Teri tadap jaldi khatam nahi hogi - Page 13 - SexBaba
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Teri tadap jaldi khatam nahi hogi

अपडेट ........ 105

अह्ह्ह्ह अर्जुन आराम से भाई ...... अचानक बाइक डेग मांगने से पूजा दीदी डर्टी हुई बोलती है

सॉरी दीदी वह .....

#### मक .... दोबारा मिल तू मुझे ..... अर्जुन पूजा दीदी को सॉरी बोलते हुए पीछे की तरफ देखता है आवर नंबर याद करते हुए गुस्से से मन मैं सोचता है

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अर्जुन गुस्से मैं होता है मगर पूजा दीदी के साथ होने से वह अपने गुस्से पर काबू करता है आवर बाइक स्टार्ट कर के फिर से चल पड़ता है

पूजा दीदी की घर उसी सहर मैं होता है तो अर्जुन कोई 20 मिनट तक पूजा दीदी के घर पहुँच जाता है आवर बाइक रोक कर पूजा दीदी के साथ घर मैं थैला लेकर आ जाता है

अर्जुन रुक मैं कॉफ़ी बना देती हुईं ..... पूजा दीदी बोलती है मगर अर्जुन मन कर देता है घर मैं पूजा दीदी की सास भी होती है तो अर्जुन उनसे भी मिलता है आवर फिर घर की तरफ निकल जाता है

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इधर घर पे राखी देवी थोड़ी घूम सूम सी होती है के पूजा इनके बारे मैं क्या सोच रही होगी तभी राखी देवी का फ़ोन बजने लगती है तो राखी देवी नम्बर देख कर थोड़ी मुस्कुरा पड़ती है क्यू की वह नम्बर अंजलि की होती है

जीई रानी साहिबा बोलिये क्या हुआ ..... राखी देवी मुस्कुराती हुई बोलती है

माँ नानी अब कैसी है ..... अंजलि पूछती है

गुड़िया नानी अब अच्छी है ..... तू आँचल को जयादा तंग तो नहीं कर रही है न ...... राखी देवी हस्ती हुई बोलती है

माँ मैं क्यू ममी माँ को तंग करने लगी .... माँ आप ये वह सब छोड़िये ... आप घर कब आ रही है ....... अंजलि पूछती है

गुड़िया 3 से 4 दिन मैं घर आ जाउंगी .... गीता कहा है ..... राखी देवी गीता के बारे मैं पूछती

माँ दीदी साथ मैं है ok कॉलेज आ गया मैं शाम मैं फ़ोन करुँगी .... अंजलि बोल कर फ़ोन रख देती है

अर्जुन जब घर आता है तो देखता है उसकी माँ हॉल मैं है तो अर्जुन रूम मैं जाता है मगर राखी देवी रूम मैं भी नहीं होती है तो अर्जुन छत पर चला जाता है तो देखता है उसकी माँ छत पर hi कड़ी है आवर मार्किट की तरफ देख रही है तो अर्जुन भी माँ के थोड़ा दूर खड़ा हो जाता है आवर अर्जुन भी मार्किट की तरफ देखने लगता है

माँ सॉरी वह पता नहीं कैसे .... अर्जुन मायुश चेहरा बनाते हुए बोलता है आवर अपना सर निचे कर लेता है

वही अर्जुन की बात सुन कर राखी देवी अनादर से शर्मा जाती है लेकिन अर्जुन की तरफ देखती नहीं लेकिन अर्जुन के कुछ आवर न बोलने से राखी देवी अर्जुन की तरफ देखती है तो अर्जुन अपना सर निचे किये होता है तो राखी देवी खुद को संभालती है आवर दो कदम बढ़ा कर अर्जुन के पास आ जाती है

कोई बात नहीं अर्जुन बीटा .... इस उम्र मैं बहुत सरे लड़कों को अपनी माँ बहन के पड़ती ऐसा ख्याल आता रहता है

लेकिन मुझे अच्छे से पता है मेरा अर्जुन ऐसा नहीं है ..... राखी देवी अपनी चेहरे पर फीकी मुस्कान लती हुई बोलती है आवर अर्जुन का सर उठा कर देखने लगती है

वही जब अर्जुन सर उठा कर अपनी माँ को देखता है तो माँ की चेहरे पर मुस्कान देख कर अर्जुन थोड़ा रहत की साँस लेता है ये सोच कर के उसकी हरकत के वजह से माँ ऊपर गुस्सा नहीं है लकिन तभ अर्जुन की नज़र माँ की गुलाब की तरह खिली हुई होंठों पर नज़र चली जाती है आवर अर्जुन अपनी माँ की रास भरी गुलाब की तरह लाल होंठों को देखने लगता है


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वही राखी देवी की जैसे hi अर्जुन की नज़र से नज़र टकराती है राखी देवी की पलकें खुद hi निचे होने लगती है

बस क्या हो रहा है मेरे को .... मैं माँ को देख कर इतना बेचैन क्यू हो जा रहा हुईं

माँ की होंठ कितनी रास से भरी लग रही है दिल कर रहा है माँ की होंठों का रास चूस लूँ .... अर्जुन के मन मैं ये दोनों बातें चल रही होती है

वही राखी देवी अब तक अपनी नज़ारे निचे कर ली हुई होती है आवर अपनी हाथ से पल्लू पकड़ कर मसल रही होती है

अर्जुन को देखना राखी देवी को बहुत अच्छा लग रहा होता है लेकिन उससे भी कही जयादा राखी देवी शर्मा भी रही होती है जिससे राखी देवी की दिल की धड़कन अब थोड़ी थोड़ी मसल रही होती है

अर्जुन माँ की होंठों को देखते हुए अब अपना सर एक बार फिर से माँ की होंठों को तरफ बढ़ने लगता है आवर फिर अर्जुन अपने दोनों हाँथ माँ की चेहरे पर रख कर राखी देवी का चेहरा ऊपर की तरफ उठा देता है जिससे राखी देवी की सर तो ऊपर हो जाती है लेकिन राखी देवी की पलकें अभी भी निचे hi होती है लेकिन राखी देवी को होंठ एक दूसरे से अलग हो चुकी होती है जैसे राखी देवी को ये बात पता है अर्जुन उनकी होंठों का रास पिने वाला है

ये सोच कर राखी देवी की जिस्म भी कंपनी लगती है

Maaaaaaaaaaaaaaaaaaa

अर्जुन बड़े hi प्यार से राखी देवी को पुकारता है जिससे राखी देवी अपनी पलकें उठा देती है दोनों माँ बेटे की नज़ारे एक दूसरे से फिर से टकरा जाती है

अर्जुन से नज़ारे मिलते hi राखी देवी की आँखें सरम से लाल हो जाती है आवर राखी देवी सरम के मरे अपनी सर अर्जुन के साइन मैं छिपा लेती है आवर अर्जुन की बाँहों मैं पूरी तरह समां जाती है जिससे राखी देवी की चुकी भी अर्जुन के साइन मैं डाब जाती है

वही अर्जुन अपना सर माँ की चिकनी गले पर रख देता है आवर माँ की गले को चुम लेता है


uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन के चूमते hi राखी देवी पूरी तरह मचल जाती है आवर अर्जुन को आवर भी मज़बूती से पकड़ लेती है

माँ के बाँहों में लेने से अर्जुन के जिस्म मैं इतना सुरूर होता है की अर्जुन के जिस्म मैं करेंट सा लगता है आवर अर्जुन एक अह्ह्ह्ह भरते हुए अपनी आँखें कुछ वक़्त के लिए बंद कर लेते है जैसे माँ को बाँहों मैं भरने से अर्जुन को बहुत सकूँ महसूस हो रहा है

सकूँ हो भी क्यू न एक तो इतनी खूबसूरत औरत उसकी बाँहों मैं लिपटी हुई होती है जिसको देख कर लड़के आवर मर्द तो मर्द औरत आवर लड़की भी मदहोश हो जाती थी आवर वह औरत आवर कोई नहीं उसकी अपनी माँ थी जिससे अर्जुन को कुछ अलग hi नासा चढ़ रहा होता है

अर्जुन अपनी माँ की जिस्म की गर्मी महसूस करने लगता है जिससे अर्जुन का लैंड भी फनफना कर खड़ा हो जाता है आवर Jan's से बहार आने के लिए फनफनाने लगता है जिससे अर्जुन अपना हाथ निचे की तरफ ले जाकर माँ की चिकनी कमर को पकड़ कर मसलने लगता है

माँ की जिस्म को मसलने से अर्जुन के कुछ आवर नासा होने लगता है अर्जुन अपना हाथ पीछे ले जाकर माँ की गांड को पकड़ लेता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन की हरकत को देख कर राखी देवी आह्हः भर्ती हुई अर्जुन के साइन से सर हटा कर अर्जुन की आँखों मैं देखने लगती है

राखी देवी की आँखें मदहोशी मैं लाल हो चुकी होती है आवर राखी देवी अपनी होंठ आवर भी खोल कर अर्जुन को देखती है आवर अपनी होंठ पर जीभ फेरती हुई अपनी पलकें निचे कर लेती है

माँ की हरकत को देख कर अर्जुन को समझते हुए देर नहीं लगता है के माँ भी किश करना चाहती है आवर अर्जुन फिर से माँ की गलों को पकड़ता है आवर अपनी एक ऊँगली माँ की होंठों पर फेरता है आवर अर्जुन माँ की होंठों पर अपना होंठ रख देता है

huinnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnn


अर्जुन के होंठों से खुद की होंठ मिलते hi राखी देवी की जिस्म कैंप जाती है आवर राखी देवी अर्जुन की पीठ को इतनी ज़ोर से पकड़ती है की राखी देवी की नाख़ून अर्जुन के पीठ पर लग जाती है

राखी देवी भी अर्जुन के साथ किश करने लगती है दोनों माँ बेटे छत के ऊपर एक दूसरे को किश कर रहे होते है ये भूल कर के इस वक़्त वह ऐसी जगह पर है जहा कोई भी देख सकता है लेकिन इन दोनों माँ बेटे को जैसे कोई फर्क hi नहीं पड़ेगा किसी को देखने से ऐसे किश कर रहे होते है

अर्जुन किश करते हुए अपना हाथ निचे ले जाकर माँ की कमर को पकड़ चूका होता है आवर माँ को अपनी जिस्म मैं दबा रहा होता है

अर्जुन माँ की निचे वाले होंठ को पकड़ कर चूसते hi चला जा रहा होता है जिससे राखी देवी भी अपनी होंठ से अर्जुन की होंठ चूस रही होती है किश करते

अभी कुछ hi मिनट होते है की राखी देवी लम्बी लम्बी सांसे लेने लगती है आवर अर्जुन को दूर करने लगती है लेकिन अर्जुन दूर न होकर आवर भी माँ को अपनी तरफ खिंच रहा होता है

वही राखी देवी की सांसे अब भूलने लगती है जिससे राखी देवी की आँखों मैं आंसू को बून्द भी आने लगती है

अर्जुन की नज़र किश करते हुए जैसे hi माँ की आँखों पर जाती है अर्जुन किश तोड़ देता है

किश टूटते hi राखी देवी दिवार से सात कर हांफने लगती है वही अर्जुन भी खड़ा होकर खुद की सांसों पर काबू करने लगता है

दोनों माँ बेटे खुद की सांसों को काबू कर रहे होते है लेकिन राखी देवी की आँखों से आंसू बाह रही होती है आवर वह भींगी आँखों से अर्जुन को देख रही होती है

माँ की आँखों मैं देख कर अर्जुन को अहसास होता है जोश मैं उसने माँ को कितना दर्द दे दिया है

माँ सॉरी वह ..... अर्जुन बोलता हुआ माँ की करीब जाने को होता है की राखी देवी वह से भगति हुई निचे चली जाती है आवर अर्जुन बस खड़ा देखता रह जाता है

राखी देवी निचे आने के बाद सीधे रूम मैं जाती है आवर बीएड पर बैठ जाती है

राखी देवी की धड़कन अभी भी धड़क रही होती है लेकिन राखी देवी की आँखों मैं एक अलग hi चमक नज़र आ रही होती है राखी देवी अपनी ऊँगली होंठ पर रखती है

Ahhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

राखी देवी जैसे hi अपनी ऊँगली होंठ पर रखती है राखी देवी को थोड़ी छनछनाहट सी दर्द होती है तो राखी देवी ऊँगली उठा कर देखती है तो ऊँगली मैं खून लगा हुआ होता है

राखी देवी उठ कर सीसे के सामने जाकर देखती है तो पति है निचे वाला होंठ एक जगह छील गयी है

पागल किश भी नहीं करना आता हुई ..... राखी देवी मन मैं सोचती है आवर मुस्कुरा देती है

अर्जुन निचे आता है आवर रूम मैं जाने को होता है तो देखता है माँ सीसे के सामने कड़ी है अर्जुन को लगता है माँ अभी गुस्से मैं इस लिए अर्जुन रूम मैं न जाकर बहार चला जाता है

अर्जुन बाइक लेता है आवर पार्क मैं जाकर बैठ जाता है

बस मैं भी कितना पागल हुईं ..... मुझे माँ के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था माँ की आँखों मैं मैंने फिर से आंसू ला hi दिया

माँ जब मेरे साथ किश करने मैं इतनी सर्मिन्दा हो गयी थी तो वह मां के साथ कैसे कर लेती थी ...... मुझे यकीन नहीं हो रहा माँ मां के साथ सम्बन्ध बना सकती है

सायद माँ की कोई मज़बूरी होगी मुझे एहि तो पता करना था जो मैंने अपनी हवस के लिए सायद सब बर्बाद कर दिया

कही माँ अब मुझसे नाराज़ न हो जाये .... कितने सल्ल के बाद तो मुझे माँ मिली है लेकिन मैं एक बार फिर से माँ से दूर हो जाऊंगा ......

नहीं नहीं अब मैं माँ से दूर नहीं रह सकता ..... पहले आँचल माँ के साथ रहते हुए मुझे माँ की कमी महसूस नहीं होती थी

मगर अब माँ के साथ रहते हुए मुझे माँ से दूर जाने मैं दर लग रहा है ...... मुझे अब दोनों माँ के साथ रहना है मुझे दोनों माँ चाइये

मैं माँ से सॉरी बोल कर उनेह मनाऊंगा मुझे यकीन है माँ मुझे मांफ कर देगी ..... तभी तो मुझे पता भी चलेगा माँ की क्या मज़बूरी थी मुझे ऐसे लग रहा है मैंने माँ को अनजाने मैं बहुत दर्द दे दिया है

अर्जुन पार्क मैं बैठा ये साडी बातें सोच सोच कर दुखी हो रहा होता है .....

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अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह Ahhhhhhhhhhhh

अच्छा लग रहा है ohhhhhhhhhh जीईई

AhhhhhhhhhhhhhHhhhhhhhhhhhhhh


करते रहिये अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

रुकिए नहीं अह्हह्ह्ह्ह आआआआआ ओह्ह्ह्हह

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

आँचल बीएड पर नंगी लेती हुई होती है आवर अर्जुन के मां आँचल की छूट मैं ज़ोर ज़ोर से ऊँगली करते hi जा रहे होते है जो आँचल मुंह खोले सिसकियाँ लेती हुई आवर ज़ोर ज़ोर से करने को बोल रही होती है आवर फिर एक लम्बी सांसे लेती हुई गांड उठा कर झड़ने लगती है

आँचल मैंने पहले भी बोलै था आवर आज भी बोल रहा हुईं तुम जिससे छहों सम्भन्ध बना लो मुझे बुरा नहीं लगेगा ...... आँचल मैं तुम्हारे काबिल नहीं तुम मेरे साथ रहती हो मेरे लिए एहि बहुत है

मैं तुमेह आवर जिस्म की आग मैं जलता हुआ नहीं देख सकता

आँचल मुझे मांफ कर देना मैंने तुम्हारी ज़िन्दगी बर्बाद कर दिया .... अर्जुन के बोलते हुए रोने लगते है

आप ऐसा क्यू बोल रहे है मैं आप को नहीं छोड़ सकती हुईं

आप ये सोच कर परेशां मत होइए के आप ने मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर दिया

हां हर औरत की ख्वाहिश होती है उसका पति उसका हर तरह से उसका पूरा ख्याल रखे जो आप ने मेरा अच्छे से ख्याल रखा है मुझे कभी किसी चीज के लिए रोका नहीं है ये मेरे लिए बहुत है

रही मेरी जिस्म की भूख की बात तो हआ आप ने वह पूरी नहीं किया है जो मुझे आप पर कई बार गुस्सा भी ाअत है लेकिन मुझे पता है इसमें आप को कोई गलती नहीं है सायद मेरी किस्मत में एहि लिखा हुआ था तभी तो आप के साथ वह हादसा हो गया

आप मेरी फ़िक्र मत कीजिये मैं खुद पर क क क काबू करना सिख लिया है ....... ये बात बोलती हुई आँचल कुछ सोच कर चुप हो जाती है

मैं आप की कभी नहीं छोड़ने वाली आवर नहीं कभी आप के इज़्ज़त पर कोई आंच आने दूंगी

आँचल रोटी हुई बोलती है आवर अर्जुन के मां के बाँहों मैं चली जाती है .....

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अर्जुन पार्क मैं काफी देर तक बैठा हुआ होता है तब पार्क की लाइट ों होती है तब अर्जुन को होश आता है आवर अर्जुन पार्क से निकल जाता है

अर्जुन घर आता है तो देखता है दोकान भी बंद हो चुकी है अर्जुन बाइक लगता है आवर घर के अंदर चला आता है आवर हॉल मैं hi बैठ जाता है तभी वह आँचल की माँ आ जाती है

अर्जुन अभी आ रहा है क्या पूजा के घर से ..... आँचल की माँ पूछती है

नानी मैं तो दोपहर मैं आ गया था आप उस वक़्त सो रही थी सायद ..... अर्जुन बोलता है

हां अर्जुन दोपहर मैं सो रही थी ..... आँचल की माँ बोलती है आवर टीवी ों कर के अर्जुन के साथ hi बैठ जाती है

अर्जुन सोफे पर बैठा बार बार किचेन की तरफ देख रहा होता है

वही राखी देवी किचेन मैं खाना बना रही होती है आवर राखी देवी भी कभी कभी हॉल मैं अर्जुन को देख रही होती है लेकिन जब अर्जुन राखी देवी की तरफ देखता है तो राखी देवी अपनी नज़र हटा कर काम करने लगती है

माँ की नज़ारे फेरने से अर्जुन मन hi मन आवर मायुश हो जाता है के उसकी माँ उसकी हरकतों से अभी भी दुखी है

अर्जुन उठ कर रूम मैं चला जाता है

वही राखी देवी किचेन से हॉल मैं फिर से देखती है तो अर्जुन हॉल मैं नहीं होता है तो राखी देवी अपना काम करने लगती है लेकिन राखी देवी बिच बिच मैं हॉल की तरफ देख ज़रूर रही होती है लेकिन अर्जुन हॉल मैं दिखाई नहीं देता है

राखी देवी तब तक खाना भी बना लेती है आउट खाना दिंनिंग टेबल पर रखने लगती है

आंटी ज़रा अर्जुन को बोल दीजिये .... मैं माँ को खाना देकर आती हुईं ...... राखी देवी आँचल की माँ से बोलती है आवर पलट मैं खाना निकल कर अपनी माँ को देने रूम मैं चली जाती है

वही आँचल की माँ अर्जुन को जाकर बोल देती है जो अर्जुन भी जल्द hi खबा खाने के लिए आ जाता है

राखी देवी भी आकर खाना खाने लगती है दोनों माँ बेटे एक दूसरे के सामने बैठे हुए खाना खा रहे होते है लेकिन अर्जुन खाना कहते हुए माँ की तरफ कई बार देखता है लेकिन राखी देवी अर्जुन की तरफ एक बार भी नहीं देखती है जो अर्जुन को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता है आवर अर्जुन काम खाना खा कर hi उठ जाता है आवर वह से चला जाता है

राखी देवी कुछ बोलने को होती है मगर अर्जुन तब तक चला जाता है

राखी क्या कर रही है इस तरह की हरकत करेगी तो उसे बुरा तो लगेगा hi न तुझे अर्जुन से नार्मल बात तो कर hi सकती है सायद उसे लग रहा है तू उससे गुस्सा है इस लिए अर्जुन को बुरा लग रहा है सायद

राखी देवी मन मैं सोचती है आवर थोड़ी मायुश हो जाती है लेकिन आँचल की माँ के साथ होने से चेहरे पर मायुशि ज़ाहिर नहीं होने देती है


रात के 11:पं

राखी देवी किचेन के काम करने के बाद अपनी माँ की मालिश करती है आवर फिर रूम मैं आती है तो देखती है अर्जुन अभी भी सोया नहीं है तो राखी देवी भी बीएड पर आकर लेट जाती है

माँ मुझे मांफ कर दीजिये मुझे पता नहीं क्या हो जाता है आप को देख कर

आप जब भी मेरे पास होती है मेरे अंदर हलचल सी मच जाती है दिल करता है मैं बस आप को देखता राहों आवर आप देखते हुए दिल करने लगता है आप के बाँहों मैं समां जौंग

माँ मैं सच कहता हुईं ये फाइलिंग मुझमे पहले कभी नहीं आया था लेकिन मैं जब से आप के साथ रह रहा हुईं तब से आप से दूर जाने मैं मुझे दर लग रहा है

माँ आप मुझसे रूठी हुई है ये सोच सोच कर hi मेरे डैम घुट रहा है माँ मैं आप से दूर नहीं रहना चाहता प्लीज मुझे मांफ कर दीजिये

आप के लिए जो गलत ख्याल मेरे मन मैं आ रहे है मैं उसे भूलने की कोशिश करूँगा प्लीज माँ मुझे मांफ कर दीजिये .....

अर्जुन बोलते हुए बहुत hi मायुश हो जाता है आवर छोटे बच्चे की तरह राखी देवी की साइन मैं सर छिपा लेता है

वही अर्जुन की बात सुन कर राखी देवी को समझते देर नहीं लगता है के हर मर्द की तरह मेरा बीटा के मन मैं भी मेरी जिस्म को देख कर गलत ख्याल आ रहे है

नहीं नहीं मेरा अर्जुन मेरे जिस्म को देख कर मुझसे प्यार नहीं कर रहा है .....

मेरा उनके लड़कों जैसा नहीं है जो बस एक औरत की जिस्म को देख कर बस हवस मिटाना चाहते है मेरा अर्जुन मुझसे सच्चा प्यार करता होगा

तभी तो मेरा रूठा अर्जुन को अच्छा नहीं लग रहा है

मेरा अर्जुन मुझसे प्यार करता है मैंने अपने अर्जुन को बहुत तकलीफ दिया है अब आवर नहीं दे सकती मैं अर्जुन को वह सब दूंगी जो अर्जुन मुझसे मांगेगा


मैंने अर्जुन की बचपन की कोई भी ज़िद्द पूरी नहीं किया है लेकिन अब मैं करुँगी चाहे मुझसे कोई पाप hi क्यू न हो जाये

राखी देवी अर्जुन को बाँहों मैं भरी हुई मन मैं सोचती है

अर्जुन के
सिसकने की आवाज़ राखी देवी अपनी साइन पर महसूस कर के थोड़ी दुखी ज़रूर होती है लेकिन अर्जुन को अपनी बाँहों मैं महसूस कर के राखी देवी मन मैं मुस्कुरा रही होती है

लेकिन राखी देवी की वह मुस्कान जल्द hi ख़तम हो जाती है आवर राखी देवी की चेहरे पर पसीने आने लगती है आवर जिस्म मैं हलचल सी होने लगती है

क्यू के अर्जुन दुखी मन से राखी देवी की बाँहों मैं होता है लेकिन अर्जुन का सर राखी देवी की चुकी पर रखा हुआ होता है जिससे अर्जुन का मुंह बार बार राखी देवी की निप्पल से लग रही होती है

राखी देवी पहले तो धयान नहीं देती है लेकिन जब बात बात अर्जुन अपना सर इधर उधर करने लगता है तब राखी देवी की जिस्म मैं गुदगुदी सी होने लगती है

धीरे धीरे राखी देवी की चेहरे का रंग बदलने लगता है राखी देवी की मुंह से गर्म ग्राम सांसे निकलने लगती है राखी देवी अर्जुन को बाँहों मैं भरी हुई कसमसाने लगती है राखी देवी अपनी दोनों पेअर एक दूसरे मैं सत्ता कर रगड़ने लगती है

Huinnnnnnnnnnnnnnnn

राखी देवी गरम सांसे छोड़ती हुई अपनी एक पेअर अर्जुन के जिस्म पर रख देती है आवर अपनी एक हाथ भी अर्जुन के पीठ पर रख देती है राखी देवी अर्जुन को पूरी तरह बाँहों मैं भर लेती है

राखी देवी की आँखों मैं मदहोशी सी छाने लगती है राखी देवी अपनी पेअर भी अर्जुन के जिस्म पर रगड़ने लगती है जैसी राखी देवी की छूट मैं भी हलचल सी मच गयी है आवर वह अपनी पेअर अर्जुन के जिस्म पर रगड़ तो रही होती है मगर राखी देवी की छूट भी अर्जुन के लैंड के पास होती है जो बार बार राखी देवी की छूट अर्जुन के लैंड से कपडे के ऊपर से टाच हो रही होती है जो राखी देवी की छूट हलकी हलकी गीली हो रही होती है

ये राखी देवी के साथ पहली बार हो रही होती है की राखी देवी अर्जुन के बाँहों मैं लेकर इतनी गर्म हो गयी होती है के वह खुद hi अपनी जिस्म के साथ छूट भी अर्जुन के जिस्म से रगड़ रही होती है

वही अर्जुन तो दुखी मन से अपनी माँ की बाँहों मैं लिप्त हुए होता है लेकिन जब अर्जुन अपनी माँ की पेअर अपनी जिस्म पर रगड़ते हुए महसूस करता है तो अर्जुन को एक झटका लगता है के माँ क्या कर रही है

लेकिन राखी देवी की हरकत की वजह से अर्जुन का लैंड तो खड़ा हो चूका होता है जो अर्जुन अपने कमर पीछे कर के खड़े हुए लैंड को छिपाने की कोशिश करने लगता है लेकिन कोई फायदा नहीं होता है क्यू की राखी देवी फिर से अर्जुन के की जिस्म से सात जाती है

माँ की हरकत की वजह से अर्जुन भी गर्म हो जाता है आवर वह भी अपनी कमर धीरे धीरे आगे की तरह बढ़ने लगता है जो अर्जुन का लैंड राखी देवी की छूट पर अब थोड़ी तेज़ी से लग रही होती है आवर टाच के साथ राखी देवी की दबी हुई अह्ह्ह्हह निकल रही होती है

अर्जुन का हाथ अब माँ की कमर से होते हुए चुकी की करीब चली गयी होती है आवर अर्जुन अपना हाथ अब पहाड़ जैसी चुकी को पकड़ने वाला होता है की राखी देवी अपनी हाथ से अर्जुन का हाथ पकड़ लेती है तभी अर्जुन अपनी माँ की आँखों मैं देखता है जो सरमाती हुई अर्जुन को देख रही होती है

अर्जुन माँ की मदहोश भरी आँखों मैं देख कर अर्जुन अपनी माँ के चेहरे के आवर करीब जाने लगता है

huinnnnnnnnnnnnnnnnnn

अर्जुन को खुद की तरफ बढ़ती हुई देख कर राखी देवी गर्म सांसे छोड़ती हुई अपनी आँखें बंद कर लेती है तभी अर्जुन माँ की होंठों होंठ सत्ता देता है जो राखी देवी भी मचल कर अर्जुन को पकड़ लेती है


वही अर्जुन माँ की जिस्म के ऊपर आ जाता है आवर माँ को किश करने लगता है

वही राखी देवी भी इस बार अर्जुन के साथ किश करने लगती है

दोनों माँ बेटे बीएड पर एक दूसरे को पकड़ कर किश करते hi जा रहे होते है कभी अर्जुन राखी देवी के ऊपर होता है तो कभी राखी देवी अर्जुन के ऊपर होती है ....

अर्जुन तो अब सोच लिया होता है माँ की होंठों का सारा रास चूस लेना है आवर अर्जुन माँ की होंठों चूसते hi जा रहा होता है वही राखी देवी भी किश करने मैं अर्जुन के पीछे नहीं हैट रही होती है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन किश करते हुए जोश मैं राखी देवी की चुकी पकड़ hi लेता है आवर बड़ी hi ज़ोर से मसल देता है जिससे राखी देवी बीएड पर अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह करती हुई सिसकने लगती है

वही अर्जुन राखी देवी के बगल मैं लेट कर अपनी सांसों को काबू करने लगता है

दोनों माँ बीटा अपनी अपनी सांसों को काबू कर रहे होते है जो राखी देवी की सांसे इतनी भूल रही होती है की राखी देवी की पहाड़ जैसी चुकी ऊपर निचे हो रही होती है

राखी देवी लम्बी सांसे लेती हुई अर्जुन को देखती है आवर फिर शर्मा कर दूसरी तरफ घूम जाती है जो अर्जुन भी माँ को मुस्कुराता हुआ देखता है आवर अपनी आँखें बंद कर लेता है

दोनों माँ बेटे किश करने के बाद दोनों तरफ मुंह कर के दिए हुए होते है जहा अर्जुन अपनी आँखें बंद कर चूका होता है वही राखी देवी की आँखें अभी भी खुली हुई होती है आवर राखी देवी सामने दिवार की तरफ देख रही होती है आवर राखी देवी की दिल अभी भी धधक रही होती है

राखी देवी की आँखों मैं सरम साफ नज़र आ रही होती है

ये मुझे क्या हो गया था ...... मैंने खुद अर्जुन को आगे बढ़ने का मक्का दे दिया

अर्जुन तो बोल रहा था आगे से ऐसा कुछ नहीं करेगा ...... लकिन अब मेरी वजह से अब वह रुकने वाला नहीं है

उसे पता चल चूका है ..... मैं उसे रोकने वाली नहीं हुईं

हे भगवन अब कल क्या होगा ...... मैं अर्जुन की सामना कैसे करुँगी मुझे तो बहुत सरम लग रही है .....

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

मेरी पेंटी भी गीली हो गयी है मुझे बाथरूम जाना चाहिए

नहीं नहीं अभी गयी तो अर्जुन को यकीन हो जायेगा उसके साथ मुझे भी अच्छा लग रहा है

अर्जुन कुछ देर मैं सो जायेगा तो चली जाउंगी

राखी देवी मन मैं सोचती है आवर अपनी आँखें बंद कर लेती है ये सोचती हुई की अर्जुन के साइन के बाद अपनी छूट से निकली हुई गर्मी को पेंटी मैं पोछ सके

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अपडेट ....... 106

हे भगवन अब कल क्या होगा ...... मैं अर्जुन की सामना कैसे करुँगी मुझे तो बहुत सरम लग रही है .....

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

मेरी पेंटी भी गीली हो गयी है मुझे बाथरूम जाना चाहिए

नहीं नहीं अभी गयी तो अर्जुन को यकीन हो जायेगा उसके साथ मुझे भी अच्छा लग रहा है

अर्जुन कुछ देर मैं सो जायेगा तो चली जाउंगी

राखी देवी मन मैं सोचती है आवर अपनी आँखें बंद कर लेती है ये सोचती हुई की अर्जुन के साइन के बाद अपनी छूट से निकली हुई गर्मी को पेंटी मैं पोछ सके

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रात के 2 :पं

अह्ह्ह्हह्हह मायआ

राखी देवी अचानक सिसकती हुई बीएड पे उठ कर बैठ जाती है आवर राखी देवी की नज़र पास मैं सो रहे अर्जुन पर चली जाती है जो अर्जुन अभी भी दूसरी तरफ मुंह कर के सोया हुआ होता है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरी छूट

राखी देवी साड़ी के ऊपर से hi पेंटी को छूट से अलग करने की कोशिश करती करती है मगर पेंटी छूट से अलग नहीं हो पति है आवर पेंटी के साथ राखी देवी की छूट की बॉल भी खिंचा जाती है जिससे राखी देवी की दर्द मैं सिसकियाँ निकल जाती है

राखी देवी धीरे से बीएड से उतरती है आवर बिना कोई आवाज़ किये रूम से निकल जाती है आवर सीधे बाथरूम मैं चली जाती है

राखी देवी बाथरूम मैं आते hi बाथरूम लॉक कर देती है आवर जल्दी जल्दी अपनी साड़ी आवर पेटीकोट निकल देती है

साड़ी आवर पेटीकोट निकल कर राखी देवी अपनी हाथ से धीरे धीरे पेंटी को छूट से अलग करने लगती है जो पेंटी पूर्ति तरह राखी देवी की छूट मैं छूट से निकली हुई पानी से सटी हुई होती

Ahhhhhhhhhhhhhhhhh

अचानक राखी देवी एक झटके मैं पेंटी को खिंच देती है जो राखी देवी की पेंटी तो अलग हो जाती है लेकिन पेंटी के साथ राखी देवी की छूट की बॉल भी साथ मैं चली जाती है

राखी देवी थोड़ी दर्द मैं सिसकियाँ लेती हुई वही निचे बैठ जाती है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कितनी दर्द कर रही है Ahhhhhhhhhh मेरी छूट

राखी देवी अपनी छूट को सहलाती हुई बोलती है

राखी देवी कुछ देर तक अपनी छूट को सहलाती रहती है आवर जब दर्द ख़तम होती है तो राखी देवी वैसे hi उठ कर मूतने बैठ जाती है

ओह्ह्ह्हह्हह ह्ह्हह्ह्ह्ह

राखी देवी की छूट से गर्म निकलती हुई मूत से राखी देवी की छूट मैं गुदगुदी सी होने लगाती है लेकिन राखी देवी को मुत्ते हुआ बहुत आनंद मिल रही होती है जो राखी देवी मुट्ठी हुई अपनी आँखें कुछ देर के लिए बंद की हुई होती है

राखी देवी मूत कर पेटीकोट आउट साड़ी पहनती है आवर बाथरूम से निकल जाती है

राखी देवी जब रूम मैं आती है तो देखती है अर्जुन अभी भी वैसा hi सो रहा है

राखी देवी अलमारी से पेंटी निकलती है आवर अर्जुन की तरफ देखती हुई जल्दी से पेंटी को पहन लेती है पेंटी पहन कर राखी देवी धीरे से जाकर बीएड पर सो जाती है

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सुबह के 7: ऍम

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह Didiiiiiiiiiiiiii

गुड़िया टूउउउउ

गीता की आँखें खुलते hi सामने अंजलि को देख कर चौंक जाती है आवर जैसे hi गीता को अपनी गलती का अहसास होती है गीता मन मैं hi शर्मा जाती है आवर अंजलि को छोड़ देती है जो इस वक़्त अंजलि को अपनी बाँहों मैं पकड़ी हुई होती है

वही अंजलि जैसे hi गीता दीदी से अलग होती है झट से बीएड से उतर जाती है आवर घूरने लगती है

दीदी मैं कोई लड़का हुईं जो मुझे प्यार कर रही है मैं अभी माँ को फ़ोन कर देती हुईं आप की अब वह शादी करवा दे

अंजलि अपनी होंठों को साफ करती हुईं बोलती है आवर रूम से चली जाती है

गुड़िया सुन तो ऐसा कुछ भ्हीईई ..... गीता आगे कुछ बोल नहीं पति है

क्यू के अंजलि रूम से चली गयी होती है

हे भगवन गुड़िया कही सच मैं माँ को फ़ोन न करदे .....

मैं भी न कितनी पागल हुईं कैसे भूल गयी मैं गुड़िया के साथ सो रही हुईं ....... बाबू आ जा अब कितनी दिन वह रहेगा देख तेरी दीदी कितनी तड़प रही है

गीता बोलती हुई तकिया को उठा कर अपनी बाँहों मैं भर लेती है

गीता कुछ देर तक उस तकिये को साइन से लगाए हुए आँखें बंद की होती है के तभी रूम मैं आँचल आ जाती है

क्या हुआ गीता बेटी किसको याद कर रही है आवर तुमेह कॉलेज नहीं जाना क्या ..... आँचल गीता की हरकत को देख कर मुस्कुराती हुई बोलती है

वही ममी माँ की मुस्कराहट को देख कर गीता थोड़ी शर्मा जाती है .....

ममी माँ आप के बाटे को याद कर रही हुईं देखिये मेरी प्यास बढ़ा कर भाग गया गया है ..... गीता पहले तो सरमाती है लेकिन फिर खुद को संभल कर बोल पड़ती है

ओह्ह धीरे बोल पागल गुड़िया सुन लेगी .... आँचल झूटी गुस्सा जैसा मुंह बनती हुई बोलती है आवर फिर मुस्कुरा देती है जो गीता भी मुस्कुरा देती है

तेरी क्या प्यास की क्या बात करूँ गीता ..... तुझसे कही जयादा तो मेरी प्यास बढ़ गयी है हर वक़्त मेरी छूट गीली हो जाती है पता नहीं कब अर्जुन आएगा ..... आँचल मन मैं सोचती हुई उस रात को याद करने लगती है

माँ अब आप क्या सोचने लगी ..... आँचल को सोच मैं देख कर गीता पूछती है

कुछ नहीं चल जल्दी से फ्रेश होजा मैं नास्ता लगा रही हुईं ..... आँचल बोलती है आवर गीता के सर पर प्यार से मरती हुई रूम से चली जाती है

गीता भी उठ कर बाथरूम मैं चली जाती है

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सुबह के 7:30 ऍम

माँ मुझे आप ने उठाया मुझे दादी के साथ जाना है ....... आस्था अपनी माँ की हाथ पकड़ कर रोटी हुई बोलती है जो इस वक़्त आस्था की आँखें भी थोड़ी रोने की वजह से काली पद चुकी होती है

आस्था बेटी ज़िद्द नहीं करते देख कैसी तेरी हालत हो गयी कई दिन से तुमने ठीक से खाना भी नहीं खाया है तेरी दादी ठीक हो जाएँगी पापा आवर अंकल उनके साथ गए है न

चलो हम घर चलते है निचे गाड़ी घडी है .... आस्था की माँ कहती है

आस्था अपनी माँ की बात सुन कर आवर भी दुखी हो जाती है लेकिन अब आस्था कुछ कर नहीं सकती ये सोच कर वह अपनी माँ की बात मान लेती है आवर जाकर गाड़ी मैं बैठ जाती है वही आस्था के पीछे hi पूजा भी भगति हुई जाती है आवर गाड़ी मैं बैठ जाती है

राधा बेटी कुछ दिन आवर रह जाती तुम .... आस्था की नानी बोलती है

माँ मन तो मेरा भी है लेकिन आस्था की पढाई आवर बर्बाद हो जाएगी

जब से उसकी दादी की तबियत ख़राब हुई है वह कॉलेज नहीं गयी है न कहती है आवर नहीं किसी से अच्छे से बात करती है

कॉलेज जाएगी तो उसका मन थोड़ा अच्छा हो जायेगा ...... आस्था की माँ बोलती है

आस्था की माँ की बात सुन कर आस्था की नानी आवर कुछ बोलती नहीं है आवर आस्था की माँ के साथ घर के बहार तक आ जाती है आस्था की माँ गयी मैं बैठती है आवर गाड़ी चल पड़ती है

दीदी आप परेशां मत होइए दादी बिलकुल ठीक हो जाएँगी ...... आस्था के साथ बैठी हुई पूजा बोलती है

लेकिन आस्था कुछ नहीं बोलती है आवर गाड़ी के शीशे से बहार देखने लगती है

वही अपनी आस्था दीदी को देख कर पूजा को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता है जो पूजा फ़ोन मैं कुछ टाइप करने लगती है आवर सेंड कर देती है

दीदी मस्सगे देखों प्लीज ..... पूजा बहुत hi धीरे से आस्था के कान मैं बोलती है

पूजा की मायुश चेहरे को देख कर आस्था फ़ोन मैं मस्सगे देखने लगती है

दीदी प्लीज मुझे मांफ कर दीजिये मैं ये बात आप को सायद नहीं बताने वाली थी लेकिन आप को दुखी देख कर मुझे यकीन हो गया है आप अर्जुन से बहुत प्यार करती है आवर मुझे ये भी पता चल गया है आप जितनी दुखी दादी के लिए है उससे कही जयादा आप अर्जुन की हरकत की वजह से है

आप अर्जुन से दूर रह कर उससे भूलने की कोशिश कर रही है मगर आप उसे भूल नहीं पा रही है

दीदी सॉरी सॉरी मुझे मांफ कर दीजिये मैंने जो भी किया आप के लिए hi किया था

आप को उस वक़्त दुखी देख कर मुझे अर्जुन पर गुस्सा आ गया था इस लिए मैंने सोचा आप की नज़र मैं अर्जुन को बुरा बना दूँ ताकि आप अर्जुन पर गुस्सा होकर उससे भूल जाए मगर मैं नहीं जानती थी आप उससे इतना प्यार करती है

दीदी प्लीज मुझे मांफ कर दीजिये ..... उस रात अर्जुन ने जो कुछ भी आप के साथ किया वह जान भुज कर कुछ नहीं किया

उस रात मैंने hi उसके जूस मैं सेक्स की गोली मिला कर पीला दिया था ...... प्लीज दीदी मुझे मांफ कर दीजिये ......

आस्था जैसे जैसे मस्सगे पढ़ती जाती है आस्था को अपनी छोटी बहन पर गुस्सा आता जाता है आवर मस्सगे पढ़ने के बाद जैसे hi आस्था पूजा को कुछ बोलने को होती है पूजा की आँखों मैं आंसू देख कर संत हो जाती है

दीदी प्लीज मुझे मांफ कर दीजिये ...... पूजा आस्था के करीब आकर बोलती है जो इस वक़्त पूजा की आँखों मैं आंसू भरी हुई होती है

अपनी बहन की रोनी सी आवाज़ सुन कर आस्था की आंसू खुद निकल पड़ती है आवर आस्था पूजा के गले मैं हाथ दाल कर अपनी बाँहों मैं भर लेती है

कोई बात नहीं गुड़िया ....... आस्था बस इतना hi बोलती है आवर पूजा को अपनी बाँहों मैं भरी हुई फिर से बहार देखने लगती है लेकिन इस वक़्त आस्था की चेहरे पर थोड़ी मुस्कान आ गयी होती है

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अर्जुन की नींद खुलती है तो अर्जुन उठ कर बीएड पर बैठ जाता है आवर अपनी आँखें मसलने लगता है अर्जुन आँखें मसलने के बाद अंगड़ाई लेता है तभी अर्जुन की नज़र सोइ हुई माँ पर चली जाती है

राखी देवी गहरी नींद मैं सोइ हुई होती है आवर राखी देवी की पल्लू साइन से हैट चुकी होती है जिससे राखी देवी की पहाड़ की दो छोटी की तरह राखी देवी दोनों चुकी कड़ी हुई होती है जिस पैर अर्जुन की नज़र पद चुकी होती है

अर्जुन माँ की चुकी को धयान से देख रहा होता है जिससे अर्जुन की गाला सूखने लगता है अर्जुन का दिल करने लगता है माँ की चुकी को पकड़ ले मगर अर्जुन की हिम्मत नहीं हो रही होती है तभी राखी देवी अर्जुन की तरह घूम जाती है आवर राखी देवी की साड़ी पेट से निचे गिर जाती है जिससे राखी देवी की गोल कुंवे की नेवल अर्जुन के आँखों के सामने आ जाते है

माँ की चिकनी कमर आवर आनर की तरह नेवल को देख कर अर्जुन की आँखों मैं एक चमक सी आ जाती है अर्जुन खुद पर आवर काबू नहीं कर पता है आवर अपना कांपते हुआ हाथ लेकर माँ की कमर पर रख कर सहलाते हुए अपनी ऊँगली माँ की नेवल मैं दाल देता है

Huinnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnn

राखी देवी सोती हुई hi कहर पड़ती है लेकिन अपनी आँखें नहीं खोलती है सायद वह अभी भी गहरी नींद मैं होती है लेकिन माँ की सिसकियाँ सुन कर अर्जुन झट से रूम से निकल जाता है

अर्जुन बीटा माँ अभी भी सो रही है क्या ...... अर्जुन को रूम से निकलते देख कर आँचल की माँ पूछती है

हां नानी माँ सो रही है ..... अर्जुन बिना नानी की तरफ देखे बोलता है आवर बाथरूम मैं चला जाता है

वही आँचल की माँ जब रूम मैं जाती है तो देखती है राखी देवी उठ कर बीएड पर बैठी हुई है

राखी बेटी तुम ठीक तो हो न .... आज इतने लेट से सोती रही

आँचल की माँ पूछती है आवर राखी देवी के पास आ जाती है

जी आंटी मैं ठीक हुईं ...... पता नहीं क्यू आज सुबह नींद hi नहीं खुली मेरी

राखी देवी बोलती है आवर बीएड से उतर जाती है आवर बिसर को ठीक करने लगती है

राखी देवी को अच्छे से पता होती है के उनकी नींद क्यू नहीं खुली मगर लेकिन राखी देवी को बहाना भी तो बनानी थी

राखी बेटी मैंने नास्ता बना दिया है तुम आवर अर्जुन नास्ता कर लेना मैं थोड़े दिन के लिए अपनी बहन के घर जा रही हुईं .....

क्या आंटी ..... मगर आप अभी क्यू बता रही है ... राखी देवी थोड़ी हैरान होती हुई पूछती है

राखी बेटी कल रात मैं hi मेरी बहन के बेटे ने फ़ोन किया था ... मैं तुमेह बताने वाली थी फिर सोचा सुबह hi बता दूंगी ..... आँचल की माँ बोलती है

ठीक है आंटी मैं फ्रेश होकर आती हुई फिर आप चली जाना ...... राखी देवी बोलती है आवर रूम से चली जाती है

राखी देवी जैसे hi बाथरूम के करीब जाती है अर्जुन बाथरूम से निकल रहा होता है दोनों माँ बेटे की नज़ारे टकराती है मगर अर्जुन अपनी नज़र हटा कर चला जाता है वही राखी देवी अर्जुन को जाते हुए देख कर बाथरूम की गेट बंद कर लेती है

राखी देवी गेट बंद कर के गेट मैं सात कर कड़ी हो जाती है आवर राखी देवी की आँखों मैं एक सरम फिर से आ गयी होती है

राखी देवी की साड़ी की पल्लू अपने आप निचे गिर जाती है जो राखी देवी अपनी साइन पर हाथ रख देती है जैसे सामने कोई खड़ा है आवर फिर सरमाती हुई अपनी बलाउज की बटन खोलने लगती है

ohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

बलाउज का बटन खुलते hi राखी देवी की दोनों अनमोल खजाना रेड ब्रा मैं क़ैद नज़र आने लगती है जो इतनी तानी हुई होती है के वह ब्रा से निकल कर बहार आना को मचल रही है

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राखी देवी की जिस्म की गोरे की कोई मिसाल नहीं होती है रेड ब्रा मैं तो राखी देवी की चुकी इतनी सेक्सी' हॉट लग रही होती है के सामने अगर कोई बुद्धा भी होता तो उसका लैंड खड़ा हो जाता आवर वह अपनी ज़िन्दगी की कोई परवाह किये बिना hi राखी देवी की चुकी पर टूट पड़ता आवर राखी देवी की चुकी को मसल मसल कर लाल कर देता बाद मैं चाहिए उसकी जान hi क्यू न ले ले राखी देवी लेकिन इस वक़्त वह कोई नहीं होता है जो राखी देवी खुद hi अपनी चुकी पर हाथ फेरने लगती है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अपनी चुकी पर हाथ फेरती हुई राखी देवी अपनी आँखें बंद करती हुई थोड़ी मुंह खोल देती है आवर राखी देवी की पेअर भी डगमगा जाते है जैसे चुकी को मसलने से राखी देवी की छूट मैं गुदगुदी हो रही हो


राखी देवी सिसकती हुई चुकी को मसलती रहती है आवर फिर पेटीकोट भी निकल देती है जो राखी देवी की भरी जवानी उभर कर दिखने लगती है

राखी देवी ब्रा पेंटी मैं खूबसूरती के साथ बहुत सेक्स की भी लग रही होती है

राखी देवी सीसे के सामने कड़ी होकर सामने ऐसे देखि है जैसे बाथरूम मैं अर्जुन hi आ गया है आवर राखी देवी उसको दिखा रही है देख बीटा तेरी माँ इस उम्र मैं भी जवान लड़कियों को मात दे सकती है


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ओह्ह्ह राखी देवी की खूबसूरती आह्ह्ह्ह चेहरा देख कर की कितनो का पानी निकल जायेगा राखी देवी ऐसी दिख रही है इस वक़्त बाथरूम मैं

राखी देवी पेंटी भी ऐसी पहनी हुई होती है जिसमे राखी देवी की सिर्फ छोटी छूट hi छिपी हुई होती है

राखी देवी सामने देखती हुई एक बार फिर से शर्मा जाती है आवर अपनी एक हाथ छूट आवर एक हाथ चुकी पर रख देती है जैसे अर्जुन अब उनकी तरफ hi आ रहा होता है

राखी देवी को पता नहीं क्या हो रहा होता है की वह बाथरूम मैं बार बार अर्जुन को देख रही होती है जो अर्जुन बाथरूम मैं होता भी नहीं है

राखी देवी सरमाती हुई अपनी नज़र उठा कर सामने देखती है तो सामने कोई भी नहीं होता है

ये क्या हो रही है मुझे

अर्जुन तो मेरे आने से पहले hi बाथरूम से चला गया था ....

राखी देवी मन मैं सोचती है आवर धीरे धीरे झरने के करीब चली जाती है आवर झरने के पास जाती hi एक बार फिर से पीछे घूम कर देखती है

Ahhhhhhhhhhhh क्या गांड होती है राखी देवी की


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राखी देवी इस तरह कड़ी होकर पीछे देख रही होती है की उनकी बड़ी गांड कितनी फैली हुई है सामने दिखने लगती है

राखी देवी की गांड इतनी बड़ी होती है की राखी देवी की गांड मैं छोटा लैंड तो राखी देवी अपनी गांड के दरारों मैं hi छिपा ले

राखी तू कर क्या रही है अर्जुन यह नहीं है तू पागल तो नहीं हो रही ये कैसी कैसी हरकत कर रही है


राखी देवी मन मैं खुद पर hi गुस्सा होती है आवर फिर ब्रा पेंटी निकल कर नहाने लगती है

राखी देवी नहाती हुई अर्जुन को याद न करने की कोशिश करती रहती है मगर अर्जुन राखी देवी की मन मैं आ hi रहा होता है आवर राखी देवी की हाथ खुद hi अपनी छूट पर चली जा रही होती है

अह्ह्ह्हह्हह Ahhhhhhhhhhhhhhhhhh Ahhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह


राखी देवी नहाती हुई कई बार अपनी छूट मैं ऊँगली करती है आवर सिसकियाँ लेती हुई कैंप सी जा रही होती है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ह अह्हह्ह्ह्ह हहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

राखी बेटी नाहा लिया क्या

राखी देवी अपनी ऊँगली ज़ोर ज़ोर से छूट मैं अंदर बहार कर हो रही होती है के आँचल की माँ की आवाज़ आ जाती है जो राखी देवी की हाथ रुक जाती है

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

हो गया आंटी ..... राखी देवी बोलती है


ये आंटी भी न .... कुछ वक़्त के बाद नहीं पुकार सकती थी

राखी देवी की आँखें लाल हो चुकी होती है

राखी देवी थोड़ी गुस्सा होती हुई झरना बंद करती है तभी राखी देवी को याद आता है वह कपडे लाना तो भूल गयी ....

आंटी ज़रा मेरे कपडे देना तो अलमारी मैं है .... राखी देवी आवाज़ देती है जो आँचल की माँ बहार hi होती है तो सुन लेती है

राखी बेटी ये लो ..... आँचल की माँ बोलती है तो राखी देवी गेट हल्का सा खोल कर साड़ी ले लेती है आवर गेट बंद कर देती है


इसमें ब्रा पेंटी बलाउज भी नहीं है .... राखी देवी सिर्फ साड़ी आवर पेटीकोट को देख कर बोलती है

आंटी ये तो बस साड़ी आवर पेटीकोट hi है .... राखी देवी झट से गेट खोलती है तो देखती है आँचल की माँ वही है तो बोलती है

बेटी वह मुझे नहीं मिली ये पहन कर रूम मैं चली जाओ न अर्जुन बहार चला गया है .... आँचल की माँ बोलती है

अर्जुन घर पर नहीं है ये सुन कर राखी देवी सिर्फ साड़ी लपेट कर बाथरूम से निकल कर रूम मैं आ जाती है

वही राखी देवी के पीछे आँचल की माँ भी रूम मैं आ जाती है .....

राखी देवी रूम मैं आती है आवर तेल्ल की बोतल उठा कर अपनी पेअर मैं लगाने लगता है वही आँचल की माँ राखी देवी की आगे आकर कड़ी हो जाती है

ओह्ह Daaiyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa आँचल की माँ सामने राखी देवी को देख कर हैरानी से मन मैं बोल पड़ती है

आँचल की माँ की आँखें भी बड़ी हो जाती है आवर आँचल की माँ को यकीन hi नहीं हो रही होती है की इनके सामने एक 42 से 43 सल्ल की औरत कड़ी है

ओह्ह्ह माआ राखी बिटिया की चूऊउ

आँचल की माँ बस राखी देवी की जिस्म को घूरती हुई जा रही होती है आवर तभी आँचल की माँ की नज़र राखी देवी की चिकनी उठी हुई चुकी पर नज़र चली जाती है आवर आँचल की माँ की मुंह खुल जाती है


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राखी देवी की चुकी आँचल की माँ की नज़रों के सामने बिलकुल नंगी दिख रही होती है जो राखी देवी की चेहरे की खूबसूरती की तरह राखी देवी की चुकी भी बहुत चिकनी होती है आवर राखी देवी की इतनी उम्र होने के बाद भी राखी देवी की चुकी बिलकुल एक जवान लड़की की तरह उठी हुई होती है जो आँचल की माँ को यकीन hi नहीं हो रही होती है के राखी की चुकी इतनी टाइट कैसे हो जाती है

राखी देवी जिस्म मैं तेल लगा रही होती है तभी उनकी नज़र आँचल की माँ पर पद जाती है आवर देखती है कैसे आँचल की माँ उसकी जिस्म को घर रही है जो राखी देवी झट से अपनी पल्लू ठीक कर ले चुकी को छिपा लेती है

वही राखी देवी को पल्लू डालते hi आँचल की माँ अपनी आँखें निचे कर लेती है


आंटी आप चलिए मैं कपडे पहन कर आती हुई ...... राखी देवी बोलती है

आँचल की माँ को खुद की जिस्म को घूरते हुए देख कर राखी देवी को थोड़ी अजीब तो लगती है मगर राखी देवी को अब किसी को खुद के जिस्म को घूरते देख कर जयादा अजीब नहीं लगता है क्यू के राखी देवी अब मान चुकी होती है उनकी जिस्म hi ऐसा है की कोई भी देख कर हैरान रह जाता है

वही आँचल की माँ हॉल मैं आकर बैठ गयी होती है लेकिन उनकी नज़र के सामने राखी देवी की भरी जवानी अभी भी नज़र आ रही होती है


राखी बेटी इस उम्र मैं भी जवान लग रही है राखी बेटी की जिस्म को देख कर तो मेरी जिस्म मैं कुछ कुछ हो रही है मन कर रहा था राखी बेटी की चुकी को पकड़ लूँ

छी चींईईई हे भगवन मैं क्यू ये सब सोच रही हुईं

आँचल की माँ खुद पर नज़ारा होती हुई बोलती है दूसरी तरफ धयान लगाने लगती है

थोड़ी hi देर के बाद राखी देवी रूम से निकल कर हॉल मैं आ जाती है

आंटी आप कहे तो मैं अर्जुन को बोल देती हुईं वह आप को छोड़ देगा बाइक से ........
राखी देवी पास आती हुई बोलती है

नहीं राखी बेटी जाने मैं hi रात हो जाएगी तुम फ़िक्र न करों मैं अकेली चली जाउंगी ..... बस वही तक जाती है मेरी बहन का लड़का बस स्टॉप पर मुझे मिल जायेगा ...... आँचल की माँ बोलती है

ठीक है आंटी ये रख लीजिये ..... राखी देवी आँचल की माँ को पैसे देती हुई बोलती है

आँचल की माँ पैसे न लेने से मन तो करती है मगर राखी देवी की ज़िद्द करने पर ले लेती है आवर फिर राखी देवी से बोल कर चली जाती है

राखी देवी हॉल से अपनी माँ की रूम मैं चली जाती है आवर रूम मैं आने के बाद कुछ ढूंढने लगती है तभी राखी देवी की माँ खस्ने लगती है तो राखी देवी झट से अपनी माँ के पास चली जाती है

माँ पानी पीजिये राखी देवी अपनी माँ को पानी देती है आवर बिसर ठीक करने लगती है

वही राखी देवी की माँ पानी पि रही होती है तभी उनकी नज़र अपनी बेटी पर चली जाती है आवर राखी देवी की माँ पानी की गिलास मुंह से हटा कर अपनी बेटी को देखने लगती है जो बेहद खूबसूरत लग रही होती है

राखी देवी की खूबसूरती को देखती हुई मन hi मन दुखी हो जाती है


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भगवन जी मेरी बेटी को हर सुख तो दिया आप ने मगर मेरी बेटी को पति का सुख छीन लिया आप ने

मेरी बेटी पति की सुख के लिए तड़पती रह गयी है


भगवन जी मेरी बेटी कभी इस बारे मैं मुझसे कोई बात नहीं की लेकिन मुझे पता बिन पति के जीना कैसी होती है

राखी देवी की माँ मन hi मन सोच कर दुखी हो जाती है

माँ आप इस तरह क्या देख रही है ..... राखी देवी जब बिसर ठीक कर लेती है तो देखती है उनकी माँ उनेह hi देख रही है तो पूछ लेती है

राखी तूने दूसरी शादी क्यू नहीं की ..... माँ मुझे इस बारे में बात नहीं करनी ..... राखी देवी इतना बोलती हुई रूम से निकल जाती है

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सुपर बीआरओ....

राखी देवी और अर्जुन क बीच और व् रोमांटिक सन होना चाहिए. मेरे ख्याल से राखी देवी से पहले राखी देवी की जो दोस्त थी जिसको अर्जुन का नंबर दिया था उसको निपटने क बाद राखी देवी का मिलान अच्छा रहेगा. ये मेरी सोच है.

बहुत जगह कुछ ऐसे व् सन आया जिसका कुछ मतलब समझ नहीं आया जैसे अर्जुन और गीता का रिलेशन ममी को पता चलने क बाद ममी, अर्जुन और गीता का कन्वर्सेशन अर्जुन और गीता का रिलेशन को लेके. मुझे तो नहीं लगता है की इसमें कोई ट्विस्ट होगा जो आगे खुलना चाहिए. एक जगह अंजलि न कहा था अर्जुन क औजार क बारे मई की दी ने कैसे ली होगी इसका मतलब है अंजलि को पता है. फिर व् कवी कवी उसकी बातें से लगता है उसे अर्जुन क बारे मई पता नहीं है.

इतने टाइम से जो अर्जुन को नुदे पिछ भेजती है मुझे लगता है वो अंजलि hi है.....

वेटिंग फॉर नेक्स्ट अपडेट.....

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थैंक्स बीआरओ

बीआरओ आगे भी जो को मज़ा आएगा अर्जुन आवर राखी का ये रोमांस hi चल रहा है

बीआरओ अंजलि को सायद सब पता है लेकिन वह अभी खुल कर नहीं आ रही है अंजलि खुल तब आएगी जब उसे सभी के सम्बन्ध का पता चल जायेगा

सायद बीआरओ वह नुदे पिछ अंजलि hi भेज रही हो :अप्प्रोवे:
 
अपडेट ...... 107

भगवन जी मेरी बेटी को हर सुख तो दिया आप ने मगर मेरी बेटी को पति का सुख छीन लिया आप ने

मेरी बेटी पति की सुख के लिए तड़पती रह गयी है

भगवन जी मेरी बेटी कभी इस बारे मैं मुझसे कोई बात नहीं की लेकिन मुझे पता बिन पति के जीना कैसी होती है

राखी देवी की माँ मन hi मन सोच कर दुखी हो जाती है

माँ आप इस तरह क्या देख रही है ..... राखी देवी जब बिसर ठीक कर लेती है तो देखती है उनकी माँ उनेह hi देख रही है तो पूछ लेती है

राखी तूने दूसरी शादी क्यू नहीं की ..... माँ मुझे इस बारे में बात नहीं करनी ..... राखी देवी इतना बोलती हुई रूम से निकल जाती है

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राखी देवी अपनी माँ की रूम से निकल कर किचेन मैं आ चुकी होती है आवर राखी देवी थोड़ी दुखी भी गयी होती है अपनी माँ की बात सुन कर

राखी देवी किचेन मैं पलट रख रही होती है तभी राखी देवी का फ़ोन बजने लगता है तो राखी देवी फ़ोन नंबर दुखी है तो ज्योति की होती है तो राखी देवी फ़ोन उठा लेती है

Hello राखी क्या आज फेरी है तू .... ज्योति उधर से पूछती है

हां मगर ..... लेकिन ज्योति पूछ क्यू रही है ..... राखी देवी बोलती है

राखी भूल गयी है न आज कौन सा डेट है ..... ज्योति मायुश भरी आवाज़ मैं बोलती है

आज का डेट ओह्ह सॉरी सॉरी ज्योति मैं सच मैं भूल गयी हुईं इतने दिन हम मिले जो नहीं ..... हैप्पी बर्थडे ज्योति

राखी देवी याद करती हुई बोलती है ..... थैंक्स कोई बात नहीं राखी .... क्या तम पार्टी मैं आ सकती हो .... ज्योति पूछती है

कब आवर कहा पार्टी है ...... ज्योति मैं तुझे मन नहीं कर सकती ... लेकिन देख मैं घर पर अकेली हुईं आज hi

आज hi आंटी भी अपने रिस्तेदार के घर चली गयी है ..... राखी देवी बोलती है

राखी मैं तुझे जयादा देर तक नहीं रोकूंगी ... तुम अर्जुन को भी साथ लेकर आ जाना

राखी देवी ज्योति के कहने पर बोल देती है अर्जुन को साथ लेकर आउंगी .... आवर राखी देवी ये भी समझ जाती है ज्योति अर्जुन को साथ लेन को क्यू बोली है

ये सोच कर राखी देवी की चेहरे पर लाली आ जाती है

अर्जुन मार्किट मैं एक जगह खड़ा होता है तभी वह से कॉलेज के लड़कियां गुजर रही होती है तभी उन लड़कियों मैं से एक लड़की की नज़र अर्जुन पे पद जाती है

ही अर्जुन भाई ......

अरे तुम कैसी हो कॉलेज की छूती हो गयी ...... वैसे अब वह लड़का तुमेह परेशां तो नहीं करता है न ..... अर्जुन पूछता है

नहीं अर्जुन भाई .... वह लड़का hi नहीं अब मुझे कोई लड़का परेशां नहीं करता है ..... आप का नाम सुन कर hi नए लड़के भी दर जाता है

कई सीनियर गर्ल बोलती है अर्जुन जब तक इस कॉलेज मैं था कोई लड़का किसी लड़की को नहीं छेड़ते थे अर्जुन भाई आप बहुत फेमस हो कॉलेज मैं .... वह लड़की मुस्कुराती हुई बोलती है

वह सब पहले की बातें है गुड़िया ..... वैसे तुम्हारा नाम क्या है ..... अर्जुन पूछता है

मेरा नाम पिंकी है ...... लेकिन आप गुड़िया बोल सकते है ..... पिंकी मुस्कुराती हुई बोलती है

ठीक है ...... Ok अभी तुम घर जाओ वर्ण आंटी परेशां हो जाएँगी ..... अर्जुन बोलता है

वही पिंकी भी ठीक है बोल कर चली जाती है

अर्जुन भी बाइक स्टार्ट करता है आवर मार्किट की तरफ चल पड़ता है

अर्जुन बेताआआआ ....... अर्जुन बाइक से थोड़ा तेज़ी मैं जा रहा होता है तभी एक औरत की आवाज़ सुन कर बाइक रोक देता है आवर पीछे घूम कर देखता है तो एक औरत उसको हाथ मार रही होती है थोड़ी दूर होने से अर्जुन उस औरत को पहचान नहीं पता है आवर बाइक किनारे लगा कर उस औरत की तरफ चल पड़ता है

अर्जुन जैसे hi उस औरत के करीब जाता है अर्जुन की दिल की धड़कन बढ़ने लगती है आवर अर्जुन औरत के पास जाकर अपनी सर निचे कर के खड़ा हो जाता है

क्यू की वह औरत आवर कोई नहीं ज्योति आंटी होती है आवर ज्योति आंटी को देख कर अर्जुन को बाथरूम का याद आ जाता है जो अर्जुन सायद भूल चूका होता है

अर्जुन बीटा कहा जा रहे हो ..... ज्योति आंटी अर्जुन से पूछती है

आंटी मैं मार्किट की तरफ जा रहा था .... कोई काम है क्या ..... अर्जुन निचे देखते हुए बोलता है अर्जुन को थोड़ा सरम भी आ रहा होता है जो अर्जुन सर उठा कर ज्योति आंटी की तरफ देख भी नहीं रहा होता है


जो इस वक़्त ज्योति आंटी अर्जुन को देख कर मन hi मन मुस्कुरा रही होती है ....

वह अर्जुन बीटा मुझे घर जाना है काफी देर से ऑटो का इंतज़ार कर रही हुईं लेकिन कोई भी यह रोक hi नहीं रहा है तुमेह अपने घर के तरफ जाते देखि तो तुमेह आवाज़ दे दिया .... अर्जुन बेटे मुझे घर तक छोड़ डोज क्या ..... ज्योति आंटी पूछती है ....... लेकिन ज्योति आंटी कोई ऑटो का अभी तक इंतज़ार नहीं की होती है

आंटी चलिए मैं आप को घर तक छोड़ देता हुईं ....... अर्जुन बोलता है

थैंक्स अर्जुन बीटा ..... ज्योति आंटी अर्जुन को थैंक्स बोलती है आवर अर्जुन के साथ चलने लगती है

आंटी दीजिये मैं ले लेता हुईं ..... ज्योति आंटी के हाथ मैं थैला देख कर अर्जुन बोलता है


ज्योति आंटी भी एक थैला अर्जुन को दे देती है

अर्जुन बाइक के पास आता है आवर थैले को आगे रख देता है आवर बाइक पर बैठ जाता है वही ज्योति आंटी भी अर्जुन के पीठ को पकड़ कर बाइक पर बैठ जाती है

चालों अर्जुन ..... ज्योति आंटी बाइक पर ठीक से बैठने के बाद बोलती है


ज्योति आंटी एक हाथ से अर्जुन को पकड़ कर बैठी हुई होती है जिससे ज्योति आंटी की चुकी अर्जुन के पीठ पर थोड़ा टाच हो गयी होती है लेकिन अर्जुन धयान नहीं देता है आवर बाइक स्टार्ट कर देता है आवर चलने लगता है

वही पीछे बैठी हुई ज्योति आंटी की दिल की धड़कन थोड़ी मचल रही होती है आवर उनकी सांसे भी थोड़ी तेज़्ज़ चल रही होती है ज्योति अर्जुन अर्जुन को पकड़ी हुई थोड़ी शर्मा भी रही होती है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhh


अर्जुन बाइक चलते हुए अचानक ब्रेक लगा देता है जिससे ज्योति आंटी की चुकी अर्जुन की पीठ पर डाब जाती है आवर ज्योति आंटी थोड़ी डर्टी हुई सिसक पड़ती है लेकिन जैसे hi बाइक रुक जाती है ज्योति आंटी झट से पीछे भी हैट जाती है

सॉरी आंटी वह कुत्ता अचानक आगे आ गया था ..... अर्जुन बोलता है

कोई बात नहीं अर्जुन ...... ये कुत्ते अचानक आगे आ hi जाते है ..... ज्योति आंटी बोलती है

वही अर्जुन फिर से बाइक स्टार्ट कर देता है लेकिन इस बार अर्जुन की हालत ख़राब हो चुकी होती है अर्जुन को ज्योति आंटी की चुकी अपनी पीठ पर महसूस कर चूका होता है जिससे अर्जुन के लैंड तक ज्योति आंटी की चुकी की महसूस पहुँच चुकी होती है


अर्जुन बाइक चलते हुए अपनी पीठ एक बार पीछे करता है जिससे ज्योति आंटी की चुकी फिर से अर्जुन के पीठ मैं डाब जाती है आवर अर्जुन ज्योति आंटी की चुकी महसूस करने लगता है

ज्योति आंटी की चुकी महसूस कर के अर्जुन के जिस्म मैं गर्मी आने लगती है आवर बाइक चलते हुए अर्जुन के माथे पर पसीने भी आने लगते है

वही अर्जुन के पीठ मैं चुकी दबने से ज्योति आंटी को थोड़ी थोड़ी सरम लग रही होती है लेकिन ज्योति आंटी की भी जिस्म मैं गर्मी बढ़ चुकी होती है

ज्योति आंटी तो कब से अर्जुन के लिए पागल होती है आवर अभी उनको एक मक्का भी मिल गया होता है जो ज्योति आंटी अपनी चुकी आवर भी अर्जुन के पीठ मैं दबाने लगती है

ज्योति आंटी अपनी चुकी जैसे जैसे अर्जुन के पीठ मैं दबा रही होती है ज्योति आंटी की जिस्म मैं गर्मी बढ़ती hi जा रही होती है आवर ज्योति आंटी की जिस्म की गर्मी अब छूट मैं भी होने लगती है जो ज्योति आंटी को अपनी छूट मैं हलचल hi महसूस होने लगती है जैसे ज्योति आंटी की छूट मैं कोई कीड़ा चल रही है


Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

ज्योति आंटी को अपनी छूट मैं सुर सुर सी महसूस होने लगती है जैसे उनकी छूट मैं कोई चीज काट रही है जो ज्योति आंटी बाइक पर बैठी हुई अपनी दोनों जांघ दबा कर छूट मैं रेंग रहे कीड़े को दबा कर मार देना चाहती है लेकिन जैसे hi ज्योति आंटी अपनी जांघ को दबती है ज्योति आंटी की जिस्म कैंप उठती है


जैसे ज्योति आंटी की पूरी जिस्म मैं झनझनाहट सी हो गयी हो

वही बाइक चलते हुए ज्योति आंटी की मदहोशी भरी आह्ह्ह्हह अर्जुन भी सुन लेता है

आंटी आप ठीक है न ..... अर्जुन बाइक थोड़ा स्लो करते हुए पूछता है

हां अर्जुन मैं ठीक हुईं ... वह थैला पकड़ने से ऊँगली थोड़ी दर्द कर रही थी ..... ज्योति आंटी झूठ बोलती है


अर्जुन बाइक चलते हुए ज्योति आंटी की चुकी को महसूस करते hi जा रहा होता है लेकिन जब अर्जुन को अपनी पीठ पर ज्योति आंटी की चुकी आवर भी दबी हुई महसूस होती है तो अर्जुन को मज़ा तो आवर आने लगता है लेकिन अर्जुन थोड़ा हैरान भी होता है ये सोच कर के क्या ज्योति आंटी जान भुज कर अपनी चुकी मेरे पीठ पर दबा रही है

लेकिन फिर सोचता है सायद ज्योति आंटी गिरने के दर से पकड़ रही है

बस अर्जुन आगे से लेफ्ट लेलो पास मैं hi घेर है ......

ज्योति आंटी बोलती है तो अर्जुन लेफ्ट ले लेता है आवर कुछ दूर जाकर बाइक रोक देता है ज्योति आंटी के कहने पर

ये क्या अर्जुन बीटा आज पहली बार मेरे घर पर आये भी तो बहार से जाने लगे ..... मैं कोई बहार वाली आंटी नहीं हुईं तुम्हारी ....... मैं तुम्हारी माँ की बेस्टफ्रेंड हुईं मतलब तुम्हारी माँ की बहन जैसी हुईं आवर तुम्हारी मसि हुईं

तुम अपनी मसि के साथ भी आते तो ऐसे hi बहार से चले जाते


ज्योति आंटी थोड़ी नाराज़गी भरी सवार मैं बोलती है

ज्योति आंटी को नाराज़ होते देख कर अर्जुन को अच्छा नहीं लगता है तो अर्जुन बाइक किनारे लगा कर ज्योति आंटी के साथ जाने लगता है


ये पकड़ों मैं गेट खोलती हुईं .... ज्योति आंटी थैला अर्जुन को देती हुईं बोलती है तो अर्जुन थैला ले लेता है तो ज्योति आंटी गेट खोलने लगती है

गेट खोलने के बाद अर्जुन घर के अंदर आ जाता है

अर्जुन बेटे बैठो मैं कॉफ़ी बना कर लती हुईं

ज्योति आंटी बोलती है आवर थैले को अपनी बीएड पर रख कर hi रूम से निकल जाती है आवर अर्जुन भी ज्योति आंटी के बीएड पर बैठ जाता है

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राखी देवी दिंनिंग टेबल पर बैठी अर्जुन का इंतज़ार कर रही होती है लेकिन अर्जुन अभी भी घर पर नहीं आता हुआ होता है

राखी देवी अर्जुन को फ़ोन भी करती है जो अर्जुन का फ़ोन ऑफ बता रहा होता है

अब कहा चला गया मुझे छोड़ कर बोलता था मुझे आप के साथ रहना है आवर सुबह से गया है आवर अभी तक घर नहीं आया ..... मैं कब से उसका इंतज़ार कर रही हुईं ..... फ़ोन भी बंद किया है

अब दूर क्यू भाग रहा है मुझसे ..... मैं तो उसके दूर जाने जैसे कोई काम भी नहीं कर रही हुईं ..... वह जो कर रहा है उसको करने तो दे रही हुईं ......

अर्जुन बीटा प्लीज जल्दी घर आ जाओ ..... तुमेह जो चाहिए मैं दूंगी तुमेह तुम बस मेरे पास रहो ...... तुमेह नहीं देख रही तो मेरा दिल बेचैन हो रहा है कहा हो अर्जुन बीटा .....

राखी देवी दिंनिंग टेबल पर बैठी हुई सोच रही होती है आवर राखी देवी की चेहरे पर उदासी साफ नज़र आ रही होती है

राखी देवी फिर से फ़ोन करती है जो इस बार फ़ोन लग जाता है रिंग होते सुन कर राखी देवी की दिल को थोड़ी सकूँ मिलती है

hello अर्जुन बीटा कहा है मैं कब से नास्ता करने के लिए इंतज़ार कर रही हुईं ..... फ़ोन उठाते hi राखी देवी बोलती है

माँ वह मैं ज्योति आंटी के घर पर हुईं वह मार्किट मैं मिल गयी थी तो उनको घर छोड़ने के लिए आ गया था ..... अर्जुन बोलता है

क्या ज्योति के घर पर है .... ठीक है बीटा आंटी को घर छोड़ दिया है तो अब घर आ जाओ मैं वेट कर लेती हुईं .... राखी देवी बोलती है

माँ आप नास्ता कर लीजिये मैं घर थोड़े लेट से आऊंगा अभी मुझे एक दोस्त से मिलना है इधर hi रहता है वह .... अर्जुन बोलता है

ठीक है बीटा मैं नास्ता कर लेती हुईं मगर घर जल्दी आ जाना ...... राखी देवी बोलती है तो अर्जुन ठीक है बोल कर फ़ोन रख देता है

फ़ोन करने के बाद hi राखी देवी की धड़कन ज़ोर ज़ोर से चलने लगती है


ज्योति अर्जुन को अपने घर लेकर गयी है कही वह इस वक़्त hi अर्जुन के साथ सेक्स तो नहीं करने वाली है

वह अर्जुन के लिए पागल है ..... वह मेरे अर्जुन का फायदा उठा लेगी ... मेरा अर्जुन सरीफ है लेकिन ज्योति ने अपने जिस्म की नुमाइश अर्जुन के सामने की तो मेरा अर्जुन ज़रूर बहक जायेगा ...... अर्जुन जिस्म देख कर कितना गर्म हो जा रहा है वह मैंने भी देख लिया है


साली ज्योति मेरे बेटे को अपनी जिस्म दिखा कर ज़रूर रिझा लेगी

अर्जुन सिर्फ मेरा है मैं किसी आवर को उसके साथ नहीं देखना चाहती

क्या मैं ज्योति को फ़ोन करू .... उसको बोल दूँ मेरे बेटे का साथ कुछ मत करों ...... करती हुईं फ़ोन

राखी क्या कर रही है ..... तूने ज्योति से पहले hi बोलै है अर्जुन उसके साथ सेक्स करना चाहे तो तुझे कोई परेशानी नहीं होगी ...... मन की अर्जुन तेरा बीटा है लेकिन ज्योति भी तेरी बेस्टफ्रेंड है आवर देखि नहीं ज्योति कितनी दुखी हो गयी थी उस दिन

अगर तेरी बेस्टफ्रेंड तेरे बेटे के वजह से खुश हो जाये तो तुझे क्या परेशानी है .... अर्जुन तेरा बीटा है आवर तेरा hi रहेगा ..... ज्योति तेरे बेटे को तुझसे छीन नहीं लेगी ...... ज्योति बस एक बार अर्जुन के साथ सेक्स करना चाहती है ..... तो करने दे न

राखी देवी जैसे hi ज्योति को फ़ोन लगाने को होती है तभी राखी देवी की दिमाग मैं ये साडी बातें चलने लगती है जो राखी देवी फ़ोन लगा नहीं पति है


लेकिन राखी देवी की धड़कन बेचैन ज़रूर हो गयी होती है राखी देवी बिना नास्ता किये hi उठ कर अपनी रूम मैं चली जाती है आवर रूम का गेट बंद कर देती है

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आदि इस वक़्त अपनी रूम मैं बीएड के सामने कुर्शी पर बिलकुल नंगा बैठा हुआ होता है आवर उसके पेअर से लेकर पूरी जिस्म कुर्सी से बंधे हुए होते है लेकिन एक हाथ खुले हुए होते है आवर आदि अपना लैंड पकड़ कर ब्राह्मी से मदों रहा होता है आवर सामने देख देख कर खुद के लैंड पर गुस्सा हो रहा होता है आवर अपनी माँ की हरकत को देख कर आदि की आँखों मैं आंसू की बुँदे भी आ गयी होती है

वही आदि के बीएड पर 3 औरत बिलकुल नंगी लेती हुई एक दूसरे के जिस्म को मसलती हुई सिसकियाँ ले रही होती है

AhhhhhhhhhhhHhhhhhhhhhh आवर ज़ोर से बेटी Ahhhhhhhhhh

बहुत जल रही है मेरी छूट

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

कहा जावू मेरी छूट

कूऊऊऊओ Hhhhhhhhhhhhhhhh

Aahhhhhhhhhhh Maaaaaaaaaaaaaaa Hhhhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhh huuuuuuuuuuuuuuuuuuu


आवर ज़ोर से देख बे हिजड़े

Ahhhhhhhhhhhhhhhh Ahhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhh Ssassssssssss

मेरी छूट चाहिए तुझे न

Ahhhhhhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhh Aahhhhhhhhhhh Sssssssssssssssssss


इसी छूट से निकला है आवर तुझे एहि छूट चाहिए

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhh Maaaaaaaaaaaaaaaaaaa

hhhhhhhhhhhhhhhhh

Aahhhhhhhhhhhhhhhhh

SSSSSSSSSSSSSSSSSSS ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह


तू इतना हरामी कैसे निकल गया

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

बेटी

Ahhhhhhhhhhhhhhhhh मेरी छूट

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

Ohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Aaaahhhhhhhhhhhhhhhhh

स्स्स्सस्स्स्सस्स्स्सस्स्स्सस्स्स्साआआ

आदि की माँ आदि के सामने बिलकुल नंगी लेती हुई होती है आवर चांदनी आदि की माँ की छूट छत रही होती है आवर घर की नौकरानी कविता आदि की माँ की चुकी को चुस्ती हुई दूसरी चुकी को मसल रही होती है

वही आदि की माँ मस्ती मैं सिसकती हुई आदि को गुस्से मैं देखती हुई बोल रही होती है

जिस माँ को आदि हर लड़के आवर मर्द से बचा कर इतने दिन तक रखा हुआ होता है जो कभी घर मैं नौकर भी नहीं रखता था के कही उसकी नज़र उसकी माँ की जिस्म पर न पद जाये आवर वह नौकर उसकी माँ को छोड़ दे


लेकिन आज वही माँ एक लड़की आवर एक घर की नौकरानी के साथ अपनी जिस्म को मसलवा रही होती है आवर वह उसको hi गुस्से से देखती हुई बोल बोल कर घुश हो रही होती है

आदि को आज अपनी माँ की ये तुम देख कर खुद पर गुस्सा आ रहा होता है लेकिन खुद पर से भी कही जयादा गुस्सा आदि को चांदनी आवर कविता पर हो रहा होता है

आदि के जिस्म बांधें हुए होते है जो आदि वह से हिल भी नहीं पा रहा होता है

आदि इतने मायुश दुखी दर्द मैं होता है की उसके मुंह से आवाज़ भी नहीं निकल रही होती है ये कह सकते है आदि की आज सदमा लगा होता है अपनी माँ की इस रूप को देख कर

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

अचानक आदि की माँ की सिसकियाँ उस रूम मैं गूंज पड़ती है

आदि सर्मिंदगी के कारण निचे देखते हुए लैंड को मसल रहा होता है तभी आदि को अपनी माँ की सिसकियाँ सुनाई देती है पहले तो आदि दर जाता है क्या हो गया उसकी माँ को आवर आदि अपनी माँ की इतने तेज़ सिसकियाँ सुन कर अपनी माँ की तरफ देखता है जो अभी भी बीएड पर लेती हुई. गांड उठा उठा कर तड़प रही होती है आवर तभी आदि की नज़र अपनी माँ की छूट पर जाती है आवर आदि की आँखें बड़ी हो जाती है लेकिन आदि के मन मैं पानी भी आ जाता है आवर आदि अपनी माँ की छूट को देखते हुए मुंह मैं आया पानी निगल जाता है

मक इतना सारा पानी Aahhhhhhhhhh बस सारा पि जाऊंगा मैं ...... आदि अपनी माँ की छूट का पानी निकलते देख कर मन मैं सोचता है


ओह्ह गॉड आंटी इतना सारा पानी ..... चांदनी भी आदि की माँ की छूट से पानी निकलती हुई देख कर हैरान होती हुई बोलती है आवर अपनी जीभ होंठों मैं सत्ता कर छूट को देखने लगती है जैसे सारा पानी पि जाना चाहती है आवर झट से अपनी ऊँगली छूट पर रख कर पानी लेकर मुंह मैं दाल देती है

वही कविता भी आदि की माँ की छूट से पानी निकलते देख कर हैरान हो गयी होती है

मालकिन आज आप की छूट से इतना सारा पानी


मालकिन लगता है आप की छूट मैं बहुत सारा पानी जमा हो रही है आज कल ..... कविता हस्ती हुई बोलती है आवर साथ मैं चांदनी भी मुस्कुरा देती है

वही आदि की माँ चांदनी की हरकत को देख कर शर्मा तो पहले hi गयी होती है लेकिन कविता की बात सुन कर तो आदि की माँ आवर भी शर्मा जाती है आवर अपनी हाथ उठा कर मुंह पर रख देती है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

आदि की माँ को सरमते देख कर चांदनी झट से अपनी मुंह आदि की माँ की छूट मैं लगा देती है आवर पानी को पिने लगती है जिससे आदि की माँ तड़प उठती है

आंटी आप की पानी तो आज आवर भी मस्त लग रही है ......


भडवे रुक मैं तुझे भी टेस्ट करवाती हुईं ....

चांदनी बोलती है आवर मुंह मैं पानी लेकर आदि की तरफ बढ़ने लगती है वही आदि चांदनी को अपने तरफ आते देख कर अपनी सूखे हुए गले को थूक से भींगने लगता है

चांदनी बेटी नहीं ...... चांदनी आदि की माँ की छूट का पानी आदि की मुंह मैं डालने के लिए झुकने hi वाली होती है तभी आदि की माँ बोल पड़ती है आवर उठ कर आदि के पास आ जाती है

वही आदि मुंह खोल चूका होता है अपनी माँ की छूट का पानी पिने के लिए लेकिन अपनी माँ को मन करते हुए सुन कर अपनी माँ को मायुशि से देखने लगता है


चांदनी बेटी ये हरामी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा की पानी तेरी छूट की है या मेरी आवर मेरी छूट का पानी तो ये पिने के लिए कुछ भी कर सकता है

इतना हरमि बेशर्म कुत्ता कमीना हो है ..... इसको मेरी छूट का पानी पिने से पहले मेरी मूत पिणि पड़ेगी ......

रुक मैं तुझे मूत पिलाती हुईं ...... इतने देर मैं तुझे प्यास तो लगी hi होगी ...... आदि की माँ बोलती है

वही अपनी माँ की बात सुन कर आदि की आँखें भर आती है आवर वह अपनी माँ को देखते हुए अपनी सर निचे कर लेता है

भड़वे ये मगरमछ का आंसू दिखना बंद कर आवर मेरा मूत पि पहले ...... चांदनी बेटी इसका सर तो ऊपर कर

आदि की माँ बोलती है तो चांदनी आदि का सर ऊपर कर देती है आवर तभी आदि की माँ अपनी छूट को दोनों हाथ से पकड़ कर छूट को थोड़ी फैला देती है आवर फिर आदि के मुंह पर मूतने लगती है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

छूट से गर्म पानी निकट hi रजनी देवी तड़प जाती है आवर आदि के मुंह मैं मूतने लगती है


रजनी देवी मूत रही होती है आवर सामने कड़ी चांदनी मुस्कुरा रही होती है वही आदि अपना मुंह बंद किये हुए आँखें भी बंद कर लेता है

चांदनी बेटी इसका मुंह तो खोल ये हरामी मुंह बंद किया है कविता तू खोल ...... रजनी देवी बोलती है तो कविता आकर आदि की मुंह खोल देती है

आदि के मुंह खुलते hi रजनी देवी की मूत आदि के मुंह मैं जाने लगता है आवर वही कविता आदि का सर ऊपर कर देती है जिससे आदि को पानी अंदर घटना hi पड़ता है

रजनी देवी काफी देर तक मुट्ठी रहती है आवर फिर मूतने के बाद रूम से निकल भगति है ......

भडवे ये है तेरी औकात .... ये तो सिर्फ सुरु हुआ है आगे तुझे बहुत कुछ देखना है .....

चांदनी बोलती है आवर रूम से चली जाती है वही कविता भी रूम से निकलती हुई आदि की रूम का गेट बंद कर देती है


माँ माँ माँ प्लीज गेट खोलिये न ..... चांदनी जब हॉल मैं आती है तो रजनी देवी को नहीं देखती है तो वह रजनी देवी की रूम मैं जाने को होती है तो गेट बंद पति है तभी चांदनी को रजनी देवी की रोटी हुई सिसकने की आवाज़ सुनाई देती तो चांदनी गेट खोलने को बोलने लगती है

चांदनी बेटी प्लीज तुम जाओ अभी ..... रजनी देवी इतना hi बोलती है

चांदनी भी फिर कुछ नहीं बोलती है आवर आकर हॉल मैं बैठ जाती है


चांदनी बेटी लगता है मालकिन दुखी है ..... कविता बोलती है .....

हां मैं माँ से बात करुँगी ...... चांदनी बोलती है आवर उठ कर चांदनी बाथरूम मैं चली जाती है

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अर्जुन ज्योति आंटी के रूम मैं बैठा हुआ होता है तभी अर्जुन को पिशाब लग जाता है तो अर्जुन रूम से बहार आ जाता है आवर अपने लैंड को इधर उधर करने लगता है लेकिन अर्जुन से बर्दास्त नहीं होता है

अर्जुन क्या हुआ ..... ज्योति आंटी आकर अर्जुन को खड़ा देता है तो बोलती है

आंटी वह बाथरूम ..... अर्जुन सरमते हुए पूछता है


अर्जुन बीटा उधर है .... ज्योति आंटी इसरा करती हुई बोलती है तो अर्जुन बाथरूम की तरफ चला जाता है

वही ज्योति आंटी कॉफ़ी को अपने रूम मैं रख कर थैले को रखने लगती है


ओह्ह No मेरे कपडे .... ज्योति आंटी को जैसे hi याद आती है की सुबह के कपडे तो अभी भी बाथरूम मैं hi है कही अर्जुन की नज़र न पद जाये

ज्योति आंटी बाथरूम की तरफ भगति है तो देखती है बाथरूम का गेट बंद हो चूका है तो ज्योति आंटी रूम मैं आ जाती है लेकिन ज्योति आंटी की दिल धक् धक् कर रही होती है की कपडे देख कर अर्जुन क्या सोच रहा होगा .....

वही अर्जुन बाथरूम बंद करते hi बिका किसी तरफ देखे लैंड निकल कर मूतने लगता है आवर
मुत्ते हुए सन्ति भरी आह्हः भरता है

अर्जुन मूतने के बाद घूम कर लैंड अंदर डालता है आवर हाथ धोने के लिए नल के पास जाता है तभी अर्जुन की नज़र ऊपर तंगी हुई ब्रा पेंटी पर नज़र चली जाती है

अर्जुन ब्रा पेंटी को धयान से देखने लगता है आवर अर्जुन का लैंड एक बार फिर से खड़ा होने लगता है

इसमें तो आंटी की छूट बिलकुल दिख जाती होगी आवर ये ब्रा इतनी छोटी ..... ये सायद आंटी की नहीं है अर्जुन हैरान होते हुए सोचता है


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अर्जुन ब्रा पेंटी को देख कर हैरान भी हो जाता है क्यू की पेंटी भी ऐसी होती है जैसे पहनने के बाद भी छूट थोड़ी बहुत दिखती hi होगी आवर ब्रा भी ज्योति आंटी की चुकी के हिसाब से छोटी hi होती है जो अर्जुन को लगता है ये ब्रा पेंटी किसी आवर की होगी

अर्जुन ब्रा को हाथ मैं ले लेता है आवर ब्रा को चुकी की जगह मसलते हुए अपनी मुंह के पास लेकर सूंघने लगता है

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

ब्रा को सूंघते हुए अर्जुन मस्ती मैं सिसक पड़ता है

अर्जुन बीटा कॉफ़ी ठंडी हो रही है ..... ज्योति आंटी की आवाज़ सुन कर अर्जुन झट से ब्रा को तंग देता है आवर हाथ धोता है आवर बाथरूम से निकल कर रूम मैं आ जाता है तो देखता है बीएड पर बैठी हुई ज्योति आंटी कॉफ़ी पि रही है


अर्जुन भी कॉफ़ी उठा कर पिने लगता है .....

आंटी आप अकेली रहती हो .... आप के लड़के साथ नहीं रहते है ..... अर्जुन पूछता है

अर्जुन के सवाल से ज्योति आंटी पहले थोड़ी शर्मा जाती है क्यू के ज्योति आंटी को लग चूका होता है अर्जुन पूछना क्या चाहता है ....

अर्जुन अभी तो मैं अकेली hi हुईं कुछ दिन के बाद मेरी बहु आवर बेटी आ जाएँगी ...... ज्योति आंटी बोलती है आवर कॉफ़ी पिने लगती है

ओह मतलब आंटी की वह ब्रा पंतय थी आंटी की चुकी इस लिए इतनी ऊपर उठी हुई है आंटी ब्रा थोड़ी छोटी पहनती है

अर्जुन ज्योति आंटी की चुकी को घूरता हुआ मन मैं सोचता है जो ज्योति आंटी की पल्लू अभी थोड़ी अलग होने से ज्योति आंटी की चुकी अर्जुन अच्छे से देख रहा होता


आंटी भी न कितनी जुल्म करती है अपनी चुकी पर .....

अर्जुन क्या सोचने लगे कॉफ़ी पियो ..... अर्जुन को सोच मैं डूबी हुई देख कर ज्योति आंटी बोलती है आवर अर्जुन की नज़र का पीछा करती हुई देख कर खुद शर्मा जाती है लेकिन पल्लू को साइन पर नहीं डालती है

अर्जुन बीटा थोड़ा वह बैग उतर डोज ...... अर्जुन जब कॉफ़ी पि लेता है तो ज्योति आंटी बोलती है तो अर्जुन हां बोलता है

अर्जुन टेबल बार छड़ कर एक बैग को उतरने लगता है जो थोड़ा अंदर की तरफ होता है अर्जुन बैग पकड़ने की कोशिश कर रहा होता है तभी अर्जुन के हाथ मैं बैग का चैन आ जाता है आवर अर्जुन उसे hi पकड़ कर खींचता है तभी चैन नीचे हो जाता है आवर बैग से कई सरे ब्रा पेंटी नीचे गिरने लगते है आवर एक पेंटी अर्जुन के मुंह पर आ जाता है


अर्जुन जैसे hi मुंह से पंतय हटा कर देखता है अर्जुन के जिस्म मैं गंगना जाता है आवर अर्जुन टेबल पर कैंप जाता है जिससे लड़खड़ते हुए अर्जुन निचे गिर पड़ता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

आवर रूम मैं आंटी आवर अर्जुन की आह्ह्ह्हह गूंज पड़ती है

अर्जुन इस वक़्त ज्योति आंटी के ऊपर गिरा हुआ होता है आवर ज्योति आंटी की चुकी अर्जुन के साइन मैं दबी हुई होती है आवर अर्जुन का हाथ ज्योति आंटी की कमर पर होती है

अर्जुन का खड़ा हो चूका लैंड ज्योति आंटी की साड़ी के ऊपर से hi उनकी छूट मैं जाने के लिए फुफकार मार रहा होता है

आंटी सॉरी वह मैं .... अर्जुन इतना बोल कर ज्योति आंटी के ऊपर से हटने की कोशिश करता है लेकिन हो नहीं पता है

वही ज्योति आंटी भी दरी हुई अर्जुन को पूरी तरह बाँहों मैं पकड़ी हुई होती है लेकिन अर्जुन की आवाज़ सुन कर अपनी आँखें खोलती है आवर फिर अर्जुन आवर ज्योति आंटी की नज़र एक दूसरे से टकरा जाती है

अर्जुन ज्योति आंटी को देखते हुए अर्जुन की नज़र ज्योति आंटी की गुलाबी होंठों पर चली जाती है आवर अर्जुन अपनी सूखे हुए गले को थूक से घोट जाता है

वही ज्योति आंटी भी सरमाती हुई अर्जुन को देख रही होती है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh


ज्योति आंटी अचानक सिसकती हुई अर्जुन को आवर भी मज़बूती से पकड़ लेती है

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थैंक्स बीआरओ

आदि गिरा हुआ है के नहीं आगे पता चल जायेगा बीआरओ

रजनी देवी इतनी बेसर्मी कर रही है आदि के सामने तो कुछ तो उनेह पता चला hi होगा आदि के बारे मैं तभी तो वह आज अपने बेटे को इतनी जलील कर रही थी

हां बीआरओ हो सकता है चांदनी अपने कोई बदला ले रही है आदि से जिसमे आदि की खुद की माँ चांदनी की साथ दे रही है सायद रजनी देवी को चांदनी की कोई सचाई जान कर hi उसका साथ दे रही है .....

अर्जुन रजनी देवी के साथ सायद चांदनी के साथ भी सेक्स कर लेकिन अर्जुन आदि का साथ देता है या चांदनी या फिर आदि आवर रजनी देवी को मिला देता है ..... ये तो वक़्त आने पर पता चला जायेगा बीआरओ
 
अर्जुन इस वक़्त ज्योति आंटी के ऊपर गिरा हुआ होता है आवर ज्योति आंटी की चुकी अर्जुन के साइन मैं दबी हुई होती है आवर अर्जुन का हाथ ज्योति आंटी की कमर पर होती है

अर्जुन का खड़ा हो चूका लैंड ज्योति आंटी की साड़ी के ऊपर से hi उनकी छूट मैं जाने के लिए फुफकार मार रहा होता है

आंटी सॉरी वह मैं .... अर्जुन इतना बोल कर ज्योति आंटी के ऊपर से हटने की कोशिश करता है लेकिन हो नहीं पता है

वही ज्योति आंटी भी दरी हुई अर्जुन को पूरी तरह बाँहों मैं पकड़ी हुई होती है लेकिन अर्जुन की आवाज़ सुन कर अपनी आँखें खोलती है आवर फिर अर्जुन आवर ज्योति आंटी की नज़र एक दूसरे से टकरा जाती है

अर्जुन ज्योति आंटी को देखते हुए अर्जुन की नज़र ज्योति आंटी की गुलाबी होंठों पर चली जाती है आवर अर्जुन अपनी सूखे हुए गले को थूक से घोट जाता है

वही ज्योति आंटी भी सरमाती हुई अर्जुन को देख रही होती है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

ज्योति आंटी अचानक सिसकती हुई अर्जुन को आवर भी मज़बूती से पकड़ लेती है

_______________________


ज्योति आंटी के ऊपर से चिपके हुए होने से अर्जुन के जिस्म मैं गर्मी होने लगती है जिससे अर्जुन का लैंड खड़ा हो जाता है आवर अर्जुन ज्योति आंटी की गुलाबी होंठों को देखते हुए अर्जुन अपनी कमर निचे की तरफ दबा देता है जिससे अर्जुन का खड़ा लैंड ठीक ज्योति आंटी अपनी छूट के ऊपर महसूस करती है जिससे ज्योति आंटी की जिस्म कैंप उठता है आवर ज्योति आंटी सिसकती हुई अर्जुन को बाँहों मैं भर लेती है

वही अर्जुन भी मक्का न गवाते हुए अपना मुंह ज्योति आंटी के मुंह मैं सत्ता देता है जिससे अर्जुन आवर ज्योति आंटी की होंठ एक दूसरे से टाच हो जाती है आवर अर्जुन झट से ज्योति आंटी की सर पकड़ कर ज्योति आंटी की होंठों को चूसने लगता है

अर्जुन के अचानक किश करने से ज्योति आंटी पहले तो थोड़ी हैरान होती है लेकिन फिर ज्योति आंटी अर्जुन के साथ देने लगती है आवर अपना हाथ अर्जुन के बालों मैं फेरने लगती है


अर्जुन ज्योति आंटी की गुलाबी होंठों को चूसते हुए अपना हाथ निचे ले जाकर ज्योति आंटी की कमर को पकड़ लेता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अपनी पर हाथ पड़ते hi ज्योति आंटी किश तोड़ती हुई सिसक पड़ती है

किश टूटने की वजह से अर्जुन आवर ज्योति आंटी की नज़ारे एक दूसरे से मिल जाती है आवर दोनों एक दूसरे की आँखों मैं देखने लगते है जो कुछ hi सेकंड मैं ज्योति आंटी सरमाती हुई अपनी पलकें निचे कर लेती है

वही अर्जुन ज्योति आंटी की सरम को देखते हुए अपना हाथ ज्योति आंटी की कमर पर सहलाने लगता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

कमर पर हाथ फेरने से ज्योति आंटी सिसकियाँ लेती हुई अर्जुन का हाथ पकड़ लेती है

अर्जुन बीटा दर्द


ज्योति आंटी सरमाती हुई बस इतना hi बोलती है के अर्जुन की नज़र एक बार फिर से ज्योति आंटी की चेहरे पर चली जाती है जो ज्योति आंटी की चेहरे पर बेहपनाह सरम होती है जो अर्जुन के देखने से ज्योति आंटी फिर से अपनी नज़ारे निचे कर लेती है

सॉरी आंटी ..... अर्जुन बोलते हुए झट से ज्योति आंटी के ऊपर से हैट जाता है


वही ज्योति आंटी भी सरमाती हुई उठ कर गिरी हुई ब्रा पेंटी उठाने लगती है

ज्योति क्या कर दिया तूने अर्जुन को रोका क्यू तू कब से एहि तो चाहती थी .... अर्जुन को अभी नहीं रोकती तो आज तेरी जिस्म की गर्मी निकल जाती तुझे कितनी सकूँ मिलती ....

अह्ह्ह ज्योति तूने सब बर्बाद कर दिया ...


क्या करूँ मुझे शर्म लगने लगी थी

अर्जुन मेरे बेटे जैसा है ..... मुझे लगा मैं कोई पाप कर रही हुईं ..... मैं कुछ गलत तो नहीं कर रही थी .....


कुछ गलत कर रही थी ...... ज्योति तेरे लिए तो अच्छा है अर्जुन तेरे बेटे जैसा है वह तुझे खुश भी कर देगा आवर बहार किसी से कहेगा भी नहीं .....

तुझे अच्छे से पता है तेरी जिस्म मैं कितनी गर्मी है जो तेरा पति भी अब नहीं बुझा पता है आवर न कभी बुझा पायेगा

ज्योति तेरी जिस्म की गर्मी दिन पर दिन बढ़ती hi जा रही है

ज्योति अगर तूने कुछ दिन आवर खुद को रोक भी लिया तो ये तेरी जिस्म की गर्मी इतनी बढ़ जाएगी की तुझे हर रह चलते हुए इंसान के निचे लेटने का मन करने लगेगा आवर यकीनन तू एक दिन किसी के निचे तंग खोल hi देगी ..... आवर वह इंसान कैसा होगा ज्योति तुझे पता भी नहीं होगा

तुझसे मज़ा लेकर वह इंसान तेरा फ़ायदा उठाने लगेगा तो क्या करेगी ... आवर तूने उसकी बात नहीं मणि आवर वह इंसान तेरा कोई वीडियो आवर पिछ नेट पर अपलोड कर दिया तो तेरा क्या होगा ज्योति तेरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी ..... मेरी मान आवर अर्जुन के साथ hi अपनी आग बुझा ले

अर्जुन से अच्छा तुझे मिल नहीं सकता ....

ज्योति आंटी ब्रा पेंटी उठा रही होती है आवर ये साडी बातें उनकी दिलों दिमाग मैं चल रही होती है

आंटी सॉरी वह गलती से हो गया प्लीज माँ को ..... अर्जुन बोलते हुए ज्योति आंटी को देख कर चुप हो जाता है आवर अर्जुन थोड़ा दर भी जाता है

क्यू की अर्जुन की बात सुन कर ज्योति आंटी अर्जुन की तरफ देखने लगती है जो इस वक़्त ज्योति आंटी की आँखों मैं आंसू आ गयी होती है जो अर्जुन को लग जाता है उसकी हरकतों की वजह से ज्योति आंटी दुखी हो गयी है

आंटी प्लीज रोइये मत ..... आंटी प्लीज मुझे मांफ कर दीजिये मुझसे आंजने मैं गलती हो गयी बीटा समझ कर hi मांफ कर दीजिये ..... आंटी मैं कभी आप के सामने नहीं आऊंगा

अर्जुन ज्योति आंटी की आँखों मैं आंसू देख कर अर्जुन भी दुखी हो जाता है जो बोलते हुए हाथ जुड़ देता है आवर ज्योति आंटी के क़दमों मैं गिर जाता है

अर्जुन बीटा ...... ज्योति आंटी बोलती हुई अर्जुन को पकड़ लेती है आवर अर्जुन को खड़ा करती हुई अर्जुन से लिपट जाती है

अर्जुन बीटा तुम्हारी कोई गलती नहीं है ..... अर्जुन बीटा तुम परेशां न हो मैं राखी से कुछ नहीं कहूँगी ..... मेरी किस्मत hi ऐसी है तो मैं क्या कर सकती हुईं ......

जिसका प्यार मुझे मिलना चाहिए था वह मिल नहीं रहा आवर जो मिल रहा है वह लेने से मेरी दिल मान नहीं रही है अर्जुन ....

मैं क्या करूँ मुझे कुछ समझ नहीं आ रही है अर्जुन बीटा ......... ज्योति आंटी बोलती हुई रोने लगती है

वही अर्जुन को ज्योति आंटी की बातें समझ नहीं आती है के ज्योति आंटी क्या बोल रही है लेकिन अर्जुन को ज्योति आंटी को रट हुए देख कर बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता है अर्जुन ज्योति आंटी को बीएड पर बैठता है आवर गिलास मैं पानी लेकर पिने को देता है

आंटी आप क्या बोल रही है मुझे समझ नहीं आ रहा है ..... आप प्लीज दुखी मत होइए ....

आंटी आप किस बात से दुखी है मुझे बता सकती है .... आंटी आप hi कहती है न मेरी माँ आप की बहन जैसी है आवर मैं आप के बेटे जैसा तो प्लीज अपने बेटे को बता दीजिये आप मेरी हरकत की वजह से दुखी नहीं है तो किस बात से इतनी दुखी हो गयी है

अर्जुन ज्योति आंटी के साथ बैठ कर पूछता है ....

वही ज्योति आंटी अर्जुन के सवाल सुन कर घबराती हुई सरमने लगती है .....

आंटी आप बस बोलती हो मैं आप के बेटे जैसा हुईं लेकिन मुझे बीटा मानती नहीं हो ..... ठीक है मुझे लेट हो रहा है माँ घर जल्दी आने को बोली है ....

अर्जुन बीटा ये सच नहीं है ...... तुमेह मैं बीटा hi मानती हुईं .... लेकिन वह बात मैं तुमेह नहीं बता सकती हुईं

ज्योति आंटी अर्जुन को जाते हुए देख कर झट से अर्जुन का हाथ पकड़ कर बोल पड़ती है

अर्जुन जब पलट कर देखता है ज्योति आंटी अर्जुन को भींगी आँखों से देख रही होती है

आंटी आप मुझे बीटा मानती है तो आप को मेरी कसम है आप मुझे बता दीजिये .....

मैं अपनी माँ के किसी काम नहीं आया तो फिर मैं बीटा hi कैसा ..... अर्जुन बीटा नाहीईई

अर्जुन बोलता हुआ ज्योति आंटी का है

आठ उठा कर अपने सर पर रख देता है जो ज्योति आंटी चीखती हुई अपनी हाथ हटा लेती है

ये क्या कर दिया अर्जुन बीटा ... मुझे अपनी कसम क्यू दे दिया .... अर्जुन बीटा तुमने अच्छा नहीं किया ..... मैं कैसे तुमेह ये बात बता सकती हुईं .... ज्योति आंटी बोलती हुई फिर से सिसकने लगती

आंटी मैंने आप अपनी कसम दे दिया है अब मैं आप को

________________________________आंटी मैंने आप को अपनी कसम दे दिया है अब आप मुझे कितना प्यार करती है ये आप hi जानती है अब मैं आप को आवर फाॅर्स नहीं करूँगा ..... अर्जुन ज्योति आंटी के आँखों मैं देखता हुआ बोलता है

वही ज्योति आंटी की दिल ज़ोर ज़ोर से मचलने लगती है

हे भगवन अर्जुन ने मुझे मुश्किल मैं दाल दिया है

अगर मैंने अर्जुन को नहीं बताया तो वह मुझसे गुस्सा भी हो जायेगा आवर कसम की वजह से अर्जुन को कुछ हो गया तो

नहीं नहीं मैं अर्जुन को कुछ नहीं होने दूंगी .... मैं अर्जुन बता दूंगी .... चाहे मुझे कितनी भी सर्मिंदगी महसूस क्यू न हो ..... ज्योति आंटी मन मैं सोचती है

आंटी मुझे जाना होगा .... माँ का फिर से फ़ोन आ रहा है .......

अर्जुन फ़ोन मैं माँ की नंबर देख कर बोलता है

अर्जुन बीटा मैं ये बात सायद तुमेह नहीं बताती लेकिन तुमने कसम देकर मुझे मज़बूर कर दिया .... मैं तुमेह आज रात मैं बता दूंगी ..... प्लीज बीटा गुस्सा नहीं होना अभी नहीं बता रही तो ...

ज्योति आंटी अपनी सर निचे किये हुए बोलती है आवर अपनी पेअर एक दूसरे मैं रगड़ रही होती है जो अर्जुन देख लेता है

ठीक है ..... आप मुझे बीटा मानती है ये जान कर मुझे ख़ुशी हो रही है .... लेकिन आंटी मैं रात मैं .... मेरा आज बर्थडे है

राखी को मैंने बोल दिया है ... अर्जुन के पूरी बात बोलने से पहले hi ज्योति आंटी बोल पड़ती है

ओह हैप्पी बर्थडे आंटी ..... अर्जुन मुस्कुरा कर बोलता

थैंक्स बीटा .... अर्जुन को मुस्कुराता देख कर ज्योति आंटी भी थोड़ी मुस्कुरा कर बोलती है

अर्जुन ज्योति आंटी के घर से निकल जाता है

वही ज्योति आंटी भी अर्जुन को बहार तक छोड़ने आ गयी होती है आवर अर्जुन को जाते हुए दरवाजे से देख रही होती है

मेरी हालत जानने के बाद क्या अर्जुन मेरे साथ सेक्स करने को मान जायेगा ..... ज्योति आंटी अर्जुन को जाते हुए देख कर मन मैं सोचती है

___________________________________

इधर घर पर राखी देवी बीएड पर सोइ हुए करवट बदल रही होती है आवर बार बार अर्जुन को फ़ोन कर रही होती है

राखी देवी के अंदर एक बेचैनी सी मची हुई होती है ऊपर से अर्जुन फ़ोन भी नहीं उठा रहा होता है जिससे राखी देवी आवर भी बेचैन हो रही होती है

क्या अर्जुन अभी भी ज्योति के घर पर होगा .... या अपने दोस्त के पास होगा

अर्जुन मेरा फ़ोन क्यू नहीं उठा रहा है

कही अर्जुन ज्योति के साथ सेक्स .... नहीं नहीं मेरा अर्जुन इतनी जल्दी किसी से सेक्स नहीं कर सकता है .....


Hello अर्जुन कहा है ..... फ़ोन भी नहीं उठा रहा है ....... मैं फ़ोन कब से कर रही हुईं .......

फ़ोन उठने पर राखी देवी नाराजगी से बोलती है ...

माँ मैं बाइक चला रहा था .... गेट खोलिये मैं बहार हुईं ..... अर्जुन बोलता है

राखी देवी जब सुनती है अर्जुन घर आ गया है तो राखी देवी झट से बीएड से उतर जाती है आवर राखी देवी सीधे भाग कर सीसे के सामने जाती है आवर अपनी साड़ी को ठीक करती हुई कुर्सी पर बैठ जाती है आवर अपनी चेहरे को देखने लगती है

राखी देवी अपनी खूबसूरत चेहरे को देख कर राखी देवी खुद hi मुस्कुरा पड़ती है आवर राखी देवी की चेहरे पर अचानक सरम भी आ जाती है जिससे राखी देवी की खूबसूरत चेहरा लाल पद जाती है


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राखी देवी इस वक़्त साड़ी मैं हद से जयादा खूबसूरत लग रही होती है ...... क्यू की राखी देवी इस वक़्त अपनी जिस्म की खूबसूरती को बढ़ने के लिए थोड़ी मेकअप भी की होती है ....... जैसे राखी देवी आज किसी को अपनी खूबसूरती सच मैं दिखना चाहती है

आवर राखी देवी की चेहरे पर इस वक़्त आई हुई लाली बता रही होती है राखी देवी जिसके लिए इतनी तैयार हुई है वह आ गया है जिससे राखी देवी की दिल की धड़कन भी धड़क रही होती है

राखी देवी थोड़ी सरमाती हुई खुद को शीशे मैं देखती hi जा रही होती है के राखी देवी की फ़ोन फिर से बजने लगती है

हे भगवन अर्जुन तो गेट पर है .... राखी देवी फ़ोन बजते देख कर होश मैं आती है आवर भगति हुई जाकर गेट के पास कड़ी हो जाती है आवर अपनी बढ़ती हुई धड़कन को थोड़ी संत करने लगती है

माँ खोलिये भी .... अर्जुन अपनी माँ की पायल की आवाज़ सुन कर जान गया होता है उसकी माँ गेट पर आ गयी है तो बोलता है

राखी देवी गेट खोलती है आवर बिना पीछे देखे hi अपनी बालों मैं हाथ फेरती हुई आगे चलने लगती है

वही अर्जुन गेट खोलने पर अंदर आता है तभी उसकी नज़र जाती हुई अपनी माँ की गांड पर चली जाती है


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अपनी माँ की गांड देख कर तो अर्जुन की आँखों मैं एक चमक hi आ जाता है

अर्जुन चलते हुए अपनी माँ की फैली हुई बड़ी गांड को घूरता hi जा रहा होता है


अर्जुन अपनी माँ की फैली हुई बड़ी गांड को देखता हुआ अंदर जा रहा होता है आवर अर्जुन का हाथ खुद hi अपने लैंड पर चला जाता है जो अर्जुन Jen's के ऊपर से अपना लैंड पर हाथ फेरते हुए अपने खड़े हो चुके लैंड को दबाने लगता है तभी राखी देवी चलती हुई पलट जाती है

अपनी माँ की अचानक पलटने से अर्जुन हड़बड़ा जाता है आवर अपना हाथ झट से लैंड से हटा लेता है

वही राखी देवी जैसे hi पलट कर अर्जुन की तरफ देखती है राखी देवी की नज़र सीधे अर्जुन के लैंड के ऊपर चली जाती है जो अर्जुन के Jen's मैं लैंड के तने हुए होने से राखी देवी अर्जुन का लैंड टाइट है देख लेती है जिससे राखी देवी की आँखें बड़ी हो जाती है आवर राखी देवी सरमाती हुई जल्दी से घूम जाती है लेकिन राखी देवी की धड़कन ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगती है आवर राखी देवी अपनी हाथ से साड़ी को पकड़ कर सुखी हुई गले मैं थूक को घोट जाती है

वही अर्जुन जल्दी मैं रूम मैं चला जाता है

राखी देवी रूम मैं न जाकर किचेन मैं चली जाती है

अर्जुन का लैंड खड़ा हो गया था सायद उसको मेरी गांड देख कर

Ahhhhhhhhhhhhhh

मर्दों को गांड इतनी उत्शुक क्यू करती है ..... राखी देवी सोचती हुई एक बार फिर से शर्मा जाती है आवर मन hi मन मुस्कुरा देती है

अर्जुन रूम मैं आने के बाद बीएड पर बैठ जाता है आवर गेट की तरफ देखता है के माँ भी रूम मैं आ रही है क्या .... लेकिन राखी देवी तो किचेन मैं चली गयी होती है

माँ को रूम मैं न आते देख कर अर्जुन जाकर गेट बंद कर देता है आवर चलते हुए अलमारी के पास जाकर अलमारी को खोल देता है

अलमारी खुलते hi अलमारी मैं अपनी माँ की कपडे देख कर अर्जुन का दिल धक् धक् करने लगता है आवर अर्जुन कांपते हुए हाथ अलमारी मैं बढ़ने लगता है आवर अपनी माँ की साड़ी को उठा कर सूंघता है तभी अर्जुन की नज़र निचे राखी हुई ब्रा पेंटी पर चली जाती है

माँ की रेड ब्रा पेंटी देख कर अर्जुन का लैंड फैन उठा देता है आवर अर्जुन साड़ी को रख कर अपनी माँ की रेड पंतय को उठा लेता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन राखी देवी की पेंटी उठा कर अपने चेहरे पर दाल कर सूंघने लगता है आवर आँखें बंद करते हुए अपनी माँ की पेंटी का खुसबू लेने लगता है

अपनी माँ की पेंटी की खुसबू से अर्जुन को एक अलग hi अहसास होता है जो अर्जुन का लैंड अब Jen's मैं पूरी तरह तन जाता है अर्जुन आँखें बंद किये हुए hi अपना एक हाथ Jen's के अंदर दाल कर लैंड मसलने लगता है

Ahhhhhhhhhhhhh

माँ की पेंटी की खुसबू इतनी नशीली है तो माँ की जिस्म की खुसबू कितनी नशीली होगी

Ahhhhhhhhhhhhhhhh

माँ की गांड देख कर तो मन किया माँ को वही कुटिया बना कर माँ की फैली हुई गांड मैं अपना लैंड दाल दूँ

अर्जुन बीटा खाना लगा दिया है आ जाओ .... अर्जुन बीटा गेट क्यू बंद कर दिया है .... राखी देवी गेट के बहार से बोलती है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन बीटा गेट खोल क्या हुआ .........

वही अपनी माँ की आवाज़ सुन कर अर्जुन हड़बड़ा जाता है आवर अर्जुन खुद का hi लैंड ज़ोर से मसल देता है जो अर्जुन का दर्द मैं आह्हः निकल जाता है

अर्जुन हड़बड़ाहट मैं अपनी माँ की पेंटी को Jen's के अंदर लैंड मैं फसा कर सरत को ऊपर से निचे कर लेता है आवर जाकर गेट खोल देता है

क्या हुआ अर्जुन बीटा तू दर्द मैं सिसकियाँ क्यू लिया ....

बाइक से गिर गया था क्या

कही चोट तो नहीं लगी है न

दिखा मुझे कहा चोट लगी है

राखी देवी बोलती हुई अर्जुन के जिस्म पर हर तरफ हाथ फेरने लगती है

माँ मैं बाइक से नहीं गिरा .... वह मैं गेट खोले आ रहा था तो मेरा पेअर निचे लग गया .... अर्जुन पेअर की ऊँगली दिखते हुए बोलता है

वही राखी देवी अर्जुन के पेअर देखने के लिए बैठ जाती है आवर अर्जुन के ऊँगली को देखती है लेकिन ऊँगली मैं कुछ भी नहीं हुआ होता है लेकिन अर्जुन की ऊँगली मैं थोड़ी धूल ज़रूर लगी हुई होती है जो अर्जुन गेट खोलते हुए अपनी ऊँगली ज़मीन पर रगड़ दिया होता है

राखी देवी जब देखती है ऊँगली मैं कुछ नहीं हुआ है तो राखी देवी उठने लगती है तभी राखी देवी की नज़र अर्जुन के Jen's पर चली जाती है आवर राखी देवी अर्जुन के Jen's मैं खाद हुआ लैंड को देखती हुई कड़ी हो जाती है

वही अर्जुन भी देख लेता है उसकी माँ उसके खड़े हुए लैंड को देख चुकी है जो अर्जुन झट से रूम से निकल जाता है

अर्जुन का लैंड तो खड़ा है क्या अर्जुन का लैंड मेरी गांड देख कर खड़ा है ....

Ahhhhhhhhhhhh कैसे जायेगा मेरी छोटी सी गांड की बिल मैं अर्जुन का मोटा लैंड

छी छी मैं क्या सोच रही हुई ..... अर्जुन मेरी गांड क्यू मरेगा वह इतनी गन्दी जगह मैं क्यू अपना लैंड डालेगा ..... मुझे क्या क्या हो रहा है मैं कुछ भी सोचने लग जा रही हुईं .....

ये अलमारी कैसे खुली है .... लगता है मैंने ठीक से बंद नहीं किया है

राखी देवी मन मैं सोच hi रही होती है के राखी देवी की नज़र खुली हुई अलमारी पर चली जाती है

राखी देवी अलमारी बंद करते हुए रुक जाती है आवर साड़ी को उठा कर बीएड पर राकी ह कर ब्रा को उठ लेती है आवर फिर पेटीकोट आवर ब्लाउज को भी उठा लेती है आवर पेंटी को न देख कर राखी देवी फिर से साड़ी को उठा कर देखती है लेकिन पेंटी साड़ी मैं भी नहीं होती है

ये पेंटी तो इसी मैं मैंने राखी थी वह कहा चली गयी .....

राखी देवी थोड़ी परेशां होती हुई मन मैं सोचती है आवर फिर से अलमारी मैं देखने लगती है आवर एक एक कपडे हटा कर अलमारी देख लेती है लेकिन पेंटी नहीं मिलती है जो राखी देवी थोड़ी परेशां हो जाती है

क्यू के राखी देवी आज ज्योति आंटी की पार्टी मैं जाने के लिए कपडे निकल कर राखी हुई होती है सरे कपडे तो होती है लेकिन पेंटी नहीं होती है

अब राखी देवी को क्या पता उनकी पंतय इस उसके बेटे के लैंड पर तंगी हुई है ....

मुझे अच्छे से याद है मैंने पेंटी भी साथ मैं राखी हुई थी सरे कपडे तो है फिर मेरी पंतय कहा चली गयी .... कही अर्जुन ने मेरी पेंटी तो नहीं लिया है

नहीं नहीं अर्जुन मेरी पेंटी लेकर क्या करेगा ....... अर्जुन तेरी पंतय क्यू नहीं ले सकता है

राखी भूल गयी गयी तेरा भाई भी तो तेरी पंतय लेता था तूने तो कई बार देखा भी था

आवर राखी तुझे ये भी पता है लड़के पेंटी के साथ क्या करते है अर्जुन ने तेरी पेंटी लिया होगा तो वह तुझे कहा मिलेगी तुझे अच्छे से पता है .....

राखी मुझे पूरा यकीन है पेंटी अर्जुन का पास hi है ....... देखना कल तेरी पेंटी बाथरूम मैं मिलेगी वह भी तेरे बीटा के पानी के साथ

अर्जुन तेरी मतवाली गांड को देख कर पागल हो गया होगा ...... जो अलमारी खोल कर तेरी पेंटी निकल कर ले लिया है ...... राखी अलमारी भी तो खुली हुई थी

मुझे यकीन नहीं है मेरा ऐसा नहीं कर सकता है ......

राखी देवी बीएड पर बैठी हुई होती है आवर राखी देवी की मन मैं ये साडी बातें चल रही होती है लेकिन राखी देवी को यकीन नहीं हो रही होती है

राखी देवी कपडे अलमारी मैं रख कर बहार निकल जाती है आवर हॉल मैं जाती है तो देखती है अर्जुन बैठा हुआ खाना खा रहा है तो राखी देवी भी जाकर बैठ जाती है आवर खाना खाने लगती है

खाना कहते हुए राखी देवी बार बार अर्जुन को देख रही होती है लेकिन अर्जुन बस निचे देखते हुए खाना खा रहा होता है

अर्जुन बीटा ज्योति आंटी ने तुमेह बताया आज उसका बर्थडे है ..... राखी देवी पूछती है

जी माँ ज्योति आंटी ने मुझे बताया है हम 7 : पं को चलेंगे ज्योति आंटी के घर .... अर्जुन कहते हुए बोलता है लेकिन अपनी माँ की तरफ देखता नहीं है

क्या हुआ अर्जुन मेरी तरफ क्यू नहीं देख रहा है ..... अर्जुन को अपनी तरफ न देख कर राखी देवी को थोड़ी अजीब लगता है तो मन मैं सोचती है

माँ मैं सोने जा रहा हुईं आप मुझे शाम मैं उठा देना ..... अर्जुन उठाते हुए बोलता है जो राखी देवी ठीक है बोल देती है

अर्जुन रूम मैं आता है आवर Jen's मैं से पेंटी निकल कर अलमारी मैं रखने को होता है तो देखता है अलमारी बंद है तो अर्जुन अलमारी खोल कर साड़ी के अंदर रख देता है आवर फिर बीएड पर लेट जाता है

वही राखी देवी खाने के बाद पलेट किचेन मैं रखने चली जाती है आवर पलट धोने के बाद टाइम देखती है तो 4:पं होने वाला होता है तो राखी देवी अब नहाने को सोचती है

राखी देवी रूम मैं जाती है आवर अलमारी खोल कर कपडे लेती है आवर फिर सोते हुए अर्जुन को देखती है फिर दूसरी ब्रा पेंटी लेकर रूम से निकल जाती है आवर बाथरूम मैं चली जाती है

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अपडेट .......... 109

माँ मैं सोने जा रहा हुईं आप मुझे शाम मैं उठा देना ..... अर्जुन उठाते हुए बोलता है जो राखी देवी ठीक है बोल देती है

अर्जुन रूम मैं आता है आवर Jen's मैं से पेंटी निकल कर अलमारी मैं रखने को होता है तो देखता है अलमारी बंद है तो अर्जुन अलमारी खोल कर साड़ी के अंदर रख देता है आवर फिर बीएड पर लेट जाता है

वही राखी देवी खाने के बाद पलेट किचेन मैं रखने चली जाती है आवर पलट धोने के बाद टाइम देखती है तो 4:पं होने वाला होता है तो राखी देवी अब नहाने को सोचती है

राखी देवी रूम मैं जाती है आवर अलमारी खोल कर कपडे लेती है आवर फिर सोते हुए अर्जुन को देखती है फिर दूसरी ब्रा पेंटी लेकर रूम से निकल जाती है आवर बाथरूम मैं चली जाती है

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राखी देवी बाथरूम मैं आने के बाद अपनी साड़ी उतरने लगती है आवर राखी देवी जैसे hi साड़ी निकलती है राखी देवी की पहाड़ की जैसी उठी हुई चुकी बलाउज मैं उठी हुई दिखने है जिससे पता चल रहा होता है राखी देवी अपनी अनमोल चुकी को किस तरह अपनी ब्रा मैं क़ैद राखी हुई है ताकि उनकी अनमोल चुकी किसी को दिख न जाए

राखी देवी साड़ी निचे रखती हुई अपनी हाथ अपने पेट पर फेरती हुई ऊँगली को अपनी नेवल मैं दाल देती है जो राखी देवी को अपनी जिस्म मैं गुदगुदी सी महसूस होती है आवर राखी देवी थोड़ी मस्ती मैं कैंप भी जाती है

राखी देवी अपनी नेवल पर ऊँगली फेरती हुई अपनी पेटीकोट की नाडा भी खोल देती है जिससे राखी देवी की पेटीकोट निचे गिर जाती है आवर राखी देवी की मोलायम चिन्नी कमर चमकाने लगती है

राखी देवी अपनी कमर पर हाथ फेरती हुई खुद hi शर्मा रही होती है राखी देवी फिर प्लेंटी भी निकल देती है

Ahhhhhhhhhhhhhhh

पेंटी निकलते hi राखी देवी फूली हुई दूध की तरह उजली चिकनी छूट दिखने लगती है जो इस वक़्त राखी देवी की छूट पर एक भी बल नहीं होती है

राखी देवी अपनी ऊँगली छूट के ऊपर रखती हुई अपनी आँखें बंद कर लेती है जैसे राखी देवी अपनी छूट को छूती हुई खुद hi कैंप रही है

राखी देवी ब्रा भी निकल कर झरने के पास चली जाती है आवर झरने को ों कर के अपनी जिस्म पर पानी गिराने लगती है


राखी देवी झरने के निचे नहाते हुए अपनी चुकी को बड़े hi प्यार से छू रही होती है जैसे राखी देवी को दर्द महसूस न हो

फिर राखी देवी साबुन को अपनी हाथ मैं लेती है आवर अपनी टाइट चुकी पर मलने लगती है चुकी पे प्यार से मलने के बाद राखी देवी अपनी हाथ छूट के पास लेकर जाती है आवर साबुन लगते वक़्त अपनी छूट को देखने लगती है


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ज्योति आंटी के घर













Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

Maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa भगवन के लिए मुझे बचा लीजिये

Ahhhhhhhhhhhhhhhh

भगवन के लिए मेरी बेटी को छोड़ दो

एक हवेली के रूम मैं एक औरत बीएड पर नंगी लेती हुई होती है आवर उसके साथ एक आदमी भी लेता हुआ होता है आवर उस औरत की छूट को छत रहा होता है तभी एक लड़की चीखती हुई हुई उस रूम मैं आ जाती है आवर उस लड़की के पीछे hi एक लड़का भी आ जाता है आवर उस लड़की को अपनी बाँहों मैं भर लेता है जो लड़की अपनी माँ को पुकारने लगती है

वह औरत उठ जाती है आवर अपनी बेटी के करीब जाने को होती है के वह आदमी उस औरत को पकड़ लेता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh जानकी ये तेरी बेटी है क्या .... ये तो बहुत खूबसूरत है इसकी जवानी तो तेरे से भी जयादा रास से भरी हुई है

वह आदमी उस लड़की को देख कर बोलता है आवर उस औरत की पीठ को चुम लेता है

साहब जी भगवन के लिए मेरी बेटी को जाने दीजिये मैं आप के पेअर पड़ती हुईं ..... वह औरत रोटी हुई बोलती है

जाने दूंगा जानकी .... पहले एक बार तेरी बेटी का रास तो चख लेने दे .... वह आदमी बोलते हुए बीएड से उतर कर उस लड़की के पास जाने लगता है आवर लड़की को अपनी बाँहों मैं भर लेता है जो वह लड़की फिर से माँ माँ पुकारने लगती है

अपनी बेटी की चीख सुन कर भी वह औरत बीएड से उतर नहीं पति है आवर रोटी रहती है तभी वह आदमी उस लड़की को बीएड पर धमकका दे देता है जो वह लड़की अपनी माँ की बाँहों मैं चली जाती है

आज तो मेरी किस्मत चमक गयी है .... माँ के साथ बेटी भी छोड़ने आ गयी है

इसकी जवानी देख कर तो मेरा तब बदन मैं आग लग गयी है Ahhhhhhhhhhhh क्या गांड है तेरी बेटी की

Ahhhhhhhhhhh Maaaaaaaaaaaaaaa वह आदमी पीछे से आकर उस लड़की की गांड को मसलते हुए अपना लैंड कपडे के ऊपर से सत्ता देता है जिससे वह लड़की दर कर अपनी माँ को पकड़ लेती है

जोगेन्दर सिंह .........

वह आदमी उस लड़की की कमर को पकड़ कर अपना लैंड रगड़ hi रहा होता है तभी उस रूम मैं एक आवाज़ गूंज पड़ती है आवर उस आवाज़ को सुनते hi वह आदमी पीछे हैट जाता है

कुत्ते कमीने तूने hi मेरी माँ की ये हालत किया है मैं तुझे ज़िंदा नहीं छोडूंगी मैं तुझे जान से मार दूंगी .....

तूने हम्हारी हस्ता खेलता घर बर्बाद कर दिया है मैं तुझे जान से मार दूंगी ....

चांदनी चांदनी बेटी .... माँ मैं उसे जान से मार दूंगी .... माँ मैं उसे तड़पा तड़पा के जान से मार दूंगी ......

चांदनी सोती हुई hi नींद मैं अचानक चीखने चिल्लाने लगती है जो आदि की माँ चांदनी की आवाज़ सुन कर रूम मैं जाती है तो देखती है चांदनी नींद मैं hi हाथ पेअर चलती हुई बोल रही होती है जो आदि की माँ चांदनी को हिलती हुई ज़ोर से पुकारती है

आदि की माँ की आवाज़ सुन कर चांदनी उठ तो जाती है लेकिन फिर भी ये बात बोलती hi रहती है के वह तड़पा तड़पा कर जान से मार देगी .....

आदि की माँ चांदनी को कुछ देर तक अपनी बाँहों मैं भरी हुई होती है जो चांदनी कुछ देर के बाद संत हो जाती है .......

बेटी मैं समझ सकती हुईं तेरे दिल पर क्या बिट रही है ....... मैं भले तेरी माँ नहीं हुईं ... लेकिन तू खुद को कभी अकेली नहीं समझना तू जैसा चाहेगी वैसा hi होगा ...... आदि की माँ चांदनी को बाँहों मैं भरी हुई hi बोलती है लेकिन आदि की माँ की आँखों मैं आंसू भी आ गयी होती है

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अर्जुन आवर राखी देवी बीएड पर अभी भी वैसे hi लेते हुआ होते है आवर दोनों माँ बेटे अपनी अपनी सांसों पर काबू पा चुके होते है

राखी देवी सरमाती हुई दूसरी तरफ पलट गयी होती है

अर्जुन जब अपनी संशों पर काबू कर लेता है तो वह पलट कर अपनी माँ की तरफ देखता है जो उसकी माँ दूसरी तरफ घूम गयी होती है तभी अर्जुन की नज़र निघ्त्य मैं पीछे की तरफ निकली हुई अपनी माँ की गांड पर नज़र चली जाती है आवर अर्जुन का लैंड फिर से खड़ा हो जाता है जो कुछ देर पहले माँ की छूट मैं टाच होने के बाद संत हो चूका था

अर्जुन को अपनी माँ की गांड निघ्त्य मैं कुछ जयादा hi बड़ी आवर चिकनी लगती है जो अर्जुन घूम कर अपनी माँ के पीछे आ जाता है आवर धीरे से Jen's का चैन खोल कर लैंड को बहार निकल लेता है आवर अपनी माँ की झट से निघ्त्य को ऊपर कर के अपना लैंड गांड मैं सत्ता देता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन का लैंड अपनी गांड पर महसूस करते hi राखी देवी मचलती हुई तड़प उठती है आवर घूम जाती है जो अर्जुन का लैंड राखी देवी की गांड से निकल जाता है लेकिन राखी देवी की नज़र अर्जुन के लैंड पर चली जाती है आवर राखी देवी अर्जुन का लैंड देखने लगती है ........

जब जब देखती हुईं अर्जुन का लैंड मुझे बड़ा hi लगता है ...... अर्जुन का इतना बड़ा लैंड मेरी छोटी सी छूट मैं कैसे जायेगा .....

Ahhhhhhhhhhhhhhhhh

मैं तो मर hi जाउंगी .........

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

राखी देवी अभी अर्जुन का लैंड देख कर मन मैं सोच hi रही होती है के अर्जुन उठ कर बैठ जाता है आवर अपना लैंड राखी देवी की मुंह के पास कर देता है जिससे अर्जुन का लैंड राखी देवी की मुंह मैं टाच हो जाती है जो राखी देवी सिसकियाँ लेती हुई अपनी आँखें बंद कर लेती है

वही अर्जुन अपना हाथ राखी देवी की चुकी पर रख देता है जो राखी देवी की पूरी जिस्म मैं झनझनाहट सी उठ जाती है है

राखी देवी झट से आँखें खोल कर अर्जुन को देखने लगती है

अर्जुन भी माँ की चुकी को सहलाते हुए देख रहा होता है आवर फिर अपनी माँ को देखता हुआ झुक जाता है आवर माँ की चुकी को पकड़ कर निप्पल को ऊपर कर देता है

अर्जुन की हरकत से राखी देवी सिहर सी जाती है लेकिन अर्जुन की नज़र से नज़र नहीं हटती है

वही अर्जुन अपनी माँ को देखता है आवर फिर अपनी माँ की जिस्म पर लेट जाता है आवर माँ को देखता हुआ राखी देवी की निप्पल को मुंह मैं भर लेता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन के मुंह मैं निप्पल जाते hi राखी देवी बीएड पर मचल जाती है आवर अपनी हाथ अर्जुन के ऊपर रख देती है

राखी देवी की जिस्म रह रह कर कैंप रही होती है वही अर्जुन का लैंड भी राखी देवी की छूट मैं टाच हो चूका होता है जो

अर्जुन बार बार दबाओ बना रहा होता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन betaaaaaaaaaaaa नाहीई Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

Maaaaaaaaaaaaaaaaaaa

दोनों माँ बेटे का चीख उस रूम मैं गूंज पड़ता है

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Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन के मुंह मैं निप्पल जाते hi राखी देवी बीएड पर मचल जाती है आवर अपनी हाथ अर्जुन के ऊपर रख देती है

राखी देवी की जिस्म रह रह कर कैंप रही होती है वही अर्जुन का लैंड भी राखी देवी की छूट मैं टाच हो चूका होता है जो

अर्जुन बार बार दबाओ बना रहा होता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन betaaaaaaaaaaaa नाहीई Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

Maaaaaaaaaaaaaaaaaaa

दोनों माँ बेटे का चीख उस रूम मैं गूंज पड़ता है

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आंटी वह ज्योति आंटी का गिफ्ट है पहले उनेह देखने दीजिये न ...... अर्जुन थैले को पकड़ कर बोलता है

अर्जुन पहले मैं देखूंगी फिर वह देखेगी ....

आंटी प्लीज दे दीजिये ....वर्ण मैं अर्जुन रेनू की साड़ी का पल्लू पकड़ कर बोल पड़ता है .

Ahhhhhhhhhhhhhhh रुक जा अर्जुन बीटा

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

Raakheeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee

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अर्जुन रेनू आंटी की साड़ी को पकड़ कर अपनी तरफ खिंच लेता है जिससे रेनू आंटी चीखती हुई एक बार घूम जाती है जिससे रेनू आंटी की आधी साड़ी अर्जुन के हाथ मैं आ जाती आवर रेनू आंटी की गहरी चिकनी नेवल अर्जुन के आँखों के सामने आ जाती है लेकिन अर्जुन की नज़र तो रेनू आंटी की गहरी नेवल को देखने के बजाये अर्जुन की नज़र रेनू आंटी की बड़े बड़े टाइट बलाउज मैं क़ैद रेनू आंटी की चुकी पर टिक गयी होती है आवर अर्जुन बड़े hi hi ध्यान से रेनू आंटी की चुकी को देखने लगता है

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वही रेनू आंटी के हाथ से थैला निचे गिर जाती है आवर रेनू आंटी की चेहरे पर एक सरम सी आ जाती है आवर रेनू आंटी एक तक अर्जुन की आँखों मैं देखने लगती है

अर्जुन भी कभी रेनू आंटी के चेहरे को देख रहा होता है तो कभी रेनू आंटी की भरी हुई जवानी को जो इस उम्र मैं भी रास से भरी हुई होती है

अर्जुन ननननननननन


ओह सॉरी आंटी

अपनी माँ की आवाज़ सुन कर अर्जुन झट से रेनू आंटी की साड़ी को छोड़ देता है जो राखी देवी जल्दी से रेनू आंटी की साड़ी को रेनू आंटी की जिस्म पर रख देती है

वही ज्योति आंटी झट से थैला लेकर रूम मैं भाग जाती है

रेनू सॉरी यार अर्जुन से गलती से हो गया होगा ..... राखी देवी रेनू आंटी से बोलती है

कोई बात नहीं राखी मुझे बुरा नहीं लगा बस थोड़ी सरम सी लगी मुझे ..... आखिर अर्जुन मेरे बाटे जैसा जो है .... रेनू आंटी अर्जुन को देखती हुई बोलती है

वही अर्जुन भी रेनू आंटी को देख कर थोड़ा मुस्कुराते हुए अपने हाथों से कुछ इशारा देता है जो राखी देवी नहीं देखती है लेकिन रेनू आंटी देख कर फिर से शर्मा जाती है

राखी देवी रेनू आंटी को लेकर फिर से हॉल मैं चली जाती है वही अर्जुन रूम मैं बैठ कर फ़ोन चलने लगता है

अर्जुन ..............


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ओह क्या मॉल लग रही हो ज्योति आंटी 😯😯😯

अर्जुन फ़ोन चला रहा होता है तभी ज्योति आंटी रूम से निकलती हुई अर्जुन को पुकारती है आवर रूम के बहार आकर सरमाती हुई कड़ी हो जाती है

वही ज्योति आंटी की आवाज़ सुन कर अर्जुन अपनी नज़र उठा कर ज्योति आंटी को जैसे hi देखता है अर्जुन का मुंह खोल के खुला रह जाता है आवर अर्जुन मन मैं बोल पड़ता है

ज्योति आंटी इस वक़्त अर्जुन के दिए हुए साड़ी पहनी हुई होती है जिस्म ज्योति आंटी बहुत खूबसूरत लग रही होती है लेकिन अर्जुन की नज़र तो इस वक़्त ज्योति आंटी की खूबसूरत फैली हुई जिस्म पर होती है

वाओ ब्यूटीफुल आंटी

आंटी आप बहुत खूबसूरत लग रही है आप मुझसे पहले क्यू दुनिया मैं आ गयी मेरे साथ जनम लेती तो मैं आप के साथ hi शादी कर लेता ...... अर्जुन ज्योति आंटी के करीब जाकर बोलता है

वही अर्जुन की बात सुन कर ज्योति आंटी सरमाती हुई अपनी पल्लू को पकड़ कर मसल देती है

वाओ ज्योति खूबसूरत के साथ बहुत हॉट भी लग रही है .... अर्जुन ने तुझे बर्थडे गिफ्ट एहि साड़ी दिया है न

राखी देवी वह आती हुई बोलती है

वही माँ की आवाज़ सुनते hi अर्जुन ज्योति आंटी से दूर हैट जाता है ....

थैंक्स राखी .....

अर्जुन ने बहुत अच्छा बर्थडे गिफ्ट दिया है मुझे .....थैंक्स अर्जुन बीटा

ज्योति आंटी थोड़ी सरमाती हुई अर्जुन को देखती हुई मुस्कुरा कर बोलती है जो अर्जुन भी मुस्कुरा देता है

चल अब केक भी काट मुझे घर भी जाना है ..... राखी देवी बोलती है तो ज्योति आंटी अर्जुन को देख कर राखी देवी के साथ चलने लगती है

ज्योति आंटी हॉल मैं जाकर देखती है तो उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है क्यू की राखी देवी आवर रेनू आंटी मिल कर वह थोड़ी बहुत सजा दी होती है आवर टेबल पर केक को रख कर चरों तरफ से मोमबत्ती जला दी होती है

ज्योति आंटी जाकर केक काट देती है केक काटते hi राखी देवी रेनू आवर अर्जुन हैप्पी बर्थडे बोलने लगते है


ज्योति आंटी पहले केक राखी देवी को खिलाती है आवर फिर रेनू आंटी को खिला देती है जो साथ मैं राखी देवी आवर रेनू आंटी भी ज्योति आंटी को केक खिला देती है लेकिन अर्जुन को कोई भी केक नहीं खिलता है जो अर्जुन थोड़ा गुस्सा होकर तीनो औरतों को देखता रहता है

वही तीनो सहेली एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रही होती है आवर तभी तीनो एक साथ अपनी हाथ मैं केक उठती है आवर अर्जुन के मुंह मैं डालने लगती है जो अर्जुन के पूरा चेहरा केक मैं रंग जाता है

अचानक केक डालने से अर्जुन समझ नहीं पता है जो अर्जुन का पूरा चेहरा केक से भर गए होता है आवर अर्जुन इधर उधर भागने लगता है वही तीनों औरत भी अर्जुन के पीछे भगति है अर्जुन को दिखाई नहीं देता है जो अर्जुन सोफे पर गिर जाता है तभी सबसे आगे ज्योति आंटी अर्जुन के पास चली आती है आवर अर्जुन के मुंह पर केक लगाने वाली होती है के अर्जुन ज्योति आंटी के चुकी के ऊपर ब्लाउज़ को पकड़ लेता है

अर्जुन का हाथ अपने चुकी पे पड़ते hi ज्योति आंटी की जिस्म सिहर उठती है जिससे ज्योति आंटी एक वक़्त के लिए वही पर रुक जाती है

ज्योति आंटी का हाथ अर्जुन के गल्ल पर तो होती है लेकिन ज्योति आंटी अर्जुन के गल्ल पर केक को लगा नहीं रही होती है

वही चेहरे पर केक लगने से अर्जुन को दिखाई तो नहीं देता है उसका हाथ इस वक़्त कहा है लेकिन जैसे hi अर्जुन को ज्योति आंटी की चुकी पर हाथ टाच होती है अर्जुन को अपने हाथ मैं गर्म सी महसूस होती है आवर अर्जुन का जिस्म मैं खून तेज़ी से दौड़ने लगते है आवर अर्जुन का छोटा महाराज भी अपने सर उठाने से पीछे नहीं हट्टे है

अर्जुन अपना हाथ आवर भी आगे करते हुए हाथ को ज्योति आंटी की चुकी पर रखते हुए ज्योति आंटी की निपल को मसल देता है

Ahhhhhhhhhhhhhh

अपनी निप्पल की मीठा दर्द को महसूस करती हुई ज्योति आंटी अपनी आँखें बंद करती हुई तड़प उठती है

वही अर्जुन को जैसे hi ज्योति आंटी की मदहोशी भरी सिसकियाँ कानो मैं पड़ती है अर्जुन आगे बढ़ते हुए ज्योति आंटी को पकड़ लेता है आवर ज्योति आंटी को पकड़ते hi घूम जाता है जिससे ज्योति आंटी सोफे पे गिर पड़ती है आवर अर्जुन भी ज्योति आंटी के ऊपर गिर जाता है

Huinnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnn

अर्जुन जैसे hi ज्योति आंटी के ऊपर गिरता है ज्योति आंटी की अह्ह्ह्ह एक बार फिर से निकल पड़ती है

वही अर्जुन ज्योति आंटी के ऊपर गिरता है तो अर्जुन को ज्योति आंटी की चुकी पर सीना टाच होते hi अर्जुन को एक अलग hi मज़ा आता है अर्जुन ज्योति आंटी के ऊपर गिरते hi ज्योति आंटी की कमर को पकड़ लेता है

अर्जुन आवर ज्योति आंटी सोफे पर एक दूसरे के ऊपर निचे होते है अर्जुन को अपने जिस्म पर गिरते hi ज्योति आंटी की जिस्म मैं एक लहार सी दौड़ गयी होती है जो ज्योति आंटी भी अर्जुन को अपनी बाँहों मैं भर ली होती है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अर्जुन का होंठ अपनी गले मैं टाच होते hi ज्योति आंटी मचल उठती है जिससे ज्योति आंटी की सिसकियाँ फिर से निकल पड़ती है

वही पीछे कड़ी राखी देवी आवर रेनू आंटी कभी अर्जुन आवर ज्योति आंटी को देख रही होती है तो कभी एक दूसरे को

अर्जुन आवर ज्योति आंटी की हरकत को देख कर जहा रेनू आंटी मन hi मन खुश हो रही होती है वही राखी देवी बस एक तक दोनों को देख रही होती है आवर राखी देवी की चेहरे की रंग बार बार बदल रही होती है


जैसे राखी देवी को इस वक़्त अर्जुन को ज्योति आंटी की इ साथ देख कर बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा हो

अर्जुन क्या कर रहा है उसके ऊपर से हैट जा देख आंटी को दर्द हो रही है ......

राखी देवी अर्जुन को पकड़ती हुई बोलती है आवर अर्जुन को ज्योति आंटी के ऊपर से उठा देती है जो अर्जुन भी उठ कर बगल मैं खड़ा हो जाता है आवर अपने चेहरे पे लगी केक को पोछने लगता है

वही ज्योति आंटी उठ कर अपनी अपनी साड़ी को ठीक करने लगती है आवर तभी ज्योति आंटी की नज़र रेनू आंटी पे पड़ती है जो ज्योति आंटी को देख कर मुस्कुरा रही होती है जो ज्योति आंटी देख कर थोड़ी शर्मा भी जाती है लेकिन ज्योति आंटी की नज़र जैसे hi राखी देवी पे पड़ती है ज्योति आंटी अपनी सर निचे कर लेती है

आंटी बाथरूम किस तरफ है मुझे दिखाई नहीं दे रहा है प्लीज बाथरूम की तरफ लेकर चलिए न ......

अर्जुन अपने चेहरे से केक पोछ कर जैसे hi अपनी माँ को ज्योति आंटी को घूरते हुए देखता है आवर ज्योति आंटी के सर निचे करते देख कर बोल पड़ता है

अर्जुन बीटा चालों मैं लेकर चलती हुईं ....... रेनू आंटी बोल पड़ती है आवर अर्जुन का हाथ पकड़ कर बाथरूम की तरफ लेकर जाने लगती है

वही ज्योति आंटी वह से अपने रूम की तरफ चली जाती है

वही ज्योति आंटी के पीछे hi राखी देवी भी ज्योति आंटी के रूम मैं चली जाती है

अर्जुन बीटा कैसा लगा गद्दे पर गिर कर ......


जी क्या आंटी ...... रेनू आंटी की बात सुन कर अर्जुन चौंकते हुए बोलता है जैसे रेनू आंटी की बात अर्जुन को समझ नहीं आई है

या कह सकते है अर्जुन समझ कर भी न समझने का नाटक करते हुए चयनकता है

क्यू की रेनू आंटी के मुस्कुराते हुए बोलने से अर्जुन समझ गया होता है के रेनू आंटी की गद्दे की बात कर रही है

वह अर्जुन बीटा मैं बोल रही थी गद्दे पर गुर कर मज़ा तो बहुत आया होगा तुमेह ज्योति के सोफे भी तो मखमली गद्दे का है ........ रेनू आंटी फिर से मुस्कुराती हुई बोलती है

सही कहा आंटी ज्योति आंटी का सोफे तो बहुत कीमती है ...... आंटी आप की सोफे भी तो वैसा hi है न ..... मखमली गद्दे जैसा .....


अर्जुन भी बोलते हुए रेनू आंटी को देखता है आवर मुस्कुरा कर अपने चेहरे को टावल से पोछने लगता है

हां मेरा भी ज्योति के सोफे जैसा तो है लेकिन ...... रेनू आंटी इतना hi बोल कर चुप हो जाती है

लेकिन क्या आंटी ......

रेनू आंटी को चुप देख कर अर्जुन पूछता है

कुछ नहीं ...... रेनू आंटी बोलती हुई बाथरूम से चली जाती है

रेनू आंटी को जाते हुए देख कर अर्जुन मुस्कुरा पड़ता है


आंटी आप की ज्योति आंटी से काम नहीं हो आप तीनो बेस्टफ्रेंड बानी थी तो क्या एक दूसरे की खूबसूरती को देख कर बानी थी जो आप तीनो सहेलिया अपने आप मैं लाजवाब हो ......

रेनू आंटी को जाते हुए देख कर अर्जुन मन मैं बोलता है आवर बाथरूम का गेट बंद करते है आवर अपना लैंड निकल कर मूतने लगता है

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhh

ज्योति आंटी की जिस्म इतनी गर्म है तो उनकी छूट मैं कितनी गर्मी होगी

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhh


अर्जुन मुत्ते हुए मन मैं सोचता है

अर्जुन मूतने के बाद हॉल मैं आता है तो देखता है हॉल मैं कोई नहीं है तो अर्जुन माँ को पुकारते ज्योति आंटी के रूम के पास चला जाता है तो देखता है ज्योति आंटी का रूम अंदर से बंद है

अर्जुन माँ को पुकार कर वही खड़ा रहता है जो कुछ देर के बाद ज्योति आंटी गेट खोलती है जो अकेली होती है

आंटी माँ कहा है ...... अर्जुन रूम मैं माँ को न देख कर पूछता है

अर्जुन बीटा अंजू का फ़ोन आया अभी तो वह चली गयी


मैंने उसे रोकने की कोशिश की मगर वह नहीं रुकी फिर मैंने उसे कहा के अर्जुन को आज मेरे साथ तो रहने दे कितने सल्ल के बाद तो मैं अपनी बर्थडे मन रही हुईं तेरे साथ जो तू जा रही है

लेकिन आंटी माँ अकेली कैसे जाएगी वह भी इतनी रात को .....

मैं देखता है वह अभी बहत hi होंगी

अर्जुन बीटा रेनू भी साथ गयी है न वह अपनी गाड़ी से घर तक छोड़ कर आ जाएगी ......


अर्जुन बोलते हुए जाने लगता है तभी ज्योति आंटी बोल पड़ती है

लेकिन आंटी रेनू आंटी तो अभी मेरे साथ बाथरूम मैं थी वह कुछ मिनट पहले hi तो आई है इतनी जल्दी निकल कैसे गयी ....... आवर माँ मुझसे बोली क्यू नहीं

अर्जुन को थोड़ी हैरानी भी होती है ये सोच कर के जाने से पहले माँ ने मुझसे कुछ कहा क्यू नहीं .......


अर्जुन बीटा मैंने hi बोलै के तू जा मैं अर्जुन से बोल दूंगी इस लिए वह चली गयी तुम छहों तो माँ बात कर लो मैं अभी आई ......

ज्योति आंटी इतना बोल कर किचेन की तरफ चली जाती है

वही अर्जुन मास को फ़ोन करने लगता है लेकिन रिंग होने के बाद भी राखी देवी अर्जुन का फ़ोन नहीं उठती है जो अर्जुन को आवर भी हैरानी होने लगती है

अर्जुन फ़ोन पर फ़ोन करने लगता है लेकिन राखी देवी फ़ोन उठती hi नहीं

Maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

अचानक अर्जुन चीखते हुए फ़ोन को फेक देता है

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