अपडेट:-29
मैं सुबह अलार्म से 6 बजे उठा और फ्रेश हुआ, और फिर किचन में जाके ब्रेकफास्ट बनाया और फिर वापिस आके नहाया, ये किरण भी एक वीक बाद आएगी तब तक काम खुद करने पड़ेंगे, नहाके मैंने स्कूल यूनिफार्म पहनी शूज पहने और फिर मिरर के सामने खुद को देखा तो कई दिनों बाद मुँह से निकला "माल लग रहा है बस" खैर बाल वाल सेट करके परफ्यूम वगैरह चिड़कके मैंने बैग उठाया और उसमे गन डाली और फ़ोन जेब में दाल के बाइक बहार निकली, तब याद आया की बस स्कूल कहा है.
फिर गूगल बाबा की मदद से स्कूल देखा जो बस 20 मिनट की दूरी पे था. मैं निकल पड़ा घर से बस थोड़ा सा नर्वस फील कर रहा था की भेनचोद कितने बड़े लोगो के बचे पढ़ते होंगे और यहाँ का माहौल कैसे होगा, सब अपने आप को तीसमारखाँ समझते होंगे लेकिन फिर दिमाग में बूत हु केयर्स ी ऍम एक.
और फिर साड़ी नर्वस्नेस दूर करके मैं स्कूल पंहुचा, बहार hi गेट के उप्पेर एक बड़ा सा बोर्ड लगा था उसपे स्कूल का नाम लिखा था मैंने बाइक अंदर घुसाई तो सिक्योरिटी गॉर्ड ने रोक लिया.
मैं:- अरे क्या हुआ अब.
सिक्योरिटी:- ईद कार्ड दिखाओ.
मैं:- अबे पहला दिन है, आज मिलेगा.
सिक्योरिटी:- तमीज से बात नहीं कर सकते.
मैं:- अबे इससे भी ज्यादा तमीज से बात होती है क्या?
वो कुछ नहीं बोलै बस मुझे घूरते हुए फ़ोन लगाया किसीको जिससे सर सर करके बात कर रहा था और फिर मुझसे मेरा नाम पूछा और फिर राइट साइड वाले कैंपस में जाने को बोलै.
मैं:- सुन कुछ बता इस स्कूल के बारे में.
सिक्योरिटी:- देखो भाई इस स्कूल में तीन कैंपस है नर्सरी विंग, जूनियर विंग और सीनियर विंग. और तुम्हारी सीनियर विंग राइट साइड है, और सत. Xavier's में रूल्स बहुत इम्पोर्टेन्ट है और यहाँ अमीर बाप के बचे गरीबो को सताते है, और यहाँ बहुत कुछ है जो तुम्हे पता लग जायेगा.
मैं:- ये सब मेरे काम की बाते नहीं थी ये बता यहाँ माल कैसी है.
उसने मुझे एक बार मुझे उप्पेर से निचे घुरा और फिर बोलै.
सिक्योरिटी:- बीटा दिल्ली के तो नहीं लगते.
मैं:- सही पकडे हो. चल अब चलता हु टाइम हो गया.
मैंने बाइक आगे दौड़ा दी और राइट साइड मोड़ा तो सामने एक बड़ी सी बिल्डिंग थी जिसके लेफ्ट साइड कैंटीन थी बड़ी सी और उसके चारो तरफ ग्रास, और राइट साइड पार्किंग. मैंने भी सीधा राइट साइड पार्किंग में ठूस दी, वह पे कार्स और बाइक्स देख के अंदाज़ा हो गया की अमीर लोग इधर hi है दिल्ली के. खैर मैंने बाइक कड़ी करि और वाच में टाइम देखा तो अभी 10 मिनट थे क्लास स्टार्ट होने में इसलिए
कैंटीन में चला गया में.
मैं कैंटीन में घुसा तो वह फुल हरियाली थी मतलब माल माल लड़किया हमारे वह तो एक दो hi होती थी और यहाँ तो बस एक से बढ़ के एक लेकिन एक चीज़ अजीब लगी मुझे की मिझे आधे लोग घर रहे थे और आधे लोग मुझे देख के खुस नज़र आ रहे थे और कुछ की आँखों में नफरत, इसका कारन मुझे पता था सीबीआई के साथ इन्वॉल्वमेंट वाली नई जो न्यूज़ देखते होंगे उन्हें पता था मैं कोण हु और जो बिगड़ी औलादे थी उन्हें नहीं पता था सायद.
लेकिन मुझे एक चीज़ और अजीब लग रही थी वो थी ये की सीनियर विंग में 9th,10th,11th,12th के स्टूडेंट्स थे लेकिन यहाँ जो जूनियर्स थे वो बिचारे कोनो में पड़े थे लाडे हुए और 12तह वाले एक दम खुल के, मैंने ये सब 69 सेकण्ड्स में अनलयसे किया और फिर एक चास्मिस लड़का बैठा था और उसके बगल में एक छोड़ू सा लड़का मैं उनके पास वाली सीट पे बिना पूछे बैठ गया.
उनलोगो ने मुझे घुरा लेकिन बोले कुछ नहीं वो चास्मिस तो कुछ बोलना छह रहा था लेकिन झिझक रहा था.
लेकिन मैंने उन लाडो को इग्नोर मारा और उस कैंटीन वाले को अपने पास आने का इशारा किया.
वर्कर:- क्या लोगे?
मैं:- पहले तो बता तो सही क्या क्या है?
उसने दो तीन आइटम के नाम बताये जो मुझे बिलकुल पसंद नहीं बस उन्हेअल्थी फ़ूड.
मैं:- जा तू ऑरेंज जूस लिया.
वो लेके आया और मैंने जुइ ख़तम किया यो बेल्ल बज गयी.
मैं वह से सीधा बहार आया और एडमिनिस्ट्रेशन बिल्डिंग की तरफ चला गया और प्रिंसिपल के ऑफिस के दरवाज़े पे आके पूछा.
मैं:- मई ी के इन सर.
प्रिंसिपल:- ओह्होऊ एक के इन माय बॉय.
बस जहातु भुड़िया इंग्लिश पेल रही है.
मैं:- मम माय ईद कार्ड, माय क्लासरूम, माय सेक्शन.
प्रिंसिपल:- वेट बीटा. तभी उसने घंटी बजायी और बहार से एक 24-25 साल का आदमी अंदर आया, पेओन था सायद.
प्रिंसिपल:- रमेश इसे 12तह सेक्शन ा में ले जाओ और वह क्लास टीचर को बोलना की इन्हे सब कुछ आज hi दिलवा दे.
उस पेओन ने हाँ में मुंडी हिल्लायी और अपने पीछे आने का इशारा किया, मैं भी उसके पीछे चल दिया और ऑफिस से निकल के उसके बगल में.
मैं:- सुन भाई वाशरूम किधर है?
रमेश:- हर फ्लोर पे है.
मैं:- और सिगग्रेटे पिने का जुगाड़.
वो रमेश मुझे घूरने लगा और फिर बोलै.
रमेश:- भूल के भी मत करना ऐसा उस बुढ़िया को पता लगा न तो ाचा नहीं होगा.
मैं:- अबे बुढ़िया की माँ की छूट तू बता न.
रमेश:- भाई मुझे माफ़ कर तू.
और फिर वो चुपचाप चलता रहा और मैंने उसे पुरे रस्ते बोलता रहा की टीचर्स में माल कोण है लड़कियों में माल कोण है पर वो बाँदा कुछ नहीं बोलै, लोदु कही का. खैर हम 3रद फ्लोर पे आये वो भी स्टैर्स से और फिर एक क्लास के सामने रुके.
रमेश:- मई ी के इन ma'am.
मैंने भी उसके बगल से देखा अंदर एक 30-35 साल की माल औरत जिसने ब्लैक साड़ी पहनी हुयी थी उसने हाँ में गार्डन हिला के अंदर आने को कहा.
हम दोनों अंदर आये और फिर रमेश ने उस ma'am को सब कुछ बताया वो भी एक दम एक्सएक्ट जो उस बुढ़िया ने बोलै था.
Ma'am:- ोककक! तुम जाओ. एंड व्हाट इस योर नाम?
लगता है लौड़ी न्यूज़ नहीं देखती,
मैं:- एक.
Ma'am:- तेल्ल में योर फुल नाम.
और फिर पूरी क्लास हसने लगी एक दो सरीफजादो को छोड़ के, है लो बीटा है लो एक दिन सब के मैं में खौफ न जमा दिया तो एक नाम नहीं.
मैं:- अंकित कुमार चौधरी.
Ma'am:- सो, योर रोल no इस 6 एंड चेक ी योर प्रीवियस रिजल्ट्स व्हिच वास् गुड बूत it's सत. सवियर्स. सो बेस्ट ऑफ़ लक.
मैंने वह देखा तो एक बेंच खाली थी और एक छोड़ू सा लड़का बैठा था एक्चुअली ठीक थक था सकल से बस सरीर से मरियल सा था तो मैं उसके पास बैठ गया थर्ड बेंच पे और एक बात मैंने गौर की यहाँ लड़के लड़की साथ बैठ सकते है और हमारे स्कूल में ऐसा नहीं था.
खैर उसके बाद वो ma'am फिजिक्स पढ़ने लगी और मैं बस ब्लैक बोर्ड को घूरे जा रहा था और दिमाग में बस ये चल रहा था की आज शाम को क्या करना है.
मेरा ध्यान बेल्ल की आवाज़ से टुटा और फिर वो ma'am मुझे जाते हुए बोली.
Ma'am:- मीट में इन रेसस्स.
मैंने बस हाँ में मुंडी हिल्लायी और वो चली गयी और उसके जाते hi वो जो लड़का मेरे बगल में था वो बोलै.
वो:- ही बीआरओ, ी ऍम आकाश, एंड दो यू वर्क फॉर सीबीआई?
मैं:- देख आकाश भाई पहली बात हिंदी में बात कर और ये बीआरओ न बोल, और दूसरी बात मैं किसी के लिए काम नहीं करता सीबीआई वर्क्स फॉर में. एक्चुअली हम साथ काम कर रहे है.
आकाश:- वैसे आपने बहुत बड़ी गलती करदी इस सेक्शन में आके.
मैं:- और वो कैसे ?
आकाश:- एक आर्यन नाम का लड़का है, इस स्कूल के सबसे बड़े ट्रस्टी और इस एरिया के ंप का बीटा, उसको आपके आने से इस सेक्शन से शिफ्ट कर दिया है तो वो आप पे गुस्सा होगा.
मैं:- गांड मरए भसदक़ा, उसके जैसे बहुत को पेला है.
वो आकाश एक दम से सांत हो गया और फिर मुझे रीलीज़ हुआ की मैं जोश जोश में ज्यादा बोल गया और तेज़ बोल गया इसलिए बगल वाले सब मुझे hi घर रहे थे जिनमे कुछ पापा की परिया भी थी, बूत हु गिवेस ा फ़क.
खैर अगले hi मिनट एक टकलू सा टीचर एंटर हुआ लेकिन इस स्कूल की एक बात अछि लगी की सब बचे खड़े होक चिल्लाये नहीं "गुड मॉर्निंग सर"
उस टीचर ने भी मेरा इंट्रो लिया और उसकी सकल से देख के लग रहा था की वो मुझे जनता है, खैर फिर भी उसने मुझे पढ़ने की हिदायद दी और फिर मैथ पढ़ने लगा, अगेन मुझे लुंड समझ नहीं आ रहा था कुछ लेकिन फिर भी मैं बस बोर्ड को घूरे जा रहा था ताकि उसे लगे की मैं पढ़ रहा हु और तुम लोग ये समझ लेना की मैं कमज़ोर हु बस इनका सिलेबस थोड़ा आगे चल रहा है. मैंने ये पीरियड भी ऐसे hi निकल दिया बेल्ल बजी और वो टीचर खिसक लिया.
मैं आकाश को धीरे से बोलै,,,
मैं:- यययय सिगग्रेटे कहा पि सकते है.
उसने मुझे घुरा और फिर बोलै,
आकाश:- वाशरूम में लेकिन कोई देख न ले नहीं तो कंप्लेंट कर देगा.
मैं:- अबे को देखे उसकीय माँ का बहहहह
मेरी आवाज़ मेरे गले में अटक गयी क्युकी मेरी नज़र भी क्लास में एंटर हुयी ma'am पे अटक गयी थी जो की बहुत हॉट थी मतलब हद्द सा ज्यादा हॉट क्लास में एक लगा हुआ था और मुझे उसमे भी गर्मी लगने लगी थी.
लेकिन मेरा ध्यान ma'am की प्यारी सी आवाज़ से टुटा.
Ma'am:- हे यू! What's योर नाम?
मैं:- अंकित कुमार चौधरी,
Ma'am:- ही माइसेल्फ ईशा एंड ी ऍम योर इंग्लिश टीचर.
मैं:- नीस तो सी योय ma'am.
वो फिर कुछ नहीं बोली बस पढ़ने लगी और इस क्लास में मैं बस ma'am को घर रहा था और ये बात उसने नोटिस भी कर ली थी लेकिन कुछ बोली नहीं. खैर उसका पीरियड भी ख़तम हुआ और फिर रेसस्स की बेल्ल हुयी और सब बचे धीरे-2 निकलने लगे मतलब कोई जल्दी नहीं थी इन्हे और वह के स्कूल में जानवर से जैसे दौड़ पड़ते थे बेल्ल की आवाज़ सुनके. अब ये भी नहीं दौड़ रहे तो मैं भी आराम से क्लास से बहार निकला और वाशरूम में जाके मूट के आया और फिर आकाश के साथ स्टाफ रूम में गया जहा फिजिक्स की ma'am ने बुलाया था. आकाश को बहार रोके मैं अंदर गया तो वह 30% सर थे और 70% ma'am और साड़ी ma'am एक से बढ़ के एक माल.
खैर मैं उस फिजिक्स वाली के पास गया
मैं:- ma'am आपने बुलाया था.
Ma'am:- it's योर होम सो स्पीक इन इंग्लिश.
ईशा:- अरे मीनू जाने दे न क्यों डरा रही है उसे.
ओह्ह्ह तो इस लौड़ी का नाम मीनू हु एक बार इसको शामे डायलाग न मारा तो मेरा नाम भी एक नहीं, मैंने मैं में ये प्रतिज्ञा ली इतने में उस मीनू ने मेरे हाथ में एक पेपर और ईद कार्ड थमा दिया.
मैं वह से बहार निकला और उस दोनों चीज़ो के जेब में दाल के फ़ोन बहार निकला. तो वो आकाश फिर बावला हो गया.
आकाश:- अबे तू फ़ोन लाया है किसी ने देख लिया तो कंप्लेंट हो जाएगी.
मैं:- अबे मुझे अल्लोवेद है, मैं स्पेशल केस हु.
आकाश:- हां ठीक है अब चल.
फिर हम दोनों कैंटीन में आये तो मेरा वो चीज़े खाने का बिलकुल मैं नहीं था इसलिए मैंने जूस आर्डर किया.
मैं:- ोयी सुन कल से चिकन सैंडविच रखियो सिर्फ मेरे लिए.
वर्कर:- पर ये कैंटीन में अल्लोवेद नहीं है.
मैं:- अबे ये ले पैसे और सिर्फ मेरे लिए लेके आईओ मुझे ये सब न पसंद
मैंने उसे 2000 का नोट दिया और वो चला गया, फिर आकाश ने मुझे पीरियड्स के बारे में बताया की 45 मिनट्स के सिक्स पीरियड लगते है हर सब्जेक्ट के और रेक्सेस भी 45 मिनट की होती है.
हम दोनों ने अपना तांजहां फिनिश किया और फिर भी टाइम था तो ग्राउंड की तरफ चले गए.
वह दो टीम क्रिकेट खेल रही थी और बाकि के स्टूडेंट्स उन्हें देख रहे थे. मतलब कितनी चुटिया बात है 22 बन्दे मिलके फील्ड पे हुग रहे है और उनसे डबल अमाउंट के स्टूडेंट्स उनको हगते हुए देख रहे है.
खैर उनमे हम दोनों भी शामिल हुए और एक पेड़ के निचे बैठ गए. तभी आकाश ने एक लड़के की तरफ इशारा किया और बोलै.
आकाश:- भाई ये है आर्यन.
मैंने उसे देखा तो ाचा था दिखने में हत्ता कट्टा था मेरे जैसा पर घमंड साफ़ झलक रहा था और वो सबपे चिल्ला रहा था 5 -6 को छोड़ के सायद ये चमचे होंगे इसके.
मैं:- अबे तो इसे देख के मुठ मारु कोई लड़की दिखा तू क्या गे समझ रहा है मुझे.
आकाश:- नहीं भाई वो बात नहीं है, मैं तो बस बता रहा था की ये आपको छोड़ने वाला नहीं है.
मैं मुस्कुरा दिया.
मैं:- ाचा और कुछ खूबी बता इसकी..
आकाश:- पढ़ने में thik-thak है बाप के दम पे ा सेक्शन में था लेकिन आपकी वजह से निकल गया. इसके जैसा बॉलर मैंने आज तक नहीं देखा.
मैं:- चल अब तेरी ार्यंपुर्ण बंद हो गयी तो चले क्लास में टाइम हो गया.
फिर हम दोनों खड़े हुए और चल दिए क्लास रूम की तरफ वह गए तो पहले से hi एक टीचर मौजूद था और उसकी सकल देख के पहचान गया की ये भसदक़ा भी हरयाणा से है.
और मैं उसे देख के hi समझ गया की भेनचोद फिजिकल एजुकेशन पढ़ायेगा क्युकी उसने ट्रैक सूट पहना हु था.
सर:- बीटा खड़ा हो नाम क्या है तेरा.
मैं:- अंकित कुमार चौधरी.
सर:- हरयाणा से है क्या?
मैंने हाँ में मुंडी हिल्लायी तो वो खुस होगया अबे अजीब गांडू इंसान है खुस ऐसे हो रहा है जैसे दामाद मिल गया हो.
खैर वो भी पढ़ने लगा पढ़ा क्या रहा था बस बकचोदी पेल रहा था फिजिकल एजुकेशन में पढ़ने को वैसे है भी क्या? किसी तरह क्लास का टाइम हुआ बेल्ल बजी तो महासय बोले
सर:- सुनो सब लड़के अगले वीक से स्कूल में टूर्नामेंट स्टार्ट हो जायेंगे तो हर सेक्शन से एक टीम ले रहे है इस बार तो अपने सेक्शन की बना लेना.
और फिर मेरी तरफ देख के बोलै.
सर:- क्रिकेट तो खेलना आता है न.
मैं:- आता है.
सर:- चल तो ये टीम अब तू hi बनाएगा अपने सेक्शन की .
मैं:- मैं कैसे मैं तो जनता भी नहीं हु किसी को..
सर:- अरे तो यो बैठ्या तेरे बगल में भुंडी सिकल का इस्ते पूछ ले.
वो हरयाणवी में बोलै तो क्लास हसने लगी और मुझे भी हसी आ गयी ओर आकाश बिचारा नीची मुंडी करके बैठ गया.
इतने में वो टीचर भी चला गया अब 5 मिनट थे हमारे पास.
मैं:- ोयी चल वाशरूम चल.
हम दोनों वाशरूम गए तो सामने से मुसीबत आ रही थी जो की आर्यन था उसने हमे रोका और मेरा इनके मुँह लगने का या बकवास सुनने का कोई मैं नहीं था लेकिन कोई लफड़ा न हो इसलिए चुप था मैं
आर्यन:- और आकाश यही है क्या वो?
आकाश ने हाँ में मुंडी हिल्लायी तो उसने मेरी तरफ देखा.
आर्यन:- तो देख भाई तेरा जो भी नाम है, तेरी वजह से क्लास से निकला उसका कोई अफ़सोस न है मुझे लेकिन तू प्रीती से दूर रहेगा नहीं तो इस स्कूल में hi नहीं पूरी दिल्ली में जीना हराम कर दूंगा.
व्हाट थे फ़क! मैं शांत क्या हो जाओ लोग सर पे मूतने लगते है ये लौड़ा मुझे परेशां करेगा.
मैं:- फर्स्ट ऑफ़ आल it's एक. और दूसरी बात हु थे फ़क इस थिस प्रीती? देख भाई वो जो भी है तेरी बेहेन, गफ, रखैल मुझे तुझसे और उससे कोई मतलब नहीं है इसकिये आइंदा से रास्ता न रोकियो.
और इतना बोलके में वह से निकला hi था की उसकी आवाज़ से एक बार फिर रुका.
आर्यन:- यहाँ कैमरा लगे है इसलिए छोड़ रहा हु लेकिन अगले वीक टूर्नामेंट में तेरी हालत कुत्तो जैसी कर दूंगा.
मैंने उसको एक लुक दिया की सीरियसली वो ऐसा कर देगा, ाजजी लुंड मेरा इसके जैसो को अपने लोडे पे बिठा के झूला झूला दू.
खैर मैं और आकाश जल्दी से वाशरूम में घुसे और मूत्र विषर्जन करने लगे.
मैं:- अबे टीम कैसे बनेंगे में.
आकाश:- अबे अपने सेक्शन में 70 बचे है और 70 में से 40 लड़के और 40 में से 2 हम फिक्स है तो बाकि के 9 और चूसे कर लेंगे.
मैं:- ठीक है तो कल तू लिस्ट दियो मुझे.
आकाश:- ोोककक. और तू उस आकाश से दूर रह भ्ह.....
उसकी आवाज़ उसके में अटक गयी क्युकी मैंने उसकी गुड्डी पकड़ के दिवार से चिपका दिया था, क्युकी बार बार एक नाम और एक बात सुनके फ़्रस्ट्रेशन हो रहा था मुझे, पर दिमाग में आया no काण्ड. इसलिए मैं उसे छोड़ दिया.
Main:-sorry! और देख आगे से उसका नाम न लियो मेरे सामने. और ये भेनचोद प्रीती कोण है उसके सामने पेलुँगा उसे.
आकाश:- उसकी एक्स!
मैं:- हम्म्म, व्हाट उसकी एक्स वो अपनी एक्स के लिए मुझसे लड़ रहा था.
आकाश:- हां सायद.
और फिर हम दोनों क्लास में आये और नेक्स्ट टीचर हमारा वेट कर रही थी, उसने भी मेरा इंट्रोडक्शन लिया और फिर पढ़ने की हिदायत देके पढ़ने लगी. केमिस्ट्री का पीरियड भी ऐसे hi निकल गया. और अब लास्ट पीरियड बचा था वो भी एक सर ने लिया और फिर बजी बेल्ल मैंने अपना बैग उठाया और तेज़ी से क्लास से निकला क्युकी सिगग्रेटे पिने का मैं कर रहा था. आकाश भी मेरे साथ आ गया
मैंने बाइक स्टार्ट की लेकिन वो पार्किंग में आया तो था लेकिन उसने बाइक वगैरह नहीं ली.
मैं:- क्यों बे बाइक वगैरह नहीं लाया क्या?
आकाश:- होंगी तब लाऊंगा न.
मैं:- अबे तो इसमें साद होने वाली कोनसी बात है. तेरे पापा क्या काम करते है वैसे?
आकाश:- मेरे पापा वैसे तो गवर्नमेंट एम्प्लोयी है पर हम फिर भी इतने अमीर नहीं है की इस स्कूल को अफ़्फोर्ड कर सके.
मैं:- तो फिर यहाँ कैसे?
आकाश:- स्कालरशिप से.
मैं:- ओह्ह तो पढ़ने वाला है तू, तो एक फ्री की एडवाइस देता हु मुझसे दूर रह और अपनी पाध्ये पे ध्यान दे क्युकी मेरे साथ रहने वाले जल्दी बर्बाद हो जाते है.
वो कुछ बोलता उससे पहले मैंने बाइक स्टार्ट की और निकल गया. मेरे को उसकी स्टोरी सुनके कोई हमदर्दी नहीं हुई क्युकी ये तो इंडिया मैं हर दुसरे बन्दे की कहानी है, अमीर नहीं हो तो बनो, सीधे रस्ते से म्हणत करो या मेरी तरह लूटपाट मचा दो. खैर मैं घर पंहुचा और दूर खोलते खोलते खाना आर्डर किया और एक सिगग्रेटे जला के सत्ता मारा और फिर बाथरूम में नहाने घुस गया बहार आया तो खाना भी आ चूका था तो मैंने पहले खाना खाया और टाइम देखा तो 2 बज रहे थे. मैंने सोचा सो लू थोड़ा. पर पहले जॉन को कॉल मिलाया.
जॉन:- hello बरोथेर.
मैं:- शाम को 7 बजे मेरे घर पे आ जाना, कही जाना है.
जॉन:- एड्रेस.
मैं:- जॉन मैं कोई दूध पिता बचा नहीं हु, तुम लोगो को मेरा पास्ट, प्रेजेंट, फ्यूचर सब पता है तो पहुंच जाना टाइम पे.
जॉन:- वेपन्स लेके औ क्या...
मैं:- अबे वॉर लड़ने नहीं जा रहे एक पिस्तौल ले आना बस सेफ्टी के लिए और कुछ नहीं.
और इतना बोलके मैंने फ़ोन कट किया और सो गया.
शाम को अलार्म से 6 बजे मेरी आँख खुली और उठते hi मैंने सिगग्रेटे जलाई और आगे के बारे में सोचने लगा. 6:45 पे मैं खड़ा हुआ और कपडे वगैरह पहने और गन लोड करके पंत में ठुसी और ठीक 7 बजे जॉन अपनी कार लेके मेरे घर पंहुचा मैं लॉन में hi बैठा वेट कर रहा था उसका घर को लॉक करके.
जॉन:- चलो मेरी कार में hi चलते है.
मैं:- जहा हम जा रहे है वह कार नहीं जाती. इसलिए इसे अंदर ठूस और मेरे साथ बाइक पे बैठ.
और फिर उसने अपने कार मेरे घर की पार्किंग में ठूसी और फर बहार आके गेट बंद किया और मेरे पीछे बैठ गया और मैंने बाइक दौड़ा दी.
जॉन:- वैसे हम जा कहा रहे है?
मैं:- गुंडा बस्ती में.
जॉन:- व्हाट? तुम गुंडा बस्ती में जा रहे हो ऐसे अकेले वो भी बाइक पे, वो देखते hi काट देंगे हमे.
मैं:- अबे शांत हो जा बे मुँह पे रुमाल बांध लियो और सराफत से चलियो.
30 मिनट में हम उस बस्ती में एंटर हुए, एक्चुअली ये एक वार्ड था जहा गुंडे, chor-uchake रहते है, यहाँ पे घर भी जजर हालत में थे और सकरी सकरी गालिया गंदगी से भरी हुयी कई लोगो ने बकरी और मुगी पाल राखी थी कसाईयो की दुकान थी वह पे मतलब एक दम वाहियाद जगह.
खैर मैंने बहार hi बाइक रोकी और और हम दोनों पैदल तीन चार पतली गलियों को पार करके एक सिंगल फ्लोर के घर के पास रुके, इसे घर कहना गलत होगा एक्चुअली दो कमरे थे बस वो.
मैं गेट खड़काया तो एक आंटी ने दरवाज़ा खोला.
आंटी:- अरे साहब आप.
मैं:- असलम कहा है.
आंटी:- वो तो दोस्तों के साथ गया है.
मैं:- बुलाओ उसे.
आंटी अंदर गयी और असलम को फ़ोन वगैरह करने लगी, इतने मैं तुम लोगो को बता दू की असलम अभय के लिए काम करता था इनफार्मेशन निकलने में और ये hi मुझे आज हर्ष के रियल स्टेट ऑफिस में काम कर रहे उसके प् के घर लेके जाने वाला था चले तो हम कल hi जाते लेकिन एक बाँदा और था जो रास्ता जनता था वो हमे लेके जाता पर वो भसदक़ा मिला नहीं कल पूरा 1 घंटा उसे ढूंढा मैंने और असलम ने.
आंटी:- आओ साहब अंदर आओ, वो बस 5 मिनट में आ रहा है.
मैं:- नहीं हम ठीक है.
5 मिनट बाद असलम भागता हुआ आया तो हम उसकी तरफ hi चल दिए.
मैं:- कहा था तू भसडक.
असलम:- अरे भाईजान वो मैं उस आदमी को धुंध रेला था.
मैं:- मिला फिर.
असलम:- हां दुसरे मोहल्ले में जुआ खेल रहा है.
मैं:- ले ये तेरे घर पे रख दे और इनको उड़ाइयो मत.
मैंने जेब से 6-7 2000 के नोट उसको दिए, उसने वो पैसे लेके अपनी माँ को दे के आया और फिर हम तीनो पैदल hi चल पड़े.
असलम:- वैसे भाईजान ये अंकल कोण है.
मैं:- तेरे काम की चीज़ नहीं है वो.
जॉन कुछ नहीं बोल रहा था बस chup-chap चल रहा था मुँह पे रुमाल बांध के सायद उसे ये जगह सूट नहीं कर रही थी.
असलम:- वैसे वो मानेगा नहीं चलने के लिए.
मैं:- वो क्या उसका बाप भी जायेगा.
5 मिनट बाद हमे एक जगह पहुंचे जहा 7-8 आदमी बैठे ताश पेल रहे थे, खेल तो 4 रहे थे बाकि तो सुप्पोर्तेर्स थे.
असलम ने इशारे उस आदमी की तरफ इशारा किया की ये है वो और उसके बाद वो वापिस चला गया
मैं और जॉन आगे बढे और उनके पास पहुँच के मैंने उस आदमी के कंधे पे हाथ रखा और बोलै
Main:-side में आ जरा.
वो:- ू मैं कही नहीं जाऊंगा बाज़ी चल रही है मेरी.
मैं:- अबे आ न भसडक, क्यों लुगाई की तरह नखरे कर रहा है.
अब सायद उसके साथ गुस्सा हो गए और वह खड़ा एक ज्यादा ताव में आ गया.
वो:- ोू मदरररर
उसकी आवाज़ हलक में रह गयी क्युकी जैसे hi वो उठा और उसने गली बकनी चाही मैंने खींच के उसके पेट में लात दी जिससे वो वही गिर गया क्युकी सकल से hi नशेड़ी था अब अपने दोस्त का बदला लेने के लिए कोई आगे बढ़ता उससे पहले जॉन ने उनपे दो गन तान दी और गन देखते hi उन सब की गांड चौक खा गयी और वो सब सांत हो गए. अब जॉन ने गन निकल ली तो मैं क्यों पीछे राहु इसलिए मैं भी अपनी गन निकली लॉक खोला और उस कालिया नाम बताया था असलम ने मैं उसकी गुड्डी पकड़ के खड़ा किया और उसके माथे पे गन रख के बोलै.
मैं:- अब चलेगा बीटा.
कालू:- हां भाई.
मैं और जॉन उसे साइड में लेके आये और हम दोनों ने अपने गन अंदर राखी और मैंने उसके खींच के कान के निचे दिया एक जिससे वो निचे गिरा और कान पे हाथ रखके खड़ा हो गया, जॉन भी शॉक हो गया था क्युकी मैंने बेफालतू में मारा था.
मैं:- चल मुझे तू अमर चांदनी के घर ले चल.
ये नाक सुनके वो शॉक हुआ फिर दर के बोलै.
कालू:- चलो भाई.
मैं:- और वो थप्पड़ इसलिए मारा था ताकि तू एक बार में hi बता दे
उसके बाद हम तीनो हमारी बाइक के पास आये और उस कालू को बीचमे बिठा के उसके बताई हुयी जगह पे पहुंचे तो वह एक 2 फ्लोर का आलीशान सा घर था उसके बहार 2 सिक्योरिटी गॉर्ड निचे थे और 2 उप्पेर टेरेस पे. मैंने उस घर को ध्यान से देखा और फिर वह से निकल दिए उस कालू को छोड़ा और उसे बोलै की आगे से यही मिलियो. उसको छोड़के हम घर पहुंचे तो रात के 9 बज चुके थे. और इस टाइम मैं और जॉन मेरे लॉन में बैठे थे.
जॉन:- इस अमर का क्या करना है.
मैं:- इसे उठाना है.
जॉन:- उसकी क्या जरूरत है वो तो हम वैसे hi कर देंगे बस सीबीआई का कार्ड दिखा के उससे पूछ लेंगे जो पूछना है.
मैं:- नाना हर काम लीगल तरीके से नहीं करना इसको मेरे तरीके से करेंगे.
इसके बाद हमने कल लिए प्लान डिसकस किया और फिर जॉन चला गया और उसके जाते hi मेरा डिनर भी आ गया तो मैंने डिनर किया और फिर मनीषा और विशाल से बात की और फिर कब आँख लगी पता hi नहीं लगा.
तो बे कॉन्टिनोएड ??
(4201 वर्ड्स :स्वेट: )