अपडेट-34
तुषार- ठीक है ले लेना मेरी खबर.. ाचा बताओ तुम सब ठीक हो, घर में कोई प्रॉब्लम तोह नहीं, और स्कूल में कोई तंग तोह कर रहा...
तान्या- (हैरानी से) नहीं अस्सी तोह कोई बात नहीं है.. लकिन ऐसे क्यों पूछ रहा है तू...
तुषार- कुछ नहीं बस ऐसे hi.. ाचा ठीक है अपना धयान रखो.. BYE...
तान्या- BYE...
अन्निका- BYE भैया, हम आपसे मिलने आएंगे...
तुषार- हाँ मेरा गुड्डू मुझे भी मिलना है तुमसे, दिल नहीं लगता तेरे बिना.. BYE...
|अब अग्गे|
हर्षिका- (ख़ुशी से) आपकी सिस्टर्स का कॉल था..?
तुषार- (मुस्कुराता हुआ) हाँ मेरी प्यारी बहनो का...
हर्षिका- मुझे भी मिलवाओ न उनसे.. मैंने आपसे पहले भी कहा था, (साद फेस बनके) लकिन अपने मुझे मिलवाया नहीं...
हरलीन- हाँ वो आपकी छोटी गुड़िया से तोह मैं मिल चुकी हु एक बार, बहुत स्वीट है वो.. लकिन आपकी जुड़वाँ बहिन से नहीं मिली.. मुझे भी एक बार मिलवाना प्लीज...
तुषार- हाँ हाँ क्यों नहीं जरूर मिलवाऊंगा उनसे आपको.. (आरुषि की और देख) क्या हुआ दीदी आप इतनी उदास क्यों लग रही हो...
आरुषि- कुछ नहीं मैं बस सोच रही थी की आज जिन लड़को को तुमने मारा है क्या उन्हें मरना सही था.? ी मैं जान से मार देना कुछ ज्यादा नहीं हो गया तुषार..?
हरलीन- (उदास होकर) मुझे भी यही लग रहा है की.......
तुषार- (बिच में चिल्ला के खड़ा होता हुआ) बसससससस.. सुनलो मेरी बात, मैंने जो किया कुछ गलत नहीं किया, (आरुषि को गुस्से में देखता हुआ) दीदी आप कह रही उन्हें जान से मार देना ज्यादा हो गया, अगर मैं वह वक़्त पर नहीं होता तोह क्या ज्यादा नहीं हो जाता..? तब क्या आपके दिल में उनके लिए बेइंतेहा नफरत नहीं होती..? क्या तभ भी आप यह नहीं चाह रही होती की मेरे साथ इतनी बदसलूकी करने वाले इंसान की गार्डन काट जाये.. मैंने वही किया है दीदी मैंने अनहोनी होने से पहले hi गार्डन काट दी.. (गुस्से में चीखता हुआ) मेरी बहिन को कोई छू तक नहीं सकता.. अगर आगे से किसी ने ऐसा करना का सोचा भी तोह मैं उससे वो बन के दिखाऊंगा जो उसने कभी न देखा न सोचा होगा...
(तुषार अपनी हर लाइन इतने cheekh-cheekh कर बोलै था की तीनो लड़कियां तोह दर के कम्प गयी...)
तुषार- (आरुषि को गुस्से से देखता हुआ) बोलो दीदी बोलती क्यों नहीं.. क्या तभ भी आप यही कहती की जो हुआ गलत हुआ है.. बोलूओ...
(आरुषि तुषार की अस्सी बातो से रू hi पड़ी थी.. उसके मुँह से कुछ निकल hi नहीं रहा था बेचारी क्या बोलती.. कुछ देर कोई कुछ नहीं बोलै, अचानक तुषार को एहसास हुआ की आज वो पहली बार अपनी बहिन पर चिलाय है, उससे कोई हक़ नहीं है की वो अपनी बड़ी बहिन से ऐसे गुस्से से बात करे, वो dhire-dhire उसके पास गया और उसके सामने जाकर खड़ा हो गया, आरुषि अभी भी बैठी हुई थी तोह तुषार ने उसको उसकी कमर से पकड़ उठा के खड़ा कर दिया, और पहले उसके बहंते आंसू को अपने हाथो से साफ़ किया और फिर कस के उससे अपने गले से लगा लिया...)
तुषार- सॉरी.. सॉरी दीदी.. मैं बहुत ज्यादा बोल गया आपको.. मुझे माफ़ कार्डो प्लीज...
आरुषि- (मुस्कुराती हुई) नहीं तू सॉरी न बोल.. और तुषार यह आंसू इस्सलिये नहीं ए की तूने मुझपे गुस्सा किया बल्कि इस्सलिये ए क्युकी तुझे मेरी कितनी फ़िक्र है.. जिस हक़ से तूने आज मुझे डांटा है न मेरे तोह आंसू निकलेंगे है.. पगला कही का तूने तोह मुझे रुला hi दिया.. (कस के गले लगाती हुई) और सॉरी, मैं गलत थी तुषार तूने सही किया उनके साथ...
हरलीन- हाँ तुषार सॉरी.. मैं भी यही सोच रही थी की अपने कुछ ज्यादा hi बड़ी सजा देदी उन्हें, लकिन अगर दूसरी तरफ से देखा जाये तोह हमारे यहाँ का कानून बिगढरा हुआ है, हम उनसे अपनी सेफ्टी की गारंटी तोह ले hi नहीं सकते...
हर्षिका- बिलकुल ठीक कहा अपने.. मैं आपकी हर बात से सहमत हु तुषार.. अगर आप वह वक़्त पर आकर हमे उसने सही बचते तोह हमारे साथ कुछ भी गलत हो सकता था.. आज हमारे साथ होता कल किसी और के साथ होता.. उनका हौसला बढ़ता जाता.. और इसी पाप के काम में और लड़के भी उनके साथ जुड़ते जाते.. और हम.. और हम तोह बस बैठी अभी रू hi रही होती न.. अगर एक अचे इंसान को बचने के लिए 100 बुरे लोग भी मरने पढ़ जाये तोह वो गलत नहीं है.. हमारे साथ बुरा होता इससे ाचा तोह उन् बुरे के साथ hi बुरा हुआ...
|बैक तो हॉस्पिटल|
(सिया अभी सवाना की गौड़ में बैठी, उसकी और फेस किया उससे चिपक के dhire-dhire सुबक रही थी.. सवाना और सफल भी बस इसी एक उम्मीद में थे की शायद डॉक्टर सिया के Mummy-Papa को बच ले.. दोनों का धयान उस रूम की तरफ यहाँ सिया के Mummy-Papa का इलाज चल रहा था...)
( और 2 घंटे बेट जाने के बाद रूम का दूर खुलता है और एक डॉक्टर बहार आता है.. सफल ने उससे देखा तोह उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो डॉक्टर से जाकर बात करे की आखिर क्या हुआ.. सफल उठा नहीं तोह आखिर डॉक्टर ने hi सफल को इशारे से अपनी और बुलाया तोह सफल घभराता हुआ उठ कर डॉक्टर के पास चला गया...)
सफल- जी डॉक्टर क्या हुआ..?
डॉक्टर- आपका नाम..?
सफल- सफल...
डॉक्टर- वो जो Ladka-Ladki अंदर है वो आपके क्या लगते थे..?
सफल- (घभराहट से) लगते थे मतब..? क्या हुआ है वो ठीक तोह है न....
डॉक्टर- मेरी बात सुनो अभी करीब 3 घंटे पहले कुछ 3,4 आदमी हॉस्पिटल में घुस ए और जबरदस्ती उन् Ladka-Ladki का रूम नंबर पूछने लगे.. हमारे गार्ड्स ने उन्हें रोकने की कोशिश की तोह उन्होंने दोनों गार्ड्स को गोली मार दी.. गोली लगते hi हॉस्पिटल में bagh-dhor मैच गयी.. जो रूम्स में थे उन्होंने दूर बंद कर लिए और जो बहार थे वो हॉस्पिटल से छीलते हुए बहार को भागने लगे.. कुछ देर बाद एक रूम से 2 बार गोली चलने की आवाज आयी.. कुछ देर और बेट जाने के बाद वापिस 3 गोली चलने की आवाज आयी, और थोड़ी hi देर में (सवाना की और इशारा कर) वो लड़की हमारे पास आयी और अपना ईद कार्ड दिखा के हमे बोली के वो एजेंट है और उसने तन्नो आदमियों को मार दिया है.. Ladka-Ladki को गोली लगी है उन्हें कुछ हो न जाये जल्दी चलो...
सफल- तोह क्या वो दोनों अब ठीक है..?
डॉक्टर- (सफल के कंधे पर हाथ रखता हुआ) देखो मर. सफल, हमने अपनी कोशिश पूरी की बचने की, हमारे पास वक़्त भी काफी था लकिन...
सफल- (अपने कंधे से डॉक्टर का हाथ झटकता हुआ, घभराहट से) लकिन क्या डॉक्टर.. आप मुझे saaf-saaf बताएंगे प्लीज..?
डॉक्टर- बात दरअसल यह है की लड़की को एक मामूली गोली लगी थी, जिससे आप कह सकते हो की सिर्फ बेहोश करने वाली गोली.. लकिन लड़के को एक ऐसे जहर की गोली लगी है जिसका कोई इलाज नहीं है...
सफल- (आँखों में आंसू भरता हुआ) तोह मतलब...
डॉक्टर- हाँ..! हमने लड़की को बचा लिया है, लकिन लड़के को नहीं बचा पाए.. उसका बच पाना इम्पॉसिबल था.. सॉरी...
(इतना बोल डॉक्टर वह से चला गया.. और सफल की हिम्मत ने डैम तोड़ दिया और वो वही घुटनो पर बेथ गया.. दूर बैठी सवाना ने जब सफल को ऐसे देखा तोह कस के सिया को अपने से लगा लिया.. वो dhire-dhire यह सोच कर रोने लगी की अब वो क्या जवाब देगी सिया को...)
सिया- (अपने ऊपर पद रहे सवाना के आंसू को फील कर, सर उठा कर) क्या हुआ दीदी.. आप रू रही हो...
सवाना- नहीं बीटा.. (सफल की और इशारा कर) वो देखो चलो भैया के पास चले...
(सवाना सिया को गौड़ में उठा के सफल के पास ले जा रही होती है की सामने रूम से 2 नर्सेज स्ट्रेचर पर किसी बॉडी को लेकर बहार चली गयी.. शायद यह सिया के पापा की बॉडी थी.. उनका फेस धोखा हुआ था तोह सिया देख नहीं पायी की कोण है वो.. अब मासूम लड़की तोह समाज भी नहीं पायी थी यह बॉडी उसके मुम्मा या पापा की हो सकती है.. लकिन सवाना ने जब यह देखा थो उसका दिल कम्पना शुरू कर दिया...)
सवाना- (सफल के पास पहुँचती हुई) सफल...
सफल- (सर ऊपर उठा, अपनी बेगहि आँखों से सवाना को देखता हुआ) हाँ...
सवाना- (दर्द भरी आवाज में) क्या कहा डॉक्टर ने...
सफल- (सिया को देख) बीटा चलो आपको आपकी मुम्मा से मिलता हु...
सिया- (बहुत खुश होकर) मुम्मा ठीक हो गए...
सफल- (आंसू को रोक मुस्कुराता हुआ) हाँ बिलकुल ठीक हो गयी आपकी मुम्मा.. (उठता हुआ) चलो...
(सिया सफल की एक ऊँगली पकड़ती है और दोनों रूम के अंदर जाने लगते है.. अभी कुछ देर पहले hi उसके पापा की बॉडी को उसके सामने से लेजाया गया था.. सवाना भी समाज गयी थी की सिया की मुम्मा जिन्दा है लकिन उसके पापा नहीं रहे.. वो वापिस एक बेंच पर बेथ कर रोने लगी उसका सर दर्द करने लगा था, एक फूल सी बची यह सदमा कैसे सेह पायेगी यह सोच कर, जब वो सुनेगी की उसके पापा अब इस दुनिआ में नहीं रहे...)
(सफल और सिया रूम में पहुंचे तोह एक बीएड पर पीठ टिकाये एक लड़की बैठी थी जो बस रोये जा रही थी.. यह थी सिया की मम्मी.. 27 साल की उम्र, खूबसूरत चेहरा, काळा बार जो अभी बिखरे हुए थे, आँखों में jhar-jhar बेहटा पानी, गुलाबी होंठ जो अभी सुख चुके थे.. इनका नाम था प्रियल.. प्रियल ने जैसे hi सिया को देखा वो और रोने लगी.. उसके पास एक नर्स कड़ी थी को उससे शांत करवा रही थी. लकिन यह दुःख तोह उससे साडी उम्र झेलना था...)
(सिया भी भाग कर गयी और बीएड पर छलांग लगा कर अपनी मुम्मा से लिपट गयी...)
सिया- (खुश होकर) मुम्मा आप ठीक हो गयी...
प्रियल- (मुस्कुराने की कोशिश कर, हाँ में सर हिलती हुई)
सिया- (अपनी मुम्मा के टपकते आंसू देख) क्या हुआ मुम्मा आप रू क्यों रही हो.. (दूरसे खली बीएड हो देख) पापा कहा है.. (झूठे गुस्से से) उन्होंने डांटा आपको.. बताओ कहा है मैं अभी उनकी खबर लेती हु...
(बेचारी प्रियल क्या बताये की अब उससे dantne-dhamkane वाला, उससे रोटी हुई को चुप करने वाला, उसके साथ cheed-chaad करने वाला, हर मुसीबत में उसका साथ देने वाला अब इस दुनिआ को छोड़ कर जा चूका है.. प्रियल से सहा नहीं जा रहा था.. उसने अपनी बेटी को पकड़ के अपने साइन से लगा लिया और अपनी आने वाली जिंदगी के बारे में सोच कर रोने लगी.. इस अनजान दुनिआ में उसका और कोई है भी नहीं.. वो कहा जाएगी, उसकी बेटी को कुछ लोग पाना चाहते है कैसे वो अपनी बेटी को उनसे बचा पायेगी, क्या वो अकेली उनसे लड़ पायेगी या यह जिंदगी बस कुछ hi दिन की होने वाली है...)
《1757 -वर्ड्स》