Incest Kamuk Alka - Page 17 - SexBaba
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Incest Kamuk Alka

अपडेट-69

लुंड मसलते हुवे विशाल जैसे hi आवाज़ की दिशा में गार्डन उठा के देखता है तो उसकी बड़ी माँ रागिनी बिलकुल नंगी बाथरूम के दरवाजे पे कड़ी हो के उसे आवाज़ दे रही थी…

रागिनी- विशु

विशाल हड़बड़ाते हुवे- है है हाँ बड़ी माँ

विशाल के हालत देख रागिनी बाथरूम से निकल के बीएड की तरफ नंगे हालत में hi उसकी तरफ बढ़ने लगती है और रागिनी को ऐसे नंगे अपन सामने आता देख विशाल का गाला सूखने लगता है तो वही विशाल की हालत देख रागिनी की हसी छूट जाती है वो मुस्कुराते हुवे विशाल से कहती है

Ragini-bête मेरा हाथ पीछे यही जा रहा है और घी पुरे कमर और पीठ में फ़ैल गया है क्या तू साबुन लगा देगा…..???

विशाल के लिए तो ये लाटरी hi समझो निकल गयी थी जिसके नाम का वो मुठ मार रहा था वही औरत बिलकुल नंगी उसके सामने कड़ी थी और उसे बाथरूम में अपने कामुक बदन पे साबुन लगा ने के लिए बुला रही थी..

विशाल- हाँ बड़ी माँ क्यों नहीं अभी आया…

रागिनी दूसरे शब्दों में- हाँ और अपना तलवार पंत में दाल लेना कही मुझे घायल न कर दे और उसके लुंड की तरफ घूरते हुवे थोड़ा आगे बढ़ती है जिस से विशाल लेते लेते hi एक कदम पीछे को हो जाता है..






रागिनी- हाहाहा इतने में hi दर गया बच्चू अपनी बड़ी माँ से चल जड़ी से आजा और ये घी चुरा दे…

और फिर रागिनी अपनी गांड मटकते हुवे वापस बाथरूम के तरफ चली जाती है..

विशाल- uuuuuuuuuuufffffffffff कितनी बड़ी गांड है बड़ी माँ के एक डैम आग है साली चिनार..

रागिनी अंदर बाथरूम में जा के विशाल का वेट कर रही होती है की उसके इंतजार को जल्दी hi समाप्त करते हुवे विशाल बाथरूम में पहुंच जाता है जिस औरत को छोड़ने के लिए वो कब से तड़प रहा था ो अभी उसके सामने बिलकुल नंगी थी और विशाल का गाला सूखा जा रहा था जिसे देख रागिनी की एक बार फिर से हसी छूट जाती है….

बाथरूम के अंदर आते hi विशाल रागिनी को आवाज़ देता है

रागिनी- बड़ी माँ मई आ गया

अंदर रागिनी बाथटब में लेती अपने गरम छूट के ऊपर तप खोल के उसपे पानी के धार से अपने छूट में जल रही आग को बुझाने की कोशिश कर रही थी और इसी दौरान विशाल की आवाज़ सुन के वो विशाल के तरफ hi उसे मुस्कुराते हुवे देखने लग जाती है…






रागिनी- आ गया तू

विशाल रागिनी को प्यासी नज़रो से घूरते हुवे- हाँ बड़ी माँ

रागिनी एक डैम से बाथटब से निकल जाती है उसके शरीर में शावर जेल से बना फोम लगा हुआ था फिर भी वो शॉवेरगेल एंड लूफाह विशाल की तरफ बढ़ाते हुवे उसे अपने पीठ पे मलने को कहती है…

रागिनी- ये ले जेल और लूफाह और फिर पीठ विशाल की तरफ कर के खुद सामने के तरफ मुँह कर कैग हम जाती है…

रागिनी के सामने की तरफ चेहरा होने के बावजूद भी उसकी बड़ी बड़ी चुचिअ विशाल को पीछे से hi अचे से नज़र आ रही थी जिसे देख विशाल का मन ललचा रहा था उसका लुंड फिर से अकड़ने लग जाता है और मनो रागिनी के नंगे चूतड़ों में समां जाना छह रहा था बस विशाल क ीक कदम आगे बढ़ने की देर थी…

बाथरूम में अब थोड़ी देर के लिए सन्नाटा च गया था बस दोनों चची और भतीजे के तेज़ षाले सांसो की ौज़ बाथरूम में गूंज रही thi..ragini भी दूसरे तरफ चेहरा कर के अपने होंठो को चबाते हुवे विशाल के छुवन का इंतजार कर रही थी…

विशाल पानी की कुछ बुँदे पहले रागिनी के पीठ पे डालता है और अपने हाथ जैसे hi रागिनी के पीठ पे रखता है रागिनी की धड़कने पुरे गति से बढ़ के उसकी छाती और दोनों चूचिया ऊपर निचे होने लगता है… उसके शरीर में तेज़ सुरसुरी होने लग जाती hai…aur वो अपने हाथ पीछे ले जा के विशाल के जांघो को जोर से अपने मुठी में भींच लेती है…

रागिनी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh

विशाल पुरे लगन से रागिनी के पीठ और कमर को जेल लगा के मसल रहा था और वही उसके हर छुवन से रागिनी पिघलती जा रही थी और वो खुद अप्पनइ गांड पीछे कर लेती है जिस से विशाल का तना हुआ लोड रागिनी के चूतड़ों के बिच बने घाटियों में फिट हो जाता है जैसे वो जगह उसके लुंड के लिए hi बानी हो..






रागिनी ने बेशक अपना एक कदम आगे बढ़ा लिया था और अपने गांड को अपने भतीजे के लुंड पे रगड़ते हुवे उसे अपने अंदर जल रहे आग के बारे में हिंट देना सुरु कर दिया था पर विशाल अब भी कोई जल्दबाजी किये बिना रागिनी के पीठ को अपने जेल से साणे हाथो को रागिनी के पीठ पे रगड़ रहा था…

विशाल पीछे से हाथ रगड़ते हुवे उसके कंधे और गार्डन को साबुन से मलने लगता है..

रागिनी- aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh हाँ ऐसे hi रगड़ रगड़ के सारा मेल छुड़ा दे bête…

विशाल- हाँ बड़ी माँ बहुत मेल है पीछे लेकिन आज इसे पूरा साफ़ कर दूंगा तुम्हारे गोर बदन पे मेल की एक बून्द नहीं बचेगी

रागिनी- ठीक है bête अचे से साफ़ कर दे अपनी बड़ी माँ के गांड को मेरा मतलब है गंदगी को…

विशाल भी रागिनी के बातो को अचे से समझ रहा था और वो ये भी समझ चुक्का था की अगर उसके आग को थोड़ा और भड़काए तो रागिनी भी अपने बेटी की तरह खुद चाक इ उसके लुंड को पकड़ के अपने छूट में भर लेगी…

रागिनी- विशु थोड़ा साइड में भी सफाई कर देना bête आज तेरी बड़ी माँ अक ये बदन तेरे हाथो में है और अपनी बड़ी माँ के शरीर को अचे से चमका देना…

विशाल रागिनी के कहे बातो को अचे से समझ रहा था और वो रागिनी के बातो पे हामी भरते हुवे जी बड़ी माँ कह की आगे उसके पेट की तरफ जेल लगाने लग जाता है…






विशाल रागिनी के कमर पेट और नाभि को अचे से मलते हुवे बिच बिच में रागिनी के छूट के ऊपर हाथ फेर देता था लेकिन वो ऐसे रियेक्ट कर रहा था मनो उसे पता hi न ह की उसका हाथ रागिनी के छूट को टच कर रहा था.

रागिनी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh हाँ ऐसे hi सफाई कर अचे से और फिर वपणी गांड को और पीछे धकेल देती है….

रागिनी- खड़े खड़े ेरे पैरो में दर्द होने लगा है मई यही लेट जाती हु तू अचे से साबुन लगा के धो दे मेरे शरीर को

विशाल- जो बड़ी माँ

और फिर रागिनी वही फर्श पे लेट जाती है… और उसकी चूचिया और उसकी छूट अब विशाल के आँखों के सामने बिना किसी परदे के थी…






विशाल शावर जेट से रागिनी के गोर कामुक बदन पे पानी की बौछार करने लगता है और फिर लूफाह के फोम को उसके शरीर पे डालते हुवे उसके बदन को फोम से भर देता है..

रागिनी को आज ये हलका सा फोम भी अपने बदन पे बहुत भरी लगने लगा था..

रागिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh हाँ ऐसे hi अचे से साबुन लगा दे

विशाल- हाँ बड़ी माँ अचे से मॉल मॉल के साबुन लगाऊंगा और आप बस देखते जाओ..

और फिर विशाल पाहे तप रागिनी के पिण्डलिओ को माल्टा है फिर उसके जांघो से होते हुवे उसके पेट को को मुथिओ में भर के मसलने लगता है..

रागिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh मममममममअअअअअअअअ रागिनी आंखे बंद किये अपने भतीजे से अपने शरीर को मसलवा रही थी बहुत ाचा लग रहा है विशु.. तोडा ऊपर भी हाथ चला वहां भी गंदगी है

विशाल अचे से समझ रहा था ऊपर मतलब खा कह रही थी फिर भी वो जान बुझ कर रागिनी के पेट को मसलते हुवे कहता है..

विशाल- ऊपर किधर बड़ी माँ…

रागिनी- कंगनी में जलते हुवे विशाल के बात पे उसके तरफ कामुक मुस्कान के साथ देखते हुवे कहती hai…apne गुलाब जामुन के तरफ साफा नै करेगा और उसके हाथ को पकड़ के अपने चुचिओ पे रख देती है..






विशाल भी अब रागिनी के पेट के साथ साथ रागिनी के चुचिओ को भी मसलन मासा के साफ़ करने लगा था.

विशाल- कितना बड़ा गुलाब जामुन है आपकी बड़ी माँ

रागिनी- आआआआअह्हह्ह्ह्ह विशु थोड़ा आराम से bête






विशाल अब रागिनी के चुचिओ को अचे से मसलने लग जाता है और उसके निप्पल को चुटकिओ में भर के निचोड़ने लग जाता है..

रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmaaaaaaaaaaaaa

विशाल- बड़ी माँ ये तो टाइट होने लगा है

रागिनी- इतने जोर से मैलेगा तो टाइट hi होगी न bête

विशाल- तो क्या आपको दर्द हो रहा है

रागिनी- माने ये कब खा… uuuuuuffffffffff तूने मेरे शरीर को इतना छेड़ा की देख मेरी पेशाब निकल गयी…






और फिर रागिनी के छूट से एक धार फुट पड़ती है और रागिनी उठ के बैठ जाती है और फिर वो तेज़ धार के साथ मूतने लगती है

विशाल रागिनी के छूट से निकल रहे हलके सुनहरी पेशाब की धार देख मदहोश होने लगता है रागिनी भी विशाल के चेहरे के भाव को पढ़ते हुवे समझ जाती है की उसे मुत्ता देख विशाल के अंदर कामाग्नि भड़कने लगी है…

रागिनी- सॉरी bête मेरे से रोका नहीं गया

विशाल- कोई बात नहीं बड़ी माँ इतस नेचुरल

रागिनी- हाँ ये तो है… च लगा दिया साबुन तो चल मैं नहा लू

विशाल- पर बड़ी माँ पीछे लगे साबुन को धोया तो है नहीं बस साबुन लगा के साफ़ किया है

रागिनी- ओह हाँ और वो तो सुख भी गया होगा चल कोई बात नहीं उसे जल्दी से पानी से साफ़ कर दे और रागिनी अपनी गांड विशाल की तरफ कर कैग हम जाती है..

सईद रागिनी के छूट की आग उसके पेशाब के साथ निकल चुक्का था इसलिए वो अब जल्दी से सब ख़तम कर के बहार निकलने की सोच रही थी पर विशाल इस मोके को इतनी आसानी से जाने नहीं देना छह रहा था इसलिए रागिनी के पीछे मुड़ते hi वो थोड़ा जेल और रागिनी के पीठ और चूतड़ों पे लगा देता है और ढेर सारा झाग रागिनी के शरीर पे फैला देता है..






और अब वो रागिनी के चूतड़ों को अपने दोनों हाथो में भर के अचे से मसलने लग जाता है

रागिनी- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह विशु और रागिनी अपने हाथो को विशाल के मरदाना छाती पे रख देती है और अपने नाख़ून विशाल के छाती पे गदा देती है….

विशाल चूतड़ों को मलते हुवे गले hi पल निचे बैठ जाता है और रागिनी के दोनों कूल्हों को फैला के उसमे अपनी ऊँगली दाल देता है…






रागिनी- ुउउइइइइइइइइ माआ ये तू क्या कर रहा है विशु

विशाल- साबुन लगा रहा हु बड़ी माँ और विशाल अपने झाग से भरे उंगलिओ से रागिनी के गांड के छोटे और तंग भूरे छेद को कुरेद कुरेद कर उसके आग को और जयदा भड़काने की कोशिश कर रहा था तो वही दूसरी तरफ शावर के निचे कड़ी रागिनी अपने बेकाबू होते सांसो को काबू में करने की नाकाम कोशिश कर रही थी....

रागिनी- uuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffffffff ऐसे जगहों पे भी लगते है क्या bête??

विशाल- हाँ बड़ी माँ घी यहां भी फ़ैल गया है उसे भी साफ़ किये देता हु…

रागिनी- ाचा वह तक घी चला गया क्या

विशाल- हाँ बड़ी माँ

रागिनी- ठीक है bête फिर अचे से साफ़ कर दे आज

और रागिनी एक बार फिर से मचलने लग जाती है और वो अपनी गांड पीछे धकेलने लग जाती hai..vishal भी मोके को देखते हुवे रागिनी के चूतड़ों को फैलते हुवे अपना मुँह लगा देता है…






रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh विशु ये क्या कर रहा है bête

विशाल- सफाई बड़ी माँ

रागिनी- अपनी बड़ी माँ की गांड इतनी अछि लगी तुझे की मुँह hi लगा दिया

विशाल- हाँ बड़ी माँ कितनी अछि खसबू आ रही है ufffffffffffffffffffffff

रागिनी- oooooooooooohhhhhhhhhhh विशु ऐसे तो मैं बेकाबू हो जाउंगी bête ये तू क्या कर रहा है मेरे साथ और इतना कह के रागिनी अपनी एक तंग उठा देती है/…






पैरो के उठते hi रागिनी की छूट पूरी खुल चुकी थी और विशाल अब रागिनी कैग एंड के छेद को छोड़ उसके छूट के गीले होठो को चूसने लग जाता है..

रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ये सब खान से सीखा तू uuuufffffffffff बहुत ाचा लग रहा है bête ऐसे hi चूस अपनी बड़ी माँ को…

विशाल बिना कुछ बोले जोर जोर से रागिनी के छूट को चूसने लगा था और फिर छूट को चूसते हुवे विशाल अपनी एक ऊँगली रागिनी के छूट में पेल देता है…






अब तक जहां विशाल रागिनी के छूट में अपनी जीभ दाल के अपने जीभ से उसके छूट को छोड़ रहा था तो अब वो जीभ के साथ दो अपनी ऊँगली भी रागिनी के छूट में पेल के अंदर बहार करने लगा था

रागिनी अपने शरीर से हो रहे खेलवाड़ से सम्भली भी नहीं थी और अभी इस दोहरे हमले से बेकाबू होती रागिनी जोर जोर से अपने छूट को विशाल के चेहरे पे दबा के मनो उसे अपने छूट में घुसा लेना छह रही हो की विशाल एक कदम और आगे बढ़ाते हुवे रागिनी के चुचिओ को मुट्ठी में भर के दबाने लग जाता है..






रागिनी बिलकुल पागल और बेकाबू हो उठती है और इस तरह एक के बाद एक हुवे हमले से उसके छूट की धार एक बार फिर से बहने लगती है और रागिनी अपना कामर्स चोर्ने लग जाती है…

रागिनी के छूट से बेहटा कमरस अब सिद्ध विशाल के मुँह में जाने लगा था जिसे रागिनी चुराने की कोशिश तो कर रही थी पर विशाल उसे चोर्ने को राजी न था और वो विशल के मजबूत पकड़ से बेबस हो के अंत में आत्मसमर्पण कर देती है और मचलते हुवे पने भतीजे के यह में अपना कामर्स बहाने लग जाती है…






विशाल कामिनी के छूट से बेहटा उसके कामर्स का ेके क बून्द चूस लेता है और उंगलिया चला चला के उसके छूट के नाजुक नसों को और ज्यादा संवेदनशील बना देता है.. कामिनी बेजान सी कड़ी जोर जोर से हाफ रही थी छूट से बहते कामर्स से मिला सुच उसके चेहरे पे साफ़ झलक रहा था अब वो विशाल से छूटना छह रही थी लेकिन विशाल उसे अब भी चोर्ने को राजी न था वो लगातार ऊँगली अंदर बहार करते हुवे रागिनी के छूट को चूस रहा था…

रागिनी के छूट में एक बार फिर से झनझनाहट होने लगी थी उसके छूट से पेशाब की धार बहने लग जाती है पर विशाल उसे अब भी कास के पकडे हुवे था जब उसे कोई रास्ता नहीं दीखता तो वो बेबस हो के उसे लात मार के उस से दूर हैट जाती है और अपनी एक तंग उठा के पेशाब की तेज़ धार मरते हुवे विशाल की तरफ बेशरम भरे नज़रो से देखने लगती है…






रागिनी- ले देख अपनी बड़ी माँ के छूट से बेहटा उसका पेशाब और उसमे सना हुआ उसका कॉमर्स जोट ेरे म्हणत से निकला hai…ise भी पीना छह रहा था तू गंदे

विशाल- हाँ बड़ी माँ आज तेरे गुलाब जामुन के साथ तेरा पूरा रास निचोड़ के पि जाऊंगा..

रागिनी- जो और जितना मिलना था मिल गया और ले लिया तूने अब जा और मुझे नहाने दे..

रागिनी के इस तरह पलटने से विशाल को अपने साथ धोका फील होने लगता है इसलिए विशाल रागिनी की तरफ बढ़ते हुवे उसके करीब जाता है और उसके पेशाब बहते छूट में अपनी उंगलिया पेल देता है..

रागिनी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है मूतने तो दे uuuuuufffffffffffffff

पर विशाल उसकी एक नहीं सनटैन और तेज़ तेज़ ऊँगली अंदर बहार करने लग जाता है जिस से रागिनी वही जो अब तक कड़ी हो के मूत रही थी वो जमीं पे गिर जाती है लेकिन विशाल की उंगलिया अब भी उसके छूट से नहीं निकलती…






विशाल- क्या बोलै तुमने जितना होना था हो गया?? खुद का काम बन गया तो धोका??

अब तू देख बड़ी माँ मैं क्या करता हु

रागिनी- क्या कर रहा है गधे चोर बस कर मैं फिर से झाड़ जाउंगी…

विशाल- पहले बोल्ट ेरे गुलाब जामुन मुझे खिलाएगी

रागिनी- हाँ खा लेना गुलाब जामुन

विशाल- बोल्ट ु कभी नहीं रोकेगी..

रागिनी- नहीं रोकूंगी पक्का uuuuuuuuuffffffffffffffffff

और फिर रागिनी विशाल के ऐसे तेज़ तेज़ ऊँगली करने से एक बार और झड़ने लगती है और हफ्ते हुवे विशाल की तरफ देखते हुवे बोलने लगती है तेरा hi है ये गुलाब जामुन और उसका ये सारा रास भी पि जाना मैं तो मज़ाक कर रही थी bête uuuuuuuuuuuffffffffffffffffff तूने तो मेरी जान hi निकल दी

और फिर रागिनी वही जमीं पे गिर जाती है और जोर जोर से हाफने लगती है…..






रागिनी- हां हां hahhhhhhhhhhhhh कुत्ते मर डाला तूने

विशाल- क्या हुआ बड़ी माँ अभी तो मैंने कुछ किया भी नहीं अभी से ये हाल हो गया तुम्हारा

रागिनी- वही सोच रही हु बिना कुछ किये तूने ये हाल कर दिया अगर कुछ करने लग गया तो मेरा क्या हाल कर देगा

विशाल- कुछ क्या बड़ी माँ

रागिनी- चुप कर जैसे तुझे पता नहीं सारा कांड कर के भोला बन रहा है

विशाल- बोलो न बड़ी माँ

रागिनी- मैं नहीं बोलती अब जा और मुझे नहाने दे बहुत देर हो गयी शाम होने को है

विशाल- और मेर गुलजामूं??

रागिनी- हाँ खा लेना अब तो ये तेरा hi है पर अभी के लिए जा मुझे नहाने दे

विशाल- पर इसका क्या करू??? विशाल ने अपने खड़े लुंड की तरफ दिखते हुवे खा

रागिनी- ओहो थोड़ा सब्र कर ले रात का करवाती हु कुछ अभी के लिए जा प्लस और रागिनी विशाल को वह से भगा के नाहने लग जाती है.....
 
ग्लिम्प्स फ्रॉम अपडेट -70

रागिनी- ऐसे क्या देख रहा hai....gulab जामुन खाने है न तुझे....?

विशाल- हाँ बड़ी माँ...

रागिनी- तो देखता hi रहेगा या खायेगा भी.... तेरी बड़ी माँ तेरे सामने बिलकुल नंगी कड़ी है विशु आ और ले ले अपना गुलाब जामुन....



 
अपडेट-70



अब तक हमने देखा की कैसे विशाल अपने हाथो का जादू चलते हुवे अपनी बड़ी माँ रागिनी के छूट से लगातार तीन बार पानी निकलवा देता है और सिर्फ उसका कॉमर्स hi नहीं उसके छूट से पेशाब की धार तक फुट पड़ती है जिस से बेसुध हो के रागिनी वही शावर के निचे ढेर हो जाती है और विशाल को रात का कह के उसे बाथरूम से बहार जाने को कहती है जिसे सुन विशाल भी भरी मन से hi सही लेकिन रात के उम्मीद में बहार निकल आता है

अब आगे…

रात का वक़्त था सभी खाने के लिए एक बार फिर से इकट्ठा हो जाते है पर आज दिनेश और अरविन्द नहीं थे क्युकी उन्हें किसी काम से सहर जाना था और कमल भी शादी का कार्ड देने अपने रिश्तेदारों के वहां गया था तो कुल मिलकर घर में आज औरते hi थी और कुछ गेट्स मेहमान थे उनके अलावा वहां राघव और विशाल था…. अलका भी शाम होते hi घर आ गयी थी और और सरे मेहमानो को खाना खिला देने के बाद घर के सद्श्य खाने को बैठे थे अलका की नज़र जब रिच एप नहीं पड़ती तो वो रागिनी से ऋचा के बारे में पूछती है जिस से उसे मालूम पड़ता है की ऋचा की तबियत सुबह से hi खराबा है जिसे सुन के अलका घबरा जाती है और खाने को चोर वो सिद्ध ऋचा के कमरे में उसका हाल चल लेने चलती जाती है जहां बेसुध हुई ऋचा गांड फैला के सोई हुई थी वो नींद में तो नहीं थी बस लेती लेते टीवी देख रही थी..

अलका को रिच अक मुरझाया चेहरा देख बहुत तरस आता है वो उसका सर अपने गॉड में ले लेती है और उसे बड़े प्यार से दुलारते हुवे उसके सर अउ कंधे को तो कभी उसके कमर को दबाने लगती है..

ऋचा को अलका के इस तरह से उसके बदन के दबाने से बहुत आराम मिल रहा था इसलिए वो किसी छोटी बच्ची की तरह अलका के और भी क्लोज हो के उसके गौर में सर रख लेती है जिसे देख अलका भी मुस्कुराने लगती है…

अलका- तूने खाना नहीं खाया bête

ऋचा- चची मेरी तबियत ठीक नहीं मैं खा लुंगी बाद में

अलका- बाद में क्यों अभी खाना है न रुक मैं आज खुद तुझे अपने हाथो से खिलाती हु और इतना कह के वो विशाल को आवाज़ मरती है

विशाल- हाँ माँ

अलका- जा ऋचा दीदी के लिए खाना ले आ

विशाल- ठीक है माँ

और फिर विशाल 2 प्लेट ले के आता है जिसपे अलका उस से पूछती है

अलका- 2 प्लेट क्यों लाया मैं इसी में से खा लुंगी

विशाल- एक प्लेट मेरा है माँ मैं भी यही आप दोनों के साथ यही खाऊंगा

ये सुन अलका मुस्कुरा देती है ाचा ठीक है टब hi यही खा बैठ जा लेकिन विशाल और अलका क्या ऋचा के कमरे में बैठते है देखते hi देखते बाकि के लोग भी ऋचा के कमरे में अपनी प्लेट ले के पहुंच जाते है..

अलका- अरे तुम सब भी यहां

निम्मो- ममी मुझे भी आप सब के सतह hi बैठना है और ऋचा की तबियत भी देखनी थी… और फिर धीरे धीरे सभी एक hi सुर में यही बात बोलने लगते है

रागिनी- मैं तो तुम्हे हमेसा से कहती आयी हु किट ु चुम्बक है तू जहां जाएगी लोग खुद तेरे पीछे खींचे चले आएंगे देख यहां भी तुझे अकेला नहीं छोरा इनलोगो ने…

रागिनी के इस बात पे अलका हसने लगती है और जवाब में बोलती है

अलका- कोई बात नहीं दीदी यहां खाये या डाइनिंग पे एक hi बात है और फिर वो निवाला तोड़ के ऋचा को खिलने लग जाती है…









ऋचा भी अलका द्वारा दिखाए लाड से और उसके हाथ से परोसे निवाले को बड़े प्यार से खाने लग जाती है..

राघव एक नज़र से अलका के छतियो को घूरे जा रहा था और अपना खाना खाने में लगा हुआ था तो वही विशाल भी अपने टारगेट पे फोकस्ड था…

राघव को एक तक इस तरह अलका को घूरता देख ऋचा पकड़ लेती है और वो रघु को टोकते हुवे बोलती है

ऋचा- ऐसे क्या देख रहा है अपनी प्लेट पे नज़र रख इधर नहीं..

ऋचा के इस बात पे सभी हसने लगते है तो उधर रागिनी भी ऋचा के बात को काटते हुवे कहती है..

रागिनी- ये देखो इसे बीमारी में भी लड़ने का मौका नहीं चोरटी ये नहीं की चच्ची इतने प्यार से खिला रही है तो खा ले पर नहीं इसे लड़ना भी है…

ऋचा- और नहीं तो क्या माँ कब से घूरे जा रहा है बंदर कही का..

इस्पे रघु बोलता है..

रघु- मैं घर नहीं रहा हु

ऋचा- फिर क्या कर रहा है..

रघु- मैं ये देख रहा हु की तुम दोनों साथ में कितना एक जैसे लगते हो आपकी शकल तो इतनी बड़ी ममी से नहीं मिलती जितनी अलका ममी से मिल रही है और ये मई आप दोनों कप एक साथ देख के hi नोटिस कर पाया…

रघु के इस बात से अलका और रागिनी के चेहरे का रंग थोड़ा फीका पद जाता hai..par फिर भी रागिनी बात क संभालते हुवे बोलती है..

रागिनी- हाँ तो मिलेगी hi न खंडन में hi शक्ल मिलती है तेरी तरह नहीं जो पड़ोस पे गया हो..

रागिनी ये कामिनी की तरफ देखते हुवे मज़ाकिया अंदाज़ में बोलती है आखिर दोनों भाभी ननद का रिश्ता जोट है मज़ाक तो बनता भी है…

कामिनी- क्या भाभी बचे को तो चोर दिया करो

निम्मो- वैसे ममी रघु बोल तो सही रहा है ये बात मैंने भी अब नोटिस की है..

अलका- ाचा बाबा ऋचा मेरी बेटी है और तू भी मेरा hi बीटा है इतना कह के अलका ऋचा को गले लगते हुवे उसके माथे को चुम लेती है…









इसी तरह कमरे में हसी मज़ाक का दौर सुरु हो जाता है जिसे अगले hi पल काटते हुवे रागिनी बोलती है…

ाचा जल्दी से खाना फिनिश करो क्युकी आज घर में कोई नहीं है तो खेत पे मुझे hi रुकना होगा….

अलका- आप क्यों दीदी मैं चली जाती हु विशाल को ले के

रागिनी- अरे नहीं तुम दोनों को कुछ पता भी है क्या इधर का तुम कैसे जाओगे??

ऋचा- हाँ चची आप मत जाओ प्लस आप मेरे साथ hi रहो आज

रागिनी- देख अब तो ये तुझे चोर्ने नहीं वाली तो तू रुक इसके पास इसकी तबियत भी कुछ ठीक नहीं और मैं खेल चली जाउंगी

Alka-par अकेले कैसे जाओगे दीदी किसी को ले जाओ साथ में

रागिनी- हाँ पर किसे ले जाऊ कोई है भी तो नै

अलका- क्यों दीदी….?? विशु को ले जाओ

कामिनी- नहीं नहीं विशु को मत भेज सहर का लड़का है ऐसा करो दीदी रघु को ले जाओ

अलका- क्यों विशु क्यों नहीं ये कभी देखा भी नहीं है खेत वगैरह रघु तो जाता hi रहता है…

इस्पे इस बार विशाल भी बोल पड़ता है हाँ माँ मैं जाऊंगा बड़ी माँ के साथ रघु फिर कभी चला जायेगा

रागिनी- हाँ तो ठीक है विशाल तुझे कोई दिक्कत तो नहीं है न bête

विशाल- नहीं बड़ी माँ मुझे क्यों दिक्क्त होगी जब आप साथ हो

रागिनी- ठीक है फिर खाना खा के तैयार हो जा फिर हम थोड़ी देर में चलेंगे..

विशाल- ठीक है बड़ी माँ

और फिर खाना ख़तम कर के सभी ऋचा के कमरे से बहार चले जाते है और अलका भी चेंज करने अपने रूम में चली जाती है और साथ में विशाल भी.

कमरे में आते hi अलका विशाल के सामने hi कपडे बदलने लगती है और देखते hi देखते अपनी साड़ी पेटकोट और ब्लाउज उतर के सिर्फ ब्रा और पंतय में विशाल की तरफ गांड कर के कड़ी हो जाती है

आज बहुत दिनों बाद माँ bête एक साथ कमरे में अकेले में मिले थे और उसपे भी अलका का ये नग्न अवतार देख के विशाल जो की सुबह से hi चुदाई के लिए तड़प रहा था और जिसके हाथ में रग्बी जैसी गदरायी महिला दो दो बार बिना चूड़े हाथ से निकल जाने से उसका लुंड और भी ज्यादा फड़फड़ा रहा था.. और ा बल्कि का नंगा रूप खासकर उसकी गांड देख के विशाल से बर्दाश्त नहीं होता और वो अलका को पकड़ के उसे किश करने जाता है की अलका पलटते हुवे बोलती है

अलका- क्या हुआ क्या देख रहा है पहले देखा नहीं है क्या???

विशाल- माँ जब से यहां आये है तुम मुझे अपना टाइम नहीं दे रही हो और सारा टाइम पता नहीं किधर गायब रहती हो…

अलका- किसी बाटे कर रहा है विशु तुझे पता है न शादी का घर है फिर काम तो लगा hi रहता है bête…

विशाल- हाँ माँ समझता हु लेकिन मैं तरस गया हु तुम्हारे लिए जब से यहां आया हु..

अलका- तरस तो मैं भी रही हु bête तुझे पता तो है तेरी माँ तेरे बगैर एक पल नहीं रह पति अब तू hi सोच कैसे गुज़ारा कर रही हु मैं तेरे बगैर..

विशाल- ऊपर से आज आपने मुझे खेत पे जाने का बोल के फसा दिया आज तो मौका भी था बड़ी माँ चली जाती रघु के साथ तो मैं आपके साथ टाइम बिता पता

अलका- अब तो बोल दिया न bête अब कैसे मना कर सकते है आज कर ले फिर मैं कुछ देखती हु..

विशाल- माँ आप कैसे रह रहे हो मेरे बिना जब आपका मन नहीं लगता तो मेरा तो बहुत बुरा हाल है आपके बिना और विशाल का चेहरा रोये जैसा हो जाता है जिसे देख अलका का ममता भरा दिल पिघलने लग जाता है और वो फ़ौरन अपने bête के तरफ झपट के जाती है और अपने होठ उसके होठो पे रख देती है…









विशाल भी अलका को अपने आगोश में भरते हुवे उसके होठो को अपने होठो में क़ैद कर लेता है और अपनी माँ अलका के रास बहरे जुबान को अपने मुँह में भर के चूसने लग जाता है…..

अलका- ये क्या कह दिया मेरे bête तूने??? तू अपनी माँ के लिए इतना तरस रहा है और मैं तुझपे ध्यान नहीं दे रही हु…

विशाल- पागलो की तरह बस अलका को चूमे जा रहा था… और चूमते चूमते वो अपना वजन अलका पे डालने लगता है जिस से अलका के कदम पीछे होने लगते है और वो तब तक पीछे हुवे जाती है जब तक की अलका के पीछे देवर नहीं आ जाता..









विशाल- अलका को दीवार से चिपकाये कभी उसके होठ तो कभी गार्डन और कभी उसके चुचिओ को चूसे जा रहा था और साथ hi अपने सख्त हाथो से उन्हें मसल भी रहा था..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh कितने दिनों बाद चुवा है तूने मुझे uuuuuuufffffffffffffffff और फिर अलका खुद विशाल के बालो में हाथ फेरते हुवे उसके कमर में हाथ दाल के उसे अपने से बिलकुल सत्ता लेती है और बहकते हुवे उसे पुरे जोरो से छुमने लग जाती hai…aaaaaaahhhhhhhhh विशु मैं बहक न जाऊ तुझे जाना है विशु दीदी इंतजार कर रही है तुम्हारा

विशाल- थोड़ी देर और माँ बस प्लस….

अलका- मेरे bête आज के लिए तू मान जा फिर मैं खुद कुछ इंतजाम करती हु..

पर विशाल अलका की सुनने की जगह उसके पैरो के पास बैठ जाता है और उसकी पंतय को खिसकते हुवे उसके रास से भीगे छूट को अपने मुँह में भर लेता है…









अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है मन जा न bête क्यों अपनी माँ एप मुसीबत लाना छह रहा है देख उधर तेरी बहन ऋचा भी इंतजार में है और तेरी बड़ी माँ भी आज के लिए चोर दे bête uuuuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffff

विशाल- बस माँ तेरे छूट से निकला अमृत पीला दे फिर चला जाऊंगा…

अलका- hayeeeeeeeeeeeee तू आग भड़का के चल तो जायेगा लेकिन उसके बाद तेरी माँ को कौन शांत करेगा bête

विशाल- इसे बिना पिए तो जाऊंगा नहीं फिर चाहे जॉब hi हो जाये..

अलका- uuuuuuuuuuuuuufffffffff बड़ा जीडी है तू और होगा भी क्यों नहीं मेरा hi खून है… अपनी माँ के छूट का रास पीना है न तुझ्र…

विशाल- हाँ

अलका- ठीक है फिर जल्दी से चूस अचे से ले मैंने टंगे खोल ली है…

इतना कह के अलका अपनी टंगे और चूतड़ दोनों पूरा खोल लेती है…









टैंगो के ऊपर उठा लेने से और अपनी भरी भरकम चूतड़ के पैट खोने से अलका की गुलाबी छूट का द्वार विशाल के लिए अब बिलकुल खुल चुक्का tha..jise विशाल किसी पिल्लै की तरह चपड़ चपड़ कर के कहते जा रहा था और अपने दन्त से उसके होठो को काट भी रहा था…

इतने शिद्दत से bête को म्हणत करता देख माँ से भी ज्यादा देर रुका नहीं गया और वो अगले hi पल अपने छूट से काम रास का रिसाव चोर्ने लग जाती है…









जो पहले एक पतले से धार में विशाल के मुँह को भरने लग जाता है और फिट आखरी के कुछ बुँदे तप तप कर के विशाल के मुँह में गिर रहा था..

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmaaaaaaaaaaaa कितने दिनों बाद तेरे जीभ का स्पर्श मिला है मेरे छूट को जैसे सालो बाद चुवा है तूने uuuuuuuuuuuufffffffffffff

विशाल अब भी अलका के छूट को चोर्ने के जगह कहते जा रहा था…

अलका- चोर दे bête अब कर लिया तूने अब जाने दे चोर मुझे वर्ण मई खुद को नहीं रोक पाऊँगी…

पर विशाल उसे चोर्ने की जगह अलका के छूट के लाल हो चुके होठो को दांतो से काटने लगता है वो उसके छूट को चोर्ने के जगह उसके कमर को कास के पकड़ के पुरे जोश में अलका के छूट को चूस रहा था..

अलका एक बार फिर से अपने छूट का रास बहाने के लिए तैयार हो जाती है और वो इतना बेकाबू होने लग जाती है की खुद कमर से धक्का मार के विशाल के मुँह में अपने पेशाब की धार भरने लग जाती है…









अलका विशाल के मुँह पे ऐसे धक्के लगा रही थी मनो विशाल के मुँह को छोड़ रही थी और उसके पास छूट नहीं लुंड था…

अलका- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh मादरचोद पि जा मूत अपनी माँ का इसी के लिए मारा जा रहा था न तू uuuuuuuuuuuuufffffffffffffffffffffffff

और फिर अलका जल्दी से घूम जाती है और अपनी गांड विशाल के मुँह की तरफ कर देती है विशाल भी अलका कैग एंड के छेद को कहते लग जाता है…









अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh विशाल ऐसे hi चाट अपनी माँ की गांड…. एक बार शादी हो जाये फिर मैं तुझसे खुद गांड मरने को बोलूंगी hhhhhhhhhhhaaaaaaaaaayyyyyyyyyeeeeeeeeeeee कितने दिन हॉग ए तुझसे गांड मरवाये uuuuuuuuufffffffffffffffffffffff चाट ऐसे hi…..

काफी देर गांड चटवाने के बाद अलका अब उठ जाती है और विशाल के लुंड को पकड़ की आगे पपीचे करने लग जाती है और फिरअपने bête को देखते हुवे पूछती है…









अलका- छोड़ेगा अपनी माँ को???

विशाल- हाँ माँ

अलका- माँ को या रैंड को???

विशाल- माँ को जो मेरी रांड है…

अलका- ठीक है लेकिन

विशाल- लेकिन क्या माँ

अलका- लेकिन अभी के लिए तुझे जाना होगा कोई आ रहा है और इतना कह के वो उसके लोडे को चोर के बाथरूम में भाग जाती है की तभी गेट पे नॉक होता है..

विशाल- हाँ आया

रघु- विशु बड़ी ममी पूछ रही है की तू तैयार है या टाइम लगेगा

विशु- बस मैं चल रहा हु तू बोल दे…

फिर रघु चला जाता है और विशाल देखता है की अलका बाथरूम के गेट से झक रही है…









विशाल- वाओ माँ आपको कैसे पता चला की कोई आ रहा है..

अलका- क्युकी मैं तेरी तरह लुंड से नहीं सोचती अब जा के देख बड़ी माँ को वर्ण फिर से आ jayegi…waise विशु तुझे एक बात बोलू

विशाल- हाँ माँ बोलो

अलका- माँ नहीं मिली तो क्या बड़ी माँ है कोशिश कर लेना चाहे तो पूरी रात कोई नहीं आएगा तुम्हे डिस्टर्ब करने..

विशाल- क्या माँ आप भी

अलका- मैं तो बस तुझे एक नए छूट का पता बता रही थी नाकि तेरी मर्ज़ी है bête…

और फिर विशाल वहां से जाने लगता है और अलका भी विशाल को जाता देख अपनी छूट मसलते हुवे कहती है… खुद तो चला गया मेरे छूट में आग लगा गया अब क्या करू मैं पूरी रात….









उधर विशाल अपने रूम से निकल के रागिनी के रूम की तरफ बढ़ने लग जाता है और रागिनी के रूम में पहुंचते hi वो नॉक करता है जिसपे रागिनी उसे अंदर आने को कहती..

विशाल जो अभी अभी एक बम से खेल के आ रहा था पर उसे क्या पता था की यह उसे पूरा का पूरा बारूद का ढेर मिलेगा…













कमरे में रागिनी ब्लू लिंगेरी में थी जो उसके गोर बदन पे काफी ज्यादा फैब रहा था… उसके बड़े बड़े चुड़तो में फसा उसकी पंतय और पीठ पे एक पतली सी क्नॉट और जिसमे उसका गोरा चूकना पीठ और चुत्तड़ बहुत hi खूबसूरत लग रहा था..

रागिनी के गोर मोठे मोठे केले के खम्बे की तरह चिकनी तइस तो गज़ब hi ध रही थी उसके पीठ चुत्तड़ और उसकी जंघे इतनी चमक रही थी मनो आज hi उसने वैक्स कराया ho…aur उसपे पानी की एक बून्द भी गिराओ तो वो बिना रुके अगले hi पल उसके जिस्म से गिर के जमीं पे पड़ी होगी…

रागिनी का ये कामुक रूप देख के विशाल के लुंड में थिरकन आने लगी थी उसके शरीर में सिहरन दौड़ गया था...

विशाल का मन तो होता है की खेत चोरो और अभी यही इस रैंड को अबॉश के घोड़ी बना के अपना लुंड उसके चिकने रसदार छूट में पेल दे लेकिन अभी उसे इसके लिए थोड़ा और इंतजार करना था…

विशाल को अपने कामरूपी जिस्म में खोता देख रागिनी बोलती है

रागिनी- तू बैठ मैं बस साड़ी दाल लू फिर चलती हु

विशाल- ठीक है बड़ी माँ



और फिर रागिनी विशाल के सामने hi पाहे पेटीकोट फिर ब्लाउज और फिर साड़ी से अपने बदन को ेके क कर के धक् लेती है और फिर दोनों खेत पे चलने को तैयार हो जाते है…..

that's आल फॉर टुडे guy's
 
अपडेट-71

रागिनी- चल विशु अब चलते hai....bahut लेट हो गया है....

रागिनी के हाथो में टोर्च था और उसने साड़ी के ऊपर से स्टाल दाल लिया था क्युकी पहाड़ी इलाको में रात का मौसम तो आप सभी समझ hi सकते है पर स्टाल तो बस नाम के लिए था क्युकी दोनों चची भतीजे के जिस्म से जो आग धधक रही थी वो पुरे खेत को गरम दे इतनी तपिश थी

रागिनी आगे आगे जबकि विशाल पीछे पीछे रागिनी के मटके गांड को देखते हुवे उसके पीछे पीछे बढ़ रहा था….

तभी रागिनी एक बार को रुक के उस से पूछती है

रागिनी- इतना धीरे धीरे क्यों चल रहा है जल्दी जल्दी पेअर बढ़ा

विशाल- चल रहा हु बड़ी माँ आपके पीछे hi तो हु….

रागिनी- पीछे क्यों है साथ साथ चल

विशाल रागिनी की गांड को घूरते हुवे कहता है - आज पीछे से तुम और भी खूबसूरत लग रही हो बड़ी माँ…

और वो लगे भी क्यों न क्युकी रागिनी साड़ी पहनती इतने निचे से है की उसके दोनों चूतड़ों की दरारे साफ़ झलक दिखला रही होती है..






रागिनी- ाचा ऐसा है क्या और इतना कहते hi रागिनी अपने स्टाल को हटा के पीछे गार्डन घुमा के देखने लगती है…

स्टाल के हटने से रागिनी का रूप विशाल पे किसी तीर के सामान काम करता है… रागिनी ऊपर से बिलकुल नंगी थी यानि उसका ब्लाउज बैकलेस था जो पीछे में सिर्फ एक डोरी से बंधा हुआ था जिस से उसकी गोरी पीठ रात के अँधेरे और मोबाइल के हलकी रौशनी में और भी ज्यादा चमक रही थी… पीठ से निचे उसकी गोरी चिकनी गांड भी बिलकुल किसी सफ़ेद ब्रेड की तरह उसके उभर नज़र आने लगा था….

रागिनी अपने बदन से स्टाल के उतर कर हाथो में ले लेती है और विशाल की तरफ पलट के देखती है…. और रागिनी के इस तरह पलटने से विशाल की नज़रे रागिनी के सपाट चिकने पेट पे अटक जाती है..






रागिनी ने साड़ी अपने नाभि के बहुत hi निचे बंधी थी जहां से उसकी छूट के ऊपरी बाल के रोमछिद्र तक नज़र आने लगा था रात के अँधेरे में भी रागिनी का ये कामुक बदन विशाल को बिलकुल अचे से नज़र आ रहा था उसका गाला सूखने लग जाता है छूट की तड़प तो उसे सुबह से hi थी फिर अभी अलका के छूट का रास पिने से उसके लुंड को छूट की तड़प कुछ ज्यादा महसूस होने लग गया था…

रागिनी- क्या देख रहा है ऐसे??

विशाल- बड़ी माँ आज तो तुम क़यामत hi लग रही हो..

रागिनी- ाचा ऐसा क्यों आज क्या खास है???

विशाल उसके पेट पे हाथ फेरते हुवे उसके नाभि को मसल देता है…

रागिनी- आआआहहहहहहह क्या कर रहा है ऐकोर दे

विशाल- ये मुझे अपनी तरफ खींच रही है बड़ी माँ और फिर विशाल निचे बैठ के रागिनी के पेट को चूमने लग जाता है…






विशाल का अपारष पते hi रागिनी मचलने लगती है…

रागिनी- चोर दे विशु यह कोई देख लेगा तो प्रोब हो जाएगी चल हैट मुझे पेशाब आयी है देख कोई आ न रहा हो तब तक मैं टॉयलेट कर लू और फिर रागिनी विशाल से छूट के उस से थोड़ी दूर पे जा के उसके तरफ देखती है और फिर धीरे धीरे अपनी साड़ी उठाने लगती hai…vishal को पहले रागिनी की पिण्डलिया फिर उसकी गोरी जांघ और अंत में पंतय के उतरते hi उसके गोल बड़े बड़े चुत्तड़ नज़र आने लगा tha…panty से छूट को आज़ाद करते hi रागिनी वह बैठ के मूतने लगती hai…darasal पेशाब तो बहाना था ो विशाल को अपनी गांड और छूट के दर्शन करा के उसके आग को और ज्यादा भड़काना छह रही थी और उसी अंजाम की पहली पहल थी…






अलका आधी बैठे झुके हुवे विशाल की तरफ गांड कर के अपने छूट से गरम पानी की धार बहाये जा रही थी और उसके छूट से निकलती धार से बज रही बांसुरी विशाल को साफ़ सुनाई दे रहा tha…..vishal से भी और रुका नहीं गया और वो जा के रागिनी के छूट के निचे अपने हाथ लगा देता है…





रागिनी अब विशाल के हाथो में hi मूत रही थी और विशाल उसे हाथो में भर के उसे रागिनी के छूट पे लगा देता है और उसके छूट को अपने बिच वाली ऊँगली से छेड़ने लगता hai..aur रागिनी की छूट जो खुद भी विशाल के लुंड को निगलने के लिए तड़प रही थी उसपे विशाल के ऊँगली का स्पर्श पा के सिसक पड़ती है….

रागिनी - aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है चैन से मूतने भी मत दे तू ab…aur फिर वो अपनी पंतय पहनने लग जाती है..

विशाल- क्या करू बड़ी माँ अब मेरे से और रुका नहीं जा रहा है और वो रागिनी की तरफ बढ़ के उसके होठो को चुम लेता है,…






इस बार रागिनी भी उसका कोई विरोध नहीं करती और अपने हाथ को उसके बालो में फेरते हुवे उसके होठो को अपने मुँह में भर के चुस्न लग जाती है….

एक लम्बी किश के बाद रागिनी बोलती है…

रागिनी- चल यहां से किसी ने देख लिया तो दिक्कत हो जाएगी और हम लेट भी हो रहा है जल्दी चल और जॉब hi करना है वहां कर लेना नहीं रोकूंगी….

विशाल भी ख़ुशी ख़ुशी रागिनी के साथ तेज़ कदमो से चल देता है और अगले कुछ देरी में दोनों hi अपने खेत पे पहुंच जाते है…

विशाल देखता है उनका खेत काफी बड़ा है और उसमे ाचा खासा फार्महाउस बना हुआ है और पुरे खेत को बड़े से घेर रखा था जहां से किसी इंसान के आने की कोई सम्भावना न थी है जानवरो और चोरो का क्या है वो तो आ hi सकते है इसलिए किसी को यह हमेसा रुकना hi पड़ता है… और आज बरी रागिनी किट hi याय उन कहे उसने ये मौका खुद बनाया था …

अंदर आते hi विशाल एक बार फिर से रागिनी पे टूट पड़ता है और रागिनी अभी उसे एक बार फिर से रोकते हुवे कहती है…

रागिनी- अरे रुक तो जा पूरी रात है कही नहीं भाग रही थोड़ा सांस तो लेने दे और फिर रागिनी ने स्टाल को बीएड पे फ़ेंक दिया और और कड़ी हो के विशाल को घूरने लग जाती है विशाल एक बार फिर से रागिनी की तरफ बढ़ने लगता है और रागिनी के अधनंगी कमर को अपने हाथो से मसल देता है…

रागिनी भी बड़े अदाओ से विशाल के तरफ बढ़ती है और उसके होठो को किश करने लगती है…






विशाल रागिनी के होठो को चूसते हुवे उसके चूतड़ों को मसलने लग जाता है तो रागिनी भी विशाल को अपने बहो में भरते हुवे उसके बालो पे हाथ फेर रही थी और उसके किश का जवाब उसके जुबान को चूसते हुवे देने लग जाती है..

किश करते करते विशाल रागिनी के कंधे से उसकी साड़ी को खिसका देता है और साड़ी के कंधे से गिरते hi रागिनी की बड़ी और भरी छाती विशाल के छाती से चिपक जाती है…

विशाल अब अर्गिनी के चुचिओ को भी मसलने लग जाता है… और विशाल के हर छुवन से रागिनी की सांसे बढ़ रही थी काफी लम्बी किश केन ा रुकने से रागनी विशाल को अपने से धकेल के खुद को उस से अलग करती है लेकिन विशाल रागिनी के साड़ी को पकड़ लेता है और रागिनी भी किसी हिरणी की तरह घूमते हुवे उस से दू रो रही थी जिस से उसकी साड़ी उसके बदन से अलग होने लग जाती है….






साड़ी के उतरते hi रागिनी अब सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में आ गयी थी…

रागिनी- अपने चढ़े हुवे सांसो को कण्ट्रोल करते हुवे विशाल की तरफ देख रही थी..

थोड़ी देर तक दोनों वही जैम जाते है मनो वक़्त वही रुक गया हो जहां एक और रागिनी की उफान मरती सांसो से उसकी चूचिया ब्लाउज फाड़ के निकल जाने को बेताब थी तो वही सामने खड़ा विशाल अपनी बड़ी माँ के इस कामरूपी बदन में खो गया था ो बदन जिसे अब से थोड़े देर में वो नोच नोच के भोगने वाला था रागिनी के आँखों में तैरती वासना कैद ओरे अब उसके आँखों से चालक के उसके यौवन में उतर आया था उसके पेअर अपने आप hi अपने भतीजे विशाल की बढ़ने लगे थे और अगले hi पल रागिनी मुस्कुराते हुवे विशाल के थोड़ी को पकड़ के ऊपर उठती है और एक छोटा सा चुम्बन उसके होठो पे कर के अपने होठ फ़ौरन उसके होठो से अलग कर लेती है और ऐसा वो कोई 2-3 बार करती है और हर बार विशाल के आँखों में देखते हुवे वो उसके होठो को चुम रही थी….

और फिर धीरे धीरे उनका चुम्बन गहराता चला जाता है और विशाल रागिनी के निचले तो रागिनी उसके ऊपर के होठो को चूसने लग जाती है और दोनों की जुबान मनो एक दूसरे के मुँह में घुसने के लिए द्वन्द लड़ना सुरु कर देती है….

विशाल होठो को चूमते चूमते रागिनी के गार्डन को भी चूमना सुरु कर देता है और रागिनी भी अपने गार्डन ऊपर कर के उसके होठो का स्वागत अपने गार्डन पे कर रही होती है…






दोनों की सांसे बुलेट ट्रैन की तरह भागने लगी थी और विशाल इस बिच अपने हाथ रागिनी के चूतड़ों पे रख के उसके चूतड़ों क दबाने लग जाता है…

रागिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh

विशाल- कितने कोमल चुत्तड़ है तेरी बड़ी माँ uuuufffffffffffff मन हो रहा मसल दू

रागिनी- तो मसल दे न तेरा hi है आज मेरे ये चुत्तड़ जितना मन करे जैसे मन करे मसल दे अपनी बड़ी माँ और उसके चुत्तड़ को….






विशाल रागिनी के चूतड़ों को जोर से मसलते हुवे बोलता है- हाँ बड़ी माँ आज तुझे ऐसा मसलूंगा जैसा तेरे किसी यार ने नहीं मसला होगा…

रागिनी- uuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhhh आज से तो टब hi मेरा यार hi हो जायेगा विशु…

रागिनी की ये बात विशाल को और ज्यादा उत्तेजित कर देती है और वो छाती को दबोच लेता है और उसपे अपना मुँह रगड़ते हुवे उसे चूमने लग जाता है…

रागिनी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh ऐसे hi खा जा अपनी बड़ी माँ को और चूस अचे से….

और फिर विशाल धीरे धीरे रागिनी के ब्लाउज के हुक ेके क कर के खोलने लग जाता है…






ब्लाउज के हुक खुलते hi रागिनी उसे अपने हाथो से निकल के वही बीएड पे फेंक देती है और बी रागिनी सिर्फ एक नेट लास वाली ब्रा में विशाल के सामने थी जिसमे उसकी चूचिया बड़े hi मुश्किल से क़ैद थी विशाल ब्रा के ऊपर से hi उसके चुचिओ को दबाते हुवे अब उसका हाथ रागिनी के गोल भरी हुई चूतड़ों पे जाता है और उसे वो मसलते हुवे रागिनी के शरीर पिउ ो आखरी कपडा उसका घाघरे की डोरी को खोलने लग जाता है….





रागिनी के घाघरे का नाडा खुलते hi उसका घाघरा सरकते हुवे उसके चिकनी जांघो को आज़ाद करते हुवे निचे को सरकने लगती है और पालक झपकते रागिनी सिर्फ ब्रा और पंतय में अब विशाल के बहो में कड़ी थी…

विशाल पहले अपनी बड़ी माँ रागिनी के अधनंगे शरीर को गौर से देखने लग जाता है और रागिनी भी अपनी बहो को विशाल के गले में भर के उसकी तरफ बढ़ने लग जाती है…

विशाल देखते hi देखे रागिनी को एक पेअर को उठा के अपने कमर पे रख लेता है और उसके छाती और चुचिओ को ब्लाउज के ऊपर से hi चूमने लगता है…






विशाल रागिनी को चूमते चूमते उसे बीएड पे गिरा देता है और खुद उसके ऊपर आ कर रागिनी के गाल गार्डन उसके होठ छाती और पेट को सेहला और चुम रहा था और रागिनी भी जल बिन मछली की तरह तड़पते हुवे बीएड पे चटपटा रही थी…..

रागिनी की बढ़ती छटपटाहट देख विशाल अब रागिनी के पीछे आ जाता है और उसे अपनी बहो में भर के पीछे से उसकी गार्डन को चूमने लग जाता है…






रागिनी भी अपने हाथ पीछे ले जा के विशाल के बाल और गार्डन को सेहला रही होती है…

रागिनी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh तू मेरी आग को कितना भड़कायेगा रे विशु.

विशाल- बड़ी माँ तुम्हारे बदन से आते खुसबू मुझे पागल कर रही है मई मदहोश होता जा रहा हु बड़ी माँ

रागिनी- अपनी बड़ी माँ के साथ ये सब कर रहा है बड़ी मड़ई माँ भी बोल रहा है

विशाल अपनी गरम सांसे रागिनी के गार्डन पे चोरते हुवे पूछता है- फिर क्या बोलू बड़ी माँ?

इस्पे रागिनी मुस्कुराते हुवे उसके कानो में कहती है जो मन करे बोल आज मैं तेरी बड़ी माँ नहीं कुछ और हु…

विशाल रागिनी के अंदर धधकते आग को और ज्यादा भड़कते हुवे उसके पंतय के अंदर हाथ दाल देता है..






रागिनी की पंतय उसके छत से निकल रहे कामर्स से पूरी तरह भीग चुक्का था और उंगलिओ के पड़ते hi उसके छूट में एक तेज़ सुरसुरी होने लगती hai…jis से अपने आप hi उसके मुँह से सिसकारी फुट पड़ती है

रागिनी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मर गयी..

पर विशाल अपनी उंगलिया पंतय के अंदर चलना जारी रखता hai..aur रागिनी के छूट के अंदर बहार करने लग जाता hai….pani से लबालब रागिनी के छूट में लगातार ऊँगली अंदर बहार होने से पांच पांच की आवाज़े आने लगी थी…

पंतय के अंदर हाथ चलने में विशाल को जब दिक्कत होने लगती है तब विशाल उसके पंतय में लगे उस क्नॉट को खींच देता हिअ जिसके गत को खुलते hi रागिनी की छूट उसके पंतय से आज़ाद हो जाती है…






अब रागिनी निचे से बिलकुल नंगी थी उसके छूट से लगातार उसका कामर्स बहने लगा था विशाल रागिनी के बैठे छूट देख के खुद को रोक नहीं पता और फ़ौरन निचे झुक के उसके छूट को अपने मुँह में भर लेता है….





रागिनी का छूट इतना ज्यादा पानी छोड़ने लग जाता है की उसके छूट से फूटती धार विशाल के मुँह के अलावा उसके गोर चिकने जांघो से हो के बहने लगा था और विशाल उन जांघो पे जीभ फेरते हुवे किसी पिले की तरह पानी की बूंदो को चूस लेता है…

रागिनी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuuuuufffffffffffffffffff करते हुवे विशाल के मुँह पे अपने छूट का दबाव बढ़ने लग जाती है… और सात hi विशाल का सर बह अपने छूट पे दबाना सुरु कर देती है.






रागिनी के बढ़ते बेचैनी को देख विशाल को समझ आ गया था की रागिनी किसी भी वक़्त अपने छूट का फवारा चोर सकती है इसलिए वो रागिनी को धक्का दे के बीएड पे लिटा देता है और खुद उसके निचे छूट के सामने खड़ा हो जाता है…

रागिनी के चेहरे पे इस वक़्त की चुदाई की खुमारी साफ़ झलक रही थी उसे बस इस वक़्त अपने कामर्स को अपने छूट से बहा देना था और इसी वजह से रागिनी लेते लेते hi गांड खिसकते हुवे बीएड के कोने में आ के अपनी टंगे उठा देती है और अपनी छूट अपने भतीजे विशाल को परोस देती है…






विशाल भी रागिनी के खुले टैंगो के बिच चमकते उसके छूट को देख की आगे बढ़ने लगता है और रागिनी उसे अपने छूट को और बढ़ता देख अपनी टैंगो को पूरा हवा में उठा के अपने हाथ से पकड़ के खोल लेती है..

विशाल अगले hi पल अपनी जुबान रागिनी क छूट पे रख देता और उसके द्वारा चोरी गयी गरम सांसे रागिनी को बेचैन करने लग जाती hai…vishal एक बार फिर से रागिनी के छूट को चाटने लगता है…






इस बार विशाल रागिनी के छूट में अपनी जुबान के साथ अपनी दो उंगलिया भी पेल देता है और धीर धीरे अंदर बहार करते हुवे उसके छूट को चूसना सुरु कर देता है..

रागिनी इस दोहरे मजे से बिलकुल पागल होने लगती है उसकी सांसे अब उसके काबू में न थी उसकी टैंगो में कंपन आने लगा था उसके छूट की धार अब किसी भी समय फुट सकती थी…






बेचैनी में रागिनी अपनी गांड उठा उठा के चटपटा रही थी और विशाल भी उतने hi शिद्दत से रागिनी के छूट को चूसते हुवे अब उसके चुचिओ को मसलने लगा था…

रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh पागल कर देगा आज तू मुझे इतना मजा तो कभी नहीं आया hayyyyyyyyeeeeeeeeeeeeee विशु मेरे सैया uuuuuuuuuufffffffffff ऐसे hi चूस अपनी बड़ी माँ को आज रागिनी तेरी हो गयी चूस ले उसका सारा रास hayyyyyyyyyyeeeeeeee मेरे bête…

और इतना कहते hi रागिनी की छूट अपना लावा चोर्ने लगती है और उधर विशाल भी पुरे जोरो से रागिनी के छूट से बह रहे काम रास को चूसे जा रहा था….. रागिनी अब हो रहे हमले से छटपटने लग जाती है वो विशाल के सर को अपने छूट पे दबती है तो कभी हटती है…






विशाल के तरफ से उसके छूट को न चोरे जाने से रागिनी अब उसे नोचने लगी थी पर विशाल भी विशाल था वो रागिनी के दोनों हाथो को अपने पंजो में कास लेता है…. जिस से रागिनी अब हाथ भी नहीं चला पति और बेबस हो के बस हफ्ते हुवे अपने छूट के चुसवा रही थी…

रागिनी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhh चोर दे कुत्ते सब पि गया अब क्या मेरी मूत पियेगा uuuuuuuuufffffffffffff सुबह से चूस रहा है अब क्या साडी रत चूसने का hi इरादा है क्या तेरा???

रागिनी के कहने का मतलब तो कोई भी समझ सकता था इसलिए विशाल भी रागिनी को आज़ाद कर देता है और रागिनी के होठो को चूमते हुवे कहता है..

विशाल- वह बड़ी माँ क्या रास है मजा आज्ञा

रागिनी- कमीने मेरी जान निकल दी और तुझे मजा आ रहा है

विशाल- इतने में hi जान निकल गयी अभी तो तुझे मेरे ये अजगर अपने बिल में लेना है… और इतना कह के वो रागिनी के चुचिओ को ब्रा के ऊपर से hi दबाने लगता है…

रागिनी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh अजगर को दूध पिलाना है तो इसे उतरना पड़ेगा bête..

विशाल- नेकी और पूछ पूछ और फिर विशाल रागिनी के ब्रा को उतरने के लिए खोलने लगता है… लेकिन उसके ब्रा की हुक कही फास रही थी जिस वजह से वो खुल के भी रागिनी के जिस्म पे hi अटका हुआ था…

रागिनी- रुक मैं निकलती हु ब्रा खुलती नहीं और चला है बड़ी माँ छोड़ने

इतना कह के रागिनी उठ जाती है और उसके साथ विशाल भी खड़ा हो जाता है फिर रागिनी अपनी ब्रा के हुक जोपहले से hi खुली हुई थी उसे उतरने लग जाती है






पर ब्रा उस से भी नहीं खुल रही थी जिस से झुंझलाते हुवे वो खुद hi अपनी ब्रा को खींच के तोड़ देती है और फिर अपने जिस्म से उतर फेंकती है…

पंतय जो की रागिनी के जिस्म से कब का अलग हो चुकी थी और ब्रा के उतर जाने से रागिनी बिलकुल नंगी हो गयी थी और उसका कामुक भरा बदन विशाल के सामने थे जिसे देख के विशाल के अंदर भी उसके खून की लहार दोगुने राफ्तेर से दौड़ने लग जाता है…






कामिनी का नंगा रूप देख विशाल मंत्रमुग्ध हो चुक्का था उसकी सांसे उसके लुंड ने लेना सुरु कर दिया था कुछ इस क़दर वो ऊपर निचे होने लगा tha..vishal की हालत देख के कामिनी मुस्कुराते हुवे बोलती है…

रागिनी- ऐसे क्या देख रहा hai....gulab जामुन खाने है न तुझे....?

विशाल- हाँ बड़ी माँ...

रागिनी- तो देखता hi रहेगा या खायेगा भी.... तेरी बड़ी माँ तेरे सामने बिलकुल नंगी कड़ी है विशु आ और ले ले अपना गुलाब जामुन....

विशाल- uuuuuuuuuuuffffffffffff बड़ी माँ तुम कितनी हॉट हो मेरा लुंड फटने को हो रहा है….

रागिनी- ऐसे कैसे फैट जायेगा बिना मेरी सेवा किये और फिर रागिनी अपने कमर मटकते हुवे बीएड की तरफ बढ़ती है जिस से उसके जांघो की थिरकन देखते बन रही थी… उसे आता देख विशाल भी खड़ा हो जाता है और रागिनी उसके करीब आ के उसे देखते हुवे घुटने के बल जमीं पे बैठ के उसके लोअर को उतरने लगती है..

रागिनी- बहुत चूसा तूने इस बिल्क ो अब जरा तेरे अजगर को देखु वो इस बिल में जाने के लायक है भी या नहीं….

और इतना कहते हुवे वो विशाल के लोअर को जैसे खिसकती है उसका हलक सुख जाता है…






लोअर के खिसकते hi उसका लुंड स्प्रिंग की तरह उछाल के रागिनी के मुँह के सामने आ जाता है जिसे लगा प्रे छुम से उसका सूपड़ा कुछ ज्यादा hi चमकने लगा था और विकराल लग रहा था..

रागिनी इतना बड़ा लुंड न hi आज तक ली थी और न hi उसने देखा था और जब इतना भयानक फुफकारता हुआ अजगर उसके सामने आता है तो उसके मुँह से अपने आप निकल पड़ता है..

रागिनी- ो बहनचोद ये क्या है इतना बड़ा…

विशाल- क्यों बड़ी माँ आज से पहले देखा नहीं इतना बड़ा??

रागिनी- उसके लुंड को मुट्ठी में भर के उसके तरफ देखते हुवे ना में गार्डन हिलती है…






रागिनी के चेहरे पे आयी चमक और डार्क ा भाव एक साथ झलक रहा था जिसे देख विशाल उसके सर पे हाथ फेरते हुवे पूछता है

विशाल- तेरे किसी भी यार का इतना बड़ा नहीं निकला?? (विशाल बार बार उसे उसके यार की याद दिलाते रहता है मनो उसे बताना छह रहा हो किट ु उसके नज़र में सिर्फ एक रंडी है और तेरा कोई भी यार का लुंड मेरे लुंड की आगे कुछ नहीं)

Ragini-fir से ना में गार्डन हिलती है

विशाल- फिर तो बड़ी माँ आज तेरी वो चुदाई करूँगा किट ु अपने सरे यार को भुला देगी और सिर्फ मेरा लुंड hi याद रह जायेगा तुझे भी और तेरे इस छूट को भी….

रागिनी मुझे भी यही लगता है और इतना कहते hi वो विशाल के लुंड पे छोटी छोटी पापियों की झरि लगा देती है…






अगर विशाल के पास विकराल लुंड था तो उसके सामने भी कोई साधारण औरत नहीं थी बल्कि एक पुराणी और मांझी हुई खिलादन थी और उसने भी अचे अचे लुंड को काबू में किया है पर इस लड़ाई में जीत किसकी होगी कौन किसे काबू में करता है वो तो आज रात पता चल hi जायेगा,,,…

विशाल- उउउउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ बड़ी माँ आप कमल ho…bahut ाचा लग रहा है..

रागिनी भी विशाल के लुंड को छत्ते हुवे उसके तरफ देखते हुवे बोलती है…






रागिनी- अभी तूने अपनी बड़ी माँ रागिनी का कमल देखा hi खा है ये तो बस सुरुवात है…

विशाल- uuuuuuuuufffffffffff बड़ी माँ तुम्हारे जुबान में इतना मजा है तो इसे मुँह में भरोगी तो कितना मज़ा आएगा…

रागिनी- साबरा कर बचे अभी पूरी रात है तेरे पास अपनी बड़ी माँ की गर्माहट देखने के लिए और फिर रागिनी देखते hi देखते विशाल के लुंड को मुँह में भरने लग जाती है…






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और विशाल भी रागिनी का सर दबाते हुवे अपना लुंड उसके मुँह में पेलने लग जाता है..

विशाल- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh

लुंड इतना बड़ा था की रागिनी के मुँह में सूपड़ा से थोड़ा ज्यादा hi गया होगा की रागिनी का पूरा मुँह भर जाता hai…aur वो अकबका के अपने मुँह से लुंड निकल के हाफने लगती है…

रागिनी- उउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ये तो मेरे मुँह में नहीं समां रहा है इतना बड़ा है….

विशाल- बड़ी माँ आज पहला दिन है फिर तुम्हारी आदत हो जाएगी इसकी और ये खुद अपनी जगह बना लेगा…

रागिनी- पुरे खंडन में किसी का इतना बड़ा नहीं है तेरा कैसे हो गया हफसि की औलाद अशोक से पैदा हुआ है या तेरी माँ अलका किसी नीग्रो से चुद के पैदा की है तुझे… हाय पूरा मुँह दुःख गया…

और इतना कह के रागिनी एक बार फिर से विशाल के लुंड को मुँह में भरने की कोशिश करने लग जाती है…






विशाल- इसका मतलब तूने पुरे खंडन के लुंड का स्वाद चख रखा है बड़ी माँ

रागिनी के पास विशाल के इस सवाल का जवाब देने के लिए जुबान नहीं था क्युकी उसके मुँह में एक बार फिर से विशाल का लुंड घुस चुक्का था जिसके वजन से उसकी जुबान उसके hi मुँह में डाब के रह गयी थी….

और एक दो चोपे मरने के बाद जैसे hi विशाल को मजा आने लगता है रागिनी फिर से मुँह से लुंड निकल के हाफने लगती है..

विशाल- अब क्या हुआ बड़ी माँ लो न अंदर कितना मजा आ रहा था..

रागिनी- अरे मेरा पूरा मुँह भर जा रहा है मैं साँस नहीं ली पा रही हु लेती हु रुक जा

विशाल को समझ आ जाता है की उसे बीएड से उठना hi पड़ेगा और जब तक वो रागिनी के मुँह कोप ेल के उसके गले में अपने लुंड के जाने का रास्ता नहीं बना देता तब तक रागिनी ऐसे hi करती रहेगी और फिर विशाल बीएड से उठ जाता है…

विशाल- अब तरय करो बड़ी माँ

रागिनी जब अपने घुटनो के बल बैठ के निचे से विशाल के तने हुवे लुंड को देखती है तो उसकी छूट और ज्यादा कुलबुलाने लग जाती है रागिनी उसके टैटू पे जीभ फेरते हुवे अपने चेहरे के ऊपर उसके लुंड को रख के उसका नाप लेते हुवे बोलती है..






रागिनी- तेरे लुंड ने तो मेरे चेहरे को hi धक् दिया विशु इसका तो देख के दर और चुदाई की लहार दोनों एक साथ उठ रही है

विशाल- फिर मुँह में भरना सुरु करो बड़ी माँ मैं भी देखु आपके अंदर की आग या फिर आप से नहीं लिया जायेगा असली मर्द का लुंड ???

विशाल के मुँह से ललकार सुन के रागिनी भी अब टो में आने लगती हैए ुर वो विशाल के लुंड को मुँह में धीरे धीरे घुसाने लग जाती है…






रागिनी विशाल के ाँद से जीभ फेरते हुवे उसके लुंड के टिप तक ले जाती है और फिर पुरे जोश में मुँह में भर लेती है…

रागिनी- तू मुझे चैलेंज करता है रागिनी को अब देख मैं पहले मुँह में और फिर अपनी इस छूट में तेरे लुंड को निगल जाउंगी uuuuuuuuuuuummmmmmmmmmmmmmm yyyyyyyyyyoommmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm

विशाल भी रागिनी के अंदर से जग रही रांड को और भड़कते हुवे कहता है…

विशाल- अभी भी आधा hi लिया है तुमने बड़ी माँ आधा अभी भी बाकि है…






विशाल के इस बात पे रगिनी अपने मुँह को और आगे बढ़ते हुवे पूरा खोल के उसके लुंड को धीरे धीरे पूरा गहराई में आमने की कोशिश करने लग जाती है और देखते hi देखते लुंड उसके मुँह में समां जाता है…

विशाल- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh बड़ी माआआआ

रागिनी- uuuuuuummmmmmmmmmmmmmm uuuuoooooooghhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaahhhhhhhhgggggggggggggggghhhhhhhh






रागिनी पुरे जोश में विशाल का लुंड चूसने लग जाती है और विशल भी खड़ा हो के रागिनी के मुँह के गर्माहट को अपने लुंड पे अचे से महसूस कर रहा था

रागिनी- uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhuuuuuuuuuuuuu ggggggghhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhgghghhhhhhhhhhhhghgh

रागिनी- uuuuuuuuuuuuuuufffffffffffffff कितना मोटा है पूरा मुँह भर गया मेरा जैसे मेरे छाती तक पहुंच गया हो…

विशाल- अब जुबान नहीं मुँह चला बड़ी माँ जहां चलना है और इतना कहते hi रागिनी के मुँह में दुबारा से लुंड पेल देता है…






रागिनी- uuuuuuuuuuuuuughhhhhhhhhhhhhhhhhhh साँस तो लेने दे उसके मुँह से गिर रही लार विशाल के लुंड से हो के उसके छाती पे फैलने लगी थी और विशाल अब लगातार जोर जोर से उसके मुँह में लुंड पेले जा रहा था….

काफी देर लुंड मुँह में रहने से रागिनी को घुटन होने लगती है और वो विशाल के लुंड को मुँह से निकलना छह रहे होती है लेकिन विशाल के अंदर का जानवर तब और वहसि हो जाता है जब उसके सामने पड़ी औरत छटपटाने लग जाये फिर वो उसकी माँ हो बुआ मासी या बहन होय ा फिर आज रात की शिकार उसकी बड़ी माँ वो हर औरत को उसकी औकात दिखने में hi अपनी जीत समझता है और वही काम आज वो फिर से दोहराता है…






विशाल अपनी एक तंग को बीएड पे रख की बी पुरे जोश में रागिनी के मुँह को प्लेन शुरू कर देता है,… रागिनी के मुँह से जैसे लार और कुघ की नदिया बहने लगी थी उसका डैम घुट रहा था और उसकी आंखे पलटने लगी थी वो चटपटा रही थी लेकिन विशाल उसके बेबसी और छटपटाहट को नज़रअंदाज करते हुवे लगातार उसके मुँह को पुरे जोश में छोड़ रहा था…





रागिनी बड़े मुश्किल से खुद को छुड़ा पति है लेकिन विशाल अगले hi पल बालो से पकड़ के वापस उसके सर को खींच के अपने लुंड के पास लता है और उसके मुँह में अपना लुंड दुबारा से पेल देता है…





हाफति हुई रागिनी की आंखे पलटने लग जाती है वो विशाल के जांघो को अपने नाख़ून से खुरचने लग जाती hai…au फिर पुरे शरीर का डैम लगा के उसके जांघो से धक्का दे के उसे खुद से अलग करती है और बहुत जोर से हाफने लग जाती है….

रागिनी- चोर दे बहनचोद मर डालेगा क्या

विशाल- मैं तो बस तुम्हारे मुँह में रास्ता बना रहा था बड़ी माँ और फिर रागिनी उठ जाती है और विशाल उसे बहो में ले के किश करने लग जाता है…






जिसमे रागिनी भी विशाल का पूरा साथ दे रही थी और साथ hi कभी उसके सर को तो कभी उसके लुंड को मुट्ठी में भर के सहलाने लग जाती है…

काफी देर चूमने के बाद रागिनी बीएड पे घोड़ी बन के अपनी गांड दिखते हुवे चलने लगती है,..






रागिनी के रसीली छूट और गांड देख के विशाल वापस से उसे पकड़ के अपना मुँह उसके गीले छूट पे रख देता है….

रागिनी विशाल के बार बार उसके छूट से कर रहे खेलवाड़ से अपने कामाग्नि के हाथो मजबूर हो के आखिर में खुद hi बोल पड़ती है

रागिनी- बस विशु अब और नहीं रुका जा रहा आ छोड़ ले अपनी बड़ी माँ को दाल दे अपना ये अजगर मेरी छूट में…

विशाल रागिनी की तड़प देख के अपने लुंड को उसके छूट पे रगड़ने लगता है..






विशाल के सख्त लुंड की आगे उसकी छूट मनो किसी गुलाब की पंखुडिओ के सामान नाजुक लग रही थी जिसके छुवन से वो खुद खुल जा रही थी और छूट का रास्ता उसके लुंड के लिए खोल दे रही थी..

रागिनी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh और कितना तड़पाएगा दाल दे न अब bête छोड़ अपनी बड़ी माँ को..

विशाल- बड़ी माँ को कैसे छोड़ सकता हु छोड़ा तो गफ या रंडी को जाता है और तुम मेरी गफ हो नहीं फिर बताओ क्या बोलू तुम्हे

रागिनी बहुत hi नाज़ुक इस्थिति में थी जिसे किसी भी हाल में लुंड चाइये था उसके छूट और सब्र नहीं रख सकती थी इसलिए वो तुरंत बोल पड़ती है..

रागिनी- ठीक है बड़ी माँ नहीं गफ नहीं तो रैंड hi बना के छोड़ इस लुंड के लिए तो मैं रंडी भी बन जाऊ..

विशाल- ठीक है फिर मेरी रंडी अब ले चुदाई के मजे

और फिर विशाल अपना लुंड रागिनी के छूट में पेल देता hai..halaki की रागिनी के छूट में जीतनेय लुंड गए थे उस हिसाब से उसकी छूट पूरी खुली हुई hi थी लेकिन विशाल के लुंड के हिसाब से उसके छूट का खुलना अभी बाकि था उसकी गालिया अब भी बहुत तंग थी जिसे विशाल के धक्के से hi तोडा जा सकता था






लुंड रागिनी के तंग छूट में जाते hi एक समय के बाद रुक जाती है मनो आगे और जाने की जगह hi नाह ो लेकिन विशाल एक और धक्का मरता है और उसका लुंड पूरा फाड़ते हुवे रागिनी के छूट के अंदर प्रवेश कर जाता है…

रागिनी के छूट में लुंड के पूरा समाते hi उसे एक तेज़ जलन होती है मनो गरम सरिया छूट के रस्ते उसके पेट में चला गया हो वो पुरे शरीर का जोर लगा के एक तेज़ चीख मरती है






रागिनी इतने जोर से चीख मरती है की वह दूसरे कमरे में चुप कर उनका रोमांच देखता इंसान बहार निकल अत है और ताली बजाते हुवे कहता है..

वह लगता है ज्यादा hi अंदर तक घुस गया है bête तू अपनी बड़ी माँ के…

आवाज़ सुनते hi विशाल के कण खड़े हो जाते है वो नज़र फेर के देखता है तो वहां दिनेश बिलकुल नंगा खड़ा अपनी लुंड मसलते हुवे उन्हें hi देख रहा था..






विशाल- बड़े पापा आप???? आप तो सहर गए थे लेकिन विशाल रागिनी के छूट में धक्के मरना नहीं रोकता और लगातार कभी दिनेश तो कभी रागिनी को देखते हुवे दिनेश के सामने hi उसकी बीवी को छोड़ रहा था…

रागिनी- सॉरी bête मैं तेरे ताऊ से कोई बात नहीं छुपाती और इन्होने hi खा था तुझे यहां ला के गुलाब जामुन खिलौ…






दिनेश- तू अभी अपने गुलाब जामुन पे ध्यान दे bête अचे से छोड़ इस रंडी को बहुत खुजली है इसके छूट में जो जाती नहीं छोड़ मादरचोद चिनार को वैसे भी इसे कोड़ने से ज्यादा मज़ा इसे किसी और से चुड़ते देखने में आता है और फिर दिनेश वही पास के सोफे पे बैठ के अपना लुंड हिलने लग जाता है…
 
अपडेट- 72



इधर आप सभी रागिनी और अलका के चुदाई में इतना खो गए की ये भूल hi गए की विशाल घर से आते आते अलका के छूट की आग भड़का के आ गया था और अब अलका उस आग को कैसे शांत करती है उसके लिए हमे खेत से सीधा घर पे चलना होगा तो चलिए अभी के लिए हम सीधा अलका के बैडरूम में चलते है और देखते है वो क्या कर रही है....

विशाल और रागिनी के चले जाने के बाद सरे अपने अपने कमरों में चले जाते है. उधर विशाल जाते जाते अलका की छूट में आग भड़का के चला गया था और वो आग अभी भी अलका के छूट में लगी होती है, हलाकि उसका बीटा विशाल उसके छूट को अचे से चूस के उसका सारा रास पि गया था लेकिन उसकी छूट अभी भी शांत नहीं हुई थी.

रात को एक 1 बजे होंगे और घर में सब सो चुके थे

अलका भी बीएड पर लम्बी लेती हुई थी, और वो इधर उधर करवट लेते हुवे अपने बढ़ते बेचैनी को दबाने की कोशिश करने लग जाती है. पर छूट में भड़कती आग से उसे नींद खा आने वाली थी ये आग उसे सोने नहीं दे रही थी, उसका एक हाथ बार बार उसकी छूट पर जा रहा था.

कामर्स से लबालब अलका के छूट और उस से बेहटा काम रास उसके छूट से निकल के चादर पे फैलने लग जाता है…









बून्द बून्द करते हुवे उसके छूट का पैनिक हूत से टपक रहा था जिसे देख के किसी के भी जुबान में पानी आ jaye…bhadkte आग के हाथो मजबूर हो के अलका अपनी दोनों टंगे खोल कर अपने हाथ से अपनी छूट को मसल रही थी. पर इससे उसे खान चैन मिलने वाला था. क्योकि उसकी छूट तो एक लम्बा और मोटा लुंड मांग रही थी. आखिर में अलका बेचैन हो कर रूम से बहार अपने आखरी शिकार रघु के पास जाने लगती hai,aaj रात रघु hi उसका सहारा बन सकता था घर की साडी लाइट्स ऑफ थे और हॉल में भी ठीक थक अँधेरा था. बेचैन अलका बिना शोर मचाये अपने कदम रघु के कमरे की तरफ बढ़ने लग जाती है…

जब रंडी को कोई लुंड नहीं मिलता, तोह घर के छोटे बचे का लुंड लेने से भी कोई परहेज नहीं होता है. अलका अभी बहार निकली के कुछ कदम hi बढाती है की उसे कामिनी के रूम में से कुछ आवाजे सुनाई देती है. अलका को थोड़ा सा शक तो होता है, और वो ये आवाज़ को अचे से पहचानती भी थी इसलिए वो वो आवाज की तरफ चल पड़ती है. थोड़ी आगे जाने के बाद आवाजे पहले से तेज हो जाती है और बी पहले से भी साफ़ सुनाई देने लग जाती है..

अभी उसने कुछ कदम hi बढ़ाये थे की उसे दीवार पे दो परछाई नजर आती है. अलका थोड़ी और आगे जाती है, और देखती है. की रघु कामिनी को दिवार से लगा कर उसके होठो को चूस रहा था. ये देखते hi अलका की धड़कने बड़ी तेज़ी से बढ़ने लगती है…. उसका हाथ अपने आप अपनी छूट पर चला जाता है और उसे मसलने लग जाती है….. अलका को अचे से पता था की रागिनी एक नंबर की चूड़ाकड है और उसका बीटा भी उसे चढ़ना चाहता है लेकिन ये दोनों ऑलरेडी एक दूसरे की चुदाई कर रहे है ये नहीं पता था.. अलका अपने छूट को मसलते हुवे चुपचाप उनका काम क्रीड़ा देख रही थी…

अलका देखती है की रघु कुछ तो इशारा ककरता है जिसे देख कामिनी निचे जमीं पे बैठ जाती है और रघु ला लुंड मुँह में भर लेती है…

कामिनी अपने bête का लुंड बड़े hi इत्मीनान से चूस रही थी क्युकी आज उसे पकड़ने वाला को नहीं था घर के सरे मर्द बहार थे और विशाल खेतो पेट है उसके बड़ी भाभी के साथ…

अलका भी दोनों माँ bête के ब्लोजॉब को देख अपने bête और खुद के चुदाई को याद करते हुवे अपने छूट को मसलने लगती है….

लेकिन वासना के आग में जल रही अलका से और ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं होता और उसके छूट को किसी भी हाल में लुंड चाइये hi था और वैसे भी उसकी सचाई न कामिनी से छुपी थीं ा रघु से इसलिए वो इसी बहाने दोनों को रेंज हाथ पकड़ के अपने आगे के रस्ते को बिलकुल साफ़ कर लेने की सोचती है और फिर दरवाजे को खोल के सिद्ध कमरे में घुस जाती है…









अलका- हाय कामो आज कमल नहीं मिला तो bête के लुंड को hi निगलने लग गयी तू….

कामिनी- अलका को ऐसे अचानक देख के चौक जाती है और वही हाल रघु का भी होने लगा था..

कामिनी- अलका तू अभी तक जग रही है???

अलका- जगती न तो कैसे पता चल पता तुम दोनों का ये खेल..

कामिनी- अब तुझसे क्या छुपाना अलका तुझे तो पता hi है मुझसे मेरे छूट की आग बर्दाश्त नहीं होती…

अलका- हाँ ये तो है और वही हाल मेरा भी हो रहा है आज रात पर खुद को मेरी बहन बोलने वाली ननद अकेले अकेले hi सवाद ले रही है मेरा ख्याल नहीं आया ?

कामिनी – अलका तू भी ले ले सवाद, एक नए और जवान लुंड का जो तेरे पति के भांजे का hi है… तुझे कोनसा मन नहीं करता.

इतना कह के कामिनी पहले अलका के गाउन में हाथ दाल के उसके गीले पंतय को सहलाती है फिर ऊपर से उसके गाउन को खींच के उसके चुचिओ को निकल के उसके होठो को चूमने लग जाती है….









अलका – uuuuuuuuufffffffffff कम्मो क्या कर रही है तेरा बीटा देख रहा है कुट्टी…

कामिनी- देखने दे उसे भी तो पता चले उसकी ममी उसके माँ से भी ज्यादा गरम औरत है जिसका छूट जाने कब से एक लुंड के लिए लार टपका रहा है… और फिर कामिनी अलका के होठो को चूसते चूसते उसे सोफे पे धकेल देती है जहां रघु नंगा बैठ के उन दोनों रंडियो के चुम्मा छाती एन्जॉय कर रहा था…









अलका भी अब सोफे पे गिर जाने से उसकी तंग ीक पल को ऊपर उठ जाती है जिस से उसका गाउन उसके कमर तक चढ़ जाता है जिसका फायदा उठाते हुवे कामिनी अलका के छूट को पंतय के ऊपर से hi अलका क ेरस टपकते छूट पे हाथ चलने लग जाती है..









अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmaaaaaaaaaaaa

रघु भी अलका जैसी खूबसूरत रंडी को देख कर कामिनी को भूल जाता है. रघु अलका के चूचिया जो की उसके गाउन से बहार निकल चुकी थी को मुट्ठी में भर के उसे मसलने लग जाता है और जैसे hi अलका को अपने चुचिओ पर रघु के हाथ का एहसास हटा है वो भी अपनी डॉन चुचिओ को अपने गाउन से निकल के रघु को सौंप देती है…

रघु समझ जाता है, की अलका के अंदर पूरी आग लगी हुई है. रघु पीछे से अलका को अपनी बाँहों में भर लेता है. और अलका के दोनों बूब्स अपने हाथो के पकड़ कर जोर जोर से मसलने लग जाता है. रघु का लुंड अलका के पीठ पे ठोककर मरने लग गया था.









लुंड महसूस होते hi अलका के छूट में और ज्यादा कुलबुलाहट जग जाती है, उधर कामिनी अलका के चुचिओ को चूसते हुवे रघु के लुंड को मुट्ठी में भर के उसके चमड़े को आगे पीछे कर रही थी और जिसे देख अलका भी अपने हाथ को आगे बढ़ा के रघु के लुंड को अपने मुट्ठी में भर लेती है मनो वो कामिनी के हाथो से उसी के bête का लुंड चीन रही हो…

आज रघु की तो जैसे लॉटरी लग चुकी थी. क्योकि अलका और कामिनी जैसी दो गदराये बदन की गरम औरत जो आज अपने पुरे ताव में थी वो उसके लुंड को खुद अपने हाथो में भर भर के हिला रही थी और अपनी छूट और गांड दे रही थी. तभी कामिनी अलका के चुचिओ को छोड़ कर बोली.

कामिनी – अलका तेरे रूम में कोण है ?

अलका – कोई भी नहीं है कम्मो विशाल तो बड़ी दीदी के साथ खेत पे गया है.

कामिनी –फिर तेरे कमरे में hi चलते है, आगे का काम वहीं करते है यह किसी ने देख लिए तो गड़बड़ हो जाएगी.

अलका – हाँ कह तो तू सही रही है यहां सेफ नहीं है और इतना कह के वो रघु का लुंड चोर के सोफे से उठ कड़ी होती है

सोफे से उठते पता लगता है की दोनों माँ bête ने उसे कब नंगा कर दिया उसे खुद भी पता नहीं चला था या फिर ये उसके अंदर की आग थी जो उसके साथ हो रह ीक के बाद एक हमले भी वो देख के भी देख नहीं पा रही थी…

अलका का नंगा रूप देख के कामिनी से बर्दाश्त नहीं होता और वो अलका के गलो को पकड़ के उसके होठो पे अपने होठ रख के चूमने लगती है..









दोनों को किसी नागिन की तरह एक दूसरे गूथते देख रघु के लुंड में भी तेज़ अकड़न होने लगी थी उसे तो आज खजान मिल गया था पर इस खजाने को लुटे कैसे वो उसे पता खा tha…undono को चिपकता देख रघु भी आगे बढ़ते हुवे उनके बिच में घुस जाता है और अलका के गांड को पंजे से दबोच कर मसलने लग जाता है…









तो जवाब में अलका भी उसके लोड को मुट्ठी में भर के मसलने लगती है…

कामिनी – चल अब यहां से षाले है वर्ण मुसीबत हो जाएगी किसी मेहमान ने अपने hi bête से चुदाई करते देख लिया तो.

रघु – हाँ ममी अब तो मुझसे भी नहीं रहा जा रहा है आज तुम दोनों की ऐसी चुदाई करूँगा की छूट फाड़ के रख दूंगा.

ये सुनते hi अलका गर्मी से भरा एक लम्बा साँस लेते है. और अपने चत्तारो को जोर से रघु के लुंड पर मरती हुई कहती है.

अलका – अह्ह्ह बेटे आज तो मजा hi आ जायेगा.

रघु अलका के नंगे बदन पे हाथ फेरते हुवे उसके चुत्तर और बूब्स मसल कर बोलै – सवाद तोह आज मैं दूंगा तुम दोनों को मेरी जान.

कामिनी – चल अलका, वर्ण मेरा बीटा रघु यही पर हम दोनों को घोड़ी बना के छोड़ने लग जायेगा.

अलका भी रघु को किश करते हुवे साथ hi उसके लोडे को मसलते हुवे कहती है









अलका– कोई बात नहीं आज यहीं पर छोड़ लेने दो. जो होगा देखा जायेगा. छूट मारनी है तो हिम्मत भी दिखने दे अपने bête को

अलका – आह्हः आज तोह तेरी माँ और ममी दोनों अपने घर के अगन में hi छुड़ेगी.

ये कहते hi अलका अपनी एक तंग उठा के रागिनी के कमर पे रख देती है और अपनी गांड पीछे निकल के घोड़ी बन जाती है.

इतनी आग रघु ने पहली बार देखि थी, उसने झट से अपने लुंड को पीछे से अलका की छूट में सेट करके उसपे रगड़ते हुवे एक जोरदार ढके से अपना पूरा लुंड उसकी छूट में दाल देता है.









कामिनी भी अलका के होठो को चूसते हुवे उसके छूट को सहलाने लग जाती है और पीछे से उसका बीटा रघु उसे भूल कर उसकी भाभी अलका के छूट को छोड़ने में खो जाता है…

लुंड अंदर जाते hi अलका को एक सह्न्ति मिलने लगती है. अलका अपने दोनों हाथो से कामिनी के कमर को कस कर पकड़ लेती है और फिर कामिनी मस्त हो कर बोली.

कामिनी – रघु दाल इस रंडी की छूट में अपना लुंड जोर जोर से छोड़ इस चिनार को की इसकी साडी आग निकल शांत हो जाये

रघु ये सुन कर जोश में आ जाता है और वो अब जोर जोर से ढके मर कर अलका की छूट को छोड़ने लग जाता है. अलका पूरी गरम हो जाती है, और वो अपने होंठो को अपने होंठो में दबा कर जोर जोर से कामिनी के चुचिओ को मसल रही थी.

रघु – ममी इतनी आग है तेरे में पहले बोलती तो मैं कब का तुझे घोड़ी बना के छोड़ देता uuuuuuuuuuuuufffffffffffffffff

अलका – क्या काउ bête जैसे जैसे उम्र बढ़ रही है इसमें आग भी बढ़ने लगी है पर कोई बहनचोद मिलता hi नहीं जो ऐसा चोदे की मेरी तसल्ली करवा दे

अलका के मुँह से गालिया सुन कर रघु का जोश और ज्यादा बढ़ गया और वो उसके चत्तारो को कस कर पकड़ कर ढके मरने लग गया.

रघु – कोई बात नहीं ममी अब देख मैं तेरी आग कैसे शांत करता हु .

अलका भी पुरे जोश में अपने चुत्तर पीछे मर मर कर रघु का लुंड अपनी छूट में ले रही थी. अलका लुंड की एक एक ढके का पूरा मजा ले रही थी. तभी बहार से किसी के खस्ने की आवाज आती है.

कामिनी – चलो अब रूम में चलते है, खिन कोई आ ना जाये.

फिर कामिनी अलका के सरे कपडे उठा कर कमर में चली जाती है. अलका भी अपनी गाउन अपने शरीर में ऊपर से दाल के वहां से कमरे की तरफ बढ़ने लगती है

अलका अंदर जाते hi सलवार और पंतय उतर कर बीएड पर अपनी टंगे उठा कर लत जाती है. उठी हुई टंगे देख कर कामिनी पहले दरवाजे को बंद करती है और फिर वो घोड़ी बन के अलका के छूट पे अपनी गरम सांसे चोरते हुवे उसके छूट के होठो को जुबान से कहते लगती है









रघु के सामने एक तरफ अलका अपनी टंगे खोल के लेती थी जिसे उसी की माँ कामिनी चूस रही थी तो दूसरी तरफ उसकी माँ अलका के छूट को चाटने के लिए जैसे झुकी थी वैसे में उसकी बड़ी गांड रघु के सामने hi था जिसे देख रघु बेकाबू होने लगता है और अलका के छूट के पानी से सना लुंड अपनी माँ के छूट में पीछे से उतर देता है..

कामिनी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh sssssshhhhhhhhhhhhhhhhhhh

जहां एक और अलका की तेज़ सांसे उसके चुचिओ को ऊपर निचे करते हुवे उफान मार रही थी और पीछे से रघु अपनी माँ के छूट में लगातार धक्के लगाए जा रहा था..









वासना की आग में जल रही अलका जो लुंड लेने का एक मौका नहीं चोरटी और जो लुंड लेने के लिए hi कमरे से निकली थी आज उसे अपनी चुदाई से ज्यादा मजा इन माँ बेटो की चुदाई को देखने में आने लगा tha….isliye वो बीएड से उठ के सामने पड़े कुर्सी पे बैठ जाती है और उनकी चुदाई को देखते हुवे अपनी छूट मसलने लग जाती है…









अलका को छूट मसलता देख कामिनी उसे अपनी बिच वाली ऊँगली दिखा के चिढ़ाते हुवे कहती है

कामिनी- साली कुटिया यह लुंड पड़ा है और तू उंगलियों से खुद को शांत कर रही है

पर अलका उसे कैसे समझाये की इन दो माँ बेटो को चुदाई करता देख उसे उसके bête विशाल की कमी खाल रही है जो होता तो आज अलका को ऐसा छोड़ता की उसके छूट के एक एक बून्द को निचोड़ डालता पर कामिनी के ऊँगली दिखने से अलका भी खान पीछे रहने वाली थी वो अपनी छूट को मसलना चोर के बीएड पे चढ़ जाती है और अपनी छूट पे कामिनी के मुँह को दबाते हुवे कहती है..









अलका – हाय कम्मो वहां कुछ दिनों बाद उधर तेरी बेटी तेरे दामाद से चुद रही होगी और तू यहां अपने bête से चुड़ते हुवे उसके ममी के छूट को चूस रही hai…kahi अपने दामाद के लुंड पे भी नज़र मत दाल देना और ये रघु बदले में तेरी बेटी को hi छोड़ डेल

कामिनी – हाय अलका ऐसा मत बोल निम्मो बहुत सीधी है. वो हमारे जैसी नहीं है जिसके जवानी में इतनी उबाल मार रही हो की भाई से hi छोड़ने लग जाये…

अलका – वो ऐसी नहीं है पर तेरा ये बीटा तो हरामी है जो अपनी माँ और ममी को छोड़ रहा है.

और अलका एक बार फिर से कामिनी को एक डैम खिंच कर उसे चूसने लग जाती है.









दूसरी साइड रघु का लुंड अब जवाब देने लग जाता hai,wo तेज़ तेज़ लुंड पेलते हुवे बोलता है

रघु- माँ मेरा हो गया मेरा निकलने वाला है…

जवाब में कामिनी भी वही दोहराती है- bête मेरा भी हो गया मैं भी आने लगी हु…

जिसे सुन अलका जल्दी से कामिनी के छूट की तरफ बढ़ने लगती है और उसके लुंड की पिचकारी अलका के मुँह पे पड़ने लगता है..









जिसका स्वागत अलका अपने मुँह को खोल के करने लगती है… उधर रघु के लुंड का सारा पानी कामिनी की छूट के ऊपर और कुछ अलका के मुँह में निकल जाता है. और फिर रघु वापस से अपना लुंड अपनी माँ कामिनी के छूट में पेल देता है

रघु के लुंड के पानी की गरमी की वजह से अलका और ज्यादा गरम हो जाती है, और वो कमीं क जांघो को कैसा कर भींच लेती है और कामिनी के गांड के छेद को चूसने लग जाती है..









कामिनी जिसके गांड और जांघो को अलका ने इस क़दर चूसा था की अगले hi पल कामिनी के छूट का भी फव्वारा फुट पड़ता है और वो रघु के लुंड से उठ जाती है और अपनी छूट अलका के मुँह पे टिका देती है लुंड के छूट से निकलते hi कामिनी के छूट से उसके और उसके bête के वीर्य की एक धार निकल रही थी जो सीधे अलका के मुँह में गिरने लगती है…







कामिनी की छूट की गरमी तो अपने bête के लुंड के पानी से शांत हो जाती है पर अलका का अभी हुआ नहीं था…

चुदाई का पहला डोर समाप्त हो चुक्का था अलका को अब अपने छूट की आग बुझानी थी इसलिए वो रघु के लुंड को चूसने और खड़ा करने की कोशिश करने लगती है पर उसके लुंड में अब जान नहीं बचा था वो मुरझा के मारा पड़ा था जिसे देख अलका नीरस हो जाती hai..aur उम्मीद भरे नज़रो से रघु की और देखती है

अलका के नीरस चेहरे को देख रघु उसे इशारे में बताता है की ये उसका तीसरा राउंड था कामिनी के साथ और बी वो कुछ देर तक नहीं उठेगा सईद

फिर अलका अपने कपडे दाल कर अपने रूम में सोने के लिए चली जाती है. और रघु वापस अपने रूम में चला जाता है. चुदाई के बाद कामिनी भी आराम की नींद में सो जाती है.

पर अलका की बेचैनी अभी शांत नहीं हुई थी लेकिन उसके आग को शांत करने वाला कोई मर्द घर में था भी नहीं जिसके आगे जा के वो अपनी टंगे खोल सके और बेचैनी में अलका अपनी छूट मलते हुवे शावर लेने चली जाती है और फिर वापस आ कर सोने लग जाती है….

 
अपडेट- 73ा (एक और लम्बी रात)

अपने कमरे में आ के भी अलका के आँखों से नींद गायब थी छूट की तड़प उसे सोने नहीं दे रही थी… वैसे आज पुरे दिन उसे किसी ने जैम कर छोड़ा है और वो उस से तसल्ली से छुड़वाई भी है वॉक इस से चूड़ी है ये हम जल्दी hi जान जायेंगे लेकिन विशाल के द्वारा लगाए आग से अलका की छूट के डेन फिर से फड़फड़ाने लगे the..alka बिस्तर पे लेते लेते अपने छूट को अपने hi हाथो से रगड़ने लगती है..





उसके छूट में जल रहे आग से उसके होठ सूखने लगे थे जिसे वो बार बार अपने जीभ से चाट कर गिला कर रही थी अगर विशाल होता तो वो इसके ऊपर और निचे दोनों होठो को अपनी पानी से सराबोर कर देता पर आज रात इस रंडी के नसीब में लुंड नहीं है सईद इसलिए वो मज़बूरी में शावर लेने का सोच कर अपने बाथरूम में जा के एक ठंडा शावर लेती है और फिर वापस बिस्तर पर आ के नंगी hi एक बेडशीट ओढ़ के सोने लग जाती है..

अभी अलका को बड़ी मुश्किल से आंख लगी hi थी की उसके कमरे का दरवाजा खुलता है जिसकी खबर नींद के आगोश में जा चुकी अलका को बिलकुल भी नहीं लगता… सामने खड़ा सख्स अपने तने हुवे लुंड को अलका के होठो पे रगड़ने लगता है…






अलका के होठो पे लुंड के कठोर दबाव और नाक में उस से निकल रहे पानी के स्मेल ने अलका के नींद को तोड़ देता है अलका जागती है तो पति है रघु सामने खड़ा हो के उसके होठो पे अपना लुंड रगड़ रहा है..

अलका- तू सोया नहीं अभी तक???

रघु- आपको चोदे बिना नींद खा आने वाली है ममी..

अलका- नींद तो मुझे भी नहीं आरही bête इस छूट की आग मुझे सोने नहीं दे रही…

और फिर अलका रघु के लुंड को मुँह में भर के चूसने लग जाती है और पुरे शिद्दत से चुस्की उसे खड़ा कर देती है जो उसके छूट की मरम्मत कर sake..alka लुंड के लिए इतना तड़पने लगी थी की वो बिना समाय गवाए खुद लेट इ अपनी टंगे खोल लेती है और रघु के लुंड को पकड़ के कहती है

अलका- चल अब जल्दी से लुंड दाल के छोड़ अपनी ममी को

रघु भी अपने लुंड को अलका के छूट के मुहाने पे रख के उसपे ऊपर निचे रगड़ने लगता है…






swedish letters on english keyboard

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh और मत तड़पा bête मेरी छूट मरे जा रही हाईल ुण्ड के लिए दाल और छोड़ अपनी चिनार ममी को मादरचोद…

और फिर रघु अलका के चुचिओ को पकड़ क ीक तेज़ धक्का मरता है जिस से उसके पानी छोड़ते छूट में रघु का लुंड सरसराता हुआ घुस जाता है..

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh अब तेज़ तेज़ धक्के मर और जरा जोर लगा uuuuuuuuuuuuuffffffffff

रघु ने अभी एक दो धक्के hi लगाए होंगे की उसके कमरे के बहार ऋचा खड़ी हो के दूर नॉक कर रही होती है

ऋचा- चची चची आप अंदर हो???

अलका को आज पहली बार अपने बचो के आवाज़ बिलकुल पसंद नहीं आयी थी वो जल्दी से रघु को धकेल के खुद से अलग करती है और खुद गाउन दाल के बहार निकलती है

अलका- हाँ bête बताओ क्या बात है

ऋचा- चची अपने तो खा था आज आप मेरे साथ so-oge आप इधर सो रहे हो मुझे अकेले दर लगने लगा था जब आंख खुली देखो मुझे पसीना भी आ रहा है..

ऋचा सचमुच पसीने में भीगी थी अलका उसे ऐसे देख उसपे तरस खाने लग जाती है और उसे गले लगा कर केटी है

अलका- bête मैं तुम्हारे पास hi थी जब तुम सो गयी तब मैं आयी हु ताकि तुम अचे से सो सको कोई नहीं मैं अपनी रानी बेटी के पास से अब नहीं हटूंगी इतना कह के व ऋचा को उसके कमरे में ले जाने लगती है क्युकी उसके कमरे में तो रघु था..

और फिर से इ अलका की छूट प्यासी hi रह गयी ये प्यास तब नहीं भड़कती यदि रघु उसे न छेड़ता लेकिन लुंड आधे में दाल के निकल लेना जैसे प्यासे से पानी चीन लेना या उस से बी ज्यादा सईद पर अलका भी मजबूर थी वॉक अरे तो क्या???

अलका से अपनी छूट की आग बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं हो रही थी उसे ऐसा लगने लगा था मनो सैकड़ो सुइया एक साथ उसके छूट में चुभोये जा रहा हो और वो उनसे मिले दर्द से तड़प रही थी अलका अपने एक तंग से दूसरे को मसलते हुवे खुद पे काबू पानी की कोशिश करने लग जाती और ऋचा के पास होने से वो अपने छूट को सेहला तक नहीं सकती थी ….अब इस तड़प को उसे कब तक सहना होगा ये तो वक़्त hi बता सकता है तब तक के लिए हम षाले है रागिनी के पास उसके फार्म पे….

विशाल ने अभी पहला धक्का मारा hi था की अंदर से उसका ताऊ टल्ली बजाते हुवे निकलता है… जिस से विशाल हैरान हो जाता है की उसके ताऊ के मौजूदगी में पिछले घंटे भर से वो उसकी बीवी को चूस रहा था लेकिन दिनेश ने कुछ भी नहीं खा लेकिन जब रागिनी ने बताया की ये उन्दोनो का hi प्लान था यानि रागिनी ने दिनेश को सब बता रखा था और दिनेश को भी इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी की उसकी बीवी को उसके छोटे भाई का छोटा बीटा छोड़ने की बात कर रहा था और बात करते करते आज छोड़ने भी लगा था…

दिनेश कमरे के अंदर आता है और विशाल एंड रागिनी के तरफ देखते हुवे कहता है…

दिनेश- तू अभी अपने गुलाब जामुन पे ध्यान दे bête अचे से छोड़ इस रंडी को बहुत खुजली है इसके छूट में जो जाती नहीं छोड़ मादरचोद चिनार को वैसे भी इसे कोड़ने से ज्यादा मज़ा इसे किसी और से चुड़ते देखने में आता है और फिर दिनेश वही पास के सोफे पे बैठ के अपना लुंड हिलने लग जाता है…

अब सुरु होता है चुदाई का असली तांडव क्युकी अब विशाल को किसी बात का दर नहीं था वो रागिनी के पति के सामने उसे छोड़ कर अपने ताऊ को जलील करने का ाचा मौका बना लिया था.. आज वो रागिनी को इस तरह छोड़ने की थान लेता है की आज के बाद उसे लुंड के नाम पे सिर्फ विशाल का लुंड याद रहे..

विशाल- ाचा किया बड़ी माँ जो तूने ताऊ को सब बता दिया अब मैं बिना डरे तेरी छूट मार सकूंगा…

रागिनी- बताना तो था hi bête पूरी रात तू संभाल पायेगा अपनी बड़ी माँ को उसे दो मर्द लगते है शांत करने के लिए…






विशाल- ऐसी hi गरम औरत मुझे पसंद है बड़ी माँ

दिनेश- की बड़ी माँ बड़ी माँ लगा रखा है इसे इसके नाम से बुला रंडी चिन्नार बोल गालिया दे इतने इज़्ज़त से चुदाई करेगा तो मेरा लुंड भी खड़ा नहीं होने वाला..

रागिनी- तुम्हारा लुंड खड़ा करने के लिए में हु न जी और फिर रागिनी आगे बढ़ के दिनेश के लुंड को पकड़ा लेती है अउ रीचे से विशाल उसे शॉट्स लगाने लगता है..






पर विशाल को इसमें कोई मजा नहीं आता इसलिए वो रागिनी को जांघो से उठा के खुद बीएड पे लेट जाता है और उसे अपने लुंड पे बिठा देता है ये सब उसने इतने तेज़ी से किया किन ा देश को न रागिनी को समझ आता है की क्या हुआ…





रागिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ffffffuuuuuuuucccccccccccckkkkkkkkkkk

दिनेश- वह रागिनी पूरा मजा उठा रही है तू??? जरा जोर जोर से कूद न

रागिनी- इसके आधे लुंड hi मेरे पेट में खलबली मचा रही है पूरा कूद के अंदर ले लिया तो मेरे मुँह से इसका लुंड निकल आएगा…

दिनेश- ाहः तुजे भी तो दमदार लुंड चाइये मेरी चिनार बीवी… अउ इतना कह के दिनेश उठ के अपना लुंड रागिनी के मुँह में दाल देता है….

दिनेश- जरा इसे मुँह में तो भर मेरी जान






रागिनी जैसे hi देंश के लुंड को मुँह में भर्ती है निचे से विशाल एक जो का झटका मरता है जिस से बाकि बचा लुंड भी अंदर घुस जाता है और रागिनी की एक चीख निकल आती है.

रागिनी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh आराम से मादरचोद

विशाल आज पहली बार अपनी बड़ी माँ के मुँह से अपने लिए गेल्या सुन रहा था लेकिन ये तो जैसे इस परिवार का रिवाज था चुदाई में खुल के मज़ा लेने का जिसका बुरा किसी को भी नहीं लगता था उल्टा ये गालिया और अपशब्द hi उनकी ऊर्जा में ईंधन का काम करती थी…

विशाल- आज तो तुझे रंडी की तरह छोडूंगा मेरी जान रागिनी…

रागिनी- तू आलरेडी रंडी की तरह hi छोड़ रहा है मुझे हरामज़ादे..

विशाल- अभी कण मेरी जान अभी तो ये सुरुवात है आज रात भर में तेरी चल न बदल दी तो मेरा भी नाम विशाल नहीं ये जोट ु गांड मटका मटका के चलती है आज इसे फाड़ूंगा साली चिनार….

रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh फाड् देना मेरे राजा छोड़ अपनी बड़ी माँ को तसल्ली करा दे आज मेरी छूट को अपने इस मोठे लोडे से…






जिसे सुन के विशाल जोश में आ जाता है और रागिनी को बीएड पे उल्टा लेता के उसे घोड़ी बना देता हैए ुर पीछे से अपना लुंड उसके छूट में पेल देता hai…dhkka इतना जोरदार था की रागिनी एक hi झटके में जो घोड़ी बानी हुई थी वो बीएड पे गिर जाती है…

रागिनी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh कुत्ते आराम से दाल नहीं सकता क्या कही भागे नहीं जा रग आराम आराम में छोड़ भड़वे..

पर विशाल तो मनो अपने मर्दानगी रागिनी को नहीं बल्कि सामने लुंड हिलता उसके पति दिनेश को दिखाना छह रहा था जो घर की औरतो को भले छोड़ रखा हो लेकिन उसे दिखाना छह रहा था की वो भले घर का बड़ा है लेकिन मर्दानगी में विशाल के सामने वो बहुत छोटा है… और सालो से उसके लुंड से चुड़ते आ रही उसकी बीवी की ये दर्द भरी चीख उस बात का साबुत दे रही थी…






बीएड पे गिरी रागिनी को विशाल उसके बालो से खींच के उठता है और दिनेश को देखते हुवे फिर से जोरदार धक्का उसके छूट में मरने लगता है जिस से बिलख के रागिनी रोने क ओहो जाती है…

रागिनी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh माँ मर गयी मैं थोड़ा धीरे कर bête पुरे बच्चादानी को ठोकर मार रहा है तू uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuufffffffffffffffffff

विशाल- क्यों बड़ी माँ आज तक बड़े पापा का इतना अंदर नहीं गया का???

रागिनी- वो इंसान है तेरी तरह गधा का लुंड नहीं उनके पास

विशाल- और तेरे बाकि यारो में से भी किसी के पास नहीं मिला ऐसा लुंड??






रागिनी- अभी तक इंसानो ने छोड़ा था आज जानवर छोड़ रहा है मुझे

विशाल- जानवर नहीं बड़ी माँ असली मर्द से चुद रही है आज तू अब तक बचो के लुंड से चुद रही थी… सही मायने आज तू असली औरत बानी है साली चिनार कुटिया….

ये सब विशाल दिनेश को सुना रहा था जिसे सुन के दिनेश अपना लुंड मसलते हुवे उनकी चुदाई देख रह था






आज दिनेश अपने hi छोटे भाई के छोटे bête की रंडी बनवा दिया था अपनी बीवी को जो उसके सामने बड़े जोरदार धक्को से रागिनी को छोड़ रहा था और रागिनी भी दर्द से चीखते हुवे विशाल के सामने कुटिया बानी अपनी गांड उठा उठा के चुद रही थी तभी विशाल ने एक जोरदार शॉट और लगा देता है जिस से रागिनी के छूट के अंदर का लावा फुट पड़ता है और उसका शरीर अकड़ने लग जाता है….





लेकिनविशाल रुकने के बजाये उसके रास बहा रहे छूट में और जोर जोर से लुंड पेलने लग जाता है आज रागिनी दिन भर में न जाने कितनी बार अपने छूट का रास बहा चुकी थी और अभी तो पूरी रात बाकि है जाने सुबह होने तक विशाल उसका क्या करने वाला है..

रागिनी के छूट में झनझनाहट होने लग जाती है वो विशाल को अपने हाथ से रुकने को कहती है लेकिन विशाल खान मैंने वाला था वो धक्का जारी रखता है वो छूट में लुंड के साथ अब रागिनी कैग एंड में पहले एक और फिर अपनी दूसरी ऊँगली भी घुसा देता है जिस से दर्द के मरे रागिनी बिलबिला जाती है…






रागिनी- uffffffffffffffffffffff वहां क्यों दाल रहा है सेल मरेगा क्या???

विशाल- हाँ बड़ी माँ इरादा तो यही है छूट तो तेरी सभी ने खोल hi दी है गांड को तो काम से काम मैं खोल दू…..

रागिनी- uuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhh mmmmmmmmmaaaaaaaaaa तेरा लुंड नहीं जा पायेगा इसमें

विशाल- इसलिए तो जगह बना रहा हु मेरी रंडी

पर रागिनी की छूट जो पहले से hi बाह रही थी उसमे इस तरह विशाल के उसके गांड में लुंड पेल देने से रागिनी पूरी पागल होने लगती है






रागिनी की छूट के लिए अब विशाल के एक झटके को भी झेल पाना मुश्किल हो रहा था वाओ दर्द और मदहोशी के मिले जुले मजे में पागल हुवे जा रही थी उसकी मॉनिंग अब चीखो में तब्दील होने लग जाती है और छूट में हो रहे तेज़ संसंहत के वजह से उसकी आंखे रह रह के बंद हो रही थी….





रागिनी जो अभी थोड़ी hi देर पहले पुरे जोश में थी अब गिड़गिड़ाने वाले आवाज़ में विशाल से कहती है..

Ragini-ruk जा bête थोड़ा साँस तो लेने दे मेरी छूट में जलन होने लगी है…

विशाल- पर बड़ी माँ मेरा तो नहीं हुआ है आइए कैसे रुक जाऊ

रागिनी- अरे मैं नहीं ले पा रही हु मेरी छूट में जलन हो रही है..

विशाल- फिर तेरी गांड में डालने दे अगर छूट में जलन होने लगी है..

रागिनी- गांड में नहीं घुसेगा बहुत बड़ा है तेरा लुंड

विशाल- उसके लिए तो जगह बना चुक्का हु

रागिनी- नहीं नहीं गांड तो बिलकुल भी नहीं और छूट भी नहीं चल हैट मुझे जलन हो रही है….

विशाल भी रागिनी की बिगड़ते हाल को देखते हुवे उसे चोर देता है और विशाल के चंगुल से आज़ाद हो के और जैसे hi रागिनी के छूट से विशाल का लुंड निकलता है उसके छूट को बहुत आराम मिलती है मनो गरम सरिया किसी ने निकल लिया हो उसकी छूट पूरी खुल चुकी थी वो अपने भागते सांसो पे काबू पाने की कोशिश करने लग जाती है पर उस बेचारी को ये खा पता था की उसे मिल रहा ये सुच कुछ पल का था याय उन कहे की वो तूफान के आने के पहले किस शांति थी…

विशाल के चंगुल से छूटे hi रागिनी घुटने के बल रेंगती हुई अपने पति की तरफ दो कदम बधाई होगी की विशाल उसके दोनों जांघो के बिच हाथ दाल के उसके कमर को अपने पंजो में फसा लेता है… और रागिनी कुछ समझ पति उस से पहले उसे खींच के अपने गॉड में बिठा लेता है और अपना लुंड उसके गांड में सेट करते हुवे इस से पहले रागिनी कुछ सोचती समझती या उसके शरीर में कोई हरकत हो पति विशाल अपना लुंड रागिनी क गांड में उतर देता है…






रागिनी की अनछुई गांड में एक डैम से विशाल का वायरल लुंड जाने से वो भी उस वक़्त जब वो आलरेडी बेहाल थी मनो रागिनी मौत के मुँह तक पहुंच गयी थी उसकी आंखे बंद हो जाती है उसके गांड से फरफरने जैसी आवाज़ बजने लगी थी और उसका मुँह बस खुला रह जाता है न कोई हरकत न कोई चीख…

अपनी बीवी की ऐसी हालत दिनेश ने कभी पहले नहीं देखा था जैसा हाल विशाल ने पिछले कुछ घंटो में hi कर दिया था जब रागिनी के शरीर से कोई हरकत नहीं मिले पे विशाल उसके पीठ को जोर से कटा है जिस से बेहोश हुई रागिनी होश में आने लगती है और होश में आते hi वो इतना तेज़ चीखती है मनो उसकी आवाज़ दूसरे गाओं के लोगो तक भी चली जाएगी…

रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa mmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaarrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr dddddddddddddaaaaaaaaaaallllllllllllllllaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa hhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaarrrrrrrraaaaaaaaaamiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii






रागिनी की हालत बिलकुल पतली हो चुकी थी और उसकी पलटती आँखे बता रही थी की उसे यमराज के दर्शन करा दिया था विशाल ने वो जोर जोर से हफ्ते हुवे अपने गांड को उस से चुराने की कोशिश कर रही थी लेकिन विशाल के मजबूत पकड़ और उसके अधमरे हालत के वजह से वो बस रोटी हुई अपनी टंगे हिलाते हुवे चटपटा रही थी…

विशाल रागिनी के छूट को थपथपाते हुवे कहता है…

विशाल- पूरा तो अभी डाला भी नहीं है चिनार अभी से तू मरने लगी है जल्दी से अपनी छूट को तैयार कर वर्ण आज तू बहुत रोने वाली है…






रागिनी- uuuuuuhhhhhhhhhh aaaaaaaaaahhhhhh मर डाला तूने मुझे जालिम uuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffff

रागिनी अपनी पूरी टंगे खोल लेती है जिस से उसका लुंड आसानी से अंदर बहार हो सके लेकिन विशाल भी चुदाई के मामले में हैवान था रागिनी जब पेअर फैलाती तो वो उसके दोनों जांघो को पकड़ के चिपकने लग जाता है…

रागिनी की हालत देख दिनेश भी शॉक हो जाता है क्युकी आज तक रागिनी को इस तरह से किसी ने नहीं रौंदा था जैसा अभी शुरू हुवे इस खेल के शुरुवात में hi विशाल ने कर दया था और अभी सुबह होने में बहुत वक़्त था िते में आगे क्या क्या होगा रागिनी के साथ…..

तो बे छॉंट.......
 
अपडेट- 73बी,(एक और लम्बी रात)



रागिनी के दर्द में देख के दिनेश को दर्द भी हो रहा था और मजा भी आने लगा था क्युकी आज तक उसकी बीवी को इस हालत पे पहुंचने वाला कोई नहीं आया था पर कहते है न हर बाप का एक बाप होता है दिनेश और उसकी बीवी रागिनी को वही उन सरे छूट के आशिक़ो का बाप मिल गया था…

रागिनी जो की अब थोड़ा आराम महसूस करने लगी थी की विशाल एक बार फिर से अपने बाकि बचे लुंड को भी उसके गांड में जोर से झटके के साथ उतर देता है,….. और फिर उसे अपने गॉड में उठाये उठाये hi बीएड से उठ के खड़ा हो जाता है….









और रागिनी को अपने बहो में भर के जोर जोर से पाने लुंड पे उछलने लग जाता है…

रागिनी उसके ताक़त पे हैरान थी वो 18-19 साल का लड़का अपने से दोगुनी उम्र से भी जयदा भरे बदन की औरत को अपने गॉड में उठा उठा के अपने लुंड पे पटक रहा था…

रागिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

और फिर रागिनी की छूटे क बार फिर से अपना पानी चोर्ने लग जाती है…








और विशाल के लगातार धक्को के वजह से रागिनी के छूट से निकलता उसका काम रास उसके लुंड पे लगने लग जाता ै जो की लुब्रीकेंट का काम करने लग गया था और जिसके वजह से रागिनी कैग एंड के चारो तरफ झाग बनने लगा था…

रागिनी बेजान सी पड़ी विशाल के लुंड पे झूल गयी थी और फिर चणक से एक बार और उसके शरीर में करंट दौड़ने लग जाता है और वो चीख पड़ती है जब उसके छूट से उसके पेशाब की धार बहने लग जाती है….









उसके पेशाब की धार इतनी मोती थी जैसे कोई मोटा पंप फैट गया हो और वह से पुरे प्रेशर से पानी निकलने लग गया हो और उसका हरामी भतीजा विशाल जिसे पता था की रागिनी की छूट की हाल बहुत खराब हो गयी है जो सईद एक भी धक्का बर्दाश्त न कर पाए वो जान बुझ कर अपना लुंड रागिनी के गांड से निकल के उसके छूट में दाल देता hai..aur हुआ भी वही रागिनी की छूट इतनी सेंसिटिव हो चुकी थी की लुंड के घर्षण मात्रा से वो छटपटाने लग जाती है और दर्द से पागल हो चुकी रागिनी अपने हाथो से अपने चुचिओ को मसलने लग जाती है…









रागिनी अपने चुचिओ को इतना कास के मसलती है मनो उस गुब्बारे में भरा सारा हवा निकल देना छह रही हो…..

रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaa रुक जा bête मर गयी मैं

विशाल- क्यों मेरी रांड अभी तो तूने खा था तुझे दो दो मर्द लगते है मैं अकेले तुझे सम्जभाल नहीं पाउँगा अब क्या हुआ मादरचोद चिनार और उसके पीठ पे जोर से छठा मार देता है जिसकी गूंज कमरे में गूंज उठती है और उतनी hi जोरदार चीख रागिनी के मुँह से भी गूंजती है ये सब दिनेश देख रहा था की आज उसकी बीवी कैसे चीखे मार रही है जो वो खुद कभी नहीं करवा पाया था…









अब विशाल मुट्ठी हुई रागिनी की छूट घुमा के दिनेश की तरफ कर देता है जिस से रागिनी के छत से निकलता उसका कामर्स और पेशाब सीधा दिनेश के चेहरे पे गिरने लग गया tha…aur एक ाम्बी चुदाई के बाद विशाल भी अपना गरम पानी से रागिनी के छूट कप भरने के लिए तैयार था…

विशाल- बड़ी माँ मेरा होने वाला है…

रागिनी- uuuuuuuuuuuffffffffffffffffffff आजा मेरे मुँह में गिरा अपना पानी जरा स्वाद चाखू तेरे पानी का मैं और फिर रागिनी अगले hi पल घुटने के बाम यह खोल के बैठ जाती है और विशाल भी अपना लुंड मसलने लग जाता है…









ये सब वही बैठा दिनेश देख रहा था लेकिन इस बात की फ़िक्र न विशाल को थीं ा रागिनी को वो दोनों बिना किसी दर और शर्म के चुदाई का खुल के मजा ले रहे the….aur फिर देखते hi देखते विशाल का लुंड अपना लावा रागिनी के मुँह में भरने लग जाता है….









रागिनी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh कितना गरम है रे तेरा ये पानी uuuuuuuuuuffffffffffffff जितना दमदार लुंड है उतना hi गधा और स्वादिष्ट पानी… देख रहे हो दिनेश अपने भतीजे के लुंड की ताक़त तुम्हारी बीवी को हिला के रख दिया जो तुम से आज तक नहीं हो पाया uuuuuuuufffffffffffffff

दिनेश अपनी बीवी के रणदीपाने को गौर से देख रहा था लेकिन हद तो तब होती है जब रागिनी विशाल का लुंड चुस्ती है और चूसते चूसते उसके पानी और थूक का मिश्रण अपने मुँह से अपने पति दिनेश के मुँह में उगल देती है…









ये विशाल के लिए बिक्लुल अजीब और नया था उसकी बड़ी माँ उसके लुंड का पानी अपने थूक में मिला के उसके बड़े पापा के मुँह में उगल रही थी जिसे वो बिना किसी विरोध के मुँह में ले ले रहा tha….udhr दूसरी तरफ रागिनी के छूट से भी लगातार पेशाब और उसके छूट का सफ़ेद गधा पानी बह रहा था जिसे रागिनी दिनेश के मुँह पे रख के अपनी गांड हिलने लगती है और दिनेश भी उसे चाटने की कोशिश करता है लेकिन उसमे एक हिचकिचाहट थी जिसे विशाल उसका सर पकड़ के रागिनी के छूट से सत्ता देता है…

विशाल- चाट लो बड़े पापा आप hi के बीवी के म्हणत का फल है एयर उसके सर को रागिनी के छूट पे दबा देता है…









रागिनी के छूट से निकलता उसका कामर्स दिनेश के मुँह को भी सफ़ेद कर देता है और दिनेश किसी भड़वे की तरह उस पानी का स्वाद चख रहा था….

चुदाई का पहला राउंड समापत हो चुक्का था रागिनी बहुत जोर से हफ्ते हुवे सोफे पे बैठ जाती hai….aur अपने गांड और छूट को छूटे हुवे उसका मुआयना लेती है तो पति है की उसका नक्शा बिलकुल बदल चुक्का था ो फ़ौरन घोड़ी बन के दिनेश की तरफ अपनी गांड कर के कहती है..









रागिनी- uuuuuuuuuufffffffffffff दिनेश देखो क्या हाल किया इसने तुम्हारे बीवी का वो भी तुम्हारे सामने पूरा फाड़ के रख दिया मेरी छूट और मेरी गांड दोनों को hhhhhhhhhhhhaaaaaaaayyyyyyyyeeeeeeeeeeeeeeeee

दिनेश भी देखता है की उसकी बीवी रागिनी के छेद अब पहले जैसा नहीं रहा बल्कि बिलकुल खुल चुक्का है छूट का भोसड़ा बन चुक्का था और गांड का गोदाम इतना जबरदस्त छोड़ा था रागिनी को विशाल ने…

तीनो सोफे पे नंगे hi बैठे थे जहां दोनों ताऊ भतीजा अगल बगल तो आज रात की रंडी बड़ी माँ उनके बिच बैठी थी..









विशाल- बड़ी माँ क्या चीज हो तुम कसम से मजा hi आ गया पर मन नहीं भरा है मेरा….

रागिनी- पूरा फाड़ के रख दिया फिर भी मन नहीं भरा तेरा अब और क्या चाहता है…

विशाल- आज पूरी रात तुझे छोड़ना चाहता हु मेरी रांड और वैसे भी अभी तो 1 भी नहीं बजा है सुबह होने तक क्यों बड़े पापा??

दिनेश- हाँ हाँ क्यों नहीं पूरी रात छोड़ इस रंडी को इसमें बहुत गर्मी है अभी तैयार हो जाएगी दोबारा से…

रागिनी- नहीं नहीं अब मेरे में हिम्मत नहीं है इसने बहुत बुरी तरह से रौंदा है मुझे जान निकल दी meri…ab और जान नहीं बची है न मुझमे न मेरे छूट में और इतना कह के रागिनी उठ के बाथरूम जाने लगती है….









रागिनी बाथरूम में जा के खुद को साफ़ कर रही थी और चेहरे पे पानी मरते हुवे खुद को फ्रेश करने लगती है उधर बहार कमरे में बैठा विशाल और दिनेश के बिच एक ावक्वर्ड ख़ामोशी छायी हुई थी जिस कारन विशाल वहां से उठते हुवे रागिनी के पीछे पीछे बाथरूम की तरफ चल देता है…

अभी विशाल बाथरूम के दरवाजे पे पंहुचा hi था की उसे कुछ वैसा दीखता है जो उसकी धड़कने बढ़ा देती है…









दरवाजे के पीछे लटका ये पर्पल पिंक कलर की ब्रा… ये ब्रा को पहचानने में विशाल को जरा भी वक़्त नहीं लगता क्युकी ये ब्रा किसी और की नहीं बल्कि उसकी माँ अलका किट hi… जो आज सुबह अलका नहाने के बाद पहनी थी और उसके बाद वो घर से बहार कुछ काम का कह के निकल गयी थी विशाल उस ब्रा को हाथ में छू के देखता है और उसमे से आती उसके माँ के बदन की कामुक सुगंध उसे माधीश करने लग जाता है उसके लुंड में अकड़न आने लगती है और उसका हाथ खुद hi अपने लुंड पे चला जाता है लेकिन उसपे बिजली गिरना अभी बाकि था क्युकी जैसे hi उसकी नज़र वाशबेसिन के तप पे जाती है जहां उसकी माँ अलका की पंतय लटके हुवे था..









विशाल वाश बेसिन की तरफ जा के देखता है तो पता है ये पंतय काफी गीली थी जिसमे से अलका का कामर्स की सुगंध आ रही thi…vishal क ये समझते जरा भी वक़्त नहीं लगता की आज उसकी माँ अलका आज पुरे दिन यही थी और किसी ने उसे बजाय है बैडरूम से बाथरूम तक लेकिन कौन???









अलका के सफ़ेद काम रास को देख विशाल से रुका नहीं जाता और वो उसपे अपनी जीभ फेरते हुवे चाटने लगता है और अपने hi माँ के छूट का सफ़ेद पानी पिटे hi विशाल के लुंड में एक बार फिर से जान आ जाता है.. उधर रागिनी भी विशाल की हरकते अपने तिरछी निगाहो से देख रही थी…

रागिनी- क्या हुआ विशाल ??

विशाल- कुछ नहीं बड़ी माँ मुझे सुसु करना था

रागिनी- तो कर ले और इतना बोलके रागिनी वहां से निकल के हॉल में आ जाती है जहां दिनेश बैठा उसका इंतजार कर रहा था…

और फिर थोड़ी hi देर में विशाल भी बाथरूम से बहार आने लगता है जहां वो देखता है की रागिनी और दिनेश कुछ फुसफुसा कर बाटे कर रहे the..vishal भी जा के उनके बगल में बैठ जाता हाउ..









रागिनी एक बार फिर से दोनों के बिच में नंगी बैठी थी और दिनेश उसके जांघो को तो कभी चुचिओ को सेहला रहा tha..ragini भी अपनी टंगे फैला देती है और दिनेश के हाथो को अपने जांघो पे सहलाने का स्वागत करती है और अपनी दूसरी जांघ विशाल की तरफ कर के अपनी टंगे खोल देती है…









विशाल भी अब अपने हाथो से रागिनी के जांघ और उसके छूट को सहलाने लग जाता है जिस से रागिनी जल्दी hi मदहोश होने लगती है और जिसे देख विशाल और दिनेश अपने होठ रागिनी के छतियो पे भिड़ा देते है जिसके गरम सांसे रागिनी पे जादू करने लग जाती है…









रागिनी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh

तीनो एक आपस में खोने लग जाते है की तभी दिनेश अपना चेहरा रागिनी के छाती से हटते हुवे बोलता है..

दिनेश- तो विशु किसी लगी तुझे तेरी बड़ी माँ की छूट

विशाल- लाजवाब बड़े पापा

दिनेश- मजा तो दिया न तेरी बड़ी माँ ने तुझे??

विशाल- हाँ बड़े पापा बहुत मजा आया लेकिन

दिनेश- लेकिन क्याबेते?

विशाल- मेरा मन नहीं भरा आपकी बीवी से

दिनेश- हहहह रागिनी चीज hi ऐसी है इस से एक बार में क्या रोज रोज छोड़ो तब बी मन नहीं भरेगा bête

विशाल- सही खा बड़े पापा

दिनेश- bête अब तो तू मेर सेक्स पार्टनर हो गया

विशाल- हाँ बड़े पापा कह सकते है

दिनेश- फिर मैंने तुझे अपनी बीवी दी है तो तुझे भी मुझे एक छूट देनी होगी

विशाल- मैं कैसे बड़े पापा मेरी बीवी थोड़ी न है और मेरे शादी में तो अभी बहुत टाइम है..

दिनेश- छूट सिर्फ बीवी की हो ये जरुरी थोड़े न है bête…

विशाल- फिर और तो कोई है नहीं जो मई आपको बड़ी माँ के बदले में दे सकू

दिनेश- पहले तू वडा कर्त ु छूट के बदले छूट देगा

अब ऐसे में विशाल मना करने के हालत में तो था नहीं तो वो बिना सोचे वडा कर देता है

विशाल- वडा है बड़े पापा लेकिन किसकी दिलवा सकता हु ये तो बताओ

दिनेश- मुझे तेरी माँ अलका की छूट चाइये जैसे तू मेरी रागिनी को छोड़ा है मैं तेरी माँ अलका को छोड़ना चाहता हु..

विशाल का हाथ जो रागिनी के छूट और जांघो पे चल रहा था ो रुक जाता है और रागिनी के जांघो को जोर से भींच लेता है…

विशाल- क्या??? ये आप क्या कह रहे हो? और मैं कैसे दिलवा सकता हु…?

दिनेश- देख bête मैं जबरदस्ती नहीं करूँगा तेरी माँ के साथ लेकिन तुझे भी कोई परेशानी नहीं होनी चाइये जब मैं उसे छोड़ू…..

विशाल के पास बोलने को कुछ बचा नहीं था हलाकि वो अचे से जनता था की उसकी माँ को दिनेश और घर के बाकि मर्द छोड़ चुके है और छोड़ते बी है लेकिन आज दिनेश के मुँह से खुल्लम खुला उसकी माँ को छोड़ने की बात से वो शॉक हो जाता है….

विह्सल- जबरदस्ती नहीं करोगे तो कैसे करोगे?? मम्मी ऐसी नै है और वो नहीं मानेगी….

दिनेश- वो तू मुझपे चोर दे और अगर तुझे देखना हो तो बता दे मई मई तुझे बता दूंगा जगह तू देख लेना..

विशाल- ठीक है बड़े पापा लेकिन मुझे देखना है आप माँ को केस ेमनाते हो…

दिनेश- ठीक है bête done…ab चल इस रंडी को दोनों मिलके छोड़ते है तेरे पहले राउंड में मैंने तुझे अकेले एन्जॉय करने दिया पर अब मुझसे भी नहीं रहा जा रहा है इस रंडी को चोदे बिना…

और फिर चुदाई का सेकंड राउंड सुरु होने लगता है…..

दिनेश ने बड़े hi चालाकी से आज विशाल को अपने जाल में फसा लिया था जिसमे फास के विशाल अपने ताऊ से अपने hi माँ अक सौदा कर लेता है और बदले में उसे उसकी बड़ी माँ मिलती है….

तो बे छॉंट......
 




निम्मो का बैक भी उसकी माँ की तरह hi रास से भरा मटका है जिसे फोड़ो तो जूस की नदिया बहेगी पर ये मटका किसके नसीब में है ये तो वक़्त hi बताएगा
 
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