- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 34,477
तेल मालिश
वो जोर से खिलखिलाई
" बाऊ जी बदमासी, बेईमानी नहीं चलेगी,... लेकिन मैं भी छोडूंगी नहीं, अब आपकी आँख में पट्टी बाँध देती हूँ, आप वैसे नहीं मानेगें,... किस चीज से बाँधू,... किस चीज से बांधू ,... हाँ ये ठीक रहेगा,... " सुगना बोली और डारे पर टंगी अपनी सूखती अंगिया उतारी और ससुर की आँखों पे
" बहू इतना जोर मत लगा, इत्ता कस के नहीं " ससुर बोले, बहु की अंगिया का स्पर्श, मूसल चंद फनफना रहे थे ,
" देखिये में तो पूरा जोर लगाउंगी, आप इतनी बेईमानी करते हैं। और जब आप का नंबर आएगा तो आप भी पूरा जोर लगा दीजियेगा, कंजूसी मत करियेगा। मैं एकदम मना नहीं करुँगी हिसाब बराबर हो जाएगा। "
जाली वाली अंगिया, सब कुछ दिख रहा था छन छन कर के गोरा तन, मस्ताया जोबन,
आराम से जैसे उनको दिखाते ललचाते सुगना ने साड़ी उतारी,
सिर्फ छोटा सा लाल लाल खूब नुकीला, लो कट चोली,...
और साड़ी मोड़ के गठरी जैसे बना के ससुर के सर के नीचे लगा दिया, उन्हें न भी दिखा हो तो पता चल जाये साड़ी उतर गयी है,... सर सर करती, ...
और अपनी दो ऊँगली उनकी आँखों के सामने दिखा के बोली,...
" कितनी ऊँगली "
" सात " वो बोले,...
सही है अब पता चला की नहीं दिख रहा, सुगना हंस के बोली,... और अपनी तर्जनी और मंझली ऊँगली जोड़ के लम्बे छेद का निशान दिखा दिया ,
दिख तो उन्हें सब रहा था, और टेंसन उनके चेहरे से लग रहा था, पर सुगना तो आज बदमाशी पे आमादा थी, उसने एक शर्त और बता दी, ...
" हाँ एक बात और आप को मुझे छूना भी नहीं चाहिए, ... तो आप मुझे हाथ नहीं लगा सकते,... " वो खिलखिलाते बोली।
" लेकिन बिना छुए कैसे, होगा, ... तू कैसे मालिश करेगी " ससुर बिचारे चौके, उन्हें अपनी सब उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा था।
" अरे रोक आपके ऊपर है मेरे ऊपर नहीं, ... मैं हाथ क्या जो मेरी मर्जी होगी वो सब लगाउंगी,... और मेरी सास नहीं है तो उनकी जगह घर की मालकिन मैं ही हूँ,... और बहू के होते हुए आप अपना हाथ इस्तेमाल करें,... अच्छा लगता है क्या। "
सुगना की हंसी खिलखिला के मोतियों की तरह फर्श पर बिखर गयी।
पहले पैरों पर बहू ने तेल लगाया, फिर हाथ पैरों की ओर बढ़ गया,... लेकिन थोड़ी देर आगे बढ़ के ही ठिठक गया, और सुगना अपने को कोसती बोली,
" मैं भी न बुरबक, तेल धोती में लग गया तो सुगना तुझे ही धोना पड़ेगा, "
और धोती की गाँठ खोलने के लिए हाथ बढ़ाया, जैसी कोई लौंडा किसी माल के शलवार के नाड़े पर हाथ डाले और अपने आप उस माल का हाथ उसे रोकने, अपनी नाड़े की गाँठ बचाने,... बस एकदम उसी तरह सूरजबली सिंह का हाथ अपने आप,... सुगना के हाथ की ओर बढ़ा लेकिन बहुत जोर की डांट पड़ गयी, बहू की।
" मना किया था न, एक बार में समझते नहीं हाँ. मैंने क्या कहा था, अपना हाथ अपने पास रखिये, फिर भी, चुपचाप हाथ बाँध के रखिये"
फिर प्यार से सुगना समझाते बोली,
" काहें परेशांन है , अरे और कुछ नहीं करुँगी। सिर्फ धोती खोल रहूं जिससे तेल न लगे, जैसे अपनी साड़ी उतार दी। और नीचे कच्छा तो आप पहने ही हैं। चलिए वादा उसका, नाडा अपने से मैं नहीं खोलूंगी अभी,... फिर ब्याहता हूँ चार महीने हो गए गौने आये, मुझे भी मालूम है कच्छे के अंदर क्या होता है। न डरती हूँ न लजाती हूँ,... चुपचाप हाथ दूर रखिये, वरना जैसे अपनी अंगिया से आँख बांध दी है न वैसे पेटीकोट का नाड़ा खोल के हाथ दोनों भी बाँध दूंगी कस के. "
हाथ हटाने के अलावा कोई चारा था भी क्या, उनके पास, ..आराम आराम से धोती खोल के तहिया के बगल में सुगना ने रख दिया और तेल लगाना शुरू कर दिया और थोड़ी देर में हाथ घुटने के ऊपर पहुँच रहा था, और लगा भी बहुत ढंग से ताकत से,...
जवान औरत की देह बहुत दिन बाद छू रही थी, देह उसके ससुर की गिनगीना रही थी, अब सुगना को तो कुछ बोल नहीं सकते थे अपनी समधिन का नाम लेकर सुगना की महतारी को इशारा करके छेड़ा,..
" हमार समधिन लगता है कौन नाऊ के साथ सोई थीं जब गाभिन हुयी, तू पेट में आयी, तब ही इतनी बढ़िया मालिश सीखी हो "
सुगना काहें चुप रहती उसने भी अपनी महतारी के कंधे पर रख कर बंदूक चला दी,...
" अरे आपकी समधन होतीं तो जवाब देतीं, अपने दामाद की दादी और बुआ दोनों का हाल सुना देतीं की वो लोग किसके किसके साथ टांग उठाये हैं, की कहीं आपके समधिन के समधी के साथ ही तो नहीं,... "
और साथ ही में हाथ सरक के जाँघों के ऊपर कच्छे के अंदर
वो जोर से खिलखिलाई
" बाऊ जी बदमासी, बेईमानी नहीं चलेगी,... लेकिन मैं भी छोडूंगी नहीं, अब आपकी आँख में पट्टी बाँध देती हूँ, आप वैसे नहीं मानेगें,... किस चीज से बाँधू,... किस चीज से बांधू ,... हाँ ये ठीक रहेगा,... " सुगना बोली और डारे पर टंगी अपनी सूखती अंगिया उतारी और ससुर की आँखों पे
" बहू इतना जोर मत लगा, इत्ता कस के नहीं " ससुर बोले, बहु की अंगिया का स्पर्श, मूसल चंद फनफना रहे थे ,
" देखिये में तो पूरा जोर लगाउंगी, आप इतनी बेईमानी करते हैं। और जब आप का नंबर आएगा तो आप भी पूरा जोर लगा दीजियेगा, कंजूसी मत करियेगा। मैं एकदम मना नहीं करुँगी हिसाब बराबर हो जाएगा। "
जाली वाली अंगिया, सब कुछ दिख रहा था छन छन कर के गोरा तन, मस्ताया जोबन,
आराम से जैसे उनको दिखाते ललचाते सुगना ने साड़ी उतारी,
सिर्फ छोटा सा लाल लाल खूब नुकीला, लो कट चोली,...
और साड़ी मोड़ के गठरी जैसे बना के ससुर के सर के नीचे लगा दिया, उन्हें न भी दिखा हो तो पता चल जाये साड़ी उतर गयी है,... सर सर करती, ...
और अपनी दो ऊँगली उनकी आँखों के सामने दिखा के बोली,...
" कितनी ऊँगली "
" सात " वो बोले,...
सही है अब पता चला की नहीं दिख रहा, सुगना हंस के बोली,... और अपनी तर्जनी और मंझली ऊँगली जोड़ के लम्बे छेद का निशान दिखा दिया ,
दिख तो उन्हें सब रहा था, और टेंसन उनके चेहरे से लग रहा था, पर सुगना तो आज बदमाशी पे आमादा थी, उसने एक शर्त और बता दी, ...
" हाँ एक बात और आप को मुझे छूना भी नहीं चाहिए, ... तो आप मुझे हाथ नहीं लगा सकते,... " वो खिलखिलाते बोली।
" लेकिन बिना छुए कैसे, होगा, ... तू कैसे मालिश करेगी " ससुर बिचारे चौके, उन्हें अपनी सब उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा था।
" अरे रोक आपके ऊपर है मेरे ऊपर नहीं, ... मैं हाथ क्या जो मेरी मर्जी होगी वो सब लगाउंगी,... और मेरी सास नहीं है तो उनकी जगह घर की मालकिन मैं ही हूँ,... और बहू के होते हुए आप अपना हाथ इस्तेमाल करें,... अच्छा लगता है क्या। "
सुगना की हंसी खिलखिला के मोतियों की तरह फर्श पर बिखर गयी।
पहले पैरों पर बहू ने तेल लगाया, फिर हाथ पैरों की ओर बढ़ गया,... लेकिन थोड़ी देर आगे बढ़ के ही ठिठक गया, और सुगना अपने को कोसती बोली,
" मैं भी न बुरबक, तेल धोती में लग गया तो सुगना तुझे ही धोना पड़ेगा, "
और धोती की गाँठ खोलने के लिए हाथ बढ़ाया, जैसी कोई लौंडा किसी माल के शलवार के नाड़े पर हाथ डाले और अपने आप उस माल का हाथ उसे रोकने, अपनी नाड़े की गाँठ बचाने,... बस एकदम उसी तरह सूरजबली सिंह का हाथ अपने आप,... सुगना के हाथ की ओर बढ़ा लेकिन बहुत जोर की डांट पड़ गयी, बहू की।
" मना किया था न, एक बार में समझते नहीं हाँ. मैंने क्या कहा था, अपना हाथ अपने पास रखिये, फिर भी, चुपचाप हाथ बाँध के रखिये"
फिर प्यार से सुगना समझाते बोली,
" काहें परेशांन है , अरे और कुछ नहीं करुँगी। सिर्फ धोती खोल रहूं जिससे तेल न लगे, जैसे अपनी साड़ी उतार दी। और नीचे कच्छा तो आप पहने ही हैं। चलिए वादा उसका, नाडा अपने से मैं नहीं खोलूंगी अभी,... फिर ब्याहता हूँ चार महीने हो गए गौने आये, मुझे भी मालूम है कच्छे के अंदर क्या होता है। न डरती हूँ न लजाती हूँ,... चुपचाप हाथ दूर रखिये, वरना जैसे अपनी अंगिया से आँख बांध दी है न वैसे पेटीकोट का नाड़ा खोल के हाथ दोनों भी बाँध दूंगी कस के. "
हाथ हटाने के अलावा कोई चारा था भी क्या, उनके पास, ..आराम आराम से धोती खोल के तहिया के बगल में सुगना ने रख दिया और तेल लगाना शुरू कर दिया और थोड़ी देर में हाथ घुटने के ऊपर पहुँच रहा था, और लगा भी बहुत ढंग से ताकत से,...
जवान औरत की देह बहुत दिन बाद छू रही थी, देह उसके ससुर की गिनगीना रही थी, अब सुगना को तो कुछ बोल नहीं सकते थे अपनी समधिन का नाम लेकर सुगना की महतारी को इशारा करके छेड़ा,..
" हमार समधिन लगता है कौन नाऊ के साथ सोई थीं जब गाभिन हुयी, तू पेट में आयी, तब ही इतनी बढ़िया मालिश सीखी हो "
सुगना काहें चुप रहती उसने भी अपनी महतारी के कंधे पर रख कर बंदूक चला दी,...
" अरे आपकी समधन होतीं तो जवाब देतीं, अपने दामाद की दादी और बुआ दोनों का हाल सुना देतीं की वो लोग किसके किसके साथ टांग उठाये हैं, की कहीं आपके समधिन के समधी के साथ ही तो नहीं,... "
और साथ ही में हाथ सरक के जाँघों के ऊपर कच्छे के अंदर