अपडेट-18
हम तो बस तुम्हारी यादों में ज़िंदगी जी रहे हैं,
ज़माने में खुश और अकेले गम में रह रहे हैं,
फिर भी तुम कहते हो हम तुम्हे दुःख दे रहे हैं,
पर शायद तुम अनजान हो की ज़माने के ज़हर को हम पि रहे हैं,
बहुत मुश्किल होता है किसी की यादों के सहारे जीना फिर भी हम तुम्हारी यादों में जी रहे हैं,
नहीं रहा जाता अब इन यादों के सहारे हम तुमसे कह रहे हैं,
अब्ब आगे
अपने इन शब्दों के बाद वो चुप हो गयी और अपने सर को मेरे hi कंधे पर रखे रखा लेकिन फर्क सिर्फ ितमा था की अब उसने मेरे हाथ को अपने दोनों हटजोन से कर कास कर पकड़ लिया था...
और एक बार फिर से उसने मेरे हाथों को चुम लिया था और अपने सर को मेरे कंधे पर रख कर बिलकुल संत पद गयी...
लेकिन उसके इतने शब्दों ने hi बोहोत कुछ कह दिया था,
कभी कभी ऐसा होता है की इंसान काम सब्दों में भी बोहोत कुछ कह जाता है...
और कभी कभी इंसान बहुत कुछ कह कर भी कुछ नहीं कह पता है...
ऐसा hi आज प्रिय ने किया था उसने इन चाँद शब्दों से hi मेरे दिल में बोहोत गहरा असर किया था...
उसकी बातों से ऐसा लग रहा था जैसे उसने बोहोत कुछ सहा है ,जो शायद कोई नहीं जनता क्योंकि वो हमेशा hi हस्ती रहती है , मस्ती करती रहती है यही बजह है उसको शायद उसको कोई समझ नहीं पाया...
खैर जब आज उसने अपने दिल की बात और दर्द को मुझसे साझा कर hi लिया है तो मैंने भी सोचा मई भी अपने हाल बयां करूँ...
लेकिन अब सवाल ये था की करूँ तो कैसे करूँ मुझमे सीधे बात कहने hi तो हिम्मत नहीं है इसलिए मुझे प्रिय वाला तरीका hi सही लगा जिस से चाँद शब्दों मई hi बहुत कहा जा सकता है...
मई अब सोचने लगा क्या कहूं की तभी मेरे दिमाग में ये कुछ लाइन आ जाती हैं...
तुम्हारे जितना हर गम को भी हमने महसूस किया,
दोगली दुनिया के हर जुल्म को भी सहन किया,
हम कहां किसी के बारे में कुछ कहते हैं,
हम तो बस आपके ही ख्यालों में तन्हा -तन्हा रहते हैं,
प्यार तो हम भी आपसे बेइंतहा करते हैं,
लेकिन इस जालिम ज़माने के सितम से डरते हैं।
मुझे नहीं पता की इन पंक्तियों का कोई मतलब है भी की नहीं बस जो दिल में आया वो बोल दिया....
लेकिन इनका अक्षर कुछ ऐसा हुआ की प्रिय की आँखों में से अंशु बहने लगे जो की मेरे कंधे पर hi टपक रहे थे...
लेकिन अब उसने अपने सर को कंधे पर से हटाया और मेरी तरफ देखने जिस से एक बार को तो मेरी भी आँखें नाम हो गयी लेकिन मैंने अपने आप को संभाला और उसकी झील सी आँखों से मोती जैसे आंशुओं को साफ़ किया और उसकी आँखों में देखने लगा...
की तभी अचानक वो बैठे- बैठे hi मेरे गले से लग गयी और मैंने भी उसे अपनी बाँहों में काश लिया...
अब उसने रोना बंद कर दिया था हम दोनों बस एक दूसरे को मह्सुश कर रहे थे की तभी उसके फ़ोन की घंटी बजती है ...
पर प्रिय पर इसका कोई अक्षर नहीं था वो तो बस गले लगी थी और घंटी लगातार बज रही थी तो मैंने उसे अलग किया कॉल पिक करने को बोलै...
उसने फ़ोन निकला तब तक फ़ोन रिंग होना बंद हो गया था तो मैंने कहा देखो तो सही किसका है...
Priya...asha भुआ का है...
mai...call कर लो शायद उनका काम ख़तम हो गया हो ...
लेकिन प्रिय मेरी बात नहीं मानती और फिरसे मेरे गले लग जाती और कहने लगती है ki...ye समय बस यहीं रुक जाये मई pal-pal को मह्सुश करना चाहती हूँ जो मैंने तुम्हारे साथ बिताया है....
की तभी दोबारा से चची जा कॉल आ जाता है तो मैंने उस से कहा बात तो करो अब ...
तो बो मुझसे अलग होती है चची से बात करने लगती है....
Priya...hello
चची...*********
priya....haan
चची...**********
प्रिय ....हाँ बस आये थोड़ी देर में...
चची...*******
Priya...ok जैसी आपकी मर्ज़ी...
अब तक यहाँ आये हुए हमें बोहोत समय हो चूका जिसकी बजह से अब सूरज देवता पृथ्वी की दूसरी और चल पड़े थे मतलब रात होने वाली थी...
इसलिए अब तक हम दोनों ने hi अपने पेअर पानी से बहार निकल लिए थे और ान प्रिय लगातार मेरी hi आँखों में देख रही थी...
मुझे कुछ अजीब सा लग रहा था और बढ़िया भी लग रहा था, एक अलग hi रोमांचा सा मह्सुश हो रहा था...
की तभी मेरी प्रिय मेरी तरफ बड़ी तो मुझे लगा की ये फिर से गले लगेगी लेकिन अबकी बार तो उसने कुछ ऐसा किया जिसकी मैंने बिकुल भी आशा नहीं की थी...
चलो ज्यादा सुस्पेंस न बढ़ाते हुए बता hi देता हूँ की उसने अबकी बार मेरे ऊपर हमला कर दिया था लेकिन किसी हत्यार से नहीं बल्कि अपने गुलाबी होठों से मेरे होठों पर ये हमला ऐसा था की बस मई तो उस मई डूब सा गया था...
लेकिन कोई 2-3 मं बाद उसने किश तोड़ दिया और मेरे पुरे चेहरे पर चुम्बनों की बरसात कर रही थी...
मई तो बस आज उसके इस रूप को देखकर बिलकुल hi अचम्भे में tha.aaj पता नहीं मेरे साथ क्या क्या हो रहा था...
लेकिन अभी शायद और झटके भी लगने बाकि थे क्योंकि प्रिय ने मेरे चेहरे को चूमना बंद कर दिया और मेरे गले लग कर उसने जो कहा उसके लिए मई कितना तड़पा हूँ बता नहीं सकता...
प्रिय...( मेरे सीने से लगे हुए hi) ी लव यू RAJ,I लव यू अब मई नहीं रह सकती तुम्हारे बिना , क्या तुम मुझे अपनाओगे...
Priya...mere से जो गलती पहले हुई थी वो मैं अब नहीं करना चाहती, मई तुम्हे खोना नहीं चाहती ...तुम मेरी जिंदगी हो , और तुम hi मेरी हर ख़ुशी ी लव यू राज ...
आज तो भगवन कुछ ज्यादा hi मेहरबान था मुझ पर पहले इतनी साडी किस्सेस और अब जिसे मई प्यार करता था उसी का इज़हार मेरे लिए तो किसी सपने से काम नहीं था...
इस से आगे अगर कुछ और हुआ तो कहीं मुझे हार्ट अटैक न आ जाये ...मई आज बोहोत कुछ खुश था की जिसे मैंने प्यार किया उसी ने मुझे इज़हार किया ...
चाहे हमारे पास्ट में कुछ भी हुआ सही लेकिन आज उसने मुझे वो सब भूलने पर मज़बूर कर दिया...
तो मैंने भी कह दिया...........
तुम्हारा सिर और मेरा सीना हो ,
हर गम को हमें साथ-साथ पीना हो ,
एक दूजे हमसफ़र हमें रहना है
ऐसा मेरे दिल का कहना है।।
mai...I लव यू तू
और उसे कास के गले लगा लिया और कहा
'' आज तुमने मुझे वो प्यारा दिया है जिसके लिए मई कई सैलून से तड़फा हूँ ,
मई भी नहीं रह सकता तुम्हारे बगैर... मई भी तुमसे बोहोत प्यार करता हूँ...
मई तुम्हे हमेशा के लिए अपनी बनाना चाहता हूँ और तुम???
प्रिय....
''तुम्हरे दिल का जो भी कहना है ,
मुझे तो बस तुम्हारे साथ रहना है
जिंदगी के इस सफर में मुझे तुम्हारा हमसफ़र रहना है,''
और फिर से हम एक दूसरे को किश करने लगे अभी कुछ hi देर हुई होगी की फिर से फ़ोन बज उठा...
प्रिय ने फ़ोन उठाया...
priya...hello...han बस अभी पहुँच रहे हैं..
उधर से-***********
priya...kya
priya...kon हो तुम
और फ़ोन कट हो gya...Priya कुछ एनसीओं मई लग रही थी
तो बे कॉन्टिनोएड