Kasam - Love is not Everything (Completed) - Page 3 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Kasam - Love is not Everything (Completed)

अपडेट 17

काजल के अकाउंट चेक करने के बाद निशा ने देखा की अतुल ने उसके कुछ hi फोटोज लिखे किया है और कुछ जगह पर comment…Fir निशा अंजलि का अकाउंट चेक करती hai…Waha भी अतुल ने कुछ जगह पर hi लाइक्स एंड कमैंट्स किया था.

ये देखने के बाद निशा सोचती है.

निशा:- (इन हेर मंद) कुछ hi फोटोज लिखे किया है और वो भी बहुत दिनों के baad…Shaayad बहुत hi काम फेसबुक चलता है.

फिर निशा अतुल को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज देती है और फिर सोचने लगती है.

निशा:- (इन हेर मंद) पता नहीं मई क्यों इतना सोच रही हु अतुल के बारे me…Kabhi कभी तो खुद पर hi गुस्सा आता है कुछ भी सोचने लगती हु और वजह से खुद hi अनजान रहती हु.

फिर निशा पढ़ने लग जाती hai…Raat के करीब 10:00 पं में निशा के मोबाइल में एक नोटिफिकेशन आता hai…Atul ने उसका फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लिया है.

बुक को साइड में रख कर वो बीएड पर चली जाती है और अतुल से चैटिंग करने लगती है.

निशा:- Hi.

कुछ देर बाद अतुल का रिप्लाई आता है.

अतुल:- Hello…But सॉरी फॉर now…Kal बात karenge…Abhi सोने जा रहा hu…Abhi फेसबुक खोला तो देखा तुम्हारा फ्रेंड रिक्वेस्ट आया था और मैंने एक्सेप्ट कर लिया.

अतुल की मैसेज से निशा का मूड थोड़ा ऑफ हो गया और साथ में हैरानी भी.

निशा:- इतनी जल्दी सोते हो? तो फिर बाकी की पढ़ाई कब करते हो?

अतुल ने उसको बताया था की वो 5 घंटा पढता hai…Shaam के 7:00 पं तक तो वो अतुल के साथ hi थी छत par…Aur अभी तो 3 hi घंटा हुआ था.

अतुल:- इस वक्त हमेशा सोता hu…Subah 4 या 5 बजे उठ कर बाकी का पढता हु.

निशा:- सच में पढ़ाकू हो.

अतुल:- Shaayad…Accha goodnight…Abb नींद भी लग रहा है.

निशा ने अतुल का मैसेज देखा hi था की अतुल का ऑफलाइन होने का सिंबल आ गया.

निशा:- गुड नाईट.

फिर निशा भी अपना मोबाइल ऑफ कर देती है और सोचती है.

निशा:- यकीं नहीं hota…Koi इतना कैसे पढ़ सकता hai…Sach में अतुल का पढ़ाई में ज्यादा hi इंटरेस्ट है.

इतना सोचने के बाद निशा फिर पढ़ने लगती है…11:00 पं के करीब वो भी सू जाती है.

नेक्स्ट डे ात कॉलेज

अतुल आज भी कॉलेज बाकी स्टूडेंट्स से जल्दी पहुँच गया tha…Jab वो आया था तब दो या तीन hi स्टूडेंट क्लास में मौजूद the…Thodi देर उनसे बात करने के बाद अतुल फ्रंट रौ के सीट में आ कर बैठता है.

धीरे धीरे सभी स्टूडेंट्स आने लगते hai…Nisha और अंजलि आज भी साथ hi आये the…Aaj अतुल को अकेला देख वो अतुल के पास आ कर बैठ जाती hai…Anjali को थोड़ा हैरानी होता है की निशा आज कल कुछ ज्यादा hi करीब हो गयी है और उससे बताये बिना hi अतुल के साथ जा कर बैठ gayi…Fir अतुल से hi hello करने के बाद वो कुछ रौ पीछे जा कर बैठ जाती है.

कुछ देर बाद काजल भी आ जाती hai…Atul और निशा से कुछ देर बात करने के बाद वो भी पीछे अंजलि के साथ जा कर बैठ जाती है.

निशा:- इतना चुप क्यों हो आज?

जब से निशा आयी थी उसने महसूस किया की अतुल का आज मूड ऑफ है और वो बात भी नहीं कर रहा tha…Usne अंजलि और काजल से ठीक से बात भी नहीं kiya...Bas उनकी बातों का जवाब दे रहा था वो भी कुछ hi शब्द में.

अतुल:- आज मूड ठीक नहीं है.

अतुल गुस्से में भी लग रहा था.

निशा:- क्या हुआ?

निशा ने भी सीरियस हो कर hi pucha…Atul ने निशा की तरफ देखा और फिर दूसरी तरफ देखने लगा.

निशा:- अगर नहीं बताना चाहते हो तो ठीक hai…Mat बताओ.

निशा ने बहुत धीरे से kaha…Uski आवाज में अतुल ने अपने लिए थोड़ा फ़िक्र महसूस किया.

एक बार फिर उसने निशा को dekha…Nisha को देख कर ऐसा लग रहा था की वो अतुल की मूड ऑफ होने की वजह का अंदाजा लगा रही thi…Atul ने कुछ पल सोचा और फिर उसने बताने का फैसला किया.

अतुल:- आज सुबह सुबह hi गौरव से फिर लड़ाई हो गया?

अतुल ने बहुत गुस्से में गौरव kaha…Usko भैया कहना तो वो कब का भूल चूका था.

निशा:- कौन गौरव?

अतुल:- मेरा भैया.

भैया कहते वक्त भी अतुल सोच रहा था की भैया कहु या नहीं.

निशा को हैरानी हो रहा था की अतुल का किसी से लड़ाई भी हो सकता hai…Wo तो सिर्फ अपने काम से मतलब रखता है.

निशा:- क्यों? क्या हुआ?

हैरानी में निशा ने पूछा.

अतुल:- कुछ ख़ास nahi…Hamesha ऐसा होता hai…Ladne का कोई मौका नहीं छोड़ता hai…Pata नहीं उसका क्या दुश्मनी है mujhse…Bachpan से ऐसा hi कर रहा है वो.

अतुल धीरे से लेकिन बहुत गुस्से में कह रहा था साड़ी baatein…Baaki कोई न सुन सके इसी लिए वो धीरे से बोल रहा था.

निशा पेहे भी यही सोच में थी की अतुल और गौरव इतना अलग क्यों hai…Gaurav एक तरफ गुंडा टाइप का जो हर वक्त दुसरो से लड़ते hi रहता है और वही अतुल एक डैम शांत और अपने काम से hi मतलब रखने वाला.

आज अतुल से बात करने के बाद उससे पता चल गया की गौरव अतुल के साथ भी वैसा hi है जैसे बाकी लोग के saath…Ye अच्छी बात था की अतुल उसके जैसा नहीं बना.

निशा को अतुल आज "खिच्चड़ का कमल" लग रहा tha…Wo उसके पापा और भैया को तो पहले भी जानती thi…Atul को समझने के बाद उसने महसूस किया की अतुल दोनों से बहुत अलग है.

निशा:- तो फिर तुम उनसे बात करके सब कुछ ठीक कर lo…Bhai भाई में दुश्मनी होना कोई अच्छी बात तो नहीं है.

अतुल:- वो कुछ माने के लिए तैयार हो तब na…Hamesha मुझे दुश्मन hi माना है उसने और वैसा hi बेहवे किया hai…Pehle तो छोटा था और कुछ कर भी नहीं सकता tha…Lekin अब्ब मई पहले जैसा कमजोर नहीं hu…Jawaab दे सकता हु.

शायद hi ये दुश्मनी कभी ख़तम ho…Naa hi वो कभी बदलेगा और ना hi कभी हमारा दुश्मनी कभी ख़त्म hoga…Mai तो उससे दुश्मन भी नहीं मंटा औअर नाही कोई रिश्ता रखना चाहता हु लेकिन वो hi है जो बार बार लड़ने चला आता hai…Kuch न कुछ करना hi पड़ेगा.

अतुल ने बहुत गुस्से में कहा ये baat…Nisha ने भी अतुल का गौरव के साथ रिलेशन और अतुल का गुस्सा देख लिया.

निशा:- अच्छा तो फिर अभी ये गुस्सा थूक दो.

निशा जो अभी तक सीरियसली बात कर रही थी अचानक मुस्कुरा कर नोर्मल्ली बात करने लगी.

अतुल को भी निशा का अचानक ऐसा बिहेवियर समझ में नहीं aaya…Wo निशा की तरफ देखता है और समझने की कोशिश करता है.

निशा:- अगर तुम्हारा चेहरा टमाटर की तरह लाल रहा तो यकीं के साथ कह सकती हु आज तुम क्लास को अच्छे से अटेंड नहीं कर पाओगे और पूरा दिन वास्ते हो जाएगा.

निशा ने फिर मुस्कुरा कर kaha…Wo किसी तरह अतुल का मूड ठीक करना चाहती थी.

निशा:- अगर तुम ऐसे hi गुस्सा में रहोगे तो तुम्हारा hi लोस्स hoga…Naa की तुम्हारा भैया ka…Jiski वजह से तुम गुस्से में हो.

सो तैयार हो जाओ पढ़ाई के liye…Kuch hi देर में क्लास भी सुरु होने वाला hai…Agar फिर भी तुमने पढ़ाई में ध्यान नहीं दिया तो मई अपना नोट भी नहीं दूंगी.

निशा ने लास्ट के लाइन कुछ इस तरह से कहा जिससे अतुल के चेहरे में थोड़ा सा स्माइल आ gaya…Usne सोचा निशा सच hi कह रही hai…Agar वो गुस्सा रहा तो ठीक से पढ़ भी नहीं पायेगा.

अपने गुस्सा को काम करने की कोशिश करते हुए उसने थोड़ा स्माइल के साथ कहा.

अतुल:- थैंक्स.

निशा ने जवाब में सिर्फ स्माइल hi दिया.

अतुल को निशा का इस तरह समझाना बहुत अच्छा laga…Gusse में वो ये भूल गया था की ये गुस्सा उससे hi नुकशान पहुंचाने वाला hai…Kahi का गुस्सा कही और उतारना अच्छा नहीं hai…Wo मुस्कुरा कर एक नजर निशा को देखता है और फिर बैग से बुक निकालने लगता है.

दूसरी तरफ निशा भी अतुल के बारे में और भी ज्यादा जान रही thi…Kuch hi वक्त में उसने अतुल को बहुत अच्छे से जान लिया tha…Lekin एक सरप्राइज अभी बाकी tha…Jo कुछ देर बाद उससे मिलने वाला hai…Atul के बारे में ऐसा बात उससे पता चलने वाला था जिसके बारे में वो सोच भी नहीं कर सकती thi…Vishwaas करना तो दूर की बात है.

इन् सब के अलावा पीछे से दो आँखें ऐसा भी था जो कुछ दिनों से दोनों को घर रहा tha…Dono की करीबी उससे अच्छा नहीं लग रहा tha…Wo भी अपना सही वक्त का इंतजार मई था.
 
अपडेट 18

क्लास में टीचर आने के बाद अतुल और निशा दोनों hi पढ़ाई में hi ध्यान देने लगते hai…Hamesha की तरह इस बिच दोनों में कुछ बात नहीं होता है.

लेक्चर की वक्त कभी कभी निशा अतुल को देख लेती thi…Atul के फेस में कोई भी एक्सप्रेशन नहीं tha…Wo सिर्फ टीचर और बोर्ड को hi देख रहा tha…Issi तरह कभी कभी अतुल का भी नजर निशा पर पद जाता tha…Lekin 2 सेकण्ड्स से ज्यादा nahi…Wo फिर अपने पढ़ाई में कंसन्ट्रेट करने लगता.

लंच टाइम

इसी तरह लेक्टर्स ख़तम होने के बाद लंच ब्रेक का टाइम आता hai…Sabhi दोस्त पहले की तरह एक hi टेबल में बैठ जाते है खाने के लिए.

लंच टाइम में भी सभी एक दूसरे से हंसी मजाक कर रहे थे लेकिन अतुल शांत tha…Nisha तो वजह जानती thi…Baaki कोई जान पाते उससे पहले hi अतुल ने कहा.

अतुल:- सॉरी friends…Aaj खाने का मन नहीं है और मूड ऑफ भी hai…Mai एक बिस्कुट लेके पार्क में जाता hu…Tum सब लंच कर के आ जाना.

अतुल इतना कह कर उठ hi रहा था की अजय ने कहा.

अजय:- तो फिर चल आज मई भी पार्क में hi चलता हु तेरे saath…Aaj एक दिन नहीं खाऊंगा तो मेरा 6 पैक्स में कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

अजय ने हँसते हुए कहा.

अतुल:- प्लीज yaar…Iss वक्त ओवरएक्टिंग मत kar…Mai अकेला रहना चाहता हु कुछ पल के लिए इसी लिए जा रहा हु.

अतुल थोड़ा फ़्रस्ट्रेटेड हो कर बोलै.

उसके बाद अजय ने भी कुछ नहीं कहा.

अतुल:- Ok friends…Lunch करके आ जाना.

इतना कह कर अतुल वह से चला गया.

अतुल के जाने के बाद hi काजल बोली.

काजल:- आज अतुल को क्या हो गया? पहले तो ऐसा कभी नहीं किया usne…Jab भी फ्री टाइम मिलता था हंसी मजाक करता tha…Aaj सुबह से hi परेशान लग रहा है.

अंजलि:- उसने बताया तो आज मूड ऑफ hai…Hoga कोई problem…Filhaal अकेला hi छोड़ना चाहिए usko…Baad में पूछेंगे.

अजय बहुत देर से कुछ सोच रहा tha…Achanak उसने अपने मोबाइल पॉकेट से निकाला और फिर हैरानी से बोलै.

अजय:- आज तो जुलाई 23 है.

अजय इतना कह कर परेशान सा हो गया.

अजय का हैरान और परेशान होना किसी को समझ में नहीं आ रहा था.

काजल:- है आज 23 जुलाई hai…Lekin क्या हुआ और आज ऐसा क्या ख़ास है.

अजय:- अब्ब समझ में aaya…Atul का मूड क्यों ऑफ है?

अजय की बात ने तीनो को और कन्फूसिओं में दाल दिया…23 जुलाई से अतुल के साथ का रिलेशन हो सकता hai…Sab इसी सोच में थे.

निशा:- 23 जुलाई से अतुल का क्या रिलेशन?

कन्फूसिओं में निशा ने पूछा.

अजय:- 2 साल पहले यही डेट में अतुल का दिल टूटा था.

अजय उदास हो कर बोलै.

निशा:- अतुल का दिल टूटा tha…Par वो तो प्यार में विश्वास भी नहीं करता?

निशा अजय की बात पर विश्वास नहीं कर पा रही थी.

अजय:- यही वजह hai…Har इंसान का सहने का एक लिमिट होता hai…Nahi सेह पाया वो इस धोखा ko…Bahut मुश्किल से संभल पाया है wo…Tabse वो प्यार जैसी बातो को भूल कर अपना करियर के बारे में सोचने लगा है wo…Darta है वो की अगर फिर से कोई उसका दिल न तोड़ de…Issi लिए वो प्यार नाम के शब्द से दूर रह कर सिर्फ अपने करियर पर फोकस करना चाहता है.

इससे वो सक्सेसफुल भी होगा और अपनी कड़वी यादें भुलाने में भी आसानी होगी.

निशा:- पर अतुल ने तो ये बात कभी नहीं बताया.

अजय:- वो उस बात को पूरी तरह से भूल जाना चाहता है इसी लिए उस बात को याद करना भी नहीं चाहता hai…Lekin आज की डेट hi ऐसा है की वो खुद पर कण्ट्रोल नहीं कर paaya…Pichli साल भी इस डेट में मैंने उससे रट हुए देखा है.

इस बार पहले से वो काफी संभल गया है लेकिन फिर भी उस मनहूस पल को भुला नहीं paaya…Fikar मत करो जल्द hi वो संभल जाएगा.

ये कहते वक्त अजय भी अच्छा ख़ासा इमोशनल हो गया था.

काजल:- बहुत बुरा hua…Abb समझ में आ रहा hai…Kabhi कभी अतुल को जब अकेले में देखती हु तो वो बहुत उदास रहता है शायद यही वजह है.

काजल को भी अतुल के लिए बुरा लग रहा था.

अजय:- है जब भी उस बेवफा की याद आता है उसकी चेहरे में वो दर्द फिर से हावी हो जाता hai…Par अब्ब काफी सुधार हुआ है उसकी हालत me…Jab उसका दिल टूटा था तब उसका हालत ऐसा था की मुझे hi दर लगने लगा था की कही खुद को hi नुकशान न पहुंचा ले वो.

लेकिन वो इतना कमजोर भी नहीं hai…Kuch वक्त लगा लेकिन खुद hi संभल गया.

अजय की बात से ऐसा लग रहा था की अतुल की इस हालत पर उससे भी बहुत बुरा लग रहा hai…Last की लाइन कहते वक्त उसकी होंठो में एक मुस्कान था जब उसने अतुल की तारीफ़ किया.

अंजलि:- बहुत बुरा लगता है जब किसी अच्छे इंसान का दिल टूट ता hai…Saccha प्यार तो मजाक बन कर रह गया hai...Atul आज भी उस बुरे वक्त को भूल नहीं paaya…Date तक याद है उससे.

अजय:- ऐसा hi है Atul…Har छोटी छोटी बातो को याद रखता है.

अजय की बात सुन कर सभी को बहुत बुरा लग रहा tha…Sabse ज्यादा निशा ko…Ajay की हर बात में वो अतुल का दर्द महसूस कर रही thi…Kabhi सोचा नहीं था उसने अतुल के बारे में ऐसी बातें भी पता चलेगा.

अतुल के लिए उससे बहुत बुरा लग रहा tha…Atul के बारे में याद करने के बाद उससे अजय की बातो में सच्चाई नजर आने laga…Atul का अकेला रहना, शांत रहना और किसी दोस्त के साथ हँसते हुए बात करना भी उससे अब्ब अतुल का नाटक hi लग रहा tha…Usse लग रहा था की अतुल ये सब खुद को खुस रखने के लिए करता है.

फिर धीरे धीरे उस लड़की पर गुस्सा भी आने laga…Gusse में उसने पूछा.

निशा:- क्या नाम है उस लड़की का?

निशा की गुस्सा उसके आवाज से hi पता चल रहा था.

अजय:- श्रुति.

अजय:- मैंने ये सब तुम सब को तो बता diya…Par ये बात अतुल को पता नहीं चलना chaahiye…Agar उससे पता चला तो मुझसे गुस्सा हो jaayega…Wo ये बात बात भूल जाना चाहता है और किसी को पता चलने नहीं देना चाहता है.

अजय ने इतना कहा hi था की निशा अचानक से पार्क की तरफ जाने लगी अतुल से मिलने.

अजय ने उससे एक दो बार रोकने की कोशिश भी kiya…Par निशा नहीं ruki…Man में कई साड़ी बातें ले कर वो तेजी से अतुल की तरफ जाने लगी.

जब वो पार्क में पहुंची तो उसने देखा की अतुल एक बेंच पर बैठ कर मोबाइल चला रहा tha…Chehre से hi वो परेशान सा लग रहा था.

निशा उसके पास पहुंची और कहा.

निशा:- अतुल.

निशा की आवाज में भी दर्द था.

अतुल ने निशा का आवाज पहचान लिया और साथ में उसका वो दर्द bhi…Aur हैरानी से वो निशा की तरफ muda…Mudte hi उसकी कानो में निशा की आवाज फिर सुनाई दिया.

निशा:- श्रुति को याद करके उदाश हो रहे हो न?

अतुल:- है.

अतुल ने ये कह तो दिया पर कहने के बाद उससे पता चला उसने क्या कह दिया है.
 
अपडेट 19



फिर जल्दबाजी में उसने पूछा.

अतुल:- क्या? कौन श्रुति?

अतुल को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की निशा क्या पूछ रही है और उससे अचानक से ये सब क्या हो गया है.

निशा:- छुपाने की जरुरत नहीं है अब्ब? अजय ने सब कुछ बता दिया है मुझे.

निशा की बातो से लग रहा था की उससे अतुल की उदासी पर बहुत बुरा लग रहा है.

निशा का ये बात सुनते hi अतुल सारा मामला समझ गया और उसका चेहरे के भाव अचानक hi बदल गया.

निशा की बात सुनने के बाद अतुल साड़ी बात समझ gaya…Uske चेहरे के भाव बदल बया और उसके चेहरे में मुस्कान आ गया.

अतुल को मुस्कुराता देख निशा को कुछ समझ में नहीं आ रहा tha…Wo कुछ बोलती उससे पहले hi अतुल ने पूछा.

अतुल:- ये श्रुति कौन है?

निशा:- वो hi जिसने तुम्हे प्यार में धोखा दिया था.

निशा कंफ्यूज हो कर boli…Atul का ये सवाल उसका कन्फूसिओं को और बढ़ा रहा था.

अतुल:- इस कहानी से तो मई भी अनजान हु.

अतुल मुस्कुरा कर hi बोल रहा tha…Usse पता चल गया था की अजय ने hi ऐसा कुछ बताया होगा निशा को.

निशा:- लेकिन अजय कह रहा था की 2 साल पहले इसी डेट में श्रुति ने धोखा tha…Issi लिए आज तुम्हारा मूड ऑफ है.

निशा अतुल की बात से और भी ज्यादा कन्फूसिओं हो गयी thi…Atul का मुस्कुराना जैसे कुछ हुआ hi नहीं है और अजय की वो baatein…Saaf पता चल रहा था की अजय सच hi बोल रहा hai…Usse समझ में नहीं आ रहा था की अतुल सच बोल रहा है या अजय.

निशा:- अपने दर्द को छुपाने के लिए मुस्कुरा रहे हो ना.

निशा की ये बात सुनते hi अतुल को थोड़ा हंसी आ गया.

फिर अतुल ने अजय को मैसेज किया और पार्क में बुलाया.

अजय के आने तक अतुल और निशा दोनों खामोश the…Nisha अपने और कन्फूसिओं में खोयी हुई thi…Aur अतुल मुस्कुरा रहा था ये सोच कर की अजय की इस मजाक पर सब ने यकीं कर लिया.

फिर कुछ देर बाद अजय, अंजलि और काजल साथ में आ gayi…Anjali और काजल को अतुल को ऐसे मुस्कुराता देख हैरानी होने लगा.

अजय:- है bhai…Kyu बुलाया?

अतुल:- बहुत दिन से कोई कहानी नहीं सुना hai…Abhi 10 मिनट बाकी है क्लास सुरु होने me…Ek अच्छी सी कहानी सुना de…Jisse सुनने के बाद हस्सी आ जाए.

अतुल ने अजय को घर कर kaha…Ajay के सिवा अतुल की बात कोई समझ नहीं paaya…Ajay अतुल की बात का मतलब साफ़ समझ रहा था.

अजय:- मुझे कोई कहानी नहीं आता.

अतुल:- Accha…To फिर तू सभी को क्या सुना रहा था जब मई कैंटीन से बाहर निकला था.

अजय:- भाई वो तो ऐसे hi…

इससे आगे अजय कुछ नहीं bola…Aur मुस्कुराने लगा जैसे उसका चोरी पकड़ा गया है.

अजय की इस बात पर निशा, काजल और अंजलि उससे घर कर देखने लगे.

अतुल ने फिर तीनो को देखने के बाद कहा.

अतुल:- तू कबसे इतना अच्छा एक्टिंग करने लग गया bey…Afsos है की मैंने मिस कर diya…Laga रह bhai…Agar डॉक्टर नहीं बन पाया तो एक्टिंग में अच्छा स्कोप है.

अजय:- थैंक्स भाई.

अंजलि:- थैंक्स के bacche…Ye कैसा मजाक tha…Ham सभी इस सच समझ रहे the…Koi अपने दोस्त के बारे में ऐसा घटिया मजाक करते है क्या?

अंजलि ने गुस्से में kaha…Uski बातो से hi लग रहा था की उससे अजय का मजाक बिलकुल भी पसंद नहीं आया.

निशा:- सच कहा अंजलि tune…Mujhe भी ये मजाक पसंद नहीं aaya…Mujhe भी लगा की ये सच है और अतुल के लिए बहुत बुरा लग रहा tha…Kabhi सपने में भी नहीं सोच सकती हु की कभी मेरे किसी भी दोस्त के साथ ऐसा कुछ ho…Aage से प्लीज ऐसा मजाक कभी मत करना.

निशा ने भी अपना सारा गुस्सा अजय पर उतार दिया.

अतुल:- अरे बस bas…Kitna डाँटोगी बच्चे ko…Kahi रोने न लग जाए.

अतुल अजय का चेहरा देख कर हस्ते हुए bola…Ajay के चेहरे से लग रहा था की उससे भी अफ़सोस हो रहा था इस मजाक के लिए.

अजय:- हंस ले bhai…Jitna हसना hai…Kabhi मेरा भी दिन आएगा.

अजय की बात से पता चल रहा था की उससे अतुल का हंसना बिलकुल भी पसंद नहीं आया hai…Pehle अंजलि और निशा का दांत और अब्ब अतुल का hansi…Iss वजह से वो थोड़ा गुस्सा हो गया.

अतुल:- अरे नाराज क्यों हो रहा hai…Mai तो ऐसे hi मजाक कर रहा tha…By थे वे थैंक्स.

अतुल ने इस बार मुस्कुरा कर कहा.

काजल:- और ये थैंक्स किस liye…Kya तुम्हे इसका ये जोके पसंद आया?

काजल के साथ अंजलि और निशा भी फिर से कंफ्यूज हो गयी अतुल की इस थैंक्स पर.

अतुल:- जोके तो पसंद नहीं aaya…Lekin इसने जोक्स बोल कर मूड फ्रेश किया उसके लिए थैंक्स बोलै इससे.

आज मेरा मूड ऑफ tha…Aur जब भी मूड ऑफ होता है ये इसी तरह कुछ न कुछ करता है मेरा मूड ठीक करने के liye…Aur बातो में उलझा देता है और मई भूल जाता हु की मेरा मूड ऑफ tha…Aaj भी वैसा hi हुआ.

ये कभी मुझे उदास नहीं रहने देता hai…Issi लिए मई इससे अपना बेस्ट फ्रेंड मंटा hu…Dosto के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है.

अतुल ने इस बार अजय की तारीफ़ किया तो अजय भी अपना गुस्सा भूल गया.

अजय:- क्या बात है yaar…Tu तो मेरा तारीफ़ भी करने लग गया?

अतुल:- है वो कभी कभी hi करता hu…Aaj का दिन तेरे लिए बहुत शुभ hai…Shaayad यही वजह है.

निशा:- लेकिन जब मैंने तुम्हे पूछा था की तुम श्रुति को याद कर रहे हो तो तुमने हां कहा था?

निशा ने कुछ सोचते हुए पूछा.

अतुल:- तुम अभी भी उसी बात पर अटकी हुई हो? वो मई तुम्हारी बात नहीं समझ पाया था इस लिए मुंह से है निकल gaya…Fir जब समझ गया तब मैंने पूछा की श्रुति कौन है?

काजल:- अच्छा है की अजय की बात सच नहीं tha...Sabhi को तुम्हारे बारे में सोच कर बुरा लग रहा था.

अतुल:- इस प्यार वाली टॉपिक पर बुरा माने की जरुरत नहीं hai…Kyuki ये मुझे सपने में भी नहीं होगा.

मेरा डिक्शनरी में प्यार का अन्टोनीम अतुल है.

अतुल की आवाज में खुद के लिए गर्व था की उससे किसी से भी प्यार नहीं होगा.

काजल:- इतना कॉन्फिडेंस.

काजल ने अतुल की आंको में देख कर पूछा.

अतुल:- इससे भी ज्यादा.

अतुल ने भी कॉंफिडेंट हो कर जवाब दिया.

काजल:- देखते है.

अतुल ने इस बार कुछ नहीं kaha…Bas सर को हां में हिला कर सहमति दिया.

काजल:- मैंने बहुत बार देखा है जो प्यार में विश्वास नहीं करते है उन्हें hi सबसे जल्दी प्यार हो जाता है.

अतुल:- ऐसा कहा देखा तुमने?

काजल:- मूवीज में.

अतुल:- अब्ब रियलिटी में आ जाइये Madam…Movie स्क्रिप्टेड होता है और प्यार के बारे में बहुत बकवास तरीके से प्रेजेंट करते hai…Real लाइफ में देखो और प्रक्टिकली socho…Mere जैसे बहुत लोग मिलेंगे जिन्हे प्यार पर विश्वास नहीं है.

अजय:- बस बस हो gaya…Ye डिबेट बाद में फुर्सत से कर lena…Pehle hi 2 मिनट लेट हो चुके है.

फिर सभी क्लास की तरफ जाने लगती hai…Atul का भी मूड अब्ब पहले से बहुत बेहतर हो गया था.

अजय भी खुस था की अतुल का मूड अब्ब ठीक हो गया hai…Anjali और काजल भी खुस थे की अतुल के साथ वैसा नहीं हुआ है जो उन्होंने सोचा था.

किसी ने कहा नहीं लेकिन सभी को अतुल और अजय की दोस्ती और एक दूसरे के लिए अंडरस्टैंडिंग बहुत पसंद आया था.

और दूसरी तरफ Nisha…Uski दिमाग में बहुत साड़ी बातें चल रहा tha…Atul के साथ वैसा नहीं हुआ था जो वो सोच रही थी इस बात के लिए वो बहुत खुस थी.

लेकिन इसके अलावा भी वो और बातें सोच रही thi…Pehli बार वो खुद से पूछ रही थी की वो अतुल के बारे में इतना क्यों सोच रही है? जब भी अतुल की बात होता था वो सबसे पहले रियेक्ट करती thi…Aur आज भी वैसा hi हुआ बिना सोचे समझे वो अतुल से उसके पास्ट के बारे में पूछने आ गयी.

और दूसरी तरफ अतुल और काजल का एक दूसरे से खुल कर और मुस्कुराते हुए बात करना अच्छा नहीं लग रहा था वो भी प्यार के टॉपिक में और काजल का अतुल को चैलेंज देना की उससे बहुत जल्द किसी से प्यार हो जाएगा.

उस वक्त तो उससे वजह पता नहीं था बुरा लगने की लेकिन अब्ब जब वो सभी बातो को एक साथ सोच रही थी और वजह ढूंढ रही थी तब उससे भी लगने लगा की कही वो अतुल से प्यार तो नहीं करने लगी है?

ये सोच दिमाग में आते hi वो एक दम से सीरियस हो गयी.
 
अपडेट 20

फ्लैशबैक

कितने अच्छे और मस्ती से भरे हुए दिन the…Ajay की हंसी मजाक, निशा का सवाल और मेरे लिए फ़िक्र, काजल और अंजलि का दोस्ती और saath…Aaj ये सब कुछ मिस कर रहा hu...Aur रह गयी है सिर्फ वो दर्द भरी यादें जहा मुझे सिर्फ अपना बर्बादी hi दीखता है और खुशियों के कुछ पल जिसकी याद की सहारे hi जी पा रहा हु.

आज भी वो दिन को याद करता हु तो खुद पर हंसी आता hai…Kitne हलके में लिया था मैंने प्यार को और अजय का वो जोक्स की मुझे प्यार में धोखा मिला tha…Usko हंसी में उड़ा दिया tha…Ek बार भी नहीं सोचा की अधूरा प्यार का दर्द क्या होता है.

आज महसूस हो रहा है वो dard…Aur 5 साल से महसूस करता आ रहा hu…Kabhi कभी लगता है की ऐसे दर्द में जीने का क्या फायदा और अब्ब मकशद hi क्या रह गया है मेरे जिंदगी में? ना hi कोई चाहत और ना hi कोई sapna…Bas किसी तरह दिन काट रहा hai...Dard और यादों में.

कभी कभी ख्याल आता है की खुद को hi ख़त्म कर दू इतना दर्द और बेकार जिंदगी जीने se…Lekin अपने पेशेंट्स को देख कर ये ख्याल दिमाग से निकाल देता हु.

वो सभी बहुत मुश्किल हालत और दुःख भरी जिंदगी जीते हुए भी जीना चाहते है… और आखिरी वक्त तक हिम्मत नहीं haarte…Kisi तरह ठीक हो कर आगे की मुश्किलों की सामना करने की कोशिश करते है.

और मई एक Doctor…Itna पढ़ लेने के बाद और कंधो में इतना जिम्मेदारी होने के बावजूद भी ऐसी घटिया बातें सोचता हु... कभी कभी तो खुद पर hi गुस्सा आता है.

शायद उन् (पेशेंट्स) का दर्द को महसूस करके या फिर उनकी दर्द में शामिल हो कर hi आगे जीने का और अपनी मुशीबत का सामना करना सिख लिया है.

वैसे भी मेरे साथ ऐसा क्या हुआ है जो मई इतना बड़ा और घटिया फैसला लेने का सोच रहा hu…Bas लव failure…Kya ये इतनी बड़ी मुशीबत है की मई इसका सामना नहीं कर पा रहा हु? क्या प्यार इंसान को इतना कमजोर बना देता है की इंसान अपने जीने की वजह hi भूल जाता है? क्या मेरा प्यार इतना खुदगर्ज़ है की एक रिश्ता के लिए बाकी रिश्ता को नजर अंदाज़ कर रहा हु? क्या माँ और दीदी का प्यार कुछ नहीं है मेरे लिए?

बस यही सब ख़याल आते है मन में तो ऐसी घटिया सोच भूल जाता hu…Apni जिम्मेदारी और माँ और दीदी से जल्द hi घर लौटने का वादा की वजह से hi जिंदगी में आगे बढ़ना चाहता हु वर्ण मेरा जिंदगी का कोई मतलब भी नहीं रहता.

ये प्यार ऐसा hi होता hai...Jaanta हु जो कर रहा हु वो सही नहीं hai...Fir भी सही करने की हिम्मत hi नहीं और ना hi करना चाहता हु.

(निशा की फोटो को देखते हुए) कुछ इसी तरह से जिंदगी काट रहा है mera…Subah से शाम तक हॉस्पिटल में पेशेंट्स की चेक उप में और फिर शाम ऐसे hi अकेला खुद से बात करते हुए और फ्यूचर की बारे में सोचते hue…Kabhi कभी दोस्तों के रूप में श्रेया और आमिर के साथ वक्त बीता लेता हु तो कभी कभी गांव में ऐसे hi घूम कर सभी के हाल चाल जान लेता हु.

अब्ब यही है मेरा जिंदगी… बस किसी तरह खुद को पहले जैसा बनाना है और माँ का सहारा बनना है… इससे ज्यादा ना hi कोई चाहत और ना hi कोई सपना.

माँ, दीदी के अलावा कभी कभी दोस्तों से बात हो जाता है लेकिन तुमसे बात करने की हिम्मत अभी तक नहीं hua…Kahi फिर से टूट न जाओ बस इसी दर से तुमसे बात नहीं कर पाटा हु और मई अब्ब तुम्हारी जिंदगी में फिर से आ कर तुम्हे परेशान भी नहीं करना चाहता.

बस यही दुआ करूँगा की तुम जहा भी रहो तुम्हे वो साड़ी खुशियां मिले जो मई तुम्हे दे सकता tha…Nahi उससे भी ज्यादा.

फिर अतुल को नींद आने लगता hai…Ghadi में टाइम देखता है और फिर.

अतुल:- 1 बज gaya…Abb सोना padega…Fir सुबह हॉस्पिटल भी तो जाना hai…Fir कभी फुर्सत में बात कर लूंगा tumse…Abhi के लिए गूडनिघत.

लास्ट के 3 लाइन कहते वक्त अतुल के चेहरे में वही पुराना मुस्कान था.

फिर अतुल निशा की फोटो बीएड के साइड पर hi रख कर सू जाता है.

सोया हुआ मुश्किल से 1 घंटा hi हुआ था की उसके मोबाइल में किसी का फ़ोन आता hai…Ring टोन की वॉल्यूम तेज होने की वजह से वो 2 hi रिंग में उठ जाता है.

स्क्रीन में नाम देखने के बाद वो फ़ोन उठा कर कहता है.

अतुल:- है Shreya…Kaho क्या बात है?

अतुल की आवाज से hi लग रहा था की वो गहरी नींद में है.

श्रेया:- अतुल प्लीज जल्दी से घर आ jaao…Neha बहुत रो रही है और अच्छे से चल भी नहीं पा रही hai…Kamar से पेअर (लेग्स) तक बहुत दर्द हो रहा hai...Pata नहीं क्या हो गया है usse…Shaam तक तो ठीक thi…Please तुम जल्दी से आ जाओ.

श्रेया ने डरते हुए कहा.

अतुल:- फ़िक्र मत karo…Abhi पहुँचता हु.

अतुल ने ये कह कर फ़ोन कट कर दिया और जल्दी से श्रेया की घर की तरफ बढ़ गया.
 
अपडेट 21

अतुल के रूम से श्रेया का घर करीब 5 मिनट के hi दुरी पर tha…Emergency कंडीशन होने की वजह से अतुल 2 मिनट में hi पहुँच गया.

नॉक करने के कुछ hi देर बाद गेट खुल gaya…Ghar के अंदर जाने के बाद अतुल ने देखा की श्रेया की घर की सभी सदस्य हॉल में hi बैठे थे.

फिर उसका नजर नेहा पर pada…Ek छोटी सी बच्ची जो अपने माँ की गॉड में बैठी थी और बहुत दर्द होने की वजह से रो रही thi…Usko देख कर ऐसा लग रहा था की वो बहुत देर से रो रही है.

वो कुछ सोच hi रहा था की नेहा की माँ hi अतुल के पास आ गयी और बोली.

नेहा की माँ (श्रेया की भाभी):- देखो न अतुल…1 घंटे से रो रही hai…Pata नहीं क्या हो गया है isse…Acche से चल भी नहीं पा रही है.

नेहा की माँ की बातो से hi अतुल समझ गया की हुआ क्या है.

अतुल:- समझ gaya…Bhabhi चिंता मत kijiye…Dawaai लिख रहा हु उसे खिला dijiye…Thoda वक्त बाद ठीक हो जाएगा.

फिर अतुल दवाई लिख कर श्रेया की पापा को देता है.

अतुल:- अंकल ये lijiye…Kisi से मंगवा लीजिये ये दवाई.

श्रेया की पापा घर के एक नौकर को दवाई लेने के लिए भेज देते है और साथ hi दवाई की दूकान वाला (फार्मासिस्ट) को फ़ोन कर के साड़ी बात बता देते है.

श्रेया की पापा की गांव में अछि जान पहचान था इस लिए कोई मुशीबत नहीं hua…Itni रात में भी नौकर 15 मिनट में hi दवाई ले आया.

फिर अतुल ने नेहा की माँ को दवाई का दोसे अच्छे से समझा दिया.

Neha’s माँ:- तुम्हे इतनी रात को तकलीफ दिया उसके लिए माफ़ी चाहती hu…Lekin क्या करू नेहा इतना रो रही थी की दर लग रहा था की इससे कुछ हो न जाए.

नेहा की माँ की आवाज में ख़ुशी थी की नेहा जल्द ठीक हो jaayegi…Itna यकीं तो अतुल की बात से उन्हें हो गया था.

अतुल:- नहीं भाभी इसमें तकलीफ की कोई बात hi नहीं hai…Ye तो मेरा फ़र्ज़ tha…Aur इस बार तो गलती भी मेरा hi है.

Neha’s माँ:- तुम्हारी गलती? लेकिन कैसे?

अतुल:- दोपहर में जब मैंने नेहा को इंजेक्शन लगाया था तब उस वक्त मुझे मुस्कले में इंजेक्शन लगाना tha…Lekin गलती से नर्व में लग gaya…Aur इसी वजह से कमर से नेहा को पेअर में दर्द महसूस हो रहा है.

ऐसे तो ये गलती नहीं होना चाहिए था लेकिन कल एक और इमरजेंसी कंडीशन था इसी वजह से जल्दबाज़ी में ये गलती हो gaya...Iske लिए माफ़ी चाहता हु.

अतुल ने सच में शर्मिंदा हो कर kaha…Abhi उससे खुद पर hi गुस्सा आ रहा था की उसका छोटी सी गलती की वजह से नेहा को इतना तकलीफ हुआ.

Neha’s माँ:- कोई बात नहीं Atul…Shaayad मई hi नेहा को गलत वक्त पर ले कर आ गयी इंजेक्शन लगवाने के liye…Jab तुम फ्री रहते तब ले कर आना चाहिए था.

Shreya’s डैड:- अतुल इसमें शर्मिंदा होने की कोई बात नहीं hai…Ho जाता है कभी कभी ऐसा.

वैसे भी तुम इतनी रात को इतनी जल्दी यहाँ आ गए वही बहुत बड़ा बात hai…Waise भी मेडिकल फील्ड में छोटी छोटी गलती तो होता रहता hai…Lekin डॉक्टर उसको किस तरह से लेते है वो बड़ी बात hai…Agar तुम चाहते तो इससे छुपा भी सकते थे लेकिन तुमने अपनी गलती मान कर सब कुछ बता diya…Ye साबित करता है की तुम में एक अच्छे डॉक्टर की हरे क काबिलियत है.

ज्ञान और कला (नॉलेज एंड तकनीक) के अलावा भी तुम में इंसानियत भी hai…Yahi दिखाता है की तुम कितना अच्छा डॉक्टर है,

तुम्हारा इस गांव में आने के बाद इस गांव का नक्शा hi बदल गया स्वस्थ्य (हेल्थ) me…Hospital में तुम पहला डॉक्टर हो जो निस्वार्थ भाव से काम करते हो और वो भी ईमानदारी se…Gaanw में सभी को स्वस्थ्य के बारे में जागरूक करने में भी तुमने बहुत म्हणत किया hai…Tumhaare आने के बाद यहाँ बहुत रोग (डिजीज) में भी बहुत कमी आया है और साथ hi बहुत रोग का इलाज भी अच्छे से मिलने लगा है.

बीटा गांव का किस्मत hi कहना पड़ेगा की तुम जैसे डॉक्टर यहाँ हो वर्ण कोई मद करने के बाद गांव की तरफ देखता व्ही नहीं hai…Sab सेहर में जाके सेटल हो जाते है.

बस इतना कहूंगा की इतनी छोटी छोटी बातो में शर्मिंदा मत हूँ.

श्रेया की पापा की बात से अतुल को थोड़ा सुकून mila…Usse लग रहा था की कही उसे सब नाराज न हो jaaye...Saath में अतुल की ये तारीफ़ श्रेया को भी बहुत अच्छा लग रहा था.

अतुल:- नहीं uncle…Ye सब तो मेरा फ़र्ज़ है इस लिए ईमानदारी से अपना काम कर रहा hu…Aur रही बात गांव में रहने की तो वो मेरा सपना था मब्ब्स पढ़ने से पहले hi.

पहले hi सोचा था जरुरत मंद लोगों की सेवा karunga…Seher में तो डॉक्टर की कमी नहीं है इसी लिए गांव में आ gaya…Aur मेरा मकशद सिर्फ पैसा कमाने का नहीं hai…Logo का इलाज कर के उनके काम आ सकू यही अब्ब मेरा जिंदगी का मकशद है.

(इन हिज मंद) इससे ज्यादा कोई सपना भी नहीं है मेरा जिंदगी में.

ये आखिरी बात उसके दिमाग में आते hi अतुल को फिर पुरानी बातें याद आ gaya…Pehle नींद का नशा और बब फिर पुरानी बातें याद आने से अतुल वह उनकंफर्टबले फील कर रहा था.

अतुल:- अंकल अब्ब इजाजत dijiye…Kal सुबह उठ कर क्लिनिक में भी जाना पड़ेगा और भाभी अगर नेहा का दर्द फिर भी ठीक नहीं हुआ तो किसी भी वक्त फिर से बुला lijiye…Aa जाऊँगा.

फिर अतुल वह से अपने रूम में आ जाता hai…Iss बार उसे बहुत जोर से नींद लग रहा था तो वो गहरी नींद में सू जाता है.

नेक्स्ट मॉर्निंग ात 10 ऍम

आज संडे में अतुल अपने क्लिनिक में hi बैठा tha…Koi पेशेंट नहीं था इस वक्त तो अतुल अभी ऐसे hi खाली बैठा था.

कुछ hi देर में श्रेया वह आती है.

श्रेया:- Hi डॉक्टर.

श्रेया ने मुस्कुराते हुए विश किया.

अतुल:- Hi.

अतुल ने भी चेहरे में थोड़ा सा मुस्कान ला कर कहा.

अतुल:- अब्ब नेहा कैसी है?

श्रेया:- अब्ब ठीक hai…Lekin तुम बहुत सीरियस लग रहे हो.

अतुल:- उसकी हाल चाल जाने के लिए तुम्हारा घर आने hi वाला tha…Kal गलती मेरा hi था इसी वजह से बुरा लग रहा hai…Aisi छोटी सी गलती का भी ख्याल नहीं रख पाया मई खुद पर hi गुस्सा आ रहा है.

श्रेया:- क्या तुम भी वो hi बात ले कर बैठ गए ho…Insaan है हम sab…Ho जाता है कभी कभी ऐसी galtiyan…Aur गलती से hi तो हम सब सीखते है.

अतुल को श्रेया की इस बात ने फिर से अपने पास्ट के बारे में सोचने पर मजबूर कर diya…Galti से सिखने वाली baat…Yahi एक बात तो था अतुल और निशा की प्यार की सुरवात का.

श्रेया:- मई जानती hu…Tumhaara गलती की वजह इमरजेंसी केस नहीं कुछ और था.

अतुल को चुप देख कर श्रेया ने kaha…Shreya की इस बात से अतुल भी हैरान हो गया.

अतुल:- कुछ और था? क्या?

श्रेया:- जरूर निशा दी की याद आ गया होगा तुम्हे और बे ख़याली में तुमने गलत जगह पर इंजेक्शन लगा दिया.

श्रेया ने तो हँसते हुए मजाक में कही थी ये baat…Lekin इस बात से अतुल को अचानक hi गुस्सा आ गया.

अतुल:- पता नहीं तुम मजाक में कह रही हो या तुम्हे ऐसा hi लगता hai…Lekin प्लीज तुम आगे से ऐसी बात कभी मत कहना.

मई प्यार और जिम्मेदारी को अलग अलग रखता hu…Iss बात का ख्याल भी रखता हु की प्यार कभी मेरा जिम्मेदारी पर असर न डाले.

अगर प्यार hi सब कुछ होता मेरे लिए तो मई अभी यहाँ डॉक्टर नहीं कोई आवारा , पागल या ड्रग एडिक्ट hota…Mai अपना ड्यूटी सिंकेरेली करता हु और कोई ऐसे इल्जाम लगाए ये मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं.

अतुल ने बहुत गुस्से में kaha…Ek तो निशा और अपना अधूरा प्यार का दर्द और ऊपर से किसी का उसके जिम्मेदारी पर ऐसा आरोप lagana…Atul से बर्दास्त नहीं हुआ इस बार.

श्रेया को भी लगा की उसने ये मजाक कर के गलती कर diya…Pehli बार उसने अतुल का गुस्सा देखा था वो भी खुद के liye…Usne तो ये सोच कर मजाक किया था की अतुल को इसी बहाने वो हंसा कर उसका मूड फ्रेश karegi…Lekin यहाँ तो ठीक उल्टा हो गया.

अतुल:- Sorry…Shaayad मई कुछ ज्यादा hi गुस्सा हो gaya…Bas ये रिक्वेस्ट है की मेरे प्यार और ड्यूटी के बारे में कभी मजाक मत karo…Warna दोस्तों के लिए कुछ भी हंसी मजाक कर सकता हु.
 
अपडेट 22

श्रेया:- Nahi…Mujhe वो मजाक नहीं करना चाहिए tha…Ek बार सोचा भी नहीं की ये मजाक तुम्हे अच्छा लगेगा या बुरा.

अतुल:- मैंने hi ओवर रियेक्ट कर दिया tha…Pata नहीं आज कल क्या हो रहा है mujhe…Bina सोचे समझे रियेक्ट कर देता hu…Ye बात अच्छे से कह भी सकता tha…Request है तुमसे की आगे से मेरे प्यार और जिम्मेदारी के बारे में कोई मजाक मत karna…Uske सिवा बाकी सभी मजाक में यू अरे मोस्ट वेलकम.

अतुल ने लास्ट के लाइन थोड़ा मुस्कुरा कर कहा माहौल को बदलने के लिए.

श्रेया:- Ok.

अतुल:- तो आज यहाँ मेरा क्लिनिक में कैसे आना हुआ?

अतुल ने बात बदलते हुए कहा.

श्रेया:- बस देखने आयी थी की तुम्हारा क्लिनिक कैसा है?

श्रेया ने चारो तरफ नजर घुमा कर कहा.

अतुल:- मैडम ये क्लिनिक है म्यूजियम nahi…Yaha बस देखने के लिए डायग्नोसिस इक्विपमेंट्स, प्रिस्क्रिप्शन के लिए कुछ पेपर्स और वाइट कोट में बैठा सामजिक सेवक hi मिलेगा.

अतुल ने हँसते हुए कहा.

श्रेया ने जब ये देखा तो उसने महसूस किया की इस बार अतुल सच में खुल कर हंस रहा hai…Koi दिखावट नहीं है.

और ये सच भी था शायद बहुत काम बार hi ऐसा हुआ की अतुल दिल से हंस रहा ho…Warna झूठी मुस्कान और खुद को खुस रखने का बहाना तो वो बहुत बार कर चुक्का tha…Lekin कभी कामयाब नहीं हो पाया tha…Dard भरी अतीत की यादो में वो जीना सिख गया tha...Na कोई ख़ुशी के पल और ना hi कोई ummeed…Bas अपना जिम्मेदारी को hi अपना जिंदगी बना लिया था usne…Uske लिए ख़ुशी के कोई पल था तो कोई मरते हुए पेशेंट की जिंदगी बचाना और कभी कभी फ़ोन में माँ और दीदी से बात चीत.

लेकिन इस बार खुद उससे भी नहीं पता चला की अभी वो श्रेया से हंस कर बात कर रहा है.

अतुल की इस हंसी को देख कर श्रेया को एक बात और याद आ gaya…Atul की past…Jitna अतुल ने उससे खुद के बारे में बताया था उससे श्रेया को पता चल गया था की अतुल अपने दोस्तों से हंस कर hi बात करता है.

अब्ब वो सोचने लगी की अतुल अब्ब धीरे धीरे अपना पुराना रूप में आ रहा hai…Shreya भी खुस थी की अतुल को हँसते हुए देख kar…Warna आज से पहले उसने अतुल को हमेशा दुखी और खामोश hi देखा था.

अतुल:- क्या सोच रही हो?

श्रेया को गहरी सोच में देख कर अतुल ने पूछा.

श्रेया:- कुछ nahi…Hanste और मुस्कुराते हुए तुम बहुत अच्छे लगते हो.

श्रेया की इस बात से अतुल को फिर से निशा की याद आ गया.

ये लाइन निशा न जाने कितनी बार अतुल को कह चुकी thi…Nisha की इसी बातो की वजह से पहले अतुल की चेहरे में हमेशा मुस्कान रहता था.

यही छोटी छोटी बातो में निशा की याद साबित कर रहा था की निशा अतुल की दिल की गहराई में बस गयी थी.

अतुल निशा से प्यार तो बहुत करता tha…Lekin जब उससे जुड़ा हुआ तब उससे पता चला की उसके प्यार में कितना गहराई hai…Juda होने के बाद निशा के साथ गुजारे हुए प्यार भरे लम्हे, छोटी छोटी नोक झोक, रूठना manana…Aur फिर निशा के बिना हर पल दिल में उठ रहा dard…Nisha की यादो में बहे उन् आंसू से अतुल महसूस कर रहा था की वो निशा से कितना प्यार करता है.

लेकिन ज्यादातर सच्चा मोह्हबत की तरह ये भी अधूरा रह gaya…Abb अतुल के पास खुद को बहलाने के लिए एक hi चीज बाकी रह गया की "मोहोब्बत पाने की चीज नहीं होता है निभाने की चीज होता है और मैंने वो सच्चे दिल से निभाया है."

श्रेया:- लेकिन तुम्हारा क्लिनिक में कही भी दवाई (मेडिसिन्स) नहीं दिख रहा है?

श्रेया की इस सवाल से अतुल होश में आया.

अतुल:- जेल भिजवाने की तैयारी कर रही हो?

थोड़ा हंसी के साथ अतुल ने puccha…Usne अपने दर्द को जुबान पे आने नहीं diya…Bahut अच्छी तरह से उसने अपने दर्द को छुपा लिया…5 सालो में उसने इतना तो सिख hi लिया था.

श्रेया:- मतलब?

अतुल:- अभी मेरे पास ड्रग लाइसेंस तो है nahi...Sirf एग्जामिनेशन, डायग्नोसिस और प्रिस्क्रिप्शन कर सकता हु.

अतुल:- Shreya…Tumhaara बेचैनी देख कर इतना तो पता चल रहा है मुझे की तुम कुछ और hi बात मुझसे पूछना चाहती हो लेकिन पूछ नहीं पा रही हो? और बे मतलब की बातें करती जा रही हो.

अतुल ने इस बार सीरियस हो कर कहा.

अतुल की इस बात से श्रेया हैरान हो गयी और फिर उसने कहा.

श्रेया:- तुम्हे कैसे पता चला की मई तुमसे कोई दूसरा सवाल पूछना चाहती हु?

अतुल:- ये तुम्हारा मुट्ठी खोलना और बंद karna…Aankhein चारो तरफ देखना और कुछ कहने की कोशिश करना और फिर चुप हो jaana…Itni साड़ी सिम्पटम्स काफी hai…Waise भी पेशेंट को ट्रीट करते हुए इतना पता तो चल hi जाता है की वो कुछ छुपाने की कोशिश कर रहा है या नहीं.

अतुल ने मुस्कुराने की कोशिश करते हुए kaha…Wo कोशिश कर रहा था अपने दर्द भरे खयालो से बाहर निकलने का.

श्रेया:- मतलब तुम मुझे पेशेंट समझ रहे हो?

अतुल:- Nahi…Lekin पेशेंट भी इंसान hi होते hai…Aur मई इंसान का डॉक्टर hu…Thodi बहुत साइकोलॉजी भी आता है हमारे सेवा me…Abb बताओ क्या पूछना चाहती हो?

अतुल ने सुरु में हँसते हुए पूछा लेकिन लास्ट की लाइन पूछते वक्त सीरियस हो गया.

श्रेया:- वो मुझे तुम्हारा आगे की कहानी जाना था.

श्रेया ने थोड़ा झिझक के साथ कहा.

अतुल:- ये बात पूछने में इतना क्यों सोच रही थी?

अतुल ने थोड़ा हैरानी के साथ पूछा.

श्रेया:- सोच रही थी की कही तुम फिर से पुरानी बातें सोच कर दुखी न हो jaao…Kal मैंने देखा था जब तुम बता रहे थे तो तुम्हारी आवाज में बहुत दर्द था.

श्रेया की इस बात पर अतुल ने थोड़ा मुस्कुरा कर कहा.

अतुल:- पुरानी बातो का याद तो हमेशा आता hi hai…Aadat सी हो गयी hai...Lekin अब्ब ये सब सहना अब्ब सिख लिया है.

लेकिन अभी थोड़ा बिजी हु कुछ रिकार्ड्स चेक करने me…Shaam में बताऊंगा.

डॉ. Sameer…What इस थिस? ये क्या प्रेस्क्रिबे किया है आपने? थोड़ा तो शर्म kijiye…Profession से आप डॉक्टर है लेकिन काम से गरीब का खून चूसने वाले पिसाच (वैम्पायर).

गुस्से में समीर की कानो में एक आवाज आया.

समीर:- क्या हुआ डॉ. निशा? आप इतना गुस्सा में क्यों है और ये आप मुझसे किस तरह से बात कर रही है?

थोड़ा हैरानी में समीर ने कहा.

निशा:- तो किस तरह से बात karu…Apna प्रिस्क्रिप्शन खुद पढ़िए.

गुस्से में निशा ने कहा और प्रिस्क्रिप्शन पेपर समीर को दे दिया.

निशा:- एक टेबलेट का रस 1000, जब की रस 50 में भी दवाई आ सकता hai…Aur दोनों hi दवाई का काम वही है.

और भी बहुत तारीफ़ सुना है aapka…Migraine में भी कैंसर का चांस बता कर कट स्कैन आर्डर करते hai…Aur ऐसे बहुत से केसेस hai…Sharm आना चाहिए आपको खुद को डॉक्टर कहते हुए.

निशा का गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.
 
कोशिश यही रहेगा भाई की डेली 2 उपदटेस पोस्ट करके स्टोरी को प्रेजेंट तक ले aau...Iss स्टोरी में लगभग सभी उपदटेस पर कुछ चंगेस किया hai...Spelling मिस्टेक, डायलाग करेक्शन और कुछ बड़े लाइन्स को शार्ट में likhna...Post करने से पहले उपदटेस को चेक करता hu...Kabhi बिजी रहता हु तो उपदटेस चेक नहीं कर paata...Iss लिए डिले हो जाता hai...Exam भी बहुत जल्द होने वाला है.

कोशिश करूँगा डेली 2 उपदटेस पोस्ट करने ki...Saath बने रहिये.
 
अपडेट 23

निशा की बात सुनने के बाद समीर के चेहरे में थोड़ा मुस्कान आ gaya...Sameer को मुस्कुराता देख निशा का गुस्सा और भी ज्यादा बढ़ गया.

वो कुछ बोलती उससे पहले hi समीर ने कहा.

समीर:- कितना टाइम हुआ है आप को हॉस्पिटल में आये हुए?

समीर का मुस्कान अब्ब भी पहले जैसा hi था.

निशा:- ये आप क्या पूछ रहे है? मई आपसे कुछ और hi बात पूछ रही हु और आप मुझसे बकवास मजाक कर रहे hai…Be सीरियस.

निशा ने बहुत गुस्से में कहा और साथ hi समीर के चेहरे से वो मुस्कान भी गायब हो गया.

समीर:- ी ऍम नॉट ा जोकर और जोके करने का मूड भी नहीं hai…Mai तो आपकी बातो पर हंस रहा था.

इतना कह कर समीर चुप हो गया और सीरियस दिखने laga…Nisha को देखते हुए उसने कहना सुरु किया.

समीर:- आप मुझे मेरे कुछ सवाल का जवाब dijiye…Uske बाद मई आपका हर एक सवाल का जवाब दूंगा.

निशा:- Ok पूछिए.

निशा ने गुस्से में hi जवाब दीजिये.

समीर:- So…Dr. निशा Singh…MD इन जनरल Medicine…Yahi है न आप का क्वालिफिकेशन.

निशा:- है.

समीर:- वर्किंग एक्सपीरियंस कितना है आपका?

निशा:- 1 year…MD कम्पलीट करने के baad…Lekin ये सब आप क्यों पूछ रहे है?

समीर:- आप का hi सवाल का जवाब दे रहा हु.

निशा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की समीर उससे क्या पूछ रहा है और ऐसी सवाल से कैसे उसकी सवाल का जवाब देने वाला है.

समीर:- सो आप की बातो से ये पता चलता है की अभी आप अस ा फिजिशियन मेडिकल फील्ड में नया hai…Aapne अभी इस दुनिया में कुछ देखा hi नहीं है.

समीर की बात सुनने के बाद निशा समीर को और भी गुस्से से घूरती है लेकिन समीर बिना कोई परवाह किये अपनी बात कहने लगता है.

समीर:- 2 साल से काम कर रहा हु मई यहाँ इस हॉस्पिटल me…Aur 4 साल हो गया है मुझे मद कम्पलीट किये hue…Bahut कुछ देख लिया है मैंने इन् 4 सालों me…Khaas कर प्राइवेट हॉस्पिटल्स में.

समीर ने अब्ब मुद्दे की बात कहना सुरु किया.

निशा:- तो आप कहना चाहते है की प्राइवेट हॉस्पिटल में काम करने के बाद सभी डॉक्टर आप की तरह कोर्रुप्त हो जाते है?

समीर:- पहली baat…Mai कोई कोर्रुप्त डॉक्टर नहीं हु.

इस बार समीर की आवाज में भी थोड़ा गुस्सा था.

निशा:- वो तो आपके प्रिस्क्रिप्शन से hi दिख रहा है.

समीर:- अच्छा ऐसा क्या था उस प्रिस्क्रिप्शन me…Maine एक्सपेंसिव दवाई प्रेस्क्रिबे किया tha…Aur आप का कम्प्लेन है मई कभी कभी अननेसेसरी टेस्ट प्रेस्क्रिबे करता हु जैसे कट स्कैन, MRI…Yahi है न आप का कम्प्लेन?

निशा:- Ha…Aur आप जैसे डॉक्टर से और भी क्या उम्मीद किया जा सकता है?

निशा को जो लग रहा था वो कहती जा रही thi…Aur उसकी हर एक बात से समीर का गुस्सा और भी बढ़ता जा रहा tha…Lekin खुद पे काबू रख के उसने कहा.

समीर:- डॉ. Nisha…Aap बहुत अच्छी डॉक्टर hai…Aapki बातो से यही लगता hai…Aur अच्छा डॉक्टर होना भी chaahiye…Keep आईटी up…But ी bet…Yaa तो आप को अपना ये अच्छाई छोड़ना होगा या फिर आप इस हॉस्पिटल में ज्यादा दिन नहीं टिक पाएंगी.

निशा:- आप धमकी दे रहे है?

समीर:- Nahi…Mujhe कोई मतलब नहीं है आप यहाँ रहे या न रहे.

अब्ब प्लीज मुझे बिच में डिस्टर्ब मत कीजिये अगर मेरा जवाब जाना चाहती है वर्ण यू मई जो.

निशा:- बता hi दीजिये अपना एक्सक्यूज़.

समीर:- आपने ये तो देखा की मैंने एक्सपेंसिव दवाई प्रेस्क्रिबे तो kiya…Lekin मैंने ऐसा क्यों किया ये आप खुद जान जाएंगी कुछ दिन हॉस्पिटल में रहने के बाद.

इतना जरूर कहूंगा की मैंने इसमें कोई कमीशन नहीं लिया hai…Aur ना hi किसी गरीब और मजबूर पेशेंट के साथ ऐसा किया है.

सिर्फ ऐसे पेशेंट और पेशेंट पार्टी के साथ ये करता हु जो पैसे की घमंड में सोचते है की वो अपने पैसा से डॉक्टर और अपने जिंदगी खरीद सकते hai…Bina सोचे समझे डॉक्टर का कालर पकड़ते है और कहते है जितना पैसा चाहिए मांग लो लेकिन उनको कुछ नहीं होना चाहिए.

ऐसे कंडीशन में मन करता है दो थप्पड़ खिंच के मारु जो मेरा ईमानदारी खरीदना चाहते hai…Lekin प्रोफेशनलिज्म बिच में आ जाता है.

लेकिन मई जो एक्सपेंसिव दवाई प्रेस्क्रिबे करता हु उससे उनको कोई नुकशान नहीं पहुंचाता hu…Wo दवाई वही काम करता है बस पैसा ज्यादा लगता hai…Aur ये पैसा मई कभी नहीं लेता hu…Wo हॉस्पिटल अकाउंट में जम्मा होता hai…Mera मंथली सैलरी वही होता है जितना फिक्स्ड है.

और ऊपर हॉस्पिटल मैनेजमेंट से अलग तरह का pressure…Unko पेशेंट की हेल्थ से कोई लेना देना नहीं hai…Bas किसी तरह उन्हें प्रॉफिट मिलना chaahiye…Ye हॉस्पिटल नहीं एक बिज़नेस hai…Patient कस्टमर है, और मेडिकल स्टाफ सेल्समेन.

अगर हम सब अपना काम अच्छे से करे और पेशेंट का ट्रीटमेंट के कोई कमी नहीं रखेंगे ार फिर भी हॉस्पिटल का फार्मेसी अच्छे से नहीं चला तो हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन मीटिंग के लिए बुलाते hai…Aur धमकी मिलता है की अगर उन्हें अच्छा ख़ासा फायदा नहीं हुआ तो हमें निकाल denge…Sheher में डॉक्टर्स की कमी भी नहीं hai…Ek जाएगा तो दूसरा आएगा और उनका बिज़नेस भी चलता रहेगा.

बहुत डॉक्टर्स जो तुम्हारा और मेरी तरह थे उन्हें इसी मज़बूरी में हॉस्पिटल छोड़ना pada…Aur मेरा मज़बूरी है की मई छोड़ नहीं सकता.

और भगवान् का आशीर्वाद है की मई अभी तक यहाँ टिका हुआ हु वो भी बिना ुनेठिकाल काम किये सिर्फ तुम्हारा कंप्लेंट छोड़ के.

किसी गरीब को नहीं लुटा hai…Sabhi का इलाज अच्छे से किया hai…Kisi को कोई नुकशान नहीं पहुंचाया hai…Sirf कुछ घमंडी दौलतमंद इंसान का पैसा दूसरे दौलतमंद में ट्रांसफर हुआ है.

इतना कह कर समीर चुप हो gaya…Chehre में बहुत गुस्सा tha…Ek नजर निशा को देखा और कहा.

समीर:- ये प्राइवेट हॉस्पिटल है कोई गवर्नमेंट नहीं जहा हम अपने मर्जी से कुछ कर sake…Bahut जल्द ऐसी सिचुएशन का सामना आप को भी करना पड़ेगा तब देखूंगा आप कैसे हैंडल करते hai…Abhi आप नया डॉक्टर के रूप में आयी hai…Abhi बहुत जोश होगा आपके पास कुछ करने का लेकिन धीरे धीरे आप को सच्चाई का सामना करना padega…Tab देखूंगा क्या करती है aap…Imaandaar hi रहेंगी, या मेरे टाइप का बनोगी या मुझसे भी ज्यादा कोर्रुप्त?

ऐसे बहुत से केस aayenge…Aise पेशेंट भी आएंगे जो आप को नर्स कह देगा…9 साल दिन रात म्हणत कर के पढ़ने के बाद आप डॉक्टर बानी है और कोई आके नर्स कह देगा तो सोचना कैसा गुस्सा aayega…Aise बहुत से केसेस hai…Thoda एक्सपीरियंस करने के बाद आपको सब पता चल jaayega...Ethics की बात किताब में hi अच्छा लगता है और निभाना बहुत मुश्किल जब सिस्टम hi कोर्रुप्त है.

गुस्से से उसने निशा को देखा और उसकी जवाब का इंतजार करने लगा.

थोड़ी देर बाद निशा ने कहा.

निशा:- क्या मज़बूरी है आपका यहाँ रहने का? अगर आप चाहे तो इसी गवर्नमेंट हॉस्पिटल में काम कर सकते है आज़ादी के साथ?

निशा का गुस्सा अब्ब ख़त्म हो चुक्का था.

समीर:- Paisa…Sabhi की मज़बूरी यही होता hai…Aapka यहाँ आने का वजह भी पैसा हो सकता hai…Mera वजह भी पैसा hai…Lekin मई पैसा ईमानदारी के साथ hi कमाना चाहता hu…Ghus और कमीशन का एक रुपैया भी नहीं लेता हु.

मेरे माँ और पापा दोनों बीमार hai…Aur मई उनका एक लौटा बीटा hu…Ilaaj और दवाई, और साथ hi घर के खर्चे के लिए बहुत पैसे की जरुरत hai…Jo गवर्नमेंट हॉस्पिटल से नहीं मिलेगा.

यहाँ बहुत मुश्किल से जॉब मिला hai…Pehle hi 2 हॉस्पिटल ने मुझे अपने ईमानदारी की वजह से निकाल दिया hai…Abb यहाँ से कही और नहीं जा सकता hu…Issi लिए मुझे एहिसस के कुछ नॉर्म्स को भूलना pada…Ye तो कुछ नहीं hai…Jarurat पड़ने पर और भी भूल jaaunga…Lekin अपने माँ और पापा के साथ कुछ होने नहीं dunga…Maa और पापा के अलावा इस दुनिया में मुझे किसी चीज का मतलब नहीं है.

आप hi sochiye…Itna पैसा खर्च करके उन्होंने मुझे डॉक्टर banaya…Aur बदले में मई उन्हें बचा भी नहीं paaya…Kya फायदा ऐसे में मेरा डॉक्टर होने ka…Maa और पापा के लिए मुझे ऐसा करना पद रहा है और मई वो हर हाल में karunga…Lekin इस हॉस्पिटल को छोड़ नहीं sakta…Yahi सिर्फ लाइफलाइन है मेरे paas…Ha लेकिन ये कोशिश जरूर करूँगा की माँ और पापा को बचाने के लिए किसी मजबूर पेशेंट का फायदा नहीं उठाऊंगा.

इस बार समीर की आँखों में थोड़ा आंसू आ गया था.

निशा:- आप अपनी जगह सही है लेकिन कही न कही ये एथिक्स के खिलाफ है?

समीर:- कुछ गलत नहीं hai…Agar है तो मुझे कोई मतलब nahi…Ye तो नहीं पता की आप को मेरा बात समझ में आया या नहीं aaya…Agar समझ में नहीं भी आया है तो धीरे धीरे सब समझ जाएंगी.

इतना कह कर समीर वह से चला gaya...Maa और पापा की याद आने के बाद वो वह रुक नहीं पाया.

निशा वही खड़े कुछ देर समीर की बातो को सोचती rahi…Koi कन्क्लूसिओं नहीं आने के बाद वो अपने काम में लग गयी.

ात इवनिंग.

शाम में निशा एक मंदिर में gayi…Waha जाके उसने कुछ देर आँखें बंद kiya…Dimaag में सिर्फ एक इंसान आया…अतुल.
 
अपडेट 24

होंठो में मुस्कान और मुस्कान में dard…Pure साल में यही तो दिन था जब निशा को अतुल की याद बहुत सताता tha…Atul का बर्थडे और वो मनहूस दिन जब दोनों ने आखिरी बार एक दूसरे को देखा था.

निशा:- हैप्पी बिरथ डे Atul…Aaj तुम पुरे 31 साल के हो gaye…Ummeed है इस बार तुम्हे अपना बर्थडे याद होगा वर्ण पहले तो मुझे hi याद दिलाना पड़ता.

ये कहते वक्त कुछ hi पल के लिए सही निशा के होंठो में मुस्कान और फ़ैल गया.

निशा:- पता नहीं अब्ब तुम कहा हो और कैसे ho…Mai तो यही दुआ करती हु और करती आयी हु 5 सालो से इसी मंदिर में की तुम जहा भी रहो खुस raho…Bhagwaan तुम्हे दुनिया भर की सभी खुशियां दे.

अतुल जब भी इस दिन को याद करती हु तो बहुत रोना आता hai…Lekin आज के दिन hi रू नहीं paati…Aaj तुम्हारा बर्थडे hai…Iss दिन को अपनी आंसू से ख़राब नहीं करना chaahti…Nahi चाहती की मेरा ये आंसू तुम्हारी खुशियों में अपशगुन बने.

तुम्हारा प्यार में इतना तो भरोषा है की आज भी तुम मुझे नहीं भुला पाए हो लेकिन हो सके तो मुझे भुला देना अपना काला अतीत समझ ke…Issi में तुम्हारी भलाई और खुशियां है.

मेरी जिंदगी तो ऐसे hi काट रही hai…Lekin तुम्हारा जिंदगी ख़ुशी में बीते यही दुआ करती hu…Happy बिरथ डे अतुल वन्स again…Hamesha खुस रहना और मुस्कुराते रहना.

निशा ने भराई हुई आवाज में कहा और निराश चेहरा के साथ अपने घर की तरफ चली गयी.

कितनी अजीब हालात thhe...Dono hi प्यार के पंछी आज भी एक दूसरे से बे इंतेहा मोहोब्बत करते है लेकिन हालात ये है की एक दूसरे को पाने की ख्वाहिश के बदले एक दूसरे की खुशियों की दुआ कर रहे thhe...Kitna मजबूर है दोनों का ये pyar!!!Dono बिलकुल अलग हो गए लेकिन अगर किसी चीज ने दोनों को आज भी जोड़ कर रखा है तो वो है दर्द, आंसू और झूठी मुस्कान.

दूसरी तरफ अतुल भी मंदिर में कुछ शिकायत करके बाहर आया hi था की उससे आमिर मिल गया.

अतुल:- अरे आमिर कब आया तू शहर से? फ़ोन भी नहीं किया… और अब्ब कहा जा रहा है?

1 हफ्ते बाद अतुल ने आमिर को देख कर pucha…Gaanw में यही एक दोस्त था अतुल का जिसको अतुल अपना सच्चा दोस्त मंटा था और जिससे अपना हरे क बात शेयर करता tha…Yaha तक की अतुल अपने पास्ट को भी आमिर के साथ शेयर कर चुक्का है.

आमिर:- आप से hi मिलने आया tha…Shreya ने बताया की आप मंदिर आये है इसी लिए आपसे मिलने चला आया.

अतुल:- कोई ख़ास बात है kya…Jo गांव आते hi मुझसे मिलने के लिए आ गया?

आमिर:- है bhai…Ek खुसखबरी देना tha…Abb शहर छोड़ रहा hu…Yahi गांव की कॉलेज में पढ़ाऊंगा.

अतुल:- Kyu…Shehar में क्या हुआ? सैलरी अच्छा नहीं मिल रहा है क्या? अच्छे से सेटल हो गया था तू वह.

आमिर:- भाई अब्ब मुझे भी पैसे से ज्यादा मतलब नहीं hai…Waise भी पैसे की कमी नहीं है mujhe…Ek घर है और दो चार jameen…Gaanw में पढ़ाऊंगा तो भी कुछ पैसे तो मिल hi jaayenge…Aaram से जिंदगी गुजार सकता हु यहाँ इसी गांव में.

अपनों से दूर भी नहीं रहना पड़ेगा और आप जैसे दोस्त के साथ भी रह पाऊंगा.

अतुल ने आमिर की बात का जवाब सिर्फ मुस्कुरा कर दिया.

आमिर:- भाई आप को देख कर hi मैंने ये फैसला लिया hai…Jab आप इतने बड़े डॉक्टर हो कर पैसा और साड़ी खुशियां छोड़ कर यहाँ एक छोटे से गांव में रह सकते है तो मई तो यही पैदा हुआ hu…Aur अपने गांव छोड़ कर दो रुपैया ज्यादा कमाने शहर जा रहा था.

अब्ब nahi…Jo भी करना है यही करूँगा, अपने गांव में करूँगा अपनों के साथ रह कर करूँगा.

आमिर मुस्कुरा कर तेजी से बोल रहा tha…Iss वजह से अतुल और भी मुस्कुराने लगा.

आमिर:- एक बात तो पूछना भूल hi गया था bhai…Aap यहाँ मंदिर क्यों आये है?

अतुल:- आज बिरथ डे hai…Issi लिए सोचा एक बार दर्शन कर लू.

आमिर:- हैप्पी बिरथ डे bhai…Lekin आज तक आपने इतने सालो में कभी एक बार बताया भी नहीं.

अतुल:- थैंक्स yaar…Lekin कभी मौका hi नहीं mila...MBBS के बाद 2 साल यहाँ गांव में रहा और मद करने 3 साल के लिए चला gaya…Aur फिर वापस यही आ gaya…Aur वो 2 साल में मुझे खुद अपना बिरथ डे याद नहीं था.

आमिर:- ये क्या bhai…Aaj आपका बर्थडे है और आप का चेहरा लटका हुआ है और मुस्कान भी एक डैम फींका है.

अतुल:- आज की डेट को मई अपने बर्थडे से ज्यादा अपना और निशा के साथ बिठाये हुए आखिरी दिन मान रहा hu…Ye मेरे लिए मनहूस दिन है.

अतुल ने फिर फींका मुस्कान के साथ कहा.

अतुल की इस बात से आमिर भी चुप हो gaya…Usse कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या बोले.

चलते चलते दोनों एक पीपल के पेड़ के पास आ gaye…Atul वह जा कर बैठ gaya…Aamir भी उसके पास आया.

आमिर:- भाई अगर बुरा नहीं मानोगे तो एक बात पूछ सकता हु?

अतुल ने आँखों से hi सहमति दे दिया.

आमिर:- जब किसी इंसान का प्यार अधूरा रह जाता है तो वो क्यों इतना मजबूर हो जाता है की जिंदगी में आगे नहीं बढ़ पाटा? भाई मुझे भी किसी से प्यार होने लगा hai…Lekin दर लगता है की मेरा भी प्यार अधूरा न रह जाए!

अतुल:- एक्साम्प्ले के लिए मुझे भी देख lo…Ek जवान था जब मुझे खुद प्यार पर भरोषा नहीं था और प्यार को बकवास बातें मंटा tha…Lekin आज हालत कुछ ऐसा है की ना तो जी पा रहा हु और ना hi मर सकता hu…Fir भी जीने की कोशिश कर रहा हु.

अगर कोई भी मुझे इस हालत में देखेगा तो कहेगा की मई पागल hu…Pyar टूटने की वजह से ऐसा बन गया hu…Pyar के अलावा मेरे लाइफ में कुछ है hi nahi…Practically सोचा जाए तो सही भी hai…Mere साथ क्या गलत हुआ है ? सिर्फ यही ना की मेरा प्यार अधूरा रह गया hai…Aur सिर्फ अधूरा प्यार की वजह से मई जिन्दा लाश बन गया hu…Pyar के अलावा भी बहुत कुछ होता है जिंदगी में.

लेकिन bhai…Jab दिल की गहराई से किसी से प्यार करते है न तो इतनी आसानी से भुला नहीं पाते hai…Nisha से तो मई पहले भी बहुत प्यार करता था लेकिन जब उससे जुड़ा हुआ तब पता चला कितना प्यार करता हु मई उससे.

हर इंसान की यही ख्वाइश होता है की वो अपने परिवार के साथ अच्छे से अपना जिंदगी bitaaye…Lekin यहाँ तो निशा hi मेरी जिंदगी में नहीं rahi…Bahut बुरा लगता है जब हम किसी से सच्चे दिल से प्यार करते है और हम उसी से अलग हो जाते है.

अतुल की आवाज में हमेशा की तरह दर्द tha…Ye कहते वक्त उसकी आँखों में आंसू के कुछ बूँद भी आ गया.

आमिर:- सच में bhai…Aap को देख कर बहुत बुरा लगता hai…Aap के साथ तो गलत नहीं होना चाहिए tha…Aur भाई अब्ब तो जब भी किसी से प्यार के बारे में सुनता हु यही सुनने को मिलता है की उनका प्यार अधूरा रह गया या उनको प्यार में धोखा मिला है.

मुझे भी धोखा मिले इस पहले संभल जाता हु.

अतुल:- किस्से प्यार करता है?

आमिर:- नहीं भाई ये सवाल अभी मत puchna…Bahut जल्द बताऊंगा लेकिन अभी नहीं.

आमिर ने कुछ सोचते हुए जवाब दिया.

अतुल:- ठीक है yaar…Jab सही लगे तब बताना.

लेकिन ये बात भी याद रखना हम किसी से प्यार करते नहीं है प्यार हो जाता hai…Jitna छुपाने की कोशिश करेगा उतना hi प्यार का एहसास और होता jaayega…Pyar से दर कर भागने से अच्छा है प्यार के दो पल अच्छे से जी le…Pyar अधूरा रह जाएगा या तुझे तेरे प्यार का मंजिल मिलेगा ये तो पता नहीं लेकिन कुछ खूबसूरत दिन शान्ति से जी paayega…Aaj मई यही सब तो मिस कर रहा hu…Ek और बात प्यार को पाने की कोशिश मत कर प्यार को निभाते जा बाकी किस्मत के पास छोड़ दे.

आमिर को समझाते वक्त अतुल को फिर से पुराने दिनों की प्यारे और दर्द भरे पल याद आ गए.

आमिर:- भाई माना पड़ेगा बहुत कुछ पता है आप को प्यार के बारे में बहुत कुछ पता है.

अतुल:- भले hi मेडिकल फील्ड में मद किया है लेकिन प्यार में पीएचडी किया है.

अतुल ने मुस्कुराते हुए कहा.

कुछ ऐसा hi था Atul…Dard भरी यादों से निकलने के लिए खुद से hi इसी तरह का मजाक कर लेता था.
 
अपडेट 25

फ्लैशबैक

निशा:- नहीं nahi…Ye मई क्या सोच रही hu…Atul मेरा दोस्त hai…Bahut अच्छा दोस्त hai…Aur थोड़ा यूनिक bhi…Issi लिए उसके बारे में कुछ बातें याद आ जाता hai…Iska मतलब प्यार तो नहीं hai…Mai भी पागल हो गयी hu…Pata नहीं क्या क्या सोच रही हु.

इतना कह कर वो थोड़ा मुस्कुरायी जैसे उसने सच में उससे कोई नादानी कर दिया hai...Jo सीरियसनेस उसके चेहरे में आया था वो अचानक hi गायब हो गया.

इन क्लास

क्लास में पहुँच कर निशा अतुल के पास बैठ gayi…Ek नजर उसने अतुल को dekha…Atul का हँसता मुस्कुराता हुआ चेहरा देख कर उससे यकीं हो गया की अजय ने मजाक hi किया था.

तभी वह काजल आ गयी.

काजल:- निशा!! क्या तुम पीछे मेरे सीट में बैठ सकती हो? इस लेक्चर में मई यहाँ आगे बैठना चाहती हु.

निशा:- क्यों?

काजल:- वो एनाटोमी की क्लास में मई बहुत पीछे रह गयी hu…Rahul सर की लास्ट क्लास में अच्छे से ध्यान भी नहीं दे paayi…Agar आज भी ध्यान नहीं दे पायी तो और पीछे रह jaaungi…Aaj किसी तरह सब कवर करना है प्लीज आज पीछे चली जा.

निशा का पीछे जाने का मन बिलकुल नहीं tha…Abb उससे भी फ्रंट में बैठना अच्छा लग रहा था.

निशा:- लेकिन राहुल सर का क्लास तो सबसे लास्ट में है? अभी बहुत टाइम है?

काजल:- लेकिन अब्ब कोई ब्रेक भी नहीं hai…Agar अभी सीट एक्सचेंज नहीं किया तो बहुत मुश्किल हो jaayega…Rahul सर सीट भी चेंज करने नहीं denge…Bahut स्ट्रिक्ट hai…Picchli बार अजय को भी बहुत सुनाया था unhone…Please यार जा na…Kahi सर आ गए तो ये मौका भी नहीं मिलेगा.

काजल ने एक hi सांस में साड़ी बात कह दिया.

अब्ब निशा के पास भी कहने के लिए कुछ बचा नहीं tha…Jaane का मन भी नहीं था और मन भी नहीं कर सकती thi…Wo बिना कुछ बोले उठ कर चली गयी पर चेहरे में उदासी को दिखने नहीं दिया.

निशा पीछे अंजलि की पास बैठ gayi…Aur बैग से बुक निकाल कर देखने lagi…Usne अंजलि से भी कोई बात नहीं किया.

थोड़ी देर में क्लास स्टार्ट हो गया.

क्लास स्टार्ट होने के बाद निशा पढ़ाई में ध्यान देने lagi…Kabhi कभी उसका ध्यान आगे अतुल और काजल पर भी चला जाता.

ज्यादातर दोनों का ध्यान पढ़ाई में hi था लेकिन कभी कभी टीचर की नजरो से बच कर दोनों हंसी मजाक भी कर रहे थे.

एक लेक्चर ख़तम हुआ और दूसरा suru...Yaha भी दोनों का हाल ऐसा hi tha…Padhaai के वक्त दोनों अच्छे से पढ़ाई भी कर रहे थे और टीचर से बच कर मस्ती भी.

अब्ब धीरे धीरे निशा को गुस्सा आने लगा.

निशा:- (इन हेर मंद) ये अतुल भी अजीब hai…Jab मई उसके पास बैठ टी हु तो कहता है की मस्ती मजाक फ्री टाइम me…Lecture के वक्त सिर्फ padhaai…Lekin अभी देखो कैसे इस काजल के साथ हंस हंस कर बातें कर रहा hai…Aur ये Kajal…Sidhe बोल देती की मुझे अतुल के साथ बैठना है तुम पीछे चली jaao…Chali jaati…Lekin इससे पढ़ाई का बहाना चाहिए.

निशा ये सोच कर और भी गुस्सा हो रही thi…Ya इंदिरेक्ट्ली जेलस फील कर रही थी और इसका एहसास अभी भी उससे हुआ नहीं tha…Iss लेक्चर निशा के लिए बेकार हो gaya…Atul और काजल की चक्कर में वो कंसन्ट्रेट hi नहीं कर पायी.

फिर आया क्लास राहुल सर का.

क्लास में सर की एंट्री होने के बाद पिन ड्राप साइलेंस चा gaya…Picchle लेक्चर के बाद सभी राहुल सर को एक स्ट्रिक्ट टीचर के रूप में जाने लगे.

डॉ. राहुल:- सो स्टूडेंट्स कैसे है आप सब?

आते hi सभी को देख कर राहुल सर ने पूछा.

कुछ hi स्टूडेंट्स ने बोलै "फाइन सर".

डॉ. राहुल:- अरे इतना साइलेंस क्यों है? डरो मत कोई बहुत नहीं hu…Aap सभी का टीचर hi हु.

राहुल सर ने मुस्कुरा कर कहा.

डॉ. राहुल:- सो students…Aaj हम फोरआर्म padhenge…Lekin उससे पहले लास्ट लेक्चर की कुछ क्वेश्चन आप सभी से puchunga…Ummeed है आप सभी पढ़ कर आये होंगे.

राहुल सर ने मुस्कुरा कर hi कहा लेकिन उनकी इस बात से सभी स्टूडेंट्स के चेहरे में दर चा gaya…Sabse ज्यादा काजल के चेहरे में.

डॉ. राहुल:- अच्छा तो फिर कोई bataao…Cubital फोस्सा का बाउंड्री क्या है? मसल्स का नाम बताओ.

उन्होंने पूछा तो सभी स्टूडेंट्स से था लेकिन किसी ने अपना मुंह नहीं khola…Sabhi को खामोश देख राहुल सर ने सभी स्टूडेंट्स को dekha…Fir अतुल पर नजर पड़ते hi उन्होंने पूछा.

डॉ. राहुल:- अतुल तुम्ही बता दो? [Last lecture me sir ko Atul aur Ajay ka naam pata chal gaya tha.]

अतुल:- (खड़ा हो कर) सर मेदिअल्ली आईटी इस प्रोनतोर टेरेस एंड लाटेराल्ल्य आईटी इस बरचियरडिअलिस.

डॉ. राहुल:- वैरी good…Sit डाउन.

उनका मुस्कान इस बार थोड़ा और बढ़ gaya…Fir उनका नजर काजल पर pada…Fir उन्होंने काजल से सवाल किया.

डॉ. राहुल:- सो तेल्ल में इतस कंटेंट?

काजल को जो दर था वही hua…Usne इस टॉपिक में कुछ पढ़ा hi नहीं था.

डॉ. राहुल:- मैंने प्रैक्टिकल में भी पढ़ाया था?

लेकिन काजल खामोश hi कड़ी rahi…Kajal को ऐसी हालत में देख पता नहीं क्यों निशा को बहुत अच्छा लग रहा tha…Last लेक्चर का सारा फ़्रस्ट्रेशन निकल गया था.

डॉ. राहुल:- कोई और बता सकता है इस क्वेश्चन का आंसर?

राहुल सर ने इतना कहा hi था की निशा अचानक कड़ी हो गयी और कहना सुरु किया.

निशा:- Sir…From मीडियल तो लेटरल आईटी इस मीडियन नर्व, ब्राचीऑल आर्टरी, टेंडॉन्स ऑफ़ बाइसेप्स बरछी एंड रेडियल नर्व.

डॉ. राहुल:- Excellent…Sit डाउन.

फिर काजल की तरफ देख कर.

डॉ. राहुल:- आप भी बैठ जाइये.

काजल बैठ जाती है लेकिन उससे बहुत बुरा लग रहा tha…Wo सोच रही थी की पूरी क्लास में उसकी बेइज्जती हो गया.

डॉ. राहुल:- सो students…Picchli बार भी कहा था और आज भी कह रहा hu…Ummeed है आगे कहना न pade…Mere क्लास में डिसिप्लिन, पुनक्तुअलिटी तो कंपल्सरी hai…Lekin इसके अलावा आप सब को हमेशा पढ़ कर आना होगा.

इतना आसान सवाल का जवाब नहीं दे पा रहे hai…Exam में तो ये इम्पोर्टेन्ट क्वेश्चन है लेकिन साथ में आप सब बाद में जब डॉक्टर बनेंगे तब ये और भी इम्पोर्टेन्ट hoga…Jab आप को पता hi नहीं की आर्टरी, वीन और नर्व कहा होता है तो कैसे पेशेंट का ट्रीटमेंट करेंगे?

सो बे सीरियस इन योर स्टडी फ्रॉम now…Aap लोग सोच रहे होंगे की बाद में पढ़ कर भी कवर कर लेंगे तो ये इम्पॉसिबल है…2 साल hi है आपको बेसिक नॉलेज पढ़ने के लिए फिर 2 साल क्लीनिकल साइंस एंड 1 साल internship…Aur कितना सिलेबस पढ़ना पड़ेगा ये तो आप को पता hi hai…Iss तरह पढ़ कर काम नहीं chalega…Bahut म्हणत चाहिए.

उम्मीद है आगे से ऐसी मिस्टेक रिपीट नहीं hoga…Jaanta हु कुछ ज्यादा hi स्ट्रिक्ट हो रहा hu…Aap सभी एडल्ट और मातुरे हो चुके hai…Iss तरह बातें करना मुझे भी अच्छा नहीं lagta…Lekin क्या करू प्रोफेशन hi ऐसा hai…Patient की लाइफ और अच्छे मेडिकल सिस्टम का सवाल hai…Agar आप सब नहीं पढ़ेंगे तो आप का करियर तो मुश्किल में पद जाएगा और साथ hi पेशेंट की लाइफ भी.

सो आफ्टर ेंटरिंग ईंटो मेडिकल कॉलेज बे serious…Koi भी प्रॉब्लम हो बिना दर के मेरे पास आ jaana…Puri हेल्प karunga…Class के बाहर आप सभी का दोस्त hi हु लेकिन क्लास के अंदर एक रेस्पोंसिबल टीचर.

आगे से पढ़ कर aana…At लीस्ट जो लेक्चर कम्पलीट हो चुक्का है वो जरूर पढ़ कर आना.

इतना कह कर राहुल सर निशा और काजल का नाम पूछ कर आगे की लेक्चर पढ़ाना स्टार्ट करते है.

उनकी इस बात से सभी स्टूडेंट सहमत the…Khaas कर अतुल और Nisha…Kajal को भी रीलीज़ हो गया की सर ने जो कहा है बिलकुल सही कहा hai…Padhne के लिए अभी बहुत कुछ बाकी है और टाइम भी ज्यादा नहीं hai…Saath में डॉक्टर को रेस्पोंसिबल भी होना चाहिए.

इस लेक्चर में निशा ने अतुल और काजल पर बिलकुल भी ध्यान नहीं diya…Iss बार वो सिर्फ लेक्चर पर कंसन्ट्रेट कर रही thi…Rahul सर की बातो से वो बहुत मोटीवेट हो गयी थी और उससे पढ़ने में मजा भी आ रहा tha…Aur साथ में जीत का ख़ुशी भी.

उससे लग रहा था की वो आज काजल से जीत गयी hai…Pata नहीं अनजाने में कैसा कम्पटीशन था उसके दिल me…Jo भी था वो निशा की चाहत और इन्सेक्युरित्य को धीरे धीरे दिखा रहा था.
 
Back
Top