Teri tadap jaldi khatam nahi hogi - Page 9 - SexBaba
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Teri tadap jaldi khatam nahi hogi

अपडेट ...... 72

राखी देवी आवर अर्जुन दोनों खेत वाले रूम मैं होते है राखी देवी थोड़ी दुखी होती है आवर अर्जुन अपनी माँ को घर रहा होता है आवर पास मैं हरिया चाचा भी बैठे हुआ होते है

दरअसल राखी देवी हरिया चाचा से बात कर रही होती है तभी अर्जुन वह आ जाता है आवर कुछ बातें पीतमपुरा के बारे मैं सुन लेता है मगर अर्जुन का पेअर गेट से टकराने से राखी देवी सुन कर चुप हो जाती है तब अर्जुन रूम मैं चला जाता है आवर अपनी माँ को घूरने लगता है

माँ क्या बात है आप क्या छुपा रही है मुझसे ये चाचा कौन है इन्हे पहले कभी नहीं देखा मैंने

अर्जुन हरिया चाचा को घूरते हुआ पूछता है

राखी आवर कुछ मत छिपा अर्जुन से अगर अभी तूने इसे कुछ नहीं बताया तो अर्जुन तुझसे फिर से दूर चला जायेगा आवर सायद hi तुझे कभी मनाफ़ करेगा ..... क्या तू एहि चाहती है

नहीं नहीं मैं अर्जुन को आवर दूर नहीं जाने दूंगी खुद से मैं अर्जुन को सब बता दूंगी ... राखी देवी मन मैं सोचती है आवर उस गाओं के बारे मैं बताना hi ठीक समझती है


अर्जुन बीटा ये हरिया चाचा है

अर्जुन बीटा यह से 40 : कम दूर एक गाओं है पीतमपुरा उस गाओं मैं तेरे पापा के दादा जी रहते थे वह बहुत अच्छे इंसान थे मगर उनसे एक गलती हो गयी थी वह अपनी एक नौकरानी के साथ सम्भन्ध बना लिए थे आवर फिर एक लड़की की जनम हुआ जिनका नाम ममता है

अर्जुन बीटा मैं उस दिन पार्टी मैं जिस औरत के घर ले गयी थी न वह औरत आवर कोई नहीं तुम्हारे पापा की बुआ थी ममता बुआ


अर्जुन ये बात जैसे hi तेरे दादा आवर बड़े दादा को पता चली के उनके बाप ने एक नौकरानी के साथ वह सब किया आवर अब एक बेटी भी है वह दोनों बहुत गुस्सा हुआ अपने बाप पर मगर कुछ बोल न सके मगर उन दोनों के दिल मैं बेहपण गुस्सा भर गया होता है वह एक दिन ममता बुआ की माँ को बहुत मरते है आवर उनेह डरा कर गाओं से निकल देते है

जब ये बात (दादा) ठाकुर साहब को पता चली तो उनेह बहुत दुःख हुआ मगर वह अब कुछ भी नहीं सकते थे क्यू के कुछ दिन से उनकी तबियत ख़राब रहने लगी थी आवर वह बीएड पर पद गए होते है फिर धीरे धीरे दिन बीतता गया आवर एक दिन (दादा) ठाकुर साहब चल बेस .... उनके मरने के बाद पता चला उन्होंने ने अपनी जायदाद मैं से कुछ खेत ममता बुआ के नाम कर चुके है

ये बात जब तेरे दादा आवर बड़े दादा को पता चली तो वह दोनों फिर से गुस्सा हो गए आवर तेरे बड़े दादा तो थान लिए के वह दोनों माँ बेटी को मार देंगे मगर तेरे दादा जी को ये बात बिलकुल भी अच्छी नहीं लगी आवर उन्होंने ने साफ मन कर दिया के वह इसमें उनके साथ नहीं रहेंगे जिससे तेरे बड़े दादा तेरे दादा पर गुस्सा हो गया उसके कुछ दिन के बाद hi तेरे बड़े दादा जी ने अपनी दूसरी हवेली उस गाओं मैं बनवा लिए ..... वह तेरे दादा से इतना गुस्सा हुआ के वह तेरे दादा को हर तरह से तंग करने लगे कभी खेतों मैं आग लगवा देते तो कभी मज़दूरों को मरने लगते तो कभी किसी गाओं के औरत लड़की के साथ सम्भन्ध बनाते

तेरे बड़े दादा जी तेरे दादा आवर ममता बुआ का गुस्सा गाओं वालों पर निकलने लगे तेरे बड़े दादा से तंग आकर तेरे दादा जी यह आ गए तेरे दादा के यह आते hi वह की साडी खेत तेरे बड़े दादा कब्ज़ा कर लिए मगर तेरे पापा जब बड़े हुआ तो वह केस कर दिए तेरे बड़े दादा पर लेकिन तेरे पापा .... राखी देवी इतना बोल पर चुप हो जाती है आवर राखी देवी की आँखें भर आती है ... जो अर्जुन समझ जाता है माँ को पापा की याद आ गयी है जो अर्जुन अपनी माँ के कंधे पर हाथ रख देता है

तेरे पापा के जाने के बाद मैं hi केस लड़ रही थी आवर देख कल hi हम केस जित गए

राखी देवी बोल कर चुप हो जाती है आवर अर्जुन को देखने लगती है


माँ आप दुखी न हो ... आज मैं आप से नाराज़ नहीं हुईं

आप ने मुझे उस गाओं के बारे मैं बता दिया इसमें आप की कोई गलती नहीं है :

अर्जुन अपनी माँ के आँखों मैं आई हुई आंसू की बुन्देय को पोछ कर कहता है

वही राखी देवी अर्जुन का हाथ पकड़ कर चुम लेती है आवर अर्जुन को गले लगा लेती है

राखी देवी बहुत खुश होती है अर्जुन का प्यार देख कर

अर्जुन अपनी माँ को लेकर घर आ जाता है घर आने के बाद राखी देवी अर्जुन को प्रीतमपुरा चलने के लिए बोलती है जो अर्जुन मन कर देता है

राखी देवी अर्जुन के मन करने पर वह अकेली hi हरिया के साथ प्रीतमपुरा के लिए निकल जाती है


रात के 9: पं

अर्जुन क्या हुआ अभी तक सोया नहीं आवर इतनी रात को ऊपर क्या कर रहा है

आँचल छत के ऊपर आकर अर्जुन से बोलती है

ममम मायआ

कोई बात नहीं बीटा मुझे पता है तू सिगरेट पिता है

आँचल मुस्कुरा कर बोलती है

वही अर्जुन सिगरेट बूटा कर निचे गिरा देता है


सॉरी माँ अर्जुन को जब भी अपनी गलती का अहसास या किसी चीज का दर होता है वह आँचल को बड़े hi प्यार से माँ पुकारता है जिससे आँचल इतनी खुश होती है की वह अर्जुन को कुछ बोल भी नहीं पति है

अरे मैं बोली न मुझे पता है तू सिगरेट पिता है फिर सॉरी क्यू बोल रहा है

आँचल मुस्कुराती हुई फिर से बोलती है आवर अर्जुन के पास hi कड़ी हो जाती है

अब बता क्या सोच रहा है ... आँचल पूछती है

माँ मैं सोच रहा हुईं माँ के साथ मुझे भी जाना चाहिए था ... अर्जुन बोलता है

ओह्ह मेरा बीटा

सही सोच रहा है मेरा बीटा .... हां दीदी के साथ जाना चाहिए था

अब दीदी को तुम्हारी ज़रूरत है

आँचल खुश होकर बोलती है आवर अर्जुन के बालों को सहला देती है

ठीक है चल सोते है काफी रात हो गयी है मुझे भी नींद आ रही है .... आँचल बोलती है

आप चलिए मैं अभी आया

....... अर्जुन बोलता है

मैं जानती हुईं तो मेरे सामने hi अब से सिगरेट मत पिने लग जाना नहीं तो मरूंगी

आँचल जाती हुई बोलती है जो अर्जुन मुस्कुरा देता है

आँचल के जाने के बाद अर्जुन एक आवर सिगरेट निकल कर पिता है आवर निचे आ जाता है आवर अपने रूम मैं न जाकर गीता दीदी की रूम मैं जाने को होता है मगर गीता दीदी के साथ अंजलि को सोता हुआ देख कर अर्जुन अपने रूम मैं आ जाता है आवर सो जाता है

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अगली सुबह पीतमपुरा मैं

मालकिन कॉफ़ी

राखी देवी सो रही होती है तभी बहार से एक लड़की की आवाज़ आती है जो राखी देवी उठ जाती है

मालकिन कॉफ़ी

राखी देवी आँखें मसलती हुई गेट खोल देती है आवर जाकर फिर से बीएड पर बैठ जाती है

मालकिन ये लीजिये कॉफ़ी ..... कॉफ़ी पीकर आप फ्रेश हो जाइये मैं नास्ता लगा देती हुईं

वह लड़की बोलती है

तू फुलवा है न ... राखी देवी कॉफ़ी पीती हुई बोलती है


जी मालकिन मैं फुलवा हुईं .. आप को मेरा नाम अभी भी याद है

फुलवा खुश होती हुई बोलती है

हां तेरी नाम मुझे अभी भी याद है तुझे मैंने अपने हाथों मैं लेकर खेलाया है _ आवर सुन तू मुझे मालकिन नहीं चची कह कर बुला सकती है समझी

राखी देवी कहती है

ठीक है मालक .... चची फुलवा बोल कर चली जाती है वही राखी देवी मुस्कुरा देती है

राखी देवी फिर बाथरूम मैं चली जाती है

राखी देवी बाथरूम से सिर्फ टॉवल मैं निकल कर रूम मैं आती है आवर आईने के सामने कड़ी हो जाती है आवर टॉवल से अपनी भींगी हुई बदन को पूछने लगती है


वही गाओं की दूसरी हवेली मैं एक लड़की बाथरूम से नंगी hi निकलती है आवर आईने के सामने सोफे पर बैठ जाती है आवर आईने के दराज़ मैं से आयल की बोतल निकल कर बोतल से बहुत सारा तेल लेकर अपनी जिस्म पर गिरा लेती है आवर अपनी जिस्म पर ऊपर से निचे तक मलने लगती है उस लड़की की जिस्म इतनी खूबसूरत होती है की कोई औरत भी उसकी जिस्म को देख ले तो उसकी छूट मैं खुजली हो जाये वह लड़की आईने मैं खुद को देख कर मुस्कुरा रही होती है आवर अपनी हाथ चुकी के ऊपर रख कर निचे की तरफ ले जाने लगती है उसकी जिस्म पर तेल्ल लगने से लड़की की जिस्म हिरे की तरह चमक रही होती है भगवन ने उस लड़की को बड़ी hi धयान से बांये हुए होते है उस लड़की की चाँद सा चेहरा आवर बहुत hi खूबसूरत जिस्म भगवन ने वरदान दिए होते है वह लड़की एक ओरेंगे कलर की पतली सी कपडा जिस्म पर दाल लेती है


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वह लड़की अपनी जिस्म को कभी आगे तो कभी पीछे से देख देख कर मुस्कुरा रही होती है वह लड़की अचानक उठ कर अपनी दोनों टंगे फैला लेती है

Ahhhhhhhhhh ओह्ह माय गॉड

वह जैसे hi दोनों टंगे फैलाती है ये आवाज़ उस रूम के खुदकी से निकलती है मगर वह आवाज़ लड़की के कानो तक नहीं आती है
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वह लड़की अपनी जिस्म को मसलती हुई अपनी जिस्म को हर जंगल से देखती है उस लड़की को अपनी जिस्म पर बहुत गर्व हो रही होती है

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhbhhhhhhhhhhhhh

वह लड़की अपनी जिस्म को निहारने मैं खोई हुई होती है तभी उसके कानो मैं किसी की आठ सुनाई देती है वह लड़की झट से पहनी हुई कपडे को लेकर छूट छिपा लेती है मगर उस लड़की की टाइट चुकी अभी भी दिख रही होती है वह लड़की झट से अपनी कपडे को ठीक से पहन कर खिड़की की तरफ जाती है मगर खुदकी के पास कोई नहीं होता है वह लड़की अपनी खुली हुई खिड़की बंद कर देती है


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ुम्माआआआआ वह सब सही कहते है मेरी जैसी कोई नहीं होगी

वह लड़की आईने मैं खुद को देखती हुई चुम्मी लेती हुई बोलती है आवर अपने कपडे पहने लगती है

वही हवेली के थोड़ी दूर एक छोटा सा बगीचे मैं 2 लड़के बैठे हुए होते है आवर दोनों की शैशे ज़ोर ज़ोर से चल रही होती है

क्या हुआ पिंटू हवा निकल गयी न तेरी साला बस देख कर hi फुस हो गया .... दूसरा लड़का हस्ते हुआ कहता है

साला इसमें मेरी क्या गलती है वह इतनी खूबसूरत है की आअह्हह्ह्ह्ह कोमल

साला तुझे अच्छे से पता है मैं लड़कियों की किस तरह चीखे निकलता हुआ मगर आज कोमल को नंगी देख कर पता नहीं कैसे मेरा पानी hi निकल गया

पिंटू कोमल की जिस्म को याद करते हुआ बोलता है जिससे पिंटू का हाथ खुद hi अपने लैंड पर चला जाता है

है है है है

सेल वह 440 वाल्ट की चिंगारी मरती है जो छूटे hi ज़मीन पकड़ना परता है

पिंटू हवेली मैं तो सभी एक से बढ़ कर मॉल है मगर उन सभी को बस कोमल hi ाएसि है जिसकी खूबसूरत किसी से बराबरी नहीं किया जा सकता है गजब की मॉल है साली वह

देखा नहीं उसकी चुकी कितनी बड़ी बड़ी थी आवर टाइट भी लगता है कोमल अपनी चुकी को दबती काम आवर सहलाती जाएदा है तभी तो उसकी चुकी बड़े तो हो रहे है मगर टाइट भी है ... वह दूसरा लड़का भी अपने लैंड को मसलता हुआ बोलता है

सही कह रहा है रिंकू कोमल की जिस्म एक आग है मैं तो उसे देख कर hi पागल सा होने लगता है कभी कभी मन करता है साली को कॉलेज मैं hi पटक कर पेल दूँ मगर फिर ये सोच कर नहीं कर पता है हुईं के उसका बाप इस गाओं का ठाकुर है वह मेरा पूरा खंडन खतम कर देगा ...... पिंटू बोलता है

पिंटू तू चिंता न कर उस कोमल को हम दोनों मिल कर उसकी छूट आवर गांड फाड़ेंगे बस मेरा काम वह मुंसी कर दे ..... रिंकू मुस्कुराते हुआ बोलता

क्या बोल रहा वह मुंसी तेरा कौन सा काम करेगा आवर क्यू ..... पिंटू थोड़ा मुंह बना कर पूछता है

क्यू के पिंटू को अच्छे से पता होता है वह मुंसी कितना हरामी है वह बिना कोई फायदे के रिंकू का कौन सा काम करेगा

पिंटू मुंसी बता रहा था हवेली मैं एक नौकर की ज़रूरत है तो मैंने बोल दिया है काम करने के लिए मुंसी बोलै है कल तक बताने के लिए

अगर मैं उस हवेली मैं गया तो समझले उस हवेली की साडी छूट गांड मैं बस हम दोनों का लैंड जायेगा ..... रिंकू कहता है

रिंकू ये तो बहुत अच्छा सोचा है भाई तुमने Aahhhhhhhhhhh कोमल रानी

पिंटू कोमल का नाम लेकर अपना लैंड फिर से मसल देता है

अच्छा पिंटू मैं अभी घर जाता हुईं कल मिलते है

रिंकू बोल कर चला जाता है

साला कुछ तो झोल हुआ है रिंकू के साथ आखिर मुंसी इसके काम करने के लिए मान कैसे गए

पता लगाना hi पड़ेगा .... पिंटू मन मैं सोचता है आवर उठ कर रिंकू के पीछे चल पड़ता है ताकि पता कर सके रिंकू अभी कहा जा रहा है
 
अपडेट ..... 73



पिंटू उस बगीचे से निकल कर रिंकू के पीछे जाने लगता है पिंटू अभी बगीचे से निकल कर सड़क पर आता hi है तभी पिंटू की नज़र सामने से आ रही औरत पर नज़र जाती है आवर पिंटू एक जगह रुक जाता है


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अरे बस ये कौन है क्या गर्म जवानी है साली की अह्हह्ह्ह्ह मेरा लैंड

सामने से आ रही औरत को देख कर पिंटू मन मैं बोलता है आवर पिंटू अपना लैंड पकड़ लेता है क्यू के पिंटू का लैंड फुल हार्ड खड़ा हो चूका होता है जो पिंटू को अपने लैंड मैं दर्द महसूस होने लगता है

क्या रे पिंटू यह क्या कर रहा है

पिंटू अपना लैंड दबाने की कोशिश कर रहा होता है तभी उसके कानो मैं ये आवाज़ जाता है तो पिंटू थोड़ा हड़बड़ा जाता है

कुछ नहीं हरिया चाचा घर जा रहा था


पिंटू बोलता तो हरिया चाचा से है मगर पिंटू की नज़र अभी भी पास आ चुकी औरत पर होती है जो वह औरत पिंटू के पास कड़ी होकर पीछे की तरफ देख रही होती है

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औरत की पीछे की तरफ निकली हुई गांड को देख कर पिंटू के माथे पर पसीने आने लगते है पिंटू एक बार फिर से अपना लैंड दबा देता है

आह्ह्हह्ह्ह्ह

पिंटू अपना लैंड दबाते hi एक बार फिर से सिसक पड्रता है


अब क्या हुआ पिंटू कहर क्यू रहा है .... हरिया चाचा पूछते है

चाचा वह पेअर मैं थोड़ा दर्द है .... चाचा ये चची कौन है


पिंटू अपने माथे पर आया हुआ पसीने को साफ करता हुआ पूछता है मगर पिंटू की नज़र अभी भी उस औरत की फुटबॉल की तरह गांड पर होती है

ये तेरी मालकिन है जिस खेत मैं तेरी माँ काम करती है वह साडी खेत इन्ही की है ठाकुर विजय सिंह की बहु है ये राखी देवी .... हरिया चाचा बोलते

नमस्ते मालकिन ... पिंटू हाथ जोड़ते हुआ बोलता

वह औरत आवर कोई नहीं राखी देवी hi होती है जो हरिया चाचा के साथ खेत देखने जा रही होती है

वही राखी देवी सिर्फ सर हिला देती है आवर आगे चलने लगती है पिंटू वही खड़ा होकर राखी देवी को जाते हुआ देखने लगता है

अरे बस मैं तो सोच रहा था कोमल से खूबसूरत कोई होगी hi नहीं मगर ये मालकिन तो बहुत खूबसूरत है ये इस उम्र मैं इतनी बवाल लग रही है तो जवानी मैं Ahhhhhhhhhhhhh मेरा लैंड

सेल इतना फड़फड़ा क्यू रहा है आह्ह्हह्ह्ह्ह साली की क्या गांड है मन कर रहा है जाकर पटक कर इसकी गांड मैं लैंड दाल दूँ

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaàaaaaaaaaa

अचानक पिंटू सिसकता हुआ बैठ जाता है आवर पिंटू का जिस्म कंपनी लगता है


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दरअसल राखी देवी चलती हुई अचानक hi पलट जाती है आवर पलटती भी है इस अदा से की राखी देवी की रसमलाई जैसी गांड का पूरा छाप दिखने लगता है जिसे देख कर पिंटू का लैंड बर्दाश्त नहीं कर पता है आवर उलटी कर देता है

ये आज कल के बच्चे भी न .... राखी देवी पिंटू को देख कर मन मैं बोलती है आवर हरिया चाचा के साथ आगे निकल जाती है

वही पिंटू अपना सरत खोल कर कमर पर बांध लेता है ताकि उसके लैंड ने जो उलटी किया है वह कोई देख न ले

क्या गांड है मालकिन की

आह्ह्ह्हह्ह बस आज लैंड का पानी भी जयादा निकल गया लगता है

पिंटू दर्द मैं सिसकते हुआ बोलता है आवर घर की तरफ निकल पड़ता है

राखी देवी खेत पर पहुँच चुकी होती है राखी देवी को देख कर कई साडी औरतें राखी देवी के पास आ जाती है आवर राखी देवी को नमस्ते करती है जो बदले मैं राखी देवी भी उन सभी को नमस्ते करती है

राखी देवी को देख कर वह सभी गाओं की औरतें बहुत खुश होती है

आप सब को पता चल गया होगा की मेरी ज़मीन मुझे मिल चुकी है तो आप सब अपनी खेत समझ कर पूरी लगन से काम कीजिये आप सब जितनी म्हणत करेंगी उतनी hi फसल अच्छी होगी


मैं वडा करती हुईं जितनी मज़दूरी आप सबको पहले मिलती थी उससे मैं जयादा hi दूंगी .... कभी भी कोई मुसीबत मैं हो मुझे आप सब बता सकती है मुझे आप की मदद कर के अच्छा लगेगा

राखी देवी मुस्कुराती हुई उन सभी औरतों से बोलती है जो वह सभी गाओं की औरतें बहुत खुश हो जाती है

राखी देवी उन औरतों के साथ आगे जाकर फसल देखने लगती है

वाओ वाओ कोमल दी आप बहुत hi खूबसूरत लग रही है

कोमल रूम से निकलती है की एक लड़की बोल पड़ती है आवर कोमल के गले लग जाती है

छोटी तेरी ये हर दिन की है मुझे देखि नहीं की तारीफ करने लग जाती है

कोमल मन hi मन खुश होती हुई बोलती है आवर अपनी छोटी बहन के गाल पर प्यार से मार देती है

दी सच मैं आप बहुत सुन्दर है मैं झूटी तारीफ नहीं करती .. ठीक है आप को अच्छा नहीं लगता तो मैं नहीं करुँगी .... कोमल की छोटी बहन थोड़ी रूठने जैसी सकल बना कर बोलती है

छोटी ये किसने कहा तेरी तारीफ मुझे अच्छी नहीं लगती मुझे बहुत अच्छी लगती है मगर मुझे तेरी बात थोड़ी बुरी भी लगती है ... कोमल उदासी जैसी सकल बना कर बोलती है

डीई आप को मेरी बात बुरी क्यू लगती है आप मुझसे प्यार नहीं करती ... कोमल की छोटी बहन मुंह बना कर बोलती है

कौन बोलै मैं तुझसे प्यार नहीं करती मैं तुझसे इतनी प्यार करती हुईं की जब कोई मेरी तारीफ तेरे सामने करता है तो मुझे बुरा लगता है .... क्यू के मेरी नज़र मैं मेरी गुड़िया hi सबसे सूंदर आवर खूबसूरत है

कोमल की बात सुन कर उसकी छोटी बहन खुश हो जाती है आवर कोमल को आवर ज़ोर से गले लग जाती है

नैना नैना कहा है जल्दी आ .... देख चची बुला रही है जल्दी जा कोमल बोलती है

ओह्ह्ह ये मम्मी भी :नैना थोड़ी गुस्से से बोलती है आवर अपनी माँ की रूम मैं चली जाती है

पापा वह सहर जाना था ..... कोमल थोड़ी डरते हुआ सामने बैठे अपने पापा ठाकुर राजन सिंह से कहती है जो दिंनिंग टेबल पर बैठ कर नास्ता कर रही होती है

(कोमल सिंह)


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आगे 24 राजन सिंह की दूसरी बेटी भगवन ने कोमल को बहुत hi कोमलता से बनाया है कोमल की जिस्म ऊपर से निचे तक बिलकुल सेम hi नज़र आता है लेकिन भगवन ने कोमल की खूबसूरती आवर बढ़ने के लिए कोमल की साइन को ऊपर की तरफ आवर कोमल की गांड पीछे की तरफ निकल कर कोमल की जिस्म को वह खूबसूरती दे दिए के कोमल को देख कर बुद्धि औरत की भी छूट मैं खुजली होने लगती है

कोमल घर मैं सभी से प्यार करती है मगर वह अपनी चाचा की लड़की ननिअ से बहुत प्यार करती है क्यू की नैना घर मैं सबसे छोटी है आवर एक घर मैं सबसे छोटा जो होता उसे हर कोई hi प्यार करता है

बड़े पापा प्लीज जाने दीजिये न प्लीज

अभी राजन सिंह कुछ बोलते उसके पहले hi ननिअ चहकती हुई बोल पड़ती है आवर राजन सिंह के करीब जाकर राजन सिंह का पीठ दबाने लगती है छोटी बच्ची की तरह जो राजन सिंह मुस्कुरा देते है

ठीक है छोटी मालकिन साहिबा .. आप को भला मैं कैसे मन कर सकता हुईं


मैं लखन को बोल देता हुईं वह लेकर चला जायेगा ... राजन सिंह कहता है जो नैना के साथ कोमल आवर पास बैठी सुमन भी खुश हो जाती है

(ननिअ सिंह )


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(आगे 20 सल्ल ) नैना राजन सिंह की छोटे भाई रंजीत सिंह आवर पुष्प सिंह की बेटी है

नैना बिलकुल बेबी डॉल की तरह होती माशूम hi पारी वह अपनी बड़ी बहनो से बहुत प्यार करती है मगर नैना अपनी सबसे बड़ी बहन से थोड़ा जयादा प्यार करती है

(सुमन सिंह)


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(आगे 22 सल्ल ) रंजीत सिंह आवर पुष्प सिंह की बड़ी बेटी

सुमन थोड़ी शर्मीली टेप की है वह बहुत काम hi बात करती है वह जयादा अपने रूम मैं रहती है आवर पढाई करती है वह भी अपनी बहनो से प्यार करती है मगर वह जाता नहीं पति है आवर ये बात कोमल आवर नैना को भी पता होती है मगर फिर भी वह चाहती है उनकी बहन उनके साथ थोड़ी हसी मजाक करे मगर सुमन नहीं कर पति है हां कभी कभी वह साथ हॉल मैं टीवी देखने बैठती है तो बाते कर लेती है


रंजन सिंह की बड़ी बेटी की जब एंट्री होगी तो उसका परिचय हो जायेगा ....

भाई लोगों अब ये स्टोरी जयादा इसी गाओं से चलेगी


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माँ .... माँ ..ओह्ह सॉरी ... सॉरी माँ

अर्जुन आँचल को पुकारता हुआ रूम मैं चला जाता है आवर अर्जुन जैसे hi रूम के अंदर जाता है सॉरी बोल कर घूम जाता है

दरअसल अर्जुन जैसे hi रूम मैं जाता है अपनी ममी माँ को सोफे पर बैठा हुआ पता है जो उसकी ममी माँ किसी सोच मैं घूम होती है आवर आँचल की पल्लू साइन से निचे गिरी हुई होती है आवर आँचल की दो अनमोल चुकी आधी नंगी दिख रही होती है जो अर्जुन झट से सॉरी बोलते हुआ घूम जाता है


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वही आँचल अपनी पल्लू साइन पर रख लेती है

कोई बात नहीं बीटा ..... क्या चाहिए आँचल साड़ी ठीक करती हुई बोलती है

माँ भूख लगी है .... अर्जुन बिना घूमे hi बोलता है

ठीक तू बैठ मैं अभी खाना लेकर आती हुईं ...... आँचल बोलती है आवर रूम से जाने लगती है

वही अर्जुन अपनी ममी माँ की बीएड पर बैठ जाता है

आँचल जैसे hi गेट पर जाती है पलट कर अर्जुन को देखती है जो अर्जुन अभी भी सर निचे hi किया हुआ होता है जो आँचल थोड़ी मुस्कुरा कर चली जाती है


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ओह मेरा बचा जाते हुआ आँचल मन मैं सोचती है

अर्जुन बीएड पर बैठा हुआ होता है के अर्जुन का हाथ अपने आप hi अपने लैंड पर चला जाता है

माँ की छाती कितनी गोरी थी आवर उनका वह कितना बड़ा था

बस ये क्यू खड़ा हो रहा है ..... मैं भी क्या सोच रहा हुईं ..... वह मेरी माँ है .... मैं क्या सोच रहा हुईं वह मेरी माँ है

अर्जुन अपने लैंड को खड़ा होते हुआ पता है तो थोड़ा घबरा जाता है आवर अर्जुन को बहुत दुःख भी होता है

तब तक आँचल खाना लेकर आ जाती है आवर अर्जुन को खाना दे देती है आवर पास मैं बैठ जाती है

वही अर्जुन खाना खाने लगता है

अर्जुन खाना खा रहा होता है तभी अर्जुन की नज़र एक बार फिर से अपनी माँ पर नज़र जाती है आवर इस बार अर्जुन अपनी नज़र नहीं हटाता है आवर अपनी ममी माँ की कातिलाना छाती को गौर से देखने लगता है


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वही आँचल अर्जुन के सामने बैठ कर अपनी हाथों मैं पहनी हुई चूड़ियों को बड़े hi धयान से देख रही होती है मगर आँचल को ये धयान नहीं जाता है की इस बार भी उसकी पल्लू साइन से हटी हुई है आवर उसकी नंगी चुकी दिख रही है जिसे देख कर उसके लादले की हालत ख़राब हो रही है

अर्जुन खाना कहते हुआ अपनी ममी माँ की छाती को निहार रहा होता है जिसे अर्जुन का लैंड आवर टाइट होने लगता है

अर्जुन क्या कर रहा है भूल मत वह तेरी माँ है जिसे तू अपनी माँ से भी जयादा प्यार करता है

अर्जुन को जैसे hi ये अहसास होता है अर्जुन अपनी नज़ारे हटा लेता है


अरे क्या हुआ पूरा खाना खा .... अर्जुन को खाना छोड़ते हुआ देखती है तो आँचल बोलती है

माँ हो गया .... अर्जुन इतना बोल कर रूम से चला जाता है

अर्जुन सीधे अपनी रूम के बाथरूम मैं जाता है आवर हाथ धोने लगता है

अह्हह्ह्ह्ह बहुत दर्द कर रहा है क्या करूँ दीदी के पास जॉन की नहीं अभी रात होने मैं बहुत टाइम है

आह्ह्ह्हह्ह

माँ वह कितनी बड़ी बड़ी थी अह्ह्ह्ह माँ बहुत खूबसूरत है उनकी जिस्म अह्ह्ह्हह्हह

अर्जुन हाथ धोने के बाद hi अपना लेंड पकड़ लेता है आवर अपनी ममी माँ को याद करते हुआ लैंड को सहने लगता है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मैं आवर नहीं रुक सकता मुझे दीदी के पास जाना होगा

अर्जुन मन मैं सोचता है आवर अपने रूम से निकल कर अपनी गीता दीदी की रूम मैं चला जाता है

अपनी ममी माँ की जिस्म को देख कर अर्जुन के अंदर आज इतनी हवस आ चुकी होती है के वह भूल जाता है अभी दिन है आवर उसकी गीता दीदी की रूम के बगल मैं hi उसकी ममी माँ की रूम है वह कभी भी आ सकती है गीता को देखने के लिए की उसकी तबियत कैसी है

अर्जुन गीता दीदी की रूम मैं जाते hi गेट बंद करते है

तभी अर्जुन की नज़र पेट बल सोइ हुई अपनी गीता दीदी की गांड पर नज़र जाती है आवर अर्जुन की आँखों मैं हवस भर जाती है अर्जुन झट से अपना सारा कपडे निकलने लगता है


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वही गीता ब्रा पेंटी मैं सोई हुई होती है मगर सोने की वजह से गीता की चादर निचे आ चुकी होती है जिससे गीता की गोरी गांड झील सी पेंटी मैं दिख रही होती है जिसे देख कर अर्जुन का लैंड झटका मरने लगता है

वही आँचल बर्तन को किचन मैं लेकर धोने लगती है

मेरा बच्चा कितना भोला है आज कल के बच्चे तो कितने बदमाश होते है आवर हम जैसी औरत को देख कर तो वह बेचैन हो जाते है मगर मेरा बच्चा उन लड़कों के जैसा नहीं है ... मेरा बच्चा एक बार देख कर सर निचे कर लिया था


मेरा बच्चा बिलकुल अलग है अगर मेरे बच्चे के जगह कोई दूसरा लड़का होता तो मेरी चुकी पकड़ कर मसल देता .... कास मेरा बच्चा इसको मसलता अह्हह्ह्ह्ह इसे मुंह मैं लेकर पिता Ahhhhhhhhhh मेरा बच्चा पिता तो कितना सकूँ मिलता मुझे

Ahhhhhhhhhhhhhhh आँचल बर्तन धोते हुआ अपनी चुकी दबती हुई सिसकियाँ लेने
लगती है आवर

Aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh


तभी आँचल की कानो मैं एक चीख सुनाई देती है जो आँचल किचेन से भगति है


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अपडेट ..... 74

आँचल भाग कर गीता के गेट पास आ तो जाती है मगर अचानक गीता की आवाज़ सुन कर वही रुक जाती है

अह्ह्ह्हह्हह बाबू दर्द हो रहा है Ahhhhhhhhhh बहु मेरी छूट

गीता की मदहोशी भरी ाएसि आवाज़े सुन कर आँचल को कुछ अजीब लगती है जो आँचल गेट पिट भी नहीं पति है

हे भगवन अंदर क्या हो रहा है गीता बेटी ाएसि बाटे क्यू बोल रही है

.... आँचल मन मैं सोचती है

दीदी आप की छूट अभी भी इतनी टाइट कैसी है .... आह्ह्हह्ह्ह्ह दीदी आप कमल की हो

आँचल की कानो मैं फिर से अर्जुन की आवाज़ आती है आवर अर्जुन की बाते सुन कर आँचल अपनी मुंह पर हाथ रख लेती है

हे भगवन क्या अर्जुन गीता को को ..ददद

आँचल मन मैं सोचती है आँचल की आँखें बड़ी हो जाती है .... आँचल भाग कर दूसरी तरफ चली जाती है

आँचल की धड़कन ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगती आवर शैशे भी तेज़ी से चलने लगती है आँचल को यकीन नहीं हो रही होती है उसका पेयारा बीटा आएसा भी कर सकता है

नहीं नहीं मुझे सायद सुनने मैं गलती हो गयी है गीता बेटी की पेअर मैं दर्द था सायद गीता की पेअर की मालिश कर रहा होगा

 Ahhhhhhhhhhhhhhhhh

आँचल मन मैं सोचती है तभी फिर से आँचल को गीता की अह्ह्ह्ह सुनाई देती है

हे भगवन गुड़िया कहा है


ये ख्याल मन मैं आते hi आँचल अंजलि की रूम मैं जल्दी से जाती है तो देखती है अंजलि की रूम का गेट बंद है तो आँचल थोड़ी रात की शेष लेती है आवर अंजलि की रूम बहार से बंद कर देती है ताकि अंजलि बहार आकर न सुन ले

आँचल फिर से गीता के गेट के पास आती है आवर छोटे हॉल से अंदर देख कर जल्द hi नज़र हटा लेती है

हे भगवन ये कैसे हो सकता है मेरा अर्जुन ितं घटिया काम कैसे कर सकता है

आँचल हॉल से देख कर दांग रह जाती है क्यू के आँचल अनादर देखती है तो अर्जुन बिलकुल नंगा बीएड के निचे खड़ा होकर गीता की टंगे पकड़ कर गीता को छोड़ रहा होता है

आँचल को सिर्फ अर्जुन का गांड hi दिखाई देती है

आँचल अपनी मुंह पर हाथ रख कर गेट के पास बहुत की तरह कड़ी रह जाती है जैसे आँचल के जिस्म मैं कोई जान hi नहीं है आँचल को बहुत दुःख हो रहा होता है की उसका पेयारा दुलारा बीटा इतना निचे कैसे गिर सकता है

आँचल कभी सपने मैं नहीं सोच सकती थी उसका अर्जुन आएसा कर सकता है


आँचल भींगी आँखों मैं आंसू लिए अपनी रूम मैं चली जाती है

वही रूम मैं अर्जुन आवर गीता बीएड पर एक दूसरे के बाँहों मैं लिपट लम्बी लम्बी शैशे ले रहे होते है आवर गीता का हाथ अर्जुन के साथ पर होता है जो गीता सहला रही होती है

दीदी अभी भी दर्द है क्या .... अर्जुन गीता की जिस्म को चूमते हुआ पूछता है

वही गीता शर्म से मुस्कुरा पड़ती है

नहीं अब दर्द नहीं हो रही है ... गीता बोल कर शर्मा जाती है

अह्ह्ह्ह मेरी छूट बाबू तेरा इतना बड़ा आवर मोटा है की किसी औरत की छूट मैं जायेगा तो वह बीएड पर मचलने लगेगी आवर मेरी तो कुंवारी छूट है

मैं hi जानती हुईं कितनी दर्द मैं हुईं .... गीता मन मैं सोचती है

बाबू मुझे बाथरूम जाना है .... गीता उठा कर बाथरूम चली जाती है आवर अर्जुन भी कपडे पहन कर रूम से निकल जाता है

अर्जुन अपने रूम मैं जाता है आवर बीएड पर गिर जाता है

अर्जुन फ़ोन निकल कर देखता है तो पता है वात्सप्प पर कई सरे फोटो आये हुआ होते है

अर्जुन नंबर देख कर समझ जाता है ये वही लड़की की नंबर है जो पहले भी कई साडी फोटो भेज चुकी होती है

अर्जुन जैसे hi वात्सप्प ओपन करता है अर्जुन का लैंड एक बार फिर से
तनतना जाता है आवर अर्जुन का हाथ खुद hi लैंड पर चला जाती है


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क्यू के वह लड़की अपनी छूट की कई साडी पिछ भेजी हुई होती है बिलकुल माखन की तरह चिकनी छूट होती है छूट की दोनों होंठ एक दूसरे से चिपकी हुई होती है

इस लड़की की छूट तो गीता दीदी की भी छूट से छोटी लग रही है ... क्या ये लड़की अभी तीन आगे की है .... नहीं मुझे नहीं लग रहा इसकी जिस्म तो गीता दीदी की तरह hi है

Aahhhhhhhhhhhh इसकी जिस्म क्या चीज है .... इसकी चुकी तो

अर्जुन को रहा नहीं जाता है आवर अर्जुन अपना लैंड फिर ज़ोर ज़ोर से सहलाने लगता है

कैसी लगी

अच्छी है

तुम्हे पसंद आई

अर्जुन पिछ देख hi रहा होता है तभी उस लड़की की मस्सगे आने लगते है

आप कौन है .... आप मुझे ाएसि क्यू पिछ भेज रही है ..... अर्जुन तुरंत पूछता है

पहले बताओ तुम्हे कैसी लगी . प्लीज ...... वह लड़की पूछती है जो अभी अपने बीएड पर अभी भी नंगी hi सोइ हुई होती है

अच्छी है ... अर्जुन रिप्लाई करता है लेकिन

रिप्लाई करने के बाद अर्जुन उस पिछ को फिर से देखने लगता है

सिर्फ अच्छी है .... :शाय: लड़की ये पोस्ट करती हुई पूछती है आवर अपनी चेहरे पर थोड़ी मायूसी सी ला देती है

आप की छूट बहुत बहुत पेयरी है आप की छूट देख कर मुझे कुछ हो रहा है आप पास होती तो आप की इस बंद हुई छूट को मैं अपने लैंड दाल कर फाड् देता Aaahhhhhhhhhhh

अर्जुन इतना लम्बा रिप्लाई देता है

वही वह लड़की इतना लम्बा रिप्लाई देख कर बहुत खुश हो जाती है आवर वह फ़ोन मैं लगे हुआ लड़के की पिछ को चूमने लगती है

Ahhhhhhhhhhh मेरी छूट खून खून हो जाएगी फिर तो .... लेकिन सॉरी मैं अपनी छूट मैं तुम्हारा वह नहीं ले सकती हुईं :लाफिंग: ........ वह लड़की रिप्लाई करती है

लड़की का रिप्लाई देख कर अर्जुन का मुंड थोड़ा साद हो जाता है

फिर मुझे अपनी छूट की पिछ क्यू भेज रही है .... अर्जुन थोड़ा गुस्से मैं रिप्लाई देता है क्यू के अर्जुन को बहुत ख़राब लगता है जब लड़की बोलती है उसे छूट नहीं देगी तो

ओह सॉरी मुझे मांफ करना मेरी बात आप को बुरी लगी तो ... लेकिन मैं पहले भी बोल चुकी हुईं मैं अपनी छूट मैं सिर्फ अपने भाई का लैंड लुंगी ..... मगर मेरी इतनी अच्छी जिस्म होने के बाद भी वह मुझे कुछ नहीं करता है

तुम्हारी कोई बहन नहीं है उसकी भी छूट मेरी तरह होगी तुम अपनी बहन की छूट क्यू नहीं फाड् देते ..... वह लड़की सिसकियाँ लेती हुई रिप्लाई करती है

इधर जैसे hi उस लड़की का रिप्लाई अर्जुन देखता है थोड़ा गुस्सा हो जाता है

साली रंडी कुटिया बकवास बंद कर ....... अर्जुन इतना रिप्लाई देकर गुस्से मैं फ़ोन बीएड पर फेक देता है

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पिंटू अभी अपने घर के बगल मैं एक टूटी हुई घर के अंदर होता है जो वह मति का घर होता है मगर कही कही से गिर गया होता है आवर पिंटू उसी घर के एक कोने मैं बैठा हुआ होता है वह पसीने से भिनगा हुआ होता है जैसे बारिश के कुछ बुन्देय गिर कर बंद हो चुकी है आवर पिंटू उस बारिश मैं भींग गया हो

माँ कसम मालकिन की जिस्म किसी पारी से काम नहीं थी उनकी गांड आह्ह्ह्ह साला जब भी याद आ रहा है मेरा लैंड खाद हो रहा है

आह्ह्हह्ह्ह्ह hhhhhhhhhhhh


क्या कातिल नज़र से देखि थी मालकिन ने .......... मालकिन छुडासी औरत लग रही है उनको थोड़ा भी गर्म कर दिया तो वह अपनी छूट मैं मेरा ये लैंड ले लेंगी Ahhhhhhhhhhhhh

पिंटू जहा बैठा हुआ होता है उसके लैंड के निचे ज़मीन कुछ जयादा hi भींग गयी होती है

साला इतना सरका तो कभी नहीं मारा था

आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बस कमर भी दर्द कर रहा है

पिंटू खड़ा होते हुआ बोलता है आवर फिर अपना लैंड पेंट के अंदर दाल कर चैन बंद कर लेता है

मुझे किसी तरह मालकिन के पास जाना होगा तभी मैं उनकी भरी जवानी का मज़ा ले पाउँगा

पिंटू उस घर से निकल कर मन मैं सोचता है

अरे तू मेरे घर क्या कर रहा है पिंटी जैसे hi अपने घर के अंदर जाने को होता है रिंकू को बहार आते देख कर पूछता है

पिंटू मैं नमक लेने आया था ख़तम हो गया है घर पर ... रिंकू बोलते हुआ निकल जाता है

लाजो खाना दे मुझे भूख लगी है पिंटू घर के आँगन से अपनी बहन को आवाज़ देता है

भैया बस नाहा hi लिया है रुकिए मैं देती हुईं ... नहीं तो आप निकल कर खा लो .... लाजो बोलती है

क्या तू नाहा रही है .... पिंटू थोड़ा हैरान होते हुआ बोलता है क्यू के पिंटू को अच्छे से पता होता है उसका दोस्त रिंकू कितना हरामी है

ठीक है तू नाहा मैं निकल कर खा लूंगा ..... लाजो वह रिंकू क्या करने आया था .... पिंटू पूछता है

वह नमक लेने आया था देखिये जयादा तो नहीं ले गया मैं नाहा रही थी तो देखि नहीं .... लाजो बोलती है

वह जयादा नहीं ले गया है ... पिंटू थोड़ा गुस्से मैं बोलता है आवर मन hi मन रिंकू को गली भी देता है

बस रिंकू मेरे घर आज कल कुछ जयादा hi आ रहा है .... पिंटू मन मैं सोचता है आवर खाना निकल कर खाने लगता है

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आँचल अभी भी अपनी रूम मैं होती है आवर आँचल की आँखें भींगी हुई होती है

मैंने खुद देखा है .... मगर मेरा दिल अभी भी नहीं मान रहा है मेरा बीटा इतनी नीच काम कभी नहीं कर सकता है

ज़रूर गीता ने कुछ किया होगा वह दोनों अर्जुन को इतना प्यार करती है के किसी भी हालत मैं उसके पास चली जाती है

उनेह पता नहीं है अर्जुन अब छोटा नहीं है वह बड़ा हो गया है

गीता बेटी की hi गलती होगी ... मुझे गीता से पूछना होगा

आँचल तुझे शर्म नहीं आएगी ये बात पूछने से ..... मन की वह दोनों तेरे बच्चे नहीं है मगर तू उनेह अपना बच्चा मान चुकी है भूल मत ...... आवर तू बस गीता को hi गलत क्यू बोल रही है सायद इसमें अर्जुन की भी कोई गलती हो

हे भगवन मैं क्या करू ....... अर्जुन तूने ये क्या किया बीटा

आँचल बीएड पर सोइ हुई ये साडी बाते सोच रही होती है आँचल को बहुत दुःख हो रही होती है तभी आँचल का फ़ोन बजने लगती है तो आँचल फ़ोन पे नाम देख कर हड़बड़ा जाती है आवर झट से रूम से भगति है आवर अंजलि की रूम के पास आकर रुक जाती है आवर अंजलि की रूम का गेट खोल देती है

माँ आप ने मेरी गेट बंद क्यू की थी ..... कही आप अपने बर्फ को तो घर मैं नहीं बोले थी ....... माँ आप आएसा कैसे कर सकती है

मैं कब से आवाज़ दे रही थी


अंजलि .... गंभीरता सा मुंह बना कर पूछती है आवर आँचल को घूरने लगती है

वही आँचल अंजलि की बात आवर उसे घूरते हुआ देख कर थोड़ी सहम जाती है

आँचल अब अंजलि को क्या जवाब दे समझ मैं नहीं आता है तो आँचल बस अंजलि को देखने लगती है

है है है हाआआआ

देखों कैसे छोटी बच्ची की तरह माँ ने मुंह बना लिया है

माँ मैं बस मज़ाक कर रही थी आप तो दर गयी

ओह मेरी पेरी माँ

अंजलि हस्ती हुई बोलती है आवर आँचल के गले लग जाती है

गुड़िया तूने तो मुझे डरा hi दिया था .... आँचल बोलती है

वैसे माँ आप चाहो तो बर्फ बना सकती है ..... अंजलि गले लगे hi बोलती है

चल हैट पागल लड़की कुछ भी बोलती है .... आँचल बस अंजलि को दूर कर के चली जाती है

क्या हुआ ममी माँ को आज मेरी बात पर वह कोई प्रकिरिया नहीं दे रही है

ममी माँ ज़रूर किसी बात से परेशां है नहीं तो वह मेरी किसी भी बात पर मुस्कुरा देती थी ....

ममी माँ क्या छिपा रही है मुझसे .... मैं पता लगा hi लुंगी मैं भी उनकी hi बेटी हुईं .... अंजलि मन मैं सोचती है
 
अपडेट ...... 75

शाम का वक़्त होने वाला होता है पिंटू अपने घर खाना खा कर कुछ देर आराम करता है आवर फिर अपनी माँ के पास जाने लगता है

पिंटू जब कुछ दुरी पर होता है तो पिंटू की नज़र एक जगह जाती है तो देखता है मुंसी वही खड़ा है आवर पास मैं hi उसकी माँ बैठी हुई है

पिंटू मुंसी को अपनी माँ के पास देख कर थोड़ा बेचैन हो जाता है आवर तेज़ी से अपनी माँ के पास पहुँच जाता है

विमला उसे मैं समझा दूंगा तू मेरी बात मान कर एक बार बोल तो उसे विमला तेरी आधी ज़िन्दगी सुखी से कटेगी ... मैंने देखा तूने बहुत दुःख सहा है

पिंटू जब अपनी माँ के पास जाता है तो उसको मुंसी की ये बात सुनाई देती है

मगर मुंसी जी ..... अरे पिंटू बीटा विमला कुछ बोलती उसके पहले hi अपने बेटे को देख कर चुप हो जाती है

क्या मुंसी चाचा ... क्या पट्टी पढ़ा रहे हो मेरी माँ को .. पिंटू घूरते हुआ पूछता है

जो भी पट्टी पढ़ा रहा था तेरी hi भलाई के लिए .... अपनी माँ से पूछ लेना ... मुंसी इतना बोल कर वह से चला जाता है

माँ वह मुंसी क्या बोल रहा था .... मुंसी के जाने के बाद पिंटू पूछता है

बीटा वह मुंसी जी बोल रहे थे तू अगर कोई नौकरी कर लेता तो वह ठाकुर के पास .... विमला बोलती है

वही ठाकुर के नाम सुन कर पिंटू खुश हो जाता है

क्या ठाकुर के पास माँ .... पिंटू उत्सुकता से पूछता है ठाकुर का नाम सुन कर hi पिंटू के आँखों के सामने कोमल की खूबसूरत जिस्म दिखने लगती है

बीटा वह मुंसी जी बोल रहे थे अगर तू नौकरी करना चाहे तो ठाकुर साहब की गाड़ी चला सकता है क्यू के मोहन का तबियत ख़राब हो गया है ... विमला बोलती है

अपनी माँ की बात सुन कर पिंटू मन hi मन बहुत खुश हो जाता है ...... माँ मैं नौकरी करूँगा बोल देना मुंसी से

वही विमला भी बहुत खुश हो जाती है

अब मज़ा आएगा मैं ठाकुर के घर की हर गदराई हुई गोरी गोरी जिस्म को रगड़ रगड़ कर उनकी छूट की राश निकल दूंगा

मगर ये मुंसी मुझे क्यू ठाकुर के घर काम पर लगा रहा है .... काम की बात तो रिंकू ने किया था .. पिंटू ये बात मन मैं सोचता है मगर उस बात पर जयादा धयान नहीं देता है क्यू के पिंटू का लैंड फूल गर्म हो गया था कोमल की जिस्म को याद कर के

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रात के 10 : पं

सहर के एक घर मैं एक 27 से 28 सल्ल की औरत मैक्सी पहनी हुई रूम मैं आती है आवर बड़े hi अदा से अपनी खोलते हुआ सामने सोये हुए आदमी को देती है

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वह औरत 27 से 28 सल्ल की होती है मगर उसकी जिस्म इतनी गदराई हुई होती है की वह 35 सल्ल की लग रही होती है

उस औरत को देख कर सामने पतले दुबले आदमी का हालत ख़राब हो जाता है वह आदमी उस औरत को देख कर अपना लैंड पकड़ लेता है

वह औरत अपनी मैक्सी निकल कर बीएड पर आ जाती है वह औरत जैसे hi बीएड पर आती है वह आदमी उस औरत को पकड़ लेता है

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

वह औरत आदमी की बाँहों मैं जाते hi सिसक पड़ती है लेकिन वह औरत भी उस आदमी को मज़बूती से उस आदमी को पकड़ लेती है जिससे उस औरत की मोती मोती टाइट चुकी उस आदमी की छाती मैं डाब जाती है जिससे उस आदमी का खड़ा हो चूका लैंड उस औरत की छूट मैं टाच हो जाता है

Aaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh परेम ..... वह औरत उस आदमी का नाम लेते हुआ फिर से सिसक कर बोलती है आवर अपनी गांड पीछे कर लेती है

ओह्ह्ह्ह आरती ूममममम तू ..... वह आदमी उस औरत का नाम लेते हुआ औरत की चुकी को मुंह मैं भर लेता है आवर चूसने लगता है वही वह औरत उस आदमी के सर को सहला कर सिसक रही होती है

वह आदमी उस औरत की चुकी को कभी चुस्त तो कभी दोनों हाथों से एक चुकी को ज़ोर से दबा तेता जिससे वह औरत अपनी चुकी की दर्द से तड़प जाती आवर उस आदमी को दूर करने लगती है

ओह्ह्ह जीई दर्द हो रही है आह्ह्ह्हह आप इसके पीछे क्यू पद आअह्हह्ह्ह्ह जाते है आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ........ वह औरत चुकी की दर्द मैं सिसकते हुआ बोलती है

ओह्ह आरती सच कहु तो उम्म्मा तेरी ये चुकी कमल की है उम्म्मा इसे देख कर मेरी जिस्म की खून तेज़ी से दौड़ने लगती है

Aahhhhhhhhhhhhhh प्लीज धीरे Aahhhhhhhhhhhh


परेम चुकी को आवर भी जोश मैं चूसने दबाने लगता है जिससे आरती बीएड पर तड़पने लगती है

परेम धीरे धीरे आरती की जिस्म को चूमते हुआ निचे छूट तक आ जाता है


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आवर आरती की छूट को देख कर अपना लैंड पकड़ लेता है आरती की छूट बिलकुल चिकनी चमक रही होती है आवर आरती छूट की दोनों होंठ एक दूसरे से सटी हुई होती है जैसे आरती की छूट अभी भी बंद हो

परेम का लैंड इतना टाइट हो जाता है की परेम अपना लैंड आरती की छूट के मुंह पर रख देता है

आह्ह्ह्हह प्लीज रुक जाइये


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आरती अपनी छूट पर हाथ रखती हुई बोलती है

वही परेम आरती को घूरने लगता है

दर्द होगा थोड़ा गिला कर लीजिये न प्लीज


आरती परेम को देखती हुई बोलती है

आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह नहीं आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ये चीटिंग है Ahhhhhhhhhhhhhh

परेम जल्दी से आरती की छूट पर थूक कर लैंड छूट मैं दाल देता है जिससे आरती दर्द मैं तड़प जाती है

वही परेम बिना रुके hi आरती की छूट मैं धक्का मरने लगता है

स्स्स्सस्स्स्स आअह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

आवर ज़ोर से एस्सस

अह्ह्ह्हह मेरी छूट अह्ह्ह्हह आवर ज़ोर से मारिये फाड् दीजिये मेरी छूट को

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह यस यस अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह Sssssssssssss hhhhhhhhhhhh

परेम धक्का मरते मरते हाफने लगता है परेम की माथे पर पसीने की बुन्देय गिरने लगती है लेकिन आरती अभी भी ज़ोर ज़ोर से छोड़ने के लिए बोलती hi हां रही होती है


परेम आरती की भरी जवानी की गर्मी के आगे आवर नहीं टिक पता है आवर आरती की छूट मैं आखिरी धक्का मरते हुआ आरती के ऊपर hi गिर जाता है

रूम मैं एक वक़्त के लिए शांति सी छ जाती है आरती की आँखें एकदम लाल सी हो चुकी होती है आरती की आँखें बता रही होती है वह अभी भी छूट की गर्मी मैं जल रही है आरती प्रेम को बाँहों मैं भर्ती हुई अपनी आँखें बंद कर लेती है

सॉरी आरती आज भी तुम्हे निराश किया ... प्रेम आरती की बाँहों से निकलते हुआ बोलता है

कोई बात नहीं प्रेम .... मुझे बुरा नहीं लगा ....... मैं खुद को शांत कर लुंगी

आरती अंदर से कितनी गर्म है वह खुद hi जानती थी मगर प्रेम का उतरा हुआ चेहरा देख कर आरती को थोड़ा दुखी हो जाती है जो आरती अपनी जिस्म की गर्मी को भूल जाती है आवर एक बार फिर से परेम को बाँहों मैं भर लेती है

सब ठीक हो जायेगा ... तुम आराम करो मैं बाथरूम से आती हुईं

आरती प्रेम के माथे को चुम कर बीएड से उतर कर बाथरूम मैं चली जाती है

आरती बाथरूम मैं जाते hi अपनी छूट मैं 2 ऊँगली दाल देती है

Aahhhhhhhhhhhhhh 2 ऊँगली छूट मैं डालते hi आरती तड़प जाती है मगर छूट से ऊँगली नहीं निकलती है

Ahhhhhhhhhhh मायआ अह्हह्ह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्स ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या करूँ मैं इस छूट की आग को अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

आरती छूट मैं बड़ी hi तेज़ी से ऊँगली करती हुई आहे भर रही होती है

अह्ह्ह्हह हहहह ssssssssss ओह्ह्ह्हह्हह

मैं आवर बर्दाश्त नहीं कर सकती कोई मुझे चाहिए जो मेरी जिस्म की गर्मी बुझा सके आह्ह्ह्हह्ह

कौन है जो मेरी छूट की गर्मी बुझा सकता है आवर मुझे कोई प्रॉब्लम भी नहीं होगी

अह्हह्ह्ह्ह मा Ahhhhhhhhhhh अर्जुन मेरे

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa


चींईईई छियईईई ओह भगवन जीई ये मैं किसे याद कर रही हुईं ...... आरती की जुबान पर जैसे hi अर्जुन का नाम आता है आरती का जिस्म मैं हलचल सी मच जाती है आवर आरती की जिस्म अकड़ने लगती है जो आरती की छूट से पानी गिरने लगती है

आरती वही नंगी hi निचे बैठी 1 मिंट तक कनपटी रह जाती है

ओह गॉड ये इतना सारा

आरती की नज़र जब अपनी छूट पर जाती है तो छूट की बहती हुई पानी को देख कर आरती बहुत हैरान होती है क्यू की आरती की छूट से बहुत सारा पानी निकल गया होता है

आरती कुछ भी कह मगर अर्जुन के नाम से hi तेरी छूट ने इतनी पानी निकल दिया .... अगर वह सामने होता आवर उसका लैंड तेरी छूट मैं जाता तो

नहीं छियईईई चींईईई चींईईई ये मैं क्या सोच रही ...... अर्जुन को मैंने अपना छोटा भाई मन है ....

आरती जल्दी से अपनी छूट को धोती है आवर नंगी hi आकर बीएड पर सो जाती है

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सब ठीक हो जायेगा तू परेशां न हो मैं अंजलि को एहि छोड़ रही हुईं कल फिर आउंगी तो लेकर जाउंगी अंजलि तेरे पास रहेगी तो मुझे याद भी नहीं करेगी ....... राखी देवी बोलती है

वही आँचल बस मुस्कुरा देती है राखी देवी अंजलि को किश कर के चली जाती है

डॉ साहब कैसी है मेरी बची .. वह उठ क्यू नहीं रही है

आँचल डॉ से दरी सहमी सी बोलती है .....

आँचल जी चिंता न करे आप की बेटी बिलकुल थी है ..... सायद वह सुबह से कुछ नहीं खाया है आवर धुप मैं आने से बेहोश हो गयी हो .... लो आप की बेटी होश मैं आ गयी ... डॉ कहता है

ओह मेरी गुड़िया तूने तो मुझे डरा hi दिया था ... तुझे कुछ हो जाता तो ... आँचल अंजलि को साइन से लगाती हुई बोलती है

आँचल जी अब आप अपनी बेटी को लेकर जा सकती है ... डॉ बोलता है तो आँचल पहले बिल देती है आवर फिर अंजलि को लेकर घर की तरफ चल पड़ती है

माँ आप मुझसे नाराज़ है ... अंजलि बड़ी hi प्यारा सा मुंह बना कर पूछती है

हां मैं नाराज़ हुईं क्यू के आप अब मुझसे झूट बोलने लगी हो

आँचल एक नज़र अंजलि को देखती है आवर मुंह बना कर बोलती है

फिर मैं भी आप से नाराज़ हुईं ... हुईं .... मुझे बात भी नहीं करनी आप से

अंजलि बोलती है आवर अपनी नाक चढ़ा कर दूसरी तरफ घूम कर बैठ जाती है ......... जो आँचल को बहुत हैरानी होती है

अभी तो वह मुझे मन रही थी फिर गुस्सा क्यू हो गयी

दोनों माँ बेटी दोनों तरफ मुंह कर के बैठ गयी होती है 5 मिंट होने के बाद भी अंजलि आँचल से नहीं कुछ बोलती है तो आँचल को अच्छा नहीं लगता है

ठीक है फिर हम पहले बातें कर लेते है ..... मैं आप से इस लिए नाराज़ हुईं ... क्यू के आप के खाना न खाने से आप के साथ क्या हो गया था आप को पता है .... आप ने खाना क्यू नहीं खाया

माँ आप ने भी तो खाना नहीं खाया सबह से

आँचल बोल कर चुप hi होती है के अंजलि बोल पड़ती है

ओह no मतलब ये सुबह से मुझे hi देख रही है मुझे इसके सामने उस तरह नहीं रहने चाहिए था ......


आँचल अपनी सर पर हाथ रख कर मन मैं सोचती है आवर तभी आँचल दिन के बारे मैं याद करने लगती है

सब ठीक हो जायेगा तू परेशां न हो मैं अंजलि को एहि छोड़ रही हुईं कल फिर आउंगी तो लेकर जाउंगी .... अंजलि तेरे पास रहेगी तो मुझे याद भी नहीं करेगी ....... राखी देवी बोलती है

वही आँचल बस मुस्कुरा देती है राखी देवी अंजलि को किश कर के चली जाती है

राखी देवी जाने के बाद आँचल अंजलि को लेकर रूम मैं चली जाती है आवर बीएड पर सो जाती है वही अंजलि भी बीएड पर सो जाती है

जब आँचल को लगता है अंजलि सो गयी है तो वह रूम से निकल कर हॉल मैं आती है आवर रोने लगती है वही अंजलि भी आँचल के जाते hi रूम से निकल जाती है आवर वह हॉल मैं आँचल के पास जाती है तो रोटी हुई देखती जो अंजलि भी आँचल से लिपट जाती है


माँ आप क्यू रो रही है .... प्लीज मत रोइये न .... अंजलि बड़ी हो मासूमियत से बोलती है

आप को आयी क्यू लग रहा है ... मेरी आँख मैं
कचरा चला गया था इस लिए मुझे रोना आ रही है

ठीक है मैं खाना लेकर आती हुईं आप एहि
बैठों

आँचल बोल कर किचेन मैं चली जाती है

ये लो दूध आवर अल्लू के पराठे ... जल्दी से खाएं मैं नाहा कर आती हुईं फिर हम दोनों मार्किट चलेंगे


आँचल फ्रेश होकर रूम से निकलती है तो देखती है अंजलि रूम मैं नहीं है तो बहार आकर देखती है तो दोकान मैं अपनी नानी के साथ होती है

मगर अंजलि जैसे hi आँचल को देखती है वह फिर से आँचल के पास आ जाती है आवर कुछ देरी के बाद वह दोनों मार्किट के लिए निकल जाती है

माँ ......

अंजलि की आवाज़ से आँचल सुबह के यादों से बहार आती है आवर अंजलि को बाँहों मैं भर लेती है

आँचल के आँखों मैं ख़ुशी की आंसू झलक पड़ती है ये सोच कर के अंजलि उसे कितना प्यार करती है जो उसे दुखी देख कर पूरा दिन खाना नहीं खाई

माँ बताइये न क्या हुआ था आप क्यू रो रही थी आवर पूरा दिन खाना नहीं खाया .... अंजलि पूछती है

अंजलि की हरकत को देख कर आँचल की वैसे भी हालत ख़राब हो चुकी होती है

आँचल न कहते हुआ भी अंजलि को बता देती है वह उसके मां के लिए दुखी है जो अंजलि मान जाती है ...

ी लव यू मेरी प्यारी माँ .... अंजलि बोलती हुईं आँचल को किश कर देती है

ुम्माआआआ

ी लव यू मेरी प्यारी सी नन्ही पारी

ummaaaaaaaaaaaaaa

हे भगवन कही दिन मैं अंजलि बेटी ने मुझपे धयान तो नहीं दिया .... आँचल की अचानक hi नींद खुल जाती है आवर आँचल के मन मैं ये ख्याल आता है

आँचल थोड़ी घबरा भी गयी होती है

अगर उसने मुझे नोटिस की होगी तो वह चैन से सो नहीं रही होगी मुझे जाकर देखनी चाहिए ..... आँचल मन मैं सोचती है आवर मैक्सी पहन कर रूम खोलने लगती है

हे भगवन ये लड़की ने नोटिस किया है

गेट खोलते hi आँचल हैरानी से बोलती है

_________________________________
 
अपडेट .... 76

Aahhhhhhhhhhhhhhhh
Sssssssssssssssssssssssssssssssssss

आँचल फ्रीज से पानी की बोतल निकल रही होती है तभी आँचल को अर्जुन पीछे से आकर पकड़ लेता है जो आँचल सिसक कर चुप रह जाती है ..... वही अर्जुन धीरे धीरे आँचल की चिकनी पेट पे अपना हाथ फेरने लगता है

आँचल बस सिसकियाँ लेती हुई बहुत की तरह कड़ी रहती है

अर्जुन आँचल को पूरी तरह बाँहों मैं पकड़ कर आँचल के गर्दन को चूमने लगता है

Sssssssssssss

आँचल गर्म शैशे छोड़ती हुई मदहोशी मैं सिसक पड़ती है

अर्जुन आँचल के पेट को सहलाते हुआ वह अपना हाथ ऊपर की तरफ ले जाने लगता है

अर्जुन का हाथ अपनी चुकी की तरफ बढ़ते हुआ अहसास कर के आँचल अर्जुन का हाथ पकड़ लेती है मगर कुछ बोलती नहीं है

अर्जुन भी झट से आँचल को अपनी तरफ घुमा लेता है आवर तभी आँचल आवर अर्जुन की नज़र एक दूसरे से टकराती है जो आँचल hi अपनी नज़ारे निचे कर लेती है

अपनी ममी माँ को नज़ारे चुराते हुआ देख कर अर्जुन आँचल को फ्रीज से सत्ता देता है

Ahhhhhhhhhhhhhhh

आँचल एक बार फिर से सिसक पड़ती है


वही अर्जुन आँचल की चेहरे को अपनी दोनों हाथों से पकड़ कर देखता है जो आँचल भी अर्जुन की आँखों मैं देखने लगती है

आँचल की आँखों मैं बेपनाह शर्म होती है आँचल की धड़कन तेज़ी से चल रही होती है आँचल अपनी हाथ से अपनी खुद की मैक्सी पकड़ कर मसल रही होती है

अर्जुन अपनी ममी माँ की आँखों मैं देखते हुआ अचानक hi अपना होंठ आँचल के होंठ पर रख देता है

हूऊईन्न्नन्नन्नन्न

अर्जुन के होंठ अपने होंठ पर पाकर आँचल की चिहुंक पड़ती है आँचल का हाथ खुद hi अर्जुन के साथ पद चला जाता है

अर्जुन आँचल की गुलाबी होंठ को चूसने लगता है वही आँचल बस अर्जुन के होंठ चूसने देती है मगर वह कुछ करती नहीं है

अर्जुन आँचल को किश करते हुआ एक हाथ को निचे ले जाकर आँचल की पेंटी को पकड़ कर निचे करने लगता है

Ahhhhhhhhhhhh Nahiiiiiiiiiiiiiiiii

माँ क्या हुआ आप ठीक है न माँ

आँचल की आवाज़ सुन कर अंजलि झट से उठ जाती है आवर आँचल को पकड़ लेती है पूछती हुई

आँचल की जिस्म कैंप रही होती है आँचल को जिस्म पसीने से भींग चुकी होती है

पाए पानी


आँचल हिचकती हुई बोलती है

अंजलि बगल मैं राखी हुई बोतल उठा कर आँचल को देती है

माँ आराम से ..... अंजलि आँचल से बोलती है

अंजलि जैसे hi आँचल को पानी देती है आँचल एक
शेष मैं hi पूरी बोतल पिने लगती है आवर पि भी जाती है

अंजलि बोतल लेकर टेबल पर रख देती है

माँ आप ठीक है .... अंजलि अपनी ममी माँ के सर के निचे आ गयी बालों को ठीक करती हुई पूछती है

हां गुड़िया .... मुझे नींद आ रही है

आँचल बस इतना बोल कर फिर से बीएड पर लेट जाती है

अपनी ममी माँ की हालत को देख कर अंजलि अभी आवर कुछ पूछने की कोशिश नहीं करती है आवर अंजलि भी आँचल को पीछे से पकड़ कर सो जाती है

माँ के साथ क्या हुआ है ... दोपहर से देख रही हुईं वह परेशां लग रही है

उस वक़्त भी सुबह बताने को बोल कर साथ मैं सो गयी .... मैं किसी तरह सुबह मैं माँ से पूछ कर hi रहूंगी .... क्या हुआ है इनके साथ

अंजलि मन मैं सोचती है

हे भगवन .... ये कैसा सपना था

इतना खराब घटिया सपने मेरे दिमाग मैं
आया भी कैसे

मेरा अर्जुन आएसा कभी कर भी नहीं सकता है

वह मेरा बच्चा तो मुझे पेटीकोट मैं भी देख कर अपनी नज़रे निचे कर लेता है

अह्ह्ह्हह्हह चींईईई ये क्या है ये कैसे हो सकता है ममममम मैं

आँचल का हाथ जैसे hi छूट पर जाती है वह अपनी पेंटी गीली पति है जो आँचल हैरान हो जाती है

आँचल अर्जुन तेरे बारे मैं क्या सोचता है वह तो भगवन hi जाने मगर तू ज़रूर अर्जुन के साथ कुछ सोच रही है आवर सायद तुझे अच्छा भी लग रही है .... तभी तो तेरी छूट पानी बहा रही है

आँचल तू सपने मैं hi अर्जुन के अहसास पाकर झाड़ सकती है तो यकीनन तेरे मन मैं कही न कही अर्जुन को तू एक मर्द की नज़र से देखने लगी है

आँचल सोच जब अर्जुन तेरी छूट मैं लैंड डालेगा तो तेरी छूट कितनी पानी
बहायेगी ....

आँचल
सच कहती है अर्जुन तेरी बरसों की पायस एक दिन मैं hi भुजा देगा

नाहीइ ये मैं के सोच रही हुईं वह मेरा बच्चा आएसा कभी नहीं करेगा मेरे साथ ... मैं आएसा सोच भी कैसे सकती है ...

हे भगवन जी ये अनाप सनाप क्यू मेरी मन मैं आ रही है ....

आँचल की आँखें भर गयी होती है आँचल घूम कर अंजलि से लिपट जाती है आवर फिर अपनी आँखें बंद कर लेती है


अगली सुबह

गीता उठ कर पहले बाथरूम जाती है आवर फिर किचेन मैं चली जाती है

ममी माँ अभी तक उठी क्यू नहीं वह सुबह hi उठ जाती है ... कॉफ़ी लेकर जाती हुईं

अपनी ममी माँ को किचेन मैं गीता नहीं देखती है तो मन मैं सोचती है आवर कॉफ़ी बनाने लगती है

गीता कॉफ़ी लेकर आँचल की रूम मैं जाती है तो रूम बंद पति है तो वह ममी माँ पुकारती है

गीता के 3 से 4 बार पुकारने पर गेट खुलता है जो आँखें मल्टी हुई अंजलि खोलती है

गुड मॉर्निंग डीई ..... थैंक यू

अंजलि गीता से कॉफ़ी ले लेती है

गुड मॉर्निंग गुड़िया

तू ममी माँ के साथ सोइ थी क्या .. वह अभी उठी क्यू नहीं उनकी तबियत ठीक है न

गीता ममी माँ को सोते हुआ देखती है तो पूछती है आवर बीएड पर चली जाती है

अह्ह्ह्ह

गुड़िया ममी माँ की जिस्म जल रही है ... ममी माँ ममी माँ क्या हुआ

गुड़िया देख मेरी रूम मैं फीवर की टेबलेट है जल्दी लेकर आ

गीता आँचल की सर अपनी गॉड मैं रख देती है

गीता की आवाज़ से आँचल की भी नींद खुल जाती है तो पति है वह अभी गीता की गॉड मैं है तो आँचल गीता की गॉड से उठ जाती है

ममी माँ आप को फीवर हुआ है आप मुझसे दवा क्यू नहीं मांगी ... गीता पूछती है

गीता बेटी तू परेशां न हो मैं ठीक हुईं ... आँचल बोलती है आवर बीएड से उतर कर बाथरूम मैं चली जाती है

गुड़िया तू एहि रह मैं नास्ता बना देती हुईं फिर ममी माँ को दवा खेला देना .... गीता बोल कर रूम से चली जाती है

वही अंजलि रूम मैं रह जाती है

अर्जुन सो कर उठता है आवर फिर फ्रेश होने के लिए बाथरूम मैं चला जाता है

अर्जुन फ्रेश होकर रूम से निकल कर किचेन की तरफ चला जाता है .... माँ कॉफ़ी बानी है

अर्जुन बोलते हुआ सामने देख कर रुक जाता है


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क्यू के सामने उसकी गीता दीदी कड़ी होकर सेल्फी ले रही होती है मगर अर्जुन की नज़र तो गीता की बहार की तरफ निकली हुई बड़ी पर टिक जाती है जो अर्जुन झट से किचेन मैं चला जाता है आवर गीता को पकड़ लेता है आवर गीता की चिकनी पीठ को चुम लेता है

आह्ह्ह्ह माआआआ

ओह मेरा बाबू उठ गया क्या ...... गीता पहले तो सिसक पड़ती है मगर फिर मुस्कुराती हुई बोलती है

वही अर्जुन गीता को पकड़ लेता है जिससे गीता की भरी भरकम गांड अर्जुन के लैंड मैं सात जाता है जिससे अर्जुन का लैंड खड़ा होने लगता है

अर्जुन अपने हाथ निचे लेजाकर गीता की कमर पकड़ कर दबा देता है जिससे गीता की निकली हुई गांड की दरार मैं अर्जुन का लैंड समां जाता है


हूंणननननन .....

अर्जुन का लैंड को अपनी गांड के दरार मैं जाते हुआ सोच कर गीता मचल जाती है

बाबू अभी नहीं देख किचेन मैं अंजलि कभी भी आ सकती है

Aahhhhhhhhhhh

अर्जुन झट से गीता की चुकी पकड़ लेता है जिससे गीता की सिसकियाँ निकल जाती है

Ssssssssssssssssss

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह .... बाबू प्लीज रुक जा अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह वर्ण मैं ... Huinnnnnnnnnn

गीता की आँखें मदहोश होने लगती है गीता की छूट मैं चल सी मचने लगती है जो गीता अपनी पेअर दोनों सत्ता लेती है आवर अपनी गांड पीछे करती हुई वही बैठ जाती है लेकिन अर्जुन भी गीता को पकड़ कर फिर उठा देता है आवर पलट कर गीता की होंठ को चूमने लगता है

ुम्माआ

गीता की होंठों को अर्जुन चूमने लगता है वही गीता अर्जुन को दूर कर देती है

बाबू अभी नहीं देख ममी माँ की अभी तबियत ठीक नहीं है मुझे उनके लिए नास्ता बनाना है

क्या हुआ माँ ... दीदी पहले क्यू नहीं बताई आप ने .... मैं माँ के पास जा रहा हुईं

अर्जुन भाग कर आँचल के रूम मैं चला जाता है

माँ क्या हुआ .... चलिए हॉस्पिटल चलते है ..... अर्जुन आँचल के रूम मैं जाकर देखता है तो आँचल कुर्सी बैठी हुई होती है आवर पास मैं अंजलि भी कड़ी होती है तो अर्जुन आँचल के हाथ पकड़ कर बोलता है

अर्जुन बीटा मैं ठीक हुईं ... बस ज़रा से सर दर्द कर रहा था देख गुड़िया ने दवा दे दिया है कुछ देर मैं आराम हो जायेगा .... आँचल थोड़ा मुस्कुरा कर बोलती है

वही अर्जुन आँचल के पास मैं बैठ जाता है

माँ मैं किचेन मैं दीदी की हेल्प करने जा रही हुईं .... अंजलि बोलती है आवर चली जाती है

चलिए बीएड पर सोइये आज पूरा दिन आप आराम करेंगी ... सारा दिन कुछ न कुछ करती hi रहती है

अर्जुन आँचल को कुर्सी से उठा कर बीएड पर बैठा देता है

क्या हुआ आप मुझे देख कर मुस्कुरा क्यू रही है .... अर्जुन पूछता है

देख रही हुईं मेरा बचा मेरे लिए कितना परेशां हो गया है .... कभी मैं भी तुझे इस तरह देख कर परेशां हो जाती थी आवर भगवन से एहि दवा करती थी मेरा बच्चा जल्दी ठीक हो जाये

आँचल के गलो को चुटी हुई बोलती है जो अर्जुन मुस्कुरा देता है

आप मेरे लिए दुनिया की सबसे अच्छी माँ ....ठीक है आप आराम कीजिये मैं नास्ता लेकर आता हुईं

अर्जुन ममी माँ को नास्ता खिलने के बाद जल्दी से कॉलेज आ जाना ..... मुझे कुछ काम है मैं दीदी के साथ जा रही हुईं अंजलि बोलती है आवर फिर अर्जुन नास्ता लेकर आँचल की रूम मैं चला जाता है


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वाओ क्या जिस्म है आअह्ह्ह्ह ये गोरी गोरी पीठ आह्ह्ह्हह्ह इतनी बड़ी पीठ है तो फिर चुकी कितनी बड़ी होगी Aaahhhhhhhhhh

ये gaaaaaaaaaaaaand है या फुटबॉल

बस मेरा पूरा जिस्म hi हिल गया आंटी की जिस्म को देख कर ....

नमस्ते राखी आंटी


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एक लड़का घर के अंदर आता है आवर राखी देवी की बड़ी गांड को देखते हुआ अपना लैंड मसलते हुआ बोलता है

वही राखी देवी ऊपर छत पर जा रही होती है मगर लड़के का आवाज़ सुन कर वह रुक जाती है

नमस्ते बीटा कौन हो तुम .... राखी देवी पलट कर बोलती है


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wowwwwwwwwwww बचपन मैं देखा था आंटी को खूबसूरत तो ठीक hi मगर अब तो एटम बम हो गयी है

आह्ह्ह्हह बहुत रास निकलेगा आंटी की चुकी से वह लड़का राखी देवी की बड़ी बड़ी चुकी को देख कर मन मैं सोचता है

कौन हो बीटा बताया नहीं तुमने ...

राखी देवी अपनी पल्लू साइन पर रखती हुई पूछती है

आंटी साहिल शांति का बीटा .... वह लड़का राखी देवी की चुकी से नज़र हटा कर बोलता है

तू साहिल है कितना बड़ा हो गया है इधर आ

राखी देवी खुश होती हुई बोलती है आवर साहिल को गले लगा लेती है

Ahhhhhhhhhh क्या खुसबू है आंटी की जिस्म की

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ये टाइट चुकी

साहिल राखी देवी की चुकी को फील करता हुआ मन मैं सोचता है आवर अपना हाथ राखी देवी की गांड पर लेजाने लगता है तब तक राखी देवी साहिल से अलग हो जाती है

कितना बड़ा हो गया है ... आ बैठ फुलवा ज़रा कॉफ़ी लेकर आ

राखी देवी हॉल मैं साहिल को बैठने को बोलती है आवर खुद भी बैठ जाती है

साहिल तेरी माँ क्यू नहीं आई ... राखी देवी पूछती है

आंटी माँ अभी बुआ के घर गयी है मैं भी बुआ के घर hi था गाओं आने के बाद पता चला के आप आई है तो मिलने चला आया .... साहिल कहता है मगर साहिल की नज़र बार बार राखी देवी की जिस्म को घर रही होती है

अच्छा किया बीटा .... वैसे अभी तू क्या कर रहा है

अह्हह्ह्ह्ह ह्ह्हह्ह्ह्ह

अभी तो आप की भरी जवानी को देख रहा हुईं आंटी .... साहिल मन मैं सोचता है

साहिल क्या हुआ .... साहिल को कुछ न बोलते देख कर राखी देवी बोलती है

ओह्ह सॉरी आंटी ... आंटी पढाई पूरी हो गयी है अब मैं कोई नौकरी करना चाहता हुईं बस उसी के चक्कर मैं हुईं .... साहिल बोलता है

ठीक है बीटा कोशिश करते रहो नौकरी मिल hi जाएगी ... लो कॉफ़ी पियो

राखी देवी फुलवा से कॉफ़ी लेकर साहिल को देती हुई बोलती है

वही साहिल कॉफ़ी लेकर पिने लगता है

ठीक है आंटी मैं चलता हुईं ... कोई काम पड़े तो मुझे याद कर लीजियेगा .... मैं अभी घर पर hi रहूँगा ....साहिल बोलता है

ठीक है बीटा ... राखी देवी बोलती है फिर साहिल राखी के पेअर छूटे कर चला जाता है

पहले से आवर संस्कारी हो गया है साहिल भगवन इसे खुश रखे ... साहिल को जाते हुआ देख कर राखी देवी मन मैं सोचती है

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माँ माँ

अर्जुन माँ माँ पुकारता हुआ रूम मैं जैसे hi आता है सामने देख कर अर्जुन की आँखें बड़ी हो जाती है अर्जुन झट से दूसरी तरफ घूम जाता है

अर्जुन देख कितनी बड़ी है तेरी माँ की गांड

आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बस मन कर रहा है पेटीकोट हटा कर माँ की गांड मैं दाल दूँ

अर्जुन घूम क्यू रहा है देख न घूम कर आह्ह्ह्हह्ह अर्जुन देख न यार वह अभी सो रही है

अर्जुन के मन मैं सोचता है आवर फिर अपनी ममी माँ की तरफ घूम जाता है जिससे अर्जुन का लैंड एक बार जेन्स मैं सर हिला देता है

वही आँचल पेट के बल सोइ हुई होती है जिससे आँचल की साड़ी खुल कर पास पड़ी होती है आवर पेटीकोट मैं आँचल की बड़ी गांड की पूरी छाप दिख रही होती है


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अर्जुन का लैंड कुछ hi सेक् मैं खड़ा हो जाता है आवर अर्जुन की आँखों मैं एक हवस साफ दिखाई देने लगता है

अर्जुन का पेअर अपने आप hi अपनी ममी माँ के करीब जाने लगता है

अर्जुन धीरे धीरे आँचल के बीएड के करीब चला जाता है आवर आँचल की निकली हुई गांड पर हाथ रखने के लिए आगे बढ़ने लगता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन का हाथ आँचल की बड़ी गांड पर बस ज़रा सा hi टाच होता है की अर्जुन का जिस्म कैंप जाता है आवर अर्जुन आँचल से कुछ दूर भी हो जाता है जैसे अर्जुन को किसी चीज का झटका लगा हो

ये मैं क्या कर रहा हुईं ... मैं इतना कैसे गिर सकता हुईं

अर्जुन के मन मैं ये आते hi अर्जुन रूम से निकल जाता है

ओह्ह मेरा बच्चा .... मैं जानती हुईं तू अपनी इस माँ से बहुत प्यार करता है ... जो अपनी इस माँ के साथ गलत हरकत कर hi नहीं सकता है ..... आँचल मन मैं सोचती हुई मुस्कुरा देती है

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अपडेट ...... 77

अर्जुन के रूम से जाने के बाद आँचल भी बीएड से उठ जाती है आवर अपनी साड़ी को ठीक करने लगती है आवर फिर शीशे के सामने कड़ी हो जाती है

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आँचल अपनी खूबसूरत चाँद सी चेहरे को देख कर खुद hi शर्मा जाती है

आँचल रूम से निकल कर हॉल मैं आ जाती है तो देखती है अर्जुन रूम से सरत पहनते हुआ निकल रहा है

माँ अब आप की तबियत कैसी है .... अर्जुन आँचल के पास आकर पूछता है

बीटा मैं ठीक हुईं ... तू कहा जा रहा है

आँचल पूछती है ..... मगर आँचल की नज़र अर्जुन के छाती को घर रही होती है

मेरा बच्चा अब जवान हो गया है इसके आगे तो मैं छोटी बच्ची लग रही हुईं


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आँचल अर्जुन को देखती हुईं मन मैं सोचती है

माँ मैं थोड़ा खेत से आता हुईं ..... अर्जुन आँचल से बोल कर चला जाता है

वही आँचल अर्जुन को जाते हुआ देख कर मन hi मन मुस्कुरा रही होती है


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ोये पिंटू गाड़ी ठीक से चला ... सुना नहीं था बड़े पापा ने क्या कहा था .... नैना पिंटू को घूरती हुई बोलती है

वही कोमल सुमन आवर चंपा मुस्कुरा पड़ती है

पिंटू सुना नहीं गुड़िया क्या बोल रही है चाहे सहर जाने मैं दोपहर क्यू न हो जाये मगर गाड़ी तुम धीरे hi चलना .... कोमल बोलती है


क्या दोपहर तक सहर जायेंगे दीदी फिर हम तो घूम भी नहीं पाएंगे सहर .... नैना छऊणकती हुई बोलती है

गुड़िया तू hi तो बोल रही है न गाड़ी धीरे चलने को ....इस बार सुमन बोलती है

दीदी वह बड़े पापा बोले थे न .... नैना थोड़ी बच्चों जैसी मुंह बना कर बोलती है

पिंटू रस्ते को देखते हुआ गाड़ी चलना .... कोमल बोलती है

वही पिंटू गाड़ी तो चला रहा होता है मगर पिंटू की नज़र बार बार सामने शीशे से सभी लड़कियों को देख कर उसका लैंड खड़ा हुआ होता है पिंटू गाड़ी चलते हुआ कभी कभी लैंड भी मसल रहा होता है

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राखी देवी अभी बीएड पर बैठी हुई सामने शीशे मैं खुद को देख रही होती है राखी देवी की आँखों मैं अजीब सी मदहोशी भरी हुई होती है


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राखी देवी को देख कर लग रहा होता है राखी देवी के मन मैं कुछ चल रहा हो

राखी तेरी ये जिस्म है या कोई फूलों का बगीचा जो हर इंसान तेरे खुसबू लेने आ जाते है

देखि नहीं कैसे गाओं के लोग तेरी जिस्म को कुत्ते की तरफ देख रहे थे

राखी तेरी कोई जवाब नहीं है तू इस उम्र मैं भी एक अनमोल खिलती हुई गुलाब है जिसका रास पिने के लिए बूढ़े भी तड़प रहे है

Ahhhhhhhhhhh

राखी देवी अपनी भरी जवानी को देखती हुई सोचती है आवर राखी देवी की हाथ खुद hi साड़ी के ऊपर से hi छूट पर चली जाती है जिससे राखी देवी की सिसकियाँ निकल जाती है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Sssssssssssss आँचल कास तू मेरे पास होती अभी अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

राखी देवी छूट को मसलती हुई बीएड पर गिर जाती है

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अह्ह्ह्ह बस ये लड़की है या सेक्स की देवी है इस कपडे मैं देख कर तो मन कर रहा है साली को एहि पटक के इसकी पहली हुई छूट मैं अपना लैंड दाल दूँ

अह्ह्ह्ह बस कास मेरा ये लैंड इसकी लाल लाल होंठों पर होती आवर वह मेरे लैंड को लॉलीपॉप की तरह चुस्ती आह्ह्ह्हह्ह


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अभी कोमल एक रूम के आगे कड़ी होती है आवर थोड़ी दुरी पर नैना कोमल की पिछ ले रही होती है

वही थोड़ी दुरी पर खड़ा पिंटू कोमल की बेमिसाल खिला हुआ जिस्म को देख कर अपना लैंड मसलते हुआ सोच रहा होता है


डीई आप इस कपडे मैं बहुत बहुत खूबसूरत लग रही है दीदी आप इस दुनिया मैं अकेली हो जिसको इतनी प्यारी जिस्म मिला है आप की कोई लड़की मुकाबला नहीं कर सकती है ..... नैना कोमल की खूबसूरती को देखती हुई बोलती है

क्यू की कोमल सच मैं बहुत खूबसूरत लग रही है कोमल की खूबसूरती को देख कर आप पास से जा रही कई साडी लडकियां भी मन मैं कोमल की तारीफ कर रही होती है

दीदी आप की शादी हो गयी है क्या .... एक लड़की खुद कोमल के पास आकर पूछ लेती है

लड़की को देख कर कोमल मुस्कुरा पड़ती है आवर उस लड़की को गॉड मैं उठा लेती है

नहीं अभी मेरी शादी नहीं हुई है आप क्यू पूछ रही है .... कोमल उस लड़की की गाल को चूमती हुई पूछती है

दीदी आप जल्दी से शादी करलो .... लड़की बोलती है

लड़की की बात सुन कर कोमल फिर से मुस्कुरा पड़ती है मगर कोमल थोड़ी हैरान भी होती है इतनी छोटी बच्ची आखिर ये क्या बोल रही है

ठीक है शादी कर लुंगी ... मगर आप क्यू मेरी शादी करवाना चाहती है ... कोमल पूछती है

क्यू के आप जब से मोल्ल मैं आई है तब से मेरे पापा आप को देख रहे है ...... कही मेरे पापा मेरी मम्मी को छोड़ कर आप के साथ भाग न जाये ....लड़की बोलती है

वही कोमल आवर नैना एक दूसरी को देख कर हसने लगती है

रानी बीटा यह क्या कर रही हो

सॉरी सीस ये थोड़ी
शरारती है ... एक औरत पास आकर बोलती है आवर लड़की को कोमल से ले लेती है

वैसे सीस तुम इतनी क्यू मुस्कुरा रही हो ... कुछ बोली क्या इसने ... कोमल को मुस्कुराती हुई देखती है तो पूछती है

दीदी अपने पति को देखिये वह कही मुझे लेकर भाग न जाये .... कोमल बोल कर फिर से मुस्कुरा पड़ती है

ओह्ह गॉड तो इसने ये कहा सॉरी सीस ाएसि कोई बात नहीं है ..... चलो पापा से तेरी शिकायत करती हुईं ... वह औरत बोलती है ...

कोई बात नहीं दीदी .... बहुत पेयरी बच्ची है आप की .... कोमल बोलती है

वैसे सीस मेरी बेटी ने सही कहा है तुम बहुत बहुत खूबसूरत हो ... वह औरत बोल कर चली जाती है

वही कोमल मुस्कुरा पड़ती है

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रात के 9:पं

आँचल अभी घर के गेट पर कड़ी होती है आवर घर के बहार की तरफ देख रही होती है ..... आँचल की चेहरे पर एक शर्म सी छै हुई होती है


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आँचल नाईट ड्रेस मैं बहुत hi खूबसूरत लग रही होती है आवर उस नाईट ड्रेस मैं आँचल की भरी हुई जवानी आज खुल कर दिख रही होती है

आँचल आज अपनी बॉल भी खुल कर राखी हुई होती है उस नाईट ड्रेस मैं आँचल की टाइट चुकी भी पूरी तरह बहार की तरफ निकली हुई होती है

आँचल की खुली हुई जुल्फें चाँद सा चेहरा आवर उसके निचे आँचल की सबसे अनमोल खज़ाना उसकी चुकी जो आज आवर भी टाइट हो गयी होती है जो कई सैलून से किसी ने बेहरमी से दबाया हुआ भी नहीं होता है

आँचल की पतली कमर आवर उसके निचे आँचल की मतवाली निराली गांड पीछे निकली हुई होती है

आँचल ाएसि नाईट ड्रेस पहले कभी नहीं पहनी हुई होती है आवर सायद ये नाईट ड्रेस भी उसकी नहीं होती है क्यू की वह नाईट ड्रेस आँचल की जिस्म मैं ाएसि लिपटी हुई होती है जैसे चन्दन की पेड़ से सांप लिप्त हुआ होता है

आँचल को बहुत शर्म भी आ रही होती है आँचल कुछ देर गेट पर कड़ी होती है आवर फिर घर के अंदर चली जाती है

ममी माँ क्या हुआ आप अंदर क्यू आ गयी

आँचल को अनादर आती हुई देख कर गीता पूछती है ... गीता की चेहरे पर एक अजीब सी ख़ुशी नज़र आ रही होती है

गीता बेटी तेरी ये नाईट ड्रेस बहुत कैसा हुआ है .... आँचल थोड़ी सरमाती हुई बोलती है

ममी माँ आप इसमें बहुत खूबसूरत लग रही है .... आप बिलकुल जवान लड़की की तरह लग रही है आप को अभी कोई देख ले तो उसके जेन्स मैं ......है है है हआ हआ

गीता बस इतना बोल कर हसने लगती है वही आँचल शर्मा कर वह से अपनी रूम मैं भाग जाती है

वही गीता आँचल को शर्मा कर जाती हुई देख कर मुस्कुरा देती है आवर अपनी छूट को मसल देती है

मायआ आप को देख कर तो मुझे कुछ कुछ हो रही है ... गीता मन मैं सोचती है

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

गीता आह भर्ती हुई सोफे पर बैठ जाती है

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पीतमपुरा गाओं के एक छोटे से घर मैं जिसमे 3 रूम होते है आवर उसकी घर के एक रूम एक 40 से 42 सल्ल की औरत बीएड पर लेती हुई होती है वह देखने मैं थोड़ी काली होती है मगर उसकी जिस्म गठीला होती है मोती मोती जांघ बड़ी बड़ी चुकी आवर उसकी काली भरी भरकम गांड

वह औरत पर लेती हुई होती है मगर उस औरत की दोनों हाथ दोनों तरफ बंधी हुई होती है आवर दोनों पेअर भी दोनों तरफ बंधी हुई होती है जिससे उस औरत की काली छूट की गुलाबी बिल दिख रही होती है उस औरत की आँखों मैं आंसू होती है आवर वह दरी हुई रूम की गेट की तरफ दिख रही होती है तभी सामने से एक लड़का को आते देख वह औरत अपनी टोनो टंगे एक दूसरे मैं सताने की कोशिश करती है ताकि अपनी छूट छिपा सके मगर पेअर बंधे हुए होने से वह छूट को छुपा नहीं पति है


अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरी बुर आह्ह्ह्हह्ह Ssssssssssss अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ओह्ह्ह ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह नहीं Ahhhhhhhhhh ohhhhhhhhhh Aaaaaaaaaaa ssssssssssssssss


वह लड़का उस औरत के पास आता है आवर उस औरत की छूट दोनों होंठ पकड़ कपड़ कर खिंच रहा होता है जिससे वह औरत दर्द मैं सिसक रही होती

आह्ह्ह्हह्ह माआआ अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्स hhhhhhhhhh हूईँण्णन आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa उस औरत की छूट से पानी निकलते hi वह औरत अपनी आँखें बंद कर लेती है

वही वह लड़का उस औरत की छूट को देख कर है रहा होता है आवर फिर उस औरत की बहती हुई छूट रह को अपनी ऊँगली मैं लेकर चाट जाता है

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अपडेट ........ 78

अर्जुन जब घर आता है तो देखता है गीता हॉल मैं बैठी है आवर उसे देख कर मुस्कुरा रही होती है

बाबू कहा था इतने देर से ... चल हाथ मुंह धोकर आ मैं खाना लगा रही हुईं ... गीता बोलती है

अर्जुन ठीक है बोल कर चला जाता है

अर्जुन हाथ मुंह धोकर आता है आवर खाना खाने लगता है

डीई माँ की तबियत ठीक है न ... अर्जुन पूछता है

हां बाबू ममी माँ ठीक है ... गीता बोलती है

अर्जुन खाना खा कर अपने रूम मैं चला जाता है

अर्जुन रूम मैं आने के बाद कपडा चेंज करता है आवर बिना गेट बंद किये बीएड पर लेट जाता है

अर्जुन बीएड पर लेता हुआ होता है तभी उसके फ़ोन पर मस्सगे आता है तो अर्जुन फ़ोन देखता है तो पता है उसी लड़की की मस्सगे है तो अर्जुन वात्सप्प ओपन करता है आवर पिछ देख कर अर्जुन का लैंड खड़ा होने लगता है


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क्यू की वह लड़की इस बार अलग अलग ब्रा पेंटी मैं अपनी कई साडी पिछ छूट गांड आवर चुकी की पिछ सेंड की होती है जिसे देख कर अर्जुन का लैंड फूल हार्ड हो जाता है

अर्जुन पिछ को देख कर बहुत गर्म भी हो जाता है


ये साली रंडी है कौन ... आवर मुझे क्यू पिछ भेजती रहती है साली को अपने hi भाई से छुड़वाना है तो .... साली मिल गयी तो इसकी गांड बुर की नक्सा बिगड़ दूंगा साली कई दिन तक बीएड से उठेगी नहीं

साली कुटिया रांड मुझे क्यू भेज रही है अपने भाई को भेज न ... साली अगर मुझे
छुड़वाने चाहती है तो बोल कहा मिलना है तेरी इस छोटी सी बुर को फाड् कर न रख दिया तो कहना ... अर्जुन अपना लैंड मसलते हुआ गुस्से मैं टाइप करता है फिर सेंड कर देता है

वही एक रूम मैं अर्जुन की मस्सगे पढ़ कर आँखें लाल हो जाती है आवर उस लड़की का हाथ अपनी छूट पर चली जाती है जो अपनी ब्रा पेंटी मैं बीएड पर लेती हुई होती है

Aahhhhhhhhhh .... मेरी छूट हां मेरी बहुत छोटी सी छूट की छेड़ है जो एक ऊँगली भी डालती हुईं तो तड़प जाती हुईं

मगर सॉरी मैं इस छूट मैं सिर्फ अपने भाई का hi लैंड लुंगी ... वह लड़की लिख कर तये करती है आवर मन hi मन मुस्कुरा भी रही होती है

तेरी माँ की छूट साली फिर मेरे को क्यू भेज रही है जाकर फड़वा ले न अपने भाई से ... साली फिर भेजी तो मैं तेरी माँ छोड़ दूंगा ..... अर्जुन गुस्सा मैं तये करता है आवर फिर फ़ोन को फेक देता है बीएड पर

लड़की की जिस्म को देख कर अर्जुन की हालत ख़राब हो चुकी होती है अर्जुन का लैंड भी टाइट होकर थोड़ा दर्द करने लगता है अर्जुन बीएड पर लेते हुआ hi अपना लैंड निकल कर मसलने लगता है

क्या मैं कुछ कर सकती हुईं अपने पति के लिए .......

अर्जुन लैंड मसल रहा होता है तभी अर्जुन के कानो मैं ये आवाज़ आती है अर्जुन नज़र उठा कर देखता है गेट के पास उसकी गीता दीदी कड़ी होती है वह भी सिर्फ ब्रा पेंटी मैं


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अर्जुन की नज़र जैसे hi अपनी गीता दीदी पर पड़ती है अर्जुन का लैंड एक बार सांप की तरह फैन मार देता है

गीता की चुकी ब्रा मैं इतनी टाइट होती है की जैसे ब्रा को फाड् कर बहार आ जाएगी

अर्जुन उस लड़की की आधी नंगी पिछ देख कर पहले से hi गर्म होता है आवर अपनी गीता दीदी को देख कर तो अर्जुन का लैंड नाग की तरह फुफकार मरने लगता है

Ahhhhhhhhhhh

गीता बीएड के पास जैसे hi आती है अर्जुन गीता की कमर पकड़ कर बीएड पर खिंच लेता है

गीता आह भर्ती हुई अर्जुन के ऊपर hi गिर पड़ती है जिससे गीता की चुकी अर्जुन के साइन मैं डाब जाती है आवर अर्जुन का लैंड गीता की छूट मैं टाच हो जाता है ... अगर गीता पेंटी नहीं पहनी हुई होती तो अर्जुन का मोटा अजगर गीता गुफा मैं घुस गया होता

अर्जुन गीता दीदी को पकड़ कर किश करने लगता है जो गीता भी अर्जुन का साथ देने लगती है

गीता की छूट अर्जुन के लैंड का अहसास कर के hi पनिया गयी होती है गीता आवर भी अपनी छूट को अर्जुन के लैंड पर रगड़ने लगती है

अह्ह्ह Sssssssssssssssssss

अर्जुन दोनों हाथों से गीता की ऊपर उठी हुई गांड को अपने लैंड पर दबा देता है जिससे गीता किश तोड़ते हुआ लम्बी आअह्ह्ह्ह भर लेती है

अर्जुन का लैंड पहले hi खड़ा होकर थोड़ा थोड़ा दर्द कर रहा होता है अर्जुन गीता को बीएड पर लेता कर गीता की पेंटी छूट से बस अलग कर के लैंड छूट मैं दाल देता है

ohhhhhhhhhh छूट मैं लैंड जाते hi गीता चिहुंक पड़ती है मगर गीता को एक मीठा सा अहसास भी होती जिससे गीता अर्जुन को बड़े hi प्यार से देखने लगती है आवर अपनी गांड उठा कर अर्जुन का लैंड छूट मैं ले लेती है

अह्हह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह आवर ओह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह sssssssssszssss अह्ह्ह्हह्हह

अर्जुन गीता की छूट मैं ज़ोर ज़ोर से धक्का मरने लगता है जिससे गीता की मस्ती मैं चीख निकलने लगती है गीता भी अपनी गांड उठा उठा कर अर्जुन का साथ दे रही होती है

अर्जुन इतने ज़ोर ज़ोर से धक्का मरने लगता है की बीएड भी हिलने लगती है

आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह बाबू ह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्स आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह Sssssssssssss बाबू बहुत मज़ा आ रहहहहहहहहह है ..... ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह बाबू मेरी छूट तुम्हारे लिए hi दुनिया से बच्चाआआ कर राखी थी Aaahhhhhhhhhh फाड् दो मेरी छूट को ohhhhhhhhhh बाबू तू नहीं जनता Ahhhhhhhhhhh तेरी दीदी की छूट गाओं के कितने लड़के फाड़ना Hhhhhhhhhhh कहते थे Ahhhhhhhhhhhh मेरी छुट्ट्ट्ट्ट

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

गीता मस्ती मैं छोड़वा रही होती है आवर फिर गीता अपनी छूट की गर्म पानी निकलती हुई चुप हो जाती है

वही अर्जुन गीता की भींगी हुई छूट मैं ज़ोर ज़ोर से धक्का मरने लगता है आवर कोई 10 मिनटों के बाद अर्जुन भी Aaaaaaaaaaaaaaa करते हुआ गीता की गदराई हुई जिस्म पर गिर पड़ता है

दोनों भाई बहन एक दूसरे के बाँहों मैं लिपटे हुआ होता है गीता की पेंटी पानी से भींग गयी होती है जो गीता उसी तरह अर्जुन के बाँहों मैं सोइ हुई होती है

अंजलि बीएड पर बिलकुल नंगी सोइ हुई होती है अंजलि की पूरी जिस्म पसीने से भींगी हुई होती है अंजलि की सांसे भी तेज़ी से चल रही होती है जिसे अंजलि अभी कभी दूर से भाग कर आई हो आवर अंजलि की थोड़ी रोशनी मैं भी चमक रही होती है

अंजलि को प्यास की अहसास होती है तो अंजलि टेबल पर राखी बोतल उठती है मगर उसमे पानी नहीं होती है तो अंजलि किचेन मैं जाने को सोचती है

Sssssssssssssss

अंजलि बीएड से उठती है की उसकी सिसकियाँ निकल जाती है अंजलि बीएड से उतर कर बिना ब्रा पेंटी के hi नाईट ड्रेस पहनने लगती है


आह्ह्ह्ह मुझे नहीं करनी चाहिए थी उस कमीनी की बात मान कर कर दिया अभी इतनी दर्द हो रही है तो उस वक़्त कितनी दर्द होगी अह्ह्ह्हह्हह ..... मगर मज़ा भी बहुत आया अंजलि नाईट ड्रेस पहनती हुई मन मैं सोचती है आवर नाईट ड्रेस पहन कर रूम से निकलती है

अंजलि जब रूम से निकलती है तो देखती है उसकी ममी माँ भी किचेन मैं फ्रिज से बोतल का पानी निकल रही है

माँ मुझे भी पानी पीना है एक मेरे लिए भी निकल लीजिये ..... अंजलि बोलती है

वही अंजलि की आवाज़ सुन कर पीछे कड़ी अंजलि को देख कर आँचल एक पल के लिए घबरा सी जाती है आवर वह कुछ देर तक फ्रिज के पास hi कड़ी रहती है

माँ जल्दी लाइए न प्यास लगी है .... अंजलि फिर से बोलती है

अंजलि की आवाज़ सुन कर आँचल वह से आती है आवर अंजलि को बोतल देकर बिना कुछ बोले अपनी रूम मैं चली जाती है

क्या हुआ है माँ को कुछ बताती भी नहीं है ... मुझे अब जानना hi होगा मुझे पता है कैसे वह बताएंगी .... अंजलि मन मैं सोचती है आवर पानी पाकर रूम मैं चली जाती है

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अगली सुबह

आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ये गांड

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.. गुड मॉर्निंग आंटी .... साहिल आज भी जब हवेली मैं आता है तो देखता राखी देवी ऊपर जा रही होती है आवर साहिल के आँखों के सामने राखी देवी की बड़ी गांड दिख रही होती है जो साहिल लैंड को मसलते हुआ गुड मॉर्निंग बोलता है

गुड मॉर्निंग साहिल .... अरे शिला


राखी देवी ऊपर जा रही होती है तभी साहिल की आवाज़ सुन कर पीछे देखती है तो पति है साहिल के साथ उसकी माँ भी कड़ी होती है तो राखी देवी गुड मॉर्निंग बोलते हुआ साहिल की माँ को पुकारती है

राखी देवी ऊपर न जाकर शिला के पास आ जाती है आवर फिर हॉल मैं शिला के साथ बैठ जाती है

मालकिन अच्छा किया आप यह आ गयी ... मालिक को यह रहना बहुत अच्छा लगता था .... शिला बोलती है

हां शिला उनेह अपने माँ से बहुत प्यार था वह इस लिए यह जयादा रहते थे मैं भी एहि रहने की अब सोच रही हुईं .... वैसे तू अब क्या करती है ........ राखी देवी पूछती है

मालकिन खेतों मैं काम करती हुईं अब ये बड़ा हो गया है आवर अपनी पढाई भी पूरा कर लिए है तो अब बस दुआ है बस इसकी नौकरी लग जाये ... मालकिन कोई जानकारी मैं काम करने की जगह है तो आप बता सकती है आप की पहले भी बहुत अहसान है मुझपे एक आवर अहसान कर दीजिये न ..... शिला थोड़ी दुखी मैं हाथ जोड़ती हुई बोलती है

क्या कर रही है शिला ... तू मेरी बहन की तरह है तूने भी बहुत कुछ किया है इस हवेली मैं रह कर ..... चिंता न कर मैं साहिल के लिए नौकरी की बात करती हुईं

वैसे साहिल चाहे तो कुछ दिनों के लिए मेरे खेत के काम का हिसाब किताब देखने के लिए रह सकता है .... राखी देवी बोलती है

राखी देवी की बात सुन कर शिला बहुत खुश होती है आवर झट से हां बोल देती है आवर साहिल की तरफ देखती है तो साहिल भी ठीक है बोल देता है साहिल फ़ोन मैं कुछ देखने लगता है आवर राखी देवी आवर शिला बात करने लगती है

वही साहिल तो बस फ़ोन चलने का नाटक कर रहा होता है ... वह फ़ोन चलते हुआ बस राखी देवी की खूबसूरती को देख रहा होता है


ओह सॉरी शिला मैं भूल गयी थी तुझे कॉफ़ी के लिए भी नहीं पूछा रुक मैं चंपा को बोल कर आती हुईं ... राखी देवी बोल कर उठ जाती है आवर किचेन के पास चली जाती है

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ओह्ह्ह्हह्ह आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या गांड है आंटी की अह्ह्ह्ह ये गांड मैं मेरा लैंड जायेगा तो आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

किचेन के पास कड़ी राखी देवी की बड़ी निकली हुई गांड देख कर साहिल की हालत ख़राब हो जाता है साहिल अपना लैंड मसल देता है

एक वक़्त के लिए शिला भी राखी देवी की गांड देख कर हैरान हो जाती है आवर साहिल की तरफ देख कर अपनी छूट पर हाथ रख देती है जैसे शिला की छूट मैं कुछ चला गया हो

इसमें मैं न तो शिला की कोई गलती होती है आवर साहिल की इस वक़्त कोई राखी देवी को देखता तो यकीनन उसकी हालत ख़राब हो जाती राखी देवी साड़ी hi ाएसि पहनी हुई होती है की उनकी गांड उभर कर बहार कुछ जयादा hi निकल गयी होती है

अह्ह्ह्हह बस लगता है मेरा पानी निकल गया

साहिल अपने जेन्स को हल्का भिनगा हुआ देखता है तो मन मैं बोलता है

माँ मैं अभी घर जा रहा हुईं ....तुम भी जल्दी आना अह्ह्ह्हह्हह

आंटी की गांड तो मैं फाड् कर hi रहूँगा

साहिल राखी देवी की गांड को घूरते हुआ वह से चला जाता है

अरे साहिल कहा चला गया .... राखी देवी साहिल को न देख कर पूछती है


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अह्हह्ह्ह्ह मालकिन आप इतनी जयादा खूबसूरत है की साहिल आप की जिस्म को देख कर खुद पर काबू नहीं रख सका .... मालकिन मुझे तो लगता है आप की जिस्म के आगे साहिल तो टिक हो नहीं सकता है .... मालकिन आप की जिस्म को कोई मर्द hi टिक सकता है

राखी देवी की इस उम्र मैं भी भरी जवानी को देखती हुईं शिला मन मैं सोचती है

शिला क्या हुआ मुझे इस तरह क्यू देख रही है

राखी देवी शिला को जब खुद को घूरती हुई देखती है तो पूछती है

वही शिला थोड़ी हड़बड़ा जाती है

मालकिन उसे कोई काम याद आ गया इस लिए चला गया .... शिला निचे देखती हुई बोलती है

राखी देवी शिला के पास आकर बैठ जाती है ....

शिला क्या हुआ .... राखी देवी शिला को थोड़ी घबराती हुई देखती है तो पूछती है


मालकिन माफ़ करना मगर मैं जब से आई हुईं बोलना छह रही थी मगर साहिल के वजह से नहीं बोली

मालकिन आप बहुत खूबसूरत है .... मालकिन मेरा मतलब आप पहले भी खूबसूरत थी मगर आप की उम्र जैसे जैसे ढल रही है आप आवर भी खूबसूरत हो रही है

मांफ करना मालकिन मेरी बात बुरा लगे तो लेकिन ये सच है .... शिला बोल कर सर निचे कर लेती है

वही राखी देवी थोड़ी सरमाती हुई मुस्कुरा देती है ..... थैंक्स शिला इसमें बुरा मैंने वाली कोई बात नहीं .... ये बात तो मुझे हर कोई hi बोलता है ... मगर शिला मुझे थोड़ा अजीब लगता है ये सोच कर के ये बात जयादा तात औरत बोलती है

अरे जो मेरे पास है वही तो उस औरत के पास भी है न .... राखी देवी ख़ुशी मैं थोड़ी मुंह बना कर बोलती है

मालकिन मैं मानती हुईं जो मेरे पास है वही आप के पास है .... लेकिन मालकिन आप की जिस्म मुझसे कई गुणा अच्छा है आप की जिस्म ाएसि है जिसे देख कर खूबसूरत औरत भी देख कर जल जाती होंगी

मालकिन की हर चीज भगवन ने बड़ी फुर्सत से बनाया होगा

आप की छाती आप की कमर आवर आप की खूबसूरती को बढ़ने के लिए बहार निकली हुई गांड जिसे देख कर मर्दों की पानी निकल जाता होगा

शिला ... राखी देवी थोड़ी बनौती गुस्से मैं बोलती है



शिला की तारीफ से राखी देवी की जिस्म मैं हलचल hi सोने लगती है जो राखी देवी शर्माने भी लगती है

मालकिन मांफ करना .... शिला थोड़ी डर्टी हुई बोलती है

शिला कोई बात नहीं .... ये कॉफ़ी पि राखी देवी चंपा को आती हुई देख कर बोलती है

वही शिला कॉफ़ी लेकर पिने लगती है शिला कॉफ़ी पीकर थोड़ी आवर बाते करती है आवर फिर चली ....

राखी देवी अभी अपनी रूम मैं होती है आवर राखी देवी की दिमाग मैं शिला की बातें चल रही होती है

क्या मैं इतनी खूबसूरत हुईं जो मर्दों को छोड़ औरत भी मेरी जिस्म के पीछे पद जाती है ... राखी देवी मन मैं सोचती है

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आँचल सुबह मैं उठ कर पहले बाथरूम जाती है आवर फिर किचेन मैं कॉफ़ी बनाने लगती है आँचल कॉफ़ी बना रही होती है मगर आँचल की दिमाग मैं कुछ चल रही होती है

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

अचानक आँचल को कोई पीछे से पकड़ लेता है जो उसका हाथ आँचल की दोनों चुकी पर होती है आवर आँचल को अपनी गांड पर कुछ महसूस होती है जिससे आँचल की जिस्म मचल जाती है आवर आँचल की सांसे तेज़्ज़ चलने लगती है

वही आँचल की इतनी तेज़्ज़ चीख सुन कर पीछे खड़ा इंसान पीछे हैट जाता है

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अपडेट ...... 79

है है हाआआ ममी माँ आप इस तरह क्यू चीख रही है ...... आँचल को जैसे hi ये आवाज़ सुनाई देती है आँचल को थोड़ी रहत मिलती है मगर आँचल की जिस्म मैं हलचल सी अभी भी मची हुई होती है

हे भगवन ये गीता है .... मैं तो दर hi गयी थी .... कैसे पकड़ी थी मुझे ... लगा के जैसे अर्जुन बीटा है आँचल अपनी सांसों पर काबू पति हुई मन मैं सोचती है

गीता बेटी तू ये क्या कर रही थी ... मैं तेरी ममी माँ हुईं ... तेरी सहेली नहीं ...

ओह्ह मेरी भोली ममी माँ .... आप भूल रही है बेटी की पहली सहेली उसकी माँ hi होती है .... गीता हस्ती हुई बोलती है

वही आँचल भी मुस्कुरा पड़ती है

हां मुझे पता है ... आँचल बोलती है

ममी माँ आप मुझसे नाराज़ तो नहीं है न ..... गीता थोड़ी सहमी सी मुंह बना कर बोलती है

आँचल गीता की बात सुन कर थोड़ी देर तक चुप हो जाती है मगर जैसे hi आँचल की नज़र गीता पर जाती है न चाहते हुआ भी आँचल अपनी चेहरे पर मुस्कान ला देती है

बिलकुल नहीं मैं भला क्यू नाराज़ होने लगी अपनी बेटी पर ... जो होना था वह हो गया ..... आँचल गीता की चेहरे पर हाथ फेरती हुई बोलती है


वही गीता मुस्कुरा कर आँचल के गले लग जाती है

माँ जल्दी से कॉफ़ी दो मुझे ..... सर दुःख रही है .... अंजलि सर पकड़े हुआ किचेन मैं आती है

ओह मेरी गुड़िया क्या हुआ इधर आ .... आँचल अंजलि को पास बोलै कर अंजलि के सर दबाने लगती है

गीता बेटी ज़रा कॉफ़ी देख ... इस लिए बोलती है रात मैं जल्दी सोया कर लेकिन तू मेरी बात मने तब न .... आँचल अंजलि के सर दबाते हुआ बोलती है

तब तक गीता कॉफ़ी बना देती है अंजलि आवर आँचल को कॉफ़ी देकर 2 कप लेकर चली जाती है

अब ठीक लग रहा है .... चल जल्दी से कॉफ़ी पीकर तैयार होजा .. मैं नास्ता बना देती हुईं ...... आँचल अंजलि की सर दबा कर बोलती है

माँ अभी भी थोड़ा दर्द कर रहा है .... अंजलि थोड़ा दुखी सवार मैं मुंह बना कर बोलती है

ठीक है जा आराम कर . मैं नास्ता बना कर फिर से तेरे सर की अच्छे से मालिश कर दूंगी .... आँचल बोलती है

आँचल बात सुन कर अंजलि मन hi मन खुश हो जाती है

ओह्ह मेरी प्यारी माँ .. ुंआआआआ.... आप जल्दी आना

अंजलि आँचल की गाल पर किश करती है आवर किचेन से चली जाती है

वही आँचल नास्ता बनाने लगती है

आँचल बना कर अर्जुन आवर गीता को बोलती है आवर दोनों का नास्ता टेबल पर रख देती है ... तब तक अर्जुन आवर गीता तैयार होकर आ जाते है आवर नास्ता करने लगते है

अर्जुन आवर गीता नास्ता कर रहे होते है आवर आँचल दोनों को देख रही होती है आवर मन मैं कुछ सोच रही होती है

ममी माँ गुड़िया नहीं आई अभी .... गीता पूछती है

गीता बेटी गुड़िया की सर दर्द कर रहा है इस लिए मैंने hi उसे आराम करने को कहा है .... आँचल कहती है

वही गीता आवर अर्जुन साथ मैं कॉलेज के लिए निकल जाते है

आँचल टेबल से सरे पलेट उठा कर किचेन मैं रख देती है आवर फिर अपनी आवर अंजलि की नास्ता लेकर अंजलि की रूम मैं चली जाती है तो देखती है अंजलि अभी भी फ़ोन चला रही होती है मगर आँचल को देख कर फ़ोन छिपा लेती है

ये लड़की कभी मेरी बात नहीं सुनने वाली है .. सर दर्द कर रहा है आवर ये फ़ोन चला रही है

आँचल थोड़ी गुस्से मैं बोलती है जो अंजलि मुंह बना लेती है

माँ मैं तो बस वात्सप्प देख रही थी ... अंजलि मुंह बना कर बोलती है

ठीक है मेरी माँ .... चल उठ आवर नास्ता कर ... आँचल बोलती है तो अंजलि उठ कर बैठ जाती है

अंजलि आवर आँचल साथ बैठ कर नास्ता करने लगती है

माँ मुझे कुछ पूछना है आप से .... अंजलि बहुत hi प्यार आवर मशोमियत से बोलती है


अरे ये तो कमल हो गया .... मेरी गुड़िया रानी आज कुछ पूछने से पहले मेरी अनुमति मांग रही है ...

बोलो क्या पूछना है .... आँचल भी अंजलि की माशूम चेहरे को देख कर
मुस्कुराती हुई बोलती है

माँ आप मुझसे कितना प्यार करती है ..... अंजलि बड़ी hi मशोमियत भरी आवाज़ मैं बोलती है आवर रोटी का निवाला हाथ मैं लिए हुए hi आँचल को देखने लगती है

वही आँचल अंजलि की माशूम चेहरे को देख कर मुस्कुरा पड़ती है

मैं अपनी गुड़िया को बहुत बहुत प्यार करती हुईं .... अपनी जान से भी जयादा .. आँचल मुस्कुरा कर बोलती है

ओह मेरी पेरी माँ ... मैं भी आप से बहुत बहुत प्यार करती हुईं .... अंजलि भी मुस्कुरा कर बोलती है

ओह मेरी प्यारी नटखट सी गुड़िया ... ी लव यू ुंआआआआ .... आँचल खुश होकर अंजलि की माथे को चुम लेती है

लेकिन माँ आप पहले मेरी कसम खाइये फिर मैं पूछूँगी ..... अंजलि इस बार थोड़ी गम्भीरता से बोलती है

अंजलि अचानक चेहरे का रंग बदलते हुआ देख कर आँचल थोड़ी हैरान हो जाती है

क्या पूछना चाहती है गुड़िया .... इसके चेहरे को देख कर तो लगता है कोई बड़ी बात hi पूछने वाली है

गुड़िया तू क्या पूछने वाली है

हे भगवन कही गुड़िया को कुछ पता तो नहीं चल गया है .....

हे भगवन अब मैं क्या करूँ ... अगर इसकी कसम न खाई तो ये पता नहीं क्या करेगी ... बिलकुल ज़िद्दी है ये ...

आवर कसम खा लिए तो इसके सवाल का जवाब भी देना पड़ेगा .....

मैं गुड़िया की कसम खा कर झूट तो बोलने के बारे मैं सोच भी नहीं सकती हुईं ......... आँचल मन मैं सोचती है

आँचल थोड़ी देर के लिए परेशां हो जाती है आँचल को समझ नहीं आता है वह अंजलि की कसम खाये की नहीं


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कोमल गाओं मैं एक जगह अकेली कड़ी होती है फ़ोन देख रही होती है वही

कोमल से कुछ दुरी पर गाओं के कुछ लड़के भी खड़े होते है आवर कोमल को hi देख रहे होते है

कोमल सूत सलवार मैं बहुत hi खूबसूरत लग रही होती है


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माँ कसम कोमल को जब भी देखता हुईं मन करता है साली को उठ कर खलिहान मैं ले जॉन आवर पटक कर उसकी गांड hi फाड् दूँ

Ahhhhhhhhhh क्या गांड बनाई है कोमल ने अह्ह्ह अगर कभी मक्का मिला तो मैं कोमल की गांड पर अपना लैंड खूब मसलूंगा .... आवर फिर उसको कुटिया बना कर बिना लैंड गिला किया hi कोमल की गांड फाड् दूंगा

Aahhhhhhhhhhhhhhh कोमल की गांड तो फटेगी hi ऊपर से कोमल मुंह भी फाड् कर चीख निकलेगी .... उनमे से एक लड़का कोमल की निकली हुई गांड को देखते हुआ बोलता है आवर अपना लैंड मसल रहा होता है

साहिल खवाब मत देख ....वह तेरे को पास भी नहीं आने देगी .... आवर बोल रहा है उठाने को ... अगर उसके बाप को बस भनक भी लगी तो वह तुझे ज़िंदा जला देगा .... लेकिन साहिल तेरी बात सही है कोमल की गांड देख कर तो गाओं के कई चाचा भी लैंड मसल देता है .... दूसरा लड़का कहता है

सेल मुझे पता है .... मगर क्या करूँ साली को देख कर सब कुछ भूल जाता हुईं ..... मॉल hi ाएसि है ..... साहिल कोमल को देखते हुआ बोलता है

कोमल को देखते हुआ साहिल की आँखों मैं नासा सा हो रहा होता है जैसे साहिल अभी सरब के नशे मैं हो .. आवर बड़बड़ा रहा है

सही कहा साहिल .... कोमल ाएसि रास मलाई है जिसे हर कोई पहले चीखना पसंद करेगा ....

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बस कोमल को कुछ देर आवर देखता रहा होता मेरा पानी निकल जायेगा ...... आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह साला लैंड भी दर्द करने लगा

साहिल बोलता है आवर अपने घर की तरफ चल देता है

वही कोमल कुछ देर वह कड़ी रहती है तभी सामने के घर से नैना निकल कर आती है तो कोमल नैना के साथ घर की तरफ चल पड़ती है

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वही कॉलेज के बाथरूम मैं एक लड़का मूत रहा होता है लड़का मूत कर लैंड जेन्स के अंदर डालते हुआ घूमता है तभी उसकी नज़र सामने कड़ी टीचर पर नज़र जाती है

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

ओह्ह्ह सॉरी सॉरी रजनी मेम सॉरी मुझे नहीं पता आप यह है ......

वह लड़का सामने आदि की माँ रजनी को देख कर जल्दी से ज़िप लगने को होता है तभी उसका लैंड डाब जाता है जो व लड़का चीख पड़ता है मगर वह लड़का अपनी चीख पर काबू भी कर लेता है ताकि उसकी आवाज़ बहार न जाये


वही सामने कड़ी आदि की माँ रजनी बस लड़के के लैंड को घूरे जा रही होती है

मगर वह लड़के दर्द मैं होने के बाद भी अपना लैंड ज़िप से निकल कर लैंड अंदर करने की कोशिश करने लगता है मगर वह लड़का ज़िप निकल नहीं पा रहा होता है क्यू के उस लड़का का लैंड का चमड़ी डाब गया होता है जो बहुत दर्द कर रहा होता है


लड़के को दर्द मैं देख कर आदि की माँ अपनी नज़ारे हटा लेती है

अर्जुन रुको मैं देखती हुईं .... तभी आदि की माँ बोल पड़ती है

वह लड़का कोई आवर नहीं अर्जुन होता है


आंटी .... अर्जुन इतना बोल कर घूम जाता है

अर्जुन बीटा मुझे देखने दो ... तुम मेरे बेटे के जैसे हो .... आदि की माँ बोलती है

अर्जुन दर्द मैं होता है तो वह फिर कुछ नहीं बोलता है

वही आदि की माँ अर्जुन के सामने आ जाती है आवर अर्जुन के सामने बैठ जाती है ताकि वह ज़िप निकल सके

अर्जुन दर्द के मरे आँखें बंद किया हुआ होता है

वही आदि की माँ अर्जुन के लैंड के पास बैठ तो गयी होती है मगर अर्जुन का मोटा लैंड देख कर आदि की माँ की आँखें बड़ी हो गयी होती है

आदि की माँ अपनी पूरी ज़िन्दगी मैं इतना बड़ा लैंड नहीं देखि हुई होती है

या कह सकते है आदि की माँ अब तक एक लैंड के अलावा सायद hi कोई लैंड इतने करीब से देखि हुई होती है छूट मैं हलचल सी होने लगती है

आदि की माँ अर्जुन का मोटा चिकना लैंड देख कर आदि की माँ की छूट मैं हलचल सी होने लगती है


या कह सकते है आदि की माँ की छूट पानी छोड़ने लगती है

आदि की माँ अर्जुन का लैंड को पकड़ने मैं शर्मा भी रही होती है

हे भगवन इतना भी बड़ा लैंड होता है ये लैंड किसी कुवारी लड़की की छूट मैं गया तो वह सायद मार hi न जाये

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ये मेरी hi छूट मैं गया तो मेरी तो जान hi निकल जाएगी मैं भी तो कुवारी hi हुईं .... Ahhhhhhhhhhhhhhhh ......

अर्जुन का मोटा लम्बा लैंड को देखती हुई आदि की माँ सोचने लगती है

आह्ह्ह्हह्ह आंटी प्लीज जल्दी निकली वर्ण कोई आ जायेगा Ahhhhhhhhhh

हां हां अर्जुन निकलती हुई

अर्जुन की दर्द भरी आवाज़ सुन कर आदि की माँ सोच से बहार आती है आवर अर्जुन का लैंड पकड़ कर ज़िप जल्दी से निकल देती है

वही अर्जुन एक बार फिर से दर्द मैं सिसक पड़ता है मगर उसको आराम भी मिलता है

अर्जुन ज़िप बंद करते हुआ बाथरूम से निकल भागता है


वही आदि की माँ अभी भी वही बैठी हुई होती है आवर जिस तरह अर्जुन का लैंड पकड़ कर निकली हुई होती है उसी तरह अभी भी हाथ की मुट्ठी बनाई हुई होती है

हे भगवन मोटा है

आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरी छूट

आदि की माँ वही मुठ्ठी अपनी छूट के ऊपर रखती हुई तड़प पड़ती है जैसे अर्जुन का लैंड hi छूट मैं चला गया हो

वही अर्जुन जाकर अपनी बेंच पर बैठ जाता है कुछ hi देर मैं क्लास ख़तम हो जाता है तो अर्जुन क्लास से निकल जाता है आवर अपने बाइक के पास खड़ा हो जाता है आवर गीता दीदी की इंतज़ार करने लगता है

अर्जुन बाइक के पास खाद हो होता है तभी अर्जुन की नज़र सामने से जा रही 2 टीचर पर नज़र जाती है जो उनमे से आदि की माँ होती है अर्जुन की नज़र जैसे hi आदि की माँ पर जाती है तो देखता है आदि की माँ उसे hi तिरछी नज़र से देख रही होती है


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आदि की माँ की चेहरे पर एक अजीब सा कश्मकश होती है जैसे वह बहुत शर्मा भी रही होती है

आदि की माँ जाती हुई रुक जाती है आवर अर्जुन के पास आ जाती है

अर्जुन मुझे मांफ करना ... गलती मेरी भी थी .... बीटा प्लीज किसी को बताना नहीं इस बारे मैं .... आदि की माँ थोड़ी घबराती हुई बोलती है

आंटी कोई बात नहीं ... मैं पागल नहीं हुईं जो आप को बदनाम करूँगा ... जो भी हुआ अनजाने मैं हुआ .... अर्जुन बोलता है

अर्जुन की बात सुन कर आदि की माँ एक सकूँ सा साँस लेती है जो पहले थोड़ी घबराई हुई होती है

थैंक्स अर्जुन ....... वैसे अर्जुन बीटा जो लड़की तुमसे शादी करेगी वह बहुत खुश रहेगी तुम्हारे साथ .... आदि की माँ उतना बोल कर चली जाती है


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आदि की माँ जाती हुई मुस्कुरा भी रही होती है जो अर्जुन नहीं देख पता है

मगर अर्जुन को जैसे Hi आदि की माँ की बात समझ मैं आती है अर्जुन भी मुस्कुरा पड़ता है तभी अर्जुन की नज़र जाती हुई आदि की माँ की गांड पर नज़र जाती है


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आह्ह्ह्हह आंटी आप की गांड भी मेरे लैंड को खुश कर रही है .... अर्जुन मन मैं सोचता है

बहुत बड़ी है न .... अर्जुन के कानो मैं ये आवाज़ आती है जो अर्जुन घबरा जाता है आवर आदि की माँ की गांड से नज़र हटा लेता है

__________________________________
 
अपडेट ......80



अर्जुन फिर पीछे होकर देखता है तो सामने गीता दीदी को घूरते हुआ देख कर बस मुस्कुरा देता है

दीदी आप जो सोच रही ....

हां बता मत मैं जानती हुईं तू रजनी मेडम की गांड नहीं देख रहा था

गीता गांड का नाम बिलकुल अर्जुन के कण मैं बोलती है आवर मुस्कुरा भी देती है वही अर्जुन भी थोड़ा मुस्कुरा देता है

दीदी आप की गांड के आगे तो उनकी गांड कुछ भी नहीं है .... अर्जुन भी गीता की कान मैं बोलता है

वही गीता मुस्कुरा पड़ती है ... चल बदमाश कुछ भी बोलता है ... गीता तो अर्जुन की बात सुन कर hi शर्मा जाती है आवर बाइक पर बैठ जाती है वही अर्जुन बाइक स्टार्ट कर देता है

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हरिया चाचा खेत का हिसाब किताब आज से साहिल देख लेगा .... आप इसको सब कुछ बता दीजिये .... राखी देवी बोलती है .... जो अभी हॉल मैं बैठी हुई होती है आवर हरिया चाचा आवर साहिल भी सामने बैठे हुआ होते है

ठीक है छोटी मालकिन ... हरिया चाचा बोलते है

वही साहिल राखी देवी की जिस्म को नज़र चुरा चुरा कर देख रहा होता है


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साहिल कभी राखी देवी की खूबसूरत चेहरे तो कभी राखी देवी की चुकी की बिच की दरार को देख कर अपनी आँखें सेक रहा होता है

आह्ह्ह्हह्ह आंटी आप दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत हो आह्ह्ह्ह

आंटी मैं जनता हुईं आप काफी सल्ल से नहीं चूड़ी है आप की छूट बिलकुल कुवारी लड़की की तरह होगी

आंटी आप एक बार मेरा प्यार काबुल कर लेना फिर देखना इसी हवेली मैं आप हर जगह आप की गदराई हुई जवानी को मसल मसल कर रख दूंगा

आप को इतना प्यार दूंगा की आप दुनिया को भूल कर बस मेरे लैंड अपनी पहली हुई छूट मैं लेती रहोगी

साहिल बीटा तुम हरिया चाचा के साथ चले जाओ ...
राखी देवी अपनी पल्लू को साइन पर रखती हुई बोलती है

साहिल फिर उठ कर हरिया चाचा के साथ चला जाता है

आंटी आज आप बहुत खूबसूरत लग रही है .... साहिल जाते हुआ बोलता है

वही राखी देवी बस शर्मा जाती है मगर कुछ बोलती नहीं है

हे भगवन मैं भी न कैसे भूल गयी पुल्लू कहा है ... वह कैसे देख रहा था

कास वह मेरे बारे मैं कुछ गलत न सोच रहा हो ... गलती मेरी hi है मुझे आयी नहीं बैठना चाहिए था उसके पास

राखी देवी मन मैं सोचती है मगर राखी देवी थोड़ी खुद पर गुस्सा भी करती है

वही राखी देवी भी रूम मैं चली जाती है

राखी देवी रूम मैं आने के बाद आँचल को फ़ोन लगा देती है जो आँचल कुछ देर के बाद फ़ोन उठती है


अह्ह्ह .... नमस्ते दीदी .... आँचल बोलती है

इधर आँचल की आह्ह्ह्ह सुन कर राखी देवी थोड़ी हैरान हो जाती है

आँचल क्या हुआ कहर क्यू रही है .... राखी देवी पूछती है

ओह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्स दीदी आप समझ जाइये न .... मैं क्या कर रही हुईं Aaahhhhhhhhhh

आँचल इस बार ज़ोर से सिसकियाँ लेती हुई बोलती है

मतलब तू ऊँगली कर रही है ...

आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जीभ नहीं आआह्ह्ह्ह

आँचल जीभ नहीं तू जीभ से कैसे कर रही है .... राखी देवी थोड़ी हैरानी से पूछती है

दीदी मैं बोल रही थी आप होती तो जीभ से कितनी अच्छी मेरी छूट को चाट देती

Ahhhhhhhhhhhhhh डीइइइइइइइइ

वही आँचल थोड़ी देर चुप रहने के बाद बोलती है


आँचल की सिसकियाँ सुन सुन कर राखी देवी की छूट भी गर्म होने लगती है राखी देवी बात करती हुई अंगड़ाई लेने लगती है

आँचल मैं अभी रखती हुईं जब तू फ्री हो जाये तो फ़ोन करना .... राखी देवी बोल कर फ़ोन रख देती है

आँचल की मदहोशी भरी सिसकियाँ सुन कर राखी देवी भी इधर गर्म हो चुकी होती है राखी देवी बीएड पर लेट जाती है आवर अपनी जिस्म को मसलने लगती है

ससससस आह्ह्ह्हह्ह

राखी देवी अपनी टाइट चुकी को पकड़ कर मीठा दर्द का अहसास पते हुआ सिसक पड़ती है

राखी देवी बीएड पर लेती हुई नागिन की तरह मचलने लगती है राखी देवी की जिस्म मैं कुछ जयादा hi गर्मी होने लगती है आह्ह्हह्ह्ह्ह

आँचल कास तू मेरे पास होती Ahhhhhhhhhhhhhhhhh

राखी देवी सिसकियाँ लेती हुई बोलती है

राखी देवी अपनी साड़ी निकल कर बीएड पर फेक देती है आवर पेटीकोट के ऊपर से hi छूट को मसलने लगती है

आह्ह्ह्हह्ह ऊह्ह्हह्ह्ह्ह आह्ह्हह्ह्ह्ह

राखी देवी की पहली हुई छूट पेटीकोट के ऊपर से भी साफ पता चल रही होती है


राखी देवी अपनी छूट की छाप पर hi ऊँगली से रगड़ रही होती है आवर कुछ hi वक़्त मैं राखी देवी की पेटीकोट भींग जाती है

राखी देवी सिसकियाँ लेती हुई बीएड पर हाफने लगती है

______________________________

अर्जुन इस वक़्त अपने हवेली के ऊपर खड़ा होकर सिगरेट पि रहा होता है आवर अर्जुन सीढ़ियों के तरफ भी देख रहा होता है ताकि निचे से कोई देख न ले

अर्जुन सिगरेट पिटे हुआ दूसरी तरफ चला जाता है तभी अर्जुन की नज़र सामने की छत पर कड़ी आदि की माँ पर नज़र जाती है

अर्जुन आदि की माँ को सामने देख कर सिगरेट छिपाने को होता है तब तक आदि की माँ देख चुकी होती है

आदि की माँ पहले तो अर्जुन को घर कर देखती है फिर अर्जुन को अपने घर आने का इसरा करती है

आदि की माँ को देख लेने से अर्जुन थोड़ा दर जाता है ..... ये सोच कर के आदि की माँ सायद उसे डांटने के लिए बोलै रही है

अर्जुन फिर भी सामने से हैट कर सिगरेट पिता है आवर आदि के घर चला जाता है

अर्जुन आदि के घर के पास जाता है तो दरवाज़ा खुला हुआ पता है तो अर्जुन घर के अंदर चला जाता है

तुम मेरे घर क्या कर रहे हो ... अर्जुन हॉल मैं जाता hi है के हॉल मैं बैठा हुआ आदि बोल पड़ता है

वह रजनी मेडम ने बुलाया है .... अर्जुन आदि के आँखों मैं देखता हुआ बोलता है

आदि तो अर्जुन को घर hi रहा होता है मगर अर्जुन भी आदि को घर रहा होता है

अर्जुन बीटा आ गया ... अर्जुन थोड़ा मार्किट जाना था क्या तुम मुझे ले जा सकते हो ....
आदि की माँ कहती है

रजनी मेडम इस वक़्त .... घर आने मैं रात हो जाएगी .... अर्जुन टाइम देखते हुआ बोलता है


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मगर जैसे hi अर्जुन की नज़र आदि की माँ पर नज़र जाती अर्जुन का लैंड Jen's मैं खड़ा हो जाता है

खुली हुई जुल्फें होंठों पर लाल होंठ लाली आँखों मैं काजल अर्जुन आदि की माँ की खूबसूरती तो देख hi रहा होता है मगर अर्जुन की नज़र अभी आदि की माँ की चौड़ी छाती पर रुकी हुई होती है

क्यू की आदि की माँ की ब्लाउज मैं तानी हुई एक चुकी दिख रही होती है जिसको देख कर अर्जुन की हालत ख़राब हो रही होती है

अर्जुन की हालत तो ख़राब हो hi रही होती है मगर इस वक़्त अर्जुन से जयादा आदि की हालत ख़राब हो रही होती है

आदि अपनी माँ की टाइट चुकी को अभी घर कर देख रहा होता है आदि अपनी माँ की बड़ी बड़ी चुकी को देख कर अपना हाथ लैंड पर रख देता है

आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कितनी कातिल जवानी है मेरी माँ की साली की जितनी उम्र बढ़ रही है ये उतनी hi जवान हो रही है

आअह्ह्ह्हह बस मेरा लैंड भी कितने दिन के बाद मुझे महसूस हुआ

ये साला कैसा घर रहा है ... बस आदि की नज़र जैसे hi अर्जुन पर जाता है आदि मन मैं सोचता है

अर्जुन को थोड़ा रहत मिलता है की आदि की माँ सिगरेट के बारे मैं नहीं मार्किट जाने के लिए बोल्या है

अर्जुन बीटा पहले तो मुझे मेडम कहना बंद करो .... ये कॉलेज नहीं घर है आवर तुम मेरी पडोसी भी हो तो तुम मुझे आंटी बोलै सकते हो घर पर ठीक है ... आदि की माँ बोलती है तो अर्जुन हां मैं सर हिला देता है

अर्जुन सहर आज नहीं कल जाना है कल कॉलेज भी बंद है तो तुमेह भी कोई प्रॉब्लम नहीं होगी .... आदि की माँ कहती है

आदि की माँ की बात सुन कर अर्जुन की नज़र आदि पर जाता है जो आदि अर्जुन को घूरते हुआ पता है

अर्जुन आदि को देखते हुआ फिर से रजनी को देखने लगता है जिससे आदि गुस्से से लाल हो जाता है

माँ मैं लेकर चलता हुईं आप को ... आदि बोलता है

आदि बीटा तेरा तबियत अभी ठीक नहीं है ... तुम आराम करों मैं अर्जुन के साथ चली जाउंगी .... आदि की माँ कहती है

आंटी कल सुबह आप तैयार हो जाइएगा ... सुबह मैं जायेंगे तो धुप होने तक. घर आ जायेंगे ... अर्जुन बोलता है

आदि की माँ ठीक है बोलती है ....

आंटी आप बहुत खूबसूरत लग रही है .... अर्जुन जाते हुआ बोलता है

थैंक्स बीटा ...... आदि की माँ मुस्कुराती हुई बोलती है

वही आदि गुस्से से लाल हो जाता है आवर अर्जुन से जयादा अपनी माँ को गुस्से से देखने लगता है

अर्जुन एक नज़र आदि को देखता है आवर मुस्कुरा कर चला जाता है

बस चल क्या रहा है मेरे घर मैं आवर ये मेरी रंडी मैं इस तरह उस हरामी के सामने आई भी कैसे

वह हमेशा जिस्म को धक् कर रखती थी मगर आज तो किसी रंडी की तरह लग रही है ... लगता है इसकी छूट मैं अब आग लग गयी है .... आदि मन मैं सोचता है

अर्जुन घर आता है आवर सीधे अपने रूम मैं चला जाता है

अर्जुन बीएड पर सोता hi है के अर्जुन का फ़ोन पर मस्सगे आता है तो अर्जुन मस्सगे ओपन करता है

ही

अर्जुन मस्सगे देख कर फ़ोन रख देता है बिना कोई जवाब दिया

कुछ देर के बाद फिर से मस्सगे आता है ..... अर्जुन फिर से मस्सगे ओपन करता है

गुस्सा हो प्लीज ... गुस्सा न हो मैं बस तुमसे बात करना चाहती हुईं

प्लीज कोई तो जवाब दो

तुम जैसा मुझे समझ रहे हो मैं वैसी लड़की नहीं हुईं

.......

मैं बिलकुल सरीफ लड़की हुईं मेरे दिल में मेरा भाई बस चूका है तो इसमें मेरी क्या गलती है ....

तुमसे अपनी दिल की बात कर के मुझे बहुत अच्छा लगता है ... प्लीज कोई तो जवाब दो

अर्जुन के फ़ोन पर लगतार मस्सगे आता hi रहता है

क्या बात करनी है .... तुम अपने भाई से सीधे बोल क्यू नहीं देती मुझे छोड़ दो ...... अर्जुन लिख कर सेंड करता है

वही एक रूम मैं लड़की बीएड पर सोइ हुई होती है आवर वह सिर्फ ब्रा पेंटी मैं होती है आवर फ़ोन पर मस्सगे आते hi देख कर थोड़ी सरमाती हुई मुस्कुरा भी देती है

हे भगवन कैसी बातें करते हो मैं भला कैसे बोल सकती हुईं ये बात .... वह लड़की मुस्कुराती हुई टाइप कर के सेंड करती है

फिर मुझे क्यू परेशां कर रही हो .... आखिर तुम हो कौन आवर मेरा नंबर कैसे मिला तुमेह

तुम मुझे जानते हो ... मैंने तुम्हारा नंबर तुम्हारी गीता दीदी की फ़ोन से चुपके से लिया है

तुम मुझे अच्छे लगे इस लिए तुमसे बात करने की सोची ... वह लड़की टाइप करती हुई फिर से मुस्कुरा देती है

मतलब तुम गीता दीदी की कोई सहेली हो ..... क्या नाम है तुम्हारा .... अर्जुन टाइप करता है

सॉरी नाम नहीं बताउंगी .... क्या तुम मुझसे गन्दी बात कर सकते हो मैं बस तुमसे बात कर के खुद को ठंडी करना चाहती हुईं .... लड़की ये टाइप करती हुई अपनी छूट को सहलाने लगती है

बात कर के क्यू ठंडी होना चाहती हो .... एक बार मिलो मैं तुमेह इतना प्यार दूंगा की तुम अपने भाई को भूल जाओगी ... देखों मेरा लैंड कितना बड़ा है अर्जुन टाइप करता है आवर जल्दी से अपने लैंड का फोटोज लेकर भेज देता है


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वही वह लड़की अभी अपनी छूट को मसल hi रही होती है मगर जैसे hi अर्जुन का मस्सगे मैं लैंड देखती है उस लड़की की सांसे एक वक़्त के लिए तुम जाती है .... उस लड़की की हाथ से फ़ोन छूट कर निचे गिर जाती है

उस लड़की की सांसे ज़ोर ज़ोर से चलने लगती है वह लड़की अपनी छूट को दोनों हाथों से छुपा लेती है .... जैसे वह लैंड अभी उसकी छूट मैं चला जायेगा

ओह्ह्ह्हह Maaaaaaaaaaaa ये क्या है ..... इतना बड़ा भी होता है क्या

इतना बड़ा आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह .... मैं तो मर hi जाउंगी

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

वह लड़की बीएड पर अपनी गांड उठा उठा कर बहुत सारा पानी बीएड पर बहाने लगती है

उस लड़की की पूरी जिस्म पसीने से भींग चुकी होती है

वह लड़की फिर दुबारा फ़ोन उठती नहीं आवर उसी तरह आँखें बंद कर लेती है

अर्जुन उस लड़की की मस्सगे का वेट करता है मगर कोई मस्सगे नहीं आता है तो अर्जुन खुद मुस्कुरा पड़ती है

लगता है मेरे लैंड को देख कर वह दर गयी है ...डरे भी क्यू न उसकी छूट भी तो कुवारी है कितनी छोटी बिल थी उसकी ...... अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कस उसकी छूट मिल जाती ..... मुझे पता लगाना hi होगा वह कौन है ...... गीता दीदी से पता करना होगा उनकी कितनी सहेली है

....... अर्जुन मन मैं सोचता है आवर बाथरूम मैं चला जाता है
 
अपडेट ...... 81

अर्जुन आदि के घर से निकल कर खेत की तरफ जाने को सोचता ताकि खेत पर क्या हो रहा है पता कर सके

वही आँचल बिलकुल नंगी अपनी बीएड पर लेती हुई होती है आवर आँचल की दोनों पेअर दोनों तरफ फैली हुई होती है आवर आँचल की छूट के आस पास छूट का पानी थोड़ा थोड़ा सुख रहा होता है

आँचल छूट की पानी निकल जाने पर अपनी जिस्म को बहुत हल्का सकूँ महसूस कर रही थी मगर आँचल की चेहरे पर एक अजीब सी उदासी आवर सरम सी छै हुई होती है

आँचल दिल hi दिल मैं कुछ सोच भी रही होती है

तभी बाथरूम का गेट खुलता है आवर अंजलि बिलकुल नंगी निकलती है जो आँचल बस एक नज़र अंजलि को देख कर बीएड पर अपनी साड़ी को खिंच कर जिस्म पर रख लेती है

वही अंजलि मुस्कुराती हुई आँचल को पकड़ लेट जाती है

ुमायआ मेरी सबसे अच्छी आवर प्यारी माँ ...

माँ आप भी कुछ बोलिये न ... आप मुझसे प्यार नहीं करती .... अंजलि आँचल को मज़बूती से छोटी बच्ची की तरह पकड़ती हुई बोलती है

अंजलि की इस हरकत से आँचल के चेहरे पर अभी थोड़ी मुस्कान आ जाती है

भगवन जीई मैं पहले रह रह कर कभी कभी आप पर गुस्सा हो जाती थी ये सोच कर के आप ने मुझे कोई औलाद क्यू नहीं देते .. मैंने पिछले जनम मैं कौन सा आएसा पाप कर दिया था ....

लकिन अब मुझे आप से कोई शिकायत नहीं है ....

आप ने मुझे कोई औलाद नहीं दिया मगर जब से गुड़िया मेरे पास आई मुझे कभी भी औलाद की कमी महसूस नहीं ... मैंने ज़रूर पहले जनम मैं कोई अच्छा बुरा काम की होगी .... मगर अब मुझे सच मैं आप से कोई गिला सिकवा नहीं है

अंजलि प्यार को महसूस करती हुई आँचल मन मैं सोचती है आवर आँचल की आँखें भर आती है

माँ आप रो क्यू रही है आप को बुरा लगा ... मैंने जो किया ... प्लीज आप मत रोइये मैं फिर कभी आप को परेशां नहीं करुँगी ....... प्लीज माँ आप मत रोइये

आँचल की आँखों से आंसू निकल कर जैसे hi अंजलि की गलों पर गिरती है अंजलि झट से उठ कर बैठ जाती है आवर आँचल की आँखों से बहती हुई आंसू देख कर अंजलि भी दुखी हो जाती है आवर मायूस होकर बोलने लगती है

ओह मेरी गुड़िया .. नहीं .. नहीं रोना नहीं ओह मेरी बच्ची रोना नहीं

आँचल भी उठ कर बैठ जाती है आवर अंजलि को गले लगा लेती है


आप तो मेरी जान हो ... मैं कभी आप से परेशां हो hi नहीं सकती आप की नटखट सी सैतानी देख कर तो मेरी दिल को सकूँ मिलता है

आप जब मेरे पास नहीं होती हो तो मुझे लगता है मेरी कोई अनमोल चीज खो गयी है

ुंआआआआआ ... आप की ये माँ आप को अपनी जान से भी जयादा प्यार करती है है ... चाहे आप कितनी भी सैतानी करे ....

आवर ये सैतानी तो मुझे सबसे अछिइइइइइ लगी

ये बात आँचल अंजलि की कान मैं थोड़ी मुस्कुराती हुई बोलती है

क्या आप को अच्छी लगी वाओ ... ी लव यू माँ .... अंजलि खुश होती हुई बोलती

दोनों माँ बेटी एक दूसरे से कुछ देर लिपटी हुई होती है

माँ गुस्सा नहीं करना ... आप पहले hi बोलती थी ... आप से कोई भी बात पूछ सकती हुईं ... इस लिए पूछ रही हुईं

क्या भाई का वह बहुत बड़ा था ... दीदी की उसमे कैसे चला गया .... क्या आप ने देखा था ...

हे भगवन ... पहले तो अपनी कसम देकर सब कुछ जान गयी ... आवर मेरे साथ ये सब भी कर लिया .... अब फिर से पूछ रही है

भगवन जी ज़रा इसको अकाल भी दे देते ....

आह्ह्ह्हह्ह कैसे बताऊँ इसे अर्जुन का कितना बड़ा है

आह्ह्ह्हह्ह पता नहीं कैसे गीता बेटी पूरी अंदर ली होगी

बाप रे मेरी छूट मैं गयी तो मैं तो चीख चीख कर मर hi जाउंगी ..... आँचल अंजलि की बातें सुन कर मन मैं सोचती है

माँ क्या सोच रही ... बताइये न ... अंजलि फिर से बोलती है

हां गुड़िया अर्जुन का बहुत बड़ा है .... पता नहीं क्या हालत हो गयी होगी गीता बेटी की .....

आँचल सरमाती हुई बोलती है ....

वाओ माँ दीदी बहुत हिम्मत वाली है .... (पता नहीं मेरा क्या हॉल होगा )

अंजलि ये बात कुछ सोचती हुई मन मैं बोलती है

माँ आप को बुरा नहीं लगा .... भाई बहन को एक साथ देख कर ... अंजलि पूछती है ...

गुड़िया उस वक़्त तो मुझे बहुत गुस्सा आया मगर जब गीता ने पूरी बात बताई तो मेरा गुस्सा चला गया ..... मैं तुम तीनो को दुखी नहीं देख सकती

गीता बेटी अर्जुन से प्यार करती है आवर सब कुछ गीता बेटी ने किया था अर्जुन उसे कई बार मन कर चूका था ... लेकिन गीता बेटी के प्यार के आगे हार गया ... आँचल बोलती है

वाओ आप सच मैं हमेह बहुत प्यार करती है .... माँ क्या एक बार फिर से करे ..... अंजलि मुस्कुराती हुई बोलती है

चल हैट बदमाश ... रात होने वाली है ... चल आज मेरी हेल्प कर किचेन मैं

आँचल अंजलि को दूर करती हुई बीएड से नंगी hi उतर जाती है आवर बाथरूम मैं चली जाती है .... वही अंजलि मुस्कुरा रही होती है

______________________________ कोमल बीएड पर लेती हुई होती है आवर फ़ोन पर बात कर रही होती है

आरती दीदी प्लीज आ जाइये न ... आप को गुड़िया भी बहुत मिस करती है .... कोमल बोलती है

कोमल मैं भी तुम सब को बहुत मिस करती हुईं ...ठीक है आज आते है तो तेरे जीजू से बात करती हुईं ... वह अपनी मां पापा से बात कर लेंगे ... ठीक है अभी रखती हुईं सबको खाना भी खिलाना है ...... आरती इतना बोल कर फ़ोन रख देती है

कोमल आरती से बात कर के खुद फ़ोन चलने लगती है .....

डीई ये पिछ कितनी अच्छी है न ... अपनी फब पर दाल दूँ क्या .... बहुत लिखे कमेंट मिलेंगे .... नैना रूम मैं आती है आवर कोमल के पास बैठ कर कोमल की एक पिछ दिखती हुई बोलती है


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अह्ह्ह्हह्हह कोमल की पिछ सच मैं कमल की होती है कोमल मखमली जिस्म पर मखमली कपडे पहनी हुई बैठी हुई होती है जिसमे कोमल की टाइट चुकी उभर कर दिख रही होती है

ये पिछ अगर नैना फब कर दाल दी तो लिखे कमेंट की नदिया hi बाह जाएगी आवर न जाने कितने लड़के पिछ देख कर hi लैंड हिलना सुरु कर देंगे आवर कोमल की पिछ को देखते हुआ कोई कोमल की मुंह मैं लैंड सताता तो कोई कोमल की उठी हुई चुकी पर लैंड रगड़ता .....

गुड़िया कोई सैतानी नहीं ... पहले भी बोल चुकी हुईं न ..... मेरी कोई भी पिछ नेट पर नहीं डालना ..... मेरी मान तो अपनी भी मत दाल .....

सैतान इधर ला फ़ोन मैं तेरे फ़ोन से अपनी साडी पिछ hi डिलीट कर देती हुईं ... पता नहीं कब तू दाल दे

कोमल नैना को डांटती हुई नैना से फ़ोन ले लेती है

वही नैना मुंह बना लेती है ....

डीईई प्लीज पिछ डिलीट मत कीजिये मैं नहीं डालूंगी ... प्लीज डीईई

नैना मुंह बना कर बोलती है

नैना की माशूम चेहरे को देख कर कोमल पिछ डिलीट नहीं करती है

ठीक है नहीं करती ... लेकिन मेरी बात याद रखना कोई सैतानी नहीं .... कोमल फ़ोन देती हुईं बोलती है

ुमायआ थैंक यू डीईई ी लव यू

नैना मुस्कुराती हुई फ़ोन ले लेती है आवर कोमल के गलों पर किश कर देती है

ठीक है अब फ़ोन रख आवर जा पढाई कर ... कोमल कहती है

वैसे डीई आप अपनी पिछ क्यू नहीं डालने देती है ....

तुझे जानना है ... ला फ़ोन मैं बताती हुईं .... कोमल बोलती हुई ननिअ को पकड़ने को होती है तब तक नैना उठ कर भाग जाती है

बदमाश लड़की ..... तुझे क्या पता मेरी पिछ देख कर कौन कमीना क्या बोलेगा ..... कॉलेज मैं hi सेल सब हरामी घूरते रहते है ... यह तक टीचर भी मुझे घूरते है

कभी कभी सोचती हुईं मेरे चेहरे पर कुछ लगा तो नहीं है .... अब भगवन ने मुझे इतनी खूबसूरत बनाया है तो मैं क्या करूँ .... कोमल मन मैं सोचती है

वही गाओं के एक घर मैं ......

एक औरत खत पकड़ कर बैठी हुई हॉट है आवर वह बिलकुल नंगी होती है उसकी चिकनी गांड पीछे की तरफ निकली हुई होती है आवर उस औरत के पीछे एक लड़का उस औरत की गांड पर एक पिछ चिपका रहा होता है

चल हो गया अब थोड़ी घोड़ी बन जस मेरी जान आज तो मैं तेरी गांड फाड् hi दूंगा जब से देखा है ... तेरा नशा सा छाया हुआ रहता है

वह लड़का अपना लैंड उस औरत की गांड मैं सताते हुआ गांड पर लगी पिछ को देखते हुआ बोलता है

लड़के की नज़र उस औरत की गांड पर न होते हुआ गांड पर चिपकी हुई पिछ पर होती है आवर वह लड़का पिछ को देख कर अपना लैंड ज़ोर ज़ोर से हिला रहा होता है

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

वह औरत जैसे hi घोड़ी बनती है वह लड़का उस औरत की कमर पकड़ कर उस औरत की सुखी हुई गांड मैं पूरी ताक़त से लैंड पूरा दाल देता है

वह औरत बेचारी दर्द मैं तड़प जाती है

आह्ह्ह्ह मेरी गांड फैट गयी आह्ह्ह्ह मैं मर जाउंगी


भगवन के लिए लैंड बहार निकल ले हरामी

आह्ह्हह्ह्ह्ह

वह औरत दर्द मैं रोटी हुई बोलती है


मक जयादा चीख मत नहीं तो वह बेलन भी तेरी गांड मैं दाल दूंगा

आह्ह्ह्हह्ह मेरी रानी अह्ह्ह्हह्हह

ये ले बस ते वह लड़का बोलता है आवर उस औरत की गांड मैं ज़ोर ज़ोर से धक्का मरने लगता है

वह औरत बेचारी दर्द मैं चीखती रहती है उस औरत की आंखों से आंसू भी निकल रहा होता है लेकिन उस लड़के को कोई फर्क नहीं पड़ता है

वह तो पिछ को देख कर आवर भी तेज़ धक्के मरने लगता है कोई 10 मिनटों के बाद वह लड़का झाड़ जाता है

उस लड़के को जैसे मॉल निकलने को होता है वह लड़का उस औरत की गांड से लैंड निकल लेता है आवर अपना लैंड गांड से निकल कर पिछ के ऊपर रख देता है ... जिससे उस लड़के का सारा पानी पिछ के ऊपर गिर जाता है ....

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

आवर जयादा दिन नहीं ... जल्द hi मैं अपना रास तेरी मुंह मैं इसी तरह दूंगा

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa


वह लड़का बोलता है आवर उस औरत की गांड पर बड़ी बेरहमी से मार कर चला जाता है

वही वह औरत दर्द मैं चीखती हुई वही ज़मीन पर लेट जाती है


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अर्जुन आवर गीता एक दूसरे के बाँहों मैं बिलकुल नंगे सोये हुआ होता है जैसे दोनों पति पत्नी हो ....

गीता तो दो चुकी होती है मगर अर्जुन अभी भी जाग रहा होता है आवर अर्जुन का लैंड अभी भी खड़ा होता है

Aahhhhhhhhhhh .... क्या करूँ उस साली की छूट बस याद आ रही है

क्या छूट है उसकी .... बस कास वह अपने भाई से पहले मुझे अपनी छूट दे देती ......

अर्जुन लैंड मसलते हुआ सोचता है

अर्जुन की आँखें हवस को वजह से लाल हो रही होती है

अर्जुन अब पहले से बदल चूका होता है अर्जुन अब वह अर्जुन नहीं होता है जो लड़कियों से दूर रहता था

अर्जुन को छूट का चस्का गीता लगा चुकी होती है अब अर्जुन को अब छूट देख कर लैंड खड़ा हो रहा होता है .....

बाबू क्या हुआ सो जा अब 3 : ऍम बजने वाले है

गीता फ़ोन देखती हुई बोलती है

डीई एक बार फिर करे क्या प्लीज....

बाबू प्लीज अब आवर नहीं मेरी छूट दर्द कर रही है ... गीता आधी नींद मैं बोलती है

Ahhhhhhhhhhhhhhh

डीई मेरा लैंड खड़ा है ... कब से बैठ hi नहीं रहा है ... एक बार करने दो न ...... अर्जुन गीता की चुकी पकड़ कर मसलते हुस कहता है जो गीता सिसक पड़ती है

ओह्ह भाई ठीक है मगर तू धक्का मर मार बस अंदर दाल कर सजा ...... प्लीज........ गीता नींद मैं hi बोलती है

अर्जुन भी फिर कुछ नहीं बोलता है आवर अपना लैंड गीता की छूट मैं दाल देता है

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

छूट मैं लैंड जाते hi गीता चीख कर अर्जुन को पूरी मज़बूती से पकड़ लेती है आवर अपनी पेअर दोनों सत्ता लेती है जिससे अर्जुन का लैंड गीता की छूट मैं फास जाता है

अर्जुन भी गीता दीदी को पकड़ कर अपनी आँखें बंद कर लेता है ..

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