Kasam - Love is not Everything (Completed) - Page 13 - SexBaba
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Kasam - Love is not Everything (Completed)

अपडेट 93

इस बार भी लेट?

निशा नाराजगी में मुंह दूसरी तरफ घुमा लेती है.

लेकिन जब उसने महसूस किया की अतुल हांफ रहा था तो फिर अतुल की तरफ घबराते हुए देखने लगती hai...Raat होने की वजह से शायद उसने पहले नोटिस नहीं किया था.

अतुल सच में हांफ रहा tha...Jaise बहुत थक गया ho...Lekin फेस में एक मुस्कान tha...Jaise उसने कुछ कर दिखाया है.

निशा:- ये क्या हाल बना रखा है तुमने?

अतुल के बिखरे हुए बाल और थोड़ा पसीना से भीगा चेहरे को देखती हुई निशा बे पूछा.

निशा:- तुम ठीक तो हो ना?

इस बार सच में घबराते हुए निशा ने पूछा.

अतुल ज्यादा बोलने की हालत में नहीं tha...Bas चेहरे से hi "हां" में इशारा किया.

अतुल वही छत की रेलिंग का सपोर्ट ले कर रेस्ट करने laga...Iss बीच निशा उससे कई बार सवालिया नजरो से घूर रही थी.

अतुल:- वो कहता था ना तुम्हारे लिए चाँद और तारे तोड़ लाऊंगा.

प्यार भरी आवाज में अतुल निशा की आँखों में देख कर बोलै.

निशा:- Haa...Badi बड़ी बातें तो करते रहते ho...Isme नया क्या है?

अतुल:- अगर मई कहु की इस बार सच में ऐसा किया है तोह?

निशा:- और मई भी कहु की मई बेवक़ूफ़ नहीं हु की तुम्हारी बकवास पर यकीं कर लू.

अतुल:- यकीं कर लो डिअर.

फिर अतुल अपने पॉकेट से एक झिलमिलाता हुआ स्टार निकालता hai...Uska डिज़ाइन और चमक देख निशा से रहा नहीं jaata...Wo अतुल की हाथो से छीन लेती है.

निशा:- बहुत hi खूबसूरत hai...Kaha से लेकर आये?

अतुल:- बस अभी मार्किट से.

अतुल का बस इतना hi कहना था की निशा को साड़ी बातें समझ में आ जाती hai...Uska thakaan...Uska हांफना सब kuch...Aur उससे भी बड़ा सवाल.

निशा:- क्यणजरूरत थी इस वक्त जाने ki...Abhi कुछ देर पहले तो तेज बारिश हो रही थी ना?

अतुल:- तो क्या हुआ?

निशा:- तो क्या हुआ? अगर बीमार पद गए तो?

अतुल:- Beemaar...Aur वो भी mai...Kisi भी बैक्टीरिया और वायरस में इतना दम नहीं की मुझे बीमार कर सके. :स्मार्त्य:

अतुल ने बस इतना hi कहा था की वो जोर से छींकता है.

ये देख निशा अपने आप hi हसने लगती hai...Aur अतुल का हालत ऐसा हो गया था जैसे किसी छोटे बच्चे की चोरी पकड़ी गयी हो.

निशा ऐसे hi अतुल की बाल पर हाथ फेरने लगती है ki...Tabhi उससे एहसास होता है की कुछ देर पहले वो अतुल को पसीने में भींगने की सोच रही थी वो असल में...

निशा:- ये क्या तुम तो पूरी तरह भींगे हुए हो?

थोड़ा गुस्से के साथ निशा अतुल को देखती है.

अतुल:- जल्दबाज़ी में बाल सूखा नहीं पाया.

निशा कुछ कहे बिना hi छत से चली जाती है.

अतुल:- निशा?

एक दो बार अतुल निशा को आवाज लगाता है लेकिन निशा कुछ सुने बिना hi वह से चली जाती है.

रूम में पहुँच कर निशा पहले तो वो स्टार को प्यार से टेबल पर रखती hai...Usse देख एक बार फिर वो मुस्कुराती hai...Muskuraaye भी क्यों naa...Itne प्यार से अतुल ने जो दिया था उससे.

फिर एक टॉवल ले कर अतुल के पास चली जाती है.

निशा:- ये lo...Acche से पोछ लो.

अतुल:- इतना प्यार? देख lena...Ek दिन तुम्हारा यही प्यार मुझे मार डालेगी.

अतुल ने निशा को देख मुस्कुराते हुए कहा.

निशा:- फिर बकवास?

अतुल:- अच्छा sorry...Ye तो bataao...Kaisa लगा वो स्टार?

निशा:- तुम से ठीक ulta...Bahut hi प्यारा है.

अतुल:- और मई?

निशा:- तुम तो उल्लू (आउल) जैसे दीखते हो.

अतुल:- Accha...Abb पता chala...Ullu भी हैंडसम होते है.

अतुल की इस बात पर निशा कुछ देर उससे घूरती रही फिर अचानक hi हसने लगी.

निशा:- तुम भी ना.

फिर कुछ देर दोनों के बिच खामोशी छा जाती है.

निशा:- ऐसे क्या देख रहे हो?

अतुल को लगातार अपनी तरफ घूरता देख निशा ने पूछा.

अतुल:- Chaand...Jaanti हो मई सिर्फ तारा hi laaya...Chaand nahi...Chaand मेरे hi पास hai...Mere सामने.

सच में इस चाँद की रौशनी में तुम्हारी खूबसूरती चाँद से काम नहीं.

निशा:- क्या तुम भी?

निशा शर्माते हुए बोली.

अतुल:- जानता tha...Ye जोके तुम्हे पसंद आएगा.

निशा:- जोके?

निशा गुस्से से देखती हुई बोली.

Atul:-Nahi nahi...Mai तो...

एक बार फिर डरने की एक्टिंग की अतुल ne...Darne की काम निशा को हसाने की कोशिश ज्यादा thi...Aur कोशिश सदल भी hua...Nisha फिर अतुल को देख हसने लगी.

निशा:- अच्छा ये bataao...Itni तेज बारिश में इतना दूर वो भी भींगते हुए क्यों गए थे?

अतुल:- बस हौसला बुलंद होना chaahiye...Kuch भी संभव hai...Aur ये तो प्यार का हौसला है madam...Kuch भी कर जाता मई तुम्हारे लिए.

निशा:- मई कुछ पूछ रही हु और तुम जवाब कुछ और hi दे रही हो.

अतुल:- बस कुछ याद आ गया था इस लिए.

निशा:- क्या याद आया था?

अतुल:- एक दिन मेरा कंधे पर प्यार से सर रख कर मुझ से बात कर रही मेरी Nishu...Uski khwahish...Ki उसका अतुल उसके लिए आसमान से चाँद तारे तोड़ लाये.

आसमान से तो तोड़ नहीं saka...Ha लेकिन धक्का मुक्का करते हुए भीड़ वाली दूकान से वो तारा जरूर तोड़ लाया.

निशा:- कही छोट तो नहीं लगी? क्या जरुरत थी ये सब करने की?

निशा ने फ़िक्र के साथ पूछा

अतुल:- छोट बिलकुल भी नहीं laga...Bas थोड़ा थक जरूर गया था.

और क्यों ना laau...Aakhir मेरी निशु की ख्वाहिश hai...Puri कैसे नहीं करता.

निशा:- किसी और दिन लाते? आज hi क्यों?

अतुल ने अब्ब उदास होने की एक्टिंग की.

अतुल:- तुम मुझसे प्यार hi नहीं करती.

निशा:- अब्ब ये क्या नया बकवास कर रहे हो.

अतुल:- तुम्हे आज का डेट भी याद नहीं.

निशा कुछ देर तक सोचती है और फिर अचानक से एक्ससिटेड हो कर कहती है.

निशा:- आवर एनिवर्सरी.

अतुल:- Exactly...Anniversary...1 साल हो गए हमारे प्यार ko...Hamaare रिलेशनशिप को.

लेकिन तुम्हे ये याद कहा?

निशा अतुल की गाल पर प्यार से पिंच करते हुए.

निशा:- अगली बार से याद रखूंगी.

इतना hi काफी नहीं था की एक और सरप्राइज अतुल ने निशा के सामने रख दिया.

एक केक.

निशा की ख़ुशी का ठिकाना hi नहीं raha...Pyar से उसने अतुल को गले लगा लिया.

फिर ऐसे hi हंसी मजाक में दोनों केक कट करते है और एक दूसरे को खिलाते है.

अतुल:- चलो अब्ब मुंह मीठा कराओ?

निशा:- अभी तो केक खाया हमने.

अतुल:- केक से क्या होता है? मुंह मीठा तो कुछ और तरीके से होता है.

निशा की होंठो पर ऊँगली फिराते हुए अतुल ने कहा.

निशा:- यू?

फिर धीरे से निशा अतुल को मारने लगती है.

और फिर दोनों लग जाते है एक दूसरे से प्यार jataane...Apne होंठो से.

निशा आज बहुत खुश thi...Atul का ये deewanapan...Ye paagalpan...Uski एक ख्वाहिश के लिए अतुल ने क्या नहीं किया.

बस यही तो प्यार था दोनों ka...Jo एक दूसरे को और भी प्यार करने पर मजबूर कर रहा था एक दूसरे से.

निशा जो हमेशा सोचती थी की अतुल कभी उससे प्यार करेगा या nahi...Aaj वो उससे टूट कर प्यार करने लगा tha...Uska दीवानापन रोज नयी ऊंचाई पर पहुँच रहा था.

ऐसे hi प्यार और मस्तियाँ करने के बाद दोनों जब जाने hi वाले थे तब.

अतुल:- निशु.

निशा अतुल की तरफ देखती है.

अतुल:- तुमने चाँद तारे मांगे थे मैंने ला कर diya...Abb कही मेरी जान hi ना मांग lena...Warna वो भी दे दूंगा.

निशा एक बार फिर उससे झूठे गुस्से से घूरने lagi...Atul भी डरने की एक्टिंग कर अपने रूम में चला गया.

अतुल के जाने के बाद.

निशा:- बुद्धू.

फिर निशा भी ख़ुशी ख़ुशी अपने रूम में चली gayi...Aaj कितना ख़ास बना दिया था उनका एनिवर्सरी को अतुल ने.
 
अपडेट 94

वाह.

चाय का एक घूँट पीते hi अतुल ने kaha...Fir एक नजर निशा को देख कर.

अतुल:- बहुत सही जगह सेलेक्ट किया तुमने.

निशा:- इसी लिए कहती हु की कभी कभी पढ़ाई की दुनिया से भी बाहर niklo...Aur 5 स्टार होटल छोड़ हर जगह का मजा लो.

अतुल को समझ में नहीं आ रहा था की क्या कहे.

निशा:- कुछ ज्यादा कह दिया क्या?

अतुल:- कुछ नहीं बहुत jyada...Madam आप का नशा ऐसा चड्ढा है की पढ़ाई क्या खाना पीना hi भूल गया hu...Raat की नींद और दिन का चैन गायब hai...Aur आप है की मुझ बेचारे पर पढ़ाकू का टैग लगा रही है.

और और और 5 स्टार hotel...Aapne मुझे वह कब देख लिया? मई तो सिर्फ माँ की हाथो से बना दाल रोटी में hi खुश hu...Kabhi कभी दोस्तों के साथ कैफ़े चला जाता हु.

"सिंपल लिविंग हाई थिंकिंग" यही मेरा सोच hai...Aur तुम हो की मुझ बेचारे पर इतना बड़ा इल्जाम!!!

निशा:- बेचारे और तुम.

निशा हंसती हुई बोली.

निशा:- और मेरे बारे में क्या ख्याल है? लिविंग स्टैण्डर्ड?

अतुल:- Tum...Dekhne से तो ऐसे लगती ho...High लिविंग सिंपल थिंकिंग.

अतुल ने मुस्कुराते हुए kaha...Wo भी समझ चूका था की उसने जानबूझ कर मुशीबत को इनविटेशन दिया है.

निशा:- मार डालूंगी तुम्हे!

अतुल:- ओह्ह sorry...Simple लिविंग सिंपल थिंकिंग.

निशा:- तुम तो गए अब्ब!!! :अंगरीवीफे:

निशा अतुल की तरफ बढ़ hi रही थी की.

अतुल:- अरे क्यों बे वजह बिन शादी की विधवा बनना चाहती हो?

निशा:- कर दी ना फिर सी बकवास बातें.

अतुल भी अपनी जगह से उठा एयर निशा की पास जा कर.

अतुल:- तुम भी जानती ho...Aadat से मजबूर hu...Majaak hi तो hai...Kabhi तुम्हारे होंठो पर मुस्कान देखने के लिए तो कभी झूठा गुस्सा.

निशा:- लेकिन कोई और भी तो मजाक कर सकते ho...Aisi बकवास खु?

शिकायती नजर से अतुल को देख कर निशा ने पूछा.

अतुल:- वो मरने वाली baat...Khush मत ho...Aur 100 साल तुम्हे मुझे झेलना padega...Marji से या मर्जी की खिलाफ.

निशा की गालो पर पिंच करते हुए अतुल ने कहा.

फिर दोनों चाय की मजे लेने लगे.

अतुल:- सच में yaar...Chaai का कोई जवाब नहीं.

निशा:- इसी लिए यहाँ लेकर aayi...Aur ये mausam...Chaai की स्वाद और कई गुना बढ़ा रही है.

बाहर तेजी से बारिश हो रही thi...Thandi हवा, बारिश की कुछ चिन्ता और दोनों की प्यार और मस्ती majaak...Maahaul को और भी खूबसूरत बना रहा था.

अतुल:- और वो भी अपनों के saath...A कप ऑफ़ टिया + रािनय सीजन विथ love...Baat hi कुछ और है.

फिर दोनों कभी एक दूसरे को देखते तो कभी बाहर की बारिश को एक दूसरे की हाथ थाम कर.

अतुल:- होनेस्त्ली कहु तुम्हारे लाइफ स्टैण्डर्ड के बारे में तो तुम्हारी bhi...Simple लिविंग हाई थिंकिंग hai...Meri तरह hi...Issi लिए तो हमारा जोड़ी परफेक्ट है.

निशा बस मुस्कुराती है.

अतुल:- लेकिन एक डाउट hai...Physics में पढ़ा tha..."Like पोल्स रेपल एच इतर" तो हम दोनों एक साथ कैसे हो सकते है?

निशा:- बुद्धू.

अतुल के सर पर धीरे से मारते हुए निशा ने कहा.

निशा:- लव इस ा हिडन एंड स्ट्रॉन्गेस्ट force...Million टाइम्स मोरे स्ट्रांगर थान मैग्नेटिक force...Don't worry...Trust ों आवर love...No ओने कैन सेपरेट एंड रेपल उस फ्रॉम एच इतर.

निशा की बातें सुन कर अतुल भी तारीफ़ किये बिना नहीं रह पाया.

अतुल:- ब्यूटी विथ ब्रेन.

तभी दोनों का नाश्ता आ जाता है.

दोनों एक hi प्लेट में खा रहे थे.

अतुल:- वैसे Nishu...Ek राज की बात बताना चाहता हु.

निशा:- राज!! मुझसे भी बातें छुपाते हो?

अतुल:- नहीं nahi...Bas कभी बताने का मौका नहीं मिला.

निशा:- बताओ.

अतुल:- किसी को बताना mat...Mai किसी का जूठा नहीं खाता hu...Bas तुम्हारा hi.

निशा तो पहले अतुल की ऐसे घूरने लगी जैसे किसी अजीब नमूना को देख लिया हो.

निशा:- रियली?

अतुल:- Haa...Awkward लगता है.

निशा:- घर में किसी का भी नहीं.

अतुल:- नहीं.

निशा:- तो फिर मेरी hi क्यों?

अतुल इसका जवाब निशा की कानो में देता है.

अतुल:- तो फिर किश कैसे करूँगा? :डी

निशा:- यू अरे रियली तू मच.

अतुल:- ओनली फॉर योर लव.

अतुल:- प्लीज अजय की कानो तक ये बात किसी भी हाल में नहीं पहुंचनी चाहिए.

निशा:- क्यों?

अतुल:- हजार बार उसका मजाक उड़ा चूका हु की वो जूठा खाता hai...Agar उससे पता चल गया तो मेरा खैर नहीं.

निशा:- (हँसते हुए) अच्छा नहीं bataaungi...Par ये बताओ तुम किसी की बर्थडे पार्टी अटेंड नहीं करते.

अतुल:- बुलाते है तो अटेंड करता हु.

निशा:- तो वह पर जूठा केक.

अतुल:- कभी नहीं khaata...Sirf इतना कहता hu..."Yaa तो 1सत पीेछे या फिर भाड़ में जाओ."

निशा:- और वो मान जाते है?

अतुल:- माना hi पड़ता है.

निशा:- यह तो ब्लैकमेलिंग है?

अतुल:- नहीं यह ऐटिटूड है?

निशा:- तुमसे जीत नहीं सकती?

अतुल:- क्यों की मुझे हारना आता hi नहीं.

निशा:- बस बस.

हाथ जोड़ कर निशा बोली.

फिर दोनों एक दूसरे को अपने हाथो से नाश्ता खिलाने लगते है.

निशा:- बस bas...Abb और नहीं?

अतुल:- एक और.

किसी तरह अतुल निशा को खिला देता है.

निशा:- अब्ब और नहीं खा सकती.

फिर अतुल बाकी का खाने लगता hai...Wo खा hi रहा था की...

निशा:- शायद तुम्हारा पेट भी भर गया है.

अतुल:- Haa...Lekin खाना तो पड़ेगा hi...Aise कैसे छोड़ सकता हु.

निशा:- अब्ब खाया नहीं जा रहा है तो कैसे खाओगे?

अतुल:- धीरे धीरे.

धीरे धीरे hi सही लेकिन अतुल खाने की कोशिश कर रहा tha...Nisha बस अतुल को hi देख रही थी.

तभी ढाबा की hi साइड में एक बच्चा दीखता है जो बारिश से बचने के लिए वह आ गया tha...Jo नाश्ता खा रहे अतुल को hi देख रहा था.

अतुल उससे बुला कर उससे अपना नाश्ता दे देता है.

वो खा hi रहा था की.

अतुल:- और खाओगे?

बच्चा:- है भैया...2 समोसा और.

फिर अतुल उसकी ये इच्छा भी पूरा कर देता है.

बच्चा:- शुक्रिया भैया.

फिर वो ख़ुशी ख़ुशी वह से चला जाता है.

निशा अभी भी अतुल को देख रही थी.

अतुल:- मई कभी एना (फ़ूड) का बर्बादी होता देख नहीं sakta...Aur खुद कभी ऐसा होने नहीं deta...Jaanti हो सिर्फ चावल का एक दाना का कीमत क्या hai...Agar हर लोग इससे बर्बाद ना करे तो कई भूखे लोग की पेट भर सकता hai...Khair ये बात छोडो..

और वो baccha...Ek आशा भरी नजर से देख रहा tha...Kisi भूखा का पेट भरना और किसी प्यासा की प्यास mitaana...Isse पुण्य की काम क्या हो सकता है? अब्ब बच्चा hai...Khud काम कर के खाने की सलाह भी नहीं दे sakta...Child Labour...Ye सही भी नहीं है.

मई जितना कर सकता था उतना तो कर hi diya...Aage का बाद में sochenge...Aur जानती ho...Wo बच्चा इस खाने के बदले ऐसे दुआ देगा जो बहुत अनमोल (कीमती) hai...Aur मेरा माना ये है की हमें बड़ी खुशियां के साथ साथ ऐसी छोटी छोटी खुशियों के बारे में भी सोचना चाहिए.

जिंदगी छोटी सी hai...Har पल jiyo...Khushi से jiyo...Khud भी जियो और दुसरो को भी जीने दो.

अतुल का इतना कहने के बाद.

निशा:- यू अरे रियली ग्रेट.

अतुल:- Nahi...Itna तो फ़र्ज़ hai...Har कोई करते है और करना भी चाहिए.

फिर पेमेंट करने के बाद.

अतुल:- बारिश तेज है.

निशा:- Chalo...Bhingte हुए चलते है.

अतुल:- बीमार पद गए तोह?

निशा:- अच्छा उस दिन तो...

अतुल:- अपने लिए nahi...Tumhaare बारे में सोच रहा हु.

निशा:- कुछ नहीं hoga...Agar जुखाम और सर्दी हो भी गया तो दवाई खा लेंगे.

अतुल:- उस दिन मुझे तोह बहुत दांत रही थी भींगने पर.

निशा:- साथ नहीं थे इस वजह se...Bhigna है तो साथ भीगेंगे.

निशा एक आँख दबा कर बोली.

फिर दोनों बाइक पर भींगते हुए चल पड़ते है प्यार की एक और सफर पर.
 
अपडेट 95

दोनों का प्यार ऐसे hi हँसते खेलते आगे बढ़ रहा tha...Hansi मजाक और मस्तियाँ के साथ साथ ढेर सारा प्यार.

लेकिन इन् सबके बावजूद कुछ ग़लतफहमी और साजिश भी अपना नया रूप लेने के लिए तैयार था.

तब (ट्यूबरक्लोसिस) इस ा ग्रनुलोमाटोस इन्फ़्लम्मतिओं कौसड़ बी मैकोबैक्टेरियम...

अतुल इससे आगे कुछ बोलता उससे पहले hi.

प्रीती:- मतलब तब भी कैंसर है.

प्रीती ने तो भोलेपन से कहा लेकिन ये बात सुन कर अतुल की दिमाग ने जैसे काम करना hi बंद कर diya...Usse ऐसा लग रहा था जैसे उसने दुनिया का अथवा अजूबा सुन लिया है.

अतुल:- तब का का कैंसरररर है!!!

प्रीती:- आपने hi तो कहा tha...Cancer के पीछे "ोमा" सफिक्स होता hai...Aur अभी आपने कहा ट्यूबरक्लोसिस में भी ग्रनुलोमा होता है.

ये सुनते hi अतुल को अपना सर किसी दीवार पर फोड़ने का मन कर रहा था.

अतुल:- कभी एक्सेप्शन के बारे में सुना hai...Maine वो भी बताया tha...Granuloma और हेमाटोमा एक्सेप्शन hai...Lekin ऐसी बातें सुनता कौन hai...Aur किसने कह दिया हर कैंसर के पीछे ोमा होता है. लेकिमिया (ब्लड कैंसर) भी एक्सेप्शन है.

अतुल की बातो में गुस्सा काम फ़्रस्ट्रेशन ज्यादा था.

प्रीती:- अच्छा sorry...Aage से ध्यान रखूंगी.

प्रीती ने इतनी मासूमियत से कहा जैसे कुछ हुआ hi नहीं hai...Aur यही बात से अतुल का गुस्सा और भी बढ़ gaya...Wo बस प्रीती को hi देख रहा था.

प्रीती:- अब्ब आगे पढ़ते है.

अतुल:- क्या पढ़ोगी?

गुस्से में तो वो चीखना चाहता था लेकिन लाइब्रेरी में होने की वजह से उसकी आवाज घुट कर रह गया.

प्रीती:- यही ट्यूबरक्लोसिस.

अतुल:- नर्सरी में हो और एस्से लिखना चाहती ho...Pehle ा, बी, स, डी पढ़ लो.

प्रीती:- मई समझी नहीं.

अतुल:- यही तुम्हारा प्रॉब्लम hai...Tum कुछ समझती hi नहीं हो.

ग्रनुलोमाटोस इन्फ़्लम्मतिओं मतलब क्रोनिक Inflammation...Aur यही नहीं आता है तो तब क्या पढ़ोगी? तब इस ान एक्साम्प्ले ऑफ़ क्रोनिक इन्फ़्लम्मतिओं.

कितना वक्त लगा कर अच्छे से पढ़ाया था नेक्रोसिस एंड Inflammation...Lekin तुम्हे तो कुछ आता hi नहीं.

बेसिक hi कुछ आता नहीं तो आगे क्या padhogi...Hajaar बार कहा है इन्फ़्लम्मतिओं और नेओप्लासिए (कैंसर) पढ़ लिया तो पैथोलॉजी लगभग सब समझ जाओगी.

अतुल अब्ब बहुत पछ्ता रहा tha...Gussa भी इतना आ रहा था जैसे कभी भी सर फट सकता hai...Ussi प्रीती को पढ़ाने के लिए कितना वक्त बर्बाद किया tha...Nisha से भी न जाने कितनी बार ये बात छुपाया tha...Aur कितनी बार दांत भी खाया था.

लेकिन कभी अफ़सोस नहीं हुआ tha...Wo तो सोच रहा था की किसी को पढ़ा रहा hai...Accha काम hi तो कर रहा hai...Lekin उससे क्या पता था जिससे वो पढ़ा रहा है उससे कुछ समझ में आता hi नहीं hai...Itne अच्छे से टाइम दे कर पढ़ाने के बावजूद भी.

लेकिन इस बात से अतुल पूरी तरह से अनजान था की असल बात कुछ और hi hai...Sach तो ये था की प्रीती कभी कुछ समझना hi नहीं चाहती thi...Bas अतुल के साथ लाइब्रेरी में वक्त बिताने का दिखावा है.

अतुल अपनी जगह से उठ गया.

प्रीती:- कहा जा रहे है आप?

अतुल:- कुत्ते की पूछ को किना भी सीधा करने की कोशिश karo...Wo टेढ़ी hi रहती है.

तुम्हारा बस की नहीं है padhaai...Mai अपना टाइम वास्ते नहीं कर सकता.

अतुल अब्ब वह से निकलने hi वाला था की.

प्रीती:- तो फिर मई कैसे पढूंगी?

अतुल:- ये मई नहीं jaanta...Bas मई तुम्हे पढ़ा नहीं sakta...Jise पैथोलॉजी का 1सत Chapter की छोटी सी बात भी नहीं aata...Wo पैथोलॉजी padhegi...Hamesha कहा है पैथोलॉजी और एनाटोमी को सीरियसली पढ़ो लेकिन.

इतना कह कर अतुल फ़्रस्ट्रेशन में अपने सर पर हाथ जोर से मारा.

अतुल:- मई ये सब किसे समझा रहा हु?

फिर अतुल वह से कुछ कहे बिना गुस्से में निकल gaya...Preeti बस अतुल को hi देखती रही जब तक वो उसकी आँखों से ओझल नहीं हो गया.

तभी कुछ दूर हाथ में किताब लिए रवि जो पढ़ काम रहा था इनकी जासूसी ज्यादा कर रहा था वो प्रीती के पास आ गया.

प्रीती को देख कर वो समझ गया की प्रीती हर्ट हो गयी है.

रवि:- फ़िक्र मत karo...Sab ठीक हो जाएगा.

प्रीती:- कैसे ठीक हो जाएगा? पहली बार उन्हें इतने गुस्से में देखा hai...Aur ये गुस्सा भी मेरे लिए.

रवि:- तुमने कभी सुना नहीं? जिसे हम सबसे ज्यादा प्यार करते है हम उसी पर ज्यादा गुस्सा दिखता hai...Gussa भी एक प्रकार (टाइप) का प्यार hi है.

रवि ने मुस्कुराते हुए kaha...Lekin ये मुस्कान के पीछे का सचाई से सिर्फ वो hi वाकिफ था.

रवि की इस बात से प्रीती का चेहरा ख़ुशी से खिलखिला उठा.

लेकिन अगले hi पल,

प्रीती:- लेकिन वो तो निशा दी से प्यार करते है ना?

रवि:- है पहले करता tha...Lekin अब्ब पछ्ता रहा hai...Abb गलत लोगो से प्यार करेगा तो यही होगा ना.

देख नहीं रही हो आज कल कितने लड़ाई होने लगी है दोनों के bich...Dekhna बहुत जल्द दोनों में ब्रेक उप हो जाएगा.

प्रीती कुछ नहीं बोल रही thi...Mauka देखते hi रवि फिर बोल पड़ा.

रवि:- मैंने अतुल की आँखों में देखा है तुम्हारे लिए प्यार!!! हे लव्स you...Bas इसी वजह से तुमसे छोटी छोटी बातो पर गुस्सा हो जाता hai...Kyu की वो तुम्हारा केयर करता है? अगर प्यार नहीं करता तो गफ होते हुए भी क्यों तुम्हे पढ़ने में इतना टाइम स्पेंड करता?

बस देखती jaao...Bahut जल्द वो तुम्हे प्रोपोज़ भी करेगा.

रवि का बस इतना hi कहना था की प्रीती की ख़ुशी की कोई ठिकाना नहीं रहा.

प्रीती:- सच्ची.

प्रीती जैसे ख़ुशी से हवा में उड़ने लगी थी.

रवि:- बस देखती जाओ.

इतना कह कर रवि वह से निकल gaya...Abb उससे अपना प्लान कामयाब होता दिख रहा था.

रवि बस लाइब्रेरी से बाहर hi निकल रहा था की उससे एक फ़ोन आता है.

फ़ोन निशा का था.

रवि:- है निशा बोलो?

निशा:- अतुल क्या अभी भी कॉलेज में है? घर अभी तक आया नहीं hai...Uska और अजय दोनों का फ़ोन नहीं लग रहा है?

थोड़ा फ़िक्र के साथ निशा ने पूछा.

रवि:- है लाइब्रेरी में hi hai...Preeti को पढ़ा रहा hai...Keh रहा था रात 9 बजे वापस aayega...Kya उससे फ़ोन दू?

निशा:- कोई जरुरत नहीं.

इतना कह कर निशा गुस्से से फ़ोन कट कर देती है.

ये gussa...Yahi गुस्सा तो चाहता था Ravi...Safalta की तरफ एक कदम और बढ़ता देख रवि का भी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था.

निशा:- (इन हेर मंद अबाउट अतुल) झूठ बोलने की क्या जरुरत थी? कह देते मई मन थोड़ी karti...Lekin ऐसे झूठ बोलना? झूठ बोलना कब से सिख गए तुम अतुल?

निशा सच में अतुल से नाराज हो गयी थी.

दूसरी तरफ Atul...Wo आज निशा को एक सरप्राइज देने का सोच घर आ रहा tha...Lekin उससे क्या पता था उसके पीठ पीछे क्या चल रहा hai...Kaise वो एक ग़लतफहमी का शिकार हो रहा है और बिना किसी गलती के भी गलत बनता जा रहा है?
 
जस्ट पास होना सफलता नहीं इन माय view...Just पास तो बहुत लोग होते है म्हणत से भी और कभी कभी किस्मत se...Baaki की बातो पर आप से पूरी तरह सहमत hu...Kisi चीज़ में कामयाबी और नयी पहचान के लिए बहुत म्हणत करना पड़ता hai...Jaan लगा देना देना पड़ता है उस चीज़ को हासिल करने के लिए. :अप्प्रोवे:

और है सिर्फ रवि hi नहीं कोई और भी जलता है अतुल और निशा se...Aur वो है अभिशेख :स्मूथ:
 
अपडेट 96

आँखें बंद करो न निशु.

एक्ससिटेमेंट में अतुल ने कहा.

निशा:- क्यों?

थोड़ा रूखेपन से निशा ने जवाब दिया.

अतुल:- करो तो सही.

निशा आँखें बंद कर लेती है.

तभी अतुल निशा का हाथ थाम कर उसमे कुछ रख देता hai...Fir निशा की मुट्ठी बंद कर देता है.

अतुल:- अब्ब आँखें खोलो.

निशा आँख खोल कर फिर अपना मुट्ठी भी खोलती hai...Aur उसने जो देखा उससे देख ख़ुशी से उछाल पड़ी.

वो निशा का फवौरीते एअर रिंग tha...Silver का वो एअर रिंग अभी भी निशा की हाथो में चमक रहा था.

निशा:- तुम्हे कहा से मिला?

अतुल:- 2 घंटे की म्हणत hai...Kisi तरह धुंध hi लिया.

ये सुन कर निशा की नजरिया एक दम से बदल गया अतुल के liye...Kuch देर पहले जहा वो रवि की बातो से अतुल से नाराज थी और अब्ब फिर से उसकी आँखें प्यार से भर आया.

अतुल:- तुम्हारा फवौरीते एअर रिंग है न.

निशा:- Haan...Tumhara फर्स्ट गिफ्ट जो है.

अतुल:- अगली बार से अच्छे से रखना.

निशा:- Ok.

फिर निशा अतुल को देखने लगती hai...Kabhi प्यार तो कभी कोई सोच में खो रही थी वो.

अतुल:- क्या हुआ?

अतुल ने निशा की चेहरे की तरफ हाथ हिला कर पूछा.

निशा:- एक बात puchu...Buraa तो नहीं मानोगे.

अतुल:- Buraa...Wo भी तुम्हारी बातो ka...Impossible...Jo भी कहना है दिल खोल कर kaho...Nahi आर्डर karo...Banda आपकी सेवा में हाजिर है.

निशा:- तुम मुझसे अभी भी उतना hi प्यार करते हो ना?

पहले तो अतुल को लगा ये मजाक hai...Lekin निशा को सीरियस देख वो भी सोचने पर मजबूर हो गया.

अतुल:- Haan...Karta हु और करता rahunga...Lekin तुम ये क्यों पूछ रही हो?

निशा:- तुम मुझसे कुछ छुपाते तो नहीं?

अब्ब अतुल की थोड़ा बहुत हिंट मिल रहा tha...Lekin इस बार उसने कुछ नहीं कहा.

निशा:- कॉलेज में मुझे जाने के लिए कहा tha...Tumne कहा था की कुछ देर बाद घर aaoge...Fir?

अतुल:- Haan...Kaha तो था? लेकिन कुछ जरुरी काम...

निशा:- प्रीती को पढ़ना.

अतुल ने बस हां में सर हिलाया.

निशा:- और वो इतना जरुरी था की मुझसे झूठ बोलना पड़ा.

अतुल:- नहीं झूठ नहीं bola...Bas घर आने hi वाला tha...Preeti रास्ते में hi आ gayi...Aur कहने लगी तब पढ़ना है.

निशा:- ठीक hai...Maine कब मन किया hai...Lekin मुझे बता तो सकते थे ना.

तुम hi socho...Kitni बार तुमने मुझे ये बात छुपाया hai...Pyar करते है yaar...Har बात शेयर करना चाहिए ... ख़ुशी की बात हो या ग़म ke...Abb तुम hi बात छुपाने लगे तो हमारे बिच का विश्वास का क्या होगा?

अतुल:- छोटी सी बात सोच कर नहीं bataya...Lekin विश्वाश karo...Tumse छुपाना नहीं चाहता था.

अतुल भी अब्ब सीरियस होने laga...Usse दर था की कही निशा को ग़लतफहमी ना हो जाए.

निशा:- विश्वाश करती hu...Puri विश्वाश है की तुम हमेशा मुझसे प्यार करते rahoge...Dhokha देने की सोचोगे भी नहीं.

और तुम भी मुझ पर विश्वाश करते हो naa...To मुझे भी बताया karo...Accha lagega...Mai तुम्हे थोड़ी न रोकूंगी उससे मत padhaao...Bas छोटी से बड़ी हर बात बताया karo...Mai भी तो शेयर करती हु.

अतुल अपना सर हां में हिलाता है.

फिर दोनों के बिच थोड़ी बातें होती hai...Lekin इस बार दोनों hi सीरियस थे.

फिर रूम में जाने के बाद दोनों hi एक दूसरे के बारे में सोच रहे थे.

प्यार तो दोनों बहुत करते थे एक दूसरे se...Vishwash भी बहुत tha...Lekin इन् सब के बावजूद भी एक दर था अनजाना सा.

निशा का dar...Usse लग रहा था की कही अतुल उससे अलग ना हो jaaye...Wo इस बात को झुठला रही thi...Lekin कही न कही वो महसूस कर रही थी की अतुक उससे दूर होता जा रहा है.

अतुल का dar...Usse दर था की कही निशा लो ग़लतफहमी ना हो jaaye...Makshad उसका साफ़ था लेकिन जो कुछ भी उसके साथ हो रहा था आज कल इससे उसका दर भी बढ़ रहा था.

रवि:- और ला yaar...Itne से मन नहीं भरा.

अभिशेख एक पेग और भरता है कप में.

अभिशेख:- किस ख़ुशी में आज इतना पी रहा है.

रवि:- निशा को अतुल से दूर कर रहा hu...Bahut जल्द निशा मेरी हो जायेगी.

नशे की हालत में जोश के साथ रवि बोल रहा था.

फिर रवि अभिशेख को सब कुछ बता देता है.

अभिशेख:- प्लान तो तेरा सही hai...Lekin अगर अतुल को पता चल गया तो?

रवि:- पता चलेगा तो भी tab...Jab निशा मेरी हो जायेगी.

रवि इतना कह कर हसने लगता है.

अभिशेख:- अगर पहले hi पता चल गया तो.

रवि:- तो kya...Kuch नहीं कर paayega...Bahut दिनों से दोस्ती बर्दास्त कर रहा हु uska...Jarurat पड़ने पर उसको उसका औकात दिखा दूंगा.

वो है hi क्या? एक सिंपल मिडिल क्लास का लड़का और उसका एक दोस्त Ajay...Kya कर पायेगा वो?

अभिशेख:- लेकिन yaar...Wo अलग hai...Kabhi उसकी आँखों में दर देखा भी नहीं है हमारे liye...Aur उसका gussa...Uski आँखों में आँखें दाल भी नहीं सकता.

अभिशेख एक बार अतुल का गुस्सा सोचते hi अंदर से कांप उठा.

रवि:- पैसा और Gunde...Kuch भी कर सकते hai...Sirf यही दुआ है की इसका इस्तेमाल करना ना pade...Agar करना पड़ा तो पीछे नहीं हटूंगा.

अभिशेख:- लेकिन यार क्या ये सही होगा? क्या निशा इतनी जरुरी है तेरे लिए?

रवि:- Haa...Bahut प्यार करता हु usse...Uske लिए hi तो ये सब कर रहा हु.

अभिशेख:- मुझे ये प्यार से ज्यादा पागलपन दिख रहा hai...Pyar नहीं जूनून लग रहा है ये.

रवि:- बकवास मत kar...Aur मेरे सामने फिर ऐसी बकवास मत करना.

रवि गुस्से से देखते हुए bola...Abhisekh भी इस बार चुप हो गया.

आज भी पैसे नहीं है? अब्ब मई कैसे शॉपिंग करुँगी.

रिया का गुस्सा कण्ट्रोल में नहीं tha...Gaurav पर ना जाने कितनी देर से चिल्ला रही थी.

गौरव:- अगले दिन कर लेना शॉपिंग?

रिया:- ये कितने दिनों से कह रहे हो?

इस बार गौरव कुछ बोल ना सका.

रिया:- अगर नहीं ला सकते तो कह do...Mai घर से ले aaungi...Lekin tum...Tum कहते हो अब्ब मई तुम्हारी जिम्मेदारी hu...Aur तुम्हारा अभी से ये हालत है.

गौरव:- वो अतुल बिच में आ जाता hai...Papa ने सारे पैसे उसकी नया लैपटॉप और मोबाइल में खर्च कर दिए.

अतुल को याद करके नफरत में गौरव बोलै.

रिया:- तो मई क्या करू.

गौरव:- कुछ nahi...Jo करुणा मई hi करूँगा.

बाप बड़ा न bhai...Sabse बड़ा रुपैया.

बस देखती जाओ तुम.

कुछ सोचते हुए गौरव ने kaha...Aur उसका यही गुस्सा यही nafrat...Riya को बहुत खुश कर रहा था.

एक तरफ अतुल और निशा का ये अनजाना सा dar...Iske बावजूद दो तरफ से saajish...Na जाने इस बुर वक्त में अतुल के साथ क्या होने वाला था.
 
भाई सॉरी तो से थिस बूत अब्ब स्टोरी ऐसी मोड़ में है जहा से रोमांटिक उपदटेस काम hi aayega...Abb जल्द hi अतुल और निशा की जुदाई का सन आएगा और फिर अतुल का लाइफ का नई chapter...Usme भी पैन hi milenge...Judaai से पहले थोड़ा बहुत रोमांटिक सीन्स भी आएगा लेकिन शायद वो आपको इम्प्रेस ना कर पाए.

स्टोरी का प्लाट hi ऐसा hai...Kuch हैप्पी मोमेंट्स तो कुछ साद moments...Happy मोमेंट्स लगभग ख़तम हो hi गए है अब्ब बाकि है तो साद मोमेंट्स.

आपका एक कंप्लेंट या फिर wish...Flashback जल्दी ख़त्म karna...Abb फ्लैशबैक ज्यादा नहीं है.

और रही बात 50-50 (Pyar+Dard)...Ye शायद मुझसे नहीं हो पायेगा.

ी रेस्पेक्ट योर कमेंट एंड wishes...But भाई स्टोरी का प्लाट जैसा है उससे रोमांटिक उपदटेस (हैप्पी टाइप) वो उतना पॉसिबल नहीं hai...Sirf इतना hi उम्मीद है की एंडिंग आपको सटिस्फी कर सके.
 
अपडेट 97

कॉसटीवे एजेंट ऑफ़ टाइफाइड फीवर इस साल्मोनेला त्यही. कॉसटीवे एजेंट ऑफ़ टाइफाइड फीवर इस साल्मोनेला त्यही....10 टाइम्स.

ये क्या हो रहा है? क्यों कंसन्ट्रेट नहीं कर पा रहा हु.?

अतुल फ़्रस्ट्रेशन में खुद से hi बातें कर रहा था.

मई तो ऐसे पढ़ रहा हु जैसे की "कलर ऑफ़ लीफ इस ग्रीन." ये तो सबको पता है फिर भी रट्टा मार रहा hu...Aise hi तो है टाइफाइड...11, 12 से hi पढता आ रहा हु. कॉसटीवे एजेंट ऑफ़ टाइफाइड फीवर इस साल्मोनेला त्यही.

और इतनी छोटी सी बात भी दिमाग में नहीं घुस रहा है.

अतुल का फ़्रस्ट्रेशन बढ़ता hi जा रहा था.

फिर अतुल बुक उठा कर फेंकने hi वाला था की लास्ट मोमेंट में वो रुक gaya...Fir बुक की ररफ रेस्पेक्टफुल्ली और गिलटी नजर से देख कर बुक को अच्छे से टेबल पर रख देता है.

अतुल:- (इन हिज मंद) ये सब क्या कर रहा हु मई?

फिर अतुल अपने बीएड पर जा कर सोने की कोशिश करता है.

नींद आँखों से कोशो दूर tha...Aadha घंटा हो gaya...Bechaini बढ़ता जा रहा था लेकिन नींद की नामो निशाँ तक नहीं था.

ऐसे hi वो मोबाइल ले कर फब ों करता hai...Nisha ऑनलाइन थी.

ये देख कर अतुल के दिल में कभी दर्द के भाव तो कभी गुस्सा आ रहा था.

मैसेज टाइप kiya..."Hi"

लेकिन सेंड करने से पहले hi कैंसिल कर दिया.

अतुल:- मुझ में भी ऐटिटूड है.

फिर अतुल मोबाइल ऑफ कर देता है.

1 मंथ हो गया tha...Ravi अपने प्लान में धीरे धीरे सफल होता जा रहा tha...Plan भी ऐसा कर रहा था जिससे अतुल और निशा पूरी तरह से अनजान the...Agar कुछ दीखता था और समझ में आता था तो सिर्फ एक दूसरे की गलतियां.

विश्वाश दिल के किसी कोना में तो जरूर था लेकिन आँखों से देखि और कानो से सुनी हुई बातो को कैसे झुठला सकते थे.

कुछ ऐसी hi baatein...Dono को हर रोज एक दूसरे से अलग कर रहा था.

Pyar...Ek यही प्यार hi तो tha...Itna सब होने के बावजूद भी काम नहीं हुआ tha...Abb था तो कुछ ग़लतफहमी और shikaayat...Shikaayat एक दूसरे की गलतियां ki...Ummeed और intejaar...Ek दूसरे की माफ़ी मांगने की.

लेकिन ऐटिटूड problem...Dono में hi tha...Galti उसका है वो hi jhukega...Usko hi माफ़ी माँगना padega...Kuch यही सोच था दोनों ka...Aur इससे बढ़ाने में रवि का हाथ.

नेक्स्ट डे

अतुल क्लास में पहुँचते hi देखा की निशा पहले hi आ गयी hai...Wo फर्स्ट रौ में hi बैठी thi...Uske पास की सीट खली था.

लेकिन अतुल निशा को गुस्से से एक नजर देख लास्ट में चला gaya...Atul की इस हरकत से निशा का गुस्सा और भी बढ़ गया.

दूरिंग लेक्चर

डॉ. राहुल:- थ्रू ग्रॉस स्पेसिमेन हाउ विल यू डिफ्रेंटिट लार्ज इंटेस्टिने एंड स्माल इंटेस्टिने?

अतुल:- अभी पढ़ा नहीं है sir...Vakt सही नहीं चल रहा hai...Jald hi पढूंगा.

अतुल का बस इतना hi कहना था की.

अभिशेख:- इतना सिंपल क्वेश्चन का भी आंसर पता नहीं.

एक तो पहले hi मूड ऑफ और ऊपर से अभिशेख का ये बात.

अतुल:- मुझसे पन्गा लेने से पहले अपना औकात dekh...Pass होने की औकात नहीं और चल रहा है ज्ञान बांटने.

पहली बार अतुल ने पास और फ़ैल जैसी कड़वी बातें किसी के लिए कहा tha...Gussa भी इतना था की कुछ बी सोच समझ नहीं पा रहा था.

अभिशेख:- तू....

अतुल:- एक और बार कुछ बोल के dikha...Aur बाहर mil...Fir तुझे दिखाता हु.

अतुल का गुस्सा hi बता रहा था की वो इस वक्त कुछ भी कर सकता है.

डॉ. राहुल:- उम्मीद है तुम्हारा ये बुरा वक्त जल्द hi ख़त्म हो jaaye...Aur गुस्से पर थोड़ा कण्ट्रोल रखो.

Abhisekh...Class ख़त्म होने के बाद मुझ से ऑफिस में milna...Dusro से पूछा क्वेश्चन में ज्यादा hi मजे ले रहे ho...Aaj तुम्हारा नॉलेज टेस्ट करता हु.

अभिशेख:- लेकिन सर.

डॉ. राहुल:- मीट में ों माय office...We विल टॉक तेरे फुरदर.

ों लंच ब्रेक

निशा:- मुझे तुम से बात करनी है.

अतुल:- लेकिन मुझे नहीं करना किसी से कोई बातें.

निशा:- जरुरी बात है.

अतुल:- लेकिन मुझे कोई इंटरेस्ट नहीं है.

निशा:- इतना जिद्दी कब से हो गए.

अतुल:- माय life...My choice...My डिसिशन.

इतना कह कर अतुल वह से निकल गया.

इन कैंटीन

अजय:- मुझे तुझसे बात करना है?

अतुल:- मूड नहीं है.

अजय अतुल को किसी तरह मन hi लेता है.

अजय:- आज कल तुझे हुआ क्या है?

अतुल:- मुझे क्या hoga...Hua तो बाकी लोगो को hai...Sab अपना hi डिसिशन बना रहे hai...Aur जो मन में आये वही बोल कर चले जाते है.

अजय:- इशारा किस तरफ है?

अतुल:- (गुस्से से) निशा.

अजय:- अच्छा तो लव मटर है.

अजय बे हँसते हुए पूछा.

अतुल:- हंस मत.

अजय भी अतुल का गुस्से से बच नहीं paaya...Wo समझ गया की कुछ तो गलत हुआ hai...Bahut galat...Warna अतुल ऐसे hi कभी गुस्सा नहीं होता.

अजय:- हुआ क्या है? सुरु से बोल.

अतुल:- यार ये प्यार में लड़का hi क्यों गलत होते है? लड़की चाहे कुछ भी करे उनकी की गलती nahi...Ladke तो जन्म से hi बेवफा और धोखेबाज़ जैसे टैग के साथ पैदा होते है.

कुछ भी हो लड़का hi गलत होते hai...Wohi प्यार में धोखा देते hai...Cheat करते hai...Relationship में होते हुए भी दूसरी लड़कियों के बारे में सोचते hai...Jab हमारा मन भर जाता है तो उन्हें छोड़ कर दुसरो के साथ सेट हो जाते hai...Ham आशिक़ काम प्लेबॉय ज्यादा होते hai...Pyar वयर कुछ होता नहीं बस टाइम पास के लिए लड़की पटटे है.

और ladkiyan...Kitni महान होती है ना? उनका pyar...Unki wafayein...Kitna महान होता है naa...Badnaam तो हमेशा लड़कों का प्यार hi होता है.

उनका प्यार प्यार और हमारा प्यार हवस?

अतुल ने अपनी दिल की साड़ी बोझ अजय को बोल दिया.

अजय को यकीं नहीं हो रहा था की बात इतना आगे बढ़ गया है.

अजय:- साफ़ साफ़ bol...Hua क्या है?

अतुल:- कुछ ऐसा hi फील हुआ yaar...Nisha की बात सुन कर.

अजय कुछ नहीं bola...Wo कुछ सोच रहा था.

अतुल:- Yaar...Soch रहा हु ऐसे प्यार जैसे चक्कर से अलग हो jaau...Abb और नहीं सेह पा रहा हु ये सब.

हर पल दिल टूटता हुआ महसूस कर रहा hu...Nahi सेह पा रहा हु यार ये सब.

कितने अच्छे दिन थे यार wo...Jab सिंगल हुआ करता tha...Sirf एक hi टेंशन और मिशन tha...Kaise ज्यादा से ज्यादा पढ़ सकू.

लेकिन abb...Jindagi क्या से हो गया!!!

जो भी अतुल के दिल में थे वो सब बोलते जा रहा tha...Dusri तरफ अजय गहरी सोच में डूबा tha...Atul और निशा के बारे में.
 
अपडेट 98

अजय:- आज निशा तुझे बुला रही थी बात करने के लिए तोह क्यों मन कर दिया तूने?

अतुल:- क्यों बात करू मई?

मई इतने दिनों से उससे बुला बुला कर थक गया hu...Kabhi उसने मेरी बात सुना? फ़ोन, मेस्सगेस, फेसबुक, व्हाट्सप्प हर jagah...Lekin उसने कभी नहीं सुना.

और आज वो बुला रही है तोह मई जाओ बात करने? कोई चांस hi नहीं.

अतुल का गुस्सा था की बढ़ता hi जा रहा था.

अजय:- समझा कर भाई!!!

अतुल:- मई समझू? समझने की जरुरत उससे है.

अजय:- अगर ऐसे hi ईगो प्यार के बिच में आता रहा तो प्यार प्यार नहीं रहेगा.

अतुल:- Ego...Ha बहुत ईगो में hu...Vajah सिर्फ वो है.

थक गया हु मनाते manaate...Bina गलती के भी कई बार सॉरी बोल चूका hu...Kayi बार उसको मनाने की चक्कर में अपना सेल्फ रेस्पेक्ट तक गिरा दिया hai...Abb इससे ज्यादा क्या कर सकता हु मई?

और करूँगा भी nahi...Samjhaya उससे जाता है जिसको कुछ समझ में आये.

और तुझे क्या लगता है? उसने मुझे क्यों बुलाया होगा? मेरा दो चार गलती और दिखा degi...Aur फिर कुछ बातें सूना कर चली जायेगी.

अजय:- यार मुझे लगता है कुछ ग़लतफहमी हो रहा hai...Tum दोनों को hi मिल कर इससे दूर करना होगा?

अतुल:- कुछ ग़लतफहमी नहीं hai...Bakwas बातें सोचने की आदत हो गयी है uski...Har बार शक.

वही कहती थी प्यार में शक नहीं होना chaahiye...Lekin अब्ब वही शक कर रही है. :नू:

मई तो कब से कोशिश कर रहा हु उससे बात करके समझाने की लेकिन वो hi है की शक की दूकान अपने साथ ले कर घूम रही है.

शक भी ऐसा की अब्ब मेरा उसमे इंटरेस्ट नहीं raha...Abb मेरा प्रीती के साथ चक्कर चल रहा है.

गुस्सा तो इतना आ रहा है की.....

गुस्से में अतुल इससे आगे बोल भी नहीं पा रहा था.

अजय:- यार शांत हो jaa...Gussa थूक दे यार.

इस बात पर अतुल कुछ देर अजय के लिए घूरता है और.

अतुल:- तू जानता है मई जल्दी गुस्सा नहीं होता और हो भी जाओ तो कण्ट्रोल कर लेता hu...Lekin इस बार आउट ऑफ़ कण्ट्रोल है.

ना तेरे कहने से और ना hi मेरे चाहने से कुछ hoga...Bas दर है की कही कुछ गलत ना कर बैठु.

अजय भी समझ गया की अतुल को कुछ देर शांत छोड़ देना चाहिए.

लगभग 15 मिनट तक दोनों में से किसी ने कुछ नहीं bola...Dhire धीरे अतुल का गुस्सा काम होने लगा.

गुस्सा काम होते hi...

अतुल:- यार हमेशा hi हम लड़के hi गलत क्यों होते है?

एकदम से अतुल की आवाज में बदलाव आ gaya...Aawaj बता रहा था की वो कितना टूटा हुआ है.

अतुल:- कितना कुछ करते है हम अपने प्यार के एहसास दिलाने के liye...Lekin आखिर में दोषी भी हम hi बन जाते है.

जब से प्यार करने लगते है टूट कर प्यार करते hai...Aisa लगता है की वही हमारा दुनिया hai...Har ख़ुशी उसी के पास रहने में ढूंढते hai...Usko स्पेशल फील कराने की हर एक कोशिश करते है.

मेरे साथ भी तो ऐसा hi हुआ tha...Aur साथ hi हमेशा एक अलग सा dar...Nisha किसी और के साथ प्यार करती hai...Iske बावजूद भी मेरे प्यार में कभी कोई कमी नहीं aaya...Dar और दिल में दर्द के साथ भी उससे प्यार करता रहा.

प्रोपोज़ भी हम लड़के hi करते hai...Agar वो प्यार को ठुकरा दे तो देवदास बन जाते है और अपना ले तो खुद को दुनिया का सबसे खुश किस्मत इंसान खुद को hi मानने लगते है.

और फिर सुरु उनके nakhre...Wo भी हम झेल लेते है बड़े प्यार se...Aur फिर अपनी तरफ से प्यार का इजहार करने के लिए नए नए सुरपरिसेस देते रहते hai...Paagalpan की हद्द से गुजर जाते है.

मिडिल क्लास फॅमिली से hu...Pocketmoney भी लिमिटेड hi होता hai...Kitni बार खुद से hi कोम्प्रोमाईज़ कर के गिफ्ट खरीदता हु निशा के liye...Wo कभी मांगती तो नहीं लेकिन अपनी ख़ुशी के लिए ये सब करता हु उसके मना करने के baawjud...Accha लगता है yaar...Usko सरप्राइज देना, गिफ्ट dena...Apne प्यार को नए नए तरह से एहसास कराते रहते hai...Uski एक muskaan...Ek ख़ुशी के लिए न जाने क्या क्या कर जाते hai...Wo भी प्यार से.

इतना सब करने के बावजूद भी मई कभी ये नहीं सोचता और नहीं चाहता की निशा भी मेरे लिए इतना कुछ kare...Bas वो भी मुझसे हमेशा प्यार करती रहे और जिंदगी की सफर में हमेशा साथ chale...Yahi ख्वाहिश है.

बस यही तो चाहते है की वो भी मेरे साथ कदम से कदम कंधे से कन्धा मिला कर chale...Hamesha विश्वाश kare...Kabhi गलत हो जाओ तो दांत कर samjhaaye...Sukh और दुःख हर वक्त में साथ दे.

यार अगर वो साथ दे ना तो उसके लिए हर चीज भुला du...Itna प्यार करता हु usse...Lekin yaar...Abb तो वही शक कर रही है :(...जब मेरा कोई गलती hi नहीं hai...Jindagi भर साथ निभाने की कसम खाने वाले दो कदम भी साथ नहीं निभा पाए.

अजय अतुल की बात ध्यान से सुन रहा tha...Atul पर तो आँख बंद करके वो विश्वाश करता tha...Lekin कही न कही उससे ये भी लग रहा था की निशा भी गलत नहीं हो सकती.

अजय:- तोह अब्ब आगे क्या करेगा?

अतुल:- कर भी क्या सकता hu...Wo कभी कुछ सुनने के लिए तैयार नहीं है.

अजय:- ऐसे कैसे चलेगा?

अतुल:- मुझे भी लगता है अब्ब कुछ भी पॉसिबल नहीं है.

अजय:- फिर?

अतुल:- फिर kya...Alag हो जाएंगे.

गुस्से में अतुल ने कहा.

अजय भी चुप हो gaya...Wo जानता था की अतुल गुस्से में बोल रहा है लेकिन जो भी बोलै था वो साफ़ दिखा रहा था की बात कहा तक पहुँच गया है.

अतुल:- अगर इस हाल में उसने मुझे छोड़ दिया naa...Toh मई उससे कभी माफ़ नहीं कर पाऊंगा.

इस बार इमोशनल हो कर अतुल ने कहा.

अजय:- भाई मेरे liye...Ek बार और अपना सेल्फ रेस्पेक्ट गिरा de...Ek बार और तरय कर निशा को समझाने ki...Itni आसानी से अलग कैसे होने की सोच सकता hai...Do तीन महीने लगा तुझे प्यार का इजहार करने में...1 साल से भी ज्यादा का रिलेशनशिप और अलग होने की बात वो भी दो तीन दिनों में?

कभी कभी अपनों के लिए ईगो और सेल्फ रेस्पेक्ट भूल जा yaar...Shayad बाद में पछताना ना पड़े.

अतुल अजय की बात के बारे में सोच hi रहा था की उससे सामने से निशा निकलती हुई दिखी.

निशा को देखते hi कभी उससे प्यार आता तो कभी gussa...Lekin कुछ hi पल बाद उसने जो देखा उससे उसका गुस्सा कई गुना ज्यादा बढ़ गया. :माध:
 
थैंक्स कामदेव भाई फॉर योर सपोर्ट एंड review...Aapki बातो से सहमत हु की अतुल गलतियां करता जा रहा hai...Galatfehmi में आ कर बिना कुछ सच्चाई जाने गलतियां करने के साथ उसका कुछ थॉट भी उससे गलत बना रहा hai...Aur अभी कुछ बातें और भी है जिसका रिप्लाई अपडेट के थ्रू dunga...Aise hi रेविएवस के साथ कंस्ट्रक्टिवे क्रिटिसिज्म भी देते रहिये भाई.
 
ग्लिम्पसे ऑफ़ अपडेट 99

निशा:- अब्ब क्या है? क्यों बुलाया?

छत में आते hi निशा गुस्से से boli...Atul तो पहले से hi गुस्से में tha...Fir भी अपना गुस्सा दबाते हुए.

अतुल:- मुझे ये रवि ठीक नहीं लग रहा है.

निशा:- तोह?

अतुल:- क्या तोह? उससे दूर रहा करो.

निशा:- तुम कौन होते हो मुझे ये सलाह देने वाले.

निशा तो गुस्से में बोले जा रही थी लेकिन उसकी ये बात से अब्ब अतुल खुद पर और कण्ट्रोल नहीं कर पाया.

अतुल:- मई कौन हु? अब्ब ये मत कहना की हम दोनों अलग हो गए है और अब्ब वो प्यार भी नहीं रहा.

गुस्से में अतुल की आवाज भी तेज हो रहा था.

निशा:- है अब्ब नहीं रहा pyar...Nahi करती हु तुम से प्यार.

अतुल अब्ब निशा की आँखों में देखते हुए...

अतुल:- सच बोल रही हो?

निशा कुछ जवाब देती इससे पहले अतुल एक बार फिर से...

अतुल:- अगर ये सच है तो मुझे भी आज से तुमसे कोई मतलब nahi...Mai भी हमारे रिश्ते को इस तरह से तोड़ लूंगा की कभी जुट नहीं पायेगा और ना hi जुटने दूंगा.

खुद की कसम खाता हु कभी मुद कर तुम्हे देखूंगा भी nahi...Har वो फोटोज और यादें जला दूंगा जिसमे हम दोनों साथ हो.

फिर तुम्हारी जिंदगी तुम्हे मुबारक और मेरा जिंदगी मुझे.

इतना कह कर अतुल छत की चक्कर लगाने लगता hai...Frustration में दीवाल पर मुक्का मरता तो कभी अपने hi बाल नोचने laga...Gussa अपने चरम पर था.

अतुल:- बहुत सेह liya...Lekin अब्ब और किस हद्द tak...Gussa सिर्फ तुम्हे hi नहीं aata...Aaj जो गुस्सा देख रही हो naa...Yahi gussa...Aisi गुस्सा में सिर्फ "में एंड Myself"...Baaki किसी की मुझे परवाह नहीं और कोई मतलब भी नहीं.

अब्ब अतुल अपना आँखें निशा की तरह उठा कर.

अतुल:- जल्दी जवाब do...Faaltu का टाइम नहीं है मेरे पास.

निशा अतुल को देख कर एकदम से दर जाती है.

अतुल का चेहरा और आँखें गुस्से में बिलकुल लाल हो गया tha...Chehra पूरा पसीना में भींगा हुआ और आँखें उसको hi घूरता हुआ.

अतुल:- जवाब दो.

लगभग दहाड़ते हुए अतुल बोलै.

[सॉरी friends...Jyada लिख नहीं paaya...Abhi थोड़ा बिजी हु और आज अपडेट देने का बोलै था इस लिए एक बार फिर अपडेट का झलक लिख कर hi पोस्ट कर रहा hu...Next अपडेट कल तक कम्पलीट कर के पोस्ट करूँगा.

अब्ब आप बताइये निशा का जवाब क्या होगा?

एंड सॉरी फॉर शार्ट अपडेट (glimpse)...Will कम्पलीट आईटी बी टुमारो.
 
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