- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 139,508
अपडेट-9
आरुषि- चलो येह nayi-nayi दोस्ती पे इक इक कप कॉफी हो जाये..
तुषार- हाँ सूरे..
हर्षिका- (मुस्कुरा क उठती हुई) ok में बना क लती हु..
आरुषि- चल में भी चलती हु..
(दोनों चली जाती है और तुषार किसी को कॉल लगा लेता है...)
|अब अग्गे|
(दोनों के जाने क बाद तुषार अपने एजेंट्स को कॉल लगता है. उधर तीनो एजेंट्स इक साथ थे फ़ोन स्पीकर पर था..)
तुषार- hello..
सफल- hello बॉस! कैसे हो अप्प अब..
तुषार- में बिलकुल ठीक हु. ाचा बताओ तुम लोग को कुछ बताने की जरुरत है?..
सवाना- नहीं बॉस हमें सब पता है. और वेट है तोह बस आपके इक आर्डर का..
तुषार- (मुस्कुरा के) हम्म..
सफल- तोह बताओ बॉस क्या हुकम है..
तुषार- अभी नहीं. अभी इक और मुसीबत मेरा इंतज़ार कर रही है..
सवाना- (हैरानी से) कैसी मुसीबत?..
तुषार- वीडियो वाले 3 मर्डर मैंने किया है वो मैंने स्कूल में सबके सामने काबुल किया था..
सवाना- वो तोह हमें पता है. और में भी वही बात करने वाली थी की अपने ऐसा क्यों किया. क्या येह कोई आपका बनाया हुआ प्लान है.. या कुछ और?..
(तुषार कुछ बोलता उससे पहले hi जो कब से चुप बैठा शिवं था बोल पड़ा..)
शिवं- हाँ येह इनका hi बनाया हुआ प्लान है..
सफल- (हैरानी से) क्या?.. लकिन तुम कैसे पता चला..
शिवं- अरे भाई एजेंट हु. येह तोह मुझे साफ़ पता चल रहा था की येह इनका कोई प्लान है और क्या प्लान है येह भी में जनता हु..
सवाना- ोोूहो तोह तुम hi हो एजेंट हाँ?.. हम तोह डेड बॉडी ले जाने वाले लगते है.. हैं न?... और क्या प्लान है जरा बताना..
सफल- अरे शांत! शांत. उसने ऐसा कब कहा की हम एजेंट्स नहीं है या लगते नहीं. वो बस इतना कह रहा है की उसके दिमाग में येह बात आयी आखिर एजेंट है वो भी. हमने इतना दिन नहीं दिया इस बात पे लकिन शयद वो इस बात को लेकर थोड़ा ज्यादा सीरियस हो गया होगा. और फिर उसके दिमाग की घंटी बजी और उससे सारा खेल समाज ा गया.. क्यों शिवं?...
शिवं- (मुस्कुरा के) थैंक्स मेरे दोस्त. हाँ सही कहा तुमने यही बात है इस बात पर में काफी देर से सोच रहा था इस लिए मुझे पता चल गया की माजरा क्या है..
सवाना- ाचा ठीक है तोह बताओ क्या प्लान है बॉस का..
शिवं- हाँ बताता हु. तोह बॉस क्या अप्प बताना चाहोगे या में hi सब क्लियर करू..
तुषार- नहीं भाई अब तूने इतना दिमाग लगाया है तोह येह हक़ तुजे मिलना hi चाहिए..
शिवं- (है के) ठीक है.. तोह सुनो.
सवाना- हाँ बताओ..
शिवं- देखो बात कुछ ज्यादा बड़ी नहीं है.. सिंपल सा प्लान है. पहले तोह येह बात की हम लोग येह मिशन छोड़ने वाले नहीं है येह मिशन बहुत लम्बा जायेगा. इस लिए तुषार जी को अग्गे चल के कोई खतरा न हो या इनका भेद न खुल जाये इस लिए उन्होंने पहले hi इक प्लान सोच लिया..
सफल- हम्म और क्या है वो प्लान?..
शिवं- वो प्लान है येह..
(शिवं उन्हें तुषार का सारा प्लान बता देता है और उन्हें क्या करने है येह तुषार उन्हें समजा देता है.. थोड़ा देर बाद तुषार फ़ोन रखता है और देखता है सामने सोफे पर आरुषि और हर्षिका बैठी हुई है जो उससे बड़े धयान से सुन और देख रही थी..)
तुषार- क्या हुआ अप्प लोग को?. ऐसे क्यों देख रही हो मुझे..
आरुषि- नहीं कुछ खास नहीं बस देख रही हु तू कही एजेंट तोह नहीं..
तुषार- (हैरानी से) क्या! में और एजेंट. और आपको ऐसा क्यों लगा भला..
आरुषि- तू इक 19साल का 12तह क्लास में पड़ने वाला आम सा लड़का है जो इंडिया के बेस्ट एजेंट्स को अपना बनाया हुआ प्लान समजा रहा है.. वाओ न…
तुषार- हम्म! तोह अस्सी बात है. अपने मेरी साडी बाते और प्लान सुना है..
हर्षिका- हाँ!. और मैंने भी..
तुषार- Ok. तोह कोई क़ुएस्तिओन्स? क्यों कर रहा हु, कैसे कर रहा हु, सेफ है नई है, कामयाब होगा नई होगा और समथिंग ेल्स?
आरुषि- नहीं. मैंने तुमसे पहली भी कहा था की तुजे जो करना है कर. में तुजे रोकूंगी नहीं बल्कि तेरा साथ दूंगी.. बस इतना कहूँगी के संभल के करना जो भी करना.. क्युकी अगर तुजे कुछ हुआ तोह पहले उससे मर दूंगी जिसने तुजे हाथ लगाया फिर खुद भी तेरे पास ा जाउंगी.. तेरे साथ…
(आरुषि का बस येह सोच के hi दिल कम्प गया और आखो में अस्सू ा गए.. तुषार उठ के उसके पास बेथ गया और उसका सर अपने कंडे पे रख लिया और ासु साफ़ कर दिए..)
तुषार- दीदी! क्यों करती हो ऐसा.. मुझे कुछ नहीं होगा.. (स्माइल के साथ उसकी तरफ देख के) और आपको तोह पता hi है न अभी मेरी उम्र hi क्या है.. अभी क्या क्या करना है मुझे सब बताया तोह था आपको मैंने. और वैसे क्या सोचा अपने क्या अप्प करोगी मेरी मदद मेरा वो काम करने में. हँ?.. देखो मुझे 2hi चाहिए बस. ः..
(और उठ के बाघ गया आरुषि भी उसके पीछे बग्ने लगी. पुरे हॉल में इनके धोरणे की dhagad-dhagad आवाज ा रही थी..)
आरुषि- रुक तू.. अभी देती hi 2तुजे. 2क्यों 6 लेले. हाँ.. दीदी से अस्सी बात करता है कोई..
तुषार- में नहीं रुकूंगा दीदी. अप्प मेरा कचुम्बर बना डौगी.. बघू…
आरुषि- वो तोह में बनाउंगी hi. बस इक बार हाथ अजजा मेरे फिर देख...
तुषार- (थोड़ा सा रुक) दीदी अप्प भी बस इक बार दिख दो फिर देखो में kya-kya बनाऊगा..( और फिर भागने लगा.)
(हर्षिका को इनकी बाते समाज तोह नहीं आ रही थी लकिन वो फुल एन्जॉय कर रही थी.. उससे अज्ज पता चल रहा था की उसका घर कितना सुना सुना रहता था.. वो सोच रही थी की येह मस्ती, येह nok-jok, hasna-hasana, किसी अपने से प्यार लेना प्यार देना कितने किस्मत वालो को मिलता है.. उसकी माँ की डिलीवरी के वक़्त डॉक्टर्स ने उन्हें 2रस्ते दिया पेहलिअ की वो खुद को बचा के. अपनी औलाद को जहा से वो आयी है वही उससे दुबारा बेज दे जा फिर खुद उसकी जगह जेक अपनी बची को ज़िंदगी दिखा सके. उसकी माँ ने उससे ज़िंदगी और अपने आपको मौत के हवाले कर दिया.. उसके पापा लास्ट टाइम कब हिस्से थे या कभी वो हस्ते भी हैं नहीं देखा. कैसे उसके पापा ने अपने दिल पे पत्थर रख के अपनी बीवी को हस्ते हस्ते तोह नहीं कहूंगा रट रट अपनी आखो के सामने अपनी ज़िंदगी को ज़िंदगी से जाते हुए देखा hoga..khushiyo बहरा दिन कब दुखो में बदल जाये कोई नहीं कह सकता…)
(हर्षिका येह सब sochte-sochte रू रही थी. अपनी और अपने फॅमिली की किस्मत हो लेकर बागवान को तरह तरह के क्वेश्चन पूछ रही थी.. कुछ देर बाद अपने आपको संभल के वो चुप हो जाती है..)
आरुषि- ाचा ठीक है बाबा में कुछ नहीं बोलूगी. मेरी बात तोह सुन ले इक बार..
तुषार- नहीं दीदी अप्प मरोगी..
आरुषि- अरे नहीं मरूंगी. ा इधर बेथ कुछ बात करनी है..
(दोनों आकर वापिस सोफे पे बेथ जाते है..)
तुषार- हाँ बोलो दीदी क्या बात है..
आरुषि- थोड़ी देर पहले जब तू फ़ोन पे बात कर रहा था तब पापा का कॉल आया था. वो कह रहे थे की तुषार को लेके घर ा जल्दी कुछ जरुरी बात है..
तुषार- हम्म ाचा तोह येह बात है..
आरुषि- हाँ. तुजे पता है पापा ने क्यों बुलाया होगा?..
तुषार- हाँ पता है. लकिन में अभी आपको नहीं बताऊंगा. चलो पहले घर चलते है..
हर्षिका- (उदास हो के) क्या इतनी जल्दी. मुझे लगा अप्प लोग थोड़े दिन रुकोगे पर अप्प तोह अज्ज hi जा रहे हो..
तुषार- हर्षिका ग थोड़े दिन नहीं पुरे इक महीने के लिए यहाँ ए है.. अभी बस जरुरी जाना पढ़ रहा है. हम कल सुभे hi आपके घर ा जायेंगे. और हमारे कपडे और सामान भी तोह घर पे hi है वो भी ले आएंगे.. ठीक है?..
हर्षिका- (खुश होक) सच्ची अप्प इक मंथ के लिए मेरे घर रुकने वाले हो..
तुषार- ग
हर्षिका- तोह फिर ठीक है..
(कुछ देर बाद आरुषि और तुषार हर्षिका के घर से निकल पड़ते है अपने घर के और जहा इक मुसीबत बैठी थी हाथ में डंडा लिए..)
(करीब आधे घंटे बाद तुषार और आरुषि अपने घर के मैं दूर के बहार काढ़े थे. तुषार बेल्ल बजता है तोह सामने अन्निका दूर खोलती है अपना साद सा फेस लिए..)
अन्निका- (साद फेस किये) भैया अप्प ा गए..
तुषार- हाँ गुड़िया..
(तीनो अंदर जाते है तोह सामने सोफे पे पापा और उनके साथ पुलिस बैठी हुई थी..)
पापा- (तुषार को देख) अरे बीटा ा गया तू..
तुषार- हाँ पापा बोलिये क्या काम था की अपने मुझे इतना अर्जेंट बुलाया..
इंस्पेक्टर- अर्जेंट तोह बुलाया था पर तुम कोनसे जल्दी ा गए हो.. खेर छोड़ो पहले येह बताओ की तुमने जगाला के तीन आदमियों को मारा है अपनी तरफ से कोई सफाई देना चाहोगे?..
तुषार- (चौंके का नाटक करता हुआ) क्या!!.. माँ.. mai..mainee?...
इंस्पेक्टर- (उसका कलर पकड़ता हुआ) हाँ तुमने..
पापा- देखो इंस्पेक्टर पहले मेरे बेटे का कलर छोड़ो..
अन्निका- (मुँह बना के) हाँ अंकल छोड़ दो भैया को..
(इंस्पेक्टर छोड़ देता है.)
पापा- में आपसे पहले भी कह चूका हु की आपके पास क्या साबुत है की मेरा बीटा हु उन् तीन आदमियों का कातिल है..
इंस्पेक्टर- मर विजय हमारे पास कोई साबुत तोह नहीं लकिन 10हज़ार से भी ज्यादा गवाह है.. इसने खुद अपने स्कूल में काबुल किया था की इसने hi उन् तीन आदमियों को मारा है. तोह अप्प hi बताओ की इक इंसान झूट बोल सकता है 10 बोल सकते है 10हज़ार तोह नहीं न.
पापा- (तुषार की तरफ देख) बीटा ये..
तुषार- (बिच में) में बताता हु पापा.. (इंस्पेक्टर की तरफ देख) देखो सर येह बात इतनी सीधी भी नहीं है जितनी अप्प सोच रहे हो..
इंस्पेक्टर- क्या मतलब है तुम्हारा..
तुषार- मेरा मतलब येह की में येह बात मंटा हु की मैंने येह बात बोली थी की मैंने hi उन् तीन आदमियों को मारा है लकिन..
इंस्पेक्टर- लकिन क्या..
तुषार- लकिन येह की अप्प hi सोचो की अगर मुझे उन्हें मार के वीडियो बनानी होती तोह में उस वीडियो में अपना फेस hi क्यों बलौर करवाता..
इंस्पेक्टर- देख बचे. तूने उस वीडियो में अपना फेस बलौर तोह करवा लिया था लकिन हमने उससे वापिस क्लियर करवाया तोह उसमे भी तेरी hi चेहरा निकला. अब बता..
तुषार- सर अप्प मेरी बात अब भी नहीं समजे..
इंस्पेक्टर- हाँ तोह समजा न फिर क्या कहना चाहता है तू..
तुषार- देखो सर मुझे भी पता है की बलौर फेस को वापिस किसी अचे एडिटर से साफ़ करवाया जा सकता है..
इंस्पेक्टर- हाँ तोह..
तुषार- तोह सर में वही तोह कह रहा हु की मुझे पता है बलौर फेस साफ़ हो सकता है तोह मैं क्यों फेस बलौर करवाता और वीडियो hi क्यों बनता पहली बात तोह..
इंस्पेक्टर- ाचा!. चलो मान लेते है तूने उन् तीनो को नहीं मारा. लकिन कल काबुल क्यों किया फिर उसकी क्या वझे थी येह बता..
तुषार- सर मैंने उधर सबको डरने के लिए बोलै था..
इंस्पेक्टर- और डरने की क्या वझे थी..
तुषार- सर उधर स्कूल का इक बिगड़ा हुआ लड़का मेरी बहिन को शेड रहा था बतमीज़ी कर रहा था. और उसने मुझे भी काफी चोट पहुंचे. इस लिए मैंने बस उससे डरने क लिए झूट बोलै था..
इंस्पेक्टर- ाचा तोह अब येह बता की में येह तेरी बात कैसे मान लू. तेरे पास है कोई साबुत..
शिवं- (अंदर अट्टा हुआ) साबुत है इंस्पेक्टर दीपक शर्मा..
(सब शिवं की तरफ देखने लगे तीनो एजेंट्स एक्के उनके पास खड़े हो गए..)
इंस्पेक्टर- आपकी तारीफ..
शिवं- हम इनके दोस्त है..
इंस्पेक्टर- हम्म तोह बताओ क्या साबुत है..
शिवं- अप्प कूद hi देख लो..
(फिर शिवं उन्हें अपने साथ लाये लैपटॉप में इक वीडियो प्ले कर दिखता है. वो वीडियो थी तुषार की देण्य की साथ हुई फाइट की. पूरी वीडियो देखने क बाद इंस्पेक्टर बोलै..)
इंस्पेक्टर- ठीक है चलो तुम सही हो लकिन क्या तुम लोग येह कहना चाहते हो की उन् तीन आदमियों को मरने वाला कोई तुम्हारा हमशकल है?..
शिवं- हाँ हो सकता है. क्यों नहीं हो सकता. येह कोई इम्पॉसिबल जैसी बात थोड़ी है या अप्प पहली बार सुन रहे हो की किसी इक hi शकल के 2 आदमी है..
सवाना- सही कहा अप्प बेवजा तुषार पर इलज़ाम लगा रहे है जब की आपके पास कोई साबुत भी नहीं.. वो इसका हमशक्ल hi है जिसने खून किया है..
सफल- अब अप्प जा सकते है इंस्पेक्टर. आपके पास कोई साबुत नहीं है की तुषार hi गुनेगार है. कातिल तोह इसका हमशकल है. अप्प जेक उससे पकड़े कही वो और न किसी को टपका दे..
इंस्पेक्टर- ठीक है तोह Mr.Tushar. अभी हम जा रहे है. लकिन आपको दुबारा परेशां करने जरूर आएंगे. अगर वो आपका हमशकल होगा तोह वो भी जल्दी hi पदक जायेगा..
(फिर वो इंस्पेक्टर और उसके साथी निकल पड़ते है अपने रस्ते और इधर शुरू हो जाता है तुषार के साथ क्वेश्चन आंसर का खेल…)
《2106 -वर्ड्स》
आरुषि- चलो येह nayi-nayi दोस्ती पे इक इक कप कॉफी हो जाये..
तुषार- हाँ सूरे..
हर्षिका- (मुस्कुरा क उठती हुई) ok में बना क लती हु..
आरुषि- चल में भी चलती हु..
(दोनों चली जाती है और तुषार किसी को कॉल लगा लेता है...)
|अब अग्गे|
(दोनों के जाने क बाद तुषार अपने एजेंट्स को कॉल लगता है. उधर तीनो एजेंट्स इक साथ थे फ़ोन स्पीकर पर था..)
तुषार- hello..
सफल- hello बॉस! कैसे हो अप्प अब..
तुषार- में बिलकुल ठीक हु. ाचा बताओ तुम लोग को कुछ बताने की जरुरत है?..
सवाना- नहीं बॉस हमें सब पता है. और वेट है तोह बस आपके इक आर्डर का..
तुषार- (मुस्कुरा के) हम्म..
सफल- तोह बताओ बॉस क्या हुकम है..
तुषार- अभी नहीं. अभी इक और मुसीबत मेरा इंतज़ार कर रही है..
सवाना- (हैरानी से) कैसी मुसीबत?..
तुषार- वीडियो वाले 3 मर्डर मैंने किया है वो मैंने स्कूल में सबके सामने काबुल किया था..
सवाना- वो तोह हमें पता है. और में भी वही बात करने वाली थी की अपने ऐसा क्यों किया. क्या येह कोई आपका बनाया हुआ प्लान है.. या कुछ और?..
(तुषार कुछ बोलता उससे पहले hi जो कब से चुप बैठा शिवं था बोल पड़ा..)
शिवं- हाँ येह इनका hi बनाया हुआ प्लान है..
सफल- (हैरानी से) क्या?.. लकिन तुम कैसे पता चला..
शिवं- अरे भाई एजेंट हु. येह तोह मुझे साफ़ पता चल रहा था की येह इनका कोई प्लान है और क्या प्लान है येह भी में जनता हु..
सवाना- ोोूहो तोह तुम hi हो एजेंट हाँ?.. हम तोह डेड बॉडी ले जाने वाले लगते है.. हैं न?... और क्या प्लान है जरा बताना..
सफल- अरे शांत! शांत. उसने ऐसा कब कहा की हम एजेंट्स नहीं है या लगते नहीं. वो बस इतना कह रहा है की उसके दिमाग में येह बात आयी आखिर एजेंट है वो भी. हमने इतना दिन नहीं दिया इस बात पे लकिन शयद वो इस बात को लेकर थोड़ा ज्यादा सीरियस हो गया होगा. और फिर उसके दिमाग की घंटी बजी और उससे सारा खेल समाज ा गया.. क्यों शिवं?...
शिवं- (मुस्कुरा के) थैंक्स मेरे दोस्त. हाँ सही कहा तुमने यही बात है इस बात पर में काफी देर से सोच रहा था इस लिए मुझे पता चल गया की माजरा क्या है..
सवाना- ाचा ठीक है तोह बताओ क्या प्लान है बॉस का..
शिवं- हाँ बताता हु. तोह बॉस क्या अप्प बताना चाहोगे या में hi सब क्लियर करू..
तुषार- नहीं भाई अब तूने इतना दिमाग लगाया है तोह येह हक़ तुजे मिलना hi चाहिए..
शिवं- (है के) ठीक है.. तोह सुनो.
सवाना- हाँ बताओ..
शिवं- देखो बात कुछ ज्यादा बड़ी नहीं है.. सिंपल सा प्लान है. पहले तोह येह बात की हम लोग येह मिशन छोड़ने वाले नहीं है येह मिशन बहुत लम्बा जायेगा. इस लिए तुषार जी को अग्गे चल के कोई खतरा न हो या इनका भेद न खुल जाये इस लिए उन्होंने पहले hi इक प्लान सोच लिया..
सफल- हम्म और क्या है वो प्लान?..
शिवं- वो प्लान है येह..
(शिवं उन्हें तुषार का सारा प्लान बता देता है और उन्हें क्या करने है येह तुषार उन्हें समजा देता है.. थोड़ा देर बाद तुषार फ़ोन रखता है और देखता है सामने सोफे पर आरुषि और हर्षिका बैठी हुई है जो उससे बड़े धयान से सुन और देख रही थी..)
तुषार- क्या हुआ अप्प लोग को?. ऐसे क्यों देख रही हो मुझे..
आरुषि- नहीं कुछ खास नहीं बस देख रही हु तू कही एजेंट तोह नहीं..
तुषार- (हैरानी से) क्या! में और एजेंट. और आपको ऐसा क्यों लगा भला..
आरुषि- तू इक 19साल का 12तह क्लास में पड़ने वाला आम सा लड़का है जो इंडिया के बेस्ट एजेंट्स को अपना बनाया हुआ प्लान समजा रहा है.. वाओ न…
तुषार- हम्म! तोह अस्सी बात है. अपने मेरी साडी बाते और प्लान सुना है..
हर्षिका- हाँ!. और मैंने भी..
तुषार- Ok. तोह कोई क़ुएस्तिओन्स? क्यों कर रहा हु, कैसे कर रहा हु, सेफ है नई है, कामयाब होगा नई होगा और समथिंग ेल्स?
आरुषि- नहीं. मैंने तुमसे पहली भी कहा था की तुजे जो करना है कर. में तुजे रोकूंगी नहीं बल्कि तेरा साथ दूंगी.. बस इतना कहूँगी के संभल के करना जो भी करना.. क्युकी अगर तुजे कुछ हुआ तोह पहले उससे मर दूंगी जिसने तुजे हाथ लगाया फिर खुद भी तेरे पास ा जाउंगी.. तेरे साथ…
(आरुषि का बस येह सोच के hi दिल कम्प गया और आखो में अस्सू ा गए.. तुषार उठ के उसके पास बेथ गया और उसका सर अपने कंडे पे रख लिया और ासु साफ़ कर दिए..)
तुषार- दीदी! क्यों करती हो ऐसा.. मुझे कुछ नहीं होगा.. (स्माइल के साथ उसकी तरफ देख के) और आपको तोह पता hi है न अभी मेरी उम्र hi क्या है.. अभी क्या क्या करना है मुझे सब बताया तोह था आपको मैंने. और वैसे क्या सोचा अपने क्या अप्प करोगी मेरी मदद मेरा वो काम करने में. हँ?.. देखो मुझे 2hi चाहिए बस. ः..
(और उठ के बाघ गया आरुषि भी उसके पीछे बग्ने लगी. पुरे हॉल में इनके धोरणे की dhagad-dhagad आवाज ा रही थी..)
आरुषि- रुक तू.. अभी देती hi 2तुजे. 2क्यों 6 लेले. हाँ.. दीदी से अस्सी बात करता है कोई..
तुषार- में नहीं रुकूंगा दीदी. अप्प मेरा कचुम्बर बना डौगी.. बघू…
आरुषि- वो तोह में बनाउंगी hi. बस इक बार हाथ अजजा मेरे फिर देख...
तुषार- (थोड़ा सा रुक) दीदी अप्प भी बस इक बार दिख दो फिर देखो में kya-kya बनाऊगा..( और फिर भागने लगा.)
(हर्षिका को इनकी बाते समाज तोह नहीं आ रही थी लकिन वो फुल एन्जॉय कर रही थी.. उससे अज्ज पता चल रहा था की उसका घर कितना सुना सुना रहता था.. वो सोच रही थी की येह मस्ती, येह nok-jok, hasna-hasana, किसी अपने से प्यार लेना प्यार देना कितने किस्मत वालो को मिलता है.. उसकी माँ की डिलीवरी के वक़्त डॉक्टर्स ने उन्हें 2रस्ते दिया पेहलिअ की वो खुद को बचा के. अपनी औलाद को जहा से वो आयी है वही उससे दुबारा बेज दे जा फिर खुद उसकी जगह जेक अपनी बची को ज़िंदगी दिखा सके. उसकी माँ ने उससे ज़िंदगी और अपने आपको मौत के हवाले कर दिया.. उसके पापा लास्ट टाइम कब हिस्से थे या कभी वो हस्ते भी हैं नहीं देखा. कैसे उसके पापा ने अपने दिल पे पत्थर रख के अपनी बीवी को हस्ते हस्ते तोह नहीं कहूंगा रट रट अपनी आखो के सामने अपनी ज़िंदगी को ज़िंदगी से जाते हुए देखा hoga..khushiyo बहरा दिन कब दुखो में बदल जाये कोई नहीं कह सकता…)
(हर्षिका येह सब sochte-sochte रू रही थी. अपनी और अपने फॅमिली की किस्मत हो लेकर बागवान को तरह तरह के क्वेश्चन पूछ रही थी.. कुछ देर बाद अपने आपको संभल के वो चुप हो जाती है..)
आरुषि- ाचा ठीक है बाबा में कुछ नहीं बोलूगी. मेरी बात तोह सुन ले इक बार..
तुषार- नहीं दीदी अप्प मरोगी..
आरुषि- अरे नहीं मरूंगी. ा इधर बेथ कुछ बात करनी है..
(दोनों आकर वापिस सोफे पे बेथ जाते है..)
तुषार- हाँ बोलो दीदी क्या बात है..
आरुषि- थोड़ी देर पहले जब तू फ़ोन पे बात कर रहा था तब पापा का कॉल आया था. वो कह रहे थे की तुषार को लेके घर ा जल्दी कुछ जरुरी बात है..
तुषार- हम्म ाचा तोह येह बात है..
आरुषि- हाँ. तुजे पता है पापा ने क्यों बुलाया होगा?..
तुषार- हाँ पता है. लकिन में अभी आपको नहीं बताऊंगा. चलो पहले घर चलते है..
हर्षिका- (उदास हो के) क्या इतनी जल्दी. मुझे लगा अप्प लोग थोड़े दिन रुकोगे पर अप्प तोह अज्ज hi जा रहे हो..
तुषार- हर्षिका ग थोड़े दिन नहीं पुरे इक महीने के लिए यहाँ ए है.. अभी बस जरुरी जाना पढ़ रहा है. हम कल सुभे hi आपके घर ा जायेंगे. और हमारे कपडे और सामान भी तोह घर पे hi है वो भी ले आएंगे.. ठीक है?..
हर्षिका- (खुश होक) सच्ची अप्प इक मंथ के लिए मेरे घर रुकने वाले हो..
तुषार- ग
हर्षिका- तोह फिर ठीक है..
(कुछ देर बाद आरुषि और तुषार हर्षिका के घर से निकल पड़ते है अपने घर के और जहा इक मुसीबत बैठी थी हाथ में डंडा लिए..)
(करीब आधे घंटे बाद तुषार और आरुषि अपने घर के मैं दूर के बहार काढ़े थे. तुषार बेल्ल बजता है तोह सामने अन्निका दूर खोलती है अपना साद सा फेस लिए..)
अन्निका- (साद फेस किये) भैया अप्प ा गए..
तुषार- हाँ गुड़िया..
(तीनो अंदर जाते है तोह सामने सोफे पे पापा और उनके साथ पुलिस बैठी हुई थी..)
पापा- (तुषार को देख) अरे बीटा ा गया तू..
तुषार- हाँ पापा बोलिये क्या काम था की अपने मुझे इतना अर्जेंट बुलाया..
इंस्पेक्टर- अर्जेंट तोह बुलाया था पर तुम कोनसे जल्दी ा गए हो.. खेर छोड़ो पहले येह बताओ की तुमने जगाला के तीन आदमियों को मारा है अपनी तरफ से कोई सफाई देना चाहोगे?..
तुषार- (चौंके का नाटक करता हुआ) क्या!!.. माँ.. mai..mainee?...
इंस्पेक्टर- (उसका कलर पकड़ता हुआ) हाँ तुमने..
पापा- देखो इंस्पेक्टर पहले मेरे बेटे का कलर छोड़ो..
अन्निका- (मुँह बना के) हाँ अंकल छोड़ दो भैया को..
(इंस्पेक्टर छोड़ देता है.)
पापा- में आपसे पहले भी कह चूका हु की आपके पास क्या साबुत है की मेरा बीटा हु उन् तीन आदमियों का कातिल है..
इंस्पेक्टर- मर विजय हमारे पास कोई साबुत तोह नहीं लकिन 10हज़ार से भी ज्यादा गवाह है.. इसने खुद अपने स्कूल में काबुल किया था की इसने hi उन् तीन आदमियों को मारा है. तोह अप्प hi बताओ की इक इंसान झूट बोल सकता है 10 बोल सकते है 10हज़ार तोह नहीं न.
पापा- (तुषार की तरफ देख) बीटा ये..
तुषार- (बिच में) में बताता हु पापा.. (इंस्पेक्टर की तरफ देख) देखो सर येह बात इतनी सीधी भी नहीं है जितनी अप्प सोच रहे हो..
इंस्पेक्टर- क्या मतलब है तुम्हारा..
तुषार- मेरा मतलब येह की में येह बात मंटा हु की मैंने येह बात बोली थी की मैंने hi उन् तीन आदमियों को मारा है लकिन..
इंस्पेक्टर- लकिन क्या..
तुषार- लकिन येह की अप्प hi सोचो की अगर मुझे उन्हें मार के वीडियो बनानी होती तोह में उस वीडियो में अपना फेस hi क्यों बलौर करवाता..
इंस्पेक्टर- देख बचे. तूने उस वीडियो में अपना फेस बलौर तोह करवा लिया था लकिन हमने उससे वापिस क्लियर करवाया तोह उसमे भी तेरी hi चेहरा निकला. अब बता..
तुषार- सर अप्प मेरी बात अब भी नहीं समजे..
इंस्पेक्टर- हाँ तोह समजा न फिर क्या कहना चाहता है तू..
तुषार- देखो सर मुझे भी पता है की बलौर फेस को वापिस किसी अचे एडिटर से साफ़ करवाया जा सकता है..
इंस्पेक्टर- हाँ तोह..
तुषार- तोह सर में वही तोह कह रहा हु की मुझे पता है बलौर फेस साफ़ हो सकता है तोह मैं क्यों फेस बलौर करवाता और वीडियो hi क्यों बनता पहली बात तोह..
इंस्पेक्टर- ाचा!. चलो मान लेते है तूने उन् तीनो को नहीं मारा. लकिन कल काबुल क्यों किया फिर उसकी क्या वझे थी येह बता..
तुषार- सर मैंने उधर सबको डरने के लिए बोलै था..
इंस्पेक्टर- और डरने की क्या वझे थी..
तुषार- सर उधर स्कूल का इक बिगड़ा हुआ लड़का मेरी बहिन को शेड रहा था बतमीज़ी कर रहा था. और उसने मुझे भी काफी चोट पहुंचे. इस लिए मैंने बस उससे डरने क लिए झूट बोलै था..
इंस्पेक्टर- ाचा तोह अब येह बता की में येह तेरी बात कैसे मान लू. तेरे पास है कोई साबुत..
शिवं- (अंदर अट्टा हुआ) साबुत है इंस्पेक्टर दीपक शर्मा..
(सब शिवं की तरफ देखने लगे तीनो एजेंट्स एक्के उनके पास खड़े हो गए..)
इंस्पेक्टर- आपकी तारीफ..
शिवं- हम इनके दोस्त है..
इंस्पेक्टर- हम्म तोह बताओ क्या साबुत है..
शिवं- अप्प कूद hi देख लो..
(फिर शिवं उन्हें अपने साथ लाये लैपटॉप में इक वीडियो प्ले कर दिखता है. वो वीडियो थी तुषार की देण्य की साथ हुई फाइट की. पूरी वीडियो देखने क बाद इंस्पेक्टर बोलै..)
इंस्पेक्टर- ठीक है चलो तुम सही हो लकिन क्या तुम लोग येह कहना चाहते हो की उन् तीन आदमियों को मरने वाला कोई तुम्हारा हमशकल है?..
शिवं- हाँ हो सकता है. क्यों नहीं हो सकता. येह कोई इम्पॉसिबल जैसी बात थोड़ी है या अप्प पहली बार सुन रहे हो की किसी इक hi शकल के 2 आदमी है..
सवाना- सही कहा अप्प बेवजा तुषार पर इलज़ाम लगा रहे है जब की आपके पास कोई साबुत भी नहीं.. वो इसका हमशक्ल hi है जिसने खून किया है..
सफल- अब अप्प जा सकते है इंस्पेक्टर. आपके पास कोई साबुत नहीं है की तुषार hi गुनेगार है. कातिल तोह इसका हमशकल है. अप्प जेक उससे पकड़े कही वो और न किसी को टपका दे..
इंस्पेक्टर- ठीक है तोह Mr.Tushar. अभी हम जा रहे है. लकिन आपको दुबारा परेशां करने जरूर आएंगे. अगर वो आपका हमशकल होगा तोह वो भी जल्दी hi पदक जायेगा..
(फिर वो इंस्पेक्टर और उसके साथी निकल पड़ते है अपने रस्ते और इधर शुरू हो जाता है तुषार के साथ क्वेश्चन आंसर का खेल…)
《2106 -वर्ड्स》