- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 140,812
अब तक आपने पढ़ा की विक्रम को अपने सपने के एक भाग में अवंतिका दिखती है और दूसरे भाग में अनलिए.
अब आगे:-
CHAPTER-2
( कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन )
अपडेट-72
PLANET-EARTH
प्लेस- ड्रीम लैंड
ये कौनसी जगह hai????aisa लग रहा है जैसे मई यहाँ पहले भी आ चुकी हूँ.......!!!!
अरे ये तोह...!!!!!!!!!
अवंतिका इस वक़्त अपने पिछले जनम के युग में अपने घर के पीछे कड़ी हुई थी जिससे उससे पहचान ने में थोड़ा वक़्त लगा पर उसने उस जगह को पहचान लिया....
अवंतिका- मई यहाँ kaise?????ye सब हो क्या रहा है????
कैसी हो पुत्री.............
ये आवाज़ अवंतिका के पीछे से आ रही thi.....awaaz सुन अवंतिका तुरंत पलटी......
अवंतिका- बबाआआ........
अपने सामने अपने पिता गुरु विशिष्ट को देखकर अवंतिका के आखों से आंसू निकलने लगा......
BABA......bas एक hi शब्द निकल पाया उसके मुँह से.......
अवंतिका दौड़ कर गयी और उसके पितः के गले लग गयी.........
बाबा- क्या हुआ putri?????mujhe तोह लगा था की मुझे पुनः अपने सामने देखकर तुम प्रस्सन हो जाओगी किन्तु तुम तोह रो रही हो????
अवंतिका- ये ख़ुशी के आंसू है baba.....aapko अपने सामने देखकर मुझे कितना ाचा लग रहा है ये मई आपको बता नहीं सकती.........
मुझे तोह उम्मीद hi नहीं थी की मई आपको फिरसे देख paaungi.......aur अब मई आपको कहीं भी नहीं जाने dungi...aap हमेशा मेरे साथ hi रहेंगे....
बाबा विशिष्ट- putri,kya तुम्हे यहाँ कुछ भी अजीब नहीं लग रहा????
अब तक अवंतिका नार्मल हो चुकी थी......
अवंतिका- हाँ baba,ye जगह तोह मेरे पिछले जनम की hai..wo सामने हमारा उस वक़्त का घर है......
बाबा विशिष्ट- हाँ putri........ye तुम्हारे पिछले जनम का hi गाओं है..
अवंतिका- किन्तु baba????hum यहाँ कैसे?????
बाबा विशिष्ट- किसने कहा की तुम यहाँ आयी हो????
अवंतिका को अपने पिता की बात का मतलब समझ नहीं आया....
अवंतिका- मई समझी नहीं बाबा????
बाबा विशिष्ट- तुम अभी एक स्वप्न में हो putri.......ye जो कुछ भी तुम देख रही ho,ye सब तुम्हारे मस्तिष्क में हो रही रचना है....
अवंतिका अपने पिता की बात को सुनकर पहले शॉकेड हुई पर फिर कुछ सोचकर एकदम उदास हो गयी......
बाबा विशिष्ट- क्या हुआ putri????tum उदास क्यों हो गयी?????
अवंतिका- अगर ये मेरा सपना hai,iska मतलब ये सब बस एक झूठ hai,aap सिर्फ मेरे सपने का एक हिस्सा हैं और मेरे आँख खुलते hi सब पहले जैसा हो जाएगा....
गुरु विशिष्ट अपनी पुत्री की बात को सुनकर मुस्करये और फिर कहा.....
गुरु विशिष्ट- putri,ye सपना ज़रूर है किन्तु सत्य भी hai...ye सच है की ये साड़ी चीज़ें तुम्हारे दिमाग में चल रही हैं पर ये भी उतना hi सच है की मई तुमसे मिलने आया हूँ........
अवंतिका तोह बस अपने पिता की बात को ठीक से समझने की कोशिश कर रही थी.....
अवंतिका- आप कह रहे हैं की ये सपना सपना होकर भी एक हक़ीक़त hai???par ये कैसे मुमकिन है???
गुरु विशिष्ट- परमेश्वर के लिए और उसके पुत्र के लिए कुछ भी असंभव नहीं है पुत्री.......
अवंतिका- मुझे आपकी कोई भी बात समझ में नहीं आ रही है बाबा........
गुरु विशिष्ट- धीरे धीरे सब समझ जाओगी putri....pehle अपने गाओं तोह घूम लो....
तुम्हे बोहोत ीचा हो रही थी न एक बार अपने पिछले जनम की मातृभूमि को फिर से देखने की...
अवंतिका- हाँ baba,par आपको कैसे pata????kya इसीलिए आपने इस सपने को मेरे दिमाग में डाला है ताकि मई अपने गाओं को एक बार फिर से देख सकूँ!!!!!!
गुरु विशिष्ट- putri,mera जीवन काल समाप्त हो चूका hai..ab मुझमे इतनी शक्ति या सामर्त्य नहीं है की मई ऐसा कुछ कर सकूँ......
तुम्हारी इच्छा को पूरा करने में किसी और का हाथ है और मई स्वयं भी उसी के आदेश के कारण मृत्यु के पश्चात भी तुमसे पुनः मिल पाया hun.....l
वैसे तोह अवंतिका को अभी तक काफी झटके लग चुके the,par ये बात उसके लिए सबसे बड़ा झटका था.....
अवंतिका- कौन baba???kaun है वो जिसने ये सब किया है और वो भी मेरे लिए....
गुरु विशिष्ट- मैंने कहा न putri...dheere धीरे सब समझ जाओगी....
chalo,apni ीचा पूरी कर लो.........
अवंतिका- जी बाबा....
अवंतिका अपने पिता के साथ अपने गाओं को एक और बार देखने निकल पड़ी.....
अपने गाओं को पुनः एक बार अपने सपने में hi sahi,par अपने आखों के सामने देखकर अवंतिका बोहोत खुश हो गयी थी......
और वहीँ गुरु विशिष्ट अपनी पुत्री को खुश देखकर खुश हो रहे थे.....
इधर उधर देखते हुए अवंतिका अपने पिछले जनम में किये गए सारे shararate,saare खेले गए खेल अपने पितः को बताती जा रही थी......
फिर एक जगह आकर अवंतिका रूक gayi....uske सामने जो था उससे देखकर उसके चेहरे पर khushi,excitement और निराशा, तीनो भाव एक साथ आ गए थे....
अवंतिका के चेहरे के इन बदलते भावों को उसके पिता ने देख लिया......
गुरु विशिष्ट- क्या हुआ putri???kya सोच रही हो???
अवंतिका ने कुछ कहा नहीं बल्कि अपनी एक ऊँगली सामने कर दी...
अवंतिका के सामने घास के बॉर्डर्स के बीच रथ राखी हुई थी जिसके तरफ उसने अपनी ऊँगली पॉइंट की थी....
गुरु विशिष्ट- मॉल मिटटी...........
अवंतिका- हाँ baba,MAL MITTI....ek ऐसी चमत्कारिक मिटटी जिससे बने घड़े या कटोरी के अंदर अगर गन्दा पानी भी रखा जाए तोह वो पानी भी साफ़ हो जाय करता है....
जिससे बने बर्तन या कढ़ाई में अगर गन्दा या सदा हुआ खाना भी रखा जाए तोह वो भी स्वच्छ हो जाता है....
गुरु विशिष्ट- हमें ये बातें ज्ञात हैं पुत्री....
अवंतिका- पता है baba,mai हमेशा से इस मॉल मिटटी के राज़ को सुलझाना चाहती थी...
मुझे पूरा यकीन था की इससे और भी बोहोत कुछ किया जा सकता है पर मई इस हक़ीक़त को बे पर्दा करने से पहले hi मर गयी.....
गुरु विशिष्ट- पिछले जनम के अधूरे कर्मो को याद करके अफ़सोस करने से कुछ प्राप्त नहीं होगा पुत्री......
अवंतिका ने बस अपनी मुंडी हाँ में हिला di,par तभी उससे कुछ याद आया....
अवंतिका- baba,aapne कहा था की ये सब मेरा सपना होने के बावजूद भी एक हक़ीक़त है.......!!!!!
गुरु विशिष्ट- हाँ पुत्री....
ये कहते वक़्त गुरु विशिष्ट के होंठों पर एक समझने और संतुष्टि भरी मुस्कराहट आ गयी जैसे की वो जानते हों की उनकी पुत्री आगे क्या कहने वाली है.....
अवंतिका- तोह क्या मई इस मॉल मिटटी को एक बार छू सकती हूँ..........??????
गुरु विशिष्ट- अवश्य पुत्री......
अवंतिका आगे बढ़ी और उसने एक हाथ में उस मॉल मीठी को उठा लिया
पर तभी..............
अवंतिका- arre,ye क्या hua?????aur ये कौन सी जगह है??????
हुआ ये की अवंतिका के मॉल मिटटी को उठाते hi अवंतिका के हाथ में एक रौशनी हुई और वो मिटटी गायब हो गयी....
इतना hi nahi,mitti के गायब होते hi एक और बार हर तरफ तेज़ रौशनी हुई और अवंतिका और उसके बाबा जहाँ खड़े the,wo जगह भी बदल गयी......
अब वो दोनों एक अंतहीन रौशनी से भरी जगह के बीच खड़े थे....
गुरु विशिष्ट- तुम तुम्हारे स्वप्न की दुनिया के सरहद पर हैं putri...kisi भी वक़्त तुम अपनी नींद से जाग सकती हो..
अपने बाबा की बात सुनकर अवंतिका की आँखों में एक बार फिरसे आंसू आ गए....
अवंतिका- कुछ कीजिये न baba...mai आपसे फिरसे अलग नहीं होना चाहती हूँ.......
गुरु विशिष्ट- putri,mai तोह कबका संसार त्याग चूका hun.tumhe तोह खुश होना चाहिए की मेरे मरने के बाद भी तुम मुझसे मिल पायी......
अवंतिका- तोह क्या आप फिरसे मुझसे मिलने नहीं आएंगे...
गुरु विशिष्ट- मैंने पहले भी कहा था पुत्री की मुझमे इतना सामर्थ्य नहीं है की खुद यहाँ तुमसे मिलने आ सकूँ..
गुरु विशिष्ट की बात सुनकर अचानक अवंतिका को कुछ याद आया......
अवंतिका- baba,agar आप अपनी मर्ज़ी से यहाँ मेरे पास नहीं आ सकते तोह फिर उस दिन दिग्विजय के घर में आपने मुझे कैसे बचाया?????
अपनी बेटी की बात सुनकर गुरु विशिष्ट के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी....
गुरु विशिष्ट- तुम्हे किसने कहा की मैंने तुम्हे दिग्विजय से बचाया था???
अवंतिका को तोह अभी तक यही लग रहा था की उस दिन उससे उसके
पिता ने hi बचाया था..
पर अपने पिता की बात सुनकर अवंतिका को एक झटका लगा.....
अवंतिका- kya????toh क्या आपने मुझे नहीं bachaya????toh फिर किसने????
गुरु विशिष्ट आगे बढे और उन्होंने अपनी पुत्री के सर के ऊपर हाथ रख diya....AVANTIKA के दिमाग के अंदर एक जगह की फोटो दिखने लगी...
अवंतिका- ये जगह तोह!!!!!!
गुरु विशिष्ट- अभी जब तुम्हारी नींद खुलेगी तोह तुम इस जगह पर चले jaana.tumhe सब पता चल जाएगा......
और जैसे hi अवंतिका ने हाँ में अपना सर hilaya,us जगह पर एक तेज़ रौशनी चमकी जिससे अवंतिका की आँखें बंद हो गयी.....
और अगले hi पल जैसे hi अवंतिका की आंखें khuli,toh वो अपने रूम में thi.....iska मतलब इस बार उसकी आँखें उसके सपने में नहीं बल्कि हक़ीक़त में खुली थी...
अवंतिका झट से उठकर बैठ गयी और अभी अभी जो भी hua,uske बारे में सोचने लगी....
अपने पितः को एक बार फिरसे मिलकर कभी उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती तोह कभी अपने बाबा से फिरसे बिछड़ने का एहसास होते hi वो मायूस हो जाती......
की तभी उससे अपने पिता की आखरी कही हुई बात याद आयी की नींद खुलते hi उससे एक जगह पर जाना है.....
अवंतिका झट से अपने बीएड से कूदि और फ्रेश होकर अपने पिता की बताई जगह पर निकल गयी........
प्लेनेट- एअर्थ
प्लेस- मैजिकल डायमेंशन
साले एक नंबर के ढीठ hain....hum जो भी सोचते hain,inhe पहले से hi पता चल जाता है......
क्लोन COMBAT.......pichle 10 दिनों से अंजलि और रोनित हर दिन 12 घंटे लगातार क्लोन कॉम्बैट फाइटिंग की ट्रेनिंग कर रहे हैं पर अभी तक अपने क्लोन्स को हारने में दोनों hi कामियाब नहीं हो पाए हैं....
मई दोनों से थोड़ी hi दूर बैठा उनकी हालत को देख कर मुस्कुरा रहा था.....
अंजलि- हां yaar.samajh hi नहीं आ रहा है की इनपे कौन सा डाव आज़माएँ.....
ये V.J भी naa,najaane इसके दिमाग में कैसे कैसे आइडियाज आते रहते हैं जिनका उसे ये हमारे ऊपर hi करता है...
रोनित- और उसके ऊपर बैठ कर है रहा है कमीना..........
मई- अब्बे असली फाइट में भी इतना टाइम लोगे kya?????tumhara दुश्मन तुम्हारे सोच को आईडिया में बदलने तक का वेट तोह करेगा नहीं...
असली फाइट में हर चीज़ रिफ्लेक्स होती hai.....har एक सेकंड जिससे तुम सोचने के लिए उसे कर रहे ho,asli लड़ाई में उतने hi बार तुम दोनों hi मर चुके होंगे.....
रोनित- bhai,bolna जितना आसान hai,karna उतना hi mushkil.....hume खुद से hi लड़ना पद रहा hai,aise में हम अपने क्लोन पर कैसे कोई भी वार सक्सेस्फुल्ली कर सकते हैं???
उसके पास तोह हमारे हर वार का जवाब तोह होगा hi ना....
रोनित की बात सुनकर में मुस्कुराया और खड़े हो गया.....
मई- ये बात तू नहीं तेरे अंदर का वो योद्धा बोल रहा है जिसने हार मान ली है...
युद्ध शारीरिक ho,ya maansik,ATTITUDE होना ज़रूरी है क्यूंकि इसी से हमारे लिए गए हर फैसले में निखार आता है......
स्वयं प्रतिकृति......
सेल्फ क्लोनिंग...........
मैंने अपने सर से एक बाल तोडा और स्पेल बोलकर बाल को फेक दिया.......
वो बाल हवा में लहराता हुआ ज़मीं की तरफ जाने लगा और जैसे hi वो बाल ज़मीं से takraya,us जगह पर धुआँ चा गया और जब धुआँ छत्ता तोह वहां मेरा क्लोन खड़ा था....
ऐसा hi एक क्लोन मैंने 1सत CHAPTER में गुरु विशाखत के साथ भेजा tha..is क्लोन के दिमाग में वो सारे डाव पेंच होते हैं जिनका उसे मई करता हूँ....
मई- तुम सब थोड़ा साइड हो जाओ...
मेरे कहते hi ओरिजिनल और फेक रोनित और अंजलि चरों एक साइड में हो गए.....
मई- प्रवाह अविद्याती.......
करंट स्विंग......
स्पांडोलिका..........
स्पिन बैकवर्डस & फॉरवर्ड......
जलम परिग्रह.........
वाटर फाॅर्स........
प्रतिलोमका अभिसार.....
रिवर्स अटैक.......
मैंने ये चार मंत्र एक के बाद एक लगातार बोले the...par पहले दो मंत्र का उच्चारित होना एक सा था वहीँ तीसरे और चौथे मन्त्रों का उच्चारित होना अलग...
वो इसीलिए क्यूंकि पहले दो मंत्र मैंने सोच कर बोले थे पर तीसरे और चौथे मंत्र मेरे मुँह से अपने आप निकले थे...
उन्हें उच्चारित करने से पहले मेरे दिमाग में बस यही ख्याल आया था की मुझे अपने क्लोन को नुक्सान पहुँचाना है.....
मेरे पहले मंत्र के बोलते hi मेरे शरीर से करंट की रेज़ निकलकर मेरे सामे खड़े क्लोन की तरफ जाने लगी...
मेरे क्लोन ने अपने हाथ आगे किये ताकि उसके पास आने से पहले hi रेज़ ख़त्म हो जाएँ पर तभी मेरे दूसरे स्पेल के प्रभाव में आकर वो करंट रेज़ आगे और पीछे दोनों तरफ से फ्लोट करते हुए मेरे क्लोन की तरफ जाने लगे....
मेरा हुम्ला और घातक हो चूका था पर मेरे क्लोन के लिए इससे हैंडल करना कोई बड़ी बात तोह थी नहीं...
मेरे क्लोन ने अपनी hi जगह पर गोल गोल घूमना शुरू कर दिया जिसकी वजा से उसके हर तरफ हवा का एक बवंडर उठ गया...
और जैसे hi मेरे द्वारा छोड़े गए दुररेंट रेज़ उस बवंडर के पास pahunche,us बवंडर ने करंट रेज़ को अपने अंदर खींच लिया....
करंट रेज़ के बवंडर के अंदर जाते hi बवंडर के घूमने की स्पीड और बढ़ गयी और कुछ hi पलों में उस बवंडर ने करंट की साड़ी ऊर्जा निचोड़ ली.....
पर तभी............
मेरे द्वारा बोले गए तीसरे स्पेल ने अपना आधे से ज़्यादा काम कर दिया था......
जैसा की मैंने बताया की मैंने आखरी के दोनों मंत्र को बिना सोचे बोलै था इसीलिए मेरा तीसरा स्पेल जो की वाटर फाॅर्स का tha,usne उस बवंडर को जो की लगभग ख़त्म हो hi गया tha,uske बीच से होते हुए मेरे क्लोन के बॉडी से टकराया....
ये हुम्ला बोहोत घातक tha,par क्यूंकि मेरे क्लोन का बॉडी भी मेरी hi तरह था इसीलिए उससे ज़्यादा कुछ हुआ नहीं...
बस उससे अपने शरीर में हल्का धक्का सा लगा और वो थोड़ा पीछे हो गया...
पर मई इतना hi चाहता tha..mere स्पेल को ना रोक पाने और पीछे की तरफ हटने की वजह से मेरे क्लोन का दिमाग घुमा और तभी मेरे 4तह स्पेल ने अपना काम कर दिया.....
मेरा चौथा स्पेल मेरे क्लोन के बोले गए स्पेल को वापस उसी की तरफ घूमने का था......
पीछे हतेहते hi मेरे क्लोन ने मुझपर एक एनर्जी रे से हुम्ला किया पर उसका छोड़ा गया रे थोड़ा आगे जाकर वापस घूम गया और जाकर उससे hi टकरा गया...
क्यूंकि ये रे उसकी खुद की शक्ति का एक रूप था इसीलिए उस रे के टकराते hi मेरा क्लोन दूर जाकर गिरा...
वहीँ मैंने जैसे hi मेरे क्लोन के छोड़े गए एनर्जी रे को वापस घूमते हुए dekha,mere हाथों में एक तलवार चमक गयी....
मई अपने स्थान से सामने की तरफ कूड़ा और रे के प्रभाव से मेरा क्लोन जहाँ जस्ट गिरा tha,mai उसी जगह पर पहुँच गया और अगले hi पल मेरी तलवार बिजली की स्पीड से चली....
मेरा क्लोन जो अभी तक ये समझ नहीं पाया था की हुआ क्या hai,wo मेरे इस हमले को संभल नहीं पाया और मेरे मेरा तलवार उसके आर पार हो गया....
उसके शरीर पर तलवार का स्पर्श होते hi वो धुआं बन कर गायब हो गया था और मेरा तलवार उसी धुंए के आर पार हुआ था...
मेरे क्लोन के गायब होने का मतलब था की मई जीत गया हूँ.....
अपने क्लोन को हराकर मैंने अपनी तलवार गायब की और जैसे hi पलटा तोह मुझे हसी आ गयी....
मुझसे कुछ hi दूर मेरे दोनों दोस्त मुझे आँखें फाड़े देख रहे थे.....
मई चलते हुए उनके सामने पहुँच गया...
अंजलि- तूने ये कैसे किया????
मई- नजरिया babes,ATTITUDE.jab तक ये नहीं badloge,kuch भी हासिल नहीं कर पाओगे.....
अपने दिमाग से इस बात को निकल दो की ये नहीं हो sakta,sab कुछ अपने आप हो जाएगा...
मैंने जो भी kiya,bina सोचे समझे किया....
इससे रिफ्लेक्स अटैक कहते hain...isme बस हमे इतना hi पता होता है की हमे सामने वाले पर हुम्ला करना है पर लास्ट मोमेंट तक ये नहीं पता होता की हम कैसा हुम्ला करने वाले हैं....
जब हमे hi नहीं मालुम होगा की हम क्या करने वाले hain,toh हमारे दुश्मनो को कैसे कुछ पता होगा????
उसने जितना भी हमारे ऊपर होम वर्क किया hoga,wo सब फ़ैल हो जाएगा......
रोनित- अमेजिंग DUDE..............aur अब मई भी सब समझ गया hun.........ab dekh,mai भी कैसे इससे हारता हूँ...
रोनित ने अपने साइड में खड़े अपने क्लोन को देखकर कहा.........
अंजलि- मई nahi,hum.....
मई- bilkul,par आज नहीं kal........aaj के लिए मेरा तुम दोनों को दिया गया ये डेमोंस्ट्रेशन hi काफी है.....
घर जाओ और आज मैंने जो भी kiya,uske बारे में ठीक से सोचो....
फिर कल तुम दोनों आकर अपनी प्रैक्टिस आगे बढ़ाना....
रोनित- ये भी ठीक hai.par एक second!!!!hum दोनों matlab?????tu नहीं आएगा क्या कल???
मई- nahi...........mujhe कहीं जाना है.......
दोनों- kyun????aur कहाँ?????
और जैसे hi मैंने दोनों को कल मेरे ना आने का कारण bataya,dono मेरे ऊपर कूद गए....
रोनित- saale,aaj तुझे नहीं छोड़ेंगे.....
अंजलि- और नहीं तोह kya...tu भूल gaya,tune क्या कहा था हम दोनों से???
मई- abbe,meri बात तोह सुनो..........
रोनित- नहीं सुनना तेरी कोई baat.tu फिर हम दोनों को अपनी बातों में लपेट लेगा.....
मई- नहीं bhai,aisa कुछ नहीं hoga..ek बार सुन तोह ले....
अंजलि- ाचा bol...par कोई डीएलओगे मारा न तोह तुझे छोड़ेंगे नहीं...
ये बोलकर अंजलि ने मुझे छोड़ diya.ab G.F ने कुछ बोलै हो और B.F न sune,aisa तोह होगा nahi,isliye अंजलि के मुझे छोड़ते hi रोनित ने भी मुझे छोड़ दिया...
फिर मई उन दोनों को आगे के बारे में कुछ कुछ बताता चला gaya.....meri बात सुनकर दोनों खुश हो गए.......
रोनित- तू सच बोल रहा है naa..kahin गोली तोह नहीं दे रहा है......
मई- नहीं भाई........
अंजलि- पर अभी hi क्यों नहीं........
मई- वही बताने जा रहा हूँ......
मैंने अपना हाथ आगे kiya,mere हाथों से एक रौशनी निकली और एक बार फिरसे हमारे सामने मेरा क्लोन आ गया...
अंजलि- अब इसकी क्या ज़रुरत है....
मई- मेरी जगह ये तुम दोनों एक साथ जाएगा......
इससे पहले की उन दोनों में से कोई इसकी वजह puchta,mai उन्हें कुछ बातें बताने लगा जिससे सुनकर वो शॉकेड हो गए...
रोनित- पर तूने ऐसा क्यों किया???
मई- हर बात मई तुम दोनों को अभी नहीं बता सकता yaar.par भरोसा rakho,ye ज़रूरी hai......aur सही वक़्त आने पर तुम दोनों को अपने आप पता चल जाएगा.....
रोनित फिर भी मुझसे कुछ पूछना चाहता था पर अंजलि ने उससे ऐसा करने से रोक दिया...
अंजलि- ठीक hai......toh अब क्या????
मई- और कुछ nahi..bas इससे लेकर जहाँ से मैंने बोलै hai,wahan से hi बाहर निकलना और फिर तुम्हे क्या करना hai,ye तोह तुम्हे बता hi चूका हूँ....
रोनित- ठीक hai.par हम इंतज़ार करेंगे.......
मैंने- पता है.......
और अगले hi पल मई गायब हो गया......
रोनित और अंजलि ने एक लम्बी सांस छोड़ी और मेरे क्लोन के साथ मिलकर एक जगह उन्होंने मैजिक दूर बनायीं और गायब हो गए.....
रोनित ने एक सुनसान जगह चुनी थी उस मैजिकल डायमेंशन से बाहर आने के लिए....
पर जैसे hi तीनो बहार aaye,unke सामने कोई खड़ा था जो उन तीनो को आँखें फाडे देख रहा था.....
पर RONIT,ANJALI और मेरे क्लोन को अपने सामने वाले को देखकर नार्मल hi रहे मानो उन्हें पहले से पता था की यही होने वाला है......
रोनित ने अपने पीछे खुले मैजिक दूर को बंद कर दिया........
अंजलि- what's उप अवंतिका.......????????
प्लेनेट- ************
प्लेस- ************
मई- उठ जाइये.............
मेरे सामने जो अपने घुटनो के बल बैठा हुआ tha,mere बोलने पर वो खड़ा हो गया पर अब भी उसका सर नीचे hi था........
मैंने एक लम्बी सांस छोड़ी और अपने सामने के नज़ारे को देखने लगा........
मई- तोह फाइनली मेरा सफर शुरू हो GAYA.....AUR मेरे सामने है मेरे सफर का पहला पड़ाव........
थे वर्ल्ड ऑफ़ वारियर्स.......
आज के लिए इतना HI........
आपका अपना V..J.......
अब आगे:-
CHAPTER-2
( कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन )
अपडेट-72
PLANET-EARTH
प्लेस- ड्रीम लैंड
ये कौनसी जगह hai????aisa लग रहा है जैसे मई यहाँ पहले भी आ चुकी हूँ.......!!!!
अरे ये तोह...!!!!!!!!!
अवंतिका इस वक़्त अपने पिछले जनम के युग में अपने घर के पीछे कड़ी हुई थी जिससे उससे पहचान ने में थोड़ा वक़्त लगा पर उसने उस जगह को पहचान लिया....
अवंतिका- मई यहाँ kaise?????ye सब हो क्या रहा है????
कैसी हो पुत्री.............
ये आवाज़ अवंतिका के पीछे से आ रही thi.....awaaz सुन अवंतिका तुरंत पलटी......
अवंतिका- बबाआआ........
अपने सामने अपने पिता गुरु विशिष्ट को देखकर अवंतिका के आखों से आंसू निकलने लगा......
BABA......bas एक hi शब्द निकल पाया उसके मुँह से.......
अवंतिका दौड़ कर गयी और उसके पितः के गले लग गयी.........
बाबा- क्या हुआ putri?????mujhe तोह लगा था की मुझे पुनः अपने सामने देखकर तुम प्रस्सन हो जाओगी किन्तु तुम तोह रो रही हो????
अवंतिका- ये ख़ुशी के आंसू है baba.....aapko अपने सामने देखकर मुझे कितना ाचा लग रहा है ये मई आपको बता नहीं सकती.........
मुझे तोह उम्मीद hi नहीं थी की मई आपको फिरसे देख paaungi.......aur अब मई आपको कहीं भी नहीं जाने dungi...aap हमेशा मेरे साथ hi रहेंगे....
बाबा विशिष्ट- putri,kya तुम्हे यहाँ कुछ भी अजीब नहीं लग रहा????
अब तक अवंतिका नार्मल हो चुकी थी......
अवंतिका- हाँ baba,ye जगह तोह मेरे पिछले जनम की hai..wo सामने हमारा उस वक़्त का घर है......
बाबा विशिष्ट- हाँ putri........ye तुम्हारे पिछले जनम का hi गाओं है..
अवंतिका- किन्तु baba????hum यहाँ कैसे?????
बाबा विशिष्ट- किसने कहा की तुम यहाँ आयी हो????
अवंतिका को अपने पिता की बात का मतलब समझ नहीं आया....
अवंतिका- मई समझी नहीं बाबा????
बाबा विशिष्ट- तुम अभी एक स्वप्न में हो putri.......ye जो कुछ भी तुम देख रही ho,ye सब तुम्हारे मस्तिष्क में हो रही रचना है....
अवंतिका अपने पिता की बात को सुनकर पहले शॉकेड हुई पर फिर कुछ सोचकर एकदम उदास हो गयी......
बाबा विशिष्ट- क्या हुआ putri????tum उदास क्यों हो गयी?????
अवंतिका- अगर ये मेरा सपना hai,iska मतलब ये सब बस एक झूठ hai,aap सिर्फ मेरे सपने का एक हिस्सा हैं और मेरे आँख खुलते hi सब पहले जैसा हो जाएगा....
गुरु विशिष्ट अपनी पुत्री की बात को सुनकर मुस्करये और फिर कहा.....
गुरु विशिष्ट- putri,ye सपना ज़रूर है किन्तु सत्य भी hai...ye सच है की ये साड़ी चीज़ें तुम्हारे दिमाग में चल रही हैं पर ये भी उतना hi सच है की मई तुमसे मिलने आया हूँ........
अवंतिका तोह बस अपने पिता की बात को ठीक से समझने की कोशिश कर रही थी.....
अवंतिका- आप कह रहे हैं की ये सपना सपना होकर भी एक हक़ीक़त hai???par ये कैसे मुमकिन है???
गुरु विशिष्ट- परमेश्वर के लिए और उसके पुत्र के लिए कुछ भी असंभव नहीं है पुत्री.......
अवंतिका- मुझे आपकी कोई भी बात समझ में नहीं आ रही है बाबा........
गुरु विशिष्ट- धीरे धीरे सब समझ जाओगी putri....pehle अपने गाओं तोह घूम लो....
तुम्हे बोहोत ीचा हो रही थी न एक बार अपने पिछले जनम की मातृभूमि को फिर से देखने की...
अवंतिका- हाँ baba,par आपको कैसे pata????kya इसीलिए आपने इस सपने को मेरे दिमाग में डाला है ताकि मई अपने गाओं को एक बार फिर से देख सकूँ!!!!!!
गुरु विशिष्ट- putri,mera जीवन काल समाप्त हो चूका hai..ab मुझमे इतनी शक्ति या सामर्त्य नहीं है की मई ऐसा कुछ कर सकूँ......
तुम्हारी इच्छा को पूरा करने में किसी और का हाथ है और मई स्वयं भी उसी के आदेश के कारण मृत्यु के पश्चात भी तुमसे पुनः मिल पाया hun.....l
वैसे तोह अवंतिका को अभी तक काफी झटके लग चुके the,par ये बात उसके लिए सबसे बड़ा झटका था.....
अवंतिका- कौन baba???kaun है वो जिसने ये सब किया है और वो भी मेरे लिए....
गुरु विशिष्ट- मैंने कहा न putri...dheere धीरे सब समझ जाओगी....
chalo,apni ीचा पूरी कर लो.........
अवंतिका- जी बाबा....
अवंतिका अपने पिता के साथ अपने गाओं को एक और बार देखने निकल पड़ी.....
अपने गाओं को पुनः एक बार अपने सपने में hi sahi,par अपने आखों के सामने देखकर अवंतिका बोहोत खुश हो गयी थी......
और वहीँ गुरु विशिष्ट अपनी पुत्री को खुश देखकर खुश हो रहे थे.....
इधर उधर देखते हुए अवंतिका अपने पिछले जनम में किये गए सारे shararate,saare खेले गए खेल अपने पितः को बताती जा रही थी......
फिर एक जगह आकर अवंतिका रूक gayi....uske सामने जो था उससे देखकर उसके चेहरे पर khushi,excitement और निराशा, तीनो भाव एक साथ आ गए थे....
अवंतिका के चेहरे के इन बदलते भावों को उसके पिता ने देख लिया......
गुरु विशिष्ट- क्या हुआ putri???kya सोच रही हो???
अवंतिका ने कुछ कहा नहीं बल्कि अपनी एक ऊँगली सामने कर दी...
अवंतिका के सामने घास के बॉर्डर्स के बीच रथ राखी हुई थी जिसके तरफ उसने अपनी ऊँगली पॉइंट की थी....
गुरु विशिष्ट- मॉल मिटटी...........
अवंतिका- हाँ baba,MAL MITTI....ek ऐसी चमत्कारिक मिटटी जिससे बने घड़े या कटोरी के अंदर अगर गन्दा पानी भी रखा जाए तोह वो पानी भी साफ़ हो जाय करता है....
जिससे बने बर्तन या कढ़ाई में अगर गन्दा या सदा हुआ खाना भी रखा जाए तोह वो भी स्वच्छ हो जाता है....
गुरु विशिष्ट- हमें ये बातें ज्ञात हैं पुत्री....
अवंतिका- पता है baba,mai हमेशा से इस मॉल मिटटी के राज़ को सुलझाना चाहती थी...
मुझे पूरा यकीन था की इससे और भी बोहोत कुछ किया जा सकता है पर मई इस हक़ीक़त को बे पर्दा करने से पहले hi मर गयी.....
गुरु विशिष्ट- पिछले जनम के अधूरे कर्मो को याद करके अफ़सोस करने से कुछ प्राप्त नहीं होगा पुत्री......
अवंतिका ने बस अपनी मुंडी हाँ में हिला di,par तभी उससे कुछ याद आया....
अवंतिका- baba,aapne कहा था की ये सब मेरा सपना होने के बावजूद भी एक हक़ीक़त है.......!!!!!
गुरु विशिष्ट- हाँ पुत्री....
ये कहते वक़्त गुरु विशिष्ट के होंठों पर एक समझने और संतुष्टि भरी मुस्कराहट आ गयी जैसे की वो जानते हों की उनकी पुत्री आगे क्या कहने वाली है.....
अवंतिका- तोह क्या मई इस मॉल मिटटी को एक बार छू सकती हूँ..........??????
गुरु विशिष्ट- अवश्य पुत्री......
अवंतिका आगे बढ़ी और उसने एक हाथ में उस मॉल मीठी को उठा लिया
पर तभी..............
अवंतिका- arre,ye क्या hua?????aur ये कौन सी जगह है??????
हुआ ये की अवंतिका के मॉल मिटटी को उठाते hi अवंतिका के हाथ में एक रौशनी हुई और वो मिटटी गायब हो गयी....
इतना hi nahi,mitti के गायब होते hi एक और बार हर तरफ तेज़ रौशनी हुई और अवंतिका और उसके बाबा जहाँ खड़े the,wo जगह भी बदल गयी......
अब वो दोनों एक अंतहीन रौशनी से भरी जगह के बीच खड़े थे....
गुरु विशिष्ट- तुम तुम्हारे स्वप्न की दुनिया के सरहद पर हैं putri...kisi भी वक़्त तुम अपनी नींद से जाग सकती हो..
अपने बाबा की बात सुनकर अवंतिका की आँखों में एक बार फिरसे आंसू आ गए....
अवंतिका- कुछ कीजिये न baba...mai आपसे फिरसे अलग नहीं होना चाहती हूँ.......
गुरु विशिष्ट- putri,mai तोह कबका संसार त्याग चूका hun.tumhe तोह खुश होना चाहिए की मेरे मरने के बाद भी तुम मुझसे मिल पायी......
अवंतिका- तोह क्या आप फिरसे मुझसे मिलने नहीं आएंगे...
गुरु विशिष्ट- मैंने पहले भी कहा था पुत्री की मुझमे इतना सामर्थ्य नहीं है की खुद यहाँ तुमसे मिलने आ सकूँ..
गुरु विशिष्ट की बात सुनकर अचानक अवंतिका को कुछ याद आया......
अवंतिका- baba,agar आप अपनी मर्ज़ी से यहाँ मेरे पास नहीं आ सकते तोह फिर उस दिन दिग्विजय के घर में आपने मुझे कैसे बचाया?????
अपनी बेटी की बात सुनकर गुरु विशिष्ट के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी....
गुरु विशिष्ट- तुम्हे किसने कहा की मैंने तुम्हे दिग्विजय से बचाया था???
अवंतिका को तोह अभी तक यही लग रहा था की उस दिन उससे उसके
पिता ने hi बचाया था..
पर अपने पिता की बात सुनकर अवंतिका को एक झटका लगा.....
अवंतिका- kya????toh क्या आपने मुझे नहीं bachaya????toh फिर किसने????
गुरु विशिष्ट आगे बढे और उन्होंने अपनी पुत्री के सर के ऊपर हाथ रख diya....AVANTIKA के दिमाग के अंदर एक जगह की फोटो दिखने लगी...
अवंतिका- ये जगह तोह!!!!!!
गुरु विशिष्ट- अभी जब तुम्हारी नींद खुलेगी तोह तुम इस जगह पर चले jaana.tumhe सब पता चल जाएगा......
और जैसे hi अवंतिका ने हाँ में अपना सर hilaya,us जगह पर एक तेज़ रौशनी चमकी जिससे अवंतिका की आँखें बंद हो गयी.....
और अगले hi पल जैसे hi अवंतिका की आंखें khuli,toh वो अपने रूम में thi.....iska मतलब इस बार उसकी आँखें उसके सपने में नहीं बल्कि हक़ीक़त में खुली थी...
अवंतिका झट से उठकर बैठ गयी और अभी अभी जो भी hua,uske बारे में सोचने लगी....
अपने पितः को एक बार फिरसे मिलकर कभी उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती तोह कभी अपने बाबा से फिरसे बिछड़ने का एहसास होते hi वो मायूस हो जाती......
की तभी उससे अपने पिता की आखरी कही हुई बात याद आयी की नींद खुलते hi उससे एक जगह पर जाना है.....
अवंतिका झट से अपने बीएड से कूदि और फ्रेश होकर अपने पिता की बताई जगह पर निकल गयी........
प्लेनेट- एअर्थ
प्लेस- मैजिकल डायमेंशन
साले एक नंबर के ढीठ hain....hum जो भी सोचते hain,inhe पहले से hi पता चल जाता है......
क्लोन COMBAT.......pichle 10 दिनों से अंजलि और रोनित हर दिन 12 घंटे लगातार क्लोन कॉम्बैट फाइटिंग की ट्रेनिंग कर रहे हैं पर अभी तक अपने क्लोन्स को हारने में दोनों hi कामियाब नहीं हो पाए हैं....
मई दोनों से थोड़ी hi दूर बैठा उनकी हालत को देख कर मुस्कुरा रहा था.....
अंजलि- हां yaar.samajh hi नहीं आ रहा है की इनपे कौन सा डाव आज़माएँ.....
ये V.J भी naa,najaane इसके दिमाग में कैसे कैसे आइडियाज आते रहते हैं जिनका उसे ये हमारे ऊपर hi करता है...
रोनित- और उसके ऊपर बैठ कर है रहा है कमीना..........
मई- अब्बे असली फाइट में भी इतना टाइम लोगे kya?????tumhara दुश्मन तुम्हारे सोच को आईडिया में बदलने तक का वेट तोह करेगा नहीं...
असली फाइट में हर चीज़ रिफ्लेक्स होती hai.....har एक सेकंड जिससे तुम सोचने के लिए उसे कर रहे ho,asli लड़ाई में उतने hi बार तुम दोनों hi मर चुके होंगे.....
रोनित- bhai,bolna जितना आसान hai,karna उतना hi mushkil.....hume खुद से hi लड़ना पद रहा hai,aise में हम अपने क्लोन पर कैसे कोई भी वार सक्सेस्फुल्ली कर सकते हैं???
उसके पास तोह हमारे हर वार का जवाब तोह होगा hi ना....
रोनित की बात सुनकर में मुस्कुराया और खड़े हो गया.....
मई- ये बात तू नहीं तेरे अंदर का वो योद्धा बोल रहा है जिसने हार मान ली है...
युद्ध शारीरिक ho,ya maansik,ATTITUDE होना ज़रूरी है क्यूंकि इसी से हमारे लिए गए हर फैसले में निखार आता है......
स्वयं प्रतिकृति......
सेल्फ क्लोनिंग...........
मैंने अपने सर से एक बाल तोडा और स्पेल बोलकर बाल को फेक दिया.......
वो बाल हवा में लहराता हुआ ज़मीं की तरफ जाने लगा और जैसे hi वो बाल ज़मीं से takraya,us जगह पर धुआँ चा गया और जब धुआँ छत्ता तोह वहां मेरा क्लोन खड़ा था....
ऐसा hi एक क्लोन मैंने 1सत CHAPTER में गुरु विशाखत के साथ भेजा tha..is क्लोन के दिमाग में वो सारे डाव पेंच होते हैं जिनका उसे मई करता हूँ....
मई- तुम सब थोड़ा साइड हो जाओ...
मेरे कहते hi ओरिजिनल और फेक रोनित और अंजलि चरों एक साइड में हो गए.....
मई- प्रवाह अविद्याती.......
करंट स्विंग......
स्पांडोलिका..........
स्पिन बैकवर्डस & फॉरवर्ड......
जलम परिग्रह.........
वाटर फाॅर्स........
प्रतिलोमका अभिसार.....
रिवर्स अटैक.......
मैंने ये चार मंत्र एक के बाद एक लगातार बोले the...par पहले दो मंत्र का उच्चारित होना एक सा था वहीँ तीसरे और चौथे मन्त्रों का उच्चारित होना अलग...
वो इसीलिए क्यूंकि पहले दो मंत्र मैंने सोच कर बोले थे पर तीसरे और चौथे मंत्र मेरे मुँह से अपने आप निकले थे...
उन्हें उच्चारित करने से पहले मेरे दिमाग में बस यही ख्याल आया था की मुझे अपने क्लोन को नुक्सान पहुँचाना है.....
मेरे पहले मंत्र के बोलते hi मेरे शरीर से करंट की रेज़ निकलकर मेरे सामे खड़े क्लोन की तरफ जाने लगी...
मेरे क्लोन ने अपने हाथ आगे किये ताकि उसके पास आने से पहले hi रेज़ ख़त्म हो जाएँ पर तभी मेरे दूसरे स्पेल के प्रभाव में आकर वो करंट रेज़ आगे और पीछे दोनों तरफ से फ्लोट करते हुए मेरे क्लोन की तरफ जाने लगे....
मेरा हुम्ला और घातक हो चूका था पर मेरे क्लोन के लिए इससे हैंडल करना कोई बड़ी बात तोह थी नहीं...
मेरे क्लोन ने अपनी hi जगह पर गोल गोल घूमना शुरू कर दिया जिसकी वजा से उसके हर तरफ हवा का एक बवंडर उठ गया...
और जैसे hi मेरे द्वारा छोड़े गए दुररेंट रेज़ उस बवंडर के पास pahunche,us बवंडर ने करंट रेज़ को अपने अंदर खींच लिया....
करंट रेज़ के बवंडर के अंदर जाते hi बवंडर के घूमने की स्पीड और बढ़ गयी और कुछ hi पलों में उस बवंडर ने करंट की साड़ी ऊर्जा निचोड़ ली.....
पर तभी............
मेरे द्वारा बोले गए तीसरे स्पेल ने अपना आधे से ज़्यादा काम कर दिया था......
जैसा की मैंने बताया की मैंने आखरी के दोनों मंत्र को बिना सोचे बोलै था इसीलिए मेरा तीसरा स्पेल जो की वाटर फाॅर्स का tha,usne उस बवंडर को जो की लगभग ख़त्म हो hi गया tha,uske बीच से होते हुए मेरे क्लोन के बॉडी से टकराया....
ये हुम्ला बोहोत घातक tha,par क्यूंकि मेरे क्लोन का बॉडी भी मेरी hi तरह था इसीलिए उससे ज़्यादा कुछ हुआ नहीं...
बस उससे अपने शरीर में हल्का धक्का सा लगा और वो थोड़ा पीछे हो गया...
पर मई इतना hi चाहता tha..mere स्पेल को ना रोक पाने और पीछे की तरफ हटने की वजह से मेरे क्लोन का दिमाग घुमा और तभी मेरे 4तह स्पेल ने अपना काम कर दिया.....
मेरा चौथा स्पेल मेरे क्लोन के बोले गए स्पेल को वापस उसी की तरफ घूमने का था......
पीछे हतेहते hi मेरे क्लोन ने मुझपर एक एनर्जी रे से हुम्ला किया पर उसका छोड़ा गया रे थोड़ा आगे जाकर वापस घूम गया और जाकर उससे hi टकरा गया...
क्यूंकि ये रे उसकी खुद की शक्ति का एक रूप था इसीलिए उस रे के टकराते hi मेरा क्लोन दूर जाकर गिरा...
वहीँ मैंने जैसे hi मेरे क्लोन के छोड़े गए एनर्जी रे को वापस घूमते हुए dekha,mere हाथों में एक तलवार चमक गयी....
मई अपने स्थान से सामने की तरफ कूड़ा और रे के प्रभाव से मेरा क्लोन जहाँ जस्ट गिरा tha,mai उसी जगह पर पहुँच गया और अगले hi पल मेरी तलवार बिजली की स्पीड से चली....
मेरा क्लोन जो अभी तक ये समझ नहीं पाया था की हुआ क्या hai,wo मेरे इस हमले को संभल नहीं पाया और मेरे मेरा तलवार उसके आर पार हो गया....
उसके शरीर पर तलवार का स्पर्श होते hi वो धुआं बन कर गायब हो गया था और मेरा तलवार उसी धुंए के आर पार हुआ था...
मेरे क्लोन के गायब होने का मतलब था की मई जीत गया हूँ.....
अपने क्लोन को हराकर मैंने अपनी तलवार गायब की और जैसे hi पलटा तोह मुझे हसी आ गयी....
मुझसे कुछ hi दूर मेरे दोनों दोस्त मुझे आँखें फाड़े देख रहे थे.....
मई चलते हुए उनके सामने पहुँच गया...
अंजलि- तूने ये कैसे किया????
मई- नजरिया babes,ATTITUDE.jab तक ये नहीं badloge,kuch भी हासिल नहीं कर पाओगे.....
अपने दिमाग से इस बात को निकल दो की ये नहीं हो sakta,sab कुछ अपने आप हो जाएगा...
मैंने जो भी kiya,bina सोचे समझे किया....
इससे रिफ्लेक्स अटैक कहते hain...isme बस हमे इतना hi पता होता है की हमे सामने वाले पर हुम्ला करना है पर लास्ट मोमेंट तक ये नहीं पता होता की हम कैसा हुम्ला करने वाले हैं....
जब हमे hi नहीं मालुम होगा की हम क्या करने वाले hain,toh हमारे दुश्मनो को कैसे कुछ पता होगा????
उसने जितना भी हमारे ऊपर होम वर्क किया hoga,wo सब फ़ैल हो जाएगा......
रोनित- अमेजिंग DUDE..............aur अब मई भी सब समझ गया hun.........ab dekh,mai भी कैसे इससे हारता हूँ...
रोनित ने अपने साइड में खड़े अपने क्लोन को देखकर कहा.........
अंजलि- मई nahi,hum.....
मई- bilkul,par आज नहीं kal........aaj के लिए मेरा तुम दोनों को दिया गया ये डेमोंस्ट्रेशन hi काफी है.....
घर जाओ और आज मैंने जो भी kiya,uske बारे में ठीक से सोचो....
फिर कल तुम दोनों आकर अपनी प्रैक्टिस आगे बढ़ाना....
रोनित- ये भी ठीक hai.par एक second!!!!hum दोनों matlab?????tu नहीं आएगा क्या कल???
मई- nahi...........mujhe कहीं जाना है.......
दोनों- kyun????aur कहाँ?????
और जैसे hi मैंने दोनों को कल मेरे ना आने का कारण bataya,dono मेरे ऊपर कूद गए....
रोनित- saale,aaj तुझे नहीं छोड़ेंगे.....
अंजलि- और नहीं तोह kya...tu भूल gaya,tune क्या कहा था हम दोनों से???
मई- abbe,meri बात तोह सुनो..........
रोनित- नहीं सुनना तेरी कोई baat.tu फिर हम दोनों को अपनी बातों में लपेट लेगा.....
मई- नहीं bhai,aisa कुछ नहीं hoga..ek बार सुन तोह ले....
अंजलि- ाचा bol...par कोई डीएलओगे मारा न तोह तुझे छोड़ेंगे नहीं...
ये बोलकर अंजलि ने मुझे छोड़ diya.ab G.F ने कुछ बोलै हो और B.F न sune,aisa तोह होगा nahi,isliye अंजलि के मुझे छोड़ते hi रोनित ने भी मुझे छोड़ दिया...
फिर मई उन दोनों को आगे के बारे में कुछ कुछ बताता चला gaya.....meri बात सुनकर दोनों खुश हो गए.......
रोनित- तू सच बोल रहा है naa..kahin गोली तोह नहीं दे रहा है......
मई- नहीं भाई........
अंजलि- पर अभी hi क्यों नहीं........
मई- वही बताने जा रहा हूँ......
मैंने अपना हाथ आगे kiya,mere हाथों से एक रौशनी निकली और एक बार फिरसे हमारे सामने मेरा क्लोन आ गया...
अंजलि- अब इसकी क्या ज़रुरत है....
मई- मेरी जगह ये तुम दोनों एक साथ जाएगा......
इससे पहले की उन दोनों में से कोई इसकी वजह puchta,mai उन्हें कुछ बातें बताने लगा जिससे सुनकर वो शॉकेड हो गए...
रोनित- पर तूने ऐसा क्यों किया???
मई- हर बात मई तुम दोनों को अभी नहीं बता सकता yaar.par भरोसा rakho,ye ज़रूरी hai......aur सही वक़्त आने पर तुम दोनों को अपने आप पता चल जाएगा.....
रोनित फिर भी मुझसे कुछ पूछना चाहता था पर अंजलि ने उससे ऐसा करने से रोक दिया...
अंजलि- ठीक hai......toh अब क्या????
मई- और कुछ nahi..bas इससे लेकर जहाँ से मैंने बोलै hai,wahan से hi बाहर निकलना और फिर तुम्हे क्या करना hai,ye तोह तुम्हे बता hi चूका हूँ....
रोनित- ठीक hai.par हम इंतज़ार करेंगे.......
मैंने- पता है.......
और अगले hi पल मई गायब हो गया......
रोनित और अंजलि ने एक लम्बी सांस छोड़ी और मेरे क्लोन के साथ मिलकर एक जगह उन्होंने मैजिक दूर बनायीं और गायब हो गए.....
रोनित ने एक सुनसान जगह चुनी थी उस मैजिकल डायमेंशन से बाहर आने के लिए....
पर जैसे hi तीनो बहार aaye,unke सामने कोई खड़ा था जो उन तीनो को आँखें फाडे देख रहा था.....
पर RONIT,ANJALI और मेरे क्लोन को अपने सामने वाले को देखकर नार्मल hi रहे मानो उन्हें पहले से पता था की यही होने वाला है......
रोनित ने अपने पीछे खुले मैजिक दूर को बंद कर दिया........
अंजलि- what's उप अवंतिका.......????????
प्लेनेट- ************
प्लेस- ************
मई- उठ जाइये.............
मेरे सामने जो अपने घुटनो के बल बैठा हुआ tha,mere बोलने पर वो खड़ा हो गया पर अब भी उसका सर नीचे hi था........
मैंने एक लम्बी सांस छोड़ी और अपने सामने के नज़ारे को देखने लगा........
मई- तोह फाइनली मेरा सफर शुरू हो GAYA.....AUR मेरे सामने है मेरे सफर का पहला पड़ाव........
थे वर्ल्ड ऑफ़ वारियर्स.......
आज के लिए इतना HI........
आपका अपना V..J.......