Teri tadap jaldi khatam nahi hogi - Page 10 - SexBaba
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Teri tadap jaldi khatam nahi hogi

पढ़ तो वह भी रहा है .. मगर एक होता है जो खुद तो कुछ कर नहीं पते है आवर दूसरे को बताते है ये नहीं करना चाहिए ..... ये उन्ही लोगों मैं से है

ये बोका तो खुद कुछ कर नहीं पाएंगे आवर करेगा उसे करने भी नहीं देंगे .... आवर ये लोग इतने बड़े चुटिया होते है की अपनी चेहरा भी नहीं दिखते है .... ये बोल भी रहा है तो दूसरा I'd बना कर

अबे रियल I'd से भी बोल सकता है ये चुटिया ... कोई बताओ उसे भाई
 
अपडेट ...... 82

 अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह Sssssssssssss माआआआआ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हूंणंन्न Hhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह आह्ह्हह्ह्ह्ह Ssssssssssss ओह्ह्ह नहीं बीटा Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

राखी देवी अचानक उठ कर बैठ जाती है राखी देवी की सांसे भी बहुत तेज़ी से चल रही होती है राखी देवी की चेहरे पसीने मैं भीग चुकी होती है

राखी देवी थोड़ी दरी हुई भी होती है

हे भगवन ये कैसा सपना न मम मेरे दिमाग मैं ये कैसे आया ....

राखी देवी फिर से सपने को याद करती हुई मन मैं बोलती है

तभी राखी को अपनी छूट मैं गिला सा महसूस होती है .... राखी देवी पेंटी पर हाथ रखती है तो वह भींगी हुई अहसास होती है आवर राखी देवी की ऊँगली उनकी छूट की पानी भी लग जाती है

हे भगवन नाहीईईई

राखी देवी हैरान परेशां भी हो जाती है राखी देवी को खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा होता है ... ये सोच कर के आखिर उनके दिमाग मैं ये आया भी कैसे .... मैं भला अपने बेटे के साथ सेक्स कैसे कर सकती हुईं

राखी देवी अपनी सर पकड़ लेती है राखी देवी की आँखों मैं आंसू की बुन्देय भी छलक जाती है

मैं ये कैसे सोच सकती हुईं .... म म मेरी इस सोच के बारे मैं अर्जुन को पता लगा तो ... वह मुझसे फिर से नफरत करने लगेगा ....

नाहीइ म ममम मैं अर्जुन बीटा से अब दूर नहीं रह सकती .... म मम मैं अर्जुन के पास अभी जाउंगी

राखी देवी ये सोच कर आवर भी दुखी हो जाती है वह थोड़ी पागल जैसी भी हरकत करने लगती है

राखी देवी जल्दी से बाथरूम मैं चली जाती है

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अर्जुन की नींद खुलती है फ़ोन पर रिंग होने से

ओह्ह्ह No

अर्जुन फ़ोन पर नंबर देख कर बोलता है ...

बाबू क्या हुआ ... चौंक क्यू रहा है

अर्जुन की आवाज़ सुन कर गीता पूछती है

डीई वह आज सहर लेकर जाना था ... रजनी मेडम को उनका hi फ़ोन आ रहा है ...

अर्जुन बोलते हुआ बीएड से उठ जाता है

वही गीता अर्जुन को देख कर मुस्कुरा देती है

लगता है अर्जुन रजनी आंटी कीईई .... गीता सोच कर मुस्कुरा देती है

गुड मॉर्निंग माँ .... कॉफ़ी बन गयी है क्या .....

अर्जुन किचेन मैं आकर आँचल को गुड मॉर्निंग बोलते हुआ पूछता है

गुड मॉर्निंग बीटा .... हां बन hi गयी है .... इतनी सुबह सुबह कहा जा रहा है .... आँचल पूछती है

वह माँ सहर जा रहा हुईं ..... रजनी आंटी के साथ उनको शॉपिंग करना है ... अर्जुन बोलता है

ठीक है बाइक अच्छे से चलने ... आवर घर भी चले जाना ... आँचल बोलती

अर्जुन कॉफ़ी पीकर घर से चला जाता है

अर्जुन जब अपने हवेली से निकल कर बहार आता है तो देखता है आदि की माँ अपनी गेट पर कड़ी होती है

लेकिन अर्जुन की नज़र आदि की माँ की जिस्म को घूरने लगती है

अर्जुन आदि की माँ को ऊपर से निचे तक देख रहा होता है आवर अर्जुन की नज़र आदि की माँ की चुकी के पास रुक जाती है

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आदि की माँ साड़ी मैं बहुत hi खूबसूरत लग रही होती है

आदि की माँ आज अलग hi रूप मैं नज़र आ रही होती है

जो औरत पहले अपनी बड़ी बड़ी चुकी को कपडे मैं छिपा कर रखती थी वह आज सिर्फ ब्लाउज मैं पहाड़ की तरफ कड़ी नज़र आ रही होती है

Hello हीरो घूरना हो गया है तो क्या हम चले ... आदि की माँ थोड़ी मुस्कुराती हुई बोलती है

जी जीई आंटी ...... मैं अभी बाइक लेकर आया ... अर्जुन हड़बड़ा कर बोलता है आवर फिर से अपनी हवेली मैं चला जाता है

वही आदि की माँ घर से निकलती हुई अपनी पल्लू को ठीक से रख लेती है ताकि उनकी बड़ी बड़ी चुकी पर आवर किसी की नज़र न पड़े

अर्जुन जल्द hi बाइक लेकर आता है तब आदि की माँ बाइक पर बैठ जाती है

आंटी चले .... अर्जुन बोलता है

हां अर्जुन चलो ... बाइक आराम से चलने ....आदि की माँ बोलती है जो अर्जुन हां बोलता है

अर्जुन बाइक स्टार्ट कर देता है

अर्जुन बाइक गाओं मैं बहुत सी धीरे चला रहा होता है मगर जैसे hi अर्जुन पक्के सड़क पर आता है बाइक थोड़ा तेज़्ज़ कर देता है

अह्ह्ह्ह

अचानक बाइक थोड़ी सी उड़ने पर आदि की माँ की आठ निकल जाती है आवर आदि की माँ अर्जुन को मज़बूती से पकड़ लेती है

अर्जुन बीटा थोड़ा धीरे चलो न ... आदि की माँ थोड़ी दरी हुई अर्जुन के कान मैं बोलती है

वही अर्जुन बस हां मैं सर हिलता है आवर बाइक फिर से थोड़ा स्लो कर देता है मगर अर्जुन का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा होता है आवर अर्जुन का लैंड खड़ा हो गया होता है

क्यू के आदि की माँ अभी भी अर्जुन को पकड़ी हुई होती है जिससे आदि की माँ की चुकी अर्जुन के पीठ मैं दबी हुई होती है आवर अर्जुन आदि की माँ की चुकी का अहसास पा चूका होता है

ओह्ह गॉड आंटी की चुकी तो बिलकुल जवान लड़की की तरह है ... गीता डीई की चुकी से थोड़ी hi टाइट काम है लगता है आंटी की चुकी बहुत काम hi मसला होगा ौंकल ने .... अर्जुन मन मैं सोचता है

वही आदि की माँ थोड़ी दरी हुई होती है जो अर्जुन को पूरी मज़बूती से पकड़ी हुई होती है

अर्जुन बाइक थोड़ा स्लो hi चलते हुआ मार्किट पहुँच जाता है ... आवर एक कॉफ़ी की दोकान पर बाइक रोक देता है आवर बाइक से उतर कर दोकान पर चला जाता है आवर एक पानी का बोत लेकर आदि की माँ को देता है

आंटी क्या लेना है आप को .... अर्जुन बोतल देते हुआ पूछता है

अर्जुन बस कपडे लेना है आवर कुछ नहीं ..... तुम एहि रहते थे न पहले ..... कोई अच्छी सी दोकान पर ले चलो .... आदि की माँ कहती है

आंटी बस कपडे लेना है तो मेरे साथ चलिए मैं काम पैसे मैं अच्छे कपडे दे दूंगा .... अर्जुन कहता है

वही अर्जुन की बात सुन कर आदि की माँ अर्जुन को हैरानी से देखने लगती है ... जैसे पूछ रही हो क्या मतलब है

ओह्ह सॉरी आंटी बताना भूल गया .... यह मेरा भी अपना दोकान है .. मतलब ममी माँ की है ... अर्जुन बोलता है

ओह अच्छा ... ठीक है अर्जुन फिर वही चलते है .... वैसे अर्जुन बीटा दोकान पर कौन रहता है ... आदि की माँ कुछ सोचती हुई पूछती है

आंटी दोकान पर नीता आंटी आवर सीतल आंटी रहती है आवर नानी भी ..... अर्जुन बोलता है

हां ठीक है चलो ... आदि की माँ बाइक पर बैठती हुई कहती है ... तो अर्जुन बाइक स्टार्ट कर देता है

नीता आंटी नमस्ते .... आप जा रही है ... बाइक घर के सामने रोकते हुआ अर्जुन बोलता है

अर्जुन तू ... खुश रह बीटा .... कितने दिन बाद आया ... वह जाकर यह का रास्ता तो भूल hi गया था ... ये कौन है .... नीता पूछती है

आंटी ये ... मेरी टीचर है रजनी आंटी ...... अर्जुन बोलता है तो नीता आदि की माँ को नमस्ते करती है ...

अर्जुन बीटा ज़रा काम है घर पर इस लिए जा रही हुईं .... दोपहर के बाद आती हुईं ....ये के पकड़ नानी को दे देना .... नीता अर्जुन को के देती हुई बोलती है

अर्जुन के ले लेता है ... आंटी आ जाइये अर्जुन बाइक खड़ा कर के घर मैं जाते हुआ कहता है

आदि की माँ भी अर्जुन के पीछे घर मैं चली जाती है

अर्जुन को देख कर अर्जुन की दोनों नानी बहुत खुश होती है आवर अर्जुन को प्यार देती है जिसे देख कर आदि की माँ भी बहुत खुश होती है

अर्जुन कुछ देर अपनी नानी के साथ रहता है आवर फिर दोकान खोलने चला जाता है

अर्जुन को आप सब बहुत प्यार करती है माँ जी .... अर्जुन के जाने के बाद आदि की माँ पूछती है

हां बेटी .... अर्जुन hi एक लड़का है हम्हारे परिवार मैं ... वर्ण हर किसी की बेटी hi है ..... अर्जुन की नानी कहती है

हर किसी की मैं समझी नहीं माँ जी .... अर्जुन का आवर भी परिवार है ....

हां बेटी अर्जुन का परिवार बहुत बड़ा है ....

नानी दोकान खोल दिया है ... आप आंटी को कपडे दिखा दीजिये .... मैं आकर बिल बना दूंगा ... वैसे मैं मां कहा है ... अर्जुन पूछता है

तेरा मम बैंक गया है ... नानी कहती है आवर उठ कर आदि की माँ के साथ दोकान पर चली जाती है

वही अर्जुन आँचल की माँ के साथ बातें करने लगता है

अर्जुन अर्जुन ...... थोड़ी देर के बाद अर्जुन की नानी पुकारने लगती है तो अर्जुन उठ कर दोकान पर चला जाता है

क्या हुआ नैन ... अर्जुन पूछता है

ज़रा नीता को फ़ोन लगा कर पूछ ब्रा पेंटी का डब्बा कहा है .... अर्जुन की नानी कहती है

अर्जुन की नानी की बात सुन कर आदि की माँ दूसरी तरफ देखने लगती है

नानी वह सामने तो दिख रही है ...

अर्जुन ब्रा पेंटी का डब्बा देख कर बोलता है ...

वह बिटिया के साइज का नहीं है रे .... अर्जुन की नानी कहती है

क्या ...... अर्जुन के मुंह से निकल जाता है मगर उसकी नानी नहीं सुन पति है मगर अर्जुन का मुंह आदि की माँ ज़रूर देख लेती है जो आदि की माँ शर्मा कर निचे देखने लगती है

वही अर्जुन तो थोड़ा हैरान हो गया होता है क्यू के वह ब्रा पेंटी 36 ... 38 की होती है

अर्जुन आदि की माँ को एक नज़र देख कर नीता आंटी को फ़ोन लगा देता है

Hello आंटी वह बड़ा वाला ब्रा पेंटी कहा है .... अर्जुन पूछता है

ठीक है आंटी ..... अर्जुन बोल कर फ़ोन रख देता है

नानी वह वह ऊपर है .... अर्जुन अपनी नानी से कहता है आवर जाने लगता है ...

अर्जुन कहा जा रहा है ... उतर कर दिखा दे न ... मुझसे वह उतरेगा नहीं .... अर्जुन की नानी कहती है

वही अर्जुन की नानी की बात सुन कर अर्जुन आवर आदि की माँ दोनों hi हैरान हो जाती है

अर्जुन आदि की माँ की तरफ देखता है तो पता है आदि की माँ सरम के मरे निचे देख रही होती है आवर अपनी हाथ एक दूसरे से दबा रही होती है

अर्जुन ब्रा पेंटी का डब्बा उतर लेता है .... आंटी कौन सा साइज चाहिए .....आंटी सरमते हुआ पूछता है

वही की माँ तो सरम से पानी पानी हो जाती है आदि की माँ की माथे पर पसीने भी आने लगती है

आदि की माँ इतने उम्र होने के बाद कभी भी किसी लड़के को अपनी साइज नहीं बताई हुई होती है वह जब भी ब्रा पेंटी लेने जाती थी वह लेडीज के पास hi जाती थी आवर आज भी सायद नीता आंटी की नाम सुन कर hi अर्जुन के साथ आई थी आवर इस लिए hi आदि की माँ अर्जुन से पूछ चुकी होती है दोकान पर कौन है

लेकिन अब आदि की माँ को बहुत सरम आ रही होती है ये सोच कर आज वह अपनी जिस्म की साइज किसी अपने बेटे से भी छोटे लड़के को बताने वाली है

आदि को समझ नहीं आ रही होती है वह अपनी साइज अर्जुन को बताये कैसे

म म साइज 40 .... ल साइज 38

वाओ

आदि की माँ सरमाती हुई बहुत hi धीरे से बोलती है वही आदि की माँ की साइज सुन कर अर्जुन के मुंह वाओ से निकल जाता है

जिसे सुन कर आदि की माँ तो सरम से पानी पानी हो होती है आवर वह अपनी पल्लू को साइन पर रख कर पल्लू दबा लेती है

हिनक हिनक

आदि की माँ अचानक हिचकी लेने लगती है

आंटी पानी लीजिये

आदि माँ को हिचकी लेते सुन कर अर्जुन पानी की बोतल आदि की माँ को दे देता है वही आदि की माँ कनपटी हाथों से पानी की बोतल लेकर एक साँस मैं पूरी बोतल पि जाती है

आदि की माँ की हालत देख कर अर्जुन को अपनी बातों पर बुरा लगता है इस लिए अर्जुन आवर कुछ नहीं बोलता है आवर ब्रा पेंटी निकल कर रख देता है .... आवर नानी से पूछ कर बिल बना देता है

अर्जुन लगता है बारिश होने वाली है

देख छत पर कपडे राखी है लेकर आ .... अर्जुन की नानी कहती है

तो अर्जुन दोकान से चला जाता है

बारिश कुछ हो देर मैं ज़ोर ज़ोर से होने लगती है ....

हे भगवन अब घर कैसे जाउंगी बारिश इतनी तेज़्ज़ हो रही है

आदि की माँ मन मैं सोचती है

वही अर्जुन कपडे लेकर रूम मैं रखता है तभी अर्जुन के नज़र एक कपडे पर जाता है आवर अर्जुन उस कपडे को उठा लेता है

आवर अर्जुन का एक हाथ अपने लैंड पर चला जाता है जो अर्जुन का लैंड आदि की माँ की साइज शूम कर hi तनतना गया होता है

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अबे नेल्ले तू पहले आकर बात तो कर ... गांडू की तरह आता है आवर गांड मैं मॉल लेकर भाग जाता है :lol1:

अबे नाले कौन चुदकड़ बाबा .. अबे ये बोल वह मैं था .... आवर तू इतना बड़ा चुटिया है बोलता है मैंने मेरा मुन्ना स्टोरी कॉपी किया है ..... तो उससे जाकर बोल न नाले हिम्मत है तो चुटिया

वह नहीं चाहता तू उसकी स्टोरी पढ़ कर हिलाये :लोटपोट:
 
अबे मुझे पता है सलवार न सही ... घूँघट दाल कर रियल I'd से कमेंट पढ़ेगा नाले :lol1:

मुझे ये बात पता hi नहीं तू कब chut.kad बाबा बन आई थी :lol1:phir मैं बन कैसे करवा सकता हुईं नल्ली :लोटपोट:

अबे नल्ली कितनी बार बोल चूका हुईं ... जिसका स्टोरी कॉपी कर रहा हुईं ... उससे जाकर बोल तो सही ....

तू इतना बड़ा गांडू है की :रोफ्लोल: ... वह जा भी नहीं रहा है
 
अपडेट ...... 83

अर्जुन के हाथ मैं अभी एक पेंटी होती है जिसकी साइज भी आदि की माँ की जितनी होती

अर्जुन पेंटी को हांथों मैं लेकर उसे देखने लगता है

इतनी बड़ी पेंटी किसकी है नानी की तो नहीं है अह्ह्ह्हह कितनी नरम है अह्हह्ह्ह्ह ये पेंटी सायद ममी माँ की माँ होगी

आह्ह्ह्हह्ह .... नानी की भी इतनी बड़ी गांड है ... मैंने कभी उनकी गांड पर ध्यान नहीं दिया होगा

अर्जुन उस पेंटी को अपने Jen's के अंदर रख देता है आवर अपनी आँखें बंद कर लेता है

सेल क्या कर रहा है ... ये पेंटी उस औरत की है जिसे तू सबसे जयादा प्यार करता तेरी माँ की माँ की है

अर्जुन को जैसे hi ये अहसास होता है अर्जुन पेंटी को Jen's से निकल देता है

अर्जुन सरे कपडे बीएड पर रख कर रूम से निकल जाता है तो देखता है बारिश बहुत तेज़ी से हो रही होती है

अर्जुन दोकान पर जाता है तो देखता बारिश के साथ हवा बहाने से पानी उसके दोकान मैं आ रही है अर्जुन जल्दी जल्दी कपडे अंदर रखने लगता है

कपडे अंदर रखने मैं आदि की माँ भी अर्जुन की मदद करती है जिससे अर्जुन के साथ आदि की माँ भी भींग जाती है अर्जुन की नानी तब तक रूम मैं जा चुकी होती है

अर्जुन जल्दी से दोकान बंद करता है आवर फिर अर्जुन आदि की माँ के साथ घर के अंदर आने लगता है

आदि की माँ दोकान से निकल कर चल रही होती है तभी पीछे चल रहा अर्जुन की नज़र आदि की माँ की भींगी हुई जिस्म पर नज़र जाती है आवर अर्जुन का लैंड पहले से खड़ा आवर भी खड़ा होने लगता है


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आदि की माँ की साड़ी भीगने से उनकी साड़ी गांड से चिपक गयी होती है जिससे उनकी गांड की छाप दिख रही होती है

आदि की माँ जैसे hi घर के गेट पर जाती है मुद कर देखती है तो अर्जुन अभी दोकान के गेट पर खड़ा है आवर पानी मैं भींग रहा है मगर उसकी नज़र उनकी ऊपर hi है

अर्जुन भागों भींग जाओगे ... आदि की माँ चिल्ला कर बोलती है तब अर्जुन होश मैं आता है आवर घर की तरफ भागता है

अह्ह्ह्हह्हह

अर्जुन भागता हुआ आता है आवर बिना आगे देख घर मैं जाने को होता है तभी आदि की माँ से टकरा जाता है जो अर्जुन खुद को बचते बचते आदि की माँ की कमर पकड़ लेता है आवर दरवाज़े मैं चिपक जाता है आदि की माँ को पकडे हुआ जिससे आदि की माँ आठ भर चुकी होती है


अर्जुन आवर आदि की माँ दरवाज़े से चिपकी हुए होते है आवर अर्जुन का हाथ अभी भी आदि की माँ की कमर पर होती है

दोनों पानी मैं भींगे हुआ होते है मगर दोनों की जिस्म मैं गर्म सी महसूस होने लगती है

अर्जुन के तो माथे पर पसीने भी आने लगता है क्यू की अर्जुन का साइन आदि की माँ की बड़ी बड़ी चुकी मैं चिपकी हुई होती है आवर अर्जुन का लैंड आदि की माँ की छूट के ऊपर चिकनी नेवल की थोड़ी निचे होती है जिससे अर्जुन का लैंड हार्ड होकर खड़ा होता है


अर्जुन को अपनी जिस्म मैं बहुत गर्मी महसूस होने लगती है अर्जुन का मुंह आदि की माँ की गर्दन पर चला गया होता है

आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

क्या खुसबू है ..... आंटी की जिस्म की अर्जुन आदि की माँ की गर्दन को सूंघते हुआ मन मैं सोचता है

Huinnnnnnnnnnnn

ओह्ह सॉरी आंटी

आदि की माँ की कसमसाने की आवाज़ सुन कर अर्जुन आदि की माँ से अलग हो जाता है

वही आदि की माँ दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा होता है जिससे आदि की माँ की चुकी ऊपर निचे हो रही होती है आदि की माँ सरम से निचे देख रही होती है तभी आदि की माँ की नज़र अर्जुन के लैंड पर जाती है जो Jen's मैं होने के बाद भी भींगने की वजह से अर्जुन का लैंड पता चल रहा होता है

ओह्ह गॉड वह क्या है ..... आदि की माँ अर्जुन के लैंड को घूरती हुई मन मैं सोचती है आवर अपनी पेअर पीछे कर देती है ताकि अर्जुन से आवर दूर हो सके

वही अर्जुन की नज़र जैसे hi आदि की माँ की नज़र की पीछा करता है अर्जुन अपने लैंड पर हाथ रख देता है ताकि आदि की माँ देख न ले मगर अर्जुन को क्या पता उसका सांप आदि की माँ देख चुकी है


आ आ आंटी .... आ आप घर मैं चलिए

मम मम मैं माँ के कपडे देता हुईं आप भींग चुकी है

अर्जुन थोड़ा हकलाते हुआ बोलता है

वही आदि की माँ बिना कुछ बोले अर्जुन के इसारे किये हुआ रूम मैं चली जाती है आवर अर्जुन भी पीछे चला जाता है .... अर्जुन की नज़र अभी भी आदि की माँ की गांड पर होती है

वाओ आंटी की गांड आह्ह्हह्ह्ह्ह अर्जुन मन मैं एक आह भरता है

आंटी ये लीजिये कपडे माँ की है ....

आंटी माँ की वह कहा है मुझे नहीं पता

अर्जुन आदि की माँ की चुकी को घूरते हुआ बोलता है

अर्जुन बस उनकी कपडे दो ... आदि की माँ समझ जाती है इस लिए सरमाती हुई बस कपडे मानती है

अर्जुन आँचल की बस साड़ी ब्लाउज आवर पेटीकोट निकल कर दे देता है

वही आदि की माँ कपडे लेकर बिना अर्जुन को देखे बाथरूम मैं चली जाती है

वही अर्जुन अपने रूम मैं चला जाता है

आदि की माँ बाथरूम मैं आकर कुछ देर तक बिलकुल संत रहती है

व व वहहहह क्या ... किसी का इतना बड़ा भी होता है .... मैंने तो पढ़ा था यह के लोगों का जयादा से जयादा 6 से 7 इंच का होता है मगर अर्जुन का

आदि की माँ की नज़र के आगे अर्जुन का लैंड दिखने लगता है आवर आदि की माँ की हाथ अपने आप छूट पर चली जाती है

आदि की माँ एक एक कपडे निकल कर बिलकुल नंगी हो जाती है आवर नहाने लगती है

आदि की माँ गदराई हुई जिस्म बिलकुल कातिलाना लग रही होती है .... पहाड़ की तरह कड़ी आदि की माँ की दो अनमोल चुकी जो चुकी की निप्पल थोड़ी बहार निकली हुई होती है आवर वह भी बिलकुल टाइट होती है

Ahhhhhhhhhhhhhh

आदि की माँ की हाथ नहाते हुए जैसे hi चुकी की निप्पल पर जाती है आदि की माँ की सिसकियाँ निकल जाती है

आदि की माँ नहाती हुई छूट भी कई बार रगड़ देती है जो उनकी हर बार सिसकियाँ निकल रही होती है मगर आदि की माँ की छूट से पानी नहीं निकलती है

आदि की माँ नाहा कर अपनी जिस्म टावल से पूछने लगती है

आदि की माँ पहले पेटीकोट पहनती है आवर फिर बलाउज पहनती है

हे भगवन ये बलाउज तो छोटी है निप्पल पता चल रही है अर्जुन को यकीनन दिख जायेगा

आदि की माँ अपनी निकली हुई नोख की तरह निप्पल को देख कर सोचती है आवर फिर शर्मा भी जाती है ... मगर आवर कोई उपाय नहीं होती है तो आदि की माँ फिर साड़ी को पहनने लगती है

आदि की माँ रजनी कपडे पहन कर रूम से निकलती है तो देखती है अर्जुन हॉल मैं बैठ कर कॉफ़ी पि रहा होता है तो आदि की माँ भी अपनी पल्लू को साइन पर रखती है आवर पल्लू को पकड़ी हुई hi अर्जुन के सामने बैठ जाती है मगर आदि की माँ अर्जुन की तरफ देखती नहीं है

आंटी कॉफ़ी पि लीजिये ... हम थोड़ी देर मैं निकलते है बारिश अभी रुकी हुई है .... अर्जुन बोलता है तो आदि की माँ कॉफ़ी पिने लगती है

मैं तो बोल रही हुईं सुबह चले जाना बारिश लग नहीं रहा रुकेगी ... लेकिन तू रुकेगा नहीं ..... ये थैला भी लेकर जाना .. अर्जुन की नानी एक थैला अर्जुन के पास रखती हुई बोलती है

नानी ये सब क्या देती रहती है हर बार .... अर्जुन मुंह बनाते हुआ बोलता है

ये गुड़िया आवर गीता के लिए है ... मेरी बछिया सहर बहुत काम hi आती है बस लेकर जाना ... अर्जुन की नानी थोड़ी दुखी सवार मैं बोलती है

ठीक है नानी लेकर जाऊंगा ... अब आप दुखी मत होइए .... अर्जुन थोड़ा चिढ़ते हुआ बोलता है

आदि की माँ कॉफ़ी पीती है आवर फिर उठ कर फिर से आँचल की रूम मैं चली जाती है आवर अपनी भींगी हुई कपडे एक थैला मैं दाल देती है

बारिश अभी रुका हुआ होता है तो अर्जुन आवर आदि की माँ घर के लिए चल देता है

इस बार आदि की माँ कपडे की थैली बिच मैं रख कर बैठी हुई होती है जिससे आदि की माँ की जिस्म अर्जुन के जिस्म मैं टाच नहीं हुई होती है

अर्जुन अभी सहर से निकल थोड़ी hi दूर जाता है के बारिश फिर से सुरु हो जाती है


ये भगवन जी भी न ... बिना मौसम बरसात होने लगते है ... अर्जुन मन मैं सोचता है

बारिश धीरे धीरे तेज़ होने लगती है आवर हवा भी तेज़्ज़ चलने लगती है

अर्जुन बीटा मौसम ठीक नहीं है बाइक रोक दो खतरा हो सकता है

आदि की माँ डर्टी हुई बोलती है ...

आंटी मैं भी एहि सोच रहा हुईं कोई छिपाने की जगह दिखे तो मैं बाइक रोकता हुईं .... शाम भी होने वाली है पता नहीं रात तक घर
पहुंचेंगे भी या नहीं ...... अर्जुन बोलता है

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कोमल अपनी खिड़की के पास कड़ी होकर बहार की तरफ देख रही होती है आवर बारिश की बुँदे हवा के झोके से कोमल के जिस्म पर कभी कभी आ रही होती है जिससे कोमल की चेहरे पर मुस्कान आ जाती है कोमल मुस्कुराती हुई अपनी जिस्म को पकड़ लेती है

कितना प्यार मौसम है आज ... कस इस मौसम मैं .... मैं किसी की बाँहों मैं होती .... आह्ह्ह्हह कितना मज़ा आता

होई दिया मैं क्या सोच रही हुईं

कोमल तू सही सोच रही है .. तुझे अब किसी मर्द की ज़रूरत है ... देख नहीं रही तेरी जिस्म कितनी गदरा रही है ाएसि जिस्म किस काम की जब कोई इसे मसले hi न

मेरी मान तो अब तुझे कॉलेज मैं किसी को अपना बॉयफ्रेंड बना लेनी चाहिए ....


नहीं ... नहीं मैं किसी ाएरे गैर को अपना बॉयफ्रेंड नहीं बनाने वाली ... आज कल के लड़के बस लड़की की जिस्म की प्यासे रहते ... प्यार तो बस हवस के लिए करते है .... वैसे भी कॉलेज मैं मुझे कोई आएसा लड़का मिला hi नहीं जो मुझे पसंद आया हो

भगवन जी ने जब मुझे इतनी खूबसूरत बनाया है तो उन्होंने मेरे लिए मेरा राजकुमार भी भी भेजा होगा जिसे देख कर मेरे दिल मैं हलचल सी मच जाये ... बस वही मेरे जिस्म को छू सकता है

हूंणनननननन कहा होगा मेरा राजकुमार ..... कोमल खुद की जिस्म को मज़बूती से पकड़ कर गर्म शैशे छोड़ती हुई बोलती है आवर फिर आकर बीएड पर गिर जाती है

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राखी देवी भी इस वक़्त हवेली की खिड़की के पास कड़ी होती है आवर उनकी भी जिस्म पर पानी की बुँदे हवा चलने से उनके ऊपर आ रही होती है आवर राखी देवी भी बहार की तरफ देख रही होती है

कितना प्यारा मौसम है राखी देवी बोलती हुई कुछ सोचने लगती है

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

छोड़िये मुझे .... बारिश हुई नहीं भागे भागे आ जाते है

राखी देवी थोड़ी मुस्कुराती हुई बोलती है ...

क्या करूँ जानेमन जब बारिश होती है मेरे जिस्म मैं आग लग जाती है इस लिए पानी के पास आ जाता हुईं ... ताकि मुझे जयादा जलना न पड़े ... राखी देवी का पति कहता है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Sssssssssssss

मैं पानी थोड़ी हुईं .... मैं भी तो आग हुईं अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह देखिये आप से जयादा मेरी जिस्म जल रही है

Ahhhhhhhhhhhhhhh ..... राखी देवी सिसकियाँ लेती हुई बोलती है

ओह्ह्ह जानेमन फिर तो आग से आग मिल जाने दो

Ahhhhhhhhhhhh


राखी देवी का पति बोल कर राखी देवी की भरी जवानी को मसलने लगता है आवर राखी देवी सिसकियाँ लेने लगती है

sunnnnnnnnnnnnnnnnnnnnn Ahhhhhhhhhhhhhhh

तेज़ हवा चलने से राखी देवी यादों से बहार आती है आवर अपनी जिस्म को मसल देती है


कास आप आज भी मेरे पास होते ....... आप मुझे क्यू छोड़ कर चले गए

मैं जब भी बारिश होते हुआ देखती हुईं ... मुझे आप की वह प्यार भरा दिन याद आ जाता है

आप बारिश मैं मुझे छोड़ते नहीं थे

बारिश होते hi आप भागे भागे मेरे पास आ जाते थे

कितना प्यारा दिन था वह ... राखी देवी मन मैं सोचती है आवर राखी देवी की आँखें भर आती है

राखी देवी अपने पति को याद करती हुई बीएड पर लेट जाती है आवर फिर सोचने लगती है

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बारिश काफी देर तक अभी भी रुकी हुई नहीं होती है चरों तरफ अँधेरे भी हो गयी होती है

वही सहर से थोड़ी दूर एक टूटी हुई घर मैं एक औरत लेती हुई रो रही होती है उसके ऊपर एक लड़के लेता हुआ होता है आवर उस औरत की साड़ी थोड़ी दूर पड़ी होती है वह औरत सिर्फ पेटीकोट बलाउज मैं होती है

वह लड़का उस औरत की चुकी ज़ोर ज़ोर से दबा रहा होता है

वह औरत रोटी हुई लड़के को दूर कर रही होती है मगर वह लड़का औरत की रोने की आवाज़ न सुन कर उस औरत की चुकी को मसल रहा होता है

वह लड़का भी नीचे आता है आवर उस औरत की पेटीकोट ऊपर की तरफ कर के औरत की छूट मैं मुंह लगा देता है


Ahhhhhhhhhh नहीं प्लीज रुक जा अह्हह्ह्ह्ह नहीं ओह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह sssssssssssss hhhhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

आवर उस औरत की चीख तेज़्ज़ हो रही बारिश मैं गूंज पड़ती है

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अपडेट ......84

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa बस

उस लड़के की चीख भी उस उस घर मैं गूंज पड़ती है वह लड़का उस औरत से थोड़ी दूर हो गया होता है आवर अपनी पेट पकड़ कर दर्द मैं चीख रहा होता है

वही वह औरत पास मैं कड़ी दूसरी औरत से लिपट चुकी होती है वह दूसरी औरत भी रोटी हुई औरत को साइन से लगा लेती है

रो मत बेटी अब तुमेह वह कुछ नहीं करेगा ... वह औरत रोटी हुई औरत को बाँहों मैं भर्ती हुई बोलती है

वही दूसरा लड़का उस लड़के को बहुत मरता है

सेल कुत्ते मैं तेरी जान ले लूंगा ...

अर्जुन बीटा नहीं वह मार जायेगा

आदि की माँ चीख पड़ती है

वही अर्जुन बड़ा सा पथल उस लड़के के सर पर मरने के उठा चूका होता है मगर आदि की माँ की आवाज़ सुन कर रुक जाता है

वही मक्के का फायदा उठा कर वह लड़का दर्द मैं चीखते हुआ वह से भाग जाता है

अर्जुन साड़ी उठा कर उस औरत के ऊपर दाल देता है

आदि की माँ उस औरत साइन से लगाए चुप करवा रही होती है वही वह औरत आदि की माँ को मज़बूती से पकड़ी हुई बस रो रही होती है

उस औरत को साइन से लगाए आदि की माँ को बहुत अच्छा लग रही होती है जैसे उस औरत से आदि की माँ की कोई अपना सा रिस्ता हो

वह औरत काफी देर रोने के बाद अचानक आदि की माँ की बाँहों मैं संत हो जाती है

बेटी बेटी तुम ठीक हो ... लड़की की चुप होने से आदि की माँ की दिल मैं बेचैनी सी होती है जो आदि की माँ लड़की को बाँहों से अलग कर के चेहरा देखती है तो वह बेहोश हो चुकी होती है

अर्जुन बीटा ये बेहोश हो गयी है हमेह हॉस्पिटल जाना होगा ... आदि की माँ दुखी सवार मैं कहती है

आंटी पास के गाओं मैं एक हॉस्पिटल है हम वह चलते है ... अर्जुन बोलता है

आदि की माँ उस औरत को उठाने लगती है तो अर्जुन भी मदद करता है आवर बाइक पर बैठा कर वह गाओं की तरफ चल पड़ता है बारिश भी थम चुकी होती है तो वह अर्जुन बाइक थोड़ा तेज़्ज़ चलता है आवर जल्द hi हॉस्पिटल पहुँच जाता है

हॉस्पिटल जाते hi औरत को भर्ती कर देता है

डॉ वह कैसी है .. क्या हुआ है उसे

डॉ के आते hi आदि की माँ पूछती है

आप कैसी माँ है जो अपनी बेटी का ख्याल नहीं रखती है .... खैर घबराने की कोई बात नहीं है वह भूख की वजह से बेहोश हो गयी है ..... मेरे ख्याल से वह कई दिन से खाना नहीं खाई है

आप को अब से उसका अच्छे से ख्याल रखना होगा वह बहुत कमज़ोर हो गयी है

डॉ बोलता है ... वही डॉ की बात सुन कर आदि की माँ दुखी आवर खुश दोनों hi होती है दुखी इस बात से होती है के ..... वह औरत कई दिन से भिखी है .... आवर ख़ुशी इस बार से होती है के डॉ ने उस औरत को आदि की माँ की बेटी बोलै होता है जिससे सुन कर आदि की माँ मन hi मन बहुत hi ख़ुशी होती है

कक्क क्या मैं अपनी बेटी से मिल सकती हुईं ... आदि की माँ हिचकती हुई पूछती है तो डॉ मिलने को बोल देता है

वही अर्जुन आवर आदि की माँ दोनों उस औरत से मिलने रूम मैं चले जाते है

आदि की माँ रूम मैं जाकर देखती है तो वह औरत ऊपर की तरफ देख रही है उस औरत की आँखों से आंसू निकल रहे है

वह औरत बहुत hi खूबसूरत होती है अर्जुन तो बस उस औरत की चेहरे को hi देख रहा होता है .....

बिलकुल मूरत जैसी हो ..... क्या नाम है .... आप आदि की माँ उस औरत की चेहरे पर हाथ फेरती हुई पूछती है

चांदनी .... वह औरत बहुत hi मशोमियत से बोलती है

बिलकुल चाँद की तरह hi खूबसूरत हो बेटी ुंआआआ ... आदि माँ बोलती हुई औरत की माथे को चुम लेती है

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मा

अंजलि सोइ हुई अचानक hi माँ पुकारती हुए उठ कर बैठ जाती है उसकी दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रही होती है

अंजलि कुछ देर तक अपनी तेज़्ज़ हुई धड़कन को संत करती है मगर फिर भी उसकी दिल संत नहीं होती है तो वह उठ कर आँचल की रूम की तरफ चली जाती है मगर आँचल उस वक़्त रूम मैं नहीं होती है

माँ रूम नहीं है कहा चली गयी अंजलि मन मैं सोचती है तभी उसे हॉल मैं आँचल बैठी हुई नज़र आती है तो अंजलि आँचल के पास चली जाती है

माँ यह क्यू बैठी है .... अंजलि पूछती है आवर आँचल के पास जाकर आँचल की गॉड मैं सर रख देती है जो आँचल मुस्कुराती हुई अंजलि के सर को सहलाने लगती है

गुड़िया मैं अर्जुन के लिए जगी हुईं ..... तेरी नानी का फ़ोन आया था ...वह घर आ रहा है मगर देख आधी रात हो गयी

मगर वह अभी तक नहीं आया उसका फ़ोन भी बंद आ रहा है

ओह्ह माँ अर्जुन सायद कही रुक गया होगा देख नहीं रही कितनी तेज़्ज़ बारिश हो रही थी

आप परेशां न हो ... अभी बारिश रुक गयी है सायद अब घर आ जाये .... अंजलि कहती है

मैं एक माँ हुईं न गुड़िया इस लिए फिकर होती है वह कहा होगा किश जगह रुका होगा वह कही उसका बाइक घराब हो गया होगा .... गुड़िया ये सब दिमाग मैं चलती रहती है

जा तू सजा .... आँचल कहती है

नहीं .. मैं भी आप के साथ अर्जुन का इंतज़ार करुँगी .... अंजलि आँचल को ज़ोर से पकड़ती हुई बोलती है जो आँचल मुस्कुरा देती है

माँ की पल्लू पकड़ने वाली लड़की पता नहीं ये ससुराल कैसे जाएगी ......

देखों गीता बेटी भी आ रही है

आँचल मन सोच रही होती है के सामने से आ रही गीता पर नज़र चली जाती है

क्या हुआ माँ आप सोइ नहीं .... गीता पास आकर पूछती है आवर वह भी आँचल के दूसरी तरफ बैठ जाती है

वह बेटी ... ओह्ह्ह्ह मेरा बीटा आँचल आवर कुछ बोलती तभी उसका फ़ोन बजने लगती है तो देखती है अर्जुन का फ़ोन है तो उठा लेती है

कहा है ... अभी तक घर क्यू नहीं आया .... ठीक तो है न .... बाइक ख़राब तो नहीं हो गयी ... रजनी दीदी साथ है न

माँ माँ माँ. .... मैं ठीक हुईं आप परेशां न होइए ... बारिश की वजह से एक घर मैं रुके है सबह जल्दी घर आ जायेंगे ....

आँचल आवर कुछ पूछती मगर अर्जुन की आवाज़ सुन कर वह चुप हो जाती है

ठीक है बीटा .... बारिश मैं भींग तो नहीं गया है .... भींग गया होगा तो उस घर के लोगों से टावल लेकर सर पोछ लेना ... आवर

माँ ...... बोलै न मैं ठीक हुईं आप परेशां न होइए काफी रात हो गयी सो जाइये अब

आँचल मुंह बना कर फ़ोन रख देती है

हआ हआ हआ हां हआ हआ हास हआ हआ हआ

आँचल के फ़ोन रखते hi अंजलि आवर गीता ज़ोर ज़ोर से हसने लगती है

डीईई माँ माँ माँ हां हां हआ हआ हआ

अंजलि बोल कर फिर से हसने लगती है

दोनों कुछ देर तक हस्ती है मगर जैसे hi आँचल पर नज़र जाती है दोनों चुप हो जाती है

दोनों अपनी hi माँ की मज़ाक उदा रही हो ....... जाओ मैं बात नहीं करती

ओह्ह माँ अच्छा सॉरी सॉरी सॉरी

माँ आप hi इतने सवाल करने लगी की अर्जुन को समझ नहीं आया होगा क्या बोले इसी लिए तो माँ करने लगा

..... अंजलि बोलती है

मेरी ये बातें एक दिन गुड़िया तुम दोनों भी बोलोगी अपने बच्चों से जब माँ बन जाओगी .... चलो अब सोने जाओ .... मुझे भी नींद लग रही है उमा ुमायआ

आँचल दोनों को किश करती है आवर उठ कर रूम मैं चली जाती है

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देखों ये भी कितनी घमंडी है अपने ससुर की तरह .... गाओं मैं इतने दिन से आई है मगर एक दिन भी हमसे मिलने के लिए नहीं आई

हमने तो उसका ज़मीन भी वापस कर दिया ..... नास्ता करते हुआ राजन सिंह थोड़े गुस्से मैं कहता है

आप कैसी बाते कर रहे है वह अपने ससुर की तरह नहीं है ... वह दूसरे दिन घर hi आई थी ... उस वक़्त आप घर पर नहीं थे ... वह ममता बुआ से मिल कर चली गयी लता देवी बोलती है

वह अकेली क्यू आई अपने बच्चों को लेकर नहीं आई उसका बीटा अब बड़ा हो गया होगा न .... राजन सिंह बोलता है

हां अर्जुन बड़ा हो गया है .... वह बोल रही थी अर्जुन कुछ जयादा hi लम्बा हो गया है .. आप की तरह ... जब वह बता रही थी तो मेरा मन ला लांच रहा था अर्जुन को देखने के लिए

कस ये झगड़ा नहीं होता तो ... आज अर्जुन भी हम्हारे साथ होता .... दोनों परिवार को मिला कर वही तो एक लड़का है ... हम्हारी पीढ़ी भी सायद एहि ख़तम हो जाती

अगर अर्जुन को राखी जनम नहीं देती तो ... क्या हम ये झगड़ा ख़तम नहीं कर सकते है जीई ....... लता देवी दुखी सवार मैं पूछती है

लता मैं भी ये झगड़ा ख़तम hi करना चाहता हुईं अगर ख़तम नहीं करना चाहता तो उसकी ज़मीन देता hi क्यू .... राजन सिंह बोलता ...

मगर वह ममता बुआ फिर .... लता देवी थोड़ी डर्टी हुई पूछती है

लता मैं ममता बुआ के बारे मैं अभी कोई बात नहीं करना चाहता ... राजन सिंह बोलते है आवर उठ कर चले जाते है

बड़ी माँ आप लोग किश बारे मैं बात कर रहे है .... आवर ये अर्जुन कौन है

गुड़िया अर्जुन तेरा बड़ा भाई है लता देवी मुस्कुराती हुई बोलती है

वाओ बड़ी माँ क्या हम्हरा भी भाई है आप ने पहले क्यू नहीं बताया वह कहा है ... कभी घर क्यू नहीं आया .... उसे हम्हारी याद नहीं आती

नैना तो ख़ुशी मैं झूम hi जाती है नैना आवर कुछ पूछे अर्जुन के बारे मैं पूछने लगती है

माँ आप कहना क्या छाती है .... इस बार कोमल बोलती है कोमल बोलकर अपनी माँ को देखने लगती है वही सुमन भी अपनी बड़ी माँ को देखने लगती है

अर्जुन तेरे छोटे दादा का पोता है ...... कोमल

वह दूसरी हवेली है न वह अर्जुन का है ... लता देवी बोलती है

लेकिन माँ पापा तो बोलते थे वह हवेली हम्हारी है ... कोमल फिर से बिच मैं बोल पड़ती है

कोमल बेटी बहुत लम्बी कहानी है फिर कभी बताउंगी ... लेकिन बेटी ये सच है अर्जुन तुम लोगों का भाई है आवर दो बहाने भी है गीता आवर अंजलि ... अभी टाइम नहीं है तुम लोग नास्ता करों कॉलेज भी जाना है ... लता देवी बोलती है तो सभी नास्ता करने लगती है


आंटी आप कही जा रही है क्या .... साहिल हवेली मैं जब आता है तो देखता है राखी देवी अपनी बैग लिए निकल रही होती है तो पूछता है

हां साहिल बीटा घर जा रही हुईं बच्चों की याद आ रही है ..... तुम हरिया चाचा के साथ अच्छे से खेतों की देख भल करना आवर मज़दूरों को पैसे की ज़रूरत पड़े तो मुझे फ़ोन करना मैं .. वैसे मैं जल्द आने की कोशिश करुँगी राखी देवी बोलती है

वही राखी देवी की बात सुन कर साहिल का दिमाग ख़राब हो जाता है बस साली रंडी ... मैं तेरे यह नौकरी कर रहा हुईं सिर्फ तेरी इस जिस्म को रगड़ने के लिए मगर साली तू तो गांड लेकर भाग रही है .... साली कही वही पर यार तो नहीं रखी है

साहिल क्या हुआ .... क्या सोच रहे हो

कक्क कुछ नहीं आंटी .... साहिल हकलाता हुआ बोलता है

ठीक है ये बैग गाड़ी मैं रखों .... राखी देवी बोलती है तो साहिल बैग गाड़ी मैं रखने चला जाता है

Ahhhhhhhhhh बस कोमललललललल जान लेगी क्या ...... सामने से आती हुई कोमल को देख कर साहिल मन मैं बोलता है

कोमल को देख कर साहिल का लैंड एक बार अपना सर उठा देता है

कोमल हवेली मैं आती है आवर बिना साहिल के देखे हवेली के अंदर चली जाती है आवर सोफे पर बैठ जाती है

नमस्ते चची ......


राखी देवी रूम से निकलती है तभी उनकी कानो मैं एक लड़की की मीठी आवाज़ सुनाई देती है राखी देवी आवाज़ की तरफ देखती है तो पति है उनके सोफे पर बहुत hi खूबसूरत प्यारी सी लड़की बैठी हुई है जो राखी देवी को देख कर मुस्कुरा रही है

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खुश रहो बेटी ... आप कौन हो मैं आप को जानती हुईं ... राखी देवी प्यार से बोलती है

मैं राजन सिंह की बाटी कोमल हुईं आंटी .... कोमल बोलती है

तुम कोमल हो ... राखी देवी बहुत hi धीरे से बोलती है


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आप से मिलने आई तो आंटी आप को अच्छा नहीं लगा ... कोमल कड़ी होती हुई मुस्कुरा कर बोलती है

क्या बोल रही हो बेटी ... भला कोई माँ अपने बच्चों से मिल कर बुरा मान सकती है क्या ....

राखी देवी बोलती हुई कोमल के पास चली जाती है

वही कोमल भी राखी देवी के पास आ जाती है आवर फिर अचानक राखी देवी के गले लग जाती है

आंटी मुझे मांफ कर दीजिये पहले मुझे नहीं पता था आप कौन हो आवर कहा रहती है

आप गाओं मैं कई दिन से आई है ... मुझे पहले पता होता की आप मेरी आंटी हो तो पहले hi मिलने चली आती .... कोमल बोलती हुई थोड़ी दुखी हो जाती है

कोई बात नहीं बेटी .... ये ऊपर वाले की दें है वह सायद पहले नहीं चाहते थे हम मिले ... राखी देवी कोमल को गले लगाए हुआ बोलती है

आंटी आप घर जा रही है .... कोमल पूछती है

हां बेटी घर जा रही हुईं मुझे बच्चों से मिलने का दिल करने लगा इतने दिन से उनसे नहीं मिली तो .... राखी देवी थोड़ी मुस्कुराती हुई बोलती है

आंटी क्या मैं भी आप के साथ चल सकती हुईं प्लीज ...... कोमल बड़ी मशोमियत से बोलती है

बेटी ये तुम क्या बोल रही हो ... मैं तुमेह मन तो नहीं कर सकती मगर सॉरी बीटा तुमेह मैं छह कर भी नहीं लेकर जा सकती हुईं ... बेटी पहले से तुम्हारे पापा हमसे गुस्सा रहते है .... तुम्हारे पापा को पता लगा तो दोनों परिवार के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं होगा .... राखी देवी बोलती हुई कोमल को अलग कर देती है

वही कोमल थोड़ी निराश हो जाती है .... राखी देवी कोमल से अलग होते hi हवेली से बहार निकल जाती है

आंटी क्या आप दीदी को नंबर दे सकती है मैं उनसे बात करुँगी ... प्लीज .... कोमल भाग कर आती है आवर रोनी सी सवार मैं बोलती है

राखी देवी कोमल की मुरझाया हुआ चेहरा देख कर गीता की नंबर कोमल को दे देती है जो कोमल के चेहरे पर थोड़ी मुस्कान आ जाती है

ठीक है बेटी मैं चलती हुईं ..... राखी देवी बोलती है आवर खुद hi गाड़ी स्टार्ट कर देती है

वही कोमल राखी देवी को जाते हुआ देखती रह जाती है

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अर्जुन 7 :पं तक अपने गाओं मैं आ चूका होता है आवर अभी आदि के घर के बहार खड़ा होता है जो आदि की माँ गेट पिट रही होती है

बस मक आ गयी गांड मारा कर साली रांड पहले कितनी सटी सावित्री बन कर रहती थी मगर ... अब साली रात भर घर से बहार रही

बस ये साला अर्जुन मेरी माँ को आएसा बना रहा है उसको तो मैं ... बस पहले मैं ठीक हो जाऊं ... आदि रूम से निकलते हुआ बहुत गुस्से मैं बोल रहा होता है

आदि को आज अपनी माँ पर बहुत गुस्सा आ रहा होता है आदि को यकीन नहीं हो रहा होता है के उसकी माँ जो पहले अपनी जिस्म को छिपा कर रखती थी आवर किसी भी मर्द से बात तक नहीं करती थी वह आज एक लड़के के साथ पूरा एक दिन साथ रही

आदि दुनिया से छिपा कर अपनी माँ को रखता था यह तक घर मैं नौकर भी नहीं रखता था ताकि उसकी माँ को वह छोड़ न दे ...

आदि खुद तो दूसरे की माँ बहन को खुद के लिए रंडी बनाना चाहता था मगर अपनी माँ सटी सावित्री बना रख रखना चाहता था जो अब उसकी माँ खुद रंडी बनते जस रही होती है

आदि मन मैं गली देते हुआ गेट के पास आ जाता है आवर गेट खोल देता है

माँ कहा थी आप ... रात को घर क्यू नहीं आई ... आदि गुस्से मैं बोलता है

आदि बीटा बारिश हो रही थी

आंटी घर के अंदर भी बता सकती है पहले अंदर चलिए मेरा हाथ दुखने लगा .... अर्जुन बोलता है जो आदि की माँ के पीछे चांदनी को गॉड मैं लिए हुआ खड़ा होता है

हां अर्जुन ... आदि घर मैं चल

आदि गुस्से मैं किनारे हो जाता है अर्जुन चांदनी को लेकर अंदर चला जाता है

बस ये .... आदि मन मैं गली देता है मगर आदि की जैसे hi अर्जुन के गॉड मैं लड़की की गोरी चिकनी पेट को देखता है आदि की आँखों मैं चमक आ जाती है

कौन है ये बहुत कड़क मॉल है साली की छूट तो दूध की तरह उजली होगी आवर गांड तो अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

आदि मन मैं सोचता है ... आदि गेट बंद कर के घर के अंदर चला जाता है आवर वह अपनी माँ की रूम मैं चला जाता है

आंटी मैं चलता हुईं .. माँ कब से फ़ोन कर रही है. ..... अर्जुन बोल कर आदि के घर से चला जाता है

टूउउ तुमममममम

वही आदि जैसे hi अपनी माँ की रूम मैं जाता है आवर सामने बैठी हुई चांदनी को देखता है हैरानी से बोल पड़ता है .. वही चांदनी आदि को देख कर गुस्से मैं घूरने लगती है मगर जल्द hi चांदनी नज़र भी हटा लेती है

वही आदि की माँ आदि को सवालिए नज़र से घूरने लगती है

आदि बिना कुछ बोले अपने रूम मैं चला जाता है आवर गेट बंद कर लेता है

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अपडेट ....... 85

अर्जुन सो कर उठता है आवर फ्रेश होने के लिए चला जाता है आवर फ्रेश होने के बाद रूम से निकलता है तो देखता आँचल किचेन मैं है तो अर्जुन किचेन मैं चला जाता है

गुड मॉर्निंग ी लव यू मेरी प्यारी सी भोली माँ

अह्ह्ह्ह

अर्जुन अचानक hi जाकर पीछे से आँचल को पकड़ कर बोलता है आवर गार्डन थोड़ा आगे की तरफ कर के आँचल की चिकनी गलों पर किश कर देता है

वही आँचल थोड़ी सहमा जाती है के कौन है जिससे आँचल की आह्हः भी निकल जाती है मगर अर्जुन की आवाज़ सुन कर आँचल मुस्कुरा पड़ती है

ओह्ह्ह मेरा राजा बीटा ... इतना प्यार दिखने की ज़रूरत नहीं .. मैं अपने हीरो पर गुस्सा नहीं हुईं

आँचल मुस्कुराती हुई बोलती है ... लेकिन आँचल की धड़कन थोड़ी थोड़ी बढ़ रही होती है क्यू की अर्जुन का लैंड आँचल अपनी गांड पर महसूस कर रही होती है

मुझे पता है मेरी प्यारी भोली सी माँ मुझपे कभी गुस्सा नहीं होती है .... लेकिन मैं फिर भी अपनी भोली माँ से मांफी तो मांगूंगा hi सुबह वैसे बात करने से .... अर्जुन बोल कर फिर से आँचल को मज़बूती से पकड़ लेता है

अर्जुन तो बस आँचल को प्यार से पकड़ रहा होता है मगर अर्जुन की हरकत की वजह से आँचल की हालत ख़राब होने लगती है

आँचल अर्जुन का लैंड का अहसास प् कर उसकी जिस्म मैं हलचल सी हो रही होती है जिसकी असर आँचल के चेहरे पर आई हुई पसीने बता रही होती है यह तक आँचल की छूट मैं भी कुछ कुछ हो रही होती है


ओह्ह मेरे प्यारा राजकुमार... उमा मैंने मांफ किया अपने शहज़ादे को

आँचल झट से घूम जाती है आवर अर्जुन को सामने कर के अर्जुन के माथे को चुम लती है

ओह माँ कितनी गर्मी हो रही है आप को गैस का आंच थोड़ा काम दीजिये न

अर्जुन आँचल के चेहरे पर आई हुई पसीने को देख कर बोलता है आवर अपने हाथ आँचल की माथे पर रख कर पसीने को पोछ देता है

वही अर्जुन के छूने से आँचल की तन बदन मैं आग लग जाती है

आँचल के साथ आज पहली बार ये हो रहा था के अर्जुन के छूने से अपनी जिस्म मैं हलचल सी महसूस हो रही होती है .... नहीं तो अर्जुन पहले कई बार आँचल की गले लग चूका होता है यह तक अर्जुन आँचल के साथ सोते हुआ आँचल चुकी भी साइट हुआ मसल चूका होता है मगर आएसा अहसास आँचल को पहले कभी नहीं हुई होती है

आँचल कुछ देर तक अर्जुन की आँखों मैं देखने लगती है वही अर्जुन की नज़र जब माँ पर पड़ती है तो अर्जुन भी माँ की आँखों मैं देखने लगता है

दोनों माँ बेटे किचेन मैं एक दूसरे की आँखों मैं देख रहे होते

आँचल अर्जुन को बड़े hi प्यार से देख रही होती है आँचल की आँखों मैं एक सरम सी होती है आँचल की जिस्म थोड़ी थोड़ी कैंप रही होती है

ये क्या हो रही है मुझे ... मैं अपने अर्जुन को इस तरह क्यू देख रही हुईं ........ आअह्हह्ह्ह्ह कितने प्यारे है अर्जुन के होंठ ...

आँचल मन मैं सोचती है जिससे आँचल की होंठ भी खुल एक दूसरे से अलग हो जाता है


वही अर्जुन अपनी माँ की खूबसूरत चेहरे को देख रहा होता है

कितनी प्यारी है माँ ... माँ की चेहरा मूर्त की तरह है जिसको मैं बचपन से पूजते आ हुआ माँ की ये होंठ

Sssssssssssssssssssss

अर्जुन मन मैं सोचता है आवर अर्जुन का हाथ खुद hi आँचल की होंठों पर चला जाता है जिससे आँचल सिसकती हुई थोड़ी पीछे हो जाती है मगर आँचल की नज़र अर्जुन से हटती नहीं है

अर्जुन भी माँ की आँखों मैं देखते हु आँचल के करीब चला जाता है आवर आँचल की कमर पर दोनों हाथ रख देता है

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन के कमर पर हाथ रखने से आँचल की मदहोशी भरी आह्हः निकल जाती है लेकिन आँचल अभी अर्जुन की आँखों से नज़र नहीं हटती है

अब किचेन मैं दोनों hi मैं बीटा बिलकुल hi एक दूसरे के करीब होते है अर्जुन के पकड़ने से आँचल आवर भी अर्जुन के करीब आ गयी होती है

अर्जुन माँ की होंठों को देख रहा होता है वही आँचल भी अर्जुन को देख रही होती आँचल की आँखों मैं मदहोशी चालक रही होती है आँचल अर्जुन की आँखों मैं देखती हुई अपनी होंठ एक बार एक दूसरे से सत्ता कर फिर से खोल देती है

अर्जुन माँ की आँखों मैं देखते हुआ अपना सर धीरे धीरे आँचल की होंठों के करीब ले जाता है

huinnnnnnnnnnnnnnnnnnn

अर्जुन जैसे hi आँचल के करीब जाता है आँचल अपनी मुंह अर्जुन के करीब ला देती है जिससे दोनों की होंठ एक दूसरे मैं टाच हो जाती है जिससे आँचल की बड़ी मदहोशी मैं सिसकियाँ निकल जाती है

दोनों माँ एक दूसरे की होंठों को चूमने लगते है अर्जुन आँचल की होंठ चूमते हुआ आँचल की कमर को ज़ोर ज़ोर से मसलने लगता है जिसे आँचल भी अर्जुन के सर पकड़ कर अपनी तरफ दबा रही होती है

किचेन दोनों माँ बेटे किश कर रहे होते है जिससे अर्जुन माँ को पकड़ किश करते हुआ माँ की जिस्म को मसल रहा होता है

किचेन मैं दोनों इधर उधर होने लगते है जैसे दोनों hi किश करने से पीछे नहीं हटना चाहते है अर्जुन तो अपनी माँ की कमर पकड़ कर उठा hi लेता है जो आँचल भी अपनी दोनों पेअर अर्जुन के कमर पर पाशा देती है आवर

अर्जुन माँ को पकड़ कर दिवार से चिपका कर किश कर रहा होता है

अर्जुन क्या कर रहा है ये रूम नहीं किचेन है बाबूउ

तभी एक आवाज़ सुन कर अर्जुन आवर आँचल को होश आता है जो अर्जुन माँ को निचे उतर कर खड़ा हो जाता है

वही आँचल साड़ी ठीक करती हुई किचेन से चली जाती है

वाओ कैसा लगा माँ के साथ किश कर के ..... बाबूउउउ तुझे तो पसीने भी हो रहे है क्या इतनी गर्मी मैं माँ की जिस्म मैं .... गीता मुस्कुराती हुई बोलती है

वही अर्जुन भी कुछ बोले बिना hi चला जाता है

अब क्या हुआ अभी तो दोनों एक दूसरे से आयी प्यार कर रहे थे जिन्ह दुनिया से कोई मतलब hi नहीं है ... मगर मैंने आएसा क्या कर दिया ..... गीता मन मैं सोचती है

गीता को बिलकुल भी बुरा नहीं लगा होता है ये देख कर की अभी उसकी ममी माँ आवर अर्जुन क्या कर रहे थे

तभी किचेन मैं अभी कड़ी hi होती है की उसे कुछ जलने की बऊ आती है तभी गीता की नज़र बन रही सब्जी पर जाती है

ओह्ह्ह गुड सब्जी भी जल रही है गीता जल्दी से गैस बन कर देती है

गीता अकेली hi किचेन मैं खाना बनाने लगती है ...

गुड मॉर्निंग डीई ..... अंजलि किचेन मैं आकर बोलती है

गुड मॉर्निंग गुड़िया .... उठ गयी ..... गीता प्यार से पूछती है

डीई प्लीज जल्दी कॉफ़ी दीजिये न .... अंजलि बच्चों जैसी बोलती है

गुड़िया तू बैठ मैं कॉफ़ी बना रही हुईं .... गीता बोलती है तो अंजलि पास hi बैठ जाती है


डीई एक बात पूछूं आप से .... अंजलि बोलती है

हां .... पूछ क्या पूछना है .... मानेगी तो नहीं मुझे पता है

गीता कॉफ़ी बनती हुई बोलती है ....

डीई आप ने वह वाला वीडियो देखा है ...... अंजलि मुस्कुराती हुई बोलती

क्या बोल रही है ..... मैं समझी नहीं कौन वाला वीडियो की बात कर रही है ....

अंजलि की बात को न समझते हुआ गीता बोलती है आवर अंजलि को एक बार देख कर कॉफ़ी बनाने लगती है

डीई वह वाला वीडियो जिसमे लड़का आवर लड़की दोनों naaaaaaaaaa ..... नंगे होते है

अंजलि अभी बोल hi रही होती है के अंजलि की बात को समझते हुआ गीता अंजलि को आँखें दिखने लगती है जो एक वक़्त के लिए अंजलि तो रुक जाती है मगर फिर गीता को देखती हुई मुस्कुरा कर बोल पड़ती है

गुड़िया ये कैसी बातें कर रही है अपनी बड़ी बहन से .... शर्म नहीं आती तुझे .... गीता थोड़ी गुस्से मैं बोलती है

डीईई मैंने तो सिर्फ पूछा है ... आप हां या न बोल सकती है .....डीईई आप से नहीं पूछूँगी तो आवर किस्से पूछूँगी ..... जाइये मुझे आप से बात नहीं करनी

अंजलि मुंह बना कर बोलती है आवर अपना मुंह दूसरी तरफ कर लेती है

वही अंजलि की चेहरा देख कर गीता को अच्छा नहीं लगता है


गीता अंजलि सही तो बोल रही है उसने तो बस पूछा है ... यस या no मैं बोल देती है उसे डांटने की क्या ज़रुरत है वह ये तुझसे पूछ रही है अच्छी बात है न ... देख नहीं रही ज़माना कितना ख़राब है

अगर अंजलि ये बात दूसरी लड़की से पूछेगी आवर फिर वह वैसा वीडियो देखेगी फिर उसके मन मैं आवर क्या क्या आएगा इसका भी तुझे ख्याल रखना चाहिए ... तुझे पता है तेरी बहन कितनी खूबसूरत है आवर कॉलेज के सरे लड़के इसके पीछे आगे तो तुझे पता है जिस्म की गर्मी कभी साथ नहीं देती है

हां देखा है ..... गीता मन मैं सोचती है आवर बोल पड़ती है

सच मैं डीईई .... मैंने एक बार भी नहीं देखा आप मुझे देखोगी प्लीज डीईई .... अंजलि मुंह बनाते हुआ बोलती है

गुड़िया वह गन्दी चीज है अच्छी बच्ची वह सब नहीं देखती है ..... गीता बोलती है

अच्छी बच्ची नहीं देखती है लेकिन आप भाई का लैंड अपनी छूट मैं ले सकती है ..... अंजलि मन मैं सोचती है

डीई प्लीज एक बार दिखा दीजिये न प्लीज प्लीज .... आप नहीं दिखना चाहती है तो वह कैसे आता है मेरे फ़ोन मैं बता दीजिये मैं खुद देख लुंगी .... अपनी सहेली के साथ ....... अंजलि बोल कर गीता की तरफ फ़ोन कर देती है

क्या सहेली के साथ देखेगी

गीता मेरी बात मान तो गुड़िया जो कहती है कर वर्ण आगे पता है वह क्या करेगी ..... गीता मन मैं सोचती है

ठीक है नास्ता बना लेने के बाद रूम मैं साथ देखेंगे .... ये ले कॉफ़ी पि ...... गीता कॉफ़ी देती हुई बोलती है

थैंक यू डीईई मेरी प्यारी डीईई

वही अंजलि खुश होकर गीता से बोलने लगती है आवर कॉफ़ी लेकर पिने लगती है

आँचल रूम मैं होती है आवर इस वक़्त आँचल की रूम लॉक होती है आँचल बीएड पर बैठी हुई होती है आँचल की आँखें आंसुओं से भरी हुई होती है

ये क्या कर दिया मैंने .... मम मैं आएसा कैसे कर सकती हुईं ... अर्जुन को जनम नहीं दिया है मगर उसे मैंने बचपन से पला है भले hi मैंने उसे अपनी दूध नहीं पिलाई है मगर वह जब मुझे माँ कहता है तो मेरी दिल को सकूँ मिलता है मुझे ये अहसास होता है अर्जुन मेरा hi बीटा है .... मगर मैंने आज उस रिश्ते को तार तार कर दिया ..... हे भगवन मुझे मेरे पाप के लिए मांफ कर देना .....

आँचल तूने कुछ गलत नहीं किया है तूने एक माँ की फ़र्ज़ आज निभा दिया है सोच अगर अर्जुन तेरी जीवन मैं नहीं आता तो तू कभी इतनी खुश रह सकती थी .... नहीं कभी नहीं तेरी जिंदगी अभी रोटी हुई काट रही होती

आँचल तुझे कभी अपने पति का प्यार नहीं मिला ... आँचल तू जीवन भर प्यार के लिए तरसती रही मगर कोई गलत कदम नहीं उठाई .....

आँचल तुझे अब कोई मर्द की ज़रूरत है

जिस औरत का पति नहीं होते है उसका हर चीज का धयान उसका बीटा रखता है

आँचल औरत की जिस्म पर उसका पति या उसके बेटे का जयादा हक़ होता है आँचल वह वक़्त आ गया है जो अब तुझे अपनी मचलती हुई जिस्म को अपने बेटे की हवाला कर दे ....

आँचल मुझे पता है तेरी नस नस मैं अर्जुन hi बसा है

आँचल तू मान या न मान मगर तू अर्जुन से प्यार करती है चाहे वह बेटे वाला hi क्यू न हो मगर तू अर्जुन से प्यार करती है जो अब उभर कर बहार आ रही है आवर मुझे पूरा यकीन ये अर्जुन के साथ प्यार कर के hi पूरी तरह निकलेगा ....

अर्जुन के बस छूने से देख तेरी जिस्म मैं कितनी गर्मी उभर आई है आँचल तेरी छूट हर वक़्त सुखी रहती थी मगर आज तेरी छूट मैं हरयाली आ गयी है तेरी सुखी छूट मैं पानी बाह रही है ..... आँचल बीएड पर लेती हुई होती है आवर आँचल की मन मैं ये साडी बातें चल रही होती है

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अर्जुन अभी खेत वाला रूम मैं होता है आवर थोड़ा मायुश भी होता है अर्जुन को अभी खुद पर गुस्सा आ रहा होता है

बस मैं कैसा बीटा हुईं जो अपनी hi माँ के साथ छियई मेरी हिम्मत भी कैसी हुई माँ के करीब जाने की ..... माँ मुझे कभी मांफ नहीं करेंगी वह मुझे कितना प्यार करती है

अर्जुन तूने कुछ गलत नहीं किया आवर माँ भी तुझसे गुस्सा नहीं होंगी

देखा नहीं माँ तेरा किश करते हुआ साथ दे रही थी

अर्जुन अगर माँ चाहती तो उसी वक़्त तुझे थप्पड़ मार कर अलग कर देती मगर माँ ने आएसा कुछ नहीं किया

वह तो तेरी आँखों मैं इस तरह देख रही थी जैसे वह तुझे खुद बी रही थी आ अर्जुन आवर मेरी होंठों को चुम ले

अर्जुन मुझे यकीन है गीता दीदी को तरह माँ भी तुझसे प्यार करती है ... मैं ये नहीं कहता के तू जाकर माँ से सेक्स करले मगर माँ को ये अहसास मत होने देना के ये सब होने के बाद तू उनसे दूर जा रहा है

अर्जुन अगर तुझे जानना है माँ तुझसे बेटे के प्यार के आगे गीता दीदी वाला भी प्यार करती है तो तुझे उनके अब जायदा करीब जाना होगा .... अर्जुन के दिमाग मैं भी आँचल की तरह चल रहा होता है

दोनों माँ बेटे एक तरह hi सोच कर अपने दिलों को दिलासा दे रहे होते है जैसे दोनों एक जिस्म दो जान है


आदि के घर

आदि की माँ अपनी रूम मैं होती है आवर शीशे के सामने टावल मैं कड़ी होती है आदि की माँ की हाथ मैं अभी नया लिया पेंटी होती है जिसे देख कर आदि की माँ शर्मा भी रही होती है

अर्जुन को मेरा साइज पता चल गया है अर्जुन क्या सोच रहा होगा मेरे बारे मैं

उसे मेरी साइज जान कर अच्छा लगा होगा

अच्छा hi लगा होगा ... मेरी जिस्म hi ाएसि है जिसे देख कर .... लोगों की हालत ख़राब हो जाती है .... इस लिए तो मैं अपनी चुकी को छिपा कर रखती थी

Ssssssssssssssss

आदि की माँ सोचती हुई अपनी चुकी दबा देती है आवर खुद सिसक पड़ती है

अह्हह्ह्ह्ह अर्जुन का लैंड कितना बड़ा है उस वक़्त कॉलेज के बाथरूम मैं देखि थी तो उतना बड़ा नहीं था मगर जेन्स मैं देखि तो कुछ जयादा hi बड़ा लग रहा था

वह कैसे मेरी जिस्म को छू रहा था अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कितना मीठा अहसास हो रहा था

क्या मैं कुछ गलत कर रही हुईं

मैंने जब से अर्जुन का लैंड देखि है मेरी जिस्म मेरी साथ नहीं दे रही है

मैं इतनी बेचैन कभी नहीं हुई जिस्म की गर्मी से जितनी बेचैन अब हो रही हुईं ... ये सब कमला की वजह से हो रहा है उसने hi मेरी जिस्म मैं इतनी आग भर दिया है

साली रंडी मेरी जिस्म मैं आग भड़का कर पता नहीं कहा चली गयी है

आने दो मैं उसकी छूट को नोच खाउंगी ....

Ohhhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्हह

आदि की माँ सोचती हुई अपनी hi छूट नोच लेती है जिसे आदि की माँ की छूट मैं मीठी दर्द होती है

Auntyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy

ओह सॉरी सॉरी बीटा ...... आवाज़ सुन कर आदि की घबराती हुई पेंटी छिपा कर पास राखी हुई साड़ी को अपनी जिस्म पर रख लेती है


आदि की माँ की आँखें शर्मा से लाल हो जाती है आवर वह बीएड पर अपनी जिस्म को चिपटी हुई बैठ जाती है

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अपडेट ..... 86

सॉरी आंटी मुझे आवाज़ देकर आना चाहिए था ...... आदि की माँ को सरमते हुआ देख कर चांदनी बोलती है आवर खुद भी घूम जाती है

कोई बात नहीं बेटी .... क्या हुआ कुछ चाहिए ........ आदि की माँ पेटीकोट पहनती हुई पूछती है

आंटी मुझे नहाने जाना है .... मगर मेरे पास कोई कपडा नहीं है ..... चांदनी बोलती है

ओह सॉरी बेटी मैं भूल गयी थी .... मैं खुद hi तुमको अपने कपडे देने वाली थी

आदि की माँ बोलती है तब तक वह साड़ी भी पहन चुकी होती है तो वह अलमीरा से अपने कपडे निकल कर चांदनी को देती है

बेटी ये साड़ी आवर पेटीकोट तो हो जायेंगे मगर ..... एक मिनट बेटी

आदि की माँ अपनी साड़ी पेटीकोट को चांदनी को देती हुई बोलती है तभी आदि की माँ को कुछ याद आती है तो वह अलमीरा फिर से खोल कर एक एक थैला निकलती है जिसमे 3 से 4 जोड़े ब्रा पेंटी होती है

बेटी ये मैं अपने लिए लेकर आई थी मगर ये छोटी है सायद तुमको हो जाये

आदि की माँ चांदनी को वह ब्रा पेंटी देती हुईं शर्मा भी रही होती है

वह चांदनी ब्रा पेंटी को देख कर थोड़ी हैरान होती है मगर फिर वह ब्रा पेंटी ले लेती है आवर कपडे लेकर रूम से निकल जाती है

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दोपहर के 12 : पं

माँ

अंजलि छत पर होती है तभी उसे अपनी गाड़ी निचे दिखा देती है जो अंजलि खुश होती हुई बोलती है आवर छत से निचे भगति है

माँ अंजलि निचे आती है बोलती है आवर राखी देवी की बाँहों मैं चली जाती है

वही राखी देवी भी अंजलि को बाँहों मैं भर लेती है ....

कैसी है मेरी गुड़िया ..... राखी देवी मुस्कुराती हुई बोलती है

वही अंजलि भी खुश मैं अच्छी हुईं बोल देती है आवर फिर गाड़ी से बैग उठा कर घर के अंदर चल देती है वही राखी देवी भी साथ चलने लगती है

माँ पानी लेकर आती हुईं .... अंजलि हॉल मैं आकर बोलती है ..... वही राखी देवी हॉल मैं बैठ जाती है

वही अपनी माँ की आवाज़ सुन कर गीता भी हॉल मैं आ जाती है जो अभी किचेन मैं होती है आवर वह भी अपनी माँ की बाँहों मैं चली जाती है

गीता बेटी आँचल कहा है .... आँचल को न देख कर राखी देवी पूछती है

माँ वह ममी माँ की थोड़ी तबियत ख़राब थी तो मैंने hi उनेह आराम करने को बोली है .... गीता बोलती है ...... तब तक अंजलि पानी लेकर आ जाती है

बेटी मैं बहुत थक गयी
हुईं ....पहले जाकर फ्रेस होती हुईं फिर सो जाउंगी

राखी देवी बोलती है आवर अपनी रूम की तरफ चली जाती है

ओह्ह गॉड मैं तो भूल hi गयी थी .... मुझे ममी माँ के पास जाना चाहिए था ..... गीता मन मैं सोचती है

डीई मैं पूजा डीई के घर जा रही हुईं ... चची ने बुलाया है क्या आप चलेंगी ..... अंजलि पूछती है

नहीं गुड़िया मुझे नींद आ रही है तू जा ..... गीता बोलती है

वही अंजलि पूजा के घर के लिए निकल जाती है

अंजलि के जाने के बाद गीता हॉल से उठ कर आँचल के रूम के पास चली जाती है तो देखती है रूम अंदर से बंद है तो गेट पीटने लगती है जो आँचल फिर भी गेट नहीं खोलती है

माँ प्लीज गेट खोलिये न .... प्लीज माँ ....

गीता की कुछ देर पुकार सुनने के बाद आखिर कर आँचल गेट खोल hi देती है .. क्यू की गीता की आवाज़ मैं थोड़ी मायुशि भरा होता है

आँचल के अंदर एहि एक तो खूबी थी वह गीता अर्जुन आवर अंजलि को कभी दुखी नहीं देख सकती थी चाहिए उसे खुद दुःख सहना पड़े

आँचल गेट खोल कर गीता को एक नज़र मुस्कुरा कर देखती है आवर फिर से बीएड पर चली जाती है

वही गीता ममी माँ की मायुश चेहरा देख कर समझ जाती है उसकी ममी माँ अभी रो रही है तो गीता जाकर आँचल के गॉड मैं सर रख कर लेट जाती है

माँ आप को दुखी होने की कोई ज़रूरत नहीं है मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी ..... गीता आँचल की गॉड मैं लेती हुई आँचल को पकड़ कर बोलती है

वही कुछ नहीं बोलती है ... हां मगर आँचल का हाथ गीता की सर पर चला ज़रूर जाता है

माँ क्या आप भी अर्जुन से प्यार करती है मेरी तरह ... गीता पूछती है

लेकिन आँचल इस बार भी कोई जवाब नहीं देती है

माँ आप चाहती है मैं यह से चली जॉन ... तो मैं चली जाती हुईं गीता बोलती है आवर आँचल की गॉड से उठने लगती है मगर आँचल गीता को अपनी गॉड मैं hi दबा लेती है

गीता बीटा मुझे नहीं पता मैं अर्जुन से कैसा प्यार करती हुईं .... मगर ये सच है अर्जुन मेरे पास होता है तो मुझे कोई दुःख दर्द का अहसास नहीं होती है .... अर्जुन के पास होने से मुझे ये भी फर्क नहीं पड़ता है तेरे मां मेरे साथ नहीं रहते है ..... आँचल कुछ देर के बाद बोलती है

माँ आप भी अर्जुन को मेरे जैसा प्यार करती है सायद ....

माँ आप जब अर्जुन के साथ किश कर रही थी तो क्या आप की जिस्म मैं एक तूफान सी हलचल महसूस हो रही थी

माँ जब अर्जुन किश कर रहा था तो क्या आप को कोई दर नहीं लग रही थी के किचेन मैं कोई आ जायेगा ....

माँ अगर आप को आएसा कुछ भी महसूस हुआ हो तो मैं यकीन के साथ कह सकती हुईं .... आप अर्जुन को एक मर्द की तरह प्यार भी करने लगी है ..... गीता बड़े hi प्यार से बोलती है

गीता बेटी तो बिलकुल सच बोल रही है अर्जुन के साथ किश करती हुई तो मैं भूल hi गयी थी मैं किचेन मैं हुईं आवर अंजलि आवर गीता भी आकर देख सकती है .... मेरी जिस्म मैं हलचल क्या मेरी जिस्म तो अर्जुन के छूने से कैंप भी गयी थी मेरी छूट भी गीली हो गयी थी ....

क्या मैं अपने अर्जुन मैं अब एक मर्द को देखने लगी हुईं

अर्जुन का लैंड अपनी गांड पर अहसास होते हुआ मेरी छूट मैं खुजली जैसी महसूस हो गयी थी जैसे अर्जुन का लैंड गांड पर नहीं छूट मैं महसूस कर रही हुईं ... अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ......


आँचल मन मैं सोचती हुई सिसक पड़ती है

वही गीता उठ कर आँचल की चेहरे को देखने लगती है जो आँचल अभी शर्मा रही होती है

माँ मतलब मैं सही हुईं आप अर्जुन को अब एक मर्द की तरह देखने लगी है .... वाओ माँ अर्जुन की तो किस्मत hi खुल गयी पहले बड़ी बहन आवर अब उसकी माँ जिसे वह बचपन से माँ पुकारते हुआ आया है

माँ अर्जुन जब आप से प्यार करेगा तो आप की ख़ुशी की कोई सीमा hi नहीं होगी .... आप उसका लैंड तो एक बार मैं पूरी अंदर ले लोगी ... क्यू के उस वक़्त आप को ख़ुशी के आगे दर्द का कोई अहसास hi नहीं होगी ....

गीता आँचल को देखती हुई मुस्कुरा कर बोलती है

वही आँचल सरम से पानी पानी हो जाती है आवर वह अपनी छूट के ऊपर हाथ रख देती है

ओह ओह .... देखों तो अर्जुन का लैंड का नाम सुनते hi माँ की पारी भी खुश हो गयी है जिसे मैं छिपा रही है .... गीता आँचल की हाथ देखती हुई मुस्कुराती हुई बोलती है

गीता बेटी प्लीज चुप हो जा बेटी ... मैं तेरी ममी माँ हुईं न .... आँचल सरमाती हुई बोलती है

ओह ओह लेकिन अब तो आप मेरी सौतन बनना चाहती है ..... वैसे मैं आप की मदद कर सकती हुईं .... लेकिन उसके बदले मुझे भी कुछ चाहिए

गीता की बात सुन कर आँचल थोड़ी हैरानी से गीता को देखने लगती है ... जैसे पूछ रही है क्या कहना चाहती हो .....

माँ आप अर्जुन से अब जयादा दिन कर दूर नहीं रह सकती है ... जो मेरे साथ भी वही हुआ था आप को बताया था क्या क्या किया मैंने अर्जुन के लिए ..... लेकिन मेरी तरह आप अर्जुन के साथ नहीं कर सकती है क्यू के आप उसे बेटे के रूप मैं पहले देखती है आवर आप ये कभी नहीं चाहेंगी .... आप की कोई गलती की वजह से अर्जुन आप से दूर जाए

लेकिन मैं अर्जुन को आप के पास ला सकती हुईं ...मैं अर्जुन को ये अहसास दिला सकती हुईं आप उससे कितना प्यार करती है .... लेकिन मुझे भी इसके बदले मैं कुछ चाहिए ..... गीता मुस्कुराती हुई बोलती है

गीता बेटी क्या बोल रही है ममम मैं अर्जुन के ..... साथ क्या चाहिए मेरी बेटी को .... ये बिना काम किये भी मैं दे सकती हुईं

आँचल गीता की गलों पर हाथ फेरती हुई बोलती है मगर आँचल की बोली मैं हिचकिचाहट सी होती है ....

मुझे जो चाहिए .... मैं अर्जुन आवर आप को मिलाने के बाद बताउंगी .... लेकिन मेरी कसम खाइये आप वडा पूरा करेंगी

गीता जब वेड की बात बोल रही होती है तो गीता की आँखों मैं एक अजब सी सरम आवर चेहरे पर मुस्कान होती है .....

गीता की बात सुन कर आवर गीता की चेहरे को देख कर आँचल को थोड़ी हैरानी होती है

बताओ क्या चाहिए .... मैं अभी दे देती हुईं ...... लेकिन मैं मममम मैं अर्जुन के साथ .... आँचल गीता की आँखों मैं देखती हुई बोलती है आवर गीता की आँखों मैं देख कर समझने की कोशिश करती है आखिर गीता क्या बोलना छह रही है मगर आँचल को कुछ समझ नहीं आ रही होती है

ोलता आँचल खुद hi सरम की वजह से नज़ारा चुरा लेती है

माँ मुझे अभी नहीं चाहिए .... आवर आप इतनी शर्मा क्यू रही है क्या आप नहीं चाहती अर्जुन के साथ पूरा करना अगर चाहती है तो बस आप वडा कीजिये ..... गीता मुंह बना कर बोलती है

गीता भी समझ रही होती है उसकी माँ सायद अंदर से तैयार तो है मगर मेरे सामने शर्मा रही है कहने मैं


आखिर गीता बेटी मुझसे किस काम के लिए वडा मांग रही है मैं तो बिना वेड के भी कुछ भी दे सकती हुईं .... मैंने तो अपनी प्रॉपर्टी भी तुम तीनो के नाम कर दिया है

लेकिन मुझे नहीं लग रही गीता बेटी मुझसे पैसे मांगेगी .... कुछ भी मांगे मैं वडा कर देती हुईं मैं बस अपने बच्चों को खुश देखना चाहती हुईं ..... आँचल मन मैं सोचती है आवर गीता से वडा कर देती है जिससे गीता ख़ुशी से आँचल से लिपट जाती है

ओह मेरी दुनिया की सबसे अच्छी प्यारी ममी माँ umaaaaaaaaaa ुमाए ुमाए

गीता तो ख़ुशी मैं पागल hi हो जाती है आवर आँचल की गलों पर किश करने लगती है

रूम मैं थोड़ी देर पहले जो आँचल रो रही होती है वह अब गीता के साथ मुस्कुरा रही होती है


माँ मैं आज hi अर्जुन से बात करुँगी .... गीता हस्ती हुई बोलती है जो आँचल शर्मा जाती है मगर आँचल आवर कुछ बोल नहीं पति है मगर आँचल को सरम भी बहुत आ रही होती है

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ये लो भाभी आज मैं तुम्हारी साडी आग बुझा दूंगा

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्हह देवर जीई अह्ह्ह्हह स्स्स्सस्स्स्स अह्ह्ह्हह्हह आवर ज़ोर अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह आआआआ hhhhhhhhhh

वह आदमी बोल कर उस औरत की छूट मैं तेज़्ज़ तेज़्ज़ धक्का मरने लगता है आवर कुछ hi देर के बा

झड़ते हुआ उस औरत के ऊपर गिर जाता है

मालिक अब मुझे घर जाना होगा ... मेरी बेटी घर आ गयी होगी ... वह औरत बोलती

AAaaaaaaaaaaaaaaaa मालिक

उस औरत की चीख उस रूम मैं गूंज पड़ती है

साली रांड कुटिया ..... सारा मुंड ख़राब कर दिया ...... साली मालिक की जगह देवर भी तो बोल सकती थी ..... वह आदमी बोलता है

मांफ कर दीजिये Aaaaaaaaaa गलती हो गयी Aaaaaaaaaaaaaaaaa

वह औरत बोल रही होती है आवर वह आदमी उस औरत की चुकी को दन्त से काट रहा होता है जिससे उस औरत की दर्द भरी आह्ह्ह्ह निकल रही होती है आवर आँखों से आंसू भी साली

अगली बार से धयान रखना ..... रात मैं जल्दी आ जाना ... आज रात तेरी ये गांड भी मरूंगा .... काफी दिन हो गए है गांड मरे हुआ

वह आदमी बोलते हुआ औरत को छोड़ देता है

वह औरत कपडे लेकर रूम से चली जाती है

कब वह दिन आएगा भाभी जिस दिन इस बीएड पर मैं आप की छूट मैं ये लैंड डालूंगा .... बस अब तक आप की नाम लेकर hi दूसरे की छूट मरते हुआ आ रहा हुईं .... वह आदमी अपना लैंड मसलते हुआ बोलता है

कुत्ता कमीना नीच इंसान है ये जो अपनी भाभी को hi छोड़ना चाहता है ..... इसको तो नर्क मैं भी जगह नहीं मिलेगी इसने तो मेरी ज़िन्दगी hi बर्बाद कर दिया है ... मैं तो पत्नी कहलाने की भी लाइक नहीं हुईं जब चाहता है मुझे रंडी की तरह छोड़ देता है

भगवन जी आयी कमीने नीच इंसान को आमिर आवर हम जैसे को गरीब क्यू बनाया आप ने .... वह औरत रोटी हुई मन मैं सोचती है आवर अपनी पल्लू मैं बहती हुई आंसुओं को पोछ लेती है

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रात के 9 : पं



डाइनिंग टेबल पर अर्जुन सर निचे लिए हुआ बैठा हुआ होता है

अर्जुन तो अपने रूम मैं खाना खाना चाहता था मगर राखी देवी साथ खाने को बोलती है तो अर्जुन साथ बैठ गया होता है

वही किचेन मैं गीता आवर आँचल खाना निकल कर डाइनिंग टेबल पर ला रही होती है

माँ अर्जुन तो आप की तरफ देख भी नहीं रहा है .... आवर सुबह मैं कैसे आप की लाल होंठों की लाली को चूस रहा था .... किचेन मैं गीता आँचल की करीब जाकर बोलती है जो आँचल शर्मा जाती है मगर आँचल की नज़र जैसे hi अर्जुन पर जाती है आँचल थोड़ी दुखी हो जाती है

मेरा बच्चा ... . उसे सायद बुरा लग रहा है ....... मैं गुस्सा नहीं हुईं बीटा तुझसे आँचल मन मैं सोचती है

माँ देखती hi रहोगी अपने होने वाले पति को या खाना भी डौगी उसे .... गीता हस्ती हुई बोलती है

गीताआए रम मैं बताती हुईं ... आँचल बोलती रहती है तब तक गीता किचेन से हस्ती हुई भाग जाती है

आँचल रोटी की लेकर जाती है आवर अर्जुन के आगे रखने लगती है Ssssssssss

आँचल रोटी रखती है तभी आँचल को अपनी गांड पर हाथ का अहसास होती है जिससे आँचल सहम जाती है जिससे आँचल थोड़ी सिसक भी जाती है आँचल अर्जुन की तरफ देखती है तो अर्जुन अभी भी निचे देख रहा है

ममी माँ आप माँ के पास जाकर बैठ जाइये न मैं अर्जुन के साथ बैठ जाती हुईं .... गीता कमीनी मुस्कान के साथ बोलती है

वही आँचल गीता को आँखें दिखती हुई वह से हैट जाती है आवर राखी देवी की बगल मैं बैठ जाती है

हे भगवन मुझे लगा अर्जुन मेरी गांड को छू रहा है .... ये गीता भी न .... आँचल मन मैं सोचती है

अर्जुन खाना कहते हुआ एक बार भी आँचल की तरफ नहीं देखता है आवर जल्द hi खाना खा कर उठने लगता है

ये क्या अर्जुन बीटा इतनी जल्दी क्यू उठ गया ..... अर्जुन को जल्दी उठाते हुआ देख आखिर कर आँचल hi बोलती है

माँ पूजा दीदी से उनके घर गया था तो उन्होंने ने मुझे खाना खिला दिया था .... अर्जुन बोलता है मगर आँचल की तरफ नहीं देखता है मगर आँचल मन hi मन खुश होती है के अर्जुन उसके बात का जवाब तो दिया

क्या पूजा दीदी घर आई है .... गुड़िया तूने मुझे क्यू नहीं बताई .... गीता अंजलि को घूरती हुई बोलती है

डीई वह मैं भूल गयी थी सॉरी .... वह सुबह घर आएँगी .... अंजलि बोलती है

खाना खाने के बाद अंजलि खाने की पलेट किचेन मैं रखने चली जाती है आवर राखी देवी अपनी रूम मैं चली जाती है दिंनिंग टेबल पर आँचल आवर गीता hi होती है

माँ एक बात कहूं ... गीता धीरे से बोलती है

आँचल बस इसरा से हां मैं सर हिलती है

माँ आप चाहे तो रात मैं होने वाली लड़ाई देख सकती है .... गीता थोड़ी मुस्कुराती हुई बोलती है

वही आँचल गीता को घूरने लगती है मगर आँचल की जिस्म मैं एक हलचल सी होती है

माँ मेरे मन मैं जो था बोल दिया बाकि आप की मर्ज़ी .... मैं आप को मस्सगे करुँगी .... आप 15 मिनट मैं आ गयी तो ठीक नहीं तो गेट बंद हो जाएगी .... गीता फिर से मुस्कुराती हुई बोलती है

आँचल बस गीता को घूरती रहती है मगर आँचल की आँखे बता रही होती है गीता की बातें सुन कर आँचल की मन मैं कुछ चल रही है

गीता उठ कर अपनी रूम मैं चली जाती है आवर वही आँचल भी अपनी रूम मैं चली जाती है


रात के 11 :50 पं

आँचल बीएड पर सोइ हुई करवाते बदल रही होती है आवर आँचल की मन मैं गीता की बातें चल रही होती है तभी आँचल की फ़ोन पर मस्सगे आती है आँचल देखती है तो गीता की मस्सगे होती है

आँचल टाइम देखती है तो 11 :55 पं हो रही है

आँचल सोच क्या रही है चली जा गीता की रूम मैं देख तो सही तेरा अर्जुन सेक्स करने मैं कैसा है क्या वह तेरे लाइक है .... तुझे जैसे मर्द चाहिए था क्या वह अर्जुन hi है .... तूने इतने दिन अपनी जवानी बच्चा कर राखी है तो कोई मज़बूती मर्द तो चाहिए hi न जो तेरी छूट की आग मिटा सके ....

नहीं मैं नहीं जाउंगी .... मैं भला अपने hi बच्चों को सेक्स कैसे देख सकती हुईं चींईईई .....

मुझे देखने की क्या ज़रुरत .... मुझे पता है मेरा अर्जुन कितना मज़बूत है .... उसे मैंने पला है

आँचल फिर भी तुझे देखना चाहिए क्या पता देख कर तेरी छूट को थोड़ी आराम मिले .... अभी पता नहीं कब तेरी छूट मैं उसका लैंड जायेगा ..... आँचल की दिमाग मैं साडी बातें चल रही होती है मगर आँचल दुविधा मैं फांसी हुई होती है वह जाये की नहीं

इधर आँचल की नज़र फ़ोन पर बढ़ रही टाइम पर भी होती है

आँचल की छूट मैं भी खुजली सी हो रही होती है


Ssssssssssssssssssssssssssssssss



आँचल सिसकती हुई अचानक बीएड पर गिर जाती है

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अपडेट ..... 87

आँचल बीएड पर गिर तो जाती है मगर आँचल की जिस्म मैं एक बेचैनी सी हो रही होती है आँचल की जिस्म की चुभन से आँचल की मन कर रही होती है वह गीता की रूम मैं चली जाये मगर लेकिन आँचल की ममता भरा दिल जाने से इंकार कर रही होती है मगर आँचल की नज़र दिवार पर लटकी हुई घडी पर नज़र बार बार जा रही होती है

आँचल को समझ नहीं आ रही होती है वह जाये की नहीं तभी आँचल की फ़ोन पर फिर से मस्सगे आती है आँचल फिर से फ़ोन उठा कर वात्सप्प ओपन कर देती है

माँ मुझे लग रहा आप देखना नहीं चाहती है कोई बात नहीं मैं आप को फिर नहीं कहूँगी ... लेकिन माँ आज की रात मैं चाहती हुईं आप देखे .... माँ 5 मिनट मैं आ जाइये मैं अर्जुन को बुला रही हुईं

आँचल मस्सगे पढ़ कर वह सोच मैं पद जाती है आँचल फिर बीएड से उतर जाती है ... सायद आँचल जाने का फैसला कर लेती है

आँचल बीएड से निचे उतरती है आवर धीरे से अपना गेट बंद करती है आवर गीता की रूम के पास चली जाती है तो देखती है गीता रूम के सामने hi कड़ी है जो आँचल मन hi मन शर्मा भी रही होती है

मुझे पता था आप आओगी .... माँ आप यह छिप जाइये अर्जुन को पता नहीं चलेगा ..... गीता अपनी सीसे के पास इसरा करती हुई बोलती है जहा पर्दा लगी हुई होती है

आँचल जब सीसे के पास जाती है तो देखती है परदे की पीछे अच्छी जगह है जहा आँचल आराम से सो भी सकती है

आँचल परदे के पीछे कड़ी हो जाती है

माँ आप देख कर ज़रा भी आवाज़ नहीं करियेगा चाहे कुछ भी अहसास हो ..... गीता थोड़ी मुस्कुराती हुई बोलती है

वही गीता की बातों को समझ कर आँचल फिर से शर्मा जाती है

गीता फिर अर्जुन को मस्सगे करती है

अर्जुन 20 मिनट के बाद रूम मैं आता है

अर्जुन मैं आते hi गेट बंद कर देता है

दी आज मेरा मन नहीं कर रहा है आप मान क्यू नहीं रही

ummmmmmmmmmmmmmmm

अर्जुन आगे बोल पता गीता अपनी होंठ अर्जुन के होंठों से सत्ता कर किश करने लगती है अर्जुन दूर होने की कोशिश करता है मगर गीता एक हाथ अर्जुन के लैंड पर रख कर ऊपर से hi सहलाने लगती है मगर किश करना बंद नहीं करती है आवर अपनी जिस्म अर्जुन की जिस्म मैं आवर भी सत्ता देती है

अर्जुन गीता को दूर करते करते हुआ आखिर कार अपनी दीदी का साथ देने लगता है आवर गीता को किश करते हुआ अपना हाथ गीता की एक चुकी पर रख देता है आवर दबाने लगता है

दोनों भाई किश करते हुआ बीएड पर गिर जाते है बीएड पर गिरते हुआ गीता सिसक जाती है आवर किश भी टूट जाती है मगर गीता जल्द hi अर्जुन के ऊपर बैठ कर अपनी नाईट ड्रेस निकल देती है आवर अर्जुन का सरत का बटन भी खोल कर सरत निकल देती है आवर अर्जुन का सर पकड़ कर अपनी चुकी पर रख देती है जो अर्जुन गीता की चुकी को चूमने लगता है

Ahhhhhhhhhhhhh ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह

गीता आह्हः भर्ती हुई अर्जुन का सर आवर भी अपनी चुकी पर दबा देती है आवर अपनी गांड अर्जुन के लैंड पर रगड़ने लगती है जैसे अर्जुन का लैंड गीता की छूट मैं हो आवर गीता मज़ा मैं लैंड अंदर हिला रही है

वही गीता की बड़ी गांड का अहसास से अर्जुन का लैंड Jen's मैं खड़ा हो जाता है

गीता डीई की चुकी को चूमते हुआ अर्जुन अपना दोनों हाथ से गीता की गांड पर रख कर मसलने लगता है जिससे गीता की सिसकियाँ रूम मैं गूंजने लगती है

अर्जुन फिर गीता की पेंटी भी निचे की तरफ करने लगता है जो गीता अपनी बड़ी गांड उठा कर पेंटी को निचे जाने देती है

दोनों भाई बहन इस वक़्त एक पति पत्नी की तरह बीएड पर प्यार कर रहे होते है वही परदे के पीछे कड़ी आँचल की दिल की धड़कन तेज़ी से चल रही होती है

आँचल बस एक तक दोनों को देख रही होती है तभी आँचल की आँखों के सामने अपनी बेटी की चिकनी बड़ी गांड नज़र आती है जिसे आँचल थोड़ी शर्मा जाती है

गीता बेटी की गांड तो कुछ जयादा hi बड़ी है .... आँचल मन मैं सोचती है

गीता सिसकियाँ लेती हुई अर्जुन को धक्का दे देती है जिससे अर्जुन बीएड पर गिर जाता है

गीता अर्जुन को देख कर मुस्कुरा देती है आवर फिर अपनी बड़ी गांड अर्जुन के लैंड के ऊपर से हटा कर नीचे हो जाती है आवर फिर अर्जुन को देखती हुई अर्जुन का Jen's का चैन खोल देती है आवर अर्जुन का Jen's निचे कर के निकल देती है

गीता Jen's को निचे फेकती हुई एक नज़र परदे की तरफ मुस्कुराती हुई देखती है जैसे इसरा कर रही होती है माँ अब वक़्त आ गया आप को अपने बेटे का अगजर देखने का .....

गीता का इसरा समझ कर आँचल की आँखों मैं एक सरम सी आ जाती है मगर आँचल की नज़र अब बिलकुल अर्जुन के लैंड पर होती है

गीता अर्जुन के एक तरफ बैठ कर अर्जुन का अंडरवियर निचे करने लगती है ताकि उसकी ममी माँ अर्जुन का लैंड देख सके

गीता एक झटके मैं अंडरवियर निचे कर देती है जिससे अर्जुन का लैंड टावर की तरह खड़ा हो जाता है

अर्जुन का इतना बड़ा मोटा लम्बा लैंड देख कर आँचल की आँखें बड़ी हो जाती है आँचल की मुंह भी खुली रह जाती है

आँचल को एक वक़्त के लिए सदमा सा लग जाता है

हे भगवन कितना बड़ा है अर्जुन का मुझे पता था अर्जुन का लैंड बड़ा है मगर इतना बड़ा .....

आँचल को यकीन नहीं हो रही होती है उसके बीटा का लैंड उसकी सोच से भी बड़ी है .... गीता बेटी ये अपनी छूट मैं कैसे लेगी .... आँचल मन मैं सोचती है

बीएड पर गीता अर्जुन का लैंड हाथ मैं लेकर मुठिया रही होती है जो अर्जुन आवर बेचैन हो जाता है आवर अर्जुन गीता की चुकी पकड़ने को कोशिश करने लगता है गीता जल्दी से उठ कर अपनी पेंटी एक झटके मैं निकल कर अर्जुन के ऊपर फिर से बैठ जाती है आवर गांड अर्जुन के सर पर रख देती है जो अर्जुन का मुंह गीता की छूट मैं चली जाती है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

छूट मैं अर्जुन का मुंह जाते hi गीता एक लम्बी सिसकियाँ लेती है जो एक बार गीता थोड़ी अपनी गांड भी उठा देती है जिससे अर्जुन का मुंह छूट से हैट जाती है मगर गीता फिर से अपनी गांड मुंह पर रख देती है जो छूट फिर से अर्जुन की मुंह मैं आ जाती है आवर अर्जुन गीता की छूट को चाटने लगता है वही गीता आँचल को देखती हुई अर्जुन का लैंड मुंह मैं लेने लगती है

इतना बड़ा गीता बेटी मुंह मैं कैसे लेगी गीता बेटी की मुंह मैं ये जायेगा भी नहीं

आँचल अपने बेटे का लैंड देखती हुई सोचती है

अपने बेटे का लैंड आज बिलकुल सामने से देख कर आँचल की जिस्म मैं गुदगुदी सी हो रही होती है आवर छूट मैं भी खुजली सी हो रही होती है तभी तो आँचल की एक हाथ अभी छूट मैं होती है आवर सायद आँचल की ऊँगली छूट मैं घूम रही होती है

आँचल गीता को तो देख भी नहीं रही होती है आँचल की नज़र तो सिर्फ अपने बेटे की लैंड पर होती है तभी आँचल की नज़र गीता से टकराती है आवर गीता की इसरा समझ कर आँचल की खुद की हालत पर नज़र जाती है जो इस वक़्त आँचल की पल्लू भी साइन से निचे गिर चुकी होती है आवर पेटीकोट भी कमर तक उठी हुई होती है आवर आँचल की हाथ छूट मैं होती है

गीता की इसारे समझ कर आँचल की आँखों मैं सरम भरी एक मुस्कान आ जाती है जैसे आँचल को अपने बेटे का लैंड बहुत पसंद आ गया है

अर्जुन गीता की छूट चाट रहा होता है तो गीता अर्जुन का लैंड की चमड़ी निचे कर के अर्जुन का चिकना टोपा चाट रही होती है जो गीता को लॉलीपॉप का मज़ा दे रहा होता है गीता बिच बिच मैं अपनी गांड उठा उठा कर सिसकियाँ भी ले रही होती है Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

दोनों भाई बहन एक दूसरे की जिस्म की गर्मी को आवर बर्दाश्त नहीं कर पते है आवर दोनों hi अपनी राश निकल देते है

वही परदे के पीछे कड़ी हुई आँचल की भी आह्ह्ह्ह निकल चुकी होती है आवर आँचल अपनी मुंह पर हाथ रखती हुई निचे बैठ चुकी होती है

आँचल की छूट से पानी इतनी निकली हुई होती है की आँचल की पेंटी से होती हुई निचे गिर रही होती है

आँचल निचे बैठी हुई हांफ रही होती है आँचल की जिस्म कैंप रही होती है जैसे आँचल की जिस्म मैं कोई जान hi नहीं बची है

आँचल कुछ देर तक अपनी सांसो पर काबू पाने की कोशिश करती है

ओह्ह्ह्ह बाबू प्लीज धीरे आह्ह्ह्ह बाबू दर्द होती है तेरा अह्ह्ह्हह्हह लैंड बहुत स्स्सस्स्स्स बड़ाआआआआ है ओह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्हह Maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

आँचल अभी अपनी सांसों पर काबू पाने की कोशिश कर रही होती है तभी उसकी कानो मैं गीता की सिसकियों की आवाज़े आने लगती है मगर गीता की माँ पुकारने से आँचल झट से बीएड की तरफ देखने लगती है जो अर्जुन बहुत hi तेज़्ज़ तेज़्ज़ धक्का मार रहा होता है

अर्जुन बीटा क्या कर रहा है वह तेरी बड़ी बहन है धीरे कर बीटा ..... आँचल मन मैं सोचती है मगर आँचल की छूट मैं फिर से खुजली होने लगती है

ये मुझे क्या हो रही है ... अभी तो मैं कड़ी हुईं फिर खुजली क्यू होने लगी Ahhhhhhhhhh मेरी छूट ...... आँचल मन मैं सोचती है आवर फिर से अपनी ऊँगली छूट मैं दाल देती है

अह्ह्ह्ह बाबू sssssssssss अह्ह्ह्हह बाबू तुझे ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह ममी माँ ने ओह्ह्ह्हह धीरे अह्ह्ह्हह मेरी छूट अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह्हह्ह

गीता अभी आँचल के बारे मैं बोल hi रही होती है के अर्जुन आवर ज़ोर ज़ोर से धक्का मरने लगता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhh

बाबू रुक जा सच मैं मुझे दर्द हो रही है Ahhhhhhhhhhh गीता बहुत hi दर्द मैं बोलती है यह तक गीता की आँखों मैं आंसू भी आ जाती है

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh

गीता आवर नहीं सह पति है आवर गीता की छूट से पानी निकल जाती है मगर अर्जुन धक्का मरता hi रहता है

हूंणणन्न अह्हह्ह्ह्ह बस रुक जा न .... अह्हह्ह्ह्ह मुझे दर्द hhhhhhhhhhhhhhhh हो रही है

हे भगवन मैंने ममी माँ की नाम लेकर गलती कर दिया क्या Ahhhhhhhhhhhhhh अर्जुन आवर भी तेज़्ज़ धक्का मर रहा है

Aaaàaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

गीता झड़ते हुआ अर्जुन से रुकने के लिए बोलती है आवर दर्द मैं अर्जुन को गली भी दे देती है मगर अर्जुन रुकता नहीं है .... तब गीता मन मैं पास्ता रही होती है उसने ममी माँ की नाम hi क्यू लिए

आह्ह्ह्हह बाबू रुक जा मैं आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आवर नहीं Sssssssssssss सह hhhhhhhhhh सकती हुईं ..... मेरी छूट मैं जलन हो रही है .... बस जा न ममी माँ को छोड़ दे उनकी छूट मैं लैंड दाल दे Ahhhhhhhhhhh बाबू प्लीज रुक जाए Aaaaaaaaaaaa आआआआआ मेरी छूट Ahhhhhhhhhhhhhhhh

Maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

गीता को दर्द तो बहुत हो रही होती है मगर गीता फिर भी आँचल की नाम ले रही होती है आवर गीता को पता चल रही होती है ममी माँ की नाम लेने से अर्जुन कितनी बेहरमी से उसे छोड़ रहा है जो गीता आवर भी आँचल की नाम लेने लगती है आवर गीता जैसे hi आँचल को छोड़ने के लिए बोलती है अर्जुन धोक्का मरते हुआ माँ को पुकारते हुआ गीता की छूट मैं झाड़ जाता है आवर बीएड पर गिर पड़ता है वही

गीता की आँखों से आंसू तो निकल रही होती है मगर गीता की चेहरे पर मुस्कान भी आ गयी होती है मगर गीता को बहुत हैरानी भी होती है क्यू की उसे अपनी छूट मैं बहुत सारा पानी महसूस हो रही होती है

गीता अपनी हाथ छूट पर रखती है तो गीता की हाथ मैं बहुत सारा अर्जुन आवर अपनी पानी आ जाती है जो गीता मन hi मन मुस्कुराती हुई अर्जुन के मंढे पर सर रख देती है

वही अर्जुन कुछ देर के बाद अपनी सांसों पर काबू पा लेता है तब अर्जुन को अहसास होता है उसने अपनी गीता दीदी के साथ अच्छा नहीं किया तभी अर्जुन को अपनी कंधे पर पानी का अहसास होता है तो अर्जुन अपनी गीता दीदी की चेहरे को देखता है जो गीता की आँखों से आंसू अभी भी निकल रही होती है

सॉरी ... डीई अर्जुन बस इतना hi बोलता है आवर अपने हाथ से गीता की बहती हुई आंसू पोछ देता है

वही आँचल एक बार फिर से झाड़ चुकी होती है आवर उसकी वजह अर्जुन आवर गीता दोनों hi होता है जो गीता खुद छुड़वाते हुआ आँचल की नाम ले रही होती है जो एक वक़्त के लिए आँचल भी गीता की जगह खुद को सोच रही होती है आवर छूट मैं ऊँगली कर रही होती है लेकिन आँचल की कानो मैं जैसे hi अर्जुन को खुद को पुकारते हुआ झाड़ता है आँचल की जिस्म जिस्म अकड़े जाती है आवर आँचल की सुखी छूट एक बार फिर हरयाली हो जाती है आँचल परेड की पीछे छिपी हांफ रही होती है

अर्जुन जो सुबह मैंने देखा क्या तुम ममी माँ से ...... गीता बस इतना बोल कर अर्जुन की आँखों मैं देखने लगती है जो अर्जुन एक वक़्त के लिए अपनी नज़ारे चुराने लगता है

अर्जुन मुझे बुरा नहीं लगेगा तुम माँ के साथ कुछ भी करे तो .... मुझे पता है ममी माँ के साथ तेरा रिस्ता अलग है .... मुझे ये भी पता है तेरे दिल मैं ममी माँ की क्या अहमियत है तू सबसे जयादा किसी से प्यार करता है तो वह सिर्फ ममी माँ है आवर सायद ममी माँ भी तुझसे उतना hi प्यार करती है तभी तो वह तुझे अलग करने के बजाये वह तेरा साथ दे रही थी आवर अभी तू ममी माँ की नाम से hi मुझे कितनी बेहरमी से छोड़ रहा था जो तुझे मेरी दर्द का भी अहसास नहीं हो रही थी ..... गीता थोड़ी मायूसी से बोलती है

सॉरी मैंने आप को इतना दर्द दिया ..... अर्जुन भी थोड़ा दुखी हो जाता है

अर्जुन क्या तू ममी माँ से प्यार करता है .... मेरी तरह .... अगर करता है तो मुझे बता सकता है ... मैं ममी माँ से बात करुँगी .... गीता अर्जुन का हाथ अपनी हाथ मैं लेकर पूछती है

वही परदे के पीछे छिपी आँचल अर्जुन के बोलने का इंतज़ार करने लगती है आँचल की धड़कन भी थोड़ी थोड़ी मचल रही होती है

दीदी मैं माँ से बहुत प्यार करता हुईं .... दीदी मुझे नहीं पता मैं माँ से कैसा प्यार करता हुईं .. मगर मैं माँ के साथ होता हुईं तो मुझे किसी की याद नहीं आती है

दीदी मैं जब माँ के साथ रहता था तो कोई गलती करने से डरता था के कही मेरी किसी गलती की वजह से माँ मुझसे गुस्सा न हो जाये आवर मेरी किसी गलती की वजह से माँ को किसी की बातें न सुन्नी पड़े

दीदी मैं माँ से अपनी जान से भी जयादा प्यार करता हुईं ... माँ मेरी सब कुछ है उन्होंने ने मुझे कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया वह मेरे लिए दुनिया की सबसे अच्छी माँ है .... अर्जुन बोलते हुआ थोड़ा दुखी भी हो जाता है अपनी बचपन की यादों को याद करते हुआ

अर्जुन तू माँ से प्यार करता है ... तू उनकी ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकता है .... अर्जुन वह प्यार का क़र्ज़ उतरने का वक़्त आ गया है अर्जुन इस वक़्त माँ को तेरी ज़रूरत है

ममी माँ अपनी खुशियों की गाला घोट कर वह तुझे खुश करने मैं अपनी आधी ज़िन्दगी गुजर दिया मगर अब ममी माँ को तेरा प्यार चाहिए ..... वह भी मेरी तरह वाला प्यार चाहिए ममी माँ को .... गीता बोल कर चुप हो जाती है

दीदी मैं माँ को हर खुशियां देना चाहता हुईं मगर दीदी मैं कैसे माँ के साथ वह .... अर्जुन बोलते हुआ रुक जाता है

अर्जुन तू चाहे तो मैं माँ से बात कर सकती हुईं ... मुझे यकीन है वह मान जाएगी .... गीता बोलती है

दीदी अगर माँ मान गयी थी मैं उनेह वह प्यार ज़रूर दूंगा .... अर्जुन कुछ देर के बाद बोलता है जो गीता खुश हो जाती है

वही परदे के पीछे कड़ी आँचल की आँखों मैं ख़ुशी की आंसू आ जाती है की अर्जुन उसके लिए क्या सोच रखता है

आँचल इतनी खुश होती है की वह परदे की पीछे से अर्जुन की बलए भी ले लती है

मेरा बच्चा ..... मुझे गर्व है मेरी परवरिश मैं कोई कमी नहीं हुई मगर मुझे तुमपे जयादा फकर है मेरे लाल .... आँचल मन मैं सोचती है

अर्जुन आवर कुछ नहीं बोलता है आवर फिर गीता की रूम से कपडे पहन कर चला जाता है वही अर्जुन के जाने के बाद गीता परदे के पास जाती है तो देखती है आँचल बैठी हुई है आवर आँचल की आँखें आंसुओं से भींगी हुई है

माँ आप रो क्यू रही है .... अर्जुन तो मान गया ... आप का क्या ख्याल है मेरी सौतन बनेगी ....

गीता मुस्कुराती हुई बोलती है .... हां मैं तेरी सौतन सासु माँ बानगी ......

आँचल सरमाती हुई बोलती है .... ठीक है फिर सुहागरात के लिए तैयार हो जाइये .... चलिए मैं बताती हुई पति को कैसे खुश करनी है

गीता आँचल की हाथ पकड़ती हुई बीएड पर आ जाती है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह गीता बेटी नहीं Sssssssssssssssssssssssssssssssssss

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कोमल बीएड पर लेती हुई होती है आवर फ़ोन मैं एक पिछ को देख रही होती है

वाओ बहुत हैंडसम है तू तेरी नाक भी मेरी तरह है हिघ्त भी अच्छी है ... मुझसे कब मिलेगा बोल

क्या तू मुझे पहचान पायेगा .... तू काम मेरे पास आएगा ... देख मैं कभी किसी लड़के से बात नहीं की है लेकिन देख तुझसे बात कर रही हुईं .... क्या तू मेरे साथ घूमने चलेगा .... नहीं चलेगा तो मरूंगी समझा ...... मेरे साथ घूमते हुआ कोई बदमाशी नहीं करना

अभी जाग रहा है या सो गया है

कोमल .... फ़ोन मैं एक पिछ देखती हुई बातें कर रही होती है कोमल की चेहरे पर मुस्कान भी होती है

कोमल फिर फ़ोन को तकिये के पास रख कर सो जाती है



अगली सुबह

कोमल जब उठती है तो सामने ननिअ को कड़ी देखती है जो नैना उसे घर रही होती है थोड़ी देर के लिए कोमल सोच मैं पद जाती है

क्या हुआ गुड़िया मुझे इस तरह क्यू घर रही है .... कोमल उठ कर अपनी बॉल को ठीक करती हुई बोलती है

डीई ये कौन है ..... आप लड़के से बात करती हो .... नैना फ़ोन दिखती हुई पूछती है

वही कोमल मुस्कुरा पड़ती है .... वह तेरे जीजू है कैसे है बता ......

क्या मगर आप तो किसी लड़के से बात भी नहीं करती है फिर इससे कैसे मिल गयी ये तो हम्हारे गाओं मैं तो क्या कॉलेज मैं भी नहीं आता है इसे मैं खुद पहली बार देख रही हुईं .... नैना कोमल को घूरती हुई बोलती है

गुड़िया कैसे बोल रही है ... बोली न वह तेरे जीजू है ... जीजू को आयी बोलेगी .... कोमल बोल कर मन hi मन मुस्कुरा रही होती है

वही नैना थोड़ी गुस्सा भी हो रही होती है जो नैना की चेहरे पर कोमल साफ देख रही होती है

सॉरी डीई मगर आप ने मुझे नहीं बताया .... आप से कटती मैं जा रही हुईं .... नैना फ़ोन बीएड पर फेक कर चली जाती है वही कोमल बस मुस्कुराती रह जाती है

Jijuuuuuuuuuuuuuu .... कोमल बोलती हुई खुद शर्मा जाती है

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राखी देवी सुबह उठ कर फ्रेश होती है आवर फिर किचेन की तरफ चली जाती है तो देखती है किचेन मैं आँचल अभी तक नहीं आई है तो राखी देवी कॉफ़ी बनाने लगती है

कॉफ़ी बन जाने के बाद भी आँचल किचेन मैं नहीं आती है

आँचल अब तक तो किचेन मैं आ जाती है क्या हुआ उसकी तबियत तो ठीक है न ... देखती हुई

राखी देवी मन मैं सोचती है आवर 2 कप लेकर आँचल की रूम मैं जाती है तो देखती है आँचल रूम मैं नहीं है राखी देवी बाथरूम मैं भी देखती है तो आँचल बाथरूम मैं भी नहीं होती है

आँचल रूम मैं तो नहीं है ये सुबह सुबह कहा चली गयी .... राखी देवी मन मैं सोचती है

Didiiiiiiiiiii

राखी देवी बाथरूम मैं देख कर टेबल से कप उठा hi रही होती है तभी आँचल रूम मैं आती है आवर राखी देवी को देख कर बोल पड़ती है

वही राखी देवी बस आँचल को घूरती रह जाती है जो आँचल अपनी सर निचे कर लेती है मगर आँचल जल्द hi तेज़ी से बाथरूम मैं चली जाती है

वही राखी देवी आँचल की बीएड पर hi बैठ जाती है आवर बाथरूम की तरफ देखने लगती है .... जैसे वह आँचल से कुछ पूछने के लिए आँचल से बाथरूम से निकलने का इंतज़ार कर रही है

वही बाथरूम मैं जाते hi आँचल गेट बंद कर देती है मगर आँचल की धड़कन तेज़ी से चल रही होती है

क्या होगा अब दीदी तो बिना जाने मानाने वाली नहीं है ....मैं उनेह क्या जवाब दूंगी ..... हे भगवन मेरी मदद कीजिये..... आँचल डर्टी हुई सोचती है आवर बाथरूम मैं बैठ जाती है

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अपडेट .... 88

राखी देवी कुछ देर तक रूम बैठी हुई होती है मगर आँचल बाथरूम से नहीं निकलती है तो तभी राखी देवी को अपनी नटखट बेटी की आवाज़ सुनाई देती है जो राखी देवी को hi पुकार रही होती है तो राखी देवी आँचल की रूम से निकल कर बहार आती है तो देखती है अंजलि हॉल मैं बैठी हुई खुद से सर दबा रही होती है तो राखी देवी अंजलि के पास चली जाती है

माँ सर दर्द कर रही .... आप कहा थी रूम मैं गयी थी जो आप नहीं थी .... अंजलि थोड़ी नाराज़गी से बोलती है

वही राखी टेबल पर राखी हुई तेल्ल का डब्बा उठ कर अंजलि की पीछे बैठ जाती है आवर डब्बे से बहुत सारा तेल्ल अंजलि की सर पर गिरा कर अंजलि की सर की मालिश करने लगती है

माँ क्या सच मैं प्रीतमपुरा मैं हम्हारी असली घर है ..... अंजलि पूछती है

हां गुड़िया ..... वह भी हम्हारी अपनी हवेली है तेरे पापा के जाने के बाद मैं कभी वह नहीं गयी लेकिन वह के ज़मीन को लेकर केस चल रही थी जो हम जित गए

माँ क्या बड़े पापा सच मैं बुरे आदमी है ममी माँ बता रही थी उन्होंने ने पापा आवर दादा के खिलाफ बहुत से साजिश किये थे इस लिए दादा यह आ गए थे .....

सही कही है आँचल ने गुड़िया वह बुरे इंसान थे मगर अब वह थोड़ा ठीक हो गए है सायद ..... राखी देवी बोलती है

माँ क्या मैं भी आप के साथ वह चलूंगी आप जाएँगी तो .... अंजलि पूछती है

हां गुड़िया हम सभी साथ मैं चलेंगे जब गर्मी की छूती होगी तुम सब की .... राखी देवी बोलती है तभी राखी देवी की नज़र सामने से आ रही आँचल पर नज़र पद जाती है जो किचेन मैं जा रही होती है लेकिन आँचल की नज़र जैसे hi जाती है आँचल वही कड़ी होकर राखी देवी को थोड़ी मुस्कुराती हुई शर्मा कर देखती है

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राखी देवी की नज़र जब आँचल की चेहरे पर पड़ती है तो राखी देवी की चेहरे पर भी एक मुस्कान आ जाती है

सुकर है भगवन का आँचल आज कितने दिन के बाद इतनी खुश दिख रही है कौन है वह खुश नसीब जिसे आँचल ने मक्का दिया क्या वह गाओं का hi है वह हवेली से बहार गयी थी

राखी देवी आँचल की चेहरे पर मुस्कान देख कर खुश तो होती है मगर फिर उस मर्द के बारे मैं सोच कर थोड़ी परेशां भी हो जाती है ये सोच कर के वह कौन है

गुड़िया मैं किचेन मैं जा रही हुईं देख गीता अभी क्यू नहीं उठी है

राखी देवी बोलती है तो अंजलि गीता की रूम की तरफ चली जाती है वही राखी देवी किचेन मैं चली जाती है तो देखती है आँचल आता निकल रही होती है रोटी बनाने के लिए

आँचल कहा थी तुम .... राखी देवी गैस ओपन करती हुई बोलती है

दीदी मम मैं ....

ममी माँ आप कब आई मेरे रूम से

आँचल बोलने मैं हिचकिचा रही थी तभी किचेन मैं आकर गीता बोल पड़ती है

सुबह मैं आई गीता ... तू सो रही थी

आँचल रहत की साँस लेती हुई बोलती है वही गीता आँचल को देख कर मुस्कुरा देती है ...

गीता बेटी आँचल तेरे साथ सोइ थी क्या ... राखी देवी थोड़ी हैरानी से पूछती है क्यू की राखी देवी कुछ आवर hi सोच रही थी आँचल के बारे मैं आवर रूम मैं आँचल को वह सिर्फ पेटीकोट आवर बलाउज मैं देखि हुई थी आवर आँचल की बॉल भी भिखारी हुई थी जिसे देख कर राखी देवी समझ रही थी आँचल किसी मर्द के साथ थी मगर गीता की बात सुन कर हैरान हो जाती है

हां ममी माँ मेरे साथ सोइ थी वह मेरी सर दर्द कर रही थी तो ममी माँ मेरी सर की मालिश कर रही थी आवर फिर मेरे साथ hi सो गयी थी .... गीता बोलती है

गीता की बात सुन कर राखी देवी आवर कुछ नहीं पूछती है मगर राखी देवी को अभी भी यकीन नहीं हो रही होती है

अंजलि अर्जुन के रूम मैं जाने को होती है तो देखती है अर्जुन का गेट अंदर से बंद है तो वह हॉल मैं आकर बैठ जाती है

ओह ओह सससस अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह माँ अब ये करना चाहती है .... आप की बहुत छोटी है ... आप को बहुत दर्द होगी

अर्जुन का लैंड ठीक आँचल की छूट की मुंह पर होती है आवर अर्जुन इस वक़्त आँचल की छूट मैं थोड़ा से लैंड डेल हुआ पूछता है जो थोड़ा सा hi लैंड जाने पर आँचल कहर रही होती है आवर अपनी हाथ से बीएड की चादर पकड़ के आँखें बन की हुई सिसकियाँ ले रही होती है

अर्जुन की बात सुन कर आँचल अपनी आँखें खोलती है आवर बड़े hi प्यार से अर्जुन को देखती है आवर फिर मुस्कुरा कर हां मैं इसरा करती है मगर अर्जुन आँचल की आँखों मैं साफ देख रहा होता है की उसकी माँ की आँखों मैं इस वक़्त कितना दर है

अर्जुन आँचल की छूट पर थूक देता है आवर फिर आँचल की कमर को मज़बूती से पकड़ लेता है आवर फिर बहुत तेज़ धक्का मरता है

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

Maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

अर्जुन माँ पुकारते हुआ उठ बैठता है अर्जुन की आँखें लाल हो चुकी होती है अर्जुन की माथे पर पसीने आ रहे होते है अर्जुन की दिल को धड़कन बहुत तेज़ी से धड़क रही होती है

ओह गॉड ये सपना था .... माँ को मैं इतनी दर्द नहीं दे सकता हुईं

क्या माँ की छूट वैसी hi होगी जैसी मैंने सपने मैं देखा .... मैं कैसे माँ को इतना दर्द दे सकता हुईं

अर्जुन अपने माथे पर आई पसीने को पूछता हुआ सोचता है आवर फिर उठ कर बाथरूम मैं चला जाता है

अर्जुन फ्रेश होकर जब रूम मैं आता है तो उसे बहार से अपने गेट पीटने की आवाज़ सुनाई देती है तो अर्जुन टावल मैं hi गेट खोल देता है तो देखता है बहार आँचल कॉफ़ी ली हुई कड़ी है अर्जुन गेट खोल कर अंदर आ जाता है तो आँचल भी रूम मैं आ जाती है

अर्जुन बीटा कॉफ़ी पि कर जल्दी निचे आ जा नास्ता भी बन गयी है ..... आँचल थोड़ी सरमाती हुई बोलती है मगर अर्जुन की तरफ देखती नहीं है

अह्ह्ह्हह

आँचल सिसक पड़ती है क्यू के आँचल कॉफ़ी टेबल पर रख कर जाने को होती है तभी अर्जुन भी घूमता है जिससे आँचल से टकरा जाता है आँचल गिरने को होती है तब तक अर्जुन आँचल की कमर को पकड़ लेता है जिससे आँचल सिसक जाती है

अर्जुन आँचल को पकड़ कर वैसे hi खड़ा होता है आवर माँ को बस देखे हुआ जाता है वही आँचल भी बस अर्जुन को देखे हुआ जा रही होती है

माँ कितनी खूबसूरत है ... माँ की होंठ कितनी पतली है माँ की चेहरा कितना चिकना है माँ की गल्ल कितनी पहली हुई है

अर्जुन मन मैं सोचता है आवर अर्जुन का सर आँचल की चेहरे की तरफ जा रही होती है

कितना माशूम है मेरा बच्चा .... एक वह समय था जब मैं अपने बच्चे की माशूम चेहरे को देख कर ना जाने कितनी पापिया दे देती थी आवर बदले मैं मेरा अर्जुन भी मेरी गल्ल पर पापिया देने लगता था .... दिल कर रहा है आज भी मैं अपने बेटे को पापिया कर दूँ

आँचल अर्जुन की आँखों मैं देखती हुई मन मैं सोचती है आवर अर्जुन को अपनी चेहरे के करीब आते हुआ देख कर शर्माने लगती है

Sssssssssssssssssssssssssssssssss

अर्जुन को पता नहीं क्या होता है अर्जुन एक हाथ से आँचल की होंठ पर ऊँगली फेर देता है जिससे आँचल मदहोशी मैं सिसक पड़ती है आवर आँचल अर्जुन को बहुत hi कास कर पकड़ लेती है जिससे आँचल की चुकी अर्जुन की जिस्म मैं डाब जाती है

अर्जुन अपनी माँ की जिस्म की गर्मी खुद महसूस करने लगता है जिससे अर्जुन का लैंड खड़ा होने लगता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhh

वही सकूँ आज भी मिल रही है अर्जुन के बाँहों मैं बस थोड़ा सा बदल गया है पहले मैं अर्जुन को बाँहों मैं भर्ती थी मगर आज मेरा बीटा मुझे बाँहों मैं भरा हुआ है

देखते hi देखते कितना सब कुछ बदल गया .... मेरा बीटा अब बड़ा हो गया है अब मैं इसकी बाँहों मैं खुद को बच्ची जैसे महसूस कर रही हुईं

Ahhhhhhhhhhhhh अर्जुन मुझे जैसे चाहे उठा सकता है अर्जुन मुझे अपनी गॉड मैं भी उठा कर मुझे प्यार कर सकता है

Maaaaaaaaaaaaaaaa

है दिया ये मैंने क्या कर दिया सोचती हुई

आँचल को जैसे hi अहसास होती है वह ये सोच रही है की अर्जुन उसे उठा कर अपना लैंड उसकी छूट मैं दाल कर छोड़ सकता है आँचल खुद hi शर्मा जाती है आवर आँचल की छूट मैं खुजली होने लगती है जो आँचल अर्जुन को पकड़ती हुई अपनी नाख़ून अर्जुन की पीठ पर गदा देता है


जिससे अर्जुन दर्द मैं कहर जाता है आवर आँचल को छोड़ देता है जो आँचल भी अलग हो जाती है

मांफ करना बीटा वह .... आँचल अर्जुन की दर्द भरी चीख सुन कर बोलती है

माँ कोई बात नहीं .... माँ वह कल के लिए मांफ कर दीजिये मुझे .... अर्जुन थोड़ा धीमी आवाज़ मैं बोलता है

अर्जुन बीटा कोई बात नहीं उसमे मेरी भी गलती थी ..... वैसे अर्जुन बीटा मुझे अच्छा लगा था .... वह प्यार

आँचल रूम के गेट पर जाती हुई पलट कर ये बात बोलती है आवर थोड़ी मुस्कुरा कर चली जाती है

वही अर्जुन थोड़ा हैरान हो जाता है ये सोच कर के माँ ने अभी क्या कहा

अर्जुन को अपनी कानो पर यकीन hi नहीं हो रही होती है ... अर्जुन कुछ देर तक वही खड़ा रह जाता है

अर्जुन तैयार होकर जाता है तो देखता है सभी डाइनिंग टेबल पर बैठे हुआ है आवर अर्जुन का वेट कर रहे है अर्जुन जाकर राखी देवी की बगल मैं बैठ जाता है

अर्जुन बीटा पढाई कैसी चल रही है .... राखी देवी पूछती है

अच्छी चल रही है माँ ... आप की तबियत कैसी है अब ... अर्जुन पूछता है

अब ठीक हुईं बीटा .... राखी देवी अर्जुन को देखती हुई बोलती है

राखी देवी को अब अर्जुन को देख कर आँखों मैं आंसू नहीं चेहरे पर मुस्कान आ रही होती है जो पहले अर्जुन को देख कर राखी देवी मायूसी से रो पड़ती थी मगर कुछ दिन से राखी देवी की दिल को सकूँ मिलती थी आवर बहुत ख़ुशी होती थी के उसका बीटा उसे वापस मिल रहा है

अर्जुन नास्ता करता है आवर उठ कर रूम मैं चला जाता है

वही अंजलि आवर गीता भी अपनी अपनी रूम मैं चली जाती है

दीदी क्या आप दोनों साथ चलेंगी

अर्जुन बाइक स्टार्ट कर रहा होता है तो गीता आवर अंजलि को आते हुआ देख कर पूछता है

नहीं अर्जुन हम चल कर आते है गाओं की लड़कियों के साथ .... गीता बोलती है तो अर्जुन अकेला hi चला जाता है

गीता अपनी सहेलियों के साथ गाओं से बहार निकली hi थी के उसके फ़ोन बजने लगती है तो गीता देखती है तो नई नंबर होती है तो गीता फ़ोन उठा लेती है

गुड मॉर्निंग गीता दीदी .... गीता के कानो मैं आवाज़ आती है

गुड मॉर्निंग तुम कौन हो क्या मैं तुमेह जानती हुईं ..... गीता थोड़ी हैरानी से पूछती है

आप मुझे नहीं जानती होंगी दीदी मगर मैं आप को जानती हुईं वह आंटी ने आप का नंबर मुझे दिया था ...... मैं पीतमपुरा से बोल रही हुईं

पीतमपुरा का नाम सुन कर गीता को यकीन हो जाता है के वह लड़की उसे सायद जानती होगी आवर माँ ने उसे नंबर दिया होगा .....

माँ ने तुमको नंबर दिया है क्या नाम है तुम्हारा ...... गीता पूछती है

दीदी मेरा नाम कोमल ..... कोमल उधर से बोलती है

ठीक है कामिल अभी मैं कॉलेज के पास आ गयी हुईं घर जाने के बाद तुमको फ़ोन करुँगी .... गीता बोलती है

ठीक है दीदी मैं भी कॉलेज मैं हुईं बोल कर कोमल भी फ़ोन रख देती है

कॉलेज मैं आने के बाद अर्जुन अपने क्लास मैं जाता है आवर अर्जुन फिर रूम मैं चरों तरफ देखता है आवर फिर जाकर अपने बेंच पर बैठ जाता है आवर गेट की तरफ देखने लगता है धीरे धीरे क्लास मैं सरे लड़के आ जाते है मगर अर्जुन अभी भी गेट की तरफ hi देख रहा होता है लेकिन जब क्लास मैं टीचर आते है तब अर्जुन गेट की तरफ देखने बंद कर देता है अर्जुन के चेहरे पर थोड़ी उदासी सी आ गयी होती है

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कोमल इस वक़्त कॉलेज के ग्राउंड मैं बैठी हुई होती है आवर मुस्कुरा कर सामने की तरफ देख रही होती है

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वही कोमल से बस थोड़ी सी दुरी पर 3 से 4 लड़के खड़े बस कोमल को hi घर रहे होते है

माँ कसम मैंने बहुत सी खूबसूरत से खूबसूरत लड़कियों को देखा है मगर इसकी जैसी लड़की मैंने कही नहीं देखा .... ये चलती फिरती एटम बम है .... इसको देख कर जिस्म का खून गर्म हो जाता है मन करता है लैंड निकल कर इसकी मुंह मैं थुश दूँ

उनमे से एक लड़का बोलता है आवर अपने लैंड को मसल देता है ...

शिव भाई आप पहले नहीं है जो ये बात बोल रहे है कॉलेज के सरे लड़के hi ये बात बोलते है हर लड़के कोमल की खूबसूरती को देख कर बेचैन हो जाते है आवर सायद कॉलेज मैं hi कोमल की रेआप भी हो जाती मगर ये मुमकिन नहीं है क्यू की कोमल एक ठाकुर की लड़की है आवर कोमल को कुछ भी हुआ तो उसके बाप सरे गाओं को जला कर रख देगा इस लिए तो कॉलेज के लड़के कोमल पहले बात भी नहीं करते है .... दूसरा लड़का बोलता है

क्या इतना बड़ा हरामी है क्या उसका बाप .... शिव बोलता है

शिव भाई अभी तुम्हारे आये हुआ जयादा दिन नहीं हुआ है सहर मैं पढ़ने हो न .... कुछ दिन मैं पता चल जायेगा .... वही लड़का बोलता है

इसकी जवानी का रास तो मैं चूस कर hi रहूँगा चाहे ज़बरदस्ती या फिर प्यार से .... वक़्त आने पर मैं इसके साथ शादी भी कर सकता हुईं ...... मगर मैं अपने बीएड पर ज़रूर ले जुन्गा .... शिव कोमल की खूबसूरती को देखते हुआ बोलता है

दीदी आवर कितनी पिछ लोगी .... सिर्फ पिछ लेकर फ़ोन मैं रखती हो फब पर डालोगी तो लड़के आप की पिछ देख कर तारीफ भी करेंगे ...... सामने से कोमल की पिछ ले रही नैना बोलती है जो थोड़ी थोड़ी चिढ भी रही होती है कोमल पर की दीदी आखिर जब अपनी पिछ की नेट पर डालती hi नहीं है तो फिर इतनी पिछ क्यू लेती है

गुड़िया फिर वही बात ...तुझे बोलै है न मैंने मुझे किसी की तारीफ नहीं चाहिए ..... ला फ़ोन दे मेरा ...... वैसे ये पिछ मैं किसी को देने वाली हुईं

कोमल को देख कर सुबह की तरह फिर मुस्कुरा देती है

कोमल को मुस्कुराती हुई देख कर नैना को कोमल की बातें याद आ आती है

दीदी क्या सच मैं आप किसी को पसंद करती है .... कौन है बताइये न मुझे ... प्लीज प्लीज .... नैना बिनती करती हुई बोलती है

हे भगवन ये सच मैं मेरी बात को सच मान रही है जबकि इसको मैंने कई बार बोलै है मैं लड़कों से दूर रहती है ..... ठीक है ये सच मान रही है तो इसको सच मैंने hi देती हुईं .... सायद इस वजह से ये मुझे लड़कों को लेकर आवर परेशां न करे .... कोमल मन मैं सोचती है

मैं अभी उससे नहीं मिली .... जब मैं उससे मिल लुंगी तो तुझे बता दूंगी .... मगर पहले तो प्रॉमिस कर फिर कभी इस बार मैं बात नहीं करेगी .... कोमल बोलती हुईं अपना हाथ नैना के आगे कर देती है


प्रॉमिस मगर आप मुझे बताना ज़रूर नहीं तो मैं घर पर सबको बता दूंगी .... नैना कुछ देर सोचने के बाद बोलती है

हे भगवन ये लड़की बिलकुल पागल है .... ठीक है जब मैं उससे सामने से मिल लुंगी तब तुझे भी मिला दूंगी ..... कोमल बोलती है फिर दोनों बहन अपने अपने क्लास मैं चली जाती है

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आदि की माँ इस वक़्त अपनी रूम मैं होती है आवर बीएड पर लेती हुई मन hi मन शर्मा रही होती है

अर्जुन मुझे इतना अच्छा क्यू लगने लगा है अर्जुन के करीब आते hi मुझे क्या होने लगता है

अर्जुन मेरे बेटे जैसा है वह मुझसे उम्र मैं कई सल्ल छोटा होगा फिर मैं उसके करीब जाते hi क्यू सोचने समझने की छमता खोने लगती हुईं

क्या हुआ आंटी आप क्या सोच रही है

आदि की माँ सोच मैं घूम होती है तभी रूम मैं चांदनी बीएड पर बैठी हुई पूछती है

कुछ नहीं बेटी .... अब तुम कैसी हो

आदि की माँ ... पूछती है

अभी अच्छा महसूस हो रही है आंटी ... आप का बहुत बहुत सुक्रिया आप की वजह से मैं ज़िंदा हुईं नहीं तो मैं मर hi जाती .... चांदनी बोलती हुई थोड़ी दुखी हो जाती है

मेरी अहसान मैंने की ज़रूरत नहीं है बेटी .... एक माँ अपनी बेटी पर कोई अहसान नहीं करती .... अहसान तो अर्जुन ने मुझपे किया है जो तुम्हारी जैसी बेटी से मुझे मिला दिया

आदि की माँ चांदनी को गले लगाती हुई बोलती है

माँ आप ने मुझे बेटी कहा है तो आप को मेरी कसम .... आप इस वक़्त क्यू परेशां है मुझे बता दीजिये .... अगर आप मुझे बेटी मान चुकी है तो मेरी कसम का लाज रख लेना

चांदनी अचानक आदि की माँ की हाथ अपनी सर पर रख देती है

वही आदि की माँ एक वक़्त के लिए सदमे मैं चली जाती है आदि की माँ को कुछ समझ मैं नहीं आता है अभी क्या हुआ वह बस चांदनी को घूरने लगती है

हे भगवन कैसी कसम दे दिया चांदनी ने .... जीवन मैं पहली बार तो किसी लड़की को अपनी बेटी मणि हुईं .... मैं भी तो एक बेटी चाहती थी भगवन से मगर भगवन ने मुझे बेटी नहीं दिया .... आवर आज hi तो मुझे चांदनी मिली है मैं इसकी झूठी कसम खा कर झूट बोली तो इसके साथ कुछ बुरा न हो जाये

लेकिन मैं इसको ये बात भी तो नहीं बता सकती मैं अर्जुन को पसंद करती हुईं

मैं ये बात इससे कैसे कहु .... मेरी बात सुन कर ये क्या सोचेगी मेरी बारे मैं की बुद्धि होने के बाद मुझे सेक्स करना है

हे भगवन कैसी मुसीबत मैं फसा दिया आप ने .... आदि की माँ मन hi मन सोच रही होती है

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अर्जुन का क्लास मैं मन नहीं लग रहा होता है तो वह लांच टाइम मैं hi घर जाने को सोचता है आवर बाइक लेकर घर की तरफ चल पड़ता है

वही घर मैं आँचल बिलकुल अकेली होती है क्यू की राखी देवी भी खेत पर चली गयी होती है

आँचल किचेन के काम कर के अर्जुन के रूम मैं चली जाती है आवर अर्जुन का रूम साफ करने लगती है

आँचल जब अर्जुन का रूम साफ कर रही होती है तभी आँचल की नज़र अर्जुन के बीएड के किनारे एक थैला पर जाती है जो आँचल की दोकान का नाम अंजलि लिखा हुआ होता है ..... जो अंजलि के नाम से दोकान आँचल hi राखी हुई होती है

अर्जुन घर गया था सायद माँ जी ने कुछ दिया है .... देखती हुईं माँ जी ने मेरे बेटे को क्या दिया है

आँचल मन मैं सोचती है आवर वह थैला उठ कर निकलने लगती है जो उस थैले मैं कई साडी सिर्फ ब्रा पेंटी hi होती है

ये तो सिर्फ ब्रा पेंटी है .... आँचल मन मैं सोचती है तभी आँचल की नज़र एक कागज पर जाती है

गीता बेटी इसमें 10 ब्रा पेंटी है तुमको जितनी रखनी है रख लेना बाकि अंजलि आँचल आवर अपनी माँ को दे देना

आँचल पढ़ कर कागज उसी मैं रख देती है

ये अर्जुन अपने रूम मैं क्यू रखा है सायद भूल गया होगा मैं गीता की रूम मैं रख देती हुईं

आँचल अर्जुन का रूम साफ कर के फिर गीता आवर अंजलि का भी रूम साफ करती है आवर फिर अपनी रूम मैं आ जाती है आवर अलमीरा से अपनी कपडे निकल कर बीएड पर रखती है आवर टावल लेकर बाथरूम मैं चली जाती है

अर्जुन घर आता है आवर बाइक लगा कर घर के गेट पर आता है तो गेट खुला हुआ होता है तो अर्जुन घर के अंदर आ जाता है आवर फिर अपने रूम मैं जाकर कपडे चेंज कर के हॉल मैं आकर बैठ जाता है आवर टीवी देखने लगता है कुछ देर के बाद अर्जुन को भूख का अहसास होता है तो अर्जुन किचेन मैं जाने को सोचता है लेकिन फिर आँचल की रूम मैं चला जाता है


माँ माँ आप सो रही है .... अर्जुन आँचल के रूम के बहार से बोलता है मगर आँचल की कोई आवाज़ नहीं आती है तो अर्जुन गेट को हल्का सा धक्का देता है तो खुल जाता है

अर्जुन रूम मैं जाकर आँचल को आवाज़ देने वाला होता है तभी अर्जुन को बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आती है तो अर्जुन समझ जाता है माँ नाहा रही है तो अर्जुन रूम से जाने को होता है तभी अर्जुन की नज़र बीएड पर राखी हुई माँ के कपडे पर नज़र जाती है

अर्जुन बीएड के पास आ जाता है आवर एक बार बाथरूम की तरफ देखता है आवर फिर बीएड पर राखी हुई साड़ी को उठा कर अपने मुंह मैं चिपका लेता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhh

माँ की साड़ी मुंह से चिपकने पर अर्जुन को बहुत hi अच्छा खुसबू महसूस होती है जिससे अर्जुन अपनी आँखें भी बंद कर लेता है

अर्जुन माँ की साड़ी की खुसबू कुछ देर तक सुंगता रहता है जो अर्जुन को अलग hi फाइलिंग का मज़ा आ रहा होता है अर्जुन फिर माँ की साड़ी बीएड पर रखता है तभी आँचल की पेंटी निचे गिर जाती है पेंटी को निचे देख कर अर्जुन के Jen's मैं लैंड तिलमिला जाता है जो पहले hi माँ की साडी की खुसबू से सर उठा चूका होता है

अर्जुन एक बार फिर से बाथरूम की तरफ देखता है आवर फिर अर्जुन की नज़र माँ की पेंटी पर जाती है आवर थोड़ा निचे झुक जाता है माँ की अनमोल खजाने को छिपाने वाली पेंटी को उठाने के लिए अर्जुन जब माँ की पेंटी उठा रहा होता है तो अर्जुन का हाथ भी कैंप रहे होते है

अर्जुन माँ की पेंटी उठ कर पेंटी को देखने लगता है आवर अर्जुन फिर छूट वाली जगह पर अर्जुन एक ऊँगली से सहने लगता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

माँ की छूट वाली जगह पर टाच करते hi अर्जुन की आँखें एक बार फिर से बंद हो जाती है जैसे अर्जुन माँ की छूट कैसी होगी आँखें बंद कर के देखने की कोशिश कर रहा है

अर्जुन इतना गर्म हो चूका होता है के वह भूल चूका होता है वह माँ के रूम मैं है आवर माँ अभी बाथरूम मैं नाहा रही है अगर वह रूम मैं आ गयी तो क्या सोचेगी उसके बारे मैं

अर्जुन माँ की पेंटी की छूट वाली जगह पर थोड़ी देर सहलाता है आवर फिर अपने Jen's का चैन खोल कर लैंड को बहार निकल देता है आवर माँ की पेंटी मैं लैंड दाल कर अपने लैंड को ठीक माँ की छूट वाली जगह पर लैंड रख कर पकड़ लेता है आवर लैंड को हिलने लगता है

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

अर्जुन अभी 2 से 3 बार hi हिलता है की उसके लैंड का पानी निकल जाता है अर्जुन खड़े खड़े hi कनापने लगता है आवर फिर अर्जुन बीएड पर बैठ जाता है

अर्जुन को खुद पर थोड़ा हैरानी भी होती है वह इतनी जल्दी कैसे झाड़ गया

अर्जुन जब अपने हाथ लैंड पर से हटा कर पेंटी मैं देखता है तो अर्जुन आवर भी हैरान हो जाता है क्यू की पेंटी छूट वाली जगह पूरी भींग चुकी होती है आवर अर्जुन का गधा मॉल ठीक छूट वाली जगह पर है

ओह गॉड माँ नाहा चुकी है .... अर्जुन को जब पानी गिरने की आवाज़ नहीं आती है तो सोचता है आवर जल्दी से पेंटी को साड़ी के अंदर रख कर रूम से निकल भागता है .....

अर्जुन को ये भी नहीं सूझता है की उसके लैंड के पानी से माँ की पेंटी पूरी गीली हो चुकी है आवर जब माँ पेंटी पहनेगी तो वह देख लेगी

अर्जुन घर से सीधे बहार निकल जाता है आवर बाइक लेकर गाओं के दोकान पर चला जाता है जहा पैन की गुमटी पर अमित बैठा हुआ होता है

अर्जुन भाई बड़े दिन के बाद आये दोकान पर ....

अर्जुन जब अमित की दोकान पर जाता है तो अमित बोलता है

अमित तुझे पता है मैं सिगरेट का फुल पैकेट लेता हुईं ... वह सहर गया था तो लेकर आया था ... आज hi ख़तम हो गया एक पैकेट दे .... अर्जुन बोलता है

अमित एक सिगरेट का पैकेट अर्जुन को देता है अर्जुन एक सिगरेट निकल कर जला देता है आवर अमित को पैसे देकर सिगरेट पिने लगता है

बस क्या हो रहा है मुझे मैं माँ के पार्टी इतना हवसी क्यू हो रहा हुईं

मैं माँ की कपड़ों के साथ कैसे एक हवसी इंसान की तरह कर रहा था बस मैंने माँ पेंटी पर hi सारा रास निकल दिया आवर पेंटी को उसी तरह छोड़ दिया

माँ नाहा कर पेंटी को पहनते वक़्त ज़रूर देख लेगी आवर नहीं भी देखेंगी तो पेंटी पहनने के बाद तो उनेह पता चल hi जायेगा .... क्या माँ को मुझपे सक होगा .... घर मैं बस मैं hi तो मर्द हुईं

अर्जुन मन मैं सोचता है तब तक सिगरेट भी ख़तम हो जाता है तो अर्जुन बाइक लेकर फिर से घर की तरफ चला जाता है

अर्जुन जैसे जैसे घर के करीब जा रहा होता है अर्जुन अंदर से दर भी रहा होता है ये सोच कर के क्या माँ पेंटी मैं उसका मॉल गिरा हुआ देख चुकी होंगी ... या बिना देखे hi पेंटी को पहन चुकी होंगी ....

माँ पेंटी को बिना देखे पहन भी चुकी होंगी तो यकीनन अपनी छूट पर मेरा पानी महसूस कर के उनको पता चल चुकी होगी

अर्जुन सोचते सोचते घर तक आ जाता है आवर बाइक लगा कर घर मैं न जाकर वही बाइक पर बैठ जाता है

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