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- Dec 5, 2013
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अपडेट-18
अन्निका- हाँ दीदी.. मैंने आरुषि डीडू को बोल दिया है की भैया ए तोह उन्हें मुझसे मिलवाने बेज देना...
तान्या- ओह्ह्ह मतलब राजकुमार खुद आएंगे अपनी राजकुमारी से मिलने..?
अन्निका- और नहीं तोह क्या.. अगर वो नहीं ए तोह हम क्रोधित हो जायेंगे.. और aas-pass क सभी इलाके जला क भस्म कर देंगे... हहै…
तान्या- हाहाहा.. चल अब चले घर…
अन्निका- हाँ चलो दीदी…
|अब अग्गे|
|बैक तो तुषार|
कैसर- शिवं स्टार्ट कर जल्दी..
(शिवं अपने हाथ में पकडे इक रिमोट को ों कर देता है.. और चेयर में लगी मशीन अपना काम करना स्टार्ट कर देती है.. वो लोहे की चेयर dhire-dhire अब गरम होने लगी थी.. करीब और 2मिंट बाद चेयर काफी गरम हो चुकी थी, अब गुंडे के चूतड़ गरम होने लगे थे. उससे एहसास हो चूका था की उसके साथ क्या होने वाला है..)
गुंडा- (डरता हुआ) bha.i.. येह कुर्सी बहुत गरम होती जा रही है.. अह्ह्ह्हह्ह भाई.. भाई में जल जायूँगा…
कैसर- न न इतनी जल्दी नहीं जलेगा तू.. अभी तोह गेम शुरू भी न हुआ.. बस थोड़ी देर और थाहार…
(चेयर में लगी मशीन ने अपना कमाल दिखते हुए चेयर को और गरम करना शुरू कर दिया.. गुंडे की पूरी बॉडी निचे से धीरे धीरे जलने लगी.. और उसके कपडे इस वक़्त उसकी बॉडी से चिपक चुके थे और उन् में से धुआँ निकलने लगा था.. गुंडा अब बर्दाश्त करने की हद में न था और चिलए जा रहा था…)
गुंडा- (रोटा हुआ) आआह्ह्ह्ब्भई आअह्ह्ह नाहीइ भाई मुजी छोड़ दी भाई माफ़ करदी... जानी दे कुट्टी.. मर जायूँगा.. रख बन जायूँगा मेंनननन…
(गुंडा तड़फ रहा था.. उठने की नाकाम कोशिश कर रहा था लकिन हिल तक नहीं प् रहा था...)
कैसर- शिवं!.. रोक दो…
(शिवं रिमोट का स्विच ऑफ कर देता है.. अब चेयर dhire-dhire ठंडी होनी चालू हो गयी थी.. लकिन गुंडे की तोह पहले hi फैट चुकी थी.. उसकी पीठ, चूतड़, टैंगो और बाजु के चेयर से दबे हुए हिस्से के कपडे जल क उसकी बॉडी से चिपक चुके थे…)
गुंडा- (दर्द से तड़फते हुए) भाई.. भाई मुझे पुलिस क हवाले करदे.. चाहे मुझे उम्र कैद की सजा दिलवादे. पर यह अत्याचार मुझ पर मात कर भाई.. तुम इक निहथे पे वॉर कर रहे हो..
कैसर- और जो तू कर रहा था क्या वो अत्याचार नहीं था.. 10 आदमियों को लेकर स्कूल में घुस गया मेरी मासूम बहिन को स्कूल के बीचो बिच चूमा.. उससे सबके सामने जलील किया.. उससे उठा क ले गया अपनी पावर क डैम पर. क्या वो सही था.. और तुजे तोह 60 आदमियों में से निकल क लाया हु में. ताकि तुजे tadpa-tadpa क मार सकू तभी मेरे मन को सकूं मिलेगा…
गुंडा- भाई ऐसा जुलम न कर.. बागवान कसम अग्गे से कुछ बुरा का…
(गुंडा अग्गे कुछ बोलता कैसर ने इक लम्बी नीदडले उसके होंठ पकड़ निचले होंठ से उपरवाले होंठ से निकल फसा दी.. उसके काळा होंठ लाल रंग में तब्दील होने लगे.. नीदडले उसके होंठो में hi अटकी थी तोह चिल्ला पाने का सवाल hi पैदा नहीं होता…)
कैसर- (इक थप्पड़ उससे मरता हुआ) बदनाम मात कर बागवान को अपनी गन्दी जुबान से… शिवं!! ों कर सेल को तड़पते देखना है मुझे…
(शिवं वापिस स्विच ों कर देता है लकिन इस बार रिमोट के 2 बटन ों करता है.. धीरे धीरे चेयर वापिस गरम होने लगी.. करीब 5मिंट बाद चेयर इतनी गरम हो चुकी थी की अब चेयर halke-halke लाल रंग में दिखने लगी थी.. गुंडे की हालत बताने लायक नहीं थी.. वो जोर जोर से नाक से सास से रहा था.. लकिन चीख नहीं प् रहा था.. अब चेयर ने अपना असली कमाल दिखना शुरू किया.. चेयर क होल्स में से lambi-lambi गरम नीडल्स बहार को एना शुरू हो गयी.. वो होल्स से बहार आयी और गुंडे के चूतड़, हाथो, पाँव और कमर में धीरे से हाफ इंच अंदर घुस क वापिस निकल गयी… गुंडा इतनी जोर से तड़प क चीखा की उसके होठो में फास्सी नीडल भी उसके होठो को फाड़ती हुई निकल क गिर गयी...)
(2मिंट तक चेयर ने अपने अप्प को शांत रखा लकिन ठंडी नहीं हुई वैसे hi गुंडे को गरम करती रही.. और करीब 2मिंट बाद, गरम होने क कारन चेयर अब गहरे लाल रंग में चमक रही थी.. इसी बिच न जाने गुंडा कितना चीखता चिलता रोटा रहा.. गुंडा की बैक साइड जल क खख हो गयी थी.. और जैसे अब वो सुन्न हो गयी थी.. की अचानक होल्स में से गरम नीडल्स वापिस निकली और गुंडे की बॉडी में 1 इंच अंदर डांस गयी.. ऐसे hi नीडल्स वापिस होल्स में चली गयी और फिर स्पीड से एक्के गुंडे को चुभ गयी.. येह प्रोसेस रिपीट होता gaya..jale पे नमक तो सुना था लकिन गुंडे को जले पे garam-garam सुई चुभ रही थी.. गुंडे की हालत देखने लायक नहीं बची थी.. क्युकी अब वो शांत हो चूका था.. अपनी जिंदगी क कुछ आखरी पल hi जी रहा था.. कपडे dhire-dhire जल रहे थे की अचानक उनमे भयानक अग्ग लग गयी.. और साथ में गुंडे की चीखे भी निकल गयी. जैसे अभी वो बेहोशी से जगह हो.. गुंडा जो पीछे से जल रहा था अब अग्गे से भी जलने लगा…
कैसर- बस बहुत हुआ.. शिवं जल्दी इससे यमराज से मिलवाओ…
शिवं- ok बॉस…
(शिवं रिमोट का इक लास्ट बटन दबा देता है.. बटन दबाते hi इक लम्बा गरम तीखा चाकू गुंडे की गर्दन क पीछे से निकल अग्गे को ा जाता है… गुंडा मार चूका था. वो बहार से उतना दिखा नहीं पाया जितना वो अंदर से तड़पा था. येह तोह बस वही जनता था. शयद अब शैतान भी उससे नरक में सजा न दे क्युकी इक भयानक सजा वो जीते जी भुगत चूका था.. कैसर और एजेंट्स कुछ देर उससे यही देखते रहे.. शिवं चेयर को ऑफ कर देता है.. सवाना जेक कैमरा बंद कर देती है…)
सफल- बॉस…
कैसर- (मास्क निकलता हुआ) हम्म..
सफल- अब क्या करना है..
तुषार- कुछ नहीं.. इसकी लाश को उठाओ और जंगल में जेक दफना दो…
(कुछ देर बाद तुषार वापिस हर्षिका क घर की और निकल जाता है.. घर पांच कर तुषार दुर्बल बजता है तोह सामने हर्षिका दूर खोलती है. और वो तुषार को देख इक स्माइल कर देती है.. तुषार क जो गुंडे को मार के चेहरे क haav-bhaav बदले हुए थे अब हर्षिका की प्यारी स्माइल देख तुषार का चेहरा खिल गया था.. वो भी मुस्कुराता हुआ अंदर ा जाता है.. और सोफे पर बेथ जाता है…)
हर्षिका- (उसके सामने वाले सोफे पे बैठती हुई) कहा गए थे आप सुभे से..?
तुषार- बस ऐसे hi थोड़ा काम था.. दीदी कहा है…
हर्षिका- वो शयद अपने रूम में hai..(par जैसे hi उससे याद अट्टा है की आरुषि उससे नाराज है तोह उसका फेस साद हो जाता है.. लकिन वो तुषार को इस बात का एहसास नहीं होने देती…)
तुषार- (उठता हुआ) ठीक है में जरा मिल क अट्टा हु दीदी से.. मुझे कुछ बात करनी है उनसे…
हर्षिका- Okay…
(तुषार जेक आरुषि के रूम के सामने खड़ा हो जाता है.. दरवाजा बंद था लकिन लॉक नहीं था.. तुषार दरवाजा को ढाका देके अंदर चला जाता है.. सामने आरुषि बीएड पे लेती फैन को घर रही थी…)
तुषार- hello दीदी..
आरुषि- (उठ क बैठती हुई) अरे तुषार तू ा गया.. कभी आया..?
तुषार- (बीएड पे बैठता हुआ) बस अभी अभी.. और आप क्या यहाँ अकेली बैठी छत को देख रही हो...
आरुषि- बस ऐसे hi.. वैसे गया कहा था तू सुभे से..?
तुषार- वो कुछ नहीं दीदी बस एजेंट्स क साथ hi था.. कुछ प्लान समजने गया था…
आरुषि- (ऊँगली दिखती हुई) पक्का न..? देख अगर तू खुद किसी से भिड़ने गया न तोह बहुत बुरा हाल करुँगी तेरा समजा…
तुषार- (उसकी ऊँगली पकड़ निचे करता हुआ) उफ्फो दीदी.. में नहीं जायूँगा किसी से भी bhidne-vhidne.. में तोह बस उन्हें अग्गे क्या करना है. सेहर में कैसे गुंडों का राज ख़तम करना है वो बताने गया था.. और एजेंट्स क साथ उनका इक बॉस भी तोह आया है. वो सब संभल लेगा अप्प मेरी फ़िक्र मत करो…
आरुषि- हम्म.. फिर ठीक है…
तुषार- वो सब छोडो दीदी. मुझे आपसे इक जरुरी बात करनी है…
आरुषि- हाँ बोल क्या बात करनी है…
तुषार- दीदी कल अपने मुझे हॉस्पिटल में किश किया था…
आरुषि- (मुस्कुरा क) हाँ किया था. तोह..?
तुषार- दीदी आप समाज नहीं रही हो.. मेरा कहना का मतलब है की आप मुझे किश कैसे कर सकती हो. ी मैं…
आरुषि- (बिच में. सीरियस होक) देख तुषार! मेरी बात सुन. जा पहले दरवाजा बंद करके आ..
(तुषार उठ क दरवाजा बंद कर देता है और वापिस आकर बीएड पर बेथ जाता है…)
आरुषि- (उसकी आखो में देखती हुई) तुषार देख! मैंने देख वही किया है जो मेरे दिल में था.. तोह मैंने तुम्हे किश कर लिया…
तुषार- (कंफ्यूज होक) दीदी आपकी कोई बात मुझे समाज नहीं आयी.. थोड़ा डिटेल में बताओ प्लीज…
आरुषि- तुषार में तुझसे प्यार करती हु. और तू भी मुझसे करता है. हैना..?
तुषार- हाँ दीदी. करता हु.. बहुत प्यार करता हु…
आरुषि- (उसके दोनों कंधो पे हाथ रखती हुई) मेरी बात सुन.. में तुजे प्यार करती हु. तू मुझे प्यार करता है..
तुषार- मैंने अभी वही बोलै दीदी…
आरुषि- (लम्बी सास अंदर लेती हुई) हष्ठ.. देख तुषार में तुजे प्यार करती हु.. बहुत प्यार करती हु.. अस ा लवर प्यार करती हु.. और तू जनता है वो किश जो मैंने तुजे किया था वो कोई बहिन अपने भाई को नहीं कर सकती.. मैंने तुजे हमेशा अपने लवर की तरह hi देखा है.. में तुझसे बेइंतेहा मोहब्बत करती हु.. कब से करती हु मुझे नहीं पता.. येह फीलिंग्स कब मेरे अंदर जाग गयी येह मुझे भी नहीं पता. लकिन तेरे बिना अकेला रहना सोच क hi मेरे अंदर कुछ कुछ होने लगता है तू समाज रहा है न… (आखे गीली करती हुई) देख तुषार मुझे पता है तू भी मुझसे प्यार करता है. नहीं तोह कोई भाई इक बहिन से ऐसा छेड़खानी नहीं करता जो तू करता है. और तूने तोह खुद hi मन्ना था कल की तू मुझे प्यार करता है इक लवर की तरह.. और अब सब जानते हुए भी तू मुझे कल किये हुए किश के बारे में पूछ रहा है…
(आरुषि की बात सुन तुषार को कुछ झटके लगे थे. लकिन अब उसके भी दिल में दबे हुए अरमान जाग गए थे…)
तुषार- दीदी.. येह नहीं हो सकता.. हाँ में आपसे प्यार करता हु.. इक प्रेमी वाला प्यार करता हु.. लकिन..
आरुषि- लकिन क्या.. मजबूरी क्या है तेरी.. में हु न तेरे साथ…
तुषार- दीदी अप्प शायद प्यार में इतना भूल चुकी हो की आपको हमारा रिश्ता भी याद नहीं रहा.. हम इक भाई बहिन है.. और भाई बहिन कभी प्रेमी प्रेमिका नहीं बन सकते... दीदी में आपसे प्यार इशिता से भी पहले का करता था.. लकिन इस समाज के बंधनो के आगे में नहीं लड़ सकता. इस लिए मैंने अपने जज्बातो को कब का अपने दिल में दबा लिया था.. और इशिता को अपनी लाइफ में ले आया. (रट हुए) लकिन कुदरत का खेल तोह देखो वो भी चली गयी मुझे छोड़ क…
(तुषार अटना बोलै और अपने अस्सू पोंछते हुए उठा और दरवाजा खोल बहार चला गया.. रू तोह आरुषि भी रही थी तुषार क जाने क बाद वो और जोर से बीएड पे लेट तकिये में अपना सर दे रोने लगी...)
(इसी बात पे में यानि येह कैसर कुछ कहना चाहता है की-
~वक़्त ने हालातो ने कुछ बातों ने मजबूर कर रखा है,
मुझे तुझसे और तुजे मुझसे इक रिश्ते ने दूर कर रखा है..~
《1877 -वर्ड्स》
अन्निका- हाँ दीदी.. मैंने आरुषि डीडू को बोल दिया है की भैया ए तोह उन्हें मुझसे मिलवाने बेज देना...
तान्या- ओह्ह्ह मतलब राजकुमार खुद आएंगे अपनी राजकुमारी से मिलने..?
अन्निका- और नहीं तोह क्या.. अगर वो नहीं ए तोह हम क्रोधित हो जायेंगे.. और aas-pass क सभी इलाके जला क भस्म कर देंगे... हहै…
तान्या- हाहाहा.. चल अब चले घर…
अन्निका- हाँ चलो दीदी…
|अब अग्गे|
|बैक तो तुषार|
कैसर- शिवं स्टार्ट कर जल्दी..
(शिवं अपने हाथ में पकडे इक रिमोट को ों कर देता है.. और चेयर में लगी मशीन अपना काम करना स्टार्ट कर देती है.. वो लोहे की चेयर dhire-dhire अब गरम होने लगी थी.. करीब और 2मिंट बाद चेयर काफी गरम हो चुकी थी, अब गुंडे के चूतड़ गरम होने लगे थे. उससे एहसास हो चूका था की उसके साथ क्या होने वाला है..)
गुंडा- (डरता हुआ) bha.i.. येह कुर्सी बहुत गरम होती जा रही है.. अह्ह्ह्हह्ह भाई.. भाई में जल जायूँगा…
कैसर- न न इतनी जल्दी नहीं जलेगा तू.. अभी तोह गेम शुरू भी न हुआ.. बस थोड़ी देर और थाहार…
(चेयर में लगी मशीन ने अपना कमाल दिखते हुए चेयर को और गरम करना शुरू कर दिया.. गुंडे की पूरी बॉडी निचे से धीरे धीरे जलने लगी.. और उसके कपडे इस वक़्त उसकी बॉडी से चिपक चुके थे और उन् में से धुआँ निकलने लगा था.. गुंडा अब बर्दाश्त करने की हद में न था और चिलए जा रहा था…)
गुंडा- (रोटा हुआ) आआह्ह्ह्ब्भई आअह्ह्ह नाहीइ भाई मुजी छोड़ दी भाई माफ़ करदी... जानी दे कुट्टी.. मर जायूँगा.. रख बन जायूँगा मेंनननन…
(गुंडा तड़फ रहा था.. उठने की नाकाम कोशिश कर रहा था लकिन हिल तक नहीं प् रहा था...)
कैसर- शिवं!.. रोक दो…
(शिवं रिमोट का स्विच ऑफ कर देता है.. अब चेयर dhire-dhire ठंडी होनी चालू हो गयी थी.. लकिन गुंडे की तोह पहले hi फैट चुकी थी.. उसकी पीठ, चूतड़, टैंगो और बाजु के चेयर से दबे हुए हिस्से के कपडे जल क उसकी बॉडी से चिपक चुके थे…)
गुंडा- (दर्द से तड़फते हुए) भाई.. भाई मुझे पुलिस क हवाले करदे.. चाहे मुझे उम्र कैद की सजा दिलवादे. पर यह अत्याचार मुझ पर मात कर भाई.. तुम इक निहथे पे वॉर कर रहे हो..
कैसर- और जो तू कर रहा था क्या वो अत्याचार नहीं था.. 10 आदमियों को लेकर स्कूल में घुस गया मेरी मासूम बहिन को स्कूल के बीचो बिच चूमा.. उससे सबके सामने जलील किया.. उससे उठा क ले गया अपनी पावर क डैम पर. क्या वो सही था.. और तुजे तोह 60 आदमियों में से निकल क लाया हु में. ताकि तुजे tadpa-tadpa क मार सकू तभी मेरे मन को सकूं मिलेगा…
गुंडा- भाई ऐसा जुलम न कर.. बागवान कसम अग्गे से कुछ बुरा का…
(गुंडा अग्गे कुछ बोलता कैसर ने इक लम्बी नीदडले उसके होंठ पकड़ निचले होंठ से उपरवाले होंठ से निकल फसा दी.. उसके काळा होंठ लाल रंग में तब्दील होने लगे.. नीदडले उसके होंठो में hi अटकी थी तोह चिल्ला पाने का सवाल hi पैदा नहीं होता…)
कैसर- (इक थप्पड़ उससे मरता हुआ) बदनाम मात कर बागवान को अपनी गन्दी जुबान से… शिवं!! ों कर सेल को तड़पते देखना है मुझे…
(शिवं वापिस स्विच ों कर देता है लकिन इस बार रिमोट के 2 बटन ों करता है.. धीरे धीरे चेयर वापिस गरम होने लगी.. करीब 5मिंट बाद चेयर इतनी गरम हो चुकी थी की अब चेयर halke-halke लाल रंग में दिखने लगी थी.. गुंडे की हालत बताने लायक नहीं थी.. वो जोर जोर से नाक से सास से रहा था.. लकिन चीख नहीं प् रहा था.. अब चेयर ने अपना असली कमाल दिखना शुरू किया.. चेयर क होल्स में से lambi-lambi गरम नीडल्स बहार को एना शुरू हो गयी.. वो होल्स से बहार आयी और गुंडे के चूतड़, हाथो, पाँव और कमर में धीरे से हाफ इंच अंदर घुस क वापिस निकल गयी… गुंडा इतनी जोर से तड़प क चीखा की उसके होठो में फास्सी नीडल भी उसके होठो को फाड़ती हुई निकल क गिर गयी...)
(2मिंट तक चेयर ने अपने अप्प को शांत रखा लकिन ठंडी नहीं हुई वैसे hi गुंडे को गरम करती रही.. और करीब 2मिंट बाद, गरम होने क कारन चेयर अब गहरे लाल रंग में चमक रही थी.. इसी बिच न जाने गुंडा कितना चीखता चिलता रोटा रहा.. गुंडा की बैक साइड जल क खख हो गयी थी.. और जैसे अब वो सुन्न हो गयी थी.. की अचानक होल्स में से गरम नीडल्स वापिस निकली और गुंडे की बॉडी में 1 इंच अंदर डांस गयी.. ऐसे hi नीडल्स वापिस होल्स में चली गयी और फिर स्पीड से एक्के गुंडे को चुभ गयी.. येह प्रोसेस रिपीट होता gaya..jale पे नमक तो सुना था लकिन गुंडे को जले पे garam-garam सुई चुभ रही थी.. गुंडे की हालत देखने लायक नहीं बची थी.. क्युकी अब वो शांत हो चूका था.. अपनी जिंदगी क कुछ आखरी पल hi जी रहा था.. कपडे dhire-dhire जल रहे थे की अचानक उनमे भयानक अग्ग लग गयी.. और साथ में गुंडे की चीखे भी निकल गयी. जैसे अभी वो बेहोशी से जगह हो.. गुंडा जो पीछे से जल रहा था अब अग्गे से भी जलने लगा…
कैसर- बस बहुत हुआ.. शिवं जल्दी इससे यमराज से मिलवाओ…
शिवं- ok बॉस…
(शिवं रिमोट का इक लास्ट बटन दबा देता है.. बटन दबाते hi इक लम्बा गरम तीखा चाकू गुंडे की गर्दन क पीछे से निकल अग्गे को ा जाता है… गुंडा मार चूका था. वो बहार से उतना दिखा नहीं पाया जितना वो अंदर से तड़पा था. येह तोह बस वही जनता था. शयद अब शैतान भी उससे नरक में सजा न दे क्युकी इक भयानक सजा वो जीते जी भुगत चूका था.. कैसर और एजेंट्स कुछ देर उससे यही देखते रहे.. शिवं चेयर को ऑफ कर देता है.. सवाना जेक कैमरा बंद कर देती है…)
सफल- बॉस…
कैसर- (मास्क निकलता हुआ) हम्म..
सफल- अब क्या करना है..
तुषार- कुछ नहीं.. इसकी लाश को उठाओ और जंगल में जेक दफना दो…
(कुछ देर बाद तुषार वापिस हर्षिका क घर की और निकल जाता है.. घर पांच कर तुषार दुर्बल बजता है तोह सामने हर्षिका दूर खोलती है. और वो तुषार को देख इक स्माइल कर देती है.. तुषार क जो गुंडे को मार के चेहरे क haav-bhaav बदले हुए थे अब हर्षिका की प्यारी स्माइल देख तुषार का चेहरा खिल गया था.. वो भी मुस्कुराता हुआ अंदर ा जाता है.. और सोफे पर बेथ जाता है…)
हर्षिका- (उसके सामने वाले सोफे पे बैठती हुई) कहा गए थे आप सुभे से..?
तुषार- बस ऐसे hi थोड़ा काम था.. दीदी कहा है…
हर्षिका- वो शयद अपने रूम में hai..(par जैसे hi उससे याद अट्टा है की आरुषि उससे नाराज है तोह उसका फेस साद हो जाता है.. लकिन वो तुषार को इस बात का एहसास नहीं होने देती…)
तुषार- (उठता हुआ) ठीक है में जरा मिल क अट्टा हु दीदी से.. मुझे कुछ बात करनी है उनसे…
हर्षिका- Okay…
(तुषार जेक आरुषि के रूम के सामने खड़ा हो जाता है.. दरवाजा बंद था लकिन लॉक नहीं था.. तुषार दरवाजा को ढाका देके अंदर चला जाता है.. सामने आरुषि बीएड पे लेती फैन को घर रही थी…)
तुषार- hello दीदी..
आरुषि- (उठ क बैठती हुई) अरे तुषार तू ा गया.. कभी आया..?
तुषार- (बीएड पे बैठता हुआ) बस अभी अभी.. और आप क्या यहाँ अकेली बैठी छत को देख रही हो...
आरुषि- बस ऐसे hi.. वैसे गया कहा था तू सुभे से..?
तुषार- वो कुछ नहीं दीदी बस एजेंट्स क साथ hi था.. कुछ प्लान समजने गया था…
आरुषि- (ऊँगली दिखती हुई) पक्का न..? देख अगर तू खुद किसी से भिड़ने गया न तोह बहुत बुरा हाल करुँगी तेरा समजा…
तुषार- (उसकी ऊँगली पकड़ निचे करता हुआ) उफ्फो दीदी.. में नहीं जायूँगा किसी से भी bhidne-vhidne.. में तोह बस उन्हें अग्गे क्या करना है. सेहर में कैसे गुंडों का राज ख़तम करना है वो बताने गया था.. और एजेंट्स क साथ उनका इक बॉस भी तोह आया है. वो सब संभल लेगा अप्प मेरी फ़िक्र मत करो…
आरुषि- हम्म.. फिर ठीक है…
तुषार- वो सब छोडो दीदी. मुझे आपसे इक जरुरी बात करनी है…
आरुषि- हाँ बोल क्या बात करनी है…
तुषार- दीदी कल अपने मुझे हॉस्पिटल में किश किया था…
आरुषि- (मुस्कुरा क) हाँ किया था. तोह..?
तुषार- दीदी आप समाज नहीं रही हो.. मेरा कहना का मतलब है की आप मुझे किश कैसे कर सकती हो. ी मैं…
आरुषि- (बिच में. सीरियस होक) देख तुषार! मेरी बात सुन. जा पहले दरवाजा बंद करके आ..
(तुषार उठ क दरवाजा बंद कर देता है और वापिस आकर बीएड पर बेथ जाता है…)
आरुषि- (उसकी आखो में देखती हुई) तुषार देख! मैंने देख वही किया है जो मेरे दिल में था.. तोह मैंने तुम्हे किश कर लिया…
तुषार- (कंफ्यूज होक) दीदी आपकी कोई बात मुझे समाज नहीं आयी.. थोड़ा डिटेल में बताओ प्लीज…
आरुषि- तुषार में तुझसे प्यार करती हु. और तू भी मुझसे करता है. हैना..?
तुषार- हाँ दीदी. करता हु.. बहुत प्यार करता हु…
आरुषि- (उसके दोनों कंधो पे हाथ रखती हुई) मेरी बात सुन.. में तुजे प्यार करती हु. तू मुझे प्यार करता है..
तुषार- मैंने अभी वही बोलै दीदी…
आरुषि- (लम्बी सास अंदर लेती हुई) हष्ठ.. देख तुषार में तुजे प्यार करती हु.. बहुत प्यार करती हु.. अस ा लवर प्यार करती हु.. और तू जनता है वो किश जो मैंने तुजे किया था वो कोई बहिन अपने भाई को नहीं कर सकती.. मैंने तुजे हमेशा अपने लवर की तरह hi देखा है.. में तुझसे बेइंतेहा मोहब्बत करती हु.. कब से करती हु मुझे नहीं पता.. येह फीलिंग्स कब मेरे अंदर जाग गयी येह मुझे भी नहीं पता. लकिन तेरे बिना अकेला रहना सोच क hi मेरे अंदर कुछ कुछ होने लगता है तू समाज रहा है न… (आखे गीली करती हुई) देख तुषार मुझे पता है तू भी मुझसे प्यार करता है. नहीं तोह कोई भाई इक बहिन से ऐसा छेड़खानी नहीं करता जो तू करता है. और तूने तोह खुद hi मन्ना था कल की तू मुझे प्यार करता है इक लवर की तरह.. और अब सब जानते हुए भी तू मुझे कल किये हुए किश के बारे में पूछ रहा है…
(आरुषि की बात सुन तुषार को कुछ झटके लगे थे. लकिन अब उसके भी दिल में दबे हुए अरमान जाग गए थे…)
तुषार- दीदी.. येह नहीं हो सकता.. हाँ में आपसे प्यार करता हु.. इक प्रेमी वाला प्यार करता हु.. लकिन..
आरुषि- लकिन क्या.. मजबूरी क्या है तेरी.. में हु न तेरे साथ…
तुषार- दीदी अप्प शायद प्यार में इतना भूल चुकी हो की आपको हमारा रिश्ता भी याद नहीं रहा.. हम इक भाई बहिन है.. और भाई बहिन कभी प्रेमी प्रेमिका नहीं बन सकते... दीदी में आपसे प्यार इशिता से भी पहले का करता था.. लकिन इस समाज के बंधनो के आगे में नहीं लड़ सकता. इस लिए मैंने अपने जज्बातो को कब का अपने दिल में दबा लिया था.. और इशिता को अपनी लाइफ में ले आया. (रट हुए) लकिन कुदरत का खेल तोह देखो वो भी चली गयी मुझे छोड़ क…
(तुषार अटना बोलै और अपने अस्सू पोंछते हुए उठा और दरवाजा खोल बहार चला गया.. रू तोह आरुषि भी रही थी तुषार क जाने क बाद वो और जोर से बीएड पे लेट तकिये में अपना सर दे रोने लगी...)
(इसी बात पे में यानि येह कैसर कुछ कहना चाहता है की-
~वक़्त ने हालातो ने कुछ बातों ने मजबूर कर रखा है,
मुझे तुझसे और तुजे मुझसे इक रिश्ते ने दूर कर रखा है..~
《1877 -वर्ड्स》