कमल ने फाड़ी हिना की
मैं एकदम आगे आ गयी, हिना के पास, मुझसे बोली वो,
" नयकी भौजी, भौजी को बोल दीजिये न एक बार बस एक बार,.. झाड़ दें, ... "
मैं एकदम से हिना की ओर हो गयी, जोर से बोली,
" बेचारी ननद तड़प रही है और यहाँ, ... घबड़ा जिन अइसन जबरदस्त सांड़ अभी चढ़ाउंगी, अरे असली मस्त औजार होते हुए ऊँगली से झड़ोगी, ... "
फिर कमल को आवाज दी,
" हे हमरी ननद रेनुआ क यार, अपनी बहिनी क भतार,.. कहाँ घुसे हो,... "
वो तो पीछे ही खड़ा था, हिना की रगड़ाई देखकर उसका भी बित्ते से भी बड़ा खूंटा एकदम फनफनाया, साथ में एक भौजाई क सहारा लेकर खड़ी रेनू, वही उससे बोली,
" अरे भौजी कुछ कह रही हैं जाओ, और नाक न कटवाना हम सब की "
भौजाइयां, हिना की क्लास की की लड़कियां, रूपा, लीना, सोना सब पहले से तैयार झट से किसी ने कन्धा पकड़ा, किसी ने हाथ, ... गुलबिया ने हिना क जो कपडा छुपाया था वही लेकर हिना के छोटे छोटे चूतड़ के नीचे लगा के अच्छी तरह उठा लिया, जैसे गौने की रात दुलहा पेलने के पहले अपनी दुलहिनिया के चूतड़ के नीचे पलंग पर क कुल तकिया लगा के उठा देता है जिससे छेद में सटाने में कोई दिक्कत न हो,
और गौने की रात की तरह ही कमल ने हिना की दोनों टांगों को उठा के अपने कंधे पर रख दिया,...
रेनू जो अपने भाई कमल के नाम से बिदकती थी, चुदाई तो छोड़िये अगर छू भी दिया तो वो झटक के दस बात सुना के दूर खड़ी हो जाती थी आज एकदम सट के बैठी, और उसे और चढ़ा रही थी एकदम खुल के,...
" अरे भैया पेल दो कस के, एक झटके में सुपाड़ा अंदर जाए तब उसे पता चलेगा की मेरे भैया के नीचे आयी है,... "
क्या पानी से बाहर निकलने पर मछली तड़पती है, उछलती है, उसी तरह तड़प के उछली वो, ये तो भौजाइयों ने दबोच रखा था वरना वो झटके दे के,
सुपाड़ा एक झटके में तो नहीं घुसा लेकिन चार पांच धक्के में अंदर,
और उसको पकड़ी लड़कियों भौजाइयों ने छोड़ दिया, एक बोली अब स्साली पटके चूतड़ जितना पटकना है, ... इतना मोटा सुपाड़ा अंदर घुस गया है लाख कोशिश आकर बाहर तो निकलेगा नहीं और कमल ऐसा चुदवैया बिन चोदे, अंदर सीधे बच्चेदानी में पानी छोड़े इसे छोड़ेगा नहीं।
लेकिन जो रगड़ाई गुलबिया चमेलिया ने की थी हिना की बिल अंदर तक गीली हो गयी थी,
वो रो रही थी, चूतड़ पटक रही थी
बाकी लड़कियां भौजाइयां अचरज से कमल का मोटा मूसल देख रही थीं, कोई नहीं थी जिसने न घोंटा हो,.. लेकिन ऐसा और सबसे बढ़कर ये ताकत,... कोई नहीं था जिसने न घोंटा हो मूसल, ... लेकिन रेनू के भाई का मूसल सबसे बाइस नहीं, बल्कि पचीस, मोटाई में भी लम्बाई में भी। ननदें, भौजाइयां ललचा के देख रही थीं, और रेनू दोहरे गर्व से अपनी सहेलियों, भौजाइयों को, एक तो मेरा है वाला। और दूसरा, दोनों ओर घोंट चुकी हूँ इस गदहा ब्रांड को जड़ तक। और उन चेहरों की आँखों की तारीफ़ एकदम कमल से सट कर बैठी रेनू देख रही थी, उसकी बहन जो पहले उससे कोसों दूर भागती थी, ... और सबसे ज्यादा उसे ख़ुशी हो रही थी, ... कभी वो बस छू लेती तो कभी चिपक जाती अपने भैया से,...
ओनर्स प्राइड नेबर्स एन्वी
इस सबसे बेखबर कमल हिना की हर चीख के साथ दूने जोर से मूसल पीछे खिंच के पूरी ताकत से पेल रहा था, ... जिस तरह से उसी कसी चूत में रगड़ता, दरेरता , घिसटता हुआ बड़ी मुश्किल से जा रहा था और उस का वो असर हुआ, जो होना था,... कलाई ऐसा मोटा होने से हिना की चूत की मसल्स जिस तरह फ़ैल रही थीं, अंदर की दीवालों की नर्वस पर जिस तरह बार बार मोटे जबरदस्त सुपाड़े से रगड़ाई हो रही थी,... चीखें धीरे धीरे सिसकियों में बदलनी ही थी वो बदल गयी. चेहरे पर दर्द की जगह सुकून छा गया,... आधे से ज्यादा घुस गया था लेकिन अब अड़स गया था.
मैंने उस शेखजादी के खूब खूब सूरत छोटे छोटे नए नए उभारों को देखते हुए कमल को इशारा किया और वो समझ गया,...
अब धीरे धीरे समझना शुरू कर दिया था उसने, वो देख रहा था की कैसे चमेलिया ने हिना के छोट छोट जुबना को बस हलके हलके छू के, सहला के हिना को पागल कर दिया था,... असली बात है मज़ा लेने की और मजा देने की
बस एक बस एक दम उसी तरह, कमल की उँगलियाँ बस एक लाइन सी खींच रही थीं उभारों के नीचे से ऊपर तक, और निपल के चारों ओर चक्कर काट रही थी, लेकिन निपल एकदम अब खड़े हो रहे थे मानो दावत दे रहें आओ न पकड़ो न दबाओ न, जिन उभारों को गाँव के लड़कों की नजर न लग जाये इसलिए वो तीन परत कर के दुप्पटे के अंदर ढँक कर छुपा कर रखती थी, अब वो खुद पागल हो रहे थे पथरा रहे थे,...
और कमल ने बस भौरें की तरह झुक के जीभ की टिप से उन खड़े बावरे निप्स को छू भर दिया।
गरम तवे पर जैसे किसी ने पानी की दो बुँदे डाल दीं.
हिना छनछना उठी, जोर जोर से सिसकने लगी खुद चूतड़ उठाने लगी और कमल ने बस झुक के अपने होंठ हिना के होंठों के पास,... छुआ नहीं, चूमा नहीं, लेकिन बस एक गुलाबी पंखुड़ी भर का फरक था दोनों के होंठों में ,
हिना इन्तजार कर रही थी और फिर खुद उसने अपने होंठ उठाकर कमल को चूम लिया, उसके बाद कमल कौन छोड़ने वाला था, हिना के दोनों होंठ कमल के होंठों के कब्जे में , और अब हाथ भी हलके हलके उन टीनेज उभारों को दबा रहे थे, मसल रहे थे,.. और हिना अब पगला रही थी लेकिन अब पहल की और किसने कमल की बहन रेनू ने, वो देख रही थी की हिना कैसे कसमसा रही है, खुद चूतड़ उठाने की कोशिश कर रही थी,...
" अरे भैया पेलो ने, ठोंक दो पूरा अंदर तक इस स्साली को आधे में मजा नहीं आएगा,... देख केतना गरमा रही है हमरे भैया के मोटे लंड के लिए"
रेनू जिसके लिए न जाने कब से ललचा रहा था कमल, अपनी बहन की बात टालने की सोच भी नहीं सकता था, बस उसने हिना को दुहरा कर दिया, एक बार फिर, जरा सा खूंटा बाहर निकाला, एक हाथ कंधे पर दूसरा हिना के छोटे छोटे जोबन पर और कस के दबौच के तीर मार दिया,
अब वो रुक नहीं रहा था, धक्के भी नहीं मार रहा था, बस ठेल रहा था, धकेल रहा था, और उस कच्ची कली की संकरी प्रेम गली में रगड़ते दरेरते, अंदर और अंदर जा रहा था,... और बस जब थोड़ा सा रहा गया होगा तो वो रुका एक पल के लिए आधे से ज्यादा खूंटा हलके हलके बाहर खींचा, और अबकी दोनों कंधो को पकड़ के पूरी ताकत से एक बार में ही पेल दिया,
हिना पहले तो चीखी, लेकिन जैसे ही वो मोटा सुपाड़ा उसकी बच्चेदानी से टकराया,... तूफान में पेड़ से टूटा पत्ता जिस तरह कांपता है झूमता है बस उसी तरह से उसकी देह , कुछ भी उसके कण्ट्रोल में नहीं था, जोर से उसने मिट्टी के ढेले पकड़ लिए और वो धुल हो गए, आँखे जैसे मस्ती से उलट रही हो पूरी देह में जैसे लहर के बाद लहर आ रही हो और जब लहर रुकी तो प्यार से उसने कमल की ओर देखा और अब खुद सर उठा के उसे चूम लिया,...
कमल ने जैसे कोई भाले को धंसा के मोड़ दे और हर अंग घायल हो जाए बस उसी तरह सुपाड़े को हिना के बच्चेदानी पर एक बार कस के रगड़ दिया और फिर वही लहरें एक नहीं अनेक, और अब कमल ने धक्के रोक दिया था, बस कभी वो हिना के उरोजों को छू रहा था तो कभी होंठों को, कभी झुक के निपल चुभला देता, कुछ देर में हिना ने आँखे खोल ली, उसे देख के मुस्करा दी, बस इससे बड़ा ग्रीन सिग्नल क्या होता।
धक्के फिर से चालू हो गया था साथ में कमल के बगल में बैठी उसकी बहन रेनू की कमेंट्री भी,
" अरे भैया और जोर से पेलो, अरे तनी गलवा पे निशान दे दो, स्कूल में कुछ तो दिखाने के लिए रहे बहुत छिपाती ढंकती थी न रगड़ो कस कस के इसकी चूँची "
कुछ देर में हिना फिर से झड़ने के कगार पर थी लेकिन कमल बस ले जा के रोक देता था
अंत में हिना को मुंह खोलना ही पड़ा, लेकिन जवाब रेनू ने दिया,
" अरे तो जोर से मुंह खोल के बोल न स्साली,... और अब स्कूल में ये सब तोपना ढांकना बंद, छुपा के रखने का काम बंद "
सर हिला के मुस्करा के हिना ने हामी भरी लेकिन रेनू ने उससे तीन बार जोर जोर से पूरा कबुलवाया, ये भी की अब बाइस पुरवे के किसी भी लड़के को मना नहीं करेगी,...