Teri tadap jaldi khatam nahi hogi - Page 8 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Teri tadap jaldi khatam nahi hogi



अपडेट ...... 62

अगली सुबह


सोते हुआ अर्जुन अचानक hi उठ कर बैठ जाता है आवर अपना सर पकड़ लेता है अर्जुन कुछ देर अपना सर पकड़े रहता है तभी अर्जुन की नज़र खुद पर जाता है जो बिलकुल नंगा होता है मगर अर्जुन के ऊपर कई सरे बिस्तर पड़े हुआ होते है

अर्जुन थोड़े देर के लिए अपने हालत को देख कर हैरान होकर रूम मैं चरों तरफ देखने लगता है मगर अर्जुन को रूम मैं कोई दिखाई नहीं देता है

मैं इस रूम मैं कैसे आया मैं तो माँ के साथ दूसरे गाओं मैं गया था आवर फिर मैं माँ को लेकर घर जा रहा था

ओह्ह्ह माँ ...... माँ कहा है

ओह्ह no ये किसने किया मेरे साथ

अर्जुन को जैसे hi राखी देवी की याद आती है अर्जुन हड़बड़ा कर बिस्तर मैं से निकल जाता है तब अर्जुन खुद को बिलकुल hi नंगा पता है अर्जुन रूम के दरवाजे की तरफ देखते हुआ अपने कपडे देखने लगता है मगर अर्जुन को अपने कपडे कही नज़र नहीं आते है जो अर्जुन सामने तंगी हुई टावल लपेट लेता है

बीटा तुम उठ गए अब तबियत कैसी है तुम्हारी ... वह बुद्धि औरत रूम मैं आती हुई बोलती है

आऍप कौन है .... में मेरे कपडे किसने निकले ..... कहा है मेरे कपडे ... क्या किया है मेरे साथ आप ने

अरे अरे बीटा कितने सवाल पूछ लिए

बीटा तुम घबराओं नहीं

मैंने तुम्हारे साथ कुछ नहीं किया है

सब कुछ तुम्हारी माँ ने किया है

तुम्हारा कपडा तुम्हारी माँ धोने लेकर गयी है

ये लो कपडे पहन लो अभी

आवर ये बताओ तुम्हारा तबियत अब कैसा है .... वह बुद्धि औरत कपडा को अर्जुन के तरफ करती हुई पूछती है

मैं ठीक हुईं

क्या आप बता सकती है मेरे साथ मेरी माँ भी यह है ... अर्जुन कपडे लेते हुआ शर्म से पूछता है क्यू के वह बुद्धि औरत अर्जुन के जिस्म को घूरती हुई मन hi मन मुस्कुरा रही होती है जो अर्जुन देख कर थोड़ा शर्माने भी लगता है ऊपर से वह बुद्धि औरत ये भी बोल गयी के अर्जुन के कपडे उसकी माँ ने hi निकली है

हां बीटा तुम्हारी माँ भी एहि है

वह पास मैं एक झरने पर नहाने के लिए गयी है

बीटा तुम भी जाकर नाहा लो ..... बहुत बदबू आ रही है तुम्हारे जिस्म से ..... वह बुद्धि औरत अर्जुन के जिस्म को फिर से घूरती हुई बोलती है

उस बुद्धि औरत को अपने जिस्म को घूरते हुआ देख कर अर्जुन को अब आवर भी जयादा शर्म सा लगता है जो अर्जुन बुद्धि औरत से लिए हुआ कायदे को अपने जिस्म के आगे कर देता है

मगर अर्जुन के चेहरे का रंग पल भर मैं hi बदल जाता है आवर अर्जुन रात की बाते याद करने की कोशिश करने लगता है मगर अर्जुन को कुछ भी याद नहीं आता है

मगर अर्जुन को बुद्धि औरत के मुंह से जब ये सुनता है के उसके साथ उसकी माँ भी एहि है तो अर्जुन को अपनी हालत पर बड़ी hi हैरानी होती है आवर अर्जुन मन hi मन शर्म से लाल हो जाता है ये सोच कर के कही उसकी माँ ने उसे नंगा देख तो नहीं लिया होगा

अम्मा वह झरना पास मैं hi है न ... अर्जुन रूम से जल्दी मैं निकलते हुआ पूछता है

अर्जुन अंदर से बेचैन हो गया होता है आवर उस बुद्धि औरत को अपनी जिस्म को घूरते हुआ प् कर अर्जुन आवर वह नहीं रह पता है जो वह से निकल जाता है

हां बीटा बस थोड़ी सी दुरी पर है .... वह बुद्धि औरत बोलती है

बिलकुल पहलवान के जैसा शरीर है इस लड़के का ..... कितनी चीख रही थी इसकी .... पता नहीं ठण्ड के हालत मैं कैसे कैसे पकड़ा होगा बेचारी को .... वह बुद्धि औरत मन मैं सोचती है

अर्जुन रास्ता चलते हुआ रात की बाते याद करने की कोशिश कर रहा होता है मगर अर्जुन को कुछ भी याद नहीं आ रहा होता है ... तभी अर्जुन की नज़र कुछ दूर कड़ी अपनी माँ पर नज़र जाती है आवर अर्जुन का पेअर वही रुक जाता है

अर्जुन जो कुछ भी रात की बाते याद करने की कोशिश कर रहा होता है वह एक पल मैं hi भूल जाता है आवर अर्जुन की नज़र बस अपनी माँ के ऊपर टिक जाती है

वही राखी देवी कुछ दूर कड़ी होकर अपनी साड़ी की पल्लू ठीक कर रही होती है जो राखी देवी चिकनी जिस्म दिख रही होती है ... मगर अर्जुन की नज़र तो अभी बस अपनी माँ की नंगी दिख रही आनर की तरह खूबसूरत नेवल पर तिकी हुई होती


राखी देवी अपनी पल्लू ठीक कर रही होती है जिससे राखी देवी की भिनगा हुआ रेशमी बॉल राखी देवी की चेहरे के आगे गिर रही होती है तो राखी देवी अपने बॉल ऊपर की तरफ करती है तभी राखी देवी की नज़र सामने खड़ा अर्जुन पर जाती है जो राखी देवी अपने पलकें निचे कर लेती है
HD-wallpaper-dipasha-model-bong-saree-lover.jpg


वही अर्जुन अपनी माँ की जिस्म को बड़े hi प्यार से देख रहा होता है मगर अचानक अपनी माँ को अपनी तरफ देखते हुआ पाकर अर्जुन पास के झाड़ियों मैं चला जाता है

अर्जुन झाड़ियों मैं कुछ देर तक छिपा हुआ होता है

अर्जुन को थोड़ा दर आवर शर्म भी लग रहा होता है

अर्जुन क्या खूबसूरती है न तेरी माँ निचे से ऊपर तक तेरी माँ की जिस्म राश से भरी हुई है

अर्जुन तेरी माँ की तरह खूबसूरत औरत मैंने तो सहर ये इस गाँव मैं अभी तक नहीं देखा

अर्जुन तेरी माँ की इतनी खूबसूरत जिस्म आयी hi बर्बाद हो रही है अब तो तेरा मां hi यह नहीं है


अर्जुन मैं तो कहता हुईं तुझे भी अपनी माँ पर डोरे डालना चाहिए मुझे यकीन तेरी माँ तुझे मन नहीं करेगी

अर्जुन तेरी माँ अगर मन गयी तो तेरी किस्मत hi बदल जाएगी

अर्जुन हर रात तेरी माँ तेरी बाँहों मैं रहेगी

अर्जुन मुझे तो लगता है तुझे भी तेरी माँ तुझे पसंद है तभी तो तेरा टाइगर अभी डहर मार रहा है

अर्जुन झाड़ियों मैं छिपा हुआ होता है आवर अर्जुन के दिमाग मैं ये साडी बातें चल रही होती है

अर्जुन के दिमाग अपनी माँ की बातें चल रही होती है वैसे वैसे अर्जुन का लैंड आवर भी खड़ा हो रहा होता है

वही राखी देवी अर्जुन को देख चुकी होती है मगर राखी देवी के दिमाग मैं पता नहीं क्या होता है राखी देवी थोड़ी मुस्कुराती हुई दूसरी तरफ देखने लगती है


HD-wallpaper-dipasha-model-saree-lover-bong-1.jpg


राखी देवी मन hi मन मुस्कुराती हुई वह से बुद्धि अम्मा के घर की तरफ निकल जाती है

राखी देवी के जाने के बाद hi अर्जुन भी झाड़ियों से निकल कर अपनी माँ को जाते हुआ देखने लगता है मगर अर्जुन जल्द hi फिर से झाड़ियों मैं चला जाता है आवर झाड़ियों मैं जाते hi अर्जुन का हाथ खुद hi अपने लैंड पर चला जाता है आवर अर्जुन के आँखों मैं एक अजीब सा नस्ग होने लगता है

वही राखी देवी थोड़ी hi दुरी पर जाकर एक पेड़ के पास कड़ी हो जाती है आवर अपनी होंठों को डबडती हुई तिरछी नज़रों से अर्जुन की तरफ देखने की कोशिश करने लगती है


HD-wallpaper-priya-bong-model-saree-lover.jpg


राखी देवी पेड़ के पास इस तरह कड़ी हुई होती है के राखी देवी की बड़ी गांड पीछे की तरफ निकली हुई होती है जैसे राखी देवी अर्जुन को खुद hi बता रही है के अर्जुन आ आवर मेरी गांड मैं अपना लैंड दाल दे

राखी देवी फिर मुस्कुराती हुई वह से आगे चलने लगती है

अर्जुन ये क्या था

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन क्या बताऊँ भाई दिल कर रहा था जाकर तेरी माँ की बहार की तरह निकली हुई गदराई हुई बड़ी गांड को अपने हांथों से मसल मसल कर तेरी माँ की दूध की तरह उजली गांड को चुद की लाल होंठ की तरह लाल कर दूँ

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhh अर्जुन बर्दाश्त नहीं हो रहा है मुझसे

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन झाड़ियों मैं छिपा हुआ होता है आवर अर्जुन के दिमाग मैं फिर से अपनी माँ के बारे मैं ये सब बातें चलने लगती है आवर अर्जुन का हाथ कब लैंड पर चला जाता है अर्जुन को भी पता नहीं चलता है आवर अचानक hi अर्जुन के लैंड से पानी निकल जाता है

अर्जुन का पानी निकलते hi अर्जुन एक दर्द भरी अह्ह्ह निकल देता है जैसे अर्जुन के लैंड मैं दर्द हो रहा है

अर्जुन कुछ देर तक लैंड को पकडे हुआ उन झाड़ियों मैं बैठा hi रह जाता है

अह्ह्ह्हह्हह बस इतना दर्द क्यू हो रहा है जैसे मैं कई बार अपना लैंड हिला चूका हुईं

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बस ये क्या लगा है मेरे जिस्म पर ...

अर्जुन अपने नेवल के निचे आस पास देखते हुआ मन मैं सोचता है क्यू के अचानक hi अर्जुन को नेवल के निचे दर्द होने का अहसास होता है तो अर्जुन वह देखने लगता है तो अर्जुन को वह चरों तरफ उजला उजला दिखाई देता है जो अर्जुन हैरानी से देखने लगता है

ये तो लगता है मेरे hi लैंड का पानी है मगर इधर कैसे लगा ..... अर्जुन अपने जिस्म को उजले उजले डेग को मसलते हुआ मन मैं सोचता है

अर्जुन फिर वह से झरने के तरफ नहाने के लिए चला जाता है है

#################################


सुबह के 9:पं

आँचल हॉल मैं परेशान बैठी कभी राखी देवी तो कभी अर्जुन पर फ़ोन लगा रही होती है मगर रिंग होने के बाद भी कोई फ़ोन नहीं उठा रहा होता है जो आँचल आवर भी परेशान हो रही होती है

ममी माँ .... मैं माँ को कब से फ़ोन लगा रही हुईं मगर माँ फ़ोन hi नहीं उठा रही है

गीता घर के अंदर आती हुई बोलती है

गीता बेटी मैं भी दीदी को कब से फ़ोन लगा रही हुईं मगर वह फ़ोन नहीं उठा रही है सायद दीदी आवर अर्जुन ठाकुर साहब के घर hi सो गए होंगे आवर अभी तक नहीं उठे होंगे

सायद कभी रात तक पार्टी चली होगी

वैसे तू दीदी को क्यू पूछ रही है कोई काम है तो मुझे बता मैं कर देती हुईं .... आँचल बोलती है

ममी माँ आप की बेटी की छूट मैं आग लगी हुई है जो आप के राजकुमार hi बुझा सकता है

ममी माँ मैं माँ को नहीं बल्कि अर्जुन के बारे मैं जानना चाहती हुईं वह घर आया की नहीं

बोल भी क्या काम है तुझे

कोऊ कोइइइइइ काम नहीं है ममी माँ मैं बस आयी hi पूछ रही थी

गीता कड़ी होकर मन मैं सोच hi रही होती है के आँचल बोल पड़ती है ...... जो गीता थोड़ी घबरा कर हिचकते हुआ बोल पड़ती है

ठीक है मैं नाश्ता लगा देती है तब तक तू ज़रा मेरी राजकुमारी को उठा दे पता नहीं रात मैं क्या करती है जो अभी तक सो रही है .... आँचल बोलती हुई किचेन की तरफ चली जाती है

###############################

बेटी मैं तो सोचती थी हम गरीब लोगों की ज़िन्दगी दुखों आवर मुसीबतों से गुजरती है मगर बेटी तुमने तो बहुत दुःख देखा है

भगवन करे तुम्हारी ज़िंदगी अब से खुशियों से भर जाये

वह बुद्धि औरत अपनी आंसू पोछते हुआ कहती है आवर राखी देवी की सर अपनी गॉड मैं ले लेती है

वही राखी देवी उस बुद्धि औरत से लिपर्ट कर आवर भी रोने लगती है

कौन है ...... सोनी बेटी तुम आ गयी क्या

वह बुद्धि औरत बहार कुछ गिरने की आवाज़ सुन कर बोल पड़ती है मगर बहार से कोई आवाज़ नहीं आती है

वही राखी देवी भी उस बुद्धि अम्मा से अलग होकर रूम से निकल कर बहार देखती है तो कोई भी नहीं होता है जो राखी देवी थोड़ी हैरान हो जाती है बहार किसी को न देख कर

क्यू के गेट के पास पानी से भरा हुआ जग गिर चूका होता है आवर जग का सारा पानी बाह चूका होता है

################################
 
अपडेट ...... 63

राखी देवी घर के बहार भी निकल कर देखती है मगर चरों तरफ कोई नज़र नहीं आता तो राखी देवी फिर से रूम मैं चली जाती है

बेटी कुछ देर आवर नहीं रह सकती यह .... तेरे यह होने से मुझे बहुत अच्छा लग रहा है ... अर्जुन रूम मैं आता है तभी उस बुद्धि औरत की आवाज़ अर्जुन को सुनाई देती है

वही अर्जुन को देख कर राखी देवी कड़ी होकर अर्जुन के पास आ जाती है

अर्जुन बीटा कैसा लग रहा है अब .... राखी देवी अर्जुन के पास आकर पूछती है

माँ मैं अब ठीक हुईं

माँ हमेह अब चलना चाहिए घर पर माँ आवर दीदी परेशान हो रही होंगी .... अर्जुन बहुत hi धीरे से बोलता है मगर अर्जुन की नज़र बस अपनी माँ की चेहरे पर hi तिकी हुई होती है ... जैसे अर्जुन के सामने कोई देवी कड़ी हो आवर अर्जुन उनेह जिह भर के देख लेना छठा है

है अर्जुन बीटा हमेह जल्दी घर जाना चाहिए

मैं अभी तेरे कपडे लेकर आती हुईं .... सायद कपडे भी सुख hi गए होंगे .... राखी बोलती हुई रूम से बहार चली जाती है

बीटा हर माँ अपने बच्चों से प्यार करती है मगर तेरी माँ उन माओं से भी जयादा प्यार करती है तुझको

बीटा इतनी प्यार करने वाली माँ किस्मत वालों को hi मिलती है

बीटा कभी अपनी माँ को दुखी नहीं करना ... वह बुद्धि औरत भी अर्जुन के करीब आकर बोलती है आवर अर्जुन के सर पर हाथ फेर कर रूम से निकल जाती है

वही अर्जुन उस बुद्धि औरत को देखता रह जाता है आवर फिर अर्जुन की नज़र बहार अपनी माँ पर चली जाती है जो टंगे हुआ कपडे उतर रही होती है

अर्जुन बस अपनी माँ को hi देखता रह जाता है

अर्जुन बीटा तेरे कपडे तो अभी सूखे नहीं है तुम एहि कपडे पहन कर घर चल

भोला जब गाड़ी लेने आएगा तो अम्मा के कपडे भी लेता आएगा

अर्जुन अर्जुन अर्जुन .... राखी देवी बोलती है मगर अर्जुन राखी देवी के बातून का कोई जवाब नहीं देता है तो राखी देवी अर्जुन को हिला कर पुकारती है तब अर्जुन हड़बड़ा कर दूसरी तरफ देखने लगता है

अर्जुन बीटा तू ठीक है न ...... राखी देवी अर्जुन के पीठ पर हाथ रखती हुई पूछती है

माँ मैं ठीक हुईं

माँ काफी देर हो चुकज है घर चलते है .... अर्जुन इस बार बिना अपनी माँ को देख कर बोलता है

हां अर्जुन चलते है ....राखी देवी बोलती है

राखी देवी उस बुद्धि औरत से ये बोल कर चल देती है के मेरा ड्राइवर गाड़ी आकर ले जायेगा

राखी देवी सुबह होते hi जब रूम से बहार आती है तो उस जगह को देख कर समझ जाती है के यह से उनका गाँव जयादा दूर नहीं है इस लिए राखी देवी अर्जुन को लेकर पैदल hi निकल जाती है

अर्जुन रास्ता चल रहा होता है मगर अर्जुन की नज़र बार बार अपनी माँ पर जा रहा होता है मगर जैसे hi राखी देवी अर्जुन की तरफ देखती है अर्जुन आगे रस्ते की तरफ देखने लगता है

राखी देवी भी रास्ता चल रही होती है आवर वह भी बार बार अर्जुन को देख रही होती है आवर अर्जुन को बार बार खुद को देखते हुआ पाकर थोड़ी हैरान भी हो रही होती है

क्यू के अर्जुन कई सल्ल के बाद आज पहली बार राखी देवी के चेहरे को इस तरह देख रहा होता है जो राखी देवी को अच्छा तो बहुत लग रही होती है मगर हैरान भी हो रही होती है के अर्जुन इस तरह क्यू देख रहा है कही मेरे चेहरे पर कुछ लगा तो नहीं है लेकिन राखी देवी कुछ पूछती नहीं है

अर्जुन बीटा लगता है फ़ोन मैं पानी चला गया है

फ़ोन खुल भी नहीं रहा है

देख बन सकता है तो सहर जाकर बनवा लेना नहीं तो दूसरा फ़ोन ले लेना ..... राखी देवी अर्जुन की तरफ अपनी आवर अर्जुन की फ़ोन देती हुई बोलती है

ठीक है माँ

अर्जुन बड़े सु प्यार से अपनी माँ को देखता हुआ बोलता है आवर राखी देवी से दोनों फ़ोन ले लेता है

################################

ममी माँ अर्जुन घर पे दिखाई नहीं दे रहा है .. अब फिर कहा चला गया

अंजलि किचेन मैं आँखें मलते हुआ आँचल से पूछती है

हे भगवन जी ये कब बड़ी होगी

आँचल बोलती है आवर किचेन की गेट अचानक बंद कर देती है आवर अंजलि को घूरने लगती है

क्या हुआ ममी माँ आप मुझे इस तरह क्यू देख रही है .... अंजलि मुंह बना कर बोलती है

अंजलि को थोड़ा बुरा लग रहा होता है के आँचल उसे इस तरह क्यू घर रही है जब के अभी मैंने तो कुछ उल्टा सीधा भी नहीं किया है

मैं तो सिर्फ देख रही हुईं क्यू के तुझे मरने का मेरा दिल hi नहीं करता है इतना प्यार hi तुझे करती हुईं मैं

मगर सुकर मन अभी दीदी यह नहीं है वर्ण वह आज तेरी गल्ल ज़रूर लाल कर देती

पागल लड़की अपनी हालत देख किस तरह किचेन मैं आई है

Ahhhhhhhhhhh


जा कपडे पहन कर आ ... आँचल बोल कर बहुत hi प्यार से अंजलि के सर पर मार hi देती है जो अंजलि झूठा अह्ह्ह भर hi लेती है

मगर जैसे hi अपनी ममी माँ की बातें सुनती है अंजलि खुद की हालत देख कर अपनी सर निचे कर लेती है क्यू के अंजलि खुद को ब्रा पेंटी मैं पति है

ओह्ह तेरी मैं तो आज बच गयी ..... अंजलि मन मैं सोचती है

वैसे ममी माँ मैं कैसी लग रररररररहीइइइइइइइइ ह्ह्ह्हह्हूऊईन्न्नन

अंजलि गेट मैं सात कर बड़ी hi कमुख भरी आवाज़ मैं बोलती है

अंजलि की कमुख भरी आवाज़ आवर अंजलि की जिस्म को देख कर आँचल भी एक वक़्त के लिए कही खो जाती है


HD-wallpaper-anjali-gaud-model-bikini.jpg


ममी माँ कितनी देखोगी अब बता भी दीजिये .... अपनी ममी माँ को अपनी जिस्म को घूरती हुई देख कर अंजलि बोलती है

क्या बोली रुक मैं अभी बताती हुईं ..... अंजलि की आवाज़ सुन कर आँचल होश मैं आती है आवर अंजलि को मरने के लिए भगति है मगर तब तक अंजलि किचेन से भाग चुकी होती है

हे भगवन .... लगता है गीता बेटी से पहले इसकी hi शादी करनी जोगी हमेह .... आँचल मन मैं सोचती है

###############################

राखी देवी आवर अर्जुन अपने गाओं मैं आ चुके होते है

राखी देवी आज अपने गाओं मैं बड़े hi शान से चल रही होती जैसे राखी देवी को आज किसी भी चीज का दर नहीं लग रही है

आएसा नहीं था के राखी देवी पहले रास्ता चलते हुआ डर्टी थी मगर थोड़ी मन मैं बेचैनी सी रहती थी के उनकी जिस्म को कौन किस नज़र से देख रहा है ये मन मैं चलती hi रहती थी ...

मगर आज राखी देवी की चेहरे का रंग बदला हुआ था आवर उसकी वजह था अर्जुन

क्यू के आज अर्जुन राखी देवी के बिलकुल साथ मैं चल रहा होता है जिससे राखी देवी के मन मैं पहले की तरह कोई भी ख्याल मन मैं नहीं आ रही होती है

या कह सकते है अर्जुन के साथ आज चलने से राखी देवी आवर कुछ याद नहीं कर रही होती है

राखी देवी के चेहरे पर इतनी ख़ुशी होती है के राखी देवी चलते चलते अर्जुन को देख कर मन hi मन मुस्कुरा भी रही होती है

नमस्ते मालकिन ..... एक औरत अपने घर से निकट हुआ बोल पड़ती है जो राखी देवी वही रुक जाती है

राखी देवी के रुकते hi अर्जुन भी रुक जाता है

मालकिन छोटे मालिक तो आप से भी लम्बे हो गए है ... वह औरत राखी देवी के कुछ बोलने से पहले hi बोल पड़ती है

उस औरत के बोलने पर राखी देवी बगल मैं खड़ा अर्जुन को देख कर मुस्कुरा पड़ती है आवर अर्जुन के चेहरे पर हाथ फेर देती है

सही कह रही हो काकी ..... अर्जुन बिलकुल अपने पापा पर गया है

वैसे काकी कई दिन से काम पर नहीं आ रही है कोई परेशानी तो नहीं है ..... राखी देवी उस औरत से पूछती है

मालकिन आप के रहते हम गाओं वालों की कभी परेशानी होगी क्या

आप तो हम गरीबों के बिन मांगे hi हम्हारी मदद कर देती है ... वह औरत बोलती है

ठीक है काकी कोई परेशानी हो तो बता दीजियेगा .... राखी देवी बड़े hi गर्व के साथ बोलती है आवर उस औरत को हाथ जोड़ती हुई आगे चलने लगती है अपने माँ के जाते hi अर्जुन भी साथ चलने लगता है

भगवन जीई ाएसि hi मुस्कान मालकिन के चेहरे पर बनाये रखने बरसों बाद आयी मुस्कुराते हुआ मालकिन को देख रही हुईं .. . राखी देवी के जाने के बाद वह औरत राखी देवी को जाते हुआ देख कर मन मैं सोचती है

कुछ hi देर मैं राखी देवी आवर अर्जुन हवेली पहुंच जाती है

घर आने के बाद राखी देवी अपने रूम मैं चली जाती है

वही अर्जुन भी अपने रूम मैं चला जाता है

अर्जुन रूम मैं आने के बाद hi बाथरूम रूम चला जाता है

अर्जुन बाथरूम मैं जाकर अपने कपडे निकल रहा होता है तभी अर्जुन के रूम मैं कोई आता है आवर अर्जुन का रूम का गेट धीरे से बंद कर देता

###########################################
 
अपडेट ..... 64

अर्जुन बाथरूम मैं आकर अपने सरे कपडे निकल चूका होता है आवर झरने के निचे खड़ा होकर ठन्डे ठन्डे गिर रहे बूंदें का मज़ा लेने लगता है तभी अर्जुन को अपने जिस्म पर किसी की हाथ का अहसास होता है जो अर्जुन हड़बड़ा कर आँखे खोल देता है ..... गीता डीइइइइइइ

अर्जुन आगे कुछ बोलता तभी गीता अर्जुन के होंठों पर अपना होंठ रख देती है आवर अर्जुन का सर पकड़ कर चूसने लगती है अर्जुन सुरु मैं तो अपनी दीदी को दूर करने की कोशिश करता है मगर कर नहीं पता है आवर उसकी वजह होती है गीता की गदराई हुई जिस्म की गर्मी जो बिलकुल नंगी hi अर्जुन से लिपटी हुई होती है आवर गीता दोनों टाइट चुकी का अहसास पाकर अर्जुन का लैंड अंडरवियर मैं फनफनाने लगता है

गीता अर्जुन के होंठ को बड़े hi प्यार से चूसने लगती है आवर एक हाथ अर्जुन के सर पर रख कर अर्जुन के बाल सहलाने लगती है

अर्जुन का हाल अब बुरा होने लगता है आवर अर्जुन अपनी गीता दीदी को पूरी तरह बाँहों मैं भर लेता है आवर अपनी गीता दीदी की कमर को पकड़ कर मसल देता है

अअअअअअअ Hhhhhhhhhhhhh

अर्जुन के पकड़ने से गीता अर्जुन के होंठों से मुंह हटा कर सिसक पड़ती है मगर अर्जुन से अलग नहीं होती आवर फिर से अर्जुन के होंठों को चूमने लगती है

अर्जुन भी अपनी दीदी गुलाब की तरह नरम राश भरी होंठ को चूमने लगता है आवर एक हाथ से अर्जुन अपनी गीता दीदी की चिकनी कमर को बड़े hi प्यार से सहलाने लगता है

अर्जुन के इतने करीब आने के बाद तो गीता ख़ुशी से झूम उठती है आवर किश तोड़ कर गर्म गर्म शैशे छोड़ते हुआ अर्जुन को देखने लगती है

आआह्ह्ह्हह्ह hhhhhhhhhhhh

गीता अर्जुन को मदहोशी भरी आँखों से देख रही होती है तभी अर्जुन गीता को पकड़ लेता है आवर गीता की टाइट चुकी को मुंह मैं भर लेता है आवर गीता की चुकी को चूसने लगता है

अचानक अर्जुन के हमले से गीता सहम जाती है आवर एक लम्बी आह्ह्ह्हह भर लेती है

वही अर्जुन अपनी गीता दीदी की टाइट चुकी को चूसते हुआ छोड़ देता है आवर फिर अपनी गीता घुमा कर गीता की पिट को चूमने लगता है आवर दोनों हाथ से अपनी गीता दीदी की कमर पकड़ कर पीछे की तरफ दबाने लगता है जिससे गीता की हालत ख़राब होने लगती है आवर गीता मुंह खोल कर सिसकियाँ ज़ोर ज़ोर से लेने लगती है

हुईं आह्ह्ह्ह ऊह्ह्हह्ह्ह्ह हहह आआआ

Aaaaaahhhhhhhhhhhh

अहह अर्जुन ने इतना hi बस मुझे छुवा तो इतना मज़ा आ रहा है जब अर्जुन मेरी (छोडाइइइइइइ ) नहो प्यार करेगा तो कितना मज़ा आएगा .....आआअह्ह्ह्हह

गीता सिसकियाँ लेती हुई मन मैं सोचती है आवर खुद hi शर्मा जाती है

वही अर्जुन आज बिलकुल गर्म हो चूका होता अर्जुन अपनी गीता दीदी की जिस्म कभी चुम रहा होता है तो कभी अपनी गीता दीदी की जिस्म को मसल रहा होता है

आह्ह्ह्हह धीरे आआआअह्ह्ह्ह माआ आअह्हह्ह्ह्ह ाररर्जुउउनंनंन आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्सस्स्स्स स्स्सस्स्स्स ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाआआई Hhhhhhhhhhh आआह्ह्ह्ह ssssssssssssssss

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

दीदी दीदी क्या हुआ आप अंदर हो क्या Diiiiiiiiiiiiiiiii क्या हुआ Diiiiiiiiiiii

अर्जुन इतना गर्म हो गया होता है की वह अपनी गीता दीदी की जिस्म को कभी चुम रहा होता है तो कभी बड़ी बेरहमी से मसल रहा होता है जो गीता तड़पती हुई अर्जुन को मन रही होती है मगर अर्जुन रुकने का नाम hi नहीं ले रहा होता है

गीता भी अर्जुन से अलग हो भी तो नहीं रही होती

आखिर गीता अर्जुन से अलग हो भी तो कैसे गीता कब से एहि प्यार पाने के लिए तो तड़प रही होती है आवर वही प्यार उसका अर्जुन उसे दे रहा होता है आवर गीता सायद सिसकियाँ आहे भर कर अर्जुन का प्यार का मज़ा ले रही होती है मगर गीता को ये दर सत्ता रही होती है की उसकी चीख बहार कोई न सुनले आवर गीता कब से अपनी चीखे दबाने की कोशिश कर रही होती है मगर अर्जुन के हमले से गीता आवर अपनी चीखे नहीं रोक पति है आवर गीता एक गर्म मदहोशी भरी लम्बी आहे भर लेती है

या यह कह सकते है की अर्जुन आएसा कर hi देता है की गीता खुद को रोक नहीं पति है

दरअसल अर्जुन अपनी गीता दीदी की जिस्म की हर आंग को कभी चुम रहा होता है तो कभी ज़ोर ज़ोर से दबा रहा होता आवर उसी बिच अर्जुन का लैंड इतना टाइट खड़ा हो जाता है की अर्जुन आवर खुद को रोक नहीं पता है आवर अचानक hi अर्जुन अपनी गीता दीदी को आगे की तरफ झुका देता है जिससे उसकी गीता की गांड की छेड़ ठीक उसके लैंड के सामने आई जाती है आवर अर्जुन देरी किये hi लैंड को अपनी गीता दीदी की गांड की छेड़ मैं घुसने लगता है मगर लैंड गीता की गांड मैं नहीं जाता है जो गीता झट से बैठ जाती है वही अर्जुन दूर खड़ा हो जाता है मगर जैसे hi बहार से अंजलि की आवाज़ दोनों के कानो मैं जाती दोनों आवर भी सहम जाते है

गीता की तो आँखों मैं आंसू भी आ गयी होती है आवर गीता दरी सहमी हुई अर्जुन को देख रही होती है जैसे सामने उसका भाई नहीं कोई कॅशे हो

डीइइइइइइ आप अंदर हो क्या

अंजलि की इस बार तेज़ आवाज़ सुन कर अर्जुन आवर गीता दोनों hi उठ खड़े होते है आवर गीता बाथरूम से निकल कर रूम मैं आ जाती है आवर अपने सरे कपडे पहन लेती है वही अर्जुन बाथरूम का गेट लॉक कर देता है

गीता कपडे पहन कर जल्दी hi गेट खोल देती है

क्या हुआ इतनी चिल्ला क्यू रही है ज़रा भी इसके साथ नहीं रहने देती है .... जा तुहि रह उसके साथ

गीता गेट खोलते hi बोल पड़ती है आवर बिना अंजलि की तरफ देखे अपनी रूम की तरफ चली जाती है वही अंजलि बस अपनी दीदी को जाते हुआ देखती रह जाती है

दीदी को हो क्या गया ..... मैंने तो कुछ किया भी नहीं

अंजलि बिना अर्जुन के रूम मैं गए hi अपनी रूम मैं चली जाती है ये सोचते हुआ के आखिर गीता दीदी ने उसे डांटा क्यू

वही अर्जुन बाथरूम मैं झरने के निचे बैठा रह जाता है ताकि उसे कुछ रहत मिल सके

वही राखी देवी की रूम मैं आँचल चाय लेकर जाती है तो देखती राखी देवी अभी बाथरूम से निकल रही है आवर मन hi मन गुनगुना भी रही है आवर राखी देवी की चेहरे भी खिला हुआ है जैसे राखी को कोई खज़ाना मिल गया है

दीदी क्या बात है आप को इतनी खुश तो सायद hi कभी देखा मैंने .... आँचल खुश होती हुई बोलती है आवर राखी देवी की करीब चली जाती है मगर राखी देवी बिना आँचल की तरफ देखे सीसे के सामने कड़ी होकर अपनी बाल सवारने लगती है

अह्ह्ह्हह्हह

क्या कर रही है

आँचल राखी देवी के पीछे आते hi राखी देवी की गांड दबा देती है जो राखी देवी अह्ह्ह भर्ती हुई बोलती है

आप इतनी मुस्कुरा क्यू रही है मुझे बताइये न वर्ण ... आँचल राखी देवी की टावल पकड़ कर चेतावनी देते हुआ बोलती है

अह्ह्ह्ह छोड़ आँचल वर्ण कोई आ जायेगा मैं बताती हुईं

राखी देवी भी अपनी टावल पकड़ कर बोलती है

वही आँचल राखी देवी की टावल छोड़ कर वही कड़ी हो जाती है

आँचल तुझे जानना है मैं इतनी खुश क्यू हुईं तो सुन मैं आज इतनी खुश इस लिए हुईं की आज मुझे बरसों बाद अपने पति की कमी महसूस नहीं हुई

आँचल आज जब अर्जुन मेरे साथ कदम से कदम मिलकर चल रहा था तो मुझे आएसा लग रहा था मुझे आज किसी का दर नहीं है

आँचल मैं जब पहले रास्ता चलती थी तो मेरे मन मैं कई सरे सवाल आते थे के मेरी जिस्म को कौन किस नज़र से देखता है आवर मैं रास्ता चलती हुई बहुत शर्मिंदगी महसूस करती थी मगर आज जब अर्जुन मेरे साथ चल रहा था तो मेरे मन ये सब ख्याल नहीं आई रही होती है

आँचल मैं आज इस लिए खुश हुईं

आँचल तुझे पता भी है मैं अकेली औरत कई सरे मर्दों के बिच रहा करती हुईं ये जानते हुए की वह मर्द कैसे मेरी जिस्म को घूरते है .... आँचल अर्जुन के आज साथ होने से मैं आज बहुत बहुत खुश हुईं मुझे किसी का दर भी महसूस नहीं हो रही थी

राखी देवी बोलती हुई थोड़ी दुखी हो जाती है

दीदी भगवान् से मेरी ये दुआ है अर्जुन आप के साथ इसी तरह खड़ा रहे दीदी आज मैं भी बहुत खुश हुईं के अर्जुन को मैंने पला है

दीदी आज मैं भी खुश हुईं की अर्जुन की परवरिश मैं मैंने कोई कमी नहीं किया है

राखी देवी की बात सुन कर आँचल की भी आँखे भर आती है आवर आँचल की आँखों मैं ख़ुशी की आंसू आ जाती है दोनों नन्द भाभी एक दूसरे की गले लग जाती है

###########################

वही सहर से दूसर एक सुनसान बस्ती से कभी दूर एक बांग्ला होता है आवर उस बंगले के चरों तरफ ऊँची ऊँची दीवारे होती है उस बंगले मैं जाने के लिए बस एक गेट hi रास्ता होता है वही बस्ती से एक लड़का बाइक लेकर तेज़ी से उस बंगले के गेट के पास आता है

क्या रे राजू माल लेकर आ गया क्या

उस लड़के के पास आते hi बंगले का चौकीदार बोलता है जो उसकी उम्र भी लड़के के जितनी होती है

हां संकर माल लेकर आ गया हुईं चल जल्दी से गेट लगा आवर चल पिटे है

राजू बाइक बंगले के अंदर करते हुआ बोलता है तो संकर भी बंगले का गेट लॉक कर देता है

चल जल्दी जल्दी पैक बना आवर सबर नहीं हो रहा है

संकर बड़े hi बेताबी से बोलता है

सेल इतना हड़बड़ा क्यू रहा है आज हम दोनों पूरी रात मस्ती करेंगे बड़े भाइये इतने दिन नहीं आते तो आज रात थोड़ी आएंगे .... लगता है वह किसी बड़े मछली के चक्कर मैं है

राजू सरब का पैक बनाते हुआ बोलता है

राजू आवर संकर पैक पर पैक पिने लगते है आवर 1 घंटे के अंदर मैं राजू आवर संकर तीन बोतल खली कर देते है दोनों के सर पर नशा सवार हो जाता है

संकर तू उस कमरे मैं गया था क्या .... राजू नशे की हालत मैं बोलता है

राजू क्या बक रहा है तुझे पता है न उस कमरे मैं जाने की खबर सुन कर hi भैया हमारी जान ले लेंगे मैं क्यू जाने लगा उस कमरे मैं

संकर थोड़ा डरता हुआ बोलता है

साला कितनी बुरी किस्मत है हम्हारी

हमारे पास इतनी खूबसूरत काली है मगर हम उसके खुसबू लेने तो दूर देख भी नहीं सकते है ....

राजू कुछ याद करते हुआ अपने लैंड को दबाते हुआ बोलता है

सही कह रहा है राजू भाई ... भाभी इतनी खूबसूरत है की उन्हें पहले देख कर hi मेरा पानी निकल जाता था मगर अब तो हम उनेह देख भी नहीं सकते है पता नहीं भाइये उनेह बंगले के अंदर क्यू रखे हुआ है कई महीने से तो भाभी बंगले से बहार भी नहीं निकली है

संकर भी अपना लैंड मसलते हुआ बोलता है

राजू आवर संकर की आँखे तो बिलकुल लाल लाल हो चुकी होती है आवर वह दोनों तो सरब के नशे मैं होने के बाद भी जब जब भाभी को याद कर रहे होते है उन दोनों की आँखि मैं एक हवश भरी नशा होने लगती है आवर वह दोनों अपने लैंड मसलने लगते है

संकर मैं आवर नहीं रह सकता हुईं भाभी जी को देखे हुआ भैया भी काफी महीने से यह नहीं आये है सायद उनके साथ कुछ हो गया है

मेरे ख्याल से इस बार भैया किसी मछली को फसते फास्ट खुद hi फास गए होंगे तभी उनका फ़ोन भी नहीं आया इतने दिन

संकर अगर भाइये किसी के जल मैं फास गए होंगे तो यक़ीनन उनेह जान से मार दिया होगा

संकर अगर भैया मर गए है तो फिर भाभी का ख्याल हमेह hi रखना होगा

संकर हम दोनों ने काफी दिन भाभी को याद कर करके हाथ से काम चल्या है .... चल आज हम दोनों भाभी की राश चूस लेते है

क्या बक रहा है राजू भाई आयेशा ख्याल भी तेरे दिमाग आया कहा से

तुजे पता है न कितना हरामी है भाइये उसे जब पता चले तो वह हमारे परिवार की माँ छोड़ देगा राजू तुझे नशा हो गया है तू घर जा

संकर डरते हुआ बोलता है आवर सरब की बोतल सभी समेटने लगता है मगर बस नशे मैं सर निचे किये हुआ वही बैठा रह जाता है

वही बंगले के कभी अंदर एक रूम का लाइट जल रही होती है आवर उस रूम मैं एक बहुत hi खूबसूरत पारी की तरह ोुरत बीएड पर बैठी हुई होती है

वह ोुरत जितनी खूबसूरत होती है की उसकी पूरा जिस्म hi दूध की तरह उजली होती है मगर उस ोुरत की चेहरे से बस आंसू hi आंसू निकल रही होती है वह ोुरत अभी बस एक ज़िंदा लाश की तरह बीएड पर बैठी हुई होती है

तभी उस रूम का गेट खुलता है आवर एक उसकी hi उम्र की ोुरत रूम मैं आती है

भाभी ये लीजिये खाना खा लीजिये ... वह ोुरत खाना बीएड पर रक्ति हुई बोलती है

नीलम मुझे भूख नहीं है ... वह ोुरत बड़ी hi धीमी आवाज़ मैं बोलती है ... जैसे उसकी मुंह से आवाज़ hi नहीं निकल रही है

भाभी आप क्यू खुद को तकलीफ दे रही है आप खाना नहीं खाएंगी तो ज़िंदा कैसे रहेंगी भगवान् के लिए भाभी खाना खा लीजिये आप कई दिन से खाना नहीं खा रही है

नीलम बोलती हुई उस ोुरत के पास बैठ जाती है

नीलम मुझे ज़हर लेकर दे दे मैं उसे खा लुंगी

नीलम मैं आवर खुट खुट कर नहीं जीना चाहती नीलम मैं मरना चाहती हुईं ... नहीं जीना चाहती

वह ोुरत रोटी हुई बोलती है

भाभी आप क्या बोल रही है आप मरना क्यू चाहती

आप एहि चाहती है आप के मरने के बाद आप की बेटी अनाथों की तरह जिये भाभी आप एहि चाहती है

हे भगवन ये मैंने क्या बोल दिया .... नीलम को जैसे hi अपनी गलती का अहसास होती है नीलम चुप हो जाती है

नीलम क्या बोली मेरी बच्ची अभी ज़िंदा बोल न नीलम क्या मेरी दिल की धड़कन ज़िंदा है बोल नीलम बोल न

क्या मेरी पारी ज़िंदा है ... वह ोुरत नीलम को पकड़ कर झिंझोरती हुई पूछने लगती है

हां भाभी आप की बेटी ज़िंदा है भाइये ने आप से झूट बोलै वह किसी आठ आश्रम मैं मगर मुझे नहीं पता वह कहा है ये बात भैया ने बताने के लिए मुझे मन किया है मगर आप की बेबसी मुझसे देखि नहीं गयी भगवन के लिए आप खाना खा लीजिये ....

नीलम बोल कर खाना आगे कर देती है

वही वह ोुरत ख़ुशी की आंसू बहती हुई खाना खाने लगती है

तुम कहा हो मेरी पारी ममम मैं आप को धुंध लूंगी आप कही भी हो आप की माँ आप को धुंध लेगी आप को आवर मैं अकेले नहीं रहने दूंगी .... वह ोुरत मन मैं रोटी हुई सोचती है मुझे

पानी .... अभी लाइ Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

वह ोुरत नीलम से पानी मांगती है आवर नीलम बीएड से उठ कर पानी लेन जाती है तभी वह ोुरत पीछे से किसी चीज से नीलम के सर पर वार कर देती है जिससे नीलम चीख पड़ती है

नीलम के गिरते hi वह ोुरत रूम से निकल कर बहार की तरफ भाग जाती है
 
अपडेट 65

रात हो चुकी होती आँचल आवर गीता किचेन मैं खाना बना रही होती है वही अंजलि उनके पास बैठ कर अपनी फ़ोन देख रही होती है आवर रह रह कर अपनी गीता दीदी को घर रही होती है मगर गीता बिना अंजलि को देखे hi अपनी काम कर रही होती है


गुड़िया ज़रा वह मिर्च का दबा दे

आँचल अंजलि से मांगती है

मगर अंजलि दबा न देकर फ़ोन मैं लगी रहती है

अह्ह्ह मंईईई मायआ

क्या करू मैं इस लड़की का एक काम भी नहीं करती है दे फ़ोन मुझे

आँचल जाकर अंजलि के सर पे मरती है आवर अंजलि की हाथ से फ़ोन छीन लेती है

ममी मा प्लीज फ़ोन दीजिये न वर्ण मैं हार जाउंगी माआआआ

अब तो फ़ोन मिल hi जायेगा ...

अंजलि इतनी प्यार आवर मासूमियत से आँचल को मा बोलती है की गीता मन मैं बोल पड़ती है आवर वही होता भी है आँचल से फ़ोन मैं एक चल चल देती है

देख मैंने उसकी एक गोटी काट डीई

आँचल अंजलि को फ़ोन देती हुई बोलती है

ओह्ह्ह मेरी प्यारी ममी माँ .. ुम्माआआआ

अंजलि आँचल के गाल पर किश करती हुई फ़ोन ले लेती है

देख अच्छे से खेल हारना नहीं

आँचल ख़ुशी से मुस्कुराती हुई बोलती है

वही अंजलि फिर से गेम खेलने लगती है

गीता बेटी क्या हुआ ...... मुझे इस तरह क्यू देख रही है

आँचल गीता को घूरती हुई देखती है तो पूछती है

कुछ नहीं ममी मा

गीता बोल कर अपना काम करने लगती है वही आँचल भी मन मैं समझ जाती है गीता उस क्यू घर रही है इस लिए आँचल जाकर गीता की माथा भी चुम लेती है

तू जानती है न मैं अंजलि को कितना प्यार

हां मुझे पता है उसने आप को hi पहले माँ बोली थी

गीता मुंह बनती हुई बोलती है

वही आँचल मुस्कुरा कर गीता को फिर से चुम लेती है आवर अंजलि को देखने लगती है


राखी देवी अपनी रूम मैं बैठी कुछ फ़ैल देख रही होती है आवर कुछ लिख भी रही होती है आवर कुछ गुनगुना भी रही होती है

अर्जुन कहा है जब से आई हुईं एक बार भी नहीं देखा ... उसके रूम देखती हुईं

राखी देवी मन मैं सोचती है आवर फ़ैल रख कर अर्जुन के रूम की तरफ चल पड़ती है मगर राखी देवी को अर्जुन रूम मैं नहीं मिलता है तो राखी देवी किचेन मैं जाकर आँचल से पूछती है तो आँचल बता देती है अर्जुन बहार गया है तो राखी देवी फिर से अपने रूम मैं आ जाती है

अर्जुन अभी अपने खेत वाले रूम मैं होता है आवर बीएड पर लेता हुआ होता है आवर अर्जुन के दिमाग मैं बहुत कुछ चल रहा होता है

ये सब हो क्या रहा है मेरे साथ मैं जिस वजह से इतने दिन अपने घर से दूर रहा आज मेरे साथ वही हो रहा है

मैं सहर मैं कितना अच्छा से रह रहा था मगर गाओं मैं आते hi मेरे साथ क्या क्या होने लगा

मेरी अपनी बड़ी दीदी मुझसे शादी करनी चाहती है

मेरे साथ सधी करने के लिए इतनी बड़ी साजिश भी किया दीदी ने आवर मेरे मन करने पर कितनी दुखी हो गयी थी

अब तो मैं उनेह मन भी नहीं कर सकता हुईं क्यू की जब से मैंने उनेह हां बोलै है वह कितनी जयादा खुश रह रही है ..... मैं उनके आँखों मैं आंसू तो नहीं ला सकता मैं अपनी दोनों बहनो के लिए कुछ भी कर सकता हुईं

अर्जुन ये सब तो ठीक है मगर उस आस्था का क्या वह तुझे कितना प्यार करती है मगर तेरी वजह से बेचारी की आँखों मैं आंसू आ गयी थी उस रात

अर्जुन उसकी जैसी लड़की तुझे कही नहीं मिलेगी

अर्जुन तुमने हर बार उस लड़की की आँखों मैं आंसू लाया है मगर फिर भी वह लड़की तुझसे दूर जाने के बजाये पास hi आती है

उस रात की हरकत से पता नहीं वह आस्था अब किस हालत मैं होगी अर्जुन तुमने आस्था के साथ अच्छा नहीं किया

वह कितनी भोली माशूम सी लड़की है

वह तुमेह सच्चे मन से प्यार करती है तभी तो तुंहारी हर बेरुखी सी बातें सुन कर भी तुमपे कभी गुस्सा नहीं हुई

मानिए अच्छा नहीं किया आस्था के साथ

अर्जुन के दिमाग मैं ये साडी बात चल रही होती है आवर अचानक ये सब्द अर्जुन के मुंह से निकल जाता है

अर्जुन अपनी आँखें बंद कर के फिर से किसी सोच मैं पद जाता है

____________________________

पूनम आस्था दीदी अभी भी दुखी है क्या वह दिख नहीं रही है वह है कहा ...... गुड़िया जल्दी बता न मुझे दीदी की फिकर हो रही है

पूजा जैसे hi घर के अंदर से आती है सामने पूनम को हॉल मैं देख कर पूछती है

पूजा दीदी आप थोड़ा सांत हो जाइये मैं आप के लिए अभी पानी लेकर आती हुईं पयास लगी होगी आप को आते hi इधर उधर भागने लगी

पूनम बोलती हुई वह से जाने लगती है तभी पूजा नीलम के हाथ को पकड़ लेती है

गुड़िया मुझे पायस नहीं लगी है बता दीदी कहा है

मैं दीदी के लिए वह से भाग कर आई हुईं आवर तू बता नहीं रही दीदी कहा है ... पूजा पूनम को घूरती हुई बोलती है

दरअसल पूजा उस रात अपनी आस्था दीदी के साथ होती है मगर सुबह होते hi पूजा की नानी की तबियत ख़राब हो जाती है आवर ये बात जैसे hi पूजा की माँ को पता चलती है पूजा की माँ उसे लेकर अपने माँ के घर चली जाती है मगर पूजा वह बस अपनी नानी को देख कर hi अकेली गाड़ी लेकर घर आ गयी होती है क्यू की पूजा को अपनी आस्था दीदी की फिकर होने लगती है वह किस हालत मैं होंगी मगर यह आने के बाद पूजा अपनी आस्था दीदी को रूम देख चुकी होती है मगर उसकी आस्था दीदी रूम मैं नहीं होती है आवर पूनम बता hi नहीं रही होती है जो पूजा थोड़ी गुस्सा होने लगती है पूनम पर

पूजा दीदी आस्था डीई माँ के साथ एक शादी मैं गयी है ... पूनम बोलती है

अह्ह्ह्हह डीईई

पागल लड़की ये पहले नहीं बता सकती थी ... पूजा पूनम के पीठ पर मरती हुई बोलती है

अरे पूजा तू घर कैसे आई ... रूम से निकलती हुई पूजा की बड़ी माँ राधा जी पूछती है

ओह्ह्ह तेरी अब तो मैं मर्डरर गयी

पूजा अपनी बड़ी माँ की आवाज़ सुन कर मन मैं बुदबुदाती है तब तक राधा जी पास आ जाती है

बोल क्यू नहीं रही पूजा तू घर कैसे आई ... राधा जी पूजा के करीब आकर थोड़ी हैरानी से पूछती है

बड़ी माँ मैं अकेली नहीं आई शामू काका भी आये है ...

पूजा के बोलते hi राधा जी थोड़ी रहत की साँस लेती है

तुझे अकेली आने की क्या जरुरत थी सोभा को पता है तू घर आ गयी है उसने तुझे अकेली आने कैसे दिया रुक मैं अभी उसकी खबर लेती हुईं .... राधा जी थोड़ी गुस्से से बोलती है

बड़ी माँ मैंने तो माँ को बताया hi नहीं .... आप बोल देना मैं घर आ गयी हुईं

गुड़िया चल बता दीदी कहा पे गयी है


पूजा पूनम को पकड़ कर घर के बहार चली जाती है ये लड़की पता नहीं किसपे गयी है राधा जी मन मैं सोचती है

____________________________

रात के 10 :पं हो चुकी होती है आँचल दिंनिंग टेबल पर खाना लगा चुकी होती है आवर बार बार फ़ोन कान पे लगा रही होती है वही राखी देवी भी फ़ोन लगा रही होती है राखी देवी आवर आँचल दोनों के चेहरे पर थोड़ी बेचैनी सी होती है

ये लड़का गया कहा है जो अभी तक घर नहीं आया आवर मेरा फ़ोन भी नहीं उठा रहा है

आँचल अर्जुन के फ़ोन न उठाने से थोड़ी बेचैन हो चुकी होती है जो फ़ोन बस लगती hi जा रही होती है

माँ अर्जुन फ़ोन hi नहीं उठा रहा है

माँ अर्जुन मेरा भी फ़ोन नहीं उठा रहा है

माँ भाई के साथ कुछ

गीता अंजलि अपने रूम से निकल कर हॉल मैं जब आती है तो अपनी माँ से कहती है

अंजलि बेटी खेत वाले घर का के भी मेरे रूम मैं नहीं है सायद अर्जुन खेत वाले रूम पर होगा तू चिंता न कर मैं अभी खेत पर जाकर देखती हुईं

राखी देवी भी परेशां तो उन सभी से जयादा होती है मगर वह ज़ाहिर नहीं होने देती है आवर के न होने से राखी देवी थोड़ी रहत की साँस ली हुई होती है राखी देवी को पूरा यकीं होती है की अर्जुन खेत वाले रूम पर hi होगा


राखी देवी कभी अपने बच्चों के सामने कमज़ोर नहीं पड़ना चाहती है आवर ये बात सच भी थी

पति के मरने के बाद अगर कोई दूसरी औरत होती तो टूट कर बिखर जाती आवर पति के गम मैं पता नहीं उसकी हालत क्या होती ... लेकिन राखी देवी तो प्यार करके सधी की थी फिर भी अपने प्यार के मरने के बाद भी राखी देवी टूटी नहीं

राखी देवी आज तक खुद hi बहार आवर घर का देख भल अकेली hi देखती हुई आई थी आवर अपने बच्चों की परवरिश भी की थी मगर कभी अपनी बच्चों के सामने अपनी आँखों से आंसू नहीं बहने दिया था


माँ मैं भी आप के साथ चलती हुईं काफी रात हो गयी है आवर लगता है बारिश भी होने वाली है

राखी देवी बोलती है आवर हवेली से जाने लगती है तभी अंजलि बोलती है

हां लग तो रही है बारिश होगी लेकिन तुम घर रहो मैं चली जाउंगी

आँचल आयेशा कर टिफिन मैं मेरा आवर अर्जुन का खाना दे दे बारिश हुई तो मैं वही अर्जुन के साथ खा लुंगी तुम लोग खाना खा लेना

अर्जुन वह होगा तो मैं फ़ोन करुँगी राखी देवी बोलती

ममी माँ मैं लेकर आती हुईं गीता बोलती है आवर टिफिन लेने चली जाती है कुछ देर के बाद गीता टिफिन लेकर अपनी माँ को दे देती है

अह्ह्ह्ह माआआ

डीई

माआआआ

राखी देवी आगे बढ़ती है तभी राखी देवी चीखती हुई गिर पार्टी है

वही आँचल गीता आवर अंजलि राखी देवी को पुकारती हुई उनके पास भगति है

माँ क्या हुआ

अंजलि दुखी सवार मैं बोलती है

वही आँचल आवर गीता भी राखी देवी को पकड़ लेती है

गुड़िया मैं ठीक हुई वह पेअर फिसल गया था

राखी देवी थोड़ी दर्द मैं बोलती है आवर कड़ी होने के बाद बस एक कदम बढ़ती है आवर फिर से चीख पड़ती है सायद राखी देवी की पेअर मैं मोच आ चुकी होती है

ओह्ह्ह माँ कहा पर दर्द हो रही है अंजलि बोलती हुई अपनी माँ को पकड़ लेती है

अह्ह्ह्हह गुड़िया लगता है पेअर मैं मोच आ गयी है

राखी देवी अंजलि की कंधे का सहारा लेती हुए बोलती है

माँ आप रूम मैं चलिए मैं खेत पर जाती हुईं ... गीता बोलती है

आवर फिर गीता आवर अंजलि अपनी माँ को सहारा देती हुई रूम तक लेकर आती है

गीता बेटी मैं भी साथ चलती हुई गीता जाने लगती है तभी पीछे से आँचल आती हुई बोलती है

ममी माँ मैं चली जाउंगी आप चिंता न करे आप का ख्याल रखिये ... गीता आँचल को मन करती हुई बोलती है आवर टिफिन उठा कर चल पड़ती है

गीता हवेली से निकल कर खेत की तरफ जाने लगती है आवर अर्जुन को फ़ोन भी लगा रही होती है

तू कहा है फ़ोन क्यू नहीं उठा रहा है कही तू मुझसे फिर से नाराज़ तो नहीं हो गया न

गीता मन मैं सोचती है

गीता तेज़ी से चलती हुई जल्दी hi खेत पर चली जाती है गीता जब अपने घर के पास जाती है तो देखती है घर का दरवाज़ा भी खुला हुआ है

गीता घर का दरवाजा खुला हुआ देख कर चैन की संश लेती है आवर दरवाज़ा खोल कर रूम मैं चली जाती है तो सामने अर्जुन को सोता हुआ देखती है अर्जुन को देख कर गीता खुश हो जाती है

ये देखे बाबू साहेब को कितनी चैन से सो रहे है

गीता मन मैं सोचती है

गीता पहले घर फ़ोन कर के अपनी को बताती है अर्जुन एहि है तो घर पर सभी रहत की साँस लेती है

गीता घर पर बताने के बाद वह रूम के बहार आती है आवर बड़ी hi छह से अंगड़ाई लेती हुई खुद मुस्कुरा पड़ती है आवर फिर रूम मैं आती हुई रूम का गेट बंद कर देती है

आज तो मैं नहीं रुकूंगी ..... गीता मन सोचती हुई शर्मा जाती है

_____________________________

आदि के घर रात के 10 :30 पं

आदि रूम मैं सोया हुआ होता है तभी आदि की नींद खुल जाती है आवर आदि उठ कर बाथरूम मैं चला जाता

आदि बाथरूम से निकल कर बीएड पर सोने को होता है तभी आदि के कानो मैं बहार से कुछ आवाज़े सुनाई देती है तो आदि गेट खोल कर बहार निकल जाता है आवर हॉल मैं आ जाता हॉल की लाइट ऑफ होती है तो आदि जला देता है आवर आदि जैसे hi लाइट जलाता है आदि का मुंह खुला के खुला रहा जाता आवर आदि के चेहरे पर पसीना आने लगती है

आदि अपनी माँ की हॉल मैं हालत देख कर पहले तो बहुत जयादा हैरान होता है मगर फिर जैसे hi आदि की नज़र अपनी माँ की गदराई हुई मस्त जवानी पर जाती है आदि की आँखों मैं एक चमक सी आ जाती है

माँ क्या हुआ आप अभी तक सोइ नहीं आवर ये

आदि अपनी माँ से पूछता है आवर फिर अपनी माँ के पहने हुए कपडे पर नज़र करता हुआ आदि फिर से देखने लगता है

आदि को यकीन hi नहीं हो रहा होता है उसकी माँ ाएसि कपडे भी कभी पहन सकती है मगर आदि अभी अपनी माँ पर गुस्सा होने के बजाये बस अपनी माँ को घूरता hi जा रहा होता है


6a7bdf51-019b-4767-ad94-d319643233eb.jpg


वही आदि के अचानक आकर लाइट जलने से रजनी जी सहम जाती है आवर अपनी नाईट ड्रेस को ठीक करने लगती है ताकि उनकी कातिल जवानी पर उनके hi बेटे की नज़र न पड़े जाये मगर देर हो चुकी होती है लेकिन रजनी जी जल्दी hi सोफे पर राखी हुई खुद की चादर दाल लेती है

बीटा ... मैं .... सोने ... hi जा रही थी

रजनी हिचकती हुई बोलती है

रजनी जी को बहुत hi जयादा शर्म आ रही होती है जो रजनी देवी चादर डालने के बाद भी अपनी जिस्म पे चादर पकड़ चुकी होती है जैसे अभी भी उनका जिस्म दिख रहा है

आदि बीटा कुछ चाहिए क्या ..

ाडीइइइइइइइ

रजनी तो आदि की तरफ देख भी नहीं रही होती है मगर रजनी आदि से क्या चाहती किसी तरह पूछती है मगर आदि कोई जवाब नहीं देता है तब रजनी जी आदि की तरफ देखती है तो पति है आदि की नज़र अभी भी उनके राश से भरी चुकी पर है जो रजनी थोड़ी गुस्से भरी सवार मैं बोलती है

को कुछःह नहीं माँ

आदि इतना बोल कर चला जाता है या कह सकते है अपनी माँ की गुस्सा होने से वह से भाग जाता है

वही अंजलि शर्माती हुई चादर डेल hi अपनी रूम मैं चली जाती है

कितनी बार बोली मैं ये नहीं पहन सकती मगर वह मने तब ना अब क्या होगा आदि जब इस बारे मैं पूछेगा तो मैं क्या जवाब दूंगी

रजनी जी मन मैं सोचती है

###############################
 
अपडेट ...... 66

कितनी बार बोली मैं ये नहीं पहन सकती मगर वह मने तब ना अब क्या होगा आदि जब इस बारे मैं पूछेगा तो मैं क्या जवाब दूंगी

रजनी जी मन मैं सोचती है

___________________________________________

यह खेत पर

गीता रूम का गेट बंद कर के रूम के अनादर चली जाती है आवर अपनी दुपट्टे को बीएड पर फेक देदी है आवर बड़ी नशीली आँखों से अपने छोटे भाई को घूरने लगती है

ओह्ह मेरा बच्चा सोते हुआ तू कितना माशूम लग रहा है तू मगर जब तू मुझसे लिपटता है तो मेरी अह्ह्ह

गीता मन मैं सोचती हुई खुद hi शर्मा जाती है

गीता धीरे धीरे अर्जुन के करीब चली जाती है आवर अर्जुन के होंठों के पास अपनी होंठ कर के अर्जुन को देखने लगती है

गीता की होंठ अर्जुन के होंठों के बस कुछ hi दूर होती है ये कह सकते है गीता आवर अर्जुन की होंठ सात hi गए है जिससे गीता की धड़कन धक् धक् कर रही होती है आवर गीता की गर्म गर्म शैशे निकल रही होती

डीइइइइइइ दीदी ाआआप यह

गीता खुद को आवर नहीं रोक पति है आवर अर्जुन का सर पकड़ कर अपनी होंठ अर्जुन के होंठ पर रख देती है आवर अर्जुन के होंठों को चूमने लगती है जिससे अर्जुन हड़बड़ा कर उठ जाता आवर गीता थोड़ी पीछे हैट जाती है वह अर्जुन अपनी गीता दीदी को यह देख कर थोड़ा हैरान होते हुआ बोलता है मगर गीता बस मुस्कुराने लगती है आवर फिर अचानक hi गीता के चेहरे का रंग बदल जाता है जैसे गीता बड़ी गुस्से मैं हो

तू मुझसे प्यार नहीं करना चाहता है तो मत कर लेकिन इतनी रात रात तक घर से बहार तो मत रह ....

गीता मुंह बना कर बोलती है आवर दूसरी तरफ घूम जाती है

वही अपनी गीता दीदी की बात सुन कर अर्जुन को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता है जो थोड़ी देर पहले अर्जुन खुद अपनी गीता दीदी को कुछ बोलने वाला होता है मगर अब कुछ बोले बिना अपनी गीता दीदी नाराज़गी से मुंह फेरना बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता है

दीदी आप क्या बोल रही है मैं आप के लिए घर से दूर नहीं भाग रहा वह दीदी पता नहीं कब मेरी नींद लग गयी थी

दीदी मेरा यकीं कीजिये मैं सच मैं सो गया था

दीदी आप को आएसा क्यू लगता है मैं आप से दूर भाग रहा हुईं

दीदी आप से दूर hi रहना होता तो मैं आप को हआ क्यू बोलता आप के साथ वह सब क्यू करता

दीदी मेरा यकीं कीजिये मैं भी आप से प्यार करने लगा हुईं

अर्जुन थोड़ा मायुशि भरी आवाज़ मैं कहता

वही अर्जुन की बात सुन कर गीता बहुत खुश हो जाती है आवर मन hi मन मुस्कुराने लगती है

गीता आज जो करना है करले गीता आज अपने छोटे भाई को बनाले अपना पति गीता इससे अच्छा मक्का तुझे सायद hi कभी मिले ... गीता के मन मैं ये ख्याल जैसे hi आता है गीता की जिस्म मैं एक हलचल सी मच जाती है आवर गीता की छूट सिहर सी जाती है

क्या सच मैं ओह्ह मेरे बाबू uummmmmaaaaaaaaaaa

गीता ख़ुशी से अर्जुन के गलों पर किश कर देती है

चल जल्दी से उठ कर मुंह धोकर आ मैं खाना लेकर आई हुईं साथ मैं कहते है

गीता अर्जुन को बीएड से उठाकर कहती है जो अर्जुन भी उठ कर रूम के अंदर मुंह हाथ धोने चला जाता है वही गीता टिफ़िन से खाना निकल कर प्लेट मैं निकलने लगती है

अर्जुन मुंह हाट धोकर आता है तो दोनों भाई बहन साथ खाना कहते है गीता खुद खाना काम आवर अर्जुन कहते हुआ जयादा देख रही होती है आवर मन hi मन मुस्कुरा रही होती है

दीदी हम घर चलते है माँ राह देख रही होगी

खाने के बाद अर्जुन बोलता है आवर गेट की तरफ जाने लगता है

क्या घर अर्जुन मैंने माँ को बोल दिया है हम रात को एहि रहेंगे तुम परेशां न हो आवर काफी रात भी हो गयी है मोषम भी ठीक नहीं है कभी भी बारिश हो सकती है

अर्जुन के घर जाने की बात सुन कर


गीता थोड़ी परेशां हो जाती है जो गीता को अपनी मन मैं चल रही खवाब टूटते हुआ नज़र आने लगती है

वही अर्जुन को भी अपनी गीता दीदी की बात सही लगती है तो अर्जुन फिर से बीएड पर आकर बैठ जाता है

वही गीता खुश होकर प्लेट को पास के टेबल पर रख कर बीएड पर लेट जाती है

अर्जुन अर्जुन अर्जुन

गीता अर्जुन के पेअर से खुद की गोरी पेअर रगड़ाती हुई बड़े hi प्यार से बोल रही होती है आवर अपने एक हाथ से अर्जुन के बल सहला रही होती है

वही अर्जुन अपनी गीता दीदी की हरकत का अहसास पाकर समझ गया होता है आज उसकी दीदी नहीं मैंने वाली है मगर फिर भी अर्जुन अपनी आँखें बंद कर के सोने का नाटक कर रहा होता है वही गीता बस अर्जुन को पुकारती जा रही होती है

ये कभी पहले नहीं करने वाला है कैसे सोने का नाटक कर रहा है ..... बच्चू मैं भी तेरी बड़ी बहन हुईं आज तो मैं तेरी बीवी बन कर hi रहूंगी

गीता मन मैं सोचती है आवर धीरे धीरे अपने सरे कपडे निकल कर बीएड के निचे फेक देती है

गीता अब बस काली ब्रा पेंटी मैं अर्जुन के साथ बीएड पर लेट जाती है


stock-photo-portrait-of-a-hot-and-graceful-woman-laying-in-a-black-lace-lingerie-among-bed-sheets-an.jpg


गीता ब्लैक ब्रा पेंटी मैं बहुत सेक्सी बोम लग रही होती है गीता के पास अभी कोई औरत भी होती वह गीता की जिस्म की बनावट को देख कर खुद को रोक नहीं पति आवर गीता की गदराई हुई जिस्म को मसल मसल कर गीता की छूट से कितनी बार पानी निकल देती

गीता अर्जुन के चेहरे को देख कर बड़े hi प्यार से अपनी जुल्फों पर हाथ फेरती है आवर फिर अपनी एक मोती टांग अर्जुन के पेअर पर फेक देती है

गीता का पेअर अर्जुन के लैंड के थोड़ी hi निचे होती है ..... गीता को जैसे hi अपने पेअर कहा है नज़र जाती है गीता मन hi मन शर्माती हुई मुस्कुराने लगती है मगर फिर गीता की चेहरे की रंग भी बदल जाती है आवर गीता की दिल धक् धक् करने लगती है

ओह्ह माँ सच मैं ..... मैं जब भी अर्जुन का लैंड देखती हुईं मुझे दर लगने लगती है

ये जब मेरी छूट मैं पूरा जायेगा तो मेरी क्या हालत होगी अह्हह्ह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्स मेरी छूट गीता सोचती हुई अपनी छूट पेंटी के ऊपर से hi मसल देती है आवर मस्ती मैं सिसक पड़ती है

वही अर्जुन सोने का नाटक कर रहा होता है मगर अर्जुन की नज़र रह रह कर अपनी गीता दीदी की तरफ हर वक़्त जा रही होती है जिससे अर्जुन अपनी बड़ी बहन की हरकत देख देख कर गर्म हो रहा होता है मगर उसकी गीता दीदी अपनी पेअर अर्जुन के पेअर पर रखती है अर्जुन का पूरा जिस्म hi झनझना जाता है आवर अर्जुन का लैंड बिलकुल hi खड़ा होकर अपना सर उठा देता है

वही गीता की जिस्म भी पूरी तरह गर्म हो चुकी होती है गीता की मुंह से गर्म गर्म शैशे निकलने लगती है गीता धीरे धीरे सिसकियाँ लेती हुई अर्जुन के मुंह के पास आकर अर्जुन के होंठों को देख रही होती है तभी अर्जुन अपनी आँखें खोल देता है आवर अपनी गीता दीदी को देखने लगता है वही गीता भी अर्जुन को बड़े hi प्यार से देखने लगती है

दोनों भाई बहन की नज़र एक दूसरे को देखने लगती है आवर फिर अचानक hi अर्जुन अपनी गीता दीदी को पकड़ कर किश करने लगता है वही गीता भी अर्जुन के जिस्म पर लेट कर अर्जुन के किश मैं साथ देने लगती है मगर गीता अचानक hi सिसकियाँ लेने लगती है

दरअसल अर्जुन को पता नहीं क्या होता है जो अर्जुन अपनी बड़ी बहन को किश करते हुआ बड़ी hi बेशर्मी से अपनी गीता दीदी की जिस्म को मसलने लगता है जो गीता सिसकियाँ लेती हुई मचलने लगती है गीता के मचलने से अर्जुन का लैंड आवर भी टाइट हो जाता है जिससे अर्जुन का लैंड दर्द करने लगता है आवर अर्जुन किश तोड़ कर दर्द मैं कहर उठता है

वही अर्जुन के दर्द मैं कहते हुआ सुन कर गीता थोड़ी हैरान होकर देखने लगती है

क्या हुआ मेरे बाबू ... तू कहर क्यू रहा है बता न ....

गीता थोड़ी परेशां होती हुई बोलती है आवर अर्जुन को गले लगा लेती है

दीदी ये दर्द कर रहा है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh गीता अभी अर्जुन को गले लगा कर अर्जुन के बोलना का इंतज़ार hi कर रही होती है तभी अर्जुन गीता का हाथ अपने बहार निकले हुआ लैंड पर रख डेट है अर्जुन के नंगे लैंड पर हाथ जाते hi गीता की शैशे तेज़्ज़ चलने लगती है आवर दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगती मगर फिर भी गीता अर्जुन का लैंड नहीं छोड़ती है आवर अर्जुन के बाँहों से निकल कर अर्जुन का लैंड देखने लगती है

अह्ह्ह्ह मेरी छूट आआआहहहहहहह ये मेरी छूट की अह्ह्ह्हह्हह बाबू तू ये कौन सा सांप रखा है ... मेरी छोटी सी बिल मैं कैसे जायेगा आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बाबू

दीदी बहुत दर्द कर रहा है

गीता अर्जुन के घोड़े जैसा लैंड आवर अपनी छोटी छूट की बिल के बारे मैं सोच hi रही होती है तभी अर्जुन एक बार सिसक पड़ता है तब गीता होश मैं आती है अपने छोटे भाई की दर्द भरी आवाज़ सुन कर गीता की दिमाग मैं पता नहीं क्या आता है गीता झट से अर्जुन का लैंड अपनी नरम मोलायम होंठों से चाटने लगती है

आह्हः दी अह्ह्ह्हह डीईई अह्ह्ह


Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

गीता अर्जुन का लैंड चाटती रहती है आवर अर्जुन मस्ती मैं आह्ह्ह भरता रहता है आवर अचानक hi अर्जुन आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह करते हुआ ठंडा पद जाता है


गीता अपने छोटे भाई का लैंड बड़े hi प्यार से चाट रही होती है आवर के मन मैं एक ख्याल आता है आवर गीता अपने छोटे भाई का लैंड का ऊपर के चमड़े को अचानक निचे कर देती है आवर बड़े hi मस्ती मैं अर्जुन का लैंड पूरी मुंह मैं ले लेती है जिससे अर्जुन बर्दाश्त नहीं कर पता है आवर अपनी गीता दीदी की मुंह मैं hi अपना पानी निकल देता है आवर गीता का सर पकड़ कर अपने लैंड गीता की मुंह मैं दबा देता है

वही गीता अर्जुन के आएसा करने से खुद को संभल नहीं पति है आवर अर्जुन का पूरा पानी पि जाती है

अर्जुन जैसे hi अपनी गीता दीदी का सर छोड़ता है गीता भी हांफती हुई बीएड पर गिर पड़ती है

______________________________

यह रजनी जी थोड़ी डर्टी हुई अपनी रूम मैं चली जाती है आवर झट से गेट बंद कर देती है

क्या हुआ कुटिया ..... तू अंदर क्यू आ गयी आवर गेट बंद क्यू कर रही है

रजनी जी जैसे hi रूम मैं आती है ये आवाज़ उनके कानो मैं पड़ती है जो रजनी जी थोड़ी दर कर अपनी सर निचे कर लेती है

क्या हुआ कुटिया बोल क्यू नहीं रही है रंडी

मालकिन आ आएडीईई

रजनी जी बस इतनी hi बोलती है

कुटिया तुझे बोली थी न जब तक मैं न कहु तू रूम मैं नहीं आएगी .... फिर क्यू आई

बीएड पर लेती हुई औरत बोलती है

मालकिन मैं आयी

रजनी शर्म से लाल होती हुई बोलती है

साली कुटिया रंडी हरमजादि छूट मैं इतनी आग लेकर बैठी है आवर अपने बेटे से दर रही है

चल इधर आ ..... बीएड पर बैठी हुई औरत बोलती

वही रजनी जी डर्टी हुई उस औरत के पास चली जाती है

स्स्सस्स्स्स अह्ह्ह्ह मालकिन अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह मालकिन अह्ह्ह्हह्हह अअअअअ मेरी छूट Ahhhhhhhhhhh मालकिन Ahhhhhhhhhh

Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh

रजनी जी जैसे hi उस औरत के पास जाती है दर्द मैं चीखने तड़पने लगती है

दरअसल रजनी जी जैसे hi उस औरत के पास जाती है वह सूरत बीएड से उतर कर रजनी जी की पेंटी निचे कर के रजनी जी की छूट को बड़ी hi बेशर्मी से पकड़ लेती है आवर रजनी जी की छूट को बाद बात नोचने लगती है जिससे रजनी जी को दर्द आवर मज़ा दोनों आने लगती है

साली तेरी छूट इतनी टाइट है की मैं बता नहीं सकती कितना मज़ा आती है मुझे

चल बीएड पर लेट जाए आज तुझे ाएसि मज़ा दूंगी की तू भूल नहीं पायेगी कभी

वह औरत रजनी जी से कहती है

वही रजनी जी बीएड पर लेती जाती है

आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ....... प्लीज मालकिन ये नहीं

उस औरत के हाथ मैं एक चीज देख कर रजनी जी का गांड फैट जाती है आवर रजनी जी दर के मरे अपनी दोनों पेअर एक दूसरे से सत्ता कर दोनों हाथ अपनी छूट पर रख लेती है

वही वह औरत एक कामिनी मुस्कान के साथ मुस्कुराने लगती है ..


तुझे इतनी बेशर्म बेहया बेगैरत रंडी बना दूंगी की तू साडी सराफत की ज़िंदगी भूल जाएगी

तुझे मैं लैंड के लिए इतनी पागल कर दूंगी की तू रह चलते हुआ किसी का भी लैंड अपनी छूट मैं ले लेगी

आवर देखना एक दिन तू अपनी कॉलेज की सरे लड़कों को अपनी छूट आवर गांड देती फिरेगी

वह औरत मन मैं सोचती है आवर मुस्कुरा देती है मगर फिर उस औरत के चेहरे का रंग बदल जाता है आवर वह थोड़ी गुस्से मैं रजनी जी को देखने लगती है

________________________________
 
अपडेट ..... 67

दोनों भाई बहन बिलकुल संत हो चुके होते है अर्जुन बस ऊपर छत की दिवार को देख रहा होता है मगर अर्जुन का लैंड अभी भी फुल टाइट खड़ा होता है जो अर्जुन अपने ऊपर चद्दर दाल लेता है मगर कोई फायदा नहीं होता है क्यू के लैंड अभी भी ऊपर की तरफ उठा हुआ hi लग रहा होता है

वही गीता मन hi मन मुस्कुरा रही होती है आवर थोड़ी थोड़ी शर्मा भी रही होती है

गीता अपनी एक पेअर उठा कर अर्जुन के लैंड पर रख देती है आवर अर्जुन को देख कर मुस्कुरा देती है जिससे अर्जुन की नज़र भी अपनी गीता दीदी पर चली जाती है जो दोनों भाई बहन की नज़र एक दूसरे को देखने लगती है

अर्जुन अब आवर क्या सोच रहा है सब कुछ तो कर hi लिया अपनी दीदी के साथ

देख तेरी गीता दीदी कितनी खुश लग रही है अर्जुन वह बस तेरा प्यार पाना चाहती है अर्जुन आवर कुछ मत सोच आवर अपनी गीता दीदी को अपना ले

स्स्स्सस्स्स्स आह्ह्ह्हह भाआआआईई हहहहहह hhhhhhhhhh बाआबब्बूउ ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

अर्जुन अपनी गीता दीदी की बड़ी बड़ी चुकी को ज़ोर ज़ोर से मसलने लगता है जिससे गीता मस्ती मैं सिसकने लगती है एक बार फिर से दोनों भाई बहन की जिस्म मैं गर्मी बढ़ने लगती है

अर्जुन अपनी गीता दीदी की चुकी को मसलते हुआ गीता की नरम पेट को चूमने लगता है जिससे गीता को एक अजीब सी गुदगुदी होती है आवर गीता मदहोश होती हुई अपनी गांड उठा कर मचल जाती है आवर अर्जुन का सर पकड़ कर अपनी जिस्म पर दबाने लगती है

गीता सिसकियाँ लेती हुई अर्जुन के कपडे उतरने लगती है जो अर्जुन भी खुद अपने कपडे उतरने लगता है अर्जुन जल्द hi अपने सरे कपडे उतर देता है आवर गीता को चूमते हुआ अपनी गीता दीदी की छूट के पास आ जाता है

Sssssssssssssssssssssss बाआआआ buuuuuuuuuuu गीता एक लम्बी Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhh भर कर अर्जुन का सर पकड़ लेती है ताकि अर्जुन उसकी छूट मैं मुंह न लगा दे वही अर्जुन हैरानी से अपनी गीता दीदी को देखने लगता है

बाबू टाइम बहुत हो गया है मैं नहीं चाहती आज भी हम्हारी मिलान अधूरी रह जाये ..... बाबू मैं आज पूरी तरह तुम्हारी होनी चाहती हुईं बाबू अपनी इस दीदी को आवर मत तड़पाओ ....

गीता बड़े hi प्यार से कहती है आवर फिर अपनी नज़ारे निचे कर लेती है जैसे गीता खुद मैं बहुत शर्मा भी रही है

वही अर्जुन की नज़र फ़ोन पर जाता है तो देखता है 2 बजने वाला होता

ये टाइम 2 कैसे हो गया ... मतलब मैं आवर दीदी से 2 घंटे

अर्जुन मन मैं सोचता है मगर अर्जुन की नज़र बस अपनी गीता दीदी की चिकनी छूट पर होती है


2217378-17.jpg
2935069-17.jpg
2391281-16.jpg
2897195-15.jpg


अपनी गीता दीदी की चिकनी छूट को देख कर अर्जुन के मन मैं एक अजीब सी ख़ुशी होती है आवर अर्जुन का लैंड फनफनाने लगता है

Ahhhhhhhhhhhh bhaaiiiiiiiiiii


अर्जुन का हाथ खुद hi अपनी गीता दीदी की छूट पर चली जाती है आवर अर्जुन अपनी गीता दीदी की चिकनी छूट पर एक बाद सहला देता है जिस गीता मचल जाती है आवर गीता दोनों हाथ अपनी छूट पर रख लेती है मगर अर्जुन भी अपनी गीता दीदी का हाथ हटा देता है आवर अपना लैंड छूट के पास रख देता है

गीता की छूट खुद की निकली हुई छूट रास से भींगी हुई होती है जिससे गीता की छूट चमक रही होती है अर्जुन अपनों गीता दीदी की चमक रही छूट को देख कर खुद को आवर नहीं रोक पता है आवर अपने लैंड को गीता की छूट मैं डालने लगता है


Sssssssssss अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाई भाई

अपनी बड़ी बहन की आठ सिन कर अर्जुन रुक जाता है आवर अपनी गीता दीदी की आँखों मैं थोड़ी सवालिए नज़र से देखने लगता जैसे पूछ रहा है अब रोक क्यू रही है

बाबू प्लीज आराम से

गीता ये बात बहुत hi धीरे से बोलती है मगर गीता की आँखों मैं एक दर सा अर्जुन देख लेता है अर्जुन बस हां मैं सर हिला देता है

अर्जुन तेरा ये घोड़े का लैंड तेरी दीदी की छोटी सी छूट मैं जायेगा तो तेरी दीदी को बहुत दर्द होगा आवर ये बात तेरी दीदी को पता है इस लिए वह दर भी रही है अर्जुन तू चाहता है तेरी दीदी ये दर्द जयादा न सही तो जितनी तेज़ी से अपना ये मोटा लैंड अपनी दीदी की छूट मैं दाल दे ताकि उनेह बस एक बार hi दर्द सहना पड़े

अर्जुन मन मैं सोचता है आवर ये सोच hi अर्जुन को सही लगता है अर्जुन आज तक किसी के साथ सेक्स तो नहीं किया होता है मगर अर्जुन सेक्स वीडियोस बहुत देखा होता है आवर अर्जुन बहुत वीडियोस मैं देखा होता है वर्जिन के साथ कैसे एक बार मैं दाल देते है जो वह लड़की बस एक बार hi चीख कर रह जाती है आवर अर्जुन इस लिए एक बार मैं hi डालने के लिए सोचता है

अर्जुन अपना लैंड को अपनी गीता दीदी की छूट मैं बस आगे का चिकना मुकुट hi सत्ता कर रुक जाता है


दीदी ये मुंह मैं दाल लो अर्जुन अपनी गीता दीदी को दुप्पट्टा देते हुआ कहता है

वही गीता भी अपनी दुप्पटा मुंह मैं दाल लेती है

वही अर्जुन अपने दोनों हाथ से अपनी गीता दीदी की कमर को बहुत hi मज़बूती से पकड़ लेता है जो उसकी गीता दीदी भी अपनी गांड उठा कर अर्जुन के हाथ मैं कमर पकड़ने देती है

गीता जैसे hi अपनी छूट पर अर्जुन का लैंड का अहसास पति है गीता की जिस्म सिहर जाती है आवर गीता को दर भी लगने लगती है जो गीता आँखें बंद करती हुई बेसित को पकड़ लेती है

अर्जुन की नज़र जैसे hi अपनी गीता दीदी की चेहरे पर जाता है अर्जुन थोड़ा हैरान हो जाता है क्यू के गीता अपनी मुंह से दुप्पटा हटा चुकी होती है

दी

बाबू मुझे थोड़ा दर लग रहा है मगर मैं ये दर्द सह लुंगी

बाबू ये दर्द मैं कब से सहना चाहती थी .... अर्जुन के बोलने से पहले hi गीता बोल पड़ती है

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa मेरी चूऊत्त आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

अर्जुन का लैंड भी अब छूट मैं जाने के लिए बेचैन होने लगता है जो अर्जुन से आवर बर्दाश्त नहीं होता है आवर अर्जुन पूरी ताक़त से अपना लैंड गीता की छूट मैं दाल देता है जो गीता की चीख उस रूम मैं गूंज पड़ती है

गीता को एक वक़्त के लिए लगता है की उसकी जान hi निकल चुकी है गीता की आँखों मैं आंसू आ जाती है गीता की पूरी जिस्म कंपनी लगती है बस अर्जुन को भींगी आँखों से देखती रहती है

भाई अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह्ह मेरी छूट फैट गयी है भाई मुझे बहुत दर्द हो रही है अह्ह्ह्हह्हह भाई आह्ह्ह्हह्ह

गीता दर्द मैं बोलती है मगर लैंड बहार निकलने के लिए एक बार भी नहीं बोलती है

डीई अब आवर दर्द नहीं होगा

अर्जुन बोलता है आवर गीता की टाइट चुकी को मसलने लगता है

अर्जुन अपनी गीता दीदी की चुकी को मसलते हुआ गीता की निप्पल को खिंच देता

जिससे गीता दर्द आवर मस्ती मैं सिसक पड़ती है

अर्जुन कभी देर तक गीता की चुकी को मसलते मसलते निप्पल को खिंच दे रहा होता है जिससे गीता को दर्द आवर मस्ती एक साथ महसूस होती है जो गीता खुद hi अपनी गांड उठाने लगती है जो अर्जुन समझ जाता है उसकी गीता दीदी की दर्द काम हो रही है आवर चौड़ाई की चाहत हो रही है जो अर्जुन धीरे धीरे लैंड अंदर बहार करने लगता है

आह्हः भाई आह्हः बाबू हहहहह आवर हहहहह अच्छा लग रहा है आह्ह्ह्हह बाबू ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तुमने तो ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरी जान hi हहहहहह स्स्सस्स्स्स अह्हह्ह्ह्ह ऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Ahhhhhhhhhhhhhhhhh Sssssssssssssssss अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

गीता को दर्द मैं मज़ा भी आ रही होती है जो गीता अर्जुन से बोल रही होती है जिससे अर्जुन भी मस्ती मैं अपना लैंड गीता की छूट मैं अंदर बहन कर रहा होता है

आह्ह्ह्हह दीदी आप की छूट बहुत टाइट थी बिलकुल एक छोटी बच्ची की तरह मगर मैंने आप की छूट को अब बड़ा कर दिया है आप एहि चाहती थी न तो ये लीजिये

आह्ह्ह्ह भाई hhhhhhhhhhhhh नहीं आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

प्लीज भाई आह्ह्ह्हह्ह नहहीइइइइइइ Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh

Aahhhhhhhhhhh मेरी छुटटटटटट ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत दर्द हो रही है भाई प्लीज Aaahhhhhhhhhhhhhh

Ahhhhhhhhhh माआआ प्लीज बचा लो आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अर्जुन

Ahhhhhhhhhhhh बहुत दर्द हो रही है Ahhhhhhhhhh

अर्जुन अचानक लैंड को बड़ी hi तेज़ी से गीता की छूट मैं अंदर बहार करने लगता है जिससे गीता दर्द मैं अर्जुन को रुकने के लिए बोल रही होती है मगर अर्जुन आवर भी तेज़्ज़ तेज़्ज़ धक्का मरने लगता है आवर
गीता दर्द मैं चीखती छिलने लगती है

ये ले इसी दिन के लिए तू इतनी बेचैन थी न ये ले मैं तेरी छूट फाड् कर रख दूंगा

अह्ह्ह्हह भइईईई Aahhhhhhhhhh तू बिलकुल अपनी मा पर गयी है साली जैसी माँ वैसी बेटी मैं बड़ी आग है न तुम माँ बेटी मैं ये ले

Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh भाई नाहीइ Aahhhhhhhhhhhhh

अर्जुन को पता नहीं क्या हो जाता है जो अपनी hi बहन को एक रंडी समझ कर छोड़ने लगता है जो गीता की दर्द माओं रोने की आवाज़ सुन कर भी नहीं रुकता है आवर राखी देवी को भी गली देते हुआ गीता को छोड़ने लगता है

वही गीता की आँखों से आंसू रुक नहीं रही होती है गीता को इतनी दर्द हो रही होती है की गीता अर्जुन को दूर करने लगती है मगर अर्जुन बड़ी hi बेशर्मी से पकड़ कर छोड़ने मैं लगा हुआ होता है

गीता की छूट से खून आवर उसकी छूट की पानी एक साथ बाह रही होती है जो गीता की छूट मैं जलन भी होने लगती है बीएड पर मचलने लगती है

वही अर्जुन अपनी बड़ी बहन की दर्द की परवाह किये बिना hi छोड़ता रहता है

आह्ह्हह्ह्ह्ह ये ले साली तेरी छूट की साडी गर्मी निकल दूंगा आह्ह्हह्ह्ह्ह मेरा निकलने वाला है बस हो गया आह्ह्ह्हह तेरी चुकी बड़ी टाइट है इसमें मैं दूध लेकर हो रहूंगा

AaaAaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

Aahhhhhhhhhhhh

अर्जुन गीता को छोड़ रहा होता है आवर बड़ी hi बेशर्मी से गीता की चुकी मसल रहा होता है वही गीता बस दर्द मैं तड़प रही होती है

अर्जुन की आँखों मैं एक अजीब सा दर्द होता है अर्जुन आवर भी तेज़ी से गीता की छूट मैं धक्के मरने लगता है

गीता 2 बार झाड़ चुकी होती है मगर गीता की छूट अभी भी गर्म होती है जैसे गीता दर्द मैं भी छोड़ने के लिए राज़ी है Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

अर्जुन झड़ते hi गीता के ऊपर गिर जाता है वही गीता भी अर्जुन को बाँहों मैं भर लेती है

गीता की आँखों से आंसू अभी बाह रही होती है मगर फिर भी गीता अर्जुन को गुस्से से दूर करने के बजाये अर्जुन को बाँहों मैं भर कर अपनी आँखें बंद कर लेती है

______________________________
 
अपडेट ..... 68

अगली सुबह

अर्जुन की आँखें अचानक hi खुल जाती है आवर अर्जुन उठ कर बैठ जाता है आवर बीएड पर अपनी गीता दीदी को न देख कर परेशां हो जाता है

ओह्ह साला क्या कर दिया गीता दीदी के साथ ... कही दीदी घर तो

अर्जुन के मन मैं ये ख्याल आते hi अर्जुन बीएड से उतर कर रूम के बहार जाने को होता है तभी अर्जुन की नज़र गेट पर पड़ता है तो देखता है गेट अभी भी बंद है अर्जुन उसी वक़्त टाइम देखता है तो पता है अभी 6 बज रहे है तो अर्जुन थोड़ा रहत की शंस लेता है मगर अर्जुन अभी भी थोड़ा परेशां hi रहता है ये सोच कर की उसकी गीता दीदी कहा है

डीई गीता डीई आप कहा हो

भाई मैं अंदर हुईं

अर्जुन की आवाज़ सुन कर गीता बोलती है

अर्जुन भाग कर अंदर जाता है तो देखता है उसकी गीता दीदी पेड़ के पास बैठी है आवर वह आग जल रही होती है जो गीता की हाथ मैं खुद की दुप्पटा होती जो पानी भींगी हुई होती है

अर्जुन देख कर समझ जाता है उसकी गीता दीदी क्या कर रही है

वही गीता अर्जुन से नज़र नहीं मिला रही होती है आवर निचे की तरफ देखने लगती है

डीई मुझे मनाफ़ कर दीजिये मुझे पता नहीं क्या हो गया था .... सॉरी गीता डीई

अर्जुन सॉरी बोलते हुआ गीता के पास hi बैठ जाता है

कोई बात नहीं अर्जुन .... गीता बस इतना बोल कर चुप हो जाती है

गीता की आवाज़ बहुत hi धीरे धीरे निकल रही होती है .. या कह सकते है गीता अर्जुन से सायद अभी शर्मा रही होती है

डीईई दर्द ज्यादा हो रहा है क्या

अर्जुन भी अपनी गीता दीदी की हालत को देख कर पूछता है आवर गीता के हाथ पकड़ लेता है

नहीं अब मैं ठीक हुईं ... चल सुबह होने से पहले घर चलते है वर्ण इस हालत मैं माँ देखेगी तो कई साडी सवाल करेगी Ahhhhhhhhhhhh

गीता बोलती हुई उठती है मगर उठ नहीं पति है आवर दर्द मैं चीख कर बैठ जाती है

सॉरी सॉरी दीदी मुझे मनाफ़ कर दीजिये

अर्जुन फिर से मनफ़ी मांगने लगता है गीता से

अर्जुन को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता है अपनी गीता दीदी की हालत को देख कर

कितनी बार मनफ़ी मांगेगा .... मैं गुस्सा नहीं हुईं तुझसे बस थोड़ी सी दर्द है .... तू मार्किट जाकर दवा ला देना अब चल

गीता अर्जुन का सहारा लेकर कड़ी हो जाती है

अर्जुन भी गीता को सहारा देते हुआ घर की तरफ चल पड़ता है रस्ते मैं दोनों भाई बहन कोई बात नहीं करते है अभी थोड़ी अँधेरा होता है तो दोनों को कोई परेशानी नहीं होती मगर रस्ते मैं कई गाओं वाले अर्जुन आवर गीता को देखते है मगर कोई कुछ पूछता नहीं है

वही आँचल सुबह hi उठ कर नाहा चुकी होती है आवर अपनी साड़ी सही करती हुई घर से बहार निकल रही होती है तभी आँचल की नज़र सामने से आ रहे अर्जुन पर नज़र पड़ती है जो आँचल मुस्कुरा पड़ती है


गीता betiiiiiiiiiiiiii

b721f47d-122c-4664-ab58-e013993a31ff.jpg


मगर जैसे hi आँचल की नज़र गीता पद जाती है आँचल गीता को पुकारती हुई दोनों की तरफ भगति है

अर्जुन क्या हुआ तेरी दीदी को पकड़ कर क्यू ला रहा है

आँचल थोड़ी घबराती हुई पूछती है आवर गीता को दूसरी तरफ से पकड़ लेती है

ममी माँ वह बोरिंग के पास पेअर फिसल गया था पेअर मैं मोच आ गयी है

अर्जुन अभी सोच hi रहा था वह क्या जवाब दे अपनी ममी माँ को लेकिन उसके पहले hi गीता बोल पड़ती है जो अर्जुन अपनी गीता दीदी को एक नज़र देख कर मुस्कुरा पड़ता है वही गीता भी मुस्कुरा कर शर्मा जाती है

ओह्ह मेरी बच्ची .... देख कर नहीं चल सकती थी

अर्जुन आराम से लेकर चल ... दर्द तो नहीं हो रही है न बेटी ...

आँचल खुद दर्द का एहसास करती हुई बोलती जैसे गीता का पेअर मैं मोच नहीं आँचल के पेअर मैं मोच आई हो

ममी माँ आप इतनी परेशान क्यू हो जाती है मैं ठीक हुईं .... दर्द भी नहीं हो रही है ... सच मैं

गीता थोड़ी मुस्कुराती हुई बोलती है

जब तू माँ बनेगी तब पता चल जायेगा .... मैं इतनी परेशां क्यू होती हुईं

आँचल गीता के बालों को ठीक करती हुई बोलती है आवर साथ लेकर चलने लगती है

तू आराम कर मैं अभी पानी गर्म कर के लती हुईं .... गीता को बीएड पर लेता कर आँचल बोलती है आवर रूम से जाने लगती है

ममी माँ .... मुझे नींद आ रही है रात भर मच्छर सोने नहीं दिए है प्लीज जो भी करना चाहती है मेरे उठने के बाद कर लीजियेगा

आँचल जाते जाते गीता बोल पड़ती है

ठीक है तू सो जा मैं उठने के बाद hi करुँगी आँचल बोलती हुई निकल जाती है

वही अर्जुन भी रूम से चला जाता है

वही दूसरी रूम आज राखी देवी बहुत खुश नज़र आ रही होती है वह आईने के सामने कड़ी होकर खुद को देख कर मुस्कुरा रही होती है

राखी देवी अभी बहुत hi खूबसूरत नज़र आ रही होती है राखी देवी आज रूप रंग hi चेंज हो गया होता है जो राखी देवी कई सैलून से सिर्फ सेम्पल सी साड़ी ब्लाउज पहन कर रहती थी वह आज रेड कलर की कठिन ब्लाउज पहनी हुई होती है जिससे राखी देवी की दो अनमोल रास से भरी चुकी की बिच की गहराई दिख रही होती है

राखी देवी इतनी गोरी होती है की उनकी दूध की तरह आधी दिख रही चुकी चमक रही होती है गले मैं मंगल सूत्र माथे पर हल्का सा सिंदूर बालों को एक तरफ गिरा कर राखी देवी खुद को निहार रही होती


dec84a1d-8688-4044-9ed3-538217691164.jpg
राखी देवी बाला की खूबसूरत लग रही होती है राखी कुछ देर खुद को निहारती रहती है फिर पता नहीं राखी देवी की दिमाग मैं क्या आता है राखी देवी अपनी मांग की सिंदूर मिटा कर रूम की गेट पर आप कर कड़ी हो जाती है मगर राखी देवी की चेहरे पर अभी भी मुस्कराहट होती है

2ed72a57-233c-4902-ba0b-c4500ea419ff.jpg
वही अर्जुन अपने रूम मैं जा रहा होता है तभी उसकी नज़र सामने गेट पर कड़ी अपनी माँ पर नज़र जाती है आवर अर्जुन चलते हुआ रुक जाता है वही राखी देवी अर्जुन को देख कर आवर भी मुस्कुरा देती है

वव्वव्वव्व सो beautifulllllllllllllllll

अपनी माँ को देख कर अर्जुन मन मैं सोचता है

अर्जुन की नज़र अपनी माँ से हैट hi नहीं रही होती है अर्जुन वही खड़ा होकर अपनी माँ को निहारता hi रहता है

जो अर्जुन कभी अपनी माँ को देखता भी नहीं था आज उसकी नज़र अपनी उस माँ के चेहरे से हैट नहीं रही होती है अर्जुन अपनी माँ की चेहरे से लेकर निचे तक देखता hi रहता है आवर तभी अर्जुन की नज़र एक जगह टिक जाती है वह जगह कोई आवर नहीं राखी देवी की पहाड़ की तरह उठी हुई रास से भरी चुकी होती है


9e128ffa-43b9-4cf3-a8a8-d1266992e8f3.jpg


राखी देवी की नज़र जैसे hi अर्जुन की नज़र की पीछा करती हुई खुद की जिस्म पर जाती है राखी देवी झट से अपनी पल्लू को अपनी साइन पर रख लेती आवर राखी देवी की चेहरे का रंग भी एक वक़्त के लिए बदल जाता है आवर राखी देवी थोड़ी शर्मा जाती है मगर राखी देवी की नज़र अभी भी अर्जुन पर hi होती है

वही अर्जुन बस अपनी माँ को देख hi रहा होता है मगर अर्जुन जब अपनी माँ को पल्लू अपनी साइन पर रखते हुआ देख कर अर्जुन नज़र हटा लेता है

माँ आप बहुत अच्छी लग रही है


Divyanka-Tripathi-Ishita-s-character-is-now-an-inseparable-part-of-my-being.jpg


अर्जुन इतना बोल कर तो चला जाता है मगर गेट पर कड़ी राखी देवी की चेहरे पर फिर से मुस्कान आ जाती है मुस्कान भी ाएसि होती है राखी देवी पर के जो राखी देवी सुन्ना चाहती थी वही अर्जुन बोल कर गया हो

f18e6180-e95f-4b79-92fe-ebd8958309cf.jpg


अर्जुन को जाते हुआ देख कर राखी देवी एक बार फिर से मुस्कुरा देती है

राखी देवी सीधे किचन मैं जाती है तो देखती है आँचल कॉफ़ी बना रही होती है

आँचल कॉफ़ी बन गयी है क्या .... राखी देवी पूछती है

वव्वव्वव्वववव डीईई ... मेरी नज़र न लगे आप को

दीदी आप बहुत खूबसूरत लग रही है

राखी देवी को देख कर आँचल खुश होती हुई बोलती है आवर जाकर राखी देवी को गले लगा लेती है

क्या कर रही है आँचल .... राखी देवी आँचल को दूर करती हुई बोलती है

दीदी क्या करूँ आप को इस रूप मैं देख कर खुद को रोक नहीं पाई दीदी मेरा मन मचलने लगा है चलिए रूम मैं चलते है .....

आँचल राखी देवी की जिस्म को घूरती हुई बोलती है आँचल की आँखों मैं एक अजीब सा नशा दिखाई देने लगता है

आँचल क्या बोल रही है .... आँचल की आँखों मैं देख कर राखी देवी शर्माती हुई बोलती है

दीदी मैं वही बोल रही हुईं जो आप समझ रही है .... दीदी आप इस रूप मैं बहार मैं जाइये .... वर्ण आँचल इतना बोल कर मुस्कुरा देती है

वर्ण क्या .. आँचल तू क्या बकवास कर रही है ..... कॉफ़ी बना है तो दे मुझे

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

आँचल की बातों से राखी देवी आवर भी शर्मा रही होती है इस लिए राखी देवी जल्द से जल्द कॉफ़ी लेकर किचेन से निकलना hi सही समझती है मगर उसके पहले hi आँचल राखी देवी की पल्लू गिरा कर आधी दिख रही चुकी को चुम लेती है आवर राखी देवी की कमर मसल देती है जिससे किचेन मैं राखी देवी की आह्हः गूंज पड़ती है

ुमायआ

दीदी मैं कह रही हुईं आप इस तरह बहार मत जाइये आप को अभी देख कर मेरी तन बदन मैं आग लग रही है तो सोचिये जब बहार के लोग आप को इस तरह देखेंगे तो उनका क्या हॉल होगा

दीदी मैं सच बोल रही हुईं कोई शरीफ भी होगा तो उसका ईमान दोल जायेगा

आँचल बहुत hi मदहोशी भरी आवाज़ मैं बोलती है आवर आँचल की गर्म शैशे का अहसास पाकर राखी देवी भी थोड़ी सहम जाती है

ओह्ह्ह अह्ह्ह्ह आँचल छोड़ ... राखी देवी गर्म शैशे छोड़ती हुई बोलती है

Aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh

आँचल राखी देवी की चुकी को मसल कर छोड़ देती है जो राखी देवी बड़ी hi उत्तेजना के साथ सिसक पड़ती है

आँचल आवर राखी देवी दोनों hi एक दूसरे को देखने लगती है दोनों की आँखों मैं मदहोशी सी छ गयी होती है दोनों की होंठ खुल चुकी होती है राखी देवी तो अपनी हाथ छूट के ऊपर रख कर दबाने लगती है किचेन मैं कुछ देर के लिए ख़ामोशी सी छ जाती है

आँचल कुछ देर तक राखी देवी को देखती रहती है आवर फिर धीरे धीरे राखी देवी की तरफ कदम बढ़ने को होती है मगर एक आवाज़ सुनते hi रुक जाती है वही राखी देवी भी सही से कड़ी होकर अपनी पल्लू ठीक करने लगती है

आप दोनों एक दूसरे को आयी घर क्यू रही है

गु गुड़िया क्या चाहिए

आँचल बोलती हुई कॉफ़ी देखने लगती है

अंजलि कभी अपनी माँ को तो कभी ममी माँ को देख कर ये पता कर रही होती है के वह दोनों क्यू एक दूसरे को आयी देख रही है मगर उसके पहले hi राखी देवी किचेन से चली जाती है

ममी माँ क्या हुआ ... अंजलि फिर से पूछती है

क्या क्या हुआ कुछ भी तो नहीं .... तू अभी तक तैयार क्यू नहीं हुई सोल्लगे नहीं जाना तुझे जा जल्दी तैयार हो जा मैं नास्ता लगाती हुईं .... आवर ये कॉफ़ी अर्जुन को दे देना

आँचल बिना कोई जवाब दिए अंजलि को hi डांटती हुई बोलती है

वही अंजलि को कुछ भी समझ नहीं आती है वह बेचारी कुछ बोले hi कॉफ़ी लेकर चली जाती है

हे भगवन अच्छा हुआ गुड़िया ने आवाज़ दे दिया .... वर्ण पता नहीं क्या सोचती वह

मुझे भी पता नहीं क्या हो गया था

मेरी भी कोई गलती नहीं है ... ये दीदी की वजह से हुआ वह इतनी खूबसूरत लग रही थी अह्ह्ह्हह्हह डीइइइइइइइ

आँचल अपनी छूट के ऊपर हाट फेरती हुई मसल देती है

क्या मैं इतनी सुन्दर हुईं के एक औरत मेरी जिस्म को देख कर बेचैन हो रही है

हे भगवन जब मुझे इस हालत मैं देख कर आँचल की ये हालत हो गयी थी तो फिर अर्जुन kiiiiiiiiiii राखी देवी के मन मैं ये ख्याल आते hi राखी देवी शर्मा जाती है

_______________________________
 
अपडेट ..... 69

राखी देवी सरम से पानी पानी हो चुकी होती है आवर राखी देवी की जिस्म मैं एक हलचल सी मच गयी होती है ये सोच सोच कर के जब उनकी खूबसूरती को देख कर उनकी छोटी बहन जैसी आँचल अपनी आप खो चुकी थी तो फिर मुझे इस तरह देख कर अर्जुन की हालत क्या हो गयी होगी आवर तभी राखी देवी को अर्जुन का घूरना याद आता है जो राखी देवी की आँखों मैं एक बार फिर से शर्म महसूस होती है


नहीं नहीं मेरा अर्जुन आएसा नहीं है

वह मेरे बारे मैं गन्दा ख्याल नहीं ला सकता है ... वह तो मुझे एक माँ की नज़र से hi देख रहा होगा

राखी देवी खुद को दिलासा दे रही होती है मगर राखी देवी की मन मैं ये ख्याल बार बार आ रहा था अर्जुन किश नज़र से देख रहा था

राखी देवी बीएड पर बैठ जाती है

वही अर्जुन अपने बीएड पर सोया हुआ होता है आवर ऊपर दिवार की तरफ देख रहा होता है मगर अर्जुन का हाथ खुद के लैंड पर होता है

आह्ह्ह्ह कितनी गोरी थी माँ की सीना आअह्ह्ह्ह मन कर रहा था जाकर उनकी भरी भरकम लम्बी चौड़ी छाती को चुम लू

मेरी माँ सच मैं बहुत खूबसूरत है तभी तो मां ने उनेह

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

अर्जुन अपनी माँ की जिस्म को याद करते हुआ अपना लैंड मसल रहा होता है

जो अर्जुन कई सैलून से अपनी माँ को देखना भी पसंद नहीं करता था आज उस अर्जुन के दिमाग मैं अपनी माँ के बारे मैं ये सब गांडेय गांडेय ख्याल आ रहे होता है आवर वह अर्जुन अपनी माँ की जिस्म को सोच सोच कर लैंड भी हिला रहा होता है

अर्जुन अर्जुन सो गया क्या

अर्जुन आवाज़ सुन कर सहम जाता है आवर लैंड से हाथ हटा लेता है

क्या हुआ अंजलि डीई .... अर्जुन बीएड से उतर कर कपडे ठीक करता हुआ बोलता है

दरवाज़ा तो खोल मैं कॉफ़ी लेकर आई हुईं ... अंजलि फिर से बोलती है

अर्जुन जाकर गेट खोलता है आवर गेट के साइड खड़ा हो जाता है वही अंजलि कॉफ़ी लेकर अंदर चली आती है

क्या हुआ फिर से सोना है क्या कॉलेज नहीं जाना .... अंजलि कॉफ़ी अर्जुन को देती हुई बोलती है

जी दीदी कॉलेज जाना है मैं बस नहाने hi जा रहा था .... अर्जुन जवाब देता है आवर कॉफ़ी पिने लगता है

ठीक है जल्दी से तैयार होकर आ मैं भी तैयार होने जा रही हुईं

अंजलि बोलती हुई रूम से चली जाती है

अर्जुन भी कॉफ़ी पीकर नहाने के लिए चला जाता है

इधर आँचल नास्ता टेबल पर लगा कर अर्जुन आवर अंजलि को आवाज़ देती है जो दोनों hi आकर नास्ता कर के कॉलेज के लिए निकल जाता है

आँचल टेबल से सरे पलेट उठा कर किचेन मैं रख कर किचेन से निकल कर गीता की रूम मैं जाती है तो देखती है गीता की रूम अंदर से बंद है तो आँचल समझ जाती है गीता सो गयी है तो आँचल गीता को आवाज़ नहीं देती है आवर फिर राखी देवी की रूम मैं चली जाती है

हूंणन्न ये क्या दी आप ने वह साड़ी क्यू निकल दिया

राखी देवी की रूम जाते hi राखी देवी को देख कर आँचल रूठने जैसी आवाज़ मैं बोलती है

तेरी वजह से hi निकल दिया .. तू तो मेरी इज़्ज़त hi लूट लेती

राखी देवी थोड़ी मुस्कुराती हुई बोलती है

ये अच्छा नहीं किया दीदी आप ने मगर दीदी आप इसमें भी

Aahhhhhhhhhh आँचल क्या करती है सभी घर पर है तू दिन मैं hi सुरु हो गयी Ahhhhhhhhhhh

क्या करूँ दीदी आप को देख कर आज मेरी जिस्म मैं बेचैनी सी हो रही है

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhh

दीदी आप की जिस्म की कोई बराबरी नहीं कर सकता दीदी आप बहुत Aaahhhhhhhhhhh खूबसूरत हो Aahhhhhhhhhhh आप को देख कर मेरी छूट मैं खुजली होने लगती है जैसे मेरी छूट नहीं लैंड है जो आप की राश से भरी छूट मैं जाना चाहता है

Aahhhhhhhhhhh

आँचल राखी देवी को चूमती हुई बोलती है वही राखी देवी मदहोशी मैं सिसकने लगती है

आँचल राखी देवी की पीछा से राखी देवी गले को चूमते हुआ राखी देवी की गांड को मसल रही होती है आवर राखी देवी कामुक भरी आवाज़े निकलने लगती है

आँचल राखी देवी की जिस्म को मसलती हुई बीएड पर धक्का दे देती है

राखी देवी बीएड पर जब गिरती है तो सिसक पड़ती है राखी देवी की चुकी बीएड पर टकरा जाती है आवर राखी देवी की गांड एक बार ऊपर से निचे हो जाती है जिससे देख कर आँचल राखी देवी की गांड दोनों हाथों से दबाने लगती है

राखी देवी बीएड पर मचलने लगती है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह दीदी आप की एहि एक चीज है जिसे देख कर मुझे जलन होती है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह दीदी आप की गांड की बनत भगवन जी ने खुद अपने हाथों से बनाया होगा दीदी सच मैं आप की गांड

Ahhhhhhhhhhh

आँचल राखी देवी की गांड को मसलती हुई आँचल खुद की छूट सत्ता कर राखी देवी की गांड अपनी छूट मैं दबा देती है जो दोनों नन्द भाभी की गर्म आहे निकल पड़ती है

___________________________ अर्जुन आवर अंजलि एक साथ कॉलेज जाती है आज अंजलि तो बिलकुल बिंदास होती है आवर वह चिड़ियाँ की तरह चिहक रही होती है

अंजलि चलती हुई अर्जुन के हाथ को पकड़ लेती है आवर साथ चलने लगती है वही अर्जुन भी बस अपनी अंजलि दी को देख कर मुस्कुरा देता है

अंजलि अपनी क्लास रूम मैं चली जाती है आवर अर्जुन अपने क्लास रूम मैं जाने को होता है मगर अर्जुन का पेअर गेट पर hi रुक जाते है आवर अर्जुन का चेहरा का रंग बदल जाता है अर्जुन एक तक सामने देखने लगता है सामने का नज़ारा hi आएसा था


Honey-Rose-Happy-Ugadi-2023-Saree-Stills.jpg


दरअसल सामने टीचर रजनी जी कड़ी होती है वह प्लेन साड़ी मैं बहुत खूबसूरत आवर सेक्सी लग रही होती है वह ब्लाउज भी ाएसि पहनी होती है की उनकी चुकी का आधा हिस्सा दिख रही होती है बालों मैं फुल होंठों पर होंठ लाली रजनी जी बवाल लग रही होती है मगर अर्जुन की नज़र तो रजनी जी की थोड़ी बहार निकली हुई गांड पर तिकी हुई होती है क्यू के अर्जुन बस पास मैं hi खड़ा होता वही रजनी जी सायद पेअर से कुछ उठाने की कोशिश कर रही होती है जो उनकी गांड थोड़ी बहार की निकली हुई होती है

अरे अर्जुन गेट पर क्या कर रहा है अंदर आ जाओ .... रजनी जी अर्जुन को गेट पर खड़ा देखती है तो बोलती है

रजनी टीचर की आवाज़ सुन कर अर्जुन होश मैं आता है आवर अंदर चला जाता है मगर अर्जुन जाते हुआ भी एक बार पलट कर रजनी जी को देखता है मगर इस बार अर्जुन को कुछ भी नहीं दिखाई देता है क्यू के रजनी जी पल्लू साइन पर रख कर बैठ चुकी होती है

अर्जुन बिलकुल पीछे जाकर बैठ जाता है अर्जुन का लैंड भी खड़ा हो चूका होता है जो अर्जुन अपने हाथ से लैंड को दबाने की कोशिश कर रहा होता है मगर अर्जुन का लैंड बैठने का नाम नहीं ले रहा होता है तभी अर्जुन की नज़र आगे बैठी आस्था पर नज़र जाती है आवर अर्जुन आस्था को देखने लगता है

वही आस्था अपनी कॉपी पर कुछ लिख रही होती है आवर नीतू से बाते भी कर रही होती है मगर एक बार भी अर्जुन की तरफ नहीं देख रही होती है मगर आस्था को हस्ते हुए बातें करते हुआ देख कर अर्जुन के चेहरे पर भी मुस्कान आ जाती है

चाँद की तरह चमकता हुआ चेहरा गुलाब की तरह खुल रही होंठ हवा मैं लहराती हुई झुलफें मखमल की तरह नरम बदन ....... ये लड़की hi है .... ये कोई आसमान की अप्सरा

मैंने बिलकुल भी अच्छा नहीं किया आस्था के साथ पता नहीं वह मुझे मनाफ़ करेगी की नहीं .... अर्जुन बीटा इतनी अच्छी गुलाब को तूने खुद से दूर कर दिया

थोड़ी आगे बैठी हुई आस्था को बड़े hi ध्यान से देखता हुआ अर्जुन मन मैं सोचता है

आस्था देख अर्जुन कैसे घर रहा है तुझे

नीतू पीछे की तरफ देखती हुई बोलती है


क्या सच कह रही है नीतू

नीतू
मुझसे आवर मज़ा मत ले ... अर्जुन मुझे hi देख रहा है मुझे यकीं नहीं हो रही है तेरी बातों पर


आस्था थोड़ी खुश तो थोड़ी मुंह बनती हुई बोलती है

आस्था को नीतू की बातों पर यकीन नहीं कर रही होती है

मगर आस्था ये सोच कर ख़ुशी के मरे थोड़ी थोड़ी शर्माने भी लगती है

साली मेरी बातों पर यकीन नहीं हो रही है तो पीछे देख ले .... नीतू मुंह बनती हुई बोलती है

नीतू की बात सुन कर आस्था सरमाती हुई पीछे की तरफ देखती है आवर फिर आस्था की दिल की धड़कन एक बार फिर से ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगती है आस्था ख़ुशी के मरे अपनी दुप्पटा मुंह पर रख लेती है

दरअसल जैसे hi पीछे देखती है अर्जुन हाथों से कुछ इसरा कर देता है जो आस्था शर्मा जाती है

ये क्या आस्था तू रो रही है या खुश है मुझे समझ नहीं आ रही है .... कब से तू अर्जुन के लिए बेचैन थी मगर वह जब तुझसे बात कर रहा है तो तू उसके तरफ देख भी नहीं रही है

नीतू थोड़ी हैरानी से बोलती है

नीतू मैं इतनी खुश हुईं की बता नहीं सकती नीतू ये मेरी आँखों मैं आंसू कैसे आ गयी तुझे जानना है तो तुझे भी मेरी तरह गुजरना होगा

नीतू अर्जुन के पीछे मैं कब से पागल थी मैं उससे कई बार बात करने की सोची मगर हर बार अर्जुन मुझे रुस्वा कर के चला गया

नीतू मैं जानती थी अर्जुन एक दिन मेरे प्यार को समझेगा मगर मुझे ये नहीं पता था इतनी जल्दी वह दिन आएगा

नीतू देख मैंने आज उससे बात भी नहीं किया आवर वह मेरी खूबसूरती का तारीफ कर रहा है नीतू ये मेरी आँखों मैं ख़ुशी की आंसू है

आस्था अपनी आँखों से आंसू को अर्जुन से छुपा कर पूछती हुई बोलती है

ठीक है बाबा मैं समझ गयी

लांच मैं तू उससे अच्छे से बात कर लेना

नीतू खुश होती हुई बोलती है वही आस्था बस मुस्कुरा देती है

____________________________
अर्जुन के घर

यह राखी देवी अपनी रूम के बीएड पर बिलकुल नागि लेती हुई होती है आवर राखी देवी की छूट से पानी बाह कर राखी देवी की गांड से होती हुई बीएड पर गिर रही होती है

राखी देवी की पूरी जिस्म पसीने से भींगी हुई चमक रही होती है

राखी देवी बिलकुल संत सी लेती हुई होती है जैसे तूफान आने से पहले की सन्ति होती है

मगर राखी देवी को देख कर लग रहा होता है राखी देवी वह तूफान की सामना कर चुकी होती है तभी तो उनकी छूट से पानी बाह रही होती है

वही बगल मैं आँचल भी उलटी लेती हुई होती जिससे आँचल की गदराई हुई गांड उठी हुई होती है आँचल की शैशे अभी भी ज़ोर ज़ोर से चल रही होती है जिससे रह रह कर आँचल बीएड पर मचल रही होती है आवर सिसकियाँ भर रही होती है

आह्ह्ह्हह्ह डीई मेरी छूट फैट जाएगी प्लीज अब तो बोल दीजिये निकलने को आह्ह्हह्ह्ह्ह मेरी छूट

अचानक आँचल सिसकने लगती है आवर कुछ निकलने के लिए राखी देवी से इजाजत मांगती है

ठीक है निकल ले मगर अगली बार मैं खुद उससे भी बड़ी बागान तेरी छूट मैं डालूंगी .... समझी राखी देवी बोलती है

आह्ह्हह्ह्ह्ह maaaaaaaaaaa आह्ह्ह्ह दीदी इतनी छोटी बागान मेरी हालत ख़राब कर रही है तो इससे बड़ी तो मेरी छूट hi फाड् देगी

दीदी आप क्या चाहती है मेरी छूट फैट जाये

आँचल अपनी छूट से एक 3 से 4 इंच का पतली सी बागान निकलती हुई बोलती है

इस लिए मैं कहती हुईं तू किसी का लैंड hi अपनी छूट मैं दाल ले ताकि मुझे तू परेशां करे

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मेरी कमर

राखी देवी बीएड से उठती हुई बोल पड़ती है सायद काफी देर लेटने से राखी देवी की कमर दर्द कर जाती है

दीदी देखिये आप का फ़ोन आ रहा है

फ़ोन की गंगनहर सुन कर आँचल बोलती है आवर फ़ोन उठा कर राखी देवी को देती है

नमस्ते ठकुराइन जी ..... फ़ोन उठाते hi उधर से एक आदमी की आवाज़ आती है

हां बबन जी बोलिये क्या हुआ .... राखी देवी पूछती है

ठकुराइन मोबारक हो आप केस जितने वाली है वह खुद पीछे हैट रहा है .... उधर से वह आदमी बोलता है

क्या वह खुद पीछे हैट रहा है ये कैसे हो सकता है बबन जी

जी ठकुराइन जी अब आप उस ज़मीन पर कुछ भी कर सकती है

अभी मैं फ़ोन रखता हुआ नमस्ते

इतना बोल कर वह आदमी फ़ोन रख देता है

फ़ोन रखते hi राखी देवी खुश हो जाती है आवर ख़ुशी मैं आँचल को गले लगा लेती है

हे भगवन बहुत बहुत धन्यवाद

आँचल आँचल वह ज़मीन अब हम्हारी है


राखी देवी आँचल से बोलती है

क्या सच मैं दीदी

आँचल भी खुश होती हुई बोलती है

हां आँचल अब वह ज़मीन हम्हारी हुई अब मैं उनका सभी सपना पूरा करुँगी

राखी देवी बोलती है

राखी देवी की आँखें कुछ सोच कर नाम हो जाती है

दीदी आप अर्जुन को लेकर वह जितना जल्दी हो सके चली जाइये अब अर्जुन को कुछ बाते जान लेनी चाहिए

आँचल बोलती है ......

सही बोल रही है आँचल .... अर्जुन को मैं कुछ दिन मैं साथ लेकर जाउंगी

pritampuraaaaaaaaaaaaaaaaaaa

राखी देवी बोलती है

_____________________________
 
अपडेट ...... 70



लांच होने के बाद अर्जुन केंटीन मैं बैठा हुआ होता है आवर पास hi कुछ दुरी पर आस्था भी बैठी हुई होती है मगर अर्जुन की तरफ एक बार भी देख नहीं रही होती है लेकिन अर्जुन बार बार आस्था को देख रहा होता है

आस्था तू आज इतनी क्यू शर्मा रही है पहले तो अर्जुन से बात करने के लिए बेचैन रहती थी ...... जा देख अकेला बैठा है बात करले उससे

नीतू थोड़ा गुस्से मैं कहती है

नीतू आज मुझे पता नहीं क्या हो रही है .. मैं अर्जुन से बात करने के लिए बेचैन रहती थी

मगर आज मेरा दिल बहुत घबरा रहा है

आस्था एक नज़र अर्जुन को देखती हुई बोलती है आवर शर्मा कर नज़ारे हटा लेती है

ठीक है तू एहि बैठ कर शर्माती रह मैं क्लास मैं जाती हुईं

नीतू गुस्से मैं बोल कर उठाने लगती है

प्लीज प्लीज रुक न नीतू मैं जाती हुईं

नीतू को गुस्से से जाते हुआ देख कर आस्था नीतू की हाथ पकड़ कर बोलती है

फिर जाकर बात कर ..... नीतू बोलती है


आस्था अपनी दुप्पटे को ठीक से साइन पर डालती हुई उठ कर अर्जुन की तरफ बढ़ने लगती है मगर पीछे से एक आवाज़ सुन कर वही रुक जाती है

ओह मर गयी ी
नेह भी अभी आना था आवाज़ को पहचानती हुई आस्था आँखें बंद करती हुई मन मैं सोचती है


क्यू के वह आवाज़ अंजलि की होती है जो अर्जुन को पुकारती हुई आ रही होती है

क्या हुआ रस्ते मैं क्यू कड़ी हो

आस्था को सामने कड़ी हुई देखती है तो अंजलि बोलती है जो आस्था कुछ बोले सामने से हैट जाती है आवर अंजलि आगे चली जाती है

मेरा हीरो अकेला क्यू बैठा है .... अंजलि अर्जुन के पास कुर्शी पर बैठती हुई बोलती है आवर आस्था की तरफ थोड़ी गुस्से से देखती है मगर आस्था जाकर अपनी जगह पर बैठ जाती है

दीदी आप जानती है अभी मेरा कोई दोस्त नहीं है तो अकेला hi बैठना पद रहा है आप यह क्यू आई आप की तो बहुत दोस्त है .... अर्जुन कहता है

हां तो कॉलेज मैं बहुत लड़के है जो लड़का अच्छा लगे उसे दोस्त बना ले ... मगर लड़कियों से दूर रहना


अंजलि फिर से आस्था को घूरते हुई बोलती है .... क्या दीदी आप को पता है न मैं लड़कियों से दोस्ती नहीं करता .... अर्जुन मुंह बना कर बोलता है

हआ मुझे पता है मेरा बाबू बहुत अच्छा बच्चा है .... अंजलि मुस्कुराती हुई बोलती है आवर अपनी दोनों हाथों से छोटे बच्चे की तरह अर्जुन के गलों को चुम लेती है जो अर्जुन भी मुस्कुरा देता है

वही आस्था अपनी कुर्शी पर बैठी हुई दोनों भाई बहन के प्यार को देख कर मन hi मन वह भी मुस्कुरा देती है

_____________________________

दीदी आप कहा जा रही है मैं खाना गर्म कर रही हुईं

राखी देवी को जाते हुआ देखती है तो आँचल पूछती है

आँचल मुझे भूख नहीं है तू खाना खा लेना मैं खेत पर जा रही हुईं देखती हुईं फसल कैसा है ......... राखी देवी आँचल से बोल कर निकल जाती है

क्या मैं अर्जुन को सब कुछ बता दूँ .... .. वह अब बड़ा हो गया है मुझे साडी बात अर्जुन को बता देनी चाहिए अर्जुन को जब ये साडी बातें कही आवर से पता चला तो वह मुझसे फिर से रूत जायेगा

राखी क्या बकवास सोच रही है इसमें तेरी कोई भी गलती नहीं है फिर अर्जुन तुझपे गुस्सा क्यू होगा

राखी ये सही समय नहीं है अगर अर्जुन को अभी कुछ पता चला तो वह गुस्से मैं कुछ भी कर जायेगा है

राखी तुझे पता है अर्जुन कितना गुस्से वाला वह तेरी बस एक गलती की सजा इतने दिन तक दिया तो सोच ये सब जान कर उसके दिल मैं कितनी शोले भड़केंगे अभी उसका गर्म खून है

मैं ये नहीं कहती तू अर्जुन मत बता राखी अर्जुन को साडी बातें जानने का पूरा हक़ है मगर राखी अर्जुन को धीरे धीरे साडी बातें बता जिससे अर्जुन का दिलों दिमाग भी संत रहे

राखी देवी रास्ता चल रही होती है आवर ये साडी बातें उनकी दिमाग मैं चल रही होती है जो राखी देवी की माथे पर पसीने भी आ रही होती है राखी देवी अपनी पल्लू को चहरे पर डालकर चलने लगती है

राम राम छोटी मालकिन

अरे हरिया चाचा आप यह ....

राखी देवी अपनी खेत वाले घर के पास जाती है तभी वह पहले से बैठा हुआ आदमी बोलता है जिसका नाम हरिया होता है आवर राखी देवी हरिया को अच्छे पहचान गयी होती है

जी छोटी मालकिन सहर गया था अपनी बड़ी बिटिया के पास अब घर जा रहा था तो सोचा आप से मिल लूँ बहुत सल्ल बिट गया आप से मिले हुआ मालिक के जाने के बाद आप एक बार भी मिलने नहीं आई ..

हरिया चाचा बोलते हुआ थोड़ा दुखी भी हो जाता है

हरिया चाचा आप को सब पता तो है hi मैं अकेले क्या क्या करती .... राखी देवी थोड़ा दुखी मन से बोलती है

हां बिटिया पता है ..... हरिया चाचा बोलते

हरिया चाचा सब अच्छा है न वह आप की बेटी फुलवा कैसी है उसकी शादी हुई की नहीं ....

अभी नहीं मालकिन आप तो जानती है हम गरीबों की ज़िंदगी .... खैर वह सब छोड़िये मालकिन मैं आप को कुछ बताने के लिए आया था

हरिया चाचा थोड़ा गंभीरता से बोलते है जो राखी देवी हरिया की तरफ देखने लगती है

क्या हुआ हरिया चाचा .... आप क्या बताना चाहते है

राखी देवी हैरानी से पूछते है

मालकिन वह बड़ी मालकिन वह आ गयी है

क्या ममता बुआ वह चली गयी है ...... राखी देवी बड़ी hi हैरानी भरी सवार मैं बोलती है जैसे राखी देवी को यकीन hi नहीं हो रही होती है

जीई छोटी मालकिन ..... हरिया चाचा हां मैं जवाब देते है

ममता बुआ ये कैसे कर सकती है

हरिया चाचा मुझे जल्द से जल्द ममता बुआ से बात करनी होगी .....

राखी देवी झट से फ़ोन लगाने लगती है मगर उधर से कोई फ़ोन नहीं उठता है जो राखी देवी आवर परेशां हो जाती है

हरिया चाचा मेरी रूम की सफाई करवा दीजिये मैं वह कल hi आती हुईं .... राखी देवी फ़ोन लगाती हुई hi बोलती है

ठीक है छोटी मालकिन ... मैं अभी फुलवा को फ़ोन कर देता हुईं हवेली की सफाई करवाने के लिए हरिया चाचा बोलते है

हरिया चाचा आप आज एहि रुक जाइये कल मेरे साथ hi चलना .... राखी देवी कहती है जो हरिया चाचा मान जाते है

____________________________


चलिए थोड़ा पीतमपुरा के बारे मैं जान लेते है

पीतमपुरा एक बड़ा गाओं है आवर उस गाओं मैं लग भाग 200 से जयादा घर है आवर उस गाओं मैं 2 शानदार हवेली है बर्षों पहले उस गाओं मैं बस एक hi हवेली थी आवर उस हवेली मैं दिन रात चहल पहल रहती थी मगर एक आएसा हादसा हुआ के के उस हवेली मैं सन्नाटा सा छ गया आवर फिर उसी की सकल की जैसा एक दूसरी हवेली उस गाओं मैं बन गयी जो उस हवेली मैं आज भी चहल पहल रहती है मगर जो पहले की हवेली थी उस हवेली मैं आज भी सन्नाटा सा छाया हुआ रहता है जो उस हवेली मैं सिर्फ हरिया चाचा आवर उनकी पत्नी आवर बेटी रहती है आवर उस हवेली की मालकिन राखी देवी है

वही दूसरी हवेली राजन सिंह का है जो उस हवेली मैं इस वक़्त 8 लोग रहते है .... राजन सिंह उसकी पत्नी लता सिंह राजन सिंह का 1 भाई आवर उसकी पत्नी राजन सिंह की 2 बेटी आवर उसके छोटे भाई का 2 बेटी है

राजन सिंह के आवर फॅमिली के बारे मैं जैसे जैसे आएंगे पता चलता रहेगा


तो चलते है राजन सिंह की हवेली मैं

एक औरत हवेली की एक रूम मैं अकेली बैठी हुई होती है आवर उसकी आँखों से आंसू बे पनाह बाह रही होती है

वही हवेली की दूसरे रूम मैं


अह्ह्ह्हह आवर ज़ोर से आह्ह्ह्हह्ह आवर ज़ोर से फाडे दीजिये मेरी छूट है आयी hi अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरी छूट Ahhhhhhhhhhh

ये ले साली आज तेरी साडी छूट की गर्मी निकल दूंगा अह्हह्ह्ह्ह

एक औरत बीएड पर लेती हुई होती है आवर सामने बैठा हुआ आदमी औरत की छूट मैं धक्का मार रहा होता है

वह औरत सिसकते हुआ सिसक रही होती है

साला हरामी लैंड मैं डैम नहीं है आवर चला है मुझे छोड़ने के लिए साला चुटिया ....... वह औरत मन मैं सोचती है

तेरी छूट फाड् दूंगा मैं तेरी छूट मैं आग लगी थी न वह भी मिटा दूंगा साली जब देखों गर्म hi रहती है ले साली अह्ह्ह्हह्हह मेरी छूट AHhhhhhhhhh फैट गयी Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhh Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

वह आदमी अचानक औरत के ऊपर छोड़ते हुआ गिर पड़ता है

बस डैम है नहीं आवर आ जाता है छोड़ने के लिए चुटिया

वह औरत बीएड से उठती हुई मन मैं सोचती है आवर साड़ी पहन कर धीरे से रूम खोल कर बहार देखती है आवर रूम से निकल जाती

वही गाओं के एक मंदिर मैं एक औरत हवन के पास पूजा मैं बैठी हुई होती है आवर औरत के सामने बैठा पंडित मटर पढ़ रहा होता है

ठकुराइन आप की पूजा सफल हुई भगवन ने चाहा तो बहुत जल्द hi आप की बेटी माँ बन जाएगी आवर आप नानी

पंडित हवन मैं आखिरी मटर पढ़ने के बाद बोलता है

वही सामने बैठी हुई ठकुराइन खुश होकर पंडित के सामने हाथ जोड़ देती है

ठकुराइन उठ कर पूजा की थाली लेकर मंदिर से निकल जाती है

राम राम ठकुराइन .... ठकुराइन चल रही होती है तो पीछे से आवाज़ आती है तो वह ठकुराइन वही रुक जाती है आवर मुस्कुरा कर देखती है


Bengali-New-Year-look.jpg


राम राम मुंसी जी .... ठकुराइन मुस्कुराती हुई बोलती है

ये ठकुराइन आवर कोई नहीं राजन सिंह की बीवी लता सिंह है

45 सल्ल की होने के बाद भी लता देवी जिस्म 25 26 सल्ल की लड़कियों की तरह खूबसूरत होती है आवर लता देवी की जिस्म रास से भरी हुई होती है

वही थोड़ी दूर खड़ा मुंसी हस्ते हुआ ठकुराइन के पास आ जाता है

क्या जिस्म है ठकुराइन की 45 सल्ल की होने के बाद भी जवान hi लगती है

ठकुराइन की जितनी उम्र ढल रही है इनका जिस्म आवर भी रसदार हो रही है कास ठकुराइन मेरी बीवी होती तो साली की छूट मैं लैंड डेल बस सोया रहता

मुंसी ठकुराइन की जिस्म को ऊपर से निचे तक देखता हुआ मन मैं सोचता है


क्या हुआ मुंसी कहा खो गया मुझे पहली बार देख रहा है क्या भूल मत मैं गाओं की मामूली औरत नहीं हुईं ... मुंसी को घूरता हुआ देख कर ठकुराइन गुस्से मैं बोलती है

ठकुराइन की आवाज़ सुन कर मुंसी सतपाका जाता है आवर निचे देखने लगता है

मांफ करना ठकुराइन मैं तो .... मुंसी हिचकते हुए बोलता है

मैं सब जानती हुईं ..... क्या काम है वह बोलो ठकुराइन मुंसी घूरती हुई बोलती है

ठकुराइन ठाकुर साहब से काम था ... मुंसी घबराते हुआ बोलता है

ठीक है मैं भेजती हुईं आप बैठिये

इतना बोल कर ठकुराइन वह से चली जाती है

ठकुराइन के जाते hi वह मुंसी भी हवेली मैं आकर सोफे पर बैठ जाता है तभी मुंसी की नज़र दूर कड़ी औरत पर नज़र जाती है आवर मुंसी की आँखों मैं फिर से चमक आ जाती है


e6ef1840-b1fe-4407-8add-448c8adb032e.jpg


क्या हुआ दीदी क्या बोल रहा था मुंसी

ठकुराइन से सामने कड़ी औरत बोलती है जो बुलु साड़ी मैं गजब की खूबसूरत लग रही होती है

अरे छोटी ये मुंसी के बारे मैं तू भी तो जानती है

ठकुराइन मुंह बनती हुई बोलती है जो पुष्प मुस्कुरा देती है

पुष्प सिंह लता देवी की छोटी देवरानी उम्र 40 सल्ल

पुष्प भी लता देवी की तरह खूबसूरत होती है आवर पुष्प की जिस्म भी जिस्म भी लता देवी की तरह गदराई हुई होती है मगर पुष्प की मुस्कान बहुत कातिलाना होती है

दीदी वह बेचारा क्या करे आप इस उम्र मैं भी इतनी खूबसूरत जो लगती है बेचारे की वह बेचैन हो जाता होगा

पुष्प मुस्कुराती हुई बोलती है

चुप कर बेशर्म ... तू मंदिर क्यू नहीं आई

लता देवी पुष्प को दंति हुई पूछती है जो पुष्प थोड़ी घबरा जाती है

दीदी वहहहह दीदी मेरा सर दर्द

हआ ठीक है जा आराम कर तेरा हर वक़्त सर hi दर्द करने लगता है

लता देवी बोलती हुई अपनी रूम मैं चली जाती है

दीदी मुझे मनाफ़ कर दीजियेगा प्लीज

वही पुष्प अपनी माथे से आया हुआ पसीना पूछती हुई वह से जाती हुई मन मैं सोचती है

वही गाओं से थोड़ी दूर कॉलेज से 4 लड़कियां एक साथ निकलती है

सोनम क्या तुम सहर चलेगी मेरे साथ

साथ चलती हुई एक लड़की कहती है

चंपा तू सहर क्यू जाना छाती है पहले तो कभी नहीं जाती थी

साथ चलती हुई दूसरी लड़की बोलती है

कोमल मैं भगवन से मन्नत मांगी थी मेरे भाई की नौकरी लग जाएगी तो मैं सहर वाली माता रानी की दरसन करुँगी आवर भाई की नौकरी लगी काफी दिन हो गयी इस लिए मैं कल hi सहर जाना चाहती हुई


चंपा बोलती है

मैं सहर साथ चलेंगी चंपा दीदी

वह दोनों लड़की से पहले hi तीसरी लड़की बोल पड़ती है

छोटी क्या बोल रही है पापा जाने नहीं देंगे वह भी सहर अकेली

सोनम दीदी मैं सहर जाना चाहती हुईं आवर मैं सहर वाली माता रानी से आरती दीदी के लिए बीटा मांगूंगी

सोनम दीदी मुझे अच्छे से पता है आप आवर कोमल दीदी दोनों रक्षा बंधन के दिन बहुत रोटी है कस हम्हरा भी एक भाई होता मगर दीदी भगवन जी ने हमेह एक भी भाई नहीं दिए लेकिन दीदी आप को पता है आरती दीदी पहले भाई के लिए रोटी थी आवर अब औलाद के लिए

सोनम दीदी मैं इस लिए सहर जाना चाहती .... वह लड़की बोलती हुई रोने तक लगती है

वही हॉल वह दोनों लड़की सोनम आवर कोमल की भी होती है वह दोनों तीसरी लड़की को गले लगा लेती है सोनम आवर कोमल की भी आँखें नाम हो जाती है

छोटी मैं पापा से बात करुँगी .... सोनम दुखी सवार मैं बोलती है

सोनम मुझे मनाफ़ करना जो तुम लोगों के सामने भाई का नाम लिए

चंपा भी दुखी होकर बोलती है

चंपा तू दुखी न हो ... भगवन जी ने hi हम्हारे किस्मत मैं भाई का प्यार नहीं लिखा है .... सोनम अपनी आँखों से आंसू पोछ तो हुई बोलती है आवर फिर वह घर की तरफ चल पड़ती है

______________________________
 
अपडेट ......71

अर्जुन आवर अंजलि दोनों साथ कॉलेज से घर आ जाते है अर्जुन घर आते hi अपने रूम मैं जाता है आवर कपडे चेंग कर के अपनी गीता दीदी की रूम मैं चला जाता है तो देखता है उसकी गीता दीदी बीएड पर नहीं है तभी अर्जुन को बाथरूम मैं पानी गिरने की आवाज़ आती है तो अर्जुन धीरे से रूम बंद कर देता है आवर बाथरूम मैं जाने को होता है के बाथरूम का गेट बंद होता है तो अर्जुन गेट धीरे से पित्त है जो गीता दरवाज़ा नहीं खोलती है जो अर्जुन एक बार फिर से गेट पित्त है जो इस बार गीता गेट खोल देती है

गेट खोलते hi अर्जुन अपनी गीता दीदी को बाँहों मैं भर लेता है आवर गीता दीदी को किश करने लगता है

वही गीता भी अर्जुन के किश मैं पूरा साथ देने लगती है अर्जुन अपनी गीता दीदी को किश करते हुआ बीएड पर धक्का दे देता है जो गीता सिसकते हुआ बीएड पर गिर पड़ती है जो गीता की टावल भी खुल जाती है आवर गीता की टाइट चुकी अर्जुन के आँखों के सामने आ जाती है अर्जुन अपनी गीता दीदी की ऊपर आ कर गीता की चुकी को सहलाने लगता है जो गीता सिसकियाँ लेती हुई अपनी हांथों से बेडसीट पकड़ लेती है

आह्ह्हह्ह्ह्ह बाबू

अर्जुन जैसे hi गीता निपल को हल्का सा दबाता है गीता सिसक पड़ती है आवर अर्जुन का सर पकड़ लेती है

अर्जुन के चुकी को सहलाने से गीता की छूट मैं चींटियां चलने लगती है गीता की छूट गर्म होने लगती है गीता अपनी पेअर एक दूसरे मैं दबाने लगती है

अर्जुन गीता की चुकी को सहलाते हुआ अपनी गीता दीदी की आँखों मैं देखने लगता है जो गीता भी अर्जुन के तरफ hi देख कर थोड़ी थोड़ी शर्मा रही होती है Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

दीदी अभी भी दर्द कर रहा है

अर्जुन जैसे hi हाथ गीता की छूट पर रखता है गीता एक लम्बी आठ लेती है तो अर्जुन पूछता है

बस थोड़ा सा दर्द है .... गीता अर्जुन को देखते हुआ बोलती है

बाप रे सॉरी दीदी सॉरी

अर्जुन फिर निचे की तरफ आकर अपनी गीता दीदी की छूट की ऊपर से टावल जैसे hi हटाता है बोल पड़ता है

क्यू की गीता की छूट पूवे की तरह फुल कर लाल हो चुकी होती है जिससे देख कर अर्जुन थोड़ा घबरा भी जाता है

अर्जुन बाबू कुछ नहीं हुआ है मैं ठीक हुईं ... गीता अर्जुन का हाथ पकड़ कर फींकी मुस्कान सा मुंह बना कर बोलती है मगर गीता की चेहरे से लग रहा होता है गीता को दर्द अभी भी हो रही है

स्स्सस्स्स्स स्स्स्सस्स्स्स

दीदी मुझे मनाफ़ कर दीजिये मुझे पता नहीं क्या हो गया था जो उस तरह करने लगा

अर्जुन सच मैं मुझे बुरा नहीं लगा था तू दुखी न हो पहली बार हर लड़की के साथ आएसा hi होता है बस मेरी थोड़ी जयादा हो गयी है तेरा वह इतना बड़ा आवर मोटा है इस लिए

गीता बोलती हुई शर्मा जाती है आवर दूसरी तरफ देखने लगती है

क्या बड़ा आवर मोटा है दीदी

अर्जुन मुस्कुरा कर पूछता है आवर गीता के बगल मैं लेट जाता है आवर गीता को अपनी बाँहों मैं भर लेता है जो गीता भी शर्म के अर्जुन के बाँहों मैं चली जाती है

बोलो न दीदी

अर्जुन फिर से पूछता है अर्जुन देखता है उसकी गीता दीदी बहुत शर्मा रही होती है तो थोड़ा मस्ती करने लगता है

अर्जुन मुझे शर्म आ रही है

गीता मुंह बना कर बोलती है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

ये क्या दीदी सब कुछ करने के बाद आप को शर्म आ रही है आप hi तो पहले नंगी हुई थी मेरे सामने अर्जुन बोलते हुआ गीता की गांड दबा देता है जो गीता सिसक पड़ती है

उस वक़्त ममम मैं अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मत कर न बाबू .... गीता बोलती हुई चुप हो जाती है आवर अर्जुन को मन करने लगती है क्यू के अर्जुन गीता की बड़ी गांड फिर से मसलने लगता है

क्या दीदी बोलो न


अर्जुन गीता की मसलदार गांड को फिर से दबाने लगता है अर्जुन का लैंड अपनी गीता दीदी की मसलदार गांड को सहलाते हुआ खड़ा होने लगता है

वही गीता भी अपनी गांड इधर से उधर करके सिसक रही होती है

अह्ह्ह्हह्हह बाबू तू क्या कर रहा है Ahhhhhhhhhhhhh वह नहीं

गीता बोलती है आवर अर्जुन के आवर भी बाँहों मैं चली जाती है

गीता अंदर से बहुत खुश होती है आवर अर्जुन के बाँहों मैं बहुत शर्मा भी रही होती है जैसे अर्जुन उसका पति हो

दोनों भाई बहन एक दूसरे से पति पत्नी की तरह एक दूसरे के बाँहों मैं चिपके बातें कर रहे होते है तभी दोनों के कानो मैं अंजलि की आवाज़ आती है जो गेट के बहार से गीता को पुकारती है

अंजलि की आवाज़ को सुन कर अर्जुन गीता दीदी से अलग हो जाता है

वही गीता जल्दी से उठ कर अपनी कपडे पहन लेती है आवर आवर जाकर गेट खोल देती है जो सामने अंजलि कॉफ़ी लिए कड़ी होती है आवर अंजलि को देख थोड़ा मुस्कुरा देती है जो अंजलि भी मुस्कुरा देती है

दीदी आप ठीक है

अंजलि अंदर आते हुआ बोलती है

हां छोटी अभी दर्द थोड़ा काम है

गीता अर्जुन को देखती हुई थोड़ी उदास होकर बोलती है आवर

वही अर्जुन बीएड पर लेट कर फ़ोन चलने लगता है जो अंजलि भी अर्जुन के साथ बीएड पर लेट जाती है

दीदी अर्जुन आप को मुझसे जयादा प्यार करता है .... अंजलि उदासी सी सकल बना कर बोलती है

गुड़िया क्या बोल रही है ... तुझे आएसा क्यू लग रहा है .... अर्जुन हम दोनों को प्यार करता है

गीता थोड़ी हैरानी से बोलती है आवर अंजलि के पास चली जाती है वही अर्जुन भी फ़ोन रख कर अपनी अंजलि दीदी को देखने लगता है

दीदी अर्जुन आप के साथ कितना वक़्त गुजरता है आप के रूम मैं भी हर वक़्त आता रहता है मगर मेरे रूम मैं नहीं आता है .... अंजलि आवर भी मुंह बना कर बोलती है

दीदी आप क्या बोल रही है मैं तो आप के रूम मैं जाता हुईं .... अर्जुन भी थोड़ा हैरानी से बोल पड़ता है

है है है है देखों देखों दीदी अर्जुन का चेहरा

अंजलि अर्जुन को देख कर हसने लगती है वही गीता भी मुस्कुरा देती है

पागल मैं तो दर गयी थी ये सोच कर के ये ख्याल तेरे मन मैं भी आई कैसे

वो मेरा राजा बाबू .... अंजलि हस्ती हुई बोलती है आवर अर्जुन के गलों पर किश कर देती है

वही राखी देवी का दिल बिलकुल भी नहीं लगता है तो राखी देवी घर आ जाती है

दीदी क्या हुआ आप परेशां लग रही है

राखी देवी की उदास चेहरा को देख कर आँचल पूछती है

आँचल कुछ नहीं हुआ मैं ठीक हुईं तू ज़रा कॉफ़ी पीला दे सर दर्द कर रही है

राखी देवी वही हॉल मैं बैठ जाती है आवर आँचल किचेन मैं चली जाती है

अर्जुन मेरे साथ वह जाएंगे क्या ..... क्या मैं अर्जुन को सब कुछ बता दूँ

मैं अर्जुन को वह जाने के लिए कहूँगी तो वह पूछेगा उस गाओं के बारे मैं

मैं अर्जुन को पूरी बात तो नहीं मगर उस हवेली के बारे मैं सब बता दूंगी

दीदी कॉफ़ी

राखी देवी सोच मैं घूम होती है मगर आँचल की आवाज़ सुन कर सोच से बहार आती है आवर आँचल से कॉफ़ी लेकर पिने लगती है

दीदी आखिर बात क्या है आप मुझे परेशां दिख रही है अब आप मुझसे भी बातें छिपाने लगी ....

आँचल थोड़ी मुंह बना कर बोलती है

आँचल तुझे आयी कैसे लगा के मैं तुझसे कुछ छिपाने लगी तू hi तो है जिससे मैं साडी बातें बताती हुईं

आँचल भले hi रिश्ते मैं तू मेरी भाभी है मगर मैंने तुझे अपनी छोटी बहन hi मन है

तो फिर बताइये न बात क्या है

आँचल बोल पड़ती है


आँचल पीतमपुरा का ज़मीन तो मिल गया है मगर आँचल हरिया चाचा यह आये है आवर उन्होंने बताया के ममता बुआ जी वह गयी हुई है

आँचल आखिर ममता बुआ उन लोगों के पास क्यू गयी है मुझे ये बात परेशां कर रही है

राखी देवी परेशां सी मुंह बना कर बोलती है

दीदी वह हम्हारे साथ तो कुछ बुरा नहीं करेंगी न आप बोलती ने बताया था वह हम लोगों से गुस्सा नहीं है

आँचल राखी देवी की हाट पकड़ कर पूछती है

आँचल मुझे पूरा यकीन है ममता बुआ हम लोगों से गुस्सा नहीं है .... मगर ममता बुआ उन लोगों के पास क्यू गयी है

आँचल मुझे ममता बुआ से मिलना hi होगा

राखी देवी बोलती है

दीदी भगवन करे ममता बुआ के दिल मैं हमारे लिए कोई बुरा ख्याल न हो

आँचल भगवन को याद करती हुई बोलती है

_______________________________


वही सहर के एक बड़े घर मैं

तुम तो बहुत बहादुर हो .. नाम क्या है तुम्हारा

एक बहुत hi खूबसूरत लड़की सागर के किनारे एक लड़के के साथ बैठी हुई बोलती है

अर्जुन

वाओ बहुत पायरा नाम है तुम कहा रहते हो ..... वह लड़की फिर से पूछती है

मैं एहि रहता हुईं अपनी ममी माँ के पास .... वह लड़का जवाब देता है

ोये देवी चलेगी या हम लोग जाये


नहीं रुक पिंकी अभी आई

ठीक है अर्जुन अभी मैं चलती हुईं फिर मिलेंगे तो ढेर साडी बातें करेंगे ठीक है ुमायआ

वह लड़की उठती हुआ अर्जुन के गलों पर किश कर देती है

अर्जुन ये किश गर्लफ्रेंड वाली नहीं है ये बड़ी बहन की किश था अपने छोटे भाई के लिए

वह लड़की हस्ती हुई बोलती है आवर अर्जुन को बे का इशारा कर के चली जाती है

महारानी सोल्लगे मैं तो बहुत शरीफ बनती फिरती है आवर यह दूसरी बार मैं hi किश कर दिया .... वैसे वह तुझसे छोटा नहीं लग रहा है

उस लड़की की सहेली बोलती है

कितना बोलती है पिंकी तुझे पता है मैं साहिल से प्यार करती हुईं आवर उसी से शादी करुँगी

मैं अर्जुन से बस दो बार hi मिली मगर उसे देख कर दोनों बार मेरे दिल को इतनी ख़ुशी होती है की मैं बता नहीं सकती

मेरा कोई अपना भाई नहीं .... लेकिन अर्जुन को देख कर मुझे लगता है जैसे कोई रिस्ता है

मैं उसे अपना छोटा भाई मान कर किश किया था बहुत प्यारा लड़का है अर्जुन वह लड़की बोलती हुई एक बार फिर से पीछे घूम कर अर्जुन की तरफ देखती है मगर अर्जुन पीछे नहीं होता है

आआआआआउनछहभ

ोये ोये भाभी कही भैया की याद तो नहीं सत्ता रही है

एक लड़की ज़ोर ज़ोर से हस्ती हुई बोलती है

मैं क्यू तेरे भैया को याद करने लगी वह तो दिन रात साथ hi रहते है आवर मेरी टांगों के बिच पड़े रहते है ... भाभी हस्ती हुई बोलती है

छठी भाभी आप पहले से बहुत गन्दी होती जा रही है ... जाइये मैं बात नहीं करती

आह्ह्ह्ह भाभी

शिवानी बोल कर जाने लगती है मगर भाभी उसे पकड़ कर फिर से बीएड पे गिरा देती है

ोये ोये मेरी नन्द रानी तो बहुत शमा रही है लेकिन जब राज बाबू का डंडा इस छूट मैं जायेगा तो सब शर्म भूल जाओगी

Ahhhhhhhhhh भाभीईईई Ahhhhhhhhhhh

भाभी बोलती हुई शिवानी की छूट मसल देती है जो शिवानी मचल जाती है

लगता है अपने राज बाबू के लिए सियाल पैक रखा है छूट को

भाभी फिर से शिवानी की छूट को मसलती हुई बोलती है

वही शिवानी बीएड पर पड़ी मचलने लगती है

अह्ह्ह्ह भाभी प्लीज मत करिये आह्ह्हह्ह्ह्ह आज तो मैं तेरी छूट देख कर hi रहूंगी

Nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

चुप होजा शिवानी माँ जी सुन लेगी

भाभी अभी शिवानी की पाजामे का नाडा खोलने वाली होती है तभी शिवानी हस्ती हुई चीख पड़ती जो भाभी शिवानी को छोड़ देती है आवर शिवानी हस्ती हुई भाग जाती है

शिवानी आवर अर्जुन की जोड़ी बहुत अच्छी लगती मगर पता नहीं अर्जुन से शादी करती की नहीं

अर्जुन पता नहीं अभी कहा है उसका फ़ोन भी नहीं लगता है ....

भाभी मन मैं सोचती है

तभी भाभी का फ़ोन बजने लगता है तो भाभी फ़ोन उठा कर बात करने लगती है

माँ आप सच बोल रही है .... भाभी जी इतनी खुश होकर पूछती है की उनकी आँखें भर आई जाती

ख़ुशी के मरे भाभी जी के हाथ से फ़ोन भी निचे गिर जाती है आवर भाभी जी वही बीएड पर बैठ कर रोने लगती है मगर भाभी जी के चेहरे पर ख़ुशी नज़र आ रही होती है

वही फ़ोन पर कोई औरत अभी भी बोल रही होती है

पता नहीं ाएसि कोई सी बात होती है जो भाभी जी की आँखों मैं आंसू मगर चेहरे पर मुस्कान होती है

साहिल मेरी आखिरी गलती समझ कर मुझे मनाफ़ कर देना ..... भाभी मन मैं बोलती है आवर फिर से रोने लगती है

 
Back
Top