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दो दिन बाद शनिवार को अतुल भी घर वापस आ गया था. उसके वापस आने से सुप्रिया को ख़ास ख़ुशी नहीं थी और वह फिर से उसके सामने झूठ बोलने पर मज़बूर थी. सुप्रिया को काफी गिलटी सा महसूस हो रहा था की वह अतुल के साथ ऐसा कर रही थी, पर उसके बार और चारा hi क्या था. उसका बस चलता तोह वह शायद अतुल को सब कुछ बता भी देती, पर अभी उसे खुद hi नहीं समझ आ रहा था की उसका भविष्य क्या होने वाला था.
अतुल की ट्रिप शायद अछि गयी थी और वह थोड़े अचे मूड में था. वापस आने के बाद दिन भर अतुल सुप्रिया के नज़दीक आने की कोशिश करता रहा पर सुप्रिया ने उसे कोई ख़ास रिस्पांस नहीं दिया. रात को दोनों बीएड में साथ लेते हुए थे, जैसे की वह हर रात एक hi बीएड पर सोते थे.
अतुल ने सुप्रिया का हाथ हलके से पकड़ा, पर सुप्रिया ने अपना हाथ पीछे खींच लिया और दूसरी और मुँह फेर लिया. अतुल ने सुप्रिया का कन्धा अपनी और खींचते हुए सुप्रिया के पेट पर अपना हाथ रख दिया. सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था की वह किस तरह से अतुल को रोके. अतुल ने उसकी छुपी को गुस्सा समझते हुए अपने होंठ सुप्रिया के गाल की तरफ बड़ा दिए, उसे किश करने के लिए. पर सुप्रिया ने अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया. इस समय तोह उसे ऐसा लग रहा था की जैसे कोई पराया मर्द उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा हो.
अतुल आज कुछ अलग hi मूड में था और उसने हार नहीं मानी. वह सरक कर सुप्रिया के ठीक ऊपर आ गया. उसने सुप्रिया का चेहरा अपने दोनों हाथों से पकड़ते हुए अपनी और किया और फिर उसके होंठों पर एक ज़ोर किश दे डाली.
सुप्रिया उसके इस एग्रेसिव बेहेवियर से एकदम से दांग सी रह गयी और वह उसे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी. पर अतुल उस पर भारी पद था और उसने सुप्रिया की टीशर्ट के अंदर हाथ घुसते हुए सुप्रिया के बूब्स को ज़ोर से पकड़ लिया. सुप्रिया को अतुल के इस तरह उसके इतना करीब आने से घिन्न सी हो रही थी, और उसने किसी तरह एक ज़ोर का धक्का दे कर अतुल को साइड किया.
सुप्रिया बीएड से कड़ी होती हुई ज़ोर से चिल्लाई - अतुल क्या कर रहे हो!!! दिख नहीं रहा आपको की मेरा मूड नहीं है...
अतुल झल्लाते हुए बोलै - क्या गलत किया मैंने? तुम मेरी बीवी हो सुप्रिया! ऐसा कब तक चलेगा... तुम्हारा तोह कभी मूड नहीं होता...
सुप्रिया ने झूठ बोलते हुए कहा - मेरे पीरियड्स चल रहे है अभी... मेरे मूड स्विंग्स होते रहते है... मेरा बिलकुल मैं नहीं है कुछ भी करने का...
अतुल - पर तुम तोह अब मुझे हाथ भी लगाने नहीं देती हो... मैं तोह बस किश hi कर रहा था...
सुप्रिया - ये किश कर रहे थे... ऐसे जबरदस्ती...
अतुल - इसमें जबरदस्ती की बात कहाँ से आ गयी... और फिर क्या करू मैं? बहार जा कर किसी को किश करू?
सुप्रिया - वही करना चाहते हो न आप!! तोह करो फिर...
अतुल ने एक गहरी सांस ली, जैसे वह अपने गुस्से पर काबू पाने की कोशिश कर रहा हो - मैं तुम्हे पहले भी समझा चूका हूँ, जो कुछ नई ईयर की पार्टी में हुआ, वह सब बस एक छोटी सी गलती थी, उसकी इतनी बड़ी सजा क्यों मिल रही है मुझे? तबसे तुम मुझसे कटी कटी सी रहने लगी हो, अब तोह कई महीने हो गए उस बात को.
सुप्रिया के पास जैसे कुछ जवाब नहीं था अतुल की बात का और वह चुप चाप कड़ी हो कर नीचे देख रही थी.
अतुल उसे छुप देख कर बोलै - तुम्हारे मैं में जो कुछ है वह क्लेअर्ल्य कहो न मुझसे? क्या प्रॉब्लम है मुझ से?
सुप्रिया - मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है... और न hi मेरे मैं में कुछ नहीं है... मैं बस अभी सोना चाहती हूँ... आपको यहाँ सोना है तोह सो जाइये और नहीं तोह बहार सोफे पर सो जाइये...
अतुल कुछ सेकंड सुप्रिया को गुस्से से घूरने के बाद अपना तकिया उठाये बहार लिविंग रूम में चला गया. सुप्रिया उसके जाने के बाद सोच में पद गयी, सच hi तोह कह रहा था अतुल, पता नहीं वह दोनों कब तक एक दुसरे के साथ ऐसे रह पाएंगे. इस तरह तोह उन दोनों की hi लाइफ ख़राब सी हो रही थी. रात भर सुप्रिया बीएड पर अकेली लेती हुई अपनी ज़िन्दगी के बारे में सोचती रही.
जब वह विक्रम के साथ होती तोह वह कितना ाचा महसूस करती अपने बारे में, और सब चीज़ो के बारे में. और फिर अतुल के साथ तोह शायद उसकी पटरी कभी ठीक से बैठी भी नहीं थी. अतुल उसके लिए कभी सही नहीं था, शायद उसे ये शादी करनी hi नहीं चाहिए थी. पर पता नहीं विक्रम के साथ उसका कोई फ्यूचर था भी या नहीं. इन्ही सब खयालो से परेशान होती हुई वह कब सो गयी उसे पता नहीं चला.
अगले दिन सुबह नाश्ते के तुरंत बाद hi अतुल घर से निकल गया. शायद इसी से उन दोनों को शांति मिलने वाली थी. सुप्रिया बैठी हुई फिर से नेगेटिव खयालो में जा hi रही थी की उसके फ़ोन की घंटी बजी. एक अननोन नंबर से कॉल आ रहा था.
सुप्रिया ने रूखी सी आवाज़ में फ़ोन उठाया - Hello...
दूसरी और से किसी औरत की आवाज़ आयी - Hello सुप्रिया बीटा... कैसी हो...
ये आवाज़ सुप्रिया को जानी पहचानी सी लग रही थी, पर उसे समझ नहीं आ रहा था ये किसकी आवाज़ है.
सुप्रिया - जी ठीक... आप....
औरत - लगता है तुमने मेरी आवाज़ नहीं पहचानी, और हाँ शायद नंबर भी सेव्ड नहीं होगा... मैं नलिनी बोल रही हु, विक्रम की माँ...
सुप्रिया ये सुन कर एक डैम से लड़खड़ा सी गयी - आंटी आप... सॉरी... कैसी है आप? मैं ठीक हु...
माँ - मैं भी ठीक हु... बिजी तोह नहीं थी न... बात कर सकते है अभी...
सुप्रिया - जी बिलकुल... मैं बिजी नहीं हु...
माँ - सॉरी मैंने ऐसे hi फ़ोन कर दिया... तुम भी काफी सुरप्रीसेड रह गयी होंगी... कैसा रहा तुम्हारा और विक्रम का मुंबई का ट्रिप...
सुप्रिया थोड़ा हैरान थी की उनको इसके बारे में पता था, पर शायद विक्रम ने hi उन्हें बताया होगा. उसे मुंबई के ट्रिप के बारे में बात करते हुए थोड़ी शर्म सी आ रही थी, आखिर इतना कुछ हुआ था उसके और विक्रम के बीच वहां - सब ठीक था... ठीक hi था...
माँ - ाचा....
सुप्रिया - विक्रम ने कुछ कहा क्या?
माँ - नहीं नहीं... वह कहाँ कुछ बताता है मुझे... बस ऐसे hi... बस वह काफी परेशान लग रहा था जब कल घर आया था तोह...
सुप्रिया - परेशान?
माँ - Haan...Vikram नोर्मल्ली कभी इतना परेशान नहीं होता... मुझे लगा शायद तुम्हे कुछ पता होगा..
सुप्रिया सोच में पद गयी - नहीं... मुझसे तोह उनकी कोई बात नहीं हुई…
माँ - हम्म्म… विक्रम पर काफी स्ट्रेस है बहुत साड़ी चीज़ो का आज कल..
सुप्रिया - हाँ... मैं समझ सकती हु...
माँ - वह तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करता है... मैं ये बात महसूस कर सकती हु... और मुझे उम्मीद है की तुम भी ये बात महसूस कर पा रही होगी...
ये बात सुन कर सुप्रिया का मैं विक्रम की तरफ पिघलता जा रहा था - हाँ आंटी... मैं जानती हु...
माँ - तुम भी मुझे माँ बुला सकती हो… आंटी क्यों कहती हो बार बार…
सुप्रिया - वह बस…. मैं….
माँ - कोई नहीं… जैसा तुम कम्फर्टेबले फील करो.. पर तुम विक्रम से बात करके देखना... क्या पता उसका स्ट्रेस काम हो जाये तुमसे बात करके...
सुप्रिया - जी बिलकुल... वैसे विक्रम आज कहाँ होंगे?
माँ - आज तोह शायद वह अपने घर पर hi होगा...
सुप्रिया - ओह ाचा...
माँ - अगर तुम चाहो तोह उसके घर जा सकती हो आज... ईशा कहीं बहार गयी हुई है....
सुप्रिया - मैं.... सोचती हु... तरय करती हु....
माँ - चलो... जल्द hi मिलते है हम लोग... अपना ध्यान रखना...
विक्रम की माँ से फ़ोन पर बात करने के बाद सुप्रिया को और ख़राब सा लग रहा था. शायद उसने hi विक्रम को कुछ ज्यादा स्ट्रेस दे दी थी. विक्रम उसे सच्चे दिल से चाहता था और वह पता नहीं क्या क्या सोचती रहती थी विक्रम के बारे में. फ़ोन कॉल तोह नहीं, शायद विक्रम से मिलकर hi इस सब के बारे में बात करना ठीक रहेगा.
सुप्रिया जल्दी से तैयार होना शुरू हुई और उसने विक्रम की दिलाई हुई एक ड्रेस पेहेन ली. अपने मैं की खलबली को शांत करने के लिए उसे विक्रम से मिलना जरूरी था. जो भी हो, वह विक्रम को नहीं खोना चाहती थी. वह अपनी कार ले कर विक्रम के यहाँ चल पड़ी. पता नहीं विक्रम कैसे रियेक्ट करेगा जब वह उसके सामने होगी तोह.
सुप्रिया बे थोड़ी देर बाद विक्रम के आलिशान घर के सामने अपनी गाडी लगायी, और अंदर की और आ गयी. उसने गार्ड को बोलै की वह विक्रम सर से ऑफिस के सिलसिले में मिलने आयी है और उन्होंने उसे अंदर जाने दिया. घर के अंदर ड्राइंग रूम में पहुंच कर वह विक्रम का वेट करने लगी. विक्रम के घर के नौकर ने शायद उसे बता दिया था की कोई उससे मिलना आया है. सुप्रिया बेताबी से इंतज़ार करने लगी.
थोड़ी देर बाद विक्रम एक कमरे से निकलता हुआ बहार आया और सुप्रिया को देखते hi उसके पेअर थम से गए - सुप्रिया... तुम यहाँ?
सुप्रिया ने एक हलकी सी स्माइल के साथ कहा - Hi... कैसे हो आप विक्रम?
विक्रम ने मुस्कुरा के कहा - ी ऍम गुड, और तुम्हे देख कर तोह और भी ाचा.. व्हाट ा सरप्राइज!
सुप्रिया - होप मैंने आपको डिस्टर्ब तोह नहीं किया....
विक्रम - नहीं... बिलकुल नहीं... ईशा भी घर पर नहीं है तोह मैं अकेला hi था घर पर...
सुप्रिया ने देखा की वहां हॉल में विक्रम के घर के नौकर भी काम कर रहे थे - हम कहीं अकेले में बात कर सकते है क्या?
विक्रम समझ गया की सुप्रिया हाउस स्टाफ के सामने बात नहीं करना चाहती थी - चलो रूम में चल कर बात करते है...
विक्रम सुप्रिया का हाथ पकड़ता हुआ उसे नीचे वाले फ्लोर में एक कमरे में ले गया, शायद ये गेस्ट रूम था. सुप्रिया का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था. इससे पहले वह इस घर में एक बार और आयी थी, होली वाले दिन, और उस दिन वह और विक्रम एक hi बाथरूम में थे जब उसने कपडे बदले थे.
दोनों एक कमरे में आ गए और विक्रम ने दरवाज़ा बंद कर दिया.
सुप्रिया - सॉरी... बिना बताये आने के लिए... मुझे लगा शायद आप…
विक्रम - सॉरी क्यों? मेरे लिए तोह ये एक बहुत hi स्वीट सा सरप्राइज है… मैं भी तुमसे मिलना चाहता था.. वैसे तुम्हे कैसे पता चला की ईशा घर पर नहीं है?
सुप्रिया - वह आपकी माँ का फ़ोन आया था… वह काफी परेशां साउंड कर रही थी आपके लिए...
विक्रम - ओह… माँ भी न…
सुप्रिया ने आगे बाद कर विक्रम को हुग कर लिया - विक्रम, मैं… ी ऍम रियली सॉरी… मैंने शायद आपको कुछ ज्यादा hi स्ट्रेस दे दिया न..
विक्रम - सुप्रिया… नहीं… ऐसा कुछ नहीं…
सुप्रिया - पर फिर भी, मैं बहुत घबरा गयी थी उस दिन. ी लव यू विक्रम…
विक्रम - ी लव यू मोरे थान यू क्नोव…
सुप्रिया का चेहरा विक्रम की छाती से चिपक गया था और उसने अपने हाथ विक्रम से लपेट लिए थे. एक अजीब सा hi सुकून मिल रहा था उसे विक्रम को हुग करके.
विक्रम ने सुप्रिया की थोड़ी पर हाथ रखते हुए उसका चेहरा ऊपर उठाया और उसके माथे पर एक हलकी सी किश की. सुप्रिया और विक्रम एक दुसरे की आँखों में खोये हुए थे. तभी सुप्रिया ने हिम्मत दिखते हुए अपने हाथ अपने से लम्बे विक्रम के गले में उचकते हुए डाले और विक्रम के होंठों पर एक किश जड़ दी. उस किश के बाद विक्रम से भी नहीं रहा गया और विक्रम भी सुप्रिया को चूमने लगा. दोनों कमरे में खड़े एक दुसरे को अछि तरह चूम रहे थे.
विक्रम ने अपने हाथ सुप्रिया की पीठ पर रखते हुए उसे अचे से जकड लिया. सुप्रिया के हाथ अभी भी विक्रम की गर्दन पर बंधे हुए थे, और विक्रम ने उसे उठाते हुए हवा में घुमा दिया. सुप्रिया भी उसके प्यार में बुरी तरह खोयी हुई थी, मुंबई वाली ट्रिप के बाद से hi मैं और भी मचल रहा था विक्रम के साथ ये सब करने के लिए.
थोड़ी देर बार जब उनकी किश टूटी, तब विक्रम ने सुप्रिया के बाल उसके चेहरे से साइड करते हुए कहा - यू क्नोव… मुझे रीलीज़ हुआ की मैं कितना सेल्फिश था पिछली बार…
सुप्रिया ने थोड़ा हैरान होते हुए पुछा - सेल्फिश कैसे थे?
विक्रम - मैंने सिर्फ अपने बारे में सोच रहा था, और तुम्हारे प्लेअसुरे के बारे में तोह मैंने सोचा hi नहीं… आज शायद उसी कमी को पूरा करने का टाइम है…
सुप्रिया - मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है…
विक्रम - अभी समझ जायेगी… तुम बस रिलैक्स करो आज…
सुप्रिया इससे पहले कुछ बोल पाती, विक्रम ने अपना हाथ सुप्रिया के ड्रेस के ठीक नीचे उसकी जाँघों के बीच लगा दिया.
सुप्रिया एक डैम से झटपटा गयी - उफ्फ्फ.. विक्रम… क्या कर रहे हो…
विक्रम - मैंने कहा न, तुम बस रिलैक्स करो.. तुम्हे बहुत ाचा लगेगा…
विक्रम ने सुप्रिया को उठाते हुए बीएड पर हलके से धकेल दिया. सुप्रिया बीएड पर गिरते हुए थोड़ा सा पीछे सर्कि जिससे उसकी ड्रेस थोड़ा ऊपर हो गयी और उसकी पंतय विक्रम को दिखाई देने लगी. विक्रम भी बीएड पर बैठ गया और उसने उसके पेअर पकड़ते हुए अपने पैरो के ऊपर रखे लिए. फिर उसकी टांगो को हलके से सहलाने लगा.
सुप्रिया के पेअर बिलकुल माखन की तरह मुलायम थे उसके पेअर, कहीं भी कोई भी निशाँ नहीं. अब तक विक्रम उसके शरीर के हर हिस्से को अछि तरह देख चूका था, उसे पता था सुप्रिया के शरीर पर कहाँ कितने टिल थे. सुप्रिया को बहुत ाचा लग रहा था विक्रम का ऐसे प्यार से उसके पैरो को मसलना.
कुछ मिनट बाद विक्रम ने हाथ सुप्रिया की जांघ तक पहुंच गए थे, और वह उसके जांघ के अंदरूनी हिस्से को प्यार से छूने लगा. वह हिस्सा काफी सेंस्टिविए था और सुप्रिया की सांसें तेज़ होती जा रही थी. सुप्रिया ने अपने जाँघे बंद कर ली और विक्रम का हाथ उसकी जाँघों के बीच में फास गया, जहाँ विक्रम हलकी सी नमी महसूस कर पा रहा था.
बहुत hi अछि सी खुशबू आ रही थी विक्रम को और वह अपने आप को और कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा था. उसने जाँघों के बीच में फसा अपना हाथ निकला और फिर वहां झुक कर हलके से किश कर दिया. सुप्रिया तोह एक डैम से उछाल सी पड़ी पर विक्रम अभी भी उसके पेअर पकडे हुए था. इसी बीच उसने सुप्रिया की ड्रेस को थोड़ा ऊपर सरकड़ा दिया जिससे उसे सुप्रिया की पूरी टाँगे दिखने लगी. सुप्रिया ने अंदर एक लास वाला अंडरवियर पहना हुआ था जिसमे उसकी गोरी टाँगे बहुत hi आकर्षिक दिख रही थी.
विक्रम उसके पैरो पर अपनी उंगलियां चलने लगा और उसका दूसरा हाथ सुप्रिया की जांघ को कास के पकड़ा हुआ था.
सुप्रिया - विक्रम… ममममम….. प्लीज रुको न…
विक्रम - ट्रस्ट में… जो भी करूँगा, तुम्हे बहुत ाचा लगेगा..
विक्रम ने फिर से अपना मुँह सुप्रिया के जानगोह पर रखते हुए वहां हलकी सी किश की. सुप्रिया की त्वचा वहां बहुत hi सेंसिटिव थी और वह हर छुअन से पागल होती जा रही थी. विक्रम ने अपनी जीब निकल कर सुप्रिया की गोरी गोरी जाँघों के बीच में घुसा दी.
सुप्रिया ने ऐसा करने पर अपने जांघ खोल दी - अह्ह्ह्हह… मममममम… उफ्फ्फ.....
विक्रम - मममम.... ाचा लगा न... अभी और भी ाचा लगेगा... बस तुम मेरा साथ दो...
सुप्रिया ने हलके से हाँ में सर हिलाया. विक्रम फिर से उसके पैरो को अपनी जीब से महसूस करने लगा. सुप्रिया को गुदगुदी भी हो रही थी और बेचैनी भी, पर पता नहीं क्यों ये सब बहुत ाचा भी लग रहा था. विक्रम की जीब सुप्रिया की पंतय से थोड़ा सा नीचे आ कर रुक गयी. सुप्रिया का हाथ वहां एक कवच की तरह लगा हुआ था.
विक्रम ने सीधे बैठते हुए सुप्रिया को अपने ऊपर खींचा और उसकी छोटी सी पंतय से बहार निकलते हुए उसके नितम्बो को अपने मुठी में कास के दबा लिया.
सुप्रिया उचकती हुई विक्रम के गले लग गयी, विक्रम के ये सब करने से वह और भी गरम होती जा रही थी.
सुप्रिया - Ufff.....mmmmm..... अह्हह्ह्ह्ह
विक्रम - बहुत सॉफ्ट हो तुम सुप्रिया... बॉडी के हर हिस्से में...
विक्रम ने एक बार फिर सुप्रिया के नितम्बो को ज़ोर के दबाया, और उसका मुँह सुप्रिया की ड्रेस के ऊपर से उसके बूब्स पर था. विक्रम ने वहां हलके से काटा तोह सुप्रिया बीएड पर पीछे गिर गयी, और पलट कर दूसरी और करवट ले ली. सुप्रिया की गांड विक्रम की तरफ थी और वह उसके ऊपर आते हुए उसके पीठ को चूमने लगा. उसके मुँह नीचे जाते हुए सुप्रिया की पंतय पर रुका.
सुप्रिया की गांड देख कर विक्रम बेकाबू होता जा रहा था और उसने वहां हलके से कटा, जिससे सुप्रिया की हलकी सी चीख निकल गयी. उसका मैं कर रहा था की वह अभी सुप्रिया की पंतय उतार कर अपना लुंड उसकी गांड में दाल दे, पर उसे फिर ख्याल आया की उसका मक़सद आज सुप्रिया को खुश करना था न की अपने आप को.
सुप्रिया अपनी ड्रेस को नीचे करने की कोशिश करने लगी - विक्रम... अह्ह्ह.... प्लीज हटो न...
विक्रम - सुप्रिया... जो भी मैं करने वाला हूँ... जस्ट ट्रस्ट में... ok..
विक्रम ने सुप्रिया को सीधा घुमाया और एक hi झटके में उसकी पंतय को नीचे खींच कर उतार दी.
सुप्रिया ने शर्म के मारे अपनी ड्रेस नीचे खींच दी और अपने पेअर बंद कर लिए - उईईईईई.... विक्रम....
विक्रम - बस अब तुम आँखें बंद करके लेट जायो... लेट में दो थे रेस्ट...
सुप्रिया - नहीं प्लीज.... मुझसे नहीं होगा... मुझे नहीं ाचा लगता...
विक्रम - तुम्हे पता है मैं क्या करने वाला हूँ...
सुप्रिया - हाँ... थोड़ा तोह आईडिया है...
विक्रम - लगता है तुमने पहले किया है, पर शायद एन्जॉय नहीं किया...
सुप्रिया सोचने लगी जब उसने पहली और आखरी बार ये राहुल के साथ किया था और उसे बहुत अजीब सा लगा था. उसके बाद उसने ये कभी नहीं किया था - हम्म्म... शायद... पता नहीं...
विक्रम - इस बार थोड़ा अलग होगा... यू विल लिखे आईटी... के...
विक्रम ने सुप्रिया पकड़ते हुए अपने पास किया - तुम मेरे मुँह के ऊपर बैठ जायो...
सुप्रिया ने तेज़ी से न में सर हिलाया - नहीं विक्रम... मैं ऐसे कैसे आपके मुँह पर बैठ जायु?
विक्रम - प्लीज... जस्ट एक बार... ट्रस्ट में...
सुप्रिया बुरी तरह काँप रही थी, और उसका हाथ विक्रम के हाथ में था. विक्रम बीएड पर लेट गया और सुप्रिया नीचे से पूरी नंगी विक्रम की छाती पर बैठ गयी. उसे ऐसे बैठना hi अजीब सा लग रहा था. विक्रम ने अपने हाथ सुप्रिया के नंगे कूल्हों पर रखे और उसे अपने मुँह के पास खींचा.
सुप्रिया ने आँखें बंद कर ली, अब जो होना था वह तोह होना hi था. बस वह विक्रम को अपने आप को इतनी पास से नहीं देखने देना चाहती थी, तोह उसने विक्रम की आँखें अपने हाथों से धक् दी, और विक्रम ने उसकी कमर को ऊपर उठाते हुए उसकी छूट को अपने मुँह के ऊपर रख दिया.
जैसे hi विक्रम ने सुप्रिया को अपने होंठों के ऊपर बिठाया, सुप्रिया की तोह हालत hi ख़राब हो गयी. आज तक उसने ऐसा कुछ नहीं किया था, और एक मर्द के होंठ उसने नीचे के होंठों के ठीक नीचे, बाप रे बाप. विक्रम ने वहां नीचे हलके से चूमा जिससे सुप्रिया के पूरे शरीर में एक सिरहन सी दौड़ गयी, और उसने अपने हाथों से अपनी ड्रेस फिर से नीचे खींचने की कोशिश करि.
विक्रम बहुत की आराम से, बिलकुल किसी कलाकार की तरह सुप्रिया को बहुत आराम आराम से नीचे चूम रहा था. सुप्रिया उठ कर कड़ी होना चाहती थी पर विक्रम ने उसकी कमर को पकडे रखा. फिर विक्रम ने अपने होंठों को थोड़ा खोलते हुए सुप्रिया की छूट को अपने मुँह में घेरा और वहां हलके हलके चूसने लगा.
सुप्रिया - Ahhhhh.....mmmmmm..... उईईईईई
विक्रम - ममममम.....
सुप्रिया को ऐसा कभी पहले महसूस नहीं हुआ था, इतना अजीब सा लग रहा था और साथ hi इतना ाचा भी. जैसे कोई प्यारा सा सिरद दर्द हो रहा हो, जिसे वह ख़तम नहीं होने देना चाहती हो. विक्रम वहां नीचे लेता हुआ बिलकुल आराम से सुप्रिया को छूट को अपने मुँह में दबाये चूसे जा रहा था. अंदर का हल्का हल्का गीलापन भी जो निकल रहा था, वह भी विक्रम बिना किसी झिझक के अपने मुँह में ले रहा था.
सुप्रिया - अह्ह्ह... विक्रम.... क्या कर रहे... अअअअअअअ.... उफ्फ्फ....
दोनों के आँखें मिली और विक्रम सुप्रिया की शकल देख कर समझ गया की उसको इस समय कितना मजा आ रहा था. सुप्रिया तोह बस किसी तरह से अपने आप को संभाले बैठी थी की कहीं उसका सब कुछ विक्रम के मुँह पर न निकल जाये.
सुप्रिया - विक्रम... मुझे हटने दो प्लीज... गड़बड़ हो जाएगी..
पर विक्रम ने उसे नहीं छोड़ा. विक्रम ने अपनी जीब बहार निकाल कर सुप्रिया के छूट को तेज़ी से चाटना शुरू कर दिया. सुप्रिया का शरीर जवाब दे चूका था और उसनेविक्रम के ऊपर झुकते हुए अपने हाथों से अपने आप को बीएड पर सहारा दिया. जो कुछ हो रहा था उसमे उसे एक ऐसा आनंद आ रहा था जो आज तक उसे नहीं मिला था.
विक्रम ने अपनी जीब सुप्रिया की गीली छूट के अंदर घुसा दी और वहां लपलप चाटने लगा. सुप्रिया बस आनंद से कररहने के इलावा कुछ न कर पायी. कुछ देर ऐसे hi करने के बाद उसे अपने अंदर का बहाव तेज़ होता हुआ महसूस हुआ और उसने फ़ौरन विक्रम के ऊपर से अपनी टाँगे हटा दी. फिर उसके टांगो के बीच से बहते हुए पानी ने बीएड का एक पूरा हिस्सा भिगो दिया.
सुप्रिया अपने छूट हलके से सहलाते हुए बीएड पर झटपटा सी रही थी - विक्रम...... उफ्फ्फ... ये क्या किया आपने....
विक्रम के चेहरे पर एक स्माइल थी, उसे पता था आज उसने सुप्रिया को जो मज़ा दिया था वह जल्दी से भूलने वाली नहीं थी, पर अभी तोह वह उसके साथ और खेलना चाहता था. ये सब होने के बाद भी उसका पानी दुबारा निकलवाने का डैम रखता था.
विक्रम - सुप्रिया... कैसा लगा...
सुप्रिया अभी भी अपनी तेज़ साँसों पर काबू पाने की कोशिश कर रही थी. पर इससे पहले वह जवाब देती, कमरे के दरवाज़े पर एक हलकी सी दस्तक हुई. दस्तक सुनते hi सुप्रिया एक डैम घबरा सी गयी और जल्दी से बीएड पर अपने कपड़ो को ढूंढ़ने लगी.
उसने लचर नज़रो से विक्रम की और देखा, उससे पूछते हुए की कौन होगा बहार. वह तोह इस सब में भूल hi गयी थी की वह किस होटल के रूम में नहीं, विक्रम के घर के एक कमरे में थी. विक्रम ने अपने होंठों पर ऊँगली रखते हुए सुप्रिया को छुप रहने का इशारा किया, और वह अपनी टीशर्ट पेहेनते हुए दरवारे की और गया और उसे हल्का सा खोला.
बहार से एक नौकर झांकता हुआ बोलै - सर... आपको डिस्टर्ब करने के लिए सॉरी... बहार दिशा जी आयी है...
विक्रम - कोई बात नहीं... उन्हें बिठायो... मैं आता हूँ...
विक्रम ने दरवाज़ा बंद किया और आईने में देख कर अपने कपडे और बाल ठीक करने लगा - सुप्रिया तुम यहीं रुको... मैं अभी 10 मिनट में आता हूँ. दिशा आज संडे को आयी है तोह कुछ जरूरी काम होगा उसे.
सुप्रिया अब तक अपने कपडे पेहेन चुकी थी और वह अभी अपने बाल ठीक करने में लग गयी. उफ्फ्फ आज कितनी बड़ी गलती हो गयी थी उससे यहाँ आ कर.
विक्रम कमरे से बहार निकला और बहार निकलते हुए कमरे का दरवाज़ा बंद करके ड्राइंग रूम में चला गया. विक्रम जैसे hi बहार ड्राइंग रूम में पंहुचा तोह दिशा वहां सोफे पर बैठी थी.
दिशा उसे देखते hi बोली - सॉरी विक्रम... आपको संडे के दिन डिस्टर्ब करने के लिए... बिग बॉस ने कुछ अर्जेंट डाक्यूमेंट्स सिग्न करने के लिए कहा है...
विक्रम - No प्रॉब्लम... मुझे पता है तुम ऐसे नहीं आती...
दिशा ने विक्रम को कुछ कागज़ पकड़ाए और विक्रम उन्हें सिग्न करने में लग गया, और फिर बीच में बोलै - दिशा.. कुछ लोगी.. चाय, कॉफ़ी, लंच?
दिशा - नहीं, कुछ नहीं. मुझे अभी कहीं और जाना है... और फिर शायद आप भी बिजी से लग रहे है...
विक्रम - नहीं... ऐसा कुछ नहीं...
दिशा - मैं आपके साथ 4 साल से काम कर रही हूँ.. इतना तोह पहचान hi लेती हूँ...
विक्रम - हम्म... ये लीजिये मैडम... डाक्यूमेंट्स बड़े सर के लिए...
दिशा - थैंक यू सर... ी विल सी यू टुमारो इन ऑफिस...
दिशा कड़ी hi हुई थी जाने के लिए, की विक्रम ने पुछा - हाउ इस अतुल दोंग?
दिशा एक पल के लिए हड़बड़ाई और फिर बोली - मैं समझी नहीं?
विक्रम - हम्म्म... यू फॉरगेट की मैं भी तुम्हारे साथ 4 साल से काम कर रहा हूँ...
दिशा - अगर आप कुछ सोच रहे है तोह वैसा बिलकुल नहीं है... मुझे मेरी बौंडरीएस अछि तरह पता है... अतुल के साथ भी और आपके साथ भी...
विक्रम - ी क्नोव... that's व्हाई यू अरे माय फवौरीते... एनीवे.. चलो सी यू टुमारो...
दिशा वहां से साइंड पेपर्स ले कर चली गयी और विक्रम वापस सुप्रिया के कमरे में पंहुचा. जब उसने कमरा खोला तोह सुप्रिया निर्वसली बीएड पर तैयार हो कर बैठी थी.
सुप्रिया ने विक्रम को देखते hi उससे पूछना शुरू कर दिया - दिशा चली गयी क्या? उसे पता तोह नहीं चला न की मैं यहाँ हूँ?
विक्रम - नहीं... उसे कुछ नहीं पता चला... पर ये क्या, तुम तोह पूरी तरह ड्रेस्ड उप हो गयी...
सुप्रिया - हाँ... मुझे अब चलना चाहिए... ये जगह ठीक नहीं है शायद हमारे मिलने के लिए...
विक्रम - हम्म्म... बूत थैंक यू सो मच फॉर किंग... ी फील की तुम्हारे आने से मेरा स्ट्रेस लेवल बिलकुल काम हो गया है...
सुप्रिया - और मुझे लग रहा है की मेरा बाद गया है...
विक्रम - तोह फिर ऐसा करते है, एक दिन बहार कहीं मिलते है और मैं तुम्हारा सारा स्ट्रेस उतार देता हूँ…
सुप्रिया ने विक्रम की और देखा, उनके चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल थी - आप न विक्रम, मुझे बेशरम बना देंगे..
विक्रम - तोह उसमे क्या गलत है…
दोनों एक दुसरे को देख कर हसने लगे. विक्रम ने पास आ कर फिर से सुप्रिया को हुग किया और दोनों कुछ देर और बैठे प्यार की बातें करते रहे.
उसके बाद सुप्रिया भी विक्रम के घर से अपनी गाडी ले कर अपने घर की और निकल गयी. चाहे वह कितनी नर्वस थी उन दोनों के रिलेशनशिप को लेकर, पर आज विक्रम ने जो कुछ किया उसमे उसे बहुत ज्यादा मज़ा आया था.
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इस सब के 2 हफ्ते बाद, ऑफिस के मीटिंग रूम में विक्रम, साहिल, सुप्रिया और कृति बैठी हुए मंथली सेल्स के नंबर रिव्यु कर रहे थे. विक्रम की कंपनी की सेल्स हर महीने बढ़ती hi जा रही थी और उन्होंने हाल hi में कुछ इम्पोर्टेन्ट मिलेस्तोनेस में पूरे किये थे. सब लोग काफी खुश थे पर उन्हें पता था की आगे और भी काफी काम था.
कृति - भैया, ी थिंक थिस कॉल्स फॉर ा पार्टी... वे शुड डेफिनिटेली सेलिब्रेट थे सक्सेस ऑफ़ आवर टीम...
विक्रम - हाँ सूरे... यू के उप विथ ा सेलिब्रेशन आईडिया एंड वे विल सेलिब्रेट....
कृति खुश होते हुए बोली - हाँ सूरे, लेट में प्लान समथिंग...
साहिल - इससे पहले हम कुछ सेलिब्रेट करे, ये मर. जेम्स का ईमेल देखा आप सब ने. वह और सुप्प्लिएर्स एक्स्प्लोर कर रहा है, थाईलैंड में... कैन यू इमेजिन?
विक्रम - ओह इस आईटी? उसकी टीम को तोह यहाँ आना था न...
साहिल - अब वह लोग यहाँ नहीं आ रहे है... वह लोग वहां के मनुफक्चरर्स से मिलने जा रहे है... मैंने सुना है की माइक और डनण्य के साथ जेम्स भी वहां जा रहा है…
विक्रम - हम्म्म...
साहिल - अगर हमने उनके कॉन्ट्रैक्ट को खो दिया तोह काफी बड़ा लोस्स होगा.... शायद हमें कुछ लोगो को भी…
विक्रम ने साहिल को हाथ के इशारे से शांत किया - नहीं ऐसा नहीं होगा, लेट में टॉक तो जेम्स...
कृति - भैया एक आईडिया है... क्यों न हम भी थाईलैंड चले और वहां उनसे मिल ले...
विक्रम - नॉट ा बाद आईडिया... एक्चुअली ग्रेट आईडिया!
साहिल - मैं तोह नहीं जा पायूँगा... मेरी यहाँ जरूरत है...
विक्रम - सुप्रिया, कृति, मैं और आकाश चले जाते है... व्हाट दो यू से?
सुप्रिया इंडिया के बहार जाने के नाम से काफी खुश सी हुई, पर उसके पास तोह पासपोर्ट भी नहीं था - वाओ... हाँ काफी ाचा रहेगा.. पर मेरे पास पासपोर्ट नहीं है...
कृति - Don't वोर्री सुप्रिया... वह तोह काफी जल्दी बन जायेगा... ी विल हेल्प यू आउट ों तहत...
विक्रम ने सुप्रिया की और देखते हुए कहा - यस, ी थिंक तुम्हारा जाना ाचा रहेगा सुप्रिया, आखिर यू क्नोव थम वैरी वेल... सो लेट में गेट थे डिटेल्स फ्रॉम जेम्स एंड फिर हम लोग जाने का प्लान करते है...
कुछ देर बार मीटिंग ख़तम हो गयी और विक्रम बहार जाने के लिए खड़ा हुआ. कृति भी विक्रम से बात करने के लिए उसके साथ बहार की और हो ली. वैसे तोह सुप्रिया भी विक्रम से बात करना चाहती थी, कभी कभी तोह उसे लगता था की वह दोनों आज कल बात hi नहीं कर पा रहे थे. विक्रम भी बिजी चल रहे थे और वह भी ऑफिस और घर के बीच में पीसी हुई सी hi थी.
मीटिंग रूम में साहिल और सुप्रिया बैठे थे और सुप्रिया अपने पेपर्स समेत रही थी.
साहिल ने इधर उधर देखा, जैसे चेक कर रहा हो की वह और सुप्रिया अकेले hi थे न - सुप्रिया... एक बात कहु...
सुप्रिया - जी सर...
साहिल - वैसे मेरा कोई हक़ नहीं है ये सब बोलने का... पर काफी दिनों से मेरे मैं में था तोह कह hi देता हूँ...
सुप्रिया पूरी अटेंशन से साहिल की और देखने लगी, पता नहीं ऐसा क्या था जो आज वह कहना चाहते थे.
साहिल - हम मिडिल क्लास लोग है... और हमें ये बात कभी नहीं भूलनी चाहिए... तुम समझ रही हो न मैं क्या कहना चाहा हूँ...
सुप्रिया को साफ़ साफ़ तोह नहीं समझ आ रहा था, पर उसे अजीब सा लग रहा था की आज साहिल सर उससे ऐसी बातें क्यों कर रहे थे - सर... नहीं मुझे कुछ समझ नहीं आया...
साहिल - सुप्रिया... तुम मेरी छोटी बेहेन जैसी हो... इसलिए मैं तुम्हे थोड़ा और खुल के समझा देता हूँ.. कोशिश करो की तुम अपने आप को इन लोगो की लाइफ से दूर hi रखो....
सुप्रिया - सर.... किस्से?
साहिल ने गहरी सांस भरी, शायद सुप्रिया उसकी बात को समझना hi नहीं चाहती थी. साहिल अपना लैपटॉप लेकर मीटिंग रूम से निकल गया. सुप्रिया भी शायद थोड़ा बहुत समझ गयी थी की साहिल क्या कहना चाहता था, पर वह अब विक्रम के साथ इतनी आगे बाद चुकी थी की उसके लिए अब अपने कदम पीछे करना नामुमकिन सा था.
सुप्रिया अपने पेपर्स ले कर बहार अपने डेस्क पर आयी तोह उसने देखा की वहीँ पास में विक्रम और कृति खड़े बातें कर रहे थे. ऐसा लग रहा था की कृति उन्हें किसी चीज़ के बारे में मानाने की कोशिश कर रही थी पर विक्रम मान नहीं रहे थे. सुप्रिया उनकी बातें ध्यान से सुनने की कोशिश करने लगी.
विक्रम - और तुम कब मूव ों करोगी राहुल से...
कृति - मूव ों मतलब?
विक्रम - यू क्नोव व्हाट ी मैं... हम पहले भी इस बारे में डिसकस कर चुके है...
कृति - के ों, हे इस रियली नीस... पर ाचा ठीक है... आप मेरी हेल्प करा दे न एडमिशन में... फिर पक्का... ी विल मूव ों...
विक्रम - इतना आसान नहीं है वहां एडमिशन होना...
कृति - आपके लिए इतना मुश्किल भी नहीं है...
विक्रम - मेरे लिए या ईशा के डैड के लिए?
कृति - शामे hi तोह है... आप मेरे लिए उनसे इतनी सी हेल्प नहीं ले सकते?
विक्रम - हम्म्म.... तुमने चाचू से बात की इस बारे में?
कृति - यू क्नोव वह मन hi करेंगे न.... हे जस्ट वांट्स में तो गेट मैरिड...
विक्रम - हम्म्म... हे इस नॉट रॉंग... बूत ok लेट में थिंक अबाउट आईटी... बूत हाँ ी सीरियसली आस्क की यू रथिंक अबाउट राहुल...
कृति - अब मैं आपको कैसे कन्विंस करू...
थोड़ी देर बाद दोनों का डिस्कशन ख़तम हुआ, और कृति अपने डेस्क पर आ कर बैठ गयी. सुप्रिया सेंस कर पा रही थी की उसका मूड थोड़ा ख़राब था, पर वह उससे अभी कुछ भी पूछना नहीं चाहती थी. और फिर विक्रम सही तोह कह रहा था, राहुल सही नहीं था कृति के लिए. उसके लिए क्या, किसी के लिए भी सही नहीं था. पर सुप्रिया तोह राहुल से जितना हो सके उतना दूर रहना चाहती थी, तोह उसका इस सब में पड़ने का कोई सवाल hi नहीं बनता था. वह जल्द hi सब कुछ भुला कर वापस अपने काम में लग गयी.
दो दिन बाद शनिवार को अतुल भी घर वापस आ गया था. उसके वापस आने से सुप्रिया को ख़ास ख़ुशी नहीं थी और वह फिर से उसके सामने झूठ बोलने पर मज़बूर थी. सुप्रिया को काफी गिलटी सा महसूस हो रहा था की वह अतुल के साथ ऐसा कर रही थी, पर उसके बार और चारा hi क्या था. उसका बस चलता तोह वह शायद अतुल को सब कुछ बता भी देती, पर अभी उसे खुद hi नहीं समझ आ रहा था की उसका भविष्य क्या होने वाला था.
अतुल की ट्रिप शायद अछि गयी थी और वह थोड़े अचे मूड में था. वापस आने के बाद दिन भर अतुल सुप्रिया के नज़दीक आने की कोशिश करता रहा पर सुप्रिया ने उसे कोई ख़ास रिस्पांस नहीं दिया. रात को दोनों बीएड में साथ लेते हुए थे, जैसे की वह हर रात एक hi बीएड पर सोते थे.
अतुल ने सुप्रिया का हाथ हलके से पकड़ा, पर सुप्रिया ने अपना हाथ पीछे खींच लिया और दूसरी और मुँह फेर लिया. अतुल ने सुप्रिया का कन्धा अपनी और खींचते हुए सुप्रिया के पेट पर अपना हाथ रख दिया. सुप्रिया को समझ नहीं आ रहा था की वह किस तरह से अतुल को रोके. अतुल ने उसकी छुपी को गुस्सा समझते हुए अपने होंठ सुप्रिया के गाल की तरफ बड़ा दिए, उसे किश करने के लिए. पर सुप्रिया ने अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया. इस समय तोह उसे ऐसा लग रहा था की जैसे कोई पराया मर्द उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा हो.
अतुल आज कुछ अलग hi मूड में था और उसने हार नहीं मानी. वह सरक कर सुप्रिया के ठीक ऊपर आ गया. उसने सुप्रिया का चेहरा अपने दोनों हाथों से पकड़ते हुए अपनी और किया और फिर उसके होंठों पर एक ज़ोर किश दे डाली.
सुप्रिया उसके इस एग्रेसिव बेहेवियर से एकदम से दांग सी रह गयी और वह उसे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी. पर अतुल उस पर भारी पद था और उसने सुप्रिया की टीशर्ट के अंदर हाथ घुसते हुए सुप्रिया के बूब्स को ज़ोर से पकड़ लिया. सुप्रिया को अतुल के इस तरह उसके इतना करीब आने से घिन्न सी हो रही थी, और उसने किसी तरह एक ज़ोर का धक्का दे कर अतुल को साइड किया.
सुप्रिया बीएड से कड़ी होती हुई ज़ोर से चिल्लाई - अतुल क्या कर रहे हो!!! दिख नहीं रहा आपको की मेरा मूड नहीं है...
अतुल झल्लाते हुए बोलै - क्या गलत किया मैंने? तुम मेरी बीवी हो सुप्रिया! ऐसा कब तक चलेगा... तुम्हारा तोह कभी मूड नहीं होता...
सुप्रिया ने झूठ बोलते हुए कहा - मेरे पीरियड्स चल रहे है अभी... मेरे मूड स्विंग्स होते रहते है... मेरा बिलकुल मैं नहीं है कुछ भी करने का...
अतुल - पर तुम तोह अब मुझे हाथ भी लगाने नहीं देती हो... मैं तोह बस किश hi कर रहा था...
सुप्रिया - ये किश कर रहे थे... ऐसे जबरदस्ती...
अतुल - इसमें जबरदस्ती की बात कहाँ से आ गयी... और फिर क्या करू मैं? बहार जा कर किसी को किश करू?
सुप्रिया - वही करना चाहते हो न आप!! तोह करो फिर...
अतुल ने एक गहरी सांस ली, जैसे वह अपने गुस्से पर काबू पाने की कोशिश कर रहा हो - मैं तुम्हे पहले भी समझा चूका हूँ, जो कुछ नई ईयर की पार्टी में हुआ, वह सब बस एक छोटी सी गलती थी, उसकी इतनी बड़ी सजा क्यों मिल रही है मुझे? तबसे तुम मुझसे कटी कटी सी रहने लगी हो, अब तोह कई महीने हो गए उस बात को.
सुप्रिया के पास जैसे कुछ जवाब नहीं था अतुल की बात का और वह चुप चाप कड़ी हो कर नीचे देख रही थी.
अतुल उसे छुप देख कर बोलै - तुम्हारे मैं में जो कुछ है वह क्लेअर्ल्य कहो न मुझसे? क्या प्रॉब्लम है मुझ से?
सुप्रिया - मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है... और न hi मेरे मैं में कुछ नहीं है... मैं बस अभी सोना चाहती हूँ... आपको यहाँ सोना है तोह सो जाइये और नहीं तोह बहार सोफे पर सो जाइये...
अतुल कुछ सेकंड सुप्रिया को गुस्से से घूरने के बाद अपना तकिया उठाये बहार लिविंग रूम में चला गया. सुप्रिया उसके जाने के बाद सोच में पद गयी, सच hi तोह कह रहा था अतुल, पता नहीं वह दोनों कब तक एक दुसरे के साथ ऐसे रह पाएंगे. इस तरह तोह उन दोनों की hi लाइफ ख़राब सी हो रही थी. रात भर सुप्रिया बीएड पर अकेली लेती हुई अपनी ज़िन्दगी के बारे में सोचती रही.
जब वह विक्रम के साथ होती तोह वह कितना ाचा महसूस करती अपने बारे में, और सब चीज़ो के बारे में. और फिर अतुल के साथ तोह शायद उसकी पटरी कभी ठीक से बैठी भी नहीं थी. अतुल उसके लिए कभी सही नहीं था, शायद उसे ये शादी करनी hi नहीं चाहिए थी. पर पता नहीं विक्रम के साथ उसका कोई फ्यूचर था भी या नहीं. इन्ही सब खयालो से परेशान होती हुई वह कब सो गयी उसे पता नहीं चला.
अगले दिन सुबह नाश्ते के तुरंत बाद hi अतुल घर से निकल गया. शायद इसी से उन दोनों को शांति मिलने वाली थी. सुप्रिया बैठी हुई फिर से नेगेटिव खयालो में जा hi रही थी की उसके फ़ोन की घंटी बजी. एक अननोन नंबर से कॉल आ रहा था.
सुप्रिया ने रूखी सी आवाज़ में फ़ोन उठाया - Hello...
दूसरी और से किसी औरत की आवाज़ आयी - Hello सुप्रिया बीटा... कैसी हो...
ये आवाज़ सुप्रिया को जानी पहचानी सी लग रही थी, पर उसे समझ नहीं आ रहा था ये किसकी आवाज़ है.
सुप्रिया - जी ठीक... आप....
औरत - लगता है तुमने मेरी आवाज़ नहीं पहचानी, और हाँ शायद नंबर भी सेव्ड नहीं होगा... मैं नलिनी बोल रही हु, विक्रम की माँ...
सुप्रिया ये सुन कर एक डैम से लड़खड़ा सी गयी - आंटी आप... सॉरी... कैसी है आप? मैं ठीक हु...
माँ - मैं भी ठीक हु... बिजी तोह नहीं थी न... बात कर सकते है अभी...
सुप्रिया - जी बिलकुल... मैं बिजी नहीं हु...
माँ - सॉरी मैंने ऐसे hi फ़ोन कर दिया... तुम भी काफी सुरप्रीसेड रह गयी होंगी... कैसा रहा तुम्हारा और विक्रम का मुंबई का ट्रिप...
सुप्रिया थोड़ा हैरान थी की उनको इसके बारे में पता था, पर शायद विक्रम ने hi उन्हें बताया होगा. उसे मुंबई के ट्रिप के बारे में बात करते हुए थोड़ी शर्म सी आ रही थी, आखिर इतना कुछ हुआ था उसके और विक्रम के बीच वहां - सब ठीक था... ठीक hi था...
माँ - ाचा....
सुप्रिया - विक्रम ने कुछ कहा क्या?
माँ - नहीं नहीं... वह कहाँ कुछ बताता है मुझे... बस ऐसे hi... बस वह काफी परेशान लग रहा था जब कल घर आया था तोह...
सुप्रिया - परेशान?
माँ - Haan...Vikram नोर्मल्ली कभी इतना परेशान नहीं होता... मुझे लगा शायद तुम्हे कुछ पता होगा..
सुप्रिया सोच में पद गयी - नहीं... मुझसे तोह उनकी कोई बात नहीं हुई…
माँ - हम्म्म… विक्रम पर काफी स्ट्रेस है बहुत साड़ी चीज़ो का आज कल..
सुप्रिया - हाँ... मैं समझ सकती हु...
माँ - वह तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करता है... मैं ये बात महसूस कर सकती हु... और मुझे उम्मीद है की तुम भी ये बात महसूस कर पा रही होगी...
ये बात सुन कर सुप्रिया का मैं विक्रम की तरफ पिघलता जा रहा था - हाँ आंटी... मैं जानती हु...
माँ - तुम भी मुझे माँ बुला सकती हो… आंटी क्यों कहती हो बार बार…
सुप्रिया - वह बस…. मैं….
माँ - कोई नहीं… जैसा तुम कम्फर्टेबले फील करो.. पर तुम विक्रम से बात करके देखना... क्या पता उसका स्ट्रेस काम हो जाये तुमसे बात करके...
सुप्रिया - जी बिलकुल... वैसे विक्रम आज कहाँ होंगे?
माँ - आज तोह शायद वह अपने घर पर hi होगा...
सुप्रिया - ओह ाचा...
माँ - अगर तुम चाहो तोह उसके घर जा सकती हो आज... ईशा कहीं बहार गयी हुई है....
सुप्रिया - मैं.... सोचती हु... तरय करती हु....
माँ - चलो... जल्द hi मिलते है हम लोग... अपना ध्यान रखना...
विक्रम की माँ से फ़ोन पर बात करने के बाद सुप्रिया को और ख़राब सा लग रहा था. शायद उसने hi विक्रम को कुछ ज्यादा स्ट्रेस दे दी थी. विक्रम उसे सच्चे दिल से चाहता था और वह पता नहीं क्या क्या सोचती रहती थी विक्रम के बारे में. फ़ोन कॉल तोह नहीं, शायद विक्रम से मिलकर hi इस सब के बारे में बात करना ठीक रहेगा.
सुप्रिया जल्दी से तैयार होना शुरू हुई और उसने विक्रम की दिलाई हुई एक ड्रेस पेहेन ली. अपने मैं की खलबली को शांत करने के लिए उसे विक्रम से मिलना जरूरी था. जो भी हो, वह विक्रम को नहीं खोना चाहती थी. वह अपनी कार ले कर विक्रम के यहाँ चल पड़ी. पता नहीं विक्रम कैसे रियेक्ट करेगा जब वह उसके सामने होगी तोह.
सुप्रिया बे थोड़ी देर बाद विक्रम के आलिशान घर के सामने अपनी गाडी लगायी, और अंदर की और आ गयी. उसने गार्ड को बोलै की वह विक्रम सर से ऑफिस के सिलसिले में मिलने आयी है और उन्होंने उसे अंदर जाने दिया. घर के अंदर ड्राइंग रूम में पहुंच कर वह विक्रम का वेट करने लगी. विक्रम के घर के नौकर ने शायद उसे बता दिया था की कोई उससे मिलना आया है. सुप्रिया बेताबी से इंतज़ार करने लगी.
थोड़ी देर बाद विक्रम एक कमरे से निकलता हुआ बहार आया और सुप्रिया को देखते hi उसके पेअर थम से गए - सुप्रिया... तुम यहाँ?
सुप्रिया ने एक हलकी सी स्माइल के साथ कहा - Hi... कैसे हो आप विक्रम?
विक्रम ने मुस्कुरा के कहा - ी ऍम गुड, और तुम्हे देख कर तोह और भी ाचा.. व्हाट ा सरप्राइज!
सुप्रिया - होप मैंने आपको डिस्टर्ब तोह नहीं किया....
विक्रम - नहीं... बिलकुल नहीं... ईशा भी घर पर नहीं है तोह मैं अकेला hi था घर पर...
सुप्रिया ने देखा की वहां हॉल में विक्रम के घर के नौकर भी काम कर रहे थे - हम कहीं अकेले में बात कर सकते है क्या?
विक्रम समझ गया की सुप्रिया हाउस स्टाफ के सामने बात नहीं करना चाहती थी - चलो रूम में चल कर बात करते है...
विक्रम सुप्रिया का हाथ पकड़ता हुआ उसे नीचे वाले फ्लोर में एक कमरे में ले गया, शायद ये गेस्ट रूम था. सुप्रिया का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था. इससे पहले वह इस घर में एक बार और आयी थी, होली वाले दिन, और उस दिन वह और विक्रम एक hi बाथरूम में थे जब उसने कपडे बदले थे.
दोनों एक कमरे में आ गए और विक्रम ने दरवाज़ा बंद कर दिया.
सुप्रिया - सॉरी... बिना बताये आने के लिए... मुझे लगा शायद आप…
विक्रम - सॉरी क्यों? मेरे लिए तोह ये एक बहुत hi स्वीट सा सरप्राइज है… मैं भी तुमसे मिलना चाहता था.. वैसे तुम्हे कैसे पता चला की ईशा घर पर नहीं है?
सुप्रिया - वह आपकी माँ का फ़ोन आया था… वह काफी परेशां साउंड कर रही थी आपके लिए...
विक्रम - ओह… माँ भी न…
सुप्रिया ने आगे बाद कर विक्रम को हुग कर लिया - विक्रम, मैं… ी ऍम रियली सॉरी… मैंने शायद आपको कुछ ज्यादा hi स्ट्रेस दे दिया न..
विक्रम - सुप्रिया… नहीं… ऐसा कुछ नहीं…
सुप्रिया - पर फिर भी, मैं बहुत घबरा गयी थी उस दिन. ी लव यू विक्रम…
विक्रम - ी लव यू मोरे थान यू क्नोव…
सुप्रिया का चेहरा विक्रम की छाती से चिपक गया था और उसने अपने हाथ विक्रम से लपेट लिए थे. एक अजीब सा hi सुकून मिल रहा था उसे विक्रम को हुग करके.
विक्रम ने सुप्रिया की थोड़ी पर हाथ रखते हुए उसका चेहरा ऊपर उठाया और उसके माथे पर एक हलकी सी किश की. सुप्रिया और विक्रम एक दुसरे की आँखों में खोये हुए थे. तभी सुप्रिया ने हिम्मत दिखते हुए अपने हाथ अपने से लम्बे विक्रम के गले में उचकते हुए डाले और विक्रम के होंठों पर एक किश जड़ दी. उस किश के बाद विक्रम से भी नहीं रहा गया और विक्रम भी सुप्रिया को चूमने लगा. दोनों कमरे में खड़े एक दुसरे को अछि तरह चूम रहे थे.
विक्रम ने अपने हाथ सुप्रिया की पीठ पर रखते हुए उसे अचे से जकड लिया. सुप्रिया के हाथ अभी भी विक्रम की गर्दन पर बंधे हुए थे, और विक्रम ने उसे उठाते हुए हवा में घुमा दिया. सुप्रिया भी उसके प्यार में बुरी तरह खोयी हुई थी, मुंबई वाली ट्रिप के बाद से hi मैं और भी मचल रहा था विक्रम के साथ ये सब करने के लिए.
थोड़ी देर बार जब उनकी किश टूटी, तब विक्रम ने सुप्रिया के बाल उसके चेहरे से साइड करते हुए कहा - यू क्नोव… मुझे रीलीज़ हुआ की मैं कितना सेल्फिश था पिछली बार…
सुप्रिया ने थोड़ा हैरान होते हुए पुछा - सेल्फिश कैसे थे?
विक्रम - मैंने सिर्फ अपने बारे में सोच रहा था, और तुम्हारे प्लेअसुरे के बारे में तोह मैंने सोचा hi नहीं… आज शायद उसी कमी को पूरा करने का टाइम है…
सुप्रिया - मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है…
विक्रम - अभी समझ जायेगी… तुम बस रिलैक्स करो आज…
सुप्रिया इससे पहले कुछ बोल पाती, विक्रम ने अपना हाथ सुप्रिया के ड्रेस के ठीक नीचे उसकी जाँघों के बीच लगा दिया.
सुप्रिया एक डैम से झटपटा गयी - उफ्फ्फ.. विक्रम… क्या कर रहे हो…
विक्रम - मैंने कहा न, तुम बस रिलैक्स करो.. तुम्हे बहुत ाचा लगेगा…
विक्रम ने सुप्रिया को उठाते हुए बीएड पर हलके से धकेल दिया. सुप्रिया बीएड पर गिरते हुए थोड़ा सा पीछे सर्कि जिससे उसकी ड्रेस थोड़ा ऊपर हो गयी और उसकी पंतय विक्रम को दिखाई देने लगी. विक्रम भी बीएड पर बैठ गया और उसने उसके पेअर पकड़ते हुए अपने पैरो के ऊपर रखे लिए. फिर उसकी टांगो को हलके से सहलाने लगा.
सुप्रिया के पेअर बिलकुल माखन की तरह मुलायम थे उसके पेअर, कहीं भी कोई भी निशाँ नहीं. अब तक विक्रम उसके शरीर के हर हिस्से को अछि तरह देख चूका था, उसे पता था सुप्रिया के शरीर पर कहाँ कितने टिल थे. सुप्रिया को बहुत ाचा लग रहा था विक्रम का ऐसे प्यार से उसके पैरो को मसलना.
कुछ मिनट बाद विक्रम ने हाथ सुप्रिया की जांघ तक पहुंच गए थे, और वह उसके जांघ के अंदरूनी हिस्से को प्यार से छूने लगा. वह हिस्सा काफी सेंस्टिविए था और सुप्रिया की सांसें तेज़ होती जा रही थी. सुप्रिया ने अपने जाँघे बंद कर ली और विक्रम का हाथ उसकी जाँघों के बीच में फास गया, जहाँ विक्रम हलकी सी नमी महसूस कर पा रहा था.
बहुत hi अछि सी खुशबू आ रही थी विक्रम को और वह अपने आप को और कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा था. उसने जाँघों के बीच में फसा अपना हाथ निकला और फिर वहां झुक कर हलके से किश कर दिया. सुप्रिया तोह एक डैम से उछाल सी पड़ी पर विक्रम अभी भी उसके पेअर पकडे हुए था. इसी बीच उसने सुप्रिया की ड्रेस को थोड़ा ऊपर सरकड़ा दिया जिससे उसे सुप्रिया की पूरी टाँगे दिखने लगी. सुप्रिया ने अंदर एक लास वाला अंडरवियर पहना हुआ था जिसमे उसकी गोरी टाँगे बहुत hi आकर्षिक दिख रही थी.
विक्रम उसके पैरो पर अपनी उंगलियां चलने लगा और उसका दूसरा हाथ सुप्रिया की जांघ को कास के पकड़ा हुआ था.
सुप्रिया - विक्रम… ममममम….. प्लीज रुको न…
विक्रम - ट्रस्ट में… जो भी करूँगा, तुम्हे बहुत ाचा लगेगा..
विक्रम ने फिर से अपना मुँह सुप्रिया के जानगोह पर रखते हुए वहां हलकी सी किश की. सुप्रिया की त्वचा वहां बहुत hi सेंसिटिव थी और वह हर छुअन से पागल होती जा रही थी. विक्रम ने अपनी जीब निकल कर सुप्रिया की गोरी गोरी जाँघों के बीच में घुसा दी.
सुप्रिया ने ऐसा करने पर अपने जांघ खोल दी - अह्ह्ह्हह… मममममम… उफ्फ्फ.....
विक्रम - मममम.... ाचा लगा न... अभी और भी ाचा लगेगा... बस तुम मेरा साथ दो...
सुप्रिया ने हलके से हाँ में सर हिलाया. विक्रम फिर से उसके पैरो को अपनी जीब से महसूस करने लगा. सुप्रिया को गुदगुदी भी हो रही थी और बेचैनी भी, पर पता नहीं क्यों ये सब बहुत ाचा भी लग रहा था. विक्रम की जीब सुप्रिया की पंतय से थोड़ा सा नीचे आ कर रुक गयी. सुप्रिया का हाथ वहां एक कवच की तरह लगा हुआ था.
विक्रम ने सीधे बैठते हुए सुप्रिया को अपने ऊपर खींचा और उसकी छोटी सी पंतय से बहार निकलते हुए उसके नितम्बो को अपने मुठी में कास के दबा लिया.
सुप्रिया उचकती हुई विक्रम के गले लग गयी, विक्रम के ये सब करने से वह और भी गरम होती जा रही थी.
सुप्रिया - Ufff.....mmmmm..... अह्हह्ह्ह्ह
विक्रम - बहुत सॉफ्ट हो तुम सुप्रिया... बॉडी के हर हिस्से में...
विक्रम ने एक बार फिर सुप्रिया के नितम्बो को ज़ोर के दबाया, और उसका मुँह सुप्रिया की ड्रेस के ऊपर से उसके बूब्स पर था. विक्रम ने वहां हलके से काटा तोह सुप्रिया बीएड पर पीछे गिर गयी, और पलट कर दूसरी और करवट ले ली. सुप्रिया की गांड विक्रम की तरफ थी और वह उसके ऊपर आते हुए उसके पीठ को चूमने लगा. उसके मुँह नीचे जाते हुए सुप्रिया की पंतय पर रुका.
सुप्रिया की गांड देख कर विक्रम बेकाबू होता जा रहा था और उसने वहां हलके से कटा, जिससे सुप्रिया की हलकी सी चीख निकल गयी. उसका मैं कर रहा था की वह अभी सुप्रिया की पंतय उतार कर अपना लुंड उसकी गांड में दाल दे, पर उसे फिर ख्याल आया की उसका मक़सद आज सुप्रिया को खुश करना था न की अपने आप को.
सुप्रिया अपनी ड्रेस को नीचे करने की कोशिश करने लगी - विक्रम... अह्ह्ह.... प्लीज हटो न...
विक्रम - सुप्रिया... जो भी मैं करने वाला हूँ... जस्ट ट्रस्ट में... ok..
विक्रम ने सुप्रिया को सीधा घुमाया और एक hi झटके में उसकी पंतय को नीचे खींच कर उतार दी.
सुप्रिया ने शर्म के मारे अपनी ड्रेस नीचे खींच दी और अपने पेअर बंद कर लिए - उईईईईई.... विक्रम....
विक्रम - बस अब तुम आँखें बंद करके लेट जायो... लेट में दो थे रेस्ट...
सुप्रिया - नहीं प्लीज.... मुझसे नहीं होगा... मुझे नहीं ाचा लगता...
विक्रम - तुम्हे पता है मैं क्या करने वाला हूँ...
सुप्रिया - हाँ... थोड़ा तोह आईडिया है...
विक्रम - लगता है तुमने पहले किया है, पर शायद एन्जॉय नहीं किया...
सुप्रिया सोचने लगी जब उसने पहली और आखरी बार ये राहुल के साथ किया था और उसे बहुत अजीब सा लगा था. उसके बाद उसने ये कभी नहीं किया था - हम्म्म... शायद... पता नहीं...
विक्रम - इस बार थोड़ा अलग होगा... यू विल लिखे आईटी... के...
विक्रम ने सुप्रिया पकड़ते हुए अपने पास किया - तुम मेरे मुँह के ऊपर बैठ जायो...
सुप्रिया ने तेज़ी से न में सर हिलाया - नहीं विक्रम... मैं ऐसे कैसे आपके मुँह पर बैठ जायु?
विक्रम - प्लीज... जस्ट एक बार... ट्रस्ट में...
सुप्रिया बुरी तरह काँप रही थी, और उसका हाथ विक्रम के हाथ में था. विक्रम बीएड पर लेट गया और सुप्रिया नीचे से पूरी नंगी विक्रम की छाती पर बैठ गयी. उसे ऐसे बैठना hi अजीब सा लग रहा था. विक्रम ने अपने हाथ सुप्रिया के नंगे कूल्हों पर रखे और उसे अपने मुँह के पास खींचा.
सुप्रिया ने आँखें बंद कर ली, अब जो होना था वह तोह होना hi था. बस वह विक्रम को अपने आप को इतनी पास से नहीं देखने देना चाहती थी, तोह उसने विक्रम की आँखें अपने हाथों से धक् दी, और विक्रम ने उसकी कमर को ऊपर उठाते हुए उसकी छूट को अपने मुँह के ऊपर रख दिया.
जैसे hi विक्रम ने सुप्रिया को अपने होंठों के ऊपर बिठाया, सुप्रिया की तोह हालत hi ख़राब हो गयी. आज तक उसने ऐसा कुछ नहीं किया था, और एक मर्द के होंठ उसने नीचे के होंठों के ठीक नीचे, बाप रे बाप. विक्रम ने वहां नीचे हलके से चूमा जिससे सुप्रिया के पूरे शरीर में एक सिरहन सी दौड़ गयी, और उसने अपने हाथों से अपनी ड्रेस फिर से नीचे खींचने की कोशिश करि.
विक्रम बहुत की आराम से, बिलकुल किसी कलाकार की तरह सुप्रिया को बहुत आराम आराम से नीचे चूम रहा था. सुप्रिया उठ कर कड़ी होना चाहती थी पर विक्रम ने उसकी कमर को पकडे रखा. फिर विक्रम ने अपने होंठों को थोड़ा खोलते हुए सुप्रिया की छूट को अपने मुँह में घेरा और वहां हलके हलके चूसने लगा.
सुप्रिया - Ahhhhh.....mmmmmm..... उईईईईई
विक्रम - ममममम.....
सुप्रिया को ऐसा कभी पहले महसूस नहीं हुआ था, इतना अजीब सा लग रहा था और साथ hi इतना ाचा भी. जैसे कोई प्यारा सा सिरद दर्द हो रहा हो, जिसे वह ख़तम नहीं होने देना चाहती हो. विक्रम वहां नीचे लेता हुआ बिलकुल आराम से सुप्रिया को छूट को अपने मुँह में दबाये चूसे जा रहा था. अंदर का हल्का हल्का गीलापन भी जो निकल रहा था, वह भी विक्रम बिना किसी झिझक के अपने मुँह में ले रहा था.
सुप्रिया - अह्ह्ह... विक्रम.... क्या कर रहे... अअअअअअअ.... उफ्फ्फ....
दोनों के आँखें मिली और विक्रम सुप्रिया की शकल देख कर समझ गया की उसको इस समय कितना मजा आ रहा था. सुप्रिया तोह बस किसी तरह से अपने आप को संभाले बैठी थी की कहीं उसका सब कुछ विक्रम के मुँह पर न निकल जाये.
सुप्रिया - विक्रम... मुझे हटने दो प्लीज... गड़बड़ हो जाएगी..
पर विक्रम ने उसे नहीं छोड़ा. विक्रम ने अपनी जीब बहार निकाल कर सुप्रिया के छूट को तेज़ी से चाटना शुरू कर दिया. सुप्रिया का शरीर जवाब दे चूका था और उसनेविक्रम के ऊपर झुकते हुए अपने हाथों से अपने आप को बीएड पर सहारा दिया. जो कुछ हो रहा था उसमे उसे एक ऐसा आनंद आ रहा था जो आज तक उसे नहीं मिला था.
विक्रम ने अपनी जीब सुप्रिया की गीली छूट के अंदर घुसा दी और वहां लपलप चाटने लगा. सुप्रिया बस आनंद से कररहने के इलावा कुछ न कर पायी. कुछ देर ऐसे hi करने के बाद उसे अपने अंदर का बहाव तेज़ होता हुआ महसूस हुआ और उसने फ़ौरन विक्रम के ऊपर से अपनी टाँगे हटा दी. फिर उसके टांगो के बीच से बहते हुए पानी ने बीएड का एक पूरा हिस्सा भिगो दिया.
सुप्रिया अपने छूट हलके से सहलाते हुए बीएड पर झटपटा सी रही थी - विक्रम...... उफ्फ्फ... ये क्या किया आपने....
विक्रम के चेहरे पर एक स्माइल थी, उसे पता था आज उसने सुप्रिया को जो मज़ा दिया था वह जल्दी से भूलने वाली नहीं थी, पर अभी तोह वह उसके साथ और खेलना चाहता था. ये सब होने के बाद भी उसका पानी दुबारा निकलवाने का डैम रखता था.
विक्रम - सुप्रिया... कैसा लगा...
सुप्रिया अभी भी अपनी तेज़ साँसों पर काबू पाने की कोशिश कर रही थी. पर इससे पहले वह जवाब देती, कमरे के दरवाज़े पर एक हलकी सी दस्तक हुई. दस्तक सुनते hi सुप्रिया एक डैम घबरा सी गयी और जल्दी से बीएड पर अपने कपड़ो को ढूंढ़ने लगी.
उसने लचर नज़रो से विक्रम की और देखा, उससे पूछते हुए की कौन होगा बहार. वह तोह इस सब में भूल hi गयी थी की वह किस होटल के रूम में नहीं, विक्रम के घर के एक कमरे में थी. विक्रम ने अपने होंठों पर ऊँगली रखते हुए सुप्रिया को छुप रहने का इशारा किया, और वह अपनी टीशर्ट पेहेनते हुए दरवारे की और गया और उसे हल्का सा खोला.
बहार से एक नौकर झांकता हुआ बोलै - सर... आपको डिस्टर्ब करने के लिए सॉरी... बहार दिशा जी आयी है...
विक्रम - कोई बात नहीं... उन्हें बिठायो... मैं आता हूँ...
विक्रम ने दरवाज़ा बंद किया और आईने में देख कर अपने कपडे और बाल ठीक करने लगा - सुप्रिया तुम यहीं रुको... मैं अभी 10 मिनट में आता हूँ. दिशा आज संडे को आयी है तोह कुछ जरूरी काम होगा उसे.
सुप्रिया अब तक अपने कपडे पेहेन चुकी थी और वह अभी अपने बाल ठीक करने में लग गयी. उफ्फ्फ आज कितनी बड़ी गलती हो गयी थी उससे यहाँ आ कर.
विक्रम कमरे से बहार निकला और बहार निकलते हुए कमरे का दरवाज़ा बंद करके ड्राइंग रूम में चला गया. विक्रम जैसे hi बहार ड्राइंग रूम में पंहुचा तोह दिशा वहां सोफे पर बैठी थी.
दिशा उसे देखते hi बोली - सॉरी विक्रम... आपको संडे के दिन डिस्टर्ब करने के लिए... बिग बॉस ने कुछ अर्जेंट डाक्यूमेंट्स सिग्न करने के लिए कहा है...
विक्रम - No प्रॉब्लम... मुझे पता है तुम ऐसे नहीं आती...
दिशा ने विक्रम को कुछ कागज़ पकड़ाए और विक्रम उन्हें सिग्न करने में लग गया, और फिर बीच में बोलै - दिशा.. कुछ लोगी.. चाय, कॉफ़ी, लंच?
दिशा - नहीं, कुछ नहीं. मुझे अभी कहीं और जाना है... और फिर शायद आप भी बिजी से लग रहे है...
विक्रम - नहीं... ऐसा कुछ नहीं...
दिशा - मैं आपके साथ 4 साल से काम कर रही हूँ.. इतना तोह पहचान hi लेती हूँ...
विक्रम - हम्म... ये लीजिये मैडम... डाक्यूमेंट्स बड़े सर के लिए...
दिशा - थैंक यू सर... ी विल सी यू टुमारो इन ऑफिस...
दिशा कड़ी hi हुई थी जाने के लिए, की विक्रम ने पुछा - हाउ इस अतुल दोंग?
दिशा एक पल के लिए हड़बड़ाई और फिर बोली - मैं समझी नहीं?
विक्रम - हम्म्म... यू फॉरगेट की मैं भी तुम्हारे साथ 4 साल से काम कर रहा हूँ...
दिशा - अगर आप कुछ सोच रहे है तोह वैसा बिलकुल नहीं है... मुझे मेरी बौंडरीएस अछि तरह पता है... अतुल के साथ भी और आपके साथ भी...
विक्रम - ी क्नोव... that's व्हाई यू अरे माय फवौरीते... एनीवे.. चलो सी यू टुमारो...
दिशा वहां से साइंड पेपर्स ले कर चली गयी और विक्रम वापस सुप्रिया के कमरे में पंहुचा. जब उसने कमरा खोला तोह सुप्रिया निर्वसली बीएड पर तैयार हो कर बैठी थी.
सुप्रिया ने विक्रम को देखते hi उससे पूछना शुरू कर दिया - दिशा चली गयी क्या? उसे पता तोह नहीं चला न की मैं यहाँ हूँ?
विक्रम - नहीं... उसे कुछ नहीं पता चला... पर ये क्या, तुम तोह पूरी तरह ड्रेस्ड उप हो गयी...
सुप्रिया - हाँ... मुझे अब चलना चाहिए... ये जगह ठीक नहीं है शायद हमारे मिलने के लिए...
विक्रम - हम्म्म... बूत थैंक यू सो मच फॉर किंग... ी फील की तुम्हारे आने से मेरा स्ट्रेस लेवल बिलकुल काम हो गया है...
सुप्रिया - और मुझे लग रहा है की मेरा बाद गया है...
विक्रम - तोह फिर ऐसा करते है, एक दिन बहार कहीं मिलते है और मैं तुम्हारा सारा स्ट्रेस उतार देता हूँ…
सुप्रिया ने विक्रम की और देखा, उनके चेहरे पर एक बड़ी सी स्माइल थी - आप न विक्रम, मुझे बेशरम बना देंगे..
विक्रम - तोह उसमे क्या गलत है…
दोनों एक दुसरे को देख कर हसने लगे. विक्रम ने पास आ कर फिर से सुप्रिया को हुग किया और दोनों कुछ देर और बैठे प्यार की बातें करते रहे.
उसके बाद सुप्रिया भी विक्रम के घर से अपनी गाडी ले कर अपने घर की और निकल गयी. चाहे वह कितनी नर्वस थी उन दोनों के रिलेशनशिप को लेकर, पर आज विक्रम ने जो कुछ किया उसमे उसे बहुत ज्यादा मज़ा आया था.
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इस सब के 2 हफ्ते बाद, ऑफिस के मीटिंग रूम में विक्रम, साहिल, सुप्रिया और कृति बैठी हुए मंथली सेल्स के नंबर रिव्यु कर रहे थे. विक्रम की कंपनी की सेल्स हर महीने बढ़ती hi जा रही थी और उन्होंने हाल hi में कुछ इम्पोर्टेन्ट मिलेस्तोनेस में पूरे किये थे. सब लोग काफी खुश थे पर उन्हें पता था की आगे और भी काफी काम था.
कृति - भैया, ी थिंक थिस कॉल्स फॉर ा पार्टी... वे शुड डेफिनिटेली सेलिब्रेट थे सक्सेस ऑफ़ आवर टीम...
विक्रम - हाँ सूरे... यू के उप विथ ा सेलिब्रेशन आईडिया एंड वे विल सेलिब्रेट....
कृति खुश होते हुए बोली - हाँ सूरे, लेट में प्लान समथिंग...
साहिल - इससे पहले हम कुछ सेलिब्रेट करे, ये मर. जेम्स का ईमेल देखा आप सब ने. वह और सुप्प्लिएर्स एक्स्प्लोर कर रहा है, थाईलैंड में... कैन यू इमेजिन?
विक्रम - ओह इस आईटी? उसकी टीम को तोह यहाँ आना था न...
साहिल - अब वह लोग यहाँ नहीं आ रहे है... वह लोग वहां के मनुफक्चरर्स से मिलने जा रहे है... मैंने सुना है की माइक और डनण्य के साथ जेम्स भी वहां जा रहा है…
विक्रम - हम्म्म...
साहिल - अगर हमने उनके कॉन्ट्रैक्ट को खो दिया तोह काफी बड़ा लोस्स होगा.... शायद हमें कुछ लोगो को भी…
विक्रम ने साहिल को हाथ के इशारे से शांत किया - नहीं ऐसा नहीं होगा, लेट में टॉक तो जेम्स...
कृति - भैया एक आईडिया है... क्यों न हम भी थाईलैंड चले और वहां उनसे मिल ले...
विक्रम - नॉट ा बाद आईडिया... एक्चुअली ग्रेट आईडिया!
साहिल - मैं तोह नहीं जा पायूँगा... मेरी यहाँ जरूरत है...
विक्रम - सुप्रिया, कृति, मैं और आकाश चले जाते है... व्हाट दो यू से?
सुप्रिया इंडिया के बहार जाने के नाम से काफी खुश सी हुई, पर उसके पास तोह पासपोर्ट भी नहीं था - वाओ... हाँ काफी ाचा रहेगा.. पर मेरे पास पासपोर्ट नहीं है...
कृति - Don't वोर्री सुप्रिया... वह तोह काफी जल्दी बन जायेगा... ी विल हेल्प यू आउट ों तहत...
विक्रम ने सुप्रिया की और देखते हुए कहा - यस, ी थिंक तुम्हारा जाना ाचा रहेगा सुप्रिया, आखिर यू क्नोव थम वैरी वेल... सो लेट में गेट थे डिटेल्स फ्रॉम जेम्स एंड फिर हम लोग जाने का प्लान करते है...
कुछ देर बार मीटिंग ख़तम हो गयी और विक्रम बहार जाने के लिए खड़ा हुआ. कृति भी विक्रम से बात करने के लिए उसके साथ बहार की और हो ली. वैसे तोह सुप्रिया भी विक्रम से बात करना चाहती थी, कभी कभी तोह उसे लगता था की वह दोनों आज कल बात hi नहीं कर पा रहे थे. विक्रम भी बिजी चल रहे थे और वह भी ऑफिस और घर के बीच में पीसी हुई सी hi थी.
मीटिंग रूम में साहिल और सुप्रिया बैठे थे और सुप्रिया अपने पेपर्स समेत रही थी.
साहिल ने इधर उधर देखा, जैसे चेक कर रहा हो की वह और सुप्रिया अकेले hi थे न - सुप्रिया... एक बात कहु...
सुप्रिया - जी सर...
साहिल - वैसे मेरा कोई हक़ नहीं है ये सब बोलने का... पर काफी दिनों से मेरे मैं में था तोह कह hi देता हूँ...
सुप्रिया पूरी अटेंशन से साहिल की और देखने लगी, पता नहीं ऐसा क्या था जो आज वह कहना चाहते थे.
साहिल - हम मिडिल क्लास लोग है... और हमें ये बात कभी नहीं भूलनी चाहिए... तुम समझ रही हो न मैं क्या कहना चाहा हूँ...
सुप्रिया को साफ़ साफ़ तोह नहीं समझ आ रहा था, पर उसे अजीब सा लग रहा था की आज साहिल सर उससे ऐसी बातें क्यों कर रहे थे - सर... नहीं मुझे कुछ समझ नहीं आया...
साहिल - सुप्रिया... तुम मेरी छोटी बेहेन जैसी हो... इसलिए मैं तुम्हे थोड़ा और खुल के समझा देता हूँ.. कोशिश करो की तुम अपने आप को इन लोगो की लाइफ से दूर hi रखो....
सुप्रिया - सर.... किस्से?
साहिल ने गहरी सांस भरी, शायद सुप्रिया उसकी बात को समझना hi नहीं चाहती थी. साहिल अपना लैपटॉप लेकर मीटिंग रूम से निकल गया. सुप्रिया भी शायद थोड़ा बहुत समझ गयी थी की साहिल क्या कहना चाहता था, पर वह अब विक्रम के साथ इतनी आगे बाद चुकी थी की उसके लिए अब अपने कदम पीछे करना नामुमकिन सा था.
सुप्रिया अपने पेपर्स ले कर बहार अपने डेस्क पर आयी तोह उसने देखा की वहीँ पास में विक्रम और कृति खड़े बातें कर रहे थे. ऐसा लग रहा था की कृति उन्हें किसी चीज़ के बारे में मानाने की कोशिश कर रही थी पर विक्रम मान नहीं रहे थे. सुप्रिया उनकी बातें ध्यान से सुनने की कोशिश करने लगी.
विक्रम - और तुम कब मूव ों करोगी राहुल से...
कृति - मूव ों मतलब?
विक्रम - यू क्नोव व्हाट ी मैं... हम पहले भी इस बारे में डिसकस कर चुके है...
कृति - के ों, हे इस रियली नीस... पर ाचा ठीक है... आप मेरी हेल्प करा दे न एडमिशन में... फिर पक्का... ी विल मूव ों...
विक्रम - इतना आसान नहीं है वहां एडमिशन होना...
कृति - आपके लिए इतना मुश्किल भी नहीं है...
विक्रम - मेरे लिए या ईशा के डैड के लिए?
कृति - शामे hi तोह है... आप मेरे लिए उनसे इतनी सी हेल्प नहीं ले सकते?
विक्रम - हम्म्म.... तुमने चाचू से बात की इस बारे में?
कृति - यू क्नोव वह मन hi करेंगे न.... हे जस्ट वांट्स में तो गेट मैरिड...
विक्रम - हम्म्म... हे इस नॉट रॉंग... बूत ok लेट में थिंक अबाउट आईटी... बूत हाँ ी सीरियसली आस्क की यू रथिंक अबाउट राहुल...
कृति - अब मैं आपको कैसे कन्विंस करू...
थोड़ी देर बाद दोनों का डिस्कशन ख़तम हुआ, और कृति अपने डेस्क पर आ कर बैठ गयी. सुप्रिया सेंस कर पा रही थी की उसका मूड थोड़ा ख़राब था, पर वह उससे अभी कुछ भी पूछना नहीं चाहती थी. और फिर विक्रम सही तोह कह रहा था, राहुल सही नहीं था कृति के लिए. उसके लिए क्या, किसी के लिए भी सही नहीं था. पर सुप्रिया तोह राहुल से जितना हो सके उतना दूर रहना चाहती थी, तोह उसका इस सब में पड़ने का कोई सवाल hi नहीं बनता था. वह जल्द hi सब कुछ भुला कर वापस अपने काम में लग गयी.