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गुलबिया
लेकिन और भी लौंडे थे खूंटा खड़ा किये दो तो चमेलिया की ही फ़िराक में ,... चमेलिया बिट्टू की चुदाई में सब ननदें भौजाई खाली देख रही थीं और अब फिर खेल शुरू हो गया।
अबकी नंबर गुलबिया का था. पन्नू लेटा था, खूंटा खड़ा, और नीलू, चंदा गुलबिया को चिढ़ा रही थीं,
" चढ़ जाइये भौजी, आपके देवर ने मस्त खूंटा खड़ा किया है "
वही ठीक चमेलिया के बगल में,,... चमेलिया थेथर होके लेटी थी। चमेलिया के बिल से मलाई अभी भी रिस रही थी।
" अरे ऐसे कैसे चढ़ जाऊं, जरा प्यार दुलार तो कर लूँ, देखूं इसकी बहनों ने कैसे मुठिया के खड़ा किया है " हँसते चिढ़ाते गुलबिया बोली
और बिना हाथ लगाए, जीभ की टिप से खूंटा जंहा बॉल्स से मिलता था थोड़ी देर चाटा, फिर सीधे लम्बे लम्बे लिक्स के साथ खड़े बांस पे चढ़ते हुए सीधे सुपाड़े तक,.... और होंठों का जोर लगा के सुपाड़े का ढक्क्न खोल दिया,
जीभ की टिप से छेद को चाटा सुरसुरी की, और गप्प से लीची की तरह रसीले सुपाड़े को गप्प कर लिया, और लगी चुभलाने, और बीच बीच में गुलबिया पन्नू का लंड चूसते चमेलिया को देख रही थी.
चमेलिया एक बार फिर से गरमा रही थी, उसकी बिल में सुरसुरी हो रही।
थोड़ी देर में गुलबिया ने आधा लंड गप्प कर लिया, साथ में वो मुठिया भी रही थी. गुलबिया के होंठ पन्नू के लंड से रगड़ते दरेरते, साथ में नीचे से जीभ भी खेल तमाशा कर रही थी, लंड को छेड़ रही थी.
अगर पन्नू नीचे से चूतड़ उछलता तो वो आँखों से बरज देती, गुलबिया की मुठियाती उँगलियाँ अब बॉल्स सहला रही थीं, पन्नू की हालत खराब थी, और देख रहे देवरों की भी, ...
गुलबिया के होंठ हटे तो मुट्ठी ने वो जगह ले ली और होंठों ने गरियाने का,
" चल स्साले अपनी बहिनियों की तरह तुंहु चुदवाना चाहते हो तो चल चोद चोद के अभी तोहार पानी निकालती हूँ लेकिन बिना झाड़े झड़े तो यहीं गाँड़ , मार लूंगी।"
" अरे भौजी आवा न. चढ़ जा, इतना देर से तो खड़ा किये हैं मस्त, ... " पन्नू बोला।
" हाँ भौजी बहुत चोर सिपाही हो गया अब असली खेल शुरू करिये " कच्ची अमिया वाली बेला उकसाते बोली , जिसकी झिल्ली आज ही चुन्नू ने फाड़ी थी।
और गुलबिया उठ के पन्नू के तने खूंटे पर, गुलबिया ने पहले सिर्फ सुपाड़ा घोंटा, और कस के पन्नू को दोनों कलाइयां पकड़ ली फिर पूरी ताकत से वो धक्का मारा की आधे से लंड अंदर था। पर अब गुलाबिया ने पन्नू को छेड़ना शुरू कर दिया कभी अपने बड़े बड़े जोबन उसके सीने में रगड़ देती कभी चूम लेती।
पन्नू से नहीं रहा गया और उसने कमान अपने हाथ में ले ली, और नीचे से दो चार जबरदस्त धक्के मारे और खूंटा अंदर जड़ तक।
गुलबिया अभी लड़कोर तो थी नहीं , मर्द पंजाब कमाने गया, होली दिवाली कभी आया कभी नहीं। कभी छुट्टी नहीं मिली कभी रिर्जेवेशन,... तो बुरिया उसकी बड़ी टाइट,...
लेकिन अभी तो चार आने का ही खेल हुआ था असली खेल तो बाकी था।
चंदा और नीलू ने पन्नू को इशारा किया और उसने कस के अपनी बाँहों से गुलबिया को दबोच लिया। ऊपर से धक्के लगाते गुलबिया के बड़े बड़े चूतड़ बहुत अच्छे लग रहे थे और उन्हें देख के पिछवाड़े के शौक़ीन पंकजवा की हालत खराब थी। जब बुर ही ठीक से नहीं चुदी थी तो पिछवाड़े का ख्याल कौन करता, ये नहीं की कोरी थी पर बहुतदिनों से, सालों से पिछवाड़े कुदाल नहीं चली थी।
लेकिन और भी लौंडे थे खूंटा खड़ा किये दो तो चमेलिया की ही फ़िराक में ,... चमेलिया बिट्टू की चुदाई में सब ननदें भौजाई खाली देख रही थीं और अब फिर खेल शुरू हो गया।
अबकी नंबर गुलबिया का था. पन्नू लेटा था, खूंटा खड़ा, और नीलू, चंदा गुलबिया को चिढ़ा रही थीं,
" चढ़ जाइये भौजी, आपके देवर ने मस्त खूंटा खड़ा किया है "
वही ठीक चमेलिया के बगल में,,... चमेलिया थेथर होके लेटी थी। चमेलिया के बिल से मलाई अभी भी रिस रही थी।
" अरे ऐसे कैसे चढ़ जाऊं, जरा प्यार दुलार तो कर लूँ, देखूं इसकी बहनों ने कैसे मुठिया के खड़ा किया है " हँसते चिढ़ाते गुलबिया बोली
और बिना हाथ लगाए, जीभ की टिप से खूंटा जंहा बॉल्स से मिलता था थोड़ी देर चाटा, फिर सीधे लम्बे लम्बे लिक्स के साथ खड़े बांस पे चढ़ते हुए सीधे सुपाड़े तक,.... और होंठों का जोर लगा के सुपाड़े का ढक्क्न खोल दिया,
जीभ की टिप से छेद को चाटा सुरसुरी की, और गप्प से लीची की तरह रसीले सुपाड़े को गप्प कर लिया, और लगी चुभलाने, और बीच बीच में गुलबिया पन्नू का लंड चूसते चमेलिया को देख रही थी.
चमेलिया एक बार फिर से गरमा रही थी, उसकी बिल में सुरसुरी हो रही।
थोड़ी देर में गुलबिया ने आधा लंड गप्प कर लिया, साथ में वो मुठिया भी रही थी. गुलबिया के होंठ पन्नू के लंड से रगड़ते दरेरते, साथ में नीचे से जीभ भी खेल तमाशा कर रही थी, लंड को छेड़ रही थी.
अगर पन्नू नीचे से चूतड़ उछलता तो वो आँखों से बरज देती, गुलबिया की मुठियाती उँगलियाँ अब बॉल्स सहला रही थीं, पन्नू की हालत खराब थी, और देख रहे देवरों की भी, ...
गुलबिया के होंठ हटे तो मुट्ठी ने वो जगह ले ली और होंठों ने गरियाने का,
" चल स्साले अपनी बहिनियों की तरह तुंहु चुदवाना चाहते हो तो चल चोद चोद के अभी तोहार पानी निकालती हूँ लेकिन बिना झाड़े झड़े तो यहीं गाँड़ , मार लूंगी।"
" अरे भौजी आवा न. चढ़ जा, इतना देर से तो खड़ा किये हैं मस्त, ... " पन्नू बोला।
" हाँ भौजी बहुत चोर सिपाही हो गया अब असली खेल शुरू करिये " कच्ची अमिया वाली बेला उकसाते बोली , जिसकी झिल्ली आज ही चुन्नू ने फाड़ी थी।
और गुलबिया उठ के पन्नू के तने खूंटे पर, गुलबिया ने पहले सिर्फ सुपाड़ा घोंटा, और कस के पन्नू को दोनों कलाइयां पकड़ ली फिर पूरी ताकत से वो धक्का मारा की आधे से लंड अंदर था। पर अब गुलाबिया ने पन्नू को छेड़ना शुरू कर दिया कभी अपने बड़े बड़े जोबन उसके सीने में रगड़ देती कभी चूम लेती।
पन्नू से नहीं रहा गया और उसने कमान अपने हाथ में ले ली, और नीचे से दो चार जबरदस्त धक्के मारे और खूंटा अंदर जड़ तक।
गुलबिया अभी लड़कोर तो थी नहीं , मर्द पंजाब कमाने गया, होली दिवाली कभी आया कभी नहीं। कभी छुट्टी नहीं मिली कभी रिर्जेवेशन,... तो बुरिया उसकी बड़ी टाइट,...
लेकिन अभी तो चार आने का ही खेल हुआ था असली खेल तो बाकी था।
चंदा और नीलू ने पन्नू को इशारा किया और उसने कस के अपनी बाँहों से गुलबिया को दबोच लिया। ऊपर से धक्के लगाते गुलबिया के बड़े बड़े चूतड़ बहुत अच्छे लग रहे थे और उन्हें देख के पिछवाड़े के शौक़ीन पंकजवा की हालत खराब थी। जब बुर ही ठीक से नहीं चुदी थी तो पिछवाड़े का ख्याल कौन करता, ये नहीं की कोरी थी पर बहुतदिनों से, सालों से पिछवाड़े कुदाल नहीं चली थी।