Incest Kamuk Alka - Page 4 - SexBaba
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Incest Kamuk Alka

part-21

दोनों के शरीर की हवस इतना बढ़ चुक्का था की क्लब से होटल तक का रास्ता भी दोनों से कटा जाना मुश्किल होने लगा था…. विशाल टैक्सी में hi अपनी माँ अलका की जांघो को सहलाने लगता है अलका भी अपने bête का साथ देते हुवे अपने पेअर फैला लेती है जिस से उसकी गीली छूट विशाल के नजरो के सामने आ जाती है विशाल लालच और खा जाने वाली नज़रो से देखते हुवे अलका के जांघ को मसलते हुवे उसके उसके ड्रेस को ऊपर की और खिसका देता है और अलका के छूट पे अपना हाथ रख देता है






अलका जो इस वक़्त कामवन की आग में जल रही थी जिसे इस वक़त किसी भी हालत में चुदाई चाइये थी विशाल के इस हरकत से उत्तेजित होने लगती है..

विशाल धीरे धीरे अलका के ड्रेस को ुकि छाती से निचे खिसका देता है जिस से अलका की चूचिया बहार आ जाती है






अब अलका का ड्रेस सिर्फ उसके पेट के पास फंसा हुआ था ो ऊपर और निचे दोनों तरफ से नंगी थी… वासना में दोनों माँ bête को इस बात की कोई परवाह नहीं थी की ड्राइवर उन्हें ये सब करता हुआ देख रहा है और अपना लुंड मसल रहा है… पर विशाल को इस बात की खान फ़िक्र थी वो तो अपनी माँ अलका के चूचियों से जैसे दूध निकलने की कसम खा राखी हो कुछ इस तरह मसल रहा होता है..





अलका से भी जब रहा नहीं गया तो वो विशाल का लुंड उसके पंत से बहार निकल कर उसपे अपना हाथ फेरने लगती है या तुन कहो अपने bête का मुठ मार रही thi…alka का गोरा कामुक बदन कार की धीमी रौशनी में भी चमक रही thi..baat जब लोडे पे हाथ सहलाने से भी न बानी तो अलका झुक के विशाल का लंड अपने मुँह में भर लेती है और लोल्लयपोप की तरह चूसना शुरू कर देती है….





विशाल- aaaaaaaaaahhhhhhhhh माँ क्या जादू है आपके मुँह में

अलका बस उसकी आँखों में देख क एक समयले पास करती है और लुंड चूसना जारी रखती है.. वो लुंड को ज्यादा से ज्यादा मुँह में भरने लगती है.. विशाल को इसमें बहुत मजा आ रहा था ो अलका के मुँह को अपने लुंड पे ज्यादा से जयादा दबाने लगता है और अलका भी भुकी कुटिया की तरह उसके लुंडपे टूट पड़ती हो मनो कुटिया को हड्डी मिल गयी हो…

विशाल- माँ

अलका- hmmmmm(muh में लुंड भरे हुवे)

विशाल- मेरे गॉड में बैठो न

अलका- तेरी गॉड में या तेरे लोडे पे

विशाल- हाँ मेरी जान मेरे लोडे पे बैत न

फिर अलका उठ के विशाल के लुंड पे बैठ जाती है बूत लुंड छूट में नहीं लेती बसा उसके लंड पे अपनी गीली छूट रगड़ते रहती है और अपनी गोरी गोरी गांड विशाल की तरफ कर के कमर हिलने लगती है






विशाल मनो मस्ती के सातवे आसमान में था… उसका दिल कर रहा था अभी यही अलका को पटक पटक के चोदे लेकिन उसे होटल में अलका के गोर बदन को नोचना था ये गली में उतनी जगह नहीं थी..

धीरे धीरे एक दूसरे के अंगो के साथ खेलते हुवे दोनों होटल पहुंच जाते है…

अलका विशाल को उसका लोढ़ा पकड़ के रूम के अंदर लती है और बड़े अदाओ के साथ अपने कपडे उसके सामने उतरने लगती है मनो कोई बाजारू औरत अपने आज रात के ग्राहक को खुश करना छह रही हो






कपडे के उतारते hi अलका विशाल के सामने पूरी तरह से नंगी हो जाती है और फिर वो बड़े अदाओ से अपनी गांड विशाल की तरफ घुमा के अपने दरस जो उसके पैरो में फंसा हुआ था वो उतर के फ़ेंक देती है





. अब अलका अपने bête या अपने आशिक़ के सामने बिलकुल नंगी कड़ी थी उसकी सांसे उसके काबू में न थी हर साँस के साथ उसकी चूचिया भी ऊपर निचे हो रही थी… विशाल उसके गार्डन को पकड़ उसे दीवार की तरफ धकेलते हुवे दिवार के सहारे खड़ा कर देता है और उसके होंटो को चूमना और उसकी भरी भरी चुचिओ को मसलना सुरु कर देता है





अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh धीरे

विशाल- अभी तो धीरे hi हाथ रखा है मेरी जान अभी से गांड फैट गयी तेरी

अलका- मेरी गांड चोर मेरे छूट की आग शांत कर उसे फाड् हिमत है तो

विशाल हस्ते हुवे अलका को देखता है और उसकी चुचिओ पे एक जोरदार थपड मार देता है…






एक hi थपड में उसकी गोरी गोरी कासी हुई चूचिया अगले hi पल लाल हो जाता है… जिसे देख के विशाल एक के बाद एक 4-5 थपड और लगा देता है…





अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhh इतस हर्टिंग विशु

विशाल- अभी खान हर्ट किया है मेरी सेक्सी माँ

अलका भी उसकी बात सुन के मुस्कुरा देती है उसकी मुस्कराहट बहुत कामुक थी…

विशाल अलका का सर पकड़ के निचे दबाने लगता है.. अलका भी समझ जाती है अपने bête के इशारे को और घुटनो के बल बैठ जाती है विशाल के दोनों जगहों के बिच और विशाल के लुंड को पकड़ की उसे किश कर लेती है और उसपे अपनी जुबान फेरने लगती है..






देखते hi देखते वो विशाल के पुरे लुंड को अपने मुँह में भर लेट है जो बड़े मुश्किल से उसके मुँह में समां पा रहा था पर औरत के हवस की आगे किसी भी लुंड की क्या औकात….





विशाल भी अलका का सर अपने लुंड पे पूरा दबा देता है जिस से की उसका लुंड पुरे जड़ तक अलका के गए में चला जाता है उसकी आवाज़ घुट घुट की ा रही थी लेकिन विशाल अभी भी उसका मुँह अपने लोड पे दबाये रखा था… धीरे धीरे विशाल अलका के मुँह को छोड़ने लगता है वो अपना कमर आगे पीछे करते हुवे अपनी माँ के मुँह में झाके मार रहा था…









जब उसने अलका के मुँह से लुंड निकला तो मनो उसके मुँह से कोई सांप निकला हो इतना लम्बा और मोटा लुंड पता नहीं कैसे ये औरत अपने छेद में हज़म कर जाती है फिर चाहे वो मुँह होय ा उसकी chut…lund के साथ ढेर सारा लार और थूक भी अलका के मुँह से बहार गिरने लगता है जो विशाल के ाँद और अलका के चुचिओ पे फ़ैल जाता है…

विशाल अपना लुंड अलका के होंटो पे मरने लगता है अलका भी उसका लुंड मुँह में भरने के लिए तड़पने लगती है और अपने होंठ खोल के अंदर लेने की कोशिस करने लगती है…






अलका की ये हालत देख के विशाल को बहुत मजा आता है वो छठा था की अलका को इतना गरम कर दे की वो लुंड की भीख मांगे और अलका जैसी औरत को छोड़ने का मजा तो तभी है जब वो लंड के लिए रंडी तक बनने को राजी हो जाये..

विशाल अलका के चुचिओ को मसलते हुवे उसके गाल पे एक थप्पड़ लगा देता है जो की बहुत धीमी थी.






अलका- मरना है तो जोर से मर न ये औरतो की तरह क्या मार रहा hai…alka ने ये बोल के मनो विशाल के मर्दानगी को उकसाया हो विशाल भी उसके बाल को बड़े बेरहमी से पकड़ के खींचता है और उसके चेहरे पे 4-5 थपड एक के बाद एक जड़ देता है…





अलका को इस दर्द में भी मजा आ रहा था…

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh हिट में................ हिट में हार्ड यू मोथेरफुकेर

विशाल और तेज़ मरता है अलका के आँखों में आंसू आ जाते है उसके गालो पे मनो खून उतरा आया हो जो कह रहे हो और नहीं प्लस और न मारो लेकिन अलका की हवस तो कुछ और hi कह रही थी

अलका- ओने मोरे ओने मोरे विशु और तेज़ मार माँ के लोडे मर्द नहीं है क्या

विशाल समझ जाता है उसकी माँ अब गरम हो गयी है और उसका ये वासना में जलता बदन वो सरे जुल्म और दर्द सहने को तैयार है जो उसे चुदाई के दौरान मिलने वाला था…

विशाल अलका को अपनी गॉड में उठता है और उसे बीएड पे लिटा देता है और अपनी जुबान अलका को छूट पे रख के उसके दानो को चाटने लगता है






अलका भी मस्ती में अपनी दोनों टंगे पूरी तरह से खोल के हवा में लहरा देती है जिस से की विशाल अचे उसके छूट को चूस और चाट सके वो विशाल के चाटने से मचलने लगती है उसका चेहरा अपने छूट पे दबाने लगती है…





अलका वासना की आग में इस तरह जल रही थी की वो उसमे आज विशाल के लुंड को भी पिघला degi..vishal पुरे शिद्दत से अपनी माँ अलका के छूट को चाट रहा था और साथ hi उसकी चर्बीदार मगर सपाट पेट क तो कभी अपनी माँ की चुचिओ को मसल रहा होता है जिसमे अलका को दर्द के साथ मजा का एक मिलजुला सुख मिल रहा था

विशाल चूसने के साथ साथ उसके दानो को काट भी रहा था और थोड़ा जोर से काट रहा था जिस से दर्द के मरे अलका चटपटे हुवे ऊपर को सरकने लगती है तो विशाल वापस से उसकी जांघो को पकड़ के अपनी और खींचता है और दुबारा से उसके छूट के दानो को चाटने काटने लग जाता है.. अलका जब जब चटपटा की आगे की और खिशक्ति है






विशाल अलका को किसी गुड़िया की तरह अलका की टंगे पकड़ के अपनी और खींचता है अलका भी विशाल के हाथो की कठपुतली बन गयी थी वो जैसे नचा रहा था अलका वैसे hi नाच रही थी

अलका- विशाल अब बर्दाश्त नहीं होता दाल दे न

विशाल- अपना चेहरा अलका के छूट से निकल के उसकी तरफ देखता है और पूछता है क्या खुल के बोलो?

अलका- दाल दे अपना लुंड मेरी छूट में बहुत खुजली हो रही है और मत तड़पा मुझसे बर्दाश्त नहीं होता…

विशाल चुदाई में अपनी माँ को आज और ज्यादा हुमिलियते करना छह रहा था इसलिए वो अलका से दूर हटकर खड़ा हो जाता है.. अलका हैरानी भरे नजरो से देखती है मनो पूछ रही हो की क्या hua….chod दे न अब और कितना तड़पाएगा अपनी माँ को… पर विशाल अलका को अपना लुंड दिखा के हिला रहा था मनो किसी कुटिया को हड्डी दिखा के ललचा रहा हो… जब अलका से बर्दाश्त न हुआ तो वो काउच से उठ के विशाल की तरफ बढ़ जाती है पर हरामी विशाल के दिमाग में तो कुछ और hi चल रहा था उसने अलका को रोकते हुवे खा

विशाल- अहा न न ऐसे नहीं आज तुझे अपनी कुटिया बनाऊंगा..

अलका- हाँ तो हु न मैं तेरी कुटिया तेरी पालतू अब चल दाल दे अपना लुंड मेरी छूट में ले मैं बन गयी कुट्टी तेरी माँ अलका तेरे लुंड लेने के लिए कुट्टी भी बन जाएगी और अलका दोगी पोज़ में बैठ जाती है विशाल को अपना गांड दिखते हुवे….






विशाल- नान ा वो तो तू बनेगी hi आज पर तुझे कुछ और करना होगा अपने छूट में मेरा लुंड लेने के लिए..

अलका- अब क्या करना होगा मत तड़पा न बहुत जोर से खुजली हो रह मेरी छूट में तू नहीं छोड़ेगा तो मैं ऐसे hi बहार चली जाउंगी नंगी फिर कोई और तेरी माँ छोड़ेगा और तू ऐसे लुंड पकड़ के देखते रहना….

विशाल- साली रंडी मेरे होते किसी और से छुड़ेगी???

अलका – तो तू छोड़ ले बाटे क्यों बना रहा है

विशाल- तुझे मेरा लुंड चाइये तो आ के ले ले लेकिन ऐसे चाक इ नहीं

अलका- फिर कैसे??

विशाल- कुटिया है न मेरी फिट कुट्टी की तरह चाक के आ अपने मालिक के पास …. विशाल के इस डोमिनेटिंग नेचर पे अलका मुस्कुराते हुवे उसे देखती है और फिर किसी कुटिया की तरह 4 पैरो पे चलते हुवे और अपनी मखमली गांड मटकते हुवे अपने मालिक के पीछे पीछे जाने लगती है






विशाल- शाबाश मेरी कुटिया आजा ऐसे hi आ और मांग अपने मालिक से लुंड बोल की वो तुझे चोदे..

अलका- यस प्लस विशाल अपनी माँ को छोड़ दे bête ये लुंड अपनी माँ के बुर में दाल के उसकी बुर फाड़ दे आअह्ह्ह कितना कदल लोढ़ा है तेरा आजा छोड़ अपनी माँ को दूर दूर क्यों जा रहा है देख तेरी माँ कुट्टी की तरह अपनी छूट लिए तेरे पीछे पीछे आ रही है छोड़ेगा नहीं अपनी अलका को??






विशाल अलका को धक्का दे के काउच पे लिटा देता है और फिर उसके चुचो को मसलते हुवे कहता

विशाल- बहुत आग लगी है तेरे छूट में साली की मैं नहीं छोडूंगा तो किसी और का लुंड ले लेगी

अलका- हाँ लगी है बुझा दे मादरचोद






विशाल अलका के ऊपर आ जाता है और अलका के गोर बदन जिसको नोच नोच के विशाल ने लाल कर दिया था वो होंठ जिस से मनो ा बरस टपक पड़ेंगे को वापस से अपने मुँह में भर लेता है.. नाजुक सी अलका उसके मस्कुलर बॉडी में मनो खो सी जाती है….

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh फ़क में bête

विशाल अपना लुंड अलका के छूट के मुहाने पे रगड़ने लगता है जो उसकी माँ की कामाग्नि को और भड़का रही थी…

और फिर उसके छूट के पानी से विशाल का लुंड गिला होने लगता है विशाल से भी कण्ट्रोल कर पाना मुश्किल था ो लुंड को रगड़ते रगड़ते अपना टोपा अलका के छूट में घुसा देता है

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaa फ़क में ुर अपनी चुकी को अपने hi हाथो से मसलने लगती है






तो बे छॉंट.............
 
Part-22



विशाल का लुंड अलका के छूट के अंदर जाते hi अलका एक सुच के सागर में डुबकी लगाने लागत है उसके मुँह से एक सिसकारी फुट पड़ती है

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhh फ़क मइईईई

और अभी उसे सुच के दर्शन हुवे hi थे की विशल ने अपना लुंड अलका के छूट से वापस निकल लिया..





अलका को ये बिलकुल भी अहा नहीं लगा और वो आंख खोल क विशाल की तरफ देखने लगती है विशाल हस्ते हुवे मनो उसे चिढ़ा रहा हो और अलका का लोड के लिए तड़प देख के उसे मजा आ रहा हो.. अलका भी उटजन में आ के विशाल के लुंड को पकड़ के खुद hi अपने छूट में दाल लेती है





लुंड छूट के अंदर जाते hi माँ bête दोनों के मुँह से एक आआअह्हह्ह्ह्ह निकल जाती है..

विशाल- aaaaaaaahhhhhhhhhh तेरी छूट जितना छोड़ू अगले दिन फिर से उतनी hi कासी हुई होती है..

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaa थोड़ा धक्के लगा अब

विशाल भी अब जोश में आने लगता है और वो अलका के छूट में धक्को की स्पीड बढ़ा देता है …

विशाल- ये इ साली बहुत आग है न तेरे छूट में बोल के तेज़ तेज़ झटके मारने लगता है

अलका- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऐसे hi बहुत देर से मेरी छूट तड़प रही थी इस पल के लिए छोड़ bête अपनी माँ को अचे से भर दे उसकी बुर को

विशाल- हाँ माँ आअज तेरी आग मैं शांत कर दूंगा

और विशाल अलका के बाल पकड़ के ऊपर खींच देता है जिस से उसकी गार्डन हवा में आ जाती है और निचे से झटके तेज़ कर के छूट को प्लेन सुरु कर देता है





अलका- aaaaaaaaaahhhhhhhhhh हरामी मेरे बाल ुकहाड़ेगा क्या आआआआहहहहह धीरे कर हैवान hi हो जाता है साला

विशाल- तेरे जैसी रैंड को धीरे में खान मजा आता है

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh सही खा चुदाई का मजा तो हैवानियत में hi है aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh mamaaaaaaaaaaaa

विशाल- फिर रोटी क्यों है बहनचोद

अलका- दुखता भी तो है bête

विशाल अलका के छूट में लुंड डेल डेल उसे उठा के सामने के चेयर पे बिठा देता है चेयर में जगह काम होने के वजह से अलका को उस थोड़ी सी जगह में hi सिमट जाती है पैरो के सिकुड़ने से उसकी छूट और टाइट हो जाती है विशाल को अपना लुंड काफी कैसा कैसा लगने लगता है मनो किसी तंग गली में ट्रक घुस गया हो





विशाल पुरे स्पीड में अपनी माँ की छूट पेलने फाड़ने में लग गया था और अलका की इस पोजीशन में हालत ख़राब होने लगती है वो तेज़ तेज़ चीखने लगती है इस पोजीशन में उसकी छूट कुछ ज्यादा hi टाइट हो गयी थी जिसमे विशाल का लुंड फास फास के जा रहा था और छूट की दीवारों में लुंड कुछ ज्यादा hi घर्षण कर रहा था जिस से अलका को अपने अंदर जलन होने लगती है

अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh बहार निकल मेरी छूट जल रही है आआआहहहहह निकल इसे नहीं बर्दाश्त हो रहा मेरे से

पर विशाल उसे वैसे hi छोड़ते रहता है और उसके गांड पे थपड मरना सुरु कर देता है.. दर्द से अलका वही कुर्सी पे निढाल हो जाती है वो चीखने के साथ रोने भी लगती है पर विशाल उसके छूट को ओखली की तारा कुत्ते जा रा था अपने मोठे लम्बे मुसल से .. अलका जितना चीखती जितना रोटी वो उतना hi थप्पड़ मरता था और झटके तेज़ करता था… और चीखते चीखते वही उसकी छूट अपने पानी का धार चोर देती है और अलका बेजान हो के कुर्सी पे सहारे hi बैठी रहती है…

काफी देर इसी पोस्टिव में छोड़ने के बाद वो अलका को गोदी में उठा के काउच की तरफ बढ़ जाता है कुर्सी से उठते hi अलका को भी अब कुछ ाचा और फ्री फील होने लगा

वो वापस अलका को काउच पे लिटा देता है और अपना लुंड पेलने लग जाता है





अलका भी अपनी गांड उठा उठा के पूरा साथ दे रही थी … अलका की छूट अब दूसरे राउंड के लिए तैयार लग रही थी वही विशाल का अभी भी नहीं हुआ था….

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh और तेज़ तेज़ खटके मार मादरचोद डैम नहीं है क्या भड़वे

विशाल- ये ले रंडी और तेज़ ले अभी रो रही थी अभी फिर से तेरी छूट आग उगलने लगी साली

अलका- तो ठंडा कर दे न मेरे खसम कजोड़ अपनी माँ को पूरा डैम लगा के फाड़ दे मेरी छूट मेरे bête विशाल का लुंड लेते हुवे अलका अपनी छूट को मस्सगे दे रही थी जिसकी उसके छूट को जरूरत भी थी

विशाल अपने स्पीड बढ़ाते हुवे पुरे तेज़ी में छोड़ने लगता है और उसके चुचिओ को अपने थपड से लाल करने लग जाता है…





अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh और मार मुझे कोई रेहम मत करना मुझे किसी रंडी की तरह छोड़ फाड़ दे मेरी छूट नोच दाल मेरे चुचिओ को ले चूस इसे पि जा कहते हुवे अपनी चुचिअ उसके तरफ बढ़ा देती है…

विशाल- aaaaaaaaaaahhhhh बहुत टाइट छूट है तेरी रंडी अशोक ने तुझे कभी छोड़ा नहीं क्या अचे से..

अलका- तो तू छोड़ ले न मेरे लाल अशोकको चोर अब तेरी माँ तेरे निचे लेती है तेरी रांड बन के …

विशाल- aaaaaaaaaaaahhhhhh माँ तेरे मुँह से ये सब सुन के और जोश आ जाता है

अलका- तो माँ नहीं रांड hi बोल मई अपने bête की रंडी हु उसकी रखैल बनूँगी मैं oooooooooooohhhhhhhhh उउउउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़

अलका को खुद नहीं पता वो जोश जोश में क्या बड़बड़ा रही थी… वो बस विशाल के जोश को दोगुना करना छह रही थी अपने बातो से

विहल- चल मेरी रंडी माँ घोड़ी बन जा पीछे से छोडूंगा अब तुझे….

अलका भी बिना समय गवाए अपनी बड़ी बड़ी चूतड़ों वाली गांड विशाल की तरफ घुमा के घोड़ी बन जाती है और अपने चूतड़ फैला देती है जिस से उसकी छूट पूरा खुल के दिख सके उसके आशिक़ विशाल को..





विशाल- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माँ तेरी गांड देख के मन करता है अपना लुंड तेरे गांड में पेल दू…

अलका- नहीं bête गांड में नहीं तू अभी मेरी छूट की आग शांत कर ये और फैला दिए मैंने तेरे लिए अब दाल अपना लुंड अपनी माँ की छूट में और छोड़





विशाल- aaaaaaaaaaahhhhhh माँ मुझे तेरी गांड मारनी है प्लस

अलका- उसकी बात फिर कभी bête अभी जो कर रहा है वो कर ले मई प्रॉमिस करती हु मेरे गांड का सील तू hi तोड़ेगा पर जब मई तुझे कहूँगी तब आज सही मौका नहीं है…

विशाल फिर बिना टीम बर्बाद किये अलका के छूट में अपना लुंड सेट करता है और गांड न मिलने के गुस्से में एक तेज़ झटका मरता है जिस से पूरा का पूरा लुंड एक झटके में अलका के बच्चेदानी से जा टकराता है अलका की मनो जान निकल गयी हो वो बहुत जोर से चीखती है

अलका- uuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii mmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaa maaarrrrrrrrrrrrrr gagggggggyyyyyiiiiiiiiiiiiiii सेल भड़वे मादरचोद आराम से नहीं दाल सकता एक hi बार में दाल दिया मेरी माँ छोड़ दी तूने मादरचोद

विहल बिना कुछ बोले अलका के कमर पकड़ के झटके लगाना जारी रखता है…. वो बार बार अपना लुंड बहार निकलता और एक बार में दाल देता और अलका दर्द से बिलबिलाने लगती





अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh छोड़ अब तेज़ थोड़ छोड़ ऐसे hi अपनी माँ को आआह्ह्ह्हह क्या छोड़ता है तू आअह्हह्ह्ह्हह मर गयी मैं

विशाल - ये ले साली गस्ती चिनार कही की और थपड मरते हुए लुंड पेलने लगता है

अलका- हाँ हु मैं चिनार बना दे गस्ती आआह्ह्ह्हह्ह जोर जोर से दाल उफ्फ्फफ्फ्फ़ कितना टाइट लुंड है तेरा मेरे छूट की चमड़ी चील दे रहा है

विशाल – aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मा मेरा लुंड भी तेरे छूट का दीवाना हो गया पहले पता होता किट ेरे छूट में इतनी आग है तो पहले hi छोड़ देता तुझे

अलका- तो छोड़ लेता कितनी बार तो नंगी मिली हु तुझे … और तुझे दिखने के लिए तो नंगी घूमती थी पर तेरे में हिम्मत hi नै

विशाल- कोई बात नहीं सब का कसार अभी निकल लूंगा तेरे छूट का भोसड़ा बना दूंगा जब तक त्र पति आएगा तेरी गांड 38 से 42 कर दूंगा साली चिनार

अलका- कर दे न मेरे राजा ये ले देख तेरी माँ की चौड़ी गांड और दाल अपना लुंड उसकी छूट में जैसे उसकी गांड hi छोड़ रहा हो….. ये कहते हुवे अलका अपनी गांड और ज्यादा उठा लेती है…





ऐसा नज़ारा देख के विशाल के मुँह में मनो पानी आ गया हो उसका फव डिश उसके सामने हो मगर वॉक है नहीं सकता विशाल उसकी गांड पे चपत लगते हुवे आआअह्ह्ह्हह माआआआ मन हो रहा हाईल उन तेरी इस छोटी छेद में पेल दू…

अलका- उसकी बरी भी आएगी मेरे bête अभी तू मेरे छूट की आग शांत कर/….

विशाल भी अलका की कमर पकड़ के तेज़ तेज़ झटके लगाने लगता है.. और कोई 10 मिनट की चुदाई के बाद अलका का शरीर फिर से अकड़ने लगता है वो छीलते हुवे कहती है…

ालका- आअह्ह्ह्हह विशु तेज़ कर मेरा होने वाला है मैं फिर से झड़ने वाली हु आआह्ह्ह्हह्ह मेरी छूट फाड् दी तूने maaaaaaaaaaaaaaa

विशाल भी किसी मशीन की तरह पुरे स्पीड में अलका की छूट क कबाड़ा बनाना सुरु कर देता है की तभी अलका का छूट अपना पानी चोर्ने लग जाती है लेकिन विशाल झटके जारी रखता है … पानी निकलने के बाद अलका से विशाल का झटका बर्दाश्त नहीं होता वो चुटन चाहती है पर विशाल के मजबूत पकड़ की आगे वो छूट नहीं पाती

विशाल- आआह्ह्ह्हह साली भगा कहाँ रही है अभी तो तुझे पूरी रात छोड़ना है और उछलना है मेरे लुंड पे

अलका- हाँ उछलूँगी कुढूँगी पूरी रात पर अभी रक जा मेरे कमा र में डैड होने लगा है एक सेक् रुक पर विशाल नहीं रुकता लेकिन जैसे hi उसकी पकड़ थोड़ी ढीली होती है अलका बेजान गुड़िया की तरह बीएड पे गिर जाती है.. उसके छूट से उसका पानी लावा की तरह बह रहा होता है





अलका बेजान बीएड पे पड़ी तेज़ तेज़ हांफ रही होती है और विशाल उसके बदन को उसके पीठ कमर उसकी नैक कन्धा पे अपने गीले होंठ और जीभ फेरने लगता hai…alka मनो जानत के सैर कर रही हो 3 बार झाड़ के निढाल पड़ने के बाद उसका बीटा उसके जिस्म को अपने होंठो और गरम सांसो से मसाज दे रहा था जिस से अलका के बदन में सुरसुरी दौड़ने लगती है उसके रोंगटे खड़े होने लगते है व पसीना में बिलकुल भीगी हुई कामुक औरत तेज़ ते हांफ रही थी…

विशाल बड़े hi पशनातेली अपनी माँ के जिसमे को चुम रहा था ये किस्सेस मनो अलका के लिए किसी दवा की तरह काम कर रहा था





अलका भी आहे भरते हुवे खुद को विशाल को सौंप देती है

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh मेरे bête खा जाएगा क्या आज मुझे… ऐसे होकर बड़ा ाचा लग रहा है आअह्हह्ह्ह्हहऔर ये कहते हुवे विषा के लुंड को पकड़ के मुठियाने लगती है…





काफी देर तक माँ bête एक दूसरे के अंगो के साथ खेलते रहे और मसलते रहे अलका एक बार फिर से रेडी हो रही थी अपने bête से अपनी छूट फड़वाने के लिए और उस चुदाई से पहले ये फोरप्ले जरुरी था

अलका अपने होंठ अपने bête के होंठो परख देती है और छोटी छोटी किस्सेस करने लगती है तो कभी अपने जुबान से उसके मुँह उसके होंटो को चाटने लगती है..





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और धीरे धीरे ये छोटी छोटी चूमिया एक बड़े किश में बदलने लगती है विशाल अलका के गर्दन में हाथ दाल के उसके होंटो को चूमने लगता है अलका भी अपने bête के होंटो का रास पि जाना चाहती थी





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दोनों माँ bête किसी प्रेमी जोड़े की तरह एक दूसरे को चुम रहे थे.. अलका के शरीर में जान आता देख विशाल अलका कैग एंड को सहलाते हुवे अपने ऊपर ले लेता है और पीछे से उसकी गांड के छेद को छेड़ते हुवे अपनी उंगलिय उसके छूट में दाल के अंदर बहार करने लगता है साथ hi वो अलका के चुचिओ को पिने लगता है





अलका भी विशाल के लुंड को मसल रही थी जो काफी देर से अलका के रेडी होने का वेट कर रहा था

विशाल अलका के कान में धीरे से कहता है- और माँ रेडी हो अगले चुदाई के लिए

अलका भी शरमाते हुवे हाँ में गार्डन हिला देती है

विशाल- तू तो शर्माती भी है मेरी चिनार माँ

Alka-sharam तो आएगी hi एक माँ अपने bête से छुड़वा रही है जिसका बीटा अपनी माँ का तीन बार पानी निकल दिया और उसकी रंडी माँ अगले राउंड के लिए फिर से रेडी है कह के अँखमार देती है और नीचेको सरक जाती है यानि विशाल के लुंड की तरफ





अलका विशाल का लुंड अपने छूट पे रगड़ने लगती है और उसकी गीली छूट पूरी तरह से विशाल के लुंड क िगलने के िये रेडी था

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh कितना टाइट है ये मेरी छूट फाड़ दी है तेरे इस लुंड ने फिर भी अभी तक तना हुआ है..

इतना कहते हुवे वो विशाल के लुंड पे बैठ जाती है और धीरे धीरे विशाल का पूरा लुंड अलका के छूट में खो जाता है….

अलका- aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh viiiiiiiiiiiissssssssshhhhhhhuuuuuuuuuuuuuuu मर गयी तेरी maaaaaaaaaaaaa

Vishal-aaaaaaaaaahhhhhhhhh माँ कूदो अब इस्पे

अलका- हाँ कूदूंगी तेरा लुंड मेरे बच्चेदान में ठोकर मार रहा है…..

और फिर बेजान हो गयी अलका अपने शरीर की साडी शक्तिओ को इकठा करके विशाल के लुंड पे कूदने लगती है..





कमरे का ये नज़ारा बहुत hi कामुक था जहां एक bête ने अपनी माँ क ऐसी चुदाई किट hi की उसके शरीर में जान hi नहीं बची थी उसके बावजूद उसकी माँ के छूट की खुजली शांत नहीं हुई वो बची खुची हिम्मत केसाथ अपने bête के लुंड पे कूद रही है…. अपनी मोती मति गांड उसके कमर पे पटक रही है… पुरे कमरे में थप थप की आवाज़ गूंज रही थी

अलका के पैरो में इतनी जान भी नहीं बची थी क वो उसपे कड़ी हो के विशाल के लुंड पे कूद सके फिर भी वो अपने कांपते पैरो से hi विशाल को छोड़ने लगती hai…vishal के सामने उसकी माँ की उछलती बड़ी गद्देदार गांड और चिकि पीठ थी जिसे देख के उस के अंदर उत्तेजना की लहार दौड़ने लगती है वो निचे से अपने माँ के छूट में झटके मरने लगता है…





विशाल के सामने अलका की गांड उसे ललचा रही थी जिस से विशाल से भी रहा नहीं गया और उसने अपनी एक ऊँगली अलका के गांड में पेल दी ….अलका पे ये दोहरा हमला उसके पुरे शरीर को झनझना देता है और वो और ज्यादा अपनी गांड फैला लेती है… लेकिन उसकी छेद इतनी तंग थी की बड़े मुश्किल से विशाल की ऊँगली जा पा रही थी…

विशाल- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhh maaaaaaaaaaaaa कितनी टाइट गांड है teri….aur फिर वो ऊँगली निकल के अलका के मुँह में दाल देता है जिसे अलका भी चूसने लगती है….

ऊँगली में उसके गांड के पसीने की स्मेल उसे कुछ ज्यादा hi उत्तेजित कर रही थी और वो अलका जो अभी मरे हालत में थी एक डैम से जोश में आ जाती है अउ पुरे जोश में अपने bête के लुंड पे कूदने लगती है..

वो इतना कामुक हो गयी थी की जहां वो विशाल से मन करती थी अपने गांड से छेद चढ़ करने में वही आज वो खुद से अपनी गांड में अपना एक ऊँगली दाल के विशाल के लुंड पे कूदने लगती है..





उसकी ये कामुक हरकत बता रही थी की वो चुदाई के किस आनंद को भोग रही थी वो वासना के सिखर पे थी …

अलका - aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh ममममममअअअअअ क्या जादू है टेट्रे लुंड में देख मैं खुद अपनी गांड अपनी ऊँगली से छोड़ रही हु …. तू मुझे ऐसा पागल कर देगा किसी दिन मैं खुद न कहने लग जो विशाल अपनी माँ की गांड फाड़ दे आज अपने इस तगड़े मोठे लुंड से…. आआआआअह्ह्ह्ह छोड़ bête और तेज़ तेज़ झटके maarrrrrrrrrrrrr छोड़ अपनी माँ को madrchoddddddddddddd फड़ दे अपनी माँ की छुट्ट्ट्ट………….





इतना कहते hi अलका उठ के अपना चेहरा विशाल की तरफ कर लेती है और वापस से उसके लुंड पे कूदने लगती है…. वो वासना की आग में पूरी तरह जल रही thi….uske चेहरे का भाव बता रहा था की वो कितना थक गयी है लेकिन उसकी छूट की आग अभी भी शांत नहीं हुई है… वो गन्दी गन्दी गालिओ के साथ विशाल के मर्दानगी को ललकारने लगती है…

अलका- छोड़ मादरचोद फाड़ दे अपनी माँ की इस छूट को आआह्ह्ह फ़क में फ़क में लिखे ा व्होरे यू मोथेरफुकेर………

विशाल भी उसकी हर गले का बदला तेज़ झटके मार कर ले रहा tha……aaahhhhhhhh साली रंडी तेरी आग मैं hi शांत करूँगा चाहे जितनी भी लगी हो कूद ऐसे hi अपने bête के लुंड में मादरचोद रंडी …

अलका विशाल के होंठो को चूमने के लिए उसकी टैट्राफ झुकती है जिसे विशाल भी समझ जाता है ये क्या करने जा रही है पर विशाल ने मनो किसी प्यासे के सामने से पानी की बोतल चीन ली हो उस तरह से अपनी माँ की गार्डन अपने होंटो से दूर कर देता है









अलका हवस और वासना के नशे में जतना जोरलगा रही थी विशाल उसके चेहरे क ोुता hi पीछे धकेल रहा tha….alka की कामुक मुस्कान और बेबसी देखने लायक थी वॉक इस तरह अपने bête के होंटो को पिने के लिए तड़प रही थी पर उसका बीटा उसे अपने से दूर किये जा रहा tha….aur उसके प्यास को और बढ़ा रहा था अपनी माँ को और जयदा तड़पा रहा था…

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh चूमने दे न अपने होंठ मुझे प्यास लग रही है aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuufffffffffffff

विशाल- तेरी प्यास तो अब मेरे लोडे का पानी पि के hi बुझेगा मेरी रंडी माआआ

अलका- बस एक बार प्लस एक बार चुम ले मेरे होंटो को aaaaaaaaaahhhhhh विशु देख तेरी माँ तेरे होंटो को चूमने के लिए तड़प रही है किश में बीटा

विशाल इसका उल्टा hi करता है और वो अलका के बाल पकड़ के पीछे की और खींच क ीक जोर का झटका मारा है अलका की छूट के साथ मनो उसकी गांड फि फैट जाती है वो इतनी जोर से चीख पड़ती है……..





अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh माँ के लोडे फाड् दी मेरी छूट साला रंडी की औलाद aaaaaaaaaahhhhh करते हुवे वो विशाल के ऊपर hi गिर पड़ते है जिस से उसकी गांड ऊपर की और उठ जाती है और विषला के धक्के भी पुरे पुरे लगने लगते है.... अलका रोने की हालत में हो जाती है उस से अपनी छूट में होती जलन बर्दाश्त नहीं हो रही थी ऊपर से विशाल के ये तेज़ धक्को के साथ उसके बालो को खींचना वो चीख चख के रो रही थी पर उसका बीटा विशाल उसे पेलता रहता है बिना किसी रहें के...

अलका के कमर में इतनी जान भी नहीं बची थी की वो और कूद सके वो बस अबमंजील पे पहुंचना चाहती थी

विशाल का भी अब होने वाला था वो काफी देर अपनी माँ अलका की छूट की पेले कर रहा था जिसमे 3 बार उसकी माँ की छूट ने पैन पानी बहा दिया था….

विशाल- बस बस मेरा हो गया मेरी रैंड थोड़ा और आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आएग उगल रही है तेरी ये छूट उउउउउउफफ्फ्फफ्फ्फ़

पर यह सिर्फ अलका की छूट hi नहीं उसका पूरा शरीर आग उगल रहा था ो इतनी गरम हो गयी थी..

अलका- आआह्ह्ह्हह्ह हाँ ऐसे hi मैं भी अअअअअ रही हूँ फिर से थोड़ा रुक के कर आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

विशाल- aaaahhhhhhhhhhh

और फिर विशाल अलका को बीएड पे लिटा के उसपे पुरे जोश में झटके लगाने लगता है… वो अपना पूरा लुंड अलका के जड़ तक पेल देता है





विशाल- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh माआआआ मैं गया

अलका- don’t स्टॉप फ़क में मैं भी आ रह हु मेरे बचे अंदर hi निकल दे अपनी गर्मी मैं तेरे लुंड की गर्माहट अंदर लेना चाहती हु aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh

विशाल- ok माँ बूत सेफ्टी…..

अलका- माँ छुड़ाने गयी सेफ्टी अभी तू मुझे खुस कर वो बाद में dekhnge…..aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaa





और फिर विशाल अलका के होंटो को चूमते हुवे अपना गधा गधा गरम माल से अलका की छूट भर देता है

विशाल- oooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh माँ ी ऍम दोने

अलका- कितना गरम है रे तेरा aaaahhhhhhhhhhhhhh मैं भी गयी मेरे बचे

पुरे कमरे में दोनों की हाफने की आवाज़ गूंज रही थी विशाल का लुंड अलका के छूट से बहार आते hi अलका के छूट से दोनों के मिला जुला पानी भी बहार आने लगा





अलका के छूट से निकलता पानी मनो किसी गुफा से कोई झटना फुट पड़ा हो…. अलका भी मदमस्त होक अपने छूट से निकल रहे अपने और अपने bête के कई घंटो के म्हणत से बना वो जूस निकल के चाटने और निगलने लगती है…





विशाल- माँ एक बात कहु…

अलका- हम्म्म बोल

विशाल- आप न चुदाई के समय एक डैम रंडी बन जाते हो…. मुझे पता नहीं था साड़ी के अंदर मेरी माँ के अंदर एक रांड छुपी है.. मुझे लगता था आप ओने में वीमेन टाइप हो…

अलका- रंडी हु तो नहीं पर तू जो जो मेरे से करवा रहा है किसी दिन सच में कोई रंडी न बना ले मुझे अपना और तू बस देखता रह जाना…

विशाल- ऐसे कैसे कोई बना लेगा जब आप न चाहो

अलका- ाचा और जोट ु मुझे सब के सामने नंगी कर के नचवाया है उसमे कोई तेरी माँ छोड़ देता तो तू क्या करता

विशाल- आप छोड़ने देती???/

अलका- पता नहीं कोई मोटा तगड़ा लुंड देख के कही मेरा इमां बदल जाये तो क्या पता…

ऐसे hi कामुक बाटे करते हुवे दोनों माँ bête एक दूसरे के जिस्म के साथ खेल रहे थे और मजे दे रहे थे…







क्या सच में अलका किसी और से चुद जाएगी??? वैसे जितनी आग है उसमे क्या पता कौन हो अगला शिकारी....???????????
 
Part-23

दोनों माँ bête रात भाई चुदाई और हवस का नंगा अच् करते रहे इस बिच जाने कितनी बार अलका के छूट न अपना पानी बहाया और कितनी बार विशाल ने अपने लुंड का पानी से अपने माँ अलका की छूट और मुँह की प्यास bujhai…alka चुदाई में ये भी भूल गयी की वो मेड्रिड हनीमून पे नहीं बल्कि किसी काम से आयी है जिसके लिए उसे अर्ली मॉर्निंग मॉडल के शूट के लिए भी जाना था

सुबह हो चुकी थी दोनों माँ bête नंगे एक दूसरे के बहो में बेखबर सोये हुवे थे..






अलका नंगी अपने बहो इ ऐसे सोई थी मनो अपने आशिक़ के बहो से लिपटी ho…uska गोरा चिकना बदन कर्तव्य फिगर जिसमे उसकी पतली नागिन सी कमर और उसके निचे गोल मोती भरी हुई गांड…. ऊपर देखो तो गोरी चिकनी पीठ और कंधो पे बिखरे उसके गहरे भूरे बाल.. पूरी की पूरी कामदेवी आग रही थी… सच में क्या किस्मत है विशाल की उसे ऐसे औरत मिली है जिससे वो जब चाहे अपनी प्यास बुझा सकता है जब चाहे उसकी चुदाई कर सकता है…

सूरज सर पे चढ़ गया था अलका का फोन काफी देर से बज रहा था पर वो इनसब से बेखबर एप bête के बहो में खोयी हुई thi….kafi देर से फोन बजने से आखिरकार अलका की नींद खुलने लग जाती है.. फ़ोन देखने पे कोई 50+ संस एंड कॉल्स थे… अभी वो नोटिफिकेशन्स देह hi रही थी की तभी उसके क्लाइंट का फिर से फोन आ जाता है… वो कॉल उठा के बाटे करने लगती hai…jhan उसे सुबह के 10 बजे तक लोकेशन पे पहुंच जाना था वही वो दोपहर के 2 बजे तक अपने बिस्तर पे नंगी सोई हुई थी….










क्लाइंट…….

अलका- ी ऍम रियली सूर्य ी विल बे तेरे इनफेव मिनट

क्लाइंट-……

अलका- no no प्लस गिव में सम टाइम ी ऍम अबाउट तो के

क्लाइंट-……..

अलका- प्लस अंडरस्टँड ी ऍम आलरेडी ों माय वे

अलका बहुत ज्यादा घबा जाती है कही उसकी ये एक गलती से डील कैंसिल न हो जाये उसका बहुत बड़ा नुकसान हो जायेगा ….इसलिए वो क्लाइंट को बहुत मनाने ककी कोसिस करने लगती है और झूट भी बोल देती है की वो होटल से निकल चुकी है और अभी पहुंच जाएगी….

और विशाल इतना शैतान हो गया था की जहां उसकी माँ क्लाइंट से मिन्नतें कर रही थी वही उसने मौका देख के अपनी माँ के मुँह में उंगलिया पेल दी






खैर जैसे तैसे अलका फोन कट करती है और विशाल को गुस्से में दन्त देती है पर विशाल उसकी बातो का बिलुल भी बुर नहीं मंटा उल्टा अलका के होंठो को चुम लेता है पर अलका खुद को चुराते हुवे बाथरूम की तरफ भगति है क्यूंकि किसी भी हालत में उसे आज लोकेशन पे पहुंच के काम व्रैप उप करना ठक्की नेक्स्ट डे की उसकी बक तो इंडिया की फ्लाइट थी…. काम ज्यादा से ज्यादा 2-4घंटे का था तो वो विशाल से रात का प्लान बनाना को कह देती है

अलका- मैं 2-4 हर में आ जाउंगी आज खान जाना है तुम प्लान कर लो इतना कह के वो बाथरूम की और जाने लगती है..






विशाल अपनी माँ को जाते हुवे उस के गोर चिकने बदन को खासकर उसकी भरवाडार गांड को देखके अपना लुंड हिलाते रहता है और मन hi मन कहता hai(pta नहीं कब इस गांड के अंदर अपना लुंड पेलुँगा)

फिर थोड़े देर में अलका बाथरूम से रेडी हो के निकलती है और 2 घंटे ा कह के वो लोकेशन के लिए निकल पड़ती है….

विशाल भी रात के म्हणत से थक गया था तो उसने होटल से खाना आर्डर किया और खाना खा के अपनी मासी सारिका से बात करने लग जाता है

विशाल- hello मसि

सारिका- hello विशु कैसा है?

विशाल- आपकी या आ रही है मासी

सारिका- ओहो मेरी याद

विशाल- वीडियो कॉल करू???

इतने में सारिका विशाल के फोन पे विडोकाल कर देती hai..aur दोनों की बाते सुरु हो जाती है जो किध हिरे धीरे से चाट पे कन्वर्ट होने लगती है..

विशाल- मासी मेरा बड़ा मन कर रहा है आपको पेलने का

सारिका- तो आजा कारन भी नहीं है

विशाल- कैशा ा पता पर आपको ता तो है मैं स्पेन में हु माँ के sath..aapki छूट देखनी है दिखाओ न

सारिका- शट उप विशाल कॉल पे ये सब नहीं

विशाल- प्लस सारिका मेरी जान देखो तुम्हारी याद में मेरे लुंड का क्या हाल हो रहा है






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सारिका- omg ये तो बहुत हार्ड हो रहा है

विशाल- वही तो मेरी जान कुछ इलाज तो कर दो…

सारिका पर ये से कैसे karu…samne होता तो जरूर करदेती…

विशाल- टब hi नंगी हो जा न मेरी रानी तेरे मखमल बदन क देख के मुठ मर लूंगा

सरका- ले देखले






विशल- उफ्फ्फ्फ्फ़ मसि क्या बूब्स है तेरे… एक गोल टाइट मन कर रहा है दबा दबा के सारा दूध निचोड़ लू

सारिका- तो ंचोद ले न अब तो ये तेरा hi है….






विशाल- aaaaaaaaaaaa मसि तू तो आग में घी दाल रही है

सारिका- तूने भी तो आग ला दी है मेरे अंदर जल्दी से आ के इसे बुझा दे

विसाहल- खान आग लगी है दिखाओ तो

सारिका- सच में देखना चाहता है?

विशाल- हाँ मेरी जान

सारिका- पर ऐसे मुझे शर्म आती है

विशाल- मुझसे क्या शरमन ज्यादा नखरे मत का दिखा

सारिका- प्लस विशु समझ न

विशाल- दिखा न मसि मुझे चेतना है तेरे छूट क

सारिका- ले देख ले तेरी मासी तेर लिए आज फोन पे बी नंगी हो गयी






विशाल- अभी खान नंगी हुई है अभी ये काली पंतय है तेरे छूट को छुपाये हुवे है

सारिका- उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ विशल तू क्या पूरा नंगा कर के मानेगा अपनी मासी को

विशाल- तो हो जा न मेरी जान तेरी मखमली गांड तो दिखा

सारिका – ले देख ले






विशाल- ऐसे नहीं मेरी जान

साइका- तो फिर कैसे…… ऐसे चलेगा??? अब सारिका भी गरम होने लगी थी वो भी विशाल को अपनी मखमल जिस्म दिखाना छह रही थी






विशाल- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh माई क्या माल है तू कसम से मन कर रहा है अभी आ क तेरे छूट में अपना लुँड़पेल दू

सारिका- आजा पेल दे ले मैं पंतय भी तेरे लिए साइड किये देती हु






विशाल- oooooooooohhhhhhhh सारिका साली मर hi डालेगी आज तू

सारिका- अभी खा मारा है अब देख तू ये कह के साडी पंतय उतर के पूरी तरह से नंगी हो जाती है और अपनी गोरी गोरी चिकनी वैक्स किया हुआ गांड विशाल को दिखा के ललचाने लगती है…






विशाल भी इधर अपने लुंड मसलने ागता है और उधर सारिका अपने छूट पे उंगलिया फेरना अगति है





सारिका ये ले आजा चाट ले अपनी मासी के छूट मन करे तो अपना लुंड भी पेल देना……. देखि मेरी छूट भी तड़प रह है तेरे लिए

इतने में कारन के आने की आहत होती hi और फोन कट जाता hai…ghdi देखने पेप ता चला दोनों मासी बंजा पिछले 2.30 घंटे से बात कर रहे थे….

विशाल मन में कहता है दोनों की दोनों बहने क़यामत है एक डैम रसभरी जितना निचोड़ो उतना रास भर जाता है…

सह hi उसके दिमाग में आता है की मम्मी यानि अलका क्यों नहीं आयी अभी तक वो तो 2 हर बोल के गईथी 3 घंटे होने को है बूत न वो आयी न उसका कोई पहन आया….

देखते देखते रात के 8 बज गए पर अलका का अभी भीकोई पता नहीं था विशाल को लगा 1 घंटे और वेट कर लेना चाइये हो सकता है लेट जाने के वजह से टाइम लग गया हो और ट्रैफिक में न फास गयी हो बूत 9 क्या अब तो 10 बजने को था बूत अलका अभी भी नहीं आयी थी

विशाल ने अलका को कॉल करने का सोच के फोन मिला देता है पर उधर से की जवाब नहीं आता… विषा को थोड़ी टेंसन होने लगती है पर वो ढूंढे भी तो कहाँ उसे तो कोई पता भी नहीं मालूम था…

विशाल एक बार को अकेले hi क्लब जाने की सोचा फिरसे लगता है कही वो गे और पीछे इ अलका आ गयी तो क्या होगा????? ये सोच के थोड़ी देर और वेट करने लग जाता है..

देखते hi देखते रात के 12 बज चुके थे पर न अलका आयी न उसका कोई फोन आया था… इंतजार करते करते विशाल की आँख लग गयी और वो होटल के कमरे में hi सो गया…..

सोने पे भी विशाल क अपनी माँ अक hi ख्याल था सपने म वो अलका को देख रहा था या यूँ कहे की अलका क सपनो में खोया हुआ था….

तभी बेल्ल बजती है जो बजते जाती है.. विशाल को लगा उसकी माँ आ गयी इसलिए वो भाग के दरवाजा खोलने जाता है..

विशाल जैसे hi दरवाजा खोलता है सामने कोई और नहीं उसक माँ अलका कड़ी थी.. पर ये वो अलका नहीं थी जो सुबह ऑफिस के लिए निकली थी.. ये तो जैसे काफी उजड़ी हुई थी.. काफी थकी थकी si…mano एक साथ कई मर्दो ने इसे नोचा हो…






विशाल अपनी माँ अलका को देखते शोकेड हो जाता है… अलका की हालत सच में बहुत hi ज्यादा खराब दिख रही थी… विशाल अपने सवालो की झाडिया लगा देता है पर उसने कोई जवाब नहीं दिया





अलका का पूरा चेहरा गीला था बाल बिखरे हुवे थे लिपस्टिक काजल सब फैला हु था गाल उसके सूजे हुवे थे… फिर भी अपनी हालत को अपने bête से छुपाते हुवे फेक समयले करती है मनो कुछ न हुआ हो.. पर विशाल को उसकी हालत देख के शक होने लगता है…





उसके शरीर जिससे हमेशा परफ्यूम की खुसबू आती थी आज कुछ अजीब बूत जनि पहचानी स्मेल आ रही थी..

Alka-dard से कराहते हुवे बोलती है सामने से हटेगा???

अंदर आने देगा या नहीं

विशाल एक डैम से होश में आते हुवे- हाँ माँ सॉरी आओ अऊ

अभी अलका सहारा ले क दो कदम बादहए hi थी की लड़खड़ाते हुवे गिरने लागत hai…vishal तुरंत भाग के उसे सहारा देता है जिस से की अलका उसके गले लग जाती है वो बिलकुल रोई सी हो जाती है..






विशाल अलका को ले जा के बीएड पे लिटा देता है बूत अलका शावर लेने के लिए बाथरूम में घुस जाती है और हॉट शावर लेने लगती है…





कपड़ो के उसके शरीर से अलग होते hi उसके जिस्म की बिगड़ी हुई हालत सामने आ जाती है....

शावर से गिरती गरम गरम पानी की बुँदे अलका को बहुत राहत दे रही थी वो काफी देर तक यूँ hi शावर में कड़ी rahi..wo चलते हुवे फिर बेह्तुब में जाती है और उसी में काफी देर तक लेट के आराम करने लगती है... गरम पानी की सिकाई से मनो उसे बहुत आराम मिल रहा था....






idhar vishal kamre me baitha tensn me aa gya tha use uski maa ki ye halat use bechain kar rahi thi ek sath kayi sare sawal uske dimag me koundh rahe the jiska jawab sirf alka ke pas tha par abhi kuch puchna na vishal ko sahi lag raha tha aur na hi sayd alka abhi koi jwab dene ke liye taiyar thi

क्या लगता है ऐसी हालत क्यों हुई होगी??

क्या हुआ होगा अलका के साथ.... ???
 
Part-24



अलका का बाथरूम में गज्ञे कफ देर हो चुक्का था पर वो अभी भी अंदर hi थी.. जिस हालत में वो अंदर गयी थी और घंटे भर बिट जाने के बाद भी उसके बहार न आने के वजह से विशाल थोड़ा टेंशन में आ जाता है और वो अलका को देहने बाथरूम में जाता है.. जहां उसकी नज़र बाथटब में नंगी लेती अलका पे पड़ती है…









अलका का सिर्फ सर बहार ता बाकि पूरा शरीर पानी के अंदर tha…uski आँखे बंद थी उसका एक हाथ उसके गोल कैसे हुवे गोरी चूचियों पे था जो की इस वक़्त गोरी काम लाल नीली ज्यादा लग रही थी जैसे किसी ने दांतो से चबाया हो… उसका दूसरा हाथ उसके छूट पेट है पर अलका मनो बेहोश थी विशाल ने अलका को आवाज़ भी लगाया पर उसके तारा से कोई हरकत नहीं थी.. फिर विशाल ने अपनी माँ अलका को बाथटब से निकला और गॉड में उठा के उसके बदन को साफ़ कर के बीएड पे लिटा देता है और उसपे ब्लैंकेट से धक् देता है…









कोई और वक़्त होता तो अलका को नंगी देख के वो छोड़ देता पर आज उसे अपनी माँ की फ़िक्र हो रही थी आज उसे अलका में कोई चुदाई औरत नहीं बल्कि अपनी माँ दिख रही thi…isi बारे में ोचते हुवे विशाल भी अपनी माँ अलका के बगल में hi सो गया…

रात से सुबह सुबह से दोपहर के 3 बज गए पर अपनी अलका अभी भी बीएड पे बेहोश हालत में सोई hi थी… शाम होने को थी विशाल ने अपनी माँ को जगाने की सोच कर उसे जगाने लगता hai…alka थोड़ी देर और बोल के करवट लेती है और विशाल को अपने आगोश में भर के लेट जाती hai…vishal भी अपनी माँ के साथ लेट जाना hi सही समझता है फिर थोड़ी देर बाद वो वापस अलका को जगाता है और अलका एक अगड़ाई के साथ आंखे खोलती है और प्यारी सी समयले के साथ अपने bête को देखती है….













अलका- गढ़ मॉर्निंग विशु

विशाल- मरंग नहीं माँ एवंग हो गयी है

अलका- व्हाट??? क्या सच में…

विषला- हाँ ये देखो टाइम

अलका- मुझे टाइम नहीं देखना अपने bête को देखना hai…aur उसके हाथ पकड़ के चुम लेती hai……comeon हुग में

विशाल- सूरे माँ









अलका- फीलिंग सो गुड now….kuch खाया तुमने??? लंच ब्रेकफास्ट कुछ किया की नहीं???

विशाल- किया माँ बूत मैं आपके साथ लंच का वेट कर रहा था..

अलका- ok मुझे थोड़ा टाइम दो मैं फ्रेश हो के आती हु तब तक तुम खाना आर्डर करो… अलका बिलकुल नार्मल होने की ाटिंग कररही थी हालाँकि उसका ान गैंग टूट रहा था पर वो विशाल को इन सब में इन्वॉल्व नहीं करना छह रही हो सायद…

अलका बीएड से उठ कर वाशरूम में फ्रेश होने जाने लगती hai..vishal जाते हुवे अपनी माँ अलका के नंगी गांड को देख रहा होता है









उसके लम्बे काळा भूरे बाल जिस से उसकी पीठ तो छुपी हुई थी पर उसकी पतली कमर और उसके नीच उसके गोल गोरी गोरी गांड में आज कुछ ज्यादा hi लचक thi…jise देख के विशाल के मन में भी उसे दबोच लेने का ख्याल आने लगता hai..khair अलका वाशरूम में जाते hi बैठ के अपनी गुलाब की पंखुडिओ जैसी छूट को धीरे से मसल देती है जिस से एक तेज़ धार फूटने लगती है… छूट से बेहटा गरम धार उसे अंदर hi अंदर बहुत सुकून दे रहा था..









देखते hi देखते पूरा फर्श उसके पेशाब से भर गया था और भरे भी क्यों न पुरे रात से जो उसने जमा कर रखा था और अगले दिन शाम को मूतने बैठी thi….peshab करने से उसे गहन सुच की अनुभूति है है और फिर वो अपने छूट और हाथ को साफ़ कर के बहार आ जाती है इतने में विशाल ने जोखना आर्डर किया था ो भी आ चुक्का tha…fir दोनों मिल के लंच फिनिश करते है और फिर इधर उधर की बाटे होने लगती है

विशाल- ठन माँ आपके ओफ्फ्स का काम कम्प्ले हो गया?

ऑफिस का काम सुनते hi अलका के चेहरे का एक्सप्रेशन बदल जाता है फिर भी वो नार्मल होते हुवे कहती है हाँ हो गया है एंड कल हम इंडिया वापस चलेंगे

विशाल- बूत माँ हमारी फ्लाइट तो आज नाईट की है

अलका- कोई बात नहीं आज मेरा कही जाने का मूड नहीं है हम कल चैलेंज तब तक तुम सिटी के बाकि क्लब घूम लो…

विशाल- आप नहीं चलोगे फिर ???

अलका- no विशाल मेरा और सोने का मन है अभी

विशाल- ok माँ बूत फिर मैं अकेला जा के क्या करूँगा मैं भी आपके साथ hi रुकता हु…

अलका- गुड फिर मैं तुम्हे कुड्ले कर के सो सकुंगी और दोनों माँ bête यूँ hi बाटे करते टीवी देखते सो जाते है और फिर उस दिन कुछ नहीं होता नेक्स्ट डे उनका चेकआउट था..

अलका रेडी हो रह थी उसने बहुत साडी ड्रेसेस तरय की बूत सब में उसके शरीर पे बने निशान चुप नहीं पा रहे थे तब उसने एक फुल मक्सी पहनना ठीक समझा जिसमे उसके पुरे शरीर को धक् लिया था













काळा टाइट बदन से चिपके मैक्सी में उसका गोरा बदन कुछ ज्यादा hi चमक रहा था उसके शरीर की बनावट इस ड्रेस में मनो सांचे में ूर्ति की तरह फिट हो गयी थी… गोरा कामुक चेहरा उसपे डार्क ब्राउन बाल सामने से तानी हुई उसकी गोल गोल सुडौल चूचिया और उसके निचे पतली कमर और जहां और फिर बरी आती है उसकी भरी कासी हुई जंघे ये साडी चीजे उसके उस ड्रेस में मनो अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए उतावले हो.. आगे से जहां ये नजारा घायल कर रहा था तो वही पीछे से उसकी बहार को निकली हुई गोल गद्देदार गांड.. uuuuuffffffffffffff जो एक बार देख ले देखता hi रह जाये….

अलका- विशु मैं कैसी लगरही हु इस ऑउटफिट में

विशाल- पताका माँ

अलका- ठनक यू…….. तो चले हम

विशाल- सूरे माँ

और दोनों माँ bête लॉबी की और चल देते रिसेप्शन पे जा के वो अपनी बाकि की फॉर्मलिटीज कर रहे थे तभी विशाल ने नोटिस किया की सब उन्हें अजीब सी नज़रो से घर रहे है उसे लगा सायद उसकी माँ अलका इतनी सेक्सी लग रही है इस वजह से सब घर रहे है इसलिए उसने ज्यादा सेरियस न लेते हुवे इन बातो को इग्नोर कर दिया…

होएल से निकल के एयरपोर्ट और फिर वापस इंडिया अपने घर आने के बाद दोनों माँ bête कुछ देय रूटीन के काम निपटाए डिनर किया और सो गए….

अगले ओने वीक अलका बहुत बिजी हो गयी थी क्यूंकि मेड्रिड से आने के बाद जो आर्डर उन्हें मिला था उसे कम्पलीट एंड ओर्गनइजे भी करना था सो वो इन्ही कामो में लगी रही देखते देखते फेब का महीना आ गया जिसे प्यार का महीना भी कहते है…

आज वैलेंटाइन डे था और अलका बहुत दिनों से विशाल को टाइम नहीं दे पा रही थी इसलिए आज वो उसे कुछ स्पेशल गिफ्ट देना छह रही थी आखिर वो उसका बीटा के साथ आशिक़ भी तो था.. सो उसने कुछ चीजे खरीदी और घर की तरफ चल दी… घर पहुंचने के बाद उसने विशाल को सरप्राइज देना चाहा सो वो विशाल के कमरे में काली गे झा विशाल मोब में गेम खेल रहा था… कमरे में अलका के एंटर होते hi माहौल करवट बदलने लगती है

अलका विशाल को आवाज़ लगाती है- विशु

विशाल जब सामने देखता है तो सामने का नज़ारा उसकेलिये बहुत hi उत्तेजित कर देने वाला नज़र था… उसकी माँ अलका हिनक स्वेटर से मुँह छुपाये उसे देख रही थी… चेहरे के भाव में हसी और शर्म साफ़ झलक रहा था लेकिन जैसे hi विशाल की नज़र थोड़ी निचे जाती है तो वो पता हैउसकी माँ हिनक के अलावा कुछ भी नहीं पहनी है जिस वजह स उसकी वाज़ की हुई चिकनी छूट की झांक मिल रही थी..









विशाल भी बहुत दिनों से अलका को भोगा नहीं था और आज उसकी माँ के साइड से hi पहल देख के वो उतावला हो जाता ै और अपनी माँ की तरफ झपटने लगता है की तभी अलका उसे स्टेचू बोल के वही रोक देती है औरबेचई विशाल भी वही रुक जाता है…

अलका विशाल से कहती है- आज पता है न क्या है??

विशाल- क्या माँ

अलका- अरे बुद्धू वैलेंटाइन डे है इतना भी नहीं मालूम

विशाल- ओह्ह सूर्य माँ वो तो मुझ पता है पर मुझे लगा आप किसी और बारे में पूछ रहे हो सायद

अलका अपना स्वेटर उतारते हुवे कहती है तुझे अपना वैलेंटाइन गिफ्ट नहीं चाइये???









Vishal-offcourse चाइये माँ…

स्वेटर के उतारते hi अलका का एक नया रूप सामने आता है जिसमे वो खुद को रेड रिबन गिफ्टवरप किये हुवे थी









विशाल- वाओ माँ कुछ नई फंतासी लग रहा है आपका…

अलका – नहीं ऐसा तो नहीं है

विशाल- फिर ये हुड को गिफ्ट व्रैप क्यों किया है..

अलका पीछे मुद के अपनी गांड विशाल की तरफ कर के कहती है अब कुछ नई चीज किसी को गिफ्ट करना हो तो उसे व्रैप तो करना पड़ता है न खोलने से पहले…









विह्सल की तो मनो धड़कने बढ़ जाती है ….(मन में- क्या सच में माँ अपनी गांड देगी आज या फिर क्या सन है)

अलका- क्या सोच रहा है गिफ्ट पसंद नहीं आया?

विशाल- no माँ बस समझ नहीं आ रहा कुछ

अलका- तू ो सोच रहा है वही है… गिफ्ट ओपन करना है तो आजा मेरे कमरे में ये कह के अलका गांड मटकते हुवे जाने लगती है..









की तभी विशाल उछाल के अलका को पकड़ लेता है और उसके कमर में हाथ दाल के उसे अपनी और खींच के उसके होंटो पे अपने होंठ रख देता है..









और पुरे शिद्दत से अलका के होंटो का रास पिने लग जाता hai…jisme अलका भी उसका बराबर साथ देती है दोनों माँ बेटे एक दूसरे के होंटो में खो जाते है आखिर बहुत समय बाद दो एक दूसरे के बहो में आये थे








क्या लगता है दोस्तों क्या गिफ्ट मिलने वाला है विशाल को अलका से…



नेक्स्ट धमाके के लिए रेडी रहे और कमेंट जरूर करे
 
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विशाल अपनी माँ अलका के होंटो पे ऐसे टूटता है मनो की जन्म के प्यासे को पानी मिल गया हो.. जिसमे उसकी माँ अलका भी उसका बराबर साथ दे रही थी आखिर उन दोनों का ये ीान होब hi तो बहुत टाइम के बाद रहा था…. दोनों किश में खोये हुवे ते की अलका को थोड़ी शरारत सूझती है और वो विशाल से छूट के अपने बैडरूम की तरफ भागने लगती है और भगति हुई अलका की गांड की थिरकन देख विशाल से भी रहा नहीं जाता और





अपनी माँ को भागता देख विशाल भी उसके पीछे अपने कपडे उतारते हुवे भागता है.. पहले टशरत फिर शॉर्ट्स और फिर नंगा hi अलका के पीछे दौड़ लगा देता है.. कमरे में पहुंचते hi अलका बीएड पे चढ़ जाती है और विशाल को ललचाने लगती है..

अलका- कैच में िफ़ यू वांट तो फ़क योर माँ…….

विशाल- ओह मुझे चैलेंज अभी तेरी गंदस्ति निकलता हु

अलका हस्ते हुवे इस तरफ से उस तरफ भागने लगती है जिसके वजह से उसके जवानी से लबालब उसकी चूचिया ऊपर निचे दये बाये हो रही थी…

आखिर विशाल एक अलका को पकड़ने के लिए उसके ऊपर एक जम्प लगा देता है और उसका पंजा सिद्ध उसकी गोल गोल कठोर चुचिओ को दबोच लेता है जिसके वजह से अलका की एक मीठी आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह फुट पड़ती है…

पकड़ में आते hi विशाल उसके कमर क अपनी बहो में क़ैद किये उसके नरम मुलायम बिस्तर पे गिर जाता है और अपनी गरम सांसे अलका के गार्डन पे चोर्ने लगता hai….aur लोवेबिते लेने लगता है..





Bête की सांसो की गर्माहट पा के अलका मदहोश होने लगती है और अपने होंठो से विशाल के गार्डन और कानो को चूमने लगती है…





माँ bête दोनों एक दूसरे के जिस्म के साथ खेलवाड़ कर रहे थे जिसमे उन्दोनो क hi बहुत आनंद आ रहा था.. धीरे धीरे उनके जिस्म इ साथ साथ कमरे का तापमान भी बढ़ने लगा था अलका के गोर मखमली जिसमे पे पसीने की बून्द किसी सोने की तरह चमक रही थी….






जो अलका की जिस्म में फुट रहे गर्मी का परिणाम tha….aur उस हर बून्द को विशाल चाट लेने के लिए अपनी जुबान अपनी माँ ालकके गरम कामुक जिसमे पे फेरने लगता है…

अपने bête की जुबान अपने जिस्म पे महसूस होते hi अलका की सिसकारी फुट पड़ती है

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh यू अरे मेकिंग योर माँ होर्नेय माय सोन..

विशाल- आप ऑलरेडी बहुत होर्नेय हो माँ





अलका- तेरे सामने आते hi जाने मुझे क्या हो जाता है विशु .. मेरा मुह्पे बस नहीं रहता मेरा जी करता है तुझे खा जाऊ … और अलका विशाल के जिसमे पे अपने दन्त गाड़ने लगती है…

विशाल- aahaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh माँ

अलका- क्यों क्या हुआ ….? और जब तू मुझे दर्द देता है तब तो बड़ा एन्जॉय करता है…

विशाल- तुम्हे भी तो रफ़ सेक्स में hi मजा आता है मेरी रानी..

अलका- वो तो है धीरे धीरे में वो मजा खान है जो जब तू मुझे रगड़ता है तब आता है…

विशाल- तभी तो तुझे निचोड़ता हु मेरी जान

अलका- सिर्फ बाटे hi करेगा या अपना गिफ्ट भी खोलेगा???

वैसे तो विशाल कोप ता था फिर भी वो अनजान बनते हुवे पूछता है…..

विशाल- क्या गिफ्ट दे रही हो…

अलका उसकी तरफ घूम जाती है और अपनी चोरी गांड फैला के दिखते हुवे पूछती है…





अलका- अब भी पूछेगा या समझ आ रहा है…..?

विशाल- समझ तो आ रहा है लेकिन तू एक बार खुद से क्लियर कर दो तो…

अलका- बहुत हरामी हो गया है तू… मेरे मुँह से सुन्ना छह रहा है न तो सुन

फिर अलका विशाल के कान के पास जा के बड़े कामुक आवाज़ में कहती है..

अलका- आज तुझे तेरी माँ अपनी गांड दे रही है जिसे फाड़ने के लिए तू और तेरा लुंड कब से तैयार hai…ab khush…sun लिया

विशाल- वाओ माँ सच्ची…

अलका- हाँ रे सच्ची छोड़ दे आज अपनी माँ की गांड कर ले अपनी ख्वाईस puri…le खोल ले अपना गिफ्ट ये तेरे सब्र का फल है





उफ्फ्फ बनने वाले ने क्या गांड बनाया है अलका के.. उसके ऊपर उसका ये कामुक रूप पता नहीं विशाल कैसे इतने दिन खुद को रोक पाया..

अपनी माँ के गहरे भूरे छेद को देख के इस बार विशाल से भी रुका नहीं गया और सिद्ध अपना मुँह अलका के गांड में घुसा देता है…





विशाल अपनी माँ की गांड में घुसने से पहले उसे अछि तरह से गीली और तैयार करना छह रहा था और इसी सोच में वो अलका के कूल्हों में फसे उसकी छोटी सुराख़ में अपना जीभ घुसा देता है

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh चाट और

विशाल- का जवाब बोल के नहीं चाट के देना था और वो जीभ से उसके छेद को सहलाने लगता है जिस से अलका के तन बदन में बिजली दौड़ने लगती है…

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaammmmmmmmmaaaaaaaaaaaaa

और वो विशाल का सर अपने गांड में दबाने लगती है… aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh विशु सूचक माय अस्स उउउउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़

अलका को अपनी गांड चटाई में इतना मज़ा आ रहा था की वो पूरी तरह से उसमे खो गयी thi...aur हो भी क्यों न ये एक अलग अनुभव था उसके liye...vishal ने अलका की छूट तो कई बार छाती थी पर के सुराख़ को वो पहली बार अपनी जीभ से कुरेद रहा tha...alka भी विशाल का मुँह अपने गांड में दबाने लगती है और उसके दो बड़े बड़े भरी कूल्हों के बिच उसके बेटे का चहेरा मनो गायब hi हो गया हो...

अलका अपने hi हाथो से अपनी चुचिओ को दबाने लगती hai...aur कामुक भरे स्वर निकलने लगती है..

अलका- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह गांड में hi घुस जायेगा क्या aaj...phle मेरी छूट की आग शांत कर ....इसकी खुजली मिटा तब तुझे तेरा इनाम मिलेगा उस से पहले नहीं .

विशाल भी जनता था की अलका की गांड मारनी है तो पहले इसे पूरा गरम करना होगा जिस से ये खुद गांड खोल के लुंड मांगे वर्ण उस से पहले तो ये गांड में लुंड घुसाने नहीं देगी..

विशाल- हाआनंनं मेरी रानी आज तेरी छूट की आग भी शांत करूँगा और उसके साथ साथ तेरे गांड की भी खुजली मिटाऊंगा सबर कर....

इतना सुनते hi अलका जो घोड़ी बन के गांड चटवा रही थी वो घूम के पीठ के बल लेट जाती है और दोनों टंगे हवा में उठा के अपनी छूट विशाल को परोस देती hai...wo चुदाई के लिए आईटीआई उतावली हो गयी टी जैसे मनो उसकी मखमली छूट और साँस भी धड़कने लगी ho….chehre पे बेशर्मी और कामवासना का भाव टपक रहा था…





विशाल भी बिना वक़्त जाया किये अपनी माँ के ऊपर आ के उसके होंटो को को चूमने लगता hai....alka को चुदाई में जिस काम में सबसे ज्यादा मजा आता था वो विशाल के होंठो को चूमने का ...

वो चुदाई के वक़्त या छोड़ने से पहले या छोड़ने के बाद भी विशाल के होंठो का रास पिने से पीछे नहीं हटती थी... अलका पुरे शिद्दत से विशाल के होंटो को काट और चबा रही थी .

विशाल धीरे धीरे निचे सरकने लगता है और अलका के चुचिओ को मुँह में भर लेता है .. वो एक चुकी को मसल रहा था तो दूसरे को मुँह में भरने की कोशिश कर रहा था पर उतनी बड़ी और सख्त चुचिओ को मुँह में भर लेना कोई मज़ाक की बात थोड़े न है... लेकिन अलका को इनसब में बहुत मजा आ रहा था वो एक हाथ से अपनी चूचिया पीला रही थी तो दूसरे से अपनी छूट रगड़ रही थी....

अलका- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह विशु पिजा दूध आज मेरे चुचिओ का अपनी माँ की दूध पि के अपने hi माँ को छोड़ेगा और उसकी गांड फाड़ेगा आज तू... आआह्ह्ह्हह्ह माआआ

विशाल भी अपनी माँ की गोल कासी हुई चुचिओ को मुँह में भरने की जगह अब उसके निप्पल चबाने लगा था .. वो अलका के निप्पल को दांतो से खींच के चोरड एटा मनो कोई रबर या च्वइंगम हो..





विशाल की ये साडी हरकते अलका के काम वासना को और भड़काने लगी थी… उसकी मखमली छूट ने पानी चूर्ण सुरु कर दिया था जिसका आभाष अलका को होने लगता है…. वो अपना हाथ निचे अपनी छूट पे भिड़ा देती है और अपने छूट प् पानी टास्ते करने के लिए उसमे अपनी उंगलिया दाल के पानी निकलने लदगति है…





अलका- अपनी ऊँगली दिखते हुए विशाल से कहती है.

अलका- देख विशु तूने मेरा क्याहाल कर दिया..

विशाल- तेरी छूट तो अभी से गीली होने लगी..

अलका- हाँ रे तेरे छूटे hi मेरी छूट बहने लगत है जाने क्यों और इतना कह के अपनी ऊँगली विशाल के मुँह में दाल देती है जिसे विशाल बड़े शिद्दत से चूसने और काटने लगता है… वो अलका की छूट के पानी से सनी उगलिओ को चाट के प्र साफ़ कर देता है पर इस से पहले की वो अपने थूक में मिले अलका के छूट के पानी को निगलता अलका अपने कमर उठा के चेहरे को विशाल के चेहरे के पास लती है और उसके मुँह से अपना मुँह भिड़ा देती है और चूमा के साथ उसके लार अपने छूट के पानी को पिने लगती है… ये दृश्य बहुत hi मादक और कामुक था जहां एक माँ अपने hi छूट का पानी अपने bête के मुँह से पि रही थी और बीटा भी उसके बदले अपनी माँ के होंटो क ेरस को चूस रहा था…





अलका- कैसा लगा टास्ते विशु अपनी माँ के छूट के पानी का….

विशाल- ी वांट मोरे माँ इतस सालती बूत अमेजिंग….

अलका- कामुक मुस्कान के साथ वापस अपने होंठ विशाल के होंठो से मिला देती है…

काफी देर अपनी माँ के होंठो को कम्मने के बाद अलका विशाल को निचे धकेलने लगती है जिसका मतलब था की विशाल उसके छूट को चूसे अलका भी वफादार गुलाम की तरह निचे खिसकने लगता है और अलका के दोनों टंगे फैला के उसके छूट को घूरने लगता hai..pasine की बुँदे उसके छूट पे मोतियों की तरह चमक रही थी जिस से विशाल मनो और ज्यादा आकर्षित हो रा हो…







विशाल अलका की छूट को तो कभी ालकको घर रहा था मनो अलका से परमिशन मांग रहा हो पर उसे अक ने hi तो निचे का रास्ता दिखाया था फिर परमिसिन किस बा का….?

दरअशल विशाल अपनी माँ के छूट की सुंदरता में खो गया था उसे ये समझ नहीं आ रहा था की अलका का चेहरा ज्यादा मादक है या उसकी छूट… इस सोच में अभी वो डूबा hi था की अलका बोल पड़ती है

अलका- क्या हुआ खान खो गया…?

विशाल- माँ आपकी छूट बहुत हूब्सूरत है?

अलका- हसने लगती है और कहती है इतने दिन से छोड़ रहा है अपनी माँ की छूट आज खूबसूरत लगी तुझे…

Vishal-no माँ आअज कुछ अलग लग रही है औरपसिने की बुँदे मनो चमक रही हो किसी ज्वेलरी की tarah…ek फोटो ले लू क्या….

अलका वो सब बाद में पहले मेरी आग शांत कर फि जो मर्जी हो करना..

विशाल- बस माँ एक मिंट भी नहीं लगेगा प्लस..

अलका- ok बूत सिर्फ उतना hi लेना वर्ण किसीने ने देख लिया तो कही के नहीं रहेंगे हम

विशाल- don’t राइ माँ और एक कुछ होतो निकलता है..

अलका- कर लिया जो करना था चल अब वो कर जिसके लिए मुझे नंगा लिटा रखा hai…aur हसने लगती है

उसके बाद विशाल वापस से अलका के दोनों पैरो के बिच आता है और धीरे धीरे अपनी जुबान अलका के छूट पे घूमने लगता है…





उसकी गरम गरम सांसे अलका की छूट के गर्मी को मनो हवा दे रहे थी जिस से मदहोश हो के अलका अपनी दोनों टंगे हवा में लहरा देती है जिस से उसकी बुर जयदा खुल के बहार आ गयी thi…aur विशाल अपनी माँ के बुर में अपनी जीभ घुसाने लगता है.. अलका अपनी टैंगो के अलावा ा[ne hatho se apni chut khol deti hai taki vishal jyada se jyada ander gehrai tak ghus sake….

Alka- ohhhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaa kya jadu hai tere juban me chat apni maa ki chut aaaaaaahhhhhhhhhhhhhh

Vishal- chut to chat raha tha sath hi alka ke chuchio ko bhi bade berahmi me daba raha tha….





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अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh विशाल और अंदर दाल अपनी जुबान

विशाल- जुबान तो डालता hi है साथ hi अपनी दो उंगलिया बह दाल देता है जिस से अक की चीख निकल जाती है

अक- aaaaahhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa फुककककककककक

विशाल अलका की छूट को अपनी ऊँगली और और अपनी जुबान से इतना और ऐसा छेड़ता है की उस से और बर्दाश्त नहीं होता और अलका उठ के सिद्ध विशाल के मुँह पे बैठ जाती है और अपनी छूट को उसके मु में दबा दबा के घिसने लगती है साथ hi विशाल का बाल पकड़ के उसे अपनी बुर में धकलने लगती है मनो विशाल को अपनी कट में आज वापस घुसा लेगी






अलका का पूरा शरीर अकड़ने लगता है और वो जोर से चिल्लाते हुवे विशाल के मुँह में hi झड़ने लगती hai….aur अपने छूट का लावा विशाल के मुँह में hi उगलना सुरु कर देती है

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaaa मैं गयी uuuuuuuuuuuufffffffffffff ओहोहोठोह ohhhhhhhhhho hooooooooooo

विशाल भी पुरे शिद्दत से अपने माँ के छूट से निकले अमृत को पी रहा था मनो एनर्जी ड्रिंक पी रहा हो…

ये वासना भी कितनी अजीब छीज है जो माँ अपने बचे को इतने लड़ से पाली हो वो वासना में इतनी पागल हो गयी की आज उसी के मुँह पे ैथ के अपने छूट का रास बहा रही थी…..

अलका के छूट ने अपना रास बहा दिया था और वो तेज़ हफ्ते हुवे विशाल के ऊपर से उतरने के लिए जैसे अपनी तंग उठाते है विशल वापस से उसे पकड़ के वैसे hi बीएड पे पटक देता है और तेज़ तेज़ जबान अलका के छूट में दाल के चाटने लगता है..






एक बार झड़ने के बाद दुबारा से ये जोरदार हमला से अलका मचल जाती है और किसी मछली की तरह छटपटाने लगती है और वो छूटना छह रही थी पर विशाल के मजबूत पकड़ की आगे वो लचर छटपटने के अलावा कुक और नहीं कर पा रही थी

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है चोर दे मेरी छूट में झनझनाहट हो रही है…

विशाल उसे इग्नोर करते हुवे अपना काम जारी रखता है …

अलका- चोर से वर्ण मई तेरे मुँह में मूत दूंगी मेरा पेशाब निकल जायेगा…

विशाल- अलका के इस बात से और जोश में आ जाता है और फिर ज्यादा वाइल्ड हो के चाटने के साथ उसके दानो को काटने लगता है..

अलका- चोर दे मादरचोद मई मर गयी मई सच में मूत डुंग ऐकोर दे वर्ण माँ के लोडे aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh

विशाल – तो मूत ना मुझे पीना है तेरा ममत आज

अलका- मत कर विशु मेरे से बर्दश्त नहीं हो रहा है कहते हुवे अलका विशालके मुँह पे hi मूतने लग जाती है…






अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh मैं गयी विशु तूने क्या कर दिया ले पि अब मेरी मूत पिजा भड़वे अपने माँ के मूत ो ाअजज्जजज

Oooooohhhhhhhhhhhhhhh गॉड ये लड़का क्या क्या करवाएगा आज मुझसे…….

विशाल अपना चेहरा अलका के छूट से हटा के उसके गांड के छेद पे ले आता है और चाटने लगता है… अलका के शरीर का अब थोड़ा आराम तो चाइये hi था दुबारा से रेडी होने को लेकिन विशाल चोर्ने को अब भी राजी नहीं था अलका के पेअर कंपनी लगते है…






अलका का पूरा जिस्म मनो खली हो गया हाउ ो बस हांफ रही थी अपनी दोनों टंगे फैलाये मुठी में कार्ड को भींचे आआआआअह्हह्ह्ह्हह aaaaaaaaaahhhhhhhh कर यही थी

अलका के जांघो की थिरकन विशाल को औरतेजित करती है वो अलका के कांपते जांघो को कास के अपने मुथिओ में भींच लेता है….

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh चोर दे चोर दे अब सांसतो लेने दे साडी रात चाटेगा तो छोड़ेगा कब हाडवे में थोड़ी एनर्जी बचा के रख अपनी आगे के लिए..

विशाल भी अलग होते हुवे अलका के ऊपर आ जाता है और उसके होंठो को चूमने लगता hai…alka भी उसके होंटो को पिटे हुवे सके लुंड को अपने हाथ में भरलेटी है और सहलाए लगती है…






अलका- यी आअज्ज्ज्ज कुछ ज्यादा मोटा नहीं लग रहा है

विशाल- आज तेरी गांड में घुसेगा सोच के एक्ससिटेड है मेरी जान

अलका- विशु बल तो दिया पर इसकी मोटाई देख के अभी से मेरी गांड फैट रह है मन ले पाऊँगी भी या नहीं…

Vishal-tu नहीं ले पायेगी पर तेरे अंदर जो रैंड है न वो ले लेगी साली कुटिया. बहाने मत बना अब …

अलका- ओह यस daddy(ko विशाल से गालिया सुनने में कुछ ज्यादा hi मजा आता है…)

विशाल- क्या बोलै डैडी?

अलका- यस डैडी मेक में योर व्होरे एंड फ़क में लिखे ा बीच……

विशाल के कानो में अलका के शब्द मनो उसके खून के स्पीड क दोगुना कर रहा था ो ालक के चूतड़ों को मसलने लगता है…

अलका ने ये नोटिस कर लिया था की विशाल दादी शब्द दूँ के ज्यादा िउतेजित हो रहा था जिस से अलका को भी मजा आ रहा था अलका विशाल के आँखों में देखते हुवे एक कामुक समयले के साथ निचे सरकने लग जाती है और विशाल के लुंड के सुपडे पापन जुबान फेरने लगती है और बड़े अदाओ से पूछती है..





अलका- दो यू लिखे थस डैडी?????

विशाल- ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh फुककककककककक माँ तुम मुझे पागल कर रही हो…

अलका- ये तो सुरुवात है bête …..और इतना कहते हुवे अलका अपने bête के अजगर को निगलने लगती है……





विशाल भी झटके मार के अपना लुंड अलका के मुँह में उतरने लगता है..

विशाल- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh कितना गरम मुँह है तेरा माँ uuuuuuuffffffffffff मैं मुँह में hi न झाड़ जाऊ…

अलका- झाड़ा जा मुझे तेरा पानी पीना है …

और फिर अलका पुरे जोश में विशाल का लुंड चूसने लगती hai..aur विशाल मनो आसमान में उड़द रहा था …

पुरे कमरे में गगगगग की आवाज़ आ रही थी बस जो की अलका के छोटे से गुलाबी होंटो के बिच फसे विशाल के लुंड के वजह से आ रहा था….

अलका- फ़क य माउथ लिखे यू अरे फूकिंग योर माँ पुसी…

विशाल भी उठ के अलका को घुटनो के बल बिठा देता है और अपना लुंड उसके मुँह में दाल के उसके मुँह को छोड़ने लगता है…





लुंड अलका के मुँह में गहराई नाप रा था तो वही विशाल की ाँद उसपे होने इ मनो थप्पड़ बजा रहा था

अलका- aaaaaaaaaaaahhuuuuuuuuuuuuuuuuggggggggggggggggggg gggggggggggguuuuuuuuuuuuuu गूऊऊऊऊजूउउउउउ

विशाल बहुत hi बुरे तरीके से अपनी माँ अलका के मुँह को छोड़ रहा tha……lund उसके गले में गहराई तक उतर जाए से अलका को साँस तक नहीं लियाजा रहा था….. और जब विशाल लुंड बहार खींचता तो तुण्ड के साथ ढेर सारा लार बह बहार निकल आता है…






विशाल के धक्को से अक की आँखे बहार आ जाती है उसके आँखों में आंसू बहने लगते है उसका काजल फ़ैल के उसके चेहरे पे फ़ैल जाता है लेकिन इन सब की परः किये बिना विशाल अपनी माँ अलका के मुँह को बेरहमी से पेल रहा था

विशाल- माँ मेरा आने वाला है…

अलका उसके लुंड को बहार निकल के मसलने लगती है फिर दुबारा मुँह में दाल लेती है फिर निकालके मसलती है फिर दाल लेती है और ऐसा hi करते रहती है जब तक विशाल का लुंड अपना पानी नहीं चोरड देता…





और विशाल अपना पानी अपनी माँ के मुँह में को देता है जिसे वो बड़े hi पसंद से पिने लगती hai…wo किसी प्यासी कुटिया की तरह विशाल केलुंड का पानी निचोड़ लेती है अपने गरम मुँह में… अभी उसका इतने से मन नहीं भरा था की लका अपने bête के लुंड को वापस से मुँह में भर के चूसने लगती है और तब तक चुस्ती है जब तक उसका ेके क बून्द न निकल गया हो.






इतने जोरदार फोरप्ले के बाद दोनों माँ बेटे बीएड पे पड़े पड़े हाफने लगते है पुरे कमरे में दोनों की चाहड़ी हुई सांसो का शोर था...

कोई और होता तो इसके बाद सो जाता पर ये खेल विशाल अपनी माँ अलका के साथ खेल रहा था वाइटी जल्दी ख़तम होने का तो सवाल hi नहीं था... उसके बाद विशाल का अभी गिफ्ट ओपन करना तो बाकि hi था..

रात अपने पुरे शवाब पे थी ये प्यार का महीना आजा अलका को प्यार के साथ दर्द भी देने वाला था और जो चुदाई के बिछोटा सा अंतराल था वो तूफान से पहले आने की शांति थी और ये तूफ़ान जो अलका के नस नस को तोड़ने और बजन इ वाला था..

सांसो के थमने के बाद अलका उठ के वाशरूम के तरफ जाने लगती है अपनी माँ को पीछे जाता देख विशाल की नजर उसके गोल गांड और पतली कमर पे पड़ती है... एक्सकिटमेंट में सोचता है क्या चीज बनाई है भगवान ने..... कितनी कामुक ुर सेक्सी है मेरी माँ मन कर रहा अभी पटक के छोड़ दू साली को... देखे कैसे गांड मटका के चल रही है मनो मुझे अपना खजान दिखा के ललचा रही हो...






विशाल पूछता है खान जा रही हो???

अलका - सुसु करने

विशाल भी शरारती आवाज में मुँह खोल के कहता है- aaaaaaaaaaaaa

अलका शरमाते हुवे- हैट बदमाश रुक मैं आयी.. अलका को भी पता था विशाल क्या देख रहा है इसलिए वो भी कुछ ज्यादा hi अपने कमर का लचक दिखते हुवे आगे बढ़ जाती है...

वाशरूम में पहुंचते hi आपका अपनी छूट मसलने लगती है और कहने लगती है हाय निगोड़ी कितनी आग है तेरे में अभी झड़ी है बेटे के मुँह में भी मूत दिया फिर भी तेरी खुजली है की जाती नहीं... किसी दिन तेरे वजह से मैं सच में रंडी न बन जाऊ और यही सब बडबडते हुवे अलका टॉयलेट सीट पे अपन छूट की धार बहाने लगती है






छूट से निकले पेशाब में इतनी तेज़ धार थी की वो सीट की जगह फ्लोर पे गिरने लगा जिसे देख के अलका हसने लगती है... और कहती है तू नहीं मानेगी तू फिर से तैयार हो गयी न विशाल का लुंड निगलने के लिए?????

चल तेरी भी विश पूरी कर दू चल दिलवौ तुझे विशाल का लुंड वो भी कब मरे जा रहा है ेरे अंदर जाने के लिए ...

और अपने चुचिओ को मसलते हुवे बड़बड़ने लगती है उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ये सेक्स का बुखार मुझे पागल कर देगा..
 
hello फ्रंड्ज़ आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद जो भी स्टोरी रीड कर रहे हो और कमेंट में अपना प्यार और फीडबैक दे रहे हो ... मई कोशिश करता हु की सभी के कमेंट का जवाब दू बूत फिर भी किसी का ने दे पाव तो उसके लिए सॉरी और मेरे इस मैसेज को hi अपने कमेंट का जवाब समझ अपने भाई के स्टोरी को प्यार और फीडबैक देते रहे

थैंक यू आल
 
एक और बात कहना चाहूंगा की मेरे कुछ रडर्स के सवाल है और कुछ जो कमेंट्स नहीं किये है उसका भी होगा की आखिर अलका के साथ मेड्रिड में हुआ क्या था??? उसकी ऐसी हालत कैसे हुई थी......?

तो मैं बताना चाहूंगा की वो स्टोरी का प्लाट रेडी है सही वक़्त आने पे मैं पोस्ट कर दूंगा एंड ट्रस्ट में पढ़ने के बाद आप सभी का रोम रोम अलका का दीवाना हो जायेगा ये मेरा आप सब सेवडा है पर एक hi रेक है की उस episode के लिए मुझे आप सभी के रिस्पांस चाइये अलग से जितना ज्यादा और ाचा रिस्पांस आप डोज मई उतना hi जल्दी और जोरदार धमाके दर episode पोस्ट कर dunga...tab तक के लिए अपना एक्ससिटेमेंट बनाये रखिये..
 
ग्लिम्प्स फ्रॉम फ्यूचर

सन 1 ात डे

अलका- नहीं नहीं अशोक ये न करवाओ मुझसे plss...mujhse ये नहीं हो पायेगा समझो तुम मेरी जान ले लो पर ये नहीं हो पायेगा

अशोक- हो जायेगा अलका तुम्हे मेरे लिए करना hi पड़ेगा ये...

अलका के ज़िन्दगी में ये दिन तो आना hi था पर ऐसा ये कभी उसने सोचा न था....

सन 2ंद ात नाईट

अशोक झटके लगा रहा था और अपनी बात मनवाने की ज़िद कर रहा था.. उसे पता था की ये अलका की सबसे कमजोर घडी है इस वक़्त उस से कुछ भी करवाया जा सकता है और अलका भी जो की वासना के नशे में कुछ भी कर सकती है किसी भी हद तक जा सकती है सिसकते हुवे पूछती है तुम सच में ऐसा चाहते हो....?

अशोक- हाँ

अलका- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ और हफ्ते हुवे कहती है ठीक है फिर और इतना कह के कांपते हुवे हाथो से मोबाइल उठा के उसे मैसेज करने लगती है...






क्या लगता है दोस्तों अशोक किसे मैसेज करवा रहा है और क्यों???

क्या कोई तीसरा जुड़ने वाला है फॉर थ्रीसम?? और जुड़ने वाला है तो कौन???

सारिका

aditya(bada बीटा)

अमन

विशाल


या उनका कोई पुराण म्यूच्यूअल फ्रेंड
 
Part-26

जहां एक और विशाल बीएड पे पड़ा पड़ा अलका का वेट कर रहा था तो वही दूसरी और अलका वाशरूम में अपना छूट मसल रही thi…darwaja बंद न होने के वजह से विशाल अलका के नंगे जिस्म को देख पा रहा था.. और ये नज़ारा उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था..





टॉयलेट कर लेने के बाद अलका वापस से बैडरूम में एंटर करती है जहां सामने उसका बीटा नजरे बिछाये अपनी माँ अलका hi वेट कर रहा था और सांसे से अलका बिलकुल नंगी चली आ रही थी… वो चाहती तो एक गाउन लप्पेट सकती थी पर उसे तो अपने जिस्म की नुमाईश करनी थी.. और करे भी क्यों न जब कुदरत ने इतना सूंदर सुडौल शरीर के मालकिन बनाया हो





अलका- ऐसे क्या देख रहा है खा जायेगा क्या??

विशाल- हाँ इरादा तो कुछ वैसा hi है….

विशाल की बात सुन अलका बड़े कामुक अंदाज़ से उसकी तरफ चल के आने लगती है जिसे देख विशाल बीएड पे हरकत करने लगता है और इस से पहले की वो उठ पता अलका झपट के उसके गॉड में जा बैठती है और उसके कूल्हे सिद्ध विशाल के लुंड पे टिक जाता hai…visl का लुंड उसके दोनों चूतड़ों के बिच फास जाता ै जिसके वह्जः से दोनों के मुँह से एक साथ सिसकारी फुट पड़ती है

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh

विशाल- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh mammmmmmmmmsaaaaaaaaaaaaaa

अलका- अपनी माँ छोड़ने के लिए अपनी hi माँ को याद कर रहे हो bête….itna कह के अपनी गांड विशाल के लुंड पी आगे पीछे करते हुवे घिसने लगती है…






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अलका के ऐसी बातो से विशाल की हसी छूट जाती है वो अलका के चुचिओ को पकड़ते गुवे पूछता है …

विशाल- फिर किसे याद करू माँ???

अलका- किसी को नहीं तू मुझे hi याद रख काफी है samjhe…aur इसी तरह हस्ते हुवे अपने होंठ विशाल के होंटो पे रख देती hai…..uuuuuuuuuuuuuuuummmmmmmmmmmmmmmm






अलका- तेरे होंठ तो औरतो से भी ज्यादा रसीले है रे…

विशाल- आखिर बीटा किसका हु…

अलका- अब तू सिर्फ बीटा खान रहा मेरा अब तो तुम एरा खसम बन गया hai…uuuuuuuuuhhhhhhhhhh कितना हार्ड हो रहा है तेरा लोढ़ा जैसे अभी घुस जायेगा मेरे छूट में

विशाल- हार्ड है तभी तो तू इसकी दीवानी है न मेरी जान

अलका- हाँ bête ये पूरा निचोड़ डालता है मेरे दानो को उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ufffffffffff

विशाल- तू फिर से मूत रही है?

अलका- नहीं bête ये तेरे लुंड की ठोकरे मेरा पानी निकल देती है






विशाल- पर अभी तो अंदर गया भी नहीं बाहेर hi है

अलका- पर ठोकर तो मेरे छूट को मर रहा है न तेरा ये बम्बू

विशाल- पानी बचा के रख माँ वर्ण तू रोयेगी मैं तुझे छोड़ता रहूँगा

अलका- मैं भी वही चाहती हु तू बिलकुल तरस न खाये मई जितना रौ तू उतना रगड़े अपनी माँ को माँ को क्यों तू मुझे बिलकुल रैंड की तरह chode..yhi सुन्ना पसंद है न तुझे

विशाल- क्या सुन्ना माँ?

अलका- ाचा बच्चू माँ से चालाकी ….. तुझे मुझेरण्ड की तरह छोड़ना है समझ माँ की तरह नहीं बीएड पे मैं तेरी माँ नहीं एक रंडी ह उतेरी चिनार अलका….. समझा मादरचोद??? और उसके होंठ काट लेती है…

विशाल- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh समझ गया मेरी रंडी माँ

अलका- वैरी गुड और इतना कह के अलका फ़ौरन घूम जाती है और अब उसकी गांड विशाल के लुंड के ऊपर होता है…






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चुदाई के खुमारी जब अलका के सर पे चढ़ती है तो वो इस मामले में अलका साडी सीमाएं लांघने से पीछे नहीं हटती और उसका ये रूप उसी का एक नजारा था… जिसे देख विशाल भी कभी कभी सोच में पद जाता है की क्या ये उसकी वही माँ है जिसे अब तक वो साड़ी या फुल कपड़ो में लिपटे देखता आया है..

विशाल अलका के कानो में कहता है- माँ एक बात बोलू

अलका- तू इस वक़्त बाटे क्यों करता है मुझे है पसंद बूत फिर भी मुँह खोल लिया है तो पूछ… लेकिन अगली बार से मुँह खोलना तो सिर्फ अपनी माँ के चुके और छूट को चूसने के लिए अपने सवाल के लिए नहीं

विशाल- माँ बाटे जब आती इसी वक़्त है मंद में तो पहले कैसे पूछूंगा…

अलका- तो चुदाई के बाद पूछ लिया कर मादरचोद रोका किसने है तुझे अभी अपनी माँ की आग शांत कर

विशाल- माँ खान तू तो गस्ती है बहनचोद

अलका- तो गस्ती की आग बुझा दे गश्ती के bête…

विशाल अलका के बातो से उत्तेजित ह रहा था ो अलका के चुचिओ को मसलने लगता है और फिर उसे निचे उतर कर उसे घोड़ी बनने को कहता है और अलका भी तुरंत घोड़ी बन के अपनी गांड हवा में लहरा देती है…

अब वो घडी आ चुक्का था जब बी अपनी माँ के अंदर प्रवेश करने वाला था जिसके एक्ससिटेमेंट में दोनों की धड़कने बुलेट ट्रैन की तरह भाग रही थी…






विशाल अपना लुंड अलका के गांड के तंग और भूरे छेद पे लगता hi है की अलका पलट जाती है….

विशाल गुस्से में – अब क्या हुआ चिनार अभी तो छोड़ने के लिए तड़प रही थी

अलका- तू शुरू hi मेरी गांड मर के करेगा क्या पहले मेरी छूट के पानी से अपने लुंड तो गिला कर ले नौसिखिये…

और अलका अपनी टंगे खोल के अपनी छूट विशाल को परोस देती है..






छूट क्या दिखा रही थी साथ hi उसके गांड के लाल सुराख़ भी सामने आ ज्ञाता विशाल का जी तो गांड में लुंड पेलने का था पर पहले छूट नहीं मरेगा तो उसकी माँ उसे अपनी गांड चुने भी नहीं देगी

विशाल अपना लुंड अलका के छूट पे लगा देता है और उसके छूट के ऊपर रगड़ने लगता है






अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh कितना गरम और सख्त है रे तेरा लुंड उउउउउउउठ्हहहहहह मेरे छूट का कचूमर निकल देता है हर बार तू ooooooooooooohhhhhhhhh ggggoooooooooooooooddddddddddddddd

अलका अभी ुशामले केलिए खुद को रेडी कर hi रही थी की विशाल झटके में अपना लुंड अलका के छूट में पेल दिया… ये अलका की छूट कुछ अलग hi मिटटी की बानी hi सायद इतनी बार विशाल ने उसे इतने बुरे तरीके से छोड़ा है की कोई और छूट होता तो भोसड़ा बन ज्ञहोता लेकिन अलका की छूट मनो वापस से हर चुदाई के बाद और जवान और कासी हुई होती जा रही हो…. इतने तेज़ हमले के बाद भी विशाल का आधा से थोड़ा ज्यादा लुंड hi अलका के छूट में समां पाया था पूरा जाना अभी भी बाकि tha..lekin ये जोरदार धक्का अलका की निकलने के लिए काफी था उसके पहले ढकी में hi अलका की चीख निकल जाती है

अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaa faaaaaaaaadddddddddddddddddddd diiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii chcccccccccccchuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuutttttttttttt iiiiiiiiissssssssssssssss mmmmmmmmmmaaaaadddddderrrrrrrrrrrr ccccccchhoooooooooooooddddddddddd neeeeeeeeeeee aaaaaaaaaaaaajj

विशाल- चिल्ला क्यों रही है बहन की लोदी तेरी माँ थोड़े ना आएगी तुझे बचने और आयी तो उसे भी तेरे साथ छोड़ दूंगा आज…..

अलका- बता नहीं सकता था और एक hi बार में पूरा क्यों डालता है हर बार भड़वे

विशाल- पूरा अभी खान डाला है मेरी रानी अभी तो आधा hi गया है

अलका जब निचे हाथ लगा के देखती है तो सच में आधा hi गया था उसकी तो मनो छोड़ने से पहले गांड फैट जाती है…..

Alka-vishu आराम से bête मैं भाग नहीं रही हु कही

विशाल- भागे के जाएगी खान चिनार और इतना कहते hi लुंड एक बार खींच के दुबारा से शॉट मरता है और पूरा लुंड जड़ तक उतर देता है..

अलका इतने जोर से चिखिति है की पूरा सोसाइटी सुन जाये पैर मॉडर्न सिटी की खास बात है की यह किसी को किसी से मतलब नहीं होता और दिल्ली में तो वैसे भी किसी को किसी की परः नहीं होती…

अलका- uuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii mmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaa बहार निकल मादरचोद इतना बड़ा है मुँह से निकल आएगा मेरे

पर विशाल नहीं निकलता और हस्ता रहता है….

अलका- प्लस विशु एक बहार निकल के दुबारा डा लेना अभी निकल ले…

विशाल- पक्का??

अलका- हाँ पक्का

विशाल अपना लुंड निकल लेता है और इस से पहले अलका रिलैक्स होती ा कोई हरकत करती दुबारा से एक जोर के झटके के साथ लुंड उसके छूट में उतर देता है

अलका इस से पहले चीख पति विशाल उसका मुँह अपने पंजे से दबा देता है






अलका का दर्द उसके मुँह गले और पंजे के बिच hi घुट के रह जाता है…. वो अपने हाथ हवा में मरने लगती है और पेअर भी छटपटने लगती है पर विशु किसी जालिम की तरह उसपे बिना किसी दया के उसका मुँह पंजे से दबा के उसे छोड़ रहा था अलका की हालत मरे जैसी हो गयी थी जिसे देख विशाल फ़ौरन पंजा उसके मुँह से हटा देता है …… सामने जो नजारा था वो बहुत भयावह था अलका का चेहरा बिलकुल लाल पद गया था उसके आँखों में आंसू …. वो पुरे शरीर का जोर लगा के चीखती है

अलका- maderchoddddddddddddddddddddddddddddd मार dalegaaaaaaaaaaaaaaaaaa kyaaaaaaaaaaaaaaaaaa






पर विशाल को पता था उसके माँ को खुस कैसे करना है इस से पहले वो और चिल्लाती चटपटी विशाल अपने होंठ अपने माँ अलका के होंठो पे रख देता है… अलका को मनो भरी दोपहरी में पानी मिल गया हो वो वैसे विशाल के होंटो को चूसने लगती है और विशाल भी उसके होंटो को चूसते हुवे धक्के लगाने लगता है

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh






विशाल –धक्के मरता और अलका के होंटो को चुस्त… दोनों माँ bête चुदाई के आनंद में खोये थे उन्हें ये भी ख्याल नहीं था की बहार कोई बेल्ल बजा रहा है और इधर अलका का मोबाइल भी बज रहा है… अलका तो अपने bête के होंटो में खोयी थी और बीटा अपनी माँ के छूट में..





अलका के साइड से कोई जवाब न मिलने के बाद अब मोबाइल विशाल का बजने लगता है

जिस से अलका अपना होंठ विशाल के होंटो से अलग करते हुवे कहती है..

अलका- विशु लगता है कोई बेल्ल बजा रहा है

विशाल- चोरो न माँ अभी नहीं देखना जिसे बजाना है बजने दो और वो अलका के कमर में हाथ दाल के घुमा देता है अलका समझ जाती है उसे घोड़ी बनना है और वो घोड़ी बन के अपनी गांड ऊपर को उठा देती है….

अभी विशाल ने एक धक्का मारा hi था की उसकी छूट बहने लग जाती है अलका एक बार दुबारा से झाड़ गयी थी..

अलका- aaaaahhhhhhhhhh mmmmmmmaaaaaaaaaaaa मैं गयी माईई gaaaaaaaaaaaayyyiiiiiiiiiiiiii तेरी maaaaaaaaaaaa firrrrrrrrrrr से gayyyyyiiiiiiiiiiiiiiiiii vishuhhhuuuuuuuuuuuu






वो थक के आगे गिरने को होती है की विशाल उसके बाल को पकड़ के वापस अपनी तरफ खींच लेता है और उसके छूट के पानी से सना अपना लुंड उसके गांड के छेद पे भिड़ा देता है की तभी वापस से दूर बेल्ल और अलका का मोब एक साथ बजने लगता है.. अलका का ध्यान स्क्रीन पे जाता है तो वहां अशोक का नंबर फ़्लैश हो रहा था… ालककी हालत बिगड़ जाती है इसका मतलब तब से अशोक दुर्बल बजा रहा था और फोन कर रहा था यानि की अशोक घर आया है और oooooooooo fuckkkkkkkkkk





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अलका- चोर विशाल तेरे पापा आ गए देख बहार जा के गेट खोल मैं ये सब समेटती हूँ

विशाल- आने दो मेरा अभी नहीं हुआ है इंतजार करने दो अपने हस्बैंड को …

अलका- चोर bête पागल हो गया है वो हम दोनों को मार डालेगा …… जाने कब से बेल्ल बजा रहा है यहां मोब में भी 18 मिस कॉल है मर गयी आज तो…

पर विशाल था की बाल पकड़ के खींचता है और वापस से अपना लुंड अलका के छूट में उतर देता है






विशाल अलका के बाल किसी घोड़ी की तरह खींचते हुवे धक्के लगाने लगता है

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh चोर दे क्या कर रहा है पागल हो गया है देख तेरा बाप बहार खड़ा है

विशाल- उसे बहार hi रहने दे उसकी बीवी अभी अंदर चुद रही है… उसकी बीवी क्यों मेरी रैंड चुद रही है ….

अलका- तू पागल हो गया है खुद भी मरेगा और मुझे भी मरवाएगा

विशाल- मरवा तो रही है बहन की लोदी और कितना मरवायेगी मादरचोद चिनार…

बहार अशोक और भीतर उसका सागा बीटा उसके छूट छोड़ रहा था अलका भी एक्ससिटेड होने लगी थी …. उसके bête की हिम्मत देख वो भी रोमांचित होने लगी थी और उसके अंदर दर के साथ रोमांच भरने लगा था….

अलका- तू नहीं मानेगा????

विशाल- सवाल hi नहीं होता

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मममममममअअअअअअन्नननननननन एक्ससिटेड होते हुवे बहार तेरा बाप खड़ा है तुझे दर नहीं लग रहा

विशाल- अभी तो वो सामने होता तब भी तुझे न चोरु

अलका- ठीक है फिर आज दिखा अपनी हिमायत और छोड़ मादरचोद और अपने गांड को पीछे धकलने लगती है

विशाल- ये हुई न मेरी रंडी वाली बात और विशाल अलका के सर को बीएड पे दबा देता है और अलका अपनी गांड और हवा में लहरा देती है…






अलका - aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmaaaaaa मर गयी छोड़ अपनी रंडी को मादरचोद छोड़ फाड़ दे मेरी छूट भड़वे बहार तेरा बाप खड़ा है और तू यहां उसकी बीवी चढ़ रहा है…. आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माँ कैसा हरामी औलाद पैदा किया है तुमने अशोक तुम्हे बहार खड़ा कर के ये यहां तुम्हारी बीवी को घोड़ी बना के उसके छूट में अपना लुंड दाल के छोड़ रहा है….

विशाल- चुप साली रंडी एक दिन तेरे अशोक के सामने भी तुझे छोडूंगा ऐसे hi घोड़ी बना के…

अलका- aaaaaaaahhhhhhhhhh मेरा तो सोच के hi पानी निकला जा रहा है पति के सामने बेटेके लुंड को भोगूंगी aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh विशाल

विशाल- देखा तू है hi रंडी ऐसे कारनामे तुझे एक्ससिटेड करते है..

अलका का बार बार झड़ना अब उसे उसके पैरो पे टिका नहीं जा रहा था ो बार बार गिर जा रही थी मौके के नज़ाकत को देखते हुवे विशाल का भी अब होने वाला था इसलिए वो अलका को सिद्ध लिटा देता है और बड़े बड़े शॉट्स मरने लगता है

और विशाल अलका को बीएड पे लिटा के तेज़ तेज़ धक्के मरने लगता है…






विशाल- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh कितनी गरम छूट है तेरी मा

अलका- अब निकल ले मेरे छूट में जलन हो रही है

विशाल- रुक जा रुक जा बस होने वाला है…

अलका- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh मार डाला तूने……

विशाल- अभी खान अभी तो पूरी रात छोडूंगा तुझे तेरे पति के सामने रंडी

अलका- हाँ छोड़ लेना मैं खुद तेरे बाप के सामने तेरे लुंड पे कूदूंगी तेरा पानी पियूँगी…

विशाल अलका के बाल खींच के अपनी और खींच के धक्को की स्पीड बढ़ा देता है






बहार उसका पति अपनी बीवी के लिए परेशां हो रहा था और यह उसकी बीवी रंडी की तरह तरह अपने bête से चुद रही थी…

Vishal-mera होने वाला है माँ

अलका- अंदर मत निकलना मैं प्रेगनेट हो जौंग पहले भी तूने अंदर छोरा था

और विशाल अलका के छूट से अपना लुंड बहार खींच लेता है और अलका के पेट पे hi अपना धार मरने लगता है






विशाल के लुंड के पानी से भीग जाने के बाद अलका करवट ले लेती है और हाफने लगती है

अलका –aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh uuuufffffffffffffff मुझे पीना तहत एरा पानी तूने सारा वास्ते कर दिया…

विशाल- कुछ वस्तेनाही हुआ है और इतना कह के बाकि बचा हुआ पानी वो अलका के गाल पे निच्ड के गिराने लगता है






अलका बेजान सी पड़ी बस हांफ रही थी चेहरे पे पड़े गर्माहट से उसके चेहरे पे एक कातिलाना मुस्कान आ जाता है वो उसे हाथ से पॉच के खाने लगती है.. वो चाटने और छूट की आग ठंडा करने में भूल गयी की बहार उसका पति खड़ा बेल्ल बजा रहा है..

अक का ध्यान वापस से बैल बजने से टूटता है और वो विशाल को गली देते हुवे कहती है…

अलका- हो गया ठण्ड कर ली अपने मन की अब जा जल्दी दरवाजा खोल आज तेरा बाप पता नहीं क्या करेगा….?

विशाल- और ये सब वो कमरे की और उसकी हाल दिखते हुवे कहता है…






कर्मा और बिस्टेर पूरा अस्तवयस्त था… बीएड के निचे अलका की रेड ब्रा पंतय और सांडले बिखरी हुई थी कोई भी कमरे की हालत देख के बता सकता था की अभी वहां क्या हुआ होगा…





अलका- तू पहले दूर ओपन कर दे मैं सब ठीक करती हु और हाँ कोशिश करना अपने बाप को थोड़ी देर हॉल में रोकने की…

विशाल- ok माँ

विशाल जल्दी से जाता है कपडे वगेरा दाल के आंख मीचते हुवे सोने की एक्टिंग करते हुवे

विशाल- पापा आप

अशोक- पापा के बचे कब से फोन कर रहा हु कहा थे तुम और तुम्हारी माँ न फोन उठा रहे न दूर खोल रहे मैं तो टेंशन में आ गया था….

अब ऐसे क्या देख रहा है जा गाड़ी में से सामान निकल ला तेरे लिए भी कुछ सपकल है.. विशाल भाग के गाड़ी से सामान निकलने जाता है क्यूंकि उसके पास कोई ऑप्शन भी तो नहीं था

इतने में अलका नाईट गाउन बांधते हुवे आती है…






अलका- अशोक tum…achanak कैसे मेरा मतलब है बताया तो दिया होता…

अशोक अलका को देखते hi उसमे खो जाता है ये वो अलका नहीं थी जिसे वो 2 मंथ पहले चोर के गया था.. ये अलका तो पहले से ज्यादा मादक ज्यादा कासी हुई और जयदा भरे हुवे शरीर वाली हो गयी थी.. और हो भी क्यों न इतने दिनों से उसका बीटा जो उसके चोर कैग ए पौधे में अपना पानी दाल रहा था तो इसका खिला तो लाजमी hi था…

अलका- ऐसे क्या देख रहे हो….?

अशोक- देख रहा हु मेरी बीवी तो किसी पुराणी शराब की तरह और ज्यादा नशीली होते जा रही है..

अलका- ाचा जी आते hi फ़्लर्ट वो भी से ….. ये बताओ की बिना बताये क्यों आये…???? और कब से बेल्ल बजा रहे हो ???

अशोक- गेट न खुलने पे टेंशन के साथ गुस्सा तो आ रहा था पर सामने अपने साहेबजादे और अपनी खूबसूरत बीवी को देख के गुस्सा चला गया..

अलका- सॉरी अशोक हमे पता नहीं था तो मेरी आंख लग गयी थी एंड फोन भी सिलें पेट है…

कोई बात नहीं मेरी जान और ये कहते हुवे अलका के होंटो पे अपने होंठ रख देता है अलका भी किश कर रही टी की विशाल के आने की हैट से दोनों अलग होते है..

विशाल- थग्स डैड ….. देखो माँ पापा ने मेरे लिए लेटेस्ट एडिशन का पस5…

अलका- है नाब सारा दिन इसी में घुसे रहना और अशोक तुमने क्यों लाया ये सब पहले hi इसे पढाई लिखे से मतलब नहीं है.. फिर सब एक दूसरे को गुड नाईट बोल के अपने अपने कमरे में चले जाते है..

अशोक- चलो वो काम करे जो अधूरा रह गया था

Alka-konsa काम?

अशोक सिद्ध अपने होंठ अलका के होंठो पे रख के चुम्न लगता है दोनों hi किश में खोये हुवे थे उधर अपने हीरो के साथ आज कलपद हो गया था उसकी वैलेंटाइन को कोई और उदा ले गया.. और उसके पास लुंड मसलने के अलावा कोई उपाय नहीं था क्युकी ले जाने वला उसका बाप था…

इधर बैडरूम में अलका और अशोक आज महीनो बाद एक हुवे थे..

अशोक- क्या बात है तुम तो पहले से भी ज्यादा कामुक लग रही हो…

अलका- ाचा वो कैसे?

अशोक वो ऐसे की ये कहते हुवे अलका को निचे बिठा देता है जिसका मतलब वो अलका को अपना लुंड चूसने के लिए कहता है…

अलका- ये क्या आते hi शुरू हो गए..?

अशोक- मेरी जान ऐसा कुछ सोच के तो नहीं आया था पर तुम्हारा ये बदला यौवन से लबालब रूप देख के मुझसे रहा नहीं जा रहा है जल्दी से अब इसे अपने कोमल रसभरी होंटो वाले मुँह में ले लो..

Alka—kuch ज्यादा hi उतावले हो रहे ho…kehte हुवे उसके लुंड पे अपनी उँगलियाँ फेरने लगती है……






ये वही औरत है जो अभी अपने bête से चुड़ते हुवे 3 बार झड़ी है पर लुंड के सामने आते hi उसके छूट के डेन वपस खड़े हो गए hai..aur ये कामवासना में फिर से एक चुदाई भरे सफर पे निकलने के लिए तैयार हो गयी है….

अशोक- वाओ बहुत समय बाद तुम्हारे हाथो का स्पर्श मिला है इसे…

अलका- तो न जाया करो मुझे चोर के…. मैं भी तो तुम्हारे स्पर्श को मिस करती हूँ और इतना कहते hi उसके लुंड पे अपनी गरम जुबान फेरने लगती है….






अलका के गरम गरम लार की गार्हत को इतने दिनों बबाद पा के अशोक तो जैसे पागल hi हो जाता है…

अशोक- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अलका मेरी जाएं तुम्हे आदमी को खुश करने का जादू आता है ufffffffffffff ये गर्माहट…..

अलका भी बस उसके आँखों में देखते हुवे चेहरे पे मुस्कान का भाव लिए अपने पति के लुंड को बड़े प्यार से चूस रही थी…

अशोक को ये सुच बहुत दिनों बाद मिल रहा था जिसके वजह से उसका खुद पे कण्ट्रोल नहीं रह पता और वो अलका के मुँह में अपन लुंड जड़ तक पेल के उसके मुँह को छोड़ने लगता है…






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अलका तो इस अचानक हुवे हमला के लिए तैयार बह नहीं थी वोट क डैम से गिरने को होती है की अशोक उसका सर पकड़ के अपने कमर का पूरा जोर उसके मुँह पे लगा देता है… अलका भी अशोक के गांड को पकड़ के सहारा लेती है और दोनों मिया बीवी की मुहचुड़ै का खेल स्टार्ट हो जाता है…..

अशोक का लुंड विशाल के लुंड से छोटा तो था पर मोटाई में कोई कमी नहीं थी और इतना तगड़ा तो था hi किसी औरत को संतुषट कर सके अलका अशोक के लुंड किसी लोल्लयपोप की तरह चूसने लगती है… उसका मोटा तगड़ा लुंड से अलका का पूरा मुँह भर गया था….

अभी कुछ hi झटके लगाए थे की अशोक अलका के मुँह में hi झाड़ gya..alka का पूरा मुँह अशोक के पानी से भर जाता है.. जिसकी कुछ बुँदे उसके होंटो पे फ़ैल जाती है वो उसे भी उठा के खा लेती है…

अलका- क्या बात है बहुत ज्यादा पानी छोरा तुमने पूरा मुँह hi भर दिया….






लेकिन ये क्या इतनी जल्दी हो गया तुम्हारा……? इतने के लिए उतावला हो रहे थे…? अब मेरी छूट कौन शांत करेगा आग लगा के सो रहे हो tum????(man में- विशाल होता तो जाने क्या hi करता और ये उसका बाप आ केन ा उसे चढ़ने दिया न खुद छोड़ पता है)

अशोक- तुम्हारे हुस्न की आगे कोई खान टिक पायेगा मेरी जान और वैसे भी मैं सफर के वजह से थक गया हूँ तुम खुद को कल के लिए तैयार रखो तेरी आग शांत करता हु मैं….

अलका- ब्लश कर के बीएड पे लेट जाती hai…(vishal को देख लोगे तो ये सवाल नहीं करोगे)

अशोक भी सफर से थका था और माल गिर जाने के बाद नींद के आगोश में चला गया…

अलका- थैंक गॉड तुमने लुंड चुसवाया मेरी छूट नहीं छाती वर्ण बीवी के छूट की पानी के साथ bête का पानी भी पि जाते आज…

अलका- ooooooooohhhhhhhhhhh माँ मेरी प्यास भी नहीं बुझी अभी तक और ये आदमी न खुद छोड़ा न उसे छोड़ने दिया…. और अलका छूट मसलते हुवे सोने की कोशिश करने लगती है..






अलका का इस तरह छूट का रगड़ के खुद को शांत करने की कोशिश करने का मतलब था उसे अभी भी संतुष्टि नहीं मिली है पर अशोक तो सो गया और अशोक के होते वो विशाल के पास जा नहीं सकती... लेकिन ये छूट की आग है वो भी अलका की जो उस से कुछ भी करवा देती है....





बेकाबू हो के अलका अपने hi छूट का पानी अपने उंगलिओ से निकल के चाटने लगती है और ये मादक पानी पनि न जैसे कोई नशीला पदार्थ हो जिसे जीभ में स्पर्श मात्रा से अलका के अंदर वासना का तूफान दौड़ने लगता है... वो सिरहाने रखे तकिये को अपने दोनों पैरो के बिच दबा के उसपे अपना छूट रगड़ने लगती है जैसे वो तकिया नहीं विशाल का मुँह हो ....

वो कामवासना में इतना आतुर हो जाती है की अपने हाथो से अपना गाला दबाइने लगती है जैसे विशाल उसे छोड़ते वक़्त दबाता है तो कभी अपने चुचिओ को मसल रही होती है...

वो वासना और गुस्से में अशोक को कोसने लगती है जो न खुद अपनी बीवी को शांत कर पाया न hi अपने बेटे को करने दिया उल्टा उसके अंदर एक आग भड़का के सो गया....

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ अशोक ये तुमने क्या किया अब मैं क्या कर कैसे शांत करू अपने इस आग को बुझाने वाला तो बगल के कमरे में है पर तुम्हारे होते मैं जा भी नहीं sakti......(man में- चली जाऊ क्या???? एक बार पानी निकल जाये तो सो पाऊँगी.. पर उसका इतनी जड़ी होता खान है वो सुबह hi न कर de....uuuuuuuuuuuuuuffffffffffffffff mmmmmmmmmmmaaaaaaaa)

तो क्या अलका जाएगी अपनी आग बुझाने अपने पति के होते हुवे अपने बेटे के पास
 
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यहां मैं अआप लोगो को अशोक के बारे में थोड़ा बताता चालू


अशोक नेवी में शिप का एक कप्तान है जो साल 2 साल में घर आता है और और कुछ महीने फॅमिली के साथ बिता के वापस शिप पे…

अब वापस आते है कहानी पे….

अलका की आग अभी भी शांत नहीं हुई थी वो अभी और छोड़ना चाहती थी लेकिन अशोक ने आज का सारा मूड ख़राब तो किया hi साथ hi उसके छूट की आग को और भड़का के खड़ सो गया.. अलका जो की अभी इस कश्मकश में थी की वो विशाल के कमरे में जाये या न जाये तो वही विशाल भी कमरे में बैठ लुंड हिलाते हुवे अपने बाप अशोक को गालिया बक रहा था क्यूंकि उसके वजह से आज वो अलका की कुंवारी गांड का सील नहीं तोड़ पाया…

दोनों माँ bête कामाग्नि में जल रहे थे एक दूसरे में फिर से घुस जाना चाहते थे लेकिन अशोक के होते दोनों में आगे बढ़ने की हिम्मत न थी और यूँ hi करवट बदलते बदलते दोनों सो गए…

सुबह अलका की आंख खुलती है तो वो एप आप को बीएड पे नंगी पति है उसका सुनहरा भरा बदन गोल गोल कठोर चूचिया जिस के निचे पतली कमरा और उस से होता हुआ कटावदार गोल गुम्बद से उसके कूल्हे उसका हाथ अनायास hi अपने बदन पे चलने लगता है…… पहले चूचियों और निप्पल से खेलते हुवे जैसे hi उसका हाथ उसके छूट पे पड़ती है उसकी एक aaaaaaahhhhhhhhhh निकल जाती है अपनी दो उंगलिअ अंदर दाल के मनो छूट का मुआयना करना छह रही हो….. अलका की छूट भी मनो किसी रसदार फल की तरह हो जिसे जरा सा मसला नहीं की उसका रास टपकने लगता है…. यही हाल उसके छूट का था अभी उसने उंगलिया फेरी hi थी की उसके छूट ने अपना कामर्स बहाना सुरु कर दिया था…






अलका- uuuuuuuuuuffffffffffffffffff निगोड़ी तुझे सुबह सुबह भी चैन नहीं जो जागते hi लार टपकने लगी…. Hhhhhayyyyyyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeee विशाल मेरे बचे देख तेरी माँ की हालत….

इस से पहले की वो और कामातुर होती अलका बीएड से उठ के वाशरूम चली जाती है जहां टॉयलेट सीट पे बैठते hi उसकी छूट अपने कामर्स के साथ गरम गरम पेशाब की धार बहाने लगती है….

अलका- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh आज तो मूतने में भी मजा आ रहा hai……aur वो वही अपनी छूट मसल मसल के मूत की धार भने लगती है मनो किसी संतरे का रास निचोड़ रही ho…aur उन्ही ऊँगली करते करते अलका की छूट बाथरूम में hi अपना काम रास बहने लग जाती है..






अब अलका को भी थोड़ा हल्का महसूस होने लगता है और वोन अहा धो के वापस अपने रोजमर्रा के काम में लग जाती है…

सुबह के कैब 11 बज रहे थे और घर में सभी लोग जग चुके थे…

विशाल अपने रूम से बहार हॉल में आता है तभी उसकी नज़र अपनी कामदेवी माँ अलका पे पड़ती hai….Jo इस वक़्त एक टिपिकल इंडियन वीमेन की तरह साड़ी पहने अपने काम में लगी हुई थी..

अलका किचन में ब्रेकफास्ट बना रही थी की तभी विशाल पीछे से अलका से चिपक जाता है और धीरे से अपने होंठ अलका के गार्डन पे रख देता है…






अलका- hhhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है अशोक घर पे hi है

विशाल- वो बहार गार्डन में पेपर पढ़ रहे है…

अलका- हाँ तो कभी भी आ सकता है तेरा बाप…

विशाल- (अलका को यूँही अपने बहो में जकड़े हुवे कहता hai…)mom

अलका- hmmmmmmmmmm

विशाल- अगर तेरा पति घर पे ध्यान दे तो उसे सबसे बड़ी मसालेदार खबर तो घर में hi मिल जाएगी और ये कहते हुवे अलका के चुचिओ को मसल देता है….

अलका हस्ते हुवे चिहुँक उठती है – चोर मुझे क्या कर रहा है वर्ण अभी तेरे बाप को बता दूंगी उसका बीटा उसकी पत्नी को छेद रहा है…

ये सहरारती बाटे करते हुवे और अलका से चिपकने से विशाल का लुंड खड़ा हो गया था जो सिद्ध अलका के गांड के सुराख़ को भेद रहा था जिस से अलका भी अनजान नहीं थी और उसकी भी सांसे चढ़ने लगी थी….






विशाल अब अपना लुंड मनो अलका की गांड में साड़ी के ऊपर से hi घुसा देना छह रहा था अलका भी प्लेटफार्म पे झुक सी गयी थी मनो अपने गांड या छूट के द्वार को अपने bête के लुंड के लिए खोल देना छह रही थी.. तवे पे राखी रोटी अब जलने लगी थी पर इस बात से बेखबर दोनों माँ बीटा अपने शहरीरक आग को बुझने में लगे हुवे थे विशाल अब अलका के चुचिओ को चोर उसके निप्पल को अपने चुटकिओ से मसल रहा था जिसके वजह से अलका के नीपल्ले बिलकुल तन के खड़ा हो गया था..

अलका भी अपनी गांड को अपने bête विशाल के लुंड पे रगड़ने लगती है… विशाल अब गार्डन को चूमने की जगह अपने होंटो में भर के चूसने लगा tha…aur साड़ी के ऊपर से hi अलका के गांड पे झटके मरना सुरु कर देता है जिस से अलका की दोनों चूचिया बहार की पानी भरे गुब्बारे की तरह थिरकने लगती है...






अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh विशाल रुक जा bête तेरा बाप घर पे hi है

विशाल- होने दो माँ क्यों दर रही हो

अलका- अशोक ने देख लिया तो क़यामत आ जायेगा चोर दे

विशाल- कोई क़यामत नहीं आएगा बल्कि वो भी तुझे छोड़ने आ जायेंगे… एक साथ दो दो लुंड का जुगाड़ हो जायेगा तेरे लिए……

ये बात विशाल ने कामाग्नि में जलते हुवे अनायास hi बोलता है पर उसके इन शब्दों ने अलका के कानो में घुलते hi उसके शरीर में उत्तेजना की लहार दौड़ गयी हो और जिसका असर उसके छूट पे पड़ता है और वो पसीजने लगती है… उसकी पंतय उसके छूट से बहते कामर्स को रोक पाने में सक्षम नहीं हो पति है और उसके छूट से निकला उसका मदनरास उसके जांघो में फैलने लगता hai…..ye सरे हमले काम थे क्या जो विशाल अपनी जीभ निकल के अलका के गार्डन उसके कान उसकी पीठ को चाटने लगता है…

अलका के ऊपर होता ये एक के बाद एक हमला अलका से बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो रहा था वो एक डैम से पलट जाती है और विशाल के होंटो पे अपने होंठ रख देती है और फिर दोनों hi एक दूजे के मुँह में खो जाते है मनो जन्मो के प्यासे को पानी मिल गया हो उनका एक दूसरे को चूमना इतना इंटेंस हो गया था की उसकी आवाज़ डाइनिंग हॉल तक जाने लगती है पर दोनों को इस बात की न कोई खबर थीं ा परवाह आखिर दोनों वसन की आग में जो जल रहे थे…..






विशाल अपनी माँ अलका के होंठो को चूमते हुवे उसके मखमली छूट को मसलने लगता है…

अलका को तो मनो किसी हाई वोल्टेज तार ने छू लिया हो ऐसे चटपटा उठती है विशाल अपनी माँ की इस तड़प को देख उसे और ज्यादा भड़काना कह रहा था और वो तेज़ी से अपनी ऊँगली अपने माँ के छूट के अंदर बहार करने लगता है वो जब जब उंगलिया अलका की छूट पे फेरता अलका उतनी hi बार तड़प उठती थी






अलका के बढ़ते इस तड़प को अब विशाल की उंगलिया नहीं उसका लुंड hi शांत कर सकता था और इसी वजह से अलका का हाथ भी विशाल के लोअर के अंदर घुस जाता है और अलका भी अपने हाथो से विशाल के लुंड को मुठियाने लगती है… किचन में जल रही एलपीजी गैस के आग से ज्यादा आग इन माँ bête में भरा था और तवे से ज्यादा गरम तो अलका हो गयी थी और रोटी से ज्यादा अलका की छूट फूल गयी thi….vishal भी मनो अलका के चुचिओ को आज उखड hi डालेगा कुछ इस तरह से हैवानियत दिखा रहा था सायद उसकी वजह उसके बाप की मौजूदगी थी जो उसे ज्यादा जानवर बना रहा था…





खैर जो भी हो इस वक़्त दोनों माँ bête अगर अलग न हुवे तो ये किचन में hi एक दूसरे को नंगा कर के चुदाई का खेल सुरु कर देंगे और नंगा क्या करना अलका का पल्लू तो बहुत पहले hi उसके चटीओ से सरक के निचे जमीन पे बिखरा था और विशाल का उसकी चुचिओ के साथ कर रहे खेलवाड़ के वजह से उसके ब्लाउज का हुक तो कब का खुल चुक्का था… बस उसकी दोनों रास से भरी चुचिओ को उसे ब्रा ने क़ैद कर रखा था जो किसी बह पल आज़ाद हो सकता था….





विशाल अब अलका के होंटो को चोर जमीन पे बैठ उसके चर्बीदार मगर सपाट पेट को मसलने लगता है और अपने होंठ उसके पेट पे रगड़ने लगता है

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh vvvvviiiiiiiiiiiiihhhhhhhhhhhhssssssssssuuuuuuuu मत कर

विशाल अलका को अनसुना कर अपनी जीभ को अपने माँ के नबी जो की अपने आप क ीक कुवां या छोटी छूट कह सकते है था में घुसा देता है..

अलका विशाल के बालो को पकड़ अपने पेट में उसका सर दबाने लगती है… विशाल यह ज्यादा समय न गवाते हुवे अपना मुँह साड़ी के अंदर घुसा देता है… उसके गरम सांसे अलका के जांघो से टकराने लगती hai….vishal की नज़र अलका के जांघो पे चमकती उसके छूट से निकली कामर्स पे पड़ती हैजिसे देख वो अपनी जीभ को अलका के जांघ पे फेरने लगता है और उस रास को पीना सुरु कर देता है… विशाल की ये साडी हरकते अलका को पागल कर रही थी वो इतना जायदा बहक जाती है की विशाल का सर पकड़ के अपने छूट पे लगा देती है






और अपनी एक तंग को उठा के उसके कंधे पे डेट है… किचन का ये नज़ारा बहुत hi कामुक था…

विशाल- तेरी पंतय तो पूरी भीग चुकी है मेरी जान






अलका- कुछ मत बोल अभी …..मुँह नहीं जुबान चला और इतना कह के उसके सर को दुबारा अपने छूट पे तो भिड़ा देती hi है साथ hi अपने छूट को उसके मुँह पे रगड़ने लग जाती है…. विशाल भी अपने दांतो से अलका के छूट के दानो को खींचने लगता hai…aur ये हमला अलका के छूट की धार को जो रोक रखा था उसे बहाने के लिए काफी था..

अलका का बदन अकड़ने लगता है वो अपने बेटे विशाल के मुँह पे एक बार फिर से झरने को तैयार थी की तभी बहार से अश्क के अंदर आने की आहात आती है






अशोक- अलका ब्रेकफास्ट तैयार हो गया क्या?

तभी अलका और विशाल दोनों का ध्यान अशोक के आवाज़ से टूट जाता है और अलका जल्दी जल्दी विशाल को अपने से अलग करने लगती है… विशाल जो इस वक़्त अलका के साड़ी में घुसा हुआ था ो निकलते हुवे अलका की गिल्ली चड्डी उतर देता है अलका रोकने की कोशिश तो करती है पर ये इतना अचानक होता है की वो रोक नहीं पति और अपनी टंगे उठा के अपने bête के हाथो में अपनी गीली कच्ची दे देती है…






आज पहली बार अलका को अशोक के आने की कोई खुसी नहीं हो रही थी क्यूंकि ये दूसरी बार था जब अलका के साथ कलपद हुआ था अगर सिर्फ 2 मिनट और वो गार्डन में बिता लेता तो अलका अपने छूट का रसा बहा देती लेकिन ठीक मोके पे hi आ के उसने फिर से सारा खेल ख़राब कर दिया…

विशाल अपनी माँ की गीली कच्ची ले के अपने रूम में चला जाता है और उसे सूंघते हुवे मुठ मरना सुरु कर देता है….

इधर अलका भी अपने बिखरे कपडे और बिखरे हालत को समेटने लगती है. उसकी उखड़ती सांसो पे काबू करते हुवे जब उसकी नज़र खुद पे पड़ती है तो अपने आप को काफी अस्त व्यस्त पति है वो वापस से अपनी साड़ी बांधने लगती है अपने ब्लाउज जिसे उसके bête ने पूरा खोल दिया था उसके हुक लगाने लगती है… और पल्लू से अपनी छाती को धक् लेती है.. उसे देख के अब कोई भी बता नहीं सकता था की अभी थोड़ी देर पहले यही औरत अपने bête के बहो में ऑलमोस्ट नंगी थी और उस से अपनी छूट चटवा रही थी

अशोक- बेबी बर्फ रेडी हो गया क्या?

अलका- हाँ जणू बस आप टेबल पे बैठो मई लगाती हो

अशोक- ठीक है तुम बर्फ लगाओ तब तक मैं विशाल को भी बुला लेता हु

अलका जानती थी थी की विशाल उसकी गीली पंतय ले के गया है तो जरूर कुछ कर hi रहा होगा ऐसे में अशोक का उसके कमरे में जाना ठीक नहीं है इसलिए वो बोल पड़ती है..

अलका- ोफ़ू अशोक आप बैठो मैं उसे बुला लती हु

अशोक भी अपनी बीवी की बात मानते हुवे डाइनिंग में बैठ नाश्ते का वेट करने लगता है और अलका विशाल को आवाज़ लगते हुवे उसके रूम की और जाने लगती है.. कमरे में जाते hi उसकी नज़र विशाल पे पड़ती है जहां वो अपनी माँ की कच्ची को अपने जुबान से छत्ते हुवे मुठ मार रहा था..






ऐसे में अलका को सामने पा कर वाओ आपस उसपे टूट पड़ता है पर इस बार बार अलका खुद को संभालते हुवे उसे बर्फ के लिए आने का बोल के निकला पड़ती है…

विशाल भी मोके की नज़ाकत को देखते हुवे नाश्ता करने हॉल में पहुंच जाता है…

नाश्ते के बाद अशोक का तो कोई प्लान नहीं था इसलिए अलका घर पे रुक के करती भी क्या तो वो अपने ओफ्फ्स चली जाती है और विशाल कलगे…

दोनों माँ bête का अशोक के घर पे रहना बहुत hi ज्यादा खाल रहा था पर बेचारे कुछ कर भी तो यही सकते थे… देखते देखते शाम हो जाती है और एक बार फिर से पूरी फॅमिली वापस से घर में इकठा हो जाते है..

विशाल- माँ

अलका- हम्म्म बोलो

विशाल- माँ कुछ करो न मेरे से रहा नहीं जा रहा है…

अलका- रहा तो मेरे से भी नहीं जा रहा है bête पर क्या करे तेरा बाप है अउ ये घर भी उसी का है

विशाल- माँ पर कुछ तो करो आपने मुझे मेरा गिफ्ट भी नहीं दिया ये बात विशाल अपने लुंड को मसलते हुवे अलका कैग एंड पे हाथ रख के कहता है..

अलका- परेशां क्यों हो रहा है तेरा गिफ्ट है तुझे hi मिलेगा …

विशाल- आज रात कुछ करो न

अलका- कैसे करू विशु तेरा जल्दी होता नहीं है और इतने देर गायब रही वो भी रात में तो तेरा बाप ढूंढ़ने लग जायेगा…

विशाल- आपका तो ठीक है आपको आपका पति मिल जायेगा पर मेरा सोचो

अलका- अब तो तू hi मेरा असली पति है मेरे छूट का मालिक

विशाल- माँ पापा और आपका सेक्स होता है?

अलका- हाँ और आज इतने दिनों बाद आया है तो वो भी मुझे नहीं छोड़ेगा

विशाल- माँ एक बात बोलू…

अलका- हम बोलो

विशाल- मैं देखना चाहता हु आपकी चुदाई….

अलका- व्हाट? तुम पागल हो गए हो क्या?

विशाल- प्लस न माँ

अलका- no वे

विशाल- माँ इसे देखो क्या आपको नहीं लगता अगर आपकी छूट नहीं तो चुदाई तो देखने को मिलनी चाइये ये बात विशाल ने अपने लुंड की तरफ इशारा करते हुवे कहा था

अलका- no विशु ये बहुत ावरक्वर्ड है तुम्हारे सामने मैं किसी से छोडूंगी और तुम देखोगे चीई

विशाल- किसी से खा डैड से चुड़ोगे न आप तो

अलका- फिर भी तुम्हारी ये फंतासी बहुत वीयर्ड है प्लस don’t आस्क में तो दो तहत

विशाल- ok फिर आज आपको मेरे कमरे में आना होगा अनीहौ बाकि मुझे नहीं पता

अलका- ये क्या बचकानी हरकत है तुम्हे पता है ये पॉसिबल नहीं है..

विशाल- क्यों आपको नहीं लगता आपको ऑडियंस मिल जाएगी तो आपके चुदाई के मजे को दोगुनी हो जाएगी

Alka-tu क्या क्या करवाएगा मेरे से कह के अपना सर पकड़ लेती है…

विशाल- अलका को थोड़ा और फाॅर्स करते हुवे मैंने लगता है…

अलका- ठीक है देखती हु तू उदास वाला चेहरा मत बना…. अब चल डिनर कर ले तेरा बाप वेट कर रहा है..

विशाल- किसकी?

अलका- ोवस्ली डिनर की और किसकी

Vishal-kon से वाले डिनर की

अलका अपने bête की डबल मीनिंग बात को समझते हुवे बड़े अदाओ से उसे बीएड पे धकेल के अपना एक पेअर उठा के उसके बीएड पे रख देती है… जिस से उसकी चिकनी गोरी जंघे कमरे की रौशनी में और ज्यादा चमकते हुवे विशाल को मनो ललचाने लगती है…






अलका- अब बता तू कौनसा डिनर

विशाल- uuuuuuffffffffffff मत कर वर्ण तेरा पति वेट करता रह जायेगा मैं उसकी बीवी क भोग लगाने लग जाउगा….

और विशाल अलका को दबोचने को आगे बढ़ता है पर अलका वह से भाग कड़ी होती है… विशाल पीछे से ेख्ता है तेरी गांड की लचक हयईईईई

और अलका शरमाते हुवे कहती है आजा मर ले फाड् दे अपने माँ की गांड और इतना कहते hi अपने गांड के उभर कुछ ज्यादा hi निकल के विशाल को उत्तेजित का देती है और फिर वहां से बहा चली जाती है…






घर के तीनो सदस्य डिनर कर चुके थे और सभी अपने अपने रूम की और चल चुके the..jhan अशोक आज बहुत टाइम बाद अलका की लेने वाला था तो वही अलका के दिलो की धड़कन इस बात से बढ़ी हुई थी की आज उसके चुदाई को देखने के लिए एक ऑडियंस उसके कमरे के बहार खड़ा हो के उसकी कड़ाई देखने वाला था… और वो ऑडियंस कोई और नहीं उसका अपना सागा बीटा था… वो बीटा जो कई बात अपनी माँ की प्यास बुझाया था पर आज वो अपनी माँ को किसी और से चुड़ते देखने वाला था…

वो ये देखने वाला था की उसकी माँ नंगी किसी की बहो में कैसी लगती है… किसी लुंड अपने छूट इ उतारते हुवे उसके चेहरे का भाव क्या होता है…

कैसे वो किसी और का लुंड अपने गले में उतारेगी अणि चुचिओ को masalwayegi…aur उटजन में और क्या क्या कर गुजरगी वो सब आज उसक बीटा देखने वाला था….


और कुछ यही हालत इधर विशाल की भी थी.. वो अपनी माँ को छोड़ा तो बहुत बार था पर किसी दूसरे से चुड़ते हुवे नहीं देखा था जो की आज वो देखने वाला tha…ye जो नज़ारा उसके सामने आने वाला था ये विशाल को चुदाई से भी ज्यादा रोमांचित कर रहा था……
 
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