TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》 - Page 6 - SexBaba
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TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》

शुक्रिया जणू भाई...

:claps:Wah भाई मस्त लिखा..

वो तोह करवाएगा hi भाई. कोई शक hi नहीं तुषार की तयारी joro-shoro से चल रही है...



लास्ट अपडेट में बहुत कुछ गड़बड़ है भाई.. शायद आज क अपडेट में कुछ मालूम पद जाये...

शुक्रिया भाई आपके कमैंट्स क लिए.. ऐसे hi साथ बनाये रखे....
 
चार लीणो में 6 emoji:D

शुक्रिया सोना जी.. हम उनकी फॅमिली छिपकर इसलिए रहता है ताकि उनकी फॅमिली को कोई खतरा न हो.. अमीर लोग, पैसे वाले खतरा तोह होगा hi न.. वैसे यह बात अभी लास्ट अपडेट में hi बताई मैंने.. आधा पढ़ क रिव्यु dena..😆

तुषार और तान्या वाला सीन आज क अपडेट में दिख जायेगा...

शुक्रिया फॉर थे कमेंट.. कीप सपोर्टिंग...
 
अपडेट-26

(तुषार भट्ट बना बस देख रहा था.. एक आदमी ने तान्या की स्कर्ट को पकड़ा और थोड़ा सा ऊपर कर दिया जिससे उसकी गोरी जाँघे दिखने लगी.. फिर उस आदमी ने तान्या की टॉप को भी थोड़ा खिसका के ऊपर कर दिया जिससे उसकी ब्लैक ब्रा thori-thori दिखने लगी और उसका गोरा सॉफ्ट पेट सामने ा गया.. तान्या रू रही थी उन् आदमियों के सामने गिड़गिड़ा रही थी.. तुषार को cheekh-cheekh के पुकार रही थी जो बस उससे मिरर से शांत खड़ा देख रहा था.. उसके चेहरे पर कोई भौ नहीं थे.. न दुःख के न ख़ुशी के जैसे किसी सदमे में हो जा शायद वो तुषार था hi नहीं.. इधर एक आदमी ने पास में रखे एक टेबल पर से एक बोतल उठाई जिसमे कुछ लिक्विड था.. उसने बोतल का ढक्कन खोला तोह उसमे से वाइट स्मोक निकलने लगी.. आदमी ने वो लिक्विड. शायद वो कोई केमिकल था.. उससे लेकर वो तान्या के करीब ऐनी लगा………

|अब अग्गे|

(आदमी वो केमिकल लेके तान्या क सामने खड़ा हो गया…)

तान्या- प्लीज मुझे छोड़ दो.. मैंने किसी का कुछ नहीं बिगड़ा…

(तभी पीछे वाले दूर से एक आदमी सूट बूट में अंदर आता है..)

आदमी- (तान्या के पास आकर खड़ा होता हुआ) पर तुम्हारे बाप ने तोह मेरा सब कुछ बिगाड़ दिया न…

तान्या- (उसकी तरफ देख शांत होती हुई) कोण हो आप..? और क्या बिगाड़ा है मेरे पापा ने आपका…

आदमी- बहुत कुछ.. बहुत कुछ मुझे बर्बाद कर दिया उसने…

तान्या- लकिन किया क्या है मेरे पापा ने…

आदमी- (गुस्से में) बस्स्स.. खामोश… अब एक भी लफज अपने मुँह से मत निकलना… सामजी.. और जो में बोलू वही करो…

तान्या- (घबराती हुई) की.. क्या. क्या करना है मुझे…

आदमी- तुम दोनों जुड़वाँ bhai-behan के नाम तुम्हारे बाप ने जो 5-5 हज़ार करोड़ रुपए जमा करवा रखे है. बस वो मेरे नाम कार्डो मैं तुम छोड़ दूंगा…

तान्या- (हैरानी से) 5-5 हजार करोड़.. इतना सारा पैसा पापा हमारे नाम कब जंहा करवाया.. मुझे नहीं पता इसके बारे में…

आदमी- देख ज्यादा षानपन्ति नहीं.. सीधी तरह से वो पैसे मेरे अकाउंट में ट्रांसफर करदे.. (उससे फ़ोन पकड़ता हुआ) यह पकड़ फ़ोन और अपने मैनेजर को बोल की (एक कार्ड देता हुआ) इस अकाउंट में 5 हज़ार करोड़ ट्रांसफर करने है. जल्दी से करदे.. देख क्या रही है.. चल जल्दी कर वर्ण ाचा नहीं होगा तेरे लिए…

(तान्या को तोह कुछ समाज hi ा रहा था.. तुषार का उससे यू bin-bataye यहाँ लेकर एना.. और जब उसने सामने देखा तोह पाया की तुषार उससे मिरर से मुस्कुराता हुआ देख रहा है… )

तान्या- (दर्द भरी आवाज में) तुषारर..

आदमी- (हस्ता हुआ) हाहाहा.. (तुषार की तरफ ऊँगली कर) वो तेरा भाई.. वो कुछ नहीं करेगा क्युकी वो हमारे साथ है.. वही तोह लेकर आया तुम्हे यहाँ.. हैना..? उसने तोह अपने पैसे मेरे नाम कर दिए अब तुम्हारी बरी है.. चल फ़ोन कर अपने मैनेजर को.. जल्दी कर जल्दी… (शैतानी मुस्कान के साथ) मुझे अभी तेरे भाई से भी कुछ बात करनी है…

तान्या- देखो अंकल मेरा कोई मैनेजर नहीं है और मुझे तोह येह भी नहीं पता की मेरे नाम 5 हज़ार करोड़ रुपए. इतने सरे पैसे पापा ने मेरे नाम कर रखे है.. प्लीज मुझे जाने दो अंकल…

आदमी- ेहः साली हराम की बची ासे नहीं मानेगी.. (वो केमिकल जो उसके एक आदमी ने पकड़ा हुआ था जिसमे अभी भी स्मोक निकल रही थी उसकी तरफ इशारा करते हुए) वो बोतल देख रही है उसके हाथ में.. उसमे अस्सी चीज है की तेरी चीखे निकल जाएगी जब उसकी एक बून्द भी तेरे इस बदन पर पड़ेगी...

तान्या- (अस्सू बहती) नहीं अंकल.. प्लीज ऐसा कुछ मत करो.. मुझे कुछ नहीं पता पैसो के बारे में…

आदमी- (गुस्से से उससे एक थप्पड़ मरता हुआ) (अपने आदमी से) ीह दाल इस्पे.. लगता ऐसे नहीं मानेगी…

तान्या- नहीं. नहीं प्लीज.. aaaaaaahhhhahhhhhhhhaaaaahhhh…Tuuusssshhhrrrrr….

(यह एक दरी बरी चीख निकली तान्या की जब उस आदमी ने उसकी जांघ पर एक बून्द उस केमिकल की डाली.. तान्या को ऐसा महसूस हुआ जैसे उसकी जांघ पर किसी ने गरम कोयला रख दिया हो.. लकिन वो दर्द सिर्फ कुछ 2सेक् के लिए hi था.. लकिन इस 2सेक् में hi तान्या दर्द से तड़प उठी थी.. आखों से आसुओं की नदी jhar-jhar बह रही थी.. उसने एक बार तुषार को देखा जो आराम से idher-udhar टहल रहा था…)

आदमी- (हस्ता हुआ) हाहाहाहा… देख तेरी यह चीखे गूंजती रही. जब तक तू पैसे मेरे अकाउंट में ट्रांसफर नहीं करती.. अपनी जिंदगी से ज्यादा प्यारे है क्या तुझे पैसे.. चल अब अचे बचे की तरह ले फ़ोन पकड़ और…….

तान्या- (बिच में, गुस्से से) कमीना, कुत्ते.. तुझे एक बार समाज नहीं आता की मेरे नाम कोई paise-wasie नहीं है.. (तुषार को देख) और तू. मुझे तोह विश्वास hi नहीं हो रहा की तू आसा कुछ कर सकता है.. इनके लिए तू कब से काम करने लग गया.. भाई है तू मेरा.. जरा सा भी तरस नहीं आ रहा तुझे मुझ पर.. और तेरी अपनी बहिन से भी बढ़कर क्या दे रहे है यह तुझे बदले में की तूने मुझे यहाँ इनके सामने लेक खड़ा कर दिया.. हैं..? बता.. बोलता क्यों नहीं…

(तान्या की इस बात पे तुषार बस मुस्कुरा जाता है.. तान्या को अपनी आखों पे यकीन करना मुश्किल हो रहा था.. वो एक बार चारो और नजर घुमा के देखती है की क्या वो जो देख रही है कही यह कोई बुरा सपना तोह नहीं.. क्या यह सब सच है..? उसके भाई ने उसके साथ आसा किया... आखिर उसका दिल chur-chur हो गया.. जब तुषार jor-jor से उससे देख हसने लगा…)

तान्या- (रोटी हुई) ी.. हेट.. यू.. तुषार.. ी हेट यू… (और वो jor-jor से रोने लगी)

आदमी- (मुस्कुरा के) सही सही सही सही.. कैसा भाई है यह.. बहिन यहाँ रू रही है और भाई उदार खड़ा मुस्कुरा रहा है. है रहा है.. आसा भाई तोह मैंने पहली बार देखा है.. चलो छोडो यह बाते मेरे काम की नहीं.. अब तू बता की पैसे मेरे अकाउंट में ट्रांसफर करेगी के नहीं.. हाहाहा.. बता.. नहीं तोह वापिस तुझे वही मजे मिलेंगे जो अभी मिले था…

(तान्या कुछ नहीं बोली और बस तुषार को घूरती रही…)

आदमी- नहीं मानेगी न…

(वो अपने आदमी को इशारा करता और इस बार उसका आदमी वो केमिकल उसके पेट पर गिरता है.. केमिकल की कुछ बून्द गिरते hi तान्या के पेट पर हरे, और नीले रंग की कुछ लेने फैल गयी.. जैसे एक करंट उसके पेट से होते हुए पूरी बॉडी में फैल गया हो.. उसकी बॉडी पूरी बंदी होने के कारन भी वो कुछ इंच तक हवा में उछाल गयी.. और दर्द तोह ऐसा की जैसे बॉडी के हर जिससे में आग की गरम लपट ने जकड लिया हो.. इस बार केमिकल ज्यादा डाला गया था तोह दर्द भी 10,12 सेक् तक होता रहा तान्या को.. जब दर्द गायब हुआ तोह वो किसी होश में नहीं थी…)

आदमी- (गुस्से से) आबे यह साली मानती क्यों नहीं है.. दर्द सेठ लेगी लकिन बाप के पैसे को आंच नहीं आने देगी.. (तान्या के फेस को देख) लो यह तोह बेहोश भी हो गयी.. (अपने आदमी से) दाल जरा वो केमिकल एक बार और देखता हु कैसे होश में न आती…

(वो आदमी वापिस तान्या पे केमिकल डालने वाला था की पुरे रूम में सफेद धुआँ फैल गया.. देखते hi देखते रूम धुए से भर गया….)

तान्या..!

तान्या..!!!

तान्या- (हड़बड़ा के सामने देखती हुई) हां.. हाँ.. अरे मुम्मा आप हो.. क्या हुआ..?

माँ- (उसके पास बीएड पे बैठती हुई) आज वापिस वही सब याद कर रही थी..?

तान्या- (उदास होक) हाँ मुम्मा.. मुझे वो सब भूलता hi नहीं है.. आज भी यकीन नहीं होता की मेरा तुषार आसा भी कर सकता था…

माँ- (उसका फेस अपने हाथो में लेती हुई) तूने बात की उससे की क्यों उसने आसा किया.. आखिर उस दिन तेरे साथ और तुषार के साथ क्या हुआ था.. तू सब जानती है..?

तान्या- नहीं मुम्मा अब जानना क्या है.. सब मेरी आखों के सामने हुआ था.. (खुश होक) पर चलो अब तुषार बदल गया है.. वो हमारे लिए लड़ता है बिना अपनी परवाह किये.. अब हम सबसे बहुत प्यार करता है.. मुझे उससे कोई शिकायत नहीं है…

माँ- तानिआए.. तू वही बात पर अड्डी है.. मुझे लगा अब तुम दोनों की नफरत ख़तम हो गयी तोह तुम उस बारे में अचे से बात करोगे.. और आखिर हमे भी तोह पता चले की आखिर हुआ क्या था.. कोई हमारे बचो को छू के नहीं देख सकता.. उससे जान से माए देंगे हम अगर मेरे किसी भी बचे पर आंच भी आयी तोह.. लकिन तुम लोग बता hi नहीं रहे हो की आखिर हुआ क्या था, किसने किया था... और मुझे पता है तुम दोनों ने झूट बोलै था.. जो भी उस दिन तुम दोनों ने अपनी नफरत करने की सफाई दी सब झूटी थी.. आखिर हम भी जानना चाहते है वो कारन की तुषार का अचानक यू सब खाना पीना छोड़ देना, अपनी सेहत पर धयान न देना, एकदम से सद्दे कपडे, सादड़ी लाइफस्टाइल जीने का विचार.. क्या था यह सब..? जैसे तुम लोग जिंदगी क्या है उससे जीना hi भूल गए हो..

तान्या- मुम्मा मुझे भी नहीं पता की आखिर उसदिन क्या हुआ था.. नफरत ने मुझे इतना अँधा कर दिया की मुझे उसकी शकल देख के वही सब याद आता था.. मैंने कभी उसकी बात नहीं सुनी. जो वो अक्सर मुझे करना चाहता था.. लकिन मुझे भी सब जानना है.. तुषार ने बोलै है की वो मुझे जल्द hi सब बता देगा…

माँ- (उसके कंधे पे हाथ रखती हुई) ठीक है बीटा.. लकिन एक और बड़ी बात इशिता. वो कहा है..? देखो मुझे पता है तुषार ने बोलै इशिता को लगता हम गरीब है, पैसे नहीं हमारे पास wagra-wagra तोह इसलिए वो तुषार छोड़ के चली गयी.. देखो कोई सच्चा प्यार करने वाली लड़की आसा नहीं करती.. और अगर उसका प्यार झूठा होता तोह तुषार उसके लिए यू पागल न होता. वो उससे कब जा भूल चूका होता. मेरा बीटा कोई बेवकूफ नहीं की किसी झूठी लड़की से प्यार कर बैठे.. यह सब झूट था और हम यह शुरू से hi जानते थे लकिन कुछ बोले नहीं.. पर इशिता है कहा और क्यों वो चली गयी तुषार को छोड़ के..?

(माँ के इस सवाल ने तान्या को गहरी सोच में दाल दिया.. वो भी सोचने लगी की इशिता ासे तोह नहीं जा सकती तुषार को छोड़ के तोह आखिर बात क्या हुई होगी…)

तान्या- मुझे नहीं पता मुम्मा.. में तुषार से बात करुँगी…

माँ- (उसके माथे पे किश कर के) ठीक है मेरा बचा… (और उठ के बहार चली गई)

|बैक तो तुषार|

(तुषार अभी भी अपने धयान में मगन था.. सफल और सवाना भी अपने काम गद्दा खोदने में लगे थे.. गुरूजी कब के जा चौके थे.. शिवं तुषार के पास hi कहड़ा था.. लकिन फिर वो chalte-chalte हवेली के बहार जाने लगा.. अभी उसने थोड़ी दूर रोड पर देखा तोह पाया की एक बाइक निचे गिरी पड़ी है. उसके पास में एक औरत और एक आदमी बशोष पड़े है शायद कोई एक्सीडेंट हुआ था.. दोनों पति होंगे क्युकी रोड के bicho-bich एक छोटी लड़की रू रही थी वो इनकी बेटी हो सकती है.. शिवं ने दूर रोड पर देखा की एक गाड़ी सामने से ा रही है जिसकी स्पीड काम hi नहीं हो रही.. शायद ड्राइवर ने थोड़ी पी राखी थी.. और वो कार फुल स्पीड से उस बची से जा लगेगी अगर वो साइड न हुई तोह.. शिवं को गुस्सा ा रहा था की सामने एक बची रोड के बिच रू रही है और यह लड़का कार क्यों नहीं स्लो कर रहा… खैर शिवं ने दूर लगा दी.. उससे कार वाले को सबक सीखने की सूजी.. स्पीड के तोह क्या कहने वो पालक झपकते बची के पास खड़ा था लकिन थोड़ा सा आगे.. कार अपनी स्पीड दिखती हुई शिवं से तकरानी वाली थी की शिवं ने अपना राइट हैंड एकदम से सीधा कर लिया गाड़ी जब शिवं के हाथ से टकराई तोह ासे रुक गयी जैसे दिवार से जा टकराई हो.. शिवं ने गाड़ी के बम्पर पे जोर से हाथ मारा था.. जिससे गाड़ी पीछे से थोड़ी ऊपर उछाल के वापिस निचे गिर गयी और गाड़ी के सरे गिलास chakna-chur हो गए.. बम्पर की हालत ख़राब थी.. इंजन से धुआँ छूट पड़ा था.. और जो सबसे बड़ी बात थी ड्राइवर के साथ वाला लड़का फ्रंट गिलास के टूटने के sath-sath वो भी गाड़ी से बहार आके रोड पे गिर गया.. ड्राइवर बशोष था… और पीछे भी 2 लड़के नशे में सू रहे थे और अचानक हुए इस सीन से दर गए दोनों के सर अगली सीट से जा जोर से टकराये थे….


《2060 -वर्ड्स》
 
थैंक्स Mr.X बीआरओ.. उम्मीद है आपको अपडेट से कुछ परेशानी नहीं हुई होगी.. तान्या वाला सीन और भी डेंजर होने वाला था बूत मैंने थोड़ा काम कर दिया.. आप सबकी फीलिंग्स जुड़ चुकी है सभी चरक्टेर्स के साथ मुझे थोड़ा दिन रखना पड़ेगा की आपका दिल न दुखे.. शुक्रिया की अपने अपडेट-25 में अपनी बात बताई. नहीं हो... काहिर.. ऐसे hi साथ बनाये रखे....
 
थैंक्स आकाश बीआरओ फॉर थे ब्यूटीफुल रिव्यु.. तान्या के साइड का सीन दिखा चूका हु की क्यों वो तुषार से नफरत करती रही.. अब वक़्त है की क्यों तुषार ने उसकी हेल्प न की और आखिर सचाई क्या है.. जो शायद सिर्फ तुषार hi जनता है.. बहुत रीडर्स तुषार से नफरत कर रहे होंगे की उसने ऐसा बेहवे क्यों किया.. वो लोग कोण थे यह भी जल्द hi मालूम होगा आपको...

थैंक्स भाई दिल से रिव्यु देने के लिए.. कीप सपोर्टिंग...
 
दोस्तों! 2दिन बाद इस हॉस्पिटल से रिहाई मिल जाएगी.. लकिन उपदटेस वैसे आएगा जैसे अभी है.. बहुत सारा काम पेंडिंग पड़ा है उससे भी निपटना है.. इधर तोह बस रेस्ट hi ले रहा था.. दिमाग शांत था और वेहला भी तोह स्टोरी का प्लाट काफी आगे तक सोच लिया है.. उम्मीद है जो भी सोचा आपको पसंद आएगा.. आप सबका साथ था तोह मैं हॉस्पिटल में भी लिख पाया.. ऐसे hi साथ बनाये रखे.. सपोर्ट दिखते रहे....
 
अपडेट-27

(तुषार अभी भी अपने धयान में मगन था.. सफल और सवाना भी अपने काम गद्दा खोदने में लगे थे.. गुरूजी कब के जा चौके थे.. शिवं तुषार के पास hi कहड़ा था.. लकिन फिर वो chalte-chalte हवेली के बहार जाने लगा.. अभी उसने थोड़ी दूर रोड पर देखा तोह पाया की एक बाइक निचे गिरी पड़ी है. उसके पास में एक औरत और एक आदमी बशोष पड़े है शायद कोई एक्सीडेंट हुआ था.. दोनों पति होंगे क्युकी रोड के bicho-bich एक छोटी लड़की रू रही थी वो इनकी बेटी हो सकती है.. शिवं ने दूर रोड पर देखा की एक गाड़ी सामने से ा रही है जिसकी स्पीड काम hi नहीं हो रही.. शायद ड्राइवर ने थोड़ी पी राखी थी.. और वो कार फुल स्पीड से उस बची से जा लगेगी अगर वो साइड न हुई तोह.. शिवं को गुस्सा ा रहा था की सामने एक बची रोड के बिच रू रही है और यह लड़का कार क्यों नहीं स्लो कर रहा… खैर शिवं ने दूर लगा दी.. उससे कार वाले को सबक सीखने की सूजी.. स्पीड के तोह क्या कहने वो पालक झपकते बची के पास खड़ा था लकिन थोड़ा सा आगे.. कार अपनी स्पीड दिखती हुई शिवं से तकरानी वाली थी की शिवं ने अपना राइट हैंड एकदम से सीधा कर लिया गाड़ी जब शिवं के हाथ से टकराई तोह ासे रुक गयी जैसे दिवार से जा टकराई हो.. शिवं ने गाड़ी के बम्पर पे जोर से हाथ मारा था.. जिससे गाड़ी पीछे से थोड़ी ऊपर उछाल के वापिस निचे गिर गयी और गाड़ी के सरे गिलास chakna-chur हो गए.. बम्पर की हालत ख़राब थी.. इंजन से धुआँ छूट पड़ा था.. और जो सबसे बड़ी बात थी ड्राइवर के साथ वाला लड़का फ्रंट गिलास के टूटने के sath-sath वो भी गाड़ी से बहार आके रोड पे गिर गया.. ड्राइवर बशोष था… और पीछे भी 2 लड़के नशे में सू रहे थे और अचानक हुए इस सीन से दर गए दोनों के सर अगली सीट से जा जोर से टकराये थे….

|अब अग्गे|

लड़का.3- (अपना सर पकड़ कार से बहार निकलता हु) आअह्ह्ह्ह बहनचोद.. क्या हुआ बे यह साला… (कार की हालत देखता मुँह खोल देखता हु) ए दीपक.., राजू, पिंकू.. साला क्या हो गया यह… (ड्राइवर को कंधे से पकड़ हिलाते हुए) राजू.. ए राजू.. यह तोह बेहोश है… पिंकू कहा गया…

दीपक- मोंटी…

मोंटी- (दीपक की तरफ देख) हाँ..? पिंकू कहा गया.. (शिवं की और देख) यह कोण है सामने खड़ा और येह क्यों रू रही है.. तू बता तुजे कुछ पता है की क्या हुआ है.. मैं सू रहा था.. और एक झटका लगा kass.k के साला सर जेक सीट से टकरा…

दीपक- अबे सेल चुप कर.. (एक तरफ इशारा कर) और वो पड़ा पिंकू अग्गे…

मोंटी- (अग्गे जेक दीपक को देखता हुआ) भाई साहब.. (भाग के उसके पास जेक) अब्बे तब से तू देख क्या रहा था.. यह भी बेहोश है.. पानी ला… अब्बे ेहः साला हुआ क्या है कोई मुझे बटेगा…

शिवं- (बची को गौड़ में उठता हुआ. जो कब से रू रही थी) अरे बीटा ठीक हो आप.. chup-chup रट नहीं... (उसके आखों से ासु पोंछता हुआ) फ़िक्र मत करो बीटा.. सब ठीक है…

(शिवं उस बची को हवेली में ले जाता है.. लड़की थी की चुप होने का नाम नहीं ले रही थी…)

शिवं- (जोर से आवाज लगता हुआ) सफल.! सवाना.!!

सफल- (खड़े में से आवाज लगता हुआ) हाँ भाई.. क्या हुआ..?

शिवं- इधर ायो बहार... चुप हो जाओ बीटा. इतना मत रू प्लीज. मुझे ाचा नहीं लग रहा.. (वापिस उसकी आखें साफ़ कर) देखो तोह कैसे अपने रू रू के अपनी आखें लाल कर्ली है…

सवाना- (शिवं के पास अत्ति हुई) क्या हुआ शिवं..? ये प्यारी सी बची कोण है और क्यों रू रही है इतना.. (बची को पकड़ती हुई) इधर ला मुझे दो इससे अभी चुप करवाती हु मैं…

(शिवं उस बची को सवाना को पकड़ा देता है और खुद सफल के साथ हवेली के बहार चला जाता है…)

सफल- (बहार का नजारा देख) भाई यह सब क्या हुआ और कब हुआ..?

शिवं- (उन् बाइक वाले लड़का और लड़की की और इशारा कर) तू वो सब छोड़ उन्हें जल्द से गद्दी में दाल और हॉस्पिटल ले चल.. वैसे तोह ज्यादा छोटे नहीं लगी है सिर्फ बेहोशी की हालत में hi है लकिन रिस्क नहीं लेना.. जा जल्दी कर…

सफल- ठीक है भाई में जाता हु…

(सफल जल्दी से हवेली जेक तुषार की कार निकलता है और ek-ek करके पहले लड़की और फिर लड़के दोनों को कार में पिछले सीट पर बैठा के उन्हें सीट बेल्ट लगा देता है और कार को सेहर के हॉस्पिटल की तरफ मूड देता है…)

(अंडर दोनों लड़को ने अपने बेहोश पड़े दोनों दोस्तों को होश में ला दिया था.. लकिन दोनों को काफी छोटे आयी थी.. ड्राइवर के सर पे लगी थी दूसरे के हाथ पाव और चेहरा चील गया था कार का कांच और सड़क की रगड़ की वझे से…)

मोंटी- (शिवं के तरफ देख) ोये लड़के.. इधर आ…

शिवं- (उसके पास जा खड़ा होता हुआ) हम्म बोलो…

मोंटी- यह सब क्या हुआ तू जनता है.. कार टकराई कैसे.. और सबसे बड़ी बात किस्से टकराई..? यहाँ तोह मुझे कुछ न दिख रहा.. हाँ वह दूर एक बाइक और एक लड़का, लड़की बेहोश पड़े थे.. काहिर वो मेरे मतलब की बात नहीं.. कार का बाइक से टकराने से ऐसा एक्सीडेंट थोड़ी होगा.. यह कुछ और हुआ है.. अब बता जल्दी तू इधर hi खड़ा था तूने सब देखा होगा…

शिवं- मैं तोह खुद bar-bar बचा हु.. देखा नहीं मैं तुम लोग की गद्दी के सामने था.. अभी ुद्धा देते मेरेको तुम लोग.. ाचा वैसे ा कहा से रहे हो तुम लोग इतनी दारू पेक..?

दीपक- वो तेरे मतलब की बात नहीं है.. लकिन एक बात बता तू रोड के बिच क्या ग़लतिया मार रहा था.. पता न है था यह रोड है.. यहाँ गड्डिया, ट्रक, मोटरसाइकिल दौड़ते है…

शिवं- वो सब छोडो तुम्हारे वो दोनों साथी कहा है..?

मोंटी- वो दोनों कार में है.. होश में तोह ा चुके है पर समाज नहीं ा रहा कुछ बोल क्यों न रहे.. बस कम्पे जा रहा है तब से. जैसे कोई bhoot-voot देख लिया हो…

शिवं- (मुस्कुराता हुआ) ाचा चलो अपने फॅमिली वालो को या किसी दोस्त, रिश्तेदार को फ़ोन करके हेल्प मांग लो.. और fata-fat निकालो यहाँ से…

दीपक- (शिवं के पास अट्टा हुआ) क्यों बे सेल चले जायेंगे आराम से तुझे उससे क्या.. (हवेली की और देखता हुआ) तेरी इधर हवेली में रुके हुए है क्या.? जो तू बोल रहा निकलो यहाँ से.. चल तू फुट ले अपने घर को कही pit-wit न जइयो मेरे से…

(शिवं अग्गे कुछ नहीं बोलता और मुस्कुराता हुआ हवेली की और चल देता है…)

(शिवं हवेली पौंछा थो देखा तुषार अभी भी वैसे hi बैठा अपने ध्यान में लीं था.. और सवाना और वो बची दोनों बेंच पर बैठे थे.. अभी वो बची रू नहीं रही थी और hass-hass के सवाना से बाते कर रही थी…)

शिवं- (उनके पास जाता हुआ) अरे आप तोह चुप हो गयी…

बची- मैं रोटी थोड़ी रहती हु.. मैं अछि बची हु.. मुम्मा कहती है रोने वाले गंदे बचे होते है. इसलिए मैं नहीं रोटी…

सवाना- (उसको गले लगाती हुई) गुड गर्ल.. कितनी प्यारी बची है न यह शिवं…

शिवं- (उसके खूबसूरत चेहरे को निहारता हुआ) हाँ बहुत प्यारी है.. वैसे आपका नाम क्या है बीटा..?

बची- मेरा नाम सिया है…

शिवं- सिया.. बहुत प्यारी नाम है आपका..

सिया- (खुश होक) थैंक्यू भैया.. (मासूमियत से) क्या मैं आपको भैया बुला सकती हु..?

शिवं- हाँ हाँ क्यों नहीं आप मुझे भैया बुला सकती हो.. और आपकी आगे क्या है..?

सिया- मैं * साल की हु…

शिवं- ओह्ह फिर तोह आप काफी बड़ी हो…

सिया- (गर्दन न में हिलती हुई) नहीं मैं 8 साल की हु. मैं छोटी हु…

शिवं- (हस्ता हुआ) ाचा ठीक है…

सिया- भैया आप हसे क्यों.. और दीदी बोल रहे थे की आप मेरे मुम्मा, पापा को लेन गए थे.. कहा है वो..? आप उन्हें लेकर नहीं ए..?

शिवं- बीटा उन्हें थोड़ी छोट आयी थी इसलिए उन्हें आपके दूसरा भैया हॉस्पिटल लेकर गया है…

सिया- (रोटी हुई) मुम्मा को छोट आयी है.. (सवाना से लिपट के) दीदी मुम्मा, पापा को छोट लगी है.. उन्हें दर्द हो रहा होगा न…

सवाना- (उसकी पीठ सहलाती हुई) रट नहीं मेरा बचा.. देखो उन्हें ज्यादा छोट नहीं लगी.. बस हलकी सी थोड़ी सी लगी है.. ठीक है.. वो जल्दी ठीक हो जायेंगे इसलिए तोह उन्हें हॉस्पिटल लेकर गए है…

सिया- ठीक है दीदी.. लकिन मुझे मिलना है उनसे…

शिवं- ठीक है आपके मां, पापा को होश ा जायेगा तोह हम उनसे मिलने चलेंगे.. Okay…

सिया- Okay भैया.. दीदी मुझे नींद ा रही है क्या मैं यहाँ सू जाऊ क्या..?

सवाना- हाँ बीटा लकिन आप यहाँ क्यों सोयुगी.. चलो मैं आपको अंदर रूम में सुला के आती हु…

सिया- नहीं दीदी मैं ऐसे hi सू जायूँगा.. आप फ़िक्र मत करो...

सवाना- नहीं.. मैंने बोलै न की आप अंदर रूम में चलो उधर जेक सू लेना.. ऐसे बचे ज़िद नहीं करते...

सिया- Okay दीदी.. आप बहुत अछि हो…

(सवाना सिया को ले जाती है हवेली के अंदर और जाने से पहले शिवं से इशारे से पूछती है की कोण है यह और क्या हुआ है आखिर तोह शिवं उससे बाद में बताने का इशारा कर देता…)

(सवाना सिया को अपने रूम में ले जाती है…)

सवाना- लो बीटा आप आराम से बीएड पर सू जाओ. ठीक है...

सिया- दीदी यह कितना सूंदर रूम है.. आपका घर भी बहुत बड़ा है.. मैंने तोह पहले ऐसा रूम कभी नहीं देखा...

सवाना- ाचा.. चलो कोई न अब से इस रूम को अपना hi संजो.. जब तक आपके मम्मी, पापा ठीक नहीं हो जाते आप यही रहो ठीक है…

सिया- Okay दीदी…

सवाना- और बताओ कुछ खाने को लाऊं क्या आपके लिए…

सिया- नहीं दीदी.. मुझे बस सोना है.. नींद ा रही है.. खाना मैं बाद में खा लुंगी…

सवाना- (उसके माथे पे किश करती हुई) ठीक है सू जाओ.. आप बहुत प्यारी बची हो…

(सवाना वापिस शिवं के पास ा जाती है और आकर तुषार को देखती है…)

सवाना- बॉस तपश्या क्यों कर रहे है तब से..?

शिवं- गुरूजी ने बोलै.. इससे इनका मन शांत रहेगा…

सवाना- हम्म गुरूजी ने बोलै है तोह जरूर होगा.. उनकी बाते किसी चमत्कार से काम है क्या.. उन्होंने तुझे क्या बना के रख दिया.. और हमे क्या बना दिया…

शिवं- (मुस्कुराता हुआ) हम्म्म..

(सवाना अग्गे कुछ पूछती उसने तुषार की तरफ देखा और एकदम से घबरा के बोली…)

सवाना- (घबराती हुई) Shii..Shiiivaann……


《1721 वर्ड्स》
 
थैंक्स आकाश बीआरओ फॉर थिस ब्यूटीफुल रिव्यु.. मुझे ख़ुशी हुई की सिया आपको पसंद आयी.. स्टोरी का हर चरक्टेर्स ऐसे रखे है मैंने की किसी न किसी को कोई एक करैक्टर बहुत पसंद आएगा. फिर चाहे वो कोई क्यूट हो, नॉटी, मस्तीखोर, दरिंदा, मासूम, शर्मिला, और गली गलोच wala.:D सबका कोई न को फव बन चूका होगा.. अपडेट थोड़ा छोटा था बूत अगला अपडेट कोशिश करूँगा बड़ा दू... ऐसे hi सपोर्ट करते रहे बीआरओ...
 
थैंक्स रोहित भाई जी.. आपकी शिकायत का कारन बस यही है की लाइफ बहुत बिजी चल रही है तोह ज्यादा वक़्त नहीं दे प् रहा.. पर अब से कोशिश होगी की अपडेट बड़े दू.. और आप चाहते हो की सेक्स न ऐड करू स्टोरी में. अब तोह भाई यह पॉसिबल hi नहीं है क्युकी नजाने कितने hi रीडर्स वेट कर रहे है की कब सेक्स सन आएगा स्टोरी तोह सॉरी भाई.. बाकि आप सपोर्ट करते रहो स्टोरी जैसी चल रही है यह ऑर्डर भी बेहतर होती नजर आएगी आपको.. थैंक्स फॉर योर ब्लेस्सिंग्स...
 
अपडेट-28

सवाना- हम्म गुरूजी ने बोलै है तोह जरूर होगा.. उनकी बाते किसी चमत्कार से काम है क्या.. उन्होंने तुझे क्या बना के रख दिया.. और हमे क्या बना दिया…

शिवं- (मुस्कुराता हुआ) हम्म्म..

(सवाना अग्गे कुछ पूछती उसने तुषार की तरफ देख और एकदम से घबरा के बोली…)

सवाना- (घबराती हुई) Shii..Shiiivaann……


|अब अग्गे|

शिवं- हाँ!! क्या हुआ…

सवाना- (तुषार की तरफ ऊँगली करके) वो बॉस…..

(शिवं भी तुषार की तरफ देखता है और पता है की तुषार की साँसे बहुत तेज चल रही है.. आखें khul-band हो रही है और जब आखें खुलती है तोह लाल रंग की रौशनी में चमकती है, बंद होने पर उसमे से लाल आंसू बहके निचे गिरते है, उसकी बॉडी सफ़ेद पढ़ चुकी थी… यह बहुत hi डरावना सीन था तुषार की आखों से बहते आंसू उसकी बॉडी और कपड़ो को लाल रंग में बदल रहे थे. जैसे कोई खून के छींटे उसपर छिड़क रहा हो…)

सवाना- (शिवं को खंड से पकड़ हिलती हुई) शिवं!.. शिवं क्या हो रहा है बॉस के साथ.. बोलता क्यों नहीं….

शिवं- (अपनी ऊँगली अपने होठो पे रख) स्स्स्सह्ह्ह्ह.. चुप रहो थोड़ी देर.. कुछ नहीं होगा बॉस को…

(सवाना शांत होक कड़ी हो गयी लकिन उससे दर भी बहुत लग रहा था तुषार को देख कर.. शिवं भी बैठा बस उससे देखता रहा.. करीब अँधा घंटा और यह नजारा चलता रहा और फिर dhire-dhire-Tushar की आखों से आंसू बहने बंद हो गए. और फिर एकदम से उसने अपनी आखें खोल ली.. वो बस सामने देख रहा था.. अब उसकी आखें नार्मल थी और साँसे भी नार्मल हो गयी थी.. सवाना बहुत दर चुकी थी उसने ऐसा सीन पहले कभी न देखा था सुना था.. तुषार अभी किसी सोच में था. उससे ऐसे सोच में देख शिवं बोलै...)

शिवं- (जोर से आवाज लगा के) बॉस!!...

तुषार- (धीरे से उसकी तरफ मुँह घुमा के) हाँ…

शिवं- ठीक हो आप..?

तुषार- हाँ.. बिलकुल.. (अपने कपड़ो को देख घबराता हुआ) ये.. यह एहहह क्या है.. खून…?

शिवं- (उठता हुआ) शांत बॉस.. आप उठो पहले.. और फ्रेश होक कपडे चेंज करलो…

(तुषार भी उठकर कपडे बदलने हवेली चला गया…)

सवाना- (तुषार को जाते हुए देख) शिवं.. येह सब क्या था.. मुझे दर लगा रहा बॉस से.. जो मैंने अभी देखा मुझे अपनी आखों पे यकीन नहीं हो रहा…

शिवं- डरने की जरुरत नहीं है…

सवाना- तोह यह…..

शिवं- (बिच में, चुप रहने का इशारा कर) वो गुरूजी बताएंगे…

(कुछ देर बाद तुषार हवेली से बहार आता हुआ नजर आता है.. वो निचे देखता हु किसी सोच में दुबे चले ा रहा था. और आकर शिवं और सवाना के सामने खड़ा हो गया…)

शिवं- (तुषार को सोच में डब्बे देख) क्या हुआ बॉस..?

तुषार- (सर उठता शिवं को देख) मेरे साथ क्या हुआ था..?

सवाना- (झट से) वो बॉस आप आखों से खून बरसा रहे थे…

तुषार- (कंफ्यूज होक) मतलब..?

शिवं- सवाना तुम 2मिंट शांत रहो.. बॉस आप बताओ की आप ध्यान लगाने बैठे थे अपनी बेटी यादों को याद कर रहे थे…..

तुषार- (बिच में hi) हाँ.. वो तोह मुझे पता है.. मैं ध्यान में था जैसा गुरूजी ने बोलै मैंने बचपन की यादें याद करना शुरू की. पहले मुझे कुछ खास याद नहीं ा रहा था लकिन फिर धीरे धीरे सब याद आने लगा.. मुझे ek-ek पल याद ा रहा था.. मैं उनमे खू चूका था. वो यादें एक फिल्म की तरह मेरे सामने चल रही थी.. लकिन फिर अचानक….

(सवाना जो बड़े गौर से कान लगा के हर एक बात को सुन रही झट से बोली…)

सवाना- अचानक क्या बॉस..?

तुषार- मुझे नहीं पता…

सवाना- प्लीज बताओ न बॉस.. फिर अचानक क्या हुआ..?

तुषार- वही तोह नहीं पता…

सवाना- मतलब..? आप साफ़ साफ़ बताओ न…

तुषार- देखो मैं अपनी यादों में था और अचानक hi गायब हो गया…

सवाना- (हैरानी से) गायब हो गए..? पर आप तोह यही थे…

तुषार- तुम समाज नहीं रही हो.. मैं अपनी यादों में कही गायब हो गया.. मुझे याद नहीं आ रहा अब.. ऐसा लगा जैसे मैं कोई फिल्म देखने आया और dekhte-dekhte वो फिल्म किसी ने चेंज करदी हो…

सवाना- मतलब आप किसी और की यादों में घूम कर ए हो.. राइट..?

तुषार- हाँ शायद.. पर यादें मुझे किसी और की नहीं मेरी अपनी hi लग रही थी.. (सोचता हुआ) पर अभी अगर मैं उन्हें याद करने की कोशिश करता हु तोह मुझे कुछ याद नहीं आ रहा.. जैसे वो मूवी मैंने पूरी बेथ के देखि है लकिन देखने के बाद मुझे वो भूल गयी…

सवाना- इसका क्या मतलब हुआ.. ऐसा होना तोह पॉसिबल नहीं है न…

तुषार- वो सब तोह मुझे नहीं पता.. पर यह खून किसका था जो मेरे ऊपर गिरा हुआ था…

सवाना- वो खून आपका hi था…

तुषार- (हैरानी से अपनी बॉडी में idher-udhar देखता हुआ) मेरा खून..? कहा किधर से निकला.. कही kat-vat लग गया है क्या...

सवाना- नहीं बॉस ऐसा कुछ नहीं हुआ है.. मैं समजती हु.. वो क्या हुआ न थोड़ी देर पहले आप……

(फिर सवाना तुषार को उसकी आखों से निकले खून और बॉडी का सफेद पड़ना, आखें चमकना सब बता देती है जिससे सुन तुषार के होश उड़द जाते है…)

तुषार- (भग्राहाट से शिवं की और देखता हुआ) शिवं…

शिवं- फ़िक्र मत करो बॉस.. आप गुरूजी से कल बात करना…

तुषार- हम्म.. यह आखिर क्या हुआ था.. मुझे जल्दी जानना है उनसे…

शिवं- बॉस रात हो चुकी है.. अभी हमे खाना खाके सोना चाहिए…

सवाना- हाँ चलो.. बहुत भूख लगी है. घड़ा khod-khod के साडी एनर्जी चली गयी…

तुषार- (खोदे हुए घड़े की और देखता हुआ) ाचा हाँ. काफी घेहरा घड़ा खोदा है.. चलो (शैतानी मुस्कान के साथ) मेरे काम आएगा.. हाहाहा…

सवाना- (कंफ्यूज होक) आपके क्या काम आएगा.. आज तोह बहुत म्हणत करवाई गुरूजी ने. ऊपर से अपने मुझे डरा दिया अपनी आखों से खून निकल कर.. मेरा तोह दिमाग का दही हो गया है.. कुछ पल्ले न पद रही आपकी बाते…

शिवं- (मुस्कुराता हुआ) तू छोड़ इन् बातो को और आ चल खाना बनाते है…

(तीनो ऐसे hi बाते करते हुए हवेली में चले जाते है…)

सवाना- बॉस आप थोड़ी देर बैठो हम दोनों अंधे घंटे में fata-fat खाना बना के लेट है.. मेरे हाथ का खाना खाओगे न तोह….

तुषार- (बिच में) तोह उंगलिया छत्ते रह जाओगे..! कुछ नया बोलो यार.. इतना पुराण डायलॉग है…

सवाना- (मुँह फुला कर, किचन में जाती हुई) मैं बनाने जा रही हु खाना…

(शिवं भी उसके piche-piche चल दिया.. तुषार वही सोफे पर बेथ T.V देखने लगा.. कुछ देर बाद सिया अंगड़ाई लेती हुई अपने रूम से बहार निकली और आकर दिंनिंग टेबल के पास कड़ी हो गयी… तुषार की नजर उसके ऊपर पड़ी तोह वो अजीब से उससे देखने लगा और बोलै…)

तुषार- hello बीटा.. आप कोण..?

सिया- (नजरे निचे कर) जी मैं सिया हु.. आप कोण हो…

तुषार- मैं तोह तुषार हु.. मेरी hi हवेली है यह.. पर आप यहाँ कब आयी और क्यों आयी और कहा से आयी..?

सिया- (सेहमी हुई, फ्लोर को देखती) वो मैं शाम को आयी थी दीदी के रूम में सू रही थी मैं.. मेरे Mamma-Papa को छोट लगी थी तोह शिवं भैया ने बोलै की जब तक मेरे Mamma-Papa ठीक नहीं होते तुम यही रह लो…

तुषार- (कंफ्यूज होक) एक मिंट एक मिंट.. आपके Mummy-Papa को छोट लगी और आप यहाँ कुछ समाज नहीं ा रहा.. (पुकारता हुआ) शिवं!! सवाना!!...

सवाना- (किचन से बहार आती हुई) हाँ बॉस क्या हुआ.. (सिया को देख मुस्कुरा के) अरे बचा उठ गए आप…

सिया- (स्माइल के साथ) जी दीदी.. वो न भूख लगी थी.. कुछ खाने को डोज क्या..?

सवाना- (उसके पास जेक निचे बेथ गले लगाती हुई) देखो मेरा बचा ऐसे नहीं बोलते.. आप sidha-sidha बोलो की आपको भूख लगी है और दीदी मुझे खाना दो.. अग्गे से ऐसा मत बोलना की खाना डोज क्या.. सामजी आप..?

सिया- Okay दीदी.. आप बहुत अछि हो…

सवाना- (उसके गाल खींचती हुई) कितनी बार बोलोगी अछि हु.. मैं इतनी भी अछि नहीं हु…

तुषार- (उठ के उनके पास जाता हुआ) सवाना! जरा बताओगी कोण है यह बची…

(फिर सवाना उससे सब बता देती है की कैसे उसके Mummy-Papa बाइक के साथ रोड पर बेहोश पड़े मिले और अभी सफल उन्हें हॉस्पिटल लेकर गया है…)

तुषार- हम्म.. बहुत ाचा किया तुम लोग ने.. (सिया की और देख) ाचा आपका नाम सिया है.. और क्या करती हो आप..? स्टडी hi करती होगी न…

सिया- नहीं वो मैं स्टडी नहीं करती हु भैया.. पहले करती थी.. पर फिर पापा की जॉब चली गयी और हमारे पास पैसे नहीं थे तोह मैं आगे नहीं पढ़ सकीय… (और फिर वो रोने लगी)

(तुषार आगे बढ़ा और सिया को गौड़ में उठा लिया और सोफे पे जेक उसको गौड़ लिए hi बेथ गया…)

तुषार- (उसकी गाल से बहते आंसू साफ़ करता हुआ) देखो सिया रू मत.. आपके Mummy-Papa ठीक हो जायेंगे न तब मैं आपको सरप्राइज दूंगा. Okay..?

सिया- कोनसा सरप्राइज..?

तुषार- वो जब आप देखोगे तोह आप खुश हो जाओगे...

सिया- Okay भैया.. भैया! मेरे मां और पापा कब ठीक होंगे..?

तुषार- जल्द hi ठीक हो जायेंगे वो.. जब ठीक होंगे तोह हम से मिलने जायेंगे हॉस्पिटल Okay...

सिया- हम कल जायेंगे न..?

तुषार- ठीक है हम कल जायेंगे.. अभी चलो खाना खा लेते है आयो चलो…

(तुषार वापिस उससे वैसे hi उठा के दिंनिंग टेबल पर ले गया और उससे अपने साथ वाली चेयर पर hi बिठा दिया.. शिवं और सवाना ने इतनी देर में टेबल पर खाना लगा दिया.. फिर चारो ने शांति से खाना खाया.. कुछ देर सभी ने बाते की और फिर सभी सोने चले गए तुषार अपने रूम शिवं अपने और सिया सवाना के साथ उसके रूम में…)

|दूसरी साइड|

(अभी इधर सुभे हो राखी थी सुभे के 6 बज रहे थे रूद्र अपने गयम रूम में एक्सरसाइज कर बहार निकलता है.. इस वक़्त वो सिर्फ एक ब्लैक शॉर्ट्स में था.. बॉडी पूरी पसीने से बिघि हुई थी.. वो वैसे hi बाथरूम घुस गया और 20 मिंट बाद फ्रेश होकर अपनी बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पर पांच गया.. वह एक आदमी एक हाथ में दारू की ट्रे और दूसरे हाथ में सिगरेट की ट्रे लिए खड़ा था.. रूद्र एक सिगरेट उठा के मुँह में दबा लेता है और दूसरे हाथ से लाइटर उठा सिगरेट जला लेता है..)

रूद्र- (बहार बालकनी में बैठे चाचा के पास सिगरेट के सुट्टे मर जाता हुआ) गुड मॉर्निंग चाचा.. सेहर की गन्दी और ठंडी हवा ली जा रही है..?

चाचा- मॉर्निंग रूद्र.. हाँ भाई. हवा तोह बहुत गन्दी हो गयी सेहर की.. (उसकी सिगरेट देख) तू इससे छोड़ा क्यों नहीं है.. एक तरफ तोह 3 घंटे जमकर कसरत करता है और ऊपर से यह दारू और सिगरेट..? क्यों इससे अपनी achi-khasi बॉडी को गाल रहा है...

रूद्र- (चेयर पर बैठता हुआ) नहीं चाचा यह साली को तोह नहीं छोड़ सकता.. मादरजात लत hi जो अस्सी लग गयी है.. और रही बॉडी गाल्ने की बात तोह अपनी बॉडी लोहे की है.. कोई भी aeddu-geddu अपने सामने झात के बाल बराबर है…

चाचा- भाई तेरेको संजना अपना खेल न है…

रूद्र- खेल से याद आया.. टाइटन अभी चीन गया था.. मुल्ख के alag-alag सेहर से कोई 3 बिल्डिंग को उसने निशाना बनाया है…

चाचा- (हैरानी से) क्या.. मतलब.. वो बिल्डिंग्स….

रूद्र- (उदास स्वर में, बात पूरी करता हुआ) अब तक उड़ा चूका होगा…

चाचा- क्या इसका कोई हल नहीं है…

रूद्र- टाइटन.. सेल का बस नाम hi तोह जानते है.. बहनचोद कब सरहद पर कर दूसरे मुल्ख पांच धमाका कर जाता तब पता चलता जब साला वापिस जहा से निकला था वही वापिस ा गया…

चाचा- हम्म.. अभी इसके बारे में सोचना छोडो और जो मुसीबत अपने टंगे काट रही है उससे ख़तम करो.. कही ऐसा न हो टंगे kat.te - kat.te यह एक दिन हमारी गर्दन hi काट डेल…

रूद्र- (हस्ता हुआ) हाहाहा मजाक चाचा मजाक छोडो.. कोई गर्दन तोह क्या ऊँगली का नाखून काट के दिखाए…

चाचा- (अजीब सा मुँह बना के) अरे याद मात दिला नाखून की.. तूने पुरे एक साल तक मर. स्टीवन को बंद करके रखा था और उसके नाखूनों को जड़ से उखाड़ देता था.. और ऐसा तूने पुरे 1 साल तक किया था. जब भी उसके नाखून लम्बे होते…


रूद्र- (बिच में) तोह उस बारे हुए डस्टबिन को और ऊपर तक भर देते… हाहाहाहा….

《1991-वर्ड्स》
 
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