अपडेट 7
मॉर्निंग में सुप्रिया की आँख बहार के आवाज़ों से खुली. उसने सोचा की आज मम्मी और भाभी इतना शोर क्यों मचा रहे है, कौन आया हुआ है घर में. तभी उसे याद आया की वह अब अपने घर पर नहीं थी. सुप्रिया को महसूस हुआ की उसकी पूरी बॉडी काफी दर्द कर रही थी. उसने घडी में टाइम देखा तोह 9 बज चुके थे. टाइम देख कर सुप्रिया हड़बड़ा गयी और जल्दी से कड़ी हो गयी. अतुल अभी तक सो रहा था और उसे देख कर सुप्रिया को कल रात को हुई साड़ी चीज़े याद आ गयी. सुप्रिया को थोड़ी खीज हुई की उसे क्यों बहार निकल कर अनजान लोगो का सामना करना था. उसने अतुल को उठाने का सोचा पर फिर उसको ग़हरी नीड में सोता देख उसे नहीं जगाया.
सुप्रिया ने आईने में देख कर अपनी साड़ी और बाल ठीक किये और धीरे से दरवाज़े की कुण्डी खोली. उसके कुण्डी खोलते hi दरवाज़ा बहार की और खुल गया, शायद किसी ने बहार से कुण्डी पहले hi खोल दी थी. बहार अतुल के 2-3 छोटे कौसिन्स खड़े थे और वह सुप्रिया को देखकर आपस में फुसफुसाने लगे और फिर है पड़े. सुप्रिया को ऐसा लग रहा था की साड़ी निगाहें उस पर hi थी.
दरवाज़ा खुलते देख अर्पिता भी वहां तुरंत आ गयी.
उसने सुप्रिया को गले लगते हुए बोलै - सुप्रिया.. उठ गए तुम लोग. अभी थोड़ी देर पहले hi मैं बहार से कुण्डी खोली थी. मैंने डिस्टर्ब तोह नहीं कर दिया न तुम दोनों को.
सुप्रिया - नहीं दीदी… सॉरी मेरी बस अभी आँख खुली थी.
अर्पिता - हाँ थक गए होंगे रात भर. कैसा रहा सब? भाई ने ज्यादा परेशां तोह नहीं किया.
सुप्रिया ने शरमाते हुए आँखें नीचे कर ली. अब वह क्या hi बोलती. अर्पिता ने कमरे में घुस कर ज़मीन पर बड़ी बेडशीट को उठा लिया और उस पर खून देख कर उसके होठों पर हलकी सी मुस्कान आ गयी. अर्पिता ने भी तभी बेडशीट पर गौर किया और उसको रीलीज़ हुआ की ये उसका hi खून था जो उसकी यौवन टूटने से निकला था.
अर्पिता - चलो तुम्हे मुझे कुछ बताने की जरुरत नहीं है, सब पता चल रहा है मुझे.
अर्पिता की बातों से अतुल की नींद भी टूट गयी और वह एक अपने चेहरे पर एक स्माइल लिए उठ कर बीएड पर बैठ गया.
अर्पिता - भाई उठ गया, देख सुप्रिया कबसे तेरे उठने का इंतज़ार कर रही है.
अतुल - हाँ काफी थक गए थे रात को, सो लेट हो गए उठने में.
अर्पिता ने सुप्रिया को आँख मारते हुए बोलै - तुम लोगो चाहो तोह अभी और आराम कर लो, मैं फिर से बहार से कुण्डी लगा दूंगी. किसी को डिस्टर्ब नहीं करने दूंगी.
सुप्रिया - नहीं नहीं दीदी, नींद हो गयी पूरी.
अर्पिता - चलो ठीक है, तुम दोनों नाहा के तैयार हो जायो और नीचे आ जाना नाश्ते के लिए. सुप्रिया तुम्हारी भाभी भी कॉल कर रही थी, तुम उनसे बात कर लेना जब फ्री हो तोह.
सुप्रिया ने हाँ में सर हिलाया. अर्पिता उन दोनों को रूम में छोड़ कर बेडशीट ले कर चली गयी और जाते जाते उसने उनका दूर बंद कर दिया.
अतुल - गुड मॉर्निंग.
सुप्रिया - गुड मॉर्निंग.
अतुल ने सुप्रिया को देखते हुए कहा - यहाँ आयो न. अतुल ने बीएड पर इशारा किया.
सुप्रिया - नहीं, आप जायो तैयार हो जायो. मैं इतने भाभी से बात करती हूँ.
अतुल - ारी यार, कर लेना उनसे भी बात.
सुप्रिया ने अपने होठों पर ऊँगली लगा कर अतुल को चुप होने का इशारा किया और फिर धीरे से बोली - बहार आपके कौसिन्स खड़े है, आप जाइये रेडी हो जाइये.
जैसे hi उसने ये बोलै कमरे के दरवाज़े एक डैम से ज़ोर से खुला और लड़का गिरते गिरते अंदर आया. शायद वह कान लगा कर सुनने की कोशिश कर रहे थे. वह हस्ता हुआ बहार भगा और अतुल उसे डांटने के लिए खड़ा हुआ. अतुल फिर बाथरूम में घुस गया. सुप्रिया ने हल्का सा दरवाज़ा ढला और अपनी भाभी को कॉल लगाया.
सुप्रिया - Hello भाभी!
उसकी आवाज़ में एक्ससिटेमेंट और रोना दोनों मिला हुआ था.
भाभी - गोलू… कैसी है तू बच्चा
सुप्रिया के ासु निकल गए - मैं ठीक हु, आप सब कैसे हो. मुझे आपकी बहुत याद आ रही है.
भाभी ने अपने आप को कण्ट्रोल करते हुए बोलै - चल ड्रामेबाज़, मुझे पता है अभी से भूल गयी होगी. वैसे सब ठीक है न?
सुप्रिया - हाँ सब ठीक है…
भाभी - कैसा रहा सब कल रात?
सुप्रिया - हाँ ठीक था…
भाभी - ठीक था मतलब, हो गया न सब?
सुप्रिया - हाँ… हो गया…
भाभी - ज्यादा दर्द तोह नहीं हुआ न. जब आएगी तब डिटेल में सब बता दियो.
सुप्रिया - थोड़ा दर्द हुआ था, पर ठीक था…… शायद थोड़ा जल्दी ख़तम हो गया सब.
भाभी - ारी वह तोह नार्मल है, पहली बार था और तू लग भी बहुत सुन्दर रही होगी. चल ये ले मम्मी से बात कर.
सुप्रिया ने थोड़ी देर बाकि सब घर वालो से बात की और फिर फ़ोन रख दिया. बात करने से उसको थोड़ा ाचा लग रहा था. उसने ऊपर देखा तोह अर्पिता दरवाज़े पर कड़ी थी. उसने पता नहीं चला की वह कब आयी थी.
अर्पिता - हो गयी बात सुप्रिया? सब ठीक है न.
सुप्रिया - हाँ दीदी, सब ठीक है.
अर्पिता - मुझे पता है तुम अपनी भाभी के काफी क्लोज हो. तुम मेरे साथ भी अपनी साड़ी बातें शेयर कर सकती हो.
सुप्रिया - हांजी दीदी.
अर्पिता - कुछ कल रात के बारे में जो तुम्हे बताना हो?
सुप्रिया को समझ नहीं आया अर्पिता क्या पूछना चाहती थी - नहीं दीदी, ऐसा कुछ नहीं.
अर्पिता - ठीक है, जब मैं करे तब बता देना.
इतने में अतुल भी नाहा कर बहार आ गया था. उसने नीचे टॉवल लपेटा हुआ था और ऊपर एक बनियान पहने हुए थी. सुप्रिया को पहली बार उसकी बॉडी शर्ट के बिना रौशनी में दिखाई दी थी. अतुल मोटा नहीं था पर उसकी बॉडी ख़ास बानी नहीं हुई थी. शायद वह कभी गयम नहीं गया था. उसकी छाती पर थोड़े बाल दिख रहे थे. सुप्रिया ने कोशिश किया की वह अर्पिता के सामने उसे डायरेक्टली न देखे.
सुप्रिया को उस समय ये थोड़ा सा मैं में आया की उसने घरवालों के कहने पर ये शादी कर तोह ली पर शायद उसे उसके सपनो का लड़का नहीं मिला. उसने जल्दी hi ये विचार अपने मैं से निकला और अपने कपडे ले कर नहाने घुस गयी. उसने एक पर्पल और ब्राउन रंग की साड़ी पहनी और फिर से थोड़ी सी भरी ज्वेलरी पेहेन ली. वह बहुत hi क्यूट लग रही थी.
तैयार हो कर वह नीचे नाश्ता करने पहुंची. अतुल और अर्पिता नीचे hi उसके वेट कर रहे थे. अतुल ने तोह नाश्ता करना भी शुरू कर दिया था. सुप्रिया को ये थोड़ा सा अजीब लगा. अब तक घर से काफी सारे रिश्तेदार जा चुके थे. अतुल, अर्पिता, उनके मम्मी पापा ले इलावा अतुल की चची और उनका बीटा बैठे हुए थे. अतुल के जीजाजी भी नहीं दिख रहे थे.
सुप्रिया ने अपनी सास और ससुर के पेअर छुए, और उसकी सास ने उसे गले लगा लिया. फिर वह नाश्ता करने के लिए डाइनिंग टेबल पर आ गयी. अर्पिता उसके लिए नाश्ता लेकर आई.
अर्पिता - सुप्रिया तुम चची को तोह जानती hi हो और ये तुम्हारा एक लौटा देवर है, घर का सबसे शैतान बच्चा - ध्रुव.
ध्रुव ने एक चंचल मुस्कान के साथ कहा - दीदी पहली बात तोह मैं बच्चा नहीं हूँ और दूसरी बात सुरपिया भाभी अब तोह हम सब को जान hi गयी होंगी.
सुप्रिया ने उसकी और देखा. उसने उसे देखा तोह था कई बार शादी में पर उसे उसका नाम याद नहीं था, आखिर इतने लोग जो थे. पर उसने फिर भी अपनी हाज़िर जवाबी दिखाई.
सुप्रिया- उनमम… हाँ याद है न, ध्रुव. मैंने आपसे पानी माँगा था कल और आप लाये नहीं थे.
सब लोग ये सुनते hi है पड़े. ध्रुव - भाभी आपको गलत याद है, ऐसा तोह कुछ नहीं हुआ था. जो हुआ था वह आप शायद भूल भी गए.
सुप्रिया - तोह आप भाभी को अभी से गलत बता रहे हो.
ध्रुव - आपको गलत नहीं बता रहा, बस शायद आप न सोने की वजह से टायर्ड हो इसलिए आपको अचे से याद नहीं.
सुप्रिया उसकी बात सुन कर झेप गयी, उसे लगा की कल तक वह अपनी भाभी को परेशां करती थी और अब वह किसी की भाभी है जो उसे परेशां करेंगे. उसे फिर याद आया की ये लड़का सुबह दरवाज़े के सामने 2-3 और टीनएजर्स के साथ खड़ा था और उसी ने दरवाज़ा ज़ोर के खोला था. उसने मैं hi मैं सोचा की इसको तोह बता के रहूंगी.
चची - चल तू अपना नाश्ता पूरा कर और भाभी को परेशां मत कर. सुप्रिया अब तुम आ गयी हो न तोह तैयार हो जायो, ये और इसका बाकी का गैंग तुम्हे परेशान करने वाले है.
सरिता (मम्मी) - ध्रुव अभी से भाभी को परेशां करने लगे. ाचा याद आया, अभी तोह तुम लोगो की नीम छड़ी की रस्म बाकि है.
सुप्रिया- नीम छड़ी? वह क्या होता है?
सरिता - हमारे यहाँ देवर बहभी की रस्म होती है, तुम दोनों को एक नीम की टहनी से एक दुसरे को मारना है.
सुप्रिया हैरान रह गयी - एक दुसरे को मारना है?
चची - आराम से मारना है, ज्यादा तेज नहीं. इस रस्म से भाभी देवर का प्यार बढ़ता है.
ध्रुव - मैं तोह आराम से नहीं खेलने वाला.
चची ने उसकी पीठ पर एक मारा - क्यों डरा रहा है अपनी भाभी को.
सुप्रिया ने उसे अपनी तीखी नज़रो से घूर कर देखा, जैसे बोल रही हो - तू बच जायेगा फिर.
नाश्ते के बाद सब लोग घर के आँगन में इखट्टा हो गए. अतुल की कजिन बहने भी आ गयी थी. ध्रुव और सुप्रिया को एक एक नीम की टहनी पकड़ा दी गयी. ध्रुव की टहनी पर पत्ते ज्यादा थे और सुप्रिया की टहनी थोड़ी सी लम्बी थी.
ध्रुव - भाभी की डंडी थोड़ी लम्बी है, ये तोह अनफेयर है.
अर्पिता - क्यों डर गया अभी से?
ध्रुव - डरा कौन है, देखते है अभी.
दोनों आमने सामने खड़े हो गए और लोगो ने गोला बना कर उन्हें घेर लिया. धीरे धीरे दोनों एक दुसरे को देखते हुए गोल चलने लगे. सुप्रिया को लगा की अगर उसने साड़ी की जगह जीन्स पहनी होती तोह वह आराम से ध्रुव को हरा देती. ध्रुव ने पहले मारने की कोशिश करि पर सुप्रिया जल्दी से दूसरी और हैट गयी. इस खेल से जैसे उसमे चुस्ती फुर्ती आ गयी हो. बचते hi उसने डंडी ध्रुव के पेअर पर मारी.
ध्रुव के मुँह से ज़रा सी भी आवाज़ नहीं निकली, पर सुप्रिया को पता था की उसे ज़ोर की लगी होगी. ध्रुव का सारा ग्रुप तोह अब भाभी के सपोर्ट में आ गया. उसने फिर सुप्रिया के हाथ पर छड़ी मारी पर सुप्रिया की भारी साड़ी ने उसे बचा लिया. सुप्रिया ने फिर से काउंटर अटैक करते हुए उसके थिगह पर ज़ोर से मारा. ध्रुव ने दर्द में मुँह तोह बनाया, पर अभी भी उसके मुँह से अहह नहीं निकली. सुप्रिया के चेहरे पर बड़ी सी स्माइल थी, जैसे बोल रही हो - ये रहा मेरा सुबह का बदला.
इस बार ध्रुव ने ज़ोर से सुप्रिया के पैरो पर मारा. सुप्रिया बच न सकीय और उसके ज़ोर से लगी और उसकी ज़ोर की चीख निकल गयी. अर्पिता और चची खेल ख़तम करने के लिए बड़े hi थी की इससे पहले सुप्रिया ने ध्रुव पर आखरी वार कर दिया और उसकी टांग पर फिरसे ज़ोर के मारा.
सब लोग सुप्रिया के लिए ताली बजने लगे और ध्रुव के बाकी भाई बेहेन उसको चिढ़ाने लगे. ध्रुव थोड़ा सा लंगड़ाता हुआ कुर्सी पर बैठ गया. अर्पिता ने सुप्रिया की साड़ी हलकी सी ऊपर काके उसका पेअर देखा और उस पर छड़ी का निशान था.
अर्पिता - ध्रुव इतनी तेज कौन मारता है भाभी को?
ध्रुव कुछ बोलै नहीं, पर सुप्रिया को अंदर hi अंदर करि बुरा लग रहा था की उसने ध्रुव को तीन बार ज़ोर के मार दिया था, उसको काफी तेज़ hi लगी होगी.
सुप्रिया - दीदी मैं ठीक हूँ, ज़रा सा लगा है ज़्यादा नहीं. ध्रुव तुम ठीक हो न?
चची - ारी उसकी चिंता मत करो, तुमने अचे से पीट दिया उसे आज तोह. सबके मैं में था ये कबसे.
ध्रुव ने है के कहा - आल गुड, वेल प्लाएड. कोई नहीं बहभी, नेक्स्ट टाइम मैं hi जीतूंगा.
खेल ख़तम होने पर, अर्पिता ने सुप्रिया के पेअर पर थोड़ी सी क्रीम लगा दी और फिर सब लोग फिरसे बैठ कर हसी मजाक और बातें करने लगे.
थोड़ी hi देर में अतुल बोलै - मम्मी मुझे 3 दिन बाद वापस जाना होगा, मेरी लीव इतने hi दिन की थी.
सरिता (मम्मी) - एक हफ्ता ुर नहीं रुक सकता अभी?
अतुल - नहीं मेरी कोई सरकारी जॉब तोह है नहीं. एक प्राइवेट बैंक है. गया नहीं तोह नौकरी से निकल देंगे.
सुप्रिया के मैं में कई सारे सवाल उठे जैसे की वह अतुल के साथ जाएगी या नहीं, और उस दुसरे शहर में सब कैसा होगा. पर ये जगह ठीक नहीं थी शायद ये सब पूछने के लिए.
सरिता - तुझे तोह छूती ले कर सुप्रिया को घुमाने ले जाना चाहिए था.
अतुल - बाद में चले जायेंगे मम्मी.
सरिता - सुप्रिया इसको जाने दे, हम सब लोग आराम से यहाँ रहेंगे और घूमने चलेंगे.
ये सुनते hi सुप्रिया की शकल hi उतर गयी. उसको समझ नहीं आ रहा था वह क्या बोले. वह यहाँ बिना अतुल के क्यों रहेगी.
अतुल - हाँ आप रखो सुप्रिया को अपने पास.
सुप्रिया ने अतुल की और देखा जैसे बोल रही हो की ये क्या बोल रहे हो, मुझे आपके साथ hi जाना है.
सरिता - सुप्रिया, जायो बीटा तुम अपना सामान अनपैक कर लो और अतुल की हेल्प भी कर दो पैकिंग में.
सुप्रिया ने जी मम्मी जी बोलै और भारी मैं के साथ अतुल के पीछे उसके कमरे में चल पड़ी.