सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी - SexBaba
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सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी

hotaks

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Hi आल. मैं एक नयी स्टोरी स्टार्ट करना चाहती हु, जो इंस्पायर्ड है मेरी ek-do फवौरीते स्टोरीज से सोस्सिप की. मैं उन स्टोरीज से काफी चीज़े बोर्रोव करुँगी, सो मैं उन स्टोरीज के वरिटेरस को थैंक यू एंड क्रेडिट देना चाहती हु.

पहली स्टोरी है, अदिति ब्यूटीफुल हाउसवाइफ देसिवेद बी punjabi1slut

और दूसरी स्टोरी है - थे इनोसेंट वाइफ बी कासिनर

मैंने पहले नहीं सोचा था पर इन दोनों स्टोरीज की हीरोइन का नाम अदिति है, कमाल का इत्तेफाक. आप इन स्टोरीज को भी जरूर पड़े.

मेरी होप है की मैं उन स्टोरीज के part ले कर अपनी स्टोरी और अछि बना पयूंगी और उन्हें भी एक अचे एन्ड तक पंहुचा पयूंगी. ये स्टोरी मैं थोड़ी रीयलिस्टिक तरीके से लिखने की कोशिश करुँगी और अलग अलग चरक्टेर्स के एक्शन्स को रीजनिंग देने की कोशिश करुँगी. जिस हिसाब से स्टोरी लिखी जाएगी वह थोड़ा स्लो रहेगा और स्टोरी की हीरोइन पहले से hi किसी के साथ भी सेक्स नहीं करने लग जाएगी. वह धीरे धीरे अलग अलग पुरुषो के द्वारा छुई जाएगी. स्टोरी को थोड़ा और इंटरेस्टिंग और पूरा बनाने के लिए और फीमेल चरक्टेर्स को इंट्रोडस कर दूंगी जिनका करैक्टर शायद हीरोइन जितना ाचा नहीं है.

आपके आइडियाज एंड इनपुट्स भी सुन्ना चाहूंगी.
 
सो ये कहानी शुरू होती है 2011 में. पर उससे पहले, इस कहानी की मैं किरदार, सुप्रिया शर्मा के बारे में जानते है. सुप्रिया उप के एक छोटे से शहर झाँसी के एक मिडिल क्लास फॅमिली से थी, उसके पापा एक प्राइवेट जॉब करते थे. सुप्रिया की मम्मी हाउस वाइफ थी और उसका एक बड़ा भाई उससे 8 साल बड़ा था. सुप्रिया के मम्मी पापा के लिए भी वह एक छोटा सा सरप्राइज थी जो 1988 में उन्हें मिला था.

छोटे होने की वजह से सुप्रिया को घर में सबसे काफी ज्यादा अटेंशन मिली, खासकर पापा और भैया से. पापा वैसे तोह काफी कन्सेर्वटिवे ख्याल के थे, पर सुप्रिया को बचपन से hi काफी छूट मिली हुई थी. सुप्रिया को जीन्स, टॉप, स्कर्ट सब पेहेनना अल्लोवेद था, जो उनके विस्तारित परिवार के कुछ लोगो की हिसाब से काफी मॉडर्न था.

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बचपन से सुप्रिया काफी क्यूट थी, और बड़े होते होते वह और भी ज्यादा क्यूट और सुन्दर होती गयी. उसने एक अचे इंग्लिश मध्यम कॉलेज से अपनी 12तह पूरी की. जब वह 12तह क्लास में थी, उसके बड़े भाई की शादी आरती से हो गयी. आरती वैसे तोह सुप्रिया से 4 साल hi बड़ी थी, पर काफी ज्यादा समझदार थी. शादी के बाद, सुप्रिया और उसकी भाभी ऐसे गहरे दोस्त बन गए, जैसे एक दुसरे की परछाई. भाभी को हर बात की समझ भी जो थी. सुप्रिया अपनी मम्मी से ज्यादा क्लोज भाभी से हो गयी.

सुप्रिया कॉलेज में हर जगह काफी एक्टिव थी. हर डांस, सांग और एक्स्ट्रा एक्टिविटी में part लेना तोह जैसे फिक्स hi था. साथ hi पड़े में भी वह काफी अछि थी और बीकॉम में उसने अपनी ग्रेजुएशन पूरी किया. का का भी तरय किया पर वह उससे नहीं हो पाया.

ऐसा नहीं था की सुप्रिया लड़को से अनजान थी. कॉलेज टाइम से की काफी लड़के उसकी तरफ आकर्षित थे. और कॉलेज आते आते तोह ये लिस्ट और भी बड़ी हो गयी. Ek-do लड़को से उसकी गहरी दोस्ती भी हो गयी थी, पर भाभी की गाइडेंस से उसने कभी कोई रेखा नहीं लाँघि. थोड़ा बहुत किश और टच बस उससे ज्यादा कुछ नहीं.

कॉलेज में hi उसके रिश्ते भी आने लगे थे. जो लड़की कॉलेज में काफी ज्यादा पतली थी अब थोड़ा भर सी गयी थी. भाभी हमेशा उसको बोलती थी की लड़को को थोड़ा चब्बी चीक्स वाली लड़किया hi पसंद आती है. भाभी उसको प्यार से गोलू बुलाती थी. पर सुप्रिया बिलकुल भी मोती नहीं थी. उसकी हाइट, 5’3 के लिए उसका वेट 55 कग्स बिलकुल ठीक था.

पापा ने सब रिश्तो को ये बोल कर मन कर दिया था की अभी तोह सुप्रिया छोटी है और कॉलेज भी पूरा नहीं हुआ. पर कॉलेज ख़तम होने के बाद तोह पापा ने भी शादी के लिए ज़ोर देना शुरू कर दिया. किसी तरह भाभी ने सबको समझाया की अभी छोटी है और 1-2 साल और रुकना ाचा होगा.

वैसी भी इतनी तोह िम्मातुरे है वह, कैसे घर संभालेगी, भाभी ने सबको बोलै. सुप्रिया फिर सोचती की भाभी बचा रही है या इंसल्ट कर रही है. पर भाभी ठहरी गहरी दोस्त, तोह उनकी बातों का क्या बुरा मन्ना. सुप्रिया जॉब भी करना चाहती थी, तोह भाभी की सिफारिश और काफी ज्यादा ज़िद्द के बाद, पापा ने उसे अपने एक दोस्त की का फर्म में जॉब करने दिया. सुप्रिया को स्कूटी चलना तोह आता hi था, और जॉब करने से तोह जैसे उसमे और भी कॉन्फिडेंस आ गया था.
 
अपडेट 1

सुप्रिया को अब जॉब को भी करते करते 2 साल हो चुके थे. मम्मी को तोह जैसे शादी की चिंता सटे जा रही थी. सुप्रिया के पापा दहेज़ के सख्त खिलाफ थे, तोह काफी सारे रिश्ते तोह ऐसे hi मन हो जाते थे. और जिनको दहेज़ नहीं चाहिए होता, उसमे कुछ न कुछ ऐसा निकल hi जाता जो रिजेक्ट hi करना पड़ता. पर सुप्रिया को कहाँ जल्दी थी.

एक दिन, मम्मी के पास उनके मायके से एक लड़के का रिश्ता आया. मम्मी का मायका ग्वालियर में था और ये फॅमिली उनके काफी करीबी थी.

मम्मी - आरती सुन, ये लड़के की फोटो देख जरा.

आरती - मम्मी जी लड़का तोह ठीक लग रहा है. कौन है?

मम्मी - ग्वालियर से है. मैंने भेजी थी न गुड्डू की फोटो उनको. वहीँ रहते है पास में.

आरती - ाचा, तोह आप ग्वालियर भेजने के चक्कर में हो.

मम्मी - ारी नहीं, लड़के की तोह जॉब लखनऊ में है. बैंक में जॉब है. वहीँ रहेगी. ससुराल ग्वालियर है.

आरती - तब तोह दहेज़ मांग रहे होंगे. पापाजी मन कर देंगे.

मम्मी - नहीं न. ये लोग नहीं चाहते दहेज़ वहज. बस शादी धूम धाम से हो जाये.

आरती - ये तोह बढ़िया है.

मम्मी - तू बात कर न गुड्डू से, तेरी तोह सुन लेगी. और किसी की बात नहीं मानेगी. 4 दिन बाद आ रहे है यहाँ देखने.

आरती - मुझे क्या मिलेगा उसके लिए. आरती ने है के बोलै.

मम्मी - ारी जो तुझे चाहिए दिला दूंगी. बस उसको समझा दे की पिछली बार की तरह न करे. जीन्स में बैठ गयी थी आ कर.

आरती - वह तोह लड़का भी ऐवी था. मान जाएगी, मैं मन लुंगी उसको.

शाम को सुप्रिया घर आती है, ज़ोर से आवाज़ लगते हुए.

सुप्रिया - भाभीई, ओह मेरी प्यारीयी भाभीई. कहाँ छुपी हो.

आरती - आ गयी मैडम. क्या हुआ, आज तोह बड़ी खुश लग रही है.

सुप्रिया - ऐसे hi, आज दिन ाचा गया न.

आरती - ाचा, लगता है फोटो लीक हो गयी.

सुप्रिया एकदम चौंकते हुए - फोटो??!! किसकी फोटो??

आरती - आपके उनकी.

सुप्रिया थोड़ा नकली गुस्से में आते हुए - भाभी आपने भी इन लोगो को ज्वाइन कर लिया. ऐसी उम्मीद नहीं थी मुझे.

आरती - चल नौटंकी. ये देख जरा. आरती उसको जल्दी से अपने फ़ोन पर फोटो दिखती है.

सुप्रिया तिरछी आखों से फोटो को देखती है - हाँ तोह?

आरती - तोह ये. 4 दिन बाद संडे को ये आएंगे एंड आप इस बार कोई ड्रामा नहीं करोगे. समझे?

सुप्रिया - भाभी पर… ऐसी क्या जल्दी है.

आरती - गोलू, मैं तुझे समझा रही हूँ न. ऐसे नहीं करते. शादी तोह करनी hi है न. फिर ये तोह ाचा hi लग रहा है.

सुप्रिया एक दम चुप चुप नीचे देखते हुए.

आरती - और जब वह यहाँ और यहाँ छुएगा न, तब भाभी को याद करना. भाभी उसको गुदगुदी करके हँसा देती है. और फिर उसके गाल खींच कर उसके गले लगा लेती है.

आरती - बस मिल ले अचे से. फिर देखेंगे बाकि सब. इतना तोह भरोसा है न मुझपर?

सुप्रिया की आँखों में हलके से ासु, वह अपना सर हिला देती है हाँ में. और फिर हसने और रोने के बीच में कुछ आवाज़ करते हुए भाभी से चिपकी रहती है.
 
अपडेट 2

संडे की सुबह सुप्रिया झुंझलाहट के साथ उठी. पिछले तीन दिनों में भाभी ने उसको एक बार भी दुबारा लड़के की फोटो नहीं दिखाई थी. उसने ज़िद्द के मारे मांगी भी नहीं थी. भाभी शायद ये खेल अचे से जानती थी, इसको अचे से तडपायो और इंतज़ार करवायो. सुप्रिया को तोह अब लड़के की शकल भी याद नहीं थी. नाम क्या बताया था सब ने - अतुल, हाँ शायद एहि था.

मम्मी रूम में फुर्ती से चलते हुए आयी और बोलै - गुड्डू, उठ जा बीटा, लड़के वाले आने वाले होंगे. 10 बजे का टाइम है.

भला इतनी सुबह सुबह कौन आता है, सुप्रिया ने मैं में सोचा. उसने मम्मी को कोई जवाब नहीं दिया और सोने की एक्टिंग करि.

थोड़ी देर में भाभी भी रूम में आयी, और बोली - गोलू उठ जा अब तोह. नाहा ले जा कर.

सुप्रिया ने एक आँख से भाभी को गुस्से में घूरा. उसने भाभी को भी कोई जवाब नहीं दिया.

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थोड़ी देर बाद घर की दुर्बल बजी. सुप्रिया फटाफट उठ कर दरवाज़े के कोने से देखने गयी की कौन आया था. 5 लोग आये थे. उनको देख कर सुप्रिया ने अनुमान लगाना शुरू किया. 2 थोड़े बड़े लोग थे, शायद अतुल के मम्मी पापा होंगे. 1 लड़की थी, यंग थी, पर उससे थोड़ी मोती थी. उसने गोल्डन कलर की साड़ी पहनी हुई थी. शायद बेहेन या भाभी?

और फिर 2 लड़के थे, दोनों यंग से लग रहे थे. दोनों शायद 25-30 के बीच में होंगे. 1 लड़का थोड़ा लम्बा, शायद 5’10, गोरा, हैंडसम और फिट बॉडी. काफी स्मार्ट लग रहा था. दूसरा लड़का उससे थोड़ी छोटी हाइट का, 5’7. उसका रंग इतना गोरा नहीं था, पर क्लीन शवेद, ग्लासेज पहने हुए, वह भी ठीक hi लग रहा था, पहले वाले जैसी बॉडी तोह नहीं पर पतला hi था. अब इनमे से कौनसा है, भाभी ने फोटो भी तोह नहीं दिखाई दुबारा. शायद ग्लासेज तोह नहीं पहने थे. सुप्रिया ने उन्हें देख कर सोचा.

भाभी अंदर गुस्से में दनदनाती हुई आयी और बोली - सुप्रिया तू अभी तक रेडी नहीं हुई.

सुप्रिया समझ गयी की भाभी काफी गुस्से में है. अगर भाभी उसे गोलू, जणू, स्वीटी, कटु या बेबी की जगह सुप्रिया बुला रही है तोह इसका मतलब खतरा hi है, सुप्रिया समझ गयी

सुप्रिया - बस 10 मीन्स दो भाभी. कह कर वह जल्दी से बाथरूम किनौर भागी.

बहार बातें और जानना पहचानना चल रहा था. और चाय नाश्ता भी शुरू हो गया था. भैया अचे से जांच पड़ताल कर रहे थे, आखिर उनकी प्यारी सी बहना की बात थी. पापा पॉलिटिक्स की बातें ले कर बैठ गए थे.

मम्मी - आरती, देख जरा गुड्डू रेडी है क्या.

फिर मेहमानो को देख कर - मैं प्यार से गुड्डू बुलाती हु, वैसे तोह सबने अलग नाम रखे हुए है उसके.

भाभी - हाँ मैं देखती हूँ, हो गयी होगी रेडी.

भाभी जल्दी से अंदर आयी और सुप्रिया की और देखा. बहुत hi क्यूट लग रही थी वह. उसने एक लाइट ब्लू कलर का कुर्ती सूट पहना हुआ था और उसके गाल शर्म से लाल हो रखे थे. भाभी ने उसे देखते hi कहा - अगर मैं अतुल जी की जगह होती तोह आज hi शादी कर देती तुझसे.

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सुप्रिया के बहार आते है सब लोग उसे hi देख रहे थे. वह लग भी इतनी क्यूट और सुन्दर जो थी. भाभी उसका हाथ पकड़ कर घर के आँगन में ले आयी. और फिर उसको अतुल की बेहेन, अर्पिता के पास बिठा दिया.

अर्पिता - फोटो से भी ज्यादा सुन्दर है ये तोह. भाई आप देख रहे हो न.

सुप्रिया की चेहरे पर एक स्माइल आ गयी और उसके गाल और लाल हो गए. उसने बिना सर उठाये ये समझने की कोशिश करि की आखिर अतुल है कौन.

अतुल की मम्मी, सरिता भी पास आकर बैठ गयी और सुप्रिया का हाथ अपने हाथ में हलके से ले लिया. सुप्रिया को ऐसा लगा जैसे वह कुछ जांच रही थी.

सुप्रिया को तोह जैसे कुछ सुनाई hi नहीं दे रहा था. उसके दिल की धड़कन काफी तेज़ हो गयी थी इस सब में. उसने चोरी से लम्बे लड़के की और देखा और पाया की वह उसको देख कर काफी स्माइल कर रहा था. एहि होगा अतुल शायद.

भाभी - आप सब सहमत हो तोह अतुल और सुप्रिया को थोड़ा टाइम दे दे अकेले बात करने का. सबने सहमति में सर हिलाये. भाभी ने सुप्रिया को हलके से उठाया और बोलै - चलिए अतुल जी.

यह बोलते hi, थोड़ी काम हाइट वाला लड़का खड़ा हो गया. उसके खड़े होते hi सुप्रिया के चेहरे से जैसे हसी गायब hi हो गयी. ओह्ह ये अतुल है, मुझे लगा… सुप्रिया ने सोचा.

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भाभी अतुल और सुप्रिया को कमरे में ले आयी और बोली - आप लोग आराम से बात कीजिये. सुप्रिया ज्यादा परेशां मत करना अतुल जी को.

सुप्रिया ने भाभी को घूर कर देखा और वह हस्ते हुए रूम से चली गयी. अतुल और सुप्रिया दोनों चुप बैठे हुए थे, सोचते हुए की कहाँ से शुरुवात करे.
 
अपडेट 3

अतुल - आपको भाभी काफी फनी और स्वीट है. अतुल ने फिर सोचा कहीं ये न सोचे की इसकी भाभी पर लाइन मार रहा हूँ.

सुप्रिया - हाँ, वह मेरी बेस्ट फ्रेंड है.

सुप्रिया तोह जैसे फिर शुरू hi हो गयी बोलना, भाभी के बारे में, अपने बारे में, अपनी जॉब के बारे में सब चीज़ो के बारे में. अतुल जो खुद ज्यादा बोलता नहीं था, उसको थोड़ी इर्रिटेशन हो रही थी पर उसने दिखाई नहीं.

अतुल - तुम मैरिज के बाद जॉब करोगी क्या?

सुप्रिया - हाँ, मैं बिलकुल जॉब कंटिन्यू करना चाहूंगी.

अतुल - Ok, पर आपको करने की जरूरत नहीं है. मैं एक बैंक ब्रांच में सीनियर लोन अफसर हु एंड काफी ाचा कमाता हूँ.

सुप्रिया - हाँ पर मैं जॉब करना चाहूंगी. मुझे ाचा लगता है.

अतुल - चलो बाद में देख लेंगे वह सब. पर मेरी तरफ से इस रिश्ते के लिए हाँ है.

इतने में भाभी उनको लेने आ गयी. सुप्रिया ने सोचा की मैं तोह अतुल से कुछ ख़ास पूछ भी नहीं पायी. भाभी उसको अकेले में ले कर गयी और पुछा - कैसा लगा.

सुप्रिया - पता नहीं भाभी, इतनी जल्दी थोड़ी न समझ आता है

भाभी - इतना hi टाइम मिलता है. सुन, मम्मी तोह हाँ बोलने वाली है. अगर तुझे कुछ कहना है तोह अभी बोल दे वर्ण बाद में मैं हेल्प नहीं कर पयूंगी.

सुप्रिया - देखने में ठीक hi है, बुरा तोह नहीं है. बाकी आप लोग देख लो. सुप्रिया ने सोचा की वह कैसे मन कर दे, वह पहले hi कितने लड़को को मन कर चुकी थी.

भाभी - ठीक है तोह पक्का हुआ. भाभी ने उसे जोर से गले लगा लिया, और उसके गाल पर किश कर दी.

फिर बहार जाकर सबको बता दिया. सब काफी खुश हो गए एंड थोड़ी देर में hi वहीँ रोके की रस्म भी हो गयी. अतुल की मम्मी ने सुप्रिया को सोने की चैन और चूडिया पहना दी. सुप्रिया के पापा ने भी अतुल का टीका किया और उसे 5,001 का लिफाफा दे दिया. सुप्रिया और अतुल को साथ बिठाया गया और उन दोनों ने एक दूसरे को लड्डू खिला दिया. फिर सुप्रिया ने झुक कर सबसे आशीर्वाद लिया.

उसको पता चला की वह लम्बा लड़का अर्पिता दीदी के हस्बैंड विनीत हैं. उसने उनके भी पेअर छूने की कोशिश की पर वह पीछे हैट गए और बोले की वह इतने बड़े नहीं की उनके पेअर छुए जाइये. उन्होंने सुप्रिया के सर पर हाथ रख दिया.

फिर दिन के खाने के बाद सब लोग वापस चले गए. और सुप्रिया अपने कमरे में अकेले बैठ कर सोच रही थी की क्या उसको उसका परफेक्ट लाइफ पार्टनर मिला या नहीं. भाभी की छोटी बेटी, अन्य उसके आस पास खेल रही थी.

मंडे को वैसे तोह सब नार्मल सा था, सुप्रिया अपनी जॉब पर भी गयी थी, पर शायद सब कुछ बदल सा गया था. 2-3 दिनों के अंदर hi शादी की तारीख भी फाइनल हो गयी. शादी सिर्फ 3 महीनो में थी. सुप्रिया का सारा परिवार शादी की तयारियों में लग गया. सुप्रिया की भाभी ने सुप्रिया की शॉपिंग का जिम्मा उठाया और साथ hi सुप्रिया को शादी से पहले का ज्ञान देने की भी कोशिश करि. वह अक्सर घंटो घंटो बातें करते रहते थे.

भाभी - गोलू तुझे सेक्स के बारे में जानना काफी जरुरी है. शादी की नीव सेक्स पर hi तिकी होती है.

सुप्रिया - भाभी.... मुझे क्यों जानना है सेक्स के बारे में, अतुल करेंगे जो उन्हें करना है न.

भाभी - ओह हो, देखो जरा कैसे बेकरार है अतुल के सब करने को लेकर. सुहागरात वाले दिन काफी लम्बी हाथ पायी चलेगी तुम लोगो की, उसके तैयार हो जा अभी से.

सुप्रिया - भाभी आप भी न...

भाभी - तूने कभी वीडियो देखि है ये सब की. आ मैं तुझे दिखती हूँ, अभी तो अन्य भी घर पर नहीं है, ाचा मौका है.

भाभी उसे खींच कर अपने रूम में ले गयी और अंदर से कुण्डी लगा दी. कमरे में अँधेरा हो रहा था. भाभी ने कद प्लेयर में एक कद डाली और टीवी पर चला कर वॉल्यूम बिलकुल ऑफ कर दिया. फिर वह और सुप्रिया दोनों कम्बल में लेट गए और टीवी देखने लगे. सुप्रिया ने पहले चोरी चुप्पे अपने फ़ोन पर 3-4 बार वीडियोस देखि थी, पर ये पहली बार वह किसी और के साथ ये वीडियोस देख रही थी.

वीडियो अंग्रेजी था जिसमे एक गोरा लड़का और एक गोरी लड़की थी. लड़का लड़की को किश कर रहा था और हलके हलके उसके बूब्स दबा रहा था. उसके बाद उसने उसकी ब्रा उतार दी और उसके बूब्स चूसे लगे.

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सुप्रिया - लड़को को बूब्स चूसने में क्यों मज़ा आता है? सुप्रिया ने एक भोला सा सवाल किया.

भाभी - पगली, इतने सॉफ्ट जो होते है ये. और फिर बचपन की याद दिलाते है उन्हें. और तेरे अभी इतने बड़े नहीं है, पर शादी के बाद हो जायेगे.

भाभी ने उसके बूब्स को अपने हाथों से छूटे हुए बोलै. भाभी के बूब्स छूटे hi जैसे सुप्रिया के अंदर की आग और बाद गयी हो. वीडियो में लड़के ने फिर अपने कपडे उतारे और लड़की का सर नीचे करके उसे अपना लुंड चुसवाने लगा. सुप्रिया के मैं में आया की सच में ऐसा होता है क्या, और एक लड़की भला एक लड़के का लुंड क्यों चूसेगी.

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सुप्रिया - की, ये कितना गन्दा है.

भाभी - कुछ गन्दा नहीं है, सब प्यार है. अगर वह अपना गणना चूसने को बोले न तोह पीछे मत हतियो, बस ये बोल दियो की आपको भी मेरी छूट चाटनी होगी.

सुप्रिया - भाभी क्या बोल रहे हो आप....

भाभी - ारी, मैंने भी तेरे भैया को एहि बोलै था. दोनों को बहुत मजा आता है. हम लोग तोह अभी भी करते है ये सब.

सुप्रिया के दिमाग में एकदम से भाभी और भैया का ये करते हुए के दृश्य चलने लगा. सुप्रिया ने किसी तरह उसे अपने मैं से हटाया.

सुप्रिया - भाभी प्लीज मुझे आपके और भैया के बारे में मत बताया. कितना अजीब लगता है.

भाभी - क्या अजीब है इसमें. सब लोग करते है. मम्मी पापा भी करते होंगे. शादी के जस्ट बाद तोह हम हर रात कई कई बार करते थे, अब तोह बस हफ्ते में 2-3 बार, जब अन्य सो जाती है.

सुप्रिया ने कभी भी भाभी और भैया के बारे में ये सब नहीं सोचा था. शायद एहि उसका बचपना था.
 
अपडेट 4

आगे की वीडियो देखते देखते सुप्रिया अपनी भाभी के और करीब आ गयी. उसने भाभी को पीछे से पकडे हुए था, और सोच रही थिस वह ये सब कैसे कर पायेगी. भाभी भी हलके हलके उसकी पीठ सेहला रही थी.

भाभी - गोलू घबरा मत, सब हो जायेगा. और ये वाला तोह बहुत आराम से कर रहा है. मैं तुझे और वीडियोस दिखायूँगी तोह तू तोह भाग hi जाएगी

सुप्रिया ने मुँह बना कर भाभी की और देखा - भाभी आप भी न, बड़े गंदे हो.

भाभी - ारी इसमें क्या गन्दी हु. और वैसे भी गंदे तोह अतुल होने वाले है तेरे साथ.

सुप्रिया - ऐसा लगता है शादी करते हुए जैसे सबको पता है हम लोग सेक्स hi करने वाले हो. कितना अजीब लगेगा. मुझे तोह बहुत ज्यादा शर्म आएगी.

भाभी हस्ते हुए - ारी इसमें शर्माना क्या, फ्री सेक्स करने का लाइसेंस है शादी.

मूवी चल hi रही की इतने में सुप्रिया की मम्मी ने बहार से आवाज़ लगायी, और सुप्रिया और उसकी भाभी टीवी बंद करके बहार आ गए. सुप्रिया रात भर सेक्स के बारे में hi सोचती रही. सुप्रिया रोज़ रात अतुल से भी बात करती थी. वैसे तोह वह hi बोलै करती थी, और अतुल सिर्फ सुनता था. दिन भर अतुल ऑफिस के काम में बिजी होता और सिर्फ टेक्स्ट पर थोड़ी बहुत बात हो जाती, जैसे क्या कर रहे हो, खाना खाया क्या ेट्स. रात को सुप्रिया उसे दिन भर की बातें बताती और शादी की शॉपिंग का अपडेट देती. अतुल भी उसे अपने दिन के बारे में बताता जो ज्यादातर ऑफिस की बोरिंग मीटिंग्स और बॉस की फटकार के बारे में होता. वह सुप्रिया से कभी कभी अपने फ्यूचर की और प्यार भरी बातें भी करता, पर कभी सेक्स के बारे में बात नहीं करता.

इस तरह से जल्दी hi तीन महीने भी बीत गए और शादी की डेट आ गयी. सुप्रिया की शादी एक बैंक्वेट हॉल में हुई, क्यूंकि उसका परिवार इतना अमीर नहीं था. लड़के वालो के रिश्तेदारों को लोग रहा था की अतुल की शादी थोड़ी हलकी जगह हो गयी. पर जैसे hi सुप्रिया शादी के मंडप में लाल रंग का लेंघा पेहेन कर आयी, सारे लोग उसे जैसे देखते hi रह गए. अतुल ने जैसे उसे स्टेज पर देखा उसे तोह यकीं hi नहीं हुआ की उसकी शादी इस लड़की से हो रही थी. सुप्रिया के सामने तोह सच में वह जैसे हल्का पद रहा था. कुछ लोग दबे आवाज़ ये बोल भी रहे थे या मैं में सोच रहे थे.

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अतुल की बेहेन अर्पिता और उनके हस्बैंड विनीत ने उनके यहाँ से साड़ी ज़िम्मेदारी उठा राखी थी. विनीत थोड़ी थोड़ी देर में सुप्रिया को थोड़ा पानी और जूस भी दे रहे थे. सुप्रिया भी स्टेज पर नर्वस थी पर विनीत जीजू का व्यहवार उसे काफी ाचा लगा. रात होते होते सुप्रिया को काफी नींद और थकन हो रही थी पर अभी तोह फेरे भी बाकी थी. अतुल और सुप्रिया को साथ बिठा कर खाना परोसा गया, साथ में अतुल के जीजू, बहिन और खास रिश्तेदार भी बैठे थे. सुप्रिया की भाभी ने उन दोनों को थोड़ा खाना खिलाया. विनीत और अर्पिता ने भी सुप्रिया को अपने हाथ से खिलाया.

फिर थोड़ी देर में उन दोनों के फेरे हो गए, और अतुल ने सुप्रिया को मंगलसूत्र पहना दिया और उसकी मांग भर दी. विदाई के शामे सुप्रिया का रो रो कर बुरा हाल था. ये पहली बार होगा जब वह अपने परिवार के दूर एक अनजान परिवार के साथ एक नए शहर में रहने जा रही थी. भाभी का भी जैसे एहि हाल था, पर उसने अपने आप को किसी तरह से संभाला और सुप्रिया को विदा किया.

सुप्रिया रट रट कार में बैठी, एक बड़ी सी सुव, जिसमे पीछे उसके साथ अतुल और अर्पिता बैठे हुए थे और आगे विनीत जीजू बैठे थे. ड्राइवर ने धीरे धीरे कार चलनी शुरू करि और इस तरह सुप्रिया अपने नए जीवन की तरफ चल पड़ी.

कार में भी सुप्रिया के ासु बह रहे थे. थोड़ी देर बाद, आगे से विनीत ने सुप्रिया को तिसुएस दिए और बोलै - अब इतने भी ख़राब लोग नहीं है हम सुप्रिया की तुम रोटी hi जायु. किडनैप करके नहीं ले जा रहे तुम्हे.

सुप्रिया को रट रट हलकी सी हसी आ गयी. अतुल ने भी उसका हाथ पकड़ कर उसे थोड़ा नार्मल किया. सुप्रिया ने पानी पिया और अपने फ़ोन पर चेक किया अगर भाभी या घर से कोई मैसेज हो. पर कोई भी मैसेज नहीं आया, शायद सब लोग अभी भी बिजी होंगे मेहमानो को विदा करने में, सुप्रिया ने सोचा. फिर सब ने थोड़ी थोड़ी बातें शुरू कर दी, और विनीत और अप्रीता मजाक करके सुप्रिया को और कम्फर्टेबले करने की कोशिश करने लगे. सुप्रिया ने अब से पहले तक विनीत जीजू से ज्यादा बात नहीं की थी, पर वह उसे काफी hi हसमुख लगे. रात भर जागने की वजह से थोड़ी देर बाद कार में सुप्रिया सो गयी और अपना सर अतुल के कंधे पर रख दिया. झाँसी से ग्वालियर का रास्ता 2 घंटे का था. अब तक सुप्रिया के ासु कब के रुक चुके थे और उसके चेहरे पर मुस्कान वापस आ गयी थी. अब उसकी आवाज़ भी चहक कर निकलने लगी थी.

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पर अपने भारी लेंगे और ज्वेलरी से वह थोड़ा परेशां हो चुकी थी. आखिर कर 2 घंटे बाद वह ग्वालियर पहुंच hi गए. सुप्रिया को काफी थकान हो रही थी पर उसे पता था की अभी तोह काफी रस्मे बाकी थी और फिर वह सोचने लगी की आज रात को क्या होगा.
 
अपडेट 5

कार के घर पर पहुंचते है सब लोगो के उसे घेर लिया. अतुल और सुप्रिया कार से उतरे और घर के दरवाज़े पर अतुल की मम्मी, सरिता ने उनकी आरती की. उन्होंने सुप्रिया को चावलों एक एक कलश को अपने दये पेअर से गिराने के लिए कहा और फिर सुप्रिया लाल रंग के पानी में पेअर रख कर घर में प्रवेश हुई.

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अतुल का घर सुप्रिया के घर से काफी बड़ा था, और अभी काफी सारे रिश्तेदार भी थे. अतुल के कौसिन्स सुप्रिया के आस पास घूम रहे थे. सभी नयी भाभी से मिलना चाहते थे. सुप्रिया सब के बीच में थोड़ा घबराई हुई थी पर उसने हिम्मत करके साड़ी रस्मे धीरे धीरे पूरी की.

पहले अतुल और सुप्रिया को घर के मंदिर ले जा कर उनसे पूजा करवाई गयी. उसके बाद घर की साड़ी लेडीज मुँह दिखाई की लेई एक साथ बैठ गयी. साथ में गीत और ढोल भी चल रहे थे. अतुल की तेजी, चची, मौसी एंड ममी ने ek-ek करके सुप्रिया की मुँह दिखाई की रस्म की और उसे गिफ्ट्स और ज्वेलरी दी. सभी ने सुप्रिया को देख कर एहि कहा की बहु तोह बहुत hi ज्यादा सुन्दर है और अतुल की तोह किस्मत hi खुल गयी.

फिर उसके बाद, सुप्रिया और अतुल को साथ बिठा कर कुछ खेल जैसी रस्मे करवाई गयी. पहले कंगना खुलाई की रस्म हुई

अर्पिता - आप दोनों को इस कंगना पे बंधे कपडे को खोलना है. भाई आप सिर्फ एक हाथ hi उसे कर सकते हो. सुप्रिया आप दोनों हाथ उसे कर सकती हो.

सुप्रिया से हलके से मुस्कुरा के कहा - दीदी मैं भी एक हाथ से खोल लुंगी.

अर्पिता - ओह होऊ. भाई इसे कहते है कॉन्फिडेंस. तू नहीं जीतने वाला सुप्रिया से.

ये सुनते hi सुप्रिया की स्माइल और बड़ी हो गयी. गाँठ काफी टाइट थी और अतुल से एक हाथ से नहीं खुल रही थी. फिर सुप्रिया ने तरय किया और उसने एक हाथ से hi गाँठ खोल दी. सभी लोग जैसे सुप्रिया की साइड हो गए थे.

उसके बाद एक थाल में चावल के पानी और फूल के साथ एक अंगूठी राखी गयी. उन दोनों के पास 3 मौके थे अंगूठी निकलने के. जिसने ज्यादा बार निकल दी वह hi जीतेगा. सुप्रिया ने तीनो बार फटाफट से अंगूठी को उठा लिया और खुश हो गयी.

अर्पिता - भाई अब तोह कन्फर्म हो गया. सुप्रिया की hi चलने वाली तुम दोनों में.

इस तरह से काफी सारा हसी मजाक चलता रहा और उन दोनों को खाना भी खिलाया गया. रात होने पर, अर्पिता सुप्रिया को ऊपर के फ्लोर में एक रूम में ले गयी. रूम काफी ज्यादा सजा हुआ था और बीच में एक बीएड था जिस पर फूलो से एक दिल बना हुआ था. सुप्रिया समझ गयी की एहि उसका सुहागरात का रूम होगा. अभी रूम में घर की काफी साड़ी लेडीज थी और बच्चे भी खेल रहे थे. लेडीज आपस में और सुप्रिया से सुहाग रात की बातें करने लगी.

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तेजी - सुप्रिया तुम थक तोह काफी गयी होंगी पर आज रात सोने को नहीं मिलेगा. अभी तोह रात भर की कुश्ती बाकी है.

चची - इसे देख कर तोह नहीं लगता की इसे नींद आ रही है. ये भी वेट hi कर रही है की कब अतुल आये और हम लोग बहार जाये.

तेजी - नहीं, देखो कितना घबरा रही है. अब हर कोई तुम्हारी तरह बेशरम नहीं होता न. तुम लोगो की ने तोह अपनी सुहागरात में इतनी ज़ोर ज़ोर आवाज़े की थी की पूरा घर नहीं सो पाया था.

चची - अब उसमे मेरी क्या गलती थी. आपके देवर hi पागल हो गए थे.

तेजी - रहने दो, तुम भी काम नहीं थी. अर्पिता तू भी तोह बता अपनी. विनीत जी भी कम नहीं है हमे पता है.

अर्पिता थोड़ा शरमाते हुए - हाँ हम लोगो भी ज्यादा सो नहीं पाए थे. विनीत को रोकना तोह एक मुश्किल काम hi है. काम से काम तीन बार तोह किया था हमने.

तेजी - काफी लकी हो तुम जो तुम्हे विनीत जैसा पति मिला है. और अब अतुल को सुप्रिया जैसी बीवी मिल गयी. दोनों hi बहुत लकी हो.

चची - हाँ भाई अतुल तोह घर का सबसे सीधा लड़का है. सुप्रिया कहीं उसका तोह तुम्हे छूटे hi न निकल....

अर्पिता थोड़े गुस्से में - चची आप भी न... कुछ भी बोलते हो. सुप्रिया डरो मत, आपके जीजू सब समझा देंगे भाई को.

थोड़ी देर तक ये हसी मजाक चला और फिर अतुल को लेकर उसके जीजाजी रूम में आ गए. अतुल के कौसिन्स रूम से निकलने को तैयार hi नहीं थे. उन सब की डिमांड थी की भाई से जब तक एक बड़ा सा गिफ्ट नहीं मिलेगा वह लोग बहार नहीं जायेंगे. किसी तरह से अर्पिता ने उन सबको मनाया और 10,001 देकर रूम से बहार किया.

जाते जाते, वह सुप्रिया के कान में बोली - सुप्रिया वहां बीएड के साइड पर दूध का गिलास रखा है, भाई को पीला देना. और ड्रावर में वेसिलीन भी राखी है अगर कोई प्रॉब्लम हो तोह. आल थे बेस्ट!

और फिर उसने कमरे के दरवाज़े बंद कर दिए और बहार से कुण्डी लगा दी. अब रूम में सिर्फ सुप्रिया और अतुल अकेले रह गए थे.
 
अपडेट 6

कमरा बंद होने के बाद अतुल ने भी अंदर से कुण्डी लगा दी. सुप्रिया बीएड के एक कोने पर बैठी हुई थी और उसकी आखें नीचे देख रही थी. अतुल ने डिज़ाइन वाला कुरता पायजामा पहने हुए था, जबकि सुप्रिया साड़ी और ज्वेलरी पहने हुए थी.

अतुल - Hi सुप्रिया….

सुप्रिया ने सोफ़्त्ल्य बोलै - Hi…

अतुल - चलो फाइनली ये लोग कमरे से निकले. कितने लम्बा रहा न ये दिन.

सुप्रिया - हम्म्म. हाँ.

अतुल - तुम काफी थक गयी होंगी, मैं हेल्प कर दू ज्वेलरी और बाकि सब उतरने में?

सुप्रिया ने मैं hi मैं सोचा की ज्यादा hi जल्दी है इसे तोह सब उतरने की, पहले एक दुसरे को जान तोह ले.

अतुल - मेरा मतलब था थोड़ा हल्का फील करोगी और आराम से बैठ पाएंगे.

सुप्रिया ने अतुल को देख कर सर हाँ में हिला दिया और अपनी ज्वेलरी उतारने लगी. जब उससे गले का हार पीछे से नहीं खुला तोह उसने अतुल की और देखा. अतुल अभी तक दरवाज़े के पास hi खड़ा था, और वह सुप्रिया का इशारा समझ नहीं पाया.

सुप्रिया को बोलना पड़ा - अतुल सुनो. ये नेकलेस नहीं खुल रहा, हेल्प कर डोज प्लीज.

सुप्रिया ने शादी से पहले hi अतुल से ये मनवा लिया था की वह उसे नाम से hi बुलाएगी. ाजी और सुनो उसके लिए काफी ओल्ड फाशिवेद था. वैसे अतुल उससे 5 साल बड़ा था, सुप्रिया अभी कुछ hi महीनो पहले 23 की हुई थी और अतुल 28 का. पर अतुल को भी इससे कोई प्रॉब्लम नहीं थी.

अतुल जल्दी से पलंग पर सुप्रिया के पीछे बैठ गया और पीछे से नेकलेस खोलने लगा. उसे पीछे से सुप्रिया की गोरी पीठ दिख रही थी जो काफी चिकनी और सॉफ्ट लग रही थी जैसे उस पर कोई भी बाल hi न हो. नेकलेस खोलते हुए अतुल के ठंडी उंगलिया सुप्रिया के गले पर लगी और सुप्रिया का पूरा शरीर जैसे काँप hi उठा. नेकलेस खुलते hi अतुल ने अपने हाथ पीछे कर लिए.

सुप्रिया - थैंक यू, अब मेरे बालो के पिन भी हटा डोज प्लीज?

अतुल - हाँ बिलकुल.

अतुल एक एक करके सुप्रिया के बालो के पिन हटाने लगा. पिन हटते हटते उसने गिनती खो दी थी की कितने पिन थे. कुछ पिन खुलते hi सुप्रिया के बाल उसकी पीठ और चेहरे पर गिरने लगे. सुप्रिया के बाल उसके कन्धों से थोड़ा नीचे उसके ब्लाउज के बीच तक आ रहे थे. अतुल उसके बालो को छू कर फील कर प् रहा था की उसके बाल काफी ज्यादा hi सिल्की और सॉफ्ट थे. अतुल को यकीं नहीं हो रहा था की ये सब अब उसका था.

अतुल ने पिन निकल का साइड में रख दिए. सुप्रिया को अब काफी बेटर महसूस हो रहा था. उसने अपने हाथों से भरी कंगन भी निकल दिए और मांग टीका भी उतार के साइड में रख दिया. साड़ी ज्वेलरी उतारने के बाद सुप्रिया बीएड पर ऊपर सरक कर बैठ गयी और उसके ठीक सामने अतुल बैठा था.

अतुल उसे गौर से देख रहा था. उसे पहली बार मौका मिला था सुप्रिया को फोटो के बहार इतनी पास से देखने का. सुप्रिया का फेस काफी क्यूट था और उसके भरे हुए गाल जैसे कोई भी पकड़ कर खींचना चाहे. सुप्रिया वैसे तोह पतली थी पर उसका शरीर सही जगह से भरा हुआ था. तभी तोह शायद उसकी भाभी उसे गोलू बुलाती थी.

सुप्रिया अतुल को घूरते हुए देखा तोह वह पूछ बैठी - क्या हुआ, क्या देख रहे हो?

अतुल - कुछ नहीं, ऐसे hi. यकीं hi नहीं होता की हम अब पति पत्नी है.

सुप्रिया को समझ नहीं आया वह क्या बोले - मुझे भी यकीं नहीं हो रहा की मेरी शादी हो गयी है. सॉरी मतलब हमारी शादी हो गयी.

अतुल ने थोड़ी हिम्मत करके बोलै - तुम्हे पता है न शादी के बाद पति पत्नी क्या करते है. यानि की हमे आज रात क्या करना है.

सुप्रिया के गाल एकदम लाल हो गए और वह भोली बनते हुए बोली - नहीं मुझे तोह नहीं पता.

अतुल - झूठ मत बोलो. तुम्हे तुम्हारी भाभी ने बताया तोह सब होगा.

सुप्रिया ने उसे घूर कर देखा और बोली - आप मुझे पहले hi दिन झूठी बोल रहे हो?

अतुल हड़बड़ा सा गया - नहीं, मेरा वह मतलब नहीं था. मैं तोह बस कह रहा था…

सुप्रिया उसको हड़बड़ा देख कर है पड़ी - इतस ok, मजाक कर रही थी. आपको भी सब पता hi होगा. वैसे आपकी दीदी आपके लिए ये दूध का गिलास दे कर गयी थी.

ये बोलते hi सुप्रिया को लगा की ये नहीं बोलना चाहिए था. क्या ये सोचेगा की मैं इसको दूध पीना का बोलकर इन्विते कर रही हूँ सब करने के लिए.

सुप्रिया - मतलब, आपका मैं है तोह पी लो नहीं तोह ठीक है.

अतुल ने सोचा की मैं तोह बहुत है मेरा, और वेट भी इतना किया है मैंने. अतुल ने गिलास उठाते हुए बोलै - हाँ मैं पी लेता हूँ.

Ek-do घूंठ पीने के बाद उसे याद आया की उसे सुप्रिया से भी पूछ लेना चाहिए - तुम पियोगी क्या?

सुप्रिया - नहीं नहीं, आप पीजिये.

अतुल ने जल्दी से दूध ख़तम किया और फिर सुप्रिया की और देखने लगा. उसने कभी सेक्स नहीं किया था तोह उसे समझ नहीं आ रहा था की वह कैसे शुरू करे सब. पर बहार बैठे सभी लोगो की शायद एहि उम्मीद थी उससे की वह आज रात सब कर लेगा. और वह खुद भी चाहता था की वह सुप्रिया के साथ आज रात सब कर ले.

सुप्रिया - हम लोग आज रात बस बातें भी कर सकते है.

अतुल - हाँ क्यों नहीं.

अतुल आ कर सुप्रिया के बराबर में बैठ गया और उसकी बातें सुनने लगा. जरा सी देर में सुप्रिया तोह जैसे बोलना hi शुरू हो गयी, और वह उसे शादी की बातें बतानी लगी. हिम्मत करके अतुल ने सुप्रिया का हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसे आराम आराम से मसलने लगा. उसका हाथ था hi इतना मुलायम की अतुल उसे छोड़ hi नहीं पा रहा था. पर सुप्रिया की कहानिया तोह ख़तम hi नहीं हो रही थी. थोड़ी देर के बाद बोलते बोलते सुप्रिया को भी उबासी आने लगी और उसकी आँखें भी काफी भरी हो चुकी थी. काफी ठण्ड थी, तोह अतुल ने खड़े हो कर बीएड पर एक रजाई बिछा दी और फिर लाइट ऑफ कर दी.

लाइट बंद करने के बाद भी कमरे में बहार की रौशनी आ रही थी. लाइट बंद करके अतुल भी रजाई में आकर लेता, और उसके पेअर सुप्रिया के पैरो से टकराये. पेअर टकराते hi सुप्रिया तोह जैसे नींद से जाग hi गयी. अँधेरे में अतुल का थोड़ा कॉन्फिडेंस बड़ा और उसने अपने पैरो के नीचे सुप्रिया के पेअर दबा लिए. शायद दूध में जो भी मिला हुआ था वह भी अब काम करने लगा था. वह धीरे धीरे सुप्रिया के और पास आ गया और उसे पीछे से पकड़ लिया. उसने सुप्रिया के गालो को हलके से किश किया और उसे अपनी और खींचा. फिर उसने अपनी एक टांग सुप्रिया की तंग पर रखते हुए उसे अपने नीचे कर लिया. ये सब इतनी जल्दी हो गया था की सुप्रिया को कुछ सोचने का मौका hi नहीं मिला. पर उसकी नींद अब पूरी तरह से उड़ चुकी थी.

गालो को चूमते चूमते, अतुल ने उसके होठों का चूमना शुरू किया और अपना हाथ सुप्रिया के पेट पर घूमने लगा. सुप्रिया का पूरा शरीर इतना सॉफ्ट था की अतुल और एक्ससिटेड हो रहा था. सुप्रिया ने किश करते हुए अपनी आँखें बंद कर ली और वह भी अतुल को हलके हलके किश कर रही थी.

अतुल को सुप्रिया के शरीर की खुशबु और स्पर्श ने पागल सा कर दिया था. उसने सुप्रिया को हल्का सा उठाया और उसकी साड़ी को खींच कर उतार फैका. उसके बाद वह फिर से सुप्रिया के ऊपर आ गया और उसके गालो और होठों को और भी ज्यादा ज़ोर से किश करने लगा. सुप्रिया ने अपने एक हाथ से ज़ोर से बीएड की चद्दर को पकड़ लिया.

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अतुल - सुप्रिया… अह्ह्ह्हह… कितने सॉफ्ट है तुम्हारे होंठ.

अतुल के लगातार किश से सुप्रिया के होंठ तोह जैसे सील hi गए थे और वह धीरे धीरे सिसकिया ले रही थी.

किश करते हुए अतुल के हाथ सुप्रिया के पूरे शरीर पर घूम रहे थे. अतुल ने उसका ब्लाउज और पेटीकोट भी खोल दिया और अब वह सिर्फ ब्रा और पंतय में थी. सुप्रिया अतुल के नीचे थी और अतुल उसके गले और ब्रा के ऊपर चूम रहा था. अतुल ने फटाफट से अपना कुरता पजामा भी उतारा और सुप्रिया को अपनी बहो में भरा. अतुल इतना एक्ससिटेड हो चूका था की उसे समझ आ गया की उसे जल्दी जल्दी सब कर देना चाहिए, इससे पहले उसका वीर्य अंडरवियर में निकल जाये.

उसने सुप्रिया की पंतय को खींच कर नीचे उतारा और अपना अंडरवियर भी उतार दिया. दोनों नीचे से अब बिलकुल नंगे हो कर एक दूसरे से लिपटे हुए थे. सुप्रिया की दिल की धड़कन बड़ी हुई थी और उसे समझ hi नहीं आ रहा था की अभी तक शांत अतुल ने एक डैम से कैसे इतनी जल्दी उसके सारे कपडे उतार दिए थे.

अतुल ने सुप्रिया की टांगो को फैलाया और अपने लुंड से योनि का द्वार खोजने लगा. उसे अँधेरे में समझ नहीं आ रहा था की वह कहाँ अपना लुंड डाले. सुप्रिया को उसका लुंड नीचे टकराता हुआ महसूस हुआ. वैसे तोह काफी ठण्ड थी, पर उसके पसीने निकले हुए थे. भाभी ने उसे समझाया था की कई बार लड़को को छूट का छेड़ नहीं मिलता, तोह उनकी हेल्प कर देनी चाहिए. हेल्प करना गलत छेड़ में डालने से तोह बेहतर hi है. सुप्रिया ने नीचे हाथ करके उसके लुंड को सही दिशा दी. लुंड पकड़ने पर उसे लगा की अतुल का लुंड ज्यादा बड़ा या मोटा नहीं है. शायद उसकी हथेली से थोड़ा सा लम्बा.

अतुल का लुंड छूट के बहार टकरा रहा था और अंदर जाने की कोशिश कर रहा था. सुप्रिया सिसकिया ले रही थी और उसने अतुल के हाथ कसके पकडे हुए थे. अतुल ने जोर लगा कर सुप्रिया की छूट में अपना लुंड थोड़ा सा घुसा दिया. लुंड अंदर जाते hi सुप्रिया की जोर सी चीख निकल गयी और उसे लगा की उसकी छूट में से कुछ बह रहा है. भाभी ने उसे बताया था की पहली बार करने पर खून निकलता है तोह वह थोड़ा डर सी गयी और उसके ासु निकलने लगे.

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अँधेरे में अतुल सुप्रिया की हालत समझ नहीं पाया और उसने अपना लुंड पूरा तरह से अंदर दाल दिया और उसके हाथों को कास के पकड़ कर वह उसके अंदर धक्के मारने लगा. सुप्रिया को दर्द हो रहा था और उसकी हालत ख़राब थी और उसने अपनी टांगो को हवा में उठाया और अतुल से लिपट गयी. कुछ hi झटको के बाद अतुल ने एक ज़ोर का धक्का मारा और सुप्रिया को कास कर पकड़ कर उसके ऊपर लेट गया. सुप्रिया को अपनी छूट के अंदर कुछ गीला सा महसूस हुआ, शायद अतुल झाड़ गया था. अतुल के धक्के धीरे होते गए और फिर उसने अपना लुंड उसकी छूट से निकल दिया और बीएड पर साइड में लेट गया. धीरे धीरे उन दोनों की तेज सांसें नार्मल हुई.

सुप्रिया को लगा की क्या बस इतना hi था? उसका तोह अभी तक कुछ भी नहीं हुआ था और उसे तोह अभी शायद ये सब थोड़ा ाचा लग्न शुरू हुआ था. अतुल उठ कर बाथरूम गया और अपने लुंड पे लगे खून को देख कर थोड़ा घबरा सा गया पर उसे भी उसके जीजू ने समझाया था की ये नार्मल है, बल्कि ाचा है क्यूंकि इससे ये पता चलता है की सुप्रिया ने हस्से पहले किसी मर्द के साथ सेक्स नहीं किया था. अतुल ने अपने आप को साफ़ किया और कपडे पेहेन कर बहार आया.

अतुल के बहार आने पर, सुप्रिया भी अपने कपडे समेत कर बाथरूम में गयी और अपने आप को साफ़ करके और कपडे पेहेन कर बहार आयी. उसे नीचे थोड़ा दर्द हो रहा था. तब तक अतुल ने बीएड की चद्दर चेंज कर दी और फिरसे कम्बल बिछा कर उसमे लेट गया. सुप्रिया भी बहार आ कर बीएड पर अतुल के बराबर में लेट गयी.

अतुल मैं में काफी खुश था की उसने सुप्रिया की सील तोड़ दी. वहीँ सुप्रिया को समझ नहीं आया की सब इतनी जल्दी कैसे ख़तम हो गया. शायद अभी थोड़ा बाद में और करे, उसने सोचा.

अतुल ने सुप्रिया का हाथ पकड़ते हुए कहा - सुप्रिया अब हम दोनों एक हो गए है. ी होप तुम्हे ाचा लगा होगा ये सब.

सुप्रिया उसकी और देख कर हलके से मुस्कुरायी और अपना चेहरा उसके सीने में छुपा लिया.

अतुल ने सुप्रिया को अपनी बाँहों में भर लिया और जल्द hi वह दोनों ऐसे hi सो गए.
 
अपडेट 7

मॉर्निंग में सुप्रिया की आँख बहार के आवाज़ों से खुली. उसने सोचा की आज मम्मी और भाभी इतना शोर क्यों मचा रहे है, कौन आया हुआ है घर में. तभी उसे याद आया की वह अब अपने घर पर नहीं थी. सुप्रिया को महसूस हुआ की उसकी पूरी बॉडी काफी दर्द कर रही थी. उसने घडी में टाइम देखा तोह 9 बज चुके थे. टाइम देख कर सुप्रिया हड़बड़ा गयी और जल्दी से कड़ी हो गयी. अतुल अभी तक सो रहा था और उसे देख कर सुप्रिया को कल रात को हुई साड़ी चीज़े याद आ गयी. सुप्रिया को थोड़ी खीज हुई की उसे क्यों बहार निकल कर अनजान लोगो का सामना करना था. उसने अतुल को उठाने का सोचा पर फिर उसको ग़हरी नीड में सोता देख उसे नहीं जगाया.

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सुप्रिया ने आईने में देख कर अपनी साड़ी और बाल ठीक किये और धीरे से दरवाज़े की कुण्डी खोली. उसके कुण्डी खोलते hi दरवाज़ा बहार की और खुल गया, शायद किसी ने बहार से कुण्डी पहले hi खोल दी थी. बहार अतुल के 2-3 छोटे कौसिन्स खड़े थे और वह सुप्रिया को देखकर आपस में फुसफुसाने लगे और फिर है पड़े. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की साड़ी निगाहें उस पर hi थी.

दरवाज़ा खुलते देख अर्पिता भी वहां तुरंत आ गयी.

उसने सुप्रिया को गले लगते हुए बोलै - सुप्रिया.. उठ गए तुम लोग. अभी थोड़ी देर पहले hi मैं बहार से कुण्डी खोली थी. मैंने डिस्टर्ब तोह नहीं कर दिया न तुम दोनों को.

सुप्रिया - नहीं दीदी… सॉरी मेरी बस अभी आँख खुली थी.

अर्पिता - हाँ थक गए होंगे रात भर. कैसा रहा सब? भाई ने ज्यादा परेशां तोह नहीं किया.

सुप्रिया ने शरमाते हुए आँखें नीचे कर ली. अब वह क्या hi बोलती. अर्पिता ने कमरे में घुस कर ज़मीन पर बड़ी बेडशीट को उठा लिया और उस पर खून देख कर उसके होठों पर हलकी सी मुस्कान आ गयी. अर्पिता ने भी तभी बेडशीट पर गौर किया और उसको रीलीज़ हुआ की ये उसका hi खून था जो उसकी यौवन टूटने से निकला था.

अर्पिता - चलो तुम्हे मुझे कुछ बताने की जरुरत नहीं है, सब पता चल रहा है मुझे.

अर्पिता की बातों से अतुल की नींद भी टूट गयी और वह एक अपने चेहरे पर एक स्माइल लिए उठ कर बीएड पर बैठ गया.

अर्पिता - भाई उठ गया, देख सुप्रिया कबसे तेरे उठने का इंतज़ार कर रही है.

अतुल - हाँ काफी थक गए थे रात को, सो लेट हो गए उठने में.

अर्पिता ने सुप्रिया को आँख मारते हुए बोलै - तुम लोगो चाहो तोह अभी और आराम कर लो, मैं फिर से बहार से कुण्डी लगा दूंगी. किसी को डिस्टर्ब नहीं करने दूंगी.

सुप्रिया - नहीं नहीं दीदी, नींद हो गयी पूरी.

अर्पिता - चलो ठीक है, तुम दोनों नाहा के तैयार हो जायो और नीचे आ जाना नाश्ते के लिए. सुप्रिया तुम्हारी भाभी भी कॉल कर रही थी, तुम उनसे बात कर लेना जब फ्री हो तोह.

सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया. अर्पिता उन दोनों को रूम में छोड़ कर बेडशीट ले कर चली गयी और जाते जाते उसने उनका दूर बंद कर दिया.

अतुल - गुड मॉर्निंग.

सुप्रिया - गुड मॉर्निंग.

अतुल ने सुप्रिया को देखते हुए कहा - यहाँ आयो न. अतुल ने बीएड पर इशारा किया.

सुप्रिया - नहीं, आप जायो तैयार हो जायो. मैं इतने भाभी से बात करती हूँ.

अतुल - ारी यार, कर लेना उनसे भी बात.

सुप्रिया ने अपने होठों पर ऊँगली लगा कर अतुल को चुप होने का इशारा किया और फिर धीरे से बोली - बहार आपके कौसिन्स खड़े है, आप जाइये रेडी हो जाइये.

जैसे hi उसने ये बोलै कमरे के दरवाज़े एक डैम से ज़ोर से खुला और लड़का गिरते गिरते अंदर आया. शायद वह कान लगा कर सुनने की कोशिश कर रहे थे. वह हस्ता हुआ बहार भगा और अतुल उसे डांटने के लिए खड़ा हुआ. अतुल फिर बाथरूम में घुस गया. सुप्रिया ने हल्का सा दरवाज़ा ढला और अपनी भाभी को कॉल लगाया.

सुप्रिया - Hello भाभी!

उसकी आवाज़ में एक्ससिटेमेंट और रोना दोनों मिला हुआ था.

भाभी - गोलू… कैसी है तू बच्चा

सुप्रिया के ासु निकल गए - मैं ठीक हु, आप सब कैसे हो. मुझे आपकी बहुत याद आ रही है.

भाभी ने अपने आप को कण्ट्रोल करते हुए बोलै - चल ड्रामेबाज़, मुझे पता है अभी से भूल गयी होगी. वैसे सब ठीक है न?

सुप्रिया - हाँ सब ठीक है…

भाभी - कैसा रहा सब कल रात?

सुप्रिया - हाँ ठीक था…

भाभी - ठीक था मतलब, हो गया न सब?

सुप्रिया - हाँ… हो गया…

भाभी - ज्यादा दर्द तोह नहीं हुआ न. जब आएगी तब डिटेल में सब बता दियो.

सुप्रिया - थोड़ा दर्द हुआ था, पर ठीक था…… शायद थोड़ा जल्दी ख़तम हो गया सब.

भाभी - ारी वह तोह नार्मल है, पहली बार था और तू लग भी बहुत सुन्दर रही होगी. चल ये ले मम्मी से बात कर.

सुप्रिया ने थोड़ी देर बाकि सब घर वालो से बात की और फिर फ़ोन रख दिया. बात करने से उसको थोड़ा ाचा लग रहा था. उसने ऊपर देखा तोह अर्पिता दरवाज़े पर कड़ी थी. उसने पता नहीं चला की वह कब आयी थी.

अर्पिता - हो गयी बात सुप्रिया? सब ठीक है न.

सुप्रिया - हाँ दीदी, सब ठीक है.

अर्पिता - मुझे पता है तुम अपनी भाभी के काफी क्लोज हो. तुम मेरे साथ भी अपनी साड़ी बातें शेयर कर सकती हो.

सुप्रिया - हांजी दीदी.

अर्पिता - कुछ कल रात के बारे में जो तुम्हे बताना हो?

सुप्रिया को समझ नहीं आया अर्पिता क्या पूछना चाहती थी - नहीं दीदी, ऐसा कुछ नहीं.

अर्पिता - ठीक है, जब मैं करे तब बता देना.

इतने में अतुल भी नाहा कर बहार आ गया था. उसने नीचे टॉवल लपेटा हुआ था और ऊपर एक बनियान पहने हुए थी. सुप्रिया को पहली बार उसकी बॉडी शर्ट के बिना रौशनी में दिखाई दी थी. अतुल मोटा नहीं था पर उसकी बॉडी ख़ास बानी नहीं हुई थी. शायद वह कभी गयम नहीं गया था. उसकी छाती पर थोड़े बाल दिख रहे थे. सुप्रिया ने कोशिश किया की वह अर्पिता के सामने उसे डायरेक्टली न देखे.

सुप्रिया को उस समय ये थोड़ा सा मैं में आया की उसने घरवालों के कहने पर ये शादी कर तोह ली पर शायद उसे उसके सपनो का लड़का नहीं मिला. उसने जल्दी hi ये विचार अपने मैं से निकला और अपने कपडे ले कर नहाने घुस गयी. उसने एक पर्पल और ब्राउन रंग की साड़ी पहनी और फिर से थोड़ी सी भरी ज्वेलरी पेहेन ली. वह बहुत hi क्यूट लग रही थी.

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तैयार हो कर वह नीचे नाश्ता करने पहुंची. अतुल और अर्पिता नीचे hi उसके वेट कर रहे थे. अतुल ने तोह नाश्ता करना भी शुरू कर दिया था. सुप्रिया को ये थोड़ा सा अजीब लगा. अब तक घर से काफी सारे रिश्तेदार जा चुके थे. अतुल, अर्पिता, उनके मम्मी पापा ले इलावा अतुल की चची और उनका बीटा बैठे हुए थे. अतुल के जीजाजी भी नहीं दिख रहे थे.

सुप्रिया ने अपनी सास और ससुर के पेअर छुए, और उसकी सास ने उसे गले लगा लिया. फिर वह नाश्ता करने के लिए डाइनिंग टेबल पर आ गयी. अर्पिता उसके लिए नाश्ता लेकर आई.

अर्पिता - सुप्रिया तुम चची को तोह जानती hi हो और ये तुम्हारा एक लौटा देवर है, घर का सबसे शैतान बच्चा - ध्रुव.

ध्रुव ने एक चंचल मुस्कान के साथ कहा - दीदी पहली बात तोह मैं बच्चा नहीं हूँ और दूसरी बात सुरपिया भाभी अब तोह हम सब को जान hi गयी होंगी.

सुप्रिया ने उसकी और देखा. उसने उसे देखा तोह था कई बार शादी में पर उसे उसका नाम याद नहीं था, आखिर इतने लोग जो थे. पर उसने फिर भी अपनी हाज़िर जवाबी दिखाई.

सुप्रिया- उनमम… हाँ याद है न, ध्रुव. मैंने आपसे पानी माँगा था कल और आप लाये नहीं थे.

सब लोग ये सुनते hi है पड़े. ध्रुव - भाभी आपको गलत याद है, ऐसा तोह कुछ नहीं हुआ था. जो हुआ था वह आप शायद भूल भी गए.

सुप्रिया - तोह आप भाभी को अभी से गलत बता रहे हो.

ध्रुव - आपको गलत नहीं बता रहा, बस शायद आप न सोने की वजह से टायर्ड हो इसलिए आपको अचे से याद नहीं.

सुप्रिया उसकी बात सुन कर झेप गयी, उसे लगा की कल तक वह अपनी भाभी को परेशां करती थी और अब वह किसी की भाभी है जो उसे परेशां करेंगे. उसे फिर याद आया की ये लड़का सुबह दरवाज़े के सामने 2-3 और टीनएजर्स के साथ खड़ा था और उसी ने दरवाज़ा ज़ोर के खोला था. उसने मैं hi मैं सोचा की इसको तोह बता के रहूंगी.

चची - चल तू अपना नाश्ता पूरा कर और भाभी को परेशां मत कर. सुप्रिया अब तुम आ गयी हो न तोह तैयार हो जायो, ये और इसका बाकी का गैंग तुम्हे परेशान करने वाले है.

सरिता (मम्मी) - ध्रुव अभी से भाभी को परेशां करने लगे. ाचा याद आया, अभी तोह तुम लोगो की नीम छड़ी की रस्म बाकि है.

सुप्रिया- नीम छड़ी? वह क्या होता है?

सरिता - हमारे यहाँ देवर बहभी की रस्म होती है, तुम दोनों को एक नीम की टहनी से एक दुसरे को मारना है.

सुप्रिया हैरान रह गयी - एक दुसरे को मारना है?

चची - आराम से मारना है, ज्यादा तेज नहीं. इस रस्म से भाभी देवर का प्यार बढ़ता है.

ध्रुव - मैं तोह आराम से नहीं खेलने वाला.

चची ने उसकी पीठ पर एक मारा - क्यों डरा रहा है अपनी भाभी को.

सुप्रिया ने उसे अपनी तीखी नज़रो से घूर कर देखा, जैसे बोल रही हो - तू बच जायेगा फिर.

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नाश्ते के बाद सब लोग घर के आँगन में इखट्टा हो गए. अतुल की कजिन बहने भी आ गयी थी. ध्रुव और सुप्रिया को एक एक नीम की टहनी पकड़ा दी गयी. ध्रुव की टहनी पर पत्ते ज्यादा थे और सुप्रिया की टहनी थोड़ी सी लम्बी थी.

ध्रुव - भाभी की डंडी थोड़ी लम्बी है, ये तोह अनफेयर है.

अर्पिता - क्यों डर गया अभी से?

ध्रुव - डरा कौन है, देखते है अभी.

दोनों आमने सामने खड़े हो गए और लोगो ने गोला बना कर उन्हें घेर लिया. धीरे धीरे दोनों एक दुसरे को देखते हुए गोल चलने लगे. सुप्रिया को लगा की अगर उसने साड़ी की जगह जीन्स पहनी होती तोह वह आराम से ध्रुव को हरा देती. ध्रुव ने पहले मारने की कोशिश करि पर सुप्रिया जल्दी से दूसरी और हैट गयी. इस खेल से जैसे उसमे चुस्ती फुर्ती आ गयी हो. बचते hi उसने डंडी ध्रुव के पेअर पर मारी.

ध्रुव के मुँह से ज़रा सी भी आवाज़ नहीं निकली, पर सुप्रिया को पता था की उसे ज़ोर की लगी होगी. ध्रुव का सारा ग्रुप तोह अब भाभी के सपोर्ट में आ गया. उसने फिर सुप्रिया के हाथ पर छड़ी मारी पर सुप्रिया की भारी साड़ी ने उसे बचा लिया. सुप्रिया ने फिर से काउंटर अटैक करते हुए उसके थिगह पर ज़ोर से मारा. ध्रुव ने दर्द में मुँह तोह बनाया, पर अभी भी उसके मुँह से अहह नहीं निकली. सुप्रिया के चेहरे पर बड़ी सी स्माइल थी, जैसे बोल रही हो - ये रहा मेरा सुबह का बदला.

इस बार ध्रुव ने ज़ोर से सुप्रिया के पैरो पर मारा. सुप्रिया बच न सकीय और उसके ज़ोर से लगी और उसकी ज़ोर की चीख निकल गयी. अर्पिता और चची खेल ख़तम करने के लिए बड़े hi थी की इससे पहले सुप्रिया ने ध्रुव पर आखरी वार कर दिया और उसकी टांग पर फिरसे ज़ोर के मारा.

सब लोग सुप्रिया के लिए ताली बजने लगे और ध्रुव के बाकी भाई बेहेन उसको चिढ़ाने लगे. ध्रुव थोड़ा सा लंगड़ाता हुआ कुर्सी पर बैठ गया. अर्पिता ने सुप्रिया की साड़ी हलकी सी ऊपर काके उसका पेअर देखा और उस पर छड़ी का निशान था.

अर्पिता - ध्रुव इतनी तेज कौन मारता है भाभी को?

ध्रुव कुछ बोलै नहीं, पर सुप्रिया को अंदर hi अंदर करि बुरा लग रहा था की उसने ध्रुव को तीन बार ज़ोर के मार दिया था, उसको काफी तेज़ hi लगी होगी.

सुप्रिया - दीदी मैं ठीक हूँ, ज़रा सा लगा है ज़्यादा नहीं. ध्रुव तुम ठीक हो न?

चची - ारी उसकी चिंता मत करो, तुमने अचे से पीट दिया उसे आज तोह. सबके मैं में था ये कबसे.

ध्रुव ने है के कहा - आल गुड, वेल प्लाएड. कोई नहीं बहभी, नेक्स्ट टाइम मैं hi जीतूंगा.

खेल ख़तम होने पर, अर्पिता ने सुप्रिया के पेअर पर थोड़ी सी क्रीम लगा दी और फिर सब लोग फिरसे बैठ कर हसी मजाक और बातें करने लगे.

थोड़ी hi देर में अतुल बोलै - मम्मी मुझे 3 दिन बाद वापस जाना होगा, मेरी लीव इतने hi दिन की थी.

सरिता (मम्मी) - एक हफ्ता ुर नहीं रुक सकता अभी?

अतुल - नहीं मेरी कोई सरकारी जॉब तोह है नहीं. एक प्राइवेट बैंक है. गया नहीं तोह नौकरी से निकल देंगे.

सुप्रिया के मैं में कई सारे सवाल उठे जैसे की वह अतुल के साथ जाएगी या नहीं, और उस दुसरे शहर में सब कैसा होगा. पर ये जगह ठीक नहीं थी शायद ये सब पूछने के लिए.

सरिता - तुझे तोह छूती ले कर सुप्रिया को घुमाने ले जाना चाहिए था.

अतुल - बाद में चले जायेंगे मम्मी.

सरिता - सुप्रिया इसको जाने दे, हम सब लोग आराम से यहाँ रहेंगे और घूमने चलेंगे.

ये सुनते hi सुप्रिया की शकल hi उतर गयी. उसको समझ नहीं आ रहा था वह क्या बोले. वह यहाँ बिना अतुल के क्यों रहेगी.

अतुल - हाँ आप रखो सुप्रिया को अपने पास.

सुप्रिया ने अतुल की और देखा जैसे बोल रही हो की ये क्या बोल रहे हो, मुझे आपके साथ hi जाना है.

सरिता - सुप्रिया, जायो बीटा तुम अपना सामान अनपैक कर लो और अतुल की हेल्प भी कर दो पैकिंग में.

सुप्रिया ने जी मम्मी जी बोलै और भारी मैं के साथ अतुल के पीछे उसके कमरे में चल पड़ी.
 
फॉर ठोस हु हैवे रीड थे स्टोरी टिल नाउ, ी हद तो जो बैक एंड मेक ा कपल ऑफ़ एडिट्स फॉर स्टोरी रेअसोंस. मैनली चेंजिंग थे सिटीज अराउंड. सुप्रिया इस नाउ ओरिजनली फ्रॉम झाँसी, एंड हेर हस्बैंड वर्क्स इन लखनऊ. हेर ससुराल रिमेंस इन ग्वालियर.
 
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