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अब तक आपने पढ़ा की भुविका और बिल्जेबब के स्पिरिट्स आपस में जुड़ जाते हैं वहीँ विक्रम और अवंतिका के बीच की दूरी भी ख़त्म हो जाती है...
अब आगे:-
CHAPTER-2
( कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन )
अपडेट- 83
PLANET-EARTH
प्लेस- मीनाक्षी मेन्शन
गुड इवनिंग AUNTY...GOOD इवनिंग अंकल....
V/MOM-aao आओ बचो बैठो......
विक्रम की माँ और डैड ने अवंतिका शनाया और उनके साथ आये उनके दोनों भाइयों के जेस्चर का जवाब देने के बाद कहा....
शाम का वक़्त hai.....VIKRAM ने अपने माँ डैड को बता दिया था की अवंतिका शनाया भी हमारे साथ आने वाले हैं और उनके साथ उनके दो भाई भी होंगे....
और मेरे दोनों दोस्त तोह थे hi....
विक्रम & पार्टी स्विट्ज़रलैंड के लिए कल निकलने वाले हैं....
मेरी माँ ने जाने से पहले मुझसे एक बार अवंतिका के दोनों भाईओं को घर लाने को कहा ताकि वो दोनों भी सब से मिल लें और हॉलिडे में जाने से पहले hi सबसे कम्फर्टबले हो जाएँ....
और इसीलिए मैंने रियांश और देवांश को घर बुला लिया....
रियांश और देवांश दोनों hi जानते थे की मेरे डैड इंडिया के लीडिंग इंडस्ट्रियलिस्ट में से एक हैं इसीलिए दोनों थोड़ा नर्वस थे..
और ये बात मैंने डैड को धीरे से बता दी...
डैड- so,we हैवे तवो फेसेस इन आवर हाउस टुडे हाँ......
रियांश- hello sir..i'am रियांश & हे इस माय बरोथेर देवांश.....
देवांश- hello सर....
रियांश- sir,i मस्ट say,it's ा हूजे ऑनर तो सीट इन्फ्रोन्ट ऑफ़ ु....
ये बात रियांश ने सिर्फ किसी औपचारिकता की वजह से नहीं कही thi...he मैंट व्हाट हे साइड.....
और ये उसकी आँखों में देखा जा सकता tha...waise तोह मेरी खुद की हक़ीक़त बोहोत बड़ी है....
ग्लूटो में मेरी पहचान की एक छोटो सी झलक देख कर सबने कैसे रियेक्ट किया tha,ye तोह आप सबको पता hi है पर जब कोई मेरे डैड की तारीफ़ करता है या उनके आगे रेस्पेक्ट से झुकता hai,toh जो फीलिंग मेरे दिल में आती है उससे मई शब्दों में बयां नहीं कर सकता....
और वो ईसीए क्यूंकि मेरी पहचान मेरे जन्म से पहले hi सुनिश्चित हो चुकी थी पर मेरे डैड ने अपनी पहचान खुद बनायीं है..
एक ऐसी पहचान जिसके आगे हर कोई झुकता है, मई भी....
डैड- दो ु वर्क फॉर में????
डैड ने ये बात थोड़ी कड़क आवाज़ में बोली थी जिससे सुनकर रियांश और देवांश जो पहले से hi डैड को अपने सामने देख कर थोड़े नर्वस the,wo और नर्वस हो गए....
डैड- मैंने पूछा की क्या तुम दोनों मेरे लिए काम करते हो????
RIYANSH/DEVANSH- no सर.....
डैड- तोह ये सर सर क्या लगा रखा है yaar...mere बच्चों के फ्रंज ho,toh मेरे लिए भी मेरे बचे की hi तरह हुए ना...
अंकल बुलाओ एंड जस्ट relax....isse अपना hi घर समझो...
डैड की बात सुनकर रियांश और देवांश थोड़ा रिलैक्स हो गए....
अरे waah,aaj सारे बच्चे घर par..kis बात की मीटिंग चल रही है भाई.....???
अभी हममे से कोई कुछ कहता उससे पहले hi ये आवाज़ हमारे पीछे से आयी जो की मेरे नानू की थी....
नानू को आता देख हम सब खड़े हो gaye.....afterall हेड ऑफ़ थे फॅमिली जो थे....
RIYANSH,DEVANSH,SHANAYA,AVANTIKA ने नानू के पेअर chue..naanu ने चारों के सर पर हाथ रख उन्हें ब्लेस्सिंग्स दी...
नानाजी- इन दोनों बच्चियों को तोह मई जानता हूँ पर ये दो नौजवानो को पहली बार देख रहा हूँ...
अवंतिका- naanu,ye हमारे भाई हैं....
नानाजी- ाचा ाचा....
अवंतिका के मुँह से नानू सुन कर मुझे बोहोत ाचा laga.aur फीलिंग सिर्फ मेरे मन में hi नहीं जाएगी thi,AVANTIKA को भी ऐसा बोलते वक़्त एक अलग hi एहसास ने छुआ था....
नानाजी- वैसे अभी शाम के वक़्त सभी बचे घर par....kahin घूमने नहीं गए तुम लोग!!!!
मई- नानू वो कल हम सब हॉलिडे पर जा रहे हैं naa,RIYANSH और देवांश भी हमारे साथ जा रहे hai....toh माँ ने कहा था की एक बार इनको घर ले आऊं....
नानाजी- ाचा किया beta.....beta हमे भी अपने घरवाले hi samjhnaa...koi भी बात बोलने में बिलकुल भी नहीं हिचकना....
रियांश- जी नानाजी.....
डैड- papa,aapki पैकिंग हो गयी...
नानाजी- हाँ वो तुम्हारी मम्मी कर रही हैं..
रोनित- naanu,aap एक्ससिटेड तोह हैं ना इस हॉलिडे के लिए.....
नानाजी- ारे मई तोह तुम सब से ज़्यादा एक्ससिटेड hun....ek तोह पहली बार विदेश जा रहा हूँ और उसके ऊपर मेरे दोनों बच्चों की शादी की सालगिरा है....
dekhna,sabse ज़्यादा तोह मई hi नाचूंगा...
नानाजी की बात सुनकर हम सब है दिए वहीँ माँ और डैड ने नानू को साइड से हुग कर लिया....
भैया..........
हम सब है hi रहे तह की इतने में हमारे कानो में ये आवाज़ आयी..
ये और कोई नहीं ाशी थी जो कोमल के साथ बाहर खेल रही थी और अभी अभी अंदर आयी थी...
जिस दिन से मैंने ाशी को समझाया tha,us दिन एक बाद से वो कभी नहीं रोई और अब वो हमेशा खुश hi रहती है...
और जैसे बचे ज़िद करते hain,thik वैसी hi ज़िद अब मेरी ाशी भी करती थी....
इनफैक्ट उसके और कोमल के बीच ज़िद के नाम पे हमेशा कम्पटीशन लगी रहती thi....par उनकी हर ज़िद उन्हें और भी प्यारा बना देती थी....
khair,mera नाम लेते हुए ाशी दौड़ कर आयी और मेरी गोद में कूद gayi..maine भी उससे पकड़ लिया....
वहीँ उसके साथ आ रही कोमल ने जब ये देखा तोह वो भी दौड़ते हु आयी और उसने भी ाशी की hi तरह मेरे ऊपर छलांग लगा दी...
मैंने उससे भी गोद में उठा लिया.....
मई दोनों के साथ मस्ती करने में लग गया वहीँ मेरे घर वालों की मेरे दोस्तों के साथ कुछ देर तक बात होती रही......
रोनित- चलो yaaron,kahin घूम कर आते हैं....
मई- यार ये दोनों मुझे नहीं छोड़ेंगी.....
अंजलि- ारे पास के hi कफ हाउस में चलते हैं naa...bacchon को भी साथ ले चलते hain,ye वहां आइसक्रीम खा लेंगी...
अंजलि की आइसक्रीम की बात सुनके कोमल और ाशी ने आइसक्रीम की रत लगनी शुरू कर दी....
माँ ने भी हमे उसी कफ शॉप में जाने को कहा....
मेरे सारे फ्रंज naanu,mom और डैड से बारी बारी mile...dad ने सबको सुबह 10 बजे तक यहीं घर पर आने के लिए कह दिया....
हम सब कफ हाउस के लिए निकले जहाँ दोनों बच्चियां आइस क्रीम खाने में बिजी हो gayin..hum लड़के मिलकर िपद में हमारे स्विट्ज़रलैंड में रुकने वाले होटल और अर्रंगेमेन्ट्स की बात में लग गए वहीँ तीनो गर्ल्स अपने गॉसिप में मशगूल हो गए...
कुछ देर बाद हम सब एक दूसरे को कल मिलने का कह अपने अपने घर निकल गए....
फिर कुछ ख़ास नहीं hua...next डे प्लान के मुताबिक अवंतिका & पार्टी सुबह 10 बजे से पहले hi मेरे घर पहुँच गए...
हम सब तोह रेडिठे hi....AVANTIKA & पार्टी रोनित और अनजालि के पेरेंट्स से मिले और उनके साथ भी काफी जल्दी कम्फर्टेबले हो गए...
हम सब अलग अलग कार्स से एयरपोर्ट के लिए निकल gaye...SHANAYA हमारे प्लेन को देखने और उसमे सफर करने क लिए कुछ ज़्यादा hi एक्ससिटेड थी...
उनमे से किसी ने भी आज तक किसी चार्टर्ड प्लेन में सैर नहीं की थी...
और जब एयरफील्ड में कड़ी हुई हमारी प्लेन पर उन सब की नज़र गयी तोह वो सब और ज़्यादा एक्ससिटेड और खुश हो गए.....
हम सब हसी ख़ुशी मस्ती करते हुए प्लेन में बैठ गए और हमारे बैठते hi हमारी प्लेन ने टेक ऑफ कर लिया.......
अब बस 10 घंटे का सफर बाकी रह गया था हमे स्विट्ज़रलैंड के शहर जुरिक में लैंड करने के लिए....
चलिए जब तक हमारे हीरो & पार्टी जुरिक pahunche,hum कहीं और से घूम आते हैं...
प्लेनेट- एलोप्टुस
प्लेस- स्टॉर्मी डेजर्ट
YELUPTUS........ek.banzar PLANET.....naa hawa,aur नाही paani....har तरफ रथ hi रथ और उसी रथ का एक अज्ञात गैस के ज़रिये उठता हुआ बवंडर..
सूरज की धीमी सी रौशनी जो की किसी और गृह के उजाले के लिए thi,us ग्रह से होता हुआ उस सूर्य का एक बारीक सा प्रकाश एलोप्टुस गृह पर पढ़ रहा था....
जिससे यहाँ के भयावह माहौल को देखा जा सकता tha...par ऐसे वीरान गृह में जहाँ किसी कीड़े तक का वास नहीं hai,wahan हम कर क्या रहे हैं...?????
अरे ये kya???????is बवंडर भरे रेगिस्तान में ये दो साये कौन hain.....chaliye, पास से देखते हैं.....
अरे ये दोनों तोह........
भुविका और बिल्जेबब हैं....
पर ये यहाँ कर क्या रहे हैं????
अच्छाआ याद aaya.....ASMODEUS ने बिल्जेबब से भुविका को किसी शांत जगह ले जाने को कहा tha,aur बिल्जेबब ने ये जगह चुनी hai....par ये जगह hi kyun????aayiye बिल्जेबब की ज़ुबानी hi सुन लेते हैं....
बिल्जेबब- एलोप्टुस में तुम्हारा स्वागत है भुविका.......
भुविका ने कुछ कहा नहीं बस इधर उधर देखती rahi...uske मन भी यही ख्याल आ रहा था बिल्जेबब उससे यहीं क्यों लाया है....
बिल्जेबब- यही सोच रही हो ना की मई तुम्हे यहाँ क्यों लाया हूँ????
बिल्जेबब की बात सुनकर भुविका चौंक गयी....
भुविका- तुम्हे कैसे पता की मई क्या सोच रही हूँ???
बिल्जेबब- तुम भूल रही हो की हम दोनों के स्पिरिट्स अब जुड़ गए हैं... इसीलिए मई तुम्हारी सोच पढ़ सकता हूँ..
भुविका- पर मई तोह तुम्हारी सोच नहीं पढ़ पा रही हूँ???
बिल्जेबब- क्यूंकि अभी तुम्हारी शक्तियों पर तुम्हारा नियंत्रण नहीं आया है....
और इसीलिए hi हम यहाँ आये hain...isse अछि जगह तुम्हे अपनी शक्तिओं को नियंत्रित करने के लिए नहीं मिलेगी...
और ना hi परीक्षा देने के लिए इससे बेहतर कोई स्थान है...
भुविका- pariksha!!!!Kaisi परीक्षा????
बिल्जेबब- अपनी शकितयों की हदों को पेहचानने और उससे और निखारने की pariksha....haan,ye सत्य है की इस वक़्त तुम्हारे अंदर दो शक्तिशाली डेविल्स की ऊर्जा है और उसके साथ मेरी शक्तियां और ज़िन्दगी भर मेरे सीखे गए विद्याएं भी तुम्हारे मस्तिष्क के किसी कोने में दफ़न है...
किन्तु एक सत्य ये भी है की तुम्हारा जन्म मनुष्य योनि में हुआ hai...aur इसिलए मेरी शक्तियों को अपनी शक्ति बनाना तुम्हारे लिए या ये कहूं तुम्हारे शहर के लिए आसान नहीं है....
पर ये नामुमकिन भी नहीं bai..aur ये जगह इस मुश्किल काम को तुम्हरे लिए आसान करने के लिए रास्ता भी बनाएगी और साथ साथ कुछ रोड भी अटकाएगी जिससे तुम्हे पार करना है....
भुविका- जब ये जगह मेरी मदद करने वाली है तोह फिर रोड क्यों अटकाएगी??? और वैसे ये जगह है kya????tumne मुझे अब तक ये भी नहीं बताया की ये जगह hi तुमने क्यों चुनी!!!!?????
बिल्जेबब- तुमने अक्सर सुना होगा की बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न ho,ant में आचायी की hi जीत होती hai....par ये जगह उस बुराई का प्रतीक है जिसके सामने आचायी ने अपने घुटने तक दिए थे......
भुविका- मतलब!!!!!!
बिल्जेबब- जिस बंज़र गृह में हम खड़े hain,kisi ज़माने में ये एक हरा भरा जीवन से भरा हुआ गृह था...
पर यहाँ की आबादी ज़्यादा नहीं thi...kul 200 लोग इस गृह में रहते थे...
भुविका- बस 200....!!!!
BEELZEBUB-yahan के गृह वासी कोई साधारण मनुष्य नहीं the...wo बोहोत अलग the...aur सबसे मज़ेदार बात ये थी की उन 200 लोगों के नाम नहीं the,bas पहचान थी और उसी पहचान से पूरा ब्रम्हांड ना सिर्फ उन्हें जानता tha,balki उनके सम्मान में झुकता भी था...
भुविका- अजीब बात hai...bina नाम के manushya...waise उनमे ऐसी क्या विशेषता थी जिसके आगे पूरा ब्रम्हांड झुकता था...
BEELZEBUB-unki पहचान hi उनकी विशेषता thi...un 200 लोगों के समूह को समय संचालक के नाम से जाना जाता tha....aur यही नाम उनकी पहचान भी थी...
भुविका- समय संचालक!!!!! क्या वो समय की गति को आगे पीछे कर सकते थे?????
बिल्जेबब- शायद!!!!
भुविका- शायद मतलब!!! तुम्हे नहीं पता!!???
बिल्जेबब- nahi...mujhe kya,kisi को भी नहीं pata...ye सब मेरे जन्म से हज़ारों साल पहले की बात है....
मुझे बस इतना पता है की वो समय संचालक अच्छाई के प्रतिक the.....aur बेहद शक्तिशाली भी...
भुविका- फिर उन्हें किसने मारा.....?????
बिल्जेबब ने कुछ कहा नहीं बस भुविका की तरफ देख कर muskuraya...aur बिल्जेबब के मुस्कान से भुविका को उसके सवाल का जवाब भी मिल गया...
भुविका- तुम्हारे फादर ने!!!!!!
बिल्जेबब- haan....par फादर ने उन्हें मारा nahi,balki उनकी आत्माओं को कैद कर लिया...
BHUVIKA-aatmaon को कैद कर लिया matlab????fir उन समय संचालकों के शरीर कहाँ गए.....
बिल्जेबब- तुम उनके ऊपर कड़ी हो?????
बिल्जेबब की बात सुन भुविका को एक तेज़ झटका लगा....
भुविका- मई तोह रथ पर कड़ी hun???kya उन सब के शरीर रथ में बदल गए???
बिल्जेबब- nahi...is ज़मीं के नीचे इस गृह की नीव में उन सभी के शरीर दफ़न hain....aur इसी वजह से hi आज भी ये गृह बचा हुआ है वर्ण कबका फैट चूका होता....
और उन शरीरों में अब भी वाइट और ब्लैक ऊर्जा काफी मात्रा में भरी हुई hai.aur जब तुम यहाँ ध्यान लगाने के लिए baithogi,tab एक तरफ वही ब्लैक ऊर्जा तुम्हे मेरी शक्तियों और सिद्धियों को तुम्हारे मस्तिष्क के भीतर ढूंढ़ने में मदद करेंगी वहीँ वाइट ऊर्जा तुम्हे अपनी मंज़िल तक पहुँचने से रोकेंगी.....
भुविका- adbhudh.....par मुझे एक बात batao,tumari बातों से पता चलता है की यहाँ जो लोग रहते the,unke अंदर जो भी शक्ति thi,wo उन्हें वाइट एनर्जी से मिली थी पर तुम कह रहे हो की उनके अंदर ब्लैक एनर्जी भी hai...toh वो उनके अंदर कहाँ से आयी.....
बिल्जेबब- मुझे पूरा सच तोह नहीं पता पर जितना पता है उतना बता देता हूँ....
फादर को उन समय संचालको से कुछ चाहिए था जो उन लोगों ने फादर को देने से मन कर दिया...
फादर ने बल पूर्वक उस चीज़ को उन समय संचालको से छीनने की भी कोशिश की पर नाकामियाब रहे...
ये जानकार की ास्मोडियस को कुछ चाहिए था पर वो उससे हासिल करने में नाकामियाब raha,ye जानकार भुविका को शॉक लगा...
अपनी बेहेन और मैडोक्स की शक्तियों को पाने के बाद भुविका को ास्मोडियस की शक्तियों के बारे me,jitna निष्कलिका और मैडोक्स जानते the,utna पता चल गया था..
और उसी आधार पर बिल्जेबब की बात उससे हज़म नहीं हो पा रही थी....
भुविका- समय संचालक तुम्हारे फादर से भी ज़्यादा शक्तिशाली थे..
बिल्जेबब- मेरे फादर से शक्तिशाली कोई भी नहीं hai...agar ऐसा कुछ होता तोह मेरे फादर उन समय संचालको को कैद नहीं कर पाते....
भुविका- समय संचालकों को तुम्हारे फादर ने कैद क्यों kiya,unhe तोह उन सब को मार देना चाहिए था...
बिल्जेबब- यही बात मैंने भी अपने पितः से पूछी thi,tab उन्होंने मुझे बस यही बताया था की जो चीज़ उन्हें समय संचालकों से हासिल की hai,agar वो उन सब को मार देंगे तोह वो चीज़ भी नष्ट हो जाएगी....
भुविका- oh.....par तुम्हारे फादर ने उन सब की आत्माओं को कैद कैसे किया???
बिल्जेबब- फादर ये जानते थे की बल पूर्वक वो समय संचालकों को मार नहीं पाएंगे...
इसीलिए उन्होंने छल का इस्तेमाल kiya..SAMAY संचालक हमेशा ध्यान की मुद्रा ने बैठे रहते थे..
एक दिन समय संचालकों को अपने गृह के वायु मंडल के बाहर कुछ धमाके सुनाई दिए....
और ये धमाके कुछ कुछ देर के बाद लगातार हो रहे थे...
इन धमाकों से इस गृह को कुछ नुक्सान तोह नहीं हो रहा tha,par धमाकों के आवाज़ से उनका ध्यान भांग होने लगा.....
उन धमाकों का कारण जानने के लिए उन में से कुछ संचालकों ने वायु मंडल से बहार जाने की बात कही...
पर क्यूंकि उनमे से किसीको भी गॉड से ऐसा करने की इजाज़त नहीं thi,isiliye बाकियों ने मन कर दिया...
और वो सब पुनः अपना मन एकाग्रित कर ध्यान में बैठ गए...
पर उन धमाकों की आवाज़ों की वजह से वो ठीक से ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे थे.....
और गृह के अंदर से वो ना hi इस परेशानी की वजह जान पा रहे the,naa hi उससे ठीक कर पा रहे थे....
अन्तः उनमे से कुछ संचालकों को अपने गृह के वायु मंडल से बाहर जाना hi पड़ा.....
गॉड को छोड़कर बस मेरे फादर hi ऐसे थे जो ये जानते थे की एलोप्टुस के बाहर समय संचालकों को मारा जा सकता है.....
पर वो ये भी जानते थे की समय संचालकों के मरते hi जिस चीज़ को वो हासिल करना चाहते hain,wo नष्ट हो जाएगा....
इसीलिए उन्होंने एक दूसरी युक्ति सोच कर राखी थी...
समय संचालक अपने गृह के सीमा को पार कर बाहर आये और उन्होंने देखा की अंतरिक्ष क बीच hi लगातार रूक रूक कर लगातार कारण भेदी धमाके होते जा रहे हैं...
धमाकों की आवाज़ से तंग आकर उन्होंने उससे रोकने के लिए स्पेल बोलै और यहीं वो धोका खा गए.....
उन्हें पहले धमाकों के होने का कारण जान लेना चाहिए tha,par आवाज़ की तीव्रता की वजह से उन्होंने बिना कारण जाने स्पेल बोल दिया था...
और जैसे hi समय संचालक के बोले गए स्पेल की वजह से रे निकल कर उन धमाकों पर padi,un धमाकों से भी एक रे निकली और उस रे ने समय संचालकों के रे को जकड लिया....
और ऐसा होते hi उस रे का श्रोत जो की समय संचालक the,wo भी धमाकों से उज्वलित हुए रे में बांध गए...
उन्होंने बोहोत कोशिश की पर वो छूट नहीं पाए...
पर इसके साथ एक चीज़ और भी हुई thi...darasal सारे समय संचालक एक दूसरे से जुड़े हुए थे....
और जैसे hi अंतरिख में आये हुए समय संचालक उन धमाकों से निकलिए रेज़ में fasen,neeche गृह के बाकी के सारे संचालकों के शरीर भी हवा में उठकर ऊपर की तरफ जाने लगे..
उन सब ने बोहोत कोशिश की की वो और ऊपर ना जाएँ पर वो सब कुछ कर ना पाए..
और वो सब ये भी जान गए थे की अंतरिक्ष में गए उनके साथियों के साथ कुछ गलत हुआ है और उसी वजह से उनके साथ भी ये अब हो रहा है..
कुछ hi देर में सारे समय संचालक अंतरिक्ष में the...antariksh में आते hi सभी संचालकों के शरीर भी रेज़ से बांध गए...
वो सब अपने बंधन से निजात पाने की बोहोत कोशिश कर रहे थे पर वो कामियाब नहीं हुए....
तभी......
उनके सामने एक तेज़ रौशनी हुई और उस रौशनी के बीच मेरे फादर प्रकट हुए....
मेरे फादर को देखते hi सारे संचालक समझ गए की ये सब उनका hi किया धरा है.....
समय संचालक मेरे फादर को उकसाने के लिए उन्हें भला बुरा कहने lage..wo चाहते थे की मेरे फादर क्रोध में आकर उन्हें मार दें क्यूंकि ऐसा करते hi जिस चीज़ की चाह मेरे फादर को thi,wo भी नष्ट हो जाती....
पर मेरे फादर उन सब के मंजूबो से अवगत the..par इसके बावजूद उनके सामने एक और परेशानी थी....
और वो ये की एलोप्टुस की नीव hi उन समय संचालकों के शक्तियों से राखी गयी है....
इसीलिए वो उन सब को अपने साथ बंदी बनाकर भी नहीं ले जा सकते थे...
पर वो समय संचालकों को वापस एलोप्टुस में भी नहीं छोड़ सकते थे...
क्यूंकि एलोप्टुस में जाते hi समय संचालकों की शक्ति फिर से बढ़ जाती और मेरे फादर ने जिस चीज़ के लिए इतना कुछ खेल रचा tha,wo उससे वापस अपने पास बुला लेते...
और वो चीज़ तोह थी hi समय संचालकों की amanat..unke बुलाते hi वो वापस आ जाती....
भुविका- और इसीलिए उन्होंने एक युक्ति sochi....aur वो ये की समय संचालकों के शरीर को उनकी शक्ति सहित एलोप्टुस के नीव में दफना दिया जाए..
और उन सब की स्पिरिट्स को अपने साथ ले जाय jaaye...kyunki आत्मा बिना शरीर के रह सकती है पर शरीर बिना आत्मा के नहीं रह sakta....HAINA !!!!
भुविका ने बिल्जेबब की आगे की बात पूरी की....
बिल्जेबब- haan...par उससे पहले फादर एलोप्टुस गए और उस चीज़ को जिससे हासिल करने के लिए उन्होंने इतना कुछ किया tha,usse लिया और वापस समय संचालकों के सामने आ गए...
उसके बाद फादर ने समय संचालकों के शरीर से उनकी आत्मा को अलग कर diya...aatma के अलग होते hi शरीर का कोई मोल नहीं raha...sabhi संचालकों के शरीर अंतरिक्ष में तैरने लगे...
फिर फादर ने उन आत्माओ से उनकी साड़ी शक्ति उनके शरीरों में स्थानांतरण कर दी....
पर साथ साथ उन सब के शरीर में कुछ काली शक्तियां भी भेज दी जिससे संचालकों के स्पिरिट्स अगर चाहें तोह भी अपने शरीर का पता नहीं लगा पाते....
फिर फादर ने सभी संचालकों के शरीर इस गृह के नीव में दफना दिए...
पर जैसे शरीर को शरीर उसकी आत्मा बनती hai,thik उसी तरह एक गृह को भी गृह हवा और पानी बनाते हैं...
इस तर्क पर जैसे hi बिना आत्मा के सारे संचालकों के शरीर दफ़न hue,thik उसी वक़्त इस गृह की आत्मा ने भी इससे छोड़ दिया...
और ये गृह ऐसा बन gaya...BANZAR.......
भुविका- इतना खतरनाक dimag,itni दूरदर्शिता के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता....
वाकई तुम्हारे फादर जैसा कोई नहीं.....
वैसे तुमने एक बात अभी भी नहीं batayi...un समय संचालकों के स्पिरिट्स का क्या hua???tumhare फादर उन्हें कहा ले गए...
बिल्जेबब- फादर ने उन सब को रखने के लिए एक अलग गृह का निर्माण किया....
भुविका- एक अलग गृह kaa!!!!abhudh.....koi नाम है उस गृह का????
बिल्जेबब- शैडो वर्ल्ड.....
आज के लिए इतना HI.....
आपका अपना V...J.....
अब आगे:-
CHAPTER-2
( कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन )
अपडेट- 83
PLANET-EARTH
प्लेस- मीनाक्षी मेन्शन
गुड इवनिंग AUNTY...GOOD इवनिंग अंकल....
V/MOM-aao आओ बचो बैठो......
विक्रम की माँ और डैड ने अवंतिका शनाया और उनके साथ आये उनके दोनों भाइयों के जेस्चर का जवाब देने के बाद कहा....
शाम का वक़्त hai.....VIKRAM ने अपने माँ डैड को बता दिया था की अवंतिका शनाया भी हमारे साथ आने वाले हैं और उनके साथ उनके दो भाई भी होंगे....
और मेरे दोनों दोस्त तोह थे hi....
विक्रम & पार्टी स्विट्ज़रलैंड के लिए कल निकलने वाले हैं....
मेरी माँ ने जाने से पहले मुझसे एक बार अवंतिका के दोनों भाईओं को घर लाने को कहा ताकि वो दोनों भी सब से मिल लें और हॉलिडे में जाने से पहले hi सबसे कम्फर्टबले हो जाएँ....
और इसीलिए मैंने रियांश और देवांश को घर बुला लिया....
रियांश और देवांश दोनों hi जानते थे की मेरे डैड इंडिया के लीडिंग इंडस्ट्रियलिस्ट में से एक हैं इसीलिए दोनों थोड़ा नर्वस थे..
और ये बात मैंने डैड को धीरे से बता दी...
डैड- so,we हैवे तवो फेसेस इन आवर हाउस टुडे हाँ......
रियांश- hello sir..i'am रियांश & हे इस माय बरोथेर देवांश.....
देवांश- hello सर....
रियांश- sir,i मस्ट say,it's ा हूजे ऑनर तो सीट इन्फ्रोन्ट ऑफ़ ु....
ये बात रियांश ने सिर्फ किसी औपचारिकता की वजह से नहीं कही thi...he मैंट व्हाट हे साइड.....
और ये उसकी आँखों में देखा जा सकता tha...waise तोह मेरी खुद की हक़ीक़त बोहोत बड़ी है....
ग्लूटो में मेरी पहचान की एक छोटो सी झलक देख कर सबने कैसे रियेक्ट किया tha,ye तोह आप सबको पता hi है पर जब कोई मेरे डैड की तारीफ़ करता है या उनके आगे रेस्पेक्ट से झुकता hai,toh जो फीलिंग मेरे दिल में आती है उससे मई शब्दों में बयां नहीं कर सकता....
और वो ईसीए क्यूंकि मेरी पहचान मेरे जन्म से पहले hi सुनिश्चित हो चुकी थी पर मेरे डैड ने अपनी पहचान खुद बनायीं है..
एक ऐसी पहचान जिसके आगे हर कोई झुकता है, मई भी....
डैड- दो ु वर्क फॉर में????
डैड ने ये बात थोड़ी कड़क आवाज़ में बोली थी जिससे सुनकर रियांश और देवांश जो पहले से hi डैड को अपने सामने देख कर थोड़े नर्वस the,wo और नर्वस हो गए....
डैड- मैंने पूछा की क्या तुम दोनों मेरे लिए काम करते हो????
RIYANSH/DEVANSH- no सर.....
डैड- तोह ये सर सर क्या लगा रखा है yaar...mere बच्चों के फ्रंज ho,toh मेरे लिए भी मेरे बचे की hi तरह हुए ना...
अंकल बुलाओ एंड जस्ट relax....isse अपना hi घर समझो...
डैड की बात सुनकर रियांश और देवांश थोड़ा रिलैक्स हो गए....
अरे waah,aaj सारे बच्चे घर par..kis बात की मीटिंग चल रही है भाई.....???
अभी हममे से कोई कुछ कहता उससे पहले hi ये आवाज़ हमारे पीछे से आयी जो की मेरे नानू की थी....
नानू को आता देख हम सब खड़े हो gaye.....afterall हेड ऑफ़ थे फॅमिली जो थे....
RIYANSH,DEVANSH,SHANAYA,AVANTIKA ने नानू के पेअर chue..naanu ने चारों के सर पर हाथ रख उन्हें ब्लेस्सिंग्स दी...
नानाजी- इन दोनों बच्चियों को तोह मई जानता हूँ पर ये दो नौजवानो को पहली बार देख रहा हूँ...
अवंतिका- naanu,ye हमारे भाई हैं....
नानाजी- ाचा ाचा....
अवंतिका के मुँह से नानू सुन कर मुझे बोहोत ाचा laga.aur फीलिंग सिर्फ मेरे मन में hi नहीं जाएगी thi,AVANTIKA को भी ऐसा बोलते वक़्त एक अलग hi एहसास ने छुआ था....
नानाजी- वैसे अभी शाम के वक़्त सभी बचे घर par....kahin घूमने नहीं गए तुम लोग!!!!
मई- नानू वो कल हम सब हॉलिडे पर जा रहे हैं naa,RIYANSH और देवांश भी हमारे साथ जा रहे hai....toh माँ ने कहा था की एक बार इनको घर ले आऊं....
नानाजी- ाचा किया beta.....beta हमे भी अपने घरवाले hi samjhnaa...koi भी बात बोलने में बिलकुल भी नहीं हिचकना....
रियांश- जी नानाजी.....
डैड- papa,aapki पैकिंग हो गयी...
नानाजी- हाँ वो तुम्हारी मम्मी कर रही हैं..
रोनित- naanu,aap एक्ससिटेड तोह हैं ना इस हॉलिडे के लिए.....
नानाजी- ारे मई तोह तुम सब से ज़्यादा एक्ससिटेड hun....ek तोह पहली बार विदेश जा रहा हूँ और उसके ऊपर मेरे दोनों बच्चों की शादी की सालगिरा है....
dekhna,sabse ज़्यादा तोह मई hi नाचूंगा...
नानाजी की बात सुनकर हम सब है दिए वहीँ माँ और डैड ने नानू को साइड से हुग कर लिया....
भैया..........
हम सब है hi रहे तह की इतने में हमारे कानो में ये आवाज़ आयी..
ये और कोई नहीं ाशी थी जो कोमल के साथ बाहर खेल रही थी और अभी अभी अंदर आयी थी...
जिस दिन से मैंने ाशी को समझाया tha,us दिन एक बाद से वो कभी नहीं रोई और अब वो हमेशा खुश hi रहती है...
और जैसे बचे ज़िद करते hain,thik वैसी hi ज़िद अब मेरी ाशी भी करती थी....
इनफैक्ट उसके और कोमल के बीच ज़िद के नाम पे हमेशा कम्पटीशन लगी रहती thi....par उनकी हर ज़िद उन्हें और भी प्यारा बना देती थी....
khair,mera नाम लेते हुए ाशी दौड़ कर आयी और मेरी गोद में कूद gayi..maine भी उससे पकड़ लिया....
वहीँ उसके साथ आ रही कोमल ने जब ये देखा तोह वो भी दौड़ते हु आयी और उसने भी ाशी की hi तरह मेरे ऊपर छलांग लगा दी...
मैंने उससे भी गोद में उठा लिया.....
मई दोनों के साथ मस्ती करने में लग गया वहीँ मेरे घर वालों की मेरे दोस्तों के साथ कुछ देर तक बात होती रही......
रोनित- चलो yaaron,kahin घूम कर आते हैं....
मई- यार ये दोनों मुझे नहीं छोड़ेंगी.....
अंजलि- ारे पास के hi कफ हाउस में चलते हैं naa...bacchon को भी साथ ले चलते hain,ye वहां आइसक्रीम खा लेंगी...
अंजलि की आइसक्रीम की बात सुनके कोमल और ाशी ने आइसक्रीम की रत लगनी शुरू कर दी....
माँ ने भी हमे उसी कफ शॉप में जाने को कहा....
मेरे सारे फ्रंज naanu,mom और डैड से बारी बारी mile...dad ने सबको सुबह 10 बजे तक यहीं घर पर आने के लिए कह दिया....
हम सब कफ हाउस के लिए निकले जहाँ दोनों बच्चियां आइस क्रीम खाने में बिजी हो gayin..hum लड़के मिलकर िपद में हमारे स्विट्ज़रलैंड में रुकने वाले होटल और अर्रंगेमेन्ट्स की बात में लग गए वहीँ तीनो गर्ल्स अपने गॉसिप में मशगूल हो गए...
कुछ देर बाद हम सब एक दूसरे को कल मिलने का कह अपने अपने घर निकल गए....
फिर कुछ ख़ास नहीं hua...next डे प्लान के मुताबिक अवंतिका & पार्टी सुबह 10 बजे से पहले hi मेरे घर पहुँच गए...
हम सब तोह रेडिठे hi....AVANTIKA & पार्टी रोनित और अनजालि के पेरेंट्स से मिले और उनके साथ भी काफी जल्दी कम्फर्टेबले हो गए...
हम सब अलग अलग कार्स से एयरपोर्ट के लिए निकल gaye...SHANAYA हमारे प्लेन को देखने और उसमे सफर करने क लिए कुछ ज़्यादा hi एक्ससिटेड थी...
उनमे से किसी ने भी आज तक किसी चार्टर्ड प्लेन में सैर नहीं की थी...
और जब एयरफील्ड में कड़ी हुई हमारी प्लेन पर उन सब की नज़र गयी तोह वो सब और ज़्यादा एक्ससिटेड और खुश हो गए.....
हम सब हसी ख़ुशी मस्ती करते हुए प्लेन में बैठ गए और हमारे बैठते hi हमारी प्लेन ने टेक ऑफ कर लिया.......
अब बस 10 घंटे का सफर बाकी रह गया था हमे स्विट्ज़रलैंड के शहर जुरिक में लैंड करने के लिए....
चलिए जब तक हमारे हीरो & पार्टी जुरिक pahunche,hum कहीं और से घूम आते हैं...
प्लेनेट- एलोप्टुस
प्लेस- स्टॉर्मी डेजर्ट
YELUPTUS........ek.banzar PLANET.....naa hawa,aur नाही paani....har तरफ रथ hi रथ और उसी रथ का एक अज्ञात गैस के ज़रिये उठता हुआ बवंडर..
सूरज की धीमी सी रौशनी जो की किसी और गृह के उजाले के लिए thi,us ग्रह से होता हुआ उस सूर्य का एक बारीक सा प्रकाश एलोप्टुस गृह पर पढ़ रहा था....
जिससे यहाँ के भयावह माहौल को देखा जा सकता tha...par ऐसे वीरान गृह में जहाँ किसी कीड़े तक का वास नहीं hai,wahan हम कर क्या रहे हैं...?????
अरे ये kya???????is बवंडर भरे रेगिस्तान में ये दो साये कौन hain.....chaliye, पास से देखते हैं.....
अरे ये दोनों तोह........
भुविका और बिल्जेबब हैं....
पर ये यहाँ कर क्या रहे हैं????
अच्छाआ याद aaya.....ASMODEUS ने बिल्जेबब से भुविका को किसी शांत जगह ले जाने को कहा tha,aur बिल्जेबब ने ये जगह चुनी hai....par ये जगह hi kyun????aayiye बिल्जेबब की ज़ुबानी hi सुन लेते हैं....
बिल्जेबब- एलोप्टुस में तुम्हारा स्वागत है भुविका.......
भुविका ने कुछ कहा नहीं बस इधर उधर देखती rahi...uske मन भी यही ख्याल आ रहा था बिल्जेबब उससे यहीं क्यों लाया है....
बिल्जेबब- यही सोच रही हो ना की मई तुम्हे यहाँ क्यों लाया हूँ????
बिल्जेबब की बात सुनकर भुविका चौंक गयी....
भुविका- तुम्हे कैसे पता की मई क्या सोच रही हूँ???
बिल्जेबब- तुम भूल रही हो की हम दोनों के स्पिरिट्स अब जुड़ गए हैं... इसीलिए मई तुम्हारी सोच पढ़ सकता हूँ..
भुविका- पर मई तोह तुम्हारी सोच नहीं पढ़ पा रही हूँ???
बिल्जेबब- क्यूंकि अभी तुम्हारी शक्तियों पर तुम्हारा नियंत्रण नहीं आया है....
और इसीलिए hi हम यहाँ आये hain...isse अछि जगह तुम्हे अपनी शक्तिओं को नियंत्रित करने के लिए नहीं मिलेगी...
और ना hi परीक्षा देने के लिए इससे बेहतर कोई स्थान है...
भुविका- pariksha!!!!Kaisi परीक्षा????
बिल्जेबब- अपनी शकितयों की हदों को पेहचानने और उससे और निखारने की pariksha....haan,ye सत्य है की इस वक़्त तुम्हारे अंदर दो शक्तिशाली डेविल्स की ऊर्जा है और उसके साथ मेरी शक्तियां और ज़िन्दगी भर मेरे सीखे गए विद्याएं भी तुम्हारे मस्तिष्क के किसी कोने में दफ़न है...
किन्तु एक सत्य ये भी है की तुम्हारा जन्म मनुष्य योनि में हुआ hai...aur इसिलए मेरी शक्तियों को अपनी शक्ति बनाना तुम्हारे लिए या ये कहूं तुम्हारे शहर के लिए आसान नहीं है....
पर ये नामुमकिन भी नहीं bai..aur ये जगह इस मुश्किल काम को तुम्हरे लिए आसान करने के लिए रास्ता भी बनाएगी और साथ साथ कुछ रोड भी अटकाएगी जिससे तुम्हे पार करना है....
भुविका- जब ये जगह मेरी मदद करने वाली है तोह फिर रोड क्यों अटकाएगी??? और वैसे ये जगह है kya????tumne मुझे अब तक ये भी नहीं बताया की ये जगह hi तुमने क्यों चुनी!!!!?????
बिल्जेबब- तुमने अक्सर सुना होगा की बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न ho,ant में आचायी की hi जीत होती hai....par ये जगह उस बुराई का प्रतीक है जिसके सामने आचायी ने अपने घुटने तक दिए थे......
भुविका- मतलब!!!!!!
बिल्जेबब- जिस बंज़र गृह में हम खड़े hain,kisi ज़माने में ये एक हरा भरा जीवन से भरा हुआ गृह था...
पर यहाँ की आबादी ज़्यादा नहीं thi...kul 200 लोग इस गृह में रहते थे...
भुविका- बस 200....!!!!
BEELZEBUB-yahan के गृह वासी कोई साधारण मनुष्य नहीं the...wo बोहोत अलग the...aur सबसे मज़ेदार बात ये थी की उन 200 लोगों के नाम नहीं the,bas पहचान थी और उसी पहचान से पूरा ब्रम्हांड ना सिर्फ उन्हें जानता tha,balki उनके सम्मान में झुकता भी था...
भुविका- अजीब बात hai...bina नाम के manushya...waise उनमे ऐसी क्या विशेषता थी जिसके आगे पूरा ब्रम्हांड झुकता था...
BEELZEBUB-unki पहचान hi उनकी विशेषता thi...un 200 लोगों के समूह को समय संचालक के नाम से जाना जाता tha....aur यही नाम उनकी पहचान भी थी...
भुविका- समय संचालक!!!!! क्या वो समय की गति को आगे पीछे कर सकते थे?????
बिल्जेबब- शायद!!!!
भुविका- शायद मतलब!!! तुम्हे नहीं पता!!???
बिल्जेबब- nahi...mujhe kya,kisi को भी नहीं pata...ye सब मेरे जन्म से हज़ारों साल पहले की बात है....
मुझे बस इतना पता है की वो समय संचालक अच्छाई के प्रतिक the.....aur बेहद शक्तिशाली भी...
भुविका- फिर उन्हें किसने मारा.....?????
बिल्जेबब ने कुछ कहा नहीं बस भुविका की तरफ देख कर muskuraya...aur बिल्जेबब के मुस्कान से भुविका को उसके सवाल का जवाब भी मिल गया...
भुविका- तुम्हारे फादर ने!!!!!!
बिल्जेबब- haan....par फादर ने उन्हें मारा nahi,balki उनकी आत्माओं को कैद कर लिया...
BHUVIKA-aatmaon को कैद कर लिया matlab????fir उन समय संचालकों के शरीर कहाँ गए.....
बिल्जेबब- तुम उनके ऊपर कड़ी हो?????
बिल्जेबब की बात सुन भुविका को एक तेज़ झटका लगा....
भुविका- मई तोह रथ पर कड़ी hun???kya उन सब के शरीर रथ में बदल गए???
बिल्जेबब- nahi...is ज़मीं के नीचे इस गृह की नीव में उन सभी के शरीर दफ़न hain....aur इसी वजह से hi आज भी ये गृह बचा हुआ है वर्ण कबका फैट चूका होता....
और उन शरीरों में अब भी वाइट और ब्लैक ऊर्जा काफी मात्रा में भरी हुई hai.aur जब तुम यहाँ ध्यान लगाने के लिए baithogi,tab एक तरफ वही ब्लैक ऊर्जा तुम्हे मेरी शक्तियों और सिद्धियों को तुम्हारे मस्तिष्क के भीतर ढूंढ़ने में मदद करेंगी वहीँ वाइट ऊर्जा तुम्हे अपनी मंज़िल तक पहुँचने से रोकेंगी.....
भुविका- adbhudh.....par मुझे एक बात batao,tumari बातों से पता चलता है की यहाँ जो लोग रहते the,unke अंदर जो भी शक्ति thi,wo उन्हें वाइट एनर्जी से मिली थी पर तुम कह रहे हो की उनके अंदर ब्लैक एनर्जी भी hai...toh वो उनके अंदर कहाँ से आयी.....
बिल्जेबब- मुझे पूरा सच तोह नहीं पता पर जितना पता है उतना बता देता हूँ....
फादर को उन समय संचालको से कुछ चाहिए था जो उन लोगों ने फादर को देने से मन कर दिया...
फादर ने बल पूर्वक उस चीज़ को उन समय संचालको से छीनने की भी कोशिश की पर नाकामियाब रहे...
ये जानकार की ास्मोडियस को कुछ चाहिए था पर वो उससे हासिल करने में नाकामियाब raha,ye जानकार भुविका को शॉक लगा...
अपनी बेहेन और मैडोक्स की शक्तियों को पाने के बाद भुविका को ास्मोडियस की शक्तियों के बारे me,jitna निष्कलिका और मैडोक्स जानते the,utna पता चल गया था..
और उसी आधार पर बिल्जेबब की बात उससे हज़म नहीं हो पा रही थी....
भुविका- समय संचालक तुम्हारे फादर से भी ज़्यादा शक्तिशाली थे..
बिल्जेबब- मेरे फादर से शक्तिशाली कोई भी नहीं hai...agar ऐसा कुछ होता तोह मेरे फादर उन समय संचालको को कैद नहीं कर पाते....
भुविका- समय संचालकों को तुम्हारे फादर ने कैद क्यों kiya,unhe तोह उन सब को मार देना चाहिए था...
बिल्जेबब- यही बात मैंने भी अपने पितः से पूछी thi,tab उन्होंने मुझे बस यही बताया था की जो चीज़ उन्हें समय संचालकों से हासिल की hai,agar वो उन सब को मार देंगे तोह वो चीज़ भी नष्ट हो जाएगी....
भुविका- oh.....par तुम्हारे फादर ने उन सब की आत्माओं को कैद कैसे किया???
बिल्जेबब- फादर ये जानते थे की बल पूर्वक वो समय संचालकों को मार नहीं पाएंगे...
इसीलिए उन्होंने छल का इस्तेमाल kiya..SAMAY संचालक हमेशा ध्यान की मुद्रा ने बैठे रहते थे..
एक दिन समय संचालकों को अपने गृह के वायु मंडल के बाहर कुछ धमाके सुनाई दिए....
और ये धमाके कुछ कुछ देर के बाद लगातार हो रहे थे...
इन धमाकों से इस गृह को कुछ नुक्सान तोह नहीं हो रहा tha,par धमाकों के आवाज़ से उनका ध्यान भांग होने लगा.....
उन धमाकों का कारण जानने के लिए उन में से कुछ संचालकों ने वायु मंडल से बहार जाने की बात कही...
पर क्यूंकि उनमे से किसीको भी गॉड से ऐसा करने की इजाज़त नहीं thi,isiliye बाकियों ने मन कर दिया...
और वो सब पुनः अपना मन एकाग्रित कर ध्यान में बैठ गए...
पर उन धमाकों की आवाज़ों की वजह से वो ठीक से ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे थे.....
और गृह के अंदर से वो ना hi इस परेशानी की वजह जान पा रहे the,naa hi उससे ठीक कर पा रहे थे....
अन्तः उनमे से कुछ संचालकों को अपने गृह के वायु मंडल से बाहर जाना hi पड़ा.....
गॉड को छोड़कर बस मेरे फादर hi ऐसे थे जो ये जानते थे की एलोप्टुस के बाहर समय संचालकों को मारा जा सकता है.....
पर वो ये भी जानते थे की समय संचालकों के मरते hi जिस चीज़ को वो हासिल करना चाहते hain,wo नष्ट हो जाएगा....
इसीलिए उन्होंने एक दूसरी युक्ति सोच कर राखी थी...
समय संचालक अपने गृह के सीमा को पार कर बाहर आये और उन्होंने देखा की अंतरिक्ष क बीच hi लगातार रूक रूक कर लगातार कारण भेदी धमाके होते जा रहे हैं...
धमाकों की आवाज़ से तंग आकर उन्होंने उससे रोकने के लिए स्पेल बोलै और यहीं वो धोका खा गए.....
उन्हें पहले धमाकों के होने का कारण जान लेना चाहिए tha,par आवाज़ की तीव्रता की वजह से उन्होंने बिना कारण जाने स्पेल बोल दिया था...
और जैसे hi समय संचालक के बोले गए स्पेल की वजह से रे निकल कर उन धमाकों पर padi,un धमाकों से भी एक रे निकली और उस रे ने समय संचालकों के रे को जकड लिया....
और ऐसा होते hi उस रे का श्रोत जो की समय संचालक the,wo भी धमाकों से उज्वलित हुए रे में बांध गए...
उन्होंने बोहोत कोशिश की पर वो छूट नहीं पाए...
पर इसके साथ एक चीज़ और भी हुई thi...darasal सारे समय संचालक एक दूसरे से जुड़े हुए थे....
और जैसे hi अंतरिख में आये हुए समय संचालक उन धमाकों से निकलिए रेज़ में fasen,neeche गृह के बाकी के सारे संचालकों के शरीर भी हवा में उठकर ऊपर की तरफ जाने लगे..
उन सब ने बोहोत कोशिश की की वो और ऊपर ना जाएँ पर वो सब कुछ कर ना पाए..
और वो सब ये भी जान गए थे की अंतरिक्ष में गए उनके साथियों के साथ कुछ गलत हुआ है और उसी वजह से उनके साथ भी ये अब हो रहा है..
कुछ hi देर में सारे समय संचालक अंतरिक्ष में the...antariksh में आते hi सभी संचालकों के शरीर भी रेज़ से बांध गए...
वो सब अपने बंधन से निजात पाने की बोहोत कोशिश कर रहे थे पर वो कामियाब नहीं हुए....
तभी......
उनके सामने एक तेज़ रौशनी हुई और उस रौशनी के बीच मेरे फादर प्रकट हुए....
मेरे फादर को देखते hi सारे संचालक समझ गए की ये सब उनका hi किया धरा है.....
समय संचालक मेरे फादर को उकसाने के लिए उन्हें भला बुरा कहने lage..wo चाहते थे की मेरे फादर क्रोध में आकर उन्हें मार दें क्यूंकि ऐसा करते hi जिस चीज़ की चाह मेरे फादर को thi,wo भी नष्ट हो जाती....
पर मेरे फादर उन सब के मंजूबो से अवगत the..par इसके बावजूद उनके सामने एक और परेशानी थी....
और वो ये की एलोप्टुस की नीव hi उन समय संचालकों के शक्तियों से राखी गयी है....
इसीलिए वो उन सब को अपने साथ बंदी बनाकर भी नहीं ले जा सकते थे...
पर वो समय संचालकों को वापस एलोप्टुस में भी नहीं छोड़ सकते थे...
क्यूंकि एलोप्टुस में जाते hi समय संचालकों की शक्ति फिर से बढ़ जाती और मेरे फादर ने जिस चीज़ के लिए इतना कुछ खेल रचा tha,wo उससे वापस अपने पास बुला लेते...
और वो चीज़ तोह थी hi समय संचालकों की amanat..unke बुलाते hi वो वापस आ जाती....
भुविका- और इसीलिए उन्होंने एक युक्ति sochi....aur वो ये की समय संचालकों के शरीर को उनकी शक्ति सहित एलोप्टुस के नीव में दफना दिया जाए..
और उन सब की स्पिरिट्स को अपने साथ ले जाय jaaye...kyunki आत्मा बिना शरीर के रह सकती है पर शरीर बिना आत्मा के नहीं रह sakta....HAINA !!!!
भुविका ने बिल्जेबब की आगे की बात पूरी की....
बिल्जेबब- haan...par उससे पहले फादर एलोप्टुस गए और उस चीज़ को जिससे हासिल करने के लिए उन्होंने इतना कुछ किया tha,usse लिया और वापस समय संचालकों के सामने आ गए...
उसके बाद फादर ने समय संचालकों के शरीर से उनकी आत्मा को अलग कर diya...aatma के अलग होते hi शरीर का कोई मोल नहीं raha...sabhi संचालकों के शरीर अंतरिक्ष में तैरने लगे...
फिर फादर ने उन आत्माओ से उनकी साड़ी शक्ति उनके शरीरों में स्थानांतरण कर दी....
पर साथ साथ उन सब के शरीर में कुछ काली शक्तियां भी भेज दी जिससे संचालकों के स्पिरिट्स अगर चाहें तोह भी अपने शरीर का पता नहीं लगा पाते....
फिर फादर ने सभी संचालकों के शरीर इस गृह के नीव में दफना दिए...
पर जैसे शरीर को शरीर उसकी आत्मा बनती hai,thik उसी तरह एक गृह को भी गृह हवा और पानी बनाते हैं...
इस तर्क पर जैसे hi बिना आत्मा के सारे संचालकों के शरीर दफ़न hue,thik उसी वक़्त इस गृह की आत्मा ने भी इससे छोड़ दिया...
और ये गृह ऐसा बन gaya...BANZAR.......
भुविका- इतना खतरनाक dimag,itni दूरदर्शिता के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता....
वाकई तुम्हारे फादर जैसा कोई नहीं.....
वैसे तुमने एक बात अभी भी नहीं batayi...un समय संचालकों के स्पिरिट्स का क्या hua???tumhare फादर उन्हें कहा ले गए...
बिल्जेबब- फादर ने उन सब को रखने के लिए एक अलग गृह का निर्माण किया....
भुविका- एक अलग गृह kaa!!!!abhudh.....koi नाम है उस गृह का????
बिल्जेबब- शैडो वर्ल्ड.....
आज के लिए इतना HI.....
आपका अपना V...J.....