अपडेट-41
खास आदमी- बॉस मैं क्या कहता हु अभी आपकी मीटिंग है कल, इंडिया के सबसे बड़े डॉन वैभव सेठिए के साथ.. आप उससे मिलने की तयारी कीजिये.. वो baar-baar इंडिया नहीं आएगा, और आएंगे तोह जरुरी नहीं की हमसे मिलेंगे hi.. अगर हमारी डील हो गयी तोह क्रोरो का माल हाथ आएगा…
लाला- हाँ बात तोह तेरी यह भी सही है.. तू तयारी कर मिलने की.. और माल फ्रेश रखना.. यह सेल दया का पत्ता साफ़ करने को भी बोलना होगा उससे.. कुछ ज्यादा hi फुदक रहा है आते hi वो…
|अब अग्गे|
खास आदमी- बॉस लकिन एक और जरुरी बात है...
लाला- क्या..?
खास आदमी- बॉस कल जग्गू की कोर्ट में पेशी होगी...
लाला- (उठता हुआ) क्या..!! (चाकर लगता हुआ) नहीं.. नहीं.. नहीं.. नहीं.. यह दया उससे फांसी दिया देगा.. (अपने आदमी की और देखता हुआ) तू बता न क्या कर सकते है हम.. तेरे दिमाग में है कोई प्लान..?
खास आदमी- (मुस्कुराता हुआ) हाँ बॉस.. मैं कह रहा हु की जब जग्गू बॉस को ठाणे से कोर्ट में लेजाया जायेगा तोह हम उनका रास्ता रोक लेंगे.. क्या कहते हो.. इससे हमे ज्यादा परेशानी नहीं होगी उन् चंन्द पुलिसवालो से निपटने में, और हम आसानी से जग्गू को छुड़ा लेंगे...
लाला- (सोचते हुआ) हम्म.. यह प्लान तोह तेरा ठीक है.. पर क्या यह काम करेगा...
खास आदमी- बिलकुल करेगा बॉस.. देखो मैं समजता हु ************************...
लाला- (हस्ता हुआ) हाहाहाहा.. वाह.. वाह.. शबाशः...
|अगले दिन, डे-6|
|बैक तो तुषार|
(सब लोग उठ चुके थे और अभी ब्रेकफास्ट कर रहे थे.. तुषार सिया को देख रहा था जो अभी ब्रेड को बहुत सारा जैम लगा के अपने छोटे से मुँह में bade-bade टुकड़े दाल उससे मुश्किल से निगल रही थी...)
तुषार- (सिया को देख, हस्ता हुआ) अरे गले में अटक जायेगा.. thora-thora कहो सिया...
सिया- नहीं..!! मैं ऐसे hi खाउंगी...
प्रियल- सिया..!! क्या बोल रहे है भैया.. उनकी बात नहीं मानती तुम...
सिया- (उदास होकर) मुझे ऐसे hi पसंद...
तुषार- (हस्ता हुआ) हहह ाचा ठीक है, जैसे खाना है खाओ...
सिया- (खुश होकर) थैंक्स भैया.. आप अचे हो, आपको 20 नंबर...
तुषार- हाहाहा ाचा तोह मेरे अछेपन के मुझे पॉइंट्स दिए जा रहे...
सिया- हाँ...
तुषार- Okay ठीक है भाई...
प्रियल- वैसे तुषार जी आप क्या करते हो.. मतलब ऐसे hi पूछ रही थी मैं, अगर आप बताना चाहो तोह.....
तुषार- अरे नहीं नहीं आप कुछ बी पूछ सकती हो.. (मुस्कान के साथ) अभी आप मेरी भाभी हो.. क्यों..?
प्रियल- (मुस्कुराती हुई) जी बिलकुल.. (एक hi सास में बोलती हुई) तोह बताइये क्या करते हो आप.. आपकी फॅमिली में kon-kon है और कहा है वो सब, और येह जो एजेंट्स है आपके साथ यह किस लिए है, क्या आपको कोई खतरा है जो यह आपके साथ रहते है.. और यह हवेली आपकी है.?, आप यहाँ अकेले क्यों रहते हो, अपनी फॅमिली के साथ क्यों नहीं रहते, क्या कोई प्रॉब्लम हुई है..?
(प्रियल teji-teji सब बोल गयी, पास बैठी सिया जग से गिलास में पानी दाल प्रियल को देखती है.. जब सिया ने ऐसा किया तोह प्रियल को एहसास हुआ की वो अभी किस रफ़्तार से बोल गयी है.. उसने सामने देखता तोह तुषार मुस्कुराता हुआ उससे देख रहा था…)
प्रियल- वो….
तुषार- (मुस्कुराता हुआ) हम्म.. काफी सवाल है.. और काफी जल्दी भी है जान्ने की…
प्रियल- वो बस दिमाग में चल रहे थे कबसे तोह…..
तुषार- (बिच में बोलता हुआ) कोई बात नहीं.. मैं बताता हु.. मैं अभी 12तह का स्टूडेंट हु.. मेरे फॅमिली में मेरे Mummy-Papa, मेरी से एक साल बड़ी मेरी आरुषि दीदी, मेरी जुड़वाँ बहिन तान्या, मेरे से एक साल छोटी मेरी बहिन मेरी गुड़िया.. हाँ एक और बात मेरी एक नयी भाभी प्रियल, (प्यार से सिया की गाल खींच के) और मेरी सबसे छोटी और क्यूट गर्ल सिया भी अब मेरी फॅमिली का हिस्सा बन चुकी है…
(किसको बिना jan-pehchan के अपनी फॅमिली का हिस्सा बोलना, तुषार की यह बात प्रियल के दिल पर लग गयी.. ऐसे की उसकी आँखों से 2 बांड आंसू निकल ए, जिसे उसने बिना किसी की नजरो में ए साफ़ कर लिया.. बहुत मुश्किल है इस समाज में एक लड़की, एक औरत का बिना मर्द के रहना, लोग झट से उससे अकेली देख फयदा उठाना जानते है.. और अभी तोह प्रियल एक बहुत hi खतरनाक शहर में ठहरी थी, अपनी फूल सी बची के साथ.. अभी उससे यहाँ सिवाए तुषार के कोई नहीं जनता था, और तुषार भी बिना उसका बैकग्राउंड जाने baar-baar उससे यह एहसास दिला रहा था की वो अकेली नहीं है मैं उसके साथ हु मेरी पूरी फॅमिली उसके साथ, और आप मेरे फॅमिली का एक हिस्सा हो…)
सिया- भैया येह गुड़िया कोण है.. कोई डॉल है क्या…
तुषार- (हस्ता हुआ) हहह हाँ डॉल hi है वो.. इतनी बड़ी हो गयी लकिन उसकी मासूमियत और शरारते बिलकुल आपके जैसी है…
सिया- ओह्ह मेरी जैसी.. मैं उसके साथ खेलूंगी न..?
तुषार- हाँ बिलकुल.. वो भी आपसे मिलकर खुश हो जाएगी.. मेरी गुड़िया को भी एक छोटी सी गुड़िया मिल जाएगी…
सिया- वो बहुत अछि है..? मुझे मारेगी तोह नहीं…
तुषार- हाहाहा अरे नहीं नहीं.. वो तोह खुद आपसे दर जाये अस्सी है वो.. (सिया को पकड़ अपनी गौड़ में बिठाता हुआ) और मेरा सीयू तोह बहुत ाचा है.. उससे कोई हाथ भी नहीं लगा सकता…
(सिया और प्रियल, सिया के पापा का दिया हुआ नाम तुषार के मुँह से सुन एक दूसरे की और देखने लगे…)
सिया- (प्रियल की और देख) मुम्मा सीयू..!!
प्रियल- (बात बदलती हुई) तोह अपने आगे बताया नहीं तुषार जी.. आप अकेले क्यों रहते हो यहाँ इस हवेली में…
तुषार- आप तोह जानती हो की यह शहर के हालत बहुत बिगड़े हुए है.. बस समाज लो की उन्ही हालातो को सुधरने के लिए मैं यहाँ अपने एजेंट्स के साथ इस हवेली में रहता हु…
प्रियल- क्या..!! पर आप तोह अभी बहुत छोटे हो.. बहुत खतरनाक लोग है जो इस गंदे काम के पीछे है…
तुषार- जी जनता हु भाभी जी.. और इसलिए एजेंट्स मेरे साथ रहते है.. हाँ उम्र छोटी है मेरी पर अब भिड़ने का जज्बा इतना बढ़ चूका है की पीछे मुद कर देखना मेरी बेवकूफी होगी..
शिवं- (बहार से अंदर आता हुआ) बॉस..!! चलिए.. ट्रेनिंग शुरू करते है...
तुषार- (प्रियल को देख) देखा.. ट्रेनिंग जारी है, एक दिन रंग जरूर लाएगी.. (सिया को उठा के साइड करता हुआ) चलो सिया बीटा बाद में मिलते है.. थोड़े दिनों बाद मैं आपको अपनी गुड़िया से मिल्यूँगा.. Okay...
सिया- Okay भैया...
(तुषार उठा और शिवं के साथ बहार चला गया.. आज गुरूजी नहीं ए थे.. आज शिवं hi तुषार को ट्रेनिंग देने वाला था...)
तुषार- तोह आज गुरूजी छूती पर है क्या शिवं..?
शिवं- हाँ आप ऐसा समाज लीजिये की उनका काम हो गया है.. उनका जो फराज था उन्होंने वो पूरा कर दिया है.. वो आएंगे वापिस जब आपको उनकी जरुरत पड़ेगी...
तुषार- ाचा..!! ऐसा कोनसा फराज पूरा कर दिया उन्होंने.. मुझे कुछ खास तोह सिखाया नहीं अभी.. खीर ठीक है...
शिवं- (मुस्कुराता हुआ) तलवार...
तुषार- (पीछे मुद उसकी और देखता हुआ) क्या..?
शिवं- (तुषार की तलवार उससे देता हुआ) तलवार.. यह तलवार जो आपको गुरूजी देकर गए है इससे हासिल कर पाना बहुत मुश्किल था...
तुषार- (तलवार पकड़ उससे धयान से देखता हुआ) क्या बोलते हो यार, इससे हासिल करने में क्या दिक्कत आयी होगी.. कितने में पड़ी थी.. हहहह.. वैसे पहले से काफी चमक रही है.. जुंग कैसे उतर रहा है इसका.. कोई chemical-wemical छिड़का है क्या इसपर..?
शिवं- (मुस्कुराता हुआ) अपने मालिक के हाथ में है तोह केमिकल की क्या जरुरत है.. खुद hi उतरता हुआ नजर आएगा...
तुषार- (मुस्कुरा के) राइट..!!
शिवं- और हाँ बॉस कल जग्गू की कोर्ट में पेशी होगी...
तुषार- क्या..!! कल.. फिर तोह बहुत गड़बड़ हो जाएगी...
शिवं- हम्म.. जग्गू को छुड़ाने के लिए लाला कोई प्लान जरूर चलेगा.. तोह क्या करना है...
तुषार- सही कहा.. चलो हम ऐसा करते है देखो *********************** समजे..?
शिवं- (हस्ता हुआ) वाह बॉस..!! हाँ यह ठीक रहेगा...
तुषार- (मुस्कुराता हुआ) हम.. नाड़ी आराम से बह रही है तोह उससे बहने देंगे, अगर बिच में पत्थर रास्ता रोके तोह उससे उखड देंगे.. हहहह...
शिवं- बिलकुल बॉस...
(फिर तुषार अपनी ट्रेनिंग शुरू कर देता है.. बिना dhup-chaaya देखे, बिना thake-hare, बिना bhuk-pyass देखे सिर्फ और सिर्फ अपनी ट्रेनिंग में धयान लगता है.. लकिन एक बात उसके धयान में जो थी वो थी की आखिर उस दिन उसके साथ क्या हुआ था.. गुरूजी ने उससे जो अपना मन शांत करने के लिए धयान लगाने के लिए बोलै था, वो पहले तोह अपनी बचपन की यादो में खोइया हुआ था फिर अचानक उसके साथ क्या हुआ, उसने क्या देखा क्या नहीं, उससे कुछ याद क्यों नहीं है.. अंदर hi अंदर उसका शक गुरूजी पर हो रहा था की आखिर उन्होंने उससे बताया क्यों नहीं की उसके साथ क्या हुआ था.. और उसके बाद उसकी वो दिल दहला देने वाली हालत हो जाना क्या था आखिर वो सब.. तुषार के मन में कुछ देर यही सब चलता रहा लकिन फिर उसका ध्यान उस तरफ से हट गया और वापिस अपने अभ्यास में लग गया...)
|सिटी नातिर, पुलिस स्टेशन|
जग्गू- (सलाखों के पीछे से गाला फाड़ता हु) ाररी ोई इंस्पेक्टर.. नहीं लेजा पायेगा तू मुझे कोर्ट तक.. कल तेरा आखरी दिन होगा.. हाहाहा.. आआअह्ह्ह्ह.. आआअह्ह्ह्ह.. आआह्ह्ह्हह.. आआह्ह्ह्हह्ह...
इंस्पेक्टर दया- (हवलडर से, जो अभी जग्गू की टंगे तोड़ रहा था लाठी से) दे और दे.. साला बहुत bak-bak करता है, सुभे से दिमाग खा गया है bol-bol कर.. कल होगा तेरे गले में फांसी का फन्दा, फ़िलहाल एन्जॉय कर पुलिस का डंडा...
(कुछ देर बाद एक 29-30 साल की लड़की पुलिस स्टेशन में रोटी हुई आयी.. jagha-jagha से कपडे फटे हुए थे, बिखरे बाल, और एक कपडे से उसने अपना चेहरा पर ढाका हुआ था.. वो आयी और आकर दया के पैरो में गिर रोने लगी...)
लड़की- (रोटी हुई) साहब.. साहब क्या इस शहर का कानून मर गया है.. क्या मुझे न्याय नहीं मिल सकता.. क्या उन् हरामजादो को उनके किये की सजा नहीं मिलेगी..?
इंस्पेक्टर दया- (उसको उठता हुआ) क्या हुआ आपको.. ठीक से बताइये आप...
लड़की- (चिल्ला कर) रपे हुआ है मेरा.. मुझे.. मुझे अन्याय चाहिए...
इंस्पेक्टर दया- (हस्ता हुआ) हाहाःहाहाः.. ाचा..!! हम क्या वेहले बैठे है इधर.. (धक्का मर साइड करता हुआ) चल हट, भाग जा अपने घर.. फालतू कामो के लिए टाइम नहीं है मेरे पास.. चिंटू.!! एक कप चाय का बोल...
लड़की- (हैरानी से) वेहले बैठे हो मतलब.. आपका यही तोह काम.....
इंस्पेक्टर दया- (बिच में, गुस्से से बोलता हुआ) एक लाठी मरूंगा न साडी अकाल ठिकाने ा जाएगी.. चल भाग जा यहाँ से...
(दया के इस रिस्पांस से सरे पोलिसवाले हेरैं थे, यहाँ तक की वो तकला पोलिसवाले भी gur-gur कर दया को देख रहा था की आखिर इस ईमानदार पोलिसवाले से तोह यह उम्मीद नहीं थी.. पर यह अचानक कैसे बदल गया...)
लड़की- (दया से थोड़ी दुरी पर बैठे उस तकले पोलिसवाले के पाव पकड़, रोटी हुई) साहब आप तोह मेरी बात सुनिए.. वो 5 लोग थे, उन्हें मुझे जबरदस्ती मेरे घर से उठा.....
तकला पोलिसवाले- (बिच में, उसका हाथ अपनी तंग से झटका हुआ) ारी दुर्र हट.. साली कामिनी.. अब रोटी कहे है.. जो होना था हो गया.. अब जा घर जा.. कोई नहीं है इधर तेरी प्रेम खाता सुनने को...
(इतना बोल उस तलके पोलिसवाले ने एक लत्त उस लड़की के साइड में कमर पर मार्डी जिससे लड़की कास कर दूर जा गिर गयी.. वो गिरी तोह उसके मुँह पर जो उसने कपडा लपेटा हुआ था वो उतर गया और जैसे hi वो कपडा उतरा और उस तकले की नजर उस पर गयी वो वही घुटनो के बाल गिर गया...)
तकला पोलिसवाले- (आंसू बहता हुआ, मुश्किल से बोलै) कछौटीईई.. टटटूउउ...
इंस्पेक्टर दया- अरे ू हवलदार.. जा इस लड़की को बहार निकल.. चल fata-fat, यह rona-dhona नहीं चाहिए मुझे.. (तकले पोलिसवाले को देख) और आप नितेश भाई.. आप क्या घंटो पे बैठे रू रहे हो.. हवलदार तूने सुना नहीं.. क्या बोलै मैं.. चल जल्दी कर...
नितेश- (रोटा हुआ, उस लड़की की और जाकर उससे उठता हुआ) क्या बोल रहे हो भाई.. बहिन है यह मेरी छोटी...
इंस्पेक्टर दया- ओह्ह बहिन है यह आपकी.. ाचा ऐसा करो घर ले जाओ.. और आगे से कभी घर से बहार नहीं निकलने देना.. ठीक है जाओ अभी...
नितेश- (गुस्से से) क्या बोलै तू.. मेरी बहिन के साथ इतना गलत हुआ है.. खीर छोड़ तू.. (लड़की की और देख) बोल छोटी, किन हरामजादो से तुझे हाथ लगाया.. मैं उनका गाला काट डालूंगा.. बोल न.. (रोटा हुआ) सॉरी छोटी.. मैंने तुझे लत मरी.. मैं kya-kya बोल गया तुझे, लकिन.....
लकड़ी- (रोटी हुई, उसका हाथ साइड कर, कड़ी होकर) लकिन क्या भैया.. छोडो मैं घर जाती हु.. मम्मी को बोलूंगी की देख तेरी बेटी चुद....
नितेश- (अपना हाथ कास कर उसके मुँह पर रखता हुआ) बास.. क्या बोल रही है तू.. उठ कड़ी हो.. (रोटा हुआ) मेरी बहिन ऐसा मत बोल.. कोण थे वो लड़के मुझे एक बार बता दे मैं उनको जिन्दा नहीं छोडूंगा...
लकड़ी- (आंसू शांत कर, गुस्से में) क्यों क्या हुआ भैया.. रू क्यों रहे हो.. हम्म.? लो एक और लात मार लो अपनी छोटी पर.. क्या हुआ अभी दया ा रही है.. अपनी बहिन पर दया ा रही है.. अगर मेरा चेहरा नहीं दीखता आपको तोह आप मुझे ऐसे hi लत maar-maar कर यहाँ से निकल देते न.. हाँ सही तोह कहा मैंने.. और अपनी बहिन पर अपने इतने आंसू बहा दिए, लकिन किसी दूसरी लड़की की यह दशा देख आपके अंदर का जवाला मुखी नहीं जलता.. (रोटी हुई, अपने भाई के हाथ पकड़) वो भी तोह किसी की बहिन होगी न भैया.. उसका भाई भी ऐसे hi गिड़गिड़ाते हुए आपके पास आया होगा न.. और ऐसे hi अपने उससे डंडे, लेट मार कर बाघा दिया होगा.. ऐसे hi है न भैया.. बोलो भैया बोलु...
(नितेश वो सब याद करता है जब कोई माँ अपनी बेटी के लिए, जब एक बाप अपनी बेटी के लिए और जब एक भाई अपनी बहिन के रपे हो जाने की खबर लेकर उसके पास आया था.. सर, सर, सर, मेरी मेरी बहिन को कोई उठा ले गया सर प्लीज मेरे साथ चलिए सर.. बीटा मेरी बेटी के साथ किसी ने बहुत निच्च हरकत की है, तुम उससे.. नितेश- आबे कोई बहार निकालो रे इससे.. यह रोज का चलता रहता है.. अपनी बेटी को समजाओ की घर में रहा करे.. अब लड़को के दिल उससे देख दूल्ल hi जाते है क्या करे माँ जी.. जाइये आप, फिर कभी एना.. हहहहह.. नितेश को dhire-dhire हर मोड़ पर अपनी गलती का एहसास हो रहा था.. आज खुद जब उसकी बहिन गुंडों के सामने नंगी करि गयी तोह यह सोच कर hi उसके अंदर की आग पहात के बहार को आ रही थी.. वो समाज नहीं प् रहा था की वो अपनी गलती पर अभी खुल कर रोये, उन् लड़कियों से जाकर माफ़ी मांगे या अभी अपनी छोटी बहिन की जिसने इज्जत लुटती है उससे मौत के घट्ट उतरे...)
नितेश- (हाथ जोड़ता हुआ, phut-phut कर रोटा हुआ) छोटी.. मुझे माफ़ करदे.. मैं गुन्हेगार हु उन् सभी लड़कियों का जिसके साथ भी गलत हुआ है.. जितनी गलती उस लड़की की इज्जत लूटने वालो की थी उतनी hi गलती मेरी भी बनती है.. मुझे सजा मिलनी चाहिए.. मैं वडा करता हुआ अग्गे से कभी भी किसी पर भी जुल्म न देखूंगा, न कभी होने दूंगा, चाहिए उससे बचने के लिए मेरी जान hi क्यों न चली जाये.. (दया की तरफ देख) दया भाई.. आप क्यों बदल गए.. आप तोह अचे और ईंमानदार पुलिस वाले हो न तोह मेरी बहिन के लिए आपको दया नहीं आयी.. अपने ऐसे क्यों किया...
लड़की- (मुस्कुराती हुई, नितेश की आँखों से आंसू साफ़ कर) भैया.. वो ईंमानदार है, और उन्होंने आपको भी शायद एक िम्मदार पोलिसवाले बना दिया है...
नितेश- (न समझता हुआ) मतलब.. क्या मतलब है तुम्हारा छोटी.. (चेयर खींच कर उसके सामने करता हुआ) यहाँ बैठो तुम, (वापिस ा रहे आंसू साफ़ कर) और मुझे मेरे किये के लिए माफ़ कार्डो.. हाँ मैं माफ़ी के काबिल नहीं हु पर...
लड़की- (चार पर बैठती हुई, बिच में बोली) घभराओ मत भैया, आपकी छोटी को कुछ नहीं हुआ है.. और मैं खुश हु की मैं सफल हुई आपको बदलने में, इस शहर को िम्मदार पुलिस वालो की बहुत जौरात है.. शायद अब आप भी उन् मेंसे एक हो.. और हाँ यह सब दया सर का प्लान था...
नितेश- क्या..!! प्लान था मतलब.. तोह मतलब जो तब से चल रहा था वो सब नाटक था..?
इंस्पेक्टर दया- (उसके पास आता हुआ) हाँ भाई.. यह सब नाटक था.. पैसे kha-kha तेरे अंदर जो हैवानियत भरी थी उससे इंसानियत में बदलना जरुरी था.. इसलिए मैंने तेरी जान से प्यारी तेरी छोटी बहिन के साथ मिलकर यह खेल खेला.. जब मैंने तेरी असलियत इससे बताई तोह पहले तोह इससे यकीं नहीं हुआ की उसका भाई पैसे और आराम के चलते किसी पे दया नहीं खता.. उससे किसी की इज्जत, किसी की मज़बूरी नहीं दिखती.. दीखता है तोह सिर्फ और सिर्फ पैसा.. मुश्किल से मैंने इससे यकीन दिलाया और यह रेडी हो गयी.. फिर आगे का जो प्लान आप जानते hi हो.. लकिन आप एक अस्सी हालत करोगे एक अस्सी हालत में भी लड़की को लात मरोगे.. मैं यह सोच भी नहीं सकता था.. ट्ठहाआआआररररररररर (और एक थप्पड़ की आवाज पुरे ठाणे में जंघ उठी जो दया ने नितेश को मारा था..)
नितेश- (अपनी लाल हो चुकी गाल पकड़) सॉरी दया भाई.. मैं अपनी गलती के लिए शर्मिंदा हु.. कसम है मुझे उस उपरवाले की, जब तक इस शरीर में जान रहेगी मेरे सामने तोह क्या मेरी पीठ पीछे भी कोई किसी लड़की को हाथ नहीं लगा पायेगा...
|Tushar’s हाउस|
(तान्या अन्निका के रूम में जाकर देखती है तोह अन्निका हाथ ऊपर हवा में उठिये अपने हाथो में तुषार की तस्वीर लिए लेती थी, और कुछ बड़बड़ा रही थी...)
अन्निका- गंदे कही के.. भूल hi गए न मुझे.. बात भी नहीं करते.. अपनी गुड़िया की कोई फ़िक्र नहीं.. फ़ोन तोह कर hi सकते हो न.. कितने दिन हो गए अपने मेरा हाल भी नहीं पूछा.. आप बुरे हो गए हो.. मुझे नहीं बात नहीं आपसे.. (स्माइल करके, तस्वीर में तुषार के होंटो को गौर से देखती हुई) हाँ में आपके इन् होंठ......
तान्या- (अंदर आती हुई, बिच में बोली) ओह्ह.. (अन्निका के हाथ से तस्वीर छीन कर) तोह इस लोंडो को याद किया जा रहा है.. हम्म.. बिगड़ गया यह लड़का.. अब हमारी कहा फ़िक्र है इससे.. पता नहीं kaha-kaha kya-kya करता फिरता होगा.. घर आएगा तोह जुटते खायेगा मेरी.. देखना दोनों टंगे बांध कर छत से निचे उल्टा लटका दूंगी...
अन्निका- (जो कब से बुरा का मुँह बना के तान्या की बाते सुन रही थी बोली) दीदी..!! आप भैया को कुछ नहीं करोगे.. वो किसी काम में फेज होंगे.. वो मुझे कभी नहीं भूल सकते.. और आपको भी नहीं भूल सकते.. वो अचे है.. वो बिगड़े नहीं है...
तान्या- लो जी.. एक पल में इधर एक पल में उधर.. अभी तोह महारानी आप कुढ़ उनकी तस्वीर लिए उन्हें दांत रही थी, और अब मैंने कुछ बोल दिया तोह आपको बुरा लग गया.. चलो छोडो बीती बातो को.. (गण गुनगुनाती हुई) जब कोई अपना पराया हो जाये, तोह उससे भी साथ hi लटका दो छत से...
अन्निका- आये दीदी यह कोनसा गण है.. आप मुझे तंग कर रही हो.. (उठती हुई) मैं अभी मुम्मा से आपकी शिकायत कर के आती हु...
तान्या- (उसको पकड़ रोकती हुई) अरे क्या करती है यार.. अब वो बन्दर तोह घर में है नहीं तोह थोड़ा मज़े ले रही थी तेरे.. चल ा तुझे कल कही घूमने ले चलती हु...
अन्निका- (उदास होकर) मुझे नहीं जाना कही.. मुझे भैया के साथ hi जाना है...
तान्या- ाचा ठीक है कल उससे मिलने चलते है.. Okay...
अन्निका- (खुश होकर, तान्या के गले लगती हुई) Okay.. ठंकु दीदी...
《3208 -वर्ड्स》