Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 9 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

अपडेट 78 चावला गेट्स वरीड अबाउट थे डे संजना विल बे इन थे हाउस

सेक्सुअल एनकाउंटर के बाद दोनों एक दूसरे को बाँहों में जाकर लेते रहे कुछ देर तक बीएड पर यूँही. सुबह के 4 बज गए और सान्वी का उठने का टाइम करीब हो रहे थे तो चावला साहब ने उस से कहा, “जाओ एक घंटे तक सो सकती हो, 5 बजे तो किचन में रहती हो तुम!”

सान्वी बोली, “एहि मुझे बेहद पसंद है, आप मुझको बहोत अच्छी तरह से जानती हो, कब जागती हूँ, कब काम करती हूँ, कब नहाती हूँ, कौन कौन सी ड्रेस पहनती हूँ, कब किआ करती हूँ आप को सब का पता है मेरे बारे में जो मेरे पति खुद नहीं जानते, तो असली पति तो आप hi हुए मेरे हम्म?” चावला साहब खामोश रहे कुछ सोचते हुए तो सान्वी ने थोड़ा नाहकरे वाली ऐडा से कहा, “नहीं मैं नहीं जाती ऊपर अब, विवान तो गहरे नींद में होगा और अगर मुझको बीएड पर नहीं देखा तो वो एहि सोचेगा के मैं किचन में चली गयी हूँ, चलो पांच बजे तक आप के साथ hi सोती हूँ, आप जगा देना अगर नींद लग गयी तो okay?”

चावला साहब ने उसस्के माथे को चूमते हुए कहा, “और अगर मुझको भी नींद लग गयी तो? हम 10 बजे तक यूँही नींद में रह गए और विवान उठेगा, और तुमको किचन में नहीं पाकर मेरे दरवाज़े को खोला और देखेगा के उस्सकी पत्नी नंगी उसस्के बाप से लिपटी बीएड पर सो रहे हैं तब किआ होगा स्वीटहार्ट?”

सान्वी थोड़ा ज़ोर से हँस्ते हुए कहा, “ोफो ऐसा कुछ बी नहीं होने वाला बुसस अलार्म लगादो 5 बजे के लिए अपने मोबाइल पर नाह सो सिंपल!” तो चावला साहब ने कहा okay और उठकर गया पहले किचन में लाइट ों करने, और अपने दरवाज़े को लॉक करके अलार्म लगाया 5.15 के लिए और वापस सान्वी को नंगी अपने बाहों में भरके दोनों चादर ओढ़के सो गए एक दूसरे को बाहों में जाकर.

सान्वी कोई 15 मिनट तक चावला साहब के छाती पर अपना जीब फर्टी रही, चुस्ती रही उनको करेस करते हुए और चावला साहब को नींद लग गए फिर सान्वी भी सो गयी. और नींद गहरे था दोनों के…..

5.15 पर अलार्म ने जगाया दोनों को और जल्दी से सान्वी उठी अपने कपडे पेहेन्ने के लिए तो चावला साहब ने उस्सको फिर जाकर के बीएड पर पटका और उस पर चढ़ गया और एक बार फिर से छोड़ा सान्वी को, खूब मज़े से किया इस बार भी और सान्वी झड़ते हुए तड़पती हुई कहांरने लगी और आखिर में चावला साहब ने अपने वीर्य को चोर्रा उसस्के पथ और बॉब्स के ऊपर….

सान्वी उनको किश करके जल्दी से अपनी निघ्त्य में निकली और कहा, “मेरे निघ्त्य की गाउन तो ऊपर कमरे में है…. उस्सको लेकर वापस किचन में आती हूँ आप और थोड़ा सो जाइए.

और सान्वी वापस अपने कमरे में गयी, निघ्त्य लिया और देखा के विवान तो गेंरे नींद मैं है, उस्सको पता भी नहीं चला के सान्वी रात भर बीएड पर नहीं थी!! तो संवी ने सोचा अब ऐसे बहोत साड़ी रातों को वो चावला साहब के साथ रात गुज़ार पाएगी. ये सोचकर वो बहोत खुश हुई और उसस्के जिस्म में एक और अजीब लेहेर दौड़ी सिर्फ इतना सोचते हुए.

वो अपने काम में बिजी हो गयी टिया और ब्रेकफास्ट बनाते हुए और बार बार चावला साहब के कमरे के तराव देखती जा रही थी मगर उस्सको पता था के आज तो चावला साहब बहोत रिलैक्स होकर आराम से देर तक सोएंगे तो उस्सको सोने दिया…..

दिन के 10 बजे चावला साहब उठे तो देखा संजा ा के बहोत सारे मेस्सगेस और मॉस्कल्स हैं. अब चावला साहब के लिए एक प्रॉब्लम हो गयी. अभी दो बार संवी के साथ सेक्स किया तो अब संजना को किआ वो खुश कर पाएगा या नहीं वो इस सोच से अब परेशां होगये थे…. सोच रहा था के दो दिन संजना के साथ नहीं किया तह और उस्सको सेक्स का इंतज़ार था चावला साहब के साथ….. यह अब चावला साहब के लिए एक दुविधा बन गए.

उस्सने सोचा अब तो टाईमटेबल के हिसाब से करना पड़ेगा सेक्स… अगर रात में सान्वी से किया तो दिन के लिए संजना के लिए बचाना चाहिए और अगर दिन में सान्वी से किया तब संजना के लिए रात की एनर्जी बचाना पड़ेगा उनको. मगर किआ 24 हॉर्स में हर रोज़ दो बार कर पाएंगे इस सोच में वो उलझे हुए थे… संजना बहोत हॉट और सेक्सी थी और अपने अदाओं और नखरों से जल्द hi चावला साहब को खड़ा कर देती थी तो उस्सने सोचा के संजना के साथ शायद ज़्यादा आसान होगा करने को… हालां के अभी दो बार कर चुके थे और 5 घंटे की नींद पूरी हुई तो जब तक संजना के घर पहुंचेंगे तब तक तो कोई 8 घंटा हो जाएगा लास्ट सेक्स किये हुए तो उस्सको यकीन था के संजना को भी खुश कर पाएंगे वो.

मगर अब सान्वी उनको जाने देता तब नाह जाता संजना के यहाँ? 10.30 बजे जब चावला साहब तैयार हो रहे थे जब सान्वी उंनसे लिपट गयी और नखरें करने लगी के कल उन् दोनों का सुहाग रात हुआ तो उस्का हक़ बनता है के वो उनको घर पर hi रोकें और उनके साथ और सेक्स करे और दिन भर उन से प्यार करे.

चावला साहब समझते समझते थक गए के वहां संजना उस्का वेट कर रही होगी, कल नहीं गए थे, ड्राइविंग स्कूल लेजाना है उस्सको वो भी उस्सको मिस कर रही होगी मगर सान्वी चाहती थी के वो उसस्के साथ पूरा दिन गुज़ारे. चावला साहब सोचने लगे अगर अभी ऐसा है तो संजना का इस घर में आने के बाद किआ मंज़र होगा.

सान्वी ने चावला साहब से कहा के संजना को मैसेज या कॉल करके बता दे के उनकी तबियत ठीक नहीं है इस लिए वो आज नहीं आ पाएंगे. मगर चावला साहब खुद संजना से मिलना चाहता था. क्यूंकि संजना के साथ रहना, वक़्त गुज़ारना एक अलग बात थी. उस्का प्यार और प्यार करने का तरीका अलग था, संजना की भोलेपन और चुलबुली ऐडा बहोत मिस कर रहे थे चावला साहब. संजना की मीठी आवाज़, उस्सकी बोलने की ऐडा, उस्सकी बेहद जान लेवा मुस्कराहट उस्सकी हंसी सब चावला साहब को बहोत hi पसंद था. अगर संजना और सान्वी में चूसे करना होता तो चावला साहब बहोत ऊंचे नंबर से संजना को चूसे करते. तो उस वक़्त चावला साहब बड़े दुविधा में पद गए थे के कैसे उस सिचुएशन को संभाले.

उस्सने बुसस सान्वी से इतना कहा के वो उसस्के साथ दिन के बारह बजे तक रहेगा उसस्के बाद वो चला जाएगा संजना के पास. और तब भी सान्वी ने कुछ कहा तो चावला साहब ने कहा, “कल hi तुमसे से बात हुई थी नाह के तुम संजना से नहीं जलेगी, और अभी hi शुरू हो गए?” पर सान्वी ने अपने सफाई में कहा, “मैं सिर्फ आज के लिए कह रही हूँ सिर्फ आज के दिन चाहती हूँ के आप मेरे साथ रहो क्यूंकि कल हमारा बिल्कुल एक सुहाग रात की तरह मेल हुआ है बुसस इसी कारण….”

तो बे कॉन्टिनोएड…………
 
अपडेट 79 संजना व्हिले ड्राइविंग

ठीक बारह बजे सान्वी के साथ रहने के बाद चावला साहब घर से निकले संजना के यहाँ जाने के लिए. अब ड्राइविंग तो 2 घंटे तक करना था वहां जाने के लिए, तो 2 बजे वहां रीच होंगे और 1 बजे तो संजना को डेरीविंग के लिए जाना था – तो हुआ यह के चावला साहब ने सान्वी के सामने संजना को फ़ोन करके कह दिया के वो लेट आएंगे तो वो बस से ड्राइविंग के लिए चली जाए और वो उस्सको वहां लेने आएगा ड्राइविंग की लेसन ख़तम होने के बाद.

जिस वक़्त सनजना को वो कॉल आया था, कॉल एन्ड करने के बाद उधर संजना बहोत उदास हो गयी थी क्यूंकि उस्सने तो सोच लिया था के चावला साहब सुबह 9 बजे तक उस के यहाँ आएगा और 9 से 12.30 तक वो उनके साथ अच्छा वक़्त बिताएगी प्यार में. मगर उस्का सपना टूटता नज़र आया उससे. वो चली गयी उस छोटी शेर में अपनी ड्राइविंग स्कूल को 12.30 बजे hi. अपने ड्राइविंग टुटर से काफी दोस्ती हो गयी थी इन् 4 दिनों में. अब वहां भी कुछ हुआ जो चावला साहब को पता नहीं है.

जिस दिन चावला साहब पी कर लुढ़क गए थे उस शहर में, याद है संजना कितनी छोटी स्कर्ट में थी नाह, तो ड्राइविंग सीखाते वक़्त उस टुटर का हाथ कई बार संजना के टांगों को छुआ था और उस आदमी को संजना की अदायें और फ्रेंडलीनेस बहोत hi पसंद आया था. संजना जितनी जल्दी किसी से दोस्ती कर लेती थी और जितनी जल्दी घुल मिल जाती थी किसी से भी, उसी तरह उस आदमी से भी घुल मिल गयी बुसस एक घाटे के ड्राइविंग सीखने के वक़्त.

दूसरे दिन वो आदमी खुद संजना का वेट करने लगा था. और उस दूसरे दिन को बी संजना शार्ट ड्रेस में थी, तो वही हुआ था गियर चेंज करते वक़्त जब संजना से ठीक से नहीं हो पा रहा था तो टुटर को गियर लगाते वक़्त हर बार उस्का हाथ संजना के जांघ को छूटा था. आदमी अब जान बुझ कर बार बार अपने हाथ को उस्सकी जाँघों पर लगता था और संजना कुछ नहीं कहती तो आदमी ने सोचा यह पत्नी वाली लड़कियों में से है, तो वो बार बार किसी न किसी वजह से संजना को छूटा था और संजना बुसस मुस्कुराती रहती थी. संजना को तो सब पता था के मर्द उस्सको क्यों वैसे छूटे हैं फिर भी वो कुछ नहीं कहती थी तो आदमी को बढ़ावा मि रहा था…..

तीसरे दिन को जब संजना गयी थी अकेली hi, चावला साहब उसस्के साथ नहीं आये थे तो, उस रोज़ 1 घाटे के बजाए टुटर संजना के साथ 2 घंटों तक रहे थे. 1 घंटे के ड्राइविंग ट्यूशन के बाद तुरोर ने संजना से पूछा था, “तुम अभी घर जाकर किआ करोगी?” संजना अपनी चुलबुली अदाओं में मुस्कुराते हुए जवाब दिया था, “कुछ ख़ास नहीं फ्री हूँ मैं तो!”

टुटर का नाम था, नागेश. वो 40 साल के ऊपर का था और संजना के अदाओं और जिस्म का दीवाना होता गया, संजना के साथ उस एक घंटा के दौरान उस्सको लगता के एक जनम बिता रहे थे संजना के साथ…. अब अगले दिन का वो बेकरारी से संजना का इंतज़ार करता. संजना जिस तरह से ड्रेस होती थी, जो खुशभू लगाती थी, जिस तरह से बात करती थी, जैसे हस्ती थी, वो सब नागेश को पूरी तरह से पागल करने लगे थे. संजना बुसस उसस्के दिल में उतर गयी थी और संजना को पता था के वो उस से बहोत इंटरेस्टेड हो रहे थे मगर कुछ नहीं कहती थी जैसे वो उस्सको बढ़ावा डेट जा रही थी शुरू से hi. ऐसा क्यों था? किआ संजना उस वक़्त को याद और फील करती थी जिस दिन पहली बार वो चावला साहब के साथ ड्राइविंग सीख रही थी? किआ उस वक़्त को संजना सोचती थी जब कार को किसी एक कोने में पार्क किया था चावला साहब ने और संजना को चूमने चाटने लगे थे कार के अंदर? किआ उस मंज़र को संजना सोचती थी जब चावला साहब ने संजना को ड्राइविंग सीट पर hi अपने गॉड में बिठा के ड्राइविंग सिखाया था? किश इसी लिए संजना उस आदमी को कुछ ज़्यादा बढ़ावा देती थी? किआ संजना चाहती थी के नागेश भी उसस्के साथ वैसा करे? किआ संजना के लिए कार में किसी एक मर्द के साथ होना एक इरोटिक मोमेंट बन गया था?

तो पूछने पर जब संजना ने नागेश को कहा के वो फ्री है तो नागेश ने पहला सवाल यह किया, “वो आदमी जिस्सके साथ तुम मेरे स्कूल को आयी थी पहली बार, जिस ने तुम्हारे सभी फीस एक साथ भर दिए थे किआ वो तुम्हारा पति है?” संजना ने जवाब दिया के “हाँ वो मेरे पति है क्यों?” तो मैं में आदमी ने सोचा “मतलब लड़की नहीं है यह और सेक्स के बारे में इस्को सब पता है और कोई खतरा नहीं है…. कुमारी लड़कियों के साथ बहोत मैक ह मच होती है शादी शुदा लड़कियों के साथ आसानी से काम बन जाता है…” तो नागेश ने संजना को जवाब दिया, “तो अगर फ्री हो तो एक घंटा और साथ रहे? किआ कहती हो?” संजना उसस्के इरादे भांप गयी थी औरर मुस्कुराते हुए कहा, “और एक घंटा ड्राइव करेंगे?”

तो नागसेह ने कहा, “नहीं ड्राइव नहीं सीखाऊंगा, ड्राइव करूँगा, एक लॉन्ग ड्राइव पर चलें एक घंटा के लिए? उसी दिन को चावला साहब ने पी रखे थे पार्क में कार चोररकार. उस रोज़ संजना दो घंटों के बाद आयी थी वापस शहर में. क्यूंकि चावला साहब नाशी में थे उनको कुछ भी पता नहीं चला था….

तो उस रोज़ नागेश संजना को बहोत दूर ड्राइव करते हुए लगाए थे जहाँ किसी जिव जंतु का कोई ठिकाना नहीं था, उस जगह से संजना को डर भी लगा था. कुछ खतरनाक था वो जगह, घाना जंगल था और कुछ अँधेरा लग रहा था उस तरफ जैसे शाम हो गयी हो…. और वहां एक जगह कार पार्क करके नागेश ने संजना को किश करना चाहा था और डायरेक्ट सेक्स के लिए प्रोपोज़ किया था. संजना को कभी किसी ने आज तक उस तरीके से डायरेक्ट प्रोपोज़ नहीं किया था सीधे सेक्स करने के लिए. वो पहली बार था…. और उस वक़्त संजना के समझ में नहीं आया के किआ कहें , चुप थी कुछ देर मगर उस्सको बहोत अच्छाह लगा था के ये आदमी बहोत फ्रैंक है और सीधा बात किया था… वैसे पहले से संजना समझ गयी थी के नागेश उसस्के अदाओं और जिस्म का दीवाना हो चूका है मगर वो सोचती थी चावला साहब के तरह वो उस्सको छुएगा, हाथ फ्रेगा उसस्के जाँघों पर, किश करेगा गर्दन पर फिर किश करेगा और उसस्के कपडे को सरकाएगा फिर उतारने की कोशिश karega…Sanjana यह सब सोच रही थी, मगर बिल्कुल नहीं सोचा था के उस तरह से सीधे मुंह सेक्स करने के लिए पूछेगा….

फिर भी संजना ने उस्सको थोड़ा सताने के लिए उस से पूछा था, “आप को डर नहीं के मैं अपने पति को बोल दूंगी के आप ने मुझको प्रोपोज़ किया?” नागेश ने जवाब में कहा था, “अरे मेमसाब, कुंवारी लड़ककयों को प्रोपोज़ करना खतरनाक होता है क्यूंकि उन् सब तो पता भी नहीं के सेक्स करने से कितना मजा मिलता है, आप तो शादी शुदा हो तो आप को तो उस मजे का पता है इस लिए मेरे ख्याल से एक शादी शुदा औरत से सेक्स करने में कोई खतरा नहीं और बहोत मजा आएगा” संजना बहोत हंसी थी उसस्के बात को सुनकर और कहा था, “और अगर मैं शादी शुदा नहीं हूँ तुमसे झूट कहा तो?” तो नागेश ने कहा, “नहीं ऐसा तो नहीं ह सकता क्यूंकि मैं ने आप को उस आदमी को किश करते देखा था उसस्के कार में मतलब वो आपका पति अगर नहीं तो पति के इलावा कोई अफेयर तो है आप की तो फिर मेरा लाइन क्लियर है मतलब क्यों?”

तो बे कॉन्टिनोएड…………….
 
अपडेट 80 संजना विथ नागेश

संजना ने तब सिर्फ ये पूछा नागेश से, “यह कौन सी जगह है? कितना डरावनी है यह जगह? हम शहर से कितने दूर है अभी?”

नागेश ने कोई जवाब नहीं दिया था और संजना के मुंह पर अपने होठ कर दिए और उस्सको किश करने लगे थे और संजना किश को रेस्पोंद करने लगी थी आराम से जैसे उस्सको भी किश करने की ज़रूरत थी उस वक़्त. नागेश ड्राइविंग सीट पर था और संजना बगल वाले सीट पर, एक दूरी सी थी, संजना को उसस्के तरफ बढ़ना पर रहा था उस्सको बाहों में भरने के लिए और नागेश को भी तकलीफ हो रही थी उस सीट से इस सीट तक अपने हाथ को बढ़ा कर संजना को होल्ड करने के लिए तो उस्सने कहा, “चलो पीछे वाले सीट पर चलते हैं, वहां आराम से करेंगे!” संजना ने जैसे उस्सको चेररते हुए पूछा, “किआ करेंगे” हालां के वो जानती थी किआ करने जाएंगे पीछे वाले सीट पर. तो नागेश ने बाहर निकलते हुए कहा, “औ तो सही देखना किआ करेंगे!”

संजना एक छोटी मिनी टाइप स्कर्ट में थी और एक टॉप था ऊपर. उस्सकी जांघें उभरे हुए साफ़ दिख रहे थे जिस ने नागेश को खड़ा कर दिया था ड्राइविंग सीखते वक़्त hi…. उस्सको संजना के जिस्म का हर एक अंग को छुहने, चाटने और चुस्सने का मैं कर रहा था पहले दो दिनों से…. जिस वक़्त उस्सने संजना को किश करते हुए देखा था चावला साहब को उसस्के कार में ड्राइविंग स्कूल के सामने, जिस वक़्त वह दोनों बाहर hi एक दूसरे को किस करने लगे थे, फिर कार के अंदर जाकर किश करने लगे थे वो सब नागेश ने देखा था मगर उस वक़्त कुछ नहीं कहा था…. नागेश को दिखा थे के वो आदमी उम्र में संजना से बहोत बड़े दीखते थे फिर भी एक इतनी जवान खूबसूरत लड़की के साथ ऐसा रिश्ता है तो उसस्के मैं में कुछ खटका था उसी वक़्त. मगर क्यूंकि उस्सको यह भी दिखा था के यह बड़े लोग हैं पता नहीं कहाँ से आये हैं इस लिए उस्सने कुछ पूछने की जुरअत नहीं किया था तब… इसी लिए आज संजना से पूछा किआ वो आदमी उस्का पति है….. हालां के देखने से तो नहीं लगा था के वो आदमीं संजना का पति हो सकता है उस्सने तो सोचा था बाप बेटी हैं दोनों और बाप बेटी की इन्सेस्ट वाला रिश्ता है….. हालां के संजना ने कुछ देर पहले कह दिया के हाँ वो उस्का पति है नागेश अपने दिमाग़ में यह समझ रहा था के चावला संजना के पिता है और दोनों में ऐसा इन्सेस्ट वाला रिश्ता है इसी लिए वो संजना से सेक्स करना चाहता था यह सोचकर अगर बाप से छुड़वा सकती है तो किसी और से क्यों नहीं….

संजना के अंदर जैसे एक आग लगी हुई थी उस्सने कहा सीट बदलने की ज़रूरत नहीं इसी सीट को पीछे कर सकते हैं और उस्सको पता था के अब किआ करने वाले थे दोनों, पहले उस्सने पूछा, “इधर कोई अत तो नहीं नाह?” नागेश ने कहा, “बिल्कुल भी नहीं अत कोई, दरवाज़ा खुला रख कर सब कुछ कर सकते हैं, बेफिक्र रहो” तो संजना लेट गयी और खुद अपने आप बिना नागेश के कहे संजना ने सब से पहले अपनी पंतय उतारी जब नागेश उस्सको देख रहा था अपने पंत के ज़िप खोलके लुंड को हाथ में सहलाते हुए… यह कुछ पिक्स हैं जिस में संजना अपनी पंतय उतार रही है और नागेश देख रहा है उस्सको अपनी पंतय उतारते हुए….

यह पहले जब वो लेती सीट पर

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यहाँ उस्का हाथ जाँघों के निचे पंतय निकलने जा रही है

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इस तीसरी पिछ म ें संजना का हाथ गांड के निचे से पंतय निकालते हुए

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इस में उस्सकी पिंक पंतय दिख रही है निकलते हुए

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पंतय निकलती जा रही है

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थोड़ा और निकली

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निकाल के नागेश को दिखा रही है

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पंतय उस्सको दिखाते हुए जीब निकल कर चिरढ़ा रही है नागेश को

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और उस्सकी चेहरे का एक्सप्रेशन देखिये पंतय उतारते वक़्त जैसे भूकी है अपने अंदर लुंड लेने के लिए…

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फिर खुद आयी नागेश के ऊपर दूसरे सीट पर

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और खुद बैठी नागेश के ऊपर

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और नागेश पर बैठ कर वही सब कुछ करने लगी भूकी थी सेक्स के लिए

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नागेश के लुंड के ऊपर उठक बैठक करती गयी

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और होना किआ था संजना ने hi सब किया नागेश के साथ उठक बैठक करती गयी उस्सने मोठे लुंड पर और रफ़्तार बढ़ाती गयी अपने उठक बैठक की खुद लम्बी लम्बी सांसें लेते हुए और खड़ तड़पने लगी और नागेश निचे से थोड़ा बहोत पुश भी करने लगा और बहोत hi जल्द दोनों झड़ने लगे तो नागेश ने लुंड बाहर निकला और सनजना के मुंह के पास किया तो संजना ने अपने दोनों हाथों में लुंड को लेके चूसा और छाता हांफते हुए…. दोनों को संतुष्टि प्राप्त हुई और वैसे hi कार के सीट पर संजना उसस्के ऊपर लेती रही कुछ देर तक…..

कुछ देर बाद संजना ने अपनी पंतय पहनी और कहा, “अब जल्दी चलो मेरे वेट कर रहा होगा मेरा हस्बैंड पार्क में…. सोचेगा मैं इतनी लेट ह्युं हुई हूँ”

तो नागेश ने कहा “कह देना आज डबल हॉर्स ट्यूशन दिया मैं ने तुम्को. और संजना ने उस्सको चूमते हुए कहा, “हाँ यह सेक्स वाला ट्यूशन दिया आज हम्म्म हीहीहीही”

यह वही दिन था जब वापस ान ेके बाद संजना चावला साहब को ढूंढ़ती रही और वो नाशी में गिर्री पड़े थे…..

तो बे कॉन्टिनोएड………….(3345 वर्ड्स फ्रॉम आल 3उपदटेस)
 
अपडेट 81 चावला एंड संजना टुगेदर

और इस दिन को चावला साहब तो घर से 12 बजे निकले थे तो 2 घंटे के ड्राइव के बाद तो वहां 2 बजे रीच होंगे, और ड्राइविंग लेसन तो 1 बजे एन्ड होता है….

खैर, चावला साहब उस ड्राइविंग स्कूल के पास रुके तो देखा के जिस कार में संजना ड्राइविंग सीखने जाती है वो वहीँ मौजूद थे तो समझ गए के लेसन फिनिश हो गए क्यूंकि 2 बज चुके थे और संजना नज़र नहीं आरही थी तो चावला साहब समझ गया के वो वापस घर चली गयी होगी बस से.

तो वो बिना संजना को फ़ोन किये डायरेक्ट ड्राइव करते उसस्के घर के तरफ जाने लगे संजना को सरप्राइज देने के लिए.

घर के अंदर से hi कार की आवाज़ सुनकर संजना उछाल पड़ी क्यों के वो जान गयी के चावला साहब आ रहे हैं और दौड़ती हुई घर के बाहर निकली तो कार को अपने घर के तरफ आते हुए देखने लगी ख़ुशी से झूमते. कार के अंदर से चावला साहब भी बड़े ख़ुशी से संजना को देख रहे थे. आशिकों का मिलान था दो दिन के जुदाई के बाद. एक दूसरे को बहोत मिस किये थे दोनों ने और चावला साहब ने जैसे hi कार पार्क किया संजना दौड़ती हुई आकर उनके बाहों में समा गयी ज़ोर से उनको जकरते हुए. और चावला साहब ने संजना को गॉड में उठा लिया और उसस्के गालों पर हज़ारों किश करते हुए चल कर घर तक पहुंचे, संजना भी जाते जाते उनके गालों पर किश करते gayi…aur घर के अंदर जाते hi दोनों के जीब एक दूसरे के मुंह के अंदर घुल रहे थे.

थोड़ी देर बाद संजना ने जल्दी से जूस सर्वे किया साहब को और उनके बाहों में जा बैठी सोफे पर लाउन्ज में और उनके गालों पर अपने उँगलियों को फरते हुए संजना ने पूछा, “तो जनाब को ऐसा कौन सा ज़रूरी काम आगया था के मुझसे इस से पहले मिलने नहीं आ सके हम्म?” चावला साहब ने तुरंत सान्वी को सोचा, वो कहने hi वाले थे के सान्वी की वजा से नहीं आ पाए थे और मुश्किल से संभाल पाए अपने जुबां को. सच तो एहि था के सान्वी ने रोक लिया था उनको वार्ना वो तो 11 बजे तक यहाँ होते संजना के साथ. संजना उनके जवाब का इंतज़ार कर रही थी उनके चेहरे में देखते हुए, मगर बहोत hi खुश दिख रही थी. तो चावला साहब ने बुसस कहा, “अरे ऑफिस के काम में फंस गया था डिअर! अब चोर्रो भी अपनी और हमारी बातें करें?!”

संजना बोली, “हम्म्म मैं कितनी उदास थी आज, मैं ने प्लान किया था के आप 10 बजे तक यहाँ होंगे और हम दोनों खूब एन्जॉय करेंगे 12.30 तक, तब आप मुझको चौररने जाते और वेट करते हम फिर वापस आते यहाँ और फिर एन्जॉय करते, एक दूसरे के साथ रहते प्यार करते, मगर आप ने मुझको अकेला चोरर दिया हम्म्म!”

चावला साहब ने थोड़ा नॉटी होते हुए कहा, “क्यों, अपने पापा के साथ ेनॉय नहीं किया किआ?” तो संजना ने अपने मुठी बांध करके उनके छाती पर मारते हुए कहा, “किआ पापा, वो तो वो है आप आप हो, उनके साथ अलग बात है और आप के साथ अलग. दोनों में फर्क है बहोत.” तो चावला साहब ने इस सब्जेक्ट को इंटरेस्टिंग पाया और कहा, “लुक, थिस इस वैरी इंटरेस्टिंग, तुम मुझे समझाओ कैसे उस में और मुझ में डिफरेंस दीखता है तुमको, ी वांट तो क्नोव एंड अंडरस्टैंड, समझाओ मुझे तुम किश के साथ किआ और कैसे फील करती हो?”

संजना ने अपने माथे पर हाथ पीटते हुए कहा, “ोफो, आप भी नाह कौन सी बात को लेकर बैठ गए अब. मैं कैसे समझों आप को? मुझको यह सब समझाना नहीं अत जी!”

चावला साहब ने समझाया, “देखो तुमने कहा के हम दोनों में फर्क है, तो किआ फर्क है वो बताओ मुझे!”

संजना ने कहा, “पफ्फफ्फ्फ्फ़ धत!! मैं आप को लव करती हूँ आप मेरा लव हो और वो मेरे पापा, आप आशिक वो पापा समझे आप?”

तो चावला साहब बोले, “सेक्स तो दोनों से करती हो बराबर तो डिफरेंस कहाँ से हुआ?

संजना ने थोड़ा नाराज़ होते हुए कहा, “ोफो आप नहीं समझोगे, आप को सिर्फ सेक्स दीखता है किआ? मेरा प्यार नहीं दीखता आप को?”

चावला साहब ने तब कहा, “अरे तो तुम अपने पापा को भी तो प्यार करती हो नाह?”

संजना ने कहा, “हाँ उस्सको पापा की तरह प्यार करती हूँ, मगर आप से आशिकों वाला लव करती हूँ एहि डिफरेंस है समझे आप?”

तब चावला साहब ने कहा, “मुझको तो डिफरेंस नहीं दीखता, दोनों से प्यार करती हो और दोनों से सेक्स भी करती हो तो मुझे तो कोई डिफरेंस नहीं दीखता बिल्कुल.”

संजना फिर खफा होते हुए कहा, “बाप रे आप को इमोशन, फीलिंग का समझ नहीं है किआ? भावनाओं की बात है आप नहीं समझोगे जी चोररये इस बात को अब चेंज टॉपिक प्लीज!”

चावला साहब एग्री हुए टॉपिक चेंज करने को और कहा, “okay तो हम किश टॉपिक पर बात करें? सेक्स पर?”

संजना ने वही अपनी “हीहीही” करते हुए कहा, “सेक्स भी बात करने वाली चीज़ है वो तो बुसस करने वाली चीज़ है जी हीहीहीही!”

तो चावला साहब ने हँस्ते हुए कहा, “तो फिर चलो करते हैं नाह!”

संजना ने भी हँस्ते हुए उनको एक ेंख मारते हुए कहा, “okay चलो, फॉलो में तो माय बैडरूम मिस्टर!”

और संजना आगे चलते हुए अपने कमरे के तरफ चल रही थी बार बार पीछे मुड़कर उनको देखते हुए और अचानक चावला साहब ने दौड़ कर उस्सको पीछे से जकरा और उठाया कुछ इस तरह से के संजना के नितम्बों वाला हिस्सा उनके लिंग पर डब्बे हुए थे और संजना ज़ोर से हस्ती जा रही थी और कहा, “आज आप प्लेफुल मूड में हो जी? मुझे क्यों ऐसे अचानक पकड़ा आप ने जैसे के मैं भागने वाली हूँ यहाँ से हीहीही!”

संजना सिर्फ एक ड्रेस में थी, छोटी मिनी टाइप ड्रेस, जिस्सके स्लीवस स्ट्रैप्स जैसे थे. चावला साहब बीएड पर बैठे और संजना से कहा, “okay, आज तुम अपने कपडे एक एक करके उतारो मेरे सामने और मैं यहाँ बैठकर तुमको देखूगा, ी विल नॉट टच यू, जब तुम बिल्कुल नुदे हो जाओ, तब आकर मेरे कपडे एक एक करके उतारना, थें वे विल फॉलो इन एक्शन्स okay बेबी?”

संजना उनके सामने कड़ी दांतों में होठों को दबाये हुए मुस्कुरा रही थी उनको सुनते हुए और कहा, “okay दोने जी!”

तो चावला साहब बीएड पर बैठकर उस्सको देखने लगे…. संजना ने अपने ड्रेस को निचे से उठाते हुए ऊपर के तरफ करती गयी और उस्सने सब बहोत धीरे धीरे किया चावला साहब के चेहरे में देखते hue…chawla साहब की नज़रें संजना के जाँघों से होकर जून जून ड्रेस उठता गया उनके नज़रें वैसे वैसे ऊपर उठते गए संजना के पथ, नबी, और ब्रा को देखते हुए…. संजना की पंतय और ब्रा लाल कलर का था जो उस्सकी फेयर स्किन को बहत सूट कर रहे थे, ड्रेस निकल दिया संजना ने तो चावला साहब को देखते हुए एक पालक झपकाते हुए जैसे पूछा के अब किआ उतारे पहले पंतय या ब्रा…. तो चावला साहब ने अपने ऊँगली से ब्रा को इशारा किया…. चावला साहब एक बॉस की तरह बैठ कर देख रहे थे संजना को एक्सेक्यूटे करते हुए…..

तो बे कॉन्टिनोएड………………….
 
अपडेट 82 चावला लिखे ा परवर्ट विथ हेर

संजना ने अपनी ब्रा की स्ट्रैप्स को दोनों कांधों पर से एक एक करके, निचे किया और अपने बूब्स पर हाथ रख कर चावला साहब के चेहरे में एक प्यास भरी नज़र से देखा, फिर अपने दांतों में होंठों को दबाते हुए पीछे ब्रा को उन्हुक किया और आहिस्ते आहिस्ते ब्रा को निकला जबकि चावला साहब के चेहरे में एक ख़ुशी की चमक दिखे संजना को, पर संजना ने ब्रा को वहीँ बूब्स पर लटके हुए रोका और मुस्कुराते हुए चावला साहब के चेहरे में कुछ देर देखती रही….

चावला साहब संजना के चेहरे में उसी चमक के साथ देखते हुए कहजा, “अरे रुक क्यों गयी मेरी जान उतारो भी, मुझको इस्सके दर्शन करने दो नाह, दो दिन से नहीं देखा है इस्को, तड़प रहा हूँ दिखाओ तो यह मुलायम मुलायम चूचियों को, कितना मैं है इस्को निहारने को बेबी!!” संजना हंस पारी और वैसे hi डेंटन में होंठों को दबाये हुए उनको देखती रही कुछ देर फिर नखरों में कहा, “हम्म्म मुझको ज़्यादा पसंद होता अगर आप उतारते इस्को!!” चावला साहब ने कहा, “बेबी आज मैं देखना चाहता तुमको इससे मेरे सामने उतारते हुए, मतलब मैं तुमको खुद को मेरे सामने नंगी करते हुए देखना चाहता हूँ, फिर नेक्स्ट टाइम तो मैं hi सब उतारूंगा nah..aaj के लिए तुम खुद सब उतरो नाह मैं अदमीरे कर रहा हूँ स्वीटहार्ट.”

तब संजना ने ब्रा को निकाल कर अपने दो उँगलियों में उस्सको लटकाये रखा एक तरफ करके और उस्सकी दोनों बूब्स एकदम गोआल गोआल, पॉइंटेड निप्पल्स के साथ चावला साहब को देख रहे थे, जैसे कह रहे हो, “आओ मुझको अपने मुंह में लेकर चुसो….” फिर संजना ने अपने दोनों हाथों को खुद अपने बूब्स पर फेर्रा और चावला साहब के दो कदम और करीब गयी, तो चावला साहब ने कहा, “नहीं नहीं इतना करीब से नहीं वही कड़ी रहो नाह और आहिस्ते आहिस्ते अपनी पंतय को निचे करती जाओ, बिल्कुल आहिस्ते आहिस्ते जैसे स्लो मोशन में उतार रही हो…..”

तो संजना वापस दो कदम पीछे गयी और अपनी पंतय की इलास्टिक पर दोनों तरफ अपनी उँगलियों को डाला पीछे हट्टे हुए और चावला साहब के चेहरे में वैसे hi देखते हुए अपने जीब को होंठों पर फेर्रा और थोड़ा सा पंतय को निचे किया बुसस दो इंच जिस से चावला साहब को संजना की कमर का निचे वाला हिस्सा दिखा और उस्सकी कमर की कर्व्स जो थोड़ा सा स का फॉर्म कर रहे थे और उस्सकी कमर पर थोड़ा उभरे हुए उस हिस्से को देखा चावला साहब ने जहाँ से उस्सकी हिप्स शुरू होते हैं और गांड के तरफ नज़र दौड़ाया चावला साहब ने जहाँ ज़्यादा उभरे हुए थे और संजना धीरे धीरे पंतय को निचे करती गयी जब चावला साहब को उस्सकी योनि की शुरुवात दिखने लगे, क्लीन शावें थी, हाँ पहले चावला साहब ने संजना को कह दिया था के हाइजीन के लिए साफ़ सुथरा होना ज़रूरी है तो शेव करने से या हेयर रेमोवेर इस्तेमाल करने से उस हिस्से को क्लीन रखने से बैक्टीरियल और फंगस वग़ैरा से इन्फेक्शन नहीं होते तो संजना वहां हमेशा क्लीन रखती थी… तो चावला साहब ने नज़रों को उस जगह से निचे करता गया धीरे धीरे जून जून पंतय उतरती गयी उनके नज़र निचे होते गए. अब संजना को झुकना पड़ा पंतय जब उस्सकी घुटनों तक हुई तो, उसस्के झुकने से दोनों बूब्स लटक गए थोड़ा हिलते हुए जिस से चावला साहब को बड़ा मज़ा आया उस नज़ारे को देखते हुए…. तब उन्हों ने सोचा उनको कैमरा ों करके शूट करना चाहिए था, मगर बहोत देर हो चुकी थी अब शूट करने के लिए, पंतय संजना ने उतार कर ज़मीन पर रख दिए थे और उनके सामने कड़ी उनको देखती रही थोड़ा मुस्कुराते हुए, थोड़ा शर्माते हुए, उसस्के चेहरे पर थोड़ा लाली पद गयी थी और संजना ने कहा, “अब कीका? मैं आऊं वहां के नहीं? मुझको ठण्ड लगने लगी है अब! आप भी मुझको नंगी खड़ा करवा रहे हो अपने सामने!!”

तब चावला साहब ने अपने बाहों को खोला और संजना जल्दी से वैसे hi नंगी उनके बाहों में सिमट गयी उनको चुम्मते हुए.

थोड़ा देर किश करने के बाद चावला साहब ने कहा, “अब मुझको वैसे hi नंगा करो यहीं बीएड पर….” तो संजना ने ख़ुशी से कहा, “okay बॉस” और संजना ने पहले चावला साहब के टीशर्ट को उतरा और उनके छाती को चूमने लगी अपने बूब को उनके पथ पर दबाते हुए, फिर संजना घुटनों के बल गयी ज़मीन पर, क्यूंकि चावला साहब तो बीएड पर बैठे हुए थे, और संजना ने उनके कमर से पहले वैस्ट बंद को उन्हुक किये और उनके पंत को आहिस्ते आहिस्ते खोला और उनके चेहरे में देखते हुए उनके ज़िप को निचे किया… तब तक चावला साहब का हाथ संजना के बूब्स को सेहला रहे थे आराम से हलके हलके ॉन्गलियों को थोड़ा उसस्के निप्पल पर फरते हुए, जिस से संजना की आह निकली….

जब ज़िप निचे कर दिया तो संजना ने पंत को दोनों तरफ से पाकर के निचे करना चाहा मगर नहीं कर पा रही थी तो कहा, “ोफो आप खड़े हो तब नाह मैं निचे करूँ पंत को!!” तो चावला साहब मुस्कुराते हुए खड़े हुए संजना के चेहरे में देखते हुए तब संजना ने पंत को बाहर निकाल दिया बिल्कुल…. और चावला साहब का मोटा तन्ना हुआ लुंड उनके बॉक्सर के अंदर फॉर्म में थे जिस्सको संजना ने देखा और बिना चावला साहब के बोले संजना ने अपने उँगलियों को उनके लुंड पर फेर्रा बॉक्सर के ऊपर hi…

चावला साहब खड़े थे, संजना घुटनों पर थी, तो चावला साहब ने संजना के सर पर हाथ रख के उसस्के चेहरे को अपने लुंड पर सत्ताया, तो संजना के गाल और मुंह उनके बॉक्सर के ऊपर hi डाब गए…. और संजना ने उनके दोनों तरफ जाँघों पर हाथ रख कर अपने गालों को उनके लुंड के ऊपर रगड़ने लगे जैसे अपने गालों से उनके लुंड को सेहला रही थी फील करते हुए… और चावला साहब सर को छत के तरफ ऊपर करके ेंख मुंध लिए और संजना के चेहरे की रागढ को अपने लिंग पर महसूस करते हुए एक तड़पती छोटी सी आवाज़ किये उन्हों ने जिस से संजना को सर ऊपर करके उनके चेहरे में देखना पड़ा…..

फिर चावला साहब ने उस्सको धीमी आवाज़ में कहा, “अब उतरो नाह बॉक्सर को, और मेरे लुंड को अपने नाज़ुक हाथों में लेलो बेबी स्स्स्सस्ठ्ठ”

संजना ने अपने जीब को होंठों पर फरते हुए बॉक्सर को निचे किया, और एक जहटके से लुंड बाहर हुआ और संजना के चेहरे के सामने आया…. संजना की नज़र बॉक्सर उतारते हुए लुंड पर hi रही, और बॉक्सर को निचे रख कर उस्सने लुंड को अपने दोनों हाथों में लिए ऊपर के तरफ चावला साहब के चेहरे में देखते हुए, फिर लुंड को किश किया संजना ने, बड़े प्यार से, लुंड को प्यार करने लगी, अपने गाल से सत्ताया, अपने होंठ से लगाया अपने छाती पर दबाया, और अपने गाल से लुंड को सहलाने लगी उस्सको फील करते हुए….. चावला साहब बेताब होते जा रहे थे, उनके पेयर थोड़ा कांप सी गए और उन्हों ने संजना के सर को पाकर के अपने लुंड को संजना के मुंह में डाला, बिना कहे संजना समझ गयी के उस्सको किआ करना है उस्सने मुंह खोल दिए और लुंड को मुंह में ले लिया और चावला साहब खड़े खड़े उसस्के मुंह में ढाका देने लगे….

चाहुला साहब की आवाज़ बदल गए, वो तड़पते हुए कहांरने लगे और संजना के मुंह में ढके की रफ़्तार को बढ़ता गया, संजना उनके कमर पर अपने बाहों को लपेट कर अपने मुंह में उनके लुंड को अंदर बाहर करती गयी….. और चावला साहब ने, उसी तड़पती आवाज़ में कहा, “आज तुम्हारे मुंह में hi करलूं? हम्म्म बोलो बेबी वहीँ झाड़ जॉन?” संजना ने कोई जवाब नहीं दिया बुसस उनके चेहरे में सर उठाये देख रही थी लुंड की रफ़्तार को ढकों के साथ अपन मुंह में लेते हुए… चावला साहब सर ऊपर उठाये संजना के मुंह में करता गया जैसे संजना के मुंह को छोड़ रहा था और बिल्कुल देर नहीं हुई जब चावला साहब ज़ोर से घुर्राटे हुए कांपते पैरों के साथ अपने लुंड को झट से हाथ से पाकर कर संजना के मुंह से निकालने hi वाला था के प्रेशर के साथ उनके वीर्य थोड़ा संजना के मुंह में बाकी बाहर उसस्के चेहरे पर, गर्दन पर, कांधों और बूब्स पर गिर्री और चावला साहब ने लुंड को हाथ में लिए जैसे मुठ मार रहा था बाकी के सारे पानी को संजना के जिस्म पर चोर्रा…. संजना उनको हेल्प करने लगी अपने हाथ से लुंड को सहलाते हुए…. ज़मीन पर थूका संजना ने जो वीर्य उसस्के मुंह के अंदर गए थे, और झड़ने के बाद चावला साहब ने फिर लुंड को संजना के मुंह के तरफ किया तो संजना ने लुंड को दोबारा मुंह में लेकर उस्सको छाती और चुस्सकार बाकी के वीर्य को ख़तम किया जबकि चावला साहब की तड़पती आवाज़ ने कमरे को भर दिया, “ाजगगगग, स्स्स्सस्शह्ह्हह्ह फहुउउउउउउ वहहाआआअह्ह्ह्ह” और हांफते हुए चावला साहब अपने पैरों को मुश्किल से संभाल रहे थे जबकि संजना उनके लुंड को चुस्ती जा रही थी सहलाते हुए, और एक हाथ से उनके बॉल पर फरते हुए, प्यार करते हुए….. ऐसा लग रहा था जैसे एक माँ अपने बचे को दर्द होने पर कैसे बहलाती है, आराम देती है उस तरह से संजना कर रही थी चावला साहब के लुंड को…..

बहोत आराम और सुकून मिला चावला साहब को…. उस्सने खुद नहीं सोचा था के सान्वी से दो बार पिछले 12 घंटों में करने के बाद वो इतनी जल्दी एक बार और झाड़ सकता है.. खुद पर फख्र महसूस किया चावला साहब ने.. और संजना को बाहों में लेकर ऊपर उठाया और कहा, “सॉरी बेबी आज तुमको खुश नहीं कर पाया मैं, मैं थोड़ा स्वार्थी हो गया अपने खुद के प्लेअसुरे को देखा… अब तो हो गया नाह मेरा…..

तो संजना ने उस्सको चूमते हुए कहा, “आप भी तो मुझे भी इसी तरह खुश कर सकते हो बिना इस्को मेरे अंदर डाले क्यों?!!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………(3000 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
थे वे शी ड्रेसेस हैवे बीन डेस्क्रिबेद मान्य टाइम्स इन मान्य उपदटेस, तेरे अरे व्होले उपदटेस रिगार्डिंग सान्वी एंड चावला only....could बे यू मिस्ड - एंड फॉर पास्ट 5 इयर्स हे हद बीन गिविंग हेर एंड एंड रेस्पेक्ट ओनली... सिम्स यू दो नॉट रीड आल उपदटेस वेल... ी हैवे रेपेटेड मान्य टाइम्स इन मान्य उपदटेस तहत थेइर रिलेशनशिप वास् तहत ऑफ़ रेस्पेक्ट टुवर्ड्स एच इतर....
 
अपडेट 83 संजना रेवेल्स थिंग्स तो चावला

तो संजना ने चावला साहब को सेक्सुअली खुश कर दिया मगर उस्सको वो संतुष्टि नहीं प्राप्त हुई थी ये चावला साहब को पता था क्यूंकि संजना ने तो चूस कर उनको झाड़ा दिया था मगर संजना के लिए कुछ भी इंतज़ाम नहीं हुआ के वो अपनी प्यास को मिटा पाते. तो इस लिए उस्सने खुद कहा चावला साहब से के जिस तरह से उस्सने उनको प्लीज किया उसी तरीके से उस्सको भी खुश किया जा सकता था बिना उसस्के अंदर पेनेत्रते किये… मगर चावला साहब ने उस बात को उतना एहमियत नहीं दिया, जैसे अनसुना किया उस बात को. और संजना ने अपने तरफ से दोबारा वो बात नहीं कही.

कुछ देर तक दोनों प्यार करते रहे एक दूजे को बाहों में भरे फिर कपडे पेहेन कर लाउन्ज में चले गए. संजना समझ गयी के चावला साहब ने उसस्के बात को नहीं समझा तो खुद उस बात को नज़र अंदाज़ कर दिया संजना ने भी.

और संजना सोच रही थी के किश तरह से चावला साहब को फिर से करने के लिए तैयार करें. कुछ इधर उधर के बातें किये दोनों ने, संजना की ड्राइविंग के बारे में भी बातें हुई और संजना ने अचानक याद किया के चावला साहब बहुत hi उत्तेजित हुए थे जिस दिन उस्सने अपने पिता से अपने सेक्सुअल सम्बन्ध के बारे में बात किया था तो संजना ने सोचा एक नाह एक दिन तो उनको सब सच बताना hi है तो क्यों आज नहीं….

तो कोई देर घंटे बाद संजना उनके बाहों में थी प्यार करते हुए लाउन्ज में सोफे पर बैठे हुए. संजना बल्कि लेती हुई थी उनके छाती पर, चावला साहब ने कमीज़ नहीं पहने हुए थे, सिर्फ उनके पंत था उनके ऊपर, संजना को उनके छाती पर रेस्ट करना बहोत पसंद था, वैसे सान्वी भी चावला साहब के छाती को पसंद करती है….

तो संजना ने कहा, “उस दिन जब मैं आप को मेरे और पापा के बारे में सब कुछ बता रही थी तो आप बहोत ज़्यादा उत्तेजित हुए थे नाह?”

चावला साहब ने जवाब में यह कहा, “अरे तुझ जैसे हॉट लड़की जब वैसे बातें सुनाये तो कौन उत्तेजित नहीं होगा भला? और फिर तुम अपनी बाली उम्र के बारे में बता रही थी और खुद अपने पिता से उस तरह से इश्क फरमाते हुए बता रही थी तो उत्तेजित तो किसी को होना hi था उस वक़्त.”

संजना ने कहा, “मुझे डर था के कहीं आप नाराज़ नाह हो जाये वो सब जान्ने के बाद, उल्टा आप तो बहोत खुश हुए थे और बात यह है के पापा भी बहोत खुश हुए थे जब उस से मैं ने आप के साथ सेक्स वाले बात को कहा था, किआ मर्दों को औरतों को दूसरे आदमी के साथ देख कर या सोच कर ज़्यादा मज़ा अत है? और हाँ उस दिन आप ने छुप कर मुझको पापा के साथ करते हुए भी देखे थे, तब भी आप बहोत hi उत्तेजित हुए थे है नाह?”

चावला सहा ने कहा, “हाँ कुछ मर्दों को जलन होती है, खून खराबा हो जाता है औरतों के लिए, और कुछ बहोत एन्जॉय करते हैं, कुछ मर्द तो ऐसे भी होते हैं जो खुद अपने वाइफ को या गर्लफ्रेंड को एक्सहिबित करने को कहते हैं, उनको बड़ा मज़ा अत है जब ग़ैर मर्द उनके वाइफ को वासना भरे नज़रों से देखते हैं, हर किस्सम के इंसान होते हैं और सब के अंदर अलग अलग तरीके के भावनाएं और चाहतें होते हैं… कई हस्बैंड्स तो अपने वाइव्स को शेयर भी करते हैं यह तो सुना होगा तुमने, इंटरनेट पर पढ़ा भी होगा तुमने पता है नाह?”

संजना ने मुस्कुराते हुए कहा “हम्म्म पता है…. आप ने भी तो मुझे शेयर किया खुद मेरे पापा से और अब अपने बेटे से भी हीहीहीहीहीही!!”

चावला साहब संजना को चूमते हुए कहा, “यह अलग बात है स्वीटहार्ट. हमको मजबूरन तुम्हारी शादी आरव से करना पर रहा है नाह? वैसे तुमको उसस्के साथ देख कर मुझको बिल्कुल जलन नहीं होगा.”

संजना ने कहा, “आप को मेरे पापा के साथ भी देख कर तो बिल्कुल जलन नहीं होता क्यों?”

चावला साहब ने थोड़ा सोचा और कहा, “हम्म क्यूंकि तुम पहले से hi उसस्के थे इसी लिए शायद.”

संजना बड़े होशियारी से अपने बात तक पहुँचने की कोशिश में थी उस्सको अच्छी तरह से पता था के वो किआ बात कर रही थी और कहाँ पहुंचना चाहती थी, इंटेलीजेंट और डेंजरस जो कह दिया था चावला साहब ने उस्सको, वो थोड़ा बहोत वैसी hi थी, सच में बहोत होशियार और चतुर थी संजना.#

तो अब संजना असली मुद्दे पर आयी यह पूछकर, “और अगर आप ने मुझे किसी और के साथ देखा या पता लगा आप को के मेरे साथ किसी और ने भी यह सब किया या करता है तब आप को जलन होगी या उतेजिना होगी?”

चावला साहब जो सोफे पर लेते हुए थे संजना को अपने छाती पर लिए हुए, तह बैठे उस्सकी बात को सुनकर. और संजना के चेहरे में देखते हुए आराम से पूछा, “ऐसा हुआ या होता है किआ? सच बता नाह! – कभी कभी मैं मैं में सोचता हूँ के तू इतनी हॉट और देसिरबले है और तुम्हारी जिस्म की गर्मी इतनी है के हो सकता है कोई और भी तुमसे यह सब करता है, मगर यह सिर्फ मेरे ख़याली बातें हैं, अब तू बता किआ सच में ऐसा है या तुम मुझको आज़मा रही है अभी?”

संजना ने अपने नज़ाकत वाली अदाओं में खड़े होकर एक दो कदम चलने के बाद एक अंगराई लेते हुए कहा, “पहले आप बताओ किआ आप को उतेजिना होगा, किआ आप एक्ससिटेड होंगे, किआ आप का मोटा शैतान उठ खड़ा होगा अगर मेरे साथ कोई और कुछ करता है तो?”

चावला साहब ने अपने पंत के अंदर अपने लिंग को सीधा करते हुए कहा, “देखो, यहाँ देखो तुम्हारा मोटा शैतान सिर्फ इतना सुनने के बाद hi मचलने लगा है अब अगर बताओगी अगर कुछ है तो यह शैतान तो बाहर उछाल के आएगा, बोलो बोलो बेबी किआ कोई और है किआ सच में?”

चावला साहब बहोत hi इंटरेस्टेड फील कर रहे थे और उनके उत्सुकता से तो संजना को एहि लग रहा था के उनको बहोत मज़ा आएगा अगर संजना ने कुछ ऐसा बताया खुद के बारे में किसी और के साथ…..

चावला साहब चल कर उसस्के पास गए और संजना को बाहों में भरके अपने लिंग को उसस्के नितम्बों पर दबाते हुए थोड़ा सा रगड़ा और उसस्के गर्दन के पीछे वाले हिस्से पर जीब फरते हुए कहा, “बोलो नाह बेबी, स्स्स्सस्शह्ह्ह्ह सुनाओ नाह कौन है और जो तुम से एन्जॉय करता है और तुम को खुश करता है कोई तो है, है नाह स्वीटहार्ट?”

तो संजना, मुड़कर उनने बाहों में उनके सामने होते हुए कहती है, “देखा आप उत्तजित ो रहे हो, मतलब अगर मेरा किसी और के साथ भी अफेयर होगा तो आप उत्तेजित honge…kyun सहीह है नाह?

चावला साहब ने कहा, “हम्म हाँ मेरी जान तुम चीज़ hi ऐसी हो, तू चीज़ बड़ी है मस्त मस्त तू चीज़ बड़ी है मस्त!! तुम एक ऐसी चीज़ हो जिस्सको शायद गॉड ने हम मर्दों को वो ख़ुशी देने के लिए बनाया है और तुझ में वो प्यार और अपनापन भर्र दिए के तुम किसी को भी खुश कार्डो चाहे वो कोई भी हो, और मज़े की बात यह है के कोई एक दूसरे से नहीं जले और किसी को भी तकलीफ नाह हो क्यूंकि एक दूसरे के समझ में आजाता है के तुम उस्सको, इस्को या किसी को खुश करने के लिए hi बनायी गयी हो…. मैं एक दिन तुम्मो तुम्हारे पापा के साथ, मेरे सात और आरव के साथ सोच रहा था तो ऐसे विचार आये थे मेरे मैं में के तुमो इसी लिए शायद क्रिएट किया होगा गॉड ने….

तो बे कॉन्टिनोएड इन नेक्स्ट पोस्ट …………….
 
अपडेट 84 संजना टेल्स समथिंग

तो संजना ने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई भी नहीं मैं तो मज़ाक कर रही हूँ!!”

चावला साहब ने कहा, “नहीं तुम मज़ाक नहीं का रही थी, मैं तुमको इतना तो पहचानता हूँ के तुम मज़ाक नहीं कर रही थी तुम्हारा किसी और के साथ कुछ नाह कुछ तो ज़रूर है अब बता भी दे नाह मुझे ख़ुशी होगी, और सच में मेरा जमके खड़ा हो गया है देख, ले छह कर देख नाह मुझे बहोत बेचैनी है जान्ने के लिए ी ऍम वैरी एक्ससिटेड हनी तेल्ल में आल!!”

संजना हस्ती जा रही थी मगर कुछ नहीं बता रही थी. चावला साहब बेताब थे सब सुनने के लिए और ज़ोर से संजना के निचे अपने मोठे तन्ने हुए लुंड को दबाते जा रहे थे, फिर कहा, “बोल नाह मेरी jaan…kaun है? या कितने हैं? उफ्फ्फ किआ एक दो से ज़्यादा हैं? हैं बाप रे बोल बोल नाह मैं ख़ुशी से पहले नहीं समां रहा हूँ बता नाह बेबी!!”

संजना ने अपने उँगलियों से दिखाया के 7 हैं!!! चावला साहब के ेंखें मोठे हुए और एक सांस लेते हुए कहा, सात? सात लोग हैं और जो तुमसे हमारे तरह इश्क करते हैं? कब? कहाँ? कैसे करते हैं?”

संजना ने कहा, “हम्म्म नहीं एक और है जिस को अभी अभी जाना है वो नई है तो 8 हुए सब मिलकर!!”

चावला साहब ने संजना को गॉड में उठाया और बैडरूम में लगाए, उस्सको बीएड पर बिठा कर कहा, “okay अब मुझको सब कुछ एक एक करके डिटेल में बता के कब और कैसे सब शुरू हुआ, और कौन कौन है और कब से? मुझको जान्ने से पहले या बाद में? किआ तुम्हारे पापा को पता है? किआ वो तुमको शेयर करता है? हँ? अरे बोल बोल नाह मैं पागल हो रहा हूँ देख यह शैतान खड़ा हो गया!!” और जल्दी से चावला साहब ने अपने पांत उतार दिए और बॉक्सर में बीएड पर बैठ गए अपने लुंड का फॉर्म संजना को दिखाते हुए.

संजना ने हीहीहीही करते हुए उनके लुंड को बॉक्सर के ऊपर hi करेस किया और उस्सने भी एक लम्बी सांस लेकर कहा, “मैं ने होनेस्त्ली आप को बोल दिया 8 हैं….. मैं सच बताने जा रही हूँ आप को. एक नाह एक दिन बताना hi था, अब अगर आप सब सुनकर नाराज़ हुए या आप को ग़ुस्सा आया तो?”

चावला साहब ने कहा, “बिल्कुल भी ग़ुस्सा नहीं आएगा डार्लिंग, मैं तो खुश हो रहा हूँ! मुझे खुद समझ में नहीं ारः के क्यों मुझे ख़ुशी हो रही है जब के मुझको ग़ुस्सा आना चाहिए था नाह? तो एहि बात है तुझ में जो किसी मर्द को तुम्हारे किसी और के साथ होने पर ग़ुस्सा नहीं उतेजिन्ह होता है, तुम हो hi ऐसी के शायद तुमको किसी 9तह या 10तह भी मिल गए तो भी शायद मुझको गुस्सा नहीं आएगा और मय्बे तुम्हारे पापा को भी ऐतराज़ नहीं होगी, पता नहीं किआ है तुझमें जो सेक्स को लेकर तुझपर ग़ुस्सा नहीं अत तुम बताओ नाह मेरी जान सब शुरू से बताओ प्लीज! और सुनों मैं भी अपने बारे में तुमको कुछ बताऊंगा मगर तुम्हारे बताने के बाद पहले तुम!”

संजना ने एक बहोत प्यारी मुस्कान के साथ उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “रियली? आप भी? किआ आप भी किसी और के साथ? हम्म्म? बोलिये नाह?”

चावला: “हाँ अभी अभी शुरू हुआ तुमसे शुरू होने के बाद, वार्ना मेरे ज़िन्दगी में कोई भी नहीं था, तुमसे यह सब करने लगा तो मुझे लगा के उस से भी शायद शामे हो सकता है और हुआ भी….”

संजना ने बड़े प्यार और कोमलता से पूछा, “कौन है? कब मिली? बोलो नाह?”

चावला साहब: “नाह, पहले तुम सब बताओ उसस्के बाद मैं सब बताउगा, मेरा तो सिर्फ एक है तुम्हारे तो 8 है तो तुम पहले बताओ…..”

तो संजना ने बता शुरू किआ इस तरह से:

“आप को याद है वो दिन जब आप आरहे थे कार में और मैं आप को बाहर वेट कर रही थी तो कुछ लोग बाइसिकल से गुज़रे थे आप के कार के पास और आप ने पूछा था वह लोग कौन थे?”

चावला साहब: “हाँ हाँ बिल्कुल याद है, तब मुझको तुमको लेकर जलन फील हो रही थी के कोई और तुम्हारे साथ कुछ करता तो नहीं…. मुझे कुछ शक हुआ था उसी वक़्त मगर तुमने कहा था के वो रघु और उसस्के साथी थे है नाह?”

संजना: “हाँ रघु hi था अप्पने चमचों के साथ”

चावला साहब: “तो किआ रघु? वो तुम्हारे साथ एन्जॉय करता है?”

संजना: “वेट वेट बताती हूँ नाह….. और आप को याद है उस दिन जब आप आये थे तो मैं ने दरवाज़ा खोलने को लेट आयी थी 10 मिनट के बाद? और आप पीछे के तरफ बाहर जाकर बाथरूम के इम्पोसट को बंद किया था?

चावला: “हाँ हाँ सब याद है उसी दिन मैं ने तुमको शूट किया है बाथरूम मैं, उस दिन मुझको थोड़ा शक हुआ था मगर फिर नज़र अंदाज़ कर दिया, तो किआ कोई था यहाँ तुम्हारे साथ? हम्म?”

संजना उनके ेंखों में प्यार से देखते हुए हाँ में सर हिलाया, फिर कहा,

“और उस दिन जब टेंट बनाना वाले टेंट बना रहे थे और सुपरवाइजर और कुछ आदमी अंदर आये थे घर में, तो आप बहोत ग़ुस्सा हो रहे थे के मैं ने क्यों उंनलोगों को अंदर आने दिया और क्यों मैं उस छोटी ड्रेस में उन् लोगों के पास बाहर गयी थी… याद है?”

चावला साहब: “हाँ उस दिन तो मुझे बिल्कुल लग रहा था के तुम जिस तरह ड्रेस थी तुम्हारे पुरे जांघें दिख रहे थे, तुम्हारे क्लीवेज भी बिल्कुल सामने थे, और इतने मर्द लोग सब की नज़रें तुम पर hi ठीके हुए थे तो मुझे बहोत शक हुआ था उस दिन को तो किआ तब भी?”

संजना ने फिर से हाँ में सर हिलाया.

चावला साहब उस मंज़र को याद करने लगे के किश तरह उन् लोगों के नज़र हर बार संजना पर ठीके रहते थे और कैसे उन्हों ने उस सुपरवाइजर से बात किये थे मगर उस्सने कुछ भी नहीं बताया था ….. और चावला साहब सोचने लगे उन् दो दिनों में एक दिन को तो वो बहोत hi लेट पहुंचा था यहाँ और एक दिन तो बिल्कुल भी नहीं आये थे तो संजना बिल्कुल अकेली थी उन् लोगों के बीच….. यह सब सोचकर चावला साहब का लुंड और भी फनफना गए….

और चावला साहब ने संजना को बाहों में भरके लम्बा वाला किश किया और संजना के हाथ को अपने बॉक्सर के ऊपर अपने लिंग पर रखे हुए किश जारी रखा, संजना को खूब चूमा और छाता उन्हों ने और संजना उनके लिंग को अपने कोमल हाथ से रगड़ती गयी काफी देर तक….

उसस्के बाद चावला साहब ने कहा, “अब बताना शुरू करो शुरू से, पहले दिन किश ने तुमको छुवा, किश किया, कैसे शुरू हुआ ेट्स सब पहले दिन से बताओ बेबी…..

संजना ने बताना शुरू किया,

“ये तब की बात है जी जब मैं कॉलेज जाती थी और पापा ने मेरे साथ करना शुरू कर दिया था. पापा के बिना मैं नहीं रह पाती थी. पीछे लेने लगे थे पापा मुझे. जब मैं सुबह कॉलेज जाती पापा के साथ और पापा कंपनी की बस में चले जाते तो मैं बस स्टॉप पर स्कूल की बस का वेट करती थी उन् दिनों रघु और एकांत नौजवान लोग मुझसे बस स्टॉप पर चेरर कहानी करते रहते थे… दिन बा दिन उन् जवानों की संख्या बढ़ते गए मेरे पास बस स्टॉप पर. क्यूंकि सब इसी गाओं के थे, सबको मैं जानती थी तो बुसस यूँही एकांत बात कर लेती थी. उन् में वो लड़का जो शराबी है जिस ने हमको कार में देखा था उस दिन, जिस्सके पूर्वजों का ज़मीन है वो भी एते थे मुझे चेररने को, और क्यूंकि उसस्के पास मोटरसाइकिल था वो तो कभी कभी बस को फॉलो करते हुए मेरे कॉलेज तक आजाते थे. क्यूंकि पापा को मेरे जांघें बहोत पसंद थे आप की तरह तो वो मेरे यूनिफार्म को काफी छोटी बनवाते थे जिस में मेरी जांघें खुद दिखे उस्सको बहोत पसंद था के मैं वैसे यूनिफार्म पहनूं. तो वो सब लड़के मेरे जांघ देखते थे और सब एक्साइट होते थे, उन् में से कुछ तो खुले आम बस स्टॉप पर कहते थे के मेरे जाँघों को देख कर सब मुठ मारते हैं और मुझको अपने लिंग को हाथ में पकड़ने को कहते थे. मैं उन् सब के बातों को अनसुना करती रहती थी.

और एक दिन उन् में से दो मेरे बस में चढ़े, और मेरे पास बैठे बुसस में और मेरे जाघों पर हाथ फ्री पुरे रास्ते…. अपने हाथ को अंदर तक किये मेरे पंतय तक…. क्यूंकि ड्रेस छोटे थे बैठने से ड्रेस और भी ऊपर हो जाते थे तो मेरी जांघें ज़्यादा नज़र आते तो उन् लोगों को बहोत ख़ुशी होती और सब बहोत उत्तेजित होते थे…. वो दोनों ने सब बात बाकी के दोस्तों को बता दिए के उन् लोगों ने मेरे जाघों को छुआ और पंतय भी…. तो बाकी के सब वही करना चाहते थे…. पता नहीं मैं क्यों उन् लोगों को रोकती नहीं थी शायद मुझे अच्छा लगता था जब वह लोग वैसा करते थे….

एक एक करके सब बस में गए मेरे साथ किसी दिन को एक, दूसे दिन को एक उसरा और तीसरे दिन को एक तीसरा… आपस में सब मेरे पीछे बात करते थे क ीक नाह एक दिन यह लोग मुझसे सेक्स करेंगे…. मैं तो पापा से करती थी तो मुझे सब पता था के यह लोग किआ चाहते हैं मुझसे…

मगर अस्सल बात तब शुरू हुई जब एक दिन पापा मुझे पहाड़ों पर घुमाने को लगाए थे. वो एक संडे का दिन था, और वहां पहुँचने पर बारिश होने लगे थे. हम दोनों बिल्कुल भीग गए थे. मैं एक छोटी स्कर्ट और ब्लाउज में थी. भीगने की वजह से मेरा ब्लाउज चिपक गए थे मेरे छाती पर और ब्रा और बूब्स दिखने लगे थे, तो पापा को करने का मैं किया… उसी जगह जहाँ पहले बार आप ने मुझे कार में किश किया था और एक बूढ़ा आदमी लड़की काट के वापस आरहे थे वही पापा मुझे बाहों में भरके किश कर रहे थे, मेरे स्कर्ट को ऊपर उठा के पंतय को निचे करके अपने लिंग को मेरे योनि के ऊपर रगड़ने लगे थे, मैं उस्सको बाहों में भरे किश कर रही थी और वो कमर हिलाते हुए रागढ रहे थे के रघु ने सब देख लिया. वो काफी देर से एक पेयर के निचे छुपा हुआ था बारिश से बचने के लिए और खड़ा होकर हम दोनों को कुछ देर से देख रहा था……

तो बे कॉन्टिनोएड………(3000 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 85 संजना कॉन्टिनुएस तो तेल्ल

वही पापा मुझे बाहों में भरके किश कर रहे थे, मेरे स्कर्ट को ऊपर उठा के पंतय को निचे करके अपने लिंग को मेरे योनि के ऊपर रगड़ने लगे थे, मैं उस्सको बाहों में भरे किश कर रही थी और वो कमर हिलाते हुए रागढ रहे थे के रघु ने सब देख लिया. वो काफी देर से एक पेयर के निचे छुपा हुआ था बारिश से बचने के लिए और खड़ा होकर हम दोनों को कुछ देर से देख रहा था……

अब आगे……….

संजना ये सब कुछ चावला साहब को सुनाते हुए उन् के चेहरे में देखती जा रही थी के कहीं उन् को बुरा तो नहीं लग रहा यह सब बातें सुनकर, मगर संजना ने देखा के चावला साहब का लिंग पंत में फुल साइज में आगये है तो वो समझ गयी के चावला साहब को सुनने में मज़ा ारः है तो उस्सने कंटिन्यू किया बताना…..

…. “और हम दोनों ने सोचा के उस बारिश में वैसे पहाड़ी इलाके में कोई भी नहीं होगा तो हम दोनों बेफिक्र होकर प्यार कर रहे थे, मेरी पंतय मेरे घुटनों के निचे फंसे हुए थे और पापा मेरे चुतरों पर हाथ दबा कर मेरे योनि के ऊपर रगाहड़ता जा रहा था और मैं ने अपने बाहों को उसस्के काँधे से करके उस्सको अपने आप पर दबाया हुआ था और उसस्के गले को चूस रही थी क्यूंकि मुझे भी मज़ा आने लगा tha…hum दोनों वैसे hi खड़े पोजीशन में hi थे सब करते हुए….. मगर जैसे hi पापा झड़े तो मुझको निचे बिठाया उस्सको चुस्सने के लिए झड़ने के बाद, मैं घुटनों के बल हो कर उसस्के लुंड को मुंह में लिए हुए चूस रही थी के अचानक रघु ने मेरे पीठ पीछे तालियां बजायी और कहा, ‘वह वह वह किआ सन है आनंद, अपनी बेटी को hi छोड़ रहे हो, अरे वह तुमको पता है मैं कब से इस्को देख के खड़ा हो जाता हूँ वह वह किआ बात है बहोत प्यार करती है संजना तुझको आनंद? ज़रा मुझको भी खुश करदे अब रानी!!’

जैसे उस्सकी तालियों को मैं ने सुना झट से पापा के लुंड को चोरर कर कड़ी हुई और अपनी पंतय को ऊपर खिंचा तब तक वो हम दोनों के करीब पहुँच गया था, बिल्कुल भीग गया था वो भी हमारी तरह और पापा के बोलती बंद हो गए थे वो कांपने लगे थे, और मैं भी थरथर कामने लगी थी एक तो बारिश की वजह से दूसरी रघु की मौजूदगी की वजह से….. मैं बहोत hi डर गयी थी और मैं पापा से लिपट के रोने लगी.

पापा ने मुझको रुकने को कहा यह कहकर के वो उस से बात करता है और मुझको वहीँ एक पेयर के निचे छुपने को कहा और वो रघु से बात करने लगा. मैं सब सुन्न रही थी. पापा ने उस से कहा, “रघु यह प्राइवेट बातें हैं इस बात को बाहर नहीं निकलना चाहिए बिल्कुल सुना तुमने? मेरे दोस्त हो नाह तो वादा करो के तुम किसी से भी कभी कुछ नहीं कहोगे सुना तुमने रघु?”

रघु ने कहा, “अरे हर बात की एक कीमत होती है यार, देख तेरी संजना पर मेरी किआ, हर नौजवान की नज़र हैं इस गाओं में, यह इतनी खूबसूरत और जवान हो गयी है के हर कोई इस्को छोड़ना चाहता है, मगर सब से पहले तू ने hi शुरू कर दिया, अब सोच तुझसे hi अगर नहीं रहा गया इस्सकी जवानी देख कर तो हम लोगों पर किआ बीत रही होगी, देख मुझे भी एक मौका देदे, देख यहाँ इस वक़्त हम तीनों के इलावा कोई नहीं; मैं भी तेरी तरह खड़ा खड़ा hi काम तमाम कर लूंगा बुसस एक बार मुझे भी मज़ा कर लेने ने फिर वादा है मेरा के यह बात यहीं के यहीं रहकर रह जाएगी…..” पापा ने ग़ुस्सा होते हुए उस से कहा, “अरे रघु वो कुंवारी है मैं ने सिर्फ ऊपर ऊपर रगड़ा है कुछ नहीं किया उस्सको…..” मैं रघु के तरफ देख रही थी और वो बार बार मुड़कर मुझको ऊपर से निचे देख रहा था पापा से बात करते वक़्त.. मेरी जांघें तो साफ़ दिख रहे थे ऊपर से ब्लाउज चिपकी हुई थी भीग कर, तो वो उत्तेजित हो गया था मुझे दिख रहा था, और मुझको पहले से hi पता था के वो मुझसे यह सब करना चाहता है क्यूंकि कॉलेज जाते वक़्त मुझको कितना चेररता रहता था अपने दोस्तों के साथ….

रघु ने पापा से कहा, “तो मैं भी सिर्फ रागढ के और चुम्मा छाती से hi काम चलूँगा न यार, इस में कौन सी बड़ी बात है, अरे तुझको चूस रही थी मुझको भी तो चुस्सके खुश कर सकती है, देख आसान डील है बुसस करने दे तो बात किसी को नहीं बताऊंगा, वार्ना सोचले छोटा सा गाओं है बात दो मिनट में फेल जाएगी और तू और संजना दोनों मुंह दिखने लायक नहीं रहोगे अगर मैं ने सिर्फ एक किसी को भी बता दिया to….aur भाई हर रात की तेरी दारू फ्री मेरे तरफ से आज के बाद, बोल डील अच्छी है के नहीं?!”

पापा और भी ज़्यादा कांपने लगे थे, मैं देख रही थी उसस्के दोनों पैर थरथर कांप रहे थे मुझको अफ़सोस हो रहा था पापा को उस हालत में देख कर, बारिश थमने का नाम नहीं ले रहा था और हम और भी ज़्यादा भीग रहे थे, बदल और बिजली भी कड़कते जा रहे थे मुझको डर भी लग रहा था…. और पापा लाचार होकर रघु को ठहरने को कहा और मेरे पास आया और कहा, “अब मैं किआ करूँ संजना? वो सबको बता देगा ऋ मैं किआ करूँ?!” तो मैं ने खुद पापा से कहा, “करने दो पापा, करने दो उससे मैं उस से बात करुँगी के पक्का वादा करे के अगर मैं ने उस्सको खुश किया तो वो कभी किसी को कुछ नहीं बताएगा, आप फ़िक्र मत करो मैं संभाल लुंगी उससे वो किसी को नहीं बोलेगा कुछ भी!”

तो पापा उसस्के पास जाकर उस्सको मेरे पास आने को कहा. रघु मेरे पास आया और मैं ने पापा से कहा, “आप उधर देखो पापा मुझको मत देखो मुझे बहोत शर्म आएगी अगर आप देखोगे तो….” पापा मूढ़ गया और रघु ने मुझको एक भूके जानवर की तरह लपेटा अपने बाहों में और एक जंगली की तरह मुझको हर जगह चाटने लगा और बहोत जल्द मेरी पैंटी को निचे करके मुझको घुमा के झुकने को कहा, मैं झुकी तो अपने लुंड को मेरे चुतरों पर दबा के रगड़ने लगा, फिर तुरंत मुझको वापस घुमाया और अपने लुंड को मेरे मुंह में डाला और कहा, ‘चूस, मज़े से चूस अपनी बाप को जैसे चूस रही थी वैसे hi चूस” मैं ने उस्सको मुंह में लिख्या और चुस्सने लगी… एकांत बार पापा के तरफ देख रहा था और देखा के पापा मुझको चूस्ते हुए देखने लगे…. रघु को चूस्ते वक़्त मेरे हाथ खुद बा खुद उसस्के कमर पर पहुंच गए और मैं जोश में आगयी और जैसे पापा को चुस्ती थी बिल्कुल वैसे hi मज़े से रघु को चुस्सने लगी और देखा के पापा ने अपने लुंड हाथ में लिए मुठ मारने लगा था मुझको देखते हुए…. रघु भी पापा को देख कर हंस रहा था…..

तब रघु निचे बैठकर मेरे पंतय को पूरा निकाल के निचे रख दिया और मेरे योनि पर अपना जीब फरने लगा और मैं कसमसाती गयी उसस्के सर के बालों को अपने मुठी में जाकर के, पापा को देखा तो वो ज़बरदस्त मुठ मार रहा था मुझको देखते हुए, रघु का एक हाथ ऊपर उठकर मेरे चूचियों को दबा रहा था, मस्सल रहा था पापा पागल होता जा रहा था मुठ मारते हुए और आखिर में रघु ने, मुझको उठाकर अपने गॉड में लिया और लुंड को मेरे निचे रगड़ने लगा बड़े ज़ोरों से… और जल्द hi वो झड़ने लगा और साथ साथ पापा भी मुठ मारते हुए हम दोनों को देखते हुए झाड़ गया…. झड़ने के बाद रघु ने उसस्के लुंड को फिर चाटने और चुस्सने को कहा जो मैं ने किया निचे बैठ कर और वो कहाँरते हुए चिलाय “वाह वाह कितना मज़ा है तेरे अंदर रे संजना मैं तुझको सोच कर मुठ मारा करता था कभी सोचा नहीं था के इतनी जल्दी इतनी छोटी उम्र में hi तुझको छोड़ पाउँगा वह वह रे मेरी किस्मत!! अहहहहहहाआआआआह!”

और मैं ने उस से वादा लिया के वो किसी को इस बारे में किसी को भी नहीं बताएगा तो उस्सने मेरे कान में धीरे से कहा, “कभी नहीं बताऊंगा मगर अब तो जब भी मुझको मैं करे करने देना okay?Jab तेरा बाप घर पे नहीं होगा तब आऊंगा okay यह बात पापा को भी मत बताना यह हमारा सीक्रेट होगा….” तो मैं ने उस्सको धीरे से कहा, “स्सश्ह चुप कर पापा सुनलेगा!!”

तो बे कॉन्टिनोएड…………..
 
अपडेट 86 संजना तेल्ल मच मोरे तो चावला

उसस्के बाद हम तीनों एक साथ वहां से निकले थे, रघु बार बार पापा के सामने मेरे पिछवाड़े पर हाथ फरते हुए जा रहा था, पापा से बात भी कर रहा था मगर पापा उस्सको कोई जवाब नहीं देता था. उसस्के दूकान के पास आगये तो पापा ने मुझको घर जाने को कहा और उसस्के साथ उसस्के दूकान में चला गया था पिने को.

मैं घर आकर नहाया और नहाते वक़्त रघु को सोच रही थी के किश तरह जोश में उस्सने मेरे साथ किया था…. पापा बड़े प्यार से करते थे, पापा से तो मैं प्यार करती थी, मगर वो पहली बार हुआ था के बिना किसी से प्यार किये मैं ने वो सब किया था तो उस में मुझे एक अलग और अजीब कशिश हुई थी और बार बार उसस्के करने के तरीके को सोच कर मुझजो कुछ होता था….

चावला साहब का लुंड जमके खड़ा हो गया था संजना के बातों को सुनते हुए और उस्सने अपने ज़िप खोला और संजना के हाथ को अपने लुंड पर किया और कहा, “इस्को सहलाते हुए बयां जारी रख, बोलती जा और सहलाती चल इस्को….”

संजना ने उनके लुंडको अपने मुलायम हाथ में लिया और उनके चेहरे में देखते हुए मुस्कुराकर पूछा, “आप को मज़ा ारः है नाह सुनने से? आप उत्तेजित हो रहे हो नाह? मेरे बारे में किसी और के साथ सेक्स करते हुए सुनकर आप को बहोत अच्छा लगता है नाह? हम्म बोलिये नाह जी!”

चावला साहब ने जवाब में कहा, “कौन उत्तेजित नहीं होगा एक जवान खूबसूरत लड़की के ज़ुबानी ऐसे बयां को सुनते हुए? कोई भी मर्द खड़ा हो जाएगा और तुमको छोड़ना चाहेगा, मगर तू बाकी सुना फिर तुझको मज़े से लेता हूँ अभी…..”

संजना ने बयान को जारी रखने से पहले सोचा, “अभी अभी तो झड़े हैं ये और मुझको प्लीज भी नहीं कर पाए थे, और अब मेरे यह सब बातें बताने से कह रहा है मुझको लेगा, मतलब साफ़ है के यह मुझको किसी और के साथ देख या सुनकर खड़ा हो जाता है इसी लिए पापा के साथ करने को देखना चाहते थे मुझे…. इस्सके यह एक फंतासी होगा मुझको किसी और के साथ देखने को मुझे लगता hai…main किसी से भी करूँ इनको ाचा लगेगा लगता है…..”

तो संजना ने बताना जारी किया “हाँ तो पापा मेरे साथ करते थे वो अलग तरह का करना होता था और जिस तरह से रघु ने किया था वो बहोत अलग था मेरे लिए… और वैसे मैं ने कभी भी नहीं सोचा था के किसी और के साथ वो सब करुँगी कभी, तो एक अजीब एहसास हुआ था रघु से करने के बाद… जीन दिनों को वो और उसस्के बाकी दोस्त मुझको चेररते थे कॉलेज जाते वक़्त तब मुझको बुसस फ्लिर्टिंग का मज़ा एन्जॉय करना होता था उन् लोगों के साथ इस लिए मैं ज़्यादा उन् लोगों से परेशान कभी भी नहीं होती थी, बुसस फ़्लर्ट समझ कर नज़र अन्द्दाज करती थी… जब वह लोग बुसस में मेरे जाँघों को छूटे थे तब कुछ होता था जैसे जब पहली बार पापा ने वहां छुआ था तो एक सेंसेशन होती है नाह वो होता ज़रूर था मगर वो सिर्फ 10 मिनट मेरे साथ होता था और जब वो लोग चले जाते और मैं कॉलेज पहुँच जाती तो सब ख़तम हो जाते हालां के एक बार तीन मेरे साथ बस में थे एक का हाथ करीब मेरे पंतय तक जा चुके थे उस रोज़ मैं कॉलेज की टॉयलेट में गयी तो देखा के गीली हो चुकी थी उन लोगों के छूने से…. फिर भी उस से ज़्यादा कुछ भी नहीं हुआ था कभी रघु के करने से पहले….

उस दिन को पापा रघु के यहाँ से पिने का बाद घर वापस आया तो मुझको बाँहों में लेकर बहोत रोया यह कहते हुए के उस्सने कभी नहीं सोचा था के मेरे जेईई पारी के साथ एक दिन ऐसा होगा, वो मुझसे माफ़ी मांग रहे थे मगर मैं नहीं रोई, मुझे रोना hi नहीं आया, क्यूंकि शायद मुझको तो अच्छा लगा था जिस तरह से रघु ने मेरे साथ किया था. तो मैं ने पापा को संभाला, चुप कराया और कहा के उस्सको माफ़ी मांगने की कोई ज़रुरत नहीं क्यों के उस में उस्का कोई दोष नहीं था, सब मेरे मर्ज़ी से हुआ था.

और उस रात को पापा ने बहोत ज़्यादा पिया, शाम को रघु के यहाँ फिर से पिने गया था और बहोत लेट वापस आये थे वो भी रघु खुद उस्सको थाम कर घर लाया था. रघु को घर के अंदर देख कर मेरे अंदर कुछ हुआ था, मेरे रौंदते खड़े हो गए थे और वो मुझको इशारे कर रहे था अपने लुंड पर हाथ को फरते हुए…. मेरे दिल के तार बजने लगे the…mujhko कुछ हो रहा था, पापा बिल्कुल बेहोश जैसे थे. रघु ने पापा को उसस्के कमरे के अंदर सुला दिया और मुझको पाकर के मेरे कमरे में लगाया और मैं आराम से चली गयी…..

वहां उस्सने जो मेरे साथ किया उस्का मज़ा कुछ और hi था.. वो बड़े जोश में करता है, बहोत पैशन है उस में सेक्स को लेकर और उस्सने मुझको पीछे लिया उस रात को, बड़ा ज़बर्दत मज़ा किया था उस रात को उस्सने मेरे साथ…. शुरू तो आहिस्ते से किया, मुझको बिल्कुल नंगी किया, मेरे बूब्स को चूसा, मेरे पुरे जिस्म को छठा, चूसा उस्सने, खुद बिल्कुल नंगा हो गया, उस्का लुंड पापा से ज़्यादा मोटा था, कुछ आप के इस मोठे शैतान जैसा है उस्का भी, मगर शायद आप की थोड़ा ज़्यादा मोटा है……”

जब संजना ने यह part कहा तो चावला साहब अपने लुंड को संजना के मुंह के तरफ किया तो संजना ने अपने मुंह में लेकर चावला साहब को चुस्सने लगी उनके चेहरे में उनकी ख़ुशी को महसूस करते हुए…..

मगर कुछ hi देर बाद चावला साहब का फिरसे नरम होने लगा, तो उस्सने अपने लिंग को संजना मुंह से निकला और हाथ में थमते हुए कहा, “जारी रख इस्को सहलाते हुए बोल रघु ने किआ किया उस रत को तेरे साथ आआह्ह्ह्ह!”

तो संजना ने बताया, “उस्सने मुझे निचे इस तरह से छठा और चूसा जैसे पापा ने कभी भी नहीं किया था, वो मेरे पंखुरियों के बीच जीब चला रहा था और उसस्के अंदर मेरे योनि की चढ़ में जीब घुसने की कोशिश में लगा हुआ था अपने जीब से hi… मैं सिसक जाती थी उस्सको रोकते हुए और वो बोलता, ‘अंदर लेने का तेरा मैं नहीं है किआ ऋ?’ मैं तड़पती हुई आवाज़ में उस्सको मन करती रहती….. और उस्सको अंदर डालने को इतना मैं था के मुझे खुद उस से कहना पड़ा के अगर अंदर डालना hi चाहता है तो पीछे डाले!! यह सुनकर उस्सकी ख़ुशी का इन्तहा नाह था और उस्सने मुझको पथ के बल बिस्तर पर घुमा के वो अंदर घुसाया के मैं चिल्ला उठी थी और इतना कसके ढके दिए थे मेरे ासशोले के अंदर के लगा था के फाड़ डालेगा मुझको वहां.. बहोत एन्जॉय किया था उस्सने मेरे साथ….. दो बार किया था उस्सने सुबह के 3 बजे तक मेरे बिस्तर पर था और बहोत खुश होकर सुबह के सादे तीन बजे वापस गया था…..

वो पहला ग़ैर मर्द था जिसस्ने मेरे बीएड पर मेरे साथ रात गुज़ारे थे साहब, अगर आप को बुरा लगे तो मुझे माफ़ करना मुझे आप को सच बताना था सो बता दिया….”

चावला साहब ने आराम से सब सुना और कहा, “और बाकी के 7 लोगों के साथ कब और कैसे हुआ वो सब भी तो बताना है तुझे अभी!!”

तो बे कॉन्टिनोएड…………….
 
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