My Complete Intentions - The Beginning - Page 6 - SexBaba
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My Complete Intentions - The Beginning

:थैंक्स: भाई फॉर योर ब्यूटीफुल रिव्यु :हुग:

एक की माँ का करैक्टर खुल के सामने आ जायेगा और उसने ऐसा क्यों किया ये भी

और रही बात एक की तो वो बिलकुल नहीं बदलने वाला उसके खून मुँह लग चूका है, वो अब नहीं रुकने वाला लेकिन वो किस रस्ते से आगे बढ़ता है ये देखने वाली बात होगी :डी
 
अपडेट:-26 (वे तो दिल्ली-1)

मेरी आँख असुसुअल हॉस्पिटल के उसी रूम में खुली और इस रूम में इतनी बार आ चूका हु की इसके बारे में सब पता चल गया है और इसी कारण मेरी नज़र सीधा वह लगी घडी पे गयी जिसमे 6 बज रहे थे और फिर खिड़की में देखा तो अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल था की सुबह के 6 बजे है या शाम के, मेरे हिसाब से hi तो शाम के होने चाहिए क्युकी सुबह बेहोश हुआ था तो शाम तक होश आ जाना चाहिए लेकिन मेरी ये सोच ज्यादा देर तक न चली क्युकी मेरा ध्यान दूर खोल के अंदर आने वाले शख्स पे चला गया था और ये राज था.

मुझे अचम्बा हुआ की ये अब यहाँ क्या कर रहा है, वो मेरे पास आया और एक चेयर खींच के बैठ गया.

राज:- और कैसा फील कर रहे हो?

मैं:- अब बेटर हु, वैसे अभी सुबह है या शाम?

राज:- सुबह के 6 बजे है.

मैं थोड़ा चौंका क्युकी इतना लम्बा बेहोश कैसे रह सकता हु.

मैं:- लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है इतना बेहोश थोड़ी न रह सकता हु

राज:- तुम्हे तो शाम को hi होश आ जाता लेकिन मैंने तुम्हे बेहोश रखवाया ताकि तुम हमारे काम में रुकावट न दाल दो.

मुझे उसपे बहुत गुस्सा आया लेकिन ये वक़्त प्यार से काम निकलने का था.

मैं: उन तीनो के कातिलों का क्या हुआ?

राज:- आल दोने मला मारा गया या फिर हमने उसे मार दिया और उसके साथियो को अरेस्ट कर लिया गया है.

:wtf: इतनी जल्दी,

मैं:- बूत हाउ तुम एक मला को इतनी जल्दी कैसे मार सकते हो?

राज:- मार सकते है जब मला टेररिज्म में इन्वॉल्व हो और कम उसका डेथ वारंट निकले.

मैं फिरसे शॉक हो गया भेनचोद ये तो बहुत तेज़ बाँदा है और सायद वो मेरे एक्सप्रेशन समझ गया और इसलिए दुबारा बोलै.

राज:- देखो मला के पीछे हम बहुत पहले से है, हमारी नज़र तुमपे मला की वजह से hi आयी है जब तुमने उसके बचो और उसके आदमियों को, राजेश को और अपने दोस्त अभय को मारा था.

मैं अपने आप को थोड़ा छोटा महसूस कर रहा था इस समय क्युकी कुछ बोलने को था hi नहीं लेकिन फिर भी मैं बोलै.

मैं:- लेकिन मैं उस मला से अपना बदला लेना चाहता था.

राज के फेस पे स्माइल आ गयी,

राज:- बदला या फिर पैसे?

अब इस बात से मुझे झटका लगा की इसे ये कैसे पता लगा और अब ये पता लगा है तो इसे ये भी पता होगा की मैंने कैसे अपने दोस्तों का उसे किया है, मुझे बहुत गिलटी फील हो रहा था इसलिए मैंने अपने नज़रे झुका ली.

राज:- नज़रे झुकी हुयी अछि नहीं लगती तुमपे और तुम्हारा मला और पैसे दोनों तुम्हे मिल जायेंगे बस उससे पहले तुम्हे मेरी बात माननी पड़ेगी

इतना बोलके वो वह से जाने लगा लेकिन मैं पीछे से बोल पड़ा,

मैं:- और उन बातो में ये बात नहीं होनी चाहिए की मुझे उस औरत के साथ रहना होगा.

राज:- तेरी बाइक और फ़ोन निचे से ले लियो.

वो बस मुरकुरा के चल गया, उसके जाते hi मैं उस घटिया से बीएड से उठा और बाथरूम में जाके फ्रेश हुआ बहार आया तो दादाजी, विवेक और रवि (मेरे चाचा का लड़का) बैठे हुए थे.

दादाजी:- अब कैसा है?

मैं:- ठीक हु.

दादाजी:- बीटा मेरी माने तो तू दिल्ली चल जा उनके पास.

मैं:- दिल्ली तो जाऊंगा लेकिन उनके पास नहीं और वैसे भी अब मेरा काम यहाँ नहीं है.

मैं:- अब आप कहा रहोगे.

दादाजी:- रवि और के घर रहूँगा मैं अब मैंने साड़ी ज़मीन इनके नाम कर दी है तेरी भी.

मैं:- कोई दिक्कत नहीं है, और तू ध्यान रखियो इनका नहीं तो घर आके मारूंगा.

दादाजी:- नालायक ये तेरा बड़ा भाई है.

मैं:- मेरा कोई नहीं है.

फिर कोई कुछ नहीं बोलै थोड़ी देर में दादाजी और रवि चले गए लेकिन विवेक वही बैठा रहा.

मैं:- तू क्यों बैठा है लौड़े, तू भी जा.

विवेक:- तू सच में दिल्ली जायेगा क्या.

मैं:- लुंड से लिख के दू क्या अब और वैसे भी मला तो रहा नहीं अब क्या फायदा यहाँ रहके.

विवेक:- मैं भी चालू क्या तेरे साथ.

मैं:- नहीं तू यही रहके अपनी फॅमिली को संभल कोई दिक्कत हुयी तो बुला लूंगा.

इसके बाद विवेक भी कुछ नहीं बोलै और उठ के चला गया और उसके जाते hi मैं उठा और जल्दी से निचे आके अपना फ़ोन लिया और बाइक की के लेके पार्किंग से बाइक निकली और घर की तरफ चल दिया.

अभी मेरी बॉडी में दर्द नहीं था सायद बेहोश होने की वजह से बॉडी जल्दी हील कर गयी, बस कुछ निशान थे फेस पे जो सही हो जायेंगे.

मैंने बाइक लॉन के अंदर रोकी और दुर्बल बजायी गेट मनीषा ने खोला और मुझे देखते hi मुँह फुला के अंदर चली गयी, अब इसे क्या हुआ और फिर अगले hi पल याद आया की इसे मैंने दांत दिया था.

मैंने भी गेट बंद किया और अंदर जाके मनीषा के बगल मैं बैठ गया.

मैं:- किरण कहा है.

मनीषा:- किसी काम से बहार गयी है.

मैं:- मनीषा कल सुबह के लिए सॉरी.

मनीषा:- तुम्हारे मुँह से सॉरी ाचा नहीं लगता.

मैं:- तो फिर तुम नाराज़ क्यों हो.

मनीषा:- तुम मुझे पे चिल्लाये क्यों ? मैं दर गयी थी.

मैंने उसे साइड से अपने बाहो में भर लिया और वो भी मुझसे चिपक गयी.

मैं:- आगे से नहीं डाटूंगा.

वो कुछ देर बाहो में लिपटी रही और फिर बोली,

मनीषा:- वैसे तुम कहा थे अब तक.

मैंने उसे कल से लेके अब तक की स्टोरी बताई तो वो भी साद हो गयी.

मैं:- अरे तुम ये सब छोड़ो मुझे खाना खिलाओ.

मनीषा भाग के खाना लेके आयी और मुझे खिलने लगी :शाय: . हम खाना खाके हेट hi थे की किरण भी आ गयी और उसके फेस से वो साद लग रही थी..

मैं:- क्या हुआ?

किरण:- सब तयारी हो गयी है कल की फ्लाइट की टिकट्स भी बुक है लेकिन अब वो स्कूल वाले बोल रहे है की कोई रीज़न दो वो भी रिटेन में.

मैं कुछ नहीं बोलै बस सोचने लगा की क्या करू कहा से लौ अब रीज़न, कुछ समझ नहीं आ रहा था की फिर दुर्बल बजी, अब कोण आ गया भेनचोद.

किरण ने गेट खोला और उसके साथ जो शख्स अंदर आया उसे देख के मैं अपनी जगह से खड़ा हो गया क्युकी ये राज था, इसे कैसे पता लगा इस घर के बारे में फिर मुझे याद आया की मेरे बारे में मुझसे ज्यादा तो ये जानता है.

राज:- चलो तुम से अकेले में बात करनी है.

मैं कुछ नहीं बोलै बस उनको इशारा किया मेरे पीछे आने का और उन्हें लेके अपने रूम में आ गया.

मैं:- बोलिये कैसे आना हुआ.

राज:- तुम कल hi दिल्ली आ जाना ऑफिस में.

मैं:- नहीं नहीं मुझे अभी काम है बहुत से.

राज:- क्या काम है बोलो अभी पुरे करवा दूंगा.

मैंने फिर उसे मनीषा के बारे में बताया और बताया की मुझे भी अपने स्कूल से डाक्यूमेंट्स वगैरह लेने है.

राज:- मेरी बेटी भी उधर hi पढ़ती है, मैं करवा दूंगा अड्मिशन उन्हें बोलो की अपना सामान पैक करे और कल निकले.

और राज ने फ़ोन मिलाया और किसी से बात करने लगा और मैं ये सोचने लगा की इसकी बेटी मेरी आगे की है तो फिर इसका मतलब इनसे भी मेरी माँ से दूसरी साडी की है. मुझे यूँ सोचता देख राज मुस्कुराया और बोलै.

राज:- हां मैंने तुम्हारी माँ से दूसरी साडी की है क्युकी हम दोनों कॉलेज के टाइम से एक दुसरे को जानते थे लेकिन हमारे घरवाले हमारी साडी के लिए नहीं मानते इसलिए हमने अपने घरवालों की मर्ज़ी से साडी कर ली, लेकिन किस्मत को कुछ और hi मंज़ूर था न तुम्हारी माँ की साडी टिक पायी और न मेरी और हम फिरसे एक हो गए.

मुझे इसकी स्टोरी में लौड़ा इंट्रेस्ट नहीं था लेकिन सुन रहा था,.

मैं:- ाचा तो वो मुझे अब अपने साथ क्यों रखना चाहती है.

राज:- इसका जवाब तो वही देंगी, मैं बस इतना बता सकता हु की वो तुझसे मिली क्यों नहीं और तुझसे बात क्यों नहीं की.

मेरे कान खड़े हो गए ये सुनके और वो भी मेरी भावनाओ को समझ रहा था सायद

राज:- तुम्हारे दादाजी ने उन्हें मन किया था तुमसे कोई रिश्ता रखने से और उन्होंने कोर्ट में ये कंप्लेंट भी की थी की तुम्हे तुम्हारी माँ से खतरा है तो वो तुम्हारे आसपास भी न दिखे अब कारन तो मुझे भी नहीं पता और न तुम्हारी माँ को लेकिन वो भी मजबूर थी.

बहनचोद बुढऊ इसको क्या चल थी ऐसा करने की दादा न होता तो चाहती में आस्मां बना देता गोली मार मार के.

Main:-acha तो अब अचानक से क्या हो गया जो मुझे अपने साथ रखना चाहती है.

राज:- तुम्हारे पापा की डेथ के बाद तुम फ्री हो और तुम अपने डिसिशन खुद ले सकते हो और तुम्हारी माँ को तुमसे मिलने के लिए कोई नहीं रोक सकता सायद इसिलए.

.

मैं कुछ नहीं बोलै बस सब कुछ समझने की कोसिस करने लगा, राज भी मेरी हालत समझ रहा था इसलिए.

राज:- ाचा मैं चलता हु कल दोपहर तक आ जाना ऑफिस और तुम्हारा एडमिशन मैं करवा दूंगा दिल्ली में

मैं कुछ नहीं बोलै बस अपनी सोच में गम हो गया, राज कब गया मुझे ये भी नहीं पता और मैं वह कितनी देर बैठा रहा ये भी नहीं पता दिमाग में क्या चल रहा है क्या नहीं कुछ समझ नहीं आ रहा था लेकिन मुझे मेरी सोच से बहार मनीषा की आवाज़ ने निकला

मनीषा:- चलो शाम हो गयी है कब तक ऐसे बैठे रहोगे.

मैं कुछ नहीं बोलै बस उठके बाथरूम में चला गया और कपडे उतर के शावर के निचे खड़ा हो गया और शावर लेके कपडे पहने और अब मंद फ्रेश हो गया था इसलिए निचे गया और किरण और मनीषा को अपने पास बिठाया.

मैं:- अपना सामान पैक कर लो मेरी बात हो गयी है तुम्हारा अड्मिशन हो जायेगा, कल मैं तुम्हे एक नंबर दूंगा उससे कांटेक्ट कर लेना वो सब सेटल करवा देगा और वह एक लड़की है मनीषा तुम उसके साथ रहोगी.

मनीषा:- कोण लड़की?

मैं:- राज सर की बेटी जो अभी आया था.

मनीषा:- ठीक है.

फिर वो दोनों अपने पैकिंग करने चली गयी और मैं टेरेस पे जाके सिगग्रेटे जला के उस प्रॉपर्टी डीलर को फ़ोन मिलाया

वो:- hello भाई आज कैसे याद कर लिया.

मैं:- सुन शामे ऐसा hi फ्लैट और यही फैसिलिटीज दिल्ली में चाहिए मुझे कल दोपहर तक.

वो:- मिल जायेगा भाई.

मैं:- और हां ये फ्लैट के पैसो में से काट लियो क्युकी ये फ्लैट मैं छोड़ रहा.

वो:- हो जायेगा भाई.

मैं:- बस किसी को भेज के मेरी बाइक उस फ्लैट पे पंहुचा दियो.

वो :- ठीक है भाई

मैं कॉल कट की और निचे जाके टीवी देखा और फिर डिनर किया डिनर करके मैं अपने रूम में आया और टेबल पे टिगों बिछा के सत् से खींच गया.

और वही सोफे पे बैठ गया, ड्रग्स लेने से दिमाग की नशे खुल गयी और साड़ी टेंशन जाती रही.

थोड़ी देर में मनीषा मेरे रूम में आयी और ज़िद्द करने लगी की वो आज आज मेरे साथ सोयेगी, मैं भी मरता क्या न करता मान ली उसकी बात और बाहो में भर के सो गया उसे.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
UPDATE:-27(Way तो दिल्ली-2)

मैं सुबह जल्दी सके उठ गया एक्चुअली उठता नहीं पर कुछ और खड़ा हो गया था और मैं बिलकुल नहीं चाहता था की मनीषा को इस बारे में पता चले नहीं तो ावक्वार्ड सिचुएशन हो जाती, खैर मैं जल्दी से उठा फ्रेश हुआ और फिर मनीषा को उठाया.

मनीषा:- सोने दो न!

मैं:- अरे उठो यार कितना सोवोगी दिल्ली भी जाना है.

जाने का नाम सुनके मनीषा जल्दी से भाग गयी अपने कमरे में और मैं फिर से बाथरूम में घुस गया नहाने और नहाके कई दिनों बाद एक दम chaka-chak रेडी हुआ और नीचे आया तो वो दोनों भी रेडी थे अपने बड़े बड़े बैग्स के साथ और बैग्स देख के मुझे याद आया मैंने तो पैकिंग की hi नहीं है, फिर सोचा पहले कुछ खा लू फिर करलूँगा पैकिंग.

हम तीनो ब्रेकफास्ट करने बैठे मैं बहुत जल्दी जल्दी खा रहा था और वो दोनों आराम से और वो दोनों मुझे ऐसे खाता देख के बहुत तेज़ हसने लगी.

मैं:- क्या हुआ यार मुझे पैकिंग भी करनी है?

मनीषा:- व्हाट? तुमने अभी तक अपना सामान भी पैक नहीं किया और मुझे लेक्चर दे रहे थे.

मैं:- अभी कर लूंगा मैं बहुत तेज़ी से.

मैं जूस का गिलास उठाया और उप्पेर भाग गया और रस्ते में जूस का गिलास ख़तम किया और बैग खोल के अपने कपडे उसमे ठूसने लगा, एक तो कपडे इतने थे की वो बड़ा सा बैग पूरा भर गया फिर मैंने दुसरे बैग में पैसे भरे और गन्स डाली तो मुझे याद आया की एक गन तो सिमरन को दे राखी है वो भी लेनी पड़ेगी फिर मैंने सब कुछ दाल लिया तो याद आया अभय का सामान वो तो मैं ऐसे छोड़ के नहीं जा सकता यहाँ, क्या करू रस्ते में फेक दूंगा :आईडिया:

मैंने अपने दोनों बैग उठाये और निचे आया और फिर अभय के कमरे से सारा सामान एक बैग में ठूसा लेकिन वह मुझे एक कमल की चीज़ मिली वो था मेरा प्यार रामपुरी नाइफ जो की तलवार से भी तेज़ था, मैंने उसे अपने बैग में डाला और फिर 3 बैग्स को मुश्किल से लड़ते हुए बहार आया तो वो दोनों मुझे देख के फिर हसने लगी.

एक:- अब क्यों है रही हो.

मनीषा:- ये तुम लड़कियों की तरह इतना सामान क्यों रखते हो

एक:- अरे यार तुम दोनों चलो भी अब क्या मजाक कर रही हो.

हम तीनो घर से बहार आये तो एक लड़का आया और बाइक की के मांगी मैंने उसे दी तो वो भी मुझे एड्रेस देके चला गया.

अब मेरे सामने थी वो कार कवर के अंदर और मैं बहुत ज्यादा एक्ससिटेड था इसे देखने के लिए

और मैंने जैसे कवर हटाया मेरी आँखे बहार आ गयी.

मैं:- व्हाट थे फ़क! रेंज रोवर स्पोर्ट्स हसे 2.0, भेनचोद 1 करोड़ की कार ले आयी किरण.

और मैंने जब उन दोनों को देखा तो मुझे एहसास हुआ की मैं खुसी खुसी में गाली दे गया.

मैं:- सॉरी: ला कीस दे तो कार की.

किरण ने कीस दी मुझे मैंने कार खोली और पहले तो बैग्स अंदर डाले और फिर खुद आया ड्राइविंग सीट पे और मनीषा मेरे बगल में और किरण पीछे, वैसे आज ये दोनों भारी माल लग रही थी लेकिन ये आज जाने वाली है इस बात का दुःख भी था. खैर मैंने कार बहार निकली और दौड़ा दी मस्त मजा आ रहा था चलने में एक दम माखन, मैंने सीधा हॉस्पिटल के सामने कार रोकी और उनको वेट करने का बोलके वह से सीधा सिमरन के केबिन में प्रकट हुआ

सिमरन:- ओह्ह्हू आज जनाब सज धज के कहा चल दिए.

मैं:- दिल्ली शिफ्ट हो रहा हु, ाचा गन दे मुझे

सिमरन:- कोनसी गन?

मैं:- देख अगर ये जोके है तो इससे बुरा जोके कोई नहीं हो सकता.

सिमरन:- वैसे ये जोके hi था और तेरी गन राज सर के पास है.

मैं:- ोकक और तू भी उसे सर बोलती है.

सिमरन:- सीबीआई हेड को सर hi बोलूंगी न वैसे मैं भी दिल्ली शिफ्ट हो रही हु परसो एक ब्रांच वह भी खुली है.

मैं:- नीस मेरा डॉक्टर मेरे साथ रहेगा, चल ब्यय.

मैं वह से निकला और कार को फिर से दौड़ा दी क्युकी 9 बज गए थे और मुझे पहले इन्हे घर छोड़ के सीबीआई ऑफिस भी जाना था.

वैसे हमारे यहाँ से दिल्ली पहुंचने में 2.5 हॉर्स लगते है लेकिन में 1.5 हॉर्स में पंहुचा देता ओर दिल्ली में घुसते hi ट्रैफिक ने गांड मार ली. पर फिर भी हॉर्न्स की आवाज़ सुनते सुनते हम पहुंच गए अड्रेस पे यहाँ भी वैसा hi अप्पार्टमेन्ट था लेकिन ये लुक्सुरिओउस लग रहा था.

हम लोग कार से बहार आये और सामान अंदर रखा मैंने अपना सामान अंदर रखा और अभय का भी क्युकी मैं फेकना भूल गया था, कही भूत वोट पीछे पद गया तो ( लौड़ा पीछे पड़ेगा तेरे)

खैर मैं फ्रेश हुआ और जाने लगा तो दिमाग में ख्याल आया की गन ले चलता हु क्या पता सीबीआई वाले धार ले मुझे लेकिन फिर ख्याल आया की गन तो ले जाने hi नहीं देंगे और फिर खाली हाथ hi कार में बैठ के निकल गया ऑफिस की तरफ जो की मेरी लोकेशन से सिर्फ 20 मिनट की दुरी पे था.

25 मिनट बाद में एक बिल्डिंग के सामने रुका एक्चुअली ये एक झात जैसे बिल्डिंग थी सॉरी बिल्डिंग तो अछि थी लेकिन डिज़ाइन झात जैसा था. खैर कुछ भी हो मैंने कार पार्किंग में ठोकी और उस बिल्डिंग के अंदर घुसा तो मेरी चेकिंग की लाडो ने अबे कोई हथ्यार लेके सीधा थोड़ी घुसेगा :सिघ:

लेकिन मैंने सब को इग्नोर मारा और रिसेप्शनिस्ट से पूछा की राज सर का ऑफिस कहा है,

वो:- 4तह फ्लोर पे...

मैं:- थैंक्स.

मैं लिफ्ट लेने की सोची लेकिन फिर सोचा कही लिफ्ट रस्ते में अटक गयी तो और मैं उसमे फास गया तो इसलिए मैंने स्टैर्स से जाना सही समझा क्युकी इन सीबीआई वालो ने नकली लिफ्ट्स लगायी होगी मुझे फ़साने के लिए.

मैं 4तह फ्लोर पे हफ्ते हुए पंहुचा क्युकी भेनचोद इनकी सिडिया भी चुतियो जैसे बड़ी बड़ी है, लेकिन यहाँ भी कन्फूसिओं थी क्युकी रूम hi रूम थे यहाँ लेकिन एक बुढ़िया बैठी थी रिसेप्शनिस्ट का बोर्ड लेके मैं उसके पास गया.

मैं:- आंटी राज सर से मिलना है, उन्हें बोलो एक आया है.

वो:- क्या बोलै तुमने मुझे.

मैं:- राज सर से मिलना है.

वो:- उससे पहले.

मैं:- ओह्ह्ह्हह आंटी hi तो बोलूंगा आपको.

वो:- रुको अभी बताती हु तुम्हे

लेकिन वो आगे बढ़ती उससे पहले उसका टेलीफोन बजा, हां ये वो लैंडलाइन hi था गरीब साले. उसने फ़ोन पे बात की और मुझे बोली जाओ 404 रूम में.

मैं:- थैंक्स आंटी.

वो:- रुक तुझे मैं बताती हु.

वो फिरसे आगे बढ़ती इतने में भाग के 404 में घुस गया और अंदर जाके रीलीज़ हुआ की ये ऑफिस इसमें ऐसे नहीं घुसना चाहिए था लेकिन आज मुझे पता नहीं किया हुआ की मैं जाके बिना पूछे राज के सामने राखी चेयर पे बैठ गया और फिर मैं अपने अगल बगल देखा तो 5 लोग खड़े मुझे घूर रहे थे जिनमे से 3 तो हॉट आइटम थी सॉरी 2 आइटम थी और एक क्यूट सी थी और दो लकड़ी थे सॉरी लड़के थे जानवर टाइप के, बस राज मुझे देख के मुस्कुरा रहा था इसलिए मैंने सबको इग्नोर किया और राज पे hi कंसन्ट्रेट किया.

राज:- कोई तकलीफ तो नहीं हुयी आने में.

मैं:- नहीं नहीं बस कुछ ठंडा माँगा दो पिने के लिए बियर चलेगी मुझे..

राज ने मुस्कुराते हुए फ़ोन पे किसी को कोल्ड ड्रिंक लाने को कहा और फिर मुझसे बोलै.

राज:- इनसे मिलो ये है मेरी सबसे बेस्ट टीम.

वर्षा:- लीडर ऑफ़ थे टीम, आगे लगभग 24-25, एक दम हॉट माल है एनकाउंटर स्पेशलिस्ट.

Payal:-ye है टेक एक्सपर्ट, ऐसी कोई चीज़ नहीं है की ये हैक न कर पाए, शी इस ब्यूटी विथ ब्रेन आगे होगी 23-24 के aas-paas और यही है वो क्यूट वाली.

सारा:- आगे लगभग 23-24, बॉडी बिल्डिंग करती है हैंड तो हैंड कॉम्बैट में किसी को नहीं छोड़ती जल्दी से, थोड़ी अकड़ू है और काम बोलती है.

जॉन:- ये 28-29 साल का है, बहुत तगड़ा स्नाइपर है और वेपन एक्सपर्ट भी 5 मिनट में बम बना भी देता है और कुछ सेकण्ड्स में किसी भी बम को खोल के रख देता है.

अजय:- ये 26 साल का हत्ता कट्टा जानवर टाइप है ये हैंड तो हैंड कॉम्बैट में बेस्ट नहीं है पर इंसानो को तोड़ने का एक्सपीरियंस है इसे, बस ये लीडर के ऑर्डर्स फॉलो करता है, सिम्पली बोले तो बीस्ट विथ no ब्रेन.

मैंने सब को hello बोलै जिसका किसी ने जवाब नहीं दिया बस पायल को छोड़ के

पायल:- hello एक

मैं:- ैला तुम तो मेरा नाम जानती हो, btw यू अरे क्यूट.

पायल ब्लश करने लगी तो सारा ने उसके पीठ में हल्का सा मारा जिससे वो शांत कड़ी हो गयी.

मैं:- ये सब तो ठीक है पर मुझे एक बात समझ नहीं आ रही की मुझपे इतनी मेहेरबानी क्यों कर रहे है सीबीआई वाले.

राज कुछ नहीं बोलै और बस मेरे सामने मेरी गन रख दी और मैं वो उठा के राज के सर पे तान दी तो उन 5ों ने मेरे सर पे तान दी.

राज:- चिल वो मजाक कर रहा है.

मैं:- हां मजाक था लेकिन रीज़न नहीं बताया.

राज:- रीज़न भी बता दूंगा लेकिन एक डील है तुम्हारे लिए, मैं तुम्हे मला और पैसे दूंगा उसके बदले में तुम सीबीआई के लिए काम करो.

मैं:- हाहाहाहा पहली बात तो अपने hi बोलै था की मला इस डेड और दूसरी बात एक किसी के लिए काम नहीं करता.

राज:- मला जिन्दा है हमारी कस्टडी में हमने बहार बोलै है की मला मारा गया और उसकी बॉडी कार ब्लास्ट में उड़ गयी है लेकिन हमने उसे उठा लिया था.

मैंने कुछ देर सोचा एक्चुअली कुछ देर नहीं बस 30 सेकंड में एक प्लान मेरे दिमाग में आया और मैं राज से बोलै.

मैं:- वैसे आपके पास इन योद्धाओ की टीम है तो इस 19 साल के लड़के की जरूरत कैसे पद गयी आपको.

राज:- गुड क्वेश्चन तो तुम्हे बात दू हर्ष चौधरी धीरे धीरे बहुत ज्यादा भाड़ गया है दिल्ली में रोज़ 20 लोग किडनैप हो रहे है लाखो का ड्रग्स एक रात में सप्लाई होता है आर्म्स स्मगलिंग हो रही है मेरे उप्पेर प्रेशर है कम के लेकिन हम बिना सबूत हर्ष का कुछ नहीं उखड सकते.

मैं:- हाहाहाहा तुम लोग पागल हो क्या सीधा हर्ष को धरना चाहते हो, अरे निचे से सुरुवात करो हर्ष अपने आप बहार आएगा और सबूत भी छोड़ देगा.

राज:- इतना इजी नहीं है ऐसे hi किसी पे हाथ डालना.

मैं:- हो सकता है अगर हम उसे एक रात में इंडिया का सबसे बड़ा क्रिमिनल प्रोवे कर दे तो उसका और उसकी गैंग का डेथ वारंट निकलेगा जिसपे कम पं जिसके सिग्न लेने हो लो और फिर निचे से तोड़ने लगो हर्ष को क्युकी डायरेक्ट तो तुम लोग उसे 7 जनम में भी नहीं धार सकते.

राज:- और एक रात में हम कैसे प्रोवे करेंगे.

मैं:- मैं कर दूंगा लेकिन उससे पहले मेरी बहुत सी शर्ते है,..

राज:- बोलो!

मैं:- पहली तो ये की हर्ष के खिलाफ जो भी काण्ड होगा मीडिया में सबसे पहले मेरा नाम आना चाहिए एक क्युकी मुझे अटेंशन चाहिए. दूसरी हमे जितना भी माल बरामद होगा 80% मेरा और 20% सीबीआई का. तीसरी सबको ये बोलै जायेगा की मैं सीबीआई के साथ काम करता हु ना की उनके अंडर. चौथी और सबसे मैं ी ऍम थे लीडर ऑफ़ थिस टीम.

वर्षा:- no! कभी नहीं और हम तुम्हारी बात ना मने तो.

मैं:- तो फिर खुद देखो हर्ष को मैं अलग से अपने तरीके से देख लूंगा.

वर्ष:- और तुम यहाँ भी हरयाणा जैसे मारकाट फैलाओगे तो हम तुम्हारे पीछे आएंगे.

मैं:- आ जाना लेकिन ी प्रॉमिस यू की तुम सब की डेथ हर्ष से भी ज्यादा पेनफुल होगी.

वर्षा:- तुम हमारे ऑफिस में हमे hi धमकी दे रहे हो, हम चाहे तो तुम्हे अभी ख़तम कर दे.

मैं:- हां तुम लोग मुझे ख़तम कर सकते हो लेकिन झुका नहीं सकते क्युकी एक वही करेगा जो उसका दिमाग कहेगा और एक हमेसा से वही करता आया है.

राज:- एनफ वर्षा! ोकक दोने एक हमे मंजूर है.

वर्षा:- पर सर.

राज:- वो सही कह रहा है हर्ष कोई बचा नहीं है जो तुम लीगली उसे धार लोगी, उसे पकड़ने के लिए उसके जैसा बनना पड़ेगा और एक उसमे बेस्ट है.

मैं:- ोकक तो दोने रहा मुझे पैसे दो और उस मला को मेरी तरफ से दो गोली मार देना.

वर्षा:- तुम्हे बदला नहीं चाहिए क्या?

मैं:- no वे! ी don't गिव ा फ़क अबाउट हिम.

राज:- लो!

राज ने लाकर से एक बैग मेरे सामने रखा

राज:- पुरे 80 करोड़ है और सब एकाउंट्स में थे जो की तुम नहीं ले सकता.

मैंने वो बैग उठा के खड़ा हुआ फिर कुछ याद आने पे फिर बैठ गया इतने में वो रिसेप्शनिस्ट कोल्ड ड्रिंक लेके आयी, भेनचोद बुढ़िया इतने धीरे काम करती है.

Main:-ek मैं बात तो रह गयी, हम लोग यहाँ से ऑपरेट नहीं कर सकते, क्युकी यहाँ हर्ष के चमचे हो सकते है.

राज:- No प्रॉब्लम हमारा एक ऑफिस और है जो मेरे घर पे है.

मैं:- ोकक थें no प्रॉब्लम, और अभी तो बहुत सी बाते करनी है तो कल सुबह मिलते है आपके घरवाले ऑफिस पे.

उसके बाद हमलोगो ने नंबर एक्सचेंज किये और राज ने बताया की शाम तक ऑफिशियली अन्नोउंस हो जायेगा की एक मेरी टीम का नया लीडर है और वो दिल्ली को क्राइम फ्री बनाने के लिए सीबीआई के साथ है. मुझे और क्या चाहिए फिर मैंने सबसे हाथ मिलाया उनमे से तीन लोगो को छोड़ के कोई खुस नहीं था मेरी जिससे मुझे लुंड फर्क नहीं पड़ता. बस राज, पायल और जॉन hi खुस थे.

खैर मैं वह से निकल दिया अपने घर की तरफ क्युकी अभी बहुत कुछ करना था.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
अपडेट:-28

मैं सीबीआई ऑफिस से निकला तो मेरे ज़हन में सवाल बहुत थे और प्लान्स भी लेकिन अभी सही वक़्त नहीं था लाइफ को वापिस से ट्रैक पे लाना था जो हो जायेगा एक दिन में पर बड़ी दिक्कत ये थी की जब मैं अपने भाई से मिलूंगा तो कैसे रियेक्ट करूँगा मेरे छोटे भाई से. और इतना सोच के hi मेरी आँख नाम हो गयी लेकिन मैंने जल्दी से आंसू पोछे और गूगल लगा लिए ताकि किसी को पता न लगे की एक इमोशनल भी है.

37 मिनट में मैं अपने नए घर पंहुचा और ये 37 मिनट इस लिए लगे एक्चुअली लगे तो 36.58 थे पर 37 मान लिए लेकिन मानना है तो 69 मानेंगे, हां तो में इतने देर से इसलिए पंहुचा क्युकी दिल्ली का ट्रैफिक खड़े बन्दे की गांड मार लेता है. मैंने कार पार्क की और घर की बेल्ल बजायी तो दरवाजा किरण ने खोला.

मैं:- तुम लोगो की फ्लाइट कब की है?

किरण:- 2 घंटे बाद की है बस 1 घंटे में निकलना होगा .

हम दोनों अंदर पहुंचे तो मनीषा गुमसुम बैठी थी, मुझे पता है ये उदास है बस दिखा नहीं रही है लेकिन आखरी टाइम पे ना चाहते हुए भी इसके चेहरे पे उदासी आ hi गयी. मैं उसके पास बैठा और उसे साइड से बाहो में भर लिया और बाहो में आते hi उसके आँखों से आंसू का बाँध टूट पड़ा और वो रोने लगी, मैंने भी उसे रोने दिया.

मैं:- मनीषा रट नहीं है.

मनीषा:- प्लीज मत भेजो न मुझे.

मैं:- तुम्हारे फायदे के लिए hi तो भेज रहा हु और वह राज अंकल की बेटी भी तो है न, उसके साथ तुम भी फेस्टिवल पे वापिस आ जाना.

मनीषा कुछ नहीं बोली बस चुपचाप बैठी रही. थोड़ी देर में पिज़्ज़ा आ गया जो किरण ने आर्डर किया था हमने पिज़्ज़ा खाया और फिर मैं उन्हें एयरपोर्ट चोर्ने निकल गया और रस्ते में किरण को वह का कांटेक्ट नंबर दे दिया.

एयरपोर्ट पे भी मनीष रोई लेकिन किरण ने उसे संभल लिया और वो उसे ले गयी अपने साथ. मैं भी दुखी था पर ये जरूरी भी था हम दोनों के लिए इसलिए मैंने अपने दिल को पत्थर का किया जो ऑलमोस्ट पत्थर hi हैए ुर घर पे निकल पड़ा.

घर पहुंच के मैंने अपना सामान सेट किया और फिर नई चैनल खोल के बैठ गया थोड़ी देर में सभी न्यूज़ चैनल पे मेरा नाम चलने लगा की सीबीआई की नयी टीम बानी है और उसका लीडर एक 19 साल का लड़का है जिसका नाम एक है और उसे कम ने अप्पोइंट किया है. इस टॉपिक पे डिबेट भी चल रहे थे पक्ष- विपक्ष के पर मुझे घंटा फर्क नहीं पड़ता.

मैंने टीवी बंद किया और खाना आर्डर करके जैक डेनियल की बोतल खोल के बैठ गया 3 पेग पिए थे की कम्भख्त खाना आ गया और मैंने खाना खाया और ड्रग्स से लेके चैन की नींद सो गया.

************

अगली सुबह मेरी आँख 7 बजे अलार्म से खुली मैंने अपना फ़ोन देखा तो उसपे किरण का मस्सग था की वो पहुंच गए (जगह नहीं बता सकता क्युकी आगे पता लगेगी) एक राज का मस्सग था की 8 बजे मिलो घर वाले ऑफिस पे और निचे एड्रेस दिया हुआ था.

मैं उठा फ्रेश हुआ नहाया धोया और फिर चकचक रेडी होक ब्रेकफास्ट के नाम पे ढेर सारा दूध पिया और जेब में गन और ड्रग्स डाला क्युकी कभी भी जरूरत पद सकती है एयर बाइक लेके निकल गया क्युकी कार में बहुत प्रॉब्लम होती है बस.

मैंने एड्रेस देखा तो 45 मिनट की दुरी पे था और मैं बाइक के मामले में गॉड लिखे ड्राइवर हु फिर भी 1 घंटे में पहुंच और मैं 45 मिनट लेट था. जिस एड्रेस पे पंहुचा वह घर नहीं बंगलो था और उसके बहार दो सिक्योरिटी गार्ड थे जिन्होंने मुझे रोक लिया.

मैं:- अबे कल सकल नहीं देखि क्या टीवी पे.

सिक्योरिटी:- देख तू जो भी है अंदर नहीं जा सकता बिना पूछे.

मैं:- अबे तो सकलकया देख रहा है बोल तेरे सर को की एक सर खुद आये है.

वो मुझे घूरने लगा और फिर फ़ोन जैसा कुछ उठा के राज को कुछ बोलै और अंदर से जवाब सुनते hi दोनों ने मुझे सलूट ठोका.

सिक्योरिटी:- सॉरी सर.

मैं:- कोई नहीं आगे से ध्यान रखियो.

उसके बाद उसने गेट खोला और मैं बाइक अंदर ठूस दी और अंदर खड़े गॉर्ड ने मुझे पार्किंग का रास्ता दिखाया मैंने वह बाइक रोकी तो वह जॉन खड़ा था.

जॉन:- वसुप बॉस!

मैं:- देखो भाई बॉस वॉस न बोलो भाई hi बोल ले अजीब सा लगता है सुनने में.

जॉन:- हाहाहा कोई नहीं! वैसे तू मस्त बाँदा है, मैंने देखा है तुझे.

मैंने भी उसे 1000 वाट की स्माइल दी और उसके पीछे चलने लगा थोड़ी अंडर जाने के बाद उसने दिवार पे लगे रेड बटन को दबाया और वह से वो दिवार दो हिस्सों में बात गयी और हम अंदर गए तो आलीशान ऑफिस था और यहाँ हर चीज़ मौजूद थी पटाखे से लेके बम था पिस्तौल से लेके राइफल्स तक और टेक्नोलॉजी से तो भरा पड़ा था.

हम उन चीज़ो को क्रॉस करके अंदर एक केबिन में पहुंचे और उसके अंदर कदम रखते hi मेरे कदम रुक गए क्युकी वह पे चारो साइड सोफस थे और बिच में एक कांच की टेबल और राज के बगल में एक 12 साल का बचा बैठा था एक दम gora-chitta, बिलकुल मेरे जैसा स्मार्ट लेकिन शकल से सरीफ लग रहा था, और मैं उसे देखते hi पहचान गया की ये मेरा भाई विशाल है और फिर तो जैसे मेरे पैरो में जान hi नहीं रही, उसने भी मुझे देखा और फिर राज की तरफ और राज ने जैसे hi हां में सर हिलाया वो दौड़ता हुआ मेरे पास आया इतने में भी घुटनो पे बैठ गया और वो सीधा गले लग गया मेरे और उसके गले लगने से उसकी तेज़ चल रही धरकन को सुनते hi मेरे अंदर का छुपा हुआ सरब दर्द जो बचपन से अब तक झेला था वो सब बहार आने लगा.

मैं और वो दोनों फुट कर रोने लगे कोई भी हमारे पास नहीं आया और राज को छोड़ के बाकी टीम मेंबर तो बस आँखे फाड़े देख रहे थे की चल क्या रहा है सायद उन्हें मालूम नहीं था.

मैं जब तक रोटा रहा जब तक मेरी आँखों से आंसू न सुख गए क्युकी मैंने सोच लिया था ये लास्ट टाइम है. वो भी मेरे गले से हटा और मेरे चेहरे को छू के देखने लगा

विशाल:- अब आप भी हमारे साथ रहोगे न.

मैं:- नहीं! वो मैं हॉस्टल में हु न इसलिए नहीं आ सकता.

विशाल ने फिर साद सा फेस बना लिया.

मैं:- हां पर तुझसे मिलने आया करूँगा और फ़ोन भी किया करूँगा.

उसके बाद वो खुश हो गया और उसके फेस पे स्माइल देख के मेरे होठो पे स्माइल आ गयी.

राज:- जाओ बीटा तुम भैया के लिए खाना बनाने में हेल्प करो.

विशाल:- ोकक डैडी! भैया मैं अभी जा रहा हु फिर मैं आपको अपने गेम्स दिखाऊंगा.

और इतना कहके वो उसके केबिन से बने गेट से सीधा घर में घुस गया और मैंने उस तरफ देखा तो मेरी माँ आँखों में आंसू लिए सायद हमे hi देख रही थी इसलिए मैं वह से उठा और बहार वाले केबिन में आ गया अकेला और सायद थोड़ी देर मुझे वापिस पहले जैसा होने में टाइम चाहिए था, मैं ऐसे hi बैठा रहा और फिर ध्यान भेनचोद मैं ऐसा नहीं हु लौड़ा ऐसे तो गांड मर जाएगी. मैं खड़ा हुआ और वापिस अंदर आया अब मुझे मेरे इमोशंस को दबा न वो काम एक चीज़ hi कर सकती है टिगों, पर इनके सामने, क्या फर्क पड़ता है, इसलिए मैं सीधा जाके सोफे पे बैठा, मैंने एक चीज़ नोटिस की तो वह सब मुझे सिम्पथी वाली नज़रो से देख रहे थे सायद राज ने बता दिया होगा मेरे बारे में.

मैंने जेब मैं हाथ दाल के एक पैकेट निकला और उसने से सिंगल दोसे टेबल पे डाला और उनमे से कोई कुछ बोलता उससे पहले सात से खींच गया और पैकेट जेब में दाल के सोफे पे आँख बंद करके बैठ गया. 69 सेकंड बाद मेरी आँख खुली और अब मेरा दिमाग बिलकुल सांत था.

राज:- तुमने ड्रग्स क्यों लिए?

मैं:- क्युकी मुझे जरूरत थी.

वर्षा:- सर ये द्रुग्गिए हमारी मदद करेगा?

मैं:- ी ऍम बेटर थान यू इन एवरीथिंग.

वर्षा:- सो लेटस चेक.

राज:- एनफ! दोनों शांति से बैठो.

फिर हम सब चुप हुए.

राज:- वर्षा हर्ष के बारे में बताओ.

वर्ष:- सर जैसे आप जानते है की हर्ष एक वाइट क्रिमिनल है पर फिर भी वो कहा रहता है क्या करता है किसी को नहीं पता. सर दुनिया के सामने एक बिज़नेस मन है, रियल एस्टेट किंग है लेकिन असल में वो ड्रग स्मगलिंग, एआरएम स्मगलिंग, ह्यूमन ट्रैफिकिंग करता है और उसके 4 बन्दे मैं है 3 बन्दे तो ये तीनो काम सँभालते है और इनके बारे में कोई जानकारी नहीं है की ये कहा है पर ये क्रिमिनल है रिकार्ड्स में और 4तह आदमी हर्ष का ख़ास है, हे इस घोस्ट, एनिमल कुछ भी कही वो काम पड़ेगा उसके लिए, हर्ष को मारने से पहले उससे होक गुज़रना पड़ेगा और वो सामने वाले को एक मौका भी नहीं देता सँभालने का.

मैं उसकी बातो पे कोई ध्यान नहीं दे रहा था क्युकी इतनी इनफार्मेशन, नहीं इससे ज्यादा इनफार्मेशन तो अभय ने मुझे दी थी हर्ष के बारे में.

राज:- कहा ध्यान है तुम्हारा.

मैं:- कही नहीं, वैसे जो वर्षा जी ने बताया उससे ज्यादा मैं बता सकता हु.

वर्षा:- हाउ? तुम कल दिल्ली आये हो और मुझसे ज्यादा जानते हो.

मैं:- ोकक सुनो, जफर ये ह्यूमन ट्रैफिकिंग देखता है और ये हर्ष का राइट हैंड भी है और इसके भी राइट, लेफ्ट, मिडिल होंगे उसके बारे में मुझे नहीं पता और न जानना, विष्णु ये ह्यूमन ट्रैफिकिंग देखता है, लेफ्ट हैंड है हर्ष का और ये अपने छोटे भाई और बेटे के साथ ये काण्ड करता है, मनीष शगल एआरएम डीलर है वो और हर्ष का मिडिल हैंड, और वो अपने भाई को अपनसे साथ रखता है सुरेश शगल.

पायल:- ये मिडिल हैंड क्या होता है?

और उसके ये पूछते hi बाकी उसे घूरने लगे, मैं और जॉन ज़ोर-2 से हसने लगे, जॉन मस्त बाँदा है भेनचोद.

राज:- ोकक साइलेंस! आगे बोलो.

मैं:- हर्ष का सबसे ख़ास है रॉय, एक्चुअली ये रॉय एक किलिंग मशीन है इसका काम hi लोगो को मारना है, और ये हर्ष की शील्ड है, जिसका हम अभी कुछ नहीं उखड सकते क्युकी हम उखाड़ने गए तो ये हमे यही गाड़ देगा.

अजय:- मेरे से नहीं बिधा है अभी.

मैं:- हीरो रुक जा उसका मौका भी आएगा.

वर्षा:- हाउ? तुम इतना सब कैसे जानते हो.

मैं:- पहुंच थी पहले.

वर्षा:- पहले मतलब.

मैं:- मैंने अभय को मार दिया न, उसने hi बताया था ये सब.

इसके बाद वर्षा सांत हो गयी.

राज:- ाचा अब हमे सुरुवात कहा से करनी चाहिए.

मैं:- बस हर्ष एंड गैंग का डेथ वारंट इशू कारवां है फिर देखेंगे.

राज:- और वो कैसे होगा.

मैं:- वो आप मुझपे छोड़ दो 3 दिन बाद वो इंडिया का सबसे बड़ा क्रिमिनल होगा और इस काम के लिए मैं जॉन को साथ रखूँगा.

राज:- वो तुम जिस मर्ज़ी को रखो और ये लो.

उसने मुझे एक लेटर दिया, मैंने उसपे नाम देखा तो आँख फटी के फटी रह गयी क्युकी ये "सत. Xavier's इंटरनेशनल स्कूल" का था जिसमे मेरा अड्मिशन हुआ है. एंड ये दिल्ली का बेस्ट स्कूल है .

राज:- अब एक बात मेरी बात भी सुन लो, रोज़ स्कूल जाओगे और स्कूल से आने के बाद हर्ष पे काम करोगे. तुम्हे अब अधिकतर लोग जान्ने लग गए है तो कोई उलटी सीधी हरकत या बदतमीज़ी की कंप्लेंट नहीं आणि चाहिए.

मैंने हाँ में मुंडी हिल्लायी.

मैं:- मेरी बुक्स ड्रेस, बैग्स और फ़ोन तो अल्लोवेद होगा न और मैं गन भी लेके जाऊंगा.

वर्ष:- व्हाट थे फ़क! स्कूल में गन का क्या करोगे और फ़ोन भी अल्लोवेद नहीं है वह.

मैं:- फॉर सेफ्टी पर्पस और मैं सीबीआई से जुड़ा हु इसका पता तुम्हारे हर्ष के बन्दों को भी पता लगेगा न और उन्होंने मुझपे अटैक किया तो.

राज:- ोकक दोनों चीज़ अल्लोवेद करवा दूंगा मैं लेकिन गलती से बेवजह तुमने रोलबाज़ी की तो ाचा नहीं होगा.

मैं:- कुछ नहीं करूँगा मैं.

राज:- ाचा होगा तिम्हारे लिए.

उसके बाद विशाल हमे लंच के लिए बुलाने आया और हम सब अंदर जाके लंच करने लगे विशाल तो मुझे ज्यादा खिला रहा था और खुद काम खा रहा था और ये टीम वाले अभी शांत बैठे थे और यहाँ आते hi khachar-kachar करने लगे और वही मैं सांत हो गया. खाना खाके हम वापिस ऑफिस में आये.

मैं:- गन तो दो मुझे.

अजय:- है तो तेरे पास.

मैं:- अबे ये कोई गन है, मैं लीडर हु मुझे राकेट लांचर या ग्रेनेड लांचर टाइप दो.

जॉन:- टैंक दिलवा दू.

और फिर सब हसने लगे बस एक की बजती करते हो.

उसके बाद जॉन ने मुझे कई गन्स दिखाई जिसमे से मैंने 9मम की बेर्रेट फस ली. क्युकी ये गन मस्त है भेनचोद खोपड़ी को तरबूज़ की तरह खोल देती है, मेरी आंखे तो किसी और चीज़ को धुंध रही थी लेकिन इनपे वो मिली hi नहीं.

मैं गन और कुछ मैग भी अपनी जेब में ठूसा और जॉन से चुपचाप 2 सीलेंसर ले लिए, फिर वह थोड़ी देर बकचोदी पेल के मैं घर आया. शाम का टाइम हो चूका था तभी दरवाज़े पे कोई आया और मैंने दरवाज़ा खोला तो एक जहातु सा लड़का खड़ा था हाथ में बुक्स और बैग लेके.

मैंने उससे वो सब चीज़े ली और अंदर आके खोल के देखा तो ड्रेस एक दम मस्त थी, भेनचोद track-suit, शॉर्ट्स ब्लेजर सब दे दिया इन्होने :सिघ:

मैंने उन सबको रखा और आगे के बारे में सोचने लगा और फिर गन उठा के निकल गया घर से किसी जरूरी काम से और वह से 2 घंटे में वापस आया. और आके खाना आर्डर किया और खाया फिर मनीषा से बात की थोड़ी देर और फिर सो गया क्यों की कल से नयी लाइफ सुरु थी फिर से.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
थैंक्स सर जी फॉर योर ब्यूटीफुल रिव्यु :हुग:

मुझे पता है सर जी :डी

और इस क्वेश्चन का मैं इंतज़ार कर रहा था की किसी ने ये क्वेश्चन मुझ से पूछा क्यों नहीं, लेकिन आप से कहा कुछ छुपा है :डी

तो बात दरअसल ये है की ये कहानी एक की जुबानी चल रही है और उसे इस बारे में कोई ज्ञान नहीं है और उसे इस बात का खामियाज़ा आगे भुगतना पड़ेगा, उसे तो यही लगता है की कम के ऑर्डर्स है लेकिन उसे सचाई नहीं पता और इस वक़्त में अपना ज्ञान स्टोरी में डालता तो मज़ा नहीं आता क्युकी मैं बस लिखर रहा हु लेकिन कहानी तो एक की है तो वो क्या जनता है क्या नहीं और ये जो स्टेट गवर्नमेंट और सेंट्रल गवर्नमेंट का किस्सा आगे आएगा लेकिन थोड़ा ज्यादा आगे :डी

ी होप यू अंडरस्टैंड :बाउ:
 
वो तो बस ऐसे hi लिख दिया थोड़ा फनी बनाने के लिए :कूल:

2 घंटे बहार क्या करके आया वो पता लग जायेगा आगे जाके :डी और गन एंड मोबाइल बस फॉर सेफ्टी रेअसोंस.

एक है तो काण्ड तो होगा hi बरोथेर :रोफ्लोल:

किरण वह नहीं रहेगी वो आ जाएगी जल्द hi और कब तक ये आज के अपडेट में है :डी

और दादा और माँ के राज़ भी खुलेंगे पर अभी नहीं :डी

एक की बजाये फॅमिली को नुक्सान इसलिए पहुंचाया एक तो एक शिफ्ट हो चूका था गाओं से और दूसरा ये जी मला भी अपने परिवार की तरह उसके परिवार को ख़तम करना चाहता था लेकिन उसे ये न पता था की वो लोग सौतेले है :डी

:थैंक्स: बरोथेर फॉर योर ब्यूटीफुल एंड वैल्युएबल रिव्यु :हुग:
 
:थैंक्स: सर जी :बाउ: फॉर योर ब्यूटीफुल रिव्यु :हुग:

और मुझे पता है ये रपे hi होता है :डी

पर मैंने पूरा रपे इसलिए नहीं बोलै क्यों कई लोग ऑफेंड हो जाते है, इसलिए मैंने यही बोलै की ड्रग्स देके सेक्स किया इसका मतलब तो रपे hi होता है बस समझ आना चाहिए जो आपको आ गया :डी

और बाकी मुझे भी नहीं पता मैंने क्या लिख दिया :डी
 
अपडेट:-29

मैं सुबह अलार्म से 6 बजे उठा और फ्रेश हुआ, और फिर किचन में जाके ब्रेकफास्ट बनाया और फिर वापिस आके नहाया, ये किरण भी एक वीक बाद आएगी तब तक काम खुद करने पड़ेंगे, नहाके मैंने स्कूल यूनिफार्म पहनी शूज पहने और फिर मिरर के सामने खुद को देखा तो कई दिनों बाद मुँह से निकला "माल लग रहा है बस" खैर बाल वाल सेट करके परफ्यूम वगैरह चिड़कके मैंने बैग उठाया और उसमे गन डाली और फ़ोन जेब में दाल के बाइक बहार निकली, तब याद आया की बस स्कूल कहा है.

फिर गूगल बाबा की मदद से स्कूल देखा जो बस 20 मिनट की दूरी पे था. मैं निकल पड़ा घर से बस थोड़ा सा नर्वस फील कर रहा था की भेनचोद कितने बड़े लोगो के बचे पढ़ते होंगे और यहाँ का माहौल कैसे होगा, सब अपने आप को तीसमारखाँ समझते होंगे लेकिन फिर दिमाग में बूत हु केयर्स ी ऍम एक.

और फिर साड़ी नर्वस्नेस दूर करके मैं स्कूल पंहुचा, बहार hi गेट के उप्पेर एक बड़ा सा बोर्ड लगा था उसपे स्कूल का नाम लिखा था मैंने बाइक अंदर घुसाई तो सिक्योरिटी गॉर्ड ने रोक लिया.

मैं:- अरे क्या हुआ अब.

सिक्योरिटी:- ईद कार्ड दिखाओ.

मैं:- अबे पहला दिन है, आज मिलेगा.

सिक्योरिटी:- तमीज से बात नहीं कर सकते.

मैं:- अबे इससे भी ज्यादा तमीज से बात होती है क्या?

वो कुछ नहीं बोलै बस मुझे घूरते हुए फ़ोन लगाया किसीको जिससे सर सर करके बात कर रहा था और फिर मुझसे मेरा नाम पूछा और फिर राइट साइड वाले कैंपस में जाने को बोलै.

मैं:- सुन कुछ बता इस स्कूल के बारे में.

सिक्योरिटी:- देखो भाई इस स्कूल में तीन कैंपस है नर्सरी विंग, जूनियर विंग और सीनियर विंग. और तुम्हारी सीनियर विंग राइट साइड है, और सत. Xavier's में रूल्स बहुत इम्पोर्टेन्ट है और यहाँ अमीर बाप के बचे गरीबो को सताते है, और यहाँ बहुत कुछ है जो तुम्हे पता लग जायेगा.

मैं:- ये सब मेरे काम की बाते नहीं थी ये बता यहाँ माल कैसी है.

उसने मुझे एक बार मुझे उप्पेर से निचे घुरा और फिर बोलै.

सिक्योरिटी:- बीटा दिल्ली के तो नहीं लगते.

मैं:- सही पकडे हो. चल अब चलता हु टाइम हो गया.

मैंने बाइक आगे दौड़ा दी और राइट साइड मोड़ा तो सामने एक बड़ी सी बिल्डिंग थी जिसके लेफ्ट साइड कैंटीन थी बड़ी सी और उसके चारो तरफ ग्रास, और राइट साइड पार्किंग. मैंने भी सीधा राइट साइड पार्किंग में ठूस दी, वह पे कार्स और बाइक्स देख के अंदाज़ा हो गया की अमीर लोग इधर hi है दिल्ली के. खैर मैंने बाइक कड़ी करि और वाच में टाइम देखा तो अभी 10 मिनट थे क्लास स्टार्ट होने में इसलिए

कैंटीन में चला गया में.

मैं कैंटीन में घुसा तो वह फुल हरियाली थी मतलब माल माल लड़किया हमारे वह तो एक दो hi होती थी और यहाँ तो बस एक से बढ़ के एक लेकिन एक चीज़ अजीब लगी मुझे की मिझे आधे लोग घर रहे थे और आधे लोग मुझे देख के खुस नज़र आ रहे थे और कुछ की आँखों में नफरत, इसका कारन मुझे पता था सीबीआई के साथ इन्वॉल्वमेंट वाली नई जो न्यूज़ देखते होंगे उन्हें पता था मैं कोण हु और जो बिगड़ी औलादे थी उन्हें नहीं पता था सायद.

लेकिन मुझे एक चीज़ और अजीब लग रही थी वो थी ये की सीनियर विंग में 9th,10th,11th,12th के स्टूडेंट्स थे लेकिन यहाँ जो जूनियर्स थे वो बिचारे कोनो में पड़े थे लाडे हुए और 12तह वाले एक दम खुल के, मैंने ये सब 69 सेकण्ड्स में अनलयसे किया और फिर एक चास्मिस लड़का बैठा था और उसके बगल में एक छोड़ू सा लड़का मैं उनके पास वाली सीट पे बिना पूछे बैठ गया.

उनलोगो ने मुझे घुरा लेकिन बोले कुछ नहीं वो चास्मिस तो कुछ बोलना छह रहा था लेकिन झिझक रहा था.

लेकिन मैंने उन लाडो को इग्नोर मारा और उस कैंटीन वाले को अपने पास आने का इशारा किया.

वर्कर:- क्या लोगे?

मैं:- पहले तो बता तो सही क्या क्या है?

उसने दो तीन आइटम के नाम बताये जो मुझे बिलकुल पसंद नहीं बस उन्हेअल्थी फ़ूड.

मैं:- जा तू ऑरेंज जूस लिया.

वो लेके आया और मैंने जुइ ख़तम किया यो बेल्ल बज गयी.

मैं वह से सीधा बहार आया और एडमिनिस्ट्रेशन बिल्डिंग की तरफ चला गया और प्रिंसिपल के ऑफिस के दरवाज़े पे आके पूछा.

मैं:- मई ी के इन सर.

प्रिंसिपल:- ओह्होऊ एक के इन माय बॉय.

बस जहातु भुड़िया इंग्लिश पेल रही है.

मैं:- मम माय ईद कार्ड, माय क्लासरूम, माय सेक्शन.

प्रिंसिपल:- वेट बीटा. तभी उसने घंटी बजायी और बहार से एक 24-25 साल का आदमी अंदर आया, पेओन था सायद.

प्रिंसिपल:- रमेश इसे 12तह सेक्शन ा में ले जाओ और वह क्लास टीचर को बोलना की इन्हे सब कुछ आज hi दिलवा दे.

उस पेओन ने हाँ में मुंडी हिल्लायी और अपने पीछे आने का इशारा किया, मैं भी उसके पीछे चल दिया और ऑफिस से निकल के उसके बगल में.

मैं:- सुन भाई वाशरूम किधर है?

रमेश:- हर फ्लोर पे है.

मैं:- और सिगग्रेटे पिने का जुगाड़.

वो रमेश मुझे घूरने लगा और फिर बोलै.

रमेश:- भूल के भी मत करना ऐसा उस बुढ़िया को पता लगा न तो ाचा नहीं होगा.

मैं:- अबे बुढ़िया की माँ की छूट तू बता न.

रमेश:- भाई मुझे माफ़ कर तू.

और फिर वो चुपचाप चलता रहा और मैंने उसे पुरे रस्ते बोलता रहा की टीचर्स में माल कोण है लड़कियों में माल कोण है पर वो बाँदा कुछ नहीं बोलै, लोदु कही का. खैर हम 3रद फ्लोर पे आये वो भी स्टैर्स से और फिर एक क्लास के सामने रुके.

रमेश:- मई ी के इन ma'am.

मैंने भी उसके बगल से देखा अंदर एक 30-35 साल की माल औरत जिसने ब्लैक साड़ी पहनी हुयी थी उसने हाँ में गार्डन हिला के अंदर आने को कहा.

हम दोनों अंदर आये और फिर रमेश ने उस ma'am को सब कुछ बताया वो भी एक दम एक्सएक्ट जो उस बुढ़िया ने बोलै था.

Ma'am:- ोककक! तुम जाओ. एंड व्हाट इस योर नाम?

लगता है लौड़ी न्यूज़ नहीं देखती,

मैं:- एक.

Ma'am:- तेल्ल में योर फुल नाम.

और फिर पूरी क्लास हसने लगी एक दो सरीफजादो को छोड़ के, है लो बीटा है लो एक दिन सब के मैं में खौफ न जमा दिया तो एक नाम नहीं.

मैं:- अंकित कुमार चौधरी.

Ma'am:- सो, योर रोल no इस 6 एंड चेक ी योर प्रीवियस रिजल्ट्स व्हिच वास् गुड बूत it's सत. सवियर्स. सो बेस्ट ऑफ़ लक.

मैंने वह देखा तो एक बेंच खाली थी और एक छोड़ू सा लड़का बैठा था एक्चुअली ठीक थक था सकल से बस सरीर से मरियल सा था तो मैं उसके पास बैठ गया थर्ड बेंच पे और एक बात मैंने गौर की यहाँ लड़के लड़की साथ बैठ सकते है और हमारे स्कूल में ऐसा नहीं था.

खैर उसके बाद वो ma'am फिजिक्स पढ़ने लगी और मैं बस ब्लैक बोर्ड को घूरे जा रहा था और दिमाग में बस ये चल रहा था की आज शाम को क्या करना है.

मेरा ध्यान बेल्ल की आवाज़ से टुटा और फिर वो ma'am मुझे जाते हुए बोली.

Ma'am:- मीट में इन रेसस्स.

मैंने बस हाँ में मुंडी हिल्लायी और वो चली गयी और उसके जाते hi वो जो लड़का मेरे बगल में था वो बोलै.

वो:- ही बीआरओ, ी ऍम आकाश, एंड दो यू वर्क फॉर सीबीआई?

मैं:- देख आकाश भाई पहली बात हिंदी में बात कर और ये बीआरओ न बोल, और दूसरी बात मैं किसी के लिए काम नहीं करता सीबीआई वर्क्स फॉर में. एक्चुअली हम साथ काम कर रहे है.

आकाश:- वैसे आपने बहुत बड़ी गलती करदी इस सेक्शन में आके.

मैं:- और वो कैसे ?

आकाश:- एक आर्यन नाम का लड़का है, इस स्कूल के सबसे बड़े ट्रस्टी और इस एरिया के ंप का बीटा, उसको आपके आने से इस सेक्शन से शिफ्ट कर दिया है तो वो आप पे गुस्सा होगा.

मैं:- गांड मरए भसदक़ा, उसके जैसे बहुत को पेला है.

वो आकाश एक दम से सांत हो गया और फिर मुझे रीलीज़ हुआ की मैं जोश जोश में ज्यादा बोल गया और तेज़ बोल गया इसलिए बगल वाले सब मुझे hi घर रहे थे जिनमे कुछ पापा की परिया भी थी, बूत हु गिवेस ा फ़क.

खैर अगले hi मिनट एक टकलू सा टीचर एंटर हुआ लेकिन इस स्कूल की एक बात अछि लगी की सब बचे खड़े होक चिल्लाये नहीं "गुड मॉर्निंग सर"

उस टीचर ने भी मेरा इंट्रो लिया और उसकी सकल से देख के लग रहा था की वो मुझे जनता है, खैर फिर भी उसने मुझे पढ़ने की हिदायद दी और फिर मैथ पढ़ने लगा, अगेन मुझे लुंड समझ नहीं आ रहा था कुछ लेकिन फिर भी मैं बस बोर्ड को घूरे जा रहा था ताकि उसे लगे की मैं पढ़ रहा हु और तुम लोग ये समझ लेना की मैं कमज़ोर हु बस इनका सिलेबस थोड़ा आगे चल रहा है. मैंने ये पीरियड भी ऐसे hi निकल दिया बेल्ल बजी और वो टीचर खिसक लिया.

मैं आकाश को धीरे से बोलै,,,

मैं:- यययय सिगग्रेटे कहा पि सकते है.

उसने मुझे घुरा और फिर बोलै,

आकाश:- वाशरूम में लेकिन कोई देख न ले नहीं तो कंप्लेंट कर देगा.

मैं:- अबे को देखे उसकीय माँ का बहहहह

मेरी आवाज़ मेरे गले में अटक गयी क्युकी मेरी नज़र भी क्लास में एंटर हुयी ma'am पे अटक गयी थी जो की बहुत हॉट थी मतलब हद्द सा ज्यादा हॉट क्लास में एक लगा हुआ था और मुझे उसमे भी गर्मी लगने लगी थी.

लेकिन मेरा ध्यान ma'am की प्यारी सी आवाज़ से टुटा.

Ma'am:- हे यू! What's योर नाम?

मैं:- अंकित कुमार चौधरी,

Ma'am:- ही माइसेल्फ ईशा एंड ी ऍम योर इंग्लिश टीचर.

मैं:- नीस तो सी योय ma'am.

वो फिर कुछ नहीं बोली बस पढ़ने लगी और इस क्लास में मैं बस ma'am को घर रहा था और ये बात उसने नोटिस भी कर ली थी लेकिन कुछ बोली नहीं. खैर उसका पीरियड भी ख़तम हुआ और फिर रेसस्स की बेल्ल हुयी और सब बचे धीरे-2 निकलने लगे मतलब कोई जल्दी नहीं थी इन्हे और वह के स्कूल में जानवर से जैसे दौड़ पड़ते थे बेल्ल की आवाज़ सुनके. अब ये भी नहीं दौड़ रहे तो मैं भी आराम से क्लास से बहार निकला और वाशरूम में जाके मूट के आया और फिर आकाश के साथ स्टाफ रूम में गया जहा फिजिक्स की ma'am ने बुलाया था. आकाश को बहार रोके मैं अंदर गया तो वह 30% सर थे और 70% ma'am और साड़ी ma'am एक से बढ़ के एक माल.

खैर मैं उस फिजिक्स वाली के पास गया

मैं:- ma'am आपने बुलाया था.

Ma'am:- it's योर होम सो स्पीक इन इंग्लिश.

ईशा:- अरे मीनू जाने दे न क्यों डरा रही है उसे.

ओह्ह्ह तो इस लौड़ी का नाम मीनू हु एक बार इसको शामे डायलाग न मारा तो मेरा नाम भी एक नहीं, मैंने मैं में ये प्रतिज्ञा ली इतने में उस मीनू ने मेरे हाथ में एक पेपर और ईद कार्ड थमा दिया.

मैं वह से बहार निकला और उस दोनों चीज़ो के जेब में दाल के फ़ोन बहार निकला. तो वो आकाश फिर बावला हो गया.

आकाश:- अबे तू फ़ोन लाया है किसी ने देख लिया तो कंप्लेंट हो जाएगी.

मैं:- अबे मुझे अल्लोवेद है, मैं स्पेशल केस हु.

आकाश:- हां ठीक है अब चल.

फिर हम दोनों कैंटीन में आये तो मेरा वो चीज़े खाने का बिलकुल मैं नहीं था इसलिए मैंने जूस आर्डर किया.

मैं:- ोयी सुन कल से चिकन सैंडविच रखियो सिर्फ मेरे लिए.

वर्कर:- पर ये कैंटीन में अल्लोवेद नहीं है.

मैं:- अबे ये ले पैसे और सिर्फ मेरे लिए लेके आईओ मुझे ये सब न पसंद

मैंने उसे 2000 का नोट दिया और वो चला गया, फिर आकाश ने मुझे पीरियड्स के बारे में बताया की 45 मिनट्स के सिक्स पीरियड लगते है हर सब्जेक्ट के और रेक्सेस भी 45 मिनट की होती है.

हम दोनों ने अपना तांजहां फिनिश किया और फिर भी टाइम था तो ग्राउंड की तरफ चले गए.

वह दो टीम क्रिकेट खेल रही थी और बाकि के स्टूडेंट्स उन्हें देख रहे थे. मतलब कितनी चुटिया बात है 22 बन्दे मिलके फील्ड पे हुग रहे है और उनसे डबल अमाउंट के स्टूडेंट्स उनको हगते हुए देख रहे है.

खैर उनमे हम दोनों भी शामिल हुए और एक पेड़ के निचे बैठ गए. तभी आकाश ने एक लड़के की तरफ इशारा किया और बोलै.

आकाश:- भाई ये है आर्यन.

मैंने उसे देखा तो ाचा था दिखने में हत्ता कट्टा था मेरे जैसा पर घमंड साफ़ झलक रहा था और वो सबपे चिल्ला रहा था 5 -6 को छोड़ के सायद ये चमचे होंगे इसके.

मैं:- अबे तो इसे देख के मुठ मारु कोई लड़की दिखा तू क्या गे समझ रहा है मुझे.

आकाश:- नहीं भाई वो बात नहीं है, मैं तो बस बता रहा था की ये आपको छोड़ने वाला नहीं है.

मैं मुस्कुरा दिया.

मैं:- ाचा और कुछ खूबी बता इसकी..

आकाश:- पढ़ने में thik-thak है बाप के दम पे ा सेक्शन में था लेकिन आपकी वजह से निकल गया. इसके जैसा बॉलर मैंने आज तक नहीं देखा.

मैं:- चल अब तेरी ार्यंपुर्ण बंद हो गयी तो चले क्लास में टाइम हो गया.

फिर हम दोनों खड़े हुए और चल दिए क्लास रूम की तरफ वह गए तो पहले से hi एक टीचर मौजूद था और उसकी सकल देख के पहचान गया की ये भसदक़ा भी हरयाणा से है.

और मैं उसे देख के hi समझ गया की भेनचोद फिजिकल एजुकेशन पढ़ायेगा क्युकी उसने ट्रैक सूट पहना हु था.

सर:- बीटा खड़ा हो नाम क्या है तेरा.

मैं:- अंकित कुमार चौधरी.

सर:- हरयाणा से है क्या?

मैंने हाँ में मुंडी हिल्लायी तो वो खुस होगया अबे अजीब गांडू इंसान है खुस ऐसे हो रहा है जैसे दामाद मिल गया हो.

खैर वो भी पढ़ने लगा पढ़ा क्या रहा था बस बकचोदी पेल रहा था फिजिकल एजुकेशन में पढ़ने को वैसे है भी क्या? किसी तरह क्लास का टाइम हुआ बेल्ल बजी तो महासय बोले

सर:- सुनो सब लड़के अगले वीक से स्कूल में टूर्नामेंट स्टार्ट हो जायेंगे तो हर सेक्शन से एक टीम ले रहे है इस बार तो अपने सेक्शन की बना लेना.

और फिर मेरी तरफ देख के बोलै.

सर:- क्रिकेट तो खेलना आता है न.

मैं:- आता है.

सर:- चल तो ये टीम अब तू hi बनाएगा अपने सेक्शन की .

मैं:- मैं कैसे मैं तो जनता भी नहीं हु किसी को..

सर:- अरे तो यो बैठ्या तेरे बगल में भुंडी सिकल का इस्ते पूछ ले.

वो हरयाणवी में बोलै तो क्लास हसने लगी और मुझे भी हसी आ गयी ओर आकाश बिचारा नीची मुंडी करके बैठ गया.

इतने में वो टीचर भी चला गया अब 5 मिनट थे हमारे पास.

मैं:- ोयी चल वाशरूम चल.

हम दोनों वाशरूम गए तो सामने से मुसीबत आ रही थी जो की आर्यन था उसने हमे रोका और मेरा इनके मुँह लगने का या बकवास सुनने का कोई मैं नहीं था लेकिन कोई लफड़ा न हो इसलिए चुप था मैं

आर्यन:- और आकाश यही है क्या वो?

आकाश ने हाँ में मुंडी हिल्लायी तो उसने मेरी तरफ देखा.

आर्यन:- तो देख भाई तेरा जो भी नाम है, तेरी वजह से क्लास से निकला उसका कोई अफ़सोस न है मुझे लेकिन तू प्रीती से दूर रहेगा नहीं तो इस स्कूल में hi नहीं पूरी दिल्ली में जीना हराम कर दूंगा.

व्हाट थे फ़क! मैं शांत क्या हो जाओ लोग सर पे मूतने लगते है ये लौड़ा मुझे परेशां करेगा.

मैं:- फर्स्ट ऑफ़ आल it's एक. और दूसरी बात हु थे फ़क इस थिस प्रीती? देख भाई वो जो भी है तेरी बेहेन, गफ, रखैल मुझे तुझसे और उससे कोई मतलब नहीं है इसकिये आइंदा से रास्ता न रोकियो.

और इतना बोलके में वह से निकला hi था की उसकी आवाज़ से एक बार फिर रुका.

आर्यन:- यहाँ कैमरा लगे है इसलिए छोड़ रहा हु लेकिन अगले वीक टूर्नामेंट में तेरी हालत कुत्तो जैसी कर दूंगा.

मैंने उसको एक लुक दिया की सीरियसली वो ऐसा कर देगा, ाजजी लुंड मेरा इसके जैसो को अपने लोडे पे बिठा के झूला झूला दू.

खैर मैं और आकाश जल्दी से वाशरूम में घुसे और मूत्र विषर्जन करने लगे.

मैं:- अबे टीम कैसे बनेंगे में.

आकाश:- अबे अपने सेक्शन में 70 बचे है और 70 में से 40 लड़के और 40 में से 2 हम फिक्स है तो बाकि के 9 और चूसे कर लेंगे.

मैं:- ठीक है तो कल तू लिस्ट दियो मुझे.

आकाश:- ोोककक. और तू उस आकाश से दूर रह भ्ह.....

उसकी आवाज़ उसके में अटक गयी क्युकी मैंने उसकी गुड्डी पकड़ के दिवार से चिपका दिया था, क्युकी बार बार एक नाम और एक बात सुनके फ़्रस्ट्रेशन हो रहा था मुझे, पर दिमाग में आया no काण्ड. इसलिए मैं उसे छोड़ दिया.

Main:-sorry! और देख आगे से उसका नाम न लियो मेरे सामने. और ये भेनचोद प्रीती कोण है उसके सामने पेलुँगा उसे.

आकाश:- उसकी एक्स!

मैं:- हम्म्म, व्हाट उसकी एक्स वो अपनी एक्स के लिए मुझसे लड़ रहा था.

आकाश:- हां सायद.

और फिर हम दोनों क्लास में आये और नेक्स्ट टीचर हमारा वेट कर रही थी, उसने भी मेरा इंट्रोडक्शन लिया और फिर पढ़ने की हिदायत देके पढ़ने लगी. केमिस्ट्री का पीरियड भी ऐसे hi निकल गया. और अब लास्ट पीरियड बचा था वो भी एक सर ने लिया और फिर बजी बेल्ल मैंने अपना बैग उठाया और तेज़ी से क्लास से निकला क्युकी सिगग्रेटे पिने का मैं कर रहा था. आकाश भी मेरे साथ आ गया

मैंने बाइक स्टार्ट की लेकिन वो पार्किंग में आया तो था लेकिन उसने बाइक वगैरह नहीं ली.

मैं:- क्यों बे बाइक वगैरह नहीं लाया क्या?

आकाश:- होंगी तब लाऊंगा न.

मैं:- अबे तो इसमें साद होने वाली कोनसी बात है. तेरे पापा क्या काम करते है वैसे?

आकाश:- मेरे पापा वैसे तो गवर्नमेंट एम्प्लोयी है पर हम फिर भी इतने अमीर नहीं है की इस स्कूल को अफ़्फोर्ड कर सके.

मैं:- तो फिर यहाँ कैसे?

आकाश:- स्कालरशिप से.

मैं:- ओह्ह तो पढ़ने वाला है तू, तो एक फ्री की एडवाइस देता हु मुझसे दूर रह और अपनी पाध्ये पे ध्यान दे क्युकी मेरे साथ रहने वाले जल्दी बर्बाद हो जाते है.

वो कुछ बोलता उससे पहले मैंने बाइक स्टार्ट की और निकल गया. मेरे को उसकी स्टोरी सुनके कोई हमदर्दी नहीं हुई क्युकी ये तो इंडिया मैं हर दुसरे बन्दे की कहानी है, अमीर नहीं हो तो बनो, सीधे रस्ते से म्हणत करो या मेरी तरह लूटपाट मचा दो. खैर मैं घर पंहुचा और दूर खोलते खोलते खाना आर्डर किया और एक सिगग्रेटे जला के सत्ता मारा और फिर बाथरूम में नहाने घुस गया बहार आया तो खाना भी आ चूका था तो मैंने पहले खाना खाया और टाइम देखा तो 2 बज रहे थे. मैंने सोचा सो लू थोड़ा. पर पहले जॉन को कॉल मिलाया.

जॉन:- hello बरोथेर.

मैं:- शाम को 7 बजे मेरे घर पे आ जाना, कही जाना है.

जॉन:- एड्रेस.

मैं:- जॉन मैं कोई दूध पिता बचा नहीं हु, तुम लोगो को मेरा पास्ट, प्रेजेंट, फ्यूचर सब पता है तो पहुंच जाना टाइम पे.

जॉन:- वेपन्स लेके औ क्या...

मैं:- अबे वॉर लड़ने नहीं जा रहे एक पिस्तौल ले आना बस सेफ्टी के लिए और कुछ नहीं.

और इतना बोलके मैंने फ़ोन कट किया और सो गया.

शाम को अलार्म से 6 बजे मेरी आँख खुली और उठते hi मैंने सिगग्रेटे जलाई और आगे के बारे में सोचने लगा. 6:45 पे मैं खड़ा हुआ और कपडे वगैरह पहने और गन लोड करके पंत में ठुसी और ठीक 7 बजे जॉन अपनी कार लेके मेरे घर पंहुचा मैं लॉन में hi बैठा वेट कर रहा था उसका घर को लॉक करके.

जॉन:- चलो मेरी कार में hi चलते है.

मैं:- जहा हम जा रहे है वह कार नहीं जाती. इसलिए इसे अंदर ठूस और मेरे साथ बाइक पे बैठ.

और फिर उसने अपने कार मेरे घर की पार्किंग में ठूसी और फर बहार आके गेट बंद किया और मेरे पीछे बैठ गया और मैंने बाइक दौड़ा दी.

जॉन:- वैसे हम जा कहा रहे है?

मैं:- गुंडा बस्ती में.

जॉन:- व्हाट? तुम गुंडा बस्ती में जा रहे हो ऐसे अकेले वो भी बाइक पे, वो देखते hi काट देंगे हमे.

मैं:- अबे शांत हो जा बे मुँह पे रुमाल बांध लियो और सराफत से चलियो.

30 मिनट में हम उस बस्ती में एंटर हुए, एक्चुअली ये एक वार्ड था जहा गुंडे, chor-uchake रहते है, यहाँ पे घर भी जजर हालत में थे और सकरी सकरी गालिया गंदगी से भरी हुयी कई लोगो ने बकरी और मुगी पाल राखी थी कसाईयो की दुकान थी वह पे मतलब एक दम वाहियाद जगह.

खैर मैंने बहार hi बाइक रोकी और और हम दोनों पैदल तीन चार पतली गलियों को पार करके एक सिंगल फ्लोर के घर के पास रुके, इसे घर कहना गलत होगा एक्चुअली दो कमरे थे बस वो.

मैं गेट खड़काया तो एक आंटी ने दरवाज़ा खोला.

आंटी:- अरे साहब आप.

मैं:- असलम कहा है.

आंटी:- वो तो दोस्तों के साथ गया है.

मैं:- बुलाओ उसे.

आंटी अंदर गयी और असलम को फ़ोन वगैरह करने लगी, इतने मैं तुम लोगो को बता दू की असलम अभय के लिए काम करता था इनफार्मेशन निकलने में और ये hi मुझे आज हर्ष के रियल स्टेट ऑफिस में काम कर रहे उसके प् के घर लेके जाने वाला था चले तो हम कल hi जाते लेकिन एक बाँदा और था जो रास्ता जनता था वो हमे लेके जाता पर वो भसदक़ा मिला नहीं कल पूरा 1 घंटा उसे ढूंढा मैंने और असलम ने.

आंटी:- आओ साहब अंदर आओ, वो बस 5 मिनट में आ रहा है.

मैं:- नहीं हम ठीक है.

5 मिनट बाद असलम भागता हुआ आया तो हम उसकी तरफ hi चल दिए.

मैं:- कहा था तू भसडक.

असलम:- अरे भाईजान वो मैं उस आदमी को धुंध रेला था.

मैं:- मिला फिर.

असलम:- हां दुसरे मोहल्ले में जुआ खेल रहा है.

मैं:- ले ये तेरे घर पे रख दे और इनको उड़ाइयो मत.

मैंने जेब से 6-7 2000 के नोट उसको दिए, उसने वो पैसे लेके अपनी माँ को दे के आया और फिर हम तीनो पैदल hi चल पड़े.

असलम:- वैसे भाईजान ये अंकल कोण है.

मैं:- तेरे काम की चीज़ नहीं है वो.

जॉन कुछ नहीं बोल रहा था बस chup-chap चल रहा था मुँह पे रुमाल बांध के सायद उसे ये जगह सूट नहीं कर रही थी.

असलम:- वैसे वो मानेगा नहीं चलने के लिए.

मैं:- वो क्या उसका बाप भी जायेगा.

5 मिनट बाद हमे एक जगह पहुंचे जहा 7-8 आदमी बैठे ताश पेल रहे थे, खेल तो 4 रहे थे बाकि तो सुप्पोर्तेर्स थे.

असलम ने इशारे उस आदमी की तरफ इशारा किया की ये है वो और उसके बाद वो वापिस चला गया

मैं और जॉन आगे बढे और उनके पास पहुँच के मैंने उस आदमी के कंधे पे हाथ रखा और बोलै

Main:-side में आ जरा.

वो:- ू मैं कही नहीं जाऊंगा बाज़ी चल रही है मेरी.

मैं:- अबे आ न भसडक, क्यों लुगाई की तरह नखरे कर रहा है.

अब सायद उसके साथ गुस्सा हो गए और वह खड़ा एक ज्यादा ताव में आ गया.

वो:- ोू मदरररर

उसकी आवाज़ हलक में रह गयी क्युकी जैसे hi वो उठा और उसने गली बकनी चाही मैंने खींच के उसके पेट में लात दी जिससे वो वही गिर गया क्युकी सकल से hi नशेड़ी था अब अपने दोस्त का बदला लेने के लिए कोई आगे बढ़ता उससे पहले जॉन ने उनपे दो गन तान दी और गन देखते hi उन सब की गांड चौक खा गयी और वो सब सांत हो गए. अब जॉन ने गन निकल ली तो मैं क्यों पीछे राहु इसलिए मैं भी अपनी गन निकली लॉक खोला और उस कालिया नाम बताया था असलम ने मैं उसकी गुड्डी पकड़ के खड़ा किया और उसके माथे पे गन रख के बोलै.

मैं:- अब चलेगा बीटा.

कालू:- हां भाई.

मैं और जॉन उसे साइड में लेके आये और हम दोनों ने अपने गन अंदर राखी और मैंने उसके खींच के कान के निचे दिया एक जिससे वो निचे गिरा और कान पे हाथ रखके खड़ा हो गया, जॉन भी शॉक हो गया था क्युकी मैंने बेफालतू में मारा था.

मैं:- चल मुझे तू अमर चांदनी के घर ले चल.

ये नाक सुनके वो शॉक हुआ फिर दर के बोलै.

कालू:- चलो भाई.

मैं:- और वो थप्पड़ इसलिए मारा था ताकि तू एक बार में hi बता दे

उसके बाद हम तीनो हमारी बाइक के पास आये और उस कालू को बीचमे बिठा के उसके बताई हुयी जगह पे पहुंचे तो वह एक 2 फ्लोर का आलीशान सा घर था उसके बहार 2 सिक्योरिटी गॉर्ड निचे थे और 2 उप्पेर टेरेस पे. मैंने उस घर को ध्यान से देखा और फिर वह से निकल दिए उस कालू को छोड़ा और उसे बोलै की आगे से यही मिलियो. उसको छोड़के हम घर पहुंचे तो रात के 9 बज चुके थे. और इस टाइम मैं और जॉन मेरे लॉन में बैठे थे.

जॉन:- इस अमर का क्या करना है.

मैं:- इसे उठाना है.

जॉन:- उसकी क्या जरूरत है वो तो हम वैसे hi कर देंगे बस सीबीआई का कार्ड दिखा के उससे पूछ लेंगे जो पूछना है.

मैं:- नाना हर काम लीगल तरीके से नहीं करना इसको मेरे तरीके से करेंगे.

इसके बाद हमने कल लिए प्लान डिसकस किया और फिर जॉन चला गया और उसके जाते hi मेरा डिनर भी आ गया तो मैंने डिनर किया और फिर मनीषा और विशाल से बात की और फिर कब आँख लगी पता hi नहीं लगा.

तो बे कॉन्टिनोएड ??

(4201 वर्ड्स :स्वेट: )
 
अपडेट:-30

मैं सके उठा और फिर वही बोरिंग रेगुलर काम निपटाए और बिना ब्रेकफास्ट किये निकल गया स्कूल आज थोड़ी प्रॉब्लम थी मुझे पेट में दर्द था इतना नहीं था पर था, आज मैं धीरे धीरे स्कूल गया रस्ते से एक पैकेट सिगग्रेटे का लिया और फिर उस सिक्योरिटी गॉर्ड के पास बाइक रोकी.

सिक्योरिटी:- यहाँ क्यों बाइक कड़ी कर रहा है? अंदर जा.

मैं:- अबे रुक जा क्यों गुस्सा हो रहा है.

मैं उसके केबिन में गया.

मैं:- यहाँ कोई आता तो नहीं टीचर वगैरह.

सिक्योरिटी:- नहीं कोई नहीं था लेकिन तुझे क्या करना.

मैंने बिना कोई जवाब दिए सिगग्रेटे जलाई और पिने लगा.

सिक्योरिटी:- अबे मरवाएगा क्या खड़ा हो.

मैं:- अबे तू भी पिले एक क्यों गुस्सा हो रहा है.

उसने मुझे एक लुक दिया और फिर हाथ आगे बढ़ा दिया, मैंने उसे देखके स्माइल करि और उसे एक सिगग्रेटे दी.

मैंने सिगग्रेटे पि और फिर वापिस बाइक स्टार्ट करके कैंपस में एंटर हुआ और उसको पार्किंग में ठूसा. तभी वह आकाश प्रकट हो गया.

आकाश:- गुड मॉर्निंग भाई.

मैं:- लिस्ट लाया.

आकाश:- हां लाया हु.

मैं:- चल कैंटीन में चलके बात करते है.

फिर हम दोनों कैंटीन में आये और एक टेबल पे बैठे और मैंने उस वर्कर, वक्तर या जो भी बोल तुम उसे, उसको बुलाया.

मैं:- जा लेके आ जो बोलै था.

वो मुंडी हिल्ला के चला गया और फिर एक ट्रे में दो प्लेट और एक ट्रे में चिकन सैंडविच भरे थे.

मैं:- एक ब्लैक कॉफ़ी और ला दे मुझे.

और इतना बोलके मैं टूट पड़ा खाने पे और वो आकाश भी मुझे ऐसे खता देख खाने लगा. 10 मिनट में सब ख़तम फिर मैंने कॉफ़ी उठके पिने लगा जो वो लोंदा देके गया था. और फिर सब ख़तम करके हम क्लास की तरफ भागे क्युकी हम पुरे 5 मिनट लेट थे.

मैं:- मई ी के इन ma'am.

Ma'am:- no, स्टैंड आउटसाइड थे क्लास एंड don't मूव.

मैं:- व्हाट? प्लीज ma'am, वे विल नेवर दो थिस अगेन.

लेकिन वो लौड़ी कुछ नहीं बोली और फिर हम दोनों भी चुचाप कॉरिडोर में खड़े हो गए.

आकाश:- भाई ये सत. ज़ेवियर है यहाँ रूल सबसे इम्पोर्टेन्ट होते है.

मैं:- अबे मेरा लौड़ा भी न माने इनके रूल्स, थोड़े दिन रुक जा सारे रूल्स न तोड़ दिए तो.

आकाश:- भाई सच में निकल देंगे तुम्हे.

मैं:- अबे सब छोड़ आजा एक रूल तोड़ने चले.

वो कुछ बोलता इससे पहले में उसे खींचता हुआ बाथरूम में ले गया और इस वक़्त बाथरूम में कोई नहीं था क्युकी फर्स्ट पीरियड था तो कोई नहीं आता इधर, मैंने आकाश को ढाका दिया और अंदर से गेट बंद करके चैन खोली बैग की (तुम क्या सोचे, गे नहीं हु बस) बैग की चैन खोल के सिगग्रेटे निकली और लाइटर से जलाई और सत्ता मारने लगा.

आकाश:- भाई मुझे जाने दे यार कोई देख लेगा तो तेरा पता नहीं मुझे निकल देंगे.

मैं:- अबे फत्तू तुझे कोई नहीं देख रहा. ाचा तू भी पियेगा.

पहले तो वो थोड़ी देर न नकुर करता रहा और फिर हां बोल दी. मैंने उसे भी दी एक.

मैं:- मुझे पहले से पता था तू सिगग्रेटे पिता है तेरी आँख देख ली थी मैंने.

आकाश:- आँखों से पता लगता है सिगग्रेटे का.

मैं:- अबे सिगग्रेटे देखके जो तेरी आँखों में डेस्पेरेट होने के भाव लालच के भाव थे वो मैंने देख लिए थे.

आकाश:- अरे भाई तुम तो गज़ब हो.

मैं:- चल मस्का मत मार. एक काम करेगा मेरे लिए.

इस टाइम हमने सिगग्रेटे पि ली थी बस चलते हुए क्लास की तरफ जा रहे थे.

आकाश:- कैसा काम और मैं hi क्यों?

मैं:- देख तुझे पैसे दूंगा और थोड़े बहुत भी नहीं बहुत सारे बस ये पता कर इस स्कूल के कोण कोनसा स्टूडेंट कोनसे क्लब में पार्टी करता है.

आकाश:- बहुत मुश्किल है ये तो.

मैं:- तभी तो पैसे दूंगा, भसडक और क्या मेरी मुठ मारवउ.

आकाश:- अरे भाई कर दूंगा न.

मैं फिर कुछ नहीं बोलै बस चुपचाप क्लास के बहार खड़ा हो गया और हम दोनों बस वेट करने लगे की कब वो लौड़ी बहार निकले कब हम अंदर जाए, एक तो पेट में दर्द हो रहा है सुबह से और उप्पेर से यहाँ खड़े पता नहीं कितना टाइम हो गया. तभी भगवन ने या पेओन ने हमारी दुआ कबूल की और बेल्ल बजी और वो चुटिया मीनू बहार आयी.

मीनू:- कल से टाइम पे आना.

आकाश:- यस ma'am.

उसके बाद हम दोनों आये और अंदर आते hi मेरी नज़र फर्स्ट बेंच पे पड़ी और मेरे कदम वही रुक गए, "क्या कोई इतना भी खूबसूरत और क्यूट हो सकता है?" मेरे मैं से यही सब्द निकले उस साक्ष को देखके, ये सायद पहली लड़की थी जिसे बस देखने का मैं कर रहा था उसे देख के दिल में घंटिया बज रही थी.

उसका क्यूट सा सूंदर सा चेहरा लाल- लाल फुले हुए गाल, छोटी सी नाक, मोती मोती आँखे, पतले गुलाबी होठ, सुराही दार गार्डन, गालो में डिंपल :लव: . बस मैं कर रहा था की साड़ी जिंदगी यही गुज़र जाए बस मैं उसे देखता राहु और वो यही बैठी रहे. ऐसी फीलिंग तो मनीषा के लिए भी नहीं आयी, हलाकि मैं उसे पसंद करता था क्युकी वो सबसे खूबसूरत लगती थी लेकिन ये तो पारी है इसने तो इस पत्थर दिल को भी धड़का दिया.

"एक" "एक" "अबे चुतियो जैसे क्यों खड़ा है" आकाश ने मुझे झिंझोर के हिलाया और तब में होश में आया और क्लास में देखा तो सब मुझे घर रहे थे क्युकी मैं पिछले 5 मिनट से एक लड़की को घर रहा हु वो भी एक जगह खड़े इससे ज्यादा चुटिया बात क्या होगी, लेकिन मैंने फिर उस लड़की की तरफ देखा तो मैं फिर उसमे खोने लगा क्युकी वो मुझे गुस्से से देख रही थी और वो गुस्से में और क्यूट लग रही थी क्युकी उसके लाल फुले हुए गाल और फूल गए थे छोटी सी नाक लाल हो गयी थी, अभी मैं कुछ और सोचता इतने में टीचर आ गए और आकाश मुझे खींचता हुआ ले गया और सबसे पीछे ले जाके बिठा दिया.

वो टीचर पढ़ने लगा लेकिन मैं तो बस उसे hi देख रहा था और उसको देखते देखते hi पूरी क्लास निकल दी, अगली क्लास भी उसके दीदार में hi गुज़र गयी और फिर रेसस्स की बेल्ल हुयी और आकाश ने सभी को ग्राउंड में आने को बोलै 10 मिनट में क्युकी ये लौड़ा मॉनिटर है.

हम दोनों ग्राउंड की तरफ चल दिए. बिच में आकाश बोलै.

आकाश:- उस लड़की से दूर रह.

मैं:- क्यों?

आकाश:- क्युकी वो hi प्रीती महरा है और वो तेरे से न पत्नी की और अगर आर्यन ने तुझे देख लिया तो वो तुझे नहीं छोड़ेगा.

मैंने उसकी बातो पे कोई ध्यान नहीं दिया क्युकी मुझे तो बस प्रीती चाहिए थी. खैर हम दोनों ग्राउंड में पहुंचे और अपने जोन में जाके बैठ गए. (थोड़ा ग्राउंड के बारे में बता दू की ये हमारी स्कूल बिल्डिंग के पीछे है और ये बहुत बड़ा है मतलब बहुत बड़ा, इसमें हर क्लास के सेक्शन वाइज जोन बना रखे है जिसमे हर स्टूडेंट को अपने जोन में hi रहना पड़ता है, वैसे तो ये गांडू रूल है लेकिन डिसिप्लिन रहता है इससे ).

हम दोनों बैठे hi थे की आकाश ने मुझे लिस्ट दी जिसमे 22 लड़को के नाम थे और मुझे बस 9 सेलेक्ट करने थे, मैं वो लिस्ट पढ़ने लगा और थोड़ी देर में hi पूरी क्लास उधर आ गयी और उनके साथ hi हमारी क्लास टीचर भी.

सब स्टूडेंट्स आके बैठे और वो हमारे सामने आके कड़ी हो गयी.

Ma'am:- हु इस कप्तान ऑफ़ योर टीम?

मैं कुछ नहीं बोलै क्युकी मुझे पता नहीं था कोण कप्तान है लेकिन आकाश खड़ा होक बोलै.

आकाश:- ma'am एक.

Wtf मैं कप्तान कब बना. लेकिन मैं खड़ा हुआ और ma'am के पास जाके खड़ा हो गया.

Ma'am:- ये चौधरी सर ने भी नए लड़के को कप्तान बना दिया, चलो कोई नहीं जल्दी सेलेक्ट करो मुझे लिस्ट सबमिट करवानी है.

मैं:- लिखो फिर. एक , आकाश, मनोज, परवीन, राहुल, रॉकी, शुभम ,ेट्स ेट्स (क्युकी सबके नाम याद न रहते इसलिए मैंने मैं लिख दिए)

Ma'am:- ोककक लेकिन तुमने अभी का नाम क्यों नहीं लिखा.

मैं:- क्युकी वो चास्मिस है और वो चस्मा उतर के बोल फेकेगा तो उसे कुछ नहीं दिखेगा.

Ma'am:- तुम ऐसे किसी के बारे में नहीं हॉल सकते.

मैं:- सॉरी तो कर लो उसे भी ऐड.

Ma'am:- इन सबकी तो यूनिफार्म है लेकिन तुम्हारी कल बन जाएगी तो बताओ क्या नंबर रैह्वण चाहोगे.

मैं:-69

और एक बार फिर क्लास मुझे घूरने लगी लेकिन कई लोग है भी रहे थे जो हरामी थे.

लेकिन उसके बाद कुछ ख़ास नहीं हुआ क्युकी आगे के दो पीरियड खाली थे टीचर hi नहीं आये लोदु और लास्ट पीरियड भी मैंने प्रीती को देखते हुए गुज़र दिया. छुट्टी की बेल्ल बजी और हम सब बहार को चल दिए, मैं और आकाश साथ चल रहे थे की अभी भी हमारे साथ आ गया.

अभी:- भाई तुम्हे ऐसे नहीं कहना चाहिए था सबके सामने..

मैं:- भसडक गांड भी तोड़ दू मैं तो तेरी सबके सामने..

वो सांत हो गया एक दम से इसलिए आकाश बोलै.

आकाश:- अरे वो मजाक कर रहा है.

इसके बाद वो चुटिया गया और आकाश मेरे साथ चल दिया पार्किंग तक.

मैं बाइक निकली और आकाश को इशारा किया बैठने का और वो झट से बैठ गया और मैं वह से चलने को हुआ तो देखा प्रिय एक कार में बैठ रही है सायद ड्राइवर लेने आया है उसको. मैंने उसे देखा और फिर बाइक दौड़ा दी आगे.

मैं:- काम बोलै था वो हुआ.

आकाश:- आधा हुआ है भाई लेकिन कुछ बड़ी बाते भी पता चली है.

मैं:- हम्म्म पूरा करके एक साथ बताइयो सब.

इसके बाद मैंने उसे रस्ते में ड्राप किया और घर आ गया. घर आते hi मैं पहले तो खाना आर्डर किया और फिर रूम में जाके बाथरूम में घूस गया और शावर लेके बहार आया तो किरण का फ़ोन था.

मैं:- hello.

किरण:- hello, कैसे हो?

मैं:- मैं तो ठीक हु तुम कब आ रही हो.

किरण:- कल आ जाउंगी एक सरप्राइज के साथ.

मैं:- ोकक वेटिंग, चलो ब्यय खाना आ गया मेरा.

उसके बाद मैंने खाना खाया और रात की प्लानिंग करने लगा और प्लान बना के मैंने सारा को मैसेज किया की वो रात को ठीक 10 बजे मेरे घर पे मिले और फिर मैं सो गया क्युकी रात भर जागना था.

शाम को 7 बजे मेरी आँख खुली फ़ोन कॉल से देखा तो राज का था.

मैं:- hello.

राज:- तुम क्या करने वाले हो जो सारा को बुला रहे हो और जॉन और अजय को भी.

मैं:- काम है बहुत जरूरी.

राज:- तो सारा क्यों? वो बस एक फाइटिंग मशीन है और तुम कोनसा फाइट करने जा रहे हो.

मैं:- लिसेन! मैंने कुछ सोच के बुलाया है उसे और मैं लीडर हु टीम का तो मुझे डीडे करने दो कोण क्या करेगा? तुम्हारा काम हो रहा है न बस देखते जाओ आराम से.

राज:- ोककक ोककक कूल करो जो करना है बस सारा को कण्ट्रोल मैं रखना.

मैंने फिर जॉन को कॉल किया और उसे उसका काम समझाया और रात को ठीक 10:30 बजे अपनी पोजीशन लेने को बोलै.

अब 8:30 बज चुके थे और मैं बस वेट कर रहा था 10 बजने का इतने मैं खाना आर्डर किया और खाना आते hi डिनर किया और फिर रूम में जाके अपनस ास्सास्सिन वाला हुड डाला और एक मास्क उठा के अपनी जेब में डाला सीबीआई वाली गन नहीं ले सकता था इसलिए लोकल वाली गन लोड की और एक मैग भी साथ लिया और ये सब करने में 10 बज गए और ठीक 10 बजे के 1 मिनट पे दुर्बल बजी, मैं समझ गया सारा आ गयी है इसलिए फटाफट निचे आया और गेट खोल के बहार आया और फिर गेट लॉक करके उसको देखा तो लुंड खड़ा हो गया क्युकी वो बहुत हॉट लग रही थी ब्लैक जीन्स और ब्लैक t-shirt में, मैं किया अभी पेल दू इसे लेकिन जज़ज़्बातो पे काबू रखते हुए मैंने उसे बोलै.

मैं:- कार अंदर पार्क कर दो अपनी.

सारा:- तो जायेंगे किसपे?

मैं:- बाइक से.

सारा:- मैं ड्राइव करुँगी.

मैं:- ोककक, बस पेअर से ब्रेक न मारना.

उसने कुछ नहीं बोलै बहार जाके अपने कार स्टार्ट की और मेरी पार्किंग में ठूस दी और सॉरी घर की पार्किंग में. और फिर बाइक स्टार्ट करके मुझे बैठने का इशारा किया. मैं भी जल्दी से बैठ गया थोड़ा डिस्टेंस बना के ताकि जेंटलमैन लागु. लेकिन सायद ये इसे पसंद नहीं आया क्युकी उसने एक दम से रेस देके क्लच छोड़ा और बाइक एक बार आगे से उठी और फिर उसने दौड़ा दी और ऐसा होने पे मैंने अपने दोनों हाथ उसपे लपेट दिए और उससे चिपक के बैठ गया, उसने इस चीज़ पे कोई गौर नहीं किया बस बाइक बढ़ा दी लोकेशन की तरफ.

ठीक 20 मिनट बाद हम एक बार के बहार खड़े थे और बाइक हमारी थोड़ी दुरी पे थी.

सारा:- तुम मुझे यहाँ पार्टी करने के लिए लाये हो.

मैं:- नू डार्लिंग यहाँ से एक फैसल नाम का बाँदा है उसे पकड़ना है और उसे पकड़ेंगे तो उसके बन्दे और ये काले पीले बाउंसर बिच में आएंगे तो तुम्हे इन्हे फोड़ना है.

सारा:- ओह्ह्ह फिर तो मजा आ जायेगा तुम्हारे साथ काम करके.

मैं:- तो चले फिर और सामान लायी हो अपना.

उसने हां में मुंडी हिल्लायी और मैंने उसका हाथ थाम लिया क्युकी यहाँ सिर्फ कपल एंट्री थी. हम दोनों अंदर गए तो गॉर्डस ने मुझे हाथ से चेक किया की कुछ उलटी सीधी चीज़ तो नहीं है लेकिन उन्हें क्या पता था की मेरी गन तो सारा के पास है और उसकी चेकिंग हुयी नहीं तो हम दोनों अंदर आये. अंदर का माहौल थोड़ा रंगीन था कॉर्फूल डीएम लाइट्स जल रही थी म्यूजिक बज रहा था लेकिन ज्यादा लाउड नहीं था लोग बैठे सरब सबब दोनों के मजे लूट रहे थे. मैंने चारो तरफ नज़र घुमाई और फैसल के आदमी गिनने लगा. और ये सब कैलकुलेशन करते करते हम दोनों काउंटर पे आये और एक एक बियर आर्डर करके पिटे हुए इधर उधर घूमने लगे.

मैं:- फैसल के 8 आदमी स्पॉटेड है, फैसल कहा पता नहीं होना यही, चाहिए और 4 बाउंसर है, टोटल 12 अब एक एक करके सुलाओ सबको.

सारा:- तुम 12 लोगो को मरने वाले हो बहुत बड़ा केस बनेगा ये.

मैं:- don't वोर्री तुम्हारी गन में सीलेंसर है और वो इललीगल है तो तुम बस एक एक करके निपटाओ बस ध्यान रहे कोई सबूत न छूटे क्युकी ये काम हम लीगली नहीं कर रहे है.

सारा:- ोकक तो फर्स्ट फ्लोर के लेफ्ट साइड वाले 2 मेरे

मैं:- और राइट साइड वाले 2 मेरे निचे वालो को बाद में देखते है.

सारा ने मुझे ब्लूटूथ दिया मैंने कान में डाला और चल दिया राइट साइड और सारा लेफ्ट से उप्पेर चढ़ते हुए मैंने अपनी गन निकली जो सारा ने अंदर आते hi दे दी थी, चलते चलते सीलेंसर लगाया इतने टाइम मैं उन दोनों के काफी करीब पहुंच चूका था वो लोग भी इधर उधर देख रहे थे लेकिन फ़ायदा ये था की इस फ्लोर पे और कोई नहीं था. उन्होंने मुझे देखा और वो कुछ समझ पाते इससे पहले मैंने पहले के माथे में गोली मारी जिससे वो धड़ाम से निचे गिरा और म्यूजिक की वजह से कोई आवाज़ भी नहीं हुयी.

दुसरे वाला हिलता उससे पहले मैंने उसपे भी गन तान दी और उसने हाथ उप्पेर कर लिए.

मैं:- फैसल कहा है.

उसने ना में मुंडी हिल्लायी और मैंने दूसरी गोली भी उसकी खोपड़ी में उतर दी.

सारा:- दोने.

मैं:- लेटस मूव.

उसके बाद हम दोनों फिर निचे उतरे और मैंने सारा को लेफ्ट साइड चलने का इशारा किया जहा चार लोग बैठे थे एक कोने में.

मैं:- सारा मास्क लगा लो.

और मैंने भी मास्क लगाया और उसने भी और फिर वो लेफ्ट साइड से आयी और मैं राइट साइड से लेकिन एक ने हमे देख लिया और वो जैसे hi उठा सारा ने गोली मारी सीधा उसकी चेस्ट में और वो सीधा उसके चेयर पे गिरा और उसको ऐसे गिरता देखके उनका ध्यान भी सारा पे गया और उन्होंने उस टेबल को पलट के उसके पीछे छुपे, सारा ने दो गोली मारी जो खली hi गयी लेकिन उनके पीछे मैं खड़ा था मैं एक के कंधे पे हाथ रखा और जैसे hi वो पीछे पलटा उसके माथे में गन दी जिससे वो वही बेहोश और वो दोनों समझ पाते इससे पहले मैंने एक के मुँह पे घुटना दिया लेकिन दुसरे ने मुझे धक्का दिया जिससे मैं पीछे को हुआ लेकिन वो मेरी तरफ बढ़ने के लिए उठा और उठते hi सारा की बुलेट उसकी खोपड़ी में घुस गयी और वो आखरी बाँदा दर गया लेकिन वो भी कुछ समझ पता उससे पहले मैं उसके गले में बुलेट उतर दी और वो वैसे hi बैठा रह गया, उसके गले से खून किसी नल के पानी की तरह गिरने लगा. लेकिन ये सारा काण्ड सबने देख लिया था इसलिए भगदड़ मच गयी थी. और सब बहार भागने लगे थे वेटर वगैरह भी भागने लगे थे लेकिन 4 काले हप्सी बाउंसर हमारी तरफ भागे आ रहे थे.

मैं सारा को इशारा किया और उसने उस बेहोश बन्दे को उठाया और मेरे से मेरी गन भी ले ली ताकि अगर पकड़ा भी जासु तो गन न मिले किसी को पीछे की तरफ हो ली.

मैं:- इसे ले जाओ अजय बहार hi मिलेगा ब्लैक हौंडा सिटी में.

इसके बाद मैंने ब्लूटूथ ऑफ किया और उन बाउंसर्स की तरफ दौड़ लगा दी. मेरे पास बस 15 मिनट थी यहाँ से निकलने की क्युकी सारा ने यहाँ पे बम भी फिट कर दिए थे ये भी हमारे प्लान में था, (एक्चुअली ये फैसल ज़फर का आदमी था और ज़फर हर्ष का तो मेरा मोतिवे था हर्ष का ध्यान दो जगह बाटना एक सीबीआई पे और एक अनजान दुश्मन पर जिससे उसका ध्यान दो जगह बात जाए और हमे आसानी हो उस तक पहुंचने में लेकिन इस अनजान दुश्मन बनने में पुलिस का रिस्क था लेकिन मैंने उनको भी उड़ने का मैं बना लिया था लेकिन ये बात सारा के दिमाग में नहीं थी और न ये हमारे प्लान में, राज मुझपे गुस्सा तो होगा लेकिन देख लेंगे और ये धमाका ज़फर का ध्यान इसके पीछे जो भी है उसपे आएगा और उधर से मैं लीगली उसके पीछे जाऊंगा, अब इस बात को छोड़ते है और आते है प्रेजेंट में)

15 मिनट थे बम फटने और पुलिस को आने में या देर से भी आये मुझे उनसे कोई लेना देना नहीं था इसलिए मैंने उनकी तरफ दौड़ लगा दी और उन चारो के पास पंहुचा तो पहले ने मुझे पंच मारना चाहा तो मैं झुका और झुकते हुए गुलाटी मारी और उनके बिच में आ गया लेकिन मैंने गुलाटी मारते टाइम अपने सॉक्स से रामपुरी निकला और दूसर वाले की जांघ में घोप दिया वो बहुत तेज़ चिल्लाया लेकिन म्यूजिक में उसकी चीख खो गयी जो तीसरे चौथे थे उनकी स्पीड बहुत तेज़ थी इसलिए उनसे इतनी जल्दी रुका न गया और वो दोनों भी पहले के पास पहुंच गए और वो तीनो मुद के मेरी तरफ बढे इससे पहले मैंने अपने नाइफ अपने पास पड़े बाउंसर के गले में घुसा के निकल दिया और वो वही लेट गया, वो लोग अपने साथी का हाल देख के गुस्से में आ गए और मेरी तरफ भाग के एक ने मुक्का मारा मैं बचा तो दुसरे ने मुझे लात दी मेरे हाथ पे जिससे मेरा रामपुरी छूट गया. अब मैं इतना भी त्रिनेड नहीं हु की तीन हट्टे काटते बाउंसर्स को अकेला पेल दू, पर ी हैवे ा प्लान और मैंने अपने ब्लूटूथ ों किया और बोलै.

मैं:- जॉन it's योर टर्न.

और मेरा इतना बोलते hi तीन बुलेट्स एक के बाद एक सिलेंटली आयी और उन तीनो के माथे में घुसी.

मैं:- गुड जॉब नाउ मूव तो थे नेक्स्ट लोकेशन.

जॉन:- पर इतनी जल्दी.

मैं:- यस! जो बोलै है वो करो.

और इसके बाद मैं वह से उठा अपना रामपुरी उठाया और फिर भाग के पीछे वाले गेट से निकला क्युकी 5 मिनट थे बम फटने में और पुलिस का साईरन भी सुनने लगा था. मैं भाग के अपनी बाइक के पास आया और भागते भागते अपने मास्क उतर के जेब में डाला और बाइक स्टार्ट करके नेक्स्ट लोकेशन पे निकल गया.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
अपडेट:-31

मैं बाइक को फुल स्पीड में अमर के घर की तरफ ले जा रहा था.

मैं:- जॉन यू लिसनिंग.

जॉन:- या ी ऍम ों माय वे.

मैं जल्दी से जल्दी ये काम करना चाहता था क्युकी कल कल का दिन था मेरे पास वादे के मुताबिक और कल भी पूरा नहीं था. ठीक 30 मिनट में मैं अमर के घर से पहले पार्किंग सी आती है जहा थोड़ा सुनसान सा एरिया है वह बाइक रोकी और पैदल बढ़ने लगा. इस टाइम दिल्ली में खलबली मची हुयी थी मेरे अकॉर्डिंग सब अपने घरो में जा चुके थे सायद क्युकी गली में कुत्तो के अलावा कोई नहीं दिख रहा था मैं अमर के घर के आगे से गुज़रा जायज़ा लेते हुए तो 2 सिक्योरिटी गॉर्ड गेट पे थे और 2 टेरेस पे. मैं ऐसे चलता हुआ उनके घर के पीछे आया..

मैं:- जॉन वेयर अरे यू?

जॉन:- ी ऍम ों माय पोजीशन. 2 गॉर्डस है निशाने पे.

मैं:- होल्ड! मेरे इशारे पे दोनों डेड चाहिए वो भी 3 सेकंड में.

जॉन:- हो जायेगा.

अब मैं दिक्कत ये थी की इस 2 फ्लोर के बुगलो की छत पे कैसे चदु, फिर नज़र लेफ्ट साइड एक पोल थे जो सायद केबल वालो का था और उससे पुरे एरिया में केबल सप्लाई होती थी इसलिए वो उच्चा भी बहुत था लेकिन प्रॉब्लम ये थी वो छत की दिवार से एक मीटर दूर था और अगर दिवार हाथ न लगी तो सीधा निचे गिरूंगा लेकिन चढ़ना तो था hi. इसलिए मैं मास्क पहना और थोड़ा पीछे हुआ और एक ऋणप लेके सीधा पोल पे छलांग लगायी और फिर उसपे चाहड़ने लगा थोड़ी दिक्कत हो रही थी क्युकी वो पोल लोहे का था और गर्मी की वजह से हाथो में पसीने आ रहे थे लेकिन मैं फिर भी टेरेस के बराबर आया, अब वो दोनों गॉर्डस मुझे आराम से दिख रहे थे और वो दोनों भी इधर उधर घूम रहे थे.

अब था मैं टास्क टेरेस पे कूदना और ये करने में मेरी फैट रही थी बहुत ज्यादा और उधर कूदना है तो थोड़ा और उप्पेर जाके कूदना पड़ेगा लेकिन ये लोग देखलेंगे तो लेकिन मैंने रिस्क लिया और तेज़ी से चाहड़ के टेरेस की तरफ रुख किया और जम्प लगा दी लेकिन जैसे मैंने जम्प लगायी उसी पल उन्होंने मुझे देख लिया..

मैं:- शूट.

और दो साइलेंट बुलेट्स उनके खोपड़ी में घुसी मुझे तो बस उनकी बॉडी फर्श पे गिरने की आवाज़ आयी थी अब मैं उस टेरेस पे लैंड न हो सका और सीधा जाके दिवार से टकराया लेकिन झटके से दिवार का किनारा मेरे हाथ में आ गया.

मैं:- माँ की छूट, घुटने थूक गए.

जॉन:- यू ऑलराइट, तुम दिख नहीं रहे.

मैं:- अबे लटका हुआ हु.

जॉन:- और बन लो हीरो..

मैं:- तेरा काम ख़तम कार में वेट कर जहा मेरी बाइक कड़ी है.

और फिर मैंने दोनों हाथो से जोर लगाया और थोड़ा उप्पेर होक एक पेअर पहले उस दिवार पे डाला और फिर पूरी बॉडी मेरी टेरेस पे थी और मेरे सामने दो डेड बॉडी पड़ी थी. मैंने उनको एक पल देखा और फिर खड़ा होक कपडे झड़े गन निकली दुबारा लोड की और निचे की तरफ चल दिया बिलकुल सिलेंटली और मैं जैसे hi 1सत फ्लोर पे आया तो लाइट्स ऑफ थी मैंने सिलेंटली वह पे एक एक रूम को खोल के देखा लेकिन उनमे से किसी रूम में अमर नहीं था एक रूम में एक लड़का था 14-15 साल का और एक रूम में लड़की 14-15 साल की वो आराम से सोये हुए थे मैं उन्दोनो के रूम बहार से लॉक किये अब एक आखरी रूम बचा था लेकिन वो बंद था अंदर से इसलिए इसको बाद में देखेंगे सोचके मैं सिलेंटली निचे उतरा जहा सिर्फ एक रूम था और उसमे एक budha-budhi hi थे बस.

अब क्लियर था की अमर उसी रूम में है मैंने गन पे हाथ टाइट किया और उसका गेट खटखटाया, लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला लेकिन दो तीन बार और गेट बजने से उसने गेट खोला और खोलते hi मैंने उसके मुँह पे पंच दिया खींच के ये उसके लिए अनएक्सपेक्टेड था इसलिए पीछे की तरफ हुआ और मैंने आगे बढ़ के उसकी चाहती में लात दी जिससे वो सीधा बीएड पे गिरा और सायद उसकी वाइफ भी उठ गयी लेकिन उनमे से कोई कुछ बोलता इससे पहले मैं उनपे गन तान दी.

मैं:- बस एक सवाल करूँगा पेण्ड्रीवे या मौत?

अमर:- कोण हो तुम?

मैं:- ये जवाब नहीं है मेरे सवाल का.

अमर:- कोनसी पेण्ड्रीवे मैं नहीं जनता किसी पेण्ड्रीवे के बारे में.

मैं:- नहीं जनता.

उसने ना में मुंडी हिल्लायी और मैंने उसके मुँह पे एक के बाद एक कई पंच दिए.

लेकिन तभी उसकी चुटिया वाइफ ने कोई बटन प्रेस किया जिससे कोई अलार्म सा बजा जैसे कोई उप्पेर आ रहा हो. मेरे पास अब टाइम नहीं था इसलिए मैंने उस अमर की गुड्डी पकड़ी और उसे बालकनी में धकेला और खुद भी बालकनी में आके गेट बंद किया.

मैं:- कार लेके आओ.

जॉन:- इन 30 सेकंड.

अब वो दो गॉर्डस कमरे में एंटर हुए और एंटर होते hi वो बालकनी की तरफ बढे hi थे की मैंने अमर की चेस्ट पे लात मारी जिससे वो बालकनी से सीधा निचे, मुझे पता था एक फ्लोर से निचे गिरा है मरेगा नहीं और उन्होंने जैसे hi गेट खोला मैं भी निचे कूद गया और अमर खड़ा हुआ और खड़ा होते hi मेरे पे लपका लेकिन मैं दी उसके सर पे गन जिससे वो वही बेहोश होक निचे गिरा लेकिन गांड तब मरी जब वो दोनों चुटिया भी निचे कूद गए लेकिन जॉन की कार भी आ hi गयी थी. मैं उन्दोनो को मारना तो नहीं चाहता था लेकिन मैंने उनमे से एक को गोली मारी और जैसे hi दूसरा मेरे नजदीक आया जॉन ने उसे कार की तकर दी और हम लोगो के शोर से आसपास के घरो की लाइट जलने लगी थी इसलिए मैंने उस अमर को उठा के कार में डाला और गेट बंद किया.

मैं:- लेटस मूव जॉन.

और जॉन ने कार पेल दी फुल स्पीड में इतने घरो से लोग बहार आने लगे लेकिन मैंने दौड़ लगा दी बाइक की तरफ पर वो गॉर्ड खड़ा होक मुझपे गन तान hi रहा था की मैं पीछे मुदा और एक बुलेट भागते भागते उसकी चेस्ट में घुसा दी और भाग के बाइक पे बैठा और स्टार्ट करके दौड़ा दी फुल हवा में लिखे बहुत तेज़. मेरा फ़ोन बार बार बज रहा था लेकिन मेरा अभी इस तरफ कोई ध्यान नहीं था थोड़ी दूर आके मैंने बाइक साइड में रोकी और निचे बैठ के लम्बी लम्बी सासे लेने लगा.

मैंने कॉल पिक कर ली क्युकी बहुत बज रहा था और जैसा मुझे अंदाजा था उसी का कॉल था.

राज:- वेयर थे फ़क यू अरे?

मैं:- अभी रोड की साइड हु.

राज:- अभी के अभी ऑफिस पहुँचो घरवाले.

मैं :- ोककक.

मैं ज्यादा बेहेस नहीं करना चाहता था इसलिए दुबारा बाइक स्टार्ट करके राज के घर की तरफ दौड़ा दी काम से काम आधे घंटे में उसके घर पंहुचा. सिक्योरिटी वालो ने मुझे देख के गेट खोला और मैंने भी सीधा बाइक पार्किंग में लगा दी वही अजय खड़ा था.

अजय:- बीटा आज ाचे से खबर ली जाएगी तुम्हारी.

मैं:- देखते है.

अजय आगे आगे चलने लगा और मैं पीछे पीछे, मुझे अब चलने में तकलीफ हो रही थी क्युकी घुटने में बहुत ज्यादा पैन हो रहा था लेकिन किसी तरह हम अंदर पहुंचे और अंदर रौशनी में मैंने खुदको देखा तो चौक गया क्युकी मेरी जीन्स पे खून आ रखा था घुटने पर से मेरे ब्लैक हुड पे खून दिख तो नहीं रहा था लेकिन मेरी चेस्ट में भी पैन था दिवार से टकराने की वजह से.

रात के 1 बज रहे थे और वह पूरी टीम मौजूद थी बाकी घरवाले सो रहे होंगे उनसे मुझे कोई मतलब नहीं था वैसे भी. मैं जल्दी से वह सोफे पे बैठा वो सब मुझे hi घूर रहे थे सारा और जॉन को छोड़के क्युकी इन्होने मेरा साथ दिया था और इनको भी सुनाई गयी होगी.

मैं:- पानी.

पायल ने गिलास में पानी दाल के दिया मैंने पानी पिया और सर टिका के सोफे पे बैठ गया.

राज:- एक तुमने क्या किया है पीछे 3 घंटे में.

मैं:- क्या मतलब.

राज:- तुम्हे थोड़ा सा भी अंदाजा है तुमने क्या किया है यू किल्ड 18 पेओप्लेस इन 3 हॉर्स जिनमे दो पोलिसवाले भी है और एक पुलिस वाला इन्जुरेड है बहुत ज्यादा. हर्ष का प् किडनैपेड है तुमने एक बार उदा दिया है वो तो उसके टच में कोई घर या बिल्डिंग नहीं थी वर्ण वो भी गिर जाती तुम्हे दिल्ली यहाँ मार काट करने के लिए नहीं लाया गया है. अभी तुम्हे हरयाणा भेज दूंगा वापिस.

ये बात उसने बहुत छिलके कही थी और मुझे पसंद नहीं है कोई मुझसे छिलके बात करे.

मैं:- फर्स्ट ऑफ़ आल उन 18 में से सिर्फ 5 को मारा है मैंने और सेकंड बात हर्ष को क्रिमिनल प्रोवे करना कोई हलवा नहीं है, लोग तो मरेंगे ये सुरुवात है अभी सैकड़ो लोग मरेंगे और कई इनोसेंट भी मरेंगे. और तुम मुझे रोक नहीं सकते और तुम्हारी वजह से दिल्ली नहीं आया हु मैं, तुम न कहते तब भी आता और इससे भी ज्यादा तबाही मचता और मुझे कोई नहीं रोक पाटा. और जितने भी लोग मारे उनमे उन बाउंसर और पुलिस वालो को छोड़ के कोई इनोसेंट नहीं था और बार में लाखो का ड्रग्स था इससे बड़ा झटका ज़फर को नहीं लगा होगा अभी तक अब वो बौखलायेगा और कुछ न कुछ जरूर करेगा. वैसे भी मुझे किसी ने नहीं देखा तो कोई प्रॉब्लम नहीं है, पुलिस को करने दो छानबीन सबूत तो वैसे भी कुछ नहीं है.

पायल:- एक्चुअली सबूत है और उसे हम डिस्ट्रॉय भी नहीं कर सकते.

मैं:- कैसा सबूत और हम उसे मिटा क्यों नहीं सकते.

पायल:- मैंने चेक किया था तुम जब बार से भाग के बाइक के पास जा रहे थे वो वह लगे लोकल कैमरा में रिकॉर्ड हो गया और साथ में तुम्हारी बाइक का नंबर भी.

मैं:- ओह्ह फ़क!

पायल:- और हम इसे डिस्ट्रॉय इसलिए नहीं कर सकते क्युकी वो गवर्नमेंट कक्तव है और हमने हैक करके डिस्ट्रॉय किया तो हमे जवाब देना पड़ेगा उन्हें क्युकी उन्हें पता लग जायेगा की किसने ये काम किया है.

मैं:- तुम हैकर hi होना, हैकर के लिए इम्पॉसिबल जैसा कोई वर्ड नहीं होता.

पायल:- ी क्नोव, बूत ी can't.

राज:- शी इस राइट इसमें सीबीआई ऑफिसियल तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकते. तुम्हे ये खुद सोल्वे करना होगा वो भी सुबह होने तक.

मैं:- मैं कोई हैकर थोड़ी न हु, और मैं तो किसी को जनता भी नहीं हु.

पायल:- एक्चुअली एक शख्स तुम्हारी मदद कर सकता है आकर लेकिन किसी को नहीं पता ये कोण है कहा रहता है बस ये तीन बार सामने आया है बैंक से पैसा उड़ने में , दिल्ली पुलिस के सर्वर में घुसने पे, और सबेर सिक्योरिटी वालो के सर्वर में घुस के इसने अपनी खुद की इनफार्मेशन डिलीट की थी. तब इसकी हाइप बहुत ज्यादा बढ़ी तो ये पता नहीं कहा गायब हो गया.

मैं:- आकर! बस नाम पता है और तुम कह रहे हो मैं इसे 3 घंटे में धुन्धु और इसे मनौ की मेरा काम कर. मजाक कर रहे हो क्या?

राज:- मेरे हिसाब से तुम्हे लग जाना चाहिए काम पे क्युकी वक़्त गुज़र रहा है.

मैंने उन 6 को घर के देखा क्युकी उन्होंने अपने हाथ खड़े कर दिए थे मदद न करने के लिए. मैं वह से बहार आया और बाइक निकल के दौड़ा दी अब कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करू कहा जाओ बस दिमाग में एक नाम गूंज रहा था आकर, और सुबह होते hi पूरी दिल्ली पुलिस मेरे पीछे होगी और मेरे साथ सीबीआई पे भी सवाल उठेंगे. क्या करू कुछ समझ नहीं आ रहा था बस आकर, आकर, आकर, तभी मेरे दिमाग में एक तस्वीर आयी और मैंने खींच के ब्रेक मारा, क्युकी मैंने आकर कही लिखा हुआ देखा था, ओह्ह्ह याद आया आकाश की हर नोटबुक पे आकर लिखा है, कही वो hi तो नहीं लेकिन वो तो चुटिया है. अब कन्फर्म तो करना hi था क्युकी गांड फटी हुयी थी मेरी इसलिए मैंने रात के 2 बजे उसे फ़ोन मिलाया 3 बार रिंग जाने पे उसने उठाया.

आकाश:- hello कोण है बे इतनी रात को?

मैं:- आकर!

आगे से कोई आवाज़ नहीं मतलब बिलकुल शान्ति चा गयी फिर थोड़ी देर बाद वो बोलै.

आकाश:- तुम कोण हो? और ये आकर क्या है?

मैं:- भसडक तेरा बाप एक बोल रहा हु. तेरे घर का एड्रेस भेज.

आकाश:- देखो सुबह आना अभी मेरे पेरेंट्स गुस्सा करेंगे

और उसने फ़ोन काट दिया अब क्या करू लेकिन मैंने झट से पायल को कॉल किया

मैं:- Hello, तुम्हे नंबर सेंड कर रहा हु, इसकी लोकेशन चाहिए मुझे अभी.

पायल:- ोकक कनेक्टेड रहो.

मैंने उसे नंबर भेजा उसने 5 मं बाद बोलै.

पायल:- दोने यहाँ से 1 घंटा दूरी पे है एड्रेस ××××××× 2 फ्लोर का घर है और ये नंबर सेकंड फ्लोर के फर्स्ट रूम में है.

मैं:- ोकक मिलते है सुबह.

मैंने कॉल कट के बाइक दौड़ा दी और इस टाइम में फुल स्पीड में जा रहा था क्युकी बात मुझपे आ चुकी थी और रोड भी सुनसान थे सारे करीब 45 मिनट के अंदर में उसके घर पंहुचा बाइक रोकी दुर्बल बजायी. 2 - 3 बार बजायी तो किसी के आने की आहात हुयी अंदर से मैंने अपनी गन निकल ली क्युकी मुझे पता था वो इतनी जल्दी नहीं मानेगा और वो डरा हुआ होगा.

एक आंटी ने गेट खोला और गेट खुलते hi मैंने गन उसपे तान दी और वो चीखती उससे पहले उसके मुँह पे हाथ रखके धकेला अंदर और खुद भी अंदर आके गेट बंद किया.

मैं:- आंटी आराम से चीखो मत.

आंटी:- कोण हो तुम?

मैं:- सीबीआई से

और फिर मैंने उसे एक कार्ड दिखाया जो मुझे राज ने मुझे दिया था ताकि प्रॉब्लम न हो ज्यादा, और वो कार्ड देखके वो सांत हो गयी.

आंटी:- आप यहाँ क्यों आये हो.

मैं:- आपका बीटा कहा है?

आंटी:- क्या किया उसने?

मैं:- वो सब उससे पूछ लेना अभी के लिए हमारे पास कोई न आये.

आंटी ने उप्पेर की तरफ इशारा किया और मैं तेजी से उप्पेर गया और उसके रूम का गेट खड़काया उसने गेट खोला पर मुझे देखते hi बंद करने लगा लेकिन मैंने उसे ढाका दिया अंदर को और खुद भी अंदर आके गेट बंद किया और पलट के देखा तो आकाश ने हाथ जोड़ लिए.

आकाश:- देखो माफ़ कर दो मुझे अब तो मैं वो सब छोड़ चूका हु, आगे से कभी भी नहीं करूँगा.

मैं:- चूतिये ये बकचोदी न पेल और एक काम कर.

आकाश:- क्या काम.

मैं:- कल रात जिस बार में ब्लास्ट हुआ था वह के आसपास किसी कक्तव में मेरी बाइक का नंबर रिकॉर्ड हो गया है वो हटा दे.

आकाश:- तुम थे क्या उस बार वाले काम के पीछे.

मैं:- सुन पंचायत न कर और chup-chap काम कर.

आकाश:- ोककक ोककक करता हु लेकिन मुश्किल है थोड़ा.

मैं:- मुझे नहीं पता कुछ भी कर बस कर दे.

आकाश:- पहले वडा करो मुझे कुछ नहीं होगा इसके बाद.

मैं:- ठीक है मेरे बाप.

इसके बाद वो खड़ा हुआ और अपना पक इन करके उसपे क्या करने लगा मुझे लौड़ा नहीं पता मैं तो बस रूम में इधर उधर घूम रहा था और टाइम देख रहा था इस टाइम मुझे पैन वगैरह कुछ महसूस नहीं हो रहा था..

4 बजने में 5 मिनट थी उससे पहले आकाश बोलै

आकाश:- दोने!.

और मैं वही उसके बीएड पे गिर गया, हास्सश्ष्ठ भेनचोद फाइनली शांति मिली इससे.

मैं:- मेरी टीम में काम करेगा.

आकाश:- सीबीआई में.

मैं:- फ़क सीबीआई, मेरी पर्सनल टीम में.

आकाश:- और पकड़ा गया तो.

मैं:- मौत मिलेगी और जिन्दा रहा तो पैसो में नेहला दूंगा तुझे.

आकाश:- और कोण कोण है टीम में.

मैं:- फ़िलहाल तो मैं hi हु.

आकाश:- सोच के बताऊंगा.

मैं:- चल मैं चलता हु परसो मिलते है.

मैं उनके घर से बहार आया और वापिस बाइक पे बैठा hi था की मेरा फ़ोन बजा मैंने उठाया.

मैं:- hello

राज:- हाउ दो यू दो तहत?

मैं:- बिकॉज़ ी ऍम एक.

राज:- आकर कोण है.

मैं:- उसके पीछे नहीं जाओगे आप क्युकी उसके सामने एक खड़ा मिलेगा हमेसा, इसलिए उससे जितना दूर रहो उतना ाचा है.

और मैंने फ़ोन कट किया और बाइक दौड़ा दी घर की तरफ थोड़ी देर में घर पंहुचा और लॉक खोलके सीधा रूम में जाके बीएड पे गिर गया क्युकी थक गया था मैं बहुत ज्यादा और गिरते hi कब आँख बंद हुयी पता hi नहीं लगा.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
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