The Story of a Bodyguard (by Naree) - Page 97 - SexBaba
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The Story of a Bodyguard (by Naree)

मैं, अपने अंडरवियर भी उतर देता हु, लेकिन जैसे hi मैं अपना अंडरवियर उतरता हु वैसे hi बगल में बैठे माहि का पति राघव की आँखे बड़ी बड़ी हो जाती है उसे देख कर ऐसा लगता है जैसे वह कुछ ऐसा देख लिया जिसकी उसे कोई उम्मीद नहीं थी, इधर हम दोनों अब पूरी तरह से नंगे हो चुके थे, माहि अपने पति से बेवफाई कर रही थी उसी के सामने, मैं, अब माहि के दोनों हाँथ छोड़ देता हु और अपने दोनों हाथों से अब उसकी छूट को सहलाने लगता हु वही माहि, का जिस्म अकड़ जाता है मेरे हाँथ अपने छूट पर पाते hi साथ hi साथ वो अब अपने दोनों हाथ मेरे काळा सफ़ेद बालो में दाल कर सहलाने लगती है, उधर उसका पति राघव अपने बीवी की हरकत को बड़े गौर से देख रहा था, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी, वह राधे को अपने पत्नी के छूट से मुँह हटाने को कह सके? वैसे भी वो छह कर भी कुछ नहीं कर सकता

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था क्यों की उसका हाँथ, मुँह के साथ साथ उसके दोनों पतले टंगे भी मैने बांध के उसको सोफे के ऊपर बैठाया हुआ था, इधर मैं, माहि की हरकत पर, लगता है मेरी जान की प्यास अच्छे से नहीं बुझा पाटा तेरा पति ये कह के मैं राघव की और एक बार देखता हु, वही माहि, अपने आँखों को बंद किये हुए उम्.. महिमा की आवाज़ धीरे से निकलती है, इधर मैं, अब तू फ़िक्र मत कर मेरी जानेमन.. अब मैं आ गया हु न आज तेरी साडी अधूरी प्यास को बुझा के hi जाऊंगा.. हहहहए.. माय अब माहि की छूट की फैंको पर से ऊँगली फेरते हुए अपनी जुबान उसकी छूट के दाने (क्लाइटोरिस) पर रख कर चूमने लगता हु. माहि मेरी जुबान की जादू में फसने लगती है जिसका साबुत उसकी आहे कर रही थी.. आह्ह्ह्हह.. सशह्ह्ह्ह.. ऊम्मम.. उफ्फ्फ्फ्फ़.. की, इधर मैं, अब अपने हाँथ पर थूक लगा कर अपने लुंड को मसलने लगता हु, मैं थोड़ी देर तक अपनी जुबान बहुत hi

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धीरे से ुर प्यार से माहि की छूट पर से फेरते हुए अपने लुंड को मसलता रहता हु, महिमा, बस्सस.. और नाहीइ.. उम्म्म.. आह्ह्ह्ह.. राधे.. सशह्ह्ह.. करती रहती है, साथ hi साथ वह अपने होंठ काटते हुए बस आँखे बंद किये अपनी छूट पर फेर रही जुबान का मजा लेने लगती है, लेकिन मैं, उसको और तड़पना चाहता था, इसलिए मैं अब एक दम से रुक जाता हु और माहि के नंगे सेक्सी बदन पर लेट जाता हूँ, मेरा कला एनाकोंडा अब माहि की जांघो के बीच में घुस जाता है.. उसकी गर्मी का एहसास होते hi वो अपनी पलके खोल कर मुझे अजीब तरह से देखने लगती है, इधर मैं, तेरी जांघो के बीच में काफी गर्मी है मेरी बुलबुल.. हहहहए.. उधर माहि को यकीन नहीं हो रहा था इस वक़्त उसकी दोनों टैंगो के बीच में एक दुमदार कला लुंड फसा हुआ है. मैं, माहि की आँखों में देखते हुए अपने लुंड को उसकी जांघो के बीच में घुसाने लगता हूँ.
 
माहि, का मुँह खुल जाता है ुर उसके मु से एक बड़ी सी आठ निकल जाती है, उधर मेरी आँखों में हवस की ज्वाला भड़की हुई थी, जो अब कभी ख़तम नहीं होने वाली थी, मैं, आगे झुक कर माहि को किश करने hi वाला था की तभी वह.. मुझे ज़ोर से अपने ऊपर से धकेल देती है ुर मैं एक दम से सोफे के दूसरी तरफ गिर जाता हु और माहि कड़ी होकर दरवाजे की तरफ नग्गे hi भागने लगती है लेकिन मैं, जल्दी से अपने आप को सँभालते हुए खड़ा होता हूँ और महिमा को झट से पकड़ते हुए, तू सोच क्या रही थी मेरी जान? यहाँ से भागने के बारे में है? हालत देख अपनी.. पूरी तरह से नंगी है तू? कही तेरे घर के बहार चौकीदार लोग देख लिए तो मेरे से तू एक बार बच भी जायगी लेकिन तुझे इस हालत में वो लोग देख लिए तो सब मिल कर तेरी छूट के साथ गांड भी मार देंगे समझी की नहीं तू हां?, माहि अपने नंगे जिस्म को ढकने लगती है,

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ुर एक पल के लिए उसका ध्यान मेरे सरकमसीसेड काळा लुंड पर चला जाता है और वह झट से अपनी नजर दूसरी तरफ कर देती है, इधर मैं, उसको लुंड निहारते हुए पकड़ लेता हु और उसको पकड़ कर एक दीवार से सत्ता कर के खड़ा हो जाता हु. मेरा कला सख्त लुंड माहि को अपनी छूट के ऊपर घिसता हुआ महसूस होने लगता है, इधर मैं, तू अब भाग क्यों रही थी? अब बस भी कर ये सब नौटंकी, माहि, प्लीज राधे.. आए.. अभी.. ंन्न.. नहीं.. प्लीज.. मैं, अभी नहीं तो कभी?, यह कह कर मैं अब अपने लुंड को मसलते हुए माहि की छूट पर रगड़ने लगता हु, जिससे माहि आहे भरते हुए मुझे देखने लगती है, इधर मैं, लौड़ा उसके छूट के ऊपर भाग पर रगड़ते हुए अब उसके बड़े चुके भी सहलाने के साथ साथ कभी कभी उसके गुलाबी निप्पल को चूमने और चूसने लगता हु, उधर माहि, भी अब अपना विरोध थोड़ा काम कर के अब मज़े लेने लगती है.

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माहि के दोनों हाथ अब मेरे गले में थे और मेरा दोनों हाथ माहि के चुचो पर ुर वो दोनों चुके अच्छे से मसल रहे थे, मैं, कुछ देर उसकी आँखों में देखने के बाद अचानक अपने होंठो को उसके होंठो पर रख के एक वाइल्ड तरीके से उसके होंठो को चूसने, काटने लगता हु, मेरे ऐसे जंगली पैन फील होते hi माहि के सांसे फूलने लगते है लेकिन इस बार वह कोई ऑब्जेक्शन नहीं करती और वो आहे भरते हुए मेरे काळा होंठो को खुद से hi चूसने लगती है वही हम दोनों के बदन एक दूसरे से चिपक चुके थे वही माहि को अपनी टैंगो क बिच में मेरा गरम लुंड महसूस हो रहा था और वह अनजाने में अपनी दोनों जंघे मेरे लुंड पर दबाने लगती है, वही मैं, अब उसके होंठो पर से अपने होंठ हटा देता हु. थूक की एक लकीर अब दोनों के होंठो पर लगी हुई थी, वही हम दोनों एक दूसरे को देखते हुए साँसे लेने लगते है कुछ देर एक दूसरे का दीदार करने के बाद?
 
मैं, अब माहि को बहो में उठा कर उसके अलीशा बिस्तर पर ले जाता हु और उसे लेता कर मैं अब माहि को देखते हुए उसका एक चुका अपने मुँह में भरकर चूसने लगता है और माहि, आह्हः.. उम्म्म.. की सिसकारियां निकलने लगती है वही माहि, के चुके को आज तक कभी उसका पति ऐसे पैशनेट तरीके से कभी नहीं चूसा था, जितना आज राधे चूस रहा था वो भी एक बार नहीं बार बार? वह चुके और होंठो को चूस और काट रहा था राधे जैसे उसके पति को अहसास दिला रहा हो की राधे ने उसकी पत्नी के हर हिस्से पर अपनी मुहर लगा रहा है, अब्ब चाहे तू राधे के नाम अपनी प्रॉपर्टी करे या न करे?? लेकिन जो तेरी बीवी है उस प्रॉपर्टी पर राधे ने अपने नाम कर चूका है, इधर मैं, दातो के बिच माहि के निप्पल दबाते हुए उसके दूसरे चुके को अपने हांथो से मसल रहा था और माहि अपने

होंठ काटते हुए मेरे काळा सफ़ेद बालो में से हाथ फेरने लगती है, इधर मैं, उसके गुलाबी निप्पल को थोड़ी देर चूसने के बाद उसकी आँखों में देखते हुए मु स ढेर सारा थूक एकता करता हु और माहि के 34 साइज से दोनों गोर चुके की खाई के थूकता हु और थूकते hi माहि ीववव.. चींईईई.. ये क्या हरकत की तुमने राधे?, इधर मैं, उसका कोई जवाब न देते हुए अपना मुँह उसके चुके की गोलाइयों के बिच रख कर अपने थूक से साणे चुके के किनारे को हलके दांतो से काटने और चाटने लगता हु साथ hi उसके चुके को मैं दबाने भी लगता हु माहि एक लुम्बी सिसकारियां लेती है आह्हः.. सष्ठ.. उम्.. की, थोड़ी देर बाद अपनी थूक से माहि के दोनों चुचो की गोलाइयों को भिगो कर अब्ब अपने काळा मुँह से बहार निकल लेता हु.. माहि की सासे उखड चुकी थी और उसके चुके की गुलाबी निप्पल और उसके चुके की गोलिया मेरी थूक से गीले हो चुके थे.

मैं, अब अपना मुँह साफ़ करता हु और माहि के बदन के अगल बगल अपने पैरो को रख के उसके ऊपर खड़ा हो जाता हु, जैसे hi राधे उसके ऊपर खड़ा होता है वैसे hi माहि की नज़र अब उसके काळा एक दम सख्त लौड़े पर पड़ती है और उस लौड़े को देखते hi उसकी आँखों की पुतलिया बड़ी बड़ी और उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है.. आज पहली बार उसने इतना खूंखार लौड़ा देखा था जिसे देख कर hi वो एक पल के लिए डर भी गई ुर मन hi मन में बस यही कहती है (हे भगवन इतना बड़ा और मोटा किसी का कैसे हो सकता है), इधर लुंड से कुछ चिप छिपा सा निचे माहि के चुचो पर गिरने लगता है जिसे देख के माहि, एव्व.. छी.. राधे, मैं, अरे मेरी जान.. मेरा लुंड भूखा है तेरी छूट में जाने के लिए.. इसी लिए वो अपना लार टपका रहा है साला.. लुंड और छूट का नाम सुनकर माहि शर्मा

जाती है ुर लेते लेते hi दूसरी तरफ देखने लगती है और उधर देखते हुए माहि, मन hi मन में.. (कितना बेशरम है यह राधे.. देखो तो मेरे पति के सामने कैसे गंदे गंदे बाते कर रहा है), इधर मैं, खड़े खड़े hi अब माहि के दोनों तरफ अपने पाओ रखे हुए अपना लुंड हिलने लगता हु, वही मेरे लुंड का गुलाबी सुपडे पर से काली चमड़ी आगे पीछे हो रही थी और माहि वो सब देखते हुए बड़ी hi जोर से सासे लेने लगती है, वही मेरे काळा लुंड के आस पास सफ़ेद काळा झांटो का जंगल बना हुआ था और उस जंगल के बिछे एक कला मोटा कोबरा जैसा सांप अपना फानन फैला रहा था.. माहि बार बार अपनी नज़र दूसरी तरफ कर रही थी पर राधे के लुंड से टपक रहा चिप छिपा सा पानी उसको गर्म कर रहा था. वो तिरछी नज़र से राधे को और उसके काळा लौड़े को देख रही थी.

उधर उसका पति भी राधे की इस हरकत की देख रहा था इधर मैं, भी कामिनी हसी के साथ अपना लुंड हिलाते हुए माहि के गदराये हुए सेक्सी बदन को देख रहा था, हम तीनो hi इस वक़्त हवस के आग में जल रहे थे, अब वक़्त hi बताएगा की ये हवस हम तीनो की कहा पर ला कर छोड़ेगी, वही उसके दूसरी तरफ मुँह करने पर मैं, अरे शर्मा क्यों रही है मेरी जान? ऐसा लौड़ा तूने कभी देखा नहीं होगा है न?, महिमा इस बात पर कुछ नहीं बोलती और बस दूसरी तरफ देखती रहती है. मैं, देख मेरे लुंड को माहि रानी.. कैसे सख्त हो गया है लोहे जैसा.. और कैसे अपनी लार टपका रहा है तेरे नग्गे और गोर चुके देख कर.. महिमा को मेरी बाते कुछ ज्यादा hi गर्म कर रही थी और वह इस वक़्त अपनी दोनों गोरी मोती मोती जंगे एक दूसरे पर घिसे जा रही थी.
 
इधर मैं, अब माहि के दोनों हाँथ को पकड़ कर उसको बिस्तर पर से उठा कर खड़ा कर देता हु और बिस्तर के बगल के दीवार से सत्ता के उसके आँखों में देखता हु, उधर माहि, डरते हुए अपनी नज़र चुरा लेती है क्युकी इस वक़्त राधे के आँखों में सिर्फ और सिर्फ हवस hi दिख रही थी, वही हम दोनों सटने की वजह से मेरा लुंड अब महिमा की छूट के ऊपर वाले हिस्से को छू रहा था और लुंड के उस एहसास से महिमा लुम्बी आहे भरते हुए मुझे एक तक देखने लगती है, इधर मैं, अब अपना लुंड थोड़ा एडजस्ट कर के माहि की छूट के ऊपर रखता हु और जैसे hi उसको अपनी फूली हुई छूट पर मेरा गरम लुंड का मोटा सा सूपड़ा महसूस हुआ वो एक दम से उछाल हु पड़ती है और मुझे अपने बहो में एक दम से कास hi लेती है. मैं, माहि मेरी जान? मेरे लौड़े के छूने भर से hi तू उछाल पड़ी तो सोच..

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जब यह तेरे अंदर जायेगा तब तेरा हाल क्या होगा है मेरी रानी बोल?.. महिमा, मेरी बात पर शर्मा कर हलकी सी स्माइल के साथ दूसरी तरफ देखने लगती है ुर ये उसका पति सोफे पर बैठा भी देखता है, मैं, अब माहि की पीठ दीवार से सत्ता देता हु जिसकी वजह से उसके चुके मेरी और सीना तान कर देखने लगते है वही फूली छूट भी मेरे लौड़े की और आ जाती है जिसकी वजह से मेरा लौड़ा अब उसकी छूट की फैंको के बिच अच्छे से आ जाट है और उसके बाद अब अपनी कमर को ऊपर निचे करने लगता हु जिसकी वजह से मेरा लौड़ा अब माहि की फूली हुई छूट की फैंको के ऊपर घिसने लगता है, माहि, मेरे गरम लुंड की छुअन अपने फूली हुई छूट पर पते hi वह लुम्बी लुम्बी सिसकारियां जैसे आह्हः.. सशह्ह्ह.. ूमम.. भरते हुए मेरे काले साइन पर अपने हाथ रख कर मुझे थोड़ा पीछे करने की कोशिश करने लगती है.

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लेकिन मैं, उसकी एक नहीं चलने देता हूँ और उसके जवाब में माय खुद hi आगे झुक कर उसके गालो को चूमता हु और फिर उसके दोनों चुके को अपने हाथो में भरके मसलता हु.. माहि, आह्हः.. नाहीइ.. सशः.. प्लीज इतना तेज नहीं, वही मेरे इतने पास होने से शर्मा कर वह अपने होंठ काटते हुए दूसरी तरफ देखने लगती है, उसको दूसरी तरफ देखने से मैं, माहि से, अपना चेहरा मेरी तरफ तो कर मेरी जानेमन और माहि, सर हिला कर ना में जवाब देती है, मैं, कर ना मेरी जान.. माहि फिर से ना में गर्दन हिलती है.. अब एक दम से मैं उसका हाथ पकड़ कर अपने लुंड पर रखता हु और अपने हाथ में गर्म सी चीज़ पाकर वो चौंक जाती है और मेरी तरफ देखने लगती है. इधर मेरे काळा चेहरे पर एक कामिनी स्माइल थी, और यह देखते hi माहि, एक दम से अपने हाथ मेरे काळा लुंड पर से हटा देती है.

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वही माहि के खूबसूरत चेहरे पर उसके बाल बिखरे हुए थे और माथे पर पसीना छाया हुआ था जिसकी वजह से उसके मांग में भरी सिंदूर थोड़ी फ़ैल सी गई थी, मैं, माहि के इस रूप को देख और ज्यादा उत्तेजित हो जाता हु और अपना लुंड अब उसके गहरी नाभि के बिच पर दबाने लगता हु. वही माहि को अपनी गहरी नाभि के ऊपर मेरे लुंड का मोटा सूपड़ा महसूस हो रहा था पर वो इस वक़्त कुछ कर नहीं पा रही थी, इधर मैं, अब उसकी आँखों में देखते हुए अपना लुंड उसके पेट पर घिसने लगता हु और माहि बस अपनी ाहो को काबू करते हुए मुझे देख रही थी, मैं, अब आगे झुक कर माहि के होंठो के पास आ जाता हु, ुर माहि भी अब अपने होंठ आगे कर देती है, बिना कोई शर्म के, मैं, ये हुई न बात मेरी जान की? ये बोलते हुए मैं, अपने काळा होंठ माहि के लाल लाल होंठो पर रख देता हु और उसे

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चूमने लगता हु.. माहि इतनी मदहोश हो चुकी थी की वह अपनी जुबान मेरी गन्दी जुबान के साथ मिला कर उसको चूसने लगती है, उसको अब कुछ भी फ़िक्र नहीं थी की इस वक़्त की वो किस आदमी के साथ क्या कर रही है, जब की उसका पति उसके सामने hi सोफे पर बैठा उसे hi देख रहा था बेबसी से लेकिन माहि को उसकी भी अब कोई फ़िक्र नहीं थी की वो क्या सोचेगा बस माहि अब अपनी हवस को संत करना चाहती थी जो राधे के छेद चढ़ से ज्यादा hi भड़क गई थी, वो राधे के बालो में से हाथ फेरते हुए जोश के साथ साथ उसके होंठो को चुम और चूस रही थी वही मैं, थोड़ी देर उसके चुके दबाने के बाद अब अपने हांथो को उसके पीछे ले जाता हु और उसकी बड़ी गांड के दोनों भागो को पकड़ कर मसलने लगता हु साथ hi साथ अपने लौड़े को उसके नाभि के बिच लगातार फिर रहा था, महिमा, आज तक इतना रोमांटिक

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फोरप्ले अपने पति के साथ भी आज तक नहीं की थी जितना राधे उसके साथ लगातार कई मिनट्स से कर रहा था जिसकी वजह से माहि खुद को कण्ट्रोल नहीं कर प् रही थी, वही दूसरी तरफ महिमा, मेरे के काळा बड़े हाँथ अपनी बड़ी बड़ी गांड पर पाकर वह अपना होश को खो बैठती है और अपना एक हाँथ मेरी काली गन्दी गांड पर रख देती है और उसको मसलने लगती है. मेरे लिए ये एक सपने जैसा था, की एक 25 साल की जवान खूबसूरत औरत मेरी काली गांड मसलते हुए मेरी होंठो को चूस रही थी वो भी अपने पति के सामने, ऐसे hi थोड़ी देर किश करने के बाद अब्ब मैं और माहि अलग हो जाते है, दोनों के हाथ अभी भी एक दूसरे की गांड पर थे. माहि अपनी साँसों को काबू करने में लगी हुई थी की तभी मैं, एक दम से माहि को ऊपर उठा लेता हु, माहि एक दम से चौंक जाती है और गिरने से बचने के लिए मेरे गले में हाँथ डालती है.
 
वही मेरा लुंड अब उसको ठीक अपनी छूट पर महसूस होता है और माहि मुझे देखते हुए.. आठ.. राधे.. प्लीज Ni..Niche उतरो मुझे??, मैं, थोड़ा रुक जा मेरी बुलबुल? इधर मैं बड़े hi आराम से उसको उठाये हुआ था और माय अब इसी हालत में माहि के गोर गले पर चूमने लगता हु माहि के लिए ये बिलकुल अलग एहसास tha..Usko आज तक कभी राघव ने भी इस तरह नहीं उठाया था. वही राधे जैसा आदमी से अपनी पति की कपरिसों सोच कर माहि काफी शर्म और गुस्सा खुद से महसूस करने लगती है, इधर मैं, अब माहि के गर्दन पर से अपनी गन्दी जुबान वह फेरने लगता हूँ.. माहि, आह्हः.. ूमम.. तू.. तुम.. मैं, क्या... मेरी जानन.. ऐसा कहकर अब मैं माहि का हाथ ऊपर कर देता हु और उसके आर्मपिट देखने लगता हु. माहि आज hi अपनी आर्मपिट्स के साथ साथ अपनी झांटे भी साफ़

किये थे, वह राधे को अपने आर्मपिट्स देखता देख शर्मसार होती है. वो कुछ कहती इससे पहले hi राधे अपना मुँह उस की आर्मपिट्स में लगा कर उसको चाटने लगता है. राधे की इस हरकत से माहि एक दम से आह्ह्ह्ह.. कमीने.. यह.. क्या.. कररर.. रही.. हो.. छोडो.. उसी.. ीववव.. माहि को अजीब सी गुदगुदी हो रही थी राधे की जुबान फेरने से.. वही मैं, जो कई बार पोर्न देख चूका था साथ hi साथ मैने यह ट्रिक कई औरतो पर आजमा भी चूका था इस लिए मुझे ये बात अचे से पता थी की औरतो के बदन के साथ जितना गन्दा खेल खेला जाए औरते उतनी ज्यादा गरम होती है वही हाल इस वक़्त माहि का था, इधर मैं, अब माहि को दूसरी आर्मपिट भी चाटने लगता हु. माहि अपनी आहे और हसी रोकते हुए आह्ह्ह्ह.. रा.. राधे.. सशह्ह्ह्ह.. रुकोऊ.. हेहेहे.. आह्हः.. क्या.. कर.. रहे.. हूँ.. ूमम..

मैं, यह मेरे प्यार करने का तरीका है मेरी जान माय तेरे जिस्म के हर हिस्से पर अपनी छाप छोड़ना चाहता हु ताकि जब भी तू अपनी गोरी और बे दाग आर्मपिट्स देखे तो तुझे याद रहे की किसी गैर मर्द अपनी गन्दी जुबान से खूब प्यार किया था, उधर माहि, मेरी बात सुनकर कुछ नहीं कह पाती और वह मुझे अपनी गोरी बे.. डेग आर्मपिट चाटते हुए देखने लगती है, माहि को अपने आर्मपिट पर राधे की ज़ुबान एक अलग hi अहसास दिला रही थी ुर राधे का ऐसा पागलपन देख पाती नहीं क्यों की माहि को पागल बना रहा था.. थोड़ी देर बाद मैं, माहि को उठाये हुए फिर से बिस्तर पे लिटा देता हु और खुद उसके ऊपर आ जाता हु, वही माहि, के दोनों आर्मपिट्स, चुके और मुँह मेरी गन्दी और बदबूदार थूक से भीग चुके थे साथ hi साथ माहि को ये गन्दी बदबू इरोटिक अहसास दिला रहे थे उसे आज तक इतनी गन्दी तरीके से कोई भी फोरप्ले नहीं किया था जितना राधे ने किया.
 
इधर माहि, नंगी लेती हुई ुर एक तुक मुझे देखे जा रही थी, मैं, अब निचे जाकर माहि की छूट देखने लगता हु जो काफी गीली हो चुकी थी मेरे हमलो से, साथ hi साथ माहि की गुलाबी छूट को देख मैं, कितनी गुलाबी छूट है तेरी.. लगता hi नहीं तेरे पति ने ठीक से छोड़ा है तुझे.. प्यासी लग रही है तेरी chut..hehe.. माहि, एक दम से उठने की कोशिश करती है मेरी बात सुन के लेकिन माय उसे उतने नहीं देता ुर माहि मेरा फिर से विरोध करते हुए.. बस बहुत हुआ अब मुझे छोड़ दो समझे?, माहि इसलिए विरोध करने लगी थी क्युकी उसे जैसे पता था की अब उसके साथ क्या होने वाला है और वह नहीं चाहती थी की अपने पति के सामने बैठे होने के बावजूद वो किसी गैर मर्द से अपनी चुदाई करवाए?, इधर मैं, अपने के बड़े हांथो से उसके दोनों हांथो को पकड़ कर ऊपर की और होल्ड करके पकड़ लेता हूँ और अपने दूसरे

हाँथ से उसकी फूली हुई बुर को सहलाते हुए, देख मेरी जान तेरी छूट कितनी गीली हो रही है अगर तुझे मेरा प्यार करना ाचा नहीं लगता तो तेरी छूट इतनी गीली नहीं होती समझी, माहि, मेरी बात पर जवाब नहीं देती मगर मन में (हे भगवन ये निगोड़ी बुर भी न राधे के छेद चढ़ से कैसे गीली हो सकती है अब माय उसके बात पर क्या कहु), माहि कास म कास में थी क्युकी उसका पति सामने बैठा था सोफे पर और वो माहि को घर रहा था जिसकी वजह से माहि की गांड फैट रही थी, वही माहि, की छूट एक दुमदार लुंड मांग रही थी लेकिन माहि क संस्कार बिच में ा रहे थे जिसकी वजह से वह खुल कर कुछ बोल नहीं प् रही थी वही उसकी संस्कार चीख चीख के कह रहे थे की तू राधे के चुंगुल से निकल जा वर्ण ये तेरी इज्जत तार तार कर देगा, यही सब को सोचते हुए माहि कुछ सोच कर एक दम से राधे को अपने ऊपर से अपना पूरा दम लगा के धकेलती है और

उसके धक्के इतने तेज थे की राधे बीएड से निचे बिछे कालीन पर गिर जाता है और उसका भरी भरकम सरीर जैसे hi निचे गिरता है वैसे hi वो कराहते हुए मदर छोड़? तेरी इतनी हिम्मत की मुझे धक्का देती है साली जितना प्यार से तुझे अपना प्यार दे रहा हु तू उतना hi मेरे सर पर बैठ गई, अब दिखता हु की मैं क्या चीज हु रुक थोड़ी देर बहन की लौड़ी ये कहते हुए अब मैं उसके पति के पास जा कर देख सेल आखरी बार तेरे से प्रॉपर्टी के पेपर पर सिग्नेचर मांग रहा हु अगर तूने अब नहीं किया तो सोच ले उसके बाद तू जितना भी मुझे रुकने को बोलेगा मैं रुकूंगा नहीं?, उधर माहि अपने आप को कोष रही थी राधे को उसने क्यों नाराज़ कर दिया अब कही वो उल्टा hi उसके साथ न करने लगे, इधर मैं, राघव के मुँह से कपडा जो बंधा था उसे निकल देता हु और कपडा निकलते hi राघव मेरी तरफ देख के

देखो राधे मैं प्रॉपर्टी के पेपर पर सिग्नेचर नहीं कर सकता तुम समझ क्यों नहीं रहे हो.. ये बोल कर वो अपना मुँह दुअरी तरफ कर देता है इधर मैं, गुस्से में सेल हरामी तुझे प्रॉपर्टी की पड़ी है वो देख तेरी बीवी कैसे अपनी इज्जत बचने के लिए तुझे आस भरी नज़रों से देखे जा रही है, वैसे क्या तू उसके इज्जत के लिए भी नहीं करेगा प्रॉपर्टी पेपर पर सिग्नेचर, राघव मेरे इस बात पर भी कुछ नहीं बोलै ये महिमा ने भी नोटिस की जिसकी वजह से उसकी जितनी भी आस बची थी अपने पति से वह अब्ब एक दम से ख़तम हो गई, इधर मैं, माहि की तरफ देख कर साली तू इस नामर्द से शादी की वो भी लव मैरिज थी है तेरे ऐसे प्यार पर माहि मेरी बात पर और गुस्सा हो जाता है इधर मैं, देख अगर तेरे से यह प्यार करता तो तेरी इज्जत के लिए ये अपनी प्रॉपर्टी तो क्या अपनी जान भी दे सकता था लेकिन ये हरामी नामर्द साला तेरे लायक hi नहीं है.
 
Episode 32बी,

माहि मेरे सामने पूरी नंगी हालत में कड़ी थी लेकिन उसका एक हाथ अपने चूचियों पर था और दूसरा हाँथ अपने छूट के ऊपर, वही वह बड़े मुश्किलों से अपने जवानी को राधे से छुपाये हुई थी, मगर अब वह इस में पूरी तरह से नाकाम नज़र आ रही थी, क्यों की राधे की नज़रें उसके गुप्तांगों को पल2 भेदती जा रही थी, इधर मैं, कुछ देर तक उसके सेक्सी हुस्न का टकटकी लगाए देखता हु फिर कुछ सोच कर एक कामिनी हंसी के साथ माहि की तरफ चल पड़ता हु ुर माहि जैसे hi अपनी और आता देखि राधे को वैसे hi उसके दिल की धड़कन तेज होने लगती है साथ hi वह राधे को अपनी और आता देख के जैसे hi भागने के लिए दरवाज़े की और जाने की सोचती है वैसे hi राधे बिजली के तेजी से दौड़ कर उसके पीछे से पकड़ लेता है, इधर राधे का लौड़ा थोड़ा ढीला हो चूका था माहि और उसके पति से बात करने के चक्कर में लेकिन जैसे hi माहि के नग्गी 36 साइज के बड़ी उभर के

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बीचो बिच लुंड का सूपड़ा टच होता है वैसे hi उसमे अब जान सी आने लगती है, वही मैं, कहा भाग रही है मेरी जान तुझे पहले भी समझा चूका हु की यहाँ से भागना तेरे लिए मुश्किल है जब तक माय न चहु वैसे भी मैने तेरा बैडरूम पहले hi अपनेर से लॉक करके उसकी चाभी अपने पास रख ली है, इस लिए अपनी ताकत को वेस्ट मत कर और यही ताकत जब तेरी छूट चुदाई होगी तब लगा लेना? क्युकी तेरा पति मानाने के मूड में नहीं है और लगता है तेरे पति को हम दोनों की सेक्सी चुदाई देखनी है तभी वह प्रॉपर्टी के पेपर पर सिग्नेचर नहीं कर रहा है, माहि, चुदाई शब्द सुन कर सेहम सी गई क्युकी उसने राधे का लौड़ा देख चुकी थी की कितना बड़ा है, अगर वो उस लौड़े से चुद गई तो उसकी छूट फैट सकती है, वह यही सोच रही थी इस टाइम और सोचने के बाद प्लीज राधे मेरी थोड़ी सी भी इज्जत करते हो तो भगवन के लिए मुझे छोड़ दो?, मैं, अब यह तेरे पति के ऊपर है अगर

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वक़्त रहते उसने प्रॉपर्टी पेपर पर सिग्नेचर कर दिया तो माय तुझे छोड़ दूंगा लेकिन उसने नहीं किया तो आज पहले तेरी गांड उसके बाद तेरी छूट फाड़ूंगा?, गांड चुदाई का नाम सुनते hi माहि, डरते हुए नहीं नहीं प्लीज मेरी गांड मत मारो मैं तो तुम्हारे इतना बड़ा (लुंड) छूट में भी नहीं ले सकती तो गांड में कैसे लुंगी?, माहि अब्ब ओपन गांड और छूट शब्द का इस्तेमाल करती है लेकिन बोलने के बाद उसे रेअलीसेड होता है की उसने कितने गंदे शब्द का इस्तेमाल किया लेकिन अब तीर कमान से निकल चूका था, इधर मैं, उसके छूट और गांड शब्द सुन कर कामिनी स्माइल करते हुए यह हुई न बात बस ऐसे hi आपको गंदे गंदे शब्द का इस्तेमाल करना है तभी मुझे छूट और गांड मरने में मज़ा आएगा?, वैसे तो तेरी छूट तो पहले hi तेरा पति मार चूका होगा? लेकिन तेरी गांड का छेद कुमारी लग रही थी इस लिए मुझे तेरी गांड hi मारनी है चल अब नाटक मत कर?.
 
यह कहते हुए उसके हांथो को पकड़ के मैं उसके अलीशा बिस्तर के पास ले गया और उसे बिस्तर पर धकेल दिया और माहि अपने बीएड के मोठे गद्दे पर पीठ के बल जा गिरी वही माहि गांड चुदाई की बात सुन कर पहले hi दरी हुई थी इस लिए वह मेरा एक बार फिर से विरोध करने लगी और उसी विरोध में वह बार बार अपने हाँथ पेअर चलने लगी और मैं, उसकी इस हरकत को देखते हुए जल्दी से उसके दोनों हांथो को अपने एक हाँथ में कास लिया और उसके बिस्तर पर रखे उसके दुपट्टे से दोनों हांथो को बांध दिया, अब बचे उसके दोनों पेअर जो इधर उधर कर के मुझे अपने पास आने से रोक रही थी इस लिए मैं बेडशीट की मदत से उसके एक पेअर को दये साइड के बीएड की कोने से बंधा और एक पेअर को बाये साइड के बीएड की कोने से बांध दिया अब उसके उसके दोनों पैरो खुल चुके थे और माहि की छूट पूरी तरह से खुल कर मेरे सामने आ गई थी.

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वही माहि, अपने दोनों हाँथ और पेअर बढ़ने के बाद गुस्से से, यह क्या किया कमीने तूने हआ और तुमने मेरे पेअर और हाँथ क्यों बंधे अभी के अभी खोलो वर्ण मेरे स बुरा कोई नहीं होगा समझे, मैं, साली हरामजादी तेरा धमकी देना बंद नहीं हुआ रुक अभी बताता हु ये कह के मैं बीएड से सोफे की और गया जहा उसके पति बैठा हुआ था वह मुझे hi देख रहा था ुर मैं, उसके पास जा के, तो राघव साहेब आपकी बीवी की छूट मरू या गांड अब आप hi बताये, राघव मेरे इस बात पर कोई जवाब नहीं दिया जब की इस वक़्त उसके मुँह से कपडा निकला हुआ था, इधर उसे कुछ न बोलता हुआ देख के माय समझ गया ये चुटिया अभी भी बीवी से ज्यादा प्रॉपर्टी प्यारी है ये सोच के मैं, अपने लाये हुए एक छोटे से बेग में से जाली वाली बोतल निकली और रौशनी में आते hi उस जाली वाली बोतल से मधुमक्खी की भिन्न भिनने की आवाज़ आने लगती है. यह

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आवाज़ सुनते hi माहि ुर उसका पति राघव उस बोतल की और देखने लगे इधर मैं, उस बोतल को लिए हुए माहि के पास गया और उसके दोनों पैरो के बिच में बैठ के बोतल खोलने लगा तभी माहि, डरते हुए ये क्या है राधे?, मैं, मधुमक्खी है मैडम जी, माहि, कुत्ते इसे यहाँ क्यों लाये हो दूर करो मेरे से, मैं, अरे संत रहे मैडम जी बस आप देखती जाये आज आप की चुदाई से पहले आपकी अंदुरुनी बदन को और सेक्सी बना के मुझे छोड़ना है वह भी पूरी रात? वैसे भी राघव साहेब प्रॉपर्टी पर सिग्नेचर करने वाले नहीं है इस लिए आज आपकी चुदाई अच्छे से करूँगा वर्ण राघव साहेब अगर सिग्नेचर कर दिए होते तो सायद मैं आपके ऊपर कभी हाँथ भी नहीं लगता, अब्ब मैं, अपना एक हाथ माहि के छूट की तरफ ले जाता हु और धीरे धीरे से अपने हाथों को गोल गोल माहि के छूट के

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ऊपर से घूमने लगता हु, वही माय अपने दूसरे हाथो से उसके दोनों जांघों को दोनों तरफ धीरे धीरे से फ़ैलाने लगता हु, जैसे जैसे उसके दोनों पेअर फैलते जा रहे थे वैसे वैसे मैं उसके छूट पर अपनी उँगलियों तेज़ी से फिरता जा रहा था, माहि की सांसें एक बार फिर से तेज़्ज़ हो चली थी, वही कुछ दूर पर बैठा उसका पति आंखे गड़ाए बड़े गौर से हम दोनों की तरफ एक तुक देख रहा था, इधर जैसे जैसे माहि के दोनों पेअर खुलते जा रहे थे वैसे वैसे उसके छूट के दोनों फांके भी अलग होते जा रहे थे और उसकी फांके खुलते hi अंदर से गुलाबी सी चमड़ी साफ़ नज़र आ रही थी जो छूट रश से पूरी तरह से भीगी हुई थी, जो कुछ देर पहले मेरे छेद चढ़ और छूट चटाई से इस तरह हो गई थी, उसकी फूली बुर अब्ब चुदाई मांग रही थी? लेकिन न तो माहि पहल कर प् रही थी और न hi मैं इतनी जल्दी में था, ये इन्तहा माहि के छूट

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की खुजली कुछ ज्यादा hi बढ़ाये जा रही थी, इधर मैं, अपना एक हाँथ से उसकी दोनों फांकों को धीरे धीरे से अलग कर के फ़ैलाने लगता हु, जैसे माय ये नज़ारा उसके पति को दिखा रहा था, वही माहि, अब्ब लुम्बी लुम्बी सांसें ले रही थी, साथ hi शर्म से उसका बुरा हाल था, और वही उसकी छूट में गीलापन भी धीरे धीरे बढ़ता जा रहा था, इससे पहले माहि कुछ संभालती मैं बगल के टेबल पर रखे झाली वाली बोतल उठता हु जो मैने कुछ देर पहले hi माहि और उसके पति को दिखाई थी, जब उस बोतल को माहि की तरफ ले जाता हु तब माहि के चेहरे का रंग जैसे फीका सा पढ़ने लगता है, जिस लाजत में वो कुछ देर पहले अपनी आँखें बंद की हुई थी अब वो दुर्र और सेहम से खुल गयी थी, वही माहि, को राधे के इरादे क्या है जरा भी समझ नहीं आ रहा था की आखिर राधे उससे चाहता क्या है?.
 
इधर मैं, डरो मुट्ठ मेरी रानी? जो आज माय तुम्हारे साथ खेल खेलने वाला हु उस खेल में तुम्हें बहुत ज्यादा मजा आने वाला है?, माहि, इसमें तो मधुमक्खी है? तुम क्या करोगे इसका और तुम इसे बोतल में कैद क्यों किये हो?, महिमा के चेहरे पर सवालों के बदल और भी गहराने लगते है वहीँ मैं, माहि की तरफ देखता हुआ धीरे से हँसते हुए, वैसे आपकी जानकारी के लिए मैं बता दू की यते देसी मधुमक्खी बड़े काम की होती है इंसान को अगर ये जिस जगह पर काट लेती हैं वहां दो से चार इंच के घेरे में पूरा सूजा देती है, वहां की चमड़ी कुछ अलग hi नज़र आने लगती है फूली फूली सी मुलायम सी फिर जब सूजन कम होने लगता है अगर वह पर कोई बड़े आराम से अपने हाथ फेरे तो ऐसा लगता है जैसे जानत मिल गयी हो कितना सुकून कितना मजा आता है पूछो

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मुट्ठ बस इस मधुमक्खी के काटते वक़्त थोड़ा सा दर्द और चुभन सा होता है और करीब एक या दो दिन बाद इसका असर ख़तम सा हो जाता है, माहि, थोड़ा परेशां होते हुए, तो तुम ये सब मुझे क्यों बता रहे हो है और तुम चाहते क्या हो मुझसे?, ये बात कहने के बाद उसका दिल जोरों से धड़कने लगता है और उसके मैं में अजीब अजीब से ख्याल आने लगे थे, मगर जहाँ तक वो सोच रही थी ऐसा hi कुछ राधे भी सोच रहा था, उसका थोड़ा डरा हुआ देख के मैं, मैने बताया तो मेरी जान? समझने वाले को बस इशारा काफी होता है, यह कह के अब्ब मैं देर न करते हुए, माहि के दोनों घोड़े पेअर जो पहले hi फैले हुए थे इस लिए मुझे उसे फ़ैलाने का टाइम वेस्ट नहीं किया इसके बाद मैं, उस जाली वाली बोतल का धाकन खोता हूँ जिसकी वजह से उसके कैद मधुमक्खी की भिन्न भिनने की आवाज़ तेज होने लगती है, वही उस बोतल

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में अपनी दो ऊँगली की मदत से बोतल के अंदर एक लकड़ी थी उसे मधुमक्खी को बिना डिस्टर्ब किये हुए आहिस्ते से निकलता हु ुर उस लकड़ी की तिल्ली जो सहद से सनी हुई थी उसे माहि के बड़े बड़े चुके बिच की सतह जहा गुलाबी निप्पल के निचे घेराव बने हुए थे वह अचे से लगा देता हु, माहि, डरते हुए ये क्या कर रहे हो यहाँ क्यों क्या लगा रहे हो कमीने कहिके?, राघव प्लीज इस कमीने को रोकते क्यों नहीं, कुछ तो कहो, माहि, के बोलने पर राघव कुछ रियेक्ट नहीं करता है बस राधे के किये हुए हरकत को बड़े गौर से देखे जा रहा था, इधर मैं, अरे साली अगर तेरा पति तुझे इतना प्यार करता तो किसी गैर मर्द के चुने तक नहीं देता?, मेरी बात सुन के अब माहि, के आँखों से हलके आंसू निकल जाते है वह टूट चुकी थी राधे के किये हरकत से नहीं अपने वो टूटी थी अपने पति के कारनामे से.

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इधर उस तिल्ली को चुके के बीचो बिच के घेराव पर सहद लगाने के बाद मैं, अब उस तीली को उठता हु और उस जाली वाली बोतल के अंदर डालता हु, और अंदर जाते hi उस पर 2 मधुमक्खी उसपर धीरे धीरे चढ़ने लगती है और जब मधुमक्खी उस पर चढ़ जाती और उस तीली को जहा मैने कुछ सेकंड पहले सहद लगाया था वहीं पर सत्ता देता हु, और अगले hi पल उस तिल्ली पर बैठी एक मधुमक्खी उसके गुलाबी निप्पल के निचे जहा एक इंच का घेराव बना हुआ था वह पर बैठ जाती और वहीँ होता है जो राधे चाहता था, एक मधुमक्खी माहि के निप्पल के निचे घेराव पर काट लेती है जिसकी वजह से माहि बुरी तरह से मचल सी उठती है, वह अपने हांथो और पैरो को खोलने की कोशिश करती है लेकिन मैं उसके हाँथ पेअर अचे से बंधे थे जिसकी वजह से

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वह खोल नहीं पाती है, वही माहि, इससे पहले वो संभालती राधे उस के तीली को उसके दूसरी गुलाबी निप्पल्स के निचे बने घेराव पर ले जाता हु और वहां पर भी 1 मधुमक्खी को छोड़ देता हु, अब वो मधुमक्खी अपने काम पर लग जाती है जैसा उस किसान ने कहा था की जहा पर सहद लगा डोज वह से मधुमक्खी जब तक सहद ख़तम नहीं होती तब तक वही पर बैठी रहेंगी लेकिन 5 सेकंड से ज्यादा उस जगह पर नहीं बैठना है इस लिए किसान के कहे मुताबिक माय 5 सेकंड होते hi दोनों उन् मधुमखी को माहि के गुलाबी निप्पल के घेराव से उठा कर तिल्ली पर बैठा कर अब बॉटल के अंदर दाल देता हु, उधर माहि, का अब बुरा हाल हो रहा था, कुछ दर्द से तो कुछ खुजली की वजह से वही जहा मधुमक्खी काटी थी वह हलकी पिंक कलर की स्किन थी लेकिन अब वह पर डार्क पिंक कलर की हो गई.
 
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