- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 36,468
अपडेट 93
नदी के ऊपर से उड़ते हुए हम ने देखा की एक औरत जो इस भयानक सुनसान और दुर्गम इलाके में पानी भर रही है उनका पहनावा भी अलग hi था वो सिर्फ एक भगवा रंग के सदी को hi लपेटे हुए थी उन्हें देख क्र हमे लगा की हमे हमारी मंजिल मिल गयी है तो हम लोगो ने छुप क्र उनका पीछा करने का फैसला किया क्यों की अगर वो हमे देख लेती तो हो सकता है की हमे हमारी मंजिल न मिल पाए इसलिए हम ने छुप क्र पीछा करने का सोच की ये खा जाती है.
हम दोनों भी अब जमीं पर अस चुके थे वो औरत नदी के किनारे से होते हुए पावतो के ऊपर जाने लगी ऐसा लग रहा था जैसे पर्वतो में सीधी बानी हुई हो फिर जब हम पास गए तो सच में सीधी बानी हुई थी जो दूर से देखने पर नहीं दीखता था फिर वो औरत पर्वतो के ऊपर से गिरने वाली झरने के पास जाकर गायब hi हो गयी हम भी सीढिया चढ़ते हुए झरने के पास पहुंचे तो हमे वह पर कुछ नहीं मिला वह न hi कोई गुफा था और न hi कोई दरवाजा दिखा हमे .
हमे वह पहुंच क्र ऐसा लगने लगा की हाथ को आया पर मुँह न लगा हम दोनों निराश होकर व्ही झरने के पास बैठे हुए थे किनारे इस लिए नहीं खा क्यों की झरने का पानी तो कई सोउ फ़ीट निचे निचे गिर रहा था और हम तो ऊपर थे और झरने तो हमारे और ऊपर से गिर रहा था , मुझे समझ नहीं आ रहा था की अब यह तक आकर क्या किया जाये तभी दीदी ने एक बात कहि जो मैंने अब तक धयान नहीं दिया था.
स्नेहा : टाइगर तुम ने एक बात गौर की यह पर नाम मात्रा की ठण्ड नहीं लग रही है
मई : है दीदी सच में यह तो ठण्ड लग hi नहीं रही है और ये बहुत आश्चर्य की बात है जरूर यह पर कुछ दिव्या सकती है जिसे हमे ढूँढना होगा.
स्नेहा : जब ठण्ड नहीं है तो चलो न झरने के पास जाकर देखते है बहुत मजा आएगा.
हम ने जो गरम कपडे पहन रखे थे उसे उतर दिए.
फिर हम दोनों झरने के पास गए तो दीदी को मस्ती सूझी वो झरने का पानी मेरे ऊपर फेकने लगी तब मैंने भी दीदी को भिगोने के लिए दीदी को पकड़ के झरने के पानी में ले गया मगर ये क्या दीदी ने मेरा भी हाथ पकड़ क्र मुझे भी खींच लिया थोड़ी देर तक तो हम ऐसे hi भीगते रहे फिर जब दीदी के कपडे पुरे भीग गए तब उनके बूब्स के उभर साफ दिखाई देने लगे तो मई उनके उभर को hi घूरने लगा तो दीदी ने मुझे अपने आप से छुड़ा क्र मुझे हल्का सा धक्का दिया तो मई झरने के उस पर चला गया और जब मई अंदर जा क्र पीछे देखता हु तो ये क्या यह तो गुफा नजर आ रहा था और अंदर उजाला भी नजर आ रहा था इस का मतलब ये झरना hi इस गुफा का दरवाजा ओह माय गॉड क्या करिश्मा है कुदरत का .
मई कुछ देर तक उसे hi देखता रहा , झरने के उस पर दीदी मुझे बहार न निकलता देख परेशान होने लगी इधर मुझे भी दीदी का ख्याल आया तो मई झरने के बहार आया और दीदी का हाथ पकड़ क्र फिर से झरने के उस पर चला गया और जब दीदी ने गुफा को देखा तो उनकी खुसी का ठिकाना hi नहीं था वो खुसी से मेरे गले hi लग गयी.
मई : दीदी हमे अंदर भी जाना है तो अब चले.
फिर मई दीदी का हाथ पकड़ क्र गुफा के अंदर जाने लगा ,गुफा के अंदर का माहौल बिलकुल संत था जरा सी भी हलचल नहीं हो रही थी कुछ और अंदर जाने पर एक बड़ा सा हॉल आया जिसमे जिसमे चारो तरफ उजाला hi उजाला था पता नहीं यह खा से रोशनी आरही थी और उस हॉल में बहुत सरे रिसि मुनि तप में लीन थे ऐसा लग रहा था की ये लोग बहुत पहले से hi tap(shadhana) क्र रहे है .
हम इधर उधर देखते हुए हॉल के बिच में आ गए तभी मेरी नजर एक ऐसे पुंज पर पड़ी जिसमे सही रोशनी निकल रही थी मई उस तरफ जाने लगा तभी पता नहीं कुछ हुआ और ऐसा लगने लगा की मेरे हाथ और पैरो को किसी दिव्या सकती से बांध दिया गया है .
मई छत पटाने लगा अपने हाथ पैरो को हिलने की कोसिस करता रहा लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ दीदी भी मुझे ऐसी हालत में देख क्र वो भी मेरे पास आने लगी तभी उनको भी वैसा hi बांध दिया गया जैसे मुझे बंधा गया था.
तब एक सुन्दर सी लड़की आयी एक डैम दूध की तरह सफ़ेद एक डैम पारी लग रही thi,jaise आसमान से अप्सरा उतर आयी हो.
लड़की : डस्ट पापी तुम लोग यह भी पहुंच गए साडी धरती काम पद गयी क्या जो तुम लोग यह भी अपना कब्ज़ा ज़माने आ गए.
मई : देखिये जैसा आप सोच रही है वैसा कुछ भी नहीं है हम यह दूसरे काम से आये है.
लड़की : मई अच्छी तरह समझती हु तुम लोगो के काम को मई अभी बाबा को बुला आईटी लती हु.
ये बोल क्र वो लड़की गुफा के एक तरफ चली गयी, थोड़ी देर बाद वो लड़की और एक महिला जो निचे नदी में पानी भरने आयी थी, और उनके साथ बाबा जी भी ये ये व्ही बाबा जी है जिन्होंने माँ को बस्तर जाने को खा था और मेरा नामकरण भी किया था.
बाबा जी ने हम लोगो को ऐसी हालत में देख क्र तुरंत हमे मुक्त किया और अपनी बेटी से खा.
बाबाजी: बेटी रम्भा ये तूने क्या किया पहले पूछ तो लेती की ये कोण है और क्यों आये है.
माफ़ करना बीटा ये मेरी बेटी नहीं जानती की तुम कोण हो.
मई :प्रणाम बाबाजी और कोई बात नहीं बाबा जी लेकिन आप यह रहते है मैंने सोचा भी नहीं था अब आप hi हमारा मार्गदर्सन करे.
बाबाजी : बीटा तुम्हारा यह आना पहले से hi तय था, और यह जो भी होगा सब विधि के विधान में लिखा जा चूका है आओ अंदर चल क्र बात करते है.
बाबाजी :बेटी इन से मिलो ये है शेर सिंह उर्फ टाइगर मैंने तुम्हे जिसके बारे में खा था वो यही है बेटी और टाइगर ये है मेरी बेटी रम्भा और ये मेरी धर्म पत्नी जब तुम लोग भटक रहे तब मैंने hi अपनी पत्नी को निचे नदी से पानी लेन को खा था, ताकि तुम लोग यह तक पहुंच सको, नहीं तो यह तक किसी का पहुंच पाना असंभव है.
रम्भा मुझे देख देख शर्मा रही थी फिर जब मैंने उसकी तरफ देखा तो वो शर्मा क्र अंदर चली गयी.
मई :है बाबा जी आप ने सही खा यह तक हम पहुंच hi नहीं पते हम ने माता जस्ट का पीछा क्र के hi यह तक पहुंचे है नहीं तो ये झरना रूपी दरवाजा कोई समझ hi नहीं पायेगा की इस के पीछे कोई गुफा भी hai,or बाबा बहार वो सब मुनि जो तप क्र थे है वो कोण है ऐसा लग रहा था की वो कई सालो से ऐसे hi साधना में लीन है.
बाबाजी : बीटा वो सभी हमारे पूर्वज है जो इस दुनिया के लिए विशेष कराय क्र के तप में सदियों से लीन है अब मेरा भी वक्त आ गया है.
नदी के ऊपर से उड़ते हुए हम ने देखा की एक औरत जो इस भयानक सुनसान और दुर्गम इलाके में पानी भर रही है उनका पहनावा भी अलग hi था वो सिर्फ एक भगवा रंग के सदी को hi लपेटे हुए थी उन्हें देख क्र हमे लगा की हमे हमारी मंजिल मिल गयी है तो हम लोगो ने छुप क्र उनका पीछा करने का फैसला किया क्यों की अगर वो हमे देख लेती तो हो सकता है की हमे हमारी मंजिल न मिल पाए इसलिए हम ने छुप क्र पीछा करने का सोच की ये खा जाती है.
हम दोनों भी अब जमीं पर अस चुके थे वो औरत नदी के किनारे से होते हुए पावतो के ऊपर जाने लगी ऐसा लग रहा था जैसे पर्वतो में सीधी बानी हुई हो फिर जब हम पास गए तो सच में सीधी बानी हुई थी जो दूर से देखने पर नहीं दीखता था फिर वो औरत पर्वतो के ऊपर से गिरने वाली झरने के पास जाकर गायब hi हो गयी हम भी सीढिया चढ़ते हुए झरने के पास पहुंचे तो हमे वह पर कुछ नहीं मिला वह न hi कोई गुफा था और न hi कोई दरवाजा दिखा हमे .
हमे वह पहुंच क्र ऐसा लगने लगा की हाथ को आया पर मुँह न लगा हम दोनों निराश होकर व्ही झरने के पास बैठे हुए थे किनारे इस लिए नहीं खा क्यों की झरने का पानी तो कई सोउ फ़ीट निचे निचे गिर रहा था और हम तो ऊपर थे और झरने तो हमारे और ऊपर से गिर रहा था , मुझे समझ नहीं आ रहा था की अब यह तक आकर क्या किया जाये तभी दीदी ने एक बात कहि जो मैंने अब तक धयान नहीं दिया था.
स्नेहा : टाइगर तुम ने एक बात गौर की यह पर नाम मात्रा की ठण्ड नहीं लग रही है
मई : है दीदी सच में यह तो ठण्ड लग hi नहीं रही है और ये बहुत आश्चर्य की बात है जरूर यह पर कुछ दिव्या सकती है जिसे हमे ढूँढना होगा.
स्नेहा : जब ठण्ड नहीं है तो चलो न झरने के पास जाकर देखते है बहुत मजा आएगा.
हम ने जो गरम कपडे पहन रखे थे उसे उतर दिए.
फिर हम दोनों झरने के पास गए तो दीदी को मस्ती सूझी वो झरने का पानी मेरे ऊपर फेकने लगी तब मैंने भी दीदी को भिगोने के लिए दीदी को पकड़ के झरने के पानी में ले गया मगर ये क्या दीदी ने मेरा भी हाथ पकड़ क्र मुझे भी खींच लिया थोड़ी देर तक तो हम ऐसे hi भीगते रहे फिर जब दीदी के कपडे पुरे भीग गए तब उनके बूब्स के उभर साफ दिखाई देने लगे तो मई उनके उभर को hi घूरने लगा तो दीदी ने मुझे अपने आप से छुड़ा क्र मुझे हल्का सा धक्का दिया तो मई झरने के उस पर चला गया और जब मई अंदर जा क्र पीछे देखता हु तो ये क्या यह तो गुफा नजर आ रहा था और अंदर उजाला भी नजर आ रहा था इस का मतलब ये झरना hi इस गुफा का दरवाजा ओह माय गॉड क्या करिश्मा है कुदरत का .
मई कुछ देर तक उसे hi देखता रहा , झरने के उस पर दीदी मुझे बहार न निकलता देख परेशान होने लगी इधर मुझे भी दीदी का ख्याल आया तो मई झरने के बहार आया और दीदी का हाथ पकड़ क्र फिर से झरने के उस पर चला गया और जब दीदी ने गुफा को देखा तो उनकी खुसी का ठिकाना hi नहीं था वो खुसी से मेरे गले hi लग गयी.
मई : दीदी हमे अंदर भी जाना है तो अब चले.
फिर मई दीदी का हाथ पकड़ क्र गुफा के अंदर जाने लगा ,गुफा के अंदर का माहौल बिलकुल संत था जरा सी भी हलचल नहीं हो रही थी कुछ और अंदर जाने पर एक बड़ा सा हॉल आया जिसमे जिसमे चारो तरफ उजाला hi उजाला था पता नहीं यह खा से रोशनी आरही थी और उस हॉल में बहुत सरे रिसि मुनि तप में लीन थे ऐसा लग रहा था की ये लोग बहुत पहले से hi tap(shadhana) क्र रहे है .
हम इधर उधर देखते हुए हॉल के बिच में आ गए तभी मेरी नजर एक ऐसे पुंज पर पड़ी जिसमे सही रोशनी निकल रही थी मई उस तरफ जाने लगा तभी पता नहीं कुछ हुआ और ऐसा लगने लगा की मेरे हाथ और पैरो को किसी दिव्या सकती से बांध दिया गया है .
मई छत पटाने लगा अपने हाथ पैरो को हिलने की कोसिस करता रहा लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ दीदी भी मुझे ऐसी हालत में देख क्र वो भी मेरे पास आने लगी तभी उनको भी वैसा hi बांध दिया गया जैसे मुझे बंधा गया था.
तब एक सुन्दर सी लड़की आयी एक डैम दूध की तरह सफ़ेद एक डैम पारी लग रही thi,jaise आसमान से अप्सरा उतर आयी हो.
लड़की : डस्ट पापी तुम लोग यह भी पहुंच गए साडी धरती काम पद गयी क्या जो तुम लोग यह भी अपना कब्ज़ा ज़माने आ गए.
मई : देखिये जैसा आप सोच रही है वैसा कुछ भी नहीं है हम यह दूसरे काम से आये है.
लड़की : मई अच्छी तरह समझती हु तुम लोगो के काम को मई अभी बाबा को बुला आईटी लती हु.
ये बोल क्र वो लड़की गुफा के एक तरफ चली गयी, थोड़ी देर बाद वो लड़की और एक महिला जो निचे नदी में पानी भरने आयी थी, और उनके साथ बाबा जी भी ये ये व्ही बाबा जी है जिन्होंने माँ को बस्तर जाने को खा था और मेरा नामकरण भी किया था.
बाबा जी ने हम लोगो को ऐसी हालत में देख क्र तुरंत हमे मुक्त किया और अपनी बेटी से खा.
बाबाजी: बेटी रम्भा ये तूने क्या किया पहले पूछ तो लेती की ये कोण है और क्यों आये है.
माफ़ करना बीटा ये मेरी बेटी नहीं जानती की तुम कोण हो.
मई :प्रणाम बाबाजी और कोई बात नहीं बाबा जी लेकिन आप यह रहते है मैंने सोचा भी नहीं था अब आप hi हमारा मार्गदर्सन करे.
बाबाजी : बीटा तुम्हारा यह आना पहले से hi तय था, और यह जो भी होगा सब विधि के विधान में लिखा जा चूका है आओ अंदर चल क्र बात करते है.
बाबाजी :बेटी इन से मिलो ये है शेर सिंह उर्फ टाइगर मैंने तुम्हे जिसके बारे में खा था वो यही है बेटी और टाइगर ये है मेरी बेटी रम्भा और ये मेरी धर्म पत्नी जब तुम लोग भटक रहे तब मैंने hi अपनी पत्नी को निचे नदी से पानी लेन को खा था, ताकि तुम लोग यह तक पहुंच सको, नहीं तो यह तक किसी का पहुंच पाना असंभव है.
रम्भा मुझे देख देख शर्मा रही थी फिर जब मैंने उसकी तरफ देखा तो वो शर्मा क्र अंदर चली गयी.
मई :है बाबा जी आप ने सही खा यह तक हम पहुंच hi नहीं पते हम ने माता जस्ट का पीछा क्र के hi यह तक पहुंचे है नहीं तो ये झरना रूपी दरवाजा कोई समझ hi नहीं पायेगा की इस के पीछे कोई गुफा भी hai,or बाबा बहार वो सब मुनि जो तप क्र थे है वो कोण है ऐसा लग रहा था की वो कई सालो से ऐसे hi साधना में लीन है.
बाबाजी : बीटा वो सभी हमारे पूर्वज है जो इस दुनिया के लिए विशेष कराय क्र के तप में सदियों से लीन है अब मेरा भी वक्त आ गया है.