अपडेट-25
गुरूजी- (मुस्कुरा के) बस यही निचे बेथ जाओ.. (तुषार निचे योग पोज़ में बेथ जाता है) ऑंखें बंद करो.. (तुषार ऑंखें बंद कर लेता है) अपने बचपन से लेकर अब तक क्या क्या हुआ है, शुरू से अब तक सब कुछ dhire-dhire सोचो.. एक बार वापिस अपनी बीती जिंदगी को देखो, कोशिश करो वो हर एक याद वापिस महसूस करने की.. (तुषार सोचने लगता है.. अपने बचना की जो dhundhli-dhundhli यादें थी उसमे खोता चला जाता है....)
|अब अग्गे|
(तुषार अपनी यादों में खोइया हुआ था.. अपने बचपन के कुछ ख़ुशी के पल.. जब वो पहली बार स्कूल गया था रोटा हुआ.. तान्या ने जब उससे मरना तोह आरुषि ने तान्या को पकड़के खींचना लकिन अन्निका ने उससे कास के गाला लगा ताकि कही उससे छोट न पांच जाये.. जब उसका स्कूल में एक बार एक लड़के से झगड़ा हुआ था तोह तीनो बहनो ने कैसे उसकी धुलाई की थी.. dhire-dhire बचपन से लेकर अब तक तुषार उन् सभी यादों को याद कर रहा था जो उससे याद थी.. लकिन इन् यादों को याद karte-karte उससे महसूस हुआ की जैसे उसकी यादों में कोई chhed-chhad हो रही है.. उससे कुछ और भी दिख रहा था.. जहा उसका चेहरा अपनी यादों को याद कर मुस्कुरा रहा था अब उस चेहरे के भाव कभी गंभीर, कभी हैरानी, गुस्सा, दर्द, ख़ुशी में बदल रहे थे.. बंद आखों से भी कुछ ासु बहार आकर निचे टपक रहे थे.. और यह सब हो रहा था जो वो देख रहा था.. अपनी यादों के sath-sath वो किसी और की भी यादें देख रहा था.. वो खुद तोह था उन् यादों में लकिन वो घटना कब कहा घाटी उस कुछ याद नहीं ा रहा था.. अपनी यादों के साथ वो bich-bich में इन् अनजान यादों को में देख रहा था.. जिसमे वो खुद था एक अस्सी जगह जो उसने पहले कभी नहीं देखि थी…)
|Tushar’s हाउस|
(तान्या अपने रूम में लेती कुछ सोच रही थी…
अन्निका- (रोटी हुई आयी) भैया.. भैया…
तुषार- क्या हुआ मेरी गुड़िया.. रू क्यों रही है तू.. हाँ..?
अन्निका- (अपनी ऑंखें मल्टी हुई) भैया तान्या दीदी ने मारा…
तुषार- अरे मेरी गुड़िया को मारा तान्या ने.. चल ा अभी खबर लेते है उसकी…
(तान्या अभी अपनी 1साल पुराणी यादों को याद कर रही थी...)
तुषार- (तान्या क रूम में घुसता हुआ) ए चुड़ैल.. क्यों मारा तूने मेरी गुड़िया को..?
तान्या- मैंने कहा मारा है इससे.. झूठ बोल रही है येह…
अन्निका- (तुषार को साइड से गले लगा के) नहीं भैया.. दीदी ने मारा…
तुषार- (अन्निका के गाल सहलाते हुए) देखा.. मेरी गुड़िया कभी झूठ नहीं बोलती…
तान्या- (बीएड से कड़ी होती हुई) हाँ मारा मैंने इससे एक कस के थप्पड़…
तुषार- (शॉक से) क्या.. तूने मेरी गुड़िया को थप्पड़ मारा.. तुम पागल हो क्या तान्या.. अज्ज तेरा बर्थडे है इसलिए छोड़ रहा हु तुझे.. वर्ण…..
तान्या- वर्ण.. वर्ण क्या..? तू भी बचा हुआ है क्युकी तेरा भी अज्ज hi बर्थडे है… और हल्का सा मारा था मैंने तेरी गुड़िया को येह तोह पता नहीं कैसे इतना रू पड़ी...
तुषार- मेरी गुड़िया बहुत नाजुक है.. हल्का सा भी उससे लग जाये तोह उससे क्या मुझे भी दर्द होता है.. (अन्निका को देख) हैना मेरी प्यारी सी जान…
अन्निका- (छलांग मार तुषार से lipat.ti हुई) हाँ प्यारे भैया…
आरुषि- (रूम में एंटर करती हुई) तुम तीनो इधर गप्पे लगा रहे हो.. चलो निचे सब मेहमान ा गए है केक काटने का टाइम हो गया है...
(चारो निचे पौंछते है तोह निचे बस aas-pados के लोग थे.. करीब 20-25 लोग hi होंगे जो ए थे वो भी तुषार की फॅमिली को ज्यादा अचे से नहीं जानते थे लकिन इन्विते करने पर ा गए थे… जैसा की स्टोरी की स्टार्टिंग में कहा था की तुषार की फॅमिली वालो को कोई नहीं जनता.. तुषार के पापा कितने बड़े बिजनेसमैन है, वो क्या बिज़नेस करते है किसी को नहीं पता.. इंडिया के टॉप5 बिजनेसमैन में से एक होने के कारन हमेशा उनपर और उनकी फॅमिली पर कोई न कोई खतरा मंडराने का दर था.. इसलिए उन्होंने अपनी फॅमिली को दुनिया वालो के सामने हाईड रखा.. यहाँ तक की जो लोग उनके लिए काम करते है उन्होंने भी अपने बॉस को और उनकी फॅमिली को नहीं देखा बस सेक्रेटरी को छोड़ कर...)
(तुषार और तान्या ने एक साथ दो bade-bade केक कटा और पहला टुकड़ा दोनों ने एक दूसरे को खिलाया और ek-ek किश दोनों ने ek-dusre के गाल पे kiya..fhir दोनों ने आरुषि, मम्मी, पापा को केक खिलाया और एक अलग केक बाकि मेहमानो में बाँट दिया… अन्निका अभी बची हुई थी.. कभी इधर तोह कभी उधर देख रही थी की कब उसकी बरी आएगी केक खाने की.. फिर जब थक हर के उससे लगा की उसका नंबर बिना बोले नहीं ऐनी वाला तोह बोली…)
अन्निका- मेको भी खिलाओ न केक…
आरुषि- येह भूकर अभी तक भूखी बैठी है…
अन्निका- (मासूमीयत से) मेको कोई केक नहीं खिला दीदी.. सबको केक खिलाया मुझे नहीं खिलाया…
तुषार- अरे अभी खिला देते है मेरी गुड़िया को…
(फिर तुषार और तान्या दोनों ने मिलकर ek-ek बड़ा वाला केक का तड़का अन्निका को खिलाया.. उसने भी बिना देर किया अपना छोटा सा मुँह पूरा खोल लिया और दोनों केक के टुकड़े उसके मुँह में दाल दिए.. टुकड़े इतने बड़े भी नहीं थे. अन्निका करीब 1मिंट तक टुकड़ो को मुँह में इधर उधर करती फाइनली निगल hi गयी..)
अन्निका- भैया.. दीदी.. मैं मर जाती तोहह.. इतना बड़ा टुकड़ा खिलाया मुझे.. मेरे पे रेहम नहीं करते आप लोग.. मैं छोटी हु सब मुझे परेशां करते...
तान्या- अरे अभी कहा परेशां किया है.. चल तुषार...
(तुषार भी थोड़ा सा मुस्कुराया और अपने केक को पूरा का पूरा निचे से पकड़ लिया और चल दिया अन्निका की तरफ.. उधर तान्या ने भी शामे hi किया हाथ में केक लिए अन्निका की तरफ बढ़ने लगी.. अन्निका बेचारी दरी दरी सी पीछे हटने लगी..)
अन्निका- भैया येह क्या करने वाले हो आप लोग.. मुझे केक से मरोगे.. मुम्मा.. येह देखो न येह भैया और दीदी का बर्थडे और येह लोग मुझे केक लगा रहे है.. अपने बर्थडे पे तोह मैं वैसे hi केक से नहाती hi हु और इनके बर्थडे पे भी मुझे hi केक लगाया जा रहा है.. मेको गन्दा नहीं होना.. पापा प्लीज हेल्प...
पापा- (मुस्कुराते हुए) सॉरी बीटा.. आज इनका बर्थडे है तोह दन्त भी नहीं सकता...
अन्निका- पापा आप बुरे हो... (रेहम भरी नजरो से) दीदी आप हेल्प करोगी…
आरुषि- अरे कैमरा कहा है में वीडियो निकलती हु…
अन्निका- आप भी बुरे दीदी.. मैं किसी से बात नहीं करुँगी…
तान्या- (एक दम उसके नजदीक जाती हुई) कितना बोलती है येह लड़की.. एक बार वापिस तेरा मुँह केक से बंद करुँगी... चल तुषार रंग दे इससे केक से...
(तुषार भी उसके साथ अग्गे बढ़ा अन्निका अभी पीछे जाती जाती दिवार के साथ लगी हुई थी.. वो कार्नर वाली दिवार थी तोह दोनों तरफ से घिरी हुई थी और सामने एक तरफ तुषार तोह दूसरी और तान्या.. तुषार थोड़ा और नजदीक गया और जैसे hi तान्या अन्निका पे केक डालने वाले थी तुषार तेजी से अन्निका के आगे खड़ा हो गया.. तान्या को कुछ समाज ए उससे पहले hi तुषार ने अपना वाला केक तान्या के मुँह पे दे मारा.... मौका देख अन्निका पीछे से आयी और तान्या के हाथो केक पकड़ उससे तुषार के मुँह पे दे मारा.... दोनों अभी मुँह लटकाये खड़े थे और मम्मी, पापा, और आरुषि और बक्की पार्टी में ए लोगो का has-has के पेट दर्द करने लगा था.. पापा और आरुषि ने alag-alag एंगल्स से वीडियो भी बना ली थी...)
अन्निका- (khil-khila क हस्ती हुई) हहहहहह.... अरे भैया बस.. अब और नहीं देखा जायेगा आपका इतना फनी फेस... और दीदी.. ओह सॉरी सॉरी जोकर दीदी.. मजा आया आपको.. भैया हमेशा मेरे साथ hi है.. (नाचती हुई) मुझे पता था भैया पलट जायेंगे... हेहेहे
तान्या- (गुस्से से फेस बनके) मिल गयी न सजा पलटने की..
तुषार- (अपना लटका हुआ मुँह लिए केक साफ़ करता हुआ) वाह गुड़िया वाह.. ाचा सिला दिया तूने मेरे प्यार का, यार ने hi ख़राब किया चेहरा यार का...
अन्निका- (हस्ती हुई) हहह.. सॉरी भैया.. आज आप दोनों का hi बर्थडे था इसलिए आप दोनों को hi केक से रंगना जरुरी था...
आरुषि- सही कहा अन्नू.. और बिलकुल ठीक किया तूने.. तेरे साथ भी तोह यही हुआ है.. (सदा सा मुँह बना के) और मेरे साथ क्या नहीं हुआ है.. बहुत ाचा किया तूने.. (अंगूठा दिखती हुई) ग्रेट जॉब...
अन्निका- थैंक्स दीदी...
(तान्या जो कब से गरम हो रही थी गुस्से से फाटक से बोली..)
तान्या- (तुषार का कलर पकड़) बुद्धू कही के. साडी रात सोच के प्लान बनाया और जब अंजाम देने का वक़्त आया तोह गद्दारी कर्ली तूने.. मिल गयी न गद्दारी की सजा.. लकिन अब असली सजा तुझे में दूंगी देख तू...
तुषार- (हाथ जोड़ ऊपर देखता हुआ) हे ऊपर वाले.. शायद आज तेरे से मुलाकात करने ा रहा हु.. कुछ मंगवा के रखना.. में बस अभी आया.. (एक तरफ इशारा करता हुआ) वो देख तान्या. कितना मोटा मेंढक है..
तान्या, अन्निका- (दर के एक साथ उछाल के उस तरफ देखती हुई) आह मुम्मा मेंढक...
(मोके का फयदा देख तुषार बाघ लिया.. तान्या भी उसके piche-piche बघणे लगी.. तुषार अपने रूम में पौंछा तान्या ने बाघ की उसके ऊपर छलांग मार दी दोनों बीएड पे गिर गए.. अभी तुषार निचे पीठ के बल लेता हुआ था और उसके साइन पर तान्या बैठी हुई थी जो अब jor-jor से मुक्के उसके साइन पर जड़ रही थी.. कुछ देर मार खाने और मार खिलने के बाद दोनों थक के बीएड पर हफ्ते हुए लेट जाते है…)
तुषार- (हलके दर्द में) बहुत मारा है तूने.. बर्थडे बॉय हु में.. मेरे पास पावर है आज मुझे कोई हाथ नहीं लगा सकता.. तूने तोह मुक्के पेले है जो.. आअह्ह्ह..
तान्या- (हस्ती हुई) बर्थडे गर्ल तोह में भी हु तोह पावर तोह मेरे पास भी हुई न…
तुषार- हाँ मुझे मरने की…
(तान्या आगे कुछ बोलती तुषार का फ़ोन रिंग होने लगा..)
तुषार- (सीधा होक फ़ोन उठता हुआ) Hello..
दूसरी तरफ- ……….
तुषार- (बीएड से उठ परेशां होता हुआ) क्या… नहीं.. ऐसा नहीं करना.. में अभी उससे लेके ा रहा हु.. प्लीज इशिता के साथ कुछ मत करना..
दूसरी तरफ- ………..
तुषार- पर तुम्हे उससे क्या काम है…
दूसरी तरफ- ………...
तुषार- (आखों में ासु लिए) नहीं नहीं.. ऐसा कुछ मत करना.. में अभी आता हु…
(तुषार डरा, घबरा अपनी आखें साफ़ कर तान्या की तरफ देखता है जो बड़ी परेशां हुई उससे देख रही थी..)
तान्या- (चिंता में) क्या हुआ तुषार.. इतना परेशां क्यों है.. रू क्यों रहा है.. किसका फ़ोन था…
तुषार- वो वो.. तान्या…
तान्या- (उसके पास जेक अस्सू साफ़ करती हुई) क्या ह्या तुषार.. बता न प्लीज.. मुझे बहुत चिंता रही है.. क्या बात हुई है..?
तुषार- वो तान्या.. येह बात किसी और को पता नहीं लगनी चाहिए.. (उसका हाथ पकड़ता हुआ) तू चल मेरे साथ…
तान्या- (उसके piche-piche चलती हुई) पर कहा…
तुषार- सब पता चल जायेगा पहले चल मेरे साथ…
(निचे पांच के तुषार ने कोई बहाना बना लिया और तान्या को साथ लिए घर से बहार चला गया और कार में तान्या को साथ लिए कहे जाने लगा… करीब एक घंटे बाद तुषार कार को एक सुनसान से रस्ते पर मूड देता है.. थोड़ी hi आगे जेक सामने एक छोटा सा घर दिखाई देता है.. तुषार कार को घर के सामने रोकता है और जल्दी से कार का दरवाजा खोल घर की और चल देता है.. तान्या भी भगति हुई तुषार के पिछले चल देती है…)
तान्या- (उसकी बाजु पकड़ती हुई) तुषार!! इधर क्यों लेके आया है मुझे.. कोनसी जगह है यह…
(तुषार कुछ नहीं बोलता और आगे चलने लगा जहा सामने 4 गार्ड्स ब्लैक कपड़ो में खड़े थे.. घर के 2 मैं दूर थे.. 2 गार्ड्स लेफ्ट और 2 गार्ड्स राइट वाले दूर के सामने खड़े थे.. तुषार उनके सामने जेक खड़ा हो गया लेफ्ट तरफ वाले गार्ड्स ने तुषार को अपनी ऑर्डर इशारा किया तोह तुषार उसकी तरफ चला गया.. तान्या तुषार के थोड़ा पीछे परेशां कड़ी थी…)
गार्ड.1- कुछ बताया तोह नहीं इससे..?
तुषार- नहीं मैंने कुछ नहीं बताया.. पर इससे तुम्हे क्या मतलब है.. और इशिता कहा है..? प्लीज मुझे जल्दी बताओ…
(गार्ड्स उससे लेफ्ट वाला दूर ओपन करके दिखते है जिससे देख तुषार के ासु jhar-jhar बहने लगते है.. वो वो जोर से चीखता हुआ अंदर एंटर कर जाता है.. तान्या को अभी नहीं दिखा था की तुषार ने क्या देखा वो भी उसके पीछे जाने लगी तोह गार्ड्स ने दूर बंद कर दिया..)
तान्या- (परेशां होक) क्या हुआ.. मुझे जाने दो अंदर.. क्या है अंदर जिससे देख मेरा भाई jor-jor से रोने लगा और अंदर बाघ गया..?
गार्ड.1- (दूसरे दूर की तरफ इशारा करते हुए) आप वह से जाइये…
(तान्या ने भी ज्यादा नहीं सोचा.. उससे फ़िक्र हो रही थी तुषार की वो जल्दी से उस तरफ गयी तोह गार्ड्स ने दूर खोल दिया तान्या अंदर चली तोह दूर बंद हो गया.. तान्या ने अंदर जाकर देखा तोह चारो तरफ अँधेरा चाय हुआ था.. और फिर ek-dam से रूम में रौशनी फेल गयी.. अभी रूम में एक बीएड लगा हुआ था और बीएड के पास 4 hate-kate आदमी खड़े थे.. चारो आदमी dhire-dhire तान्या की तरफ बढ़ने लगे.. तान्या को दर लगने लगा एक अनजान जगह पर एक बंद कमरे में 4 आदमियों से साथ वो अकेली थी.. वो dhire-dhire पीछे कदम बढ़ने लगी…)
तान्या- कोण हो तुम लोग.. क्या चाहते हो मुझसे..?
(कोई आदमी कुछ नहीं बोलै और चारो ने आकर तान्या को पकड़ लिया.. उन्होंने तान्या को पकड़ा और लेकर बीएड पर पटक दिया…)
तान्या- (रोटी हुई) तुषाररर… कहा गया तू… छोडो मुझे तुम लोग….
(एक आदमी ने रस्सी ली और तान्या के hath-pau कास कर बीएड से बांध दिए.. तान्या तोह बस रोये चीखे जा रही थी.. खुद को छुड़ाने की नाकाम कोशिश किये जा रही थी.. तान्या के सामने वाली जो दिवार थी वो ek-dam से एक मिरर में बदल गयी.. उसने देखा मिरर के उस पर तुषार ek-dam शांत खड़ा उससे देख रहा है…)
तान्या- तुषारर.. देख क्या रहा है… यहाँ क्यों लेके आया मुझे..? यह लोग क्या कर रहे मेरे साथ.. बोल न.. बोलता क्यों नहीं तू.. खड़ा क्या है.. (रोटी हुई) तुषार.. यह लोग मेरा रपे कर रहे है क्या..? तू अपनी बहिन का रपे करवाने इधर लाया है…
(तुषार भट्ट बना बस देख रहा था.. एक आदमी ने तान्या की स्कर्ट को पकड़ा और थोड़ा सा ऊपर कर दिया जिससे उसकी गोरी जाँघे दिखने लगी.. फिर उस आदमी ने तान्या की टॉप को भी थोड़ा खिसका के ऊपर कर दिया जिससे उसकी ब्लैक ब्रा thori-thori दिखने लगी और उसका गोरा सॉफ्ट पेट सामने ा गया.. तान्या रू रही थी उन् आदमियों के सामने गिड़गिड़ा रही थी.. तुषार को cheekh-cheekh के पुकार रही थी जो बस उससे मिरर से शांत खड़ा देख रहा था.. उसके चेहरे पर कोई भौ नहीं थे.. न दुःख के न ख़ुशी के जैसे किसी सदमे में हो जा शायद वो तुषार था hi नहीं.. इधर एक आदमी ने पास में रखे एक टेबल पर से एक बोतल उठाई जिसमे कुछ लिक्विड था.. उसने बोतल का ढक्कन खोला तोह उसमे से वाइट स्मोक निकलने लगी.. आदमी ने वो लिक्विड. शायद वो कोई केमिकल था.. उससे लेकर वो तान्या के करीब ऐनी लगा………
《2481-वर्ड्स》