The Story of a Bodyguard (by Naree) - Page 22 - SexBaba
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The Story of a Bodyguard (by Naree)

मैं, कर ना मेरी जान ऐसा क्यों यार, रति, फिर से ना में गर्दन हिलती है.. अब मैं, एकदम से रति का हाथ पकड़ कर अपने सख्त लुंड पर रखता हु जिससे रति अपने हाथ में गर्म सी चीज़ पाकर चौंक जाती है ुर मेरी तरफ घूरने लगती है उसका रिएक्शन देख के मेरे चेहरे पर एक स्माइल आ जाती है ुर रति एक दम से अपने हाथ मेरे लुंड पर से हटा देती है, इधर रति, के खूबसूरत चेहरे पर उसके बाल बिखरे हुए थे क्युकी उसके बाल बहुत hi घने ुर बड़े थे जो उसकी विशाल गांड के भी निचे तक एते थे और उसके बाल हल्के ब्राउन कलर के थे वही इस ठण्ड में भी उसके मानते पे पसीना छाया हुआ था मैं उसके इस रूप को देख और ज्यादा उत्तेजित हो जाता हु और अपने मुसल लुंड को छूट से हटा के पेट पर दबाने लगता हु क्युकी रति की हाइट मेरे से बहुत छोटी थी इस लिए जब वह

मेरे साथ कड़ी होती तो उसका सर मेरे साइन तक अति जिसकी वजह से मेरा लुंड उसके पेट के नाभि के सामने था वही रति, को अपनी नाभि के ऊपर मेरे लुंड का बड़ा सा सूपड़ा महसूस हो रहा था पर लेकिन इस वक़्त वह कुछ कर नहीं पा रही थी, मैं, उसकी आँखों में देखते हुए अपना लुंड उसके नाभि के खाई के ऊपर अपना मोटा सा सूपड़ा घिसने लगता हु और रति बस अपनी ाहो को काबू करते हुए मुझे देख रही थी उसकी तेज साँस लेने से उसकी बड़ी बड़ी चुके ऊपर निचे वो रहे थे, इधर मैं, अब आगे झुक कर रति के पंखुड़ी जैसी होंठो के पास आ जाता हु वही रति, भी अब देर न करते हुए अपने गुलाबी होंठ आगे कर देती है जिसे देख के मैं, बहुत hi रोमांटिक अंदाज म मेरी जान ये हुई न बात बस ऐसे hi करती जा?, ये बोल के अपने होंठ उसके गुलाबी होंठो पर रख देता हु ुर उसे चूमने लगता हु,

रति, इतनी मदहोश हो चुकी थी की वह अपनी जुबान मेरी जुबान के साथ मिला कर उसको चूसने लगती है, वही रति, को अब कोई फ़िक्र नहीं थी की वो किसकी बहु है? किस की पत्नी है? और वो किसके साथ है? वो यहाँ क्या कर रही है?, वो सरे संस्कार भूल के मेरे होंठो को जी जान लगा के ऐसे चूस रही थी जैसे माय उसका पति हु? वही मैं, अपना थूक जब वो मुँह खोलती तो अंदर कर देता और रति वह पूरा का पूरा चाट लेती थोड़ा बहुत मेरे होंठो पे जो भी थूक उसे फील होता वो भी तुरंत अपनी जुबान से चाट कर क्लीन कर देती, वह मेरे बालो में से हाथ फेरते हुए बड़ी जोश में मेरे होंठो को चूस रही थी वही मैं, अब उसकी पीठ से हाँथ को धीरे धीरे सहलाते हुए निचे ले जाता हु, और उसकी बड़ी गांड जो करीब 36 की होगी उसे अपने बड़े बड़े हथेली में पकड़ कर अपना लुंड उसके पेट पर दबाने लगता हु,

इधर मेरे हाथ अपनी गांड पर पाकर रति अपना होश खो बैठती है और मेरा देखा देखि में वह भी अपने हाँथ को मेरी गांड पर रख देती है और उसको मसलने लगती है मेरे लिए ये एक सरप्राइज जैसा था, की एक 22 साल की औरत वो भी शादी सुदा संस्कारी खूबसूरत औरत एक 40 साल के के आदमी जो उससे करीब करीब 18 साल बड़ा है वो मेरी गांड मसल रही है ये सोचते hi मेरा लुंड में और भी ज्यादा तनाव आ जाता है, ऐसे hi थोड़ी देर किश करने के बाद माय रति से अलग हो जाता हु दोनों के हाथ अभी भी एक दूसरे की गांड पर थे रति अपनी साँसों को काबू करने में लगी हुई थी और मैं अपने होंठो पर से जुबान फेर रहा था जिसे देख वो शर्मा जाती ह, वही मैं, एक दम से रति के कमर में हाथ डालकर उसको और ऊपर उठा लेता हु रति एक दम से चौंक जाती है और

गिरने से बचने के लिए मेरे गले में अपना दोनों हाथ डालती है ुर माय एक हाँथ निचे लेजके अपना काळा लुंड को छूट के सामने कर देता हु वही रति, को ये महसूस करते hi वो मुझे गुस्से से घूरते हुए रति, जीजूउउ Ni..Niche उतरो mujhe..plz, मैं बड़े hi आराम से रति को उठाये हुआ था और माय उसकी बातो को इग्नोर करते हुए उसके सुराही दर गर्दन पे चूमने.. लगता हु रति के लिए ये बिलकुल अलग एहसास था उसको आज तक कभी उसका पति ने भी इस तरह नहीं उठाया था भला कैसे उठता वो एक दुबला पतला और रति भरी हुई बदन की मालकिन वही रति, मेरा अपनी पति की कपरिसों सोच कर काफी शर्म महसूस करने लगती है क्यों की इस वक़्त मैं हर तरह से उसके पति रामु से आगे चल रहा था वही मैं, अब रति को दीवार से सत्ता कर उसके गले पर से जुबान फेरने लगता हु मेरी इस हरकत से रति, आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. ऊह्ह्ह्हह्ह.. जीजूउउउ..
 
मैं, मई क्या... मेरी जानन.. बोल बहु?.. ऐसा कहकर अब माय रति का हाथ ऊपर कर देता हु और उसके आर्मपिट देखने लगता हु रति आज सुबह hi अपने आर्मपिट्स साफ़ किये हुई जब हम हॉस्पिटल आ रहे थे, वह मुझे अपने आर्मपिट्स देखता हुआ पाके शर्मसार होने लगती है. वो कुछ कहती इससे पहले hi माय अपनी जुबान रति की एक दम गोरी और साफ़ सुथरी आर्मपिट्स में डालकर उसको चाटने लगता हु मेरी की इस हरकत से रति एकदम से उछाल पड़ती है.. रति, आह्हः.. यह.. क्या कररर.. रही.. हो जीजूउउ.. चींईईई.. आह्हः.. रति को अजीब सी गुदगुदी हो रही थी मेरी जुबान फेरने से.. मैं, अब तक अपने बीवी के अलावा भी कई औरतो को छोड़ चूका था इस लिए माय जनता था की ऐसा करने से औरत कुछ ज्यादा hi गर्म होती ह औरतो को कुछ अलग अतरंगी करवाना बहुत पसंद होता है वो भी शादी सुदा औरतो को वही मैं, अब्ब रति के दूसरी आर्मपिट भी चाटने लगता हु,

इधर रति, के लिए एक दम नया था ये एक्सपीरियंस वो अपनी आहे और हसी रोकते हुए खुदको काबू में लेट हुए हहममम... जीजूउउउउ... रुकोओओओओ... आह्ह्हह्ह्ह्ह... हहहहए.. सशह्ह्ह्ह.. ऊंठ्ठ.. नाहीइ.. हेहेहे.. ुफ्फूऊ.. ुंहःहः.. सशह्ह्ह्ह क्या कर रहे होऊ जीजू आप पागल हो गए हो क्या ऐसा भी कोई करता है क्या छोडो, मैं, ये मेरे प्यार करने का तरीका है माय तेरे बदन के हर हिस्से पर अपनी मुँह से मुहर लगा के छोड़ना चाहता हु. रति, मरी बात सुनकर कुछ नहीं कह पाती और मुझे अपनी आर्मपिट चाटते हुए देखने लगती है और रति को अपने आर्मपिट पर मेरी गरम ज़ुबान एक अलग hi अहसास दिला रही थी उसका असर उसके छूट पे हो रहा था क्यों की जब से आर्मपिट्स मैं छत रहा था तब से उसकी छूट लगा तर प्रे छुम छोड़ रही रही थी और मेरा ऐसा पागलपन देख नहीं पाती क्यों रति को भी पागल बना रहा था थोड़ी देर के बाद,

मैं, रति को उठाये हुए फिर से बिस्तर पे लेता देता हु और खुद उसके ऊपर आ जाता हु.. रति की दोनों आर्मपिट्स, चुके और मुँह मेरे थूक से भीग चुके थे और रति नंगी लेती हुई एक तुक मुझे देखे जा रही थी वो सोच रही थी की (जीजू मेरे हर हिस्से में अपने मुँह से खूब छठा है लेकिन मुझे इस बर्फ बरी में भी गर्मी क्यों लग रही है पसीने क्यों बाह रहे है), वही मैं, अब निचे जाकर रति की छूट देखने लगता हु जो काफी गीली हो चुकी थी मेरे किये हुए हमलो से, रति की गुलाबी छूट को देख अब मैं उसको देखते हुए एक बात बता मेरी जान तेरा पति रामु तुझे ठीक से अब तक छोड़ा भी नहीं है क्या?, मेरे इस सवाल से रति, एक दम से चौंक जाती है उसके पास मेरे इस सवाल का कोई जवाब नहीं था लेकिन कुछ सोचते हुए रति, ककककककक.. कककककी.. क्याआ.. मममममम.. मतलबबबबब.. है आपका है?,

मैं, कितनी गुलाबी छूट है तेरी.. लगता hi नहीं तेरे पति रामु ने ठीक से छोड़ा है मुझे तेरी ये छूट बहुत प्यासी लग रही है.. हहै.. रति, बिना शर्म के टंगे फैलाये हुए मुझे देख रही थी मैं भी हस्ते हुए अब अपनी जुबान फिर से उसकी छूट पर रख कर उसको चाटने लगता हु और मेरे मुँह से स्लरुपपप.. पूछह.. स्लरुपपप.. पुछठ.. स्लरुपपपप.. पुछठ.. की आवाज़ वह गूंजने लगती है वही मेरी छूट चटाई से रति, लुम्बी लुम्बी आहे भरने लगती है आईईए.. नाहीई.. ीवव.. छियई.. रुकोऊ.. रुकोऊ.. पलासी.. आह्ह्ह्ह.. जीजूउउ.. ुम्मःहः... सशह्ह्ह्ह... हहहयययय.. आअह्हह्ह्ह्ह.. ूमममहहह.. सशह्ह्हह्ह.. मैं, तू फ़िक्र मत कर.. आज मई तेरी छूट को अच्छे से छोड़ कर उसकी साड़ी प्यास मिटा दूंगा, रति एक संस्कारी और वफ़ा दार पत्नी थी इस लिए ये सब करना मन गवाही नहीं देता है इस लिए वो अपनी छूट

पर हाथ रख कर मुझे पीछे हटाने की कोशिश करने लगती है, लेकिन अब मैं उसका हाथ पकड़ कर उसकी गोरी उँगलियों को अपने मुँह में डालकर चाटने लगता हु रति अपनी उँगलियों पर मेरी जुबान फिरता महसूस कर उसको अजीब सा लगता है और रति, मन में (एव्व कैसा आदमी है.. सब कुछ चाट रहा है इन घिन नहीं अति क्या), इधर मैं, एक एक करके रति की गोरी उंगलिया चाट रहा था और वह बस लचर अवस्था में अपने होंठ काटते हुए मेरी हवस को देख रही थी.. माय ऐसे hi कुछ देर रति के दोनों हाथो की उंगलिया चाट2 कर थूक से सना देता हु अब माय रति के दोनों हाथ छोड़ देता हु और रति अपने हाथो पर राधे की गन्दी और बदबूदार थूक देख कर उनको घिन सी आती है और झट से अपनी साड़ी से साफ़ करने लगती है, की तभी मैं अपनी जुबाननं रति की गर्म और फूली हुई छूट पर रख देता हु.
 
रति, aaiieee.e.e... ॉंमहह... ससष्ठ, मैं, क्या मस्त स्वाद है तेरी छूट का.. एकदम मीठा.. ग्लूपपपपपप... सल्लूरररप्प... सलूरररपपप.. ुम्मःहहह.... सल्लूरररपपप...?. मेरे मुँह से सलूरररपपपपप की आवाज़ सुन के रति, शर्मा सी जाती और वो बिस्तर को अपनी हांथो से कास कर पकड़ लेती है और जोर से सिसकारने लगती है आईएईए.. जिजुओ.. रुकू.. आह्ह्ह्ह.. फिरर.. से क्यों करने लगे आह्हः.. ऊम्मम प्लीज हटाओ न वह से अपना.. मुहहह.. जीजू.. आह्हः.. सशह्ह्ह.. मेरी गन्दी बातो से वो ुर ज्यादा गर्म हो रही थी और साथ hi साथ शर्म से लाल भी मैं फिर से उसकी छूट की फैंको बहुत hi तित थी और उसे किसी तरह अपने ऊँगली से फैला के अपनी जुबान से चाट रहा था और अपनी एक मोती ऊँगली से उसकी छूट के दबने ुर क्लाइटोरिस पर रख कर उसको रगड़ने लगता हु.. जिसकी वजह से रति मेरे सर के बालो में हाथ दाल कर जोर से आहे भरने लगती है,

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वह मछली की तरह तड़प रही थी अपने सर को इधर उधर कर रही थी और वो मुझे अपनी छूट को छत्ते हुए देख के और भी ज्यादा मदहोश हो रही थी, आज से पहले रति की छूट उसका पति ने कभी ढंग से छुआ तक नहीं था तो वो रति की फूली छूट क्यों छत्ता, वही आज जब रति ने अपने नन्दोई के छूट चटाई फील की तब उसे पहली बार अपने पति रामु पर गुस्सा आया की उसने ऐसा पहले क्यों नहीं किया इधर मेरी नज़र रति के मासूम चेहरे पर थी, देख रहा था की कैसे य संस्कारी बहु अपनी असली हवस को दिखा रही है, वही मैं, अब रति की दोनों टाँगे फैला देता हु जिससे अब उसकी गुलाबी छूट खुल कर सामने आ जाती है. उसकी छूट पर जैसे जैसे मेरी जुबान फेरने लगती है वैसे वैसे रति के दोनों पैरो में बढे पायल अलग सा आवाज करने लगते ह ुर उसकी नजर अपने पायलो पर जाती है

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और वह याद करती है की वो पायल उसके पति रामु ने उसको गिफ्ट में दिए हुए थे जब वो पिछले हफ्ते घर ए थे तब वही अपने पति की याद आने पर रति एक पल के लिए मुझे अपनी छूट से पीछे करने के लिए अपना हाथ आगे बढाती है की तभी मैं रति की छूट के डेन को काटता हु.. रति, आईएईए... ममअअअअ... सस्शह्ह्ह.. रति की आँखे बड़ी हो जाती है और उसका बदन पूरा अकड़ सा जाता है.. मेरे अचानक हमले से रति का हाथ मुझे हटाने के बजाये अब मेरे सर के बालो में फेरने लगती है, ये सन काफी गर्म लग रहा था अब माय रति की दोनों टाँगे और ज्यादा फैलता हु और अपनी बड़ी जीभ को गोल करके उसकी तित फैंको से होते हुए छूट के अंदर तक दाल कर चाटने लगता हु.. रति की हालत अब पतली हो चुकी थी, वो अब किसी भी वक़्त अपना पानी निकलने.. वाली थी जिसकी वजह से उसके मु से आह्हः.. हटाओ..

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अपने मुँह को वह से आह्ह्ह्ह.. उम्म्म.. आह्ह्ह्ह.. रूक्कू... ममममम.. जीजूउउउउ... न्नन्न.. ननणणन... नहीं... मत.. करो... न.. मैं, उसकी बात को अनसुना करके अपनी जुबान रति की छूट में और अंदर तक डालकर चाटने लगता हु उसकी क्लाइटोरिस और फांके फड़क रहे थे उसकी छूट से प्रे छुम की बढ़ बाह रही थी जिसे मैं कहते जा रहा था और अपने एक हाँथ से रति की चुकी की गुलाबी निप्पल को अपनी ऊँगली से मरोड़ रहा था जिसकी वजह से रति के पेअर अब थरथराने लगते है और वह अपने आँखे बंद कर के जोर से चिल्लाने लगती है.. आईईए.. नही.. नही.. ओह्ह्ह.. जीजू.. उनममम.. प्लीज.. उमठ.. सष्ठ.. ऐसे छीलते हुए रति के छूट से गर्म पानी की तेज़ पिचकारियां मेरे मुँह में.. जाने लगती है मैं भी अपना मुँह रति की छूट पर रख कर उसकी छूट से निकल रहा गरमा गरम सारा काम राश निगलने और चाटने में

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लग जाता हु ुर रति अपनी गांड उठा उठा कर मेरे मुँह पैर अपना काम राश बहा रही थी और माय पागलो की तरह रति की छूट से निकल रहा सारा राश पिने लगा वही रति अपना सारा काम राश बहाने के बाद वो अब वापिस होश में आने लगती है और उसको एहसास होता है की अभी अभी क्या हुआ है उसके साथ??, मैं, अब अपने चेहरे पर से हाथ फेरते हुए रति को देखता हु उधर रति, राधे के काळा चेहरे पर लगा हुआ सफ़ेद पानी देख वो शर्म से लाल हो जाती है इधर अब मैं खड़ा हो जाता हु और अपना कला मोटा लुंड हाथ में लेकर हिलने लगता हु रति मेरे एनाकोंडा जैसे लौड़े को देख शर्मा जाती है, वह अब राधे से अपनी नज़र नहीं मिला पा रही थी इस वक़्त, वही मैं, वाह्ह... वो क्या बोलते है है याद आया अमृत.. तेरी छूट में अमृत है.. मजा आ गया ऐसा अमृत राश पि कर. मैं आज धन्य हो गया अब तो रोज पिऊंगा तू पिलेगी न रति मेरी जान?,
 
रति, मेरी बात सुनकर अपने चेहरे पर हाँथ रख देती है. वो नज़र नहीं मिला पा रही थी मेरे से जिसे देखते हुए मैं Chal..Ab शर्मा मत.. अब तेरी बारी है चूसने की.. रति अब अपने चेहरे पर से हाथ हटाकर मुझे देखने लगती है. उसको कुछ समझ नहीं आता की मैं किस बारे में बात कर रहा हु.. उसे ऐसा देख मैं, अरे देख क्या रही है चल अब मेरा लुंड chus...Lund चूसने की बात सुनकर रति को घिन सी आती है मेरे काळा बदबूदार लुंड, जो हद से ज्यादा मोटा और लुम्बा देख कर गन्दा सा मुँह बनती है और दूसरी तरफ देखती है.. वो अब कुछ भी बोलने की हालत में नहीं थी, इसलिए वो मुझे देख कर ना में सर हिलने लगती है.. उसको ऐसा करते हुए देख मुझे बहुत गुस्सा आने लगता है और मन में (इसकी माँ का भोसड़ा... साली मादरजात ने खुद मज़े ले लिए, छूट का पानी क्या निकल गया, साली फिर से

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संस्कारी बन गयी लुंड चूसने से मन कर रही है रंडी कुटिया? मादरचोद साली) मैं, अपने गुस्से को काबू में करते हुए प्यार से बोलता हु क्या हुआ मेरी जान.. तूने तो मज़े ले लिए अपनी छूट का पानी निकल दिया अब मेरी बारी आयी तो मन कर रही है तू? वही रति, मेरी बात सुनकर शर्म से दूसरी तरफ फेस करके देखने लगती है इधर मैं, जानता था की झड़ने के बाद रति फिर से नार्मल होने लगी है इसिलए वह मन कर रही है मैं अब इस वक़्त कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता था और अपने, मन में- (साली आज नहीं तोह कल पर तुझे मेरा लौड़ा चूसना hi होगा?), उधर रति की नज़र मेरे काळा लुंड पर hi जा रही थी. पानी निकलने के बाद अब उसके मन में थोड़ा सा पछतावा आ रहा था अपने पति के बारे में सोचकर लेकिन तभी मैं उसके मुँह के पास अपना लुंड लेकर जाता हूँ और अपने लुंड को हिलने लगता हु..

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रति अपने दोनों हाथो से मेरे जांघो को अपने आप से दूर करने लगती hai..Jise देख कर मैं, अरे मेरी जान चूसने के लिए नहीं ये देख कैसे मेरा लुंड तरस रहा है तेरी फूली हुई छूट में जाने लिए ये देख रति, का ध्यान अब मेरे काळा बड़े लुंड पर जाता है जो माय बड़ी hi तेज से हिला रहा था और मेरे लुंड का गुलाबी सूपड़ा चमक रहा था इस वक़्त साथ hi साथ मेरी टेनिस बॉल्स जैसी गुठलिया हिल रही थी इधर उधर वही लुंड और गोटियों के आस पास काली सफ़ेद झांटें की गुच्छे भरी पड़ी थी रति की नज़र अब एक तुक मेरे काळा अज़गर जैसे लुंड पर थी और मन hi मन रति ("हे भगवन इतना गन्दा बार्बुदर और भयानक लिंग किसी का कैसे हो सकता है, मेरे एक हाँथ जितना बड़ा लुंड उफ्फ्फ्फ़ और मोटा कितना है में बाजु जितनी? यह किसी औरत में कैसे इतना मोटा ुर लुम्बा घुस सकता है और घुसेगा भी तो उस औरत की बुर तो आठ फ़ायद के रख देगा ये मुस्टंडा लिंग?"),
 
Episode 7स, रति 1सत सेक्स विथ राधे,

इधर मैं अब पीछे होते हुए रति की दोनों टैंगो के बिच आ जाता हु और उसके पेअर दोनों हाथो से पकड़ कर रति की तरफ देखने लगता हु वो अभी भी अपने आप को संभल रही थी और रिक्वेस्ट कर रही थी की ये सब मत करो लेकिन माय उसको देखते हुए अपना मुसल लुंड को उसकी फूली हुई छूट की फैंको को फैला के मोहने पर रख कर हलके से रगड़ने लगता हु, अपनी छूट पर मेरा लुंड को फुला हुआ सूपड़ा महसूस करते hi रति अपने होंठ काटते हुए जीजू आपका बहुत मोटा और लुम्बा है प्लीज अंदर मत डालिये नहीं तो माय मर जाउंगी?. ये सुन के मेरे चेहरे पर अब शैतानी हसी थी और माय अब निचे देखते हुए अब धीरे से अपने लुंड का सूपड़ा उसकी छूट में दबाने लगता हु, मैं रति को देख रहा था की उसकी जंघे काँप रही थी मेरा कला लौड़ा अपनी छूट पर रगड़ता हुआ देख कर.. वो बस मेरे काळा

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लौड़े को देख रही थी जो कभी भी उसकी छूट को फाड़ते हुए अंदर जाने को तैयार था लेकिन मैं जल्दबाज़ी में नहीं था माय बस रति की फूली हुई छूट पर अपना लुंड अच्छे से रगड़ रगड़ कर उसको और ज्यादा गर्म करने में लगा हुआ था लेकिन रति की अब हालत ख़राब हो चुकी थी उसका दिमाग ठीक से.. काम नहीं कर रहा था वो अपनी आँखे बंद कर के बस अपनी गांड हलके से उठा रही थी, ताकि मेरा लुंड उसकी छूट में घुस सके वो हवस के नशे में थी उसे बस लुंड अंदर लेना था भले hi इस मुसल लुंड से उसकी छूट फैट जाये इस वक़्त और इधर माय उसकी हालत देख अपना लुंड और जोर से उसकी फूली हुई छूट की फैंको पर घिसने लगता हु. मैं, मेरी जान.. घुसा दू अपना लुंड?, ऐसा बोलकर मैं रति की छूट की दीवार पर ऊपर से लेकर निचे तक एक बार अच्छे से अपना लुंड को घिसता हु वही रति को कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था और वो मेरे लौड़े को पकड़ के

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रति मस्ती में अह्हह्ह्ह्ह... स्स्स्सह्ह्हह्ह... ऊफ्फ, रति को कोई होश नहीं था, वो बस अपने आँखे बंद किये अपनी छूट पर मेरा गरमा गरम लुंड महसूस किये जा रही थी साथ hi वो खुद अपने हांथो से मेरा गरम शाक्त लौड़े को पकड़ के खुद hi से अपने छूट सेहला रही थी, मैं भी अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था रति की संस्कारी छूट में अपना लुंड घुसाने के लिए और देर न करते हुए मैं अब जोर लगा के अपने मुसल लुंड का सूपड़ा उसकी फूली हुई छूट में दबाने लगता हु.. वही रति दर्द से कराहते हुए आअह्ह्ह्हह.. उम्म्म्म.. मेरा लुंड रति की छूट पर से फिसल कर ऊपर चला जाता है जिसकी वजह से रति और मैं एक दूसरे को देखते है और माय रति की सिसकारी सुनकर मुस्कुराते हुए मेरी जान तेरी छूट बहुत hi तित है ऐसा लग रहा है जैसे तेरी छूट अभी कुमारी हो मेरा सूपड़ा घुस hi नहीं रहा है अब क्या करू ये सुन के रति शर्म से

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दूसरी तरफ मु करके धीरे से जीजू आपका बहुत मोटा और लुम्बा है वो नहीं घुसेगा.. इधर कैसे नहीं घुसेगा और माय बिना वक्त गवाए अब अपने लुंड पर ढेर सारा मु से थूक निकल के मोठे सुपडे पे मलने लगता हु और फिर से उसकी छूट की फैंको को फैला के अपना 5 इंच मोटा सूपड़ा रख कर रगड़ने लगता हु.. रति कुछ नहीं बोलती ुर बस आहे भरने लगती hai..Mera कला लुम्बा मोटा लुंड जिसका सूपड़ा जो हद से ज्यादा मोटा था वह रति की गुलाबी छूट को चुम रहा था.. अब रति मुझे रोकने की हालत में बिलकुल नहीं थी, वह बस अपनी छूट पर मेरा कला कोबरा लुंड घिसता हुआ महसूस कर रही थी, इधर मैं, अब अपने काळा हब्शी लौड़े पर दबाव डालने लगता हु. इसे देखते हुए रति अपनी सांस रोके हुए इंतज़ार करने लगती है उस पल का लेकिन मैं दबाव डालकर अपना लुंड वापस पीछे कर लेता हु. रति कुछ नहीं बोलती और बस राह देखती रहती है,

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माय फिर से दबाव डालता हु पर अपना लुंड उसकी छूट में नहीं घुसता. रति पर टूओ जैसे ज़ुल्म हो रहा था अब. मुझे पता था की रति जरूर तड़प रही होगी लुँड्ड्ड अंदर लेने के लिए, लेकिन मैं रति कोऊ बिलकुल बेशर्म बनाना चाहता था. लेकिन रति अपने मुँह से कुछ बोल hi नहीं रही थी, इधर माय ऐसे hi अपना लुंड उस की छूट पर काफी देर तक घिसता रहता हु.. थोड़ी देर बाद मैं अपना कला मोटा लुंड फिर से उसकी फूली हुई छूट के फैंको के ऊपर रखता हु और उसकी छूट के क्लाइटोरिस को अपनी ऊँगली में पकड़ कर घिसने लगता हु. इस हमले से रति की आँखे नशीली हो जाती है और वो अब मेरी आँखों में देखने लगती है, उसकी आँखों में हवस साफ़ दिख रही थी, वो चाहती थी की अब उसकी छूट में मेरा लुंड जाए और वो अनजाने में अपनी कमर उठा के अपनी छूट मेरे लुंड पर दबाने लगती हु उसके ऐसा करने से मेरे
 
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