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अपडेट ...... 72
राखी देवी आवर अर्जुन दोनों खेत वाले रूम मैं होते है राखी देवी थोड़ी दुखी होती है आवर अर्जुन अपनी माँ को घर रहा होता है आवर पास मैं हरिया चाचा भी बैठे हुआ होते है
दरअसल राखी देवी हरिया चाचा से बात कर रही होती है तभी अर्जुन वह आ जाता है आवर कुछ बातें पीतमपुरा के बारे मैं सुन लेता है मगर अर्जुन का पेअर गेट से टकराने से राखी देवी सुन कर चुप हो जाती है तब अर्जुन रूम मैं चला जाता है आवर अपनी माँ को घूरने लगता है
माँ क्या बात है आप क्या छुपा रही है मुझसे ये चाचा कौन है इन्हे पहले कभी नहीं देखा मैंने
अर्जुन हरिया चाचा को घूरते हुआ पूछता है
राखी आवर कुछ मत छिपा अर्जुन से अगर अभी तूने इसे कुछ नहीं बताया तो अर्जुन तुझसे फिर से दूर चला जायेगा आवर सायद hi तुझे कभी मनाफ़ करेगा ..... क्या तू एहि चाहती है
नहीं नहीं मैं अर्जुन को आवर दूर नहीं जाने दूंगी खुद से मैं अर्जुन को सब बता दूंगी ... राखी देवी मन मैं सोचती है आवर उस गाओं के बारे मैं बताना hi ठीक समझती है
अर्जुन बीटा ये हरिया चाचा है
अर्जुन बीटा यह से 40 : कम दूर एक गाओं है पीतमपुरा उस गाओं मैं तेरे पापा के दादा जी रहते थे वह बहुत अच्छे इंसान थे मगर उनसे एक गलती हो गयी थी वह अपनी एक नौकरानी के साथ सम्भन्ध बना लिए थे आवर फिर एक लड़की की जनम हुआ जिनका नाम ममता है
अर्जुन बीटा मैं उस दिन पार्टी मैं जिस औरत के घर ले गयी थी न वह औरत आवर कोई नहीं तुम्हारे पापा की बुआ थी ममता बुआ
अर्जुन ये बात जैसे hi तेरे दादा आवर बड़े दादा को पता चली के उनके बाप ने एक नौकरानी के साथ वह सब किया आवर अब एक बेटी भी है वह दोनों बहुत गुस्सा हुआ अपने बाप पर मगर कुछ बोल न सके मगर उन दोनों के दिल मैं बेहपण गुस्सा भर गया होता है वह एक दिन ममता बुआ की माँ को बहुत मरते है आवर उनेह डरा कर गाओं से निकल देते है
जब ये बात (दादा) ठाकुर साहब को पता चली तो उनेह बहुत दुःख हुआ मगर वह अब कुछ भी नहीं सकते थे क्यू के कुछ दिन से उनकी तबियत ख़राब रहने लगी थी आवर वह बीएड पर पद गए होते है फिर धीरे धीरे दिन बीतता गया आवर एक दिन (दादा) ठाकुर साहब चल बेस .... उनके मरने के बाद पता चला उन्होंने ने अपनी जायदाद मैं से कुछ खेत ममता बुआ के नाम कर चुके है
ये बात जब तेरे दादा आवर बड़े दादा को पता चली तो वह दोनों फिर से गुस्सा हो गए आवर तेरे बड़े दादा तो थान लिए के वह दोनों माँ बेटी को मार देंगे मगर तेरे दादा जी को ये बात बिलकुल भी अच्छी नहीं लगी आवर उन्होंने ने साफ मन कर दिया के वह इसमें उनके साथ नहीं रहेंगे जिससे तेरे बड़े दादा तेरे दादा पर गुस्सा हो गया उसके कुछ दिन के बाद hi तेरे बड़े दादा जी ने अपनी दूसरी हवेली उस गाओं मैं बनवा लिए ..... वह तेरे दादा से इतना गुस्सा हुआ के वह तेरे दादा को हर तरह से तंग करने लगे कभी खेतों मैं आग लगवा देते तो कभी मज़दूरों को मरने लगते तो कभी किसी गाओं के औरत लड़की के साथ सम्भन्ध बनाते
तेरे बड़े दादा जी तेरे दादा आवर ममता बुआ का गुस्सा गाओं वालों पर निकलने लगे तेरे बड़े दादा से तंग आकर तेरे दादा जी यह आ गए तेरे दादा के यह आते hi वह की साडी खेत तेरे बड़े दादा कब्ज़ा कर लिए मगर तेरे पापा जब बड़े हुआ तो वह केस कर दिए तेरे बड़े दादा पर लेकिन तेरे पापा .... राखी देवी इतना बोल पर चुप हो जाती है आवर राखी देवी की आँखें भर आती है ... जो अर्जुन समझ जाता है माँ को पापा की याद आ गयी है जो अर्जुन अपनी माँ के कंधे पर हाथ रख देता है
तेरे पापा के जाने के बाद मैं hi केस लड़ रही थी आवर देख कल hi हम केस जित गए
राखी देवी बोल कर चुप हो जाती है आवर अर्जुन को देखने लगती है
माँ आप दुखी न हो ... आज मैं आप से नाराज़ नहीं हुईं
आप ने मुझे उस गाओं के बारे मैं बता दिया इसमें आप की कोई गलती नहीं है :
अर्जुन अपनी माँ के आँखों मैं आई हुई आंसू की बुन्देय को पोछ कर कहता है
वही राखी देवी अर्जुन का हाथ पकड़ कर चुम लेती है आवर अर्जुन को गले लगा लेती है
राखी देवी बहुत खुश होती है अर्जुन का प्यार देख कर
अर्जुन अपनी माँ को लेकर घर आ जाता है घर आने के बाद राखी देवी अर्जुन को प्रीतमपुरा चलने के लिए बोलती है जो अर्जुन मन कर देता है
राखी देवी अर्जुन के मन करने पर वह अकेली hi हरिया के साथ प्रीतमपुरा के लिए निकल जाती है
रात के 9: पं
अर्जुन क्या हुआ अभी तक सोया नहीं आवर इतनी रात को ऊपर क्या कर रहा है
आँचल छत के ऊपर आकर अर्जुन से बोलती है
ममम मायआ
कोई बात नहीं बीटा मुझे पता है तू सिगरेट पिता है
आँचल मुस्कुरा कर बोलती है
वही अर्जुन सिगरेट बूटा कर निचे गिरा देता है
सॉरी माँ अर्जुन को जब भी अपनी गलती का अहसास या किसी चीज का दर होता है वह आँचल को बड़े hi प्यार से माँ पुकारता है जिससे आँचल इतनी खुश होती है की वह अर्जुन को कुछ बोल भी नहीं पति है
अरे मैं बोली न मुझे पता है तू सिगरेट पिता है फिर सॉरी क्यू बोल रहा है
आँचल मुस्कुराती हुई फिर से बोलती है आवर अर्जुन के पास hi कड़ी हो जाती है
अब बता क्या सोच रहा है ... आँचल पूछती है
माँ मैं सोच रहा हुईं माँ के साथ मुझे भी जाना चाहिए था ... अर्जुन बोलता है
ओह्ह मेरा बीटा
सही सोच रहा है मेरा बीटा .... हां दीदी के साथ जाना चाहिए था
अब दीदी को तुम्हारी ज़रूरत है
आँचल खुश होकर बोलती है आवर अर्जुन के बालों को सहला देती है
ठीक है चल सोते है काफी रात हो गयी है मुझे भी नींद आ रही है .... आँचल बोलती है
आप चलिए मैं अभी आया
....... अर्जुन बोलता है
मैं जानती हुईं तो मेरे सामने hi अब से सिगरेट मत पिने लग जाना नहीं तो मरूंगी
आँचल जाती हुई बोलती है जो अर्जुन मुस्कुरा देता है
आँचल के जाने के बाद अर्जुन एक आवर सिगरेट निकल कर पिता है आवर निचे आ जाता है आवर अपने रूम मैं न जाकर गीता दीदी की रूम मैं जाने को होता है मगर गीता दीदी के साथ अंजलि को सोता हुआ देख कर अर्जुन अपने रूम मैं आ जाता है आवर सो जाता है
_____________________________
अगली सुबह पीतमपुरा मैं
मालकिन कॉफ़ी
राखी देवी सो रही होती है तभी बहार से एक लड़की की आवाज़ आती है जो राखी देवी उठ जाती है
मालकिन कॉफ़ी
राखी देवी आँखें मसलती हुई गेट खोल देती है आवर जाकर फिर से बीएड पर बैठ जाती है
मालकिन ये लीजिये कॉफ़ी ..... कॉफ़ी पीकर आप फ्रेश हो जाइये मैं नास्ता लगा देती हुईं
वह लड़की बोलती है
तू फुलवा है न ... राखी देवी कॉफ़ी पीती हुई बोलती है
जी मालकिन मैं फुलवा हुईं .. आप को मेरा नाम अभी भी याद है
फुलवा खुश होती हुई बोलती है
हां तेरी नाम मुझे अभी भी याद है तुझे मैंने अपने हाथों मैं लेकर खेलाया है _ आवर सुन तू मुझे मालकिन नहीं चची कह कर बुला सकती है समझी
राखी देवी कहती है
ठीक है मालक .... चची फुलवा बोल कर चली जाती है वही राखी देवी मुस्कुरा देती है
राखी देवी फिर बाथरूम मैं चली जाती है
राखी देवी बाथरूम से सिर्फ टॉवल मैं निकल कर रूम मैं आती है आवर आईने के सामने कड़ी हो जाती है आवर टॉवल से अपनी भींगी हुई बदन को पूछने लगती है
वही गाओं की दूसरी हवेली मैं एक लड़की बाथरूम से नंगी hi निकलती है आवर आईने के सामने सोफे पर बैठ जाती है आवर आईने के दराज़ मैं से आयल की बोतल निकल कर बोतल से बहुत सारा तेल लेकर अपनी जिस्म पर गिरा लेती है आवर अपनी जिस्म पर ऊपर से निचे तक मलने लगती है उस लड़की की जिस्म इतनी खूबसूरत होती है की कोई औरत भी उसकी जिस्म को देख ले तो उसकी छूट मैं खुजली हो जाये वह लड़की आईने मैं खुद को देख कर मुस्कुरा रही होती है आवर अपनी हाथ चुकी के ऊपर रख कर निचे की तरफ ले जाने लगती है उसकी जिस्म पर तेल्ल लगने से लड़की की जिस्म हिरे की तरह चमक रही होती है भगवन ने उस लड़की को बड़ी hi धयान से बांये हुए होते है उस लड़की की चाँद सा चेहरा आवर बहुत hi खूबसूरत जिस्म भगवन ने वरदान दिए होते है वह लड़की एक ओरेंगे कलर की पतली सी कपडा जिस्म पर दाल लेती है
वह लड़की अपनी जिस्म को कभी आगे तो कभी पीछे से देख देख कर मुस्कुरा रही होती है वह लड़की अचानक उठ कर अपनी दोनों टंगे फैला लेती है
Ahhhhhhhhhh ओह्ह माय गॉड
वह जैसे hi दोनों टंगे फैलाती है ये आवाज़ उस रूम के खुदकी से निकलती है मगर वह आवाज़ लड़की के कानो तक नहीं आती है
वह लड़की अपनी जिस्म को मसलती हुई अपनी जिस्म को हर जंगल से देखती है उस लड़की को अपनी जिस्म पर बहुत गर्व हो रही होती है
Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhbhhhhhhhhhhhhh
वह लड़की अपनी जिस्म को निहारने मैं खोई हुई होती है तभी उसके कानो मैं किसी की आठ सुनाई देती है वह लड़की झट से पहनी हुई कपडे को लेकर छूट छिपा लेती है मगर उस लड़की की टाइट चुकी अभी भी दिख रही होती है वह लड़की झट से अपनी कपडे को ठीक से पहन कर खिड़की की तरफ जाती है मगर खुदकी के पास कोई नहीं होता है वह लड़की अपनी खुली हुई खिड़की बंद कर देती है
ुम्माआआआआ वह सब सही कहते है मेरी जैसी कोई नहीं होगी
वह लड़की आईने मैं खुद को देखती हुई चुम्मी लेती हुई बोलती है आवर अपने कपडे पहने लगती है
वही हवेली के थोड़ी दूर एक छोटा सा बगीचे मैं 2 लड़के बैठे हुए होते है आवर दोनों की शैशे ज़ोर ज़ोर से चल रही होती है
क्या हुआ पिंटू हवा निकल गयी न तेरी साला बस देख कर hi फुस हो गया .... दूसरा लड़का हस्ते हुआ कहता है
साला इसमें मेरी क्या गलती है वह इतनी खूबसूरत है की आअह्हह्ह्ह्ह कोमल
साला तुझे अच्छे से पता है मैं लड़कियों की किस तरह चीखे निकलता हुआ मगर आज कोमल को नंगी देख कर पता नहीं कैसे मेरा पानी hi निकल गया
पिंटू कोमल की जिस्म को याद करते हुआ बोलता है जिससे पिंटू का हाथ खुद hi अपने लैंड पर चला जाता है
है है है है
सेल वह 440 वाल्ट की चिंगारी मरती है जो छूटे hi ज़मीन पकड़ना परता है
पिंटू हवेली मैं तो सभी एक से बढ़ कर मॉल है मगर उन सभी को बस कोमल hi ाएसि है जिसकी खूबसूरत किसी से बराबरी नहीं किया जा सकता है गजब की मॉल है साली वह
देखा नहीं उसकी चुकी कितनी बड़ी बड़ी थी आवर टाइट भी लगता है कोमल अपनी चुकी को दबती काम आवर सहलाती जाएदा है तभी तो उसकी चुकी बड़े तो हो रहे है मगर टाइट भी है ... वह दूसरा लड़का भी अपने लैंड को मसलता हुआ बोलता है
सही कह रहा है रिंकू कोमल की जिस्म एक आग है मैं तो उसे देख कर hi पागल सा होने लगता है कभी कभी मन करता है साली को कॉलेज मैं hi पटक कर पेल दूँ मगर फिर ये सोच कर नहीं कर पता है हुईं के उसका बाप इस गाओं का ठाकुर है वह मेरा पूरा खंडन खतम कर देगा ...... पिंटू बोलता है
पिंटू तू चिंता न कर उस कोमल को हम दोनों मिल कर उसकी छूट आवर गांड फाड़ेंगे बस मेरा काम वह मुंसी कर दे ..... रिंकू मुस्कुराते हुआ बोलता
क्या बोल रहा वह मुंसी तेरा कौन सा काम करेगा आवर क्यू ..... पिंटू थोड़ा मुंह बना कर पूछता है
क्यू के पिंटू को अच्छे से पता होता है वह मुंसी कितना हरामी है वह बिना कोई फायदे के रिंकू का कौन सा काम करेगा
पिंटू मुंसी बता रहा था हवेली मैं एक नौकर की ज़रूरत है तो मैंने बोल दिया है काम करने के लिए मुंसी बोलै है कल तक बताने के लिए
अगर मैं उस हवेली मैं गया तो समझले उस हवेली की साडी छूट गांड मैं बस हम दोनों का लैंड जायेगा ..... रिंकू कहता है
रिंकू ये तो बहुत अच्छा सोचा है भाई तुमने Aahhhhhhhhhhh कोमल रानी
पिंटू कोमल का नाम लेकर अपना लैंड फिर से मसल देता है
अच्छा पिंटू मैं अभी घर जाता हुईं कल मिलते है
रिंकू बोल कर चला जाता है
साला कुछ तो झोल हुआ है रिंकू के साथ आखिर मुंसी इसके काम करने के लिए मान कैसे गए
पता लगाना hi पड़ेगा .... पिंटू मन मैं सोचता है आवर उठ कर रिंकू के पीछे चल पड़ता है ताकि पता कर सके रिंकू अभी कहा जा रहा है
राखी देवी आवर अर्जुन दोनों खेत वाले रूम मैं होते है राखी देवी थोड़ी दुखी होती है आवर अर्जुन अपनी माँ को घर रहा होता है आवर पास मैं हरिया चाचा भी बैठे हुआ होते है
दरअसल राखी देवी हरिया चाचा से बात कर रही होती है तभी अर्जुन वह आ जाता है आवर कुछ बातें पीतमपुरा के बारे मैं सुन लेता है मगर अर्जुन का पेअर गेट से टकराने से राखी देवी सुन कर चुप हो जाती है तब अर्जुन रूम मैं चला जाता है आवर अपनी माँ को घूरने लगता है
माँ क्या बात है आप क्या छुपा रही है मुझसे ये चाचा कौन है इन्हे पहले कभी नहीं देखा मैंने
अर्जुन हरिया चाचा को घूरते हुआ पूछता है
राखी आवर कुछ मत छिपा अर्जुन से अगर अभी तूने इसे कुछ नहीं बताया तो अर्जुन तुझसे फिर से दूर चला जायेगा आवर सायद hi तुझे कभी मनाफ़ करेगा ..... क्या तू एहि चाहती है
नहीं नहीं मैं अर्जुन को आवर दूर नहीं जाने दूंगी खुद से मैं अर्जुन को सब बता दूंगी ... राखी देवी मन मैं सोचती है आवर उस गाओं के बारे मैं बताना hi ठीक समझती है
अर्जुन बीटा ये हरिया चाचा है
अर्जुन बीटा यह से 40 : कम दूर एक गाओं है पीतमपुरा उस गाओं मैं तेरे पापा के दादा जी रहते थे वह बहुत अच्छे इंसान थे मगर उनसे एक गलती हो गयी थी वह अपनी एक नौकरानी के साथ सम्भन्ध बना लिए थे आवर फिर एक लड़की की जनम हुआ जिनका नाम ममता है
अर्जुन बीटा मैं उस दिन पार्टी मैं जिस औरत के घर ले गयी थी न वह औरत आवर कोई नहीं तुम्हारे पापा की बुआ थी ममता बुआ
अर्जुन ये बात जैसे hi तेरे दादा आवर बड़े दादा को पता चली के उनके बाप ने एक नौकरानी के साथ वह सब किया आवर अब एक बेटी भी है वह दोनों बहुत गुस्सा हुआ अपने बाप पर मगर कुछ बोल न सके मगर उन दोनों के दिल मैं बेहपण गुस्सा भर गया होता है वह एक दिन ममता बुआ की माँ को बहुत मरते है आवर उनेह डरा कर गाओं से निकल देते है
जब ये बात (दादा) ठाकुर साहब को पता चली तो उनेह बहुत दुःख हुआ मगर वह अब कुछ भी नहीं सकते थे क्यू के कुछ दिन से उनकी तबियत ख़राब रहने लगी थी आवर वह बीएड पर पद गए होते है फिर धीरे धीरे दिन बीतता गया आवर एक दिन (दादा) ठाकुर साहब चल बेस .... उनके मरने के बाद पता चला उन्होंने ने अपनी जायदाद मैं से कुछ खेत ममता बुआ के नाम कर चुके है
ये बात जब तेरे दादा आवर बड़े दादा को पता चली तो वह दोनों फिर से गुस्सा हो गए आवर तेरे बड़े दादा तो थान लिए के वह दोनों माँ बेटी को मार देंगे मगर तेरे दादा जी को ये बात बिलकुल भी अच्छी नहीं लगी आवर उन्होंने ने साफ मन कर दिया के वह इसमें उनके साथ नहीं रहेंगे जिससे तेरे बड़े दादा तेरे दादा पर गुस्सा हो गया उसके कुछ दिन के बाद hi तेरे बड़े दादा जी ने अपनी दूसरी हवेली उस गाओं मैं बनवा लिए ..... वह तेरे दादा से इतना गुस्सा हुआ के वह तेरे दादा को हर तरह से तंग करने लगे कभी खेतों मैं आग लगवा देते तो कभी मज़दूरों को मरने लगते तो कभी किसी गाओं के औरत लड़की के साथ सम्भन्ध बनाते
तेरे बड़े दादा जी तेरे दादा आवर ममता बुआ का गुस्सा गाओं वालों पर निकलने लगे तेरे बड़े दादा से तंग आकर तेरे दादा जी यह आ गए तेरे दादा के यह आते hi वह की साडी खेत तेरे बड़े दादा कब्ज़ा कर लिए मगर तेरे पापा जब बड़े हुआ तो वह केस कर दिए तेरे बड़े दादा पर लेकिन तेरे पापा .... राखी देवी इतना बोल पर चुप हो जाती है आवर राखी देवी की आँखें भर आती है ... जो अर्जुन समझ जाता है माँ को पापा की याद आ गयी है जो अर्जुन अपनी माँ के कंधे पर हाथ रख देता है
तेरे पापा के जाने के बाद मैं hi केस लड़ रही थी आवर देख कल hi हम केस जित गए
राखी देवी बोल कर चुप हो जाती है आवर अर्जुन को देखने लगती है
माँ आप दुखी न हो ... आज मैं आप से नाराज़ नहीं हुईं
आप ने मुझे उस गाओं के बारे मैं बता दिया इसमें आप की कोई गलती नहीं है :
अर्जुन अपनी माँ के आँखों मैं आई हुई आंसू की बुन्देय को पोछ कर कहता है
वही राखी देवी अर्जुन का हाथ पकड़ कर चुम लेती है आवर अर्जुन को गले लगा लेती है
राखी देवी बहुत खुश होती है अर्जुन का प्यार देख कर
अर्जुन अपनी माँ को लेकर घर आ जाता है घर आने के बाद राखी देवी अर्जुन को प्रीतमपुरा चलने के लिए बोलती है जो अर्जुन मन कर देता है
राखी देवी अर्जुन के मन करने पर वह अकेली hi हरिया के साथ प्रीतमपुरा के लिए निकल जाती है
रात के 9: पं
अर्जुन क्या हुआ अभी तक सोया नहीं आवर इतनी रात को ऊपर क्या कर रहा है
आँचल छत के ऊपर आकर अर्जुन से बोलती है
ममम मायआ
कोई बात नहीं बीटा मुझे पता है तू सिगरेट पिता है
आँचल मुस्कुरा कर बोलती है
वही अर्जुन सिगरेट बूटा कर निचे गिरा देता है
सॉरी माँ अर्जुन को जब भी अपनी गलती का अहसास या किसी चीज का दर होता है वह आँचल को बड़े hi प्यार से माँ पुकारता है जिससे आँचल इतनी खुश होती है की वह अर्जुन को कुछ बोल भी नहीं पति है
अरे मैं बोली न मुझे पता है तू सिगरेट पिता है फिर सॉरी क्यू बोल रहा है
आँचल मुस्कुराती हुई फिर से बोलती है आवर अर्जुन के पास hi कड़ी हो जाती है
अब बता क्या सोच रहा है ... आँचल पूछती है
माँ मैं सोच रहा हुईं माँ के साथ मुझे भी जाना चाहिए था ... अर्जुन बोलता है
ओह्ह मेरा बीटा
सही सोच रहा है मेरा बीटा .... हां दीदी के साथ जाना चाहिए था
अब दीदी को तुम्हारी ज़रूरत है
आँचल खुश होकर बोलती है आवर अर्जुन के बालों को सहला देती है
ठीक है चल सोते है काफी रात हो गयी है मुझे भी नींद आ रही है .... आँचल बोलती है
आप चलिए मैं अभी आया
....... अर्जुन बोलता है
मैं जानती हुईं तो मेरे सामने hi अब से सिगरेट मत पिने लग जाना नहीं तो मरूंगी
आँचल जाती हुई बोलती है जो अर्जुन मुस्कुरा देता है
आँचल के जाने के बाद अर्जुन एक आवर सिगरेट निकल कर पिता है आवर निचे आ जाता है आवर अपने रूम मैं न जाकर गीता दीदी की रूम मैं जाने को होता है मगर गीता दीदी के साथ अंजलि को सोता हुआ देख कर अर्जुन अपने रूम मैं आ जाता है आवर सो जाता है
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अगली सुबह पीतमपुरा मैं
मालकिन कॉफ़ी
राखी देवी सो रही होती है तभी बहार से एक लड़की की आवाज़ आती है जो राखी देवी उठ जाती है
मालकिन कॉफ़ी
राखी देवी आँखें मसलती हुई गेट खोल देती है आवर जाकर फिर से बीएड पर बैठ जाती है
मालकिन ये लीजिये कॉफ़ी ..... कॉफ़ी पीकर आप फ्रेश हो जाइये मैं नास्ता लगा देती हुईं
वह लड़की बोलती है
तू फुलवा है न ... राखी देवी कॉफ़ी पीती हुई बोलती है
जी मालकिन मैं फुलवा हुईं .. आप को मेरा नाम अभी भी याद है
फुलवा खुश होती हुई बोलती है
हां तेरी नाम मुझे अभी भी याद है तुझे मैंने अपने हाथों मैं लेकर खेलाया है _ आवर सुन तू मुझे मालकिन नहीं चची कह कर बुला सकती है समझी
राखी देवी कहती है
ठीक है मालक .... चची फुलवा बोल कर चली जाती है वही राखी देवी मुस्कुरा देती है
राखी देवी फिर बाथरूम मैं चली जाती है
राखी देवी बाथरूम से सिर्फ टॉवल मैं निकल कर रूम मैं आती है आवर आईने के सामने कड़ी हो जाती है आवर टॉवल से अपनी भींगी हुई बदन को पूछने लगती है
वही गाओं की दूसरी हवेली मैं एक लड़की बाथरूम से नंगी hi निकलती है आवर आईने के सामने सोफे पर बैठ जाती है आवर आईने के दराज़ मैं से आयल की बोतल निकल कर बोतल से बहुत सारा तेल लेकर अपनी जिस्म पर गिरा लेती है आवर अपनी जिस्म पर ऊपर से निचे तक मलने लगती है उस लड़की की जिस्म इतनी खूबसूरत होती है की कोई औरत भी उसकी जिस्म को देख ले तो उसकी छूट मैं खुजली हो जाये वह लड़की आईने मैं खुद को देख कर मुस्कुरा रही होती है आवर अपनी हाथ चुकी के ऊपर रख कर निचे की तरफ ले जाने लगती है उसकी जिस्म पर तेल्ल लगने से लड़की की जिस्म हिरे की तरह चमक रही होती है भगवन ने उस लड़की को बड़ी hi धयान से बांये हुए होते है उस लड़की की चाँद सा चेहरा आवर बहुत hi खूबसूरत जिस्म भगवन ने वरदान दिए होते है वह लड़की एक ओरेंगे कलर की पतली सी कपडा जिस्म पर दाल लेती है
Ahhhhhhhhhh ओह्ह माय गॉड
वह जैसे hi दोनों टंगे फैलाती है ये आवाज़ उस रूम के खुदकी से निकलती है मगर वह आवाज़ लड़की के कानो तक नहीं आती है
Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhbhhhhhhhhhhhhh
वह लड़की अपनी जिस्म को निहारने मैं खोई हुई होती है तभी उसके कानो मैं किसी की आठ सुनाई देती है वह लड़की झट से पहनी हुई कपडे को लेकर छूट छिपा लेती है मगर उस लड़की की टाइट चुकी अभी भी दिख रही होती है वह लड़की झट से अपनी कपडे को ठीक से पहन कर खिड़की की तरफ जाती है मगर खुदकी के पास कोई नहीं होता है वह लड़की अपनी खुली हुई खिड़की बंद कर देती है
ुम्माआआआआ वह सब सही कहते है मेरी जैसी कोई नहीं होगी
वह लड़की आईने मैं खुद को देखती हुई चुम्मी लेती हुई बोलती है आवर अपने कपडे पहने लगती है
वही हवेली के थोड़ी दूर एक छोटा सा बगीचे मैं 2 लड़के बैठे हुए होते है आवर दोनों की शैशे ज़ोर ज़ोर से चल रही होती है
क्या हुआ पिंटू हवा निकल गयी न तेरी साला बस देख कर hi फुस हो गया .... दूसरा लड़का हस्ते हुआ कहता है
साला इसमें मेरी क्या गलती है वह इतनी खूबसूरत है की आअह्हह्ह्ह्ह कोमल
साला तुझे अच्छे से पता है मैं लड़कियों की किस तरह चीखे निकलता हुआ मगर आज कोमल को नंगी देख कर पता नहीं कैसे मेरा पानी hi निकल गया
पिंटू कोमल की जिस्म को याद करते हुआ बोलता है जिससे पिंटू का हाथ खुद hi अपने लैंड पर चला जाता है
है है है है
सेल वह 440 वाल्ट की चिंगारी मरती है जो छूटे hi ज़मीन पकड़ना परता है
पिंटू हवेली मैं तो सभी एक से बढ़ कर मॉल है मगर उन सभी को बस कोमल hi ाएसि है जिसकी खूबसूरत किसी से बराबरी नहीं किया जा सकता है गजब की मॉल है साली वह
देखा नहीं उसकी चुकी कितनी बड़ी बड़ी थी आवर टाइट भी लगता है कोमल अपनी चुकी को दबती काम आवर सहलाती जाएदा है तभी तो उसकी चुकी बड़े तो हो रहे है मगर टाइट भी है ... वह दूसरा लड़का भी अपने लैंड को मसलता हुआ बोलता है
सही कह रहा है रिंकू कोमल की जिस्म एक आग है मैं तो उसे देख कर hi पागल सा होने लगता है कभी कभी मन करता है साली को कॉलेज मैं hi पटक कर पेल दूँ मगर फिर ये सोच कर नहीं कर पता है हुईं के उसका बाप इस गाओं का ठाकुर है वह मेरा पूरा खंडन खतम कर देगा ...... पिंटू बोलता है
पिंटू तू चिंता न कर उस कोमल को हम दोनों मिल कर उसकी छूट आवर गांड फाड़ेंगे बस मेरा काम वह मुंसी कर दे ..... रिंकू मुस्कुराते हुआ बोलता
क्या बोल रहा वह मुंसी तेरा कौन सा काम करेगा आवर क्यू ..... पिंटू थोड़ा मुंह बना कर पूछता है
क्यू के पिंटू को अच्छे से पता होता है वह मुंसी कितना हरामी है वह बिना कोई फायदे के रिंकू का कौन सा काम करेगा
पिंटू मुंसी बता रहा था हवेली मैं एक नौकर की ज़रूरत है तो मैंने बोल दिया है काम करने के लिए मुंसी बोलै है कल तक बताने के लिए
अगर मैं उस हवेली मैं गया तो समझले उस हवेली की साडी छूट गांड मैं बस हम दोनों का लैंड जायेगा ..... रिंकू कहता है
रिंकू ये तो बहुत अच्छा सोचा है भाई तुमने Aahhhhhhhhhhh कोमल रानी
पिंटू कोमल का नाम लेकर अपना लैंड फिर से मसल देता है
अच्छा पिंटू मैं अभी घर जाता हुईं कल मिलते है
रिंकू बोल कर चला जाता है
साला कुछ तो झोल हुआ है रिंकू के साथ आखिर मुंसी इसके काम करने के लिए मान कैसे गए
पता लगाना hi पड़ेगा .... पिंटू मन मैं सोचता है आवर उठ कर रिंकू के पीछे चल पड़ता है ताकि पता कर सके रिंकू अभी कहा जा रहा है