- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 145,354
अपडेट 84
रिकैप........
जहाँ मनु ने दो कार को देखा मैं गेट के बहार मीन्स कोई अंदर हैं …और बहार आने वाला है सो मनु ने वन को थोड़ा पीछे करके पार्क करने को कहा …वन थोड़ा ..पीछे पार्क की …और कुछ hi देर में एक जाना पहचाना इंसान अंदर से बहार aaya..jise देखकर मनु चौंक गया …पैर तभी मनु के कंधे पे किसी ने हाथ रखा और जब मनु ने पीछे पलट कर देखा तोह ..एक बार फिर चौंक गया …..कोण थे यह दो इंसान जिसमे से एक को मनु मैं गेट पैर देखकर चूंकि ..और उसके कंधे पैर हाथ रखने वाला कोण था ?? …
अब आगे........
मनु हैरान था ..एक तरफ सामने खड़े इंसान को देखकर और …अचानक से जिसने उसके कंधे पैर हाथ रखा था …उससे तोह उसकी हैरानी और बढ़ चुकी थी ..क्युकी सामने खड़ा इंसान नीता मम का भाई था जो जैस्वाल से हाथ मिलकर वहां से निकल रहा था ….उसके हाथ मिलाने से एक मतलब तोह साफ़ था की हु आज पहली बार जैस्वाल से नहीं मिल रहा था …
उधर मनु ने जब पीछे देखा तोह उसका चौंकना भी अपनी जगह जैयाज़ था क्युकी वहां उसके पीछे हाथ रखने वाला इंसान एक लड़की थी …और कोई आम लड़की नहीं अग्गरवाल साब की बेटी ….जी हाँ यह सूरज अग्गरवाल की बेटी विरंदा थी …जिसने यहाँ उन तीनो को जैस्वाल पैर निगाह रखते हुए देख लिया था …जिसके बाद उसने आगे बढ़कर मनु को पहचान कर उसके कंधे पैर हाथ रखा था …
मनु पहली बार जब विरंदा से मिला था …तब उसने गौर किया था …की विरंदा कुछ अलग है …पैर क्युकी उसकी आमने सामने 1 ों 1 विरंदा से ज्यादा बात नहीं हुई पैर …कुछ तोह था विरंदा में अलग की मनु उसे महसूस कर सकता था ..भले hi वृंदा आगे में उससे बड़ी थी …पैर वृंदा नार्मल दिखने की कोशिश करती थी …पैर मनु उसके नार्मल चेहरे के पीछे देखने की कोशिश करके भी नहीं देख पता था …पैर उसका यहाँ होना शायद मनु ने सोचा नहीं था …सो उसका चौंकना अपनी जगह सही भी था …खैर वृंदा को देखकर मनु चूंकि जरूर पैर उसने ज्यादा रियेक्ट नहीं किया …
वृंदा “ hi तुमको देखा तोह hi करने चली आयी …”
मनु “ नीस 2 सी ु अगेन पैर आपका यहाँ होना आपकी बात जस्टिफिए करता नहीं है …सो प्लीज साफ़ कहिये मुझसे …”
वृंदा “हाँ तुम सही कह रहे हो ??? वैसे तोह मैं जैस्वाल के पीछे आयी thi..kyuki सुना है जैस्वाल कुछ अलग किसम का इंसान है जिसे गलत काम करने में ज्यादा मज़्ज़ा अत है …सो सोचा खुद hi इसकी तफ्तीश की जाये …सो मर मानव पैर मेरे सवाल अब भी वहीँ है ..आप यहाँ कैसे ??”
इस पैर मनु ने इशारा किया की हु यहाँ इन दोनों के साथ आया है क्युकी इनका परिवार जैस्वाल के कब्ज़े में है ..जिस पैर वृंदा हैरान थी ..की जैस्वाल जैसा बड़ा इंसान ऐसा कुछ कर सकता है …
तोह मनु ने उसे वन में बैठा लिया …तब तक नीता मम का भाई वहां से जा चूका था …और जैस्वाल भी उसके साथ निकल चूका था …मनु ने विरंदा को वन में रहने को कहा और अकेला 20 फ़ीट की बॉउंड्री फंड कर अंडर दाखिल हुआ .जहाँ ज्यादा सिक्योरिटी नहीं थी …शायद जैस्वाल को लग रहा था ..की उस जगह का पता किसी और को नहीं होगा सिवाय उसके …सो मनु अंदर जाकर उन दोनों की फॅमिली को ढूंढ़ने लगा …और कुछ देर बाद उसे हु लोग मिल भी चुके थे …मनु उन सबको लेकर जल्दी से बहार आने लगा ..पैर यह उसकी शायद सबसे बड़ी भूल थी ..की उसने बिना ज्यादा धयान दिए जैस्वाल को काम आँका था …जैस्वाल के उस farm-house से निकलते hi उसके सामने कुछ लोग हथियारों समेत सामने खड़े थे …जैसे उनको अंदाज़ा था की कोई उनको छुड़ाने की कोशिश में लगा हुआ है …गेट के बहार निकलते hi मनु और उसके पीछे उन दोनों आदमियों की फॅमिली थी …और सामने कई हथियार बंद लोग मनु के सामने थे …जिनको देखकर फॅमिली एक बार फिर से डर से भर चुकी थी …पैर मनु ने आगे बढ़कर उनसे लड़ना शुरू कर दिया था …हु दोनों आदमी भी उन से भीड़ चुके थे …पैर हथियारों के आगे उनकी कहाँ चलती …सो बेचारे लगे पीटने ….पैर मनु अकेले hi तीन के साथ लड़ रहा था …पैर सामने से बन्दे ज्यादा थे …सो उनमे से जो बन्दे खली बचे हुए थे …उन्होंने फॅमिली वालों को खींचना शुरू किया …पैर अचानक से सब कुछ बदल चूका था …क्युकी मनु अब अकेला नहीं लड़ रहा था …विरंदा भी मैदान में खुद चुकी थी ..उसके हर वार से बन्दे ज़मीन चाटने लगे थे …
और मनु भी अब फॅमिली वालों को बचने में जुट चूका था …मनु और उन आदमियों ने उनकी फॅमिली वालों को साफल्य वन में बैठा दिया था …उसके बाद मनु वापस आया और उसने वहां मुजूद बन्दों को कुत्ते की तरह धोना शुरू कर दिया …तब तक उन दोनों आदमियों ने उनके हथियार ले लिए थे …विरंदा भी कमाल की फाइटर थी …यहाँ अगर हु नहीं होती तोह शायद मनु अकेले बचने में थोड़ा परेशान होता पैर विरंदा ने सही टाइम रहते उनका बखूबी साथ दिया और …कुछ hi देर में सारे बन्दे ज़मीन पैर घटना के बल पड़े थे …उन्होंने हार मान ली थी ..वह सरे अब उन दोनों आदमियों के गन पॉइंट पैर थे …
मनु “ सुनो तुम में से एक आदमी यहाँ से अपनी फॅमिली को लेकर निकल जाओ क्युकी …आगे जो होने वाला है शायद तुम्हारी फॅमिली बर्दास्त न कर सके …” मनु के यह कहते hi ,,,आदमी 3 ने आदमी 2 को देखा और इशारा किया ..तोह हु वहां से वन लेकर निकल गया ..किसी सेफ जगह के लिए …
आदमी 3 “ बता बे तेरा बॉस कहाँ है ..इस टाइम ??”
जैस्वाल के आदमी “ जैस्वाल साब तोह अभी अपने दूसरे फार्म हाउस पैर होंगे क्यों ..??”
मनु ने उस आदमी के कान के पास जाकर कुछ कहा ..तोह हु आदमी गन पॉइंट पैर सभी को फार्म हाउस के अंदर ले गया …
मनु विरंदा से “ विरंदा जी देखो यहाँ सब ठीक है अगर आप जाना चाहें तोह यहाँ से जा सकती हैं ..क्युकी आगे जो होनेवाला है शायद आपको ाचा न लगे ..या आप मुझे बाद में ह्यूमैनिटी पैर कोई लम्बा सा भसन्ड दें …जो इस टाइम सुनने का मूड नहीं है मेरा ..”
विरंदा उसकी इस बात पैर हँसते हुए “ नीस जोके मानव जी आप भी गज़ब की आदमी हो …एक तरफ मुझे इनसबसे भीड़वा दिया और यह सोच भी लिया की मैं आपको जज भी करुँगी …अगर आपको ऐसा कुछ लग रहा है तोह ..भूल जाईये क्युकी अगर मुझे ऐसा कुछ लगता तोह मैं आपकी साइड से लड़ती hi नहीं ..खैर आगे करना क्या है..??”
मनु “ जस्ट वेट एंड वाच …ऐसे hi इन सबको छोड़ कर जा नहीं सकते इनका कुछ करना चाहिए पैर क्या करें इनका अन्य सुग्गेस्टिव ??”
विरंदा हँसते हुए “ करना क्या है …मुजरिम हैं यह लोग …जिनका काम लोगों को मरना या तंग करना है ..तोह ऐसे लोगों को छोड़ना कहीं से भी जैयाज़ नहीं है …बाकी सब आप पैर है..??”
मनु “ मीन्स िफ़ थे वाणीश सो पीपल don’t ु वोर्री अबाउट थम ???”
विरंदा “ शुड ी ?? वोर्री अबाउट थी सिक बास्टर्ड्स …अगर घर में कीड़े आते हैं तोह लेक्चर बाज़ी से ाचा है pest-control समझ रहे हैं न ..”
मनु “ मतलब यह टाइम pest-control करने का है ??”
विरंदा “ और नहीं तोह क्या …और उस जैस्वाल का क्या ..??उसे ऐसे तोह नहीं छोड़ सकते न ..”
मनु “ हाँ यह भी सही है अगर उसके एक farm-house में pest-control हो रहा है ..तोह लगे हाथों दूसरे farm-house को कवर कर लेते हैं ..आपकी क्या राइ है इस पैर ..??”
विरंदा “ राइ तोह नेक है …चलिए चलते हैं..”
मनु “ दो मिनट और बस काम होने hi वाला है ..” मनु के इतना कहते hi हु आदमी अंडर से तेज़ी से भागता हुआ बहार आया और उसके आते hi पुरे farm-house में एक जबरदस्त ब्लास्ट हो चूका था ..आदमी मनु के पास आकर तेज़ सांसे लेते हुए …” भाई जैसा आपने कहा था ..उनसबको हाथपैर बांधकर अंडर एक रूम में छोड़ दिया और बाद में गैस का पाइप निकल कर …उन्ही के लाइटर से काम कर दिया …कुछ hi देर में उनसभी का काम हो जायेगा …”
मनु ने एक तीखी नज़र उस पैर डाली …तोह उसने आगे कहा “ भाई समझ रहा हूँ साला एक भी इंसान वहां से छूटने वाला नहीं है क्युकी मुझे भी पता है अगर उनमे से कोई बचा तोह हम सभी फंसेंगे सो आप बेफिक्र रहो ..”
विरंदा “ क्या बात है वैरी नीस अब …?”
मनु “ अब क्या ??”
विरंदा “ अरे अब चलें यहाँ से ..”.
मनु “ हाँ पैर आप ..”
विरंदा “ ओह्ह्ह! के ों ..मैं भी तुम्हारे साथ चल रही हूँ …क्युकी इसमें ज्यादा मज़ा है ..मीटिंग से तोह बहुत ज्यादा …तोह क्या कहते हो चल सकती हूँ आपके ..साथ ”
मनु “ इंसान की पहचान उसके बुरे वक़्त में hi हुआ करती है ..जहाँ आमतौर पैर लोग ऐसे टाइम पैर साथ छोड़ कर बचना पसंद करते हैं …पैर आप सुच में अलग हैं …ऐसे टाइम में आपको मज़ा सूझ रहा है …तोह एक बात कहूंगा …अगर आपको छोटे इंसान से यानी मुझसे कोई प्रॉब्लम न हो तोह ???”
मनु की बात पूरी भी नहीं हुई थी की सामने वृंदा “ यार आप न …ाचा okay ! क्या हम दोस्त बन सकते हैं ??अगर हाँ तोह मिलाओ हाथ ..” इस पैर मनु ने हाथ मिला ..लिया
और विरंदा “ दोस्ती का पहला रूल है सुच तोह सुनलो …तुमसे झूंठ नहीं कहूँगी कुछ कहना है तुमसे पैर सही टाइम देखकर “ विरंदा का इशारा tha…unke साथ मौजूद हु तीसरा आदमी ..
मनु “ तोह जब चलना है तोह चलने कैसे ??”
आदमी “ भाई इसमें कोनसीबाड़ी बात है …उन लोगों की कार है न …उससे चलते हैं ??”जिस पैर मनु और विरंदा दोनों एग्री थे ..वह आदमी वहां से जाकर हु कार ले आया …और उसमे बैठने को कहा …मनु और विरंदा को ..
उधर farm-house में जैस्वाल आयाशी में लगा हुआ था …पेग पैर पेग चल रहे थे …उसके
जैस्वाल “ हु साली सोफ़िया भी जल्दी hi मेरे सामने होगी …उस साली रैंड को अचे से छोडूंगा …और उस साली उसकी चमची को भी नहीं बक्शने वाला …आज उन दोनों को छोड़कर अपने राहुल का बदला लूंगा …अरे मन कर देती ..मेरे राहुल को …ज्यादा से ज्यादा दो थपड जड़ देती मगर साली ने मेरे एकलौते बेटे को जान से मार दिया …साली एक बार सामने आ जा… कैसे भी इस बाप ने तेरा क्या हाल करना है ..तुझे बता देता …बहनकी लोदी ,,,साली मेरे बेटे को खा गयी …अरे राहुल क्यों मुझे छोड़ गया मेरे बचे …देख तेरे बाप का क्या हाल है …??”जैस्वाल नशे में अपने गुज़रे बेटे को याद कर रहा था …
आज उसे राहुल याद आ रहा था ..और इसी में उसका पेग पिने का तरीका बदल चूका था …जैस्वाल वहां बैठा वेट कर रहा था की उसके सामने राहुल की सेक्रेटरी उसके सामने आ चुकी थी …जो उससे कहने लगी ..
सेक्रेटरी “ सर बास कीजिये आपने बहुत पि ली है …ऐसे आपके पिने से राहुल सर वापस नहीं आने वाले ..वह जा चुके हैं …”
जैस्वाल “ कैसे भूल जॉन उसे ..अरे अगर उस सोफ़िया को मन करना था तोह मन कर देती ..ज्यादा से ज्यादा उसे सबके सामने दन्त देती ..उस पैर भी अगर दिक्कत थी ..तोह दो थप्पड़ लगा देती ..पैर इतने ुचे से मेरे राहुल को धकेल दिया ..उसने पता है ..कितने चीथड़े हुए मेरे राहुल के जिसे मैंने इतने प्यार से पला था …उसकी लाश को कन्धा देते हुए मुझपर क्या बिट्टी मैं जानता हूँ …अरे उसे तोह मुझे मरने के बाद कन्धा देना था …उल्टा जवान बेटे को कन्धा देना पड़ा मुझे …यह किस बाप के लिए ाचा है तुम बताओ मुझे ..पैर अब और नहीं बदला तोह लूँगा मैं उस सोफ़िया से यह मेरी ज़िन्दगी की आखिरी कसम है …मरने से पहले उस सोफ़िया को जिन्दा तोह चुदुँगा नहीं …”
उस सेक्रेटरी ने जैस्वाल को इतने गुस्से में कभी नहीं देखा था …पैर उसे जैस्वाल की चिंता थी …क्युकी उसका गुस्सा अपनी जगह जैयाज़ था किसे अपने जवान बेटे को मरने के बाद कन्धा देना ाचा लगेगा ..हाँ उसने आखिर तक राहुल को रोका था …और खुद सोफ़िया ने भी उसे रोका था ..पैर हुआ वही जो सोफ़िया ने किया …राहुल आज जिन्दा नहीं था …
और जैस्वाल गुस्से में सोफ़िया से बदला लेने पैर उतारू था …ऐसे में कई बार उसकी सेक्रेटरी ने राहुल के बारे में जैस्वाल से कहना चाहा पैर जैस्वाल शायद बदले में पागल हुआ पड़ा था …हु कुछ सुनने से पहले hi …उस सोफ़िया को गाली देने लगता था ..और उसके गुस्से के आगे कुछ कह पता हु उससे पहले hi कुछ लोग डंडान्ते हुए उसके farm-house में आ चुके थे …
हु लोग किसी के body-guard जैसे लग रहे थे उनके अंदर आने से जैस्वाल गुस्से से भर चूका था …
जैस्वाल “ कोण है बे यहाँ क्या कर रहे हो ??”
पीछे से एक आवाज़ आयी “ यह मेरे लोग हैं जिनको सिर्फ मेरा आर्डर सुनने की आदत है “ पीछे आवाज़ को सुनकर जैस्वाल देखने लगा तोह उनके पीछे से दो लडकियां चली आ रही थी …
जिनको देखकर सेक्रेटरी ने जैस्वाल को बताया यह सोफ़िया और उसकी साथ नेहा हैं …जिसे सुनकर जैस्वाल ने जेब से पिस्तौल निकल ली और तान दी सोफ़िया पैर ..
सोफ़िया “जेब में रख लो जैस्वाल यह खिलौना नहीं है ..चल गयी तोह खामखां तुम मारे जाओगे ??”
जैस्वाल “ पैर मरने से पहले हरामजादी तुझे ले कर मरूंगा ….यह जैस्वाल का वडा है …”
सोफ़िया “ तोह चला कर देख लो …”
जैस्वाल पिस्तौल चला पता उससे पहले hi उसके हाथ से पिस्तौल चीन ली सोफ़िया के body-guard ने ..जैस्वाल कुछ कर hi नहीं पाया ..
की पीछे से मनु और विरंदा भी आ चुके थे …
सोफ़िया “ हाँ तुम्हारी hi कमी बची थी …लो देखलो तमाशा …” सोफ़िया ने उसके बाद पिस्तौल निकल कर एक फायर किया जो जैस्वाल के जस्ट कान के पास से निकल चूका था ….जैस्वाल अपनी जगह से बिलकुल नहीं हिला ..न भागने की कोशिश की उसने ,,,जैसे मरने और मारने दोनों के लिए त्यार था ..
सोफ़िया “ जैस्वाल एक बात मरने से पहले अचे से समझ लो तुम्हारे बेटे को मैं जान कर नहीं मारा उसे कई बार मन किया था …की मुझसे दूर रहे पैर उसने सुना नहीं …मरना मेरा लास्ट ऑप्शन था …सो उसे मार दिया …अब तुम्हारी बारी है त्यार हो जाओ मरने के लिए …”
जैस्वाल “ मारना है तोह मार दे हराम जादि पैर मैं मरने से पहले तुझे ले कर मरूंगा यह ले ..”
जैस्वाल ने एक रिमोट निकल लिया था …
जैस्वाल “ यह टीवी का रिमोट नहीं है …मुझे पता था की आज नहीं कल तेरा मेरा आमना सामना होगा जरुर और उसमे शायद मेरे हाथ में हथियार न बचे पैर मैं इसके लिए भी त्यार हूँ अगर तुमने मुझे मारा तोह यह farm-house जिसमे मैंने अचे खासे तरीके से बूम लगा रखा है …उसका बटन दबाकर तुम सभी को साथ ले कर मरूंगा …अब मार मुझे …”
जैस्वाल के यह कहते hi उसके पीछे कड़ी राहुल की सेक्रेटरी बेहोश हो चुकी थी …विरंदा ने आगे बढ़कर उसे थमा और उसकी नब्ज़ चेक की और कहा ….
विरंदा “ यह प्रेग्नेंट है ..”और उसे होश में लेन में जुट गयी वृंदा …और कुछ देर पानी मारने के बाद हु होश में आ चुकी थी ..उसके होश में आते hi वृंदा ने उसे बताया की हु माँ बनने वाली है ..
जिसे सुनकर हु “ नहीं यह नहीं हो सकता मैंने राहुल सर को मन भी किया था …”
जैस्वाल “ किस बात के लिए मन किया था ??”
सेक्रेटरी “ सर ी म सॉरी मैंने आपसे छुपाया है ..यह बचा राहुल सर का है मेरे पेट में ..मैंने उनको मन भी किया था ..पैर उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी ..और अब सब आपके सामने है ..”हु यह कहकर रोने लगी..
जैस्वाल “ लगता है तुम भी इनसबके साथ मिल चुकी हो …मेरे मरे हुए बेटे पैर ऐसा इलज़ाम लगते तुमको शर्म नहीं आती ..??”
सेक्रेटरी “ नहीं सर मैं झूंठ नहीं कह रही हूँ यह बचा राहुल सर का hi है …अगर यकीं न आये तोह इसका टेस्ट करवा लीजिए ..अगर मैं गलत निकली तोह सोफ़िया के साथ मुझे भी गोली मार देना ..पैर इनसब में मेरे घर तोह टूट गया न …”
जैस्वाल “ अगर ऐसा है तोह टेस्ट करवा लेता हूँ अभी और यह बचा अगर राहुल का निकला तोह तुम चिंता मत करो इसके बाद मैं तुमको किसी चीज़ की जरूरत महसूस नहीं होने दूंगा ..इतना पैसा दूंगा टुनको की अगर तुम्हरे परिवार ने तुमको छोड़ भी दिया तोह तुमको किसी की आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा तुम आराम से अपनी ज़िन्दगी जी सकोगी ..”
जैस्वाल “ मुझे इस लड़की का टेस्ट करवाना है ..उसके बाद हम अपना काम देख लेंगे …और अगर टेस्ट फ़ैल हुआ तोह इस लड़की के साथ मैं भी मरने को त्यार हूँ ..तुमको कोई प्रॉब्लम “
सोफ़िया ने जैस्वाल को देखा “ no प्रॉब्लम हम अपना मेटर थोड़ी देर के लिए रूक देते हैं …”
जैस्वाल ने किसीको कॉल किया और कुछ hi देर में एक डॉक्टर वहां आचुका था जिसने उस लड़की का पैरेंटल टेस्ट किया और तेज़ी से रिपोर्ट लेन को कहा ..कोई हाफ ऑवर बाद रिपोर्ट जैस्वाल के मोबाइल पैर रिपोर्ट थी जिसमे कन्फर्म हो चूका था ..की हु बचा राहुल का hi है ..
जैस्वाल ख़ुशी से “ देखो मैं दादा बनने वाला हूँ …अरे राहुल देख तू मार्कर भी हमारे साथ है …ी मिस ु बीटा ..”
उस लड़की के सर पैर प्यार से हाथ रखते हुए “ सॉरी बीटा मुझे माफ़ करना …जिन हालातों में मैं हूँ वहां हर किसी को शक की नज़र से देखना मेरी मजबूरी है …तुम यहाँ से चली जाओ ..क्युकी शायद इस बचे के नसीब में उसके दादा का सुख नहीं लिखा है ..मैंने अपने लॉयर को कॉल कर दिया है …आजके बाद तुमको किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी ..तुम ख़ुशी से रहना ..मेरा आश्रीवाद तुम्हारे साथ है ..और हो सके तोह मुझे माफ़ कर देना ..”जैस्वाल उस लड़की के सर पैर हाथ रखकर और रहा था ..
मनु “ जब तुम्हारी ज़िन्दगी में तुम्हारा नया पोता या पोती आ रही है तोह तुम्हारा मरना या मरना क्या जरूरी है ..अरे चैन से उसकी परवरिश करो ..और दूसरों को भी चैन से रहने दो ..”
जैस्वाल “ नहीं अगर मैंने इस सोफ़िया को छोड़ दिया तोह राहुल मुझे कभी माफ़ नहीं करेगा ..”
मनु “ वह क्या बात है तुम मरने और मारने को त्यार हो ..पैर उस नन्ही जान का भी सोच लो जिसके आयने से पहले उसका बाप दुनिआ में नहीं है ..शायद इसके बाद तुम भी मर जाओगे ..और जब यह बचा ..पैदा होगा तोह पता है ..दुनिआ इसे क्या कहकर पुकारेगी …नाजायज़ …यह सुनकर उप्पेर से खुश होना की तुम्हारे पोते को दुनिआ दुत्कारे पैसा होने से इंसान की पहचान नहीं बदल जाती ..एक बार सोचना jarror..kyuki पैसा हर जगह इज़्ज़त दे जरूरी नहीं है ..बिना maa-baap के नाम के किसी इंसान की हालत क्या होती है किसी अनाथ से पूछना शायद हु तुमको सही मायने में बता सके ..”
मनु की बात सुनकर सोफ़िया के साथ नेहा दोनों अपने बचपन को याद करने लगी …जिसमे दुनिआ से उनको प्यार काम दुत्कार ज्यादा मिली थी ..उसके बाद वही सब सोफ़िया ने लोगों को लौटाया भी था ..जिस जिसने उसका उस टाइम मज़ाक उदय था ..उसे उप्पेर भेजकर ..पैर नेहा के सर पैर उसने हाथ रखकर उसे अपने साथ रख लिया था वर्ण नेहा शायद पता नहीं किस हाल में होती ..
नेहा भी मनु की बातें सुनकर मनु में खो सी गयी थी ..उसकी हर बात कितनी सुच थी उसे अचे से पता था …
जैस्वाल “ पैर राहुल क्या मुझे माफ़ करेगा अगर मैंने इसे छोड़ दिया तोह ???”
मनु “ तुम्हारी मर्ज़ी है …मारो या मारो ..उसके बाद अगर मर गए तोह उस बचे का क्या होगा एक बार किसी आम इंसान जैसे एहसास करके सोचना जवाब तुम्हारे सामने होगा ..बाकी माफ़ तोह तुम्हारा बीटा तब भी नहीं करेगा अगर उसके बचे को सही से उसका नाम न मिले और दुनिआ उसे पाप की पैदाइश कहे …”
जैस्वाल रिमोट फेंकते हुए “ नहीं कोई मेरे राहुल के बचे को पाप की पैदाइश नहीं कहेगा मैं …हर एक को खुद बताऊंगा की यह मेरा पोता है …”
मनु “ पैर उसके लिए तुमको इसके साथ जीना होगा ???”
जैस्वाल सोफ़िया से “ मुझे माफ़ करना मैं बेटे के गम में पागल हो गया था …पैर अब जीने के लिए मेरे पास नया सहारा है ..तुम्हारे साथ राहुल ने जो भी किया उसके लिए हो सके तोह मैं तुमसे माफ़ी मांगता हूँ ..पैर अगर तुम चाहो तोह मुझे जान से भी मार दो मैं उफ़ तक नहीं करूँगा पैर मेरे पोते और मेरी बहु को छोड़ दो यही एक गुज़ारिश है तुमसे …”
सोफ़िया सोच में गम थी ..उसने नेहा को देखा ..उसने भी सर हिलाकर इशारा किया ..तोह सोफ़िया ने कहा ..
सोफ़िया “ जाओ पहली बार सोफ़िया किसी को जीने का मौका दे रही है ..उस लड़की को लेकर यहां से निकल जाओ ..और कहीं जाकर चैन से अपने बुढ़ापे में अपने बच्चों के साथ रहना क्युकी आजके बाद तुमको इस शहर में देखा तोह तुमको जान से मार दूंगी बिना सोचे …अब दफा हो जाओ ..यहाँ से आज से यह farm-house मेरा है ..”
जैस्वाल “ मुझे मंजूर है मैं अभी जा रहा हूँ यह देश छोड़कर …तुम चैन से रहना ..मुझे अब तुमसे कोई शिकायत नहीं है …क्युकी तुमने मेरे बेटे को मुझसे चीन है तोह मैं तुमको शायद hi इस ज़िन्दगी में कभी माफ़ कर पौन पैर आज मुझे अपने वारिस के रूप में जो ख़ुशी मिली है उसके बदले में मैं यहाँ से हमेशा हमेशा के लिए जा रहा हूँ ..चलो बहु “ जैस्वाल वहां से उस लड़की के साथ निकल गया ..
मनु वहां से जाने को हुआ ..तोह सोफ़िया ने उसे रोका ..
सोफ़िया “ हे ु ..यह फार्म हाउस आज से तुम्हारा हुआ …क्युकी मुझे नेहा ने बताया कैसे तुमने उसे उन लोगों से बचाया ..सो मेरी तरफ से यह farm-house तुम्हारे नाम है ..”
मनु “ सॉरी मेमसाब मुझे जान बचने के बदले सौदे बाज़ी की आदत नहीं है ..अपनी भीख के लिए नया भिकारी दंड लेना ..” मनु के यह कहने से सोफ़िया और सामने से नेहा सब चौंक चुके थे ..ख़ास टूर पैर सोफ़िया जो सामने से मन करने पैर बुरी तरह से til-mila चुकी थी …
मनु नेहा के करीब आकर “ मैं तोह समझा था जान का कोई मोल नहीं हुआ करता पैर …आपकी जान तोह बड़ी सस्ती है जी ..जिसकी कीमत एक मामूली सा फार्म हाउस है ..खैर आप के सर पैर ऐसे कई फार्म हाउस कुर्बान ..जाइये आप भी सोचेंगे किस दिलदार से पला पड़ा था …आपकी जान फ्री …कोई फवौर नहीं लूंगा आपकी जान बचने का …” मनु इतना कहकर बहार निकल आया ..
सोफ़िया नेहा से “ यह अपने आप को समझता क्या है कई करोड़ का farm-house दे रही हूँ ..और हु मुझे hi निचा दिखा कर चला गया ..लेना है तोह ठीक वर्ण माय फुट ..” सोफ़िया पेअर पटक कर रह गयी ..
नेहा सोफ़िया से “ दीदी उनका कहना सही है ..उन्होंने बिना मुझे मेरी पहचान जाने मेरी जान बचाई थी ..पैर आपने उनकी म्हणता की कीमत लगा कर उनको छोटा साबित कर दिया है ..सॉरी दीदी यहाँ हु गलत नहीं हैं ..??”
सोफ़िया “ तुझे हुआ क्या है ..उस कल के इंसान के लिए अपनी दीदी से बेहाश कर रही है ..तुझे नहीं लगता तू उसकी साइड ले रही है …”
नेहा “ नहीं दीदी मैं आपकी साइड हूँ ..” पैर नेहा की ऊँगली मनु की तरफ पॉइंट कर रही थी ..
सोफ़िया “ यह कैसा मेरी साइड हुआ ..जबकि तेरी ऊँगली उसकी साइड है?????”
नेहा “ दीदी ऊँगली पैर मत जाओ भले hi ऊँगली उनकी तरफ है ..पैर मेरा दिल आपकी साइड है ..”
सोफ़िया “ हाँ गलती तोह मेरी hi है न …हु तोह हर बार सही है ..पैर एक बात समझ नहीं आ रही की तू उसे इतने रेस्पेक्ट से कैसे बोल रही है ??”
नेहा झेंपते हुए “ दीदी उन्होंने मेरी जान बचाई है …तोह काम से काम इतनी रेस्पेक्ट तोह बनती हैं ..उनकी ..”
नेहा मैं में “ जान बचाकर hi मुझे लूट लिया ..उन्होंने दीदी पहली बार किसी के सीने से लग कर इतना सुकून मिला है ..अब आपको कैसे कहूं …आपकी यह छोटी नेहा अब बड़ी हो गयी..”
सोफ़िया “ हाँ जैसे मैंने तोह तेरे लिए कभी कुछ किया hi नहीं है हैं न ..??”
नेहा कान पकड़ते हुए “ सॉरी दीदी “
सोफ़िया उसे गले लगा लेती है ..
वृंदा “ सॉरी मम उसका मूड थोड़ा ऑफ है ..आप फार्म हाउस उसके नाम करवा दो बाकी मैं उसे समझा लुंगी ??”
सोफ़िया “ तुम कोण हो उसकी ??”
वृंदा “ मैं सिर्फ उसकी दोस्त हूँ …”
सोफ़िया “ ok दोने नाउ वे अरे लीविंग ..”
सोफ़िया और नेहा चली गयी …जाते जाते दोनों ने मनु को देखा ..जहाँ सोफ़िया का देखना कुछ अलग सात है ..और नेहा का आप समझ गए होंगे ..बेचारी बेमानन से मनु को देखती हुई चली गयी …
उनके जाने के बाद वृंदा ने मनु को समझाया की हु यह farm-house ले ले और बाद में सोचे की उसे करना क्या है …
मनु ने पहली बार वृंदा के कहने पैर farm-house देखा तोह उसे एहसास हुआ की असली रईसी किसे कहते हैं …जैस्वाल ने ाचा खासा farm-house बनवाया था ..जिसमे हर चीज़ विदेशी और मेहगे से मॅहगी थी ..
मनु सोचने लगा की उसने यह फार्म हाउस लेकर क्या सही किया ???क्युकी किसी की जान बचने के बदले में कुछ लेने की उम्मीद करना उसकी आदत नहीं थी ..पैर वृंदा के ज़ोर देने पैर उसने ज्यादा बेहेष नहीं की ..
वृंदा ने उस आदमी को जो उनके साथ था ..उसे जाने को कहा ..वह उन्दोनो को अपना नंबर देकर चला गया …
उसके बाद उस आलिशान farm-house में मनु और वृंदा बचे थे …और वृंदा ने मनु से कहा
वृंदा “ दोस्ती का उस्सॉल है सुच बताना ..तोह कुछ कहना चाहती हूँ अपने दोस्त से ..”
मनु “ हाँ कहो न ..वैसे भी तुम जिस तरह से लड़ी हो उसे देखकर मैं आराम से कह सकता हूँ की तुम आम लड़की नहीं हो ??”
वृंदा ने उसके बाद जो कुछ मनु से कहा उसे सुनकर मनु सोच में पद चूका था …की उसने विरंदा से दोस्ती करके क्या सही फैसला लिया या नहीं ??? :हिंट:
रिकैप........
जहाँ मनु ने दो कार को देखा मैं गेट के बहार मीन्स कोई अंदर हैं …और बहार आने वाला है सो मनु ने वन को थोड़ा पीछे करके पार्क करने को कहा …वन थोड़ा ..पीछे पार्क की …और कुछ hi देर में एक जाना पहचाना इंसान अंदर से बहार aaya..jise देखकर मनु चौंक गया …पैर तभी मनु के कंधे पे किसी ने हाथ रखा और जब मनु ने पीछे पलट कर देखा तोह ..एक बार फिर चौंक गया …..कोण थे यह दो इंसान जिसमे से एक को मनु मैं गेट पैर देखकर चूंकि ..और उसके कंधे पैर हाथ रखने वाला कोण था ?? …
अब आगे........
मनु हैरान था ..एक तरफ सामने खड़े इंसान को देखकर और …अचानक से जिसने उसके कंधे पैर हाथ रखा था …उससे तोह उसकी हैरानी और बढ़ चुकी थी ..क्युकी सामने खड़ा इंसान नीता मम का भाई था जो जैस्वाल से हाथ मिलकर वहां से निकल रहा था ….उसके हाथ मिलाने से एक मतलब तोह साफ़ था की हु आज पहली बार जैस्वाल से नहीं मिल रहा था …
उधर मनु ने जब पीछे देखा तोह उसका चौंकना भी अपनी जगह जैयाज़ था क्युकी वहां उसके पीछे हाथ रखने वाला इंसान एक लड़की थी …और कोई आम लड़की नहीं अग्गरवाल साब की बेटी ….जी हाँ यह सूरज अग्गरवाल की बेटी विरंदा थी …जिसने यहाँ उन तीनो को जैस्वाल पैर निगाह रखते हुए देख लिया था …जिसके बाद उसने आगे बढ़कर मनु को पहचान कर उसके कंधे पैर हाथ रखा था …
मनु पहली बार जब विरंदा से मिला था …तब उसने गौर किया था …की विरंदा कुछ अलग है …पैर क्युकी उसकी आमने सामने 1 ों 1 विरंदा से ज्यादा बात नहीं हुई पैर …कुछ तोह था विरंदा में अलग की मनु उसे महसूस कर सकता था ..भले hi वृंदा आगे में उससे बड़ी थी …पैर वृंदा नार्मल दिखने की कोशिश करती थी …पैर मनु उसके नार्मल चेहरे के पीछे देखने की कोशिश करके भी नहीं देख पता था …पैर उसका यहाँ होना शायद मनु ने सोचा नहीं था …सो उसका चौंकना अपनी जगह सही भी था …खैर वृंदा को देखकर मनु चूंकि जरूर पैर उसने ज्यादा रियेक्ट नहीं किया …
वृंदा “ hi तुमको देखा तोह hi करने चली आयी …”
मनु “ नीस 2 सी ु अगेन पैर आपका यहाँ होना आपकी बात जस्टिफिए करता नहीं है …सो प्लीज साफ़ कहिये मुझसे …”
वृंदा “हाँ तुम सही कह रहे हो ??? वैसे तोह मैं जैस्वाल के पीछे आयी thi..kyuki सुना है जैस्वाल कुछ अलग किसम का इंसान है जिसे गलत काम करने में ज्यादा मज़्ज़ा अत है …सो सोचा खुद hi इसकी तफ्तीश की जाये …सो मर मानव पैर मेरे सवाल अब भी वहीँ है ..आप यहाँ कैसे ??”
इस पैर मनु ने इशारा किया की हु यहाँ इन दोनों के साथ आया है क्युकी इनका परिवार जैस्वाल के कब्ज़े में है ..जिस पैर वृंदा हैरान थी ..की जैस्वाल जैसा बड़ा इंसान ऐसा कुछ कर सकता है …
तोह मनु ने उसे वन में बैठा लिया …तब तक नीता मम का भाई वहां से जा चूका था …और जैस्वाल भी उसके साथ निकल चूका था …मनु ने विरंदा को वन में रहने को कहा और अकेला 20 फ़ीट की बॉउंड्री फंड कर अंडर दाखिल हुआ .जहाँ ज्यादा सिक्योरिटी नहीं थी …शायद जैस्वाल को लग रहा था ..की उस जगह का पता किसी और को नहीं होगा सिवाय उसके …सो मनु अंदर जाकर उन दोनों की फॅमिली को ढूंढ़ने लगा …और कुछ देर बाद उसे हु लोग मिल भी चुके थे …मनु उन सबको लेकर जल्दी से बहार आने लगा ..पैर यह उसकी शायद सबसे बड़ी भूल थी ..की उसने बिना ज्यादा धयान दिए जैस्वाल को काम आँका था …जैस्वाल के उस farm-house से निकलते hi उसके सामने कुछ लोग हथियारों समेत सामने खड़े थे …जैसे उनको अंदाज़ा था की कोई उनको छुड़ाने की कोशिश में लगा हुआ है …गेट के बहार निकलते hi मनु और उसके पीछे उन दोनों आदमियों की फॅमिली थी …और सामने कई हथियार बंद लोग मनु के सामने थे …जिनको देखकर फॅमिली एक बार फिर से डर से भर चुकी थी …पैर मनु ने आगे बढ़कर उनसे लड़ना शुरू कर दिया था …हु दोनों आदमी भी उन से भीड़ चुके थे …पैर हथियारों के आगे उनकी कहाँ चलती …सो बेचारे लगे पीटने ….पैर मनु अकेले hi तीन के साथ लड़ रहा था …पैर सामने से बन्दे ज्यादा थे …सो उनमे से जो बन्दे खली बचे हुए थे …उन्होंने फॅमिली वालों को खींचना शुरू किया …पैर अचानक से सब कुछ बदल चूका था …क्युकी मनु अब अकेला नहीं लड़ रहा था …विरंदा भी मैदान में खुद चुकी थी ..उसके हर वार से बन्दे ज़मीन चाटने लगे थे …
और मनु भी अब फॅमिली वालों को बचने में जुट चूका था …मनु और उन आदमियों ने उनकी फॅमिली वालों को साफल्य वन में बैठा दिया था …उसके बाद मनु वापस आया और उसने वहां मुजूद बन्दों को कुत्ते की तरह धोना शुरू कर दिया …तब तक उन दोनों आदमियों ने उनके हथियार ले लिए थे …विरंदा भी कमाल की फाइटर थी …यहाँ अगर हु नहीं होती तोह शायद मनु अकेले बचने में थोड़ा परेशान होता पैर विरंदा ने सही टाइम रहते उनका बखूबी साथ दिया और …कुछ hi देर में सारे बन्दे ज़मीन पैर घटना के बल पड़े थे …उन्होंने हार मान ली थी ..वह सरे अब उन दोनों आदमियों के गन पॉइंट पैर थे …
मनु “ सुनो तुम में से एक आदमी यहाँ से अपनी फॅमिली को लेकर निकल जाओ क्युकी …आगे जो होने वाला है शायद तुम्हारी फॅमिली बर्दास्त न कर सके …” मनु के यह कहते hi ,,,आदमी 3 ने आदमी 2 को देखा और इशारा किया ..तोह हु वहां से वन लेकर निकल गया ..किसी सेफ जगह के लिए …
आदमी 3 “ बता बे तेरा बॉस कहाँ है ..इस टाइम ??”
जैस्वाल के आदमी “ जैस्वाल साब तोह अभी अपने दूसरे फार्म हाउस पैर होंगे क्यों ..??”
मनु ने उस आदमी के कान के पास जाकर कुछ कहा ..तोह हु आदमी गन पॉइंट पैर सभी को फार्म हाउस के अंदर ले गया …
मनु विरंदा से “ विरंदा जी देखो यहाँ सब ठीक है अगर आप जाना चाहें तोह यहाँ से जा सकती हैं ..क्युकी आगे जो होनेवाला है शायद आपको ाचा न लगे ..या आप मुझे बाद में ह्यूमैनिटी पैर कोई लम्बा सा भसन्ड दें …जो इस टाइम सुनने का मूड नहीं है मेरा ..”
विरंदा उसकी इस बात पैर हँसते हुए “ नीस जोके मानव जी आप भी गज़ब की आदमी हो …एक तरफ मुझे इनसबसे भीड़वा दिया और यह सोच भी लिया की मैं आपको जज भी करुँगी …अगर आपको ऐसा कुछ लग रहा है तोह ..भूल जाईये क्युकी अगर मुझे ऐसा कुछ लगता तोह मैं आपकी साइड से लड़ती hi नहीं ..खैर आगे करना क्या है..??”
मनु “ जस्ट वेट एंड वाच …ऐसे hi इन सबको छोड़ कर जा नहीं सकते इनका कुछ करना चाहिए पैर क्या करें इनका अन्य सुग्गेस्टिव ??”
विरंदा हँसते हुए “ करना क्या है …मुजरिम हैं यह लोग …जिनका काम लोगों को मरना या तंग करना है ..तोह ऐसे लोगों को छोड़ना कहीं से भी जैयाज़ नहीं है …बाकी सब आप पैर है..??”
मनु “ मीन्स िफ़ थे वाणीश सो पीपल don’t ु वोर्री अबाउट थम ???”
विरंदा “ शुड ी ?? वोर्री अबाउट थी सिक बास्टर्ड्स …अगर घर में कीड़े आते हैं तोह लेक्चर बाज़ी से ाचा है pest-control समझ रहे हैं न ..”
मनु “ मतलब यह टाइम pest-control करने का है ??”
विरंदा “ और नहीं तोह क्या …और उस जैस्वाल का क्या ..??उसे ऐसे तोह नहीं छोड़ सकते न ..”
मनु “ हाँ यह भी सही है अगर उसके एक farm-house में pest-control हो रहा है ..तोह लगे हाथों दूसरे farm-house को कवर कर लेते हैं ..आपकी क्या राइ है इस पैर ..??”
विरंदा “ राइ तोह नेक है …चलिए चलते हैं..”
मनु “ दो मिनट और बस काम होने hi वाला है ..” मनु के इतना कहते hi हु आदमी अंडर से तेज़ी से भागता हुआ बहार आया और उसके आते hi पुरे farm-house में एक जबरदस्त ब्लास्ट हो चूका था ..आदमी मनु के पास आकर तेज़ सांसे लेते हुए …” भाई जैसा आपने कहा था ..उनसबको हाथपैर बांधकर अंडर एक रूम में छोड़ दिया और बाद में गैस का पाइप निकल कर …उन्ही के लाइटर से काम कर दिया …कुछ hi देर में उनसभी का काम हो जायेगा …”
मनु ने एक तीखी नज़र उस पैर डाली …तोह उसने आगे कहा “ भाई समझ रहा हूँ साला एक भी इंसान वहां से छूटने वाला नहीं है क्युकी मुझे भी पता है अगर उनमे से कोई बचा तोह हम सभी फंसेंगे सो आप बेफिक्र रहो ..”
विरंदा “ क्या बात है वैरी नीस अब …?”
मनु “ अब क्या ??”
विरंदा “ अरे अब चलें यहाँ से ..”.
मनु “ हाँ पैर आप ..”
विरंदा “ ओह्ह्ह! के ों ..मैं भी तुम्हारे साथ चल रही हूँ …क्युकी इसमें ज्यादा मज़ा है ..मीटिंग से तोह बहुत ज्यादा …तोह क्या कहते हो चल सकती हूँ आपके ..साथ ”
मनु “ इंसान की पहचान उसके बुरे वक़्त में hi हुआ करती है ..जहाँ आमतौर पैर लोग ऐसे टाइम पैर साथ छोड़ कर बचना पसंद करते हैं …पैर आप सुच में अलग हैं …ऐसे टाइम में आपको मज़ा सूझ रहा है …तोह एक बात कहूंगा …अगर आपको छोटे इंसान से यानी मुझसे कोई प्रॉब्लम न हो तोह ???”
मनु की बात पूरी भी नहीं हुई थी की सामने वृंदा “ यार आप न …ाचा okay ! क्या हम दोस्त बन सकते हैं ??अगर हाँ तोह मिलाओ हाथ ..” इस पैर मनु ने हाथ मिला ..लिया
और विरंदा “ दोस्ती का पहला रूल है सुच तोह सुनलो …तुमसे झूंठ नहीं कहूँगी कुछ कहना है तुमसे पैर सही टाइम देखकर “ विरंदा का इशारा tha…unke साथ मौजूद हु तीसरा आदमी ..
मनु “ तोह जब चलना है तोह चलने कैसे ??”
आदमी “ भाई इसमें कोनसीबाड़ी बात है …उन लोगों की कार है न …उससे चलते हैं ??”जिस पैर मनु और विरंदा दोनों एग्री थे ..वह आदमी वहां से जाकर हु कार ले आया …और उसमे बैठने को कहा …मनु और विरंदा को ..
उधर farm-house में जैस्वाल आयाशी में लगा हुआ था …पेग पैर पेग चल रहे थे …उसके
जैस्वाल “ हु साली सोफ़िया भी जल्दी hi मेरे सामने होगी …उस साली रैंड को अचे से छोडूंगा …और उस साली उसकी चमची को भी नहीं बक्शने वाला …आज उन दोनों को छोड़कर अपने राहुल का बदला लूंगा …अरे मन कर देती ..मेरे राहुल को …ज्यादा से ज्यादा दो थपड जड़ देती मगर साली ने मेरे एकलौते बेटे को जान से मार दिया …साली एक बार सामने आ जा… कैसे भी इस बाप ने तेरा क्या हाल करना है ..तुझे बता देता …बहनकी लोदी ,,,साली मेरे बेटे को खा गयी …अरे राहुल क्यों मुझे छोड़ गया मेरे बचे …देख तेरे बाप का क्या हाल है …??”जैस्वाल नशे में अपने गुज़रे बेटे को याद कर रहा था …
आज उसे राहुल याद आ रहा था ..और इसी में उसका पेग पिने का तरीका बदल चूका था …जैस्वाल वहां बैठा वेट कर रहा था की उसके सामने राहुल की सेक्रेटरी उसके सामने आ चुकी थी …जो उससे कहने लगी ..
सेक्रेटरी “ सर बास कीजिये आपने बहुत पि ली है …ऐसे आपके पिने से राहुल सर वापस नहीं आने वाले ..वह जा चुके हैं …”
जैस्वाल “ कैसे भूल जॉन उसे ..अरे अगर उस सोफ़िया को मन करना था तोह मन कर देती ..ज्यादा से ज्यादा उसे सबके सामने दन्त देती ..उस पैर भी अगर दिक्कत थी ..तोह दो थप्पड़ लगा देती ..पैर इतने ुचे से मेरे राहुल को धकेल दिया ..उसने पता है ..कितने चीथड़े हुए मेरे राहुल के जिसे मैंने इतने प्यार से पला था …उसकी लाश को कन्धा देते हुए मुझपर क्या बिट्टी मैं जानता हूँ …अरे उसे तोह मुझे मरने के बाद कन्धा देना था …उल्टा जवान बेटे को कन्धा देना पड़ा मुझे …यह किस बाप के लिए ाचा है तुम बताओ मुझे ..पैर अब और नहीं बदला तोह लूँगा मैं उस सोफ़िया से यह मेरी ज़िन्दगी की आखिरी कसम है …मरने से पहले उस सोफ़िया को जिन्दा तोह चुदुँगा नहीं …”
उस सेक्रेटरी ने जैस्वाल को इतने गुस्से में कभी नहीं देखा था …पैर उसे जैस्वाल की चिंता थी …क्युकी उसका गुस्सा अपनी जगह जैयाज़ था किसे अपने जवान बेटे को मरने के बाद कन्धा देना ाचा लगेगा ..हाँ उसने आखिर तक राहुल को रोका था …और खुद सोफ़िया ने भी उसे रोका था ..पैर हुआ वही जो सोफ़िया ने किया …राहुल आज जिन्दा नहीं था …
और जैस्वाल गुस्से में सोफ़िया से बदला लेने पैर उतारू था …ऐसे में कई बार उसकी सेक्रेटरी ने राहुल के बारे में जैस्वाल से कहना चाहा पैर जैस्वाल शायद बदले में पागल हुआ पड़ा था …हु कुछ सुनने से पहले hi …उस सोफ़िया को गाली देने लगता था ..और उसके गुस्से के आगे कुछ कह पता हु उससे पहले hi कुछ लोग डंडान्ते हुए उसके farm-house में आ चुके थे …
हु लोग किसी के body-guard जैसे लग रहे थे उनके अंदर आने से जैस्वाल गुस्से से भर चूका था …
जैस्वाल “ कोण है बे यहाँ क्या कर रहे हो ??”
पीछे से एक आवाज़ आयी “ यह मेरे लोग हैं जिनको सिर्फ मेरा आर्डर सुनने की आदत है “ पीछे आवाज़ को सुनकर जैस्वाल देखने लगा तोह उनके पीछे से दो लडकियां चली आ रही थी …
जिनको देखकर सेक्रेटरी ने जैस्वाल को बताया यह सोफ़िया और उसकी साथ नेहा हैं …जिसे सुनकर जैस्वाल ने जेब से पिस्तौल निकल ली और तान दी सोफ़िया पैर ..
सोफ़िया “जेब में रख लो जैस्वाल यह खिलौना नहीं है ..चल गयी तोह खामखां तुम मारे जाओगे ??”
जैस्वाल “ पैर मरने से पहले हरामजादी तुझे ले कर मरूंगा ….यह जैस्वाल का वडा है …”
सोफ़िया “ तोह चला कर देख लो …”
जैस्वाल पिस्तौल चला पता उससे पहले hi उसके हाथ से पिस्तौल चीन ली सोफ़िया के body-guard ने ..जैस्वाल कुछ कर hi नहीं पाया ..
की पीछे से मनु और विरंदा भी आ चुके थे …
सोफ़िया “ हाँ तुम्हारी hi कमी बची थी …लो देखलो तमाशा …” सोफ़िया ने उसके बाद पिस्तौल निकल कर एक फायर किया जो जैस्वाल के जस्ट कान के पास से निकल चूका था ….जैस्वाल अपनी जगह से बिलकुल नहीं हिला ..न भागने की कोशिश की उसने ,,,जैसे मरने और मारने दोनों के लिए त्यार था ..
सोफ़िया “ जैस्वाल एक बात मरने से पहले अचे से समझ लो तुम्हारे बेटे को मैं जान कर नहीं मारा उसे कई बार मन किया था …की मुझसे दूर रहे पैर उसने सुना नहीं …मरना मेरा लास्ट ऑप्शन था …सो उसे मार दिया …अब तुम्हारी बारी है त्यार हो जाओ मरने के लिए …”
जैस्वाल “ मारना है तोह मार दे हराम जादि पैर मैं मरने से पहले तुझे ले कर मरूंगा यह ले ..”
जैस्वाल ने एक रिमोट निकल लिया था …
जैस्वाल “ यह टीवी का रिमोट नहीं है …मुझे पता था की आज नहीं कल तेरा मेरा आमना सामना होगा जरुर और उसमे शायद मेरे हाथ में हथियार न बचे पैर मैं इसके लिए भी त्यार हूँ अगर तुमने मुझे मारा तोह यह farm-house जिसमे मैंने अचे खासे तरीके से बूम लगा रखा है …उसका बटन दबाकर तुम सभी को साथ ले कर मरूंगा …अब मार मुझे …”
जैस्वाल के यह कहते hi उसके पीछे कड़ी राहुल की सेक्रेटरी बेहोश हो चुकी थी …विरंदा ने आगे बढ़कर उसे थमा और उसकी नब्ज़ चेक की और कहा ….
विरंदा “ यह प्रेग्नेंट है ..”और उसे होश में लेन में जुट गयी वृंदा …और कुछ देर पानी मारने के बाद हु होश में आ चुकी थी ..उसके होश में आते hi वृंदा ने उसे बताया की हु माँ बनने वाली है ..
जिसे सुनकर हु “ नहीं यह नहीं हो सकता मैंने राहुल सर को मन भी किया था …”
जैस्वाल “ किस बात के लिए मन किया था ??”
सेक्रेटरी “ सर ी म सॉरी मैंने आपसे छुपाया है ..यह बचा राहुल सर का है मेरे पेट में ..मैंने उनको मन भी किया था ..पैर उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी ..और अब सब आपके सामने है ..”हु यह कहकर रोने लगी..
जैस्वाल “ लगता है तुम भी इनसबके साथ मिल चुकी हो …मेरे मरे हुए बेटे पैर ऐसा इलज़ाम लगते तुमको शर्म नहीं आती ..??”
सेक्रेटरी “ नहीं सर मैं झूंठ नहीं कह रही हूँ यह बचा राहुल सर का hi है …अगर यकीं न आये तोह इसका टेस्ट करवा लीजिए ..अगर मैं गलत निकली तोह सोफ़िया के साथ मुझे भी गोली मार देना ..पैर इनसब में मेरे घर तोह टूट गया न …”
जैस्वाल “ अगर ऐसा है तोह टेस्ट करवा लेता हूँ अभी और यह बचा अगर राहुल का निकला तोह तुम चिंता मत करो इसके बाद मैं तुमको किसी चीज़ की जरूरत महसूस नहीं होने दूंगा ..इतना पैसा दूंगा टुनको की अगर तुम्हरे परिवार ने तुमको छोड़ भी दिया तोह तुमको किसी की आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा तुम आराम से अपनी ज़िन्दगी जी सकोगी ..”
जैस्वाल “ मुझे इस लड़की का टेस्ट करवाना है ..उसके बाद हम अपना काम देख लेंगे …और अगर टेस्ट फ़ैल हुआ तोह इस लड़की के साथ मैं भी मरने को त्यार हूँ ..तुमको कोई प्रॉब्लम “
सोफ़िया ने जैस्वाल को देखा “ no प्रॉब्लम हम अपना मेटर थोड़ी देर के लिए रूक देते हैं …”
जैस्वाल ने किसीको कॉल किया और कुछ hi देर में एक डॉक्टर वहां आचुका था जिसने उस लड़की का पैरेंटल टेस्ट किया और तेज़ी से रिपोर्ट लेन को कहा ..कोई हाफ ऑवर बाद रिपोर्ट जैस्वाल के मोबाइल पैर रिपोर्ट थी जिसमे कन्फर्म हो चूका था ..की हु बचा राहुल का hi है ..
जैस्वाल ख़ुशी से “ देखो मैं दादा बनने वाला हूँ …अरे राहुल देख तू मार्कर भी हमारे साथ है …ी मिस ु बीटा ..”
उस लड़की के सर पैर प्यार से हाथ रखते हुए “ सॉरी बीटा मुझे माफ़ करना …जिन हालातों में मैं हूँ वहां हर किसी को शक की नज़र से देखना मेरी मजबूरी है …तुम यहाँ से चली जाओ ..क्युकी शायद इस बचे के नसीब में उसके दादा का सुख नहीं लिखा है ..मैंने अपने लॉयर को कॉल कर दिया है …आजके बाद तुमको किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी ..तुम ख़ुशी से रहना ..मेरा आश्रीवाद तुम्हारे साथ है ..और हो सके तोह मुझे माफ़ कर देना ..”जैस्वाल उस लड़की के सर पैर हाथ रखकर और रहा था ..
मनु “ जब तुम्हारी ज़िन्दगी में तुम्हारा नया पोता या पोती आ रही है तोह तुम्हारा मरना या मरना क्या जरूरी है ..अरे चैन से उसकी परवरिश करो ..और दूसरों को भी चैन से रहने दो ..”
जैस्वाल “ नहीं अगर मैंने इस सोफ़िया को छोड़ दिया तोह राहुल मुझे कभी माफ़ नहीं करेगा ..”
मनु “ वह क्या बात है तुम मरने और मारने को त्यार हो ..पैर उस नन्ही जान का भी सोच लो जिसके आयने से पहले उसका बाप दुनिआ में नहीं है ..शायद इसके बाद तुम भी मर जाओगे ..और जब यह बचा ..पैदा होगा तोह पता है ..दुनिआ इसे क्या कहकर पुकारेगी …नाजायज़ …यह सुनकर उप्पेर से खुश होना की तुम्हारे पोते को दुनिआ दुत्कारे पैसा होने से इंसान की पहचान नहीं बदल जाती ..एक बार सोचना jarror..kyuki पैसा हर जगह इज़्ज़त दे जरूरी नहीं है ..बिना maa-baap के नाम के किसी इंसान की हालत क्या होती है किसी अनाथ से पूछना शायद हु तुमको सही मायने में बता सके ..”
मनु की बात सुनकर सोफ़िया के साथ नेहा दोनों अपने बचपन को याद करने लगी …जिसमे दुनिआ से उनको प्यार काम दुत्कार ज्यादा मिली थी ..उसके बाद वही सब सोफ़िया ने लोगों को लौटाया भी था ..जिस जिसने उसका उस टाइम मज़ाक उदय था ..उसे उप्पेर भेजकर ..पैर नेहा के सर पैर उसने हाथ रखकर उसे अपने साथ रख लिया था वर्ण नेहा शायद पता नहीं किस हाल में होती ..
नेहा भी मनु की बातें सुनकर मनु में खो सी गयी थी ..उसकी हर बात कितनी सुच थी उसे अचे से पता था …
जैस्वाल “ पैर राहुल क्या मुझे माफ़ करेगा अगर मैंने इसे छोड़ दिया तोह ???”
मनु “ तुम्हारी मर्ज़ी है …मारो या मारो ..उसके बाद अगर मर गए तोह उस बचे का क्या होगा एक बार किसी आम इंसान जैसे एहसास करके सोचना जवाब तुम्हारे सामने होगा ..बाकी माफ़ तोह तुम्हारा बीटा तब भी नहीं करेगा अगर उसके बचे को सही से उसका नाम न मिले और दुनिआ उसे पाप की पैदाइश कहे …”
जैस्वाल रिमोट फेंकते हुए “ नहीं कोई मेरे राहुल के बचे को पाप की पैदाइश नहीं कहेगा मैं …हर एक को खुद बताऊंगा की यह मेरा पोता है …”
मनु “ पैर उसके लिए तुमको इसके साथ जीना होगा ???”
जैस्वाल सोफ़िया से “ मुझे माफ़ करना मैं बेटे के गम में पागल हो गया था …पैर अब जीने के लिए मेरे पास नया सहारा है ..तुम्हारे साथ राहुल ने जो भी किया उसके लिए हो सके तोह मैं तुमसे माफ़ी मांगता हूँ ..पैर अगर तुम चाहो तोह मुझे जान से भी मार दो मैं उफ़ तक नहीं करूँगा पैर मेरे पोते और मेरी बहु को छोड़ दो यही एक गुज़ारिश है तुमसे …”
सोफ़िया सोच में गम थी ..उसने नेहा को देखा ..उसने भी सर हिलाकर इशारा किया ..तोह सोफ़िया ने कहा ..
सोफ़िया “ जाओ पहली बार सोफ़िया किसी को जीने का मौका दे रही है ..उस लड़की को लेकर यहां से निकल जाओ ..और कहीं जाकर चैन से अपने बुढ़ापे में अपने बच्चों के साथ रहना क्युकी आजके बाद तुमको इस शहर में देखा तोह तुमको जान से मार दूंगी बिना सोचे …अब दफा हो जाओ ..यहाँ से आज से यह farm-house मेरा है ..”
जैस्वाल “ मुझे मंजूर है मैं अभी जा रहा हूँ यह देश छोड़कर …तुम चैन से रहना ..मुझे अब तुमसे कोई शिकायत नहीं है …क्युकी तुमने मेरे बेटे को मुझसे चीन है तोह मैं तुमको शायद hi इस ज़िन्दगी में कभी माफ़ कर पौन पैर आज मुझे अपने वारिस के रूप में जो ख़ुशी मिली है उसके बदले में मैं यहाँ से हमेशा हमेशा के लिए जा रहा हूँ ..चलो बहु “ जैस्वाल वहां से उस लड़की के साथ निकल गया ..
मनु वहां से जाने को हुआ ..तोह सोफ़िया ने उसे रोका ..
सोफ़िया “ हे ु ..यह फार्म हाउस आज से तुम्हारा हुआ …क्युकी मुझे नेहा ने बताया कैसे तुमने उसे उन लोगों से बचाया ..सो मेरी तरफ से यह farm-house तुम्हारे नाम है ..”
मनु “ सॉरी मेमसाब मुझे जान बचने के बदले सौदे बाज़ी की आदत नहीं है ..अपनी भीख के लिए नया भिकारी दंड लेना ..” मनु के यह कहने से सोफ़िया और सामने से नेहा सब चौंक चुके थे ..ख़ास टूर पैर सोफ़िया जो सामने से मन करने पैर बुरी तरह से til-mila चुकी थी …
मनु नेहा के करीब आकर “ मैं तोह समझा था जान का कोई मोल नहीं हुआ करता पैर …आपकी जान तोह बड़ी सस्ती है जी ..जिसकी कीमत एक मामूली सा फार्म हाउस है ..खैर आप के सर पैर ऐसे कई फार्म हाउस कुर्बान ..जाइये आप भी सोचेंगे किस दिलदार से पला पड़ा था …आपकी जान फ्री …कोई फवौर नहीं लूंगा आपकी जान बचने का …” मनु इतना कहकर बहार निकल आया ..
सोफ़िया नेहा से “ यह अपने आप को समझता क्या है कई करोड़ का farm-house दे रही हूँ ..और हु मुझे hi निचा दिखा कर चला गया ..लेना है तोह ठीक वर्ण माय फुट ..” सोफ़िया पेअर पटक कर रह गयी ..
नेहा सोफ़िया से “ दीदी उनका कहना सही है ..उन्होंने बिना मुझे मेरी पहचान जाने मेरी जान बचाई थी ..पैर आपने उनकी म्हणता की कीमत लगा कर उनको छोटा साबित कर दिया है ..सॉरी दीदी यहाँ हु गलत नहीं हैं ..??”
सोफ़िया “ तुझे हुआ क्या है ..उस कल के इंसान के लिए अपनी दीदी से बेहाश कर रही है ..तुझे नहीं लगता तू उसकी साइड ले रही है …”
नेहा “ नहीं दीदी मैं आपकी साइड हूँ ..” पैर नेहा की ऊँगली मनु की तरफ पॉइंट कर रही थी ..
सोफ़िया “ यह कैसा मेरी साइड हुआ ..जबकि तेरी ऊँगली उसकी साइड है?????”
नेहा “ दीदी ऊँगली पैर मत जाओ भले hi ऊँगली उनकी तरफ है ..पैर मेरा दिल आपकी साइड है ..”
सोफ़िया “ हाँ गलती तोह मेरी hi है न …हु तोह हर बार सही है ..पैर एक बात समझ नहीं आ रही की तू उसे इतने रेस्पेक्ट से कैसे बोल रही है ??”
नेहा झेंपते हुए “ दीदी उन्होंने मेरी जान बचाई है …तोह काम से काम इतनी रेस्पेक्ट तोह बनती हैं ..उनकी ..”
नेहा मैं में “ जान बचाकर hi मुझे लूट लिया ..उन्होंने दीदी पहली बार किसी के सीने से लग कर इतना सुकून मिला है ..अब आपको कैसे कहूं …आपकी यह छोटी नेहा अब बड़ी हो गयी..”
सोफ़िया “ हाँ जैसे मैंने तोह तेरे लिए कभी कुछ किया hi नहीं है हैं न ..??”
नेहा कान पकड़ते हुए “ सॉरी दीदी “
सोफ़िया उसे गले लगा लेती है ..
वृंदा “ सॉरी मम उसका मूड थोड़ा ऑफ है ..आप फार्म हाउस उसके नाम करवा दो बाकी मैं उसे समझा लुंगी ??”
सोफ़िया “ तुम कोण हो उसकी ??”
वृंदा “ मैं सिर्फ उसकी दोस्त हूँ …”
सोफ़िया “ ok दोने नाउ वे अरे लीविंग ..”
सोफ़िया और नेहा चली गयी …जाते जाते दोनों ने मनु को देखा ..जहाँ सोफ़िया का देखना कुछ अलग सात है ..और नेहा का आप समझ गए होंगे ..बेचारी बेमानन से मनु को देखती हुई चली गयी …
उनके जाने के बाद वृंदा ने मनु को समझाया की हु यह farm-house ले ले और बाद में सोचे की उसे करना क्या है …
मनु ने पहली बार वृंदा के कहने पैर farm-house देखा तोह उसे एहसास हुआ की असली रईसी किसे कहते हैं …जैस्वाल ने ाचा खासा farm-house बनवाया था ..जिसमे हर चीज़ विदेशी और मेहगे से मॅहगी थी ..
मनु सोचने लगा की उसने यह फार्म हाउस लेकर क्या सही किया ???क्युकी किसी की जान बचने के बदले में कुछ लेने की उम्मीद करना उसकी आदत नहीं थी ..पैर वृंदा के ज़ोर देने पैर उसने ज्यादा बेहेष नहीं की ..
वृंदा ने उस आदमी को जो उनके साथ था ..उसे जाने को कहा ..वह उन्दोनो को अपना नंबर देकर चला गया …
उसके बाद उस आलिशान farm-house में मनु और वृंदा बचे थे …और वृंदा ने मनु से कहा
वृंदा “ दोस्ती का उस्सॉल है सुच बताना ..तोह कुछ कहना चाहती हूँ अपने दोस्त से ..”
मनु “ हाँ कहो न ..वैसे भी तुम जिस तरह से लड़ी हो उसे देखकर मैं आराम से कह सकता हूँ की तुम आम लड़की नहीं हो ??”
वृंदा ने उसके बाद जो कुछ मनु से कहा उसे सुनकर मनु सोच में पद चूका था …की उसने विरंदा से दोस्ती करके क्या सही फैसला लिया या नहीं ??? :हिंट: