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भाग ८६ ----इन्सेस्ट कथा
सैंया बने नन्दोई
17,58,958
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आज वो दुबारा झड़ के भी नहीं रुके, और मैंने भी तो अंदर से ऊँगली नहीं निकाली, वो क्या कहते हैं, प्रॉस्ट्रेट पर, जब उनका झड़ना रुक गया, तो मैंने प्रोस्ट्रेट पर रगड़ना शुरू कर दिया, दो चार सेकेण्ड तक तो कुछ नहीं हुआ लेकिन फिर जैसे कोई ज्वालामुखी फूट पड़ा, पहाड़ में से कोई झरना निकल गया हो,
५ बार, ६ बार झड़ना रुकता फिर चालू, और जब दोनों रुक भी गए तो उसी तरह दस मिनट तक एक दूसरे से चिपके, ... फिर धीरे धीरे मेरे मर्द ने अपनी बहिन की बिल से अपना झडा हुआ खूंटा निकाला, और बगल में कटे पेड़ की तरह गिर के,...
लेकिन मैं थी न, मैंने अपनी उँगलियों से ननद की बुर की दोनों फांको को जैसे पकड़ के सील कर दिया और चूतड़ उसी तरह उठे, एक भी बूँद मलाई की बाहर नहीं निकली। उनके झड़ना रुके दस मिनट हो गए थे ननद भी थकी सी लग रही थीं।
लेकिन ननद रानी को गरम करना मेरे बाएं हाथ का खेल था, पांच दस मिनट बाद मैंने अपना खेल दिखाना शुरू कर दिया।
बस मैं अपने साजन की बहिनिया की जस्ट चुदी बुर पर हथेली रख के मैं धीरे धीरे सहला रही थी, और थोड़ी देर में ही मेरी ननद गरमाने लगी. वो भी अपने बहन की हालत देखकर मुस्करा रहे थे. थोड़ी देर में ही उनकी बहन की बुर फड़फड़ाने लगी, कस के दोनों फांको को मैंने रगड़ते हुए चिढ़ाया,
" मज़ा आया मेरे सैंया का लौंडा घोंट के. "
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मेरे सैंया की बहन भी मुस्करायी बोली,
" भौजी, तेरे सैंया के पहले मेरे भैया थे "
" तेरे भैया थे तब नूनी थी मेरे सैंया हो गए तो लौंड़ा हो गया, समझीं सैंया की बहन जी "
मैं कौन पीछे हटने वाली थी, लेकिन ननद मेरी पैदायशी खानदानी छिनार, पलट के बोली,
" भौजी, लेकिन नूनी से लौंड़ा किया किसने, भूल गयी गौने की रात. का मिला था नूनी की, जबरदस्त मूसल, सबेरे चिरैया का मुंह एकदम लाल हो गया था रात भर धक्का खा खा के "
अब मैं लजा गयी,
मेरी ननद ने गौने की अगली सुबह की याद दिला दी,
मेरी दो ननदें पकड़ के, बल्कि टांग के मुझे मेरे कमरे से उठा के ले आयीं जहाँ मेरी सब ननदें कुछ जेठानिया भी थीं,
और यही ननद जिद करने लगीं की भौजी सास लोग ऊपर वाली मुंह दिखाई करती हैं, हम ननद तो नीचे वाली,
तो एक कोई छुटकी बोली, और का भौजी हमरे भैया को तो बुलबुल आपन दिखाय दी और हम ननद से का लजा रही हैं,
मैं ने कस के लहंगा पकड़ लिया, लेकिन मेरी इन्ही ननद ने इशारा किया.
मैं समझ नहीं पायी तब तक नीलू और लीला मेरी दोनों छोटी ननदों ने कस के मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए पीछे से, और दो छोटी ननदों ने आराम से धीरे धीरे लहंगा सरका दिया एकदम कमर तक अब सब ननदें लगी देखने, यही बोलीं
" अरे भौजी, भैया ने रात भर धक्का मारा का कैसे चोट लग लग के लाल हो गयी है कउनो मरहम लगा दें का "
तबतक अंदर से रात भर की मलाई भी थोड़ी सी छलक कर बाहर निकली
तो चीनू इनकी ममेरी बहन बोली, अरे भैया ने मरहम लगा दिया है, और मेरी दोनों फांके फैला दीं तो भरभरा कर,... ,
तो आज ननद उसी का जिक्र कर रही थीं।-
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बात में तो मैं जीत नहीं सकती थी तो मैं एक्शन पे उतर आयी,
उस दिन की तरह मैंने भी इनकी बहन की बुर फैलाई और कुप्पी की तरह मलाई भरी थी, ऊपर तक, बजबजा रही थी, ननद के भैया की रबड़ी मलाई से
बस ऊँगली से मैंने थोड़ी मलाई लगाई और ननद के मुंह में लगा दी।
नदीदी ने चाट लिया।
और मेरे कुछ कहने के पहले अपने भैया से उनकी बहन बोली, " भैया बहुत स्वादिष्ट है, मस्त मस्त "
" अब रोज खिलाना मेरी ननद को बिना नागा, तीनो मुंह में "
मैं भी उन्हें चिढ़ाती बोली और ननद की चुनमुनिया पर हमला बोल दिया. पहले दोनों फांको को चूसती रही, फिर अंदर जीभ डाल के मलाई लपेटी और पलट के वही जीभ मेरी ननद के मुंह में, अभी थोड़ी देर और जहाँ थोड़ी देर पहले मेरे मरद का मोटा लंड धक्के मार रहा था,
वहीँ, मेरे मरद की बहन की चूत पर मेरी चूत घिस्से मार रही थी,
" मेरे मरद से तो बहुत मज़ा ले लिया अब थोड़ी देर हमहुँ से मज़ा ले लो, ननदी "
सैंया बने नन्दोई
17,58,958
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आज वो दुबारा झड़ के भी नहीं रुके, और मैंने भी तो अंदर से ऊँगली नहीं निकाली, वो क्या कहते हैं, प्रॉस्ट्रेट पर, जब उनका झड़ना रुक गया, तो मैंने प्रोस्ट्रेट पर रगड़ना शुरू कर दिया, दो चार सेकेण्ड तक तो कुछ नहीं हुआ लेकिन फिर जैसे कोई ज्वालामुखी फूट पड़ा, पहाड़ में से कोई झरना निकल गया हो,
५ बार, ६ बार झड़ना रुकता फिर चालू, और जब दोनों रुक भी गए तो उसी तरह दस मिनट तक एक दूसरे से चिपके, ... फिर धीरे धीरे मेरे मर्द ने अपनी बहिन की बिल से अपना झडा हुआ खूंटा निकाला, और बगल में कटे पेड़ की तरह गिर के,...
लेकिन मैं थी न, मैंने अपनी उँगलियों से ननद की बुर की दोनों फांको को जैसे पकड़ के सील कर दिया और चूतड़ उसी तरह उठे, एक भी बूँद मलाई की बाहर नहीं निकली। उनके झड़ना रुके दस मिनट हो गए थे ननद भी थकी सी लग रही थीं।
लेकिन ननद रानी को गरम करना मेरे बाएं हाथ का खेल था, पांच दस मिनट बाद मैंने अपना खेल दिखाना शुरू कर दिया।
बस मैं अपने साजन की बहिनिया की जस्ट चुदी बुर पर हथेली रख के मैं धीरे धीरे सहला रही थी, और थोड़ी देर में ही मेरी ननद गरमाने लगी. वो भी अपने बहन की हालत देखकर मुस्करा रहे थे. थोड़ी देर में ही उनकी बहन की बुर फड़फड़ाने लगी, कस के दोनों फांको को मैंने रगड़ते हुए चिढ़ाया,
" मज़ा आया मेरे सैंया का लौंडा घोंट के. "
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मेरे सैंया की बहन भी मुस्करायी बोली,
" भौजी, तेरे सैंया के पहले मेरे भैया थे "
" तेरे भैया थे तब नूनी थी मेरे सैंया हो गए तो लौंड़ा हो गया, समझीं सैंया की बहन जी "
मैं कौन पीछे हटने वाली थी, लेकिन ननद मेरी पैदायशी खानदानी छिनार, पलट के बोली,
" भौजी, लेकिन नूनी से लौंड़ा किया किसने, भूल गयी गौने की रात. का मिला था नूनी की, जबरदस्त मूसल, सबेरे चिरैया का मुंह एकदम लाल हो गया था रात भर धक्का खा खा के "
अब मैं लजा गयी,
मेरी ननद ने गौने की अगली सुबह की याद दिला दी,
मेरी दो ननदें पकड़ के, बल्कि टांग के मुझे मेरे कमरे से उठा के ले आयीं जहाँ मेरी सब ननदें कुछ जेठानिया भी थीं,
और यही ननद जिद करने लगीं की भौजी सास लोग ऊपर वाली मुंह दिखाई करती हैं, हम ननद तो नीचे वाली,
तो एक कोई छुटकी बोली, और का भौजी हमरे भैया को तो बुलबुल आपन दिखाय दी और हम ननद से का लजा रही हैं,
मैं ने कस के लहंगा पकड़ लिया, लेकिन मेरी इन्ही ननद ने इशारा किया.
मैं समझ नहीं पायी तब तक नीलू और लीला मेरी दोनों छोटी ननदों ने कस के मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए पीछे से, और दो छोटी ननदों ने आराम से धीरे धीरे लहंगा सरका दिया एकदम कमर तक अब सब ननदें लगी देखने, यही बोलीं
" अरे भौजी, भैया ने रात भर धक्का मारा का कैसे चोट लग लग के लाल हो गयी है कउनो मरहम लगा दें का "
तबतक अंदर से रात भर की मलाई भी थोड़ी सी छलक कर बाहर निकली
तो चीनू इनकी ममेरी बहन बोली, अरे भैया ने मरहम लगा दिया है, और मेरी दोनों फांके फैला दीं तो भरभरा कर,... ,
तो आज ननद उसी का जिक्र कर रही थीं।-
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बात में तो मैं जीत नहीं सकती थी तो मैं एक्शन पे उतर आयी,
उस दिन की तरह मैंने भी इनकी बहन की बुर फैलाई और कुप्पी की तरह मलाई भरी थी, ऊपर तक, बजबजा रही थी, ननद के भैया की रबड़ी मलाई से
बस ऊँगली से मैंने थोड़ी मलाई लगाई और ननद के मुंह में लगा दी।
नदीदी ने चाट लिया।
और मेरे कुछ कहने के पहले अपने भैया से उनकी बहन बोली, " भैया बहुत स्वादिष्ट है, मस्त मस्त "
" अब रोज खिलाना मेरी ननद को बिना नागा, तीनो मुंह में "
मैं भी उन्हें चिढ़ाती बोली और ननद की चुनमुनिया पर हमला बोल दिया. पहले दोनों फांको को चूसती रही, फिर अंदर जीभ डाल के मलाई लपेटी और पलट के वही जीभ मेरी ननद के मुंह में, अभी थोड़ी देर और जहाँ थोड़ी देर पहले मेरे मरद का मोटा लंड धक्के मार रहा था,
वहीँ, मेरे मरद की बहन की चूत पर मेरी चूत घिस्से मार रही थी,
" मेरे मरद से तो बहुत मज़ा ले लिया अब थोड़ी देर हमहुँ से मज़ा ले लो, ननदी "