My Complete Intentions - The Beginning - Page 5 - SexBaba
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My Complete Intentions - The Beginning

अपडेट:-20 ( बैक तो ट्रैक ;) )

हम लोग वह से निकले हमे रोहतक पहुंचने में 6 हॉर्स लगने थे, लेकिन बिच में मनीषा ने बोलै की उसके घर चलो सुबह निकलेंगे. मैंने भी उसकी बात मान ली और कार को उसके घर की तरफ मोड़ दिया.

30 मिनट की ड्राइव के बाद हम एक अचे से घर के सामने रुके वह पे एक टाला लगा हुआ था जिसके चाबी हममे से किसी के पास भी नहीं थी, इसलिए पत्थर से वो टाला तोडा और हम अंदर आये पैसे का और गन्स का बैग भी अंदर लेके आये.

हम लोग हॉल में आये तो वह मनीषा और उसकी फॅमिली की पिछ थी जिसे देख मनीषा साद हो गयी और सायद आंसू भी आ गए उसकी आँखों मैंने लेकिन मैंने उसके कंधो पे हाथ रखा और उसे तसल्ली दी तो वो मेरे गले लग गयी.

मनीषा:- तुम तो मुझे नहीं छोड़ डोज न?

मैं:- तुम्हे क्या लगता है.

मनीषा:- मुझे नहीं पता, प्रॉमिस करो मुझे.

मैं:- ोकक Devil's प्रॉमिस.

मनीषा:- नू! God's प्रॉमिस.

मैं:- भगवन भी एक बार को अपना वडा तोड़ दे, लेकिन डेविल नेवर ब्रेक हिज प्रॉमिस.

मनीषा:- ोककक, ी लव यू.

मैं:- मनीषा छोड़ो मुझे और जाके सो जाओ देखो रात के 2 बजने वाले है.

मनीषा:- मैं तुम्हारे साथ सोऊंगी.

मैं:- नहीं नहीं बिलकुल नहीं तुम सो जाओ.

मनीषा ने बुरा सा मुँह बनाया और चली गयी किरण को लेके और उसे उसके रूम में छोड़के मुझे एक लुक देके रूम में घुस गयी.

कितनी क्यूट है बस मैं करता है इसकी आँखों से इसके दिल की गेहराईओ में उतर जाओ, मान करता है इसके सागर रुपी नैनो में डूब के मर जाओ, अगर ये बार केहड़े की एक मुझे अपना दिल दे दो, कसम से अभी सीना फाड़ के इसके हाथ में रख दू.

अभय:- ोू मजनू गयी भाभी , अब चले.

एक्चुअली मैं एक जगह खड़ा होक बस ये बाते सोच रहा था पागल की तरह, भेनचोद ये क्या हो रहा है मुझे चुतियो वाले काम क्यों कर रहा हु.

मैं:- चल- चल.

हम दोनों भी एक रूम में आये और वो पैसो का बैग रखा और उस सूटकेस को टेबल पे रख के खोला, वाओ भेनचोद ग्लोक 17गेन 4 17+1 शॉट 9मम लूजर पिस्टल्स थी वो चारो

मैं:- 2 तेरी 2 मेरी.

अभय:- सिल्वर वाली मेरी, ब्लैक तेरी

मैं:- दोने!

अभय:- नूब चलनी आती है.

मैं:- लौड़े खुद को तीसमारखाँ न समझ तूने भी स्कूल में शूटिंग सीखी है.

अभय:- अबे तुझे तो रीलोड भी न करनी आती होगी.

मैं:- भसडक मुझे वैसे भी कन्फेस पसंद है ये गन तो सिर्फ डरने के लिए और तू भसडक कब काम आएगा सीखा मेरे को.

अभय:- गुरूजी बोल.

मैं:- लौड़ा मेरा.

उसके बाद अभय ने मुझे रीलोड करना, लॉक- अनलॉक और भी कई तरीके बताये की एआईएम कैसे करते ेट्स. उसके बाद हमने सिगग्रेटे फुकी और सो गए.

रात को लेट सोये तो लेट तो उठना hi था. इसलिए सुबह के 9 बजे थे और कोई मुझे झकझोर के उठा रहा था.

मैं:- अबे सोने दे न.

और इतना बोलके मैंने आँख खोली तो मनीषा मुझे हिला हिला के उठा रही थी. मेरा तो दिन hi बन गया सबसे पहले उसे देखके, काश मेरी और मनीषा की अलग दुनिया होती जहा रोज़ वो मुझे ऐसे hi उठती मैं ऑफिस जाता वह से थक हार के घर आता फिर मनीषा मुझे प्यार से पानी पिलाती (लौड़े खियाली पुलाव न पका ये इस जनम में पॉसिबल न है)

मैं:- तुमने तकलीफ क्यों की, अभय उठा देता न.

मनीषा:- क्यों मैं नहीं उठा सकती क्या?

मैं:- उठा सकती हो, बिलकुल उठा सकती हो.

मनीषा:- जल्दी से फ्रेश होक आओ ब्रेकफास्ट रेडी है फिर निकलना भी है.

मैंने हां में मुंडी हिल्लायी और उसने आगे बढ़ के मेरे गाल पे किश की और भाग गयी.

हाय कितनी मासूम है और मैं कितना बड़ा दरिंदा क्या ये मेरे साथ रह भी पायेगी, अब तो रह लेगी मतलब बाद में अपने साथ नहीं रख पाउँगा क्युकी कंडीशन चेंज हो जाएगी, लेकिन मैं अभी क्यों फ्यूचर प्लान कर रहा हु, अभी मुझे जाके नहाना चाहिए.

मैं बाथरूम में घुसा और नहाया और वो hi कपडे दुबारा पहने क्युकी और कपडे थे hi नहीं बस, मैंने रूम में आके रेडी हुआ और एक गन अपनी जीन्स में डाली ऐसे hi हवाबाज़ी के लिए :रोल: .

फिर हम सब ने ब्रेकफास्ट किया और कार में बैठ के निकल लिए, मैंने 2 घंटे में दिल्ली पंहुचा दिया था सबको क्युकी एक तो फोर्टनेर और उप्पेर से मैं ड्राइवर :कूल:

Manisha:-chalo शॉपिंग करते है अब तो तुम क्रोरेपति हो.

बस ये क्या बोल रही है, वो किरण क्या सोचेगी की मेरे बाप से पैसा चीन के क्रोरेपति बने घूम रहे :सिघ:

अभय:- हां भाई चल हमने भी कभी मॉल से शॉपिंग नहीं की है

मैं:- ोकक तो चलो.

अभय ने मुझे रास्ता बताया और मैंने भी पंहुचा दिया कार को मॉल में, हमने बैग में से पैसे निकले और चल दिए मॉल में, अभय को किसी का साथ ज्यादा पसंद नहीं आता, वो अकेला रहना ज्यादा पसंद करता है इसलिए वो निकल गया अकेला कुछ पैसे लेके. मनीषा ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खींच के ले गयी बॉयज सेक्शन में और किरण बिचारि फ़ूड कोर्ट में चली गयी.

मैं:- वैसे तुम्हारी चॉइस ख़राब है फिर भी तुम hi पसंद कर लो.

मनीषा:- व्हाट दो यू मैं बी चॉइस ख़राब है?

वो आँखे मटकती हुयी बोली

मैं:- तुम्हारी चॉइस हु मैं और मुझमे ऐसा कोई फीचर नहीं है जो कोई लड़की मुझे पसंद करे, इवन तुम भी मुझसे नफरत करती थी लेकिन अचानक से प्यार.

मनीषा:- बताती हु बाद में.

मैं:- इंतज़ार रहेगा ma'am.

भेनचोद क्या क्या करना पद रहा है लड़की के पीछे, शॉपिंग, जी हुज़ूरी ऐसे तो लौड़े लग जायेंगे.

खैर हम दोनों ने शॉपिंग की एक्चुअली शॉपिंग नहीं पूरी शॉप hi खरीद ली 15 जीन्स 15 शर्ट्स ,t-shirts, शॉर्ट्स, स्नीकर्स भेनचोद इतने कपडे मैंने अपनी जिंदगी में नहीं ख़रीदे थे और वो भी इतने महंगे. खैर हमारी शॉपिंग ख़तम हुयी और हम बिल पाय करके फ़ूड कोर्ट में आये तो वह अभय और किरण कुछ बाते कर रहे थे आपस में और हमे देख के वो दोनों चुप हो गए मुझे अजीब लगा क्युकी अभय जल्दी से किसी से बात नहीं करता और लड़की से तो बहुत hi रेयर बात करता है खैर मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया इस तरफ. हमने वह पे लंच किया और निकल पड़े हरयाणा के लिए.

हम हमारी सिटी में घुसे hi थे की अभय ने मुझे एक तरफ इशारा किया और मैंने उस तरफ देखा तो मेरी आँखे बड़ी हो गयी, क्युकी वह वो राजेश और उसके साथ 3 4 लोग खड़े थे, लेकिन हम अभी कुछ नहीं कर सकते थे क्युकी मनीषा साथ थी हमारे.

और मैं प्रॉब्लम थी की अब हम रहेंगे कहा क्युकी उस रूम में तो मैं मनीषा को रख नहीं सकता और गाओं में भी नहीं लेके जा सकता इसलिए मैंने एक प्रॉपर्टी डीलर के पास फ़ोन किया जो की हमारे जान पहचान का hi है.

मैं:- hello लोंदे.

वो:- और चौधरी साहब कैसे हो?

मैं:- सुन 4 रूम, 1 किचन, और हॉल प्लस पार्किंग हो ऐसा फ्लैट चाहिए 15 मिनट में मैसेज कर मुझे.

वो:- अभी करता हु और पेमेंट.

Main:-tu उधर hi मिलियो, दे दूंगा.

वो:- ठीक है भाई और कोई सेवा.

मैं:- है एक काम लेकिन वो बाद में.

और इतना बोलके मैंने फ़ोन कट किया और कार को साइड लगा के उस राजेश एंड पार्टी को देखने लगा. वो लोग कुछ नहीं कर रहे थे बस has-has के बाते कर रहे थे.

15 मिनट में मैसेज आया और लोकेशन मिलते hi मैंने कार दौड़ा दी और वो लोकेशन 15 मिनट की hi दुरी पे था.

हम उधर पहुंचे तो वो एक सोसाइटी टाइप था एंड वह के फ्लैट्स शामे hi थे और सूंदर भी, हम हमारे फ्लैट के पास पहुंचे और वह बहार hi वो डीलर मिल गया. हम कार से उतरे वो मुझ से गले मिला और हमे घर वगैरह दिखाया इतने में अभय ने उसे पैसे लाके दिए और उसे चलता किया क्युकी वो पका रहा था.

वैसे तो सब चीज़ थी फ्लैट में बस khaane-peene की चीज़ो को छोड़ के, उसके लिए मैंने किरण को पैसे दे दिए थे और बोल दिया था की अर्रंगे कर ले वो सब चीज़. उसके बाद सब अपने अपने सिलेक्टेड रूम्स में गए. मेरा और मनीषा का रूम उप्पेर था वही अभय और किरण का नीचे फ्लोर पे. मेरे रूम में लाकर था मतलब अब मैं पैसे रख सकता हु इसमें. अब पैसे मिले है तो अमीरी तो दिखानी है इसलिए 3 ीफोने बुक करे मैंने अपने फ़ोन से. और रूम में जाके तैयार हुआ एक गन पेंट में डाली और कार की कीस लेके अभय के रूम में आया और निकल पड़े हम कुछ सम्मान िक्खता करने. लेकिन मैं इन सब में विवेक को भूल चूका था पता नहीं क्यों बूत अभी दिमाग में उसका ख्याल नहीं था. हम दोनों एक बाइक के शोरूम में गए एक ढुके खरीदी और उसकी डिलीवरी घर करवा के फिर दो नाइफ लिए बिलकुल रामपुरी टाइप एंड और भी कई इक्विपमेंट्स लिए जो काम आ सकते थे कभी भी और फिर निकल दिए उस जगह पे जहा राजेश को देखा था.

लेकिन हम वह पहुंचे तो कोई नहीं था लेकिन सोचा पूछताछ hi करले थोड़ी इसलिए हम जहा वो बैठे थे वह गए और उस दुकान वाले से पूछा की वो लोग कहा है तो उसने बताया पता नहीं साहब कहा गए लोग.

तभी मेरी नज़र थोड़ी दूर एक आदमी पे पड़ी जो फ़ोन पे किसी बात कर रहा था और उसका थोबड़ा देख के में पहचान गया की ये राजेश के साथ था अभी.

मैं:- वो रहा एक तो चल इसे hi धरती है.

अभय:- चल.

हम दोनों ऐसे hi मस्ती मसरते हुए उसके बिलकुल पास पहुंच गए.

मैं:- ू भाईसाहब टाइम क्या हुआ है?

वो:- नहीं पता मुझे.

मैं:- तो फ़ोन में देख के बताओ न.

वो:- अबे बोलै न नहीं पता.

और वो पीछे मुद्दा और पीछे मुझे देख के शॉक हो गया, ी क्नोव वो मुझे जनता होगा लेकिन शॉक होने की क्या बात है उसमे.

वो:- तू तू जिन्दा कैसे है, तुझे तो किडनैप कर ले गए थे न.

मैं:- उन सब को निपटा दिया मैंने, चल अब तू राजेश का पता बता.

वो:- कभी नहीं बताऊंगा.

अब वह लोग इखट्टा होते इससे पहले अभय ने गन निकल के उसके माथे पे राखी और बोलै.

अभय:- अबे लौड़े चल कार में बैठ कब से pak-pak किये जा रहा है.

वो बिचारा दर गया और चुपचाप कार में बैठ गया और अभय उसके साथ बैठ गया. मैंने कार स्टार्ट करि और उस जगह ले ली जहा हम इन सबको ठिकाने लगते है जहा कोई नहीं धुंध सकता इन्हे. बस इस वक़्त मुझे अभय का बिहेवियर थोड़ा विएर्ड लग रहा था जैसे वो कोई चीज़ छठा हो और उसे न मिली हो.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
अपडेट:-21 (It's एक :रोल: )

मैंने अभय के लिए आ रहे खयालो को दिमाग से झटका और कार को उस जंगल की तरफ बढ़ा दिया जो की एक घंटे की दुरी पे था लेकिन मैं आराम से जा रहा था कुछ सोचते हुए, खैर एक जंगल आया और मैंने कार को उस जंगल में उतर दिया एक कच्चे रस्ते पे और थोड़ी दूर जाने के बाद वो कच्चा रास्ता भी ख़तम हो गया मतलब अब पैदल जाना था.

हम तीनो कार से उतरे और उस आदमी की मैंने गुड्डी पकड़ी और अपने आगे लेके चलने लगा, थोड़ी दूर पगडण्डी पे चलने के बाद हम एक खण्डार में पहुंचे और उस खण्डार में घुसने के बाद भी हमने एक रूम का गेट खोला जहा दो कंकाल पड़े हुए थे और एक कंकाल तो कट्टा हुआ पड़ा था. और वह भयानक बदबू आ रही थी.

उस आदमी की तो गांड फैट गयी अंदर का हाल देखते hi.

आदमी:- मुझे छोड़ दो मैं सब बता दूंगा.

मैं:- वो तो तू बताएगा hi लेकिन मैं तुझे एक दर्दनाक मौत देना चाहता हु बहुत hi दर्दनाक, तेरी रूह तक कांप जाएगी, अब तू सोचेगा की तूने तो कुछ किया hi नहीं तो इतनी बुरी मौत क्यों? तो सुन बीटा मेरी मर्ज़ी.

अभय:- अबे उसकी गांड मत फाड़ लेट में डील विथ हिम.

मैं:- लेकिन मैं उसे मारना चाहता हु और मेरा मैं कर रहा है.

अभय ने कुछ नहीं बोलै बस अपनी गन उस आदमी की खोपड़ी पे तानी.

आदमी:- साहब वो इस वक़्त मला साहब की बंद पड़ी फैक्ट्री में मिलेगा 5 आदमियों के साथ.

मैं:- जिसे लोग भूतिया फैक्ट्री बोलते है.

आदमी:- हां साहब

और उसके इतना बोलते hi उसकी खोपड़ी में अभय ने बुलेट उतर दी और उसकी खोपड़ी तरबूज़ की तरह खिल गयी जिसके चित्ते मुझपे भी पड़े.

Main:-Ewww लौड़ा.

अभय:- चल धरती है राजेश को.

मैं:- प्लान तो बना ले लौड़े.

अभय:- सुन फैक्ट्री है सुनसान एरिया में और वह बस 5 आदमी होंगे और मैं बात में गन उसे करूँगा, तू बस देखता जइयो.

मैं:- और पोस्टमॉर्टेम में बुलेट्स का पता लगा तो.

अभय:- नहीं लगेगा, ब्लैक में ूँरेजिस्टरड बुलेट्स है साड़ी.

मैं:- ोकक! थें लेटस हंट हिम.

अभय कुछ नहीं बोलै बस वह से चल दिया, मैं भी मुस्कुराया और उस निचे पड़ी दीदी बॉडी पे लात मारी जो कमरे में हो गयी मैंने गेट बंद किया और सिगग्रेटे जलके.

मुँह में डाली और चल दिया भार की तरफ. मैं थोड़ा नर्वस था आज क्युकी बस बिना प्लान के ऐसे घुसना मुझे ठीक नहीं लग रहा था लेकिन कोई नहीं देखते है.

मैं कार के पास आया तो अभय आलरेडी बैठा हुआ था मैंने भी बिना कुछ बोले ड्राइविंग सीट पे बैठ गया और कार स्टार्ट कर के पेल दी फुल स्पीड में लिखे क्रेजी स्पीड वो भी कच्चे रस्ते में. अभय की भी गांड फैट गयी और वो टाइट होक बैठ गया.

अभय:- अबे लौड़े पागल है क्या आराम से चला न.

मैं:- क्यों फटी गांड अब?

इसके बाद मैंने कार नार्मल की मेरी नार्मल स्पीड भी 90-100 जा रही थी.

2 घंटे बाद हम दोनों उस फैक्ट्री के थोड़ी देर पहले उतरे और वह से पैदल हो लिए. इस वक़्त अँधेरा हो चूका था.

मैंने अपनी गन निकली उसे रीलोड की और आगे बढ़ गया.

अभय:- तू गन उसे करेगा.

मैं:- हां सोच रहा हु कर लू तरय, ऐसे hi चलनी आ जाएगी.

अभय:- सही है बस.

हम दोनों बात करते हुए उस फैक्ट्री के पास पहुंचे.

अभय:- सुन मुझे लीड करने दे ये वाला

मैं:- ोकक बेब.

अभय मुझे फैक्ट्री के पीछे लेके आया और वह से एक लकड़ी की सिद्दी से उप्पेर चढ़े और विंडो से कूद के अंदर आये और अंदर आते hi 2 लोगो ने हमपे गन तानी और उनके गन तानते hi अभय ने एक माथे में गोली मारी और दूर के अंडो पे लात मारी जिससे उसे गांड फाड़ दर्द हुए इतने में अभय को टाइम मिल गया और उसने उसकी भी खोपड़ी खोल दी.

ी मस्ट से अभय इस फ़ास्ट भेनचोद, अभय ने मेरी तरफ देखा और स्माइल दी, अब साफ़ था की बस 4 बन्दे बचे है जिनमे से एक राजेश है लेकिन वो लोग जान गए होंगे गन की आवाज़ से की कोई आ गया है. और फैक्ट्री में अँधेरा था तो कुछ साफ़ साफ़ नहीं दिख रहा था.

खैर अभय आगे बढ़ा और मैं उसके पीछे पीछे तभी मुझे एक बुलेट की साउंड आयी और एक बाँदा धाम से निचे गिरा, भेनचोद मुझे दिख भी नहीं रहा था और ये अभय पेले जा रहा था.

खैर अभी दो बन्दे और राजेश बचा था बस,

अब मैं अभय के साथ hi चल रहा था और हम निचे वाले फ्लोर पे आये और अभय ने सीढ़ियों से उतरते hi बिना देखे राइट साइड में हाथ करके फायर किया और धाम से बॉडी गिरी निचे.

मैं:- भेनचोद ये कैसे किया तूने?

अभय:- साउंड सेंस! अरे वो रहा एक और.

अभय बहुत तेज़ भगा सामने मुझे कुछ क्लियर दिख नहीं रहा था और थोड़ी देर में वह की लाइट ों हुयी तो वह हॉल में राजेश खड़ा था उसने अभय के गल्ले पे एक नाइफ लगा रखा था और अभय की पिस्तौल अपने दुसरे हाथ में पकड़ राखी थी.

मुझे कुछ समझ नहीं आया की ये कैसे हो गया, अभय को ऐसे कैसे पकड़ लिया, तभी वो आखरी बाँदा हॉल में आया, सायद इसी ने लाइट ों की थी लेकिन वो हॉल में आया hi था की उस राजेश ने खुद उसे गोली मार दी.

राजेश:- ोू सुन छोकरे आगे न बढियो नहीं तो तेरे दोस्त का गाला काट दूंगा.

लेकिन मैंने अपनी गन उसपे तान दी और उसकी तरफ बढ़ने लगा.

राजेश:- देख आगे मत बढ़ मैं इसे मार दूंगा.

मैं:- मार दे.

राजेश:- अबे तेरा दोस्त है वो.

मैं:- लौड़ा मेरा,

और एक बुलेट निकली गन से और सीधा उस राजेश के सर में और वो पीछे को गिरने लगा लेकिन इतने में अभय ने उसके हाथ से अपनी गन ली और मुझपे तान दी, मैं भी उसके बिलकुल करीब पहुंच चूका था और मेरी गन उसके सर पे और उसकी गन मेरे सर पे थी और दोनों hi मुस्कुरा रहे थे.

अभय:- निशाना लगाना कहा से सीखा.

मैं:- बताना जरूरी नहीं समझता.

अभय:- तो हो जाये 1व्1 फाइट आज, एंड ी प्रॉमिस ी विल किल यू वैरी बदली.

मैं:- मार तो तू पहले भी सकता था मोके भी बहुत थे फिर क्यों नहीं मारा.

अभय:- क्युकी अगर तू उस वार से बच जाता तो तू मुझे नहीं छोड़ता.

मैं:- चलो पता तो है मेरे बारे में.

अभय:- वैसे तुझे कैसे पता लगा, उस रंडी किरण ने मुँह खोल दिया होगा.

मैं:- बीटा तू बेशक फाइट मेरे से 1% आगे हो लेकिन दिमाग में तू मेरा 1% भी नहीं है. तुझे क्या लगा किरण तुम लोगो के साथ मिली हुयी है, ाजजी लुंड मेरा, तुझे क्या लगा एक को किडनैप कर लेंगे, ाजजी लुंड मेरा, तुझे क्या लगा तू इस राजेश के साथ मिलके मुझे मार देगा और मला को धोका देके और सब पैसे लेके उड़ जाओगे यहाँ से, ाजजी लुंड मेरा.

अभय की आँखे बड़ी हो गयी क्युकी मैंने उसका प्लान पूरा खोल के रख दिया था.

अभय:- हाउ ? कैसे?

मैं:- चल तेरे को सस्पेंस में नहीं मरूंगा.

अभय:- मरेगा तू.

मैं:- ोकक देखते है अब सुन, सुन जब तू यहाँ आया तो मुझे तू थोड़ा ावक्वार्ड सा लगा पहले वाला अभय नहीं लगा जो की मुझे नार्मल नहीं लगा लेकिन फिर मैंने सोचा छोड़ो होगी कोई बात, लेकिन एक दिन मैं रात को मूतने के लिए उठा और तू किसी से फ़ोन पे बात कर रहा था की एक को मार देंगे और फिर मला को मार देंगे और फिर सारे पैसे लेके देश छोड़ देंगे, लेकिन मुझे ये नहीं पता था की तू किस्से बात कर रहा है, और ऐसे hi मुझे किरण पे पहले hi दिन शक्क हो गया था मतलब वो नूब थी बिलकुल नूब शी don't क्नोव अबाउट एनीथिंग एक दिन उसे लपेटे में लिया और उसे पट्टी पढ़ाई की मेरा साथ दे तब उसने मुझे बताया की उसके बाप ठाकुर और मला ने मिल के मुझे किडनैप करके वह लेके जाने का प्लान बनाया जिसमे तू उनका साथ देगा और उसने बताया की तूने उन्हें मनीषा क बारे में बताया और मनीषा को उठवा दिया और उसके परिवार को मरवा दिया और उसे बोलै की उसे शादी करने के लिए उठाया है, पहले तो मैं किडनैप नहीं होता लेकिन मनीषा को वह से निकलना था इसलिए किडनैप हुआ मैं, नहीं तो वो लौड़े मुझे किडनैप कर लेते क्या ाजजी लुंड मेरा, और तू साले नूब तुझे क्या लगा वो बहार आ गया है वह, भसडक वो वह बहार आ जाता न तो उन बन्दों के साथ साथ पुरे ठाकुर फॅमिली को मार देता और साथ में तुझे भी और मनीषा को भी और वो कोई डील नहीं करता पैसो की, सब एक्टिंग थी बीटा लेकिन इस प्लान में किरण को शामिल नहीं किया मैंने इसलिए वो दर रही थी इतना, और मैंने इसीलिए उसके बेटे रमन को नहीं मारा क्युकी मुझे किसी ठाकुर के खून से हाथ नहीं रंगने थे मुझे वो तो बस तुझे डरने के लिए एक्टिंग की थी और आज तेरा मूड ख़राब पता है क्यों था क्युकी मैं वह से जिन्दा बच गया और किरण ने तेरा साथ देने से मन कर दिया था दिल्ली में और इसलिए तूने राजेश को फ़ोन मिलाया और उसके साथ मिलके एक क्विक प्लान बनाया उसे सिटी एंट्रेंस पे दिखने के लिए बोलै ताकि तू मुझे आज hi मार सके, अबे लौड़े पागल लगता हु क्या तुझे जो कुछ भी मान लूंगा, क्युकी राजेश ऐसे ओपन में घूम hi नहीं सकता और वो भी तब जब उसे पता है की उसकी जान खतरे में है, और वो भी हमारे जाते hi गोली हो गया, लेकिन यहाँ तक तो ठीक था तूने उस खाण्डेर में उस बन्दे के खोपड़ी में गोली मार्के मुझे डरना चाहा और फिर फैक्ट्री में अँधा पुश करने के लिए बोलै, पीछे लकड़ी की सिद्दी कोण रखता है वो भी बंद फैक्ट्री में और फिर विंडो से चढ़ते hi तूने 10 सेकंड में उन दोनों बन्दों को मार दिया मतलब तुझे पता है की बन्दे कहा है एयर ये बन्दे भी मला के थे तो no प्रॉब्लम और वैसे भी तेरा और राजेश का प्लान मला को मार के उसके पैसे उड़ने का था तो उसके बन्दे मरवाने के किये तुमने उन्हें ऐसी जगह पे खड़ा किया जो बहुत अछि थी लेकिन तुझे पहले से पता थी, और मुझे मार के तू मनीषा को मरता और फिर वी पैसे भी ले लेता और फिर तूने अँधेरे में एक और को मारा और फिर सीढ़ियों में एक को बिना देखे मार दिया और बोलता है साउंड सेंस, भसडक पुबज खेल रहा है क्या और फिर वो लौड़ा राजेश क्या सोचा की तुझपे गन तानने से मैं अपनी गन फेक दूंगा.

अबे पागल लौड़े तेरे जैसे लोंदे बहुत देखे है मैंने एक नाम है मेरा ऐसे hi कोई चुटिया नहीं बना सकता मुझे.

अभय एक दम ब्लेंक हो चूका था उसे प्रोसेस करने में टाइम लग रहा था क्युकी जिसे वो खुद का गेम समझ रहे थे वो एक्चुअल में मेरा गेम था, मैं इन्हे दिखा रहा था की ये लोग जीत रहे है, ाजी लौड़ा एक से जीतेंगे ये लोग.

मैं:- अब बोल भसडक.

अभय:- तू बेशक तेज़ है लेकिन फाइट में मुझसे नहीं जीत पायेगा.

मेरे फेस पे स्माइल आ गयी और हम दोनों ने अपनी गन वह से थोड़ी दूर पे एक टेबल पे राखी और आमने सामने खड़े हुए.

मैं:- देख तुझे लगता है तू मुझसे तेज़ है और मुझे लगता है तू मेरे बराबर है इसलिए ऐसे तो हार जीत मुश्किल है इसलिए जो उन गन के पास पहले पहुंच के दुसरे को शूट कर देगा ये मैदान उसका और वो यहाँ का खिलाडी.

अभय:- मंजूर है.

फिर क्या था हम दोनों भाड़ गए एक दुसरे की तरफ

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
अपडेट:-22 (एक V/S अभय)

अब मुझे पता है की अभय मुझे फाइट में हरा सकता है क्युकी उसने मार्टिकल आर्ट सीखा हुआ है दिल्ली में, और अभय मेरे बारे में क्या जनता है बस उतना जितना मैंने उसे दिखाया है और एक यही प्लस पॉइंट है मेरे पास की ी क्नोव हिम, एंड हे क्नोव लेकिन उतना जितना मैंने दिखाया है.

अभय मेरी तरफ बढ़ा और मैं अपनी जगह पे hi खड़ा रहा और उसने आते hi पंच बना के मेरे पेट की तरफ ले जाके एक दम से मेरी चीन पे मारा, मैंने ये एक्सपेक्ट नहीं किया था मेरे दोनों हाथ उसका पंच ब्लॉक करने पहुंचे hi थे की उसने अपने पंच को चेंज कर दिया और वो मेरी चीन पे बहुत तेज़ लगा और मैं दो कदम पीछे हो गया, मैंने अपना एक हाथ अपनी चीन पे लगाया तो वह से ब्लड निकल रहा था.

अभय:- एक तू बचा है मेरे सामने, तू बस बकचोदी कर सकता है पर मैंने खुद पे म्हणत की है.

मैं:- चल लौड़े पका मत.

फिर अभय ने मेरे पास आके एक पंच मेरे मुँह पे मारा और में निचे झुक के बचा और उसकी तइस पे पंच मारने को हुआ hi था की उसने घुटना दिया मेरे सर पे और मैं पीछे की साइड गिरा लेकिन मैं जल्दी से खड़ा हो गया, क्युकी अभय बहुत तेज़ है वो पड़े पड़े को पेल देगा और मैं मुठ मरता रह जाऊंगा.

मैंने खड़े होते hi अभय की रिब्स पे पंच मारा लेकिन उसने मेरा हाथ पकड़ा और घूम के मेरी तरफ पीठ की और मेरे कान पे कोहनी मारी घुमा के.

मैं:- भेनचोद!

अभय:- हाहाहाहा! क्या हुआ एक तू ऐसे हर्ष से लड़ेगा भसडक वो तुझे फूक मार्के मार देगा.

मैंने इस बारे में सोचा और इतने में मुझे मेरी नाक के बहुत तेज़ दर्द हुआ, क्युकी उस अभय ने मेरे दिमाग में घुस के मुझे पंच मारा था, लेकिन वो यहाँ नहीं रुका उसने मेरे अंडो पे लात मारी लेकिन मैंने एक हाथ से रोका इतने में उसने एक और पंच मेरी नाक पे दिया तो मैं पीछे की तरफ गिर गया.

मैंने पड़े पड़े अपनी नाक से खून पोछा और खड़ा हुआ और तब मुझे याद आया की मैं भाग के गन उठा के मार देता हु इसे, लेकिन फिर बाद में ख्याल आया की इसकी मौत दर्दनाक कैसे होगी फिर.

"लेट में के"

लौड़े तू गांड न फाड़ मेरी इसको तो मैं hi पेल दूंगा.

मैं:- क्यों बे तू गन उठके मार सकता है तो मरता क्यों नहीं.

अभय:- उसने मजा नहीं आएगा

और इतना बोलते hi उसने मेरे रिब्स पे स्पिन किक दी जो की बहुत तेज़ लगी मुझे और मैं फिर निचे गिरा.

मैं:- "फ़क".

मैं फिर से खड़ा हुआ और गन की तरफ भागने को हुआ लेकिन अभय ने पीछे मेरी शर्ट पकड़ी और अपनी साइड से खींच के मुझे पिलर से सत्ता के मुझे non-stop कई मतलब कई पंच मारे.

और उसके हट्टे hi मैं घुटनो पे आ गया क्युकी मेरा पूरा थोबड़ा लाल हो चूका था खून से मेरी शर्ट पे भी खून गिर रहा था.

अभय:- अबे क्या हुआ, बहुत बॉस बन रहा था की अभय ये कर, वो कर, अब क्या हुआ?

मैं फिर खड़ा हुआ और उसके पास पहुंच के उसके मुँह पे एक पंच मारा लेकिन उसने झुक के मेरी रिब्स में भयानक पंच दिया और मैं फिर से घुटनो पे आ गया.

अब मेरे पास एक गन और थी जो मेरी पंत के पिछले हिस्से में थी एक मैं किया की अभी निकल के खोपड़ी खोल दू, लेकिन इससे क्या होगा ये तो मर जाएगा लेकिन फिर भी जीत जायेगा की एक ने चीटिंग करके मारा इसे और मेरा ईगो भी नहीं मानेगा. बेशक मर जाओ ऐसे लड़ते लड़ते लेकिन जब तक ये गन की तरय नहीं करेगा तब तक मैं भी नहीं करूँगा.

और ये सोच के मैंने अपनी पंत से गन निकली और अभय कुछ सोचता उससे पहले उसपे तान दी, उसकी फट के हाथ में आ गयी, लेकिन मैंने वो गन भी उस टेबल साइड फेक दी, जिससे अभय के फेस पे स्माइल आ गयी.

अभय:- लौड़े मार सकता था तू मुझे, लेकिन तूने छुटियापन्ति कर दी.

मैं:- ईगो प्रॉब्लम.

और मैं एक बार फिर से खड़ा हुआ पूरी एनर्जी लगा के और उसके पास पहुंच के उसके अंडो पे लात मारनी चाही लेकिन वो तेज़ी से वह से हटा और मेरा लेफ्ट हैंड अपने राइट हैंड में फसा के कटक से तोड़ दिया.

मैं गांड फाड़ चिलाय क्यों गांड फाड़ hi दर्द हुआ था, और निचे घुटने पे आ गया और अपनी कोहनी पकड़ के बैठ गया लेकिन तभी उसने मेरी खोपड़ी पे इतनी तेज़ लात मारी मेरा मुँह बाज़ा सीधा जमीन में और भेनचोद फिर बहुत तेज़ दर्द हुआ.

"लास्ट एंड फाइनल कॉल, लेट में के आउट"

आजा लौड़े आजा तेरी वजह से hi नहीं मारा इसे नहीं तो ऐसे 10 को पेल दू मैं ये बात मैंने उससे कही और अंदर से एक hi आवाज़ आयी :लिएर्:

और फिर मेरी साँसे एक दम से तेज़ हो गयी लिखे फुल स्पीड पकड़ ली मैंने मेरे दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन तेज़ हो गया, मुझे मेरी नशे फड़कती हुयी महसूस होने लगी, इसी बिच वो अभय कुछ भोक रहा था जो मुझे ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था और इधर मेरी निचे पड़े-2 की आँखे एक दम से खुल गयी. अब मैं बस देख पा रहा था लेकिन और कुछ मेरे कण्ट्रोल में नहीं था.

मुझे अब अपनी बॉडी में पैन फील होना बंद हो गया था, मैं एक दम से खड़ा हुआ और अपना लेफ्ट हाथ पकड़ के 2-3 बार मोड़ा और फिर एक दो भर झटका जिससे मेरा लेफ्ट हैंड फिक्स हो गया.

मैंने अभय को घुरा और उसकी तरफ बढ़ा, अभय को नहीं पता था की मैं कोण हु इस टाइम, मैं उसके पास पंहुचा और फुल स्पीड में एक पंच मारा उसकी रिब्स पे उसने हाथ बिच में लाया लेकिन रोक न पाया. और एक पंच में वो टेढ़ा हो गया और फिर उतनी hi तेज़ और स्पीड से एक पंच दिया उसकी लेफ्ट रिब्स पे इस बार वो घुटनो पे आ गया.

मैंने उसके बाल पकड़ के उठाया और उसके फेस पे पंचेस बजने लगा बहुत तेज़ वो एक दो बार अपने हाथ बिच में लाया लेकिन जल्दी hi वो ढीला पद गया, अब उसका फेस भी मेरी तरह लाल hi चूका था लेकिन उसे और भी दर्द देना बाकी था मैं थोड़ा पीछे हुए और वापिस से उठा और जम्प करके एक किक मेरे फेस पे मारनी चाही लेकिन उसे पता नहीं है की सामने कोण है इसलिए मैंने उसकी मेरे फेस के पास आते hi रोक ली और उसके जैसे hi जुपे करके एक किक उसके थोबड़े पे दी, वो थोड़ा दूर जाके गिरा और मैं भी उसके पास पंहुचा लेकिन उसके पास पहुंचा hi था की मुझे बदबू आयी बहुत तेज़ और मैं अपने घुटनो पे आ गया, :wtf:

मेरी आँखे बहार होने को हो गयी, क्युकी वो स्मेल मेरे दिमाग में घुस रही थी मुझे ऐसी हरकते करता देख के अभय खड़ा हुआ और मेरे लात मारी जिससे मेरा मुँह सामने राखी "टिगों" के बैग पे लगा और एक दम से मेरे नाक के पास "टिगों" आते hi मेरे को मेरी बॉडी के अंदर दौड़ती हुयी एनर्जी काम होती दिखी और मेरी बॉडी का पैन वापिस आ गया मतलब इस ड्रग से वो वापिस चला गया.

मेरे बॉडी में फिर दर्द था और मुझे पता था अब वो ना आने का लेकिन स्टिल वो बहुत कुछ कर गया मेरा हाथ भी ठीक कर गया भसदक़ा, मैं उठा और उस बैग में हाथ दाल के टिगों निकला और इस टाइम में भूल चूका था मैं कहा हु क्या कर रहा हु मेरे साथ कोण है, मुझे बस ड्रग्स चाहिए था क्युकी बहुत दिनों से नहीं लिया था इसलिए बॉडी की मांग बढ़ गयी थी. मैंने अपनी हथेली पे नाक लगायी और खींच गया एक बार में और मैं ट्रिपल दोसे ले ली थी इसलिए मैं ब्लेंक हो गया 20 सेकंड के लिए और इस टाइम मुझे कुछ महसूस नहीं हो रहा था बस मुझे अपने दिमाग में और बॉडी में घूमता हुआ ड्रग्स जरूर महसूस हो रहा था.

धीरे धीरे मैं वापिस आया और अब मेरा दिमाग फुल बूस्ट हो चूका था ड्रग्स के कारण दर्द गायब था और अब अभय की लगने वाली थी.

मैं वह से उठा और उठते hi अभय ने मुझे किक मारनी चाही लेकिन मैं उससे बचा और 2 पंच दिए उसकी रिब्स पे जो पहले hi टूट चुकी थी और एक उसके मुँह पे, वो थोड़ा सा पीछे और पीछे होते hi मैंने दी उसकी चाहती में लात जिससे वो उस पिलर से टकराया और वापिस आगे को आया और आगे आते hi उसके पेट में लात दी और वो झुका पेट पकड़ के और झुकते hi उसका सर पकड़ के उस पिलर में 3 बार बजाय उसका सर फैट चूका था और वो बस अब ख़तम होने hi वाला था, इसलिए मैं उसे वही छोड़ के गन उठा के लाया और खोपड़ी पे तान दी.

मैं:- और फाइटर कोई आखरी ख्वाहिश.

अभय:- किल में! और याद रख तू हर्ष को कभी नहीं हरा सकता अगर तेरा ऐसा hi हाल रहा तो, इस बीमारी को ठीक करवा और टीम बना. मिलते है अगले जनम फिरसे पहले जैसे दोस्त बांके, पैसो ने दोस्ती ख़तम कर दी और धोके ने जान ले ली.

ये सब बाते वो बड़ी धीरे और ruk-ruk के बोल रहा था.

मैं:- लौड़े बोर न मार.

और मैंने उसकी खोपड़ी में 2 बुलेट्स उतर दी.

भेनचोद कितना बोलता है.

मैं उसकी बॉडी के पास बैठ गया और मेरी आँखों में वो पल गुजरने लगे जब हम छोटे थे तब हम दोस्त बने, साथ खेलना साथ उलटे सीधे काम करना, बहुत कुछ हमने साथ किया लेकिन अंत में मुझे अपने हाथो से अपने दोस्त की जान लेनी पड़ी. अब मेरे दिमाग में अभय की बाते गूंज रही थी की सच में कोई गलती तो नहीं कर रहा न मैं हर्ष के खिलाफ जाके क्युकी, मैं अभय से इतना पिता हु तो वो तो पता नहीं क्या हाल करवा देगा मेरा, ी नीड ा टीम या ऐसा बाँदा जो हर्ष के अंदर से निकल जाए.

खैर ये सब बाद की बाते है मैं खड़ा हुआ और वो टिगों का बैग उठा के जेब में डाला और तीनो गन्स भी. और साड़ी लाश उठा के एक जगह ीखता की और बहार चल दिया, थोड़ी दूर चलने के बाद मैं कार के पास आया और उसमे बैठके मैंने वापिस जाने की बजाय कार को सीधा फैक्ट्री की तरफ ले जाते हुए अंदर घुसा दिया और फिर उन लाशो की उस कार में डाला और उस कार को ऐसे खड़ा किया की उसकी आयल टैंक बहार की साइड हो, मैंने उसका आयल टैंक खोला और थोड़ा सा लीक भी किया. और उस फैक्ट्री से बहार आया.

मैं:- अभय साले फोर्टनेर में तेरा अंतिम संस्कार कर रहा हु, किसी जनम में मत मिलियो

और मैं गोली मारी सीधा आयल टैंक में और कूद के दिवार के पीछे चुप गया और फिर हुआ एक बहुत तेज़ धमाका और वो फैक्ट्री भी कार के साथ फैट गयी.

मैंने भी वह से निकलना hi ठीक समजा क्युकी पुलिस आ जाएगी कभी भी. मैंने जेब से फ़ोन निकला तो रात के 10 बज रहे थे. मुझे पता था मेरी बॉडी में बहुत छोटे है अभी मुझे ड्रग्स की वजह से फील नहीं hi रहा लेकिन असर ख़तम होते hi गांड मर जाएगी इसलिए मैंने सिमरन को कॉल किया.

मैं:- hello!

सिमरन:- कोण बोल रहा है?

मैं:- एक! ी वांट तो मीट यू, ी मैं मैं इन्जुरेड हु बहुत ज्यादा बताओ कहा औ,

सिमरन:- ओह्ह माय गॉड जल्दी से हॉस्पिटल पहुँचो.

मैं:- ोकक!

मैंने फ़ोन कट किया और मैं रोड की तरफ चल दिया क्युकी अभी मैं सिटी के आउटसाइड था इसलिए पैदल चलता रहा, चलता रहा और फिर मैं रोड पे पंहुचा लेकिन यहाँ भी बस पैदल hi चलना था और क्या कर सकते है. तभी मेरा फ़ोन बजा मैंने देखा तो मनीषा का था.

मैं:- hello!

मेंशा:- कहा हो तुम, घर नहीं आना तुम्हे, इतनी देर तक क्या कर रहे हो बहार.

मैं:- अभय इस डेड.

वो कुछ नहीं बोली, मैं hi थोड़ी देर बाद बोलै.

मैं:- सुबह तक आ जाऊंगा मैं, bye.

और मैंने कॉल कट जार दिया, भेनचोद अभी से वाइफ बन रही है ये तो बाद में क्या हाल करेगी, इस सोच को झटका और फिर से पैदल चल पड़ा, तभी पीछे से लाइट आती दिखी और मैंने पीछे देखा तो एक कार थी, मैंने उसे लिफ्ट के लिए हाथ दिया तो उसने कार रोक दी और कार रुकी तो बस ये तो मेरसेदेज़ है, खैर उस कार का विंडो ओपन हुआ और अंदर एक 40-45 साल का well-educated बाँदा बैठा था.

मैं:- अंकल लिफ्ट.

उसने मुस्कुरा के गेट खोला और मैं उसके बाजु वाली सीट पे बैठा. और उसने कार दौड़ा दी.

वो आदमी:- कहा जाओगे बीटा.

मैं:- मेदांता हॉस्पिटल छोड़ दो.

वो आदमी:- इतने झकम और खून कहा से लगवा लिया.

मैं:- कुछ नहीं बस ऐसे hi.

वो आदमी:- माइसेल्फ राज वर्मा.

मैं:- एक!

राज मुस्कुराया मेरा नाम सुनके....

और बोलै ...

राज:- मेंटली डिस्टर्बेद लग रहे हो और ड्रग्स भी ले रखा है.

मैं उसकी इस बात से उसकी तरफ घूम गया क्युकी मैं अभी तक उसे बस इग्नोर कर रहा था लेकिन इस बात ने अंदर तक हिला दिया की इसे कैसे पता.

राज:- शौक होने की जरूरत नहीं है मर. एक

मेरे बारे में जान जाओगे और ये डॉ. प्रभाकर का कार्ड उनसे मिलो वो तुम्हारी बीमारी का इलाज़ कर देंगे.

मैंने भी chup-chap वो कार्ड लिया और सीट पे सर टिका के आँखे बंद करके इस आदमी के बारे में सोचने लगा की कोण है ये भेनचोद.

राज:- आ गया तुम्हारा हॉस्पिटल.

मैं कार से उतरा और हॉस्पिटल की तरड़ मुदा तो वो पीछे से बोलै.

राज:- आगे मुलाकात जरूर होगी और तब तुम जान जाओगे मुझे.

मैंने उसकी तरफ देखके एक फीकी सी स्माइल दी और हॉस्पिटल की तरफ बढ़ गया.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
अपडेट:-23 (कन्फूसिओं :कन्फ्यूज्ड: )

मैंने उस राज को फीकी सी स्माइल दी और हॉस्पिटल की तरफ बढ़ गया, हॉस्पिटल में एंटर होते hi लोगो का घूरना मुझे सुरु हो गया, लेकिन मुझे लौड़ा फर्क नहीं पड़ता इसलिए बस सीधा सिमरन के केबिन की तरफ चल पड़ा, इस वक़्त मेरी बॉडी में फिर से पैन होना सुरु हो गया था लेकिन किसी तरह केबिन में पंहुचा और सीधा जाके वह सोफे पे लेट गया.

सिमरन मुझे देखके सीधे मेरे पास आयी और नर्स को और वार्डबॉय को बुलाके मुझे कही रूम में ले गए और फिर उस नर्स ने मुझे इंजेक्शन दिया और मेरी आँखे धीरे-2 बंद हो गयी.

मेरी आँख खुली तो असुसुअल में एक हॉस्पिटल के बीएड पे लेता हुआ था और मैं जब खिड़की साइड देखा तो ये भी पता लग गया की सुबह हो चुकी है, तभी मैं उठा और वाशरूम गया और वह फ्रेश होक जब मिर्रोर के सामने खड़ा हुआ तो झटका सा लगा क्युकी मेरे सर पे पट्टी बंधी हुयी थी और पुरे फेस पे jagah-jagha निशान थे और सूजन भी आ राखी थी, भें का लौड़ा फेस की माँ छोड़ गया और फिर थोड़ी निचे देखा तो मेरे लेफ्ट हैंड पे नार्मल प्लास्टर बंधा हुआ था :wtf: मेरा लेफ्ट हैंड तो उसने सही कर दिया था फिर इन्होने प्लास्टर क्यों बांध दिया.

मैं वह से निकला और सिमरन के केबिन की तरफ चल दिया उसके केबिन में पहुंच के पता लगा की वो रात को hi घर चली गयी थी आधे घंटे में आने वाली है.

मैंने वही बैठ के वेट करना सही समझा क्युकी मुझु कुछ सवालो के जवाब चाहिए थे. लेकिन टाइमपास करने को कुछ नहीं था तो फ़ोन निकला लेकिन वो भी switch-off बैटरी न होने के कारन, तभी मेरी नज़र वह घडी पे गयी तो सुबह के 9:30 हो रहे है मनीषा तो पागल hi हो गयी होगी फ़ोन करके कही पुलिस में न चली जाए वो लेकिन मैं कह दूंगा की एक्सीडेंट हुआ था मेरा और मैं यही था रात से. ओह्ह्ह्ह शीट्ट्ट्ट गन्स कहा है मेरी, लौड़े लग गए भेनचोद.

तभी उस केबिन का गेट खुला सुर सिमरन अंदर आयी.

सिमरन:- गुड मॉर्निंग.

मैं:- गन्स और ड्रग्स कहा है.

सिमरन:- लाकर में है, वो तो ाचा हुआ नर्स ने नहीं देखे.

मैं:- जल्दी दो मुझे.

सिमरन:- ोककक! वैसे तुम करते क्या हो?

मैं:- तुम्हे पता लगे तो बताना.

सिमरन:- मैं पुलिस से पूछ के बताउंगी.

मैं:- मैं मजाक के मूड में बिलकुल भी नहीं हु.

और वो मेरे बातो के वजन को समझ गयी और चुपचाप लाकर में से गन और ड्रग्स लाके दिए मुझे मैं उन्हें अपनी पंत में ठूसा.

मैं:- बस एक क्वेश्चन मेरा लेफ्ट कोहनी पे प्लास्टर क्यों है?

सिमरन:- क्युकी तुम्हारी कोहनी डिस्लोकाते हो चुकी थी.

मैं:- पर कैसे मैंने इसे सही कर दिया था.

सिमरन:- नहीं ऐसा नहीं है ये कोहनी टूटी हुयी थी और इसे हमने सही किया है है.

मैं:- लिसेन no जोके.

सिमरन:- ी ऍम नॉट जोकिंग

मैं:- ोकक लिसेन

और फिर मैंने उसे अपने बारे में थोड़ा बहुत बताया की कैसे मेरी दूसरी पर्सनालिटी बहार आ जाती है. पहले तो वो हसी लेकिन फिर सीरियस होक बोली.

सिमरन:- ये बहुत बड़ी बीमारी है.

मैं:- इसका इलाज़.

सिमरन:- मैं तो नहीं कर सकती लेकिन दिल्ली में एक डॉक्टर है डॉ. प्रभाकर वो तुम्हे ठीक कर देंगे.

तभी मैंने अपनी जेब से उसे वो रात वाला कार्ड दिया तब उसने बोलै हां यही है वो. फिर उसने मुझे कुछ मेडिसिन दी और रेस्ट करने को बोलै.

मैं वह से उठने को हुआ तो सिमरन बोली.

सिमरन:- वैसे एक चीज़ बतानी थी तुम्हे ये जो तुम्हारी पर्सनालिटी है न वो कुछ नहीं है बस तुम्हारी इमेजिनेशन है.

मुझे लौड़ा समझ नहीं आया लेकिन मैंने सिमरन से पूछना सही नहीं समझा क्युकी ये उसके सिलेबस में नहीं.

मैं वह से उठके बहार आया और फिर हॉस्पिटल के बहार आया मुझे चलने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी क्युकी रिब्स में दर्द था लेकिन मैंने एक टैक्सी रुकवाई और उसे एड्रेस बताके पीछे बैठ गया, सॉरी बैठ नहीं लेट hi गया. और उसने आगे बढ़ा दी टैक्सी.

मैं:- लौड़े आराम से.

हुआ ये की उसने एक दम से ब्रेक मारा और मैं सीट से निचे गिरा जिससे बहुत दर्द हुआ बस.

ड्राइवर:- भाई गाली क्यों देता है सामने गधा है.

मैं:- गधे की माँ की छूट.

ड्राइवर:- अरे वो जानवर है उसको काहे गाली देना

मैं:- जानवर की माँ की छूट और अब तू भी चुपचाप आराम से चल वर्ण

और मैंने एक गन निकल के उसकी खोपड़ी पे रख दी जिससे उसकी फैट गयी बहुत बुरे वाली लेकिन मैंने फिर वो गन हटा के वापिस रख ली

मैं:- अबे नकली है.

ड्राइवर:- भाई गांड न फाड़ यार आराम से चला लूंगा.

एक्चुअली मेरा मैं कर रहा था की इसे गोली मार दू और मैं मार भी देता लेकिन फिर मैंने नहीं मारी क्युकी मैंने खुद से सवाल किया की क्यों मारु मैं इसे. खैर इस कन्फूसिओं को मैंने छोड़ा, छोड़ा नहीं क्युकी मेरे दिमाग में इस टाइम 100 सवाल थे और उनके जवाब एक का भी नहीं था. सो मच कन्फूसिओं.

ड्राइवर:- घर आ गया भाई तुम्हारा.

मैं टैक्सी से निचे उतरा और उसे 500 का नोट दिया. उसने मुझे 300 वापिस देने चाहे लेकिन मैं अब रहीस था इसलिए उसे चेंज रखने को बोल दिया.

मैं मैं गेट खोल के अंदर गुस्सा तो लॉन में नयी ढुके कड़ी थी, बस फाइनली खुद की बाइक :स्वेट: ये भी मेरा एक इंटेंशन था की मेरी ये वाली बाइक हो जो की हो चुकी थी और क्या चाहिए अब "बहुत कुछ". मैंने अपने दिमाग की बकचोदी को इग्नोर मारा क्युकी इन थॉट्स को मैं झटक नहीं सकता था या झटक नहीं पा रहा था मैं शांत होना चाहता था लेकिन हो नहीं पा रहा था.

खैर मैंने दुर्बल बजायी, दूर खुला जो मनीषा ने खोला था वो एक दम से मुझे देख के रुक गयी और फिर मेरी कंडीशन देख के मुझसे गले लग गयी.

मैं:- आह्ह्ह्हह्ह

मनीषा:- सॉरी! सॉरी!

मैं:- it's ोककक.

मनीषा मुझे सहारा देके अंदर ले गयी और मुझे सोफे पे बिठाया, किरण हमे देख के मुस्कुरा रही थी.

मनीषा:- मुझे सब बताओ.

मैं:- बताऊंगा पहले कुछ खिलाओ बहुत भूख लगी है.

मनीषा उठके या भागके खाना लेके आयी और मुझे अपने हाथो से खिलने लगी, खाना खिला के पानी पीला के वो मेरे बाजू में बैठी मेरी बाजू पकड़ के.

मनीषा:- अब बताओ और तुम इतने परेशां क्यों हो और अभय को क्या हुआ.

फिर मैंने उसे कल के दिन का पूरा काण्ड बताया अभय के बारे में बताया.

मनीषा:- तुम्हे कुछ हो जाता तो.

मैं:- पता नहीं क्या होता?

मनीषा:- देखो मैं तुम्हे ये सब छोड़ने के लिए नहीं कहूँगी क्युकी तुम मुझे hi छोड़ डोज बस इतना बोलूंगी की खुद को कुछ मत होने देना.

मैं:- ोकक ma'am.

फिर मनीषा ने मुझे सहारा देके मुझे मेरे रूम में छोड़ा वो तो वही रुकना चाहती थी पर मैंने भेज दिया की मुझे सोना है.

उसके जाते hi मैंने वो गन्स निकल के सेफ मैं राखी और टिगों को टेबल पे बिछाया और सात से खींच गया सारा और फिर सोफे पे hi बैठ गया. थोड़ी देर में मैंने उस पैकेट को उठा के सेफ में रखा और 2 दोसे अपने पास राखी.

मैंने कपडे उतरे और वो प्लास्टर कट किया नाइफ से भेनचोद बेफालतू में बांध दिया उसने, और फिर जाके बाथ ली चेरे को छोड़ के.

बहार आके कपडे पहने तो किरण आयी रूम में उसके हाथ में नए फ़ोन का डिब्बा था. मैंने उससे वो डिब्बा लिया और उसे अपने पास बैठने को बोलै. मैंने फ़ोन की उन्बॉक्सिंग की और उसको अपने अकॉर्डिंग सेट किया.

मैं:- मनीषा कहा है.

किरण:- वो सोने गयी, उसके सर में दर्द है थोड़ा.

मैं कुछ नहीं बोलै बस किरण को अपनी तरफ खींचा और उसके होठो पे अपने होठ रख दिए और चूसने लगा जैसे सालो से भूखा हु, किरण भी एक सेकंड में मेरा साथ देने लगी. मेरे हाथ किश करते-2 उसकी कमर को सेहला रहे थे और फिर धीरे धीरे फिसलते हुए एक हाथ उसकी गांड पे चला गया और एक हाथ उसकी t-shirt के अंदर से उसकी पीठ पे और वो अपने एक हाथ से मेरी चेस्ट सेहला रही थी दुसरे से मेरे गाल.

जब हम दोनों की साँसे उखाड़ने लगी तब हम अलग हुए और नार्मल होने लगे.

किरण:- अब क्या करना है बॉस?

मैं:- मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा मैं क्या करू, ी ऍम टोटली कन्फ्यूज्ड. मेरे दिमाग में अभय की बाते घूम रही है मेरे दिमाग में उस राज की बाते घूम रही है लेकिन समझ नहीं आ रहा करू तो करू क्या.

किरण:- वैसे अभय ने सही कहा वे नीड टीम.

मैं:- कहा से लौ टीम, ऑडिशन रखवा दू की हर्ष चौधरी को मारने के लिए ऑडिशन दो.

किरण:- तुम्हे पहले इस मला को मार के पैसे ीखता करने चाहिए. और फिर मनीषा को दूर भेज दो पढ़ने के लिए ताकि वो सेफ रहे और उसे दिल्ली जाने से पहले भेजो ताकि किसी को शक न हो.

मुझे भी किरण की बात सही लगी.

मैं:- तो तुम मनीषा का किसी अचे से स्कूल में अड्मिशन करवाओ और वह का पासपोर्ट वगैरह भी बनवाओ.

किरण:- ये तो मैं बनवा दूंगी मेरे कांटेक्ट है.

मैं:- एक काम और है एक कार खरीद लो.

किरण:- कोनसी.

मैं:- मुझे नहीं पता बस भागने में राकेट हो

किरण:- हो जायेगा.

फिर मैंने उसे पैसे दिए और फिर हमने एक दुसरे को किश किया इस बार मेरे हाथ उसके टाइट बूब्स को सेहला रहे थे और वो भी मुझे फुल जोश में किश किये जा रही थी. लेकिन मैंने उसको अलग किया.

मैं:- रात को रूम का गेट खुला रखना...

किरण ने शर्मा का मुंडी हां में हिलायी और निकल गयी और मैं खड़ा होक मनीषा के रूम में चला गया जहा वो सो रही थी उसके फेस के मासूमियत देखके मैं अपनी साड़ी टेंशन और दर्द भूल गया और जाके उसको बाहो में भर के लेट गया और वो भी मुझसे लिपट गयी और उसके फेस की स्माइल और भी ज्यादा क्यूट हो गयी और फेस में ऐसा खोया की कब नींद आयी पता hi नहीं लगा.

शाम को मनीषा ने मुझे मेरे लिप्स पे किश करके उठाया.

मैं:- मुझे तुमसे कुछ कहना है.

मनीषा:- बोलो न.

मैं:- देखो गुस्सा नहीं होना पर मेरे पास हमेशा खतरा रहेगा और जब तक हर्ष ख़तम नहीं हो जाता तब तक तुम फोरीगन में पढ़ोगी.

मनीषा ये सुनते hi रोने लगी.

मैं:- देखि ी लव यू सो मच और मैं तुम्हे खतरे में नहीं दाल सकता और हर्ष को ख़तम करते hi बुला लूंगा तुम्हे.

मनीषा:- ठीक है लेकिन तुम मुझसे मिलने आओगे.

मैं:- आऊंगा और तुम्हे कोई भी प्रॉब्लम हो थें कॉल में.

मनीषा:- ोकक!

और फिर मुझे छोटा सा किश करके भाग गयी जैसे छोटे बचे करते है, मैं भी अपने रूम में आया और पंत में एक गन ठुसी, जेब में पैसे ठूसे और बाइक की के उठके चल दिया विवेक से मिलने.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
अपडेट:-24

मैंने कीस उठायी और बाइक निकली बहार और स्टार्ट करके जैसे hi चलायी तब पता लगा की भेनचोद कोहनी में तो अब भी दर्द है, लेकिन अब पंगे लिए है तो भुगतने भी पड़ेंगे इसलिए मैं धीरे धीरे निकल पड़ा.

और थोड़ी देर बाद विवेक के घर पहुंच के मैंने दुर्बल बजायी तो आंटी ने गेट खोला, मुझे देख के खुश हो गयी वो.

मैं:- नमस्ते आंटी जी.

आंटी:- नमस्ते बीटा आओ आओ अंदर आओ.

हम दोनों अंदर गए तो उन्होंने मुझे सोफे पे बिठाया और पानी वगैरह पीला के मेरे पास बैठ गयी.

आंटी:- बीटा कहा थे इतने दिन और वो अभय कहा है? और ये इतनी चोट कैसे आयी तुम्हे.

मैं कुछ देर के लिए चुप हो गया क्युकी बोलू तो क्या बोलू लेकिन फिर हिम्मत करके बोलै.

मैं:- वो मैं तो उप गया हुआ था तो पता नहीं अभय का मुझे भी कुछ पता नहीं लग रहा. और कल मेरा एक्सीडेंट हो गया था इसलिए चोट आ गयी

आंटी:- पता नहीं तुम लोग क्या करते रहते हो? आज न्यूज़ नहीं देखि एक बंद फैक्ट्री में जाली हुयी लाशें मिली है और उनकी पहचान भी नहीं हो पा रही.

मैं:- पता नहीं आंटी जी हम तो इन सब से दूर रहते है.

आंटी:- अछि बात है,

मैं:- विवेक कहा है आंटी

आंटी:- जा विवेक उप्पेर अपने कमरे में है.

मैं भी जल्दी से खिसक लिया क्युकी ज्यादा झूट न बोल पता मैं.

मैं विवेक के कमरे के बहार आके अंदर देखा तो वो साला पोर्न देख रहा था दूर के साइड पीठ karke.main चुपचाप उसकी पीछे से गया और फ़ोन चीन लिया, विवेक की गांड फैट गयी. लेकिन मुझे देखते hi मुझपे कूद पड़ा वो और मुझे बीएड पे ढाका दिया और मैं बीएड पे गिरते hi करहाने लगा.

मैं:- भें के लौड़े गांड तोड़ दी.

फिर उसने मुझे गौर से देखा और मेरा फेस, मेरे कपडे और मैंने रिब्स पे हाथ लगाया था वो समझ गया की मैं काण्ड hi करके आया हु.

विवेक:- भेनचोद कहा था तू?

फिर मैंने उसे उप वाला काण्ड बताया जिसके बाद वो मेरा गुणगान करने लगा.

विवेक:- ाचा अभय कहा है?

मैं:- अभय मर गया.

विवेक:- देख मजाक मत कर.

मैं:- वो कल फैक्ट्री के ब्लास्ट में मर गया.

विवेक कुछ नहीं बोलै और चुपचाप बीएड पे बैठ गया और फिर उसकी आँखों से आंसू आने लगे. मैंने उसे पानी पीला के सांत करवाया.

विवेक:- कैसे? तू तो साथ था न उसके.

मैं:- चल तुझे दारु पिलाता हु. फिर बात करेंगे.

वो भी कुछ नहीं बोलै हम दोनों निचे आये मैंने उसे बाइक की के दी और उसने बिना कुछ बोले ठेके की तरफ दौड़ा दी.

आज विवेक भी मेरे साथ गया ठेके पे बिना डरे.

मैं:- यययय एक जैक डेनियल दे तो.

ठेकेवला:- ओह्ह्हू देखो तो कोण आये है.

विवेक:- सुन बे गांडू बकचोदी मत कर, चुपचाप दे.

उसने भी दे दी विवेक को गुस्से में देख के, हम दोनों ने सोडा, चकना, गिलास वगर लिए और टंकी की तरफ चल दिए.

विवेक ने जल्दी hi टंकी पे पंहुचा दिया और हम दोनों ने अपनी जगह पे जा के पेग बनाये, मैं तीसरा बनाने लगा लेकिन विवेक ने नहीं बनाने दिया.

विवेक:- हम दोनों hi पिएंगे अब से बस, सब माँ छुड़ाए.

फिर हम दोनों ने दे पेग दे पेग पूरी बोतल पि ली और सेट हो गए, सेट विवेक हुआ था, मुझे तो बस नशा था सरूर सा हुआ था बस.

विवेक:- अब बता मुझे क्या हुआ अभय के साथ, किसने किया भेनचोद माँ छोड़ दूंगा उसकी.

मैं:- अरे हम दोनों को पता लगा की राजेश उस फैक्ट्री में है तो हम वह गए, वह फाइट हुयी मेरी कोहनी और सर में लगी थी इसलिए मैं साइड हुआ और अभय को पता नहीं था इसलिए वो सीधा घुस गया और फिर पता नहीं कैसे ब्लास्ट हो गया.

विवेक:- इस मला की माँ की छूट इसे नहीं छोडूंगा मैं, चल अभी पेल के आते है इसको.

मैं:- रुक जा भसडक, कल देखेंगे अभी रात भी हो रही है.

विवेक:- मम्मी को बताऊंगा तो क्या होगा उनका.

मैं:- बताना तो पड़ेगा hi कब तक छुपायेगा.

विवेक:- चल मुझे घर छोड़ के आ अब.

मैं:- चल!

मैंने बाइक स्टार्ट की और विवेक को बिठा के उसे उसके घर के बहार छोड़ा और कल्टी हो लिया. वैसे मैंने विवेक को सचाई इसलिए नहीं बताई क्युकी वो मुझसे भीड़ जाता बिना कुछ सोचे समझे क्युकी अभय उसका भाई था और मला का नाम इसलिए लिया क्युकी वो मेरा साथ दे बस मला को मारने में फिर मैं उसे सचाई बता दूंगा और फिर देख लेंगे क्या होता है.

मैं ये सब सोचता हुआ जा hi रहा था की मेरा फ़ोन बजा मैंने बाइक साइड में रोकी और देखा तो कॉल मनीषा का था.

मनीषा:- कहा हो तुम इतनी देर हो गयी.

मैं:- अरे मैं लेट हो जाऊंगा तुम सो जाओ.

मनीषा:- ठीक है मैं किरण को बोल दूंगी की वो तुम्हे खाना दे दे.

मैं:- ोकक ब्यय.

और मैंने जैसे hi फ़ोन जेब में डाला तो दो लोग मेरे सामने थे और मुझे नाइफ दिखा रहे थे. मैंने हाथ उप्पेर किये और बाइक से उतरा.

पहला:- चल बे लोंदे, जो भी है सब दे दे.

दूसरा:- चल जल्दी कर.

मैं:- अबे तुम दोनों हो कोण.

पहला:- लूटेरे है हम यहाँ के.

मैंने अपना एक हाथ पीछे लेके गया, वो सोचे पैसे निकल रहा हु इसलिए वो खुश हो गए लेकिन मैं गन निकल के पहले वाले की खोपड़ी पे रख दी तो उन्दोनो की फैट गयी.

मैं:- अबे बाक्लोडो काम से काम लूटना तो सिख लो इस नाइफ को गले पे लगाया जाता है 1 फ़ीट दूर से तो बचा भी न डरे.

पहला:- भाई माफ़ कर दो हम फिर नहीं करेंगे.

मैं:- मेरे लेके करो भेनचोद, छाए खून करो लेकिन मुझे न रोक देना कभी भी, नहीं तो उप्पेर से लेके निचे तक पूरा तोड़ दूंगा दोनों को.

उसके बाद मैंने बाइक पे बैठा और चल दिया, तभी मेरे दिमाग में ख्याल आया की बहार का खाना खाना चाहिए आज और इसलिए रेस्टोरेंट में डिनर किया और निकल पड़ा घर पे. घर पहुंच के मैंने दुर्बल बजायी तो दूर किरण ने खोला और उसे देखके पता नहीं क्युकी अजीब सा फील हुआ क्युकी उसने वही ब्लैक निघ्त्य पेहेन राखी थी और भारी माल लग रही थी, खैर मैं अंदर आया और सोफे पे बैठा और किरण भी मेरे पास आके बैठ गयी.

मैं:- मनीषा कहा है?

किरण:- वो तो सो गयी. खाना लौ तुम्हारे लिए.

मैं:- नहीं मैं खाके आया हु, मेरे रूम में आओ तो.

और मैं उठके उप्पेर आया और पहले देखा मनीषा सो रही है की नहीं लेकिन वो सो रही थी तो मैं अपने रूम में आया और वो गन्स वगैरह सेफ में रखे और कपडे निकल के शॉर्ट्स पहना और खुद को मिर्रोर में देखा.

फेस की माँ चूड़ी पड़ी है लेकिन स्टिल हैंडसम हु, बॉडी भी ठीक है लेकिन कट्स नहीं है, ी थिंक होने चाहिए तो क्या गयम सुरु कर दू नहीं इतना टाइम खा है मेरे पास.

तभी मेरे रूम का दूर खुला और फिर बंद हुआ किरण अंदर आयी और उसने आते hi मुझे पीछे से बाहो में भर लिया. हाय कितना सॉफ्ट सरीर है उसका मुझे अपनी पूरी बॉडी पे फील हो रहा है.

अब मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था इसलिए मैं घुमा और अपने होठ उसके होठो से जोड़ दिए और बहुत स्मूथली किश करने लगा और किरण भी मेरा साथ दे रही थी, मैंने किश करते-2 उसकी गांड पे हाथ ले गया और सहलाने लगा वो और ज्यादा मुझसे चिपक गयी उसके नरम टाइट बूब्स मेरी चेस्ट पे चुभ रहे थे. मैंने उसे ढाका दिया तो वो बीएड पे गिर गयी और फिर मैं भी उसके उप्पेर आके दुबारा किश करने लगा, और एक हाथ से उसके टाइट बूब्स को सेहला रहा था. किश करके जैसे hi हम अलग हुए मैं उसके गले पे किश करने लगा और गले पे किश करते-2 निचे आ गया और शोल्डर पे से निघ्त्य के स्ट्रिप को हटा के वह किश करने लगा.

फिर मैंने उसे उठाया और उसकी निघ्त्य को निचे की तरफ सरका के कमर तक कर दिया और उसके बूब्स पे दोनों हाथ रखके मसलने लगा.

किरण:- ाः आराम से दर्द होता है.

मैं कुछ नहीं बोलै बस लेफ्ट हैंड हटा के अपना मुँह उसके निप्पल पर रख दिया और चूसने लगा और दुसरे वाले को दबाने लगा.

किरण:- अह्ह्ह्हह एक ऐसे hi, सूचक आईटी हार्ड.

मैंने दुसरे वाले के साथ भी ऐसा hi किया और फिर जब उसके गोर बूब्स बिलकुल रेड हो गए तो मैंने उनको छोड़ा और उसके गहरी नाभि में जीभ दाल दी और ऐसा करते hi वो मचल गयी और मेरे सर को पकड़ के अपनी नाभि में दबाने लगी. हम दोनों आवाज़ नहीं कर रहे थे क्युकी मनीषा उठ सकती है, इसलिए मैं खड़ा हुआ और अपने रुमाल को फोल्ड करके किरण के मुँह पे बंद दिया जिससे उसकी आवाज़ न निकले और फिर मैंने उसकी निघ्त्य जो की कमर तक थी उसे निकल दिया और उसकी छूट पे हाथ फेरा तो वो बिलकुल चिकनी थी. मैंने देर न करते हुए अपना शार्ट निकला और किरण को घोड़ी बनाया और पीछे से लुंड उसकी छूट पे सेट किया और एक धक्का मारा खींच के, किरण चिल्ला तो नहीं पायी लेकिन मुझे पता था उसे दर्द तो हुआ hi है इसलिए मैं कुछ सेकण्ड्स रुका और फिर से एक ढाका मारा और पूरा उसके अंडर उतर दिया इस बार भी वो कांप गयी लेकिन अब मेरे दिमाग में चुदाई और दारू का नशा दोनों था तो मैंने धक्के लगाने स्टार्ट कर दिए और फिर कई पोजीशन में उसे 2 बार छोड़ा और उसे बाहो में भर के लेट गया.

किरण:- मजा आ गया.

मैं:- हां अब तुम जाओ.

किरण वह से उठी और अपने कपडे उठा के वह से चली गयी, मैं भी बाथरूम में जाके बाथ लिया और फिर टाइम देखा तो रात के 2 बज रहे थे इसलिए सो गया.

सुबह मेरी आँख मेरा फ़ोन बजने से खुली और ये फ़ोन मेरे दादा के नंबर से आ रहा था. मैंने कॉल पिक की

मैं:- hello

और दादाजी ने जो बोलै वो सुनके मेरे हाथ से फ़ोन छूट गया और मैं वही अपना सर पकड़ के बैठ गया.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
:थैंक्स: बरोथेर फॉर योर ब्यूटीफुल एंड वैल्युएबल रिव्यु

और मुझे सेक्स सन लिखने नहीं आते और ये वाला भी इसलिए दाल दिया क्युकी इसका भी रीज़न है स्टोरी में और वो आगे पता लगेगा. और रही बात ड्रग्स की तो वो भी चोर देगा लेकिन अभी तो फ़िलहाल नहीं :डी

कीप सपोर्टिंग
 
:थैंक्स: सर जी फॉर योर लव एंड सपोर्ट

और रही बात हेट कमैंट्स की तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता उनसे :डी

हर किसी को एक चीज़ पसंद नहीं आती सब का टास्ते अलग होता है और मैंने तो उसपे रियेक्ट भी नहीं किया किसी रीडर ने hi उसको रिपोर्ट मार दिया सयाद :डी

अगेन थैंक्स फॉर योर सपोर्ट सर जी :बाउ:
 
अपडेट:-25 (नई तुरंस)

मैं जल्दी से खड़ा हुआ और कपडे बदल के गन के पंत में डाली क्युकी कभी भी काम आ सकती है और के उठके निचे भगा, निचे मनीषा मिल गयी.

मनीषा:- कहा जा रहे हो.

मैं:- आके बात करता हु.

मनीषा:- एटलीस्ट बता दो.

मैं:- अरे एक बार बोलै न आके बात करता हु, समझ नहीं आता.

ये बात मैंने बहुत तेज़ गुस्से में बोली थी और मनीषा भी इतनी तेज़ आवाज़ सुन के दर गयी और चुप हो गयी, मुझे भी उसपे चिल्लाना बुरा लगा लेकिन अभी वक़्त नहीं था उसे मानाने का, इसलिए मैं भाग के बहार आया और बाइक स्टार्ट करके निकल गया.

मैं बहुत तेज़ बाइक चला रहा था मतलब बहुत तेज़ और इसी कारन में बहुत जल्दी हॉस्पिटल पंहुचा और भाग के रिसेप्शन पे पंहुचा.

मैं:- hello! बलदेव चौधरी की फॅमिली कोनसे रूम में हैं.

रिसेप्शनिस्ट:- 402.

मैंने फिर ज्यादा टाइम वास्ते न करते हुए भगा उप्पेर की तरफ भेनचोद ऐसे टाइम पे लिफ्ट भी नहीं मिली इसलिए स्टैर्स से hi दौड़ लगनी पड़ी और भाग के 404 रूम के सामने आया और जैसे hi अंदर घुसा मेरे कदम अपने आप रुक जिसके 2 कारन थे.

पहल तो ये था की मेरे सामने 3 लाशें पड़ी थी सफ़ेद कपडे में लिपटी हुयी. और दूसरा ये की वह वो औरत कड़ी थी जिससे मैं सबसे ज्यादा नफरत करता हु. लेकिन दादाजी ने मुझे अंदर आने का इशारा किया और मैं धीरे धीरे उनके पास पंहुचा और वह राखी तीनो लाशो में से जो सबसे छोटी लाश थी उसके चेरे पर से वो कपडा हटाया तो मेरेको पहली बार ऐसा लगा की मेरी आँखों में सच्ची वाले आंसू आ रहे है और ऐसा हो भी रहा था पता नहीं क्यों पर मेरी आँखों में आंसू आ गए लेकिन मैंने जल्दी से अपनी आँखे पोची और मोनू के फेस पे हाथ फेरा, अभी भी उसके चेरे की मासूमियत क्रोरो में एक थी. लेकिन इस समय वो हमारे बिच में नहीं था, मुझे मेरे बाप और अपनी सौतेली माँ की मौत का जरा सा भी दुःख नहीं था लेकिन मोनू को देख के अंदर से कलेजा फाटे जा रहा था और गुस्सा भी इतना आ रहा था की पूछो मत.

मैं:- क्या हुआ इन्हे.

दादाजी:- ये लोग घूमने गए थे कल वह पे इन तीनो को गोली मार दी गयी आज सुबह इनकी लाश बरामद हुयी है और मैंने तुझे बुला लिया.

मैं कुछ नहीं बोलै क्युकी क्या बोलू कुछ समझ नहीं आ रहा था, इतनी देर में मेरी माँ जिससे मुझे नफरत वो मेरे पास आयी.

माँ:- बीटा.

मैं:- दादाजी इस औरत को किसने बुलाया है, इसे बोलिये निकल जाए यहाँ से.

दादाजी:- बीटा आज आज शांत हो जा.

मैं:- क्यों शांत हो जाओ ये आयी hi क्यों है चली गयी थी इतने साल पहले मुझे छोड़ के तो अब क्या वो ज़हाकाम जो मुझे मिले है उनपे नमक छिड़कने आयी है.

माँ:- बीटा मुझे माफ़ करदे और तू मेरे साथ दिल्ली चल, वह मैं, तू, तेरा भाई, तेरी बेहेन और तेरे पापा सुख से रहेंगे.

मैं तो हैंग हो गया ये सुन के की इसने शादी कर्ली दूसरी, लेकिन कर सकती है इसमें मैं कुछ नहीं बोल सकता क्युकी ज़िन्दगी में आगे बढ़ने का हक़ सबको है..

मैं:- कभी नहीं मैं अकेला हु और अकेला hi रहूँगा, मुझे नहीं चाहिए कोई फॅमिली, नाउ जस्ट गेट आउट.

मैं मेरी माँ पे चिल्लाया तो पीछे से एक बाउंसर टाइप बाँदा मुझे मारने आया सायद मेरी माँ का बॉडीगार्ड होगा, लगता है अमीर आदमी से शादी कर ली.

खैर वो बाउंसर मुझे मारने आया और मेरी माँ उसे मन करने लगी लेकिन वो सायद अपनी मैडम को खुश करना चाहता था की वो कितना वफादार है.

मैं भी उसको अपनी तरफ आते हुए देख कर खड़ा हो गया क्युकी बचा तो हु नहीं मैं की उसकी बॉडी लैंग्वेज न समझू.

और वो मेरे जैसे hi पास आया मैं फुल खींच के उसके अंडो पे लात मारी, ये उसके लिए अनएक्सपेक्टेड था उसे लगा होगा की वो मुझे थोड़ा डरायेगा धमकाएगा और मैं चुपचाप सुन लूंगा, लेकिन हो गया उसका उल्टा क्युकी it's एक :रोल: .

अंडो पे लात लगते hi वो झुका और झुकने से उसका जो सर मेरे सामने झुक गया था उसपे मैंने घुटना दिया और घुटना निचे से मारा था इसलिए वो खड़ा हुआ और खड़े होते hi मैंने उसकी चाहती मैं लात दी जिससे वो पीछे की दिवार से टकरा के निचे गिरा और फिर नहीं उठा .

मैं:- आगे से थोड़ा ाचा बाँदा लाना.

माँ:- इसकी तरफ से मैं माफ़ी मांगती हु और तुम प्लीज मान जाओ बीटा मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हु.

मैं कुछ बोलता उससे पहले 3 पुलिस वाले भी उस रूम में एंटर हुए.

मैं उस इंस्पेक्टर की वर्दी पे नाम देखा जो की सुरेश सिंह था और वो सकल से hi मला का पालतू कुत्ता लग रहा था.

सुरेश:- आप सब लोग बहार जाओ, इनका पोस्टमॉर्टम होगा.

मैं:- वो तो हम लोग चले जायेंगे, लेकिन ये किया किसने है.

सुरेश:- आइए लड़के तेज़ आवाज़ में बात नहीं करने का.

माँ:- इंस्पेक्टर तुम्हारी हिम्मत कैसे हुयी मेरे बेटे से ऐसे बात करने की.

भेनचोद ये क्या फॅमिली ड्रामा चल रहा है, यहाँ 3 लोग मर गए है और ये लोग अलग hi खिचड़ी पका रहे है.

इतने में सिमरन एंटर हुयी बस इसकी hi कमी थी और साथ में विवेक भी अब मुझे इतने लोग देखके थोड़ी घुटन सी महसूस होने लगी थी.

लेकिन अब उस इंस्पेक्टर की आवाज़ और भी तेज़ हो गयी .

इंस्पेक्टर:- सुन बे औरत तू जो कोई भी है इस तेरे बेटे को इतना मारूंगा की अगला पिछले सब भुला दूंगा.

मेरी माँ अब भी इतनी भोली है या नहीं ये तो पता नहीं पर वो उस इंस्पेक्टर से थोड़ा दर गयी. लेकिन मेरे दिमाग में अलग hi बकचोदी हुयी मैंने सिमरन को अपने पास बुलाया और चुपके से अपनी गन निकल के उसको थमा दी और उस इंस्पेक्टर के सामने जा के खड़ा हो गया.

मैं:- वैसे आप ये सब छोड़ो ये बताओ की इन्हे किसने गोली मारी या मरवाई और क्यों?

इंस्पेक्टर:- वो सब हम देख लेंगे हमे तू हमारा काम मत सीखा. और तुझे पता है तो तू बता दे.

मैं:- मला ने मरवाया है इन्हे जो एंड अरेस्ट हिम.

उस इंस्पेक्टर को पता नहीं क्या हुआ मला का नाम सुनके उसने मेरे थोबड़े पे पंच दिया ये मेरे लिए बिलकुल अनएक्सपेक्टेड था इसलिए पीछे हो गया लेकिन वो एक और मारता इससे पहले उसके हवलदारों ने उसे पकड़ लिया और मुझे हथकड़ी पहना दी, मैंने भी हस्ते हुए पेहेन ली क्युकी मुझे पता था ये 30 मिनट भी अंदर नहीं रख पायेगा मुझे.

माँ:- इंस्पेक्टर तुम ये ठीक नहीं कर रहे हो.

इंस्पेक्टर:- चुप रंडी.

अब वैसे तो मुझे फर्क नहीं पड़ना चाहिए लेकिन ये वर्ड सुनके मुझे बहुत ग़ुस्सा आया और मैंने उस इंस्पेक्टर की चाहती में लात मारी और फिर क्या होना था उन दो हवलदारों ने मुझे दो दो मुक्के मारे और बिठा के ले गए जीप में.

अब मेरे दिमाग में सिर्फ दो बाते चल रही थी की इनको गोली किसने मारी और उसका जवाब था मला के आदमियों ने. और दूसरी बात ये थी की मैं ये बात प्रोवे कैसे करू लेकिन प्रोवे करने से कोई फायदा नहीं है गवर्नमेंट hi उसकी है और ये साले मुझे hi न फसा दे इस केस में, क्या करू? क्या करू? लौड़ा समझ नहीं आ रहा.

इतने में पुलिस स्टेशन आ गया और वो लोग मुझे स्टेशन में ले गए और जाके लॉकअप में दाल दिया. और वो इंस्पेक्टर मुझे घूर के बहार को चल दिया.

हवलदार:- बीटा अब बहुत पिटेगा तू सर से.

मैं:- अबे जा बे पक्का मत.

मैंने उसको इग्नोर मारा और वह पत्थर का बैठने जैसा था उसपे बैठ गया और सोचने लगा की क्या करू, इस टाइम मेरा दिमाग कुछ भी नहीं सोच पा रहा था क्युकी बहुत साड़ी चीज़ एक साथ चल रही थी जिसमे मेरी माँ भी शामिल हो चुकी थी. जिंदगी भी पता नहीं कैसा खेल खेल रही थी मेरे साथ कुछ समझ hi नहीं आ रहा था की आगे क्या करू.

मैं अपने खयालो से बहार आया, जब वो इंस्पेक्टर सेल में घुसा और दो हवलदार भी.

मैं:- मुझे एक कॉल करनी है.

इंस्पेक्टर:- नहीं हो सकती अभी तो रिमांड होगा तेरा ों ड्यूटी पुलिस अफसर पे हाथ उठता है. बांधो इसे मैं सुधरता हु.

उन दोनों हवलदारों ने मुझे बंधा और बहार चले गए.

और उनके बहार जाते hi सुरेश ने मेरे थोबड़े पे पंच दिया सच में साले का हाथ बहुत भरी था, बस अभी हॉस्पिटल से आया हु ये फिर भेज देगा लेकिन मैं गन सिमरन को दे दी ये ाचा किया क्युकी मुझे पता था ये इंस्पेक्टर कुछ चुटिया हरकत करेगा और अगर गन पकड़ी जाती तो मेरे लोडे लग जाते.

मैं अपने दिमागी खयालो से बहार आया जब उस सुरेश ने मेरी रिब्स पे मुक्के मारना सुरु कर दिए और फिर दुबारा फेस पे.

मुझे अब बहुत दर्द हो रहा था क्युकी वो बहुत देर से पिट रहा था मुझे.

मैं:- भहीनं के लावववडी फैक्सें पी मात्त मारर.

वो गली सुनके और बावला हो गया और पास में पड़ा डंडा उठके मेरे घुटने के पीछे वाली साइड दिया, और मैं गाँडफाँड चिल्लाया क्युकी बहुत तेज़ दर्द हुआ था लेकिन वो आगे और मारता इससे पहले एक हवलदार भगा हुआ आया और उस सुरेश के कान में कुछ बोलै जिसे सुनके सुरेश ने वो डंडा वही फेका और बहार हो गया सेल से.

मैं अभी भी उस डंडे से बंधा हुआ था अपने दोनों हाथो के सहारे लटक सा रहा था क्युकी मेरे पैरो में बिलकुल भी जान नहीं थी खड़े होने की और इस जल्लाद ने बहुत मारा था भेनचोद गांड तोडूंगा इसकी भी.

तभी पुलिस स्टेशन में दो लोग एंटर हुए जिन्हे देख के मुझे डबल शॉक लगा क्युकी एक तो मेरी माँ थी और दुसरे शख्स को देखके बस एक ख्याल आया की ये यहाँ क्या कर रहा है और इसका मेरी माँ के साथ क्या वास्ता लेकिन वो शख्स तो वही रुक गया और मेरी माँ मुझे देखते hi मेरे पास आयी और चिल्ला के बोली.

माँ:- हाथ खोलो इसके..

दो हवलदार भाग के आये और मेरे हाथ खोले लेकिन हाथ खुलते hi मैं निचे गिर गया और मेरी माँ ने मेरे सर को अपनी गौड़ में रख लिया और मेरी आँखों में ना चाहते हुए भी आंसू आ गए और बचपन के वो पल जब मैं अपनी माँ की गौड़ में सर रख के सोता था लेकिन मैं ज्यादा सोच न पाया क्युकी सेल के बहार वो शख्स खड़ा होक पुलिस वालो पे चिल्ला रहा था इसलिए मैं भी उनकी बाते ध्यान से सुनने लगा.

ओह्ह सहित बताना तो भूल hi गया ये बाँदा राज है और इसीलिए मुझे और ज्यादा हैरानी हो रही थी और खुसी भी क्युकी मेरी माँ को जो नुझे अपने साथ रखने का भूत चढ़ा है वो राज hi तोड़ देगा क्युकी उसे मेरे बारे में पता है की मैं एक ड्रग एडिक्ट हु और वो एक ऐसे इंसान को अपने घर में क्यों रखेगा. अगेन इन लोगो ने मेरी सोच में रुकावट दाल दी अपनी ऊँची आवाज़ से.

राज:- ये केस अब तुम पुलिस वालो का नहीं है, ये केस अब सीबीआई देखेगी और इंस्पेक्टर तुम अपनी औकात भूल रहे हो..

सुरेश:- सॉरी सर गलती हो गयी आगे से नहीं होगा. लेकिन केस तो हमारे पास रहने दीजिये.

राज:- बस पोस्टमॉर्टेम की रिपोर्ट आने दो और फिर उन तीनो के कातिलों को और उसके पीछे जो शख्स है उसकी लाश मिलेगी 24 घंटे अंदर-2.

उस सुरेश का फेस सफ़ेद हो गया और वो सलूट करके निकल गया. वेट ा सेकंड अब मुझे याद आया मैंने राज को कहा देखा है, नेवसपपेर में मैंने इसका इंटरव्यू पढ़ था कमल का बाँदा है ये और इसने बहुत अचे-2 काम भी किये है.

राज अंदर आया और मेरी माँ को बहार भेज दिया और मेरे पास बैठ के बोलै

राज:- तू टेंशन मत ले मैं देख लूंगा उन्हें.

मैं:- नहहीं उस्ससेय्य माईंण हीई माररूङ्गगा.

राज:- हालत नहीं है अभी तेरी और मुझे पता है तू कितना बड़ा छुपा रुस्तम बना फिरता है तेरे सरे मर्डर्स का पता है मुझे, तेरे पे हर सेकंड नज़र रहती है मेरी. कैसे कैसे तूने लोगो को मारा है.

मैं तो भेनचोद शॉक hi हो गया इन्हे इतना सब कैसे पता और मेरे एक्सप्रेशन देख के वो समझ गए.

राज:- दिमाग पे जोर न दाल एक हफ्ते बाद फुल रिकवर होक सीबीआई ऑफिस आ जइयो.

मैं हां में मुंडी हिल्लायी और फिर पता नहीं क्या हुआ क्युकी मैं बेहोश हो चूका था एनर्जी नहीं बची थी बॉडी में बिलकुल भी.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
:थैंक्स: फॉर योर रिव्यु बडी

और अभी वो बस 19 साल का लड़का है जिसे ठीक से कोई जनता भी नहीं है और सारे काम वो चुपके करता है तो ऐसे में वो पुलिस को हैंडल नहीं कर सकता और बेहोश होना भी लाज़मी है क्युकी वो एक दिन पहले हॉस्पिटल से आया है उसकी रिब्स डैमेज है सर पर मुँह पर कोहनी में चोट है और उसके बाद उसकी और पिटाई होती है तो वो बेहोश hi होगा, वो इन्ही हालातो से लड़के hi स्ट्रांग होगा अगर ये सब न दिखा के मैं दिखाऊ की इसने पुलिस को पेल दिए ये कर दिया वो कर दिया उसको कोई रेलाते hi नहीं कर पायेगा

और रही बात नफरत की तो वो अभी भी करता है उससे और वो ख़तम भी नहीं होने वाली लेकिन माँ की गौड़ में आके इंसान सब कुछ भूल जाता है और वो रोया इसलिए था की उसे बचपन के पल याद आ गए थे इसलिए नहीं की वो नफरत काम क्स्डने लगा है, और एक मतलबी है वो अपना मतलब निकलने के लिए कुछ भी कर सकता है.

ी होप तुम्हारे डाउट क्लियर हो गए होंगे :डी

थैंक्स फॉर योर रिव्यु
 
:थैंक्स: भाई फॉर योर ब्यूटीफुल रिव्यु :हुग:

और मला को तो पहले से पता था एक के बारे में लेकिन वो कुछ कर नहीं पा रहा था उस मीडिया वाले काण्ड से लेकिन राजेश के मरते hi उसने अटैक कर दिया.

और जो एक की माँ की बेटी है वो जरूरी तो नहीं उसकी hi हो पहले से भी हो सकती है :डी
 
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