The Story of a Bodyguard (by Naree) - Page 95 - SexBaba
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The Story of a Bodyguard (by Naree)

Episode 32

कुछ दिन बाद एक साम मैने कही कॉल किया और उससे कुछ बात की उसके बाद मैं अपनी कार से एक किसान के पास गया उससे बात करते हुए, अरे चाचा मुझे कुछ मधुमक्खी चाहिए जो सिर्फ इंसानो को hi काटे और जहा कहु वह काटे क्या ऐसी कोई मधुमक्खी मुझे मिल सकती है क्या?, मैने किसी से सुना था आप ऐसी मधुमक्खी रखते है और ये भी सुना है की आपके के बागान में कई किस्म की मधुमक्खी रखे हुए है जो माय चाहता हु वैसा hi? किसान, बेतवा हमरे पास तो कई किस्म की मधुमक्खी है लेकिन तुहरे की क्यों चाही? वैसे तुहरे के नहीं पता की अगर यही मधुमक्खी किसी को काट लेबे तो वह आदमी मर जाए, मैं, अरे चाचा तभी तो आपके पास आया हु नहीं तो माय कही और भी जा सकता था, किसान, बेतवा तुझे ऐसी मधुमखी कहे चाहि किसी को कटवाए की खातिर, मैं, चाचा यह समझ लीजिये की मुझे इसकी बहुत जरुरत है? आप पैसे बोलिये

कितना चाहिए मेरे पास होगा तो जरूर दूंगा, किसान, तू ाचा आदमी लागे है मुझे और सायद तू ाचा काम के लिए hi यही मधुमक्खी लेवे आइल बा, वैसे हमरा की कउनो पैसे की जरुरत नाही है क्यों की यही मधुमखी हमरे बेतवा बीत्या जैसे है, इन्हे पाल के hi हम अपना और अपने परिवार का पीट पला थाई, लेकिन तू हमसे हमार जान माँगा थो, मैं, चाचा मेरे ऊपर विश्वास रखिये आपके मधुमक्खी को माय कुछ नहीं होने दूंगा काम होने पर आपको लौटा दूंगा, किसान, कुछ सोच कर, चल बेतवा ठीक है, फिर वो किसान बागान के दूसरी और गया जहा उसने मधुमखी के घर बनाया हुआ था और वह जा के एक जाली दार बोतल में कुछ मधुमखी रख क मेरे पास आया और मुझे वो बोतल देते हुए देखा बेतवा यही मधुमखी रात में hi किसी के ऊपर रक्खे जहा क्तवबे के है लेकिन यही देसी और छोटी मधुमक्खी है

इससे किसी की जान नहीं जा सकीय जितना भी किसी को कटवा ले तू? लेकिन ीे मधुमखी जहा भी काटी वह 2 दिन तक बहुत सूजन रही, मैं, 1 हजार उस किसान को देते हुए.. चाचा ये रख लीजिये मैं सुबह आपको मधुमक्खी दे दूंगा लेकिन अगर मैं इस मधुमक्खी को बहार निकला और कही ये भाग गई तो?, किसान, पैसे ले कर अरे बेतवा हाई मधुमक्खी कही न भागी क्यों की वो देखो एक बड़ी सी मधुमक्खी है न वो इन सब की रानी है? इस लिए इनका छोड़ कर हाई छोटी मधुमक्खी कही नहीं भगिनगी, लेकिन एक बात का धयान रखना बेतवा? अगर बोतल से निकले तो इनका छत्ता जो मैने एक छोटे छोटे तिल्ली की तरह बना के बोतल में रखा है उसे hi पकड़ के बहार निकली है और जहा क्तवबे का है वह बोतल में जो सहद रखे है उसे तू वह लगा देहा समझे, फिर मैं सब कुछ समझ के, किसान से विदा ले कर अपने कार में आया और कुछ प्लान अपने मन में बना कर मैं कही को निकल गया.
 
वही कुछ घंटो के बाद जहा राधे पहुंचना चाहता था वह पहुंच गया और जैसे hi एक बड़े घर के पीछे पंहुचा वैसे hi राधे ने एक मिस कॉल दिया और कुछ मिनट्स बाद एक साया ने बैक दूर ओपन किया और वह सेक्स दूर ओपन करने के बाद एक झलक राधे को देखा उसके बाद वो वह से चला गया इधर राधे, कार से एक शराब की बोतल खोल के मुँह से लगा के गततततत.. गततततत.. गततततत.. करते हुए पिने लगा वही राधे, ने शराब पिटे हुए किसी को कॉल किया और उसे कुछ हिदायत देने के बाद कॉल कट कर दिया (राधे कुछ तो प्लान कर रहा था उसके दिमाग में क्या चल रहा था इस वक़्त कोई भी अनुमान नहीं लगा सकता था), इधर राधे ने 1 बड़ी बोतल शराब की khat-am करने के बाद एक सिग्रेटे जलाई और बड़े घर के अगल बगल घूम कर जायजा लेने लगा की Chauki-dar कहा कहा है ुर जब वो दबे पाओ सब को देख लिया वही सिगरेट कुछ देर पिने के बाद उसे..

फेक देता है और कार से कुछ पेपर निकल कर बड़े घर के पीछे वाले दरवाज़े से अंदर जाता है और गेट को सताने के बाद वह दबे पाओ अंदर जाता है और हॉल में एक सेक्स टीवी देखते हुए शराब की चुस्की ले रहा था और इधर राधे धीरे धीरे चलते हुए उसके पीछे गया और अपने जेब से एक बड़ा कपडा निकल कर एक झटके में उस सेक्स को मुँह पर बांधने लगा लेकिन वो सेक्स को जैसे hi ये मालूम हुआ वो राधे का विरोध करते हुए अपने हाँथ को इधर उधर चलने लगता है, लेकिन दानव जैसे राधे को इसका कोई फर्क नहीं पड़ा और बड़े hi आसानी से उसके मुँह पर कपडा बढ़ने के बाद अब उसके सामने राधे जैसे hi जाता है वैसे hi वो सेक्स चौकते हुए राधे तुम हो?, वह कुछ ऐसा hi बोलने वाला था लेकिन उसके मुँह पर कपडा बंधा होने से वो कुछ बोल नहीं पता इधर राधे, है बड़े साहेब माय राधे hi हूँ.

यह कहते हुए अब्ब उसके हांथो को एक रस्सी की मदत से बांधने लगा, (ये कोई और नहीं पिया का बड़ा भाई राघव ठाकुर था यानि रघु का बड़ा बीटा जिसके साथ राधे किसी जानवरो जैसा सुलूक कर रहा था), इधर राधे, हांथो को बढ़ने के बाद, तो साहेब मैं आज दिखाऊंगा की माय किस तरह का आदमी हूँ अपने मेरी पिया मालकिन का दिल दुखाया है, उनके सब से दिल के करीब जो हॉस्पिटल था? वह अपने अपने नाम करवा लिया देखे से और साथ में साड़ी प्रॉपर्टी भी अब उसकी कुछ कीमत तो आपको चुकानी होगी यह सब सुनते hi राघव, चाट पटटे हुए कुछ बोलने की कोशिश करता है लेकिन कपड़ा बंधे होने के कारन बोल नहीं पता है, इधर मैं, अरे साहेब आप इतना चाट पता क्यों रहे हो माय आपको भी चांस दूंगा बोलने का लेकिन उससे पहले आज आपको आपकी इस करतूत के लिए कुछ तो दंड मुझे देना है ये कह के मैं, राघव को अपनी बहो में उठा लिया और उसे उठाते हुए 1सत फ्लोर पर गया जहा उसका बैडरूम था.
 
वह पहुंचने के बाद दरवाजा खोला तो देखा राघव की बीवी महिमा अपने बैडरूम में एक बहुत hi सेक्सी शार्ट निघ्त्य में अकेले सोइ हुई थी, सायद उसकी बेटी जिसका नाम पीहू था वह दूसरे रूम में हो? यह देख के मुझे ाचा लगा अब माय जो मन में आएगा इन दोनों के साथ कर सकूंगा, इधर माहि, उसकी निघ्त्य शार्ट होने के कारन उसके मोठे मोठे गोर जंघे मुझे अछि तरह से दिखने लगी, इधर मैं, राघव को उसके hi bed-room के सोफे पर बैठा के धीरे से.. अपने जो मेरी पिया मैडम को दुःख दिया है उसका सारा हिसाब और लगान आज माय लूंगा यह कह के मैं उसके सामने एक प्रॉपर्टी के पेपर रखता हु ुर उसे सिग्नेचर करने को इसरा किया तो वह उस प्रॉपर्टी के पेपर को पढ़ के सन्न hi रह जाता है और पढ़ने के बाद वो न में सर हिलता है.

वही मैं, गुस्से से फिर जब तक आप अब सिग्नेचर नहीं करेगा तब तक आपकी बीवी के साथ माय khelun-ga, ये मैं नहीं करना चाहता था लेकिन तेरी ना सुन कर मैं अब करूँगा?, ये कह के जल्दी से महिमा के बिस्तर पर गया उधर महिमा आराम से सोइ हुई थी उसके पीठ बिस्तर पर थी और उसके तेज साँस लेने की वजह से उसके चुके निघ्त्य के ऊपर से ऊपर निचे हो रहे थे वही महिमा, के दोनों पेअर सटे हुए थे जिसकी वजह से उसकी फूली हुई छूट मुझे निघ्त्य के ऊपर से दिख रही थी, वही जब मेरी नज़र महिमा के बदन का अचे से x-ray ले लेता हूँ, उसके बाद मैं, जैसे महिमा के नग्गी और गोर मोठे मोठे जांघो को छुआ वैसे hi महिमा, की पलके खुल जाती है और जैसे hi मुझे देखती है वैसे hi वह गुस्से से, कमीने तेरी हिमायत कैसे हुई मेरे बैडरूम और मेरे बिस्तर तक आने की है?,

यह कह कर वह बिस्तर पर उठ कर बैठ जाती है ुर अपने दोनों पैरो को समेत के बिस्तर के ऊपरी भाग पर बैठ जाती है, इधर मैं, अरे मैडम जी आप तो गुस्सा होने लगी मुझे अपने बैडरूम में देख कर? वैसे मैं आपके पति राघव जी से लगान वसूल करने आया हु, माहि, लगान, कैसा लगान? ये कैसी बहकी बहकी बाते कर रहे हो, अभी मैं चिल्ला के अपने पति को बुलाती हूँ ये कह के वह अपने पति को आवाज़ देने लगी राघव राघव कहा हो?, इधर मैं, मुस्कुराते हुए हहहहए.. साली बगल में छोरा बैठा है और तू दहाड़े मार के चिल्ला रही है. ये कहते हुए माय बिस्तर से उठा और थोड़ा चल कर सोफे के पास खड़ा हो गया उधर मेरी बात पर महिमा, गुस्से मुझे घूरते हुए, अब्ब इसका क्या मतलब है तुम्हारे कहने का है?, उसकी बात पर मैं, जल्दी से सोफे की तरफ वाली लाइट को ों कर दिया और जैसे hi लाइट ों हुआ वैसे hi hi महिमा अपने पति राघव

को सोफे पर बैठा हुआ देखि और अपने पति के मुँह पर कपडा बंधा हुआ और हांथो में रस्सी बंधी हुई देख के वह गुस्से से मेरी और देख के, ये क्या हरकत है राधे तुमने मेरी पति को ऐसे क्यों बांध के रखे हो छोडो अभी के अभी नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा, मैं, छोड़ दूंगा मेरी जान? लेकिन अपने पति को बोल जो देखे से मेरी पिया मैडम के साड़ी प्रॉपर्टी अपने नाम किया है वह फिर से मेरी पिया मैडम के नाम करे?, महिमा, अपने पति की तरफ देख के, जो राधे कह रहा है आप कार्डो न? मैने पहले hi कही थी की आप अपने hi घर वालो की साडी प्रॉपर्टी क्यों अपने नाम करवा लिया अब उसकी सजा मैं क्यों भुगतु, अपने पत्नी की बात पर राघव ठाकुर एक बार देखा उसके बाद वह अपना सर दूसरी और कर दिया यह देख के मैं, हेहेहे.. देखा तेरा पति per-meshwar को तुझसे ज्यादा अपनी प्रॉपर्टी प्यारी है.
 
यह कह के मैं, दोबारा से बिस्तर पर जा के मैं महिमा को घूरते हुए उसकी और बढ़ने लगा उधर महिमा, थोड़ा डरते हुए देखो राधे तुम्हे राघव से मतलब है तो उससे बात करो मुझसे क्या मिलेगा तुम्हे, उसकी बात पर मैं, अरे मेरी फुलझड़ी अब जब तक तेरा पति पेपर पर सिग्नेचर नहीं कर देता तब तक माय तेरे साथ एक खेल khelun-ga?, ये कहते हुए मैं अब उसके दोनों पैरो को अपने एक एक मजबूत हांथो में पकड़ लेता हु और महिमा, आह्ह्ह्हह कमीने कहिके छोड़ मुझी? माय तेरे साथ कोई खेल वेल नहीं खेलना चाहती हु छोडो मुझे आह्हः??, ये कहते हुए महिमा अपने दोनों पैरो को मुझसे छुड़ाने के लिए जैसे साइकिल चलते है वैसे hi मुझे मरने लगी?, लेकिन मेरी दम के आगे महिमा ज्यादा विरोध नहीं कर पाई वही मैं, पैरो पर अपना काबू पाने के

बाद मैं अपनी गन्दी जुबान निकल कर उसके गोर पाओ को चाटने लगा उधर महिमा, जैसे hi मेरी जुबान अपने गोर पाओ पर पाई वैसे hi उसे गुड़ गुड़ी सी हुई और उसके मुँह से हहहह आह्हः.. ऊम्मम.. मत करूओ हेहेहे.. उसे एक अलग सा मज़ा आ रहा था मेरे इस तरह से उसके पैरो के पाओ को चूमने से उधर उसका पति राघव सोफे पर बैठे हुए बस बे बसी से देख रहा था लेकिन वह इस वक़्त कुछ कर भी नहीं सकता था. इधर मैं, उसके दोनों गोर पाओ को बारी बारी से अपनी जुबान निकल कर चाटने के बाद वहहह क्या गोर पाओ है आपके बड़ी बहु, महिमा, गुस्से से घूरते हुए यह क्या हरकत की थी अभी तुमने हां अब्ब हो गया न अब्ब मेरे पैरो को छोडो और जाओ यहाँ से, मैं, अभी तो शुरुआत हुई है बहु रानी? लेकिन अगर आपका पति पेपर पर सिग्नेचर कर देता है तो ये सब यही ख़तम हो जायगा और मैं आपको टच भी नहीं

करूँगा, मेरी बात सुन कर, महिमा, अब एक दम से बिस्तर से उठी और उठ कर एक बार अपने पति की और देखि तो वह अभी भी दूसरी और मुँह किये हुए था ये देख के माहि, देखो राधे मेरा पति नहीं मानाने वाला उसे मेरे से ज्यादा अपनी प्रॉपर्टी प्यारी है?, वैसे तुमने जितना मुझसे मिले हो हमेशा अदब के भाव से hi मिले हो इस लिए तुम मेरा थोड़ा बहुत लिएहज तो करते होंगे क्यों है न?? उसी का वास्ता है मुझे छोड़ दो? मैने तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ा है फिर मेरे साथ यह सब हरकत क्यों कर रहे हो? महिमा, बीएड से थोड़ी दुरी पर खड़े हो कर मुझसे कहती है इधर मैं भी बीएड से उठ के माहि के सामने जा कर, एक बात पता है मैडम जी आपको की पत्नी तो अर्धांगिनी होती है अपने पति की और तो और अपने पति के प्रॉपर्टी का भी हकदार होती है तो बदला मैं दोनों से hi तो लूंगा.
 
सेदूसिंग स्टार्ट..

इतना बोलकर मैं महिमा की पतली कमर में हाथ डालके उसको अपनी तरफ खींचता हु और खींचते hi माहि एक दम मेरे बहो में आ जाती है और उसके चुके मेरी काली छाती में धस जाते है, वही मेरे इस हरकत से महिमा के बाल उसके खूबसूरत चेहरे पर बिखर से जाते हैं, जिससे वो कुछ ज्यादा hi सेक्सी लगने लगती है और यही सेक्सी लुक मुझे दीवाना बनाने के लिए काफी था वही मैं, उसे एक तुक देख रहा था महिमा भी मुझे देख रही थी, उधर उसका पति जो सोफे पर बैठा हुआ था वो भी अपने बीवी को मेरी बहो में देखता है, लेकिन उसके मुँह से इस वक़्त कुछ नहीं निकलता वैसे वो अभी बोल भी नहीं सकता था क्युकी उसके मुँह बंद था इधर मैं, अब अपने काळा हाथ उसकी शार्ट निघ्त्य के ऊपर से गांड पर रख कर मसलने लगता हु, लेकिन महिमा मेरे हाथो को पकड़ते हुए आह्हः.. Ru..Ruko.. मैं सच में चिल्ला ूँगी और जो घर के

बहार मेरे गार्ड है वो ऊपर आ जायँगे मैं, साली तेरा पति तेरे सामने बैठा हुआ है और तू किसी और को बुलाना चाहती है, लेकिन एक बात सुन ले अगर तेरे गार्ड तेरे चिल्लाने से आ भी गए तो तेरे hi बदनामी होगी और वह गार्ड कही मेरे बहकावे में आ गए तो सोच माय तो तुझे छोडूंगा साथ में तेरे वो गार्ड लोग भी तुझे कुटिया बना के छोड़ेंगे, महिमा, न.. नहीं.. यह सब बकवास है उन गार्ड लोगो को माय पैसे देती हु, वह लोग मेरे साथ कभी देगा नहीं दे सकते है समझे मैं, जैसी तेरी मर्जी मेरी जान अगर तुझे नहीं मानना तो बुला के देख ले अपने गार्ड लोगो को, महिमा, मेरी बात पर सोचने पर मजबूर हो जाती है, इधर माय उसके एक्सप्रेशन देख कर मुस्कुराता हु और अपने मन में (साली ये कामिनी मेरे बहकावे में आ गई है अब ये सोर नहीं करेगी?), अब मैं, बिना कुछ बोले थोड़ा आगे होकर उसके गोर गले को चूमने

लगता हु, मेरे यूँ अचानक वॉर से माहि सम्भल नहीं पाती और कास मसते हुए छोडोऊ.. मुझी.. आह्ह्ह्ह.. राधे?, मैं, उसकी बात को अनसुना करके अपनी गन्दी और खुरदरी जुबान उसके गोर गले के यहाँ वह घूमने लगती है साथ hi साथ मैं माहि निघ्त्य के बटन्स खोल कर जैसे hi उसे निकलने वाला होता हूँ?. वैसे hi माहि एक बार फिर मेरे हाथो को पकड़ते हुए रुको राधे ये सब गलत है मैं, कुछ गलत नहीं है मेरी जान.. सब कुछ सही चल रहा है वैसे अपने पति को देख कितना मज़ा ले रहा है, किसी गैर के बहो में अपने पत्नी को देख कर. महिमा, मेरी बात पर एक नज़र अपने पति राघव के ऊपर मरती है तो पाती है की सच में उसका पति उसे hi देख रहा है आंखे बड़ी बड़ी करके ये देख के महिमा, प्लीज राघव जो राधे कह रहा है वह कर क्यों नहीं देते? क्या तुम्हे सच में मेरे से प्यार नहीं है

क्या?, राघव, इस बार भी कुछ नहीं बोलता है वह महिमा की बात सुन कर फिर से दूसरी और देखने लगता है इधर मैं, अरे साली अपने नामर्द पति से क्यों मिनत्ते कर रही है अगर वह तेरे से प्यार करता तो कब का सिग्नेचर कर चूका होता प्रॉपर्टी पेपर पर ये कह के पीर से मैं उसके गले पर अपने जुबान से थूक छोड़ने लगता हु वही महिमा, आह्ह्ह्ह.. नाहीजी.. छोडो.. मुझे.. प्लीज.. राधे.. आह्हः, मैं, अपना मुँह उसके गले पर रख कर उसको चूमने जारी रखते हुए तुझे मैने क्या कहा जब तक तेरा पति प्रॉपर्टी पेपर पर सिग्नेचर नहीं कर देता तब तक मैं तेरे साथ ऐसे hi खेलूंगा अब चुप चाप हो जा और मुझे गुस्सा मत दिला वर्ण मेरा गुस्सा अभी तक तू देखि नहीं है, ये कह के मैं अपने दोनों हाथ उसके निघ्त्य के ऊपर से 34 साइज के चुचो पर रख कर उसे सहलाने लगता हु, जिससे माहि के मुँह से अब आहे निकलने लगती है.

आह्ह्ह्ह.. ुम्हह.. cchhh..uumm की.. साथ hi साथ उसकी दिल की धड़कन बढ़ सी जाती है. थोड़ी देर उसके सुराही दर गले को चूमने के बाद अब मैं, उसके मासूम चेहरे को पकड़ कर उसकी आँखों में देखने लगता हु. माहि मेरे छेद चाँद से काफी गर्म हो चुकी थी और वह भी अब्ब मेरी आँखों में देख के हल्का हल्का सा शर्माने लगती है साथ hi साथ उसको समझ नहीं आ रहा था की उसकी धड़कने इतनी तेज़ क्यों हो रही है जब की वह, राधे के साथ कुछ भी नहीं करना चाहती थी वो भी अपने पति के सामने होते हुए इधर मैं, एक बार फिर से अपना कला मुँह आगे बढ़ता हु लेकिन पता नहीं क्यों महिमा भी बिना विरोध किये बस मेरी आँखों में देखते हुए अपना मुँह खोल देती है और मैं, उसका ये रिएक्शन देख के ास्चर चकित होता हु जो औरत कुछ देर पहले मेरा इतना विरोध कर रही थी वो अचानक मुझे किश देने के लिए खुद hi अपना होंठो को आगे कर रही थी.
 
अब्ब मैं उसके इस रिएक्शन को देख के जोश में आ जाट हु, और अपने काले होंठ उसके लाल लाल होंठो पर रख कर प्यार से उन्हें चूसने लगता हु. मेरे ऐसे किश करने भर से hi महिमा के जिस्म से एक तेज़ बिजली सी दौड़ जाती है जिसकी सोक से वो मेरे शर्ट के कोलर को कास के पकड़ लेती है, इधर मैं, उसके कमर में हाथ दाल कर उसको थोड़ा ऊपर उठता हु क्युकी महिमा मेरे से थोड़ी छोटी थी क्युकी उसकी हाइट 5 फिट 5 इंच की और मेरी हाइट 6 फिट 5 इंच की थी हम दोनों के हाइट में 1 फिट का फर्क था, वही मैं, माहि के होंठो को अच्छे से चूसते हुए उसके पति यानि राघव के तरफ अपनी कनखी आँखों से देखा तो वो आंखे फाडे हमें hi देख रहा था, लेकिन उसको ऐसे हम दोनों को घूरने से मेरा जोश दुगना हो जाता है वही मेरी कब से ये फंतासी रही थी की दूसरे के बीवी को उसके hi पति के सामने छोड़ने की और आज

मेरी फंतासी करीब करीब पूरी हो सकती थी, लेकिन अभी यह नहीं बोल सकता था की उसकी बीवी छोड़ने को मुझे मिलेगी भी या नहीं, क्युकी अगर उसने मेरे चुदाई से पहले प्रॉपर्टी पेपर पर सिग्नेचर कर दिया तो मेरे वेड की हिसाब से मुझे उसकी पत्नी को बिना चोदे छोड़ना होगा खैर इधर मेरे उठाने के वजह से अब महिमा के होंठ मेरे होंठ के जस्ट सामने आ चूका था उधर महिमा भी अपने दोनों हाथ मेरे गले में दाल देती है इधर मैं, एक पल उसके लाल होंठो को देखता हु तो पाटा हु उसके होंठ जैसे कप कप रहे थे ये देख के मुझे थोड़ी खुसी होती है ुर मैं देर न करते हुए अपने होंठ फिर एक बार उसके होंठो से मिला देता हु और चूसने लगता हु वही मेरे हाँथ कभी उसके नग्गी कमर तो कभी उसकी बड़ी गांड पर घूमने लगते है. वही महिमा, थोड़ी हेअल्थी थी और मुझे ऐसी hi औरत पसंद आती है जिसका

बदन थोड़ा भरा हो और मेरे हिसाब से महिमा मेरे लिए एक दम परफेक्ट थी, 2 से 3 मिनट्स तक ऐसे hi हम दोनों एक दूसरे के होंठ को अच्छे से चूसने के बाद अलग हो जाते है और महिमा के हाथ अभी भी मेरे काळा गले में hi थे ुर दोनों के होंठो पर थूक लगा हुआ था. इधर मैं, अपने होंठो पर से जुबान फेरता हु. वही महिमा, अब अपने हाथ मेरे गले में से हटा देती है और अब उसको शर्म आने लगती है क्यों की उसने इस बार राधे का वो बिलकुल भी विरोध नहीं की थी साथ hi साथ अपने होंठ खुद hi खोले थे राधे के साथ किश करने के लिए.. वो कुछ और सोच पाती इससे पहले मैं, फिर से महिमा के होंठो के तरफ बढ़ता हु. इस बार महिमा की नज़र राधे के काले होंठो की तरफ जाती है, लेकिन इस बार महिमा के पास मौका था की वो कुछ विरोध जताये, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी क्यों की राधे के होंठ उसके होंठो से अब्ब जुड़ चुके थे.

वही महिमा, मेरे छाती पर हाथ रख कर पीछे धकेलने लगती है लेकिन इस नार मैं उसको एक दम गॉड में उठा लेता हु, जिससे महिमा, अपने दोनों हाथ मेरे गले में दाल देती है क्युकी की उसे डर था की कही वह निचे गिर न जाए राधे के बहो में से क्युकी माहि का वेट ज्यादा थी कोई 60 कग की, लेकिन माहि को बिलकुल नहीं पता था की राधे एक गधा है, जिस पर कितना भी वेट डालो वो सब उठा सकता था, उसे अपने मजबूत बदन पर नाज़ था और ये ताकत गॉड गिफ्टेड थी, इधर मैं, अब उसके नरम और लाल लाल होंठ फिर एक बार अच्छे से चूसने लगता हु, उधर उसका पति सोफे पर बैठे हुए अपने बीवी को किसी गैर मर्द के गंदे होंठो को चूसते हुए देख थोड़ा घिन सी आती है की कैसे उसकी बीवी इतने भद्दे काळा आदमी को ऐसे पैशनेट तरीके से किश दे सकती थी, वही उसके मन में इस

वक़्त प्रॉपर्टी के लिए क्या चल रहा था ये नाटो मुझे पता थी ुर न hi माहि को, उधर महिमा विरोद तोह नहीं कर रही थी लेकिन मेरे किश का जवाब भी नहीं दे रही थी. उसके मन में अभी भी झिजक थी के कैसे वह एक गैर मर्द के साथ वह भी उसके पति के सामने hi वह ये सब कर सकती है भले hi उसका पति पिया के क्ष पति रितेश के साथ सोने पर मजबूर किया था लेकिन माहि, ने अपना पति धर्म का पालन करते हुए उसके साथ सोइ थी लेकिन आज अपने hi पति के सामने किसी और मर्द के साथ सोना उसके लिए सच में तू मच था.. इधर मैं, माहि को ज्यादा कुछ सोचने का मौका बिलकुल भी नहीं दे रहा था?, मैं तो बस अपने शतरंज के गोटिया सजा रहा था खेलने से पहले की? वही माहि, भी राधे के जबरन चूमने के वजह से अपने होश में नहीं रह पा रही थी. अब्ब मैं, किश करते हुए उसके निघ्त्य को उतरने लगता हु, लेकिन चूमते हुए hi..

महिमा मेरे हाथ को वहां से हटा देती है. मुझे पता था के वो अभी पूरी तरह से तैयार नहीं थी, लेकिन मैं अब किसी भी किम्मत पर ये मौका नहीं गवाना चाहता था इस लिए मैं अब निघ्त्य के ऊपर से उसके चुके अचे से मसलने लगता हु जिससे उसकी सासे तेज़ होने लगती है. मैं ये सब देख कर के महिमा को और गर्म करने के लिए उसे उठाकर जहा उसका पति सोफे पर बैठा था वह ले जाता हु और साइड के बगल में रखे एक बड़े टेबल पर सत्ता देता हु मैं अब और तेज़ी से उस के होंठ और उसके चुके दोनों रगड़ने लगता हु. उधर माहि, को तो बिलकुल भी समझ नहीं आ रहा था की वो आखिर क्या करे? एक तरफ उसका पति बैठा हुआ था तो दूसरी तरफ राधे उसके बदन के साथ खेलते हुए उसके हवस को जगा रहा था वही न hi वो राधे को चूमने से रोक पा रही थी और ना hi उससे अपने चुचो को मसलने से रोक पा रही थी, वही इस

वक़्त सन काफी गरम बन चूका था.. इधर मैं, महिमा की निघ्त्य को फाॅर्स दे कर फिर से उतरने लगता हु और इस बार माहि मेरे फाॅर्स के आगे स्लेंडर कर देती है और अपने हांथो को खुद hi ऊपर कर देती है और मैं एक सेकंड भी नहीं लगता उसकी निघ्त्य उतरने में और निघ्त्य उतारते hi मैं उसे बाजु में फेंक देता हु जहा उसका पति राघव बैठा हुआ था, वही माहि, के निघ्त्य उतारते hi अब वो सिर्फ ब्रा और पंतय आ गई थी इधर मैं, अब्ब देर न करते हुए उसके ब्रा के ऊपर से चुके को दबाने लगता हु साथ hi उसके निप्पल पर से अपनी उंगलिया फेरने लगता हु. वही मेरा कला जालिम लुंड सख्त होकर पंत में तन चूका था उधर महिमा को भी अपनी टांगो के बीच में गर्माहट महसूस हो रही थी. उससे मालुम था की वो शाक्त चीज़ क्या हो सकती है और वो बात उसको ुर गर्म करने लगती है इधर थोड़ी देर बाद माय किश तोड़ता हु और तभी?
 
महिमा मेरे से अलग होकर अपने जिस्म को अपने हांथो से ढकने लगती है वही उसके थूक से भरे होंठ कम्प रहे थे. इधर मैं, बड़े hi शैतानी अंदाज़ में उसके दूध से चमकते जिस्म को देखने लगता हु, वही महिमा एक नज़र अपने पति जो सोफे पर बैठा हुआ था उसपर मरती है साथ hi उसे अपनी निघ्त्य जो सोफे पर पड़ी हुई थी उस पर जाती है और वह जैसे hi अपने निघ्त्य को उठाने जाती है की तभी मैं उसको पीछे से पकड़ लेता हु, महिमा, आह्ह्ह्ह.. कमीने कहिके रुकू छोडो.. तुम क्या पागल हो और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी निघ्त्य उतरने की मैं, मन में (साली बहन छोड़.. फिर से संस्कार जाग रहे है इसके तभी तो इसे ये नहीं पता की इसने hi अपने हांथो को ऊपर उठाये थे निघ्त्य उतरने के वक़्त में), उधर मैं फिर उसको पलटा कर उसके हाथ से निघ्त्य खींच कर उसको फिर से जहा

उसका पति बैठा हुआ था वह फेक देता हु, इसके बाद मैं, उसके दोनों चुचो को अपने हाथो में भरकर दबाने लगता हु.. महिमा, आह्हः.. राधी.. सशह्ह्ह.. प्लीज.. आह्हः.. रुको.. प्लीज.. हटाओ.. आह्हः.. अपने.. आठ.. गंदे.. हांथो को.. इधर मुझे उसकी रिक्वेस्ट सुनाने का मोड़ नहीं था और माय उसके ब्रा के ऊपर से चुचो को और जोर से दबाने लगता हु.. महिमा अपने दांतो को काटते हुए अपनी ाहो को काबू करने लगती है, वो बार बार अपने पति की और नज़र मार रही थी, वो सोच रही थी की उसका पति अब प्रॉपर्टी पेपर सिग्नेचर कर देगा, लेकिन उसका पति बस उसे घर रहा था? लेकिन न hi वह अपने पत्नी को बचने के लिए कुछ कर रहा था न hi राधे महिमा पर रहम दिखा रहा था, वही जब माहि राधे को देखती है जो हवस में अंधे भेड़िये की तरह उसके चुचो को मसल रहा था.

माहि, राधे के कंधो पर हाथ रख कर उसको दूर करते हुए हां.. आठ पागल हो क्या.. ऐसे कौन दबाता है तुम एक दम जंगली हैवान जैसे हो कमीने कहिके?, राधे उसके ब्रा के ऊपर से बड़े चुके को मसल मसल कर लाल कर चूका था इधर मैं, फिर से महिमा की तरफ बढ़ता हु और उसके पास आकर दाया बुब्बे को अपने हाँथ में पकड़ कर दबाने लगता हु.. महिमा मेरा हाथ पकड़ लेती है ुर मुझे गुस्से वाली नज़र से देखने लगती है, इधर मैं, उसके हांथो को अपने हाथो पर से हटा कर फिर से उसका चुका जोर जोर दबाने लगता हु कुछ देर दबाने के बाद अब मैं उसके दूसरा चुका को पकड़ कर उसे जोर जोर से दबाने लगता हु और महिमा अपने मुँह पर हाथ रख कर अपने ाहो को काबू करने की कोशिश करने लगती है, उसे दर्द तो हो रहा था लेकिन कही न कही वो हवस में अंधी

होती जा रही थी आज तक उसके पति को अभी उसके सामने एक सोफे पर बैठा हुआ था उसने भी कभी ऐसे जानवरो की तरह माहि के बड़े चुके नहीं बढ़ाये थे, इधर मैं, अब निचे झुक कर महिमा के ब्रा के ऊपर से जहा उसकी ब्रा के ऊपर एक उठान थी यानि उसकी निप्पल उसपर अपनी गन्दी जुबान फेरने लगता हु और मेरे ऐसा करते hi माहि जोर से सिसकारी भर्ती हुए.. आह्हः.. नाहीई.. उम्म्म.. दूर करो अपनी गन्दी जुबान, वो मेरे मुँह पर हाथ रख कर मुझे अपने चुचो से दूर करती है, इधर मैं, उसके हाथ को पकड़ लेता हु और उसको देखने लगता हु. इस वक़्त उसकी आँखों में गुस्सा और शर्म दोनों थी. वह शर्मा इस लिए थी की कही उसकी सिसकारियों को उसका पति सुन के उसे ये न लगे की उसकी पत्नी एक गैर मर्द के साथ मजे कर रही है और गुस्सा इस बात पर थी की राधे को जितना मन वो कर रही थी.
 
राधे उतना hi माहि के साथ किसी रण्डी की तरह पेश आ रहा था, इधर मैं, अब फिर से उसके ब्रा के ऊपर अपना मुँह रख कर उसके निप्पल पर से जुबान फेरते हुए चूसने लगता हु और मेरी जुबान की गन्दी थूक अब माहि के ब्रा जहा निप्पल थी वह एक दम गीली होने लगती है वही महिमा, मुझे अपने चुचो से अलग करने की कोशिश करते हुए आह्हः.. राधे.. उम् छोडो.. मुझे.. आह्हः.. उम्म्म.. सशः.. मैं, अब उसके ब्रा को ऊपर करने लगता हु तभी महिमा, मेरे हाथ पकड़ लेती है वही उसके चेहरे पर गुस्सा साफ़ साफ़ झलक रहा था पर मैं मुस्कुराते हुए फिर से उसके चुचो में अपना मुँह धसा कर उनको फिर से चूमने लगता हु, ुर माहि, हे.. राधे छोड़ कमीने आह वो फिर से उसको अपने जिस्म से अलग करने लगती है.. मैं, अब बिना डरे हुए की उसका पति मेरा क्या hi उखड लेगा? मैं उसके दाए

चुके के ऊपर से हलके से ब्रा हटा देता हु ुर अब मेरे सामने महिमा के 34 साइज के सफ़ेद बड़ा चुका आ जाता है उधर महिमा का धयान अपने पति पर था इस बात का फायदा उठा कर मैं अब उसके नग्गे चुका दबाने लगता हु. इधर मेरे पंत के अंदर लौड़ा काफी सख्त हो चूका था और अब मैं थोड़ा और आगे आकर अपने पंत के ऊपर बने बड़े तम्बू को महिमा के आगे से दोनों टांगो के बिच एक दम जोर से घुसा हु.. हाला की इस वक़्त महिमा सिर्फ ब्रा पंतय में थी और मैं सिर्फ पंत पहने हुआ था शर्ट तो मैने पहले hi उतर चूका था, इधर मेरे धक्के से उसका मुँह थोड़ा खुल सा जाता है लेकिन वह इस वक़्त अपने पति को गुस्से से घूरते जा रही थी उसे ये लग रहा था की उसका पति राघव उससे नहीं वह अपने प्रॉपर्टी से प्यार कर रहा है,

इधर मैं, उसकी आँखों में देखते हुए एक बार थोड़ा पीछे होता हु और महिमा के कमर में हाँथ दाल कर एक जोर का झटका आगे से देता हु जिसकी वजह से महिमा कुछ कह पाती उससे पहले hi उसको अपने टांगो के बिच गर्म लोहे जैसी चीज़ महसूस होती है और वह सिसकारने लगती है.. आह्हः.. मर.. गईई.. उस एहसास से उसका रोम रोम जैसे कपङे लगता है साथ hi उसको जैसे कोई शॉक hi लगा हो उस तरह से रियेक्ट करती है, क्युकी मेरा खड़ा लुंड जो पंत के अंदर होने के बावजूद सीधा माहि की फूली छूट पर ठोकर मारा था, जिससे उसे ऐसे लगा जैसे वो शाक्त चीज़ सीधा उसकी छूट में hi चला गया हो, क्यों की राधे ने उतनी तेज़ी से अपना लौड़ा उसकी टांगो के बिच घुसाया था.

वही महिमा, के एक्सप्रेशन इस वक़्त देखने लायक थे, उसकी आँखे जैसे सफ़ेद हो जाती है उस एहसास से और वह अपने होंठ काटते हुए अपने आप पर काबू पाने की कोशिश करने लगती है क्युकी वो अपने पति के सामने बहकना नहीं छाती थी भले hi अपने पति के कहने पर उसने पिया ठाकुर के पति के साथ सेक्स करवाई थी लेकिन इस वक़्त उसका पति उसके सामने बैठा हुआ था और उसके सामने किसी के साथ महिमा कुछ करना नहीं चाहती थी भले hi उसे छूट में आग लगी हो, इधर मैं, महिमा के एक्सप्रेशन देख और गर्म हो जाता हु वही शराब का नासा मेरे ऊपर कुछ ज्यादा hi गरम कर रहा था और दूसरी तरफ महिमा के सेक्सी एक्सप्रेशन उफ्फ्फ्फ़ मेरे लौड़े को तो बिना चोदे कही झाड़ hi न जाए, लेकिन माय खुद पर काबू रखते हुए अपना लुंड वापिस पीछे ले कर फिर एक बार जोर से माहि माँ के टैंगो के बीच में घुसता हु,

महिमा, आह्ह्ह्हह.. ऊम्मम.. राधी.. बस बहुत हुआ अब मुझे छोडो नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा आह्हः.. वह अपने कामवासना को काबू करके कहती है वही मैं, मैडम जी मेरी ये चीज़ काफी बड़ी और खुखार भी है, बस एक बार मुझे मौका दे कर तो देखिये मैं आपको पूरी रात मजे दूंगा और एक दिन में इतने मजे दूंगा, जितना तेरा न मर्द पति जिंदगी भर नहीं दे पायेगा मैं, अब उकसाने के लिए माहि के सामने उसके पति की बुराई करता हु ये मेरा ट्रिक होता है संस्कारी औरतो को अपनी रण्डी बनाने से पहले, क्युकी संस्कारी औरते अपने पति को अपना सब कुछ मानती है और जो कहते है वो सब अपना करम मान के करती है, इधर मैं, ये कह के फिर से अपना लौड़ा उसकी टांगो के बीच घुसता हु और महिमा आहे भरते हुए राधे के कंधो पर हाथ रख देती है.
 
वही उसका एक चुका ब्रा के अभी भी नंगा बहार लटक रहा था जो महिमा ने ये ऑब्सेर्वे नहीं किया वो तो बस अपने पति को घूरे जा रही थी उसे लग रहा था की उसका पति कभी भी राधे के लाये हुए पेपर पर सिग्नेचर कर के उसे राधे के चुंगल से छुड़ा लेगा लेकिन अभी तक उसका पति कोई भी रियेक्ट नहीं कर रहा था इसी बात का उसे गुस्सा था, इस वजह से महिमा राधे जो कर रहा था उसे कुछ पता नहीं चल प् रहा था क्युकी वो अब धीरे2 काम वासना में डूबती जा रही थी, इधर मैं, उसके नंगे चुके को पकड़ कर आगे झुक कर अपने होंठ उस लाल लाल होंठो की तरफ ले जाता हु, उधर मेरे लौड़े के वॉर और काम उत्तेजना के कारन वो अब अपने hosh-o-aawas में नहीं थी इस वजह से मेरी तरफ देखते हुए अपने होंठ आगे कर देती है उसका ये रिएक्शन देख कर उसका पति थोड़ा चुकता है की

महिमा ने खुद से अपने होंठ आगे की है, इधर मैं उसके रिएक्शन से खुस था और अपने काले होंठ उसके होंठो पर रख कर फिर एक बार माय चूमने लगता हु.. किश करते हुए अब मैं अपने हांथो को उसके पीछे ले जा कर ब्रा का हुक निकलने लगता हु और महिमा को एक दम से इस खतरे का एहसास होता है और वह अपने आप को मेरे से दूर करते हुए राधी.. ये तुम क्या कर रहे थे अभी है तुम्हारी हिम्मत कैसे हुए ये सब करने की है?, मैं, मन में (ये संस्कारी साली बहुत नाटक कर रही है बस थोड़े वक़्त की बात है मेरी रण्डी उसके बाद तू खुद hi मुझे वह सब करने देगी जो तेरा पति सायद करता होगा), ये सोचते हुए मैं महिमा एक खुले हुए चुके को देखता हु, जो अभी तक उसको पता नहीं चला था, अब मैं थोड़ा आगे बढ़ कर उसका खुला चुका दबाता हु और तब जाकर माहि को एहसास होता है की उसका एक चुका ब्रा से

बहार झूल रहा है ुर वो जल्दी से अपने खुले चुके को ब्रा से धक् लेती है और इधर मैं अब यहाँ तक हम आ गए है अब क्या शर्माना.. तेरा चुका भी काफी ठोस है जब की तेरी एक बच्ची है कोई नहीं इसे दबा दबा क एक दम नरम कर दूंगा मेरी बातो से वह और शर्मा जाती है लेकिन पति बैठा हुआ फील करके वह शर्माना छोड़ कर मेरे से नहीं.. यह सब जो कर रहे हो गलत है तुम्हे मेरे पति से मतलब है तो तुम उसके साथ डील करो मेरे साथ क्यों गन्दी हरकत कर रहे हो देखो न राघव तुम कुछ करते क्यों नहीं ये सब मेरे साथ गलत कर रहा है और तुम मेरे सामने बैठे होने पर भी कुछ नहीं कर रहे हो प्ल्ज़ इस कमीने को जो चाहिए वो दे के इसे यहाँ से दफा करो, मैं, उसकी बात पर सामने बैठे उसके पति की और देख के, देख तेरी पत्नी के हवस जाग रही है तभी तो उसने अभी कुछ देर पहले अपने होंठो को मेरे गन्दी होंठो पर खुद hi राखी है.
 
वही इतनी देर से इसके चुके मसल रहा हु, इस लिए तेरे पास मौका है तू प्रॉपर्टी के पेपर पर जल्दी सिग्नेचर कर दे? नहीं तो कही तेरी बीवी बहक गई तो ये तेरी भी नहीं सुनाने वाली साली हरामज़ादी बहुत गरम माल है ये कह के हसने लगा हहहह.. महिमा मेरी बात पर गुस्से से मुझे घूरते हुए ये.. ये क्या कह रहे हो मम मैं खुद तुम्हे किश??.. इसके आगे कुछ बोलती उससे पहले मैं कुछ बोलने नहीं देता और एक दम से आगे बढ़कर उसको अपनी बाहो में भर लेता हु और फिर से उसके होंठो पर होंठ रख कर चूमने लगता हु बड़े hi वाइल्ड तरीके से और वो मेरे कंधो पर मरने लगती है साथ hi मुझे अपने आप से दूर करने लगती है. उधर उसका पति सोफे पर बैठा बस देख hi रहा था वो न तो कोई हरकत कर रहा था और न hi वो अपने बीवी को बचने के लिए कोई ऑब्जेक्शन करता है.

उसके मन में क्या चल रहा था वो न तो मुझे पता था ुर न hi माहि को पता थी, इधर मैं उसे किश करते हुए, अब उसके ब्रा का हुक फाइनली निकल देता हु और उस के नंगी पीठ पर से हाथ फेरने लगता हु महिमा, मन में (हे Bhagwan...Ye कमीना क्या कर रहा है.. अभी नहीं रोका तो.. मेरे पति के सामने hi नग्गा कर देगा और मैं उसके सामने रुस्वा हो जाउंगी नहीं.. नहीं मुझे कुछ करना होगा), लेकिन महिमा ऐसे वाइल्ड किश अज्ज पहली बार किसी के साथ कर रही थी जिसकी वजह से उसका दिमाग किश करते वक़्त अपने होश खोने लगता है वो कुछ सेकंड पहले सोची थी की राधे को अपने से दूर कर देगी लेकिन अब उसका विरोध ख़त्म होने लगता है और वह अपने दोनों हाथ मेरे कंधो पर रख कर साथ देते हुए मुझे चूमने लगती है जिसका अहसास होते hi मैं जैसे पागल hi हो जाता हु और अब मैं अपने दोनों हाथ पागलो की तरह

माहि की नंगी पीठ पर आया वह फेरने लगता हु, वही मेरे बड़े हाथ माहि को अपनी पीठ पर अलग hi एहसास दिला रहे थे वही मैं बड़े hi वाइल्ड तरीके से उसके सॉफ्ट होंठो को चूसते हुए अपनी गन्दी जुबान अंदर करने लगा और ये फील होते hi माहि अपने मुँह को खोल देती है ये मेरे लिए बहुत बड़ी जीत थी की एक संस्कारी पत्नी अपने पति के होते हुए भी वो मेरे साथ दे रही थी, वही उसके मुँह खुलते hi मैं तुरंत अपनी जुबान उसके मुँह के अंदर कर देता हु और माहि मेरे शराब की बदबू वाली जुबान को चूसने लगती है उसका ये रूप सोफे पर बैठा उसका पति भी देख के ास्चर चकित हुआ, इधर मैं उसकी कोई परवाह किये बगैर अपने हांथो को उसकी पीठ से लेकर उसकी पंतय में कैद बड़े बड़े गांड जो 38 साइज की थी उसपर हाँथ ले जा कर मैं आते की तरह घुटने लगा मेरे ऐसा करते hi माहि सिसक पड़ती है लेकिन वह

मेरे जुबान को चूसना बिलकुल भी बंद नहीं करती है क्युकी सायद उसके हवस जाग चुकी थी भला कोई शादी सुदा औरत अपने आप को कितनी देर तक रोज सकती थी और हुआ भी वैसा hi माहि अब बिना डरे की उसका पति सामने बैठा है वो क्या कहेगा उसकी परवाह किये बगैर वो भी अपने हांथो को मेरी शर्ट लेस्स बदन पर अपने हांथो को ले जा कर सहलाने लगी वही काफी देर से किश करने की वजह से अब महिमा की सांस फूलने लगती है. अब वह मुझे पीछे धकेलने की कोशिश करने लगती है, लेकिन मैं उसको छोड़ने के लिए तैयार नहीं था क्युकी मैं जनता था की कही माहि के संस्कार जाग गया तो सायद मुझे फिर से उसे गर्म करना पड़ेगा यही डर की वजह से उसे अपने चुंगुल से निकलने नहीं देना चाहता था, लेकिन महिमा अपना पूरा दम लगा कर मुझे जोर का धक्का देती है जिसकी वजह से मैं इस बार थोड़ा पीछे हैट जाता हूँ.
 
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