Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 3 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

अपडेट :::: 16

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अब्ब तक्क

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कोठी दिल्ली शहर के बहरी तरफ थी.. मैं अपने hi ख्यालों में डूबा हुआ चलता hi जा रहा था. सोचों ने यलग़र की हुई थी शरीर का अंग अंग दर्द कर रहा था. लेकिन अब्ब बर्दाश्त करने की आदत का फ़ायदा होने लगा tha.main शुरू से ढीट भी था.

दर्द तो भूल कर मैं अपनी hi बनाई ख्यालों की दुन्या में गम चलता रहा.

na-jaane कितना दूर तक चला गया था. मुझे कोई अंदाज़ा नहीं था. जब मैं कोठी से निकला तो 2:पं के आस पास का टाइम तो होगा शायद. कन्फर्म नहीं है. बस अंदाज़ा hi था.

मुझे ख्यालों की दुन्या से बहार निकलने वाली एक चीख थी.

जिस में दर्द था जैसे कोई खतरे में हो.

मैंने हड़बड़ा कर अपने ird-gird के माहौल को देखा दूर दूर तक कोई भी मकान नहीं दिखाई दे रहा tha."chalte चलते मैं इतनी दूर कैसे आ गया. में इतना अपने ख्यालों में गम था के मुझे पता hi नहीं चल"

सनसन इलाका था. रोड से काफी दूर झाड़ियों में कुछ लोग दिखे मुझे.

मैं उस तरफ को चल दिया. जब वहां पोहंचा तो देखा एक लड़की ज़मीन पर पड़ी कराह रही है और एक औरत के साथ गुंडे टाइप बन्दे जबर्सती कर रहे थे.....



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अपडेट : 16

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अब्ब आगी

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""ये देख कर मेरा दमाग hi ख़राब होने लगा साला अभी एक hi दिन हुआ है कोठे की दुन्या को छोड़े हुए, और यहाँ भी कोठे पर रहने वाली bebas,majboor और लाचार लड़कियों और ौटों की तरह कोई भी कोई भी लड़की हो या औरत मेहफ़ूज़ नहीं.

क्या कोई ऐसी जगा भी है जहाँ aurat-zaat की इज़्ज़त की जाती हो. हर कोई औरत को सिर्फ भोगने की मशीन hi समझता है. साली दुन्या जब भी किसी अकेली लड़की या औरत को देखती है तो राल टपकने लगती है हरामी साले कुत्ते कही के""

""मेरा ग़ुस्सा आखरी हद को छूने लगा मेरा सारा दर्द कहाँ गया मुझे नहीं पता. मुझे अपनी माँ की बेबसी याद आने लगी जब भी उसका उत्तरा हुआ चेहरा देखता था मैं सब समझ जाया करता था. के माँ hi ये ऐसी हालत क्यों है..!!

आज भी एक माँ की इज़्ज़त खतरे में थी. और मेरे रहते कोई एक माँ की इज़्ज़त को तार तार करे मैं उसका सर्र hi उखड के रख दूंगा. आज मुझे अपने अंदर की दुन्या hi बदली हुई महसूस होने lagi.aisa लगने लगा के मेरे अंदर कोई जवालामुखी उबाल रहा हो. और बहार आने को बेचैन हो रहा हो...

लेकिन एक बात थी, मैं लड़ाई लड़ना नहीं जनता था. इस लिए सोचना पड़ा क ऐसा क्या करून क उस बेचारी औरत की इज़्ज़त बच जाये. कुछ समझ नहीं आया तो टाइम को बर्बाद न करते हुए मैं भाग कर एक गुंडे के पीछे आया और एक ज़ररदार लात उस के पिछवाड़े पर दे मारी वो थोड़ी दूर जा कर गिरा. लेकिन tab-tak दूसरा संभल गया. और मेरी तरफ लपका. मेने भी आगे बढ़ कर उसके पेट पे सर की टक्कर दे मारी टक्कर कुछ ज़यादा hi जोरर की लग गई. वो पेट पकड़ कर थोड़ा पीछे हटा.

मुझे भी चक्कर आने लगे. साला गेंदे की नेसल से था वो. वो गुंडा तो गिरा नहीं लेकिन मेरा सर्र चक्र गया. फिर पहले गुंडे ने आ के मुझे पीछे से लात मारी मेरी गांड हिल कर रह गई.



"aaaaaaaaaaaaaaa mamaaaaaaaaaaaaaaa" merrrrrrraaaaaaaaaaaaaaaaa piiiiccccccchhhhhhhwwwwwwaaaaaaadddddddaaaaaaaaaaaa""

""हाय मारररर दिया साले हरामी ने""



"साला अपनी चोटों को तो मैं भूल hi गया था". चूतड़ों का एक बार फिरसे हशर नशर हो गया. दिल किया भाग लून यहाँ से कही आंटी को बचने के चक्कर में मेरे चुत्तडों का hi सत्यानाश न हो जाये"

गुंडे की लत लगने से मैं उछाल कर आगे दुसरे गुंडे के ऊपर जा गिरा. अब्ब सर्र के चक्कर तो काम हो गए थे लेकिन चुत्तडों का दर्द जान निकलने लगा.

जिस गुंडे के ऊपर में गुरा उसने मुझे अपने ऊपर से उठा कर साइड फ़ेंक diya.aur दोनों गुंडे मिलकर चल दिए उस औरत की तरफ.

मैं लड़ाई में शामिल तो गया था ग़ुस्से में आ कर. लेकिन मुझे तो लड़ना भी नहीं आता था. ""क्या करून"" अब्ब लड़ाई तो लड़नी hi थी.



""...लडूंगा नहीं तो सीखों गए कैसे .. और सीखों गए नहीं तो अपनी माँ और बहनो को बचाऊँगा कैसे..""

ऐसी सोच के आते hi मेरी हिम्मत बढ़ने लगी. एक लड़की की आवाज़ सुनाई दी. वो चीखते हुए ""माँ उठो .. माँ उठो"" ..बोल रही थी. मैंने देखा तो दोनों गुंडे फिर से उस औरत पर झपटने की तैयारी कर रहे थे. मैंने idhar-udhar देखा कोई काम की चीज़ मिल सके तो कुछ किया जाये.

एक छोटा पत्थर का नुकीला टुकड़ा नज़र आया मुझे. वो कुछ ज़यादा hi छोटा था. 4" का छोटे से पठार का टुकड़ा था. चलो कुछ न कुछ तो है शायद इस से काम बन जाये. मैंने उस पत्थर की नोक को अपनी उँगलियों के दरमियान से बहार निकल कर अपनी मुठी को बंद किया और नोक वाली साइड को एक आदमी के सर पे पीछे की तरफ जोरर से मारा लेकिन वो साला ऐन मौका पर अचानक से थोड़ा सा घूम गया. पत्थर उसे लगा ज़रूर. लेकिन कुछ ख़ास फरक नहीं पड़ा. वो सतर्क हो गया और दूसरा गुंडा भी ये देख चौकन्ना हो गया. अब्ब उन दोनों को मुझपर ग़ुस्सा कुछ ज़यादा hi आने लगा tha.(saala कल का छोकरा उन गुंडों से लड़ेगा) मैंने उनके man-pasnad काम में टांग जो घुसा दी thi.abb वो दोनों गुंडे मुझे छोड़ने वाले नहीं थे. साले दोनों अचानक से मुझ पर झपट पड़े....

मेरी सेहत अछि है जिस्म भी मज़बूत है मैं कमज़ोर भी नहीं हूँ. बस इन तीन चार दिनों में कुछ कुछ पंक्चर हो गया tha.lekin वो दोनों हराम के जाने पूरे सांड थे. मुझसे टकराये और में किसे बचे की तरह उछलता हुआ थोड़ा दूर जा कर धड़ाम से नीचे गिरा.


"aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa"

मैं फिरसे पिछवाड़े के बॉल गिरा एक बार तो मुझे दिन में hi तारे नज़र आने लगे. ऐसे लगा मैं ज़मीन पारर नहीं ज़मीन पारर पड़े छोटे छोटे पत्थर के नुकीले टुकड़ों पर जा गिरा हूँ और सारे छोटे छोटे पत्थर मेरे पिछवाड़े में घुस गए हैं. मेरी चीखें निकलने लगी..

वो हरामज़ादे दोनों गुंडे हंसने लगे ....

""लेकिन मैंने एक बात पर धयान ज़रूर दिया था.""

गिरते गिरते भी "पत्थर" को मैंने अपने हाथ से छूटने नहीं दिया. एक गुंडा आगे मेरे तरफ आया और मेरे पेट पारर एक लात मरने लगा. खुद को पेट में पड़ने वाली से बचने के लिए मैंने अपने दर्द को बर्दाश्त करते हुए अपने हाथ में मौजूद पत्थर के नुकीले हिस्से को उस गुंडे के घुटने के जोड़ पर अपनी बची खुची ताक़त लगा कर मार दिया. पत्थर की नोक सही से उसके घुटने पर लग गई.



Aaaaaaaaaaa मर्डरर गैय्यिययियाआआआ ....

की आवाज़ उस वीराने में गूँज गई और वो अपने घुटने को पाकर लंगड़ाता हुआ एक टांग पर नाचने लगा. दूसरा आदमी कुछ देर के लिए पहले आदमी की तरफ देखने लगा उसे पता hi नहीं चला के उस के दोस्त को चोट किस चीज़ से लगी है. वो इस लिए थोड़ा सुरप्रीसेड था. मैंने दुसरे गुंडे के पीछे आ कर उसे कोई मौका दिए बगैर उस के सर्र के पिछली तरफ उस नुकीले पत्थर से अपनी पूरी ताक़त से वर्कर कर दिया.

क्यूंकि मैं डर गया था अगर अब अगर मैं इनके हाथ लगा तो ये मुझे ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे. क्यूंकि मैंने एक गुंडे को ज़ख़्मी कर दिया था. इन जैसे हरामी आदमियों की नेचर मैं अच्छी तरह से जनता था. मुझे लड़ना भले hi न आता हो लेकिन जिस माहौल में मैं रहा हूँ वहां इन जैसे haram-zaadon की दुन्या बस्ती है. इस लिए इस दुन्या की साड़ी haram-zadgiyon का नॉलेज था मुझे. बस लड़ना नहीं आता था. जिस आदमी के मैंने पीछे से पत्थर मारा था. उसे पत्थर कुछ ज़यादा hi लग गया था. वो बेहोश होने के करीब था. पहले वाला भी अभी तक लंगड़ा रहा था लेकिन अब्ब तब उसने अपने दर्द पर काबू प् लाया था. हाँ लंगड़ा ज़रूर रहा था.

मैंने उसकी तरफ देखा



""' ओह्ह्ह्हह टेरररीई भिन्नन्न न के..""""



साले ने चाकू निकल लिया था.

मुझे तो हाथ से भी सही तरह से लड़ना नहीं आता था. इसने तो चाकू hi निकल लिया था.. अब क्या करून..???

चाकू देख कर चूतड़ों के साथ साथ अब्ब गांड में भी कुछ कुछ चुभने laga.saala कही आज मैं मर्डर hi न जाओं.

"ऐसे कैसे मैं मर्डर सकता हूँ. मैं यहाँ मरने के लिए तो नहीं आया. कुछ तो करना पड़ेगा"

मैंने इधर उधर देखा वो औरत और लड़की अब्ब काफी दूर कड़ी थी.

मैं उस लड़की और औरत को देख हैरान रह gaya"me लड़ाई में ीनता गम था के मुझे इन दोनों का पता hi नहीं चला . "चलो ाचा हुआ अब्ब तो वो दोनों सेफ हैं"

अब्ब इस चाकू वाले से कैसे बचूं. इतना तो मुझे पता था वो साला अब्ब इतना तेज़ी से नहीं लाडे गए लंगड़ा जो हो गया था.

उसका चाकू देख कर मुझे लगा इस दुसरे गुंडे के पास भी चाकू होना चाहिए जो बेहोश पड़ा है. मैंने जल्दी ने उस की तलाशी लेनी शुरू की.

मुझे उसके पास से चाकू मिल गया. मैंने जल्दी से चाकू निकल कर अपने हाथ में पकड़ लिया.

साला वो लंगड़ा इतनी देर में मुझ तक पोहंच गया था. इससे पहले के वो मेरे चाकू मरता मैं जल्दी से नीचे गिर gaya.warna मेरा गाला hi कट जाता.

वो एक पेअर से लंगड़ा हो गया था तो खुद को संभाल नहीं पाया और गिरने लगा.

वो गुंडा मेरे ऊपर hi गिरने वाला था, मैं जल्दी से कल्टी मार के साइड हो कर खुद को बचाया, कहीं मुझपर न आ गिरे, और मेरा राम नाम सत्य यही हो जाये और माँ और बहनो वही कोठे पे......

वो चाकू समेत अपने साथी के ऊपर गिरा उस का चाकू उसके अपने साथी की hi पीठ में घुस गया. मैंने देर नहीं की. मैंने जल्दी से अपने हाथ की मुठी में दबे पत्थर से उस गुंडे के भी सर्र पारर वारर कर दिया वो भी नीचे गिर गया. फिर मैंने तीन बार और उसके सर्र पे जोरर से उस पत्थर को फिर से मारा उस का काम ख़तम. शायद ये भी बेहोश हो गया था....

मैंने उसे लात से हिला कर देखा वो साइड में पलट गया लेकिन बेहोश था

मैंने औरत की तरफ देखा. तो वो और उस की बेटी मेरी तरफ आ रही थी.

औरत रट हुए मुझे boli.....""Beta में तेरा किस मोहन से शुक्रिया अदा करून तुमने हमें बचा लिया........

विजय ....... आंटी जी ऐसी बात न करें औरत की इज़्ज़त बड़ी कीमती होती है.


"फिर खुद में hi बोलै" इस बात को मुझसे बेहतर कौन जान सकता है.



मुझे आपको इस हालत में देख कर बोहत बुरा लगा. इस लिए मुझसे रहा नहीं गया. तो आप की मदद कर दी.

आंटी .... बीटा तुम न आते तो मेरा और बेटी का पता नहीं क्या होता.

""मैंने लड़की की तरफ देखा. दर्री दर्री हुई सी मासूम सी फटते पुराने से कपडे पहने हुए मुझे चक्कर चक्कर देख रही थी...."""

विजय ..... आंटी आप का घर कहाँ है.

आंटी ....बीटा शहर के शुरू में जो आबादी है वहां रहती हूँ.

विजय ... आप यहाँ कैसे आई इस वरन इलाके में ....

आंटी. .... बीटा यहाँ से थोड़ी एक और बस्ती है. वहां मेरी बेटी के लिए दवाई लेने जा रही तो ये गुंडे रास्ते में मिल गए. ये मुझे पहले भी परेशां करते रहते थे. आज मुझे देख कर ये मेरे पीछे आ गए.

विजय .... तो इतनी दूर जा के दवाई लेने जाने की क्या ज़रुरत थी. और अगर आपको ये गुंडे परेशां करते थे तो आपने अपने घर में किसी को बताया क्यों नहीं.

आंटी .... जहाँ हम रहते हैं वहां का डॉक्टर आज नहीं आया था. इस लिए पास वाली बस्ती जा रहे थे... (फिर रट हुए) हमारा इस दुन्या में और कोई नहीं है. हम दोनों माँ बेटी अकेले hi रहती है.

विजय .... गुंडों की तरफ इशारा करते हुए.

विजय .... ये दोनों कौन हैं.

आंटी ......""दररते हुए"" ये हमारे इलाके के आवारा गुंडे हैं सारा दिन

gunda-gardi करते रहते हैं.

विजय ..... फिर तो मसला हो गया अब्ब क्या करें ये तो अब्ब हमें भी नहीं छोड़ें गे.

आंटी .... (रट हुए) बीटा इन दोनों के और भी साथी हैं अब्ब ये हम माँ बेटी को उठा लें जायेंगे हम तो पहले hi dar-ba-dar की ठोकरें कहते हुए इस जगा ए थे. अब कहाँ जायेंगे हमारे पास तो कोई ठिकाने भी नहीं.



मैंने दोनों गुंडों की तरफ देखा.

""""ओह्ह्ह्हह्हह terrrrrrrrrrriiiiiiii"""
 
थैंक्स बॉस:

जिस की खुद की लाइफ दर्द से भरी हो

वो कभी भी नहीं चाहे गए के

उस की वजा से किसी और भी दर्द मिले

अचे फॅमिली मिली है विजय को कभी न कभी काम आ सकती है

अगर विजय उनकी इज़्ज़त पर दाग़ लगने से बचाये गए

तू ऊपर वाला तो सब देख hi रहा है न

वो देगा विजय को हिम्मत और ताक़त

सिर्फ इस फॅमिली के साथ रहना hi ज़रूरी नहीं
 
थैंक्स माय डिअर:

विजय ने अपनी माँ की बेबसी देखि है वो कैसे

एक और माँ को भी बर्बाद होते देख सकता है

माँ तो माँ होती है ना

विजय कैसे न उस की इज़्ज़त को लूटने से बचता

नेक्स्ट अपडेट में एक धमाल होने वाली है

मैंने कहा था एक विजय का नया रूप

जल्द hi सामने आने वाला है

वेट फॉर थे नेक्स्ट अपडेट

नेक्स्ट अपडेट विल बे ा स्पेशल अपडेट
 
अपडेट ::::: 17

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अब्ब तक्क

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विजय .... गुंडों की तरफ इशारा करते हुए.

विजय .... ये दोनों कौन हैं.

आंटी ......""दररते हुए"" ये हमारे इलाके के आवारा गुंडे हैं सारा दिन

gunda-gardi करते रहते हैं.

विजय ..... फिर तो मसला हो गया अब्ब क्या करें ये तो अब्ब हमें भी नहीं छोड़ें गे.

आंटी .... (रट हुए) बीटा इन दोनों के और भी साथी हैं अब्ब ये हम माँ बेटी को उठा लें जायेंगे हम तो पहले hi dar-ba-dar की ठोकरें कहते हुए इस जगा ए थे. अब कहाँ जायेंगे हमारे पास तो कोई ठिकाने भी नहीं.

मैंने दोनों गुंडों की तरफ देखा.

""

ओह्ह्ह्हह्हह terrrrrrrrrrriiiiiiii"""

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अपडेट :::::: 17

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अब्ब ाजी

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मैं तो भूल hi गया था एक को चाकू लगा है और हम तीनो abb-tak यही खड़े थे. कोई आ गया तो मारे जायेंगे. मैंने जो चाकू एक गुंडे के कपड़ों से निकला था उसे अपनी शलवार में कमर की तरफ फंसाया फिर बारी बारी दोनों की तलाशी ली. उन दोनों की पॉकेट से सारा सामान निकाला. दोनों गुंडों की पॉकेट से काफी पैसे निकले मैंने काउंट किये तो रस:20000 के करीब थे वो मैंने वो पैसे आपकी जेब में दाल लिए अब मुझे पैसों की ज़रुरत तो थी hi.

hhhmmmmmmmmmmm अब मुझे पैसे इन जैसों के पास से मिल जाया करेंगे.

ये शै रहेगा. क्यूंकि मुझे पैसा और पावर दोनों बढ़ानी थी.

""".......पैसा कहाँ से आएगा अब्ब टेंशन ख़तम. हहहहहहहहहह

ये हैं न गुंडे लोग इन जैसों के पास तो बोहत पैसे होंगे वही मेरे काम आएंगे............"""""

लड़की और आंटी मुझे हँसते देख रही थी लेकिन बोली कुछ नहीं

मुझे दोनों गुंडों के पास से और कुछ अपने मतलब का नहीं मिला.

इन दोनों गुंडों ने "मुझे आंटी और लड़की" को देख लिया था अब्ब ये हमारे पीछे पद जायेंगे.

मैं सोचने लगा मुझे क्या करना. अब इस शहर में रहना है तो इन जैसों से बचने के लिए कुछ तो करना hi हो गया.

""क्या करून"" दिल में आया दोनों का गाला hi काट दूँ.

न मेरे पीछे आएंगे. और न hi आंटी और उसकी बेटी के.

"..अगर छोड़ दिया तो हरामी साले सारे गुंडे मिलकर हम तीनो के पीछे पद जायेंगे..."

साला जब भी दो ऑप्शन दमाग में आते हैं तो दमाग का दही होने लगता है. मेरे लिए फैसला करना मुश्किल हो गया था. आंटी ने मुझे कंधे से पकड़ कर हिलाया. मैं अपनी सोचों से बहार आया.

आंटी....... बीटा क्या सोच रहे हो.

विजय...... आंटी जी बस यही सोच रहा हूँ इन गुंडों का क्या करना है.???

आंटी .... क्या करना है बीटा छोड़ दो इन दोनों को हमें अब जाना चाहिए...

विजय .... आंटी जी अगर इन को छोड़ दिया तो ये दोनों बाद में हमें नहीं छोड़ेंगे.

इन जैसों पारर दया नहीं करनी चाहिए. वर्ण ये हमें ज़िंदा नहीं रहने देंगे.

इस शहर में इन लोगों की dada-geeri चलती है.

शाम होने में 2 घंटे का वक़्त बाकी था.

मैं मैं hi मैं में कुछ सोच रहा था.

विजय ..... आंटी जी आप अपने घर की तरफ चलें मैं आप के पीछे-2 आता हूँ..

आंटी मैं मार कर अपने घर वाले रस्ते की तरफ जाने लगी.

मैंने सोचा मुझे अपने अंदर हिम्मत पैदा करने के लिए पहले अपने डर को अपने अंदर से ख़तम करना padega.uske लिए कुछ भी करना पड़े मैं करूँगा वर्ण रेखा बाई से कैसे लडूंगा.

""मैं जो करने वाला था वो मैंने सोच लिया था""

लेकिन दिल कांप रहा था. मेरे हाथ ऐसे कांपने लगे जैसे मुझे कोई बीमारी लग गई हो. अभी मेरे हाथ खली थे तो ये हाल था जब चाकू पकड़ कर किसी को मारना पड़े तब मेरा क्या हाल होगा.

मैंने नज़र घुमा कर पूरे एरिया को देखा. दूर दूर तक कोई नहीं tha.Aunty और लड़की दूर कड़ी मेरी hi तरफ देख रही थी. अभी में सोच hi रहा था के दूसरा गुंडा होश में आ गया.

"मुझे ग़ुस्से से देख कर वो घुंडा कुत्ते की तरह भोकने लगा"

गुंडा ...... ोये छोकरे तूने बोहत बड़ी गलती करदी. अब तुझे कौन बचाएगा

मुझसे. तू यहाँ से ज़िंदा बच कर नहीं जा सकता. ये सारा इलाका हमारा है किसी में इतना दम नहीं जो हम से टकराने की जुर्रत kare.lekin तूने हम पर वॉर कर के अच्छा नहींकिया और उस औरत की तो मैं वो हालत करूंगा जो उसकी बेटी के साथ की थी..... साली को पूरे इलाके की रंडी न बनाया तो मेरा नाम भी लूखा नहीं...

उस के बोलने से मैं थोड़ा रिलैक्स होने लगा. मुझे गुंडे की बातें सुन्न कर डर नहीं लग रहा tha."wo जो भी बकवास कर रहा था मुझे उससे कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा tha.uske होश में आने से और उसके बोलने से मेरे अंदर का विज्जु बहार आने लगा.



" मेरा कम्पन भी ख़तम हो गया था. उसकी बातों ने मुझमे हौसला बढ़ाना शुरू कर दिया. अब्ब जो भी मैं करने वाला था. ये गुंडा तो सोच भी नहीं सकता tha.(bass मुझे अपने अंदर के डर को बहार निकलना था और मेरा डर अब्ब बड़ी हद्द तक जा चूका था) मेरे लिए जो डबल माइंडेड वाली प्रॉब्लम थी मैंने पहले उस पर काबू पाया और एक फैसले पर खुद को पक्का कर किया.... मुझे अपने आप में बोहत चेंज सा आता महसूस होने लगा.

गुंडा उठने लगा. अब्ब मैं डबल माइंडेड नहीं था. जो मैं करने वाला वो किये बगैर कोई चारा भी नहीं था. फिर मैंने भी गुंडे के पास से मिले हुए चाकू को "जो मैंने अपनी कमर पर शलवार के नाड़े की मदद से बंधा था" निकल कर हाथ में मज़बूती से पकड़ लिया. मैंने खुद को अंदर से मज़बूत बना लिया था.



लेकिन चाकू हाथ में आते hi मेरे हाथ के साथ साथ मेरा पूरा जिस्म भी काम्पने लगा. कभी लाइफ में ऐसा किया भी तो नहीं था. अब पहली बार ऐसा कर रहा था तो मेरी फटने वाली हो रही थी.

मुझे खुद पर हंसी भी आ रही थी और ग़ुस्सा भी.

1...... मैं अपने अंदर से डर को निकलने के लिए हिम्मत जुटाने में कामियाब हो गहा था....... ये अछि बात थी....

2...... लेकिन अपने कंपते हुए शरीर पर कण्ट्रोल करने में नाकाम हो रहा था.

मैं अपने हाथ में चाकू पकडे गुंडे को देख रहा था वो भी अपने चाकू को अपने हाथ में लिए मेरी तरफ बढ़ा.

इससे पहले के वो मुझ तक पोहंचे और मुझ पर हमला करे. जितना हो सका मैंने खुद पर कण्ट्रोल कर के तेज़ी से आगे बढ़ कर गुंडे के पेट में चाकू का वर्कर कर दिया. लेकिन चाकू उसके पेट में नहीं लगा. गुंडे ने खुद को बचने के लिए अपने एक हाथ आगे कर लिया tha.uske हाथ पर कट लगा और खून बहने लगा.



मेरा पूरा शरीर कांप रहा था. लेकिन एक बात मैं जनता था क गुंडे को एक भी मौका मिला तो मैं पक्का मारा जाऊँगा. इस लिए मैंने जितना हो सका गुंडे पर चाकू से वर्कर पे वर्कर करने लगा. मेरा कोई भी वर्कर गुंडे को ज़यादा ज़ख़्मी तो नहीं कर रहा tha.kyunki मेरे हाथ कांप रहे थे और छह कर भी अपनी पूरी ताक़त नहीं लगा प् रहा था.

पर हाँ मेरे किये गए बार बार के वर्कर से उसके शरीर से जगा खून निकलने लगा. गुंडे को चोट इतनी ज़यादा नहीं लगी थी. लेकिन अपना खून जगा जगा से बेहटा देख कर वो डर गया. और कुछ देरर के लिए वो मुझे भूल खुद के बह रहे खून को देखने लगा.

"लेकिन मेरे लिए एक बात अजीब हो गई. मैंने जितने भी वर्कर चाकू से उस गुंडे पर किये थे उस बीच मेरे अंदर का बोहत कुछ बदल चूका था. मेरे शरीर का कम्पना ख़तम हो गया था. और गुंडे का खून को देख कर मुझे पता नहीं क्यों बड़ा सकूं सा मिलने लगा"

अब्ब मुझे खुद में कॉन्फिडेंस दिखने लगा था.

"शायद ये वही सिचुएशन थी जो ""जब्ब जब्ब रेखा बाई या उस के गार्ड्स मुझे मारते थे. तो मुझे दर्द को बर्दाश्त करना आ गया था और मैं अक्सर रेखा बाई को देख कर हंस दिया करता था. रेखा बाई ग़ुस्से में मुझे और मारा करती, जब तब मैं बेहोश नहीं हो जाता था"

डेरिंग और ज़िद्दी तो मैं शुरू से hi था. बस इस गुंडे का खून देख कर मैं फिर से रेखा बाई के कोठे वाला विज्जु बन गया. वहां रह कर जो आग मेरे अंदर जल रही होती थी. इस गुंडे के खून को देख कर मेरे अंदर की आग को कुछ रहत सी मिलने लगी और मैं एक अलग hi दुन्या में जा पोहंचा.

अब मेरा गुंडे को देखना का अंदाज़ बदल चूका था.

वो अब्ब भी अपने बह रहे खून को hi देख रहा था. उस के चेहरे पारर डर के मारे पसीना आना शुरू हो गया था.

मैंने वक़्त जाया न करते हुए आगे बढ़ कर उसके चाकू वाले हाथ की कलाई पारर अपने चाकू से वर्कर कर दिया चाकू उसके हाथ से गिर गया. और वो मुझे देख कर हैरान भी था और दर्रा हुआ भी. उसे मेरी आँखों में क्या नज़र आया मुझे पता नहीं. लेकिन वो मेरी आँखों में देखने की ताब न ला सका और अपनी नज़रे फेर ली.

मेरा दिल किया मैं इस गुंडे के साथ खेलूं. फिर मैंने उस गुंडे के साथ खेलना शुरू कर दिया. उस वीरान इलाके में गुंडे की चीखीं गूंजने लगीं मैंने अपने हाथ में मौजूद चाकू से गुंडे के शरीर पर छोटे छोटे an-ginat घाव लगाने शुरू कर दिए. इस खेल में मुझे बड़ा hi मज़ा आने लगा.

"मुझे याद आया जब एक बार माँ ने ro-ro कर अपने अंदर की घुटन को अपने आंसुओं की सूरत में बहार निकला था.. अब्ब मैं आंसू तो बहा नहीं सकता था"

इस लिए मैंने अपने अंदर की घुटन को बहार निकलने के लिए उस गुंडे के साथ छोटे छोटे घाव लगा कर खेलना शुरू कर दिया.... खेलते खेलते मैं अपने होश खोने लगा... मुझे नहीं पता वो गुंडा चीख रहा है या नहीं वो औरत और लड़की मुझे कर डर रही हैं या बेहोश हो गई हैं मुझे ये भी याद नहीं रहा क कोई यहाँ आ भी सकता है और मुझे इस गुंडे को क़तल करने के चक्कर में धार न लिया जाये..

मुझे बस इतना याद है के मैंने अपना खेल खेलना था और अपने अंदर के डर और घुटन को हमेशा हमेशा के लिए ख़तम करना है. या ये याद रहा क साथ hi दूसरा गुंडा भी है मैंने उसे भी धार लिया.

फिर मैंने उन दोनों गुंडों से ऐसा खेल खेला क मेरे सारे कपडे खून से टर्र होने लगे. गुंडों की चीखों ने तो कब का दम तोड़ दिया था.

लेकिन मैं अपने खेल में लगा हुआ था.

""....मुझे रास्ता मिल गया था अपनी हिम्मत को बढ़ने ka.....apne डर को ख़तम करने का .....अपने अंदर मौजूद घुटन को बहार निकलने का..."""

और फिर मैं पागलों की तरह चीखने लगा.

"""""Maa...priya""" """Maa...priya""" मेरे मोहन से "माँ प्रिय" कई मिंट तक निकलता रहा इतने में आंटी और लड़की भाग कर मेरे पास आई.

और मेरे हाथ से चाकू छीन कर फ़ेंक दिया. आंटी मुझे झंझोड़ने लगी मैंने आंटी की तरफ देखा तो आंटी डर के मारे दो क़दम पीछे हट गई. आंटी भी मेरी आँखों में देख कर डर गई थी.......

मतलब अब्ब वक़्त आ गया है क लोग मुझसे दररंनननन""" हहहहहहह"""

फिरसे मेरे kah-kahe निकलने लगे.
 
अपडेट ::: 18

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अब्ब तक्क

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और फिर मैं पागलों की तरह चीखने लगा.

"""""Maa...priya""" """Maa...priya""" मेरे मोहन से "माँ प्रिय" कई मिंट तक निकलता रहा इतने में आंटी और लड़की भाग कर मेरे पास आई.

और मेरे हाथ से चाकू छीन कर फ़ेंक दिया. आंटी मुझे झंझोड़ने लगी मैंने आंटी की तरफ देखा तो आंटी डर के मारे दो क़दम पीछे हट गई. आंटी भी मेरी आँखों में देख कर डर गई थी.......

मतलब अब्ब वक़्त आ गया है क लोग मुझसे दररंनननन""" हहहहहहह

मेरे फिरसे kah-kahe निकलने लगे.


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अपडेट ::: 18

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अब्ब आएगी

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मुझे मेरी आँखों से आग सी निकलती हुई महसूस हो रही थी.

में खुद भी अपने जिस्म में हो रहे बदलाव को महसूस कर पा रहा था. मुझे अपने जिस्म से भाप सी उठती हुई महसूस होने लगी. मेरे सारे कपडे गुंडों के खून से रंग चुके थे.

आंटी की हिम्मत नहीं हो रही थी क वो मुझे कुछ कहे.

जगा भी खतरनाक थी दो गुंडों के जिस्म lahu-lahaan पड़े हुए थे.

आंटी ने हिम्मत करके मुझ थप्पड़ मरने शुरू किये.



"chattakkk"chattaakkk"chhaattaakk"



3 थप्पड़ खाने के बाद मुझे कुछ होश आया

मैंने aas-paas देखा तो गुंडों की लाशें पड़ी थी सामने मुझे सब याद आ गया.

मैं उन लाशों को देख कर मुस्कुराने लगा.

"रेखा बाई का शुक्रिया आज मैं जिस स्टेज पर हूँ ये सबब रेखा बाई का hi तो किया धरा था अगर वो मुझे दुन्या में चलने का ढंग न सिखाती तो मैं आज इस रूप में कभी भी नहीं आ सकता था. रेखा बाई ने मुझ पारर टार्चर कर कर के मुझे इतना ढीट और डेरिंग बना दिया था. आज मैं दो खून कर के भी मैं डर नहीं रहा था.

मैं खुश था....



"बोहत ज़यादा खुश"



""ये मेरी मंज़िल का पहला पढ़ाओ था जिसे मैंने पार कर लिया था.""



रेखा बाई अब तेरा क्या होगा. मेरा वादा है खुदसे "रेखा बाई" मैं तुझे मारूंगा नहीं तू खुद कहेगी विज्जु मुझे मारर दाल लेकिन मैं तुझे मारूंगा नहीं. तेरा इक इक पल rote-sisakte-bilakte-tadapte-gid-gidate हुए गुज़रे गए. लेकिन तुझे मौत नहीं आने दूंगा मैं""



फिर मैंने दोनों बाज़ो पहला कर ऊपर आस्मां की तरफ देखा. और फिर

""ऊपर वाले को थैंक यू बोलै""

और ***फिर जोरर से चिल्लाया***

***** Rekhaaaaaaaaaaaa baaaaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiii*****


काट ले अपने दिन मौज मस्ती में जितने दिन हैं तेरे पास खूब rang-raliyan मन ले.

जो धंदे करने हैं karle,jisko तड़पना है तड़पा ले ,जिसको उठाना है उथले, तुझे तब तक छूट है जब्ब तक्क मैं आ नहीं जाता....

""



माँ प्रिय"""" मैं आऊँगा खुद को संभाल कर रखना मेरे लिए"""



"मेरी बातें और चिल्लाना देख दोनों माँ बेटी दर्री हुई भी थी,

और हैरान परेशान भी"

फिर मैंने आंटी की तरफ देखा आंटी दर्री हुई थी.

विजय .... आंटी जी दररने की ज़रुरत नहीं है मुझे अपना बीटा hi समझिये.

फिर मैंने लड़की की तरफ देखा उसकी तो ऑंखें भी डर की वजा से बड़ी बड़ी हो चुकी थी.

मुझे उसपर तरस आ रहा था लेकिन मैं उसके पास जा कर उस को तसल्ली नहीं दे सकता था. मेरे सारे कपडे खून से साणे हुए थे.

विजय...... आंटी अब्ब हम इस इलाके में नहीं रह सकते..

आंटी .... बीटा फिर हम कहाँ जायेंगे हमारे पास तो रहने के लिए कोई और जगा भी नहीं है...

विजय .... आंटी जी परेशां न हूँ मैं हूँ ना आपके साथ. आप मेरी माँ जैसी हैं आप मेरे साथ रह सकती hain.hum शहर के दूसरी साइड कोई जगा देख कर रह लें गे.

"मेरी बात सुन्न आंटी ने ख़ुशी ख़ुशी हाँ बोल दिया" बेचारी और करती भी क्या

फिर मैंने आंटी को थोड़ा फैसले पर जाने को बोलै आंटी अपनी बेटी को लेकर कुछ दूर कड़ी हो गई....

आंटी और उसकी बेटी के जाने के बाद मैंने गुंडों की जेब से निकलने वाले सामन को फिरसे देखा. मुझे उसमे एक मतचबॉक्स मिली मेरा काम बन गया था.

मैंने दोनों गुंडों के कपडे चाकू से पहाड़ के उनके शरीर से अलग किये. अब्ब दोनों मादरचोद गुंडे मेरे सामने नंगे थे. फिर मैंने उनके उतारे हुए कपडे उनके मोहन पर अछि तरह से लपेट दिए और फिर मतचबॉक्स से एक teeli(diya सलाई) निकल कर जलाई और उन गोंडों के चेहरे पर बंधे कपड़ों को आग लगा di...gundon के मुर्दा चेहरे जलने लगे. कुछ देरर मैं उनके जलते चेहरों को देखता रहा जब तक उनके चेहरों पर बंधे सारे कपडे जल नहीं gaye.main वही खड़ा रहा..

फिर मैं चल कर आंटी के पास जा पोहंचा.

आंटी और उसकी बेटी अब्ब भी घबराई हुई थी. मैंने आंटी के पास पोहंच कर आंटी से kaha"aunty जी मेरे सारे कपडे खून की वजा से ख़राब हो गए हैं मुझे कपडे बदलने padenge.lekin मेरे पास और कपडे नहीं हैं"

आंटी .... (अभी भी दर्री हुई थी लेकिन बोलना तो था) बीटा पहले जहाँ मैं रहती हूँ वहां जाते हैं तुम पास में hi कहीं चुप जाना मैं कहीं न कहीं से कपड़ों का जुगाड़ लगा कर तुम को ला दूँगी....

मुझे क्या ऐतराज़ हो सकता था इस लिए मैं आंटी और उसकी बेटी के साथ चल पड़ा.

कुछ देर चलने के बाद मुझे एक रिहाइशी इलाका दिखाई दिया. शायद यही आंटी रहती हूँगी.

आंटी .... (एक तरफ इशारा करते हुए) बीटा तुम वहां चुप कर इंतज़ार करो मैं तुम्हारे लिए कपडे ले कर आती hoon.....phir आंटी अपनी बेटी को ले कर चली गई और मैं वहीँ चुप कर बेथ गया. कोई ख़ास छुपने की जगा तो नहीं थी लेकिन फिर भी मैं किसी की नज़र में आना नहीं चाहता था. इस लिए जगा मुनासिब न होने के बावजूद भी मैं वही बेथ गया.. दिल में दुआ कर रहा था कोई इस तरफ न ए.

मुझे बैठे बैठे काफी देर गई थी और आंटी अभी तक नहीं आई thi.abb तो शाम का अँधेरा भी होने वाला tha...kahin कोई इस तरफ न आ जाये और मुझे इस हालत में देख कर पुलिस को न bula-le या कोई और पन्गा न हो जाये... मैं ऐसी hi सोचों में घूम था.

के मुझे आंटी अपनी बेटी के साथ आती हुई दिखी मैंने रहत की सांस ली. कुछ देर बाद आंटी मेरे पास पोहंच गई उनके हाथ में कपडे थे और लड़की के हाथ में एक बर्तन था शायद उसमे पानी था.

चलो ये भी ाचा हुआ मुझे तो याद भी नहीं था के कपड़ों के साथ साथ मेरे चेहरे पर भी खून लगा हुआ है.

मैंने कपडे और पानी लेकर आंटी को थोड़ा दूर जाने को बोलै आंटी समझ गई और अपनी बेटी के साथ कुछ फैसले पर चली गई....

मैंने अपने सारे कपडे उतारे और फिर पानी से खुद को अचे से साफ़ किया. अपने चेहरे को मैं अचे से साफ़ कर रहा था बाकी का तो कपड़ों में चुप hi जाना था.

खुद कको अचे से क्लीन करके मैंने आंटी के लाये हुए कपडे पहने. किसी बड़े आदमी के थे मैं उस कपड़ों में अजीब सा दिखने लगा. लेकिन pehn'ne तो थे hi और कोई चारा भी नहीं था. फिर मैंने अपने उतरे हुए कपड़ों से अपनी सब चीज़ें निकल कर मैंने अपने नए पहने कपड़ों की जेब में दाल लीं.

अब्ब मुझे कुछ चैन मिल रहा था. वर्ण खून से सब चिपचिपा लग रहा था.

और बोहत hi ुकझन होने लगी थी.

मैंने अपने उतारे हुए कपड़ों को फोल्ड कर के गाँठ बाँध ली और और फिर घोरसे देखने लगा कुछ रह तो नहीं गया. सब चेक करके मैं आंटी के पास आया और फिर हम तीनो शहर की तरफ चल दिए.

मैं और आंटी अपनी अपनी सोचों में गम हो गए और बेचारी लड़की जो बीमार भी थी उसे अभी तक मेडिसिन भी नहीं मिली thi.himmat कर के हमारे साथ hi चल रही थी.

15 मिंट तक चलने के बाद मैंने अपने उतारे हुए कपडे एक जगा देख कर उनको आग लगा दी.

(आप रीडर्स लोग ये मत सोचें मैं इतना सब कैसे सोच रहा हूँ तो मैं आपको बता दूँ क मेरी जितनी भी लाइफ है साड़ी की साड़ी hi सोचों में hi गुज़री है और जहाँ रह कर मैं इतना बड़ा हुआ हूँ वहां दमाग का चलना आम बात है और मैं तो था भी सब से अलग. हर वक़्त प्लान hi प्लान बनता रहता था ये कैसा होगा वो कैसे होगा.. इस लिए मेरा दमाग बोहत चलता था. जब कोठे पर था तब भी मैं बोहत तेज़ था. अब्ब तो मैं आज़ाद हो गया हूँ अब्ब मुझे हर पल हर लम्हा सोचना hi था. के क्या क्या करना कैसे करना है. ये कैसे होगा वो कैसे होगा. ये सब तो मैं होश सँभालते hi सोचने लगा था.)

जब तब कपडे जल नहीं गए मैं वही खड़ा रहा. शहर अब्ब भी दूर था. मैं हैरान भी था क मैं पैदल इतना चल कर इस इलाके में कैसे आ गया था. अब पता चल रहा था के मैं शहर से बोहत दूर हूँ...

हम फिर से चल दिए कुछ दूर चलने के बाद हमें एक गधा गाडी नज़र आई जो शहर hi की तरफ जा रही थी. गधा गाडी एक तीसरे रास्ते से हमारे पास से हो कर गुज़र रही थी. मैंने उसे आवाज़ लगा कर मदद के लिए बोलै. वो रुक गया तो मैंने उससे शहर जाने के लिए कह दिया वो भला आदमी था उसने मेरे साथ दो लेडीज देख कर हम को गधा गाडी पर बिठा लिया. फिर हम गधा गाडी पर hi बेथ कर शहर में एंटर हुए.

शाम का अँधेरा हो चूका था. हम गधा गाडी से उत्तर. मैंने उस भले आदमी का शुक्रिया अदा किया और फिर से चल दिए टैक्सी की तलाश में.

कुछ दूर तक चलने के बाद हमें एक टैक्सी वाला मिला हमने उससे दिल्ली सिटी के दूसरी तरफ चलने को कहा.

उसे क्या प्रॉब्लम हो सकती थी. हम टैक्सी पर सवार हो गए और फिर टैक्सी चल पड़ी.....

हम तीनो hi शहर की chaka-chond को देखने lage...delhi शहर पूरा का पूरा jag-maga रहा था रात होने से हर तरफ लाइट्स रोशन थी हर मंज़र भी kaabil-e-deed था मुझे ये सब देख बोहत hi ाचा लग रहा था. मेरे लिए ये पहला मौका था जब मैं रात के वक़्त किसी बड़े सिटी में बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स बड़ी बड़ी गाड़ियां और रोड्स पर जल रही ख़ूबसूरत लाइट्स सब बोहत hi ाचा लग रहा था....

हम तीनो दिल्ली शहर की खूबसूरती में खोये हुए थे. क टैक्सी अचानक से रुकी.

विजय .... क्यों भाई टैक्सी क्यों रोक दी आपने..???

ड्राइवर ... अब्ब और कहाँ ले कर चालों जहाँ पोहचने का कहा था वहां पोहंचा तो दिया है...

ख्यालों में डूबे और दिल्ली के मनाज़र को देखते टाइम का पता hi नहीं चला

विजय ..... भाई यहाँ कोई अछि सी जगा है रहने को तो बता दो.. अब्ब इतनी रात हम कहाँ जायेंगे...

ड्राइवर ने फिरसे टैक्सी को आगे बढ़ाया और एक सरए पर ला कर अपनी टैक्सी रोक दी..

ड्राइवर ..... तुम बचे भी हो और तुम्हरे साथ लेडीज भी हैं इस लिए मैं तुमको यहाँ लेकर आया hoon...ye सरए एक औरत की है.. तुम सब यहाँ रह सकते हो..

मुझे ड्राइवर के बात करने का अंदाज़ ाचा लगा उसने हमें एक सही जगा पर पोहंचा दिया था. बाद में मेरे दिलसे उन ड्राइवर के लिए बोहत दुआएं निकलीं.

मुझे इसी इलाके में रह कर बोहत कुछ सीखने और करने को मिला.....

हम सब टैक्सी से नीचे उत्तर और उसका जो रेंट बनता था वो उसे दिया. हम सरए की तरफ बढ़ गए और टैक्सी ड्राइवर किसी और को ढूंढ़ने निकल pada.....rozi रोटी जो कमानी थी उसने.....

हम सरए में दाखिल हुए तो हमें सामने एक आंटी एक चेयर पे बैठी नज़र आई.

हम तीनो उनके पास गए. और उनको नमस्ते बोलै..

मैं उनको मालकिन hi लिखों गए...

मालिकान .... जी कहिये क्या काम है..

विजय ...... आंटी जी रहने के लिए कमरा चाहिए था...

मालिकान .... हाँ क्यों नहीं इसी लिए hi तो हूँ मैं yahan...koi आइडेंटिटी है तो दिखाओ.

मैं ये सुन्न थोड़ा परेशान हो गया अब्ब मैं अपनी आइडेंटिटी कहाँ से laaon.lekin आंटी के पास सब कुछ था अपनी आइडेंटिटी के रिलेटेड. मेरे कुछ बोलने से पहले hi आंटी ने अपना ईद मालिकान को दिखा diya....malikan ने इंद्राज किया और हमें लेकर एक रूम में आ गई...

रूम की हालत इतनी भी अछि नहीं थी लेकिन हमें अछि या बुरी से क्या फ़र्क़ पड़ना था..

मालिकान हमें रूम में छोड़ कर चली gai.maine रूम का अचे से जायज़ा लिया दो खटिया थी एक की कुछ बेहतर हालत थी और दूसरी उस का क्या कहूँ.

""लगता है आंटी भी बास ावें hi है..""

रूम में कुछ और छोटा मोटा सामान tha.humen इससे क्या लेना देना हमें तो सर छुपाने की जगा चाहिए थी सो मिल गई.

मैं अब्ब तक्क अपने दर्द को बर्दाश्त कर रहा था. मजबूरी थी वर्ण हिम्मत तो कब की टूटना चाहती थी. अगर खुद पर से कण्ट्रोल खो देता तो अब्ब तक्क वही पड़ा होता गुंडों की लाशों के पास.

खटिया को देखते hi मेरे सारे दर्द एक साथ उभर आये और मैं बड़ी मुश्किल से खटिया के पास पोहंचा और धड़ाम से खटिया पर जा कर गिर पड़ा...

अब्ब मैं कोई शक्तिमान तो था नहीं. क मुझे कुछ न होता अपनी लाइफ का सबसे खतरनाक "खेल" खेल कर आया था इतनी हिम्मत जूता तो ली थी लेकिन पूरा शरीर दर्द की इन्तहा को पहंचने लगा था और साथ hi मुझे टेम्प्रेचर भी महसूस होने लगा tha....khatiya पर गिरते hi मुझे अपने चुत्तडों पर बोहत दर्द हुआ लेकिन अब्ब उठने की हिम्मत ख़तम हो चुकी थी. स्लो स्लो मेरी ऑंखें बंद होने लगी. और मेरे अपने hosh-o-hawaas खो बैठा.

पता नहीं सो गया था या बेहोश हो गया था.

सूबा मेरी आँख खुली तो मैंने अपने आस पास देखा तो पता चला क दिन निकल आया है और मेरे शरीर पर एक लुंगी बंधी यही hai.mere सारे कपडे उत्तर हुए थे. माने उठने की कोशिश की तो आंटी बोल पड़ी.



आंटी .... बीटा लेते रहो अभी तुम ठीक नहीं हो...

 
अपडेट ::: 19

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अब्ब तक्क

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खटिया को देखते hi मेरे सारे दर्द एक साथ उभर आये और मैं बड़ी मुश्किल से खटिया के पास पोहंचा और धड़ाम से खटिया पर जा कर गिर पड़ा...

अब्ब मैं कोई शक्तिमान तो था नहीं. क मुझे कुछ न होता अपनी लाइफ का सबसे खतरनाक "खेल" खेल कर आया था इतनी हिम्मत जूता तो ली थी लेकिन पूरा शरीर दर्द की इन्तहा को पहंचने लगा था और साथ hi मुझे टेम्प्रेचर भी महसूस होने लगा tha....khatiya पर गिरते hi मुझे अपने चुत्तडों पर बोहत दर्द हुआ लेकिन अब्ब उठने की हिम्मत ख़तम हो चुकी थी. स्लो स्लो मेरी ऑंखें बंद होने लगी. और मेरे अपने hosh-o-hawaas खो बैठा.

पता नहीं सो गया था या बेहोश हो गया था.

सूबा मेरी आँख खुली तो मैंने अपने आस पास देखा तो पता चला क दिन निकल आया है और मेरे शरीर पर एक लुंगी बंधी यही hai.mere सारे कपडे उत्तर हुए थे. माने उठने की कोशिश की तो आंटी बोल पड़ी.

आंटी .... बीटा लेते रहो अभी तुम ठीक नहीं हो...


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अपडेट ::: 19

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अब्ब्ब आएगग्गीइ

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आंटी .... बीटा लेते रहो अभी तुम ठीक नहीं हो...

विजय .... आंटी जी मैं तो ठीक हूँ मुझे क्या होना है. भला चंगा तो hoon.lekin मेरे कपडे किस ने और क्यों उतारे हैं....???

फिर आंटी ने मुझे रात मेरे साथ क्या हुआ सबब बताया तो मैं आंटी की बातें सुन्न कर हैरान रह गया. मेरी इतनी हालत ख़राब हो गई थी.

हुआ ये था क जब मैं खटिया पर गिरा था. तो मैं बेहोश हो चूका था. आंटी मुझे खाने के लिए पोछने लगी लेकिन मैंने कोई रिस्पांस नहीं दिया तो आंटी ने मुझे हिला कर उठाने लगी. मुझे हाथ लगते hi आंटी को पता चला क मुझे बुखार आ गया है और मैं अपने होश में भी नहीं हूँ. आंटी घबरा कर मालिकान को बुला लाइ थी.

मालिकान एक अछि औरत है और उसकी की एक बेटी भी नर्स है. मालिकान ने अपनी बेटी की मदद से मुझे चेक किया फिर मेरे कपडे उतार कर मेरे सारे ज़ख़्म देखे.

मेरे ज़ख़्म देखते hi साड़ी चारों डर gai...meri हालत hi इतनी बुरी थी.

पिछले 5 दिन से मेरी कुत्ते जैसी हालत हो गई थी.

रेखा बाई की मार फिर रेखा बाई के गार्ड्स की मार और चूतड़ों का सत्यानाश होना

कमर पर भी ज़ख़्म ए थे और फिर ट्रैन में पड़ने वाली बेल्ट की मार और आज हुई घटना ने मेरा जोड़ जोड़ हिला डाला था.

मेरे शरीर पर कई जगा घाव आ चुके the.malikan ने अपनी बेटी की मदद से मेरे ज़ख्मो को एंटीसेप्टिक लोशन धोया और फिर उन ज़ख्मो पर एक क्रीम लगाई. चरों ने मिलकर मेरी ऐसी केयर की जैसे क मैं उनमे से एक hoon.(ye सुन मेरे ऑंखें नाम हो गई थी मैं कोठे से क्या निकला मुझे हर क़दम पर बुरे लोगों के साथ साथ अचे लोग भी मिल रहे थे. ये सबब भगवन hi तो कर रहा था मेरे लिए शायद मेरी हिम्मत और दर्द को देख कर उसको भी मुझ पर दया आ गई थी)

मालिकान ने आंटी से मेरी इस हालत के बारे पुछा तो आंटी ने उन गुंडों के मर्डर के इलावा जो हुआ सब बता diya.malikan और उसकी बेटी साड़ी बात सुन कर हैरान रह गई क मैंने इतनी सी आगे में hi आंटी की इज़्ज़त कैसे बचा li.ye सब जान कर मालिकान और उसकी बेटी ने दिलसे मेरी केयर ki.malikan की बेटी ने मेरे ज़ख्मो की अचे ट्रीटमेंट के बाद मुझे उसने अपने पास से एक इंजेक्शन भी लगाया...

"इस दौर में भी ऐसे लोग हैं मुझे अब्ब पता चल रहा था. वर्ण मेरा तो किसी से सही बर्ताव करने का मैं नहीं रहा था. कोठे पर रहते मेरे अंदर ऐसे hi विचार ने जनम लिया था लेकिन अब्ब इन सब की मेरे साथ मोहब्बत ने मुझे बोहत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया था"

जितना हो सका मालिकान की बेटी ने मेरी ट्रीटमेंट की. रात का वक़्त था सब कुछ सही से तो हो नहीं सकता था और मुझे हॉस्पिटल भी नहीं लेकर जा सकते थे. उनको डर था कहीं मेरे ज़ख़्म देख कोई कुछ लोचा न karde.aur बात पुलिस तक पोहंच जाये इस लिए इसी कमरे में रह कर hi मेरे लिए सब मिलकर सब कुछ कर रहे the.raat को जो हो सका वो किया और बाकी का मेरा ट्रीटमेंट आज करना था...

आंटी ने साड़ी रात जाग कर मेरी फ़िक्र में hi गुज़र दी थी....

सब कितना प्यार दे रहे थे mujhe"jo एक नाजायज़ था जिसकी कुत्ते से भी काम वैल्यू थी. में इमोशनल होने लगा लेकिन यही तो मुझे नहीं करना था कुढ़ को हर तरह से बदलना था. पर हाँ जो मुझसे प्यार करते हैं मैं उनके लिए अपनी जान भी दे दूंगा"

खुदको इमोशनल होने से बचा लिया मैंने अब्ब सब कुछ मुझे बोहत hi ाचा लग रहा था ऐसा लग रहा था जैसे मैं अपनी hi फॅमिली के साथ hoon."family की बात पर मुझे फिरसे माँ और बहने याद आ गई." लेकिन अब्ब मैं पहले जैसा नहीं रहा था अब्ब मैं बदल गया था. कल के हुए हादसे ने मुझे बदल दिया था अब्ब मैं माँ और बहनो को याद कर के दुखी नहीं बल्कि अब्ब मुझे लग रहा था क मैं जल्द hi अपनी फॅमिली को ले आऊँगा मुझे मेरे अंदर से आवाज़ आ रही थी. क जो रास्ता मैंने कल इख़्तियार किया है ऐसे hi रास्ते पर चल कर मैं अपनी मंज़िल तक पोहंच सकता hoon."main आंटी की बात सुनते सुनते अपने hi ख्यालों में खो गया था"

आंटी ......(मुझे हिलाते हुए) बीटा क्या सोच रहे हो..?

विजय .... (हड़बड़ाते हुए) ाँ हाँ आंटी जी में मालिकान के और उनकी बेटी बारे सोच रहा था. कितने अछि हैं ना दोनों.

आंटी ..... हाँ विजय बीटा भगवन का शुक्र है जो मालिकान की बेटी नर्स थी. वर्ण पता नहीं क्या हो जाता. उन सोनो माँ बेटी ने तुम्हारा बोहत ख्याल रखा. दोनों बोहत hi मिलनसार हैं.

विजय ..... ह्म्म्मम्म अछि बात hai"intna बोल कुछ देर चुप raha"phir बोलै

विजय ..... इतना कुछ हुआ और मुझे पता hi नहीं चला... आपने अपने अपनी बेटी के लिए कुछ किया या नहीं वो भी तो बीमार थी ना.

आंटी ..... बीटा रानी अब्ब ठीक है मालिकान की बेटी से रानी को मेडिसिन दे दी थी.

अब्ब रानी बिलकुल ठीक है....

विजय ..... आंटी जी मेरा नाम विजय है .. आप मुझे विजय बुला सकती हैं.

आंटी ..... विजय बीटा तुम बोहत hi प्यारे हो और मेरी बेटी का नाम तो तुमने जान hi है लिया और मेरा पद्मा है... (ये बोल आंटी की आँखों में आंसू आने लगे)

विजय ..... अरे आंटी जी आप रोने क्यों लगी , कोई परेशानी तो नहीं हो gai.sab ठीक है ना.???

आंटी ..... बीटा सब ठीक है ये तो ख़ुशी के आंसू हैं जो निकल पड़े. अब्ब तो याद भी नहीं कब खुश हुई थी ज़िन्दगी में.

अछि भली ज़िन्दगी थी हमारी पता नहीं किस बुरी नज़र लग गई और सब कुछ उजाड़ गया. आज इतने सालों बाद तुमने मुझे और मेरी बेटी को सहारा दिया है. तो ऐसा लगने लगा है जैसे मैं छाओं में आ गई हूँ. बोहत थक हूँ ना विजय बीटा तो थोड़ी सी ख़ुशी भी बर्दाश्त नहीं हुई और आंसू निकल pade....(ye सब बोलते हुए आंटी रो भी रही थी)

मुझे आंटी का रोना ाचा नहीं लग रहा था तो मैंने उठ कर आंटी के बह रहे आंसुओं को अपने दोनों हाथों की उँगलियों से साफ़ करके उनको गले लगा लिया,

मुझे फिर से माँ और बहनो की याद आने लगी और मैं आंटी के गले लग माँ की महक को महसूस करने लगा. मुझे बोहत सुकून मिलने अलग माँ तो माँ होती hai"aunty भी माँ थी तो माँ जैसी महक क्यों ना आती"

और वहां कोठे पर रह कर मैंने कभी भी खुल कर अपनी माँ से प्यार नहीं किया tha.kitna bad-naseeb था main.meri आँखों से भी ाआंसु बहार आना चाहते थे लेकिन अब्ब मेरी लाइफ में आंसुओं के लिए कोई जगा नहीं थी. इस लिए मैंने उन्हें बहने नहीं दिया कुछ देर हम दोनों ऐसे hi एक दुसरे को दिलासा देते रहे...

रानी ......(जो पास दूसरी खटिया पर बैठी थी वो भी ऐसी सिचुएशन पर खुद का कण्ट्रोल खो बैठी और रोने लगी)

रानी के रोने की आवाज़ से हम दोनों अलग हुए तो आंटी ने रानी के पास जा कर रानी को गले लगा liya.apni माँ के गले लगती रानी फूट फूट कर रोने लगी....

"अब्ब ये क्या था रानी क्यों रोने लगी"

आंटी ..... रानी बेटी तू क्यों रोने लगी क्या हुआ तुझे ..??

रानी ...... माँ अज्ज कितनी बड़ी ख़ुशी मिली है ना (हिचकियाँ लेते हुए) आज हमको भी थोड़ी सी ख़ुशी मिल hi गई विजय भाई कितने अचे हैं ना maa(rani बोलते हुए रोये जा रही थी बेचारी पता नहीं कबसे दुखी थी)

मैंने जब से रानी को देखा था तबसे hi रानी को बोहत hi दुखी देखा था..

आंटी ...... हाँ बेटी भगवन हमारी खुशियों को किसी की नज़र न लगाए.

"कभी कभी थोड़ी सी ख़ुशी भी कितना सुकून दे जाती है. इन दोनों माँ बेटी ने कैसी दुःख भरी ज़िन्दगी गुज़री होगी" ?????

मैं उन दोनों माँ बेटी के प्यार को देख अपनी तितलियों की याद में जाने लगा क अचानक से दूर नॉक हुआ... मैंने देखा तो एक 20 आगे की लड़की कमरे में दाखिल हो रही थी.

लड़की ...... क्या हुआ सब उदास क्यों दिख रहे हैं सूबा सूबा

आंटी ...... आओ आओ पूजा बेटी हम तो बस ऐसे hi माँ बेटी गले मिल रहे थे..

पूजा ...... हममममममममम चलो ठीक है "और फिर मेरी तरफ देख कर" अरे उठ गया हमारा हीरो..



मैं हड़बड़ा gaya...hero और मैं



विजय ...... अरे पूजा दीदी मैं हीरो कैसे हो गया.

पूजा ...... हम्म्म ी लिखे आईटी क तुमने मुझे दीदी बोल दिया इसका मतलब है क तुम सच में अचे लड़के हो. चलो बताओ अब कैसी तबियत है तुम्हारी. रात तो बड़ा परेशां किया था तुमने हम सब को ..

विजय ...... दीदी अब्ब मैं ठीक हूँ और मुझे कुछ नहीं पता रात को क्या हुआ था मैं तो सो गया था.

पूजा ...... तुम ठीक हो??? "हम्म्म और तुम सो रहे थे रात भर" मुझे स्टाइल से देखते हुए ऐसे जैसे हम पहले भी कई बार मिल चुके hai..main तो बस पूजा दीदी का चेहरा hi देख रहा था. इक अनजान लड़के से ऐसे प्यार भरे और लाड के से अंदाज़ में बोल रही thi.."mujhe दुन्या के नए रंग समझ आने लगे जिनसे मैं अज्ञान था" में हर बात पर बोहत घोर कर रहा tha.....phir दीदी बोली

पूजा .... तुमने सब को हिला के रख दिया इतनी सी आगे में hi तुमने इतना कुछ कर लिया. तुम तो सच में हीरो हो... "फिर जैसे उनको कुछ याद आया" हाँ याद आया तुम्हारे शरीर पर इतने ज़ख़्म कैसे आये. "आंटी को देख कर फिर मुझसे बोली" आंटी तो कह रही थी क तुम कल hi इनको मिले हो और तुम्हारे ज़ख्मो को देख के लगता है क कुछ दिन पुराने हैं. क्या हुआ है तुम्हारे साथ..????

विजय ...... दीदी चोट लग्न तो लाइफ का हिस्सा है बास लग गई. अब क्या बताओं मैं आपको....

पूजा ...... ये चोट नहीं है तुम्हारे ज़ख़्म देख कर लगता है जैसे तुम पर किसी ने टार्चर किया है. चलो मुझे बताओ सब कुछ "अचे बचे bankar"...pooja दीदी की बात और स्टाइल से मुझे हंसी भी आ रही थी लेकिन खुद पर कण्ट्रोल कर मैं ये सोचने लगा (अब्ब इनको क्या बताओ पीछे hi पद गई है)

विजय .... (कुछ सोच कर) वो .. वो तो कुछ दिन पहले जब मैं मुंबई से दिल्ली की तरफ आ रहा था तो ट्रैन में दो लड़के एक लड़की के साथ ज़बरदस्ती कर रहे थे तो लड़की को बचने के चक्कर उन लड़कों से मेरी झड़प हो गई थी. बास वही से ये सारे ज़ख़्म ए है.



(पूजा मैं में "लगता है ये अभी सही बात बनाना नहीं chahta.kuch तो लोचा है. लेकिन है बोहत hi पायरा लड़का आज रहने देती हूँ फिर कभी पूछ लूंगी. पहले hi बेचारा ज़ख़्मी है और पता नहीं इस के हालात कैसे हैं कौन है कहाँ से आया है सब अभी नहीं पोछती मैं इससे... पारर छोड़ोगी तो मैं नहीं इसे बच के कहा जायेगा)



आंटी ..... पूजा बेटी कहाँ गम हो गई हो. विजय बीटा का चेकउप नहीं करना क्या??

पूजा दीदी हड़बड़ा गई और बोली..... है हाँ हाँ क्यों नहीं अभी चेक कर लेती हूँ...

पूजा ..... (मुझसे बोली) चलो अपने ज़ख़्म दिखाओ मुझे ..और ये लुंगी भी निकालो.

विजय ..... क्यों लुंगी क्यों निकालों आपको शर्म नहीं आएगी.. मुझसे लुंगी उतरवा के...

पूजा ..... ू ीीीेरूओ रात भर तेरे साथ क्या हुआ वो तो सुन hi लिया होगा tumne.chal जल्दी से लुंगी निकल वर्ण में खेंच लेती हूँ..

ये बोल पूजा दीदी हंसने लगी और साथ में आंटी और रानी भी.

उनकी हंसी सुनकर मैं झींप गया. अब्ब रात तो मुझे होश नहीं था तो सबब ठीक था अब्ब मैं कैसे सब के सामने नंगा हो जाऊं. मुझे अजीब सा लगने लगा.

मैं था तो besharam:"sharam नाम की चीज़ मेरी लाइफ में थी hi नहीं" पता नहीं आज कहाँ से मुझे शर्म सी महसूस होने लगी.....

""बदलती है ज़िन्दगी रंग नए नए""

मुझे नंगा करने की बात पर मुझे मेरी तितलियाँ याद आने लगी कसिए वो मुझसे मस्ती किया करती थी. और हम सब में कोई पर्दा भी नहीं था. लेकिन यहाँ मैं फस गया tha.main फिर से सोचो में गम हो गया था. क मुझे कमरे में फिर से हंसने की आवाज़ें सुनाई di.maine सब की तरफ देखा तो मेरी लुंगी पूजा दीदी के हाथ में थी.

ओह्ह्ह्ह टेरररीईई ये पूजा दीदी भी ना कमाल की है बेशरम मैं था और शर्म पूजा दीदी भूल गई थी. चलो अब्ब क्या सोचना जो होना था हो गया.

मैंने खुद पर काबू पाया और अपने पिछवाड़े को छत की तरफ कर के लेट gaya.mujhe let'te देख सब फिरसे हंसने लगी...

विजय ..... "बास करो सबब" अब्ब मेरा सब कुछ तो देख लिया है. कुछ बचा है तो बता दो वो भी मैं दिखा देता हूँ..

हहहहहहहहहह

सब के kah-kahe फिरसे के गूँज गए मेरी बात सुनकर...

फिर पूजा दीदी ने एंटीसेप्टिक लोशन से मेरे ज़ख्मो को धोया और मेरे शरीर पर बड़े hi प्यार se(jaise के मैं उनका अपना हूँ) आज जो कुछ मेरे लिए ले कर आई थी वो लगाने lagi....is सिचुएशन में मैं फिरसे से अपनी सोचों में गम हो गया....



(कितना प्यार कर रहे थे ये प्यारे लोग mujhse...abhi एक hi दिन हुआ था और मुझे ऐसे ट्रीट कर रहे थे क जैसे हम बरसों से साथ रह रहे हूँ अगर मेरी कोई बड़ी बेहेन होती और वो भी मुझसे ऐसे hi प्यार से बर्ताव करती तो मेरी लाइफ माँ और बहनो के साथ कितनी ख़ूबसूरत hoti....padma आंटी फिर रानी फिर मालिकान और अब्ब उनकी बेटी सब के सब एक से बढ़कर मोहब्बत करने वाले लोग.

कितनी ख़ूबसूरत ज़िन्दगी होती है जब तक कोई उलझन इन जैसे प्यार करने वाले लोगों की लाइफ में ना ए....




पूजा दीदी को देख कर और उनके मुझसे बेहेवियर को ले कर मुझे इतना सुकून मिल रहा था क क्या बताओं अपने ghar(kothe) को छोड़ देने से जो दर्द और अधूरा पत्र सा था, पूजा दीदी के मेरी लाइफ में आने से वो काम हो गया था, मैं बोहत hi खुश था...

फिर मेरी सोच बदलने लगी और मेरा ग़ुस्सा भी बढ़ने लगा....

पद्मा आंटी की दुःख भरी लाइफ और रानी के साथ उन दोनों गुंडों ने ऐसा क्या किया hoga,jo रानी बेचारी हर दम उदास रहती थी, मेरा खून गरम होने laga....samaj में ऐसे लोगों को जीने का हक़ नहीं मिलना चाहिए जो बेबस और लाचार औरतों और लड़कियों पर अपने घिनोने इरादे ले कर चढ़ दौड़ते हैं.... मेरा ग़ुस्सा ऐसे लोग के खिलाफ बढ़ने लगा....

रेखा बाई भी इन्ही लोगों में शामिल थी जो पूजा दीदी जैसी नजाने कितनी हस्ती खेलती लड़कियों की ज़िन्दगी बर्बाद कर चुकी थी.....

मेरी मा भी कभी पूजा दीदी के जैसी हस्ती खेलती होगी रेखा बाई ने उनकी हस्ती खेलती ज़िन्दगी में आग लगा di,rekha बाई और उन के जैसी औरतों का तो वो हाल होना चाहिए क फिरसे कोई ऐसे घटिया विचार अपने मैं में लाने से hi थार थार कांपने लगे.......

फिर मेरी आँखों के सामने पूजा दीदी हस्ती हुई दिखी मैं उनके साथ मस्ती करते होए बाजार की तरफ जा रहा था और अचानक से रेखा बाई के गुंडों ने पूजा दीदी को पकड़ liya......main छह कर भी कुछ नहीं कर सका...)



मैंने चिल्लाने लगा "छोड़ दो मेरी पूजा दीदी को" "छोड़ दो मेरी पूजा दीदी को"



 
अपडेट ::: 20

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अब्ब तक्क

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रेखा बाई भी इन्ही लोगों में शामिल थी जो पूजा दीदी जैसी नजाने कितनी हस्ती खेलती लड़कियों की ज़िन्दगी बर्बाद कर चुकी थी.....

मेरी मा भी कभी पूजा दीदी के जैसी हस्ती खेलती होगी रेखा बाई ने उनकी हस्ती खेलती ज़िन्दगी में आग लगा di,rekha बाई और उन के जैसी औरतों का तो वो हाल होना चाहिए क फिरसे कोई ऐसे घटिया विचार अपने मैं में लाने से hi थार थार कांपने लगे.......

फिर मेरी आँखों के सामने पूजा दीदी हस्ती हुई दिखी मैं उनके साथ मस्ती करते होए बाजार की तरफ जा रहा था और अचानक से रेखा बाई के गुंडों ने पूजा दीदी को पकड़ liya......main छह कर भी कुछ नहीं कर सका...)

मैंने चिल्लाने लगा "छोड़ दो मेरी पूजा दीदी को" "छोड़ दो मेरी पूजा दीदी को"



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अपडेट ::: 20

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अब्ब्ब आएगग्गीइ

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मेरे चिल्लाने से सबब हड़बड़ा गए. क अचानक से मुझे क्या hua.pooja दीदी ने मुझे हिलाया मैं अपनी hi दुन्या में बोहत आगे चला गया था. मुझे याद hi नहीं रहा क मैं तो अपने रूम में हूँ, और पूजा दीदी मुझे ट्रीट कर रही थी,


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"chattakk"chattakk"

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2 थप्पड़ मेरे गाल पर पड़े तो मैं होश में आया.... माने देखा तो मेरे सामने hi पूजा दीदी कड़ी थी आंटी और रानी भी कड़ी थी.

थप्पड़ मुझे पूजा दीदी ने मारे थे.............

ओह्ह्ह्हह्ह तो वो सबब मेरा इमेजिनेशन tha..."phir मैंने एक लम्बी गहरी सांस ले कर पूजा दीदी के हाथ पकड़ कर अपनी आँखों से लगा लिए. आज फिरसे मेरी आँखों में आंसू आने लगे. पर आज मेरा भी मैं हो रहा था क इन को बहा लून." पूजा दीदी को अपने हाथ पर गीला सा कुछ महसूस हुआ तो पूजा दीदी को रीलीज़ हुआ क मैं रो रहा हूँ.

पूजा ..... अर्र्रे हमारा हीरो रोटा भी hai..."didi ने हंसने की नाकाम कोशिश की वो भी मेरे ऐसे बर्ताव से इमोशनल हो गई thi"miane पूजा दीदी को गले लगा लिया और आंसू बहाने लगा. आज मेरे अंदर की बची खुची घुटन भी बह रही थी. आज मुझे वो सुकून मिल रहा था. जिस की तलाश में मैं काई साल से तड़प रहा था. आज मेरे अंदर से सारा ग़ुबार निकल रहा था. मुझे पूजा दीदी के गले मिल कर और उनकी मोहब्बत के एहसास से वो सब मिल रहा था. जिस की कल्पना माने कभी नहीं की थी. "मेरी इस दुन्या में हैसियत hi क्या थी"

पूजा दीदी मेरी पीठ को सेहला रही थी. कितना प्यार जीता रही थी वो. एक अजनबी और बेलिबास लड़के के गले लग कर भी उनको गिल्टी फील नहीं हो रहा था. पूजा दीदी मुझे एक बचे की तरह ट्रीट करने lagi.kuch देर पहले कैसे पूजा दीदी nat-khat से अंदाज़ में मुझसे बात कर रही थी.

लेकिन अब की पूजा दीदी पहले वाली से अलग hi दिख रही थी.

जब मेरे अंदर का ग़ुबार आंसुओं की शकल में बहार आया तो मुझे अंदाज़ा हुआ क मैं बिना कपड़ों के hi उनके गले लग गया था.




मैंने पूजा दीदी को सॉरी बोल कर जल्दी से अपनी लुंगी बाँध ली....




लुंगी बांधने के बाद मैंने सब की तरफ देखा तो सब की आँखों में आंसू थे और पूजा दीदी तो मुझे ऐसे देख रही थी. जैसे दर्द में मैं नहीं वो हैं मेरे आंसू देख के पूजा दीदी के भी आंसू निकल रहे थे. और फिर पूजा दीदी रट हुए मेरे गले लग gai.aur मेरे सर पर हाथ फेरते हुए मेरे गालों को चूमने लगी

पूजा ..... बास कर मेरे भाई तू तो सबब को रुलाने पे तुला हुआ है... इतना दर्द कहाँ से आ गया. अभी तो तुम बचे हो और इतना दर्द... चुप कर जा मेरे भाई..

मैं कुछ नहीं बोलै आंटी और रानी भी आ कर हमसे लिपट gai.kuch देर हम ऐसे hi प्यार के इन हसीं पळून में खोये रहे.

आज मुझे बोहत कुछ मिल गया था. इतना प्यार देख कर मेरा हौसला बढ़ रहा था.

और कल जो मैंने एक दरिंदा बनने का इरादा किया था. पूजा दीदी के प्यार ने मुझे बचा लिया. """वर्ण दरिंदा बन कर मैं कही इंसानियत hi न भूल जाता"""

लेकिन दरिंदा में अब्ब भी बनूंगा लेकिन उन हरामजादो के लिए जो रानी और पूजा दीदी जैसी प्यार करने वालियों की लाइफ को नरक से भी बदतर बना देते हैं.

फिर मैं पूजा से अलग हुआ और खुद को कण्ट्रोल कर के खटिया पर बेथ गया. पूजा दीदी भी मेरे पास आ कर बेथ गई और पूछने लगी "तुझे हुआ क्या था"

अब्ब पूजा दीदी से मैं कुछ भी छुपाना नहीं चाहता था. पूजा दीदी मेरे अपनों में शामिल हो गई थी. और अपनों से कुछ छुपाने सही नहीं होता.



विजय .... (मैंने पूजा दीदी के दोनों हाथों को पकड़ लियाफिर बोलै) पूजा दीदी मैं "चुप"



पूजा .... हाँ हाँ बोल डर मैट मुझे पता है कुछ ऐसा है तेरी ज़िन्दगी में जो तू बताते हुए डरता है. मुझे बता मुझे अपनी दीदी बोलता है ना तो बता दे मुझे.

पता नहीं आज मुझे क्या हो रहा था .... मैं खटिया से नीचे उतरा और पूजा दीदी के घुटनो पर अपना सर रख दिया.

पूआज दीदी शॉकेड हो गई मेरे ऐसे करने वो तो सोच भी नहीं सकती थी क उसकी लाइफ में कभी कोई ऐसा भी आएगा जो उनसे इतना प्यार और इतना सम्मान देगा.

पूजा दीदी की आँखों में फिरसे आंसू बहने लगे फिर पूजा दीदी मेरे सर के लम्बे बलून में अपनी उँगलियाँ फेरने lagi....aunty और रानी हैरान भी थी और इमोशनल भी वो भी फिरसे आंसू बहाने लगी.....

पता नहीं जब्ब से मैंने मुंबई छोड़ा था, सबब कुछ अजीब hi हो रहा था मेरी ज़िन्दगी में. मेरे सामने हालात बदल बदल कर आ रहे थे. पहले ट्रैन में इक लड़की को बच्या उसके लिए मार भी कहानी padi....wo मुझे अपने घर ले गए, वो भी मुझे छोड़ना नहीं चाहते the.phir आंटी ऑन रानी मेरी ज़िन्दगी में आई एक बार फिरसे हालात बदल गए और मुझे पद्मा आंटी की भी इज़्ज़त बचानी पड़ी. फिर गुंडों के साथ हुई झड़प जिसमे मैंने मार भी खाई और उन दोनों गोंडों को जला भी दिया....

फिर रात को मैं बेहोश हुआ तो सभी लेडीज ने मेरे साथ ऐसे बर्ताव किया क मेरी सबब सोचों में हलचल hi मचा दी....

इन थोड़े से दिनों में क्या कुछ नहीं हो गया था .... मुझे हर्ष अंकल का परिवार मिला फिर पद्मा आंटी मिली और अब्ब मालिकान और पूजा दीदी सबब मिल कर मुझे एक नई लाइफ जीने के लिए बोल रहे the.lekin मेरी ज़िन्दगी का मक़सद भी तो बोहत hi संगीन था.... मुझे अपनी राह में सोच समझ कर चलना था ..

लेकिन इनके प्यार को देख कर मैं कैसे इन सबब उल्टा hi प्यार न करून जितना ये सबब लोग मुझसे कर रहे हैं और पूजा दीदी वो तो सबब से अलग हैं.

सबब के प्यार ने मुझे अंदर से हल्का करना शुरू कर दिया. अब्ब मैं इस दिल्ली शहर में अकेला नहीं था तीन तीन परिवार मेरे साथ थे..... लेकिन फिर भी मैं अपने असली परिवार से अलग था. काश वो भी जल्द hi हम सबसे मिल जाएँ. तो कितना मज़ा आएगा.

सब एक साथ रहेंगे हमारा प्यार बढ़ता जायेगा और फिर कोई दर्द नहीं रहेगा मेरी और माँ बहनो की लाइफ में..........

पूजा ..... (रट हुए) क्या हुआ मेरे भाई तू क्यों रो रहा है. देख ना तू हम सब को भी रुला रहा है .... क्यों इतना दुखी रहता है .. देख सबब तुझसे कितना प्यार करते हैं ... खुद को अकेला मैट जाएं .. हम सबब हैं ना तेरे साथ ... बता दे जो तेरे दिल में है .. और खुद को अंदर से हल्का कर ले ...



(बड़ी अजीब बात थी पूजा दीदी खुद रो रही थी और साथ में आंटी और रानी भी फिर भी पूजा दीदी मुझे ना रोने को बोल रही थी.... खुद रो रही थी और मुझे हौसला दे रही थी ... खुद के आंसू थम नहीं रहे थे और मुझे मेरे आंसू रोकने को बोल रही थी)



वाह रे ज़िन्दगी तू और क्या क्या रंग दिखाएगी



कुछ देर बाद मैंने खुद को संभाला और अपना सर उठा कर पूजा दीदी की आँखों में देखा तो उनकी आँखों से आंसू बह रहे थे... मेरे देखने से अपने होंठों पे मुस्कान लाने की कोशिश करने lagi....pooja दीदी की आँखों से बह रहे आंसू के साथ मुस्कान देख कर मुझे हंसी आ गई.

पूजा दीदी मेरी hi आँखों में देख रही थी अपनी अजीब आंसू भरी मुस्कान के साथ लेकिन मुझे हँसता देख वो समझ गई क मैं क्यों हंस रहा हूँ. पूजा दीदी ने अपने दोनों हहतों से मेरे सर्र के लम्बे बलून को पकड़ कर मेरे सर को जोरर से हिलने लगी और साथ साथ हसने भी लगी. (साले नौटंकी करता है)

कुछ देर पहले चल रहे इमोशनल डर्मा का एन्ड बड़ा hi मज़ेदार हुआ ये देख आंटी और रानी की भी हंसी छूट गई. यही तो प्यार होता है जो दिल से दिल को समझा देता hai.((dil मिल जाएँ तो बहार आ जाती है और ग़म उड़द जाते हैं)) मैं और पूजा दीदी अपनी छेड़ कहानी में लगे रहे फिर थोड़ी देर बाद पूजा दीदी ने मुझे कस के अपने गले लगा लिया और उन की आँखों में इस बार ख़ुशी के आंसू थे. जब्ब कोई अपना ""कोई अपना स्पेशल"" मिलता है वैसी hi ख़ुशी आज हम सबब को मिल रही थी. पूजा दीदी और रानी बोहत hi ज़यादा खुश थी...

पूजा दीदी का कोई और भाई है या नहीं ये मुझे अभी पता नहीं ... लेकिन उनके प्यार को देख कर लग रहा था जैसे मेरे पूजा दीदी की लाइफ में आने से उनके भी सबब सपने पूरे हो गए hain..............khaas कर रानी जो कभी भी अपनी माँ के इलावा किसी से मिल hi नहीं पाई थी और अपने ग़म कभी किसी से बाँट नहीं सकीय थी.

वो भी दौड़ती हुई आई और मेरे और पूजा दीदी के गले लग गई.

फिर तो जैसे रानी पागल हो गई वो मेरे चेहरे को ऐसे चूमने लगी मानो उसे कोई खज़ाना मिल गया हो. (सब रानी के खुश होने से खुश the)jab रानी के दिल की हसरत पूरी हुई तो रानी खुद hi मुझसे अलग हो कर मेरी आँखों में देखने lagi.rani की भी आँखों में आंसू थे लेकिन ख़ुशी के the."mera प्यारा bhai"bol कर रानी मुझे फिरसे चूमने लगी....

आंटी कैसे पीछे रहती वो भी आ गई अपना हिस्सा वसूलने.

खैर काफी देर तक ये सन चलता रहा...... कुछ देर हमारी हंसी की आवाज़ें कमरे में गूंजने लगी. बड़ा hi अनोखा मिलान हुआ था आज हम सबब का हम सब एक दुसरे से अजनबी थे लेकिन अब्ब हम सबब एक थे. हमारे दिल एक दुसरे के प्यार से jag-mag कर रहे थे. सभी के चेहरे चमक रहे थे. फिलवक्त किसी को कोई ग़म नहीं था........

मेरा मूड तो था पूजा दीदी को अपने बारे में सबब बताने का लेकिन इस ख़ुशी के माहौल को मैं ख़राब नहीं करना चाहता था.

पूजा दीदी ने इशारा में कहा था बाटने को लेकिन मेने नहीं बताया.....

आज पूजा दीदी का मैं नहीं हुआ अपनी जॉब पे जाने का उसने फ़ोन करके सॉरी बोल दिया. और आज पूजा दीदी स्पेशल मुझे अपने हाथ का बना हुआ खाना खिलने वाली थी. आज का दिन हम सब के लिए खुशियों भरा था.

मालिकान अभी तक अपने काम में मसरूफ थी. फिर पूजा दीदी चली गई लंच की तैयारी जो करनी थी.

पीछे कमरे में मैं आंटी और रानी रह गए फिर हम भी बातों में लग गए लेकिन ऐसी कोई भी बात नहीं कर रहे थे. जो दुःख देने वाली हो.

हमने अपने दुःख भरी बातों को फिर किसी वक़्त के लिए ताल दिया.

ऐसे hi बातों में लंच का टाइम हो gaya.mujhe बड़ी ज़ोरों की भूक लगी थी. सूबा से चल रहे इमोशनल ड्रामा में मेरा नाश्ता hi रह गया था. लेकिन मैंने खुद पर कण्ट्रोल किया. मैं किसी को बता कर शर्मिंदा नहीं करना चाहता था.....

लंच से थोड़े देर पहले मैंने फ्रेश हो कर अपने कपडे पहने वही जो मुझे बोहत hi खुले थे. और मेरे साइज से बड़े भी थे..

मुझे पुराने ड्रेस में देख आंटी ने अपने माथे पर चपत लगाई और बोली...

आंटी .... विजय बीटा तुम्हारे लिए तो कपडे पहले ले लेने चाहिए थे. अब्ब ऐसे कपडे पेहेन कर हम मालिकान के घर कैसे कयेंगे.

पूआज .... (रूम में एंटर करते हुए) कुछ नहीं होता लंच के बाद नई कपडे ले लेंगे बाजार जा कर. और वो अपने घर जा रहा, ये मालिकान का क्या मतलब हुआ ....

आंटी ... सॉरी बीटा




पूजा .... अरे आंटी आप भी मेरी माँ जैसी हैं सॉरी मैट बोलिये मैं तो ऐसे hi कह रही थी और वैसे भी मैंने माँ को आज जो हुआ सब बता दिया है माँ भी बोहत खुश है
 
अपडेट :::: 21

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अब्ब टककककक

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मुझे पुराने ड्रेस में देख आंटी ने अपने माथे पर चपत लगाई और बोली...

आंटी .... विजय बीटा तुम्हारे लिए तो कपडे पहले ले लेने चाहिए थे. अब्ब ऐसे कपडे पेहेन कर हम मालिकान के घर कैसे कयेंगे.

पूआज .... (रूम में एंटर करते हुए) कुछ नहीं होता लंच के बाद नई कपडे ले लेंगे बाजार जा कर. और वो अपने घर जा रहा, ये मालिकान का क्या मतलब हुआ ....

आंटी ... सॉरी बीटा

पूजा .... अरे आंटी आप भी मेरी माँ जैसी हैं सॉरी मैट बोलिये मैं तो ऐसे hi कह रही थी और वैसे भी मैंने माँ को आज जो हुआ सब बता दिया है माँ भी बोहत खुश है


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अपडेट :::: 21

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अब्ब ाआअगेई

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पूजा दीदी के आने के बाद मैं उन्ही कपड़ों में hi उनके साथ उनके घर की तरफ चल दिए. आंटी और रानी भी साथ thee.rani के कपडे भी बास ावें hi थे. लेकिन पूजा दीदी को इससे कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा था..



""और ये एक अछि बात थी.""



मेरे दिल में पूजा दीदी के लिए इज़्ज़त और भी बढ़ गई.

पूजा दीदी का घर ऊपर वाले पोरशन पर था. नीचे के पोरशन में 5 कमरे थे जो के रेंट पर दिए गए थे.

जैसा के मुझे बाद में पूजा दीदी ने बताया था के उनके घर में वो और उसकी माँ hi रहती हैं. और नीचे वाले कमरों को रेंट पर देकर घर का खर्चा निकलती हैं. पूजा दीदी नर्स भी है लेकिन वो इक प्राइवेट हॉस्पिटल है तो ज़यादा वक़्त नहीं हुआ जॉब करते हुए इस लिए उनकी pay(salary) भी काम थी. कभी कभी hi नीचे के सारे कमरे बुक होते थे. घर के हालत कुछ ख़ास नहीं थे....




पर दिल के मुआमले में पूजा दीदी और मालिकान सबब से बढ़कर थी.




हम सब मिलकर पूजा दीदी के घर पर पोहंचे.

मालिकान ने हमारा ऐसे सवागत किया जैसे के हम उनके अपने हैं...



na-ke karaye-daar



मालिकान ने हम सबको अच्छे से अंदर एक कमरे में बिठाया सामान जो था कमरे में कुछ ख़ास नहीं था लेकिन...

नफासत और सलीके से हर चीज़ अपनी जगा पर बोहत अच्छे से राखी हुई थी.

देख कर दिल खुश हुआ. वैसे भी हम कौनसा अमीर लोग थे. हम तो पूजा दीदी से भी गए गुज़रे थे. लेकिन भगवन की करनी क हमारे डिल मिल गए थे.

जिससे हम सबब की लाइफ में एक सुकून सा आ गया था.

मेरी तो खैर कंडीशन सबब से अलग thi,main भी कुछ देर के लिए सबब कुछ भूल गया और सबब की ख़ुशी में शामिल हो गया.




"""मेरे ज़ख़्म अलग थे और इन सब के अलग """




अगर कुछ वक़्त की ख़ुशी मिले तो वेलकम करना chahiye...so मैं भी सब के साथ मिलकर इस ख़ुशी के लम्हात को सेलिब्रेट कर रहा था.

हम यहाँ ए थे तो सिर्फ खाना खाने नहीं, क आते hi टेबल पर बेथ खाने लग्ग जाएँ.

मालिकान और पूजा दीदी हमें कमरे में बिठा कर बहार चली गई थी.

इसलिए मैं ये सब सोच रहा था.

कुछ देर बाद पूजा दीदी और मालिकान अंदर कमरे में दाखिल हुई.

पूजा दीदी ने एक ट्रे पकड़ा हुआ था शायद पहले हम सब को कोई ड्रिंक पिलाने वाली थी....




""नॉट बाद हर चीज़ उम्दा होती है गर कोई दिल से आपकी खिदमत में पेश करे.""




पूजा दीदी ने पहले आंटी को फिर रानी को और बाद में मुझे वो ड्रिंक सर्वे किया....

पूजा दीदी मेरी आँखों में देख रही थी कही मैंने मंद तो नहीं किया, मैं भला क्यों मंद karonga.hum सबब अब्ब एक hi तो थे...




""और में ठहरा tawaif-zaada""

जितनी इज़्ज़त मिल रही थी उतनी मेरी औक़ात नहीं थी.




कुछ hi देर में हम सब एक दुसरे को अच्छे से समझ चुके थे.

पूजा दीदी मेरे पास hi बेथ गई. और मालिकान आंटी के पास बेथ गई.

जब तक ड्रिंक ख़तम नहीं हुई सब चुप रहे,

ये भी अच्छी बात है, बात करने के लिए बाँदा कुछ सोच hi लेता है..

मालिकान ने जब देखा क हमने ड्रिंक ख़तम कर लिए हैं तो वो अचानक से उठी और मुझे मेरी जगा से उठा कर मुझे अपने गले से लगा लिया...



"कमाल है"



किसी से कोई बात नहीं की और सीधा आ कर मुझपर अटैक कर दिया.

मालिकान ने मुझे अच्छे से प्यार भरे अंदाज़ में गले लगाया जैसे जाने कब से तरस रही हूँ.




"क्या पूरी दुन्या की औरतें इतनी hi अंदर से खली होती हैं क कोई अगर अपना सा लगे तो देर किये बगैर उसे अपने दिल में बसा कर गले से अलग लेती हैं."




मालिकान ने मुझसे अलग हो कर पहले मेरी आँखों में dekha"meri नीली आँखों में वैसी hi बोहत कशिश थी" फिर मेरे माथे पर किश करदी....

मालिकान का बास नहीं चल रहा था क वो मेरे चेहरे को चूम चूम कर अपने अंदर से उमड़ रहा सारा प्यार आज hi मुझपे लुटा दे. मैंने पूजा दीदी की तरफ देखा.




"अरे ये क्या पूजा दीदी की आँखों में फिरसे आंसू 'मतलब यहाँ भी कोई लोचा है हर तरफ दुःख hi दुःख दर्द hi दर्द आंसू hi आंसू"




मालिकान मुझसे अलग हो कर आंटी से सॉरी बोली ((मुझे ज़यादा वैल्यू जो दी थी मालिकान ने इस लिए आंटी को सॉरी boli))aur फिर मेरे पास बेथ गई.

कमरे में दो खटिया थी और दो चेयर थी...

लेकिन मैं एक खटिया पर बैठा था जिस पर पूजा दीदी ने बड़े शोक से बिस्तर बिछाया हुआ था उनको पता था क मेरे "पिछवाड़े" पर ज़ख़्म हैं उसी हिसाब से चीयर कुछ ख़ास कम्फर्टेबले नहीं थी. लकड़ी की थी ना इस लिए.

उस खटिया पर मेरे एक तरफ पूजा दीदी बेथ गई और दूसरी तरफ मालिकान..

मुझे यकीन hi नहीं हो रहा था इस सिचुएशन का... हालत पल पल बदल रहे थे.




"मैं इतना इम्पोर्टेन्ट कैसे हो गया इन सबके लिए. मेरे साथ इतनी मोहब्बत क्यों की जा रही है???




कहीं ऐसा तो नहीं क वक़्त मुझे इतना प्यार देकर आगे मेरे लिए इस प्यार के बदले दर्द hi दर्द न लिख de.....bass यही सोच आते hi मेरी "टोन" बदलने लगी..




मुझे इतना प्यार हज़म नहीं हो रहा था. मेरे अंदर फिरसे घुटन सी बढ़ने lagi.mere सच जाने बगैर hi ये सब मुझे प्यार दे रहे थे. कही ये भी

'हर्ष चौहान' और उनकी वाइफ के जैसे सोच में पद जाएँ और सबब को अपनी अपनी इज़्ज़त की फ़िक्र होने लगे. मेरी घुटन बढ़ने लगी फिर ये बढ़ते बढ़ते इतनी बढ़ी क मेरी सांस फूलने लगी और मुझे सांस लेने में परेशानी होने लगी लेकिन मेरा मेरी सांस की तरफ तो धयान था hi नहीं.




"सब मेरी हालत देख कर डर गए पूजा दीदी नर्स थी और सूबा हुए काण्ड की वजा से वो कुछ कुछ मेरी हालत को समझ गई "




पूजा दीदी ने मुझे झंझोड़ना शुरू कर दिया लेकिन कुछ फ़र्क़ नहीं पद रहा था. फिर मुझे थप्पड़ माआररने लगी लेकिन फिर भी फ़र्क़ नहीं पद रहा tha......abb की बार मेरे अंदर की हालत की कुछ और थी.



"साला मैं उन गुंडों को मार कर खुद को शेर समझ रहा था यहाँ बात जब्ब प्यार की आयी तो मैं "फ्यूज" hi हो गया था.

अब्ब और पता नहीं मुझमे कौन कौनसी कमज़ोरियाँ थी, ये वीकनेस ये कमज़ोरियाँ मेरे लिए बोहत बड़ा खतरा थी. क्या करून मैं अपने अंदर की वीकनेस का..?

मेरा मिशन ितं बड़ा है और मैं ...

क्या हूँ मैं .. कुछ भी नहीं.. मैं कभी खुद को डिस्कवर कर भी पाऊँगा-

ya-nahi.... ऐसे hi पल पल बदलते रहे. मैं तो फिर किसी काम का नहीं rahunga.yahi सोचें मुझे सांस लेने नहीं दे रही थी,

अगर मैं खुद को साबित hi न कर पाया तो फिर इन साँसों की ज़रुरत hi क्या hai..kall की बंद होती सांसें आज hi बंद हो जाएँ तो क्या फ़र्क़ पड़ता है.

मैं कभी भी अपनी माँ और बहनो को वहां से छुड़ा नहीं पाऊँगा.

उन के बगैर तो मेरी ज़िन्दगी है hi नहीं"




यहाँ तक पोहचते hi मैं खुद को चिल्लाने से रोक नहीं पाया और चीखने लगा.




"maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa"priyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa"

"maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa"priyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa"




फिर मैं घुटनो पर नीचे गिर कर ऊँची ऊंची आवाज़ में चीखने लगा.

अंदर का दर्द बढ़ जाये तो कण्ट्रोल नहीं rehta....mera कण्ट्रोल खुद पार्स बार बार चोट रहा था.....

कुछ देर पहले सबब कितने खुश थे पारर अब्ब मेरी हालत देख कर परेशान हो गए थे.

मेरे चीखने से मेरी सांसें तो ठीक हो गई थी लेकिन मेरे अंदर के ज़ख़्म फिरसे बढ़ने लगे the..........main घुटनो के बल बैठा बास चीखे hi जा रहा था और "maa"priya"maa"priya"bole जा रहा था...

पूजा दीदी समझदार थी उसने सबब को रोक लिया और मुझे जी भर के रोने दिया.

जब कुछ देर तक मैं चुप नहीं हुआ तो पूजा दीदी ने मुझे अपने गले से लगा लिया.

मैं खुद को पूजा दीदी से छुड़ाने लगा लेकिन पूजा दीदी मुझे नहीं छोड़ रही thi.pooja दीदी ने मुझे कस के पकड़ा हुआ था.




"सब मेरी कंडीशन देख बेहद परेशां थे."




रानी की तो हालत hi पतली हो रही थी. बेचारी को आज hi इतनी ख़ुशी मिली थी वो साड़ी की साड़ी धरी की धरी रह गई... वो मुझे ऐसी हालत में देख ख़ामोशी से आंसू बहाये जा रही थी.

मैंने अपना पूरा जोरर लगा कर पूजा दीदी को खुद से अलग kiya........phir मैं छेखते हुए बोलै....



विजय ...... मुझे इतना प्यार मैट दो क मैं अपनी मंज़िल से hi भटक जाऊं.

मुझे नहीं चाहिए इतना प्यार मैं इस काबिल भी नहीं हूँ.....

मुझे एक दरिंदा बनना है..

लेकिन आप सबब मिलकर मुझे प्यार दे दे कर कमज़ोर कर रहे हैं.....

मुझे प्यार नहीं चाहिए मुझे मेरी माँ और बहनो को लाना है....

मुझे सिर्फ एक दरिंदा बनना है....

ये बोलते वक़्त मेरे अंदर का दर्द मुझसे सहन नहीं हो रहा था.

मेरा फिरसे दम घुटने लगा मेरी आँखों ने रंग बदलना शुरू कर दिया..

लेकिन इस बीच पूजा दीदी भाग कर इक इंजेक्शन ले आई और मुझे लगा दिया वर्ण पता नहीं आज मैं क्या कुछ कर बैठता...

धीरे धीरे मुझपर इंजेक्शन का असर होने लगा और थोड़ी hi देर में मैं बेहोश हो गया...


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मेरे बेहोश होने के बाद

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पूजा दीदी ने रानी की मदद से मुझे खटिया पर लिटाया....

सबब के होश उड़े हुए थे....

कोई कुछ बोलने की हिम्मत hi नहीं कर पा रहा था....

सभी के चेहरों पारर कई तरह के भाव आये हुए थे....

डर भी था....

दुःख भी....

दर्द भी था....

चिंता भी थी....

सबब मुझे मिले जुले भाव के साथ देख रहे थे....

फिर रानी और पूजा दीदी ने मेरे हाथों को पकड़ कर अपने गालों पर लगाया और रोने लगीं....


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मतलब मेरा दर्द उनसे भी सहन नहीं हो पा रहा था....

लंच बनाया गया था स्पेशल मेरे लिए....

पड़ा रह गया वही सबब की भूक hi मर्डर गई थी....

कैसे कहते वो खाना' प्यार जो मुझसे इतना करने लगे थे....

जब्ब कोई अपना इतनी तकलीफ में हो भूक तो उड़े गई hi....


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मालिकान और आंटी भी दोनों चेयर्स को मेरी खटिया के पास घसीट कर उस पर बेथ गई.

पूजा दीदी और रानी अभी भी रो रही thi.kya करती बेचारी बड़े नाज़ुक से दिल की मालिक थी....

पद्मा आंटी को अचानक से याद क उन दोनों गुंडों को मारते वक़्त भी मैं ऐसे hi चिल्लाया था. अब्ब आंटी से रहा नहीं गया और रट हुए बोलने लगी..




आंटी ..... विजय बीटा कितना दुखी है 'कल भी इस की ऐसी hi हालत हो गई थी'.



पूजा दीदी... मतलब कल जो हुआ आपने तो सब बताया था लेकिन अब आप कुछ और बोल रही हैं ..

"पूरी बात क्या है"

"बास ौत्रों के पेट अब्ब इतने भी मज़बूत नहीं होते बड़ी hi जल्दी फूल जाते हैं...

आंटी ने रट हुए कल की साड़ी हकीकत मालिकान और पूजा दीदी के सामने उगल दी


और अपना पेट हल्का कर लिया....

पद्मा आंटी ने अपना पेट तो हल्का कर लिया लेकिन ये नहीं सोचा क विजय का राज़ किसी को नहीं बनता चाहिए था वर्ण कुछ भी गड़बड़ हो सकती है.....

 
अपडेट ::: 22

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अब्ब टककककक

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मालिकान और आंटी भी दोनों चेयर्स को मेरी खटिया के पास घसीट कर उस पर बेथ गई.

पूजा दीदी और रानी अभी भी रो रही thi.kya करती बेचारी बड़े नाज़ुक से दिल की मालिक थी....

पद्मा आंटी को अचानक से याद क उन दोनों गुंडों को मारते वक़्त भी मैं ऐसे hi चिल्लाया था. अब्ब आंटी से रहा नहीं गया और रट हुए बोलने लगी..

आंटी ..... विजय बीटा कितना दुखी है 'कल भी इस की ऐसी hi हालत हो गई थी'.

पूजा दीदी... मतलब कल जो हुआ आपने तो सब बताया था लेकिन अब आप कुछ और बोल रही हैं ..

"पूरी बात क्या है"

"बास ौत्रों के पेट अब्ब इतने भी मज़बूत नहीं होते जल्दी फूल जाते हैं...

आंटी ने रट हुए कल की साड़ी हकीकत मालिकान और पूजा दीदी के सामने उगल दी और अपना पेट हल्का कर लिया....

पद्मा आंटी ने अपना पेट तो हल्का कर लिया लेकिन ये नहीं सोचा क विजय का राज़ किसी को नहीं बनता चाहिए था वर्ण कुछ भी गड़बड़ हो सकती है.....


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अपडेट ::: 22

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अब्ब आएगी

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लेकिन यहाँ गड़बड़ का चांस काम hi था...

कहते हैं दीवारों के भी कान होते हैं...




लेकिन जहाँ दिल में प्यार hi इतना स्ट्रांग हो तो no टेंशन....




मालिकान और पूजा दीदी हक्की बक्की साड़ी बात सुन रही थी....

जब साड़ी बात सुन ली तो एक बार तो दोनों माँ बेटी के तोते hi उड़द गए....




मेरा नाम जो चेंज हो गया tha...........""now ी ऍम थे किलर""




लेकिन दोनों माँ बेटी ने जल्द hi खुद को संभल लिया....

पूजा बोली ..... लेकिन माँ ये "माँ और प्रिय" का क्या चक्कर है...

कुछ तो बोहत बड़ी गड़बड़ है...

वर्ण विजय इतना भी कमज़ोर नहीं है क अपनी "माँ और प्रिय" के लिए कुछ कर न सके .... सच में बोहत बड़ी गड़बड़ है.... ""फिर मेरे माथे पर किश कर के पूजा दीदी बोली"" ऐसे hi तो नहीं मेरा भाई इतने दर्द में है....

पूजा ..... माँ हम सबब मिलकर विजय को संभल लेंगे आप क्या कहती हैं....

मालिकान अपनी hi सोचों में डूबी थी...



पूजा (रिपीट)..... maaaaaaaaaaa



मालिकान .... ha...haann क्या हुआ

पूजा ...... माँ मैं कह रही थी अब्ब विजय भाई को हमने hi संभालना है..

मालिकान..... (इमोशनल भी थी दर्री हुई थी कहाँ से लाती इतनी हिम्मत)

लेकिन बेटी कौन इसे संभल सकता है.

तूने देखा नहीं कैसे ये किसी के काबू में hi नहीं आ रहा था..

और कितने ग़ुस्से में था और जो उसने बोलै है... उसका क्या???

जब विजय को होश आएगा तो कैसे रियेक्ट करेगा.

पहले ये सब सोचो....

और मैं कुछ नहीं कह सकती....

अब तो इससे डर भी लगने लगा है....

पद्मा आंटी .... बेहेन जी दररने की ज़रुरत नहीं है.... पहले भी विजय ने खुद को संभल लिया था मुझे लगता है इस बार भी ये खुद hi ठीक हो जायेगा.

"फिर आंटी पूजा दीदी से बोली" इसे कितनी देरर में होश आ जायेगा....

पूजा ....."सोचते हुए" मेरे ख्याल से इसे एक घंटा और लग जायेगा... या शायद पहले भी होश में ा सकता है ... इंजेक्शन की ज़यादा दोसे नहीं दी थी मैंने विजय ko...(pooja दीदी कभी मुझे भाई बोलती तो कभी विजय.. बेचारी खुद भी कंफ्यूज थी वो क्या बोले जा रही है)

फिर सब ऐसे hi बातें करते रहे


***********************************

मेरी आंख खुली तो मैंने खुद को खटिया पर लेते paya.abb मैं ठीक था. मुझे याद नहीं रहा था. क मैंने कुछ देर पहले क्या काण्ड किया था....

मुझे होश में आते देख सब मेरी तरफ लपके.....

पूजा दीदी ने मुझे बहन में भर लिया और मेरा haal-chaal पूछने लगी...

मैं पूजा दीदी को जवाब दिए बगैर hi सब को देखने लगा सबब मुझे hi घूर रहे थे.

अजीब सिचुएशन थी सब मुझे ऐसे घूर 'क्यों' रहे हैं.????




पूजा ..... भाई अब्ब बोल भी दो ना. कैसे महसूस कर रहे हो.. ???


पूजा दीदी के बार बार पूछने पारर मुझे सबब याद आने लगा क मैं तो बेहोश हो गया था लेकिन कैसे ये याद नहीं.

और जो कांड मुझसे हुआ था मुझे ाचा नहीं लगा.

मैंने फीस खुद पार्स कण्ट्रोल खो दिया था.

आखिर कब तक मैं ऐसे hi गलतियां रहूँगा.

ऐसे तो कभी किसी काम का नहीं बन्न पाऊँगा.

शायद अभी मैं बचा हूँ इस लिए मेरा खुद पारर इतना कण्ट्रोल नहीं रहता.

मैं हर्र बार खुद hi कुछ न कुछ गलत कर hi जाता हूँ.

मुझे ठन्डे दमाग से हर्र इक चीज़ पारर घोरर करना है.

मुझे पहले खुद को ताक़तवर बनाना होगा.

शायद शरीर में ताक़त होगी तो मैं खुद पर कण्ट्रोल करने में कामियाब हो जाओं. पारर शरीर को मज़बूत कैसे बनाओं..


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लेकिन इससे पहले आज जो हुआ उसपर घोर करना ज़यादा ज़रूरी है....

आज मैं प्यार के चक्कर में इमोशनल हो गया....

कही ये प्यार मेरे रास्ते की दीवार तो नहीं बन्न जायेगा....


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सुना था के प्यार इंसान को मज़बूत बनता है....

फिर मुझे क्यों इतना कमजोर्र बना रहा है....

अपनी माँ और बहनो के प्यार के लिए मैं मज़बूत नहीं बन्न पा रहा हूँ....

क्या करून प्यार करना छोड़ दूँ....???

सिर्फ इक जानवर बन्न जाऊं....

जिस के अंदर सिर्फ और सिर्फ हैवानियत होती है....

इक ऐसा दरिंदा बन जाऊं जिसे सिर्फ खुद की भूक से मतलब होता है....

क्या करून.... क्यों karoon....kaise karon....kyaa कोई मुझे बताएगा....

कौन बताये गए मुझे मेरी तरह सभी दुखी हैं....

अगर उन सबब के पास सलूशन होते तो क्या सबब दुखी होते....

उन दरिंदों के जैसा बन्न जाऊं जिनकी वजा से मेरी माँ बर्बाद होगी....

और अब्ब मेरी बहनो की ज़िन्दगी भी बर्बाद होने वाली है....

मैं प्यार hi तो करता हूँ अपनी माँ से अपनी बहनो से....

अगर मैं दरिंदा बन्न गया तो मेरा प्यार मेरी माँ और बहनो के लिए मर्डर जायेगा...

पूजा दीदी का प्यार भी तो वैसा hi है जैसा मेरी तितलियों का मुझसे है...

और रानी का प्यार भी तो वैसा hi है....

मालिकान और आंटी के गले लग्ग कर मुझे अपनी माँ के जैसा एहसास क्यों हुआ....

नहीं मुझे प्यार से दररना नहीं है....

प्यार मेरी वीकनेस नहीं है....

यही प्यार hi तो मुझे ताक़तवर बनाएगा....

खुश नसीब hi तो होता है वो जिस के नसीब में इतना प्यार है....

मैं एक तवायफ का बीटा हूँ तो क्या हुआ....

इंसान भी तो हूँ पूजा दीदी और बाकी सबब मुझसे प्यार करते हैं....

उन्हें मेरे tawaif-zaada होने पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा....

मुझे खुद को साबित करना है क तवायफ का बीटा भी महान हो सकता है....

मैं पूजा दीदी और सबब को ये सबत कर के दिखाऊँगा....

इक tawaif-zaada भी इंसबब से सच्चा प्यार कर सकता....

मैं महान भी बनूँगा....

और दरिंदा भी बनूँगा ....

और ऐसा दरिंदा बनूँगा क जो खुद को दरिंदा समझ कर बेबस और लचर....

लड़कियों और औरतों पारर ज़ुल्म करते हैं मैं उन के लिए....

इक ऐसा दरिंदा बनूँगा क फिर कोई दरिंदा बनने की हिम्मत hi न कर सके....


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अब्ब और नहीं जितना खुद से कण्ट्रोल खोना था खो चूका. अब्ब सिर्फ मुझे क्या करना है कैसे करना है सिर्फ उस पारर hi धयान देना है.

आज से hi प्लान सोचना shuru....(adat जो थी हर्र वक़्त कुछ न कुछ प्लान करने की)

खुद को कैसे मैंने बदलना है. आज से hi शुरू. फिर मैंने खुदसे hi कुछ फैसले लिए और पूजा को उनके गाल पे एक किश कर के उनसे सॉरी बोलै...



पद्मा आंटी .... (खुश होते huye)dekha मैंने कहा था ना विजय खुद hi खुद को संभल ले गए...



माहौल अचानक से एक बार फिरसे बदल गया ग़म के बदल झट्ट गए और खुशियों की moosla-dhaar बारिश शुरू होगी फिर सबब ने उस बारिश में नाहा नाहा कर खूब मज़ा लिया और कुछ hi देरर में

"जिस कमरे में थोड़ी देर पहले मातम था"

अब्ब पूजा दीदी और रानी के khil-khila कर हंसने की आवाज़ें गूंजने लगीं.

पहले दुःख से भूक ुड्डी हुई थी और अब्ब मारे ख़ुशी से भूक को hi भूल चुके थे....

शाम भी होने वाली thi.aur अब्ब मुझसे भूक बर्दाश्त करना मुश्किल था....

मैंने सबके सामने पूजा दीदी के गाल को अपने दांतों में क़ैद किया और फिर अपने दांतून का दबाओ पूजा दीदी के गाल पर बढ़ने लगा..



aiiiiiiiiiiiiiiiii "पूजा दीदी की तेज़्ज़ आवाज़ निकली"

सब हंसने लगे और पूजा दीदी मुझे घूरने lagi....(nautanki एंग्री फेस)



विजय ..... दीदी घूरना बंद करो अब्ब भूक लगी है कुछ तो खाना पड़ेगा इसलिए मुझे आपके गाल का टास्ते ाचा लगा लेकिन अपने खाने hi नहीं diya...idhar लाओ अपना गाल मुझे भूक लगी है...


पूजा दीदी मेरे चेहरे की तरफ अपने गाल लाते हुए अचानक से मेरे गाल पारर hi काट लिया और khil-khila कर हँसते हुए बहार भाग गई.



सबब फिरसे हंसने lage....bada hi प्यार भरा माहौल बन्न गया था....

कुछ वक़्त के लिए मुझसे एक गलती हो गई थी... लेकिन अब्ब मैं कोई गलती नहीं करना चाहता था. अब्ब मैंने फैसला कर लिया था खुद पर कण्ट्रोल करने का.

मैं ज़िद्दी तो था hi इसी का फ़ायदा उठा कर अब्ब मुझे खुद को कण्ट्रोल करना था.

पूजा दीदी ने खाने गरम करके हम को bataya.time काम था लंच तो रह hi गया था. अब्ब खाना खा के शॉपिंग पे भी जाना था. इस लिए फटाफट खाना खाया गया. और फिर मैं रानी और पूजा दीदी शॉपिंग के लिए निकल गए....

जहाँ हम इस वक़्त मौजूद थे वो एक स्माल टाउन tha.pooja दी के घर से पैदल 10 मिंट की दूरी पारर hi एक बड़ा बाजार है हम वहां गए. मैंने भी अपने पैसे साथ ले लिए थे मैं पूजा दीदी पारर लोड नहीं डालना चाहता था. वैसी भी उनके हालात नॉर्मल hi थे. तो हमें काफी खरीदारी करनी थी. तो पूजा कहाँ तक पाय कर पाती 'इस लिए मैंने सब अपने हाथ में ले लिया.'

मैंने कुछ अपने लिए जो फैसले लिए थे आज का दिन निकल जाने से वक़्त काम था.

इस लिए ज़रूरी सामान के इलावा बाकी सबब कल पारर छोड़ दिया..

आज सिर्फ कपडे और कुछ जो ज़यादा ज़रूरी था वो ख़रीदा.

मैंने पूजा दीदी को बता दिया था क मैं कैसे कपडे लेना चाहता hoon..to पूजा दीदी ने मुझे कहा था "आज एक दो सूट ले लो बाकी कल ले लेना पहला अपना हुलिया दुरस्त करो और अपने बाल आजकल के फैशन के हिसाब से बनवाओ.

फिर कल दोबारा आ कर तेर लिए ड्रेस खरीद लेंगे"

मैंने फैसला किया था क मैं अपने सर के बालों को कटवा दूंगा क्यूंकि मेरे बाल मेरी पहचान बन्न चुके थे और मुझे कुछ ऐसा दिखना था क रेखा बाई के आदमी मुझे पहचान न सकें... इस लिए मैंने पूजा दीदी को अपने लिए ड्रेस पसंद करने के लिए बोलै था. मैं कुछ कुछ जनता था लेकिन जब तक प्रैक्टिकल न किया जाये तब तक सही से पता नहीं चलता इस लिए कपड़ों को ले के मैं बोहत कंफ्यूज था.

वक़्त काम था तो कपडे और कुछ ज़रूरी चीज़ें ले कर हम जल्दी से घर वापिस आ गए...

अब्ब मेरे लिए वो घर hi बन्न गया था....

हम पहले पूजा दीदी के घर hi गए थे वहां आंटी को लेकर हम अपने कमरे में जाने लगे तो मालिकान ने कहा अब्ब उस कमरे में जाने की क्या ज़रुरत है.



विजय ..... आंटी जी अभी हमें वहीँ रहने दें इसपर हम बाद में बात करेंगे. हाँ एक बात मैं ज़रूर कहूंगा पहले मैं अकेला था दिल्ली में फिर हम तीन huye(padma आंटी और रानी को देख कर)

और अब्ब हम पांच हैं. इस लिए टेंशन न लें किसी भी तरह की .....



मालिकान ... (इमोशनल) मुझे गले लगा लिया और माथे पर किश कर दी. और मुझे दुआएं देने लगी... फिर हम तीनो पूजा दीदी और मालिकान को bye बोल कर अपने कमरे में ा गए.

कमरे में आते hi मैंने फ्रेश हो कर अपने नए कपडे पहने और अपनी खटिया पर लेट gaya.rani और आंटी ने भी अपने कपडे बदल लिए.

मैंने उन के चेहरे देखे तो वहां मुझे सूबा वाली रौनक नज़र आई ... अछि बात है ...(मैंने खुद में सोचा) अब्ब मैं इनको कभी दुखी नहीं होने दूंगा.... बोहत गलतियां कर leen...ab और नहीं

नींद अभी नहीं आ रही थी तो मैं सोचने लगा अब्ब मुझे कल के लिए क्या करना चाहिए. मैं देरर नहीं करना चाहता tha.mujhe जल्द से जल्द कुछ बनना था....



ओह्ह्ह्हह्ह टेरररररररीईई



मोबाइल लेना तो भूल hi गया अजित भाई को कॉल भी करना था. साला कोई न कोई गलती तो हो hi जाती है.

अब्ब कल सूबा hi पूजा दीदी के फ़ोन से कॉल करता हूँ. बाकी बाद में सोचेंगे.

काफी देर तक मुझे नींद नहीं आई तो मैं ऐसे hi प्लानिंग में लगा रहा.

साला इतने साल हो गए प्लान बनाते बनाते पारर सही से प्लान बनाना नहीं आया.

इन्ही सोचों रात आधी गुज़र गई फिर जा के नींद aai..soch के सोया था क सूबा जल्दी उठना है...


********************************************************************

सूबा सूरज के निकलने के कुछ hi देरर बाद मेरी भी आंख खुल गई.

मुझे फ़ौरन hi याद आया क मैंने पूजा दीदी से मोबाइल ले कर अजित भ को कॉल करनी है.

मैं भगा भगा ऊपर वाले पोरशन में gaya....aur दूर नॉक किया फ़ौरन hi मालिकान ने दूर ओपन किया....

"मतलब मालिकान भी जल्दी उठती हैं .... अछि बात है" मालिकान मुझे देख कर खुश हुई और साइड हो कर मुझे अंदर आने दिया.

अंदर आ कर मैंने पूजा दीदी का पोछा तो उन्हों ने कहा क वो सो रही है.

अब्ब ये मेरा भी घर था.

बेशरम तो मैं शुरू से hi था इस लिए झिझक भी ज़यादा देरर रहने वाली नहीं थी.

इस लिए फिरसे भगा भगा पूजा दीदी के रूम के घुस गया.



ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह टेरररररररीईईई

"डर्टी गर्ल"




समझ तो गए होंगे गर्ल्स कैसे सोती hain(so can't एक्सप्लेन नाउ) अभी मैं 18+ नहीं हूँ ना....

मैंने पूजा दीदी को उठाया वो मुझे देख हड़बड़ा गई खुद को ठीक कर के मुझसे पुछा क क्या hai(sookhe अंदाज़ में बोली)




"सूबा सूबा मैंने उनका दमाग जो ख़राब कर दिया था"




विजय .... मुझे एक कॉल करनी है तो कल बाजार से मोबाइल ले कर नहीं आया इस लिए आपके पास तो मोबाइल होगा hi तो मुझे अपना मोबाइल दें....




पूजा ..... "उल्लू कही का"


सामने पड़ा मोबाइल नहीं दिखा तुमको. इतनी जल्दी उठा दिया....

"वाह मैडम कल सूबा वाले मूड में आ गई थी"

मुझे क्या मैंने मोबाइल उठाया और ले कर अपने कमरे में आ gaya..phir मैंने अजित भाई का नंबर lagaya...bell गई लेकिन अजित भाई ने उठाया नहीं....

मुझे hi कुछ ज़यादा जल्दी है... शयद अजित भाई अभी तक्क सो रहे होओगे...

अब्ब तक पद्मा आंटी भी उठ गई थी मुझसे पूछने लगी क किसे कॉल कर रहे हो मैंने बता diya"apne एक फ्रेंड को" मैंने मोबाइल अपनी खटिया पर रखा और बाथरूम में घुस गया चलो पहले फ़्रेशः हो लेते हैं फिर दोबारा कॉल करता हूँ. मैं बाथरूम में घुस गया. फिर कुछ देरर में मैं नाहा कर बाथरूम से बहार निकला तो आंटी मोबाइल कान से लगा कर कुछ सुन्न रही थी और उनके चेहरे के रंग बदल रहे थे...

मैं हैरान रह गया. मैं आंटी के पास पोहंचा तो आंटी ने मुझे देख कर मोबाइल मुझे दे दिया मैंने नंबर देखे बगैर hi मोबाइल कान से लगा लिया....



उधर से .... hello कौन हैं आप बात तो करें इतनी देर से बोल रहा हूँ...

(((मुझे लगा ये अजित भाई की आवाज़ है मैंने नंबर देखा तो सच में अजित भाई hi थे..... लेकिन आंटी को क्या हुआ.??? चलो बाद में आंटी से पूछते हैं....)))

 
थैंक्स बीआरओ:

आपका कहना भी सही है

विजय हर्ष चौहान से फ्यूचर में राब्ते में ज़रूर रहे गए

हर्ष विजय की कितनी मदद करता है ये आने वाला वक़्त hi बताएगा

विजय को किसी की मदद से ज़यादा ज़रुरत है खुद को अपने अंदर से ढूंढ़ने की

अभी विजय के काई खामियां हैं और हर्ष के पास जा कर वो सब सही से नहीं कर सकता

विजय का अपना hi एक 'लाइन ऑफ़ एक्शन' हो गए

वो आपको नेक्स्ट 2 उपदटेस में पता चलेगा

अगेन थैंक्स एंड bye
 
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