Meri Aashiqui Tumse hi (Bhai aur Behen) - Page 16 - SexBaba
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Meri Aashiqui Tumse hi (Bhai aur Behen)

दोस्त यहाँ बात दुश्मनी की नहीं है बल्कि ये अलग hi माजरा है.... जल्द hi पता चलेगा की Prince/Sultaan पे बचपन में हुम्ला किसने और क्यों किया था.... वो कौनसी वजह है जिसकी वजह से सुल्तान के ज़िंदा होने की बात जान के जमीला इतना दर गयी....

वो कहते हैं न की....

कोई तो वजह ज़रूर थी वर्ण इस तरह कोई बेवफा नहीं होता....

शायद वो श्राप....
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 146

प्रिंस : मतलब की ऐसा कोई नहीं है जो ये बता सके की मैं कौन हूँ... मेरे परिवार वाले कहाँ हैं.. और मेरा घर कहाँ है...?

शनाया : शायद एक शख्स है जिसे तेरे बारे में कुछ पता हो....

शनाया की बात सुन के प्रिंस को आशा की एक किरण नज़र आती है....

प्रिंस : अच्छा... जल्दी बता कौन है वो....??????

अब आगे....

शनाया : हमारे रिआज़ सर....

प्रिंस : रिआज़ सर अब ये कौन हैं...?

शनाया : तुम रिआज़ सर के फवौरीते स्टूडेंट हुआ करते थे... वो तुम्हे अपने बेटे की तरह मानते थे.... वो अब हमारे कॉलेज के प्रोफेसर हैं....

प्रिंस : अच्छा मगर मैं तो इस नाम के किसी प्रोफेसर को नहीं जानता....

शनाया : तुम कॉलेज आओगे तब न जानोगे.... जब से कॉलेज शुरू हुआ है तुम शायद 5 - 7 दिन hi कॉलेज आये होंगे.... मैंने ठीक कहा न.... बाकी दिन जाने सरकार कहाँ गायब रहते थे....

प्रिंस : चल न अब ज़्यादा नौटंकी मत कर और जल्दी से बता की रिआज़ सर कहाँ मिलेंगे....?

शनाया टाइम देख के कहती है....

शनाया : ममममममम... इस वाक या तो वो अपनी क्लास में होंगे या फिर लैब में.... अब तो कॉलेज चल के hi पता चलेगा...

प्रिंस : तो फिर चल जल्दी....

दोनों कॉलेज की तरफ चल देते हैं....

कॉलेज पहुँच के उन्हें पता चलता है की रिआज़ सर लैब में हैं.... दोनों लैब की तरफ जा hi रहे होते हैं की स्टूडेंट्स के चीखने की आवाज़ आने लगती है....

प्रिंस : क्या हुआ ये अचानक से सब चिल्ला क्यों रहे हैं....?

तभी वहां भागते हुए एक लड़की आ टी है शनाया उसे रोक के पूछती है आखिर बात क्या है....?

लड़की घबराते हुए : व.... व... वो लैब में आग लग गयी है.... बचाओ.... उसे बचाओ... कोई बचाओ...

इतना कह के वो वहां से भाग जाती है....

लड़की की बात सुन के प्रिंस और शनाया चौंक के एक दूसरे की तरफ देखते हैं...

दोनों के मुँह से एक साथ hi निकलता है...

दोनों : लैब में आग.... रिआज़ सर...

ये कह के दोनों लैब की तरफ दौड़ लगा देते हैं.... लैब का हाल देख के दोनों घबरा जाते हैं.... लैब में चारो तरफ से आग लगी हुई है और हर गुज़रते पल के साथ वो बढ़ती hi जा रही है.... प्रिंस चाहे तो चुकी में अपनी पावर्स से आग को बुझा दे मगर सब की मौजूदगी की वजह से वो ऐसा नहीं कर पा रहा है.... उसे अब एक hi रास्ता नज़र आता है और वो है जल्द से जल्द लैब में जा के रिआज़ सर को बचाना....

ये सोच के वो लैब की तरफ बढ़ा hi था की तभी शनाया उसका हाथ पकड़ के उसे रोक लेती है....

शनाया : पागल तो नहीं हो गए ये क्या करने जा रहे हो....?

प्रिंस : शनाया रिआज़ सर अंडर है उन्हें बचाना बहुत ज़रूरी है एक वो hi हैं जो ये बता सकते हैं की मेरा परिवार और घर कहाँ है.... इस से पहले की देर हो जाए मुझे जाने दो...

शनाया : नहीं कभी नहीं.... मैं जान के तुम्हे मौत के मुँह में कूदने नहीं दूंगी.... कभी नहीं...

प्रिंस : शनाया मुझे कुछ नहीं होगा... प्लीज मेरी बात मान लो मुझे जाने दो...

शनाया है की प्रिंस को चोर hi नहीं रही प्रिंस की बात सुन के वो और भी मज़बूती से प्रिंस का हाथ पकड़ लेती है.... इधर आग है की हर गुज़रते पल के साथ बढ़ती hi जा रही है.... जब प्रिंस के बर्दाश्त की हद पार हो जाती है तब वो गुस्से में शनाया के ऊपर चीखता है और उसका हाथ छुड़ा लैब का दरवाज़ा तोड़ते हुए अंडर घुस जाता है....

प्रिंस को जलती आग में कूदते देख शनाया की रूह कांप जाती है... वो प्रिंस का नाम ले के ज़ोर से चीखने लगती है साथ hi रोने भी लगती है....

शनाया : Princeeeeeeeeeeee....

प्रिंस के पीछे पीछे शनाया भी लैब में घुसने की कोशिश करती है मगर स्टूडेंट्स उसे रोक लेते हैं.... तभी वहां शनाया का भाई आयुष आ जाता है.... अपनी बेहेन का हाल देख वो उसे संभालता है....

आयुष : क्या हुआ शनाया तू इस तरह रो क्यों रही है....? बात क्या है बता मुझे....?

शनाया : W....W....Wo प्रिंस लैब में चला गया....

आयुष शॉकेड : Kyaaaaaaaaaaaa...? मगर क्यों....?

शनाया : W....W.... वो रिआज़ सर को बचने....

आयुष : मगर रिआज़ सर तो यहाँ हैं....

रिआज़ सर के आयुष के पास खड़े देख शनाया शॉक हो जाती है.... वो कभी लैब की तरफ देखती है तो कभी रिआज़ सर की तरफ....

शनाया : अगर रिआज़ सर यहाँ है तो फिर अंडर लैब में कौन है...?

तभी वहां मौजूद अनु कॉलेज की स्टूडेंट जो रैगिंग वाले दिन प्रिंस के आने से बच गयी थी वो कहती है....

अनु : अंडर बब्बली है....

इस बार चौंकने की बारी रिआज़ सर की थी... अनु ने उनकी बेटी का नाम जो लिया था....

रिआज़ : कौन बब्बली....?

अनु : आपकी बेटी....

अनु की बात सुन के इस बार चीख रिआज़ सर के मुँह से निकलती है....

रिआज़ : Kyaaaaaaaaaaaa....?

अपनी बेटी को बचने के लिए वो लैब की तरफ जाने लगते हैं मगर स्टूडेंट्स उन्हें पकड़ लेते हैं....

रिआज़ : छोड़ो मुझे जाने दो... अंडर मेरी बेटी है.... वो मासूम मर जायेगी... प्लीज मुझे उसे बचने दो...

मगर स्टूडेंट्स उन्हें चोर hi नहीं रहे....

इधर जलती हुई लैब में प्रिंस हर तरफ रिआज़ सर को ढूंढ रहा है.... आग से उसे कोई दर नहीं लग रहा है दर लगे भी कैसे आग उसके लिए कोई गैर नहीं बल्कि उसका hi एक हिस्सा है उसकी एक पावर्स जो उसे कभी जला hi नहीं सकती.... उसे इस वक़्त दर लग रहा है तो वो रिआज़ सर के लिए..... कभी उन्हें कुछ हो न जाए... कहीं वो इस भयानक आग में जल के मर न जाए.... वो इस बात से अनजान है की इस वक़्त रिआज़ सर तो लैब के बहार हैं अंडर लैब में उसके साथ जो मौजूद है वो रिआज़ सर की बेटी बब्बली है...

बब्बली बेहद दरी हुई है... इस वक़्त वो चारो तरफ से आग से घिरी हुई है.... उसे अपनी मौत साफ़ नज़र आ रही है.... दर के मारे उसकी आवाज़ तक नहीं निकल रही.... वो लैब के टेबल के नीचे दुबक के बैठी हुई उन तीनो को बड़ी शिद्दत से याद कर रही है.... एक ऊपर वाला दूसरा उसके डैड रिआज़ सर और तीसरा उसके सब से प्यारा दोस्त सुलतान जो बचपन में उसकी हर मुसीबत में उसका साथ देने चला आता था... सुलतान ने बब्बली से वादा जो किया था हर मुसीबत से उसे निकालने का.... और आज जब बब्बली की जान पे बन आयी है तब किस्मत का खेल देखो अनजाने में hi सही सुलतान अपना वादा निभाने मतलब उसे मुसीबत से बचने यहाँ पहुँच hi गया....

प्रिंस पागलों की तरह रिआज़ सर को लैब में हर तरफ ढूंढ रहा है मगर वो उसे कहीं नज़र नहीं आ रहे... जब वो वहां है hi नहीं तो उसे नज़र कैसे आएंगे... इधर बब्बली ने खुद को आग से तो बचा लिया है मगर धुँवे से वो खुद को बचा नहीं पा रही है.... धूंवा तेज़ी से उसके मुँह और नाक के ज़रिये उसके अंडर समां रहा है.... वो अगर आग से किसी तरह बच गयी तो धुँवे से कभी नहीं बच पाएगी... धुँवे की वजह से धीरे धीरे वो बेहोश होने लगती है.... उसका दम घुटने लगता है... उसकी नॉब्स डूबने लगती है... उसके दिल की धड़कन कमज़ोर पड़ने लगती है.... उसके मुँह से बस इतना hi निकलता है....

बब्बली : सुलताआआआं....

ये कह के वो बेहोश सी होक एक तरफ गिर जाती है....

प्रिंस हर तरफ रिआज़ सर को ढूंढ लेता है उसे वो कहीं नहीं मिलते जिस से उसे ये यकीन हो जाता है की रिआज़ सर इस वक्त लैब में नहीं हैं... शायद वो बहार hi हैं.. ये सोच के वो बहार जाने hi वाला होता है की तभी किसी लड़की की आवाज़ सुन ख़ास करके उसके मुँह से सुलतान सुन के प्रिंस चौंक जाता है.... वो पलट के हर तरफ देखता है.... उसे वहां कोई नज़र नहीं आता....

प्रिंस खुद से बात करते हुए....

प्रिंस : यार ये क्या बात हुई... यहाँ तो कोई नहीं है... तो फिर वो लड़की की आवाज़ जो मैंने सुनी वो.... शायद वो मेरा भ्रम था.... नहीं यार आवाज़ तो मैंने सुनी थी.... वो किसी लड़की की दर्द भरी आवाज़ थी... तो जब मैंने आवाज़ सुनी थी तो आवाज़ देने वाली भी होगी.... हाँ ज़रूर होगी... मगर वो है कहाँ....???

तभी प्रिंस के चेहरे पे बब्बली के लॉकेट की तेज़ रिफ्लेक्शन पड़ती है जिसे देख के एक पल के लिए प्रिंस की आँख चमक जाती है... फिर उस रिफ्लेक्शन का पीछे करने पे उसे टेबल के नीचे कोई बेहोश नज़र आता है...

इधर काफी देर बाद भी जब प्रिंस बहार नहीं आता तब दर के मारे शनाया पागलों की तरह रोने लगती है.... आयुष का हाल भी शनाया जैसा hi है उसे भी अपने दोस्त प्रिंस की मौत का दर सताने लगता है.... रिआज़ सर का हाल भी बेहद बुरा बना हुआ है... उन्हें भी अपनी बेटी की बेहद फ़िक्र होने लगती है.... प्रिंस और बब्बली की मौत का दर वहां मौजूद सभी को सताने लगता है.... हर गुज़रते पल के साथ लैब में लगी आग और भी भयानक रूप लेने लगती है.... ठीक तभी वहां फायर ब्रिगेड यानी आग बुझाने वाले आ जाते हैं....

इधर लैब में प्रिंस दौड़ के बब्बली के करीब जाता है.... और उसे देखता है.... बब्बली बेहोश है उसकी नॉब्स लगभग डूब चुकी है... दिल की धड़कन कभी भी बंद हो सकती है.... प्रिंस उसका पेट दबा के उसके अंडर से धुँवे को निकालने की कोशिश करता है... मगर वो कामियाब नहीं हो पा रहा है.... धूंवा काफी हद का बब्बली के जिस्म में भर चूका है साथ hi उसने अपना असर भी दिखाना शुरू कर दिया है.... अब प्रिंस को एक hi रास्ता नज़र आता है वो फ़ौरन बब्बली के जिस्म पे सुरक्षा घेरा दाल देता है और पोस्टल खोल के जल्द से जल्द वहां से ड्रीमवोर्ल्ड निकल जाता है... वहां पहुंच के वो बब्बली के चेहरे को अपने हाथों में ले के उसके मुँह को खोल अपने मुँह को उसके मुँह से जोड़ के उसके मुँह से धुँवे और उस से पैदा हुई साड़ी गन्दगी को खींच के निकालने लगता है... कुछ देर में बब्बली के जिस्म से धुँवे के साथ साथ बाकी कचरा भी निकल जाता है... फिर प्रिंस उसके मुँह में जादुई पौधा हेक्सिन के रास की कुछ बूँद डालता है.... अब ज़रुरत है बब्बली के जिस्म में पूरी तरह से ऑक्सीजन के साथ साथ सांस पहुँचाने की.... प्रिंस उसके नाक को बंद करके अपने मुँह से उसके मुँह में सांस देने लगता है.... साथ hi उसके सीने के हिस्से को पंप भी करने लगता है ताकि उसके दिल की धड़कन बढ़ जाए.... प्रिंस अपनी इस कोशिश में कामियाब होने लगता है.... धीरे धीरे बब्बली के दिल की धड़कन नार्मल होने लगती है.... उसे होश आने लगता है.... ठीक तभी प्रिंस एक बार फिर से पोर्टल के ज़रिये वापिस लैब में आ जाता है....

अब तक फायर ब्रिगेड वाले लगभग लैब की आग बुझा चुके the....Prince बब्बली को गॉड में ले के लैब से बहार निकल जाता है...

प्रिंस को बहार निकलते देख शनाया दौड़ के उसके करीब जाती है.... रिआज़ और आयुष भी उसके पास पहुँच जाते हैं... अब तक बब्बली को होश आ चूका है.... अपनी बेटी को ठीक देख रिआज़ सर को बेहद ख़ुशी होती है.... बब्बली अपने डैड के सीने से लिपट के रोने लगती है.... इधर पहले तो शनाया प्रिंस के पूरे जिस्म को अच्छे से चेक करती है की कहीं उसे कोई चोट तो नहीं लगी... फिर पूरी तसाली करने के बाद खींच के एक थप्पड़ प्रिंस के गाल पे रसीद करती है....

Chataaaaaaaaaaaak....

फिर रट हुए उसके सीने से लिपट जाती है.... साथ hi उसके सीने में मुक्का भी मारने लगती है....

फिर उसका गिरेबान पकड़ के बेहद गुस्से में कहती है...

शनाया बेहद गुस्से में : क्या समझते हो तुम अपने आप को... हीरो हो तुम...? सुपरमैन हो...? जो जलती आग में कूद गए... ये करने से पहले तुमने ये नहीं सोचा की अगर तुम्हे कुछ हो गया तो मेरा क्या होगा....? अगर आइंदा गलती से भी तुम ने ऐसी गलती करने की कोशिश भी की न तो देख लेना तुम्हारी टाँगे तोड़ दूंगी... समझे...

शनाया की बात सुन के प्रिंस हाँ में अपनी गर्दन हिला देता है....

शनाया : ये गर्दन क्या हिला रहे हो... अपनी जुबां से कहो की दोबारा ऐसा नहीं करूँगा....

प्रिंस : जी शनाया जी... मैं ऐसा दोबारा नहीं करूँगा...

प्रिंस की बात सुन के शनाया गुस्से में उसे एक छाता और खींच के मारती है....

Chataaaaaaaaaaaak....

शनाया गुस्से में : यहाँ मेरी हालत खराब बानी हुई है और तुम्हे मज़ाक सूझ रहा है....

प्रिंस : नहीं यार मेरी ऐसी मजाल कहाँ की मैं शनाया मैडम से मज़ाक कर सकूँ....

प्रिंस की बात सुन के शनाया गुस्से में उस से अलग हो के दूर कड़ी हो जाती है...

शनाया : तुम्हे मेरी ज़रा भी फ़िक्र नहीं है अगर फ़िक्र होती तो ऐसा हरगिज़ न करते और देखो ये सब करने के बाद अपनी गलती मान ने के बजाये मेरा मज़ाक बना रहे हो.... जाओ बात मत करो मुझसे....

प्रिंस शनाया को अपनी बाहों में ले के कहता है....

प्रिंस : सॉरी न यार... अब माफ़ भी कर दे... कहा न ऐसा फिर नहीं करूँगा... अब अपना गुस्सा थूक दे...

शनाया गुस्से में : कहाँ थूकूं तुम्हारे मुँह पे....?

प्रिंस : अगर तेरी यही मर्ज़ी है तो यही सही...

शनाया आगे बढ़ के प्रिंस का चेहरा अपने हाथ में ले के उसे किश करने लगती है....

प्रिंस को इस बात की उम्मीद नहीं थी की शनाया ऐसा कुछ करेगी.... वो फ़ौरन उस से अलग हो जाता है.....

आयुष : शनाया अगर तुम्हारा गुस्सा ठंडा हो गया हो तो क्या मैं प्रिंस से मिल सकता हूँ...?

प्रिंस : अच्छा हुआ यार तू आ गया वर्ण आज तो मैं काम से गया था...

शनाया गुस्से में प्रिंस को देख के :

शनाया : तुम्हे मैं बाद में देखती हूँ....

फिर वो लोग रिआज़ सर की तरफ बढ़ जाते हैं....

बब्बली जो इस वक़्त काफी अच्छा महसूस कर रही थी.... प्रिंस उस के करीब जा के उस से पूछता है.....

प्रिंस : तुम ठीक तो हो न....?

प्रिंस की आवाज़ सुन के रिआज़ सर और बब्बली प्रिंस को देख के चौंक जाते हैं.... ख़ास कर के रिआज़ सर... कुछ दिन पहले सोना ने प्रिंस की फोटो उन्हें दिखाई थी जिसे देख के वो ये पहचान गए थे की ये प्रिंस नहीं बल्कि सुलतान है.... आज उसी सुलतान को अपने सामने देख वो चौंक जाते हैं... ये वो hi सुलतान है जिसने सालों बाद एक बार फिर से उनकी बेटी की जान बचायी है....

रिआज़ : सुलतान....

प्रिंस : जी मेरा नाम प्रिंस है....

रिआज़ : तुम सुलतान हो.... सुलतान....

रिआज़ के मुँह से सुलतान सुन के बब्बली ख़ुशी से उछाल पड़ती है और आगे बढ़ के कास के प्रिंस के सीने से लिपट जाती है... और सुलतान कह के उसके पूरे चेहरे को चूमने लगती है....

बब्बली की हरकत देख जहाँ प्रिंस चौंक जाता है वहीँ शनाया का चेहरा गुस्से से लाल हो जाता है.... वो आगे बढ़ के बब्बली को प्रिंस से अलग करते हुए कहती है....

शनाया : क्या कर रही है कमीनी चोर मेरे प्रिंस को...? ये क्या कर रही है...? जान बचने का ये सिला थोड़े hi होता है की तू उसकी जान ले ले....

बब्बली : मैं अपने सुलतान को प्यार कर रही हूँ न की उसकी जान ले रही हूँ... और तू है कौन मुझे रोकने वाली....? सुलतान दोस्त है मेरा मैं उसे किश करूँ या कुछ और करूँ मेरी मर्ज़ी... फंस कहाँ से आ जाते हैं ैंवे hi.... हाँ नहीं तो....

ये कह के बब्बली एक बार फिर से सुलतान के सीने से लिपट जाती है.... जिसे देख शनाया का गुस्सा सातवे आसमान पे पहुँच जाता है.... वो उसे कुछ कहने hi वाली होती है की तभी...

रिआज़ : बब्बली बीटा ये क्या कर रही हो चलो चोरो सुलतान को....

अपने डैड की बात सुन के न चाहते हुए भी बब्बली प्रिंस से अलग हो जाती है... मगर उसका हाथ नहीं चोरटी... उसने प्रिंस का हाथ इतनी कास के पकड़ा हुआ है जैसे की अगर उसने प्रिंस का हाथ छोड़ा तो वो फिर से न उसे चोर के चला जाए....

प्रिंस रिआज़ से : सर मुझे आप से कुछ बेहद ज़रूरी बात करनी है....

रिआज़ : बात तो मुझे भी तुमसे करनी है... मगर यहाँ नहीं.... घर चलो वहां चल के आराम से बात करेंगे....

रिआज़ सर के घर पहुँच के.... प्रिंस जैसे hi अंडर जाता है वहां दिवार पे लगी अपने बचपन की फोटो को देख के बुरी तरह से चौंक जाता है.... शनाया का हाल भी कुछ ऐसा hi है....

प्रिंस : वो फोटो किसकी है....?

रिआज़ हैरत से : क्या पुछा तुमने....?

प्रिंस : जी मैंने पुछा वो सामने दिवार पे लगी फोटो किसकी है....

रिआज़ : क्या तुम नहीं जानते की ये फोटो किसकी है....?

प्रिंस न में अपनी गर्दन हिला देता है....

अभी रिआज़ सर कुछ कहने hi वाले होते है की तभी बब्बली बीच में बोल पड़ती है....

बब्बली : ये मेरी और सुलतान की बचपन की फोटो है....

प्रिंस उस फोटो के बेहद करीब जा के उसे देखते हुए कहता है....

प्रिंस : शनाया देखो इस बच्चे की शकल मेरे बचपन की फोटो से कितनी मिलती है न....

अभी प्रिंस ने इतना hi कहा था की तभी बब्बली ज़ोर ज़ोर से हसने लगती है....

हहहहहहहहह....

बब्बली को यूँ हस्ते देख प्रिंस चौंक जाता है....

प्रिंस : ये इसे क्या हुआ....? ये अचानक से इस तरह क्यों हसने लगी....

बब्बली : तुम्हारे मज़ाक करने की आदत अब गयी नहीं सुलतान.... वो क्या कहा तुमने.... इस बच्चे की शकल मेरे बचपन की फोटो से कितनी मिलती है न....

प्रिंस : हाँ तो इसमें मज़ाक वाली क्या बात है....?

बब्बली : मज़ाक नहीं तो और क्या है....? अपने बचपन की फोटो को किसी और बच्चे का बता रहे हो....

प्रिंस : Kyaaaaaaaaaaaa...?

बब्बली : जी हाँ ये मैं हूँ बब्बली और ये है मेरा सब से प्यारा और सच्चा दोस्त सुलतान यानी तुम.... ये किसी और की नहीं बल्कि तुम्हारी बचपन की फोटो है....

प्रिंस : मेरा नाम प्रिंस है न की सुलतान.... ये देखो मेरा इंटरनेशनल ईद कार्ड... इस में साफ़ लिखा है की मेरा नाम प्रिंस है सुलतान नहीं.... तो जब मैं हूँ तो सुलतान कैसे हो सकता हूँ....

रिआज़ : तुम्हारा नाम सुलतान से प्रिंस कैसे हो गया ये तो मैं नहीं जानता मगर हम इतना ज़रूर जानता हूँ की तुम सुलतान हो.... वो सुलतान जिसे मैं बचपन से जानता था.... जो मेरा सब से फव स्टूडेंट था.... स्टूडेंट तो क्या वो मुझे अपनी बेटी बब्बली से भी अज़ीज़ था.... वो सुलतान कोई और नहीं बल्कि तुम hi हो....

प्रिंस : आप इतने यकीन से कैसे कह सकते हैं की मैं hi ये तस्वीर वाला सुलतान हूँ.... ये भी तो हो सकता है की हम दोनों एक नहीं बल्कि दो अलग अलग इंसान हो....

रिआज़ : जी नहीं ते मुमकिन नहीं... जानते हो क्यों...? क्यों की इसकी आँखों हु बहु तुमसे मिलती हैं... वैसी hi नीली नीली आँखें और आँखों के किनारे ये काला टिल... जानते हो किसी भी इंसान के जिस्म में 2 चीज़ें ऐसी होती हैं जो किसी दूसरे से कभी नहीं मिल सकती.... एक तो उसकी फिंगरप्रिंट और दूसरी उसकी आँखें....

प्रिंस : ठीक है एक पल के लिए मैं ये मान लेता हूँ की मैं प्रिंस नहीं बल्कि सुलतान हूँ.... और आप मुझे बचपन से जानते हैं...

रिआज़ : हाँ....

प्रिंस : तो आप ये भी जानते होंगे की सुलतान का एक परिवार भी था उसके माँ बाबा भी थे.... उसका एक घर भी था....

रिआज़ : ये सब तुम मुझसे क्यों पूछ रहे हो....? क्या तुम्हे नहीं पता की तुम्हारा परिवार है माँ बाबा है तुम्हारा घर है....?

प्रिंस : जी नहीं मैं कुछ नहीं जानता... या ये कहना ज़्यादा ठीक होगा की मुझे 9 साल पहले का कुछ भी याद नहीं.... न hi अपने माँ बाबा के बारे में न hi अपने घर के बारे में और नहीं किसी और के बारे में....

प्रिंस की बात सुन के रिआज़ के साथ साथ बब्बली भी बुरी तरह से चौंक जाती है...

दोनों शॉकेड : Kyaaaaaaaaaaaa

प्रिंस : हाँ यही सच है.... मेरे पैदा होने के से ले के 9 साल तक का मुझे कुछ याद नहीं.... मुझे बस इतना याद है की एक दिन जब मेरी आँख खुली तब मैंने खुद को हॉस्पिटल की बीएड पे पाया.... उन्होंने मुझे बताया की मेरा नाम प्रिंस है और वो मेरी नानी हैं.... उसके बाद मैं उसके साथ रहने लगा.... ( फिर प्रिंस उन्हें उसके बाद की पूरी कहानी सुनाता है जिसे सुन के वहां मौजूद सभी की होंठों पे कभी मुस्कराहट फैल जाती है तो कभी उनकी आँखें नाम हो जाती हैं तो कभी उसके चेहरे पे बेइन्तेहाँ गुस्सा आ जाता है...) और फिर मैं यहाँ अपने परिवार को ढूंढने आ गया... मैंने उन्हें ढूंढने की बहुत कोशिश की मगर न मैं अपने परिवार वालों को ढूंढ पाया और न hi अपने घर को जहाँ मैं कभी रहता था....

रिआज़ सर अपने आंसू पॉच के कहते हैं : क्या वाकई में तुम्हे अपना लाइफ का पिछले कुछ याद नहीं....?

प्रिंस : जी नहीं... मैं अपनी लाइफ के बारे में कुछ नहीं जानता.... मगर शायद अब जान सकता हूँ.... आप के ज़रिये मुझे अपने बारे में सब पता चल सकता है.... एक आप hi हैं जो मुझे मेरी बीती ज़िन्दगी मेरे माँ बाप और मेरे घर के बारे में बता सकते हैं....

रिआज़ : हाँ भी और नहीं भी....

प्रिंस : मतलब....

रिआज़ : मतलब ये की मैं तुम्हारे बारे में ज़्यादा कुछ तो नहीं जानता मगर हाँ कुछ काम भी नहीं जानता hoon....Itna ज़रूर जानता हूँ जिस से तुम अपने परिवार वालों से मिल सकते हो और अपने घर जा सकते हो....

रिआज़ की बात सुन के प्रिंस बेहद खुश हो जाता है....

प्रिंस : क्या सच में...? आप जानते हैं की मेरे माँ बाबा कौन है...? मेरा घर कहाँ है...?

रिआज़ : नहीं मैं न तो तुम्हारे माँ बाबा को जानता हूँ और न hi ये की तुम्हारा घर कहाँ है.... मगर उन्हें ज़रूर जानता हूँ जिनसे तुम ये पता कर सकते हो की तुम्हारे माँ बाबा कौन हैं और तुम्हारा घर कहाँ है....?

प्रिंस : तो प्लीज बताइये न की वो कौन हैं....?

रिआज़ : बब्बली बीटा वो पुराणी फोटो एल्बम तो लाना....

रिआज़ एल्बम खोल के उसमे एक फोटो प्रिंस को दिखते हैं.... जिसे देख प्रिंस....

प्रिंस : ये तो वही फोटो है जो मैंने शनाया के घर उसके एल्बम में देखि thi...Hain न शनाया....

शनाया हाँ में अपनी गर्दन हिला देती है...

रिआज़ : जानते हो इस फोटो में तुम्हारे साथ ये दोनों लडकियां कौन हैं....?

प्रिंस न में अपनी गर्दन हिला देता है...

रिआज़ : ये सुलतान है यानी तुम... और ये दोनों हैं तुम्हारी बहने...

प्रिंस ख़ुशी से : मेरी बहने....

रिआज़ : हाँ ये सोना है और ये है महक...

रिआज़ सर के मुँह से सोना और महक का नाम सुन के प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....?????

(टोटल वर्ड काउंट = 3714)
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....



अपडेट 147 "श्राप और सुलतान"



रिआज़ एल्बम खोल के उसमे एक फोटो प्रिंस को दिखते हैं.... जिसे देख प्रिंस....

रिआज़ : जानते हो इस फोटो में तुम्हारे साथ ये दोनों लडकियां कौन हैं....?

प्रिंस न में अपनी गर्दन हिला देता है...

रिआज़ : ये सुलतान है यानी तुम... और ये दोनों हैं तुम्हारी बहने...

प्रिंस ख़ुशी से : मेरी बहने....

रिआज़ : हाँ ये सोना है और ये है महक...

रिआज़ सर के मुँह से सोना और महक का नाम सुन के प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....?????

अब आगे.....

प्रिंस : आप किस सोना और महक की बात कर रहे हैं....?

प्रिंस की बात सुन के रिआज़ सर एल्बम के काफी पेज पलट के उसे एक तस्वीर दिखा के कहते हैं....

रिआज़ : ये देखो.... ये लास्ट ईयर कॉलेज के एनुअल फंक्शन की पिछ है..... इस में ये है सोना...

सोना की फोटो देख के प्रिंस बुरी तरह से चौंक जाता है....

प्रिंस हैरत से कभी रिआज़ सर को देखता है तो कभी सोना की फोटो को....

प्रिंस : क.... क.... क्या आप सच कह रहे हैं....? क्या वाकई में ये सोना है....?

रिआज़ : हाँ.... ये hi सोना है...

रिआज़ सर के मुँह से हाँ सुन के प्रिंस एक गहरी सांस लेता है....

रिआज़ : मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की तुम इसे जानते हो....?

प्रिंस : जानता तो नहीं हूँ मगर हाँ अब जान न ज़रूर चाहता हूँ.... इस से मुझे बहुत कुछ जान न है....

रिआज़ : कुछ दिन पहले एक दिन ये कॉलेज में मुझसे मिली थी... ये मुझसे कुछ पता करने आयी थी जानते हो क्या....? इसने मुझे तुम्हारी बचपन और जवानी की फोटो देखा के पुछा की क्या दो इंसानो की आँखें एक जैसी हो सकती हैं....? मेरे ये बताने पे की इस दुनिया में इंसान के जिस्म की दो चीज़ें ऐसी है जो एक दूसरे से नहीं मिलती एक तो उसके फिंगरप्रिंट्स और दूसरी उसकी आँखें.... दोनों hi फोटो में जो आँखें हैं वो बिलकुल एक सी hi हैं.... नीली आँखें और आँखों के किनारे काला टिल.... जिसका मतलब ये है की ये दो नहीं बल्कि एक hi इंसान की फोटो है और वो इंसान और कोई नहीं बल्कि सुलतान है यानी तुम.... मेरे मुँह से ये सुन ते hi उसके चेहरे के भाव हर गुज़रते पल के साथ बदलने लगे.... पहले तो वो बेहद खुश हो गयी... फिर अचानक से उसके चेहरे की वो हंसी गायब हो गयी और उसकी जगह गुस्से ने ले लिया.... उसका चेहरा उस वक़्त ऐसा हो गया था जैसे की उसने अपने सब से करीबी दोस्त या अपने सब से बड़े दुश्मन को देख लिया हो.... उसे देख मुझे बेहद हैरानी हुई.... उस वात तुम्हारी फोटो देखते हुए उसके होंठों पे हंसी थी मगर साथ hi उसकी आँखों में मुझे बेइन्तेहाँ प्यार के साथ साथ दो और चीज़ें भी नज़र आयी एक तो बेइन्तेहाँ गुस्सा साथ hi बेइन्तेहाँ नफरत भी....

प्रिंस : मगर ये कैसे मुमकिन है जहाँ प्यार है वहां नफरत नहीं हो सकती और जहाँ नफरत है वहां प्यार नहीं हो सकता....?

रिआज़ : हाँ ये सच है... यही बात तो मेरी भी समझ में नहीं आयी.... की ये कैसे मुमकिन है....? मगर उस वक़्त इस नामुमकिन बात को मैं सोना के चेहरे पे साफ़ साफ़ मुमकिन होते हुए देख रहा था.... मैं उसे इस बारे में पूछना चाहता था... मगर मेरी क्लास का वक़्त हो गया तो मैं वहां से ये सोच के चला गया की इस बारे में उस से बाद में पूछ लूंगा.... उस दिन के बाद से मेरी उस से मुलाकात hi नहीं हुई....

प्रिंस : क्या आप मुझे ये बता सकते हैं की ये कब की बात है... मतलब आपकी और उसकी मुलाकात कब हुई....?

रिआज़ : यही कोई 12 से 15 दिन पहले....

प्रिंस : इस का मतलब ये उस वक़्त की बात है जब मैं काम की वजह से मुंबई गया था....

प्रिंस अपने मन में : मतलब ये बात महक के इलाज से पहले की है.... उस वात सोना को पता चल चूका था की मैं प्रिंस नहीं बल्कि सुलतान हूँ... उसका भाई सुलतान.... क्यों इतने सालों बाद अपने बिछड़े भाई से मिल के उसे ख़ुशी नहीं हुई....? क्यों उस ने मुझे पहचान के भी नहीं पहचाना...? क्यों उसने मेरे ऊपर महक की किडनेपिंग का इलज़ाम लगाया....? यहाँ तक की मुझे जेल तक भेजवाने से पीछे नहीं हटी.... मतलब ये सब उसने जान बूच के किया.... ये जान्ने के बाद भी की मैं उसका भाई हूँ.... उसने मेरे साथ ऐसा किया.... मगर क्यों....????

रिआज़ : कल सुबह कॉलेज से मैं तुम्हे सोना के घर का पता ले के दे दूंगा... तुम जा के उस से मिल लेना....

प्रिंस : उसकी ज़रुरत नहीं....

रिआज़ : क्यों....?

प्रिंस : क्यों की मैं उन के साथ उन के hi घर में रहता हूँ....

रिआज़ शॉकेड : kyaaaaaaaaaaaa....? तुम सोना के घर में रहते हो....?

प्रिंस : हाँ भी और नहीं भी....

रिआज़ : मतलब....

प्रिंस : मैंने उनके घर के बगल वाले हिस्से में उनका किरायेदार बन के रह रहा हूँ....

रिआज़ शॉकेड : Kyaaaaaaaaaaaa....?

प्रिंस : जी हाँ ये सच है....

रिआज़ : हैरत है तुम उसके साथ उस घर में रह के भी इस बात से अनजान हो की वो घर तुम्हारा अपना है... वो तुम्हारी बेहेन है और तुम अपने hi परिवार के साथ रह ते हुए भी अनजान की तरह शहर भर में अपने परिवार और अपने घर को ढूंढ रहे हो.... उसने तुम्हे कुछ बताया क्यों नहीं....? क्यों तुमसे साड़ी बात छुपा के राखी....? क्यों....?

प्रिंस : अब इस क्यों का जवाब या तो सोना hi दे सकती है या फिर मुस्कान...?

रिआज़ : ये मुस्कान कौन है....?

प्रिंस : महक को मैं प्यार से मुस्कान कहता हूँ.... जानते हैं उसकी मुस्कान बड़ी प्यारी है.... अब सोना के अलावा महक hi ये बता सकती है की सच क्या है.... ?

रिआज़ : महक कैसे तुम्हारी बात का जवाब दे सकती है....? वो तो एक बीमार अपाहिज की तरह पिछले 10 साल से बिस्तर पे पड़ी है... न वो कुछ बोल सकती है और न hi अपनी मर्ज़ी से अपने जिस्म को हिला सकती है.... बस एक ज़िंदा लाश की तरह सालों से बिस्तर पे पड़ी हुई है.... ये बात मुझे सोना से पता चली थी....

प्रिंस : आप की बात सही भी है और नहीं भी.... सही ऐसे की महक पिछले 10 साल से बीमार थी.... मगर अब नहीं... अब वो बिलकुल ठीक हो चुकी है....

रिआज़ : ये तो ख़ुशी की बात है....

प्रिंस : हाँ शायद....

रिआज़ : शायद मतलब....!!!! क्या तुम अपनी बेहेन महक के ठीक होने से खुश नहीं हो....?

प्रिंस : खुश क्यों नहीं होऊंगा... उसे ठीक खुद मैंने hi तो किया है....

रिआज़ : तुम ने ठीक किया मतलब....?

प्रिंस : ये बात फिर कभी करेंगे... काफी वक़्त हो गया है अब मुझे चलना चाहिए.... घर जा के उन सब से अपने सवालों के जवाब भी तो लेने हैं....

रिआज़ और बब्बली उसे रोकने की बहुत कोशिश करते हैं मगर प्रिंस बाद में आने का कह के अपने सवालों के जवाब लेने घर की तरफ चल देता है....

इधर रूम में जमीला खामोश कड़ी गहरी सोच में डूबी हुई थी.... अरबाज़ उसे आवाज़ देता है मगर जमीला को जैसे कुछ सुनाई hi नहीं दे रहा है... 2 - 3 बार आवाज़ देने के बाद भी जब जमीला उसे कोई जवाब नहीं देती तब अरबाज़ उसका कन्धा पाकर के उसे हिलता है... जैसे hi उसके कंधे पे हाथ रखता है जमीला बुरी तरह से चौंक जाती है... दर के मारे उसके मुँह से चीख निकल जाती है... उसका पूरा जिस्म पसीने से भीग जाता है साथ hi दर से वो कांपने लगती है....

अरमान : क्या बात है जमीला तुम इतनी घबराई हुई क्यों हो....?

जमीला : W....W.... वो लौट आया... S...S...Sultaan लौट आया.... साथ hi व.... व... वो Sh....Sh...Shraap भी....?????

इधर सुलतान महक को कॉल करके उसे ..... पार्क में जल्द से जल्द आने को कहता है....

महक : क्या बात है प्रिंस तुम ने अचानक से मुझे यहाँ क्यों बुलाया....? कोई प्रॉब्लम है क्या....? बताओ मुझे...? किसी ने तुमसे कुछ कहा क्या....? बताओ मुझे....

प्रिंस : या hi तो बात है की सब कुछ जान ने के बाद भी न तो सोना ने कुछ कहा और न hi तुम ने...

महक : सोना ने फिर कुछ कहा क्या...? ये सोना भी न.... इसको मैं छोड़ूंगी नहीं... मेरे मन करने के बाद भी उसने तुम्हे फिर से उल्टा सीधा कहा....

प्रिंस : लगता है तुमने मेरी बात ठीक से सुनी नहीं मैंने कहा की न तो सोना ने मुझसे कुछ कहा और न hi तुम ने.... मैं वो hi ान कही बाते जान न चाहता हूँ.... वादा करो मुझसे की मैं तुमसे जो कुछ भी पूछूंगा तुम उसका सच सच जवाब डौगी.... वादा करो...

महक : प्रिंस तुम क्या कह रहे हो मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा है.... और ये किस बात का वादा मांग रहे हो....?

प्रिंस : प्यार करती हो मुझसे....?

महक : हाँ अपनी जान से भी ज़्यादा....

प्रिंस : यकीन करती हो मुझ पे...?

महक : खुद से भी ज़्यादा...

प्रिंस : तो फिर ये वादा करो की मैं जो भी कुछ तुम से पूछूंगा उसका तुम सच सच जवाब डौगी....

महक : मैं वादा करती हूँ... तुम मुझसे जो पूछना चाहते हो वो पूछो मैं उसका सच सच जवाब दूंगी....

प्रिंस : मैं कौन हूँ....? मेरा असली नाम क्या है....?

प्रिंस की बात सुन के महक बुरी तरह से शॉक हो जाती है... उसका जिस्म बुरी तरह से कांप जाता है....

महक : व.... व.... वो... T...T...Tum....

प्रिंस महक की आँखों में गौर से देखते हुए कहता है....

प्रिंस : मुझे यकीन है की मेरी मुस्कान मुझे दिल ो जान से चाहती है... वो मुझसे कुछ नहीं छुपा सकती.... जिस तरह मैं उसके सामने एक खुली किताब हूँ वो भी अपने दिल की किताब मेरे सामने खोल के मुझे अपनी ज़िन्दगी के हर एक पहलु से वाकिफ करवाएगी.... वो हर एक बात मुझे बताएगी जो उसे पता है... चाहे वो अच्छी हो या बेहद बुरी.... और अगर इस वक़्त मेरे सामने जो लड़की कड़ी है वो मेरी मुस्कान नहीं सोना की बेहेन महक है... तो मुझे महक से किसी बात की उम्मीद नहीं.... वो चाहे तो अभी के अभी मेरे किसी भी सवाल का कवाब दिए बिना यहाँ से जा सकती है... मैं उस से किसी बात का कोई सवाल नहीं करूँगा.... अब ये फैसला तुम्हे करना है की तुम सोना की बेहेन महक हो या फिर मेरी मुस्कान.... जो मुझे दिल ो जान से चाहती है....

महक को समझ नहीं आ रहा है की वो प्रिंस के सवाल का क्या जवाब दे... अगर वो प्रिंस को सब सच बताती है तो उसे इस बात का दर है की सच जान ने के बाद कहीं प्रिंस उसे चोर न दे.... और अगर वो सच नहीं बताती तब भी उसे इस बात का दर है की प्रिंस उसे चोर देगा.... महक की ये उलझन उसके दिल ो दिमाग में उठ रहे सवाल प्रिंस उसके चेहरे के बदलते राग को देख साफ़ साफ़ समझ जाता है....

प्रिंस : अगर मुस्कान को ये दर है की सच जान ने के बाद मैं उसे चोर दूंगा तो ये दर वो अपने दिमाग से निकाल दे.... मैंने जो वादा अपनी मुस्कान के साथ किया है की चाहे क़यामत hi क्यों न आ जाए मैं कभी अपनी दोस्त मुस्कान का साथ नहीं छोड़ूंगा.... हर हाल में हमेशा उसके साथ रहूँगा.... तो बिना दर के बताओ के असल बात क्या है.... मैं कौन हूँ और मेरा असली नाम क्या है....?

प्रिंस की बात सुन के महक रहत की सांस लेती है और उसके सवालों के जवाब डरते डरते देती है....

महक : टी.... टी.... तुम्हारा असली नाम प्रिंस नहीं सुलतान है.... और तुम कोई गैर नहीं बल्कि मेरे चचेरे भाई हो... मेरे बड़े पापा शाहबाज़ अली खान और बड़ी माँ शिफा की एकलौती औलाद सुलतान अली खान.... पूरे खानदान में सिर्फ तुम hi एक लड़के थे... बाकी सभी को सिर्फ लडकियां hi थी...

प्रिंस शॉकेड : kyaaaaaaaaaaaa...?

महक : हाँ ये सच है....

प्रिंस : बचपन में ऐसा क्या हुआ था जिसकी वजह से मेरी याद्दाश चली गयी....? मैं अपने परिवार से दूर हो गया....? और इतने सालों तक क्यों मेरे माँ डैड और मेरे परिवार वालों ने कभी मुझे ढूंढने की कोशिश नहीं की....?

महक : ये सब एक श्राप की वजह से हुआ....

प्रिंस : श्राप....!!!! कैसा श्राप...????

महक : ये बात आज से 10 साल पहले उस मनहूस दिन की है जिस दिन मैं एक अपाहिज एक ज़िंदा लाश की तरह ज़िन्दगी जीने को मजबूर हो गयी थी... उस दिन मैं अपने रूम में अपने बीएड पे एक बेजान मुर्दे की तरह आँखें बंद किया अपनी किस्मत को कोस रही थी की तभी मेरी माँ जमीला और मेरे डैड अरबाज़ मुझे देखने मेरे रूम में आये.... रूम में मुझे सोया हुआ समझ के उन्होंने जो भी कुछ कहा उसे सुन के मेरे पैरों टेल से ज़मीन खिसक गयी.... मुझे अपने किये पे शर्मिंदगी होने लगी.... यहाँ तक की मुझे खुद पे घिन सी आने लगी.... मुझे समझ नहीं आ रहा था की मैं इतना नीचे कैसे गिर गयी.... कैसे दूसरों की बातों में आ के मैंने एक बेहद संगीन गुनाह कर दिया... जिसकी कोई माफ़ी नहीं....

प्रिंस : ऐसा क्या किया तुमने बताओ मुझे....?

महक : वो बात ये थी की... डैड माँ से ये कह रहे थे की....

अरबाज़ रट हुए : ये हमारे घर को जाने किस की नज़र लग गयी... एक के बाद एक हम पे मुसीबतों का पहाड़ टूट रहा है... पहले hi हम ने क्या काम तकलीफ झेली है जो अब मेरी मासूम सी बच्ची महक के साथ ये हो गया....

जमीला : ये सब उस श्राप की वजह से हो रहा है....

अरमान : ये किस श्राप की बात कर रही हो तुम....?

फ्लैशबैक : श्राप....

जमीला : वो hi श्राप जो शहनूर ने हमारे पूरे खानदान को दिया था.... हमारे पूरे खानदान के मर्द... मर्द होक भी एक हिजड़े की ज़िन्दगी गुज़ारेंगे.... यहाँ तक की जब भी हमारे खानदान की लड़कियों या ॉर्टून में से किसी की भी शादी बहार के किसी मर्द के साथ होगी तो ये श्राप उसे भी लग जाएगा.... हमारे पूरे खानदान की औरतें या लडकियां कभी माँ नहीं बन पाएगी... किसी भी तरह से नहीं.... क्या आप को याद नहीं जब सुल्तान ***** साल का था तब जिस स्कूल में वो पढता था वहां एक लड़की हुआ करती थी जिसका नाम था मासूम.... हमारी बेटी सोना के साथ साथ सुल्तान मासूम को भी अपनी सब से करीबी दोस्त मानता था.... मासूम भी सोना की तरह सुल्तान को बहुत चाहती है.... मासूम और सोना एक पल के लिए भी सुल्तान से अलग नहीं होना चाहते थे... हर पल हर लम्हा वो उसके साथ रहते थे.... मासूम अपने घर के बजाये हमारे घर के उस दूसरे हिस्से में सुल्तान के साथ hi रहती थी.... इस बात से न तो सुल्तान के माँ बाप को कोई ऐतराज़ था और न hi मासूम की माँ शाहनूर को....

शाहनूर मासूम की माँ होने के साथ साथ सुल्तान की माँ की बचपन की जिगरी दोस्त भी थी.... दोनों एक दूसरे से इतना प्यार करती थी की एक दूसरे के लिए जान तक देने को तैयार रहती थी.... एक को तकलीफ होती तो दर्द दूसरे को होता था.... दोनों हर काम साथ hi करती थी.... भले hi दोनों एक दूसरे के साथ नहीं रहती थी मगर दोनों दूर रह के भी हमेशा एक दूसरे के बेहद करीब थी.... जब भी दोनों में से किसी को दूसरे की ज़रुरत पड़ती तो बिना आवाज़ दिए hi वो उसके पास पहुँच जाती.... शाहनूर सुल्तानगढ के दूसरी तरफ नीली झील के पास एक बेहद hi आलिशान हवेली में रहा करती थी.... जिस दिन सुल्तान पैदा हुआ था उसी दिन शाहनूर ने शिफा से ये वादा ले लिया था की अगर उसकी बेटी हुई तो उसकी शादी वो सुलतान से hi करवाएगी.... और जल्द hi वो दिन भी आ गया जब शाहनूर ने एक मासूम और बेहद प्यारी पारी जैसी बेटी को जनम दिया.... उसे देखते hi शिफा ख़ुशी से झूम उठी उसने फ़ौरन उस बच्ची को अपनी गॉड में उठा लिया और कहा....

शिफा : मेरी बहु मासूम आ गयी.... देख शहनूर मेरी बहु मासूम को कितनी प्यारी और खूबसूरत है न....

शिफा की बात सुन के शहनूर बेहद खुश हो गयी....

शहनूर : क्या तू सच कह रही है...? क्या तू वाकई में इसे अपनी बहु बनाएगी....?

शिफा : हाँ हाँ क्यों नहीं ज़रूर.... तू अगर इन कार भी कर देगी तब भी मैं इसे hi अपने बेटे सुलतान की बीवी और अपनी बहु बनाउंगी....

शहनूर : मतब तू सच में अपना वादा पूरा करेगी....

शिफा : हाँ मेरी बेहेन.... ये आज से बल्कि अभी से मेरी बहु है... मेरी बहु मासूम.....

शहनूर बेहद खुश होते हुए : तू ने तो इसका नाम भी रख दिया....

शिफा : नाम तो रखा है मगर मैंने नहीं बल्कि किसी और ने जानती है वो कौन है....?

शहनूर न में अपनी गर्दन हिला देती है....

शिफा : सुल्तान ने....

शहनूर हैरत से : सुलतान ने मगर कब ये तो अभी अभी पैदा हुई है और सुलतान तो इस से मिला भी नहीं... तो फिर वो इसका नाम कैसे रख सकता है....?

शिफा : माना की सुल्तान अभी तक मासूम से नहीं मिला है और न hi उसने इसे देखा है.... मगर इसे महसूस ज़रूर किया है.... मासूम के पैदा होने से पहले जब भी मेरे साथ सुल्तान यहाँ आता था.... जानती है वो क्या कहता था.... माँ मेरी मासूम आने वाली है... माँ चलो न मासूम को लेने चलते हैं.... जब वो आएगी और मुझे अपने पास नहीं देखगी तब वो मुझ पे बहुत नाराज़ होगी... और मैं अपनी प्यारी मासूम को न तो उदास देख सकता हूँ और न hi नाराज़....

शहनूर : मतलब सुल्तान को ये पहले hi पता चल चूका था की उसकी होने वाली बीवी जल्द hi आने वाली है....

शहनूर की बात सुन के शिफा हाँ में अपनी गर्दन हिला देती है.... इस बात से दोनों बेहद खुश हो जाती हैं....

ये बात सोना को परेशान करती.... मासूम को सुलतान के साथ देख सोना को बेहद तकलीफ होती उसे मासूम पे बेहद गुस्सा आता.... सोना को ऐसा लगता जैसे की मासूम सुल्तान को उस से चीन रही है.... जबकि ऐसा था नहीं सुल्तान के दिल में मासूम के लिए जितनी जगह थी सोना के लिए भी इतनी जगह थी.... सुल्तान दोनों को एक जैसा hi चाहता था.... वो सोना को हमेशा ये बात कहता की मासूम अगर सुल्तान का दिल है तो सोना उस दिल की धड़कन.... दोनों में से अगर एक भी सुल्तान से जुड़ा हो गयी तो वो जी नहीं पायेगा.... सोना को सुल्तान की बात पे यकीन नहीं आया उसे ये दर सताने लगा की एक दिन सुल्तान सोना को ज़रूर चोर देगा.... तब सुल्तान ने दोनों से ये वादा किया की चाहे जो हो जाए सुल्तान कभी दोनों में से किसी को नहीं चोर सकता... हमेशा hi उनके साथ रहेगा.... मगर किस्मत को ये मंज़ूर न था.... वो तो अच्छा हुआ की वक़्त रहते हम को सुलतान की असलियत पता चल गयी.... आबिद (सुलतान के फूफा) ने हम को ये बताया की सुलतान के अंडर काली शैतानी शक्तियां हैं.... वो इंसान नहीं बल्कि शैतान का बीटा है.... जो इंसानो पे ज़ुल्म करने और उन्हें अपना गुलाम बना के उनपे राज करने आया है... बड़ा होक वो ऐसा दरिंदा बनेगा जो अपने hi घर की बहु बेटियों की इज़्ज़त के साथ खेलेगा.... अपनी ताक़त और साम्राज्य बढ़ने के लिए अपने hi खानदान की औरतों से बच्चे पैदा करेगा.... पहले तो मुझे आबिद की कही किसी बात पे यकीन नहीं आया मगर कई बार उन्होंने मुझे ऐसी ऐसी चीज़ें दिखाई जिस से मेरा इस बात पे इंकार करना नामुमकिन सा हो गया की सुलतान वाकई में एक शैतान है.... जब भी सुलतान अकेला होता तब वो कुछ न कुछ बुरा ज़रूर कर रहा होता... जैसे मुर्गी को काट के उसपे सिन्दूर डालना.... कोयले से अजीबोगरीब और खौफनाक पेंटिंग बनाना.... चुप चुप के घर की औरतों को नहाते और कपडे बदलते हुए गन्दी नज़र से देखना.... हमारे पूछने पे ये बताना की वो यहाँ उन के बुलाने पे hi आया है... और रही बात मुर्गी की तो उन्हें जाने किसी ने काट दिया वो तड़प रही थी जो उस से देखा नहीं गया तो उनकी जान बचने के लिए वो उनके ज़ख्मों पे मलहम लगा रहा था.... और वो कोई खौफनाक पेंटिंग नहीं बल्कि स्कूल में जो ड्राइंग उसे सिखाई गयी थी वो उनको प्रैक्टिस कर रहा था.... अब ज़मीन पे पेंसिल से तो बना नहीं सकता था इस लिए उसने कोयले का इस्तेमाल किया.... ये सब कह के वो हमेशा hi अपने बुरे कामो पे पर्दा दाल दिया करता था.... धीरे धीरे उसकी शैतानियां बढ़ने लगी और एक दिन तो उसने हद hi कर दी.... उसने सीढ़ी से उतारते हुए आबिद को धक्का दे के जान से मारने की कोशिश की... वो आये दिन किसी न किसी पे हुम्ला कर देता.... उस की इन हरकतों की वजह से हमारे साथ साथ सोना को भी उस से नफरत सी होने लगी.... मगर सुलतान के माँ डैड और उनके बाद एक मासूम hi ऐसी थी जिसे सुलतान पे पूरा यकीन था... वो हमेशा ये hi कहते थे की ये सब सुलतान ने नहीं बल्कि किसी और ने किया है.... सुलतान एक मासूम छोटा सा बच्चा है वो ये सब कैसे कर सकता है.... सुलतान की हरकतों से तंग आके हम ने ये फैसला किया की या तो सुलतान के माँ डैड सुलतान को यहाँ से कहीं दूर भेज दे या फिर हम सब से नाता तोड़ ले.... उन्होंने सुलतान को दूर तो नहीं भेजा मगर हाँ खुद हमसे दूर रहने लगे.... वो घर के बगल वाले हिस्से में रहने चले गए.... इस बात से नाराज़ हो के घर से सभी लोगों ने उनसे अपना नाता तोड़ लिया.... यहाँ तक की सोना ने भी.... फिर एक दिन बेहद hi अजीबो गरीब वाक्य हुआ.... वो क्या और क्यों हुआ ये किसी को पता नहीं चल पाया....? वो हुआ ये था की हर संडे की तरह उस संडे को भी सुलतान अपने माँ डैड और मासूम के साथ हमारे फार्महाउस पे छुट्टी मानाने गया था.... संडे बीत गया मंडे भी बीत गया यहाँ तक की ट्यूसडे और वेडनेसडे भी बीत गया 4 दिन हो गए... इन 4 दिन में न तो उन से कोई यहाँ वापिस आया और न hi उनकी कोई खबर आयी.... फिर पांचवे दिन अचानक से किसी का फ़ोन आया उसने जो कहा उसे सुन के हमारे पैरों टेल से ज़मीन निकल गयी.... हम फ़ौरन भागे भागे फार्महाउस पहुंचे.... वहां का हाल देख हमारे होश hi उड़द गए.... वो नज़ारा इतना खौफनाक था की दर के मारे हमारी चीख निकल गयी.... चारो तरफ खून hi खून है.... ज़मीन पे 3 इंसानी लाश पड़ी हैं जिन्हे बड़ी बेरहमी से मारा गया है.... उसके जिस्म के कई हिस्से किये गए हैं उसके चेहरे को बड़ी बेरहमी से कुचला गया है.... उनके कपडे देख के उन्हें पहचाना जा सका की ये लाश शाहबाज़ और शिफा की हैं.... साथ hi पास hi एक बच्ची की भी लाश है... और उसके दूसरी तरफ एक और बच्चे का जिस्म है जो खून से सना हुआ hai....Shayad ये भी मर hi चूका है.... उन सब को देख हम ने ये मान लिया की ये लाशें किसी और की नहीं बल्कि सुलतान उसके माँ डैड और मासूम की है.... अब हम इस सदमे से उभर hi नहीं पाए थे की तभी.... वहां शाहनूर आ गयी.... सुलतान उसके माँ डैड और अपनी बेटी मासूम की हालत देख शहनूर का कलेजा पहात पड़ा वो पागलों की तरह रोने लगी... उसे इतना गहरा सदमा लगा की वो पागल सी होने लगी... उसे इतने दुःख में देख हम से रहा नहीं गया.... उसका दुःख बाटने हम उसके करीब जाने लगे.... हम को अपने करीब आते देख वो गुस्से से पागल सी हो गयी.... इस सब का ज़िम्मेदार वो हम को ठहराने लगी हमारे लाख समझने पे भी वो नहीं मानी.... गुस्से में उसने हम को श्राप दे दिया....

शाहनूर बेहद गुस्से में चीखते हुए कहती है....

शहनूर : वहीँ रुक जाओ.... खबरदार जो इनके करीब भी आये तो... एक एक की जान ले लुंगी... जब ये ज़िंदा थे तब तुम सब ने न तो इनकी कोई बात मानी और न hi इनपे यकीन किया.... और अब इनके मरने पे इनके पास जा रहे हो.... अपने झूठे आंसू बहा रहे हो... बंद करो ये झूट मूठ का दिखावा.... हम को तुम सब के इन दिखावे के आंसू नहीं चाहिए और न hi ये झूठी हमदर्दी चाहिए.... बंद करो अपना ये नाटक और गौर से देखो इन्हे ये मरे नहीं है बल्कि इनका क़त्ल हुआ है... और जानते हो इनका क़ातिल कौन है...? तुम सब.... हाँ तुम सब ने मिल के इन्हे मारा है... एक हस्ते खेलते परिवार को मौत के घात उतार दिया... एक मासूम बच्ची को उसकी माँ से दूर कर दिया... मेरी कोख उजाड़ दी... तुम को इन बेक़सूर लोगों पे ज़रा भी रेहम नहीं आया... बिना कसूर के तुम सब ने मिल के इन्हे मौत की सजा दे दी.... मगर अब बस अब और नहीं... अब सजा पाने की बारी तुम सब की है... हाँ अब तुम सब अपने किये इस घिनोने काम की सजा भुगतोगे.... मैं एक माँ एक दोस्त के नाते तुम सब को अपने टूटे और ज़ख़्मी दिल से ये बाद दुआ यानी श्राप देती हूँ की तुम्हारी वजह से जो इन सब ने सहा है अब से वो तुम सब और साथ hi तुम सब का पूरा खानदान सहेगा.... तुम सब ने मेरी मासूम बच्ची की जान ली न... अब देखना आज के बाद तुम्हारे पूरे खानदान में कोई लड़की या औरत कभी माँ नहीं बन पाएगी... तुम्हारे पति तो क्या इस पूरी दुनिया में कोई कभी भी तुम्हारे पूरे खानदान की मौजूदा और आने वाली किसी भी औरतों और लड़कियों को माँ नहीं बना पायेगा.... तुम्हारे पति नामर्द हो जाएंगे.... तुम सब एक बाँझ की ज़िन्दगी गुज़ारोगी... एक बाँझ की ज़िन्दगी.... सब के सब नामर्द और बाँझ...

ये कह के शहनूर पागलों की तरह हसने लगती है....

हहहहहहहहह....

उसकी आवाज़ सुन के सुलतान के जिस्म में हरकत सी होती है.... सुलतान दर्द भरी आवाज़ में माँ कह के पुकारता है... सुलतान की आवाज़ सुन के जहाँ हम चौंक जाते हैं वहीँ शहनूर फ़ौरन सुल्तान के करीब जा के उसे उठा के कास के अपने सीने से लगा लेती है...

शहनूर : टी.... टी... तू ठीक हैं न सुलतान...

सुलतान हाँ में अपनी गर्दन हिला देता है..... जिसे देख शाहनूर खुश हो जाती है....

शाहनूर : मेरा सुलतान ठीक है... (रट हुए सुलतान के पूरे चेहरे को चूमने लगती है...) हे ऊपर वाले तेरा लाख लाख शुक्रिया तू ने मेरे सुलतान को बचा लिया.... (फिर पलट के बेहद गुस्से में कहती है... अब ये तुम से और तुम्हारे पूरे खानदान से हमारा बदला लेगा.... वो बदला इतना शर्मनाक होगा जिसे तुम में से कोई सेह नहीं पायेगा.... जानते हो वो बदला क्या है...? इस पूरी दुनिया में तुम्हारे पूरे खानदान में किसी भी औरत या लड़की को माँ सिर्फ और सिर्फ एक hi शख्स बना पायेगा और वो होगा सुलतान.... हाँ मेरा बीटा सुल्तान... मासूम का सच्चा और प्यारा दोस्त सुलतान....

फिर सुल्तान की तरफ अपना हाथ बढ़ा के.....

शहनूर : सुलतान मुझसे एक वादा कर की मैं जो कहूँगी वो तू पूरा करेगा... वादा कर मुझसे....

सुलतान अपना हाथ शहनूर के हाथ में दे के इस बात का इक़रार करता है की हाँ मैं वादा करता हूँ की आप जो कहोगी मैं वो करूँगा....

शहनूर : सुलतान तू मासूम से निकाह करेगा... उसे वो हर खुशियां देगा जिसकी वो हक़दार है.... उसे ज़िन्दगी भर खुश रखेगा.... उसकी आँखों में कभी आंसू नहीं आने देगा....

शहनूर की बात सुन के वहां मौजूद सभी बुरी तरह से चौंक जाते हैं.... साथ hi सुलतान भी... सब को ये बात समझ नहीं आ रही है की शहनूर सुलतान से ये कैसा वादा मांग रही है.... जो लड़की मर चुकी है... उस से सुलतान कैसे निकाह कर सकता है...? एक मरे हुए इंसान को कोई कैसे ज़िन्दगी भर खुश रख सकता है....? कैसे...? ये शहनूर कैसा नामुमकिन सा वादा सुलतान से मांग रही है...?

शहनूर : बोल सुलतान चुप क्यों है....? जवाब दे... पूरा करेगा न अपना वादा... सुलतान हैरत से शहनूर की आँखों में देखता है.... जाने शहनूर की आँखों में उसे ऐसा क्या नज़र आता है जिसे देख वो हाँ में अपनी गर्दन हिला के कहता है....

सुलतान : मैं अपना वादा ज़रूर पूरा करूँगा...

सुल्तान के ये कहते hi... शहनूर के चेहरे पे मुस्कान आ जाती है... वो आगे बढ़ के सुलतान की पेशानी को चुम लेती है फिर एक बेजान जिस्म की तरह एक तरफ लुढ़क जाती है.... शहनूर की हालत देख सुलतान की चीख निकल जाती है वो शहनूर के जिस्म से लिपट के रोने लगता है....

ठीक तभी वहां पुलिस और डॉ आ जाते हैं.... पुलिस लाशों को देखने लगती है वहीँ डॉ सुल्तान और शहनूर का चेक उप करने लगते हैं....

डॉ : इस बच्चे की चोट काफी गहरी है इसे हॉस्पिटल में एडमिट करवाना पड़ेगा और इनको (शहनूर की तरफ इशारा करके) शायद कोई गहरा सदमा लगा है जिसकी वजह से ये कोमा में चली गयी हैं....

इंस्पेक्टर : क्या आप जानते हैं की ये तीनो लाश किन की है...? और इन्हे किसने मारा....?

आबिद : जी ये मेरे बड़े साले शाहबाज़ और उसकी बीवी शिफा की लाश है और ये छोटी बच्ची मासूम है... यहाँ क्या हुआ ौपप इन्हे किसने मारा ये हम नहीं जानते..... और ये बच्ची सामने वो औरत जो कोमा में है ये उसकी बच्ची है....

अभी आबिद ने इतना hi कहा था की तभी सुलतान ज़ोर से चीखता है....

सुलतान बेहद गुस्से में चीखते हुए : जी नहीं मेरे माँ डैड और मासूम मरे नहीं हैं... वो ज़िंदा हैं.... सुना आप सब ने... ज़िंदा हैं वो....

ये कह के सुलतान बेहोश हो जाता है...

फिर सुल्तान और शहनूर को हॉस्पिटल में एडमिट करवा दिया जाता है... और शाहबाज़ शिफा और मासूम के जिस्म को पोस्टमॉर्टेम के बाद दफना दिया जाता है....

कुछ दिन में सुलतान की तबीयत ठीक हो गयी.... और वो घर आ गया....

पहले तो शहनूर के श्राप की बात पे किसी ने भरोसा नहीं किया... मगर धीरे धीरे सब को इस बात का यकीन होने लगा की उसका वो श्राप झूठा नहीं बल्कि सच्चा है.... सिर्फ हमारे घर के hi नहीं बल्कि हमारी पूरी खानदान के आदमी मर्द से नामर्द बन गए.... उनके पास लुंड तो था मगर वो अब सिर्फ पिशाब करने के लिए hi रह गया था.... खड़ा होने की जैसे उसमे अब ताक़त hi नहीं रह गयी थी.... हर डॉ हर वैद हकीम को दिखने के बाद भी किसी के लुंड में ज़रा सी की अकड़न नहीं पैदा हुई.... इस बात से सब को ये यकीन हो गया की ये सब शहनूर के श्राप की वजह से hi हो रहा है.... ऐसे में गुस्से में आबिद ने इस सब का ज़िम्मेदार सुल्तान को ठहराया.... उनके कहने पे सब ने भी ये मान लिए की ये सब सिर्फ और सिर्फ सुलतान की वजह से hi हो रहा है.... धीरे धीरे सब को सुलतान से नफरत सी होने लगी.... सब बात बात पे सुलतान को ज़लील करने लगे उसे बिना बात के मारने पीटने लगे.... सुलतान ये कह के सब कुछ सेहत रहा की ये सब कोई गैर नहीं बल्कि मेरे अपने हैं.... और अपनों को प्यार देने का हक़ है तो गुस्सा करने और मारने का भी हक़ है.... घर में चाहे वो सुलतान से छोटा हो या बड़ा... न तो कोई उसकी इज़्ज़त करता और न hi किसी को उसपे ज़रा सा भी रेहम आता... वो हर तरह का ज़ुल्म सुलतान पे करते.... कभी तो ज़रा सी भी बात पे चाहे उसमे सुलतान की गलती हो या न हो गुस्से में चिंता गरम कर के सुलतान के जिस्म के हिस्से ख़ास कर के उसकी पीठ को दाग देते... सुलतान दर्द से तड़पता रहता मगर उनको उस मासूम पे ज़रा सा भी रेहम नहीं आता... उनका सुलतान को मारना उसपे ज़ुल्म करना ये सब अब रोज़ का काम हो गया था.... वो एक बार के लिए खाना पीने भूल सकते थे... मगर सुलतान को ज़लील करना उसे मारना पीटना नहीं भूलते... फिर एक दिन तो उनके ज़ुल्म की इन्तेहाँ हो गयी....

ये कह के महक खामोश हो गयी....

Prince/Sultaan : महक चुप क्यों हो गयी....? बताओ मुझे जवाब दो... क्या हुआ था उस दिन...? क्या किया था उन लोगों ने उस एक दिन....????

(वर्ड काउंट 5240)
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 148

महक : सुलतान दर्द से तड़पता रहता मगर उनको उस मासूम पे ज़रा सा भी रेहम नहीं आता... उनका सुलतान को मारना उसपे ज़ुल्म करना ये सब अब रोज़ का काम हो गया था.... वो एक बार के लिए खाना पीने भूल सकते थे... मगर सुलतान को ज़लील करना उसे मारना पीटना नहीं भूलते... फिर एक दिन तो उनके ज़ुल्म की इन्तेहाँ हो गयी....

ये कह के महक खामोश हो गयी....

Prince/Sultaan : महक चुप क्यों हो गयी....? बताओ मुझे जवाब दो... क्या हुआ था उस दिन...? क्या किया था उन लोगों ने उस एक दिन....????

अब आगे.....

प्रिंस की बात सुन के भी महक खामोश रहती है.... उस से आगे कुछ कहा hi नहीं जा रहा है.... वो बस रोये जा रही है.... महक को कुछ न कहते देख प्रिंस एक बार फिर से उस से वो hi सवाल करता है....

प्रिंस : महक बताओ मुझे क्या हुआ था उस दिन....?

प्रिंस के मुँह से मुस्कान की जगह महक सुन के महक ये समझ जाती है की प्रिंस उस से नाराज़ है.... इस बात से उसे और भी ज़्यादा तकलीफ हो ने लगती है.... वो ये अच्छे से जानती है की अभी तक उसने जो प्रिंस को बताया उसे सुन के प्रिंस इतना नाराज़ है तो जब वो उसे उन दिन की बात बताएगी तब तो पक्का वो उस से नफरत करने लगेगा.... इस बात से महक का दिल देहल जाता है.... वो और भी ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है....

प्रिंस के लाख पूछने पे भी जब महक ये नहीं बताती की उस दिन क्या हुआ था....? तब प्रिंस न चाहते हुए भी वो करता है जो उसे नहीं करना चाहिए....

प्रिंस : तुम नहीं बताना चाहती मत बताओ अब मैं तुमसे और कोई सवाल नहीं पूछूंगा.... अब मैं ये खुद देखूंगा की उस दिन क्या हुआ था....?

ये कह के प्रिंस अपने हाथ हवा में घूमने लगता है.... अपने जिस्म में नीलम जिनि की पावर्स के ज़रिये प्रिंस सामने एक स्क्रीन जैसा बना देता है और फिर उसमे एक फिल्म की तरह वो सब साफ़ साफ़ नज़र आने लगता है जो अभी कुछ देर पहले महक ने प्रिंस को बताया था.... उसे देख वहां मौजूद सभी का दिल तड़प जाता है सब की आँखों से बेतहाशा आंसू बहने लगते हैं साथ hi उनका दिमाग गुस्से से फटने लगता है.... प्रिंस ने जो ज़ुल्म सही हैं या फिर ये कहना ज़्यादा ठीक होगा की प्रिंस के परिवार के लोगों ने उसपे जो ज़ुल्म किये हैं वो सब को साफ़ साफ़ नज़र आ रहा है.... प्रिंस के अपने परिवार वालों ने मिल के मासूम Sultaan/Prince के साथ वो किया जो कोई अपने दुश्मन के साथ भी न करे.... सुनने से ज़्यादा देखने में सामने का मंज़र 1000 गुना ज़्यादा खौफनाक और बेइन्तेहाँ दर्द भरा है... फिर जब उस दिन की बारी आती है तब महक प्रिंस के आगे हाथ जोड़ के उसे रोक के आगे न देखने को कहती है....

महक : प्रिंस प्लीज इसे अभी बंद कर दो... प्लीज इस के आगे मत देखो प्लीज प्रिंस मेरी बात मान जाओ.... प्लीज....

प्रिंस : ये तुम कैसी बात कर रही हो महक... क्या तुम ये नहीं चाहती की तुम्हारे प्रिंस को सच्चाई का पता चले....? ये पता चले की आखिर उस दिन ऐसा क्या हुआ था....? जिसने मेरी पूरी दुनिया hi पलट के रख दी...

अभी प्रिंस ने इतना hi कहा था की तभी बाबा की आवाज़ सुन के सब पलट के देखते हैं..... बाबा की आँखों से आंसू बह रहे हैं साथ hi उनके चेहरे पे बेइन्तेहाँ गुस्सा भी है.... सिर्फ और सिर्फ प्रिंस की वजह से बाबा ने खुद को काबू किया हुआ है....

बाबा : प्रिंस हमेशा से मैं तेरी हर बात मानता आया हूँ.... सिर्फ और सिर्फ तेरी वजह से मैं छह के भी न मलिका सुनहरी को मार पाया न hi पारी को.... मगर अब और मुझसे बर्दाश्त नहीं होता... प्लीज इस बार मुझे मत रोक.... अपनी वो कसम वापिस ले ले.... ताकि मैं इन कमीनो से तेरा बदला ले सकूँ.... अरे ये इंसान नहीं बल्कि हैवान हैं हैवान.... इन्हे इंसान कहना इंसानियत की तौहीन होगी.... ये सारे शैतान है... शैतान.... इन सब ने मिल के तेरे साथ वो किया है जिसे करने में एक पल के लिए शैतान की रूह भी कांप जाए.... मगर इनके चेहरे पे ज़रा सी भी शिकन नहीं आयी.... ये सब के सब वाकई में शैतान हैं....

अभी प्रिंस कुछ कहने hi वाला था की तभी....

सोना : सही कहा आप ने ये कमीना वाकई में शैतान है.... इसने हमारी ज़िन्दगी को अज़ाब बना के रख दिया.... साले को जान से मार दो मगर तब भी ये नहीं मरता लौट के वापिस आ जाता है... जानते हैं क्यों....? क्यों की ये इंसान नहीं बल्कि शैतान है....

सोना की बात सुन के सब को उसपे बेहद गुस्सा आने लगता है.... इस ऐ पहले की गुस्से में कोई कुछ कहता.... एक साथ 3 झन्नाटेदार थप्पड़ सोना के गाल पे रसीद होते हैं....

Chataaaaaaaaaaaak.... Chataaaaaaaaaaaak.... Chataaaaaaaaaaaak.....

ये और किसी ने नहीं बल्कि ज़रा रूही और शनाया ने सोना को मारा था....

तीनो : साली कामिनी तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे प्रिंस को शैतान कहने की.... शैतान प्रिंस नहीं बल्कि तू है तेरी ये बेहेन है तेरा पूरा खानदान है....

उनकी बात सुन के और उनके हाथों से थप्पड़ खा के सोना को बेहद गुस्सा आ जाता है गुस्से में वो कुछ कहने hi वाली होती है की तभी....

तीनो : अब अगर एक गलत लफ्ज़ तू ने अपनी गन्दी जुबां से प्रिंस के लिए निकाला तो अभी यहीं तेरे जिस्म के इतने टुकड़े करेंगे की तेरा पूरा खानदान मिल के भी उसे समेत नहीं पायेगा.... साली कमीनी एक तो इतना नीच और घिनोना काम करती है और ऊपर से आँखें भी दिखती है....

सोना : जी नहीं नीच मैं नहीं ये (प्रिंस की तरफ इशारा कर के) है....

अभी सोना ने इतना hi कहा था की तीनो गुस्से में उसे मारने के लिए आगे बढ़ती हैं.. मगर प्रिंस उन्हें रोक के कहता है...

प्रिंस : अभी नहीं और ऐसे तो बिलकुल भी नहीं.... अभी तो इसे और इसके साथ साथ इसके पूरे खानदान को वो सब सहना है जो मैंने सहा है... वो दर्दनाक ज़िन्दगी गुज़ारनी है जो मैंने गुज़ारी थी.... वो हर काम करना है जो इस पूरी दुनिया में किसी ने नहीं किया है... और न hi कोई कभी करेगा.... अब वक़्त आ गया है उस श्राप के शुरू होने का जो शहनूर माँ ने इस कमीनी के पूरे खानदान को दिया था..... बस देखते जाओ मैं इन के साथ क्या क्या करता हूँ.... उस से पहले ये जान लेते हैं की उस आखरी दिन इन कामिनियों ने मेरे साथ क्या किया था....?

प्रिंस की बात सुन के महक की रूह कांप जाती है.... वो रट गिड़गिड़ाते हुए प्रिंस से कहती है...

महक : नहीं प्रिंस प्लीज... मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ... तुम्हारे पेअर पड़ती हूँ... प्लीज आगे क्या हुआ ये मत देखो.... प्लीज....

सोना : महक तू क्यों इस कमीने के आगे हाथ जोड़ रही है....? ये कल भी एक कमीना था और आज भी एक कमीना hi है... देखा ये आ गया न अपनी औकाद पे.... कल तक जो हमारा अपना सागा बना फिरता था वो आज हम को तकलीफ पहुँचाने की बात कर रहा है... कल तक जो तेरी आँखों में आंसू की एक बूँद तक नहीं आने देने का वादा कर रहा था.... आज इसकी वजह से तेरी आँखों से आंसुओं का सैलाब बह रहा है और इसे ज़रा सा भी फर्क नहीं पढ़ रहा है.... ये तो वही कर सकता है जो इंसान नहीं बल्कि शैतान है....

प्रिंस : इंसान कौन है और शैतान कौन ये अभी पता चल जाएगा....

ये कह के प्रिंस सामने स्क्रीन की ततफ इशारा करता है.... प्रिंस के इशारे पे स्क्रीन पे उस दिन क्या हुआ वो नज़र आने लगता है....

सुबह का वक़्त है सुल्तान अपने कमरे में सो रहा है... सो क्या रहा है वो तो बेहोश पड़ा हुआ है.... कल रात की मार के निशाँ उसके जिस्म पे साफ़ नज़र आ रहे हैं.... तभी कोई उस रूम में दाखिल होता है.... जिसे देख प्रिंस गुस्से से सोना की तरफ देख के उस से पूछता है....

प्रिंस : इसे तो तुम पहचानती होगी... अगर याद न हो तो बता दूँ की ये और कोई नहीं बल्कि शराफत की मिसाल सोना मैडम जी है... और वो सामने ज़मीन पे जो सो रहा है वो सुलतान है... यानी मैं... अब देखना कैसे हमारी सोना मैडम के चेहरे से शराफत का नक़ाब उतरेगा और वो अपनी शैतानी हरकत पे उतर आएँगी....

प्रिंस की बात सुन के सोना बेहद गुस्से में पलट के प्रिंस को देखती है... फिर उस स्क्रीन की तरफ मुद जाती है....

इधर रूम में आते hi सोना सुलतान को देख के अपना मुँह बना लेती है... और बेहद गुस्से में कहती है....

सोना : देखो तो शैतान को हम सब की नींद उदा के कैसे चैन से सो रहा है... अभी इसकी नींद भगति हूँ... ये कह के सोना उसके साथ आयी लड़की की तरफ इशारा कर के कहती है....

सोना : मेहरीन (सोना के फूफा आबिद की बड़ी बेटी) तू वो अपने साथ लायी है न....?

सोना की बात सुन के मेहरीन हाँ में इशारा करती है.... और लोहे का दो गरम गरम चिंता सोना को दिखा के कहती हैं....

मेहरीन : हाँ ये देख... ये पूरी तरह से गर्म है.... इस से पहले की ये हवा में hi ठंडा हो जाए.... इसे इस कमीने की पीठ पे ठंडा करते हैं....

सोना : हाँ हाँ क्यों नहीं... चल जल्दी से शुरू हो जा....

मेहरीन : क्यों तू इस काम में मेरा साथ नहीं देगी....?

सोना : नहीं मेहरीन.... मैं छह के भी इसके साथ वो नहीं कर सकती... प्यार जो इस कमीने से इतना करती हूँ... मगर इस कामने ने मेरे साथ साथ उस कमीनी मासूम को भी चुना.... जो मुझे कतई मंज़ूर नहीं... जो दर्द जो तकलीफ इस कमीने को उसके साथ देख के मुझे होती आयी है आज उसका इस से पूरा बदला लुंगी... चल अब बातें बनाने में ज़्यादा वक़्त न बर्बाद कर और वो कर जो करने के लिए हम यहाँ आये हैं....

मेहरीन : हाँ मेरी जान देख कैसे मैं अभी इस कमीने की पीठ जलती हूँ....

ये कह के मेहरीन गरम गरम चिंता ले के अपनी माँ नसरीन के साथ सुलतान की तरफ बढ़ती हैं.... और दोनों मिल के गरम चिमटे को सुलतान की पीठ पे कास के सत्ता देती हैं और तब तक नहीं हटती जब तक की वो उसकी पीठ से निकल रहे खून से ठंडा नहीं हो जाता....

पीठ पे गरम चिमटे के लगते hi एक तेज़ दर्द के एहसास के साथ सुलतान की नींद टूट जाती है.... वो दर्दनाक चीख के साथ उठ जाता है.... और बुरी तरह से तड़पने लगता है... उसे बेइन्तेहाँ दर्द हो रहा है... वो चीख रहा है रो रहा है... खुद को इस बेइन्तेहाँ दर्द से बचने की पूरी कोशिश कर रहा है मगर उसकी पूरी कोशिश नाकाम बानी हुई है... उसकी नाज़ुक पीठ की चमड़ी पूरी तरह से जल चुकी है.... और उसमे से खून निकल के बह रहा है... सुलतान दर्द में बुरी तरह से तड़पते हुए चीख रहा है अपने बचाओ को लिए अपनी माँ डैड को आवाज़ लगा रहा है.... मगर वो जब यहाँ हो तब न उसकी बात सुने या उसे बचाये... सुलतान सोना मेहरीन और नसरीन से रेहम की भीख मांग रहा है... मगर तीनो है की उनको उसपे ज़रा सा भी रेहम नहीं आ रहा है.... बल्कि सुलतान की हालत देख के वो बेहद खुश हो रही हैं.... ज़ोर ज़ोर से हंस रही हैं.... जब सुलतान के दर्द सहने की शक्ति जवाब दे जाती है तब वो बेहोश हो जाता है....

मेहरीन : हाय कितना मज़ा आ रहा था... ये अचानक से क्या हुआ इस कामने की आवाज़ कैसे बंद हो गयी....? सोना ज़रा देख तो....

सोना सुलतान के मुँह पे लात मार के चेक करती है...

सोना : कुछ नहीं.... कमीना बेहोश हो गया है....

तभी पीछे से किसी की आवाज़ सुन के दोनों पलट के देखती हैं.... ये और कोई नहीं बल्कि मेहरीन के डैड और सोना के फूफा आबिद हैं...

आबिद : तो होश में लाओ इस कमीने को....

तभी अचानक से एक बार फिर से पूरे घर में सुलतान की दर्दनाक चीख गूंजने लगती है....

आआआआगगजघ्हहहहहहह.....

सुलतान पागलों की तरह दर्द से चीख रहा है....

आबिद : ये क्या किया तुम ने पानी दाल के भी क्या कोई किसी को जगाता है क्या....? और जब बात इस शैतान सुलतान की हो तो कोई नया दर्दनाक तरीका आज़माना चाहिए था न....

महक : पानी दाल के नहीं उठाना था तो फिर कैसे....?

तभी नसरीन जो कहती है उसे सुनके सब चौंक जाते हैं.... जी हाँ सुलतान को बेहोशी से जगाने वाली और कोई नहीं बल्कि महक hi है....

महक : फूफा जी मैंने जो इस कामने की सदी हुई पीठ पे डाला था वो सादा पानी hi था.... मगर ये तो ऐसे चिल्ला रहा है जैसे की मैंने इसकी पीठ पे लाल मिर्च लगा दी हो.....

नसरीन : वो सादा पानी नहीं था बल्कि मैंने लाल मिर्च के पाउडर के साथ साथ उस पानी में नमक भी मिला दिया था.... ताकि इसके सादे हुए जिस्म पे पड़ते hi इसे और तेज़ दर्द हो और इसकी और भी ज़ोर से चीखें निकले.... अब चलिए जल्दी से मुझे मेरा इनाम दीजिये.... आज जीत मेरी हुई.... आज मेरी वजह से इसकी चीख बहुत ज़ोर से निकली थी.... आज सोना और मेहरीन हार गयी और मैं जीत गयी... चलिए जल्दी से मुझे मेरा इनाम दीजिये....

नसरीन की बात सुन के जहाँ सोना और मेहरीन चीड़ जाती हैं वहीँ आबिद खुश हो के नसरीन को 500 की 10 नोट इनाम में देता है.... उसमे से नसरीन 2 नोट महक को दे के कहती है....

नसरीन : ये ले मेरी बच्ची ये तेरा इनाम है... इस कमीने को तकलीफ पहुँचाने में तू ने भी मेरा पूरा साथ दिया है....

सामने स्क्रीन पे हो रही हैवानियत को देख वहां मौजूद सभी का दिल दर्द से फटने लगता है साथ hi गुस्से के मारे सब पागल होने लगते हैं.... सब सोना और महक को जान से मारने के लिए आगे बढ़ते हैं... मगर प्रिंस उन्हें अपनी कसम दे के रोक लेता है....

प्रिंस : अभी नहीं और इतनी जल्दी नहीं.... इन से पूरा बदला लिया जाएगा एक एक बात का एक एक दर्द का जो मैंने इनके और इनके पूरे खानदान की वजह से सहा है.... अब जब तक वो मैं इन्हे सूद समेत लौटाऊंगा नहीं मुझे चैन नहीं aayega.wo दर्द वो तकलीफ नहीं लौटा देता.... तब तक इन्हे जीना होगा.... हर पल हर लम्हा टिल टिल कर के तड़पते हुए जीना होगा.... ये तो बस दिन की शुरुवात है देखते हैं आगे इन कमीनो ने और क्या किया है मेरे साथ....?

फिर वो सब सुलतान को दर्द में तड़पते चोर के शैतानी हंसी हस्ते हुए वहां से चले जाते हैं....

अभी सुलतान को दर्द में तड़पते हुए एक घंटा भी बीता नहीं था की तभी... नाज़ सुलतान की दूसरी बुआ नज़मा की बड़ी बेटी वहां आके खींच के सुलतान की पीठ पे एक लात मार के कहती है....

नाज़ : ए शैतान उठ... क्या पूरा दिन सोता hi रहेगा.... या फिर कुछ काम भी करेगा.... हमारे नाश्ते के गंदे बर्तन पड़े हैं.... जल्दी से चल के उन्हें साफ़ कर... इस से पहले की मैं मार मार के तेरी सदी हुई पीठ की बाकी बची हुई चमड़ी भी उतार दूँ....

नाज़ की बात सुन के सुलतान बुरी तरह से दर जाता है... और जिस्म में हो रहे बेइन्तेहाँ दर्द को किसी तरह बर्दाश्त करते हुए उठता है और लड़खड़ाते कदमो से झूठे बर्तन साफ़ करने के लिए किचन की तरफ बढ़ जाता है....

इसी तरह मार कहते कहते सुलतान का पूरा दिन गुज़रता है... आज भी उसे खाने में बचा हुआ झूठा खाना खाने को मिला है... और प्यास लगने पे घर की लड़कियों में से किसी का गिलास में थूका हुआ पानी.... न चाहते हुए भी सुलतान वो पानी पी लेता है.... जब बेतहाशा प्यास लगती है तब इंसान ये नहीं देखता है की जो पानी वो पी रहा है वो साफ़ है या फिर गन्दा उसे तो बस अपनी प्यास बुझानी है...

किसी तरह दिन तो गुज़र गया मगर रात है की गुजरने को तैयार hi नहीं.... आज सुलतान को रात का खाना नहीं दिया गया था.... खाने को कुछ बचा hi नहीं था.... आज रात का खाना होटल से आया था जो सब ने मिल के पूरा ख़तम कर दिया... सुलतान को वो खाना खाना तो क्या देखना तक नसीब नहीं हुआ.... जिस्म में बेइन्तेहाँ दर्द और पेट में भूक लिए सुलतान रट हुए चाट पे चला गया और आसमान की तरफ देख के ऊपर वाले से इस दर्द भरी ज़िन्दगी से निजाद मांगने लगा.... तभी अचानक से किसी की दर्दभरी चीख से पूरा घर गूँज उठा....

आआआआगगजघ्हहहहहह....

चीख सुन के सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं....

मेहरीन : ये तो डैड की आवाज़ है.....

महक : कुछ देर पहले मैंने उन्हें चाट की तरफ जाते देखा था....

मेहरीन : चाट पे तो वो कमीना सुलतान है.... कहीं उसने तो डैड के साथ कुछ....

मेहरीन के ये कहते hi अब चाट की तरफ दौर लगा देते हैं.... वहां का हाल देख सब बेहद गुस्से में आ जाते हैं...

आबिद ज़मीन पे गिरे हुए हैं उसके सर से खून निकल रहा है... सुलतान उनके करीब बैठा है.... उसका पूरा हाथ आबिद के खून से रंगा हुआ है... पास hi लोहे की रोड पड़ी हुई है जिसपे खून लगा हुआ है....

सामने स्क्रीन पे देख सोना बेहद गुस्से में प्रिंस को देख के कहती है....

सोना : देख कमीने गौर से देख.... ये तू ने किया है.... आबिद फूफा को जान से मारने की कोशिश की है....

सोना की बात सुन के प्रिंस मुस्कुराते हुए कहता है....

प्रिंस : अबे कमीनी झूठा इलज़ाम लगाने से पहले ये तो देख ले की वाकई में उस वक़्त वहां क्या हुआ था....?

फिर प्रिंस अपने हाथ का इशारा करता है.... सामने स्क्रीन पे आबिद चाट की बढ़ रहे हैं.... उन्हें सुलतान चाट के कोने में खड़े रट हुए नज़र आ रहा है...

आबिद गुस्से से सुलतान को देख के कहते हैं...

आबिद : साले कमीने आज तेरी वजह से मैं नामर्द बन गया हूँ.... मेरा लुंड अब बस मूतने के लिए रह गया है.... एक वक़्त था की मैं जब चाहता किसी भी औरत को पटक के छोड़ लिया करता था... मगर अब साले तेरी वजह से वो श्राप मुझ पे लग गया है और मेरा ये लुंड खड़ा hi नहीं होता... छोड़ना तो बहुत दूर की बात है.... मैं नामर्द बन के रह गया हूँ.... चुदाई मेरे लिए एक सपना बन के रह गयी है... साले सिर्फ और सिर्फ तेरी वजह से मैं क्या इस पूरे खानदान का हर एक मर्द अब नामर्द बन गया है.... सब के साथ साथ मेरी ज़िन्दगी भी नर्क से भी बत्तर बन गयी है.... आज मैं तेरा किस्सा हमेशा हमेशा के लिए ख़तम कर दूंगा.... आज तुझे जान से मार के मैं अपना बदला ले लूंगा.... आज तुझे मरना होगा....

ये कह के आबिद गुस्से में आगे बढ़ते हैं.... वो सुलतान के करीब पहुँच के उसके सर पे लोहे की रोड से मारने hi वाले होते हैं की तभी अचानक से आसमान में तेज़ बिजली कड़कती है... आबिद के जिस्म को एक झटका सा लगता है और वो उड़ते हुए पीछे जा गिरते हैं... उनका सर पहात जाता है और उनके मुँह से दर्द भरी चीख निकल जाती है... उनकी चीख सुन के सुलतान दौर के उनके पास जाता है और उनके सर से निकल रहे खून को रोकने के लिए दोनों हाथ से उन्हें सर पे चोट लगी जगह को खास के दबाने लगता है ताकि खून निकलना बंद हो jaate.....theek तभी सब ऊपर आ जाते हैं और मौजूदा हालात को देख के ये समझते हैं की ज़रूर सुलतान ने hi कुछ किया है.... सब को वहां देख आबिद के दिमाग में एक आईडिया आता है....

आबिद : बचाओ मुझे ये शैतान मुझे जान से मार देगा.. मुझे इस से बचा लो....

आबिद की बात सुन के और सुलतान के हाथों में खून देख के सब को आबिद की बात पे यकीन हो जाता है... और गुस्से में वो सुलतान को मारने के लिए उसके करीब जाने लगते हैं...

सुलतान : नहीं ये झूट है.... मैंने कुछ नहीं किया... मेरा यकीन करो सोना मैंने कुछ नहीं किया....

मेहरीन : कमीने झूट बोलता है... एक तू hi यहाँ मौजूद है... तू ने hi मेरे डैड को जान से मारने की कोशिश की है.... जिसका सबूत तेरे हाथों में लगा खून है.... साले कमीने तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे डैड पे जान लेवा हुम्ला करने की....? आज मैं तुझे ज़िंदा नहीं छोड़ूंगी...

ये कह के मेहरीन सामने पड़ी रोड उठा के सुलतान को उस से पीटने लगती है.... मौत के दर से सुलतान अपनी जान बचने के लिए सोना के पास जाता है और उसके जो हुआ वो सब बताता है... मगर सोना तो क्या वहां मौजूद कोई भी सुलतान की किसी बात पे यकीन नहीं कर रहा है....

सोना : साले कमीने.... तेरी हिम्मत कैसे हुई अपनी गन्दी जुबां से मेरा नाम लेने की.... फूफा जी को जान से मारने की तेरी कोशिश ने आज ये साबित कर दिया की तू इंसान नहीं बल्कि सच में एक शैतान है.... और शैतान को ज़िंदा रहने का कोई हक़ नहीं.... तेरा क्या भरोसा आज तू ने अकेला पा के फूफा को जान से मारने की कोशिश की... जाने कल तू हम से बदला लेने के लिए मुझे या फिर महक को भी जान से मार दे....

और फिर तभी एक ज़ोरदार चीख पूरे फ़िज़ा में गूँज उठती है....

Aaaaaaggghhhhhhhhhhh.....????

(वर्ड काउंट 3520)
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 149

सोना : साले कमीने.... तेरी हिम्मत कैसे हुई अपनी गन्दी जुबां से मेरा नाम लेने की.... फूफा जी को जान से मारने की तेरी कोशिश ने आज ये साबित कर दिया की तू इंसान नहीं बल्कि सच में एक शैतान है.... और शैतान को ज़िंदा रहने का कोई हक़ नहीं.... तेरा क्या भरोसा आज तू ने अकेला पा के फूफा को जान से मारने की कोशिश की... जाने कल तू हम से बदला लेने के लिए मुझे या फिर महक को भी जान से मार दे....

और फिर तभी एक ज़ोरदार चीख पूरे फ़िज़ा में गूँज उठती है....

Aaaaaaggghhhhhhhhhhh.....????

अब आगे....

ये चीख किसी और की नहीं बल्कि सुलतान की थी.... वो हुआ ऐसा था की मेहरीन और सोना गुस्से में सुलतान को मारते हुए छत के किनारे तक ले आती हैं.... सुलतान रोटा रहता है.... उनसे ये कहता रहता है की उसने कुछ नहीं किया वो बेक़सूर है.... मगर उनको न तो उसकी किसी बात पे यकीन आता है और न hi उस मासूम पे रेहम.... मेहरीन गुस्से में रोड को खींच के सुलतान के सर पे मारती है.... सुलतान के सर से तेज़ी से खून निकलने लगता है.... सुलतान के मुँह से दर्दनाक चीख निकल जाती है वो तड़पते हुए एक आखरी बार सोना की आँखों में देखते हुए अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ा के उस से मदत मांगता है मगर सोना को उसपे ज़रा सा भी रेहम नहीं आता.... वो गुस्से में अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लेती है.... ये सुल्तान बर्दाश्त नहीं कर पाटा..... उसका दिल बुरी तरह से टूट जाता है.... उसमे जीने की छह ख़तम हो जाती है.... वो दर्द भरे दिल से एक आखरी बार प्यार से सोना का नाम ले के उसे पुकारता है....

सुलतान : सोनाआआआआ....

सुलतान के मुँह से अपना नाम सुन के सोना पलट के उसकी तरफ देखती है.... अचानक से उसके पलटने से सुलतान को धक्का लगता है और वो छत से नीचे गिर जाता है.... सुलतान को छत से गिरते देख सोना की जैसे जान hi निकल जाती है... इधर जाने क्यों महक भी सुलतान को छत से गिरते देख दौड़ के किनारे की तरफ आती है.... छत के किनारे पड़े फ्लावर पॉट से सोना और महक टकरा जाती हैं और वो पॉट नीचे सीधे सुलतान के सर पे जा के गिरता है.... जिसे देख जहाँ सोना और महक के मुँह से चीख निकल जाती है... वहीँ बाकी घर वाले ख़ुशी से हसने लगते हैं....

Sultaaaaaaaaaaaan.....

इधर स्क्रीन पे सुलतान को देख यहाँ मौजूद सभी के मुँह से दर्दनाक चीख निकल जाती है....

Sultaaaaaaaaaaaan.....

सब गुस्से में पलट के सोना और महक को देखने लगते हैं.... ज़रा रूही और शनाया गुस्से में सोना और महक के पास जाती हैं और उन्हें पीटने लगती हैं....

बड़ी मुश्किल से प्रिंस उन्हें सोना और महक से दूर करता....

प्रिंस : मैंने कहा न नहीं ऐसे नहीं... इन्हे सजा मिलेगी मेरे ऊपर हुए हर एक ज़ख्म की हर एक दर्द की जो मैं खुद इन्हे दूंगा....

फिर स्क्रीन की तरफ दिखा के कहता है....

प्रिंस : पहले ये तो देखो की आगे क्या हुआ....?

सब स्क्रीन पे देखने लगते हैं....

सुलतान की हालत देख के आसमान भी रो पड़ता है.... गुस्से में आसमान में बिजलियाँ कड़कने लगती है.... वहां का माहौल देखते hi देखते बेहद ग़मगीन और खौफनाक हो जाता है.... तभी अचानक जाने कहाँ से काला धूंवा हर तरफ छाने लगता है.... किसी को कुछ नज़र नहीं आ रहा है.... वहां मौजूद सभी का डैम घुटने लगता है.... कुछ देर तक वहां ऐसा hi माहौल बना रहता है... फिर जब वो काला धूंवा चाट ता है तब वहां न तो सुलतान है न hi उसकी लाश.... बस कुछ है तो वो है ज़मीन पे फैला सुलतान के जिस्म से बहा गरम खून....

वहीँ एक तरफ महक बेहोश पड़ी हुई है.... महक की हालत देख सब बेहद घबरा जाते हैं.... वो उसे उठा के रूम में ले जाते हैं.... महक की ऐसी हालत उनसे देखि नहीं जाती... डॉ महक का चेक उप करने के बाद हैरान हो जाते हैं....

डॉ : इसकी आँखों को चोर के इसका पूरा जिस्म बेजान सा हो गया है... हैरत है अपनी पूरी लाइफ में में मैंने ऐसे किसी पेशेंट को नहीं देखा.... इसके जिस्म पे कहीं कोई चोट का निशाँ नहीं है मगर फिर भी इसकी ऐसी हालत है.... क्या आप ये बता सकते हैं की इसके साथ क्या हुआ था....?

जमीला रट हुए : कुछ भी नहीं हुआ डॉ.....

डॉ : ज़रूर कुछ तो हुआ है इसके साथ... वर्ण किसी की हालत अचानक से ऐसी नहीं हो सकती....

इसके बाद प्रिंस उस स्क्रीन को बंद कर देता है....

ज़रा के साथ साथ बाकी सब भी आँखों में आंसू लिए बेहद गुस्से में प्रिंस को देखने लगते हैं.....

प्रिंस : अब तुम लोगों को क्या हुआ....? मुझे इतने गुस्से में क्यों देख रहे हो....?

ज़रा : क्या ज़रुरत थी तुझे इस कमीनी को ठीक करने की....?

प्रिंस : अब मुझे थोड़े hi पता था की मैं जिसकी जान बचा रहा हूँ.... जिसका इलाज कर रहा हूँ की वो मेरा hi हसीं और खतरनाक क़ातिल निकलेगा.... अब तू तो जानती है की मैं किसी को तकलीफ में नहीं देख सकता....

ज़रा : चाहे वो तेरा दुश्मन hi क्यों न हो....?

प्रिंस : हाँ ये बात अब तक तो सही थी मगर आगे शायद ऐसा न हो.... अब तो इस प्यार और परिवार के नाम से नफरत सी हो गयी है.... इस दुनिया में इस सब का कोई वजूद hi नहीं रह गया है... बस कुछ है तो वो है धोका और दरिंदगी.... काश मैं इंडिया आया hi न होता... काश मुझे अपने इस सो कॉल्ड परिवार के बारे में पता hi नहीं चलता.... काश मैंने अपनी नानी की बात मान ली होती.... काश....

ज़रा : वो तब की बात थी जब तू छोटा था अकेला था मजबूर था.... मगर अब नहीं... अब न hi तू छोटा है न कमज़ोर है और न अकेला.... अब मैं तेरे साथ हूँ.... अब अगर गलती से भी इन कमीनो ने तेरे साथ कुछ गलत करने के बारे में गलती से सोचा भी तो मैं उसी वक़्त इनकी जान ले लुंगी.... तू छह के भी मुझे नहीं रोक पायेगा.... (फिर गुस्से में सोना और महक को देख के कहती है) इस से पहले की मैं तुम दोनों की जान ले लून यहाँ से चली जाओ और भूल के भी अपनी ये मनहूस शकल नहीं दिखाना....

शनाया : ये क्या ज़रा इतने से तू इन कामिनियों को जाने देगी.... पहले चल के देखें तो सही की इन दोनों के साथ बाकी के वो कमीने कौन हैं जिन्होंने प्रिंस के साथ इतनी ज़लील हरकत की....?

ये कह के शनाया और ज़रा सोना और महक का हाथ पकड़ के दोनों को गैज़ेट ते हुए उनके घर में ले जाती हैं..... और ले जा के उन्हें एक तरफ धकेल देती हैं....

अपनी बेटियों का हाल देख जमीला बेहद गुस्से में आ जाती है....

जमीला : ये क्या बदतमीज़ी है....? तुम लोग हो कौन....? और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी बेटियों के साथ ऐसी हरकत करने की....

ज़रा : मैं कौन हूँ ये बाद में बताउंगी पहले ये बता की वो कमीने आबिद नसरीन और मेहरीन कहाँ हैं....?

जमीला : जुबां संभाल के बात करो लड़की.... तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे घर में घुस के मेरे hi परिवार वालों को गाली देने की....? हम शरीफ लोग हैं.... हम से शराफत से बात करो यही तुम्हारे लिए ठीक रहेगा....

ज़रा : तुम सब और शरीफ अच्छा मज़ाक है.... अबे जब तुम सब ने मिल के बेक़सूर और मासूम प्रिंस की जान लेने की कोशिश की थी तब तुम्हारी ये सो कॉल्ड शराफत क्या घूमने गयी थी....?

जमीला : ये क्या बकवास कर रही हो तुम....? हम ने कब प्रिंस की जान लेने की कोशिश की....?

प्रिंस : प्रिंस की न सही मगर सुलतान को तो जान से मारने की कोशिश की थी न जमीला चची....

प्रिंस को अपने घर में देख और उसकी बात सुन के वो चौंक जाती है.... उसका पूरा जिस्म दर से कांप जाता है....

जमीला : य.... य..... ये तुम k...k...kya कह रहे हो....?

प्रिंस : वो hi जो सच है.... वैसे आपको सुलतान याद है या भूल गयी....?

जमीला : ...........

प्रिंस : मुझे लगा hi था.... आप भूल गयी होंगी.... आप भूल भी गयी तो क्या हुआ चची जान मैं हूँ न याद दिलाने के लिए.... देखिये मुझे गौर से मैं वो hi हूँ कल का सुलतान और आज का प्रिंस.... वैसे आप चाहे तो मुझे सुलतान कह सकती हैं.... मैं बिलकुल भी बुरा नहीं मानुगा.... मगर हाँ प्यार से.... क्यों की अब मैं वो पहले वाला अकेला कमज़ोर और बेचारा सुलतान नहीं हूँ.... अब मैं प्रिंस हूँ... प्रिंस अली खान.... जिसके साथ कुछ गलत करना तो दूर उसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता.... और अगर गलती से कभी किसी ने सोचा भी तो फिर वो कुछ और सोचने के लिए कभी ज़िंदा नहीं रहेगा....

अरबाज़ : तुम हम को धमकी दे रहे हो....?

प्रिंस : अरे नहीं चाचा जान मैं आप को धमकी नहीं दे रहा बल्कि हकीकत से आप सब का सामना करवा रहा हूँ... जानते हैं बचपन में जब मैं यहाँ रहता था... तब मुझे आप सब के ज़ुल्मों से बचने वाला कोई नहीं था... मगर अब ऐसा नहीं होगा.... जानते हैं क्यों....? क्यूंकि इस शहर में जितने लोग हैं उस से कई ज़्यादा मेरे सिक्योरिटी गार्ड्स हैं.... वैसे मैं खुद इतना ताक़तवर हूँ की मुझे कभी अपने सिक्योरिटी गार्ड्स की ज़रुरत hi नहीं पड़ी.... तो अब आप सब से ये गुज़ारिश है की गलती से भी अब मेरे साथ ी मैं सुलतान के साथ कुछ गलत करने के बारे में सपने में भी नहीं सोचना... अगर कभी गलती से भी किसी ने ऐसा सोचा भी तो फिर वो कुछ और सोचने के लिए ज़िंदा नहीं बचेगा.... और इसे अब धमकी hi समझना.... अब मुझे ये बताइये की आप सब ने 10 साल पहले एक मासूम बच्चे पे ज़ुल्म करने का जो महान काम किया था उसकी वजह क्या थी....?

सोना : हम ने उसके साथ वही किया था जो एक शैतान के साथ किया जाता है....

अभी सोना ने इतना hi कहा था की तभी एक साथ 3 झन्नाटेदार थप्पड़ उसके गाल पे रसीद होता है....

Chataaaaaaaaaaaak....

तीनो : साली तेरी हिम्मत कैसे हुई प्रिंस को शैतान कहने की....?

जमीला गुस्से में : तुम होती कौन हो मेरी बेटी पे हाथ उठाने वाली....?

रूही : मैं प्रिंस की बीवी हूँ....

शनाया : मैं प्रिंस का प्यार हूँ....

ज़रा : मैं प्रिंस का प्यार होने के साथ साथ उसकी सिक्योरिटी गार्ड भी हूँ....

जमीला हैरत से : क्या कहा तुम तीनो इसको चाहती हो....?

प्रिंस : सिर्फ ये 3 hi नहीं बल्कि और भी बहुत सी हैं.... ये न तो मुझे आप को बताने की ज़रुरत और न hi आप को जान ने की ज़रुरत है.... फिलहाल इस वक़्त ये जानना ज़रूरी है की आप सब ने मेरे साथ वैसा वहशियाना सुलूक क्यों किया....? और आप को किसने ये कहा की मैं शैतान हूँ....?

जमीला : आबिद ने....

प्रिंस : बस उनके कहने पे आप सब ने ये मान लिया.... की एक **** साल का मासूम बच्चा शैतान है....

जमीला : नहीं उसने हम को सबूत दिखाए थी जिस से हम को ये यकीन हो गया की तुम शैतान हो....

प्रिंस : ऐसे क्या सबूत दिखाए थे बताएंगी मुझे....? मुझे भी तो पता चले की आप ने ऐसा क्या देखा जो एक मासूम बच्चे को शैतान मान लिया...

जमीला : व.... व..... वो.... उसने बताया था....

फिर जमीला वो hi बताती है जो सब ने स्क्रीन पे देखा था.... जिसे सुन के प्रिंस ज़ोर ज़ोर से हसने लगता है...

हहहहहहहहह....

प्रिंस को यूँ हँसते देख वहां मौजूद सब हैरत से उसे देखने लगते हैं....

जमीला गुस्से में : मैंने क्या कोई जोके मारा है जो तुम इस तरह से हंस रहे हो....?

प्रिंस : आप ने अभी जो कहा वो जोके नहीं तो और क्या है....? क्या किसी छोटे बच्चे का कोयले से ज़मीन पे ड्राइंग बनाने ये ये साबित हो जाता है की वो शैतान है....? क्या किसी मुर्गी या किसी और जानवर को तकलीफ में देख उसके जिस्म का बेहटा खून रोकने के लिए उसे दवा लगाने से ये साबित होता है की वो शैतान है...? या फिर जब किसी औरत या लड़की के कपडे बदलते वक़्त कोई बच्चा उसके रूम में चला जाए तो क्या इस से ये साबित हो जाता है की वो शैतान है...? बताइये जवाब दीजिये... क्या ये सब बातें ये साबित करती हैं की वो मासूम बच्चा शैतान है...?

प्रिंस की बातों पे जब जमीला गौर करती है तब उसे ये समझ में आता है की प्रिंस सही कह रहा है... इस सब से ये कतई साबित नहीं होता है की प्रिंस शैतान है... नहीं कभी नहीं....

प्रिंस : बोलिये न... जवाब दीजिये मेरी बात का....

जमीला : .......

प्रिंस : अगर वाकई में मैं शैतान होता तो क्या चुप चाप आप सब के ज़ुल्म सेहत....? क्या आप सब मुझे छत से धक्का देके मारने की कोशिश कर पाते....? बताइये जवाब दीजिये....

प्रिंस की बात सुन के जमीला के साथ साथ सोना और बाकी सब भी उसकी बातों पे सोचने पे मजबूर हो जाते हैं.... उन्हें ऐसा लगने लगता है की प्रिंस ने अभी जो कहा वो सच है....

जमीला : तुम जो कह रहे हो वो गलत नहीं है... मगर आबिद ने जो कहा और दिखाया उसका क्या....?

प्रिंस : ये तो अब वो hi बता सकते हैं की उन्होंने आप सब को मेरे बारे में गलत क्यों कहा....? ये क्यों कहा की मैं शैतान हूँ....?

जमीला : मगर वो तो यहाँ नहीं है...

प्रिंस : हाँ जानता हूँ की वो यहाँ नहीं है इस का मतलब ये नहीं की उसे यहाँ लाया नहीं जा सकता....

फिर प्रिंस पलट के मैक्स की तरफ देखता है....

प्रिंस : मैक्स मुझे 10 मिनट्स के अंडर वो यहाँ चाहिए....

मैक्स : नेमत उसे किसी भी वक़्त यहाँ लाती होगी....

अभी मैक्स ने ये कहा hi था की तभी नेमत आबिद को घसीट ते हुए अंडर लाती है और उसे प्रिंस के सामने पटक देती है....

आबिद खुद को अचानक से किसी और जगह पा के बुरी तरह से चौंक जाता है....

आबिद : मैं तो वहां था... ये अचानक से यहाँ कैसे आ गया....?

फिर हैरत से प्रिंस और बाकी सब को देख के जमीला से पोछता है.... भाभी जी ये सब लोग कौन हैं और हमारे घर में क्या कर रहे हैं....?

प्रिंस गुस्से में : सुलतान को जानते हो...?

आबिद : कौन सुलतान....?

प्रिंस : हैरत है अपने भतीजे सुलतान को नहीं जानते....?

आबिद : अच्छा वो शैतान....

अभी आबिद ने इतना hi कहा था की तभी उसको वहां देख शनाया ज़रा और रूही बेहद गुस्से में उसपे टूट पड़ती है और जैम के उसकी धुलाई करने लगती हैं.... तीनो मार मार के उसे अधमरा बना देती है.... प्रिंस फ़ौरन आगे बढ़ के उन्हें रोकता है....

प्रिंस : अबे इसे जान से नहीं मारना है.... पहले इसे सब सच तो बता देने दो....

प्रिंस बेहद गुस्से में आगे बढ़ के आबिद को उसकी गर्दन से उठा के उस से कहता है...

प्रिंस : दोबारा मुझे शैतान कहा तो अभी तुझे जान से मार दूंगा...

आबिद : M....M....Maine tu...mhe कब शैतान कहा.... वो तो मैंने उस सुलतान को कहा....

प्रिंस : वो सुलतान मैं hi हूँ....

आबिद शॉकेड : Kyaaaaaaaaaaaa....? मगर वो तो सालों पहले मर चूका है....

प्रिंस : प्रिंस को मारना नामुमकिन है.... मगर तुझे मारना बेहद आसान.... अब अगर मरना नहीं चाहता है तो जल्दी से वो बता जो सच है....

आबिद : मैंने वो hi तो कहा जो सच है.... सुलतान एक शैतान है.....

प्रिंस : लगता है तू ऐसे नहीं बताएगा....

फिर ज़रा की तरफ देख के कहता है....

प्रिंस : ज़रा मुझे 2 मिनट्स के अंडर इसके मुँह से सच सुन्ना है....

प्रिंस ने अभी इतना कहा hi था की तभी ज़रा घायल शेरनी की तरह आबिद पे टूट पड़ती है.... वो जैम के उसकी धुलाई करने लगती है... आबिद की चीखों के साथ साथ उसकी हड्डियों के टूटने की आवाज़ भी आ ने लगती है.... जब आबिद से और दर्द बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है तब वो सब सच बताने को तैयार हो जाता है....

आबिद : आआआआगगजघ्हहहहहह.... बस करो रेहम करो मुझपे.... मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकता.... मैं सब सच बताने को तैयार हूँ.... मैंने झूट कहा था... सुलतान शैतान नहीं है.... बल्कि वो प्रिंस है... इस पूरे ब्रह्माण्ड का बादशाह.... प्रिंस ऑफ़ गैलेक्सी.... ये सब मैंने शैतान के पुजारी शाखा के कहने पे किया था.... यही सच है...

जहाँ आबिद की बात सुन के सब चौंक जाते हैं वहीँ प्रिंस गुस्से में आगे बढ़ के खींच के उसके कान के नीचे एक झन्नाटेदार थप्पड़ रसीद करता है....

Chataaaaaaaaaaaak....

प्रिंस : पूरा सच बता.... मुझे पूरा सच जान न है....

आबिद : ये सब मैंने काली शक्तियों को पाने के लिए किया.... ताकि मैं जिस लड़की या औरत को चाहे उसे अपना गुलाम बना के उस की जवानी का रास पी सकूँ.... मैंने बहुत सी लड़कियों और औरतों के जिस्म को देखा है उनकी जवानी के मज़े लुटे हैं.... मगर तुम्हारी माँ की बात hi अलग थी.... वो इस दुनिया की सब से खूबसूरत औरत थी.... मैंने हर तरह से उसे अपने नीचे लाने की कोशिश की मगर मुझे हमेशा नाकामी hi हासिल हुई.... सीधे तरीके से मैं उसे हासिल नहीं कर सकता था तब मैंने शैतान के पुजारी शाखा से मदत मांगी.... वो इस शर्त पे मेरी मदत करने को तैयार हो गया की मैं उसे सुलतान ला के दूँ.... ताकि वो सुलतान से उसकी असीम पावर्स हासिल कर सके.... मगर सुलतान को सब की नज़रों से दूर शाखा के पास ले जाना आसान नहीं था.... हर पल हर लम्हा कोई न कोई सुलतान के पास मौजूद रहता था.... सोना तो उसे एक पल के लिए भी खुद से अलग नहीं होने देती हर लम्हा उसे साथ चिपकी रहती.... सुलतान से प्यार जो इतना करती थी.... यही हाल शहनूर की बेटी मासूम का भी था... वो भी एक पल के लिए भी सुलतान से दूर नहीं होती थी.... ऐसे में सुलतान को शाखा के पास ले जाना नामुमकिन बात थी... ये काम तभी हो सकता था जब मैं सब की नज़रों में सुलतान को शैतान साबित कर दूँ.... मैंने एक प्लान बनाया और उसपे अमल करने लगा.... धीरे धीरे मैं सुलतान को सब की नज़र में शैतान साबित करने में कामियाब हो गया... घर में सब उस से नफरत करने लगे... सब उसे शैतान समझने लगे.... यहाँ तक की उसे अपनी जान समझने वाली सोना भी सुलतान से नफरत करने लगी.... सब ने उस से नाता तोड़ लिया.... सुलतान के माँ डैड और शहनूर के बाद एक मासूम hi ऐसी थी जिसे सुलतान पे पूरा यकीन था... वो ये मान ने को कभी तैयार hi नहीं हुई की सुलतान शैतान है.... सब के कहने पे सुलतान के माँ बाप उसे ले के घर के दूसरे हिस्से में रहने लगे.... सुलतान को सब से अलग करने के बाद भी मैं उसके माँ बाप और मासूम को उस से अलग नहीं कर पाया.... मुझे समझ नहीं आ रहा था की मैं क्या करूँ कैसे सुलतान की माँ शिफा के जिस्म को हासिल करूँ....? कैसे सुलतान को शैतान के पुजारी शाखा के पास ले के जाऊं....? कैसे.... तभी अचानक से एक दिन मेरी किस्मत ने मेरा साथ दिया और सुलतान अपने माँ बाबा और मासूम के साथ घूमने फार्महाउस चला गया....

ये बात मैंने शका को बता दी.... शका फ़ौरन वहां आ पहुंचा.... और उसने सुलतान को वहां से ले जाने की कोशिश की.... मगर वो उसमे कामियाब नहीं हो सका.... जाने वो कौनसी शक्ति थी जिसने शका को सुलतान तक नहीं जाने दिया.... न hi उसके माँ बाप और मासूम तक पहुँचाने दिया.... शका उन्हें तकलीफ तो दे पाया मगर मार न पाया....

मैक्स : मगर प्रिंस के माँ डैड और मासूम तो मर चुके थे न.... उनकी लाश फार्महाउस में मिली थी....

आबिद : नहीं वो लाश उनकी नहीं थी.... वो शका ने अपने जादू से वहां उनकी जगह किसी और की लाश दाल दी थी.... वो तीनो आज भी ज़िंदा हैं....

आबिद की बात सुन के प्रिंस बेहद खुश हो जाता है वो फ़ौरन आबिद के पास जा के उस से अपने माँ डैड और मासूम के बारे में पूछने hi वाला होता है की तभी अचानक से आबिद....??????

(वर्ड काउंट 3264)
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 150

आबिद : अचानक से एक दिन मेरी किस्मत ने मेरा साथ दिया और सुलतान अपने माँ बाबा और मासूम के साथ घूमने फार्महाउस चला गया....

ये बात मैंने शका को बता दी.... शका फ़ौरन वहां आ पहुंचा.... और उसने सुलतान को वहां से ले जाने की कोशिश की.... मगर वो उसमे कामियाब नहीं हो सका.... जाने वो कौनसी शक्ति थी जिसने शका को सुलतान तक नहीं जाने दिया.... न hi उसके माँ बाप और मासूम तक पहुँचाने दिया.... शका उन्हें तकलीफ तो दे पाया मगर मार न पाया....

मैक्स : मगर प्रिंस के माँ डैड और मासूम तो मर चुके थे न.... उनकी लाश फार्महाउस में मिली थी....

आबिद : नहीं वो लाश उनकी नहीं थी.... वो शका ने अपने जादू से वहां उनकी जगह किसी और की लाश दाल दी थी.... वो तीनो आज भी ज़िंदा हैं....

आबिद की बात सुन के प्रिंस बेहद खुश हो जाता है वो फ़ौरन आबिद के पास जा के उस से अपने माँ डैड और मासूम के बारे में पूछने hi वाला होता है की तभी अचानक से आबिद....??????

अब आगे....

प्रिंस को अपने करीब आते देख आबिद बुरी तरह से दर जाता है.... उसे ऐसा लगने लगता है जैसे की सच जान ने के बाद प्रिंस उसे जान से मारने के लिए उसके करीब आ रहा है.... मौत का खौफ उस पे इस कदर हावी होता है की उसके दिमाग को तेज़ झटका लगता है और देखते hi देखते उसे पैरालिसिस का अटैक आ जाता है... उसके जिस्म का राइट साइड का पूरा हिस्सा बेजान सा हो जाता है... यहाँ तक की उसका आधा चेहरा और जुबां भी.... प्रिंस उस के करीब जा के उस से अपने माँ डैड और मासूम के बारे में पूछता है.... मगर आबिद अब इस हालत में नहीं है की उसे कुछ भी बता सके.... इस बात से प्रिंस गुस्से से पागल सा हो जाता है.... और चीखने लगता है....

प्रिंस : Kyuuuuuuuuuuuuun....? आखिर क्यूँउउउउन.....? ये सब मेरे hi साथ kyuuuuuuuuuun....? Kyuuuuuuuuuun....? मुझे तकलीफ दे के सब को ख़ुशी मिलती है....? Kyuuuuuuuuuuun...? आखिर क्यों मेरी गलती न होने पे भी वो लोग जो मुझे चाहने का दावा करते हैं... मेरी hi जान के दुश्मन बने हुए हैं kyuuuuuuuuuuunnn....? क्यों मुझे सच्चा प्यार नसीब नहीं होता kyuuuuuuuuuuunnn...? क्यों गलती न होने पे भी मेरे साथ मेरे hi सो कॉल्ड अपनों ने हैवानो जैसा सलूक किया kyuuuuuuuuuuun....? क्यों मेरे माँ डैड के ज़िंदा होने के बावजूद मैंने एक अनाथ की ज़िन्दगी गुज़ारी kyuuuuuuuuuuunnn....?

ये कह के प्रिंस पागलों की तरह चीख रहा है उसकी आँखों से बेतहाशा आंसू बह रहे हैं.... उसका दिल तड़प रहा है... उसकी ऐसी हालत देख सब का दिल रो रहा है.... सच जान के प्रिंस के परिवार वाले शर्मिंदगी से गड़े जा रहे हैं.... उन्हें आबिद से ज़्यादा खुद पे गुस्सा आ रहा है की कैसे उसकी बातों में आ के उन सब ने सुलतान के बेक़सूर होने के बाद भी उसे कसूरवार समझ के उसपे बेइन्तेहाँ ज़ुल्म किया.... सब से ज़्यादा तो सोना जो सुलतान को चाहने का दावा करती थी... उस ने अपने वेह्शीपन की इन्तेहाँ कर दी... सुलतान पे इतना ज़ुल्म किया की शैतान भी देख के शर्मा जाए....

प्रिंस काफी देर तक रोटा रहते है.... गुस्से में चीखता रहता है... प्रिंस को इतने गुस्से में देख किसी की हिम्मत नहीं होती की उसके करीब भी जा सके... प्रिंस का दर्द उसकी तड़प देख आस्मां का कलेजा भी पहात पड़ता है... और तेज़ बारिश शुरू हो जाती है.... कुछ देर बाद प्रिंस अपना सर ऊपर उठता है और बेहद गुस्से में चीखते हुए कहता है....

प्रिंस : अब बस बहुत सेह लिया मैंने.... अब और नहीं.... अब से सिर्फ और सिर्फ वो होगा जो मैं चाहूंगा.... अब से जो मेरे साथ जैसा करेगा वो मुझसे बिलकुल वैसा hi पायेगा... (फिर पलट के सोना महक और बाकी घर वालों को देख के कहता है....) जिस ने मेरे साथ जैसा किया है उसे वैसा hi मिलेगा... अब दर्द देने की बारी मेरी है और सहने की बारी तुम सब की... मैं इस पूरे खानदान के लोगों की वो हालत करूँगा की फिर कोई किसी निर्दोष मासूम के साथ कुछ भी गलत करने के नाम से भी डरेगा.... मैं सब को ऐसे ज़खम दूंगा जिसका कोई निशाँ न होगा बस कुछ होगा तो वो होगी तकलीफ... बेइन्तेहाँ तकलीफ.... वो तकलीफ जो मैं बचपन से ले के आज तक सेहत आया हूँ.... उस तकलीफ की शुरुवात शहनूर माँ ने सालो पहले इन कमीनो को श्राप दे के पहले hi कर दी है.... साले बड़े मर्द बन के एक मासूम पे ज़ुल्म करते थे न... अब साले सब के सब नामर्द बन के घूम रहे हैं... सालों के पास लुंड तो है मगर किसी काम का नहीं.... (अरबाज़ की तरफ देख के) क्यों चाचा जान मैंने ठीक कहा न.... हहहहहहहहह... अब इस घर की कोई भी लड़की या औरत कभी माँ नहीं बन पाएगी... सब की सब बाँझ बन के रह जायेगी... जल्द hi इस गलीज़ खानदान का नामोनिशान पूरी तरह से मिट जाएगा... और ऐसा होना भी चाहिए... हैवानो के साथ न कभी अच्छा हुआ है और न hi आगे कभी अच्छा होगा.... (फिर मैक्स की तरफ देख के कहता है) मैक्स मुझे इस सो कॉल्ड पूरे खानदान की जन्मकुंडली चाहिए... ख़ास कर के मुझे ये जान न है की मेरे साथ हैवानो जैसा सलूक करने वाले इस खानदान के वो कौन कौन महान लोग हैं....? अब चलो यहाँ से मुझे इन हैवानो के पास खड़े रहने से भी घिन आ रही है....

प्रिंस शनाया रूही ज़रा और बाकी सब के साथ घर के दूसरे हिस्से की तरफ चल देता है.... प्रिंस के परिवार के लोग छह के भी उसे रोक नहीं पाते... रोकते भी तो किस मुँह से.... उन्होंने उसके साथ ऐसा हैवानो वाला सुलूक किया है जिसकी कोई माफ़ी नहीं...

सब के जाने के बाद....

इमरान हैरत और गुस्से में : अरबाज़ भाई... घर में इतना सब हो गया और आप ने मुझे बताना तक ज़रूरी नहीं समझा.... आप ने तो कहा था की शाहबाज़ भाई शिफा भाभी और सुलतान की मौत एक एक्सीडेंट में हुई थी.... तो फिर ये सब क्या है जो प्रिंस और आबिद जीजू ने कहा.... क्या वाकई में वो सच है जो मुझे अभी पता चला है....? बताइये मुझे जवाब दीजिये....

इमरान की बात सुन के अरबाज़ हाँ में अपनी गर्दन हिला देते हैं....

इमरान शॉकेड : कैसे भाई कैसे...? आप सब एक मासूम के साथ ये सब कैसे कर सकते हैं.... उस मासूम ****** के बच्चे के साथ ऐसा हैवानो जैसा सलूक करते वक़्त क्या एक पल के लिए भी आपकी रुक नहीं काम्पी.... कैसे आप ने उस मासूम बच्चे के साथ हैवानो से भी बत्तर सलूक किया.... आप सब मिल के शैतान उस बच्चे को कहते रहे जबकि हैवानियत भरा काम आप सब ने किया... शैतान वो नहीं बल्कि आप सब हैं... सच जान ने के बाद मुझे तो आप सब को अपना कहते हुए भी शर्म आ रही है मगर शायद आप सब को अपने किये पे ज़रा भी शर्मिंदगी नहीं होगी.... है न...

अरबाज़ : इमरान ये सब बातें हम बाद में भी कर सकते हैं... अभी सब से ज़्यादा ज़रूरी आबिद को हॉस्पिटल ले जाना है... उसे वक़्त पे हॉस्पिटल न ले जाय गया तो कहीं उसे कुछ हो न जाए...

इमरान : आप सब में इंसानियत शायद पूरी तरह से मर चुकी है... है न... तभी तो आप अब भी प्रिंस का साथ देने के बजाये इस शैतान का साथ दे रहे हैं... सच जान ने के बाद भी आज आप को प्रिंस की नहीं बल्कि इस कमीने आबिद की फ़िक्र है...

अरबाज़ : हाँ मुझे इसकी फर्क है क्यों की भले की ये एक कमीना इंसान है इसकी वजह से सब बर्बाद हो गया.... मगर... हाँ मगर न चाहते हुए भी ये आज भी हमारी बेहेन का सुहाग है... मैं इसे इस तरह मरने के लिए नहीं चोर सकता... मैं अपनी बेहेन को विधवा होते हुए नहीं देख सकता....

इमरान : किस बेहेन की बात कर रहे हैं आप... उस बेहेन की जिसने अपने इस कमीने पति के साथ मिल के अपने hi बड़े भाई अपनी बेहेन जैसी भाभी और मासूम बच्चे सुलतान की जान लेने की कोशिश की.... अपने सेज भतीजे सुलतान की ज़िन्दगी को जहन्नुम बना के रख दिया... उस बेहेन की बात कर रहे हैं आप... अरे डायन भी सात घर चोर के वार करती है मगर उसने तो अपने hi घर को बर्बाद कर दिया.... आप उस डायन के लिए परेशान हो रहे हैं.... आप को जाना है तो आप शौक से जा सकते हैं... मगर इस सब के लिए मुझसे किसी भी मदत की उम्मीद नहीं रखियेगा... न मैं न मेरी बीवी और न hi मेरी दोनों बेटी.... हम में से कोई भी अब न तो आप में से किसी का साथ देगा और न hi आप की कोई मदत करेगा.... आज से प्रिंस की तरह हम भी आप के कोई नहीं....

ये कह के इमरान गुस्से में अपनी बीवी को ले के अपने रूम में चला जाता है....

इमरान ने जो भी कहा वो सच है मगर अरबाज़ अपने बहनोई को इस हाल में मरने के लिए भी तो नहीं चोर सकता था... भले hi आबिद एक शैतान सही मगर फिर भी आखिर है तो वो इसका बहनोई.... उसकी बेहेन का सुहाग... न चाहते हुए भी अरबाज़ और जमीला आबिद को हॉस्पिटल ले जाते हैं... उनके जाने के बाद....

इमरान की दोनों बेटी ऐना और मीणा बेहद गुस्से में सोना और महक से पूछती हैं...

दोनों : सोना दी ये सब क्या है....? महक दी बताइये क्या ये सब सच है जो हम ने अभी सुना....? क्या वाकई में प्रिंस हमारा भाई सुलतान है...? बताइये....

सोना आँखों में आंसू लिए हाँ में अपनी गर्दन हिला देती है....

दोनों : अगर ये सच है तो कहीं वो भी तो सच नहीं जो अभी आबिद फूफा और प्रिंस ने कहा.... बताइये....

सोना इस बार भी आँखों में आंसू लिए न चाहते हुए भी हाँ में अपनी गर्दन हिला देती है....

सोना की हाँ सुन के दोनों को एक झटका सा लगता है....

दोनों बेहद गुस्से में : कैसे दी कैसे आप सब ऐसा कर सकती हैं.....? कैसे...? कह दीजिये अभी जो हम ने सुना वो झूट है....

सोना रट हुए : नहीं ये सब सच है....

दोनों : दी क्या आप मेरे एक सवाल का जवाब सच्चे दिल से देंगी.... ये जो आज तक आप सुलतान से प्यार करने का दावा करती थी.... क्या वो सब एक झूट था... ? एक फरेब था.....?

सोना : नहीं वो सब सच था... मैं सुलतान को दिल ो जान से चाहती थी चाहती हूँ और मरते दम तक चाहती रहूंगी....

दोनों चीखते हुए : झूठ बोलती हैं आप... आपने कभी सुलतान से दिल से प्यार किया hi नहीं.... ये सब बस आप जुबां से कहती आयी हैं.... जानती हैं क्यों....? क्यों की जहाँ सच्चा प्यार होता है वहां यकीन होता है.... बिना यकीन के प्यार नहीं हो सकता.... प्यार एक एहसास है.... सच्चे दिल से किसी को चाहने का नाम प्यार है.... प्यार करने वाले अपने प्यार पे हस्ते हस्ते अपनी जान तक लुटा देते हैं... न की किसी गैर की बात सुन के अपने hi प्यार पे शक कर के उसके साथ हैवानो से भी बत्तर सलूक करते हैं.... आप को पता है मैं हमेशा से आप जैसा बनना चाहती थी... एक परफेक्ट गर्ल... मैं आप की हर एक खूबी पाना चाहती थी.... मैं हमेशा hi ऊपर वाले से इस बात से नाराज़ रही की उसने मुझे आप जैसा क्यों नहीं बनाया... मगर आज मैं इस बात पे ऊपर वाले से बेहद खुश हूँ उसका शुक्र है की उसने मुझे आप जैसा हैवान नहीं बनाया.... एक वक़्त था जब मुझे आप दोनों को दी कहने में गर्व महसूस होता था... मगर अब आप दोनों की सच्चाई जान ने के बाद मुझे आप दोनों को दी कहने पे भी गईं आती है... इस वक़्त मेरा दिल कर रहा है की मैं आप दोनों को जान से मार दूँ... मगर नहीं अगर मैंने ऐसा किया तो ये सुलतान के साथ न इंसाफ़ी होगी.... आप दोनों उसकी गुनेहगार हैं... वो खुद अपने हाथों से आप दोनों को सजा देगा तब जाके उस मासूम के साथ इन्साफ होगा.... जानती हैं जब आप ने उस मासूम पे महक का किडनैप करने का इलज़ाम लगाया था तब मुझे आप की बात सही लगी और उस पे बेहद गुस्सा आया था... मगर अब जब सच्चाई सामने आयी तो अब मुझे खुद पे गुस्से आ रहा है की मैंने अनजाने में hi सही उसे गलत कैसे समझा.... पता नहीं इस बात के लिए वो मुझे माफ़ करेगा भी की नहीं मगर हाँ आप दोनों की हैवानियत तो कतई माफ़ी के काबिल नहीं है.... जाइये कहीं जा के अपना मुँह छुपा लीजिये कहीं दुनिया वालों को आप दोनों की करनी का पता न चल जाए.... अगर कहीं ऐसा हुआ तो फिर कभी कोई भाई अपनी बेहेन और अपने परिवार वालों पे भरोसा नहीं करेगा.... और हाँ ये कान खोल के सुन लीजिये आज के बाद सुलतान से साथ साथ आप की ये दोनों बेहेन भी आपके लिए मर गयी.... अब से हमारा आप दोनों के साथ कोई रिश्ता नहीं....

ये कह के ऐना मीणा अपने रूम में चली जाती हैं.... सोना और महक अपने रूम में जा के अपने किये पे शर्मिंदगी महसूस करके पागलों की तरह रोने लगती हैं....

अगली सुबह घर की बेल्ल बजने से सब की नींद खुलती है.... इमरान उदास मन से जा के दरवाज़ा खोलते हैं सामने प्रिंस को देख बुरी तरह से चौंक जाते हैं....

इमरान : प्रिंस इतनी सुबह सुबह तुम यहाँ सब खैरियत तो है....?

प्रिंस घर में घुसते हुए : अपनी तो सब खैरियत है चाचू... अपने चाहने वालों की खैरियत पता करने चला आया.... मैंने सोचा क्यों न आज की इस सुहानी सुबह को और खुशनुमा बना दिया जाए.... क्यों क्या कहते हैं चाचू...?

इमरान : प्रिंस तुम्हारे साथ इन सब ने मिल के जो भी कुछ किया न मुझे उसके बारे में कुछ पता था और न hi मैं उस सब में शामिल था... जब ये सब हुआ तब मैं यहाँ था hi नहीं... अपने बीवी बच्चों के साथ चेन्नई में था.... करीब एक साल बाद जब मैं यहाँ आया तब मुझे ये बताया गया की शाहबाज़ भाई शिफा भाभी और तुम्हारी मौत एक एक्सीडेंट में हुई थी.... इस सब ने जो भी कुछ तुम्हारे या भाई भाभी के साथ किया उस सब में मेरा कोई हाथ नहीं... मगर हाँ अब मैं इन में से किसी को नहीं छोड़ूंगा... इस सब को भाई भाभी और तुम्हारे साथ किये हर एक ज़ुल्म का हिसाब देना होगा.... मैं इन के साथ वो करूँगा की ये....

प्रिंस : रिलैक्स चाचू रिलैक्स... वो सब आप मुझ पे चोर दीजिये... वो सब मैं देख लूंगा... मुझे पता है की अब मुझे क्या करना है... और उसी की शुरुवात करने मैं यहाँ आया हूँ... ये देखिये फाइल.... जानते हैं इसमें क्या है... इसमें हमारे इस सो कॉल्ड खानदान का लोगों के नाम और उनकी पूरी जन्मकुंडली है... इस सो कॉल्ड खानदान में कौन मेरा अपना है और कौन पराया ये सब लिखा है.... आप बस देखते जाइये की अब मैं क्या करता हूँ....

फिर ज़रा को कुछ इशारा कर के प्रिंस एक रूम की तरफ बढ़ जाता है...

इमरान : प्रिंस वहां कहाँ जा रहे हो....?

प्रिंस : अपने रूम की तरफ जा रहा हूँ.... ये वही रूम है न जहाँ मैं बचपन में रहा करता था... और अब इसे मेरा मक़बरा बना दिया गया है.... बस उसे hi देखने जा रहा हूँ...

ये कह के प्रिंस आगे बढ़ता है और रूम का दरवाज़ा खोल देता है.... ये वो hi रूम है जिसमे सोना किसी भी हालत में किसी भी भी जाने नहीं देती.... इस रूम में उसके सुलतान की बचपन की यादें जो हैं.... इस रूम को सोना ने बेहद hi खूबसूरती से सजाया हुआ है चारो तरफ अपने हाथों से सुलतान की पेंटिंग बना के लगायी हुई हैं.... घर का ये हिस्सा उसे अपनी जान से भी प्यारा है... इस में किसी को जाने की इजाज़त नहीं है.... अगर कोई गलती से भी इस रूम के पास पहुँच जाता है तो सोना तूफ़ान मचा देते है.... आज न सिर्फ प्रिंस उस रूम की तरफ गया है बल्कि वो उस रूम का दरवाज़ा खोल के उस रूम में दाखिल भी हो गया है... प्रिंस के रूम में जाते hi सोना अपने रूम से बहार आती है.... बहार इमरान चाचू को हैरत से सुलतान के रूम की तरफ देखता पा के वो चौंक जाती है फिर जब उसकी नज़र सुलतान के रूम के खुले गेट पे पड़ती है तब गुस्से से उसका दिमाग फटने लगता है... वो गुस्से से चीखते हुए कहती है....

सोना : किसकी इतनी हिम्मत हुई उस रूम का दरवाज़ा खोलने की....? बताइये मुझे किसने खोला उस रूम ko....tabhi प्रिंस बहार झाँक के कहता है मैंने....

प्रिंस को रूम में देख सोना बुरी तरह से चौंक जाती है.... वो छह के भी उसे कुछ नहीं कह पाती....

प्रिंस : अपने रूम में आने के लिए मुझे किसी की इजाज़त की ज़रुरत नहीं.... वैसे मेरे रूम का इतना बुरा हाल किसने किया.... इसे देख के ऐसा लग रहा है जैसे ये मेरा रूम नहीं बल्कि मेरी क़ब्र है.... और ये इतनी बेकार सी पेंटिंग किसने मेरे रूम में लगायी है.... इन बेकार की पेंटिंग की असली जगह ये नहीं बल्कि....

ये कहने के बाद प्रिंस जो करता है उसे देख सोना का दिल देहल जाता है... उसका कलेजा बेइन्तेहाँ दर्द से फटने लगता है.... उसकी आँखों से आंसुओं का सैलाब सा बहने लगता है.... वो पागलों की तरह रोने लगती है....

सोना : नहीं प्रिंस... नहीं रेहम करो... प्लीज ऐसा मत करो.... तुम्हे मेरी कसम प्लीज ऐसा मत करो.... तुम्हे ऊपर वाले का वास्ता ऐसा मत करो....

सोना की चीख सुन के सब अपने रूम से बहार आ के देखते हैं.... बहार जो हो रहा है उसे देख सब को बड़ी हैरानी होती है....

प्रिंस सोना के हाथों से बनायीं अपनी बचपन की साड़ी फोटोज को एक एक करके बड़ी बेदर्दी से रूम के बहार फ़ेंक रहा है.... जिसे देख सोना का दिल तड़प रहा है... उसका दिल रो रहा है उस से बर्दाश्त नहीं हो रहा.... धीरे धीरे प्रिंस साड़ी फोटोज को बहार फ़ेंक के रूम से बाहर आता है.... फिर सब फोटोज को एक जगह जमा कर के अपनी जेब से लाइटर निकाल है फिर लाइटर जला के कहता है....

प्रिंस : इन बेकार की पेंटिंग का इस घर में कोई काम नहीं.... इन को जला देना hi बेहतर है....

प्रिंस की बात सुन के सोना का दिल बुरी तरह से तड़प जाता है.... वो पागलों की तरह रट हुए हाथ जोड़ के प्रिंस को ऐसा करने से रोकती है.... मगर प्रिंस उसकी एक नहीं सुनता वो उस जलते हुए लाइटर को उन फोटोज पे दाल देता है और देखते hi देखते वो साड़ी फोटोज जलने लगती हैं.... जिसे देख जहाँ सोना पागलों की तरह रो रही है वहीँ प्रिंस ज़ोर ज़ोर से हंस रहा है....

हहहहहहहहह....

उन फोटोज को यूँ जलते देख सोना के साथ साथ महक की भी आँखों से बेतहाशा आंसू बहने लगते हैं.... उसका दिल भी तड़पने लगता है....

प्रिंस : ज़रा सोचो बस इस मामूली सी तस्वीरों को जलते देख तुम्हे इतनी तकलीफ हो रही है.... तो सोचो उस वक़्त मुझे कितनी तकलीफ हुई होगी जब तुम लोगों ने लोहे के इस गरम चिमटे से मेरी पीठ जलाई थी.... मैं भी इसी तरह दर्द से तड़पा होऊंगा.... मेरी आँखों से भी आंसू निकले होंगे... मेरी दर्द भरी चीखों से पूरा घर गूंजा होगा.... उस वक़्त क्या तुम्हे मुझपे ज़रा सा भी रेहम आया था... नहीं... बल्कि मेरी पीठ को बेरहमी से जलने के बाद तुम कितनी खुश हुई थी.... याद है... (प्रिंस हवा में इशारा करता है एक बार फिर से वहां स्क्रीन आ जाती है जिसपे वो नज़र आने लगता है जो सोना और बाकी सब ने सुलतान के साथ किया था...) वो देखो सामने हैवानियत का वो नंगा नाच जो तुम सब ने मिल के मेरे साथ खेला था... देखो कैसे उस लोहे के गरम चिमटे से मेरे पीठ जलाई थी.... आज तुम्हे तकलीफ में देख मेरे दिल को सुकून मिल रहा है.... मुझे ऐसा लग रहा है जैसे की उस वक़्त न सही मगर इस वक़्त सही तुम्हारी आँखों से ये बहते आंसू मेरी जाली हुई पीठ पे मरहम का काम कर रहे हैं.... जितना तुम तड़प रही हो उठा hi मुझे सुकून मिल रहा है.... वैसे तुम चाहो तो इन्हे जलने से बचा सकती हो मैं तुम्हे रोकूंगा नहीं....

प्रिंस की बात सुन के सोना दौर के वहां जाती है और उन जलती हुई फोटोज पे लगी आग को अपने हाथों से बुझाने लगती हैं... उसे ऐसा करते देख महक चीख उठती है....

महक : सोना तू पागल तो नहीं हो गयी.... ये क्या कर रही है....? क्यों अपने हाथ जला रही है....? ये फोटोज जल चुकी हैं इसे अब तू नहीं बचा सकती... दूर हैट यहाँ से....

अब तक साड़ी तस्वीर पूरी तरह से जल के राख हो चुकी है.... जिसे देख सोना गुस्से से पागल सी हो जाती है... वो पलट के बेहद गुस्से में प्रिंस से पूछती है...

सोना : आखिर तुम्हे क्या मिल गया ये सब करके....? बताओ मुझे....

प्रिंस : वो hi मिला जो तुम सब को मिला था मुझे बेइन्तेहाँ दर्द दे के....

फिर प्रिंस जो कहता है उसे सुन के वहां मजूद सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं....?????

(वर्ड काउंट 3482)
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 151

महक : सोना तू पागल तो नहीं हो गयी.... ये क्या कर रही है....? क्यों अपने हाथ जला रही है....? ये फोटोज जल चुकी हैं इसे अब तू नहीं बचा सकती... दूर हैट यहाँ से....

अब तक साड़ी तस्वीर पूरी तरह से जल के राख हो चुकी है.... जिसे देख सोना गुस्से से पागल सी हो जाती है... वो पलट के बेहद गुस्से में प्रिंस से पूछती है...

सोना : आखिर तुम्हे क्या मिल गया ये सब करके....? बताओ मुझे....

प्रिंस : वो hi मिला जो तुम सब को मिला था मुझे बेइन्तेहाँ दर्द दे के....

फिर प्रिंस जो कहता है उसे सुन के वहां मजूद सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं....?????

अब आगे.....

प्रिंस : बस बहुत हो गया.... बंद करो ये झूठा दिखावा करना.... मैंने कुछ गलत नहीं किया है... मैंने तो वो hi लौटाया है जो तुम लोगों ने मुझे दिया था... नफरत... बेइन्तेहाँ नफरत.....

सोना : वो सब हम ने अनजाने में किया मगर तुम सब जान बूच के कर रहे हो....

प्रिंस : अनजाने में..... लो जी और सुनो... अपने गुनाह छुपाने का अच्छा बहाना बनाया है.... सोना मैडम ने....

सोना : ये बहाना नहीं बल्कि सच है.. हम उस वक़्त बच्चे थे.... हम में उतना दिमाग न था.... हम फूफा जी की बातों में आ गए थे... वैसे भी वो हमारे अपने हैं... उस वक़्त उन्होंने जो कहा वो हम ने मान लिया.... इस में हम ने गलत क्या किया.... बताओ मुझे....

प्रिंस : अगर वो तुम्हारे अपने थे तो फिर मैं कौन था....? बताओ मुझे जवाब दो.... क्या मैं तुम्हारा अपना नहीं था....? जब तुम लोगों ने उनकी बात मान ली तो फिर मेरी बात क्यों नहीं मानी...? तुम तो मुझसे प्यार करने का दावा करती थी न.... क्या यही था तुम्हारा प्यार....? की जिसे प्यार करने का दावा करो उसी से नफरत करो उसे बेइन्तेहाँ दर्द दो....? यहाँ तक की उसे जान से मारने की कोशिश करो.... क्या यही होता है सच्चा प्यार....? अगर हाँ तो ऊपर वाला किसी दुश्मन को भी ऐसा दिखावे वाला सच्चा प्यार न दे.... और अगर मुझसे इतनी hi नफरत है तो मेरी फोटो से यूँ दिखावे का लगाव क्यों....? बंद करो ये झूठे प्यार का दिखावा करना.... कहीं ऐसा न हो की तुम्हारे इस झूठे दिखावे का प्यार देख के लोग इसे सच मान ले.... और जब उन्हें तेरे इस कमीने पैन का पता चलेगा तब लोगों का सच्चे प्यार से भरोसा उठ जाएगा.... अभी तो बस शुरुवात है... देखना धीरे धीरे तुम्हारी ज़िन्दगी में मैं इतने दर्द भर दूंगा की तुम्हे खुद की ज़िन्दगी से नफरत सी हो जायेगी....

सोना : मानती हूँ की मैंने जो तुम्हारे साथ किया वो गलती नहीं बल्कि गुनाह था... और मुझे अपने किये हर गुनाह की बत्तर से बत्तर सजा मंज़ूर है.... मगर ये मंज़ूर नहीं की कोई ये कहे की मेरे दिल में सुलतान के लिए जो प्यार है वो झूठा है.... चाहे ये बात कहने वाला शख्स खुद सुलतान hi क्यों न हो.... सुलतान के लिए मेरा प्यार सच्चा और पाक है... उसे मेरे दिल से कोई नहीं निकाल सकता.... माना की इस वक़्त मेरा वो प्यार मुझसे जुड़ा है... मगर कसम है मुझे अपने सच्चे और पाक प्यार की जो मुझे अपने सुलतान से है.... मैं उस प्यार को वापिस पा के रहूंगी... चाहे उसे पाने के लिए मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े.... वो ज़ख़्म वो तकलीफ जो मैंने जाने अनजाने में अपने सुलतान को गलत मान के दी है उस से हज़ार गुना ज़्यादा ज़ख़्म मैं सहने को तैयार हूँ.... अब ये देखना है की मेरे प्यार की जीत होती है या फिर तुम्हारी नफरत की....

सोना की बात सुन के प्रिंस ज़ोर ज़ोर से हसने लगता है...

प्रिंस : हहहहहहहहहहह.... लो देखो इसे..... गौर से देखो सोना मैडम को ये नया खेल शुरू कर दिया इसने.... चलो अच्छा है अब इस खेल में काफी मज़ा आएगा.....

अभी प्रिंस ने ये कहा hi था की तभी एक लड़की घर में आती है जिसे देख वहां मौजूद सभी चौंक जाते हैं....

लड़की : सरप्राइज.....

उस लड़की की आवाज़ सुन के प्रिंस बुरी चौंक जाता है.... (ये तो उसकी आवाज़ hai....wo यहाँ कहाँ से आ गयी....?) फिर कुछ सोच के अचानक से प्रिंस के चेहरे पे मुस्कराहट फैल जाती है.... प्रिंस पलट के उसकी तरफ देखता है....

प्रिंस : ****** तुम यहाँ....

अभी प्रिंस ने इतना कहा hi था की तभी वो लड़की प्रिंस को देखते hi ख़ुशी से उछाल पड़ती है.... वो दौर के प्रिंस के करीब जाती है और उसके ऊपर कूद के कास के प्रिंस के सीने से लिपट जाती है.... साथ hi उसके पूरे चेहरे को पागलों की तरह चूमने लगती है....

उस लड़की को यूँ प्रिंस को किश करते देख सोना के साथ साथ वहां मजूद सभी लडकियां बुरी तरह से जल जाती हैं.... सब को यूँ जलते देख प्रिंस को मज़ा आने लगता है.... सब को ख़ास कर के सोना और महक को जलने के लिए प्रिंस भी कास के उस लड़की को अपनी बाहों में भर लेता है.... और आगे बढ़ के उसके होंठों को अपने मुँह में ले के चूसने लगता है.... प्रिंस के यूँ अचानक से उसे किश करते hi वो लड़की बुरी तरह से शॉकेड हो जाती है.. उसे इस बात की उम्मीद नहीं थी की प्रिंस उसे किश करेगा.... उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता... वो पूरे जोश में प्रिंस के होंठों को चूसने लगती है.... इधर बाकी सब के साथ साथ सोना और महक को भी उस लड़की पे बेहद गुस्सा आने लगता है.....

करीब 10 मिनट्स तक दोनों सब के सामने किश करते रहते हैं.... फिर जब उनकी सांस उखाड़ने लगती है तब जा के वो अलग होते हैं..... उनके अलग होते hi....

सोना गुस्से में : ये क्या तरीका है शीना....?

जी हाँ ये प्रिंस की पेरिस वाली दोस्त शीना hi है.... मगर ये यहाँ क्या कर रही है....? चलिए शीना से hi जान लेते हैं.... वो यहाँ कैसे और क्यों आयी है....?

सोना : तुझे ज़रा भी शर्म नहीं है... किसी अनजान को यूँ क्या कोई सब के सामने किश करता है क्या....?

शीना : कौन अनजान....? ये... ये तो प्रिंस है.... मेरा दोस्त.... मेरी जान मेरा सब कुछ....

शीना की बात सुन के सोना के साथ साथ सब बुरी तरह से चौंक जाते हैं..... सब के मुँह से एक साथ एक hi बात निकलती है और वो है क्या....?

Kyaaaaaaaaaaaa....?

शीना : हाँ और क्या.... पेरिस में हम स्कूल और कॉलेज में एक साथ hi पढ़ते थे.... (फिर प्रिंस को आँख मार के कहती है...) इतना hi नहीं हर काम हम साथ hi करते थे....

सब एक बार फिर से चौंक जाते हैं....

सब : Kyaaaaaaaaaaaa....?

ये तुम सब क्या पागलों की तरह बार बार क्या क्या कर रहे हो....?

प्रिंस : चोर न यार इन लोगों को.... तू ये बता अचानक से तू यहाँ कैसे आ गयी....? तुझे तो यहाँ आने से चीड़ थी न... फिर....

शीना : क्या करूँ यार तेरी याद ने मुझे यहाँ आने पे मजबूर कर दिया....

प्रिंस : वैसे तुझे पता कैसे चला की मैं यहाँ इंडिया में हूँ....?

शीना : विजय ने मुझे बताया....

प्रिंस : क्या....?

अभी शीना ने विजय का नाम लिया hi था की तभी दर के मारे विजय की हालत खराब हो जाती है... उसे ऐसा लगने लगता है जैसे की प्रिंस मार मार के उसकी हालत खराब कर देगा.... बस ये सोच के वो चुप चाप वहां से खिसकने लगता है.... मगर ज़रा की नज़र उस पे पद जाती है और वो उसे दबोच लेती है....

ज़रा : साले कमीने एक तो गलती करता है और ऊपर से उसकी सजा भुगतने के बजाये चुप चाप यहाँ से खिसक रहा है....

विजय : व.... वो... वो मैंने वो....

ज़रा : ये वो वो क्या कर रहा है... तुझे प्रिंस ने मन किया था न किसी को भी ये बताने से की हम इंडिया में हैं.... मगर तू है की.... साले एक बात तेरे पेट में नहीं पचि... उलटी करना ज़रूरी था क्या....? और कमीने बताया भी तो किसे इस चिपकू शीना को.... अब देख मैं तेरा क्या हाल करती हूँ....

ये कह के ज़रा विजय को पीटने लगती है.... प्रिंस फ़ौरन आगे बढ़ के ज़रा को रोकता है.... और विजय को उठता है.... प्रिंस को अपने इतने करीब पा के विजय दर के मारे कांपने लगता है.... और प्रिंस से माफ़ी मांगने hi वाला होता है की तभी प्रिंस जो कहता है उसे सुन के बुरी तरह से चौंक जाता है.....

प्रिंस : दर मत मैं तुझे मारने नहीं आया बल्कि अपनी इस शेरनी से तुझे बचने आया हूँ.... कहीं ये गुस्से में तुझे चीयर पहाड़ के न रख दे.... वैसे आज तू ने दिल खुश कर दिया मेरा... जानता है कैसे....?

विजय धीरे से न में अपनी गर्दन हिलता है....

प्रिंस : आज पहली बार तू ने जो किया वो ठीक किया.... माना की मेरे मन करने पे भी तू ने शीना को ये बताया की हम यहाँ इंडिया में हैं.... मगर इस से मैं तुझसे नाराज़ नहीं बल्कि खुश हूँ.... जानता है क्यों....? क्यों की मैं खुद शीना को यहाँ लाना चाहता था....

फिर सोना और महक की तरफ देखते हुए शीना को कास के गले लगा के कहता है....

प्रिंस : ये सच्ची और प्यारी दोस्त है मेरी.... और सब से बड़ी बात ये की ये मेरे साथ वफादार है.... चाहे कोई इसे कुछ भी कह दे ये कभी किसी और की बातों में आ के मुझपे शक नहीं करेगी इस बात का पूरा यकीन है मुझे... वो यकीन जो मुझे ज़रा शनाया रूही नेमत और सैर पे है... ये सब मेरा यकीन है.... मेरा गुरूर है... बल्कि मेरा hi हिस्सा है.... ये औरों की नहीं हैं इन्हे खुद से ज़्यादा मुझपे यकीन है.... अगर मैं अपनी जुबां से भी कहूं की मैं गलत हूँ तो इन में से कोई ये कभी नहीं मान सकता की मैं कभी गलत हो सकता हूँ...

प्रिंस की बातें सोना और महक के दिल में एक नुकीले खंजर की तरह चुभने लगती हैं... एक तो प्रिंस ने अपने चाहने वालों की लिस्ट में उनका नाम शामिल नहीं किया उल्टा उन्ही के सामने प्रिंस दूसरी लड़कियों को अपनी जान और अपना प्यार कह रहा है....

पेंस : ये सब मेरे लिए किसी की जान ले भी सकती हैं और मेरे कहने पे हँसते हँसते अपनी जान दे भी सकती है.... देखना चाहता है...

प्रिंस : शीना कुछ लोगों का कहना है की मैं शैतान हूँ.... इस बात पे तुम्हारा क्या जवाब होगा....?

शीना : तू और शैतान.... नामुमकिन.... तू नेकी का फरिश्ता है न की कोई शैतान.... और जो तुझे शैतान कहे वो कोई पागल hi हो सकता है या फिर अँधा....

प्रिंस : और अगर ये बात मैं खुद कहूं की मैं कोई फरिश्ता नहीं बल्कि एक शैतान हूँ तो....?

शीना : तो फिर मेरा ये जवाब होगा की पिछले 10 साल में तेरे मुँह से इस से खराब जोके मैंने आज तक नहीं सुना.... तू क्या अगर ऊपर वाला खुद आ के भी मुझसे ये कहे तू शैतान है तो मैं उसकी बात भी न मानु....

प्रिंस : मुझे पे इतना यकीन करने की वजह जान सकता हूँ....

शीना : जहाँ सच्चा प्यार होता है वहां यकीन खुद बहुद आ जाता है.... सच्चा प्यार सच्चे यकीन का hi दूसरा नाम है... जहाँ एक दूसरे पे यकीन नहीं वहां प्यार नहीं.... वो बस एक दिखावा है... और मुझे तुझपे खुद से भी ज़्यादा यकीन है.... वैसे अचानक से तू ये सवाल क्यों कर रहा है....?

प्रिंस : कुछ नहीं बस ऐसे hi.... किसी को ये बताना था की इस दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जो मुझ पे यकीन करते हैं.... किसी और की बातों में आ के मुझे शैतान नहीं समझते....

ये कहते कहते प्रिंस की आँखें नाम हो जाती हैं.... जिसे देख वहां मौजूद सभी के साथ साथ सोना और महक की आँखें भी नाम हो जाती हैं....

शीना तड़प के : क्या बात है प्रिंस ये अचानक से तेरी आँखें नाम क्यों हो गयी....? कुछ हुआ है क्या....?

प्रिंस : नहीं यार कुछ नहीं.... वो बस ऐसे hi बीता कुछ याद आ गया था....

शीना तड़प के : नहीं प्रिंस ज़रूर कोई तो बात है.... मैंने आज से पहले कभी तेरी आँखों में आंसू नहीं देखे.... आज 10 साल में पहली बार तेरी आँखों में नमी देखि है.... बता न क्या बात है...? किसी ने तुझसे कुछ कहा क्या....? बता मुझे मैं अभी उसकी जान ले लुंगी.... प्लीज बता...

प्रिंस : कुछ नहीं यार बस ऐसे hi... खैर मेरी चोर और ये बता तू अचानक से यहाँ कैसे आ गयी....?

शीना : प्रिंस तू बात को घुमा रहा है....

प्रिंस : यार तू तो हाथ धो के पीछे hi पद गयी... कहा न ऐसी वैसी कोई बात नहीं.... वो बस अपने लिए तुम सब का प्यार और साथ देख के दिल भर आया....

सोना और महक के साथ वहां मौजूद सब ये जानते हैं की प्रिंस को क्या याद आ गया.... और उसकी आँखें क्यों नाम हो गयी....

शीना : पक्का न यही बात है न....

प्रिंस कभी झूठ बोलता नहीं तो आज कैसे बोल देता.... तो वो बात बदलते हुए कहता है.....

प्रिंस : अरे देख तुझे मैं एक ख़ुशी की बात तो बताना भूल hi गया.... जानती है..... मेरे माँ और डैड ज़िंदा हैं....

प्रिंस की बात सुन के शीना शॉक हो जाती है... और साथ hi ख़ुशी से उछाल पड़ती है....

शीना ख़ुशी में : क्या तू सच कह रहा है....?

प्रिंस : हाँ शीना.... ये सच है.... मैं अनाथ नहीं हूँ.... मेरे भी माँ डैड हैं.... और जानती है वो ज़िंदा हैं.... है न ख़ुशी की बात... शुक्र है ऊपर वाले का की मेरे माँ डैड ज़िंदा हैं.... बचपन से मैं उनके प्यार को तरसता आया हूँ... जब भी स्कूल में पार्क में या कहीं और बच्चो को अपने माँ बाबा के साथ देखता था तब मुझे अपने अनाथ होने पे बेहद गुस्सा आता था मुझे बेहद तकलीफ होती थी.... मुझे ऐसा लगता था जैसे की मैं दुनिया का सब से बदनसीब बच्चा हूँ जिसके माँ बाबा उसके साथ नहीं हैं.... मेरे पास सब कुछ तो है.... बेशुमार दौलत.... वो सब कुछ जिसे पाना हर किसी की ख्वाहिश होती है.... मगर कुछ नहीं था तो वो था... माँ बाबा का साथ और प्यार... मैं हमेशा ये सोच सोच के रोया करता था की आखिर क्यों ऊपर वाले ने मुझे मेरे माँ बाबा से जुड़ा कर दिया....? क्यों उसे मुझपे ज़रा भी रेहम न आया....? क्यों उसने मुझे माँ बाबा के प्यार से महरूम कर दिया....? क्यों....?

फिर सोना और महक की तरफ गुस्से से देख के...

प्रिंस : मुझे ये नहीं पता था की मेरे माँ और बाबा को मुझसे दूर करने में ऊपर वाले का नहीं बल्कि कुछ नीचे वाले कमीने लोगों का हाथ है....

शीना : क्या मतलब....?

प्रिंस : मतलब ये की कुछ कमीने लोगों की वजह से मैं अपने माँ बाबा से दूर हो गया....

शीना : कौन हैं वो कमीने... बस एक बार तू मुझे उनका नाम बता.... मैं उन कमीनो की वो हालत करुँगी की वो मौत की भीख मांगेंगे मगर उन्हें मौत भी नसीब नहीं होगी... उन कमीनो को एक ज़िंदा लाश बना के रख दूंगी...

प्रिंस : उस से ज़्यादा ज़रूरी इस वक़्त मुझे अपने माँ बाबा को ढूंढना है.... वो ज़िंदा तो हैं मगर कहाँ हैं ये नहीं पता.... मुझे सब से पहले ये पता करना है की वो हैं कहाँ....? और फिर जल्द से जल्द उनसे मिलना है....

शीना : तो फिर देर किस बात की चल अभी साथ चल के उन्हें ढूंढते हैं....

प्रिंस : तू लम्बा सफर कर के आयी है तू आराम कर जब तक मैं ये पता लगता हूँ की वो कहाँ हैं... फिर साथ मिल के उन्हें लेने जाएंगे....

ये कह के प्रिंस वहां से जाने लगता है... की तभी शीना उस से जो सवाल करती है उसे सुन के वहां मौजूद सभी बुरी तरह से हिल जाते हैं.... उन्हें इस बात से बेहद घबराहट सी होने लगती है की शीना के सवाल का प्रिंस क्या जवाब देगा....?????

****************************************

इधर पेरिस में....

रानी साहिबा : बाबा अगर प्रिंस ने अपने माँ और बाबा के बारे में आप से पुछा तो आप क्या जवाब देंगे उसे....?

बाबा : इसी बात को ले के तो मैं भी परेशान बना हुआ हूँ.... मुझे भी समझ में नहीं आ रहा है की मैं प्रिंस से क्या कहूंगा....? सच उसे मैं बता नहीं सकता और झूठ उस से मैं कहना नहीं चाहता....

रानी साहिबा : तो क्या आप उसे सच बता देंगे....?

बाबा : अब इस के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं है....

रानी साहिबा : मगर आप ये भी अच्छे से जानते हैं की प्रिंस को सच बताने का क्या अंजाम हो सकता है.....?

बाबा : हाँ जानता हूँ.... मगर ये भी जानता हूँ की उसे सच बताना भी बेहद ज़रूरी है.... अभी प्रिंस के पास अपनी पूरी पावर्स नहीं हैं जिनकी मदत से वो सच का पता लगा सके.... इस वक़्त उसे सच खुद के बजाये किसी और से hi पता चल सकता है.... जिसमे दो hi ऐसे हैं जो उसे सच बता सकते हैं....

रानी साहिबा : वो दो लोग और कोई नहीं बल्कि एक आप हैं और दूसरा है शैतान अघुरा.... और अगर आपने प्रिंस से वो सच छुपाया तो शैतान अघुरा इस का पूरा फायदा उठाएगा.... वो उस सच को प्रिंस के सामने अलग तरीके से पेश करेगा.... जिस से प्रिंस उन्हें गलत समझने लगेगा जो उसके अपने हैं.... उन का कोई क्रूर न होते हुए भी प्रिंस उन्हें कसूरवार मान लेगा.... जो की गलत होगा.... बेहद गलत....

रानी : तो अब आप hi ये बताइये की क्या किया जाए....?

बाबा : मेरी तो खुद कुछ समझ में नहीं आ रहा है.... की क्या किया जाए प्रिंस को सच बताया जाए या नहीं....

रानी : क्यों न प्रिंस को आधा सच बताया जाए....

बाबा : आधा सच मतलब....

रानी साहिबा : आधा सच मतलब की उसे आप उतनी hi बातें बताइये जितनी की इस वक़्त के लिए ज़रूरी है.... फिर जब सही वक़्त आएगा तब उसे बाकी सब भी बात दीजियेगा.... क्यों की सही वक़्त आने पे उसे अपने आप सच का पता चल जाएगा.... जिस से वो अभी अनजान है.....

बाबा : शायद आप ठीक कह रही हैं.... इस वक़्त हमे प्रिंस को उतना hi सच बताना चाहिए जितना की इस वक़्त ज़रूरी है.... मैं उसे वो hi बताऊंगा जो ज़रूरी है....

क्या है वो सच जिसे प्रिंस को अभी बताने से रानी साहिबा के साथ साथ बाबा भी बेहद घबरा रहे हैं.....????? जल्द hi आप सब को उस बारे में पता चलेगा... जैसे जैसे स्टोरी आगे बढ़ेगी.... प्रिंस की पावर्स के साथ साथ उसे सच का पता भी चलता जाएगा....????

*****************************************

इधर हॉस्पिटल में.....

(वर्ड काउंट 3000)
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 152

बाबा : शायद आप ठीक कह रही हैं.... इस वक़्त हमे प्रिंस को उतना hi सच बताना चाहिए जितना की इस वक़्त ज़रूरी है.... मैं उसे वो hi बताऊंगा जो ज़रूरी है....

क्या है वो सच जिसे प्रिंस को अभी बताने से रानी साहिबा के साथ साथ बाबा भी बेहद घबरा रहे हैं.....????? जल्द hi आप सब को उस बारे में पता चलेगा... जैसे जैसे स्टोरी आगे बढ़ेगी.... प्रिंस की पावर्स के साथ साथ उसे सच का पता भी चलता जाएगा....????

अब आगे....

इधर हॉस्पिटल में दो लोग काफी परेशान हैं.... दोनों की निगाहें हर तरफ प्रिंस को ढूंढ रही है.... उन्हें बड़ी बेसब्री से प्रिंस के आने का इंतज़ार है.... ये दोनों और कोई नहीं सैर और कुसुम हैं....

इधर घर में....

प्रिंस : तू लम्बा सफर कर के आयी है... आराम कर जब तक मैं ये पता लगता हूँ की वो कहाँ हैं... फिर साथ मिल के उन्हें लेने जाएंगे....

ये कह के प्रिंस वहां से जाने लगता है... की तभी शीना उस से जो सवाल करती है उसे सुन के वहां मौजूद सभी बुरी तरह से हिल जाते हैं.... उन्हें इस बात से बेहद घबराहट सी होने लगती है की शीना के सवाल का प्रिंस क्या जवाब देगा....?

शीना : प्रिंस तू ने ये नहीं बताया की तू यहाँ क्या कर रहा है....?

प्रिंस : पहले तू मुझे ये बता की तू यहाँ कैसे....?

शीना : ये मेरे शाहबाज़ मां का घर है.... अब तू बता की तू यहाँ कैसे....?

प्रिंस : मैं तेरे उसी मां का बीटा हूँ....

प्रिंस की बात सुन के शीना शॉकेड हो जाती है...

शीना शॉकेड : Kyaaaaaaaaaaa....?

प्रिंस : इस में इतना शॉकेड होने वाली क्या बात है....?

शीना : मैं शॉकेड इस लिए हूँ क्यों की मेरे पूरे खानदान में बड़े मां को चोर के किसी को भी बीटा नहीं हुआ वो भी सिर्फ एक.... और बाकी सब को सिर्फ बेटियां hi हुई.... और मां के उस लड़के का नाम प्रिंस नहीं बल्कि सुलतान था....

प्रिंस : जी हाँ और वो सुलतान मैं hi हूँ....

शीना : मगर ये कैसे मुमकिन है.... मामा मामी और सुलतान तो सालों पहले मर गए थे.... उनका एक्सीडेंट हुआ था.... अरबाज़ मां ने तो फ़ोन पे हम को यही बताया था.... तो जब सुलतान मर चूका है तो वो ज़िंदा कैसे हो सकता है....

प्रिंस : चल एक पल के लिए ये मान लिया की तू जो कह रही है वो सच है.... तो इसका मतलब ये हुआ की मैं झूठ कह रहा हूँ....

शीना : तू झूट कहे ये मुमकिन नहीं....

प्रिंस : तो इस का मतलब ये hi हुआ न की मैं hi सुलतान हूँ....

शीना : अगर मैं ये मान लून की तू सुलतान है तो सालों पहले जो मारा था वो कौन था....?

प्रिंस : वो सुलतान hi था....

शीना : तू क्या कह रहा है मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है... एक तरफ तू ये कह रहा है तू प्रिंस नहीं है बल्कि सुलतान है.... और दूसरी तरफ तू ये कह रहा है की सुलतान सालों पहले मर चूका है....

प्रिंस : हाँ....

शीना : क्या हाँ....? या तो तू पागल हो गया है या मुझे पागल बना रहा है.... अबे जब सुलतान सालों पहले मर चूका है तो वो ज़िंदा कैसे हो सकता है....?

प्रिंस : सालों पहले जो मारा था वो सुलतान था... और अभी तेरे सामने जो ज़िंदा खड़ा है वो प्रिंस है....

शीना : अब इन दोनों बात का मतलब क्या हुआ ये भी बता दे....?

प्रिंस सोना और महक की तरफ देख के : सालों पहले सुलतान मर चूका है.... यानी उसकी रूह मर चुकी है उसका वजूद उसका सब कुछ मर चूका है.... उसके अपने उसके लिए मर चुके हैं.... वो अपने जो उसे हैवानियत की हद तक चाहते थे.... उसे इतना चाहते थे की सारे जहाँ की नफरत भी काम पद जाए.... और उस नफरत की इन्तेहाँ तो तब हुई जब उन hi अपनों के सामने सुलतान ने अपना दम तोडा.... उसकी रूह उसका वजूद सब मिट गया.... और फिर जनम हुआ प्रिंस का जिसे तू पिछले 10 साल से जानती है.... जिसके साथ तू रही है.... तो बता हुआ न मैं सुलतान साथ hi प्रिंस भी....

प्रिंस की बातें शीना के अलावा बाकी सब की समझ में आ रही थी.... शीना अपनी सर खुजा के कहती है....

शीना : यार तू ने अभी जो कहा वो सब मेरे सर के ऊपर से गया..... उसमे मुझे बस ये समझ में आया की तू प्रिंस है... मेरा प्रिंस.... बाकी बातें बाउंसर चली गयी.... अबे तू क्या कह रहा है बताएगा.... एक तरफ तू कह रहा है की सुलतान के घर वाले उसे चाहते थे.... मगर वो चाहत हैवानियत की हद तक थी.... अबे चाहत में हैवानियत कहाँ से आ गयी.... और जो किसी को चाहता है वो उसे मार कैसे सकता है....? और जब किसी इंसान की रूह मर गयी तो वो ज़िंदा कैसे रह सकता है....?

शीना की बात सुन के प्रिंस मुस्कुरा के कहता है....

प्रिंस : तू न थक गयी है... तुझे आराम करना चाहिए.... तू ये सब चोर और जा के आराम कर मैं बाद में तुझे मिलता हूँ.... फिर सब आराम से अच्छे से बताता हूँ....

फिर नेमत से कहता है....

प्रिंस : नेमत जब तक मैं वापिस न आ जाऊं... तू अपना और शीना का पूरा ख़याल रखना.... किसी पे भी भरोसा मत करना समझी.... और हाँ याद रखना अगर तुम दोनों में से किसी को एक खरोच भी आयी तो तू जानती है... मैं क्या कर सकता हूँ....

ये कह के प्रिंस अपने दोस्तों के साथ वहां से बहार चला जाता है.... फिर सब को सैर के पास हॉस्पिटल जाने को बोल के खुद शहनूर माँ के घर की तरफ चल देता है....

इधर शहनूर अपने बंगलो में बीएड पे कोमा में बेजान सी पड़ी हुई है... उसका पूरा जिस्म बेजान बना हुआ है.... आँखें पत्र सी गयी हैं.... उन्हें देख के ऐसा लगता है जैसे की उन्हें किसी का इंतज़ार है....

प्रिंस पूछते पूछते शहनूर के बंगलो की तरफ बढ़ जाता है.... जैसे hi वो बंगलो में अपना कदम रखता है.... शहनूर के जिस्म को एक झटका सा लगता है.... जैसे जैसे प्रिंस के कदम घर के की दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगते हैं.... शहनूर के दिल की धड़कन तेज़ होने लगती है.... उनकी सालों सी पथराई आँखें इधर उधर घूम के किसी को तलाशने लगती हैं.... दरवाज़े पे पहुँच के प्रिंस बेल्ल बजता है.... और बेसब्री से दरवाज़े के खुलने का इंतज़ार करने लगता है.... काफी देर बाद दरवाज़ा खुलता है... सामने एक लड़की कड़ी है....

लड़की तेज़ लहज़े में : क्या है....?

उसे देखते hi जाने क्यों प्रिंस कुछ कह hi नहीं पाटा बस एक तक उसे देखता hi रह जाता है.... प्रिंस को कुछ न कहते देख वो एक बार फिर से उस से पूछती है....

लड़की : तुम कौन हो....? क्या चाहिए तुम्हे....?

इस बार भी प्रिंस कुछ नहीं कहता बस एक तक उसे देखता रहता है.... प्रिंस को कुछ न कहते साथ hi उसे यूँ खुद को घूरते देख उस लड़की को अब प्रिंस पे गुस्सा आने लगता है.... बड़ी मुश्किल से वो अपने गुस्से को दबा के कहती है....

लड़की : बोल नहीं सकते गूंगे हो क्या...?

प्रिंस : माँ....

इधर प्रिंस ने माँ कहा और उधर शहनूर का दिल उसकी आवाज़ और मौजूदी को सुन और महसूस कर के तेज़ी से धरकने लगा... सुलतान के आने की आहात उसका एहसास शहनूर हो होने लगा... उसकी आँखों से ख़ुशी के आंसू बहने लगे....

इस बार प्रिंस के मुँह से बस माँ निकलता है.... जिसे सुन के उस लड़की का दबा हुआ गुस्सा बहार आ जाता है और वो प्रिंस पे भड़क जाती है...

लड़की : क्या कहा माँ....? मैं तुम्हे माँ लगती हूँ.... मैं अभी बस 18 साल की हूँ और एक 18 साल की खूबसूरत और सेक्सी लड़की को तुम माँ कह रहे हो... तुम्हे शर्म नहीं आ रही....

इस के साथ वो न जाने और क्या क्या प्रिंस को सुनाने लग जाती है.... प्रिंस अब भी कुछ नहीं कहता बस एक तक उसे देखता hi रहता है.... और वो लड़की है की प्रिंस को बस सुनाये जा रही है.... उसकी आवाज़ सुन के वाहन एक और लड़की आ टी है....

लड़की : ये क्या आइना तू यूँ दरवाज़े से क्यों क्यों बात कर रही है....? तेरा दिमाग तो ठीक है न....?

ये कह के दूसरी लड़की हंसने लगती है...

आइना : जी नहीं अलीना मैं भी ठीक हूँ और मेरा दिमाग भी ठीक है... मगर ये (दरवाज़े के बहार खड़े प्रिंस की तरफ इशारा करके कहती है) इसका दिमाग खराब हो गया है और शायद आँखें भी.... तभी तो एक हॉट और सेक्सी लड़की को ये माँ कह रहा है....

आइना की बात सुन के इस बार अलीना और ज़ोर ज़ोर से हसने लगती है....

अलीना : हहहहहहहहह.... अरे मेरी नादान और भोली बहना.... दरवाज़े भी कभी बात किया करते हैं क्या...?

आइना : ः वैरी फनी... मैं जानती हूँ की दरवाज़े बात नहीं किया करते हैं मगर इंसान तो करते हैं न....

अलीना : ये तू किसकी बात कर रही है....?

आइना गुस्से में प्रिंस को घूरते हुए : ये जो बहार खड़ा मुझे माँ कह के बुला रहा है उसकी....

आइना की बात सुन के अलीना और ज़ोर ज़ोर से हँसते हुए कहती है...

अलीना : अबे तूने निकाह भी कर लिया साथ hi बच्चा भी पैदा कर लिया और मुझे बताया तक नहीं.... थिस इस नॉट राइट हाँ आइना... काम से काम अपने बेटे से तो मिलवा... मैं भी तो देखूं की तेरा सो कॉल्ड बीटा दीखता कैसा है....?

अलीना की बात सुन के आइना गुस्से में प्रिंस का हाथ पकड़ के उसे घर में खींच के अलीना से कहती है....

आइना : ले देख ले इसे....

किसी अनजान लड़के को देख के अलीना चौंक जाती है... उसकी हंसी कहीं गायब सी हो जाती है....

अलीना : ये कौन है...?

आइना गुस्से में : वो hi जो मुझे माँ कह रहा था....

अलीना: हे मिस्टर कौन हो तुम...? और यहाँ क्यों आये हो....?

अलीना की बात सुन के प्रिंस की तंत्र टूट टी है....

प्रिंस : माँ....

इस बार अलीना गुस्से से....

अलीना : क्या...?

प्रिंस : जी वो मुझे माँ से मिलना है...

अलीना : माँ से मिलना है तो अपने घर जाओ यहाँ क्यों आये हो....?

प्रिंस : जी आप समझी नहीं.... मुझे शहनूर माँ से मिलना है....

अलीना : माँ की तो सिर्फ हम तीन hi बेटियां थी.... ये अचानक से बीटा कहाँ से आ गया....? सीधे सीधे बताओ की कौन हो तुम....?

प्रिंस : जी मेरा नाम प्रिं.... ी मैं सुलतान है....

अलीना : कौन सुलतान....? हम किसी सुलतान को नहीं जानते...

अभी अलीना ने इतना hi कहा था की तभी किसी की चीख पूरे बंगलो में गूंजने लगती है....

ालीनाआआआआ.....

उस चीक को सुन के अलीना के साथ साथ आइना भी चौंक जाती है.....

दोनों के मुँह से एक साथ hi निकलता है....

दोनों : दादी....

ये कह के दोनों ऊपर की तरफ भागती हैं....

प्रिंस भी उनके पीछे पीछे जाता है....

अलीना : क्या हुआ दादी....? आप इस तरह से चीखी क्यों.....?

दादी शहनूर की तरफ इशारा कर के.....

दादी : व.... व.... वो.... शहनूर....

अलीना : क्या हुआ माँ को....?

दादी : वो वो उसकी आँखों से आंसू बह रहे हैं... साथ hi उसका दिल बहुत तेज़ी से धड़क रहा है....

दोनों के पीछे पीछे प्रिंस भी रूम में दाखिल होता है... जैसे hi उसके कदम रूम के अंडर पड़ते हैं.... शहनूर के मुँह से ज़ोर से चीख निकल जाती है...

शहनूर : Sultaaaaaaaaaaaaaaan....

सुल्तान का नाम ले के वो चीखती है फिर बेहोश हो जाती है.....

सालों के बाद शहनूर की आवाज़ सुन के सब ख़ुशी से उछाल पड़ते हैं वहीँ उसे फिर से बेहोश होते देख उदास हो जाते हैं....

अलीना : दादी.... माँ बोली.... आज सालों बाद माँ बोली....

दादी : हाँ मेरी बच्ची....

आइना ख़ुशी से उछलते हुए....

आइना : मतलब माँ ठीक हो गयी... वो कोमा से बहार आ गयी....

दादी : शायद हाँ....

आइना : फिर ये उठ क्यों नहीं रही....? ये बात क्यों नहीं कर रही है....?

प्रिंस : वो इस लिए क्यों की माँ अभी बेहोश हैं... और माँ को जल्द से जल्द हॉस्पिटल ले जाना चाहिए न की बातों में वक़्त बरबात करना चाहिए....

ये कह के प्रिंस शहनूर को अपनी गॉड में उठा के तेज़ी से बहार की तरफ चल देता है....

दादी : हे तुम कौन हो और मेरी बहु को कहाँ ले जा रहे हो....? अलीना रोक इसे....

दादी की बात सुन के अलीना आगे बढ़ के प्रिंस को रोकती है.... साथ hi अपने नौकरों और सिक्योरिटी गार्ड्स को भी आवाज़ देने लगती है.... फिर प्रिंस के सामने जा के कड़ी हो जाती है....

अलीना बेहद गुस्से में : मैं कहती हूँ मेरी माँ को चोर दो नहीं तो अच्छा नहीं होगा....

प्रिंस उसे समझने की बहुत कोशिश करता है.... की शहनूर को हॉस्पिटल ले जाना बेहद ज़रूरी है... मगर कोई उसकी बात सुन ने को तैयार hi नहीं....

अलीना की आवाज़ सुन के उसके नौकर और सिक्योरिटी गार्ड्स वहां आ जाते हैं प्रिंस का रास्ता रोकने लगते हैं.... उनको सामने से न हैट ते देख प्रिंस को गुस्सा आ जाता है और वो ज़ोर से चीखता है...

प्रिंस : सिक्योरिटी....

अभी प्रिंस ने इतना कहा hi था की तभी High-tech सिक्योरिटी गार्ड्स अंडर आ जाते हैं.... और वहां मौजूद सब के सर पे गन तान देते हैं....

प्रिंस : अब अगर किसी ने मुझे रोका तो अपनी मौत का ज़िम्मेदार वो खुद होगा.... तुम सब की भलाई इसी में है की मुझे माँ को हॉस्पिटल ले जाने दो....

अलीना : नहीं.... कभी नहीं.... हम तुम्हे माँ को कहीं नहीं ले जाने देंगे... जाने तुम कौन हो....? कहाँ से आये हो....? क्या चाहते हो....?

प्रिंस ज़ोर से चीखते हुए : आलू ये वक़्त बेहेस का नहीं है.... इस वक़्त सब से ज़्यादा ज़रूरी माँ को हॉस्पिटल ले जाना है कहीं ऐसा न हो की देर हो जाए और माँ को कुछ.....

ये कहते कहते प्रिंस खामोश हो जाता है और तेज़ी से बहार की तरफ चल देता है.... हाई - टेक सिक्योरिटी गार्ड्स और साथ hi सर पे लगी गन की वजह से किसी की हिम्मत नहीं हो रही की वो प्रिंस को रोक सके....

प्रिंस के मुँह से आलू सुन के अलीना के साथ साथ आइना और दादी भी चौंक जाते हैं.... इस से पहले की वो प्रिंस से कुछ पूछ पाती.... प्रिंस शहनूर को ले के कार तक पहुँच जाता है और उन्हें पिछली सीट पे लेता देता है... दादी और आइना भी चुप चाप शहनूर के पास कार में बैठ जाती हैं.... और अलीना आगे प्रिंस की बगल में.... प्रिंस तेज़ी से कार हॉस्पिटल की तरफ दौड़ा देता है.... प्रिंस की कार के साथ साथ उसकी कार के आगे और पीछे उसकी सिक्योरिटी की तीन तीन कार चल रही है जो ट्रैफिक को क्लियर करते हुए तेज़ी से आगे बढ़ रही है....

अलीना जहाँ हैरत से बस प्रिंस को hi देखे जा रही है.... वहीँ प्रिंस बेहद परेशान हाल में बार बार पीछे मुद के शहनूर की तरफ देख रहा है....

प्रिंस अपनी जेब से मोबाइल निकाल के मैक्स को कॉल कर के कहता है....

प्रिंस : मैक्स मेरी बात ध्यान से सुन.... शहनूर माँ की हालत बहुत खराब है मैं उनको ले के ******* हॉस्पिटल जा रहा हूँ.... मेरे पहुँचने से पहले Doctor's की पूरी टीम वहां पहुँच जानी चाहिए....

ये कह के प्रिंस फ़ोन कट कर देता है....

अलीना के साथ साथ आइना और दादी को भी प्रिंस की न तो कोई बात समझ में आ रही है और न hi कोई हरकत.... उन्हें ये समझ नहीं आ रहा है की आखिर प्रिंस शहनूर को माँ क्यों कह रहा है...? वो उनके लिए इतना परेशां क्यों है....? और उसने अलीना को आलू क्यों कहा....?

अलीना : क.... क.... कौन हो तुम....?

प्रिंस : .........

प्रिंस को कुछ न कहते देख अलीना एक बार फिर से प्रिंस से पूछती है....

अलीना : मैंने पुछा कौन हो तुम....?

इस बार भी प्रिंस उसकी बात का कोई जवाब नहीं देता.... वो बस या तो पीछे देखे जा रहा है या फिर तेज़ी से कार ड्राइव कर रहा है... कार की स्पीड देख सब के होश उड़े हुए हैं... क्यों की इस वक़्त कार अपनी फुल स्पीड में जा रही है.... एक हलकी सी टक्कर बेहद hi खौफनाक एक्सीडेंट को अंजाम दे सकती है... मगर प्रिंस को इस बात की कोई फ़िक्र नहीं है.... उसे बस फ़िक्र है तो वो है शहनूर माँ की जिसे वो जल्द से जल्द हॉस्पिटल पहुँचाना छह रहा है...

प्रिंस को इस बार भी कुछ न कहते देख अलीना उसे हिला के उस से एक बार फिर से वो hi सवाल करती है....

अलीना : तुम कौन हो...?

प्रिंस : सुलतान....

अलीना : सुलतान कौन...? और तुम मुझे आलू क्यों कह रहे हो....?

प्रिंस : क्यों की तुम्हारा नाम आलू है...?

अलीना : वो hi तो मैं पूछ रही हूँ की तुम्हे कैसे पता चला की मेरे बचपन का नाम आलू है...? क्यों की इस नाम से मुझे पीछे 10 साल से कोई नहीं बुलाता...

इस से पहले की प्रिंस कुछ कहता हॉस्पिटल आ जाता है..... प्रिंस जैसे hi कार को हॉस्पिटल के अंडर ले जाता है... वहां दो हेलीकाप्टर लैंड होते हैं.... उसमे से डॉ की टीम बाहर आती है....

प्रिंस शहनूर माँ को गॉड में उठा के हॉस्पिटल के अंडर ले जाता है....

प्रिंस : डॉ चाहे जो करना पड़े करो.... चाहे जितना पैसा लगे लगाओ.... जिसे बुलाना चाहो बुलाओ... ी don't केयर.... मुझे हर हाल में माँ ठीक चाहिए... सुना आप सब ने... हर हाल में जल्द से जल्द माँ को ठीक करो....

प्रिंस की बात सुन जहाँ अलीना आइना और दादी हैरत से उसे देखने लगते हैं वहीँ डॉ उनका चेक उप करने लगते हैं....

डॉ : इन की कंडीशन देख के लग रहा है की ये सालों से कोमा में थी....

प्रिंस : हाँ डॉ माँ करीब 10 साल से कोमा में थी...

डॉ : थी मतलब....?

अलीना : सालों के बाद आज हम ने इनकी आवाज़ सुनी..... आज अचानक से माँ ने चीखते हुए सुलतान कहा और फिर वो बेहोश हो गयी...

डॉ शॉकेड : ये चीख कैसे सकती हैं.... इनका चीखना मुमकिन नहीं है....? क्यों की ये अभी भी कोमा में hi हैं....

प्रिंस : क्या बात कर रहे हो डॉ....? सिर्फ मैंने hi नहीं बल्कि सब ने इनकी चीख सुनी है.....

डॉ : सालों से कोमा में पड़ा हुआ इंसान कैसे चीख सकता है....?

प्रिंस : ये भी हो सकता है की माँ कोमा से बहार आ गयी हो....? और तब माँ चीखी हो....

डॉ : जी नहीं ये अब भी कोमा में hi है....

शहनूर की आवाज़ सुन के प्रिंस को जो ख़ुशी मिली थी वो डॉ की बात सुन के गम में बदल जाती है... जाने क्यों प्रिंस की आँखें नाम हो जाती हैं....? शायद ये उस प्यार की वजह से हुआ है जो सुलतान के दिल में शहनूर माँ के लिए है.... डॉ की ये बात की माँ अभी भी कोमा में hi है ये प्रिंस से बर्दाश्त नहीं हो रही.... भले hi प्रिंस को इस वक़्त बीता कुछ भी याद नहीं.... उसके दिमाग में बीती बातें बेहद गहराइयों में दफ़न हुई पड़ी हैं.... मगर प्यार का वो एह्साह आज भी प्रिंस महसूस कर पा रहा है... वो hi एहसास शहनूर माँ ने भी महसूस किया है...

प्रिंस आँखों में आंसू लिए शहनूर की तरफ बढ़ता है और प्यार से उनके चेहरे की तरफ देखते हुए कहता है...

प्रिंस : माँ देखो न ये डॉ क्या कह रहे हैं....? इनका कहना है की आप अब भी कोमा में hi हैं.... उठिये न माँ बताइये न इन्हे की आप ठीक हो चुकी हैं.... माँ आप कोमा से बहार आ चुकी हैं.... बोलिये न माँ..... आप तो मेरी हर बात माना करती थी न.... चाहे आप कितनी भी गहरी नींद में क्यों न हो आप मेरी हर आहात पहचान लेती थी न.... तो फिर आज क्या हुआ माँ....? आज आप क्यों मुझे नहीं पहचान रही....? क्यों अपने सुलतान की आवाज़ सुन के भी नहीं उठ रही...? बोलिये न माँ....? बस एक बार माँ... बस एक बार आप उठ जाइये.... प्लीज माँ प्लीज उठ जाइये न.... देखिये आप का बीटा आया है.... आप का सुलतान आया है.... क्या आप अपने सुलतान से नहीं मिलेंगी....? उठिये न माँ प्लीज उठ जाइये....

ये कह के सुलतान शहनूर के सीने से लिपट के रोने लगता है.... प्रिंस को इस हाल में देख साथ hi उसकी बातें सुन के वहां मौजूद डॉक्टर्स के साथ साथ अलीना आइना और दादी को बड़ी हैरानी होती है.... वहीँ शहनूर माँ के लिए उसका दर्द उसकी तड़प देख सब की आँखों से आंसू बह रहे हैं..... उन्हें ये समझ नहीं आ रहा है की आखिर प्रिंस शहनूर को अपनी माँ क्यों कह रहा है....? क्यों वो उनके लिए इतना बेचैन है....? क्यों उनके लिए उसकी आँखें नाम है.....? किसी अनजान के लिए कोई इतना परेशां कैसे हो सकता है....? और अगर ये अनजान नहीं है तो फिर ये है कौन.....?

इधर प्रिंस की तड़प उसके आंसू उसकी आवाज़ उसके पास होने का एहसास शहनूर को होने लगता है.... अपने सुलतान को इस तरह तड़पते देख शहनूर का दिल भी तड़प उठता है... वो उसे अपने सीने से लगाने के लिए तड़प जाती है.... उसके दिमाग में पुरानी यादें उभरने लगती हैं.... उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगता है.... उसके जिस्म में हलचल सी होने लगती है.... और वो एक चीख के साथ गहरी बेहोशी से जाग जाती है....

शहनूर : Sultaaaaaaaaaaaaaan....

(वर्ड काउंट 3443)
 
थैंक्स डिअर फॉर योर लवली कमेंट न सपोर्ट....

भाई अब अचानक से एक hi दिन में सब कुछ तो नहीं हो सकता न.... धीरे धीरे और एक एक कर के सब का पता चलेगा.... पहले ये पता लगाना पड़ेगा की उस दिन आखिर हुआ क्या था....? और ये अचानक से सुलतान के माँ डैड और मासूम कहाँ गायब हो गए....? आखिर वो हैं तो हैं कहाँ....? और इसकी शुरुवात प्रिंस शहनूर माँ से करता है... इसलिए वो यहाँ आया है....
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 153.....

सुलतान शहनूर के सीने से लिपट के रोने लगता है.... प्रिंस को इस हाल में देख साथ hi उसकी बातें सुन के वहां मौजूद डॉक्टर्स के साथ साथ अलीना आइना और दादी को बड़ी हैरानी होती है.... वहीँ शहनूर माँ के लिए उसका दर्द उसकी तड़प देख सब की आँखों से आंसू बह रहे हैं..... उन्हें ये समझ नहीं आ रहा है की आखिर प्रिंस शहनूर को अपनी माँ क्यों कह रहा है....? क्यों वो उनके लिए इतना बेचैन है....? क्यों उनके लिए उसकी आँखें नाम है.....? किसी अनजान के लिए कोई इतना परेशां कैसे हो सकता है....? और अगर ये अनजान नहीं है तो फिर ये है कौन.....?

इधर प्रिंस की तड़प उसके आंसू उसकी आवाज़ उसके पास होने का एहसास शहनूर को होने लगता है.... अपने सुलतान को इस तरह तड़पते देख शहनूर का दिल भी तड़प उठता है... वो उसे अपने सीने से लगाने के लिए तड़प जाती है.... उसके दिमाग में पुरानी यादें उभरने लगती हैं.... उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगता है.... उसके जिस्म में हलचल सी होने लगती है.... और वो एक चीख के साथ गहरी बेहोशी से जाग जाती है....

शहनूर : Sultaaaaaaaaaaaaaan....

अब आगे.....

शहनूर की आवाज़ सुन के वहां मौजूद सब ख़ुशी से उछाल पड़ते हैं.... वहीँ डॉ बेहद हैरान हो जाते हैं....

डॉ : हैरत hai....Maine अपनी पूरी लाइफ कोमा के किसी पेशेंट को इस तरह होश में आते नहीं देखा... और न hi ऐसा कहीं सुना....

प्रिंस : ये प्यार है.... एक बीटा का अपनी माँ से और एक माँ का अपने बेटे से.... अगर प्यार सच्चा हो तो चमत्कार भी हुआ करते हैं.... देखो मेरे प्यार ने आखिर माँ को गहरी नींद से जागने पे मजबूर कर hi दिया.... आज मैं बहुत खुश हूँ बहुत खुश.... मेरी माँ जो मुझे वापिस मिल गयी है....

अलीना : ा Hello.... तुम्हारा जो भी नाम है... ये मेरी माँ है... तुम्हारी नहीं... दोबारा मेरी माँ को अपनी माँ कहा न तो मैं तेरी टांगें तोड़ दूंगी.... बड़ा आया.... चल फुट यहाँ से....

अलीना की बात सुन के प्रिंस शहनूर माँ को कास के अपने सीने से लगा के कहता है....

प्रिंस : तू फुट यहाँ से आलू की बच्ची.... और ये तेरी नहीं मेरी माँ है....

अलीना : तू न मैं छोड़ूंगी नहीं तुझे....

प्रिंस : अबे जा जा बड़ी आयी छोडूंगी नहीं.... तू आलू है... ज़्यादा छू चपड़ की न तो मैं तेरा भरता बना भी लूंगा और उसे खा भी लूंगा... समझी....

प्रिंस को यूँ अलीना को बातें सुनते देख आइना को उस पे बेहद गुस्सा आ जाता है.... वहीँ शहनूर उनकी बातें सुन के मुस्कुराने लगती है....

आइना : अबे एक तो मेरी माँ को अपनी माँ कह रहा है और उलटे हम को hi धमकी दे रहा है.... देख चुप चाप निकल ले यहाँ से नहीं तो... तू मेरा गुस्सा जानता नहीं है....

प्रिंस : लो जी और सुनो पहले आलू आयी थी धमकाने और अब ये चालु आयी है....

प्रिंस की बात सुन के आइना भड़क जाती है.... और प्रिंस को मारने के लिए आगे बढ़ती है.....

आइना : अबे तेरी तो... तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे आइना को चालु कहने की देख अब मैं तेरे साथ क्या करती हूँ....?

ये कह के आइना प्रिंस को मारने के लिए आगे बढ़ती है मगर दादी उसे ऐसा करने से रोक देती है....

अलीना : ये क्या दादी आप भी इसी का साथ दे रही हैं.... ये कौन है कहाँ से आया है क्यों आया है....? आते के साथ hi माँ को यहाँ ले आया और अब हमारी माँ को अपनी माँ कह के उन पे अपना हक़ भी जाता रहा है.... कल को ऐसा न हो की ये हम दोनों को भी अपना कहने लगे....

दादी : ये जब अपना है तो अपना hi कहेगा न....

अलीना : मतलब....?

शहनूर : मैं बताती हूँ.... ये कोई और नहीं बल्कि सुलतान है... मेरा सुलतान... मेरा लाडला बीटा सुलतान....

शहनूर की बात सुन के अलीना के साथ साथ आइना भी शॉकेड हो जाती है... दोनों के मुँह से एक साथ एक hi लफ्ज़ निकलता है....

दोनों : kyaaaaaaaaaaaaa....? क्या कहा आपने.....? आप इसकी माँ हैं....

शहनूर : माना की मैंने सुलतान को जनम नहीं दिया मगर फिर भी मैं इसकी माँ हूँ.... ये मेरे छोटे चच्चा की बेटी शिफा और मेरे बड़े चाचा के बेटे शाहबाज़ का लाडला बीटा सुलतान है.... ये मेरे लिए बेटे जैसा hi है.... शायद बेटे से भी बढ़ के है....

शाहनूर की बात सुन के दोनों एक बार फिर से चौंक जाते हैं....

दोनों : Kyaaaaaaaaaaaa....?

शहनूर की बात सुन के एक पल के लिए प्रिंस भी चौंक जाता है.... उसे शहनूर का अरबाज़ के साथ साथ आबिद के पूरे खानदान को दिया हुआ श्राप याद आ जाता है.... अरबाज़ के खानदान में कौन कौन लोग आते हैं ये सोच के प्रिंस एक पल के लिए हिल जाता है.... फिर खुद को संभाल के बात को बदलते हुए कहता है....

प्रिंस : माँ ये आलू और चालू पागल हैं क्या....? जो बार बार दोनों क्या क्या कह रही हैं..... लगता है इनका दिमागी संतुलन ठीक नहीं है... डॉ से इनका इलाज करवाना पड़ेगा....

ये कह के प्रिंस हसने लगता है.... प्रिंस की बात सुन के और साथ hi उसे यूँ हस्ते देख दोनों को उसपे बेहद गुस्सा आने लगता है....

आइना बेहद गुस्से में : इलाज की ज़रुरत मुझे नहीं बल्कि तुझे है.... अगर अब तू ने एक और बार मुझे चालू कहा न तो देख लेना मैं तेरी क्या हालत करती हूँ... मेरा नाम चालू नहीं आइना है समझे....

शहनूर : वो नाम भी तो इसी ने तुम्हे दिया था.....

दोनों शॉकेड : इसी ने दिया था मतलब....!! हम तो इसे जानते भी नहीं आज पहली बार देख रहे हैं... तो हमारा नाम ये कैसे रख सकता है....?

शहनूर : तुम दोनों के असली नाम के साथ साथ तुम्हारा घर के नाम भी इसी ने रखा था....

अलीना : ऐसा भी कोई नाम रखता है क्या....? आलू और चालू.... ये भी भला कोई नाम है... इस से तो अच्छा माँ आप hi हमारा नाम रखती....

प्रिंस : तुम पता है मैंने तुम दोनों के नाम क्या सोच के रखे थे....?

आइना : हम को चिढ़ाने के लिए और क्या....?

प्रिंस : जी नहीं.... बल्कि इसके पीछे एक ख़ास वजह थी और वो वजह था तुम दोनों के लिए मेरा प्यार.... पहले अलीना.... तुम्हारा नाम मैंने अलीना इस लिए रखा था क्यों की तुम जन्नत की पारी से भी ज़्यादा खूबसूरत थी.... और जानती हो जन्नत की सबसे खूबसूरत पारी का नाम अलीना है....

प्रिंस की बात सुन के अलीना बेहद खुश हो जाती है....

प्रिंस : और रही बात तुम्हारे दूसरे नाम की तो वो मैंने आलू रखा था उसकी दो वजह थी पहली ये की आलू वो चीज़ है जिसके बिना कोई भी सब्ज़ी अधूरी रहती है.... वैसे hi मैं यानी सुलतान अपनी आलू के बिना अधूरा था.... रही दूसरी वजह की तो मुझे आलू बेहद पसंद है.....

प्रिंस के मुँह से ये सुन के की वो उसे बेहद पसंद है अलीना बेहद खुश हो जाती है.... आखिर वो खुश क्यों न हो उसे जन्नत की पारी से भी ज़्यादा खूबसूरत कहने वाला खुद बेहद स्मार्ट डैशिंग और हैंडसम पर्सनालिटी वाला जो है....

प्रिंस : अब बारी है आइना की.... तो सुनो मैंने तुम्हारा नाम आइना क्यों रखा.... उसकी एक ख़ास वजह है तुम्हारी ये सितारों सी चमकती आँखें और बेहद खूबसूरत चेहरा..... तुम्हारी आँखों में मुझे हमेशा hi अपना अक्स नज़र आता था.... जब भी मैं तुम्हे देखता मुझे तुम्हारे चेहरे में अपना चेहरा नज़र आता है... ऐसा लगता जैसे की तुम और मैं दो नहीं बल्कि एक हैं.... यहाँ भी मैं hi हूँ और तुम्हारे अंडर भी मैं hi हूँ.... तुम मेरा आइना हो.... और रही बात तुम्हारे दूसरे नाम की.... तो मैंने तुम्हारा नाम चालु इस लिए रखा था क्यों की जब भी मैं तुम्हारे चेहरे में अपना अक्स देखना चाहता था तुम हमेशा hi अपनी आँखें बंद कर लेती थी... मुझे अपना चेहरा नहीं देखने देती... तो मैं चीड़ के तुम्हे चालु कहता.... तुम दोनों के बिना मुझे चैन नहीं आता था.... जितना तुम दोनों को मैं प्यार करता था उतना hi मुझे तुम दोनों को तंग करने में मज़ा आता.... तुम दोनों भी काम न थी.... दोनों मुझे परेशान करने का कोई मौका नहीं चोरटी.... तुम्हारी हरकतों की वजह से कभी कभी मुझे बेहद गुस्सा आता था.... मगर तुम दोनों के प्यारे और खूबसूरत चेहरे को देख वो गुस्सा फ़ौरन हवा हो जाता.... और जब तुम दोनों मुझे किसी करती तब मैं खुद को दुनिया का सब से खुश नसीब समझता... की जन्नत की दोनों हसीं और खूबसूरत पारी मेरे साथ है और वो मुझे चाहती भी हैं....

प्रिंस के मुँह से अपनी तारीफ सुन के अलीना और आइना बेहद खुश हो जाती हैं.... वो अभी कुछ कहने hi वाली होती है की तभी....

डॉ : अब आप लोग बहार जाइये पेशेंट को आराम करने दीजिये....

शहनूर और प्रिंस के समझने पे अलीना आइना और दादी घर चले जाते हैं....

प्रिंस वहीँ शहनूर के बगल में बैठ जाता है और प्यार से उनके चेहरे को देखने लगता है....

नोट : यहाँ प्रिंस की जगह उसका नाम सुलतान होगा क्यों की शहनूर के लिए वो सुलतान है....

शहनूर : ऐसे क्या देख रहे हो सुलतान....?

सुलतान : देख रहा हूँ आप कितनी खूबसूरत और प्यारी हैं.... आप के जैसी खूबसूरती मैंने आज तक नहीं देखि....

सुलतान के मुँह से अपनी तारीफ़ सुन के शहनूर खुश हो जाती है.... साथ hi उसे बेहद शर्म भी आने लगती है....

शहनूर : बदमाश माँ से फ्लिर्टिंग कर रहा है.....

सुलतान : नहीं माँ सच कह रहा हूँ.... आप से ज़्यादा खूबसूरत हसीं और सेक्सी और कोई हो hi नहीं सकती....

शहनूर गुस्सा दिखते हुए : क्या कहा तू ने....?

सुलतान : खूबसूरत और हसीं.... क्यों गलत कहा क्या मैंने....? क्या आप खूबसूरत हसीं नहीं हैं....?

शहनूर : मैं उसकी बात नहीं कर रही बल्कि ये कह रही हूँ की तू मुझे अपनी माँ को सेक्सी कैसे कह सकता है....? तुझे शर्म नहीं आयी ऐसा कहते हुए....?

सुलतान : जी नहीं भला मुझे क्यों शर्म आएगी... और वैसे भी मैंने कुछ गलत तो नहीं कहा जो सच है वो hi कहा.....

शहनूर : माँ को कोई बीटा सेक्सी कहता है क्या....?

सुलतान : मैं कहता हूँ.... आज से नहीं बल्कि बचपन से जब मुझे आप से प्यार हुआ था....

शहनूर शॉकेड : Kyaaaaaaaaaaaa....? Pyaaaaaaaaaar....?

सुलतान : जी हाँ प्यार.... वो hi प्यार जो मुझे मासूम से है.... मैं मासूम को जितना चाहता हूँ उतना hi आप को भी चाहता हूँ....

शहनूर : ये तू क्या कह रहा है... मासूम के लिए तेरा प्यार समझ में आता है मगर मैं.... मैं तेरी माँ हूँ और एक बीटा अपनी माँ से कैसे प्यार कर सकता है.....?

सुलतान : क्यों नहीं कर सकता....? क्या माँ एक लड़की नहीं है....

शहनूर : मैं तुझे लड़की नज़र आती हूँ....

सुलतान : जी हाँ वैसे आप की उम्र ज़्यादा भी नहीं है....

शहनूर : अबे मैं तेरे से दुगनी उम्र की हूँ....

सुलतान : अच्छा मुझे पता hi नहीं था.... चलो ये एक तरह से अच्छा hi है.... मुझे एक एक्सपेरिएंस्ड लड़की मिल गयी अब मुझे किसी चीज़ की कोई प्रॉब्लम नहीं होगी.....

शहनूर : तू क्या बक रहा है तुझे पता भी है....?

अचानक सुलतान हसने लगता है....

सुलतान : हहहहहहहहहह....

सुलतान को अचानक से यूँ हस्ते देख शहनूर को बड़ी हैरानी होती है....

शहनूर : ये अब पागलों की तरह हंस क्यों रहा है...?

सुलतान : हाहाहाःहाहा... माँ हंसु नहीं तो और क्या करूँ.... आप अब तक नहीं बॉडी आज भी मेरे मज़ाक को सच मान बैठी....

शहनूर : तू मज़ाक कर रहा था....

सुलतान : और नहीं तो क्या....?

सुलतान की बात सुन के शहनूर ख़ामोशी से बस एक तक उसे देखने लग जाती है....

सुलतान : क्या हुआ माँ आप अचानक से खामोश क्यों हो गयी....?

शहनूर : क्या वाकई में तू मज़ाक कर रहा था....?????

इधर घर में.....

सुलतान की तस्वीरों के जलने की वजह से सोना बेहद दुखी है.... साथ hi प्रिंस की नफरत देख के सोना का दिल रो रहा है.... वहीँ शीना को देख उसे उसपे गुस्सा भी आ रहा है साथ hi इस बात की तसाली भी है की शायद ये hi वो है जिसकी मदत से सोना अपने प्यार सुलतान को वापिस पा सकती है.....

महक भी बेहद गुस्से में शीना को देख रही है..... वो आगे बढ़ के ुस्व थप्पड़ मारने hi वाली होती है की तभी.... सोना उसे रोक देती है....

सोना : महक पागल तो नहीं हो गयी ये क्या करने जा रही है.....?

महक : उस कमीनी शीना को मारने जा रही हूँ.... देखा नहीं कमीनी ने आते के साथ hi क्या किया....? उसने प्रिंस को सब के सामने यहाँ तक की मेरे सामने किश किया.... उसकी हिम्मत कैसे हुई ऐसा करने की....?

सोना : मैंने भी देखा की उसने क्या किया..... और रही बात उसकी हिम्मत की तो उसके साथ प्रिंस है.... वो जो चाहे करे उसे कोई नहीं रोक सकता....

महक : कोई रोके न रोके मैं तो ज़रूर रोकूंगी... अब देखना मैं कैसे इस कमीनी की बंद बजती हूँ....

सोना : पागल मत बन महक.... ऐसा कुछ मत करना जिस से प्रिंस हम से और नाराज़ हो जाए.... तू ने सुना नहीं उसने क्या कहा था.... वो दोनों बचपन के दोस्त हैं साथ hi एक दूसरे को चाहते भी हैं.... एयर अगर ऐसे में अगर हम ने महक के साथ कुछ उल्टा किया तो प्रिंस हम से और भी ज़्यादा नाराज़ हो जाएगा....

महक : तो फिर तू hi बता की अब हम क्या करें....?

सोना : हम को किसी भी तरह शीना को अपने साथ मिला के रखना होगा ताकि उसके ज़रिये हम प्रिंस के पास रह सके और उसे अपने प्यार की सच्चाई का यकीन दिला सके... अगर हम को अपना प्यार वापिस पाना है तो हम को अब वो सब करना होगा जो हम ने कभी नहीं किया वो सब सहना होगा जो हम ने नहीं सहा.... इस वक़्त प्रिंस हम से बेहद नाराज़ है.... वो हम को जिस्मानी नहीं बल्कि दिमागी तकलीफ पहुँचाने की बेहद कोशिश करेगा.... ये जानते हुए भी की हम को तकलीफ पहुंचा के खुद उस के दिल को भी बेहद तकलीफ होगी.... फिर भी वो ऐसा करेगा.... उसके अंडर भरा हुआ गुस्सा उसे ऐसा करने पे मजबूर करेगा....

महक : क्या उसके दिए हर तकलीफ को सेह के हम उस के दिल में हमारे लिए जो नफरत है उसे ख़तम कर पाएंगे....?

सोना : क्या कहा तू ने.... प्रिंस और नफरत.... ये मुमकिन नहीं.... प्रिंस कभी किसी से नफरत नहीं कर सकता.... हाँ वो नाराज़ ज़रूर हो सकता है मगर नफरत नहीं.... नफरत करना उसकी फितरत में नहीं.... वो अपने दुश्मन से भी नफरत नहीं कर सकता हम तो फिर भी उसके अपने हैं....

महक : ये तू कैसे कह सकती है....?

सोना : ज़रा सोच अगर प्रिंस नफरत करता तो क्या सच जान ने के बाद वो आबिद फूफा और बाकी सब को ज़िंदा चोरता जो उसके और उसके माँ डैड के गुनेहगार हैं....? नहीं कभी नहीं वो उसी वक़्त सब को जान से मार देता और कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाटा.... मगर उसने ऐसा नहीं किया.... जिस तरह बचपन में मैंने मेहरीन के साथ मिल के गरम चिमटे से सुलतान की पीठ जलाई थी बदले में वो आज मेरे साथ उस से भी बत्तरीन सलूक कर सकता था मगर उसने ऐसा नहीं किया उसने मुझे जिस्मानी नहीं बल्कि दिमागली तकलीफ पहुंचाई.... उनसे मेरे जिस्म को जलने के बजाये अपनी उन तवीरों को आग लगायी जो मुझे अपनी जान से भी ज़्यादा प्यारी है.... इस से ये साबित होता है की वो हम से नफरत नहीं करता बस उसके दिल में हमारे लिए नाराज़गी है जिसे हम को किसी भी तरह से दूर करना होगा.... और इस में हमारा साथ सिर्फ और सिर्फ शीना hi दे सकती है.....

महक : तू ने जो कहा वो ठीक है मगर हम प्रिंस के दोस्तों से मिल के भी तो प्रिंस मन सकते हैं.... फिर शीना hi क्यों....?

सोना : क्यों की प्रिंस की नाराज़गी की वजह से उसका कोई दोस्त हमारा साथ नहीं देगा.... बस एक शीना hi है जो हमारा साथ दे सकती है... आखिर वो हमारी बेहेन जो है....

महक : अगर ऐसी बात है तो फिर चल शीना को अपने साथ मिला के Sultaan/Prince को मानाने का कोई रास्ता निकालते हैं.....

इधर पेरिस में...

बेगम साहिबा : बाबा आने जो कहा वो सब तो ठीक है मगर आप प्रिंस को वो सच बताएँगे कैसे....? और जब वो अपनी पावर्स को उसे करके भी अपने माँ डैड और मासूम का पता नहीं लगा पायेगा तब वो उनके बारे में जान ने सीधे आपके पास आएगा.... तब आप उस से क्या कहेंगे....? क्या आप ये कह पाएंगे की उसके माँ बाबा जहाँ हैं वहां का पता आप को भी पता नहीं.... उनके बारे में अगर कोई जानता है तो वो है *********..... प्रिंस छह के भी उस से कुछ नहीं पता कर सकता क्यों की उस की यादें क़ैद में हैं.... और जब तक वो आज़ाद नहीं हो जाती प्रिंस उस से कुछ पता नहीं कर sakta....Ek बार के लिए प्रिंस मासूम को तो धुन्ध सकता है मगर अपने माँ बाबा को नहीं....

बंगारू बाबा : आप ने जो कहा वो सच है... मगर ये भी सच है की अब न चाहते हुए भी प्रिंस वो सब करेगा जो उसकी तबीयत के खिलाफ है.... एक तो पहले hi प्रिंस अपनी साड़ी प्रेमिकाओं से परेशान है ऊपर से शहनूर का दिया हुआ उसके पूरे खानदान के श्राप के सच होने का वक़्त भी आ गया है.... गुस्से में आ के इंसान अक्सर गलत hi करता है... वैसा hi शहनूर ने भी किया... उसने प्रिंस के पूरे खानदान को श्राप तो दे दिया मगर खुद ये भूल गयी की वो और उसकी बेटियां.... यहाँ तक की प्रिंस के अपने माँ और डैड भी इस खानदान के सदस्य होने की वजह से न चाहते हुए भी इस श्राप के शिकार हो गए..... उस श्राप की वजह से जैसा प्रिंस खानदान की बाकी लड़कियों और औरतों के साथ करेगा ठीक वैसा hi उसे इनके साथ भी करना पड़ेगा.... फर्क सिर्फ इतना होगा की उनके साथ सेक्स प्रिंस गुस्से में अपना बदला लेने के लिए करेगा.... मगर इनके साथ श्राप की वजह से.... बल्कि उस श्राप की वजह से अलीना आइना के साथ साथ शहनूर खुद भी प्रिंस की तरफ अत्त्रक्ट होने लगेगी.... न चाहते हुए भी वो प्रिंस को चाहने लगेंगी....

बाबा की बात सुन के नानी बुरी तरह से चौंक जाती हैं....

नानी : Kyaaaaaaaaaaaa....?

बाबा : हाँ ऐसा होगा ज़रूर होगा..... ये hi सब की किस्मत में लिखा है और किस्मत के लिखे को कोई नहीं बदल सकता....

नानी : अगर ऐसा है तो फिर वो भी इस श्राप का शिकार हो गई.....

बाबा : जी हाँ न चाहते हुए भी प्रिंस की माँ शिफा भी इस श्राप का शिकार है.... एक और भी है जो इस श्राप का शिकार है और वो है *******

जल्द hi उसके बारे में भी पता चलेगा की वो कौन है.....??????

(वर्ड काउंट 3050)
 
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