अपडेट ::: 78
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मैं पैलेस में जाते hi सीधा जूली के पास जा पोहंचा, जूली कण्ट्रोल रूम में थी. मुझे देखते hi ख़ुशी से झूमती हुई कड़ी हो गई.. जूली मेरे पास आई और मेरे हाथो को थाम कर बोली..
जूली:- विजय आज तुम कण्ट्रोल रूम में.??
मैं इतने दिनों से कण्ट्रोल रूम में नहीं आया था. इसलिए जूली ने पूछा था मुझसे.
विजय:- जूली रूम में चलो मेरे साथ, मुझे कुछ बात करनी है.
जूली:- हाँ हाँ चलो...... जूली मेरा हाथ पकडे हुए hi पास के रूम में चल दी..
अंदर पोहंचे तो जूली ने मुझे एक चेयर पर बिठाया, मैं बैठा तो जूली भी उसी चेयर क डंडे पर अपनी गांड टिका कर बेथ गई.
जूली अपना चेहरा घुमाये मुझे देखने लगी..
जूली के पेअर मेरे पैरों क ऊपर थे... मैं मुस्कुराने अलग..
विजय:- जूली क्या बात है आज बोहत खुश दिख रही हो, और ऐसे मुझसे चिपक कर क्यों बैठी हो......... मैंने जूली से मुस्कुराते हुए पूछा..
जूली:- बास विजय आज तुम्हे स्पेशल अपने पास आता देख कर खुश हो गई हों. और ऐसे बैठने को मेरा दिल ने कहा तो मैं बैठे gai....julie मेरे सर्र के बालों में उंगलियां फेरने लगी.. जूली कुछ मूड में दिख रही थी. जूली की आँखों में सेक्स की भूक नहीं दिखी थी मुझे, बास एक अपनापन्न था, जो जूली की आँखों में मुझे दिखा था..
विजय:- ये तो अच्छी बात है क मेरे आने से तुम्हारा दिल झूम उठा, ऐसे hi खुश खुश रहा करो..
जुली:- विजय मैं तो अब्ब हर दुम्म hi खुश रहती हों.. उदास तो मैं पहले भी नहीं थी, पारर पहले लाइफ में दिल की ख़ुशी नहीं थी... अब्ब मुझे भी खुद के अंदर नयी फीलिंग्स देखने को मिलने लगी हाँ. मैं बहुत खुश हों, अपने अंदर नयी जनम ले चुकी फीलिंग्स को लेके .... विजय आज कुछ ख़ास बात है ना, जो तुम कण्ट्रोल रूम में आये हो..
विजय:- हाँ जूली, बात तो बोहत hi ख़ास है, कल रात जो कुछ हुआ शहर में वो तो शायद तुम भी जान चुकी हो. दो मासूम लड़कियों का रपे हुआ है. और अब्ब वो अलोक गैंग वाले डंके की चोट पर शहर में दनदनाते फिर रहे हाँ. और कम तक्क को धमकी दे कर कुछ भी करने से रोक दिया गया है... अब्ब वो सदा अपनी मनमानी करते रहेंगे और मैं उन्हें देखता रहूँगा, ये तो होने से रहा, मैं आज से hi उन सबब को ख़तम करने के मिशन पर निकलने वाला हों..
जूली:- ह्म्म्मम्म्म्म सुना तो मैंने है विजय, बहुत गलत हुआ है दोनों लड़कियों क साथ, और दोनों गैंग्स को तो हमने ख़तम करना hi है, तो फिर देर करना सही नहीं है. तुम आज से hi अपना काम शुरू कर दो..
विजय:- हाँ मैं इसी लिए तुम्हारे पास आया हों.. राजा पार्टी दिखी क्या आज तुम्हे..
जूली:- उदय आया था, कुछ देर बेथ कर चला गया. उसे भी सबब पता चल गया था रात जो हुआ, और उन चरों ने कुछ इन्फो भी कल निकाली है दोनों गैंग्स की. वही डिसकस करने आया था..
विजय:- जूली मुझे एक गैंग बनानी है पुरे दिल्ली को अपने अंडर लेने क लिए.
तो उसके लिए मुझे बहुत से आदमियों की ज़रूरत padegi.alag अलग फील्ड के लिए अलग अलग तरह क लोग मुझे चाहिए होंगे. और मैं आदमी वो अपने साथ शामिल करना चाहता हों. जो मेरे काम के लिए सही होगा.. हमे उनको त्रिनेड भी करना है हर तरह से और उन्हें पुरे देश में अलग अलग जगा से ढूंढ़ने भी है... कुछ लोग तो हमे जल्द hi मिलने वाले हैं. वो मैं तुम्हे बाद में बताऊंगा...
बाकी का मैं सोच रहा हूँ. हमारे देश में अनाथ लोगों की कमी नहीं है. 18 साल के होते hi लड़के और लड़कियों को अनाथ आश्रम से निकल दिया जाता है, ता क वो खुद को खुद क दुम्म पर खड़ा कर सकें. पारर ये सबब के लिए आसान नहीं होता... जुइले तुम्हे उन सबब लोगों को ढूंढ़ना है, जो अनाथ आश्रम से निकल के खुद के लिए सर्वाइव करने के लिए निकले हुए हाँ.. ज़यादा तर लकड़ी और लड़कियों को बहुत सी प्रोब्लेम्स होती हाँ. तुम उन्हें अपने पास बुलवाओ.
और फार्महाउस को भी जितना वासी किया जा सकता है वो करो... वहां जगा की कमी नहीं है.. बहुत से लोगों के रहने के लिए वहां जगा का अर्रंगे किया जा सकता hai..aas पास का खाली एरिया भी हम खुद के अंडर में ले लेंगे. मीलों वीरान इलाका है, वो हमारे काम आएगा.
जो लड़के और लड़कियां स्टडी में अच्छे होंगे, जिनकी परसेंटेज ज़यादा होगी,
हम उन्हें साथ मिला के कोई बिज़नेस स्टार्ट करेंगे. बहुत से लटेंडेड स्टूडेंट जॉब न होने की वजा से धक्के खा रहे हाँ. हमें उनको साथ शामिल करना है. और कोठे पर से लाइ गई औरतों और लड़कियों को भी उस बिज़नेस में शामिल करना है. अगर उनमे से किसी का मैं किसी और काम में हुआ तो उन्हें उनकी पसंद का काम करने में मदद दी जायेगी. पैसे की कमी तो हमें कभी भी होने से रही...
हर एक स्टूडेंट अपने अंदर बहुत से आइडियाज रखता है, हमें सभी के आईडिया को भी अप्प्रिसते करना है. अगर हो सका तो तो एक मुलती बिज़नेस शुरू कर दिया जाएगा.. हमने तो करना नहीं है.
जिनको हम बिज़नेस के लिए chunenge....wo खुद की लाइफ को बनाएंगे उन्हें समझा दिया जायेगा. क वो जितनी ुहंचाई पर बिज़नेस को लेकर जायेंगे. जितनी जिसमे काबिलियत होगी, जितनी वो म्हणत करेंगे, उन्हें सैलरी भी उसी हिसाब से मिलती रहेगी..
किसी की भी मंथली सैलरी फिक्स नहीं hogi..sabhi खुद क दुम्म पे अपनी सैलरी को बढ़ाएंगे... ऐसे hi करके हम बिज़नेस को आगे बढ़ाएंगे. बिज़नेस से आनेवाला पैसा हमे तो चाहिए नहीं होगा. इसलिए बिज़नेस के न चलने का कोई ामकान नहीं है. ुटला हम बिज़नेस को और भी आगे बढ़ने के लिए खुद से पैसा लगाएंगे...
और अगर कुछ स्टूडेंट्स स्टडी में अच्छे नहीं हुए तो उसे खुद की गैंग के लिए तैयार किया जाएगा.. अगर वो हमारे साथ मिल गए तो हमारी गैंग कभी ख़तम नहीं होगी, क्यूंकि गैंग खुद क मुफाद के लिए नहीं होगी, पूरी hi गैंग आम जनता की भलाई क लिए होगी.
जूली मेरी बातें सुनते hi मेरे कंधे पर अपना सर्र रख चुकी थी. जूली भी मेरी बातों से शॉकेड हो गई थी.. इसलिए वो मेरे कंधे पर सर्र रखे खुद की शॉकेड कंडीशन पर काबू पाने की कोशिश कर रही थी... जूली की तेज़ साँसे मेरे कंधे से टकरा रही थीं..
कुछ देर बाद जूली ने मुझे देखा और फिर वो मेरे चेहरे पर झुकती चली गई, जूली को भी मुझपर प्यार आने लगा था, जूली मेरे होंटो को अपने होंटो में लेने लगी, जूली को कोई झिझक नै थी, जूली एक ओपन लड़की थी, और मैं भी कोई शरीफ लड़का नहीं था, जूली मेरे होंटो को अपने होंटो में लिए मेरे आइडियाज जान कर ख़ुशी का इज़हार कर रही थी.
जूली किश में एक्सपर्ट थी, जूली बहुत hi धीरे धीरे से मेरे होंटो का रस्सपान करने लगी. जूली के हाथ मेरे सररर के पीछे थे और ऐसे hi जूली मुझे किश किये जा रही थी. जूली मेरे होंटो को बदल बदल कर चूसने लगी. जूली कुछ हॉट होने लगी,
जूली वाइल्ड होने लगी. मैंने जूली की शर्ट में हाथ घुसा दिया. मेरा हाथ जूली के पेट से होता हुआ जूली की ब्रा में घुस गया, और मैं जूली के बूब्स और निप्पल को डालने लगा, जूली ने मुझे किश करना छोड़ा और मेरी आँखों में देखने लगी..
जूली:- थैंक्स विजय जो तुमने मुझे इस लायक समझा.. मैंने इतना भी नहीं सोचा था. दिल तो बहुत था पारर मैं तुमसे खुद कुछ भी कहना नहीं चाहती थी.
तुमने खुद से मुझे ये इज़्ज़त दे कर मुझे बहुत ख़ुशी दी है. वर्ण ये सबब तो मेरे लिए एक आम बात है, जिस्म की भूक क मुआमले में तो मैं बहुत hi सस्ती सी
चीज़ बन क रह गई थी. सबब करती तो मैं अपनी मर्ज़ी से hi थी, पारर तुमसे करने क लिए मेरा दिल बहुत मचलता रहता था. थैंक्स विजय दिल की हालत को समझने के लिए..
विजय:- जूली खुद को सस्ती लड़की क्यों समझती हो, तुम सस्ती तो नहीं हो..
जूली:- हाँ विजय अब्ब मैं सस्ती नहीं रही हूँ.... इतना बोल कर जूली फिरसे मेरे होंटो पर टूट पड़ी. और मैं जूली के बूब्स को दबाने लगा, जूली मज़े से मुझे किश करती रही और मैं जूली को पूरा पूरा मज़े देने लगा..
जूली भी तो अब्ब अकेली hi थी. जूली ने खुद को मेरे लिए और मेरी फॅमिली के लिए वक़्फ़ कर दिया था. इतना तो मैं जूली क लिए कर hi सकता था..
कुछ देर ऐसे hi चलता था फिर जूली मेरे ऊपर से उठ कड़ी हुई. नीचे बैठ क्र जूली मेरे लुंड को आज़ाद करने लगी. कुछ देर में मेरा नंगा लुंड जूली क हाथ में था, और जूली उसे हाथ में पकड़ कर उसकी मज़बूती को चेक करने लगी.
जूली:- विजय ये तो बहुत hi बड़ा है. तुमतो लुंड के मुआमले में बहुत hi लकी हो.... इतना बोल कर जूली मेरे लुंड को मोहन में लिए चूसने लगी.. जूली पूरा पूरा मज़ा ले रही थी.
लुंड तो जूली की किश से hi खड़ा हो गया था. जूली मज़ा से अपना मैं बहलाने लगी.. 5 मिंट तक जूली मेरे लुंड को चूसती रही और फिर कड़ी हो कर अपनी पेण्ट उतारने लगी.
जूली की पेण्ट ुति, जूली नीचे से नंगी हुई तो मैं ने भी अपनी पेण्ट और अंडरवियर नीचे सरका दिया. और लुंड को लिए hi जूली की तरफ बढ़ गया.
विजय:- जूली क्या करने का मैं है....
जूली:- विजय मैं तो बहुत कुछ करने का है.
विअज्य:- तो फिर जितना टाइम है तुम्हारी छूट को ठंडा कर देता हूँ. मेरा तो लेट hi होगा. इसलिए जल्दी से उस सूफी पर उलटी हो जाओ. मैं तुम्हे ठंडा कर दूँ. वर्ण तुम पूरा दिन hi मचलती रहोगी..
जूली ने देर नहीं की और सूफी पर झुक अपनी अपनी गांड को बहार निकला और अपनी छूट मेरे लुंड के लिए सेट करदी.. मैं जूली के पीछे गया और अपने लुंड को पकड़ कर जूली की छूट पर सेट किया और एक हल्का सा धक्का लगा diya.julie की छत गीली थी और पहले से hi पूरी तरह से खुली हुई थी..
मेरा लुंड 3" तक जूली की छूट में उतर गया..
siiiiiiiiiiiiiiiiii हममममममममः ahhhhhhhhhhh मज़ा आ गया विजय बाकी का भी दाल दो.
मैंने जूली को कमर से पकड़ा और कस कर अपना बाकी का लुंड भी जूली की छूट में उतार दिए. अभी 2" बहार hi था क जूली की चीख निकल गई..
aiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ohhhhhhhhhhhh विजय तुम्हारा लुंड बोहत बड़ा है. और सालों गुज़र गए इतना बड़ा नहीं लिया. अभी मेरी छूट अंदर गहराई में टाइट है. थोड़ा धीरे घुसाओ, दर्द होता है.
मैंने उतने hi लुंड से जूली की चुदाई शुरू कर दी, स्पीड कुछ तेज़ hi राखी थी मैंने, जूली की छूट तो जल्द hi गेली हो गई थी और अब्ब मुझे जूली को शांत करना था. मेरे लुंड का क्या है. जूली क पास से जाओ तो कही भी इसे हल्का कर सकता था. मैंने अपने लुंड को हल्का करने का न सोचते हुए जूली को थोड़ा सा मज़ा देने का सोचा था.
अचानक से hi जूली की चुदाई का प्रोग्राम बन गया था. वर्ण अभी जूली का नंबर नहीं था, जूली से पहले अभी भी कई थीं छूट खुलवाने वळून की लिस्ट में.. जूली की चुदाई तो अच्छे से फिर कभी हो पाएगी. अभी जूली की छूट को ठंडा करके काम की बातें करनी थी. और मैं जूली की छूट को ठंडा करने के लिए अपने लुंड को जूली की छूट में अंदर बहार करने लगा. जूली धीरे धीरे करके अपने चार्म की तरफ बढ़ने लगी. जूली एक हाथ से खुद की छूट को रगड़ भी रही थी. वो भी जल्दी से खुद की छूट का पानी निकलवाने वाली थी. दूर भी लॉक नहीं था और हम कण्ट्रोल रूम के एक रूम में थे. यहाँ किसी वक़्त भी कोई भी आ सकता था..
जूली के बेताबी बढ़ी तो मैंने अपने धक्को की स्पीड भी बढ़ा दी. जूली की छूट का पानी उसकी छूट से बह कर नीचे सूफी पर गिरने लगा. मेरा लुंड जूली की छूट के पानी से फुल गीला हुआ तो वो माखन की तरह से चिकना हो गया और स्लिप हो हो कर जूली की छूट में अंदर बहार लगा. जूली का जिस्म अकड़ने लगा था. जूली की सिसकियाँ हलकी आवाज़ में उसके मोहन से निकल रही थी.
जूली अपने चार्म पर पोहंची तो जूली ने झटके खाने शुरू कर दिए... फिर कुछ hi देर में जूली की छूट ने पानी भी छोड़ दिया.. जूली सूफी पर ढेर हुई तो मेरा लुंड खुद hi जूली की छूट से निकल गया.. मैंने इधर उधर नज़र दौड़ाई तो मुझे एक जगा एक छोटा सा रुमाल पड़ा हुआ दिखा वो मैंने उठाया और अपने लुंड को साफ़ करने लगा..
जूली खुद की साँसे ठीक करने लगी. और मैंने अपने लुंड को साफ़ करके फिरसे छुपा लिया.. और चेयर पर जा कर बैठ गया.
कुछ देर में जूली भी रिलैक्स हुई और अपनी पेण्ट पहन कर मेरे गॉड में आ कर बैठ गई..
जूली:- थैंक्स विजय पता नहीं मुझे खुद पर काबू क्यों नहीं रहा. वर्ण मैं इतनी भी कमज़ोर नहीं हों..
विजय:- होता है जूली, यही तो लाइफ है, कब क्या हो जाए कुछ कहा नै जा सकता. इतस natural..its नार्मल..
जूली:- विजय तुमने पहले जो अपने आइडियाज बारे बताया था, वो इतना ज़बरदस्त था क मैं बहुत ज़यादा एक्ससिटेड हो गई थी. आज तक्क कभी किसी ने ऐसा सोचा नहीं होगा. जैसा तुमने सोचा है.. इससे ये हमारा बिज़नेस तरक्की न करे, ये तो होना पॉसिबल नहीं, बहुत hi जल्द हमारा बिज़नेस वर्ल्ड लेवल पर छा जाएगा.
मैं आज से hi अपने काम पर लग जाती हों. और जल्द से जल्द ऐसे लोगों को ढूंढ़ती हों.
विजय:- जूली अभी हमारे पास बहुत सा पैसा है. और आगे भी मैं पैसों का ढेर लगाने वाला hon..jo स्टूडेंट हालत की तंगी का शिकार हाँ, उन्हें एडवांस में hi सैलरी दे देना. और उनसे काम से मुतालिक सबब बातें भी कर लेना. आगे तुम भी तो सबब समझती हो..
तुम्हे कई ऐसे लड़के और लड़कियां भी मिलेंगी जो किसी कंपनी में काम कर चुके होंगे.. उनका एक्सपीरियंस हमारे काम आएगा..
सबसे ख़ास बात कई ऐसे लड़कियां भी हाँ, जो बहुत ज़यादा टैलेंटेड होती हाँ, पारर किसी कंपनी में जॉब सिर्फ इस लिए छोड़ देती हाँ, वहां उसकी इज़्ज़त खतरे में रहती है. और वो इन सबब से ज़यादा काबिल भी होती हाँ. क्यूंकि जो काबिल होता है, उसे एक जगा रह कर काम करने की आदत नहीं होती.
लड़की खुद की इज़्ज़त बचने के लिए वो जॉब छोड़ देती है. पारर कुछ लडकियां अपनी इज़्ज़त की परवा न करते हुए जॉब नहीं छोड़ती.
तुम्हे इज़्ज़त बचा कर जॉब छोड़ देने वाली लड़कियों को सबसे ज़यादा वैल्यू देनी है, उनकी काबिलियत के हिसाब से उन्हें पाय दे देना.. 2 दिन में hi मैं पैसो का और इंतेज़ाम कर लूंगा.. जितना को खुद से आत्ताच कर सकती हो करो. पारर जल्दी करना.. अगर हम दिल्ली सिटी में अपने बिज़नेस की एक चैन बनाने में कामयाब हो गए तो, फिर दिल्ली हमारा हो जाएगा.. कोई भी पॉलिटिशियन आये वो हमसे नहीं टकरा सकेगा.. पुरे डेल्ही के बुसिनेस्स्में को भी खुद से आत्ताच करना होगा.
एक और बात भी मेरे मंद में आ रही है. अगर हम आने वाले चाँद महीनो में परदे क पीछे रह कर दिल्ली और देश की कई और कम्पनीज के साथ अपना शेयर बना लें तो हम और भी स्ट्रांग हो जाएंगे. ज़यादा ात्र कम्पनीज छोटे लेवल पर काम कर रही हाँ. वो हमारे लिए बेस्ट रहीनगी. धीरे धीरे करके जब हमारे चैन बन्न जाए तो वही छोटी छोटी कम्पनीज का लेवल हम बढ़ाते जायेंगे..
जूली:- ये सबब है तो बढ़िया पारर करना इतना भी आसान नहीं है..
विजय:- तो हम कैसा रातों रात करने वाले हाँ.. जो एम्प्लाइज हमसे आत्ताच होंगे, वही करेंगे सबब कुछ, कैसे करना है, वो खुद सोचेंगे, आखिर वो सबब न सही अक्सर तो उनमे हमे काबिल मिलेंगे hi..
और सबसे बड़ी बायत ऑस्कर लोग अपने आइडियाज किसी को इस लिए नहीं बताते क उनके आइडियाज का अक्सर मज़ाक़ भी बना दिया जाता है, हम सबब को hi अप्प्रिसते करेंगे. हमारे बिज़नेस को चलने के लिए सबब को hi अपना बेस्ट देना होगा, जो जितना बेस्ट देगा, वो उतना hi बेनिफिट हासिल कर पायेगा... और अगर सब को ये बता दिया जाए क उन्हें उनकी म्हणत का पूरा पूरा कंपनसेशन मिलेगा तो तुम देखना जूली एक रेस लग जायेगी. और सभी एक दूसरे से नंबर 1 बनने में लग जायेंगे. और बिज़नेस रातों रात hi इंडिया की साड़ी सीमायें लांग कर पुरे वर्ल्ड में फेल जाएगा.. और हम इसी पैसे को अपने देश क जरुआत मांडो के काम में लाएंगे.
दिल्ली शहर में बास रहे गुंडों के पास hi इतना पैसा है क अगर उनसे सबब hi छीन लिया जाए. तो लाखों लोगों के लिए वो पैसा 10 साल तक्क भी ख़तम न हो. सबब गुंडे लुटेरे इतना पैसा लूट चुके हाँ आम जनता से..
जूली सबब तो मैं नहीं छीन सकता, पारर जितना भी मुझे हासिल हो सका वो मैं हासिल कर के रहूँगा. और आज से hi ये मिशन शुरू.. गुंडे तो मरते hi रहेंगे. पारर साथ में हर रात तड़प रहे लोगों के लिए कुछ करना होगा.
जूली सच बताओं तो मैंने इन कुछ सालों में तो मैंने दिल्ली में रह कर गुज़ारे हाँ. बोहत कुछ सोच लिया है मैंने. जूली मैं अकेला कुछ नहीं कर सकता. और न hi मैं अकेला हों जो इस समाज का दुःख दर्द बांटने के लिए खुद को सर्फ़ कर देना चाहता है.. हर फारद अपने अंदर अलग अलग फीलिंग्स और आइडियाज रखता है...
जितना दर्द मैंने झेला है, उसकी इन्तहा नहीं है जुइले.. पारर मैं एक बात भी जानता हों. क मैंने तो खुद क दुम्म पर और सबब के प्यार को पा कर माँ और बहनो को बचा लिया है.... पर तुम सोचो एक शहर में कितने कोठे होंगे. एक कोठे पर कितनी किडनैप करके लाइ गई लड़कियां होंगी.. कितनी बहार क मुल्कों में बेच दी गई होंगी.. कई माँ बाप ऐसे भी होंगे जिन्हे ये भी नहीं पता क उनकी लाड़ली बेटी होगी कहाँ. मैं जो कोठे से लड़कियां और औरतें लाया हों. अब्ब भी कइयों क घर वाले उन्हें ढून्ढ रहे होंगे. सबब के सबब कितने दर्द से गुज़र रहे होंगे...
जूली मुझे तो मेरे दर्द की दवा मिल गई, मेरे माँ और बहने और कुछ दूसरी महिलायें आज़ाद हो चुकी हाँ... ये एक कोठे का हाल है.. ऐसे hi पूरा इंडिया भरा पड़ा है...
जूली मैं सबब का दर्द तो बाँट नहीं सकता.. और न hi मैं पुरे इंडिया के कोठे उजाड़ सकता हों. एक कोठा बरदाद होगा तो दूसरा बन जाएगा. दूसरा उजाडोंगा तो तीसरा बन्न जायेगा..
जूली मैं बास इतना करना चाहता हों, क जितने कोठो पर घरों से अगवा की हुई लड़कियां मेरी कस्टडी में लाइ जा सकती हाँ. उन्हें हासिल किया जाए. और इसके लिए एक गैंग की ज़रूरत है... कुछ ऐसा करना पड़ेगा क कोठे शरीफ वही चलें, और कोठे पर सिर्फ वही लड़कियां hi हों जो कोठे की पैदाइश हाँ. जो खुद की मर्ज़ी से सबब करना चाहती हाँ. मेरी माँ और बहनो क जैसी कोई मजबूर किसी कोठे पर न रहे...
जूली ये सबब इम्पॉसिबल नै है. खुद की लगन, कर गुजरने की ठान लेने से सबब होने लगता है.. हम अपनी गैंग अपने मुफाद के लिए तो बनाने से रहे.. इसलिए मुझे नहीं लगता क ये गैंग बन्न नहीं पायेगा.. ये ज़रूर बनेगा देर लगी तो लगी, पारर बनेगा ज़रूर. और जब्ब तक्क मैं ज़िंदा हूँ, मैं ये सबब करने से पीछे नहीं हटने वाला..
जूली पहले दिल्ली से काम शुरू करो. धीरे धीरे आगे बढ़ना. अगर कोई दिल्ली से बहार का मटर हो तो देखा जाएगा.. अगर कोई मुलती टैलेंटेड पुरे देश में कही से भी दिखे उसे खुद से आत्ताच करो. मतलब ध्यान रखना कोई भी मतलबपरस्त अरु मुफाज परास्त हमारे बीचे में नै होना चाहिए..
लालची और मुफाज परास्त अगर गरीब भी हो तो उसे उसकी कुछ मदद करके भगा दो. हमें सिर्फ मैं के साफ़ लोगों की ज़रूरत है.
साड़ी दुन्या hi तो मतलबी नहीं, अक्सर हालत क सताए हुए लोग एक मौका मिलने का ीनेज़र में हाँ. बोहत से लोग जो कुछ कर गुजरने का हौसला रखते हाँ, हमे उन्हें खुद में शामिल करना है..
जूली ये सबब करना है, धीरे धीरे से hi सही, लेकिन हमे आगे और आगे बढ़ना है....
बास एक बात का धयान रखना, जैसा मक़सद हमारा है या जैसा मैं सोच रहा हों. ऐसी सोच रखने वाले को हमेशा के लिए सुला दिए जाता है. मुझे तो खुद की कोई टेंशन नहीं है, पारर हमें खुद को सीक्रेट रख के ये सबब करना है.
नज़रों में आ गए तो कोई हमारा कुछ बिगड़ तो नहीं सकती, पारर उसे एक पोलिटिकल इशू एक सामाजिक इशू बनाया जा सकता है.. अगर गैंग का हेड सामने ना ए, या किसी को कुछ पता न चले क गैंग कहाँ से स्टार्ट हुई है और इसके पीछे कौन हाँ. कोई भी हमारा कुछ भी नहीं उखाड़ सकता.............
कहने को तो और भी बाहर कुछ है जूली मेरे मैं में. पारर अब्ब बाकी का फिर करूंगा.. इस सबब बातों में पहले अनाथ लड़के और लड़कियों को ढूंढो, और इज़्ज़त के लिए जॉब छोड़ देने वाली लड़कियों को पहले ढूंढो....
बाकी का सबब बाद में.. पहले जिन को तंगी हो रही है, उन्हें जीने की आशा दिखाओ... na-jaane कितने दर्द से गुज़र रहे होंगे..
अब्ब मैं चलता हों. फिर मिलते हाँ..
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