अपडेट 22
दरवाज़े पर आवाज़ सुन कर सुप्रिया चौंक गयी. वह तोह किसी को अपने रूम पर एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी. उसने दरवाज़ा खोला तोह बहार निक्की कड़ी थी.
निक्की - सुप्रिया क्या तुम मेरी help............ek मिनट, ये तोह मेरी साड़ी है.
निक्की के चेहरे पर सुप्रिया को थोड़ा सा गुस्सा दिखा, सुप्रिया को लगा की निक्की अभी उसे ये साड़ी चेंज करने के लिए बोलेगी.
निक्की से तभी अपने सीरियस चेहरे पर हलकी सी मुस्कान लायी - पर सच बोलू तोह तुम पर ज्यादा अछि लग रही है. ाचा ज़रा पीछे से मेरे लेंगे की दूरी बाँध डौगी?
सुप्रिया उसके मुँह से अपनी तारीफ़ सुनकर थोड़ी हैरान हो गयी. ये वह निक्की तोह नहीं लग रही थी जो अब तक उससे मुँह सदा कर बात कर रही थी. निक्की सुप्रिया के रूम में घुस गयी, और सुप्रिया उसका ब्लाउज पीछे से ठीक करने लगी. निक्की ने काफी ाचा मेकअप किया हुआ था और उसका चेहरा एक डैम खुश और निखरा हुआ सा लग रहा था. उसके बदन में से एक बहुत hi अछि खुशबू आ रही थी. ब्लाउज की डोरी बांधते बन्द्ठे, सुप्रिया का चेहरा उसकी पीठ के काफी पास आ गया था.
सुप्रिया - तुम काफी ज्यादा हॉट लग रही हो. ये कलर तुम पर काफी सूट करता है...
निक्की ने उसकी और देखा और कहा - पर तुमसे तोह काम hi हॉट हु....
दोनों एक दुसरे की और देख कर है पड़े. पिछले 1-2 दिनों की साड़ी लड़ाई मानो कुछ hi पालो में ख़तम हो गयी हो. शायद सुप्रिया का उससे कार में प्यार से बात करना काम आया.
सुप्रिया - चले फिर नीचे? आपका बेसब्री से इंतज़ार हो रहा है...
निक्की ने हाँ में सर हिलाया और फिर वह दोनों एक दुसरे का हाथ पकडे हुए नीचे की और चल पड़े. नीचे पहुंच कर सुप्रिया ने देखा आज तोह कल से कई ज्यादा लोग थे और साड़ी नज़रे उन दोनों पर थी. किसी तरह से साड़ी नज़रो से बचते हुए वह दोनों जा कर रेनू के पास खड़े हो गए.
रेनू - आ गए तुम दोनों फाइनली... कितनी देर लगा दी...
वहां एक आदमी रेनू के पास खड़ा था. निक्की ने उसे देखते hi नमस्ते करि और उनके पेअर छुए. सुप्रिया नहीं जानती थी की ये कौन है. आदमी 50 से तोह ऊपर hi होगा, उसकी हाइट एवरेज थी - 5'8, और हल्का सा पेट निकला हुआ था, पर वैसे अपनी आगे के हिसाब से फिट hi लग रहा था. उसके चेहरे पर एक एक अचे से मैनटिनेंड मूछ और दादी थी जो उसका रॉब और बड़ा रही थी. उसके कपडे और तेवर देख कर सुप्रिया समझ गयी की ये कोई ख़ास hi था.
सुप्रिया इतनी हड़बड़ी में वहां आयी थी की उसकी सारे का पल्लू नीचे गिर गया, और वह उसे ठीक करने लगी.
उस आदमी ने सुप्रिया को अपनी साड़ी ठीक करते हुए देखा और फिर रेनू से बोलै - आपने बताया नहीं की आपकी दूसरी बेटी भी है.
रेनू हस्ते हुए - यह मेरी बेटी नहीं है, पर मेरी बेटी जैसी hi है. सक्सेना जी के ऑफिस में एक एम्प्लोयी की वाइफ है, सुप्रिया. सुप्रिया ये निक्की के ससुर है - प्रताप जी. काफी बड़ा बिज़नेस है इनका कानपूर में. हम लोगो सालो से जानते है इनको. निक्की का हाथ तोह इन्होने सालो पहले hi मांग लिया था.
प्रताप ने रेनू को मुस्कुरा के देखा और कहा - आप तोह मुझे शर्मिंदा कर रहे हो.
रेनू थोड़ा घबराई हुई - मैं आपको कैसे शर्मिंदा कर सकती हु.
प्रताप ने सुप्रिया का हाथ पकड़ा और कहा - बहुत ाचा लगा आपसे मिलकर सुप्रिया जी. सच कहु तोह ये दोनों बहने hi लग रही है.
प्रताप जी हलके हलके सुप्रिया का हाथ मसल रहे थे और सुप्रिया को देख कर मुस्कुरा रहे थे. सुप्रिया को ाचा लग रहा था की रेनू उसे अपनी बेटी जैसा hi समझती थी, और निक्की के कपड़ो में तोह वह और भी अछि लग रही थी.
रेनू ने उन्हें इशारा किया - बीटा आप दोनों जायो, यहाँ खड़े बोर हो जाओगे. संगीत के फंक्शन की तैयारी करो.
प्रताप ने सुप्रिया का हाथ छोड़ दिया. रेनू की तरफ से इशारा मिलते hi सुप्रिया और निक्की वहां से अलग हैट कर अपनी उम्र के लोगो के पास चले गए. सब लोग शाम के डांस की बातें कर रहे थे. अब तोह जैसे निक्की का चेहरा भी खिला हुआ था और वह सबसे है कर बात कर रही थी. सुप्रिया को लग रहा था की अब शायद निक्की अपनी शादी को लेकर एक्ससिटेड थी, जैसे एक लड़की होती है. जो होना था, वह चूका था, और अब उस बारे में सोच कर कोई फायदा नहीं था.
सुप्रिया को भी सब लोग काफी अचे से सारे प्लान्स में शामिल कर रहे थे, तोह उसे भी काफी ाचा लग रहा था. सुप्रिया अब तक निक्की के होने वाले पति से नहीं मिली थी तोह वह उसकी नज़रें भीड़ में उसे hi ढून्ढ रही थी.
सुप्रिया, निक्की और बाकी सब लड़की वाले एक अलग कमरे में जा कर डांस की तैयारी करने लगा. उस में सुप्रिया के कौसिन्स भी शामिल थे, जिसमे कुछ लड़के भी थी. सब लोग बारी बारी से अपने स्टेप्स करके दिखा रहे थे. जैसे hi सुप्रिया ने उन्हें हल्का सा डांस करके दिखाया, उस पर कई साड़ी सीटियां बज गयी, और सब उसकी काफी तारीफ करने लगे. सुप्रिया ने देखा की निक्की के कौसिन्स तोह जैसे उसके डांस में कुछ ज्यादा hi इंटरेस्ट ले रहे थे, और उनका लीडर बना हुआ था निक्की का सबसे बड़ा कजिन - कारन. वह और निक्की और सुप्रिया शायद एक hi उम्र के थे.
कारन - सुप्रिया, तुम ऐसा करो, ये वाला स्टेप करते हुए जरा सा गोल घूम जायो और फिर मैं तुम्हे ऐसे पकड़ लूंगा.
कारन जैसे हर बहाना ढून्ढ रहा था सुप्रिया को छूने का. सुप्रिया ने भी सोच रखा था की इस बार वह किसी को अपना फायदा नहीं उठाने देगी.
सुप्रिया - नहीं, ी थिंक सोलो डांस hi ठीक रहेगा मेरा. या फिर गर्ल्स वाले ग्रुप में.
सुप्रिया ने निक्की की और देखा, जैसे उसे कह रही हो की वह कारन को उससे पीछे हटाए.
निक्की भी शायद कारन को अचे से जानती थी - हाँ कारन, सुप्रिया ठीक कह रही है. तुम लोगो का डांस ाचा नहीं लग रहा.
कारन ये सुन कर थोड़ा सा अपसेट सा हो गया और पीछे हैट गया. डांस की प्रैक्टिस करते करते पति नहीं कब 2 घंटे बीत गए थे. सुप्रिया अब काफी थका हुआ सा महसूस कर रही थी.
सुप्रिया थकी हुई अपनी गर्दन को मसल hi रही थी की एक डैम से पीछे से किसी ने आकर उसके कंधो पर हाथ रखा और दबाने लगा. सुप्रिया ने एक डैम से आँख खोल कर ऊपर देखा तोह कारन था. सुप्रिया ने हड़बड़ा कर उसके हाथ हटाने की कोशिश करि, पर कारन ने हाथ नहीं हटाए. इस समय रूम में सिर्फ वह दोनों hi थे.
कारन - सुप्रिया आराम से बैठो. लगता है तुम थक गयी हो, तोह मैंने सोचा क्यों न थोड़ी मस्सगे कर दू...
सुप्रिया - थैंक्स कारन, पर मैं ठीक हु, प्लीज हटायो न हाथ...
कारन - मस्सगे hi तोह है, इसमें क्या प्रॉब्लम है... अगर यहाँ उनकंफर्टबले न हो तोह मेरे रूम चल सकते है....
कारन ने ये कहते हुए सुप्रिया के कंधो को ज़ोर के दबाया. सुप्रिया ने एक पतली डोरी सा ब्लाउज पहना था तोह कारन का हाथ उसके नंगे शरीर को छू रहा था.
कारन ने जैसे hi सुप्रिया के कंधो को ज़ोर से दबाया, सुप्रिया के मुँह से हलकी सी अह्ह्ह्ह निकल गयी. वह सुनकर कारन और भी ज्यादा मूड में आ गया, और अपने हाथ उसके गले में और नीचे कर दिया. वह सोचने लगा - क्या सॉफ्ट स्किन है... बिलकुल माखन जैसी...
सुप्रिया ने उसका हाथ पकड़ा ताकि वह और नीचे न जा सके - प्लीज कारन, हाथ हटायो. मैं कोई तमाशा नहीं बनाना चाहती....
कारन ने अपना एक हाथ उसकी गिरफ्त से छुड़ाया और उसको और नीचे करते हुए उसकी बूब्स पर लगा दिया. तभी वहां निक्की आ गयी, और उसे देख कर कारन के हाथ रुक गए . निक्की को देख कर सुप्रिया ने जैसे रहत की सांस ली हो.
निक्की - कारन... ये क्या कर रहे हो... सुप्रिया को छोडो..
कारन - तुम्हे क्या प्रॉब्लम है... तुम अपना काम करो न...
निक्की ने पास आ कर कारन को हाथों को सुप्रिया से अलग किया - सुप्रिया हमारी मेहमान है, तुम्हे इतनी भी तमीज नहीं है की लड़कियों से कैसे बेहवे करते है...
कारन ने उसकी और गुस्से से देखा और वह रूम से बहार चला गया...
सुप्रिया - थैंक गॉड निक्की तुम आ गयी.... ये कारन तोह कुछ ज्यादा hi....
निक्की ने उसकी और देखा और कहा - कोई nahi....Waise उसका कसूर नहीं है. उसकी जगह मैं भी अगर लड़का होता न तुम्हारी कमर के तुमको से पागल hi हो जाती. और तुम्हे पकड़ कर....
निक्की ने पीछे से उसके बूब्स पकड़ लिए थे, सुप्रिया को अजीब लग रहा था पर वह हस्ते हुए बोली - बस, अब कुछ ज्यादा hi हो गया.
निक्की ने उसे पीछे से पकडे हुए आईने के सामने करके दिखाया - देखो तोह ज़रा सामने, क्या हॉट लग रही हो.
सुप्रिया ने आँखें ऊपर करके देखा तोह पाया की वह सच में काफी हॉट लग रही थी. उसके बूब्स हलके से ब्लाउज के बहार आ रहे थे, जिससे उसका क्लीवेज और भी बड़ा लग रहा था. उसे यकीं hi नहीं हुआ की वह ये पेहेन कर पूरे दिन घूम रही थी. निक्की के हाथ अभी भी उसके बूब्स से थोड़ा सा नीचे उसे पकडे हुए थे.
निक्की ने उसके पास आ कर उसके कान में हलके से कहा - और वैसे कारन इतना बुरा भी नहीं है... बस थोड़ा हॉर्नी रहता है हमेशा... मैं किसी को बतायूंगी नहीं अगर तुम उसके साथ कुछ...
सुप्रिया - पागल हो क्या... तुम्हे पता है न मैं मैरिड हु.
निक्की - तोह क्या हुआ... और अगर नहीं होती मैरिड तोह?
सुप्रिया - तोह भी कुछ नहीं.... चलो टाइम हो गया है... ऊपर जा कर संगीत के लिए चेंज कर ले.
सुप्रिया ने अपने आप को निक्की से अलग किया, वह अभी भी उसे घूर रही थी. वह दोनों फिर संगीत के लिए चेंज करने ऊपर चले गए. और आधे एक घंटे बाद चेंज करके बहार निकले. सुप्रिया ने इस बार निक्की का hi एक लेंघा पहना हुआ था और निक्की एक बहुत hi रॉयल स्टाइलिंग लेंगे में गज़ब लग रही थी. दोनों hi बहुत अचे लग रहे थे.
जब वह नीचे पहुंचे तोह संगीत का प्रोग्राम शुरू हो hi रहा था. बारी बारी सब डांस के लिए स्टेज पर आ रहे थे. पहले लड़को वालो की तरफ से डांस हुआ, वह काफी नार्मल सा hi था, बिना किसी एनर्जी के. उन्हें देख कर निक्की और सुप्रिया काफी खुश हो गए की उनका डांस तोह इससे काफी बेहतर होने वाला था. लड़को वाले के उस डांस में hi सुप्रिया को पहली बार निक्की का होने वाला पति दिखाई दिया. उसने कपडे तोह काफी अचे पहने हुए थे पर उसकी कद काठी सब काफी नार्मल hi थी. पर शायद वह निक्की के परिवार से काफी ज्यादा अमीर था, और इसी लिए उनकी शादी हो रही थी.
उसके बाद लड़की वालो का डांस शुरू हुआ. पहले निक्की की कजिन बहनो ने डांस किया. उसके बाद निक्की के घर के बड़ो लोगो ने डांस किया, जिसमे निक्की के मम्मी पापा भी थे. और फिर आखिर में निक्की, सुप्रिया और उसकी एक फ्रेंड डांस करने उतरे. उन्होंने 2-3 बॉलीवुड गांव पर मस्त हो कर डांस किया.
केहदो न केहदो न, यू अरे माय माहिया...
आज के लड़के ी तेल्ल यू, इतने लल्लू व्हाट तो यू.... कभी कोई मुझसे न कहे, ओह माय डार्लिंग ी लव यू...
उनके डांस से जैसे पूरी पार्टी में जान आ गयी हो. सब लोग तालियां और सीटियां बजा रहे थे. प्रताप जी भी स्टेज पर आये गए और उन तीनो पर नोट वार कर फैकने लगे. सुप्रिया को लगा की जैसे उस पर तोह उन्होंने सबसे ज्यादा पैसे उड़ाए, पर शायद ये उसका ब्रह्म भी हो सकता था.
स्टेज पर एक डैम वेटर्स की भीड़ िक्खता हो गयी नोट उठाने के लिए और सुरपिया और बाकि सब जल्दी से स्टेज से नीचे आ गए.
सुप्रिया एक साइड में कड़ी अपनी सांस वापस ला hi रही थी की उसे एक जानी पहचानी आवाज़ ने पीछे से बुलाया.
विक्रम - Supriya....Great डांस वन्स अगेन...
सुप्रिया ने पलट ते हुए देखा की यह तोह विक्रम सर थे - ओह... hello सर...
विक्रम - लगता है तुमने करियर चेंज करके डांस को चुन लिया है. जब भी तुमसे मिलता हूँ कोई न कोई डांस hi हो रहा होता है.
सुप्रिया - नहीं नहीं ऐसा नहीं है. बस इत्तेफाक है. वैसे आप यहाँ आज?
विक्रम - हाँ, मैं कल सुबह hi कुछ दिनों के लिए बहार जा रहा हु, तोह सोचा आज hi इस कपल को हैप्पी मैरिड लाइफ विश कर दू.
सुप्रिया - ओह ाचा....
विक्रम - वैसे तुमने क्या सोचा जॉब के बारे में? हम एक एक्सपोर्ट ओरिएंटेड बिज़नेस शुरू कर रहे है, अगर तुम इंटरेस्टेड हो तोह जॉब काफी इंटरेस्टिंग रहेगी, काफी सीखने को मिलेगा..
सुप्रिया - सच बतायु तोह मुझे टाइम hi नहीं मिला इस बारे में सोचने का. पर मुझे लगता है जॉब तोह मुझे शुरू करनी चाहिए फिर से.
विक्रम - सोचो सोचो, और जब रेडी हो तोह मुझे मैसेज कर देना. मेरा कार्ड तोह है हो तुम्हारे पास.
सुप्रिया - सॉरी अगर आप एक बार और अपना नंबर दे दे तोह.…
विक्रम हस्ते हुए - तोह उस पार्टी से निकलते hi कार्ड डस्टबिन में.
सुप्रिया - नहीं नहीं, ऐसा नहीं था. उस दिन बस जल्द बाज़ी में कहीं गिर गया था. सच.
सुप्रिया को याद आया उस दिन अतुल की हालत ख़राब थी पार्टी में और कैसे उन्हें जल्दी से घर जाना पड़ा था. वहीँ जल्दबाज़ी में कार्ड कहीं गिर गया होगा. पर शायद सच तोह ये भी था की ek-do दिन के बाद उसने कभी विक्रम के बारे में सोचा भी नहीं था. इतना कुछ जो चल रहा था उसकी लाइफ में.
विक्रम - चलो ी बिलीव यू. ये लो मेरा नंबर - 9871क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स. इस बार मत खोना…
सुप्रिया - थैंक यू सर, मैं आपको इस शादी के बाद पक्का मैसेज करुँगी…
विक्रम - चलो मैं बाकी लोगो से मिलता हु और फिर मुझे यहाँ से निकलना है. नीस तो मीट यू अगेन, मिस झाँसी की रानी.
सुप्रिया को इसकी इस बात से हसी सी आ गयी. उसे काफी इम्प्रेससिवे लगा की विक्रम को उस दिन की बातें याद थी, की वह झाँसी से थी. उसने देखा की विक्रम दूसरी तरफ जा कर प्रताप जी से बात कर रहा था. विक्रम के सामने तोह जैसे प्रताप जी भी थोड़ा झुक कर hi बात कर रहे थे. उसे ये देख कर लगा की विक्रम का तोह लेवल hi अलग था.
सुप्रिया फिरसे रेनू के साथ मेहमानो की खातिरदारी में लग गयी. रात को वह अपने कमरे में काफी लेट पहुंची. उसने अपना फ़ोन कमरे में hi छोड़ दिया था. फ़ोन पर अतुल की 2 मिस्ड कॉल थी और कुछ मेस्सगेस. साथ hi राहुल की भी एक मिस्ड कॉल थी. उसे समझ नहीं आ रहा था की राहुल आखिर उससे चाहता क्या था. रात के 12 बज चुके थे तोह उसने अतुल को वापस कॉल करना ठीक नहीं समझा. उसने बस उसे मैसेज करके बता दिया की उसका फ़ोन कमरे में रह गया था और बाकी सब बढ़िया चल रहा था.
तभी सुप्रिया के कमरे पर किसी ने खटखटाया. सुप्रिया ने सोचा की इतनी रात को कौन हो सकता था.
वह दरवाज़े के पास आयी और उसने हलके से पूछा - कौन है?
बहार से कारन की आवाज़ आयी - सुप्रिया... दरवाज़ा खोलो... मैं हु.
सुप्रिया कारन की आवाज़ सुन कर घबरा गयी. बड़ी मुश्किल से उसने आज कारन से पीछा छुड़ाया था, और अब वह फिर यहाँ आ गया था. उसे पता था कारन यहाँ क्यों आया है और वह उसके लिए दरवाज़ा बिलकुल नहीं खोलना चाहती थी. कारन ने थोड़ा और ज़ोर से दरवाज़े को बजाना शुरू किया.
सुप्रिया की दिल की धड़कने तेज़ हो चुकी थी, अभी इतना शोर हो रहा था रात को, अगर किसी ने भी देख लिया तोह उसके बारे में क्या सोचेंगे. पर वह दरवाज़ा खोल देगी तोह कारन शायद कुछ किये बिना न माने. दिन में उसके हाथ उसके बूब्स तक तोह पहुंच hi गए थे.
सुप्रिया ने जल्दी से निक्की को मैसेज किया - निक्की प्लीज एक बार बहार आयो.
निक्की उस टाइम सोने hi जा रही थी और उसने सुप्रिया का मैसेज देखते hi अपना दरवाज़ा खोला और बहार कारन को पाया.
निक्की - कारन तुम यहाँ क्या कर रहे हो?
कारन - तुमसे फिर से बीच में आ gayi...why डोंट यू मंद योर बिज़नेस....
निक्की समझ गयी थी की कारन ने पि हुई थी और वह क्यों सुप्रिया के कमरे में घुसना चाहता था - कारन, मैं अभी चाचू को फ़ोन लगयूंगी और फिर तुम्हारी खैर नहीं होगी. अभी की अभी यहाँ से जायो.
कारन - यू बीच... तुम खुद तोह जो चाहे कर सकती हो और mujhe....I क्नोव आल अबाउट यू...
निक्की ने अपनी आवाज़ ुचि की - मंद योर लैंग्वेज एंड गेट आउट ऑफ़ here...nahi तोह अभी तुम्हे होटल से बहार करवा दूंगी..
कारन उसकी ुचि आवाज़ सुन कर थोड़ा होश से में आया - It's नॉट ओवर... तुम देखना अब.
कारन फाइनली वहां से चला गया. निक्की ने सुप्रिया के दरवाज़े पर हलके से नॉक किया - सुप्रिया, वह चला गया यहाँ se...tum सो जायो आराम से...
सुप्रिया ने दरवाज़ा खोला और निक्की को देख कर उसके गले लग गयी. वह कारन के शोर से काफी घबरा गयी थी, आखिर उसकी इज़्ज़त का सवाल था. पर निक्की ने उसे बचा hi लिया था. उसकी हालत देख कर निक्की सुप्रिया के कमरे में आ गयी और उसे शांत करने के लिए उसे पानी पिलाने लगी.
सुप्रिया को धीरे धीरे पानी पीते हुए सांस वापस आयी - निक्की.. थैंक यू यार...
निक्की - इसमें थैंक यू की क्या बात है... सॉरी अगेन कारन के लिए... तुम्हे लगेगा की हमारी फॅमिली में सभी लोग काफी अजीब है...
सुप्रिया हसने लगी - हाँ लग तोह रहा था मुझे...
निक्की - पर सच कहु तोह तुम्हे थोड़ा और स्ट्रांग बनना पड़ेगा.. नहीं तोह तुम ऐसे सर्वाइव नहीं कर पयोगी...
सुप्रिया - हम्म्म्म... तुम पहली पर्सन नहीं हो जिसने मुझे ये कहा हो...
निक्की - चलो, अब आराम करो.
निक्की बहार hi जा रही थी की सुप्रिया ने उसे कहा - निक्की... अगर वह बाद में दुबारा आ गया तोह?
निक्की - नहीं आएगा.
सुप्रिया - तुम यहीं सो जायो न प्लीज...
निक्की - Ummm...par....
सुप्रिया - प्लीज यार... बस आज रात के लिए...
निक्की ने सुप्रिया की और देखा, सुप्रिया ऐसे प्यार से गिड़गिड़ाते हुए कितनी मासूम सी लग रही थी. सच में कोई इस लड़की को बताये की इतनी भी मासूम न बना करे. कोई न कोई तोह इसका फायदा उठा hi लेगा.
निक्की - ाचा ठीक है...
निक्की वहीँ डबल बीएड पर सुप्रिया के बराबर में आ कर लेट गयी. दोनों एक दुसरे को देख रहे थे, और सुप्रिया के चेहरे पर अब डर नहीं था की अब उसे कोई परेशान नहीं करने वाला था. दोनों ऐसे hi एक दुसरे को देखते हुए एक दुसरे का हाथ पकडे हुए लेते रहे. बहार की रौशनी सुप्रिया के चेहरे पर पद रही थी जिससे वह और भी खूबसूरत लग रही थी...
निक्की के दिल में हल चल हो रही थी, उसे शायद सुप्रिया को पहले hi बता देना चाहिए था की वह Bi-sexual थी, उसे लड़कियों के साथ सोने में उतना hi मजा आता था जितना लड़को के साथ. और पहले hi दिन से सुप्रिया को देख कर उसके दिल में कई ख्याल चल रहे थे. पर क्या सुप्रिया इस सब के बारे में जानती थी. इस समय तोह सुप्रिया को ये बताना गलत होता, क्यूंकि वह पहले से दरी हुई थी.
सुप्रिया भी निक्की की नज़रों में अपने लिए कुछ अलग hi महसूस कर रही थी. उसने सुना तोह था लड़कियों को लड़कियों के साथ ये सब करते हुए पर पहले कभी एक्सपीरियंस नहीं किया था... पर ये भी तोह सब गलत hi hoga...shayad वह कुछ ज्यादा hi सोच रही थी....
दोनों ऐसे hi कुछ देर लेते रहे और फिर निक्की ने hi उसके पास आ कर उसके बालो में हाथ फेरने शुरू कर दिए. सुप्रिया को उसके हाथ अपने बालो में बहुत अचे लग रहे थे. दुसरे हाथ से निक्की ने उसके चेहरे को सोफ़्त्ल्य मसलना शुरू किया. वह सुप्रिया के चेहरे पर आये बालो को अपनी उँगलियों से हटा रही थी. इतनी प्यार से तोह कभी अतुल ने भी उसे छुआ नहीं था. निक्की के हाथों में जैसे कोई जादू था जिससे सुप्रिया के पूरे शरीर में एक अलग सी हरकत होनी शुरू हो गयी थी.
निक्की - अगर आज कारन तुम्हारे कमरे में आ जाता तोह…
सुप्रिया - Toh…tum बताया फिर… तुम्हारा भाई है…
निक्की - मेरा दूर का कजिन है वह… भाई कहना शायद कुछ ज्यादा hi पर्सनल होगा…
सुप्रिया - ाचा जो भी… पर तुम उसको अचे से जानती हो शायद…
निक्की - Haan…agar वह अंदर आ जाता तोह तुम्हे फ़क किये बिना तोह वह नहीं मानता…
सुप्रिया उसके मुँह से ये सुनकर थोड़ी हैरान सी हो गयी - क्या तुम और कारन भी….
निक्की - नहीं… नेवर… वह फैसल को जानता था… और इसीलिए उसकी मुझसे फट टी है…
सुप्रिया - ओह ाचा….
निक्की के हाथ और बेकाबू होते जा रहे थे और अब सुप्रिया के होंठों से खेल रहे थे…
सुप्रिया का मैं बहुत hi विचलित हो रहा था पर वह अपने आप को किसी तरह से काबू में रखने की कोशिश कर रही थी. उसने करवट ले कर अपने आप को दूसरी और किया. निक्की एक पल के लिए तोह रुकी पर फिर उसने सुप्रिया की टीशर्ट को कंधे से नीचे किया और उसके कन्धों पर किश करने लगी.
सुप्रिया ने आज तक ऐसी सॉफ्ट किश महसूस नहीं की थी. भाभी ने मजाक में ek-do बार उसके बूब्स तोह पकडे थे पर ऐसा कुछ नहीं... निक्की की किश बढ़ती जा रही थी, और सुप्रिया के चेहरे पर एक मुस्कान सी आ गयी thi...Par उसे याद आया की ये सब भी तोह गलत hi था, उसके साथ कोई लड़का नहीं था पर एक लड़की तोह थी. उसे किसी तरह से निक्की को रोकना होगा...
सुप्रिया ने सोफ़्त्ल्य कहा - निक्की... तुम थक गयी होंगी न... और कल और भी फंक्शन्स है... सो जाते है प्लीज...
निक्की एक डैम से रुक गयी, शायद उसका ये सब करना ठीक नहीं था, उसे तोह पता भी नहीं था की सुप्रिया ये करना भी चाहती है या नहीं. वह वहीँ पीछे मुद कर लेट गयी. सुप्रिया को लगा की निक्की शायद उसकी बात का बुरा मान गयी, और उसने खुद निक्की को पीछे से पकड़ लिया और वह दोनों ऐसे hi एक दुसरे को स्पून करते हुए सो गए. सुप्रिया के पेअर निक्की के पैरो के ऊपर, दोनों एक दुसरे में उलझे हुए..
सुबह जब वह उठे, तोह सफ़ेद चादर में लिपटे हुए वह एक दुसरे की बाहों में थे. इतनी अछि नींद सुप्रिया को पहले कभी नहीं आयी थी, और उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी. पर उसे याद आया की निक्की की शादी सिर्फ एक दिन दूर थी और आज बहुत सारे काम बाकि थे.
सुप्रिया - गुड मॉर्निंग निक्की...
निक्की - गुड मॉर्निंग, तुम्हे डिस्टर्ब तोह नहीं हुआ न रात को?
सुप्रिया बहुत सोफ़्त्ल्य बोली - नहीं... मुझे ाचा लगा तुम यहाँ रुक गयी..
निक्की ने उसकी आँखों में देखा- तोह फिर मुझे कल रात रोका क्यों.....
सुप्रिया ने आंखें नीचे कर ली, उसके पास कोई जवाब नहीं था...
निक्की - मुझे ाचा लगा वैसे तुमने मुझे जैसे रात को हुग कर लिया tha....kaash हम लोग.... चलो जाने दो..
सुप्रिया - हाँ जाने देते है प्लीज... तुम जा कर तैयार हो न.. तुम्हारी सगाई है आज...
निक्की - हाँ, मैं जाती हूँ अपने रूम...
दोनों एक दुसरे की और ऐसे देख रहे थे जैसे उनके बीच कुछ अधूरा रह गया हो. सुप्रिया को लगा पता नहीं वह क्यों इतना सोच रही थी निक्की के बारे में, आज से पहले उसने कभी किसी लड़की के साथ ऐसा कुछ करने का नहीं सोचा था. उसने जल्दी से अपने मैं से सारे ख्याल निकले और तैयार होना शुरू हो गयी.
आज दोपहर में सगाई का फंक्शन था और फिर शाम को मेहँदी की रस्म. सगाई के लिए सुप्रिया ने अपनी hi एक अछि सी साड़ी निकल कर पेहेन ली. वह उसमे भी काफी सुन्दर लग रही थी. सगाई के फंक्शन में सुप्रिया स्टेज पर सबके बीच में hi थी. अब तोह उसे ऐसा लग रहा था की जैसे ये परिवार उसका hi परिवार हो. और वह सब कामो में अपना पूरा हक़ जाता रही थी. जैसे hi उसकी नज़रें निक्की से मिलती वह उन्हें फटाफट से हटा लेती. निक्की भी बीच बीच में सुप्रिया की और देख रही थी...
सगाई के फंक्शन के बाद निक्की और उसका होने वाला पति बैठ कर एक साथ खाना खा रहे थे. सुप्रिया ने उन दोनों को अकेला छोड़ना hi सही समझा. आज कारन भी उससे दूर hi रह रहा था. उसे दूर एक कोने में रेनू जी और प्रताप जी किसी गहरी चर्चा में दिखे. रेनू के चेहरे पर काफी टेंशन बानी हुई थी और प्रताप भी थोड़े गुस्से में लग रहे थे. उसने सोचा की उसे बाद में जाकर पूछना चाहिए की क्या बात हो गयी थी.
शाम को सब लोग नीचे hi मेहँदी के लिए इखट्टा थे. सबसे पहले दुल्हन को hi मेहँदी लगाई गयी. और फिर धीरे धीरे करके सबका नंबर आने लगा. सुप्रिया ने शादी के बाद से अपने हाथों पर मेहँदी नहीं लगाई थी तोह वह काफी एक्ससिटेड थी. उसका नंबर आने hi वाला थी की रेनू ने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे अपने साथ चलने के लिए कहा.
सुप्रिया को लगा की कुछ जरूरी hi होगा तोह वह भी चुप चाप रेनू के साथ चल दी. रेनू उसे अपने कमरे में ले गयी. रेनू का कमरा उसके कमरे से बहुत बड़ा था.
सुप्रिया - क्या हुआ रेनू जी, आप काफी टेंशन में लग रहे हो.
रेनू - बात hi कुछ ऐसी है, मुझे समझ hi नहीं आ रहा मैं क्या करू?
सुप्रिया - क्या बात है, आप मुझे बताये. क्या प्रताप जी ने आपसे कुछ कहा?
रेनू ने चौंकते हुए उसे देखा - तुम्हे कैसे पता?
सुप्रिया - मैंने आप लोगो को सगाई के बाद कुछ बहस करते देखा था. पर पता नहीं क्या बात कर रहे थे आप.
रेनू थोड़ी चुप सी पद गयी - कैसे बतायु तुम्हे. पर बताये बिना कुछ होगा भी नहीं.
सुप्रिया - क्या वह आपसे दहेज़ की डिमांड कर रहे है?
रेनू - डिमांड तोह कर रहे है, पर दहेज़ की नहीं. दहेज़ तोह वैसे भी हम दे hi रहे है.
सुप्रिया - फिर किस चीज़ की डिमांड कर रहे है…
रेनू - तुम्हारी…
सुप्रिया भौचक्की सी रह गयी - क्या?????? मेरी????
रेनू - मैंने उन्हें बहुत समझाया पर वह मैंने को तैयार hi नहीं है. मुझे कभी इस घर में रिश्ता नहीं जोड़ना चाहिए था.
रेनू अब रोने लगी थी.
सुप्रिया - पर वह मुझसे चाहते क्या है?
रेनू - वह चाहते है…. वह चाहते है… की आज रात तुम उनके कमरे में चली जायो.
सुप्रिया हैरान रह गयी थी और उसकी आवाज़ में गुस्सा भी आ गया था - क्या बकवास है ये…
रेनू - मैंने एहि उनको कहा था, पर फिर उन्होंने मुझे कुछ फोटोज दिखाई.
रेनू ने उसके आगे अपना फ़ोन कर दिया जिसमे फैसल एंड निक्की के साथ की फोटोज थी. ये कल की फोटोज तोह नहीं थी पर शायद उससे पहले की कभी की होंगी. इन फोटोज में वह दोनों नंगे थे और एक दुसरे के साथ बहुत साड़ी चीज़े कर रहे थे. सुप्रिया ये देख कर एक डैम से चुप हो गयी.
रेनू - तुमने भी तोह मुझसे झूठ बोलै. मैंने तुम्हे कहा था न की कुछ भी ऐसा वैसा लगे तोह मुझे तुरंत बताना. मुझे एहि डर था की उसे अगर ये सब पता चल गया तोह... पता नहीं उसे ये पता भी कैसे चला...
सुप्रिया के जैसे अब जान में जान hi न हो.
रेनू - वह कह रहे है वह ये रिश्ता आज रात hi तोड़ देंगे और ये साड़ी फोटो न्यूज़ में दे देंगे. अगर तुम उनके कमरे में न आयी तोह.
सुप्रिया - पर ये कैसी शर्त हुई उनकी.
रेनू - तुम जानती नहीं हो उसे, एक नंबर का ठरकी इंसान है वह. अगर उसने तुम पर नज़र दाल दी है तोह वह तुम्हे पाए बिना नहीं मानेगा…
सुप्रिया रेनू की आवाज़ में सुन सकती थी की उसने अपने सारे बंद परदे खोल दिए थे. अब वह प्रताप जी को भी तू तड़के से बोल रही थी, जैसे वह उसके बारे में अचे से जानती हो.
रेनू ने एक डैम से अपना आप को शांत करते हुए अपनी आवाज़ धीमी की, जैसे उस बंद कमरे में भी डर हो - मैंने बहुत समझाया पर वह नहीं माने. सुप्रिया…. निक्की तुम्हारी बेहेन जैसी है, तुम उसकी जिंदगी बर्बाद होते देख सकोगी?
सुप्रिया - और मेरी जिंदगी का क्या.
रेनू - मेरी बात सुनो, तुम्हे डरने की जरूरत नहीं है. एक तोह वह बुद्धा है, उसका अब खड़ा भी नहीं होता सही से, दूसरा मेरे पास एक आईडिया है.
सुप्रिया - नहीं, पर मैं ऐसे कैसे मैं किसी के भी कमरे में चली जायु.
रेनू का चेहरा गुस्से में लाल हो गया था - समझो बात को जरा. तुम भी तोह एक छोटा सा ब्लाउज पेहेन कर घूम रही थी नीचे. मैं तोह उसी समय समझ गयी थी की कुछ तोह काण्ड होगा जब वह तुम्हारा हाथ पकडे हुए था.
सुप्रिया को ये बात सुन कर अपने ऊपर hi शर्म आने लगी. सच में, क्या वह अपने जिस्म की नुमाइश कर रही थी सब के सामने…
रेनू ने फिरसे अपने गुस्से पर काबू किया - देखो बीटा, मैंने कहा न एक प्लान है मेरे पास.
सुप्रिया की आँखों में ासु भर आये थे - क्या प्लान?
रेनू - वह कमरे में शराब तोह जरूर पियेगा. तुम उसके गिलास में ये गोली दाल देना, इससे उसे नींद आ जाएगी.
सुप्रिया - और अगर ये प्लान काम नहीं किया तोह… उसने शराब न पि या ये गोली काम नहीं करि…
रेनू - बिलकुल काम करेगी, मैंने खुद कई बार…. वह कहते कहते रुक गयी
रेनू - और फिर मैंने बयाया न, अब उसका खड़ा नहीं होता. ज्यादा से ज्यादा वह तुम्हे इधर उधर थोड़े हाथ मार लेगा, उससे ज्यादा कुछ नहीं कर पायेगा.
सुप्रिया तोह ये सोच कर hi घबरा गयी थी. एक बुद्धा इंसान उसके शरीर को कहाँ कहाँ छुएगा.
रेनू - बस उसके सामने थोड़ा दिखावा सा कर लेना और जब वह सो जाये तोह तुम उसके बराबर में सो जाना, ताकि उसे लगे की उसने सब कर लिया.
सुप्रिया - मुझसे नहीं होगा ये सब… रेनू जी.. आप समझो.. मैं ऐसी लड़की नहीं हु…
रेनू - मेरे पास कोई भी और विकल्प होता तोह मैं वह कर लेती, चाहे मुझे खुद सोना पड़ता उसके साथ. पर तुम्हारे सामने मेरी जैसी अधेड़ उम्र की औरत के साथ कौन सोना चाहेगा.
सुप्रिया को उसकी बात सुन कर लगा की वह शायद अपनी बेटी के लिए कुछ भी कर सकती थी. और आखिर कार अब उसकी और निक्की की भी अछि दोस्ती हो गयी थी, दोस्ती से शायद थोड़ा ज्यादा hi. क्या उसे निक्की की जिंदगी के बारे में नहीं सोचना चाहिए.
रेनू - और सुनो, किसी को कुछ नहीं पता चलेगा. ये बात हम तीन लोगो के बहार कभी नहीं जाएगी. वैसे मैं सक्सेना जी से बात करुँगी की वह अतुल की थोड़ी हेल्प कर दे. पर उनको भी कुछ नहीं बतायूंगी.
सुप्रिया अब इन सब बातों से पिघलती जा रही थी. उसे निक्की की भलाई के लिए ये करना hi होगा. निक्की कितनी खुश थी अब, अगर वह साड़ी फोटो बहार आ गयी तोह उसकी तोह पूरी लाइफ hi ख़राब हो जाएगी….
रेनू उसकी चुप्पी से समझ गयी थी अब ये मन नहीं करेगी - चलो थोड़ा चेहरा ठीक कर लो, मेक उप लगा लो, फिर मैं तुम्हे उनके कमरे तक छोड़ देती हु.
रेनू ने जिस हिसाब से ये बात कही, सुप्रिया को लगा जैसे रेनू उसकी दलाल हो और उसे एक कमरे में सेक्स के लिए बेचने जा रही हो. उसने किसी तरह से अपने ासु पोछे और थोड़ा मेक उप लगाना शुरू किया. रेनू ने पीछे से आकर उस पर एक ाचा सा परफ्यूम लगा दिया.
फिर वह दोनों प्रताप के कमरे की तरफ चल पड़े. सुप्रिया के पेअर मानो लोहे के बन गए हो, वह उठ hi नहीं रहे थे. रेनू उसे एक हाथ से पकडे हुए किसी तरह से प्रताप के कमरे के बहार ले आयी.
सुप्रिया के अंदर जाने से पहले, रेनू ने उसे एक आखिरी बात कही - ाचा सुनो, उनका गुस्सा काफी तेज़ है, जैसे कहे वैसा कर लेना. और ज्यादा बोलना मत उनके आगे…
सुप्रिया ये सुन कर और भी घबरा गयी. अब तक उसके दिमाग में एक बुड्ढे आदमी की छवि थी जो उसे शायद थोड़ा बहुत छुयेगा और फिर या तोह उसका जल्दी से निकल जायेगा या वह नींद की गोली खा कर सो जायेगा. पर रेनू तोह अब कुछ और hi कह रही थी. अंदर अगर कुछ और मामला निकला तोह वह कैसे सब संभालेगी.
इससे पहले सुप्रिया कुछ कह पाती, रेनू ने दरवाज़ा खोला और सुप्रिया को अंदर धकेलते हुए कमरा बंद कर दिया. अंदर कमरे में अँधेरा था, पर बहार से काफी रौशनी आ रही थी जिससे सुप्रिया को सब कुछ साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था. ये कमरा काफी ज्यादा बड़ा था, बीच में एक बड़ा सा डबल बीएड था जो अचे से सजा हुआ था, जैसी किसी की सुहागरात हो. और साथ hi एक सोफे और एक झूला सा भी था. बीएड को इस तरह सजा हुआ देख सुप्रिया का पूरा शरीर काँप उठा, पता नहीं वह कहाँ hi फास गयी थी.
तभी किसी ने पीछे से आ कर उसकी गांड दबायी और अपना हाथ उसकी पीठ पर रखा.
प्रताप - सुप्रिया... आ गयी तुम फाइनली...
सुप्रिया ने देखा की प्रताप जी के चेहरे पर एक हसी थी जैसे उसे उसका पसंदीदा खिलौना मिल गया होगा. प्रताप के हाथ एक डैम कड़क थे और सुप्रिया की कमर को हलके हलके मसल रहे they…Supriya की शकल पर उसकी घबराहट साफ़ थी.
प्रताप - क्या हुआ.. इतनी घबराई हुई क्यों लग रही हो...
सुप्रिया नीचे देख रही थी, क्या प्रताप जी को नहीं पता की वह क्यों घबरा रही थी - सर... वह....
प्रताप - सर नहीं.... आज रात मुझे प्रताप जी बुलायो... बस अपना पति hi समझो मुझे आज रात tum...dekho कैसे बीएड भी सजवाया है तुम्हारे लिए….
सुप्रिया को लगा ये कैसा इंसान है, वह उसकी बेटी की उम्र को थी और उसने उसके लिए ये बीएड सजवाया था - सर वह....
प्रताप ने गुस्से से सुप्रिया की और देखा - रेनू ने बताया नहीं तुम्हे की मुझे गुस्सा आता है तोह मैं क्या करता हूँ...
सुप्रिया ने गले में आवाज़ hi नहीं थी - बताया था प्रताप जी...
प्रताप ने उसका हाथ पकड़ लिया - और क्या बताया रेनू ने...
सुप्रिया थोड़ा झटपटा सी रही थी - बस... जो आप कहे...
प्रताप - गुड girl…Haan तोह शुरू करे…. रात पता नहीं कब बीत jaye...Main बहुत देर से तुम्हारा वेट कर रहा था...
प्रताप ने सुप्रिया का हाथ खींचते हुए उसे कमरे में आगे ले गया. फिर झूले पर बैठ कर सुप्रिया को अपनी गॉड में बिठा लिया और उसकी बाहों को मसलने लगा.
प्रताप - वाओ... क्या सॉफ्ट हाथ है तुम्हारे... सच में जब तुम्हे कल देखा था तभी से मैं था की तुम्हे अचे से दबोच लू...
प्रताप ने सुप्रिया को अपनी बहून में भरा और उसे कास के जकड़ने लगा. सुप्रिया अपने से डबल आगे के आदमी की जांघ पर बैठी थी और वह उसे ऐसे छू रहा था, उसे काफी गन्दा लग रहा था. वह नहीं चाहती थी की ये आदमी उसे ऐसे छुई या जरा भी टच करे. उसे अपने आप पर भी गुस्सा आ रहा था की उसने अपने आप को ऐसी सिचुएशन में फसने कैसे दिया. इससे ाचा होता की वह कभी इस शादी में आती hi न.
सुप्रिया के हाथ मसलते मसलते प्रताप ने उसे अपनी गॉड में और पास खींच लिया और उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया.
प्रताप - साड़ी का क्या काम है वैसे अब... हटा दो न इसे...
सुप्रिया - प्लीज रहने दीजिये न...
सुप्रिया ने उसकी और देखा और उसकी शकल में छिपे हुए गुस्से को भी.
प्रताप ने सुप्रिया का मुँह ज़ोर से पकड़ा - साड़ी फाड़ दू या उतारेगी….
सुप्रिया का मुँह इस तरह दबाने से दर्द कर रहा था, उसने न चाहते हुए भी जल्दी से अपनी सारे उतारनी शुरू करि, और फिर उतार कर साइड में रख दी.
प्रताप - हाँ ये हुई न बात... ऐसे hi अचे से बात सुनोगी तोह सब प्यार से हो जायेगा... नहीं तोह मुझे गुस्सा आता है न तोह ाचा नहीं होता...
प्रताप ने फिर से उसे अपनी गोदी में बिठा लिया और अब साड़ी के बिना उसे उसका गाला और क्लीवेज साफ़ दिखाई दे रहा था. उसने अपने होंठ उसके गले पर लगा दिए और उन्हें हलके हलके किश करने लगा. और दूसरा हाथ उसके पेट पर चलने लगा.
सुप्रिया हलके हलके ाँहें भर रही थी - अह्ह्ह... ahhh.....mmmm
प्रताप उसकी हलकी हलकी आवाज़ सुन कर और जोश में आ गया, और उसके होंठों पर किश करने लगा. उसका लुंड भी अब हरकत में आना शुरू हो गया था.
सुप्रिया को समझ hi नहीं आ रहा था वह क्या करे, उसके हाथ हवा में झूल रहे थे, वह कैसे इस हैवान को अपने आप को किश करने से रोके. उसे अपनी गांड के नीचे कुछ महसूस होना शुरू हो गया था. क्या प्रताप का लुंड खड़ा होना शुरू हो गया था, रेनू जी ने तोह बोलै था की उनका लुंड इतना खड़ा नहीं hota...Kya रेनू ने उससे झूठ बोलै था?
सुप्रिया ने एक दो बार अपना मुँह पीछे करने की कोशिश करि पर प्रताप ने पीछे से उसका सर पकड़ का उसका मुँह फिर से अपनी और कर दिया.
प्रताप ऐसे hi थोड़ी देर सुप्रिया को किश करता रहा, सुप्रिया के सॉफ्ट रसीले होंठ बने hi किश करने के लिए थे. झूले पर बैठे बैठे उसकी कमर अकडनी शुरू हो गयी थी, और ऊपर से सुप्रिया उसके ऊपर बैठी थी - ऐसा करते है, बीएड पर चलते है...
सुप्रिया - बीएड पर क्यों...
प्रताप हस्ते हुए - इतनी भी नासमझ न बनो... आयो चलो पहले तुम जरा मेरी मालिश कर दो... पूरा शरीर अकड़ा हुआ है….
प्रताप ने अपने कपडे उतारने शुरू किये और एक के बाद एक सारे उतार दिए. सुप्रिया ने कोशिश करि की वह प्रताप की और न देखे पर वह जानना चाहती थी की क्या प्रताप का लुंड पूरा खड़ा था. उसने देखा की प्रताप जी का लुंड पूरा तोह नहीं खड़ा था, पर फिर भी काफी मोटा और काला था. प्रताप ने उसे अपना लुंड लो देखते हुए पकड़ लिया.
प्रताप ने अपना लुंड पकड़ा और बोलै - छुप छुप के क्या देख रही हो इसे, इससे भी पूरा खेलने को मिलेगा, बस थोड़ा सब्र करो…
उसके ये बोलते hi सुप्रिया ने दूसरी और नज़र फेर ली. वह इस काले लुंड से क्यों खेलेगी, ये आदमी उससे क्या करवायेगे अभी…
प्रताप बीएड पर उल्टा लेट गया और बोलै - सुप्रिया... जरा मेरी पीठ की मालिश कर दो...
सुप्रिया धीरे धीरे वहां बीएड पर आयी, उसकी पीठ पर काफी निशाँ थे और उसकी गांड एक डैम काली गन्दी सी थी. सुप्रिया अपने गोर गोर हाथों से उसकी पीठ को छूना नहीं चाहती थी, पर अभी उसके पास कोई और चारा नहीं था. उसने डरते हुए अपनी ऊँगली प्रताप की पीठ पर राखी, उसकी पीठ एक डैम सख्त थी पर कई जगह से उसका शरीर का मोटापा बहार लटक रहा था. सुप्रिया ने एक और ऊँगली पीठ के बीच में राखी, ौड दो उँगलियों से हलके हलके मसलना शुरू किया.
प्रताप ने लेते हुए कहा - ये क्या गुदगुदी सी कर रही ho....poore हाथ से मालिश करो…
सुप्रिया ने किसी तरह से नाक मुँह सिकोड़ कर अपना पूरा हाथ प्रताप की पीठ पर रखा और हलके हलके मसलने लगी…
प्रताप - अह्ह्ह्ह… क्या सॉफ्ट हथेली है tumhari…ahhhhh… और दम लगाया जरा… मैं भी दम लगयूंगा फिर बाद में….
सुप्रिया अभी भी हलके हलके हाथ चला रही थी, पीठ इतनी खुरदुरी सी थी की उसका हाथ hi नहीं चल रहा था, और फिर ये काली सी पीठ पर उसके गोर से हाथ…
प्रताप ने अपना हाथ पीछे करके उसकी कलाई पकड़ी और ज़ोर के दबायी - दम नहीं है क्या…. ज़ोर के करो नहीं तोह मैं तुम्हारी मालिश करके दिखता हूँ.
सुप्रिया उसकी बात सुन कर घबरा सी गौ और उसके हाथ और ज़ोर से चलने लगे. क्या पता मालिश से hi ये सो जाये, सुप्रिया ने सोचा. वह साइड में बैठ कर और ज़ोर से उसकी पूरी पीठ पर हाथ चलने लगी. डैम लगते लगते उसका चेहरा पीठ के और पास आ गया था.
प्रताप - अह्ह्ह... बिलकुल ऐसे hi...Ye बढ़िया है…
तभी बिना कुछ बोले, प्रताप ने एकदम से करवट ली और सीधा हो कर लेट गया. सुप्रिया का चेहरा अब प्रताप के लुंड के ठीक सामने था. लुंड अभी भी पूरा खड़ा नहीं था पर एक मोटा सा कला सा लुंड ठीक उसके मुँह के सामने था.
सुप्रिया एक डैम से डर के चिल्लाई और अपनी आँखें बंद कर ली - उउउउउउइइइइइइइ.....
प्रताप - ारी क्या हुआ… इससे क्यों डर रही हो.. पहले कभी लुंड नहीं देखा क्या...
सुप्रिया ने अब तक सिर्फ अतुल का hi लुंड देखा था रियल लाइफ में, और उस दिन फैसल का थोड़ी दूर से. पर ये इतनी पास उसके, ये मोटा सा काला लुंड… और वह भी किसी पराये मर्द का…
प्रताप ने सुप्रिया की आँखें बंद देख कर जल्दी से उसका हाथ पकड़ा और अपने लुंड पर लगा दिया. लुंड जैसी hi सुप्रिया के हाथ में आया, वह हल्का हल्का हिलने लगा….
सुप्रिया के हाथ में एक आधा खड़ा लुंड था, उसकी आँखें बंद थी पर उसे महसूस हो गया था की उसने क्या पकड़ा है - ुह्ह्ह्ह... ये क्या....
सुप्रिया अपना हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी, पर प्रताप का हाथ उसके हाथों के ऊपर था, और वह उसके हाथों को कहीं जाने नहीं दे रहा था.
प्रताप - चलो.. मसलो इसे अब.….
प्रताप ने उसका हाथ पकडे हुए अपने लुंड पर चलवाना शुरू किया. सुप्रिया के हाथ उसके लुंड पर चलते हुए काँप रहे थे. उसने अपनी आखें धीरे धीरे खोली, उसके दोनों हाथ प्रताप के लुंड पर थे, और प्रताप उन्हें अछि तरह पकडे अपने लुंड पर घुमा रहा था. सुप्रिया सोचने लगी की वह कैसे आप को इस मुसीबत से निकले, शराब तोह उसे कहीं दूर दूर तक नहीं दिख रही थी, वह कैसे उस गोली को प्रताप को खिलाएगी.
प्रताप के तोह आनंद की कोई सीमा नहीं थी, उसने आज तक अपने लुंड पर ऐसे हाथ महसूस नहीं किये थे. जिसके हाथ इतने सॉफ्ट हो उसका मुँह कैसा होगा, ये सोच कर hi प्रताप के मुँह में पानी आने लगा - अह्ह्ह… सुप्रिया…. चलो अब इसे अपने मुँह में लो...
सुप्रिया - मुँह में!!
प्रताप - हाँ, और क्या… अपने पति का भी तोह मुँह में लेती होगी?
सुप्रिया - Nahi…maine कभी मुँह में नहीं liya...please… ये नहीं…
ये सुन कर प्रताप की एक्ससिटेमेंट और भी बाद गयी. क्या सच में इसने कभी किसी का मुँह में नहीं लिया, यानी एक वर्जिन मुँह उसके सामने था. कैसा नामर्द पति था इतनी खूबसूरत लड़की का. उसके गुलाब जैसे होंठों पर प्रताप की नज़र पड़ी तोह उसका लुंड और भी टाइट हो गया.
प्रताप - फिर तोह बहुत मज़ा आएगा तुम्हे... लो ise...shabaash....
प्रताप ने सुप्रिया का चेहरा अपने लुंड की तरफ धकेला... सुप्रिया को इतनी दूर से hi उसके लुंड से एक बदबू सी आ रही थी... वह इसे अपने मुँह में बिलकुल नहीं लेना चाहती थी..
सुप्रिया - प्लीज प्रताप जी... ये नहीं प्लीज... मैं और मालिश कर देती हूँ….
प्रताप - मुझे मन मत करो.. चुप चाप से इसे अपने मुँह में लो...
सुप्रिया अपना पूरा डैम लगा कर अपने आप को लुंड से दूर करना छह रही थी पर प्रताप भी उतना hi दम लगाए उसका चेहरा अपने लुंड पर धकेलने की कोशिश कर रहा था.
सुप्रिया - प्लीज… मुझे नहीं ाचा लग रहा ये सब….
प्रताप ने सोचा की ये ऐसे नहीं मानेगी, इसे औकात में लाना hi पड़ेगा. उसने एक डैम से सुप्रिया के मुँह पर एक खींच के थप्पड़ मारा...
प्रताप - ले न इसे चुप चाप से... क्या नौटंकी कर रही है साली...
सुप्रिया उसके चांटे से सेहम सी गयी और उसने ज़ोर लगाना बंद कर दिया. आज तक उसे किसी ने ऐसा नहीं मारा था. उसका चेहरा आगे की और गया और प्रताप का लुंड उसके होंठों पर रगड़ खाने लगा. उसके होंठ लुंड के रगड़ते hi हलके से खुल से गए थे. जो बदबू उसे अब तक दूर से आ रही थी अब उसके होंठों पर थी…
प्रताप से अब रुका नहीं जा रहा था, सुप्रिया के कोमल होंठों पर उसका लुंड रगड़ खा रहा था और उसके अंदर हलचल बढ़ती जा रही थी - चल अब मुँह खोल और इसे मुँह के अंदर ले…
प्रताप ने सुप्रिया का मुँह पकड़ा और लुंड को थोड़ा और अंदर घुसा दिया. सुप्रिया का मुँह अभी भी थप्पड़ से गूँज रहा था, इससे पहल वह अपने आप को संभल पाती, लुंड का ऊपर का हिस्सा उसके होंठों के बीच में था. सुप्रिया को ये सब बहुत hi गन्दा लग रहा था, बिल्किल उलटी करने का मैं कर रहा था. सुप्रिया एक और थप्पड़ नहीं खाना चाहती थी पर वह लुंड को और अंदर अपने मुँह में भी नहीं लेना चाहती थी. वह ऐसे hi वहां जैम गयी थी, और प्रताप अपना लुंड और अंदर घुसाने की कोशिश कर रहा था…
प्रताप - चलो चलो... और अंदर लो इसे….
प्रताप ने उसका सर पीछे से पकड़ कर और अपना लुंड उसके मुँह में और अंदर घुसा दिया. लुंड अभी भी पूरी तरह सख्त नहीं था पर प्रताप को सुप्रिया के कोमल से मुँह में अपना लुंड बहुत hi ाचा लग रहा था.
प्रताप - अह्ह्ह... क्या मुँह है तुम्हारा Supriya....jaise बना hi इस चीज़ के लिए हो…
प्रताप अब काफी बेकाबू हो चूका था और उसने सुप्रिया का मुँह नीचे धकेल कर लुंड पूरा उसके मुँह में दाल दिया था. सुप्रिया को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, और प्रताप के नीचे के बाल उसके चेहरे पर लग रहे थे, जो उसे और गन्दा महसूस करा रहे थे. सुप्रिया ने अपनी आँखें बंद कर ली ताकि उसे प्रताप के बाल न दिखे, प्रताप तोह जैसे उसकी गर्दन को छोड़ hi नहीं रहा था. सुप्रिया ने अपना एक हाथ वहीँ बालो के बीच में रखा और अपने आप को पीछे धकेलने की कोशिश करती रही. सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था वह और क्या करे.
प्रताप का लुंड सुप्रिया की जीब को छू रहा था जो उसे और भी एक्साइट कर रहा था. वह चाहता था की उसका लुंड थोड़ा और खड़ा हो जाये ताकि वह उसकी सुप्रिया के मुँह में गले तक पंहुचा दे, उसनी अपनी जवानी में कई बार ऐसे किया था. पर लुंड तोह जैसे और खड़ा hi नहीं हो रहा था. जैसे hi प्रताप ने सुप्रिया पर अपनी पकड़ को ढीला किया, सुप्रिया ने अपना मुँह उसके लुंड से पीछे कर लिया. लुंड अब उसके थूक से गीला हो चूका था, ये देख कर सुप्रिया और भी घिनोना महसूस करने लगी.
सुप्रिया ने ऊपर प्रताप की और देखा तोह उसके चेहरे पर काफी एक्ससिटेमेंट और हवस छड़ी हुई थी, वह शायद अपना लुंड सुप्रिया के मुँह में फिर से ठूसना चाहता था.
प्रताप बीएड पर अपने घुटनो पर बैठा और उसने सुप्रिया को बीएड पर नीचे लिटाया. वह सुप्रिया की ऊपर टाँगे फैला कर बैठा और अपना लुंड उसके मुँह के ठीक सामने ले आया. उसका पूरा भर सुप्रिया पर नहीं था, पर सुप्रिया को उसका ऐसे अपने ऊपर बैठना बहुत hi भयानक सा लग रह था.
सुप्रिया बस उसकी और देख कर अपनी आँखों से उसे रुकने के लिए कह रही थी पर प्रताप तोह रुकने का नाम नहीं ले रहा था. प्रताप में ऐसे बैठे हुए फिर से सुप्रिया के मुँह में अपना लुंड घुसा दिया, और जैसे hi वह अपने मुँह इधर उधर करती, वह अपने शरीर का और भार उस पर दाल देता.
सुप्रिया दर्द से बीच बीच में कराह रही थी. प्रताप को उसकी आवाज़ों से और हिम्मत मिल रही थी. प्रताप उसके गाल पर हलके हलके थप्पड़ मार रहा था और बीच में ब्लाउज के ऊपर से उसके बूब्स दबा रहा था…
प्रताप का एक पोजीशन में ज्यादा डेट बैठना मुश्किल था, उसके पेअर मुद से रहे थे - मज़ा आ गया सच में… अब ऐसा करो... अपने बाकी कपडे भी उतार दो.….
प्रताप सुप्रिया के ऊपर से हटा, और सुप्रिया ने अपने मुँह को दर्द में पकड़ा. इतनी देर से प्रताप का मोटा लुंड अपने मुँह में लेकर उसका मुँह दर्द करने लगा था. उसने किसी तरह से अपने आप को बीएड से उठाया और थोड़ा दूर जा कर कड़ी हो गयी. ऐसे तोह वह पूरी रात उसके साथ खेलता रहेगा… क्या वह अभी इस कमरे से भाग जाये..
प्रताप - अब कड़ी हो hi गयी हो तोह वहां से मेरा व्हिस्की का गिलास भी दे दो.
प्रताप ने जैसे hi सुप्रिया को गिलास लाने का इशारा किया, सुप्रिया की थोड़ी सी आशा बड़ी की शायद वह अभी भी प्रताप को रोक पाए. वह गिलास लेने टेबल पर गयी और उसने चुपके से अपनी ब्रा में से गोली निकल कर उसके गिलास में दाल दी. गोली एकदम से hi घुल भी गयी.
प्रताप बीएड से गुर्राया - क्या hua....wahan क्यों कड़ी है.. यहाँ वापस आ जल्दी से….
सुप्रिया गिलास ले कर वापस बीएड पर गयी और उसके हाथ में गिलास दे दिया.
प्रताप - ये लो, एक गूथ पियो...
सुप्रिया उसकी और देखनी लगी, वह ये गिलास से सिप नहीं ले सकती थी, ये तोह उसने सोचा hi नहीं था - नहीं, मैं शराब नहीं पीती...
प्रताप - Ek-do सिप में कुछ नहीं होगा, मैंने कहाँ न मुझे मन करने वाली लडकियां बिलकुल पसंद नहीं..
प्रताप गिलास सुप्रिया के पास ले गया और जबरदस्ती उसको 2-3 घूंठ पीला दिए. और फिर वह खुद पीने लगा. व्हिस्की काफी कड़वी थी और सुप्रिया को बिलकुल अछि नहीं लगी, सिप लेते hi उसका दिमाग एक बार के लिए तोह जैसे पूरा hi घूम गया था. पर उसके बाद फिलहाल तोह सुप्रिया को कुछ महसूस होना शुरू नहीं हुआ था.
प्रताप - अब अपने बाकी कपडे उतार....
सुप्रिया की घबराहट अब और भी बढ़ती जा रही थी... अगर वह गोली काम न की तोह. पर फिलहाल तोह उसके पास और कोई चारा नहीं था. उसने अपना ब्लाउज और पेटीकोट धीरे धीरे उतारा, और अब वह ब्रा और पंतय में प्रताप के सामने कड़ी थी.
प्रताप - रुक क्यों गयी... पूरा उतारो न...
सुप्रिया को लग रहा था की अब तक ये क्यों नहीं बेहोश हुआ, उस पर तोह हल्का हल्का नशा होना शुरू हो चूका था... उसने धीरे धीरे अपनी ब्रा खोलनी शुरू करि.
प्रताप - जल्दी कर न... पूरी रात नहीं है...
सुप्रिया ने अपनी ब्रा उतार के फेकि और अपने हाथों से अपने बूब्स धक् लिए. उसे बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी, इस बुड्ढे इंसान को अपने बूब्स दिखते हुए.
प्रताप उसके ब्रा से बहार निकले मम्मी देख कर पागल सा हो गया - क्या चीज़ हो तुम… ढकने की जरूरत नहीं है... चल... पंतय भी उतार....
सुप्रिया ने अपनी पंतय को नीचे सरकाया. उसकी छूट के ऊपर हलके हलके बाल थे, जो लास्ट उसने अतुल के लिए शेव हटाए थे.
प्रताप उसके पूरे शरीर को घूरे जा रहा था - ओह गॉड... यहाँ आयो जल्दी से...
प्रताप को अब हल्का हल्का नशा होना शुरू हो गया tha...Supriya अभी भी बीएड से दूर कड़ी थी... वह ऐसे नंगे हो कर प्रताप के पास नहीं जाना चाहती थी..
प्रताप उसकी और देख कर जोर से चिल्लाया - यहाँ आ जल्दी से हरामज़ादी......
सुप्रिया डर के उसके पास चली गयी, और प्रताप ने उसे खींच के अपने नीचे दबा लिया. वह उसके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा.
सुप्रिया के नंगा शरीर के नीचे फूल थे और ऊपर प्रताप - अहह. ोुछ... प्लस प्रताप जी ... रुकिए…. उम्मम्मम्म
प्रताप कहाँ उसकी सुनने वाला था - सुप्रिया... पूरा मजा दूंगा तुझे आज raat...aaj रात तुम्हारी दूसरी सुहागरात…
प्रताप उसके बूब्स जानवरो की तरग काट रहा था और उसके निप्पल्स को चाट रहा था... सुप्रिया भी अब ये सब करते करते पागल हो चुकी थी और उसके मुँह से भी ज़ोर ज़ोर की सिसकियाँ निकल रही थी. वह नीचे से पूरी तरह गीली हो चुकी थी और प्रताप का आधा खड़ा लुंड उसकी जाँघों पर टकरा रहा था.
कब ये सब करते करते प्रताप बेहोश को कर सुप्रिया के ऊपर कब सो गया उसे पता hi नहीं चला. सुप्रिया के अंदर भी अब इतनी हिम्मत नहीं थी की उसे अपने ऊपर से हटाए, उसकी भी आँखें बंद होती जा रही थी. आँखें बंद होते होते भी उसके दिमाग में बस एक बात चल रही थी की कैसे वह एक सीढ़ी साधी सी हाउस वाइफ आज किसी और मर्द, और वह भी अपने से उम्र में बहुत बड़े मर्द, के बिस्तर में उसके साथ नंगी सोई पड़ी है. नशे ने जल्द hi उसकी भी आँखें बंद कर दी और वह दोनों ऐसे hi एक दुसरे की बाहों में नंगे सो गए.