RAJ -The mystery man (thriller & Magic) - Page 3 - SexBaba
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RAJ -The mystery man (thriller & Magic)

है भाई एक रीडर होने की वजह से मुझे पता है की मेरी स्टोरी कैसी है और कितना इंट्रेस्ट हो सकता है रीडर्स का अब तक की स्टोरी mein...sachhai को झुटलाने की मेरी आदत नहीं अब तक की स्टोरी में ऐसा कुछ खास नहीं हुआ है जो रीडर्स का इंट्रेस्ट बनाये रखे और उन्हें बंधे रखे...

खैर अच्छा लगा आपको इस स्टोरी के साथ बने हुए देखकर आशा है आज का अपडेट कुछ बेहतर हो पिछले वालों से...
 
अपडेट-17

प्रिय ने मेरे हाथ को अपने हाटों में पकड़ा और बोहोत hi मासूम hi सकल के साथ poocha''kya हुआ''

mai...kuchh nhi...pahli बार तो मई तुम्हे पहचान hi नहीं पाया tha...itna बदल जो गयी ho...aur दूसरी बजह तुम hi हो....

इस बात को सुनकर शायद प्रिय को पता चल गया था की मई क्या कहना छठा हूँ...

अब्ब आगे......................................................

प्रिय को पता नहीं क्या हुआ इस बात से कुछ उदास सी हो चुकी थी उसके चेहरे पर एक अलग दर्द सा मह्सुश हो रहा था...

उसने अब मेरा हाथ जो पकड़ा था वो अब छोड़ दिया tha...use शायद उस एक hi लाइन से बोहोत दुःख पहुंचा tha...kahte हैं न कभी किसी को दुःख देने के लिए ज्यादा कुछ नहीं कड़वी जुबान और और तीखे सब्द होने चाहिए वो किसी भी दिल के कह को भेद के उस में जखम दे देते हैं ...

आज ऐसा hi कुछ मेरे से हो गया था पर न तो मेरी जुबान कड़वी थी और न hi ज्यादा तीखे सब्द थे...

में इसलिए किसी से ज्यादा बातें करना पसंद नहीं करता की कब कहाँ किसे किस बात का बुरा लग जाये...

अब में पछता रहा था की अब कुछ होना तो है नहीं फिर मैंने इसे उस बात को याद दिलाकर दुःख दे दिया...

और जब कोई दुःख में होता है मुझे बोहोत बुरा लगता hai...chahe वो कोई भी सही इंसान हो या जानबर खैर...

मैंने प्रिय से पूछा की हुआ ऐसा तो मैंने कुछ नहीं कहा...

Priya...mai तुम्हारी तरह ढक्कन नहीं हूँ जो ये भी न समझू की किस बड़े में बात कर रहे हो...

mai...ha तुम ढक्कन कहाँ हो तुम तो बिल्ली हो

मई माहौल को हल्का करना चाहता था पर कोई असर नहीं हुआ क्योंकि ये वाट शायद प्रिय के दिल पर लगी थी...

Priya...Plesase! राज में इस वख्त मज़ाक के मूड में नहीं हूँ...

उसने मेरा नाम लिया तो मई समाज गया की ये कुछ ज्यादा hi सीरियस हो गयी है क्योंकि जब वो नार्मल होती है हमेशा हस्ती हुई रहती है और मुझे तो कभी भी बिना चिड़ाये नहीं रहती है...

mai...sorry अगर तुम्हे बुरा लगा हो to...vo बस मेरे मुंह से निकल गया मेरा कोई इरादा नहीं था की मई जांबुजहकार तुम्हे तंग करूँ ...

Priya...nhi इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है , गलती तो सब मेरी है क्योंकि मैंने तुम्हे दर्द diya,tumhe मेरी वजह से बोहोत कुछ सहना पड़ा...

Mai...chodo यार अब क्या होना है इन बातों को कर कर बस पुराने जखम और हरे हो जाते हैं...

priya...mujhe माफ़ कर दो मैंने तुम्हे बोहोत दर्द दिया है...

mai...maine तुम्हे कभी गलत समझा hi nhi...par तुम्हे तब हुआ क्या था जो tumne...aisa किया

Priya...mujhe माफ़ कार्डो मई तुम्हर अभी नहीं बता सकती hun...mai मज़बूर थी...

अब मई भी सीरियस हो चूका था क्योंकि मई भी जान न चाहता था उसने ऐसा क्यों किया था...

mai...lekin क्यों किया तुमने ऐसा बताओ तो सही..

Priya...agar मैंने बता दिया तो शायद तुम कई लोगों से नफरत करने लग jao...isliye अभी जानना सही नहीं होगा तुम्हारे लिए...

mai...mai किस से नफरत करने लग जाऊंगा और किस लिए बताओ तो सही...

Priya...mai अभी नहीं बता सकती ,लेकिन सिर्फ इतना बता सकती हूँ की वो तुम्हारे अपने हैं, इस से ज्यादा मई तुम्हे कुछ नहीं बता सकती...

Priya...agar तुमने कभी भी मुझसे प्यार किया है तो अब इस के आगे तुम कुछ नहीं पूछोगे तुम्हें मेरी कसम राज,

अब में कह भी क्या सकता था उसने अपनी कसम जो देदी लेकिन अब मेरे दिमाग मैं उथल पुथल हो रही थी की ऐसा क्या है जिस से मई लोगों से नफरत करने लग जाऊंगा?

वो घर मई से hi कोण है ? में जितना इस बारे में सोच रहा था उतना hi मेरा दिमाग चक्र रहा tha...samajh नहीं आ रहा था की अब मई क्या करूँ...

जब कोई अपनों के hi बारे में कह दे तो बोहोत दर्द होता है दिल में , दिमाग काम नहीं करता किसी पर विश्वाश नहीं होता...

अब प्रिय मेरे hi तरफ देख रही थी लेकिन मेरा ध्यान उसकी तरफ नहीं था मई तो अपने hi ख्यालों में खोया हुआ था ,

अब बिलकुल मेरे से सात कर बैठ गयी और एक हाथ मेरे कंधे पर रखा और दुसरे हाथ में उसने मेरा मेरा एक हाथ ले लिया...

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Priya...mujhe माफ़ कर दो मई अभी तुम्हे कुछ नहीं बता सकती par...wkt आने पर सब कुछ बता दूंगी...

मई... आखिर कब आएगा वो वख्त ,ऐसा क्या है जो मई नहीं जनता अपनों क्र बारे में...

mai...tumne तो मुझे उस प्यार की कसम दो कभी तुमने होने hi नहीं दिया...

mai...kya तुमने कभी भी मुझसे प्यार किया hai...batao ये किस प्यार की कसम दी है तुमने जो होने से पहले hi खो gya...batao मुझे क्या तुमने कभी मुझसे प्यार किया hai...aur मेरी आँखों में हलके हलके अंशू आने लगे...

पहले तो बोहोत देर तक मेरी आँखों में देखती रही मई भी उसकी hi आँखों में देख रहा था, कुछ देर तो उसने मेरी आँखों में देखा फिर अपने हाथ से मेरी आँखों के आंशू साफ किये और नीचे पानी में नज़र गड़ाए हुए देखती रही...

वहां अब एक dam.sannata चा गया था और बस पानी बहाने की आवाज़ आ रही थी मेरी अब हिम्मत नहीं थी की उससे और बात करूँ...

इसलिए मई भी पानी को देखते हुए उसकी आवाज़ सुनाने लगा जिस से की थोड़ी बहुत शांति मिल रही थी मेरे मन को...

की तभी प्रिय ने ऊपर की तरफ देखा और एक लम्बी साँस अंदर खींची और मेरा जो हाथ उसने अपने हाथ मई पकड़ रखा था उसको ऊपर किया और थोड़ा सा खुद नीचे की तरफ झुकी और मेरे हाथ पर एक किश कर दिया....

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उसके किश करने के बाद मैंने अपने हाथ की तरफ देखा तो पाया की मेरे हाथ पर उसककी लिपस्टक को बजह से होटों के निशान पड़े हुए हैं...

मई तो बिलकुल शॉकेड हो गया मुझे इस वक्त उससे ऐसे किसी भी प्रतिक्रिया की कोई उम्मीद नहीं thi...aur अछ्म्भे से उसकी तरफ देखने लगा...

पहले तो वो शर्मा गयी लेकिन फिर...

उसने कहा ऐसे क्या देख रहे हो जैसे कोई भूत देख लिया हो...

mai...ye क्या था...

priya...tumhe नहीं pta...kiss tha...aur इसी के साथ उसने एक और बार मेरे हाथ को चुम लिया...

ये सब मेरे किये तो एक सपने जैसा था मई जो कुछ भी मेरे साथ हुआ था सब कुछ भूल गया tha...ki तभी उसने अपनी सर मेरे कंधे पर रख दिया...

ये कुछ अलग hi फीलिंग थी उसका हाथ मेरे हाथ में था और उसने मेरे हाथ पर अपने होठों से किश भी की थी और अब उसने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया....

यही सब सोचते -सोचते मैंने भी अपना सर उसके सर से भिड़ा दिया

( ये सन कुछ इस तरह था की )



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और मई उस पल को मह्सुश करने लगा अब तक मई पूरी तरह से शांत हो चूका था और बस इस पल को मह्सुश कर रहा था की तभी प्रिय कुछ कहना चालू करती है...

प्रिय के सब्द---------

हम तो बस तुम्हारी यादों में ज़िंदगी जी रहे हैं,

ज़माने में खुश और अकेले गम में रह रहे हैं,

फिर भी तुम कहते हो हम तुम्हे दुःख दे रहे हैं,

पर शायद तुम अनजान हो की ज़माने के ज़हर को हम पि रहे हैं,

बहुत मुश्किल होता है किसी की यादों के सहारे जीना फिर भी हम तुम्हारी यादों में जी रहे हैं,

नहीं रहा जाता अब इन यादों के सहारे हम तुमसे कह रहे हैं,

कर लो अब अपने आगोश में मुझे ये हम तुमसे कह रहे हैं...

तो बे कॉन्टिनोएड
 
इतने बड़े रिव्यु के लिए बोहोत बोहोत धन्यवाद

  1. ये बात बिलकुल सही है की प्रिय एक बहुत hi सुलझी हुई लड़की और भी बोहोत कुछ है वो ये बात आगे आगे पता चल जाएगी...
  2. ये तो अभी नहीं पता किसने किसके कहने पर फाॅर्स किया या नहीं भी किया ये बातें पर है कोई अपना hi...ye भी पक्का है...
  3. अपने इतना बड़ा रेबु दिया इसलिए एक राज़ खोल देता हूँ जिन तीन चहरक्टेर्स का अपने नाम लिया ुमने से शायद 1 या 2 hi स्टोरी में रहे ...पर ये पक्का है 3 नहीं रहेंगे...
  4. अपडेट देने की जल्दी मुझे बजी रहती hai...par कभी कभी सिचुएशन hi ऐसी बन जाती है की टीम hi नहीं मिलता

थैंक्स फॉर कमेंटिंग एंड कीप सपोर्टिंग
 
अतुल भाई पहले तो बोहोत सुक्रिया स्टोरी के साथ बने रहने के लिए आशा है आप इसी तरह आगे भी होशला बढ़ाते रहेंगे...

बात कुछ इस तरह है की प्रिय एक तो राज़ से थोड़ी बड़ी है और मातुरे भी ज्यादा hai...isliye वो अभी राज को किसी मुसीबत में फास्ट देखना नहीं चाहती...

पास्ट में जो कुछ भी हुआ अब तो उसके लिए ेओ छोटा सा फ्लैशबैक denapadega...aur अभी फ्लैशबैक का टाइम नहीं है सो वेट फॉर सस्पेंस तो बे ओपन...

लास्ट की लाइन्स के लिए hi ये पूरा अपडेट लिखा गया नहीं तो ये शुरू की लाइन्स थी...

थैंक्स फॉर कमंटिंग

कीप रीडिंग

कीप सपोर्टिंग
 
किन शब्दों में करें हम आपका सुक्रिया,

आपके इस कमेंट ने तो हमें मोह लिया,

एक बार फिर स्टोरी पड़ने के लिए धन्यवाद...

जो भी गाओं की स्टोरी का प्लाट लेता है वो ज्यादातर सही hi होता hai...par स्टोरी कोई कम्पलीट नहीं कर पता इसलिए मई जल्दी hi स्टोरी को कम्पलीट करने की सोचूंगा...

हाँ फ़िलहाल तक तो हीरो को घोंचू टाइप hi दिखाया hai...har कोई सुना देता है अगर मेरे साथ सब कुछ सही रहा तो हीरो के साथ अभी बोहोत कुछ होगा...
 
अपडेट-18


हम तो बस तुम्हारी यादों में ज़िंदगी जी रहे हैं,

ज़माने में खुश और अकेले गम में रह रहे हैं,

फिर भी तुम कहते हो हम तुम्हे दुःख दे रहे हैं,

पर शायद तुम अनजान हो की ज़माने के ज़हर को हम पि रहे हैं,

बहुत मुश्किल होता है किसी की यादों के सहारे जीना फिर भी हम तुम्हारी यादों में जी रहे हैं,

नहीं रहा जाता अब इन यादों के सहारे हम तुमसे कह रहे हैं,

अब्ब आगे

अपने इन शब्दों के बाद वो चुप हो गयी और अपने सर को मेरे hi कंधे पर रखे रखा लेकिन फर्क सिर्फ ितमा था की अब उसने मेरे हाथ को अपने दोनों हटजोन से कर कास कर पकड़ लिया था...

और एक बार फिर से उसने मेरे हाथों को चुम लिया था और अपने सर को मेरे कंधे पर रख कर बिलकुल संत पद गयी...

लेकिन उसके इतने शब्दों ने hi बोहोत कुछ कह दिया था,

कभी कभी ऐसा होता है की इंसान काम सब्दों में भी बोहोत कुछ कह जाता है...

और कभी कभी इंसान बहुत कुछ कह कर भी कुछ नहीं कह पता है...

ऐसा hi आज प्रिय ने किया था उसने इन चाँद शब्दों से hi मेरे दिल में बोहोत गहरा असर किया था...

उसकी बातों से ऐसा लग रहा था जैसे उसने बोहोत कुछ सहा है ,जो शायद कोई नहीं जनता क्योंकि वो हमेशा hi हस्ती रहती है , मस्ती करती रहती है यही बजह है उसको शायद उसको कोई समझ नहीं पाया...

खैर जब आज उसने अपने दिल की बात और दर्द को मुझसे साझा कर hi लिया है तो मैंने भी सोचा मई भी अपने हाल बयां करूँ...

लेकिन अब सवाल ये था की करूँ तो कैसे करूँ मुझमे सीधे बात कहने hi तो हिम्मत नहीं है इसलिए मुझे प्रिय वाला तरीका hi सही लगा जिस से चाँद शब्दों मई hi बहुत कहा जा सकता है...

मई अब सोचने लगा क्या कहूं की तभी मेरे दिमाग में ये कुछ लाइन आ जाती हैं...

तुम्हारे जितना हर गम को भी हमने महसूस किया,

दोगली दुनिया के हर जुल्म को भी सहन किया,

हम कहां किसी के बारे में कुछ कहते हैं,

हम तो बस आपके ही ख्यालों में तन्हा -तन्हा रहते हैं,

प्यार तो हम भी आपसे बेइंतहा करते हैं,

लेकिन इस जालिम ज़माने के सितम से डरते हैं।

मुझे नहीं पता की इन पंक्तियों का कोई मतलब है भी की नहीं बस जो दिल में आया वो बोल दिया....

लेकिन इनका अक्षर कुछ ऐसा हुआ की प्रिय की आँखों में से अंशु बहने लगे जो की मेरे कंधे पर hi टपक रहे थे...

लेकिन अब उसने अपने सर को कंधे पर से हटाया और मेरी तरफ देखने जिस से एक बार को तो मेरी भी आँखें नाम हो गयी लेकिन मैंने अपने आप को संभाला और उसकी झील सी आँखों से मोती जैसे आंशुओं को साफ़ किया और उसकी आँखों में देखने लगा...

की तभी अचानक वो बैठे- बैठे hi मेरे गले से लग गयी और मैंने भी उसे अपनी बाँहों में काश लिया...

अब उसने रोना बंद कर दिया था हम दोनों बस एक दूसरे को मह्सुश कर रहे थे की तभी उसके फ़ोन की घंटी बजती है ...

पर प्रिय पर इसका कोई अक्षर नहीं था वो तो बस गले लगी थी और घंटी लगातार बज रही थी तो मैंने उसे अलग किया कॉल पिक करने को बोलै...

उसने फ़ोन निकला तब तक फ़ोन रिंग होना बंद हो गया था तो मैंने कहा देखो तो सही किसका है...

Priya...asha भुआ का है...

mai...call कर लो शायद उनका काम ख़तम हो गया हो ...

लेकिन प्रिय मेरी बात नहीं मानती और फिरसे मेरे गले लग जाती और कहने लगती है ki...ye समय बस यहीं रुक जाये मई pal-pal को मह्सुश करना चाहती हूँ जो मैंने तुम्हारे साथ बिताया है....

की तभी दोबारा से चची जा कॉल आ जाता है तो मैंने उस से कहा बात तो करो अब ...

तो बो मुझसे अलग होती है चची से बात करने लगती है....

Priya...hello

चची...*********

priya....haan

चची...**********

प्रिय ....हाँ बस आये थोड़ी देर में...

चची...*******

Priya...ok जैसी आपकी मर्ज़ी...

अब तक यहाँ आये हुए हमें बोहोत समय हो चूका जिसकी बजह से अब सूरज देवता पृथ्वी की दूसरी और चल पड़े थे मतलब रात होने वाली थी...

इसलिए अब तक हम दोनों ने hi अपने पेअर पानी से बहार निकल लिए थे और ान प्रिय लगातार मेरी hi आँखों में देख रही थी...

मुझे कुछ अजीब सा लग रहा था और बढ़िया भी लग रहा था, एक अलग hi रोमांचा सा मह्सुश हो रहा था...

की तभी मेरी प्रिय मेरी तरफ बड़ी तो मुझे लगा की ये फिर से गले लगेगी लेकिन अबकी बार तो उसने कुछ ऐसा किया जिसकी मैंने बिकुल भी आशा नहीं की थी...

चलो ज्यादा सुस्पेंस न बढ़ाते हुए बता hi देता हूँ की उसने अबकी बार मेरे ऊपर हमला कर दिया था लेकिन किसी हत्यार से नहीं बल्कि अपने गुलाबी होठों से मेरे होठों पर ये हमला ऐसा था की बस मई तो उस मई डूब सा गया था...

लेकिन कोई 2-3 मं बाद उसने किश तोड़ दिया और मेरे पुरे चेहरे पर चुम्बनों की बरसात कर रही थी...

मई तो बस आज उसके इस रूप को देखकर बिलकुल hi अचम्भे में tha.aaj पता नहीं मेरे साथ क्या क्या हो रहा था...

लेकिन अभी शायद और झटके भी लगने बाकि थे क्योंकि प्रिय ने मेरे चेहरे को चूमना बंद कर दिया और मेरे गले लग कर उसने जो कहा उसके लिए मई कितना तड़पा हूँ बता नहीं सकता...

प्रिय...( मेरे सीने से लगे हुए hi) ी लव यू RAJ,I लव यू अब मई नहीं रह सकती तुम्हारे बिना , क्या तुम मुझे अपनाओगे...

Priya...mere से जो गलती पहले हुई थी वो मैं अब नहीं करना चाहती, मई तुम्हे खोना नहीं चाहती ...तुम मेरी जिंदगी हो , और तुम hi मेरी हर ख़ुशी ी लव यू राज ...

आज तो भगवन कुछ ज्यादा hi मेहरबान था मुझ पर पहले इतनी साडी किस्सेस और अब जिसे मई प्यार करता था उसी का इज़हार मेरे लिए तो किसी सपने से काम नहीं था...

इस से आगे अगर कुछ और हुआ तो कहीं मुझे हार्ट अटैक न आ जाये ...मई आज बोहोत कुछ खुश था की जिसे मैंने प्यार किया उसी ने मुझे इज़हार किया ...

चाहे हमारे पास्ट में कुछ भी हुआ सही लेकिन आज उसने मुझे वो सब भूलने पर मज़बूर कर दिया...

तो मैंने भी कह दिया...........

तुम्हारा सिर और मेरा सीना हो ,

हर गम को हमें साथ-साथ पीना हो ,

एक दूजे हमसफ़र हमें रहना है

ऐसा मेरे दिल का कहना है।।

mai...I लव यू तू

और उसे कास के गले लगा लिया और कहा

'' आज तुमने मुझे वो प्यारा दिया है जिसके लिए मई कई सैलून से तड़फा हूँ ,

मई भी नहीं रह सकता तुम्हारे बगैर... मई भी तुमसे बोहोत प्यार करता हूँ...

मई तुम्हे हमेशा के लिए अपनी बनाना चाहता हूँ और तुम???

प्रिय....

''तुम्हरे दिल का जो भी कहना है ,

मुझे तो बस तुम्हारे साथ रहना है

जिंदगी के इस सफर में मुझे तुम्हारा हमसफ़र रहना है,''

और फिर से हम एक दूसरे को किश करने लगे अभी कुछ hi देर हुई होगी की फिर से फ़ोन बज उठा...

प्रिय ने फ़ोन उठाया...

priya...hello...han बस अभी पहुँच रहे हैं..

उधर से-***********

priya...kya

priya...kon हो तुम

और फ़ोन कट हो gya...Priya कुछ एनसीओं मई लग रही थी

तो बे कॉन्टिनोएड
 
इतने मस्त कमेंट के लिए बोहोत बोहोत धन्यवाद ...

जब कोई तरीब करता है तो बोहोत अच्छा लगता है और आगे और भी अच्छा करने की कोशिश रहती है...

लास्ट वाले सुस्पेंस से शायद एक और सुस्पेंस का जन्म हो जाये लेकिन ये बाला सुस्पेंस शायद अगले hi अपडेट में ख़तम हो जाये ...

और इस के बाद एक इंसान राज से नफरत करना काम कर देगा...

कीप रीडिंग

कर्प सपोर्टिंग
 
आपका बोहोत बोहोत सुक्रिया स्टोरी पड़ने के लिए ...

अपने इस सुस्पेंस के बारे में तीन बातें कहीं ...

उनमे से एक सही है अब ये पता अगले अपडेट में लगेगा की कोण सी लेकिन फिर भी एक पॉइंट काम कर देता हूँ...

प्रिय का प्यार सच्चा hai...lekin अभी तोडा कच्चा है...

कीप रीडिंग

कीप सपोर्टिंग
 
ब्लैक्सोल भाई पहले तो आपका बोहोत बोहोत धन्यवाद स्टोरी पड़ने और कमेंट करने के लिए...

जैसा की मई पहले भी कह चूका हूँ प्रिय का प्यार बिलकुल सच्चा है वो राज को धोका नहीं देगी...

अभी मई ज्यादा कुछ जनता नहीं लिखने के बारे में बस जो दिल में आता है लिख देता हूँ इसलिए गलतिया होना तो लाज़मी है ...

आगे से लिखने मई सुधर करने की पूरी कोशिश रहेगी...

आगे भी कहानी पड़ते रहिये और जो गलतियां हो उन्हें उजागर करते रहिये...

कीप रीडिंग

कीप सपोर्टिंग
 
अपडेट-19

प्रिय ने फ़ोन उठाया...

priya...hello...han बस अभी पहुँच रहे हैं..

उधर से-***********

priya...kya

priya...kon हो तुम

और फ़ोन कट हो gya...Priya कुछ टेंशन मई लग रही थी

अब आगे...

उसने दोबारा फ़ोन किया तो स्वीटकॉफ आ रहा था...

Priya...jaldi चलो गाड़ी में बैठो...

(गाड़ी की तरफ भागते हुए उसने ये बात मुझसे कही तो मई भी उसके साथ hi चलते हुए कहा )

mai...hua क्या है आखिर तुम इतनी टेंशन मई क्यों लग रही ho...kuchh तो बताओ...

priya...gadi में बैठो बताती हूँ...

अब तक हम गाड़ी के पास पहुँच चुके थे और प्रिय ने जल्दी से गाड़ी स्टार्ट की और बोहोत तेज़ी से गाड़ी दौड़ा दी...

अब मैंने उस से पूछा बताओ तो सही हुआ क्या है...

तो उसने कहा... अभी भुआ (chachi)ka कॉल आया था और वो कुछ कहने hi बलि थी की एक बोहोत जोर की चीख सुनाई दी और कॉल कट हो गया ... और फिर तरय किया अब फ़ोन स्वीटकॉफ हो गया था ...

इतनी देर में हम वहां पोहोंच चुके थे जहाँ पर हम चची को छोड़ के गए थे लेकिन वहां का नज़ारा hi कुछ और था ...

घर बिलकुल सुमसान पड़ा था बस वहां बिल्ली के

कटोरे का दूध फैला हुआ पड़ा था और बिल्ली बंधी हुई रो रही थी अपनी आवाज़ में...

जब वहां जाकर आवाज़ लगाई तो कहीं से भी कोई जवाब न मिला की तभी

प्रिय को कुछ दिकता है...

उसे वहां टूटी हुई चूड़ियां और एक दो चीज़ गिरी हुई मिली जो की सीधा सीधा संकेत हातपाई की तरफ कर रही थी...

प्रिय उन चूड़ियों को उठाकर देखने लगी- ये चुडिया तो

मई- चची की हैं...

Priya...iska मतलब की किसी ने भुआ के साथ जवार जस्ती की है...

mai...lekin ऐसा कोण कर सकता है और क्यों...

Priya...pta लग जायेगा... और वो किसी को फ़ोन करती है...

priya...julie जल्दी से ये no ट्रेस करो*********

priya...jitna जल्दी हो सके उतना जल्दी करो और लोकेशन को मेरे मोबाइल से कनेक्ट करो...

उदाहर से-*************

Priya...ok बूत फ़ास्ट इतस पर्सनल. ..

इतने में हम अपनी थार तक पहुँच कर हम उसमे सवार हो गए और उसने गाड़ी दौड़ा दी अपने घर की तरफ...

अब तक रात का अँधेरा बढ़ने लगा था और मई तो बस आज जो कुछ भी हो रहा है उसके बारे में सोच कर चकित हो रहा था...

कभी कभी महीनो बीत जाते हैं साल गुज़र जाती हैं पर इंसान की जिंदगी वहीँ की वहीँ होती hai...aur कभी ऐसा होता है की कुछ hi मिंटो में इंसान कहाँ से कहाँ पहुँच जाता है ...

शायद आज मेरे साथ भी ऐसा hi रो रजा था पहले प्रिय का मिलना और अब शायद चची का किडनैप होना बस कुछ hi घंटों के अंतराल में घटित हुई कुछ घटनाएं थी ये...

खैर हम घर पहुँच गए और प्रिय पता नहीं बोहोत जल्दी से मेरे को वहीँ रुकने को कहकर पता नहीं कहाँ गयी...

अभी मुझे वहां बैठे हुए 3-4 मिंट भी नहीं हुए होंगे की तब तक वो आ गयी...

अब तक हुई हमारी मुलाकातों में मैंने उसके कई रूप देखे थे लेकिन ऐसा रूप कभी नहीं देखा था...

वो कुछ इस तरह थी की उसने अपने पुरो बॉडी पर एक ब्लैक लाठर सूट था जो की बिलकुल उसकी बॉडी से चिपका हुआ था...

और सबसे अचम्भे की बात तो ये थी की उसकी पीठ पर दो तलवारें बंधी हुई थी कुछ उस तरह...

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मई अभी उसको देख hi रहा था की उसका फ़ोन बजा और कुछ बातें हुई ...

priya...haa बताओ जूली कुछ पता चला की नहीं...

उधर से- ठीक है मई वहां पहुंच रही हूँ हूँ और तुम अभी पूरी टीम को इन्फॉर्म कर दो और वहां पहुंचो...

उधर...******

Priya...ha जल्दी से जल्दी...

फिर अब तक गम पोहोंच गए एक नयी गाड़ी के पास

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मैंने उस से पूछ ये क्यों तो उसने कहा पता चल जायेगा...

अब तक उसका मोबाइल पर लोकेशन आने लग गयी थी तो उसने देर न करते हुए गाडी उसी दिशा में दौड़ा दी जहाँ वो लोकेशन थी...

वो अभी मूव कर रहे थे और तेज़ी से जंगल की तरफ बाद रहे थे...

तो प्रिय ने भी पूरी स्पीड से उनकी तरफ गाड़ी दौड़ा दी और कुछ hi देर में हम उनके बहुत पास पहुँच गए थे लोकेशन के हिसाब से...

(अब सभी लोग सोच रहे होंगे की ऐसा कैसे एंटनी जल्दी कोई पकड़ में आता है क्या)

तो हुआ ये था की अब उनकी लोकेशन का मूव होना बंद हो गया और हम उनके बोहोत नज़दीक the....lekin जैसे hi हम वहां पहुंचे तो हमें वहां कुछ नहीं मिला और हम ऐसी जगह पर थे जहाँ से चार रस्ते निकलते थे ...

और लोकेशन भी वहीँ बता रहा था तो हमने वहां रुक कर इधर उधर देखा तो हमें मुझे एक कजज मई लिप्त हुआ फ़ोन मिला...

जब हम ने उस कागज़ को खोल के देखा तो उसमे से एक फ़ोन मिला जो की चची का था और उस कागज़ पर कुच्ग लिखा हुआ था तो हमने वो पढ़ा मेरी तो कुछ समझ नहीं आया क्या था...

उस पर लिखा हुआ था की ''तुम मुझे कभी नहीं पकड़ पाओगी '' ...''अगर इसको सही सलामत चाहती हो तो हमें वो वापिस कर दो जो तुम्हारे पास है'' ...

इतना hi लिखा हुआ था उस के आगे कुछ नहीं ...

mai...ye क्या है और तुम्हारे पास ऐसा क्या है जिसके लिए इन्होने चची का किडनैप किया...

Priya...in सब बातों के लिए अभी समय नहीं है... पहले चची को ढूँढना hai...baad में मई तुम्हे सब बता दूंगी...

Priya...ab ये सोचना है की वो किस रस्ते पर गए honge...ek गलत कदम हमारे लिए बोहोत बड़ी गलती हो सकता है

अब हमारे सामने ये समस्या ये थी की कोण से रस्ते पर जाएं वहां से 4 रस्ते निकले हुए थे ....

अगर हम गलत रस्ते पर चले गए तो उन्हें पकड़ना बोहोत hi मुश्किल होगा ....

Priya...isme से एक रास्ता तो सहर की तरफ जाता है इसलिए वो वहां तो जाएंगे nhi...ab इन तीन मई से दो जंगल की तरफ जाते हैं...

mai...gaye तो वो जंगल में hi होंगे लेकिन कोण से बाले में...

प्रिय कुछ सोचने लगती है की फिर से उसका फ़ोन बजता है...
 
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