सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी - Page 2 - SexBaba
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सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी

अपडेट 8

कमरे में पहुंचते hi सुप्रिया ने अतुल से गुस्से में पुछा - आप मुझे यहाँ छोड़ कर चले जाने का सोच रहे हो?

अतुल - हाँ, तुम वहां जाकर क्या करोगी. यहाँ घर पर hi बेटर है. वहां कोई भी नहीं है, बोर हो जायेगी.

सुप्रिया - पर वहां आप तोह होंगे न…..

अतुल - सुप्रिया मैं तोह सुबह से रात तक काम में बिजी रहता हूँ. तुम अकेले कैसे मैनेज करोगी.

सुप्रिया - तोह आपने मुझे पहले क्यों नहीं बताया की आप मुझे वहां नहीं ले जाओगे.

सुप्रिया की आँखों से ासु बहने लगे थे. उसे लग रहा था की उसका पति उसे छोड़ कर जा रहा है और वह यहाँ कैसे रहेगी.

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अतुल ने पास आ कर रहा - ाचा रो मत. सुनो मेरी बात. मैं अभी किसी के साथ शेयरिंग में रह रहा हूँ. मैं इसलिए भी तुम्हे नहीं ले जा सकता. मुझे 1-2 महीने का टाइम दो, मैं दूसरी जगह रेंट पर घर लेता हूँ और फिर तुम्हे यहाँ से ले जायूँगा.

सुप्रिया के अभी भी ासु बह रहे थे, और अतुल ने उसे हुग कर लिया.

अतुल - इस तरह से मम्मी का भी मैं रह जायेगा नयी बहु के साथ रहने का.

सुप्रिया धीरे धीरे चुप हुई और अपने ासु पोछे - ठीक है, पर सिर्फ 1-2 महीने, इससे ज्यादा नहीं. प्रॉमिस?

अतुल ने उसके माथे पर किश करते हुए बोलै - प्रॉमिस! तुमसे इससे ज्यादा मैं दूर रह भी नहीं पायूँगा. वैसे सुनो, पैकिंग छोडो, कुछ और करते है न अभी….

सुप्रिया उसका इशारा समझते हुए - नहीं, अभी नहीं. मुझे काफी सारे काम है. वैसे भी एहि आपकी सजा है मुझे यहाँ छोड़ के जाने की.

अतुल - ये तोह काफी बड़ी सजा है.

सुप्रिया के अतुल को हल्का सा पीछे धकेला - जो कर रहे हो उसी की हिसाब से hi सजा है. ाचा अब मुझे काम करने दो, आप जायो यहाँ से नहीं तोह आपके घरवाले क्या सोचेंगे.

अतुल - ाचा बाबा ठीक है, कह कर वह रूम से चला गया.

सुप्रिया उसके बाद अपने सूटकेस ओपन करके अपने कपडे निकल कर अलमारी में सेट करती गयी. उसने शादी के गिफ्ट्स वाला बैग भी निकल कर अलग रख दिया. 1-2 घंटो बाद वह गिफ्ट्स वाला भरी बैग लेकर नीचे की और चल पड़ी. उसे सीढ़ियों पर ऊपर आता हुआ ध्रुव दिखा. ध्रुव काफी यंग और हैंडसम था, शायद 19-20 साल को होगा. उसने एक स्टाइलिश सी t-shirt और जीन्स पहने हुई थी और उसके बाल थोड़े बिखरे हुए से थे पर फिर भी स्टाइलिश लग रहे थे.

सुप्रिया को भरी बैग उठाते देख ध्रुव ने बोलै - भाभी आप ये छोडो, मैं उठा लेता हूँ. कहाँ ले जाना है?

सुप्रिया - नहीं तुम रहने दो. तुम्हारे पेअर में लग गयी थी न.

ध्रुव ने अनजान बनते हुए कहा - कब? अच्छा वह… वह तोह कुछ भी नहीं था. बल्कि मुझे आपको सॉरी बोलना चाहिए. अर्पिता दीदी ने बताया की आपके पेअर पर निशाँ पद गया था.

सुप्रिया - मैं ठीक हूँ. एक्चुअली सॉरी तोह मैं हूँ, तुम्हे तोह तीन बार तेज़ की लगी थी न. इसलिए मैं तुमसे कुछ काम नहीं करवायुंगी आज. नहीं तोह तुम तोह मेरी कम्प्लेन कर डोज सबसे.

ध्रुव ने सुप्रिया के हाथ से बैग छीना और बोलै - आप मुझे जानते नहीं हो अभी. चलो ठीक है आज मुझे ये बैग उठाने दो, कभी मुझे हेल्प चाहिए होगी तोह आप हेल्प कर देना. दोने है?

सुप्रिया - पक्का, दोने है!

ध्रुव और सुप्रिया स्टैर्स से नीचे आ गए और सुप्रिया ने बैग अतुल की मम्मी को दे दिया. सुप्रिया फिर किचन में कड़ी हो कर उन्हें खाना बनाते देख रही थी और उनसे बातें कर रही थी. ध्रुव भी वहीँ पास में खड़ा बीच बीच में कमेंट मार कर सुप्रिया को चिड़ा रहा था. सुप्रिया भी काम नहीं थी और उसकी बातों का पूरा जवाब दे रही थी.

शाम को विनीत जीजू भी घर आ गए और सबकी मण्डली में शामिल हो गए. विनीत और ध्रुव मिलकर सुप्रिया की खिचाई करने की कोशिश कर रहे थे. सुप्रिया के सपोर्ट में पहले तोह चची और अर्पिता आ गयी पर फिर उन्होंने भी दाल बदल कर सुप्रिया को छेड़ना शुरू कर दिया. सुप्रिया ने अतुल की और सपोर्ट के लिए देखा पर वह तोह चुप चाप मुस्कुरा के किसी की साइड नहीं ले रहा था. बातों बातों में सुप्रिया को पता चला की ध्रुव के पापा दुबई में जॉब करते थे और चची और ध्रुव इसी घर में रहते थे. चची का कमरा नीचे था और ध्रुव का ऊपर सुप्रिया के बराबर वाला कमरा. सुप्रिया को जब पता चला तोह उसे ध्रुव की पिछले दिन वाली हसी का राज भी समझ आ गया था.

खाना खा कर आस पास के लोग घर चले गए. और सुप्रिया भी अतुल के साथ अपने कमरे में आ गयी. सुप्रिया को फिर से घबराहट होने लगी की आज रात को क्या होगा. वह शायद अभी दुबारा सेक्स के लिए तैयार नहीं थी.

सुप्रिया ने बीएड पर अपना तकिया बिलकुल कोने में किया और कम्बल में लेट गयी. अतुल भी लाइट ऑफ करके आ कर लेट गया. कम्बल में अतुल ने अपना हाथ बड़ा कर सुप्रिया का हाथ पकड़ा.

अतुल - ठण्ड हो रही है न.

सुप्रिया ने उसका हाथ पीछे करते हुआ कहा - मैंने कहा था दिन में, की आप मुझसे दूर रहेंगे.

सुप्रिया को दुसरे hi दिन अतुल के ऊपर कण्ट्रोल लेते हुए ाचा सा लग रहा था. उसने पहले कभी किसी से इतनी सख्ती से बात नहीं की थी. वह अतुल की और पीठ करके लेट गयी, और मुस्कुराने लगी. उसे लगा की अतुल उसे मानाने के लिए आएगा, पर अतुल ने चुप चाप मन मॉस कर आँखें बंद कर ली. 3-4 मिनट बाद जब सुप्रिया ने पलट कर देखा तोह अतुल सो चूका था. उसने गहरी सास ली और अपनी आँखें बंद करके सोने की कोशिश करि.

अगले दिन सुबह घर में और काम लोग थे. ध्रुव कॉलेज गया हुआ था और बाकी बचे रिश्तेदार भी जा चुके थे. अर्पिता भी अपने ससुराल चली गयी थी पर वह ज्यादा दूर नहीं रहती थी और मम्मी जी ने सुप्रिया को बताया की शाम को फिर आएगी. अतुल टीवी में मैच देख रहा था और अतुल के पापा नेवसपपेर पड़ने में बिजी थे. सुप्रिया ने अपनी भाभी को फ़ोन करके अब तक की साड़ी बातें बताई. उसने ध्रुव के बारे में भी बताया की कैसे उसे एक शरारती देवर मिला है. और फिर परेशान होते हुए अतुल के अकेले जाने की बात भी बताई. भाभी ने सुप्रिया को समझाया की 1-2 महीनो की hi बात है और वह एडजस्ट कर ले.

शाम होते hi फिर से लोगो की चहल पहल हो गयी. सब लोग अंताक्षरी का गेम खेल रहे थे. सुप्रिया को तोह जैसे साड़ी फिल्मो के सारे गाने याद थे. और उसको जाता देख सब उसकी आवाज़ से काफी इम्प्रेस हो रहे थे. ध्रुव ने सुप्रिया की आवाज़ को कॉपी करने का नाटक करते हुए बेसुरा गाना गया तोह सुप्रिया ने मज़ाक में उसे थप्पड़ दिखाया.

सुप्रिया - फिरसे मार खाना चाहते हो मुझसे.

ध्रुव - कोई नहीं आप मार लो. आपके हाथ इतने सॉफ्ट है की लगेगी भी नहीं.

उधर अर्पिता और चची डबल मीनिंग गाने गए कर सुप्रिया को चिढ़ाने की कोशिश कर रहे थे.

चची - सरकै लो खटिया ज्यादा लगे, जेड में बलमा प्यारा लगे.…

अर्पिता - रुक्मणि रुकमणी, शादी के बाद क्या क्या हुआ, कौन हरा, कौन जीता….

उनको देख कर ध्रुव भी शुरू हो गया - इन थे नाईट, no कण्ट्रोल, क्या करून कुछ तोह बोल...

सुप्रिया के गाल अब तक शर्म से लाल हो चुके थे, पर ध्रुव के गाना शुरू करते hi, सुप्रिया ने उसके कंधे पर हलके से मारा और उसे चुप करने का इशारा किया. इस तरह काफी देर तक सबकी मीठी नोक झोक चलती रही.

खाना खाने के बाद जब सुप्रिया रूम में पहुंची तोह अतुल अपना आखरी बैग पैक कर रहा था. सुप्रिया को याद आया की कल तोह अतुल चला जायेगा और वह फिर से थोड़ी उदास हो गयी. बीएड पर लेटने के बाद अतुल ने खुद hi सुप्रिया से पीठ मोड़ ली. सुप्रिया को लगा की उसे अतुल को ऐसे नहीं जाने देना चाहिए.

वह सरक कर अतुल के पास आ गयी और उसे पीछे से हुग कर लिया. अतुल भी हुग से थोड़ा हैरान था पर वह भी मौका नहीं खोना चाहता था. उसने पलट कर सुप्रिया की प्यारी आँखों में देखा और उसके गालो को चूमने लगा. सुप्रिया कुछ बोली नहीं और उसने अपनी आँखें बंद कर ली.

अतुल इस सब के लिए इतना बेकरार था की उससे रुका hi नहीं जा रहा था. उसने फटाफट से सुप्रिया की साड़ी को खींच कर उतार दिया और उसका पेटीकोट ऊपर करके उसकी पंतय नीचे कर दी. दो दिन पहले उसने घबराहट और अँधेरे में गौर नहीं किया था पर सुप्रिया के नीचे जैसे बाल थे hi नहीं. शायद उसने शादी से पहले वैक्स करवाया होगा वहां पर. और उसकी गुलाबी छूट बिलकुल किसी अँगरेज़ लड़की की तरह लग रही थी.

अतुल ये सब देख कर और उत्तेजित हो गया, और अपने सारे कपडे उतार दिए. सुप्रिया अपने हाथ नीचे ले आयी थी और अपने आपको ढकने की कोशिश कर रही थी. अतुल ने उसके हाथों को अपनी हाथों से पकड़ा और अपने पैरों से उसके पेअर खोलने लगा. वह सुप्रिया के ऊपर लेट गया और इस बार उसके लुंड ने छूट को आराम से खोज लिया. अतुल ने सुपिया के गले पर किश करते हुए अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया.

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सुप्रिया को पहली बार से काम डर लग रहा था और लुंड के अंदर जाते hi उसने अपनी कमर ऊपर उठा ली. वह हलके हलके सिकियाँ ले रही और उसने अपने हाथ छुड़ा कर अतुल की हुग कर लिया. अतुल उसको हुग करते हुए अंदर बहार झटके मार रहा था. सुप्रिया भी अपनी बॉडी को हिला रही थी. पर थोड़े hi झटको के बाद अतुल धीरे होता गया और उसने सुप्रिया के अंदर अपनी धार छोड़ दी.

सुप्रिया अभी भी उसको कसके पकड़ी हुई थी और अपनी बॉडी उसकी तरफ चला रही थी. जैसे hi उसे अंदर धार फील हुई उसको पता चल गया की अतुल का हो गया था. अतुल ने उसे किश करके हुए - ी लव यू बोलै.

सुप्रिया ने भी हलके से बोलै - में तू.

अतुल फिर हैट कर बाथरूम चला गया और सुप्रिया बीएड पर लेट गयी. वह सोचने लगी की शायद उस दिन से थोड़ा तोह ज्यादा देर हुआ था और उसे थोड़ा ाचा भी लगा था. पर वह अभी भी अधूरा फील कर रही थी. थोड़ी देर बाद दोनों गहरी नींद में सो गए.
 
अपडेट 9

अगले दिन अतुल के जाने की साड़ी तैयारी हो चुकी थी. जैसे hi घर के बहार टैक्सी आयी, तोह ध्रुव ने बैग्स को टैक्सी में रख दिए और अतुल अपने मम्मी पापा की पेअर छू कर टैक्सी में बैठ गया. उसने सुप्रिया को bye तोह क्या उसकी तरफ ठीक से देखा भी नहीं. सुबह कमरे में hi उसने सुप्रिया को चूमते हुए bye बोल दिया था, पर सुप्रिया को लगा की वह अभी भी जाने से पहले उसे bye तोह बोलेगा.

टैक्सी में उसे छोड़ने अतुल के पापा और ध्रुव भी चले गए. अर्पिता भी तभी अपने ससुराल के लिए निकल पड़ी. उसने सुप्रिया को गले लगा का bye बोलै और उसे उदास न होने की सलाह दी.

सबके जाने के बाद, सुप्रिया अपने कमरे में आ गयी और बीएड पर लेट कर रोने लगी. उसे समझ नहीं आ रहा था की वह अतुल के बिना यहाँ कैसे रहेगी. रट रट, उसकी आँख लग गयी और उसे पता hi नहीं चला की कब 2 घंटे बीत गए. उसकी आँख खुली तोह वह अपना चेहरा धो कर नीचे चली गयी.

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नीचे पहुंचकर उसने देखा की ध्रुव भी रेलवे स्टेशन से वापस आ गया था. वह मम्मी जी और चची के साथ किचन के काम में लग गयी. अगले कुछ दिन कुछ ऐसे hi चलते रहे, सुबह उठ कर तैयार हो कर किचन के कामो में हेल्प करती. फिर दिन होते होते ध्रुव कॉलेज से आ जाता और घर की रौनक बड़ा देता और फिर शाम होते होते कोई न कोई और आ hi जाता और हसी मजाक में पूरी शाम निकल जाता.

बस एक रात थी जो सुप्रिया को अकेले अपने कमरे में बितानी होती और वह उससे अतुल की याद दिलाती थी. वह अतुल को कॉल करके थोड़ी देर बात कर लेती और अपने दिन के बारे में बता देती. अतुल भी उसे अपने ऑफिस और दिन के बारे में बता देता, और कभी कभी उससे सेक्स भी बातें भी करता. सुप्रिया उसको सताने के लिए फ़ोन पर सेक्सी आहे भर्ती. पर जब कॉल ख़तम हो जाती तब भी रात काफी लम्बी बची होती थी और उसे अपने आप को नीचे छू कर hi शांत करना पड़ता था.

4-5 हफ्तों में hi उसकी और ध्रुव की तोह जैसे गहरी दोस्ती हो गयी थी. वह अपने आप को रोज़ उसके कॉलेज से आने का इंतज़ार करते हुए पाती और उसके आने पर वह कभी गम शूप, कभी ताश या कभी ऐसे hi एक दुसरे की टांग खींचने में लग जाता थे. कई मायनो में तोह उन दोनों का रिश्ता उसे अपनी भाभी की याद दिलाता था और वह कमी भी पूरा करता था. ध्रुव भी अपनी भाभी का पूरा ख्याल रखने की कोशिश करता. वह रोज़ उसके लिए कुछ न कुछ बहार से ले कर आता और अपनी मम्मी और तेजी से लड़कर सुप्रिया को घर के कामो से दूर रखने की कोशिश करता. पर भाभी से उसे तोह लड़ना भी ाचा लगता था.

चची - सुप्रिया आज तक ये लड़का हमारे लिए तोह कुछ नहीं लाया. पता नहीं क्या जादू कर दिया तुमने इस पर. चलो ाचा है अब तुम hi इसे सम्भालो और इसके लिए लड़की भी तुम्ही ढूंढ़ना.

सुप्रिया - हाँ बिलकुल, कैसी लड़की चाहिए तुम्हे ध्रुव?

ध्रुव - आपको लगता है मैं शादी करूँगा?

सुप्रिया - मैं भी बिलकुल ऐसे hi बोलती थी अपने घर में, पर देखो हो गयी न शादी.

ध्रुव - अब आप जैसा पागल तोह नहीं हूँ न मैं.

सुप्रिया और चची ने दोनों तरफ से उसके कंधे पर मारा.

ध्रुव - ाचा कोई ढूंढ़नी hi है तोह अपनी जैसी ढूंढ़ना. कोई छोटी बहिन है क्या आपकी?

सुप्रिया - है न, मेरी एक कजिन सिस्टर है. वह मेरे जैसी hi दिखती है.

ध्रुव ने थोड़ा सोचते हुए बोलै - नहीं, वह नहीं चलेगी…. आप जैसा तोह कोई हो hi नहीं सकता.

इतने में चची उठ कर चली गयी, ध्रुव के कहा - भाभी आपसे कुछ बात करनी थी.

सुप्रिया - हाँ बोलो न.

ध्रुव - आप किसी को बताएंगी तोह नहीं.

सुप्रिया - हमारी आपस की बात? कभी भी नहीं.

ध्रुव - मुझे कॉलेज में एक लड़की पसंद है, पर वह मुझे भाव hi नहीं देती.

सुप्रिया - ारी वहहह. क्या नाम है उसका. फोटो तोह दिखायो. और तुम्हे कैसे मन कर सख्त- है कोई.

ध्रुव - नीति है उसका नाम. वह तोह मन कर hi रही है न. पर मेरे पास एक आईडिया है.

सुप्रिया - कैसा आईडिया?

ध्रुव - मैं उसे जेलस फील करवाना चाहता हूँ और फिर शायद वह मुझे अलग तरह से देखे. मैं जानता हूँ वह मुझे लिखे करती है अंदर hi अंदर.

सुप्रिया ने भी कॉलेज में दोस्तों के लिए ऐसे कई आइडियाज निकले थे - आईडिया तोह ाचा है. कोई लड़की है जो तुम्हारी हेल्प कर दे इस में?

ध्रुव - हाँ, मेरे दिमाग में तोह सिर्फ एक hi है. आप.

सुप्रिया - मैं!!!??? नहीं बाबा, मैं नहीं करुँगी, कोई भी पकड़ लेगा आराम से.

ध्रुव - कैसे पकड़ेगा? आप तोह कॉलेज स्टूडेंट hi दीखते हो और मेरा कोई फ्रेंड आपसे मिला भी नहीं कभी.

सुप्रिया - मुझे मरवाओगे तुम. अगर घर पर किसी को भी पता चल गया तोह.

ध्रुव - किसी को नहीं पता चलेगा. प्लीज भाभी, कोई भी नहीं है और जिसे मैं ट्रस्ट कर सकू.

सुप्रिया - नहीं यार, प्लीज समझो न.

ध्रुव - आपने उस दिन जब मुझे मारा था आपने वादा किया था न की आप मेरी हेल्प करोगी.

सुप्रिया को लग गया की ध्रुव उसे इमोशनल कर रहा है, उसने भी खुद ये कई बार किया हुआ था. पर वह उसको फिर भी मन नहीं कर पायी.

सुप्रिया - ठीक है पर सिर्फ एक बार और घर में किसी को भी नहीं पता चलना चाहिए.

ध्रुव - ओह यू अरे ग्रेट भाभी! कहकर उसने सुप्रिया के गाल खींच लिए.

फिर उन दोनों ने प्लानिंग करि की कैसे सब होगा. प्लान सिंपल था, ध्रुव किसी बहाने से सुप्रिया को घर से कुछ घंटो के लिए ले जायेगा और फिर वह उसके कॉलेज के सामने साथ होने का नाटक करेंगे. प्लान के हिसाब से सुरप्रिया ने कपडे चेंज करने के लिए ध्रुव के बैग में रख दिए. और फिर 2-3 दिन बाद खेल शुरू किया.

सुप्रिया - मम्मी जी, मुझे कुछ सैंडल्स खरीदनी थी तोह मैं सोच रही थी की ध्रुव मुझे मार्किट ले जायेगा.

सरिता - हाँ बीटा ठीक है, अगर मुझे चलना है तोह मैं भी चल सकती हूँ.

ध्रुव - हाँ आप hi ले जायो, मैं नहीं ले कर जा रहा.

सुप्रिया - अब तोह ये hi मुझे ले कर जायेगा मम्मी जी.

सरिता - ले जा न भाभी को, उसके अचे से मार्किट दिखा दियो.

ध्रुव - अगर आप बोल रहे हो तोह ठीक है, वर्ण…

इस तरह से सुप्रिया ध्रुव की बाइक पर घर से निकल पड़ी. उसने अब तक ज्यादा बहार देखा नहीं था तोह उसको भी ाचा लग रहा था. सबसे ट्रिकी part कपडे चेंज के था जिसके लिए ध्रुव सुप्रिया को एक मॉल में ले गया और उसने वहां के वाशरूम में चेंज कर लिया. जब सुप्रिया चेंज करके एक ब्लैक ड्रेस में आयी तोह ध्रुव उसे देखता hi रह गया.

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सुप्रिया इस ड्रेस में बिलकुल एक कॉलेज स्टूडेंट की तरह दिख रही थी और हद्द से ज्यादा क्यूट और प्रीटी लग रही थी. सुप्रिया वैसे तोह साड़ी में भी क्यूट और सुन्दर लगती थी पर इस ड्रेस में उसे देख कर ध्रुव जैसे खो hi गया.

सुप्रिया - क्या हुआ? चले? ये लो मेरी साड़ी रख लो अपने बैग में. वापस आ कर यहीं चेंज कर लेंगे. थोड़ा मुश्किल होगा पर ठीक है, देख लेंगे.

ध्रुव - हाँ ठीक है चलो.

बाइक पर बैठने के बाद, ध्रुव ने पीछे पलट कर नीचे देखा तोह उसे सुप्रिया की गोरी टाँगे दिख रही थी. और उस पर एक हल्का सा चोट का निशाँ जो शायद उसने सुप्रिया को दिया था. सुप्रिया ने उसके कंधे पर हाथ रख कर उसे पकड़ा. ध्रुव इस समय काफी खोया हुआ hi था और उसकी दिमाग में बस सुप्रिया की ड्रेस और टाँगे चल रही थी. किसी तरह से वह कॉलेज के बहार पंहुचा, और फिर वह दोनों नीति के बहार आने का वेट कर रहे थे. जैसी hi नीति बहार आयी, ध्रुव ने इशारे से सुप्रिया को बता दिया की वह कौन थी. सुप्रिया ने नीति को देखा. वह कुछ कुछ उसकी तरह hi लगती थी - सिल्की बाल, हलके से चब्बी चीक्स, पतली कमर, पर उससे थोड़ा काम सुन्दर.

उसको आता देख सुप्रिया ने अपना हाथ ध्रुव के हाथ में दे दिया, उसकी उंगलियां ध्रुव की उंगलियों के बीच में जकड़ी हुई. ध्रुव ने भी उसका सॉफ्ट हाथ को कास के पकड़ लिया. नीति ने उन लोगो को देख लिया था और उनकी और आयी.

नीति - Hi ध्रुव.

ध्रुव - Hi नीति, कैसी हो.

नीति - बढ़िया. ये कौन है, पहले नहीं देखा.

ध्रुव - ये रिया है, मेरी गर्लफ्रेंड. इस कॉलेज से नहीं है.

नीति - ओह्ह गर्लफ्रेंड! मुझे पता नहीं था की तुम्हारी गर्लफ्रेंड है.

ध्रुव - हाँ, ये देखो. शी इस जस्ट अमेजिंग न.

सुप्रिया - Hi, ुर नीतू राइट?

नीति ने उसे थोड़ा गुस्से से देखा और बोलै - नीतू नहीं नीति. सो तुम लोग कबसे साथ हो?

ध्रुव - अभी 1-2 महीने, बूत ऐसा लगता है की सालो से जानते है एक दुसरे को..

नीति - सो जस्ट गुड फ्रेंड्स या….

ध्रुव ने सुप्रिया के चेहरे को पकड़ते हुए अपनी और खींचा और उसके गालो पर किश करते हुए बोलै - हाँ, काफी अचे फ्रेंड्स है!

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सुप्रिया एक डैम से हैरान सी रह गयी. ये किश तोह प्लान का part hi नहीं था. पर उसने किसी तरह से अपनी हैरानी को छिपाते हुए चेहरे पर स्माइल राखी.

नीति उनकी किश से काफी छिड़ गयी - Ok bye, मुझे जाना है.

नीति थोड़ा गुस्से में वहां से चली गयी. उसे यकीं hi नहीं हो रहा था की ध्रुव ने उससे सुन्दर लड़की को अपनी गर्लफ्रेंड बना लिया. वह तोह ध्रुव को सिर्फ इसलिए लटका रही थी की उसे पता था की उससे सुन्दर पूरे कॉलेज में कोई नहीं था. ध्रुव भी कॉलेज का सबसे स्मार्ट लड़का था, जो अब शायद उसका नहीं था.

उसके जाने के बाद, ध्रुव और सुप्रिया भी बाइक की तरफ चल पड़े. सुप्रिया को ध्रुव पर गुस्सा आ रहा था की उसने बिना बताये उसे कैसे किश कर दिया. उसने बाइक पर बैठ कर ध्रुव को नहीं पकड़ा और कॉलेज से थोड़ी दूर जाते hi वह उस पर रास्तें में गुस्सा करने लगी.

सुप्रिया - तुमने मुझे किश क्यों किया. ये प्लान में नहीं था.

ध्रुव - सॉरी भाभी पर उस टाइम वह एक डैम से hi हो गया. पर नीति की शकल देखने वाली थी उस टाइम.

सुप्रिया - तुम मुझे पहले बता सकते थे अगर ऐसा करना था तोह.

ध्रुव - भाभी सच में कोई प्रे प्लांड नहीं था. आपने भी तोह मेरा हाथ पकड़ लिया था.

सुप्रिया - वह अलग बात है. ाचा जल्दी से मॉल चलो.

ध्रुव बहार से तोह चाहे काफी कूल बना रहा था पर अंदर hi अंदर उसे अभी तक सुप्रिया के सॉफ्ट गाल अपने हूँठों पर फील हो रहे थे. और उसके सॉफ्ट हाथ अपने हाथों में. उसके दिमाग से ये दोनों hi चीज़े जा नहीं रही थी. मॉल पहुंच कर सुप्रिया वाशरूम में चेंज करने गयी. पर उसने पाया की वाशरूम में साड़ी पेहेनना काफी मुश्किल था. अगर वह साड़ी नीचे गिरा देगी तोह उसकी साड़ी काफी गन्दी हो जाएगी.

उसने ध्रुव को टेक्स्ट किया - ध्रुव अंदर आयो जल्दी से.

ध्रुव को समझ नहीं आया की भाभी उसे लेडीज बाथरूम में क्यों बुला रही है. थोड़ा हिचकिचाते हुए वह अंदर गया. सुप्रिया एक बाथरूम स्टाल के अंदर थी और उसने ब्लाउज पहना हुआ था और नीचे पेटीकोट पर साड़ी ज़रा सी बंधी हुई थी और बाकी साड़ी उसके हाथ में थी. ब्लाउज में सुप्रिया के बूब्स की शेप साफ़ दिखाई दे रही थी. सुप्रिया के बूब बहुत ज्यादा बड़े तोह नहीं थे, पर वह हद्द से ज्यादा सुडोल

थे, एक डैम परफेक्ट शेप, जैसे वह सख्त होने के साथ साथ बिलकुल मुलायम भी हो.

सुप्रिया - सुनो, तुम ये साड़ी पकड़ो और मैं धीरे धीरे साड़ी बांधती हूँ.

ध्रुव उसको घूरता हुआ बोलै - ठीक है

सुप्रिया - और सुनो, दूसरी साइड देखो, मुझे नहीं.

ध्रुव एक डैम से दूसरी और पलट गया. सामने ऐना था और उसमे सुप्रिया साफ़ दिखाई दे रही थी. सुप्रिया का फोकस अपनी साड़ी बाँधने में था, तोह उसने गौर नहीं किया की ध्रुव उसे आईने से देख प् रहा था. ध्रुव सुप्रिया के गोर गोर गले और ब्लाउज के ऊपर की छाती को देख रहा था. ये देख कर उसका लुंड हल्का सा खड़ा होने लगा था.

सुप्रिया - आज तोह मैंने तुम्हारी हेल्प कर दी. पर आज के बाद मुझे अपने इन फालतू आइडियाज में इन्क्लुडे मत करना.

ध्रुव - सॉरी भाभी. पर आपके भी इनपुट थे इस प्लान में, और वैसे मैं भी तोह लेडीज वाशरूम में खड़ा हूँ न आपके लिए.

सुप्रिया को ये सुन कर थोड़ी हसी और थोड़ा गुस्सा आ गया, पर उसने अपने आप को कण्ट्रोल किया. उसने जल्दी से अपने साड़ी की प्लेट्स बनायीं और फिर शीशे में देख कर अपने बाल ठीक करने लगी. सुप्रिया ने शीशे में से देखा की ध्रुव वहीँ खड़ा उसे घूर रहा था, तोह उसने हल्का सा पलट कर ध्रुव को एक तीखी नज़र से देखा.

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सुप्रिया - चलो अब तुम बहार जायो. हो गया तुम्हारा काम यहाँ.

ध्रुव झेपते हुए बहार चला गया और थोड़ी देर बाद सुप्रिया भी आ गयी. उन्होंने मॉल से थोड़ी शॉपिंग करि ताकि घर पर कुछ दिखा सखे. वापिस जाते हुए सारे रास्ते दोनों बिलकुल चुप रहे.
 
अपडेट 10

उस दिन घर आ कर ध्रुव और सुप्रिया ने एक दुसरे से ज्यादा बात नहीं करि. रात को सुप्रिया ने जो हुआ उसके बारे में थोड़ा सोचा भी और उसे लगा की ध्रुव ने उसे किश अपनी गर्लफ्रेंड को इम्प्रेस करने के चक्कर में किया था, सो सुबह आने तक उसने बात को मैं से निकल दिया. ध्रुव अगले दिन थोड़ा नार्मल सा था पर फिर भी थोड़ा दूर दूर.

2-3 दिन बाद सरिता ने सुप्रिया को बताया की वह एक दिन के लिए हरिद्वार जा रही है. उसने अतुल और सुप्रिया की शादी हो जाने पर हरिद्वार में पंडितो को खाना खिलने का संकल्प लिया था. उसके साथ अर्पिता और विनीत भी जा रहे थे.

सरिता - अतुल के पापा मार्किट के काम की वजह से नहीं जा प् रहे है. पर चची तोह घर पर hi थी तोह वह सब का ख्याल रख लेंगी. तुम परेशां मत होना.

सुप्रिया - एक hi दिन की तोह बात है मम्मी जी, इसमें क्या परेशां होना. आप आराम से जायो.

अगले दिन, सरिता हरिद्वार के लिए निकल पड़ी और वह एक दिन बाद वापस आने वाली थी. शाम को चची ने सुप्रिया पर काफी लाड दिखाया और उसे कुछ भी काम नहीं करने दिया. उसने सुप्रिया की पसंद का खाना बनाया और रात होने पर सुप्रिया अपने कमरे में सोने चली गयी.

हर रात की तरह, सुप्रिया की जब अतुल से बात ख़तम हुई तोह 12 बज चुके थे और उसे नींद नहीं आ रही थी. उसने पाया की उसके कमरे में पानी ख़तम हो गया था तोह वह रात को नीचे पानी लेने चली गयी. ये पहली बार नहीं था जब वह रात को पानी लेने नीचे गयी हो, और रात को सीढ़ियों की लाइट ों hi रहती थी जो घर के आँगन में नाईट लाइट का काम करती थी.

सुप्रिया दबे पेअर नीचे पहुंची और अपनी बोटलर में पानी भरने hi वाली थी की उसे चची के कमरे से हसने की आवाज़े आयी. सुप्रिया ने सोचा की इतनी रात को चची के कमरे में कौन होगा. सुप्रिया ने थोड़ा दूर से झाँक के देखा. कमरा हल्का सा खुला हुआ था और चची बीएड के नीचे कड़ी हुई थी. बीएड पर कोई आदमी अपनी टाँगे फैला कर लेता हुआ था. उसे उनकी बातें सुनाई दे रही थी, बिलकुल साफ़ तोह नहीं पर वह समझ पा रही थी की वह क्या बोल रहे है. ुसाडमी की आवाज़ सुन कर वह हैरान रह गयी, ये तोह पापाजी की आवाज़ थी.

चची - सरिता के सामने तोह कितना सीधे बन के रहते हो, और उसके जाते hi....

पापाजी - तू भी तोह काम नहीं है. उसके होते हुए भी तेरी आग काम नहीं होती जो छोरी छुपे आ कर मेरा लुंड दबा जाती है.

चची - क्या करू, आपका भाई यहाँ जो नहीं है. वह होता तोह वह hi मुझे ज़ालिमों के तरह कूट देता.

पापाजी - चल आजा, आज तुझे मैं कुटुंगा ज़ालिमों के तरह.

चची - ज्यादा आवाज़ नहीं करना, बहु ने सुन लिया तोह गड़बड़ हो जाएगी.

पापाजी - सुन लिया तोह सुन ले. ाचा ये ले, जरा ये ब्रा पंतय पेहेन कर दिखा.

चची - ये किसकी है? छोटी सी लग रही है.

पापाजी - सोच किसकी है. बड़ी मुश्किल से उसके कमरे से निकल कर लाया हु.

चची - किसकी? बहु की? आप भी न… ये मेरे नहीं आने वाली मेरा तोह उससे 4 साइज बड़ा है.

पापाजी - फसा के पेहेन ले, मुझे देखना है.

सुप्रिया बहार कड़ी ये सब सुन कर शॉक में थी. कुछ दिन पहले उसके एक जोड़ी ब्रा पंतय गायब थे, पर उसे लगा था की वह कहीं रख कर भूल गयी थी. उसने कभी दूर दूर तक भी इस बारे में सोचा नहीं था. चची और पापाजी???

चची ने अपने कपडे उतारे और किसी तरह से सुप्रिया की ब्रा पंतय पहनी. सुप्रिया की पंतय तोह जैसे उसके लिए एक बिकिनी से भी छोटी थी. और उसकी ब्रा को उसे बड़ी खींच तान करके बंद करना पड़ा.

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पापाजी - क्या लग रही है तू इसमें. आजा चल मेरा लुंड चूस ले अब.

चची - आपके नज़र में क्या सुप्रिया बैठ गयी है अब? उसे छोड़ना इतना आसान नहीं होगा मैं पहली hi बता देती हूँ. मेरी बात और थी, सुप्रिया तोह बहुत hi सीढ़ी लड़की है.

पापाजी - ारी नहीं, सुप्रिया पर तोह किसी और की hi नज़र है. पहले उनके खेल तोह हो जाने दो.

चची - किसकी नज़र है?

पापाजी - तू वह सब छोड़ और यहाँ आ कर लुंड चूस मेरा.

चची फिर बीएड पर चढ़ गयी और सुप्रिया को बीएड अचे से दिखाई नहीं दे रहा था बस हलकी हलकी आवाज़े आ रही थी. ये सब सुनने के बाद सुप्रिया की टाँगे काँप रही थी, उसने बोतल को वहीँ छोड़ा और बिना किसी आवाज़ किये वापस ऊपर चली गयी और अपने कमरे की कुण्डी लगा ली.

उसका दिमाग में हज़ार सवाल चल रहे थे. क्या किसी और को चची और पापाजी के बारे में पता था? क्या उसे मम्मीजी को इस बारे में बताना चाहिए? क्या वह अतुल या भाभी को बताये? पापाजी किसकी बात कर रहे थे जिसकी नज़र मुझ पर है? सवालों की उधेड़ बन में वह बैठी सोच hi रही थी की उसके कमरे किसी ने हलके से खटखटाया.

सुप्रिया एक डैम से डर गयी, क्या चची और पापाजी ने उसे नीचे देख लिया था. वह उनका सामना बिलकुल नहीं करना चाहती थी. फिर से हलकी सी खत खत हुई. सुप्रिया ने डरते हुए दरवाज़ा खोला और सामने ध्रुव को पाया. ध्रुव को देख कर जैसे सुप्रिया की जान में जान वापस आयी.

सुप्रिया - क्या हुआ?

ध्रुव - आप सोये नहीं अभी तक? मैंने आपको नीचे से ऊपर आते देखा तोह पता चला आप जग रहे हो. और मुझे भी नींद नहीं आ रही थी, तोह मैंने सोचा…

ध्रुव बहार खड़ा बोल रहा था तोह सुप्रिया को लगा कहीं नीचे उसकी आवाज़ न जाये तोह उसने ध्रुव का हाथ पकड़ कर उसे अंदर खींचा और कमरा बंद कर दिया. वह नहीं चाहती थी की किसी को पता चले की वह अभी भी जगी हुई है.

सुप्रिया - शह्ह्ह्ह थोड़ा धीरे बोलो…

ध्रुव - क्यों क्या हुआ?

सुप्रिया ने सोचा की क्या ध्रुव को अपनी मम्मी और ताऊजी के बारे में पता था. उसे उसका मासूम सा चेहरा देख कर लगा की ध्रुव को यह सब नहीं पता होगा. और वह ध्रुव को ये सब बता कर परेशां नहीं करना चाहती थी. वैसे तोह किसी और दिन, इस समय वह ध्रुव को अपने कमरे में कभी अंदर नहीं आने देती, पर जो सब उसने नीचे सुना और देखा था उसके बाद ध्रुव का वहां होना उसकी बेचैनी काम कर रहा था.

सुप्रिया - कुछ नहीं, सब सो रहे है न. और तुम इतनी तेज़ तेज़ बहार बोल रहे हो.

ध्रुव - ाचा. पर आप तोह जगे हो.

सुप्रिया - हाँ मैं भी सोने hi वाली थी.

ध्रुव - तो सो जायो फिर. मैं चलता हूँ.

सुप्रिया - रुको, थोड़ी देर बैठ जायो, अगर तुम्हे लेट नहीं हो रहा तोह.

ध्रुव - हम्म्म, ठीक है, वैसे भी कल कॉलेज नहीं है.

सुप्रिया - और बताया, तुमने तोह उस दिन के बाद बताया भी नहीं की आगे क्या हुआ. कोई मैसेज आया नीति का?

ध्रुव - हाँ, आपको कैसे पता उसका मैसेज आया था?

सुप्रिया - मुझे लगा hi था की वह मैसेज करेगी. अब बस तुम उसे मिलने के लिए बोलना और फिर एक साद सी स्टोरी सुना देना की तुम्हारा ब्रेक उप हो गया और वह लड़की किसी और को लिखे करती है.

ध्रुव - आपको सारे आइडियाज आते है. ाचा अगर ब्रेक उप न करना हो उस लड़की से तोह?

सुप्रिया - किस लड़की से? ारी वह तोह मैं hi थी न एक्टिंग कर रही थी तुम्हारे लिए.

ध्रुव - हाँ पर अगर उस लड़की को hi गर्लफ्रेंड बनाये राखु तोह?

सुप्रिया के माथे पर शिकन आने लगी थी - क्या मतलब?

ध्रुव सुप्रिया को घूरता हुआ बोलै - भाभी, ी लव….

सुप्रिया एक डैम से सकपका सी गयी - प्लीज ध्रुव आगे मत बोलना.

ध्रुव - पर क्यों भाभी. मैं सोते जागते बस आपके बारे में hi सोचता हूँ. और उस दिन जो भी हुआ उसके बाद तोह मुझे यकीं हो गया है….

सुप्रिया - मैं तुम्हारी भाभी हु. प्लीज उस रिश्ते की रेस्पेक्ट करो.

ध्रुव - विथ आल देय रेस्पेक्ट भाभी, आपको भी पता है की अतुल भैया आपके लिए गलत है.

सुप्रिया थोड़ा गुस्सा होते हुए - ध्रुव मुझे ऐसा कुछ नहीं पता है. तुम जायो अभी यहाँ से.

ध्रुव - भाभी मैं चला जायूँगा बस मुझे एक किश चाहिए आपसे. और कुछ नहीं.

सुप्रिया - पागल हो गए हो क्या. किश?

ध्रुव - भाभी उस दिन आपके गाल किस कर के मैं तोह जैसे पागल हो गया था. मुझे बस एक किश और चाहिए और फिर मैं चला जायूँगा.

ध्रुव ने सुप्रिया के हाथ पकड़ लिए. कोई और दिन होता तोह शायद सुप्रिया उस पर ज़ोर से गुस्सा कर देती पर अभी जो सब नीचे हो रहा था वह ज्यादा आवाज़ नहीं करना चाहती थी. ध्रुव के हाथ पकड़ने से वह भी अंदर hi अंदर थोड़ा पिघलने लगी थी.

ध्रुव - प्लीज बस एक किश और कुछ नहीं.

सुप्रिया ने उसकी और देखा और जैसे आँखों से उसे आगे बढ़ने के लिए हाँ कर दिया हो. ध्रुव ने सुप्रिया का चेहरा पकड़ते हुए उसके गालों पर किश किया और फिर एक डैम से उसके होंठों को चूमने लगा. ध्रुव के हाथ सुप्रिया की पीठ पर चल रहे थे. सुप्रिया को लगा नहीं था की ध्रुव लिप किश करेगा पर वह भी उसकी किश में थोड़ा बह गयी और उसको वापस किश करने लगी.

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कुछ सेकंड किश के बाद जब ध्रुव के हाथ उसकी गांड दबाने लगे तोह सुप्रिया ने उसे थोड़ा पीछे धकेला. उसे पता था की अगर उसने ध्रुव को नहीं रोका तोह न जाने वह क्या hi कर बैठेंगे आज.

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सुप्रिया - बस किश की बात हुई थी, और किश हो चुकी है. तुम जायो अब यहाँ से.

ध्रुव - बस थोड़ा सा और करते है न प्लीज.

सुप्रिया - ध्रुव! जायो यहाँ से, इससे पहले मैं शोर मचा दू.

ध्रुव न चाहते हुए भी कमरे से चला जाता है. सुप्रिया ने फिरसे दरवाज़े की कुण्डी लगायी और पाया की उसका पूरा शरीर काँप रहा था. उसने किसी तरह से रूम की लाइट ऑफ करि और कम्बल में घुस कर सो गयी.

अगले दिन सुबह जब उसे उसकी आँख खुली तोह उसे पिछली रात के दोनों कारनामे याद आ गए. उसने आप को ध्रुव को किश करने के लिए कोसा, और फिर डरते डरते कमरे का दूर खोला. वह नीचे जा कर सब का सामना नहीं करना चाहती थी. पर जैसे hi उसे सरिता की आवाज़ सुनाई दी उसे काफी रहत हुई. उसने नीचे जा कर सरिता को गले लगा लिया और उसके हलके से ासु बह गए.

सरिता - क्या हुआ बीटा, ऐसे क्यों रो रही है.

सुप्रिया - कुछ नहीं, बस आपको बहुत मिस किया.

सरिता - ारी एक hi दिन के लिए तोह गयी थी.

बहार से जैसे सब नार्मल था, चची, पापाजी, मम्मी जी सब वापस अपने कामो में लग गए पर सुप्रिया के मैं में जैसे एक तूफ़ान था. अतुल को गए हुए 6 हफ्ते हो चुके थे और वह अब यहाँ से निकालनी चाहती थी. उसने अतुल को कॉल करके उसे फिर से याद दिलाया की उसने 2 महीने का प्रॉमिस किया था. अतुल ने उसे बताया की उसने किराये एक फ्लैट ले लिया है और वह अगले hi हफ्ते उसे लेने आ रहा था.

सुप्रिया इस खबर से काफी खुश थी. वह कल रात के बाद इस घर में बिलकुल नहीं रहना चाहती थी. अगर अतुल उसे लेकर नहीं जाता तोह वह शायद अपने मायके hi वापस चली जाती. सुप्रिया ने ख़ुशी ख़ुशी अपने जाने की पैकिंग शुरू करि. उसने कोशिश करि की वह अपने दिमाग से चची और पापाजी वाली बात निकल दे पर वह काफी मुश्किल था. अब जब वह उन्हें इस नए नज़रिये से देखती तोह उसे कुछ चीज़े पहले से ज्यादा साफ़ दिखाई देने लगी थी.

अगले एक हफ्ते सुप्रिया और ध्रुव भी एक दुसरे से थोड़ा कटे कटे रहे. ध्रुव कॉलेज से आकर सीधे अपने कमरे में घुस जाता. चची ने मजाक भी किया इस बार तोह शायद देवर भाभी की अचे से लड़ाई हो गयी है. सुप्रिया है के बात को ताल देती.

सुप्रिया के जाने से एक दिन पहले, शाम को वह खुद hi ध्रुव के कमरे के बहार कड़ी थी. उसने हलके से नॉक किया. वह जाने से पहले ध्रुव के साथ अपने रिश्ते को थोड़ा ठीक करना चाहती थी. आखिर एक hi देवर था उसका और उसके साथ बिताएंगे गए हसी मजाक के पालो को वह एक किश किस वजह से ख़राब नहीं करना चाहती थी.

ध्रुव - आ जायो अंदर.

सुप्रिया - बिजी हो क्या?

ध्रुव - नहीं, बस ऐसे hi.

सुप्रिया - आज कल नीचे भी नहीं आते ज्यादा. नाराज़ हो?

ध्रुव - नहीं, मैं कौन होता हूँ नाराज़ होने वाला.

सुप्रिया - ऐसे क्यों बोल रहे हो. तुम्हे पूरा हक़ है, सही बात के लिए. मैं कल चली जयुंगी लखनऊ.

ध्रुव - पता है.

सुप्रिया - तुम्हारी नीति से बात हुई आगे? वह काफी अछि लड़की है, मुझे अपडेट देते रहना.

ध्रुव - क्यों? आपको क्यों अपडेट दू.

ध्रुव के ठन्डे जवाबो से सुप्रिया काफी इमोशनल हो गयी और उसके आंसू बहने लगे. वह वहां कड़ी हलकी हलकी सिसकियों के साथ रो रही थी. ध्रुव उसे रोटा देख एक डैम से पिघल गया और उसने सुप्रिया के पास आ कर उसे हलके से हुग कर लिया.

ध्रुव - सॉरी, मैंने शायद ज्यादा बोल दिया.

सुप्रिया - हाँ बोल तोह दिया.

ध्रुव - भाभी आप प्लस मत जायो न. आपके बिना मैं कैसे रहूँगा.

सुप्रिया अपने ासु पोछते हुए - प्लीज फिर से वह साड़ी बातें मत शुरू करो. ध्रुव हम फ्रेंड्स तोह रह सकते है न.

ध्रुव ने कोई जवाब नहीं दिया. सुप्रिया ने उसे थोड़ा सा नीचे खींचा और उसके गाल पर हलके से एक किश कर दी.

सुप्रिया - ये मेरा गिफ्ट तुम्हारे लिए जाने से पहले, अस ा फ्रेंड. और फिर वह कमरे से बहार चली गयी.

अगले दिन सुबह अतुल आ गया था और उसे शामे डे सुप्रिया को वहां से लेकर वापस लखनऊ जाना था. सुप्रिया के जाने से पहले सब लोग काफी रोये और उसको ट्रैन स्टेशन तक विदा करने आये. सुप्रिया ट्रैन में बैठी सबको bye बोल रही थी. ध्रुव वहीँ थोड़ा पीछे खड़ा था और उसकी आँखों में सुप्रिया ने पहली बार हलके से आंसू देखे. ट्रैन चल पड़ी और सुप्रिया अब एक नए शहर और जीवन की तरफ चल पड़ी. पिछले दो महीनो ने उसे पहले से थोड़ा मातुरे कर दिया था पर आगे जो होने वाला था शायद वह उसके लिए अभी रेडी नहीं थी.
 
अपडेट 11

एहि कोई 7-8 घंटे बाद ट्रैन फाइनली लखनऊ पहुंच गयी. सुप्रिया ने इससे पहले कभी किसी ट्रैन स्टेशन पर इतनी भीड़ नहीं देखि थी. भीड़ में वह किसी तरह अतुल को फॉलो कर रही थी, और उसने नोटिस की बहुत साड़ी नज़रे उस पर थी. जैसे लोग उस घूर रहे हो हर जगह.

रात हो चुकी थी और वह टैक्सी पकड़ कर अपने फ्लैट की सोसाइटी में पहुंचे. उनका फ्लैट एक 10 मंजिला बिल्डिंग में 6तह फ्लोर पर था, और ऊपर जाने के लिए लिफ्ट थी. नीचे एक सिक्योरिटी गार्ड खड़ा था जिसने अतुल को सलूट मारा. सुप्रिया काफी थकी हुई थी पर फिर भी एक्ससिटेमेंट में उसने फ्लैट का हर कोना तभी देख डाला. ये एक 2 भक का फ्लैट था, जिसमे एक छोटा था लिविंग रूम और किचन थी, और एक बालकनी भी जिससे नीचे सोसाइटी की एंट्रेंस दिखाई देती थी. वैसे तोह ये फ्लैट अतुल के ग्वालियर वाले घर से काफी छोटा था, पर सुप्रिया को फ्लैट काफी ाचा लगा. उसे काफी एक्ससिटेमेंट थी इस नए शहर में रहने की.

दोनों चेंज करके बीएड पर आ गए, और एक दुसरे को किश करते हुए एक दुसरे की बाहों में थक कर सो गए. अगले दिन संडे था तोह दोनों देर टेक सोये. सुबह उठते hi सुप्रिया बालकनी में बहार का नज़ारा देखने गयी और वहां साथ वाली बालकनी में एक लड़की सिगरेट पि रही थी. सुप्रिया ने उसे हल्का सा Hi बोलै पर उसने सुप्रिया की और कोई ध्यान नहीं दिया.

सुप्रिया वापस बीएड पर आयी और उसने अतुल के गाल पर एक किश करते हुए उसे जगाया. अतुल ने हलके से आँखें खोलते हुए सुप्रिया को पकड़ लिया और दोनों थोड़ी देर ऐसे hi एक दुसरे को किश करते रहे. किश करते हुए सुप्रिया को ध्रुव की किश याद आ गयी, पर वह कभी उसका जिक्र किसी से नहीं करना चाहती थी.

अतुल - सुनो, आज राहुल घर आएगा मेरा सामान देने. राहुल वही जिसके साथ मैं पहले शेयरिंग पर रहता था. वह मेरे साथ hi काम करता है.

सुप्रिया - ओह ाचा. ठीक है मैं खाना बना दूंगी उसके लिए.

अतुल - हाँ वह शायद दिन में आएगा. पर अभी तोह हम थोड़ी और मस्ती कर सकते है.

सुप्रिया - दिन हो गया है ऑलमोस्ट. 11 बज रहे है. मुझे जल्दी जल्दी सब करने दो. मैंने कभी अकेले किचन का काम नहीं किया तोह मुझे टाइम लगेगा.

सुप्रिया फटाफट से उठ कर किचन के काम में लग गयी. और फिर वह और अतुल नाहा के रेडी हो गए. सुप्रिया ने एक ब्लू कलर की कुर्ती पहने हुई थी, और वह बहुत hi सुन्दर लग रही थी. दिन में 2 बजे के करीब राहुल ने उनके घर की घंटी बजायी.

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राहुल - डिस्टर्ब तोह नहीं किया तुम लोगो को. ये लो यार तुम्हारा बाकी का सामान. बस ये लास्ट था.

अतुल - थैंक्स, आयो बैठो. ये सुप्रिया है.

सुप्रिया - Hello, नमस्ते.

राहुल - नमस्ते भाभी!

सुप्रिया को भाभी सुन कर थोड़ा अजीब सा लगा. अभी तोह वह एक देवर को रोटा हुआ छोड़ कर आयी थी, और अब एक और मिल गया यहाँ. उस भाभी शब्द नहीं सुन्ना था. तीनो बैठ कर बातें करने लगे, और राहुल उसे भाभी बुलाता रहा.

सुप्रिया - राहुल भैया एक बात पूछू? आप बुरा तोह नहीं मानोगे न.

राहुल - हाँ सूरे भाभी, आप बोलो न.

सुप्रिया - आपकी आगे क्या है?

अतुल उसे थोड़ा सा हैरान हो कर देख रहा था.

राहुल - 24, पर क्यों भाभी?

सुप्रिया - गुड, तोह आप और मैं ऑलमोस्ट शामे आगे के hi हैं. आप मुझे प्लीज भाभी मत बुलायो, सिर्फ सुप्रिया चलेगा. भाभी बोलते हो तोह ऐसा लगता है की जैसे मैं कोई 30 साल की महिला हूँ.

राहुल - मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है भाभी? पर फिर आप भी मुझे सिर्फ राहुल बुलाओगे फिर, और ये आप भी ड्राप hi कर देते है न.

सुप्रिया - हाँ पक्का, दोने.

राहुल - भाभी, ी मैं सुप्रिया, मैं भी एक बात कहूं. तुम बुरा मत मन्ना, मैं गेनुइनेली बोल रहा हूँ. तुम अपनी फोटो से भी कहीं ज्यादा ब्यूटीफुल हो. ी मैं बी नेचर. और आपकी आवाज़ तोह रियल में और भी स्वीट है.

सुप्रिया - मेरी आवाज़?

राहुल - हाँ मैंने आपकी आवाज़ फ़ोन पर सुनी है जब आप और अतुल बात करते थे रात को. अतुल कई बार स्पीकर ों करके बात करता था न.

सुप्रिया ने हैरान हो कर कहा - स्पीकर ों करके?

अतुल - कभी कभी किया था, रोज़ नहीं. जब साथ में ऑफिस का काम चलता था.

सुप्रिया को पता hi नहीं था की कोई उसकी और अतुल की प्राइवेट बातें सुन रहा था. कभी कभी तोह वह अतुल को सताने के लिए कुछ ज्यादा hi बोल देती थी या सेक्सी सी आवाज़ें निकलती थी. ये सब तोह उनके प्राइवेट पल थे, अतुल उसको कैसे स्पीकर पर कैसे कर सकता था. उसको अतुल पर गुस्सा आ रहा था.

राहुल ने सुप्रिया के चेहरे को पद लिया - सुप्रिया, वैसे ऐसा कुछ ज्यादा नहीं सुना मैंने. सो परेशां मत हो. और बाद में अतुल की पिटाई मत करना.

सुप्रिया है पड़ी और उसने कुछ आगे नहीं कहा. 1-2 घंटो बाद राहुल चला गया. सुप्रिया को राहुल का नेचर ाचा लगा, काफी हेल्पफुल सा बाँदा था वह. उसके जाने के बाद सुप्रिया को सुबह वाली सिगरेट वाली लड़की याद आयी, और उसने अतुल से पुछा.

सुप्रिया - हमारे बराबर में कौन रहता है? मैंने मॉर्निंग में देखा था एक लड़की को.

अतुल - पता नहीं कौन है. पर हाँ उससे थोड़ा दूर hi रहना.

सुप्रिया - क्यों?

अतुल - मुझे वह थोड़ा चरक्टेरलेस लगती है.

सुप्रिया - ऐसा क्यों?

अतुल - मैंने उसके फ्लैट पर काफी लड़को को आते देखा है. छोडो न उसे, हम अपनी बात करते है. चलो बैडरूम में चलते है.

सुप्रिया - नहीं अभी भी आपकी सजा बाकी है. एक्चुअली वह और भी बाद गयी, क्यूंकि आपने राहुल को हमारी आपस की बातें सुनाई थी. कितना ेम्बरर्सिंग था वह उसके सामने.

अतुल - सॉरी बाबा, यहाँ आयो न प्लीज.

अतुल सुप्रिया को पकड़ने की कोशिश कर रहा था और सुप्रिया अतुल से बचने की. फाइनली वह अतुल की पकड़ में आ गयी और वह उसे पीछे से पकडे हुए बैडरूम में ले गया. अतुल ने जल्दी से अपने और सुप्रिया के कपडे उतार दिए. आज पहली बार वह दिन में ये सब कर रहे थे, तोह उन दोनों को एक दुसरे का शरीर साफ़ दिख रहा था.

दोनों बिलकुल नंगे एक दुसरे के साथ लेते हुए थे, और ऊपर से एक हल्का सा कम्बल उन्हें देखा हुआ था. अतुल ने देखा की सुप्रिया का शरीर सच में इतना गोरा था कपड़ो के बिना, उसके बूब्स, उसकी जाँघे, उसकी पीठ, सब कुछ. एकदम माखन को तरह सॉफ्ट. उसने उसके बूब्स के बीच में अपना मुँह लगा लिया और अपने हाथ उसके नीचे दाल कर कर कमर पर घुमा रहा था. सुप्रिया भी इतने दिनों बाद ये सब करने के लिए काफी बेकरार थी, और उसके हाथ अतुल के बालो में घूम रहे थे. सुप्रिया को भी पहली बार अतुल का लुंड दिखाई दिया था. उसका लुंड ज्यादा बड़ा नहीं था, एहि कोई 4-5 इंच का. सुप्रिया ने वीडियोस में तोह काफी बड़े देखे थे तोह उसे लगता था की सबके hi इतने बड़े होते होंगे.

अतुल ने जल्दी से सुप्रिया के अंदर अपना लुंड दाल दिया और धक्के मारने लगा. थोड़ी देर बाद वह झाड़ गया और फिर थक कर सुप्रिया के ऊपर पेअर करके लेट गया. सुप्रिया उसे पकडे हुए लेती रही, जैसे वेट कर रही हो की आगे अभी कुछ और होगा. अतुल थोड़ी में hi सो गया और सुप्रिया भी थोड़ी देर बाद सो गयी.

जब उसकी आँख खुली तोह रात हो चुकी थी और साथ वाले फ्लैट से ज़ोर ज़ोर की आवाज़ें आ रही थी. सुप्रिया ने गौर से सुना तोह उसे समझ आ गया की ये सेक्स की आवाज़ें है. उसने सेक्स वीडियोस में hi आवाज़ें सुनी थी पहले. उसने सोचा की कभी उसकी तोह इतनी तेज़ आवाज़ नहीं निकली है सेक्स में, पता नहीं क्या hi होता है ऐसा जिसमे ऐसी आवाज़ें निकलती है.

अगली सुबह अतुल को ऑफिस जाना था, तोह सुप्रिया ने जल्दी से उठ कर उसका खाना बना दिया. अतुल भागता हुआ सा ऑफिस चला गया और फिर सुप्रिया ने घर के काम से साथ अपनी भाभी, मम्मी और मम्मी जी से बात की. और शाम होते होते अतुल का वेट किया. अतुल 7 बजे तक घर आ गया और फिर उन लोगो ने खाना खाना खाने के बाद बीएड में थोड़ी देर प्यार किया और फिर सो गए.

इसके बाद अगले 2 हफ्ते जैसे ये hi रूटीन बन गया था. कभी अतुल थोड़ा लेट हो जाता या थका हुआ होता तोह सेक्स नहीं भी होता और वह बस किश करके सो जाते. पर साथ वाले फ्लैट से सेक्स की ज़ोर की आवाज़ें काम से काम हफ्ते में 3-4 बार तोह जरूर आती. अतुल की सिर्फ संडे छुट्टी होती और वह दिन घर के काम और शॉपिंग ेट्स में निकल जाता. सुप्रिया को सच में यहाँ काफी बोर होना शुरू हो गया था.

सुप्रिया जब अकेली होती तोह वह कभी कभी ध्रुव के बारे में भी सोचती, और उसे एक दो बार मैसेज hi किया, पर उसका कोई रिप्लाई नहीं आया. 2 हफ्ते बाद, अतुल के ऑफिस जाने के बाद, सुप्रिया ने सोचा की खुद से घर से बहार निकले और वह सोसाइटी के गार्डन में नीचे घूमने चली गयी. उसे नीचे सिक्योरिटी गार्ड दिखा और कुछ और लोग सोसाइटी के. थोड़ी देर बाद वह ऊपर आयी तोह उसे उसके घर की चाबी नहीं मिल रही थी. सुप्रिया परेशां हो कर चाबी ढूढ़ने लगी पर वह उसे कभी भी नहीं दिख रही थी.

तभी साथ वाले फ्लैट पर एक लड़की आ कर दरवाज़ा खोलने लगी. उसने बहार सुप्रिया को परेशां खड़े देखा.

लड़की - क्या हुआ, तुम कोई हेल्प चाहिए?

सुप्रिया - नहीं, वह बस मेरी चाबी नहीं मिल रही है.

लड़की - ओह ok. फिर क्या करोगी?

सुप्रिया - अपने हस्बैंड को कॉल करुँगी या वेट hi करना पड़े शायद. मुझे दांत पड़ेगी उनसे अगर कॉल किया तोह.

लड़की - तुम मेरे यहाँ वेट कर सकती हो.

सुप्रिया ने उस लड़की को लगभग रोज़ बालकनी में सिगरेट पीते देखा था पर उनकी कभी बात नहीं हुई थी. और अब वह उसे अपने घर के अंदर बुला रही थी. और फिर वह सेक्स की तेज़ आवाज़ें और अतुल की बातों से उसने उसके बारे में एक गलत धारणा बना ली थी.

सुप्रिया - नहीं ठीक है, मैं बहार hi वेट कर लुंगी.

लड़की - बहार कब तक वेट करोगी. ठण्ड हो रही है. आ जायो, चाय पीते है.

सुप्रिया न चाहते हुए भी उसके फ्लैट में चली गयी. उसका फ्लैट थोड़ा अलग स्टाइल कर था पर काफी ाचा सजा हुआ था.

लड़की - बी थे वे, मेरा नाम मेघा है, और तुम?

सुप्रिया - मैं सुप्रिया.

थोड़ी हिचकिचाहट के बाद वह दोनों आराम से एक दूसरे से बातें करने लगे. सुप्रिया को उससे बात करके ऐसा नहीं लगा की वह कोई गलत लड़की है. मेघा की बिलकुल जैसे दिखने वाली फ्रेंड थी उसकी कॉलेज में. मेघा उसकी hi हाइट की थी, पतला पर भरा हुआ शरीर, उसने स्टाइलिश सी कुर्ती पहने हुई थी. उसका फेस थोड़ा मातुरेद था तोह सुप्रिया ने अंदाज़ा लगाया की वह शायद 30 साल की होगी. उसकी बातों से सुप्रिया को वह मैरिड तो नहीं लगी, तोह उसके मैं में सेक्स की आवाज़ों के बारे में सवाल थे. पर वह ये सब पूछने में हिचक रही थी. आखिर कार मेघा ने hi वह टॉपिक उठा लिया.

मेघा - तुमने ज़रूर मेरे बारे में सुना होगा अपने पति से या किसी और से इस सोसाइटी में?

सुप्रिया - नहीं ऐसा कुछ नहीं. मैं तोह किसी और को जानती भी नहीं यहाँ.

मेघा - तोह तुम अंदर आने से मन क्यों कर रही थी? वैसे तुम्हारा चेहरा सब बता देता है. थोड़ा कण्ट्रोल करना सीखो अपने चेहरे हो.

सुप्रिया ने हिम्मत करके पुछा - आप मैरिड तोह नहीं लग रहे पर आपके फ्लैट से आवाज़ें आती है.

मेघा है पड़ी - ओह मुझे पता नहीं था की दूसरी साइड सुनाई देती होंगी. क्यूंकि मुझे तोह तुम्हारी साइड से कुछ सुनाई नहीं देता.

सुप्रिया ने ये सुन कर आँखें नीचे कर ली.

मेघा - मैं जानती हु तुम्हारा सवाल, मैं कॉल गर्ल नहीं हूँ. पर हाँ मेरे कई फ्रेंड्स है जो आते है और मैं उनके साथ एन्जॉय करती हूँ. सेक्स बना hi एन्जॉय करने के लिए है, तुम भी तोह एन्जॉय करती होगी अपने हस्बैंड के साथ. या शायद नहीं?

सुप्रिया इससे पहले कुछ बोलती, उसे सिक्योरिटी गार्ड को कॉल आया की उसके फ्लैट की चाबी नीचे मिल गयी है. सुप्रिया भागी भागी चाबी लेने नीचे चली गयी और फिर वापस अपने घर चली गयी.

इस दिन के बाद सुप्रिया और मेघा की बातचीत शुरू हो गयी थी, और वह अक्सर दिन में एक दुसरे के साथ बैठ कर बातें करते थे. और कुछ hi दिनों में काफी खुल गए थे. सुप्रिया ने अब तक किसी को इतना खुल कर अपनी सेक्स लाइफ के बारे में इतना डिटेल में नहीं बताया था. मेघा तोह जैसे एक सेक्स एक्सपर्ट थी, जो उसे कई साड़ी टिप्स देती थी, पर काफी सारे तोह सुप्रिया को काफी अजीब लगते थे.

उसने सुप्रिया को अपनी सेक्स लाइफ स्पाइसी बनाने के लिए रोलप्ले का आईडिया दिया. की वह और उसका पति कोई और बनने का नाटक करे, और फिर वह थोड़ा खेल करने के बाद सेक्स करे. सुप्रिया को ये कांसेप्ट काफी अटपटा लगा, पर उसने इस बारे में इंटरनेट पर सर्च किया और पाया की और लोगो का भी इसको लेकर ाचा एक्सपीरियंस था. उसने फिर अतुल को ये आईडिया बताया एंड काफी देर लगायी उसे कन्विंस करने के लिए.

अतुल - यार काफी वीयर्ड है ये आईडिया. ऐसे कैसे कोई और बनने का नाटक करे.

सुप्रिया - तरय करके देखते है न प्लीज. आप चाहो तोह मैं कोई और बन जाती हूँ, कोई हीरोइन या कोई और लड़की जिसे आप कभी चाहते हो.

अतुल - नहीं, ऐसा कुछ नहीं. ाचा करना hi है तोह मैं hi कोई और बन जाता हूँ, जो तुम्हारे घर आकर तुम्हे छोड़ता हु.

सुप्रिया ने पहली बार अतुल के मुँह से ये शब्द सुना था. उसके अंदर जैसे एक्ससिटेमेंट बाद रही हो.

सुप्रिया ने हलके से कहा - जैसा आप चाहो. जैसे अपने आईडिया को उसने अब अतुल का आईडिया बना दिया हो. अतुल भी अब मूड में आ गया था.

अतुल - Ok, ठीक है, मैं तुम्हारे पति के ऑफिस का दोस्त हु, जो तुम्हारे घर आ कर तुम्हारे साथ सब करता हूँ.

सुप्रिया को थोड़ा सा अजीब सा लगा, पर रोलप्ले का आईडिया तोह वह hi लायी थी. क्या अतुल किसी के बारे में सोच रहा था? राहुल? नहीं, वह राहुल का सोच कर तोह नहीं कर सकती थी, या कोई भी और जिसको वह जानती हो. पर वह अब पीछे नहीं हैट सकती थी.

सुप्रिया - मैं आपको क्या कह कर बुलायु रोलप्ले में.

अतुल थोड़ा सोचा कर - विक्रम या विक्रम जी.

सुप्रिया के रहत की सांस ली - हाँ ठीक है.

अतुल घर के बहार गया और विक्रम बन कर घर के अंदर आया. उसने अपनी चाल और स्वाभाव थोड़ा सा चेंज कर लिया. थोड़ा रोबीला और अकड़ वाला. सुप्रिया को अंदर हसी आ रही थी, पर उसने अपने आप को कण्ट्रोल करते हुए उसका रोलप्ले में साथ दिया.

सुप्रिया - विक्रम जी क्या कर रहे हो आप, ये गलत है.

अतुल - करने दो मुझे सब सुप्रिया आज.

उसने सुप्रिया को किश करना शुरू कर दिया. अतुल उसे काफी अग्ग्रेस्सिवेली किश कर रहा था. उसने ऐसी किश सुप्रिया को कभी नहीं की थी.

सुप्रिया की सांसें तेज थी और उसके मुँह से आहें निकल रही थी. अतुल ने उसे उठाया और बीएड पर पटक दिया, और उसके कपडे खींच कर उतार दिए.

सुप्रिया - विक्रम जी प्लीज मत करिये न.

सुप्रिया अपने हाथों से अतुल को रोकने की कोशिश कर रही थी, और अतुल थोड़ा जबरदस्ती उसको हाथ काबू में कर रहा था. उसने उसके बूब्स को चूसना शुरू किया, और फिर हलके हलके बाईट करने लगा. सुप्रिया की चीख निकल गयी, उसे अतुल के साथ इतना मज़ा कभी नहीं आया था.

सुप्रिया - अह्हह्ह्ह्ह. विक्रम जी, प्लीज आराम से, मुझे दर्द हो रहा है.

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पर अतुल उसकी कुछ नहीं सुन रहा था, और उसने उसके बूब्स को ज़ोर से दबाना शुरू किया. सुप्रिया दर्द और एक्ससिटेमेंट में चीख रही थी, उसके नीचे जैसे एक ज्वाला फूटने लगा था. फिर अतुल ने भी जल्दी से अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया और झटके मारते हुए अपना सारा माल उसके अंदर निकल दिया.

सुप्रिया भी आज ऐसे काँप रही थी जैसे पहले कभी न काँपी हो सेक्स करने के बाद. सब होने के बाद, वह भी निढाल हो कर अतुल की बाहो में लेती गयी. अतुल और वह एक दुसरे को देख कर हसने लगे, उन्हें समझ hi नहीं आ रहा था की अभी सब क्या हुआ था.

सुप्रिया - अतुल, थैंक यू!

अतुल - किस लिए?

सुप्रिया - मेरी बात मैंने के लिए, ये करने के लिए.

अतुल - अतुल नहीं, विक्रम जी हूँ मैं, बुलायो न मुझे विक्रम जी.

सुप्रिया ने शरमाते हुए उसके सीने में अपना मुँह छुपा लिया और बोलै - आप बहुत गंदे है विक्रम जी.

इस सब के बाद, अगले कुछ हफ्ते वह शनिवार की रात को रोलप्ले करने लगे. अतुल कभी पडोसी बन कर, कभी सुप्रिया का बॉयफ्रेंड या दोस्त बनकर या कभी कुछ और बनकर उसके साथ सेक्स करता था. हालाँकि अतुल अभी भी जल्दी झाड़ जाता, पर पहले के फोरप्ले में सुप्रिया को बहुत मज़ा आता. सुप्रिया को अब अपनी सेक्स लाइफ पहले से अछि लगने लगी थी.
 
अपडेट 12

अगले 2-3 हफ्ते अतुल और सुप्रिया का रोलप्ले ऐसे hi चलता रहा. रोलप्ले से अतुल और सुप्रिया थोड़ा से और नज़दीक आ गए थे. वह लोग रोलप्ले की बिना भी सेक्स करते पर अतुल काफी जल्दी hi दोने हो जाता था.

सुप्रिया को अब लखनऊ में 3 महीने होने वाले थे और उसकी शादी की 6 मंथ एनिवर्सरी भी अब एक महीने hi दूर थी. वीकेंड्स पर कभी कभी राहुल भी उनके घर आ जाता और वह लोग साथ खाना कहते. सुप्रिया छह कर भी मेघा को अतुल के सामने इन्विते नहीं कर पाती थी.

एक संडे रात को उनके प्यार के सेशन के बाद सोने में कुछ ज्यादा hi लेट हो गया और मॉर्निंग में वह दोनों देर से उठे. अतुल जल्दी से उठ कर तैयार हुआ और सुप्रिया उसका लंच पैक करने में लग गयी. पर जल्दबाज़ी में अतुल अपना लंच ले जाना भूल गया. सुप्रिया ने सोचा की ाचा मौका है अतुल को सरप्राइज देने का, वह उसके बैंक जा कर उसका लंच देगी और शायद वह साथ बैठ कर भी खाना खा ले.

सुप्रिया अचे से तैयार हो कर नीचे गयी और अतुल के ऑफिस के लिए ऑटो रिक्शा ढूंढ़ने लगी. ये पहली बार था जब वह लखनऊ में अपनी सोसाइटी से बहार अकेली निकली थी. जब वह अतुल के साथ होती तोह वह ध्यान hi नहीं देती थी की वह कहाँ जा रही है. अकेले उसे काफी अजीब सा लगा, जैसे लोगो की नज़र उसे hi घूर रही थी. शायद वह कुछ ज्यादा अचे से ड्रेस हो कर भी तोह निकली थी. उसने नोटिस किया की पूरे रास्ते ऑटो वाला उसे बार बार अपने मिरर से देख रहा था.

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आखिर वह अतुल की बैंक ब्रांच तक पहुंच गयी. काफी बड़ी और अछि दिखने वाली बैंक ब्रांच थी ये. उसने सिक्योरिटी गार्ड से अतुल के बारे में पुछा तोह पता चला की वह मीटिंग में है और सुप्रिया को उसके डेस्क तक छोड़ दिया. सुप्रिया वहीँ बैठी इधर उधर देख रही थी, राहुल भी कहीं नहीं दिख रहा था.

थोड़ी देर बाद, अतुल 2 लोगो के साथ मीटिंग रूम से निकलता है. वह आपस में बात hi कर रहे होते है, जब अतुल की नज़र सुप्रिया पर पड़ती है. उसके साथे खड़े ब्रांच मैनेजर, मर सक्सेना की नज़र भी वहीँ पड़ती है.

सक्सेना - वाओ, अतुल देखो तुम्हारे देख पर कोई काफी खूबसूरत कस्टमर आया है. जा कर लोन पास करो उसका.

अतुल - सर, ी थिंक वह मेरी वाइफ है.

सक्सेना - ओह ाचा, मुझे पता नहीं था. चलो मिलते है तुम्हारी वाइफ से.

अतुल उन दोनों को सुप्रिया के पास लेकर जाता है - सुप्रिया तुम यहाँ. कॉल तोह कर देती आने से पहले. ाचा ये मेरे बॉस है मर सक्सेना, ब्रांच मैनेजर और ये मर विक्रम सिंह है, काफी बड़े बिज़नेस मन है लुकणौ के.

सुप्रिया ने दोनों की और देखकर कर स्माइल किया और hello कहने के लिए अपना सर हिलाया. विक्रम नाम सुन कर वह थोड़ा सा चौंक गयी थी, ये तोह वही नाम है जो वह रोलप्ले में अक्सर अतुल उसे करता था. विक्रम की पर्सनालिटी में कुछ तोह बात थी. वह 5’10 इंच लम्बा था, अछि पिसीके, जीन्स के ऊपर जैकेट पहने हुई, और आँखों पर सनग्लासेस. उसका चेहरा भी काफी वेल टोंड था, और एक अचे सी मेन्टेन करि हुई बियर्ड.

दूसरी और सक्सेना 5’8 हाइट का था, उसकी तोंद निकली हुई थी और उसने एक नार्मल सी चेक शर्ट और पंत पहने हुई थी.

सुप्रिया - Hello सर, नीस तो मीट यू.

सक्सेना - मरस शर्मा, नीस तो मीट यू तू. अतुल, तुमने कभी बताया नहीं की तुम्हारी वाइफ इतनी सुन्दर है.

सुप्रिया के गाल हलके से पिंक हो गए ये सुनकर.

सक्सेना - काफी हार्ड वर्किंग है आपके हस्बैंड. अभी एक बड़ी डील क्लोज करि है विक्रम जी के साथ.

सुप्रिया उनकी और देख कर मुस्कुरायी. विक्रम जी सुन कर उसे थोड़ी सी हसी भी आ रही थी और थोड़ा अजीब भी लग रहा था - हाँ सर, ऑफिस में hi हमेशा बिजी रहते है. अतुल ये आपका लंच, आप घर पर भूल गए थे.

सक्सेना - अतुल, ऑफिस के बहार भी जिंदगी है, एन्जॉय किया करो, और तुम्हारी तोह अभी नयी शादी हुई है. मरस शर्मा, वैसे आप ऑफिस की पार्टी में आ रहे हो न?

सुप्रिया - कौनसी पार्टी?

सक्सेना - ारी अतुल तुमने पार्टी के बारे में भी नहीं बताया. हमारे बैंक की एनुअल पार्टी होती है, काफी बड़ा इवेंट होता है. 2 हफ्ते बाद है. अतुल मुझे तुम सुप्रिया का नंबर दे देना, मैं अपनी वाइफ को बोलकर उन्हें पार्टी वाले लेडीज व्हाट्सप्प ग्रुप में ऐड करवा दूंगा. लेडीज कुछ डांस प्रोग्राम का प्लान कर रही है.

सुप्रिया - हाँ सूरे सर. मुझे काफी ाचा डांस आता है.

सक्सेना - चलो मिलते है फिर पार्टी में.

ये कह कर, सक्सेना और विक्रम थोड़ा सा दूर हैट कर कुछ और बात करने लगे.

अतुल - सुप्रिया तुम आयी कैसे बैंक तक?

सुप्रिया - ऑटो से, और कैसे? और वैसे hi जयुंगी भी.

विक्रम ने ये सुनते हुए बीच में बोलै - Ma’am माय ड्राइवर विल ड्राप यू होम. ऑटो इस नॉट तू सेफ फॉर यू.

सुप्रिया - No सर, इतस ok, मैं चली जयुंगी.

विक्रम - नॉट ा प्रॉब्लम, मुझे अभी वैसे भी यहाँ थोड़ा और टाइम लगेगा. इतने में ड्राइवर विल ड्राप यू. टेक केयर.

उसने अपने ड्राइवर को इशारा करके सुप्रिया को ड्राप करने के लिए बोलै. सुप्रिया ने अतुल की और देख कर इशारो में परमिशन मांगी. अतुल ने उसे सर हिला कर जाने के लिए हाँ किया, और सुप्रिया ड्राइवर के साथ कार में चली गयी. उसे कार्स के बारे में इतनी जानकारी तोह नहीं थी पर वह इससे पहले कभी इतनी अछि कार में बैठी नहीं थी. ड्राइवर ने उसे उसकी सोसाइटी के गेट तक छोड़ दिया.

शाम को जब अतुल वापस आया तोह वह दोनों आपस में थोड़ा लड़ने लगे.

अतुल - यार तुम मुझे बता तोह देती की तुम बैंक आ रही हो. और लंच तोह मैं मैनेज कर लेता न.

सुप्रिया - सुप्रिसे था आपके लिए, मुझे लगा आप खुश होंगे. और वैसे आपने एक बार भी नहीं पूछ मुझसे की साथ में लंच करना है क्या.

अतुल - तुमने देखा था न की मैं कितना बिजी था ऑफिस में. विक्रम जो है न, वह काफी बड़ा बाँदा है, वह डील काफी इम्पोर्टेन्ट थी.

सुप्रिया - विक्रम… वही न जिसने मुझे ड्राप करने के लिए बोलै था. तुम हमारे रोलप्लेक्स में वही विक्रम बनते थे क्या?

अतुल - पागल हो क्या. ऐसा कुछ नहीं है.

सुप्रिया - लगता तोह ऐसा hi है. स्टाइल तोह कुछ वैसा hi मारने की कोशिश करते हो. अब से कोई विक्रम रोलप्लेक्स नहीं. आपको आईडिया भी है की मुझे वह नाम सुन कर कितना अजीब लग रहा था, मेरी हसी निकलने वाली थी.

अतुल - यार ऐसे नहीं करो. चलो ठीक है मेरे पास और भी आइडियाज है, उसने सुप्रिया को गले लगते हुए बोलै.

सुप्रिया - मुझे कोई आइडियाज नहीं सुनने.

अतुल - सुनो तोह. बिलकुल नया है. मैं एक सिक्योरिटी गार्ड हूँ जिसकी नज़र तुम पर है, और जब तुम्हारा पति चला जाता है मैं आकर तुम्हे गंदे से छोड़ता हूँ.

सुप्रिया - चीटी, कितना गन्दा आईडिया है.

अतुल - ारी यार, कहीं तोह मान जायो. ये भी नहीं, वह भी नहीं.

सुप्रिया - हद्द करते हो आप. विक्रम वाला नहीं होगा मुझसे.

अतुल - ठीक है फिर, तोह रेडी रहो अपने गार्ड भैया के लिए.

ये सुनकर सुप्रिया है पड़ी. अगले कुछ दिन ऑफिस से आकर अतुल गार्ड की थोड़ी थोड़ी एक्टिंग करता बिना सेक्स किये. मैडम, ये आपकी चिट्ठी है. मैडम, ये आपका पार्सल है. मैडम, आपने ये सब्जी मंगवाई थी. मैडम कुछ हेल्प चाहिए थी क्या. सुप्रिया जब थैंक यू भैया बोलती, तोह उसे काफी हसी आती थिस पर साथ में hi पता नहीं क्यों वह काफी एक्ससिटेड भी फील कर रही थी, और बेकरारी से सैटरडे का वेट कर रही थी.

इस बीच वह पार्टी वाले व्हाट्सप्प ग्रुप में भी ऐड हो गयी थी. पार्टी में हर किसी को एक सोलो डांस करना था और फिर एक ग्रुप डांस था. सुप्रिया डांस को लेकर काफी एक्ससिटेड थी, उसने अपने कॉलेज में काफी बार स्टेज पर डांस किया था. सोलो डांस का गाना उसे hi चुनना था, ग्रुप डांस का कोई फनी सा भोजपुरी गाना था.

शनिवार की रात को अतुल सिक्योरिटी गार्ड की बारी आ hi गयी थी.

अतुल - मैडम, सर घर पर है क्या?

सुप्रिया - नहीं वह तोह नहीं है.

अतुल - आपसे एक बात करनी थी.

सुप्रिया - बोलिये.

अतुल - मैडम आप बहुत hi सुन्दर हो और आपको देख कर मुझे गांव में अपनी बीवी की याद आती है.

सुप्रिया - ाचा भैया. तोह?

अतुल - तोह मैडम मैं एक बार आपका हाथ छू सकता हूँ? उससे मुझे मेरी बीवी की याद पूरी हो जाएगी.

सुप्रिया - नहीं भैया, क्या बोल रहे हो आप.

अतुल - प्लीज मैडम एक बार बस. दिवाली का बोनस समझ कर दे दो.

सुप्रिया - ठीक है भैया, बस हाथ पकड़ना है एक बार.

अतुल उसके पास जाकर उसके हाथ अपने हाथ में पकड़ लेता है, और फिर झट से अपनी पंत और अंडरवियर नीचे करके उसका हाथ अपने लुंड पर रख दिया.

सुप्रिया - भैया ये क्या कर रहे हो आप. हाथ छूने का बोलै था बस.

अतुल - मैडम पर ये नहीं बोलै न की कहाँ टच करूँगा.

अतुल का लुंड अभी पूरी तरह से खड़ा नहीं था. सुप्रिया के सॉफ्ट हाथ उसके लुंड पर लगते है उसके सारे तार बज गए.

सुप्रिया भी थोड़ी हैरान थी, उसने कभी इस तरह से तोह रोलप्ले नहीं किया था. अतुल सुप्रिया के हाथ को अपने हाथ के ऊपर पकड़ कर अपने लुंड पर चलवा रहा था.

अतुल - अह्ह्ह्हह मैडम जी, बहुत hi ाचा लग रहा है. और चलैया न हाथ.

सुप्रिया का हाथ अतुल के लुंड पर चलने लगा और धीरे धीरे उसका लुंड बड़ा होता गया. सुप्रिया के हाथ मैं लुंड जैसे थिरक सा रहा हो.

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सुप्रिया - भैया हो गया अब, मुझे नहीं टच करना और.

अतुल - मैडम देख तोह लो, एक वॉचमन का लुंड आपके हाथ में है. आपकी पति से तोह बड़ा होगा.

सुप्रिया अतुल की ये अश्लील बातें सुनकर और हॉट हो गयी थी. अतुल ने अपने एक हाथ से सुप्रिया के होंठ कास कर दबाये, और सुप्रिया का मुँह थोड़ा सा खुल गया.

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अतुल - मैडम मुँह में लोगी मेरा लुंड.

सुप्रिया ने ये सुनते hi थोड़ा गुस्से में अतुल की और देखा. उनकी पहली hi बात हो चुकी थी की वह मुँह में नहीं लेगी. उसने अपना हाथ उसके लुंड से हटा लिया.

सुप्रिया - अतुल नहीं, मैंने पहले hi मन कर दिया था न.

अतुल - ाचा ठीक है नहीं कर रहा पर अतुल नहीं बुलायो न अभी.

अतुल - अह्ह्ह्ह मैडम रुक क्यों गए. बहुत hi मस्त माल हो आप.

अतुल ने सुप्रिया को दिवार की और धकेला और उसकी गांड अपने हाथों से दबाने लगा. सुप्रिया की गांड अछि भरी हुई थी, सो उसे उसको दबाने में बड़ा मज़ा आता था. वह सुप्रिया की गांड को अचे से दबाते हुए उसे किश करने लगा.

सुप्रिया - भैया क्या कर रहे हो. पीछे रहो थोड़ा.

अतुल - मैडम अभी पीछे रहने का टाइम नहीं है. अब तोह छोड़ कर hi रहूँगा.

अतुल ने सुप्रिया को अपने कंधे पर उठाया और बैडरूम की और ले गया. सुप्रिया उसके ये रूप को देख कर थोड़ा शॉक में थी. अतुल उसे बीएड पर गिरा के उसके ऊपर छड़ कर उसे किश करने लगा. ये उसकी फवौरीते पोजीशन थी.

अतुल.- मैडम जबसे आपको नीचे देखा था मेरा बहुत मैं था आपको छोड़ने का. आज मौका मिल hi गया. क्या टाइट माल हो.

अतुल ने सुप्रिया की कुर्ती थोड़ी फाड़ते हुए उतारी, और उसकी लेग्गिंग्स और पंतय को नीचे किया. सुप्रिया की सांसें बहुत तेज हो चुकी थी. वह अतुल को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी. अतुल तोह आज जैसे एक भेड़िये की तरह उस पर टूटा हुआ था. झटपाहट में वह अतुल को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश पायी.

अतुल - मैडम कहाँ जा रहे हो.

अतुल ने सुप्रिया को पीछे से खींचा और साइड में लिटा कर उस पीछे से अचे से दबोच लिया और उसके बूब्स ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा.

सुप्रिया - ोुछहहह. प्लसस भैया, अतुल…. अह्ह्ह्हह

अतुल ने अपने हाथ से सुप्रिया की एक टांग उठायी और उसे छोड़ने लगा - क्या प्लीज मैडम, एन्जॉय करूऊ.

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कुछ hi झाकतो में अतुल का वीर्य सुप्रिया के अंदर और ऊपर निकल गया, और अतुल की स्पीड धीरे हुई. सुप्रिया वहां लेती हुई, उसकी आँखों से ek-do आंसू बह रहे थे. जैसे सच में वह अपने पति के साथ न हो.

अतुल के छोड़े hi, सुप्रिया ने उसे पीछे धकेला और बाथरूम में अपने आप को साफ़ करने गयी. अतुल बीएड पर लेता हुआ काफी खुश था, आज उसे बड़ा मजा आया था ये सब करने में.

सुप्रिया वापस आकर - अतुल, ये क्या था. मैं आपको रुकने के लिए बोल रही थी न.

अतुल - सुप्रिया, बस खेल hi तोह था. एंड मुझे पता है तुम्हे ाचा तोह जरूर लगा होगा.

सुप्रिया - नहीं! मुझे बिलकुल ाचा नहीं लगा. ऐसा लगा जैसे तुम जबरदस्ती कर रहे हो. मुझे नहीं करना ऐसे आज के बाद. मैं नहीं इमेजिन करना चाहती की कोई सिक्योरिटी गार्ड मेरे साथ ये सब कर रहा है.

सुप्रिया थोड़ा गुस्से में रूम से चली गयी. वह पूरी तरह से अतुल पर गुस्सा नहीं थी. उसे अपने आप पर भी गुस्सा आ रहा था की उसने इस सब की पहल की थी, और उससे भी ज्यादा की अतुल सही था, उसे कहीं न कहीं ये सब थोड़ा सा ाचा लगा था.
 
होपफ़ुल्ली स्टोरी अछि लग रही होगी अब तक. आगे की स्टोरी प्लांड है, पर अगला अपडेट शायद 3-4 दिन बाद आये. अगर पॉसिबल होगा तोह जल्दी भी आ सकता है. सबसे ज्यादा टाइम फोटोज और गिफ्स ढूंढ़ने में लग जाता है.
 
अपडेट 13

अगले 2-3 दिन सुप्रिया ने अतुल से ज्यादा बात नहीं करि, वह अभी भी उससे गुस्सा थी. अतुल ने सुप्रिया को मानाने की कोशिश तोह की, पर वह ऑफिस के काम की वजह से भी लेट आ रहा था, सो बात इतनी बानी नहीं. एक शाम उसने ऑफिस से जल्दी निकल का घर जाने का सोचा, और अपने साथ राहुल को भी ले गया, क्यूंकि उसे पता था की राहुल के सामने वह गुस्सा नहीं करेगी. राहुल के सामने सुप्रिया ने नार्मल तरह से बात करने की कोशिश करि, पर कहीं न कहीं उसका ख़राब मूड राहुल को दिख रहा था.

राहुल - और क्या चल रहा है सुप्रिया.

सुप्रिया - कुछ भी नहीं, काफी दिनों बाद आये हो तुम. या अतुल तुम्हे खींच कर साथ लाये है आज.

राहुल - ेहह्ह्म्म, ऐसा कुछ नहीं, ऐसे hi सोचा, काफी दिन हो गए थे. तुम लोगो की लड़ाई चल रही है क्या.

सुप्रिया - नहीं तोह. सब बढ़िया है. क्यों, अतुल ने कहा क्या कुछ?

राहुल - अतुल ने कुछ नहीं बताया, तुम hi बता दो.

सुप्रिया ने सोचा की अब राहुल को वह ये सब कैसे बताएगी, बल्कि मेघा के इलावा उसने किसी को भी ये रोलप्ले वाली बातें नहीं बताई थी - ह्म्मम्म्म्म. जाने दो न ये सब, चलता रहता है. मैं तोह वैसे भी इस वीकेंड वाली पार्टी के लिए रेडी हो रही हूँ आज कल.

राहुल - कौनसी पार्टी?

सुप्रिया - तुम्हारे ऑफिस की पार्टी. तुम इन्वितेद नहीं हो क्या?

राहुल - तुम जा रही हो उसमे!

सुप्रिया - हाँ, मुझे ek-do डांस परफॉरमेंस करनी है वहां. कितना मजा आएगा न.

राहुल - क्या? तुम उस पार्टी में मत जाना, और कोई डांस वन्स तोह बिलकुल भी नहीं करना.

सुप्रिया - क्यों, ऐसा क्या है? मैंने कॉलेज में भी काफी डांस किये है.

राहुल - अब मैं तुम्हे कैसे समझायु. ये कॉलेज नहीं है. अतुल तुमने मन नहीं किया?

अतुल को पता था की ऐसी पार्टीज में लोग खूबसूरत लड़कियों को कैसे देखते है. पर वह सुप्रिया को जाने के लिए मन नहीं कर सकता था. एक तोह खुद उसके बॉस सक्सेना ने सुप्रिया को पार्टी में इन्विते किया था और सुप्रिया ने उसकी वाइफ से भी बात करि थी, जो काफी एक्ससिटेड थी सुप्रिया के डांस में part लेने से. दूसरा कहीं न कहीं वह अपनी खूबसूरत बीवी को लोगो को दिखाना चाहता था, की आखिर वह कितना लकी है.

अतुल - अब मैं क्या बोलू? खुद सक्सेना की वाइफ भी तोह डांस कर रही है.

राहुल - उसकी बात और है. पर सुप्रिया को नहीं जाना चाहिए.

सुप्रिया - राहुल, तुम परेशां मत हो इतना ज्यादा. काफी साडी लेडीज डांस कर रही है, काम से काम 8-10 है. ाचा इवेंट रहेगा.

राहुल अब इससे ज्यादा क्या hi बोलता, और वह रात का खाना खा कर चला गया.

सुप्रिया बाकी पूरा हफ्ता डांस की तैयारी में लग गयी. मर. सक्सेना की वाइफ - रेनू ने सबको एक कॉमन ड्रेस थीम में ड्रेस हो कर आने के लिए कहा था. एक लाल साड़ी और एक काला स्लीवलेस ब्लाउज. साड़ी तोह सुप्रिया के पास थी, पर उसे अतुल के साथ मार्किट जा कर ब्लाउज लाना पड़ा. सुप्रिया इस नए शहर में अतुल के ऑफिस के लोगो की वाइव्स से बात करके काफी खुश थी और उसे लग रहा था और वह कॉलेज के दिनों की तरह काफी ाचा डांस करके लोगो को इम्प्रेस करना चाहती थी.

आखिर प्रोग्राम वाला दिन भी आ गया. सुप्रिया ने जब तैयार हो कर अपने आप को आईने में देखा तोह वह खुद भी हैरान रह गयी. वह बहुत hi ज्यादा सुन्दर लग रही थी, बस मार्किट से लाया हुआ स्लीवलेस ब्लाउज उसके थोड़ा छोटा था और थोड़ा फास के आ रहा था, जिससे उसके बूब्स और बड़े लग रहे थे. अतुल ने जब उसे देखा तोह उसका भी मुँह खुला का खुला रह गया.

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सुप्रिया - कैसी लग रही हूँ? ठीक है पार्टी के लिए.

अतुल - हाँ बहुत अछि लग रही हो. सारे लोग शायद तुम्हे hi न देखते रह जाये.

सुप्रिया को ये सुन कर खुश हो गयी पर उसे काफी घबराहट भी होनी शुरू हो गयी थी. वह लोग घर से टैक्सी पकड़ कर एक फार्म हाउस पहुंचे जहाँ पार्टी होनी थी. सुप्रिया ने देखा की ये कोई छोटी पार्टी नहीं थी, बल्कि बहुत सारे लोग इन्वितेद थे. उसकी घबराहट बढ़ती जा रही थी. पार्टी में घुसते hi उन्हें सक्सेना और उसकी बीवी रेनू मिल गए. रेनू कोई 35-38 साल की महिला होगी, जो सुप्रिया से थोड़ी लम्बी थी और उसका पूरा शरीर अचे से भरा हुआ था, हर जगह से. सुप्रिया ने रेनू को अपने डांस प्रैक्टिस के ek-do वीडियोस भेजे थे, तोह उसे सुप्रिया को पहचानने में देर नहीं लगी.

रेनू - सुप्रिया!!!! तुम आ गयी. ववव क्या लग रही हो यार.

सुप्रिया के चेहरे पर एक स्माइल थी और उसके गाल सुर्ख लाल हो चुके थे - Hello Ma'am.

रेनू - चलो चलो, बाकी सब लोग वेट कर रहे है, वहीँ मैं तुम्हे सब समझा दूंगी.

वह सुप्रिया का हाथ खींचते हुए उसे अपने साथ ले गयी, और अतुल और सक्सेना पीछे रह गए. रेनू सुप्रिया को स्टेज के पीछे ले गयी और वहां और 5-6 लेडीज लाल साड़ी में कड़ी थी. सब एहि कोई 25 से लेकर 35 के बीच में होंगी, पर कोई भी सुप्रिया जितना सुन्दर नहीं था.

रेनू - कुछ लोगो ने लास्ट मिनट मन कर दिया, पर चलो उन्हें देख लेंगे बाद में.

रेनू ने ये बात सुप्रिया को थोड़ी सी अटपटी लगी, पर उसका दिमाग अभी भी डांस पर फोकस्सड था, और कैसे वह इतने सारे लोगो के सामने स्टेज पर उतरने वाली थी.

रेनू ने सुप्रिया के कान में कहा - सुप्रिया तुम सबसे एन्ड में जाना, ताकि तुम और लोगो को पहले करते देख पायो. और वैसे भी मुझे लगता है की बेस्ट को लास्ट के लिए रोक लेना hi ाचा है.

थोड़ी देर में ek-ek करके डांस शुरू हो गए. सब लेडीज अलग अलग बॉलीवुड सांग्स पर डांस कर रही थी. सुप्रिया को स्टेज के साइड में होनी की वजह से डांस तोह साफ़ साफ़ दिख रहा था पर सामने खड़े लोग नहीं दिख रहे थे. पर उसे लोगो की तेज़ तेज़ तालियों और सीटियों से लग रहा था की काफी लोग ये देख रहे होंगे. उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी, और जैसे उसे कुछ भी सुनाई और दिखाई देना भी बंद हो गया हो.

तभी उसे रेनू के हिला कर बोलै - सुप्रिया! जायो, तुम्हारी बारी है अब.

सुप्रिया होश में आते hi स्टेज पर ऊपर चली गयी. सामने उसके अनुमान के हिसाब से भी ज्यादा लोग थे. आगे 2-3 कैमरामैन, और उनके पीछे लोगो का एक बड़ा से झुण्ड. सुप्रिया के स्टेज पर आते hi सीटियां बजने लगी. सुप्रिया को भीड़ में खड़ा अतुल भी किसी तरह से दिखाई दे गया. वह स्टेज के थोड़े साइड में खड़ा था. सुप्रिया ने गहरी सांस ली और अपने गाने का चलने कर वेट करने लगी.

गाना चलते hi धीरे धीरे उसके पेअर जैसे अपने आप hi चलने लगे, और वह सामने खड़े लोगो को भूलती गयी. उसका गाना इतना नया नहीं था, पर उसका फवौरीते डांस सांग तहत - मुझे रंग दे, मुझे रेंज दे, हाँ अपनी प्रीत विच रंग दे. जैसे जैसे वह डांस करती गयी, उसके चेहरे पर स्माइल वापस आती गयी, और उसका सारा डर ख़तम हो गया.

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वहीँ भीड़ में खड़ा अतुल भी अपने फ़ोन पर उसकी वीडियो लेने की कोशिश कर रहा था. उसने देखा की लोग तोह जैसे सुप्रिया के गाने पर सबसे ज्यादा सीटियां बजा रहे थे. कुछ लोग तोह अपनी पंत में अपना लुंड भी एडजस्ट कर रहे थे. अतुल को गुस्सा आना चाहिए था, पर उसे अपनी बीवी के डांस पर प्राउड फील हो रहा था.

गाना ख़तम होते hi ज़ोर से तालियां बजी. सुप्रिया जल्दी से स्टेज से उतर गयी और उसने पाया की पासनो में भीग चुकी थी.

रेनू ने उसके पास आते हुए उसे गले से लगा लिया - कमल कर दिया तुमने सुप्रिया! तुम तोह हमारे शो की स्टार थी. पर अभी एक ग्रुप डांस बाकी है और उसमे मैं भी करुँगी तुम लोगो के साथ.

कुछ hi मिनट बाद, रेनू सब को लेकर स्टेज पर आ गयी. इस बार सुप्रिया को इतना डर नहीं लग रहा था. गाना कोई भोजपुरी गाना था जिसके बोल तोह सुप्रिया को समझ नहीं आ रहे थे, बस खुल के नाचना था जो उसने किया. इस गाने में कुछ ज्यादा hi कमर हिलनी थी और उसे लगा की उसका पूरा hi शरीर कुछ ज्यादा hi हिल रहा है. उनके नाचते नाचते एक दो लोग स्टेज पर छड्ड गए, और सुप्रिया के पास आने लगे. सुप्रिया एक डैम से घबरा गयी, पर तभी रेनू ने बीच में आ कर उन्हें नीचे किया.

किसी तरह से गाना भी पूरा हुआ, और सब स्टेज से नीचे आ गए. अब सुप्रिया बुरी तरह से थक चुकी थी. थोड़ी देर रेनू और बाकी सब लेडीज से बात करने के बाद वह अतुल को ढूंढ़ने लगी, पर उसे वह कहीं भी नहीं दिख रहा था. उसे थोड़ी दूर ड्रिंक्स का काउंटर दिखाई दिया और वह उस और पानी लेने चली गयी. वहां जा कर उसने पानी माँगा hi था की एक डैम एक आदमी ने उसकी कलाई पकड़ ली. वह बुरी तरह नशे में धुत था.

आदमी - बेबी तुम कहो तोह मैं तुम्हे रंग दू अचे से.

सुप्रिया अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, पर वह आदमी उसे अपनी और खींच रहा था. तभी कोई और आया और उसने उस आदमी के हाथ को खोलते हो सुप्रिया से अलग किया. ये और कोई नहीं विक्रम था, जो सुप्रिया को उस दिन बैंक में मिला था.

विक्रम ने आराम से उस आदमी को बोलते हुए कहा - तुमने ज्यादि पि ली है, घर जायो.

वह आदमी भी विक्रम को देख कर पीछे हैट गया और वहां से चला गया. सुप्रिया अपनी कलाई पकडे कड़ी थी, उसे ज़ोर से रोना आ रहा था, पर उसने किसी तरह से अपने आप को कण्ट्रोल किया हुआ था.

विक्रम - आप ठीक हो?

सुप्रिया के गले से किसी तरह से आवाज़ निकली - हाँ. थैंक यू सर.

विक्रम - It's ok, ये लो, पानी.

सुप्रिया के ek-do गूथ पानी पीने के बाद उसकी आवाज़ जैसे वापस आयी.

सुप्रिया - थैंक यू सर! मैं सुप्रिया, आपने शायद मुझे पहचाना नहीं होगा, हम उस दिन बैंक में मिले थे. मैं मर. अतुल शर्मा की वाइफ.

विक्रम - मुझे याद है अचे से. और आपने अभी hi तोह इतना ाचा डांस परफॉरमेंस किया.

सुप्रिया - थैंक यू सर. पर लगता है मुझे नहीं करना चाहिए था.

विक्रम - नहीं ऐसा नहीं. कुछ लोगो को ड्रिंक करके कुछ होश नहीं रहता.

कुछ hi देर में उनकी बातें शुरू हो गयी. और हमेशा की तरह सुप्रिया ने अपने बारे में सब कुछ बताना शुरू कर दिया. जैसे उसे इस पार्टी में बात करने के लिए कोई मिल गया हो.

विक्रम - ओह इंटरेस्टिंग, तोह आप झाँसी से हो.

सुप्रिया - यस सर, और लखनऊ में मुझे 3 मोनथस हो गए है.

विक्रम - तोह आप कहीं जॉब कर रहे हो या फिर जस्ट ात होम?

सुप्रिया - अभी तोह बस घर पर hi, हाँ पर मैंने पहले जॉब की हुई है एक का फर्म में.

विक्रम - इंटरेस्टिंग, ये मेरा कार्ड है, अगर आप कभी जॉब ढून्ढ रही हो तो मुझे कॉल करना. हमें हमेशा टैलेंटेड लोगो की जरूरत होती है.

सुप्रिया - सूरे सर, मैं जरूर रीच आउट करुँगी.

विक्रम उसे bye करके वहां से चला गया और सुप्रिया ने फिर से इधर उधर देख कर अतुल को ढूंढ़ना चाहा. उसे फाइनली अतुल और राहुल एक साथ दिख hi गए, और अतुल के हाथ में शराब का गिलास था. सुप्रिया ने आज तक कभी अतुल को ड्रिंक करते नहीं देखा था तोह वह काफी हैरान थी.

सुप्रिया - आप ड्रिंक कर रहे हो?

अतुल - ारी नहीं, मैंने बस गिलास पकड़ा हुआ है, और ek-do घूंठ लिए है. ज्यादा कुछ नहीं.

सुप्रिया को तोह ऐसा लग रहा था की उसे अतुल के बारे में कुछ भी न पता हो - ी थिंक घर चलते है अब. बहुत हो गया.

सुप्रिया ने रेनू को bye बोलै और फिर अतुल के साथ पार्टी से घर चली गयी. राहुल ने उन दोनों के लिए एक कैब बुला दी थी. अतुल और वह पूरे रास्ते चुप थे, और सुप्रिया को अब काफी तेज़ गुस्सा आ रहा था.
 
अपडेट 14

(ये अपडेट विक्रम के पर्सपेक्टिव से है)

विक्रम भीड़ में खड़ा सुप्रिया को डांस करते हुए देख रहा था. उसकी बॉडी की मूवमेंट और चेहरे की स्माइल बहुत hi ज्यादा अट्रैक्टिव थी. उसे थोड़ी हैरानी थी की उस जैसी लड़की इस पार्टी में डांस कर भी क्यों रही है. पर फिर रेनू का यही तोह कमल था, वह ऐसे hi लड़कियों को ढून्ढ ढून्ढ कर सब के सामने लाती थी. और शायद वह इसी लिए तोह इस पार्टी में आया था.

विक्रम की निगाहें उसकी कमर, बूब्स या गांड पर नहीं, बल्कि उसके चेहरे पर तिकी हुई थी. इतना प्यारा और क्यूट चेहरा. उसके आस पास खड़े लोग सुप्रिया के बारे में गन्दी गाण्डी चीज़े बोल रहे थे.

क्या डांस कर रही है रंडी की तरह.

किसकी कुटिया है यह.

इसके मम्मी तोह देखो, कैसे उछाल उछाल के बहार आ रहे है.

डांस ख़तम होने से पहले hi विक्रम वहां से हैट कर ड्रिंक्स की और चला गया. थोड़ी देर बाद जब उसने सुप्रिया को पास hi किसी आदमी से झूझते हुए देखा तो उससे उसकी हेल्प किया बिना रहा नहीं गया. और फिर जब सुप्रिया बोलना शुरू हुई तो उसकी आवाज़ विक्रम को बहुत hi स्वीट और इनोसेंट सी लग रही थी. वह शायद उसे घंटो सुन सकता था. सुप्रिया अपनी कहानी बताये जा रही थी और विक्रम मुस्कुराते हुए सुन रहा था. वह अपने बारे में कभी किसी को ज्यादा कुछ नहीं बताता था.

विक्रम एक काफी अछि फॅमिली से था. उसके पापा एक आईएएस अफसर थे, और उनका अमीर लोगो और पॉलिटिशंस के साथ उठना बैठना था. कॉलेज में उसकी मुलाकात और प्यार ईशा से हुआ था, जो एक बड़ी बिज़नेस फॅमिली से थी. विक्रम देखने में काफी स्मार्ट और हैंडसम था और ईशा भी बहुत hi सुन्दर थी. दोनों को आपस में काफी प्यार हो गया.

विक्रम आर्मी ज्वाइन करना चाहता था, और उसने 22 साल की उम्र में ंदा का एग्जाम क्लियर किया और ट्रेनिंग के बाद आर्मी ज्वाइन कर ली. उसने अगले 6 साल आर्मी में बिताये और कप्तान की रैंक तक पंहुचा. ईशा और वह इस सब के बीच में एक दुसरे से कनेक्टेड रहे. वह अभी भी विक्रम से hi शादी करना चाहती थी.

ईशा के डैड शादी के लिए तोह मंज़ूर थे, पर उनकी एक hi शर्त थी - विक्रम आर्मी छोड़ कर उनका बिज़नेस ज्वाइन करे. विक्रम ने न चाहते हुए भी ईशा के लिए ये किया और जल्द hi उनकी शादी हो गयी. शुरू के रोमांच के बाद, विक्रम और ईशा को 1-2 साल में ये समझ आ गया की शायद वह दोनों की काफी बदल चुके थे और कॉलेज का प्यार और शादी दो अलग चीज़ थी. ईशा को अपने पैसे खर्च करने का शौक था, और वह कभी भी विक्रम को ये दिखने से पीछे नहीं रहती थी की वह कितनी अमीर है. वहीँ विक्रम की लाइफ काफी डिस्कॉपलीनेड थी और वह पूरी तरह बिज़नेस के काम में डूब चूका था.

इन 2 सालो में, विक्रम ने ईशा के डैड को अछि तरह से इम्प्रेस कर दिया था. वह बिज़नेस चलने में बहुत hi ाचा था, उसका आर्मी का एक्सपीरियंस उसे एक ाचा लीडर बनता था. धीरे धीरे ईशा के डैड, विक्रम को पूरी तरह से अपना बिज़नेस सौपने लगे. और विक्रम ये सब नहीं छोड़ना चाहता था. ईशा और विक्रम से आपसी एग्रीमेंट से ये डीडे किया की वह अपना रिलेशनशिप ओपन रखेंगे. इसका मतलब वह जिस चाहे उसके साथ सो सकते थे.

बस दो शर्ते थी, जो उन दोनों ने एक दुसरे से राखी थी. ईशा की शर्त थी की वह दोनों कभी भी किसी से रोमांटिकल्ल्य प्यार नहीं करेंगे. वह हक़ सिर्फ उन दोनों का एक दूसरे पर था. वह सिर्फ दुसरे लोगो के साथ सो सकते है. विक्रम को नहीं लगा की अब वह कभी किसी से प्यार कर पायेगा तोह इसे इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं लगी. दूसरी शर्त विक्रम की थी की ईशा के डैड को कभी इस बात का पता नहीं चलने दिया जायेगा, क्यूंकि वह काफी पुराने ख्याल के थे.

और फिर इस सब की शुरुवात तोह ईशा ने कर डाली, शायद इस एग्रीमेंट से पहले से hi. ईशा को पार्टीज करने का काफी शौक था, और उन पार्टीज में बहुत कुछ होता था. विक्रम को कभी ईशा की पार्टी लाइफ समझ hi नहीं आयी, पर यहीं उसकी मुलाकात जय से हुई थी, जो एक लोकल नेता का बीटा था. जय, वैसे तोह विक्रम से 3-4 साल छोटा था, पर इस सब में वह विक्रम का गुरु था.

जय विक्रम को नयी नयी लड़कियों से मिलवाया और धीरे धीरे विक्रम उन्हें छोड़ने लगा. कई बार तोह वह दोनों साथ में मिल कर लड़कियों को छोड़ा करते थे. विक्रम जो बहरी दुनिया के लिए एक साफ़ सुथरा बिज़नेस मन था, इन लड़कियों को काफी गंदे से छोड़ता था. पर कहीं न कहीं उसे ये सब करने से कोई ख़ास ख़ुशी नहीं होती थी, और अब ये बस उसका रूटीन बन गया था. उधर जय को तोह बस इसी काम में सबसे ज्यादा मज़ा आता था. जय और उसमे ये फरक भी था की विक्रम कभी पब्लिक में अपनी इमेज ख़राब नहीं होने देता था, जबकि जय को इस सब से कोई फरक नहीं पड़ता था. बहरी दुनिया के लिए ईशा और विक्रम अभी भी एक हैप्पिली मैरिड कपल थे, पर वह दोनों एक दुसरे के साथ बहुत hi काम समय बिताते थे. इस सब को शुरू हुए 7 सात साल हो चुके थे, और अब विक्रम 35 साल का था.

उस दिन जब बैंक में विक्रम ने सुप्रिया को पहली बार देखा, उसे तभी लगा था ये तोह सब की नज़र में आ hi जाएगी. और अब इस पार्टी के डांस के बाद उसे यकीं हो गया था की अब उसकी खैर नहीं थी.

बैंक वाली पार्टी से निकलते hi, उसके फ़ोन पर एक कॉल आया.

जय - तुमने सुना शहर में एक नयी लड़की आयी है.

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विक्रम के फ़ोन पर सुप्रिया की डांस की फोटोज आने लगी. उसे हैरानी नहीं हुई की जय को इतनी जल्दी ये खबर मिल गयी थी. उस पार्टी में काफी सारे लोग जय के करीब थे. विक्रम काफी ज्यादा शातिर था और उसका दिमाग लोगो से दो कदम आगे hi चलता था.

विक्रम - हम्म्म, ी क्नोव. मैरिड है.

जय - और भी बढ़िया. बहुत हॉट है यार. तुम कहो तोह उठा ले आज रात hi.

विक्रम - नहीं, अभी नहीं. तुमने जो उस कॉलेज प्रोफेसर के साथ किया था उससे पहले hi काफी बवाल हो रखा है. अभी ये टाइम नहीं है.

जय - वह कॉलेज वाली को मजा तोह बहुत आया था. तुम भी तोह थे वहां, बस तुम्हारा नाम कहीं नहीं आता.

विक्रम - और वही बेटर है. इसको तुम मुझ पर छोड़ दो, पर इसमें टाइम लगेगा. तोह अभी बिलकुल भूल जायो.

जय - जैसे तुम कहो दोस्त.

विक्रम ने फ़ोन रखा और सोचने लगा. उसे दिमाग में अभी भी सुप्रिया का प्यार सा चेहरा और स्वीट सी आवाज़ चल रही थी. वह उसके साथ कोई जबरदस्ती नहीं करना चाहता था. उसे सोचना पड़ेगा की सुप्रिया को कैसे वह धीरे धीरे सेट करे. पर इससे पहले उसे शायद आज कोई चाहिए था जैम के छोड़ने के लिए.
 
अपडेट 15

टैक्सी में सुप्रिया को पता चल गया था की अतुल ने सिर्फ ek-do सिप नहीं ली है. वह बार बार झूल कर उसके ऊपर गिर रहा था. आगे टैक्सी वाला भी बार बार अपने मिरर में सुप्रिया और अतुल को देख रहा था. सुप्रिया को घबराहट भी हो रही थी और गुस्सा भी आ रहा था. एक तोह इतनी रात, और ऊपर से अतुल की ये हालत. थोड़ी देर में उनकी सोसाइटी बस आ hi गयी थी, पर जिस तरह से वह टैक्सी वाला सुप्रिया को देख रहा था उसे ाचा न लग रहा था.

टैक्सी से उतारते hi सुप्रिया ने वॉचमन को आवाज़ लगायी.

सुप्रिया - भैया… प्लीज मेरी हेल्प करोगे क्या.

वॉचमन उसे देखते hi पहचान गया था - हाँ मैडम, बताइये, क्या हुआ.

सुप्रिया - जरा इनको ऊपर तक पहुंचने में हेल्प करेंगे क्या.

अतुल गाडी से उतर गया था पर उसके कदम लडखडे रहे थे.

वॉचमन - बिलकुल मैडम.

अतुल को एक तरफ से सुप्रिया ने पकड़ा और दूसरी तरफ से वॉचमन ने. और दोनों पीछे से अतुल को सहारा देते हुए उसे लिफ्ट की तरफ ले गए. अतुल को पीछे से पकडे हुए वॉचमन का हाथ सुप्रिया के हाथ को छू रहा था. सुप्रिया ने वॉचमन की और देखा, उसकी हाइट सुप्रिया से ज्यादा नहीं थी, और उसने एक t-shirt एंड पंत पहनी हुई थी, और उसकी दादी बड़ी हुई थी. उसकी शकल से ऐसा लग रहा था की जैसे उसे बड़ा ाचा लग रहा था ये सब.

वॉचमन - क्या हुआ साहब को? ज्यादा पि ली लगता है इन्होने.

सुप्रिया - हाँ शायद.

लिफ्ट खुलते hi वह फिर से अतुल को सहारा देते हुए उनके घर की तरफ चलने लगे. वॉचमन ने अपना हाथ थोड़ा सा एडजस्ट किया और अब उसका हाथ सुप्रिया के हाथ के ऊपर था. सुप्रिया को बिलकुल ाचा नहीं लग रहा था पर उसे अभी वॉचमन की हेल्प चाहिए थिस इसलिए वह कुछ बोली नहीं. दरवाज़े पर आते hi, सुप्रिया ने किसी तरह से अतुल की पॉकेट से घर की चाबी निकली और घर का दरवाज़ा खोला.

सुप्रिया - थैंक यू भैया, आप इनको बैडरूम तक बस पंहुचा दो.

वॉचमन - कोई बात नहीं मैडम. वैसे मेरा नाम इक़बाल है, आप मुझे इक़बाल बुला सकते हो.

सुप्रिया को इन सब बातों से जैसे पिछले हफ्ते का रोलप्ले याद आ रहा था. किस तरह अतुल ने उसे जबरदस्ती किश करते हुए उसे बैडरूम में ले जाकर उसके साथ सेक्स किया था. सुप्रिया ने इन खयालो को अपने दिमाग से निकलने की कोशिश करि.

कमरे में पहुंचते hi सुप्रिया ने देखा की बीएड और ज़मीन पर उसके कपडे फैले हुए थे. वह जल्दबाज़ी में कपडे अचे से रख कर नहीं गयी. उसने ये तोह कभी नहीं सोचा था की रात को उन दोनों के इलावा कोई और उनके बैडरूम में इस तरह से आएगा.

सुप्रिया और इक़बाल ने अतुल को सहारा देते हुए बीएड पर लिटाया, और सुप्रिया उसके आस पास से अपने कपडे हटाने लगी. इक़बाल भी उसकी मदद करता हुआ बीएड से कपडे हटाने लगा.

इक़बाल ने बीएड से एक ब्रा उठाते हुए सुप्रिया को दी - ये शायद आपकी है मैडम.

सुप्रिया की पूरी शकल लाल हो चुकी थी, और उसने झट से इक़बाल के हाथ से अपनी ब्रा ली और उसे बाकी कपड़ो के साथ रख दिया. इक़बाल की शकल पर एक दबी हुई सी हसी थी, जैसे कह रहा हो की चलो आज इसकी ब्रा तोह देखने को मिली.

सुप्रिया - थैंक यू भैया, आपने काफी हेल्प कर दी. आप जा सकते है.

इक़बाल - ठीक है मैडम. कुछ भी चाहिए हो तोह आप मुझे कॉल कर सकते हो. वैसे एक बात बोलू मैडम.

सुप्रिया - हाँ बोलो भैया.

इक़बाल ने सुप्रिया को घूरते हुए कहा - शराब इंसान को कमज़ोर बनती है. आदमी को कमज़ोर नहीं होना चाहिए.

सुप्रिया ने देखा की इक़बाल की पंत में कुछ उभरा हुआ सा था और उसकी नज़र उसके बूब्स पर थी - ठीक है भैया... थैंक यू. गुड नाईट.

इक़बाल - गुड नाईट मैडम.

उसके जाते hi सुप्रिया ने गहरी सांस ली और वह कपडे चेंज करके बीएड पर आ गयी. उसे अभी तक इक़बाल का हाथ अपने हाथ पर और उसकी गन्दी नज़र अपनी शरीर पर महसूस हो रही थी. उसे समझ नहीं आ रहा था की वह अब भी उसके बारे में क्यों सोच रही थी. एहि सोचते सोचते सुप्रिया सो गयी.

सुबह उसकी नींद अतुल की किश से टूटी. अतुल के मुँह से अभी भी शराब की स्मेल आ रही थी.

सुप्रिया को रात की साड़ी बातें याद आयी तोह उसका गुस्सा भी वापस आ गया - अतुल पीछे हटो.

अतुल - ारी क्या हुआ यार, गुड मॉर्निंग hi तोह बोल रहा हूँ.

सुप्रिया - तुम्हे याद भी है की कल रात को तुमने क्या किया था?

अतुल - क्या किया था?

सुप्रिया - तुम्हे याद नहीं की तुम शराब के नशे में बेहोश थे.

अतुल - ारी यार हाँ, मैं बहुत ररली पीटा हूँ, और कल तोह तुम्हारे डांस की ख़ुशी में पी रहा था.

सुप्रिया - मुझे वॉचमन की हेल्प लेनी पड़ी तुम्हे ऊपर लाने में.

अतुल - अच्छा... फिर क्या किया वॉचमन के साथ.. कहीं तुम्हारा रोलप्ले पूरा तोह नहीं हो गया.

सुप्रिया और भी ज्यादा गुस्से में - मजाक की हद्द होती है.

अतुल - सॉरी बाबा, ाचा मैं फिर कभी इतना नहीं ड्रिंक करूँगा. प्रॉमिस.

अतुल ने पूरा दिन सुप्रिया को मानाने में लगा दिया. वह सुप्रिया को मूवी दिखने ले गया और उन्होंने बहार डिनर किया. सुप्रिया भी धीरे धीरे नार्मल हो गयी.

अगले हफ्ते होली थी और वह लोग 2-3 दिन के लिए अतुल के घर ग्वालियर जा रहे थे. सुप्रिया बहुत hi खुश थी, आखिर सुप्रिया की शादी के बाद की पहली होली जो थी. सुप्रिया सबसे 3 महीने बाद मिलने के लिए काफी एक्ससिटेड थी, 3 महीने हो चुके उसे वहां गए हुए. रास्ते भर वह सोचती रही की वहां सब से मिल कर कैसा लगेगा, खास कर ध्रुव से. पता नहीं क्यों वह अक्सर ध्रुव के बारे में सोचती रहती थी. ग्वालियर पहुंचते hi सुप्रिया ने सबके पेअर छुई या गले मिली - मम्मी जी, पापा जी, चची, अर्पिता, विनीत. वहीँ ऊपर खड़ा उसे ध्रुव भी दिखाई दिया. सुप्रिया उसे देख कर बहुत hi खुश थी. उनके बीच में जो भी हुआ था वह उसे भूल चुकी थी.

सुप्रिया - ध्रुव, वहां क्यों खड़े हो. नीचे आयो न.

ध्रुव नीचे आया, और उसके चेहरे पर भी एक हलकी सी स्माइल थी. उसने ध्रुव को देखा तोह उसे उसमे थोड़ा बदलाव सा लगा, जैसे उसने अपनी बॉडी और भी बना ली हो. उसकी बाहे और भी मजबूत लग रही थी, और उसने काफी मसल्स बना ली थी.

सुप्रिया - लगता है मेरे पीछे से तुमने गयम ज्वाइन कर लिया है, काफी मसल्स बना ली.

चची - हाँ अब तोह पूरा दिन गयम में hi रहता है. घर पर तोह दिखाई भी नहीं देता.

सुप्रिया - ाचा है, किसे इम्प्रेस करने के लिए गयम कर रहे हो.

ध्रुव ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया और बात कहीं और मोड़ दी - आप बताया, कैसा चल रहा है वहां सब.

सुप्रिया ने उसे और बाकि सब को लखनऊ की कहानियां सुननी शुरू कर दी थी. उसे पता चला की अर्पिता दीदी के बेबी होने वाला है, और वह उनके लिए बहुत hi खुश हो गयी. अगले दिन होली थी, तोह होली की तैयारी चल रही थी. सुप्रिया को होली खेलना बहुत hi ज्यादा पसंद था. उसने होली के लिए एक सफ़ेद कुर्ती भी निकाल ली थी.

सुबह वह कमरे से बहार hi निकली थी की बहार कड़ी चची ने उसे मुँह पर अचे से गुलाल लगा दिया. अतुल को होली इतनी अछि नहीं लगती थी तोह वह अपने कमरे में hi रहा. सुप्रिया ध्रुव को ढून्ढ रही थी पर वह अपने कमरे में नहीं था. वह उसे ढूँढ़ते धुनते छत पर गयी. तभी ध्रुव ने अचानक से उसे पीछे से पकड़ लिया और उसे चेहरे पर गुलाल लगाने लगा.

ध्रुव - हैप्पी होली भाभी!!

सुप्रिया - हैप्पी होली! रुको तुम ज़रा.

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सुप्रिया पलटी और उसके चेहरे पर गुलाल लगाने लगी, और गुलाल लगते लगते वह दोनों बहुत hi नज़दीक आ गए. ध्रुव ने रंग लेकर उसकी गर्दन पर लगाना शुरू किया. सुप्रिया उससे बचने की कोशिश करती हुई भागी, पर ध्रुव ने उसे पीछे से पकड़ा और रंग उसकी पीठ पर लगाना शुरू कर दिया.

उसका हाथ अपनी पीठ पर लगते hi सुप्रिया के मुँह से हलकी सी अह्ह्ह निकल गयी. उसकी यह सुनकर तोह जैसे ध्रुव की हिम्मत और बाद गयी, और उसने सुप्रिया की कमर और पेट को पकड़ा और फिर अपने अपने रंग भरे हाथ उसके कंधे से लेकर हाथों तक फेरने लगा. सुप्रिया की पीठ बिलकुल ध्रुव से सटी हुई, जैसे वह उस पर बैठी हुई हो.

सुप्रिया जो अब तक मुस्कुरा रही थी, उसे ये सब अजीब लग रहा था - ध्रुव, रुको प्लीज....

पर ध्रुव रुकने का नाम नहीं ले रहा था, और उसने उसकी कुर्ती के ऊपर से hi उसके बूब्स पर हाथ फेरने लगा और सुप्रिया को और कास कर पकड़ लिया. ध्रुव का चेहरा सुप्रिया के बालो के बीच में था.

ध्रुव - भाभी मैं आपका काफी वेट किया, अब आप आ गए तोह आपको जाने नहीं दूंगा.

सुप्रिया अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी पर ध्रुव की पकड़ काफी मजबूत थी - अह्हह्ह्ह्ह, ध्रुव छोडो मुझे प्लीज...

ध्रुव ने उसके बूब्स को दबाते हुए उसके गले पर किश कर दिया.

सुप्रिया - Ouch....Dhruv ये गलत कर रहे हो तुम....

ध्रुव - कुछ गलत नहीं भाभी, मुझे पता है आप भी मेरे साथ सब करना चाहते हो.

ध्रुव के हाथ रुक नहीं रहे थे, और वह उसके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगे. तभी उन दोनों को कोई ऊपर आता हुआ सुनाई दिया, और सुप्रिया ने उसे पीछे हटा कर अलग किया.

जैसे hi चची ऊपर आयी, वह बोली - ओह्ह यहाँ तोह भाभी देवर की होली चल रही है.

सुप्रिया काफी सकपका सी गयी थी. उसे लगा की चची ने कहीं कुछ देख तोह नहीं लिया, उसकी कुर्ती पर रंगो के हाथ थे, तोह वह समझ तोह जरूर गयी होंगी. पर चची ने इस बारे में कुछ नहीं कहा.

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चची - ध्रुव, जरा बाल्टी भर के पानी तोह ला. तेरी भाभी यहाँ सूखी कड़ी है.

सुप्रिया - नहीं चची, पानी नहीं, बहुत ठण्ड हो रही है.

पर ध्रुव इतने में पानी ले आया था और उसने पूरा बाल्टी पानी सुप्रिया के ऊपर दाल दिया. सुप्रिया की सफ़ेद कुर्ती पूरी गीली हो गयी और उसके अंदर के कपडे दिखाई देने लगे.

सुप्रिया कापते हुए बोली - अह्ह्ह्ह, कितना ठंडा पानी है.

ध्रुव की नज़र तोह जैसे सुप्रिया के ऊपर hi थी, पर उसने अपनी को वहां देखते हुए दूसरी और मुँह कर लिया, और फिर वह वहां से नीचे आ गया.

चची ने उसे हलकी सी मुस्कान के साथ बोलै - जवान भाभी और देवर की जोड़ी होती बहुत बढ़िया है. पर उसे तड़पते रहना, इसके आगे मत बढ़ना.

सुप्रिया - मुझे समझ नहीं आया क्या कह रहे हो आप.

चची - बनो मत, खैर जाने दो, मैं किसी को नहीं बतायूंगी. जायो तुम नीचे जायो, सर्दी लग जाएगी.

सुप्रिया के मैं में आया की वह भी बोल दे की पता तोह उसे भी बहुत कुछ है, पर उसने बोलना ठीक नहीं समझा और वह नीचे चली गयी. अपने कमरे में जाकर उसने कपडे बदले और रंग साफ़ किया. उसे यकीं hi नहीं हो रहा था की ध्रुव की हिम्मत इतनी बाद गयी की आज उसे उसके बूब्स को पकड़ लिया. उसे उसकी पकड़ से जैसे अपने नीचे गीलापन महसूस हो रहा था. वह सोचने लगी की क्यों बार बार वह ध्रुव के बारे में सोचती रहती है और क्या उसे इस तरह से पराये मर्दो का टच ाचा लगता है.
 
अपडेट 16

(ये अपडेट ध्रुव के पर्सपेक्टिव से शुरू होता है)

सुप्रिया के ऊपर पानी डालते hi उसकी ब्रा ध्रुव को साफ़ दिखाई दे रही थी, और उसमे फसे हुए उसके मम्मी उसका लुंड खड़ा कर रहे थे. पर उसकी मम्मी वहां थी, और वह नहीं चाहता था की उसकी पंत का उभर उन्हें दिखाई दे, तोह वह फटाफट से नीचे चला गया.

पिछले तीन महीने से वह हर रोज़ सुप्रिया के बारे में सोचता रहता था. उसके गालो और होठों पर की हुई किश उसे चैन से सोने नहीं देती थी. सुप्रिया के लखनऊ जाने के बाद वह काफी उदास रहना था पर जल्द hi उसने सुप्रिया की फोटो देख कर मुठ मारना आदत बना ली थी. वह रोज़ सोचता की काश सुप्रिया अभी भी यहाँ होती तोह वह शायद धीरे धीरे उसके साथ आगे कुछ और कर पाटा.

आज जो उसने सुप्रिया के साथ किया, उसने सोचा नहीं था की वह ये कभी कर पायेगा. आखिर सुप्रिया उसकी भाभी थी, और सब कुछ इतने खुले में इतनी जल्दी हो गया. सुप्रिया की सुडोल बूब्स अभी भी उसके हाथों में उसे महसूस हो रहे थे. पर अब ये करके तोह वह और भी बेचैन हो चूका था, और उसे ये बेचैनी शांत करने की काफी जरूरत थी. उसने अपनी बाइक निकली और नीति के घर पर चल पड़ा. बाइक चलते चलते वह नीति और अपनी पिछले 3 महीने की कहानी को याद करने लगा.

सुप्रिया के जाने के बाद के कुछ दिन तक तोह उसने नीति की मेस्सगेस को इग्नोर किया था, पर नीति उसे एक दिन कॉलेज के बहार रोक कर कड़ी हो गयी थी.

नीति - ध्रुव! तुम मेरे मेस्सगेस इग्नोर कर रहे हो क्या.

ध्रुव ने उसमे कोई इंटरेस्ट नहीं दिखते हुए कहा - नहीं, ऐसा कुछ नहीं.

नीति - मुझे पता चला की तुम्हारा ब्रेक उप हो गया है उस लड़की से, और वह यहाँ से चली गयी है.

ध्रुव ने सुप्रिया के जाने से पहले खुद hi ये बात अपने दोस्तों में फैला दी थी, अब वह किसी को ये तोह नहीं बता सकता था की उस दिन वह अपनी भाभी को अपनी गिर्ल्फ्रेल्ड बना कर लाया था. वैसे भी उसका कोई दोस्त कभी सुप्रिया से मिला नहीं था. सुप्रिया के जाने के बाद उसे लगा की शायद के करना गलत था, पर तब तक ये बात नीति तक पहुंच चुकी थी.

ध्रुव - हाँ वह हमारा ब्रेक उप हो गया. वह ग्वालियर से जा चुकी है.

नीति ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा - ओह, ी ऍम सो सॉरी. पर हम लोग तोह फ्रेंड्स बन सकते है न. वैसे अगर तुम फ्री हो तोह मुझे घर तक ड्राप कर डोज?

ध्रुव ने नीति की और देखा, उसकी शकल पर लिखा था की वह उसे फुल लाइन मार रही थी. पहले तोह वह खुद hi नीति के पीछे भाग रहा था और अब वह उसके पीछे लगी थी. उसको इस बात से काफी ख़ुशी होनी चाहिए थी, पर उसके अंदर जैसे नीति के लिए कोई फीलिंग hi न हो.

ध्रुव ने बेमन बोलै - ठीक है, मैं ड्राप कर दूंगा. बैठो पीछे.

नीति ख़ुशी ख़ुशी उसकी बाइक पर पीछे बैठ गयी और उसके कंधो को कास के पकड़ लिया - मुझे थोड़ा डर लगता है बाइक पर. प्लीज थोड़ा आराम से चलना.

इसके बाद ध्रुव का उसे रोज़ कॉलेज के बाद घर ड्राप करना शुरू हो गया था, और धीरे धीरे नीति और उसकी नज़दीकी बढ़ती रही. कंधो की जगह, अब नीति अपने हाथ उसकी छाती पर लपेट कर उससे चिपक कर बैठने लगी. ध्रुव उसे उसके घर के पास ड्राप कर देता था, और फिर वह दोनों रात रात भर टेक्स्ट और कॉल करने लगे.

नीति देखने में तोह अछि थी, पर ध्रुव पता नहीं क्यों उसमे सुप्रिया को ढूंढ़ने की कोशिश करता. और वह उसे उसमे मिलती नहीं थी. एक तोह नीति के बूब्स थोड़े से छोटे थे, दूसरा उसका चेहरा सुप्रिया जितना मासूम और प्यारा नहीं था. पर फिर भी, ध्रुव नीति के साथ घूमने लगा. एक दिन वह दोनों मूवी देखने गए और वहां उनकी पहली किश हुई. नीति ने hi किश की शुरुवात की थी, जो ध्रुव के लिए थोड़ी हैरानी की बात थी. और उसके बाद तोह उसने जैसे नीति ने अपने आप को ध्रुव को सौप hi दिया था.

ध्रुव भी जब मौका मिलता कभी उसको किश करता और कभी उसके मम्मी दबाते, जो अभी भी इतने बड़े नहीं थे. मम्मो से आगे बढ़ते बढ़ते धीरे धीरे उन्होंने साड़ी हाडे पार कर के सेक्स भी कर लिया था. उन दोनों के लिए hi वह पहले सेक्स पार्टनर्स थे और नीति अब इस रिलेशनशिप से बहुत खुश थी. उससे ध्रुव से बहुत प्यार था और वह उसके लिए बहुत पोस्सेस्सिवे भी थी. पर ध्रुव के लिए तोह नीति बस सेक्स की जरूरत पूरी करने की चीज़ बन गयी थी.

अब वापस होली वाले दिन, ध्रुव बाइक चलता हुआ होली के गुब्बारों से बचता हुआ नीति के घर के बहार पंहुचा. उसके अंदर आज एक ऐसी भूक थी जो पहले कभी नहीं थी.

ध्रुव ने नीति को कॉल लगाया - नीति, मैं नीचे खड़ा हूँ. चल जल्दी आ जा.

नीति - ध्रुव, ऐसे कैसे आ जायु यार, होली है, काफी लोग घर पर आये हुए है.

ध्रुव ने थोड़ा तेज़ आवाज़ में उसे बोलै - मुझे नहीं पता, अभी 5 मं में नीचे मिल, नहीं तोह मुझे आज के बाद कभी नहीं मिलियो.

नीति उसकी आवाज़ में गुर्राहट सुन कर थोड़ा सा घबरा सा गयी - ाचा रुको, मैं आती हूँ अभी.

कुछ देर बाद, नीति एक टीशर्ट एंड जीन्स पहने नीचे आयी. ध्रुव गुस्से में उसका इंतज़ार कर रहा था.

ध्रुव - चल बैठ जा जल्दी से.

नीति - कहाँ जा रहे है हम, तुम्हे पता है मुझे क्या बोल कर आना पड़ा?

ध्रुव - मुझे ये सब नहीं सुन्ना, बस पकड़ ले कास कर, अभी हम हॉस्टल रूम पर जा रहे है.

ध्रुव के कॉलेज के कुछ दोस्त एक हॉस्टल के रूम में रहते थे, और उस रूम की चाबी ध्रुव के पास रहती थी. ध्रुव और नीति अक्सर वहीँ सेक्स किया करते थे. ध्रुव को पता थी आज होली के दिन कोई भी वहां नहीं होगा, सब अपने घर गए होंगे.

नीति - ध्रुव तुम पागल हो क्या, इसके लिए मुझे बुलाया है आज.

ध्रुव - तुझे नहीं करना? बता, नहीं करना तोह मैं किसी और को ढूंढ़ता हूँ.

नीति उसका ये रुख देख कर थोड़ा हैरान थी. नार्मल दिन में भी ध्रुव उससे थोड़ा काम प्यार से hi बोलता था पर आज तोह वह कुछ ज्यादा hi गंदे से बात कर रहा था. नीति को वैसे उसका ये बाद बॉय वाला ऐटिटूड काफी ाचा लगता था, पर वह कभी कभी सोचती थी की काश वह उसे थोड़ा सा प्रिंसेस की तरह भी ट्रीट करे.

ध्रुव को भी कभी कभी लगता था की वह बस नीति का इस्तेमाल कर रहा है और उससे काफी बदतमीज़ी से बोल रहा है, पर जब नीति खुद hi उससे चिपक कर रहना चाहती थी तोह उसे भी ये सब करने का बढ़ावा मिल रहा था.

नीति - मैंने मन नहीं किया, पर....

ध्रुव - चल बैठ जा यार, टाइम मत वास्ते कर.

नीति बाइक पर बैठी और ध्रुव ने झटके से बाइक स्टार्ट करके वहां से चला दी. जिस रफ़्तार से ध्रुव बाइक चला रहा था, नीति ने ध्रुव को पीछे से कास के पकड़ लिया. ध्रुव जल्दी से बाइक चलता हुआ हॉस्टल पंहुचा, और वह और नीति रूम के अंदर आ गए.

कमरे में घुसते hi ध्रुव ने नीति को दीवार पर पुश करते हुए उसे पलटा और उसकी गांड ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा. नीति का चेहरा दीवार से चिपका हुआ था, और उसे थोड़ा डर थोड़ी एक्ससिटेमेंट हो रही थी. ध्रुव वैसे तोह उसके साथ आराम से hi सेक्स करता था पर बीच बीच में कई बार वह थोड़ा बेकाबू भी हो जाता था. नीति को उसका ये पागलपन ाचा तोह लगता था पर वह ज़ाहिर नहीं होने देती थी. ध्रुव ने उसकी जीन्स को नीचे खींचा और देखा की नीति ने एक छोटी सी चड्डी पहनी हुई थी जो पूरी तरह से उसकी गांड को नहीं कवर कर रही थी. उसकी गोरी गांड ध्रुव को बहुत अछि लगती थी, और उसे देख कर वह सुप्रिया की गांड के बारे में सोचता था.

ध्रुव ने अपनी उंगलियां उसके गांड के दोनों गोलों पर गड़ाई और उसकी गांड को नोचने लगा.

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नीति - ोुछः... ध्रुव प्लीज आराम से... दर्द हो रहा है..

ध्रुव ने उसकी बात को अनसुना करते हुए, नीचे झुक कर अपना मुँह उसकी गांड पर लगा दिया और वहां काटने लगा. नीति दर्द से कसमसा रही थी पर उसे समझ hi नहीं आ रहा था की वह ध्रुव को कैसे रोके. वह अपने हाथ पीछे करके ध्रुव को काटने से रोकने लगी, पर ध्रुव ने उसके हाथों को साइड धकेला और उसकी गांड पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा.

नीति - अह्ह्ह्हह.... ध्रुव क्या हो गया है तुम्हे आज.

ध्रुव - नीति चुप चाप कड़ी रह...

ध्रुव ने उसकी पंतय को उसकी गांड के बीच में किया ताकि उसे उसकी पूरी गांड दिख सके, और फिर वह उसे हलके हलके किश करने लगा. नीति का तोह अभी से नीचे पानी निकलने लगा था और उसे लग रहा था की आज तोह उसकी खैर नहीं.

ध्रुव उसे पीछे से पकड़ कर बीएड पर ले गया और उसे बीएड के ऊपर झुक्का दिया, और फिर उसकी गांड पर थप्पड़ मारने लगा, पहले हलके हलके, और फिर तेज़ होता गया. नीति दर्द से चिल्ला रहा थी, पर बहार गाने बज रहे थे और इस शोर में कोई उसकी आवाज़ नहीं सुन सकता था. जब ध्रुव का मैं उसकी गांड से भर गया, उसने अपनी पंत और अंडरवियर उतारा और नीति को अपनी और मोड़ा.

ध्रुव - चल इसको फटाफट से चूस.

नीति - ध्रुव तुम पागल से हो गए हो आज, क्या खाया है तुमने आज.

ध्रुव का लुंड पूरी तरह से खड़ा था, और फड़क सा रहा था. नीति ने पहले ध्रुव का लुंड चूसा हुआ था, पर वह उसने खुद hi ध्रुव को खुश करने के लिए किया था. पर आज जिस तरह से उसका लुंड खड़ा था नीति थोड़ी दरी हुई सी थी.

ध्रुव - ले न यार इसको अपने मुँह में.

ध्रुव ने पीछे से उसका सर पकड़ा और अपना लुंड उसके मुँह के पास ले आया. नीति ऊपर खड़े ध्रुव को देख रही थी, और वह समझ गयी थी ध्रुव उसकी नहीं सुनने वाला. तोह उसने जल्दी से ध्रुव के लुंड को अपने मुँह में ले लिया. उसका गरम लुंड जैसे hi उसके मुँह में गया, ध्रुव के मुँह से अह्ह्ह निकल गयी, और उसने आँखें बंद करते हुए नीति के सर को पीछे से पकड़ा हुआ रखा. नीति का मुँह खुद hi लुंड पर चल रहा था, पर उसे ऐसा लग रहा था की जैसे ध्रुव के लुंड का साइज भी आज पहले से बड़ा था, और उसका मुँह पूरा भरा हुआ था.

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ध्रुव ने इस बीच नीति की टीशर्ट को खींच कर उतारा और उसकी ब्रा के अंदर हाथ दाल कर उसकी चूचियों को दबाने लगा. नीति बीएड पर बैठी हुई और ध्रुव खड़ा हुआ, ध्रुव का लुंड नीति के मुँह में और उसकी चूचियां ध्रुव के हाथ में.

ध्रुव ने उसके निप्पल्स को ज़ोर ज़ोर से दबाना शुरू किया और नीति की हालत तोह जैसे और ख़राब हो रही थी. लुंड मुँह में होने की वजह से वह चीख भी नहीं पा रही थी.

नीति ने उसका लुंड अपने मुँह से निकलते हुए बोलै - प्लीज यार, मेरा मुँह दर्द कर रहा है और तुम मेरे बूब्स भी पिंच कर रहे हो. बहुत दर्द हो रहा है.

ध्रुव - चल ठीक है, घोड़ी बन जा जल्दी से.

ध्रुव ने उसे मोड़ा और नीति अपने हाथ बीएड पर रखते हुए अपने कमर को ऊपर किया और एक घोड़ी जैसे बन गयी ध्रुव के लिए. ये डोग्गिस्टीले पोज़ में उन्होंने सेक्स पहले कभी नहीं किया था. ध्रुव पीछे से अपना लुंड उसकी छूट पर लाया और नीति के बाल पकड़ते हुए उसके अंदर एक झटके से दाल दिया. नीति इस तेज़ के झटके से एक डैम चीख गयी. ध्रुव ने फिर उसके बाल पकडे हुए उसे पीछे से छोड़ना शुरू कर दिया.

नीति दर्द और प्यार के एहसास में चीख रही थी, और ध्रुव उसे बिना रुके चोदे जा रहा था. बीच बीच में वह उसके बूब्स दबा रहा था और उसकी गांड पर थप्पड़ मार रहा था.

ध्रुव अपने क्लाइमेक्स तक पहुंच hi रहा था, और जैसे hi उसका माल नीति के अंदर निकला, उसके मुँह से निकला - अह्ह्ह्ह सुप्रिया...

नीति को ध्रुव के साथ इस सेक्स में बहुत hi मजा आया था, शायद वह इसी तरह से छोड़ना चाहती थी. पर जैसे hi उसने सुप्रिया का नाम सुना वह एकदम से चौंक गयी. क्या ध्रुव अभी भी अपनी पुराणी गर्लफ्रेंड के बारे में सोच रहा था.

ध्रुव जैसे hi उसके ऊपर से हटा, नीति ने उससे पुछा - तुमने सुप्रिया का नाम क्यों लिया मेरे साथ सेक्स करते हुए?

ध्रुव उसकी और बिना देखा बोलै - ऐसे hi निकल गया यार, तेरे बारे में hi सोच रहा था.

नीति - सच बोलो ध्रुव. मैं क्या तुम्हारे लिए बस एक फ़क तोय हूँ की जब मर्ज़ी चाहा मेरे साथ कर लिया.

ध्रुव ने उसका कोई जवाब नहीं दिया, उसके अंदर का जानवर थोड़ा सा शांत हो चूका था - चलो कपडे पेहेन लो, मैं तुम्हे ड्राप कर दूंगा.

नीति जल्दी से अपने कपडे पेहेनने लगी - तुमने मेरी बार का जवाब नहीं दिया. क्या तुम अभी भी सुप्रिया से टच में हो? क्या तुम उससे प्यार करते हो.

ध्रुव - नहीं यार, ऐसा कुछ नहीं. तुम फालतू में hi ज्यादा सोच रही हो.

नीति को उसकी बातों पर यकीं नहीं हो रहा था - सुनो, मुझे तुम्हारी किसी बात पर यकीं नहीं है. मैं कल तुम्हारे घर आ रही हूँ, तुम्हारी मम्मी से मिलने. बेफिक्र रहो, दोस्त बनकर आयूंगी, गर्लफ्रेंड नहीं. बस होली की मिठाई देने.

ध्रुव - घर क्यों आना है.

नीति - मुझे आना है बस, मैंने कितनी बार तोह बोलै है तुम्हे की मुझे घर ले चलो एक बार. और तुम्ही तोह कहते हो की तुम्हारी मम्मी तोह काफी ओपन माइंडेड है.

ध्रुव ने सोचा की अभी तोह सुप्रिया भाभी और 2 दिन यहीं है, और अगर नीति घर आयी तोह उसे सब पता चल जायेगा - यार अभी सही टाइम नहीं है. अगले हफ्ते प्लान करते है.

नीति ने मैं hi मैं सोचा की मैं तोह कल hi आकर रहूंगी, चाहे ये जो भी बोले. इसकी मम्मी से बात करुँगी तोह शायद कुछ और पता चले.

ध्रुव ने नीति को उसके घर के बहार ड्राप किया, और फिर अपने घर आ गया. नीति के साथ सब करके वह थोड़ा शांत हो चूका था. घर पहुंच कर वह अपने कमरे के तरफ गया और जब बहार आया तोह उसे सुप्रिया दिखाई दी. वह कपडे बदल चुकी थी और एक साड़ी पहने कड़ी थी, और अपने गीले बालों को तौलिये से सुख रही थी. उसकी ब्लाउज की डोरी को देखते hi ध्रुव का मैं फिर से बेचैन होना शुरू हो गया. क्या कमल लग रहे थे सुप्रिया के बूब्स और कमर पीछे से. उसे छत्त पर पकडे हुए बूब्स फिर से याद आ गए, जैसे अभी भी उसे हाथों में hi हो. वह खड़ा हो कर वह नज़ारा देख hi रहा था की एक डैम से अतुल भैया कमरे के बहार आ गए और उसने अपनी नज़रे नीची कर ली और वहां से चला गया.

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शाम को अर्पिता दीदी और जीजू आये हुए थे, तोह न छह कर भी वह दोनों नीचे सब के साथ बैठे हुए थे. विनीत जीजू हमेशा की तरह उन दोनों को छेड़ रहे थे पर ध्रुव और सुप्रिया दोनों काफी चुप चाप थे. चची भी उन्हें बारीकी से देख रही थी ताकि उसे उनके बीच की कहानी का पता चले.

विनीत - क्या हुआ भाई, मैंने तोह सोचा था आज होली का माहौल बना हुआ होगा, पर यहाँ तोह सब लोग बड़े चुप चुप है.

सुप्रिया - हाँ बस जीजू ऐसे hi, थोड़ा सा सर में दर्द है.

विनीत - ारी तोह ये देवर किस काम का है, इनसे अपना सर डब्वायो न.

ध्रुव के हलकी सी आँख ऊपर करके सुप्रिया की और देखा. सर की जगह उसने तोह कुछ और hi दबा दिया था भाभी का, अब तोह वह शायद उसे हाथ भी न लगाने दे.

ध्रुव - भाभी, मैं मेडिसिन ला दू आपके लिए.

सुप्रिया ने उससे थोड़ा बेरुखी से बोलै - नहीं ठीक है सब.

फिर सब लोग अर्पिता की प्रेगनेंसी की बातें करने लगे और बच्चे का नाम सुझाने लगे. और चची और मम्मी जी सुप्रिया को छेड़ने लगे.

चची - सुप्रिया तुम भी अब जल्दी से बेबी कर लो, अब तोह शादी को भी 6 महीने होने वाले है.

सुप्रिया तोह क्या hi बोलती, और उसने शर्मा का अपनी आँखें नीचे कर ली.

मम्मी जी - हाँ सुप्रिया, तुम और अतुल कर लो बेबी जल्दी से, फिर तुम्हारा और अर्पिता दोनों के बच्चे साथ में hi खेल लेंगे.

विनीत - ारी भाई सब सुप्रिया के पीछे क्यों पड़े हो, कोई साले साहब को भी बोलो की वह जल्दी से ये सब करे.

अतुल भी वहां बैठा मंद मंद मुस्कुरा रहा था, उसे अपने परिवार के बीच में बोलने की कभी हिम्मत hi नहीं होती थी. और ये जीजू ने तोह उस पार hi सब दाल दिया. अभी तोह वह और सुप्रिया बच्चा नहीं करना चाहता थे, और उसके मैं में सुप्रिया को लेकर और भी कई चीज़े थे जो वह पहले पूरा करना चाहता था. पर वह ये सब कैसे यहाँ बोलता.

चची - हाँ अतुल तुम बताया, तुम सुप्रिया को खुश तोह रख पा रहे हो न. कुछ अडवीसे चाहिए तोह अपने जीजू से ले लेना.

उधर ध्रुव भी ये सब सुन रहा था, कैसे उसका परिवार बेशर्मी से सुप्रिया और अतुल को सेक्स करने के लिए बोल रहा था. उसके मैं में आया की अगर भैया से नहीं हो पा रहा तोह क्या सुप्रिया भाभी उसके साथ करना चाहेंगी.

सुप्रिया को भी समझ नहीं आ रहा था की वह क्या बोले पर उसे चची का अतुल पर सवाल लगाना ाचा नहीं लगा, सो वह बोल पड़ी - चची जी आप परेशां मत हो, अतुल मुझे बहुत खुश रखते है.

ये सुनते hi सबके मुँह से ओह्ह्ह्ह होओओओओ निकल पड़ा, जिससे सुप्रिया का चेहरा और लाल हो गया. अर्पिता ने पास बैठे बैठ सुप्रिया के पेट पर हलकी सी छूती कांटी और उसे हुग कर लिया. ध्रुव को ये सुन कर थोड़ा सा गुस्सा आ रहा था. इसके बाद रात का खाना होने के बाद सब अपने घर या कमरों में जा कर सो गए.

अगले दिन, सुबह 11 बजे, उनके घर की घंटी बजी और पापाजी ने दरवाजा खोला. बहार नीति एक सलवार सूट पहने कड़ी थी और उसके हाथ में मिठाई का डब्बा था.

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नीति - नमस्ते अंकल. मैं ध्रुव की फ्रेंड हु, नीति. होली की मिठाई लायी थी.

पापाजी ने नीति को घर के अंदर किया और चची और ध्रुव को आवाज़ लगायी - ध्रुव देख जरा तेरी फ्रेंड आयी है.

चची ने उसे गले लगते हुए बोलै - आयो बीटा, अंदर आयो.

चची नीति को ऊपर से नीचे तक देख रही थी. उसने ये नाम ध्रुव के फ़ोन पर देखा था, और बहार बहार से उन दोनों के मैसेज भी पड़े थे, तोह उसे आईडिया तोह था की वह उसकी गर्लफ्रेंड होगी. वह नीति को देख कर बहुत खुश थी. काफी अछि चॉइस थी उसके बेटे की.

ध्रुव भी एक डैम से नीचे आया तोह उसे यकीं नहीं हुआ की नीति वहां कड़ी थी. उसने मन करने के बाद भी नीति की इतनी हिम्मत हुई की वह उसके घर hi आ गयी. उसने नहीं लगा था की नीति ये कर सकती है, आखिर एक लड़की कैसे अपने बॉयफ्रेंड के घर पर hi आ जाये.

चची - देख क्या रहा है, नीति को बिठा, मैं चाय नाश्ता लगाती हु.

ध्रुव ने अपना गुस्सा दबाते हुए नीति को बैठने को बोलै. नीति सारे घर को बारीकी से देख रही थी, वह सोच रही थी शायद एक दिन ये घर उसका ससुराल हो सकता है. चची भी आ कर नीति से उसके घर और परिवार के बारे में पूछने लगी. जरा सी बातों से hi, नीति को चची का नेचर बहुत hi ाचा और ओपन लगा, तोह उसने हिम्मत करके चची से अपने मैं के सवालो को पूछना शुरू कर दिया.

नीति - आंटी जी, ध्रुव के और फ्रेंड्स भी घर आते है क्या.

चची - हाँ बीटा, आते है न. पर आप पहली बार आयी हो, और बहुत ाचा किया आपने जो आप मिलने आ गयी हमसे.

नीति - हांजी. उन फ्रेंड्स में कोई लड़की भी क्या....

चची अब नीति का सवाल समझ गयी थी - नहीं बीटा, ये और किसी लड़की को घर पर बुलाना, हो hi नहीं सकता. मुझे पक्का पता है की आप भी खुद से hi आये हो न, इससे पुछा होगा तोह इसने मन hi कर दिया होगा. आप इसकी पहली गर्ल फ्रेंड हो जो घर आयी हो.

चची ने गर्ल फ्रेंड के गर्ल पर ज़ोर डालते हुए बोलै. नीति ये सुन कर काफी खुश हो गयी, काम से काम उससे पहले कोई ध्रुव के घर तक तोह नहीं आया था.

चची - और बल्कि मैं ये कहूँगी की शायद आप hi इसकी पहली गर्लफ्रेंड भी हो.

अतुल ने अपनी मम्मी की और देखा, जैसे उन चुप करना चाहता हो.

नीति थोड़ा ब्लश करते हुए बोली - थैंक यू आंटी जी. हांजी, ध्रुव ने तोह घर आने से मन कर दिया था.

चची - कोई बात नहीं, अब आप कभी भी आ जाना. ध्रुव, जा जरा अपनी भाभी को भी बुला ले, वह भी मिल लेंगी नीति से.

नीति ये सुनकर थोड़ा सा हैरान हो गयी, ध्रुव ने उसे कभी नहीं बताया था की उसकी कोई भाभी भी है - भाभी??

चची - हैं, ध्रुव के भाई और भाभी लखनऊ रहते है, अभी होली के लिए आये है.

ध्रुव तोह जैसे हिलने का नाम hi नहीं ले रहा था, और आखिर वह कैसे सुप्रिया और नीति को आपस मिल मिलवाये - रहने दो न मम्मी, वह बिजी होंगी.

चची - ारी तुम भाभी देवर की आपस में इतनी बनती है और उन्हें नहीं मिलवाएगा अपनी गर्लफ्रेंड से.

चची ने खुद hi आवाज़ लगा दी - सुप्रियाआ, सुनो जरा, एक बार नीचे आयोगी.

ये नाम सुनकर नीति की हैरानी अब और बाद गयी थी. क्या ये कोई इत्तेफाक था की उसकी भाभी का नाम सुप्रिया था.

सुप्रिया साड़ी पहने सीढ़ियों से नीचे आयी और जैसे hi उसकी नज़र नीति पर पड़ी उसके कदम एक डैम से थम गए. नीति और वह दोनों एक दुसरे को देखने लगे. नीति ने उसे देखा तोह उसे यकीं hi नहीं हुआ, ये तोह वही लड़की थी जिसे ध्रुव कॉलेज में अपनी गर्लफ्रेंड बना कर लाया था. थोड़ी अलग लग रही थी क्यूंकि उसने साड़ी पहने हुई थी पर बेशक वही लड़की थी.

चची - सुप्रिया, यहाँ आयो, ये नीति है, ध्रुव की ख़ास फ्रेंड.

सुप्रिया धीरे धीरे आ कर चची के बराबर में बैठ गयी. उसके दिल की धकड़न बहुत तेज़ हो चुकी थी, उसकी छोरी जो पकड़ी गयी थी. ध्रुव ने भी तोह उसे नहीं बताया था की नीति अब उसकी गर्लफ्रेंड थी, और आज घर आने वाली थी. नीति भी सुप्रिया और ध्रुव को बारी बारी से देख रही थी. उसने मैं में हज़ारो सवाल थे ध्रुव के लिए.

चची भी सबकी शक्ल देख कर भांप गयी की कुछ तोह गड़बड़ है - क्या हुआ भाई, सब इतना चुप क्यों हो गए?

नीति ने खुद को सँभालते हुए बोलै - कुछ नहीं आंटी जी, बस वह भाभी इतनी सुन्दर है न, की मैं देखती hi रह गयी.

ध्रुव के अंदर hi अंदर एक रहत की सांस ली, शायद नीति इतनी समझदार तोह थी की मम्मी के सामने उसकी पोल नहीं खोलेगी. सुप्रिया ने भी अनजान बनते हुए उससे बात करनी शुरू करि.

सुप्रिया - थैंक यू! पर आपसे तोह काम hi प्रीटी हु.

नीति - वह तोह ध्रुव से पूछना पड़ेगा. ी मैं की ध्रुव ने आपकी बहुत तारीफ़ करि है.

सुप्रिया - पर उसने मुझे नहीं बताया की आप लोग एक साथ हो...

नीति - शायद उसे लगा हो की आपको बताने से कुछ गड़बड़ हो जाएगी.

चची - ारी कैसी गड़बड़, भाभी तोह अपने देवर की हेल्प hi करती है.

सुप्रिया ने नीति को देखते हुए बोलै - हाँ बिलकुल, मैं ध्रुव की हेल्प के लिए कुछ भी कर सकती हूँ, जैसे उसे बोल रही हो की उसने जो भी किया वह उन दोनों के लिए hi किया.

चची - ध्रुव, तुम नीति को अपना कमरा क्यों नहीं दिखा देते.

ध्रुव और नीति ऊपर उसका कमरे की और चल पड़े. और सुप्रिया और चची नीचे hi रह गए. कमरे में पहुंचते hi नीति ने ध्रुव से दबी आवाज़ में सवाल पूछने शुरू कर दिए.

नीति - सुप्रिया भाभी?? वह तुम्हारी भाभी है? और तुम उनको अपनी गर्लफ्रेंड बनाकर लाये थे?

ध्रुव - नीति सुनो, मैं तुम्हे सब समझा दूंगा, पर यहाँ नहीं, कल कॉलेज के बाद मिलते है.

नीति - नहीं, मैं hi पागल थी. मुझे अब सब समझ आ रहा है.

ध्रुव - क्या समझ आ रहा है.

नीति - तुम्हारी भाभी तुम्हे लिखे करती है और तुम भी उन्हें लिखे करते हो. कल मुझे फ़क करते हुए भी तुमने उनका नाम....

ध्रुव - क्या बोल रही हो. ऐसा कुछ नहीं है.

नीति ऐसे कड़ी थी की उसे बहार की और दिख रहा था और ध्रुव को नहीं. तभी सुप्रिया भी दरवाज़े के बहार आ कर कड़ी हो गयी, और उसे देखते hi नीति के दिमाग का गुस्सा जैसे और बाद गया हो. वह आज तक परेशान थी की वह सुप्रिया को ध्रुव के दिमाग से नहीं निकाल पायी थी पर यहाँ तोह कहानी कुछ और hi थी. उसे लगा शायद ध्रुव की भाभी ने hi उसे फसाया होगा और ध्रुव तोह अभी इस सब बातों में थोड़ा कच्चा है. आखिर ध्रुव था hi इतना हैंडसम. ध्रुव नीति को बहुत ज्यादा पसंद था और वह ध्रुव के लिए किसी से भी लड़ सकती थी.

नीति ने सुप्रिया को देखते हुए ध्रुव से कहा - ध्रुव, अगर ऐसा नहीं है तोह अभी मुझे किश करो.

ध्रुव को पता नहीं था की सुप्रिया बहार कड़ी है - नीति, किश यहाँ?

नीति - क्यों, मुझे कल तोह बड़े गंदे से फ़क किया था, आज किश भी नहीं कर सकते. किश में, नाउ!

नीति ने ध्रुव का चेहरा पकड़ कर उसे किश करना शुरू कर दिया. ध्रुव ने भी नीति को शांत करने के लिए उसे वापस किश करना लगा. नीति किश करते हुए सुप्रिया को घूर रही थी, जैसे बोल रही हो की ध्रुव सिर्फ उसका है. सुप्रिया उन दोनों को किश करता देख वहां से हट गयी, और उसके मैं में काफी बेचैनी सी होनी लगी. ध्रुव जो अब तक उसके पीछे पड़ा था अपने कमरे में खड़ा किसी और लड़की को किश कर रहा था. उसे इस बात से कोई फरक तोह नहीं पड़ना चाहिए था, पर पता नहीं क्यों वह इस बात को हज़म नहीं कर पा रही थी.

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सुप्रिया वापस नीचे चली गयी और चची उससे नीति के बारे में बात करने लगी. चची को नीति बहुत hi अछि लगी थी, जैसे उन्हें उनकी बहु hi मिल गयी हो. थोड़ी देर के बार नीति और ध्रुव भी नीचे आ गए, और नीति जाने hi वाली थी.

नीति - आंटी जी आपसे मिलकर बहुत ाचा लगा. मैं अब आती रहूंगी यहाँ.

चची - बिलकुल, जब मर्ज़ी अपना hi घर समझ कर आ जाना.

नीति ने सुप्रिया को थोड़ा सा टॉन्ट मारते हुए कहा - और भाभी जी आप तोह वापस जा रहे होंगे न कल?

सुप्रिया किसी तरह से अपना गुस्सा कण्ट्रोल कर रही थी - हाँ, हम लोग कल चले जायेंगे. वैसे नीति एक बात कहु, तुम बहुत hi सुन्दर हो और ध्रुव बहुत hi लकी है की उसके पास तुम्हारे जैसी फ्रेंड है.

नीति ने भी उसे आँखें दिखते हुए बोलै - हाँ वह तोह है. और मैं उसे छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाली.

ध्रुव नीति को ड्राप करने अपनी बाइक पर ले गया, और सुप्रिया ने जब उन्हें बाइक पर एक साथ देखा तोह जैसे उसके मैं में और भी जलन होने लगी. जिस तरह से नीति सुप्रिया को अकड़ से देख रही थी, सुप्रिया को यकीं हो गया था की नीति किसी भी तरह से ध्रुव के लिए सही नहीं थी, और वह ध्रुव को नीति के बारे में सलाह तोह दे कर hi रहेगी.

घर पर ड्राप करते हुए, ध्रुव नीति से बोलै - नीति... थैंक्स तुमने मम्मी को कुछ नहीं बताया...

नीति - देखो ध्रुव, जो भी हुआ, वह मैं किसी को नहीं बतायूंगी. पर आज से तुम सिर्फ मेरे हो, समझे? और सुप्रिया और तुम्हारे बीच अगर कुछ भी है तोह उसे आज hi ख़तम कर दो.

ध्रुव - सच यार, वह मेरी भाभी है बस, कुछ नहीं है हमारे बीच.

ध्रुव को अंदर काफी गुस्सा आ रहा था की कहाँ तोह अब तक वह नीति को अपने काबू में कर के रखता था, और आज वही नीति उसको अपने हिसाब से चलने की कोशिश कर रही थी. पर उसे पता थी की ये मामला काफी शान्ति से डील करना होगा, नहीं तोह घर पर पता चल गया तोह काफी गड़बड़ हो जाएगी. कल सुप्रिया भाभी वापस चली जाएँगी और फिर शायद वह इस सब का कोई न कोई इलाज ढून्ढ सकेगा.
 
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