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यह कह कर अब मैं देर न करते हुए.. थोड़ा निचे झुक कर माया की गोरी ुर मोती मोती जांघों को चूमने लगता हु और मेरी जुबान अपनी जांघ पर लगते hi.. माया, जोर से सिसकारने लगती है आह्ह्ह्ह.. ूममममम.. अंकल.. प्लीज मत करो ऐसा मुझे आह्ह्ह्ह.. गुदगुदी हो रही.. हेहेहे.. आह्हः.. उफ्फ्फफ्फ्फ़.. वो अब किसी भी तरह का विरोध कर नहीं पा रही थी और करती भी क्यों? क्युकी वह भी अपनी प्यास बुझाना चाहती थी जो राधे ने भड़काई थी भले hi वह ऊपर ऊपर से राधे को मन कर रही थी लेकिन उसके अंदर आग भड़क चुकी थी, इधर मैं, अब उसकी जांघो को चूमते हुए धीरे धीरे ऊपर आ जाता हु. अब हम दोनों के जिस्म एक दूसरे से चिपके हुए थे. अचानक मेरे ऊपर आने से माया मेरे बदसूरत कला चेहरे को देखने लगती है ुर उसे राधे की आँखों में साफ़ साफ़ सेक्स का नशा
दिख रहा था, वही माया, को अब अपनी टांगो के बिच में पंत में कैद गर्म लुंड अचे से महसूस हो रहा था और वो ये फील करते hi तेज़ी सी ससे लेने लगती है, मैं, अब उसके एक चुके के ऊपर हाँथ रख के उसकी आँखों में देखते हुए सहलाने लगता हु और माया अपने होंठो को काटते हुए बस मुझे देखती रहती है, इधर मेरे हथेली उसके निप्पल को दबाते हुए निचे उसकी छूट की तरफ जाने लगती है की तभी माया, अपने दोनों हाथो से अपनी फूली हुई छूट छुपा देती है.. जिसे देख कर मैं, अब बस भी कर मेरी जान.. क्यों छुपा रही है?, माया कुछ नहीं बोलती, मैं, अब फिर से एक हाँथ से उसके चुचो को मसलने लगता हु और माया आहे भरते हुए मुझे देखने लगती है.. मैं, थोड़ा निचे आ कर उसकी हाथो पर अपनी जुबान रख कर चाटने लगता हु, मेरी जुबान महसूस होते hi माया अपने हांथो को अपनी छूट पर से
हटा लेती है और उसको गुलाबी छूट अब मेरे आँखों के सामने आ जाती है जिसे देख कर मैं, उफ़.. क्या.. क़यामत.. छूट है तेरी मेरी जान?. माया राधे को अपनी छूट के इतना पास पाकर जल्दी से अपनी छूट ढकने लगती है. क्युकी उसे बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी एक गैर मर्द को अपनी छूट दिखवाना इधर मैं, मत छुपा अब इसको मेरी जान.. इस छूट को देखने के लिए पता नहीं कितने लड़के सपने देखे होंगे? लेकिन माय जनता हूँ तू अपनी छूट को सिर्फ अपने पति को दिखाई होगी, लेकिन आज मुझे अपने अप्सरा जैसे छूट को दिखा कर तूने मेरे रात बना दी उसके लिए माय तेरा दिल से धन्यवाद् करता हु, माया, मेरी बात से कुछ ज्यादा hi शर्मा जाती है लेकिन वह फिर भी अपने छूट को ढकने की कोशिश करने लगती है लेकिन मैं, अब अपने हाथ उसके हाथो पर रख कर उनको छूट पर से हटा देता हु अब हम दोनों एक दूसरे को घूरने लगते है.
दिख रहा था, वही माया, को अब अपनी टांगो के बिच में पंत में कैद गर्म लुंड अचे से महसूस हो रहा था और वो ये फील करते hi तेज़ी सी ससे लेने लगती है, मैं, अब उसके एक चुके के ऊपर हाँथ रख के उसकी आँखों में देखते हुए सहलाने लगता हु और माया अपने होंठो को काटते हुए बस मुझे देखती रहती है, इधर मेरे हथेली उसके निप्पल को दबाते हुए निचे उसकी छूट की तरफ जाने लगती है की तभी माया, अपने दोनों हाथो से अपनी फूली हुई छूट छुपा देती है.. जिसे देख कर मैं, अब बस भी कर मेरी जान.. क्यों छुपा रही है?, माया कुछ नहीं बोलती, मैं, अब फिर से एक हाँथ से उसके चुचो को मसलने लगता हु और माया आहे भरते हुए मुझे देखने लगती है.. मैं, थोड़ा निचे आ कर उसकी हाथो पर अपनी जुबान रख कर चाटने लगता हु, मेरी जुबान महसूस होते hi माया अपने हांथो को अपनी छूट पर से
हटा लेती है और उसको गुलाबी छूट अब मेरे आँखों के सामने आ जाती है जिसे देख कर मैं, उफ़.. क्या.. क़यामत.. छूट है तेरी मेरी जान?. माया राधे को अपनी छूट के इतना पास पाकर जल्दी से अपनी छूट ढकने लगती है. क्युकी उसे बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी एक गैर मर्द को अपनी छूट दिखवाना इधर मैं, मत छुपा अब इसको मेरी जान.. इस छूट को देखने के लिए पता नहीं कितने लड़के सपने देखे होंगे? लेकिन माय जनता हूँ तू अपनी छूट को सिर्फ अपने पति को दिखाई होगी, लेकिन आज मुझे अपने अप्सरा जैसे छूट को दिखा कर तूने मेरे रात बना दी उसके लिए माय तेरा दिल से धन्यवाद् करता हु, माया, मेरी बात से कुछ ज्यादा hi शर्मा जाती है लेकिन वह फिर भी अपने छूट को ढकने की कोशिश करने लगती है लेकिन मैं, अब अपने हाथ उसके हाथो पर रख कर उनको छूट पर से हटा देता हु अब हम दोनों एक दूसरे को घूरने लगते है.