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अपडेट 164(बी)
अगले दिन बाबा ने मेरी और सुमन की शादी करा दी हमने सब का आशीर्वाद लिया फिर उनसे जाने की बात की जिसे सुन क्र रम्भा को थोड़ा दुःख हुआ क्यों की इतने दिन तक वो हमारे साथ hi थी कुछ दिनों के लिए hi सही मई उस से दूर जाने वाला था सुमन ने उसे गले लगा क्र अपना ख्याल रखने को कहा मैंने भी उसे अपना ख्याल रखने और जल्दी आने का बोल क्र बाकि सब से विदा ले क्र सुमन के साथ वह से निकल गया और एक मैदानी एरिया में आ गया फिर जीन ने जो मुझे रिंग दी थी उसे घिसने लगा और जीन को आने के लिए याद करने लगा कुछ hi देर में हमारे सामने एक विशाल काय जीन प्रगट हो गया जिसे देख क्र सुमन भी दर से मेरे पीछे आ गयी तभी वो जीन बोलै
जीन: आप जीन लोक जाने के लिए सुरवीर.
मई : जी हम जाने के लिए तैयार है.
फिर जीन ने अपना बड़ा सा पंजा जमीं पर रखा और कहा की आप दोनों इस पे आ जाइये तब मैंने सुमन का हाथ पकड़ कर जीन के हथेली पर आ गया फिर जीन ने अपना पंजा ऊपर उठाया और लगा आसमान में उड़ने सुमन को उचाईयों से बहुत दर लग रहा था इसलिए उसने मुझे कास कर पकड़ा हुआ था 2 घंटे आसमान में सफर करने के बाद वो हमे एक बड़े से जालमुखी के ऊपर ले आया.
सुमन तो निचे का नजारा देख कर तो बहुत hi जायदा दर गयी क्यों की नीचे उस बड़े से जालमुखी से लगा तर गरम लावा पिघल क्र बहार आ रहा था.
सुमन: टाइगर ये जीन हमे इस जवाला मुखी में दाल क्र मरना चाहता है क्या , मुझे अभी नहीं मरना ा रे आज hi तो हमारी शादी हुई है और मुझे तो तुम्हारे बच्चे भी पैदा करने है,
मई : डरो मत सुमन मई बात करता हु जीन से ,
ये तुम हमे इस जवाला मुखी के पास ले क्र क्यों आये हो.
जीन: आँका ये जवाला मुखी असली नहीं है ये तो मायावी जालमुखी है यही तो हमारे जीन लोक जाने का दरवाज़ा है .
मई : क्या ये ाली नहीं है फिर कैसे इसमें गरम लावा पिघल क्र बहार निकल रहा है.
जीन : ये सब एक माया है नहीं तो हर कोई जीन लोक में परवेस क्र जाता इसलिए ये माया से बनाया गया जालमुखी है चलिए अब हम चाहते है .
ये बोल क्र वो हमे उस बड़े से जालमुखी में ले जाने लगा जब हम जालमुखी के अंदर जाने पर भी गर्मी क्र अहसास नहीं हो रहा था इसी से पता लग रहा था की ये असली नहीं है मायावी है सुमन ने तो कास कर मुझे पकड़ लिया थे और अपनी आँखे बंद क्र ली थी, काफी देर तक हम उस मायावी जालमुखी के अंदर जाते रहे उसके बाद हम ने जीन लोक में दाखिल हो गए यह का मौसम बहुत hi खुशनुमा tha.aasman से बहुत hi अच्छा नजारा मई देख रहा था.
मई : देखो सुमन हम जीन लोक में आ गए देखो यह कितने सुन्दर सुन्दर पेड़, पक्छी है.
कुछ hi देर में जीन हमे एक नगर के बहार उतर दिया और वो जीन भी अपने सामान्य रूप में आ गया ,फिर वो नगर के प्रवेश द्वार पर जाकर सैनिको से बात करने लगा वो हवा में उड़ते हुवे पहरेदारी क्र रहे थे कुछ देर बाद दरवाज़ा अपने आप खुल गया तब जीन ने हमे अंदर चलने को कहा.
अगले दिन बाबा ने मेरी और सुमन की शादी करा दी हमने सब का आशीर्वाद लिया फिर उनसे जाने की बात की जिसे सुन क्र रम्भा को थोड़ा दुःख हुआ क्यों की इतने दिन तक वो हमारे साथ hi थी कुछ दिनों के लिए hi सही मई उस से दूर जाने वाला था सुमन ने उसे गले लगा क्र अपना ख्याल रखने को कहा मैंने भी उसे अपना ख्याल रखने और जल्दी आने का बोल क्र बाकि सब से विदा ले क्र सुमन के साथ वह से निकल गया और एक मैदानी एरिया में आ गया फिर जीन ने जो मुझे रिंग दी थी उसे घिसने लगा और जीन को आने के लिए याद करने लगा कुछ hi देर में हमारे सामने एक विशाल काय जीन प्रगट हो गया जिसे देख क्र सुमन भी दर से मेरे पीछे आ गयी तभी वो जीन बोलै
जीन: आप जीन लोक जाने के लिए सुरवीर.
मई : जी हम जाने के लिए तैयार है.
फिर जीन ने अपना बड़ा सा पंजा जमीं पर रखा और कहा की आप दोनों इस पे आ जाइये तब मैंने सुमन का हाथ पकड़ कर जीन के हथेली पर आ गया फिर जीन ने अपना पंजा ऊपर उठाया और लगा आसमान में उड़ने सुमन को उचाईयों से बहुत दर लग रहा था इसलिए उसने मुझे कास कर पकड़ा हुआ था 2 घंटे आसमान में सफर करने के बाद वो हमे एक बड़े से जालमुखी के ऊपर ले आया.
सुमन तो निचे का नजारा देख कर तो बहुत hi जायदा दर गयी क्यों की नीचे उस बड़े से जालमुखी से लगा तर गरम लावा पिघल क्र बहार आ रहा था.
सुमन: टाइगर ये जीन हमे इस जवाला मुखी में दाल क्र मरना चाहता है क्या , मुझे अभी नहीं मरना ा रे आज hi तो हमारी शादी हुई है और मुझे तो तुम्हारे बच्चे भी पैदा करने है,
मई : डरो मत सुमन मई बात करता हु जीन से ,
ये तुम हमे इस जवाला मुखी के पास ले क्र क्यों आये हो.
जीन: आँका ये जवाला मुखी असली नहीं है ये तो मायावी जालमुखी है यही तो हमारे जीन लोक जाने का दरवाज़ा है .
मई : क्या ये ाली नहीं है फिर कैसे इसमें गरम लावा पिघल क्र बहार निकल रहा है.
जीन : ये सब एक माया है नहीं तो हर कोई जीन लोक में परवेस क्र जाता इसलिए ये माया से बनाया गया जालमुखी है चलिए अब हम चाहते है .
ये बोल क्र वो हमे उस बड़े से जालमुखी में ले जाने लगा जब हम जालमुखी के अंदर जाने पर भी गर्मी क्र अहसास नहीं हो रहा था इसी से पता लग रहा था की ये असली नहीं है मायावी है सुमन ने तो कास कर मुझे पकड़ लिया थे और अपनी आँखे बंद क्र ली थी, काफी देर तक हम उस मायावी जालमुखी के अंदर जाते रहे उसके बाद हम ने जीन लोक में दाखिल हो गए यह का मौसम बहुत hi खुशनुमा tha.aasman से बहुत hi अच्छा नजारा मई देख रहा था.
मई : देखो सुमन हम जीन लोक में आ गए देखो यह कितने सुन्दर सुन्दर पेड़, पक्छी है.
कुछ hi देर में जीन हमे एक नगर के बहार उतर दिया और वो जीन भी अपने सामान्य रूप में आ गया ,फिर वो नगर के प्रवेश द्वार पर जाकर सैनिको से बात करने लगा वो हवा में उड़ते हुवे पहरेदारी क्र रहे थे कुछ देर बाद दरवाज़ा अपने आप खुल गया तब जीन ने हमे अंदर चलने को कहा.
