Pyaar Nafrat or Kismat - Page 10 - SexBaba
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Pyaar Nafrat or Kismat



अपडेट 76



रिकैप........

जहाँ मनु चैन से सो गया पैर राजिंदर को रात भर नींद नहीं आयी …सोच सोच के की कहीं अगर यह सब मनु को सुच में पता चल गया ..या अजय या सुमित्रा तोह घर में क्या इज़्ज़त रह जायगी उसकी …

या कहीं मनु को पता चल गया है ..यह सोचकर राजिंदर खुद को कोस रहा था ….पैर कोई और अभी खुश था ..उसके प्लान का अगला स्टेप अभी बाकी था ….....

अब आगे........

अगला दिन आया मनु सुबह जल्दी उठा और अजय के साथ उसे ट्रेनिंग पूरी की और जब हु वापस आया तोह घर में उसने देखा की सिर्फ उसकी मम्मी hi घर पैर थी …राजिंदर आज अपने काम पैर सुबह जल्दी चला गया था …शायद फेस नहीं करना चाहता था किसी को ..या जो भी वजह रही हो …सुमित्रा नाश्ता और लंच त्यार कर रही थी …

अजय ने पूछा भी की राजिंदर कहाँ है …तोह सुमित्रा ने कहा की हु तोह सुबह hi चले गए …

सुमित्रा से उसके बाद अजय ने कुछ नहीं kaha…who अपने कामो में लग gaya..nashta सुमित्रा ने लगाया टेबल पैर मनु और अजय दोनों नाश्ता करने लगे ….सुमित्रा ने भी उनके साथ hi नाश्ता किया … तीनो ने हलकी फुलकी बात की राजिंदर को लेकर कोई जीकर नहीं हुआ उसके बाद …अजय नाश्ता करने के बाद अपनी प्लेट लेकर किचन में रखने चला गया …

अब टेबल पैर सिर्फ सुमित्रा और मनु बचे हुए थे …अजय वहां से निकलकर टीवी देकने में बिजी हो गया …

मनु और सुमित्रा ने एक दूसरे को देखा …

सुमित्रा “ बीटा आज पहली बार तुम्हारे पापा इतनी जल्दी चले गए सब ठीक तोह है न ??”

मनु “ मम्मी सब ठीक है आप बस भरोसा रखो …”

सुमित्रा “ तुझे नहीं लगता की ऐसे तोह तुम्हारे पापा हमसे काटने लग जायेंगे ??आगे क्या होगा ”

मनु लम्बी साँस लेकर “ मम्मी ऐसा कुछ नहीं है अभी उनको उनके हाल पैर छोड़ दो ..क्युकी अभी यह जरूरी है …और वैसे भी उनको भी एहसास होना जरूरी है …की हु गलत हैं सो आप टेंशन फ्री रहो ..बाकी सब अपने आप ठीक हो जायेगा “

सुमित्रा “ पैर कब और कैसे ??“

मनु “ इसका जवाब सिर्फ इतना है की …वक़्त अपने एपनिया आप सब ठीक कर देगा ..आप बस भरोसा रखो वक़्त पैर …”

सुमित्रा मुस्कुराते हुए “ वक़्त पैर या तुम पैर मैं अचे से जानती हूँ की तुम कुछ न कुछ करोगे ताकि फॅमिली सेफ रहे …पैर ज़रा धयान से हु पापा हैं तुम्हारे ..”

मनु “ हाँ मुझे पता है की हु मेरे पापा है …बस यही एहसास उनको भी होना जरूरी है की फॅमिली के साथ होने का मतलब क्या है उनको पता चले …आप बस अपना ध्यान रखो …मुझे आप दोनों की चिंता है ..बाकी तोह सब ठीक है …”

सुमित्रा ने इस बात पैर अपनी चेयर से उठकर मनु को अपने सीने से लगा लिया …ख़ुशी से उसका माथा चुकार ..

सुमित्रा “ बीटा सॉरी की तुम्हे यह सब देखना पड़ा न चाहते हुए भी तुमको इसमें पड़ना पड़ा मैं नहीं चाहती थी की तुम दोनों भाई इसमें पदों इसीलिए तुम दोनों को नहीं बता रही थी …मुझे माफ़ करना …मैं सुच नहीं चाहती थी की अपने maa-baap की इनबातों में तुम दोनों पदों …”सुमित्रा के आंसू निकल आये ..

मनु सीने से निकल कर “ कैसी बात करती हो मम्मी हम एक परिवार हैं और परिवार का मतलब सिर्फ सुख का नहीं हर दुःख का भी रिश्ता होता है ..और क्या हुआ अगर मुझे पता चल गया …और वैसे भी आज नहीं तोह कल पता चलता hi …और तब क्या होता जब यह बात मुझे बहार किसी और से पता चलती आपने सोचा भी है की तब मुझे कैसा फील होता …अपने तोह कह दिया की अपने maa-baap की इन बातों में हमे नहीं पड़ना चाहिए …मैं भी समझता हूँ पैर आपने सोच भी एक बार तब क्या होता जब बात हमारे हाथ से निकल जाती …या पापा उसके चक्कर में हम सभी को छोड़ देते या फॅमिली से रिश्ता hi तोड़ लेते …सोचना जरूर एक बार “

सुमित्रा के पैरों टेल ज़मीन निकल चुकी थी ..उसने अब ध्यान दिया इस बात पैर की मनु क्या कहना चाहता है …उसने फील किया की राजिंदर कैसे कुछ दिनों से उसे और फॅमिली को इग्नोर कर रहा था …उसे मनु का मतलब समझ आ चूका था ..उसने एक बार सोचा सुच में अगर रजिनि के चक्कर में अगर कोई ऐसा वैसा फैसला ले लिया तब क्या होता ??? यह सोचकर hi उसके पसीने छूटने लगे ..

मनु ने जब देखा सुमित्रा सोच में गम है और उसके पसीने छूट रहे हैं तोह उसने सुमित्रा को चेयर पैर प्यार से बैठाया और पानी दिया पिने को ताकि सुमित्रा नार्मल हो सके …

सुमित्रा भी कुछ देर में नार्मल हो चुकी थी पैर उसके मंद में मनु की बात फंस चुकी थी …उसे अब मनु की बातों का मतलब समझ आ चूका था ..

मनु “ सॉरी मम्मी मेरे मतलब आपको परेशां करना नहीं था ..पैर आपने सोचा था की आप दोनों अगर परेशान हैं तोह उसमे हम दोनों भाई न पड़े तोह इसमें आपकी गलती नहीं है …यह तोह आपका प्यार है हमारे लिए …पैर पापा का यह कांड आज नहीं तोह कल हमारे सामने भी आता hi ..यह भी सुच है ..क्युकी इंसान ाचा करे या bura..ek न एक दिन उसके एक्शन का रेक्शन होता जरूर है ..सो यहाँ भी होता …मैं सिर्फ आप दोनों की भलाई चाहता हूँ …मेरा मतलब सिर्फ अपने परिवार को सेफ रखना है …क्युकी ऐसी मम्मी और कहाँ मिलेगी मुझे ..??” मनु ने सुमित्रा के गाल को चूमते हुए कहा ..

सुमित्रा भी खुश थी की उसका बीटा कैसे उसके और राजिंदर के लिए सोच रहा है…

सुमित्रा “ सुच में मैं बहुत लकी हूँ की तुम जैसा बीटा है मेरा ..जो हर हाल में हमारे साथ है ..”

मनु “ हमारे नहीं आपके साथ हूँ …क्युकी मुझे आपकी फिक्र पापा से बहुत ज्यादा है ..क्युकी पापा यहाँ गलत हैं ..सो मैं आपके साथ हूँ…”

सुमित्रा “ पैर तुम्हारे पापा का भी सोचो ज़रा “

मनु “ उनका और आपका दोनों का hi सोच रहा हूँ …क्युकी मुझे पुरे परिवार की चिंता है ..पैर यह झटका पापा के लिए जरूरी है अभी के लिए ताकि उनको भी परिवार की एहमियत पता चले ..आप ज्यादा मत सोचो वर्ण यह सोचो की आज रजिनि है कल कोई और होगी ..कितनो के पीछे हम भागते रहेंगे …बहार वळून से ज्यादा हमे अपनों पैर लगाम की जरूरत है …आप ज्यादा दिमाग न लगाओ ..और उनकी फ़िक्र भी मुझपर छोड़ दो ..मैं एपनिया आप देख लूंगा …और हाँ जब तक खुद पापा को एहसास न हो जाये आप इसके बिच में ना पड़ा और न hi कमज़ोर पड़ना वर्ण यह कमज़ोरी hi पूरा परिवार तबाह कर देगी ..क्युकी आज तोह सिर्फ रजिनि है आगे शायद कोई और होगी …सो बे रेडी तो फाइट ..”

सुमित्रा “ हाँ मेरे लाल जानती हूँ तुम सब ठीक कर डोज और भरोसा भी है तुम पैर ..वर्ण शायद hi कोई माँ अपने बेटे को यह सब बताने कहे …तुम नहीं जानते मैं कैसे खुद को सभाला है …”

मनु “ अब और नहीं …और आगे से और नहीं सभालना खुद को क्युकी हम हैं न आपको सँभालने के लिए …और आगे से कुछ भी लगे तोह बताना ज़रूर क्युकी हम एक फॅमिली हैं ..और फॅमिली में सब हर हाल में एक दूसरे का साथ देते हैं ..समझी “

सुमित्रा मुस्कुराते हुए “ हाँ बीटा समझ गयी ..अचे से समझ गयी ..अब मुझ बूढी को कुछ टेंशन लेने की ज़रूरत नहीं है ..मेरा शेर बीटा है न तोह मैं क्यों सोचूं ..लव ु बीटा ”

मनु “ अब बूढी कहाँ से बिच में आगयी ..अरे आप तोह जवान हो भूल गयी ..उस दिन ice-cream पारलर में कैसे जब आप मेरे गले लगी हुई थी ..तोह सब देख रहे थे ..अरे आप तोह कितनी सूंदर हो कोई मुझसे पूछे मैं बताऊंगा की मेरी मम्मी दुनिआ की सबसे सुन्दर लेडी hai…I लव ु मम्मी..” मनु ने सुमित्रा को अपने सीने से लगा लिया … सुमित्रा का मूड भी अब हल्का हो चूका था ..क्युकी उसे सुबह से राजिंदर की चिंता हो रही थी …पैर मनु ने उसके दिमाग में उठ रहे सवलून को शांत कर दिया था ..

मनु सीने में लगे हुए ..” एक वडा करो मम्मी आगे से आप मुझे कोई बात नहीं chupaogi..verna मैं आपसे बात नहीं करूँगा ..” मनु ने झूंठे गुस्से से कहा ..सुमित्रा भी समझ रही थी उसके झूठे गुस्से को ..

सुमित्रा “ ok वडा करती हूँ आगे से जो भी होगा तुमको पहले बता दूंगी ok …बॉस “ बॉस सुनकर दोनों माँ बेटे गले लगे हुए एक साथ हंसने लगे ..

की तभी अजय किसी काम से बहार आया और दोनों को हँसते हुए और गले लगे हुए देखकर बोलै ..

अजय “ थिस इस नॉट फेयर मम्मी ..यह सही नहीं है ..भैया hi अकेले आपके बेटे नहीं हैं मैं भी हूँ न आपका बीटा तोह मुझे क्यों नहीं गले लगती हो ..”

सुमित्रा और मनु इस बात पैर एक साथ हंस पड़े और सुमित्रा ने एक तरफ का हाथ खोलकर अजय को भी बुला लिया ..और अपने साथ मिला लिया …अब तीनो माँ बेटे एक साथ सीने से लगे हुए हंस रहे थे….

उधर रजिनि अपने दिमाग में सोच रही थी की जो बात किसी को पता नहीं …उसके बारे में किसी को पता लगा कैसे ..मतलब उस लिफाफे वाले को कैसे पता की रजिनि …यह सब कर रही है..

रजिनि तेरी चलती खोपड़ी की औरत जो करती थी ..उसका पता अनिल को भी नहीं लगने देती थी की कर क्या रही है ..अनिल बेशक बहार मर्द था …गार्ड का काम करने वाला अनिल हत्ता कट्टा था ..पैर उसके घर की मर्द रजिनि थी ..क्युकी अनिल की उसके सामने एक नहीं चलती थी ..रजिनि तीन बार माँ भी ज़बरदस्ती बानी थी …पहली बार जब सोनम हुई तोह hi अनिल ने कहा की अब एक बेटी hi बहुत है ..पैर रजिनि की बेटे की चाहत के आगे अनिल की एक न चली …रजिनि ने अनिल को कोई ऐसा मौका नहीं दिया था ..जिसको लेकर अनिल बहस कर सके …तोह अनिल भी उससे ज्यादा दिमाग और ज़बान नहीं लड़ता था …

पैर रजिनि आज सोच में गम थी ..अब रजिनि के दिमाग में क्या चल रहा था यह तोह सिर्फ रजिनि जानती thi…per आसानी से मान जाये हु रजिनि कहाँ …

रजिनि कुछ सोचते हुए मुस्कुरा रही थी …उसके दिमाग में कुछ चल तोह रहा था उसकी शैतानी मुस्कराहट का मतलब कुछ न कुछ तोह था ..अब क्यात है इसका मतलब यह तोह किस्मत hi जाने ..

खैर उधर सुमित्रा अपने खाना बनाना के बाद ख़ुशी से अपने काम पैर चली गयी ..क्युकी अब राजिंदर और उसके बिच की बात में मनु उसके साथ था …और जैसे मनु ने जैचंद का राशन बंद किया था ..बचपन में उसके दिमाग को देखकर सुमित्रा भी अब टेंशन फ्री थी …सुमित्रा सुच में मनु को अपने साथ फील कर रही थी …और मनु का उसकी केयर करना उसे ाचा लग रहा था ..राजिंदर को लेकर अब उसका मंद भी क्लियर था …उसे मनु पैर सुच में प्राउड वाली फीलिंग आ रही थी ..

हु अपने काम पैर भी खुश रही आज …उधर माँ के जाने के कुछ देर बाद अजय भी निकल गया ..स्विमिंग के लिए स्पोर्ट्स क्लब …उसे आजकल नया बहुत सवार था स्विमिंग सिखने का ..जब मनु ने कहा तोह अजय का जवाब था “ भैया स्विमिंग सीखा जरूरी है क्युकी जब बचपन में अगर उस टाइम आप नहीं होते तोह मेरा क्या होता “

मनु ने इस पैर अजय को अपने सीने से लगा लिया ..और कहा “ तू कभी भी मुझसे अलग नहीं है ..जहाँ तू वहां तेरा भाई हमेशा तेरे साथ खड़ा होगा आज तोह कह दिया आगे ऐसा सोचना भी नहीं की तुझे कुछ हो jaye…agar जरूरत पड़ी तोह …बड़ी बातें करना ाचा नहीं लगता पैर इतना समझ ले …जब जरूरत होगी वहां तेरे कहने से पहले तेरे सामने तेरे साथ मिलूंगा …क्युकी तू दुनिआ में सबसे कीमती है मेरे लिए …जब तू छोटा सा स्कूल में पॉटी कर देता था तब भी ..मैं तेरे साथ hi होता था ..अब भी तेरे साथ हूँ …चाहे तू कितना भी बड़ा क्यों न हो जाये पैर मेरे लिए तू हमेशा मेरा छोटा भाई रहेगा …हमशा “

अजय भी इस बात पैर चुपके से कुछ आंसू बहा देता और जल्दी से पंच भी देता की भैया को पता न चल जाये …हु अचे से जनता था की उसका भाई उसे लेकर कितना प्रोटेक्टिव है..

अजय अपने क्लब जा चूका था और क्युकी रजिनि और राजिंदर शाम को मिला करते थे तोह मनु ने सोच पुरे दिन क्या किया जाये सो ..सोचा चलो ऑफिस hi चला जाये ..पैर उसके त्यार होते hi उनसे बाइक स्टार्ट की तुरंत कॉल आगया उसके मोबाइल पैर ..

मनु ने नंबर देखा “ चला गया ऑफिस अब ड्यूटी hi भरनी होगी पैर कहीं और “ खुद से बोलै और मुस्कुराते हुए कॉल पिक किया …

कॉल शबनम का था …उसने मनु को बुलाने के लिए कॉल किया था ..मनु भी चल पड़ा ..शबनम के घर ..

कुछ देर में hi मनु उसके सामने था …

शबनम ने आज लाल रंग का सूट पहना हुआ था मांग में सिन्दूर और गले में मगलसूत्र देखकर सुहागन महसूस हो रही थी shabnam..manu की सुहागन ..उसका गोरा रंग और लाल रंग का सूट दोनों की चमक किसी का भी दिल घायल कर दे …मनु भी इंसान hi था ..उसका हाल भी शबनम को देखकर मचल उठा ..

पैर शबनम ने आगे आकर मनु के पेअर छुए …मनु ने उसे पेअर चुने से रोका..

मनु “ कितनी बार कहा है आप मुझसे बड़ी हो यह मेरे साथ मत किया करो ाचा नहीं लगता मुझे किआ आप मेरे पेअर छुओ ..”

शबनम “ हाँ जानती हूँ ..पैर मैं अब आपकी बीवी हूँ ..और इस रिश्ते से आप मुझसे बड़े हैं और आपके पेअर चुना मेरा हक़ है …आप प्लीज मुझे मेरे इस हक़ से महरूम न करो ..”

मनु “ बस करो आपसे बहस भी तोह नहीं कर सकता क्युकी आपके आगे तोह मेरी चलने से रही ..क्युकी आप थेइर मेरी गुरु …ाचा किस लिए बुलाया मुझे आपने ?”

शबनम ने मनु को प्यार से देखा दुनिआ भर का प्यार उसकी आँखों में सिमट आया था …मनु के लिए .. मनु के सीने से लग गयी शबनम ..

शबनम शिकयत भरे लहज़े में “ लगता है आपको मेरी फिक्र hi नहीं …कितने दिन हो गए आपको मुझसे मिले हुए ..देखना तोह दूर एक बार कॉल भी नहीं किया ..अपने लगता हैं बीवी नहीं कोई बोझ हूँ आप पैर …मैं जानती हूँ यह रिश्ता अचानक से जो हमारे बिच में बना उसे सबके सामने आप नहीं कहना चाहते पैर चाहे जो भी हो हूँ तोह मैं आपकी बीवी ..जानती हूँ ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकती ..पैर इतना हक़ तोह मेरा मेरे पति पैर बनता है की कुछ पल अपने पति के पहलू में गुज़रूँ ..कहीं ज्यादा तोह नहीं मांग रही हूँ मैं ..”शबनम की आँखों में ांसो थे ..मनु ने भी देखा तोह उसके आंसू पूछे अपने हाथों से और उसके माथे को चुम लिया ..

मनु “ ऐसा नहीं है शबनम ..तुम मेरी बीवी हो …और बीवी मतलब बीवी …सिर्फ बीवी ..ऐसा नहीं है की मुझे इस रिश्ते से कोई शर्म है या तुम्हारे पहले से शादी शुदा होने से कोई परहेज़ है ..न hi मुझे किसी और कहने की परवाह है ..जब रिश्ता बना है तोह ..रिश्ता निभाना भी होगा ..उसने अकेले साड़ी जिम्मेवारी तुम्हारी नहीं हो सकती ..मेरा हिस्सा भी उतना hi है जितना तुम्हारा है ..पैर क्या करूँ ..थोड़ा सा किसी और वजह से बिजी था ..सो खुद अपने लिए भी टाइम नहीं निकल पाया ..जनता हूँ तुम समझदार हो …पैर यकीं मनो मैं भी तुमको बोझ नहीं मंटा हूँ बस थोड़ा सा परेशां था कुछ दिनों से …”

शबनम ने सुना की मनु भी उसे चाहता है तोह उसका मुझाया हुआ चेहरा खिल उठा …उसे दुनिआ की सबसे बड़ी ख़ुशी मिल गयी ..उसने मनु के होटों को अचानक से ख़ुशी के मारे चुम लिया …मनु ने भी इस अचानक से हुए किश में भी उसका साथ दिया ..

शबनम “ ी लव ु ..आपने आज मुझे दुनिआ की सबसे बड़ी ख़ुशी दे दी है ..आप जानते नहीं की मैं आज कितनी खुश हूँ अब मुझे और कुछ नहीं चाहिए ..अब ने कह दिया इतना मेरे लिए काफी है ..”

मनु “ हाँ पैर एक बात सोचता हंट ओह बुरा लगता है ..??”

शबनम नार्मल होते हुए “ किस बात का ??”

मनु “ यही की क्या हम दोनों तुम्हारे हस्बैंड इसरार के साथ सही कर रहे हैं ???”

शबनम के अंडर इसरार का नाम सुनकर लावा फूटने लगा ..” देखिये ..आप मेरे पति हैं …मैं आपकी पत्नी हूँ ..इसरार से मुझे कोई लेना देना नहीं है ..वह चाहे जिए या मरे मुझे उससे कोई लेना देना nahi…aap मुझे अपनाओ या छोड़ दो मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है ..आपसे हाथ जोड़कर विनती है …आप इसरार का नाम लेकर मुझे जलील न करो “

मनु ने शबनम का मूड बिगड़ता हुआ देखा तोह उसे खचकर अपनी गॉड में बैठा लिया ..शबनम का चेहरा दोनों हाथों से थामकर उसने उसके लाल लिपस्टिक को अपने होटों से भिड़ा लिया …और उसके होटों का रास पिने लगा …शबनम अचानक से हुए इस हमले के लिए त्यार नहीं थी ..उसका मूड ऑफ था ..उसके हाथ body-reaction के चलते ..मनु को ओपपोसे करने लगे पैर जैसे hi उसे मनु के होठों का एहसास हुआ …उसकी आँखें अपने आप बंद होती चली गयी ..

और कब यह किश स्मूच में बदल गया ..दोनों को पता नहीं चला ..पिछले 15 मिनट से दोनों लगातार एक दूसरे को स्मूच कर रहे थे …अब शबनम की साँसे भरी हो चली थी …उसे सांस लेने में दिक्कत हो चली थी ..उसकी ढूढ़ अब ठोस होने लगे थे …उसकी धड़कने तेज़ हो चली थी ..

मनु ने महसूस किया की शबनम को सांस लेने में दिक्कत हो रही है ..सो उसने hi स्मूच को तोडा ..

शबनम हैरत तेज़ सांसें लिए मनु की गॉड में बैठी थी …उसकी पूरी लिपस्टिक मनु खा चूका था ..जो थोड़ी बची थी हु दोनों के होटों पैर फ़ैल चुकी थी …शबनम ने जब मनु के चेहरे पैर खुद की लाल लिपस्टिक देखि तोह शर्मा गयी ..वहीँ मनु भी शबनम को शरमाते हुए देखकर अब खुश था ..की शबनम अब ठीक है ..

मनु ” होटों की पायस तोह भुझ गयी पैर आज बड़ा दिल है ..अपनी बीवी के हाथ का कुछ खाने का क्या हमारी …बीवी हमारे लिए एक कप चाय बना सकती है ??”

शबनम झूंठ में मन ऊके सीने में मरते हुए “ बड़े आये चाय वाले ..अरे आपकी बीवी इतनी बेकार भी नहीं है की सिर्फ अपने पति को चाय से खुश कर दूँ आप रुको मैं अभी गयी और अभी आयी …आज आप बिना खाये नहीं जाओगे यहाँ से कह देती हूँ”

मनु शबनम को देखते हुए “ हाँ मैं भी खाये बिना नहीं जाऊंगा ..”

शबनम मनु की बातों का मतलब समझ gayi..per अभी हु किचन में चली गयी ..खाना बनाना ..शबनम मैं से जुट गयी वहां ..उसने एक साथ कई चीज़ें बनाई अपने पति के लिए..

मनु किचन में नहीं गया ..अभी उसके दिमाग में रजिनि आगे क्या करेगी यह ख्याल आ रहा था ..वह उसी सोच में गम था ..टाइम बिता और शबनम का खाना रेडी था ..पैर मनु अभी तक अपने सोच में गम था .. शबनम ने आवाज़ लगाई खाने के लिए मनु ने टाइम देखा तोह लंच का टाइम हो चूका था …मतलब पीछे घंटा भर से मनु उसके बारे में सोच रहा था …उसने अपने दिमाग को झटका दिया और हाथ मुँह धोकर टेबल पैर आ गया ..

शबनम ने गज़ब का कमल किया था ..उसने आज कई सब्ज़ी एक साथ बनाई थी ..matar-paneer , आलू गोभी , और चपटी साथ में खीरे का रायता , और पुलाव ,,,और जैसे hi शबनम ने पुलाव का ढक्कन हटाया तोह जो भीनी भीनी खुशबू उठी मनु की न चाहते हुए भी और भूख बढ़ने लगी …शबनम मुस्कुराते हुए मनु को देख रही थी …जैसे मनु की आखों में उसे समझ आ रहा था ..की मनु को उसकी म्हणत से बनाया खाना पसंद आया है ..

मनु ने भी शबनम का हाथ चुम लिया …और कहा “सुच में इतनी जल्दी बना लिया तुमने इतना सब??”

शबनम ने कुछ नहीं कहा हु अपने हाथों से मनु को प्लेट में खाना सर्वे करने लगी …जैसे hi खाना सर्वे हुआ …मनु ने खींच कर शबनम को अपने गॉड में बैठा लिया ..

शबनम “ अरे पहले खाना तोह खा लीजिये न मैं कहीं भागी तोह नहीं जा रही हूँ न …”

मनु “ तुमको क्या लगता है क्यों गॉड में बैठाया है तुम्हे …चलो मुँह खोलो “

मनु ने पहला निवाला शबनम को खुद अपने हाथों से खिलाया ..शबनम ने मुँह खोला तोह उसके आंसू निकल आये थे ..ऐसे पूरी लाइफ में उसकी चिंता किसी ने नहीं किट hi ..खुद अपने घर में भी जब तक हु रही थी …वहां के रूल के हिसाब से पहले मर्द खाना कहते थे .उसके बाद औरते खाना कहती थी ..आजतक इसरार ने भी उसे इस तरह से कभी खाने को नहीं पूछा था ..पैर मनु तोह पहला निवाला hi उसे अपने गॉड में बैठकर खिला रहा था ….

मनु ने देखा शबनम रो रही है तोह उसने उसके आंसू पि लिए “ बहुत हुआ इतना ाचा खाना बनाया ..खुद अपने हाथ से खिला रहा हूँ ..पैर तुमको रोने की पड़ी है …मैं नहीं कहूंगा की रोना मत क्युकी आंसू बड़े बेवफा होते हैं ..कब ख़ुशी में कब गम में निकल आते हैं किसी को नहीं पता ..पैर इतना जरूर कहूंगा ..की मेरी कोशिश यही रहेगी की अगर तुम्हारी आँख में पानी आये भी तोह सिर्फ खुशियों के नाम पैर …अब रोना बंद करो और खाना खाओ ..”

शबनम को मनु ने खुद अपने हाटों से खिलाया ..और शबनम भी ख़ुशी से खाने लगी …मनु के हातून …शबनम ने उसके बाद खुद अपने हाथों में प्लेट ले ली और मनु को उसकी गॉड में बैठे हुए hi खाना खिलने लगी …दोनों का खाना ख़तम हुआ …

तोह शबनम सब समेटने लगी …और किचन से एक कटोरी लेकर मनु के सामने आगयी …उसमे खीर थी ..

मनु ने उसे भी शबनम को गॉड में लेकर खाया …और उसे भी खिलाया …

शबनम खाना का सामान समेटने लगी तोह मनु ने उसे खचकर गॉड में बैठा लिया ..

मनु “ अब “

शबनम “ अब क्या ??”

मनु “ सोच लो …शायद भूख अभी भी हो ..???”

शबनम मनु का मतलब समझ रही थी ..”कैसी भूख…”

मनु “ ाचा ठीक है तोह मैं चलूँ क्युकी मेरी बीवी को तोह भूख hi नहीं है …” मनु ने उठने की कोशिश करते हुए कहा ..

पैर शबनम ने उसे उठने नहीं दिया न खुद उसकी गॉड से उतरी …ुटला उसके गले से लिपट गयी …ताकि मनु को रोक सके ..

पैर मनु तेरा अपना body-builder उसे शबनम का वजन क्या पता चलता …उसने शबनम को गले में लटका कर hi उठा लिया बस शबनम के गांड के निचे हाथ लगा लिए की शबनम कहीं गिर न जाये …

शबनम को लेकर हु मैं गेट की तरफ चलने लगा ..तोह शबनम को भी लगा की मनु सुच में जा रहा है ..

शबनम “ प्लीज रुक जाइये न हाँ मुझे भूख है ..मैं बीवी हूँ आपकी मुझपर आपका हक़ है ..पैर ऐसे तोह न जेईएन मुझे आपका ऐसे जाना बर्दास्त नहीं होगा ..कह देती हूँ …” शबनम ने शिकायत भरे लहज़े में कहा ..

मनु मुस्कराते हुए शबनम की आँखों में देखने लगा …शबनम की आँखों में प्यार उसे भी दिख रहा था ..पैर छेड़ने के लिए मनु उसे अभी भी मैं गेट की तरफ उठए लिए जा रहा था …

डर कर शबनम ने आँखें बंद कर ली …पैर मनु का चलना उसे महसूस हो रहा था …

थोड़ी देर में शबनम को लगा की मनु ने उसे कहीं बैठा दिया था ..पैर शबनम अभी तक मनु के जाने से दरी हुई थी …उसे कुछ आवाज़ें आयी तोह …उसने देखा हु अपने बैडरूम में अपने बीएड पैर बैठी है ..

और सामने मनु नंगा है …उसका हौलबी लोढ़ा हवा में किसी लोहे के रोड जैसे तना हुआ खड़ा था …मनु का मज़बूत जिस्म उसके फलादि बाज़ो मोठे मोठे तगड़े डोले …उसका 10 पैक से भरा पेट …और छुड़ा मज़बूत सीना और तगड़े टाइट ठोस जंघे देखकर शबनम …का जिस्म भी आग में झुलसने लगा … सामने मनु का ताज़ा साफ़ गोरा लोढ़ा देखकर शबनम के मुँह में पानी आने लगा ..पैर औरत चाहे कितनी भी बड़ी हो या छोटी उम्र की हो हाय और शर्म उसका घेणा hi है ..शबनम के जिस्म की आग उसे जला रही थी ..पैर मुँह से उसने मनु को अभी तक कुछ नहीं कहा था …पहले भले hi उसने मनु को रोकने के लिए कह दिया था पैर अब जब मनु हवा तने हुए अपने लोडे के साथ नंगा था तोह शबनम का मुँह और छूट एक साथ लार टपकने लगा था …पैर नज़रें जुख़ी हुई थी …

मनु आगे बिस्तर की और बढ़ा …शबनम समझ गयी आगे क्या होगा ….उसे भी उसका जिस्म अब तड़पा रहा था …मनु उसके पास आ चूका था ..शबनम के फेस के निचे एक ऊँगली टीकाकार उसके फेस को उप्पेर अपने आँखों के सामने किया ..

मनु “ क्या हुआ मेरी बीवी शर्मा रही है ..एक बार देखो ज़रा मेरी आँखों में {शबनम ने देखा } जो आगे करना छह रहा हूँ उसकी इज़ाज़त है क्या ???”

शबनम मनु के नंगे बदन से लिपट गयी “ आप बार बार ऐसे क्यों पूछते हैं मैं आपकी बीवी हूँ कोई गैर नहीं हक़ है आपका मुझपे जो चाहे करलो ..पैर ऐसे पूछा मत करो …अह्ह्ह!” मनु ने शबनम की गांड को मुठी में भींच लिया था …

मनु “ जनता हूँ की मेरा हक़ है …पैर इसमें तुम्हारी मर्ज़ी भी उतनी जरूरी है जितनी मेरी …इसलिए पूछता हूँ तुमसे ….और वैसे भी आज पूछने की ख़ास वजह है …”

शबनम ने हैरत से देखा मनु को …मनु उसकी गांड को सेहला रहा था …उसे समझ आ गया की आज उसकी गांड का उद्घाटन पक्का है …मनु का हलबी लोढ़ा अपने गांड में जाते हुए महसूस करके hi शबनम के जिस्म में एक सनसनी फ़ैल चुकी थी …

उसने भी एक बार सर हिला दिया मतलब मनु समझ गया …मनु आगे बढ़ा और शबनम के जिस्म से उसने ek-ek कपडे को अलग कर दिया …मनु यह देखकर हैरत में था की शबनम ने आज न ब्रा पहनी थी और न hi पंतय …मतलब सिर्फ सूट hi पहना था शबनम ने …

अब शबनम बिलकुल नंगी थी …मनु की तरह …शबनम और मनु अब बीएड पैर लेते हुए थे ….मनु का लोढ़ा उसके नाभि से उप्पेर तना हुआ था …शबनम के भी नाभि के उप्पेर हु उसे महसूस हो रहा था …

पैर मनु और शबनम के स्मूच के साथ लोडे और छूट का रगड़ना अभी शुरू था …मतलब दोनों हलके हलके एक दूसरे के जिस्मो को आपस में घिस रहे थे …

मनु की चीब शबनम के मुँह में थी …और उसके हाथ अचे से शबनम की चुकी मसल रहे थे …मनु अपने हाथों से बिना रेहम किये चुकी मसल रहा था …शबनम भी एक तरफ चुकी एक तरफ स्मूच और एक तरफ जिस्म की घिसाई का मज़ा ले रही थी …उसका जिस्म तप रहा था ….

उसके हाथ मनु के कमर को सेहला रहे थे …इतना तगड़ा मर्द उसके उप्पेर था पैर शबनम और मनु अपने अपने जिस्मो की देहक में एक दूसरे को मस्ती से घिस रहे थे …की अचानक से शबनम इस गर्मी के आगे हार गयी … तीन तरफ का माज़ा उसकी छूट से पानी निकलने का सबब बन चूका था …

शबनम के जिस्म ने अचानक झटके खाये तोह मनु भी रुक चूका था …उसने आराम से शबनम को ओर्गास्म का मज़ा लेने दिया …कुछ सेकंड में hi शबनम आसमान से ज़मीं पैर आ चुकी थी …

बैडरूम के बहार आज कई दिन बाद इसरार काम से जल्दी लौट चूका था …भूक के मारे उसका हाल बुरा था …बहार बाइक देखकर उसे समझ आ चूका था शबनम और मनु साथ में होंगे ..पैर करता क्या खाली पेट इंसान को दुनिआ की सबसे सुन्दर लड़की भी अछि नहीं लगती …सो सिद्ध गया किचन की तरफ ..वहां उसने देखा आज तोह खाने में शबनम ने मज़े दर खाना बनाया है …

चाहे शबनम उसे अपने पास न आने देती हो पैर खाना और सारा काम अभी भी इसरार के और शबनम के जिम्मे hi था ….खाना शबनम बनती तोह बहार का काम इसरार देखता …इस आप एक बिना कही अंडरस्टैंडिंग कह सकते हैं … इसरार ने खाना देखा तोह एक प्लेट में लिया और तेज़ी से खाने लगा …कुछ मिनटों में इसरार का पेट भर चूका था …वहां उसने खीर देखि …तोह हु एक कटोरी में कहते हुए …उप्पेर वाले रूम में जाने लगा …

की बैडरूम का गेट ओपन था …उसमे से शबनम की सिसकियाँ उसे सुनाई दी ….उसका दिमाग उसे उप्पेर जाने को कह रहा था …पैर उसके पेअर खुद बा खुद गेट की आगे आ चुके थे …जहाँ मनु शबनम को ओर्गास्म के मज़े लेते हुए देख रहा था ..

अब शबनम नार्मल हो चुकी थी ….मनु ने जब उसे नार्मल होते देखा तोह उसके हाथों में अपना टाइट लोढ़ा थमा दिया …शबनम उसे थामे हलके से उसकी मस्सगे करने लगी ….मनु शबनम के चुकी को एक हाथ से और दूसरे से उसकी छूट की लकीर को सहलाने लगा …शबनम भी थोड़ी hi सही फिर से गरम होने लगी …

बहार इसरार ने जब शबनम के हाथों में मनु का तगड़ा हलबी लोढ़ा देखा तोह उसकी गंडपंती भी जाग गयी …इसरार की गांड में खुजली उठने लगी ..उसने देखा मनु का लोढ़ा कितना टाइट है तोह खीर को खाना छोड़कर उसने इधर उधर देखा …की कुछ मिल जाये ..

शबनम की छूट से निकले पानी की वजह से मनु की उँगलियाँ पूरी लथपथ हो चुकी थी ….पैर मेहनती मनु लगा हुआ था छूट को घुसने में ..

शबनम भी कभी जोर से पकड़ कर मनु का लोढ़ा दबा देती तोह कभी उसकी खाल पूरी पीछे करके सुपडे को निकाल देती …फिर अचानक से बंद कर देती …मनु को ऐसा करने से दर्द होता …पैर ऐसे में उसे यह दर्द भी मज़्ज़ा दे रहा था …

उधर मनु का लाल सुर्ख सूपड़ा देखकर इसरार के मुह्ह से लार पानी के जैसे टपकने लगी थी ..

शबनम से अब कण्ट्रोल करना मुश्किल था ..उसने मनु को रोक कर उसके कान में कहा ..” जानू अब सहा नहीं जाता अब दाल दो न “

मनु ने भी उसकी बात को समझा क्युकी अब उसका लोढ़ा भी फूलों टाइट हुआ पड़ा था …

मनु अब शबनम के उप्पेर थोड़ा सा उप्पेर आ चुका था …थोड़ा सा उप्पेर मतलब हाइट का डिफरेंस सही हो और लोडे और छूट आमने और सामने सही से लड़ाई कर सकें ..

मनु लोढ़ा लिए अभी भी शबनम के उप्पेर था ..उसने लोढ़ा पेलने की जल्दी अभी तक नहीं की …उसने उप्पेर आकर शबनम को देखा और इशारा किया ..

शबनम भी उसके इशारे को समझ गयी उसने खुद से लोढ़ा अपनी छूट के सही छेद पैर टिका दिया …

और मनु को ढाका लगाने का इशारा किया ..

मनु ने एक ज़ोरदार झटका दिया और लोयडा छूट के गीले होने की वजह से संसंता हुआ आधे से काम घुस चूका था …शबनम भी हलके से दर्द के साथ मनु को और अंदर आने को कह रही थी …मनु शबनम के उप्पेर चढ़ा हुआ ज़ोर से झटका देता है ..और इस बार पूरा लोढ़ा एक बार में उतार देता है शबनम की छूट में …

बहार खड़ा इसरार ऐसे सन को देखकर बेचैन हो उठा था …उसकी गांड की खुजली उसके सोचने की ताकत ख़तम कर चुकी थी ..उसे पहले से मनु का गोरा हलबी लोढ़ा पसंद था ..आज दूसरी बार अपनी hi बेगम को मनु से चुड़ते हुए देख रहा था …हु पैर छूट से ज्यादा लैंड उसके दिमाग में चाय हुआ था …इसरार ने देखा तोह पाया की पहले वाला क्रिकेट बात बैडरूम के गेट के अंडर hi साइड में रखा हुआ है …उसने एक सेकंड की देर न करते हुए उस बात को अपने हाथ में लिया …और अपनी पंत निचे करके सिद्ध गांड पे लगा लिया …बिना यह सोचे की लकड़ी का बात जिसकी हठी पैर रबर की गृप है हु बिना चिकनाई के उसके गांड में जाएगी कैसे …

अंडर शबनम की छूट में जैसे hi मनु ने एक बार में hi लोढ़ा अंदर उत्तार दिया …उसके मुँह से अचानक हिचकी निकली हूखखक्क! दर्द तोह हुआ उसे पर पहली चुदाई जितना नहीं …

मनु ने उसके बाद हलके से धक्के लगाने शुरू किये …शबनम को धीरे मज़ा कहाँ आता ..

शबनम “ अहहहह! थोड़ा तेज़्ज़ …….अह्ह्ह्ह!!!”

मनु ने ढके और तेज़ कर दिए ..

शबनम की सिसकी ो तेज़ निकलने लगी …आहहह!!! और तेज़्ज़ ….”

मनु की स्पीड बाद रही थी …

बहार इसरार भी सूखा बात की हठी गांड में लेने में लगा हुआ था …अंडर से शबनम की सिसकी सुनकर और मनु के तेज़ झटके देखकर उसका हाल बुरा हो चला था …

उसने इधर उधर देखा तोह कुछ नज़र नहीं आया …तोह जो बची हुई खीर थी ठंडी फ्रिज की उसी को इसरार ने फटाफट बात की हठी पैर माला और अपनी गांड में सरका लिया ..और गीली खीर से लथपथ हठी को गांड में उप्पेर निचे करने लगा …

अंडर शबनम का हाल मज़ेदार था ….उसका जिस्म मनु के निचे होते हुए भी उसका जिस्म कमान जैसे तन चूका था …उसकी छूट पैर मनु का लोढ़ा अंदर जाते हुए मनु की जंघे शबनम की जांघों से टकरा कर पट्ट!!!

पाटट! की आवाज़ पैदा कर रही थी …पैर इसमें छूट में लोढ़ा पूरी तरह से नहीं जा प् रहा था मनु को मज़्ज़ा नहीं आ रहा था …पैर शबनम तोह मस्ती में मस्त थी ….मनु ने अब शबनम की जंघे थम के उप्पेर कर लेता है …उसके पेअर खचकर अपने कंधे पैर रख लेता है …और अब मनु का लोढ़ा शबनम की छूट में और अंडर उसकी छूट की जड़ तक जाने लगा था ….

उधर बहार ठप्प्प!!! ठप्प्प!!!! की आवाज़ें सुनकर इसरार का हाल बुरा हो चूका था ..उसके हाथों से उसकी गांड में बात की हठी ..और तेज़ी से जाने लगी थी …उसकी गांड में अब रबर चुबने लगी थी …पैर अंदर लाइव होती उसकी बेगम की चुदाई …उसकी गर्मी बढ़ा रही थी …सामने मनु जैसा तगड़ा इंसान कंधे पैर शबनम के पेअर टंगे हुए तेज़ी से चुदाई करने में लगा हुआ था …

मनु के झटके अब तूफानी रफ़्तार से बाद रहे थे …शबनम भी दो बार झाड़ चुकी थी …और तीसरी बार झड़ने की तयारी में थी …और तेज़ झटको के वजह से और छूट के पानी में आते जाते लोडे से झाग निकलने लगा था …

सफ़ेद झाग सा निकल रहा था ….शबनम झड़ी तोह मनु नहीं रुका ….क्युकी उसका रुकना मुश्किल था …शबनम का हाल अब बेहाल था …क्युकी तीसरी बार झाड़ रही थी शबनम …मनु ने अब छूट से लोढ़ा निकल कर शबनम के गांड के निचे एक ताखिया लगा दिया और गीला लोढ़ा शबनम के गांड के छेद पैर लगा दिया …शबनम को देखा उसके बाद …

शबनम ने भी मनु को रुकने को नहीं कहा …उसके मुँह से सिर्फ इतना निकल “ थोड़ा आराम से करना ..बस “

मनु ने भी इशारे से उसे कहा की हु धयान रकेहगा …मनु ने हल्का सा पुश किया …शबनम की गांड में लोडे का सूपड़ा चला गया …शबनम को हल्का सा दर्द हुआ …पैर उसके मुँह से आवाज़ नहीं निकली …

मनु ने एक झटका दिया और आहे लोढ़ा शबनम की गांड में जा चूका था …शबनम को दर्द हुआ …पैर लोडे के गीले होने के चलते ज्यादा नहीं …कुवारी जरूर थी उसकी गांड पैर शबनम पिछले कुछ दिनों से गांड में अनल प्लग लगाए गांड को खोल रही थी …ताकि मनु का गांड मरने की विश को पूरा कर सके ..

मनु ने देखा शबनम को दर्द नहीं हुआ …तोह मनु ने अगले झटके में पूरा जड़ तक लोढ़ा गांड में घुसा दिया …शबनम को अब बेहिसाब दर्द हुआ क्युकी बट प्लग की उतनी लम्बाई नहीं थी जितना मनु का लोढ़ा था ..

शबनम की गांड से खून निकल आया था ..क्युकी शबनम को दर्द हो रहा था और गांड में लोढ़ा फंसा हुआ था सो दोनों इस बात से अनजान थे …

शबनम ने दर्द के बाद भी मनु को देखा और उसके गाल पैर हाथ रखकर कहा ..”आज मेरी गांड का आपका सपना भी पूरा हुआ मैं बहुत खुश हूँ की आपका यह सपना मैं पूरा कर पायी …हाँ दर्द है ..पैर हैरान मत होना क्युकी पिछले दिनों से आपके सपने के लिए मैं कोशिशों में लगी हुई थी ..सो काम से काम आपके लिए कुछ तोह कुंवारा मैंने बचा रखा था …एन्जॉय माय लव …लव ु जानू “

मनु ने कुछ नहीं कहा …उसने शबनम को एक लम्बा स्मूच लेकर उसके गांड में लोढ़ा आगे पीछे करना शुरू कर दिया …शबनम को कुछ देर दर्द हुआ पैर मनु लगातार लोडे को थोड़ा सा बहार निकल कर थोड़ा सा थूक देता अपने लोडे पैर और गांड में और तेज़ी से चुदाई करने लगता …शबनम को अब गांड मरवाने में मज़्ज़ा आ रहा था …

उधर इसरार बहार थक चूका था ..गांड चिल गयी थी उसकी अंदर से रबर के हठी के चलते …हु अब उप्पेर जा चूका था ..पैर साथ में हु बात भी ले गया था ..क्युकी उसकी गांड का माल और खीर से बात की हठी बहुत गन्दी हो चुकी थी …

अंदर मनु लगातार गांड पेलते हुए शबनम के साथ मज़े में डूबा हुआ था ….शबनम भी अब खुलकर मज़े में डूबी हुई थी ..शबनम के साथ मनु भी अब झड़ने के कगार पैर था …शबनम ने देखा मनु झड़ने वाला है तोह उसने इशारा किया की मनु अपना पानी उसकी छूट में खाली करे ..

मनु ने भी बिना देरी किये लोडे को गांड से निकल कर छूट में थुश दिया और लगा पेलने तेज़ी से और अपना पानी उसने छूट में खाली कर दिया …

आठ!!! आईईईई! की आवाज़ के साथ शबनम भी झड़ने लगी …मनु का गरमा गरम लावा छूट में उत्तर चूका था उसके …शबनम की छूट सिखुद का मनु के पानी को चूस गयी ..उसने आज एक बांड भी पानी वास्ते नहीं किया …

मनु झड़ने के बाद शबनम के उप्पेर से उत्तर चूका था …शबनम भी अब नार्मल हो चुकी थी …

मनु ने देखा टाइम 3.00पं बज चुके थे …सो टाइम था अब जाने का ..मनु ने एक बार शबनम को चूमा और जाने को कहा …शबनम भी थक चुकी थी …सो वैसे hi नंगी सो गयी …मनु बहार आया और अपने कपडे पहन कर जाने के लिए त्यार हुआ …

उसने देखा एक बार शबनम को शबनम इतने बार झड़ने के बाद और इतनी लम्बी चुदाई की थकन से थकी हुई सो चुकी थी ..मनु ने एक बार उसके माथे को चूमा और निकल गया ..

कुछ टाइम बाद hi मनु रजिनि के घर के पास था …टाइम बिता आज राजिंदर 4.30पं बजे तक नहीं आया …मनु भी हैरान था ..पैर उसके दिल में एक तरफ ख़ुशी थी ..चलो राजिंदर तोह काम से काम लाइन पैर आ चूका है ..पैर उसका दिमाग बिना सबूत के यकीं मैंने को त्यार नहीं था …टाइम बीता 5.00पं बज चुके थे राजिंदर वहां से गुज़रता हुआ दिखा …रजिनि के घर का रोड के पास होने का एक फ़ायदा यह भी था की रजिनि अपने घर के अंदर से hi आने जाने वाले को बिना गेट खोले देख सकती थी …उसकी वजह थी रजिनि के घर में दो गेट का होना ..मतलब उसका मैं गेट अंडर था जो मोस्टली खुला रहता था …पैर जो गेट लगा रहता था …हु जाली वाला गेट था …सो उसे नज़र रखने के लिए बस मैं गेट को ओपन रखना होता था …

सो राजिंदर जैसे hi रस्ते से गुज़रने वाला था …रजिनि राजिंदर के सामने फुल make-up में थी …

राजिंदर भी रजिनि को देख चूका था ..सो उसने भी बाइक रोक ली …

रजिनि “ मनु के पापा चलो मैंने आपके लिए चाय बनाई है “

राजिंदर “ नहीं कोई बात नहीं आज मेरा दिल चाय पिने का नहीं है आप बेकार में परेशान न हो..”

रजिनि “ कोई बात नहीं चाय का मैं नहीं तोह कमसे काम आज आराम से बात करेंगे चलो तोह सही …” रजिनि ने ज़ोर देते हुए कहा ..

राजिंदर “ सोनम की मम्मी आज तबियत ठीक नहीं है फिर कभी और देखेंगे ..आप चिंता न करो ाचा चलता हूँ ..”

राजिंदर ने उसके बाद एक न सुनी रजिनि की और बाइक लिए घर की ऑर्डर चला गया …पैर रजिनि गुस्से में पेअर पटकती हुई अंडर चली गयी …

मनु भी उसी विंडो के पास खड़ा था …उसका मैं अब शांत था ..क्युकी काम से काम राजिंदर अब रजिनि से दुरी बनाने में लग गया था ..मतलब राजिंदर के सर से काम से काम रजिनि का भूत अभी के लिए उत्तर चूका था …

अंडर मनु ने देखा रजिनि ने पहले जैसे छूट को आईने के सामने खोल कर गुस्से में राजिंदर को जामंकर गलियां दी ..और कहा “ कबतक इस छूट के जाल से बचेगा राजिंदर एक na-ek दिन तुझे इसी छूट में डूबा न दिया तोह रजिनि नाम नहीं …” उसके बाद रजिनि ने किसी को कॉल किया ..और कुछ बात की ..मनु ने आखिर तक सुना और आपने घर वापस आ गया ..

राजिंदर घर में hi था ..पैर मनु के सामने आने से बचता रहा …मनु भी अपने कंप्यूटर पैर कुछ करता रहा ..और टाइम बिता और सबके आने पैर खाना खाया और सो गया …

अगला दिन निकल चूका था मनु और अजय सुबह जल्दी अपनी ट्रेनिंग पैर निकल गए और कल की तरह आज भी राजिंदर आज घर से उनके आने से पहले घर से निकल चूका था ..

उसके बाद सुमित्रा भी अपने टाइम से निकल गयी ..और अजय भी टाइम के साथ स्पोर्ट्स क्लब निकल गया ..

अब बचा मनु …उसने एक लिफाफा त्यार किया और रजिनि के घर के सामने पहले की तरह पाथेर मार्कर रख दिया ..

रजिनि बहार आयी तोह उसने लिफाफा देखा और उसे लेकर अंदर चली गयी ..

उसके बाद मनु भी वहां से उसी फैक्ट्री में चला गया ..जो उसने उस दिन देखि थी …वहां वही लोग आये हुए थे ..मनु ने उनको कॉल करके hi बुलाया था …मनु ने उनको कुछ समझया ..और कुछ हिदायतें दी ..और एक खाली चैम्बर में चला गया ..जहाँ मनु ने एक पुराण सैग अड्डा रखा हुआ था …मनु उसी पैर बेथ गया और उसने अपने जेब से मास्क निकल कर मुँह पैर लपेट लिया यह मास्क कुछ अलग था ..यह कुछ कुछ स्पाइडर मन के जैसे था मतलब उस मास्क में मनु की आईज कवर थी …पैर उसमे जो कपडा था उसे दिखाई अचे से देता था …और उसके साथ hi मनु का पूरा फेस भी कवर होता था …मनु ने अपनी बाइक पहले hi छुपा दी थी …ताकि जान पहचान का कोई इंसान पता न लगा सके की मनु वहां है …

उसके बाद मनु ने उस दिन जो सामान मेडिकल स्टोर से लिया था ..उसे भी वहीँ पड़े एक टूटे छोटे अलमारी टाइप के ड्रावर में रख दिया …मनु अब वेट कर रहा था …थोड़ी देर में hi उसे ऐसा लगा की कोई बहार है …मनु बहार आया तोह पाया की रजिनि अकेले आयी हुई थी …

मनु ने उसके पास जाकर उसे अपने साथ ले आया ..रजिनि दरी हुई थी ..पैर उसके साथ उसी रूम में आ चुकी थी ..

मनु भारी आवाज़ में चलने वाला एक पोर्टेबल रेकडर निकल कर चला देता है ..

उस से आवाज़ आती है “ तुम्हे पता है न क्यों आयी हो यहाँ ??”रेकडर को उसी पैर पॉज कर देता है मनु..

रजिनि “ हाँ जानती हुई तुम मुझे छोड़ोगे और मैं भी अपनी मर्ज़ी से आयी हूँ ..वर्ण मेरी हालत क्या करोगे अचे से पता है ..”

रिकॉर्डर प्ले करता है आगे “ यह तुम्हारी मर्ज़ी से हो रहा है न .???”आगे पॉज कर देता है ..

रजिनि ”हाँ मेरी मर्ज़ी शामिल है इसमें मुझे अचे से पता है इंकार करने पैर क्या होगा सो मैं त्यार हूँ ..”

रिकॉर्डर “ कपडे उत्तर दो एक भी कपडा जिस्म पैर नहीं होना चाहिए ..” रिकॉर्डर पॉज ..

रजिनि उसके बाद हिचकते हुए कपडे उतरने लगती है ..कुछ hi देर में रजिनि पूरी तरह से नंगी मनु के सामने थी ..वह मनु को ऐसे नंगा देखते हुए उनकंफर्टबले थी ..

मनु अपनी जगह से उठा …रजिनि का हलक सुख चूका था …उसे अचे से पता था क्या होने वाला है ..शायद हु इसके लिए घर से त्यार होकर भी आयी थी …उसे अचे से पता था की उसके साथ होने क्या वाला है …पैर मनु रजिनि के पास आकर रुक गया ..

उसने अचे से रजिनि को देखा …रजिनि को पहली बार नहीं नंगा देख रहा था मनु ..पैर यह देखना चाहता था की रजिनि यहाँ कोई होशियारी न करे सो उसने आगे पीछे अचे से चेक किया …ताकि रजिनि को चालाकी न कर सके ..

मनु ने रेकडर रजिनि ने कान के पास प्ले किया ..” अब मेरे साथ चलो ..”

रजिनि बुरी तरह से डर चुकी थी क्युकी सामने वाला एक शब्द नहीं बोलै था ..और जो कहना था ..वह सब रिकॉर्डर के ज़रिये hi बोल रहा था ..पैर रजिनि करती क्या ..मनु रजिनि को देखने लगा ..

रजिनि नंगे जिस्म को छुपाते हुए मनु के साथ चलने लगी …

मनु उसे एक चैम्बर के पास ले आया ..जहाँ सब शीशा लगे हुए थे ..जिसका अरेंजमेंट मनु और उनलोगों ने hi किया था ..वर्ण जेल हुई पुराणी फैक्ट्री में शीशा भला कैसे बचते …

मनु ने वहां आकर फिर एक बार रिकॉर्डर ों किया ..” वहां शीशा से अंदर देखो ..”

रजिनि डरते हुए आगे आयी और अंदर झाकने लगी …शीशा नए थे सो साफ़ साफ़ दिख रहा था ..

अंडर जो उसने देखा तोह रजिनि की रूह कांप चुकी थी …रजिनि की आँखें हैरत से फ़ैल चुकी थी …उसे यकीं hi नहीं हुआ ऐसा होगा अंडर का हाल …रजिनि बुरी तरह से टूट चुकी थी ….



रजिनि वहीँ ज़मीन पैर धम्म !! से बेथ गयी जैसे उसके जिस्म में जान hi न ..हो ..क्युकी अंदर का हाल hi रजिनि के होश उड़ा देने वाला था ..उसे यकीं नहीं हो रहा था की ऐसा भी कुछ हो सकता है ..:हिंट:
 
थैंक्स आपको ाचा लगा इतना काफी है सस्पेंस में छोड़ना आदत की मज़बूरी है ..don't वोर्री इस बार बहुत कुछ क्लियर कर दूंगा ..पैर कुछ सवाल अभी भी छोड़ रहा हूँ ताकि आपका गेस्सेस भी देख सकूँ ..क्युकी मुझे यकीं है आप सब hi स्मार्ट है ...सोचिये शायद कुछ समझ आ जाये ...

और रजिनि का तोह अभी शुरू किया है मनु ने अभी आगे क्या होगा यह भी आगे आपको जल्द पता चलेगा ...
 
अपडेट 78

रिकैप........

अंडर जो उसने देखा तोह रजिनि की रूह कांप चुकी थी …रजिनि की आँखें हैरत से फ़ैल चुकी थी …उसे यकीं hi नहीं हुआ ऐसा होगा अंडर का हाल …रजिनि बुरी तरह से टूट चुकी थी ….

रजिनि वहीँ ज़मीन पैर धम्म !! से बेथ गयी जैसे उसके जिस्म में जान hi न ..हो ..क्युकी अंदर का हाल hi रजिनि के होश उड़ा देने वाला था ..उसे यकीं नहीं हो रहा था की ऐसा भी कुछ हो सकता है ..

अब आगे........

रजिनि ज़मीन को देख रही थी …उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था …उसका जिस्म नंगा होने के बावजूद ठंडा पद चूका था …उसका जिस्म डर के साये में लिप्त हुआ अपने गरम खून को सूखने पैर मजबूर हो चला था …

जहाँ रजिनि सिर्फ चुदाई का सोचकर आयी थी …वहां उसके सामने जो नज़ारा था हु किसी जानलेवा सदमे से काम नहीं था …

हाँ ऐसा सन देखकर सदमा लग्न तोह बनता hi था ….क्युकी अंडर शीशे के उस पार जो नज़ारा था …हु रजिनि के लिए हु दर्द भरा डरावना सपना था …जिसकी उसने सपने में भी उम्मीद नहीं की होगी …

रजिनि का टूटना यह बता रहा था की उसे कितना सदमा लगा था …

मनु ने रिकॉर्डर प्ले किया “ समझ गयी न तुम्हारे पास और रस्ते नहीं हैं ….” रिकॉर्डर पॉज ..

रजिनि तोह जैसे सदमे में hi डूबी हुई थी …उस रिकॉर्डर की आवाज़ सुनकर उस सदमे से थोड़ी बहार आयी …पैर उसका जिस्म कांप रहा था …रजिनि के जिस्म का बाल डर के मारे खड़ा हो चूका था ….नंगी रजिनि जो थोड़ी देर पहले खुद को जो थोड़ा बहुत कवर भी कर रही थी …अब उसने हु भी करना छोड़ दिया था …

मनु अंदर से रजिनि को ऐसे हाल में देखकर सुकून महसूस कर रहा था ..क्युकी इस सब की जिम्मेवार भी रजिनि hi थी…

रजिनि जैसे तैसे उठी एक बार फिर से उसने उस शीशे के पार देखा ….उस शीशे के उस पार देखकर उसके आंसू निकलने लगे …ज्यादा देर वहां रहना अब रजिनि के बर्दास्त के बहार था …

रजिनि वहां से निकल कर उसी रूम में आ चुकी थी …

वहां पड़े उस गद्दे पैर बैठी आंसू बहा रही थी …मनु ने न उसे कोई सहारा दिया न उसे रोने से रोका …क्युकी अपने बदले की चाहत में रजिनि बहुत कुछ गलत कर चुकी थी …और बहार जो हो रहा था …उसकी वजह भी रजिनि hi थी …

रजिनि अब अपनी बेबसी पैर आंसू बहा रही थी …पैर मनु को कोई जल्दबाजजी नहीं थी …उसने रजिनि के राजिंदर और सुमित्रा को बर्बाद करने के प्लान को जान्ने के बावजूद भी अभी तक नंगी पड़ी रजिनि को हाथ तक नहीं लगाया था …पता नहीं क्या चल रहा था मन ऊके दिमाग में …

रजिनि थोड़ी देर रोटी रही पैर मनु बस उसे देखता रहा …

उसके कुछ देर बाद उस चैम्बर के पास किसी के आने की आवाज़ महसूस हुई …रजिनि अपने रोने में लगी हुई थी …पैर मनु अलर्ट था …सामने से एक लम्बा तगड़ा बाँदा सलवार में बिना कुर्ते के चला आ रहा था उसके हाथ में कुछ था …उसका तगड़ा छोड़ा मज़बूत जिस्म देखकर पता चलता था की बाँदा अपने जिस्म पैर कितनी म्हणत करता होगा …पैर अभी उसका जिस्म पसीने से लेथ पथ था …

हु बाँदा वहां आया …रजिनि ने भी उसे देखा पैर उस बन्दे ने अपना फेस कवर किया हुआ था ….उसने मनु को कुछ दिया और रजिनि को लानत भरी नज़र से देखता हुआ वापस चला गया …

मनु के हाथ में जो चीज़ उसने दी थी एक बड़ी सेरीन का मोबाइल था …कुछ टेबल टाइप का ..पैर उसमे कोई वीडियो पॉज हुआ पड़ा था ..मनु उसे लिए रजिनि के सामने आ चूका था उसने उस वीडियो को दिखते हुए प्ले किया …उस वीडियो को देखकर रजिनि फिर से एक बार कमज़ोर हो गयी थी …उस वीडियो को देखते hi उसके आंसू फिर एक बार तेज़ हो चुके थे ..मनु ने वीडियो रोक दिया …

मनु ने एक बार फिर रिकॉर्डर प्ले किया “ तुम्हे याद है न यहाँ जो हुआ है उसके बारे में किसी को नहीं कहना है और अगर कहा तोह इससे भी और ज्यादा हो सकता है ..” रिकॉर्डर पॉज ..

रजिनि रट हुए “ हाँ जानती हूँ देख चुकी हूँ तुम्हारी हवनयत …मुझे छोड़ना चाहते थे न …आयी तोह हूँ तुम्हारे सामने ….पैर तुमने ऐसा क्यों किया …जब मैं आराम से छोड़ने को त्यार थी तोह तुमने उनको बिच में क्यों लाये यह अछि बात नहीं है ..उनको ले आये समझ आता है पैर उसके बारे में तुम्हें पता कैसे लगा यह सब तुम कैसे जानते हो ..??? काम से काम इतना तोह बता दो मुझे …”

रिकॉर्डर प्ले “ तुमको पता है न क्या करना है अगर ज्यादा होसियारी की तोह साड़ी स्मार्टनेस तुम्हारी धरी की धरी रह जाएगी …मुझे तुम्हारे बारे में तुम्हारी सोच से ज्यादा पता है …ज्यादा बकबक मत करो सिर्फ जितना कहा जाये उतना hi करो न उससे काम या ज्यादा …तुम समझदार हो आगे समझ चुकी होगी ..??”

रजिनि आंसू पूछते हुए ..” आखिर तुम चाहते क्या हो ?? ठीक है मैं सब करुँगी नंगी पड़ी हूँ तुम्हारे सामने आओ जी भर के छोड़ लो मुझे ..मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी ..और कह भी नहीं सकती हूँ …यह तुम जानते हो …छोड़ना hi है न मुझे लो आओ छोड़ डालो …जैसे चाहे वैसे करो मैं तुम्हारी गुलाम हूँ …लो आओ भी अब नंगी पड़ी हूँ फिर किस बात की देरी है ..????”

रिकॉर्डर को मनु ने थोड़ा फॉरवर्ड किया और प्ले “ बुलाया तोह चुदाई के लिए hi था …पैर इंसान होती तोह चुदाई कर भी लेता …किसी कुटिया को छोड़ना और उस पैर तुम्हारे छूट देखकर थूकने का भी मैं नहीं है …लानत से भरी अपनी छूट लेकर निकल जाओ ..यह किसी अचे मर्द के थूकने लायक भी नहीं है …चल निकल यहाँ से ….अआकखहह!!! थूऊऊऊ!!! “

रजिनि को अपने जिस्म का बड़ा गुरूर था पैर सामने से ऐसा जिस्म लिए हुए भी …मनु ने रजिनि के नंगे होने के बावजूद उसे लानत से भरी बाते सुनकर मनु ने अचे से जलील कर दिया था ..रजिनि का गुरूर उन बातों को सेहन hi नहीं कर प् रहा था …चुदाई के लिए बुलाकर भी मनु ने लानत में डूबा दिया था रजिनि को ..

रजिनि उस टाइम मनु से बहस कर भी नहीं सकती थी …क्युकी रजिनि की मैं स्विच अभी मनु के हाथ में थी ..

रजिनि उठी और अपने कपडे उठाने को हुई …अचानक रिकॉर्डर प्ले हुआ “ कपडे वहीँ छोड़ दो वहां ड्रावर में कुछ सामान रखा है उसे पहन लो और मेरे साथ चलो …” रजिनि ने ज्यादा कुछ नहीं किया छोड़ने तोह हु वैसे भी आयी थी अब चुदाई से ज्यादा क्या हो सकता है …रजिनि ने भी चुप चाप उस ड्रावर को खोला और उसमे एक पंतय thi…uske अलावा कुछ और नहीं सो रजिनि ने चुपचाप उसे पहन लिया …

उस पंतय को पहन कर रजिनि अब मनु के सामने थी …मनु ने उसे साथ चलने का इशारा किया …और दोनों साथ चल पड़े …मनु उसे उस एक और चैम्बर में ले आया जहाँ 15 लोग फेस कवर किये तगड़े जिस्म के साथ नंगे खड़े थे …उनके लोडे तने हुए थे …रजिनि उनको देखकर डर चुकी थी …नंगे आदमी जिनके face-cover हैं और सबके लोडे तने हुए थे ..उसने सोचा की कहीं उसके साथ कोई जबडाती न करे यह लोग ..पैर यहाँ सभी 15 लोग रजिनि के आने के बाद लाइन से खड़े हो गए …

रजिनि के जिस्म पैर सिर्फ हु काळा रंग की पंतय थी …जिसे पहने हु उन सबके सामने थी ..

मनु का रिकॉर्डर एक बार फिर प्ले हुआ “ अपने कपडे उत्तर दो ..” रिकॉर्डर पॉज हो गया …

रजिनि समझ चुकी थी शायद यह सब उसे बारी बारी छोड़ेंगे ..मन्ना करना उसके बस में न था …सो chup-chap उसने वही किया जो उसे कहा गया था …उसने पंतय उत्तर दी ..

और वेट करने लगी की अब कोण सामने से उसे छोड़ने आएगा ..पैर कोई अपनी जगह से हिला तक नहीं …

और अजीब बात हुई की जीतनेय लोग तने हुए लोडे के साथ खड़े थे रजिनि के नंगे होते hi …सबके लोडे बैठने लगे …और कुछ hi देर में सबके लोडे नार्मल साइज में निचे झूल रहे थे …जैसे कभी खड़े hi नहीं होंगे …

रजिनि हैरान थी ..उसके लिए या हर उस औरत के लिए इससे ज्यादा बजैती का पल शायद hi दुनिआ में होगा की मर्दों का खड़ा लोढ़ा छूट देखकर बेथ जाए …जबकि औरत को नंगा देखकर लोढ़ा तन जाता है ..पैर यहाँ तोह खड़ा लोढ़ा भी छूट देखकर बेथ गया ..रजिनि के लिए इससे ज्यादा शर्मिंदगी का पल शायद hi कभी रहा हो …उसका सर शर्म से झुख चूका था ..

रजिनि को मनु के उस रिकॉर्डर की बातें याद आ रही थी …उसके दिमाग में हु शब्द रह रह कर गूंज रहे थे ..” किसी कुटिया को छोड़ना और उस पैर तुम्हारे छूट देखकर थूकने का भी मैं नहीं है …लानत से भरी अपनी छूट लेकर निकल जाओ ..यह किसी अचे मर्द के थूकने लायक भी नहीं है …चल निकल यहाँ से ….अआकखहह!!! थूऊऊऊ!!! “

रजिनि को ऐसे महसूस हुआ किसी ने सुच में सामने से उसके मुँह पैर थूक दिया हो ..और थूक महसूस होते hi उसके हाथ अचनाक से अपने मुँह को पूछने चले गए ..पैर थूका तोह किसी ने था hi नहीं ..सो अनजाने में सही वहां उसका ाचा सा पोपट हो चूका था …सब मर्द उसे इग्नोर मार रहे थे .. उसके अंदर का औरत के जिस्म वाला गुरूर टूट चूका tha..uski लाइफ का सबसे हुमिलिटेड टाइम था ..जहाँ उसके जिस्म को देखना तोह दूर उसके नंगे होने के बाद भी लोडे झुके हुए पड़े थे ..उसे लगने लगा सुच में क्या उसके जिस्म में औरत वाली कोई बात भी है या नहीं ..???

मनु अंदर से खुश था …रजिनि का टुटा घमंड और उसका यूँ थूक को अपने चेहरे से पूछना उसने अचे से महसूस कर लिया था …सिर्फ रजिनि को या मनु को hi पता था की रजिनि अचानक से अपने फेस को क्यों साफ़ कर रही थी ..

मनु ने फिर से रेकडर को रिवाइंड या फॉरवर्ड किया और सही जगह पैर लाकर प्ले किया …”कपडे पहनो और चलो ..”

रजिनि अपनी सोच से रेकडर की हु भारी आवाज़ सुनकर बहार आ चुकी थी …chup-chap पंतय पहनी और मनु के साथ चल पड़ी …मनु वहीँ …उसी चैम्बर में वापस आ चूका था …रजिनि भी उसके साथ आ चुकी थी ..

उसने फिर एक बार रिकॉर्डर प्ले किया ..” कपडे पहनो और निकलो यहाँ से तुम इस लायक नहीं की तुम्हे कोई सही सा मर्द छोड़ sake..tum लानत से भरी अपनी छूट लेकर निकल जाओ यहाँ से ..और ध्यान रहे आज के बाद जब भी बुलाऊँ तोह वापस आना होगा …वर्ण तुम समझदार हो ..और जब जरुरत होगी तब लिफाफा तुम तक पहुंच जायेगा याद रहे …तुमको तुमसे बेहतर जनता हूँ …मेरी नज़र तुम पैर रेहगी ..और यह पंतय पहनकर hi रहोगी तुम …जब चेंज करने का टाइम आएगा लिफाफा तुम्हारे पास खुद पहुंच जायेगा …तब इस ुसेड पंतय का क्या करना है बता दिया जायेगा ..चलो निकल जाओ …अपनी लानत से भरी छूट लेकर …”

रजिनि chup-chap अपने कपडे पहन कर चली गयी ..उस पेंटी को पहने वहां से …हु पंतय कोई आम सी पंतय नहीं थी …हु वाइब्रेटर की पंतय थी जिसका रिमोट मनु के पास था …इसकी खासियत यह थी की इसके रिमोट की रेंज अछि खासी थी ..यह रिमोट दिवार के आर पार भी काम कर जाता था …कोई 1000मत्र तक काम कर लेता था यह रिमोट ..अब कहाँ से यह सब लाया था मनु वही जाने ..पैर रजिनि को अचे से जलील कर चूका था मनु आज …रजिनि का औरत के जिस्म का घमंड अचे से चकनाचूर कर दिया था मनु ने …

रजिनि के निकलते hi मनु ने देखा रजिनि चली गयी या नहीं ..उसने अचे से चेक किया और जब उसे अचे से यकीं हुआ तोह उसने आराम से अपना face-mask उत्तर दिया ..और हु वहां मजूद लोगो के पास गया और उनको हेल्प के लिए थैंक्स कहा …

उनमे उसी बन्दे ने मनु को कहा “ अरे भाई थैंक्स तोह आपको आपकी वजह से आज कितना मज़्ज़ा लुटा हमने यह तोह हम hi जानते हैं ….आपने आज जो मौका हमे दिया है …उसके बदले में जब भी जरूरत हो …हम आपकी कोई न कोई मदद करेंगे जरूर ..जब भी आपको काम पड़े …आप सोचना नहीं यह हमारा नंबर है …बस कॉल कर देना हम आपके सामने होंगे ..”

मनु ने भी उसका नंबर लिया और उनको एक बार थैंक्स कहा …

हु बाँदा “ पैर भाई उन दोनों का क्या करना है ??? उनको छोड़ दें जैसा आपने कहा था हमारे face-cover थे ..और हम में से किसी ने उनसे न कुछ कहा न आवाज़ निकली जैसा आपने कहा था …पैर कुवारी गांड का मज़्ज़ा सुच में अभी तक हमारे दिलो मैं है …थैंक्स भाई जो आपने दो गंडो के कुंवारेपन का दक्कन खोलने का मौका हमे दिया …”

मनु “ कोई बात नहीं आपने जो किया उसके लिए यह कुछ भी नहीं था …और उस औरत को जो घमंड था उसे तोड़ने में आप के इन दोस्तों ने जो हेल्प की हु भी सुच में हेल्पफुल रहेगी …अब उसे अचे से समझ आ गया होगा की उसकी सही जगह कहाँ है …उसे क्या पता आपके सामान लड़कियों से ज्यादा लड़कों के पिछवाड़े में मज़े ढूंढते हैं ..पैर ाचा hi हुआ …और हाँ उन दोनों को कपडे पहना कर पहले की तरह उनके मुँह कवर करदेना उनकी आँखें तोह नहीं खोली न आप लोगों ने ???”

हु बाँदा “ अरे नहीं भाई उल्टा हमने तोह मुँह भन्दा हुआ था ..ताकि उनकी आवाज़ न निकले आँखें तोह जैसा आपने बोलै था उनकी पहले से hi कवर की हुई थी …पैर भाई जैसा आपने कहा था …बिना रेहम के हम सभी ने अचे रोंडा है उनकी गैंडों को ..भाई कसम से हम 20 लोगों को सुच में मज़्ज़ा आगया ..उनकी गांड मरने में सालो का अचे से ची च लाठर मज़ा दिया ..साले कई महीनो तक याद राख्नेगे दर्द को ..और शायद hi उनको उनकी गांड की यह हालात दिमाग से निकल पाए …आज का दिन उनकी कुवारी गैंडों के लिए काला दिन था …दोनों साले कई बार बेहोश हुए गांड मरवाते हुए …पैर सैलून को पानी छिड़क –छिड़क कर होश में लगा कर फिर से गांड मरै पैर लगा दिया …भाई कसम से आपने गज़ब मज़ा दिलवाया है …हम तोह आपके कायल हो गए …कहाँ सेल फ्री फंड के दारू की बोत्तल के चक्कर में अपना गांड का ढक्कन खुलवा गए हीहीहीहीहीहीहीहीहीह!!!!” उसकी बात सुनकर वहां सभी की हंसी निकल गयी ..

मनु भी हंस पड़ा ..उसके सामने से उनके साथी दो लोगों को चरों साइड से पकडे ले जारहे थे …उन दोनों लोगों की आँखें और मुँह बंधा हुआ था ..पैर दर्द से दोनों की कराहट सुनाई फिर भी दे रही थी …

दोनों का मुँह ज़मीं की तरफ था …मतलब उनको 8 लोग हर एक साइड से हवा में लटकाये हुए गांड उप्पेर की और किये हुए ले गए ..पीछे से एक बाँदा वहां से कुछ सॉफ्ट कॉटन ला रहा था ..उसके हाथ में रुई का हु बंडल देखकर सब मुस्क्रत उठे …

मनु को समझ नहीं आया ..की यह सब क्यों मुस्कुरा रहे हैं ..उसके पास खड़े इसी बन्दे ने मनु के कान के पास आकर कहा “ भाई हैरत मत मानो यह उसकी बीमारी है ..साला जिसकी कुवारी गांड मरता है उसकी गांड से निकले खून को रुई में लपेटकर सेफ रखलेता है …साले को समझया है ..यह आदत अछि नहीं है …पैर साला मंटा नहीं है ..”

उसकी बात पैर मनु भी हंस पड़ा ..था सुच में बड़ा अजीब सा शॉक था उस बन्दे का जो ऐसे गंदे चीज़ को संभलकर रखता था …

हु बाँदा जब सब नार्मल हो गए तोह उसने मनु से कहा “ भाई एक बात समझ नहीं आयी …”

मनु “ कोनसी बात “

बाँदा “ भाई इतना सब किया उस औरत के साथ उसे नंगा तक रखा पैर आपने छोड़ा क्यों नहीं ..?? यह समझ नहीं आता की ऐसे मौके पैर तोह लोग टूट पड़ते हैं …पैर आप शांत और नार्मल थे कहीं आपको भी हमरा चस्का तोह नहीं है???”

मनु हाथ जोड़कर “ भाई ऐसा शॉक आपको hi मुबारख हो …मैं ऐसे hi भला हूँ …उसको निचा दिखने की वजह …सिर्फ इतनी थी की हु अपनी सही जगह अपनी हद में बानी रहे …”उसके सामने तोह मनु चुप हो गया पैर मनु मैं में बोलै “ रजिनि को ठोकने का टाइम अभी नहीं है …उसे तोह मैं हाँ यही करूँगा उस मादरचोद हरामजादी के साथ …साली मेरा घर तोड़ने चली थी …अभी तोह शुरू भी नहीं किया है …”

हु बाँदा मनु को सोचते हुए देखता है तोह मनु के कंधे पैर हाथ रखकर उसे सोच से बहार लता है ..”भाई क्या हुआ ..उसे इतनी आसानी से छोड़ दिया आपने यह बात समझ नहीं आयी ..”

मनु शैतानी मुस्कराहट के साथ “ यह सिर्फ शुरुवात है …अभी तोह यह ट्रेलर था …पूरी कहानी अभी बाकी है …उसके आंसू अभी निकलने शुरू हुए हैं …औरत का मतलब यह नहीं की उसे माफ़ कर दूँ …अभी तोह उसका रोना शुरू हुआ है …और मज़ा आने वाला है ……हाहाहाःहाहा!!!!” मनु ने जिस नफरत से कहा था …उसके उस फेसिअल एक्सप्रेशंस और उस शैतानी हंसी को देखकर वहां मोस्टली सभी की गांड फट चुकी थी …जहाँ थोड़ी देर पहले सभी उसे नयी गांड मिलने के लिए थैंक्स कह रहे थे ..पैर उन्होंने मनु के प्लानिंग और प्लॉटिंग के परफेक्शन को खुद देखा था …जो सब्बित कर रहा था की मनु कितना डेंजरस पर्सन है …

हु सभी बन्दे बेशक गुंडे थे पैर उन्सब्कि एक साथ मनु की इस एक हरकत से गांड अचे से हवा ले चुकी थी …सबसे ज्यादा तोह उसकी फट रही थी जिसने थोड़ी देर पहले मनु से गांड मरने के शॉक के बारे में पूछा था …पैर सामने से किसी ने कुछ नहीं कहा ..

मनु ने एक बार उनको थैंक्स कहा और उनसभी को जाने को कहा और जैसे हु सभी गए वहां से उसके बाद मनु ने कॉल किया

मनु “ थैंक्स उस्मान भाई आपके बन्दे सही में बड़े काम आये इसके लिए थैंक्स “

उस्मान “ अरे कैसी बात करते हो यह तोह कुछ भी नहीं तुम्हारे लिए उस्मान का दिल खुला हुआ है ..जब भी जरूरत हो बिना टेंशन के बोल देना …और हो सके तोह घर आना …सुमैला कई बार पूछ चुकी है …जब से सीमा ने तुम्हारे बारे में बताया है उसने जिद्द सी पकड़ ली है तुम्हे घर बुलाने की ..हो सके तोह एक बार आ जाना “

मनु “ भाई अभी थोड़ा मुश्किल है ..पैर जैसे hi टाइम मिलेगा ..कोशिश करूँगा किआ आपसे पर्सनली मिलकर सही से थैंक्स कह सकूँ ..ाचा अभी रखता हूँ थोड़ा सा काम है …और थैंक्स भाई ..”

मनु ने उसके बाद कॉल कट की और घुस गया उसी चैम्बर में जहाँ गद्दा पड़ा था …मनु वहां पास में कुछ ढूंढने लगा …वहां से कुछ निकला ..वह कैमरा था …मनु ने उसकी रिकॉर्डिंग को रोका और सेव किया …और आगे पीछे करके देखा जिसमे सारा हाल रिकॉर्ड हो चूका था …उसने पहले वाला हु क्लिप जो उसने रजिनि को दिखाया था …उसे भी उसी के साथ रखा और वहां का सारा हाल अचे से चेक किया और जो सामान उसके लिए जरूरी था ..वह साथ में लिया …और जिसकी जरूरत यहाँ थी ..उसे वहीँ सेफ्टी के साथ रख दिया …और चल दिया अपने घर की तरफ …

उधर रजिनि वहां से निकलने के बाद घर आ चुकी थी …उसकी बेटियां खाना मांगने लगी ..तोह उसने बिना किसी शोर शारबे के खाना बनाया और उनसबको परोस भी दिया …

उसकी तीनो लड़कियां हैरत में थी …की आज उनकी माँ ने इतना सब बिना किसी को कुत्ते या पीटते आराम से कर दिया इसमें सबसे ज्यादा सोनम खुश थी …मैं से दुआ कर रही थी की उसकी माँ ऐसे hi रहे …उस पैर उप्पेर वाले को देखकर थैंक्स और कर रही थी …अब उनको क्या पता रजिनि की हालत अंदर से क्यात hi …उन बेचारी बचियूं ने तोह यह भी नहीं नोट किया ..की उनकी माँ घर से निकलते तोह फुल make-up में थी .पैर आते हुए उसके चेहरे का मोस्ट ऑफ़ make-up रोने से ख़राब हो चूका था ..रोने के निशान साफ़ साफ़ दिख रहे थे ..पैर सामने से भूखे बचूं को माँ से ज्यादा खाने में इंटरेस्ट था …और वैसे भी रजिनि कुछ पूछते भी तोह मोस्ट ऑफ़ टाइम बचूं को कूट डालती थी …

पैर आज हालत जुड़ा थे …रजिनि टूटी हुई थी ..काम तोह किसी रोबोट की तरह कर रही थी ..पैर उसका दिमाग अभी तक उस थूक पैर अटका हुआ था ..जो मनु ने उसके मुँह पैर उसके ज़मीर पैर थूका था ..रजिनि घर से मैं बना कर गयी थी चुदाई का …सो चुदाई होती भी तोह रजिनि शायद कुछ दिन याद रखती …

पैर नंगा करके चुदाई से इंकार कर देना …और 15 लोगों का लोढ़ा एक साथ बेथ जाना …रजिनि के मुँह पैर एक गज़ब का लानत भरा झापड़ था …जो उसे चैन से एक सेकंड के लिए भी बैठने नहीं दे रहा था …

रजिनि को अपने जिस्म का घमंड था ..पैर चोट आज उसी घमंड पैर की थी मनु ने ..रजिनि समझ नहीं प् रही थी की इस बात की ख़ुशी मनाये की वहां से बिना चूड़े आ गयी है …या इस बात का गम मन्ये की उसे नंगा देखकर खड़े लैंड भी बेथ गए …उसके दिमाग और उसके वजूद को सही से हिला डाला था …खुद उसका वजूद उसे कह रहा था “ लानत है तू सुच में औरत hi है न …जिसे देखकर मर्द को तुझे पाने का सपना पलना चाहिए या थूकना चाहिए …आककककहहह थूऊ!” उसका वजूद भी उसे लानत hi दे रहा था …

हु अपने में बिजी थी उसने न खाना खाया नाप अणि पिया …बेचैनी से पागल सा हाल हुआ पड़ा था …उसने फिर भी हिम्मत करके मुँह हाथ तोह धो hi लिए थे …कपडे उतरने को भी उसका दिल नहीं हुआ …जिस आईने के सामने छूट को दिखाकर रोज़ बड़ी बातें करती थी आज उस आईने के सामने भी नहीं गयी ..बस जब से आयी थी खाना बनाना के बाद से बीएड पैर पद गयी थी …किसी लाश के जैसे ..

शाम हुई बहार से अनिल आ रहा था …अनिल आज अपने पेअर फैला कर चल रहा था …

सोनम “ पापा क्या हुआ है ?? ऐसे क्यों चल रहे हो …???”

अनिल “ बीटा आज केले के छिलके से फिसल गया था कमर में चोट आयी है इस लिए ऐसे चल रहा हूँ कोई बड़ी बात नहीं है …दो एक दिन में सब ठीक हो जायेगा ..”

सोनम “ पापा अपना धयान रखना ..”

अनिल “ हाँ मेरी बची …पापा अपना ध्यान रखेंगे …तू खेलो ..”

रजिनि जो अनिल को देखकर चाय बनाने लगी थी …उसने सब सुना था …उसके आखों से कुछ बांड ांसो निकल गए थे …रजिनि मुँह में धीरे से बोली “ अब कैसे बताये यह की हु केले का छिलका नहीं तगड़े मोठे लोडे थे जिन्होंने एक साथ तेरे बाप को बेदर्दी से छोड़ा है …खुद मैं उस शीशे से देखा था ..और वहां तेरा बाप अकेला नहीं था वहां तोह हु भी था पैर उसके बारे में उनसबको कैसे पता चला..” रजिनि कुछ और कहती उससे पहले अनिल ने उसके कंधे पैर हाथ टिका कर पूछा ..

अनिल “ तुम ठीक हो न ऐसे चुप न रहा करो …मैं डर जाता हूँ की तुम रोज़ वाली रजिनि हो या नहीं आह्हः! रजनी थोड़ा दर्द है …सॉरी चाय बना रही हो ???”

रजिनि “ हम्म्म! आप बैठो चाय लाती हूँ …” रजिनि ने अनिल को भेज दिया बीएड पैर बैठने को अनिल से बैठा नहीं जा रहा था सो गांड उप्पेर किये उल्टा लेट गया …

रजिनि अचे से जानती थी की अनिल का यह हाल किस वजह से है …रजिनि के आंसू बहने लगे थे अनिल का हाल देखकर …

उधर मनु अपने घर में कंप्यूटर में आते hi लगा हुआ था ..उसने क्या किया यह तोह वही जाने …पैर जैसे hi उसका काम ख़तम हुआ उसके फेस पैर स्माइल आ चुकी थी …यह स्माइल क्यों थी ..यह तोह वही जाने …

पैर मनु ने देखा घर पैर सभी अपने कामो में लगे हैं तोह मनु थोड़ा टहलने को बोलकर चला गया …राजिंदर तोह पहले से hi मनु के सामने आने से बचने में लगा हुआ था …और सुमित्रा अपने खाने में बिजी थी अजय टीवी देखने में बिजी था सो मनु चल दिया पेडल hi …

थोड़ी देर में hi मनु रजिनि के घर के सामने था उसने उसी विंडो का रुख किया और वहां चला गया …रजनी और अनिल इस टाइम खाने बैठे थे …रजिनि और अनिल अपनी अपनी सोचों में गम थे दोनों की अपनी वजह thi…per खाने बैठे हुए थे बीएड पैर अनिल क्युकी बेथ नहीं पा रहा तहत ओह खोनी पैर टिका हुआ खा रहा था …रजिनि भी उसके साथ hi बीएड पैर बैठी हुई खाने में लगी thi..rajini के प्लेट में मनु ने देखा तोह समझ गया की रजिनि और अनिल ने अभी खाना शुरू किया है …

मनु ने जेब से रिमोट निकला और बटन प्रेस किया ….जहाआनंनंन्न!!!! की हलकी सी आवाज़ के साथ रजिनि की पंतय अपना काम करने लगी …रजिनि की छूट में वाइब्रेशन होने लगा …रजिनि की अचानक से हुए इस हमले का पता नहीं था उसके गले का निवाला गले में अटक गया ….छूट में वाइब्रेशन भी गज़ब का हो रहा था …ऐसे मज़े को रजिनि ने कभी महसूस भी नहीं किया था …

उसका जिस्म अकड़ने लगा …छूट के सेंसिटिव हिस्से को जिसे छूट का दाना या क्लाइटोरिस भी कहते हैं उसी पैर हु पंतय सबसे ज्यादा हुम्ला कर रही थी …पैर इसमें भी मनु शैतानी कर रहा था …

अचानक से बटन दबाता और अचानक से रोक देता …रजिनि कभी बैठे हुए अकड़ जाती तोह कभी नोर्मल्ली बैठी होती अनिल हैरत से देख रहा था …उसने देखा तोह पूछा ..

अनिल “ क्या हुआ रजिनि??? सब ठीक तोह है न ???”

रजिनि “ होना उउउ सब ठीकककककक इ इ ीे है आप खनननाआआअ खाऊओं न “

अनिल को कुछ समझ नहीं आ रहा था ..पैर रजिनि से बहस भी नहीं कर सकता था so…chup चाप खाने लगा …

रजिनि को अचे से तंग कर रहा था मनु कभी बटन दबाता और कभी रोक देता …थोड़ी देर करने के बाद मनु रुक गया …रजिनि ने भी चैन की साँस ली …और आराम से खाने लगी ..मनु ने उसे खाने दिया ..जैसे hi रजिनि का खाना ओवर हुआ …मनु ने बटन दबा दिया और बटन से हाथ नहीं हटाया …रजिनि की छूट इस वाइब्रेशन से मस्ती में चूर हो चुकी थी ….

रजिनि ने सिद्ध एक हाथ हलके से अपनी टांगों के बिच में छूट को छूटे हुए फंसा लिया ताकि वाइब्रेशन छूट को और ज्यादा मज़्ज़ा दे सके …उसे यह मज़्ज़ा पहली बार मिला था …

मनु अचे से उसे देख रहा था …अनिल रजिनि को देखकर सोचने लगा शायद उसके पेट में दर्द हो रहा होगा सो उसने रजिनि को इग्नोर मर दिया वैसे भी दर्द तोह उसका भी काम नहीं था ..अगर pain-killer न ली होती तोह घर आ न पता अनिल …पैर pain-killer के बाद भी दर्द be-inteha था अनिल को …ऐसा में उसने रजिनि को इग्नोर hi करना ठीक समझा …

मनु अचे से रजिनि को देख रहा था रजिनि की उप्पेर होती आँखें बता रही थी की उसका पानी बस निकलने hi वाला है …सो अचानक से मनु ने वाइब्रेशन रोक दिया ..पानी निकलने से कुछ देर पहले hi इसके रुकने से सेक्सुअली बहुत फ़्रस्ट्राटे हुई रजिनि उसे बहुत गुस्सा आया ..उसकी छूट में आग लगी गई थी ..उसने दुनिआ भर की गालियां मैं मैं में दी उस वाइब्रेशन रोकने वाले को ….उसका हाल बुरा था …कैसे भी अभी उसे पानी निकलने का मैं था …उसने सिद्ध पीछे देखा बचे खाना खा चुके थे …उसने जोर से बचियूं को अंदर टीवी देखने को कहा …लड़कियां डरते हुए चली गयी ….

उनके जाते hi रजिनि किसी जगली कुटिया जैसे अनिल पैर झपटी …अनिल दर्द से दोहरा हो रहा था …पैर रजिनि ने रेहम नहीं किया इस टाइम उसे अपनी छूट की पड़ी हुई थी …रजिनि ने फटाफट …अनिल की पेण्ट खोलदी और उसका अंडरवियर निचे किया …अनिल को पीछे लिटा दिया …गांड और कमर के बल लेटने से अनिल दर्द से अधमरा हो चूका था ..पैर रजिनि उसके लैंड को हाथों में लिए उप्पेर निचे कर रही थी …पैर दर्द से दोहरे हुए किस आदमी का लैंड खड़ा होता जो अनिल का अभी होता????

अनिल “ रजिनि हटो दर्द हो रहा है मुझे …”

रजिनि फिर भी लगी हुई थी …लैंड खड़ा नहीं हुआ …तोह उसने अनिल के उप्पेर चढ़ने का मैं बना लिया ..और उसके उप्पेर चढ़कर बेथ गयी और अपनी छूट को उसके मुरझाये लैंड से रगड़ने लगी …अनिल दर्द से बेहाल हो उठा उनसे दर्द से बेचैन होकर रजिनि को रोकना चाहा पैर रजिनि इस टाइम रुक hi नहीं रही थी …

सो अनिल ने एक जोरदार धक्का दिया और अपने उप्पेर से रजिनि को गिरा दिया रजिनि अचानक से इस हमले के लिए त्यार नहीं थी …सो जब अनिल ने धक्का दिया तोह रजिनि अनिल के उप्पेर से hi नहीं बीएड से भी निचे ज़मीन पैर गिर गयी…

अनिल दर्द से बचें अचानक से साइड होकर लेट गया ..और गुस्से में रजिनि को देखकर बोलै ..

अनिल “ अबे साली देख तोह ले तुझे देखकर लैंड खड़ा भी नहीं हुआ hai…per तुझे क्या साली किसी रैंड जैसे बस छूट रगड़ रही है …अरे तुझे देखकर चूमना तोह दूर अब छोड़ने का मैं भी नहीं होता …उस पैर तेरे नखरे …जा माँ छुड़ा,,, बहिन की लोदी आज के बाद ऐसे रैंड के जैसा काम किया न तोह याद रख लेना की तुझे देखकर तोह किसी कुत्ते का भी लैंड न खड़ा हो …ायककक ठयऊ…!!” अनिल के मुँह में अचानक से कोई मचार चला गया तोह उसने थूक दिया …

पैर रजिनि को ऐसा लगा की अब अनिल ने भी उसके मुँह पैर hi थूक दिया है …रजिनि अब छूट की गरमी भूल चुकी थी उठी और बहार चली गयी बच्चों के साथ hi चुप चाप साइड में लेट गयी और पुरे दिन को याद करते हुए उसके आंसू निकल आये और ांसो बहते हुए पूरी रात खुद को खुद hi में ढूंढ़ती रही ,उस cover-mask वाले बन्दे (मनु) का धिक्कारना hi रजिनि अभी तक समझ नहीं पायी थी उस पैर अनिल उसके खुद के हस्बैंड ने भी उसे सामने थूक दिया था .अनिल का यूँ थूकना रजिनि के आत्मा पैर सबसे बड़ी चोट थी पूरी रात उसके आंसू नहीं रुके थे …

मनु भी यह सब देखकर घर चला गया और खाना खाकर सोने चला गया… उसके चेहरे पैर शैतानी मुस्कराहट थी …अब इस शैतानी मुस्कराहट की वजह और यह किसके लिए है ??? यह तोह किस्मत और वक़्त hi जानते थे …
:हिंट:
 
अपडेट 79

रिकैप........

मनु भी यह सब देखकर घर चला गया और खाना खाकर सोने चला गया… उसके चेहरे पैर शैतानी मुस्कराहट थी …अब इस शैतानी मुस्कराहट की वजह और यह किसके लिए है ??? यह तोह किस्मत और वक़्त hi जानते थे …

अब आगे........

रजिनि अपनी किस्मत को जब आज उठी थी तभी से कोस रही थी …की उसके बदले के चलते उसकी छूट तोह बच गयी पैर उसके हस्बैंड की गांड का ढकन खुल गया था …पैर अब हो क्या सकता था …अनिल अगले दिन काम पैर जा चूका था …हालत उसकी अभी तक ठीक नहीं थी …पैर रजिनि ने रात जो उसके साथ किया था ..उसके चलते अनिल का मूड बहुत ख़राब हो चूका था …अब गांड तोह बचा नहीं पाया था पैर ..उसका गुस्सा तोह उसमे पहले से hi भरा हुआ था ..पैर रात रजिनि का जबरदस्ती उसके उप्पेर लड़ कर अपनी छूट का उसके लैंड पैर रगड़ना उसके दर्द की परवाह न करना अनिल को बहुत ज्यादा बुरा लगा था ..सो वहां का गुस्सा अब रजिनि पैर था ….सुबह hi गुस्से से खाना खाये बिना घर से जा चूका था अनिल …

पैर पीछे अपने रजिनि को अकेला लानत से भरी ज़िललत में छोड़ गया था …रात भर से जाएगी रजिनि की आँखें लाल हुई पड़ी थी …पैर उनमे सुकून नहीं था …उसका घमंड जैसे ज़मीन खोदकर उससे भी निचे घुस चूका था ..उसके अंदर की औरत अपने आप को ऐसे नाकारा जाना बर्दास्त नहीं कर प् रही थी …उसका दिल जैसे मर जाने को कर रहा था …

रजिनि को एक नहीं तीन बार एक hi दिन में नाकारा गया था ..पहला मनु ने उस चैम्बर में उसकी छूट छोड़ने से मन करके उसे हैरत से भर दिया …उसके बाद दूसरे चैम्बर में उन लोगों के खड़े लैंड का रजिनि को नंगा देखने के बाद भी बेथ जाना …उसके लिए उसके औरत होने के घमंड के मुँह पैर एक लानत भरा तमाचा था …हु तोह चलो जैसे तैसे रजिनि संभल भी लेती …पैर रजिनि अपने खुद के पति का नाकारा जाना और बदले में जलील करना उसके लिए दुब मरने के लिए काफी था ..पैर रजिनि थेइर ढीठ सो …रोटी रही सोचती रही . पैर मरने के लिए जो ख्याल आता रजिनि उसे अपने दिमाग से परे कर देती ..

रजिनि के दिमाग में अचानक से एक ख्याल आया और उसके चेहरे से सारा दर्द हवा हो चूका था …शायद..

अब रजिनि का रजिनि जाने … उधर मनु के घर में अभी मनु और सुमित्रा थे …क्युकी सुबह राजिंदर जल्दी जाने के चाकर में निकला तोह उसने पाया उसकी बाइक स्टार्ट नहीं हो रही है सो उसे रुकना पड़ा …पता नहीं क्यों उसकी अभी तक हिम्मत नहीं बन रही थी मनु के सामने आने की ???.इसे डर नहीं कह सकते क्युकी राजिंदर तेरा मनु का बाप और बाप को भला बेटे से डरने की क्या वजह होगी …हाँ यह जरूर हो सकता है राजिंदर अपने बेटे के सामने पढ़कर उसी टॉपिक पैर बात करने से बचने का सोच रहा हो या शायद इस आगे में हु नहीं चाहता हो की उसका अपना बीटा उसके ऐसे किसी बात को लेकर उसको शक की नज़र से देखे …अब चाहे जो हो पैर अभी तोह राजिंदर अपनी तरफ से मनु के सामने आने से बचना छह रहा था …मनु भी इस बात को समझ रहा था …सो हु भी खुद राजिंदर के सामने आने से बच रहा था …ताकि राजिंदर शरमिंटा या ावक्वार्ड फील न करे …

खैर अब मनु और अजय वापस आये तोह राजिंदर की बाइक वहीँ थी और राजिंदर अपने रूम में tha…rajinder ने अजय और मनु के आते hi अजय को आवाज़ लगाई और अपने साथ बाइक को ठीक करवाने के लिए ले गया …अब वहां सुमित्रा और मनु hi बचे थे …

सुमित्रा “ तू ठीक तोह हैं न बीटा ??”

मनु “ मुझे क्या हुआ मम्मी ?? ओह्ह समझ गया don’t वोर्री रजिनि का धयान है मुझे …आप चिंता मत करो …सब ठीक कर दूंगा …”

सुमित्रा उसके पास आकर उसके चेयर के पास उसे अपने पास खींच लेती है प्यार से ..

सुमित्रा “ हाँ पता है जब तूने कहा है तब से टेंशन लेनी छोड़ दी ..पैर बीटा मुझे उनकी (राजिंदर की ) टेंशन से ज्यादा तेरी टेंशन है ..हम लोग तोह अपनी ज़िन्दगी जी चुके पैर तुम लोगों की ज़िन्दगी तोह अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुई है …उस पैर मेरी और तेरी पापा की यह फालतू चिंता में और तुझे मैंने बेकार में घसीट लिया …सॉरी बीटा ..”

मनु घूमकर उठ गया और खड़ा हुआ ताकि सिद्ध अपनी माँ को संभल सके क्युकी हु चेयर पैर बैठा था और चेयर के पीछे से सुमित्रा ने उसे पकड़ा हुआ था ..और सिद्ध होकर उसने अपनी माँ को अपने सीने से लगा लिया ..सुमित्रा भी अपने बेटे के सीने में पूरी समां गयी क्युकी शायद अब उसका बीटा hi उसके दर्द को जनता था …मनु भी अपनी माँ को अपने सीने में समिति हुए उसके दर्द को समझ रहा था ..मनु ने प्यार से सुमित्रा के सर पैर हाथ फिराया ..

मनु “ मम्मी ऐसा क्यों सोचती हो ..मैं कोई गैर तोह नहीं इस दुनिआ में सबसे ज्यादा हक़ अगर मुझपर किसीका है तोह आपका है ..आपने मुझे जनम दिया है पला पोषा अपने संस्कारों से सींचकर बड़ा किया hai...is दुनिआ में लोग पेड़ लगते हैं उसे बड़ा करते हैं प्यार से देखभाल करते हैं ताकि टाइम आने पैर हु बड़ा होकर उनको फल दे सके ..पैर आपने तोह आज तक सिर्फ हमारे लिए क़ुरबानी पैर क़ुरबानी दी है ..आज पहली बार आपके और पापा के लिए कुछ करने का मौका मिला तोह आप मुझे सॉरी कह रही हैं …नहीं मम्मी इस दुनिआ में मेरा वजूद यह बताता है की मैं आप दोनों का बीटा हूँ ..मेरा सब कुछ आप दोनों से जुड़ा हुआ है ..सो ऐसा सोच कर मुझे परया या गैर मत साबित करो ..it’s हर्टिंग में “

सुमित्रा रो पड़ी सुनकर यह सब पैर यह आंसू ख़ुशी के ांसो थे पैर मनु को लगा उसने शायद कुछ ऐसा वैसा बोल दिया है …हु भी सुमित्रा को लेकर सेंसिटिव था ..सो सुमित्रा के आंसू पूछने लगा ..और उसे जल्दी से चेयर पैर बैठा दिया ..और फटाफट पानी दिया उसे नार्मल होने के लिए ..

सुमित्रा रट हुए भी नोटिस कर रही थी की मनु को उसकी कितनी केयर है …कैसे रोने भी नहीं देता ..उसका रोम रोम मनु को अपनी केयर करते देख ख़ुशी से दुआ दे रहा था …उसका रोना कुछ देर में रुक चूका था ..

सुमित्रा “ बीटा यह तोह ख़ुशी के आंसू थे तू बेकार में hi परेशां हुए ..”

मनु “ चाहे ख़ुशी हो या गम जब तक मैं आपके सामने हूँ मुझे आपके आंसू बर्दास्त नहीं हैं …यह अचे से समझ लो ..और रही बात परेसहानी की तोह आपका हक़ है मुझपर ..और मेरा आप पैर यह हक़ दुनिआ में मुझ से कोई नहीं चीन सकता …इस दुनिआ में मेरा होना hi आप पैर मेरा हक़ है ..उसी तरह मुझपर आपका हक़ है जब तक दुनिआ में मेरा वजूद है ..और रही उस रजिनि की बात तोह आप उसे भुज जाओ ..आपके हर आंसू के बदले उसका …सॉरी डायलाग मरना गन्दी बात है ..”

सुमित्रा मुस्कराते हुए “ तोह फिर ??”

मणि “ तोह फिर से मतलब ..??”

सुमित्रा “ अरे तूने hi तोह कहा न की …डायलाग मरना गन्दी बात है तोह फिर ..”

मनु “ तोह फिर कुछ नहीं …आप ज्यादा मत सोचो यह काम मेरा है आप बस सेहत बनने पैर धयान दो ..ताकि मेरी अचे से सेवा हो सके ..उम्माह्ह्ह्ह!” मनु ने सुमित्रा कैग ाल पैर किश करते हुए कहा ..

सुमित्रा का मूड भी अब ठीक था ..मनु ने बातों में लगा कर उसका ध्यान रजिनि के टॉपिक से हटा दिया था ..

सुमित्रा “ बीटा अब मुझे कोई टेंशन नहीं चाहे तेरे पापा अब किसी के साथ कुछ भी करें मुझे उसने कोई शिकायत नहीं है ..उन्होंने मुझे तुम दोनों के रूप में मुझे जो दुनिआ की सबसे अनमोल ख़ुशी दी है उसके आगे बाकी सब बेकार है ..और वैसे भी ऐसे औरतों का क्या है …कब तक चलेगा यह सब ..एक महीना ??एक साल या???? या कुछ और साल ??? चलने दे मैं थेइर उनकी बीवी ..आज नहीं तोह कल हु वापस आएंगे hi ..क्युकी फॅमिली का मतलब hi है सभी का साथ ..सो देखते हैं कब तक उनका आशिक़ी का भूत उतरेगा ?? मुझे अब उनकी कोई चिंता नहीं है ..क्युकी मेरा प्यारा बीटा है न ..जिसको मेरी परवाह है ..बचपन से तुम दोनों के लिए जी रही थी ..आगे भी तुम दोनों के लिए जियूँगी ..तू जाने दे ये सब ..मुझे कुछ नहीं चाहिए बस तुम दोनों बेटे मेरे जीने के लिए बहुत हो उनको जो करना है करने दे ..”

मनु “ हाँ मैं भी यही सोच रहा हूँ की उस रजिनि को शायद कोई नया नाम देना पड़ेगा शायद पापा उससे लेकर भाग जाये या ऐसा hi कुछ सो सोच रहा हूँ उसे मैं कहूंगा क्या ?? मतलब मम्मी तोह आप hi हो मेरी तोह उसे कहूंगा क्या नयी छोटी मम्मी कैसा रहेगा ??” मनु ने सुमित्रा को छेड़ते हुए कहा ..

सुमित्रा ने मनु को उसके कंधे पैर मर कर कहा “ मेरा मज़ाक उडाता है ..तू भला उसे छोटी मम्मी कहने के सपने भी देखने लगा ..देख ऐसा मज़ाक ाचा नहीं है ..यह बात मुझे ज़रा भी पसंद नहीं आयी …तू कहकर तोह दिखा उसे कुछ ..” सुमित्रा को गुस्सा आ चूका था

मनु शांति से “ थोड़ी देर पहले तोह आपने hi कहा था न आपको अब कोई टेंशन नहीं है …तोह अचानक से क्या हुआ ..यही समझने के लिए मैंने उसे यहाँ आपके सामने रिश्ते में जोड़ा सोचो जब कुछ देर आप बर्दास्त नहीं कर पायी तोह आगे कैसे बर्दास्त कर लेती ..सो यह एक बीमारी है और इसका इलाज़ अभी जरूरी है ..इसे छोड़ देना मतलब आगे अपने लिए खुद नयी बीमारी त्यार कर देना ..सो मेरा काम मुझे करने दो ज्यादा इमोशनल मत हो इस बात में ..अब पापा का और उसका क्या करना है यह मुझे तय करने दो …क्युकी कब किसे माफ़ करना है और किसे नहीं यह मेरी टेंशन है ..आप बस सुकून से अपनी ज़िन्दगी जीते रहो ..हर घर में कोई एक होता है ..जो शायद सामने से कुछ करने में हिचकता नहीं है ,,,इस घर में यह काम अब से मेरे नाम हो गया है ..पैर एक बात याद रखना आप की दुनिआ में सबसे ज्यादा शायद अपने आप से भी ज्यादा मैं आपसे प्यार करता हूँ ..शायद आप और अजय दुनिआ में मेरे लिए सबसे बढ़कर हैं ..सो आप लोग मेरी कमज़ोरी नहीं मेरी ताकत बनो ..जो मुझे करना है हु करने दो ..आप उसे अभी बर्दास्त नहीं कर प् रही हैं आगे कैसे कर लेंगी यह मैं अचे से जनता हूँ सो मुझे मेरा काम करने दो प्ल्ज़ मम्मी ..”

सुमित्रा समझ गयी मनु का मतलब क्या है …उसके दिल में एक तरफ अपने बेटे को लेकर प्यार था ..वहीँ अब उसके दिल में एक तरफ मनु से ज्यादा रजिनि और राजिंदर की चिंता थी …क्युकी उसे अचे से पता था की मनु आसानी से रजिनि को छोड़ने वाला नहीं है ..अब रजिनि का क्या होगा यह तोह रजिनि और उसकी किस्मत hi जानती है ..

मनु सुमित्रा को सोच में गम देखकर “ मम्मी ी लव ु ..आपके हर ांसो का बदले में उसका क्या हाल होगा यह सब कहकर फालतू में ड्रामा नहीं करूँगा बस आप इतना समझ लो की ..ी लव ु मोरे थें माय सेल्फ ..”

सुमित्रा मुस्कराते हुए “ और पापा को नहीं करता ??”

मनु मुस्कराते हुए “ किसने कहा नहीं करता उसने प्यार ..अरे खूब करता हूँ ..पैर आका यहाँ तराज़ू में पलड़ा भरी है क्युकी अब आप मोती होने लगी हो …hihihihhi”manu भागने लगा ..

सुमित्रा “ाचा मैं मोती हो गयी हूँ रुक अभी बताता हूँ तुझे ..” सुमित्रा अब मनु को मरने भागी उसके पीछे पैर साडी में ज्यादा भाग नहीं पायी ..उसका पेअर फिसला और गिरते हुए मुश्किल से बची ..मनु ने उसे देखा तोह आकर फटाफट उसे अपने हाथों में उठा लिया ..सुमित्रा हैरत से देख रही थी..

झूंठ में मरते हुए “ अभी तोह मोती कह रहा था अब मोती नहीं हूँ मैं ..??”

मनु झूंठ में “ हाँ सही कह रही हो पैर चाहे जैसे भी हो मेरी प्यारी मम्मी हो ..और हाँ आप मोती नहीं हो ..एक दम अप्सरा जैसी हो ..लव ु mummy”..uske बाद मनु ने सुमित्रा को निचे उतारा और दोनों बातें करने लगे आजा सुमित्रा का मैं नहीं था जाने का ..पैर अन्त्य का कॉल आया तोह जाना पड़ा उसे ..

घर सिर्फ अजय आया था ..जो शायद मनु ने सोच रखा था राजिंदर बाइक रिपेयर होते hi वहीँ से निकल गया था …कुछ hi देर में अजय भी निकल गया था अपने स्पोर्ट्स क्लब में ..

बचा था मनु उसे भी जस का कॉल आया जिसने कुछ साइट्स फाइनल कर लिए थे ..तोह मनु ने भी उसे कहा की हु जैसे चाहे वैसे कर सकती है ..क्युकी जस और गुरुभाई वहां के सबसे भरोसे मंद इंसान थे ..सो जस ने भी कहा की आप एक बार देख लेना तोह मनु ने कहा की ठीक है हु जैसे hi टाइम मिलेगा हु देख लेगा ..

अब मनु का कॉल कट हुआ तोह पाया की रजिनि को देखा जाए ..मनु चल दिया रजिनि के घर की तरफ पैर रस्ते में hi कॉल आया आज बाबा ने उसे अपने ऑफिस में बुलाया था वहां कुछ काम था ..मनु वापस घर की तरफ गया और अपनी बाइक लेकर चल पड़ा बाबा के पास ..

मनु कुछ देर में hi बाबा के सामने था ..बाबा के पास जाकर मनु ने अपनी आदत के हिसाब से उनके पेअर छुए और उनसे उनका हाल पूछा ..

बाबा आज कुछ परेशां से थे ..पैर कुछ कह नहीं रहे थे ..उनके बेटे भी वहीँ थे जो कुछ अलग सा बेहवे कर रहे थे ..मनु को कुछ गड़बड़ लगी वहां ..पैर बिना पता लगये रियेक्ट करना सही नहीं था ..सो बाबा की बातें सनटैन रहा मनु …

बाबा मनु को कहने लगे थे की उनका माल अब delhi,Mumbai,kolkatta ,और चेन्नई तक जाने लगा था ..मतलब उनका डिस्ट्रीब्यूशन का काम अब बाद रहा था ..तोह इसका मतलब तोह ख़ुशी का होना चाहिए था पैर बाबा आज परेशान थे उनका चेहरा बता रहा था की कुछ छुपा रहे थे बाबा मनु ने अपने दिमाग में सोचा की बात क्या है तोह उसे लगा वजह तोह कुछ है जो बाबा उससे छुपा रहे हैं सामने से पैर वजह क्या है शायद कोई कम्पटीशन हो पैर मार्किट में बाबा शुरू से hi ऐसे माहोल के आदि रहे the..toh वजह क्या थी ?? जिसकी वजह से बाबा जैसे इंसान परेशां थे बाबा ने कुछ देर मनु से बात की और किसी काम से वहां से चले गए ..तोह मनु ने रुख किया घर के सबसे पुराने नौकर की और ..

जिसका नाम था हरी जो शुरू से बाबा के यहाँ काम करता आया था ..मनु के पैदा होने से भी पहले से हु बाबा के यहाँ था ..मनु उसे प्यार से हरी काका कहता था ..मनु उसके पास गया और उसके पेअर छुए क्युकी आगे में हरी काका मनु से बड़े थे …हरी काका मनु को देखकर बहुत खुश हुए ..उन्होंने भी मनु का हाल चल पूछा और कुछ देर ऐसे hi दोनों एक दूसरे से बातें करते रहे पैर मनु ने आखिर में पूछ hi लिया की वजह क्या है जिसकी वजह से बाबा टेंशन में हैं ..तोह हरी ने जो कहा उसे सुनकर मनु चौंक गया …वजह hi कुछ ऐसी थी की किसी गुंडे टाइप के आदमी ने बाबा को उनके ऑफिस में आकर धमकी दी थी की हु बाबा को जान से मार देगा उस टाइम उनके दोनों बेटे वहीँ थे उन्होंने उस गुंडे से लड़ने की कोशिश भी की थी ..पैर उसके आगे दोनों कमज़ोर साबित हुए थे ..उस गुंडे ने कह दिया था की हु दो दिन बाद फिर आएगा और बाबा को सारे मार्किट के सामने जान से मार डालेगा..

बाबा ने पुलिस में कम्प्लेन करने की कोशिश भी किट ओह उन्होंने बाबा को hi समझया था की हु उस गुंडे से दूर रहे और उसकी पहुंचा उप्पेर तक है उसका कनेक्शन शायद लम्बा था जिसके आगे पुलिस भी बाबा का साथ नहीं दे पायेगी …और आज एक दिन बिट गया था ..बाबा अपने से आज मिलकर आखिरी बार देखना चाहते थे …तोह मनु समझ गया की बाबा क्यों इतने परेशां हैं ??

हरी ने बताया की बाबा के छोटे बेटे को उसका पता हु देकर गया था …मनु ने उसके बाद एक लम्बी सांस ली ..और हरी काका के पेअर चुकार वापस चला आया ..

मनु अब बाबा के बेटों के सामने था मनु उनको चाचा कहता था ,,,सो दोनों के पेअर मनु ने छुए और उनसे उनके हाल चाल पूछे ..मनु से दोनों ने नोर्मल्ली बात की …उन्होंने मनु को ज़रा भी एहसास नहीं होने दिया की किसी परेशानी से वह और उनका परिवार जूझ रहा है …मनु भी उस वजह को जनता था ..मनु ने छोटे चाचा को कहा “ चाचा जी आपकी गाडी कहाँ है आज उसे चलने का मैं है क्या चला सकता हूँ ??”

छोटे चाचा “ अरे पगले मैंने कब मन किया है कार तुझसे बढ़कर है क्या ??? आ चल साथ में hi आज चलते हैं तू आराम से जी भर कर चला लेना ..” चाचा ने चाबी निकलते हुए कहा ..

छोटे चाचा के कार एक खुली जीप थी आर्मी स्टाइल जिसको छोटे चाचू ने बड़े तरीके से मॉडिफाइड करवाया हुआ था ..उसकी बड़ी लाठर की काली सीट, और आर्मी कलर और उसके बड़े बॉडी से बहार निकले हुए ट्रेक्टर टाइप टायर बड़े मस्त लगते थे मनु को हु अक्सर उसे देखकर चलने के लिए सोचा करता था ..पैर कभी उसने कहा नहीं था पैर जैसे हु उस कार को देखता था …छोटे चाचू अचे से समझते थे की मनु को हु जीप कितनी पसंद है …

सो थोड़ी देर बाद hi मनु ड्राइविंग सीट पैर और छोटे चाचू ड्राइवर के साथ की सीट पैर बैठे कार चला रहे थे …मनु की नज़र सामने रोड पैर थी …छोटे चाचू भी उसके साथ खुश बैठे हुए थे ..

मनु सामने देखते हुए” चाचू मुझे यकीं था की मैं आपका अपना hi हूँ पैर आपसे मुझे यह उम्मीद नहीं थी की इतनी बड़ी बात हो जाने के बाद भी आप मुझे इसकी भनक तक नहीं लगने देंगे ..क्या मैं सुच में इतना गैर हूँ आपके लिए ???”

छोटे चाचू समझ चुके थे मनु का मतलब क्या है ..उनको समझ आ चूका था शायद हरी ने सब बता दिया था मनु को क्युकी उनके फॅमिली के बाद और सिर्फ हरी hi था जो यह जनता था की बाबा और उस गुंडे में क्या बात हुई थी ..छोटे चाचू ने लम्बी सी साँस ली और कहा “ बीटा जब तुम्हे पता चला होगा तोह यह भी अचे से पता होगा की तुम्हारे बाबा जो शायद खुद यह नहीं चाहते थे की तुमको यह सब पता चले …इसमें सुच में हमारी गलती नहीं है …इस कार को जिसे मैंने कितने चाव से बनवाया था ..जिस अभी तुम चला रहे हो ..जिसे अपने आलावा में मैकेनिक को भी नहीं चलने देता ..उसके बाद भी तुमको लगता है की मैं तुमको गैर मंटा हूँ ..नहीं मनु बीटा ऐसा नहीं है ..पापा ने मन किया था की तुमको यह सब पता चले हु तुमको इन सब से दूर रखना चाहते थे ..ी म सॉरी बीटा मैं पापा की बात नहीं ताल सकता था ..”

मनु गाडी रोक कर साइड लगा देता है “ चाचू आप सॉरी न कहो पैर यह भी सोचकर देखो की मुझपर क्या बीती होगी जब किसी ने मेरे बाबा को सामने से कुछ कहा होगा और आपको और बड़े चाचा को कुछ कहा होगा …एक बार बस एक बार मेरी साइड भी सोचकर देख लो ??”

छोटे चाचू “ हाँ बीटा तुम्हारी बात सही है पैर अब कर क्या सकते हैं ..जब पुलिस भी हाथ काढ़े कर दे तब aam-insaan करे तोह क्या ???”

मनु शांत भाव में “ self-defence सुना होगा न आपने ??”

छोटे चाचू “ हाँ बीटा सुना है पैर उसका यहाँ क्या काम ??”

मनु “ टाइम आने पैर पता चल जायेगा ..ाचा उसका एड्रेस उसने आपको दिया है न ????”

छोटे चाचू “ हाँ दिया है ..पैर तुम कहीं लड़ने का तोह नहीं सोच रहे हो न ..??”

मनु “ नहीं चाचू मैं कहाँ भला कुछ कर सकता हूँ ..बस उससे एक बार बात करना चाहता हूँ चलिए नए क बार प्ल्ज़ मेरी खातिर ..”

छोटे चाचू का दिल हिल चूका था उनके हाथ अपने आपन उनके गाल पैर चला गया था ..शायद उस गुंडे ने उनके गाल पैर मारा हो ..

चाचू मनु की बात ताल नहीं पाए और उन्होंने एड्रेस बता दिया और मनु ने जीप की रेस बढ़ा दी ..थोड़ी देर में hi दोनों उस गुंडे के बड़े से घर के सामने थे जहाँ बहार कुछ गुंडे टाइप के लोग रस्ते के बहार खड़े थे ..

मनु ने चाचू को देखा और उनसे ड्राइविंग सीट पैर बैठने को कहा ..चाचू वहीँ रुक गए सामने खड़े गुंडे चाचू को देखकर हंस रहे थे चाचू भी शर्मिंदे से होकर सर निचे करके वहां उस खुली जीप के ड्राइविंग सीट पैर बैठे हुए थे..

मनु वहां गया और उसने पूछा की हु गुंडा कहाँ है तोह उन्होंने मनु को कहा की अंदर hi है ..तोह मनु ने अंदर जाना चाहा तोह उन्होंने उसे रोक दिया ..मनु को ढाका मरने लगे मनु थोड़ा सा पीछे गया और पीछे जाकर तेज़ी से उसने एक जम्प लिया और दोनों के सीने पैर उसने अपने दोनों घुटने के साथ जबरदस्त वार किया …दोनों गुंडे ज़ोर से निचे गिर चुके थे …दोनों गुंडों को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी चिलाना चाहते थे पैर चीला नहीं पा रहे थे ..वहां का एरिया भी बड़ा शांत सा था ..शायद कोई हाई टाइप एरिया था जिसके आस पास मोस्टली farm-house लोगों ने अपने सुकून के लिए बना रहे थे ..और इतना मेहगा एरिया होने के बाद भी घरों के बहार एक कक्तव नहीं था …जो थे सो गलियों के मैं एंट्रेंस पैर थे पैर यह घर लास्ट में था सो कक्तव में आने का सवाल hi नहीं बनता शायद गुंडा खुद नहीं छठा था की उसका लोकेशन मॉनिटर किया जाए ,,या कोई और वजह हो पैर यहाँ यह बात मनु के फवौर में थी ..

मनु ने उसके गिरते hi बड़ी बेदर्दी से उनकी गर्दनो को तोड़ डाला ..दोनों गुंडे ठीक से चिल्ला भी नहीं पाए और दुनिआ से रुखसत हो चुके थे ..मनु ने पीछे देखा पलटकर …पीछे छोटे चाचू के पसीने छूट चुके थे अगर चाबी मनु के पास नहीं होती तोह हो सकता है शायद डर के मारे हु यहाँ से गायब भी हो जाते ..

मनु ने एक बार उनको देखा और शांत रहने को कहा …और अंडर गेट को जम्प करके चला गया …अंदर घर के कुछ म्यूजिक सा चल रहा था मनु ने देखा मोस्टली घर शीशे से बना है ..सो उसने एक विंडो के अंदर देखने की कोशिश की ..उसने अचे से देखा की घर में कोई कक्तव तोह नहीं है पैर वहां wall-mount तोह थे कक्तव के पैर कक्तव नहीं ..मनु ने देखा तोह अंडर कोई 3 बन्दे और थे तीनो मस्ती से सोफे पैर शराब और म्यूजिक का मज़्ज़ा ले रहे थे ..मनु घर के पीछे की तरफ गया ..घर कोई एक मंजिला था जिसमे निचे कुछ कमरे बने थे पीछे की तरफ किचन था ..और शायद उप्पेर एक या दो रूम बने हुए थे ..मनु पीछे गया तोह पाया की किचन का दूर भी शीशे का है सो मनु ने सोचा की इसे तोडे या नहीं क्युकी सामने तीन गुंडे पहले hi थे और अगर हु कोई आवाज़ करे तोह हो सकता है हु भी त्यार हो जाएँ ,,बहार आलरेडी दो का काम हो चूका था .. उसने देखा तोह पाया की पीछे से भी एक लोहे की राउंड सी सीधी थी जिससे उप्पेर जाया जा सकता था ..

मनु उसी सीधी से उप्पेर चल दिया .उसका सोचना था की शायद उप्पेर से कोई रास्ता अंडर जाने को मिले ..सो उप्पेर जब गया तोह पाया उप्पेर बालकनी में सब ओपन है उससे सत्ता हुआ था पहला रूम और पहला रूम जो उस घर में था खुला हुआ था उसके साथ वाले रूम से कुछ टीवी चलने की आवाज़ आ रही थी ..मनु ने सेफ्टी से दूर के के होल से देखा तोह कोई लम्बा तगड़ा गुंडा टाइप बाँदा वहां टेबल पैर कोकीन की लाइन को बारी बारी सूंघ रहा था …ड्रग्स मनु ने इससे पहले सिर्फ सुनी थी पैर सामने से पहली बार देख रहा था ..वह गुंडा उसे सूंघ कर लम्बी सी सांस लेता और कुछ देर रूककर फिर एक और लाइन बना देता और उसे भी सूंघने लगता था ,,,कोकीन कोई आम ड्रग नहीं है उसकी कीमत अछि खासी होती है …और उस गुंडे का इतना आराम से उससे सूंघना बता रहा था .की हु ऐसा पहली बार नहीं कर रहा है ..मतलब उसका कनेक्शन पक्का बड़े लोगों से है ..

मनु ने उसे देखकर कुछ सोचा और वहीँ रस्ते से निचे किचन की और चल diya..manu आराम से वहां गया और किचन में कुछ किया और चल दिया वापस उप्पेर ..

मनु ने गेट को नॉक किया ..तोह उस गुंडे ने उसे खोला गुंडा ाचा खासा तगड़ा था ..उसके बाल कुछ सफ़ेद से थे और उसके चेहरे का हाल बता रहा था की हु शायद कई बार आमने और सामने की लड़ाई कर चूका था ..मनु को देखकर उसने पूछा “ अबे कोण है तू और घर के अंदर कैसे आया हु भी अकेला ..”

मनु “ भाई हु कुछ काम था इस लिए बहार पूछा तोह उन्होंने अंदर भेज दिया ..पैर लगता है आपको 5 करोड़ में दिलचस्पी नहीं है ..ठीक है चलता हूँ आप आराम करो किसी और से काम करवा लूँगा बस 10 मिनट का hi काम था पैर लगता है आप बिजी हैं ..सॉरी भाई ..” मनु पलटा और चलने लगा ..

गुंडा 5 करोड़ का नाम सुनकर ललचा चूका था उस पैर मनु का काम उसने hi कहा था की 10 मिनट का है ..ऐसे मौके को छोड़ना किसे पसंद होगा भला ..

गुंडा “ ोये रुक लड़के वापस आया शायद तू गलत समझ रहा है ..आ अंदर चल और बता की बात क्या है और काम कैसा है ??”

मनु वापस आया और अंदर चलने लगा गुंडा गुमा और अंदर को चलने को हुआ तोह मनु ने एक ज़ोरदार वार किया एक रोड से उस गुंडे के सर पैर ..गुंडा खून बहने से और वार के ज़ोर से बेहोश हो चूका था ..मनु अंदर आया तोह देखा वहां बहुत सा पैसा और कोकीन पड़ी हुई थी ..मनु ने पैसा समेटा और एक चादर जो वहां अलमारी में थी उसमे बंधा और एक गठरी बनाई और बालकनी से निचे फेंका उस गठरी को और उस गुंडे के मुँह में कपडा ठूंसा और उसके सर पैर कुछ कपडा बंधा ताकि उसका खून रुक जाये और एक और बड़ी दी चादर में उसने उस गुंडे को बंधा और अपने कंधे पैर उठा लिया ..और उसी सीधी से निचे उतर आया ..और उस बार पीछे के रस्ते वाली दिवार फंड गया ..पैर उससे पहले उसने पैसों से भरी गठरी को बहार फेंक दिया और उस पार शायद दूसरी गली का रोड था जेस्पर ज्यादा आना जाना नहीं होता होगा ..वहां से एक हाथ में गठरी और दुरसरे कंधे पैर उस चादर में लपेटे हुए गुंडे को जिसको उसने कवर कर दिया था उसे लिए वापस चाचू के पास आगया ..और दोनों को पैसे से भरी गठरी और उस चादर में लिपटे हुए गुंडे को पीछे कार में दाल दिया और चाचू को साइड होने को कहा चाचू के पसीने बता रहे थे की सामने उन दोनों मरे हुए गुंडों की लाशों जिनको मनु ने जाने से पहले मारा था ..उनकी खुली आँखें देखकर चाचू का हाल पतला है ..पैर मनु नार्मल था ..

मनु ने गाडी स्टार्ट की और थोड़ी hi दुरी पैर कार वहां से गयी होगी की उसी घर में एक बड़ा सा ब्लास्ट हुआ जिसमे सब कुछ तहस नहस हो चूका था ..जिसको देखकर चाचू की आवाज़ निकालनी बंद सी हो चुकी थी ..

मनु से चाचू ने रस्ते में एक शब्द भी नहीं कहा …थोड़ी hi देर में दोनों बाबा के ऑफिस पहुंचने वाले थे ..की मनु ने कार रोक दी ..और चाचू से कहा “ क्या हुआ चाचू क्या मैंने कुछ गलत किया ??”

छोटे चाचू जो अभी तक सहमे बैठे थे उनकी हिम्मत जवाब दे चुकी थी ..” मनु तुम हो क्या दो लोगों को तुमने जान से मार दिया और ऐसे आराम से बैठे हो जैसे कुछ हुआ hi नहीं ..तुम सुच में इंसान hi हो न ???तुम में दया जैसी चीज़ नहीं है क्या ??”

मनु “ चाचू मैं भी इंसान हूँ पैर थोड़ा अलग हूँ मुझ में भी दया है यह सब करके मुझे मज़ा नहीं आया है…”

चाचू “ पैर तुम्हे देखकर लगता तोह नहीं है की तुमको कुछ हुआ है ..”

मनु शांति से “ चाचू आपसे कहा न मैं भी इंसान हूँ ..पैर अलग हूँ क्युकी गलत देखना मेरे बस से बहार है ..और दया और प्यार मुझमे भी है ..पैर हर इंसान का अपना तरीका होता है उसे दिखने का ..आपकी नज़र में जो सही है जरूरी तोह नहीं किसी और की नज़र में हु भी सही hi हो ???”

चाचू “ मतलब तुम यह कहना चाहते हो की तूने उन लोगों को मार्कर गलती नहीं की ..??”

मनु “ आप जैसे चाहो समझ सकते हो मुझे सफाई में कुछ नहीं कहना है बस इतना समझ लो आप सब मेरी फॅमिली हो और जहाँ मेरी फॅमिली पैर कोई सोचेगा वहां मैं अपने आप सामने आ जाऊंगा और जो उस टाइम सही लगेगा हु करूँगा..”

चाचू “ मतलब किसी को जान से मार देना सही है इससे क्या तुम्हारा गुनाह काम हो जायेगा ??”

मनु “ मतलब किसीको अगर फांसी की सजा हो तोह उसे अपने कामो को देखने की जगह जल्लाद से लड़ना चाहिए की हु उसे मरना क्यों चाहता है …क्या इसमें उस जल्लाद की गलती है जो सिर्फ अपना काम कर रहा है ..चाचू जब कानून ने उसको सजा में फांसी दी है तोह उसमे जल्लाद का क्या कसूर (कसूर अपने आयुष भाई की स्टोरी है अपने को मस्त लगती है ) क्या जल्लाद को सारा ब्लैम देना सही है ??? उस बन्दे की गलती नहीं जिसने गलत काम किये हैं जिसकी वजह से हु आज फांसी के तख्ते पैर है ??”

चाचू “ मतलब तुम जल्लाद हो जो किसी को भी जान से मार डोज ??”

मनु “ सॉरी चाचू अभी आपका मूड सही नहीं है आप जब शांत मैं से सोचोगे तब आपको सही लगेगा ..”

मनु ने कार स्टार्ट कर दी और मैं मार्किट के चौक पैर आ चूका था मैं मार्किट के सामने उसने कार रोक दी और उसने चाचू को कहा की हु बाबा को यहाँ ले आएं ..चाचू ने अब मनु से कोई बात नहीं की और बाबा को जाकर कहा की मनु मैं मार्किट में जहाँ कभी -कभी स्टेज लगा होता है वहां आपको बुला रहा है ..

बाबा ने सुना तोह हु चले आये पीछे हरी काका और बड़े चाचा और छोटे चाचू भी आ चुके थे स्टेज के चबूतरे पैर मनु ने उस चादर समेत उस गुंडे को रख दिया कार से निकल कर …

बाबा ने पूछा भी की मनु ने उन्हें यहाँ क्यों बुलाया है ..तोह मनु ने उनको रुकने को कहा ..

मनु ने पास के सब्ज़ी बिकने वाले से थोड़ा पानी की बोत्तल ली और उस चादर में से बेहोश पड़े उस गुंडे को निकल लिया ..जिसे देखकर बाबा और बड़े चाचा हैरान थे ..की मनु इतने बदनामी गुंडे को यहाँ अकेले कैसे ले आया है ..

मोस्टली लोग उस गुंडे को जानते थे सो सभी तमाशा के नाम पैर रुक चुके थे ..यह दुनिआ की गन्दी आदत है की अगर किसीकी मदद की बारी हो तोह सामने से मदद कोई करता नहीं है पैर तमाशे के नाम पैर लू गरम से जमा हो जाते हैं ..उस पैर दुःख की बात यह जालिम टेक्नोलॉजी जिसके लिए लोग वीडियो ऐसे बनाना लगते हैं जैसे सभी प्रोफेशनल फोटोग्राफर हों ???

यहाँ भी यही होने लगा कुछ लोग तोह लाइव के लिए त्यार होने लगे …पैर मनु ने उस गुंडे के घर से आते हुए पिस्तौल ले ली थी ….उसे हवा में फायर किया …….ठननंत्र! अब गन की आवाज़ ऐसी hi थी …

सबके हाथ वहीँ रुक गए ..

मनु ज़ोर से “ प्ल्ज़ ऐसे मज़्ज़ा नहीं आने वाला यह शूटिंग नहीं है जिसका कैमरा चला उसे इससे (पिस्तौल) थोड़ी सी बात करनी होगी …और यह आज मेरे बाबा के साथ हुआ है कल आपके साथ भी हो सकता है ..सो थोड़ा ध्यान दो ..प्लीज ..”मनु ने समझते हुए कहा ताकि लोग कैमरा रोक दें ..शायद मुँह से कहने से ाचा गन की आवाज़ का असर हुआ था वहां ..

मनु ने उसके बाद आगे बढ़कर उस गुंडे के हाथ पाँव खोले हु साला अभी तक बेहोश पड़ा था …साला गन की आवाज़ से भी नहीं जगा था …मनु ने उस बोत्तल का पानी उसपर दाल दिया …

पानी पड़ते hi उठ गया सामने मनु को देखते hi बोलै अपना सर पकड़ कर “ साले टूट ओह 5 करोड़ की बात कर रहा था ..पैर तूने तोह मुझे ..अरे यह कहाँ हूँ मैं अबे यह बुद्धा भी यहीं है रुक जा मैं बताता हूँ तुझे …और साले तेरी अगर गांड नहीं मारी तोह मैं ????”

हु मनु पैर झपटने वाला hi था …पैर मनु ने सामने से उसपर हु पिस्तौल तान दी …कदम जहाँ थे वहीँ रुक गए …

गुंडा “ अबे भाई क्या इतने में भी तेरा मैं नहीं भरा है ..साला सर तोह फोड hi चूका है ..अब करना क्या चाहता है ..???”

मनु “ सॉरी पैर आदत से मज़बूर हूँ …कपडे उत्तर दो ..एंड ुर टाइम स्टार्ट नाउ ..”

गुंडा “ अबे मरना है तोह मार दाल पैर कपडे नहीं उतरने वाला मैं “

मनु ने आगे बढ़कर हवा में फायर किया और पिस्तौल को उसके गले से लगा दिया गरम नाल उसके चामिड़ को झुलसा चुकी थी …उसकी चीखें सुनाई दे रही थी …पैर मनु हिला तक नहीं ..उसने ज़रा भी रेहम नहीं किया उसपर ..

मनु वहीँ सब्ज़ी वाले से चाक़ू की तरफ इशारा करके “ भैया ज़रा चाक़ू देना पिस्तौल में मज़ा नहीं है ..यह मोती चामिड़ का है थोड़ा इसको छीलना पड़ेगा ..अपना चाक़ू देना ज़रा ”

उस सब्ज़ी वाले ने देख hi लिया था …की मनु रेहम नहीं कर रहा है उसने देर नहीं लगाई …तुरंत चाक़ू हवा में मनु की तरफ फेंका …पैर यह क्या उस गुंडे ने हवा में hi उसे लपक लिया उस चाक़ू को …

और जम्प लेकर हु किसको पकड़ चूका था यह थे सबसे आगे खड़े छोटे चाचू उसका चाक़ू अब छोटे चाचू के गले पैर लगा हुआ था …

गुंडा “ हाहाहाहा !!! अगर किसी ने हिलने की कोशिश की तोह “ मनु बोल पड़ा

मनु “ हाँ पता है यह सन हर मूवी में देखा है कुछ नया हो तोह मज़ा आये …” मनु आगे बढ़ने लगा …अब सभी की साँसे थम सी गयी थी …मनु आगे बढ़ने लगा अपने हाथ की पिस्तौल उसने अब भी उस पैर सामने से तान राखी थी पैर आगे बाद रहा था ..

गुंडा उससे कुछ बोलता बाबा बोले “ अरे बीटा यह क्या पागलपन है देख नहीं रहे हो की तुम्हरे छोटे चाचा के गले पैर उसका चाक़ू लगा रखा है ..”

मनु ने बाबा को देखा और एक चुपके से साइड में चेहरा करके आँख दबा दी …बाबा समझ गए कुछ न कुछ है जो मनु ने सोच रखा है .पैर बात सामने खुद के बेटे पैर थी ..

छोटे चाचू “ रुक जाओ मनु देख नहीं रहे हो यह मुझे मार देलेगा ..रुक जाओ “

मनु “ चाचू थोड़ी देर पहले hi तोह आपने दया की बातें की थी ..भूल गए क्या ?? अब कहिये की ऐसे लोग सुच में दया के लायक हैं आप कहो तोह चला जॉन वापस ??? पैर तब तक यह चाक़ू लिए अपना काम कर चूका होगा क्यों (गुंडे की तरफ उससे मनु ने पूछा )..सही हूँ न मैं”

गुंडा डर चूका था क्युकी मनु के चेहरे पैर ज़रा भी शिकन नहीं थी ..

गुंडा “ अबे साले तू हैं कोण लाइफ में पहली बार देखा है कोई किसी अपने को चाक़ू की नोक पैर देखकर भी नहीं दर रहा है ..देख में कह रहा हूँ पीछे चला जा ..वर्ण “

मनु “ हाँ जनता हूँ की अगर मैंने तेरी बात नहीं मानी तोह फलाना ढिमका …अबे सुन एक बात धियान से सुन यह मेरे चाचा हैं अब मेरे दो चाचा हैं एक को कुछ हुआ भी तोह सामने से तुझे दुनिआ का सबसे बड़ा जेहनाम दिखा दूंगा ..पैर मरने से ज्यादा तड़पा कर तेरी हु हालत करूँगा की तू खुद को डर के मारे खुद hi मार लेगा और यह बात चाचू से पूछ कर देख ले ???”

चाचू डरे हुए “ अरे भाई यह पागल हैं तुमको पता नहीं इसने तुम्हारे गेट के बहार कैद वो आदमियूं को 5 सेकंड में जान से मार दिया और उनकी आँखें तक बंद नहीं की इसने इससे रेहम की उम्मीद मत करना यह पूरा जल्लाद है शायद जल्लाद रेहम कर ले पैर यह नहीं करने वाला ..मेरा पता नहीं बचूंगा या नहीं पैर यह पक्का है तुमको यह यहाँ से ऐसे hi जाने नहीं देगा जो इंसान तुमको तुम्हारे घर से ऐसे उठा ला सकता है सोच कर देखो हु तुमको जाने देगा ???”

गुंडे की यह बात सुनकर पूरी तरह फट चुकी थी …भीड़ और बाबा और बड़े चाचा सांस रोके सामने का मंज़र देख रहे थे …उनका दिल गले में अटक चूका था ..

मनु रुका नहीं पैर गुंडा अब डर चूका था ..मनु आराम से आगे आया ..और उसने गुंडे के हाथ को थाम लिया जिसमे चाक़ू था …गुंडा ाचा खासा तगड़ा था पैर सामने से मनु के बारे में सुनकर और उसकी हिम्मत और जिगर देखकर उसके पेअर कांप रहे थे …

मनु ने कास कर उसका चाकू वाला हाथ थाम लिया था उसकी पकड़ बड़ी कासी हुई थी ..गुंडे का हाथ हिल नहीं पा रहा था …हु तोह पुराण छठा हुआ गुंडा था वर्ण ऐसे में उसका मुट्ठ निकल भी जाता तोह कोई बड़ी बात नहीं थी …इतनी भीड़ में मनु ने उसकी गुंडागर्दी का भूत उतार दिया था ..

मनु ने छोटे चाचा को उसके हाथ से निकल दिया छोटे चाचा बाबा के साथ थे …मनु ने उसके हाथ को पकड़ा और उसको अचे से दबाना शुरू कर दिया …मनु के हाथ पहले से hi अपने ओल्ड एक्टर धर्मेंद्र पाजी से मिलते थे …बोले तोह उसकी उँगलियाँ hi काफी तगड़ी और मोती थी ..मनु के हाथ का झापड़ पड़ना मतलब कान से शायद संननननन की आवाज़ का मज़्ज़ा लेना अगर बाँदा कमज़ोर हुआ तोह शयद कान का पार्द hi फट जाये ..

मनु का हाथ कसने लगा उसके हाथ का खून रुका हुआ सा महसूस होने लगा था …भीड़ अभी तक मुँह बहे तमाशे में शरीक थी ..जब लाइव फाइट सन मिले तोह मज़्ज़ा और hi होता है ..

मनु के हाथ कसने से उसके हाथ से चाक़ू छूटने को हुआ तोह मनु ने उसे घिरने से पहले पकड़ लिया …आप कहोगे दूसरा हाथ गांड तोह नहीं दबा हुआ था उसके …तोह मनु ने उसके मुँह से जस्ट कुछ दुरी पैर hi पिस्तौल लगा राखहि थी ..साला पिस्तौल और मनु की ताकत के आगे खुद भुला हुआ था की उसका दूसरा हाथ खाली है ..

मनु ने चाक़ू हाथ में लिया hi था ..पीछे से पुलिस आ चुकी थी …पता नहीं किसकी गांड में खुजली थी की ऐसे में जब मनु कुछ करता पुलिस को बुला लिया था किसी ने ..अब क्युकी मामला मार्किट का तहत ओह खुद शो साथ में आया था ..उसने जैसे hi उस गुंडे को देखा उसने पुलिस को वहीँ रोक लिया ..

सी जो नया भर्ती हुआ था ..” सर आप देख नहीं रहे यहाँ इतना माहोल खराब है और आप रुकने को बोल रहे हैं ???”

शो “ पहली बात यह कोई आम गुंडा नहीं है …दूसरी बात यार कभी तोह पब्लिक का भी भला सोच लिया करो ..लड़का जो भी सही जिगर वाला है जहाँ इतने लोग तमाशा देख रहे हैं वहां हमे थोड़ी देर देख लेंगे ..तुम अपना मुँह थोड़ी देर off-duty कर लो …”

शो को मनु देख चूका था ..शो ने मनु को आगे काम करने का इशारा किया ..अब पता नहीं उस शो को उस गुंडे से क्या दुश्मनी थी की उसे बचने की जगह मनु को इशारा कर रहा था ..

मनु सेकंड भर का उसके बाद वेट नहीं किया और उसके उस हाथ को जिसको उसने पकड़ा हुआ था ..उसे घुमा दिया खाट! की आवाज़ हुई और हाथ टूट गया ..पैर मनु नहीं रुका उसने ोप्पसीते डायरेक्शन में खोनी मारी और उसके टूटे हुए हाथ को अब खोनी से तोड़ डाला ..पहले मनु ने उसका हाथ कंधे से तोडा था ..मनु ने उसके बाद उसकी उसी टूटे हाथ की कलाई को पकड़ कर उल्टा किया और उसके जोड़ से काटत! की आवाज़ के साथ हाथ लटक चूका था …उस गुंडे का हाल चिल्ला चिल्ला कर बुरा हो चूका था …

गुंडा “ आह्ह्ह्हह्ह!! मार डाला कमीने ने शो से सर मुझे अंदर दाल दो मैं किसी भी जुर्म को कुबूल करने को त्यार हूँ आप मुझे इस जल्लाद से बचा लो सर प्ल्ज़ आपका एहसान मानुगा ..”

शो “ सॉरी अभी हम रस्ते में hi हैं …आज पुलिस को कितना ट्रैफिक मिल रहा है उफ़ क्या होगा इस जगह का ??”

गुंडा समझ चूका था शो से उसको मदद नहीं मिलने वाली …मनु ने उसके बाद उसके घुटने पैर अपने राइट पेअर से सामने से जोर से वार किया और उसका पेअर उल्टा टूट चूका था …

गुंडे का गाला दर्द और मनु की बेरहमी से फटने लगा था ..मनु का उस गुंडे का हाल करते देख कई लोग बेहोश हो चुके थे …और कई लोग हैरत से भरे मनु को देख रहे थे ..जिनमे बाबा और दोनों चाचा शामिल थे …छोटे चाचू तोह पहले hi देख चुके थे ..सो उनके लिए यह बड़ी बात नहीं थी …पैर बाबा और बड़े चाचा पहली बार मनु को ऐसे सामने से देख रहे थे ..उसमे हैरत की बात तोह यह थी की मनु की चेहरे पैर गुस्सा जैसा कुछ नहीं था ..शांति से बेदर्द मनु उस गुंडे को आराम से चिल्लाता हुआ देख रहा था ..

सी ताव में आ चूका था “ सर देखिये न यह लड़का किस हद तक जा चूका है ??आप कुछ कीजिये नहीं तोह यह सरे आम उसे जान से मार देगा “

शो “ पता है हु गुंडा है कोण इस पैर 22 मर्डर 36 रपे और ह्यूमन ट्रैफिकिंग के साथ हर हु मामला दर्ज़ है जिसको दुनिआ में ाचा नहीं मन जाता ..अगर एक गन्दा कीड़ा मर भी गया तोह क्या होगा वैसे भी तोह हमारे हाथ उप्पेर के लोग बांध देते हैं ..आज जो हो रहा है होने दो ..ाचा है काम से काम यहाँ के बाकी गंदे लोग तोह समझ जायेंगे की जब आम इंसान की सटक जाती है तोह ऐसे लोगों से ज्यादा पावरफुल होता है ..वैसे मानना पड़ेगा लड़के में दम तोह है ..लगता भी हीरो टाइप है ..?? क्यों भाई चौबे जी क्या कहते हो लड़का है न सही मायने में हीरो मार्टिकल ???”शो का चौबे जी का चोली दमन का साथ था ..चौबे जी कैसे इंकार कर देते साहिब का प्रमोशन का सवाल था भाई ..

चौबे जी “ हाँ सर आप सही कह रहे हैं लड़का हु क्या कहते हैं गांव में तूफानी है ..पूरा उस पैर लड़के को देखा तोह सामने से ह्रितिक और साइड से सनी देओल और हाथों से धर्मेंद्र पाजी की याद आ गयी सर उस पैर फाइट तोह लड़का पूरा धांसू करे hai…sir जी हम तोह लड़के के फैन हो गए …एक आपके फैन हैं उसके बाद आज आपके बाद पहला कोई नज़र अयाह ै जिसको देखा तोह आप की जवानी के दिन याद आ गए “

चौबे जी “ सी सर अभी आप नए आये हैं थोड़ा यहाँ सर जी के एक्सपीरियंस से सिखये उसके बाद सारा इलाका आपका hi तोह है क्यों सर जी हीहीहीहीहीह”

सी “ सर मुझे समझ नहीं आ रहा किआ आप उस लड़के को रोक क्यों नहीं रहे हैं ??”

शो “ टाइम आने दो जवाब देंगे आपको इस बात का अरे भाई अभी मज़ा लेने दो उस हाराम्खोर की चीखों का ..”

मनु उधर उसका छिलने से छोटे चाचू को देखता है …छोटे चाचू शर्म से सर झुका लेते हैं ..

मनु उसके बाद उसकी गीली जबान देखता है जो छिलने से लार टपकते हुए बहार निकल आयी थी उस पैर मनु एक ज़ोरदार हुक पंच देता है ..उसकी निकली ज़बान उस पंच से ज़मीं पैर उसी के डेंटन के बिच फंसकर काट कर निचे पड़ी हिल रही थी क्युकी अभी उसमे जान बाकी थी ..उसके बाद मनु वहां से उसे छोड़ देता है क्युकी हु उठने की हालत में नहीं था ..और पुलिस की तरफ जाने लगता है ..

बाबा रस्ते में “ बीटा तुमने ऐसा काम क्यों किया अरे मैं तोह ??”

मनु ने उनके पेअर छुए “ बाबा आपको दादा मन है कोई भी मेरे दादा और चाचा को कुछ करे मतलब मेरी फॅमिली को कुछ हो ..और मैं उसे आसानी से जाने दूँ यह मुझे मंजूर नहीं ाचा चलता हूँ ..पुलिस का काम भी अभी बाकी है “

बाबा ने उसे गले लगा लिया उनके आंसू निकल आये थे ..अपने लिए मनु का प्यार देखकर ..बड़े चाचा भी खुद को रोक नहीं पाए थे हु भी रो रहे थे ..पैर जब से मनु ने यह सब बातें बाबा से कहीं थी छोटे चाचू के ांसो निकल आये थे ..अब उनकी समझ में आ रहा था की मनु का प्यार का मतलब क्या था ..

मनु रुका नहीं आगे बड़ा और शो के सामने हाथ आगे कर दिए ..

शो ने फटाफट उस नए सी की पिस्तौल उसके साइड केस से निकली और दनादन दो राउंड फायर किये और उस गुंडे को जो ज़मीन पैर अभी तक ज़िंदा पड़ा था ..उसे उप्पेर पहुंचा दिया और उसी पिस्तौल को वापस उस सी के उप्पेर फेंका सी बॉडी रिफ्लेक्शन के चलते उसे कैच कर चूका था ..अब सी हैरत से शो को देख रहा था ..

शो मनु को देखकर “ कमाल है यार तुम तोह तगड़े जिगर वाले इंसान निकले क्या मज़ा दिला दिया तुमने और हु भी लाइव नीस वैरी नीस ..”

मनु हैरत से देख रहा था शो को पैर अकेला नहीं था उससे ज्यादा हैरत से भरा हुआ था वह सी जिसकी ऑफिसियल पिस्तौल से शो ने उस गुंडे को थोक डाला था ..

शो “ अरे बीटा घर जाओ आराम करो यहाँ तोह बस पुलिस एनकाउंटर हुआ है …पैर आगे से ऐसे कानून हाथ में नहीं लेना …अरे यार तुमको क्या लगा यह सब कहूंगा …नहीं यह नहीं कहूंगा ..

बीटा वेलडोने आईएम सो मच प्राउड ऑफ़ ु ाचा किया साले का हाल यह हरामका पिल्ला इसी लायक था ..तुम आराम से जाओ न किसी ने कुछ देखा है न सुना है ..और आगे ऐसा कुछ हो तोह जब तक मैं या सी साब हैं दोनों में से किसी को भी बता देना क्यों सी साब आप कुछ नहीं कहेंगे अरे भाई आपका आज अकाउंट ओपन हुआ है एनकाउंटर का काम से काम लड़के को थैंक्स hi कह दीजिये “

सी मैं मार्के थैंक्स कहता है मनु को ..क्युकी अब उस मर्डर में सी की पिस्तौल की गोली उसे हुई थी और पिस्तौल पैर खुद उसी के निशान मौजूद थे सो समझ चूका था की ..अगर ज्यादा ईमानदारी दिखाई तोह काम से तोह गया साथ में जेल में मर्डर का चार्ज अलग से लगेगा ..सो समझ गया सीनियर कितना तेज़ दिमाग है ..

मनु उसके बाद वहां से चला गया जहाँ बाबा और दोनों चाचा अब उसके गले लगे ख़ुशी मन रहे थे पब्लिक उल्टा पानी बेहटा पहली बार देख रही थी ..अब मरने वाला तेरा गुंडा सो हमदर्दी शायद hi किसी के मैं में हो?? सब वहां से अब निकलने लगे थे ..क्युकी खुद पुलिस ने hi मनु को छोड़ दिया था ..सो ईमानदारी का धुल पीटना ऐसे में समझदारी नहीं थी ..सो अब अपने अपने रस्ते लोग हो लिए थे ..फ़िल्मी दुनिआ जैसा असल ज़िन्दगी में सामने से किसी को किसी की नहीं पड़ी hoti..jisko आपकी परवाह है हु बेशक आपके साथ होगा पैर सामने से किसी अनजाने से एक गिलास पानी की उम्मीद करना भी सरासर बेवकूफी है …हु भी अपने मतलब को देखकर आपके लिए पानी लाएगा अगर मतलब नहीं है तोह शायद मन भी करदे ..दुनिआ है किसी का क्या कर सकते हैं …

खैर मनु बाबा के साथ निकल चूका था ..मनु ने फिल्मो जैसे कोई डायलाग नहीं मारा था की मुझे कानून के साथ ले चलो नहीं मुझे तोह इसकी सजा काटनी है …मनु को उस शो ने जाने को कहा हु थैंक्स बोलकर निकल गया ..

सी “ सर अब तोह बता दिज्ये की आपने ऐसा क्यों किया ?? सुच में सर मैं आपके साथ हूँ ..”

शो “ उसको मरने की वजह चौबे जी से पंच लेना हम चलते हैं …और वैसे भी साथ तुम तोह क्या अब खुद तुम्हारी पिस्तौल खुद देगी …don’t ु वोर्री यहाँ कैद हमसे है ..जब तक कायदे में रहोगे फायदे में रहोगे ..” शो वहां से बाबा के पास चला गया ..

सी मुँह फाडे शो को जाते हुए देख रहा था ..चौबे जी ने सी को हिलाया “ अरे सी सर आपको पता नहीं है उस साले कमीने ने एक बार शो सर का गिरेबान पकड़ लिया था …साले ने उस दिन गर्मी दिखाई थी ..पैर हमारे सर तोह ठहरे मिसाइल सर ने साले को अचे से ठोका और हवालात में दाल दिया ..पैर उस साले के साथी बड़े पहुंचवाले थे …उसे छूटा कर ले गए ..कसम से उस दिन मैं किया की साले की गांड में अपना यह कांस्टेबल वाला डंडा ठूंस दूँ पैर खुद से ज्यादा सर के लिए बुरा लगा था ..हमारे सर ग्रेट इंसान हैं अभी आप नए आये हैं …आप को कुछ नहीं होने वाला ..बस आप फुलटू में दंबनगई मत दिखायेगा ..बाकी आज आप समझ गए होंगे की सर के हाथ और दिमाग दोनों मिसाइल हैं “

सी मुँह फाडे देख रहा था शो को जो बाबा से बात कर रहा था ..

शो बाबा से “ सॉरी उस दिन मैंने आपकी मदद नहीं की थी सुच कहूं तोह मुझे उस दिन बुरा भी लगा था ..की ऐसे कमीने इंसान के लम्बे पहुँच के चलते हम आपको पीछे हटने के लिए कहना पड़ा पैर आज इस नौजवान ने हमको भी अपने आप को साबित करने का मौका दे दिया ..वैसे उस दिन नहीं आया था यह आपके साथ ..इसका आपसे रिश्ता क्या है जो इसने इतने बड़े गुंडे को यहाँ मार्किट में ज़लील कर दिया ???”

बाबा शान से सीना फुलाकर मनु को एक हाथ से अपने सीने के पास खिंच लेते हैं..” शो साब यह मेरा पोता है …जिसको जब पता लगा तोह यह उसे यहाँ उठा लाया उसके घर से ..”

शो “ वह भाई तुम तोह सुच में कलेजा रखने वाले लड़के हो पैर सुना है की उसके घर तोह काफी लोग रहते हैं पहरेदारी के ???”

छोटे चाचू “ सर पैर वहां तोह शायद इसने ब्लास्ट कर दिया ..”छोटे चाचू ने शो से कहा तोह बाबा गुस्से से छोटे चाचू को देखने लगे तोह उनका सर निचे झुख गया ..

शो “बहुत अचे चलो ाचा हुआ की एक साथ पूरा गैंग ब्लास्ट में मारा गया ..वैसे हु शायद गैस लीकेज का ब्लास्ट है कोई नहीं मैं देख लूंगा …वैसे तुमसे मिलकर ख़ुशी हुई नौजवान मेरा नाम है नविन पाठक नीस मीटिंग ु ..“ पाठक सर ने हाथ मिलते हुए कहा ..मनु ने भी अपना नाम बताया और उसके बाद पाठक सर ने अपना पर्सनल नंबर मनु को दिया और जब जरूरत पड़े तोह करने को कहा ..

मनु ने भी उनको अब पेअर चुकार विदा दी क्युकी पाठक सर आगे में बड़े चाचा जीतनेय थे ..उनको बड़ी हैरत हुई की अभी थोड़ी देर पहले खुले आम लड़ने वाला यह लड़का अब कितने संस्कार के साथ उनके पेअर छू रहा है ..उन्होंने मनु को गले लगा लिया ..और ख़ुशी से विदा ली …और बाबा और दोनों चाचा अपने ऑफिस की और मनु के साथ चल पड़े ..पाठक सर भी अपने रस्ते चल दिए …बाकी का काम उनके स्टाफ के हाथ था ..

उधर मनु के लिए रजिनि नयी मुसीबत त्यार करने वाली थी …जाने उसके शैतानी दिमाग में क्या आया था ???की उसकी मुस्कुराहट reh-reh कर उसके चेहरे पैर आ रही थी …अब रजिनि के दिमाग में क्या आ चूका था यह तोह वक़्त और किस्मत को hi पता है ..:हिंट:
 
अपडेट 80

रिकैप........

उधर मनु के लिए रजिनि नयी मुसीबत त्यार करने वाली थी …जाने उसके शैतानी दिमाग में क्या आया था ???की उसकी मुस्कुराहट reh-reh कर उसके चेहरे पैर आ रही थी …अब रजिनि के दिमाग में क्या आ चूका था यह तोह वक़्त और किस्मत को hi पता है ..

अब आगे........

मनु वापस अपने बाबा के सामने था ,,बाबा ने बड़े प्यार से उसे गले लगा लिया ..

बाबा” बीटा तुमने इतना सब मुझ बुड्ढे के लिए किया यह तोह मैं सपने में सोच भी नहीं सकता था की मेरा यह छोटा सा नन्हा पोता इतना बड़ा कब और कैसे हो गया है ??”

मनु “ बाबा आप कैसी बातें कर रहे हैं ,,आपको मैं अपने दादा मंटा हूँ और कोई दादा को कुछ कहे और पोता सनटैन रहे ऐसा कैसे हो सकता है ???”

बाबा “ पैर बीटा ??”

मनु “ नहीं बाबा सहना हर बार सही नहीं होता जहाँ आप सहने की बात करने वाले हैं तोह प्लीज मैं इसके बारे में कुछ नहीं कहूंगा ..मेरे लिए दादा का हाथ मेरे सर पैर बना रहे इससे ज्यादा की चाहत नहीं है मेरी ..”

बाबा ने यह सुनकर मनु को गले से लगा लिया ..

बड़े चाचा “ भाई मान गए काम से काम कोई तोह है जिसको हम जिगरवाला कह सकते हैं ..वे अरे सो प्राउड ऑफ़ ु बीटा पैर ऐसे रोड पैर तमाशा करना सही था भला??”

मनु “ चाचा जी जंगल में मोर नचा किसने देखा ?? उसने हमारे बाबा और आप लोगों को ऑफिस में घुस कर मारा क्या हु सही था …आज एक ने ऐसा किया कल को कोई और करता यह जरूरी था ..जिसे आप तमाशा कह रहे हैं ..उसी तमाशा के बाद लोगों को पता चला की इन गुंडों में असल में कितना दम होता है …इसके बाद कोई और भी gunda-gardi करने से पहले हज़ार बार सोचेगा ..”

बड़े चाचा इस बात से लाजवाब हो चुके थे ..उन्होंने भी मनु को अपने सीने से लगा लिया..

छोटे चाचा जो अभी तक शांत खड़े थे ..मनु ने उनका रुख किया ..

मनु “ सॉरी चाचू आपको यह सब देखना पड़ा ..मुझे प्लीज माफ़ कर देना ..”

छोटे चाचा “ नहीं बीटा तुम सही थे ..जब उसने मेरी गर्दन पैर चाकू रखा तब समझ में आया की जानवर को मरने के लिए जानवर बना पड़ता है …आईएम सॉरी की मैंने तुमको गलत समझा ..” छोटे चाचा ने मनु के सामने हाथ जोड़ लिए ..मनु ने उनके हाथ थम लिए ..

मनु “ सॉरी की बात नहीं है चाचा हमको सहना छोड़ना होगा ..वर्ण ऐसे लोग आज जो ऑफिस तक आ चुके हैं घर तक भी आराम से आ जायेंगे .”

छोटे चाचा “ हाँ तुम सही हो अब से ऐसा हो होगा …पैर एक बात तुमको मेरी भी माननी होगी ..”

मनु “ हु क्या ..”

छोटे चाचा ने अपनी जीप की के मनु को दी ..

छोटे चाचा ..” अब से यह जीप तुम्हारी हुई …क्युकी तुमको यह पसंद है तोह इस पैर हक़ भी तुम्हारा hi हुआ ..”

मनु “ चाचू यह सब मैंने किसी जीप के लांच में नहीं किया था …यह सब आपके और बाबा के लिए किया है ..जीप आपकी थी और आपकी hi रहेगी ..”

छोटे चाचा “ नहीं बीटा यह मुझे भी पता है ..की तुमने यह सब हमारे सम्मान के लिए किया है ..पैर यह तुम्हारे छोटे चाचू की तरफ से एक छोटा सा गिफ्ट है ..प्लीज इंकार मत करना ..”

मनु मन करने hi वाला था बाबा बोले ..

बाबा “ हाँ बीटा इंकार मैं भी नहीं सुनने वाला इस बात से मैं भी एग्री हूँ तुम्हारे चाचा ने पहली बार तुमको सही हक़ दिया है ..प्लीज इंकार करके हमारा दिल न तोड़ना .” उसके बाद बड़े चाचा ने भी जोर दिया ..

अब मनु इंकार न कर सका …इतने लोगों की बात मान नई पड़ी उसे भी जीप की के ले ली उसने भी …पैर अब सवाल था बाइक का करे तोह क्या ..उसके दिमाग में आया अब अजय भी बड़ा हो रहा है उसे भी कोई न कोई बाइक तोह लेनी है hi उसपर अजय कई बार मनु से ज़िद करता था उसकी बाइक चलने के लिए ..पैर मनु उसे छोटा होने का बहाना बना कर मन कर दिया करता था ..पैर अब अजय की बाइक का इंतज़ाम अपने आप हो चूका था ..

मनु वहां से बाबा और सभी से विदा लेकर चला गया और बाइक को छोटे चाचा ने हरी काका के हाथ मनु के घर भिजवा दिया ..

घर पैर अजय मनु को कार में देखकर ख़ुशी से नाच उठा ..हरिकका भी बाइक को घर के बहार कड़ी करके के मनु को देककर चला गया ..

अजय “ वाओ भैया यह जीप किसकी है और इसे आप क्यों यहाँ ले आये हैं ??”

मनु “ अजय यह जीप छोटे चाचू ने मुझे दी है मन करने के बाद भी ..अब इसे तुम अपनी माँ सकते हो ..”

अजय “ यह अब मेरे भैया के पास भी कार है ..भैया प्लीज एक राउंड घूमना है चलो न प्लीज ..प्लीज “

मनु को अजय को देखकर हंसी आ गयी ..पैर उनसे अजय को अचे से घुमाया उस जीप में ..अब अजय सुच में खुश था ..की उसके भाई के पास कार है …

अजय “ भैया पैर अब बाइक का क्या होगा ??”

मनु समझ गया अजय का मतलब क्या है ..

मनु “ होगा क्या अब हर जगह कार में तोह नहीं जा सकता सो जब जरूरत होगी तोह कार उसे कर लेंगे ..”

अजय का मुँह लटक गया ..उसका सोचना था अब बाइक उसकी हुई ..पैर मनु ने यह कहकर उसका मुँह लटका दिया था ..पैर अजय का मुँह यूँ लटकना मनु से बर्दास्त नहीं हुआ ..

मनु “ बस कर नौटंकी बाइक चला लेना पैर बाइक अभी तुझसे संभल भी पायेगी क्या ??”

अजय ख़ुशी से नाचते हुए “ हाँ भैया मैं चला लूंगा पक्का देखलो ..”

अजय ने मनु की बाइक को स्टार्ट करने की कोशिश करते हुए कहा ..पैर बाइक पुरनी बुलेट माचिस्मो 500कक थी जिसके राइट फुट साइड पैर उसका गियर सिस्टम था ..और ब्रेक लेफ्ट फुट साइड में था ..जो नोर्मल्ली उल्टा मन जाता है ..उस पर बुलेट का किक वाला प्रेशर सिस्टम जिसमे अगर गलती से भी गलत किक स्टार्ट करने की कोशिश की तोह बाइक स्टार्ट हो या न हो .पैर पेअर तोह पक्का फ्रैक्चर कर hi देगी ..आजकल की बाइक में यह सब नहीं होता है ..

अजय ने बाइक को स्टार्ट करने की कोशिश की पैर बाइक तोह स्टार्ट नहीं हुई पैर अजय बाइक की सीट से कुछ ुचा उछाल गया ..अगर बाइक स्टैंड पे नहीं होती ..तोह पका बाइक और अजय ज़मीन पैर पड़े होते ..मनु हंस पड़ा अजय को देख कर ..

अजय “ क्या भैया आपको भी यही बाइक मिली थी चलने के लिए देखो हम जैसे लोगों से तोह यह हाथी स्टार्ट भी नहीं होता ..”

मनु “ हाँ नौटंकी अचे से जानता हूँ कैसे रात दिन बस सोचता है की बाइक तुझे मिले पैर आज जब दे रहा हंट ओह ड्रामा कर रहा है ..ाचा चल आज तुझे सीखा देता हूँ आ बेथ पीछे “

उसके बाद मनु ने अजय को बाइक पैर बैठाया और उसे हर बारीक़ से बारीक़ चीज़ सिखयी जिसमे स्टार्ट करने से लेकर बाइक का मैकेनिक सिस्टम शामिल था ..अजय ने भी ध्यान से सुना और सीखा उसे ..कोई 2 घंटे बाईट होंगे और अजय बाइक पैर बैठा बाइक अचे से चला रहा था ..और सबसे पहले मनु ने अजय को स्टार्ट करना hi सिखाया था .ताकि जब जरूरत पड़े तोह किक मरने के लिए उसे किसी और को ढूंढना न पड़े…

यहाँ दोनों भाई अपने में बाइक और कार में बिजी थे वहीं रजिनि अपने दिमाग में नए कीड़े के साथ लगी हुई थी ..

रजिनि कुछ सोच रही थी …उसके चेहरे पैर स्माइल थी ..

खुद से बात कर रही थी ..” हाँ यह सही रहेगा “

रजिनि अपने उस आईडिया पैर लग चुकी थी ..

शाम का टाइम हो चूका था ..अजय बाइक लेकर घूमने में बिजी था ..उसका हाथ अभी थोड़ा साफ़ होना बाकी था (बाइक पैर) सो बाइक लेकर घूमने चला गया ..वह ..

मनु शाम होते hi अपने काम में लग गया ..उसने सिद्ध रुख किया रजिनि के घर का ..थोड़ी देर में hi खिड़की के बहार था हु …उसका ध्यान अंडर बना हुआ था ..उसने जो देखा उसके बाद मनु को सुच में गुस्सा सा आ चूका था..

उसके मुँह से निकला “ बस बहुत हुआ …औरत समझ कर छोड़ा पैर यह तोह ऐसे मानेवाली नहीं है ..”

शाम का टाइम था राजिंदर के आने का ..रजिनि चाय के साथ त्यार थी …राजिंदर दूर से आता दिख चूका था रजिनि को ..

रजिनि बहार चली गयी ..और राजिंदर को उसने रोक्का ..राजिंदर जो कैसे भी अब रजिनि से दुरी बनाना चाहता था ..पैर रजिनि आज राजिंदर को आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं थी ..उसने सिर्फ चाय की बात की और अंडर न चाहते हुए भी राजिंदर को आना पड़ा ..

राजिंदर चाय के लिए बैठा हुआ था ..और रजिनि चाय के लिए उसे कप में परोसने लगी उसने चाय में एक हाई दोसे virga(sex मेडिसिन) दाल दी चोरी से ..और जैसे hi राजिंदर को देने पलटी ..तोह

उसके मुँह से एक आवाज़ आयी …आअह्ह्ह्हह!!! उईईईईई!!! उसका शरीर अकड़ चूका था …और उसके हाथ से चाय का कप राजिंदर के पास जा गिरा …चाय का कप टूट चूका था ..पैर रजिनि ैथी हुई कड़ी थी …

क्युकी रजिनि की छूट पैर लगी पंतय पैर मनु ने बोटों ों कर दिया था ..उसकी छूट का हाल ख़राब था ..राजिंदर हैरत से रजिनि को देख रहा था ..

पिछले कई दिनों से रजिनि की छूट की भूख शांत नहीं हुई थी ..उस में हर बार उसका पानी निकल hi नहीं पा रहा था …सो सेक्सुअली फ़्रस्ट्रेशन से उसका दिमाग भी सोचने समझने की हालत में नहीं था …रजिनि भूखे कुत्ते जैसे छूट की आग में जलती हुई ..राजिंदर के पेण्ट पैर लपकी ..

राजिंदर कुछ कर पता उससे पहले राजिंदर का मोबाइल रिंग हुआ …जिसमे कॉल आ रहा था ..मनु का ..राजिंदर ने ढाका देकर रजिनि को खुद से अलग किया ..और मोबाइल लिए बहार आ गया ..उसने कॉल पिक किया ..

मनु “ पापा घर पैर कितने बजे तक आ रहे हैं ..ऑफिस कॉल किया तहत ओह पता चला आप निकल गए ..सो सोचा पूछ लूँ की आप की बाइक कहीं पंचर तोह नहीं हुई अगर हुई है तोह बता देना हम हैं न आपको चिंता करने की जरूरत नहीं ..”

राजिंदर “ नहीं बीटा बस आ hi रहा हूँ ..”राजिंदर समझ चूका था की यहाँ ऑफिस का बहाना चलने नहीं वाला क्युकी मनु ने पहले hi उसके ऑफिस में कॉल किया होगा ..सो बस चुपचाप हु बाइक लिए अपने घर निकल गया ..

मनु ने भी अब बोटों को ऑफ किया और वाइब्रेशन जस्ट पानी निकलने से पहले hi रुक गयी ..अब रजिनि जो पहले से आग में तपी हुई थी ..उसकी ऊँगली अब अपने आप छूट में चली गयी ओर ..जब तक उसका पानी नहीं निकला ..उसका हाथ रुका नहीं ..

मनु भी राजिंदर के निकलने के बाद वहां से निकल चूका था भागते हुए राजिंदर के आने से पहले घर आ चूका था ..जहाँ राजिंदर घर के बहार जीप देखकर हैरत से भरा हुआ था ….पैर उसने ज्यादा कुछ कहा नहीं ..तभी अजय वहां बाइक चलते हुए आ चूका था ..उसने राजिंदर को बताया की यह कार अब मनु की है ..जिसपर राजिंदर ने ज्यादा कुछ नहीं कहा ..

शाम हुई और सुमित्रा भी घर आ चुकी थी ..शामे रिएक्शन जीप को लेकर उसका भी था ..तोह अजय ने उसे भी बता दिया ..जिसपर सुमित्रा ने खाने के टाइम मनु को कार को वापस करने को कहा ..तोह मनु ने उसे बताया की बाबा और छोटे चाचू ने ज़िद्द करके उसे यह जीप दी है ..जिसपर सुमित्रा भी मान चुकी थी ..क्युकी बात यहाँ बाबा किट hi ..सो चुप हो गयी थी सुमित्रा भी ..

अजय ज़िद करने लगा रात को की कार में घूमना है ..तोह मनु ने सभी को साथ लेकर घूमने का सोचा ..पैर राजिंदर बहाना बनाना लगा की उसका मूड नहीं है ..

मनु “ पापा प्लीज क्या आप हमारे साथ चल नहीं सकते थोड़ी देर के लिए ..”

राजिंदर ने उसके बाद कुछ नहीं कहा ..chup-chap त्यार हो गया ..और पूरा परिवार अब कार में घूमने निकल पड़ा …कार मनु ड्राइव कर रहा था ..और उसके साथ आगे ज़िद्द करके अजय बैठा था ..खुली जीप में आस्मां में तारो की चाव में सभी खुली हवा का मज़्ज़ा लेते हुए घूमने चल दिए ..जिसमे सुमित्रा ने कार को घर में आने की ख़ुशी में मंदिर चलने को कहा ..मनु ने कार मंदिर की तरफ मोड दी ..कुछ hi देर में मंदिर के सामने थे ..मंदिर के जस्ट बंद होने का टाइम था ..सो जल्दी से पूजा करवाई मनु की फॅमिली ने …और सभी ने अचे मैं से पूजा की …और आगे चल दिए …

जेस्पर मनु ने ice-cream पार्लर का रुख किया जिसमे सभी ने वहां अपनी अपनी पसंद की ice-cream खाई ..राजिंदर वहां भी chup-chup था ..

मनु राजिंदर को थोड़ी देर के लिए अपने साथ आने को कहकर साथ ले गया ..

मनु “ सॉरी पापा लगता है आपको ऐसे आना ाचा नहीं लगा ..ी म सॉरी मुझे माफ़ कर देना ..पैर क्या आप फॅमिली के लिए थोड़ा टाइम नहीं दे सकते …ज्यादा नहीं बस थोड़ा सा टाइम काफी होगा “

राजिंदर “ ऐसी बात नहीं है बेटे ..फॅमिली के लिए टाइम नहीं दूंगा तोह और किसे dunga..bas थोड़ा सात हाका हुआ था ..पैर अब सब ठीक है ..मुझे सुच में ख़ुशी है की फॅमिली को लेकर तुम कितना सोचते हो …तुम ज्यादा मत सोचो मैं ठीक हूँ”

मनु “ ऐसे कैसे नहीं सोचूं क्या आप हमसे अलग हैं?? नहीं न हम सब मिलकर एक फॅमिली हैं जहाँ हर किसी की ख़ुशी मायने रखती है ..उसमे आपकी ख़ुशी भी शामिल है …सो आपको इसमें nazar-andaaz कैसे किया जा सकता है ??”

राजिंदर “ अरे पागल मैं खुश हूँ जिसका बीटा फॅमिली को ऐसे साथ मिलकर सोचने वाला हो उसे भला साइड में रहने की फ़िक्र कैसे होगी तू ..अपनी जगह सही है ..बस ऐसे hi तैराकी करता रह यही दुआ है इस बाप की “

राजिंदर ने यह कहते हुए मनु को गले लगा लिया ..पिछले कई दिनों से जो दुरी थी चाँद पलों में अपने आप हैट चुकी थी ..जिसमे मनु ने सामने से न कहकर भी राजिंदर को रजिनि से दूर कर दिया था … राजिंदर अपने बर्ताव को लेकर जो टेंशन पीला हुए था ..अपने बेटे के गले लगते hi न जाने कोनसी दुनिआ में टेंशन जा चुकी thi..rajinder को कहीं न कहीं जो लग रहा था की मनु उसे शायद जलील करे या जाने कैसे रियेक्ट करे यह डर भी आज उसका अपने आप दूर हैट चूका था ..

दोनों बाप बेटे अपने gile-shikve दूर करते हुए वापस आये और जहाँ अब राजिंदर ने भी खुलकर एन्जॉय किया ..ice-cream कहते हुए सुमित्रा ने अचे से नोटिस किया की अब राजिंदर का बर्ताव पहले वाला hi हो चूका था …जिसकी वजह उसे अचे से पता thi..manu ने पाका कुछ न कुछ किया होगा ..वर्ण थोड़ी देर पहले राजिंदर जो यहाँ अपने आप में खोया हुआ था अचानक से उसका बर्ताव कैसे बदला ??

सुमित्रा ने मनु को देखा ..जो इस टाइम अजय को ice-cream कहते हुए देख रहा था ..

मनु “ अजय आराम से अगर ज्यादा अछि लग रही है तोह पैक भी करा लेता हंग हर पैर आराम से खा लेना पैर अभी तोह आराम से खा ..”

अजय “ भैया कसम से मस्त है यह थैंक ु आज बहार आकर ाचा लगा फॅमिली ट्रिप का मज़्ज़ा hi अलग है और सबसे बड़ी बात अपना pocket-money भी सेफ रहता है …हीहीहीहीहीही!” अजय की इस बात पैर सभी एक साथ हंसने लगे ..

और ऐसे hi बात चित में सब घर वापस एन्जॉय करते हुए चले आये …और टाइम से सो गए ..

अगला दिन निकल चूका था ..सुबह हर रोज़ की तरह मनु और अजय ट्रेनिंग पैर और राजिंदर अपने ऑफिस के लिए त्यार हो चूका था ..मनु और अजय वापस आये नाश्ता किया और सुमित्रा और अजय साथ में जॉब और स्पोर्ट्स क्लब को दोनों निकल गए ..

घर पैर बचा आज मनु जो अपने कंप्यूटर पैर लगा हुआ था ..उसने लिफाफा त्यार किया और रजिनि के घर के बहार रख दिया और दूर जाकर एक छोटा सा पत्थर फेंक दिया …उस पाथेर की आवाज़ से रजिनि तुरंत बहार आयी और उसने उस लिफाफे को देखा ..और उसे लेकर अंदर चली गयी …मनु वहां से निकल गया ..और उसी बंद पड़ी फैक्ट्री में चला गया ..जहाँ पहले उसने रजिनि को बुलाया था …

वहां जाकर मनु ने अचे से वहां कुछ कैमरा फिट किये ताकि रजिनि अगर बाद में कुछ झूठा इलज़ाम लगये तोह उससे बचा जा सके ..

कोई घंटा भर हुआ होगा की रजिनि वहां पहुँच चुकी थी …उसी चैम्बर में रजिनि मन ऊके सामने थी …रजिनि के आने से पहले hi मनु अपने मास्क को पहन चूका था …

रजिनि “ देखो मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है क्यों मुझे ऐसे तंग कर रहे हो ???”

मनु रिकॉर्डर ों “ ज़ादा शरीफ न बन अचे से जानता हूँ तेरी हर हरकत ??” रिकॉर्डर पॉज

रजिनि “क्या जानते हो ??”

रेकडर ों “ बोलै न ज्यादा शरीफ न बन यह डाँग किसी और की आगे करना मेरे आगे नहीं ??” रिकॉर्डर ऑफ

रजिनि समझ चुकी थी यहाँ रोने धोने का कोई फ़ायदा नहीं क्युकी हु अचे से अपने हस्बैंड और उस अनजान इंसान को मर्दों से चुड़ते हुए देख चुकी थी ..

रिकॉर्डर प्ले “ कपडे निकल सारे के सारे ???”

रजिनि “ आखिर तुम चाहते क्या हो ??”

मनु रिकॉर्डर प्ले करने वाला होता है पैर रजिनि अपने कपडे खोलने लग जाती है …तोह रिकॉर्डर साइड में रख देता है ..यह रिकॉर्डर में आवाज़ मनु की hi थी पैर वौइस् चेंज सॉफ्टवेयर से उसने अपनी वौइस् चेंज की हुई थी ….

रजिनि अपने सारे कपडे निकल चुकी थी ….मतलब अब हु मनु के सामने एक दम नंगी कड़ी थी ..

मनु अपनी जगह से उठा और उसने रजिनि को सामने से देखा …(मास्क के अंदर से दिखाई देता था पैर बहार से मास्क में देखना पॉसिबल नहीं था …)

मनु ने रजिनि को एक और लैंड जैसा एक वाइब्रेटर दिया …और रिकॉर्डर प्ले किया …

रिकॉर्डर प्ले “ इसे छूट में डालो अभी बिना सवाल किये ..”

रजिनि ने तुरंत उस लैंड के साइज के वाइब्रेटर छूट में दाल लिया …उस वीरता का पूरा साइज एक लैंड जैसा hi था ..

रजिनि ने जैसे hi उसे अपनी छूट में डाला मनु ने रिमोट से उसे ों कर दिया …रजिनि जो इतने दिन से लैंड की आग में जल रही थी ..आज उसे लैंड का सुच मिल hi चूका था चाहे असली न सही नकली hi सही पैर अब उसकी छूट में लैंड था जो उसे मज़्ज़ा दे सकता था …

उम्मम्मम!!! आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह!!! रजिनि के मुँह से सिसकी निकलने लगी …

मनु ने वाइब्रेटर को फुल स्पीड पैर सेट कर दिया अब रजिनि उसे अपनी छूट में लिए ज़मीन पैर लेट चुकी थी ..छूट का तूफ़ान उसके सर चढ़कर बोल रहा था ..रजिनि खुद से अपने हाथों से अपनी चूचियां मसलने लगी थी …

उम्मम्मम!! अह्हह्ह्ह्ह!!! ओह्ह्ह्हह्हह!!! इहह्हह उम्मम्मम्मम्म!!! रजिनि का हाल कोई भी बता सकता था की रजिनि कितने मज़े में थी …

उसका पानी बस किसी भी पल निकलने को त्यार था …

पैर मनु ने उसके पानी निकलने से जस्ट पहले hi वाइब्रेटर को ऑफ कर दिया …रजिनि अपने पानी निकलने के कगार पैर त्यार थी ..उसका हाल अचानक से पानी न निकल पाने से बुरा हो चूका था ….उसने अपने हाथों को अपनी चुकी से हथ्यता और उस वाइब्रेटर को पकड़ना चाहा पैर मनु ने आगे बढ़कर उस वाइब्रेटर को उसकी छूट से बहार निकल लिया और उसके हाथों को पकड़ लिया …

रजिनि “ मेरे साथ आखिर तुम्हारी दुश्मनी क्या है …न खुद छोड़ते हो न छोड़ने का मज़्ज़ा लेने देते हो ..काम से काम थोड़ा रेहम तोह करो मुझपर …आखिर मेने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है …तुम्हारे सामने नंगी औरत है और उस पैर भी तुम न मुझे छोड़ रहे हो न ढंग से छोड़ने दे रहे हो …ऐसा क्यों क्या बिगाड़ा है मैंने तुम्हारा ???”

मनु ने कोई जवाब नहीं दिया …छूट की बेचैनी अब रजिनि के दिमाग में चढ़ चुकी थी …

रजिनि “ देखो तुम मुझे छोड़ नहीं रहे हो तोह कोई बात नहीं काम से काम थोड़ा रेहम तोह करो मुझपर काम से काम मेरे हाथ छोड़ दो मुझे अपना पानी hi निकल लेने दो …”

पैर मनु पैर इसका कोई असर नहीं हुआ …न मनु ने उसके हाथ चोदे न उसको पानी निकलने का मौका दिया ..

रजिनि “ मैं तुम्हारे हाथ जोड़ रही हूँ …मुझे छोड़ लो प्ल्ज़ …जैसे चाहो छोड़ो …उठाकर या लिटा कर मैं उफ़ तक नहीं करुँगी ..पैर छोड़ो मुझे …यह मेरी आखिरी खवाहिश है ..तुम्हारा लम्बा कद और जिस्म का यह कटाव देखकर पता चलता है ..की तुम्हारा औज़ार भी तगड़ा होगा ..पैर न जाने तुमको क्या दिक्कत है न छोड़ रहे हो न मज़े ले रहे हो ??उल्टा मेरे हस्बैंड की गांड और मरवा डाली तुमने ..एक तोह हु साला अनिल पहले से गन्दा था पैर अब गांड मरवा कर गांडू भी बनवा दिया तुमने …इतना तोह अचे से समझ गयी हूँ तुम कोई नार्मल दुश्मनी नहीं निकल रहे हो …वर्ण तुमको राजिंदर के भाई उस jai-chand के ससुर का कैसे पता चलता जिसे अभी तक मेरे हस्बैंड को भी नहीं पता चला था …तुमने अनिल के साथ उसकी गांड भी अचे से मरवा डाली …देखो उसके साथ मेरा कोई रिलेशन नहीं है ..बस उसका और मेरा एक hi मकसद था …राजिंदर और उसकी फॅमिली से बदला लेना ..पैर जैसे तुमने उसे बूढ़ा होने के बाद भी नहीं छोड़ा ..यह अचे से समझ चुकी हूँ ..की तुम मुझे ऐसे hi नहीं जाने डोज …मैंने आजतक अनिल के शिव किसी गैर मर्द को अपने पास आने तक नहीं दिया है …पैर आज खुद कह रही हूँ की तुम जैसे चाहो मुझे छोड़ लो …मैं अनिल की तरफ नज़र उठाकर भी नहीं देखूंगी …यह मेरा वडा है …बस एक बार मेरी चुदाई दिल खोल कर कर दो ..मैं भीख मांग रही हूँ तुमसे ..”

मनु ने उसके बाद भी रजिनि को आसानी से नहीं छोड़ा ..

रजिनि “ देखो अगर तुम मुझे सही से छोड़ोगे तोह मुझे क्या जरूरत होगी ..अनिल की ??? या राजिंदर की अरे एक बार मुझे जी भर कर छोड़ लो …कसम खाती हूँ न अनिल को देखूंगी न राजिंदर को ..न उसके बाद राजिंदर की फॅमिली को …क्युकी मैं अचे से समझ चुकी हूँ ..राजिंदर के पास जाना और तुम्हारा मेरी लाइफ में एंट्री लेना नार्मल नहीं है …उस पैर तुमने मेरे औरत होने का घमंड भी चकनाचूर कर दिया है …अब तोह मुझे सपने में भी मर्दों की दुत्कार hi नज़र आती है ..प्लीज मुझे छोड़ डालो ..”

मनु ने उसके हाथों को छोड़ दिया …और रिकॉर्डर प्ले किया..

रिकॉर्डर “ मुझे चुदाई आसान नहीं है ..अगर मुझसे छोड़ना है तोह मेरी कुछ शर्तें हैं ??”

रजिनि “ मुझे हर शर्त मंज़ूर है बस मुझे छोड़ डालो मैं इस आग में जल रही हूँ ..अब यह तड़प नहीं सही जा रही मुझसे ..देखो मैंने तोह अभी तक राजिंदर और तुम्हारा रिश्ता भी नहीं पूछा ..पैर सिर्फ एक बार मुझे छोड़ लो …वडा है मेरा मेरी लाइफ में और कोई मर्द नहीं होगा तुम्हारे आलावा ..”

रिकॉर्डर प्ले” शर्त नंबर एक …मुझे चुदाई में रेहम करना नहीं आता ..”रिकॉर्डर पॉज .

रजिनि “ मैं चाहती हूँ तुम्हारे जैसे मर्द रेहम भी न करे “

रिकॉर्डर प्ले “ शर्त नंबर 2 …मैं जैसे चहुँ तुमको जहाँ चहुँ छोडूंगा ..” रिकॉर्डर पॉज ..

रजिनि “ मंज़ूर “

रिकॉर्डर “ शर्त नंबर 3 ….जब तक मैं नहीं चाहूंगा तब तक किसी और का हाथ तुमपर नहीं लगेगा ..”

रजिनि “ अनिल तोह वैसे भी हाथ लगता नहीं …और किसी से मेरा वास्ता नहीं उसका ससुर कुछ दिन से काम के नाम पैर डोरे दाल रहा था ..पैर मैंने उसे लिमिट से बहार नहीं आने दिया ..और बचा राजिंदर अगर तुम एक बार मुझे मिले तोह वडा है किसी और को देखूंगी तक नहीं ..क्युकी मुझे यकीं है एक बार तुमसे छोड़ने के बाद इनमे से किसी और के पास मैं जा कर भी तुमको भूलने वाली नहीं हूँ ..सो जब पहले hi तुम्हारा होना है तोह बाद में किसी और का होना इसका मतलब hi नहीं बनता ..”

रिकॉर्डर प्ले “ शर्त नंबर 4 …वहां उस ड्रावर में कुछ कागज़ हैं उनपर सिग्न कर दो ..”

रजिनि छूट की आग में तड़प रही थी …फटाफट उस ड्रावर की तरफ गयी और कागज़ निकले और सिग्न करने वाली थी ..की रिकॉर्डर प्ले हुआ ..

रिकॉर्डर प्ले “ इनपर यह लिखा है …की तुम आगे जो भी physical-relation मेरे साथ रख रही हो ..यह सब तुम्हारी मर्ज़ी से है …इसमें कोई जबरदस्ती नहीं है …और अगर कभी तुमने कोई गलत इलज़ाम लगाया तोह कारवाही तुमपर लीगल वे में होगी ..जिसपर तुमको कोई भी ऑब्जेक्शन नहीं है ..”रिकॉर्डर पॉज ..

रजिनि “ हाँ समझ गयी …अचे से …सिग्न करने से अगर तुम्हारे जैसे मर्द मिल जाये तोह साडी प्रॉपर्टी तुम्हारे नाम कर दूँ ..पैर प्रॉपर्टी के नाम पैर तोह अब सिर्फ मेरी छूट hi बची है ..सो अगर एक सिग्न से तुम मिल रहे हो तो सौदा घाटे का नहीं है …” रजिनि ने मनु को एक बार देखा और सिग्न कर दिया ..

मनु ने उस पेपर को अचे से देखा ..और उसे संभल कर उसी ड्रावर में लॉक करके रख दिया ..

रजिनि पीछे नंगी कड़ी उसे देख रही थी …मनु ने पलट कर उसे देखा ..

रिकॉर्डर प्ले “ लास्ट शर्त जब तक मुझे से चुड़ोगी राजिंदर की फॅमिली से बदला भूल जाना …क्युकी हु मेरा टारगेट है …उनलोगों के साथ कब क्या करना है यह मैं तय करूँगा …उसमे मुझे तुम्हारी कोई dakhal-andazi नहीं चाहिए ..” रिकॉर्डर पॉज ..

रजिनि “ मंज़ूर वैसे भी अगर तुम्हारे जैसे मस्त जिस्म का बाँदा अगर मेरे पास हो तोह मुझे बदले का करना भी क्या है …उल्टा मेरे लिए तोह ाचा hi है की राजिंदर और उसकी फॅमिली से तुम बदला लेना चाहते हो ..जब मेरा यह हाल है ..तोह उनका क्या हाल होगा …मुझे यह भी मंज़ूर है आओ मुझे छोड़ो अब …”

मनु ने एक बार फिर रिकॉर्डर प्ले किया “ सोच लो मैं कोई रेहम नहीं करता चुदाई में और एक बार शुरू किया तोह आगे जो होगा उसकी जिम्मेदार तुम खुद रहोगी …??”रिकॉर्डर पॉज ..

रजिनि “ हाँ मेरे मालिक मुझे पता है …साड़ी जिम्मेदारी मेरी है होश और हवास मैं मैंने सिग्न भी कर दिया है तुम बस मुझे छोड़ लो …जैसे चाहो वैसे छोड़ो पैर अब छोड़ लो “

रिकॉर्डर प्ले “ मेरा मास्क नहीं निकलेगा जब तक मैं न चहुँ तब तक नहीं …”रिकॉर्डर पॉज ..

रजिनि “ हाँ जानती हूँ तुमको मुझे गुलाम बनाना है तोह तुम्हारी गुलाम इसके लिए भी त्यार है ..पैर अब सहा नहीं जाता ..आओ अपना काम करो ..”

मनु ने रिकॉर्डर साइड में रखा और अपने T-shirt को अपने जिस्म से निकल दिया जिसके बाद उसके जिस्म पैर गयम वेस्ट बाकी थी …t-shirt निकलने के बाद उसके गोर बदन और चोदे सीने और मजबूत कट्स वाले शोल्डर को देखकर रजिनि का दिल मचल गया …वह तोह अभी तक नंगी थी …अब मनु ने अपने gym-west (गयम वाली baniyaan)ko भी उतार दिया ..जिसके बाद उसके 10 पैक बॉडी को देखकर रजिनि के मुँह से एक अह्ह्ह! निकल गयी ..सीईईई!

मनु ने उसके बाद अपनी जीन्स उतार दी जिसमे उसकी मज़बूत छोड़ी टंगे साफ़ बता रही थी की मनु ने अपने जिस्म को किस कदर म्हणत से तपकर मज़बूत किया था …

रजिनि भी काम नहीं थी ..उसका जिस्म अपने आप में बेमिसाल था 36स की चुकी और उसपर 30 की कमर और निचे चोदे गुल गांड जिसका साइज 38 होगा जिसे देखकर किसी का भी दिल मचल जाये पैर यहाँ उसका यह जिस्म भी मनु को गरम करने के लिए काफी कहाँ था …मनु का बॉडी पैर कण्ट्रोल था …पैर बॉडी पैर कण्ट्रोल से ज्यादा उसके दिमाग पैर उसका कण्ट्रोल था ..वर्ण सामने नंगी रजिनि को देखकर किसका दिल न मचले ..पैर यहाँ मनु जो अभी तक शांत था …क्युकी उसका मैक्सक सिर्फ चुदाई नहीं कुछ और hi था …जो आगे आपको पता चलने वाला है ..

मनु अब नंगा हो चूका था उसका नरम लोढ़ा जो अभी तक semi-erect था जो जिसका साइज अनिल के खड़े लैंड से इतने में भी काफी बड़ा था …जिसके साफ़ रंग को देखकर रजिनि का मैं ख़ुशी से झूम उठा था …कहाँ अनिल जो नहाने तक में ढिल्ला था …और कहाँ मनु का जिस्म जो हरतरह की ट्रेनिंग के बाद कैसा हुआ था ..रजिनि की आज चंडी थी …सॉरी चंडी नहीं सोना कहना ज्यादा सही होगा ..

मनु ने पुरे जिस्म से कपडे उतारने के बाद भी अपने चेहरे से मास्क को नहीं उतारा था ..पैर उसका जिस्म देखकर रजिनि तोह मस्ती से झूम उठी थी …

मनु ने इशारा किया …और रजिनि उसके पास आ चुकी थी …मनु ने रजिनि को निचे बैठाया ..और रजिनि उसके हर इशारे पैर किसी गुलाम की तरह उसका हर आर्डर फॉलो कर रही थी …

मनु ने रजिनि का सर पकड़ कर अपने semi-erect लोडे को उसके मुँह के पास लाया ..रजिनि आगे समझ चुकी थी …शादीशुदा थी कोई बची नहीं थी …मतलब साफ़ था लोढ़ा चूसना …रजिनि ने आजतक अनिल का लैंड अपने मुँह में नहीं लिया था …क्युकी एक तोह अनिल का गन्दा रहना और साथ में अनिल का लोडे का रंग काला होना …

पैर यहाँ रजिनि ने कोई कसार नहीं छोड़ी chup-chap मनु के लोडे को अपने मुँह में ले लिया …

रजिनि का गरम मुँह में जाते hi लोडे का खड़ा होना शुरू हो चूका था …रजिनि भी पूरी ईमानदारी से लोढ़ा चूसने में बिजी थी …

इमम्म!!!! अह्ह्ह्ह!!! रजिनि के मुँह से निकलती सिसकी बता रही थी की उसे पहली बार लोढ़ा चूसने में भी मज़ा आ रहा था …

मनु का लोढ़ा रजिनि का गरम मुँह पाकर अब अपने रंग में आ चूका था ….उसका हलबी लोढ़ा अपने पुरे उफान पैर था …

रजिनि पुछठ!! अह्ह्हम्मम्मम!! की आवाज़ें निकलते हुए ..लोडे को मुँह में लेने में बिजी थी …पैर साइज का असर अब उसको पता चल रहा था …लोढ़ा उसके मुँह में पूरा जा नहीं प् रहा था …सिर्फ सूपड़ा hi उसके पुरे मुँह को भरने के लिए काफी था ..

की तभी मनु ने कोई रेहम न करते हुए ..उसके मुँह में जबरदस्ती लोढ़ा थुश दिया …ाह्म्म्मम्म्म्म! की आवाज़ आयी और रजिनि का पूरा गाला भर चूका था …पैर मनु को जैसे रजिनि की कोई परवाह नहीं थी …उसने कई बार अपने लोडे को रजिनि के मुँह में छूट की तरह अंदर बहार किया …

उसका लोढ़ा रजिनि के मुँह से निकलने वाले थूक और लार से सन्न चूका था ..और रजिनि का हाल बुरा हो चला था …किसी भी पल रजिनि का दम निकल सकता था …पैर मनु ने अचानक से लोढ़ा उसके मुँह से निकल लिया ..

और रजिनि के थूक से साणे अपने लोडे को कई बार उसके चेहरे पैर जोर से चांटे की तरह मारा ….

रजिनि के लिए यह नया एहसास था …आजतक रजिनि सिंपल वे में सिर्फ चुदाई और उसके बाद सोना यही उसकी लाइफ थी ..पैर ऐसा पहली बार होना भी उसके लिए काफी एक्सीटेंड था ..

अब मनु ने रजिनि को उस गद्दे पैर लेटने का इशारा किया ..रजिनि भी समझ चुकी थी …सो chup-chap वहां पड़े गद्दे पर जाकर लेट गयी…

मनु अब उस ड्रावर की तरफ गया और अपने hulabi-lode पैर एक साथ उसने दो कंडोम छाडे लिए …और साथ में कोई जेल जैसी चीज़ उस पैर मॉल ली ..और बाद चला उस गद्दे की तरफ …जहाँ रजिनि चुदाई के लिए त्यार लेती हुई थी …

मनु ने उसके पास जाकर उसकी चुकी जोर से भींच ली …रजिनि के मुँह से आवाज़ निकल आयी …आआह्ह्ह्हह!! अब यह आवाज़ दर्द किट hi या मज़े की यह तोह रजिनि जाने ..पैर मनु ने उसकी आवाज़ की कोई परवाह नहीं की …और ताबड़तोड़ जोर से चुकी मसलना जारी रखा …..रजिनि भी पहली बार बिना रेहम के किंकी और बड़सम के मज़े एक साथ ले रही थी …

रजिनि की चूचियां लाल हो चुकी थी …पैर मनु तोह बेरहम बन चूका था ..रजिनि भी दर्द में भी मज़े ले रही थी …शायद डर रही थी की अगर उसने मनु को रोका तोह कहीं यह मर्द भी उसे ठुकरा न दे …सो मनु का दिया हर दर्द शी रही थी …अब जाने मज़े में या डर से ..

पैर यह बात पक्की थी की उसकी लाइफ में ऐसा सेक्स पहली बार था …

मनु ने कास कास कर उसकी चूचियां लाल कर दी थी ..अब मनु के हाथ बढे रजिनि की nipple’s की ऑर्डर जहाँ पैर भी मनु ने ज़रा भी रेहम नहीं किया …उनको अपने दोनों हाथों के उँगलियाँ और अंगूठे से पकड़ कर दोनों निप्पल को बहार की तरफ खिंचा …जिसका सिद्ध असर हुआ रजिनि पैर ….

आअह्हह्ह्ह्हह!!! जान लोगे क्या …?? अरे यहीं हूँ भाग नहीं रही हूँ …थोड़ा सा आराम से कर लो प्लीज ..” रजिनि ने मनु से कहा ..

मनु पैर इसका उल्टा असर हुआ …उसने और ज़ोर से रजिनि के थानों के nipple’s को किसी भैंस की तरह किचन शुरू कर दिया …जैसे कोई दूध निकलता है ठीक वैसे hi …और उसकी इतनी बेदर्दी का असर भी रजिनि की चूचियों पैर हुआ …और chrrrrrrrrrrr! की आवाज़ के साथ चूचियां पानी बहाने लगी ..(काफी ज़ोर से दबाने के बाद सूजन का पानी शायद निकल आया होगा क्युकी दूध तोह रजिनि के चुकी में था नहीं …पैर पानी जरूर निकल आया था..)

मनु उसके बाद रुका नहीं रजिनि किध वो चूचियां दोहने लगा और दूध न सही पैर पानी ज़रूर निकल चूका था ….छहाररररररर!!!!!! की आवाज़ के साथ …जिस से रजिनि को भी आराम मिल रहा था …

अब मनु का एक हाथ रजिनि की छूट पैर गया …और उसने रजिनि के छूट के छेद में दो उंगलियां एक साथ घुसेड़ दी …अब क्युकी मनु की उंगलियां भी तगड़ी और मोती थी …सो रजिनि की छूट का छेद दर्द करने लगा ….पैर रजिनि ने मनु को रोका नहीं …मनु भी ज़ोर से छूट में उंगलियां अंदर बहार करने लगा ….

रजिनि जहाँ एक तरफ चुकी के मज़े में मस्त थी …अब मनु उसे एक हाथ से चुकी का मज़्ज़ा और एक हाथ से छूट का मज़्ज़ा दे रहा था …सबसे बड़ी बात अभी तक मनु ने एक वर्ड नहीं कहा था…

रजिनि से सहना मुश्किल हो चूका था …

रजिनि “ मेरे मालिक अब अपनी गुलाम को छोड़ भी डालो न देखो तुम्हारी उंगलियों ने जो हलचल मचाई है उसकी दवा तोह यह मरदाना लोढ़ा hi पूरी कर सकता है …देखो अब और न तड़पाओ देखो चूचियां और छूट का हाल बुरा है …अब देर न करो प्लीज ..”

मनु ने यहाँ उसकी बात मान ली …जो छूट को उसने ऊँगली दाल कर थोड़ा बड़ा किया था …अब उसमे अपना हलबी लोढ़ा सत्ता दिया ..और एक ज़ोरदार झटका दिया और रजिनि की साँसे उसके हलक में अटक चुकी थी …

मनु का हुलभी लोढ़ा उसकी पानी से लबालब भरी छूट में संसंत हुआ आधा से थोड़ा काम चला गया था …अब क्युकी अनिल के साइज में और मनु के साइज में डिफरेंस था ..सो अनिल का साइज जहाँ तक जगह बना पाया था वहां तक मनु का आधा से काम जा चूका था …और क्युकी लोढ़ा साइज में लब्म और मोटा भी काफी तहत ओह रजिनि के लिए दर्द भरा एहसास था …पैर मनु वहीँ नहीं रुका …

मनु ने एक यहाँ भी रजिनि पैर रेहम नहीं किया और उसकी अटकी सांस के बावजूद भी एक और करारा झटका मारा और आधा लोढ़ा उसकी छूट में उतार दिया जिसके साइज के चलते रजिनि की छूट में से खून निकल आया …

रजिनि “ आह्हः!! जान से मारोगे क्या …तीन बचूं की माँ की छूट में भी दर्द कर दिया …तुम सुच में तूफानी मर्द हो …आठ! लगता है छूट फट गयी है आह्ह्ह्हह!!!”

मनु ने उसकी बात पूरी भी न होने दी और एक और कसकर झटका दिया और अपना पूरा हलबी लोढ़ा उसकी छूट में उत्तर दिया …

रजिनि “ उउउउइइइइ मा मार डाला …अरे मेरी छूट फट गयी ..आह्ह्ह्ह!! जान से मार दिया हे मेरी छूट फाड़ दी …..आइइइइइइइइ!!! अरे थोड़ा तोह रेहम करो न …”

मनु ने अब उसकी छूट में लोढ़ा अंदर बहार करना भी शुरू कर दिया …रजिनि की छूट सुच में फट चुकी थी ….और उसकी छूट से खून की धार निकल रही थी …पैर मनु तोह जैसे जानवर बन चूका था …रजिनि की हालत पैर उसने ज़रा भी रेहम नहीं किया …

रजिनि “ आह्हः !!! जान लोगे क्या ???”

पैर मनु उसकी छूट में लोढ़ा पेलने लगा पैर अचानक से रजिनि को एहसास हुआ की उसकी छूट में जलन होने लगी …

रजिनि “ आयी माँ यह कैसी जलन हो रही है …ऐसे लग रहा है साड़ी छूट में आग लगी हुई है …”

पैर मनु छूट में लोढ़ा पेलने में लगा रहा …रजिनि ने उसे दूर धकलेना भी चाहा पैर होते काटते मनु के आगे उसकी कहाँ चलती ..

मनु ने रजिनि को बराबर छोड़ना चालू रखा …उल्टा उसके पैरो को उठा कर अपने कंधे पैर रख लिया …अब तोह लोढ़ा और अंदर तक जाने लगा …

रजिनि भी लोडे को सीधे अपने पेट में महसूस कर सकती थी …पैर न जाने मनु के छोड़ने में उसको मज़े की जगह जलन हो रही थी ….ऐसा लग रहा था उसे की उसकी छूट में आग लगी हो ..पैर मनु रुका नहीं …

बेदर्दी से छूट पिलाई करता रहा …अब उस दर्द में भी रजिनि को ढर्रे धीरे मज़्ज़ा मिलने लगा था …पैर जलन बार्कर थी ..पैर रजिनि का जिस्म जिसको चुदाई की आग थी …उसके आग के आगे छूट की आग और जलन अब छूती पद रही थी ….

रजिनि “ अह्ह्ह्ह! सुच में तुम पाके मर्द हो ..ऐसे hi आह्हः!!!”

मनु बिना बोले चुदाई में लगा हुआ था …रजिनि की दर्द भरी सिसकी अब मज़े की सिसकियों में तब्दील हो चुकी थी …

मनु की चुदाई और छूट की जलन के आगे रजिनि की गर्मी अब ठंडी होने के कगार पैर थी ..मतलब उसका पानी निकलने वाला hi था ….पैर मनु तोह dur-dur तक पानी निकलने के aas-pass भी नहीं था …सो ज़ोर शोर से लगा हुआ था की अचानक रजिनि का जिस्म अकड़ने लगा और उसकी छूट ने फाइनली हार मान ली थी ..

रजिनि “ आह्ह्ह्ह!!! मैं गयी आए!!!! ऊऊह्ह्हह्ह!!! ामममममम!!!! ईईईई!!! शहहहहससष्ठ!!!”

रजिनि के पानी निकलने के बाद भी मनु ज़ोर से चुदाई में लगा हुआ था ….पैर रजिनि के लिए अब चुदाई का मज़ा अब जलन में बदल चूका था …पैर मनु जैसे उसकी सुनने के मूड में नहीं था …पैर उसने अब रजिनि को पलट दिया …

और रजिनि की छूट से लोढ़ा निकल लिया ..रजिनि बस थोड़ी सांस ले पायी थी चुदाई के बाद पैर अचानक से मनु ने अपना लोढ़ा उसकी गांड पैर लगाया और अंडर थुश दिया एक ज़ोरदार झटके के बाद ..

रजिनि जिसने आजतक गांड में ऊँगली तक नहीं किट hi ..इतना बड़ा लोढ़ा तोह दूर की बात है ..अनिल से चुदाई जरूर होती थी उसकी पैर गांड तोह कभी नहीं..

पैर यहाँ उसके सोचने से पहले hi मनु ने लोडे का सूपड़ा उसकी गांड में ठूंस दिया था ..छूट का पानी और उस जेल के वजह से लोढ़ा भी हल्का सा अंडर चला गया था ..रजिनि जो अभी तक छूट की जलन से उभर नहीं पायी थी …

उसकी गांड में अब जलन होने लगी थी …पैर मनु तोह जैसे रेहम न करने के मूड में था …सो झटके के बाद एक और झटका दिया ..रजिनि का हाल बुरा हो चला था …

रजिनि “ आह छोड़ दो मुझे बात छूट की हुई थी ..पैर तुमने तोह आह्ह्ह्ह!!! गांड में भी थुश दिया मेरे आयी दर्द हो रहा है..” पैर मनु रुका नहीं उल्टा रजिनि को घोड़ी बनाकर उसके दोनों हाथ पकड़ कर उसने लोढ़ा अंडर ठूसना जारी रखा …

रजिनि की हालत पतली हो चुकी थी दर्द के मारे बुरा हाल था ..पैर मनु ने पूरा लोढ़ा अंदर डालकर hi चैन लिया …रजिनि की चीखें वहां गूंज रही थी ..पैर रजिनि का हाल जान ने के लिए वहां दूर दूर तक कोई नहीं था ..रजिनि की गांड से भी खून निकलने लगा था …जो उसकी गांड से बेहटा हुआ उसके घुटनूं तक आ चूका था ..पैर मनु ने उस पैर कोई रेहम नहीं किया ..

रजिनि कुछ कर नहीं सकती थी ..पैर मनु रुका नहीं लोढ़ा अंदर बहार करना शुरू किया …रजिनि की गांड भी छूट की तरह अंदर से कई जगह से काट चुकी थी …जिसमे मनु का हु डॉटेड कंडोम उसके दर्द को और बढ़ा रहा था ..पैर मनु रुका नहीं पूरी तेज़्ज़ी के साथ लोढ़ा पेलता रहा ..

रजिनि को इसमें मज़्ज़ा काम सज़ा ज्यादा मिल रही थी …

रजिनि “” आह्ह्ह्हह!!! कोई है बचा लो मुझे …आह्ह्ह्ह!! यह मुझे मार डालेगा …आअह्ह्ह मेरी गांड फात रही है …बहार निकल लो अपने उस लोडे को …ईईईईई !”

पैर मनु बिना रुके उसकी गांड मरता रहा …आज जैसे मनु ने कसम खा ली थी रजिनि को दर्द देने की …सो लगा हुआ था ..पैर अब रजिनि की गांड में भी मनु के लोडे के लायक जगह बन चुकी थी ..सो उसे अब धीरे धीरे इसमें भी मज़्ज़ा आने लगा था …पैर जलन अभी तक बार्कर थी …हर बार जब लोढ़ा अंडर जाता तोह उसका हाल बुरा हो जाता ..पैर बहार आते hi मनु तूफानी रफ़्तार से लोडे को पूरा फिर से अंदर कर देता ..

मनु ने कई बार पूरा लोढ़ा निकल कर अंदर डाला …ताकि रजिनि की गांड खुल जाए ..और ऐसा हुआ भी रजिनि की गांड 10रस के सिक्के जितनी खुल चुकी थी …मनु का लोढ़ा कब अंदर होता कब बहार रजिनि समझ नहीं प् रही थी ..

मनु ने अभी तक उसके हाथ पकड़ रखे थे ..मनु रजिनि के दोनों हाथ कसकर पकडे उसकी गांड में बेदर्दी से लोढ़ा पेले जा रहा था …पैर रजिनि का जिस्म इसके भी मज़े लेने लगा था …

रजिनि “ आह्ह्ह्ह!! ोुह्ह्ह ऐसे hi आअह्ह्ह!!! सुच में दर्द तोह हुआ पैर अगर पहले पता होता की इतना मज़्ज़ा आनेवाला है तोह पहले hi गांड मरवा लेती ….ऊऊह्ह्ह्ह!!! और ज़ोर से …”

मनु ने यह सुनकर उसके हाथों को छोड़ दिया …मनु ने आगे से रजिनि की एक चुकी को थमा और मसलते हुए उसकी गांड मरने लगा रजिनि को अब और मज़्ज़ा आने लगा …

पैर मनु ने थोड़ी देर उसकी चुकी को मसाला और उसका हाथ अब रजिनि की छूट के दाने (क्लाइटोरिस ) पर चला गया …मनु उसे मसलने लगा …रजिनि को और मज़ा आने लगा …और उसका पानी निकल गया ..पैर मनु अभी तक वैसा hi था …

रजिनि “ आह्हः!! मुझे सभलो मैं गयी आअह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह!!! ेइइइइइइइ!!” रजिनि झाड़कर उस गद्दे पैर गिर चुकी थी मनु ने उसको पलट दिया किसी गुड़ाई जैसे और वापस उसकी छूट में लोढ़ा पेल दिया …

और लगातार पेलने लगा …रजिनि ने भी उसे रोका नहीं …हु अंदर से मनु की ताकत की फैन हो चुकी थी …दो बार उसे झाड़ने के बाद भी मनु अभी तक लगा हुआ था ..उसके लिए मानुस यही मायने में मर्द था …ऐसा मर्द जो बेदर्दी से छोड़ता है ..पैर इस बेदर्दी में भी रजिनि को मज़्ज़ा आ रहा था ..

मनु लगातार चुदाई तूफानी रफ़्तार से कर रहा था ..अब रजिनि भी खुलकर उसका साथ दे रही थी ..

रजिनि “ उफ्फ्फ्फ़! ऐसे hi आअह्ह्ह! तुम सुच में सूची मर्द हो …मैं तुम्हारी आज से गुलाम हूँ …मेरा यह जिस्म आज से सिर्फ तुम्हारा गुलाम है ..आज के बाद इस पैर सिर्फ तुम्हारा हक़ होगा …मेरा हु गांडू पति भी आजके बाद इसे नहीं छू सकेगा …मुझे जैसे चाहे जहाँ चाहे छोड़ना …मैं तुम्हारी गुलाम हूँ …सिर्फ याद करना मुझे मैं चली आउंगी …आह्ह्ह्ह!! जो मज़ा तुमने मुझे दिया है ..उसके आगे मेरी जान भी कुर्बान है ..आह्ह्ह्ह!!! कहाँ मैं हर रोज़ तुम्हें गाली देती थी ..पैर आज तुम को दिल से कह रही हूँ मुझे अब किसी और मर्द की जरूरत नहीं है …तुम मुझे जैसे चाहो वैसे रखो , चाहे गुलाम या रखैल या जो भी तुम चाहो …बस मुझे खुद से दूर मत करना वर्ण मैं मर जाउंगी …आह्ह्ह्हह! ..एक मर्द के दर्द में भी मज़ा मिलता है पहली बार देखा है …”

मनु ने अब रजिनि को छूट से लोढ़ा निकल दिया …रजिनि का दिल थम से बेथ चूका था… उसे लगा उसने कुछ ज्यादा बोल दिया है ..

रजिनि “ सॉरी अगर तुमको बुरा लगा हो तोह पैर मुझे ऐसे छोड़कर मत जाओ ..मैं हाथ जोड़ रही हूँ तुम्हारे ..” रजिनि गाड़े पैर पड़ी हाथ जोड़ने लगी ..

पैर मनु ने उसके हाथों को न देखा और उसे पलट दिया ..रजिनि सोचने लगी यह हुआ क्या …मनु ने उसकी गांड को उप्पेर किया और रजिनि का सर अभी तक गद्दे पैर लगा हुआ था …रजिनि ने सोचा की शायद मनु उसकी गांड फिर मरना चाहता है ..अब रजिनि भी उसे रोक या टोक कर अपना मज़्ज़ा बेकार नहीं करना चाहती थी ..सो

सर उस गद्दे पैर रखे chup-chap उसके एक्शन का इंतज़ार कर रही थी ..मनु ने अपना हुलाबी लोढ़ा उसकी गांड पैर हल्का सा फिर्या और रजिनि ने आँखें बंद कर ली ..क्युकी पहला दर्द उसे याद था …पैर अचानक से लोढ़ा गांड में न जाकर उसकी छूट में मनु ने उतार दिया उसकी छूट मारने लगा …

रजिनि को मज़्ज़ा मिलने लगा …रजिनि ने एक बार भी सर नहीं उठाया ..बस उसकी गांड उठी थी जिसके पीछे से मनु लगातार उसकी छूट की दनादन चुदाई कर रहा था …

रजिनि को ऐसे hi मनु बिना रुके छोड़ता रहा …रजिनि का पानी ऐसे hi एक बार और निकला पैर मनु फिर भी लगातार चुदाई जारी रखे हुए था …रजिनि का पानी इस बार पिशाब के साथ निकल आया था …रजिनि का पिशाब निकल रहा था ..पैर मनु लगातार उसकी चुदाई कर रहा था ..सो उसका यह ओर्गास्म मल्टीप्ल ओर्गास्म में बदल चूका था …रजिनि को ऐसा मज़्ज़ा पहली बार मिला था …पैर मनु रुका नहीं उसे छोड़ता रहा …

अब कोई 10 मिनट बाद मनु भी अपने पानी निकलने के लागर पैर था …रजिनि की छूट में उसने कुछ तेज़ झटके दिए और अपना पानी निकल दिया ..उसका पानी काफी निकला और उसके पानी निकलने से पहले hi रजिनि का पानी भी निकल गया ..

मनु ने धयान नहीं दिया पैर गांड में ज़ोर से चुदाई करने की वजह से उसके दो कंडोम में से एक कंडोम फट चूका था ..पैर लगातार जोरदार चुदाई के बाद उसका दुरसरा कंडोम अभी तक साबुत था ..सो जैसे hi उसका पानी निकला ..सो उसने रजिनि को कास कर पीछे से पकड़ लिया ..रजिनि की हड्डियां ढीली पद गयी उसके ज़ोर से पकड़ने से ..पैर रजिनि ने उसे रोका नहीं …उसके लिए आज पहली बार यह नया एहसास था …कहीं न कहीं आज उसका दिल मनु की चुदाई पैर आ चूका था …उसपर बेरहमी से चुदाई के बावजूद जो मज़्ज़ा आज मनु ने उसे दिया था उसके लिए पहली बार था ..अंदर से मनु के लिए उसका दिल अलग कहानी बता रहा था …हु फैन हो चुकी थी मनु की उसकी ताकत ..उसका खुद पैर कण्ट्रोल और उसकी चुदाई ..और साथ में उसका स्टैमिना देखकर रजिनि उससे बिना इम्प्रेस हुए नहीं रह पायी थी ..

मनु ने जब अपना पानी निकल दिया तोह उसने रजिनि की छूट से लोढ़ा निकल दिया ..और हु गद्दे से उठा ..और उसने अपने लोडे से कंडोम निकला …उसके पानी में भीगा उसका लोढ़ा देखकर रजिनि से रहा नहीं गया ..उठी और गप्प से उसका लोढ़ा मुँह में लेकर चूसने लगी …और पूरा पानी पीकर साफ़ कर दिया ..

मनु ने उसे अब खुद से दूर किया और अपने कपडे पहने ..रजिनि ने मनु को कपडे पहनते हुए देखा …उसके दिल और दिमाग में मनु की हर हरकत जैसे चाप सी गयी थी …मनु ने अपने कपडे पहन लिए थे …सो अब उसने उस ड्रावर में से हु कागज़ निकल कर अपने पास रखा जिसमे उसने रजिनि के सिग्न लिए थे ..और साथ में हु जेल जो उसने कंडोम पैर लगाई थी ..वह रजिनि की तरफ फेंक दी …

रजिनि ने देखा तोह उसे बड़ी हैरत हुई …और उसे अपनी छूट और गांड की जलन का पता अब चल चूका था …क्युकी यह नार्मल जेल नहीं एक ऑइंटमेंट जेल थी जिसको दर्द में उसे किया जाता था …ताकि गर्माहट मिल सके …पैर यहाँ उसकी छूट में जलन के लिए मनु ने उस जेल को उसे किया था ..पैर अब रजिनि कर भी क्या सकती थी …जो चुदाई और जो चस्का अब मनु ने उसे दिया था …उसके लिए यह जेल अब कोई मायने नहीं रखती थी ..

रजिनि मुस्कुराते हुए “ तोह जनाब ने हमारी लेने के लिए दर्द का यह पैमाना तैयार कर रखा था …कोई बात नहीं अब तोह रजिनि आपकी गुलाम है ..आपका दिया हर दर्द अब इस गुलाम के सर माथे है ..हुज़ूर”

मनु ने रजिनि को ऊँगली से इशारा किया …इशारा था उसकी छूट ..रजिनि ने उसकी ऊँगली का इशारा देखा तब उसे पता चला की उसकी छूट और गांड से बेहटा खून उसके घुटनूं तक आकर सुख चूका था …उसने खुद को ऐसे देखा तोह उसका दिल कांप गया ..खून बता रहा था की किस बेदर्दी से मनु ने उसकी गांड और छूट को छोड़ा है …रजिनि बैठी तोह उसकी गांड में बेपनाह दर्द हुआ ..उसकी छूट का हाल भी खासा ाचा नहीं था ..छूट भी सूज कर पाँव रोटी जैसी फुल चुकी थी ..उसकी छूट की खाल फ़ैल चुकी थी ..उसे पीछे से गांड दिखी तोह नहीं पैर उसकी कमर अब दुखने लगी थी ..

मनु ने उसे एक टेबलेट दी रिकॉर्डर प्ले “ यह टेबलेट लो दर्द काम हो जायेगा “

रजिनि ने बिना कोई सवाल किये टेबलेट ली और खा ली मनु ने उसे बोतल जो उसने साथ ली थी पानी के लिए दी ..ताकि हु टेबलेट खा सके ..दोसे हाई पावर की थी जिसका असर 15 मिनट में हो जाया करता था ..रजिनि ने पानी के साथ टेबलेट ली और मनु ने रजिनि को दोनों हाथों में उठा लिया और उसे दूसरे चैम्बर में जहाँ एक और बीएड पड़ा था वहां लेता दिया और उसके कपडे लेने चला गया ..

कपडे ले आया और उसने रजिनि को दिए और वहां से चला गया बोतल और एक साफ़ कपडा देकर ताकि रजिनि खुद को साफ़ कर सके ..रजिनि जैसे तैसे पानी से खुद के खून को साफ़ करने लगी पैर उससे कुछ हो नहीं प् रहा था ..

उधर मनु ने वहां लगे हर कैमरा को अपने बेग जो हु साथ लाया था उसमे पैक किया और वापस उस चैम्बर में चला गया जहाँ रजिनि खुद को साफ़ करने की कोशिश कर रही थी ..पैर कर नहीं प् रही थी …सो मनु आगे बढ़कर खुद hi उसे के खून को साफ़ करने लगा ..रजिनि किसी जादू में बंधी सिर्फ मनु को देखती रही …इतनी केयर तोह कभी उसकी पति ने भी नहीं की थी उसकी आपको क्या लगा ऐसा कहूंगा सॉरी ऐसा नहीं था ..पैर हाँ यह जरूर था की किसी से अगर इम्प्रेस होते हैं तोह उसकी केयर अछि लगती है ..जैसे अभी रजिनि को लग रही थी …मनु ने उसे साफ़ किया और कपडा साइड में रख दिया और उसने रजिनि को उसके अंडरवियर यानि पंतय और ब्रा पहने में भी मदद की …यह कोई केयर नहीं इसकी वजह थी मनु वहां से जल्द से जल्द निकलना छह रहा था …पैर रजिनि के लिए तोह यह केयर hi था ..

उसके बाद रजिनि को मनु ने खड़ा किया जिसके बाद रजिनि ने अपने कपडे पहने ..और त्यार हुई ..अब उसका दर्द काम था ..टेबलेट का असर था ..पैर दर्द अभी बाकी था जरूर ..सो छूट और गांड में कसक बाकी थी रजिनि की ..

मनु ने रिकॉर्डर प्ले किया “ याद है न जब चाहूंगा जैसे चौंगा वहां आना होगा …और साड़ी शर्तें याद रखना वर्ण ..”रिकॉर्डर पॉज..

रजिनि मुस्कुराते हुए “ बड़े बेदर्दी है मालिक आप …कितना दर्द दिया पैर ाचा लगा की जिसने दर्द दिया दवा भी उसने hi दी ..अब आपकी गुलाम जा रही hai..aapki हर शर्त मुझे अचे से याद है ..जब आपका दिल करे मुझे याद करलेना …मेरा वडा भी याद रखना ..अब यह जिस्म और यह दिल आपके नाम है ..इस पैर और किसी का हक़ नहीं ..पैर मुझे कभी खुद से अलग न करना …बस गुलाम की इतनी सी खाव्हिश है ..और हाँ काम से काम कोई तोह जरिया मुझे भी दो ताकि दोबारा आपसे मिल सकूँ ..”

रिकॉर्डर प्ले “ जब मुझे जरूरत होगी तुम्हारे घर लिफाफा आ जायेगा ..और अगर मुझसे मिलना हो तोह अपने घर के बहार मैं रोड के पास वाले पेड़ पैर वाइट चौक से निशान बना देना मैं खुद समझ जाऊंगा ..”

रजिनि “ यह सही रहेगा ..वैसे अभी तोह दर्द है ..पैर जैसे hi ठीक हो जाउंगी तब देखते हैं …अब गुलाम को इज़ाज़त दो ..चलती हूँ ..”

रजिनि ने चलने की कोशिश की तोह उसकी गांड और छूट में दर्द की लहर दौड़ गयी ..पैर जाना तोह था hi ..पैर उसकी चल बदल चुकी थी पूरी ..उसके पेअर फैला कर चलने से मनु के दिल को बड़ी ठंडक मिल रही थी ..

मनु मैं में “ अभी तोह सही से शुरू भी नहीं किया अभी से तेरी चाल बदल गयी …अभी तोह आगे देखना तेरा क्या होगा ..”

मनु ने उसके जाने का वेट किया और उसने अचे से चेक किया की ..रजिनि चली गयी या नहीं ..जब उसे यकीं हुआ की रजिनि वहां से जा चुकी है ..मनु ने जब टाइम देखा तोह हैरान हुआ क्युकी हु पिछले 3 घंटे से रजिनि को छोड़ रहा था …खैर हु भी वहां से निकल गया अपनी बाइक पैर ..

मनु अपने घर आ चूका था …जहाँ उसने अपने सामान को अचे से छुपा दिया ..और अपने दिमाग में आगे के लिए सोचने लगा ..उधर रजिनि अपने घर आ चुकी थी …रस्ते में जब भी उसे ऑटो में झटका लगता उसकी हालत पतली हो जाती ..पैर जैसे तैसे हु अपने घर आ चुकी थी …3 घंटे की चुदाई के बाद उसके जिस्म में ताकत नाम की चीज़ नहीं बची थी ..सो जैसे आयी वैसे hi पद गयी वहां ..पूरा दिन सोती रही ..शाम तक उसको बुखार आ चूका था ..दर्द का असर तोह शुरू तब हुआ जब टेबलेट जा असर ख़तम हुआ ..रजिनि की छूट और गांड में रह रह कर तेज़ सी तीस उठ रही थी ..पैर उसका दिल अभी तक उस अनजान मर्द के लिए तड़प रहा था जिसने उसको बेदर्दी से छोड़ा था …इस दर्द में भी उसके लिए रजिनि सोच में गम थी ..उसकी बेटियों को खाना शाम को अनिल ने ढाबे से लेकर दिया और उसे भी दवाई लेकर दी …सो खाना और दवाई खाकर रजिनि सो गयी ..

उधर शाम हुई तोह घर पैर सभी आ चुके थे …घर की रौनक आज अलग थी …न राजिंदर पहले जैसे ावक्वार्ड था ..न कोई और टेंशन थी ..पैर अचानक से मनु की फॅमिली को दो अलग अलग खबर मिली ..जिसे सुनकर मनु खुश हो या परेशां यह उसकी समझ से बहार था …..
:हिंट:
 
भाई ...मुझे बुरा लगने की बात है hi नहीं ..अपने को तोह क्रिटिक की आदत है .....पैर स्टोरी में आपने कहा की मनु रोटा है ..तोह भाई कहाँ आपको लगा की हीरो अपनी फॅमिली के बहार रोया ??



बात फालतू की तारीफ की नहीं है ...

आपको स्टोरी अछि लगी उसके लिए थैंक्स ...पैर आपको क्या ाचा नहीं लगा यह जानना hi मेरा मक़सद है ...ताकि जो कमी आपको लग रही है वह किसी और को न लगे ..

और सॉरी की बात नहीं है ..आपसे सुग्गेस्टिव चाहता हूँ ..आप से फालतू तारीफ की उम्मीद नहीं करता हूँ ..पैर सवाल तोह आपने फेंका पैर अब उसका जवाब भी बता दो ...

यकीं मनो बुरा नहीं लगा ...पैर उम्मीद करता हूँ आपके सुग्गेस्टिव से हो सकता है कहानी नयी रफ़्तार hi पकड़ ले ...

जैसे आप साफ़ कहते हो ...यहाँ भी मैं आपसे साफ़ सुग्गेस्टिव की उम्मीद करता हूँ ...ताकि हो सकता है आगे आपके सुग्गेस्टिव से कहानी में हीरो का अगला स्टेप आपको पसंद आये या आपके सुग्गेस्टिव से कहानी में कुछ नयापन आये ...
 
भाई ...मनु ने ऐसा क्यों किया उसके पीछे वजह क्या थी ..वह भी आपको पता hoga..manu ने उसके बाद चितु को अपने से अलग किया है ..आज तक चिंटू का जिक्र कहनी में नहीं है ...

आमतौर पैर मेरी आदत है कहानी में सस्पेंस छोड़ देना ..और आने वाले अपडेट में क्या होनेवाला है इसको पूरी तरह से नहीं बताता हूँ ..यह मेरा अपना तरीका है ..


पैर आज पहली बार आपकी वजह से बता रहा हूँ अपनी लीग से हटके की चिंटू कॉलेज में मनु के साथ होगा वहां उसका हाल हीरो क्या करेगा खुद देख लेना ...इस ज्यादा कहकर आपका मज़्ज़ा ख़राब नहीं करना चाहता ..अपना हीरो जवाब देता है पैर कब यह उसकी टाइमिंग है ..

आपके सपोर्ट के लिए थैंक्स भाई ..सुच में मैं आपकी बात से नाराज़ या ओफ्फेंन्डेड नहीं हूँ ..मैंने पहले भी कहा था ..कहानी में आपका नजरिया अलग हो सकता है ..और किसी और का अलग पैर उसके लिए ...आपसे नाराज़गी का मतलब hi नहीं बनता भाई ...

आप फ्री हो जहाँ जैसा लगे ..बता देना ....सूची कमेंट का इंतज़ार रहता है मुझे भी ...


बचपन दिखने का मक़सद इतना था ..की बचपन में हीरो का थॉट प्रोसेस और जवानी में उसकी मातुरित्य आपके सामने क्लियर हो ..
 




अपडेट 81


रिकैप........

उधर शाम हुई तोह घर पैर सभी आ चुके थे …घर की रौनक आज अलग थी …न राजिंदर पहले जैसे ावक्वार्ड था ..न कोई और टेंशन थी ..पैर अचानक से मनु की फॅमिली को दो अलग अलग खबर मिली ..जिसे सुनकर मनु खुश हो या परेशां यह उसकी समझ से बहार था …..

अब आगे........

मनु खाना खाकर उठा hi था की अचानक घर का ओल्ड रिंगवाला फ़ोन बजा …

जिसको राजिंदर ने पिक किया ..क्युकी राजिंदर हाथ धोकर वापस आ रहा था …कॉल पैर कुछ देर बात की और वापस आ गया …

राजिंदर को सोच में देखकर सुमित्रा ने पूछा “ क्या बात है किसका कॉल था “

राजिंदर “ हु jai-chand की साली जो हमारे घर में रहती थी हु अब इस दुनिआ में नहीं रही …”

सुमित्रा “ ओह्ह्ह! यह तोह बुरा हुआ ..चलिएः उसे देख आते हैं बेचारी अभी कुछ hi दिन पहले तोह एक बेटी की माँ बानी थी ..”

अजय “ क्या मम्मी हु साली चाचा की है उससे हमारा क्या रिश्ता उल्टा टाला तोड़कर माकन में गुसि थी मर गयी तोह मर गयी अब हम क्या कर सकते हैं “

सुमित्रा “ अजय ऐसे नहीं बोलते बीटा भले hi हु जिन्दा रहते गलत थी ..पैर अब बात अलग है ऐसे में जाना जरूरी होता है ..”

अजय “ भूल गयी मम्मी आपका दिल कितना कमज़ोर है …आप किसी की लाश तक नहीं देख पाती …भूल गयी क्या जब पड़ोस के उमदराज़ अंकल जब गुज़रे थे तब उनकी लाश देख कर आप बेहोश हो गयी थी …???”

सुमित्रा “ पैर बीटा जाना भी जरूरी है …अगर नहीं गए तोह उनको बुरा लगेगा …”

राजिंदर “ अजय सही कह रहा है …पैर सुमित्रा तुम रहने दो मैं और मनु चले जायेंगे वहां क्यों मनु क्या कहते हो ??”

मनु कुछ बोलता उससे पहले उसका मोबाइल बजा ..उसने कॉल पैर बात की और जब बात हुई तोह हु बोलै ..

मनु “ सॉरी पापा लगता है आपको अकेले hi जाना पड़ेगा ..क्युकी भटनागर सर का कॉल था कह रहे थे कोई मीटिंग है जो बहुत अर्जेंट है जिसके लिए मुझे उनके साथ दिल्ली जाना होगा …मैंने उनको बताया तोह उन्होंने कहा क्युकी मैं बिज़नेस का काम मेरे और भटनागर सर के हाथ में है सो मेरा जाना जरूरी है ..वर्ण कंपनी में बहुत कम्प्लीकेशन हो सकती है …जाना तोह नहीं चाहता पैर बात सिर्फ अकेले मेरी नहीं है …उसका इफ़ेक्ट कंपनी के हज़ारों वर्कर पैर पड़ेगा सो जाना मज़बूरी है …”

राजिंदर “ कोई बात नहीं बीटा तुम तयारी करो जाने की मैं अकेले चला जाऊंगा ..क्युकी अजय अभी छोटा है ..और तुम्हारी माँ को वहां बार बार बेहोश होते देखना मेरे बूट ेके बहार है …तोह अकेले जाना hi पड़ेगा …”

तोह फ़िलहाल फाइनल हुआ की राजिंदर अकेला वहां cremation(anitim संकर ) के लिए जायेगा और मनु दिल्ली के लिए निकलेगा …

मनु रात को अपनी तैयारी में लग गया …की उसे दिल्ली में अपने साथ क्या सामान लेना उसकी पैकिंग में लग गया …

दिल्ली में 1 वीक के लिए जाना था अगले दिन शाम को निकलना था ..सो मनु रात को पैकिंग करके सो गया …

अगले दिन जैसा तय हुआ था राजिंदर ऑफिस में छुट्टी के लिए कॉल करके निकल गया ..jai-chand के यहाँ ..और सुमित्रा भी आज घर पैर hi थी ..उसका मैं नहीं था जाने का ..पैर मनु को रेस्टोरेंट से कॉल आया तोह हु वहां निकल गया …

रेस्टोरेंट में आज सब कुछ नार्मल hi था ..पैर कुछ अकाउंट के काम के चलते जस ने मनु को वहां बुलाया था ..

जस “ तोह आपने नए रेस्टोरेंट के लिए क्या सोचा ???”

मनु “ सोचना क्या है जस …जो तुम फाइनल करोगी वही होगा …तुम बताओ करना क्या है ..??”

जस “ मैं और गुरु भाई ने कुछ जगह फाइनल की है पैर हेड ऑफिस के लिए दिल्ली की जगह फाइनल की है …क्युकी दिल्ली देश की कैपिटल है ..और वहां बिज़नेस रिफार्म का ाचा स्कोप है सो वहां ऑफिस की जगह ..होना अपने आप में सही रहेगा ..बस आप एक बार साइट विजिट कर लो ..कुछ डीलर हैं जो सही कीमत में ..जगह बेचने को त्यार हैं …कॉल पैर बात कर ली है पैर बिना साइट देखे वहां कुछ कहना सही नहीं है …”

मनु “ तोह प्रॉब्लम क्या है गुरु भाई और तुम जाकर जगह देख आओ ??”

जस ” ओह्ह्होऊ! आप समझते क्यों नहीं यहाँ का काम भी बाद रहा है और अकाउंट के लिए मुझे यहाँ रुकना पड़ता है फिर डेली इन्वेंटरी उसे भी देखना पड़ता है ..आपको पता भी है एक नन्ही सी जान पैर कितना बोझ है आपने तोह कह दिया दिल्ली चली जाओ पैर …इतना आसान नहीं है ..दिल्ली जाना ..” जस ने कहा

उसकी बात पैर मनु हंस पड़ा ..

मनु “ ओह्ह्ह! सॉरी मुझे माफ़ करना मैं धयान hi नहीं दिया की इस नन्ही जान पैर कितना बोझ है ..चलो कोई बात नहीं ..पैर एक दिन के लिए तोह जा hi सकती हो न ..??”

जस “ आप न तू मच हो ..अगर जा सकती तोह अभी तक चली गयी होती ..पैर लगता है दिल्ली अभी दूर है ..”

मनु “ बस बस जस ाचा समझ गया ..अगर गुरु भाई और तुम एक साथ नहीं जा सकते तोह तुम ..अकेले तोह जा सकती हो साइट विजिट के लिए ???”

जस “ हाँ जा सकती हूँ पैर दिल्ली में अकेली लड़की कैसे मैनेज करेगी ..आप खुद सोचना …मैं तोह आज तक इस सिटी से भी बहार नहीं गयी ..तोह अकेले दिल्ली जाना ..ना बाबा मेरे अकेले का बस नहीं है यहाँ ..”

मनु “ ओह्ह्ह! तोह यह बात है ..मेरी शेरनी दोस्त अकेले जाने से डर रही है ..??”

जस ने वहां इधर उधर देखा ..ऑफिस में सिर्फ मनु और जस hi थे बाकी लोग बहार काम में लगे हुए थे …

जस “ मनु तुमने मुझे self-dependent बनाया ..मैं मानती हूँ की मैं बिना वजह दरी नहीं हूँ ..पैर एक लड़की की तरह सोचकर देखना ..यहाँ तोह तुम और बाकी सब हैं देखने के लिए पैर वहां दिल्ली में मुझे कोई जरूरत पड़ी तोह कौन होगा ??? शेर भी अकेला हो तोह कुत्ते उसे घेर लेते हैं तोह ..मैं तोह लड़की हूँ अकेली क्या -क्या कर लुंगी ..??”

मनु “ और अगर मैं कहूं की तुम अकेली नहीं ho…na आज न कल न hi पूरी ज़िन्दगी …मैंने कहा था न की मैं हर कदम तुम्हारे साथ हंट ओह तुमने यह कैसे सोच लिया की वहां तुमको अकेला जाने दूंगा ??”

जस “ पैर आपने hi तोह कहा न अकेले जाकर देख लो ?”

मनु “ अरे अब दोस्त से मज़ाक नहीं करूँगा तोह किसके साथ मज़ाक करूँगा …”

जस “ मज़ाक तोह ठीक है ..बूत ी म दामम सीरियस अबाउट थिस ..मैं अकेले नहीं जाने वाली दिल्ली में ..”

मनु “ अगर मैं कहूं की मेरे साथ चलो तोह क्या तुम त्यार हो ??”

जस मैं में “ अगर तुम चाहो तोह दुनिआ के आखिरी चूर तक तुम्हारे साथ चली जॉन दिल्ली क्या है ..मेरा तोह बस नहीं चलता वर्ण ..जीना तोह जीना मरने के बाद भी तुम्हारा साथ न छोडूं मैं मेरे प्यारे मनु …”

मनु “ कहाँ खो गयी लगता है …मेरे साथ जाना ाचा नहीं लगा ..कोई बात नहीं गुरु भाई और तुम जब चाहो चले जाओ ..अगर काम से टाइम न मिले तोह एक या दो दिन के लिए ऑफिस में छुट्टी कर देना ..अब तोह ठीक है न ..”

जस “ मैं न तोह नहीं कहा न ..”

मनु “ पैर जस डिअर आपने हाँ भी नहीं कहा ..लगता है है आपको गुरु भाई के साथ hi जाना है तोह वैसे सही ..”

जस “ नहीं अब मैं आपके साथ hi जाउंगी ..पैर अचानक से दिल्ली जाने का कैसे प्लान बना लिया ??? “

मनु “ अब अगर तुम्हारी जगह कोई और पूछता तोह कह देता की तुम्हरे वजह से जा रहा हूँ ..पैर सुच कहना दोस्ती का रूल है ..सो एक अर्जेंट मीटिंग है दिल्ली में जिसके वजह से जाना होगा ..सो अगर जा रहा हूँ तोह तुम भी चलो .. मीटिंग की मीटिंग हो जाएगी और साइट विजिट भी हो जायेगा ..और तुम्हारा साथ भी मिल जायेगा क्या कहती हो ??”

मनु ने जस के सामने हाथ रख दिया उसका हाथ मांगने जैसे ..जस ने एक सेकंड भी नहीं लगाया उसका हाथ थमने में ..

जस “ क्या बात है जनाब ..आप तोह सुच में बुसिनेस्स्में हैं …एक तरफ मीटिंग और साथ में साइट विजिट और उसके साथ हम दोनों लगता है दिल्ली में कुछ अलग hi मज़ा आनेवाला है ..शेज़ड़ी साहिबा को मंज़ूर है ..यह शेज़ड़ी आपके साथ जाना क़ुबूल करती है …हीहीहीही”

मनु “ तोह शेज़ड़ी साहिबा ..दिल्ली मैं सिर्फ साइट विजिट करनी है या कुछ और भी प्रोग्राम हैं ..शेज़ड़ी साहिबा के ??”

जस “ शेज़ड़ी अपनी मर्ज़ी की मालिक हैं ..अभी कुछ सोचा नहीं आगे दिल्ली खुद शहज़ादी को बताएगी की करना क्या है ..आप बस टाइम बताओ जाना कब है .???”

मनु “ शाम को 8 बजे निकल रहे हैं बाकी कॉल कर दूंगा ..तुम त्यार रहना ..पैर मेरे साथ जाने में कोई प्रॉब्लम तोह नहीं ..”

जस ने मनु के गले में एक बाजू डाला और कहा “ लगता है बॉस तोह मान गया पैर दोस्त को पक्का कुछ प्रॉब्लम है …वर्ण शेज़ड़ी को ऐसे hi कोई मन नहीं करता ..”

मनु “ नहीं जी खादिम तोह आपका गुलाम है ..आप जैसे कहो ..वैसे हम आपके इस्तकबाल में त्यार हैं ..”

दोनों में ऐसे hi कुछ देर मीठी nik-jhokh होती रही ..की अचानक मनु का मोबाइल बजा ..

मनु ने कॉल पिक किया और बात की ..जस वहां अपने काम में लग गयी ..

कॉल कट हुई तोह मनु सोच में था ..

जस “ क्या हुआ ?? सब ठीक तोह है न ..??”

मनु “ हाँ सब ठीक है ..पैर नीता माँ को कुछ प्रॉब्लम है …उनके भाई का कॉल था हु चाहते हैं की अब नीता माँ उनके साथ रहे ..??”

मनु ने नीता मम के बारे में जस को बता रखा था की कैसे नीता मम उसकी माँ सामान और कैसे उसकी लाइफ में आयी ..सो नीता मम की कॉल पैर जस को हैरानी नहीं हुई ..

जस” यह तोह अछि बात है ..कब तक अकेली रहेंगी हु ..भले hi तुम उनके लिए सब कर लो पैर अकेला पैन फिर भी उनके साथ है ..अगर उनका भाई उनको साथ रखना चाहता है तोह इससे ाचा कुछ नहीं है ..”

मनु “ जस बात हु नहीं है ..मैं भी खुश हूँ उनके लिए ..की फाइनली उनके अपने भाई को उनकी असली एहमियत का पता चला ..पैर प्रॉब्लम कुछ ऑर्डर है ..”

जस “ मतलब “

मनु “ प्रॉब्लम नीता माँ ने कड़ी कर दी है ..वह कह रही हैं हु हमे छोड़कर जाना नहीं चाहती ..”

जस मैं में “ उनकी क्या गलती ..जब कुछ साल में मैं तुम्हारे साथ हूँ ..और एक पल के लिए तुम्हारा साथ छूटने से डर्टी हूँ. तोह हु तोह तुम्हें बेटे की तरह चाहती हैं ..मेरी चाहत और उनकी चाहत में अंतर है पैर चाहत तोह चाहत है ..इसमें किसका जोर चलता है ..”

मनु “ कहाँ खो गयी ??”

जस “ कहीं नहीं बस सोच रही थी ..”

मनु “ ठीक है तुम त्यार रहना शाम को मिलते हैं मैं ज़रा उनसे मिलकर उनको समझता हूँ..”

जस “ धयान से कहीं बात सुलझने के बजाये बिगड़ न जाए ..”

मनु “ हाँ धयान तोह रखना होगा ..क्युकी सुच कहूं तोह मेरा दिल भी उनको भेजने का नहीं है पैर अपने लगाव के चलते उनको हमशा के लिए अकेला नहीं छोड़ सकता ..”

जस “ पैर एक बात समझ नहीं आयी की उनके भाई को अचानक से उनपर इतना प्यार कैसे आया ..मुझे कुछ गड़बड़ लग रही है ..उनको समझा लो पैर एक बार उनके भाई पैर नज़र भी रखना जरूरी है ..की उसे सुच में बहिन चाहिए या इसके पीछे कोई नया फंदा है ..”

मनु “ घर पैर अजय hi जासूसी के लिए बहुत है ..शहज़ादी साहिबा ..तुम यहाँ हु सब मत करो ..पैर तुम्हारी बात में पॉइंट है ..मैं भी यही सोच रहा हूँ ..की अचानक से अलग रहने वाले भाई को इतना प्यार कैसे उम्मेद आया ..पैर कोई बात नहीं एक बार नीता माँ से बात कर लूँ और उनके भाई को उसके बाद देखते हैं ..अगर ज़रूरी हुआ तोह कुछ इस मटर पैर भी करेंगे ..अब नीता माँ को ऐसे hi कहीं जाने को नहीं कह सकता है न ..??”

जस “ हाँ सही कहा पहले उनसे बात करलो आगे का बाद में देखना ..और शाम को टाइम से कॉल कर देना ..”

उसके बाद मनु वहां से निकला और सिद्ध नीता मम के घर आ चूका था ..क्युकी हु अभी घर पैर hi थी ..

नीता मम “ क्या बात है आज मनु यहाँ लगता है यह कोई सपना है ..”

मनु नीता मम के ताने को समझ गया …

मनु “ सॉरी माँ मैं तोह अपनी प्यारी नीता माँ के पास आया था ..पैर भूल गया ..नीता माँ पहले नीता मम भी हैं …”

नीता “ ज्यादा फालतू बात करने की ज़रूरत नहीं है …अचे से समझती हूँ तेरी चालाकी …यहाँ की बात वहां घूमना कोई तुझसे सीखे ..” नीता मम ने बात करते हुए मनु का कान पकड़ लिया …

मनु “ आह्हः! सररययीय सॉरी माँ गलती हो गयी मुझसे ..अब कान छोड़ दो देखो अब तोह अपनी माँ के सामने हूँ ..शिकायत आराम से कर लेना …प्लीज मेरी प्यारी माँ …”

नीता मम ने भी उसका कान छोड़ दिया …अब दोनों साथ में बैठे बात करने लगे …

नीता मम ..” देख बीटा ज्यादा की ख्वाहिश नहीं है पैर काम से काम आ नहीं पता तोह कॉल hi कर लिया कर …”

मनु सीरियस होते हुए “ सॉरी माँ आपको तोह पता है …लाइफ बहुत बस्सी है झूट मैं आपसे बोल नहीं सकता पैर यह भी सुच है …की इन दिनों बहुत बिजी था …जिसके चलते आ नहीं पाया …पैर अजय तोह दिन में एक चाकर लगता होगा न …???...उसे बोलै हुआ है .साथ में आपके लिए एक सर्वेंट का भी इंतज़ाम किया था …हु ठीक काम कर रही है न ???”

नीता मम प्यार से देखते हुए ..”हाँ मेरे बचे सब ठीक है ..अजय भी हर रोज एक राउंड आता है ..और हु नौकरानी भी अछि है हर तरह से सेवा करती है ….पैर बीटा मुझे कभी कभी तुझे देखने का दिल करता है …उसका क्या …??”

मनु ..” अरे माँ उसी लिए तोह यहां आया हूँ ..चलो तयारी करो ..साथ चलते हैं ..याद है न मां जी ने बुलाया है आपको ..??”

नीता थोड़ा नार्मल होकर “ मनु देख मैंने तुझे पहले hi कहा था ..मुझे नहीं जाना ..इतने साल से आजतक उनलोगों ने आजतक अपनी बहिन को न जीते देखा न मरते हुए ..पैर आज अचानक से उनको बहिन की याद आ गयी ..मुझे यह सब ठीक नहीं लग रहा है ..मुझे उनकी ज़रूरत नहीं ..मेरे लिए तुम और अजय hi काफी हो ..जहाँ इतनी ज़िन्दगी काट गयी बाकी भी काट जाएगी ..तुम इसके लिए मुझ पैर जोर न देना क्युकी अगर तुमने कहा तोह मैं मन नहीं कर पाऊँगी …प्लीज बीटा …”

मनु नीता मम के दोनों हाथ थम लेता है ..थोड़ा दबाता है ..और उसके बाद नीता मम को अपने सीने से लगा लेता है ..जहाँ नीता मम सुकून से सिमट जाती है ..मनु के अपनेपन के चलते ..

मनु “ माँ “

नीता “ हम्म्म!”

मनु “ माँ मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ …यह नहीं कहूंगा की आपके जाने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा ..सुच कहूं तोह पड़ेगा बहुत पड़ेगा ..पैर इसका मतलब यह नहीं की आपको आपके भाई मतलब मां जी से दूर कर दूँ …आपकी बात सही है अगर आपको अपनी ज़िन्दगी में हर फैसले को लेने का पूरा हक़ है ..चाहे फैसला जो भी हो ..आपका बीटा आपके साथ है ..पैर क्या आप मेरी एक बात मानोगी ..”

नीता मनु को और कस्ते हुए “ बीटा यह मुझे पता है ..जहाँ दुनिआ में मेरा साथ कोई दे या न दे वहां तुम और अजय मेरे साथ परछाई की तरह होंगे ..पैर अचानक से मेरे भाई का यूँ मुझे अपने पास बुलाना ..मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा ..पैर तुम जो कहोगे मैं बिना सवाल के मान लुंगी ..”

मनु “ माँ मैं कुछ सोचा है ..अगर आप बुरा न मनो तोह कुछ कहूं …”

नीता प्यार से उसके गाल सहलाते हुए ..” पागल है क्या तेरी बात का बुरा मान सकती हूँ क्या ..बोल भी क्या कहना है ..”

मनु “ तोह एक काम करो सामान पैक करो जाने की तयारी करो …दिल्ली चलना है ..”

नीता मम उसके गले से अचानक दूर हुई और हैरत से मनु को देखने लगी..

मनु “ क्या हुआ माँ ???”

नीता “ बीटा अगर तुमने कहा है तोह चली जाउंगी दिल्ली पैर मेरे 1 % मैं नहीं है वहां जाने का ..मैं आज भी उनके कड़वे बोल नहीं भूली हूँ …पैर तुम्हारी बात नहीं टालूंगी ..ाचा तुम बैठो मैं तयारी करती हूँ ..” नीता मम वहां से मुड़ने को हुई उनकी आँखों से आंसू बहने hi वाले थे …

नीता मम अंदर जाने को मुड़ी पैर मनु ने अचानक से उनके हाथ को पकड़ कर उनको रोक लिया …

नीता मम“ छोड़ो न बीटा जा रही हूँ न तयारी करने के लिए ..”

मनु ने नहीं छोड़ा हाथ उल्टा खचकर नीता मम को अपने पास अपने सीने से लगा लिया ..नीता मम के आंसू बहने hi वाले थे .

मनु “ माँ मैं दिल्ली चलने को कहा है …आपको अकेले जाने को नहीं ..शायद आपने धयान नहीं दिया ..”

नीता मम हैरानी से “ मतलब ??”

मनु उसके सर को प्यार से अपने सीने में लगा लेता है ..

मनु “ माँ मैं आपको ऐसे hi अकेला बेहज दूंगा यह आपने सोच भी कैसे लिया …मैं खुद चल रहा हूँ आपके साथ …अरे मज़ाक थोड़ी है ..आप माँ हो मेरी ऐसे कैसे आपको अकेला दिल्ली भेज दूँ …क्यों सही है न ..??”

नीता मम जहाँ अब तक दिल्ली जाने के नाम से दुनिआ भर का गम उनके चेहरे पैर आ चूका था ..अचानक से उनका मुखड़ा ख़ुशी से खिल उठा ..नीता मम ने हाँ में सर हिला दिया ..

मनु “ आपने सोच भी कैसे लिया की …अचानक से कोई कॉल आएगा और मैं आपको ऐसे hi भेज दूंगा …आप माँ हो मेरी ..कोई गैर नहीं आज तोह सोच लिया आगे से ऐसा सोचना भी नहीं वर्ण मैं आपसे कभी बात नहीं करूँगा ..समझ गयी न ..??” मनु ने झूंठा गुस्सा दिखते हुए कहा ..

नीता मम ने अपने कान पकड़ लिए ..” सॉरी बीटा मुझे लगा की तुम भी मुझसे अब पीछा छुड़ाना कहते हो ??”

मनु ने उनके हाथों को उनके कानो से हाथ दिया ..और बोलै “ माँ ऐसा सोचना भी नहीं मैं बहुत काम लोगों को अपने करीब आने देता हूँ ..और आपको तोह माँ मन है ..जब माँ को hi जाने दूंगा तोह माँ मानने का मतलब hi क्या है ..मैं जनता हूँ आपको ऐसा लगा होगा की मैं आपको दिल्ली भेजना चाहता हूँ ..तोह यह सही भी है …क्युकी मैं नहीं चाहता की मेरे चलते आप आपने भाई से दुरी बना लें ..पैर इसका मतलब यह नहीं है की मैं आपको हमशा के लिए वहां उनके पास भेज रहा हूँ …जब मां जी की सगी बहिन यानी आपको उनपर डाउट है तोह ..मैं अचानक से उनपर कैसे यकीं कर लूँ …समझ रही हो न ???”

नीता मम “ जब तुम को भी यकीं नहीं है तोह वहां लेकर hi जाना क्यों चाहते हो मुझे …जबकि मैं तोह उनको देखना भी नहीं चाहती ..”

मनु “ माँ दुनिआ बड़ी अजीब है …यहाँ लोग भी अलग हैं …बिना वजह यहाँ कुछ नहीं होता …मैंने कहा न मैं आपके साथ चल रहा हूँ …वहां जरा भी गड़बड़ लगी तोह आपको वापस ले आऊंगा …वैसे भी आपको लेकर बहार कहीं जाने को मिलता नहीं ..और जब मौका मिला है छुट्टी एन्जॉय करने का तोह आपको जाना नहीं है ..पता भी है ..कितने अरमान थे मेरे दिल्ली में आपके साथ कितना मज़ा करूँगा ..पैर आपने एक बार में मेरे सारे अरमानो पैर पानी बहा दिया …” मनु ने कहा

जिसका मतलब नीता मम अचे से समझ गयी..

नीता मम ने एक बार फिर उसके गाल को सहलाया .” बीटा अचे से समझती हूँ तेरी चालाकी की तुम कहाँ क्या बोलता है ..और तेरे अरमान भी अचे से पता हैं …एक काम के लिए तू दिल्ली जानेवाला नहीं पक्का पूरा वर्कलोड साथ ले जानेवाला है …और मेरा नाम बदनाम कर रहा है …पैर कोई बात नहीं अगर तू साथ है तोह दिल्ली क्या ..अमेरिका भी जाने में मुझे कोई परेशानी नहीं है …”

मनु “ यह सही कहा माँ अगली बार अमेरिका hi चैलेंज ..आखिर उनको भी पता चले की हमारी माँ का रॉब क्या है ???हहहह!”

नीता मम भी उसके साथ हंसने लगी ..नीता मम ने नार्मल होकर कहा ..” बीटा पैर जाना जरूरी है क्या …???”

मनु “ हाँ माँ जरूरी है ..मैं भी मां जी में आये अचानक बदलाव पैर यकीं नहीं कर प् रहा हूँ ..ज़रा दिल्ली में थोड़ा देखना ज़रूरी है …सुना है दिल्ली में यहाँ के मॉल से बड़े मॉल हैं वहां आप घूम लेना “

नीता मम “ मुझे पता hi था ..”

मनु “ क्या पता था माँ ???”

नीता मम “ घूम लेना मतलब तू पक्का वहां बिजी रहने वाला है …यह तोह कन्फर्म हो चूका है ..वर्ण तू मुझे यूँ अकेले घूमने को नहीं कहता मुझे नहीं जाना दिल्ली …सुन ले ..”

मनु दोनों हाथ जोड़कर “ सॉरी माँ आप से छिपाना नहीं छठा था ..पैर मेरी मीटिंग भी है दिल्ली में पैर मीटिंग सिर्फ एक दिन की है बाकी तोह मैं फ्री hi हूँ …”

नीता मम “ देखा मैंने कहा था न तू सिंगल काम के लिए दिल्ली जाने वालों में से नहीं है …मेरी बात सुच है न …और मुझे ऐसे दिखा रहा था की जैसे सिर्फ मेरे लिए जा रहा है …छ्पप्फह!”

मनु ने नीता मम के मुँह पैर हाथ रख दिया “ माँ ऐसा सोचना भी नहीं मीटिंग तोह कल रात hi डीडे हुई थी …सुबह ऑफिस में जस भी पीछे पद गयी दिल्ली में साइट विजिट के लिए ..और वहां से सब सटले करके हटा hi था की आपका कॉल आ गया …जिसमे मैंने सोचा की जब काम सारे दिल्ली के hi हैं तोह एक बार में hi देख लेता हूँ …पैर अगर आपको लगता है की मैं सिर्फ आपको मीटिंग के चलते साथ ले जारहा हूँ तोह …आप मेरे साथ मीटिंग के बाद स्पेशलय चलना ताकि आपको पता चले की काम अपनी जगह है ..पैर माँ हर चीज़ से उप्पर है मेरे लिए …तब तोह ठीक होगा न …??”

नीता मम को तब रीलीज़ हुआ की मनु वास्तव में एक साथ कितने कामो में फंसा रहता है ..पैर इतने के बाद भी अकेला उनकी परवाह करता है …स्पेशल उनके साथ जाने को लेकर कही हु बात नीता मम को छू गयी ..

नीता मम “ बीटा “

मनु “ हम्म! “

नीता मम प्यार से उसके सर पर हाथ फिरते हुए …”बीटा ी म सॉरी मुझे लगता है मैं ज्यादा बोल गयी मुझे …हम्म्म!” मनु ने एक बार फिर उनके मुँह पैर हाथ रख दिया …

मनु “ माँ इस दुनिआ में ऐसा कोई दिन न आये की आपको मुझसे ऐसा कुछ कहना पड़े जो मैं बर्दास्त नहीं कर सकता …मज़ाक में भी नहीं आपको निचा देखने दे सकता हूँ ..और आप सॉरी कह रही हैं मुझे ..इससे ाचा मार लेती हु ाचा लगता ..पैर आपका माफ़ी मांगना मुझे बर्दास्त नहीं है …..ी लव माय माँ …यह बात अचे से समझ लो ..दुनिआ में कोई आपको मुझसे दूर नहीं कर सकता …”

नीता मम के आंसू निकलने लगे यह सुनकर …उन्होंने मनु को फिर से सीने से लगा लिया ..मनु ने उनके आंसू पूछे ..

मनु “ अब बस भी करो पहले खुद hi शक करती हो और खुद hi रोने लगती हो …अब तोह खुद को देखलो एक बार ज़रा …कहाँ पहले जीरो साइज (मनु का मतलब पहले उनके मोटापे से था ) और अब कहाँ यह मेरी पतली दुबली सी नयी ककड़ी जैसी माँ ..जब देखो रोने के नए बहाने ढूंढती रहती हैं ..ी हेट टीयर्स ..डिअर ी होते टीयर्स ( राजेश खाना स्टाइल में कहा मनु ने ) पूछ डालो इन ाँसों को …ी जस्ट हेट टेअर …मुहह्हआआ! “ मनु ने आंसू पूछते हुए नीता मम के गाल की पापी ले ली …ताकि नीता मम का रोना बंद हो सके …

और ऐसा हुआ भी कहाँ दोनों अभी तक सेंटी हुए पड़े थे ..पापी लेने के बाद नीता मम ने भी रिवर्ट में मनु के पीछे भागना शुरू कर दिया …

नीता मम “ बदमाश माँ की पापी लेता है …अभी बताता हूँ तुझे …”

मनु आगे भागते हुए …” मैंने पहले hi कहा था …ी हेट टीयर्स डिअर …ी हेट टीयर्स ..पैर आपको बहाने थे सो सोचा पापी ले लूँ कमसे से काम राजेश खन्ना जी जो कितने रोमांटिक थे उनको याद कर सकूँ …पैर सुच में गीले गालो को चूमकर मज़ा नहीं आया …कहाँ पहले हु गोल मटोल गाल और कहाँ यह बोरिंग डिंपल वाले नार्मल से गाल ..”

नीता मम “ रुक जा एक तोह पापी ले ली उप्पेर से राजेश खन्ना बना है तुझे ..रुक तू एक बार हाथ तोह आ …बताता हूँ तुझे …उसपर मेरी इतनी म्हणत से पतला होना उसका मज़ाक बना रहा है ..भूल गया खुद hi पीछे लग कर पतला किया था ..मेरा क्या है ..फिर से मोती हो जाउंगी ..”

मनु अचानक से रुक गया ..नीता मम उसके रुकने से चौंक गयी …मनु रूककर घुमा और उसने नीता मम के हाथों को पकड़ा और

कहा “ माँ मज़ाक अपनी जगह है ..मैं आपको खुश देखना चाहता हूँ ..मुझे आपके पहले वाले रूप से कोई दिक्कत नहीं थी ..बस दिक्कत यह थी की आपने जीना hi छोड़ दिया था ..आपको बिजी रखने और हेअल्थी रहने के लिए मैं आपको इतना फिट करने पैर जोर दिया …आज एक बार खुद को आईने में देखो क्या मेरा फैसला गलत था माँ???”

नीता मम ने खुद को वहां पास में लगे अलमारी के आईएनए में देखा तोह पाया ..कहाँ पहले हु डबल देककर बस जैसे हुआ करती थी …पैर आज उनके फिगर को देखकर कोई जवान एक्ट्रेस भी शर्मा जाये …मतलब जहाँ उनकी आगे की औरतें मोटापे और अकड़न की शिकार हुआ करती थी ..वह वहां लोच और लचक से भरी हुई फुर्तीली थी …इसके सबूत उनका मनु के पीछे भागना था …उन्होंने खुद को आईने में देखा और याद किया अपना ओल्ड रूप तब उनको समझ आया ..की मनु ने उनपर कितना दिमाग खपाया था ..कैसे मनु और अजय दोनों hi उनके खाने को लेकर उनसे लड़ते थे ..कैसे उनका जंक फ़ूड बंद करवाया था …जहाँ पहली बार उनका वजन थोड़ा काम हुआ तोह खुद उनको भी यकीं नहीं हुआ था …पैर थोड़ा थोड़ा करके आज वह फैट 2 फिट

थी …और यह सब उनकी आँखों के सामने अचानक से चलने लगा था ..उनको कई बार खुद यकीं नहीं होता था की उन्होंने खुद को फिट कर लिया है …

मनु “ क्यों अभी मैं गलत हूँ क्यों है न ??”

नीता मम ने बड़े प्यार से उसके सर पैर आशीर्वाद जैसे हाथ रखा ..”बीटा तुझे गलत कहना एक माँ के लिए गली है ..जो काम से काम मेरे होते पॉसिबल नहीं है …क्युकी मैं खुद तेरी माँ हूँ ..सो अब सेंटी होना छोड़ ..चल आज तेरे लिए खाना बनती हूँ …”

मनु “ लगता है कामवाली आज नहीं आयी है जो आप खुद खाना बना रही हो ..”

नीता मम “ अब क्या करूँ बीटा यह सब तुम्हारा और अजय का hi किया धरा है ..कहाँ पहले आराम से बहार का खलिया करती थी ..पैर तुम दोनों शैतानो ने मिलकर मुझे खुद के बने खाने की आदत दाल दी ..पैर तेरे और अजय के लिए तोह मुझे खुद hi बनाना पसंद है ..तू बेथ मैं अभी आयी ..”

मनु उसके बाद बेथ गया ..क्युकी अजय का आने तोह पॉसिबल नहीं था क्युकी घर पैर सुमित्रा के साथ था …सो मनु यहाँ था ..नीता मम ने ाचा खाना बनाया था ..मनु ख़ुशी से खाने लगा …और साथ में नीता मम को भी उसने ज़िद करके खुद अपने हाथों से खिलाया ..दोनों मज़े से खाना कहते हुए टाइम बिताने लगे …

उधर किसी जगह कुछ दो लम्बे तगड़े सूट बूट में बैठे हुए 3 आदमी एक साथ बैठे थे ..

आदमी 1 “ तोह उस सोफ़िया का क्या करना है समझ आ गया न ??”

आदमी 2 ंद 3 “ यस सर उसके दिल्ली के पॉइंट से उठाना है ..और उसकी सेक्रेटरी को भी नहीं छोड़ना है सब याद है ..पैर सर आपको नहीं लगता मर बॉस को पता चला तोह यह बात आपके और हमारे लिए ठीक नहीं है ???“

आदमी 1 “ हहहहह! कुत्ते का नाम उसके काम से है ..और मर्द का नाम उसके काम खौफ से है …जितना जिसका खौफ होता है ..उतना hi हु डरपोक होता है ..तुम बेफिक्र रहो ..बस काम पूरी मुस्तैदी के साथ करना क्युकी मर बॉस का पता नहीं पैर ..अगर तुम लोग चुके तोह मैं चुकने वाला नहीं हूँ ..तुम्हारे फॅमिली को जिन्दा नहीं छोडूंगा ..याद है न हु रैंड सोफ़िया और उसकी हु हरामजादी मरदारचोद सेक्रेटरी मुझे जिन्दा चाहिए ..यहाँ इस जगह नहीं जगह तुम लोगों को बता दी जाएगी ..अब तुम लोग जा सकते हो ..”

आदमी 2 ंद 3 “ ok सर “

हु दोनों चले गए ..आदमी अकेला बैठा था वहां से निकल गया …

आदमी 2 “ यार अगर उस सोफ़िया को नहीं पकड़ा तोह यह हमारे घर वळून को जान से मार देगा ..और पकड़ लिया तोह हु हरामी मरदारचोद बॉस हमको मार देगा बिना सांस लिए ..क्या करैं ??”

आदमी 3 “ करना क्या है अभी यह शेर है इसकी सुन ..बॉस की बाद में देख लेंगे ..उसे क्या दुनिआ में सपना आने वाला है की हम दोनों सोफ़िया को किडनैप करना चाहते हैं …तू चल काम जरूरी है ..वर्ण घरवाले मरेंगे हमारे ..भूल गया साले ने उनका किडनैप कर लिया है ???”

आदमी 2 “ भाई तू सही कह रहा है …पहले अपने घरवळून के लिए उस बॉस की चमची का किडनैप करते हैं उसके बाद सोचेंगे की करना क्या है ???चल तयारी करते हैं ..”

दोनों चल दिए वहां से …सोफ़िया और नेहा के किडनैप की तयारी के लिए …

उधर मनु और नीता मम ने खाना फिनिश किया और मन ऊके कहने पैर दोनों वहां से मन ऊके घर निकल गए जहाँ सुमित्रा और अजय दोनों थे ..वहां चारो ने जैम कर मस्ती की अब शाम ढलने वाली थी …सो नीता मम ने घर जाने का जिक्र किया क्युकी उनकी पैकिंग बाकी थी ..सो अजय उनके साथ चला गया …मनु की पैकिंग हो चुकी थी …सो हु तोह अपने में मस्त था ..शाम होने को आयी तोह उसने जस को कॉल किया और रेडी रहने को कहा …

और चल दिया अपने सामान के साथ जस के यहाँ टैक्सी में जहाँ से उसने जस को पिक किया ..जस आज पहली बार इंडियन ऑउटफिट में थी ..गज़ब लग रही थी ..पैर मनु ने अस उसुअल उसकी तारीफ की और जस ने भी शर्मा कर उसका जवाब दिया …हँसते खेलते नीता मम के घर के बहार टैक्सी लग चुकी थी …मनु ने टैक्सी से उत्तर कर नीता मम के पेअर छुए ..और उनका सामान भी टैक्सी में लोड किया ..और उनको जस से इंट्रोडस किया ..

जस को देखकर नीता मम ने जस को गले से लगा लिया ..

मनु को खोनी मारी और उसके कान के पास जाकर “ तूने मुझे बताया नहीं जस कितनी सुन्दर है …लगता है जैसे चाँद खुद तेरे साथ में चल रहा हो …”

जस ने धीरे से कही बात भी सुन ली थी शर्म के मारे उसके गाल लाल हो चुके थे …

मनु नीता मम के कान में “ चाँद तोह है पैर एक नहीं आज मेरे साथ एक साथ दो दो चाँद है …मेरी माँ भी किसी चाँद से काम हैं क्या..???”

नीता मम “ हाँ मुझे बुद्धि को चाँद बता रहा है लगता है …मज़ाक करने को कोई और नहीं मिला …??”

मनु ने जस की तरफ देखा “ क्यों चाँद नंबर 1 क्या कहती हो चाँद नंबर 2 के लिए …क्या यह सुच में चाँद से काम हैं क्या ???”

जस “ हाँ तुम सही कह रहे हो यह तोह सुच में चाँद hi हैं …”

मनु “ देखा अब तोह कोई शक नहीं है चाँद नंबर 1 ने भी मान लिया …की तुम चाँद से काम नहीं हो ..”

नीता मम कैग ाल भी शर्म से लाल हो चुके थे …उन्होंने ऐसे उम्मीद नहीं की थी ..की जस भी मनु का साथ देगी …सो शांत बेथ गयी हु भी ..

इस बिच उनका एयरपोर्ट आ चूका था जहाँ भटनागर सर खड़े थे …क्युकी मनु ने पहले hi जस और नीता मम का टिकट करवा दिया था ..सो बस जरूरत थी सिर्फ बोर्डिंग की …सो सभी ने बोर्डिंग क्लियर किया और फ्लाइट में बेथ गए …जहाँ दिल्ली उनका लास्ट पॉइंट था ..जहाँ दिल्ली में बहुत कुछ un-accepted होना था …..
:हिंट:
 
अपडेट 82

रिकैप........



इस बिच उनका एयरपोर्ट आ चूका था जहाँ भटनागर सर खड़े थे …क्युकी मनु ने पहले hi जस और नीता मम का टिकट करवा दिया था ..सो बस जरूरत थी सिर्फ बोर्डिंग की …सो सभी ने बोर्डिंग क्लियर किया और फ्लाइट में बेथ गए …जहाँ दिल्ली उनका लास्ट पॉइंट था ..जहाँ दिल्ली में बहुत कुछ un-accepted होना था …..

अब आगे........

मनु और बाकी सब अपने टाइम से दिल्ली आ चुके थे ..क्युकी रात काफी बिट गयी थे सो सारे सिर्फ अपने अपने होटल रूम में check-in करके सोने चले गए …यह आपको क्लियर कर दूँ की यह विजिट ऑफिसियल थी …सो अशोक शर्मा जी की कंपनी ने सिर्फ होटल में रूम आल्लोट करवाए थे मनु और भटनागर सर के लिए ..पैर क्युकी अब जस और नीता मम साथ में थी सो मनु ने उनके लिए भी शामे होटल में pre-booking करवा दी थी ..सो सब को अपने अपने अलग अलग रूम मिले हुए थे ..पैर मनु और भटनागर सर का रूम एक फ्लोर पैर था पैर उसके निचे वाले फ्लोर पैर जस और नीता मम का रूम था ..सो सभी अपने अपने रूम में चले गए और होटल में रूम सर्विस ने उनको टाइम पैर डिनर सर्वे कर दिया जिसे लेकर वह सभी अपने अपने रूम में सो गए क्युकी थकन थी ..हाँ सफर उतना लम्बा नहीं था ..पैर सफर की थकन थी …और अगले दिन मीटिंग थी सो सबने सोने का फैसला किया और टाइम से अपने अपने रूम में सो गए …

उधर jai-chand के घर चलते हैं जहाँ सुबह राजिंदर वहां पंहुचा था ..जहाँ उसने देखा jai-chand की साली के atim-sanakar के लिए लोग जमा थे ..उसके atim-sanskar के लिए बहुत लोग आये थे जिनमे jai-chand ने कुछ लोगों को गांव से बुलाया भी था …जिनमे गांव से राजिंदर और jai-chand का भाई मतलब उनका चचरा भाई …बबनाथ भी आया हुआ था …बबनाथ की उम्र jai-chand जितनी hi थी ..उसके बड़े भाई राजिंदर की उम्र राजिंदर जितनी hi थी …जो अब इस दुनिआ में नहीं था …आप सोच रहे होंगे की राजिंदर के चेहरे भाई का नाम राजिंदर कैसे पड़ा ..तोह उसके पीछे रीज़न इतना था ..की राजिंदर और राजिंदर के पैदा होने में एक या दो दिन का अंतर था ..और क्युकी दोनों के पिता भाई थे सो दोनों में प्यार और प्रेम भी ाचा था ..जब राजिंदर पहले हुआ तब उसका नाम राजिंदर के पिता ने राजिंदर नाम रखा ..पैर जब चाचा के घर उनका बीटा राजिंदर के बाद पैदा हुआ तोह चाचा ने उसका नाम भी राजिंदर hi रखा अपने भाई के बड़े बेटे के नाम पैर ताकि दोनों परिवारों में bhai-chara बना रहे ..पैर कुछ टाइम बाद hi राजिंदर के घर जैचंद पैदा हुआ और उसके चाचा के घर बबनाथ पैदा हुआ …तोह दोनों के पैदा होने में ज्यादा ब्लड लूसे से जहाँ jai-chand की माँ दुनिआ छोड़ चुकी थी ..वहीँ बबनाथ की माँ उसके 5 साल बाद बीमारी से चल बसी थी …उसी बिच में राजिंदर के पिता अपने दोनों बचो को लेकर गांव से शहर आ चुके थे जहाँ कुछ टाइम बाद उनका भी देहांत हो गया …यही वजह थी राजिंदर ने खुद को कमाई की भाटी में जोंख दिया ताकि खुद को और jai-chand को सही परवरिश दे सके ..चाचा भी कुछ साल बाद अपने भाई के पास चले गए पैर पीछे उनके उनके बड़े बेटे ने जहाँ जुर्म और गुनाह का रास्ता चुना और बन गया …अपने आस पास के इलाके का बड़ा गुंडा …जिसके कसमे वेड दूर दूर तक खाये जाते थे …राजिंदर (चाचा का लड़का ) अपने आप में टॉप क्लास का मुज़रिम टाइप का इंसान था ..जिसकी मौत उसी के गांव में अजीब और गरीब तरह से हुई थी ..जिसके बाद उसके कामो के चलते बबनाथ ने उसकी जगह ली थी ..पैर बबनाथ अपने बड़े भाई जितना टफ तोह नहीं था पैर …था हु भी ताड़ी लाइन का बाँदा …जिसकी jai-chand से अछि पता करती थी ..क्युकी ताऊ का बीटा और हम उम्र होना …जहाँ राजिंदर से दोनों hi छोटे थे ..सो राजिंदर की इज़्ज़त बबनाथ भी करता था …

जहाँ राजिंदर भी उसे jai-chand जैसे hi प्यार से पेश अत था ..पैर jai-chand और बबनाथ की केमिस्ट्री अलग थी …वहां राजिंदर दोनों से एक दुरी बना कर रखता था ..पैर बबनाथ के दिल और दिमाग में राजिंदर के लिए कोई मेल नहीं था ..पैर अब मेल आने लगा था ..वजह था jai-chand जो अक्सर बबनाथ को राजिंदर के खिलाफ भड़काया करता था ..पैर बबनाथ उसकी बात पैर ज्यादा रियेक्ट नहीं करता था ..पैर आज कुछ अलग होना बाकी था …

तोह हुआ यूँ जब राजिंदर वहां अकेला आया तोह jai-chand ने उसे राजिंदर और उसकी फॅमिली के खिलाफ बड़कना शुरू किया ..” देखो बाबा आज ऐसे टाइम पैर जहाँ मेरी जवान साली मरी पड़ी है ऐसे में भी राजिंदर अकेले आया है ..क्या मेरी साली उसकी फॅमिली का हिस्सा नहीं है ??? देख रहे हो न तुम की कैसे राजिंदर ने हमलोगों को अपनी फॅमिली से अलग कर दिया है …और तोह और भाभी (वैसे तोह हु भाभी कहता नहीं था सुमित्रा को उसके नाम से बुलाता था पैर बाबा के सामने हु ऐसे दिखा रहा था जैसे हर बार हु सुमित्रा की इज़्ज़त करता है ) और बचे भी नहीं आये …क्या तुमको नहीं लगता की राजिंदर को ऐसे में अपने बचो को लाना नहीं चाहिए था ???”

ऐसे उसकी बातें सुनकर बाबा भी सोचने को मज़बूर हो चूका था …अब क्युकी हु अक्सर jai-chand कैग हर जाया करता था …सो उस पैर jai-chand की बातों का असर भी हुआ …राजिंदर के घर आजतक हु गया नहीं था ..क्युकी राजिंदर का घर दूर था ..उस पैर राजिंदर का अक्सर उसके बड़े भाई और उससे दुरी बना कर रखा वजह थी जो राजिंदर उसके जुर्म के चलते बना कर रखता था …जैसे नोर्मल्ली इंसान करते हैं अपनी फॅमिली को अक्सर लोग अपने बदनाम फॅमिली मेंबर्स से दूर रख कर वैसा hi राजिंदर ने किया हुआ था ..

राजिंदर आया तोह बाबा ने अपने बड़े ताऊ के लड़के के पेअर छुए …

राजिंदर “ बाबा और कैसे हो बचे ठीक है न ???”

बाबा “ हाँ भैया सब ठीक है और घर पैर सब कैसे हैं ?? हु लोग नहीं आये ..”

राजिंदर “ बाबा तुमको शायद पता नहीं पैर तुम्हारी भाभी (सुमित्रा )का दिल बड़ा कच्चा है हु अक्सर डेथ को आसानी से बर्दास्त नहीं कर पाती ..वह अक्सर बेहोश हो जाती है ..हमारे पड़ोस में एक बुद्धा ख़तम हो गया था ..वहां भी हु बेहोश हो गयी थी …उसे एडमिट तक करने जैसे हालत बन चुके थे ..यही वजह है उसे साथ नहीं लाया …वर्ण यहाँ उसे बेहोश होते देखकर क्या होता तुम समझ सकते हो ??”

बाबा “ हाँ भैया पैर बचे तोह आ सकते थे ??”

राजिंदर “ बाबा शायद तुमको पता नहीं jai-chand के करम ज्यादा अचे नहीं है ..उस पैर उसकी बीवी और ससुर हु अलग खोपड़ी के इंसान है ..बच्चों के लिए यही ाचा है की हु in-sab से दूर रहें क्युकी तुमने jai-chand के बचो को देखा hi होगा कैसे छोटे होते हुए भी gaali-galoch करते हैं ..मंटा हूँ ऐसे में बचे आते जरूर पैर तुमको तोह पता है …उनके छोटे bhai-behan(jai-chand के बचे) उनकी ज्यादा देर बर्दास्त नहीं कर पाते सो कैसे ले आता उनको यहाँ …”

बाबा “ हाँ बात तोह सही है आपकी jai-chand के बचे हैं तोह शैतान और गाली भी देते हैं ..पैर आजकल तोह गाली आम बात है …बचे आजकल पैदा भी नहीं होते पैर maa-behan की गाली सिख जाते हैं …पैर आगरा आते तोह मैं भी उनसे मिल लेता अब तोह बच बड़े हो गए होंगे …??”

राजिंदर गर्व से “ हाँ काफी बड़े हो गए हैं तुमको पता है या नहीं पैर मानव अब 12तह मैं है ..दसवीं (10तह) उसने फर्स्ट क्लास से पास की thi..or कुछ सालो में अजय भी उसके जैसे hi 10तह में होगा ..”

बाबा बहुत कुश हुआ क्युकी चलो कोई तोह था उनकी फॅमिली में जिसने 10तह से उप्पेर पड़े की thi..bhale hi उसने आजतक मनु और अजय को नहीं देखा था पैर …उसके लिए राजिंदर के लिए इज़्ज़त आज और बढ़ चुकी थी ..वह जानता था कैसे राजिंदर ने बचपन से खुदको और jai-chand को पढ़ाया और लिख्या था ..भले hi jai-chand अपनी आदतों के चलते पढ़ा नहीं ..पैर उसके पीछे राजिंदर ने कोई कमी नहीं किट hi यह उसे अचे से पता था …शायद यही वजह थी की हु राजिंदर की इज़्ज़त भी करता था …

बाबा “ भैया यह तोह ख़ुशी की बात है की अपने परिवार में कोई तोह है जो पद रहा है दसवीं को जिसने पढ़कर पार किया वर्ण हम तोह अंगूठा तक hi रह गए …और जब मैंने अपने बच्चों को पढ़ना चाहा तोह साले वोह भी गांव की मस्ती में पड़े छोड़कर बेथ गए …पैर कोई बात नहीं …यह भी काफी है की अपने परिवार में कोई तोह अचे से पद रहा है …”

राजिंदर “ बाबा तुमको पता है मानव ने खुद के पीछे कितनी म्हणत की है ..और शायद अपने भाई को देखकर hi अजय भी आज उसके रस्ते म्हणत कर रहा है …सुच में कभी कभी यकीं नहीं होता की बचे कब बड़े हो गए ..??”

बाबा ने राजिंदर की आँखों की चमक देखि तोह कहा “ भैया लगता है आपको अपने बड़े बेटे पैर काफी गर्व है ??”

राजिंदर “ बाबा हर maa-baap को बचो पैर गर्व hi होता है अगर बचे काबिल हों toh…maanav के पीछे मैंने उतना ध्यान नहीं दिया जितना मैंने jai-chand पैर दिया था ..कई बार उसके पड़े को लेकर मुसीबतें भी आयी …यहाँ तक की मैं अकेला उसकी और अजय की पड़े को चलने में na-kaafi हुआ पैर उस टाइम तुम्हारी भाभी ने मेरा साथ दिया …अपने बचूं के लिए सुमित्रा ने पहली बार घर से कदम बहार निकला …यह मंटा हूँ जितना मैंने jai-chand के लिए किया उतना अपने बच्चों के लिए नहीं किया ..पैर कभी मेरे दोनों बेटों ने मुझे इस बात पैर कुछ नहीं कहा ..हर हाल में खुद को न सिर्फ आगे किया बल्कि फर्स्ट ताका ए बिना ट्यूशन के …और इतने के बाद भी आज सब तुम्हारे सामने है …”

बाबा राजिंदर की बातों से सोच में पद गया …कहाँ उसे jai-chand उल्टा सिद्ध बताता था और कहाँ राजिंदर ने उसे सचाई बताई थी..

राजिंदर “ अरे बाबा वैसे तुम सिर्फ jai-chand के hi घर आते हो क्या हम तुम्हारे कुछ नहीं लगते ..अरे एक बार तोह हमारे यहाँ आओ ताकि तुम अपने भतीजों से मिल सको ..मैं कुछ नहीं सुनुँगा ..अब जब भी टाइम मिले आना जरूर ..ok “

बाबा” ठीक है भैया …पहले आज का काम ख़तम हो जब भी उसके बाद टाइम मिलेगा मैं घर जरूर आऊंगा ..”

उसके बाद राजिंदर ने वहां मौजूद सभी को एक नज़र देखा …जिसमे jai-chand उसका ससुर और उसकी बीवी और उसके बचे थे …साथ में jai-chand की बीवी की छोटी बहिन जिसकी शादी अभी नहीं हुई थी …जिसने अपने बड़ी बहिन की ढूढ़ मुहि बची को संभाला हुआ था सभी को देखा …

जिसमे राजिंदर ने देखा किसी के चेहरे पैर कोई ख़ास गम नहीं था ..इस बात से उसे हैरानी हुई तोह उसने बबनाथ से पूछा …

राजिंदर “ बाबा यह सब क्या है इनके घर में जवान बेटी ख़तम हुई है और यह लोग ऐसे नार्मल तुम समझ रहे हो न ???”

बबनाथ “ हाँ भैया आपका मतलब समझ रहा हूँ …पैर लगता है आपको किसी ने बताया नहीं की हु लड़की जो मरी है हु पहले से T.B की मरीज़ थी …उसका मरना तय था …सो ज्यादा टॉम जहां नहीं है यहाँ ..”

राजिंदर “ अरे बाबा T.B (ट्यूबरक्लोसिस ) इतनी बड़ी बीमारी तोह नहीं है जिसका इलाज़ नहीं हो सकता तोह फिर यह सब ??”

बाबा “ भैया अब jai-chand जाने या उसका ससुर मुझे इससे ज्यादा नहीं पता ..जो मुझे बताया था यही बता दीया आपको …”

राजिंदर इस बात पैर सोच में था …की T.B का इलाज़ तोह आसानी से हो सकता है पैर न जाने इन्होने क्यों नहीं करवाया ..

पैर राजिंदर ने एक बात नोटिस की …यही की jai-chand का ससुर को बैठने में प्रॉब्लम हो रही थी (अब उसे क्या पता मनु ने उसकी गांड का ढक्कन खुलवा दिया था ..रजिनि के चक्कर में न सिर्फ अनिल का ढक्कन खुला था बल्कि jai-chand के ससुर का ढक्कन भी खुल चूका था …)

खैर jai-chand की साली का अंतिम संस्कार हुआ अपने टाइम से …और राजिंदर वहां से सब काम होने के बाद अपने घर आया …जहाँ घर के बहार hi हु नाहा लिया (हिन्दू ट्रेडिशन में लोग जब क्रिमशन से आते हैं तोह घर में आने से पहले नहाना पड़ता है ..ताकि उनके साथ मरे हुए इंसान के बैक्टीरिया साथ में न आ सके जिसका साइंस भी कई जगह प्रूफ देता है … )

खैर राजिंदर घर आ चूका था …पैर सब काम होने के बाद jai-chand और उसके ससुर ने बबनाथ को घेर लिया था …ताकि राजिंदर के खिलाफ भड़का सकें उसे ..

Jai-chand “ देखा बाबा कैसे राजिंदर आया अकेला hi और उसके साथ घर से कोई नहीं आया …ऐसा लगता है राजिंदर हमसे काटना चाहता है ..”

अब उसे क्या पता राजिंदर और बाबा की बात हो चुकी थी ..जहाँ राजिंदर ने उसे सब बता दिया था …पैर jai-chand लगा हुआ था उसे भड़काने मैं …

Jai-chand का ससुर बीड़ी पिटे हुए “ देखो बाबा तुमने खुद महसूस किया न उसे कोई गम नहीं था …हमारी जवान बेटी के मरने का …देखा उसके आंसू तक नहीं निकले ??”

बाबा “ आंसू तोह खुद तुमने भी नहीं बहाये तोह भैया से उम्मीद क्यों भाई ..??”

बाबा की बात सुनकर jai-chand का कपटी ससुर चंक गया …उनसे जो सोचा था उसके उल्ट जवाब बाबा ने उसे दिया था …अब क्युकी बबनाथ अपने इलाके का मन हुआ बाँदा था ..उसके बारे में मशहूर था की उसके पास हर समय हथियार रहता है …चाहे टाइम कैसा भी हो बबनाथ अपने साथ हथियार रखता था …और हथियार से मतलब यहाँ चाक़ू या किसी छोटे मोठे हथियार से नहीं …एक जर्मन पिस्तौल हमेशा उसके पास रहती थी जिसे हु हर वक़्त अपने साथ रखता था …न जाने उसे कब इसकी जरूरत पद जाए …

बाबा के जवाब से jai-chand और उसका ससुर दोनों तिलमिला चुके थे …पैर कुछ करना मतलब अपने बचूं के लिए दूसरा बाप ढूंढना …सो मैं मार्कर चुप रह गए …

जहाँ आज राजिंदर से बात करके बबनाथ को पता चल चूका था की जैसा jai-chand और उसके ससुर ने कहा था उसके खिलाफ राजिंदर और उसका परिवार वैसा नहीं था …बल्कि उसे खुद राजिंदर से बात करने के बाद यकीं हुआ की तब जैसी बीमारी जिससे उस लड़की को आसानी से बच्या जा सकता था …उसके बाद भी इन लोगों ने उस लड़की को आसानी से मरने दिया …यह बात बबनाथ के दिमाग में भी बेथ चुकी थी …सो उसने रात को ज्यादा बात नहीं की …अंतिम संस्कार के बाद 4 दिन तक हु वहां रुका …उसके बाद सिद्ध घर निकलने का प्लान बना चूका था ..

और पहली बार jai-chand और उसके ससुर को उनकी चाल उलटी पड़ती नज़र आ रही थी …पैर आगे सब उनके हाथ से ज्यादा बबनाथ की मर्ज़ी पैर डिपेंडेंट था ..सो मैं और झख दोनों साथ में मार कर दोनों सो गए ….

उधर अगले दिन मनु और बाकी सब उठे और अपने दिन के डेली रुटीन में लग चुके थे …क्युकी आज मीटिंग थी सो भटनागर सर और मनु सुबह अपने ब्रेकफास्ट को लेकर वहां से नीता मम और जस से बात करके निकल चुके थे …अब होटल रूम में अपने अपने रूम में जस और नीता मम बची थी …क्युकी आज उनका कोई प्लान नहीं था …सो दोनों ने अपने रूम में hi रहकर रुकने का फैसला किया था …वैसे भी होटल ाचा खासा था …मतलब होटल रूम में हर चीज़ मौजूद थी चाहे टीवी हो या छोटा सा फ्रिज और बस एक कॉल पैर खाने के लिए room-service सो होटल में रुका ज्यादा बोरिंग नहीं था उन दोनों के लिए …जहाँ नीता मम अपने को टीवी के साथ बिजी कर चुकी थी वहीँ …जस ने कॉल करके गुरु भाई से रेस्टोरेंट का काम का हिसाब लिया (अकाउंट का ) और अपनी डेरी में सब नोट किया …और उसके बाद जो डीलर दिल्ली में उसके प्लाट के लिए कांटेक्ट में थे उनके साथ back-up भी टल्ली किया …मतलब उनके साथ साइट विजिट के लिए जरूरी बात की ..ताकि अगले दिन मीटिंग के बाद मनु और वह सही जगह का चुनाव कर सके …मतलब जस अपनी तरफ से परफेक्शन में काम कर रही थी …

मनु और भटनागर सर मीटिंग के लिए दूसरे जगह पैर गए क्युकी क्लाइंट मीटिंग थी सो ….क्लाइंट ने जोर दिया था की कोटशन को उन्ही के ऑफिस में क्लियर किया जाये ..वैसे तोह बहुत से distributer’s थे वहां पैर मनुफक्टोरे के साथ अचे डिस्ट्रीब्यूशन के लिए अशोक शर्मा की कंपनी को टेंडर मिला था …पैर फाइनल कोटशन के बाद होना था …क्युकी मेल के थ्रू बहुत सी चीज़ें जो क्लियर नहीं होती हु फेस तो फेस क्लियर किया जा सकता था ..सो मीटिंग का पर्पस आप समझ चुके होंगे …क्लाइंट ऑफिस के बहार अछि खासी भीड़ थी …जिसे देखकर भटनागर सर भी थोड़े सोच में थे ..क्युकी अक्सर उनका काम मेल से hi हो जाया करता था ..पैर क्युकी क्लाइंट काफी बड़ा था …और उसके साथ जुड़ना मतलब लॉन्ग टर्म बिज़नेस प्रॉफिट जिसके चलते आज बहुत दिनों बाद उनको किसी ऑफिस में फेस 2 फेस आना पड़ा था …ऐसा नहीं था की मीटिंग से उनको कोई प्रॉब्लम थी ..पैर कुछ हेसिताशन था काफी दिन बाद मीटिंग से ..पैर अपने भटनागर सर थे बड़े कूल पर्सन ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से pass-out भटनागर सर अंदर से जीतनेय भी टेंशन में हों पैर सामने से कूल hi थे …

मनु और भटनागर सर दोनों ऑफिसियल मीटिंग में आये थे सो जैसा co-operate ऑफिस का ुंकाः रूल है …ड्रेस कंडक्ट मतलब दोनों फुल्ली ऑफिसियल ऑउटफिट में थे और यहाँ ऑफिसियल मीटिंग में मोस्टली लोग …सुइटेड थे ..जैसा की मोस्टली होता है …भटनागर सर अपने ग्रे सूट में जहाँ फिट एंड चार्मिंग लग रहे थे वहीँ आज मनु ने पहली बार कोई सूट पहना हुआ था …और इसमें उसकी हेल्प किट hi खुद भटनागर सर ने …उन्होंने मनु को आज के लिए स्पेशलय लाइट sky-blue कलर के सूट में विथ मैचिंग टाई (यहाँ सब hi सूट में विथ टाई थे सो स्पेशल कहना ज़रूरी नहीं है ..आप समझ सकते हैं ..) में था …भटनागर सर का मोटो था की मनु सेण्टर ऑफ़ अट्रैक्शन रहे ..और वैसे हुआ भी …अपना मनु किसी सेलिब्रिटी जैसे चमक रहा था …अब चार्मिंग पर्सनालिटी तोह उसी पहले hi थी ..पैर लाइट sky-blue सूट में हु धमाल लग रहा tha…aisa नहीं है वहां हैंडसम लड़के नहीं थे ..पैर अपना मनु वहां अपने आप में परफेक्ट था …मस्सों सा चेहरा परफेक्ट एथलेटिक टोन बॉडी छोड़ा सीना चोदे बाज़ू …जेस्पर उसका सूट और आपको तोह पता hi होगा सूट में एक्स्ट्रा लेयर होती है पैडिंग की जिसके चलते पतला इंसान भी तगड़ा लगता है ..पैर तगड़ा अगर पहने तोह ??? आगे आप स्मार्ट हैं …

खैर जैसा भटनागर सर का प्लान था मनु को सेण्टर ऑफ़ अट्रैक्शन बनाना का वैसा हुआ भी …मनु जैसे hi अंदर आया रिसेप्शन पैर जैसा होता है की मोस्टली company’s चार्मिंग लड़कियों को रिसेप्शन का काम देती हैं ..ताकि कंपनी का रिलेशन और इम्प्रैशन ाचा पद सके जो भी कंपनी में आये या कंपनी से जुड़े उस पैर ..

यहाँ मनु को भटनागर सर ने पहले hi वारं किया था की हु आने से पहले माइल्ड डॉ का उसे करे …वैसा मनु ने किया भी …मनु और भटनागर सर जैसे hi रिसेप्शन में आये उन्होंने ग्रीट किया और अपने आने का पर्पस बताया तोह उसे लेडी ने दोनों को जब पहली बार देखा तोह उसकी नज़रें मनु पैर ऐसी तिकी की उसके बाद से हटी hi नहीं …बेहचरी ने पहले बहुत से लड़के देखे होंगे पैर मनु तोह अपना मनु hi था ..मस्सों सा दिखने वाला मनु उसका लम्बा कद ..और परफेक्ट बॉडी उस पैर उसका परफेक्शन के साथ जेस्चर जिसे देखकर रिसेप्शन वाली भी बार -बार मनु को देखे बगैर रह नहीं पा रही थी …उसके बाद जैसे टाइम आया सारे कांफ्रेंस हॉल में मीटिंग के लिए आ चुके थे ..

कंपनी बड़ी जानी मानी थी ..उसके फाउंडर कंपनी के चेयरमैन के pad-dada थे ..जो अब दुनिआ में नहीं थे पैर दादा से होते हुए पिता उसके बाद कंपनी अब पोते के हाथ में आ चुकी थी ..पोता मतलब सूर्यकांत अग्गरवाल जी जो आगे में मनु के बाबा से भी बड़े थे …और आगे ज्यादा होने के कारन चलने फिरने में आजकल उनको दिक्कत हुआ करती thi..so व्हीलचेयर पैर थे ..उनकी पोती जो कंपनी की सीईओ थी विरंदा अग्गरवाल जो आगे में मनु से थोड़ी बड़ी थी ..अभी तक सिंगल थी ..इसकी वजह आपको आगे टाइम आने पैर पता चल जाएगी ..उसके पिता सूरज अग्गरवाल जी जो इस कंपनी के मद थे ..जिन्होंने इस मीटिंग इवेंट को ऑर्गेनिसे किया था वहां उनकी तीनो पीढ़ी मौजूद थी …मतलब दादा ..बीटा ओर पोती ..सूर्यकांत जी बेशक चल फिरने में थोड़े तकलीफ में थे ..पैर उनका बिज़नेस मंद hi था जिसके बट कंपनी आज कई हज़ार करोड़ का प्रॉफिट बनाया करती थी ..उनकी आज ज़िद थी की उनको मीटिंग में आना है …सो बेटे ने भी ज्यादा ज़ोर नहीं दिया ..ऐसा नहीं था की सूरज को बिज़नेस सेंस नहीं थी ..पैर उसे अपने बाप से प्यार था सो उसने भी ज्यादा जोर नहीं दिया ..

मीटिंग शुरू होने में टाइम था ..

सब मीटिंग रूम में आ चुके थे …सूरज और विरंदा के साथ व्हीलचेयर पैर सूर्यकांत जी भी वहां आ चुके थे …सूरज ने सबको बैठने को कहा …सब अपनी जगह पैर बेथ गए ..पैर अचानक मनु अपनी जगह से उठा …और सूर्यकांत जी की ओर बढ़ने लगा …सब चौंक गए की अचानक से मनु को क्या हुआ ..सबसे ज्यादा टेंशन में तोह अपने भटनागर सर थे ..क्युकी क्लाइंट एक तोह नामी था ..उसपर इन्फ्लुएंटीएल भी काफी था ..रईसी अग्गरवाल जी के खून में बस्ती थी ..एक गलती तोह टेंडर तोह हाथ से गया hi बल्कि इलाका भी उन्ही का है ..सो गलती करके यहाँ से जाना आसान नहीं होगा …यह सब सोचकर भटनागर सर सोच में आ चुके थे ..

पैर मनु बेहिचक सूर्यकांत जी के पास गया ..और उनके व्हीलचेयर के पास आकर उसने उनके पेअर छुए जैसे की उसके संस्कार थे ..

सूर्यकांत जी ने भी उसके सर पैर हाथ रख दिया ..बिना इमोशन के ..पैर सूरज और विरंदा हैरान थे …

तभी पीछे से कोई बोलै ..” यह लो टेंडर तोह हीरो ने पहले hi अपने नाम कर लिया पेअर चुकार ..लगता है यह कोई फ़िल्मी इंसान है ..जो आते hi maska-polish में लग गया है ..”

मनु ने पीछे पलट कर देखा “ आपको लगता है यह maska-polish है तोह यही सही …मैंने तोह एक बुजुर्ग इंसान को जो कहीं न कहीं मेरे दादू की आगे के हैं ुमका सम्मान किया है ..और अगर आपको इतना hi इन्सेक्युरे फील हो रहा है तोह आपको यहाँ आना hi सोचकर चाहिए था …”

मनु उसके बाद अपनी सीट पैर बेथ गया ..वह आदमी जो मनु से जवाब की तोह उम्मीद नहीं कर रहा था ..पैर मनु ने इन्सेक्युरित्य पैर कहकर उसको तिलमिलाने पैर मज़बूर कर दिया था …

हु बोलै “ आज के टाइम में तुम पेअर चुने जैसे फ़ालतू बातिओं को यहाँ मीटिंग तक ले आये इसे maska-polish नहीं कहूं तोह क्या कहूं …और उल्टा मुझे इन्सेक्युरे कह रहे हो ??ु विल्लगेर ”

मनु ने नार्मल लहज़े में कहा “ थैंक्स आपने एटलीस्ट मन तोह सही इससे पहले शायद किसी ने हमारे बुजुर्गों को ऐसे पेअर चुकार सम्मान देना बंद कर दिया …चलिए आज ाचा किया मैंने की यह संस्कार जो हमारे इंडियन ट्रेडिशन की शान है इनको मैंने आपके आगे रख दिया …और अगर आपको यह maska-polish लगता है तोह वही सही …पैर क्या आपसे एक सवाल पूछ सकता हूँ …जस्ट ओने क्वेश्चन प्लीज ??”

हु आदमी गुस्से में “ हम्म ! बोलो …”

मनु “ आपके घर में रेडियो है न ??”

हु आदमी “ र ु सम काइंड ऑफ़ स्टुपिड ???? हाउ डरे ु ??? तुमको मैं इतना गरीब लगता हूँ की रेडियो जैसा फालतू चीज़ को अपने घर पैर रखूँगा ..मेरे घर में 75इंच का ब्रांडेड टीवी है …”

मनु “ तोह आप पक्का घर से यहाँ तक बैल गाडी में आये होंगे है न ???”

मनु की बात पैर वहां सभी मुँह दबाकर हसने लगे the…per उस आदमी का गुस्सा बहुत बाद चूका था ..

हु आदमी “ हाउ डरे ु ???? ु जर्क ….र ु सम काइंड ऑफ़ फ्रिक और मोरोन ???? मैं भला बैलगाड़ी में क्यों आने लगा ??? मेरे पास roles-royal है …???”

मनु “ तहत इस माय व्होले पॉइंट ….की जब आप मॉडर्न होंगे तोह आपको हर बात ओल्ड लगेगी ..जब आप टाइम के साथ बदल गए ..उसी तरह यहाँ भी लोगों ने आपकी तरह ट्रेडिशन को छोड़ना शुरू कर दिया ..और आज सबको वेस्टर्न कल्चर की पड़ी है ..जबकि हमारा कल्चर वर्ल्ड में साइंटिफिक वे में प्रोवें है की हम लोगों का ट्रेडिशन ओने ऑफ़ थे बेस्ट ट्रेडिशन है …सो िफ़ ी फॉलो माय बेस्ट ट्रेडिशन …व्हाट इस थे बिग डील …??”

मनु की बात पैर उस आदमी को लाजवाब कर दिया पैर हु हार मने को त्यार नहीं था ..सो जब कुछ नहीं सुझा तोह उसने मनु को कहा “ ब्लडी विल्लगेर “

मनु ने उसे कहा “ सॉरी सर मई बे ी म नॉट मॉडर्न अस लिखे ु ?? बूत एटलीस्ट ी क्नोव वैरी वेल तहत world’s 85% ऑफ़ पापुलेशन बेलोंगस तो विल्लगेस ..नॉट ओनली इन इंडिया इतस अबाउट व्होले वर्ल्ड रेश्यो …मई बे अस मॉडर्न पीपल लिखे ु …थिंक अबाउट तहत villager’s बिलोंग ओनली बिनीथ ुर काइंड ऑफ़ पीपल बूत थिंक वन्स हु सप्लाई ुर डेली ग्रोसरी एंड डेली प्रोडक्ट इतस बीइंग मेड बी सम विल्लागेरस थिंक वन्स िफ़ villager’s स्टॉप मेकिंग थी प्रोडक्ट्स वोउल्ड ु सर्वाइव सिंगल डे ??? मई बे नॉट ु आल्सो देपेंद villager’s सो don’t थिंक अबाउट विल्लागेरस बिनीथ ु …थिंक वन्स ..और थिंक वन्स ुर अनसस्टर्स आल्सो बिलोंग सम काइंड ऑफ़ विलेज at-lest थिंक अबाउट थम ..थे मिगहत बे शमिंग ों ु अबाउट थी काइंड ऑफ़ एक्टिविटीज … “

उसका मुँह उतर चूका था इस बात पैर उसका जवाब नहीं निकल पाया …सुच hi कहा था मनु ने की अगर गांव एक दिन के लिए सप्लाई रोक दे तोह जिस कॉफ़ी से उस जैसे कई लोगों का दिन शुरू हुआ करता था और साथ में डेली सामान के बिना उनका कोई अस्तित्व hi नहीं था ..

इस बात पैर सब hi एक राइ से मनु से सहमत थे सूरज जी और सूर्यकांत जी की आँखों की चमक बता रही थी ..की हु भी इस बात से एग्री हैं …पैर मनु वहां रुका नहीं हु अपनी जगह से उठा और उस आदमी की आगे जाकर उसके सामने खड़ा हो गया …

सभी हैरत में थे जैसे की मनु उसे कहीं कुछ कर hi न डाले पैर मनु ने उसे मारने के बजाय उसके पेअर छुए क्युकी हु भी उम्रदराज़ था …और कुछ अजीब हुआ मनु के पेअर छूटे hi उसके हाथ अपने आप मनु के सर पैर थे ..

मनु उठा और कहा “ सर आपने देखा ट्रेडिशन हमरे खून में है …आपने इतना होने के बाद भी मेरे सर पैर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया यह बताता है की हमसभी भले hi कितने मॉडर्न हो जाएँ अपनी ट्रेडिशन और रूट्स से जुड़े हुए हैं …अपने एक बार भी मुझे हाथ रखने से पहले नहीं हटाया ..इससे साबित होता है किआ आप भले hi roles-royal में चलते हैं पैर आपके संस्कार आपके साथ हैं ..मुझे अब आपसे कोई शिकायत नहीं है ..आप आगे में मुझसे बड़े हैं सम्मान योगय हैं ..आपके सम्मान में झुकने में मुझे ख़ुशी हुई ..वही ख़ुशी मुझे वहां व्हीलचेयर पैर बैठे दादू के पेअर चुने में हुई थी …इसमें maska-polish कैसा ???”

हु आदमी “ सॉरी बीटा मुझे लगा था की तुम शायद यहाँ कुछ ट्रेडिशन के नाम पैर हासिल करने आये हो ??”

मनु “ आपसे किसने कहा मैं यहाँ हासिल करने नहीं आया ??”

मनु की इस बात पैर हु हैरान था ..

मनु “ मैं हासिल करने आया हूँ पैर अपने दम पैर हासिल करूँगा भी अगर मेरी किस्मत में हुआ तोह मुझे मिलेगा भी ..पैर इसके चलते मैं अपनेआप को भूलना नहीं चाहता मैं क्या हूँ इस बात से ज्यादा जरूरी है …की मैं कैसे हासिल करता हूँ …अपने से बड़ों के सम्मान में अगर झुकना अगर दिखावा है तोह यही सही मुझे किसीको कुछ साबित नहीं करना है ..मैं जो हूँ उसी में खुश हूँ …अगर टेंडर मुझे न मिलकर आपको मिला तब भी सुच कहता हूँ मुझे उतनी hi ख़ुशी होगी जितनी मुझे खुद टेंडर मिलने पैर होती ..”

हु आदमी इस बात पैर खुद को रोक नहीं सका आग बढ़कर उसने मनु को अपने गले से लगा लिया ..इस बात पैर मीटिंग रूम में हर कोई अपने को रोक नहीं पाया ताली बजने से …

पैर सूरज जी ने आगे कहा “ भाई अगर आप सबकी इज़ाज़त हो तोह मीटिंग शुरू की जाए ??”

इस पैर मनु उस आदमी के गले से निकल कर अपनी सीट पैर चला गया ..

मनु के बगल में बैठते hi भटनागर सर ने मनु की पीठ थप तपते हुए कहा ..

भटनागर सर “ बहुत अचे तुमने तोह पहली बॉल पैर सिक्स hi जड़ दिया ..ी म सो प्राउड ऑफ़ ु बीटा ..तुम सुच में बड़े हो गए हो …”

मनु ने इस पैर सिर्फ स्माइल करके उनको देखा ..और मीटिंग शुरू हुई ..सभी ने apni-apni कोटशन दी ..पैर सबसे लास्ट में भटनागर सर ने कोटशन दी जिसमे उनका ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होना यहाँ काम कर गया …भटनागर सर ने पहले के 10 साल के टाइम पीरियड में जो उस क्लाइंट का लोस्स और प्रॉफिट था उसके बेसिस पैर चार्ट था उसे सबके सामने रखा और साथ में डिस्ट्रीब्यूशन के लिए भी ाचा रेट दिया जिसके बाद क्लाइंट मतलब अग्गरवाल फॅमिली में कुछ देर बात हुई और फाइनली टेंडर मिला शर्मा & कंपनी को मतलब मनु और भटनागर सर को …

सभी इस बात से और उनकी तयारी से बहुत इम्प्रेस थे …क्युकी जैसे उन्होंने वहां प्रेजेंटेशन दिया था उसके बाद साफ़ पता चल रहा था की …गलती की गुन्जायिश hi नहीं है …खैर मीटिंग कुछ घंटों में ओवर हो चुकी थी …और अजीब बात यह की हु आदमी टेंडर मिलने के बाद खुद आगे बढ़कर वहां शर्मा & कंपनी के लिए ख़ुशी से कॉंग्रट्स कर रहा था …उसने भटनागर और मनु को कॉंग्रट्स किया और वहां थोड़ी देर बात करने के बाद निकल गया ..ऐसे hi वहां बाकी लोग भी apne-apne स्टाफ के साथ वापस निकल गए ..और जब मनु और भटनागर सर जाने लगे तोह रिसेप्शन पैर उनको रोक लिया गया ..

रिसेप्शन वाली लड़की “ सर आपको चेयरमैन सर ने ऑफिस में बुलाया है ..”

मनु और भटनागर सर दोनों कुछ देर बाद चेयरमैन के ऑफिस में खड़े थे ..जहाँ अग्गरवाल फॅमिली के लोग मौजूद थे ..जहाँ सूरज और विरंदा भटनागर सर को अपने साथ ले गए कॉन्ट्रैक्ट पैर सिग्न के लिए अब रूम में मनु और सूर्यकांत बचे थे ..

सूर्यकांत “ बीटा तुम्हारा नाम क्या है ??”

मनु “ जी मेरा नाम है मानव सिंह ..”

सूर्यकांत “ बीटा शर्मा जी की कंपनी में कबसे हो ??”

मनु “ जी उनके साथ कुछ साल hi हुए हैं..”

सूर्यकांत “ बीटा तुम्हारे घर में कोण कोण हैं और तुम्हारे पिता क्या करते हैं ??”

मनु “ जी मेरे घर में मम्मी पापा और एक छोटा भाई है ..और मेरे पापा एक छोटे से मजदूर हैं ..”

सूर्यकांत “ वही मैं सोच रहा था की एक ऐसा संकरी लड़का यहाँ मीटिंग में कैसे आ गया ..पैर मुझे सुच में ख़ुशी है की तुम आज मुझसे मिले …जैसे तुमने उस आदमी को जवाब दिया और उसे बिना निचा दिखाए अपना मुरीद बन आलिया ..और टेंडर मिलने के बाद भी मैंने देखा उसे खुद तुमको बधाई दी मुझे तुमको देखकर सुच में बहुत ख़ुशी हुई ..तुम्हारे maa-baap ने सुच में बहुत अचे संस्कार दिए है तुम्हे ..”

मनु “ जी सुक्रिया सर..”

सूर्यकांत “ बीटा सर नहीं तुम चाहो तोह मुझे अंकल कह सकते हो ..”

मनु “ अगर बुरा न मने तोह मैं आपको अंकल नहीं कहना चाहता ..”

सूर्यकांत “ अंकल क्यों नहीं बीटा …अंकल में क्या बुराई है ..”

मनु “ अंकल में बुराई तोह कुछ ज्यादा नहीं ..पैर अंकल सुनने में कुछ समझ नहीं आता ..”

सूर्यकांत “ मतलब ..”

मनु “ मतलब अंकल तोह आजकल किसी को भी कहीं भी कह देते हैं ..अंकल में उतना apna-pan नहीं है जितना हमारे यहाँ ..चाचा जी या ताऊ जी कहने में अत है ..”

सूर्यकांत हँसते हुए “ ठीक है जो तुम्हे ठीक लगे ..”

मनु “ तोह मैं आपको दादू कहूंगा ..अगर आपको दादू से दिक्कत न हो तोह ..क्युकी आप को देखकर दादू वाली फीइंग आती है …”

सूर्यकांत “ तोह तुमको मुझे दादू कहना है ..तोह यह तय रहा ..अबसे तुम मुझे दादू hi कहोगे ..”

इस बात पैर दोनों हंसने लगे ..पैर अचानक से मनु थोड़ा सीरियस हो गया ..

सूर्यकांत “ क्या हुआ मानब बीटा कोई बात है ..दादू से कुछ कहना चाहते हो ??”

मनु “ हाँ दादू आपको कुछ बताना चाहता हूँ ..”

सूर्यकांत “ क्या बीटा ,,जो कहना है साफ़ साफ़ कहो ..”

मनु “दादू जैसा की मैंने आपको बताया मेरे पापा एक मजदूर हैं मतलब उनको काम के चलते छोटे काम तक करने पड़ते हैं ..मतलब saf-safai तक जिसके लिए कई बार मुझे लोगों ने निचा दिखने के लिए “ जमादार का बीटा “ तक कहा है ..तोह सोच रहा हूँ किआ आप जैसे बड़े इंसान को कहीं मेरे जैसे छोटे इंसान की बदनामी न लग जाए ..”

उसकी इस बात पैर सूर्यकांत बहुत जोर से हंसा ..मनु हैरत में था ..बात यहाँ सीरियस थी पैर सूर्यकांत ऐसे हंस रहा था जैसे मनु ने कोई जोके मारा हो ??

सूर्यकांत “ सॉरी बीटा मैं अपने को रोक नहीं पाया ..तुम यही कहना चाहते हो न की मैं अगर तुम्हारा दादू बन गया तोह तुम्हारे पिता का छोटा काम इससे हमारी बदनामी तोह नहीं होगी ..??? यही मतलब है न तुम्हारा ??”

मनु हाँ में सर हिला देता है ..

सूर्यकांत “ बीटा एक काम करोगे ..??”

मनु “ जो बोलिये ..”

सूर्यकांत “ अब बीटा मैं तोह चल फिर सकता नहीं पैर तुम मेरी चेयर को मेरे बताये जगह ले चलोगे ..??”

मनु ने उसके बाद चेयर को पकड़ लिया और धकेलने लगा जहाँ सूर्यकांत ने उसे बताया वहां ले गया दोनों एक हॉल में पहुँच चुके थे ..जहाँ बहुत सी तस्वीरें लगी हुई थी ..जिनको देखकर लग रहा था की हु बड़े पहुंच वाले इंसान होंगे ..

सूर्यकांत “ बीटा यह सब तस्वीरें हमारे बाप दादाओं की है देख रहे हो न ??”

मनु “ जी हाँ ..”

सूर्यकांत “ बीटा यह सब हमारे दादा और पद दादा हैं जो शुरू में अमीर नहीं थे बहुत मामूली से इंसान थे ..जिनका काम ढूढ़ बेचना था ..यह टाइम मिलने पैर हर तरह का काम कर लिया करते थे …सो अभी भी तुमको लगता है हम ज्यादा बड़े इंसान है ..??”

मनु “ पैर ..”

सूर्यकांत “ देखो बीटा काम जीने के लिए जरूरी है ..पैर काम सिर्फ जीने का जरिया है ..उसे लेकर निचा सोचने या निचा देखने की ज़रूरत नहीं है ..काम सिर्फ काम होता है ..इंसान की असल पहचान उसके कर्मो से होती है …नाकि उसके काम से काम तोह बस कमाई का ज़रिया hai…jahan काम बदला जरिया अपने आप बदल जाता है ..उसे लेकर खुद को छोटा समझ ने की ज़रूरत नहीं है ..अगर तुमको मुझे दादू कहना है तोह दादू कहो ..उसमे सोचना कैसा ??”

मनु “ तोह मैं आपको दादू hi कहूंगा …अब ठीक है न ???”

सूर्यकांत “ बीटा सुच में तुमसे मिलकर मुझे तुम्हारे रूप में पोता hi मिल गया ..मेरी बड़ी छह थी पोते की ..पैर किस्मत ने पोते की जगह पोती दे दी ..मुझे पोते और पोती में अंतर करना ाचा नहीं लगता ..मेरी पोती बहुत अछि है …सुच कहूं तोह पोते की जरूरत hi महसूस नहीं हुई आजतक ..पैर उसकी माँ उसे जनम देते हुए hi चल बसी ..आजतक मैंने और उसके पिता ने बड़े नाज़ से उसे पाला है ..पैर जो इच्छा बरसों पहले उसके जनम से डाब गयी थी ..आज तुम्हें देखकर वापस लौट आयी …तुमको देखा तोह दिल किया की तुमसे बात करूँ तुमको जानू और तुम्हारे विचार सुनु ..और सुच कहूं तोह जैसे तुम्हारे विचार जाने बहुत ाचा लगा मुझे की तुम कितने अचे सोच के साथ आगे बाद रहे हो ….मुझे ख़ुशी है की मैंने तुमसे आज बात की ..वर्ण मैं तोह समझ था की आजकल के बचे बस चकाचोंध के पीछे भागने में hi लगे हुए हैं …”

मनु “ थैंक्स दादू की आपने मुझे इतना सम्मान दिया ..पैर आपसे मिलकर भी मैंने जाना की इंसान अपने कामो से बड़ा बनता है नाम और कमाई के जरिये से नहीं ..यह तोह आप जैसे किसी अछि सोच के बुजुर्ग से मिलने पैर hi पॉसिबल था ..मुझे ख़ुशी है की ..मैं आज आपसे मिला ..”

दोनों बातें करने लगे कुछ hi देर में दोनों काफू घुल मिल चुके थे ..मनु ने अचानक से पूछा ..

मनु “ वैसे दादू आपको हुआ क्या है जिसके चलते आप चलने फिरने से मेरा मतलब समझ रहे हैं न आप ..”

सूर्यकांत “ मानव बीटा ..”

मनु “ ओह्ह्ह! सॉरी दादू बताना भूल गया …फॅमिली में सभी मुझे मनु कहते हैं ..आप भी मनु hi कहिये ..”

सूर्यकांत “ मनु ाचा नाम है ..पैर मानव उससे ाचा है ….तोह सोनो बीटा मनु कुछ दिनों से कमर में अचानक से दर्द हुआ उसके बाद पेअर रखना hi ज़मीन पैर पॉसिबल नहीं हुआ ..और आगे सब तुम्हारे सामने है ..”

मनु ने ध्यान से सूर्यकांत को देखा कुछ देर हाथ पकड़ कर किसी डॉक्टर जैसे उनकी नब्ज़ चेक की ..और थोड़ी देर में कहा ..” अरे दादू आप तोह परफेक्ट हैं एक बार खड़े होईये न प्लीज एक बार …आपको एक जादो दिखता हूँ ..”

सूर्यकांत ने जैसे तैसे कोशिश की और चेयर से खड़े हो गए ..उनसे सिद्ध खड़ा नहीं हुआ जा रहा था …उनके पेअर कांप रहे थे ..मनु ने उनको सहारा दिया हुआ था ..पैर अचानक से मनु उनके सामने से पीछे की तरफ गया और उसने सूर्यकांत को किसी बचे जैसे कसकर हवा में कमर से दोनों हाथों को लपेटकर उठा लिया ..और हवा में एक बार इधर एक बार उधर लहरा दिया ..जिससे सूर्यकांत एक बार तोह डर सा गया ..पैर उसके हवा में हिलने से उसकी रीढ़ की हड्डी में कड़कककक! की दो बार आवाज़ आयी और ..मनु ने उसे ज़मीन पैर छोड़ कर दूर हैट गया …

और बड़ी अजीब बात हुई की सिद्ध खड़ा होने और पेअर कांपने पैर मज़बूर सूर्यकांत अपने पैरों पैर सिद्ध खड़ा था …उसके पैरो में अब खून बहुत तेज़ी से बह रहा था …उसके साथ hi मनु ने सूर्यकांत के गर्दन को एक बार पकड़ कर लेफ्ट और राइट में चटका दिया …अब तोह सूर्यकांत खुद को बिलकुल फ्रेश महसूस कर रहा था …

सूर्यकांत “ मनु बीटा यह क्या किया तुम और अचानक से तुमने मुझे जैसे डरा hi दिया ..मुझे तोह लगा जैसे मेरे आखिरी टाइम आ चूका है ..पैर तुमने तोह इस बुड्ढे को व्हीलचेयर का मोहताज hi न छोड़ा …पैर यह सब कैसे मुझे समझ नहीं आता की मैं तुम्हे कैसे थैंक्स कहूं …???”सूर्यकांत को शब्द नहीं मिल रहे थे ..

मनु “ हु क्या है न दादू आपकी व्हीलचेयर ने मुझसे कहा की अपने दादू को मुझसे उठा दो मैं बोर हो गयी हूँ ..सो मैंने उसकी बात सुन ली …और वैसे भी मेरे दादू है ..मुझे ाचा नहीं लगता की आशीर्वाद के लिए आपकी व्हीलचेयर से पहले परमिशन लेनी पड़े ..सो कर दिया जादू “

सूर्यकांत ने आगे बढ़कर मनु को अपने सीने से लगा लिया …उसके गले लगाने से पता चल रहा था की उसे मनु में कितना apna-pan लग रहा था .. सूर्यकांत जो बहुत कठोर किसम का इंसान था ..पैर उसके आँखों में मनु के लिए अपनापन देखकर और उसकी आँखों में हलकी सी नमी देखकर कोई भी बता सकता था की सूर्यकांत कैसे मनु को अपना मान चूका था ..

सूर्यकांत मनु के गले लगा हुआ था की वहां विरंदा और सूरज आगये भटनागर सर के साथ ..तीनो हैरान थे की व्हीलचेयर पैर बैठने वाला सूर्यकांत अचानक से खड़ा कैसे हो गया …

सूर्यकांत “ सूरज और वृन्दु बीटा ऐसे मत देखो ..यह सब एक जादो का कमाल है …हहहहहह!”

सूरज “ पैर पापा कैसे ..मेरा मतलब है डॉक्टर तोह आपसे हार मान चुके थे ..तोह अचानक से यह चमत्कार कैसे हुआ ..??”

विरंदा “ दादू आपको बता नहीं सकती मैं कितनी खुश हूँ ..आपको इस व्हीलचेयर पैर देखकर मैं कैसे जी रही थी यह मुझे पता है …पैर दादू यह हुआ कैसे ??”

सूर्यकांत ने मनु की तरफ देखा मनु ने न में सर हिला दिया ..की मेरे बारे में मत कहना …

सूर्यकांत “ बीटा पता नहीं अपने आप hi मैं किया की चेयर से उठकर चलने की कोशिश करूँ और पता नहीं किस जादो ने मुझे ठीक कर दिया ..पैर जो भी हो …इस बूढ़े की उम्र थोड़ी जरूर बाद गयी ..काम से काम अब चलकर तुम्हारे खुशियूं को एन्जॉय तोह कर सकूंगा ..”

विरंदा की आँखें भर आयी थी सूरज भी खुश था …अपने बाप को चलते देखकर …क्युकी बेसहक रईस थे अग्गरवाल फॅमिली पैर पैसे के साथ फॅमिली में सिर्फ यह तीन जाने hi थे ..जिनमे सूर्यकांत और सूरज दोनों की बीवी दुनिआ में नहीं थी ..और विन्र्द अभी तक शादी के लिए सोच hi नहीं रही थी …पैर आज अनजाने में hi सही मनु ने उनको खुशियूं से भर दिया था ..क्युकी सूर्यकांत जो को लेकर दोनों बाप बेटी परेशान थे ..पैर उसका मर्ज़ समझ में hi नहीं आ रहा था किसी के …और दर्द की दवाई लेने के अलावा और कोई जरिया नहीं था ..सो बेचारा बस व्हीलचेयर का मोहताज़ बनचुका था …पैर अब सब ठीक था ..

मनु “ ाचा सर अब हमे जाने की इज़्ज़ज़त दीजिये ..”सूरज से मनु ने कहा ..

सूर्यकांत उसे रोकना चाहता था पैर मनु ने उसे आँख मार दी ..सूर्यकांत उसकी बात पैर हंसने लगा ..

सूरज “ ok आपका कॉन्ट्रैक्ट का काम फाइनल हो चूका है ..पैर आज क्युकी बहुत दोनों बाद हमारे घर खुशियां आयी हैं …सो आज शाम को घर पैर एक पार्टी है ..और मैं आपको अभी इन्विते कर रहा hun..aap लोग हमारे घर जरूर आये ..”

मनु “ थैंक ु सर पैर होटल में कुछ और फॅमिली मेंबर भी हैं साथ में ..”

सूर्यकांत “ अरे तोह बीटा कहने की बात है क्या …उनको भी साथ ले आना ..तोह तय रहा शाम को मुलाकात होगी पार्टी में और तुमको आना hi होगा ..मैं नान यही सुनुँगा …ok “

मनु “ जी ठीक है शाम को मिलते हैं ..”

सूर्यकांत “ विर्न्दु बीटा इनको बहार तक छोड़ आओ ..प्लीज ..”

विरंदा “ दादू यह बा ताकि नहीं है ..आप प्लीज कहते अचे नहीं लगते आर्डर देते हुए अचे लगते हैं …सो वही कीजिये जिसमे आप अचे हैं …ok मैं जाती हूँ इनको see-off करने आइए मेरे साथ ..” वृंदा मनु और भटनागर सर को बड़े अदब से बहार ले गयी और सी ऑफ कर दिया …

सूर्यकांत जाते हुए मनु को पीछे से बड़े धयान से देख रहा था ..जाने किस सोच में था …सूरज ने उसकी नज़रों का पीछा किया तोह पाया उसका बाप मनु को जाते हुए देख रहा था ..उसके बाप के चेहरे पैर एक लग सी स्माइल थी ..

सूरज “ पापा आप ठीक हैं न ..??”

सूर्यकांत “ बीटा ठीक क्या होता है ..मैं तोह बेहतर हूँ ..चाहे तोह रेस लगा कर देख ले मुझसे ..हहहह”

सूरज “ सॉरी पापा आपसे बिना पूछे अचानक पार्टी का सोच लिया …”

सूर्यकांत “ बीटा तूने बिलकुल सही सोचा ..मेरे दिमाग में पहली बार यह बात लेट आयी की पार्टी तोह बनती है …सुच में तूने बहुत ाचा किया इनदोनो को इन्विते करके ..”

सूरज “ पापा आज आप बहुत खुश लग रहे हैं सब ठीक है न ??”

सूर्यकांत “ बीटा पहले शायद सही न हो पैर अब सब सही है …यह जो लड़का यहाँ से गया है न ???”

सूरज “ हाँ क्या गलत है …पैर पापा मुझे तोह सुच में बहुत ाचा और संस्कारी लगा ..”

सूर्यकांत “ बीटा कब बड़ा होगा आधे में hi बोल पड़ा ..पहले पूरी बात तोह सुन लेता ..”

सूरज “ सॉरी पापा …पैर लड़का सुच में बहुत भला और मासूम है ..”

सूर्यकांत “ भला और मासूम तोह है hi ..पैर जादूगर भी है ..हाहाहा”

सूरज हैरानी से “ जादूगर मतलब “

सूर्यकांत “ हाँ जादूगर hi है देखा नहीं कैसे भरी मीटिंग में अपने खिलाफ बोलनेवाले का भी दिल जीत लिया यह किसी जादो से काम है क्या ???”

सूरज “ हाँ आपकी बात में दम है ..वर्ण मुझे तोह ऐसा लगा था ..की मीटिंग के बाद यहाँ से दो ग्रुप पर्सनल दुश्मनी लेकर निकालेंगे ..पैर हुआ उल्टा hi ..टेंडर भी यह लड़का ले गया और उस आदमी को भी इसने अपना बना लिया …कुछ बात तोह है इस लड़के में जो apne-aap उसकी तरफ खींचती है …और बात यहाँ खूबसूरती की नहीं hai…khubsurat तोह बहुत होंगे पैर इस लड़के का डेरिंग और क्लैम नेचर और पॉजिटिव ऐटिटूड उसे बाकी भीड़ से अलग करता है ..यह पक्का लाइफ में कुछ न कुछ करेगा जरूर ..यह मेरे सिक्स सेंस कह रहा है..”

सूर्यकांत “ बीटा लगता है आज कसम खा राखी है अपने बाप से हर बात चीन लेने की ..पैर तुमने सही कहा ..और ाचा लगा जानकार की तुमने उसे नोटिस किया ..वास्तव में यह बहुत लम्बी रेस में जीतने वाला है ..अभी थोड़ा काम मई बे अपने रिसोर्स से हो पैर जहाँ सही चांस मिला वहां इसे इग्नोर करना मतलब फ्यूचर को इग्नोर करना है ..और उसका साथी भी काम नहीं था …न जाने कैसे पैर दोनों अपने में बेमिसाल थे ..यह तुमने ाचा किया की शाम को दुबारा उनसे मिल पाएंगे क्युकी जल्दबाज़ी में उन्दोनो का नंबर लेना याद hi नहीं रहा मुझे तोह ..”

दोनों बाप बेटे जहाँ मनु और भटनागर सर के बारे में बात कर रहे थे ..मनु और भटनागर सर अपने होटल के लिए टैक्सी पकड़ चुके थे ..विरंदा भी उनको see-off कर के वापस पापा और दादा के पास आ चुकी थी ..

मनु और भटनागर सर दोनों hi खुश थे ..एक तोह कॉन्ट्रैक्ट मिलना उस पैर लास्ट डे पैर एक ग्रैंड पार्टी जिसमे दिल्ली के और लोगों से मिलकर बिज़नेस एक्सपैंडेर के लिए स्कोप देखना होगा …और नए लोगों से मिलना और नयी जगह पैर जान पहचान बढ़ाने से प्रॉफिट hi था ..

भटनागर सर ने टैक्सी में बैठते hi मनु को गले लगा लिया ..”देखा तुम्हारी वजह से टेंडर मिल गया ??”

मनु “ सर आप गलत कह रहे हैं टेंडर आपकी म्हणत से मिला है …ना की मेरी वजह से ..”

भटनागर सर “ देखो जैसा प्लान था तुमो सेंटर ऑफ़ अट्रैक्शन रखने का वैसा हुआ भी तुमने सभी को पहले hi नेगेटिव से पॉजिटिव में बदल दिया ..उसके बाद तोह सब मलाई था ..मलाई ..अब चाहे तुम यह मनो या न मनो पैर टेंडर मिलने की असल वजह तुम हो ..”

मनु “ सर आप मेरे गुरु हैं आपसे बहस तोह कर नहीं सकता पैर यह भी सुच है पिछले 10 साल का रिकॉर्ड ..और उसपर आपकी पकड़ इस टेंडर की असल वजह है …बाकी आप कुछ भी कहो ..”

भटनागर सर “ और पार्टी के बारे में क्या कहोगे ??”

मनु “ पार्टी उसका क्या ??”

भटनागर सर “ बीटा आज से तुमको नहीं जानता हूँ ..मेरा उस रूम से जाना और अचानक से एक आदमी का व्हीलचेयर से उठ जाना ..ऐसे चमत्कार फिल्मो में हुआ करते हैं …असल ज़िन्दगी में नहीं ..और मुझे इस में तुम्हारा हाथ नहीं ..पूरा का पूरा मनु दिख रहा है …सो मुझसे झूंठ बोलना भी मत ..”

मनु समझ चूका था किआ आगे कुछ भी कहना मतलब बात खींचना ..सो उसने बात बदल दी ..

मनु “ ाचा सर आपने शर्मा सर को बताया या नहीं ???”

भटनागर सर ने अपने सर पैर हाथ मारा “ अरे यार कहाँ अभी तोह फ्री हुए हैं ाचा याद दिलाया ..उनको कॉल hi कर लेता हूँ …”भटनागर सर अपनी कॉल पैर बिजी हो गए ..और मनु टैक्सी से बहार देखने लगा ..शहर की चमक धमक को …

उधर हु दोनों आदमी जो सोफ़िया और नेहा को किडनैप करने के चक्कर में थे आज पहले दिन फ़ैल हो चुके थे ..क्युकी सोफ़िया आज अपने रूम से hi बहार नहीं निकली थी ..और नेहा तेरी उसकी साथी ..दोनों साथ में hi थे …और रही बात डेली सामान की तोह उसके लिए उनके बॉडीगार्ड और बाकी लम्बा सा स्टाफ मर बॉस ने दिया हुआ था ..सो दोनों महारानी बस आपने मुँह हिलती और सामान उनके सामने हाज़िर हो जाया करता था ..

आदमी 2 “ यार अब क्या करे साली हारमन कुटिया बहार hi नहीं निकली आज तोह ..उधर उस हरमि ने हमारा फॅमिली को किडनैप कर लिया है …साला तरफ कुआँ एक तरफ खाई ??”

आदमी 3” बात तोह तेरी सही है …पैर कर क्या सकते हैं जब साली बहार hi नहीं आयी तोह घर में उसे किडनैप करना मतलब उसके body-guard से फ्री में एक गोली लेकर सो जाना ..”

आदमी 2 “ अबे साले गोली लेकर सो जाना मतलब “

आदमी 3 “ लगता है तेरे भेजे में प्रॉब्लम है ..वर्ण गोली लेकर सो जाना मतलब समझ नहीं ..आया ..अबे ढक्कन गोली मतलब उसकी बन्दूक की गोली और सोना मतलब परमानेंट सोना ..समझा …”

आदमी 2 “ भाई कमसे काम टूट ओह मत फाड़ पहले hi काम लोडे लगे हुए हैं जो तू …ाँद भी बटोर ने के लिए लगा हुआ है …कुछ सोच ..वर्ण फॅमिली वाले मर जायँगे ??”

आदमी 3 “ तू लगता है चुटिया है ..अबे उस आदमी को सिर्फ उस सोफ़िया और उसकी चमची से मतलब है ..उसको खुद उनसे बदला लेना है ..जब तक हु दोनों उसके हाथ नहीं लगती हमारे घरवाले सेफ हैं ..तू हाल फिलहाल काम पैर ध्यान दे ..”

आदमी 2 “ भाई पैर फिर भी “

आदमी 3 “ तू आज नहीं कल पैर ध्यान de…kyuki चूक के बाद कोई न कोई तोह पक्का काम होगा …या तोह हु ya..hum या हमारी फॅमिली ..सो अभी सिर्फ काम पैर धयान दे..”

आदमी 2 “ सही है भाई … आज नहीं तोह कल पका इस मादरचोद सोफ़िया को ले उड़ेंगे हम ..तू भी टेंशन मत ले “

आदमी 3 ने उसके कान को सेक दिया ..” साले एक तोह तेरी खुद की फटी हुई है ..उस पैर भी मुझे समझा रहा है …तू मुँह काम दिमाग चला ..वही ऐसे में सही होगा …और कल सोफ़िया और उसकी चमची पका हमारे हाथ में होगी ..”

दोनों साथ में अपने दिमाग में कल के लिए प्लान सोचने में लग चुके थे ..की कैसे सोफ़िया को किडनैप करना है …

उधर मनु और भटनागर सर अपने होटल में आ चुके थे ..जस और नीता मम के पास मनु चला गया ..कुछ देर दोनों से बात की ..और शाम को पार्टी के बारे में बताया की शाम को हु दोनों रेडी हो सकें …नीता मम और जस बहुत खुश थी की शहर में आते hi एक बड़ी जगह की पार्टी में जाने को मिलने वाला है …मनु उनको बोलकर अपने रूम में नहाकर और रूम सर्विस से खाना मंगवाकर उसे खाकर अलार्म लगा कर सो गया …ताकि शाम को फ्रेश मूड से पार्टी एन्जॉय कर सके …..

मनु जहाँ पार्टी के लिए खुश था वहीँ jai-chand और उसका ससुर बबनाथ को अभी भी भड़काने में लगे हुए थे ..पैर क्या बाबा उनकी बातों में आने वाला था ..और क्या हु दोनों आदमी क्या सोफ़िया और नेहा को किडनैप करने में कामयाब होंगे …और अचानक से इस पार्टी में जाना और सोफ़िया और नेहा का किडप और इसके साथ नीता मम का भाई जिसको अभी तक पता भी नहीं था की उसकी सगी बहिन दिल्ली में मोजोद है …क्या सुच में नीता मम की जरूरत थी उनके भाई को या कोई गड़बड़ है यहाँ ..यह तोह सिर्फ वक़्त और किस्मत को hi पता है ..की आगे क्या होगा ..
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अपडेट 83

रिकैप........

मनु जहाँ पार्टी के लिए खुश था वहीँ jai-chand और उसका ससुर बबनाथ को अभी भी भड़काने में लगे हुए थे ..पैर क्या बाबा उनकी बातों में आने वाला था ..और क्या हु दोनों आदमी क्या सोफ़िया और नेहा को किडनैप करने में कामयाब होंगे …और अचानक से इस पार्टी में जाना और सोफ़िया और नेहा का किडप और इसके साथ नीता मम का भाई जिसको अभी तक पता भी नहीं था की उसकी सगी बहिन दिल्ली में मोजोद है …क्या सुच में नीता मम की जरूरत थी उनके भाई को या कोई गड़बड़ है यहाँ ..यह तोह सिर्फ वक़्त और किस्मत को hi पता है ..की आगे क्या होगा ..

अब आगे........

नीता मम बैठी बोर हो रही थी ..क्युकी हु और जस तोह पहले hi होटल रूम में रुकी हुई थी ..और हु दोनों hi कहीं गयी नहीं थी ..सो नीता मम को नींद नहीं आ रही थी ..उन्होंने टीवी देखकर टाइम पास करने का सोचा भी पैर टीवी देखकर टाइम पास होना मुश्किल था क्युकी टीवी में वही घिसे पिटे शो आ रहे थे ..सो नीता मम ने रूम से बहार जाने का फैसला किया …और क्युकी उनके hi फ्लोर पैर जस रुकी थितोह उसके रूम के दूर को नॉक किया ..

जस ने दूर ओपन किया ..” अरे आप आइए न …मम आईएए अंदर ..”

नीता मम अंदर चली गयी ..जस भी अभी तक जाएगी हुई थी उसके बीएड पैर डेरी और काफी सामान फैला हुआ था ..जो बता रहा था ,,की जस ऐसे में भी अपने काम में लगी हुई थी..

नीता मम “ अरे बेटी तुम टीवी नहीं देख rahi..kaam में लगी हो काम से काम आराम तोह कर hi सकती हो न ??”

जस “ मम हु न आराम hi कर रही हूँ …काम कोनसा भाग दौड़ का है ..बस जो कुछ करना है …उसकी अपडेट मोबाइल से ले रही थी ..और इन्वेंटरी की डिटेल देख रही थी ..साथ में डीलर के साथ भी बात कर रही थी …ताकि मनु सर (नीता मम के सामने हु मनु को मनु सर hi कह रही थी …पैर अकेले में या ऑफिस में मनु hi कहती थी ..) का काम सही से हो सके ..”

नीता मम बड़े धयान से उसकी हर बात सुन रही थी …

नीता मम “ तोह बेटी क्या रहा ..??”

जस “ हु न मम डीलर से बात हो गयी है …और जैसे hi मनु सर कहेंगे साइट विजिट हो जाएगी …खैर आप बताइये आप यहाँ अचानक कैसे ??”

नीता मम “ हु न बीटा क्या है की थोड़ा बोर फील कर रही थी …सो सोचा तुमसे hi बात कर लूँ पैर लगता है मैंने तुमको डिस्टर्ब किया ..सोऊ सॉरी बीटा ..ाचा मैं चलती हूँ ..तुम काम कर लो..”

जस “ अरे मम ऐसा कुछ नहीं है काम जस्ट फिनिश हुआ है ..आप आराम से बैठिये ..वैसे भी यहाँ ज्यादा कुछ करने को है hi नहीं …सो सोचा काम में खुद को बिजी कर लूँ ..पैर आपने ाचा किया किआ आप यहाँ आ गयी ..आपको जाने की जरूरत नहीं है ..आराम से बैठिये न..” जस ने सारा सामान समेत ते हुए कहा ..

नीता मम उसके बीएड पैर आराम से बेथ गयी ..

जस “ हाँ तोह कहिये मम क्या बात शुरू करें ??”

नीता मम हैरत से ..” अरे बीटा तुम जवान हो और मुझसे पूछ रही हो ??? तुम बताओ न ..??”

जस “ सॉरी इसके लिए पैर हु क्या है न …काम से ज्यादा फुर्सत hi नहीं मिलती ..सो बहार के टॉपिक पैर ज्यादा नॉलेज नहीं है मुझे ??”

नीता मम “ बीटा सॉरी की बात नहीं ..पैर क्या बहार भी बात नहीं करती किसी से ..??”

जस “ करती हूँ न …पग में लड़कियों से ..उसके बाद रेस्टोरेंट में सरे स्टाफ से साथ में customer’s से और मनु सर से भी ..”

नीता मम “ और घर पैर कोण कोण हैं …??” नीता मम को जस के बारे में सिर्फ इतना पता था की हु मन ऊके यहाँ काम करती है ..पैर उसके फॅमिली के बारे में मनु ने ज्यादा नहीं बताया था ..सो नीता मम ने अनजाने में उसके दर्द को ताज़्ज़ा कर दिया ..

जस की आँखों में नमी सी च गयी …अपनी सख्त जस रोने से बचा करती थी या ..किसी के सामने रोने को मोस्टली अवॉयड करती थी ..पैर सामने से नीता मम का यह सवाल कहीं न कहीं उसके अकेले पैन को याद दिलने में कामयाब हो चूका था …

जस ने को शांत देखकर नीता में सोच में पद चुकी थी ..

नीता मम “ सॉरी बीटा अगर मैंने कुछ गलत पूछ लिया तोह माफ़ करना मुझे …”

जस अपने आँखों की नमी को मुँह फेरकर तेज़ी से साफ़ करके मुस्कुराते हुए नीता मम को देखती है ..और कहती है ..

जस “ नहीं मम ऐसी बात नहीं है ..छुपाने जैसा कुछ है hi नहीं …फॅमिली के नाम पैर बस मैं hi हूँ ..”

नीता मम हैरत से “ क्या ..??”

जस “ हाँ मम मेरी फॅमिली के नाम पैर सिर्फ मैं hi बची हूँ ..शायद मैं भी नहीं बचती पैर मनु सर ने आगे बढ़कर इस दुनिआ में अकेली पड़ी लड़की को न सिर्फ जीना सिखाया बल्कि खुद को काबिल बनाना में कोई कसार नहीं छोड़ी उन्होंने …जहाँ एक अकेली लड़की जिसके आगे पीछे कोई न हो ..वहां लोग उसे किस नज़र से देखते हैं …यह सब को पता है ..पैर न सिर्फ उन्होंने मुझे मेरी साड़ी परेशानियों से निकला ..बल्कि self-depended बनने में हेल्प की ..शायद इस जनम में मनु सर जैसा इंसान मिलना मेरे लिए तोह पॉसिबल hi नहीं है ..” उसके बाद जस ने अपनी साड़ी ज़िन्दगी को नीता मम के सामने खोल दिया ..जिसे सुनका नीता मम की आँखों में भी आंसू आ गए ..

नीता मम “ बीटा हु है hi ऐसा ..शायद तुम्हें पता नहीं …की ऐसा पहली बार नहीं है ..की उसने तुमको hi दुखों से निकला हो …मैं शायद उसकी लाइफ में आने वाली पहली इंसान हूँ जिसे उसने अपना मन …और उस काली दुनिआ जिसे सब गमो का सागर कहते हैं ..उस काळा सागर से मुझे अपना हाथ बढ़ाकर बहार निकल लिया …यकीं नहीं आया हो तोह यह देख लो ..” नीता मम ने अपनी ओल्ड पिक जिसमे हु कभी डबल सल साइज से भी बड़ी हुआ करती थी …हु पिक जस को दिखायी ..

जस ने जब देखा तोह उसे यकीं hi नहीं हुआ ..की उसके सामने बैठी नीता मम किसी टाइम इतनी मोती हुआ करती थी ..क्युकी जितना उनका मोटापा था ..उससे बहार आने के लिए मोस्टली लोग लिपोसक्शन सर्जरी (जिसमे जिस्म की चर्बी को सर्जरी से अलग किया जाता है ..और जो बहुत महंगी होती है ) उसका सहारा लेना पड़ता है ..पैर आज नीता मम को देखकर लग रहा था ..जैसे किसी टेलीमार्केटिंग कंपनी का कोई ऐड हो जिसमे पहले मोटा इंसान दिखते हैं ..और बाद में अचानक से उसका वेट लोस्स ..जो मोस्टली ग्राफ़िक्ली होता है ..जिस पैर आजकल के लोग आँख बंद करके यकीं भी कर लेते हैं …

खैर ..जस ने जब पिक देखि तोह नीता मम ने भी उसे अपनी और मनु की मिलने की बात और कैसे मनु और अजय ने उनको फैट 2 फिट किया सब बता दिया ..जिसे सुनकर जस भी हैरान थी ..उसके बाद क्युकी दोनों का कमान टॉपिक था मनु से उसी को लेकर बात चलने लगी ..जिसमे दोनों ने मनु के बारे में ाचा -ाचा बोलै ..क्युकी दोनों hi एक दूसरे के काम जान पहचान में थी ..

नीता मम “ तोह बीटा ऐसा है मेरा मनु ..तुमको पता है ..मनु को देखकर अजय भी बिलकुल वैसे hi बनने में लगा हुआ है ..पैर जहाँ मनु क्लैम है ..वहीँ अजय बोल्ड और वाइब्रेंट ..”

जस मैं लगा गर सुन रही थी ..” हाँ मम आपने सही कहा …मनु सर सुच में बहुत क्लैम रहते हैं ..” मैं में बोली “ इसी क्लैम नेचर से और अपनी अच्छी से मेरा तोह चैन और सुकून भी मनु ने लूट लिया है …अब आपको कैसे कहूं की हु मेरे लिए जीने के लिए उसी तरह हैं जैसे जीने के लिए सांस “

नीता मम “ बीटा लगता है ..मनु ज्यादा hi पसंद है तुम्हें ..???”

जस “ मम किसी को अगर जीने का नया जरिया मिले और जिसने जीने के काबिल बनाया है उसे अगर हम पसंद भी न करें तोह शायद उपपरवाला भी हमे माफ नहीं करेगा ..??”

नीता मम ने हलके से खोनी मरी जस को “ अरे पागल ..मेरा बीटा जवान है तू जवान है ..वह हैंडसम है ..तू सुन्दर है ..और बात पसंद की कर रही हूँ ..और तुम पता नहीं कहाँ से कहाँ जा रही हो ..अब बची तोह नहीं हो …जो हर बात सामने से hi कहूं और तुम समझो …???”

जस नीता मम का मतलब सुनकर शर्म से दोहरी सी हो गयी थी ..उसके गोर गाल गरम और लाल पद चुके थे ..उसकी आँखें झुक चुकी थी ..नीता मम का मतलब समझ कर ..पैर बेहचरी सिर्फ मुँह छुपाने के अल्वा कुछ कर नहीं सकती थी ..सो उसने मुँह दोनों हाथों से चिप्पा लिया ..

नीता मम छेड़ते हुए “ है ऋ मेरी प्यारी बनो देखो तोह कैसे लाल हो गयी है ..बीटा अगर पसंद है तोह बता दे शायद कुछ हेल्प कर सकूँ उस पागल के लिए ..वर्ण तुम बस पसंद hi करती रह जाना …और अगर नहीं है तोह कोई बात नहीं ..मैं तुम्हारे लिए किसी को देखूंगी ..पक्का ..वैसे लगता तोह है की तुमको मेरा बीटा पसंद नहीं है ??” नीता मम ने मज़े लेते हुए कहा ..

जस अचानक से “ मैं कब कहा की हु पसंद नहीं हैं ..??” जस ने खुद को बोलने के बाद रोकने की कोशिश की पैर तब तक उसके दिल का हाल पता चल चूका था ..नीता मम को ..नीता मम के चेहरे पैर मुस्कराहट फ़ैल चुकी थी …पैर अपनी बात बोलने के बाद जस शर्म से फिर मुँह छिपा लेती है …

नीता मम ने उसे खींच कर अपने गले लगा लिया ..”आये हाय अब आया न ऊंट पहाड़ के निचे …अब मुँह छुपने से क्या होगा अब तोह बात निकल गयी हाथ से …आये हाय यह लड़की कैसे साफ़ मुकर जाती अगर मैंने जाल न फेंका होता ..अरे अब मुँह छिपाना छोड़ भी दे ..समझ गयी हूँ तुझे मनु पसंद है ..चल इसमें हेल्प भी करुँगी इसमें तेरी ..”

जस भी बहुत दिनों के बाद किसी औरत के गले लगी थी ..जहाँ उसे मनु के बाद अपनापन दिख रहा था सो ..उसने हाथों को खुलकर नीता मम को लपेट लिया अपने गले से …उसे पता भी नहीं चला अचानक से आंसू बहने लगे उसके …पैर यहाँ दुःख के नहीं ख़ुशी के आंसू थे ..क्युकी बहुत दिनों बाद कोई उसे ऐसा मिला था जिसने उसके दिल के हाल को समझ था ..और साथ देने की बात की थी …

जस रट हुए “ थैंक यू मम …आज अगर आपने मुझसे पूछा नहीं होता तोह शायद कभी हिम्मत hi नहीं कर पाती अपनी चाहत को बता पाने की …शायद अपनी चाहत को अपने सीने में hi दफ़न कर देती ..पहली बार आपके सीने लग कर मुझे apana-pan मिल रहा है ..एंड सॉरी आपका ड्रेस मेरे रोने से ख़राब हो गया hai..uske लिए ..”

नीता मम “ पहली बात तोह बीटा तुम अब मुझे मम मत कहो ाचा नहीं लगता मुझे की तुम्हारे जैसे प्यारी बची मुझे मम कहे ..और बीटा ड्रेस की चिंता छोड़ दो ..यह ज्यादा ख़ास नहीं है …कपडे सिर्फ कपडे होते हैं ..जिनका काम सिर्फ तन ढकना है ..इंसान से ज्यादा कपड़ों की एहमियत नहीं होती है ..और अभी ज्यादा खुस मत हो …अभी तोह आगे बहुत मौके मिलेंगे जहाँ तुमको शायद अपने प्यार के लिए कहीं न कहीं किसी न किसी से टफ कम्पटीशन मिले सो बे रेडी फॉर बॉटल ऑफ़ लव …क्युकी जब तुम्हारे जैसे प्यारी बची के दिल में उसके लिए यह सब है ..तोह मई बे इन फ्यूचर और भी लड़कियां होंगी क्युकी उसका तोह नेचर hi है हेल्पिंग …सो पॉसिबल है तुमको तुम्हारा प्यार इतनी आसानी से न मिले …बाकी मैंने जैसा कहा है हेल्प करुँगी hi …अब रोना बंद करो ..”

नीता मम की बातें सुनकर जस को उस्मान और सुल्तान की उन relative’s की याद आगयी जिनके लिए उस दिन रेस्टोरेंट में मनु मला तक से भीड़ गया था …और जैसे जाते हुए तीनो मनु को देख रही थी …उनकी आँखों की चमक देखकर जस सोच में पद गयी थी ..पैर अब नीता मम ने उसका साथ देने को बोलकर और सामने से यह बता दिया था की ..इतस ा बॉटल …लड़ाई है प्यार की ..जिसमे उसे अगर मनु को पाना है तोह हर मानने से ज्यादा जीतना होगा …और यह भी पॉसिबल है उसे कम्पटीशन मिले ..जो शायद आगे मिलना भी था ..क्युकी यहाँ मनु की फैन फोल्लोविंग काफी है लड़कियों में …पैर सामने से तोह किसी ने कहा नहीं ..पैर आगे टाइम का क्या पता ???

नीता मम “ कहाँ खो गयी बीटा..??”

जस “ कहीं नहीं ..वैसे आपको क्या मैं अन्त्य कह सकती हूँ ??”

नीता मम मज़ाक में “ हाँ अभी तोह चल जायेगा पैर आगे अगर सब ठीक रहा तोह शायद अन्त्य काफी न रहे सुनने को ??” जस इस बात पैर शर्माने लगी थी ..

जस ने अब बात का रुख मोड़ दिया “ अन्त्य हु सर ने कहा था की अब अचानक से आपके भाई जो यहाँ रहते हैं उनको आपकी याद आ रही है …”

नीता मम जो अबतक खुश और छेड़खानी में लगी हुई थी ..अब सीरियस हो चुकी थी “ हाँ बीटा इतने दिन बाद अचानक से भैया का मुझे यहाँ बुलाना मुझे समझ नहीं आ रहा ?? पता नहीं क्या है उनके दिमाग में ..??”

जस कुछ सोचते हुए ..” अन्त्य आपसे कुछ पूछ सकती हूँ क्या ???”

नीता मम “ हाँ बीटा पूछो न ??”

जस “ आपके नाम क्या कोई फड़ वैगेरा या प्रॉपर्टी है यहाँ दिल्ली में ??”

नीता मम “ बीटा फड़ तोह मेरे हस्बैंड ने hi की थी …मेरे नाम से और उनके दुनिआ से जाने के बाद एक फड़ पापा ने शायद की थी ..जिसके बारे में मुझे ढंग से याद नहीं ..और हाँ कुछ प्रॉपर्टी भी है यहाँ मेरे नाम से पैर उनको मैंने कभी खुद आकर देखा hi नहीं क्युकी कभी जरूरत hi नहीं पड़ी …”

जस कुछ देर सोचती रही ..और बोली “ अन्त्य जी आप यहाँ हैं यह बात आपके भाई को पता है ??”

नीता मम “ नहीं बीटा टाइम hi नहीं मिला अचानक से मनु ने प्लान बन आलिया ..और यहाँ ले आया मुझे ..”

जस “ तोह एक काम कीजिये …आप अपने भाई को कॉल मिलाये अभी …इसी टाइम पैर यह मत बताना की आप यहाँ दिल्ली मैं hi हैं ..उनको कहना की बात क्या है ..और जब सब बता देंगे तब कहना इस मंथ आना शायद पॉसिबल नहीं है …और हाँ स्पीकर पैर बात करना …चलिए बात कीजिये …”

नीता मम “ लगता है ..हमारा अजय hi सीड नहीं देखता …तुम भी उसके जैसे जासूसी दिमाग वाली लड़की हो ..चलो ाचा है ..अगर सब ठीक हुआ तोह अजय के लिए उसकी नयी सीड वाली भाभी उसके जासूसी कांडों में उसका साथ देगी ….हीहीहीहीहीही”

जस भाभी सुनकर फिर से शर्माने लगी ..उसे एक बार तोह लगा जैसे सुच में मनु उसका hi हो गया ..पैर नीता मम ने जब कॉल मिल्या स्पीकर पैर तब हु वापस नार्मल हो गयी ..

की तभी अचनाक से किसी ने रूम के गेट पैर नॉक किया …जस उठकर वहां से गेट ओपन करने चली गयी …और क्युकी अचानक से किसी ने गेट पैर नॉक किया था सो नीता मम ने भी कॉल को म्यूट कर दिया था कॉल अभी पूरी तरह से कनेक्ट नहीं हुई थी …जस जब वापस आयी तोह उसके साथ मनु था …जो पहले उठकर नीता मम के रूम में गया ..और उसके बाद अब जस के रूम में आया था …शायद उसे कोई अंदाज़ा हो की यह दोनों यहाँ अलग शहर में साथ hi होंगी ..

खैर कॉल लगने वाला था ..तोह जस ने मनु को चुप रहने का इशारा किया ..मनु को बड़ा अजीब लगा की अचानक से यह दोनों स्पीकर पैर किसको कॉल कर रही हैं ..पैर क्युकी चुप रहने को कहा गया था सो हु भी चुप चाप देखने लगा ..

कॉल अब कनेक्ट हो चूका था कुछ रिंग के बाद उधर से आवाज़ आयी ..” hello हाँ नीता बोलो ..”

नीता मम “ हाँ भैया …आपने दिल्ली क्यों बुलाया है मुझे …???”

उधर से ..” अरे नीता इतने दिन बाद भाई से बात कर रही हो ..और नाह ाल चाल …न hello hi …सिद्ध मुद्दे की बात …सालों बाद भी नहीं बदली तुम …”

मनु अब समझ चूका था की यह नीता मम के भाई हैं ..पैर उसकी समझ में यह नहीं आया की अचानक से उनसे बात करने का ख्याल नीता मम के दिमाग में कैसे और कब आया था …पैर जब चुप रहना जरूरी हो हु चुप hi था …सो बड़े फोकस से हर एक बात सुनने लगा ..

नीता मम “ भैया ाचा है न …की काम से काम कोई एक तोह बदला नहीं है वर्ण …लोगों की अक्सर फितरत होती है बदल जाना …क्यों सही है न ..???” नीता मम का तना सुनकर उनका भाई शायद अंदर से भुक्ला चूका हो ..पैर उसने ज्यादा रियेक्ट नहीं किया …शायद उसे उम्मीद थी की कुछ कड़वे गीले शिकवे सुनने पड़ेंगे ,,,सो शायद हु भी अपने मंद से प्रेपर था …

उधर से ..” हाँ नीता वक़्त के साथ बदलना पड़ता है ..खैर कब आ रही हो यहाँ …क्युकी तुम्हारा आना बहुत जरूरी है ..क्युकी शायद कुछ hi दिन बचे हैं …??” उधर से किसी के खुसपुसाने की आवाज़ भी आ रही थी …

नीता मम ने मनु को और जस को एक नज़र देखा ..तोह दोनों ने न में सर एक साथ हिला दिया ..नीता मम उनका मतलब बखूबी …समझ चुकी थी ..

नीता मम ..” सॉरी भैया ..आपको शायद सुनकर ाचा न लगे पैर मैं दिल्ली नहीं आना चाहती ..सो आप यह तोह सोचिये भी मत …और किस बात के दिन काम बचे हैं ???”

उधर से फिर कुछ खुसपुसाहट हुई ..यह तोह ाचा था यहाँ होटल रूम में एक दम शांति thi…verna अगर बहार कहीं भीड़ में अगर नीता मम बात करती तोह शायद hi पता चलता की उनके भाई के साइड के कुछ खुस पूस चल रही है ..

उधर से बड़ी गंभीर आवाज़ आयी ..” सॉरी नीता बताना तो नहीं चाहता था ..पैर अब शायद बताना hi पड़ेगा ..की अब तुम्हारा भाई कुछ hi दिनों का मेहमान है ..मुझे कैंसर है ..लास्ट स्टेज है ….जानता हूँ मैं शायद ाचा भाई नहीं बन पाया ..पैर इस उम्र में जब जीवन अपने ाकीहरी पड़ाव में है ..और मैं बीएड से भी नहीं उठ सकता हूँ ..वहां ज़िन्दगी में मुझे तुम्हारा ख्याल आया ..सोचा अपनी छोटी बहिन के साथ अपने आखिरी पलों को साझा कर लूँ शायद मरते टाइम ..चैन से मर सकूँ …तुम बेशक मुझे माफ़ न करना ..पैर अपने मरते हुए भाई से कुछ टाइम के लिए hi मिल लो ..ताकि जीवन के आखिरी सफर पैर चैन से विदा ले सकूँ ..”..भाई तोह भाई होता है …ऐसा मेरे नहीं नीता मम का मन्ना था ..सो बेचारी इतनी na-insaafi के बाद भी जबसे सुना था की उनका भाई शायद आगे जिन्दा न बचे ..उनके आंसू अपने आप निकलने लगे ,,उनको अपने बचपन की हर याद अपनी आँखों के सामने चलती महसूस हो रही थी …

नीता मम रट हुए …” भैया यह आप क्या कह रहे हैं ..आपको कैंसर .कैसे और कब हुआ ..??”

उधर इस पहले कुछ खुस पूस हुई और “ नीता टाइम तोह एक साल से उप्पेर हो गया …पैर bed-rest पैर पिछले 6 मंथ से हूँ …नीता तुम्हारा भाई मर रहा है …बस एक बार एक बार अपने मरते हुए भाई से मिल लो …प्लीज …”

नीता मम कुछ कहती उससे पहले hi मनु ने उनके मोबाइल से कॉल कट कर दी ..नीता मम रट हुए मनु को अचानक से कॉल कट करने पैर हैरानी से देखने लगी ..पैर जस पहले जैसे शांत थी ..शामे मनु भी शांत था ..उसने नीता मम को अपने सीने से लगा लिया …जहाँ नीता मम किसी बचे जैसे रोटी रही ..मनु उनको बस सर पैर प्यार से हाथ फेरकर रोने देता रहा ..कोण मानेगा की स्कूल की सबसे कड़क vice-principal आज रो रही थी ..

उधर से अचानक से कॉल डिसकनेक्ट होने से उधर से कॉल आने लगा था ..रिंग होते फ़ोन को देखा तोह नीता मम ने कॉल पिक करनी चाही ..पैर मनु ने मोबाइल अपने हाथ में ले लिया ..नीता मम हैरानी से देख रही थी ..की उधर उनका सागा भाई मर रहा है ..पैर मनु उनको बात भी नहीं करने दे रहा ..

मनु “ माँ धयान से सुनो …ज्यादा नहीं कहूंगा ..आपको जाना है आप को ले चलूँगा ..पैर अभी के लिए मेरी बात मानलो ..उनसे केहदो की आपको कमसे काम 4 दिन आने में लगेंगे और आप यहाँ परमानेंट रहने के लिए आ रही हो ..और आपके भाई मतलब मां जी के पास और कितना टाइम है .एक बार उनसे पूछ लो ..बस इतना hi ..”

नीता मम हैरान थी पैर उनको अचे से पता था ..की मनु बिना मतलब कोई बात नहीं करता है ..सो उन्होंने कॉल उठाकर ठीक वैसा hi कहा जैसे मनु ने कहा था ..और जैसे तैसे बात की और कॉल उसके बाद डिसकनेक्ट कर दी ..

नीता मम को अपने भाई के लिए बुरा लग रहा था ..पैर मनु की हरकत भी हैरान करने वाली थी ..पैर इस टाइम उनकी आंखों में आंसू थे ..पैर सामने मनु और जस कूल थे ..जैसे उनको कोई दुःख hi नहीं है ..

मनु “ माँ क्या कहा मां जी ने कितना टाइम है उनके पास ??”

नीता मम आंसू बहते हुए “ ज्यादा से ज्यादा 2 या 3 महीने ..पैर लगता है तुमको उनके मरने का दुःख नहीं है ??”

मनु ने जस की तरफ देखा और उसे इशारा किया ..वह उठकर कहीं चली गयी …

मनु “ आपने कैसे सोच लिया की मुझे दुक्ख नहीं है ..पैर अचानक से आप खुद भूल गयी की …आपको खुद इस बात पैर हैरानी थी ..की आपके मेरा मतलब है मां जी ने आपको अचानक कॉल किया है ??”

नीता मम “ तोह ..”

मनु “ माँ ज़रा धयान से सोचना की …उनका अचानक से आपको कॉल करना और अचानक से दिल्ली आने के लिए प्रेस्सुरीसे करना और साथ में अब यह कैंसर क्या आपको इस बात पैर यकीं है ??”

नीता मम इस बात से सोच में पद गयीं ..पैर बात भाई किट hi ..सो नीता मम ने कहा ..

नीता मम “ तोह तुम यह कहना चाहते हो की अगर मैं आने में आना की करूँ तोह भैया ने झूंठ -मुठ कैंसर का नाम ले लिया है ??”

मनु “ माँ मैंने ऐसा तोह नहीं कहा ..पैर बिना देखे आप या मैं कैसे कह सकते हैं की मां जी को सुच में कैंसर है भी या नहीं ..एक बार इस एंगल से भी सोचना शायद आसान हो ??”

नीता मम मनु का मतलब समझ गयीं थी ..पैर 1 % भी कैंसर की बात सच निकली तोह ???

मनु “ माँ ज्यादा सोचो मत …पहले यह जानना ज़रूरी है की आपके यहाँ आने में उनका क्या रोले है ..और अचानक से उनका सारा धयान आप पैर लग्न कुछ गड़बड़ भी हो सकता है …आप मुझे गलत मत समझो आप मेरी माँ हो ..मेरी जिम्मेदारी बनती है आपकी सेफ्टी ..वही कर भी रहा हूँ …आप फ़िक्र छोड़ो …क्युकी जो चीज़ हाथ में नहीं है उसकी फिक्र करना बेकार है ..अगर आपके फिक्र करने से कोई फरक पड़े तोह साथ में करेंगे ..पैर अभी आप त्यार हो जाओ पार्टी के लिए ..”

नीता मम “ बीटा मेरा मूड नहीं है ..ऐसी बात सुनकर मूड -ऑफ हो गया ..”

मनु “ माँ आप सोचती बहुत ho…kharab मूड के लिए hi तोह आपको पार्टी में ले जाना बनता है ,,,वर्ण अकेले रूम में पड़े रहने से मंद और ज्यादा उल्टा सोचने लगेगा …सो ज्यादा कहने सुनने से बेहतर है आप तयारी पैर धयान दो ..”नीता मम मैं न होते हुए भी उठी और जाने lagi…toh मनु ने उनका हाथ पकड़ लिया पीछे से …

मनु “ माँ क्या अपने बेटे पैर यकीं नहीं है ..अगर नहीं है तोह कोई बात नहीं ..आप पैर मैं सोचता था की मेरा हक़ है ..पैर अगर आपका मूड नहीं है तोह कोई बात नहीं हम रहने देते हैं ..कोई नहीं जायेगा पार्टी में …”

नीता मम नार्मल होते हुए “ अजय और तेरी यह बातें अचे से पता हैं मुझे ..कैसे इमोशनली ब्लैकमेल करके मनवा लेते हो ..सब पता है ..ाचा ठीक है चल चल रही हूँ पार्टी मैं …”

मनु “ऐसे उतरे चेहरे के साथ पार्टी में जाकर करना क्या है ???”

नीता मम “ अब चेहरे का क्या करूँ ??”

मनु ने उठकर आगे बढ़कर नीता मम के गाल पैर एक किश कर दी ..नीता मम का मूड अभी भी थोड़ा उखाड़ा हुआ था ..पैर मनु रुका नहीं उसने दूसरे गाल पैर किश करनी शुरू कर दी ..और बिना रुके किश करता रहा ..जिससे नीता मम न चाहते हुए भी हंसने लगी …क्युकी ऐसे मानाने वाला अगर कोई हो तोह ..शयद hi किसी का मूड ख़राब रहेगा ..

खैर मनु ने अब नीता मम को एक बार गले लगा कर उनको हिम्मत दी ..और त्यार होने जाने को कहा ..नीता मम जा चुकी थी ..उनके जाते जस अपने हाथ में कुछ लेकर आयी थी जिसे उसने मनु को थमा दिया था ..

हु चीज़ लैपटॉप थी जिसे मनु ने ों किया ..और साथ में पड़े नीता मम के मोबाइल जो की बात चित में हु यहाँ गलती से भूल गयीं thi..usme कुछ देर पहले की जो कॉल थी ..उसे जो नीता मम के आटोमेटिक कॉल रिकॉर्डिंग के फंक्शन के चलते रिकॉर्ड हो गयी थी ..उसे उस लैपटॉप में कॉपी kiya…handfree लगाई ताकि लैपटॉप से वौइस् क्लियर सुन सके और मोबाइल की उस कॉल को मनु ने कुछ फ्री सॉफ्टवेयर जो की वौइस् मॉडुलेशन के लिए उसे होते थे उनके उसे से सुना तोह उसका दिमाग सब समझ चूका था …

मनु के बदलने वाले चेहरे के भाव देखकर जब जस ने मनु से पूछा ..” क्या हुआ “

तोह मनु ने कुछ कहने के बजाये …हैंडफ्री उसके आगे कर दी …और रिकॉर्डिंग में हु khus-push जो नीता मम के भाई के पीछे से आ रही थी ..उस वौइस् मॉडुलेशन टूल के बाद अब साफ़ सुनाई दे रही थी …जिसे अब जस ने सुना …और जब जस ने सुना तोह …हैरानी से मनु को देखा ..मनु ने जस को देखा और सर हिला कर इशारा किया …जस भी समझ गयी ..

उसके बाद कुछ देर दोनों में बात हुई …जिसके बाद मनु जस के रूम से चला गया उसे रेडी होने को कहकर …और जस भी अब त्यार होने लगी ..मनु वहां से निकल कर अपने रूम में आया और कुछ कॉल किये उसने और किसी से कुछ बात की …और लैपटॉप एक बार फिर से ों किया क्युकी लैपटॉप उसके साथ hi था …कुछ लैपटॉप में khit-pit की और त्यार होने लगा ..

उसके बाद मनु और सभी अपने अपने रूम में त्यार होने लगे थे की अचानक से दो रूम के बहार रूमसर्विसे ने नॉक किया यह दो रूम थे जस और नीता मम के जिनके बहार ऑनलाइन डिलीवरी जो मनु ने कुछ देर पहले की थी एक्स्ट्रा पेमेंट करके हु आ चुकी थी …जिसमे कुछ ड्रेस थी …जिनको room-service वालों ने दोनों को दिया और अपने काम पैर चले गए …दोनों hi हैरान थी पैर क्युकी कुछ देर पहले उनका मूड जहाँ कुछ बताओं से टेंशन में था अचानक से गिफ्ट देखकर अब खुश था …

खैर पार्टी शुरू होने में अभी टाइम था …पैर यह सभी होटल से निकल चुके थे …अब सब में अलग थे …जहाँ जस नई सेमि मॉडर्न और वेस्टर्न के कॉम्बो के साथ अपने जवानी के जलवे भीकर रही थी ..वहीँ नीता मम आज एक रेहमी और कडाहेदार सदी के बिच अपने हुस्न की लग जलवे दिखा रही थी …भटनागर सर अस उसुअल सूट में हैंडसम लग रहे थे क्युकी हु आगे में बेशक काफी बड़े थे मनु से पैर फिटनेस फ्रिक होने के चलते उनके पेट ने अभी तक कमर से बहार होने का जोखिम नहीं लिया था …और इन सब में अपने मनु ने आज सुबह की तरह एक नया सूट पहना हुआ था ..क्युकी पार्टी शाम किट hi सो सुबह जैसे टाई वाला सूट नहीं था ..पैर दज (डिनर & जैकेट) पहना हुआ था …जिसमे उसका अपना ओरा था ..

खैर यह सब टैक्सी में बैठे सबसे आगे भटनागर सर और पीछे तीनो जैसे तैसे एडजस्ट हो गए …पार्टी वेन्यू तक टैक्सी ने उन्हें पहुंचा दिया …जहाँ जब मनु ने सूर्यकांत अग्गरवाल जी का महल जैसे घर को देखा तोह उसे पता चला की सुच में सूर्यकांत जी कितने बड़े हैं पैसे और रुतबे दोनों में …

सब पार्टी के लिए अंदर जाने को हुए पैर सिक्योरिटी ने उनको बहार रोक दिया ..वजह शायद उनका टैक्सी से आने हो ??? जिसपर शायद सिक्योरिटी को यकीं hi नहीं हुआ हो की ऐसे बड़ी और ग्रैंड पार्टी में जहाँ लोग अक्सर सिर्फ प्राइवेट इनविटेशन पैर आते हैं ..और जिनके पास काम से काम अपनी कार तोह मोस्टली होती hi है ..पैर यहाँ यह लोग टैक्सी से कैसे इस पार्टी में आ सकते हैं …

भटनागर सर ने उस सिक्योरिटी पर्सन से बात की और उसे अंडर पूछने को कहा जिसके कुछ देर तक वहां हु लोग सिर्फ लोगों को आते जाते देख रहे थे …बड़े बड़े लोग उनको देखकर वहां इग्नोर करते हुए अंडर जा रहे थे…

कुछ देर बाद जब अंडर से उसको कन्फर्म हुआ तोह उसने बड़े hi अदब के साथ इंसबको अंदर लेजाकर वहां ठराया …जहाँ कुछ hi देर में पार्टी के असली होस्ट यानी सूर्यकांत और उनकी फॅमिली उसके सामने थी ..और जैसा की आपको पता है इनकी फॅमिली में सूर्यकांत और सूरज और विरंदा hi हैं ..सो सभी ने बड़े प्यार और रेस्पेक्ट से उनका वेलकम किया …जहाँ सूरज तोह भटनागर सर के साथ बिजी हो गया ..और विरंदा नीता मम और जस के साथ लग गयी बताओं में ..और बचे सूयरकान्त और मनु तोह हु दोनों भी आपस में बातिन करने लगे …

पार्टी कुछ देर में hi अपने जवानी पैर आने वाली थी ..यहाँ अचे से ाचा खाना और अलग –अलग तरह की महंगी से महंगी शराब जोकि अक्सर ऐसी party’s में हुआ करती हैं ..वहां मौजूद थी ..और जवान लोगों के लिए नाचने गाने में लिए अलग जगह का इंतजाम था ..पैर ऐसे में भी मनु को सूर्यकांत जी छोड़ने का नाम hi नहीं ले रहे थे …

उधर सूरज और भटनागर सर के बिच में अब बातें होते हुए ड्रिंक का राउंड लगने लगा था ..वहीँ विरंदा से उसकी आगे के लोग जब मिलने आये तोह हु उनके साथ बिजी हो गयी ..पैर अब जस और नीता मम अकेले रह गए वहां पार्टी में ..सो जस ने नीता मम का हाथ थमा और चल दी कुछ खाने ..मतलब स्नैक्स के लिए ..नीता मम जहाँ यहाँ शायद अकेला फील करती पैर जस ने उनका हाथ थामकर उनको अकेला फील नहीं होने दिया ..उसके बाद दोनों स्नैक लेने के बाद वहां अलग रंग में आ चुकी थी…

अब शायद डांस फ्लोर पैर जहाँ शायद कोई स्लो सांग बज रहा था ..सो जस नीता मम का हाथ थामे नाचने के लिए डांस फ्लोर तक ले गयी ..नीता मम पहले तोह न नुकुर करने लगी ..पैर जब देखा यहाँ लोग सिर्फ गिनती के hi बचे हैं और जिनमे लेडीज hi हैं सो उन्होंने भी जमकर डांस किया ..और जस भी उनके साथ जमकर नाची ..यहाँ आकर सुच में अब जाकर नीता मम को सही में मज़ा आने लगा था ..पैर बहकारी को कहाँ पता था ..की यह मज़ा बस शायद ज्यादा देर का नहीं है …नीता मम ने डांस फ्लोर जो मैं हाउस के साइड में बने लॉन में tha..jahan से मैं बिल्डिंग में कोण आ रहा है और कोण जा रहा है ..सब क्लियर दीखता था ..वहां मैं रोड से अचानक किसी फॅमिली ने एंट्री ली ..जिसे देखकर नीता मम की ख़ुशी पल में उड़ चुकी थी ..जिसे जस ने देख लिया ….नीता मम डांस फ्लोर से नाचते हुए रुक चुकी थी ..और फ्लोर से उतर गयीं जस उनके साथ थी …नीता मम ने फ्लोर से उतर कर एक बार फिर सामने देखा जैसे कुछ यकीं करना चाहती हों पैर यह सामने जो था हु सपना नहीं सुच hi था ..नीता मम को उस टाइम बहुत गुस्सा आया …पैर जस उनको साइड में खींचकर ले गयी और उनको समझया और पानी पिलाया ..जस ने मनु को मस्सगे किया और मनु उधर सूर्यकांत को बोलकर वापस आ चूका था ..

नीता मम ने सामने मनु को देखा तोह उनसे रुका नहीं गया …हु वहीँ मनु से लिपट कर रोने लगीं ..

नीता मम “ देख मनु भैया ने कहा था की उनको कैंसर है ..और उनसे बीएड से भी उठा नहीं जारहा है ..पैर हु और उनकी फॅमिली तोह यहाँ इसी पार्टी में सबके साथ आराम से घूम रही है …भैया ने ऐसा गन्दा झूंठ क्यों कहा …बता मुझे …क्या दुनिआ में bhai-behan के प्यार का कोई मोल नहीं ..बोल बीटा बोल ..”

मनु शांत आवाज़ में “ माँ एक बात कहूंगा ..जब हु self-centred हैं तोह आपको भी अपने बारे में सोचना चाहिए …आप यह आंसू उनके लिए बेकार मत करो जिनको इनकी परवाह नहीं ..आप दुनिआ में क्या हो ??यह आपको तय करना है ..या तोह बस अपने भाई के झूठ पैर बेबसी के आंसू बहाइये याम यह तोड़ जवाब देने के लिए त्यार रहिये ..और वैसे भी रोना आपको नहीं झूंठ बोलने वालों को चिहए …मैं हर तरह से आपके साथ हूँ …रोने में भी और जवाब देने में भी “

नीता मम पैर इन बातों का असर तुरंत हुआ ..उन्होंने अपने आंसू पूछे ..और कहा “ चल मेरे साथ अभी यहाँ सबके सामने उनकी फॅमिली को असल कैंसर कैसा होता है ..बता देते हैं ..चल मेरे साथ ..” नीता मम ने मनु को साथ चलने को कहा पैर मनु अपनी जगह से हिला तक नहीं ..

नीता मम “ अभी तोह चलने की बात कर रहा था साथ देने की बात कर रहा था …अब क्या हुआ …??”

मनु “ माँ दो वजह हैं ..एक यह किसी ओर की पार्टी है ..जिसमे शायद हमारी फॅमिली का तमाशा करना सही नहीं होगा …चाहे वजह जो भी हो घर का मटर घर पे स्लेव हो वही ठीक है ..और दूसरा जब तक सामने वाले की असल वजह आपके सामने न हो कुछ भी अचानक से कर देना सही नहीं है ..मेरा मतलब समझ रही हैं न आप ..???”

नीता मम उसकी बात सुनकर सोचने लगी तोह जस ने उनको समझया ..जिसके बाद मनु और उन दोनों ने वहां से खाना खाकर जाने का सोचा ..पैर सूर्यकांत जी कहाँ मैंने वाले थे ..और कुछ देर पहले hi उन्होंने मनु का नंबर लिया था सो उसे कॉल करके बुला लिया ..और क्युकी मनु अकेला नीता मम को छोड़ना नहीं चाहता था सो जस के साथ उनको भी सूर्यकांत जी के सामने ले आया ..

जहाँ मनु ने उनको बताया की इनकी तबियत ठीक नहीं है सो उसको यहाँ से जाना होगा …पैर सूर्यकांत जी ने अपने फॅमिली डॉक्टर को कॉल किया तोह पता चला शाहिब यहीं पार्टी में मज़े ले रहे हैं …सो जैसे hi सूर्यकांत का कॉल गया हु वहां जिन के जैसे फुर्ती से आ गए ..और उन्होंने नीता मम का check-up किया ..अब जब कुछ हुआ होता तोह कहते न ..पैर कमज़ोरी बता दी उन्होंने ..और कुछ दवाई भी लिख दिन …सूरज और विरंदा अपने अपने गेस्ट के साथ बिजी थे ..सो मनु उनको साथ लेकर जाने के लिए त्यार था ..पैर सूर्यकांत जी के जोर देने पैर ..उन्होंने वहीँ खाना मंगवा कर खा लिया था ..और साथ में कुछ देर मनु ने सूर्यकांत जी से बात की और जाने की रिक्वेस्ट की .. सूर्यकांत ने भी अब ज्यादा ज़ोर नहीं दिया बस विरंदा को कॉल करके बुलाया और साथ में सभी को ba-izzat see-off करने को कहा ..विरंदा ने भी सभी को see-off किया ..यह तोह गनीमत थी की नीता मम के भाई जो पार्टी में अपनी फॅमिली के साथ आये थे उनका अभी तक इनसब से सामना नहीं हुआ …

खैर भर छोड़ने आयी विरंदा सभी को see-off किया …जाते हुए मनु किसी से टकरा गया …अचानक से हु इंसान शायद जल्दी में था …बदले में उसने और मनु ने एक दूसरे को सॉरी भी कहा …विरंदा ने उसे मर जैस्वाल कहकर पुकारा था …(मर जैस्वाल शायद आपको याद हो ..अगर नहीं तोह सोफ़िया और मर जैस्वाल के बेटे राहुल का सामना आपको याद ho…haan यह वही मर जैस्वाल हैं राहुल के बाप ) ..अब क्युकी भटनागर सर को सूरज ने और ड्रिंक के लिए रोक लिया था सो यह बाकी सब अपने होटल में टाइम से गए और सो गए …भटनागर सर शायद आज आने वाले नहीं थे …

खैर अगला दिन आया …तोह सबसे पहले मनु अपने टाइम से उठा और होटल के रूफ पैर एक्सरसाइज करने लगा ..और उसके बाद निचे आ गया ..सुबह के टाइम सभी अपने अपने रूम में थे …रूम सर्विस ने सभी को नास्ते से फ्री कर दिया था …अब टाइम था कुछ करने का ..क्युकी जस और नीता मम अपने अपने रूम में hi थी ..सो आज अकेले मनु ने बहार जाने का सोचा ..और अकेले hi बहार निकल गया …

उधर मर जैस्वाल ने उन दोनों आदमियों पैर एक बार फिर से दबाव बनाया था ..किडनैपिंग का सोफ़िया और नेहा की …सो बेचारे दोनों बस टाक में लगे हुए थे की कब कोई बहार आये और हु पकड़ कर अपनी जान इस जैस्वाल से बच्ये ..पैर दिन आधा निकल चूका था पैर हाथ लगा …तानंन्न !!! समझ गएँ होंगे हाँ भाई घंटा लगा हाथ उनके ..क्युकी सोफ़िया कोई रोड पैर घूमने वाली बची तोह थीं यही जिसे कोई भी लोल्लिपोप दे और हु उसके साथ हो ले …यहाँ सोफ़िया की आगे पीछे body-guard की लम्बी दिवार थी उस पैर मर बॉस का नाम जिसके आगे अचे ाचों की फटकार हाथ में आ जाया करती थी …उसके आगे दो आदमी भला अकेले सोफ़िया और नेहा को किडनैप करने चले थे …उनका अंदर का हाल सिर्फ उनको hi पता था …

खैर मनु अपने टाइम से होटल में आ चूका था …उसके आते hi उसके मोबाइल पैर जस का कॉल आया जिसमे उसने कहा की डीलर आज का टाइम मांग रहा है ..पैर मनु ने उसे दो दिन के बाद के लिए कह दिया …क्युकी आज उसे किसी से मिलने जाना था …

मनु जस के कॉल के बाद एक हॉस्टल सॉरी गर्ल्स हॉस्टल के बहार खड़ा था किसी का इंतज़ार कर रहा था …उसके खड़े होने के बाद से वहां खड़े लड़के तीतर बन चुके थे …क्युकी मनु ने आज आर्मी टाइप कपडे पहने हुए थे …सो मनचले सोच रहे थे शायद कोई वहां गोवत ने सिविल ड्रेस में गर्ल्स सेफ्टी के लिए खड़ा किया हो …

पैर मनु वहां किसी से मिलने आया था …लड़किया मगर यहाँ तितलियों जैसे फ़ैल चुकी थी …मनु की हाइट और उसकी पर्सनालिटी का करिजमा शायद ऐसा था ..की आने जाने वाली लड़की .शायद एक बार उसे पलट कर देखती जरूर थी ..सबसे बुरा हाल तोह सिंगल लड़कियों का था …बेचारी हर कोई यह उम्मीद सजाये बैठी थी की शायद यह सामने खड़ा हीरो उपपरवाले ने उसी के लिए भेजा है ..पैर ऐसा थान यही ..भीड़ में आते जाते चेहरों में मनु किसी को पेचानने में लगा हुआ था …पैर कोई एक नज़र आया उसे जान पहचाना हुआ सा चेहरा जिसके पीछे जाकर मनु ने अचानक से हाथ रखा ..बदले में उसने भी जब धयान से देखा तोह मनु को सही से पहचाना तोह कुछ कहने सुनने के बजाये हु इंसान उसके गले में दोनों बहिन दाल कर झूल चूका था किसी बचे जैसे ..जिसे देखकर बहुत सारे दिल लड़कियों के जल चुके थे …

पैर हु इंसान हु लड़की ख़ुशी से झूम उठी थी …उसके लिए तोह यह सपने से काम नहीं था …शायद उसके लिए सुर्प्रीज़े hi था मनु का अचानक से वहां होना …लास्ट में मनु को hi कहना पड़ा क्युकी भीड़ भी सिर्फ उनको hi देख रही थी …

मनु “ अरे बस भी करो दीदी …मैं आपका छोटा भाई हूँ पैर आप तोह मुझे पैर ऐसे लटकी हुई हैं जैसे ..की मैं आपसे कितना बड़ा हों …”

लड़की “ चुप …मुझे पहले यकीं करने दे ..मुझे तोह अभी तक यकीं hi नहीं हो रहा है मेरा भाई मेरा मनु यहाँ आ चूका है मुझसे मिलने ..जिसको जो सोचना है सोचे मुझे किसी की कोई परवाह नहीं है …”लड़की ने बेबाकी से कहा ..यह लड़की कोई ोूर नहीं पुष्पी दीदी थी मनु की जो आज बहुत खुश थी ..

मनु बेचारा करता क्या ??? पैर पुष्पी के मनु को भाई कहने से जो सांस बेचारी लड़कियों की चढ़ी हुई थी ..वापस आ चुकी थी …वर्ण बेचारी कितने अरमान तोड़ने वाली थी ….

खैर मनु ने पुष्पी को अपने गले से उतरा ..लोग भी सोच में गम थे यह इंसान hi है या कोई पहाड़ क्युकी पुष्पी भी कोई बची तोह नहीं थी पैर मनु के गले पैर लटकने के बाद भी मनु उसे बचे जैसे पकडे हुए था ..जब पुष्पी को थोड़ा लाड काम हुआ तोह खुद उतर गयी उसके गले से …और हाथ पकड़ कर उसे अपने रूम की तरफ ले जाने लगी ..

पैर हॉस्टल के गार्ड ने रोका तोह उसने उसे कहा की मनु उसका भाई है ..पैर गार्ड तस से मास नहीं हुआ ..बोलै यहाँ सब के भाई hi आते हैं ..सभी लड़कियों के भाई hi खड़े हैं बहार देखलो ..उसने इशारा किया उन मनचलों की तरफ ..पैर मनु बहस नहीं करना चाहता था सो ..पुष्पी से उसने कहीं और चलने को कहा ..

दोनों कुछ देर बाद साफé में बैठे थे …

मनु “ तोह दीदी यहाँ सब कैसा है ??”

पुष्पी” सब ठीक है भाई ??”

मनु “ दीदी आप ठीक हो न ?? यहाँ ..मेरा मतलब है कोई परेशानी तोह नहीं है खाना ठीक से मिलता है न ..और पैसे तोह टाइम से मिलते हैं न आपको ???”

पुष्पी जो अभी तक मनु का हाथ थामे हुए थी …बोली “ भाई सब ठीक है ..पहले थोड़ा अजीब सा लगा पैर अब हैबिट बन गयी है …पैर आज तूने यहाँ आकर सुच में दिल खुश कर दिया ..पहले से नहीं आ सकता था दुफर …”

मनु “ हु सॉरी दीदी आजकल काम और बहुत साड़ी चीज़ों में फंसा रहता हूँ न तोह टाइम मिला hi नहीं ..पैर जैसे hi टाइम मिला तोह सोचा की आपसे जरूर मिलूंगा ..और देख लो आपके सामने हूँ ”

पुष्पी रट हुए “ सॉरी भाई शायद मैं ज्यादा hi जोर दे रही हूँ ..यह मैं भी अचे से जानती हूँ किट ु छोटा होने के साथ भी आज तक मेरा हर खर्चा उठा रहा है ..और एक मैं हूँ जो तुझे आने के लिए सुना रही हूँ…?? मुझे माफ़ करना भाई ”

मनु “ दीदी देखो इतने दिनों बाद तोह आपसे मिला हूँ …आपको तोह खुश होना चाहिए की आपका भाई इस काबिल है जो …आपके हर जरूरत को पूरा करने का हौसला रखता है ..पैर उसके बजाये आपको आंसू बहाने की पड़ी है ..रहने दो मैं वापस hi चला जाता हूँ ..ok bye “ मनु उठकर जाने को हुआ …पैर पुष्पी ने उसे बचे जैसे लपक कर पकड़ लिया जैसे हु सुच में चला जायेगा ..

और मनु को खिंच कर बैठा दिया वापस ..

पुष्पी “ ठीक है अब नहीं कहूँगी ..पैर ऐसे तोह मत जा अभी तोह तुझे ठीक से देखा भी नहीं है …वाओ कितना हीरो जैसा हो गया है ..तभी मैं कहूं की लडकियां क्यों तुझे देख रही थी ??”

मनु इस बात पैर शर्माने लगा …पैर पुष्पी ऐसे मौके छोड़ने वालों में से कहाँ थी ..

पुष्पी “ आए हे देखो कैसे शर्मा रहें हैं हमारे हीरो साब …सज धज के तोह ऐसे आएं हैं जैसे की …अपनी गफ से मिलने आये हों ??”

मनु “ दीदी आप भी ??”

पुष्पी “ मतब ??”

मनु “ अरे दीदी पहली बार आपके हॉस्टल आया तोह क्या फाटे कपड़ों में अत ..लोग तब नहीं कहते आपको की कैसा फटीचर इंसान हैं जिसे बहिन के पास आने तक की तमीज़ नहीं है ..पैर अगर आपको इनमे बुरा लग रहा है तोह अभी फाड़ देता हूँ इन कपड़ों को ???” मनु कपडे फाड़ने को हुआ तोह पुष्पी ने उसके हाथ रोक दिए ..

पुष्पी “ सर जी ऐसा जुल्म मत करना आपके कपडे से ज्यादा आपके कपडे उतारने से लोगों पैर ज्यादा फर्क पड़ता है ..क्युकी अंदर जो बॉडी आपने म्हणत से बना राखी है ..वैसे बॉडी बनाने के लिए यहाँ लड़के पता नहीं क्या क्या ?? करते हैं …तोह फिलहाल कपडे रहने दो ..वैसे भी बहुत दिनों बाद मिले हो अगर तंग न खीचूँ तोह क्या करूँ ..चलो मानती हूँ आ नहीं सकते पैर कॉल तोह कर hi सकते हो ??? या हु सोचे बैठे हो ???”

मनु “ सॉरी दीदी आगे से धयान रखूँगा ..ी म सो सॉरी ??”

इन दोनों की बातें चल रही थी साफé में ..टाइम भी दिन का hi था ..यंग लोग बैठे थे वहां की मनु ने अचानक से एक पैकेट निकल कर पुष्पी को थमा दिया ..

पुष्पी “ यह क्या है भाई ..”

मनु “ दीदी आप रखो काम आएंगे यह कुछ पैसे हैं देख रहा हूँ दिल्ली ाचा कहसा मंगा शहर है ..समझ सकता हूँ आपका यहाँ कैसे काम चलता होगा ??? “

पुष्पी “ तू न ज्यादा बड़ा हो गया है ..मुझे जरूरत नहीं है ,,,मेरे पास पैसे हैं तू hi रख इनको ..जो तूने किया है वही बहुत है …”

मनु “ दीदी ज्यादा कहना ाचा नहीं लगता पैर ..आप को देखकर hi समझ आता है ..आप कैसे यहाँ रहती होंगी ..आपके कपडे hi अलग लग रहे हैं ..बाकियों से ऐसे में आपको कैसे यहाँ सर्वाइव करना पड़ता होगा समझ सकता हूँ ??”

पुष्पी इस बात पैर सोच में पद चुकी थी ..क्युकी भले hi हु सामने से नहीं कह पति थी ..पैर आज मनु ने खुद देख लिया था जहाँ लड़कियां आजकल के कपड़ों के साथ मॉडर्न थी वहीँ ..पुष्पी अपने सूट में लोगों से बहिन जी सुना करती थी ,,,इस बात पैर कई बार लडकियां उसे निचा महसूस कार्य करती थी …क्युकी पुष्पी की गिनती ब्रिलियंट स्टूडेंट में हुआ करती थी ..सो सामने से न बहिन जी कहकर पीछे से उसे सुन्ना hi पड़ता था ..पैर आज मनु ने उसके ड्रेस और उसके अलग से पड़े रहने को महसूस कर चूका था ..पैर पुष्पी पैसे लेने को त्यार नहीं थी ..

मनु “ दीदी आपको पता है …आप बड़ी हो पैर चलेगी मेरी hi …मैं और सुनने के मूड में नहीं हूँ इस पैकेट को chup-chap अपने बेग में रख लो …”

पुष्पी ने भी इस पैर जोर नहीं दिया ..और पैसे बेग में रख लिए ..

पुष्पी “ पैर सुच कहूं तोह मुझे यहाँ नए कपड़ों की जरूरत नहीं है वैसे भी कपडे बदलने से इंसान बदल नहीं जाता ..”

मनु “ दीदी यह पैसे आपके लिए हैं आप की मर्ज़ी है आप चाहे इनसे ड्रेस लो या नहीं …पैर मेरा काम से काम यह मन्ना है जैसा देश वैसा भेष बाकी आप मुझे से बड़ी हैं ..ज्यादा इस बारे में कहूंगा नहीं “

इस बात पैर पुष्पी अपनी जगह से उठा कर मनु को टाइट हुग दिया …और ऐसे hi थोड़ी देर बातें करने के बाद मनु और पुष्पी अपने अपने रस्ते निकल गए …

मनु वहां से वापस अपने होटल आ चूका था …क्युकी अभी दिन बचा था सो उनसे रुख किया नीता मम के रूम का ..

नीता मम ने रूम में मनु को आने दिया और उसके सामने मुँह फुलाये बेथ चुकी थी ..

मनु “ माँ ऐसे मुँह फूलने से काम नहीं चलने वाला है ..आपको समझना होगा की बात सिर्फ उतनी नहीं है …जितनी आसान आप समझ रही हैं ???”

नीता मम “ मैंने कहाँ कुछ कहा जो कहना है …सुन्न्ना है उसके लिए तोह तुम हो न ..हम तोह बस इस होटल रूम में बोर होने के लिए आये हैं क्यों सही है न ??”

मनु ने इस बात पैर नीता मम को पास जाकर अपने साइड के हाथ से प्यार से हल्का सा हुग दिया …और कहा

मनु “ तोह माँ इस बात से नाराज़ हैं की हम इस होटल में बंद हैं ..क्यों यही वजह है न आपकी नाराज़गी की ??”

नीता मम “ हम्म्म!”

मनु ने कास कर एक टाइट हुग दिया और कहा “ तोह जल्दी से रेडी हो जाओ आज कुछ देखते हैं बहार की दिल्ली में क्या हो रहा है ….”

और कहकर चला गया ..उसने एक मश्ग जस को भी कर दिया ..भटनागर सर का कुछ पता नहीं था अभी तक ..

खैर सब कुछ देर बाद होटल के बहार थे …नीता मम और जस के साथ मनु भी रेडी था ,,

नीता मम ने खोनी मारी जस को …जस “ ोछह! “ नीता मम ने उसे इशारा किया ..

जस मनु से “ तोह कहाँ चलना है ??”

मनु “ यह तोह सोचा नहीं …पैर चलो आप सब के साथ कुछ शॉपिंग hi कर लेते हैं उसके बाद देखते हैं “

शॉपिंग के नाम से दोनों के चेहरे खिल चुके थे जो मनु ने बखूबी देख लिया था ..पैर कुछ कहा नहीं ..और होटल के बहार आकर उसने टैक्सी की और उसे अचे मॉल जाने को कहा ..

मॉल आकर दोनों को जैसे जन्नत मिल चुकी थी …दोनों यानि जस और नीता मम को उसने कहा जो चाहिए आप ले लो ..और हाँ बिल इस गरीब के नाम होगा ..”यह कहकर उनसे अपना डेबिट और कॅश जस को दे दिया …और दोनों लेडीज अपने काम में लग चुकी थी …

दोनों लेडीज स्पेशल में जुट गयी ..मनु बहार साफé में कॉफ़ी पिने चला गया ..जहाँ उसने कॉफ़ी पि और उसके बाद मॉल घूमने लगा ..

जहाँ अचानक से उससे कोई टकराते हुए बचा …यह एक लड़की थी शायद जल्द बाज़ी में थी ..मनु उसका चेहरा तोह नहीं देख पाया पैर पीछे से उसने उस लड़की को देखा ..लड़की भी शायद जल्दबाज़ी में मनु को नहीं देख पायी ..पैर मनु सिर्फ पीछे आती लड़कियों के झुण्ड में सिर्फ एक नाम hi सुन पाया …

और हु नाम था “ कनिका ..”

यह नाम लेते हुए पीछे आती लड़कियां उस लड़की को रोकने की कोशिश कर रही थी …मनु भी पीछे से जाते हुए उस लड़की को देख रहा था …लड़की को पीछे से देखकर न जाने मनु को क्यों उसके तरफ खिचाव सा महसूस हुआ ..नाम कनिका सुनकर न जाने मनु को क्यों कुछ अपनापन सा महसूस हुआ …पैर उस अनजानी सी लड़की को जाते हुए ..जो एक फुल ड्रेस में एक लम्बा सा खुला गाउन पहने दौड़ रही थी ..

उसे पीछे से देखकर मनु एक अनजाने अट्रैक्शन में खोया हुआ …उसे देखने को मजबूर सा हो गया था ..यह उसकी लाइफ में पहली बार हुआ था …लड़की तेज़ी से डूअड़ टी हुई बहार जाने लगी थी …पैर मनु उसके पीछे अनजाने से दूर से खिंचा चल दिया था …लड़की बहार पार्किंग की तरफ गयी थी ..सो मनु भी उसके पीछे खींचा चला गया था …

पार्किंग से हु लड़की न जाने कहाँ गायब हो चुकी थी पैर मनु उसे हर जगह ढूंढ़ता फिर रहा था ..पैर हु शायद जा चुकी थी ..पैर मनु वहां उसे दंड रहा था …शायद उसकी लाइफ का यह पहला मौका था जहाँ मनु का खुद पैर कोई भी बस नहीं था ..

पैर जैसे hi उसे एहसास हुआ की हु लड़की शायद वहां नहीं है ..अचानक से उसे होश आया तोह उसने देखा की दो लोग एक लड़की को उसके मुँह हाथ बांधकर कहीं ले जाने के चक्कर में हैं ..लड़की होश में है पैर क्युकी मुँह हाथ पेअर बंधे हैं सो छटपटाने के अलावा कर hi क्या सकती थी …मनु ने यहाँ वहां देखा ..मॉल के पार्किंग के उस एरिया में लोग काम थे शायद पार्किंग फुल होने की वजह से और कई कई जगह से तोह लाइट भी फूटी हुई थी या शायद काम नहीं कर रही थी ..सो उस साइड में लोग तोह काम hi थे साथ में उस साइड का ज्यादातर हिस्सा अँधेरे से में डूबा हुआ था ..

मनु ने यहाँ वहां देखा तोह पाया की उस अँधेरे की साइड में हु दोनों आदमी उस लड़की को ले जाकर एक वन में डालने लगे हुए थे …और लड़की अपने को छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रही थी ..पैर उसकी चलती कहाँ दोनों आदमी उसे वन में पटक कर बातें करने लगे …मनु धयान से साइड में चुप कर उनको सुनने लगा ..

आदमी 2 “ भाई हु साली सोफ़िया तोह हाथ आयी नहीं पैर उसकी साथी हाथ में आ गयी अब क्या करें ??”

आदमी 3 “ करना क्या है …उस पागल को कॉल कर और कह की भाई हमे सोफ़िया तोह नहीं मिली पैर उसकी चाहती मिल गयी शायद साला मान जाये ..और हमको हमारे घरवालों से मिलने दे ..??” इस पैर आदमी 2 किसीको कॉल करने लगा ..

अंदर वन में नेहा छटपटाने लगी तोह आदमी 3 बोलै “ देखो डरो नहीं हम कोई गंदे काम करने वाले नहीं हैं हमारे घर में भी …लडकियां हैं तुम आराम से रहो …हम तुमको छोड़ देंगे बस तुम हमरे साथ आराम से रहो ..डरो नहीं यह काम हमने जान भुजकर नहीं किया है ..यह सब हमारी मजबूरी है ..”

पैर नेहा यह सब सुनने के बाद भी छटपटाना जारी रखती है …आदमी 3 “ देखो मेरी बात मनो बचकर जाने का सिर्फ एक रास्ता है …और हु है हमारी बात आराम से मनो …”

आदमी 2 तब तक शायद बात कर चूका था ..वह वहां आकर बोलै “ भाई हु सलत ओह सुनने को त्यार hi नहीं है ..कह रहा है अगर तुमने उस सोफ़िया को नहीं पकड़ तोह हु हमको और हमारे फॅमिली को जान से मार देगा …और साले ने इतना कहकर फ़ोन काट दिया …”

आदमी 3 “ यार यह तोह प्रॉब्लम है ..अब क्युकी इसको उठा लिया है पैर सोफ़िया अभी भी बहार है ..और अगर ऐसे में हमने सोफ़िया को पकड़ने के लिए कुछ किया तोह हु सोफ़िया हमको चैन से जेने नहीं देगी ..सो अब एक hi काम हो सकता है ..”

आदमी 2 “ हु क्या भाई …??”

आदमी 3 “ इस लड़की को चारा बना कर उस सोफ़िया को बहार निकलने पैर मजबूर करना …और साथ में उसे भी किडनैप करना और बाद में उस साले सरफिरे को दोनों को दे कर खुदको और अपनी फॅमिली को बचाना …अब यही हो सकता है …तू एक काम कर इसका फ़ोन निकल उससे सोफ़िया को बोल की यह लड़की हमरे कब्ज़े में है …और बाकी सब उसके हाथ में है …अगर यह बात उसने मर बॉस को कही तोह इस लड़की को जान से मर देंगे ..”

आदमी 2 ने ठीक वैसा hi किया उसने सोफ़िया को नेहा के फ़ोन से कॉल की और उसे अकेले आने को कहा …और साथ में कहा की अगर उसे नेहा की जान प्यारी है तोह हु अकेले hi आये …मनु जो साथ में यह सब होते देख रहा था …सोचने लगा की पुलिस को कॉल करदे ..पैर उसने सोचा की अगर पुलिस को कॉल की तोह केस के लिए बाद में उसे भी कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ेंगे और फिर उसे लगा की दिल्ली में शायद नया बवाल न हो जाये …और फिर शायद उसका काम भी इस बात से इफ़ेक्ट हो …सो हु सोचने लगा की करना क्या सही रहेगा ..

उधर हु लोग वहां से नेहा को लेकर जाने की फ़िराक में थे ..तोह मनु ने फाइनली डीडे किया को हु उस लड़की को बचाएगा ..

और मनु वहां से अचानक से उनके सामने आ गया ..और अचानक से सामने आ जाने से हु दोनों सोचने लगे की यह कोण कहाँ से आ गया ..

आदमी 2 “ ऐ हीरो यहाँ से निकल ..यह हमारा मटर है ..वर्ण तेरी यह अछि खशी शकल बिगड़ दूंगा ..”और उसने पिस्तौल निकल लिया ..

मनु कुछ बोलै नहीं बल्कि फुर्ती से उस की तरफ लपका ..और मनु उसके गन तन्ने से पहले उसके हाथ से गन छिन्न चूका था ..

मनु ने उस आदमी को गन पॉइंट पैर लेकर कहा “ देखो उस लड़की को छोड़ दो..”

आदमी 3 “ देख भाई तू जो भी है ..प्लीज यहाँ से चला जा ..हम तोह वैसे भी लड़की को कुछ करना hi नहीं चाहते हैं ..पैर हम मजबूर हैं बात यहाँ हमारी नहीं हमारे फॅमिली की है …अगर हमने इस लड़की को छोड़ भी दिया तोह इसके बदले उल्टा हमारी फॅमिली को इसकी कीमत अपनी जान से देनी पड़ेगी जिसके लिए हम त्यार नहीं हैं ..”

मनु उसकी बातों से सोच में पद गया ..मनु ने उस गन पॉइंट पैर रखे आदमी को छोड़ दिया और कहा “ तुको देखकर लगता भी नहीं की तुम दोनों कोई प्रोफेशनल मुजरिम हो ..अगर तुमको ठीक लगे तोह मुझे काम से काम बात क्या है बता दो ..शायद मैं कोई हेल्प कर सकूँ …??”

मनु के गन पॉइंट निचे करते hi दोनों आदमी ..सोचने लगे की बात करना सही है या नहीं ??

आदमी 3 “ हम दोनों दोस्त हैं ..हमारी फॅमिली को एक आदमी ने किडनैप कर रखा है ..और बदले में हु चाहता है की ..हम उसके लिए इस लड़की और इसकी मालिक मिस सोफ़िया को उसके हवाले कर दें और हु बदले में हमारे परिवार को छोड़ देगा …”

मनु “ तुमको इतना आसान लग रहा है यह सब करना ..और तुमको लगता है ..की हु यह सब होने के बाद तुमको आसानी से जाने देगा ???”

आदमी 3” पैर तुम खुद सोचकर बताओ की हम करें भी तोह क्या …इंसान अगर मर भी जाये पैर काम से काम उसकी फॅमिली सेफ रहे तोह इससे ज्यादा की उम्मीद और कर भी क्या सकते हैं हम ..”

मनु सोचने लगा ..मनु “ उसका नाम क्या है ???”

आदमी 2 “ मर जैस्वाल जिसके बेटे को इसकी मैडम ने जान से मार दिया है ..और साला इन सबके बिच में पइसस रहे हैं हम और हमारी फॅमिली ..”

मनु “ चलो एक काम करते हैं ..पहले तुम्हारी फॅमिली को चुड़ते हैं उसके पास से उसके बाद देखते हैं ..पैर पहले इस लड़की को छोड़ो ..”

आदमी 3 “ यार तुम पागल हो क्या ..एक तोह उस इंसान का जालिम दिमाग उस पैर इसको छोड़ा तोह उल्टा इसका कुछ जाने वाला नहीं उल्टा हमारी फॅमिली के लेने देने पद जाएंगे ..और उस पैर इसकी मिल्क को अगर पता चला की इसको किडनैप करने वाले हम हैं तोह हु थेइर जहरीली नागिन ..उस आदमी को कुछ करने से पहले हमको जान से मार देगी ..और हमारे मरने के बाद हु पागल हमारे घरेलू को मारेगा सो अलग ..”

मनु “ एक काम करो पहले इस लड़की को छोडो उसके बाद उसके पास से हम तुम्हारे फॅमिली को भी छुड़ा लेंगे ..” मनु की बात सुनकर और उसके बोलने से दोनों सोचने लगे की क्या करें और कैसे क्या यह इंसान सुच में ट्रस्ट के लायक है ???? उन दोनों के सोचने और देखने से मनु ने उनके मैं को भांप लिया ..

और पिस्तौल उनको देते हुए कहा “ यार अब तोह यकीं कर लो ..तुमने बात फॅमिली की है ..और अगर तुम्हरी जगह कोई भी ऐसे हालत में होता तोह उसके साथ यही होता …चलो अब उस लड़की को छोडो ..पहले इसको इसकी सही जगह छोड़ देते हैं ..उसके बाद तुम्हारे साथ चल कर तुम्हरे फॅमिली को बचते है ..बदले में मुझे कभी कभी चाय पीला दिया करना घर बुलाकर ..और हाँ आज तुम्हारी इस मर जैस्वाल की इस प्रॉब्लम का जड़ से सफाया भी कर hi देते हैं ..कहो क्या कहते हो ..”

आदमी 3 “ तुम सुच में इंसान hi हो न …ऐसे हालत में तुमको चाय की सूझ रही है ..यह समझ नहीं आ रहा है ..की वहां शायद जान के लाले पद जायेंगे ..??? तुमको नहीं लगता चाय का दाम जान से ज्यादा नहीं है ..”

मनु हँसते हुए ..” लगता है तुमको चाय का दाम दिख रहा है ..पैर लगता है तुमको यह नज़र नहीं आ रहा की ..एक चाय के दाम में तुमको एक नया साथी मिल रहा है ..जो तुम्हारी फॅमिली को बचने की बात कर रहा hai..khair छोड़ो चलो पहले इस लड़की को छोड़ो ..”

मनु की बात सुनकर आदमी 2 ने नेहा को आज़ाद किया ..नेहा जो सामने से यह सब सुन चुकी thi..manu को जब उसने सामने से देखा तोह उसके चेहरे में खो सी गयी ..उसने छूटने के बाद भी छटपटाना नहीं किया और आराम से वन की सीट पैर सीधी बेथ गयी ..

मनु “ अरे भाई अब किसका इंतज़ार है चलो इनको इनकी मालिक के पास ले चलो ..”

आदमी 2 “ भाई तुमको नहीं लगता हु इतनी आसानी से हमको जाने देगी ??”

मनु “ ऐसा क्या चलो देखते हैं इनकी मेमसाब को भी ..” दोनों आदमी वन में बेथ चुके थे वन को जहाँ सोफ़िया को आने को कहा था ..वहां ले जाय गया ..

सामने सोफ़िया अकेले hi कड़ी थी ..जिसे देखकर नेहा के आंसू निकलने लगे ..

सोफ़िया “ देखो तुमने कहा था की तुम मुझे अकेले मिलना चाहते ho..badle में तुम नेहा को कुछ नहीं करोगे ..तोह लो सोफ़िया तुम्हारे सामने है ..अकेली बिलकुल निहथि बिना किसी बॉडीगार्ड के ..तोह तुम अपना वडा पूरा करो मेरी नेहा को छोड़ दो ..मैं वडा करती हूँ …कुछ नहीं करुँगी ..”

मनु नेहा को देखकर “ चलिए आपको आपकी मेमसाब के पास छोड़ आता हूँ ..आइये ..”नेहा चुपचाप बहार निकली ..नेहा खुद हैरान थी की पुरे दिन body-guard में घिरी रहने वाली सोफ़िया उसके लिए अकेले आयी थी ..

नेहा को देखकर सोफ़िया को भी सुकून आ चूका था ..क्युकी नेहा ठीक थक थी ..नेहा मनु के साथ आगे बड़ी ..

मनु नेहा के साथ सोफ़िया के पास आया ..तोह सोफ़िया ने गुस्से में मनु को एक तमाचा मारा …

मनु तमाचा पड़ने पैर गुस्से में आ चूका था ..उसने पलट कर तड़क!!!!! तड़क !!!! एक साथ दो तमाचे एक साथ सोफ़िया के मुँह पैर जड़ दिए ..

नेहा सन्न से हैरान thi..wahin सोफ़िया के लिए यह पहली बार था ..की किसी मर्द ने उसे सामने से तमाचा जड़ दिया हो …और एक नहीं एक साथ दो …जैसे मनु तमाचे के बदले में उसे इंटरेस्ट भी रेतुर्न करने के मूड में था …

सोफ़िया के गोर गाल सुरक पद चुके थे ..कानो से संन्न!!! की आवाज़ निकल रही थी …उसे पहले तोह समझ hi नहीं आया की यह सामने से हुआ क्या …उसकी गोर गालो के लास्ट में जहाँ से होंठ के कोने जहाँ से शुरू होते हैं वहां से खून बहने लगा था …मनु ने रेहम नहीं किया था …रेतुर्न फवौर में जिसका सबूत था सोफ़िया के मुँह के दोनों साइड से बेहटा खून ..सोफ़िया के मुँह पैर उसे किसी ने सामने से कभी कुछ नहीं कहा था ..और जो कहने की हिम्मत करता उसे सोफ़िया जिन्दा नहीं छोड़ती थी …पैर यहाँ तोह किसी मर्द ने उसके मुँह पैर एक साथ दो तमाचे जड़ दिए थे …जिससे सोफ़िया बोखला चुकी थी …

हु दोनों आदमी भी सामने से सोफ़िया के गालो को लाल होते देखकर गाडी से बहार आ चुके थे ..सोफ़िया का भूखलना देखकर आदमी 2 “ भाई अब यह बाँदा तोह गया नागिन को hi बजा दल्ला इसने तोह ..”

आदमी 3 “ देखते हैं अब क्या होगा ..?”

सोफ़िया गुस्से में बौखलाते हुए आस पास देखने लगी ..तोह उसे पास में एक कांच का टुकड़ा नज़र आया ..सोफ़िया लपक कर उसे उठाकर मनु को मरने चल दी ..

आदमी 2” भाई यह बाँदा तोह गया ..देखना यह सोफ़िया के हाथों सहीहेड होगा पक्का ??”

आदमी 3 “ नहीं यह बाँदा थोड़ा अलग लग रहा है ..??”

आदमी 2 “ अरे भाई आमतौर पैर लड़के लड़कियों पैर हाथ नहीं उठाते और तुम कह रहे हो यह अलग है ..??”

उधर सोफ़िया ने जैसे hi मनु पैर वार करना चाहा ..मनु ने उसके हाथ से आने वाले वार को ब्लॉक किया और एक खोनी उसके हाथ में मर दी …जिससे सोफ़िया को बेहिसाब दर्द हुआ ..उसका गुस्सा और बाद गया ..

आदमी 2 “ भाई अलग वलग कुछ नहीं देख नहीं रहे इसमें में भी वही हिंदी फ़िल्मी बहुत चढ़ा है ..औरतों पैर हाथ न उठाने का …और तुम कह रहे हो अलग है ..”

सोफ़िया दर्द में और पागल हो चुकी थी ..और उसने हर तरह से कोशिश की …की हु मनु को जान से मार डेल ..पैर मनु ने उसके हर वार को बड़े hi फुर्ती से न सिर्फ रोका उल्टा उसके हर वार के बदले में उसके मुँह का हाल बदल दिया ..उसके हर वार के बदले में मनु के हाथ का हाथ उसके मुँह पैर तेज़ और जहंनते दर कहते से उसका वेलकम करता था ..सोफ़िया के मुँह का हाल अब बुरा हो चला था …पैर सोफ़िया हार मने को त्यार नहीं थी ..सो उसने एक सुमरसॉल्ट लिया और मनु को गले को टारगेट किया ..बदले में मनु ने एक बैकफ्लिप ली और उसके वार से बचा और उसके कांच वाले हाथ को जोर से थाम लिया …और उसपर उसकी पकड़ छूटने के बदले और बढ़ने लगी ..जिससे सोफ़िया का हाथ खून से सन्न चूका था ..क्युकी जिस तेज़ धार से हु मनु को मरने के चाकर में थी हु तेज़ दर अब उसे अपने हाथों को मन ऊके हाथ के दबाव से काटने लगी हुई थी ..

सोफ़िया गुस्से में बिलबिलाते हुए ..” छोड़ कुत्त्ते तुझे बताता हूँ मैं क्या चीज़ हूँ ..” पैर मनु ने उसके हाथ को और जोर से दबा दिया खून और ज़ोर से निकलने लगा ..अह्ह्ह्ह!! की सिसीकी पहली बार सोफ़िया के मुँह से फूटती ..

पैर मनु ने रेहम न करते हुए ..उसके मुँह पैर दो और तमाचे जड़ दिए …चाटकककक!!!! चटककककक!

सोफ़िया के हाल पहली बार बुरे नहीं बहुत बुरे थे …

सोफ़िया “ अह्हह्ह्ह्ह!!! छोड़ो मुझे “

मनु “ बड़ी बद्तमीज़ हो ..एक तोह मैं इस लड़की को यहाँ ba-izzat यहाँ छोड़ने आया ..तुमने न कुछ सुना ..न कुछ जाना ..उल्टा मुझे hi मरने की कोशिश की ..लगता है तमीज़ से तुम्हारा दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं है …अब भुगतो ..बड़े शॉक हैं न जान लेने के ..तोह थोड़ा जान जाने का एहसास भी करो ..”मनु ने सोफ़िया के हाथ को पदक हुआ था उसे और हल्का सा दबा दिया ..

नेहा “ दीदी यहाँ इनकी गलती नहीं है ..गलती आपकी है..”

सोफ़िया हैरानी से देखने लगी ..जो नेहा रात दिन उसके आगे पीछे घुमा करती थी …आज पहली बार उसने सामने से आगे आकर खुद उससे गलत कहा था ..और यह तमाचा ..मनु के तमाचे से भी तेज़ लगा था …उसके dilo-dimaag पैर उसके मुँह से नेहा के लिए सिर्फ ीनता निकल ..” क्या मैं गलत हूँ ???”

नेहा “ हाँ दीदी किडनैप तोह मुझे उन्दोनो ने अपनी फॅमिली के लिए किया था ..इन्होने तोह मुझे उनसे छुड़ाया …और यहाँ आपके सामने इज़्ज़त से छोड़ने चले आये ..पैर आपने तोह इनको hi जान से मरना chaha..didi अगर आप इनकी बात सुनती तोह आपको पता चलता की गलती इनसे नहीं आपसे हुई है …”

सोफ़िया यह सुनकर ढीली पद गयी मनु ने भी उसके हाथ को छोड़ दिया और उसके हाथ से कांच निकल कर उसके हाथ में अपना हांके बंद दिया ..सोफ़िया चुपचाप मनु को यह करते हुए देख रही थी …उसे अपने बर्ताव पैर पहली बार शर्मिंदगी हो रही थी ..पैर हु क्या है न सोफ़िया का ईगो बहुत हाई टाइप का था ..सो सॉरी और हु भी किसी मर्द को हु केहड़े यह उसके ईगो के अगेंस्ट था …मनु उसके हाथों में हांके बांध कर उठा ..तोह नेहा ने सोफ़िया के मुँह से निकलते खून को साफ़ किया और उसके गले लग गयी …जैसे कोई बचा गले लगता है ..

सोफ़िया “ नेहा पता है ..मैंने तोह सोचा था ..की आज के बाद शायद hi तुझे देख पाऊँगी ..पैर देख तू मेरे सामने है ..”

नेहा “ दीदी मैंने भी सोचा था शायद अब मुझे अपनी बड़ी दीदी के बिना hi जीना पड़ेगा ..पता है आपको उन दोनों बेचारों ने भी मुझे अपनी मर्ज़ी से किडनैप नहीं किया है ..उनको भी उस मर जैस्वाल ने फाॅर्स किया है ..उनकी फॅमिली को किडनैप करके ..”

सोफ़िया गुस्से में “ यह जैस्वाल को मैं जिन्दा नहीं चौंगी ..पैर यह है आइकॉन ..और इसने तुमको किडनैप क्यों किया ??”

मनु “ लगता है तुम दिमाग से भी पैदल हो ..जिसके बेटे को तुमने जान से मारा था ..वह तोह तुमको किडनैप करना चाहता था ..पैर फांसी यह बेचारी ..खैर मैं चलता हूँ उन दोनों की फॅमिली को भी बचाना है उस जैस्वाल से ..”

सोफ़िया “ एक मिनट रुको ..”

मनु रुक गया …सोफ़िया ने अपने मोबाइल पैर किसी से बात की और कुछ देर बात करने के बाद ..

सोफ़िया “ तुम सही कह रहे हो ..वह सब क्सीक्स जगह पैर हैं ..तुमको कुछ करने की जरूरत नहीं ..मैं एक कॉल करती हूँ हु सब साफल्य यहाँ होंगे ..और उस जैस्वाल को मैं खुद देख लुंगी ..”

मनु “ जगह बताने के लिए थैंक्स ..हम अपने आप यह काम कर लेंगे तुम अपना और इस लड़की का धयान रखो ..और हाँ आगे से सामने वाले की बात सुने बिना कुछ करने से पहले सोच लेना कहीं हु बेक़सूर तोह नहीं जिसकी बात सुने बिना तुम उसे जान से मार दो …ाचा चलता हूँ ..” नेहा की तरफ देखकर “ और तुम भी अपना धयान रखना वर्ण तुम्हारे चलते तुम्हारी यह मेमसाब किसी और की जान न ले लें ok bye एंड टेक केयर..”

नेहा यह सुनकर निचे देखने लगी ..पैर न जाने उसके मैं में क्या आया ..की शर्मीली सी रहने वाली यह लड़की जो ज्यादा बोलती तक नहीं थी ..अपनी जगह से उठी ..और मनु के गले लग कर उसे थैंक्स कहा ..जिससे वहां सब हैरान थे ..

पीछे खड़े दोनों आदमी ..

आदमी 3 “ देखा मैंने पहले hi कहा था न ..यह बाँदा ोरों से अलग है ..पहली गले मिलकर bye कह रही है ..दूसरी का गुरूर ज़मीन पैर hai..or पहली के गले लगने के बाद दूसरी का चेहरा देखा …??”

आदमी 2 गौर से सोफ़िया को देखते हुए ..” हाँ भाई यह तोह सोच में गम है ..”

आदमी 3 शान से “ यही अलग है ..इस बन्दे में …तू देखना हमारी फॅमिली पक्का कुछ hi देर में हमारे पास होगी ..”

आदमी 2” भाई सुच में कहाँ हम ..जीने और मरने में फंसे हुए थे ..पैर किस्मत ने हमको सचमे एक मिसाइल से hi मिला दिया है ..मान गए गुरु ..तुम्हारा दिमाग सुच में ज़हर है …जिसने लड़के के टैलेंट को पहचान लिया ..”

मनु वहां से लौट आया था …पीछे से छोड़ आया था ..सोफ़िया और नेहा को वहां ..वन में बैठकर तीनो वहां से निकल चुके थे …कुछ hi देर में वहां सोफ़िया के body-guard आ चुके थे ..जहाँ सोफ़िया को ऐसे हालत में उन्होंने देखा तोह ..उनमे से एक ने पूछा “ मम अरे ु ok ??”

सोफ़िया “ यस आईएम okay …”

Body-guard “ मम आपको हुआ क्या …पहले कभी आपको ऐसे नहीं देखा ..पहली बार आपको इस हाल में देखा है …वैसे वे अरे बिलीव की आप अगर एक बार ट्रक से भी भीड़ गयीं तोह उसमे भी ट्रक hi डिस्ट्रॉय होगा ..बूत पहली बार आपको देखकर चिंता हो रही है ..अरे ु सूरे तहत ु फाइन ??”

सोफ़िया “ यस थैंक्स फॉर ुर कंसर्न बूत ी म फाइन ?”

सोफ़िया के मुँह से पहली बार थैंक्स सुनकर उस बन्दे को यकीं नहीं हुआ …की आर्डर देने वाली सोफ़िया पहली बार थैंक्स जैसा वर्ड कह सकती है …उसके लिए तोह यही बोनस था …की उसकी नकचढ़ी मैडम सोफ़िया ने थैंक्स जैसा वर्ड कहा है ..

नेहा “ फाइन कैसे दीदी को ट्रीटमेंट चाहिए हॉस्पिटल ले चलो..??”

Body-guard कॉल करके अपॉइंटमेंट लेता है ..और कहता है “वैसे मम हुआ क्या था यहाँ ,,,”

नेहा “ कुछ ज्यादा नहीं ..आपने सही कहा था …दीदी अगर ट्रक से भी भीड़ जाएँ तोह ट्रक टूट जायेगा ..पैर आज दीदी के आगे ट्रक नहीं नुक्लेअर मिसाइल thi…hihihihihhihihihi” नेहा ने जब यह कहा तोह body-guard अपना सर खुजाने लगा ..पैर सोफ़िया ने नेहा को उसके सर पे मर दिया ..और चुप रहने को कहा ..

और हॉस्पिटल में ट्रीटमेंट लेकर सोफ़िया अपने होटल के पेंटहाउस जा चुकी थी ..

उधर मनु ने मॉल में जस को कॉल करके कह दिया था अगर हु लेट हुआ तोह हु लोग टैक्सी से वहां से होटल रूम चले जाएँ…

और बातें करते हुए मनु उस जगह पहुँच चूका था जहाँ उन दोनों की फॅमिली को किडनैप करके रखा हुआ था ..यह जगह भीड़ भाड़ से दूर थोड़े रिच एरिया में फार्म हाउस के रूप में थी ..या यूँ कहिये यह जगह एक फार्म हाउस hi थी ..

जहाँ मनु ने दो कार को देखा मैं गेट के बहार मीन्स कोई अंदर हैं …और बहार आने वाला है सो मनु ने वन को थोड़ा पीछे करके पार्क करने को कहा …वन थोड़ा ..पीछे पार्क की …और कुछ hi देर में एक जाना पहचाना इंसान अंदर से बहार aaya..jise देखकर मनु चौंक गया …पैर तभी मनु के कंधे पे किसी ने हाथ रखा और जब मनु ने पीछे पलट कर देखा तोह ..एक बार फिर चौंक गया …..कोण थे यह दो इंसान जिसमे से एक को मनु मैं गेट पैर देखकर चूंकि ..और उसके कंधे पैर हाथ रखने वाला कोण था ?? …
:हिंट:
 
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