Incest The Tiger - Page 14 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest The Tiger

अपडेट 93

नदी के ऊपर से उड़ते हुए हम ने देखा की एक औरत जो इस भयानक सुनसान और दुर्गम इलाके में पानी भर रही है उनका पहनावा भी अलग hi था वो सिर्फ एक भगवा रंग के सदी को hi लपेटे हुए थी उन्हें देख क्र हमे लगा की हमे हमारी मंजिल मिल गयी है तो हम लोगो ने छुप क्र उनका पीछा करने का फैसला किया क्यों की अगर वो हमे देख लेती तो हो सकता है की हमे हमारी मंजिल न मिल पाए इसलिए हम ने छुप क्र पीछा करने का सोच की ये खा जाती है.

हम दोनों भी अब जमीं पर अस चुके थे वो औरत नदी के किनारे से होते हुए पावतो के ऊपर जाने लगी ऐसा लग रहा था जैसे पर्वतो में सीधी बानी हुई हो फिर जब हम पास गए तो सच में सीधी बानी हुई थी जो दूर से देखने पर नहीं दीखता था फिर वो औरत पर्वतो के ऊपर से गिरने वाली झरने के पास जाकर गायब hi हो गयी हम भी सीढिया चढ़ते हुए झरने के पास पहुंचे तो हमे वह पर कुछ नहीं मिला वह न hi कोई गुफा था और न hi कोई दरवाजा दिखा हमे .

हमे वह पहुंच क्र ऐसा लगने लगा की हाथ को आया पर मुँह न लगा हम दोनों निराश होकर व्ही झरने के पास बैठे हुए थे किनारे इस लिए नहीं खा क्यों की झरने का पानी तो कई सोउ फ़ीट निचे निचे गिर रहा था और हम तो ऊपर थे और झरने तो हमारे और ऊपर से गिर रहा था , मुझे समझ नहीं आ रहा था की अब यह तक आकर क्या किया जाये तभी दीदी ने एक बात कहि जो मैंने अब तक धयान नहीं दिया था.

स्नेहा : टाइगर तुम ने एक बात गौर की यह पर नाम मात्रा की ठण्ड नहीं लग रही है

मई : है दीदी सच में यह तो ठण्ड लग hi नहीं रही है और ये बहुत आश्चर्य की बात है जरूर यह पर कुछ दिव्या सकती है जिसे हमे ढूँढना होगा.

स्नेहा : जब ठण्ड नहीं है तो चलो न झरने के पास जाकर देखते है बहुत मजा आएगा.

हम ने जो गरम कपडे पहन रखे थे उसे उतर दिए.

फिर हम दोनों झरने के पास गए तो दीदी को मस्ती सूझी वो झरने का पानी मेरे ऊपर फेकने लगी तब मैंने भी दीदी को भिगोने के लिए दीदी को पकड़ के झरने के पानी में ले गया मगर ये क्या दीदी ने मेरा भी हाथ पकड़ क्र मुझे भी खींच लिया थोड़ी देर तक तो हम ऐसे hi भीगते रहे फिर जब दीदी के कपडे पुरे भीग गए तब उनके बूब्स के उभर साफ दिखाई देने लगे तो मई उनके उभर को hi घूरने लगा तो दीदी ने मुझे अपने आप से छुड़ा क्र मुझे हल्का सा धक्का दिया तो मई झरने के उस पर चला गया और जब मई अंदर जा क्र पीछे देखता हु तो ये क्या यह तो गुफा नजर आ रहा था और अंदर उजाला भी नजर आ रहा था इस का मतलब ये झरना hi इस गुफा का दरवाजा ओह माय गॉड क्या करिश्मा है कुदरत का .

मई कुछ देर तक उसे hi देखता रहा , झरने के उस पर दीदी मुझे बहार न निकलता देख परेशान होने लगी इधर मुझे भी दीदी का ख्याल आया तो मई झरने के बहार आया और दीदी का हाथ पकड़ क्र फिर से झरने के उस पर चला गया और जब दीदी ने गुफा को देखा तो उनकी खुसी का ठिकाना hi नहीं था वो खुसी से मेरे गले hi लग गयी.

मई : दीदी हमे अंदर भी जाना है तो अब चले.

फिर मई दीदी का हाथ पकड़ क्र गुफा के अंदर जाने लगा ,गुफा के अंदर का माहौल बिलकुल संत था जरा सी भी हलचल नहीं हो रही थी कुछ और अंदर जाने पर एक बड़ा सा हॉल आया जिसमे जिसमे चारो तरफ उजाला hi उजाला था पता नहीं यह खा से रोशनी आरही थी और उस हॉल में बहुत सरे रिसि मुनि तप में लीन थे ऐसा लग रहा था की ये लोग बहुत पहले से hi tap(shadhana) क्र रहे है .

हम इधर उधर देखते हुए हॉल के बिच में आ गए तभी मेरी नजर एक ऐसे पुंज पर पड़ी जिसमे सही रोशनी निकल रही थी मई उस तरफ जाने लगा तभी पता नहीं कुछ हुआ और ऐसा लगने लगा की मेरे हाथ और पैरो को किसी दिव्या सकती से बांध दिया गया है .

मई छत पटाने लगा अपने हाथ पैरो को हिलने की कोसिस करता रहा लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ दीदी भी मुझे ऐसी हालत में देख क्र वो भी मेरे पास आने लगी तभी उनको भी वैसा hi बांध दिया गया जैसे मुझे बंधा गया था.

तब एक सुन्दर सी लड़की आयी एक डैम दूध की तरह सफ़ेद एक डैम पारी लग रही thi,jaise आसमान से अप्सरा उतर आयी हो.

लड़की : डस्ट पापी तुम लोग यह भी पहुंच गए साडी धरती काम पद गयी क्या जो तुम लोग यह भी अपना कब्ज़ा ज़माने आ गए.

मई : देखिये जैसा आप सोच रही है वैसा कुछ भी नहीं है हम यह दूसरे काम से आये है.

लड़की : मई अच्छी तरह समझती हु तुम लोगो के काम को मई अभी बाबा को बुला आईटी लती हु.

ये बोल क्र वो लड़की गुफा के एक तरफ चली गयी, थोड़ी देर बाद वो लड़की और एक महिला जो निचे नदी में पानी भरने आयी थी, और उनके साथ बाबा जी भी ये ये व्ही बाबा जी है जिन्होंने माँ को बस्तर जाने को खा था और मेरा नामकरण भी किया था.

बाबा जी ने हम लोगो को ऐसी हालत में देख क्र तुरंत हमे मुक्त किया और अपनी बेटी से खा.

बाबाजी: बेटी रम्भा ये तूने क्या किया पहले पूछ तो लेती की ये कोण है और क्यों आये है.

माफ़ करना बीटा ये मेरी बेटी नहीं जानती की तुम कोण हो.

मई :प्रणाम बाबाजी और कोई बात नहीं बाबा जी लेकिन आप यह रहते है मैंने सोचा भी नहीं था अब आप hi हमारा मार्गदर्सन करे.

बाबाजी : बीटा तुम्हारा यह आना पहले से hi तय था, और यह जो भी होगा सब विधि के विधान में लिखा जा चूका है आओ अंदर चल क्र बात करते है.

बाबाजी :बेटी इन से मिलो ये है शेर सिंह उर्फ टाइगर मैंने तुम्हे जिसके बारे में खा था वो यही है बेटी और टाइगर ये है मेरी बेटी रम्भा और ये मेरी धर्म पत्नी जब तुम लोग भटक रहे तब मैंने hi अपनी पत्नी को निचे नदी से पानी लेन को खा था, ताकि तुम लोग यह तक पहुंच सको, नहीं तो यह तक किसी का पहुंच पाना असंभव है.

रम्भा मुझे देख देख शर्मा रही थी फिर जब मैंने उसकी तरफ देखा तो वो शर्मा क्र अंदर चली गयी.

मई :है बाबा जी आप ने सही खा यह तक हम पहुंच hi नहीं पते हम ने माता जस्ट का पीछा क्र के hi यह तक पहुंचे है नहीं तो ये झरना रूपी दरवाजा कोई समझ hi नहीं पायेगा की इस के पीछे कोई गुफा भी hai,or बाबा बहार वो सब मुनि जो तप क्र थे है वो कोण है ऐसा लग रहा था की वो कई सालो से ऐसे hi साधना में लीन है.

बाबाजी : बीटा वो सभी हमारे पूर्वज है जो इस दुनिया के लिए विशेष कराय क्र के तप में सदियों से लीन है अब मेरा भी वक्त आ गया है.
 
अपडेट 94

बाबाजी : बीटा अब तुम लोग कुछ खा पि क्र आराम क्र लो मई भी इधर का थोड़ा काम क्र लेता हु.

फिर बाबा जी उस रूम से बहार निकल गए ,हम दोनों भाई बहन ने एक तोते से रूम में हाथ मुँह धोया फिर हम लोगो तो जमीं पर बैठाया गया फिर रम्भा हम लोगो के लिए खाना लेकर आयी जो कई प्रकार के फल थे , इस बिच वो मुझे hi देख रही थी.

स्नेहा : टाइगर ये लड़की बार बार तुम्हे देख क्र इतना मुस्कुरा क्यों रही है .

मई : मुझे क्या पता दीदी ये तो व्ही जाने.

भोजन करने के बाद हम लोग व्ही बैठ क्र आराम किया फिर रम्भा की माँ कुछ कपडे और गहने लेकर आयी और एक जगह पर रख दिया .

माता जी : बेटी ये कपडे और कुछ गहने है जो तुम पहन लेना तुम्हारे विवाह की तयारी हो चुकी है .

तब दीदी ने उन कपड़ो को देख क्र कहा.

स्नेहा : पर माता जी ये तो दो जोड़ी कपडे है एक और किसके लिए है.

माता जी : बेटी ये एक जोड़ी मेरी पुत्री रम्भा के लिए है उसकी भी सदी होगी और बीटा जाओ तुम दूसरे ककछ में तुम्हारे कपडे व्ही रखे है.

फिर मई उस रूम सेट निकल क्र दूसरे रूम में जा hi रहा था की मेरी टक्कर रम्भा सी हाउ गयी वो दौड़ते हुए आ रही थी जिससे उसका बैलेंस बिगड़ गया वो गिरने को हुयी तब मैंने तुरंत hi उसके कमर में हाथ रख क्र उसे बचा लिए वो मेरी आंको में देखने लगी और मई उसकी आँखों में देखने लगा सब कहते है की जो तुम्हारी आँखों में देख ले वो तुम्हारी दीवानी हो जाये, मगर मुझे रम्भा की आंको में देख क्र उस में दुब जाने का मन क्र रहा है ,

हम दोनों कुछ देर तक एक दूसरे की आँखों में देखने लगे फिर बाद में हमें होस आया तो रम्भा शर्मा क्र भाग गयी.

फिर मई दूसरे रूम में आकर तैयार हुआ मई यह कीप वेस भूसा कीप हिसाब सी तैयार हुआ तहत जो भगवा रंग की धोती कुरता और गले में गमछा था जब मई तैयार होकर बहार आया तो हॉल की तरफ से काफी आवाजे आ रही थी इसलिए मई हॉल कीप तरफ गया और जब मई वह पर जाकर देखा तो वह पर बहुत सरे लोग थे.

मई इतने सरे लोगो तो देख और आश्चर्य चकित हुआ क्यों की जब मई आया था तब यह ऐसा नहीं लग रहा था की यह इतने सरे लोग भी रहते honge,sayad ये गुफा काफी बड़ी होगी तभी इतने सरे लोग है यह पर , तभी सभी लोगो की नजर मुझ पर पारी तो सभी एक डैम संत हो गए.

तभी बाबा जी मेरे पास आये तब मैंने बाबा जी से पूछा बाबा जी ये इतने सरे लोग .

बाबाजी : आओ बीटा यह मंडप पर बैठो ,बीटा ये सभी रहते है दुनिया की सब मोह माया छोड़ क्र सदा जीवन जीते है यह सब भक्ति और प्रेम भाव से यह जीवन यापन क्र रहे है.

उसके बाद मई मंडप में बैठ गया फिर पंडित जी ने कुछ मंत्र पढ़े और कुछ रस्मे करवाई और खा की कन्याओ को बुलाओ.

कन्याओ सब्द सुन क्र मेरे दिमाग की घंटी बजी इधर से रम्भा और स्नेहा दुल्हन बन क्र मंडप पर आकर मेरे बाजुओं में बैठ गई, तभी मैंने बाबा जी से खा-

मई : बाबा जी ये सब क्या है मुझे तो बताया गया था की मेरी सधी स्नेहा के साथ होने वाली है फिर ये आपकी पुत्री भी यह पर ये सब क्या है है बाबा जी.

बाबाजी : बीटा ये सब तो विधि के विधान में लिखा है और मेरी बेटी का जन्म भी इसी लिए हुआ है की वो आगे की लड़ाई में तुम्हारा साथ दे सके ये भी कोई साधारण कन्या नहीं है ये भी माता के आशीर्वाद से पैदा हुई है नेक काम करने के लिए ये तुम्हारा जीवन भर हर परिस्तिथि में तुम्हारा परछाई बन क्र रहेगी और इसे तुम्हारे बारे में सब पता है इसलिए तुम्हे इसे कुछ भी समझाना नहीं पड़ेगा .

मई : बाबा जी आपकी कहि हुई बात को हमारे परिवार के सभी लोगो ने मणि है और आपने जो भी खा था सब सही हुआ है तो अब मई आपकी बात कैसे ताल सकता हु.

फिर सुरु हुआ हमारी शादी हो पूरी विधि और रीती रिवाज के साथ चली फिर वह के सभी लोग पीला चावल और फूल छिड़क क्र हमें आशीर्वाद दिया और फिर दोनों मेरी पत्नियों ने भी मेरा आशीर्वाद लिया और हम तीनो ने भी सभी को हाथ जोड़ क्र आशीर्वाद लिया

फिर हम तीनो को एक रूम में छोड़ दिया गया तब मैंने पहले स्नेहा से पूछा-

मई : स्नेहा आप खुस तो हो न इस सदी से.

यह पर मई स्नेहा को दीदी इसलिए नहीं कह रहा हु क्यों की दीदी ने पहले hi कह दिया था की शादी के बाद मुझे मेरे नाम से hi पुकारना और परिवार वालो के सामने जरुरत पडने पर hi दीदी बुलाना.

दीदी : है मई बहुत खुस हु मेरा सपना जो पूरा हो गया है.

फिर यही सवाल मैंने रम्भा से पूछा -

रम्भा : है मई भी बहुत खुस हु जब से बाबा ने आपके बारे में बताया था की आप hi मेरे जीवन साथी बनेगा तब से लेकर आज तक मई आपकी रह देख रही थी की कब आप आएंगे और कब मुझ से विवाह क्र मुझे अपना बना लेंगे.

मई : पर क्या तुम जानती हो हमारी जीवन सैली यह से बिलकुल अलग है क्या तुम रह पाओगी वह पर.

रम्भा : जब आप मेरे साथ रहोगे तो मई कहि भी रह लुंगी .

मई : मई नहीं रहूँगा फिर भी वह तुम्हे और भी बहन मिल जाएगी जैसे की ये है स्नेहा .

रम्भा : है स्नेहा दीदी तो मेरी बड़ी बहन है क्यों दीदी मैंने सही खा न.

स्नेहा : है मेरी बहन और मई तुम्हे वह के टूर तरीके पूरा सीखा दूंगी.

फिर हम लोग कुछ देर तक ऐसे hi बाटे करते रहे फिर थोड़ी देर बाद बाबा जी आये और मुझे अपने साथ लेकर व्ही हॉल में आये और फिर पुंज क्र पास लेकर मुझे बैठा दिया
 
अपडेट 95

फिर हम लोग कुछ देर तक ऐसे hi बाटे करते रहे फिर थोड़ी देर बाद बाबा जी आये और मुझे अपने साथ लेकर व्ही हॉल में आये और फिर पुंज क्र पास लेकर मुझे बैठा दिया.

बाबाजी: बीटा ये है सकती पुंज इसके रहते यह कभी बुराई और पंप यह कभी नहीं आ सकते ,क्या तुम्हे मालूम है की तुम्हारा सबसे बड़ा दुसमन कोण कोण है.

मई : बाबा जी मई तो सिर्फ उसे जनता हु जिसने मेरे नील गृह को नस्ट किया था व्ही मेरा सबसे बड़ा दुसमन है.

बाबा जी: बीटा वो तो हो गया दूसरे गृह का इस गृह का सबसे बड़ा पापी है कलयुग का सैतान कालदमान और इसके अनुयायी hi धरती पर पंप फैलते है.

मई : परतु बाबा hi ये हमे दिखाई क्यों नहीं देते है .

बाबा जी: उनका काम ऐसे hi हो जाता है और उन्हें रोकने वाला भी कोई नहीं है जस्ट कारन उनको अपने आप को किसी के सामने उजागर hi नहीं करना पड़ता , मई तुम्हे कुछ दिखता हु फिर तुम खुद hi समझ जाओगे की वो लोग पाप कैसे फैलते है .

फिर बाबा जी नीड मेरा हाथ सकती पुंज पर रखा तब सकती पुंज से दिव्या किरणे निकलने लगी और मुझे कुछ दिखने लगा.

मई देख रहा था एक आम इंसान चुप चाप चला जा रहा था तभी एक डस्ट आत्मा जैसा हवा में hi प्रकट हुआ और उस आम इंसान के ऊपर कुछ मायावी किरणे फेकि जिससे उस इंसान के सरीर में कुछ हुआ व्ही पर hi एक धनि आदमी अपना धन को थैले में लेकर जा रहा था तभी उस इंसान ने उस धनि आदमी सी मर पिट की और उसका धन लेकर भाग गया.

बाबा जी: ये है लालच जो आम आदमी को लालची बना और चोरी लूट पैट करवाता है, अब मई तुम्हे काम केतु के बारेमे दिखता हु.

मैंने फिर सी देखा की एक आम इंसान एक डैम संत बैठा हुआ था तभी एक डस्ट आदमी आया और कुछ माया वि किरण उस आम इंसान पर छोड़ा तब वो इंसान उठा और आने जाने वाली लड़कियों को देखने लगा तभी उसकी नजर एक मिनी स्कर्ट पहने हुए एक लड़की पर गयी और वो इंसान उस लड़की सी छेड़छाड़ करने लगा और जबरदस्ती खींच क्र लेट जा क्र उसके साथ दुष्कर्म किया.

बाबा जी : ये है बीटा काम केतु जो आम इंसान के अंदर घुस क्र छेड़ छड़ और बलात्कार जैसी घटनाओ को अंजाम देता है. यस कई घरो में फुट भी करा चूका है .ऐसे hi बहुत सरे पाप फ़ैलाने वाले दूत है तुम्हे पहले आम इंसानो में काम ,करोड़, मोह ,lobh,Maya इन सबको मनुस्यो के अंदर से निकलना होगा तभी ये डस्ट लोग सामने आएंगे.

मई : जी बाबा जी मई समझ गया पर बाबा अभी तो मुझे सकती प्राप्त करने के लिए जाना था न वो मुझे खा मिलेगी .

बाबा जी : बीटा इसका जवाब भी तुम्हे ये शक्ति पुंज hi देगा.

अभी मई सकती पुंज पर हाथ रखने hi वाला था की एक आदमी आया.

आर्मी : गुरु देव आप लोगो तो बुला रहे है विदाई का मुहरत निकला जा रहा है.

बाबा जी : तुम चलो हम आते है.

बीटा अब सीधे सकती पुंज को छू क्र साइड व्ही चले जाना ,चलो अब चलते है.

फिर हम वह से रूम की तरफ आ गए झा सी बिदाई की रसम होनी थी यह रम्भा का रोना सुरु हो गया था, वह के सभी लोग रम्भा से आ क्र मिल रहे थे मई धीरे से स्नेहा के कण में खा उसे देखो कैसे रो रही है और आप हो की चुप चाप हो.

स्नेहा : तो मई क्यों रौ वो अपना घर और मम्मी पापा से दूर जा रही है इसलिए रो रही है मई थोड़ी न कहि जा रही हु.

मई : है येह भी बात है आप तो घर में hi रहोगी.

फिर बाबा जी ने मुझे इसरा किया की मई रम्भा को लेकर जाऊ तो मई रम्भा का हाथ पकड़ क्र उसे धीरे धीरे हॉल तक ले आया फिर भी उनका मेल मिलाप और रोना धोना जारी hi था तब फिर बाबा जी ने इसरा किया hi तीनो का हाथ सकती पुंज में रखो तब मैंने स्नेहा अपना और रम्भा का एक एक हाथ सकती पुंज में रखा .

सकती पुंज में हमारे हाथ रखते hi हम तीनो hi सकती पुंज से कुछ रोशनी निकली और हम तीनो की दूसरी जगह पर थे.

यह आने के बाद भी रम्भा का रोना काम नहीं हुआ तो मैंने स्नेहा को इसरा kiya,tab स्नेहा ने रम्भा सी खा-

स्नेहा : रम्भा अब चुप हो जा मेरी बहन नहीं तो हम तुम्हे वापस छोड़ आएंगे .

रम्भा : (सिसकते हुए) नहीं दीदी मई खा रो रही हु.

स्नेहा : फिर ठीक है अब आगे चलते है देखते है यह क्या होता है.

तो बे कॉन्टिनोएड......
 
अपडेट 96

हम चले हुए अभी थोड़ी दूर निकले hi थे की ऐसा लगने लगा की कुछ भूकंप सा हो रहा है धरती थोड़ी हिल रही है मई उन दोनों का हाथ पकड़ लिया अब कुछ जायदा hi धरती हिलने लगी तो मई इधर उधर देखा तभी एक तरफ से मुझे धूलो का अम्बर उड़ते हुए दिखाई दिया और वो तेजी से हमारे पास hi आता दिखाई दिया तब मैंने उन दोनों का हाथ पकड़ क्र ऊपर हवा में उठा दिया .

कुछ hi देर में हम क्या देखते है की बहुत सरे विशाल शाकाहारी ड्रैगन्स का झुण्ड दौड़ते हुए जा रहे है और उनके पीछे बड़े बड़े मांसाहारी ड्रैगन जो तीन थे वो एक दूसरे को धक्का देते हुए शाकाहारी ड्रैगन्स के बच्चे जो पीछे रहा जाते उन्हें या तो पैरो से कुचल देते ये फिर अपने दातो में दबा क्र फेक देते .

रम्भा से ये सब देखा नहीं गया तो उसने ऊपर से hi लेज़र की रस्सी जैसी कुछ सकती अपने हाथो से निकली जो मांसाहारी ड्रैगन के पैरो में जा क्र बांध गयी और जैसे hi उनके पेअर बंधे तीनो ड्रैगन धड़ाम से जमीं पर गिर गए ,काफी देर तक वो लोग छूटने का प्रयास करते रहे मगर नहीं छूट पाए जब शाकाहारी ड्रैगन्स काफी आगे चले गए तो रम्भा ने उन मांसाहारी ड्रैगन को बंधन से मुक्त क्र दिया तब वो ड्रैगन उठ क्र शाकाहारी ड्रैगन्स की तरफ देखा जब वो नहीं दिखे तो ये ड्रैगन वापस लौट गए.

हम भी उन मांसाहारी ड्रैगन के पीछे उड़ते हुए जाने लगे कुछ दूर पर जाकर जंगल के अंदर वो ड्रैगन एक जगह पर रुक गए जहा पर ये ड्रैगन रुके वह पर एक छोटी सी hi झोपडी बानी हुई थी वह पहुंच क्र ड्रैगन चिल्लाने लगे तो हम लोग भी पेड़ो के पीछे छुप क्र देखने लगे की यह क्या होता है.

कुछ देर में झोपडी के अंदर से 6-7 दानव जैसे लगने वाले लोग उस छोटी सी झोपडी से बहार निकलने लगे, जब वो लोग बहार आये तब जो ड्रैगन के सर थे वो दानव के जैसे हो गए हमे ये देख क्र आश्चर्य हुवा की ये ड्रैगन के सर दानवो के सर जैसे कैसे हो गया .

मई : लगता है ये दानव hi ड्रैगन बने हुआ है , लगता है यह पर पूरा माया जल बच्चा हुआ है सम्हाल क्र रहना होगा.

रम्भा : है जी आपने सही खा हमे सम्हाल क्र hi कुछ करना होगा.

इधर वो लोग बात काटने लगे -

लीडर : खदेड़ दिया उन शाकाहारी ड्रैगन्स को .

दानव ड्रैगन (D.D): है हमने खसदीद तो दिया पर बिच में किसी दिव्या सकती ने हमारे पैरो को बंद दिया था.

लीडर : क्या दिव्या सकती यह सकती हमारे और महारानी साहिबा के पास hi है महारानी जी के सामने न कह देना नहीं तो ,ठीक है अब तुम लोग जाओ.

लीडर (बाकि दानवो से ) तुम लोग मानुसों की बस्ती की तरफ जाओ और आतंक फैलाओ जिससे वो लोग दर के महारानी को जो चाहिए वो Dede,ab जाओ.

फिर लीडर उस झोपडी में वापस चला गया और वो दानवो ने अपना रूप बदला और सीसे ( गिलास) जैसे हो गए धयान से देखने पर hi वो लोग दिख रहे थे वार्ना एक झलक में तो कोई उन्हें देख भी नहीं पायेगा इ डैम पारदर्शी दिख रहे थे वो लोग फिरवो 6लोगो का ग्रुप एक डिसा में चल पड़े ,हम भी छुपते हुए उनका पीछा करने लगे.

जंगल के बुचो बिच मैदानी इलाका था और उसी में 15-20 घरो की एक बस्ती जैसा बना क्र मनुष्य रस्ते थे, जब ये दानव बस्ती के पास पहुंचे तो ये लोग सभी अलग अलग डिसओ में फ़ैल गए इधर बस्ती वाले बेफिक्र हो क्र अपना काम क्र रहे थे और दानव धीरे धीरे उनकी तरफ बढ़ रहे थे तभी एक दानव बस्ती वालो के द्वारा बनाये गए जल में फास गया और छिलने लगा जिससे बस्ती में रह रहे लोगो को पता चल गया की दानवो ने हमला क्र दिया है.

सभी लोग इधर उधर छुपने क्र लिए भागने लगे, इधर बाकि दानवो ने हमला क्र दिया कोई घरो में बड़े बड़े पत्थर फेक रहा था तो कोई घरो में आग लगा रहा था, कोई आदमियों को हवा में उछाल क्र फेक रहा था, कोई लड़कियों और महिलाये जो भी मिल जाती उन्हें निर्वस्त्र क्र के उन के अंगो से खेल रहे थे ये सब हम लोगो से देखा नहीं गया तो हम ने स्नेहा को सुरक्छित जगह छुपा क्र रम्भा लड़कियों और ओरतो को बचाने चली गयी और मई उड़ते हुए जो भी आदमियों को हवा में उछाल क्र फेक रहे थे उन्हें पकड़ क्र सुरक्छित जमीं पर छोड़ रहा था फिर अपने तलवार को यद् किया और एक दानव को सम्हालने का मौका तक नहीं दिया और उसकी गर्दन धड़ से अलग क्र दिया , गर्दन धड़ से अलग होते hi दानव अपने वास्तविक रूप में आ गया इधर रम्भा ने देखा की दो दानव एक औरत के पीछे भाग रहे है तो रम्भा ने एक के पैरो को बंद दिया जिससे वो मुँह के भर निचे गिर गया दूसरे के ऊपर लेज़र बीम से वर किया वो पीछे हवा में उड़ते हुए लोहार के भठ्ठे में जा गिरा जिसकी वजह से आग उसके सरीर में लग गयी और वो चिल्लाते हुए जल क्र मर गया और जिसके पेअर बंधे हुए थे वो छूटने के लिए चटपटा रहा था जिसको रम्भा में जीवन के बंधन से मुक्त क्र दिया ,बाकि दानवजो बचे हुए थे वो जान गए थे की कोई अस गया है जो इन बस्ती वालो की रक्छा क्र रहा है फिर हमारा और उनका आमना सामना हुआ रम्भा के पास भी सकतिया थी जिससे वो आराम से उनका मुकाबला क्र रही थी फाइट में भी वो काफी एक्सपर्ट थी हवा में घूम घूम क्र वो दानवो से लड़ रही थी इधर मई भी दानवो से लड़ रहा था मेरे पास अभी जायदा पावर तो नहीं थे बीएस थी तो तलवार और उड़ने की सकती मई उनके हमले का जवाब अपनी तलवार से देता उनके पावर बीम को मई अपने तलवार से रोक देता मुझे पर बड़े बड़े चट्टान से भी हमला किया जिससे मई या तो वह से हैट जाता या फिर उड़ हवा में उड़ क्र उन हमलो से बचता काफी देर बाद मैंने उस दानव को मर hi दिया इधर रम्भा ने भी उस दानव को मर hi दिया टोटल 5 लोग मरे जा चुके थे और एक जो जल में फसा हुआ था हम उस पर धयान hi नहीं दे थे उसने स्नेहा को छुपे हुए देख लिया था उसने अपने माया से जल कटा और स्नेहा को पीछे से जाकर पकड़ लिया स्नेहा बहुत hi दर गयी और जोर से चिल्ला क्र मुझे बुलाने लगी.

मैंने और रम्भा ने स्नेहा की आवाज सुन क्र तुरंत hi उसके पास पहुंचे इधर बस्ती वालो की भी पता चल गया था की हम उनकी रक्छा क्र रहे है इसलिए वो लोग भी हमारे पीछे hi स्नेहा तक पहुंच गए.

मई : छोड़ दो उसे नहीं तो तुम्हारा भी अंजाम तुम्हारे साथियो जैसा होगा .

दानव : नहीं मई इसे नहीं छोडूंगा अगर छोड़ दिया तो तुम लोग मुझे भी मर डोज .

मई : अगर तुम से स्नेहा को छोड़ दिया तो मई वादा करता हु की मई तुम्हे जाने दूंगा.

तब दानव ने धीरे से स्नेहा को छोड़ दिया और धीरे धीरे पीछे हटने लगा और थोड़ी दूर के बाद वो तेजी से भाग गया.

स्नेहा छूटते hi मेरे गले लग गयी .

रम्भा : अप्प ने उसे जाने क्यों दिया .

मई : मैंने उसे इसलिए जाने दिया क्यों की वो जाकर अपने लीडर को बताएगा जिससे वो भी आएगा और मारा जायेगा.

इधर बस्ती वाले हमारे आगे हाथ जोड़ क्र खड़े थे .
 
घर में फंक्शन था इस लिए अपडेट नहीं दे प् रहा था अब फ्री हुआ हु तो अपडेट जल्द से जल्द देने की कोसिस करता हु.
 
अपडेट 97

सभी बस्ती वाले हमारे आगे हाथ जोड़ क्र खड़े थे और मई उन बस्ती वालो को देख रहा था उनके पहनावे अजीब थे सभी कमर के ऊपर से नंगे थे और निचे कोई पेड़ो के पत्तो से या फिर जानवरो के खाल से अपने गुप्तांगो को ढके हुए थे ोर्टो का भी व्ही हल था ,तभी उनके बिच से हाथो को जोड़ क्र एक आदमी बहार आया और खा-

आदमी : आप लोगो का बहुत बहुत सुक्रिया बीटा जो आप लोगो ने उन दानवो से हमे बचाया, मई इस छोटी सी बस्ती का मुखिया हु तुम कोण हो बीटा और यह कैसे आये.

मई : मेरा नाम टाइगर है और ये है मेरी पत्नी स्नेहा और रम्भा और समझ लीजिये की हमे hi आप लोगो को उन दानवो से बचने के लिए उस ऊपर वाले ने भेजा है.

मुखिया : तुम सही कह रहे हो बीटा हमारे कुल गुरु हमे बताते है की भविष्य से एक मसीहा अपनी दो पत्नियों के साथ यह आएंगे और हमे दानवो के अत्याचार से हमे मुक्ति दिलाएंगे वो आप hi है हमारे मसीहा आइये आपका स्वागत है हमारे इस छोटी सी बस्ती में .

मई : मुखिया जी आपके कुल गुरु ने खा था की भविष्य से आएंगे तो ये कोण सी जगह है .

मुखिया : बीटा ये ड्रैगन युग है इस कल में पृथ्वी पर ड्रैगन का राज है और ये दानव उन्हें भी दानव बना क्र उनसे अपना काम करवाते है अब चलिए बाकि बाटे आप हमारे साथ कुटिया में बैठ क्र करते है.

फिर हम लोग मुखिया जी के साथ उनके झोपडी में चले गए और इधर जिस दानव को हम ने छोड़ा था वो सीधा अपने लीडर के पास गया .

लीडर : आ गए तुम लोग इन मनुस्यो की बस्ती में तबाही मचा क्र बाकि सब खा है कहि उन मनुस्यो की बेटी बीबी के साथ रंगरलिया तो नहीं मन थे .

दानव : नहीं दानव राज ऐसा कुछ नहीं है उल्टा मई hi अपनी जान बचा क्र वह से भाग आया हु और बाकि के जो सैनिक थे वो मरे गए है.

लीडर : क्या वो सब मरे गए ये कैसे हो सकता है और कोण है वो जिसकी इतनी हिम्मत हो गयी की वो हमारे सैनिको को मरे.

दानव: दानव राज ऐसा लगता है की वो कहि दूसरी दुनिया से आया है क्यों की उनलोगो का पहनावा अजीब थे आप महारानी तक ये बात पंहुचा दीजिये.

लीडर : हैट बेवकूफ ऐसे छोटे मोठे बात के लिए हम क्यों महारानी जी को परेशान करेंगे उनसे हम खुद निपटेंगे जाओ और ड्रैगन की सेना को इकठ्ठा करो .

मुखिया जी का झोपा तो नहीं लग रहा था क्यों की वो काफी बड़ा था की पत्नी सुन्दर और थोड़ी हेल्थ वाली लग रही थी उम्र भी जायदा नहीं था स्नेहा से थोड़ी बड़ी लगती थी, जैसा की मैंने पहले बताया था की यह के लोग निचे के hi अंगो को ढके हुए है ऊपर पूरा खुला हुआ था तो जब हम मुखिया जी के घर में बैठे हुए थे तब उनकी पत्नी जो बाद में मुखिया जी ने बताया था वो हम लोगो के लिए पानी लेकर आयी तो मई क्या देखता हु मुखिया जी की पत्नी गोरी और सुन्दर तो थी hi साथ में सरीर थोड़ा भरा होने के कारन उनके बूब्स भी बड़े बड़े थे और तित भी थे मैंने जब उन्हें देखा तो मेरे लुंड में कुछ हलचल hi हुई और जब उन्होंने मुझे पानी दिया तो वो मुझे देखने लगी और मई भी सब भूल क्र उन्हें देखने लगा दोनों की आँखे मिली और मुखिया जी की पत्नी खो गयी मेरी आँखों में

जब कुछ समय हो गया और मुखिया जी की पत्नी मेरे पास से नहीं हटी तो सबका धयान हमारी तरफ गया स्नेहा तो जानती थी मेरे आँखों के सम्मोहन वाली बात को इसलिए उन्होंने अपना सर hi पकड़ लिया और मुखिया जी ने अपनी पत्नी को आवाज दे क्र हिलाया तब जाकर वो अपने होस में आयी.

मुखिया : खा खो गयी थी प्रेमलता जाओ खाने का इंतजाम करो.

मुखिया जी की पत्नी मुझे देखते हुए रसोई घर में घुस गयी.

मुखिया : आप लोग बैठ क्र बाटे कीजिये मई खाने का इंतजाम देखता हु.

ये बोल क्र मुखिया जी भी रसोई घर की तरफ निकल गए उनके जाने के बाद स्नेहा बे बोलना सुरु किया-

स्नेहा - तुम अपने आँखों का कुछ करो नहीं तो दुनिया की आधी नारी जाती तुम्हारी दीवानी होंगी.

रम्भा : क्यों इनकी आँखों को क्या हुआ है दीदी और दुनिया की आधी नारी जाती इनकी दीवानी कैसे होंगी.

स्नेहा : तुम्हे पता नहीं है इसकी आँखों में जादू है जो कोई भी लड़की या औरत इनकी आँखों में थोड़े देर के लिए देख ले वो इसकी दीवानी हो जाती है और इसका उदाहरण तुम्हारे सामने है .

रम्भा: क्या आप .

स्नेहा : है मई , क्यों की मई तो बचपन से hi इसकी आँखों में देख क्र दीवानी होती गयी और भी बहुत सी है बाद में तुम्हे पता चलेगा.

मई : अब मई क्या क्र सकता हु इसमें उन्होंने मुझे देखा तो मैंने भी देख लिया .

रम्भा : तो क्या मुखिया जी की पत्नी भी इनकी दीवानी हो गयी है.

स्नेहा : लग तो ऐसा hi रहा है तुम दोनों और नजर रखना कहि ऐसा न हो जाये की सदी हमारी हुई है और सुहागरात वो मन रही है.

रम्भा : क्या दीदी आप भी कुछ भी बोलती हो .

स्नेहा : हाय मेरी बहन तो सुहागरात सब्द सुन क्र hi शर्मा गयी.

ऐसे hi हम कुछ देर तक बात चित करते रहे फिर हम सब खाना खा क्रेक कमरे में आराम किया जो मुखिया जी ने हमे दिया था , शाम को भी कुछ खास नहीं हुआ हम बस्ती में hi इधर उधर घूमते थे और रात में खाना वन खा क्र उसी रूम में सोने चले गए एक तरफ स्नेहा और रम्भा जमीं पर hi सो रही थी और दूसरी तरफ मई था, रम्भा तो आराम से सो गयी पर स्नेहा कुछ देर तक इधर उधर हो क्र चटपटा रही थी फिर बाद में उसे नींद आ hi गयी लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी, मई भी चटपटा रहा था तभी उस रूम के खिड़की पर मुझे साया नजर आया तो मैंने एक नजर साइड में सो रहे स्नेहा और रम्भा की तरफ देखा तो वो दोनों सो रही थी मई तुरंत hi दरवाजे को धीरे से खोलकर बहार निकल आया और उस खिड़की की तरफ गया तो वह पर कोई महिला थी जिसकी पीठ मेरी तरफ थी फिर मई उसके पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रहा ,तब वो मेरी तरफ मुद क्र मुझे देख क्र चौक गयी.

क्यों की वो कोई और नहीं मुखिया जी की पत्नी प्रेमलता थी वो मुझे देख क्र चौक गयी और वह से जाने लगी.

मई : रुकिए और आप यह पर क्या क्र रही थी पहले ये बताइये.

प्रेमलता : वो.. वो.. मई तो ऐसे hi देखने आयी थी की आप लोग ठीक से सो रहे है या नहीं .

मई : आप ऐसे नहीं बताएंगी रुकिए मई मुखिया जी की hi यह पर बुला लेता हु.

प्रेमलता : रुकिए उन्हें मत बुलाइये मई बताती हु., वो मई आप को hi देखने आयी थी.

मई : मुझे पर क्यों?

प्रेमलता : वो मैंने जब से तुम्हे देखा है तब से ऐसा लग रहा है की मई तुम्हारी तरफ खींची चली जा रही हु पता नहीं क्यों तुम्हे देखते रहने कमान करता है .

मई : बीएस देखते रहने का मन करता है और कुछ नहीं.

ये बोल क्र मैंने उनके बूब्स के निप्पल्स को मरोड़ दिया .

प्रेमलता : आअह्ह्ह्ह धीरे आज तक उसे मेरे शिव किसी ने टच तक नहीं किया है.

मई : मतलब क्या मुखिया जी कुछ नहीं करते क्या.

तो बे कॉन्टिनोएड.............
 
अपडेट 98

मई : मतलब क्या मुखिया जी कुछ नहीं करते क्या.

प्रेमलता - है मुखिया जी ने आज तक मुझे छुआ तक नहीं है मई अभी भी कुवारी हु.

मई : क्या पर ये कैसे हो सकता है मुझे जानना है.

फ़्लैश बैक

प्रेमलता : ये बात तब की है जब मेरे बाबा ने मेरी शादी एक ऐसे इंसान से करवाना चाहते थे जिससे मई बहुत नफरत करती थी इसलिए मई वह से भाग गयी और भागते भागते मुझे एक दानव ने पकड़ लिया तब वो मुखिया जी hi थे जिन्होंने मुझे दानव से बचाया तब hi वो मेरे मान को भ गए .

फिर मुखिया जी ने मुझे मेरे बारे में पूछा तब मैंने अपने बारे में सब कुछ बता दिया की मई घर से भागी हुई हु और मेरे पास रहने की जगह नहीं है .

मुखिया : मई अपनी बस्ती का मुखिया हु लेकिन मेरी बस्ती में कुवारी अकेली लड़कियों के लिए जगह नहीं है.

प्रेमलता : तो ठीक है आप hi मुझ से विवाह क्र लीजिये.

मुखिया : मई तुम से विवाह नहीं क्र सकता तुम से क्या किसी भी लड़की से मई विवाह क्र के किसी की जिंदगी ख़राब नहीं क्र सकता क्यों की मई उन्हें वो सुख नहीं दे सकता जो शादी के बाद हर लड़की की छह होती है मतलब मई सम्भोग नहीं क्र सकता.

प्रेमलता : तो मई क्या करू खा जाऊ?

मुखिया : एक रास्ता है तुम मेरी पत्नी बन क्र मेरे साथ चलो फिर बाद में कोई और तुम्हे मिल जाये तो उसके साथ चली जाना.

ऐसे hi चार साल गुजर गए अब मुझे उनकी आदत हो गयी थी तब मुखिया जी ने खा-

मुखिया : प्रेमलता अब मुझे भी तुम्हारी आदत हो गयी है तुम्हे मेरी तरफ से छूट है की तुम किसी और से सम्भोग क्र सकती को लेकिन मेरी इज्जत का भी धयान रखना.

मैंने बहुत ढूंढा लेकिन मुखिया जी के बदनामी के दर से मई पीछे हैट जाती .

प्रेजेंट -

प्रेमलता : ये थी मेरी कहानी लेकिन जब से तुम्हे देखा है तब से मेरे सोये हुए अरमान फिर से जग उठे है अब तुम hi मेरी इस तम्मना को पूरी क्र सकते हो.

मई : मई तुम्हे वो पूरा सुख दूंगा जो तुम्हे आज तक नहीं मिला है लेकिन तुम्हे एक वादा करना होगा की मेरे बाद तुम किसी और से सम्भोग नहीं करोगी .

प्रेमलता : ठीक है मई वादा करती हु तुम hi मेरे सरीर को भोगने वाले पहले और आखरी मर्द होंगे तुम्हारे शिव किसी और को मई अपना ये तन छूने तक नहीं दूंगा.

मई : तो ठीक है फिर कहा चलना है बताइये.

प्रेमलता (खुस होते हुए) : तो चलो मेरे साथ .

फिर प्रेमलता मुझे अपने साथ बस्ती से कुछ दूर झाड़ियों के पीछे ले गयी उसने अपने साथ एक मसल रखा हुआ था बस्ती के सभी लोग सो चुके थे फिर मई प्रेमलता को बहो में लेकर किश करने लगा वो भी पुरे जोस क्र साथ मेरा साथ दे रही थी फिर हम ने साँस के फूलते तक किश किया

अब तो मई प्रेमलता को जल्द से लालड़ नंगी करना चाहता था लेकिन जो पहले से hi नंगे थे उनका मजा मई पहले लेना चाहता था प्रेमलता की चूचिया बड़ी और काफी टाइट लग रही थी और उन पैर ब्राउन कलर के निप्पल एकदम खड़े थे. मई तो प्रेमलता की चूचियों को देख कर पागल हो गया और वो उन पैर किसी भूके शेर की तरह टूट पड़ा वो प्रेमलता की दोनों चूचियों को अपने हाथो मि भर कर मसलने लगा वो मस्ती मि चीखने लगी तो मई ने अपना मुँह निचे करके उसकी की चुकी को पकड़ कर अपने मुँह मि दाल लिया और मई उसकी चुकी को ऐसे चूसने लगा मनो वो प्रेमलता की चुकी नहीं कोई आम चूस रहा हो मई कभी उसकी चूचियों पैर अपने डाट गदा देता और कभी अपने दातो से पकड़ कर खींच डालता जिस से प्रेमलता सिसक उठती और बालो में अपनी उंगलिया फिरते उससे अपनी चूचिया चूसा रही थी और बड़बड़ा रही aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh राजा ऐसे hi चुसो aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh खा जाओ मेरी चूचियों आआआहहहहहहह आज बरसो बाद किसी मर्द ने इनका स्वाद लिया है

मई प्रेमलता की चूचियों को चूस रहा था जभी मेरे हाथ निचे प्रेमलता की छूट पर गया और मई प्रेमलता की छूट को उसके कपडे (जो एक जानवर का खाल था) के ऊपर से सहलाने लगा.. प्रेमलता की छूट तो मस्ती में पानी चोर रही थी जिस से उसकी छूट और मेरी ऊँगली पूरी तरह से गीली हो गयी थी. मई प्रेमलता की चूचियों और छूट को सहलाते बड़बड़ा रहा था क्या चूचिया है तुम्हारी मेरी जान और अपना हाथ प्रेमलता की छूट में डालने की कोशिश करने लगा. तो उसने बी अपनी दोनों टैंगो को फैला दिया जिस से मुझे भी अपना हाथ छूट में डालने मि आसानी हो हो अब मैंने अपना हाथ प्रेमलता के एक मात्रा कपडा जो उसने पहना था उसे धीरे धीरे करके निचे खिसकना laga.ab प्रेमलता पूरी नंगी हालत में मेरी बहो में थी वो एक तरफ मई उसकी की चूचियों को बारी बारी से चूस रहा था दूसरी तरफ अपना हाथ प्रेमलता की छूट पैर फिरा रहा था. उसकी की चूचियों को मई अपने होंठो के कब्ज़े में कर रखा था और उसकी की छूट पैर मेरे के हाथ का कब्ज़ा था. मई साफ़ देख रहा था की मस्ती में प्रेमलता की छूट भर भर कर पानी चोर रही थी. उसकी बुरी हालत तो उस समय और हो गयी जब मैंने अपनी ऊँगली उसकी की छूट में दाल दी और उससे अंदर बहार करने लगा बड़ीमुस्किल से एक ऊँगली जा रहा था अब जोश में प्रेमलता अपने आपको काबू में नहीं रख पा रही थी और बोलने लगी, " हाय राजा जी , कृपया जल्दी कुछ करो न. नहीं तो मैं पागल हो जाउंगी. ओह्ह्ह अब बर्दास्त नहीं होता " पैर मेरे जैसा खिलाडी कहा मानाने वाले था मैंने प्रेमलता को एक पेड़ के सहारे मूड कर खड़ा किया और खुद निचे बैठ गया और अपने दोनों हाथ उसकी गांड पैर रख दिए और फिर अपने होंठ प्रेमलता के चूतड़ों पैर रख दिए और जीभ निकल कर उसके चूतड़ों को चाटने लगा और कभी उसके चूतड़ों पैर अपने दांत गदा देता मस्ती के कारण अब प्रेमलता से बर्दाश्त करना मुश्किल था तो मई ने प्रेमलता को पलट दिया और उसकी की टांगो को पूरी से फैला दिया और अपने होंठ उसकी की रास चोरटी छूट के ऊपर रख दी हाय rajaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa jjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjjiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii........uuuuuuufffffff.....haaayyyyeeeeee......" प्रेमलता तो बुरी तरह सिसक रही थी. पैर मई ने अपनी लपलपाती हुयी जीभ उसकी छूट के अंदर तक्क दाल दी असा लग रहा था की जैसे मई प्रेमलता को अपनी जीभ से hi छोड़ रहा हो छूट में मेरी जीभ पा कर वो मस्त उठी और मेरे सर को पकड़ कर अपनी छूट पैर दबाने लगी और साथ hi निचे से अपनी गांड अचल रही थी. प्रेमलता मेरे सर को अपनी छूट पैर दबाये सिसक रही थी बड़बड़ा रही थी aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh राजा क्यों तड़पा रहे हो aaaahhhhhhhhhhh छोड़ मुझे aaaaaaaahhhhhhhhhh छतो मेरी मेरे राजा अब मेरी तेरी हु aaahhhhhhhhhhhhhhhhhh चाट ले मेरी आज पहली बार मेरी किसी ने चट्टी है प्रेमलता तो आज ऐसे कर रही थी की अगर उस को इस समय कोठे की रंडी भी देख वो बी शर्मा जाये . प्रेमलता तो ऐसा क्र रही मनो की वो कोई बहुत बड़ी रैंड हो वो एक हाथ से मेरे सर कोअपनी छूट पैर दबाये और दूसरे हाथ से चूचियों को दबा रही थी. प्रेमलता तो निचे से अपनी गांड नचा नचा कर झाड़ रही थी और मई भी उस समय तक प्रेमलता की छूट पैर चिपका रहा जब तक मई प्रेमलता की छूट के रास की आखरी बून्द चाट नहीं प्रेमलता की छूट चाटने के बाद मई अपनी जगह से उठा तो प्रेमलता किसी रैंड की तरह मुझ से चिपक गयी और खुद hi मेरे होंटो को चूमने लगी. ये सायद प्रेमलता के बदन की गर्मी थी जो अब उस से बर्दाश्त नहीं हो रही थी और उस ने अपना हाथ मेरे अंडरवियर में दाल दिया और मेरे मस्त लौड़े को सहलाती उस से मिन्नत करने लगी , हाय राजा जी अब दाल दो इससे मेरी छूट में फाड् दो मेरी छूट aaaaaahhhhhhhhhhhhh भुजा दो मेरे बदन की आग और खुद की बैठ कर मेरा अंडरवियर निचे खिसका दिया जैसे hi उसने ने मेरा अंडरवियर निचे किया मेरा का फनफनता हुआ लौड़ा किसी नाग की तरह झूमता उसके मस्त गोर गालो से टकराया और जैसे hi मेरा मस्त लौड़ा उस के गोर गालो से टकराया असा लगा जैसे किसी ने उस को तमाचा मारा हो. वो मेरे लुंड को पकड़ कर बोली राजा अब दाल दो न मेरे अंदर तो मैंने उस को और तड़पता हुआ बोलै दाल दूंगा तेरे अंदर मेरी रैंड पहले जरा इसको अपने गुलाबी होंठो का स्वाद तो चका दो.

मेरा इतना कहना था की उसने मेरे लुंड पकड़ा और अपने होंठो में दबा कर चूसने lagi.vo मेरे लुंड को ऐसे चूस रही थी जैसे वो लुंड न हो कर लोल्लयपोप हो और उस में कोई स्वादिस्ट क्रीम निकल रही हो. मई तो प्रेमलता के बाल पकड़ अपनी कमर चलने लगे जैसे की मई उस के मुँह को छोड़ रहा हो. उस के मुँह से Aaaaaauuuunnggggggg……ki आवाज़ आने लगी तो पूरे कमरे में मदहोशी च गई… मैंने उस को जमीं पैर लेत जाने को कहा तो प्रेमलता निचे जमीं पैर लाइट गयी तो मई उसके टैंगो के बीच आ गया. प्रेमलता जमीं पैर नंगी लेती हुई थी और उसकी रेंज सीधी निचे ज़मीन पैर थी . मई जो उसके टांगो के बीच खड़ा था मई ने उसके दोनों टांगो को अपने हाथ से पकड़ कर पूरी तरह से फैला दिया जिस से उसकी छूट अब बिलकुल मेरे लुंड के सामने थी वो निचे लेती अपने होंठो को अपने मुँह मि दबा रखा था सायद इसलिए अगर मई अपना मस्त मुसल मोटा लुंड उसकी छूट मि गुसडे तो दर्द के मारे उसकी चीखे निकल कर बहार ना जाये. उसकी छूट काफी पानी छोड़ रही थी जिस पैर मैंने अपना लुंड रख कर उस की छूट रास से चिकना कर रहा था. और उसके बदन में मस्ती में झुरझारी हो रही थी. वो दर्द के दर से अपने होंठ अपने दांतो में दबाये अगले पल का इंतज़ार करने लगी की कब माँ झटका मर कर अपना लुंड उसकी छूट में गुस्सा देता की तभी मई ने एक जोर दर एक झटका मारा, और अब मेरे लुंड का सूपड़ा प्रेमलता की छूट को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया. मेरा ये झटका इतना जोरदार था की वो अपने आप को रोक नहीं पायी और दर्द से चिल्ला उठी, uyeee......aaahhhh .. मा......... मर........ जाउंगी....... मैं.......... आह्ह्ह्हह्ह...... सेहन.... नहीं... हो .. रहा... आआह्ह्ह्ह ......... .......... धीरे राजा jiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii रुक जाओ ना आआअह्ह्ह्ह........ . नहीं ले पयोगी जरा धीरे करिये aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh प्रेमलता के ऊपर झुक गया और उस के होठों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे साथ hi अपने लुंड का सूपड़ा उसकी छूट के अंदर बहार क्र के सुपडे से hi छोड़ने laga.premlata कुछ संभालती उस से पहले hi मैंने एक और धक्का मारा और आधा लुंड उसकी छूट मि घुस वो तो दर्द से चीख पड़ी क्यों की उसकी छूट की झिल्ली फैट चुकी थी और छूट से खून निकलने लगा था मई कुछ देर तक रुक गया और उसके बूब्स को दबाने लगा वो तो अच्छ था की मैंने उसके होठो को कैद क्र रखा था नहीं तो उसकी चीख से बस्ती जग गयी होती फिर कुछ देर बाद मई उसकी दर्द की परवाह न करते हुए उसके टाइट छूट के मज़े ले रहा था मई प्रेमलता के दर्द की परवाह न करते हुए उस को छोड़ते हुए बोलै , साली रैंड क्या तित छूट है लगता hi तेरे उस हिज़्रे पति ने सच में तेरी जवानी को लूटा नहीं. मेरी बिल्लो रानी अब मि तेरी इस गदराई जवानी का मज़ा लूटूँगा अब से तू मेरी hi मेरी रैंड रैंड मेरी रखैल और फिर से धक्का मारा और अपना मुसल लुंड जड़ तक उस की छूट में गुसाद दिए. मेरा लुंड उसकी छूट में ऐसे फिट था मनो किसी ने प्रेमलता की छूट किला थोक दिया था . वो निचे लेती दर्द से चीख रही थी जबकि मई उसके ऊपर चढ़ा उस की छूट में अपना लुंड अंदर बहार कर रहा था. लुंड छूट के अंदर बहार होने से उस को बी अब थोड़ी रहत मिलने लगी और उसका चिकना थोड़ा काम हो गया था पैर वो धीरे धीरे कराह रही थी उदार मई अपना लुंड पूरा उस की छूट मि बहार निकलता और फिर झाड़ तक उससे प्रेमलता की छूट मि गुस्सा देता. उस की छूट बी अब पानी छोड़ रही थी जिस से अब आसानी से अंदर बहार गच्चा गाछ आ जा रहा था फिजाओ में या तो उसकी की सिसकिया या फच फच की आवाज़े hi गूंज रही thi.mera लुंड अब उस की छूट में अपनी जगह बना चूका था और वो बी निचे से अपनी गांड उठा उठा कर सहयोग बे दे रही थी और मेरा लुंड अपनी छूट मि ले रही थी. वो अपनी गांड उछलते हुए बोली, उह, मेरा राजा तूने तो आज मुझे स्वर्ग दिखा दिया ," और मई भी ऊपर से उस की छूट पैर धक्के मरते बोलै, प्रेमलता मेरी रानी अब से तुम सिर्फ मेरी हो मेरे लिए hi बानी हो और हमेशा रहोगी मेरे दिल की रानी मेरी डार्लिंग और ऊपर से झटके दे कर उसको छोड़ रहा था साथ hi उसकी चूँची को पाकर कर धक्का मरता रहा दोनों ने एक दूसरे को अपनी अपनी बाँहों में जाकर रखा था और अपनी अपनी कमर उठा उठा कर एक दूसरे की छूट और लुंड छोड़ रहे थे. प्रेमलता सायद झाड़ गयी थी तभी तो उस ने मुझ को जोर से जकड लिया था. मई ऊपर से उसकी छूट पैर ताबड़तोड़ धक्के मर रहा था .लुंड अब बड़ी तेज़ी सेउसकी छूट मि गच्चा गच्चा अंदर जा रहा था की मई उस के ऊपर से उठा और उसने उसको घोड़ी बन ने को कहा तो वो भी मेरे कहने पैर अपने दोनों हाथ अग्गे करके अपनी गांड को उठा कर घोड़ी की पोज़ मि बन गयी .
 
अपडेट 98 का बाकि बच्चा हुआ अपडेट आज hi आएगा
 
अपडेट 98 कंटिन्यू.......

मई प्रेमलता के पीछे आया और उसकी गोरी गांड पैर थपाद मरने लगा उसके मुँह से थप्पड़ की आवाज़ पैर aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh निकल रही थी और वो मुझे रोक बी नहीं थी उस दिन मुझे पता चला औरत की गांड पैर थप्पड़ की मर्द से औरत को मज़ा आता hi . मई प्रेमलता की गोरी गांड पैर थप्पड़ मरते बोलै, बोल अब से तू किसकी रैंड hi तो वो सिसकती बोली, तेरी हु, तेरी रंडी हु . इस पैर मई उस की कमर को पकड़ कर अपना लुंड फिर से प्रेमलता की छूट पैर सताते बोलै रंडी मई जनता था की तू बहुत बड़ी रैंड hi तभी अपनी ये बड़ी गांड हिला हिला कर मेरा लौड़ा खड़ा क्र दिया था . मेरी बात पैर वो कमर हिलाते बोली मुज रैंड को बोल दिया होता राजा में अब से इसको मेरे लिए hi खड़ा क्र के रखना वो बोली है राजा तूने मुझे रैंड बना दिया तेरे इस मस्त लुंड की याद मि मेरी छूट पानी छोड़ती थी हाय मेरे राजा अपनी इस रैंड को माफ़ क्र दो अब से अपने इस मस्त लौड़े का पानी मेरी छूट में hi निकलना मेरी छूट हर वक़्त हाज़िर है. उसकी बात पैर मैंने अपना लुंड उसकी छूट से लगाया और प्रेमलता के बालो को खींच कर एक hi झटके से लुंड उसकी छूट में घुसड़ दिया और लगा उसको छोड़ने मई उसको छोड़ते हुए बालो को जोर से खींचता और कभी पीछे से उस की बड़ी बड़ी चूचिया जो निचे लटक रही थी उसको पकड़ कर जोर से मसल डालता उधर वो भी उस दर्द की परवाह किये बिना अपनी गांड आग्गे पीछे करके मेरे ताल से ताल मिला रही थी. और उस के चेहरे पैर ऐसी ख़ुशी थी क्यों की आज पहली बार चुदाई का सुख मिल जो रहा था . मैंने अपने धक्को की रफ़्तार और तेज़ कर दी सायद अब मेरे लुंड भी पानी छोड़ने वाला था इसलिए मैंने उसकी कमर पकड़ और तेज़ तेज़ धक्के मरने शुरू कर दिए और साथ hi धक्के मरते बड़बड़ा रहा था ले मेरी रैंड मेरी कुटिया ले मेरा लौड़ा साली रंडी की औलाद aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh साली रैंड ा आआ रहा हु मि रैंड तेरी छूट मि ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मेरा निकलने वाला है और इतना बोलते hi मई बे प्रेमलता के छूट में लास्ट धक्का मारा और उस के ऊपर ढेर हो गया मेरे लुंड उसकी छूट में वीर्य की पिचकारी छोड़ दी था. उस रात न वो थकने का नाम ले रही थी और न hi मई. जब भी थक कर आराम करते फिर से वो एक दूसरे की बहो मि खो जाते उस रात असा कोई स्टाइल नहीं था जिस स्टाइल मि मैंने उस को न छोड़ा हो और वोभी उस वक़्त चुदाई में मेरा खुल क्र भरपूर साथ दिया . उस रात मई ने प्रेमलता की तीन बार चुदाई की थी और दोनों व्ही पास्ट हो क्र सो गए थे
 
अपडेट 99

सुबह मेरी नींद बहुत hi सोर सरबे के साथ खुली ऐसा लगा मनो हम दोनों को किसी ने साथ में देख लिया हो और जैसे hi मेरी नींद खुली मई तुरंत इधर उधर देखा तो कोई नहीं था आवाज बस्ती के तरफ से आ रही थी मई तुरंत प्रेमलता को जगाया वो भी आवाज सुन क्र दर गयी थी मई उसे खा की तुम दूसरी डिसा से बस्ती पहुँचो मई इस डिसा से आता हु .

फिर हम दोनों ने फटाफट कपडे पहने और अपने अपने डिसा से चले गए फिर जब मई वह पंहुचा तो भीड़ लगी हुई थी ,मई भीड़ को चीरता हुआ अंदर गया तो देखा की 5-6 लोगो की लॉस छिन्न भिन्न अवस्था में थी उन में दो बच्चे थे और दो महिला, और पुरुष थे, ऐसा लग रहा था जैसे किसी जानवर ने उन्हें मारा हो, वह पर उनके परिजन आंसू बहा रहा था, मुझे भी बहुत दुःख हुआ और गुस्सा भी आ रहा था की कैसे बेरहमी से मारा है .

मई मुखिया जी के पास गया उन्हें पूछने की कैसे ये सब हुआ तो मुखिया जी ने खा-

मुखिया - बीटा ये सैतानी ड्रैगन्स का किया धरा है हम ने उनके सैनिको को मारा इसलिए उन्होंने हमारे लोगो को मारा है ये देखो उनकी तरफ से संदेस आया है अब युद्ध के लिए तैयार हो जाओ अब हम क्या करे.

मई : करना क्या है युद्ध की तयारी करनी है और क्या.

मुखिया जी: चलो भाई सब को ले चलो अंतिम संस्कार भी करना है.

जाव हिम उनका अंतिम संस्कार आईटी के लौट थे थे तभी एक आदमी भागते हुए आया और वो चिल्ला चिल्ला क्र बोल रहा था दानव अस थे है सब लोग छ्हिप जाओ.

मई : मुखिया hi आप ऐसा कीजिये पुरे बस्ती वालो को लेकर कही सुरक्छित जगह पर चले जाइये इनसे हम निपटाते है .

फिर मुखिया जी पूरी बस्ती वालो को लेकर जाने लगे मई स्नेहा और रम्भा के पास पंहुचा.

मई : स्नेहा आप भी इन बस्ती वालो के साथ चली जाओ यह हम दोनों सम्हाल लेंगे .

स्नेहा : ये बताओ की तुम खा थे रात में भी अपने बिस्तर में भी नहीं थे.

मई : वो मई इधर hi टहल रहा था नींद नहीं आ रही थी न इसलिए ये सब छोडो आप जल्दी से बस्ती वालो के साथ चली जाओ वो देखो मुखियांजी को चलने में परेशानी हो रही है आप उन्हें लेट आईटी चली जाओ, स्नेहा उनके पास चली गयी अब उनको क्या बताता की मुखियें क्यों लंगड़ा क्र चल रही है.

पूरी बस्ती खली हो गयी बचे सिर्फ हम दोनों मई और रम्भा.

मई : रम्भा तैयार हो .

रम्भा : है जी मई तैयार हु.

हम दोनों भी व्ही बस्ती में एक जगह छिप गए तभी ऐसा लगा धरती हिल रही है मनो भूकंप आ गया हो क्यों की सामने से बड़े बड़े ड्रागोनो का झुण्ड आ रहा था तब रम्भा में कुछ पढ़ा और उन ड्रैगन्स की तरफ हाथ सी कुछ इसरा किया उधर उन ड्रैगन्स के झुण्ड के सामने के सभी ड्रैगन्स व्ही जमीं में धरासाई हो गए उनके पीछे के कुछ ड्रैगन भी उन के ऊपर hi गिर गए तब बाकि ड्रैगन व्ही पर रुक गए ,तभी उनके ऊपर से एक उड़ता हुआ ड्रैगन आया और सामने आ क्र खड़ा हो गया और फिर उसका रूप बदल गया और ये क्या ये तो व्ही है दानवो का लीडर .

लीडर : कोण हो तुम लोग सामने आओ नहीं तो पूरी बस्ती जला क्र रख क्र दूंगा.

तब मई और रम्भा दोनों बहार निकल क्र उस दानवो के लीडर के सामने जाकर खड़े हो गए.

लीडर : तुम लोग तो एक तुच्छ सा मनुष्य हो लेकिन यह के नहीं लगते कोण हो तुम लोग, खा से आया हो और हमारे सैनिको को क्यों मारा .

मई : हम भविष्य से आये है मेरा नाम है टाइगर और ये है मेरी पत्नी रम्भा तुम लोग इस बस्ती के लोगो को परेशान क्र रहे हो और तुम्हारे सैनिको को ने भी यही किया था इस लिए वो मरे गए और तुम भी यह से चले जाओ नहीं तो ठीक नहीं होगा.

लीडर : हमारी इन बस्ती वालो से कोई दुश्मनी नहीं है ये बस्ती वाले हमारे महारानी को जो चाहिए वो दे दे तो हम कुछ नहीं करेंगे नहीं तो किसी को भी नहीं छोड़ेंगे.

मई : मेरे रहते तुम इन बस्ती वालो का कुछ नहीं बिगड़ सकते.

लीडर : लो फिर सम्हालो.

ये बोल क्र उसने अपना रूप बदला और अपने मुँह से मुझ पर आग उगलने लगा लेकिन मुझ पर आग का कोई असर न होता देख उसने रम्भा पर हुम्ला किया लेकिन उसने भी एक शील्ड बना क्र अपने आप को बचा लिए .

जब उसका वर हम पर असर नहीं हुआ तब वो हुआ में िफ़ गया और अपने सिपाहियों को हुम्ला करने को खा तो दानव ड्रैगन ने हम पर हुम्ला क्र दिया इधर रम्भा ने लीडर ड्रैगन को सम्हाला वो दोनों एनर्जी बॉल से एक दूसरे पर हुम्ला क्र रहे थे उधर मई उड़ते हुए सैनिक ड्रागोनो को मर रहा था एक ड्रैगन ने तो मुझे निगल hi लिया था मई उसके पेट को अपनी तलवार से चित क्र बहार आया और जब मई जमीं पर गिरा हुआ था तब ड्रागोनो के झुण्ड में मुझे कुचलने की कोसिस की मई इधर उधर हो क्र बच गया इधर रम्भा के सामने भी वो ड्रैगन टिक नहीं पाया और आसमान इ उड़ गया तो अब रम्भा भी ड्रैगन सैनिको के साथ भीड़ गयी हम दोनों को उलझा देख और लीडर ने पीछे से आकर रम्भा को दोनों बाजुओं से पकड़ क्र ऊपर उठा लिए और अपने साथ ले जाने लगा रम्भा चिल्लाने लगी तब मई उसकी तरफ देखा तो मुझे बहुत गुस्सा आया मेरी पूरी आँखे डार्क ब्लू हो गयी मई भी तेजी से उड़ते हुए गया और उस लीडर ड्रैगन के पंख काट दिया जिससे उसने रम्भा को छोड़ दिया , रम्भा गिरने लगी तब मई तेजी से उड़ते हुए जाकर उसे हवा में hi अपने बाजुओं में थम लिया और सुरक्छित जमीं पर उतर दिया उधर वो ड्रैगन phad-phadata हुआ खा गिरा पता नहीं इधर बाकि बच्चे ड्रैगन भी भाग चुके थे.

इसका मतलब था जीत हमारी हुई थी रम्भा ने अब भी मुझे कस क्र जकड़ा हुआ था और उसकी आँखे बंद थी.

तो बे कॉन्टिनोएड...

..
 
Back
Top