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अपडेट-66 (बड़ी माँ के गुलाब जामुन)
मोबाइल में चल रहे फोटोज और सन देख के विशाल का लुंड फटने को होने लगता है…
विशाल को समझ आ गया था की रागिनी को सईद पता नहीं वो किन फोटो के लिए टैरिफ कर रहा है और इस से पहले वो आ के मोबाइल चीन ले वो साडी फोटोज एंड वीडियो अपने फोन में ट्रांसफर कर लेता है और ट्रांसफर कर लेने के बाद पूछता है..
विशाल- बड़ी माँ इनमे से कुछ पिक्स मई ले लू प्लस
रागिनी- हाँ ले ले जो तुझे अछि लगे इसमें पूछने का क्या है बीटा है तू मेरा…
अब आगे
विशाल ेके क कर के रागिनी के सरे डार्क सीक्रेट्स देखता चला गया और हर फोटो पे रागिनी के टैरिफ में दोहरे सब्द का इस्तेमाल कर रहा था और इनसब से बेखबर रागिनी जो अपने कपडे बदल चुकी थी और शीश ेके सामने कड़ी हो के आपने बालो को सवारते हुवे विशाल की बातो का जवाब भी दे रही थी…

विशाल- बहुत राज़ दबाये है बड़ी माँ आपने अपने इस फोन में
रागिनी- हेहेहे मैं क्या राज़ रखूंगी गधे और राज़ होता तो तुझे मोबाइल देती क्या?
विशाल- ये गुलाब जामुन किसे खिला रहे हो बड़ी माँ… ये बात विशाल ने उस फोटो को देख के खा था जिसमे रागिनी किसी को अपने निप्पल चुसवा रही थी….

how to type a fraction on a keyboard
रागिनी- गुलाब जामुन खान दिख रहा है तुझे??? शादी वाड़ी की फोटो है क्या??
विशाल- नहीं बूत शादी के बाद की फोटो लग रही है जिसमे दूल्हा दुल्हन खिलते है एक दूसरे को…
रागिनी- किसकी साहड़ी में मई किसे गुलाब जामुन खिला रही मुझे तो यद् भी नहीं रुक मैं अभी आती हूँ फिर दिखाना किस फोटो की बात कर रहा है तू
उसके अगले hi फोटो में रागिनी को कमल काउच पे लेता के तेज़ तेज़ छोड़ रहा था और साथ hi उसके निपल्स को मुँह में भर के चूस रही थी…
विशाल- वाओ बड़ी माँ क्या आम है काश मैं भी एक बाईट ले पाटा… मैं तब खान था बड़ी माँ आम के मौसम में??

रागिनी- आम?? वो अपने बगीचे का होगा और तो हम बहार की ऍम कहते नहीं..
विशाल- हाँ माँ है तो अपने hi बगीचे का माली भी अपने hi बगीचे का है फोटो में..
रागिनी- देखा बिना फोटो देखे बता दिया न
विशाल- हाँ बड़ी माँ और आपको गणना इतना पसंद है आपने कभी बताया नहीं… कितने दिल से चूस रहे हो आप सुगरकाने…
इस पिच में रागिनी अरविन्द के लुंड चूस रही थी याय उन कहो अरविन्द अपने लुंड को रागिनी के मुँह में तेज़ तेज़ पेल रहा था…

रागिनी- ओहो कभी गुलाब जामुन कभी आम कभी गणना रुक मैं देखु किस फोटो का पूछ रहा है तू ऐसे तो मुझे याद भी नहीं और फिर साडी साज सज्जा के बाद रागिनी एक बहुत hi कामुक परफ्यूम अपने बदन पे छिड़कती है जिसके सुगंध से पूरा कर्मा महकने लग जाता है और अब वो वापस से विशाल के करीब आके बैठ जाती है और विशाल के हाथ से मोबाइल ले के देखने लग जाती है और जैसे hi देखती है की विशाल किन फोटोज के बारे में काफी देर से बात कर रहा था ो कोई और नहीं बल्कि रागिनी के उसके हाथो से बनाये उसी के ब्लूएफिल्मस थे जो उसका आशिक़ रिकॉर्ड करता था जब भी उसे छोड़ता था….
चोरी पकडे जाने पे रागिनी का गाला सूखने लगता है और पसीना आने लगता hai…pasina उसके माथे पे तो थी hi साथ hi उसके आर्मपिट पे भी जमा होने लगी थी जो उसके ब्लाउज को गीली कर रही थी और अभी तोड़े देर पहले hi रागिनी ने जो कामुक परफ्यूम लगाया था उसमे घुलने लग जाता है… रागिनी का कामरूप देख के विशाल का लुंड जो के पहले से hi खड़ा हो के पंत में फड़फड़ा रहा था उसके ऊपर उसके शरीर से आती ये मादक खुसबू विशाल को मदहोश करने लग जाता है…
और दूसरी तरफ रागिनी के पास अभी के लिए विशाल के लिए उसके किसी भी बात का कोई उत्तर नहीं था उसका सफ़ेद सफ़ेद पद चुक्का था उसके चेहरे लालिमा फीका पड़ने लगा था ुसंके चेहरे से शर्म और मादकता का भाव एक साथ टपकने लगा था …
उसके आर्मपिट से आती तेज़ परफ्यूम और पसीने की खुशबु मनो विशाल को अपनी और खींच रही थी और वो भी मंत्रमुग्ध हुवे रागिनी के आर्मपिट के तरफ खींचने लगा था और रागिनी भी उसे अपनी तरफ आता देख तो रही थी पर उसका शरीर मनो वही जैम गया था ो कोई प्रतिकिर्या नहीं दे पा रही थी और देखते hi देखते विशाल रागिनी के बगलो में अपना मुँह घुसा देता है,,,

रागिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ये क्या कर रहा है विशु…..
विशाल- ये कौनसा परफ्यूम है बड़ी माँ बहुत अछि है
रागिनी- aaaaaaaaaahhhhhhhh तो ऐसे कौन सुघट है bête चल हैट जाने दे दरवाजा भी खुला है कोई आ गया तो क्या सोचेगा…
विशाल- यही की मैं अपने बड़ी माँ से प्यार करता हु..
रागिनी- बड़ी माँ से ऐसे प्यार नहीं करते bête चल चोर…
हलाकि विशाल ने उसे पकड़ा नहीं था ो जा सकती थी पर उसका मुँह चोर्ने को कह रहा था लेकिन वो उठ के जाए के जगह अपने हाथ उठा के उसे अचे से सूंघने में मदद करे लगती है….
विशाल- चोर दूंगा लेकिन एक शर्त पर और विशाल रागिनी के बगल को अब काटने लगता है….
रागिनी- aaaaaaaaahhhhhhhhhh काट क्यों रहा है निशान पद जायेंगे ….
विशाल- सॉरी बड़ी माँ पर ये इतना चिकना है जैसे माखन और इस से आती खूब मुझे मदहोश कर रही है बड़ी माँ
रागिनी- चल चोर अब जाने दे वो आते hi होंगे लंच के लिए
विशाल- हाँ अगर आप मेरी एक बात मनो….
रागिनी- कोण सी बात??? Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh काट मत कुत्ते
विशाल- यही की मुझे भी गुलाब जामुन खिलाओगी अपना
रागिनी- ची किसी बाते कर रहा है मैं तेरी बड़ी माँ हु
विशाल- हाँ तो फिर नहीं चोरता मैं….
रागिनी- उउउउउउउउउफ्फ्फफ्फ्फ़ कसी जिद कर रहा है bête चल हैट उठने दे और विशाल को धकेल के उठ जाती है और तेज़ कदमो से भागने लगती है की तभी विशाल उसे कमरे से निकलने से पहले उसकी साड़ी को मुट्ठी में भर लेता है जिस वजह से रागिनी के बीएड से उठते hi उसकी साड़ी खुल जाती है…..

vietnamese typewriter
साड़ी के कंधे से सरकते hi रागिनी की छाती अब विशाल के बिलकुल सामने थी उसकी धड़कने बहुत तेज़ बढ़ने लगी थी और हर बीट के साथ उसकी दोनों चूचिया पुरे जोर से ऊपर निचे होने लगी thi…Ragini के सपाट पेट पे पसीने की बुँदे चमक रही थी और उसके बालो से बेहटा पसीना अपनी जगह बनाते हुवे रागिनी के दोनों चुचिओ के बिच बने घातिओ में बहने लगा था..
रागिनी- aaaaahhhhhhhhhhh विशु क्या कर रहा है ऐकोर वर्ण बहुत मार खायेगा इतनी शैतानी ठीक नहीं देख मेरी साड़ी उतर दी तूने…
इस्पे विशाल रागिनी के पल्लू को मुट्ठी में भर क ीक बार और खींच लेता है जिस से बाकि की बची साडी जो कही कमर के किसी कोने में फांसी थी अब पूरी तरह से उसके जिस्म से अलग होक वही फर्श पर बिखर जाती है…

रागिनी दीवार के सहारे हफ्ते हुवे चिपक के कड़ी हो जाती है और चोर्ने को बार बार मिन्नतें करने लगती है लेकिन उसकी गरम धसधकते जिस्म और उसके मुँह से निकले शब्दों में कोई तालमेल hi नहीं था…. उसकी आहे मनो कह रही हो आजा इस से आगे तो नहीं जा पाऊँगी आ पकड़ ले अपनी बड़ी माँ को और कर ले अपने मन की खा ले गुलाब जामुन और सारा रास निचोड़ ले अपने बगीचे के आम का जिसके लिए तू तरस रहा है

विशाल बीएड से उठ के दिवार से चिपके रागिनी के करीब जाने लगता है और विशाल को अपने करीब आता देख बिना साड़ी के सिर्फ ब्लाउज पेटीकोट में अपने कामुक बदन को छुपाते हुवे रागिनी दीवार के और ज्यादा चिपक के उसे देखते हुवे हाफने लगती है…
विशाल- अब खान जाओगी…
रागिनी (बड़े कामुक भरे अंदाज़ में)- मत कर bête पाप है ये मई तेरी बड़ी माँ हूँ.. लेकिन ये सिर्फ उसके होठ कह रहे थे उसका मादक शरीर नहीं ये उसकी आँखे बता रही थी विशाल को आता देख वो भी अपने पैरो को मलते हुवे अपने लातो को साइड करते हुवे उसे hi देख रही थी मनो कह रही हो ज्यादा समय नहीं है जल्दी खा ले अपने जामुन…
विशाल एक बार फिर से रागिनी को दबोच लेता है और दीवार से लगा के इस बार निचे झुक के उसके पेट को चूमने लगता है…

विशाल- उफ्फफ्फ्फ़ बड़ी माँ तुम्हारी ये पेट कितनी सूंदर है हाय
रागिनी- सभी की तो होती है bête अब चोर दे न क्यों तड़पा रहा है अपनी बड़ी माँ को बस कर अब बाद में प्यार कर लेना चोर दे बचे…
पर विशाल का इरादा कुछ और hi बन गया था वो अब उठ के रागिनी के गार्डन पे टूट पड़ता है

विशाल रागिनी के गार्डन से टपक रहे पसीने की बूंदो को अपने होठो में दबा के चूस जाता है..
रागिनी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है पगले चोरता क्यों नहीं अब
विशाल- तुम्हारे तो पसीने में भी खुशबु है बड़ी माँ तभी अलग अलग लोग तुमसे चिपके थे वीडियो और फोटो में भी…
रागिनी- sssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhh कीसी को मत बताना bête ये सब पता नहीं तेरे हाथ कैसे आ गया….
विशाल- हाँ अगर मुझे भी अपना गुलाब जामुन खिलाओगी…
रागिनी- उफ्फफ्फ्फ़ कैसा जिद ले के बैठ गया है ये लड़का..
इस पकड़म पकड़ाई में रागिनी की साड़ी उतर जाने से रागिनी बस मैरून ब्लाउज पेटीकोट में थी उसकी धड़कने बढ़ने लगी थी उसका छूट भी पसीजने लगा था लेकिन दिनेश और अरविन्द के आने का भी समय हो रहा था जिस से उसकी घबराहट बढ़ते जा रही थी…
विशाल अगले hi पल रागिनी को घुमा देता है और पीछे से उसके गार्डन को चूमने लग जाता है….

रागिनी भी किसी कठपुतली की तरह विशाल के इशारे पेग हम जाती है और अपने पसीने से भीगे गार्डन को विशाल को सौंप देती है लेकिन गार्डन के साथ रागिनी का एक चीज और विशाल के स्पर्श से पागल होने लगा था ो था उसके गोल गोल चूतड़ और उसके वो बड़ी दरार जिसमे विशाल का लुंड अपनी जगह बनाना सुरु कर दिया था…

लुंड का दबाव चूतड़ों पर पड़ते hi रागिनी कसमसाने लग जाती है…. उसके बड़े बड़े चुत्तड़ जिसकी गहराई में पूरा घर कभी न कभी खो चुक्का है वो चुत्तड़ विशाल के लुंड के लिए एक संकरी दीवार प्रतीत हो रही थी…
पेटिक्ट के पतले कपडे को चीरता फाड़ता विशाल का लुंड रागिनी के छूट के मुहाने पे तो कभी उसके तंग छोटी सी भूरे गांड के बने उस छेद को ठोकर मरने लगा था जहां के छुवन मात्रा से रागिनी के छूट से पानी बहते हुवे उसके जांघो पे बहने लगी थी…
रागिनी (uufuuuuuuuuuuuuffffffffff कितना बड़ा और मोटा लग रहा है इसका लुंड अगर जल्दी नहीं छूट पायी तो माँ छुड़ाने गया दिनेश मैं इसके लुंड पे कूदने न लग जाऊ).-
रागिनी- uuuuuuuuuffffffffffffffff विशु चोर दे bête बहुत प्यार कर लिया अपनी बड़ी माँ को कुछ अपने बड़े पापा के लिए भी चोर दे…
रागिनी के ये शब्द साफ़ जाहिर कर रहा था की वो क्या चोर्ने के लिए कह रही थी लेकिन हाथ में आया खजाना कौन hi चोरता है….

विशाल अब निचे झुक के रागिनी के नंगे कमर पे चूमियो के बौछार कर देता है साथ hi उसके कोमल मक्काहान जैसे चर्बीदार मगर सपाट पेट को अपने दोनों हाथो में भर के मसलने लग जाता है…
विशाल- बड़े पापा तो करते hi है बड़ी माँ आज मुझे प्यार करने दो न कितनी अछि खुसबू आ रही है तुम्हारे बदन से मेरा चोर्ने का तो दिल hi नहीं हो रहा है… ये बात विशाल रागिनी के पेट को लगातार मसलते हुवे बोल रहा था….

Ragini-bas कर विशु अब मुझे भी कुछ होने लगा है अब जाने से मुझे वर्ण पाप करवा देगा तू मुझसे और इतना कह के रागिनी विशाल से छूटे हुवे एक बार फिर से घूम जाती है और बी विशाल का लुंड रागिनी के चूतड़ों से आज़ाद हो चुक्का था जो थोड़ी देर पहले उस गहरी घाटी में फसा हुआ था…
रागिनी के घूम जाने से अब दोनों एक बार फिर से आमने सामने हो जाते है रागिनी की तेज़ धड़कने और आँखों में भरी वासना की चमक उसके चेहरे पे तैरने लगा था…. दोनों की नज़रे आपस में मिल जाती है रागिनी की प्यास उसके आँखों में साफ़ नज़र आने लगा था वो कभी अपने होठो को अपनी गार्डन आगे कर के विशाल के होठो से मिलाने की कोशिश कर रही थी तो अगले hi पल जैसे कुछ था जो उसे रोक रहा था और वो अपने को रोक लेती थी लेकि उसके होठ अब विशाल के होठो से मिलने के लिए मनो तड़पने लगी थी जिसकी सुरुवात उस से नहीं हो पा रहा था…

रागिनी की आँखों में तड़प और वासना दोनों भर भर के मनो अब उसके आँखों से छलकने लगा था ो विशाल को खुद को सपने के लिए तैयार थी उसके होठ विशाल के होठो से मिलने से तरस रहे हो लेकिन एक औरत वो भी रिश्ते में बड़ी माँ ये कदम उठाये तो उठाये कैसे हाँ अगर उसका बीटा विशाल कुछ किया तो वो नहीं रोकेगी और सईद रागिनी अब विशाल के सुरु करने का इंतजार हो और विशाल का भी हल कुछ यही था अब तक जॉब hi किया उसमे उसे रागिनी से नजरे नहीं मिलनी पद रही थी लेकिन आँखों में आंखे दाल के चूमना पहली बार में थोड़ा हिम्मत का काम तो tha..par जॉब hi हो अब पीछे का कोई रास्ता नहीं था और देखते hi देखते दोनों के गरम सुलगते होठ आपस में मिल जाते है….

और देखते hi देखते बड़ी माँ और बीटा का वो पवित्र रिश्ता सईद अब इसी चूमियो के साथ टूट चुक्का था अब ये दो गरम जिस्म एक दूसरे में मिल जाना छह रहे हो रागिनी भी अब विशाल को अपने होठ नहीं अपने गरम सुलगते जिस्म सौंप दी थी..
रागिनी- uuuuuuuuuuuuuuuuummmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmuuuuuuuuuuuu
विशाल अब अपने हाथ रागिनी के चुचिओ पे ले जा के उसे मसलने लग जाता है वो वही रागिनी भी विशाल के होठो को चूसते हुवे उसके बलिष्ठ मर्दाने चौड़ी छाती पे हाथ फेर के मनो उसके मर्दानगी का जायज़ा ले रही थी…
काफी लम्बे चले चुम्बन के बाद रागिनी अपने होठो को आज़ाद करते हुवे तेज़ तेज़ हाफने लगती है
रागिनी- आआआआह्ह्ह्ह ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह uffffffffffffffff
Vishal-wow बड़ी माँ क्या नरम होठ है तेरे
रागिनी- चुप कर आखिर कर लिया न अपने मन की…
विशाल- अभी खान बड़ी माँ अभी तो कुछ भी नहीं kiya…aur एक बार फिर से रागिनी के चेहरे को पकड़ के उसके तेज़ चल रहे सांसो पे काबू पाने से पहले वापस से उसके होठो को अपने होठो से दबा लेता है…

रागिनी भी विशाल के चूमीओ का जवाब ज्यादा भड़काऊ औरत बन के देने लगी थी जो बता रही थी की उम्र जॉब hi हो उसमे आग बहुत है और वो विशाल को अपने आग में झुलसा सकती है…
विशाल भी लगातार रागिनी के होठो का रास अपने होठो से निचोड़ते हुवे निचे उसके मखमली पेट को बड़े जोरो शोर से मसल रहा था जिसका रैंड गोर पैन से लाल हो चला था…
रागिनी अब विशाल के चुम्बन का जवाब निचे से अपने छूट का दबाव विशाल के लुंड पे बढ़ा के देने लगी थी सीधे शब्दों में कहु तो रागिनी विशाल के ुण्ड पे अपने छूट से झटके लगाने लगी थी जैसे वो विशाल को छोड़ रही हो…
विशाल भी रागिनी के बढ़ते कामवासना को देखते हुवे उसके कमर में अपने दोनों हाथ दाल के अपने से कास लेता है और अगले hi पल घुमा के बीएड पे पटक देता है…
Ragini-aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh
रागिनी बीएड पे बैठ के अपने दोनों हाथ पीछे टिका के और पैरो को बीएड से निचे लटका के विशाल को देखने लग जाती है मनो पूछ रही हो अब क्या???

विशाल एक बार फिर से रागिनी को अपने बहो में भर लेता है और सके छतियो को चूमने लग जाता है…
विशाल उसके छतियो पे हाथ फेरते हुवे पहले उसके गलो को चूमते हुवे उसपे अपनी गरम सांसो की बौछार करने लग जाता है रागिनी एक कामुक गरम औरत बड़े मुश्किल से खुद को अब तक रोके राखी थी उसका बांध भी अब कभी भी टूट सकता था रागिनी विशाल के बाप अशोक का लुंड तो खाया की नहीं पता नहीं लेकिन लगता है उसके bête का लुंड आज जैसे खा hi लेगी…
विशाल अब रागिनी को बीएड पे लेता के उसके ऊपर आ जाता है और उसके पेट गार्डन और छतियो को पुरे जोश में चूमने चाटने लग जाता है…

रागिनी अब छटपटाते हुवे अपने सर को दये बाये पटकने लगती है उसकी सांसे बेकाबू होने लगी थी और उसके हाथ विशाल के सर पे जोर जोर से चलने लग जाता है… विशाल भी उसके ऊपर लेते लेते पेटीकोट के ऊपर से hi अपने लुंड का दबाव उसके छूट पे बनाने लगा था मनो बता रहा हो देख बड़ी माँ कितना दमदार लुंड तेरे अंदर घुसने वाला है जो तेरी छूट की धज्जिया उदा देगा ठीक वैसे hi जैसे तेरी बेटी की उदा के आया है और वो मरे हालत में अपने रूम में पड़ी है..
रागिनी भी लगातार अपने ऊपर विशाल के द्वारा हो रहे प्रहार से पिघलने लगी थी. उसका दी लैब आगे बढ़ने का होने लगा था पर वही कश्मकश जहां वो खुद पहले बढ़ना नहीं छह रही थी लेकिन विशाल को रोकती भी नहीं…

विशाल अब रागिनी के पैरो को तो उसके पिंडलियों से होते हुवे हुवे उसके पेटीकोट को उठाते हुवे उसके जांघो पे जुबान फेरना लगा था और जांघो को छत्ते हुवे उसे बिच बिच में काट भी रहा था
रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh चोर दे bête अब तो इतना कुछ कर लिया बस कर अब (या ले ले अपने गुलाब जामुन मैं नहीं रोकती इस से पहले की दिनेश आ जाये)
विशाल- क्यों बड़ी माँ आपको ाचा नहीं लग रहा मेरा आपको प्यार करना
रागिनी अब कैसे बोले की वो जो कर रहा है वो प्यार नहीं हवस है जिसके अंधी में उनका पवित्र रिश्ता तबाह हो जाएगगा वो मन hi मन लुंड के लिए तड़पने लगी थी वो दुआ करने लगी या तो दिनेश आ के उसे इस परिस्थिति से बचा ले या विशाल आगे बढ़ के कर ले ज करना है बस ऐसे बिच में रहने से उसकी तड़प उसकी जान ले रही थी… उसका गाला सूखा जा रहा ता और सूखे भी क्यों न गले का पैनिक हूत से जॉब बह रहा था…
कोई और होता तो सईद रागिनी को अब तक छोड़ चुक्का होता लेकिन विशाल को औरत को तड़पा के छोड़ने में मज आता है जिसमे वो खुद लुंड मांगे जैसे उसकी देवरानी अलका होय ा उसी के छूट से निकली उसकी बेटी ऋचा..
रागिनी की आग अब और ज्यादा उस से संभाल पाना मुश्किल होने लगा था ो तड़पते हुवे अपने दोनों पैरो को विषा के गार्डन पे रख उसे खींच के अपने छूट पे उसके चेहरे को दबा लेती है…
विशाल भी रागिनी की बढ़ती बेचैनी को देख अपने जीत की और एक कदम बढ़ते हुवे पेटीकोट के ऊपर से hi उसके छूट पे जैसे hi हाथ रखने वाला था की गाड़ी के हॉर्न की आवाज़ आती है जिसे सुनते hi रागिनी जो थोड़ी देर पहले विषा को अपने पैरो में जकड के अपने छूट पे दबा रही थी वही रागिनी अपने उसी पेअर से विषा के छाती पे मरते हुवे अपने से अलग करने लगती है…
रागिनी की दुआ भगवान ने सुन लिया था और उसकी इज़त तार तार होने से बचने के लिए उसके पति दिनेश को घर बिलकुल सही समय पर भेज दिया tha……lekn सईद रागिनी को दिनेश का इस समय आना बिलकुल भी पसंद नहीं आया था..

दोनों बड़े बेमन से बहार की तरफ देखने लग जाते है विशाल का हाथ अब भी रागिनी के कमर पर hi था और रागिनी का हाथ भी अभी तक विशाल के कंडे और छाती पे था....
दिनेश के कदमो की आहात आने के बावजूद भी विशाल मनो रागिनी को चोर्ने को राजी नहीं था और वो दिनेश के पास आने की परवाह किये बिना उसके बीवी को उसी के कमरे में अपने बहो में भर के चुम रहा था...
विशाल- मुझे गुलाब जामुन कहने है बड़ी माँ

रागिनी- चल अब तो चोर दे तेरे ताऊ आ गए बहुत कर लिए प्यार तूने अपनी बड़ी माँ को अब जा जल्दी वो आते hi होंगे..
विशाल- और मेरा गुलाब जामुन??
रागिनी- वो मौका तो तूने गवा दिया हेहेहे
विशाल- नहीं मुझे चाइये पहले बोलो डोज की नहीं वर्ण मैं यही रहूँगा ऐसे hi और आपको भी नहीं जाने दूंगा
रागिनी- ओहो विशु अभी जा फिर कभी देखते है
दिनेश की आवाज़ अब सुनाई देने लगी थी जिसका मतलब था ो कमरे के करीब आने लगा था
विशाल भी जल्दी से उठ के वहां से जाते हुवे रागिनी को देख के बोलते हुवे जाता है…
विशाल- गुलाब जामुन तो मैं खा के रहूँगा बड़ी माँ और अपने मोबाइल का स्क्रीन दिखते हुवे जाता है जिसका मतलब था की आपके काळा कारनामे मैंने अपने मोबाइल में ट्रांसफर कर लिया है…
रागिनी विशाल के इस तरह से धमकाना रागिनी को बुरा नहीं लगा बल्कि वो और लाड प्यार से विशाल को वही बीएड पे बैठे बैठे देख रही थी

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रागिनी वही पेटीकोट और ब्लाउज में बीएड पे बैठे बैठे अपने bête के सामान के भतीजे को जाता देख रही थी… वही भतीजा जो पिछले 1-2 घंटे से रागिनी को उसी के बिस्टेर पर रगड़ रहा था और अगर दिनेश थोड़ी देर और न आता तो सईद उसकी बवि रागिनी उसी के बैडरूम में उसी के बिस्टेर पे अपने छोटे भाई के bête से चुद जाती…. और यही सब ख्याल ने रागिनी के अधरों पे मुस्कान ला दिया था लेकिन दिनेश अब किसी भी वक़्त कमरे में आ सकता था इसलिए वो जल्दी से उठ के अपने फर्श पे बिखरे सरे को उठाने लगती है और तेज़ी से पहनने लगती है…

दिनेश कमरे में घुसते hi देखता है उसकी बीवी साड़ी लप्पेट रही है जो इस वक़्त अधनंगी थी और उसकी नज़रे निचे थी जिस से वो दिनेश को आता नहीं देख पायी थी पर ऐसा दिनेश को लगता था क्युकी दिनेश के आने की खबर तो उसे कब का लग गया था…
दिनेश- अरे भाग्यवान ये क्या दिन दहाड़े नंगी हो रही है रात तक का तो सब्र कर लेती.. मैं तो बस रोटी खाने आया था और तू पूरा भट्टी खोल के बैठी है
रागिनी- चुप करो हर वक़्त तुम्हे यही सूझता है.. मैं बस कपडे बदल रही थी खाना बनते हुवे साड़ी गन्दी हो गयी थी… चलो खाना लगाती हु विशाल और ऋचा को भी आवाज़ दे दो
दिनेश- सिर्फ विशाल ऋचा और अलका खा गयी?
रागिनी- उगाई होगी किसी काम से मार्किट वगैरह..
दिनेश- ठीक है ठीक है तू खान लगा और दिनेश एंड रागिनी खाने के मेज की तरफ चल देते है….
नेक्स्ट अपडेट में देखते है विशाल को गुलाब जामुन मिलता है या अभी और सब्र करना होगा.???? उधर दिनेश को टाइम पे घर भेज के ऊपर वाले ने भी रागिनी को एक मौका दिया है खुद को बचने का पर क्या वो खुद को बचाएगी या लेट जाएगी विशाल के निचे ये वक़्त hi बताएगा…
मोबाइल में चल रहे फोटोज और सन देख के विशाल का लुंड फटने को होने लगता है…
विशाल को समझ आ गया था की रागिनी को सईद पता नहीं वो किन फोटो के लिए टैरिफ कर रहा है और इस से पहले वो आ के मोबाइल चीन ले वो साडी फोटोज एंड वीडियो अपने फोन में ट्रांसफर कर लेता है और ट्रांसफर कर लेने के बाद पूछता है..
विशाल- बड़ी माँ इनमे से कुछ पिक्स मई ले लू प्लस
रागिनी- हाँ ले ले जो तुझे अछि लगे इसमें पूछने का क्या है बीटा है तू मेरा…
अब आगे
विशाल ेके क कर के रागिनी के सरे डार्क सीक्रेट्स देखता चला गया और हर फोटो पे रागिनी के टैरिफ में दोहरे सब्द का इस्तेमाल कर रहा था और इनसब से बेखबर रागिनी जो अपने कपडे बदल चुकी थी और शीश ेके सामने कड़ी हो के आपने बालो को सवारते हुवे विशाल की बातो का जवाब भी दे रही थी…

विशाल- बहुत राज़ दबाये है बड़ी माँ आपने अपने इस फोन में
रागिनी- हेहेहे मैं क्या राज़ रखूंगी गधे और राज़ होता तो तुझे मोबाइल देती क्या?
विशाल- ये गुलाब जामुन किसे खिला रहे हो बड़ी माँ… ये बात विशाल ने उस फोटो को देख के खा था जिसमे रागिनी किसी को अपने निप्पल चुसवा रही थी….

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रागिनी- गुलाब जामुन खान दिख रहा है तुझे??? शादी वाड़ी की फोटो है क्या??
विशाल- नहीं बूत शादी के बाद की फोटो लग रही है जिसमे दूल्हा दुल्हन खिलते है एक दूसरे को…
रागिनी- किसकी साहड़ी में मई किसे गुलाब जामुन खिला रही मुझे तो यद् भी नहीं रुक मैं अभी आती हूँ फिर दिखाना किस फोटो की बात कर रहा है तू
उसके अगले hi फोटो में रागिनी को कमल काउच पे लेता के तेज़ तेज़ छोड़ रहा था और साथ hi उसके निपल्स को मुँह में भर के चूस रही थी…
विशाल- वाओ बड़ी माँ क्या आम है काश मैं भी एक बाईट ले पाटा… मैं तब खान था बड़ी माँ आम के मौसम में??

रागिनी- आम?? वो अपने बगीचे का होगा और तो हम बहार की ऍम कहते नहीं..
विशाल- हाँ माँ है तो अपने hi बगीचे का माली भी अपने hi बगीचे का है फोटो में..
रागिनी- देखा बिना फोटो देखे बता दिया न
विशाल- हाँ बड़ी माँ और आपको गणना इतना पसंद है आपने कभी बताया नहीं… कितने दिल से चूस रहे हो आप सुगरकाने…
इस पिच में रागिनी अरविन्द के लुंड चूस रही थी याय उन कहो अरविन्द अपने लुंड को रागिनी के मुँह में तेज़ तेज़ पेल रहा था…

रागिनी- ओहो कभी गुलाब जामुन कभी आम कभी गणना रुक मैं देखु किस फोटो का पूछ रहा है तू ऐसे तो मुझे याद भी नहीं और फिर साडी साज सज्जा के बाद रागिनी एक बहुत hi कामुक परफ्यूम अपने बदन पे छिड़कती है जिसके सुगंध से पूरा कर्मा महकने लग जाता है और अब वो वापस से विशाल के करीब आके बैठ जाती है और विशाल के हाथ से मोबाइल ले के देखने लग जाती है और जैसे hi देखती है की विशाल किन फोटोज के बारे में काफी देर से बात कर रहा था ो कोई और नहीं बल्कि रागिनी के उसके हाथो से बनाये उसी के ब्लूएफिल्मस थे जो उसका आशिक़ रिकॉर्ड करता था जब भी उसे छोड़ता था….
चोरी पकडे जाने पे रागिनी का गाला सूखने लगता है और पसीना आने लगता hai…pasina उसके माथे पे तो थी hi साथ hi उसके आर्मपिट पे भी जमा होने लगी थी जो उसके ब्लाउज को गीली कर रही थी और अभी तोड़े देर पहले hi रागिनी ने जो कामुक परफ्यूम लगाया था उसमे घुलने लग जाता है… रागिनी का कामरूप देख के विशाल का लुंड जो के पहले से hi खड़ा हो के पंत में फड़फड़ा रहा था उसके ऊपर उसके शरीर से आती ये मादक खुसबू विशाल को मदहोश करने लग जाता है…
और दूसरी तरफ रागिनी के पास अभी के लिए विशाल के लिए उसके किसी भी बात का कोई उत्तर नहीं था उसका सफ़ेद सफ़ेद पद चुक्का था उसके चेहरे लालिमा फीका पड़ने लगा था ुसंके चेहरे से शर्म और मादकता का भाव एक साथ टपकने लगा था …
उसके आर्मपिट से आती तेज़ परफ्यूम और पसीने की खुशबु मनो विशाल को अपनी और खींच रही थी और वो भी मंत्रमुग्ध हुवे रागिनी के आर्मपिट के तरफ खींचने लगा था और रागिनी भी उसे अपनी तरफ आता देख तो रही थी पर उसका शरीर मनो वही जैम गया था ो कोई प्रतिकिर्या नहीं दे पा रही थी और देखते hi देखते विशाल रागिनी के बगलो में अपना मुँह घुसा देता है,,,

रागिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ये क्या कर रहा है विशु…..
विशाल- ये कौनसा परफ्यूम है बड़ी माँ बहुत अछि है
रागिनी- aaaaaaaaaahhhhhhhh तो ऐसे कौन सुघट है bête चल हैट जाने दे दरवाजा भी खुला है कोई आ गया तो क्या सोचेगा…
विशाल- यही की मैं अपने बड़ी माँ से प्यार करता हु..
रागिनी- बड़ी माँ से ऐसे प्यार नहीं करते bête चल चोर…
हलाकि विशाल ने उसे पकड़ा नहीं था ो जा सकती थी पर उसका मुँह चोर्ने को कह रहा था लेकिन वो उठ के जाए के जगह अपने हाथ उठा के उसे अचे से सूंघने में मदद करे लगती है….
विशाल- चोर दूंगा लेकिन एक शर्त पर और विशाल रागिनी के बगल को अब काटने लगता है….
रागिनी- aaaaaaaaahhhhhhhhhh काट क्यों रहा है निशान पद जायेंगे ….
विशाल- सॉरी बड़ी माँ पर ये इतना चिकना है जैसे माखन और इस से आती खूब मुझे मदहोश कर रही है बड़ी माँ
रागिनी- चल चोर अब जाने दे वो आते hi होंगे लंच के लिए
विशाल- हाँ अगर आप मेरी एक बात मनो….
रागिनी- कोण सी बात??? Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh काट मत कुत्ते
विशाल- यही की मुझे भी गुलाब जामुन खिलाओगी अपना
रागिनी- ची किसी बाते कर रहा है मैं तेरी बड़ी माँ हु
विशाल- हाँ तो फिर नहीं चोरता मैं….
रागिनी- उउउउउउउउउफ्फ्फफ्फ्फ़ कसी जिद कर रहा है bête चल हैट उठने दे और विशाल को धकेल के उठ जाती है और तेज़ कदमो से भागने लगती है की तभी विशाल उसे कमरे से निकलने से पहले उसकी साड़ी को मुट्ठी में भर लेता है जिस वजह से रागिनी के बीएड से उठते hi उसकी साड़ी खुल जाती है…..

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साड़ी के कंधे से सरकते hi रागिनी की छाती अब विशाल के बिलकुल सामने थी उसकी धड़कने बहुत तेज़ बढ़ने लगी थी और हर बीट के साथ उसकी दोनों चूचिया पुरे जोर से ऊपर निचे होने लगी thi…Ragini के सपाट पेट पे पसीने की बुँदे चमक रही थी और उसके बालो से बेहटा पसीना अपनी जगह बनाते हुवे रागिनी के दोनों चुचिओ के बिच बने घातिओ में बहने लगा था..
रागिनी- aaaaahhhhhhhhhhh विशु क्या कर रहा है ऐकोर वर्ण बहुत मार खायेगा इतनी शैतानी ठीक नहीं देख मेरी साड़ी उतर दी तूने…
इस्पे विशाल रागिनी के पल्लू को मुट्ठी में भर क ीक बार और खींच लेता है जिस से बाकि की बची साडी जो कही कमर के किसी कोने में फांसी थी अब पूरी तरह से उसके जिस्म से अलग होक वही फर्श पर बिखर जाती है…

रागिनी दीवार के सहारे हफ्ते हुवे चिपक के कड़ी हो जाती है और चोर्ने को बार बार मिन्नतें करने लगती है लेकिन उसकी गरम धसधकते जिस्म और उसके मुँह से निकले शब्दों में कोई तालमेल hi नहीं था…. उसकी आहे मनो कह रही हो आजा इस से आगे तो नहीं जा पाऊँगी आ पकड़ ले अपनी बड़ी माँ को और कर ले अपने मन की खा ले गुलाब जामुन और सारा रास निचोड़ ले अपने बगीचे के आम का जिसके लिए तू तरस रहा है

विशाल बीएड से उठ के दिवार से चिपके रागिनी के करीब जाने लगता है और विशाल को अपने करीब आता देख बिना साड़ी के सिर्फ ब्लाउज पेटीकोट में अपने कामुक बदन को छुपाते हुवे रागिनी दीवार के और ज्यादा चिपक के उसे देखते हुवे हाफने लगती है…
विशाल- अब खान जाओगी…
रागिनी (बड़े कामुक भरे अंदाज़ में)- मत कर bête पाप है ये मई तेरी बड़ी माँ हूँ.. लेकिन ये सिर्फ उसके होठ कह रहे थे उसका मादक शरीर नहीं ये उसकी आँखे बता रही थी विशाल को आता देख वो भी अपने पैरो को मलते हुवे अपने लातो को साइड करते हुवे उसे hi देख रही थी मनो कह रही हो ज्यादा समय नहीं है जल्दी खा ले अपने जामुन…
विशाल एक बार फिर से रागिनी को दबोच लेता है और दीवार से लगा के इस बार निचे झुक के उसके पेट को चूमने लगता है…

विशाल- उफ्फफ्फ्फ़ बड़ी माँ तुम्हारी ये पेट कितनी सूंदर है हाय
रागिनी- सभी की तो होती है bête अब चोर दे न क्यों तड़पा रहा है अपनी बड़ी माँ को बस कर अब बाद में प्यार कर लेना चोर दे बचे…
पर विशाल का इरादा कुछ और hi बन गया था वो अब उठ के रागिनी के गार्डन पे टूट पड़ता है

विशाल रागिनी के गार्डन से टपक रहे पसीने की बूंदो को अपने होठो में दबा के चूस जाता है..
रागिनी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है पगले चोरता क्यों नहीं अब
विशाल- तुम्हारे तो पसीने में भी खुशबु है बड़ी माँ तभी अलग अलग लोग तुमसे चिपके थे वीडियो और फोटो में भी…
रागिनी- sssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhh कीसी को मत बताना bête ये सब पता नहीं तेरे हाथ कैसे आ गया….
विशाल- हाँ अगर मुझे भी अपना गुलाब जामुन खिलाओगी…
रागिनी- उफ्फफ्फ्फ़ कैसा जिद ले के बैठ गया है ये लड़का..
इस पकड़म पकड़ाई में रागिनी की साड़ी उतर जाने से रागिनी बस मैरून ब्लाउज पेटीकोट में थी उसकी धड़कने बढ़ने लगी थी उसका छूट भी पसीजने लगा था लेकिन दिनेश और अरविन्द के आने का भी समय हो रहा था जिस से उसकी घबराहट बढ़ते जा रही थी…
विशाल अगले hi पल रागिनी को घुमा देता है और पीछे से उसके गार्डन को चूमने लग जाता है….

रागिनी भी किसी कठपुतली की तरह विशाल के इशारे पेग हम जाती है और अपने पसीने से भीगे गार्डन को विशाल को सौंप देती है लेकिन गार्डन के साथ रागिनी का एक चीज और विशाल के स्पर्श से पागल होने लगा था ो था उसके गोल गोल चूतड़ और उसके वो बड़ी दरार जिसमे विशाल का लुंड अपनी जगह बनाना सुरु कर दिया था…

लुंड का दबाव चूतड़ों पर पड़ते hi रागिनी कसमसाने लग जाती है…. उसके बड़े बड़े चुत्तड़ जिसकी गहराई में पूरा घर कभी न कभी खो चुक्का है वो चुत्तड़ विशाल के लुंड के लिए एक संकरी दीवार प्रतीत हो रही थी…
पेटिक्ट के पतले कपडे को चीरता फाड़ता विशाल का लुंड रागिनी के छूट के मुहाने पे तो कभी उसके तंग छोटी सी भूरे गांड के बने उस छेद को ठोकर मरने लगा था जहां के छुवन मात्रा से रागिनी के छूट से पानी बहते हुवे उसके जांघो पे बहने लगी थी…
रागिनी (uufuuuuuuuuuuuuffffffffff कितना बड़ा और मोटा लग रहा है इसका लुंड अगर जल्दी नहीं छूट पायी तो माँ छुड़ाने गया दिनेश मैं इसके लुंड पे कूदने न लग जाऊ).-
रागिनी- uuuuuuuuuffffffffffffffff विशु चोर दे bête बहुत प्यार कर लिया अपनी बड़ी माँ को कुछ अपने बड़े पापा के लिए भी चोर दे…
रागिनी के ये शब्द साफ़ जाहिर कर रहा था की वो क्या चोर्ने के लिए कह रही थी लेकिन हाथ में आया खजाना कौन hi चोरता है….

विशाल अब निचे झुक के रागिनी के नंगे कमर पे चूमियो के बौछार कर देता है साथ hi उसके कोमल मक्काहान जैसे चर्बीदार मगर सपाट पेट को अपने दोनों हाथो में भर के मसलने लग जाता है…
विशाल- बड़े पापा तो करते hi है बड़ी माँ आज मुझे प्यार करने दो न कितनी अछि खुसबू आ रही है तुम्हारे बदन से मेरा चोर्ने का तो दिल hi नहीं हो रहा है… ये बात विशाल रागिनी के पेट को लगातार मसलते हुवे बोल रहा था….

Ragini-bas कर विशु अब मुझे भी कुछ होने लगा है अब जाने से मुझे वर्ण पाप करवा देगा तू मुझसे और इतना कह के रागिनी विशाल से छूटे हुवे एक बार फिर से घूम जाती है और बी विशाल का लुंड रागिनी के चूतड़ों से आज़ाद हो चुक्का था जो थोड़ी देर पहले उस गहरी घाटी में फसा हुआ था…
रागिनी के घूम जाने से अब दोनों एक बार फिर से आमने सामने हो जाते है रागिनी की तेज़ धड़कने और आँखों में भरी वासना की चमक उसके चेहरे पे तैरने लगा था…. दोनों की नज़रे आपस में मिल जाती है रागिनी की प्यास उसके आँखों में साफ़ नज़र आने लगा था वो कभी अपने होठो को अपनी गार्डन आगे कर के विशाल के होठो से मिलाने की कोशिश कर रही थी तो अगले hi पल जैसे कुछ था जो उसे रोक रहा था और वो अपने को रोक लेती थी लेकि उसके होठ अब विशाल के होठो से मिलने के लिए मनो तड़पने लगी थी जिसकी सुरुवात उस से नहीं हो पा रहा था…

रागिनी की आँखों में तड़प और वासना दोनों भर भर के मनो अब उसके आँखों से छलकने लगा था ो विशाल को खुद को सपने के लिए तैयार थी उसके होठ विशाल के होठो से मिलने से तरस रहे हो लेकिन एक औरत वो भी रिश्ते में बड़ी माँ ये कदम उठाये तो उठाये कैसे हाँ अगर उसका बीटा विशाल कुछ किया तो वो नहीं रोकेगी और सईद रागिनी अब विशाल के सुरु करने का इंतजार हो और विशाल का भी हल कुछ यही था अब तक जॉब hi किया उसमे उसे रागिनी से नजरे नहीं मिलनी पद रही थी लेकिन आँखों में आंखे दाल के चूमना पहली बार में थोड़ा हिम्मत का काम तो tha..par जॉब hi हो अब पीछे का कोई रास्ता नहीं था और देखते hi देखते दोनों के गरम सुलगते होठ आपस में मिल जाते है….

और देखते hi देखते बड़ी माँ और बीटा का वो पवित्र रिश्ता सईद अब इसी चूमियो के साथ टूट चुक्का था अब ये दो गरम जिस्म एक दूसरे में मिल जाना छह रहे हो रागिनी भी अब विशाल को अपने होठ नहीं अपने गरम सुलगते जिस्म सौंप दी थी..
रागिनी- uuuuuuuuuuuuuuuuummmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmuuuuuuuuuuuu
विशाल अब अपने हाथ रागिनी के चुचिओ पे ले जा के उसे मसलने लग जाता है वो वही रागिनी भी विशाल के होठो को चूसते हुवे उसके बलिष्ठ मर्दाने चौड़ी छाती पे हाथ फेर के मनो उसके मर्दानगी का जायज़ा ले रही थी…
काफी लम्बे चले चुम्बन के बाद रागिनी अपने होठो को आज़ाद करते हुवे तेज़ तेज़ हाफने लगती है
रागिनी- आआआआह्ह्ह्ह ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह uffffffffffffffff
Vishal-wow बड़ी माँ क्या नरम होठ है तेरे
रागिनी- चुप कर आखिर कर लिया न अपने मन की…
विशाल- अभी खान बड़ी माँ अभी तो कुछ भी नहीं kiya…aur एक बार फिर से रागिनी के चेहरे को पकड़ के उसके तेज़ चल रहे सांसो पे काबू पाने से पहले वापस से उसके होठो को अपने होठो से दबा लेता है…

रागिनी भी विशाल के चूमीओ का जवाब ज्यादा भड़काऊ औरत बन के देने लगी थी जो बता रही थी की उम्र जॉब hi हो उसमे आग बहुत है और वो विशाल को अपने आग में झुलसा सकती है…
विशाल भी लगातार रागिनी के होठो का रास अपने होठो से निचोड़ते हुवे निचे उसके मखमली पेट को बड़े जोरो शोर से मसल रहा था जिसका रैंड गोर पैन से लाल हो चला था…
रागिनी अब विशाल के चुम्बन का जवाब निचे से अपने छूट का दबाव विशाल के लुंड पे बढ़ा के देने लगी थी सीधे शब्दों में कहु तो रागिनी विशाल के ुण्ड पे अपने छूट से झटके लगाने लगी थी जैसे वो विशाल को छोड़ रही हो…
विशाल भी रागिनी के बढ़ते कामवासना को देखते हुवे उसके कमर में अपने दोनों हाथ दाल के अपने से कास लेता है और अगले hi पल घुमा के बीएड पे पटक देता है…
Ragini-aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh
रागिनी बीएड पे बैठ के अपने दोनों हाथ पीछे टिका के और पैरो को बीएड से निचे लटका के विशाल को देखने लग जाती है मनो पूछ रही हो अब क्या???

विशाल एक बार फिर से रागिनी को अपने बहो में भर लेता है और सके छतियो को चूमने लग जाता है…
विशाल उसके छतियो पे हाथ फेरते हुवे पहले उसके गलो को चूमते हुवे उसपे अपनी गरम सांसो की बौछार करने लग जाता है रागिनी एक कामुक गरम औरत बड़े मुश्किल से खुद को अब तक रोके राखी थी उसका बांध भी अब कभी भी टूट सकता था रागिनी विशाल के बाप अशोक का लुंड तो खाया की नहीं पता नहीं लेकिन लगता है उसके bête का लुंड आज जैसे खा hi लेगी…
विशाल अब रागिनी को बीएड पे लेता के उसके ऊपर आ जाता है और उसके पेट गार्डन और छतियो को पुरे जोश में चूमने चाटने लग जाता है…

रागिनी अब छटपटाते हुवे अपने सर को दये बाये पटकने लगती है उसकी सांसे बेकाबू होने लगी थी और उसके हाथ विशाल के सर पे जोर जोर से चलने लग जाता है… विशाल भी उसके ऊपर लेते लेते पेटीकोट के ऊपर से hi अपने लुंड का दबाव उसके छूट पे बनाने लगा था मनो बता रहा हो देख बड़ी माँ कितना दमदार लुंड तेरे अंदर घुसने वाला है जो तेरी छूट की धज्जिया उदा देगा ठीक वैसे hi जैसे तेरी बेटी की उदा के आया है और वो मरे हालत में अपने रूम में पड़ी है..
रागिनी भी लगातार अपने ऊपर विशाल के द्वारा हो रहे प्रहार से पिघलने लगी थी. उसका दी लैब आगे बढ़ने का होने लगा था पर वही कश्मकश जहां वो खुद पहले बढ़ना नहीं छह रही थी लेकिन विशाल को रोकती भी नहीं…

विशाल अब रागिनी के पैरो को तो उसके पिंडलियों से होते हुवे हुवे उसके पेटीकोट को उठाते हुवे उसके जांघो पे जुबान फेरना लगा था और जांघो को छत्ते हुवे उसे बिच बिच में काट भी रहा था
रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh चोर दे bête अब तो इतना कुछ कर लिया बस कर अब (या ले ले अपने गुलाब जामुन मैं नहीं रोकती इस से पहले की दिनेश आ जाये)
विशाल- क्यों बड़ी माँ आपको ाचा नहीं लग रहा मेरा आपको प्यार करना
रागिनी अब कैसे बोले की वो जो कर रहा है वो प्यार नहीं हवस है जिसके अंधी में उनका पवित्र रिश्ता तबाह हो जाएगगा वो मन hi मन लुंड के लिए तड़पने लगी थी वो दुआ करने लगी या तो दिनेश आ के उसे इस परिस्थिति से बचा ले या विशाल आगे बढ़ के कर ले ज करना है बस ऐसे बिच में रहने से उसकी तड़प उसकी जान ले रही थी… उसका गाला सूखा जा रहा ता और सूखे भी क्यों न गले का पैनिक हूत से जॉब बह रहा था…
कोई और होता तो सईद रागिनी को अब तक छोड़ चुक्का होता लेकिन विशाल को औरत को तड़पा के छोड़ने में मज आता है जिसमे वो खुद लुंड मांगे जैसे उसकी देवरानी अलका होय ा उसी के छूट से निकली उसकी बेटी ऋचा..
रागिनी की आग अब और ज्यादा उस से संभाल पाना मुश्किल होने लगा था ो तड़पते हुवे अपने दोनों पैरो को विषा के गार्डन पे रख उसे खींच के अपने छूट पे उसके चेहरे को दबा लेती है…
विशाल भी रागिनी की बढ़ती बेचैनी को देख अपने जीत की और एक कदम बढ़ते हुवे पेटीकोट के ऊपर से hi उसके छूट पे जैसे hi हाथ रखने वाला था की गाड़ी के हॉर्न की आवाज़ आती है जिसे सुनते hi रागिनी जो थोड़ी देर पहले विषा को अपने पैरो में जकड के अपने छूट पे दबा रही थी वही रागिनी अपने उसी पेअर से विषा के छाती पे मरते हुवे अपने से अलग करने लगती है…
रागिनी की दुआ भगवान ने सुन लिया था और उसकी इज़त तार तार होने से बचने के लिए उसके पति दिनेश को घर बिलकुल सही समय पर भेज दिया tha……lekn सईद रागिनी को दिनेश का इस समय आना बिलकुल भी पसंद नहीं आया था..

दोनों बड़े बेमन से बहार की तरफ देखने लग जाते है विशाल का हाथ अब भी रागिनी के कमर पर hi था और रागिनी का हाथ भी अभी तक विशाल के कंडे और छाती पे था....
दिनेश के कदमो की आहात आने के बावजूद भी विशाल मनो रागिनी को चोर्ने को राजी नहीं था और वो दिनेश के पास आने की परवाह किये बिना उसके बीवी को उसी के कमरे में अपने बहो में भर के चुम रहा था...
विशाल- मुझे गुलाब जामुन कहने है बड़ी माँ

रागिनी- चल अब तो चोर दे तेरे ताऊ आ गए बहुत कर लिए प्यार तूने अपनी बड़ी माँ को अब जा जल्दी वो आते hi होंगे..
विशाल- और मेरा गुलाब जामुन??
रागिनी- वो मौका तो तूने गवा दिया हेहेहे
विशाल- नहीं मुझे चाइये पहले बोलो डोज की नहीं वर्ण मैं यही रहूँगा ऐसे hi और आपको भी नहीं जाने दूंगा
रागिनी- ओहो विशु अभी जा फिर कभी देखते है
दिनेश की आवाज़ अब सुनाई देने लगी थी जिसका मतलब था ो कमरे के करीब आने लगा था
विशाल भी जल्दी से उठ के वहां से जाते हुवे रागिनी को देख के बोलते हुवे जाता है…
विशाल- गुलाब जामुन तो मैं खा के रहूँगा बड़ी माँ और अपने मोबाइल का स्क्रीन दिखते हुवे जाता है जिसका मतलब था की आपके काळा कारनामे मैंने अपने मोबाइल में ट्रांसफर कर लिया है…
रागिनी विशाल के इस तरह से धमकाना रागिनी को बुरा नहीं लगा बल्कि वो और लाड प्यार से विशाल को वही बीएड पे बैठे बैठे देख रही थी

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रागिनी वही पेटीकोट और ब्लाउज में बीएड पे बैठे बैठे अपने bête के सामान के भतीजे को जाता देख रही थी… वही भतीजा जो पिछले 1-2 घंटे से रागिनी को उसी के बिस्टेर पर रगड़ रहा था और अगर दिनेश थोड़ी देर और न आता तो सईद उसकी बवि रागिनी उसी के बैडरूम में उसी के बिस्टेर पे अपने छोटे भाई के bête से चुद जाती…. और यही सब ख्याल ने रागिनी के अधरों पे मुस्कान ला दिया था लेकिन दिनेश अब किसी भी वक़्त कमरे में आ सकता था इसलिए वो जल्दी से उठ के अपने फर्श पे बिखरे सरे को उठाने लगती है और तेज़ी से पहनने लगती है…

दिनेश कमरे में घुसते hi देखता है उसकी बीवी साड़ी लप्पेट रही है जो इस वक़्त अधनंगी थी और उसकी नज़रे निचे थी जिस से वो दिनेश को आता नहीं देख पायी थी पर ऐसा दिनेश को लगता था क्युकी दिनेश के आने की खबर तो उसे कब का लग गया था…
दिनेश- अरे भाग्यवान ये क्या दिन दहाड़े नंगी हो रही है रात तक का तो सब्र कर लेती.. मैं तो बस रोटी खाने आया था और तू पूरा भट्टी खोल के बैठी है
रागिनी- चुप करो हर वक़्त तुम्हे यही सूझता है.. मैं बस कपडे बदल रही थी खाना बनते हुवे साड़ी गन्दी हो गयी थी… चलो खाना लगाती हु विशाल और ऋचा को भी आवाज़ दे दो
दिनेश- सिर्फ विशाल ऋचा और अलका खा गयी?
रागिनी- उगाई होगी किसी काम से मार्किट वगैरह..
दिनेश- ठीक है ठीक है तू खान लगा और दिनेश एंड रागिनी खाने के मेज की तरफ चल देते है….
नेक्स्ट अपडेट में देखते है विशाल को गुलाब जामुन मिलता है या अभी और सब्र करना होगा.???? उधर दिनेश को टाइम पे घर भेज के ऊपर वाले ने भी रागिनी को एक मौका दिया है खुद को बचने का पर क्या वो खुद को बचाएगी या लेट जाएगी विशाल के निचे ये वक़्त hi बताएगा…




































































