My Complete Intentions - The Beginning - Page 7 - SexBaba
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My Complete Intentions - The Beginning

अपडेट:-32

मेरी आँख खुली और मैं उठके बैठ गया टाइम देखा तो 12 बज रहे थे, घुटने में दर्द था बहुत तेज़. फ़ोन उठा के देखा तो उसपे भी राज एंड टीम्स की कई कॉल्स थी लेकिन मुझे अभी खुद पे ध्यान देना था. इसलिए मैं खड़ा हुआ और बाथरूम में जाके फ्रेश हु और फिर नहाने के लिए अपना हुड उतरा तो देखा चेस्ट उप्पेर से चिल्ली हुयी है कोहनी पे भी चोट है खून सुख रखा था वह पे फिर जीन्स उतरी बड़ी मुश्किल से तो घुटना भी पूरा लाल हो रखा था खून से. मैंने शावर ों किया और उसके निचे खड़ा हो गया थोड़ी देर में जितना भी खून लगा हुआ था वो सब धुल गया और मैं नहाके बहार आया और कपडे पहने, तभी फिर फ़ोन बजा जो की वर्षा का था.

मैं:- hello.

वर्षा:- जल्दी से ऑफिस पहुँचो.

मैं:- अभी नहीं आ सकता क्यों पहले हॉस्पिटल जाऊंगा और ब्रेकफास्ट भी नहीं किया है मैंने.

वर्षा:- यहाँ तुम्हारे दोनों काम हो जायेंगे जल्दी आओ अर्जेंट है.

मैं:- ोककक किंग.

मैंने फ़ोन कट किया और बहार आके कार निकली क्युकी बाइक कल रात बहुत ज्यादा चलायी थी तो पेट्रोल ख़तम होने वाला था. मैं कार में बैठा और फिर सीधा पंहुचा राज के घर जिसे ऑफिस कहलो या घर एक hi बात है. मैंने सीधा बाइक पार्किंग में कड़ी की और अंदर गया.

तो अंदर का सन ये था की एक चेयर पे अमर बंधा हुआ था जो थोड़ा पीटा हुआ भी लग रहा था लेकिन जिस बन्दे को बार से उठाया था वो ज्यादा पीटा हु बैठा था चेयर पे वो भी आँखे बंद किये और पूरी टीम उसके दोनों साइड कड़ी थी.

मैं:- वसुप गाइस.

वर्षा:- ओह्हो महाराज आ गए आप.

मैं:- फर्स्ट थिंग ी नीड ट्रीटमेंट एंड सेकंड थिंग ी नीड फ़ूड.

राज:- वर्षा दो हिज ट्रीटमेंट और पायल तुम अंदर से खाना लेके आओ इसके लिए.

मैं:- ये ट्रीटमेंट देगी, पागल हो गए हो क्या? ये गोलिया चलना जानती है.

वर्षा:- ी ऍम मेडिक आल्सो.

मैं:- ोककक तो करो.

और मैंने अपनी शर्ट उतर दी फिर मुझे रीलीज़ हुआ यहाँ तीन लड़किया है लेकिन अब तो हो गया जो होना था.

पायल:- ओह्ह माय गॉड तुम्हे बहुत ज्यादा लगी है.

मैं:- बहुत थोड़ी है ये तो.

वर्षा:- और तुम्हारा घुटना.

मैं:- पहले यहाँ तो टेप वगैरह लगा दो.

वर्षा:- ोककक.

फिर मैं वह एक चेयर पे बैठा और वर्षा एक फर्स्ट ऐड बॉक्स लेके आयी उसने पहले कोई पानी सी चीज़ मेरी चेस्ट पे नारी जिससे बहुत तेज़ जलन हुयी लेकिन मैं सेह गया उसके बाद उसने बड़े हलके हाथ से उसपे दवाई लगायी और फिर टेप्स मार दी और शामे चीज़ उसने कोहनी के साथ भी की.

वर्षा:- चलो पंत उतरो.

मैं:- रुको उस रूम में चलो.

फिर हम दोनों बगल वाले रूम में आये और मैं उसे एक बार देखा और अपनी जीन्स उतरी और सोफे पे बैठ गया वो भी घुटनो के बल बैठ के मेरे घुटने को देखा और फिर वह भी दवाई लगा के पट्टी बंदी मैंने पंत पहनी और फर शर्ट भी पहनी जो जॉन ने दी थी लाके.

इस टाइम मैं, राज, वर्षा, सारा, अजय, जॉन और पायल एक रूम में बैठे थे सोफस पे और मैंने ब्रेकफास्ट भी कर लिया था या सायद लंच भी कह सकते हो.

मैं:- सो अब बताओ क्या सन है?

वर्षा:- देखो अमर हमारी हेल्प के लिए रेडी है लेकिन वो तुम्हारे साथ डील करना चाहता है और कुछ मांगना भी.

मैं:- हो जायेगा don't वोर्री.

वर्षा:- और जिसे तुम लोग बार से उठा के लाये हो वो मुँह नहीं खोल रहा है.

मैं:- गंगा तो नहीं है.

अजय:- नहीं गंगा नहीं है बस बोल रहा है की बेसक जान से मार दो ज़फर के बारे में कुछ नहीं बताएगा.

मैं:- देख लेंगे इसे लेकिन पहले अमर से मिलके आता हु मैं.

मैं खड़ा हुआ और मेरे साथ वर्षा भी आयी बाकी सब यही बैठे गिलास में से देख रहे थे बहार. इस टाइम वो दोनों होश में थे और दोनों सांत बैठे थे.

मैं:- हां तो अमर क्या चाहिए तुम्हे उस पेण्ड्रीवे के बदले.

अमर:- 10 करोड़ रूपीस और मेरी फॅमिली को और मुझे इस देश से बहार भेज दो सेफ जगह.

मैं:- 10 करोड़ ज्यादा है लेकिन मैं देऊंगा तुझे और देश से बहार जाने के लिए वर्षा से बात कर.

वर्षा:- मैं राज सर से पूछती हु.

अमर:- लेकिन इतना आसान नहीं है वो पेण्ड्रीवे लाना.

मैं:- क्यों नहीं है आसान.

अमर:- क्युकी वो एक सेफ में राखी है और वो सेफ रियल एस्टेट ऑफिस में है, वह तुम chori-chuppe नहीं जा सकते.

मैं:- और वो सेफ कैसे खुलेगी और तेरे किडनैप होने से तो वह की सिक्योरिटी बढ़ा दी होगी हर्ष ने.

अमर:- हर्ष इतने छोटे काम नहीं देखता ये तो रॉय देखता है सब और उसको हरा पाना इम्पॉसिबल है.

मैं:- वो खुद वह बैठ के सिक्योरिटी नहीं देगा और ये भी हो सकता है की वो उस पेण्ड्रीवे को अपने साथ ले जाए.

अमर:- नहीं नहीं वो उसे अपने साथ नहीं ले जा सकता क्युकी वो वह के सिस्टम से कनेक्टेड है और वो कोई नार्मल पेण्ड्रीवे नहीं है, उसको वह से निकलने से पहले तुम्हे वह का सिस्टम हैक करना होगा.

मैं:- और कोई इनफार्मेशन.

अमर:- हां बस एक एडवाइस है हर्ष से मत भिड़ो, वो तुम लोगो को कही का नहीं छोड़ेगा अभी तो उसका ध्यान भी नहीं होगा तुमपे क्युकी वो दिल्ली hi नहीं पूरी इंडिया पे राज़ करने का प्लान बना रहा है.

मैं:- थैंक्स फॉर योर इनफार्मेशन और हां तू हमारी लड़ाई का अंजाम देखने के लिए जिन्दा नहीं रहेगा इसका मुझे अफ़सोस है.

अमर:- क्या?

मैं:- ये

और मैं गन निकल के उसके पूरा फेस गोलियों से भर दिया, वो सब मुझे रोकते या कुछ बोलते उससे पहले मैंने उसे मार दिया था, ी क्नोव वो इनोसेंट है पर मुझे घंटा फर्क नहीं पड़ता उससे साला मेरे सामने मेरे दुश्मन की तारीफ.

राज:- व्हाट थे हेलल तुमने एक इनोसेंट को मार दिया, अरे आउट ऑफ़ योर मंद, ये फॅमिली वाला था

मैंने उसकी बातो पे कोई ध्यान नहीं दिया, एक बार उस अमर की लाश को देखा और एक झटका लगा की ये मैंने क्या कर दिया, व्हाट थे फ़क बाँदा पेल दिया मैंने पर क्यों? एक सेकंड एक सेकंड मैंने दो दिन से ड्रग्स नहीं लिए है और इसका मतलब वो वापिस से ऐसा कर रहा है no वे भेनचोद.

मैं वही अपना सर पकड़ के बैठ गया क्युकी वो एक्टिव है या मेरा दिमाग कुछ और कर रहा है उसे गुस्सा क्यों आया क्युकी उसे फालतू की एडवाइस पसंद नहीं है. लेकिन इतनी सी बात पे कोण किसी को मारता है और आंसर है "मैं".

मैं:- लीव में अलोन.

"तू नहीं रोक पायेगा मुझे बहार आने से"

मैं:- राज ी नीड ड्रग्स किसी को भी मेरे घर भेजो और मुझे ड्रग्स लाके दो नहीं तो ी डिस्ट्रॉय एवरीथिंग.

वो सब लोग मुझे घूर रहे थे क्युकी मैं चुतियो जैसी हरकत कर रहा था निचे पड़ा पड़ा.

राज ने जॉन को इशारा किया और वो वह से तेज़ी से निकल गया.

मैं:- क्यों मेरे पीछे पड़े हो.

"तूने hi बनाया है मुझे और मुझे कोई नहीं रोक पायेगा और जब तक वो गन्दा इंसान मुझे रोकने का इलाज़ लेके आएगा तब तक तो यहाँ सब ख़तम हो चुके होंगे.".

मैं:- लीव में अलोन, वर्षा तुम सब लोग जाओ यहाँ से

मैंने ये बात बहुत तेज़ बोली और सायद राज को मेरी कंडीशन का पता था इसलिए उन्होंने उन सब को एक रूम में जाने का इशारा किया और खुद भी उस रूम में जाके एक बटन दबे जहा एक गिलास का दूर बन गया.

मैं निचे पड़ा पड़ा ये सब देख रहा था और ये सब मेरी वजह से हो रहा था क्युकी मैं इतना ज्यादा ड्रग एडिक्ट हो चूका हु की दो दिन खुद को कण्ट्रोल नहीं रख पाया और फिर मेरी आँखे बंद हो गयी और फिर झटके से खुली और आँखे खुलते hi मैं खड़ा हुआ और एक बार उन सब की तरफ देखा जो की एक गिलास के दूर से मुझे अजीब सी नजरो से देख रहे थे और फिर मेरे पास चेयर पे बंधे फैसल के आदमी को देखा जो मुझे आँखे फाड़े देख रहा था लेकिन वो कुछ समझ पता इससे पहले मैंने उसकी चेस्ट में एक लात मारी जिससे वो चेयर समेत निचे गिरा और गिरते hi चेयर टूट गयी .

मैंने उसे खड़ा किया और गार्डन से पकड़ के वो रस्सी और टूटी हुयी चेयर के पार्ट्स अलग किये उससे और फिर उसकी फेस पे non-stop मुक्को की झड़ी सी लगा दी वो पागल हो गया बिचारा हाथ जोड़ने लगा उसके पुरे फेस पे खून टपक रहा था.

वो:- मुझे मत मारो मैं सब बता दूंगा.

मैं:- पर मुझे तो सिर्फ तुझे मारना है, मुझे कोई जानकारी नहीं चाहिए.

इतना बोलके मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपने हाथ में फसा के तोड़ दिया वो बहुत तेज़ चिल्लाया और फिर मैंने उसका दूसरा हाथ पकड़ के भी तोड़ दिया और वो इस बार बेहोश हो गया दर्द से.

मैं:- कमज़ोर इंसान.

और मैंने उसके बेहोश सरीर को उठके दिवार पे देके मारा जिससे उसकी खोपड़ी फैट गयी और वो वही मर गया, पर ये सन देख के अंदर रूम के लोगो का खून खोल गया सिर्फ पायल और राज को छोड़ के क्युकी राज को सच पता था और पायल दरी हुयी थी लेकिन अजय ने गेट खोला राज उसे रोकता उससे पहले वो बहार आ गया और उसके पीछे सारा और वर्षा भी, उनको देखके मेरे फेस की स्माइल और गहरी हो गयी.

अजय:- एक स्टॉप, ये क्या पागलपन है.

और वो आगे बढ़ के मेरे को पकड़ता उससे पहले मैंने उछाल के लात मारी उसके मुँह पे जो बहुत फ़ास्ट थी इतनी फ़ास्ट थी की वो मेरे से डबल सरीर का बाँदा निचे गिर गया. इतने में सारा आयी और ये हैंड तो हैंड कॉम्बैट में उस्ताद है इनके अकॉर्डिंग. उसने मेरे फेस पे कई पंचेस मारे जो मैंने ब्लॉक किये और फिर अचानक से उसका पंच पकड़ा और उसका हाथ मोड़ के उसके मुँह पे एक मुक्का मारा और वो इतना तेज़ था की वो सीधा वही लेट गयी उसकी नाक से खून बहने लगा था इतने में अजय खड़ा हुआ और उसने मेरी रिब्स पे पंच मारना चाहा लेकिन मैंने उसका हाथ पकड़ा और दुगनी स्पीड से उसको उसकी रिब्स पे जड़ दिया जिससे वो एक साइड को झुका और झुकते hi मैंने दूसरी रिब्स पे भी जड़ दिया जिससे वो पीछे हटा और पीछे हट्टे hi उसके चेस्ट पे मैंने उछाल के दोनों लात मारी जिससे वो पीछे गिरा, गिरा तो मैं भी लेकिन खड़ा हो गया इतने में वर्षा आयी लेकिन मैं उसका गाला पकड़ लिया लेकिन तभी मुझे मेरे पीछे किसी के होने का एहसास हुआ और मैंने वर्षा को ढाका दिया और पीछे पलटा तो जॉन खड़ा था हाथ में एक पैकेट लिए और वो शॉक भी था अंदर का हाल देखके, मैं उसकी तरफ बढ़ा इतने में पीछे से किसीने मेरे घुटने वाले जॉइंट पे लात मारी जिससे में घुटनो पे आ गया और इतने में राज बहार आके चिल्लाया.

राज:- ये इसके फेस पे उड़ेल दो.

और जॉन ने वो पूरा पैकेट मेरे मुँह पे दे के मारा और जैसे टिगों की स्मेल मेरे नाक से होते हुए खोपड़ी में पहुंची मैं वही पसर गया, क्युकी बहुत ज्यादा ड्रग्स था ये

ड्रग्स अंदर जाते hi मेरी आँखे खुल गयी मेरा कण्ट्रोल वापिस आ गया था मैंने वह निचे पड़ा हुआ ड्रग्स और अपने फेस पे लगा हुआ भी झाड़ा और हाथ में लेके सात से खींच गया, हास्सश्ष्ठ फाइनली शांति और फिर वही लेट गया. पता नहीं कितनी देर मैं ऐसे hi लेता रहा निचे फर्श पे मेरी आँख बंद हो चुकी थी मंद बिलकुल स्टॉप था मतलब रेस्ट मोड पे जा चूका था.

जब मेरी आँख खुली तो वह कोई लाश वगैरह नहीं थी बस सारा का थोबड़ा सुजा हुआ था, अजय का भी यही हाल था वर्षा के गले पे उंगलियों के निशाँ थे, अब इन्हे कैसे फेस करूँगा. मेरी आँखे खुली देखके वो सब मेरे पास आ गए.

वर्षा:- तो होश आ गया जनाब को, सर ी can't वर्क विथ हिम.

सारा:- में तू.

अजय:- मैं भी नहीं कर सकता एक पिस्को के साथ काम, या तो ये रहेगा या मैं.

राज:- जॉन और पायल तुम्हारा क्या कहना है.

जॉन:- मेरे को कोई प्रॉब्लम नहीं पर जब मेरी टीम hi नहीं होगी तो मैं क्या करूँगा.

पायल कुछ भी नहीं बोली सायद अभी भी दरी हुयी थी वो.

राज:- ोकक तो अब तुम लोग सम्भालो वापिस, एक रेस्ट पे जायेगा.

मैं:- वेट! कैसा रेस्ट ी ऍम फाइन.

राज:- no यू अरे नॉट फाइन कल दिन में 3 बजे डॉ. प्रभाकर के से अपॉइंटमेंट है तुम्हारी.

मैं:- ोककक फाइन.

राज:- अब बताओ वो पेण्ड्रीवे कहा है.

मैं:- याद नहीं है क्युकी वो साड़ी इनफार्मेशन उसने ली है मैंने नहीं वो गेम खेल रहा है मेरे साथ hi, इनफार्मेशन लेके मार दिया उसे ताकि हमारे हाथ कुछ न लग सके, अब तुम लोगो को अपनी पुराणी टीम मुबारक हो किस्मत में हुआ तो जरूर मिलेंगे.

और इतना बोलके मैं बहार आया तो रात hi हो चुकी थी ऑलमोस्ट, मैं कार में बैठा और निकल दिया घर की तरफ, भेनचोद ड्रग्स भी ख़तम अब क्या करूँगा मैं? डॉ hi बेस्ट ऑप्शन है पर क्यों मुझे कोनसा बीमारी है पर दुसरे तो यही बोलते है और अगर ये बीमारी है तो मैं खुद के साथ hi क्यों खेल रहा हु और अब गुस्सा नहीं करना वो गुस्से से hi एक्टिव हो रहा है.

इतना सब सोचते हुए मैं घर पंहुचा कार पार्क की और दूर के पास आया तो वो लॉक नहीं था, सोचा जॉन ने बंद नहीं किया होगा इसलिए बेख़ौफ़ अंदर चला गया लेकिन अंदर आया तो सरप्राइज मिला क्युकी मेरे सामने किरण बैठी थी एक हॉट सी रेड निघ्त्य में और फिर मुझे याद आया की वो तो आज आने वाली थी.

उसने भी मुझे देखा तो वो भी भाग के आयी और मेरे से लिपट गयी लेकिन मेरी आह्हः निकल गयी क्युकी चेस्ट में पैन हुआ.

किरण:- क्या हुआ?

मैं:- कुछ नहीं इन्जुरेड हु थोड़ा, डिनर रूम में ले आओ.

वो किचन में चली गयी और मैं अपने रूम में आया और बाथरूम में घुस के फ्रेश हुआ और फिर बहार आके सोफे पे बैठा इतने में किरण खाना लेके आयी और हमने साथ में डिनर निपटाया और डिनर करके अब हम दोनों वही सोफे पे बैठे थे पर अब दोनों के हाथ में सिगग्रेटे थी.

किरण:- क्या हुआ है यहाँ पे.

फिर मैंने उसे साड़ी बात बताई.

किरण:- तुम बचे नहीं हो एक, हाउ कैन यू ट्रस्ट ों सीबीआई वो अपने फायदा देख के काम करते है. तुम उनके साथ कोई काम नहीं करोगे और कल डॉक्टर से भी मिलोगे.

मैं:- वो खुद hi मेरे साथ काम नहीं करेंगे. और वैसे भी अभी फ़िलहाल मैं भी थोड़ा रेस्ट चाहता हु और अपनी बीमारी का इलाज़ भी तो इतने ओनली स्कूल और नार्मल लाइफ.

किरण:- वो तो तुम्हे करना पड़ेगा लेकिन मेरे हिसाब से तुम्हे त्रिनेड हो जाना चाहिए और इतने इन सीबीआई वालो को देखने दो इनसे कुछ नहीं होगा वैसे भी.

मैं:- हम्म्म कहती तो तुम सही हो हर्ष से ऐसे नौसिखियों की तरह नहीं भीड़ सकता मुझे उसके बराबर नहीं तो कमसेकम उप्पेर तो उठना hi होगा. और उसके लिए मेरे पास प्लान है.

किरण:- कैसा प्लान और तुमने कहा था न की रेस्ट लोगे.

मैं:- ये प्लान पूरा होने में काम से काम 9 या 10 महीने या 1 साल लग जायेगा.

किरण:- तो बताओ.

मैं:- लिसेन तुम बिज़नेस स्टार्ट करो मेरे नाम से पैसे जितने लगाने है लगा दो, मेरे पास है वो भी लगा दो और तुम्हारे पास है वो भी, बस मुझे एक साल में दिल्ली का सबसे बड़ा बिज़नेस टाइकून बना दो.

किरण:- वो तो हो जायेगा, पर तुम क्या करने वाले हो.

मैं:- बस देखती जाओ अब तुम क्या क्या करता हु मैं. हर्ष को 1 साल भूल जाते है, और उसकी हिटलिस्ट से हटने के लिए मैं कल hi ऑफिशियली सीबीआई छोड़ दूंगा.

किरण:- हम्म्म ग्रेट चलो अब सोने, मैं थक गयी हु..

मैं:- आओ तुम्हारी थकन मिटाता हु.

और मैंने उसे अपनी तरफ खींचा और उसे गौड़ में उठके बीएड पे लिटाया और फिर उसके होठो पे होठ रखे और फिर प्यार के या सरीर के इस खेल में ऐसा खोये की आँख कब लगी पता hi नहीं चला.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
एक्चुअली दुसरे वाला पहले hi आ गया था जब एक खुद के घर पे था और वो एक को आर्डर दे रही थी, अब एक को गुस्सा आ रहा था और ड्रग्स न होने की वजह से वो part एक्टिव हो रहा था पर वो एक को मुश्किल में डालना चाहता था क्युकी एक उसको रोक रहा है ड्रग्स देके और वो उस चीज़ में कामयाब भी हो गया एक को कुछ नहीं मिला और टीम गयी वो अलग :डी
 
डॉ. प्रभाकर से देखते है क्या पता चलता है और एक का पास्ट का भी खुलके पता लगेगा सायद और इस बीमारी का सुरुवात कहा से हुए ये भी,

और एक किस चीज़ का बिज़नेस करेगा ये उसे भी नहीं पता क्युकी ये काम किरण करेगी अपने हिसाब से :डी

और हर्ष को वो हरा सकता है अगर उसके पास एक टीम हो और सारे रिसोर्सेज और उसे फुल छूट हो बन्दे मारने की लेकिन फ़िलहाल उसके पास कुछ भी नहीं है

Btw, थैंक्स बरोथेर फिर योर ब्यूटीफुल रिव्यु :हुग:
 
अपडेट:-33

मेरी सुबह आँख खुली तो देखा मेरा फेस दो मुलायम चीज़ो में धसा हुआ है और मेरा किसी की नैवेल पे, मैं खड़ा हुआ किरण के गाल पे एक किश किया और बाथरूम में घुस गया जब फ्रेश होक बहार आया तो किरण जा चुकी थी अपने रूम में, मैंने भी स्कूल यूनिफार्म पहनी और रेडी हो गया स्कूल जाने के लिए, अब गन लेके नहीं जा सकता था क्युकी अब कोई सीबीआई से लिंक नहीं था मेरा बस दो दिन की हीरोगिरी थी :सिघ2: ,खैर मैं निचे आया तो ब्रेकफास्ट रेडी था कई दिनों बाद घर का खाना नसीब हो रहा था, मजे से ब्रेकफास्ट ठूसा और बाइक लेके निकल गया.

रस्ते में आकाश को पिक किया और बाइक पे पेट्रोल डलवा के स्कूल पहुंचे आज हमने सीधा बाइक पार्किंग में रोकी और भाग के क्लास में गए तो होपफ़ुल्ली क्लास में कोई टीचर नहीं था. अब दिक्कत ये हो रही थी की आकाश था क्लास का सेकंड टोपर और उसे बैठना था आगे और मुझे बैठना था पीछे, लेकिन उसकी मेरे आगे कहा चलने वाली थी इसलिए मैं उसे खींच के पीछे लेके गया और सबसे लास्ट बेंच पे बिठा दिया.

और फिर वो एंटर हुयी जिसको मेरी आँखे क्लास में एंटर होने के पहले से hi निहार रही थी, वो आयी और सीधा फर्स्ट बेंच पे बैठ गयी बस देखा भी नहीं एक बार मेरी तरफ, खैर टीचर भी आयी और अटेंडेंस लेने लगी.

Ma'am:- अंकित चौधरी.

मैं:- प्रेजेंट ma'am.

Ma'am:- खड़े रहो.

Wtf खड़े रहो, पर क्यों लेकिन मेरी कोण सुनने वाला था इसलिए उसने पहले सबकी अटेंडेंस ली और फिर मेरी तरफ ध्यान दिया..

Ma'am:- हां तो मर. एक कल क्यों नहीं आये?

मैं:- वो एक्सीडेंट हो गया था, इसलिए.

Ma'am:- झूठे बहाने मत मारो.

मैं:- बेशक देख लो

इतना बोलके मैं आगे गया और पहले घुटने पे बंधी पट्टी दिखाई और फिर कोहनी पे लगी हुयी, इतना देखने के बाद वो चुप हुयी लेकिन इम्प्रैशन तो अब भी झड़ना है था इसलिए बोली.

Ma'am:- ोकककक आगे से एप्लीकेशन लिखना और अभी के लिए एक एप्लीकेशन लिख के सबमिट करो.

मैं:- ोकक ma'am.

Ma'am:- और तुम्हारा सिलेबस कहा तक कम्पलीट हुआ है क्युकी इन तीन दिनों में सरप्राइज टेस्ट है.

सरप्राइज टेस्ट बता के कोण लेता है :सिघ:

मैं:- ma'am अभी तो तयारी नहीं है.

Ma'am:- मुझे पता था इसलिए आज तुम पुरे दिन लाइब्रेरी में बैठ के अपना आज तक का सिलेबस रिकवर करोगे हर सब्जेक्ट का.

मैं:- पर में अकेला कैसे.

Ma'am:- प्रीती अगर तुम्हे कोई प्रॉब्लम नहीं है तो तुम हेल्प कर डौगी इसकी.

प्रीती:- ोककक ma'am.

Ma'am:- जाओ तुम अब और कोई शिकायत नहीं आणि चाहिए तुम्हारी.

मैंने हाँ में मुंडी हिल्लायी अंदर से तो भेनचोद इतना खुस था की ma'am को उठा के गले लगा लू, दिल की बात बोल दी थी उन्होंने, खैर मैंने अपने इमोशंस के पिटारे को अपने दिल की संदूक में बंद किया और बैग उठा के क्लास से बहार निकल के खड़ा हो गया, 2 मिनट में प्रीती भी बैग लेके आयी, उसने मुझे देखा और फिर बड़ी प्यारी पर गुस्से में बोली.

प्रीती:- तुम यहाँ खड़े क्यों हो? लाइब्रेरी क्यों नहीं गए.

मैं:- वो वो मैंन....

प्रीती:- क्या वो वो कर रहे हो ठीक से बोलो.

करा दी बजती भेनचोद बोल भी नहीं पा रहा, पर ये मेरा फर्स्ट टाइम था जब मैं किसी के सामने हकलाया था.

मैं:- वो वो मुझे लाइब्रेरी का नहीं पता था.

प्रीती:- चलो अब मेरे साथ.

मैं कुछ नहीं बोलै बस हाँ में मुंडी हिला दी और उसके पीछे पीछे चलने लगा, थोड़ी देर बाद हम लाइब्रेरी पहुंचे एंट्री करवाई और एक कोने में जाके बैठ गए आमने सामने.

प्रीती:- पहले फिजिक्स फिर केमिस्ट्री और फिर मैथ पढ़ेंगे बाकी सब्जेक्ट खुद पढ़ लेना.

मैं:- ोकक तो पढ़ाओ.

प्रीती:- क्या पढ़ाओ, अपनी बुक निकालो फिजिक्स की एंड don't तेल्ल में की तुम स्कूल में बुक नहीं लेके आया.

मैं:- वो वो एक्चुअली भूल गया मैं जल्दी-2 में.

प्रीती:- पता नहीं कैसे अड्मिशन हो जाता है ऐसो का बुक भी नहीं है स्टडी में भी पीछे है.

मैं:- कुछ कहा क्या तुमने.

ये बात उसने बहुत धीरे बोली थी लेकिन मेरे तेज़ कानो ने सुन ली :कूल:

प्रीती:- कुछ नहीं बोलै मैंने, तुम जाओ और फिजिक्स, माथा और केमिस्ट्री की बुक लेके आओ.

मेरे को बुरा तो लगा था की उसने ऐसा कैसे बोल दिया, पर इसका जवाब अभी नहीं बाद में दूंगा सही वक़्त पे और ऐसा सोच के मैं खड़ा हुआ और उस बड़ी सी लाइब्रेरी का चक्कर लगा के तीन बुक्स लेके आया और टेबल पे रख दी.

फिर वो मुझे फिजिक्स पढ़ने लगी किसी खड़ूस बूढी मैडम के जैसे और मैं भी किसी चमन चूतिये चम्पू जैसे ध्यान से पढ़ने लगा और वो पढ़ने में और मैं पढ़ने में ऐसा मगन हुए की हमारा ध्यान रेसस्स की बेल्ल से हटा.

प्रीती:- रेसस्स के बाद केमिस्ट्री पढ़ेंगे और कल मैथ्स, जाओ अब.

मैं कुछ नहीं बोलै बस हाँ में मुंडी हिल्लायी और वह से काट लिया क्युकी मैं लाइफ में पहली बार किसी के सामने नर्वस फील कर रहा था. मैं कैंटीन में पंहुचा जहा आकाश पहले से मौजूद था और उसके चेहरे पे 12 बजे हुए थे.

मैं:- क्या हुआ बे ये गांड जैसा मुँह क्यों बना रखा है?

आकाश:- अबे में आरती को लिखे करता पर वो उस मनोज से बात करती है बस.

Main:-to यहाँ सदी सकल बनाने से बात नहीं करेगी जा उसके सामने हरकते कर थोड़ी हवाबाज़ी कर.

आकाश:- मेरी छोड़, अपनी देख 3 दिन बाद टूर्नामेंट सुरु, क्या करेगा तू? चल आज प्रैक्टिस करते है.

मैं:- अबे मैं प्रैक्टिस वगैरह नहीं करता अपुन ों थे स्पॉट खेलता और पेलता है.

आकाश:- अब तू चल तो काम से काम अपने प्लेयर्स को hi देख ले, कॅप्टेन्सी का ख़ाक करेगा फिर तू.

मैं:- चल बीटा आज तुझे जलवे दिखता हु.

आकाश:- और मुझे क्यों लग रहा हैटरी बरजति होने वाली है.

मैं:- ी ऍम योर बॉस, ठीक से बात कर.

मैंने ये बात थोड़ी तेज़ बोली जिससे आकाश सेहम गया और मुंडी झुका के चलने लगा.

मैं:- अबे मुँह मत लटका मजाक कर रहा था.

आकाश:- भसडक.

और वो मेरे पीछे भगा और मैं ग्राउंड की तरफ हम दोनों ऐसे भागते हुए पहुंचे जहा हमारे क्लास के लोंदे प्रैक्टिस कर रहे थे.

आकाश:- और प्रैक्टिस कैसी चलर रही है बे तुम्हारी.

मनोज:- सही है एक दम, तुम दोनों भी आ जाओ, साला दर लग रहा है आर्यन न जित जाए इस बार भी.

मैं:- नहीं जीतेगा.

मेरा ऐसे बोलने पे वो हसने लगे. मैंने उन्हें घुरा तो वो चुप हुए और मनोज मेरी तरफ बात बढ़ाते हुए बोलै चल खेल के दिखा तो, मैंने भी जोश जोश में पकड़ लिया बात लेकिन जैसे hi बात हाथ में लिया और तब मुझे रीलीज़ हुआ की मैंने उड़ता तीर खुद की चाहती पे ले लिया है क्युकी बात हाथ में लिए जमाना हो चूका है लेकिन अब पकड़ लिया है तो फिर देखा जायेगा जो होगा. मैंने पोजीशन ली और उस मनोज ने एक लड़के को बोल दी मुझे नाम तो नहीं पता था लेकिन वो बहुत लम्बा run-up लेके भाग के आया और खतरनाक एक्शन के साथ बहुत गांड फाड़ पेस बॉल डाली जो की मैं समझ पाटा उससे पहले स्टंप्स उदा ले गयी.

मनोज:- ये तो कुछ भी नहीं है आर्यन इससे भी ज्यादा फ़ास्ट डालता है.

मैं:- अबे क्या फ़्लैश है वो लौड़ा खेर मैं देख लूंगा तुम प्रैक्टिस करो.

अब मैं उनको बात पकड़ा के साइड आया hi था की आर्यन होने चमचो के साथ आ गया मेरी खिली उड़ने.

आर्यन:- ऐसे खेलेगा तू मेरे सामने, हाहाहाहा.

मैं:- तेरा हो गया तो मैं जाओ और जिस दिन मैच होगा उसदिन की उसदिन देखेंगे.

आर्यन:- वो तो तू हारेगा, लेकिन तू प्रीती से दूर रह नहीं तो जान से मार दूंगा.

मैं:- "मुझे मरने चले हो बीटा मैं खुद तुम्हारी मौत हु, एक तरफ सरीफ हु मैं तो दूसरी तरफ हरामी भी बहुत हु..!!"

और इतना बोलके मैं और आकाश आगे बढ़ गए क्युकी क्लास का टाइम हो hi चूका था.

आकाश:- भाई क्या डीएलओगे था.

मैं:- मेरे साथ रहा कर तू भी सिख जायेगा.

उसके बाद हम टॉयलेट गए और फिर वो क्लास में गया और मैं लाइब्रेरी में आके बैठ गया और प्रीती का वेट करने लगा. थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद वो आयी थोड़ा साद लग रही थी वो मुझे.

प्रीती:- चलो केमिस्ट्री की बुक निकालो.

मैं:- तुम्हे क्या हुआ? साद क्यों हो?

प्रीती:- तुम्हे उससे क्या मतलब.

उसके बाद मैं कुछ नहीं बोलै बस चुपचाप बुक निकल के उसको दी, अगर इसकी जगह कोई और होता तो वो अभी तक पिट चूका होता लेकिन इसकी तो बात hi अलग है और सायद उसे भी उसकी गलती रीलीज़ हुयी इसलिए वो बोली.

प्रीती:- सॉरी! किसी और का गुस्सा तुमपे निकल दिया.

मैं:- it's ोककक, मैंने तो दोस्ती के नाते पूछ लिया था.

प्रीती:- दोस्त! दोस्त कब बने हम.

मैं:- अरे वो वो तुम क्लासमेट हो और क्लास्स्मेटिस दोस्त hi तो होते है.

प्रीती:- ाचा ठीक है. वैसे आह फायर एंड आइस में पार्टी दे रही है मेरी फ्रेंड तो तुम आना चाहो तो.....

मैं:- आ जाऊंगा लेकिन आकाश को लेके आऊंगा.

प्रीती:- ोकक, अब पढाई पे ध्यान दो.

वो फिर से पढ़ने लगी और मैं पढ़ने लगा छुट्टी होने तक पता hi नहीं चला की हम कितनी देर से बैठे पढ़ रहे है, चलो एक तो फायदा हुआ की सिलेबस तो कवर हुआ काम से काम.

मैं:- ोककक ब्यय.

प्रीती:- रात को याद से आ जाना 8 बजे फायर एंड आइस .

मैंने हाँ में मुंडी हिल्लायी और पार्किंग की तरफ निकल लिया, वह पे आकाश मेरा पहले से hi वेट कर रहा था.

मैं:- चले तो.

आकाश:- चल.

मैंने बाइक स्टार्ट की और आकाश को पीछे बैठा के दौड़ा दी.

आकाश:- वैसे अब क्या करना है हमे बॉस.

मैं:- कुछ नहीं करना पहले 12तह क्लियर कर फिर देखते है.

आकाश:- क्यों क्या हुआ?

मैं:- ज्यादा सवाल जवाब न कर और चुपचाप रह.

वो कुछ नहीं बोलै मैंने उसे ड्राप किया और सीधा बाइक को घर पे ले जाके रोका और रूम में जाते hi बैग फेका सीबीआई से मिली हुयी गन उठायी उनका कार्ड उठके जेब में डाला और कपडे चेंज करके निकल गया, किरण भी घर पे नहीं थी सायद बहार गयी हुयी होगी.

अब मुझे सीबीआई हेडक्वार्टर से बुलावा आया था राज का, उनका मैसेज आया था जब में पार्किंग में था और इसी कारण से मैंने आकाश को दांत दिया था, क्युकी उस वक़्त मेरे दिमाग में 100 चीज़े चल रही थी.

मैं करीब 27 मिनट 29 सेकंड में सीबीआई ऑफिस पंहुचा लेकिन इस बार कोई चेकिंग नहीं हुयी मेरी इसलिए सीधा मैं 4तह फ्लोर पे आया और वह वही बुद्धि रिसेप्शनिस्ट थी.

उसने मुझे घूरा और मैंने उसे स्माइल दी और सीधा राज के केबिन की तरफ गया और बिना नॉक करे सीधा अंदर और अंदर जैसा मैंने सोचा था वो सब थे मतलब राज था और उसके 5 नमूने लेकिन आज एक नमूना नया था करीब 26-27 साल का गोरा चिट्टा बाँदा था.

राज:- आ गए तुम.

मैं:- आ hi गया हु तभी तो दिख रहा हु, ये सब बाते छोड़ो और सीधा काम की बात पे आओ.

वो जो आदमी था वो बोलै.

वो:- बचे थोड़ा आराम से तुम सीबीआई हेड के सामने बैठे हो.

मैं:- तेरी तारीफ, और तू है कोण? और तू मुझे रूल्स समझायेगा...

मैं थोड़ा छिलके बोलै जिससे वो सब को कल मंजर याद आ गया.

राज:- एक एंड आशीष कूल डाउन वो यहाँ नया है, और वो तुम्हारी जगह लेगा टीम में.

मैं:- no ओने कैन टेक प्लेस ऑफ़ में. वो मेरा 50% भी नहीं है. पर ी don't केयर जो मर्ज़ी करो.

राज:- हां यही तो दिक्कत है की यू don't केयर अबाउट एनीवन खैर छोड़ो वो गन और कार्ड यहाँ टेबल पे रखो.

मैंने वो दोनों चीज़ टेबल पे राखी तो वो आशीष बोलै.

आशीष:- मैंने तेरे बारे में सब कुछ पता कर लिया है अब तक जिन्हे तूने मारना था मार लिया और उन सब के लिए मैं तुझे राज सर के कहने पे माफ़ कर रहा हु लेकिन आगे से तुम मुझे किसी भी इललीगल स्पॉट पे या क्राइम की जगह पे मिले तो बहुत बुरा हो गए तुम्हारे लिए.

मैं:- हो गया तेरा, अब मेरी भी सुन ले तू कुछ भी कर ी don't गिव ा फ्लाइंग फ़क, लेकिन मेरे पीछे आने की गलती भूल से भी न कर दियो और गलती से आ भी गया तो हाथ मत दाल दियो मेरे पे नहीं तो निचे से तोड़ने लगूंगा और उप्पेर तक तोड़ता जाऊंगा. अब किसी और को कुछ कहना है या मैं जाओ.

राज:- नहीं बस आशीष की बात पे गौर करना अब अगर तुमने कुछ भी गड़बड़ी की तो तुम को बक्शा नहीं जायेगा और एक बात ध्यान रहे विशाल से दूर रहना मैं नहीं चाहता वो तुम जैसा बने.

मैं:- हाहाहाहा, सबूत मिले तो कर लेना कुछ भी और विशाल मेरा भाई आज नहीं तो कल वो मेरे साथ होगा और फिर देखता हु कोण रोकेगा मुझे. और एक फ्री की एडवाइस दू तुम लोग हर्ष का तो क्या उसका एक पिलर भी नहीं उखड पाओगे. गुड़ bye.

और इतना बोलके मैं वह से निकला और सीधा डॉ. प्रभाकर के पास गया लेकिन वो किसी अर्जेंट काम के लिए आउट ऑफ़ सिटी गए हुए है तो कल hi मिलेंगे वो, अब मैं वह क्या करता इसलिए मैं भी घर आ गया.

मैं घर पंहुचा तो किरण पहले से hi मौजूद थी. उसने मुझसे पूछा की कहा गए थे मैंने उसे सब बताया तो वो जाके खाना लायी और फिर हमने साथ खाना निपटाया.

इस वक़्त हम दोनों एक दुसरे की बाहो में लेते हुए थे.

मैं:- किस चीज़ का बिज़नेस करोगी रीडर्स लोग पूछ रहे है?

किरण:- कोण रीडर्स.

मैं:- अरे कुछ नहीं तुम बताओ न.

किरण:- मेरे हिसाब से हर्ष से टक्कर लेनी है तो उसके बिज़नेस में hi उसे हराना ठीक होगा. वैसे स्कूल में क्या चल रहा है.

फिर मैंने उसे स्कूल में पहले दिन से लेके अब तक का सब बताया.

किरण:- ये प्रीती का क्या सन है और अगर इससे प्यार करते हो तो मनीषा का क्या?

मैं:- मुझे नहीं पता प्यार क्या होता है और क्या नहीं या मैं किस्से करता हु, पर मनीषा मुझसे प्यार ..........

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
दोस्तों स्टोरी के अकॉर्डिंग आगे चल के क्रिकेट के कुछ उपदटेस आने वाले है अगर आप लोगो को क्रिकेट देखा है तो बताइये और नहीं देखना तो भी बताइये फिर उस हिसाब से सिचुएशन क्रिएट करू की क्रिकेट का टाइम न मिले हीरो को अगर देखना है तो चलने देते है ऐसे hi :डी

थैंक यू सो मच आल ऑफ़ यू फॉर योर लव एंड सपोर्ट :बाउ:
 
थैंक्स बरोथेर फॉर योर ब्यूटीफुल रिव्यु :लव:

एक क्या कर रहा है इसका तो मुझे भी नहीं पता :?:

प्रीती के सामने एक नर्वस हो जाता है बिचारा क्या करे वो है hi इतनी क्यूट :ब्लश1: और बजती का बदला तो लिया जायेगा :ेविलौगह:

आशीष को माँ का ...... :अप्प्रोवे: , रिवेंज लेने की जरूरत hi नहीं पड़ेगी :डी

एंड अगेन थैंक्स बरोथेर :हुग:
 
थैंक्स सर जी फॉर योर ब्यूटीफुल रिव्यु :बाउ:

मैं भी थोड़ा बहुत एक जैसा hi हु मुझे भी प्यार के बारे में और उसके एहसास के बारे में कुछ नहीं पता :शाय:

प्यार तो किसी एक से hi होगा :डी देखते है वो बदनसीब कोण होगी

एप कॉलेज एंड स्कूल लाइफ अरे थे बेस्ट part ऑफ़ आवर लाइफ मुझे तो कोई स्कूल के दिन वापिस दे तो मैं खुसी खुसी मान जाऊंगा :अंगरिसद:

थैंक्स अगेन सर जी :हुग:
 
मैं खुद को बेस्ट तो नहीं पर ी ऍम गुड ात एव्री गेम, क्रिकेट में स्टेट लेवल तक खेला हु, वॉलीबॉल में नेशनल लेवल तक खेला हु इंडियन नेवी में जाने का मौका भी मिला था जब में 18 साल का था लेकिन मैं गेम सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए खेलता था इसलिए नहीं गया :डी, और फुटबॉल रेसलिंग , कबाड़ी के हर मैच देखता हु मैं. मैंने 100 मीटर, 200 मीटर रेस में स्टेट लेवल टूर्नामेंट हुआ था रोहतक में तो गोल्ड लेके आया था उसमे में, और चैस तो मेरा फवौरीते है इंडोर गेम्स में लेकिन अब वक़्त के साथ हमे भी बदलना पड़ा और इन सब खेलो को छोड़ के ऑनलाइन गेम्स को अपनाना पड़ा :डी , ी ऍम एथलिट बिकॉज़ मैं हरयाणा से बिलोंग करता हु और वह पढ़ाई से ज्यादा खेलो पे ध्यान देते है, इसलिए इसी का असर था :डी
 
अपडेट:-34

किरण:- ये तुम क्या बोल रहे हो?

मैं:- मैं वही कह रहा हु जो मैंने नोटिस किया है जो मेरे दिमाग ने कहा है, मनीषा मुझसे प्यार वयर नहीं करती वो तो मुझसे नफरत करती थी अचानक से प्यार कैसे हो सकता है? वो बस मुझे उसे करके आगे बढ़ना चाहती थी.

किरण:- और तुम्हे ऐसा क्यों लगता है.

मैं:- क्युकी मैंने उसके चेहरे को पढ़ा है जब बहार दुसरे देश में पढ़ने की बात हुयी तब उसके फेस पे खुसी के भाव आये थे लेकिन उसने वो भाव छुपा के दुःख के कर लिए और बस एक बार मन किया जाने से और उस टाइम भी उसके चेहरे पे दर था कही मैं उसे यही न रख लू.

मैं रुका और पानी पाइक फिर बोलै.

मैं:- वो जब भी मुझे अपने साथ सोने के लिए बोलती थी तब उसके चेहरे पे एक दर होता था कही में हाँ न कह दू, अब उसके कॉल क्यों नहीं आते अरे वो छोड़ो एक बार भी नहीं आया, किइसका रीज़न है तुम्हारे पास? वो मेरे दिल से खेल सकती है दिमाग से नहीं.

किरण:- और तुम्हारा दिल क्या कहता है? और अगर तुम्हे पहले से ये सब पता था तो तुमने उसे रोका क्यों नहीं बल्कि जैसा वो चाहती थी तुमने वैसे hi किया.

मैं:- दिल क्या चाहता है या क्या कह रहा है उससे मुझे कोई मतलब नहीं है क्युकी जिस राह पे में चल रहा हु वह फैसले दिमाग से लिए जाते है न की दिल से और मैंने उसे आगे इसलिए बढ़ाया क्युकी चाहे वो मुझसे नफरत करती हो पर मेरे को वो अछि लगती है और मैं यही चाहता था की वो अपनी लाइफ में आगे बढे लेकिन अगर ये बात वो सीधे सीधे hi बोलती तो भी मान जाता. पता नहीं क्यों जिसे भी दिल से चाहता हु वो धोका क्यों दे जाता है.

किरण:- मैं तुम्हे कभी धोका नहीं दूंगी.

मैं:- दे भी नहीं पाओगी और सोचना भी मत क्युकी फिर तुम्हारी और तुम्हारे खंडन को वो मौत दूंगा जो न तुमने कभी देखि होगी और न hi सुनी होगी.

अब मेरी आवाज़ में गुस्सा था और मेरी बात करने का टोन बदलने लगा था और किरण समझ रही थी की इसे ज्यादा गुस्सा दिलाया तो ये पेल देगा अभी.

किरण:- एक! रिलैक्स गुस्सा क्यों होते हो? मनीषा ने जो किया उसे करने दो तुम बस खुद पे ध्यान दो उसकी सजा भगवन उसे देगा.

मैं:- भगवन? कोण भगवन? मैं चलती फिरती मौत हु और इंसान भगवन से ज्यादा मौत से डरता है और मनीषा ने अनजाने में hi सही पर धोका तो दिया hi है और उसे उसकी सजा मौत से भी बदतर मिलेगी.

किरण:- ोकक रिलैक्स! जाओ तुम रेडी हो जाओ पार्टी में भी जाना है.

और पार्टी का नाम सुनके मेरे दिमाग में प्रीती का फेस आ गया और उसको देख के सारा गुस्सा और फ़्रस्ट्रेशन कहा गयी पता hi नहीं लगा और उससे मिलने की खुसी में, मैं झट से बाथरूम में जाके शावर लिया और बहार आया तो बहार किरण ने मेरे लिए कपडे निकल रखे थे. जो एक ब्लैक शेडेड रफ़ जीन्स थी और एक कॉटन की वाइट शर्ट जिसपे हुड जैसा टोपा लगा हुआ था. मैंने झट से कपडे पहने और फिर निचे नाइके के स्नीकर्स और एक दम chaka-chak रेडी हो गया, बाल वाल सेट किये. पर्स डाला और कार की के उठायी और निचे आया.

किरण:- यू अरे लुकिंग हैंडसम.

मैं:- थांग्स. रात को लेट आऊंगा तुम सो जाना.

किरण:- ोोककक ब्ययी.

उसके बाद मैं घर से कार लेके आकाश के घर की तरफ निकला , उसके घर पंहुचा तो वो बहार hi मिल गया लोदु एक दम saj-dhaj के खड़ा था जैसे आरती जाते hi बोलेगी "आकाश यू अरे लुकिंग हैंडसम, आ जाओ मार लो मेरी :रोल: " पर जो भी स्मार्ट लग रहा था पर मेरे से काम. खैर वो कार देखके चौंका और फिर जब मैंने मिरर डाउन किया तो मुझे देखके खुस हो गया और फाटक से आगे बैठ गया.

मैं:- लौड़े इतना तैयार होक क्या करेगा उधर.

आकाश:- अरे भाई आरती आ रही है न.

मैं:- वो तुझे भाव तो देती भी नहीं.

आकाश:- तो क्या हुआ मैं तो उसे बचपन से प्यार करता हु न पर वो मोहित बिच मैंने ा रहा है.

ओह्ह्ह तो लोंदा प्यार में है.

मैं:- चल गांड जैसी शकल न बना अपुन सेट करवाएगा आरती तुझसे.

आकाश:- सच्ची भाई.

मैं:- ज्यादा न उछाल पहले पूरी बात सुन, बदले में मुझे आशीष शर्मा नाम का अफसर है सीबीआई में उसकी हिस्ट्री, जियोग्राफी, केमिस्ट्री फिजिक्स सब चाहिए..

आकाश:- नहीं नहीं मैं नहीं कर सकता, वो लोग मुझे पकड़ लेंगे तो.

मैंने गाडी के मारे खींच के.

मैं:- उतर लौड़े तेरी तो सीबीआई के सर्वर हैक करने में hi फैट गयी आगे जाके इंटरनेशनल क्राइम करेगा तब क्या होगा तेरा. भाग बस.

आकाश:- देख भाई मैं कर दूंगा लेकिन पकडे गए तो.

मैं:- देख बॉस मैं हु तो जो बोलता हु वो कर, बाकी सब मैं देख लूंगा.

आकाश:- हो जायेगा फिर तो लेकिन मुझे नया पक बिल्ड करना पड़ेगा मेरे वाला कमज़ोर है थोड़ा.

मैं:- तो करना !

आकाश:- वो पैसे?

मैं:- लिस्ट बना के दे दियो, मैं आर्डर कर दूंगा.

हम दोनों बात करते करते फायर एंड आइस पहुंच गए, दिल्ली के टॉप नाईट क्लब्स में एक है ये. हमने कार पार्क की और उतरके गेट पे आये तो बाउंसर्स ने रोक लिया.

बाउंसर्स:- प्राइवेट पार्टी!

मैं:- अबे तो अंदर जाके बोल एक साहब आये है.

उन दोनों ने मुझे घुरा और फ़ोन करते उससे पहले हमारे पीछे से आवाज़ आयी "ये मेरे साथ है" . इस आवाज़ के साथ में पीछे पलटा तो दिल मेरे मुँह को आ गया, वक़्त रुक गया, साडी टेंशन सारे थॉट दिमाग से चले गए, मैं कोण हु ये भी भूल गया क्युकी सामने हूर की पारी कड़ी थी एक लाइट पिंक कलर के फ्रॉक में वो किसी क्यूट सी गुड़िया की तरह लग रही थी. लेकिन आकाश को मेरे खुश होना पचा नहीं इसलिए उसने मुझे पेट में कोहनी मारी.

आकाश:- अबे लार मत टपका.

मैं:- माँ.. मई.. मैं.. कहा लार टपका रहा हु, कुछ भी बोलता है.

प्रीती:- ही एक, ही आकाश.

मैं:- हेलल... Hello...

वो मुझे हकलाता देख खिलखिला के हसने लगी, और मैं उसके हस्ते चेहरे पे फिरसे खोता उससे पहले आकाश hi बोल पड़ा.

आकाश:- तो चले अंदर.

प्रीती:- हां चलो मैं एक को अपनी फ्रेंड्स से मिलवाती हु.

प्रीती आगे बढ़ी और उसके बढ़ते hi मैंने आकाश पीठ पे मुक्का मारा.

मैं:- भसडक बहुत जल्दी हो रही है अंदर जाने की, बात भी नहीं करने दी.

आकाश:- जा बे उसके सामने कैसे शाहरुख़ खान जैसे हकला रहा था, अबे तू क्या गुंडा बनेगा..

मैं:- बकचोदी न पेल चल अब अंदर.

फिर हम दोनों भी अंदर गए तो वह तो फुल रंगीनी छायी हुयी दज पे dhichik-dhichik हो रही थी और वह सारे हमारे सेक्शन के hi लड़के लड़किया थी. पर एक चीज़ सही थी की वह दारु भी थी और क्या चाहिए मुझे लेकिन फिर याद बस प्रीती के सामने सरीफ बनना है मुझे. सो आज दिल पे पत्थर रख लूंगा.

प्रीती:- अरे एक वह क्या कर रहे हो यहाँ आओ न.

मैं:- आ.. आया...

फिर हम दोनों उनके ग्रुप के पास सोफे पे बैठे जहा आरती और मनोज और उनकी 2 चार लड़किया और बैठी थी. प्रीती ने वेटर को आवाज़ थी वो भें का लौड़ा जूस लेके आया, मादरचोद नाईट क्लब में जूस कोण पिता है बे इससे सही तो कही मंदिर hi ले चलते.

प्रीती:- एक शी इस माय बेस्ट फ्रेंड आरती और ये अंजलि और ये सना और ये दिव्या और इस मनोज को तो तुम जानते hi होंगे.

मैं सब को hello बोलै और वो जूस का गिलास एक सांस में पूरा पी गया.

प्रीती:- तो एक अपने बारे में बताओ कुछ.

मैं:- में.. मेरे .. बारे में, कुक... कुछ नहीं हैं बात.. बताने.. लायक.

प्रीती:- अरे तुम हकला क्यों रहे हो, मैंने देखा है तुम्हे तुम वैसे तो बहुत बोलते हो.

मैं एक सास खींची और ज़ोर से छोड़ी और खुद से बोलै "लौड़े बहुत बजती हो चुकी अब और नहीं, भूल मत तू हरयाणा से है और तू इन चम्पू लोगो के सामने हकला रहा है शेम ों यू एक" अब मैंने खुद को निचा दिखाया तो मुझमे कॉन्फिडेंस अपने आप आ गया.

मैं:- नहीं ऐसा कुछ नहीं है, ख़ूबसूरत लड़कियों के सामने बोलती अपने आप बंद हो जाती है.

प्रीती:- ोकक, ोकक, ये सब छोड़ो और अपने बारे में बताओ.

मैं:- मेरे बारे में कुछ बताने लायक नहीं है न hi आज तक मैंने कुछ इंट्रेस्टिंग चीज़ की है अभी तक. अनाथ हु और खुद के दम पे कुछ बनना चाहता हु. सरीफ हु लोगो का दुःख मुझसे देखा नहीं जाता, अगर किसी के आँखों में आंसू देख लू तो मेरे आँखों में आंसू आ जाए, अरे मुझे तो किसी मचार के मरने पे भी दुःख होता है की भगवन ने ऐसा क्यों किया.

अब मैं कुछ और रायता फैलता इससे पहले आकाश ने मेरे पेट में कोहनी मारी और आँख दिखाई तो मैं शांत हो गया और जब उनको देखा था वो साड़ी लड़किया इमोशनल हो गयी थी मुझे ऐसे देख रही थी जैसे मैं भगवन का अवतार हु :डी

प्रीती:- तुम बहुत अचे इंसान हो एक.

अंजलि:- हां तुम बहुत अचे हो एक, कितने इमोशंस है तुममे और ये एक तुम्हारा दोस्त मुझसे ठीक से बात भी नहीं करता.

आकाश:- हां तो तू कोनसा करती है, मैसेज का रिप्लाई तो देती भी नहीं.

अंजलि:- हां तो तूने मुझे चॉक्लेट देना क्यों बंद किया.

प्रीती:- अरे तुम दोनों लड़ो मत यार, चलो इन बॉयज को यही बैठने दो हम थोड़ा दूसरो को भी अटेंड करके आते है.

वो लड़किया जाने लगी तो वो मनोज भी खड़ा हुआ लेकिन मैंने उसका हाथ पकड़ के बिठा लिया.

मैं:- अबे कहा जा रहा है लड़की है क्या या उनका गुलाम जो उनके पीछे-2 हो लिया.

मनोज:- नहीं यार वो तो मैं बस दोस्तों के पास जा रहा था.

आकाश:- तो क्या हम तेरे दोस्त नहीं है.

मनोज:- नहीं ऐसी बाए...

मैं:- अबे आकाश ये तो मर्द hi नहीं है, लड़कियों के पीछे छुपता है उनके साथ जुइ पिता है, गली भी ने दे सकता ये तो किसी के आगे. अरे थू है ऐसा लड़का होने पे.

आकाश:- अरे ये तो टिकटोक भी बनता है.

मैं:- व्हाट? भाग भसडक तू तो गे है.

मनोज:- नहीं नहीं मैं मर्द हु असली मर्द.

मैं:- तो हो जाए तेरे और मेरे बिच चैलेंज.

मनोज:- कैसा चैलेंज?

मैं:- कोण ज्यादा दारु पिता है? जिसने ज्यादा पि वो होगा असली मर्द.

मनोज:- नहीं ! नहीं! मैंने बस एक दो बार पि है मैं नहीं लगाने वाला कोई ऐसी शर्त.

आकाश:- अबे ये औरत है भसदक़ा, चुडिया पेहेन लियो घर जाके, लुंड कटवा ले तू भसडक, दारु नहीं पि सकता, कैसा दोस्त बना लिया बे.

मनोज को गुस्सा आ गया क्युकी हमने उसकी आत्मा तक हिला दी थी और ऐसा होते देख मैंने आकाश को आँख मारी.

मनोज:- मैं तैयार हु तू माँगा दारू.

मैं:- अबे यहाँ नहीं उस साइड चल जहा अँधेरा है थोड़ा नहीं तो सब देखलेंगे, और तक़िले शॉट्स होंगे हम दोनों एक साथ पिएंगे देखते है कोण ज्यादा पिता है.

मनोज:- चल तो फिर.

हम दोनों एक कोने में आये जहा हमे कोई न देख रहा था, 2 मं में आकाश आ गया एक वेटर के साथ और उसने टेबल पे 20 chote-chote गिलास रख दिए तक़िले के.

मैं:- 1, 2, 3 जो.

और इतना बोलते hi हम दोनों उठा के सत्ता सात मारने लगे एक के बाद एक शॉट, अब वो चुटिया तो अपना गाला जला रहा था लेकि मैं अँधेरे का फायदा उठा रहा था बस गिलास को मुँह के पास लेके जाता और जैसे hi वो पिने के लिए मुँह उप्पेर करता मैं अपने साइड से साडी दारू पीछे फेक देता. अब उसने गुस्से और जोश में 8 पेग मार लिए और अब उसे फुल चढ़ चुकी थी क्युकी उसने एक दो बार पि थी और ये पेग भी फुल नेट रखवाए थे आकाश ने, अब होना था काण्ड इसलिए मैं जान बुझ के हां गया.

मैं:- मैं हार मंटा हु मनोज भाई, तुम तो मर्द हो.

मनोज:- मैं मर्द हु भेनचोद, मैं मर्द हु.

अब वो तेज़ तेज़ चिल्लाने लगा और गालिया बकने लगा, हम दोनों मौके की नजाकत को समझते hi वह से साइड हो गए और झट से प्रीती और के पास आके खड़े हो गए और मासूम सी सकल बना ली जैसे हमसे सरीफ कोई हो hi न. और अब धीरे धीरे मनोज को ज्यादा चाहड़ने लगी और वो फुल फॉर्म में आ गया था, अब वो दज वाले को गालिया बकने लगा इसलिए दज बंद हो गया और दज बंद होते hi सबका ध्यान मनोज पे आ गया क्यों ममवो चुटिया ज़ोर ज़ोर से माँ बेहेन की गालिया दिए जा रहा था, खुद को मर्द बोले जा रहा था लेकिन जैसे hi उसकी नज़र हमारी तरफ पड़ी वो भाग के हमारे पास आया लेकिन वो भाग ऐसे रहा था की एक हवा का झोका भी उसे गिरा दे :रोफ्लोल:

मनोज:- आरती मैं मर्द हु, असली मर्द ये सब चैनल है मादरचोद.

आरती:- शट उप मनोज ये क्या बकवास किये जा रहे हो, और तुम तो ड्रिंक नहीं करते थे न.

मनोज कुछ बोलता उससे पहले hi आकाश ने और आग लगा दी.

आकाश:- अरे अंजलि उसका पापा बिल्डर है वो तुझ जैसे मिडिल क्लास लड़की की बात सुनेगा क्या? ऐसा मैं नहीं ये मनोज कह रहा था.

अब मनोज भैया थे फुल रोल में अब उनके कानो मैंने क hi आवाज़ गूंज रही थी की वो बिल्डर का बीटा है और आरती एक मिडिल क्लास लड़की और वो उसे सुना रही है.

मनोज:- भेनचोद तू दो कोड़ी की लड़की मुझे बताएगी, जानती है मेरा बाप कोण है?

अब वो आगे कुछ बोलता उससे पहले उसके गाल पे पड़ा एक रैप्टा जो मारा था हमारी अप्सरा प्रीती ने

प्रीती:- लिमिट में रहो मनोज और ये तुम ने दारू क्यों पि.

मनोज को थप्पड़ से थोड़ा होश आया और उसने मेरी तरफ ऊँगली कर दी और बोलै.

मनोज:- हम दोनों ने मिलके पि थी एक शर्त लगा के.

आकाश:- झूट बोल रहा है ये एक तो मेरे साथ था बेशक इसका मुँह सूंघ लो ये तो non-veg भी नहीं खता, ये क्या दारू पियेगा.

अब आकाश के बात सुन प्रीती मेरे पास आयी और मेरे फेस के पास आपने फेस लायी, मेरी तो धड़कन hi बुलेट ट्रैन जैसी हो गयी लेकिन वो जल्दी hi पीछे हो गयी

प्रीती:- सरीफ इंसान पे इलज़ाम मत लगाओ मनोज, आज के बाद हमारे पास दिखना भी मत.

मनोज:- देख लूंगा तुम्हे और इस रनननन...

वो आरती को कुछ बोलता उससे पहले आकाश ने उसके थोबड़े पे पंच दिया लेकिन आरती की आँखों में आंसू आ गए थे तो आकाश ने उसे अपने गले से लगा लिया. लेकिन मनोज भैया एक पंच लगते hi वही पसर गया और दे उलटी पे उलटी करने लगा जिससे हम सब इधर आ गए.

मैं:- don't वोर्री आरती है हम है न तुम उसकी बातो को सीरियसली मत लो और तुंहारा इतना केयरिंग दोस्त आकाश है न तो इस मनोज जैसो को पास मत आने दो.

आरती:- अब से ऐसा hi करुँगी

प्रीती:- सॉरी फ्रेंड्स इसकी वजह से पार्टी ख़राब हो गयी चलो फिर कभी कर लेंगे. अब फ़िलहाल घर चलते है.

और उसके बाद प्रीती आरती को लेके चली गयी और फिर धीरे धीरे सब निकल गए , होटल के स्टाफ ने मनोज के पेरेंट्स को भी कॉल कर दिया था. सबके जाते hi आकाश मेरव गल्ले लगा.

आकाश:- थैंक यू भाई, टुन्ने तो एक बार में hi काँटा जड़ से निकल के फेंक दिया और ऐसी दवाई भी छिड़क दी की और कांटे आये hi न.

मैं:- चल अब दूर हट भसडक और जा एक दारू की बोतल लेके आ.

उसके बाद आकाश ने दारू आर्डर किआ ुर फिर हम दोनों ने पेट भर के पि और फिर मैंने आकाश को उसके घर ड्राप किया और खुदके घरपे आया तो किरण उठी हुयी थी और वो मुझे देखते hi पहचान गयी की मैं छहढा के आया हु इसलिए उसने ज्यादा कुछ नहीं पूछा बस खाना लाके दिया, मैंने भी खाना खाया और चुपचाप जाके कमरे में सो गया.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
अपडेट:-35

सुबह आँख खुली तो सर चक्र रहा था हैंगओवर से इसलिए मैं आराम से खड़ा हु और बाथरूम में जाके फ्रेश हुआ नहाया धोया और किरण को आवाज़ लगायी की निम्बू पानी के साथ प्रकट हो. जितने किरण आती उतने मैंने स्कूल यूनिफार्म डाली और chaka-chak रेडी होक निचे आया और निम्बू पानी पाइक ब्रेकफास्ट किया और बाइक उठा के स्कूल निकल गया.

आज बहुत से काम निपटने थे जिनमे से मैं काम था डॉ से अपॉइंटमेंट, वैसे डॉ से मिलना ज़रूरी है क्या मतलब मैं अब ठीक तो हु पर जब तक गुस्सा न आ रहा हो लेकिन गुस्सा तो कभी भी आ सकता है इसलिए मिल लेता हु.

आज ये करूँगा वो करूँगा ये सब प्लानिंग करता हुआ मैं स्कूल पंहुचा और बाइक अंदर कड़ी करके बहार आया तो अलग सन चल रहा था आरती, आकाश और मनोज और सायद एक दो लड़की और खड़े थे वह और मनोज उनसे सॉरी बोल रहा था अछि बात ये थी की उसे कुछ याद नहीं था की दारू किसने पिलाई लेकिन याद भी होता तो भी उसकी कोई नहीं सुनता. मैं भी टाइमपास के लिए उनके पास चला और चुपचाप खड़ा होक सुनने लगा उनकी बाते.

मनोज:- आरती मुझे माफ़ कर दो मैं सच में ड्रिंक नहीं करता वो किसी ने पीला दी होगी, तुम मेरी अछि दोस्त हो न.

आरती:- गेट लॉस्ट, दोस्त थी तुम्हारी लेकिन अब नहीं हु तुम एक अमीर बाप की बिगड़ी हुयी औलाद हो और वैसे भी नशे में इंसान की सचाई बहार आ hi जाती है और तुम्हारी भी आ गयी.

इतना बोलके आरती अपनी फ्रेंड्स को लेके खिशक ली अब वह हम तीनो रह गए.

मैं:- क्या हुआ मनोज?

मनोज:- यार पता नहीं कल किसने पीला दी और मैं कुछ अनाप सनाप बोल गया, वैसे तुम दोनों भी तो वही थे न.

आकाश:- पता नहीं हमे, हम तो साइड चले गए थे, चल अब जो हुआ सो हुआ. क्लास में चल टाइम हो गया.

आकाश:- और तू लाइब्रेरी चला जा, प्रीती बोल के गयी है.

मैं:- चल रेसस्स में मिलते है.

उसको बोलके मैं भाग के लाइब्रेरी की तरफ गया, भाग के नहीं तेज़ तेज़ चल के मतलब जल्दी में वह गया, वह जाके देखा तो प्रीती कल वाली जगह पे hi बैठी कुछ पढ़ रही थी.

मैं:- hello.

प्रीती:- ू ही, तुम कब आये?

मैं:- बस अभी अभी.

प्रीती:- वैसे कल के लिए सॉरी.

मैं:- इतस ोकक तुम्हारी गलती थोड़ी न थी, पता नहीं कैसे संस्कार दिए है उसके पेरेंट्स ने जो वो अभी से ड्रिंक्स करने लगा है, अभी तो पढ़ने के और कुछ बनने के दिन है.

प्रीती:- हां, वैसे तुम्हारी सोच कितनी अछि है न..

मैं:- नहीं ऐसी बात नहीं है वो तो मैं थोड़ा सेंसिटिव और इमोशनल हु न तो दुःख हुआ थोड़ा.

प्रीती:- अव्व्व! कोई नहीं होता है. वैसे मैंने सुना है आर्यन तुम्हारे साथ उलझने के कोसिस कर रहा है.

मैं:- नहीं पता मुझे, मेरेको तो लड़ाई झगड़ो से दर लगता है मुझसे तो मचार न मरे आर्यन से पन्गा क्यों लूंगा.

प्रीती:- मुझे भी ऐसे hi इंसान पसंद है और तुम उससे दूर hi रहना वो बहुत गन्दा और बद्तमीज़ लड़का है.

मैं:- ोकक मैं ध्यान रखूँगा, वैसे एक बात पुछु अगर तुम बुरा न मानो तो?

प्रीती:- नहीं नहीं पूछो क्या पूछना है तुम जैसे अचे इंसान की बातो का बुरा क्यों मानूंगी.

मैं:- वो.. वो.. आर्यन तुम्हारा बॉयफ्रेंड था क्या?

प्रीती एक पल के लिए तो चुप हुयी फिर वो थोड़ा गुस्से में हुयी और फिर दुबारा सांत लहज़े में बोली.

प्रीती:- हां था मैं उसकी बातो में आ गयी थी और उसे सरीफ समझने लगी थी और इसी वजह से मैंने उससे दोस्ती की और फिर एक दिन उसने मुझे पर्पस किया लेकिन मेरे दिल में कोई फीलिंग नहीं थी पर फिर भी उसे बुरा न लगे इसलिए हां कह दी लेकिन उसने कुछ दिनों में रंग दिखाना सुरु कर दिया और फिर एक दिन मैंने टेरेस पे उसे एक दूसरी लड़की के साथ देखा और फिर उसे के बारे में और पता किया तो पता लगा वो बहुत बुरा इंसान है, और मुझे बहुत हर्ट हुआ, इसलिए नहीं की वो बुरा पर इसलिए की वो झूठा है. मुझे झूट से सख्त नफरत है.

अब उसकी बाते सुन के मैं ब्लेंक हो गया भेनचोद ये तो क्या से क्या हो गया, मैं भी शामे चीज़ hi दोहरा रहा हु क्या करू इसे सचाई बता दू, नहीं नहीं, नहीं बता सकता और वैसे भी ी ऍम एक और मैं इसको कभी पता नहीं लगने दूंगा की मैं क्या चीज़ हु.

प्रीती:- एक! एक! कहा खो गए?

मैं:- हहहह कही नहीं बस सोच रहा था की कितना गन्दा इंसान है वो.

प्रीती:- अरे तुम उसे छोड़ो और अब पढ़ाई करो आज पुरे दिन मैथ पढ़ेंगे.

फिर मैं कुछ नहीं बोलै बस सारा ध्यान पढ़ने में लगा दिया और हम पढ़ने में ऐसा खोये की रेसस्स की बेल्ल से ध्यान टुटा हमारा.

प्रीती:- चलो लंच के बाद कम्पलीट हो जाएगी मैथ्स भी.

मैं:- ोकक मिलते है फिर ब्यय.

और मैं जल्दी से बाथरूम में गया और वह जाके मूतने लगा कई देर तक और फिर डायरेक्ट ग्राउंड में जाके आकाश के पास बैठ गया और अपनी टीम को देखने लगा की कैसे खेल रहे है ये लोग.

आकाश:- अबे यार तूने कल वाला काण्ड मस्त किया, आरती अब मेरे साथ hi बैठने लग गयी.

मैं:- अबे वो सब छोड़ मेरे से काण्ड होगा वो भी बहुत बड़ा.

आकाश:- अब क्या किया तूने?

फिर मैंने उसे अपनी और प्रीती की कनवो बताई जिसे सुनके वो पेट पकड़ के हसने लगा.

मैं:- चूतिये हसने के लिए नहीं बोलै तुझे.

आकाश:- तो मैंने बोलै था तुझे इतनी फैकने को, अब कुछ नहीं हो सकता जितने दिन चले उतने दिन चला. उसके दिल में अपनी जगह बना की सच पता लगने पे भी वो तुझे माफ़ कर दे.

मैं:- कितनी वाहियात एडवाइस दी है तूने मुझे, वैसे मैं भी किस्से पूछ रहा हु जिसके खुद लोडे लगे थे कल तक.

आकाश:- हां प्रभु तुमने हमारा उद्धार कर दिया, अब पक्का मत ब्यय, मैं चला अंजलि के पास.

मैं:- भाग भसडक.

मैं भी उठके लाइब्रेरी hi आ गया क्युकी करने को तो भेनचोद कुछ था hi नहीं तो सोचा थोड़ा पढ़ hi लू लेकिन क्या ख़ाक पढता मेरे पीछे पीछे प्रीती भी आ गयी.

प्रीती:- तुम बड़े जल्दी आ गए आज.

मैं:- हां वैसे hi आज बोर हो रहा था इसलिए.

मैं:- वैसे तुमसे बात करनी हो स्कूल के बहार तो कैसे कांटेक्ट करू? ी मैं नंबर मील जाता तो.

प्रीती:- ओह्ह्ह तो नंबर चाहिए मेरा, पर मैं ऐसे hi किसी को नंबर नहीं देती.

मैं:- पर हम तो दोस्त है न.

प्रीती:- दोस्त तो सब है, नंबर सिर्फ क्लोज फ्रेंड को hi मिलता है.

मैं:- और उसके लिए क्या करना पड़ेगा.

प्रीती:- तुम्हे मुझसे पूछना पड़ेगा और मैं मन करुँगी या हां करुँगी वो मेरे उप्पेर है.

मैं:- ोककक, तो क्या ये खूबसूरत सी लड़की मेरी क्लोज फ्रेंड बनना चाहेगी.

प्रीती:- उम्मम्मम, ोकक तुम बुरे नहीं हो पर कुछ शर्त है मेरी

मैं:- मंज़ूर है.

प्रीती:- अरे सुन तो लो, नंबर ओने रोज़ चॉक्लेट लाके डोज मुझे, नंबर तवो जैसे हो वैसे hi रहोगे, नंबर थ्री कोई बाद वर्ड या लड़ाई झगड़ा नहीं करोगे और हमेशा मेरी केयर करोगे.

मैं:- हां मंज़ूर है ये सब तो बिना शर्त भी करता मैं (लौड़ा करता ये कैसी शर्ते है भेनचोद गांड फैट जाएगी ऐसे तो)

उसके बाद उसने मुझे अपना नंबर दिया और फिरसे हम दोनों पढ़ने में खो गए और छुट्टी होने पे वो बस ब्यय बोलके चली गयी अब मैं भी निकल गया बाइक उठा के सीधा डॉक्टर के पास क्युकी आकाश तो वैसे भी आरती के साथ चला गया था और मुझे भी मिलना जरूरी लग रहा था क्युकी हर्ष से भिड़ने से पहले खुदसे भिड़ना होगा पर देखते है वो क्या बोलते है.

मैं हॉस्पिटल पंहुचा और बाइक पार्किंग में कड़ी करके रिसेप्शन पे आया.

मैं:- एक्सक्यूज़ में मिस, डॉ. प्रभाकर कहा मिलेंगे, मेरे पास अपॉइंटमेंट है.

वो:- 3रद फ्लोर रूम नंबर 312.

मैं:- थैंक्स.

और इतना बोलके मैं लिफ्ट मैं आता और 3रद फ्लोर का बटन प्रेस किया, वैसे मेरा दिल घबरा रहा था और गांड फैट रही थी की पता नहीं डॉक्टर कोनसी बीमारी बता दे. पर अब कुछ नहीं हो सकता इसलिए मैं चुचाप 312 रूम में गया और वह जाके दूर पे नॉक किया तो अंदर से एक रौबदार आवाज़ आयी "के इन"

और जैसे hi मैं एंटर हुआ तो उन्होंने मुझे देखा और स्माइल करने लगे. फिर उन्होंने मुझे बैठने का इशारा किया.

डॉ:- तो आ hi गए आखिर हमारे पास?

मैं:- एक्सक्यूज़ में. आप मुझे जानते है क्या ?

डॉ:- हां भाई जानते है तुम सिमरन बीटा के दोस्त हो उसने बताया था मुझे और राज जी ने अपॉइंटमेंट दिलवाई है तुम्हे तो तुम्हारे बारे में कैसे नहीं जानेंगे.

मैं:- वैसे सिमरन कहा है?

डॉ:- वो तो घर पे hi है अभी, वैसे कल के लिए माफ़ी चाहूंगा कुछ ज़रूरी काम आ गया था.

मैं :- कोई बात नहीं काम तो कभी भी आ जाते है.

डॉ:- ाचा इन बातो को दरकिनार करो और मुद्दे पे आओ तो राज ने मुझे तुम्हारी प्रॉब्लम बताई की तुम कैसे खुद पर से कण्ट्रोल खो देते हो और फिर खुद के hi एक रूप में आ जाते हो जो शैतान के बराबर है या वो शैतान है. क्या मैं सही हु?

मैं:- हां.

डॉ:- लेकिन सिर्फ इस बात पे hi सोच के कुछ फैसला लेना गलत होगा, इसलिए तुम्हारे कुछ टेस्ट होंगे और तुम्हारे दुर्गस्य के भी, पर इससे पहले मुझे तुम्हे अपनी पूरी कहानी बतानी होगी की ये सुरुवात कहा से हुआ?

मैं:- लेकिन मैं वो सब याद नहीं करना चाहता क्युकी वो बहुत बुरा था?

डॉ:- हम्म्म, पर सब सुरु से क्लियर होगा तो आसानी होगी.

मैं:- पर कुछ टाइम चाहिए मुझे.

डॉ:- कोई बात नहीं आज तुम टेस्ट करवाओ अपना और कल इसी टाइम आना खुद को तैयार करके फिर बताना मुझे और अपनी रिपोर्ट भी लेते जाना.

मैं:- जैसा आप कहे.

उसके बाद उन्होंने मुझे एक रूम में भेजा जहा एक नर्स थी उसने मेरा ब्लड टेस्ट किया और मेरी खोपड़ी के स्कैन और मृ वगैरह की और फिर मुझे बोली की अब आप फ्री हो, उसके बाद में निचे आया तो मुझे कमज़ोरी महसूस हो रही थी क्युकी उसने बहुत सारा खून लिया था मेरा क्युकी कुछ ज्यादा hi टेस्ट होने वाले थे. पर मैं किसी तरह घर पंहुचा और जाते hi एक जूस पिया और खाना खाया.

इस वक़्त रात हो गयी थी और मैंने और किरण ने डिनर कर लिया था अब मैं पहले जैसा फील कर रहा था और इस समय किरण मेरी बाहो में बिलकुल नग्न अवस्था में थी.

किरण:- मनीषा को कॉल करो न.

मैं:- क्यों?

किरण:- मुझे देखना है वो अब भी कैसे बात करती है.

मैं:- ोकक.

उसके बाद मैंने मनीषा को कॉल मिलाया तो उसने एक hi रिंग में उठा लिया.

मैं:- hello मनीषा.

मनीषा:- ू ही एक.

मैं:- और क्या कर रही हो ? तुम तो याद hi नहीं करती.

मनीषा:- अरे वो टाइम नहीं मिलता मुझे पढ़ाई से और बाद में बात करती हु मुझे स्कूल जाना है अभी.

और इतना बोलके उसने फ़ोन कट कर दिया और ऐसा होते hi मेरे फेस पे स्माइल आ गयी लेकिन किरण गुस्सा हो गयी.

किरण:- इसे मैं छोडूंगी नहीं.

मैं:- अरे छोड़ो न उसे, हम दोनों एक खेल खेलते है.

किरण:- क्या ?

मैं:- प्यार का खेल.

और इतना बोल के मैंने अपने होठ उसके होठो से जोड़ दिए और फिर दोनों जवान जिसमे प्यार के खेल में ऐसे खोये की कब खेल ख़तम हुआ और कब वो थक के सोये पता hi नहीं लगा.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
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