Teri tadap jaldi khatam nahi hogi - Page 7 - SexBaba
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Teri tadap jaldi khatam nahi hogi

अपडेट..... 54

अंजलि मन मैं सोचती है आवर छत से निचे आने लगती है

अंजलि भगति हुई निचे जब आती है तो देखती है उसकी गीता दीदी का एक हाथ अर्जुन के गर्दन पर होती है आवर अर्जुन भी गीता दीदी के कमर को पकड़ा हुआ है आवर उसकी गीता दीदी अर्जुन का सहारा लेकर धीरे धीरे चल रही होती है

डीईई

ओह्ह्ह गीता मेरी बच्ची... क्या हुआ अर्जुन बीटा .... अंजलि कुछ बोलती उससे पहले hi किचेन से निकलती हुई आँचल बोल पड़ती है

माँ वह वह

ममी माँ वह पेअर मैं थोड़ी चोट लग गयी थी ......

अर्जुन बस वह वह कर रहा होता है इस लिए गीता बोल पड़ती है

hhhhhhhhhhh

ओह्ह्ह अर्जुन बीटा आराम से

कैसे चोट लग मेरी बच्ची... दिखा मुझे चोट जयादा तो नहीं लगी है

गीता बोलती हुई दर्द मैं सिसक पड़ती है जो आँचल का दिल तड़प जाती है आवर आँचल गीता को पकड़ लेती है बोलती हुई

आँचल जैसे hi गीता को पकड़ती है अर्जुन गीता को छोड़ देता है

ममी माँ चोट तो बहुत बुरी गति से लगी है ..... जो अभी मुझे समझ मैं आ रही है

ममी माँ आप मत देखिये नहीं तो आप मेरी चोट को देख कर दर जाएँगी के कैसे आप के बेटे ने मेरी चिपकी हुई छोटी सी छूट मैं अपने मोटा सांप दाल दिया है

hhhhhhhhhhhhhhhh

ओह्ह मेरी बच्ची


वह कड़ी होकर क्या देख रही है पकड़ नहीं सकती है

गीता मन मैं सोचती हुई सिसक पड़ती है

गीता की दर्द भरी आहे सुन कर आँचल दर जाती है आवर सामने कड़ी अंजलि से बोलती है... जो अंजलि भी भाग कर गीता को दूसरी तरफ से पकड़ लेती है

आँचल आवर अंजलि दोनों मिल कर गीता को उसके रूम मैं लेकर जाती है आवर बीएड पर लेता देती है

अंजलि बीटा ज़रा पानी लेकर आ देख

कितनी गर्म है मेरी बच्ची का जिस्म ..... बीएड पर लेटते हुआ आँचल बोलती है आवर गीता के माथे पे लटकी हुई बाल अलग कर देती है

चोट कहा आवर केस लग गयी मेरी बच्ची देख दर्द की वजह से तेरी जिस्म भी गर्म हो रही है ..... आँचल घबराती हुई बोलती है आवर गीता की जिस्म को देखने लगती है के चोट कहा लगी है जिसके वजह से गीता को इतनी दर्द हो रही है

ममी माँ आप परेशान न हो मैंने दवा खा लिया है ..... गीता गेट की तरफ देखती हुई बोलती है

दिखा मुझे कितनी चोट लगी है .... आवर कहा पर .....

ओह्ह्ह मेरी गुड़िया

आँचल गीता के पेअर को देखती हुई बोलती है जो गीता के पेअर पर पट्टी बंधी हुई होती है

आँचल के फिर से पूछने पर गीता अपनी पेअर उठा कर दिखती है जो आँचल गीता के पेअर पर पट्टी बंधी हुई देख कर आँचल का दिल मचल जाती है

पता नहीं कितनी चोट लगी है देख ये पट्टी भी लाल हो रही है.... आँचल गीता के पेअर पर हाथ फेरती हुई बोलती है

ममी माँ ये लो पानी.... अंजलि पानी का गिलास आँचल के आगे करती हुई बोलती है

आँचल पानी का गिलास लेती है आवर अपनी साड़ी के पल्लू को भिनगा कर गीता के माथे पर रख कर वही बैठ जाती है

दीदी को चोट कब लग गयी रात मैं तो दीदी को कोई चोट नहीं लगी थी आवर दीदी रात मैं पता नहज कहा चली गयी थी आवर दीदी के साथ अर्जुन कैसे आ गया..... अंजलि वह कड़ी होकर मन मैं सोचती है

अर्जुन कैसे ममी माँ से बोलते हुआ घबरा रहा था जैसे उसने कोई चोरी किया है आवर कैसे दीदी अर्जुन को देख कर मुस्कुरा रही थी

अंजलि वह कड़ी होकर बस एहि सोच रही थी क्यू के अंजलि कब से बस अर्जुन आवर गिरा को hi देख रही थी जो अंजलि को गीता की बात पर ज़रा भी यकीन नहीं हो रही होती है मगर अंजलि अभी कुछ पूछ भी नहीं सकती थी अपनी गीता दीदी से क्यू के अभी वह आँचल थी आवर गीता के पेअर मैं सच मैं चोट लगी हुई होती है


गुड़िया तेरी दीदी सो गयी है लेकिन देख अभी भी इसका जिस्म थोड़ा गर्म है ज़रा तू माथा भिनगा दे मैं आती हुई....

आँचल बोलती है तो अंजलि गीता की माथे पर अपनी दुप्पटा भिनगा कर रख देती है आवर पास मैं बैठ जाती है

हहहह हूऊं अअअअअअअ ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

दीदी ये क्या करवा दिया आप ने..... मैं बुरा भाई हुईं जो अपनी दीदी की ये हालत कर दिया ..... चलिए हॉस्पिटल चलते है ..... आप को कितनी दर्द हो रहा है ..... अर्जुन रोने जैसा आवाज़ मैं बोलता है

अर्जुन की जब नींद खुलती है तो अर्जुन को अपनी गीता दीदी की आह्ह्हह्ह्ह्ह सुनाई देती है जो उसकी गीता दीदी दर्द मैं कैंप रही होती है आवर गीता की जिस्म भी गर्म होती है जो अर्जुन की आँखे भींग जाती है

बाबू कुछ नहीं हुआ है मुझे बस थोड़ी दर्द हो रही है.... आवर तूने कुछ नहीं किया है ...... मैं तो ये दर्द कब से लेना चाहती थी.... मगर मुझे नहीं पता था इतना दर्द होता है..... गीता अर्जुन को देखती हुई फींकी मुस्कुराहट से बोलती है

गीता को अभी कितनी दर्द हो रही है गीता की आँखों से पता चल रही होती है मगर सामने अपने छोटे भाई के उदास चेहरे को देख कर गीता अपनी दर्द थोड़ी देर के लिए भूल जाती है आवर चेहरे पर एक मुस्कान लेकर बोल देती है

अर्जुन तेरी दीदी सही कह रही है ये दर्द तो हर लड़की को सहना hi पड़ता है मगर यह थोड़ा उल्टा है जो दर्द तेरी दीदी को तेरा जीजा देने वाला था वह दर्द तूने दे दिया.. आवर ये भी तेरे साथ कुछ जयादा hi मस्ती मैं तेरे सांप को अपनी गुफा मैं ले ली

सीतल मुस्कुराती हुई बोलती है

सीतल की बात सुन कर अर्जुन अपना सर निचे कर लेता है वही गीता शर्म के मारे सीतल को चुप रहने का इशारा करती है जो सीतल हस्ती हुई अपनी होंठों पर हाथ रख लेती है

अर्जुन बगल वाला रूम मैं बाथरूम है तुम फ्रेश हो लो तब तक मैं गीता को देख लेती है कितनी बुरी हालत किया है तुमने इसकी छहु

सीतल आगे कुछ बोलती उसके पहले hi गीता उठ कर सीतल की मुंह दबा देती है जो सीतल की मुंह सा बस छू hi निकल कर रह जाता है

लेकिन अर्जुन तो समझ जाता है सीतल क्या बोलने वाली थी जो अर्जुन शर्म के मारे रूम से निकल जाता है

साली कुटिया हरामजादी .... मेरे भाई से इतना भी मज़ा न ले ... गीता सीतल के पीठ पर मरती हुई बोलती है

hhhhhhhhhhhhhhh

साली अभी शर्मा रही है आवर रात मैं कैसे चीखे निकल रही थी

मैं पक्का कहती हुईं तेरी छूट तो पूरी फैट गयी होगी गीता रानी ...... सीतल हस्ती हुई कहती है

साली जब मेरे भाई का वह तेरी छूट मैं जायेगा तब तेरी भी छूट फैट जाएगी आवर तू तो चीला चीला कर सभी गाँव के लोगो को बता देगी के तेरी छूट फार गयी ..... गीता भी मुस्कुराती हुई बोलती है

मुझे नहीं लेना अपनी छूट मैं तुहि ले

वैसे गीता तेरी सपना तो पूरी हो गयी... अब क्या दूसरी सपना भी पूरी करेगी ...... गीता को देखती हुई सीतल पूछती है

सीतल मुझे कुछ समझ मैं नहीं आ रही है लेकिन मैं दूसरी सपना पूरी जरूर करुँगी ...... Sssssssssssssssssssssssssssssssssssss hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

गीता बोलते हुआ कुछ सोचने लगती है तभी सीतल अपनी एक ऊँगली गीता की छूट मैं दाल देती है जो गीता सिसक पड़ती है

दीदी क्या हुआ गीता सिसकते हुआ जैसे hi आँखे खोलती है सामने अंजलि को देखती है

वही अंजलि बोल कर गीता को अजीब नज़र से देखने लगती है जैसे अंजलि समझने की कोशिस कर रही हो के उसकी गीता दीदी सिसक क्यू रही है क्यू के अभी आएसा कुछ हुआ hi नहीं के गीता दीदी को दर्द महसूस हो

गु गु गुड़िया पानी..... अंजलि को खुद को घूरते हुआ पाकर गीता थोड़ी घबरा जाती है जो घबराती हुई पानी मांगने लगती है

अंजलि भी उठ कर फ्रीज से पानी निकलने लगती है

हे भगवन बचा लेना कैसे घर रही थी गुड़िया मुझे...... गीता बीएड पर उठ कर बैठती हुई मन मैं सोचती है


वही अंजलि फ्रीज से पानी का बोतल निकल कर गीता को दे देती है तो गीता पानी पिने लगती है

वही अंजलि बस गीता को घूरती रहती है

जैसे अंजलि के दिमाग मैं कुछ चल रहा हो

गुड़िया गुड़िया गुड़िया

अंजलि अपनी गीता दीदी को घर रही होती है तभी आँचल की आवाज़ आती है

हुईं ये ममी माँ बस मुझे hi पुकारती रहती है.... अंजलि मुंह बना कर बोलती है आवर रूम से निकल जाती है

अंजलि के जाते hi गीता चैन की शंश लेती है आवर पानी पीकर फिर से लेट जाती है

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राखी मैं बोल रहा हुईं अब आवर कोई बच्चे के बारे मैं नहीं सोचते है हम्हारी दो राजकुमारी hi काफी है क्या बोलती हो राखी

अभी ाढी रात हो रही होती है आवर राखी दे अपने पति की बाँहों मैं सिमटी हुई होती आवर दोनों hi नंगे होते है तभी राखी देवी के पति बोलता है

क्या आप जीवन भर खुश रहेंगे .... राखी देवी बहुत hi मासूमियत से पूछती है

हां राखी तुम मेरी बाँहों मैं इसी तरह लिपटी रही तो मैं जीवन भर खुश रहूँगा..... राखी का पति कहता है

लेकिन मैं खुश नहीं रहूंगी जीई मैं बहुत खुश हुईं के मेरे पास दो राजकुमारी है मगर मुझे एक राजकुमार भी चाहिए जो मुझे माँ माँ कह के पुकारे आवर मैं उसे लल्ला कह के गले लगा लू

हम्हरा ये महल खुशियों से भर जायेगा मुझे मेरा लल्ला मिल जायेगा आवर आप को अपना वरिष्ठ आवर हम्हारी दो राजकुमारियों को राजकुमार जैसा भाई फिर हम्हरा परिवार सफल हो जायेगा फिर चाहे मैं अपने लल्ला को आखिरी बार hi क्यू न देखूं ..... राखी देवी एक मुस्कान के साथ बोलती है

राखी ये सब्द दोबारा अपनी जुबान पर मत लाना राखी मुझे आवर कोई बच्चा नहीं चाहिए बस मुझे तुम चाहिए...... राखी देवी का पति तड़प आवर गुस्से से बोलता है जैसे राखी के पति को राखी की बात बिलकुल भी अच्छी न लगा हो

आप चाहते है मैं ाएसि बात न करूँ तो प्लीज भगवान् के लिए मुझे एक बार ोुए माँ बना दीजिये मैं जानती हुईं आप मुझसे बहुत प्यार करते है आवर

आप नहीं चाहते के मैं एक बार आवर माँ बनो

विक्रम जी हर किसी का जान बस एक भगवान् hi ले सकता है ये दुनिया के लोग तो कुछ भी बोलते है

आप देख लेना भगवान् ने चाहा तो मैं अपने बेटे को युनि के रस्ते दूंगी आवर युनि के रस्ते नहीं भी दूंगी तब भी मुझे कुछ नहीं होगा मैं अपने लल्ला को अप्प्रेसिअशन के ज़रिये hi आप को दूंगी

प्लीज मुझे एक बार माँ आवर बना दीजिये मेरी तीसरी ओप्प्रेशन भी ठीक से होगी बस आप मेरे साथ होना मुझे बस एक लल्ला चाहिए ....... राखी देवी बोलती हुई अपने पति के आगे रोने लगती है

राखी ये कैसी ज़िद्द पकड़ कर बैठी हो तुम डॉ ने मन किया है मगर तुम मान hi नहीं रही हो मैं तुमेह नहीं खोना चाहता हुईं मगर मैं तुमेह दुखी भी नहीं देख सकता हुईं

राखी तुमने मुझे उलझन मैं दाल दिया है मैं जानते हुआ कैसे तुमेह...... राखी मैं तुमेह खोना नहीं चाहता हुईं.... विक्रम तड़प कर बोलता है आप कहते है मैं दुखी न रहूं तो प्लीज भगवान् के लिए मान जाइये

मैं इस हवेली मैं जब से आई हुईं आप से कुछ नहीं माँगा है मैं आज आप से मांग रही हुईं प्लीज प्लीज प्लीज मान जाइये .... इस बार राखी देवी रोटी दहकती बोलती हुई अपने पति से लिपट जाती है

राखी देवी की तड़प देख कर वुक्रम सिंह सोचने पर मज़बूर हो जाता है

राखी

मालकिन मालकिन मालकिन

मुझसे दूर रह हरामज़ादी

राखी देवी अपने खेत वाले रूम मैं सोइ हुई सपनो के हसीं दुनिया मैं खोई हुई होती है तभी कमला

राखी देवी की जिस्म को पकड़ती हुईं उनेह पुकारने लगती है जो राखी देवी की नींद खुल जाती है आवर राखी देवी कमला को गुस्से मैं पुकार देती है

राखी देवी की लाल आँखे देख कर

कमला भी दर कर थोड़ी दूर हैट जाती है

मममम म मालकिन वववववा हहह छ्होटे मालिक आये है ..... राखी देवी की लाल आँखे देख कर कमला डर्टी हुई बोलती है

ये पहली बार होती है जब राखी देवी की आँखों मैं इतना गुस्सा कमला ने देखि हुई होती है जो कमला बोलकर राखी देवी की बिना कुछ जवाब सुने रूम से निकल जाती है

आप क्यू मुझे छोड़ कर चले गए

मैं बोली थी न..... मैं अपने लल्ला को इस दुनिया मैं लाऊंगी

देखिये लल्ला आवर मैं दोनों ठीक है मगर आप मुझे छोड़ कर चले गए

मेरा लल्ला बिलकुल आप पे गया है

आप जानते है मेरा लल्ला मुझसे अभी बहुत रूठा है मगर मुझे कोई गम नहीं है

मेरा लल्ला मेरे पास है मैं बहुत खुश हुईं

देखिये मेरा लल्ला आ रहा है .....

राखी देवी सामने लटकी हुई अपने पति की तस्वीर से रोटी हुई बोलती है आवर जैसे hi अर्जुन के आने की आहात होती है राखी देवी अपने बहते हुआ आंसू को पोछ लेती है

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थैंक्स बीआरओ

सही है दोस्त गीता जितनी भी चालाकी दिखा ले मगर अंजलि से आगे नहीं निकल सकती है आवर अंजलि को थोड़ा साख तो हो रहा है मगर वह अभी कुछ पूछ नहीं पाई है

राखी देवी के लिए नफरत अभी अर्जुन के दिल से काम नहीं हुआ है मगर जो रात मैं हुआ है उसका कुछ तो असर पड़ेगा hi अर्जुन के ऊपर

आगे देखते है बीआरओ अर्जुन के दिल से कब अपनी माँ की नफरत काम आवर खराम होती है
 
अपडेट ....... 55

राखी देवी अपनी आँखों से बहुति हुई आंसू तो पोछ लेती है मगर राखी देवी की दिल का दर्द अभी भी दिख रही होती है जो राखी देवी थोड़ी फीकी मुस्कान से मिटने की कोशिस करती है मगर अर्जुन अपनी माँ की चेहरे पर उदासी देख लेता है मगर कुछ बोलता नहीं है

हआ अर्जुन क्या बात है..... राखी देवी अर्जुन को प्यार से देखती हुई बोलती है मगर अर्जुन तो राखी देवी की तरफ देखता भी नहीं है

कोई विजय सिंह का फ़ोन आया था उनके घर किसी चीज की पार्टी है वह आप को बुलाया है..... अर्जुन बिना अपनी माँ को देखे बोलता है

आवर भी कुछ बोल रहे थे क्या वह ... राखी देवी पूछती है

नहीं

अर्जुन बोलता है आवर अपनी माँ के यह से चला जाता है

अर्जुन के आज फिर से मुंह फेर कर बाते करना देख राखी देवी को बहुत तकलीफ होती है जो अर्जुन के जाते hi राखी देवी की आंसू जो रुकी हुई होती है वह चालक जाती है

आप दुखिये मत होइए मैं रो नहीं रही

भले hi मेरा लल्ला आज मुझसे खफा है मगर एक दिन वह मुझे वही प्यार देगा जिसके लिए मैं आज तक तड़पती आई हुईं

एक दिन मेरा लल्ला मुझे मांफ ज़रूर कर देगा मुझे पूरा यकीन है..... अपने पति के फोटो को देखती हुई राखी देवी बोलती है

अर्जुन खेत वाले रूम से निकल कर कुछ आगे खेत की तरफ बढ़ जाता है

अर्जुन अपने खेत को देखते हुआ आगे चल रहा होता है जो कुछ मज़दूर अर्जुन को देख कर नमस्ते कर रहे होते है

अर्जुन जब अपने खेत से थोड़ी दूर चला जाता है तो अर्जुन की नज़र थोड़ी दूर एक पेड़ के निचे एक औरत पर नज़र पड़ता है जो औरत पेड़ के निचे बैठ कर कुछ कर रही होती है मगर उस औरत की चेहरा अर्जुन को नज़र नहीं आता है तभी अर्जुन की नज़र उस औरत के साड़ी पर पड़ता है तो अर्जुन उस औरत की तरफ तेज़ी से बढ़ जाता है

ह्ह्हह्ह्ह्ह ये कैसी जलन है मेरे साथ क्या हो रहा है मेरी ये निगोड़ी बुर छोटे मालिक को देख कर मचलने क्यू लगती है

सांत होजा क्यू तंग कर रही है

Aaaaahhhhhhhhhh क्या करों इस बुर की ह्ह्हह्ह्ह्ह

अर्जुन जब उस औरत के करीब जाता है तो उसके कानो मैं आवाज़ आती है मगर सामने का नज़ारा देख कर अर्जुन के चेहरे पर पसीने आने लगते है

क्यू के अर्जुन के आँखों के सामने उस औरत की बड़ी बड़ी गांड दिख रही होती है आवर उस औरत की गांड बहुत गोरी होती है जिससे अर्जुन का लैंड भी खड़ा होने लगता है

औरत दूसरी तरफ बैठी हुई होती है तो वह अर्जुन को आते हुआ नहीं देख पति है ऊपर से वह औरत पेड़ के पीछे होती है आवर उस औरत की पीठ के पीछे से अर्जुन उसके पास आ गया होता है

अर्जुन तो उस औरत की नंगी गांड देख रहा होता है मगर वह औरत अर्जुन को नहीं देख पति है

आते hi अर्जुन तो उस औरत की बड़ी गांड देख कर उसका लैंड खड़ा हो गया होता है ऊपर से उस औरत की आवाज़ अर्जुन के कानो मैं जैसे hi आती है अर्जुन का पेअर डगमगा जाते है आवर अर्जुन वही रुक जाता है क्यू के अर्जुन इस आवाज़ को जनता था

ये तो कमला चची hi है ये मेरे बारे मैं आएसा बोल रही है .... अर्जुन वह खड़ा होकर hi मन मैं बोलता है जैसे अर्जुन पहले hi जान चूका हो वह औरत कमला hi है मगर अर्जुन थोड़ा हैरान भी होता है कमला की बाते सुन कर

वह औरत कोई आवर नहीं कमला hi होती है जो अर्जुन कमला की साड़ी देख कर hi पहचान गया होता है आवर जब अर्जुन आवाज़ सुनता है तो अर्जुन को बिलकुल यकीन हो जाता है

अर्जुन को कुछ समझ नहीं आता है वह कमला के पास जाये या वही से पीछे हैट जाए क्यू के कमला अभी भी सिसक रही होती है आवर कमला की सिसक भी ाएसि होती है के अर्जुन के जिस्म मैं हलचल सा होने लगता है आवर अर्जुन का लैंड भी सर उठाने लगता है

हहहह हहहह माआअह हहहहह hhhhhhhhhhh

कमला ओह्ह कमला ओह कमला कहा है

अअअअअ ररररर्जुन बीटा

कमला अचानक सिसकते हुआ हाफने लगती है तभी एक औरत की पुकारने की आवाज़ आने लगती है जो कमला उठ कर मुड़ती है तभी कमला की नज़र अर्जुन पर पद जाती है आवर कमल अर्जुन का नाम हड़बड़ाते हुआ ले लेती है

अर्जुन को वह देख कर कमला को इतनी शर्म आती है की कमला वह से थोड़ी तेज़ी से चली जाती है

वही अर्जुन भी हड़बड़ा कर रस्ते से हैट जाता है

कमल वह से जा चुकी होती है मगर अर्जुन अभी भी वही खड़ा होकर कमला को जाते हुआ देखता रहता है मगर कमला एक बार भी पीछे मूढ़ कर नहीं देखती है जब कमला अर्जुन के आँखों से ुझल हो जाती है तो अर्जुन वह से पेड़ के आगे चला जाता है

अर्जुन जब पेड़ के आगे जाता है तभी अर्जुन की नज़र पेड़ के निचे नज़र जाती है जो वह एक दो जगह पर गधा गधा सा कुछ गिरा हुआ होता है आवर वह पर भींग भी गया होता है जो देख कर अर्जुन समझ जाता है वह क्या है क्यू के कुछ देर पहले कमला वही बैठी हुई होती है

अर्जुन बड़े hi धयान से कमला की छूट से गिरी हुई रास को देखने लगता है

अर्जुन देखते हुआ कमला की गिरी हुई रास को छूने की कोशिस करता है मगर कुछ सोच कर अर्जुन वह से चला जाता है

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शाम के 6: पं

गीता अभी बीएड पे बिलकुल नंगी लेती हुई होती है गीता की खूबसूरत जिस्म फूल की तरह खिली हुई होती है गीता की जिस्म किसी सुराही की तरह होती है पेअर से लेकर कमर तक तो बराबर होती है मगर उसके ऊपर गीता की गांड फैली हुई होती है फिर उसके ऊपर गीता की जिस्म गांड के ऊपर चुकी के निचे तक बराबर होती है वही गीता सीना भी उसके गांड की तरह बड़ी होती है जो गीता की जवानी देख कर किसी लड़की की भी मुंह मैं पानी आ जाये

गीता बीएड पर नंगी लेती हुई होती है आवर गीता की एक हाथ अपने hi छूट के ऊपर होती है

गीता बस अपनी पहली हुई छूट के ऊपर ऊँगली फेर रही होती है आवर कभी कभी एक ऊँगली को छूट के अंदर दाल रही होती है

गीता जैसे hi एक ऊँगली को छूट के अंदर दाल रही होती है गीता की जिस्म कैंप जा रही होती है आवर गीता सिसकते हुआ अपनी गांड उठा दे रही होती है

गीता ये न जाने कब से कर रही होती है क्यू की गीता की छूट से रास अभी भी बाह रही होती है

बाबू कहा चला गया है आ न देख कब से मेरी छूट रो रही है

देख एक बार मैं ये छूट नहीं मानेगी इसको इतना प्यार कर के ये रोना hi बंद करदे

hhhhhhhhhhhh

कहा है बाबू....

गीता अपनी छूट मैं ऊँगली करती हुई धीरे से बोलती है

दीदी क्या आप ठीक है ये गेट क्यू बंद कर के राखी है

ओह्ह्ह मा गुड़िया

गीता अंजलि की आवाज़ सुन कर हड़बड़ा कर उठ जाती है आवर गीता हड़बड़ाहट मैं गीता जल्दी से मैक्सी पहन लेती है मगर पेंटी ब्रा नहीं पहन पति है जो अभी पेंटी आवर ब्रा दोनों बीएड के निचे पड़े हुआ होते है

गीता मैक्सी पहन कर गेट खोल देती है गेट खोलने के बाद गीता धीरे धीरे चलते हुआ बीएड की तरफ जाने लगती है तभी अंजलि गीता को पकड़ लेती है आवर सहारा देते हुआ बीएड पर लेता देती है

दीदी अब दर्द कैसा है.... बीएड पर लेता का अंजलि पूछती है

गुड़िया दर्द की पूछ रही है वह तो कब की ख़तम हो गयी है आवर फिर से दर्द मांग रही है ...... गीता अपनी छूट की तरफ देखती हुई बोलती है

मांग रही है ........... दीदी क्या बोल रही है आप

अंजलि चौंकते हुआ बोलती है आवर गीता को घूरने लगती है

गीता तो बोल चुकी होती है मगर जब अंजलि को घूरती हुई पति है तब गीता को लगता है कुछ उल्टा बोल दी है

गुड़िया मैं बोल रही थी अब दर्द काम हो गयी है मगर मैं अभी चलूंगी तो फिर से पेअर दर्द करने लगेगा..... गीता बात घूमते हुआ बोलती है

दीदी आप जयादा परेशान मत होइए आज मैं आप की रूम मैं hi सो जाउंगी

मैं नहीं चाहती मेरी दीदी को आवर दर्द का अहसास हो..... अंजलि कहती है

हे माँ ये गुड़िया क्या बोल रही है

ये मेरी रूम मैं सोयेगी तो मैं कैसे सन्ति से सो सकती हुईं

गुड़िया तेरी दीदी को बहुत दर्द हो रही है आवर मैं ये दर्द रात मैं मिटाना चाहती हुईं

मगर तू साथ सोयेगी तो कैसे मिटाऊँगी.... गीता मन मैं सोचती है

रात के 11:30 पं

ये क्या हो रहा है मेरे साथ मैं इतना निचे कैसे गिर सकता हुईं

मैं जिस वजह से मैं अपनी माँ से नफरत करता आ रहा हुईं आज मैं भी वही कर रहा हुईं

फिर मुझमे आवर माँ मैं कौन सा फर्क रह गया है मैं भी तो वही कर रहा हुईं

माँ ने अपने भाई के साथ किया आवर मैंने दीदी के साथ

मैं आएसा कैसे कर सकता हुईं मुझे यह आना hi नहीं चाहिए था

अर्जुन अपने रूम मैं सोया हुआ होता है आवर अर्जुन के दिमाग मैं बहुत कुछ चल रहा होता है

वही राखी देवी भी बीएड पर सोइ हुई कुछ सोच रही होती है जो राखी देवी के चेहरे पर उदासी छै हुई होती है

तभी आँचल रूम मैं दाखिल होती

आँचल जब रूम मैं आती है तो उसकी नज़र राखी देवी के ऊपर पड़ती है जो आँचल भी थोड़ी उदास हो जाती है मगर फिर आँचल कुछ सोच कर अपनी कपडे निकलने लगती है आवर सारा कपडा निकल कर सिर्फ ब्रा पेंटी मैं बीएड पर चली जाती है

आँचल बिना कोई आहात किये हुआ बीएड पर चली जाती है आवर राखी देवी के बगल मैं लेट जाती है मगर राखी देवी को कोई अहसास नहीं होती है

आँचल राखी देवी की बगल मैं लेट कर अपना एक हाथ राखी देवी की पेट पर रख देती है आवर पेट पर हाथ चलते हुआ आँचल अपनी हाथ निचे की तरफ ले जाने लगती है

sssssssssssssssssssssssssssssss

Aaaaaaaaaaaanchallllllllll

आँचल का हाथ जैसे hi राखी देवी की छूट के पास जाती है राखी देवी झट से आँचल की हाथ पकड़ने के लिए हाथ बढ़ा लेती है मगर तब तक देर हो चुकी होती है आवर आँचल की एक ऊँगली राखी देवी की छूट मैं जा चुकी होती है जो राखी देवी आँचल को पुकारते हुआ सिसक पड़ती है

hhhhhhhhhhh ssssssssss माआआ ह्ह्हह्ह्ह्ह आँचल मत कर ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह

राखी देवी आहे भरते हुआ आँचल को रोकने लगती है मगर आँचल राखी देवी की छूट मैं ऊँगली करती hi रहती है

आआआआआ ह्ह्हह्ह्ह्ह दीदी आप की छूट कितनी गर्म है फिर भी आप मन कर रही है..... आँचल राखी देवी की छूट मैं ऊँगली करती हुई बोलती है

आँचल मत कर मेरा आज मन नहीं है sssssssssssssss hhhhhhhhhhhhh

राखी देवी बोल रही होती है के आँचल दो ऊँगली राखी देवी की छूट मैं दाल देती है जिससे राखी देवी अपनी गांड उठाते हुआ सिसक पड़ती है

दीदी लगता है आप को मज़ा आ रहा है देखिये ये आप की जोबन भी बता रही है

Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

ाआआंचलललललललल

आँचल बोलती हुई राखी देवी की निपल मसल देती है जो राखी देवी एक बार फिर से सिसक पड़ती है

राखी देवी इस बार इतनी जोश मैं सिसकती है के वह बिलकुल चित लेट जाती है आवर राखी देवी के ऊपर hi आँचल गिर पड़ती है

अब ाएसि हालत हो चुकी होती है की राखी देवी के ऊपर आँचल गिरी हुई होती है जिससे राखी देवी आवर आँचल की चुकी एक दूसरी की चुकी से सटी हुई होती है मगर राखी देवी की शैशे तेज़ी से चल रही होती है

राखी देवी के ऊपर गिरने के बाद भी आँचल राखी देवी की गर्दन कल चूमने लगती है जो राखी देवी आँचल को दोनों हांथों से पकड़ लेती है

राखी देवी आवर आँचल एक दूसरे की आँखों मैं देखने लगती है

आँचल राखी देवी की आँखों मैं अब माधोसी सी साफ देख रही होती है जिसे देख कर आँचल मुस्कुराने लगती है

आआआआन्चल प्लीज गेट बंद करदे..... राखी देवी गर्म शैशे छोड़ती हुई बोलती है
 
थैंक्स बीआरओ

बीआरओ अर्जुन अपनी मंज माँ से इतना प्यार करता है के सायद वह देख भी ले तो वह आँचल से गुस्सा न हो क्यू के आँचल ने अर्जुन को इतना प्यार hi दिया है

आवर बीआरओ आँचल ाएसि औरत है जो अपनी दर्द का घूंट पीकर अर्जुन आवर गीता अंजलि मैं ख़ुशी धुंध चुकी है वर्ण आँचल अपनी ज़िंदगी मैं कुछ भी कर सकती थी
 
ूपडते ...... 56

आँचल बीएड से उतर कर गेट बंद कर देती है

आँचल गेट बंद करने के बाद फिर से बीएड पर आ जाती है तो देखती है राखी देवी बस उसे hi देख रही है आवर राखी देवी की आँखों मैं एक नासा से दिख रही होती है

राखी देवी की दोनों होंठ भी एक दूसरे से अलग होकर खुली हुई होती है आवर राखी देवी की शैशे तेज़ी से चल रही होती है

आँचल एक मुस्कान के साथ अपनी एक हाथ राखी देवी की चिकनी पेट पर रख देती है जिससे राखी देवी सिसकते हुआ अपनी मुंह घुमा लेती है ओर बीएड की चादर दोनों हाथ से पकड़ लेती है

आँचल उस हाँथ को कुछ देर तक राखी देवी की पेट पर घूमती hi रहती है जिससे राखी देवी की जिस्म मैं गुदगुदी सी होती रहती है आवर राखी देवी सिसकती hi रहती है आवर आँचल मन hi मन मुस्कुरा रही होती है

आँचल फिर वह हाँथ को धीरे धीरे फिर से निचे लेकर जाने लगाती है आँचल का हाँथ जैसे जैसे निचे जाता है राखी देवी की शैशे आवर तेज़ होने लगती है आवर राखी देवी अपनी कमर हिलने लगती है जैसे राखी देवी पहले hi जान चुकी है आँचल क्या करने वाली है जो राखी देवी अपनी बड़ी गांड उठा कर इधर उधर करने लगती है ताकि आँचल वह न करे जो वह करने वाली है

मगर आँचल समझ जाती है जिससे आँचल बिना कुछ आवर सोचे झट से उठ कर राखी देवी की पेअर पर बैठ जाती है ताकि राखी देवी आवर इधर उधर न कर

आँचल के ऊपर बैठते hi राखी देवी अपनी सर उठा कर आँचल को देखने लगती है

राखी देवी की आँखों मैं एक माधोसी सी छै हुई होती है जैसे राखी देवी भी अब वही चाहती है जो आँचल करना चाहती है

आँचल राखी देवी की आँखों मैं देखती हुई अपनी एक हाथ ऊपर ले जाकर राखी देवी की होंठ पर रख देती है जिससे राखी देवी एक बार फिर से सिसक पड़ती है आवर अपनी आँखें बंद कर लेती है मगर फिर जल्द hi राखी देवी अपनी दोनों आँखें खोल कर आँचल की आँखों मैं देखने लगती है

आँचल अपनी एक ऊँगली को राखी देवी की होंठों पर रख देती है आवर उस को राखी देवी की होंठ पर फेरने लगती है जो राखी देवी बस पयासी नज़र से आँचल को देखती रहती है

आँचल फिर वह हाथ को गले से निचे की तरफ लेकर जाने लगती है आवर राखी देवी को देखती हुई चुकी के पास अपनी हाथ रोक देती है

आँचल राखी देवी को देखती हुई राखी देवी की चुकी पे अपनी हाथ फेरने लगती है आवर फिर बलाउज की नोक मैं निकली हुई राखी देवी की निप्पल को पकड़ लेती है आवर दो ऊँगली से मसल देती है

Sssssssssssssssss आआआआहहहहहहह

आँचल राखी देवी की निप्पल को इस तरह मसल देती है की राखी देवी सिसकते हुआ अपनी सर उठा लेती है आवर आँचल की बाँहों मैं चली जाती है

राखी देवी
कुछ देर तक आँचल की बाँहों मैं सिसकती रह जाती है आवर आँचल राखी देवी की पीठ पर एक हाथ से फेरती रहती है

आँचल राखी देवी की पीठ पर हाथ फेरती हुई अपनी मुंह राखी देवी की गर्दन पर रख देती है आवर जीभ से राखी देवी की गले को चाटने लगती है जिससे राखी देवी hhhhhhhhhhh भर्ती हुई आँचल को पकड़ लेती है मगर इस बार सिर्फ राखी देवी नहीं आँचल भी सिसक पड़ती है

क्यू के इस बार सिसकते हुआ राखी देवी आँचल की कमर दोनों हाथ से पकड़ लेती है आवर सिसकते हुआ राखी देवी उठती है जो राखी देवी का मुंह आँचल के गर्दन पर चली जाती है जो आँचल भी सिसक पड़ती है


अब हालत ये होती है की दोनों औरत का जिस्म एक दूसरे की जिस्म से सटी हुई होती है आवर दोनों एक दूसरे से लिपटी हुई होती है आवर दोनों के मुंह से गर्म गर्म सहने निकल रही होती है

राखी देवी आवर आँचल दोनों का जिस्म आग की तरह जल रही होती है आवर दोनों hi अब जल्दी से इस जिस्म की गर्मी से निकलने के लिए तड़प रही होती है

दोनों का हाथ एक दूसरे की पीठ पर चल रही होती है जैसे दोनों एक दूसरे की हालत समझ रही है

दीदी आवर बर्दास्त नहीं हो रही है
न ...... आँचल राखी देवी से अलग होते हुआ बोलती है

वही राखी देवी बिना कुछ बोले आँचल को देखती हुई बीएड पर लेट जाती है आवर अपनी पेअर फैला लेती है

आँचल भी राखी देवी को देख कर समझ जाती है जो आँचल फिर से राखी देवी के करीब चली जाती है आवर राखी देवी की आँखों मैं देखती हुई राखी देवी के कपडे निकलने लगती है

आँचल जैसे जैसे राखी देवी के कपडे निकलती है आँचल की खुद की हालत ख़राब होती जाती है


ही
माँ कास दीदी की तरह मेरी भी जिस्म होती

दीदी 3 बच्चे जनम देने के बाद भी इनका जिस्म कितनी सख्त आवर मोलायम है

Hhhhhhhhhhhhh

आँचल राखी देवी की जिस्म को छूती हुई ाठी भर्ती हुई मन मैं सोचती है


आँचल राखी देवी की सरे कपडे निकल चुकी होती है आवर अब उस रूम के बीएड पर दो आधी उम्र की औरत बीएड पर नंगी होती है आवर दोनों की गर्म गर्म शैशे निकल रही होती है

राखी देवी आँचल को देख कर अपनी नज़र दूसरी तरफ कर लेती है

आएसा लग रहा होता है जैसे आज राखी देवी का दिल कही आवर खोया हुआ है मगर राखी देवी की जिस्म आग की तरह जल रही होती है मगर फिर भी आज राखी देवी आँचल की साथ नहीं दे रही होती है आवर ये बात आँचल बड़ा अजीब लगता है क्यू के राखी देवी कितनी भी दुखी क्यू न रहती है मगर दोनों जब साथ मैं नंगी होती है तो दोनों खूब मस्ती करती थी मगर आज राखी देवी कुछ नहीं कर रही होती है मगर आँचल को ये तो पता चल गया होता है राखी देवी की जिस्म मैं आग लगी हुई है

आँचल राखी देवी की आँखों मैं देखती हुई राखी देवी की पेट पर मुंह रख देती है आवर राखी देवी की नाभि मैं जीभ दाल देती है जो राखी देवी सिसकती हुई तड़प जाती है आवर आँचल के सर पर एक हाथ रख देती है मगर आँचल रूकती नहीं है आवर नाभि को चूमती हुई निचे की तरफ आने लगती है

Ssssssssssssssssssssssssssssss

आँचल जैसे hi राखी देवी की छूट के पास आती है राखी देवी अपनी गांड उठा देती है जिससे राखी देवी की छूट आँचल के मुंह मैं चली जाती है आँचल भी राखी देवी की कमर पकड़ कर राखी देवी की छूट को चाटने लगती है राखी देवी ज़ोर ज़ोर से सिसकने लगती है

राखी देवी अब इतनी गर्म आवर बेचैन हो जाती है की राखी देवी अब अपनी गांड उठा उठा कर छूट को आँचल की मुंह मैं दबा रही होती है

वही आँचल भी राखी देवी की छूट को बड़े hi प्यार से चाट रही होती है


राखी देवी की छूट छत्ते हुआ आँचल एक हाथ से राखी देवी की चुकी पकड़ लेती है आवर प्यार से सहलाते हुआ निप्पल को मसल देती है

Hhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa hhhhhhhhhhhhhhh

आँचल के निप्पल मसलने से राखी देवी की जिस्म मैं एक मीठा सा दर्द होती है जिससे राखी देवी की ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह निकल जाती है आवर राखी देवी सिसकने लगती है

आँचल राखी देवी की छूट को अपनी होंठों से पकड़ कर खिंच देती है

आँचल राखी देवी की छूट के साथ खेल रही होती है जिससे राखी देवी बस आहे भर रही होती है


sssssssssss hhhhhhhhhhhhhh ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह

आँचल आवर नहीं सह सकती मैं इस छूट की आग भगवान् के लिए मेरी आग निकल दो

राखी देवी जिस्म की आग मैं जलती हुई बोलती है

राखी देवी की बेचैनी देख कर आँचल मुस्कुरा पड़ती है आवर एक ऊँगली राखी देवी की छूट मैं दाल देती है

आँचल राखी देवी की छूट मैं उस ऊँगली को ज़ोर ज़ोर से अंदर बहार करने लगती है जो राखी देवी की हालत ख़राब होने लगती है

राखी देवी की जिस्म थोड़ी hi देर मैं अकड़ने लगती है आवर राखी देवी अपनी गांड उठा उठा कर आँचल की ऊँगली को छूट मैं लेने लगती है

राखी देवी की गर्म गर्म निकल रही आहे उस रूम मैं गूंज रही होती है

राखी देवी की मदहोश आहे सुन कर आँचल भी मदहोश होने लगती है आवर राखी देवी की छूट मैं ऊँगली करती हुई अपनी एक हाथ खुद की छूट मैं दाल कर ऊँगली करने लगती है जो उस रूम मैं नन्द भाभी की मदहोश भरी आहे गूंजने लगती है

दोनों जिस्म की गर्मी मैं ये भी भूल जाती है की ये उनका घर है आवर इस घर मैं इनके अपने बच्चे भी है


आँचल राखी देवी की मदहोश भरी आहे सुन कर इतनी बेचैन हो जाती है की आँचल राखी देवी की छूट मैं बड़े hi ज़ोर ज़ोर से दो ऊँगली छूट मैं अंदर बहार करने लगती है जो राखी देवी आँचल की दो ऊँगली के धक्के जयादा देर तक सह नहीं पति है आवर चैन की Aaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh भरी हुई बीएड पर हाफने लगती है

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रात 11:पं

शोभा आवर बता अकेले खूब मस्ती करती थी न वह ....... आस्था की माँ राधा मुस्कुराती हुई कहती है

राधा की बात सुन कर शोभा थोड़ी शर्मा जाती है आवर राधा के बाँहों मैं मुंह छिपा लेती है जो अभी दोनों एक रूम मैं साथ सोइ हुई होती है

शोभा तू अभी तक नहीं बदली मैं तुझे कितनी बार बोल चुकी हुईं मैं तेरी बड़ी जेठानी नहीं बड़ी बहन हुईं

लेकिन तू मुझे बड़ी बहन मानती hi नहीं है

मेरी नसीब hi ख़राब है जो भगवन ने मुझे एक छोटी बहन नहीं दिए

डीइइइइइइ

राधा थोड़ी मायूसी से कहती है तभी शोभा बोल पड़ती है

दीदी आप क्या बोल रही है आप को कभी आएसा लगा है जो मैंने आप की बात न मान कर कुछ अलग किया है

अगर मैं आप को जेठानी मानती तो आप की हर बात नहीं मानती मगर मैंने हर बार आप की बात मणि है क्यू

क्यू की मैं भी आप को बड़ी बहन मानती हुईं

लेकिन दीदी आप से ये बाते करने मैं मुझे शर्म आती है

क्यू की डीई मेरी कोई बड़ी बहन नहीं थी तो मैंने कभी आएसी बात नहीं की तो आप से कैसे कर सकती हुईं ..... शोभा शर्माती हुई कहती है

शोभा की बात सुन कर राधा मुस्कुरा पड़ती है आवर शोभा की माथा चुम लेती है जो शोभा भी राधा से लिपर्ट जाती है


वही दूसरे रूम मैं आस्था पूजा पूनम आवर पूनम की माँ एक बीएड पर होती है आवर पूनम की माँ काजल की सर का मालिश कर रही होती है

ममी आप पहले से कभी बदल गयी इसका क्या राज है ...... पूजा मन मैं मुस्कुराती हुई बोलती है

पूजा की बात सुन कर पूनम की माँ थोड़ी हैरान हो जाती है आवर थोड़ी सोच मैं पद जाती है काजल क्या बोल रही है मैं कैसे बदल गयी

वही आस्था आवर पूनम भी पूजा को अजीब नज़र से देखने लगती है तभी पूजा मुस्कुराती हुई आस्था को कुछ इशारा करती है जिससे आस्था तो पहले झूठा गुस्से वाला सकल बनती है फिर मुस्कुरा पड़ती है

पूजा बेटी कैसी बाते कर रही है भला मैं कैसे बदल गयी तुझे आएसा क्यू नाला मुझे नहीं पता मगर मैंने हमेशा तुम तीनो को एक जैसा प्यार किया है .... पूनम की माँ थोड़ी दुखी होकर बोलती है

ममी मैंने कब कहा आप मुझे या छोटी या फिर आस्था दी को अलग अलग प्यार की है मैं तो कुछ आवर बात कर रही थी जो मुझे अभी कब से अहसास हो रही है ..... पूजा आस्था को देखती हुई फिर से इशारा करती है आवर मुस्कुरा पड़ती है

पूजा बेटी क्या मैं जयादा ज़ोर ज़ोर से तेरी सर दबा रही हुईं सॉरी सॉरी मुझे लगा तुझे अच्छा लग रही है इस लिए ज़ोर से दबा रही थी .... पूनम की पूजा का सर धीरे से दबती हुई बोलती है

पूनम की माँ की बात सुन कर पूजा आवर आस्था एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा पड़ती है

माँ दोनों डीई आप की तंग खिंच रही है पूजा दी कुछ आवर hi बात बोल रही है

पूनम थोड़ी नाराज़ होती हुई बोलती है जो आस्था आवर पूजा की इशारा समझ कर मुस्कुराती हुई देख चुकी होती है

पूनम की बात सुन कर आस्था आवर पूजा ज़ोर ज़ोर से हसने लगती है जो पूनम की माँ हैरानी से पूनम को देखने लगती है जो मुंह बना कर अपनी माँ को देख रही होती है

बेटी मैं समझी नहीं .... पूनम की माँ पूनम से बोलती है

मुझे नहीं सोना आप दोनों के साथ मैं जा रही हुईं आवर दी दोनों बुआ का भी इतने hi बड़े बड़े है समझी ...... पूनम रूम से जाती हुईं बोलती है

बेबी बेबी बेबी सुन पूनम को जाते हुआ देख कर आस्था बेबी बेबी पुकारती है मगर पूनम रूम से निकल जाती है

वही पूनम की बात सुन कर पूनम की माँ समझ जाती है आवर पूजा की सर आगे की तरफ कर के अपनी साइन पर आँचल दाल देती है जो अभी उनकी आँचल निचे गिरी हुई होती है

बदमाश लड़की तुझे शर्म नहीं आती अपनी ममी के साथ ाएसि मस्ती करती हुई ..... पूनम की माँ पूजा को मरती हुई बोलती है जो पूजा बीएड पर आस्था के बगल मैं लेट कर दोनों एक साथ हसने लगती है


वही एक रूम एक मर्द आवर एक औरत अभी बिलकुल नंगे लेते हुआ होते है आवर उस औरत की छूट से पानी टपक रही होती है

भाभी हर वक़्त आप की छूट को छोड़ कर एहि मज़ा आता है ..... वह आदमी कहता है

मेरी भी छूट को आप का लैंड पसंद आ गया है देवर जी वर्ण मेरी पास तो लैंड की कमी नहीं है ..... वह औरत कहती है

भाभी आज मुझे आप की गांड मरने का मन कर रहा है दीजिये न जब से इसे नंगा देखा है लैंड बेचैन रहता है ..... वह आदमी कहता है

नहीं नहीं अभी नहीं देवर जी बाद मैं मार लेना

मुझे अभी बहुत काम है .... वह औरत झट से उठ कर कपडे पहनने लगती है आवर आधे कपडे hi पहन कर रूम से निकल जाती है


वही रूम से निकल कर पूनम एक रूम के गेट पर कड़ी होकर गेट पिट रही होती है

अरे गुड़िया सोइ नहीं ... गेट खोलते hi शोभा बोलती है

सोभा देख कौन है ..... गेट पीटने की आवाज़ सुन कर राधा कहती है तो सोभा उठ कर गेट खोलती है तो देखती है तो गेट पर पूनम मुंह बनाये हुआ कड़ी होती है तो सोभा प्यार से बोलती है मगर पूनम वह से सीधे राधा के पास चली जाती है जो सोभा को थोड़ी अजीब लगती है

बाआआ पूनम राधा को पुकारती हुई राधा से लिपर्ट जाती है

क्या हुआ मेरी गुड़िया को किसी ने कुछ कहा क्या ..... राधा पूनम को बाँहों मैं भर्ती हुई कहती है

बुआए मुझे दोनों दीदियों के साथ नहीं सोना है ..... पूनम मुंह बना कर बोलती है

क्यू कुछ कहा क्या उन्होंने बताओ मुझे मैं अभी उनकी खबर लेती हुईं ..... राधा बोलती है

बुआ वह दोनों दीदी मेरी माँ से मस्ती कर रही है

बुआ आप आवर छोटी बुआ का भी तो मेरी माँ से भी बड़े बड़े है क्या मैं आप दोनों से मस्ती की ....पूनम पूरी बात बता कर बोलती है जो राधा आवर सोभा एक दूसरे को देखती है मगर शोभा शर्मा कर सर नीचर कर लेती है मगर राधा मुस्कुरा पार्टी है

वह दोनों बड़ी सैतान हो गयी है मैं सुबह दोनों की खबर लेती हुईं चलो हम्हारे साथ hi सो जाओ ..... राधा अपनी हसी दबती हुई बोलती है

ठीक है .... पूनम बोलती है आवर सो जाती है

गुड़िया आज भी दूध नहीं पि न तूने

सोभा ज़रा देख बिन्दा चली गयी क्या मेरी भी दूध लेकर नहीं आई ...... राधा कहती है तो सोभा किचेन की तरफ चली हटी है

बिन्दा ये क्या हरकत है शर्म नहीं आती मेरी जगह कोई आवर आता तो क्या होता ..... शोभा जैसे hi किचेन मैं जाती है तो बोलती है

क्यू के किचेन मैं बिन्दा सिर्फ बलाउज पेटीकोट मैं होती है आवर साड़ी पहन रही होती है

सोभा की आवाज़ सुन कर बिन्दा घबरा जाती है आवर अपनी सर निचे कर लेती है

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आँचल क्या अर्जुन कभी भी मेरे बारे मैं तुझसे बात नहीं करता था .... राखी देवी रोनी सी आवाज़ मैं पूछती है

अभी राखी देवी की छूट की गर्मी तो निकल चुकी होती है मगर राखी देवी की दिल अभी भी बचें सी होती है आवर राखी देवी की आँखें भींगी हुई होती है

आँचल बता न चुप क्यू है बता न आँचल

आँचल को कुछ न बोलते सुन कर राखी देवी आँचल को पकड़ती हुई पूछती है

हे भगवान् अब मैं दीदी को क्या बताओ के अर्जुन दीदी का नाम भी सुन्ना पसंद नहीं करता था

भगवन जी बच्चों के लिए माँ का दिल इतना कमज़ोर क्यू बनाया है आप ने जो एक माँ अपने बच्चे के लिए इतनी तड़पती है

भगवन जी आएसा कुछ कीजिये के अर्जुन के दिल मैं भी दीदी के लिए इतना प्यार आ सके

मैं आवर नहीं देख सकती दीदी को इस तरह .... आँचल मन मैं सोचती है

दीदी मैं आवर नहीं देख सकती आप को इस तरह मैं सुबह hi अर्जुन को सब कुछ बता दूंगी .... आँचल बोल पड़ती है
 
अपडेट ....... 57

अगली सुबह


आँचल जब सो कर उठती है तो बीएड पर वह खुद को अकेली पति है तो वह उठ कर पहले बाथरूम मैं जाती है आवर फिर रूम से निकल जाती है

आँचल जब रूम से निकल रही होती है तो आँचल की नज़र थोड़ी दूर पर कड़ी राखी पर उस की नज़र जाती है जो राखी देवी अभी अर्जुन के रूम के गेट पर कड़ी होती है मगर अंदर नहीं जा रही होती है

आँचल राखी देवी को बस देख कर किचेन मैं चली जाती है

वही रूम के अंदर अभी सोया हुआ होता है आवर बीएड पर अर्जुन इधर से उधर हिल रहा होता है जैसे अर्जुन सपने मैं कुछ करने की कोशिश कर रहा होता है आवर तभी अर्जुन एक आअह्ह्ह्ह लेते हुआ उठ कर बीएड पर बैठ जाता है

अर्जुन उठ कर बीएड पे बैठ गया होता है मगर अर्जुन की शैशे ज़ोर ज़ोर से चल रही होती है आवर अर्जुन की आँखें भी लाल हो चुकी होती है अर्जुन अचानक अपना सर पकड़ लेता है

बस ये कैसा हिलवणा सपना था

आएसा सपना मैं कैसे देख सकता हुईं

भले hi मैं उनसे नाफ़ात करता हुईं

मगर वह मेरी मायआ ..... अर्जुन बीएड पर बैठ कर सोचने लगता है

तभी राखी देवी अर्जुन का गेट पीटने लगती है जो अभी अर्जुन के गेट पर hi कड़ी होकर अर्जुन की आह सुन चुकी होती है

गेट पीटने की आवाज़ सुन कर अर्जुन अपनी सोच से बहार आता है आवर अपने लोअर पहन कर अपनी आँखें मसलते हुआ गेट खोल देता है

अर्जुन बीटा क्या हुआ चीख क्यू रहा था ..... गेट खुलते hi राखी देवी अर्जुन को पकड़ कर पूछती है

वही अर्जुन गेट खोल कर गेट के पास hi आँखें मॉल रहा होता है जो उसकी माँ उसे पकड़ कर पूछ लेती है जो अर्जुन बस एक तक अपनी माँ को देखने लगता है

वही राखी देवी अर्जुन के सर पर हाथ फेरने लगती है आवर प्यार से अर्जुन को अपनी बाँहों मैं भरने लगती है तभी अर्जुन अपनी माँ से अलग हो जाता है जो राखी देवी अर्जुन को देखने लगती है

मुझे कुछ नहीं हुआ है आवर कुछ हुआ भी होता तो मैं आप को नहीं बताता

आवर अब इतना झूठा प्यार देखने की कोई ज़रूरत नहीं

आप प्लीज मेरे रूम से जाइये अभी

जब प्यार दिखन था उस वक़्त तो खुद रंगरेलिया मन रही थी मुझे रुला कर

ये बात अर्जुन थोड़ा गुस्से मैं बोलता है आवर घूम कर खड़ा हो जाता है

वही अर्जुन की बात सीधे राखी देवी की दिल पर लगती है जो राखी देवी रोटी हुई अपनी हाथ साइन पर रख कर आँखें बंद कर लेती है

राखी देवी फिर भी अर्जुन की तरफ बढ़ती है मगर अर्जुन दो कदम आवर आगे बढ़ जाता है जो राखी देवी सिसकती हुई रो कर रूम से निकल जाती है

अर्जुन वह जैसी भी है मगर तेरी माँ है आवर उनकी गलती इतनी भी नहीं है जितना तूने उनको रोला दिया है

आवर आज तो उनकी कोई भो गलती नहीं थी वह तो बस तुझसे पूछ रही थी तू बस बोल देता कुछ नहीं हुआ

इतना सब कुछ बोलने की क्या ज़रूरत थी

ये नफरत अब बंद कर अर्जुन

क्या तू नहीं छठा माँ तुझे गले लगाए

है अर्जुन तू माँ के बाँहों मैं जाना चाहता है

तू माँ के बाँहों मैं सोना चाहता है

अर्जुन एक बार माँ को मांफ कर के देख मुझे यकीन है

वह तुझे इतना प्यार देंगी की तू साडी नफरत भूल जायेगा

अर्जुन उस पर अभी भी खड़ा होता है आवर ये साडी बाते अर्जुन के दिमाग मैं चल रही होती है जो अर्जुन की आँखों से अपने आप आंसू निकल रही होती है

अर्जुन सोचते हुआ बीएड पर बैठ जाता है

अर्जुन की आँख से आंसू निकल रहे होते है अर्जुन फिर उठ कर बाथरूम मैं चला जाता है

वही राखी देवी अर्जुन के रूम से निकल कर अपने रूम मैं चली जाती है

राखी देवी को अर्जुन की बाते जयादा दुखी नहीं कर रही थी

राखी देवी की आंसू इस लिए निकल रही होती है की अर्जुन आज इतने दिन के बाद कैसे गुस्सा हो गया कुछ दिन से तो अच्छे से बात कर रहा था

मगर आज पहले जैसा hi नफरत से बात कर रहा था

आवर एहि बात राखी देवी को जयादा दुखी कर रही थी

राखी देवी अपनी रूम मैं जाकर बीएड पर गिर पड़ती है आवर पास के टेबल पर राखी हुई अपने पति की फोटो उठा लेती है आवर साइन से लगा लेती है

आप क्यू मुझे छोड़ कर चले गए मुझे आप की बहुत याद आ रही है

मैं आवर नहीं जीना चाहती हुईं मुझे भी आप के पास आना है

मैं आवर अर्जुन की नफरत नहीं सह सकती हुईं नहीं सह सकती हुईं .... राखी देवी अपने पति की फोटो को साइन से लगा कर रोटी हुई बोल रही होती है

वही राखी देवी रूम मैं आने के बाद अपनी रूम की गेट बंद करना भूल गयी होती है जो अभी राखी देवी की तड़पती हुई अपने पति से कहती हुई साडी बाते कोई सुन रही होती है जो उस सख्त की भी आँखों मैं आंसू आ जाती है वह सख्त भाग कर राखी देवी के पास आना चाहती है मगर नहीं आ पति है आवर रोटी हुई वह भी चली जाती है

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आदि के घर

आदि की माँ रजनी किचेन से निकल रही होती है तभी नौकरानी को आती हुई देख कर वही रुक जाती है आवर उस नौकरानी को आती हुई देख कर घूरने लगती है क्यू के वह नौकरानी अभी मन मैं hi मुआकुरा रही होती है जो उस नौकरानी के चेहरे पर भी दिख रही होती है

कविता ये कॉफ़ी ज़रा आदि को दे दे आवर इस तरह मुस्कुरा क्यू रही है .... आदि की माँ कॉफ़ी आगे करती हुई कहती है

दीदी बस आयी hi ....... दीजिये मैं कॉफ़ी छोटे मालिक को दे देती हुईं .... कविता मुस्कुराती हुई hi बोलती है जो आदि की माँ रजनी को बड़ी अजीब लगती है कविता की बाते मगर फिर भी कुछ नहीं बोलती है आवर फिर से किचेन मैं चली जाती है

वही कविता कॉफ़ी लेकर आदि के रूम मैं चली जाती है आवर गेट बंद कर देती है

छोटे मालिक कॉफ़ी .... कविता बोलती हुई कॉफ़ी आगे करती है आवर अपनी बलाउज की एक बटन खोल देती है आवर मन hi मन मैं मुस्कुराने लगती है

वही आदि अभी कुछ आवर hi काम मैं बिजी होता है मगर कविता की आवाज़ सुन कर हड़बड़ा जाता है आवर उठ कर बैठ जाता है आवर कविता की चुकी को देखते हुआ कॉफ़ी ले लेता है

क्या हुआ छोटे मालिक आप की गन चल नहीं रही है क्या ..... कविता हस्ती हुई बोलती है आवर आदि को देखने लगती है जाती है

वही कविता की बात सुन कर आदि गुस्से मैं कविता को घूरने लगता है

साली मेरी गन चल रही है की नहीं अभी पता चल जायेगा तुझे

बस तू अपनी ये साड़ी ऊपर उठा दे ...... आदि गुस्से मैं बोलता है

ओह हो ये बात है क्या

ठीक है छोटे मालिक .... आप के सामने मैं साड़ी भी उठा रही हुईं आवर अपनी सबसे कीमती चीज भी दिखा रही हुईं आप चाहे तो अपनी गन उस पर भी चला सकते है

मगर मेरी एक सरत है आप को पहले मेरे सपने अपनी घुस से गोली निकालनी पड़ेगी ..... कविता मुस्कुराती हुई बोलती है

कविता की बात सुन कर आदि के चेहरे से गुस्सा छू मंतर हो जाता है आवर आदि के चेहरे पर एक दर शर्म जैसा दिखने लगता है

आदि इधर उधर देखने लगता है

क्यू छोटे मालिक गन नहीं चल रही है क्या जब आप की गन चलने लगेगी तो बोल दीजियेगा

मैं आप के सामने अपने टंगे खोल दूंगी हहहाआआअह्ह्हआआआह्ह्ह्हआआह्ह्हआआअह्ह्हआआह्ह्हआआहाआआअह्ह्ह्हह ........ कविता हस्ती हुई बोलती है आवर रूम से निकल जाती है

कविता इतनी क्यू है रही है पागल हो गयी है क्या ..... कविता हसी हुई जैसे hi किचेन मैं जाती है आदि की माँ रजनी तेज़्ज़ आवाज़ मैं बोल पड़ती है

आदि की माँ रजनी की तेज़्ज़ आवाज़ सुन कर कविता एकदम चुप हो जाती है आवर एक नज़र आदि की माँ रजनी की तरफ देखती है जो रजनी लाल लाल आँखों से कविता को घर रही होती है जो कविता अपनी सर निचे कर लेती है

कही मालकिन ने मेरी बात सुन तो नहीं ली ..... कविता मन मैं सोचती है

वही आदि की माँ कविता को गुस्से से घूरती हुई किचेन से निकल जाती है

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शाम के 6:पं

गीता अपनी रूम मैं होती है आवर बार बार गेट की तरफ देख रही होती है आवर मन hi मन मुस्कुरा रही होती है तभी गीता की रूम मैं अर्जुन आ जाता है

गीता diiiiiiiiiiiiiii

आआह्ह्ह्ह Maaaaaaaaaa अअअअअअअ

अर्जुन जैसे hi रूम मैं आता है गीता अर्जुन को देख चीख पड़ती है जो अर्जुन गीता को पुकारता हुआ गीता के पास आ जाता है

दीदी जयादा दर्द हो रहा है

ohhhhhhhhhh दीदी मैं अभी दवा लेकर आता हुईं ..... अर्जुन गेट की तरफ जाता हुआ बोलता है

क्यू के अर्जुन जैसे hi गीता के माथा को छूटा है अर्जुन को गीता का माथा बहहत गर्म लगता है जो अर्जुन घबरा जाता है

बाबू पहले बहार से गेट बंद कर के आ ...... गीता थोड़ी मुंह बना कर कहती है जैसे गीता को बहुत दर्द हो रहा है

दीदी मैं दवा लेकर आता हुईं न .... अर्जुन फिर से कहता है

नहीं बाबू प्लीज बहार का गेट बंद कर न बिना दवा के भी मेरी दर्द ख़तम हो जाएगी जल्दी कर वर्ण ममी माँ आवर गुड़िया घर आ जाएँगी ..... गीता फिर से मुंह बना कर कहती है

अर्जुन भी अपनी गीता दीदी की बात मन कर बहार का गेट बंद करने चला जाता है

अर्जुन का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा होता है आवर अर्जुन थोड़ा डरा हुआ भी होता है गीता का गर्म जिस्म को छू कर

अर्जुन का सर सुबह से घूम रहा होता है इस लिए अर्जुन नाश्ता कर के hi घर से निकल गया होता है मगर कुछ देर पहले hi गीता ने अर्जुन को अपनी बीमारी का बता कर घर जल्दी से आने को बोली होती है जो अर्जुन बाइक तेज़ी से चलते हुआ घर आ गया होता है

अर्जुन जल्दी से गेट बंद कर के गीता के रूम मैं आ जाता है आवर गीता के पास hi बैठ जाता है

दीदी आप का जिस्म बहुत जल रही है मैं ाभज दवा लेकर आता हुईं .... अर्जुन कहता है

बाबू मेरी जिस्म की गर्मी दवा नहीं तू मिटा सकता है

बाबू मेरी आंग आंग जल रही है प्लीज मुझे जल्दी से इस दर्द से आजाद कर दे दाल दे इसमें अपना वह ........ गीता बोल कर अपनी जिस्म के ऊपर से चादर हटा देती है जो अर्जुन अपनी आँखे बंद करते हुआ चीख परता है

didiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

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अपडेट .... 58

अर्जुन अपनी गीता दीदी की हालत देख कर पहले hi बहुत दर गया होता है जो गेट बंद करने के बाद वह गीता के पास hi बैठ गया होता है आवर गीता की माथे को छू रहा होता है तभी गीता अर्जुन से बोलती हुई अपनी जिस्म से चादर हटा देती है जो गीता चादर के अंदर बिलकुल नंगी होती है

अर्जुन तो गीता की फूल hi खिली हुई बदन बस एक नज़र देख कर वह अपनी आँखे बंद कर लेरा है मगर अर्जुन के बंद आँखों मैं भी गीता की उठी हुई चुकी दिख रही होती है

बाबू क्या हुआ मेरी जिस्म अच्छी नहीं है क्या जो तुम आँखें बंद कर रहा है

देख कितनी जल रही है मेरी ये जिस्म

बाबू तेरी दीदी जिस्म की आग मैं जल रही है इस आग को तुहि बुझा सकता है ...... देख न बाबू

गीता बोलती हुई अपने दोनों हाथ से अर्जुन का हाथ चेहरे से अलग कर देती है मगर अर्जुन आँखे नहीं खोलता है आवर सर को दूसरी तरफ कर देता है

दीदी ये गलत है हम दोनों भाई बहन है आप आएसा क्यू कर रही है आप शादी कर लीजिये न .... अर्जुन दूसरे तरफ मुंह घुमाये बोलता है

बाबू मैं भी तो एहि चाहती हुईं तू करले न मुझसे शादी बना ले मुझे अपनी बीवी फिर हम दोनों खूब मस्ती करेंगे

ssssssssssssssss स्स्स्सस्स्स्स

गीता अर्जुन से कहती है आवर अर्जुन का एक हाथ अपनी चुकी के ऊपर रख कर खुद सिसक पड़ती है

वही अर्जुन तो गीता दीदी की बात सुन कर हैरान परेशान हो जाता है

अर्जुन झट से खड़ा हो जाता है आवर पलट कर गीता की आंखों मैं देखने लगता है जो गीता मुस्कुरा कर अर्जुन को देख रही होती है वही अर्जुन के आँखों मैं एक गुस्सा साफ नज़र आ रहा होता है

अर्जुन जिस वजह से अपने परिवार से इतने दिन दूर रहा होता है आवर आज तक अपनी माँ से नफरत करते हुआ आया होता है

आज उसकी दीदी उससे भी बड़ी बात बोल चुकी होती है जो अर्जुन गुस्से से लाल हो चूका होता है मगर वह अपनी गीता दीदी को बस गुस्से से घर रहा होता है

मगर गीता की जिस्म पर नज़र जाते hi अर्जुन का लैंड पेंट मैं वह अपना सर उठाने लगता है जो अर्जुन कभी गीता की आँखों मैं तो कभी गीता की जिस्म को देख रहा होता है जो अर्जुन के आँखों मैं गुस्से की जगह अब शर्म hi होने लगती है

आखिर था तो अर्जुन एक लड़का hi आवर जब एक जवान लड़की किसी लड़के के सामने बिलकुल नागि बीएड पर लेती हो तो लड़का चाहे भाई hi क्यू न हो उसके जिस्म मैं कुछ कुछ तो होगा hi आवर गीता की जिस्म तो बाकि लड़कियों से अलग थी जो अर्जुन की नज़र जब जब पद रही होती है उसका लैंड सर उठा रहा होता है

दीदी अप्प पागल हो गयी है क्या .. ये क्या बोल रही है

आप को ज़रा भी ख्याल नहीं जब हम्हारी शादी की बात .... अर्जुन कभी गीता की आँखों मैं तो कभी अपनी गीता दीदी की जिस्म को घूरते हुआ आधी बात बोल कर hi रुक जाता है

बाबू मुझे किसी का परवाह नहीं है बस तू मुझे अपनले मैं तेरे बिना नहीं जिह सकती हुईं मुझे हर वक़्त सिर्फ तू hi दीखता है मुझे नहीं पता ये कब आवर कैसे हुआ मगर तुहि मेरे दिल मैं बस चूका है मुझे बस तेरा hi प्यार चाहिए

बाबू मैं जानती हुईं तू भी मुझे बहुत प्यार करता है

उउउउम्मम्म

गीता अर्जुन से बाटे करती हुई नंगी hi बीएड से उठ जाती है आवर अर्जुन को पीछे से पकड़ कर अर्जुन के गले को चूमने लगती है आवर अपनी एक हाथ अर्जुन पेट पर चलने लगती है

गीता दीदी के अचानक करीब आने से अर्जुन थोड़ा घबरा कर आगे जाने को होता है मगर उसकी गीता दीदी अपने दोनों हांथों से पकड़ कर बाँहों मैं ले लेती है जिससे अर्जुन के जिस्म मैं पहले से हो रही गर्मी एक वक़्त के लिए आवर बढ़ जाती है आवर अर्जुन घूम कर गीता से लिपर्ट जाता है आवर अर्जुन खुद hi अपनी गीता दीदी का गाला चूमने लगता है

अर्जुन के अचानक चूमने से गीता सिहर सी जाती है आवर अपनी चुकी को उठा कर अर्जुन के साइन मैं आवर दबा देती है आवर अर्जुन का सर पकड़ कर किश करने लगती है

गीता दीदी के किश कार्नर पर अर्जुन भी झट से अपनी गीता दीदी का सर पकड़ लेता है आवर अर्जुन भी अपनी गीता दीदी की होंठ चूमने लगता है

अर्जुन के किश मैं साथ देने पर गीता के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है आवर गीता किश करती हुई अर्जुन का एक हाथ पकड़ कर अपनी कमर पर रख देती है आवर अपनी जिस्म को अर्जुन के जिस्म मैं आवर दबा देती है जिससे गीता को अर्जुन का लैंड अपनी छूट के ऊपर महसूस होने लगती है

अपनी गीता दीदी की जिस्म की गर्मी से अर्जुन खुद को आवर नहीं रोक पता है आवर अर्जुन गीता को लेकर बीएड पर गिर जाता है मगर दोनों एक दूसरे को किश करना बंद नहीं करते है

दोनों भाई बहन 5 मिनट तक किश करते hi रहते है जब दोनों की शैशे तेज़्ज़ चलने लगती है तब अर्जुन hi अपनी दीदी से अलग होकर बीएड पर गिर जाता है आवर ज़ोर ज़ोर से शैशे लेने लगता है

वही गीता की भी बहुत बुरी हालत होती है गीता की आँखों मैं एक दो बून्द आंसू भी आ गए होते है मगर गीता के चेहरे पर एक ख़ुशी सी होती है जैसे गीता को एक बहुत बड़ी ख़ुशी मिल गयी हो

sssssssssssssssssssss आआह्ह्हह्ह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

गीता शैशे ले रही होती है तभी अर्जुन उठ कर गीता के पेट को चूमने लगता है जिससे गीता अपनी गांड उठा कर सिसकियाँ लेने लगती है आवर अर्जुन का सर पकड़ कर अपनी पेट मैं आवर दबाने लगती है

अर्जुन गिरता की पेट को चूमते चाटते हुआ निचे की तरह बढ़ने लगता है जिससे गीता रह रह कर थोड़ी कैंप सी जा रही होती है आवर सिसकियाँ भी ले रही होती है

अर्जुन गीता की छूट के पास आकर रुक जाता है आवर अपनी गीता दीदी की छूट को देख कर अपनी गीता दीदी को एक नज़र देखता है जो गीता थोड़ी शर्म वाली मुस्कान के साथ अर्जुन को देख रही होती है


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अर्जुन अपनी गीता दीदी की आँखों मैं देख कर अपनी नज़र निचे कर लेता है जो अर्जुन की नज़र फिर से उसकी गीता दीदी की छूट पर चली जाती जाती

गीता की छूट बिलकुल चिकनी होती है आवर गीता की मैं थोड़ी मांस निकली हुई होती है जिसे देख कर अर्जुन का मन उस चम् को चुने का मन करने लगता है आवर अर्जुन जयादा देर खुद को रोक भी नहीं पता है आवर झट से अपना एक हाथ गीता की छूट पर रख कर उस चम् को ऊँगली से फ़ैलाने लगता है

वही अर्जुन के उस तरह करने से गीता मचल सी जाती है आवर अपनी जिस्म को मड़ोड़ती हुई दोनों पेअर आवर फैला कर छूट को उठा देती है


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गीता अपनी जिस्म को मदद कर अपनी दोनों पेअर एक दूसरे से सत्ता देती है जिससे गीता की छूट की निकली हुई चम् थोड़ी फ़ैल जाती है है आवर गीता की छूट की गुलाबी छेद भी दिखने लगती है

अपनी दीदी की खूबसूरत छूट को देख काट अर्जुन की आँखों मैं एक मदहोशी सी आ जाती है आवर अर्जुन का लैंड पेंट के अंदर hi फनफनाने लगता है जो अर्जुन का हाथ खुद hi अपने लैंड के ऊपर चला जाता है आवर अर्जुन अपनी गीता दीदी की छूट को बड़ी hi धयान से देखने लगता है

अर्जुन देख कितनी प्यारी छूट है तेरी दीदी की इतनी अच्छी छूट को तू देखना नहीं चाहता था

अर्जुन जयादा मत सोच चुम ले अपनी दीदी छूट को पि जा अपनी दीदी की छूट का सारा पानी बनाले अपनी दीदी को अपनी बीवी

तेरी दीदी खुद hi तुझे अपना पति बनाना चाहती है

तेरी दीदी एहि चाहती है की उनकी कुंवारी छूट मैं तेरा hi लैंड जाए दाल दे अर्जुन अपनी दीदी की मखमली कुंवारी मैं अपना लैंड

दाल दे अर्जुन दाल दे आवर मत सोच

अर्जुन अपनी गीता दीदी की छूट को देख रहा होता है आवर अर्जुन दिमाग मैं ये सभी बाते चल रही होती है

अर्जुन गीता की छूट को देखते हुआ अचानक hi अपना सर झुका कर अपनी गीता दीदी की चुम मैं मुंह दाल देता है

Ssssssssssssssss

Aaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh बाआआआबूउउउउ hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

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आदि के घर

Sssssssssss आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह आअह्हह्ह्ह्ह ssssssssssssss Aaahhhhhhhhhh आवर काट ज़ोर Hhhhhhhhhh यस यस Aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhh

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahh

एक तेज़ आवाज़ होकर फिर बंद हो जाती है आवर फिर रूम मैं सन्ति सी छः जाती है

मालकिन मुझे मांफ करना मगर मालकिन आप तो बहुत प्यासी है कब से इस छूट मैं लैंड नहीं लिया है .... कविता एक कामिनी मुस्कान के साथ बोलती है


जो अभी आदि की माँ रजनी के बैडरूम मैं दोनों नंगी होती है आवर आदि की माँ रजनी की छूट से बहुत सारा पानी बाह रही होती है

कविता कुटिया मन तो कर रहा है तुझे अभी जान से मार दू चली जा मेरे घर से ...... रजनी गुस्से मैं कहती है

वही कविता रजनी को देख कर खुद hi मुस्कुरा रही होती है

मालकिन मुझे पता है आप को मुझपे गुस्सा आ रहा है मगर मालकिन मुझे ये भी पता है आप आज अंदर से बहुत खुश है आवर ये आप की आँखें बता रही है

आप एहि चाहती है तो मैं चली जाती हुईं

मालकिन मैंने भले hi आप के साथ थोड़ी ज़बरदस्ती की थी मगर बाद मैं आप भी साथ दे रही थी

इसका मतलब आप भी अपनी जिस्म की गर्मी मैं जल रही थी मगर मैंने आप की उस गर्मी को कुछ वक़्त के लिए संत कर दिया है

मगर मालकिन आज जो हुआ इसका असर अब हर दिन दिखेगा आप इस छूट की आग को अब बर्दाश्त नहीं कर सकती है अब आप को एक साथी की ज़रूरत पड़ेगी hi जो मैं पूरी कर सकती हुईं

मगर आप तो मुझे भगा रही है

ठीक है मालकिन आज गयी तो फिर नहीं आने वाली मैं .... कविता बीएड से उतर कर अपने कपडे पहनने लगती है

वही कविता की बात सुन कर आदि की माँ रजनी की आँखें भर आती है

कविता सॉरी सॉरी

कविता मत जा तू प्लीज मत जा

कविता जो कुछ भी तुमने कही वह बिलकुल सच है

कविता तेरी बहुत सुक्रिया आज कई साल के बाद मैं अपनी जिस्म मैं बहुत अच्छा महसूस कर रही हुईं ....... प्लीज मत जा

आदि की माँ रजनी कविता की साड़ी पकड़ कर मायूसी से बोलती है

ठीक है मालकिन नहीं जाती तो क्या फिर से आप की इस छूट रानी की गर्मी निकल दूँ sssssssssssssssssssssssssssss

कविता मुस्कुराती हुई बोलती ोा आवर आदि की माँ रजनी की छूट पर अपनी एक हाथ रख देती है

छूट पर हाथ रखने से आदि की माँ सिसकती हुई शर्मा कर कविता को देखने लगती है जो कविता आवर भी मुस्कुरा पड़ती है

Ssssssssssss आह्ह्हह्ह्ह्ह अभी नहीं मैं बहुत थक गयी हुई Aaahhhhhhhhhhhh प्लीज मत करो hhhhhhhhhhhhhhh

आदि की माँ तड़पती हुई बोलती है जो कविता भी आदि की माँ के बगल मैं लेट जाती है

तुम सुबह इतनी है क्यू रही थी आवर आदि के साथ किसी गन के बारे मैं बात कर रही थी क्या मेरा बीटा कोई मुसीबत मैं है प्लीज मुझे बता दो

मालकिन वह कोई मुसीबत मैं नहीं है मैं तो बस आदि जी से मज़ाक कर रही थी आवर मैं असली गन की बात नहीं कर रही थी

मैं तो आदि की लैंड की बात कर रही थी

सच मैं आप ने तो कुछ आवर hi समझ लिया था जो मैं दर गयी थी मुझे लगा आप आदि की हालत का ज़िम्मेदार मुझे न बना दे ..... कविता कहती है आवर आदि की माँ की चुकी पर हाथ फेरने लगती है

भडवे कुत्ते सेल हरामी वह दिन दूर नहीं जब तेरे hi सामने तेरी ये सटी सावित्री माँ दूसरे मर्द से अपनी छूट छोड़वाएगी तब मैं देखूंगी तू क्या करता है ..... कविता एक कामिनी मुस्कान के साथ मन मैं सोचती है

बात ाएसि थी के सुबह जब आदि की माँ कविता को कॉफ़ी लेकर जाने को बोली थी तभी आदि की माँ कविता के पीछे आदि के रूम के पास आ गयी होती है आवर रूम के बहार से hi आदि आवर कविता की बात सुन चुकी होती है

आदि की माँ कविता आवर आदि की बात सुन तो चुकी होती है मगर आदि की माँ को कोई भी बात समझ नहीं आई होती है मगर कविता की हस्ती हुई आवाज़ सुन कर आदि की माँ इतना तो समझ चुकी होती है के उसके बेटे के साथ कुछ तो हुआ है जो कविता को पता है आवर बात बार किसी गन की बात कर रही है जो आदि की माँ थोड़ी दरी हुई भी होती है मगर उससे कही जयादा कविता पर वह गुस्से हुई होती है ...... आवर जब कविता आदि के रूम से निकल कर किचेन मैं आई होती है तभी आदि की माँ रजनी उसे गुस्से से घर रही होती है मगर उस वक़्त कुछ नहीं बोलती है मगर जब कविता आदि की माँ की रूम मैं आकर मन hi मन मुस्कुरा रही होती है तभी आदि की माँ को आवर गुस्सा आती जाती है आवर कविता से हसने की वजह पूछ लेती है मगर कविता कुछ नहीं बताती है जो आदि की माँ खुद को रोक नहीं पति है आवर कविता को गुस्से मैं एक तप्पड़ मार देती आवर कविता को गन्दी गन्दी बाते बोलती हुई पुलिस मैं कम्प्लेन करने की बाते बोलने लगती है जो एक वक़्त के लिए कविता भी दर जाती है

कविता अचानक नीची बैठ कर रोने लग गयी होती है आवर आदि की माँ रजनी से मांफी भी मांगने लग जाती है जो आदि की माँ कविता को रोटी हुई देख कर थोड़ी संत हो जाती है आवर उसकी वक़्त कविता उठ कर आदि की माँ पर टूट पड़ती है

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अरे आँचल तू अकेली क्यू आ रही है गुड़िया भी तेरे साथ मैं थी न ....

राखी देवी जब खेत वाले घर के बहार निकलती है तो आँचल को आती हुई देखती है तो पूछती है

हां दीदी गुड़िया भी साथ थी मगर वह बदमाश लड़की मुझे अकेली वह छोड़ कर घर चली गयी है

दीदी गुड़िया कब से घर चलने को बोल रही थी तो मैंने उसे बोल दिया तू घर चली जा

मुझे लगा वह मस्ती कर रही है घर मेरे hi साथ जाएगी मगर गुड़िया सच मैं घर चली गयी ....

आँचल मुंह बना कर कहती है जैसे आँचल राखी देवी से ये बात बोलती हुई शर्म महसूस कर रही हो

वही आँचल की बात सुन कर राखी देवी हसने लगती है

अब मायुश क्यू हो रही है तू hi तो उसे सर पर बैठा कर राखी है आवर जो बच्चा अपनी माँ के सर पर चढ़ कर रहता है वह अपनी माँ से बिलकुल भी नहीं डरता है क्यू के उसे पता होता है वह कितनी भी गलती करले उसे उसकी माँ कुछ नहीं बोलेगी

हाहाहाआअहाआआ .... राखी देवी हस्ती हुई बोलती है

हां तो दीदी ये बड़ी गलती भी नहीं है गुड़िया की समझी .... चलिए घर चलते है मुझे बड़ी ज़ोर की भूख लगी है

आँचल कहती है तो राखी देवी साथ मैं घर चलने लगती है

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अपडेट ....... 59

अर्जुन अपनी गीता दीदी की चिकनी छूट को देख कर खुद को रोक नहीं पता है आवर गीता की छूट मैं अपना मुंह लगा hi देता है

अर्जुन को अपनी छूट के ऊपर जाते hi गीता बेडसीट पकड़ अपनी गांड उठा कर चिहुंक उठती है आवर गीता की मदहोशी भरी आवाज़ उस रूम मैं गूंज उठती है

गीता की आवाज़ मैं इतनी माधोसी होती है की अर्जुन का लैंड टनटना सा जाता है जो अर्जुन अपना एक हाथ को लैंड के ऊपर रख कर दबा देता है आवर अपनी गीता दीदी की पूरी छूट को दोनों होंठ से पकड़ लेता है

अर्जुन के होंठ से छूट को पकड़ने से गीता एक बार आवर सिसक पड़ती है आवर गीता अपना एक हाँथ अपने छोटे भाई के सर पर रख कर खुद hi अपनी छूट मैं अर्जुन का सर दबा देती है

अर्जुन के मुंह मैं गीता की छूट पूरी ताएफ़ सात जाता है जिससे अर्जुन का जीभ गीता की छोटी गुलाबी छेद मैं चला जाता है गीता अपनी गांड हिला हिला कर सिसकियाँ लेने लगता है

वही अर्जुन भी अपनी बड़ी बहन की छूट को मीठा रास समझ कर चाटने लगता है आवर एक हाथ से गीता की कमर दबाने लगता है

अर्जुन के छूट चाटने से गीता पूरी तरह बेकाबू बेचैन हो जाती है आवर बार बार अपनी गांड उठा उठा कर मचल रही होती है आवर कभी कभी तो गीता का मुंह hi खुल जा रही होती है

गीता खुद को आवर नहीं रोक पति है आवर उठ कर बैठ जाती है

गीता के अचानक उठाने से अर्जुन का मुंह छूट से हैट जाता है आवर अर्जुन का मुंह छूट के आगे बीएड पर रह जाता है जो अर्जुन अपना सर उठा कर अपनी गीता दीदी की तरफ देखता है

अर्जुन की नज़र जैसे hi अपनी गीता दीदी के चेहरे पर जाती है अर्जुन को अपनी गीता दीदी की आंखों मैं एक अजीब सी बेचैनी दिखाई देती है

आवर दोनों भाई बहन एक दूसरे की आँखों मैं देखने लगते है

diiiiiiiiiii Ahhhhhhhhhhhhhhhhh

Ssssssssssssssssssssssssssssssssssss

अर्जुन अभी अपनी गीता दीदी की आँखों मैं देख hi रहा होता है तभी गीता अपने दोनों हाथ से अर्जुन के सरत का बटन खोल कर अपनी गुलाब की तरह गुलाबी होंठ से अर्जुन के साइन को चूमने लगती है

गीत अचानक इस तरह चूमने से अर्जुन एक लम्बी आह्हः भर लेता है मगर अर्जुन का भी हाथ अपनी गीता दीदी के कमर पर चला जाता है आवर अर्जुन अपनी गीता दीदी की कमर को मसल देता है जो गीता भी अपनी आँखे बंद करती हुई सिसक पड़ती है

गीता सिसकियाँ लेने के बाद hi फिर से अर्जुन का सीना चूमने लगती है आवर अर्जुन का सरत भी निकल कर फेक देती है

वही अर्जुन आह लेते हुआ बीएड पर गिर पड़ता है आवर अपनी गीता दीदी हरकत को देखने लगता है

वही गीता शेरनी की तरह अर्जुन के साइन को कभी चूमती है तो कभी अपने हाथों से मसल रही होती है गीता अर्जुन के जिस्म को चूमते हुआ अर्जुन का जेन्स का भी बटन खोल कर जेन्स को निचे की तरह करने लगती है


MAaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

गीता अर्जुन को मदहोशी मैं चूमते हुआ इतनी जल्दी मैं अर्जुन का जेन्स का बटन खोल कर जेन्स निचे करती है के अर्जुन को भी समझ नहीं आता है मगर अर्जुन को जैसे hi अहसास होता है अर्जुन झट से अपना दोनों हाथ अपने लैंड के ऊपर रख देता है मगर तब तक देर हो चूका होता है

क्यू की गीता अर्जुन के हाथ रखने से पहले hi अपना हाथ अर्जुन के लैंड पर रख चुकी होती है आवर अर्जुन का फनफनाता हुआ लैंड गीता के हाथ मैं फनफना रहा होता है

अर्जुन का लैंड जैसे hi गीता के हाथ मैं आता है गीता की आँखे बड़ी हो जाती है आवर गीता मन मैं hi अपनी माँ को याद कर लेती है ...... जैसे हर बच्चा किसी से डरने के बाद अपनी माँ को याद करता है

वही हाल अभी गीता का हो रहा था

गीता अर्जुन का आधा लैंड तो उस रात अपनी कुवारी छूट मैं ले चुकी होती है मगर गीता उस अर्जुन का लैंड नहीं देख पायी हुई होती है मगर गीता पहले भी अर्जुन का लैंड का अंदाजा लगा चुकी होती है के उसके भाई का लैंड बड़ा है मगर इतना बड़ा है अभी देख कर यकीन नहीं कर रही होती है आवर दर कर गीता की शैशे तेज़्ज़ चलने लगती है

अह्हह्ह्ह्ह दीदी दर्द हो रहा है प्लीज छोड़ दीजिये Ahhhhhhhhhh

गीता डरते हुआ अर्जुन का लैंड पकड़ कर अचानक मदुदने लगती है जिससे अर्जुन दर्द मैं चीख पड़ता है

गीता अर्जुन की दर्द भरी आवाज़ सुनकर जल्दी से अर्जुन के लैंड छोड़ देती है

गीता अब क्या सोच रही है तुझे Hi अब इस लैंड को अपनी छूट मैं लेना है

अब तो अर्जुन भी तुझसे प्यार करने लगा है

देख कैसे तेरी जिस्म को देख रहा है

गीता अर्जुन भी आज तड़प रहा है तेरे प्यार के लिए आवर मत सोच आज अर्जुन को पूरी तरह अपना बना ले बना ले गीता बना ले

गीता अर्जुन के सामने बैठी हुई कभी अर्जुन के मज़बूत सरीर तो कभी अर्जुन के फनफनाता हुआ देख को देख रही होती है आवर गीता के दिमाग मैं बहुत साडी बाते चल रही होती है

ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह Ahhhhhhhhhhhhh

गिरा अर्जुन के जिस्म मैं खोई हुई होती है तभी अर्जुन उठ कर अपना एक हाथ गीता के छूट मैं अपना एक ऊँगली दाल देता है जिससे गीता आह भर्ती हुई दोनों पेअर एक दूसरे से सत्ता लेती है आवर आँखें बंद कर लेती है मगर गीता की धड़कन बहुत तेज़ी से चल रही होती है आवर गीता रह रह कर कैंप भी रही होती है

अह्हह्ह्ह्ह कितनी गर्म है दीदी की छूट लग रहा है मेरा ऊँगली जल जटगा

हे भगवन मैं क्या सोच रहा हुईं

मैंने अपनी ऊँगली दीदी की छूट मैं डाली क्यू ......... chhiiiiiiiiii

अर्जुन तू बहुत किस्मत वाला है जो तुझे पहली छूट भी मिली तो तेरी hi खुद की बहन की वह भी बड़ी बहन की

अर्जुन उस रात तो तूने अपनी गीता दीदी को छोड़ तो दिया था मगर उनकी आग अभी भी नहीं बुझी है अर्जुन आज अपनी गीता दीदी की साडी आग भुजा दे

अर्जुन आज अपनी गीता दीदी की छूट को इतना छोड़ की गीता दीदी की जिस्म की आग hi भुज जाये

नहीं मैं आएसा कभी नहीं कर सकता हुईं ये मेरी दीदी है मैं अपने hi बहन के साथ .... छियई

अर्जुन मुझे पता है तू भी अपनी गीता दीदी से अब प्यार करने लगा है

मगर तू दर रहा है के जिस बात के लिए तू अपना बचपन बर्बाद कर दिया वह काम कैसे कर सकता है

मगर अर्जुन इसमें तेरी कोई गलती नहीं होगी तूने कई बार गीता दीदी को मन कर चूका है मगर वह नहीं मणि क्यू के वह तुझे अपना पति मान चुकी है

उन्होंने उस रात बोली भी थी

अर्जुन आवर मत सोच आवर अपनी गीता दीदी को अपनी पत्नी बना ले

अर्जुन तू जिस दर्द से गुजरा है वह बिता हुआ कल तो नहीं आएगा मगर एक वक़्त तू ज़रूर ला सकता है जिसमे तू खुश होगा आवर तेरी माँ को तेरा दर्द सहना पड़ेगा

अर्जुन समझ रहा है न मैं क्या बोलना चा रहा हुईं


है अर्जुन मैं गीता दीदी को अपना ले

फिर देख जब तेरे आवर गीता दीदी के सम्भन्ध के बारे मैं तेरी माँ को पता चलेगी तो उनेह कितना दुःख होगा

आवर मुझे पता जब जब तेरी माँ दुखी होगी तो तुझे ख़ुशी होगी

तुझे भी तो दुःख हुआ था जब अपनी माँ को अपने hi मां के साथ देखा

आवर सोच अर्जुन आवर मत सोच

अर्जुन का हाथ अभी भी गीता दीदी की छूट मैं होती है आवर अर्जुन के दिमाग मैं बहुत कुछ चल रहा होता है

Aaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

Gudiyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

अचानक एक चीख सुन कर गीता गुडियाआआआ पुकार पड़ती है

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ओह्ह्ह ओह्ह्ह्ह क्या बात है दीदी आप तो अपनी रूम ाएसि सजा रही है जैसे अपनी hi रूम मैं आज सुहागरात मानाने वाली है ... पूजा आस्था के रूम को देख कर मुस्कुराती हुई कहती हुई

क्यू के आस्था अपनी रूम की हर पुराणी चीज को हटा कर नए नए रोमांटिक पोस्टर लगा रही होती है जो पूजा रूम मैं आने के बाद देख कर बोल पड़ती है

दन्त मत डीकगा वह सभी पुराणी हो गयी थी

मैं कब से इन सब को हटाने के लिए सोच रही थी मगर नहीं हटा पा रही थी मगर आज माँ की रूम साफ की तो सोची अपनी भी रूम साफ कर लेती हुईं

वैसे भी आज माँ पापा का सल्ल गिरा है तो साफ करना तो बनता hi है

चल हैट अभी बहुत काम करना है मुझे ..... आस्था बोलती हुई रूम से निकल जाती है

छोटी तुझे नहीं लग रहा आज दीदी कुछ जयादा hi खुश लग रही है

छोटी मुझे तो लग रहा है ..... वैसे तू क्यू मुस्कुरा रही है


आस्था के रूम से जाने के बाद पूजा बोलती है .... तभी पूजा की नज़र पीछे कड़ी पूनम पर जाती है जो मुस्कुरा रही होती है तो पूजा पूनम को घूरती हुई पूछती है

दीदी आज जीजू आने वाले है हम्हारे घर इस लिए दीदी इतनी खुश है ..... पूनम हस्ती हुई कहती है

वाओ फिर तो बहुत मज़ा आने वाला है छोटी

पूजा बड़ी hi खुश होती हुई बोलती है फिर अचानक पूजा के चेहरे पर एक गुस्सा नज़र आने लगता है आवर फिर पूजा खुद hi मुस्कुरा पड़ती है

वही पूनम पूजा की चेहरा देख कर थोड़ी देर के लिए दर जाती है मगर फिर मुस्कराहट देख कर पूनम भी मुस्कुरा देती है

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अपडेट ...... 60

गीता को अचानक hi अंजलि की चीख सुनाई देती है जो गीता अंजलि की चीख सुन कर पहले तो दर जाती है मगर फिर जल्दी से मैक्सी पहन कर रूम की खिड़की के पास जाकर बहार देखने लगती है

गुड़िया छिप क्यू रही है ...... तुझे चोट तो नहीं लगी

गीता जब खिड़की के बहार देखती है तो अंजलि खिड़की के दिवार से छिपने की कोशिश कर रही होती है मगर तब तक गीता देख कर बोल पड़ती है

अंजलि की आवाज़ hi सुन कर ..... दर तो गीता भी गयी होती है

मगर गीता अपनी दर को भूल कर पहले अंजलि को क्या हुआ ये सोच कर खिड़की के पास चली गयी होती है जो अंजलि छिपने की कोशिश कर रही होती है

अंजलि को कुछ नहीं हुआ देख कर गीता थोड़ी रहत की शंश लेती है मगर फिर गीता की आँखों मैं शर्म आवर दर दिखाई देने लगती है जो गीता झट से खिड़की के पास से हैट जाती है

गीता जब पलट कर बीएड की तरफ देखती है तो अर्जुन भी रूम से जा चूका होता है

ये गुड़िया कब से खिड़की के पास थी

क्या वह हम दोनों को देख रही थी

हे भगवन .... अब क्या होगा


मुझे गुड़िया को किसी तरह समझना होगा नहीं तो ........ हे भगवन

गीता साडी बाते मन मैं सोचती है

गीता भी जल्दी से गेट की तरफ भगति है ताकि गेट खोल सके आवर अंजलि से पता कर सके की वह कब से उसे देख रही है आवर उसने सब देख लिया है तो वह कोई बात घर मैं किसी को न बताये

दीदी ये पागल लड़की अभी भी बहार hi घूम रही है ........ कब से मुझे अकेली छोड़ कर घर आई है ये

गीता जैसे hi गेट खोलती है सामने अंजलि के साथ अपनी माँ आवर ममी को देखती है जो आँचल अंजलि को दांत रही होती है वही अंजलि बस है रही होती है

गीता गेट खोल कर बगल मैं खड़ा हो जाती है मगर गीता की नज़र सिर्फ अंजलि पर होती है वही अंजलि बिना गीता की तरफ देखे hi अपनी रूम की तरफ चली जाती है

गीता बेटी अर्जुन घर मैं है क्या

नहीं है तो उसे फ़ोन कर ज़रा ..... राखी देवी बोलती है

माँ अर्जुन अपने रूम मैं है ....

कोई काम है क्या ..... गीता पूछती है

गीता बेटी बगल के गाओं मैं जाना है

आज ठाकुर साहब के घर पार्टी है उनके शादी के सल्ल गिरह की तो सोची अर्जुन को भी अपने साथ लेकर चली जाती

गीता बीटा ज़रा तुहि बोल दे अर्जुन को

मैं भी तैयार होकर आती हुईं .... राखी देवी बोलती है आवर अपनी रूम की तरफ चली जाती है

गीता अर्जुन के रूम के पास जाती है तो देखती है अर्जुन का रूम बंद है तो गीता अर्जुन के रूम का गेट पीटने लगती है

अर्जुन काफी देर तक कोई जवाब नहीं देता है

अर्जुन प्लीज गेट खोल ..... अर्जुन के कुछ बोलते हुआ न पाकर गीता बोलती है

दीदी अभी मुझे कोई बात नहीं करनी है प्लीज आप जाइये अभी .... अर्जुन अंदर से बॉलर है

अर्जुन की आवाज़ से गीता को समझ आ जाती है के अर्जुन अभी मेरी वजह से सायद सर्मिन्दा है जो गीता भी थोड़ी दुखी हो जाती है

ठीक है बाबू तू गेट नहीं खोलना चाहता है तो मत खोल मगर अभी तैयार होजा माँ तेरा इंतज़ार कर रही है पास के गाओं मैं जाने के लिए

गीता थोड़ी मायुशि से बोलती है जैसे गीता को अर्जुन की मायुशि भरी बाते अच्छी न लगी हो

आवर गीता भी थोड़ी मायुश होकर अपनी रूम की तरफ चली जाती है


रात के 7 :पं

अर्जुन गाड़ी चला रहा होता है आवर गाड़ी के पीछे राखी देवी बैठी हुई अर्जुन को प्यार से देख रही होती है मगर अर्जुन एक बार भी पीछे अपनी माँ की तरफ नहीं देखता है

अर्जुन का मुंड आज पूरा hi ख़राब हो चूका होता है अर्जुन अपने आप से शर्मिंदा भी हो रहा होता है

अर्जुन को ये बाते अभी आवर परेशान कर रही थी के उस वक़्त वह कैसे अपनी गीता दीदी के साथ दे रहा था

अर्जुन जब जब वह बाते सोच रहा होता है अर्जुन को अपनी गीता दीदी की जगह अपनी माँ पे गुस्सा आ रहा होता जो अर्जुन अपनी माँ की तरफ अभी देख भी नहीं रहा होता है

अर्जुन तू माँ पर क्यू गुस्सा हो रहा है

माँ ने कुछ नहीं किया था आज

उनेह तो कुछ पता भी नहीं है

अब जो भी किया है तुमने आवर गीता दीदी ने किया है

तू भी तो गीता दीदी का साथ दे रहा था

अर्जुन तू मान या ना मान मगर मुझे पता है तू भी अपनी गीता दीदी को पसंद करने लगा है

आवर ये नाटक बंद कर के गीता दीदी के साथ वह सब कर के दुःख हो रहा है

अर्जुन तुझे दुःख तो हो रहा है मगर गीता दीदी के वह सब कर के नहीं

अर्जुन तुझे दुःख इस बात से हो रहा है के तू अपनी दीदी से प्यार नहीं कर सका

अर्जुन तुझे दुःख इस लिए हो रहा है के तूने अपनी गीता दीदी की छूट मैं अपना लैंड न दाल सका

अर्जुन मानले तू भी अपनी माँ की रह पर चल रहा है

अर्जुन जिस तरह तू मज़बूर होकर अपनी Hi बड़ी बहन के साथ समभंद बना लिया तो सोच तेरी माँ भी किसी मज़बूरी मैं hi अपनी भाई के साथ समभंद बनाई होगी

अर्जुन देख उस चेहरे को तुझे लगता है उस चेहरे मैं तेरे लिए कोई प्यार नहीं है .....

नहीं अर्जुन

मुझे उस चेहरे तेरे लिए बेहपनाह प्यार नज़र आ रही है

अर्जुन माँ की आँखें देख कैसे बस तुझे hi देख रही है जैसे तुहि उनके लिए दुनियां की सबसे कीमती चीज है

अर्जुन मेरी बात मान आवर मांफ करदे माँ को

माँ को मांफ करदे अर्जुन .... मांफ करदे

अर्जुन गाओं आ गया है गाड़ी थोड़ा धीरे करलो बीटा ..... ार्जुउउउउउउन Aaaaaaaaaaaaaaaaaaa राखी देवी बोलती हुई चीख पड़ती है

Maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

वही अर्जुन के दिमाग मैं वह सब बाते चल रही होती है जो अर्जुन अपनी माँ की बातों पर धयान hi नहीं देता है ......

या कह सकते है अर्जुन को अपनी माँ की बात सुनाई hi नहीं देता है

क्यू के अर्जुन का दिमाग वह सब बाते चल रही होती है जिससे अर्जुन का दिमाग hi घूम रहा होता है

मगर अर्जुन अपनी माँ की तेज़्ज़ आवाज़ सुन कर अर्जुन अचानक hi ब्रेक लगा देता है जो राखी देवी अर्जुन के सीट से टकराते हुआ चीख पड़ती है अपनी माँ की चीख सुन कर

अर्जुन भी माँ पुकारते हुआ जल्दी से गाड़ी से उतर कर राखी देवी के पास आ जाता है

माँ आप ठीक है चोट तो नहीं लगी दिखाइए मुझे

अर्जुन बोलता हुआ अपनी माँ की सर को देखने लगता है

इस वक़्त अर्जुन का प्यार को देख कर राखी देवी का दिल मैं बेहपनाह खुसी होने लगती है

राखी देवी अर्जुन बस अर्जुन के चेहरे को देखने लगती है

राखी देवी को यकीन hi नहीं हो रही होती है के अर्जुन उससे इतना भी प्यार कर सकता है

अर्जुन का प्यार देखते हुआ राखी देवी की आँखें भर आती है

माँ चोट कागा लगी है दर्द हो रहा क्या

माँ आप रो क्यू रही है ..... अर्जुन अपनी माँ की आँखों मैं आंसू देख कर बड़े hi प्यार से बोलता है आवर राखी देवी की आँखों से गिरती हुई बुन्देय पोछ देता है

अर्जुन का इतना प्यार देख कर राखी देवी रोटी हुई भी मुस्कुरा पड़ती है

अर्जुन बीटा तू परेशान न हो मुझे चोट नहीं लगी है

मममम मैं ठीक हुईं

राखी देवी को इतनी ख़ुशी हो रही होती है की राखी देवी ठीक से बोल भी नहीं पा रही होती है

वही अर्जुन अपनी माँ की आँखों से आंसू पोछ कर गाड़ी का गेट फिर से बंद कर देता है आउट फिर गाड़ी स्टार्ट कर देता है

अर्जुन बीटा एहि से गाड़ी घुमा ले पास मैं hi हमेह जाना है ..... राखी देवी बोलती है

अपनी माँ की बात सुन कर अर्जुन गाड़ी घुमा लेता है तभी अर्जुन की नज़र सामने हवेली पर पड़ती है तो अर्जुन हवेली के बहार hi गाड़ी रोक देता है

माँ आप जाओ मैं गाड़ी साइड मैं लगा देता हुईं .... अर्जुन कहता है मगर राखी देवी गाड़ी से उतर कर वही कड़ी हो जाती है जो अर्जुन समझ जाता है उसकी माँ उसे भी साथ लेकर जाना चाहती है तो अर्जुन भी गाड़ी लगा कर राखी देवी के पास आ जाता है

अर्जुन जैसे hi राखी देवी के पास आता है

राखी देवी अर्जुन का हाथ पकड़ लेती है आवर हवेली के अंदर जाने लगती है

वही अर्जुन बस अपनी माँ को hi देखने लगता है

अर्जुन इस वक़्त अपनी माँ की प्यार को देख कर अर्जुन खुद को एक बच्चा समझने लगता है

जैसे अर्जुन अभी बहुत छोटा है आवर वह अकेला कही चला न जाए इस लिए उसकी माँ उसका हाथ पकड़ी हुई है

ये ईडेन अर्जुन के दिमाग मैं चल रहे होते है जिससे अर्जुन के आँखों मैं आंसू आ जाते है

माआआआ

नमस्ते दीदी

नमस्ते आंटी

अर्जुन यादों मैं खोया हुआ होता है तभी राखी देवी अचानक hi अर्जुन को अपने आगे कर लेती है आवर अर्जुन के कंधे पर अपनी दोनों हाथ रख कर सामने वाली औरत को नमस्ते कर देती है

वही राखी देवी अचानक इस तरह करने से अर्जुन के मुंह से माँ निकल जाता है

मगर सामने हस्ती हुई औरत को देख कर अर्जुन भी नमस्ते बोल पड़ता है

राखी एहि तेरा बीटा अर्जुन है

.... सामने वाली औरत बोलती है जो राखी देवी मुस्कुराती हुई हां मैं सर हिला देती है

बीटा तुम बहुत किस्मत वाले हो जो तुमेह राखी जैसी माँ मिली

राखी के जगह मैं होती तो सायद hi तुमेह जनम दे पति

मैं तो ये सुन कर hi दर गयी थी के राखी फिर से माँ बनाने वाली है

राधा डीईईडी

वह औरत बोल रही होती है तभी राखी देवी बिच मैं बोल पड़ती है जो वह औरत चुप हो जाती है

वह औरत आवर कोई नहीं आस्था की माँ राधा देवी होती है

मगर अर्जुन राधा जी की बात सुन कर हैरान भी हो जाता है आवर सोच मैं भी पद जाता है ये सोच कर के आखिर आंटी बोलना क्या चाह रही है

अर्जुन एक नज़र अपनी माँ को भी देखता है जो राखी देवी अर्जुन के सर पर हाथ फेर कर मुस्कुरा देती है आवर अर्जुन का हाथ पकड़ कर चुम लेती है

बीटा चलो मैं तुमेह अपनी फॅमिली से मिलवाती हुईं

आस्था की माँ बोलती है

अर्जुन आवर राखी देवी राधा जी के साथ हवेली के अंदर चले जाते है

हवेली मैं चरों तरह चहल पहल होती है हवेली मैं बहुत सरे लोग आये हुआ होते है

राधा जी एक जगह जाकर रुक जाती है

वही सामने 2 लड़कियां कड़ी होकर आपस मैं बाते कर रही होती है

गुड़िया तेरी दीदी कहा है राधा पूछती है

जी जूउउउउउउउ

बुआ व वाह्ह्ह दीदी तो आप के साथ hi बहार थी .....

वह लड़की औरत की आवाज़ सुन कर जैसे hi घूमती है सामने अर्जुन को देखती है जिससे उसके मुंह से अचानक hi जीजू सब्द निकल जाते है मगर जीजू सब्द बहुत hi धीरे से बोलती है जो उसकी आवाज़ आवर कोई तो नहीं सुनता है मगर पास कड़ी हुई लड़की उसकी आवाज़ सुन hi लेती है आवर सामने खड़ा अर्जुन को देख कर मुस्कुरा पड़ती है

गुड़िया आवर पूजा बेटी चलो तुम दोनों आंटी को नमस्ते कहो ... राधा जी कहती है तो पूनम आवर पूजा राखी देवी को नमस्ते करती है

ये लड़की पता नहीं कब कहा चली जाती है ..... राधा जी मन मैं बुदबुदाती है

राखी इसे तो तुम जानती hi होगी ये विक्रम की बेटी है पूजा आवर ये मेरे भाई की बेटी है पूनम

ओह बुआ मैं अपनी परिचय खुद भी दे सकती थी न ..... आप क्यू देने लगी ......... पूनम मुंह बना कर बोलती है

जिससे पास कड़ी राधा जी के साथ राखी देवी भी मुस्कुरा पड़ती है

ठीक है बाबा तू अपनी परिचय खुद दे अर्जुन को

आवर कोई सैतानी नहीं समझी


अर्जुन का अच्छे से धयान रखना अर्जुन पहली बार घर आया है

राधा जी बोलती है आवर राखी देवी को साथ लेकर चली जाती है

राखी देवी के जाने के बाद hi पूनम आवर पूजा एक दूसरे को देख कर दोनों मुस्कुरा पड़ती है

पूनम तो अर्जुन को यह देख कर मुस्कुरा रही होती है मगर पूजा की हसी मैं कुछ आवर hi बड़ी ख़ुशी नज़र आ रही होती जैसे पूजा के दिमाग मैं कुछ चल रही होती है

मेरे चेहरे पर कुछ लगा है क्या .... अर्जुन पूछता है

नहीं

आप क्यू पूछ रहे है

ओह सॉरी सॉरी

हम दोनों कुछ आवर बात पर हस्स रही है आप को देख कर नहीं ... पूजा बोलती है

गुड़िया िनेह छत पर लेकर चल

मैं अभी आती हुईं

इनका अच्छे से धयान रखना hi होगा बड़ी माँ ने बोली है है .... पूजा बोलती है

पूजा के कहने पर पूनम अर्जुन को साथ आने को बोलती है तो अर्जुन पूनम के साथ चला जाता है

वही राधा जी राखी देवी को एक जगह लेकर जाती है जहा पहले से जहा पहले से सोभा आवर पूनम की माँ के साथ राधा जी की सास होती है

राखी देवी उनसे मिल कर उनके साथ hi बैठ जाती है

वही राखी देवी के थोड़ी दुरी पर एक जहाज 3 लोग बैठे हुआ होते है आवर शराब पिटे हुआ बाते कर रहे होते है

विक्रम तूने बताया नहीं हमेह के यह हुस्न की मलिका भी आने वाली है

Aaaaaaaaaaahhhhh

कसम से यार मैं जब राखी को देखता हुईं मेरे जिस्म मैं एक गर्मी सी होने लगती है .... उनमे से एक आदमी सामने राखी देवी की लाइट मैं चमकती हुई खूबसूरत चेहरे को देखता हुआ कहता है

उस आदमी की बात सुन कर विक्रम सिंह के हाथ से शारब की गिलाश अपने आप hi छूट कर निचे गिर जाता है आवर विक्रम सिंह राखी देवी को hi देखने लगता है

विक्रम सिंह अभी शराब के नशे मैं होता है मगर उसकी नज़र जैसे hi राखी देवी के ऊपर जाता है विक्रम सिंह का नशा उतर जाता है

राखी देवी को देखते हुआ विक्रम सिंह का एक हाथ खुद hi अपने लैंड के ऊपर चला जाता है

बस ये तो पहले से भी गदरा गयी है ...... विक्रम सिंह राखी देवी को घूरता हुआ मन मैं सोचता है

वही हॉल उन दोनों का भी होता है

वह दोनों भी राखी देवी को देख कर अपने लैंड मसल रहे होते है

विक्रम सिंह अचानक वह से राखी देवी की तरफ चला जाता है


इस बार तो लगता है विक्रम राखी की छूट मैं लैंड दाल hi देगा .... विक्रम के जाते है उनमे से एक बोलता है जो दोनों hi मुस्कुरा पड़ते है

अह्ह्ह्हह्हह

सॉरी सॉरी राखी विक्रम बोलने लगता है

कोई बात नहीं गलती मेरी थी .... राखी देवी अपनी सरे की पल्लू को साइन के ऊपर डालती हुई बोलती है मगर राखी देवी की आँखों मैं एक शर्म सी आ गयी होती है जो राखी देवी विक्रम से नज़र नहीं मिला पा रही होती है

वही विक्रम हवस भरी आँखों से राखी देवी की चुचुई को घर रहा होता है

दरअसल विक्रम सिंह राखी देवी के पास जैसे hi आता है राखी देवी कुर्सी से उठ कर घूम जाती है आवर उसका hi विक्रम सिंह फायदा उठा कर विक्रम सिंह राखी देवी कमर को पकड़ लेता है

वही राखी देवी की भी एक हाथ विक्रम के कंधे पर चला जाता है

विक्रम सिंह उस मक्के का फयसा उठा कर अपना एक हाथ कमर से निचे कर के राखी देवी के गांड पर रखते हुआ दबा भी देता है जिससे राखी देवी सिसक पड़ती है

विक्रम के सॉरी सॉरी सुन कर राखी देवी विक्रम सिंह को कुछ बोल भी नहीं पति है आवर विक्रम सिंह से अलग हो जाती है

राखी सॉरी सच मैं मैंने तुमेह नहीं देखा प्लीज मुझे मांफ कर देना .... विक्रम सिंह फिर से बोलता है

कोई बात नहीं विक्रम गलती मेरी भी थी जो मैं अचानक उठ कर घूम गयी

तुम कैसे हो कब आये अमेरिका से ..... राखी देवी पूछती है

मैं तो बिलकुल भी ठीक नहीं हुईं राखी तुम्हारी जवानी की नशा आज भी मेरे साइन मैं होती रहती है

कस तुम मुझसे शादी कर लेती मेरी जान ..... विक्रम सिंह थोड़ी मायुशि से बोलता है जो राखी देवी विक्रम को घूरने लगती है

हां हआ हआ हा

विक्रम तुम कभी नहीं सुधरने वाले

विक्रम को हस्ते देख राखी देवी बोलती

क्यू के विक्रम सिंह को हस्ते हुआ देख कर राखी देवी को लगता है विक्रम मस्ती कर रहा है

मगर राखी देवी को क्या पता विक्रम सिंह मस्ती मैं hi अपने दिल का बात बोल रहा होता है

क्या करूँ राखी तुमेह जब भी देखता हुआ तुम्हारे साथ मस्ती hi करने का दिल करताआआआ है ...... विक्रम सिंह राखी देवी को निचे से ऊपर तक देखता हुआ बोलता

साली ये तो हर दिन आवर भी जवान होती जा रही है

आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

इसकी पेट कितनी चिकनी है अह्हह्ह्ह्ह इसकी आनर की तरह नाभि अह्ह्ह्हह दिल तो कर रहा है इसमें मुंह hi दाल दूँ ..... विक्रम सिंह राखी देवी की चिकनी नाभि को देख कर मन मैं सोचता है


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विक्रम अब बस भी करों अब हम कॉलेज मैं नहीं रहे हम्हारे बच्चे अब कॉलेज मैं पढ़ते है ... राखी देवी बोलती है

राखी तो क्या हुआ

ये अर्जुन कहा चला गया

विक्रम मैं अभी आई

विक्रम कुछ बॉलर उसके पहले hi राखी देवी बोल कर वह से चली जाती है

वही राखी देवी को जाते हुआ विक्रम सिंह राखी देवी की इधर उधर होती हुई बड़ी गांड को देखने लगता है


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विक्रम सिंह राखी देवी के गांड को बड़े hi कमीने हवस भरी आँखों से देखता hi रहता है जब तक राखी देवी उसके आँखों से ुझल नहीं हो जाती है

राखी देवी के जाने के बाद विक्रम सिंह जल्दी बाज़ी मैं वह से चला जाता है जैसे विक्रम सिंह के दिमाग मैं कुछ बड़ा चलने लगा हो

विक्रम सिंह घर के किचेन मैं चला जाता है आवर काम कर रही नौकरानी को पीछे से पकड़ लेता है

Ssssssssss अह्हह्ह्ह्ह मालिक क्या कर रहे है कोई आ जायेगा

विक्रम के पकड़ने के साथ hi वह नौकरानी डर्टी हुई कहती है

आह्ह्ह्हह साली रहा नहीं जाता है चल छोड़ने नहीं देगी तो लैंड hi चूस ले

विक्रम अपना लैंड नौकरानी के गांड मैं दबाता हुआ कहता है

विक्रम का लैंड अपनी गांड पर महसूस कर के नौकरानी की छूट मैं खुजली होने लगती है मगर नौकरानी समझती है किचेन मैं छोड़वाया तो कोई आ सकता है इस लिए वह लैंड चूसने के लिए मान जाती है

आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह चूस साली चूस आह्ह्ह्हह बर्दाश्त नहीं हो रहा है आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह साली तेरी मुंह को hi आज फाड् दूंगा Ahhhhhhhhhhh

विक्रम नौकरानी के मुंह मैं ज़ोर ज़ोर से धक्का मरते हुआ बोलता जा रहा होता है

वही नौकरानी विक्रम का तेज़्ज़ तेज़्ज़ धक्का से गु गु कर रही होती है

मेरी बात धयान से सुन जो दवा मैंने तुझे भाभी को देने के लिए दिया था वह दवा भाभी को नहीं किसी आवर को देना है

मैं तुझे इसारे से बताऊंगा तुम जोश मैं दाल कर उसे दे देना .... Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh

विक्रम बोलता हुआ अपने लैंड का पानी नौकरानी के चेहरे पर नीकल देता है

वही राखी देवी अर्जुन को हवेली मैं देख रही होती है मगर राखी देवी अर्जुन कही नज़र नहीं आता है तो राखी देवी अर्जुन को फ़ोन करने लगती है

अर्जुन अभी हवेली के छत पे होता है आवर सामने आस्था कड़ी होती है जो अर्जुन के एक तक देखने आस्था खुद hi शर्मा रही होती है


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हे भगवन क्या मेरा हीरो क्या सच मैं मुझे hi देख रहा है मुझे तो यकीन hi नहीं हो रहा है ... आस्था मन मैं सोचती है

वही अर्जुन आस्था को ऊपर से निचे तक आयी देख रहा होता है जैसे आस्था अभी उसके सामने बिलकुल नंगी कड़ी है

अर्जुन के आँखों मैं एक नशा सा दिख रहा होता

वही छत के दूसरी तरफ पूनम आवर पूजा साथ कड़ी हुई होती है आवर उनकी नज़र अर्जुन आवर आस्था पर hi होती है

पूजा दीदी ये कैसे हो सकता है

आस्था दीदी तो बोलती थी जीजू उनके पास भी खड़ा नहीं होते है

लेकिन अभी देखिये कैसे जीजू दीदी को घूरे जा रहे है

मुझे तो यकीन hi नहीं हो रहा है ...... पूनम पूजा की तरफ देखती हुई बोलती है

वही पूजा अर्जुन आवर आस्था की तरफ देख कर मुस्कुरा रही होती है

गुड़िया जल्दी से निचे जा आवर देख आस्था दीदी के रूम मैं कोई है तो नहीं ..... पूजा बोलती है

पूजा दीदी आस्था दीदी के रूम मैं कोई होगा भी तो क्या फर्क पड़ेगा वह ऊपर थोड़ी कोई आएगा .... पूनम बोलती है

अरे मेरी बुद्धू गुड़िया कोई ऊपर नहीं आने वाला है बल्कि आस्था दीदी अपनी रूम मैं जाने वाली है वह भी अर्जुन के साथ जल्दी जाकर देख टाइम बहुत काम है .... पूजा अर्जुन के चेहरे की तरफ देखती हुई मुस्कुरा कर कहती है

पूजा दीदी क्या मतलब है आप का .... पूनम को पूजा की बात hi समझ नहीं आती है तो पूछती है

अरे बाबा तू सवाल बहुत पूछती है

देख अर्जुन जल्द hi आस्था दीदी को किश करने वाला है

वाओ दीदी आप को कैसे पता चला

पूजा बोल hi रही होती है तभी पूनम की नज़र अर्जुन आवर आस्था कक तरफ चली जाती है आवर देखते hi देखते अर्जुन आस्था को पकड़ कर किस्स्स करने लगता है जो पूनम खुश होकर बोल पड़ती है

वही अर्जुन के अचानक किश करने से आस्था का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगता है आस्था अर्जुन को दूर भी करना चाहती है मगर कर नहीं पति है क्यू के अर्जुन आस्था का सर बड़े hi मज़बूती से पकड़ लिया होता है जो आस्था छह कर भी अलग नहीं हो पति है

अर्जुन आस्था की होंठ चूसते हुआ अपना एक हाथ अचानक hi आस्था के गांड पर रख देता है

अर्जुन का हाथ अपनी गांड पर अहसास करते hi आस्था का जिस्म कैंप जाता है आवर आस्था अपनी कमर आगे की तरफ उठा देती है जिससे आस्था को एक ज़ोर की झटका लगती है जो आस्था उसी वक़्त अपनी कमर फिर से पीछे कर लेती है आवर अर्जुन से अलग भी हो जाती

हे भगवन वह क्या था

आअह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह मत करो अर्जुन ओह्ह्ह्हह दर्द हो रहा है आआह्ह्ह Ssssssssssss आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

आस्था अलग होकर सोचती hi है तभी अर्जुन फिर से आस्था के करीब आकर आस्था को पकड़ कर आस्था की गाला चूमते हुआ कमर को मसलने लगता है जिससे आस्था आहे भरने लगती है

अर्जुन प्लीज मत करो प्लीज अर्जुन मत करों आएसा

Sssssssssssss आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ह्ह्हह्ह्ह्ह

आस्था अर्जुन को दूर होने के लिए बोल रही होती है

वही अर्जुन अचानक hi अपना एक हाथ आस्था के छूट के ऊपर रख देता है जो आस्था सिसकियाँ लेने लगती है आवर सिसकते हुआ वही बैठ जाती है

प्लीज मत करो अर्जुन प्लीज मत करो अर्जुन

इस बार आस्था रोटी हुई बोलती है मगर अर्जुन को कोई फर्क नहीं पड़ता है अर्जुन फिर से आस्था के पास जाने लगता है

अर्जुन आस्था के पास जाता उसके पहले hi अर्जुन के ऊपर भरा हुआ बाल्टी का पानी पूजा पीक देती है

दूर रहो मेरी दीदी से

पूजा बोलती हुई आस्था को पकड़ लेती है

वही जैसे hi अर्जुन के ऊपर पानी गिरता है सामने आस्था को रट हुआ देख कर अर्जुन हड़बड़ा सा जाता है

सॉरी पता नहीं

चले जाओ मेरे घर से वर्ण मैं अभी बड़े पापा को बता दूंगी ..... पूजा गुस्से से बोलतो है

वही अर्जुन बिना कुछ बोले वह से चला जाता है

मालकिन परेशान मत होइए आप का बीटा एहि कहीं होगा


लीजिये ये जोश पीजिये तब तक मैं आप के बेटे को देखती हुईं ...

राखी देवी अर्जुन को कई बार फ़ोन लगा चुकी होती है मगर अर्जुन एक बार भी फ़ोन नहीं उठता है जो राखी देवी परेशान हो रही होती है तभी वह नौकरानी आ जाती है आवर राखी देवी को जोश देने को होती है तभी राखी देवी अर्जुन के बारे मैं बोलती है

वह नौकरानी राखी देवी को वह जोश देकर चली जाती है

वही राखी देवी को प्यास लगी हुई होती है तो राखी देवी वह जोश पि लेती है

अर्जुन अर्जुन

राखी देवी जोश पीकर गिलाश टेबल पर रख रही होती है तभी अर्जुन हवेली के बहार जाता हुआ दिखाई देता है

राखी देवी अर्जुन को पुकारती हुई खुद भी हवेली के बहार की तरफ भगति है

अर्जुन का दिमाग काम नहीं कर रहा होता है अर्जुन का लैंड पेंट मैं पूरी तरह तना हुआ होता है अर्जुन गाड़ी के पास खड़ा होकर अपनी जेब से सिगरेट निकल कर पिने लगता है तभी अर्जुन की नज़र सामने आती हुई राखी देवी पर नज़र जाती है आवर अर्जुन की नज़र अपनी माँ की जिस्म के ऊपर रुक जाता है

राखी देवी जैसे जैसे अर्जुन के पास आ रही होती है अर्जुन की आँखों मैं आवर भी चमक आ रही होती है आवर अर्जुन अपनी माँ की जिस्म को घूरने लगता


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वही राखी देवी भी अर्जुन के सामने आकर कड़ी हो जाती है आवर राखी देवी भी अर्जुन की आँखों मैं देखने लगती है

अर्जुन को घूरते हुआ देख कर राखी देवी भी अर्जुन को देखने लगती है

राखी देवी की आँखों मैं एक अजीब सा नशा दिखाई दे रही होती है

अर्जुन क्या कर रहा है होश मैं आ वह तेरी माँ है .... तू ितं कैसे गिर सकता है

राखी देवी की आँखों मैं कर अर्जुन मन मैं सोचता है जो अर्जुन अपनी आँखें निचे कर लेता

बीटा क्या हुआ बिना कुछ बोले बहार क्यू आ गया .... अर्जुन के नज़र हट्टे hi राखी देवी बोलती है

माँ मुझे घर जाना है

अर्जुन बोलता है आवर गाड़ी का गेट खोल कर सीट पर बैठ जाता है

वही राखी देवी भी अर्जुन के साथ आगे hi बैठ जाती है

अर्जुन गाड़ी तो चला रहा होता है मगर अर्जुन का नज़र बार बार राखी देवी के ऊपर जा रहा होता है

वही राखी देवी भी अर्जुन को इस तरह खुद को कहते हुआ देख कर थोड़ी थोड़ी शर्मा रही होती है

अर्जुन अपनी मा को देखते हुआ गाड़ी की स्पीड आवर तेज़्ज़ कर देता है

गाड़ी की स्पीड बहुत तेज़्ज़ हो जाती है मगर अर्जुन को ज़रा भी अहसास नहीं होता है के उसका गाड़ी का स्पीड तेज़्ज़ है

Aaaaaaaaaaaaa ार्जुउउउउउउउणं

राखी देवी की चीख हवा मैं गूंज पड़ती है

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अपडेट ..... 61

अर्जुन गाड़ी चलते हुआ बार बार अपनी माँ को देख रहा होता है

वही राखी देवी की नज़र अभी अर्जुन के जिस्म पर होती है मगर राखी देवी को ज़रा भी होश नहीं होता है के अभी अर्जुन की नज़र कहा है आवर वह किस हालत मैं है दरअसल राखी देवी सीट पर बौठि हुई तो होती है आवर राखी देवी की साइन से पल्लू निचे गिर चुकी होती है आवर राखी देवी की दोनों बड़ी बड़ी चुकी के साथ राखी देवी की चिकनी पेट आवर आनर की तरह नेवेल दिख रही होती है जिसे अर्जुन का धयान बार बार अपनी माँ की जिस्म पर जा रही होती है


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वही राखी देवी अर्जुन के कपड़ों को देख कर थोड़ी हैरान भी होती है ...क्यू के अर्जुन का कपडा भिनगा हुआ होता है तभी राखी देवी की नज़र सामने सड़क पर जाती है आवर राखी देवी चीख पड़ती है

तब तक देर हो चुकी होती है आवर गाड़ी जाकर पेड़ से टकरा जाती है

दरअसल अर्जुन अपनी माँ की जिस्म को देखने मैं इतना खो चूका होता है के अर्जुन को पता hi नहीं चलता है के वह गाड़ी अपने गाँव की तरफ न लेजाकर दूसरी तरफ लेकर जा रहा होता आवर राखी देवी के चीखने तक गाड़ी पेड़ से टकरा चुकी होती है


रात के 12 :30ऍम



अर्जुन बीटा Nahiiiiiiiiiiiii

राखी देवी चिक्ति हुई अचानक उठ कर बैठ जाती है

राखी देवी की आँखें लाल हो चुकी होती है ढकन ज़ोर ज़ोर से चली रही होती है आवर राखी देवी उठते hi अपनी छूट पर हाथ रख चुकी होती है जैसे राखी देवी की छूट अभी बिलकुल नंगी हो

अआप कौन है मैं कहा हुईं

ममममरा आयआर्जन कहा है

राखी देवी चीखती हुई जैसे hi उठती है सामने एक बुद्धि औरत को देखती है तो राखी देवी उस बुद्धि औरत से पूछती है

बेटी तुम चीख क्यू रही हो क्या तुमेह भी ठण्ड लग रही है ..... वह बुद्धि औरत पूछती है

आप कौन है अम्मा मेरा अर्जुन कहा है उसे कुछ हुआ तो नहीं है भगवन के लिए बता दीजिये अम्मा


अर्जुन बीटा क्या हुआ क्या हुआ मेरे बच्चे ..... राखी देवी उस बुद्धि औरत से पूछ hi रही होती है तभी राखी देवी के कानो मैं अर्जुन के कहरने की आवाज़ सुनाई देती है तो राखी देवी भाग कर अर्जुन के पास चली जाती है

वही अर्जुन ज़मीन पर लेता हुआ होता है आवर अर्जुन के ऊपर कई सरे फटा हुआ बिस्तर पड़ा हुआ होता है फिर भी अर्जुन ठण्ड से कहर रहा होता है

अर्जुन को कांपते हुआ देख कर राखी देवी अर्जुन का सर अपनी गॉड मैं लेकर रोने लगती है


अम्मा घर मैं आवर कोई नहीं है

मेरा अर्जुन ठण्ड से कैंप रहा है मुझे अभी अर्जुन को हॉस्पिटल लेकर जाना होगा

अम्मा भगवन के लिए घर मैं आवर कोई है तो बुला लीजिये

राखी देवी रोटी हुई बोलती है आवर अर्जुन को पकड़ के उठाने लगती है

बिटिया घर मैं आज अकेली हुईं मेरी एक बेटी है जो सहर गयी है

बीटीए तू अकेली इसे इतनी दूर हॉस्पिटल नहीं लेकर जा सकती है आवर ऊपर से तेरी गाड़ी भी सायद ख़राब हो गयी है

अम्मा मैं अपने अर्जुन को कुछ नहीं होने दूंगी

मैं अर्जुन को किसी भी तरह हॉस्पिटल लेकर hi जाउंगी

कुछ नहीं होने दूंगी तुमेह मेरे बच्चे Sssssssssssssssssssss

राखी देवी रोटी हुई बोलती है आवर अर्जुन का माथा चुम कर अर्जुन को उठाने लगती है मगर राखी देवी अर्जुन को उठा नहीं पति है .... तभी अर्जुन का हाथ राखी देवी अपनी चुकी पर पति है जो अर्जुन राखी देवी की चुकी ज़ोर ज़ोर से दबने लगता है जो राखी देवी सिसक पड़ती है आवर अर्जुन को लेकर फिर बैठ जाती है

बिटिया तेरा बीटा अब बच्चा नहीं है जो तू इसे तू गॉड मैं उठा कर हॉस्पिटल लेकर चली जाएगी

बिटिया तू अपने बेटे को बचाना चाहती है तो एक काम करना होगा तुझे फिर तेरा बीटा सायद सुबह तक ठीक हो सकता है

अम्मा मैं अपने अर्जुन के लाइट कुछ भी करुँगी

क्या करना है अम्मा भगवन के लिए जल्दी बताइये मुझे

वह बुद्धि औरत अभी बोल hi रही होती है तभी राखी देवी बोल पड़ती है

बेटियां मुझे मांफ करना मैं जो बोल रही हुईं मगर बेटियां एहि एक रास्ता है जो तू अपने बेटे को बचा सकती है

अम्मा आप मेरी माँ की उम्र की है आप मुझसे मांफी मत मांगिये

अम्मा आप बताइये न मुझे क्या करना है

Ssssssssssss Aaaaahhhhhhhhhhhhhh

राखी देवी बोलती हुई सिसक रही होती है क्यू के अर्जुन राखी देवी की चुकी दबाते हुआ राखी देवी की पेट को चुम भी रहा होता है आवर ठण्ड से कैंप भी रहा होता है

बेटियां तुझे अपनी जिस्म की गर्मी अपने बेटे को देनी होगी

अअअअअम्मम्माआ

राखी देवी बड़ी hi गुस्से मैं बोल पड़ती है राखी देवी की आँखे भी गुस्से से लाल हो जाती है

राखी देवी गुस्से से उस बुद्धि औरत को देखने लगती है

बेटियां मैं जानती हुईं कोई भी माँ अपने जवान बेटे के साथ नंगी नहीं सो सकती है

मगर बिटियन मैंने तेरी अपने बेटे के लिए तड़प देख कर बोली ये बात

बेटियां इस शंशार मैं हर माँ अपने बच्चे से सबसे जाएदा प्यार करती है

लेकिन बेटियां मुझे लगता है तू अपने बेटे से बेहपनाह प्यार करती है आवर ये तेरी तड़प बता रही है

बेटियां मेरी बात बुरी लगी है तो मुझे अपनी माँ समझ कर मांफ कर देना

बेटियां मैं अभी हल्दी वाला दूध गर्म कर के लती हुईं

वह बुद्धि औरत बोलती है आवर उस रूम से बहार चली जाती हैं

राखी तू अम्मा को इतनी गुस्सा से क्यू देख रही है

अम्मा ने तुझे सिर्फ तेरे बेटे को बचने के लिए उपाए बताया है

अब तुझे वह करना है के नहीं तू जान

राखी तेरी तक़दीर मैं सायद एहि लिखा है

अपनों के लिए अपनी जिस्म की क़ुरबानी देना

राखी तुझे इस बार भी अपनी जिस्म की कुर्बानी देनी hi होगी सब कुछ भूल कर

राखी तू अपने भाई को ठीक तो नहीं कर सकीय मगर राखी तू अपने बेटे को सायद बच्चा सकती है

राखी थोड़ी देर पहले तो तू एहि सपना देख रही थी के तेरा अर्जुन तेरे जिस्म की हर आंग को मसल रहा होता है आवर देख तेरा वह सामना भी सच हो रही है

अर्जुन इस वक़्त भी तेरे जिसक को मसल रहा है

राखी आवर मत सोच अम्मा की बात मान जा ...... मान जा राखी ..... मान जा

Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

देख राखी तेरी छूट भी गर्म होकर जल रही है राखी यह मत कहना तेरी छूट हर वक़्त आयी hi गर्म रहती है

राखी अर्जुन के छूने से hi तेरी जिस्म इतनी गर्म हो रही राखी देख तेरी पेंटी भी गीली हो गयी राखी तेरी छूट गीली हो गयी

Ssssssssssssss Ssssssssssss ओह्ह्ह्हह्हह आअह्हह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह्ह Aaaaaaaaaaaaa ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह हहहहह SsssssssssssssssSsssssss

राखी देवी के दिमाग मैं साडी बाते चल रही होती है तभी अर्जुन अपना एक हाथ राखी देवी के साड़ी मैं हाथ दाल कर छूट मैं ऊँगली करने लगता है

अर्जुन के ऊँगली करने से राखी देवी ज़ोर ज़ोर से आहे भरने लगती है आवर अर्जुन का सर अपनी चुकी मैं दबाने लगती है

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

राखी देवी अर्जुन का हाथ पकड़ती हुई सिसक पड़ती है

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वही आस्था के घर

आस्था अपने रूम मैं बेजान सी बैठी हुई होती है आवर आस्था के आँखों से आंसू बाह रही होती है

आज आस्था को खुद पे गुस्सा आ रही होती ये सोच कर के इतने गिरे हुआ लड़के को इतना प्यार वह कैसे कर सकती है

अर्जुन के घटित हरकत से आज आस्था बिलकुल टूट चुकी होती है

आस्था तो खुद hi अपना सब कुछ अर्जुन के नाम कर चुकी होती है आवर सायद आज अर्जुन प्यार से सेक्स भी करता तो आस्था अर्जुन को मन नहीं करती मगर अर्जुन आस्था के साथ आएसा कर रहा था जैसे आस्था एक बाजारू रंडी हो

वह सब जब आस्था को याद आ रही होती है आस्था की आँखों से आंसू आवर भी बाह रही होती है

आस्था रोटी हुई लेट कर तकिये मैं मुंह छिपा लेती है

***

***

वही विक्रम सिंह गाओं के एक छोटे से घर मैं बैठ कर शराब पि रहा होता है आवर विक्रम सिंह के आँखों मैं एक अजीब सी चमक होती है जैसे विक्रम सिंह को कोई खजाना मिलने वाला है ..... तभी उस घर का गेट खुलता है तो विक्रम सिंह खुश होकर शराब का गिलाश उठा कर पिने लगता है

अबे रंडी उसे दवा दी के नहीं वह है कहा उसे साथ लेकर क्यू नहीं आई

विक्रम सिंह नशे के हालत मैं कहता है

वही वह औरत अपनी सर निचे कर लेती है मगर बोलती कुछ नहीं है

साली तू उसे लेकर नहीं आई ..... साली रंडी एक काम नहीं कर सकती है तू

मालिक भगवन के लिए धीरे बोलिये वर्ण बगल वाली आंटी सुन लेगी ... वह औरत डर्टी हुई कहती

अबे रंडी तू मुझे चुप होने को बोल रही है .... साली वह बुद्धि सुन लेगी तो क्या होगा वह तेरे नामर्द पति को बता देगी

अच्छा hi होगा उसे भी पता चल जायेगा तू कितनी गर्म है जो रात दिन छोड़वाने के बाद भी तेरी आग ठंडी नहीं होती है

साला जब से आता हुआ तेरी hi छूट तो छोड़ रहा हुईं .... सोचा आज अपनी खवाबों की मलिका की छूट फाड़ूंगा मगर उसे भी तू लेकर नहीं आई चल साली कपडे निकल आज भी तुझे hi छोड़ देता

विक्रम सिंह नशे की हालत मैं कहता है

वही वह औरत बिना कुछ बोले कपडे निकलने लगती है उस औरत के कपडे निकलते hi विक्रम सिंह उस औरत पर टूट पड़ता है

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हुईं हुईं हुईं मायआ मायआ हुईं हुईं माआआ

अर्जुन कांपते हुआ राखी देवी की जिस्म पर हर तरफ हाथ चला रहा होता आवर अपनी सर राखी देवी की कभी पेट मैं तो कभी राखी देवी की बड़ी बड़ी दोनों चुकी मैं मुंह छुपा रहा होता है

अर्जुन का ऊँगली अभी भी राखी देवी की छूट मैं होती है आवर राखी देवी की पेंटी पूरी तरह भींग चुकी होती है क्यू के राखी देवी अर्जुन के ऊँगली करने से आवर बर्दाश्त नहीं कर पति है आवर छूट की गर्म पानी निकल चुकी होतीं मगर अर्जुन अभी भी ऊँगली राखी देवी की छूट मैं कर hi रहा होता है जिससे राखी देवी की हालत ख़राब हो रही होती है आवर राखी देवी बैठी हुई सिसकियाँ भर रही होती है


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बेटियां ये दूध पीला दे ..... बेटियां मैं दूसरे रूम मैं हुईं कुछ चाहिए तो बोलना

बुद्धि औरत की आवाज़ सुन कर hi राखी देवी अपनी निचे गिरी हुई पल्लू को साइन पर रख लेती है आवर अर्जुन का दोनों हाथ पकड़ कर अपनी गॉड मैं दबा लेती है आवर निचे देखने लगती है

राखी देवी उस बुद्धि अम्मा से आने से अपनी सर को निचे तो कर्ली हुई होती है मगर राखी देवी को बहुत शर्म आ रही होती है ऊपर से अर्जुन बार बात राखी देवी के जिस्म को चुम रहा होता है

दोनों माँ बेटे की हरकतों को देख वह बुद्धि औरत रूम मैं जयादा देर आवर रुकना अच्छा नहीं समझती है


बिटिया दूध अभी पीला देना

राखी की हालत देख बुद्धि औरत बोलती है आवर दूध को राखी के सामने रख कर रूम से जल्दी से निकल जाती है

Ssssssssss sssssssssssss Aahhhhhhhhhhhhhhh AAaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ारररररजूउउउन

बुद्धि औरत के आने से राखी देवी अपनी सिसकियाँ थोड़ी देर के लिए रोक ली हुई होती है मगर बुद्धि औरत के जाने के बाद hi राखी देवी बहुत hi कामुकता भरी आवाज़ मैं सिसकियाँ लेती हुई अर्जुन का नाम लेकर आवर सिसकियाँ लेने लगती है

अर्जुन के बार बार जिस्म छूने से राखी देवी की आँखों मैं मदहोशी सी नज़र आने लगती है

राखी देवी खुद को आवर नहीं रोक पति है आवर अर्जुन से थोड़ी दूर होती हुई सामने कुछ दुरी पर राखी हुई दिया को बूटा देती है
 
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