Incest Kamuk Alka - Page 2 - SexBaba
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Incest Kamuk Alka

टीज़र फ्रॉम फ्यूचर जहां दोनों भाई मिलके अपनी माँ अलका को पेलेंगे



 
Part-9

अलका अपने कमरे में सोई हुई थी की तभी मोब की घंटी ने उसकी नींद तोड़ दी स्क्रीन पे देखा था उसकी बहन सारिका का नंबर फ़्लैश हो रहा था..






उसने फोन पिक किया और अपनी बहन सरिता से बात की उसकी बहन ने उसे बर्थडे विश किया और हाल चल जान के कॉल डिसकनेक्ट हो गयी.

खिड़की से बहार देखा तो पाया की शाम हो चुकी थी अलका अपने नींद से जागती है और एक अंगड़ाई के साथ बीएड से उठने लगती है...






एक अंगड़ाई के साथ अलका जागती है और फ्रेश होने के लिए वाशरूम चली जाती है... थोड़ी देर में फ्रेश होने के बाद वो किचन में अपने लिए कॉफ़ी बनाने चली जाती है और बालकनी में खड़ी हो के अपना कॉफ़ी पिने लगती है एंड सोसाइटी के बचे जो खेल रहे थे उन्हें देखते हुवे अपना शाम बिता रही थी.. वैसे तो आज अलका का बर्थडे था और उसका बहार का प्लान भी था लेकिन उसके जाग रहे भावनाओ के वजह से उसे कही बहार जाना ठीक नहीं लगा...

घंटा भर समय बिताने के बाद अपने कमरे में चली जाती है..

उसने टाइम पास करने के लिए बुक पढ़ना सही समझा और एक बुक निकलती है पढ़ने के लिए

और बीएड के एक कार्नर पे जमीं पे बैठ के बुक खोल के पढ़ना शुरू कर देती है...








कमरे हलकी लाइट जल रही थी जिसमे अलका का जिस्म एक अलग hi शाइन मार रहा था उसकी बैकलेस ब्लाउज में उसकी पीठ... हलकी चर्बीदार कमर और बिलकुल लोवेस्ट से बंधी साड़ी ..

उसे बहुत ज्यादा कामुक बना रही थी..

इधर अलका जिस किताब को पढ़ रही थी उसमे स्टोरी ये था की इसमें एक कपल अपने जीवन में किसी तीसरे व्यक्ति को शामिल करने की फंतासी करता है और इसी के आर्डर गिर्द कहानी घूमती है...

अलका को ये स्टोरी अपनी कहानी लगने लगती है वो तीसरा इंसान उसे विशाल और हेरोइन में वो खुद को देखने लगती है... स्टोरी काफी इरोटिक थी और इंटिमेट सीन्स भी थे और इन्ही सब से इन्फ्लुएंस हो के अलका अंदर की आग फर से बहड़कने लगती है अब उसे बुक में क्या लिखा है कुछ दिखाई या समझ नहीं आ रहा था लिखा चाहे जो व् हो उसके पढ़ने में आआअह्ह्ह्ह मममममियययय मई आपको छोड़ना चाहता हु आपके छूट का पानी पीना पीना चाहता हु अपने इस लुंड से आपके छूट की आग ठंडा करना चाहता हु

अलका- हाँ तो छोड़ न रोका किसने है मई भी तो कब से यही चाहती हु मेरे बेटे विशाल

आआआअह्हह्ह्ह्हह ममममममअअअअ विशाललललल फस्द दे अपनी माँ की छूट पिजा इसके पानी को..

उसके दिमाग में यही लाइन्स चलने lagi....koi फोटो आता तो उसे विशाल और खुद के चुदाई के सन याद आने लग जाते थे...

अलका के ऊपर एक बार फिर से वासना का खुमार चढ़ने लगा था... उसके जिस्म की तपिश बढ़ने लगी थी वो इतनी गरम हो गयी की उसे अपने जिस्म पे एक डोलोर वाली ब्लाउज भी हैवी लगने लगी थी जिस से तंग आ कर उसने वो डोर hi खींच दी और डोर के खुलते hi उसके भरी भरकम लेकिन कठोर चूचिया एक डैम से बहार आ धमकती है








और ऐसे नंगी hi किताब पढ़ना सुरु कर देती है किताब क्या पढ़ती है बस पैन पलट रही होती है क्यों उसके दिमाग में तो कोई और हो कहानी सुरु हो गयी थी...

उसके आग में जैसे उसके कुछ करने या सोचने की साडी शक्ति जैसे ख़तम कर दी हो..

धीरे धीरे वो साड़ी भी उतर फेंकती है.










और बिलकुल नंगी घुटनो के बल बैठ क अपने hi ख्यालो में खो सी जाती है...





जनुअरी के ठण्ड जो अचे ाचो की हड्डी पिघला दे उस ठण्ड से मनो अलका की जुंग सुरु हो गयी हो...

उसके बदन की तपिश कह रही हो होगा तू जनुअरी का महीना मरते होंगे लोग तेरे ठण्ड से लेकिन मई अलका हु.. और मेरे जिस्म की आग के आगे तेरी कोई औकात nahi...aur उसके जलती जिस्म के आग का सोर्स था उसकी छूट....

अलका को बेचैनी थोड़ी ज्यादा होने लगती है उसके छूट का जैसे किसी ने नल खोल दिया हो जो की रुकने का नाम hi नहीं ले रही thi....uski रोंगटे भी खड़े हो गए थे और निप्पल्स भी






flip a coin in browser

वो वैसे hi नंगी अपने बीएड पे लेट जाती है और कल से अब तक के सरे घटनाओ को याद करते हुवे मस्त हो रही होती है...





उसके दिल और दिमाग या यूँ कहे दिल दिमाग और छूट के बिच कोई जुंग चूड़ी हुई थी.. जिसमे उसे सही और गलत ले बिच एक चुनाव करना था...

सही चुनने का मतलब उसे इसी तरह तड़पना और ऊँगली करना था और गलत का मतलब बगल के कमरे में जाना और अपनी प्यास बुझाने के इंतजाम करना...

वैसे जब वासना सवार हो तो सही सिर्फ एक hi चीज लगता है वो है छूट में लुंड चला जाये बस..

अलका अपने मन में सोचते हुवे पर कैसे अप्प्रोच करू विशाल को वो मेरा बीटा है कही वो बुरा मन गया तो क्या सोचेगा मेरे बारे में की उसकी माँ अपने hi बेटे से छोड़ना छह रही है अपने hi बेटे का लुंड निगलना छह रही है ये गलत नहीं होगा

तभी उसे दूसरे ख्याल भी आता है और वो ये था की कैसे विशाल केक मलने क्र बहाने अलका के चुचिओ को मॉल देता है...

कैसे अपनी माँ को चुप चुप के वाशरूम में नंगी देखता है

और तो और आज जब अलका सोई थी तब उसे देख के मुठ भी मारा था जिसका साबुत दरवाजे पे गिरा उसका पानी है जो साफ़ न करने की वजह से वह दाग पद गया है...

इन सरे उधेड़ बन में अलका का हाथ फिर से अपने छूट पे चला जाता है










और अपने छूट से बहते रास को चाटने लग जाती है ये महक ये टास्ते जैसे एक कैटेलिस्ट का काम करता है और अलका और ज्यादा उत्तेजित हो जाती है इतना की वो अपने सिरहाने रखे तकिये को उठा के अपने दोनों जांघो के बिच बानी पतली गुलाबी लकीर जो की कल रात से hi उसे परेशां कर रही थी के बिच दबा देती है और उस्ले ऊपर अपनी गांड आगे पीछे करते हुवे अपने छूट को रगड़ना सुरु कर देती है





हवस इंसान को कितना पागल बना देती है न ये हवस hi तो है जिसमे सबसे शर्मीला इंसान भी अपनी साडी शर्म हाय भूल क अपने आग को शांत करने के अलग अलग इंतेज़ाम करने लगता है...

अलका का भी वही हाल था इन सब से तंग आ के वो बीएड से उठ के अपने घर के बने बार में चली जाती है और इनसब के बिच उसने अपने बदन को ढकने कोई कोई जरुरत नहीं समझी वो बिलकुल नंगी छूट का रास बहते हुवे अपने कोमल मुलायम गांड मटकते हुवे बार में अपने लिए एक पेग बनती है










और बोतल साथ hi ले के अपने रूम में आ जाती है..

उसे इस बात का जरा भी दर नहीं था की विशाल देख लेगा तो क्या होगा....?

और होना भी क्या था ये तो वैसे भी विशाल के निचे कब से आने को तरस रही है देख लेता तो ाचा hi होता...

वो पहला पेग लगा के और मस्त हो जाती है






वासना के नशे से तंग आ कर उसने शराब का सहारा लिया पर शराब तो िंचीजो को और भड़काने का काम करती है ये इस पगली को कौन समझाए...

अपने दोनों नंगे मखमली जांघो के बिच बोतल रख के उस से बाटे करने लगती है काश तू बोतल नहीं मेरे बेटे का लुंड होती तो मई अभी तुझे पूरा का पूरा खा जाती..






काश उसे और उसके लोडे को भी लाना इतना hi आसान होता जितना की ये बोतल...

नशे में आ के वो अपने hi बेटे को गली देने लग जाती है वो मादरचोद हिम्मत क्यों नहीं दिखता कैसा हिजड़ा बीटा पैदा किया है मेरे इस छूट ने .... जो इतने मौके के बाद भी बस पोर्न में लगा रहता है.. और मेरी ये छूट है की उसके लिए अपना पानी बहाने से बाज नहीं आ रही है.. क्या वो रंडिया मेरे से ज्यादा कामुक है....?

ये बात नशे में सही पर अलका के ईगो में लग गयी... वो औरत जिसे देख के पूरा सोसाइटी अपना लुंड मसलता है पूरा ऑफिस चाहता है की कब वो मुझे अपने निचे ले ..

यह तक की मरी कई रिश्तेदार जो मुझे छोड़ने की फ़िराक़ में रहते है और मैं उन्हें घास नहीं डालती चुने देना तो दूर की बात है

और यह मेरा बीटा साला डरपोक इतने िश्रो के बाद भी खुद से अपना लुंड मसल रहा है टीवी के रंडियो को देखते हुवे...

इसके बस की बात नहीं तो मुझे hi कुछ करना होगा और अलका एक और पेग लगाने की सोचती है फर ख्याल आता है नहीं थोड़ा होश में रहना सही रहेगा ताकि कुछ बिगड़े तो संभाला जा सके... वो बोतल साइड रखती है

और वाशरूम में नंगे hi फ्रेश होने चली जाती है फर्श होने के बाद वो अपनी साड़ी और कपड़े पहनना सुरु कर देती है..








वो अपने पेटीकोट को इतने निचे बांधती है की जरा सा सरके तो उसकी छूट दिख जाये

गोरा चमकीला मादक बदन उसके ऊपर इस तरह कपड़ो को पहनना किसी पे हमला करने से काम नहीं था

वो अपनी लाल साड़ी पहन के विशाल के ऊपर बिजली गिराने के लिए बिलकुल तैयार हो के खुद को एक बार आईने में देखती है






इस दौरान भी वो अपनी गांड को थोड़ा बहार निकल के उसपे हाथ फेरने लगती है और एक कातिल मुस्कान के साथ अपने कमरे से विशाल के कमरे की और चल देती है...

जहां विशाल अभी अपने लैपटॉप में कुछ कर रहा था...

अलका- विशाल क्या कर रहे हो

विशाल- कुछ खास नहीं माँ बस गेम्स खेल रहा हु..

अलका क्यों आज कोई मूवीज नहीं देख रहे...

विशाल- रात की बात से झेपते हुवे no माँ

अलका- ठीक है तुम अपना काम करो मैं चलती हु...

विशाल- क्यों माँ बैठो न कोई अछि सी मूवी देखते है दोनों साथ में वैसे भी आज आपका बड़े है तो हाउस पार्टी टाइप हो जायेगा..

अलका- ok नॉट ा बाद idea...to क्यों न हम हॉल में चले

विशाल- सूरे माँ

अलका- कोई अछि सी मूवी लगाना कही तुम जो अकेले में देखते हो वो सब न दिखा देना अपनी माँ को और सिले करते हुवे आँख मार देती है

विशाल शरमाते हुवे- क्या माँ आप भी...

और उसकी माँ अलका उसे अपना नंगा पीठ दिखते हुवे कमरे से बहार चली जाती है..

विशाल इस वक़्त कोई काम नहीं कर रहा था बल्कि सेक्स स्टोरी पढ़ रहा था क्यों जो हालत अलका की थी विशाल की भी शामे hi थी...

विशाल को लगने लगता है इस बहाने माँ के और करीब आया जा सकता है इसलिए वो की रोमांटिक मूवी के बारे में सोचता है प्ले करने को....

विशाल अपना लैपटॉप बंद कर के हॉल में आता है जहां उसकी माँ अलका शेल्फ से शराब की बोतल उतर रही थी... साइड में एक धीमी रौशनी में लैंप जल रहा था जिसकी रौशनी अलका के नंगे पीठ पे पड़ने से अलका की पीठ कुछ ज्यादा भड़काऊ लग रही थी






अलका के इस रूप को देख के विशाल का मुँह खुला का खुला रह गया.. विशाल की आवाज़ सुनते hi अलका जैसे पलटी

विशाल को उसके चूचियों के बिच गहरी घाटी दिखने लगती है जो अलका के द्वारा छोरा गया पहला तीर था और तीर भी सही निशाने पे लगा

जिसे देख विशाल के मुँह से अनायास hi निकल पड़ता है- हॉट

अलका- क्या खा तुमने....?

विशाल- कुछ नहीं माँ आज आपका बड़े है तो कैन ी ज्वाइन ु फॉर ा ड्रिंक

अलका - ok बूत जस्ट 1 पेग और मई व् बस ये पहली और आखरी पी रही हु माहौल एन्जॉय करने के लिए ...

विशाल भी अपनी माँ से एक ड्रिंक लेता है और गिलास ले क टीवी की तरफ चल पड़ता है...

अलका- कौनसी मूवी लगा रहे हो...?

विशाल - माँ भोत साडी मूवी है पेण्ड्रीवे में हम इसे सौरोत कर लेंगे

अलका- ok

विशाल पेण्ड्रीवे लगता है जिसमे सर्फ एक सिंगल मूवी थे और वो मूवी थी फिफ्टी शेड्स ऑफ़ ग्रे...

अलका- तुमने तो कहा इसमें भोत साडी मूवीज है पर इसमें तो सिर्फ यही फिल्म है

विशाल- मूवीज तो थी माँ बूत सायद देल हो गयी...

अलका - फिर अब क्या करे....?

विशाल- अगर आप चाहो तो हम ये भी देख सकते है...

अलका भी तो यही चाहती थी फर भी ऊपरी मन से कहती है no वे थस इस एडल्ट मूवी एंड ी ऍम योर माँ हम साथ में ये नहीं देख सकते...

विशाल भी नाटक करते हुवे कहता है - ok फर दो मिंट दो मई जल्दी से कोई और डाउनलोड कर के आता हु और भाग क अपने रूम में चला जाता हु बिना अलका के जवाब सुने..

अलका को लगने लगता है कही इस माँ बेटे के ड्रामे में आज फर से मेरी छूट प्यासी न रह जाये... फॉर अब जो उसने बोल दिया तो थोड़ा वेट तो करना पड़ेगा ..

इधर विशाल भी काफी होशयार था वो झूट मूत का टाइम पास करने लगा जिसमे कोई 10-15 मिनट निकल गए बूत मूवी उसने अभी तक कोई धुंडी भी नहीं बस ढूंढ़ने का नाटक कर रहा था...

विशाल- माँ नेट भी स्लो है इसलिए टाइम लग रहा है...

कोई आधा घंटा बिट जाने के बाद अलका कहती है ok तुम फिर कभी डाउनलोड कर लेना आज के लिए लगता है यही देखना पड़ेगा लगाओ पेण्ड्रीवे टीवी में ...

यह विशाल की चाल कामयाब हो जाता है और वो पेण्ड्रीवे टीवी में लगाने को चल देता है तभी अलका डबल मीनिंग में उस से कहती है

अलका- देखना सही छेद में जाये कही गलत छेद में मत दाल देना

विशाल- के ों माँ छेद का मुझे पता है खा डालना है

अलका- वो तो पता लग जायेगा....

विशाल- क्या माँ..?

अलका- कुछ दाल गया पेण्ड्रीवे सही छेद में

विशाल - यस माँ

और मूवी शुरू हो जाती है जिसमे एक सन आता है जब हेरोइन को हीरो अपने ऑफिस के लिफ्ट में एक जबरदस्ती किश कर लेता है एक डैम वाइल्ड...

जिसे देख के माँ बेटे दोनों की नजरे एक दूसरे से मिल जाती है.... विशाल जिसका लुंड उसके पेंट में हिचकोले मरने लगा था उसने सोफे से एक पिलो लिया और अपने गॉड में रख लिया..

इधर अलका के छूट के डेन भी फड़कने लगे और उसके पेअर आपस में रगड़ने लगे...

दोनों माँ बेटे मूवी एन्जॉय कर रहे थे

फिर उसमे एक सन आता है जिसमे हीरो पहली बार हेरोइन के कपडे उतरता है पहले जीन्स फॉर टॉप उसके बाद उसकी ब्रा और उसके पुरे जिसमे को चूमने लगता है

उसके होंठ उसकी कमर उसके बूब्स लिप्स और पंतय के ऊपर से उसकी छूट और फिर उसकी पंतय उतर देता है और अपना खड़ा लुंड उसकी छूट में दाल देता है छूट में लुंड डालते hi हेरोइन के साथ साथ अलका के मुँह से भी एक आह निकल जाती है वो भी अपने बेटे के नाम की...

अलका- आअह्ह्ह विष्ष्ठालललल

विशाल जब अपनी माँ की तरफ देखता है तो पता है की उसकी माँ तंग ले ऊपर तंग रख के अपनी जांघो से अपने छूट मसल रही है उसके नजरो में वासना के डोरे साफ़ झलक रहे थे जो की विशाल के लिए एक न्योता था देरी थी तो विशाल के समझने की और उसे एक्सेप्ट करने की ..

विशाल- कुछ खा माँ

अलका को तो जैसे चोरी पकड़ी गयी हो उसकी सांसे पहले से hi चढ़ी हुई थी चूचिया ऊपर निचे हो रही थी फर भी उखड़ते हुवे सांसो पे काबू करते हुवे उसने खा

अलका- नहीं तो

विशाल - मुझे लगा आपने मेरा नाम लिया..

अलका- तुझे खड़ा हो लगता है

और दोनों फिर से मूवी देखने में व्यस्त हो gaye...aur अलका ने भी रहत की साँस ली..

थोड़ी देर बाद एक सन आता है जिसमे हीरो हेरोइन को टाई से बांध देता है और अपने मुँह में आइस ले के हेरोइन के पुरे बदन पे रगड़ता है जिस से हेरोइन काफी उत्तेजित हो के मोअन करने लगती है और हेरोइन की हालत देख के अलका की भी सिसकी निकल जाती है

अलका से अब बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो रहा था उसका हाथ खुद पे खुद अपनी छूट पे चला गया और वो उसे मसलने लगी....

टीवी पे इंटिमेट सीन्स थोड़ा वाइल्ड होने से हेरोइन की आवाज़ थोड़ा लाउड हो गया था अलका जो खुद को मजे देने में थोड़ी देर के लिए खो गयी थी इस आवाज़ से जाग सी गयी और जब उस की नजर विशाल पे गयी तो देखा की विशाल का लुंड शॉर्ट्स से बहार है और वो उसे मसल रहा है तकिये को आड़ में..

अलका- विशाल

विशाल- डरते ये ये यस

अलका- बीटा वो लैंप ऑफ कर दे थोड़ा डार्क रूम होता तो ज्यादा मजा आता... डार्क रूम तो बहाना था अलका को अपने छूट को सहलाना था....

विशाल जिसका लुंड बिलकुल लोहे की रोड की तरह खड़ा था और इस वक़्त पंत से बहार था बिना किसी सोच के उठा और लैंप बंद करने चला गया...

उसका लम्बा मोटा खीरे जैसा लुंड को देख के अलका के आँखों में चमक सी आ गयी..

फिर भी माँ होने के नाते उसने विशाल से खा विशु व्हाट इस थिस अरे और मस्टरबॉटिंग...?

विशाल- सूर्य माँ वो थोड़ा एक्ससिटेमेंट में..

अलका ने उसे डांटा नहीं बस ok बोल के टॉपिक क्लोज कर दिया जिसका एक मतलब ये था की विशाल के मुठ मरने से अलका को कोई प्रोब नहीं थी और होती भी कैसे वो तो खुद इसी लुंड के लिए यह बैठी है मूवी तो जस्ट बहाना है...

विशाल वापस आ के अपने सीट पे बैठ जाता है पर इस बिच न तो वो अपने लुंड को छुपाने की कोशिश करता है न पंत में डालने की उसका लुंड वैसे hi हवा में लहरा रहा था...

सोफे पे बैठ ते हो वो वापस तकिया अपने गॉड में रखने लगता है तभी अलका कहती है...

अलका - अब छुपा के क्या करो करो हिलाओ बे ा में..

विशाल को ये बात चैलेंज सी लगती है और वो अपने शॉर्ट्स पूरा उतर देता है और नंगा hi सोफे पे बैठ जाता है...

अलका अपने मन में इसे एक बार ऑप्शन क्या दिया अपनी माँ के सामने hi नंगा अपने लुंड को शलए जा रहा है... पर कितना मोटा तगड़ा लुंड है मेरे विशु का आज अगर इसका टास्ते नहीं लिया तो ये सारा किया कराया बेकार हो जायेगा जो मई होने नहीं दूंगी...

अलका- विशु तुम्हे शर्म नहीं अपनी माँ के सामने ये सब करते हुवे

विशाल- माँ मूवी इतनी इरोटिक है की मेरे से बर्दाश्त नहीं हुआ फिर आपने तो खा बे ा में. और ये बात विशाल अलका के छाती को देखते हुवे साथ अपने लुंड को हिलाते हुवे बोल रहा था...

स्क्रीन की रौशनी में बेटे को माँ कामुक लग रही थी तो बेटे के लुंड पे लगा प्रेकम की चमक माँ अलका को उसका रही थी मनो कह रही हो आप मुझे चाट लो...

तभी वो सन आया जिसमे हीरो हेरोइन के घोड़ी बना के उसके गांड पे कहते लगता है फिर उसे अलग अलग पोजीशन में छोड़ने लग जाता है..

ये प्रहार अलका के लिए भोत ज्यादा था उस से बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था पर वो समझ नहीं पा रही थी की स्टार्ट कैसे करे जब की विशाल बिंदास अपने लुंड को मसल रहा था...

तभी अलका उठ के जाने लगी.. जिसे देख विशाल कहता है

विशाल- क्या हुआ माँ मूवी अछि नहीं लगी

अलका- कुछ नहीं बेशरम तुम देखो मूवी और एन्जॉय करो.. ये बात अलका ने उसके लुंड की तरफ देखते हुवे कहा था..

विशाल- तो आप भी करो किसने मन किया hai...ya मई कोई हेल्प करू...?

विशाल को ये बात सुन के अलका की धड़कने बढ़ गयी मनो विशाल ने हेल्प करू खा हो पर अलका को सुनाई दिया मई आपका पानी निकल दू ..

अलका एक स्मैल के साथ- no थैंक्स

और इतना कहते हुवे अलका अपनी गांड मटकते हुवे अपने बैडरूम की तरफ जाने लगी...

विशाल- मूवी पॉज कर दू माँ..?

अलका ने पलट के एक समयले की और दरवाजे पे झुक के कुछ गिरा हुआ था जिसे उठाने के लिए अलका झुकती है

और देखते हुवे अलका ने खा ये क्या गिरा है यह विशु...

ये वही पानी था जो सुबह में विशाल ने अलका को देख के उसके दरवाजे पे गिराया था और ये बात दोनों जानते थे की वो क्या चीज है...






अलका उसपे हाथ फेरते हुवे अपनी जुबान से चाट लेती है और ये काम वो विशाल को दिखते हुवे करती है..

एक तो झुकने से अलका की मोती भरी गांड से सम्भलने का मौका मिला नहीं की अपने लोडे से निकले पानी को अपने माँ अलका को यूँ छत्ते हुवे देखना विशाल के लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया था के विशाल की धड़कन बुलेट ट्रैन की तरह दौड़ने लगती है

दोनों माँ बेटे कामातुर एक दूसरे को देखते है और सवाल वही था की शुरुवात कौन करे....

इसी बिच एक कामुक मुस्कान के साथ अलका अपने कमरे में चली जाती है और दरवाजा बंद कर लेती है..

दरवाजा बेशक बंद था पर अंदर जलती लाइट और वार्डरॉब के खुलने बंद होने की आवाज़ इस बात का साबुत था की वो सोई नहीं है

विशाल अगेन - कही मैंने फिर से कोई गलती तो नहीं कर दी... क्या करू कैसे माँ से बात आगे बढ़ाऊ...

उन्हें कैसे बताऊ की मई उन्हें रत भर नंगी करके खूब kas-kas कर छोड़ना चाहता हु,

हाय मेरी मा ालकाआअ कहते हुवे विशाल अपने लोडे को मथने लगता है की तभी दरवाजे के खुलने की आवाज़ आती है...

सामने से साक्षात् कामदेवी अलका चली आ रही थी उसके बाल खुले हुवे थे बॉडी पे सायद कोई स्प्रे मारा था जिसकी खुसबू उसके आने से पुरे हॉल में भर गयी..

स्टाल ओढ़े अलका बड़े लचक के साथ विशाल की तरफ बढ़ने लगती है उसके आँखों में शर्म वासना और उसके गुलाबी होंटो पे फैली उसकी कामुक मुस्कान जिसे विशाल एक तक अलका को घूरे जा रहा था उसकी माँ का ये रूप किसी के भी इमां को डगमगा दे ऐसा था..

अलका वापस आ के सोफे पे बैठ जाती है और पेअर सामने के टेबल पे रख देती है... जिसे देख के विशाल के दिमाग में सवाल दौड़ने लगता है...

माँ तो साड़ी में थी फिर उनका पेअर नुदे क्यों है नाईट ड्रेस में होती तब भी उनका ड्रेस तो दीखता hi बूत माँ के जांघो तक कुछ भी नहीं दिख रहा है सिवाए उनके स्टाल के तो क्या वो नंगी है...?

ये ख्याल आते hi विशाल का दिल जोरो से ढकने लगा मनो उसका कलेजा उसके मुँह को आ जायेगा.. तभी अलका कहती है ऐसे क्या देख रहे हो मूवी सुरु करो..

विशाल- ok माँ और फिल्म सुरु कर देता है

विशाल- नीस फ्रेग्रेन्स माँ

Alka-thank ु

विशाल - पर आपकी बॉडी की फ्रेग्रेन्स इस फ्रेग्रेन्स से ज्यादा अछि है..

अलका- ो रियली अपनी माँ से फ़्लर्ट....?

विशाल- माँ एक बात पुछु...

अलका- पूछो

विशाल- आप तो साड़ी में थी न...

अलका- हाँ तो क्या हुआ...

विशाल- तो अब आप ने क्या पहना है साड़ी तो नहीं दिख रही

अलका- मुझे ठण्ड लग रही थी तो मई अपने लिए स्टाल लेने गयी थी और वही ओढ़ रखा है...

विशाल- और स्टाल के अंदर...?

अलका- क्या मतलब स्टाल के अंदर

विशाल- स्टाल के अंदर क्या पहना है माँ...? ये बात विशाल अपना लुंड हिलाते हिलाते पूछता है और पूछते पूछते अलका के बिलकुल पास चला जाता है जिसे देख अलका की धड़कने भी बढ़ने लगती है

अलका- तुम्हे उस से क्या तुम जाओ और हिलाओ अपना जो हिला रहे हो...

विशाल- क्या तुम स्टाल के अंदर नंगी हो......?

ये बात सुनते hi मनो अलका को तेज़ बिजली का झटका लगा हो...

अलका- शट उप विशाल

विशाल - प्लस माँ दिखाओ न अंदर क्या पहना है...

ये बात सुनते hi अलका ने कोई नाराज़गी दिखाए बिना सोफे से उठती है और अपना स्टाल एक डैम से उतर देती है और सामने जो नज़ारा था उसे हैंडल कर पाना बड़ा hi मुश्किल काम था










विशाल को लगा ये अंदर कोई शार्ट ड्रेस में होगी लेकिन स्टाल के हटने से जो नज़ारा विशाल को दिखा उसकी धड़कने उसके काबू में न रही एक पल को वो अपनी माँ अलका को सायद नंगा भी बर्दाश्त कर लेता लेकिन अलका ने जो लिंगेरी डाली थी वो कुछ अलग hi कामुक बना रही थी उस कामदेवी को ..

अलका- ऐसे क्या देख रहे हो कभी देखा नहीं है क्या मुझे...?

विशाल- no माँ देखा तो है पर इन कपड़ो में नहीं

अलका- ाचा तो अब देख लिया न जाओ तुम भी क्या याद रखोगे...

विशाल और अलका वापस मूवी देखने लगते है पर विशाल का मन अब मूवी में नहीं लग रहा था वो लगातार अलका पे hi नज़रे टिकाये हुवे था क्युकी अब तो अलका ने स्टाल भी सोफे के किसी कोने में फ़ेंक के सिर्फ लिंगेरी में मूवी देख रही थी या यूँ कहो अपने बेटे को अपना जिस्म दिखा रही थी..

अलका- कितना घुरोगे विशु...?

विशाल- माँ यू अरे तू हॉट काश आप मेरी गफ hoti...ye बात सुन के अलका मुस्कुरा देती है...

अलका को भी अब ज्यादा खींचना सही नहीं लगता अगर विशाल का लुंड चखना है तो थोड़ा आगे उसे भी बढ़ना पड़ेगा इसी ख्यालो से वो विशाल के सोफे पे जा क उसके जांघो से अपनी जांघो सत्ता के बैठ जाती है..

अलका- ाचा तो फिर क्या करते...?

विशाल- मई आपसे बहुत प्यार करता दिन रत ..

अलका ब्लश करते हुवे- ाचा ये सब कहने की बाते है...

विशाल- no माँ रियली

अलका- ाचा तुम्हारे पापा तो नहीं कर पते..

विशाल- पर मई कर सकता हु माँ काश कभी मौका मिलता तो बता पता

अलका - उसके लुंड को देखते हुवे कामुक अंदाज़ में कहती है इतना आसान नहीं है विशु...

विशाल- क्या मुश्किल है माँ ये बात कहती हुवे विशाल ने अपना हाथ अलका के जांघो पे रख दिया और धीरे से दबा देता है

अलका के सब्र का बांध भी टूटने लग जाता है उसके मुहे से एक सिसक फुट पड़ती है- आआह्ह्ह्हह

औरत के आग को शांत करना बचो के बस की बात नहीं तुम अभी छोटे हो थोड़े और बड़े हो जाओ...

विशाल- इसे देख के भी आपको लगता है की ये आग नहीं बुझा पायेगा और मई अभी भी छोटा हु...

ये बात विशाल ने अपना लुंड अलका के हाथ में देते हुवे खा था..






अलका के हाथ में विशाल का लुंड आते hi मनो उसकी धड़कने भोत तेज़ हो गयी उसकी चूचिया ऊपर निचे होने लगी उसकी धड़कने बहार तक सुनाई देने लगती है इनसब के बिच अलका अपने बेटे विशाल का लुंड को मुठियाते हुवे उसे किड्स बोल के सामने चली जाती है अलका को लगता है काम तो बन गया बस इसके अंदर के आग को थोड़ा और भड़का दू तो खुद मुझे छोड़ने के लिए मरने लगेगा.

इसलिए वो सामने के सोफे पे बैठते हुवे कहती है तुम लड़को का सही है निकालो और हिला लो

विशाल- तो आप भी कर सकते हो किसने रोका है...

अलका- तुम्हारे सामने??

विशाल- हाँ तो क्या मैं भी आपके सामने hi तो कर रहा हु...

अलका- और किसी को पता लग गया तो क्या सोचेगा???

विशाल- यहां कौन है हम दोनों के अलावा, प्लस माँ करो न मुझे देखना है

अलका- क्या देखना है तुम्हे

vishal-aapke गोर भरे बॉडी को








तभी अलका एक डैम से कड़ी हो जाती है और विशाल को चलेंगे करते हुवे कहती है देखो मुझे अचे से क्या तुम्हे लगता है तुम मेरी आग शांत कर पाओगे....?

विशाल- क्यों नहीं एक मौका तो दो..

अलका- पर तुम तो मुठ मर के खुद को शांत कर रहे हो मेरा आग कैसे शांत कर पाओगे

विशाल- आप भी मारो न मैं देखना चाहता हु...

अलका- तुम अपनी माँ को ऊँगली करते देखना चाहते हो?

विशाल- हाँ माँ प्लस न

अलका- क्या तुम अपनी माँ को नंगा देखना चाहते हो विशु....?

विशाल- यस माँ


अलका क्या तुम
चाहते हो तुम्हारी माँ अपनी ये लिंगरी भी उतर के तुम्हारे सामने बिलकुल नंगी हो jaye(ye सब अलका अपने बातो के जरिये अपने बेटे को उकसा रही थी)









विशाल- यस माँ हो जाओ नंगी....

और फिर अलका पहले अपनी ब्रा उतर के विशाल के चेहरे पे फ़ेंक देती hai..uski ये हरकते काफी जानलेवा थी..

अलका- क्या तुम चाहते हो मैं अपनी ये पंतय भी उतर दू...?

विशाल- यस माँ उतर दो ी वांट तो सी योर पुसी






flip a coin best of 3

और फिर वो अपना पंतय भी उतर देती है विशाल कहने लगता है माँ हाथ तो हटाओ मुझे वो देखना है?

अलका- क्या?

विशाल- योर पुसी

अलका- पुसी नहीं बेटे छूट बोलना सिख...

विशाल- आपकी छूट देखनी है माँ






और अलका अपने दोनों हाथो को हवा में उठाये अपने बेटे को छूट क्या अपने शरीर के हर एक अंग का दर्शन करा देती है

विशाल एक के बाद एक वॉर झेलता जा रहा था

तभी अलका विशाल के सामने वाले सोफे पे बैठ गयी और अपनी दोनों टंगे फैला के अपनी
छूट में ऊँगली डालते हुवे सिसकारने लगती है...





ओह्ह्ह्ह गॉड विशाल तू कितना गन्दा है तूने अपनी माँ को नंगा कर दीया और अब अपनी तरह मुझे भी फिंगरिंग करने पे मजबूर कर दिया.... कैसी आग भड़का दी तूने मेरी छूट में बेटे अब ये कैसे शांत होगा तेरे पापा भी यहां नहीं है (ये बोल कर अलका ने अपना आखरी देव खेल दिया)

विशाल- अपने माँ के करीब जाता है और उसके जांघो पे हाथ रख उसे दबाते हुवे कहता है तो क्या हुआ माँ मैं हूँ न






अलका- तो क्या तू मुझे छोड़ेगा?

विशाल- क्यों नहीं अलका मेरी जान कहते हुवे अपना मुँह अपने माँ के छूट पे रख देता है और चाटने लगता है (विशाल को लगने लगा था की और देर करना सही नहीं होगा इसलिए वो बिना टाइम गवाए अलका के छूट पे हमला कर देता है)

अलका ऊपरी मन से- आह विशाल तू ये क्या कर रहा है ये गलत है मैं माँ हूँ तेरी (भीतर मन से और कर अचे से चाट अपने माँ की छूट को)

विशाल कोई जवाब नहीं देता और अलका के छूट को किसी पिल्लै की तरह छत्ता रहता है..

अलका की कामाग्नि भड़क गयी थी वो विशाल के चेहरे को ज्यादा से जयादा अपने छूट पे दबाने लगती है...






वो अब तक जितना और जो कुछ भी सीखा था वो सारा आर्ट अपनी माँ अलका को दिखा देना चाहता था. वो अलका को हर हल में खुश करने की कोशिश करने लगा





वो अपने जीभ से अलका के छूट के डेन को कुरेद कुरेद कर उसका पानी पिने लगा

विशाल के किये एक एक वॉर के आगे अलका मुमकिन नहीं था... उसके मुँह से तेज सिसकारीय फूटने लगी थी..

aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh visshuuuuuuuuuuuuuuuuuuu मेरेईईईई beteeeeeeeeeee खायआ जाआ अपनी माँ की chut..aisa कहते हुवे






वो तेज तेज अपने बेटे का सर अपने छूट में दबाने lagi..aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh visssssssssssssjhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaakllllllllllll kkhhhhhhhhhhhhhhkhhhhhaaaaaaaaa jjjjjjjjjjaaaaaaaaaaaaaa मममममममीीरररररररररीईई chhhhhhhhhhhhuuuuuuuuuuuuuuuuuttttt को बहुत परेशां कर रही है दो दिन से...







विशाल भी जैसे आज अपनी माँ की छूट में घुस के hi मानेगा कोच इस तरह से अपनी माँ के छूट को चाटने लगता है.. वो जुबान के साथ साथ एक ऊँगली भी अलका के छूट में घुसेड़ देता है जो अलका के लिए बर्दाश्त कर पाना मुश्किल था

अलका- और तेजजजजजजज थोड़द्दाआआआ ऑरररररररर अनाआड़द्दाआआआररररररररर mmmmmmeeeeeeeeeerrrrrrrrrrraaaaaaaaa aaaaaaaaaannnnnnnnnneeeeeeeeeeee वाला है आआह मा






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और एक तेज धार उसके छूट से फुट पड़ती है है मनो उसके छूट में जो बांध थी वो टूट गया हो और पानी की तेज धार सीधा विशाल के ऊपर पड़ने लगता है...

अलका का ओर्गास्म इतना ज्यादा हुआ की विशाल के साथ साथ वो भी पूरा भीग गई...






विशाल अपने माँ के ऊपर आ कर उसे किश करने लगा अलका ने भी जवाब में अपने होंठ विशाल के होंठो पे रख दिए.. दोनों एक दूसरे के साथ एक लम्बे च ुम्बन में खो गए जो सुरु तो पैशनेट हुआ था पर दोनों के अंदर भड़के आग के वजह से उसे वाइल्ड बनाते देर न लगा..

देखते hi देखते वो घडी भी आ गयी थी जिसका दोनों को बड़ी बेसब्री से इंतजार था और खास कर के अलका को...
 
Part-10

दोनों माँ बेटे एक दूसरे के होंठो को ऐसे चूस और चबा रहे थे मनो च्वइंगम चबा रहे हो उन्होंने शुरुवात तो चूमने से की थी पर अलका हवस में इतनी वहसि हो गयी की वो विशाल के होंटो को काटना सुरु कर दिया..

अपने दन्त से पकड़ के किसी रुबूर के तरह खींच देती थी बदले में विशाल उसके साथ वही करता मनो अलका उसे निर्देश दे रही थी और विशाल उन निर्देशों का पालन कर रहा था.. विशाल जब जब अलका के निचे होंटो को अपने दन्त में भर ले खींचता था अलका इतना तेज़ नाख़ून उसके पीठ पे गदति और खरोंचती थी...

कमरे का तापमान बहुत बढ़ गया था अब ठण्ड की कोई परवाह नहीं थी क्यूंकि दोनों के पास हीटर आ गया था...

एक लम्बे और डीप किसिंग के बाद दोनों माँ बेटे अलग होते है और तेज़ तेज़ एक दूसरे को देख के हांफ रहे होते है...

दोनों के होठ इस भीषण चूसै से बिलकुल लाल हो गया था...

अलका और विशाल की नजर आज पहली बार एक दूसरे से माँ बेटे की तरह नहीं वासना में होता खा रहे मर्द और औरत की तरह मिलती है..

अलका शर्म से लाल होने लगती है कैसे उसके बेटे ने अपने उंगलियों से hi उसके छूट को इतना प्यार दिया की उसकी छूट काम रास के साथ तेज़ धार में मूत भी बहाने लगी थी और उस पेशाब और कामर्स का मिल जुला जो अमृत बना था वो सीधा उसके बेटे के चेहरे से जा टकराया था...

अलका को छूट से निकली अमृत की कुछ बुँदे अभी भी उसके जांघो उसके पेट और छाती पे फैली हुई थी जिसे वो पॉच पॉच कर चाटने लग जाती hai...vishal ने कभी अपने माँ का ये रूप नहीं देखा था.. उसे अलका ने कभी इस बात की भनक भी नहीं लगने दो की उसके अंदर कितनी आग hai..aur पेटीकोट और ब्लाउज के अंदर छुपी उसकी रसीली बुर और चुकी हर वक़्त एक लुंड मांगती है एक ऐसा मजबूत हाथ जो उसके उरोजों को निचोड़ के रख...

दोनों माँ बेटे तेज़ तेज़ हफ्ते हुवे एक दूसरे को देखते है मनो आँखों hi आँखों पे पूछ रहे हो अब आगे क्या...?

टीवी पे चल रही फिल्म ख़त्म हो चुकी थी और उस बेकार सी मूवी और हेरोइन को कौन देखे जब अलका जैसी भडकू नशीली और मांसल औरत नंगी अपने निचे लेती हो...

दोनों के उतेज़ना का एक सबसे बड़ा कारन ये था की दोनों माँ बेटे थे जो उन दोनों की आग को रह रह के और भड़काए जा रहा था..

अलका- विशु तूने तो मेरी जान hi निकल दी रे... खा से सीखा ये सब

विशाल- माँ वही मूवी और एक शरारती समयले पास कर देता है...

अलका- चल कुछ तो फायदा हुआ तेरे उन फिल्मो के देखने का...

ाचा सुन पहल फटाफट कुछ खाना बना देती हु फर डिनर कर के अपने चलते है

विशाल को अलका की ये बात कलपद जैसो लगी जिस से विशाल चयनकते हुवे सोने जायेंगे माँ....?

अलका- तो और क्या इतनी रात को और क्या करेगा (फ्लिप होना कोई औरतो से सीखे अपना काम निकलते hi देखो कैसे फ्लिप मार गयी.... या फिर से कोई नया देव सुझा है अलका को...?)

विशाल- ये तो चीटिंग है माँ आपका हो गया और मेरा क्या...?

अलका- मुस्कुराते हुवे तेरा क्या से क्या मतलब.. चल पहले डिनर बनाने मेरी मदद कर...

विशाल- नहीं प्रॉमिस करो की आप चीट नहीं करोगे..

अलका बड़े ऐडा के साथ विशाल के पास कमर मटकते हुवे आती है जो की उसके नंगे होने के कारन उसकी चूचिया कुछ ज्यादा hi जम्प कर रही थी... उसके लुंड को पकड़ते हुवे कहती है अरे मेरे आज रात के खसम तू चाहे तो मत सोने देना अपने इस लोडे को दाल देना अपनी माँ के इस छूट में .. और छोड़ लेना जितना जी करे तेरा मई नहीं रोकूंगी और रोका नहीं तो तू जबरदस्ती पेल देना आज अपनी माँ अलका को...

ये बात अलका अलका ने विशाल के लुंड को अपने हाथ में पकड़ के और विशाल के हाथ को अपने ढकते छूट से सताते हुवे बोलै था..

जो की विशाल के लिए एक रोमांचकारी अनुभव था...

वो इस बात से सरप्राइज था की वो सच में अपनी माँ के साथ ये कर रहा है पर इस से ज्यादा शॉक था वो भी इस बात पे की उसकी माँ सेक्स में बिलकुल खुल के बात करती है एक बाजारू की तरह और यही बात अलका को बिस्तर पे किसी मर्द को उकसाने के लिए खास बनती है...

अपनी बात ख़तम कर के अलका जैसे hi किचन में जाने के लिए मुड़ती है.. विशाल उसके गांड पे एक जोर का छठा मरता है वो थप्पड़ इतनी तेज़ थी की अलका के चूतड़ किसी जेली की तरह लैप लैप थिरकने लगे और साथ hi पुरे हॉल में उस थपड की गूंज गूंजने लगी

अलका-- आआआआअह्हह्ह्ह्हह क्या करता है लगती है .

विशाल- तुम्हारी गांड भोत थिरकती है माँ मेरे से कण्ट्रोल नहीं हुआ...

इस्पे अलका मुस्कुराते हुवे कहती है अभी तूने देखा hi खा है अपनी माँ क अंगो का थिरकन तूने सिर्फ माँ को देखा है अलका को नहीं... और आज मई तुझे असली अलका से मिलवाउंगी तू टिक तो पायेगा न कही आधे में फ़ुस्स्सस्स तो नहीं हो जायेगा...

विशाल- तो दिखाओ न माँ मेरा मतलब है अलका दिखाओ न अपना असली रूप

अलका - सब्र कर डिनर कर ले पहले

विशाल से और कण्ट्रोल नहीं हो रहा था उसने अपनी माँ से कहा

विशाल- माँ डिनर हम बहार से आर्डर कर लेते है न आपका बड़े भी है कुछ सपकल और जब तक डिनर न आ जाये आप मुझे अपना स्टार्रर सर्व कर सकती हो

अलका को अपने बेटे की ये होश्यारी अछि लगी उसे ज्यादा टाइम भी मिल जायेगा और खाना भी नहीं बनाना पड़ेगा...

अलका- ठीक है तू खाना आर्डर कर के मेरे कमरे में आ जाना मई तब तक फ्रेश हो लू पुरे शरीर से पेशाब की बदबू आ रही है...

विशाल- ये बदबू नहीं माँ ये असली खुशबु है

और आपके रूम में क्यों मेरे में क्यों नहीं....?

अलका- क्यूंकि आज तक जिस बिस्तर पैर मई सर्फ तेरे पापा के लिए नंगी हुई हु मई चाहती हु आज तू मुझे उसी बिस्तर पे नंगी करे और ..

विशाल- और क्या माँ....?

अलका- पहले माँ बोलना बंद कर अलका बोल आज रात के लिए .

विशाल- ok अलका बूत और क्या...?

अलका- और आज रात तू अपनी माँ छोड़ेगा मादरचोद कह के अलका अपने कमरे में जाने लगती है


अलका का भरा श्री वो भी बिलकुल नंगी पीछे से देखते बनता था अगर उसके किसी एक अंग की तारीफ करू तो बाकि के लिए गलत होगा... वो ठीक hi ऐसी की जिस से नजर न हेट...

विशाल जैसे कमरे में एंटर होता है वो देखता है उसकी माँ अलका एक रेड गाउन में उसका वेट कर रही थी गाउन कुछ ऐसा था की आगे से ओपन था कमर पे एक क्नॉट बंधी थी खुला होने की वजह से अलका की मखमली जांघ साफ़ साफ़ देखि जा सकती थी .. उसके हाथो में एक पेग था जिसे ले के वो बड़े नजाकत से कड़ी विशाल का इंतजार कर रही थी..





विशाल- क्या आप ड्रिंक करोगे??

alka-iske बिना वो नहीं हो पायेगा मुझसे जो मैं आज की रात करना चाहती हूँ...

विशाल- क्या करना चाहती हो माँ????

अलका- तुझे बताया न आज की रात तू मेरा खसम है मुझे अलका बोल माँ या माँ नहीं..

विशाल- ok ok मैं भूल गया था उसके लिए सूर्य वैसे बताओ तो और क्या प्लान है अलका तुम्हारा???

अलका- तुझे आज असली अलका से मिलना है न??

विशाल- हाँ बिलकुल

अलका ने विशाल को पकड़ के बीएड के एक कोने में बिठाया और खुद दूर जा के पॉज बनाते हुवे अपने बेटे को उकसाने की कोशिश सुरु कर दी उसने.... क्यूंकि वो जानती थी किसी मर्द को जितना उकसाओगे वो बिस्तर पे उतनी बुरी तरह रौंदेगा और अलका के अंदर जो रांड रह रह के जाग रही थी उसे वही चाइये क्यूंकि सॉफ्ट लव से अलका का कोच नहीं होने वाला था और नहीं उसका इसमें कोई इंट्रेस्ट है काम काम आज की रात तो बिलकुल नहीं..

अलका- तो ले आज की रात मैं पूरी तरह से तेरी हुई जो मर्जी जैसे मर्जी कर सकता है






अलका- देख अपनी माँ की ये पहली कासी हुई जांघ तेरा मन नहीं होता इसे मसलने का????

विशाल- होता है माँ और जैसे उठ के अपने माँ अलका के पास जाने लगता है

अलका उसे इशारे से बैठने को कहती है- सस्शह्ह्ह्हह्ह विशु जब तक मैं न कहु उठना नहीं बेटे

विशाल भरी मन से वापस वही बैठ जाता है...






अभी विशाल पिछले हमले से सम्भला भी नहीं था की अलका ने अपनी दोनों चूचिया गाउन से बहार निकल लेती है और गाउन को आगे से अपने कमर तक उठा लेती है जिसमे उसकी ब्लाक पंतय विशाल को साफ़ साफ़ दिखने लग जाती है..

अलका- तुझे मेरी चूचिया कैसी लगती है विशु?

विशाल- जबरदस्त अलका ऐसा जैसे किसी ने गुब्बारे में जेली भर दिया हो

अलका- तेरा इसे पिने माँ मन नहीं हो रहा??? इसे दबाने का मसलने का निचोड़ने का इन निप्पलों को मरोड़ने का??

विशाल की हालत सच में बहुत ख़राब होने लगती है वो फिर से उठने की कोशिश करता है पर अलका लास्ट टाइम की तरह फिर से उसे रोक देती है....

Alka-dekh लिया अलका के जलवे या अभी और कोई अरमान है तेरे???

विशाल- अपना सबसे मैं खजाना तो आप अभी भी छुपा कर के रखे हो उसे तो दिखाया hi नहीं

अलका समझ जाती है विशाल किस खजाने की बात कर रहा है

वो अपने गाउन को धीरे धीरे अपने कमर तक उठके अपनी गांड को थोड़ा बहार की तरफ निकलते हुवे बड़े कामुक अंदाज में कहती है

अलका- कही तुम इस खजाने की बात तो नहीं कर रहे???






विशाल- यस माँ आपकी गांड भोत लाजवाब है पर ऐसे नहीं पूरा खोल के दिखाओ न

अब कमरे का तापमान इतना बढ़ गया था की अलका से भी बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो रहा था अपने बेटे को गरम करते करते वो खुद गरम हो गयी...






उसने एक hi झटके में गाउन उतर फेंका और घुटने के बल सोफे को पकड़ के बैठ गयी उसके इस अंदाज से उसका गांड उसका चउरवे देखते बनता था आज अलका का रूप कामदेवी का हो गया था ....





अगले hi पल अलका उस सोफे पे पीठ के बल लेट गयी और दोनों टंगे उठा के अपने काळा पंतय को उतरने लगी और दोनों माँ बेटे की नजर एक दूसरे से हटने का नाम hi नहीं ले रहा हो जैसे.. अलका एक के बाद एक वॉर किये जा रही थी इधर विशाल भी अपनी माँ को अपना लुंड निकल के दिखा रहा था जिसकी प्यास ने उसके माँ अलका को ये सब करने पे मजबूर कर दिया था....





देखते hi देखते शरीर से चिपका वो आखरी कपडा यानि की उसकी काली काभी अलका ने उतर फेंका और बिलकुल नंगी कमर पे हाथ रख दोनों मखमली जांघो को आपस में सत्ता के कड़ी हो गयी और अपने बेटे से पुछति है???

अलका- रेडी है अपनी अलका के साथ बिस्तर गरम करने के लिए या अभी भी कोच फंतासी है तेरी??

विशाल- फंतासी तो है माँ पर वो धीरे धीरे करता जाऊंगा

इतने में दूर बेल्ल बजी और अलका अपने बैडरूम से बहार देखती है तो फ़ूड डिलीवरी वाला खाना लिए गेट पे खड़ा था








अलका- फ़ूड वाला आ गया है विशु जा खाना ले आ...

विशाल थोड़े नाराजगी दिखते हुवे- इस बहन के लोडे को भी अभी hi आना था... ये फर्स्ट टाइम था जब अलका ने विशाल के मुँह से गली सुनी थी अलका मुस्कुराते हुवे मन में कहती है मजा आएगा

विशाल- अलका तुम मेरी फंतासी पूछ रही थी न ????

अलका ने हाँ में जवाब दिया


विशाल- तो जाओ खाना तुम ले कर आओ वो भी ऐसे hi....

अलका- रियली तुम किसी गैर के सामने अपनी माँ को नंगा परोसने की सोच रहे हो???

विशाल को भी ये ज्यादा लगा तो उसने खा ok तो एक काम करो ये टॉवल लपेट के जा सकते हो लेकिन फ़ूड लेने के बहाने आपको अपना टॉवल एक बार गिरना होगा??

अलका- तुम पक्का ये करवाना चाहते हो??

विशाल- हाँ ये मेरी फंतासी है मई देखना चाहूंगा उस डिलीवरी वाले का एक्सप्रेशन

अलका- ok तो देखो

और अलका फ़ूड लेने चली जाती है जहां डिलीवरी बॉय पहले से खड़ा था पर वो इस बात से बिलकुल अनजान था की उसपे अभी थोड़ी देर में अलका नाम की बिजली गिरने वाली है...






दूर खोलते hi अलका पे बॉक्स पिक करा और जानबूझ के अपना टॉवल चोर दिया जिस वजह से वो डेलिवरी बॉय के सामने बिलकुल नंगी खड़ी थी..

वो तुरंत खाना ले के दरवाजा बंद कर देती है उसकी धड़कने किसी बुलेट ट्रैन की तरह दौड़ने लगी थी क्यूंकि ये अनुभव उसने पहली बार किया था जो काफी वाइल्ड था.. उसका मन इतना बहकने लगा की उसे एक पल को लगा डेलिवरी वाले के सामने hi झुक के वो सब कर डेल जिसके लिए विशाल उसका कमरे में इंतजार कर रहा था...

तेज धड़कने और कदमो के साथ वो भागते हुवे अपने रूम में गयी...

ये जो नजारा अभी विशाल ने देखा था और अलका ने दिखाया था उसने इनदोनो को वासना के चरम पे पहुच दिया था कमरे में घुसते hi विशाल अलका को कहिच के अपने आगोश में ले लेता है और फिर सुरु होता है दोनों के बीच एक वाइल्ड किसिंग ...

अलका हवस में इतना पागल हो गयी थी की वो विशाल के होंटो को चोर उसके अंडरआर्म्स तक को चाटने चूसने लगी थी और साथ hi लुंड को मुठी में भर के मसलना सुरु कर देती है....






विशाल- aaahhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaalkkkkkkkkkkkkkkkkaaaaaaaaaaaaaaaaaa तुम kaaammmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaalllllllllll होओओओओओओओओ

अब बरी अलका की थी विशाल पे अपना जादू चलने का वो देखते hi देखते घुटनो के बल विशाल के दोनों जांघो के बिच बैठ जाती है और विशाल को देखते हुवे पहले उसके लोडे पे किश फिर उसके टोपे पर अपना जीभ फेरते हुवे अपने मुँह में भर लेती है...






विशाल को अलका द्वारा लुंड चूसने से ज्यादा अलका के आंख में आंख डालने की ऐडा घायल करती है... इस दौरान अलका के आँखों में शर्म का नमो निशान नहीं था कुछ था तो वासना के तैरते वो लाल डोरे..

जुबान पे लोडे का टास्ते मिलते hi अलका का मुँह खुद बा खुद तेज तेज चलने लगा.. वो पूरा का पूरा लुंड जातक जाना चाहती थी लेकिन विशाल का लुंड था भी उसके नाम की तरह विशाल जिसे पूरा लेने हर किसी के बस की बात नहीं पर सामने मैदान में उसकी माँ कड़ी थी जिसने उसे अपनी छूट से निकला था तो उसका लुंड लेना उसके लिए कौन सी बड़ी बात थी उसने एक जोर लगे और पूरा लुंड ज्यादा तक लेने की कोशिश करने लगी पर वो कामयाब नहीं हो पा रही थी

विशाल अपनी माँ की भावनाओ को समझते हुवे एक तेज झटका मरता है और पूरा लुंड अलका के मुँह में समां जाता है,,, मुँह क्या उसका लोढ़ा तो उसके गले को चीरते हुवे उसके हलक में उतर जाता है...






अलका की बढ़ते हवस और प्यास को देखते हुवे विशाल के अंदर का सैतान भी जाग जाता है और वो और ज्यादा जालिम बन जाता है और अपना पूरा पूरा लुंड अपने माँ के गले में उतरना सुरु कर देता है या यूँ कहे माँ की मुँह छोड़ना सुरु कर देता है





विशाल भूल जाता है की सामने जिस औरत के साथ अपने जिस्म की प्यास बुझा रहा है वो कोई और नहीं उसकी माँ है उसे तो बस अलका में एक औरत दिख रही थी जिसे आज वो noch-noch के खा जाने वाला tha....vishal इतना ब्रुटली अलका के मुँह को छोड़ रहा था की अलका से साँस तक नहीं लिया जा रहा था उसका लुंड उसके गले को चीरते हुवे जैसे उसके कलेजे को टटोल रहा हो...





जब ये मुँह चुदाई अलका के बर्दाश्त से बहार हुआ तो वो चटपटा के भागने लगी पर विशाल ने उसका मुँह निकलने की जगह और दबा दिया .. अलका की जैसे जान निकल गयी हो वो अपने बेटे को देखने लगती है तो विशाल पता है की अलका की आंखे पलटने लगी है और वो रहम की भीख मांग रही हो की निकल ले अपना मुसल मेरे से साँस नहीं लिया जा रहा है...

विशाल भी सिट्ठाईओं को देखते हुवे अपना लुंड बहार बहार खींच लेता है तब जा के अलका के जान में जान आयी






अलका के मुँह से ढेर सारा थूक और कुघ निकलता है वो गुस्से में विशाल को देखने लगती है और दर्द भरे स्वर में कहती है मादरचोद मार डालेगा क्या???????????

विशाल भी अब बीटा नहीं उसका खसम बन के मजे लेने लगा था वो जितना अलका को दर्द में देखता उतना उसे और दर्द देने की िक्षा होती उसने दुबारा से अपने माँ के मुँह में एक hi झटके में पूरा लुंड दाल दिया .... इस हमले के लिए अलका बिलकुल भी तैयार नहीं थी... क्यूंकि पिछले बार के मुँह छोडन से जो उसकी साँस चढ़ी हुई थी वो अभी उसी पे काबू नहीं पा पायी थी की ये दूसरा इतना जोरदार हमला ालके के आँखों में आंसू बहने लगे वो दर्द सी बिलबिला गयी और विशाल उसके गलो पे थपड मार के उसे और दर्द देना सुरु कर देता है.....






अलका के मुँह से जैसे लार और थूक की नदिया बहनी शुरू हो गयी हो और उसका बीटा जो लगता है किसी जनम का बदला लेने के लिए मैदान में उतरा था.. वो कभी अलका के गलो पे थप्पड़ मरता तो कभी उसके चुचिओ को मसल देता





अलका को लगने लगा कही उसने विशाल को उकसा के कोई गलती तो नहीं कर दी पर ये तो बस शुरुवात थी अभी उसे बहुत सरे दर्द से गुजरना था जो उसे उसका लाडला बीटा hi देने वाला था

विशाल अपना लुंड अलका के मुँह से निकल लेता है अलका भोत जोर से खस्ने लगती है की तभी वो अलका को किसी गुड़िया की तरह उठता है और बीएड पे फ़ेंक देता है.. अलका को मनो विशाल के इस ताक़त का अंदाजा hi नहीं था वो शॉक हो के विशाल को देखते रही की इतनी गदरायी सरीर की औरत को उसने ऐसे फेंका जैसे कोई फूल हो...

इतने दर्दनाक हुवे मुहचुड़ै के बाद भी अलका की तपिश वैसी की वैसी थी उसका वैक्स किया हुआ शरीर के पोर पोर खड़े हो गए थे और अलका इस वक़्त थोड़ा आराम की साँस ले रही थी क्यूंकि जुंग अभी बाकि थी माँ और बेटे में अभी कोई भी हरा न था

बिस्तर पे पड़ी अपनी माँ के कामुक शरीर और प्यारा सा चेहरा देख के विशाल उत्तेजित होने लगता है और साथ hi उसे प्यार भी आता है

वो बड़े जेंटली उसकी चुचिओ को मसलते हुवे एक सॉफ्ट मसाज देना शुरू कर देता है.






अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh vvvvvvvvvvvvvvvvvvvvviiiiiissssssssssuuuuuuuu

विशाल- हाँ अलका कैसा लगा ये राउंड

अलका थके हुवे आवाज में- तूने तो मेरी जान hi निकल दी सेल

vishal-par अभी तो मैंने कुछ किया hi नहीं तुम अभी से अधमरी हो गयी......

अलका- तो करना सेल रोका किसने है मेरे में अभी बहुत जान है ... माँ हूँ तेरी समझा???????

विशाल- तो आज रात माँ बन के छोड़ना चाहती हो या कुछ और????

अलका- कुछ और से तेरा क्या मतलब है बेटे (अलका को कही न कही समझ आ गया था की विशाल क्या कहने की कोशिश कर रहा है पर वो अपने बेटे के मुँह से सुन्ना छह रही थी)

विशाल- देख लो आआप्प बुरा न मन जाओ..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh अब बुराआआआ मन्नेईई को क्या बचा है sale...bol जो बोलना छह रहा है मैं भी तो देखु कितना शेर है तू?

विशाल- पक्का?????/

अलका- हाँ बस पक्का अब क्या गालिया खता रहेगा जो बोलना है बोल

विशाल- आज मैं तुझे अपनी रंडी की तरह छोडूंगा अलका तेरे इस छूट का कावड़ कर दूंगा..

alka-aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh छोड़ना फिर रुका क्यों है मेरी छूट भी कब से जल रही है पर उस से पहले मेरी चित को रेडी तो कर..

विशाल जैसे hi उठ के अलका की छूट की तरफ बढ़ता है अलका कहती है

अलका- रुक ऐसे नहीं..

विशाल- फिर ?????

अलका- अपना ये लोढ़ा पहले मेरे मुँह में दाल....

विशाल- अभी भी मन नहीं भरा क्या???

अलका- तू दाल न मैं बताती हु और विशाल ने वैसा hi किया

अब अपना मुँह मेरे छूट पे ले जा और उसे चाट






विशाल ने जैसे hi अपना जीभ अलका के गुलाबी छेद पे सताया अलका के मुँह से सिसकारी फुट पड़ी

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh maamamammmmmmmmmmmm

क्या छूट छत्ता है तू.... ऐसे hi और अंदर दाल अपनी जुबान ... मेरे दानो को अपने जुबान से कुरेद

विशाल इतने तसल्ली से अलका की छूट चाटने लगता है की अलका तेज तेज मोअन काने लगती है

विशाल अपनी ऊँगली अलका के छूट में दाल के उस जगह को छेद देता है जो हर औरत की कमजोरी होती है और ऐसा करते hi अलका एक जोरदार शोर के साथ झड़ना सुरु कर देती है






ये 3रद टीम था जब अलका को ओर्गास्म आया था और ये वका इतना एक्सट्रीम था की उसका पूरा शरीर कंपनी लगा.. जैसे छूट से पानी नहीं शरीर से जान निकल गयी ho...is कम्पन में उसकी चूचिया कुछ ज्यादा थिरक रही थी...





दोनों माँ बेटे पसीने में लथपथ हो गए थे कल से प्यासी अलका को उसके बेटे ने 3 बार डिस्चार्ज कर दिया था पर उसका पानी अभी एक बार भी नहीं निकला था और ये सोच कही न कही अलका के दिमाग में भी आ गयी थी...

अलका तेज तेज हांफने लगती है और कहती है रुक जा विशु बेटे मेरे में अब जान नहीं बची है थोड़ा साँस लेने दे...

अलका की ये रेक सुन विशाल के चेहरे पे मुस्कान आ जाती हो मनो वो कह रहा हो मैं जीत गया तू हार गयी.. वो अपनी माँ को बड़े प्यार से किश करने लग जाता है... एक पैशनेट किश अलका को जैसे मनो सीपीआर मिल रहा हो.. वो एक हाथ से विशाल का लुंड तो दूजे हाथ से अपने छूट मसलने लगती है...






विशाल और अलका के बिच हुवे लम्बे किश और उसके साथ hi वो दोनों एक दूसरे के अंगो को सेहला कर राहत दे रहे थे.

इस समय विशाल को अपने माँ का बड़ा ख्याल था वो किश करते हुवे उसके जांघ से होते हुवे उसके चूतड़ों को सेहला रहा था. उसका ये प्यार अलका के अंदर वापस जान भरने लगी थी और वो एक बार फिर से मैदान में कूदने को तैयार थी






अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh vvvvvvvvvvvvvviiiiiishuuuuuuuuuuuu मैं पागल हो जाउंगी कुछ कर बेटे...

विशाल- क्या करू माँ( विसाहल को पता तो था पर वो ये अपनी माँ से सुन्ना छह रहा था)

अलका- अपनी माँ के छूट में लगे इस आग को शांत कर दे बेटे अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है..

विशाल- पर अलका मेरी जान तुमने तो खा था आज तुम माँ नहीं मैं बीटा नहीं फिर तुम मुझे बीटा क्यों बोल रही हो

अलका समझ जाती है विशाल का दिया हुआ हिंट और उसके चेहरे पे भी एक मुस्कान आ जाती है फिर वो कहती है ठीक है विशाल मेरे राजा मेरे खसम अपनी इस रंडी के छूट में अपना ये मोटा लुंड दाल के उसकी छूट भर दे यही सुन्ना छह रहा था न सुन लिया अब छोड़ सेल बन जा मादरचोद

विशाल- अलका के दोनों पैरो के बिच आता है और उसकी छूट वापस चाट के तैयार करने लगता है






अलका- aaaaaahhhhhhhhhh माआआआ viiiiiiiiissssssssssssshhhhhhhhhhhhhhuuuuuuuuuuuuuu दाल दे मेरे बेटे मुझसे नहीं रहा जा रहा है (वासना में अलका इतनी अंधी हो गयी थी की अपने बेटे से hi अपनी चुदाई की भीख मांग रही थी)

विशाल- बीटा नहीं मास्टर हूँ तेरा और तू मेरी रैंड समझी..

अलका- हाँ मेरे मालिक अपने इस रंडी को छोड़ दो और बना लो इसे अपना गुलाम....

विशाल अपना लुंड अलका की छूट पे रखता है और रगड़ने लगता है ये सरे काम अलका की आग को शांत करने की बजाय और बढ़ा रहे थे...

अलका- दाल दे न क्यू तड़पा रहा है अपनी माँ को.. बन तो गयी तेरी रंडी अब छोड़ता क्यों नहीं

विशाल को अलका का उसके बेटे के लुंड के लिए भीख मांगना काफी उत्तेजित कर रहा था चुदाई तो होनी hi थी पर वो अपनी माँ को और गिड़गिडवाना चाहता था...

इधर अलका को जब गिड़गिड़ाने का फायदा नहीं लगा तो उसने अपने बेटे को ललकने की योजना बनाई क्यूंकि मर्द सब बर्दाश्त कर सकता है पर चैलेंज नहीं वो भी उसके मर्दानगी की

अलका- तेरे बस का नहीं है क्या सर चेतना hi सीखा है लगता है छोड़ना तेरे बस की नहीं बड़ा आया मुझे रंडी बनाने वाला लुंड में डैम hi नहीं लगता है...

विशाल को ये बात चुभ गयी अलका का योजना काम कर गया..

विशाल- क्या बोलै साली रैंड डैम नहीं है है रुक दिखता हु तुझे अपना डैम

अलका- हाँ नहीं है डैम bassssssssssss aaaaaaauuuuuuccccccchhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मममममअअअअअअअअ

इस से पहले अलका अपनी बात पूरी करती विशाल के लुंड का टोपा अलका की बुर को चीरता फाड़ता हुआ अपना जगह बना लेता है...

अलका- सेल मादरचोद रंडी की औलाद कुत्ते बता तो देता एक डैम से दाल के फाड् दी मेरी छूट

विशाल हस्ते हुवे - अभी तो आधा भी नहीं गया और तेरी बुर फैट गयी मम्मी अभी तो पूरा जाना बाकि है..

अलका अपनी बुर मसलते हुवे कहने लगती है- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh तो दाल न मेरे लाल मई तो यही कह रही हु छोड़ अपनी माँ को छोड़ आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माआआ

अभी अलका पहले हमले से सम्भली भी नहीं थी की विशाल फिर से एक जोर का झटका मरता और उसका पूरा लुंड अपनी माँ अलका की छूट को चीरते हुवे पूरा अंदर चला जाता है...

अलका- uuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaa विशाल मादरचोद रंडी की औलाद अब क्या मर डालेगा मुझे....






हाय अशोक देखो आपका बीटा आपकी बीवी को आपके बिस्तर पे hi अपनी रंडी बना के छोड़ रहा है रोको इसे वर्ण तुम्हारे आने तक ये मेरे छूट का भोसड़ा बना देगा..... aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ममममममअअअअअअअ

ये हमला इतना तेज था जिसकी अलका ने कभी कल्पना भी नहीं की थी वो इतना तेज चीखती है की आवाज बहार तक चली गयी होगी पर इन बातो का इस वक़्त किसे परवाह था वो तो बस एक दूजे को शांत करने में लगे थे..

विशाल- aaaaaaahahhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmoooooooooooooommmmmmmmmmmmmmm कककययय्यआआआ mkmmmmmmmmmmmmmkkkkkkkkkhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaannnnnnn जैसा बदन है तेरी और ये बुर इतनी गरम है की जैसे मेरा लुंड अंदर hi पिघल जायेगा...

अलका-- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh viiiiiissssssssssshhhhhhhhhhhallllllllllllllllllllllll टटटूउउउउ कितना हरामी है अपनी माँ छोड़ रहा है सेल

विशाल- तू भी तो कोई रंडी से काम नहीं दो दिन से देख रहा हु पुरे घर में नंगी घूम रही है........

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh त्तत्तत्तूऊऊ टूउउ सब नोटिस कर रहा था...

विशाल- और नहीं तो क्या कही कोई तुझे न छोड़ दे इस बात का दर था मुझे जैसी तेरी हरकते हो गयी थी....

अलका- तुझे एक और बाप मिल जाता...

विशाल- अभी तो तू मुझे बाआपपपपपप बाआआआंन्नन्नन्नं साहाआईईई मादरचोद अलका बहन की लोदी कितना ग्रह है तू...

अलका- ठंडा कर दे मेरे राजा क्या मस्त लुंड है तेरा मैं तो तेरी गुलाम हो गयी आज से

विशाल- चल अब घोड़ी बन तेरी ये गदरायी गांड देखते हुवे तेरी छूट मरूंगा

alka-ghodi बना कुट्टी बना जो मन करे बना अपनी माँ को बस अपना लुंड मत निकलना मेरे बुर से






और अलका घोड़ी बन जाती है उसका बड़ा गुंबद सा गांड विशाल के बिलकुल सामने था विशाल से रहा नहीं जाता और वो अलका के गांड पे थपड़े की बरसात कर देता है

अलका- aaaaahhhhhhhhhhhhh और मार थोड़ा तेजज maaaaarrrrrrrrrr भोत ाचा लग रह है

विशाल- तू पूरी रंडी हो गयी है आज तुझे दर्द में मजा आ रहा है

अलका- तो दे न दर्द aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaarrrrrrrrrrrr mmerrrrrrrrrrrrrrrreeeeeeeeeee गगगगगगगाआआआंन्नननननदददददद पप्पी टीएएजजजजजजज टीइज्ज्जज्ज माहाअरररररर

आअह्ह्ह मेरे विशाल मेरे राजा एक चूमा तो दे दे अपने होंटो से अपना थूक पीला दे मेरा गाला सुख रहा है मेरररीई जाआनंनं मेरे बेटे अपनी माआ को कक्कछ्हःहूउउउम्म्मम्म लललललीईईई...






aaaaahhhhhhhhhhhhh अब जान में जाननं ायियीईइ .. कुछ कर बेटे मैं पागल हो रही हु थोड़ा जोर लगा भूल जा की मैं तेरी माँ फाड् दे मेरी इस बुर को....

विशाल- aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaa ttttttttttttuuuuuuuuuuuuuummmmmmmmmmmmhhhhhhhaaaarrrrrrrrrrriiiiiiiiiiiiiii अअअअअगगगगगग शांत कर के रहूँगा अब देखो






विशाल एक तेज झटके के साथ अपना लुंड अपनी माँ की बुर में घुसा देता है और किसी पिस्टन की तरह छोड़ना सुरु कर देता है..

पुरे कमरे में दोनों माँ बेटे की मादक आवाज गूंज रही थी

अलका- हहाआनंनं एआइइइइइइस्स्सस्सीी hiiiiiiiiii तेरा लुंड मेरे बच्चेदानी में लग रहा है uuuuuuuuuuuiiiiiimmmmmaaaaaaaaaaa कितना बड़ा लोढ़ा है तेरा विशु और झटके माअररररर मेरी गांड चाट मेरे चुचो को मसल आआअह्हह्ह्ह्हह मायआ ाअस्सष्ठोुक्क्क्क्क्क तुम्हारा बीटा तो तुम्हारा बाप निकला तुम्हारी बीवी को छोड़ने में

विशाल- आआह्ह्ह्हह मेरी राजआनंनंड्डड़ साली कुटिया आजजज तेरी गर्मी शांत कर के रहूँगा






विशाल का हर झटका अलका के पुरे शरीर को झकझोर रहा था हर झटके के साथ विशाल अपनी माँ अलका के गांड पे थपड जड़ देता था.. ालको को वो थपड ज्यादा मजा देने लगा था..

अलका- uuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffffff aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh mmmmmmmeeeeeeeeerrrrrrrrrrrr beeetttttteeeeeeeeeeee और जोर से क्यों नहीं मारता अपनी रंडी को






विशाल के थपडो से अलका की पूरी गांड लाल हो गयी थी बस उस औरत में जाने कौनसा बहुत घुस गया था वो और और किये जा रही थी विशाल अभी भी उसे पीछे से hi अलका को पेले जा रहा था ... अलका की बड़ी मोती गांड विशाल को जैसे उकसाने लगी और विशन ने उसमे अपना मिड फिंगर दाल के अंदर बहार करने अलका की कुंवारी गांड जिसमे हवा जाने की भी जगह न थी उसमे विशाल अपनी ऊँगली अंदर बहार कर रहा था... लुंड तो पहले से उसके बुर को भरे हुवे था अब ऊँगली उसके गांड को भरने कागि थी जिसे अलका के सब्र का बांध टूट गया और बड़े तेज धार के साथ वो एक बार फिर से निढाल हो गयी...

आआआहहहहहहह vvvvvvvvvvisssssssshhhhhhhhalllllll mmmmmmeeereeeeeeeeee बाआअच्छे मैमर गईइइइइइइइ aaaaaahhhhhhhhhh






आज उसका ये 4तह ओर्गास्म था पिछले ओर्गास्म hi इतना ते हुआ था की उसकी जान निकल गयी थी इस बार तो वो झड़ते हुवे बहुत बुरी तरह कंपनी लगी अब उस से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था उसके पेअर बहुत बुरे तरीके से कंपनी लेफ्ट है





aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh bbbbbbbbbbbbbbbaaaaaaaaaaacccccccccccccccccchhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaa llllllllllllllooooooooooooo मुझे मई मर गयी मेरी जान निअक्ल दी तूने विशाल

इधर अलका झटके खा रही थी पर विशाल का पानी अब भी नहीं निकला था तो वो बिना रुके अपनी माँ अलका को शॉट पे शॉट लगाए ज्ज्ज्जाआँ रहा था अलका जिसके शरीर में जांणण नहीं बची थी उसके बुर में जलन होने लगी थी और हो भी क्यों न पिछले 4 घंटे से वो अपने बेटे विशाल से चुद रही है जिसमे 4 बार बार वो झाड़ चुकी है... उसके बुर में जो कीड़ा था उसे विशाल के लुंड ने राउंड के मार दिया था










अलका के खड़े गिरने लगी थी उसकी ये हालत देख के विशाल ने उसे बीएड पे लिटा दिया और अपने पूरी रफ़्तार में लुंड अलका की बुर में पेलने लगता है...

अलका के पेअर हवा में झूल रहे होते है इसके बावजूद उसके पेअर में कंपजापि हो रही थी वो विशाल के आएगी रोने गिड़गिड़ाने लगी की विशाल उसे छोड़ दे लेकिन विशाल का अभी हुआ नहीं था फिर वो कैसे छोड़ता

विशाल- aaaaaahhhhhhhhhhh ssssssssaaaaaaaaaallllllllllllliiiiiiiiiiiiiiiiii rrrrrrrrrrrraaaaaaaaannnnnnnnnnnddddddddddd पैन मांग रही थी और ले पैन

अलका- मैं तेरे हाथ जोड़ती हूँ बेटे मुझे बक्श दे मेरे बुर में बहुत जलन हो रही पूरा पानी सूखा दिया है तूने मेरे बुर का रुक जा अब मुझसे तेरे ये झटके झेले नहीं जा रहे है...






अलका से जब बर्दाश्त कर पाना मुश्किल होने लगता है तो वो विशाल से छूट के भागने लगती है की तभी विशाल उसे पकड़ के वापस बीएड पे पटकता है और कभी अपने हाथ से तो कभी अपने लात से अलका के चेहरे को बिस्तर पर दबा के अपना लुंड उसके छूट की गहराइयो में उतरना शुरू कर देता है... उसे इस वक़्त अलका में माँ नहीं एक औरत दिख रही थी जिसके छूट में उसे झड़ना था,....









और अलका ने hi तो खा था मैं रोकू तब भी मत रुकना रंडी की तरह छोड़ना पर उसकी ये साडी बात सायद आज उसपे भरी पड़ने वाली थी... अलका के पास बचने का कोई उपाय नहीं था वो गिड़गिड़ाने लगी लम से काम थोड़ी देर साँस लेने दे पर विशाल आज अपने माँ की कोई बात नहीं सुनने वाला था...

अलका- बेटे मेरा गाला सूखने लग रहा है मेरे होंटो को चुम न एक बार इसकी भी प्यास बुझा दे... अलका इसलिए भी कह रही थी की इसी बहाने विशाल उसके बुर से अपना लुंड तो निकले... विशाल तुरंत अपने होंटो अपने माँ के होंटो से मिला देता है जिसे अलका पागलो की तरह चूसने लगती है








अलका अपने शरीर में साडी शक्तिओ को इकठा कर एक बार फिर से विशाल के साथ किश करने लग जाती है मनो किश न हो उसके रिचार्ज होने का कोई जुगाड़ हो और वो धीरे धीरे तैयार होने भी लगती है..





तभी विशाल अलका के चेहरे को अपने हाथ में ले के कहता है तू तब तक मेरा साथ देगी जब तक मेरा पानी न निकल जाये....?

तुझे पानी पीना पसंद है न ???

अलका- रट हुवे दर्द भरी आवाज में हाँ विशु कहती है

विशाल- तो फिर मेरा पानी निकल मादरचोद रंडी साली चिनार और उसके मुँह में थूक देता है...

विशाल की ये हरकत और उसके थूक ने मनो अलका के शरीर में कोई ऊर्जा भर दिया हो... वो समज्झ जाती है hi कमांड अपने हाथ में लेना होगा वर्ण उसका बीटा विशाल उसे रात भर पेलता रहेगा...

अलका- विशु

विशाल- बोलो मेरी जान

अलका एक समयले के साथ कहती है बीटा इस बार तुम लेटो मैं तुम्हारे ऊपर आउंगी..

विशाल- ok अलका दरलंग






वो पहले विशाल के लुंड को अपने दोनों चुचिओ के बिच भर के अपने चूचियों को छोड़ने लग जाती है ....

विशाल को अपनी माँ अलका का ये अंदाज काफी कामुक लगता है और अलका भी अब अपने कामदेवी का बन चलना शुरू कर देती है....

विशाल- aaaahhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmaaaaaaaaaa तेरी ये चूचिया भोत मजा आ रहा है aaaaaahhhhhhhhhhhhhh

अलका- हाँ मेरे बेटे ले अपनी माँ के मजे अचे से ले छोड़ मेरे इन घाटियों में भी अपना ये लुंड दाल के छोड़...

अब धीरे धीरे अलका के शरीर में भी इतनी जान तो आ hi गयी थी की वो अपने बेटे के लोडे में बह रहे लावा को बहार निकल सके..... वो विशाल के लुंड को वापस अपने मुँह में भर लेती है...






और पूरा अंदर तक ले लेती है एक hi बार में अब जो हमला हो रहा था वो अलका के तरफ से था वो जानती है की उसकी बुर बेशक ठंडी पद गयी हो पर उसके गले की गर्माहट उसके बेटे का पानी निकलने के लिए काफी है और अलका वही करने लग जाती hai..use बस एक बार अपने बुर का फिर तैयार होने तक का वेट करना था इस लिए तब तक वो विशाल के लुंड को चूसना जारी रखती है...

लुंड चूसै के बाद और अपने बेटे के लुंड पे बैठने से पहले एक बार फिर से अपने होंठ विशाल के होंठो पर रख देती है फिर से एक बार किश करना शुरू कर देते है






दोनों माँ बेटे किसी सांप की तरह एक दूसरे में गूथ जाते है और चूमने चाटने का दौर शुरू हो जाता है...

अलका- कैसा लग रहा है विशु????????/

विशाल- भोत ाचा माँ पर अब मुझे अपना ये लुंड आपके छूट में डालना है...

अलका हाँ बेट उसी के लिए तो तेरे लुंड को रेडी का रही थी अब देख तू अपनी माँ अलका ौर्य रैंड अलका का जादू... और समयले करते हुवे विशाल के दोनों साइड अपना पेअर रख देती है ......

और विशाल को दिखते हुवे उसके लुंड को पकड़ती है धीरे धीरे उसपे बैठना शुरू कर देती है....

अलका 4 बार डिस्चार्ज भले हो गयी थी लेकिन अपने बेटे के पानी पिए बिना वो भी नहीं रुकने वाली थी... देखते देखते एक माँ बेटे दोनों के साइड से एक कराहने की आवाज़ आती है और अलका की छूट अपने बेटे विशाल के लुंड को पूरा निगल चुकी होती है....






और अलका तेज तेज चिल्लाते हुवे अपने बेटे विशाल के लुंड पे कूदने लगती है...

अलका- aaahhhhhhhhhhhh vvvvvvviiiiiiiiiishhhhhhhhhaaaaaaalllllll कब निकलेगा रे तेरा ये मेरा 5वि बार है तूने तो आज मुझे पागल hi कर दिया .. पहली चुदाई में hi तूने अपनी माँ की तसल्ली कर दी अअअअअअअ mmmmmmmmaaaaaaaaaaa ास्स्सह्ह्ह्हह्हूऊऊककककककक देखो कैसे तुम्हारा बीटा तुम्हारी बीवी की ले रहा है उसका भोसड़ा बना देगा तुम नहीं आये तो

विशाल- तुम्हारे अंदर आग hi इतनी है की एक बार में तेरा नहीं होने वाला ..... आअह्हह्ह्ह्ह मेरी रंडी मेरी अलका साली चिनार तेज तेज kud.....mera आने वाला है.. ये बोलके विशाल अलका के चुचिओ पे मरने लगता है उन्हें मसलने लगता है... दर्द का मजा अलका को भी आने लगा था....








अलका- aaaaaaahhhhhhhhhhh विशाल मेरा फिर से अअअअअ रहा है जल्दी कर सेल मादक्रोड.. ऐसा कहते हुवे अलका पीछे मुड़के विशाल के ाँद को मुट्ठी में भर लेती है और खींचना सुरु कर देती है....

अलका से अब और सहन नहीं हो रहा था वो बस अब फ्री होना छह रही थी इसलिए वो अपने सरे हथकंडे अपनाने लगती है...

विशाल भी जवाब में अलका के चर्बीदार पीठ और पेट को नोचना सुरु कर देता है..

दोनों माँ बेटे वासना के आग में पागल हो गए थे

दोनों का बदन बिलकुल ला हो गया था जैसे मनो उनमे से खून निकल आएगा अगर थोड़ा जोर से मसल दो तो..






तभी विशाल एक तेज आवाज के साथ झरने लगता है

विशाल- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmaaaaaaaaaaa मैं आया मेरी अलका मेरी चिनार मायआ






लुंड के बहार आते hi ढेर सारा पानी अलका के बुर से बहार गिरने लगता hai...ye पानी अलका और विशाल के मिलान का साबुत था

लुंड को बहार खींचने पे एक पुककककक जैसी आवाज भी आयी थी जो ये बताने के लिए काफी था की अलका की छूट अभी भी कितनी टाइट है... जिसमे विशाल का लुंड पूरा फास के जा और आ रहा था...

अलका जो अभी विशाल के आगे घोड़ी बानी हुई थी एक डैम से पीछे मुद जाती है ताकि एक भी बून्द मिस न हो जाये






अलका निचे उतर के अपने बेटे का लुंड अपने मुँह में भर लेती है और उसके लुंड से निकला सारा पानी पिने लग जाती hai...is पानी के लिए तो अलका का ये हाल हुआ था उसे कैसे जाने देती

उसका मन इतने से भी नहीं भरा था की अपने बुर से भी अपने बेटे और अपने खुद के मिले जुले पानी को भी निकल निकल पे खाने लगती है....




 
क्या बोलती पब्लिक एक मॉर्निंग सेक्स करा दू क्या....?











सारिका की भी एंट्री होने वाली है गाइस बहुत जल्दी... ये भी काम भड़काऊ औरत नहीं है और क्यों न हो है तो अलका की बहन....

एक्ससिटेड?????????????????
 
Part-11



अपने बेटे विशाल के साथ हुवे इतने धुवेदार चुदाई के बाद अलका में इतनी हिम्मत भी नहीं बची थी की वो उठ के इस उस खाने को खा सके जिसके लिए आज वो एक अनजान डिलीवरी बॉय क सामने नंगी हो गयी थी... जिसे अपना गोरा सुलगता जिस्म दिखने के लिए और अपने बेटे को खुश करने के लिए उसने अपना टॉवल जानबूझ के गिरा दिया था.. वो बेसुध पड़ी रही और पड़े पड़े सो गयी...








इस तरह की चुदाई की तो उसने कल्पना भी नहीं की होगी .. पर जो आग उसके अंदर जल रही थी उसे इसी तरह की वहसि चुदाई की जरुरत थी और ये जरूरत उसके छोटे और लादले बेटे ने पूरी कर दी...

सुबह की ठण्ड ने अलका के नींद को तोड़ दिया था..

बदन पे हाथ फेरने पे उसने पाया की वो बिलकुल नंगी अपने बिस्तर पर पड़ी है... शरीर के अलग अलग हिस्सों पे उसके और विशाल के प्यार की निशानी फैला हुआ था उसके बालो में उसके चुचिओ पे पेट, नाभि, कमर ,सभी जगह उसके और विशाल के चिपचिपा पानी के सुख जाने से सफ़ेद निशान बन गया था...

आज उसका बदन भोत टूट रहा था उसका बीएड से उठने का कोई मन नहीं था पर उसे बहुत जोरो की पेशाब आयी थी जिसके लिए उसे वाशरूम जाना hi padta..alka जैसे hi बीएड से उतर कर बाथरूम की तरफ बढ़ने लगी वो एक डैम से जमीन पे गिर गयी... उसके पैरो में इतनी भी जान नहीं बची थी की वो बीएड से उठ सके.. रात के जोश जोश में बेटे का लुंड ले तो लिया और ये दर्द है वो सायद उसी की कीमत hai...jaise तैसे वो वाशरूम में गयी और पोर्ट पे बैठ के अपने छूट के बचे बाकि पानी को भी बहा दिया... और उसी तरह अलका थोड़ी देर बैठी रही उसे आराम भी मिल रहा था..

थोड़े आराम के बाद अलका पॉट से उठ के वाशबेसिन पे अपना मुँह धोने लगी और वह जब उसकी नज़र खुद पे पड़ी तो रात की साडी घटनाये किसी फिल्म की तरह उसके दिमाग में फ़्लैश करने लगा..

विशाल ने उसे बहुत बुरी तरह से रौंदा था उसके शरीर के हर एक भाग को मसल मसल के काट काट के लाल नीला नीसाण कर दिया था








जिसकी खबर अलका को अपने बेटे विशाल के लुंड पे उछलते समय नहीं लगी थी..

अलका दो दिनों से अपने बर्थडे में लगी आग बुझाने के लिए घर में नंगी hi घूम रही थी ताकि कैसे भी उसका बीटा विशाल उसके छूट में अपना लुंड दाल के एक दमदार चुदाई करे और उसके छूट में लगी आग को बुझा दे और हुआ भी वैसे hi लेकिन अलका का मन अभी भी कपडा पहनने का बिलकुल नहीं था वो अभी नंगी hi रहना चाहती और जितनी गर्मी उसके शरीर में है वो रह भी लेती पर बाईट रात उसके बेटे ने वो गर्मी शांत कर दो थी जिसका नतीजा ये हुआ की सुबह की ठंडी हवा जब उसके बदन को चुटी है तो उसके शरीर में एक तेज कंपकंपी आने लगती है.

वो वार्डरॉब से एक ढीली वाइट मैक्सी निकल के पहन लेती है उसके अंदर उसके अंदर उसने ब्रा पंतय कुछ भी पहनने की जरुरत नहीं समझी.....

सर एक पतली सफ़ेद पारदर्शी मैक्सी जिसमे से उसका अंग अंग अपनी झलकियां दिखने की कोशिश कर रहा था...








अलका को अभी इस अवस्था में यदि कोई देख ले तो तुरंत घोड़ी बना के उसके छूट में अपना लुंड भर दे उसे बिना चोदे रुकेगा नहीं..

उसके बदन का गठन hi इतना कामुक था जिसकी तारीफ शब्दों में नहीं हो सकती उसके लम्बे काळा बाल गोरा चेहरा पतली कमर उस से ऊपर थोड़ी चर्बीदार लेकिन बाकि घरेलु औरतो की तरह निकली हुई बिलकुल भी नहीं पेट.. उसके निचे मोती कासी हुई जंघे.. और जांघो और कमर के बिच वो जगह जिसके लिए हर कोई अलका का दीवाना है यानि की अलका को छूट.. जिसमे रात भर उसका बीटा अपना लुंड दाल के उसे अपना गुलाम बना लिया tha..jab अलका की नजर अपने छूट पे गयी तो उसकी हालत एक hi रत में बदली हुई नजर आने लगी...








बेचारी को छूट बिलकुल लाल गुलाबी हो गयी थी इतने भयानक चुदाई के कारन थोड़ी सूजन भी आ गयी थी..

अलका का हाथ खुद hi अपनी छूट का हल टटोलने के लिए उसपे चलने लगा.

अलका- aaaaaaaaaahhhhhhhhhh विइइइइइइस्स्स्सह्ह्ह्हह्हुउउइइइ ककककययय्यआआअ हालललललल कककककअर दिया बेटीईई तूंबीएई ाआपपपपण्णञ्ञीीी माआआ ककककककाआ ऐसे कोई छठुड्ड़त्तत्ता हाई क्या अपनीइ ममअअअअ को सुजा दिया ने मेरे इस नाज्जजुऊक्कककक ससीसीई छःहुत्तत्त कक्कुवाओ

और अलका खुद भी तो कितनी नाजुक है बिलकुल फूल जैसी और फूल के पंखुडिओ जैसा hi उसकी स्किन भी जिसे मसलो तो जैसे रास निकल जाये उसके शरीर से ..

रत के थकावट की वजह से अलका वापस आ के अपने बिस्तर पे गिर जाती है और अपने छूट को मसलते हुवे बड़बड़ाने लगती है

अलका- बीच अब मिल गयी शांति.. पता ले लिया विशाल का लोढ़ा हो गयी या और लेना है... पर तू तो उसके आगे हार गयी.. 5 बार पानी निकला उसमे tera...aaaaahhhhh ममममममअअअअ वैसे है भी तो कितना मोटा तगड़ा लुंड मेरे बेटे काआआ.

इन्ही सोच में वो अपनी छूट मसलने लगती hai..aur उसके बुर से रास रिसना शुरू हो जाता है..






जिसे अपनी ऊँगली से निकल के अलका चाट लेती है... शरीर बेशक टूट रहा हो पर इस कुटिया का हाथ और जुबान अब भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था.

वो अपने छूट का पानी निकल निकल के चाट रही थी...








फर उसने अपनी छूट से कहा अब तुझे दिन रत ठोकने वाला आ गया है बस थोड़ा सब्र कर आराम कर ले...

इसी तरह दिन गुजर गया शाम हो गयी... अलका को भी हालत बेहतर हो गयी.. वो फ्रेश हो के अपने बेटे विशाल के कमरे में जाती है पर विशाल वहां नहीं होता है वो कही बहार गया होता है...

अलका अपने मन में कहती है घर में मेरे जैसी औरत उसकी माँ जिसे छोड़ने का लाइसेंस मिल गया है उसे वो अकेली है और उसका फायदा उठाने की जगह पता नहीं खा घूम रहा है नालायक...

अलका को पता नहीं क्यों आज माँ वाली फ़िक्र होने की जगह बीवी का गर्लफ्रेंड वाली जलंत होती है विशाल से.. उस रात विशाल अपने किसीदोस्त के यहाँ पार्टी में गया था और देर से आता है जिस वजह से कुछ नहीं हो पता.. और अलका के छूट को भी तयारी का टाइम मिल गया क्यूंकि उसे दुबारा मैदान में हार जो नहीं माननी थी..

सुबह विशाल जब अलका के कमरे में आता है तो अलका नाराज हो के दूर नहीं kholti..kal तक जिस लुंड के लिए वो दरवाजा खोल के अपने छूट में ऊँगली करती थी नंगी घुमा करती थी आज वो लुंड खुद चल के उसके पास आया है और वो दूर नहीं खोल रही थी

विशाल भी काफी देर नॉक करने के बाद चला जाता है..

अलका अब माँ नहीं बीवी बन गयी थी जिसके नखरे तो उठाने hi थे विशाल को भी..

तभी अलका को एक शरारती सूझती है.. वो अपने बेटे को मैसेज करती है

अलका- hello मेरे खसम खा हो याद नहीं आ रही अपनी अलका की....?








विशाल- माँ ये क्या ड्रामा है आया तो था आपने दूर नहीं खोला

अलका- वो उस नालायक विशाल के लिए नहीं खोला जो अपनी माँ को अकेला चोर के पता नहीं खा रत भर आवारगर्दी कर रहा था... पर तुम तो मेरे खसम हो और मई अपने खसम से बात कर रही हु...

विशाल समझ जाता है की अलका रोलप्ले करना चाहती है तो वो भी खसम बन के hi बात करना शुरू कर देता है..

विशाल- सही किया तुमने बेबी इतनी हॉट एंड सेक्सी माँ को चोर के बहार कोई बेवकूफ hi जायेगा... मई तो बिलकुल भी न जाता अगर मेरे घर में तुम्हारे जैसी बाला की खूबसूरत कामुक औरत हो..

अलका- वही तो देखो न रात भर मेरी छूट अपना आंसू बहती रही और वो गायब था कुट्टी का बचा...

यह अलका खुद को कुट्टी कह के विशाल को उकसाने की कोशिश शुरू कर देती है..

विशाल- तो तुम मुझे बुला लेती मई तुम्हारे छूट की गर्मी मिटा देता .

देखो मेरा लोढ़ा कब से तुम्हे कुट्टी बनाने के लिए खड़ा hai..aur विशाल अपने लुंड की फोटो भेज देता है...








फोटो देख के अलका की छूट फिर से रिसने लग जाती है उसके मुँह में पानी आने लगता है

अलका- वाओ ये तो काफी बड़ा है मेरे नंगी से छूट में खलबली मचा देगा...

विशाल- तुम्हारा इस से काम गुज़ारा भी खा होगा मेरी जान... वैसे इस वक़्त कुछ पहना है या नंगी हो के बात कर रही हो....?

अलका- खुद देख लो








विशाल- वाओ क्या फिगर है तुम्हारा क्या मस्त चूचिया है.. मेरा बस चले तो मसल दू और सारा रास निचोड़ के पि जाऊ...

अलका- आआअह्ह्ह्हह तो निचोड़ो न कब से तरस रही है मेरी ये फुदडीईई

विशाल- पर दूर बंद कर रखा है तुमने....

अलका- तुम्हारे लिए खुला है वो बस विशु के लिए बंद है..

ये इस बात का सिग्नल था की आओ और फिर से भर दो अपनी माँ के बुर में अपना लुंड तुम्हारी माँ वेट कर रही है...

तभी दरवाजे पे दस्तक होने भर से दरवाजा खुल जाता है ..

सामने बिलकुल नंगी कड़ी अलका अपने खसम अपने बेटे विशाल का स्वागत अपने दोनों हाथ में चूचियों को मसल के दिखते हुवे करती है








शरीर पे एक भी बाल का नमो निशान न होने के कारन अलका का बदन कुछ ज्यादा hi चमक रहा था .. उसपे दो बड़ी बड़ी खरबूजे के आकर की चूचिया जिसे वो अपने हाथ में ले के दबाते हुवे विशाल को आगे बढ़ने के लिए उकसा रही थी क्या गज़ब ध रही thi....thoda निचे उसका सपाट पेट और गहरी नाभि जिसके निचे अलका की गुलाब की पंखुडिओ जैसी छूट..... आआआह्ह्ह्ह क्या नजारा था शामे का...

अलका- आ गए मेरे जणू

विशाल- हाँ मेरा जान मेरी अलका तुम कहो और न औ ऐसा हो सकता है है क्या..

अलका- देखो न मेरी छूट कितना तड़प रही है तुम्हारे याद में ..

विशाल- तड़प तो मेरा ये लुंड भी रहा है मेरी जान पर कोई बात नहीं अभी हम दोनों मिल के इनदोनो की तड़प ख़तम करेंगे..

और दोनों के बिच चूमियो का दौर शुरू हो जाता है... दोनों माँ बेटे के आग उगलते जिस्म से जिस्म टकराने लगते है किसका हाथ किधर जा रहा है किसी को कोई खबर रही बस लगे है दोनों माँ बेटे एक दूजे को चूमने और मसलने में...

अलका- आआआह्ह्ह्हह्ह मेरे राजा खा माँ छुड़वा रहा था कल भन्न के लोडे..

विशाल- कल तो नहीं पर आजजज जरूर maaaaaaaaaaaa कक्ककघूऊऊऊडड़डीगग्गगीीीी मेरी वो भी अपने बेटे के लोडे se...aaaaaaaahhhhhhh साहाललीईई कितना आआअह्हह्ह्ह्ह हहहहाआईईई टट्ट्टीीररीररेरे मीटीए kkkkiuutttiiiyaaaaaaaaaaaa

अलका से उसके लुंड से ज्यादा देर तक दूर रहा नहीं गया... अपने बेटे विशाल के होंटो को चूसते हुवे उसके मोठे तगड़े लुंड को मुट्ठी में भर के उसे मसलने लगती है








अलका- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ककककककयययययययआआआ ममममममाऊऊऊटटटटटटाआआआ lllllllllloooooooooddddddddaaaaaaaaa है तेरा विशु माँ hi चुद जाती है मेरी पूरा खलबली मचा देते है छूट से पेट तक....

विशाल- aaaaaaaahhhhhhhhhh माआआआआ जीतनीई ाजगगगगग तत्तीरे मेर है तुझे इस से छोटे से तेरा कुछ नहीं होगा

अलका - ये बात तो है और अब मुझे मिल भी गया है तेरा ये मुसल...

और ये कहते हुवे अलका विशाल के दोनों टैंगो के बिच अपने घुटनो के बल बैठ जाती है और उसके मोठे से लुंड को मोठे से टोपे पे अपना गरम गुलाबी जुबान फेरने लगती है..








अलका ये सरे काम नजर से नजर मिला के करती है जैसे वो अपने बेटे को अपनी वासना का भूख दिखाना छह रही हो.... वो बताना छह रही हो की उसकी माँ लुंड की कितनी भुकी है...

विशाल- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह maaaaaaaaaa

अलका पहले बड़े प्यार से अपने बेटे का लुंड चुस्ती है फिर वो एक डैम से पूरा लुंड मुँह में भरने की कोशिश करने लगती है जिसमे उसकी मदद विशाल उसके मुँह में अपना लुंड दबा के कर देता है..








विशाल का ये लम्बा मुसल अलका के पुरे हलक तक चला जाता है उसको खांसी आने लगती hai...par माँ यदि चुदाई में वहसि है तो बीटा इस मामले में अपनी माँ का भी बाप है

विशाल तेज़ झटको के साथ अलका का मुँह छोड़ने लगता है पूरा फर्श अलका के लार और कुघ से गीला हो जाता है...

विशाल- आआआहहहहहहह माआआआ कितना गरम मुँह है तेरा लगता है मेरा लुंड पिघल जायेगा....

अलका जवाब में कुछ नहीं बोल पति और बोलेगी भी कैसे मुहे जो अपने बेटे के लुंड से भर रखा था

अलका आज इतने गहराई और टाइट होक लुंड चूस रही थी की विशाल से बरषत नहीं हुआ और वो अलका के मुँह में hi झाड़ गया....

कल रात वो विशाल जिसने अपने माँ को रुला दिया था अपने चुदाई से आअज उसकी माँ ने उसे पहले राउंड में हरा दिया था आखिर माँ माँ hi होती है और वो अलका जैसी भड़काऊ और....

अलका विशाल के लुंड से निकले पानी को गटकने लगती है...








विशाल अपनी माँ का पूरा मुँह अपने लुंड के निकले पानी से भर देता है

विशाल को सांसे चढ़ गयी थी वो तेज तेज हटने लगता है लेकिन उसकी माँ अलका अभी भी उसके लुंड को चूसना चेतना जारी रखती है...

अब बरी विशाल की थी विशाल अलका को एक धक्का देता है और अलका बीएड पे गिर जाती है...

अलका बीएड पे अपने दोनों टैंगो को मोड़ के अपने गांड और पीठ के बल पीछे की और खिसकते जाती है पर इस बिच उसकी नजरे विशाल से नहीं हटती

अलका अपने बेटे विशाल के सामने hi उसे दिखते हुवे अपना छूट मसलने लगती है








अलका- आआअह्हह्ह्ह्हह वववववीीिष्ठ्हहूऊऊऊ देख तेरी माँ कितनी गरम हो रही है.... इसे ठंडा कर बीटा वर्ण तेरी ये माँ को किसी दिन रंडी की तरह कोई छोड़ के चला जायेगा... और तू पार्टी करते रह जाना अपने दोस्तों के साथ..

विशाल- ऐसा नहीं होगा तुझे मई इतना छोडूंगा इतना छोडूंगा की तू अशोक का लुंड भी लेना पसंद नहीं करेगी मेरी रांड.... तू सिर्फ मेरी रांड बनेगी किसी दूसरे की नहीं... समझी ये कहते हुवे विशाल ने अलका की जांघो में हाथ दाल के अपनी और खींच ता है जिसे हवस में उड़ती अलका की कमर सीधे विशाल के चेहरे के सामने आ जाती है और उसकी छूट विशाल के मुँह के पास

विशाल- आआआआहहहहहहह ककययय्यआआ महाककककक है मेरी रंडी माँ के छूट काआआआ और अलका की बुर में अपना जीभ घुसना और जीभ से hi उसके बुर को छोड़ना शुरू कर देता है....

विशाल पुरे लगन के साथ अलका की छूट चाटने लगता है इस दौरान अपनी माँ की चूचियों को भी दबाता मसलता है तो कभी उसके जांघो को...

अलका को अपने बदल पे होते ये जुर्म और दर्द में hi मजा आता है...

अलका- आआअह्हह्ह्ह्ह ववववववीीिष्ष्हठ्ठाआआंलललल ऐसे hi चाट ममममआसस्सस्स्स्सालालललललल दे मुझे आआह्ह्हह्ह्ह्ह शाबाश मेरे बेटे.....

विशाल भी अपनी माँ को खुश करनी कोई कसार नहीं चूर्ण चाहता था वो बिलकुल गहराइयो तक अपनी जीभ दाल के अलका के बुर को अपनी जुबान से छोड़ रहा था....








अलका- आआआअह्हह्ह्ह्हह विशाल अब बर्दाश्त नहीं होता दाल दे अपना लोढ़ा अपनी माँ की छूट में बेटे...

विशाल भी वैसे hi करता है वो पहले लुंड अलका के छूट के ऊपर रखता है और एक झटके के साथ पूरा लुंड एक hi बार में अलका की छूट में उतर देता है...

ाललका के मुँह से एक तेज़ चीख निकल जाती है....

आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मममममम वीईसस्शह्ह्हह्ह्ह्ह सालललललईईई मादरचोद आराम से नहीं दाल सकता एक बार में पूरा दाल दिया फाड् दी मेरी छूट बहन के लोडे ने...








विशाल- कोई जवाब देने के बजाय अपना लुंड बहार निकलता है और दुबारा से पुरे तेज़ झटके के साथ एक hi बार में दाल देता है...

अलका बेचारी बिलख के दर्द से बिलबिलाने लगती है...

अलका- अबे भड़वे क्यययय्यआआआ कररर राहहहहह ाहीईईओ रंडी की औलाद. मीरररिणी जाआनंनं लेगा क्या....

विशाल- नहीं तेरी छूट लुंगेरी रंडी माँ.... क्या कहा था तूने कोई ऐसे छोड़ के चला जायेगा और मई पार्टी करूँगा.....

और तू क्या सब के सामने टंगे खोलती फिरेगी रंडी साली अलका बोल मादरचोद और गलियों के साथ तेज़ तेज़ झटके लगाना शुरू कर देता है....

अलका- हहहाआनंनं चढूँगी ..... रंडी बनूँगी .... तू बहार रहेगा तो मेरे छूट का ख्याल कोण रखेगा.... आआअह्हह्ह्ह्हह ममममममूउउउउमम्मीयियय

विशाल- तू सिर्फ मेरी रैंड है विशाल की रैंड तुझे सिर्फ मई छोडूंगा अपना रखैल बना के दिन रत जब मन करे chodunga......aaahahhhhh ाआललकककककाआआआ बबूल मेरी रैंड है तू बोल मादरचोद ..

अलका- आआअह्हह्ह्ह्हह और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ लगा झटके वर्ण सच में किसी और के निचे लेट जाउंगी..( यह अलका ने विशाल को सीधा सीधा चैलेंज कर दिया था... विशाल के कहने पे भी अलका ने खुद को विशाल का रैंड जानबूझ के नहीं बोलै....)

विशाल जैसे पागल सा हो गया अलका ने उसकी मर्दानगी को ललकारा हो जैसे...

विशाल अपना लुंड अलका के छूट से बहार निकल लेता है...

अलका उसे सवालिया नजरो से देखने लगती है...

पर विशाल जो करने वाला था वो अलका की छूट के सरे नसों को हिला के रख देने वाला था और अलका इस बात से अनजान अपनी चूचिया मसल रही थी और विशाल को देख रही थी मनो पूछ रही हो लुंड क्यों निकला अपना....? डालता क्यों नहीं है...?

विशाल- चल कुट्टी बन पीछे से छोडूंगा तेरे गांड लाल करने का मन हो रहा है...

अलका- ओह रियली तो ये ले कर लाल जोर जोर से मरना. की दो दिन तक निशान न jaye...aur अपनी उंगलिया अपने छूट में दाल के उसका पानी चाटने लगती है...

अलका एक साइड में पड़े बेडशीट से अपने लुंड को अचे से साफ़ कर के बिलकुल ड्राई कर देता है और फिर अलका के छूट को भी सूखा देता hai...alka आने वाले खतरे से अनजान अपनी ऊँगली चाटने में बिजी थी

तभी विशाल अपना लुंड अलका की छूट में सेट करता है और अपना सूखा लुंड उसकी सुखी छूट में एक झटके में पूरा जड़ तक उतर देता है...

जिस से उसका लुंड अलका की छूट को चीरते हुवे सीधा अलका के बचे दानी से जा टकराया है...

अलका की छूट चिरचिराहट के साथ फैट सी गयी थी ... अलका इतना जोर से चिल्लाती है की उसकी आवाज़ पुरे घर में गूंज जाती है उसकी मनो जान hi निकल गयी हो

अलका- aaaaahhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaa. Vvvvvvvviiiiiiiiisssshhhhhhhhaaaaalllllllllllll rrrrrrraaaaaannnnnnnnnnddidiiiiiiiiiiiiii की बब्बा कछ्छछ्ररररे साललीईए मार डेल क्या ...

वो रट हुवे लुंड निकलने को कहने लगी






अलका- बीटा निकल ले मुझे बहुत दर्द हो रहा है सहा नहीं जा रहा प्लस निकल ले....

ये झटका उस से बर्दाश्त नहीं हो रहा था उसकी छूट जलने लगी थी वो तेज़ तेज़ अपने हाथ बीएड पे पटक के रोने लगी...








अपने बेटे से रहम की भीख मांगने लगती है पर विशाल उल्टा उसके गांड पे छतो थप्पड़ो की बरसात कर देता है उसकी शरीर तो वासना और चुदाई की आग से पहले hi लाल था उसकी गांड भी लाल हो गयी मनो अब खून निकल आएगा








अलका- आआअह्हह्ह्ह्हह अस्स्सोूओकककक देखठीोू तुम्हारा बीटा अपनी माँ को रंडी बनान छह रहा है बचाओ मुझे इस हैवान से...

विशाल- aaaaaaaaaahahhhhhh बड़ा गरम छूट है अलका तेरी मजा आ रहा है......

अलका की छूट वापस से गीली हो गयी थी अब अलका को भी थोड़ा आराम और झटके में मजा आने लगा था वो फिर से विशाल को उकसाना सुरु कर देती है...

अलका - आआअह्हह्ह्ह्ह हाआनंनं हहहाआईईई क्या लोढ़ा है तेरा राजे पुरे गहराई नाप ले आता है आआह्ह्ह्ह आइआइइइइस्ससेई होईए

तभी विशाल पीछे से अलका की गर्दन उठता है और अपनी तरफ घुमा के उसे चूमने लगता है और यही तो अलका को चाइये था चुदाई और चुदाई के बिच होंठ चूसै...






अलका की छूट का इंजन वापस गरम होना शुरू हो जाता है और अलका फिर से बड़बड़ाना शुरू कर देती है और झटके दे थोड़ा जोर से मेरी जान डैम नहीं बचा क्या ....? थक गया ख़तम हो गयी तेरी मर्दानगी....?

विशाल- बहनचोद क्या औरत है अभी रो रही थी अभी फिर आग भड़क गयी तेरी....

अलका- तो ठंडा कर न भड़वे बाटे क्या बना रहा है छूट छोड़ बाटे नहीं.... रुक तुझे दिखाऊ....

अलका उसे धोका लगाती है और उसके लुंड पे एक hi बार में बैठ के पूरा लुंड जातक जाती है...

विशाल का लोढ़ा मनो कभी उस जगह पे था hi नहीं... कल जो बहुत विशाल बहुत विशाल के अंदर था मनो आज वो बहुत अलका के अंदर घुस गया tha..Wo तेज तेज कूदने लगी








और खुद अपने गांड पे थप्पड़ मारने लगती है.... उसके दोनों चूतड़ बिलकुल लाल हो चूका था और वो इसे एन्जॉय कर रही थी दोनों माँ बेटे इस सर्दी में भी पसीना से लथपथ हो गए थे...

काफी देर अपनी माँ अलका को अपने लुंड पे कूदने के बाद विशाल अलका को धोका दे कर अपने ऊपर से उतर देता है और उसके बाल पकड़ता है और घसीटता हुआ दरवाजे के पास ले जा के दीवार के सहारे खड़ा कर देता है






और पीछे से उसके गांड पे जोरदार छतो को बरसात करने लग जाता है वो वापस से अपना लुंड अलका की छूट में एक झटके में उतर के स्पीड बढ़ा देता है और एक भीषण चुदाई और धक्को का दौर शुरू हो जाता है... ये धक्के अलका को बेकाबू करने लगे थे वो दर्द और चरम दोनों का सुख एक साथहसूस कर रही थी उसकी चीख में दर्द भी था और चुदाई का सुख भी

एक लम्बी चुदाई के बाद दोनों माँ बेटे एक साथ अपने चरम पे पहुंच रहे थे

अलका- आआह्ह्ह्ह ममरररररराआ ा ह्ह्ह्हूऊओऊणन्नीई वववालललआआआआ ह्ह्ह्हाईइइइइ ववववियिस्सश्हूउउउउउउउ

विशाल- मेरा भी मुम्मा मेरा आने को है आअह्ह्ह

अंदर नहीं मेरे मुँह में गिरना मई पीना चाहती हु आअह्हह्ह्ह्ह और अलका बैठ के अपने बेटे का लुंड मुँह में भर के चूसने लगती है..








8-10 धक्को के बाद विशाल अपने माँ अलका के मुँह को दुबारा अपने सफ़ेद गधे पानी से भर देता है और उसकी माँ वो आखरी बून्द तक जातक जाती है...






अपनी माँ अलका को पानी निकलने के लिए विशाल भी तेज तेज अपनी उँगलियाँ अपनी माँ की छूट में चलने लगता है... अलका और विशाल की सिसकारियों से पूरा कमरा गूंजने लगा था अलका पुरे जोश से विशाल का लुंड चूस रही थी मनो उसका आखरी बून्द ताका निचोड़ के अपने गले की प्यास बुझाएगी और इधर अंकित भी अपनी माँ की बुर में अपनी उंगलियों से मजा देने लगा अगले थोड़े hi देर में अलका एक जोर दर चीख के साथ झड़ने लगी उसके छूट से सफ़ेद चिपचिपा तरल पदार्थ बहार आने लगा जो उसके और उसके बेटे के मिला जुला रास था अलका उसे निकल के खाना सुरु कर देती है मनो वो अपनी प्यास इसी से बुझाएगी...





अलका की बुर लगातार अपना पानी टपकते रहती है ...



यह गौर करने वाली बात ये है की विशाल के फाॅर्स करने के बाद भी अलका ने आज खुद को विशाल का रांड नहीं bola....kya वो सच में किसी और के निचे आना चाहती है....?

या विशाल आज उतना रगड़ hi नहीं पाया की अलका के मुँह से वो निकलवा सके जो वो सुन्ना चाहता है... ये जवाब तो कहानी के साथ hi मिलेगा...

स्टे तूने गाइस....

 




अलका इस गेटिंग रेडी फॉर ानोथेर राउंड कीप फोल्लोविंग गाइस...
 
पैरट- 12

दोपहर के एक सेक्स गेम के बाद अब एक लम्बा सेक्स गेम खेलना है तो उसके लिए दोनों के हथ्यार को पहले अचे से तैयार करना hoga....alka और विशाल दोनों अपनी आज की पहली चुदाई के बाद एक दूजे के अंगो के साथ खेल रहे थे .. जो उनकी वासना को बढ़ने के लिए एक प्रवर्कोउट दोसे था... अलका थी जो अपने बेटे का लुंड चोर्ने का नाम hi नहीं ले रही थी वो लगातार अपनी छूट सहलाते हुवे अपने बेटे के लुंड हिला रही थी काफी लम्बी किश के बाद विशाल अपनी माँ से कहता है माँ एक और राउंड हो जाये..






अलका बिना देर किये अपने बेटे के लुंड को पुरे शिद्दत से चाटने और चूसे लग जाती है.. मनो वो दूसरे राउंड की तयारी कर रही हो... सायद उसका पानी तो निकल गया लेकिन उसकी तड़प को अभी शांत करना बाकि था..









अलका पूरा जड़ो जेहन लगा के विशाल का लुंड बहुत पाशंतली चूस रही thi...Yahi काम दूसरे तरफ से विशाल अपनी माँ की छूट के साथ कर रह था.





विशाल को जुबान अलका के छूट पे पड़ते hi वो बिन जल की मछली की तरह तड़प uthti...alka के रोम रोम में सिहरन दौड़ने लगता hai...wo छूट के पानी को ऐसे चाट रहा था मनो पिल्ला दूध चाट रहा हो किसी कटोरे से...





अलका भी उसके सर को अपने छूट में दबाने लग जाती है जिस से की ज्यादा से ज्यादा अंदर तक विशाल की जुबान ले सके...

एक बार फिर से दोनों खिलाडी मैदान में उतरने के लिए तैयार हो रहे थे...

अलका- अब दाल दे बेटे बर्दाश्त नहीं होती मेरे इस बुर को तेरे लुंड से दुरी दाल दे प्लस....

विशाल- बड़े प्यार से अपने माँ के होंटो को चूमने लगता है... अपनी माँ अलका के मुँह में जैसे घुस जाना छह रहा हो ...

अपने छूट के पानी से सनी विशाल के जुबान और होंटो को चाट के अलका और नशीली हो रही थी... उसके ऊपर चुदाई की खुमारी बढ़ने लगती hai..jo उसके बर्दाश्त के बहार हो रही थी.. वो किसी भी विशाल को अपने अंदर समां लेना चाहती थी... लेकिन विशाल था की बस उसे हाई और हाई कर रहा था लेकिन जिसके लिए वो तड़प रही थी वो अलका को नहीं दे रह था. अलका खुद से विशाल का लुंड पकड़ के अपने छूट में घुसाने की कोशिश करने लगती है....

अलका की जो हालत थी वही हाल विशाल का भी था वो बस अपनी माँ को ज्यादा से ज्यादा गरम कर के छोड़ना छह रहा था... वो इतना गरम करना चाहता था की उसकी माँ अपने बेटे से लुंड की भीख मांगने लग जाये ..

विशाल अलका के ऊपर आता है और बड़े प्यार से उसके होंटो को चूमते हुवे ... उसके उरोजों को सहलाते है धीरे पशनातेली अपना लुंड अलका की छूट में घुसा देता है...






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अलका को एक बहुत hi सुकून का आनंद होता है... वो मस्ती के सागर में होते लगाने लगती है... और अंकित बड़े प्यार से अपना लुंड अपनी माँ के बुर के अंदर बहार कर रहा था....

अलका- आअह्ह्ह्हह विशु मेरे बचे ऐसे hi बहुत सही जा रहा है तू...

मेरे चुचिओ को भी चूस ... ये निप्पल पी

विशाल भी अपनी माँ के निर्देशों का पालन करते हुवे अलका के निप्पल पे जुबान फेरने लगता है...






और कभी अपने होंटो से तो कभी अपने दांतो से अपनी माँ अलका के निप्पल खींच लेता है ...इन सब में आज विशाल कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रहा था न hi अलका अभी तक कोई डिमांड करती है मनो दोनों एक लम्बी पारी खेलने के मन बना के मैदान में उतरे हो





दोनों माँ बेटे बड़े पशनातेली आराम से चुदाई कर रहे थे लेकिन अलका तो अलका है उसे ये धीरे धीरे में ज्यादा मजा कहाँ आता है... उसे तो चाइये वाइल्ड रफ़ सेक्स जो उसे अंदर तक झकझोर दे जिसके बाद वो कड़ी भी न हो सके.. लेकिन प्लेअसुर उसे हार्डकोर से hi मिलता है...

वो चाहती तो आराम से भी अपने बेटे को तेज़ तेज़ करने को बोल सकती थी.. पर उसे विशाल की मर्दानगी को ललकारा के जो मजा मिलता है वो सिंपल आर्डर या रेक से खान मिलता hai..aur अपनी इन्ही हरकतों को दोहराते हुवे अलका एक बार फिर से शुरू हो जाती है....

अलका- अब क्या सारा दिन मादरचोद ऐसे होल होल hi डालता रहेगा डैम नहीं बचा क्या नामर्द sale...aise बुझायेगा मेरे छूट की आग तेरे से नहीं होगा तो बुलाऊ किसी को....

ये साडी बाटे विशाल के मर्दानगी को जगाने के लिए एक दोसे का काम करती है.. और विशाल के अंदर का वेह्शी भी जागने लगता है.. उसके बाद जो खेल सुरु हुआ वो अलका का मनपसंद खेल था जिसकी वो दीवानी थी....

विशाल समझ जाता है की उसकी माँ को बिस्तर पर प्यार नहीं चाइये एक डोमिनेंट मर्द chaiye..jo उसकी रेल बना de..aur फिर शुरू होता है उसके बेटे विशाल का वेह्शी पाना...

विशाल एक डैम से उसकी टंगे हवा में उठा के उसके कंधे तक मोड़ देता है जिस से अलका की गांड इतनी ऊपर उठा जाती है की छूट के साथ साथ गांड का छेद भी दिखने लग जाता है..






एक्ससिटेमेंट के मरे अलका की गांड और छेद में भी जैसे धड़कने आ गयी हो... उसके लाल गुलाबी छेद खुल और बंद हो रहे थे ... जिसे देख विशाल ने अपनी माँ के छूट पे 2-4 थप्पड़ बक तो बक लगा दिए.. अपने नाजुक छूट पे थप्पड़ पड़ते अलका की बॉडी में कम्पन दौड़ने लगती है

अलका- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हिट में हर्डर बेबी .... फुक में फुक योर मदर यू मोथेरफुकेर.. के ों हिट में हिट में हार्ड यू बहनचोद..

विशाल अपने लोडे पे थूक लगता है और फिर पुरे ताक़त के साथ अपना लुंड अलका की छूट में पेल देता देता है..

झटका इतना जोरदार था की अलका का चेहरा दर्द से लाल पद जाता है और उसकी चीख पुरे घर में गूंजती है

अलका- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह वववववीीीिस्स्सस्शह्ह्ह्हआआअलललललल फाड् दी मेरी छूट आअह्ह्ह्हह सेल कब सुधरेगा तू एक बार में पूरा क्यों डालना है मादरचोद समझ नहीं आता तेरे.... एक तो तेरा लोढ़ा इतना बड़ा है की लगता है की किसी दिन मेरे छूट में दाल के मेरे मुँह से बहार निकल देगा तू

Vishal-aaahhhhhh मेरी रआनंदददद तेरा वो सूख भी पूरा कर दूंगा किसी दिन अभी तू छूट से पेट तक में hi मजा ले मेरी माँ अलका .....

और इसी के साथ विशाल झटको की रफ़्तार बढ़ा देता है ...

अलका- आआअह्हह्ह्ह्ह अहह अहह अह्ह्ह ऐसे hi तेज तेज और तेज शाबाश मेरे बेटे छोड़ अपनी माँ को आअह्ह्ह छोड़ छोड़ छोड़ छोड़ मादरचोद रुकना नहीं...

अलका की ये हालत देख के विशाल का जोश भी दोगुना हो जाता hai...tabhi अलका कहती है विशु कुछ नया करना है मुझे....

विशाल- क्या गांड मारवणी है..

अलका- नहीं रे गांड तो कभी नहीं मुझे वहां विंडो पे खड़े हो के छोड़ना है ... तू छोड़ और मई पूरी सोसाइटी चुड़ते चुड़ते देखूंगी...

विशाल- और पूरी सोसाइटी भी तुम्हे चुड़ते देखेगी उसका क्या...

अलका- अरे माँ छुड़ाने गयी सोसाइटी तू चल और मेरे फंतासी पूरी कर बहुत मजा आएगा देख अभी से मेरी छूट फुदकने लगी... कितना क्रेजी होगा चल जल्दी ...और अलका गांड मटकते हुवे विंडो की तरफ जाने लगती है तभी विशाल का मन उसकी गांड को देख के दोल जाता है... आखिर उसकी भी फंतासी थी अलका की गांड मरने ki...wo तुरंत अलका के बाल किसी घोड़ी के लगाम की तरह पकड़ के खींचता है और जीने के पास बानी खम्बे से चिपका के अपना लुंड उसकी छूट में झटके से दाल देता है..






अलका- आआह्ह्ह्हह्ह क्या कर रहा है यह नहीं खिड़की के पास कहा था

विशाल- पहले तू मेरी फंतासी पूरी कर फर मई तेरी करूँगा...

अलका- आआअह्ह्ह्ह कैसी फंतासी छोड़ तो रहा है अपनी माँ ...और क्या चाइये अब तुझे ..

विशाल उसके गांड पे थप्पड़ लगते हुवे कहता है..- तेरी ये मखमली गांड चाइये...

अलका- आआअह्ह्ह्हह विशु वह कभी नहीं लिया है मैंने... और तेरा है भी बहुत मोटा मई बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगी तू जैसे मर्जी जितनी मर्जी मेरी छूट मर ले पर गांड नहीं....

विशाल भी जिस पे आ जाता है- साली छूट तो तेरी पहले से फटी थी मुझे तेरी गांड फडनी है... मंजूर है तो बोल वर्ण माँ chuda...mai चला

अलका- फिर तुझे छूट भी नहीं मिलेगी अगर तू मुझे आधे में छोरा तो

विशाल अपनी माँ अलका की गर्मी अचे से जनता था इसलिए वो ok बोल के अपना लुंड उसकी छूट से बहार निकल लेता है..

छूट में लुंड जाने से अलका को उतना दर्द नहीं हुआ जितना इस तरह बिच में विशाल के चोर्ने से हो रहा था.

अलका- विशाल तू ब्लक्मैल करेगा अपनी माँ को....?

विशाल- no माँ इतनी सेक्सी गांड है मेरा जी ललचाता है इसे देख के मुझे इसमें अपना लुंड डालना है बस

अलका- ाचा ठीक है मेरे बचे तू hi खोलना मेरे गांड की सील पर आज नहीं फिर kabhi....ab जल्दी आ के दाल अपना लोढ़ा और धक्के लगा मूड की माँ मत छोड़..

विशाल- पहले बोलो आज नहीं तो कब....?

अलका- ok बाबा जब मेरी ये छूट और गांड तेरे इस मुसल को खेलने के लिए तैयार हो जाये अब खुश अब जल्दी आ बेटे बहुत खुजली हो रही है तेरे माँ की छूट में ..

विशाल - उसके चूतड़ों पे थप्पड़ मरते हुवे माँ नहीं तू मेरी रंडी है साली सामजी

अलका- aaaaaaaaaahhhhhhh रंडी तो सबसे चुदती है तो क्या तू मुझे औरो से भी छुड़वाएगा

विशाल- नहीं तू सिर्फ मेरी रैंड है..

अलका- मेरे छूट की गर्मी तेरे अकेले से ठंडी नहीं होने वाली तू तो अभी बचा है .

विशाल- बहुत बोल लिया तूने अब देख तुझे दिखता हु बचा हु या क्या

और विशाल उसे विंडो पे बने स्लैब पे घुटनो के बल बिठा देता है






स्पेस इतनी नहीं होती की वो घोड़ी बन सके.. विशाल उसके बल पकड़ के खींचता है जिससे की उसकी गार्डन ऊपर को हो जाती है और फिर विशाल अपना लुंड उसकी छूट की गेहराइओ में उतरने लग जाता है...

अलका- आआह्ह्ह्हह हाँ ऐसे hi छोड़ मुझे आआह्ह्ह्ह देख नंगी आँखों के साथ साथ नंगे हो के भी हम सहर देख रहे hai...aaaahhhh क्या मस्त छोड़ता है तू.... बस ऐसे hi उतरता रह अपना लुंड मेरे इस छूट में मैं आने वाली

आआह्ह्ह्हह्ह आआह्ह्हह्ह्ह्ह hu...kafi लम्बे चुदाई के बाद अलका खिड़की पर hi झड़ने लग जाती है उसकी आंखे बंद होने लगती है शरीर ढीला पद जाता है...

विशाल उसे अपनी गॉड में उठा के वापस बिस्तर पे किसी बेजान गुड़िया की तरह फ़ेंक देता है..

अलका- आआह्ह्हह्ह्ह्ह आराम से बेटे

विशाल अलका को अनसुना करते हुवे अपना लुंड सीधा उसके छूट की गहराइयो में उतर देता है...






अलका जो आंखे बंद कर के हांफ रही थी.. अपने टूटे उखड़े हुवे सांसो को जोड़ रही थी विशाल के इस हमले से एक डैम से उसकी आंखे बहार को आ गयी वो चिलाना तो चाहिए पर चीला न पायी और मरे हुवे आवाज में कहती है...

अलका- आआआअह्हह्ह्ह्ह साँस तो लेने दे बहनचोद मर hi डालेगा क्या....

विशाल पे उसके किसी बात का कोई असर नहीं था वो अपनी धक्के लगाना जारी रखता है.

विशाल- आआह्ह्ह्हह क्या मखमली और गरम छूट है तुम्हारी आअह्ह्ह्ह मजा आ जाता है इसमें अपना लुंड दाल के और उसकी चूचियों को उखाड़ने लगता है ...

चूचियों को बेदर्दी से मसलना अलका को ाचा लगता है वो और जोर से कर कहने लगती है और आंखे बंद hi होती है ....

विशाल को अपनी माँ के आंख में आंख दाल के छोड़ने में मजा आता है और अभी जब अलका ने आंखे बंद कर राखी है तो विशाल को इतना मजा नहीं आता इसलिए विशाल अपनी माँ के गाल पे कास कास थप्पड़ लगाने लगता है...






अलका को भी दर्द में hi तो मजा आता है... वो ऊपर उठ के विशाल को किश करने लगती है और अपने एक हाथ से अपना छूट मल्टी रहती है...

अलका की शक्तिया वापस आ रही थी वो विशाल को ब्रूटल बनने के लिए ललकारने लगती hai...kyunki जितना विशाल अलका के साथ रफ़ होता है उतना hi ज्यादा अलका एक्ससिटेड होती है...

विशाल जहां एक और अलका के छूट को अपने लुंड से भर रखा था तो वही दूसरी और उसने अपनी दो उंगलिया अलका के मुँह में दाल दी जिसे अलका बड़े प्यार और लस्ट से चूसने लगती है ..






ये नजारा किसी की धड़कन बढ़ने के लिए काफी था . अलका मनो इनसब में खो hi गयी thi..tabhi विशाल उसके गांड में हाथ दाल के एक डैम से पलट देता है .......

अलका भी समझ जाती है की उसे घोड़ी बनना है और वो बिना समय गवाए घोड़ी बन के अपने दोनों चूतड़ों पे छठा चाट दो छठा लगा के अपने चूतड़ फैला लेती है...

विशाल- विशाल भी थपेड़ो की बारिश कर देता है अलका के गांड pe...Uski गांड इतनी लाल हो गयी थी जैसे लग रहा हो डी तरबूज काट के रखे हो....






एक्ससिटेमेंट में विशाल अपनी एक ऊँगली अलका की गांड में पेल देता है...

अलका- आआह्ह्ह्ह मादरचोद मन किया है न गांड को छेड़ने से फिर क्यों कर है... और अलका आगे गिरने लगती है जिसे विशाल वापस पकड़ के अपनी और खींच लेता है और फिर से पेलना शुरू कर देता है..

एक गांड और छूट में एक साथ परहर होने से अलका को फर से ओर्गास्म होने लगता है और वो निचे गिरने लगती है पर उसका शीतन बीटा उसके चेहरे पे लात रख के पीछे से उसकी छूट मरता रहता है अलका बेचारी न आगे हो पा रही थी न पीछे..






बस वो अपनी तिरछा नज़रो से विशाल को घर रही थी मनो रहम की भीख मांग रही हो... पर चुदाई करते समय विशाल को अलका में माँ दीखता hi कहाँ है

अलका- आआअह्हह्ह्ह्हह वववववीीिष्ठ्हहूऊऊऊ साँस 2 मं रुक जा बेटे मई ठीक से खड़ा भी हो पा रही हु मेरे पेअर कैंप रहे है रुक जा

पर विशाल को पता था उसकी माँ को जोश में लाना है तो उसे और दरिंदगी दिखानी होगी..






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वो दोनों हाथो से अलका के बल पकड़ के पीछे खींचता है और ठुकाई सुरु कर देता है

अलका- आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह फ़क फ़क फ़क फ़क फ़क में यू मोथेरफुकेर फ़क में हर्डर पहाड़ दे मेरी छूट घुस जा इसमें विषा कुट्टी के पिल्लै... नाली के कीड़े मादरचोद अपना छोड़ते शर्म नहीं आती बहनचोद रंडी की औलाद

ये सब अलका दर्द में पागल हो के बड़बड़ा रही थी उसे इस वक़्त खुद नहीं पता वो क्या बोल रही है. बस जो मुँह में आ रहा है बड़बड़ा रही है ..

विशाल भी कभी कभी ाल्कि गांड पे तो कभी गलो में तो कभी पिता हर जगह थपड मर मर के अलका के नाजुक गोर बदन को लाल कर दिया था इतने से भी जब उसका मन नहीं भरता तो वो जोर जोर से दन्त काटने लग जाता है और इतना तेज़ की चमड़ी खींच लेता है...

अलका को इस ब्रूटल सेक्स में बहुत मजा आने लगता है वो दर्द को एन्जॉय भी करती है सहन न होने पे रोने भी लग जाती है...

अलका रट huwe-aaahhhhh मम्मूउम्मम्मीयिययी और मर और मर मर के मेरा खाल उतर हिट में हार्ड मास्टर... मेक में योर व्होरे ..

आखिर अलका ने अब जा के वो बात बोली जो विशु सुबह की चुदाई में सुन्ना चाहता था...

विशु कुटिल मुस्का के साथ- क्या बोलै फिर से बोलना...

अलका- और मारो और दर्द दो मेरे मालिक मुझे अपनी रंडी बना के छोड़ो... यही सुन्ना छह रहा था न तू...

विशु- आआह्ह्ह्हह हाँ मेरी रांड सुबह तो बड़े नखरे कर रही थी अब आयी न लाइन पे

अलका- हाँ मेरे खसम आ गयी तेरी रांड लाइन तेरे लुंड ने ला दिया... आआह्ह्ह छोड़ छोड़ छोड़ मादरचोद छोड़ अपनी माँ को तेज धक्के लगा फाड़ दे मेरी छूट को घुस जा इसमें आअह्ह्ह

विशाल- रैंड नहीं......... रखैल है तू मेरी..... बोल कौन है...?






विशाल ने अलका की पूरी रेल बना दी थी वो इस वक़्त जो कहता वो वही करती सायद गांड भी मरवा लेती वो वासना और दर्द के उस चरम पे पहुंच गयी थी.... उसका पूरा चेहरा उसके आँशु और पसीने से भीग चूका है...

उत्तेजना और थपडो से इतनी लाल हो गयी थी जैसे अब खून उसके गलो को चीरते हुवे बहार निकल आएगा

अलका- हाँ हाँ रखैल हु तेरी मादरचोद .. छोड़ अपनी रखैल को फाड् दे उसकी छूट दिखा अपनी mardangi.aaahahhhhh आआस्स्शह्ह्ह्हूँऊकककककक तुमने कभी ऐसे क्यों नहीं छोड़ा अपनी बीवी को

इस दर्द भरी चुदाई में अलका जाने कितनी बार झाड़ गयी थी पर विशाल ने एक बार भी उसे अपने गिरफ्त से निकलने का मौका नहीं दिया...

अब अलका की हालत ये हो गयी थी की उसके पेअर कंपनी लगे थे विशाल के झटको से बचने के लिए वो पेअर सिकुड़ने की कोशिश करती भी विशाल वापस उसके पेअर फैला के छोड़ने लगता है..






और एक बार फिर से अलका की छूट अपना सैलाब उगलने को तैयार है.. पर विशाल है की अलका की छूट में लुंड निकल hi नहीं रहा है....

अलका- विशु पोजीशन चेंज कर मेरे कमर में दर्द होने लगा और अलका बार बार गिरने लगती है वो विशाल उसे उठा के सोफे पे ले जाता है और खुद बैठ के अलका को अपने लुंड पे उछलने को कहता है

अलका भी अपने मास्टर की बात मानते हुवे वैसा hi करती है जैसा विशाल कहता है... विशाल के लुंड पे बैठ के अलका उसपे कूदना शुरू कर देती है

अलका- आअह्ह्ह्हह विशाल मेरा ाएंनई वाला है थोड़ा झटका मर निचे से..






विशाल भी अपने झटके तेज़ कर देता है और अलका की छूट के बार फिर से भलभल के अपना पानी विशाल के लुंड पे उड़ेल देती है... अलका से अब कूदना तो दूर टिका भी न जा रहा था वो विशाल के पंजे में पंजा फसा के सपोर्ट ले के उसके लेंड पे बैठी थी

इतने तेज़ ओर्गास्म के बाद अलका जब विशाल के लुंड से उतरना चाही तो विशाल वापस से उसे अपने आगोश में दबा लिया






अलका का पूरा जिस्म लाल थक के छूट छूट हो गया था उसमे इतनी हिम्मत नहीं बची थी की वो हिल भी सके विशाल के गिरफ्त से छूटना तो दूर की बात thi..wo वैसे hi मरे हालत में विशाल के ऊपर पड़ी रही और विशाल निचे से झटके लगता रहा...

अलका के छूट में तेज जलन होने लगती है वो बस मरे हालत में मोअन कर रही होती है

अलका- ऊऊह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह चोर दो अब मेरे छूट में बहुत जलन हो रही है जाने दो थोड़ा आराम करने दो प्लस विशाल .उसके बाद चाहो तो दुबारा दाल देना पर अभी रुक जाओ प्लस बेटे

विशाल का भी होने वाला था फिर वो कैसे रुकता. विशाल अपने झटके जारी रखता है..

विशाल के हर झटके से अलका के चुचिओ में और गांड में थिरकन होने लगती है...

विशाल वापस से अलका के गांड पे मरने लगता है ....उठ साली अपना हो गया तो सो रही है उठ मेरी रांड अपने खसम को खुस कर उठ चिनार ..

इस दौरान जब विशाल की गिरफ्त थोड़ी ढीली पद गयी तो अलका मौका देख के भागने लगती है वो अपने शरीर की साडी शक्ति इकठा कर के बीएड से कूद के भागने hi वाली होती है की विशाल वापस उसे बालो से पकड़ के वही जमीं पे पटकता है और अपना लुंड दाल के छोड़ना सुरु कर देता hai..sath hi साथ उसके गांड और कमर की मसाज करने लगता है आखिर दर्द भी तो वही दे रहा था ..






अलका बिलख बिलख के रो रही थी पर उसका बीटा नहीं रुकता

अलका- निकल ले कुत्ते अब क्या मार डालेगा .... क्या खता है की तेरा निकलता hi नहीं .. बस कर मई मुँह से निकल देती हु मेरी छूट भोत जल रही है






विशाल- आआह्ह्ह्ह मेरी फानन बस थोड़ा सा और मेरा आने वाला है.. बस थोड़ा सा और टिक जा

अलका- आआह्ह्ह्हह नहीं हो रहा बेटे ला मई चूस के निकल दूंगी

जब वो चुप नहीं होती रोने लगती है तो विशाल दुबारा उसके मुँह में अपना हाथ दाल के छोड़ने लगता है






अलका बड़े तेज धार के के साथ मूतने लगती है जिसपे विशाल हसने लगता है

विशाल- तू तो मूतने लगी साली ः






अलका- मेरे छूट का सारा रास तो निचोड़ लिया अब मूत hi बचा है पिले maderchod.Aur इस बार अलका और विशाल दोनों एक साथ अपना पानी निकल देते है ..

अलका की जंघे थार थार कंपनी लगती है उसमे एक परसेंट भी जान नहीं बचा था खड़ा रहने को

औरत जब चुदाई के दौरान मूतने लग जाये तो इसका मतलब है की उसे चरमसुख मिल गया है और आपका बूत से निकलता ये तेज़ धार इस बात का साबुत है की आज उसके बेटे ने उसे वो सुख दे दिया जिसके वजह से उसकी छूट ये धार निकलने पे मजबूर हो गयी है...






अलका की हालत बहुत पतली हो गयी थी ऐसी चुदाई तो कोई किसी बाजारू औरत की नहीं करता जैसा विशाल अपनी माँ अलका की करता है...

अलका विशाल के लुंड पे hi गिर गयी वो उठने या उतरने की हालत में बिलकुल भी नहीं थी फिर विशाल hi अपना लुंड अपनी माँ अलका के छूट से निकलता है तो अलका के छूट से दोनों का मिला जुला तरल छिछिओ पानी अलका की छूट से गिरने लगता है..






विशाल बचे हुवे पानी को अलका के मुँह में गिरा देता है जिसे मरे हालत में होने के बावजूत कामर्स की प्यासी अलका उसे चूसने चाटने लग जाती है और सारा मॉल गटकने लगती है...





आज फिर से विशाल ने अलका की रेल बना दी उस फूल सी नाजुक औरत को विशाल ने खूब कास के निचोड़ा है... और ये तो बस शुरुवात है....
 
Part-13

आज फिर से अलका के लादले विशाल ने दूसरी बार उसे अपनी माँ अलका को ऐसा तोडा की उसकी रेल बना di...alka बिलकुल बेहोशी की हालत में सोई थी.






इतनी बार झड़ने के बाद उसकी हिम्मत hi नहीं होती बीएड से उठने ki...Use कपडे पहनने का न होश था न हिम्मत...

दो hi दिन में विशाल ने उसकी छूट इतनी खोल दी थी की खा एक या दो ऊँगली से अलका की सिसकी निकल जाती थी आज उसकी छूट बिलकुल खुला खुला सा दिख रहा है मनो कलाई दाल के किसी ने निकला हो...

विशाल दो दिनों में hi इतनी गहराई में चला गया था जहां तक उसका बाप अशोक 25 साल में नहीं जा पाया...

देर रात अलका को पेशाब लगती है पर उसके अंदर उठने की हिम्मत hi नहीं थी वो लेते लेते बीएड पे hi मूतने लगी..






पेशाब की गर्माहट उसकी छूट और जांघो से होते हुवे बिस्तर पर फ़ैलाने लगा... ये पेशाब की गर्माहट उसे बहुत अछि लग रही थी मनो विशाल के लुंड से जो उसकी छूट फैट गयी है उसकी सिकाई हो रही हो... वो बिना उठने की ज़ेहमत किये पेशाब का आखरी बून्द लेते लेते बिश्तर पर hi मूत दी और अपने छूट को मसलते हुवे बीएड के उस कोने में जा के सो गयी जहां पेशाब न पंहुचा था और सूखा था...

जब वासना भर जाये तो इंसान क्या से क्या हो जाता hai...wo औरत जो अपने जिस्म पे एक बाल नहीं उगने देती.. जो एक बून्द पसीना आ जाये तो नाहा के परफ्यूम छिड़क लेती है.. वो औरत दो दिन से वासना के नशे अपनी छूट का पानी अपने बेटे के लुंड का रास थूक सब पि और निगल जा रही है ...और आज लेते लेते बिस्तर में मूत भी diya...achanak अलका को अपनी छूट में फिर से कुछ गर्माहट सा फील होने लगा ...

उसने आंख खोला तो पाया विशाल उसकी छूट चाट रहा है...

विशाल- गढ़ मरंग माँ

अलका- गुड मॉर्निंग बीटा कितना टाइम और अपनी दोनों टंगे पूरी खोल दी मनो विशाल के सामने उसका फव डिश परोस दिया हो...

अलका अब नार्मल हो चुकी थी और सामने जब उसका विशाल हो तो वो खुद को रोक भी कैसे सकती है...

अलका अपना पेअर विशाल के चेहरे पे लगा देती है जिसका साफ़ मतलब था की विशाल को अलका के पेअर चाटने है..










अलका अपना पूरा पेअर विशाल के मुँह में दाल देती है... मनो विशाल से बदला ले रही हो बता रही हो की जब वो जबरन मुँह में लोढ़ा पेलता है तो कैसा फील होता है...

विषा पूरी गीली कर देता है अपनी माँ के पेअर चाट चाट के..

चेहरा तो चेहरा अलका के पेअर भी इतना खूबसूरत की लोगो को उस से भी प्यार हो जाये






विशाल अपनी माँ के पेअर के उंगलिओ को चाटने के बाद ऊपर की और बढ़ने लगता है अलका के जांघो और कमरों को भी गिला करना सुरु कर देता है की तभी अलका उसे उसे रोक देती है...

अलका- अभी नहीं विशु आज ऑफिस में मेरे एक बोहोत इम्पोर्टेन्ट प्रोजेक्ट का रिजल्ट अन्नोउंस होना है तो तो उसके लिए मुझे टाइम पे ऑफिस पहुंचना होगा...

विशाल- अपने लुंड को दिखते हुवे और मम्मी इसका क्या...

अलका- इसका इलाज करने लग गयी तो तू आज भी मुझे कही जाने लायक नहीं छोड़ेगा

विशाल- पर कुछ तो करो माँ

अलका को उसपे तरस आ जाता है. वो कहती है ok पर तू मुझे नहीं चुवेगा ..

अलका को पता था की एक बार उसकी इंजन भड़क गयी फिर वो नहीं रुकने वाली इसलिए वो नहीं चाहती की विशाल उसको चुवे जिस से उसका आग भड़क जाये...

अलका अपने घुटनो के बल बैठ जाती है और विशाल का लुंड अपने हाथो थम लेती है






और उस बड़े मोठे मुसल के हाथो में आते hi अलका के मुँह से एक आअह्ह्ह निकल जाती है

अलका- आआह्ह्ह्ह कितना गरम और सख्त है ... तभी तो मेरा और मेरे इस छूट का कचूमर निकल देता

है... वो अपने बेटे के लुंड पे जुबान फेरने लग जाती है

विशाल- आआह्ह्ह्हह्ह मायआ यू अरे अमेजिंग

अलका- आअह्हह्ह्ह्ह शट योर माउथ एंड जस्ट एन्जॉय बेबी






और अलका अपने मुँह में पूरा नहीं भर्ती बस दांतो तक ला के उसमे अपना गरम गर्म जुबान चलने लगती है... विशाल को अलका की ये ऐडा बहुत मस्त करने लगती है

विशाल- आआह्ह्ह्हह्ह माँ ी ऍम फीलिंग तू गुड...

फिर अलका उसके लुंड के उसके जड़ से ले कर उसके टॉप तक जुबान फेरने लगती है






अलका- आअह्हह्ह्ह्ह ममममममअअअअअ क्या कमल का लुंड चुस्ती हो आप.. आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह माआआ

अलका अपना मैजिक बंद नहीं करती उसे और भड़काने लगती है

अलका कभी उसके लुंड को तो कभी उसके ाँद को चूसना चेतना सुरु कर देती है






विशाल अपने आप से बहार आ रहा था अगर उसकी माँ को ऑफिस जाना न होता तो सायद विशाल अपनी माँ का रेल बनाना सुरु कर देता पर उसे सिचुएशन का अंदाज़ा भी था...

अलका का थूक से विशाल के लोढ़ा कुछ ज्यादा hi चमक रहा था अलका भी रह रह के उसका लुंड अपने चेहरे पे किसी make-up ब्रश की तरह रगड़ लेती है...

अब अलका उसके पुरे लुंड को देखते hi देखते अपने मुँह में भर लेती है...






विशाल- आआह्ह्ह्ह मेरी चिनार मायआ क्या चुस्ती है किसी बाजारू को भी पीछे चोर दे तू बहनचोद

अलका कुछ नहीं कहती बस मुस्कुराते हुवे विशाल को देखती है और लुंड चूसना जारी रखती है....

तभी उसके ऑफिस से फोन आने लगा

अलका- विशु जल्दी कर बेटे मई लेट हो रही हु ..

विशाल- क्या करू माँ सब तुम्हारे हाथ में है

अलका- एक काम कर मेरा मुँह hi छोड़ ले अभी के लिए चल शुरू हो जा






विशाल तेज झटके के साथ अपना पूरा लुंड अलका के गले में उतर देता है अलका की जैसे जान hi निकल गयी हो वो वही बैठे बैठे तेज़ धार के साथ मूतना शुरू कर देती है ....

विशाल अपना झटका लगाना जारी रखता है...






वो अलका के गार्डन को पीछे से पकड़ के अपना पूरा लुंड उसके गले तक उतर दे रहा था ...और जब जब वो ऐसा करता तब तब अलका की मूत निकलने लग जाती थी

विशाल किसी पागल हठी की तरह अलका के मुँह पे टूट पड़ता है और जोर जोर से उसके मुँह को छोड़ना जारी रखता है...






अलका ने पहले hi काफी देर तक विशाल का लुंड चूसा था और उसके बाद से जोरदार मुँह चुदाई से विशाल के लुंड में भी खलबली मच गयी थी अब मंजिल ज्यादा दूर नहीं था उसका निकलने वाला था तो वो थोड़ा और अपनी माँ के मुँह को अपने लुंड में दबाने लगा

इतने देर के मुँह चुदाई से अलका के मुँह और गले में दर्द होना शुरू हो चूका था... उसके पुरे चेहरे पर उसका काजल उसके आंसुओ और लार के साथ मिल के फ़ैल गया था...






और ये हालत बता रही थी की अलका अपने बेटे के लिए कितना दर्द सेह रही है

विशाल- आआआहहहहहहह मममममममअअअअअअ मेरा आने वाला है

अलका- अंदर hi निकल दे मुझे तुम्हारा पानी पीना है (इशारे से)

और विशाल तेज गुर्राहट के साथ अलका के मुँह में अपना गरम लावा उगलने लगता है






जिसे अलका पूरा का पूरा जातक जाती है और लुंड को चूसना तब तक नहीं रूकती जब तक पूरा बून्द न पि जाये...

विशाल का लुंड अब मुरझाने लगा था इसके बावजूद उसकी साइज देख अलका मुस्कुराने लग जाती है और उसके लार और विशाल के गरम पानी का मिला जुला रूप अब भी उसके लुंड पे लगा था जिसे अलका चाटने लगती है..






उसके बाद अलका फ्रेश हो के अपने ऑफिस चली जाती है...

बेचारी का प्रेजेंटेशन था और विशाल ने उसके मुँह का इतना बुरा हाल कर दिया की उसे बोलना तो दूर की बात उसे अपना मुँह भी नहीं खोला जा रहा था ...
 
Part-14

आज विशाल का मन कॉलेज में नहीं लग रहा था... उसका भाई कारन के न आने से वो कॉलेज में बोर हो रहा होता है ....

वो कॉलेज से निकल के सीधा सारिका यानि अपनी मौसी के घर जाने लगता hai..karan सारिका का बीटा और विशाल का कजिन है

थोड़ी देर में वो कारन के घर पहुंच जाता है ..वो मैं एंट्रेंस से होते हुवे घर में एंटर करता है जहां पुरे घर में शांति फैली हुई थी...

उसने कारन को आवाज भी लगाया पर कोई रिस्पांस नहीं मिला उसे...

कारन की और से कोई जवाब न मिलने पे वो अपनी सारिका के कमरे की और जाने लगता hai....jaise hi सारिका के रूम के पास वो पहुँचता है उसे कुछ अजीब से आवाज आती है.. जिस आवाज से वो अनजान नहीं था और उसे समझते देर न लगी की अंदर क्या चल रहा है सायद उसकी मौसी मौसा इंटीमेट हो रहे थे. वो वह से वापस हॉल के तरफ मुद गया.. तभी उसके अंदर उन्हें देखने की िक्षा जाएगी और वो डरते डरते दबे पॉ सारिका के बैडरूम की तरफ दुबारा से बढ़ने लगा... वो ये सोच सोच के एक्ससिटेड हो रहा था की आज वो अपनी मौसी को चुड़ते हुवे देखेगा..

जैसे hi सो कमरे के अंदर झांकता उसकी नजर अपनी मासी के बिखरे बाल ,पसीने और वासना की गर्मी से गोरा बदन जो अभी लाल गुलाबी हो गया था..










बड़ी चायदि छाती और उसपे लटकी हुई उछलती उसकी दोनों चूचिया..

थोड़ा नजर और निचे ले जाने पर उसकी दो मोती मोती कासी हुई लाल गोरी janghe..aur दोनों जांघो के बिच में उसकी गुलाबी छूट जिसमे इस वक़्त उसके मौसा का लुंड घुसा हुआ था और वो उस लुंड पे तेज़ सिसकारी के साथ उछाल रही थी ..

सारिका- आअह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह हाँ हाँ ऐसे hi

थप थप थप थप्प्प्प

पीछे से उसके मौसा सारिका के पीठ पे तक कभी जंग गांड या बाकि अंगो मसलते या थपड मर मर के सारिका का जोश बढ़ा रहे होते है..

जोश जोश में कूदती सारिका को जब उसके पति ने उसे पलट के घोड़ी बनाया तो सारिका को नज़र इस दौरान दरवाजे पे पद गयी जहां उसे ऐसा लगा की कोई उन्हें देख रहा है .. पर वो इस मजे में कोई दखलंदाजी या बढ़ा नहीं चाहती थी ..लेकिन सारिका के पलटने के दौरान विशाल को कुछ ऐसा दिखा जिसकी उसे उम्मीद भी नहीं थी... वो जिसे मौसा समझ रहा था वो उसका मौसा नहीं बल्कि उसका भाई कारन था जिसके लुंड पे उसकी माँ यानि विशाल की मौसी कूद रही थी...

ये देख के विशाल की धड़कने आउट ऑफ़ कण्ट्रोल होने लगी... वो जल्दी से मोब निकल के एक शार्ट क्लिप बना लिया...

क्युकी सारिका को डाउट हुआ था की कोई देख रहा है इसलिए वो दुबारा से दरवाजे की तरफ देखती hai..to पाती है की उसका भांजा विशाल ने उनकी चोरी पकड़ी ली hai..par कारन इस बात से अभी भी बेखबर था.. जब सामने सारिका जैसी हुस्न की मलिका घोड़ी बानी हो तो कोई भी मर्द किसी और चीज में ध्यान कैसे दे सकता है .






सारिका चाहती तो रुक सकती थी पर सायद उसका होने वाला था या फिर उसे इस बात से एक्ससिटेमेंट मिल रही थी की उसे ऑडियंस मिल गया...

सारिका खुद अपना गांड कारन की लुंड पे पटक पटक के पूरा अंदर लेने लगती hai..is पोजीशन में अलका की मोती चूचिया खुलती हुई हवा में लहराने लगती है.. विशाल का मन होता है वो उसे थम ले और उसका दूध पी जाये .

दोनों मौसी और भांजे की नजर एक दूसरे से हैट hi नहीं रही थी..

सारिका के अंदर की आग मनो और ज्यादा भड़क गयी हो.. और वो विशाल को दिखते हुवे और ज्यादा वाइल्ड होने लगती है वो नोटिस करती है की विशाल उसकी चुचिओ को घर रहा है तो उत्तेजना में अपनी चूचिया खुद hi मसलने लग जाती है.. विशाल का देखना सच में सारिका छूट की आग में घी का काम कर गया था सायद और उस आग को बेचारा कारन खेल नहीं पाया और तेज कराहते हुवे ...

कारन- आआह्ह्ह्ह माआ मई आ रहा हु

सारिका- नहीं बीटा इतनी जल्दी नहीं थोड़ी देर देर प्लीज..

पर इस पे किसका जोर चलता है जो कारन का चलेगा वो अपनी माँ को उसकी मंजिल तक पहुचाये बिना उसकी छूट में hi झाड़ गया..

सारिका उसे पकड़ के उसका मुँह अपने छूट पे लगा देती है और तब तक नहीं हटती जब तक उसके छूट से फवारा न निकल जाये ..

विशाल वह से चुप चाप चला गया क्युकी ज्यादा देर वह रहना ठीक भी नहीं था जो दिखना वो वो देख चूका था वो... उसके लुंड में भी हलचल हो गयी थी ..

थोड़ी देर में फ्री होने के बाद कारन को अपने मोब में विशाल का 8 मिस कॉल दीखता है वो उसे कॉल बैक करता है तो विशाल अपनी बाटे बताता है और कहता है वो घर के बहार वाले पार्क में है

कारन- फिर तू अंदर क्यों नहीं आया...

विशाल- कैसे आता गेट बंद था फोन तू उठता नहीं .

कारन- सूर्य सूर्य अभी आजा मई गेट पे खड़ा हु

विशाल आता है और दोनों भाई गले मिलते है..

अंदर का माहौल बिलकुल नार्मल था ..

दोनों माँ बेटे भी बिलकुल सामान्य थे..

सारिका की नजर विशाल से मिलती तो वो शर्मा रही होती है..

विशाल को भी ावक्वार्ड लगता है पर आज से सारिका में सायद hi उसे मौसी दिखेगी .

अब साड़ी में लिप्टो सारिका उसे नंगी चूचिया चूसते और दबाते घोड़ी बानी हुई दिख रही थी

सरिक- कैसे हो विशाल...?

विशाल- ठीक हु मौसी आप कैसे हो..?

सरिक- मैं भी ठीक हु विशु..

क्या पियेगा चाय ठंडा या कुछ और...

विशाल- कुछ नहीं मौसी मई तो बस वैसे hi बोर हो रहा था तो आप सब से मिलने आ गया.

विशाल का ये सदा पैन और संकोच देख के सारिका को लगता है विशाल कितना भोला और शर्मीला है.. पर उसे क्या पता जब ये लड़का अपने पे आता है तो क्या करता है.... उसके बेटे कारन की तरह आधे में नहीं रुकता..

दोनों भाई कारन के कमरे में बैठ के इधर उधर बारे कर रहे..

तभी सारिका कारन को बहार से दूध लेन को कहती है और कारन बहार शॉप से दूध लेन चला जाता hai..sath hi सारिका विशाल से हेल्प के लिए किचन में आने को भी कहती है...

विशाल को इस बात का अंदाजा था की क्या हेल्प चाइये होगा उसकी मौसी को

सारिका- क्या कर रहे थे तुम विशु मेरे बैडरूम के बहार..

विशाल बिलकुल भी डरा था क्यूंकि उसे पता है की इस वक़्त उस से ज्यादा गलत और दरी हुई उसकी मौसी सारिका है..

विशाल- कुछ नहीं मौसी कारन आज कॉलेज नहीं आया और मेरा फोन भी उठा रहा था तो मई तो बस आप से और कारन से मिलने आया tha...ye देखने आया था की सब ठीक तो hai..par यह तो आपलोगो ने पूरी फिल्म दिखा दी , और हसने लगा

सारिका- शर्म से झपटी हुई... देख लिया न फिल्म अब किसी को बताना मत प्लीज.. अलका को भी नहीं ..

विशाल- (अपने मन में अब तुम्हे क्या पता तुम्हारी बहन खुद अपने बेटे से चुद रही है नई ईयर से)

ठीक है पर इनमे मेरा क्या फायदा....?

सारिका- बता तुझे क्या चाइये...?

शॉपिंग कर ले मेरे कार्ड से जो मर्जी खरीद ले.. या तेरी फवौरीते बाइक दिला दू ..?

कोई ट्रिप मारनी हो कही भी मई देती हु खर्चे जितनी महंगी होटल में चाहे जितने दिन मर्जी उतने दिन रुक एन्जॉय कर .

विशाल- क्या मौसी ये बचो वाले लालच दे रहे हो .

सारिका- फिर क्या चाइये तू hi बता और जल्दी बोल कारन आता hi होगा...

विशाल- मेरे भी कुछ नीड है... और आपके ये सेक्सी कर्व्स देख के तो मेरा भी मन करने लगा है आपके साथ.... कहते हुवे विशाल सारिका के बिलकुल करीब आ जाता है और उसके एक चुके पे हाथ रख देता है...

सारिका- ये गलत है विशाल..

विशाल- ये आप बोल रही ho....?ab विशाल पीछे से सारिका को हुग कर लेता है और गार्डन पे किश करने लग जाता है.. उसे कोई दर नहीं था सारिका से..






सारिका ने एक वाइट पतली सी टॉप पहना था जिसे विशाल एक झटके में उसके कंधे से उतर देता है जिस से सारिका के चुके बहार को आ जाते है और विशाल उसे मसलने लगता है...

सारिका- आआह्ह्ह्ह वेट विशाल तुम मुझे ब्लैकमेल कर रहे हो..

विशाल- मई तो बस प्यार कर रहा हु मेरी मौसी सारिका.. और अपना लुंड पंत के अंदर से hi उसके गांड में घुसा देता है..

सारिका को टाइट चुभन महसूस होती है..

सारिका- आअह्ह्ह्ह ाचा मुझे थोड़ा टाइम दे एक डैम से दिमाग काम नहीं कर रहा मेरा

विशाल सारिका को घुमा के उसके होंटो को चूमने लगता है.. जिसमे सारिका न साथ देती है न विरोध करती है बस मूर्ति बानी कड़ी रहती है .. तभी कारन के आने की आवाज आती है और दोनों अलग हो जाते है...

कारन किचन में एंटर करता है और सारिका से कहता है..

कारन- माँ ये दूध वगैरह सुबह hi मंगवा लिया करो दोपहर में सभी शॉप्स में ख़तम हो जाती है .. कम्युनिटी सेंटर से लाना पड़ा इतना दूर जा के .

सारिका- ाचा ठीक है तुम लोग बाटे करो मई चाय नाश्ता ले के आती हु...

विशाल के मोठे कठोर लुंड के छुवन से सारिका का छूट रिसने लगता hai..bete से छोड़ने के बाद भांजे से छोड़ने में कोई बड़ी या अलग बात नहीं थी पर औरत को थोड़ा टाइम तो चाइये hi होता hai..aur फर्स्ट टाइम में संकोच तो होती hi है वो भी अपने भांजे से..


यह मई आपको सारिका के बारे में थोड़ा बताता चालू...





सारिका उम्र 42 साल

रंग बिलकुल पिंक रोज देखा है न वाइट से ज्यादा पिंक से काम बस वही.. जो चुने भर से लाल हो जाये और मसलने पे खुदा जाने क्या होगा..

हाइट लम्बी लिखे मॉडल.. बॉडी कर्तव्य है यानि की जहां से होना चाइये वही से है वो थिक..

बड़े बड़े और कासी हुई चुके... गोल भरी और बहार निकली हुई गांड...






और गोरी चिकनी मखमली जंघे... कुल मिला के अलका part 2 यानि एक और कामदेवी... दोनों बहने जैसे पुराणी शराब हो... इंग में एक कोटे है न... फाइन वाइन विल गेट बेटर विथ आगे..

ये भी उम्र के साथ और नशीली होती जा रही है.... जिसका स्वाद सोसाइटी ऑफिस या बहार के मर्द तो चोरो उसके अपने सेज बेटे भी लेने से नहीं कतराना चाहते ...

पर दोनों में सिर्फ एक फ़र्क़ था एक और जहाँ अलका खुल के ब्रूटल सेक्स एन्जॉय करती थी तो सारिका को इनसब का कोई खास एक्सपीरियंस नहीं था एंड वो थोड़ा शर्मीली थी... हो सकता है समय के साथ वो भी खुल जाये बूत अस ऑफ़ नाउ शी उसे खोलना बाकि है एंड देखते है किसके साथ खुलेगी...

बैक तो स्टोरी.....

सारिका- आओ बचो कफ स्नैक्स रेडी है हॉल में आ जाओ... दोनों भाई हॉल में आ कर कफ के मजे ले रहे होते है... सारिका भी अलका और घर के बारे में पूछने लगती है और विशाल अक्सोर्डिंगली जवाब देने लगता है.... देखते देखते अँधेरा होने लगता है और सारिका के साइड से कोई रिस्पांस न मिलने पे विशाल अपनी चल चलने की सोचता है...

विशाल- मसि आज मम्मी के ऑफिस में कुछ ज्यादा काम है वो लेट आएगी मई बैठे बैठे बोर हो जाता हु ...क्या मई आज आपके यह hi रुक जाऊ. ?

ये सवाल सुनते hi सारिका की धड़कने बढ़ जाती है क्युकी इसके पीछे का कारन वो कही न कही जानती hi थी और अभी वो रेडी भी नहीं थी सब के लिए... कोई और दिन होता तो सायद सारिका का जवाब बिना एक सेक् लगाया जान होता लेकिन आज सिचुएशन कुछ और था...

सारिका थोड़ा सोचने के बाद- हाँ बीटा ये भी कोई कहने की बात है ये तुम्हारा hi तो घर है... लेकिन अलका जब आएगी और तुम उसे नहीं मिले तो वो अकेली नहीं पद जाएगी घर में...

विशाल- तो आप बोल दो न आपने मुझे रोका है फिर वो कुछ नहीं बोल पायेगी आपसे

सारिका (मन में ये विशाल तो बहुत चालक है) ठीक है मई बोल दूंगी तुम रुक जाओ आज यही

कारन इन सब के पीछे के करने से अनजान था ..

जहां एक और विशाल के घर में रुक जाने से सारिका को दिल की धड़कने बधाई थी तो वही विशाल एक्ससिटेमेंट में रात का वेट कर रहा था.. आखिर कर वो वक़्त भी आ गया सभी ने डिनर भी फिनिश कर लिया और गप्पे मरने के बाद सोने की तयारी में लग गए क्युकी सारिका को जल्दी से जल्दी रात काटना था ..

सारिका- एक बचो टाइम से सो जाना मई भी सोने चलती हु गुड नाईट

विशाल को अपना चाल फ़ैल होते दिखने लगा... उधर रोहित भी रात में अपनी माँ की लेना चाहता था...

तभी विशाल टपक से बोल पड़ता है...

विशाल- क्या मसि मई आपके लिए रुका हु और आप अपने बेटे को चोर के जा रही हो....

सारिका- बीटा रात हो गयी है सोना तो है न...

विशाल- मासी मुझे नींद नहीं आ रही और कारन को भी नहीं आ रही..

कारन भी हाँ मम्मी बोल पड़ता है...

सारिका- ok तो क्या करे फिर बताओ..

विशाल- मासी मूवी देखते है न फिर जब नींद आएगी तो सो jayege..rohit भी विशाल को हाँ में हाँ मिलाने लगा

सारिका के पास बचने का कोई बहाना नहीं दिखा तो बेचारी ok बोल देती है... और तीनो सारिका के रूम में चले जाते है ..

इस से पहले की कारन कुछ कर पता विशाल झपट के सारिका की गॉड में चला जाता है...

विशाल- आज मई मासी की गोदी में सोऊंगा तू अपना देख ले

कारन- नहीं मई सोऊंगा मेरी माँ है

और दोनों लड़ने लगते है तभी सारिका जो विशाल के इस हरकत से शोकेड थी पर उसके पास कोई रास्ता नहीं था ने बोलै- ok मई बिच में सो जाती हु तुम दोनों मेरे बगल में सो jao....Happy बस लड़ो नहीं और जो व् मूवी देखनी है लगा लो...

सारिका ने इस वक़्त जो नाईट ड्रेस पहना था वो बहुत hi शार्ट एंड सेक्सी था जिसमे जरा भी अंगड़ाई लेने क लिया अगर उसने हाथ उठाया तो उसके छूट और गांड एक साथ दिख जायेंगे..






ऊपर से उसकी बड़ी बड़ी चूचिया जो आधे से ज्यादा बहार hi thi..is ड्रेस में वो काफी भड़काऊ लग रही थी...

मूवी स्टार्ट हो गयी और तीनो ने फिल्म देखना सुरु कर दिया...

कारन धीरे से अपना हाथ अपनी माँ के जांघो पे फेरना लगता है...

तो दूसरी तरफ विशाल सारिका के चूतड़ों से कहलन सुरु कर देता है...

सारिका तो कारन- क्या कर रहा है विशु देख लेगा..

कारन - बल्कणत के अंदर कैसे देख पायेगा माँ don't वोर्री आप एन्जॉय करो..

सारिका फर विशाल से बोलती है कारन देख लेगा क्या कर रहा है पर विशाल कोई जवाब नहीं देता और उसके चूतड़ कमर मसलना जारी रखता है...

कारन अब सारिका के चुचो को दबाना सुरु कर देता है...

कारन- माँ आप मेरे साइड मुँह कर के सो विशाल के नहीं...

विशाल इस्पे कोई बहस नहीं करता उल्टा कहता है - हाँ मासी उसके साइड कर लो मुझे कोई डिक्ट नहीं वर्ण साडी रात रोटा रहेगा रोटलु... एक्चुअली सारिका के पलटने से विशाल का काम आसान हो जाता इसलिए वो बहस करना ठीक नहीं समझा....

सारिका का कारन की तरफ पलटने से उसकी गांड विशाल की तरफ हो जाती है.. और यही तो विशाल को चाइये था .






विशाल बिना देर किया सारिका की लाइनर पंतय को साइड कर देता है... पंतय भी तो बस नाम की थी एक पतली सी पंतय सारिका के उतने बड़े गांड को कहाँ से छुपा पति...

आगे से कारन उसके छूट को छेद रहा था तो पीछे से विशाल... सारिका इस दोहरे हमले से पागल हो रही थी... कारन ने उसका हाथ अपने पंत के अंदर दाल दिया और सारिका न चाहते हुवे भी कारन के लुंड को मसलना सुरु कर देती है... तभी विशाल अपनी बिच की ऊँगली सारिका की गांड को टाइट सल्पक भूरी छेद में दाल देता है सारिका चिहुँक जाती है अगर अभी दोनों के बिच न फांसी होती तो सायद बहुत तेज़ चिल्लाती पर बेचारी की हालत ऐसी थी की आंख में आंसू आ गए और वो दर्द उसके गले में घुट के रह गया ..

टीवी पे ध्यान किसी का नहीं था कम्बल के अंदर कोई अलग hi शो चल रहा था खा सारिका अपने बेटे और भांजी के बिच नंगी लेती हुई थी.. क्युकी वो ड्रेस पहले hi उसके गांड और चुचो को ढकने में सक्षम नहीं थी ऊपर से उसे कमर तक उठा दिया दोनों ने मिल के ...

सारिका का मन बड़ा होने लगा छोड़ने का पर इस समय और उसके लिए इस समय किसी एक को उसे सुलाना या दूसरे कमरे में भेजना होगा.. वर्ण उसकी छूट बस सुलगती रहेगी उसे आराम नहीं milega....tabhi एक समय ऐसा आता है की विशाल भी सारिका के छूट में ऊँगली दाल देता है और इधर कारन भी साथ hi विशाल अपना लुंड सारिका की गांड में रगड़ रहा होता है ...

सारिका- की मनो दर से गांड फैट जाती है जैसे की चोरी पकड़ी गयी साथ hi उसकी सिसकारी भी निकल जाती है आअह्ह्ह्हह ऊऊह्ह्हह्ह

दूसरे ऊँगली के स्पर्श से कारन थोड़ा शॉक होता है फर और वो सारिका किणतर्फ देखता है... सारिका फुसफुसाते हुवे कारन से कहती है..

सारिका- मेरे से और रहा नहीं जा रहा है विशाल भी जगा हुआ है तू ये सब बंद कर और सजा सुबह कर लेना जो करना है वर्ण पकडे जायेंगे वो अलग..

कारन का मन तो नहीं था पर उसे सारिका की बात सही लगी.. फिर उसने कहा

कारन- पर मम्मी ऐसे नींद नहीं आएगी..

सारिका - तो क्या कर सकते है अब जा वाशरूम में जा के रिलेक्स हो जा मेरी ब्रा पंतय तेरे वाशरूम में hi पड़ी है ये बात बोलते वक़्त सारिका शर्मा जाती hai..(subah सारिका और कारन ने जब नहाते वक़्त पहले राउंड का सेक्स करा था तब सारिका ने अपनी पंतय और ब्रा वही चोर दी थी)

कारन बड़े भरी मन से- ok माँ

कारन अपने कमरे के वाशरूम में चला जाता है...

उसके जाते hi सारिका गुस्से में ये क्या कर रहे हो तुम विशाल जगा हुआ है और तुम उसके सामने उसकी माँ के पुसी में फिंगरिंग कर रहे हो...?

विशाल का इस वक़्त बहस करने का कोई मूड नहीं था वो अपनी मसि सारिका का फेस पकड़ता है और उसके होंटो को चूमना शुरू कर देता






hai...sarika पहले तो विरोध करती है फिर शांत हो जाती है लेकिन साथ अब भी नै दे रही थी.. विशाल अपना एक हाथ सारिका के गोर गोर मोठे चुचिओ पे लता है और दबाना सुरु कर देता है....





सारिका को भी अब मस्ती चढ़ने लगती है..

सारिका- ऊऊह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो चोरो कारन आ गया तो दिक्कत हो जाएगी...

विशाल- आने दो आ गया तो ाचा hi होगा फिर आपको दो दो लुंड मिल जायेंगे..

सारिका- आआह्ह्ह्हह ची ये क्या बोल रहे हो...?

विशाल- वही जिसके लिए आप तड़प रहे हो मासी

सारिका- अभी के लिए चोर दो वर्ण प्रोब हो जाएगी समझो विशु ..

तभी कारन के वाशरूम से फ्लश की आवाज़ आती है जिसका मतलब ये था की वो अब कभी भी आ सकता है...

सारिका उस से अलग हुई और खुद को सही kiya..fr विशाल जा के चिपकने लगा तो सारिका बोली कारन को सो जाने दो फिर कुछ देखते है पर प्लस अभी चोर दो..

विशाल को सारिका का ये आईडिया ठीक लगा..

तो उसने कहा पर वो सोयेगा कैसे जब तक आपकी ले नहीं लेता..?

सारिका - तुम दोनों कारन के रूम में hi सो जाओ ... और फिर जैसा हो मुझे व्हत्सप्प कर देना...

विशाल को यही ठीक भी लगा और वो वह से उठ के जाने लगा...

सारिका का फ़िलहाल के लिए जान चुटी दोनों से अब दोनों में से कोई भी सोये सारिका को एक का दर तो काम से काम नहीं रहे...

ईसिस तरह कारन और विशाल दोनों कमरे में सो रहे थे विशाल को आज सारिका की छूट नहीं मिली इसलिए उसे विशाल की बातो में कोई इंट्रेस्ट नहीं आ रहा था... और वो चाहता था की विशाल सो जाये और विशाल चाहता था कारन सो जाये

इधर विशाल सारिका से व्हाट्सप्प पर भी बात जारी रखता है क्युकी कही ऐसा न हो की कारन के सुलाने के चक्क्र में सारिका hi सो जाये

विशाल- मासी

सारिका- बोलो

विशाल- आप बहुत हॉट ho...mujhse रहा नहीं जा रहा है कुछ करो न

सारिका- मैं क्या करू कारन जब तक जगा है...

इसी तरह बात चलते हुवे कारन के खरातो की आवाज आने लगती है.. अभी अभी पानी गिरा के भी तो आया था और करने को कुछ था नहीं तो नींद आना लाजमी hi था...

विशाल- लगता है कारन सो गया

सारिका- अचे से चेक करो

विशाल चेक करता है फिर- हाँ सो गया है पक्का अब आ जाऊ...

सारिका का दिल बड़े जोरो से धड़क रहा था बेटे के होते किसी और से छोड़ना फिर पकडे जाने का दर उसकी छूट गीली हो रही थी और धड़कने तेज़ भाग रही थी..

सारिका- नहीं कमरे में नहीं तू चाट पे वेट कर मई आती हु ...

विशाल- चाट क्यों

सारिका- अरे अगर वो जाग गया तो ढूंढ़ते हुवे रूम में आ गया फिर पकडे जायेंगे चाट पे थोड़ा टाइम तो मिल जायेगा ..

विशाल- ok मई जाता हु आप जल्दी आओ और प्लस पंतय पहन के मत aana...ab बर्दाश्त नहीं हो रहा है..

सारिका - क्यों.....?

विशाल- अरे मासी वैसे hi टाइम काम है समझो न

सारिका मन में कितना शैतान है ये...

और विशाल चाट पे चला जाता है...

थोड़े देर के वेट क्र बाद सारिका भी आ जाती है और विशाल को ढूंढ़ने लगती है चारो तरफ

तभी पीछे से कोई उसे जकड लेता है और सारिका के मुँह से चीख लेकिन थोड़ी धीमी निकल जाती है






विशाल सारिका को अपने गिरफ्त में लेते hi अपना काम शुरू कर देता है वो उसकी निघ्त्य ऊपर कर के उसकी चूचिया दबाना शुरू कर देता hai..jaisa विशाल ने खा था सारिका निचे से बिलकुल नंगी थी उसकी साफ़ चिकनी छूट साफ़ साफ़ दिख रही थी.. विशाल जो पहले से hi नंगा था .. अलका के निघ्त्य ऊपर होते hi उसका लुंड अलका के दोनों चूतड़ों की गहराइयो में घुसने की कोशिश करना शुरू कर देता है....

सारिका- आआह्ह्ह्ह ाअरररांम से बेटे

विशाल- रोक मत मासी क्या चीज है तू आअह्ह्ह्हह क्या मखमली जिस्म है तेरा और ये गांड. उफ्फ्फफ्फ्फ़ कहते हुवे अपना लुंड उसके गांड में घुसने लगता है...

सारिका- ये क्या गन्दी गन्दी बाटे कर रह है है...

विशाल - तुम भी बोलो बहुत मजा आएगा ..

सारिका- मुझे नहीं बोलना ..

विशाल जनता था की इस वक़्त इन बहस का कोई फायदा नहीं इसलिए वो कोई जोर देता भी नहीं है... बस सारिका को और गरम करना सुरु कर देता है...

वो बगल के स्टोर रूम से कोई कारपेट उठा के लता है और सारिका को उसी पे लेटने को कहता है सारिका भी तुरंत लेट जाती है...

फिर विशाल सारिका के दोनों टैंगो के बिच आता है सारिका भी बात को समझते हुवे अपनी टंगे अपने भांजे विशाल के लिए खोल देती है..

अपने मसि के सहयोग को देख विशाल के चेहरे पे मुस्कान आ जाती है.. वो अलका के पेअर के बिच उसके गुलाबी छेद पे अपना जुबान फेरता है.. अलका को बहुत रिलीफ मिलता है मनो जानत पहुंच गयी ho..ye अंदाजा सारिका के एक्सप्रेशन को देख के लगाया जा सकता था






विशाल पुरे जोश में अपनी मसि सारिका के छूट को छत्ते हुवे उसके चुचो को दबाये जा रहा था . और सारिका भी मस्ती के गोते लगा रही थी...

सारिका- आआह्ह्ह्हह हाँ बेटे ऐसे hi बहुत सही ाआउउउउउवक्क्कछहहह

विशाल-- कैसा लग रहा है मासी...

सारिका- आआआहहहहह बहुत ाचा तेरे खा से सीखा..

विशाल- तू बस मजे ले मसि आज तेरे छूट का सारा पानी निकल dunga...bahut गरम है तेरी छूट....

सारिका- कितना गन्दा बोलता है विशु ची.

विशाल- अभी मेरा लुंड तेरे छूट में जायेगा फिर तुझे भी यही लांग अचे लगने लगेगी मेरी masi....Aur विशाल सारिका के चुचिओ से खेलने लगता है...






सारिका- आआअह्हह्ह्ह्ह मुझे नहीं पता था तुझे ये सब आता है आअह्ह्ह

विशाल- क्यों कारन तेरी छूट नहीं छत्ता.

सारिका- आआआह्ह्ह्हह्ह ऊऊह्ह्ह्हह्ह छत्ता है रे पर उसे चोर तू अभी...

फिर विशाल सारिका के चुचो को सारिका के hi मुँह में दाल देता है.. ले मसि आज तू अपनी दूध खुद पी






सारिका भी जुबान निकल के चाटने लगती है... आआआह्ह्ह्ह क्या क्या करवा रहा है तू....

विशाल- अभी तो कुछ करा hi नहीं मासी असली मजे तो तुझे मिलने बाकि hi है... फिर विशाल ने वो किया जिससे सारिका का पूरा जिस्म कैंप गया ..






विशाल अपनी पूरी जीभ निकल के सारिका के गांड से छूट तक चाट लेता है .

और एक फिंग गांड सारिका के गांड के गुलाबी सुराख़ में दाल के दोनों छेड़ो पे एक साथ जीभ फेरने लगता है





सारिका- आआआअह्हह्ह्ह्ह माआआआ क्या कर रह है वो गन्दा होता है .

पर विशाल रुकने की जगह उसी तरह दोहराता है ..सारिका उसके इस जादू से पिघलने लगी थी जो काम उसका बीटा सुबह अपने लुंड से नहीं कर पाया था वो विशाल ने अपने जुबान से कर दिया था...

सारिका का जिस्म अकड़ने लगता है वो झड़ने के करीब होती है ..

सारिका- आआआअह्ह्ह्हह विशु ऐसे hi बेटे मैं आने वाली हु और जुबान अंदर दाल अपनी ोुह्ह्ह्ह फुखकक

विशाल तुरंत चेतना चोर के पूछता hai...-khan मासी....?

सारिका- रुका क्यों चाट ता रह

विशाल- क्या मासी ..!?

सारिका समझ जाती है विशाल खेल रहा है और वो क्या सुन्ना चाहता है .

सारिका- मेरे पुसी में बेटे....

विशाल- वो क्या होता है... हिंदी बोलो न

सारिका को कैसे भी बस अपने छूट में उबाल रहे लावे को बहार निकलना था वो बेबस हो के बोल पड़ती है- मेरे छूट चाट विशु आअह्ह्ह यही सुन्ना छह रहा था न... अब चाट अपनी मासी के गुलाबी छूट को

विशाल हस्ते हुवे मन में कहता है अब आयी न लाइन पे अभी तुझसे क्या क्या करवाऊंगा देख .. और छूट को जुबान से छत्ते हुवे अपना एक ऊँगली भी घुसा देता hai....is प्रहार से सारिका के छूट का बांध टूट पड़ता है और वो भलभल के झरने लगती है






सारिका- आआआआअह्हह्ह्ह्ह माआआआ मायी गाययुःईईई आआअह्ह्ह्हह वववीीिष्ठाहालललल तू कमल है बेटे आआआआह्ह्ह्हह्ह और उसका सर अपने छूट पे दबाने लगती है

सारिका के जहर जाने के बाद वो तेज़ तेज़ हाफने लगती है उसका पूरा जिस्म पसीना पसीना हो गया था और रत में बल्ब की धीमी रौशनी में उसका पसीना मोतियों की तरह चमकने लगता है






सारिका को ऐसा ओर्गास्म पहले कभी नहीं आया था वो पूरा पसीने में लथपथ हो गयी थी जबकि अभी मैं खेल तो शुरू हुआ भी नहीं था...

सारिका के बुर के फवारे को पिने के बाद विशाल सरीके के ऊपर आने लगता है

वो सारिका के निप्पल सरीके के मुँह दाल के चूसने को कहता है और खुद भी चूसने लग जाता है ऐसे में दोनों के जुबान आपसे में टकरा जाते है और फिर कभी वो निपल चूसते कभी आपस में जुबान ..






ये सब सारिका के लिए नया था जो उसे और रोमांच दे रहा था

विशाल पुरे जोर से सारिका के चूचियों को मसल रहा था जिसके कारन सारिका और उसका पूरा जिस्म खास कर उसकी चूचिया पूरी लाल हो चुकी थी...

सारिका- आआह्ह्ह्ह दढठीिरररीी बेटे

विशाल- धीरे में मुझे मजाज नहीं आता मेरी जान

सारिका- क्या बोलै मसि से जान.....?

अभी तो तुझे अपनी रैंड. भी बनाऊंगा सारिका मसि

सारिका को ये थोड़ा अजीब लगता है पर जाने क्यों बुरा भी नहीं लगता..

सारिका- शुतुप मई चली जाउंगी वर्ण...

विशाल- चल मेरी रैंड अब मेरे लुंड को अपने मुँह में ले...

सारिका - विशु मुझे ये वर्ड्स नहीं पसंद

विशाल- ठीक है मासी मेरी अब नहीं बोलूंगा चल जल्दी से ले मुँह में मेरे से बर्दाश्त नहीं हो रहा






सारिका विशु के लुंड को पकड़ते hi- बाप रे ये तो काफी बड़ा है और मोटा hai....mera मुँह hi फाड़ देगा

विशाल- क्यों कारन का छोटा है...

सारिका - नहीं उसका भी बड़ा है मेरी हालत ख़राब कर देता है पर तेरा उस से बड़ा है तू क्या करेगा...?

विशाल तब की तब देखगे अभी तू पहले चूस इसे ... प्यार कर






सारिका बड़े प्यार से विशाल के लुंड पे जुबान फेरती है फिर चूमने लगती है... और चूसना शुरू करती हो है की निचे से कुछ गिरने की आवाज़ आती है.....

सारिका- लगता है कारन जाग गया..

विशाल- इस मादरचोद को भी अभी जागना था .

सारिका- हस्ते हुवे शट उप विशाल भोत गन्दा बोलते हो तुम... तुम रुको मई देख के आती हु...

सारिका खुद को साफ़ करती है और निचे भागते हुवे जाने लगती है तो देखती है कारन किचन में पानी पि रहा है.

सारिका-( ों व्हाट्सप्प) कारन जाग गया..

विशाल- तो अब..

सारिका - अब क्या वेट करो

विशाल- नहीं हो रहा मासी

सारिका - इसके सोये बिना कैसे औ

विशाल- ाचा होता पेल देता तुझे साली खुद का हो गया तो नखरे कर रही है ..

सारिका- तो पेल देते.... किसने रोका था पलवाने तो आयी थी मई...

विशाल- अभी आता हु निचे फिर पेलता हु तुम्हे

सारिका- आजा मैं कपडे उतारू...?

पर कारन का क्या करेगा ..?

सारिका को भी पता था अब मुश्किल है इस लिए वो विशाल को तैसे कर रही थी...

सारिका हॉल में जाते हुवे...

सारिका- कारन तू है...

कारन- हाँ माँ पीस लगी थी तो और आज पानी रखा भी नहीं था आपने रूम में और मई भी भूल गया था इसलिए किचन में आना पड़ा...

सारिका- सार्य्य बचे ...ाचा कोई बात नहीं सजा...

कारन- नींद नहीं आ रही माँ थोड़ी देर यही हॉल में टीवी देखूंगा फिर सो जाऊंगा...

सारिका- ok जैसा तुझे ठीक लगे मई सोने जा रही हु ..

कारन- माँ एक किश तो दे दो काम से काम

सारिका कारन की तरफ बढ़ते हुवे उसके होंटो से अपने होंठ मिला लेती है और दोनों एक दूसरे के होंटो को चूसने लगते है...






सारिका का हाथ कारन के शॉर्ट्स में चला जाता है और वो उसका लुंड सहलाने लगती है .. थोड़ी देर की इंटेंस किसिंग के बाद दोनों अलग होते है और सारिका अपने रूम में जाने लगती है.. तभी कारन सारिका के गांड पे एक छठा लगता देता है





सारिका के चूतड़ थिरकने लगते है सारिका पीछे मुड़के एक समयले देती है और अपने कमरे में चली जाती है...

वह अपने मोब देखती है तो उसमे विशाल के भोत सरे ंसग्स थे.

विशाल- मसि कितना टाइम और ..?

सारिका- अब पॉसिबल नहीं है कारन हॉल में टीवी देख रहा है... ाचा होगा तुम सो जाओ हम सुबह कुछ सोचती हूँ तेरे लिए ....
 


भविष्य की एक झलक जिसमे अलका और सारिका को किसी ने एक साथ छोड़ के दोनों को अपना पानी पीला दिया ..

पर किसने कौन हो सकता है अन्य गेस.....?
 
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