RAJ -The mystery man (thriller & Magic) - Page 4 - SexBaba
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RAJ -The mystery man (thriller & Magic)

सॉरी फॉर लेट अपडेट............

सच बताऊँ तो मुझे उम्मीद नहीं थी की अपडेट देने के बाद इतनी जल्दी रिस्पांस मिलने लग जायेगा...

क्योंकि ये अपडेट कुछ ज्यादा hi डिले हो गया tha...khair आप सभी को स्टोरी के साथ बने हुए देखकर बोहोत खुसी हुई...

कोशिश करूँगा की अगला अपडेट जल्द से जल्द आप लोगों तक पहुचाऊं...

''हौशले बाद जातें हैं पास्ट सेनाओं के,

जब सहारा मिल जाता है उन्हें अपने चाहने वालों का''

कीप रीडिंग

और एक गुजारिश मुझे कीमती रे देते रहिये ताकि स्टोरी को बढ़िया बनाया जा सके...
 
बोहोत बोहोत सुक्रिया आप का भाई रिव्यु के लिए ...

एक बात अब के रेविएवस मई कॉमन आ रही है वो है हीरो का मातुरे न होना और ये सही भी है...

इस बारे में मेरा इतना कहना है की यहाँ से राज जब अपने गाओं पहुंचेगा तो बिलकुल बदल चूका होगा ...

थैंक्स फॉर कमेंटिंग

कीप रीडिंग

कीप सपोर्टिंग...
 
अपडेट-20

Priya...isme से एक रास्ता तो सहर की तरफ जाता है इसलिए वो वहां तो जाएंगे nhi...ab इन तीन मई से दो जंगल की तरफ जाते हैं...

mai...gaye तो वो जंगल में hi होंगे लेकिन कोण से बाले में...

प्रिय कुछ सोचने लगती है की फिर से उसका फ़ोन बजता है...


अब्ब आगे.......................

आज की कहानी प्रिय की जुबानी

. {NOTE-aaj प्रिय की जगह मई लिखा जायेगा राज को राज और आशा चची को भुआ इसलिए कोई कन्फूसिओं न हो तो hi बेहतर है}

अपडेट-20

आज के दिन जितनी भी बार ये फ़ोन बजा था कुछ न कुछ मुसीबत लेकर hi आया tha...pahle तो घर पर रूम में राज के साथ ,फिर खेत par,Phir bhua(chachi) के किडनेपिंग की खबर ...

आज के दिन जितनी भी बार ये फ़ोन बजा था कुछ न कुछ मुसीबत लेकर hi आया tha...pahle तो घर पर रूम में राज के साथ ,फिर खेत par,Phir bhua(chachi) के किडनेपिंग की खबर ...

अब देखना ये था की ये बाला कॉल मुसीबत को बढ़ाता है या काम करता है...

ये कॉल जूली का था.......

julie...mam! जो अपने no बताया था उसकी लोकेशन तो स्टेबल हो गयी है लेकिन...

mai...lekin क्या..

जूली- मैंने पहले उस no की लोकेशन के साथ बाले 4 और no. को ट्रेस कर लिया था जो की बिलकुल आपके बाले बताये गए no की शामे लोकेशन पर थे...

julie-aur उन लोगों की लोकेशन इस वक्त ****** जंगल की और जाते हुए बता रही है...

mai...ok टीम को कितनी देर में लगेगी वहां तक पहुँचाने में...

julie...team को कई 45 मं लग जाएंगी...

mai...ok मई वहां निकलती hun...team को जल्द से जल्द मेरे से कनेक्ट करो और उनलोगों की लोकेशन को भी मेरे फ़ोन से कनेक्ट करो...

उसका कॉल कट होने के बाद मैंने अपनी गाड़ी को उस जंगल की और दौड़ा दिया...

अब अँधेरा पूरा अँधेरा छ गया था और हम तेज़ी थार में से जंगल की बाद रहे थे...

राज भी मुझ से कई सवाल पूछ रहा था जैसे की.....

1... तुम ये सब कैसे कर रही हो?

2... और ये टीम का क्या मटर है?

3. कहीं तुम कोई सीक्रेट एजेंट तो नहीं?

4. ..वो लोग तुमसे क्या पाना चाहते हैं?

5. ..और उन्होंने चची को hi क्यों किडनैप किया?

6. . ये तलवारें ये गन्स आखिर कर तुम हो क्या?

अभी मेरे पास इतना वक्त नहीं था की इन सब सबलों का जवाब दे सकूँ...

मैंने बस इतना कह दिया की अभी तुम्हारे सवालों की लिस्ट और बढ़ने वाली है ...और मई तुम्हे सब कुछ बता दूंगी पर पहले भुआ को बचाना है...

कोई 10 मं बाद हम तेज़ी से जाते हुए जंगल में पहुँच गए थे लेकिन अब तक उनलोगों की लोकेशन आना बंद हो गया था ...

मैंने जूली को कांटेक्ट किया तो पता चल की शायद वहां कोई एक्सपर्ट है जिसने सिग्नल को हाच कर लिया है और मई उनको इस लोकेशन से आगे यहाँ से ट्रेस नहीं कर सकती हूँ...

julie...ab तो आपको खुद hi पता लगाना होगा की वो लोग कहाँ गए हैं ...

mai...hmm बे इन कांटेक्ट एंड तरय तो रीच हेरे अस अर्ली अस पॉसिबल!

mai...mujhe ऐसा लग रहा है को यहाँ बोहोत प्लानिंग कर के हमें लाया गया है....

फिर मैंने गाड़ी मई से एक बैग निकला जिस मई नाईट विज़न गूगल्स थे जो की एक मैंने पहन लिया और एक राज को दिया ...

उस बैग मई और कई चीज़ें थे जैसे की नाईट विज़न binoculars(durbeen),

चाकू , gun.etc...

राज के लिए तो सब कुछ नया था वो तो आज बिलकुल शॉक मई था की हो क्या रहा है उसके साथ ...

जब उसने नाईट विज़न गॉगल्स लगाए तो बिलकुल चकित रह गया क्योंकि उस की बजह से वो रात में भी देख सकता है कहाँ पहले बिना गाड़ी के लाइट के कुछ नहीं दिख रहा था...

और अब सब कुछ की तभी उसने बैग मई गन और चाकू भी dekhe...to मुझसे पूछ ''आखिर तुम हो क्या''

मैंने कहा - ''दुश्मनो के लिए यौम और तुम्हारे लिए बस एक माँ से काम''

तो मैनरमे गाड़ी अगर बड़ा दी थोड़ी दूर जाने पर एक कच्चा रास्ता दिखा अब फिर परेशानी आ गयी आगे गए होने या कच्चे रस्ते पर...

मैंने उतर कर देखा तो उस रस्ते पर टायर्स के निशान थे जो की इस बात का साबुत था की वि लोग वहीँ से गए थे ....

तो मैंने हम उनके chakrachinhon(tyre प्रिंट्स ) पर चल पड़े और कोई 10 -15 मं हो गए थे और मई टीम से कांटेक्ट मई थी तो पता चला की वो भी यहाँ के लिए निकल चुके हैं...

पर अभी भी उन्हें करीब 30 से 40 से मं लग जाएंगी यहाँ पहुँचाने में...

की तभी गाड़ी से कुछ टकराने की आवाज आती है...

बहार की और जब हमारा ध्यान गया तो पता चला की कई तरफ से लोग हमपर धुआंधार फायरिंग कर रहे हैं ,

mai....Raj अब तो तुम्हे पता चल गया होगा इस

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थार को लेन का रीज़न...

Raj...han ये तो बुलेट प्रूफ है ...

mai...aur भी बोहोत कुछ है...

मैंने भी अपनी गन लेकर उनमे से एक को टपका दिया tha...aur तेज़ी से आगे बढ़ते हुए जो सामने से फायर कर रहा था उसको टक्कर मरी और वो भी मर गया...

ये सब कुछ बस कुछ hi सेकण्ड्स मई हुआ था...

राण की तो जैसे ये सब देखकर आंखें hi बहार निकल aayi...Raj क्या कोई भी पहली बार इस तरह के मज़ार को देखेगा तो इसका भी हल राज की तरह hi होगा...

दो को तो मैंने मार दिया था लेकिन फायरिंग अब भी जारी थी और आगे जाने का रास्ता भी बंद था... और अब कोई दिख भी नहीं रहा था...

शायद फायरिंग पेड़ों से हो रही थी खैर मैंने गाड़ी रोकी और पीछे की तरफ हुई तो गाड़ी मई एक बैग रखा था जिसे मैंने खोला तो जो हर बार होता है वही हुई मतलब राज शॉकेड....

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क्योंकि वो बैग हथियारों से भरा था और उसमे तरह तरह की डेंजरस गन्स थी गोलियां थी एक दो तलवार भी थी...

मैंने उस मई से एक रिफल निकल और दूरबीन से पेड़ों पर देखा तो अभी दो आदमी हम पर फायरिंग कर रहे थे ...

तो मैंने उनमे से एक को जल्दी hi किसी टूटे आम की तरह नीचे गिरा दिया...

और दूसरे के पेअर और हाथों पर गोलिया चलाई तो वो भी नीचे आ गया...

वो बोहोत ऊंचाई से गिरा था इसलिए उसने छिलने के अलावा कोई हरकत नहीं की...

अब चारो तरफ देखने के बाद हम बिलकुल निश्चिंत हो गए थे की यहाँ कोई नहीं है...

मई गाड़ी से बहार उतर कर उस आदमी के पास गयी जिसको की पेड़ से जिन्दा नीचे गिराया गया था...

मई उसके पास पहुंची तो उसने खुद hi अपनी जान चाकू से ले ली...

अब रास्ता बंद था तो मैंने राज से से गाड़ी के पास रुकने को कहा और कहा की टीम के आने का इंतजार करें ...

लेकिन वो नहीं मन और उसने कहने लगा की मई तुम्हे अकेला नहीं जाने दूंगा मई भी तुम्हरे साथ चलूँगा

mai...samjha करो तुम मेरे लिए बोहोत इम्पोर्टेन्ट हो मई तुम्हारी जान को जोखिम मई नहीं दाल सकती...

Raj...meri जान तो तुम हो अब मई भी तुम्हारे बगैर नहीं रह सकता हूँ ...तुम्हे मेरी कसम जो तुम मुझे जाने से रोको...

mai..huh चलो फिर इसमें से तलवार ले लो अपने लिए जो चाहे वो गन ले लो...

उसने अपनी पसन् की तलवारें और गन्स ले ली और मैंने भी जरुरी सामना और गन्स ,मैगजीन्स ले ली...

और आगे चल पड़े कुछ hi दूर चलने के बाद हमें वहां एक खण्डार सा दिखा...

( हमें अँधेरे मई जैसा की पहले भी बताया है नाईट विज़न गॉगल्स की वजह से दिकब रहा है)

हम थोड़ा और उस बंगले के पास गए और एक झड़ी के पीछे छिपकर दूरबीन से वहां का जायजा लिया तो दो वहां गेट पर दो लोग गन्स के साथ पहरा दे रहे थे...

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तो मैंने अपने साथ लायी हुई गन्स मई से नाईट विज़न स्नाइपर

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निकली एक पालक झपकते hi दोनों की आत्मा को सरीर से मुक्ति दे दी...

वहां गोली की आवाज सुनकर छत पर भी कुछ हलचल हुई तो वहां देखा तो वहां भी यही हाल था....

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उनमे से जैसे hi एक को गोली मरी तो दूसरा कहीं छिपग्य और अँधा ढूंढ गोली चलने गया...

न उसका कोई निशाना था न कोई लखस्या बस वो तो हवा मई गोली चला रहा था...

तो मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं की क्योंकि मुझे पता था की जब इसकी गोलिया ख़तम हो जाएंगी तो ये कोई गोलीबारी न देख कर बहार जरूर निकलेगा...

और हुआ भी ऐसा hi कुछ देर बाद बो बहार निकला की पालक झपकते hi छत से नीचे ...

अब अंदर जाने का रास्ता बिलकुल साफ़ दिख रहा था क्योंकि आस पास कोई नहीं दिख रहा था ...

फिर भी खतरा न लेते हुए थर्मल बिनोकुलर से देखा तो कोई करीब अंदर 20 -25 आदमी नज़र आ रहे थे लेकिन न तो कोई छत पे था न कोई बहार..

लेकिन अब तक गोलियों की आवाज़ सुनकर अंदर जो आदमी थे वो चौकन्ना हो गए होने...

फिर कर क्या सकते हैं अंदर जाने के अलावा कोई चारा भी नज़र नहीं आ रहा था...

तो मैंने राज से कहा की तुम ऊपर छत पर जा कर वहां का जायज़ा लो और उनकी नज़रो मई आये बगैर चची को ढूंढने की कोशिश करना...

और अगर कोई भी सामने आये तो उसे मरने मई हिचकिचाना नहीं ये सभी कोण्टार्कट किलर्स लग रहे हैं इसलिए जो सामने आये उसे मार दो...

और फिर मई उसे इतना कहकर अंदर जाने लगी लेकिन मुझे उसकी बोहोत चिंता हो रही थी क्योंकि ये बोहोत खतरनाक लोग थे और वो गाओं का एक सीधा साधा इंसान ...

''भगवन की लेखनी को कोण मिटा सकता है'' यही सोचकर मई अंदर चली गयी...

वहां फ़िलहाल तो बिलकुल सन्नाटा था कुछ देर हवेली को खंगालने के बाद मुझे एक हॉल मई 5 आदमी दिखे जिनमे से एक उनका बॉस था...

मैंने कोई देर किये बगैर उनमे से एक को टपका दिया...

mai...akhir तुमने अपनी मौत को बुला hi लिया...

boss...haste हुए. अभी तेरे दूध के दांत टूटे नहीं तू मुझे मारेगी...

boss...khade खड़े मेरा मुंह क्या देख रहे हो इसे मौत के घाट उतर दो...

वो अपनी गन्स तन hi रहे थे की मैंने फुर्ती दिखते हुए 2 के हत्ब काट काट दिए...

और तीसरा गोली चलने hi बाला hi की मैंने पेअर मई लगे हुए एक चाकू को निकल कर उसके गले में मार दिया...

उसके हाट हे चाकू लगने के साथ फायर तो हो गया लेकिन चाकू लगने की बजह से उसकी गन गिर गयी और वो भी मर गया...

तो मैंने उस बॉस की तरफ गन करते हुए कहा की अब तुझे कोण बचाएगा...

की तभी फायर होता है और एक गोली आकर मेरे पीठ पर लगती है...

तो बे कॉन्टिनोएड. .....
 
अब ये तो नहीं पता की किसने किया किया है पर जो भी होगा आगे रोमांचक होगा मेरी तरफ से तोह

''दुश्मनो के लिए याम,

और तुम्हारे लिए बस माँ से काम''

मेरा तो यही मानना है की चाहे कोई भी लड़की सही या कोई और सही पर किसी को भी सबसे ज्यादा प्यार उसकी माँ करती है...

आपके रिप्लाई आपके कमेंट में में...

कमेंट करने के लिए बोहोत बोहोत सुक्रिया...

कीप रीडिंग

कीप कमेंटिंग...
 
इस अपडेट के बाद सबसे ज्यादा यही पॉइंट निकल कर आया है की हीरो बिलकुल कमज़ोर है...

और अभी तक ये सही भी है और मई पहले भी कह चूका हूँ जब हीरो यहाँ से गाओं जायेगा तो बिलकुल बदल चूका होगा और अगले अपडेट मई भी कुछ दम खुम दिखायेगा...

राज को पावर्स भी मिलेंगी लेकिन और स्टोरीज की तरह

NHI...SHAYAD कुछ अलग ...

मई एक 12तह का स्टूडेंट हूँ तो टीम काम मिल पता है इसलिए उपदटेस लेट आते हैं...

और मुझे किसी भी कमेंट का कोई बुरा नहीं लगा ..

कीप रीडिंग ...

कीप कमेंटिंग...
 
अपडेट-21


उसके हाट हे चाकू लगने के साथ फायर तो हो गया लेकिन चाकू लगने की बजह से उसकी गन गिर गयी और वो भी मर गया...

तो मैंने उस बॉस की तरफ गन करते हुए कहा की अब तुझे कोण बचाएगा...

की तभी फायर होता है और एक गोली आकर मेरे पीठ पर लगती है...

अब आगे

{सन-1}

आगे की कहानी राज की जुबानी...

प्रिय के अंदर जाते hi मई छत पर चढ़ने का रास्ता ढूंढने लगा ...

मैंने उस खण्डर के पीछे जाकर देखा तो वहां से वो इस तरह का था की छत पर जाया जैसे...

मई वहां से छत पर चढ़ने की कोशिश करने लगा पर गन्स और तलवारों के साथ चढ़ना थोड़ा मुश्किल था...

लेकिन फिर भी थोड़ी मसक्कत के बाद मई छत पर जाने मई सफल हुआ...

वो खण्डार 3 मंज़िल का था और टूटा फूटा होने की बजह से मई दूसरी मंज़िल पर पहुँच गया...

खण्डार थोड़ा बड़ा था मई एक एक कोने को चेक कर रहा था की इनलोगों ने कहीं चची को यहाँ तो नहीं छुपा रखा...

मई छानबीन कर रहा था और नीचे से लगातार फायरिंग की आवाज़ आ रही थी मुझे प्रिय की बोहोत फ़िक्र हो रही थी....

वैसे इतनी भी नहीं क्योंकि आज के दिन उसने इतना कुछ किया था जो की मरी सोच से भी परे था...

लेकिन ऐसा कोण होगा जो अपने प्यार की चिंता न करे चाहे प्रिय कोई भी सही पर इस वक्त अकेली थी और पता नहीं इस खण्डार मई कितने आदमी थे...

इस मंज़िल की छानबीन पूरी कर ली थी लेकिन मुझे कोई नहीं मिला था...

इसलिए मई अब 3श्री मंज़िल पर पहुंचा पर वहां भी कुछ नहीं मिला सिवाय मकड़ियों के जले और चमगादड़ों के... अब तक फायरिंग की आवाज़ें आना रुक चुकी थी...

मई धीरे धीरे नीचे बाद रहा था और मई बड़े hi अचम्भे मई था की जब हमने यहाँ थर्मल बिनोकुलर्स से देखा था तो काम से काम 20-25 आदमी होने का अनुमान था लेकिन यहाँ तो एक भी नहीं...

लेकिन शायद मई गलत था क्योंकि जैसे hi

मई वहां से उतर कर नीचे आने लगा मतलब 2श्री मंज़िल पर आया तो मुझे वहां एक आदमी एक आदमी दिखा जो की इस वक़्त उस जगह था जहाँ पर प्रिय ने एक को टपकाया था...

मेरे कदमो की आहात सुनकर उसने पीछे पलट कर देखा और कहा तू हमारे जीआरपी का तो है नहीं...

उस के पास इस वक़्त कोई हथियार नहीं था और था भी दुबला पतला सा hi...

तो उसके लड़ने का तो कोई सवाल hi नहीं था तो वो और लोगों को आवाज़ देना चाहता था की उससे पहले उसके पेट मई एक जोरदार लत पड़ी और वो नीचे गिर गया एक लात मैंने उसके हाथ मई मरी और...

मई उसके पास बैठ कर पूछने लगा की कोण हो तुम लोग और मेरी चची को क्यों किडनैप किया...

vo....ham तो पैसों पर काम करते हैं हमें कुछ नहीं पता...

तभी एक गोली चलने की आवाज़ आती है

जिससे की मेरा ध्यान भटक जाता है और वो खड़ा होकर भागने की कोशिश करता है पर मई उसे पकड़ लेता हूँ लेकिन पता नहीं कहाँ से उसने चाकू निकला और मेरे हाथ पर मारा और भागने लगा...

मैंने उसे गर्दन के पीछे से पकड़ रखा था और उसने मेरी कलाई के ऊपर चाकू मारा था...

चाकू छोटा था इसलिए ज्यादा तो नहीं लगी थी लेकिन फिर भी ठीक थक खून निकल रहा था ...

लेकिन अब की बार मेने पकड़ने के बजाय उसे शूट कर diya...aur नीचे जाने लगा मुझे पता नहीं क्यों प्रिय की बोहोत फ़िक्र हो रही थी....

{सन-1 एंड्स}

[••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••पहले तो थोड़ा इन लोगों के बारे में जान लेते हैं...

Dilawar...ek ऐसा इंसान जो की सभी अबैध धंधे करता है ...

dabria...contract किलर जिसकी एक पूरी गैंग है और ये लगभग सभी तरह की फाइटिंग टेक्निक्स जानती है•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••]

{सन-2...}

गोली लगने के बाद प्रिय मुंह के बल जमीं पर गिर पड़ी thi...aur वो कराह रही थी...

आगे की कहानी प्रिय की जुबानी...

मेरे गोली लगी तो थी पर बस छोटा सा घाव hi हुआ और गोली अंदर नहीं जा सकीय क्योंकि जो लाठर सूट मैंने पहना था बुलेट प्रूफ था...

जिसकी बजह से मुझे गोली न लग सकीय लेकिन में जमीं पर गिर पड़ी और दर्द से कराहने लगी ...

की तभज एक चिर परिचित आवाज़ मेरे कानो में आयी जिसे सुनकर मेरी आँखों मई खून उतर आया...

awaz...ye क्या करवा दिया दिलवर तुमने इसे नहीं मरना था?

Dilawar...to क्या करता मई हाँ ?

Dilawar...ek तो इसने वैसे hi नाक मई दम कर रखा hai...aur दूसरा आज इसने मेरे कितने आदमियों को मार दिया...?


तो बे कॉन्टिनोएड
 
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स्टोरी का पोस्टर होप ु आल विल लिखे आईटी...
 
अपडेट-22

जिसकी बजह से मुझे गोली न लग सकीय लेकिन में जमीं पर गिर पड़ी और दर्द से कराहने लगी ...

की तभज एक चिर परिचित आवाज़ मेरे कानो में आयी जिसे सुनकर मेरी आँखों मई खून उतर आया...

awaz...ye क्या करवा दिया दिलवर तुमने इसे नहीं मरना था?

Dilawar...to क्या करता मई हाँ ?

Dilawar...ek तो इसने वैसे hi नाक मई दम कर रखा hai...aur दूसरा आज इसने मेरे कितने आदमियों मारा है

अब आगे...

आवाज़ -जिसको मरना था उसका तुम्हे कोई अत पता नहीं इस बेचारी को मार दिया...

दिलावर - जितना नाज़ुक तुम इसे समाज रही हो ये उतनी नाज़ुक है nhi...kya नाम था लड़के का?

ये जो आवाज़ थी ये कोई और नहीं आशा भुआ थी...

bhua...Raj

दिलावर- लगता है ये या तो उसे अपने साथ नहीं लायी या फिर उसे कहीं बहार hi छोड़ कर आयी है...

asha...han ऐसा हो सकता hai...kisi को भेजो बहार देखने...

dilawar...ham...dabria जरा भेजो किसी को...

फिर डबरिआ मुंह से एक आवाज़ करती है की तभी 15 लोगों की उसकी टीम हाज़िर हो जाती है जिसमे 2 लड़के और 13 लड़किया थी...

dabria...jao कुछ लोग जाकर बहार देख कर आओ कोई है तो नहीं...

फिर उनमे से कोई 5-6 लोग चले जाते हैं जिनमे 2 लड़के थे ...

जब मुझे पता चला की ये पूरा प्लान राज को मरने के लिए था तो मेरा दिमाग सटक गया...

इस वक़्त आशा और दिलावर कुछ बातें कर रहे थे ...

Asha...dilawr कहीं ये मर तो नहीं गयी...

अभी दिलावर कुछ कहता उससे पहले hi मैंने उठते हुए कहा...

तुम्हारे बाजुओं में इतना दम नहीं,

मार दो हमें ये किसी बहम से काम नहीं,

वो दोनों मुझे खड़ा देख कर चौंक गए और साथ hi साथ डबरिआ और उसकी टीम भी...

मई... ''आज हमें उन्होंहे धोका दिया,

जिन्होंने कभी हमें गॉड मई लिया''

mai...akhir क्या बिगाड़ा है उसने तुम्हारा...

आशा ने कुछ नहीं कहा

mai...bolo क्या हुआ...

उसने तो कुछ नहीं कहा लेकिन दिलावर ने कहा जो भी हो लेकिन आज तो तुम नहीं बचोगी...

और उसने डबरिआ को कुछ इशारा किया...

मई भी अब रेडी हो गयी थी और मैंने अपनी एक तलवार निकल ली थी...

उसने अपनी एक फाइटर को लड़ने bheja...vo मुझे करते दिखने लगी... लेकिन मई अपनी जगह पर कड़ी रही...

और जैसे hi वो रुकी हुई मैंने उसके उसके घुटने मई सामने से लात मरी जिस से वो वहां से टूट गया और उसकी चीख निकल गयी...

mai...kya डबरिआ बच्चो को पाल रखा है कोई ढंग का सा फाइटर भेजो

फिर उनमे से एक कोई करीब 6 फ़ीट की एक नीग्रो फाइटर निकल कर आयी उसके हाथ मई तलवार भी बोहोत भरी थी...

उसने आते hi तलवार से मुझपर हमला कर दिया मैंने उसे तलवार से रोका लेकिन फिर भी उसकी तलवार मेरे बाजु को चीरते हुए गयी...

उसने तभी फुर्ती से दुशरा बार किया मैंने सँभालते हुए अपनी तलवार को आगे किया लेकिन एक तो वो बोहोत ताकतबर थी और दूसरा उसकी तलवार भी कुछ भरी थी...

जिसका नतीजा ये हुआ की मेरी तलवार टूट गयी और मई पीछे की तरफ गिर गयी...

और वो दोनों हाथ ऊपर कर के तलवार को मेरे मई मरने hi वाली थी की अचानक गिर जाती है...

हुए ये था की जहाँ हम लड़ रहे थे वो जगह सीढ़ियों के करीब थी और उसकी पीठ सीढ़ियों की तरफ थी जैसे hi उसने

मुझे मरने के लिए की तभी उसने उसके पीछे से उसके घुटने मई लात मरी जिसकी बजह से उसका बैलेंस बिगड़ गया और वो घुटन के बल ज़मीं पर गिर ठीक उसी वक़्त मई पीछे को पलट gyi...or कड़ी हो गयी

गिरने की बजह से उसकी तलवार ज़मीं मई गड गयी जिसका फायदा उठाते हुए मैंने उसके मुंह पर एक सुपर किक ज़द दी और वो चारो खाने चित हो गयी...

राज़ को देखकर दिलवर ने गुस्से मई कहा की खड़े खड़े क्या देख रहे हो मारो इन्हे ...

तभी सभी एक साथ अटैक कर देते हैं यहाँ अब लगभग 7-8 मेंबर थे 2 तो पास्ट पड़े थे और 5-6 मेंबर्स बहार गए थे...

उसके आर्डर को सुनते hi सभी एक साथ हमला कर देते हैं...

अब हम भी दो थे लेकिन मुझे राज की चिंता हो रही थी क्योंकि ये सभी त्रिनेड थे और राज ने शायद पहले hi कभी ऐसा किया हो...

लेकिन वो भी दिखने मई कोई काम नहीं था एक तो उसकी लम्बाई और बॉडी भी ठीक थक थी जिसकी बजह से वो किसी से भी काम नहीं था ....

अब तक वो लोग हम तक पहुँच चुके थे ...और हम दोनों एक दूसरे की पीठ से पीठ भिड़ाये खादर हुए थे और दोनों की hi तलवारें ऊपर थी कुछ इस तरह...

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उनलोगों के आते hi मैंने अपनी तलवार को घूमना स्टार्ट कर दिया जिसका कोई तोड़ नहीं जनता था उसके पास आते आते hi दो लोग नरक सिधार चुके थे...

उदाहर राज ने भी एक को मार दिया था...

अब केबल 5 लोग बचे थे जिनमे से एक डबरिआ थी...

की तन तक जो उनके जो लोग बहार गए थे वो भी आ गए...

और लड़ने लगे अब उनका पलड़ा थोड़ा भरी हो गया था ...और अभी तक मेरी टीम भी यहाँ नहीं पोहोंची थी...

लेकिन लड़ने के अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं था...

3 लड़किया एक साथ मुझसे लड़ रही थी और एक लड़का राज से जिसको की राज ने थोड़ी मसक्कत के बाद गिर दिया और उसके हाथ तोड़ दिए...

मैंने भी उन तीनो मई से एक को मार दिया था जिसकी बजह से डबरिआ को छोड़ कर सभी ने मुझपर अटैक कर दिया ...

जिसमे से की राज ने उस लड़के को खींच लिया लेकिन उसने राज के हाथ मई लात मार्के उसकी तलवार गिरा दी...

और अपनी तलवार से उसे मरने लगा लेकिन वो बचने लगा वो राज पर हावी बो रहा था इसलिए जो मुझसे लड़ रहे थे मैंने उन मई से तेज़ी से 2 की गर्दन काट दी और तलवार फेंक के मरी और जो राज़ से लड़ रहा था वो सीधे उसके पेट मई से पार गयी...

लेकिन मई अब निहत्थी थी और वो तीन हथियार के साथ लेकिन मैंने उछाल कर एक के मुंह पर अपना घुटना मारा वहां से भाग कर तेज़ी से अपनी गन ली और सभी को भून दिया जिसे देखर डबरिआ गुस्से से पागल हो गयी...

और उसने भी मुझपर गोलियां चला दी लेकिन मैंने एक दीवार की आउट ले ली...

की कहीं से राज ने डबरिआ के तरफ तलवार फेंक कर माज़ी जिस से उसको कोई खासी चोट तो नहीं आयी लेकिन उसके हाथ से बन्दूक गिर गयी...

जिसका फायदा उठतव हुए मई उसके पास पगुंछ gyi...aur अपनी तलवार उठा कर कहा

'' आओ डबरिआ आमने सामने का मुक़ाबला करते हैं''

जिस से उसके होठों पर एक कातिलाना मुश्कान आ gyi...aur उसने लड़ने के लिए तुरंत हामी भर दी...

और फिर शुरू हुआ तलवार बाज़ी का एक घमाशान संग्राम जिसको चलते चलते कोई 30 मं हो गए लेकिन कोई भी हार मन ने को तैयार नहीं था...

डबरिआ अब बुरी तहर से थक चुकी थी और बोहोत hi जल्दी अपने घुटने टेकने वाली थी...

की तभी दिलावर ने आवाज़ लगाई की इ लड़की अपने हथियार दाल दे वर्ण इसका गाला उदा दूंगा...

जिससे मि मेरा ध्यान भटक गया और डबरिआ ने मेरे पहले से कटे हुए हाथ मई फिर से तलवार से बार कर दिया...

दिलावर ने आशा के गले पर चाकू रख रखा था और मरने की धमकी के दे रहा था...

और वो चिल्ला रही थी की मुझे बचा लो...

मुझे लगा था की ये इनका फिर से कोई ड्रामा है...

इसलिए मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और डबरिआ से लड़ने lagi...lekin राज को क्या पता था उसके पीछे यहाँ क्या हुआ है...

वो उसे बचने चला तो दिलावर ने चुकु को गर्दन पर दवा diya...jiski बजह से गर्दन से खून बहाने लग gya...or राज जहाँ था वहीँ रुक गया...

अब तक डबरिआ को माइबे पूरा छका लिया था लेकिन और उसको बुरी तरह से घायल कर दिया उसकी तलवार को ज़मीं पर गिरा दिया था.. ...

लेकिन उसने बेईमानी करते हुए मेरी आँखों मई रेट dàal दिया और मेरी जांघ मई एक छोटा चाकू घुसा दिया...

जब ये मंज़र राज़ ने देखा तो उसकी आँखों मई खून उतर आया और उसने डबरिआ को शूट कर दिया...

लेकिन इसका फायदा दिलावर ने उठया और वो वहां से भाग nikla...aur उस आशा को वहीँ छोड़ गया ...

मुझे उस का चेहरा देखते hi बोहोत गुस्सा आ रहा था...

दिलावर का भागना हुआ और मेरी टीम की खण्डार मई एंट्री हुई...

( टीम का इंट्रो बाद मई दिया जायेगा)

मैंने उन्हें तुरंत hi दिलावर को पकने के लिए भेज दिया...

वो लोग गए लेकिन उन्हें दिलावर कहीं नहीं मिला तो मैंने उन्हें वहां की लाशों को ठिकाने लगाने के लिए कहा...

और जूली से कहा की तुम मुझे घर तक छोड़ आओ क्योंकि मेरी हाथों और पैरों मई चोट थी जिसकी बजह से गाड़ी चलने मई दिक्कलत होती और रात का समय वैसे hi था...

जब ये घाव टीम के डॉक्टर ने देखे तो उसने इन्हे साफ़ कर के ड्रेसिंग

कर दी...

Asha...mujhe माफ़ दो मुझसे बोहोत बड़ी गलती हो गयी...

और पता नहीं क्या क्या नहीं कहा लेकिन मैंने कुछ भी नहीं सुना...

और राज़ और जूली से गाड़ी मई चलने को कहा...

वो दोनों चल दिए मेरे पेअर मई लगी थी इसलिए राज मुझे सहारा दे रहा था...

तो बे कॉन्टिनोएड
 
थैंक्स फॉर कमेंटिंग भाई

सभु को एक्शन सीन्स पसंद आया ये जानकर बोहोत ख़ुशी हुई मुझे...

बाकि के पॉइंट्स कई बार रिपीट कर चूका हूँ...

हां स्टोरी मैजिक और पावर से रिलेटेड है और बोहोत HI जल्द स्टोरी मैजिक की तरफ बढ़ेगी..

कीप रीडिंग

कीप सपोर्टिंग
 
अपडेट-23

(मेरी स्टोरी का अब तक का सबसे बड़ा अपडेट)

Asha...mujhe माफ़ दो मुझसे बोहोत बड़ी गलती हो गयी...

और पता नहीं क्या क्या नहीं कहा लेकिन मैंने कुछ भी नहीं सुना...

और राज़ और जूली से गाड़ी मई चलने को कहा...

वो दोनों चल दिए मेरे पेअर मई लगी थी इसलिए राज मुझे सहारा दे रहा था...


अब्ब आगे.........................

आगे की कहानी राज की जुबानी...

हम प्रिय को सहारा देते देते गाड़ी तक पहुंचे तो हमारे पीछे पीछे चची जी भी आगयी...

पर मेरे एक बात समझ नहीं आ रही थी की ये आज चची से इतना उखड़ी हुई क्यों है...

पहले तो सबकुछ सही था फिर आज अचानक इसे क्या हुआ...

वहां भी मैंने देखा था की प्रिय चची को भुआ कहने के बजाय उनके नाम से बुला रही थी...

खैर हम लोग गाड़ी मई बैठ चुके the...JULIE गाड़ी ड्राइव कर रही thi...uske बगल मई चची बैठी थी...

और पीछे मई और प्रिय बैठे थे ...

जब गाड़ी चल पड़ी तो चची ने प्रिय से बात करने की कोशिश की पर कामयाब न हो सकीय...

क्योंकि उसने कुछ रूखे से लहज़े मई कहा'' अभी मेरा किसी से कोई भी बात करने का मूड नहीं है''

ये सुनकर चची के साथ साथ मुझे भी बोहोत शॉक लगा क्योंकि जो लड़की हमेशा सही मूड मई रहती है और इतने लोगों से फाइट करने के दौरान भी बिलकुल कूल थी तो इस वक़्त उसे क्या हुआ...

फिर चची अपना सा मुंह लेकर बैठ गयी मैंने देखा जूली भी कुछ बात करना चाहती थी पर उसने भी प्रिय के ऐसे बेहेवियर को देख कर संत रहना सही समझा...

अब सुमसान रोड पर बिलकुल गाड़ी चल रही थी कोई किसी से किसी भी प्रकार की बात नहीं कर रहा था और रात के कोई करीब 10 -11 बज रहे थे...

मेरे मन मई भी कई तरह के सवाल थे लेकिन मैंने भी इस वक़्त संत रहना hi उचित समझा...

लेकिन फिर से एक बार सरे फसाद की जड़ ने आवाज़ लगाई...

समझ चुके होंगे आप लोग ये घंटी थी मेरी जान (PRIYA)ke फ़ोन की घंटी बाज़ी...

उसने कोई जयादा बात नहीं करि , बस है न मई जवाब दिया...

और फ़ोन काट दिया... और इस लहज़े मई कहा की चची उसे सुन सकें...

और कहा की पापा और मम्मी आज आज नहीं आने वाले तीन चार दिन बाद आएंगे वहां अभी टीम लग जायेगा...

और फिर उसने जूली से का की '' कहीं किसी होटल या ढाबे से खाना और पैक करा लेना'' प्लीज!

julie...ok मम

फिर प्रिय ने कुछ नहीं कहा और मेरे दाएं हाथ की बाज़ू को अपने की अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपनी आंखें बंद कर के मेरे खंधे पर सर रख लिया...

images-10.jpg


मई सोचने लगा आखिर ये कब क्या करे कुछ पता नहीं चलता अब चची सामने बैठी है और ये मेरे कंधे पर सर रख के बैठी है...

इसे तो किसी बात की कोई फ़िक्र hi nhi...to मैंने डेरे से उस से कहा की चची भी साथ मई hi बैठी हैं...

वो थोड़ा हिली लेकिन वो तो अलग होने के बजाय मुझसे और चिपक के बैठ गयी...

मुझे भी बोहोत सुकून मिल रहा था उसे ऐसी अपने बिलकुल करीब महसूस कर के ...

ये एक अलग hi फीलिंग होती है जब आप किसी की मौजदगी मई अपने चाहने वाले के इतने करीब होना कोई छोटी बात नहीं है...

इस वक़्त कार की लाइट की पीली रौशनी मई उसका चेहरा बोहोत hi मासूम लग रहा tha...ab उसके चचेरे को देख कर कोई नहीं कह सकता की ये इतनी खतरनाक भी हो सकती है की 4-4 लोगों से अकेले लड़ के उन्हें मार सकती है...

लेकिन इस वक़्त तो वो बोहोत hi मासूम और ख़ूबसूरत लग रही थी उसके बाल उसके चेहरे के सामने आ रहे थे जिन्हे मैंने अपनी ऊँगली से उसके कान के पीछे सेट लार दिया..

मेरे ऐसा करने पर प्रिय ने एक बार आंख खोल कर प्यार भरी नज़रो से मेरी तरफ देखा और मेरे गाल पे एक किश किया...

और फिर से मेरी बाजु को कास के पकड़ लिया और कंधे पर सर कर सो गयी...

मुझे उसकी इस हरकत पर बोहोत प्यार आया की तभी गाड़ी रुकी ... लेकिन प्रिय अब भी मुझसे अलग नहीं हुई और जैसे थी वैसे hi रही...

गाड़ी एक ढाबे पर रुकी थी जूली और चची खाना पैक करने चले गए थे...

मैंने उसके माथे पर एक किश किया और उस से पूछा आखिर हो क्या चीज़ तुम ...

उसने पहले मेरी आँखों में देखा फिर कहा की '' तुम बोहोत भोले हो RAJ...ye दुनिया बोहोत खतरनाक है''...

मई अभी कुछ कहता उस से पहले hi उसने मेरे होठों पर ऊँगली रख दी और कहा अभी कुछ नहीं...

और उसने अपनी ऊँगली हटा कर अपने होठ मेरे होठों पर रख दिए...

images-11.jpg


फिर करीब 5 मं तक किश चला और सांसें फूलने की वजह से हम अलग हुए...

उसे कहा की राज ी लव ु की तभी गाड़ी की खिड़की खुली और जूली गाड़ी मई आ गयी...

लेकिन तब तक प्रिय अपनी पहली बलि पोजीशन मई आ गयी थी ...यही उसका सर मेरे कंधे पर था....

फिर चाचिग गाड़ी मई आयी और गाड़ी चल पड़ी घर की और अब मई भी प्रिय के सर से सर लगगे उसको महसूस कर रहा था...

आज इसने इतने सरे शॉक दिए की उसके सामने ये वाला कुछ नहीं था पर ये के मीता शॉक था जिसमे मुझे भी मज़ा आया क्या अहसाह होता है जब ये मुझे किश करती है मई शब्दों मई बयां नहीं कर सकता ...

मई बिलकुल खो जाता हूँ प्रिय मई जब भी ये मेरे करीब आती सब कुछ भूल कर बस इसी मई डूब जाता हूँ,


राज की तरफ से प्रिय के लिए कुछ पंक्तिया..................

मई कैसे बयां करूँ, तेरे साथ को,

लगता है जैसे कोई चाँद निकला हो, अँधेरी रात को

हर ऐडा, हर कशिश तेरी, मुझे लुभाती है

हो जाएं एक दूजे के हम अब तो नियति भी यही चाहती है...

हमारे किश मई वाष्ण का कोई नमो निशान नहीं होता बस एक सच्चा प्यार होता है

जिस मई डूब कर हम दोनों hi खो जाते हैं

मई इन्ही सोचों मई उसके सर पर अपना सर रख के गम था की...

कुछ hi देर मई हम अपने घर पोहोंच गए...

वहां जाकर प्रिय ने जूली से रुकने की कहा तो वो भी मान गयी...

हम चरों hi घर के अंदर aaye...julie को बजी एक कमरा बता दिया गया था...

सभी अपने अपने कमरों मई चले गए...

फ्रेश होकर खाने की टेबल पर आकर सभी खाना खा रहे थे...

वहां ऐसा कुछ खास नहीं hua...ab प्रिय का चची को इग्नोर करने का सिलसिला चलता रहा...

प्रिय ने जूली से कहा...

उस खण्डार मई आग लगवा दो उन लोगों से कह कर...

और फिर दोनों मई थोड़ी बहुत बातें hui...iske बाद खाना खाकर सभी लोग अपने अपने कमरों मई चले गए...

मई भी अपने कमरे मई सोने की तैयारी कर रहा tha...mujhe म्यूजिक सुनते हुए सोने की आदत थी उस से मुझे जल्दी नींद आ जाती थी...

इसलिए मैंने अपना फ़ोन लिया और ईरफ़ोन कान मई लगाए और लेट गया बीएड पर...

कुछ hi देर मई मुझे नीड आ आने lagi...lekin अभी शायद भवन को ये मंज़ूर नहीं था की अभी रात ख़तम हो...

एक बार फिर से फ़ोन की घंटी ने मेरी नींद ख़राब की मैंने नीड मई फ़ोन उठाया और कहा कोण है...

ईरफ़ोन की वॉल्यूम फुल थी, उधर से आवाज़ आयी...

अच्छा अब हम कोण हो गए, तुझे तो कभी हमारी याद भी नहीं आती...

न तेरा फ़ोन लगता है, सुबह से से कितनी बार तरय कर चुकी hun...kahan रहता है आखिर कर तू ...वहां जाकर हमें तो बिलकुल भूल गया है...

मई नींद मई तो था लेकिन जिसकी कॉल थी उसकी आवाज़ सुनके अब न रह सका...

ये कोई और नहीं मेरी प्यारी रानी दीदी थी...

थोड़ा गुस्से मई थी लेकिन आवाज़ के फिर भी क्या kahne...bohot सुरीली आवाज़ थी उनकी...

इतनी देर मई उन्होंने पता नहीं मुझे कितना और सुनाया अब मेरी नींद पूरी तरह से भाग चुकी थी...

गलती मेरे से भी हो गयी जब से यहाँ आया हूँ मैंने वहां किसी की कोई खवार नहीं...

जिसका पूरा पूरा खामियाजा मुझे मिल रहा था...

मैंने उन्हें रोकते हुए kaha-are रुको तो सही कुछ मेरी भी सुना की आप तो बस सुनाये hi जा रही हो...

रानी didi...chaunkte ...आप ?

mai...(man मई)- लो एक और गलती हो गयी अभी पहले से hi गुस्से मई थी अब और भड़का दिया...

mai...are अरे सॉरी गलती से निकल गया...

Rani...tu और करता है क्या है केबल गलतियों के अलावा...

mai...ab छोडो भी क्या बातें लेकर बैठ गयी हो...

mai...vaise एक बात कहूं?

Rani...nhi तो क्या मई अकेले hi बात करूँ ! बोलो

mai...tum गुस्सा कभी कभी करती हो और गुस्से मई और ज्यादा खूबसूरत लगती हो...

की तभी कमरे का गेट खुलता है और प्रिय ने भी एंट्री मरी वो भी दूध के गिलास के साथ...

उसने मुझे किसी से बात करता हुआ देख बोहोत आराम से आयी और मुझे hi चुप रहने का इशारा किया जबकि ऐसा तो मुझे करना चाहिए था...

Rani...lo हो गया shuru...tu नहीं सुधरेगा...

अभी मैंने कुछ नहीं कहा क्योंकि मई प्रिय को ध्यान प्रिय की तरफ था जिसने की दूध का गिलास टेबल पर रखा और जाने लगी...

लेकिन वो तो गेट बंद कर के मेरे hi तेज़ी से चलते हुए मेरे पास आयी...

और उसने एक एअर पीेछे निकल कर अपने कान मई लगा लिया और मेरी बाजु का तकिया बना कर मुझे कान मई कहा बात करो...

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मेरे दिमाग मई बस एक hi ख्याल आया की ये कब क्या करे कुछ पता नहीं चलता...

जब मेरी तरफ से कोई उत्तर न मिला तो उधर से रानी दीदी ने कहा - अब क्या हुआ अभी तो बोहोत बोल रहा था और अब मौन धारण कर लिया...

mai...kuchh nhi...abhi इतना hi कहा था की प्रिय शरारत करने लग गयी...

वो मेरे पेट मई गुदगुदी कर रही थी और मुस्कुरा रही थी...

उसकी गुदगुदी की बहह से मुझे हसी आ रही थी जिसको की रानी दीदी ने सुन लिया...

Rani...kya हुआ क्यों है रहा है...

mai...bas ऐसे hi , और तुम बताओ वहां सब कैसे हैं...

Rani...sab बढ़िया हैं बस तुम्हारी बोहोत याद आती है मुझे...

mai...mujhe भी...

प्रिय मेरे कान में

images-12.jpg


...कितना झूट बोलता है राज...

Rani...ha पता है कितना याद किया ,

तभी तो तूने कॉल किया एक बी बार

Mai...koi न 4-5 दिन की hi तो बात है फिर मई आ जुन्गा...

Rani...chonkte हुए ...4- 5 दिन?

Rani...tu कल नहीं आ रहा...

mai...nhi...

रानी ...क्यों...

अभी यहाँ कोई नहीं है प्रिय और चची के alwa...sabhi कहीं गए 3-4 दिन मई वापस आएंगे...

चची का नाम सुनते hi प्रिय का हाथ रुक गया...

वो अब बस बातें hi सुन रही थी इस तरह बोहोत देर हमारी बातें चलती रही और प्रिय बातें सुनते रही...

Rani...ab बोहोत बातें हो gyi...gud नाईट

mai...itni भी क्या जल्दी है...

Rani...mujhe सुबह पड़ने भी जाना है...

mai...hmm गुड नाईट...

उसने भी गुड नाईट कहा पर कॉल कट होने से पहले कुछ किश जैसी आवाज़ आयी और उन्होंने फिर कॉल कट कर दिया...

प्रिय सवालिया नज़रों se...ye क्या था

mai...pta nhi..par अब बताओ तुम जब तो बोहोत सररत सूझ रही थी अब क्या हुआ tumhe...bohot देर से संत पड़ी हो

प्रिय ....कुछ nhi...bas ऐसे hi तुम थोड़ा संभल के रहा karo...tumhare पास ऐसे बोहोत से लोग हैं जो तुम्हे नुकसान पहुँचाना चाहते हैं...

mai...mtlb

priya...mtlb तो बोहोत कुछ है लेकिन अभी इतना जान लो की तुम्हारी चची का किडनैप नहीं हुआ था...

mai...saaf साफ़ बताओ यूँ बातों को न घुमाओ...

priya...unhone किडनैप का ड्रामा किया था तुम्हारे मर्डर की लिए...

मई तो ये सुनके बिलकुल सी सन्न रह गया और बस मई इतना hi कह पाया ''क्या''

priya...yahi सच hai...isliye कह रही हूँ साबधान रहा करो...

mai...lekin क्यों मैंने उनका ऐसा क्या बिगाड़ा है की वो मुझे मरना चाहती हैं ...

priya...ye तो अभी मुझे भी नहीं पता लेकिन मई जल्द से जल्द इसका पता लगा lungi...akhir क्या बात है जो वो तुम्हे मारना चाहती हैं...

मई इस वक़्त बस यही सोच रहा था आखिर मैंने इन लोगों का बिगाड़ा hai...koi मुझसे नफरत करता है तो कोई जान से मरना चाहता है...


तो बे कॉन्टिनोएड. ..

अब की बार बड़ा अपडेट दिया है उम्मीद है रिस्पांस भी अच्छा मिले...
 
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