Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 17 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

थैंक्स..!!

हाँ श्वेता को उसके बेटे ने अपने लुंड के पानी से चमका दिया है.. श्वेता का इतना चहकना तो बनता hi है... अब्ब चुदाई सीजन शुरू हो hi चूका है.. जो भी विज्जू के लुंड के नीचे आती जायेगी .. वो चुदती जाएगी.. पद्मा आंटी ,, मालकिन और भाभी का नंबर भी आएगा.. दीक्षा के दिल में आगे चल के क्या कुछ बदलता है, वो तो आने वाले समय में hi पता चलेगा. दिलहल के लिए तो उसकी छूट बहुत शांत है.... पूजा दीदी भी तो श्वेता ,priya,jhanvi और श्रुति की तरह से विज्जू के लिए स्पेशल है... अनन्य का जज़्बा अच्छा है. पारर यहाँ मटर अलग था इसलिए विज्जू ने अनन्य को रोक दिया और समझा भी diya.vijjuu ने सालों तो दर्द झेले हाँ प्लानिंग बनायें हाँ. अब्ब उसे पावर मिली है तो कुछ तो ाकर्ण hi अपडेगा.

दोनों गैंग्स अब्ब ख़तम तो होंगे hi..
 
थैंक यू बॉस..!!

वो को ये सबब तो करना hi था, आखिर उसकी तितलियाँ भी तो सालों से तड़प रही थी. और विज्जू की माँ भी सच्चे प्यार और दिल से चुदाई के लिए अतरसि हुई थीई विज्जू ने माँ और बहनो को सही से खुश किया है.... जैसा कनेक्शन विज्जू और श्वेता का है... दिल की बातें तो फिर निकालनी hi थी..

बास कभी मन में था क कोई ऐसा करे, na-jane कितने hi लोग कोई भी गलतिओ किये बिना सजा काटते रहते हाँ और गुनाह करने वाले आज़ाद फिरते रहते हाँ. इसलिए मैंने ये प्लान बनाया..
 
अपडेट ::: 78

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मैं पैलेस में जाते hi सीधा जूली के पास जा पोहंचा, जूली कण्ट्रोल रूम में थी. मुझे देखते hi ख़ुशी से झूमती हुई कड़ी हो गई.. जूली मेरे पास आई और मेरे हाथो को थाम कर बोली..

जूली:- विजय आज तुम कण्ट्रोल रूम में.??

मैं इतने दिनों से कण्ट्रोल रूम में नहीं आया था. इसलिए जूली ने पूछा था मुझसे.

विजय:- जूली रूम में चलो मेरे साथ, मुझे कुछ बात करनी है.

जूली:- हाँ हाँ चलो...... जूली मेरा हाथ पकडे हुए hi पास के रूम में चल दी..

अंदर पोहंचे तो जूली ने मुझे एक चेयर पर बिठाया, मैं बैठा तो जूली भी उसी चेयर क डंडे पर अपनी गांड टिका कर बेथ गई.

जूली अपना चेहरा घुमाये मुझे देखने लगी..

जूली के पेअर मेरे पैरों क ऊपर थे... मैं मुस्कुराने अलग..

विजय:- जूली क्या बात है आज बोहत खुश दिख रही हो, और ऐसे मुझसे चिपक कर क्यों बैठी हो......... मैंने जूली से मुस्कुराते हुए पूछा..

जूली:- बास विजय आज तुम्हे स्पेशल अपने पास आता देख कर खुश हो गई हों. और ऐसे बैठने को मेरा दिल ने कहा तो मैं बैठे gai....julie मेरे सर्र के बालों में उंगलियां फेरने लगी.. जूली कुछ मूड में दिख रही थी. जूली की आँखों में सेक्स की भूक नहीं दिखी थी मुझे, बास एक अपनापन्न था, जो जूली की आँखों में मुझे दिखा था..

विजय:- ये तो अच्छी बात है क मेरे आने से तुम्हारा दिल झूम उठा, ऐसे hi खुश खुश रहा करो..

जुली:- विजय मैं तो अब्ब हर दुम्म hi खुश रहती हों.. उदास तो मैं पहले भी नहीं थी, पारर पहले लाइफ में दिल की ख़ुशी नहीं थी... अब्ब मुझे भी खुद के अंदर नयी फीलिंग्स देखने को मिलने लगी हाँ. मैं बहुत खुश हों, अपने अंदर नयी जनम ले चुकी फीलिंग्स को लेके .... विजय आज कुछ ख़ास बात है ना, जो तुम कण्ट्रोल रूम में आये हो..

विजय:- हाँ जूली, बात तो बोहत hi ख़ास है, कल रात जो कुछ हुआ शहर में वो तो शायद तुम भी जान चुकी हो. दो मासूम लड़कियों का रपे हुआ है. और अब्ब वो अलोक गैंग वाले डंके की चोट पर शहर में दनदनाते फिर रहे हाँ. और कम तक्क को धमकी दे कर कुछ भी करने से रोक दिया गया है... अब्ब वो सदा अपनी मनमानी करते रहेंगे और मैं उन्हें देखता रहूँगा, ये तो होने से रहा, मैं आज से hi उन सबब को ख़तम करने के मिशन पर निकलने वाला हों..

जूली:- ह्म्म्मम्म्म्म सुना तो मैंने है विजय, बहुत गलत हुआ है दोनों लड़कियों क साथ, और दोनों गैंग्स को तो हमने ख़तम करना hi है, तो फिर देर करना सही नहीं है. तुम आज से hi अपना काम शुरू कर दो..

विजय:- हाँ मैं इसी लिए तुम्हारे पास आया हों.. राजा पार्टी दिखी क्या आज तुम्हे..

जूली:- उदय आया था, कुछ देर बेथ कर चला गया. उसे भी सबब पता चल गया था रात जो हुआ, और उन चरों ने कुछ इन्फो भी कल निकाली है दोनों गैंग्स की. वही डिसकस करने आया था..

विजय:- जूली मुझे एक गैंग बनानी है पुरे दिल्ली को अपने अंडर लेने क लिए.

तो उसके लिए मुझे बहुत से आदमियों की ज़रूरत padegi.alag अलग फील्ड के लिए अलग अलग तरह क लोग मुझे चाहिए होंगे. और मैं आदमी वो अपने साथ शामिल करना चाहता हों. जो मेरे काम के लिए सही होगा.. हमे उनको त्रिनेड भी करना है हर तरह से और उन्हें पुरे देश में अलग अलग जगा से ढूंढ़ने भी है... कुछ लोग तो हमे जल्द hi मिलने वाले हैं. वो मैं तुम्हे बाद में बताऊंगा...

बाकी का मैं सोच रहा हूँ. हमारे देश में अनाथ लोगों की कमी नहीं है. 18 साल के होते hi लड़के और लड़कियों को अनाथ आश्रम से निकल दिया जाता है, ता क वो खुद को खुद क दुम्म पर खड़ा कर सकें. पारर ये सबब के लिए आसान नहीं होता... जुइले तुम्हे उन सबब लोगों को ढूंढ़ना है, जो अनाथ आश्रम से निकल के खुद के लिए सर्वाइव करने के लिए निकले हुए हाँ.. ज़यादा तर लकड़ी और लड़कियों को बहुत सी प्रोब्लेम्स होती हाँ. तुम उन्हें अपने पास बुलवाओ.

और फार्महाउस को भी जितना वासी किया जा सकता है वो करो... वहां जगा की कमी नहीं है.. बहुत से लोगों के रहने के लिए वहां जगा का अर्रंगे किया जा सकता hai..aas पास का खाली एरिया भी हम खुद के अंडर में ले लेंगे. मीलों वीरान इलाका है, वो हमारे काम आएगा.

जो लड़के और लड़कियां स्टडी में अच्छे होंगे, जिनकी परसेंटेज ज़यादा होगी,

हम उन्हें साथ मिला के कोई बिज़नेस स्टार्ट करेंगे. बहुत से लटेंडेड स्टूडेंट जॉब न होने की वजा से धक्के खा रहे हाँ. हमें उनको साथ शामिल करना है. और कोठे पर से लाइ गई औरतों और लड़कियों को भी उस बिज़नेस में शामिल करना है. अगर उनमे से किसी का मैं किसी और काम में हुआ तो उन्हें उनकी पसंद का काम करने में मदद दी जायेगी. पैसे की कमी तो हमें कभी भी होने से रही...

हर एक स्टूडेंट अपने अंदर बहुत से आइडियाज रखता है, हमें सभी के आईडिया को भी अप्प्रिसते करना है. अगर हो सका तो तो एक मुलती बिज़नेस शुरू कर दिया जाएगा.. हमने तो करना नहीं है.

जिनको हम बिज़नेस के लिए chunenge....wo खुद की लाइफ को बनाएंगे उन्हें समझा दिया जायेगा. क वो जितनी ुहंचाई पर बिज़नेस को लेकर जायेंगे. जितनी जिसमे काबिलियत होगी, जितनी वो म्हणत करेंगे, उन्हें सैलरी भी उसी हिसाब से मिलती रहेगी..

किसी की भी मंथली सैलरी फिक्स नहीं hogi..sabhi खुद क दुम्म पे अपनी सैलरी को बढ़ाएंगे... ऐसे hi करके हम बिज़नेस को आगे बढ़ाएंगे. बिज़नेस से आनेवाला पैसा हमे तो चाहिए नहीं होगा. इसलिए बिज़नेस के न चलने का कोई ामकान नहीं है. ुटला हम बिज़नेस को और भी आगे बढ़ने के लिए खुद से पैसा लगाएंगे...

और अगर कुछ स्टूडेंट्स स्टडी में अच्छे नहीं हुए तो उसे खुद की गैंग के लिए तैयार किया जाएगा.. अगर वो हमारे साथ मिल गए तो हमारी गैंग कभी ख़तम नहीं होगी, क्यूंकि गैंग खुद क मुफाद के लिए नहीं होगी, पूरी hi गैंग आम जनता की भलाई क लिए होगी.

जूली मेरी बातें सुनते hi मेरे कंधे पर अपना सर्र रख चुकी थी. जूली भी मेरी बातों से शॉकेड हो गई थी.. इसलिए वो मेरे कंधे पर सर्र रखे खुद की शॉकेड कंडीशन पर काबू पाने की कोशिश कर रही थी... जूली की तेज़ साँसे मेरे कंधे से टकरा रही थीं..

कुछ देर बाद जूली ने मुझे देखा और फिर वो मेरे चेहरे पर झुकती चली गई, जूली को भी मुझपर प्यार आने लगा था, जूली मेरे होंटो को अपने होंटो में लेने लगी, जूली को कोई झिझक नै थी, जूली एक ओपन लड़की थी, और मैं भी कोई शरीफ लड़का नहीं था, जूली मेरे होंटो को अपने होंटो में लिए मेरे आइडियाज जान कर ख़ुशी का इज़हार कर रही थी.

जूली किश में एक्सपर्ट थी, जूली बहुत hi धीरे धीरे से मेरे होंटो का रस्सपान करने लगी. जूली के हाथ मेरे सररर के पीछे थे और ऐसे hi जूली मुझे किश किये जा रही थी. जूली मेरे होंटो को बदल बदल कर चूसने लगी. जूली कुछ हॉट होने लगी,

जूली वाइल्ड होने लगी. मैंने जूली की शर्ट में हाथ घुसा दिया. मेरा हाथ जूली के पेट से होता हुआ जूली की ब्रा में घुस गया, और मैं जूली के बूब्स और निप्पल को डालने लगा, जूली ने मुझे किश करना छोड़ा और मेरी आँखों में देखने लगी..

जूली:- थैंक्स विजय जो तुमने मुझे इस लायक समझा.. मैंने इतना भी नहीं सोचा था. दिल तो बहुत था पारर मैं तुमसे खुद कुछ भी कहना नहीं चाहती थी.

तुमने खुद से मुझे ये इज़्ज़त दे कर मुझे बहुत ख़ुशी दी है. वर्ण ये सबब तो मेरे लिए एक आम बात है, जिस्म की भूक क मुआमले में तो मैं बहुत hi सस्ती सी

चीज़ बन क रह गई थी. सबब करती तो मैं अपनी मर्ज़ी से hi थी, पारर तुमसे करने क लिए मेरा दिल बहुत मचलता रहता था. थैंक्स विजय दिल की हालत को समझने के लिए..

विजय:- जूली खुद को सस्ती लड़की क्यों समझती हो, तुम सस्ती तो नहीं हो..

जूली:- हाँ विजय अब्ब मैं सस्ती नहीं रही हूँ.... इतना बोल कर जूली फिरसे मेरे होंटो पर टूट पड़ी. और मैं जूली के बूब्स को दबाने लगा, जूली मज़े से मुझे किश करती रही और मैं जूली को पूरा पूरा मज़े देने लगा..

जूली भी तो अब्ब अकेली hi थी. जूली ने खुद को मेरे लिए और मेरी फॅमिली के लिए वक़्फ़ कर दिया था. इतना तो मैं जूली क लिए कर hi सकता था..

कुछ देर ऐसे hi चलता था फिर जूली मेरे ऊपर से उठ कड़ी हुई. नीचे बैठ क्र जूली मेरे लुंड को आज़ाद करने लगी. कुछ देर में मेरा नंगा लुंड जूली क हाथ में था, और जूली उसे हाथ में पकड़ कर उसकी मज़बूती को चेक करने लगी.

जूली:- विजय ये तो बहुत hi बड़ा है. तुमतो लुंड के मुआमले में बहुत hi लकी हो.... इतना बोल कर जूली मेरे लुंड को मोहन में लिए चूसने लगी.. जूली पूरा पूरा मज़ा ले रही थी.

लुंड तो जूली की किश से hi खड़ा हो गया था. जूली मज़ा से अपना मैं बहलाने लगी.. 5 मिंट तक जूली मेरे लुंड को चूसती रही और फिर कड़ी हो कर अपनी पेण्ट उतारने लगी.

जूली की पेण्ट ुति, जूली नीचे से नंगी हुई तो मैं ने भी अपनी पेण्ट और अंडरवियर नीचे सरका दिया. और लुंड को लिए hi जूली की तरफ बढ़ गया.

विजय:- जूली क्या करने का मैं है....

जूली:- विजय मैं तो बहुत कुछ करने का है.

विअज्य:- तो फिर जितना टाइम है तुम्हारी छूट को ठंडा कर देता हूँ. मेरा तो लेट hi होगा. इसलिए जल्दी से उस सूफी पर उलटी हो जाओ. मैं तुम्हे ठंडा कर दूँ. वर्ण तुम पूरा दिन hi मचलती रहोगी..

जूली ने देर नहीं की और सूफी पर झुक अपनी अपनी गांड को बहार निकला और अपनी छूट मेरे लुंड के लिए सेट करदी.. मैं जूली के पीछे गया और अपने लुंड को पकड़ कर जूली की छूट पर सेट किया और एक हल्का सा धक्का लगा diya.julie की छत गीली थी और पहले से hi पूरी तरह से खुली हुई थी..

मेरा लुंड 3" तक जूली की छूट में उतर गया..

siiiiiiiiiiiiiiiiii हममममममममः ahhhhhhhhhhh मज़ा आ गया विजय बाकी का भी दाल दो.

मैंने जूली को कमर से पकड़ा और कस कर अपना बाकी का लुंड भी जूली की छूट में उतार दिए. अभी 2" बहार hi था क जूली की चीख निकल गई..

aiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ohhhhhhhhhhhh विजय तुम्हारा लुंड बोहत बड़ा है. और सालों गुज़र गए इतना बड़ा नहीं लिया. अभी मेरी छूट अंदर गहराई में टाइट है. थोड़ा धीरे घुसाओ, दर्द होता है.

मैंने उतने hi लुंड से जूली की चुदाई शुरू कर दी, स्पीड कुछ तेज़ hi राखी थी मैंने, जूली की छूट तो जल्द hi गेली हो गई थी और अब्ब मुझे जूली को शांत करना था. मेरे लुंड का क्या है. जूली क पास से जाओ तो कही भी इसे हल्का कर सकता था. मैंने अपने लुंड को हल्का करने का न सोचते हुए जूली को थोड़ा सा मज़ा देने का सोचा था.

अचानक से hi जूली की चुदाई का प्रोग्राम बन गया था. वर्ण अभी जूली का नंबर नहीं था, जूली से पहले अभी भी कई थीं छूट खुलवाने वळून की लिस्ट में.. जूली की चुदाई तो अच्छे से फिर कभी हो पाएगी. अभी जूली की छूट को ठंडा करके काम की बातें करनी थी. और मैं जूली की छूट को ठंडा करने के लिए अपने लुंड को जूली की छूट में अंदर बहार करने लगा. जूली धीरे धीरे करके अपने चार्म की तरफ बढ़ने लगी. जूली एक हाथ से खुद की छूट को रगड़ भी रही थी. वो भी जल्दी से खुद की छूट का पानी निकलवाने वाली थी. दूर भी लॉक नहीं था और हम कण्ट्रोल रूम के एक रूम में थे. यहाँ किसी वक़्त भी कोई भी आ सकता था..

जूली के बेताबी बढ़ी तो मैंने अपने धक्को की स्पीड भी बढ़ा दी. जूली की छूट का पानी उसकी छूट से बह कर नीचे सूफी पर गिरने लगा. मेरा लुंड जूली की छूट के पानी से फुल गीला हुआ तो वो माखन की तरह से चिकना हो गया और स्लिप हो हो कर जूली की छूट में अंदर बहार लगा. जूली का जिस्म अकड़ने लगा था. जूली की सिसकियाँ हलकी आवाज़ में उसके मोहन से निकल रही थी.

जूली अपने चार्म पर पोहंची तो जूली ने झटके खाने शुरू कर दिए... फिर कुछ hi देर में जूली की छूट ने पानी भी छोड़ दिया.. जूली सूफी पर ढेर हुई तो मेरा लुंड खुद hi जूली की छूट से निकल गया.. मैंने इधर उधर नज़र दौड़ाई तो मुझे एक जगा एक छोटा सा रुमाल पड़ा हुआ दिखा वो मैंने उठाया और अपने लुंड को साफ़ करने लगा..

जूली खुद की साँसे ठीक करने लगी. और मैंने अपने लुंड को साफ़ करके फिरसे छुपा लिया.. और चेयर पर जा कर बैठ गया.

कुछ देर में जूली भी रिलैक्स हुई और अपनी पेण्ट पहन कर मेरे गॉड में आ कर बैठ गई..

जूली:- थैंक्स विजय पता नहीं मुझे खुद पर काबू क्यों नहीं रहा. वर्ण मैं इतनी भी कमज़ोर नहीं हों..

विजय:- होता है जूली, यही तो लाइफ है, कब क्या हो जाए कुछ कहा नै जा सकता. इतस natural..its नार्मल..

जूली:- विजय तुमने पहले जो अपने आइडियाज बारे बताया था, वो इतना ज़बरदस्त था क मैं बहुत ज़यादा एक्ससिटेड हो गई थी. आज तक्क कभी किसी ने ऐसा सोचा नहीं होगा. जैसा तुमने सोचा है.. इससे ये हमारा बिज़नेस तरक्की न करे, ये तो होना पॉसिबल नहीं, बहुत hi जल्द हमारा बिज़नेस वर्ल्ड लेवल पर छा जाएगा.

मैं आज से hi अपने काम पर लग जाती हों. और जल्द से जल्द ऐसे लोगों को ढूंढ़ती हों.

विजय:- जूली अभी हमारे पास बहुत सा पैसा है. और आगे भी मैं पैसों का ढेर लगाने वाला hon..jo स्टूडेंट हालत की तंगी का शिकार हाँ, उन्हें एडवांस में hi सैलरी दे देना. और उनसे काम से मुतालिक सबब बातें भी कर लेना. आगे तुम भी तो सबब समझती हो..

तुम्हे कई ऐसे लड़के और लड़कियां भी मिलेंगी जो किसी कंपनी में काम कर चुके होंगे.. उनका एक्सपीरियंस हमारे काम आएगा..

सबसे ख़ास बात कई ऐसे लड़कियां भी हाँ, जो बहुत ज़यादा टैलेंटेड होती हाँ, पारर किसी कंपनी में जॉब सिर्फ इस लिए छोड़ देती हाँ, वहां उसकी इज़्ज़त खतरे में रहती है. और वो इन सबब से ज़यादा काबिल भी होती हाँ. क्यूंकि जो काबिल होता है, उसे एक जगा रह कर काम करने की आदत नहीं होती.

लड़की खुद की इज़्ज़त बचने के लिए वो जॉब छोड़ देती है. पारर कुछ लडकियां अपनी इज़्ज़त की परवा न करते हुए जॉब नहीं छोड़ती.

तुम्हे इज़्ज़त बचा कर जॉब छोड़ देने वाली लड़कियों को सबसे ज़यादा वैल्यू देनी है, उनकी काबिलियत के हिसाब से उन्हें पाय दे देना.. 2 दिन में hi मैं पैसो का और इंतेज़ाम कर लूंगा.. जितना को खुद से आत्ताच कर सकती हो करो. पारर जल्दी करना.. अगर हम दिल्ली सिटी में अपने बिज़नेस की एक चैन बनाने में कामयाब हो गए तो, फिर दिल्ली हमारा हो जाएगा.. कोई भी पॉलिटिशियन आये वो हमसे नहीं टकरा सकेगा.. पुरे डेल्ही के बुसिनेस्स्में को भी खुद से आत्ताच करना होगा.

एक और बात भी मेरे मंद में आ रही है. अगर हम आने वाले चाँद महीनो में परदे क पीछे रह कर दिल्ली और देश की कई और कम्पनीज के साथ अपना शेयर बना लें तो हम और भी स्ट्रांग हो जाएंगे. ज़यादा ात्र कम्पनीज छोटे लेवल पर काम कर रही हाँ. वो हमारे लिए बेस्ट रहीनगी. धीरे धीरे करके जब हमारे चैन बन्न जाए तो वही छोटी छोटी कम्पनीज का लेवल हम बढ़ाते जायेंगे..

जूली:- ये सबब है तो बढ़िया पारर करना इतना भी आसान नहीं है..

विजय:- तो हम कैसा रातों रात करने वाले हाँ.. जो एम्प्लाइज हमसे आत्ताच होंगे, वही करेंगे सबब कुछ, कैसे करना है, वो खुद सोचेंगे, आखिर वो सबब न सही अक्सर तो उनमे हमे काबिल मिलेंगे hi..

और सबसे बड़ी बायत ऑस्कर लोग अपने आइडियाज किसी को इस लिए नहीं बताते क उनके आइडियाज का अक्सर मज़ाक़ भी बना दिया जाता है, हम सबब को hi अप्प्रिसते करेंगे. हमारे बिज़नेस को चलने के लिए सबब को hi अपना बेस्ट देना होगा, जो जितना बेस्ट देगा, वो उतना hi बेनिफिट हासिल कर पायेगा... और अगर सब को ये बता दिया जाए क उन्हें उनकी म्हणत का पूरा पूरा कंपनसेशन मिलेगा तो तुम देखना जूली एक रेस लग जायेगी. और सभी एक दूसरे से नंबर 1 बनने में लग जायेंगे. और बिज़नेस रातों रात hi इंडिया की साड़ी सीमायें लांग कर पुरे वर्ल्ड में फेल जाएगा.. और हम इसी पैसे को अपने देश क जरुआत मांडो के काम में लाएंगे.

दिल्ली शहर में बास रहे गुंडों के पास hi इतना पैसा है क अगर उनसे सबब hi छीन लिया जाए. तो लाखों लोगों के लिए वो पैसा 10 साल तक्क भी ख़तम न हो. सबब गुंडे लुटेरे इतना पैसा लूट चुके हाँ आम जनता से..

जूली सबब तो मैं नहीं छीन सकता, पारर जितना भी मुझे हासिल हो सका वो मैं हासिल कर के रहूँगा. और आज से hi ये मिशन शुरू.. गुंडे तो मरते hi रहेंगे. पारर साथ में हर रात तड़प रहे लोगों के लिए कुछ करना होगा.

जूली सच बताओं तो मैंने इन कुछ सालों में तो मैंने दिल्ली में रह कर गुज़ारे हाँ. बोहत कुछ सोच लिया है मैंने. जूली मैं अकेला कुछ नहीं कर सकता. और न hi मैं अकेला हों जो इस समाज का दुःख दर्द बांटने के लिए खुद को सर्फ़ कर देना चाहता है.. हर फारद अपने अंदर अलग अलग फीलिंग्स और आइडियाज रखता है...

जितना दर्द मैंने झेला है, उसकी इन्तहा नहीं है जुइले.. पारर मैं एक बात भी जानता हों. क मैंने तो खुद क दुम्म पर और सबब के प्यार को पा कर माँ और बहनो को बचा लिया है.... पर तुम सोचो एक शहर में कितने कोठे होंगे. एक कोठे पर कितनी किडनैप करके लाइ गई लड़कियां होंगी.. कितनी बहार क मुल्कों में बेच दी गई होंगी.. कई माँ बाप ऐसे भी होंगे जिन्हे ये भी नहीं पता क उनकी लाड़ली बेटी होगी कहाँ. मैं जो कोठे से लड़कियां और औरतें लाया हों. अब्ब भी कइयों क घर वाले उन्हें ढून्ढ रहे होंगे. सबब के सबब कितने दर्द से गुज़र रहे होंगे...

जूली मुझे तो मेरे दर्द की दवा मिल गई, मेरे माँ और बहने और कुछ दूसरी महिलायें आज़ाद हो चुकी हाँ... ये एक कोठे का हाल है.. ऐसे hi पूरा इंडिया भरा पड़ा है...

जूली मैं सबब का दर्द तो बाँट नहीं सकता.. और न hi मैं पुरे इंडिया के कोठे उजाड़ सकता हों. एक कोठा बरदाद होगा तो दूसरा बन जाएगा. दूसरा उजाडोंगा तो तीसरा बन्न जायेगा..

जूली मैं बास इतना करना चाहता हों, क जितने कोठो पर घरों से अगवा की हुई लड़कियां मेरी कस्टडी में लाइ जा सकती हाँ. उन्हें हासिल किया जाए. और इसके लिए एक गैंग की ज़रूरत है... कुछ ऐसा करना पड़ेगा क कोठे शरीफ वही चलें, और कोठे पर सिर्फ वही लड़कियां hi हों जो कोठे की पैदाइश हाँ. जो खुद की मर्ज़ी से सबब करना चाहती हाँ. मेरी माँ और बहनो क जैसी कोई मजबूर किसी कोठे पर न रहे...

जूली ये सबब इम्पॉसिबल नै है. खुद की लगन, कर गुजरने की ठान लेने से सबब होने लगता है.. हम अपनी गैंग अपने मुफाद के लिए तो बनाने से रहे.. इसलिए मुझे नहीं लगता क ये गैंग बन्न नहीं पायेगा.. ये ज़रूर बनेगा देर लगी तो लगी, पारर बनेगा ज़रूर. और जब्ब तक्क मैं ज़िंदा हूँ, मैं ये सबब करने से पीछे नहीं हटने वाला..

जूली पहले दिल्ली से काम शुरू करो. धीरे धीरे आगे बढ़ना. अगर कोई दिल्ली से बहार का मटर हो तो देखा जाएगा.. अगर कोई मुलती टैलेंटेड पुरे देश में कही से भी दिखे उसे खुद से आत्ताच करो. मतलब ध्यान रखना कोई भी मतलबपरस्त अरु मुफाज परास्त हमारे बीचे में नै होना चाहिए..

लालची और मुफाज परास्त अगर गरीब भी हो तो उसे उसकी कुछ मदद करके भगा दो. हमें सिर्फ मैं के साफ़ लोगों की ज़रूरत है.

साड़ी दुन्या hi तो मतलबी नहीं, अक्सर हालत क सताए हुए लोग एक मौका मिलने का ीनेज़र में हाँ. बोहत से लोग जो कुछ कर गुजरने का हौसला रखते हाँ, हमे उन्हें खुद में शामिल करना है..

जूली ये सबब करना है, धीरे धीरे से hi सही, लेकिन हमे आगे और आगे बढ़ना है....

बास एक बात का धयान रखना, जैसा मक़सद हमारा है या जैसा मैं सोच रहा हों. ऐसी सोच रखने वाले को हमेशा के लिए सुला दिए जाता है. मुझे तो खुद की कोई टेंशन नहीं है, पारर हमें खुद को सीक्रेट रख के ये सबब करना है.

नज़रों में आ गए तो कोई हमारा कुछ बिगड़ तो नहीं सकती, पारर उसे एक पोलिटिकल इशू एक सामाजिक इशू बनाया जा सकता है.. अगर गैंग का हेड सामने ना ए, या किसी को कुछ पता न चले क गैंग कहाँ से स्टार्ट हुई है और इसके पीछे कौन हाँ. कोई भी हमारा कुछ भी नहीं उखाड़ सकता.............

कहने को तो और भी बाहर कुछ है जूली मेरे मैं में. पारर अब्ब बाकी का फिर करूंगा.. इस सबब बातों में पहले अनाथ लड़के और लड़कियों को ढूंढो, और इज़्ज़त के लिए जॉब छोड़ देने वाली लड़कियों को पहले ढूंढो....

बाकी का सबब बाद में.. पहले जिन को तंगी हो रही है, उन्हें जीने की आशा दिखाओ... na-jaane कितने दर्द से गुज़र रहे होंगे..



अब्ब मैं चलता हों. फिर मिलते हाँ..



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थैंक्स..!!

जूली का मैं बदला तो विजजू के लिए जूली को शांत करना पड़ा.. जूली भी तो अब्ब विज्जू की हो गई है, तन्न से भी और मैं से bhi..vijjuu का दमाग अब्ब बहुत चलने लगा है... किसी दौर में वो सिर्फ सोचा करता था. अब्ब तो विज्जू को वक़्त ने एक तूफ़ान बना दिया है.. तो विज्जू अब्ब कुछ भी करेगा... बिज़नेस एम्पायर तो खेद हो hi गई अब्ब.. और गरीबो को दो वक़्त का खाना रेगुलर मिलता रहे तो उनके आधे से ज़यादा दुःख ख़तम हो जाते हाँ.... हौसले बुलंद हो जाएँ तो गैंग एक हो या कई ख़तम करने में दुश्वारी तो होती है, पर नामुमकिन नहीं रहता..
 
थैंक यू वैरी मच..!!

विजय अब्ब तूफ़ान बन्न गया है. और उसका ब्रेन बहुत hi फ़ास्ट हो गया है. बहुत से आइडियाज उसके मैं में आने लगे हाँ. विज्जू जो भी कर सका करता रहेगा.. गैंग बनाने क लिए हर किसम क लड़के और लड़कियों की विज्जू को ज़रूरत रहेगी.. इसलिए विज्जू ने ये प्लान बनाया.... विज्जू का अपनी माँ के लिए प्यार सबसे ख़ास है.. ये तो एक अचानक से बना सेक्स सन था, अभी आगे चल क बहुत कुछ होगा.. वो तो बास श्वेता क मैं की खावागीश थी ऐसे छोड़ने की .. आगे चल के विज्जू का अपनी माँ से बहुत hi रोमांटिक सेक्स और मस्ती होगी.. इमोशंस भी होंगे और प्यार भी होगा..
 
अपडेट ::: 79

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TIME:07:10:PM:

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लोकेशन दिल्ली


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"बहुत hi घटिया और बेशर्मी वाला गाना है"

ड्राइंग रूम में बैठे दादा जी ने सामने लेद टीवी पर चल रहे एक गाने को देख कर अपने विचार बच्चो के सामने रखते हुए कहा..

दादा फिर बोले...

दादा जी:- जब हमारा ज़माना था तो कोई भी औरत अपने पति के शिव कभी किसी गैर के सामने अपने सर्र को नंगा तक नहीं किया करती थी, और आज के ज़माने में इतना गन्दा गन्दा सबब hi घरुन में दिखाया जाता है. मैं कहता हों, इसे कोई बंद भी करेगा क्या.??

लड़की 1:- दादा जी आप भी तो बड़े मज़े से ये सबब देख रहे थे. जब्ब पूरा मज़ा ले लिया तो अब्ब हमे इतना लम्बा लेक्चर क्यों दे रहे .... लड़की मज़ा लेते हुए अपने दादा जी से बोली.

लड़की :- दादा जी अगर आप को ये सबब नंगा देखना पसनद नहीं था, तो आपने गाने के बीच में hi क्यों नहीं बताया, मैं चैनल बदल देती...... लड़की 2 भी अपने दादा जी के मज़े लेते हुए बोली..

दादा जी:- (मसखरी करते हुए) अरे बीटा बीच में बोलना अच्छी बात थोड़ी न होती है.

लड़का:- वैसे दादा hi गाना तो आपको भी बहुत पसंद आया होगा. आपकी तो नज़रें hi नहीं हट रही थी. उनके कपडे देख कर...... लड़का क्यों पीछे रहता वो भी अपने दादा से मस्ती करने लगा..

लड़की:- अब्ब तो मैं रोज़ hi दादा जी के साथ ऐसे hi गाने देखा और सुना करुँगी..

""और ज़ी हॉरर शो भी""

एक आवाज़ सुनाई दी और सबब hi उस आवाज़ की सिम्त देखने लगे. जैसे hi सबकी नज़र उस तरफ गई, आने वाले को देखा तो सबब के hi तोते उड़द गए..

आने वाला एक नक़ाब में था, उसके हथु में शॉटगन थी. और उसकी आँखों से दरिंदगी झलक रही thi..sabb hi आने वाले को देख कर समझ गए क आने वाला डाकू है. और अब्ब वो इस घर का सफाया कर जाएगा.

दादा जी हिम्मत करके बोले.

दादा जी:- kkk...kaun ho..tt.. तुम..

डाकू:- (भरी आवाज़ में बोलै) मेरे हथु में गन देख क्र भी मुझसे पूछ रहे हो............ चलो फिर भी मैं तुम्हे बता देता हों... तुम सबब अपने कमाई में से कुछ मुझे भी देदो... बहुत ऐश से ज़िन्दगी गुज़र रहे हो तुम सबब, मेरा भी कुछ ऐसा hi मैं हिअ, कुछ ऐश मैं भी करना चाहता हो, तुम लोगों क पास जो एक्स्ट्रा मनी है, वो मुझे चाहिए.. वर्ण मैं अपनी इस खूबसूरत गन के साउंड से तुम सबब को कुछ नज़ारे दिखाना शुरू कर दूंगा.. और मेरा ख्याल है क मैं एक दो को गोली मार कर अपनी गन के साउंड को चेक करवा hi देता हों..

दादा जी:- nnnn..nahi...ttt..tum..aisa कुछ नहीं करोगे..

डाकू:- तो फिर सबब hi शराफत से अंदर चलो, और तिजोरी में जितना कुछ है. वो सब मुझे देदो... टाइम वास्ते किया या कोई चालाकी की तो. मुझे कोई भी अडवीसे देने की ज़रूरत नहीं है. मैं सीधा hi किसी न किसी को उदा डोंगा..

सबब के सबब hi डर गए थे, एक तो गन और दूसरा डाकू की आवाज़ में दरिंदगी बोहत thi..sabb hi चुप चाप तिजोरी वाले रूम की तरफ बढ़ गए.. और फिर सारा माल एक थैले में दाल कर डाकू क हवाले कर दिया गया..

डाकू:- 10 mint..sirf 10 मिंट चुप रहना वर्ण मुझे 2-4 को मारना पड़ेगा. और मैं किसी को मारना नहीं चाहता. मेरा काम हो गया है... और तुम सबब भी सेफ हो तो कोई उलटी सीढ़ी हरकत मैट करना....

डाकू चला गया. और किसी ने कोई शोर नहीं मचाया.. सभी को अपनी जान पियरी थी. पैसा तो फिर भी भी आ सकता था... जान गई तो कहाँ से आएगी..

डाकू उस कोठी से निकल कर तेज़ी से इक साइड में बढ़ गया.... रस्ते में hi उसने अपना नक़ाब उतरा और शॉटगन को अपने कपड़ो में छुपा लिया, और एक टैक्सी करके अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ गया..

डाकू को इस बात का पता नहीं चला, क वो रॉबरी करने से पहले से hi किसी की नज़रों में आया हुआ था..

टैक्सी वाले ने डाकू को एक जगा उतार दिया.. टैक्सी चली गई तो डाकू एक तरफ बढ़ने लगा.. अभी वो कुछ दूर hi गया था.

एक पिचकूप वन उसके पास आ के ruki,pickup का दूर अचानक से hi खुला और अंदर से 4 हाथो ने उस डाकू को पकड़ कर गाडी में खेंच लिया. दूर बंद हुआ और गाडी एक तरफ स्पीड से भागने लगी..

डाकू समझ गया क वो किसी गैंग क कब्ज़े में आ छुअका है..

वन क अंदर 4 लोग थे.. एक गाडी चला रहा था.... और 3 पीछे बैठे हुए थे.

एक बोलै:- चुप चाप बैठे रहो. अभी कुछ मैट बोलना.. वर्ण तुम्हारे लिए अच्छा नै होगा..

डाकू कुछ नहीं बोलै और वन स्पीड से एक तरफ बढ़ने लगी. रास्ते में hi डाकू के चेहरे पर एक कपडा दाल दिया गया था, वो रास्ते को पहचान न सके इसलिए ..

20 मिंट बाद hi वन अपनी मंज़िल पर जा के रुकी..

डाकू को अंदर एक रूम में ले जाय gaya..room में पोहचते hi डाकू क चेहरे पार्स कपडा हटा दिया गया..

डाकू का चेहरा देख के लग रहा था, क वो इस सबब सिचुएशन से नर्वस नहीं है. डाकू फिजिकली और मेंटली बहुत hi स्ट्रांग था. अचानक बदली सिचुएशन से वो घबराया भी नहीं था, बास कुछ हैरान था..

एक लड़का:- आराम से बैठो मर. गुरनाम सिंह..

डाकू का नाम गुरनाम सिंह था, और उसकी आगे 40 क करीब थी...

वो बड़ा हैरान हुआ क सबब उसका नाम भी जानते हाँ...

लड़का:- गुरनाम सिंह जी आपका हैरान होना बनता है. सबब कुछ आप के सामने खुल कर सामने आ जाएगा.. बास कुछ hi देर का इंतज़ार है. अभी कुछ hi देर में हमारे बॉस स आपसे बी कॉल बात करेंगे.

गुरनाम:- स, मैं कुछ समझा नहीं, कौन है ये स और मुझे यहाँ इस तरह से लाने का मक़सद क्या है..

लकड़ा:- सबब डिटेल आपके सामने आ जायेगी.. कुछ देर वेट करें.

2 मिंट बाद hi सामने टेबल पर रखा हुआ फोन बजने लगा.... कॉल को यस करके लाउड स्पेअके पर दाल क्र फिरसे टेबल कर रख दिया गया..

स:- मर. गुरनाम सिंह जी, कैसे मज़ाज हाँ आपके..

गुरनाम:- मैं ठीक हों सर..

स:- गुरनाम सिंह आपने आज जो कुछ भी किया है. मुझे उस सबब की रिपोर्ट मिल चुकी है.. आप की पूरी लाइफ hi मेरे सामने एक खुली किताब की तरह से है.. मैं जानता हों. आप कुछ महीने पहले hi जेल से रिहा हो कर आये हाँ. और आपके घर के हालत आज कल कैसे चल रहा हाँ. पैसों की तंगी की वजा से आपने आज मजबूर होकर एक कोठी में रॉबरी की है. वर्ण आप ऐसे नहीं हाँ. आप तो लोगों के लिए, लोगों के काम आने क लिए मर मिटने वाले इंसान हाँ..

गुरनाम:- सर, मुझे अब्ब अच्छी की बातें सुनने से उलझन होती है. मैं अपनी अर्ली लाइफ में जो कुछ भी था, वो मेरा पास्ट था, अब्ब मैं पहले जैसा नहीं रहा और न hi मुझे किसी के अच्छे या बुरे से कोई ग़र्ज़ है. कोई मरे या जिए. किसी का रपे हो, या किसी को सरे आम नंगा कर दिया जाए, मुझे इससे कोई फर्क नै पड़ता.. मैंने अपनी नई लाइफ खुद क हिसाब से जीने का मैं बना लिया है... अब्ब मैं पीछे मुद कर नहीं देहकना चाहता...

स:- मर. गुरनाम सिंह जी, मुझे आपकी बातों पर न तो ग़ुस्सा आएगा, और न hi दुःख होगा.. आप जो कुछ भी बोल रहे हाँ, वो भी एक हिसाब से सही hi है. लोगों का भला करने क चक्कर में अक्सर खुद को बहुत hi भारी नुकसान उठाना पड़ता hai...main जानता हों, आपके जैसा वतन से मोहब्बत करने वाला, लोगों के लिए खुद की बलि तक चढ़ा देने वाला इंसान कभी कभी hi पैदा होता है. आपने सच्चे दिल से खुद के परिवार को दुखी करके भी लोगों की भलाई तर्क नहीं की.

आप जैसा लोगों के होने से hi तो मुझे हौसला मिलता है. वर्ण एक अकेला इंसान जल्दी hi हिम्मत हार जाता हिअ. और मेरी हिम्मत आप जैसे लोगों से बढ़ती है.. आपकी पूरी लाइफ hi बेशुमार कारनामों से भरी पड़ी है..

गुरनाम:- मैंने कहा न मुझे अब्ब पीछे मुद कर नहीं देखना..

स:- गुरनाम मेरी एक बात सुन्न्ना चाहेंगे आप..

गुरनाम- हाँ क्यों नहीं, सुनंने में हर्ज hi क्या है, मनमानी तो हर कोई करता है, अरु मैं भी तो खुद की hi मानोगे, मेरा क्या जाता है आपकी बात सुनने में..

स:- गुड गुरनाम जी, तो मैं ये कहने वाला हों, क आपको सालों जेल भुगतनी पड़ी, वो भी समझ सेवा क चक्रों में, आपके अपने hi डिपार्टमेंट क लोगों ने आपको साज़िश करके फांस्वा दिया, और आप एक लम्बे आरसे के लिए जेल में चले गए, और पीछे आपके बीवी बच्चे भूके पियासे रट बिलखते रहे, तड़पते रहे. किसी ने भी आपकी सेवाओं के बदले में आपके बीवी बच्चो को दो वक़्त की रोटी नहीं दी. और आप जैसे अफसर की बीवी लोगों क घरों में काम करके बच्चो का पेट पालती रही.....

गुरनाम सिंह जी, अब्ब मैं जो कहने जा रहा हों, उसे ग़ौर से सुंनिये गए..

गुरम:- ठीक है, स सर, मैं आपकी बात अच्छे से सुनेगा, आप बोलिये..

SS:-gurnam सिंह जी, आप ने कई साल समाज सेवा की है. और बदले में आपको कभी भी कुछ नहीं मिला, ना बड़ाई और न hi कोई इनाम, पारर आपने इस सबब की परवा किये बिना hi लोगों की भलाई की है, वो भी बिना किसी मतलब के.. डिपार्टमेंट में रहते आपके लिए हमेशा hi कोई न कोई परेशानी रही है... मैं आपको एक पैकेज देना चाहता हों. मैं आपको अपनी गैंग के एक हिस्से का लीडर बनता हों तो क्या आप मेरे लिए काम करेंगे.. बदले में आपको जो कुछ भी चाहिए वो मिलेगा.. आपके बच्चो का अचछा फ्यूचर बनने की मैं गारंटी लेता हों. अरु सामाजिक सेवा के लिए पैसा पावर, और सिक्योरिटी मेरी तरफ से होगी. आने वाले वक़्त में कभी भी कोई भी इशू आपके और न hi आपकी फॅमिली के लिए रास्ते में आएगा...

स की बात कर गुरनाम सिंह हैरान, परेशान रह गया...

गुरनाम:- मुझे करना क्या होगा..

स:- देखिये गुरनाम सिंह जी. जो काम आपने पूरी ज़िन्दगी किया है, अब्ब भी आप वही करेंगे. पारर इस बार काम करने का तरीका कुछ हट के होगा.. मैं खुद की एक गैंग ओर्गनइजे कर रहा हों. और मुझे आप जैसे hi लोगों की ज़रूरत है. काम वही सबब होगा, जो आपके दिल की मंशा होगी. हम अपने कुछ काम आपके सामने रखेंगे, जो भी आपको सही लगे आप उसे चूसे कर सकते हाँ.. ये काम इललीगल होक भी लीगल hi होगा.... कोई भी ऐसा काम आप से नहीं लिया जायेगा, जिससे आपके दिल पर कोई बोझ बने. बल्कि उल्टा इससे आपको एक अलग hi सकूँ मिलेगा.. आप समाज की भलाई के लिए जो कुछ पहले आप नहीं कर पाए थे, इस बार वो पुरे मुनज़्ज़म तरीके से किया जायेगा.. और आप होंगे इस गैंग के एक हिस्से के लीडर................... बॉयज गुरनाम सिंह जी को ज़रूरी डिटेल और हमारे गैंग बनाये जाने का मक़सद समझा दो.

रूम में खड़े चरों लड़के एक साथ बोले:- ok बॉस




कॉल एंडेड

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फिर गुरनाम सिंह को साड़ी बात डिटेल से बता दी गई..

गुरनाम सिंह की हालत ख़राब होने लगी थी. उसकी आँखों में आंसू आने लगे. वो नीचे घुटनो के बल बैठा आंसू बहाने लगा..

गुरनाम:- harpreet(wife) गुरु जी की किरपा से आज मेरा पहला गुना भी होते होते रह गया. गुरु जी ने मुझे गुनाओ की दलदल में उतरने से बचा लिया, हरप्रीत मुझे मेरे जीने का मक़सद फिरसे वापिस मिल गया...... हरप्रीत बाबा जी की किरपा हो गई है हमपे. वर्ण आज ज़िन्दगी में पहले बार किसी को लूटने गया था, कब्ब से तुम सबब की भूक देख देख कर मेरा ईमान डगमगाने लगा था, पारर मुझे गुनाहो में उतरने से पहले hi बाबा जी ने मुझे बचा लिया, बाबे की मैहर हो गई हाँ हमपे हरप्रीत... हरप्रीत... गुरनाम नीचे झुकता हुआ रोने लगा..

गुरनाम सिंह ने हमेशा hi समाज सेवा की थी, कुछ लोगों को गुरम सिंह का ऐसा करना सही नहीं लगा, तो गुरनाम को जेल में भिजवा दिया गया.. जेल जाने क बाद गुणराम सिंह के बीवी और बच्चो को परेशां किया जाने लगा, और गुरनाम सिंह की बीवी को लोगों के घरों में काम करके घर चलना पड़ा..

गुरनाम सिंह जेल से आया तो उसे कही भी नौकरी नहीं करने दी गई. गुरनाम के मुखालिफ हर जगा से गुरनाम को बदनाम करके काम से निकलवा देते थे, तंग आ कर आज गुरनाम एक नकली शॉटगन लेकर उस कोठी में रॉबरी करने चला गया था.

गुरनाम सिंह क बच्चे पिछले 4 सिन के कुछ भी नहीं खा सके थे.. 4 दिन से सबब के hi पेट अनाज जा एक दाना भी अनहि गया था... इसलिए गुरनाम रॉबरी जैसा काम ाकरने पर मजबूर हुआ.

वर्ण गुरनाम जैसा इंसान मर्डर तो जाता, पर कभी ऐसा न करता... गुरनाम सिंह उड़ती हुई चिडया को गन से शूट कर दिया करता था, इतना जीदार था, क मौत की आँखों में ऑंखें दाल कर लड़ना इसकी आदत थी.. पर हालत और सैशियों ने गुरनाम को रुला कर रख दिया.. बच्चो का खली पेट इंसान को कही का नहीं छोड़ता.....

SS(vijay) को पता चला तो उसने गुरनाम को खुद की टीम में शामिल करने का फैसला कर लिया..

गुरनाम सिंह को 5 लाख फ़ौरन hi दे दिए गए, जिसे गुरनाम ने ले लिए.. गुरनाम एक बनने वाले गैंग क एक हिस्से का हेड था, तो गुरनाम ने पैसे लेने में कोई झिझक नहीं महसूस की... गुरनाम ने लूटा हुआ माल रूम में hi छोड़ा और घर जाने के लिए उठ खड़ा हुआ..

रूम में राजा गैंग थी, पर वो भी अभी किसी के सामने अपनी असली सूरत में नहीं आना चाहते थे.. उनके फेस बदले हुए थे.. सबब ने hi गुरनाम को गले से लगाया और उसे इज़्ज़त से बहार ले कर चलने लगे गुरनाम को उसके घर छोड़ा और फिर वापिस आ गए...




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मैं एक ऊंची बिल्डिंग की छत पर स्नाइपर गन लगाए हुए था.. मुझसे 700 मीटर की दूरी पर एक 8 मंज़िला बिल्डिंग थी. जिसके 6 फ्लोर पर आज दोनों गैंग्स की मीटिंग होने वाली थी.

सुनने में आया था क दोनों गैंग्स रोज़ hi कही न कही मीटिंग कर रहे हाँ. आज उनकी मीटिंग मेरे सामने वाली बिल्डिंग में थी.. और मैं उन सभी का वेट कर रहा था..

कुछ देर पहले मई गुरनाम सिंह से बात कर रहा था, आज जब्ब मैं जूली से फ्री हो कर पैलेस में गया था, तो कुछ hi देर में पापा का फोन आया था, और उन्हों ने hi मुझे गुरनाम सिंह का बताया था, पापा उनको पहले से hi जानते थे, पर मुझे बताना भूल गए थे, पापा ने पहले कई बार गुरनाम सिंह को समझने और अपने साथ मिलाने की कोशिश की थी, पर गुरनाम सिंह जी पुलिस से रिलेटेड किसी भी सख्श की बात सुन्ना hi नहीं चाहते थे...

मैंने अपने हिसाब से गुरनाम सिंह को हैंडल करने का सोचा, गुरनाम सिंह का मैं अंदर से बहुत hi उजला था, और मुझे यकीन था क कुछ म्हणत तो करनी hi पड़ेगी, पर गुरनाम सिंह जी मेरी बात मान जायेंगे.. अच्छाई इतनी जल्दी किसी क अंदर से नहीं जाती, बास कभी कभी कही जा के छुप जाती hai.ya सो जाती है. और गुरनाम सालो सितम सहते सहते भलाई की सोच से दूर हो गए थे..

जूली से फ्री होकर मेरा मैं तो था क किसी से कुछ मस्ती क्र ली जाए. पारर फिर गैंग्स की डिटेल मिलने की वजा से सबब hi पेंडिंग करना पड़ा..

अलोक का भाई सिद्धार्त नाथ अभी अंडरग्राउंड था. इसलिए कुछ वक़्त क लिए उसे मैंने छोड़ दिया था. उनकी इन्फो जैसे hi मिलती मैं उस हरामी को धार लेता.

मैं दूरबीन लगाए हुए बिल्डिंग को देख रहा था.. वैसे भी कमिश्नर के आदमी दोनों गैंग्स की पूरी डिटेल के लिए उनके पीछे hi थे.. जैसे hi वो बुलिडिंग क पास पोहचते कम को पता चलता और कम मुझे बता देता...





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थैंक यू वैरी मच..!!

विजय क लिए गुरम एक अच्छा इंसान, अच्छा दोस्त, अच्छा लीडर सबत होगा.. विज्जू अब दोनों गांड को ख़तम करने वाला है.. पर ये सबब आसान भी नहीं है. टाइम लगेगा और दिक्कत भी बहुत होगी विज्जु को.... बुसिनेस के लिए अभी टाइम है.. और दन्न क लिए विज्जू क्या सोचता है.. वो देखते हैं..

विज्जू को अभी 3 दिन hi तो हुए हैं.. महक जल्द hi आएगी. वो अपना काम ाधुआ नहीं छोड़ेगी.. विज्जू महक का लवर तो है नहीं.. जस्ट गुड फ्रेंड सही से फ्री हो आकर hi आएगी
 
अपडेट ::: 80

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नीचे मेरे लिए एक बुगाटी कार कड़ी हुई थी, मुझे इमरजेंसी में भागना भी पद सकता था,




ये टोटली एरिया hi महेंद्र गैंग का था, यहाँ हर तरफ उनकी सिक्योरिटी बिखरी पड़ी थी. मेरे लिए आज का ये मिशन आसान नै था..

पारर मेरे लिए तो मेरी लाइफ में सबब कुछ hi मुश्किल तरीन रहा है. और फिर जैसा रास्ता मैंने खुद के लिए चुना था, या वक़्त ने मेरे लिए मुंतखिब कर दिया था........ वहां मुझे हर दम्म ऐसे हे हालातों से गुज़ारना था... किसी भी लम्हे एक अनदेखी गोली मेरा काम तमाम कर सकती थी. और मैं अपने पीछे रोने वळून की एक लम्बी लिस्ट छोड़ कर परलोक सुधार सकता था.

पर ये सबब तो करना hi था... ऐसे कामों के लिए सोचने की आदत मुझमे नहीं थी. यहाँ मैं अकेला hi आया था, राजा गैंग को मैंने गुरनाम क पीछे लगा दिया था, और फिर यहाँ किसी और की ज़रूरत भी नहीं थी..

कुछ देर मुझे कम की तरफ से कॉल आई क दोनों गैंग्स कुछ hi देर में पोहचने वाले हाँ... मैं दूरबीन को हटा कर स्नाइपर गन को अच्छे से चेक करने लगा. कही काम क टाइम कुछ गड़बड़ न करदे......

फिरसे दूरबीन लगा कर मैं अपने हदफ़ को देखने लगा.. मेरा चेहरा बदला हुआ था और हथु पर ग्लव्स थे. कोई क्लू नहीं यहाँ छूटने वाला था, बास मुझे किसी तरह से यहाँ से निकल जाना था, उसके बाद खतरा कम् हो जाता.

फासला बहुत था, मुझे फोरि ढूंढ पाना आसान नहीं था, जितना टाइम मैंने लगाना था, मुझे उसी टाइम में सबब करना था..

वो भी तो गैंगस्टर थे, जल्द hi पता लगा लेते क फायरिंग कहाँ से की जा रही है. और मुझे उनके पता चलने से पहले hi अपना काम करके निकल जाना था.. मैंने सभी गैंग्स वळून की पिक्स देख ली थीं और मुझे किसी को भी पहचानने में कोई परेशानी नहीं होने वाली थी..

सामने बिल्डिंग में मुझे कुछ गाड़ियां रूकती हुई दिखें. और मैंने उन सबब पर अपना फोकस बढ़ा दिया.. मैं अभी किसी पर भी हमला नहीं कर सकता था. मुझे सभी क 6तह फ्लोर पर जाने का वेट करना था..

10 मिंट बाद मुझे सभी 6तह फ्लोर पर दिखे..... मैंने दूरबीन को साइड में किया और स्नाइपर से आंख लगा का गैंगस्टर पार्टी को देखने लगा..

सबब hi मेरे निशाने पर थे, और एक के मरते hi बाकी सबब सावधान हो जाते, और मुझे जल्द से जल्द जितने ज़यादा मार सकता था, मार कर निकलना था..

मेरा पहला निशाना बनने वाला था मला, चुटिया एवं की सपोर्ट से मला बना और अब्ब एवं का hi खून चूसने में लगा हुआ है.. मला की पावर दोनों गैंग्स में ज़यादा थी.... मेरा आज का मैं टारगेट मला और अलोक नाथ थे.

बाकी जो भी मारा वो बोनस..........

अलोक नाथ का भाई सिद्धार्थ नहीं आया था... कोई न कहाँ तक्क छुपा रहेगा..

सभी टेबल की साइड में बैठे हुए मीटिंग में मसरूफ थे. और मला कुत्ता कुछ ज़यादा hi बढ़ चढ़ कर बोल रहा था. मैंने अलोक नाथ को देखा उसका फासला मला से 3 चेयर्स का था.. मुझे मला को मारते hi फ़ौरन अलोक नाथ को मारना था..

चूतिये खुद क इलाके में 6तह फ्लोर पर शीशे के पास बैठे खुद को सेफ समझ रहे थे... शायद उनके मंद में था क यहाँ उनके लिए खतरा कहाँ से आएगा.. दूर बास यही एक बिल्डिंग थी, जहाँ उनकी कुछ सिक्योरिटी कम् थी, वर्ण पास की बिल्डिंग्स में उनकी सिक्योरिटी बहुत hi टाइट थी.. इसलिए सभी रिलैक्स थे और खुद को खतरे से बहार समझ रहे थे..

मैंने एक गहरी सांस लेकर छोड़ी और फिरसे एक लम्बी सांस खुद के लंग्स में उतार कर सांस को रोक लिया और निशाना लगाने के लिए खुद को तैयार कर लिया.

मला जो बहुत hi उछाल कूद मचा रहा था.. मेरी ऊँगली क दबते hi गोली सीढ़ी जा कर उसके सर्र को आधा उड़ाते हुए सामने की दीवार से जा टकराई. मैंने फ़ौरन hi अलोक की तरफ स्नाइपर गन की नाल का रुख किया और ट्रिगर दबा दिया.. पर अलोक की किस्मत अच्छी थी, जो वो मला को देखने के लिए थोड़ा सा घूम गया था, जिस वजा से गोली अलोक नाथ का एक कान उड़ाते हुए दीवार से जा टकराई. मैंने फ़ौरन hi एक और गोली चलाई और इस बार अलोक फ़ौरन hi खुद को बचने के लिए नीचे झुक गया था. जिस वजा से गोली उसके एक कंधे को hi उधेड़ गई.. अलोक एक हाथ से हमेशा के लिए अपाहिज हो गया था..

मैंने अलोक को छोड़ा और फिर जो भी मुझे दिख रहा था, उसको निशाना बनाने लगा.. एक मिंट में दो मैगज़ीन खली हो गए थे....

मला के बाद कौन मारा मैं ये देखने के लिए वहां नहीं रुका और स्नाइपर गन को छोड़ कर नीचे के लिए भाग खड़ा हुआ.. मैं बहुत hi तेज़ी से स्टैर्स उतर रहा था.. मैं नीचे खड़े हुए गुंडों को खुद की तरफ देखते हुए देख लिया था, अब्ब मुझे खुद को बचते हुए यहाँ से भागना था.. इससे पहले क कोई मुझ तक्क पोहंचे मुझे गाडी लेके यहाँ से निकल जाना था..

2 फ्लोर नीचे उतारते हुए मुझे लिफ्ट खली मिली तो मैं लिफ्ट के ज़रिये तेज़ी ने नीचे जाने लगा.. जैसे hi लिफ्ट रुकी मैं दौड़ता हुआ बहार की तरफ भाग निकला..

पिस्तौल मैंने हाथ में ले लिया था, जिस वजा से बिल्डिंग के मैं फ्लोर पर भगदड़ मच गई थी..

और अब्ब तो बहार से भी गोलियां चलने की आवाज़ें आने लगी थीं..

मैं भागता हुआ पार्किंग में पोहंचा और अपनी बुगाटी कार में बैठ कर तेज़ी से ड्रिफ्टिंग करते हुए पार्किंग से बहार निकलने लगा.....






मेरी स्पीड इतनी थी क हर कोई खुद को बचने क लिए साइड में कूदने लगा.. और मैं गाडी को लिए बहार रोड पर आ गया.. एक्सेलरेटर पर मेरा पेअर बार बार अपना दबाओ कम् या ज़ायदा करने लगा.. जिस वजा से मेरे गाडी भयानक झटके खा रही थी. और लोग खुद को बचने के लिए साइड में कूदने लगे थे....

मुझे गाडी भागते हुए सबब ने hi नोटिस कर लिया था, और कुछ फासले पर खड़े हुए गुंडे भी मेरी गाड़ी को देख चुके थे...




उन्हों से अपनी गन्स का मोहन hi खोल दिया. और मेरी गाडी में अनगिनत गोलियों के निशाँ बनने लगे.. लेकिन खुश किस्मती से गोली भी गोली गाडी के टायर को नहीं लगी.

बुगाटी कार भी तो स्पेशल hi थी. उसे कुछ खास फर्क नहीं पड़ा और गोलियों की बरसात में से भागती हुई रेंज से बहार होने लगी..

अभी मैं उनके hi एरिया में था और आगे मेरे लिए रास्ते ब्लॉक किये जा सकते थे. और मुझे सभी रास्ते ब्लॉक होने से पहले hi निकल जाना था.

पर ये इतना भी आसान नहीं था. फायरिंग शुरू होते hi पुरे एरिया को सील करना शुरू कर दिया गया था, और पूरा गैंग hi अब्ब रोड पर निकल क्र मेरे लिए मौत बनने वाला था. सबब को hi मेरी गाडी के बारे में इन्फो दे दी गई होगी..

मैंने कार को धीरे करते हुए एक रोड से टर्न लिया तो मुझे पीछे से 3-4 कार्स की हेड लाइट्स दिख गई थी. जो बहुत ज़यादा स्पीड से मेरे पीछे आने लगी थीं...






मैं समझ गया क वो मेरे पीछे लग चुके हाँ. और आगे भी और na-jaane कितनी गाड़ियां मेरे पीछे लगने वाली थीं.

और मुझे आज एक लम्बी रेस की ज़रूरत पद गई थी.. मुझे किसी क हथु में आने से पहले hi गैंगस्टर एरिया से निकल जाना था... मैं 110 की स्पीड से गाडी को भगाये जा रहा था..

जब मेरे पीछे आने वाली गाड़ियां भी इसी स्पीड से मेरे पीछे आने लगी तो मैंने एक्सेलरेटर पारर अपना दबाओ बढ़ा दिया और मेरी कार 200 की स्पीड से भागने लगी.

इतनी स्पीड में हर किसी क लिए गाडी को कण्ट्रोल करना आसान नहीं होता.. और वो भी जब्ब किसी का पीछा किया जाए. मेरा पीछा करने वाली गाड़ियां बहुत पीछे रह गई.. आगे फिर एक मोड़ आया तो मैंने एक्सेलरेटर पर अपना दबाओ काम किया और गाडी स्लो होने लगी...

मेरे सामने एक क्रॉस रोड था..

सामने की साइड में छोटा सा रोड था और main-road दोनों साइड में टर्न हो रहा था.

और यहाँ पर चौक का एरिया खली था, जिस वजा से मुझे main-road के एक साइड में जो इस एरिया से बहार निकलता है. 2 गाड़ियां रोड को ब्लॉक किये हुए दिखें...

अब्ब मैं घूम कर वापिस तो जाने से रहा. एक साइड वापिस इसी एरिया में जा रही थी. और एरिया से बहार निकलने वाले रोड को ब्लॉक किया हुआ था. मेरे पास सामने छोटे रोड का इंतेखाब करने क शिव कोई ऑप्शन नहीं था. सोचने का समय भी नहीं था. वर्ण पीछे वाली गाड़ियां मुझ तक पोहंच जाती.

मैंने उसी तंग रोड पर गाडी को भगा दिया. वो रोड कुछ सही नहीं था. मेरी कार उस रोड पर जाते hi लहराने लगी.. और साइड में कड़ी गाड़ियों से मुझपर फिरसे फायरिंग शुरू कर दी गई... मेरे लिए इस तंग रोड पर संभालना मुश्किल होने लगा था. पारर मेरे पास कोई और ऑप्शन भी नहीं था.. 40 की स्पीड से मैं उस रोड पर गाडी भागने लगा...

कुछ hi देर में मैंने उस रोड को आधा क्लियर कर लिया था.. मेरे पीछे hi वो गाड़ियां भी आने लगीं थी. इस रोड पर गाडी चलना आसान नहीं था.

मैं खुद भी बड़ी मुश्किल से स्टेरिंग को काबू किये हुए था.. यहाँ मेरी ट्रेनिंग काम आ रही थी.. ट्रेनिंग क दौरान मुझे पहाड़ों में ऐसे hi गाडी को भागना सिखाया गया था..

कैसी भी सिचुएशन हो खुद को मेंटली स्ट्रांग रखते हुए फोरि फैसला कैसे लिया जा सकता है.. और खतरनाक सिचुएशन से निकल भागने के लिए मुझे क्या करना होगा ये भी मुझे सबब बताया और सिखाया गया था.. ये सबब इतना भी आसान नहीं था, गोलियों की बरसत ज़ेहन को प्रेस्सुरीसेड कर देती है. और इंसान फैसला लेने लायक नहीं रहता..

और ऐसी hi सिचुएशन में मुझे खुद को 100% एक्टिव रखना था..

अब्ब कुछ hi डोरी पर रोड फिरसे टर्न होने वला था, और मुझे सामने से कोई नहीं दिख रहा था..

जल्द hi मैं गाडी को दूसरे रोड पर लेजाने में कामयाब भी हो गया था..

पिछले रोड पर गाडी चलते हुए मुझपर गोलियां चलना आसान नहीं था, क्यूंकि गाडी को काबू में करना एक मसला था और फिर लहराती है गाडी से गोलियां चलना दूसरा बड़ा मसला था.. इसलिए मुझवर गोलियों की बरसात कुछ देर क लिए थम्म गई थी..

अब्ब रोड पिरसे फ़ास्ट स्पीड के लिए परफेक्ट हो गया था, तो मैंने फिरसे एक्सेलरेटर पर दबाओ बढ़ाना शुरू कर दिया. और गाडी एक बार फिरसे हवा में बातें करने लगी...

अगर मुझे 5 मिंट तक कोई राह में न मिला तो मैं इन सबब क शिकंजे से निकल सकता था.. पारर अब्ब तक तो सबब hi गुंडे सभी रोड्स को ब्लॉक कर चुके होंगे..

आज मेरे लिए मेरी दिल पसंद कंडीशन बन्न गई थी, जिंटा खतरा बढ़ रहा था, मेरे अंदर का ओरिजिनल विज्जू बहार आने लगा था, और मैं धीरे धीरे करके और भी ज़यादा रिलैक्स होने लगा था...

मुझे अभी तक्क अपनी ओरिजिनल परफॉरमेंस देने का मौका नहीं मिला था.. हैंड तो हैंड रियल फाइट भी किसी से नहीं हुई थी, और मौत जैसे खतरे में मैं इससे पहले कभी नहीं आया था, आज बानी सूरत इ हाल ने मुझे मज़ा देना शुरू कर दिया. दुश्मन क इलाके में घुस कर उन्हें ललकारना, उनपे हमला करना और फिर उनके शिकंजे से निकल भागना, आसान बात नहीं थी.

पारर मेरे लिए ऐसी सिचुएशन बहुत hi ज़यादा इंटरेस्टिंग थी.. खतरे से गुज़ारना और मौत की आँखों में ऑंखें डाल कर लड़ना यही तो ज़िन्दगी है...

ऐसे hi हालातों से गुज़र कर लाइफ जीने में मज़ा आता है..

मैं गाडी भगाये जा रहा था क मुझे फ़िज़ा में लंग गन की आवाज़ सुनाई दी..






लंग गन का साउंड सुन कर मेरे होंटो पर मुस्कान आ गई, अब्ब कुछ और भी मज़ा आने वाला था.. अब्ब मेरे लिए खतरा और भी ज़यादा बढ़ गया था.

एक सही से चलाई गई गोली मेरी तरफ आई तो वो मेरी गाडी को चीरते हुए और गाडी की सीट को फाटे हुए मुझे उधेड़ कर रख दे गई.

इतनी खतरनाक होती है लंग गन.. और उससे निकलने वाली बुलेट..

मैं गाडी को लहराते हुए स्पीड देने लगा. अभी वो बहुत पीछे थे, लंग गन की रेंज बहुत ज़यादा होती है, पर चलती गाडी से निशाना लगाना भी तो बच्चो का खेल नहीं था.. वर्ण पहली hi गोली मेरा काम कर चुकी होती..

आएगी फिर एक टर्न आया तो मैं 70 स्पीड से टर्न लेने लगा. अब्ब गाडी को और भी ज़यादा स्लो नहीं कर सकता था, लंग से चाली जाने वाली गोली का खतरा था.

टर्न लेते hi गाडी 2 व्हील्स पर हो गई. मैंने अपनी स्किल को इस्तेमाल करते हुए गाडी को उलटने से बचा लिया था....






स्टेरिंग पर मेरी ग्रिफ्ट बहुत की मज़बूत थी, और मेरा फुल कण्ट्रोल भी था. गाडी जल्द से सीढ़ी भी हो गई..

मैं हर किसम से खतरे से बचते हुए गाडी को फिरसे भागने लगा..

गाडी एक बार फिरसे हवा से बातें करने लगी और कुछ hi देर में मैं डेड जोन से निकल चूका था... गैंगस्टर एरिया पीएच रह गया था.

पर मेरे पीछे लग चुकी गाड़ियां जल्द hi मेरे पीछा छोड़ने वाली नहीं थीं... पूरा गैंग hi मेरे पीछे लग चूका था. और मैं जल्द से जल्द सभी की पकड़ से निकल जाना चाहता था.

कुछ आगे मुझे दो गाड़ियां रोड को ब्लॉक किये हुए दिखें, मैं स्पीड कुछ कम् करने लगा. कुछ फैसले पर पोहंचा तो मुझे दोनों गाड़ियों की साइड में कुछ गुंडे हथु में गन्स लिए खड़े हुए दिखे.

उन्हों ने मुझपर गोलिओयान नहीं चलाई थी, शायद मेरे स्लो होने से वो समझ गए होंगे क मैं गाडी रोकने वाला हों.

मैंने पागल तो नहीं था.. जो गाडी रोकता..

गाडी स्लो होते होते 30 मीटर क फासले तक जा पोहंची तो मैंने एक्सेलरेटर पार्स दबाओ को कम् करके गाडी की स्पीड 20 तक्क करदी थी..

25 मीटर क फासले पर पोहचते hi मैंने फिरसे एक्सेलरेटर पर दबाओ बढ़ा दिया और गाडी तूफानी अंदाज़ अख्तियार करते हुए सामने रोड ब्लॉक किये हुए दोनों गाड़ियों से पुरे ज़ोर से जा टकराई, दोनों गाड़ियां एक धमाका करते हुए साइड में जा कर लुढ़क गईं. और मैं खुद को सँभालते हुए आगे बढ़ने लगा..






गाडी जब्ब टकराई थी तो मुझे गुंडों की चीखो की आवाज़ें भी सुबाई दी थी.

चूतिये मुझे ज़िंदा पकड़ने की क्या ज़रूरत थी.. मेरे देखने hi गोलियों से भून देना चाहिए था..

मेरे होंटो पे एक मुस्कान आए गई थी. आज सब कुछ मेरे लिए मज़े से भरपूर था. गुंडों की चीखें मुझे बहुत मज़ा दे गईं थीं..

कितनो हाथ पेअर टूटे मुझे नहीं पता मैं तो बास गाडी को सर्र पत् भगाये जा रहा था.. अब्ब मेरे लिए खतरा न होने क बराबर रह गया था.

मेरा पीछा करने वाले खतरनाक गुंडे थे.. पर साले रेसर नहीं थे.. किसी का पीछा करने के लिए गाडी की नहीं रेसिंग स्किल की जरुआत होती है..

मेरे पास लंग होती तो मैं उनक पूरा एरिया hi उदा देता........

20 मिंट बाद मैं सभी की नज़रों से दूर हो चूका था, अब्ब मैं अपने एरिया में भी दाखिल हो गया था.. मेरी गाडी की हालत देख कर सभी की अटेंशन मेरी तरफ हो गई थी, मैं सभी को नज़र अंदाज़ करते हुए सिटी से बहार जाने लगा..

इस हालत में गाडी को पैलेस की तरफ नहीं ले जाय जा सकता था.. शहर से बहार निकलते hi मैंने गाडी रोक दी और गाडी से बहार आ कर मैं कुछ फासले पर कड़ी एक और गाडी में जा बैठा...

और फिर कुछ दूर पोहंच कर मैंने अपने पास मौजूद रिमोट से पहले वाली गाडी को ब्लास्ट कर दिया... ये सबब मैंने पहले से hi प्लान कर रखा था...

मेरी गाडी पैलेस जाने वाले रास्ते की तरफ मुद चुकी थी..





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पुरे दिल्ली शहर में तहलका मचा हुआ था............

मला के साथ साथ शहर के 4 और जाने माने बुसिनेस्स्में मारे गए थे. सभी की हत्या बहुत hi भयंकर तरीके से हुई थी.. हाई लेवल क बुसिनेस्स्में और मला की मौत की ऐसी भयंकर मौत से सबब hi अचम्बे में थे.. इतनी भयानक मौत और वो भी उन्ही के इलाके में घुस कर मार दिया किसी ने किलर ने..

4 बुसिनेस्स्में शदीद ज़ख़्मी हुए थे.. अलोक नाथ का एक कान और एक हाथ उड़द चूका था.. महेंद्र सिंह क भाई जीतेन्द्र सिंह को भी सीने में राइट साइड एक गोली लगी थी, जो उसकी पसलियों को फाड़ते हुए उसके लंग्स को उधेड़ते हुए पार निकल गई थी..

मीडिया को इस सबब से दूर रख गया था. लेकिन लोक नाथ और महेंद्र खुद hi खुद करने लायक नहीं रहे थे, तो मीडिया को कैसे रोक पाते..

इस बार मीडिया ने गैंग्स क दबाओ में आने से पहले से सबब लाइव दिखाना शुरू कर दिया था. मीडिया की वजा से ये खबर पुरे देश में hi फेल गई थी...

और साथ hi शहर से बहार एक गाडी के ब्लास्ट होने की न्यूज़ भी फ़्लैश हो रही थी...

सिद्धार्थ नाथ को पता चला तो वो भी अपने गार्ड्स क साथ वही पोहंच गया.

ज़ख़्मियो को पास में hi मौजूद एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट किया जाने लगा.

किशन अरोरा गैंग का जाना माना गुंडा और एक लीडर इस वात कुछ ाकरने लायक नहीं रहा था..... उसकी सीटी hi गम हो चुकी थी.. या उसकी माँ hi चुद चुकी थी..

क्राउड की वजा से जख्मियों को हॉस्पिटल में एडमिट किये जाने में बहुत परेशानी होने लगी थी. तो मेहन्द्र सिंह और अलोक नाथ के गुंडों ने हवाई फायरिंग शुरू कर दी. जिसको मीडिया ने लाइव टेलीकास्ट करना शुरू कर दिया था...

महेंद्र सिंह अपने भाई की हालत देख कर बहुत ग़ुस्से में था.. जीतेन्द्र सिंह का सीना में 3" का एक सौरख बन्न चूका था.. गोली लगते hi वो बेहोश हो गया था.. उसकी साँसे मोहन और नाक की बजाये सीधे hi लंग्स से अंदर बहार होने लगी थें...

अभी वो मारा नहीं था.. देखते हाँ आगे चल क वो मरता है या जीता है..

शहर के दूसरे मरने वाले बुसिनेस्स्में लोगों के वजा से दिल्ली शहर में अफरा तफरी का माहौल बन्न गया था.. सभी बड़े बड़े लोग हॉस्पिटल के लिए निकल खड़े हुए थे.

शहर की कई जानी मानी हस्तियां हॉस्पिटल में पोहंच चुकी थीं.. कम साब भी कुछ देर में पोहचने वाले रथे.. वो भी यहाँ आ कर सभी के दुःख में शामिल हो दो आंसू बहाना चाहते थे...

पर कम साब दिल hi दिल में बहुत खुश थे.. अब्ब कुछ दिनों तक शहर में अमन रहेगा.. और इसी का फायदा उठा क्र गैंग को ख़तम करना आसान हो जाएगा..

अलोक नाथ और जितेंद्र के ज़ख़्मी होने से अभी कोई कुछ करने की पोजीशन में नहीं रहा था....

मला की फॅमिली रोटी बिलक्ति हुई वही पोहंच गई थी.. मला का चेहरे देखने लायक नहीं रहा था.. आधा चेहरा उसका उड़द चूका था.. और बाकी के चेहरे से अंदर का सिस्टम बहार निकल निकल कर सभी का दिल ख़राब किये दे रहा था...





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मैं जब्ब पैलेस में पोहंचा तो सभी सिटींग हाल में बैठे हुए थे... वहां एक बड़ा लेद टीवी लगा दिया गया था....

और सभी उसपर टेलीकास्ट हो रही न्यूज़ को देख रहे थे.. उस पर मेरा hi कारनामा दिखाया जा रहा था....

मैं जैसे hi अंदर पोहंचा तो मुझे देख कर सबब hi ख़ुशी से खड़े हो गए..

पापा:- आ गया मेरा शेर.. बहुत अच्छे बीटा.. आज का मिशन तुम्हारा बहुत बढ़िया रहा.. वेल दोने आगे भी ऐसे hi झंडे गाढ़ते रहना..

हर्ष अंकल:- सही कहा रंजीत, विजय हमारा शेर hi है....

दीक्षा आंटी:- होगा कैसे नहीं.. हम सबब ने hi तो इसे शेर बनाया है..

माँ मेरी तरफ भाग कर आई और मुझे अपनी बहन में भर कर मेरे चेहरे को चूमने लगी.

माँ:- मुझे गर्व है अपने विज्जू पे, भगवन ने तुझे मेरी कूख से जनम दे कर मुझे बहुत बड़ा इनाम दिया है.. तुझे देख कर मेरी नस नस में सकूँ अस उतरने लगता है.. और जब्ब तुम खुद को दो पर लगा कर किसी के लिए लड़ते हो तो मेरी छाती गर्व से फूलने लगती है...

माँ नम्म आँखों से मुझे फिरसे चूमने लगी... सभी मेरे पास hi आ गए थे..

प्रिय जहान्वी और श्रुति अब्ब ठीक थी. लगता है अपनी अपनी छूट की अच्छे से सिकाई कर ली थी...

प्रिय मेरे बाज़ो को थाम कर मेरे कंधे को चूमती हुई बोली..

प्रिय:- विज्जू आज का तुम्हारा मिशन कितना खतरनाक था, हमे न्यूज़ से पता चला था क तुम कितनी मुश्किल से वहां से बच निकले हो..

जहान्वी मेरे दूसरे कंधे को थामे हुए बोली..

जहान्वी:- हाँ विज्जू वो इलाका कितना खतरनाक था, तुम उनके चुंगल से सही सलामत आ गए हो. मुझे बहुत ख़ुशी है, तुम्हे फिरसे देख के..

श्रुति पेरी पीठ में अपने गरम बूब्स से सिकाई कर रही थी.. मेरी गर्दन पर अपना मोहन लाते हुए बोली..

श्रुति:- हमारा विज्जु किसी से कम् है क्या. जो ऐसे hi किसी के हाथ आ जाए..

पूजा दीदी और रानी मेरे सर्र के बालो को सेहला रही थीं..

विजय:- ये मेरे लिए कौनसा पहला मिशन hai.jo आप सबब ऐसे मुझे घेरे हुए हाँ..

माँ:- विज्जू बीटा पैलेस में रहते हुए तो ये हमारी नज़रो में तुम्हारा पहला मिशन है ना.. इसलिए हम कुछ ज़यादा hi ख़ुशी से बावले हो गए हाँ..

फिर पापा ने मुझे गले से लगा क बधाई दी.. पापा के बाद पूजा दीदी ने मुझे काफी देर गले तक्क लगाए रखा....

vijay:-(didi क कान में) दीदी आज की रात आपके नाम है, तो कुछ रात के लिए बचा लो.. अभी किसी और को भी अपना प्यार लौटाने दो...

पूजा दीदी मेरी बात सुनके मेरी कमर पर चुटकी काटने लगी.. दीदी झींप गई thi..kuch देर के लिए शायद को वो अपनी छूट के खुलने वाली बात को भूल गई थीं.....

रानी से मिला. सोनाक्षी आंटी से मैं बहुत अच्छे से मिला, अभी उन्हें भी ज़यादा टाइम नहीं दे पाया था... अब्ब जल्द hi इनका भी नंबर लगाना पड़ेगा...

कुछ देर मेल मिलाप क बाद सभी अपनी अपनी जगा पर बेथ गए. मैं माँ की गॉड में सर्र रख कर लेट गया. मेरे पेअर नीचे hi थे..

प्रिय मेरे साथ बैठी मेरे ऊपर लड़ कर लेट गई थी.. प्रिय का एक दूध मेरे बाज़ो की एक साइड में था, तो दूसरा दूध दूसरे साइड में था. प्रिय ने अपने बूब्स का सेण्टर मेरे बाज़ो पर रख हुआ था...

प्रिय कभी मुझे पीठ से सेहलती तो कभी माँ की कमर पर हाथ फेरने लगती.. प्रिय बड़े प्यार से मुझे और माँ को पचकार रही थी...

मेरी प्रिय की छूट ने एक नयी दुन्या जो देख ली थी. प्रिय बहुत खुश दिख रही थी... और मज़े में भी थी. तो अपने प्यार का भरपूर इज़हार कर रही थी... प्रिय की साँसे मेरे कंधे से टकरा रही थीं..

प्रिय:- विज्जू आज उठने के बाद से hi तुम्हे देखने का बहुत मैं कर रहा था. दिल में था क तुम्हे देखते hi अपनी आँखों में उतार लून... और भी बहुत कुछ करने को दिल छह रहा था... आज उठने के बाद से hi सबब बहुत अच्छा अच्छा लग रहा है...

माँ :- (धीरे se)hmmmmmmm.. ऐसा सबब कुछ तो होगा hi प्रिय बेटी.. रात की हुई छुड़ाए ने तुम्हे अंदर से पूरी तरह से विज्जू से जोड़ दिया है ना.. तुम रात पुरे दिल से जो विज्जू से चूड़ी हो... तुम्हरी आत्मा अब्ब विज्जू विज्जू hi पुकारे gi...abb तुम्हे कई दिनों तक खुली आँखों से भी विज्जू hi नज़र आता रहेगा...

विजय:- माँ तो फिर आपको भी आज सारा दिन मैं hi मैं नज़र आता रहा हों क्या.

माँ:- विज्जू बीटा तुम तो मेरी नज़रों से कभी दूर हुए hi नहीं.. रियल में न भी नज़र आओ. पारर तुम्हारा अक्स तो मुझे हर दुम्म hi दीखता रहता है..

विजय:- प्रिय तुम्हे पता है.. आज सूबा मैंने माँ को भी छोड़ लिया है..

प्रिय:- सच विज्जू माँ भी अब्ब हम जैसी हो गई है... माँ ने भी तुम्हारे लुंड ले कर छूट और आत्मा का मिलान कर लिया है..

विजय:- हाँ मेरी पारी, सूबा मैं माँ के रूम में गया था, और फिर वही माँ से भी मुझे पूरा प्यार मिल गया.. माँ दो घंटे तक मेरे लुंड को अपनी छूट में लिए रही han..chudaai तो हमने बोहत बाद में की थी.. अभी पूरी तरह से खुल के मैंने और माँ ने चुदाई नहीं की है. सूबा टाइम कम् था तो जल्दी में सबब हुआ, पारर हमे सकूँ बहुत मिला है..

हम तीनो hi धीरे धीरे बोल रहे थे.. किसी को हमारी बातें समझ नहीं आ रही थे. और वैसे भी ज़यादा टर्र इस वक़्त न्यूज़ में बिजी थे.. और सभी ने हमें हमारे हाल पे छोड़ दिया था....

सबब समझदार जो थे...

माँ:- प्रिय बेटी मैं भी तुम्हारी तरह से अपने विज्जू का पूरा प्यार पा चुकी हों.. सालों की तड़प कुछ कम् हो गई है... कोठे पर चुद चुद क आत्मा बहुत hi ज़ख़्मी हो गई थी मेरी..

प्रिय:- माँ ये आपने बहुत अच्छा किया है.. विज्जू हमारा hi तो है. फिर पूरा प्यार पाने के लिए देर करने की ज़रूरत hi क्या है.. अचछा हुआ जो आपने विज्जू से सबब कर लिया.. माँ अब्ब तो आपकी छूट शांत है ना. और दिल भी..

माँ:- हाँ प्रिय बेटी आज सालों बाद मैंने एक पूरा दिन ख़ुशी से भरपूर गुज़ारा है...

विजय:- माँ रूम में चलें वहां कुछ बातें करते हाँ.. और आज पूजा दीदी का भी नंबर लगाने का मैं नहीं..

माँ:- विज्जू बीटा रात भी तुम नहीं सोये हो. आज रहने दो कॉल से पूरी तरह से फ्रेश हो कर तीनो से कर लेना.. आज हम पांचू एक साथ सोयेंगे...

विजय:- हाँ माँ आप भी सही कह रही हनन..

माँ:- अभी ठहरो कुछ देर में डिनर शुरू होने वाला है. फिर चलते हाँ रूम में.





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डिनर के बाद कुछ तो बेथ गए सिटींग हाल में, और न्यूज़ देखने लगे, बाकी सबब अपने अपने रूम में जाने लगे..

मैं पूजा दीदी, रानी और नताशा दीदी को लिए उनके रूम में जाने लगा...

रूम में पोहंचे तो

विजय:- दीदी आज मैं माँ के साथ सोने वाला हूँ, रात भी नहीं सोया. पहले तो मेरा मैं था क मैं आज रत आपके पास रुक जाओ. पारर फिर माँ ने कहा क आज तुम थके हुए हो तो कल पूरी तरफ से फ्रेश हो कर तीनो क पास चले जाना.. अब्ब आप क्या कहती हाँ..

पूजा दीदी की सांस तो पहले से hi अटकी हुई थी, उन्हों ने एक दुम्म से अपना रुका हुआ सांस छोड़ा, फिर वो बोली..

पूजा दीदी:- थैंक गॉड.. वर्ण आज सारा दिन hi मेरा बहुत बुरा हाल रहा है.. मुझे लग रहा था क आज hi सबब कुछ हो जाएगा... मुझे भी आज की रात चाहिए थी विज्जू, रानी की वजा से मैं बहुत अपसेट थी, रानी जितना एक्ससिटेड thi,isne मेरा और नताशा का खून hi सुखाया हुआ था..... (फिर रानी को देखकर बोली)... रानी कमीनी अब्ब तो तुम खुश हो ना... एक रात और ऊँगली से अपनी छूट को ठंडा कर लेना..

रानी:- दीदी मुझे इतनी भी आएग नहीं लगी यही. मैं तो बास आपको तंग कर रही थी.. हमारे लिए माँ भी सबब से आगे हाँ. अभी हमारा विज्जू माँ के साथ सोया भी तो नहीं है.. पहले माँ का ख्याल रखना ज़यादा ज़रूरी है...

नताशा दीदी कुछ नहीं बोली वो बहुत शर्मा रही थी.. वो मस्ती हर किसम की कर लेती थी. पर खुल कर के बातें कम् hi किया करती थी. आज तो वैसे भी उनकी छूट खुलने की बात हो रही थी, तो वो पसीने छोड़ रही थी.

मैंने नताशा दीदी को पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया और दीदी क गले पर किश करने लगा..

विजय:- दीदी आप नर्वस क्यों हो रही हाँ. मैं सबब प्यार से करूंगा ना. आपके साथ.. छूट खुलने से दर्द तो होता hi है.. जितना रानी और पूआज दीदी को होगा, उतना hi आप को भी होगा...

नताशा दीदी मेरे खुद के गले पारर किश से गहरी सांस लेने lagi..didi ने मुझे कस के पकड़ लिए.. उनके बूब्स मेरे सीने से दबने लगे.. तो मैंने उनकी गांड की दरार में ऊँगली दाल दी.. और गांड के छेड़ को ढूंढ कर प्रेस करने लगा.. पंतय पहने होने की वजा से सही से नहीं हुआ पारर ऊँगली लगने का एहसास hi बहुत होता है.. दीदी की सिसकी निकल गई..

नताशा:- विज्जू यही शर्म hi तो हम सबब के लिए सब से बड़ी होती है, सबब करने में झिझक का होना भी ज़रूरी है, इसका भी अपना एक अलग hi मज़ा है, और एक अलग सकूँ.. विज्जू तुमसे शर्म और डर नहीं है.. डर तो होने hi है, पहला टाइम सभी क लिए ऐसी hi फीलिंग्स लाता है. मैं कैसे बताओ विज्जू तुम्हे, मेरी तो 2 दिन से सूख hi नहीं रही है. जितना डर है, जितनी शर्म है, उल्टी ेक्सइटेमेंट भी है...

विजय:- दीदी तो फिर आज hi सबब करलों..

नताशा दीदी:- नहीं विज्जउ ये सबब माँ से बढ़ कर तो नहीं है ना.. और फिर तुम कौनसा हमे बीच में छोड़ कर कही भाग जाओगे.. आज नहीं तो कल.. कल नै तो फिर नेक्स्ट किसी दिन सही.. हमें अपने अंदर की आग नहीं बुझानी है विज्जू. हमे तो बास तुम्हारा प्यार खुद में सामना है.. वो प्यार कुछ लेट सही.. पर सकूँ से hi सबब करेंगे.. हमे कोई जल्दी नहीं है..

विजय:- दीदी आज आपने बहुत अच्छा बोलै है.. यही तो हम सबब का प्यार है.

मैंने दीदी से अलग हुआ... तीनो hi शांत थीं.. मैंने तीनो को अच्छे से किश की, और गण बोल कर अपने रूम में जाने लगा...





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थैंक्स..!!

ऐसा तो होना hi था भाई.. मैंने रियल क हिसाब से स्टोरी को लिखा है.. विज्जू सभी को सही से टाइम दे सकता है.. अपर रियल में अक्सर ऐसा hi होता है. जो सोचा जाता है अक्सर वैसा करने में इंसान लेट हो जाता है.. और कुछ इमोशंस एक्ससिटेमेंट की वजा से लेट हो जाते हैं.. पर जैसे hi 2-4 दिन गुज़रते हाँ.. सबब याद आने लगता है.. यहाँ पैलेस में ऐसा hi हो रहा है.. आज की अपडेट में आपको आपके मतलब का बहुत कुछ मिलने वाला है. जूली के साथ विज्जू की बॉन्डिंग आगे चल क दिखेगी.. अभी दिन hi कितने हुए हाँ.. सबब एक hi बार में तो सही होने से रहा.. और आगे चल क विज्जू बहुत कुछ करेगा.. दिल्ली गांड को ख़तम ाकरेगा.. इमोशन भी दिखेंगे.. और छुडाईओ भी होगी.. और बाकी सबब को भी विज्जू टाइम देगा.. धीरे धीरे hi सब होगा.. विज्जू एक hi दिन तो सबब के मैं को शांत करने से रहा..

जूली की अतराफ़ से ट्रैंनिंग वाली बात भी आगे चल के सामने आ जायेगी.. पहल जो ज़रूरी है विज्जू वही कर रहा है..

महक क साथ विज्जू का बहुत सा टाइम इकठे गुजरने वाला है.. विज्जउ क लिए महक सा साथ बहुत देर तक रहने वाला है..

लाली का भी आपने सही कहा मैं भी कुछ ऐसा hi ार्कने वालो हूँ.. पर अभी लाली को ठीक होने में कुछ दिन लगने वाले हाँ.. ाहर करैक्टर क साथ इंसाफ होगा .. अभी तो विज्जु को पैलेस में ए हुए 3 दिन hi हुए हं..
 
थैंक्स.>!!

विज्जू अब्ब मास्टर बाँदा बन चूका है.. विज्जू इस ओने माँ आर्मी.... अलोक नाथ की किस्मत अच्छी थी जो बच गया वर्ण लम्हो की चूक उसे फायदा दे गई.. विज्जू ऐसे hi जानलेवा मिशन में अपना बेस्ट दिखने का आदि है.. उसकी ट्रेनिंग hi बहुत टफ हुई है.... विज्जू क स्टेप लेने का अंदाज़ hi ऐसा होता है क जिसपर वो टूट पड़ता है.. वो तो बोखलाए गए hi.. अब्ब बास जल्द hi विज्जू सभी कचरे को समेटने वाला है.. बहुत परेशां कर लिया इन गैस वळून ने दिल्ली की मासूम जनता को और जो बुसिनेस्स्में गंदे धंदे में शामिल हाँ वो भी एक एक करके मरते जायेंगे.. ... पूजा दीदी , रानी और नताशा दीदी के साथ सेक्स के लिए भी आगे एक ट्विस्ट आने वाला है.. उम्मीद है आपको पसंद आएगा..
 
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