- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 146,310
अपडेट 84
निशा की पापा को सामने देख अतुल एक दम से चौंक gaya...Wo अपनी जगह से उठ गया और निशा की पापा को घूरने laga...Ek बार तो उसको विश्वाश hi नहीं हुआ.
लेकिन जब आस पास देखा तो यकीं करने पर मजबूर हो gaya...Atul के सभी घर वाले चौंक कर निशा की पापा को hi देख रहे थे.
ा. डैड:- आप यहाँ? आइये na...Baithiye.
अतुल की पापा खुद गेट तक जा कर उनको अपने साथ ले कर आये.
अतुल की पापा की इस हरकत सभी को एक बार फिर से चौंकाने के लिए काफी tha...Aaj तक दोनों एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे लेकिन अभी जो हुआ उससे देख कोई भी विश्वाश नहीं कर पा रहा था.
अतुल भी शांत सब कुछ देख रहा tha...Shreya अतुल को देख रही थी और जो रहा था उससे समझने की कोशिश कर रही थी.
निशा की पापा भी अतुल की पापा को हैरानी से देख रहे the...Aise बदलाव उनको भी विश्वास नहीं हो रहा tha...Atul की पापा की आँखों में पश्चाताप साफ़ दिख रहा tha...Aur ये देख कर उनकी आँखों में भी वही पश्चाताप दिखने लगा.
Vakt...Sabse balwaan...Sabse ताक़त war...Kab किसको क्या बना दे? क्या करने पर मजबूर कर दे? इसका जवाब वक्त के पास hi होता है.
ये वक्त hi था जिसने आज सभी की जिंदगी बदल कर रख दिया tha...Haalaath क्या से क्या बन गया था.
यही वक्त था जिसने दो इंसान को नफरत की जगह पश्चाताप की आग में जलने पर मजबूर कर दिया tha...Har पल paschataap...Har पल दिल में एक बोझ.
अतुल:- अंकल बैठिये न.
अतुल ने सामने की सोफे की तरफ इशारा किया.
निशा की पापा के बैठने के बाद hi अतुल बैठा.
अतुल की छोटी छोटी बातों को वो गौर कर रहे the...Wohi sanskaar...Jo हॉस्पिटल में एक झलक सा दिखा tha...Aaj भी वही sanskaar...Ek बार फिर खुद से नफरत करने से रोक नहीं पाए निशा की पापा? "क्यों मैंने जल्दबाज़ी कर दी?" बस यही सवाल उनको अंदर से खाये जा रहा था.
अतुल:- Di...Please चाय बना कर लाइए ना.
अतुल की इस बात सुनते hi निशा की पापा को एक झटका सा laga...Jaise hi अतुल ने ये महसूस किया.
अतुल:- नहीं नहीं Uncle...Uss बात का बदला नहीं ले raha...Aap हमारे मेहमान hai...Aur मेहमान का सम्मान करना हमारा कर्त्तव्य hai...Mai तो वो बात भूल hi चूका था.
अतुल की बात से उनको थोड़ा राहत मिला.
फिर अतुल की नजर श्रेया पर पड़ा.
अतुल:- ये है निशा की Papa...Bataya था ना तुम्हे.
(तो Nisha's डैड) और ये है Shreya...Meri....
अतुल इस इ आगे कुछ बोलता उससे पहले...
आरव:- मई जा रहा हु खेलने.
फिर आरव वह से दौड़ कर निकल गया बाहर खेलने.
अतुल का ध्यान आरव पर चला गया और वो श्रेया को इंट्रोडस करना भूल hi गया.
निशा की पापा जवाब सुन्ना तो चाहते थे लेकिन पूछ नहीं paaye...Atul को सवाल करने का हिम्मत भी नहीं जूता पा रहे थे वो.
ा. डैड:- आप यहाँ? कोई मुशीबत तो नहीं हुई आने में?
न. डैड:- यहाँ का एड्रेस पता करने में थोड़ा प्रॉब्लम तो हुआ tha...Lekin किसी तरह पता कर liya...Atul से एक बार मिलना चाहता था.
अतुल:- मुझसे? कोई ख़ास काम?
थोड़ा हैरानी के साथ अतुल ने पूछा.
(इन हिज मंद) अब्ब क्या काम बाकी रह गया?
न. डैड:- उस दिन हॉस्पिटल एडमिट करने के लिए थैंक यू बोलना चाहता था.
अतुल:- इसमें थैंक यू की क्या बात है Uncle...Agar ऐसा नहीं करता तो इंसानियत की हत्या हो जाता मुझसे.
और एक डॉक्टर हो कर इंसानियत कैसे भूल सकता हु?
आप की जगह कोई और होता तो भी मई उसके लिए यही karta...Aur आप तो निशा के पापा hai...Aap को कैसे छोड़ देता.
निशा की नाम बहुत hi प्यार से लिया अतुल ने.
न. डैड:- आज भी प्यार करते हो निशा से?
निशा की पापा श्रेया की तरफ देख कर बोले.
लेकिन अतुल एक बार फिर निशा में ऐसे खोया था की वो इस बात को समझ hi नहीं पाया.
अतुल:- करता rahunga...Aakhiri सांस तक करता rahunga...Aur इतना करता हु की बयान नहीं कर sakta...Meri बदकिस्मती है की वक्त रहते आपको यकीं नहीं दिला पाया कितना प्यार करता हु मई निशा se...Uski ख़ुशी के लिए साड़ी हद्द पार कर सकता hu...Meri बदकिस्मती.
न. डैड:- (इन हिज मंद) मेरी बदकिस्मती है की मई समझ नहीं paaya...Samajhne की कोशिश hi नहीं किया.
न. डैड:- अब्ब क्या कर रहे हो? बहुत बड़े डॉक्टर बन गए होंगे? बहुत तारीफ़ सुना था निशा se...Padhne में बहुत अच्छे हो.
अतुल:- मद कर liya...Aur लोगो के इलाज में काम आ सकू ऐसे डॉक्टर बन गया हु.
निशा ने भी अपनी स्टडी को कंटिन्यू रखा न?
न. डैड:- उसने भी मद कर लिया है.
अतुल:- (इन हिज मंद) थैंक गॉड.
न. डैड:- अच्छा लगा तुम्हे आगे बढ़ता देख कर.
निशा की पापा ने एक नजर अतुल और फिर श्रेया की तरफ देख कर कहा.
अतुल:- जब साथ देने वाला कोई अपना हो तो ग़म को भूलने में वक्त नहीं लगता.
यही साथ श्रेया की दोस्ती से mili...Jindagi में आगे बढ़ने की एक वजह.
अगर श्रेया का दोस्ती और साथ ना होता तो अभी इस घर के अलावा और कही hota...Yaa तो उपरवाले के पास, या फिर पागल खाना या फिर कोई रिहैबिलिटेशन सेंटर.
किस्मत से बार बार धोखा मिलने के बाद शायद किस्मत को hi मुझ पर तरस आ gaya...Aur श्रेया मेरी जिंदगी की एक मोड़ पर मुझे मिली.
अतुल खुद को मजबूत दिखाने की हर एक कोशिश कर रहा tha...Ki वो आगे बढ़ gaya...Lekin उसका दर्द उसके अलावा भी सब महसूस कर रहे the...Aur सभी उसकी तरह hi मजबूर थे.
आरव:- पापा मुझे चॉकलेट चाहिए.
एक जिद्द लेकर आरव फिर घर में वापस aaya...Pehle तो वो गौरव के पास जा रहा था लेकिन अतुल को देख उसकी तरफ आ गया.
आरव:- मुझे चॉकलेट खाना है.
अतुल:- थोड़ी देर बाद खाएंगे.
फिर अतुल ने किसी तरह उसको मन लिया.
अब्ब निशा की पापा की बाकी का शक यकीं में बदल gaya...Sochne सझने के लिए कुछ बाकी नहीं tha...Aankho से दिखी और कान से सुनी बात को उन्होंने सच मान लिया.
ा. डैड:- निशा कैसी है?
न. डैड:- जी वो भी अच्छी hai...Khush है.
ये बात सुनते hi अतुल की दिल में एक मीठा सा दर्द hua...Jo वो सुन्ना चाहता था एक बार फिर सुन लिया.
न. डैड:- अच्छा तो अब्ब चलता hu...Atul से मिलने आया tha...Atul को आगे बढ़ता देख बहुत अच्छा लगा.
निशा की पापा से अब्ब वह रहा नहीं जा रहा था.
ा. डैड:- चलिए मई गेट तक छोड़ देता हु.
फिर दोनों साथ चलते है.
ा. डैड:- आप मुझसे नाराज तो नहीं है ना.
न. डैड:- नाराज हो कर भी क्या hoga...Hamaara आपसी नाराजगी से hi आज ये हाल है.
जो भी हुआ ऐसा होना नहीं चाहिए था.
ा. डैड:- बहुत गलत hua...Apna घमंड और नफरत का शिकार अपने hi बच्चे हो गए.
न. डैड:- खैर अब्ब दोनों खुश है अपनी जिंदगी me...Koshish करेंगे आगे कभी ऐसी गलती ना हो.
न. डैड:- अच्छा अब्ब इज़ाज़त दीजिये.
अतुल की पापा आँखों से hi इज़ाज़त देते hai...Bolne की हालत में तो वो भी नहीं थे.
Uncle...Uncle.
पीछे से चिल्लाते हुए अतुल aaya...Atul की आवाज सुन निशा की पापा रुक गए.
अतुल:- आप बहुत hi लकी hai...Nisha आपकी बेटी hai...Aise बहुत काम hi पिता होते है जिन्हे ऐसी बेटी मिलती है.
आपकी इज़्ज़त और सम्मान के लिए उसने अपने प्यार तक को hi कुर्बान कर diya...Hazaar बार मनाया था लेकिन एक बार भी वो नहीं maani...Kehti थी वो मुझसे भी ज्यादा आपसे प्यार करती hai...Aapka इज़्ज़ार और आपका प्यार hi सब कुछ है उसके liye...Jo आप कहेंगे वो वही करेगी.
ऐसी थी Nisha...Ek बेटी की फ़र्ज़ निभाने में उसने कही कोई कमी नहीं rakha...Request है आपसे कभी उसको कोई दुःख होने मत dijiye...Khush और मुस्कुराती हुई hi वो अच्छी लगती है.
इतना कह कर अतुल वापस चला गया और निशा की पापा भी चले गए.
थोड़ी दूर आगे बढ़ने के बाद उनकी आँखों में आंसू आ gaye...Haar की aansu...Ek पिता की हार की आंसू.
निशा की पापा को सामने देख अतुल एक दम से चौंक gaya...Wo अपनी जगह से उठ गया और निशा की पापा को घूरने laga...Ek बार तो उसको विश्वाश hi नहीं हुआ.
लेकिन जब आस पास देखा तो यकीं करने पर मजबूर हो gaya...Atul के सभी घर वाले चौंक कर निशा की पापा को hi देख रहे थे.
ा. डैड:- आप यहाँ? आइये na...Baithiye.
अतुल की पापा खुद गेट तक जा कर उनको अपने साथ ले कर आये.
अतुल की पापा की इस हरकत सभी को एक बार फिर से चौंकाने के लिए काफी tha...Aaj तक दोनों एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे लेकिन अभी जो हुआ उससे देख कोई भी विश्वाश नहीं कर पा रहा था.
अतुल भी शांत सब कुछ देख रहा tha...Shreya अतुल को देख रही थी और जो रहा था उससे समझने की कोशिश कर रही थी.
निशा की पापा भी अतुल की पापा को हैरानी से देख रहे the...Aise बदलाव उनको भी विश्वास नहीं हो रहा tha...Atul की पापा की आँखों में पश्चाताप साफ़ दिख रहा tha...Aur ये देख कर उनकी आँखों में भी वही पश्चाताप दिखने लगा.
Vakt...Sabse balwaan...Sabse ताक़त war...Kab किसको क्या बना दे? क्या करने पर मजबूर कर दे? इसका जवाब वक्त के पास hi होता है.
ये वक्त hi था जिसने आज सभी की जिंदगी बदल कर रख दिया tha...Haalaath क्या से क्या बन गया था.
यही वक्त था जिसने दो इंसान को नफरत की जगह पश्चाताप की आग में जलने पर मजबूर कर दिया tha...Har पल paschataap...Har पल दिल में एक बोझ.
अतुल:- अंकल बैठिये न.
अतुल ने सामने की सोफे की तरफ इशारा किया.
निशा की पापा के बैठने के बाद hi अतुल बैठा.
अतुल की छोटी छोटी बातों को वो गौर कर रहे the...Wohi sanskaar...Jo हॉस्पिटल में एक झलक सा दिखा tha...Aaj भी वही sanskaar...Ek बार फिर खुद से नफरत करने से रोक नहीं पाए निशा की पापा? "क्यों मैंने जल्दबाज़ी कर दी?" बस यही सवाल उनको अंदर से खाये जा रहा था.
अतुल:- Di...Please चाय बना कर लाइए ना.
अतुल की इस बात सुनते hi निशा की पापा को एक झटका सा laga...Jaise hi अतुल ने ये महसूस किया.
अतुल:- नहीं नहीं Uncle...Uss बात का बदला नहीं ले raha...Aap हमारे मेहमान hai...Aur मेहमान का सम्मान करना हमारा कर्त्तव्य hai...Mai तो वो बात भूल hi चूका था.
अतुल की बात से उनको थोड़ा राहत मिला.
फिर अतुल की नजर श्रेया पर पड़ा.
अतुल:- ये है निशा की Papa...Bataya था ना तुम्हे.
(तो Nisha's डैड) और ये है Shreya...Meri....
अतुल इस इ आगे कुछ बोलता उससे पहले...
आरव:- मई जा रहा हु खेलने.
फिर आरव वह से दौड़ कर निकल गया बाहर खेलने.
अतुल का ध्यान आरव पर चला गया और वो श्रेया को इंट्रोडस करना भूल hi गया.
निशा की पापा जवाब सुन्ना तो चाहते थे लेकिन पूछ नहीं paaye...Atul को सवाल करने का हिम्मत भी नहीं जूता पा रहे थे वो.
ा. डैड:- आप यहाँ? कोई मुशीबत तो नहीं हुई आने में?
न. डैड:- यहाँ का एड्रेस पता करने में थोड़ा प्रॉब्लम तो हुआ tha...Lekin किसी तरह पता कर liya...Atul से एक बार मिलना चाहता था.
अतुल:- मुझसे? कोई ख़ास काम?
थोड़ा हैरानी के साथ अतुल ने पूछा.
(इन हिज मंद) अब्ब क्या काम बाकी रह गया?
न. डैड:- उस दिन हॉस्पिटल एडमिट करने के लिए थैंक यू बोलना चाहता था.
अतुल:- इसमें थैंक यू की क्या बात है Uncle...Agar ऐसा नहीं करता तो इंसानियत की हत्या हो जाता मुझसे.
और एक डॉक्टर हो कर इंसानियत कैसे भूल सकता हु?
आप की जगह कोई और होता तो भी मई उसके लिए यही karta...Aur आप तो निशा के पापा hai...Aap को कैसे छोड़ देता.
निशा की नाम बहुत hi प्यार से लिया अतुल ने.
न. डैड:- आज भी प्यार करते हो निशा से?
निशा की पापा श्रेया की तरफ देख कर बोले.
लेकिन अतुल एक बार फिर निशा में ऐसे खोया था की वो इस बात को समझ hi नहीं पाया.
अतुल:- करता rahunga...Aakhiri सांस तक करता rahunga...Aur इतना करता हु की बयान नहीं कर sakta...Meri बदकिस्मती है की वक्त रहते आपको यकीं नहीं दिला पाया कितना प्यार करता हु मई निशा se...Uski ख़ुशी के लिए साड़ी हद्द पार कर सकता hu...Meri बदकिस्मती.
न. डैड:- (इन हिज मंद) मेरी बदकिस्मती है की मई समझ नहीं paaya...Samajhne की कोशिश hi नहीं किया.
न. डैड:- अब्ब क्या कर रहे हो? बहुत बड़े डॉक्टर बन गए होंगे? बहुत तारीफ़ सुना था निशा se...Padhne में बहुत अच्छे हो.
अतुल:- मद कर liya...Aur लोगो के इलाज में काम आ सकू ऐसे डॉक्टर बन गया हु.
निशा ने भी अपनी स्टडी को कंटिन्यू रखा न?
न. डैड:- उसने भी मद कर लिया है.
अतुल:- (इन हिज मंद) थैंक गॉड.
न. डैड:- अच्छा लगा तुम्हे आगे बढ़ता देख कर.
निशा की पापा ने एक नजर अतुल और फिर श्रेया की तरफ देख कर कहा.
अतुल:- जब साथ देने वाला कोई अपना हो तो ग़म को भूलने में वक्त नहीं लगता.
यही साथ श्रेया की दोस्ती से mili...Jindagi में आगे बढ़ने की एक वजह.
अगर श्रेया का दोस्ती और साथ ना होता तो अभी इस घर के अलावा और कही hota...Yaa तो उपरवाले के पास, या फिर पागल खाना या फिर कोई रिहैबिलिटेशन सेंटर.
किस्मत से बार बार धोखा मिलने के बाद शायद किस्मत को hi मुझ पर तरस आ gaya...Aur श्रेया मेरी जिंदगी की एक मोड़ पर मुझे मिली.
अतुल खुद को मजबूत दिखाने की हर एक कोशिश कर रहा tha...Ki वो आगे बढ़ gaya...Lekin उसका दर्द उसके अलावा भी सब महसूस कर रहे the...Aur सभी उसकी तरह hi मजबूर थे.
आरव:- पापा मुझे चॉकलेट चाहिए.
एक जिद्द लेकर आरव फिर घर में वापस aaya...Pehle तो वो गौरव के पास जा रहा था लेकिन अतुल को देख उसकी तरफ आ गया.
आरव:- मुझे चॉकलेट खाना है.
अतुल:- थोड़ी देर बाद खाएंगे.
फिर अतुल ने किसी तरह उसको मन लिया.
अब्ब निशा की पापा की बाकी का शक यकीं में बदल gaya...Sochne सझने के लिए कुछ बाकी नहीं tha...Aankho से दिखी और कान से सुनी बात को उन्होंने सच मान लिया.
ा. डैड:- निशा कैसी है?
न. डैड:- जी वो भी अच्छी hai...Khush है.
ये बात सुनते hi अतुल की दिल में एक मीठा सा दर्द hua...Jo वो सुन्ना चाहता था एक बार फिर सुन लिया.
न. डैड:- अच्छा तो अब्ब चलता hu...Atul से मिलने आया tha...Atul को आगे बढ़ता देख बहुत अच्छा लगा.
निशा की पापा से अब्ब वह रहा नहीं जा रहा था.
ा. डैड:- चलिए मई गेट तक छोड़ देता हु.
फिर दोनों साथ चलते है.
ा. डैड:- आप मुझसे नाराज तो नहीं है ना.
न. डैड:- नाराज हो कर भी क्या hoga...Hamaara आपसी नाराजगी से hi आज ये हाल है.
जो भी हुआ ऐसा होना नहीं चाहिए था.
ा. डैड:- बहुत गलत hua...Apna घमंड और नफरत का शिकार अपने hi बच्चे हो गए.
न. डैड:- खैर अब्ब दोनों खुश है अपनी जिंदगी me...Koshish करेंगे आगे कभी ऐसी गलती ना हो.
न. डैड:- अच्छा अब्ब इज़ाज़त दीजिये.
अतुल की पापा आँखों से hi इज़ाज़त देते hai...Bolne की हालत में तो वो भी नहीं थे.
Uncle...Uncle.
पीछे से चिल्लाते हुए अतुल aaya...Atul की आवाज सुन निशा की पापा रुक गए.
अतुल:- आप बहुत hi लकी hai...Nisha आपकी बेटी hai...Aise बहुत काम hi पिता होते है जिन्हे ऐसी बेटी मिलती है.
आपकी इज़्ज़त और सम्मान के लिए उसने अपने प्यार तक को hi कुर्बान कर diya...Hazaar बार मनाया था लेकिन एक बार भी वो नहीं maani...Kehti थी वो मुझसे भी ज्यादा आपसे प्यार करती hai...Aapka इज़्ज़ार और आपका प्यार hi सब कुछ है उसके liye...Jo आप कहेंगे वो वही करेगी.
ऐसी थी Nisha...Ek बेटी की फ़र्ज़ निभाने में उसने कही कोई कमी नहीं rakha...Request है आपसे कभी उसको कोई दुःख होने मत dijiye...Khush और मुस्कुराती हुई hi वो अच्छी लगती है.
इतना कह कर अतुल वापस चला गया और निशा की पापा भी चले गए.
थोड़ी दूर आगे बढ़ने के बाद उनकी आँखों में आंसू आ gaye...Haar की aansu...Ek पिता की हार की आंसू.